Incest Kamuk Alka - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

hotaks

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Dec 5, 2013
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अपकमिंग part

अब अगला एक धमाकेदार अपडेट 250तह पेज कम्पलीट होने के खुसी पे देता हु बड़ी माँ रागिनी के साथ एक एक्सट्रीम वाइल्ड थ्रीसम और साथ hi एक और किरदार के ऊपर से पर्दा उठने वाला है





 
Part-1 (थे बिगनिंग)

Hello गाइस मैं एक स्टोरी सुरु करने जा रहा हूँ जो की है एक औरत और उसके सम्बन्धो के बारे में ये इन्सेस्ट और अडल्ट्री दोनों है तो इसका मजा लीजिये.

अलका आगे 40 सुन्दर गोरी भरा हुआ बदन की मालकिन. एक डैम मिलफ फिगर जिसे देख लो तो रात को नींद न आये.. बाकि आप उसे देख के भी अंदाजा लगा hi सकते है की अलका कोई मामुली औरत नहीं बल्कि एक बाला का नाम है..

अलका एक हाउसवाइफ के साथ साथ एक ओफ्फ्स में भी जॉब करती है जहां के सरे एम्प्लोयी उसे देख के लार टपकते है और अलका को भी ये सब अचे से पता है फिर भी वो कोई मौका नहीं छोड़ती है उन्हें तैसे करने का या यूँ कहु उसे भी इसमें बहुत मजा आता है. फिर चाहे वो टाइट साड़ी में गांड निकल के अपनी मोती फूली हुई गांड का प्रदर्शन करना हो या अपनी चूचियों की गहराई में सब की नजर कैद कर लेना मजा तो वो पूरा लेती थी






य ह



फिर आता है उसका पति अशोक उम्र कोई 45





िन्दों का 2 बीटा है...

बड़े का नाम आदित्य आगे कोई 23 साल





छोटे का नाम विशाल आगे 21





दोनों समय के साथ मादरचोद बनते गए ...... कैसे वो कहानी में पता लग hi जायेगा
 
Part-2 (नई ईयर नाईट)

नई ईयर की नाईट होने की वजह से ऑफ में पार्टी चल रही थी सभी लोग शराब और दज के नशे में पार्टी एन्जॉय कर रहे थे अलका के घर ऑफ से थोड़ी दूर होने की वजह से उसने ज्यादा पि नहीं थी बस दोस्तों का साथ जरूर दिया था लेकिन शराब का सुरूर उसपे चढ़ तो फिर भी गया था कदम बहक रहे थे .. उसका साथी एम्प्लोयी राजीव डांस के बहाने कभी उसके कमर तो कभी उसके गांड पे हाथ फेर के मजे ले रहा था शराब के नशे में कही न कही अलका को भी ये सब ाचा लग रहा था

आज अलका ने एक टाइट ओने पीेछे ड्रेस पहन रखा था जो उसके सेक्सी और कर्तव्य फिगर को और भड़काऊ बना रहा था





राजीव और अलका दोनों शराब का नशे में मस्त थे कभी राजीव अपना लुंड अलका की गांड में रगड़ता तो कभी अलका भी मस्त हो के अपना गांड पीछे कर लेती है.





जहां एक और राजीव आज अलका की छूट का स्वाद कहना चाहता था तो वही आज अलका भी खुल के मजे लेने के मूड में थी..





और बगल में खड़ा राजीव का दोस्त शुक्ल भी इस मौके के इंतजार में था क्यूंकि अलका ऐसी औरत नहीं जो आसानी से किसी के हाथ आ जाये वो तो आज शराब का नशा और दिसंबर या यूँ कहु जनुअरी का महीना था जिसके ठण्ड में उसकी जिस्म आग उगल रही थी जिसे शांत करने के लिए एक मोठे तगड़े लुंड की जरुरत थी..

राजीव धीरे धीरे अलका क ड्रेस के अंदर हाथ दाल देता है






अलका की भी मदहोशी में एक आह निकल जाती है उसके गोर मोठे चुके कुछ ज्यादा hi तन गया था जो सीधे राजीव की छाती से डाब रहा था....

मौके की नजाकत को देहते हुवे राजीव ने धीरे से अलका की गर्दन पे अपने गरम सुलगते होठो को रगड़ने लगा






जिसकी स्वीकृति अलका ने भी अपने गर्दन को उठा के दे दिया उसके बदन में मनो की करंट सा लगा और वो राजीव की बाँहों में पिघलने लगी..

राजीव की गरम सांसे अलका के अंदर दबे वासना के आग में घी का काम करने लगा.. वो सब भूल सी गयी उसे याद भी नहीं की वो खान है लोग उसे घर कर देख रहे है पर उसे इनसब की खान कोई परवाह थी... उसे बस लुंड चाइये था जिस से वो अपनी छूट की खुजली मिटा सके जिसका पानी पे क उसे इस ठण्ड में गर्माहट मिल जाये...

अलका को लुंड का पानी पीना भोत पसंद था. और सायद आज भी उसे एक नए लुंड का स्वाद मिल जाता अगर उसके बेटे विशाल का फोन न आता है अलका का मनो मूड hi खराब हो गया था लेकिन राजीव अभी भी उसके जिस्म में खेल रहा था क्यूंकि उसे पता था आज अगर ये निकल गयी तो फिर हाथ नहीं लगने वाली इतनी आसानी से

अलका- hello (आआह्ह्ह्हह्ह )

विशाल- hello माँ कब तक आओगे और आप ऐसे क्यों बात कर रहे हो










अलका - अभी पार्टी से निकल hi रही हूँ 30 मिनट तक आ जाउंगी (ाहूऊऊछहः) इधर राजीव का लुंड उसके गांड में घुसने को रेडी था हाथ उसके ड्रेस के अंदर से उसके चूहों को मसल रहा था और गार्डन तो कभी पीठ पे किश इतने सरे वॉर को अलका सेह नहीं पायी और उसके मुँह से सिसकारी निकल गयी..









विशाल- ठीक है माँ आ जाओ हम वेट कर रहे है और फोन कट गया...

इधर अलका का छूट पानी बहाने लगा था उसे बस अपनी प्यास बुझानी थी लेकिन उसे घर भी जाना था जहां सभी उसका वेट कर रहे थे क्यूंकि आज अलका का बड़े भी तो है..


आगे की कहानी यानि नेक्स्ट part में आपको पता लगेगा की बड़े पे अलका को क्या गफ्ट मिला... प्यास तो उसकी बड़े पे hi बुझेगी देखते है कौन बुझाता है स्टे तुनेड
 
Part-3

अलका पार्टी से निकल जाती है घर जाने के लिए और बहार आ कर अपने कैब का वेट करने लगती है तभी राजीव बहार आता है और उसे ड्राप करने का ऑफर करता है ड्राप तो बहाना था उसे आज अलका की छूट मारनी थी, अलका को भी पता था की अगर वो राजीव के साथ चली गयी तो वो आज घर तो नहीं पहुंच पायेगी इसलिए उसने राजीव को थैंक्स बोलै और इतने में उसकी कैब भी आ गयी और अलका उसमे बैठ के अपने घर को निकल पड़ी इधर बेचारा राजीव आज फर से लुंड मसलता रह गया.




अभी अलका कार से थोड़ी दूर hi गयी होगी की एक भोत तेज़्ज़ धड़ाम की आवाज़ आती है मनो कही बम फटा हो जब गाड़ी डिस्बैलेंस होती है तब पता लगता है की गाड़ी की टायर पंक्चर हो गयी है और इतने सुनसान रात में आस पास कोई पंक्चर की दुकान तो मिलने से रहा और बहार जो ठण्ड लग रही थी वो अलग

अलका को खुद पे गुस्सा आने लगता है काश वो राजीव की हेल्प ले लेती तो घर पहुंच जाती और न भी पहुँचती तो गर्माहट का जुगाड़ तो हो hi जाता.

गरम तो वो पहले से hi थी ये सब सोच सोच क उसके छूट से पानी बहने लगा... बहार ठण्ड अंदर गर्मी (जिस्म की गर्मी) अलका का मन बेकाबू होने लगा था.

तभी रैस्ट उसके सामने एक कार आ कर रुकी. अब ऐसी कामुक औरत को देख के कोई भला अपनी गाड़ी कैसे नहीं रोकेगा

carwala(cw)- hello मम अन्य प्रोब






अलका- वो ैतुल्य मेरे कैब की टायर पंक्चर हो गयी है सो मैं किसी गाड़ी का वेट कर रही हु

कव- (कभी उसकी मोठे जांघ तो कभी उसकी दोनों चुहिओ और उसके बिच के घाटियों को घूरते हुवे) कहो तो मैं आपको कही ड्राप कर दू

अलका- no थैंक्स ी विल मैनेज

कव- अरे मैडम इतनी रात में अकेली खान से मैनेज करोगे आ जाओ में ड्राप कर दू






अलका को भी ये ठीक लगता है और वो कव की बात मान लेती है..

गाड़ी में एंटर होते hi एक अजीब से स्मेल अलका के नाक से होते हुवे दिमाग में चढ़ जाती है वो स्मेल दारू जॉइंट का कुछ मिला जुला कॉकटेल था

अलका तो पहले से hi नाशी में थी ऊपर से ये गंध उसे और मदहोश करने लगी

कव- hello मेरा नाम अमन है

अलका- hi मेरा नाम अलका

अमन- तो अभी आप पार्टी से आ रहे हो अगर मैं गलत न हु तो (उसके चुहिओ को घूरते हुवे)

अलका ने समयले के साथ हाँ ऑफ में पार्टी थी तो वही लेट हो गया और ऊपर से ये टायर पहात गया सो अलग मुँह बनाते हुवे

अमन- ये तो ाचा हुआ की टायर पहात गया (मैं तो तेरी ये गांड फाड् दू आज मौका मि जाये तो)

अलका- वो कैसे

अमन- वर्ण मैं आपसे कैसे मिल पता एंड लाफ

अलका- समयले देती है

दोनों आगे जा hi रहे थे की पुलिस की नाकाबंदी दिखी पूछने पे पता लगा की सामने कोई एकदन्त हुआ है

अलका उदास हो गयी उसे किसी भी हाल में घर जाना था और उसके घर जाने का एक वही रास्ता था..

अमन की तो मनो जैसे लॉटरी निकल गयी हो उसे अलका के साथ थोड़ा ज्यादा टाइम मिल गया

तभी दोनों इधर उधर की बाटे करने लगे और अमन ने अलका से खा अगर तुम चाहो तो हम दोनों िल इ भी ने ईयर सेलेब्रेट कर सकते है और बोतल की तरफ इशारा करते हुवे कहा एक एक पेग हो जाये.

पहले तो अलका ने मना किया लेकिन जोर देने पे वो मान गयी क्यूंकि पि तो उसने पहले से राखी थी..

अमन ने बड़े चालाकी से अलका के पेग मोठे मोठे बनाने लगा और खुद क लिए लाइट पेग बनता.

देखते देखते अलका को नशा होने लगा

तभी अमन बात करते करते अलका क जांघो पे अपने हाथ फेरने लगा...






अलका के तरफ से इसका कोई विरोध न देख उसकी हिमत बढ़ने लगी और वो धीरे से अपना हाथ और अंदर को ले गया और उसके जांघो को मसल दिया

अलका- आआअह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो मत करो

अमन- तुम भोत हॉट हो

अलका- ठनक यू और अमन क बालो में हाथ फेर दिया जिसके लिए उसे अमन की तरफ झुकना पड़ा और झुकने से अमन को उसके गोल मोठे और गोरी चूचियों के दर्शन हो गए

अमन ने अपना फेस आगे कर क उसे किश करना छह पर अलका पीछे हैट गयी...

दोनों नशे और हवस की आग में मनो जल रहे थे अमन मन में सोचा की अगर इसे छोड़ना है तो थोड़ी हिम्मत दिखानी hi होगी

और अमन ने अपना हाथ अलका क कमर में डाला और अलका को अपनी और खींच लिया अलका एक झटके से उसके ऊपर गिर गयी और उसकी चूचिया उसके छाती में धस गयी

दोनों की गरम सांसे आपस में घुलने लगी और वासना के डोरे अलका के आँखों में साफ़ दिख रहा था लेकिन वो औरत hi क्या जो एक बार में मान जाये बिना नखरे किये

अलका- ये क्या कर रहे हो ये मत करो मैं शादी हुडा हु

इस वक़्त अलका अमन के ऊपर थी और जिसका फायदा उठाते हुवे अमन अपने हाथ से अलका के गांड को सहलाते हुवे उसे अपने काबू में करने की कोशिश करने लगा

अमन- तुम इतनी हॉट लग रही हो की खुद पे काबू नहीं कर पाया

अलका- तो काबू करना सीखो म नॉट ा व्होरे ok (अभी भी वो अमन क ऊपर hi थी)

अमन- उसके गांड को अब धीरे धीरे दबाने लगा और उसके बदन की खुसबू में जैसे मनो वो खो सा गया था..

एक तो ड्रेस पहले hi इतनी छोटी थी जो अलका के गोल गुम्बद जैसी गांड को कैद नहीं कर पा रही थी उसपे अमन के खींचे जाने से बची कसार पूरी हो गयी और उसकी भरी गुम्बद जैसी गांड एक थिरकन के उसके ड्रेस के बहार आ गयी...






उसकी पतली धरी जैसी पंतय उसके दोनों चूतडोंमे कही खो सी गयी थी और खोये भी क्यों न उसकी गांड है hi इतना बड़ा मटके जैसा.





अमन अपना हाथ धीरे धीरे उसके कमर से खिसकते हुवे उसके गांड पे फेरने लगा और देखते hi देखते उसकी मखमली गांड अमन क पंजो में क़ैद हो गयी...





दोनों की गरम सांसो ने गाड़ी के अंदर का तापमान भी बढ़ा दिया था

अलका को पता व् नहीं लगा कब उसके होंठ अमन क होंठ से जा मिले और दोनों पागलो की तरह एक दूसरे को चूमने लगे थे..














शराब के नशे से ज्यादा तेज़ नशा जो उसके सर पे सवार था वो था वासना का नशा जिसे शांत करने के लिए उसके छूट में जल्दी से कोई मोटा तगड़ा लुंड चाइये था..

ये सब इतनी जल्दी और अचानक से हुआ की अलका को कुछ समझने का मौका hi नहीं मिला जिसका एक सबसे बड़ा कारन ये था की ऑफिस के पार्टी में राजीव ने उसके अंदर हवस का आग तो लगा दिया था पर शांत नहीं कर पाया.

इधर अमन पागलो की तरह अलका के जिस्म के साथ खेल रहा था.

उसके होंठ अलका के होंठो का जैसे सारा रास निचोड़ के पि जाने को तड़प रहा हो.... साथ hi एक हाथ से अलका के गांड को मसल रहा था तो दूसरा हाथ अलका के गोल कड़क चूचियों को निचोड़े जा रहा था...






इस वक़्त काश उसके पास एक दो और हाथ होते तो वो उसे जरूर अलका के छूट में दाल देता लेकिन हाथ न सही लुंड तो था जो बना hi छूट में घुसने के लिए है..

इनसब के मस्ती में अलका की सीत्कारी कर में गूंज रही थी

अलका- आअह्ह्ह्ह आरममम

अमन- मुऊआह्ह्ह्हह ूउम्म्म्न्न

अमन उसके थोंग को उसके गांड से आज़ाद करने की कोशिश करने लगा अलका के समझते hi उसने अपने आप को थोड़े ऊपर उठा लिया ताकि अमन उसके पंतय को उसके जिस्म से अलग कर सके और अमन ने किया भी वैसा hi..






पंतय के अलग होते अमन ने अपना एक हाथ आगे से अलका के छूट के ऊपर रख देता है





अलका- आअह्ह्ह्हह

अमन- ये तो काफी गिल्ली हो रही

अलका- हवस और शर्म का मिला जुला जवाब देती है हम्म्म्म

अमन- और गरम भी बहुत है है

अलका - आअह्ह्ह्ह आराम से

अमन ने एक ऊँगली उसके छूट में दाल देता है

अलका के मुँह से एक आअह्ह्ह्ह फुट पड़ती है

अलका अमन के छाती को नोचने लगती है..

अलका ऊपर के मन से तो ना कह रही होती है लेकिन उसकी छूट और उसका मन कुछ और hi कह रहा था..


अमन जैसे आज उसके चुकी के सरे रास निचोड़ देगा कुछ इस तरह से दबा रहा था अलका से बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था पर वो किस अनाज को ऐसे कह भी नहीं सकती थी की अपना लुंड मेरे छूट में दाल दो और मुझे छोड़ो किसी रंडी की तरह

तभी तेज़ गाड़ी के हॉर्न बजने लगती है रास्ता साफ़ हो चूका था और दोनों को एक दूसरे के जिस्म से खेलते कोई 2-3 घंटे पुरे हो चुके थे जिसका उन्हें पता hi नहीं चला...


दोनों को इस बात का बिलकुल भी होश नहीं था की वो खान है और क्या कर रहे है जब होश आता है तो अलका खुद को नंगी पति है वो अपने छूट और भरी भरकम चुचो को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगती है





ये एक रात में आज दूसरी बरी थी जब अलका की छूट प्यासी रह गयी भोत भरी मन से वो आगे जाने को राजी हुवे और अपने घर को निकल पड़े घर से कोई 500 मत्र पहले अलका को उतर जाना सही लगा क्यूंकि जो काम आज उसने अमन एक अजनबी के साथ किया था वैसे में उसका घर वो देख ले ये अलका को सही नहीं लगा....
 
Part-4

इधर आप सभी अलका के हुस्न में इतना खो गए की यही भुला दिया घर पे विशाल अलका का वेट कर रहा है. तो चलिए देखते है अपना हीरो विशाल सर्फ वेट कर रहा है या कुछ और भी


विशाल क पापा यानि अशोक किसी काम क सिलसिले में ऑस्ट्रेलिया गया हुआ है और आदित्य जो इस वक़्त मुंबई में हायर स्टडी कर रहा है यानि घर में विशाल अकेला है जो अपनी माँ अलका का वेट कर रहा है और बेचारी अलका है जिसके साथ हर बार धोखा हो जा रहा है उसकी छूट बार बार प्यासी hi रह जा रही है और अपने प्यासी छूट को लिए अलका अपने घर की तरफ आने लगती है रात क 3 बजे अलका जैसो कामुक औरत अकेली वो व् इतनी भडकू ड्रेस 👗 में चल रही है... 1सत जान की ठण्ड जो अचे ाचो को रजाई से निकलने न दे अलका इस भडकू ओने पीेछे में रोड पे अकेली गांड मटका मटका क चल रही थी उसे देख के ये कहना मुश्किल है की उसकी चूचिया ज्यादा थिरकती है या उसकी गांड या यूँ कहो दोनों में कोई कम्पटीशन लगा हो...

घर के गेट पे पहुंचते hi अलका घर के अंदर एंटर करती है.. यह आपलोग अंदाज़ा लगा सकते हो की अमन ने जो अलका के जिस्म क साथ खेला है उसके जिस्म पे लायी जगह निशान बने है जो इस बात का साबुत था की अलका को किसी ने भोत अचे से रगड़ा है नोचा है बूत अफ़सोस खा नहीं पाया..

हॉल में एंटर होते hi विशाल की नज़र अलका पे पड़ी उसे आज उसकी माँ कुछ अजीब सी लगी या सायद वो समझ गया था की आज उसकी माँ अलका कही बज के आयी है अब उस बेचारे को क्या पता की बजते बजते बच गयी

अलका क चूचियों पर अमन के दन्त के निशान से नीलापन आ गया था जिसे अलका के बाल छुपा पाने में असमर्थ था... उसके बाल भी अस्त व्यस्त थे चाल में लडख़ड़ात देख विशाल भाग के अपनी माँ अलका को सहर देने जाता है और इस हड़बड़ाहट में वो भूल hi गया की वो पोर्न देख रहा था और उसका लुंड लुंड नहीं रोड बना हुआ था










उसने अपनी चड्डी भी निकल राखी थी निक्कर में उसका लुंड जैसे पंत फाड् के बहार आ जायेगा वो टीवी क पोर्न से नज़र तो हटा लिया लकण सामने जो औरत कड़ी थी वो किसी पोर्नस्टार से काम नहीं थी और जिस हालत में वो थी उसका बीटा hi उसे छोड़ दे अगर मौका मिल जाये....

जैसे hi विशाल अलका को सहारा देने क लिए उसका हाथ अपने कंधे पे रखता है और अपना हाथ अपनी माँ अलका क पीठ पे रखता है उसे एक तेज़ करंट लग जाता है..

क्यूंकि वो पोर्न के नशे में था अपने माँ क आने से पहले अपने लुंड को सेहला रहा था जिस से वो काफी उत्तेजित हो चूका था और फर अलका जैसे औरत के नंगे बदन को चुने का मौका मिल जाये तो शरीर में बिजली क्यों न दौड़े फिर चाहे वो उसकी माँ हो पर उसके लुंड के लिए तो वो सर्फ एक छूट थी गरम chut...vishal अलका को सहारा देते हुवे आगे बढ़ hi रहा था की अलका एक डैम से लड़खड़ा के गिर गयी और जैसा की आप सभी को पता है उसकी ड्रेस भोत छोटी थी जो उसके गांड को छुपाने में नाकाम थी और उसके ऊपर अमन ने उसकी पंतय भी निकल दी थी इसका मतलब अलका उस ड्रेस के अंदर नंगी थी बिलकुल नहीं no ब्रा no पंतय

अलका जैसे गिरी उसकी बड़े मटके जैसी गांड एक डैम से विशाल क आँखों के सामने आ गयी.






विशाल की धड़कने किसी बुलेट ट्रैन की तरह दौड़ने लगी अब उसे अलका माँ नहीं कुछ और hi नज़र आ रही थी जिस से वो अपनी प्यास बुझा सकता था पर कैसे ये उसे पता नहीं ..

विशाल जैसे hi अपनी माँ को सहारा दे क उठता है तो मौके का फायदा उठाते हुवे वो अलका को गांड को दबाने लगता है ...






अभी बेचारे इस हमले से संभाल भी नहीं था की सामने से अलका को चूचिया बहार को आ गयी थी.... जाने ये इम्तिहान आज माँ का था ये बीटा का......





जहां एक और दोनों अपनी गर्मी शांत करना चाहते थे तो वही दोनों का रिश्ता भी बिच में एक कांटा था पर कहते है न जब हवस सर पे चढ़ जाता है तो रिश्ता कही वासना के तूफान में बज जाता है ....

विशाल अपनी माँ अलका को सहारा देते हुवे सोफे पे बिठा देता है झा ड्रेस ऊपर होने से अलका की छूट और चूचिया दोनों विशाल के आँखों के सामने मनो इशारा कर रही हो आप मुझे टास्ते करो...

पर विशाल में अभी भी इतनी हिम्मत नहीं थी की वो ऐसा वैसा कुछ कर सके

अंकित जल्दी से अपनी माँ को ब्लैक कफ देता है उसे सोफे पे अचे से लिटाता है और उसके नशे के उतरने का वेट करने लगता है

बल्क कफ अपना असर दिखने लगती है और अंकिता नार्मल होने लगती है

इनसब भीड़ भाड़ में विशाल भूल hi जाता है की स्क्रीन पे पोर्न चल रहा है... और जब सामने अलका जैसी कामुक औरत हो तो वर्चुअल पोर्न पे किसका हो ध्यान जायेगा...

पर होश में आते अलका का ध्यान टीवी स्क्री पे गया झा एक बीटा अपनी माँ क मुँह में लुंड दाल क उसकी मुँह को छोड़ रहा था

बेचारी अलका एक वॉर से बचती नहीं उसपे दूसरा वॉर हो जाता है वो

तभी उसका ध्यान अंकित पे जाता है तो देखती है उसका बीटा उसके गोर जिस्म को देख क अपना लुंड मसल रहा था ...






अलका- विशाल तुम अभी तक जाग रहे हो

विशाल- हाँ माँ भूल गए आज आपका बड़े है मई कब से आपका वेट कर रहा हु केक कट करने क लिए

अलका- हलके से स्मैल के साथ टीवी की तरफ देखते हुवे मेरा वेट तो दिख रहा है..

विशाल की नज़र टीवी पे गयी तो उसे याद आया उसने क्या गलती कर दो और उसने जल्दी जल्दी टीवी ऑफ करने क लिए रिमोट ढूंढ़ने लगा पैर रिमोट पे अलका अपनी मखमली गांड टिकाये हुवे थी

विशाल - जल्दबाजी में रिमोट उठाने क लिए आगे बढ़ता है और अलका क गांड की भूरे छेद को अपनी उंगलिओंसे छेद देता है अलका के मुँह से एक सीत्कारी निकल पड़ती है आआह्ह्ह क्या कर रहा है

विशाल- श्री माँ वो रिमोट आपके निचे था और फर वो टीवी ऑफ क्र देता है

अलका- और क्या किया आज तुमने मेरे वेट करने के अलावा ये बात अलका ने पोर्न के तरफ टॉन्ट करते हुवे खा

विशाल- झेपते हुवे ंतंग माँ आप फ्रेश हो जाओ तो हम केक कटाई करे

अलका- no बेबी म टायर्ड टुडे कल करते है

विशाल- क्या माँ मई कब से वेट कर रहा हु और आप मन कर रहे हो आपके लिए दोस्त ज्यादा इम्प है बीटा नहीं बेटे के साथ पार्टी नहीं करोगे...

अलका- बीटा समझा करो

विशाल- मुझे नहीं समझना मई जा रहा हु सोने आप करो पार्टी अपने दोस्तों के साथ

अलका- अरे सुन तो खा जा रहा है

विशाल- गण माँ

अलका- को गिल्ट फील होता है और वो विशाल को आवाज़ देते हुवे कहती है ाचा इधर आ क केक लगा तो सही ...तब तक मैं फ्रेश हो क आता हु

विशाल खुश हो क - ok माँ बूत उसकी क्या ज़रूरत आप इसमें काफी हॉट लग रही हो ये बात विशाल ने अलका के चुचिओ को घूरते हुवे खा था जिसे अलका ने भी पहचान लिया था

अलका- हॉट लगता है मूवी ज्यादा देखने लगे हो तभी अपनी माँ को हॉट बोल रहे हो

विशाल- चुटकी लेते हुवे तो सेक्सी चलेगा...?

अलका- हसी और गुसा का मिला जुला जवाब में बस विशाल कह पति है

विशाल- वैसे माँ िफ़ ु don't मंद आप आज सच में भोत हॉट एंड सेक्सी लग रहे हो

अलका- शट उप विशाल ी ऍम योर माँ

विशाल जब अलका को गुस्सा की जगह ब्लश करते देखता है तो वो थोड़ा आगे बढ़ने की सोचता है

विशाल- एंड माँ सबसे सपकल पता क्या है.....?

अलका- क्या....?

विशाल- गुस्सा तो नहीं करोगे....?

अलका- no बेबी

विशाल को भी काम बनता सा लगता है

विशाल- आपके ये लॉन्ग लेग्स एंड ये थिक थिगह बोलते हुवे अलका की जांघो पे हाथ फेर देता है...

अलका अपनी आँखे बंद कर लेती है और सर दूसरे तरफ घुमा लेती है जो की विशाल के लिए एक इशारा था की वो थोड़ा बातो की जाल फैलाये तो अलका को अपने निचे ला सकता है

अलका- ok मई फर्श हो के आती हु तुम केक लगाओ टेबल पे

विशाल ok मो बूत क्या मई एक किश कर लू

अलका- क्यों

विशाल- क्यों क्या आप मेरी माँ हो

और अलका के ऊपर आ जाता किश करने के लिए अलका क दिमाग में कार वाला सारा स्क्रीन एक डैम से फ्लैशबैक होने लगता है और अपनी आंखे बंद करने लगती है

विशाल का मन तो उसके होंटो को चूमने का था पर वो उसके गलो को चुम लिया और उठ के बोलै आप फ्रेश हो जाओ मई केक लगता हु

अलका का भी ध्यान आता है वो शरमाते हुवे सोफे से उठ के अपने बैडरूम की तरफ जाती है


उसकी गांड में आज कुछ ज्यादा लचक नज़र आ रही थी....
 
Part-5

अपने रूम में पहुंच के अलका अपने कपडे को उतरने लगी ... और उसके ोनेपीएस के उतारते hi शीशे के सामने बिलकुल नंगी कड़ी हो के अपने आपको देखने लगी...






उसके चूचिया ठण्ड और वासना के मरे एक डैम कड़क हो गयी निप्पल तन के खड़े हो गए अगर उसमे दूध होता तो जरूर टपक पड़ता..









उसका हाथ खुद से hi उसके चूचियों पे चली गयी और दबाने लगी ....

जैसे उसकी नज़र उसके दोनों जांघो के बिच पतली गुलाबी लकीर पर जाती है उसके चेहरे पे एक कामुक मुस्कान आ जाती है...

वो अपने दूसरे हाथ को अपने छूट पे रखती जिस से उसके छूट से बहती चिपचिपा रास उसके हाथो में सं जाती है...

वो अपने छूट से साणे हाथ को अपने नाक के करीब लती है और उसके गंध ने जैसे उसपे कोई जादू कर दिया और उसका जीभ खुद पे खुद उसके हाथ पे चला जाता है और वो अपने हाथ को चाटने लगती है...






वो गंध उसे इतना पागल कर रही थी की वो अपने हाथ को दुबारा अपने छूट में दाल के छूट रास निकल के चाटने लगी...

अलका के ऊपर वासना का नशा पूरी तरह सवार हो चूका था...

इधर विशाल अलका का वेट करते करते अलका को बुलाने का सोचा और अलका के बैडरूम की तरफ चल diya...aur जैसे hi उसने कमरे में एंटर किया उसने जो देखा उसे खुद पे यकीं नहीं हुआ उसका लुंड जो अभी पूरी तरह से बैठा भी नहीं था एक बार फर से अपने नंगी माँ और उसके भरे हुवे बदन को देख क खड़ा हो गया...

आज पहली बार विशाल अपनी माँ के मखमली गांड को देख रहा था वो भी सामने...

अलका अपने वासना के नशे में इतना खो गयी थी की वो भूल hi गयी थी की उसके रूम का दूर खुला है और वो कमरे में बिलकुल नंगी अपने hi छूट का रास चाट रही है...

ऐसा कामुक दृश्य जहां अलका जैसी गदरायी भरे शरीर की औरत एक डैम नंगी अपने छूट का पानी निकल निकल के चाट रही हो वैसी कोई लड़का कैसे बर्दाश्त कर सकता था....

अपनी उंगलियों को अपने छूट में डालने के लिए इस बार अलका को थोड़ा झुकना पड़ा जिस से उसकी बड़ी गद्देदार गांड बहार की तरफ कुछ ज्यादा निकल चुकी थी ...






ये एक्शन विशाल के ऊपर जैसे एक हमला था जिसे वो भोत मुश्किल से बर्दाश्त कर पाया था कोई और होता तो सायद विशाल आगे बढ़ने की सोचता पर यह तो उसकी सगी माँ थी...

अचानक अलका की नज़र शीशे पे पड़ती है जहां उसकी नज़र दरवाज़े पे खड़े विशाल पे नज़र पड़ती है.. और वो देखती है की विशाल अलका की गांड को घर रहा था और अपने लुंड को मसल रहा था...










कोई और समय होता तो सायद अलका विशाल को उसकी मर्यादा याद दिला देती पर इस समय तो वो खुद वासना के नशे में सवार थी उसे जाने क्यों विशाल को देख क अपने छूट में एक सेंसेशन फील हुआ और इस सेंसेशन में वो इस बार कुछ ज्यादा hi ऊँगली अपने छूट मुले घुसा देती है और उसके मुँह से एक आअह्ह्ह निकल जाती है...

विशाल को दिखने के लिए वो अपनी गांड थोड़ा और बहार को निकल लेती है मनो वो कहना छह रही हो देख मेरे बेटे अपनी माँ की बड़ी और भरी भरकम गांड को अचे से देख . ये तेरे लिए hi है आओ दबाओ मन करे तो अपना लुंड दाल क फाड् दो इसे....






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विशाल को लगता है की उसे अलका को केक कट के लिए आवाज़ देनी चाइये इस से पहले की अलका उसे पकड़ ले पर उसे क्या मालूम अलका उसे तो देख चुकी थी और अपनी ये मखमली गोरा बदन खासकर गुम्बद जैसी गांड उसी के लिए निकल कर झुकी हुई है...

विशाल- दरवाजे से थोड़ा दूर जा कर माँ केक रेडी है

अलका- (होश में आते हुवे) हाँ बस अभी आयी मेरे बेबी

और थोड़े देर बाद अलका रेडी हो के अपने रूम से बहार आती है...

और जैसे hi विशाल अलका को देखता है उसका उसका लुंड और दिमाग दोनों उस से बगावत करने लगते है...

ऐसा नहीं है की विशाल ने इस से पहले कभी अलका को ऐसे न देखा था लेकिन आज जो जो उसके साथ हुआ उन साडी घटनाओ ने अंकित को लुंड से सोचने पे मजबूर कर दिया...


अलका जैसी भडकू औरत इस सार्ड रात में अगर इस अवस्था में आ जाये तो कामदेव भी उसे चोदे बिना नहीं रह पाए फर ये तो बेचारा विशाल था जो अभी पोर्न देख क अपने लुंड को हिला रहा था....







दोस्तों आगे की कहानी जानने के लिए प्लस अपना सपोर्ट और प्यार दे आपके कमेंट्स से पता लगता है की कहानी आपको पसंद आ रही है नहीं
 
Part-6

अलका के बहार आते hi विशाल का मुँह खुला का खुला रह जाता है.. उसका लुंड भी उसके शॉर्ट्स क अंदर हलचल मचाने लग जाता है..


विशाल- वाओ माँ इस ड्रेस में आप तो काफी हॉट लग रही हो.

अलका- शट उप विशाल आज कितनी बार हॉट बोलोगे don't फॉरगेट ी ऍम योर माँ..

विशाल- येह ी क्नोव बूत माँ इतनी हॉट एंड सेक्सी हो तो कॉम्पलिमेंट तो बनता hi है..

अलका- ब्लश करते हुवे थँक्स btw एंड अब चल के केक कटे....?

और अलका विशाल को क्रॉस कर क हॉल की तरफ बढ़ने लगती है

जो ड्रेस उसने पहना था उसमे उसकी चूचिया और गांड तो बगावत कर रही थी मनो कह रही हो हमे आज़ाद कर दो ....






विशाल एक तक अपने माँ के कर्व्स को देखता रहता है कभी उसके चुकी को कभी उसके गांड को तो कभी उसके केले के खबे जैसी जांघो को उसका हर एक अंग इस ड्रेस में निखार के दिख रहा था जो इस रत में किसी के भी अरमानो को जगा दे...

अलका- अपने बेटे के नज़र को पकड़ते हुवे... विशाल केक काटना है या यु hi घूरते रहोगे आज तुम....?

विशाल- सूर्य माँ आज सच में आप बहोत सेक्सी लग रहे हो..

अलका - उसके शॉर्ट्स में खड़े लुंड को देखते हुवे वो तो दिख hi रहा है...

विशाल- झेपते हुवे क्या माँ

अलका- यही की मेरे बेटे का काफी बड़ा हो गया है

विशाल- क्या मतलब मई समझा नहीं

अलका- अरे बुद्धू ये की तुम अब बड़े हो गए हो तुम्हारे लिए कोई लड़की देखि पड़ेगी..

विशाल- क्या माँ आप कुछ भी बोलते रहते हो चलो केक कट करते है

अलका केक करने क लिए जैसे झुकती है उसका आधे से ज्यादा चुकी बहार को तरफ आ जाती है ये सन विशाल के साँस और उत्तेजना बढ़ाने के लिए काफी था..






पता नहीं आज बेचारे को और कितनी वॉर झेलनी hai..aur कब तक वो इनसब वॉर को झेल पायेगा

केक कट होते hi हैप्पी बड़ी तो माँ गाते हुवे अलका को केक खिलता है

और हैप्पी बर्थडे माय सेक्सी माँ गाने लगता है

अलका भी विशाल को केक का टुकड़ा खिलाती है और थोड़ा सा केक उसके गाल पे प्यार से मॉल देती है जिस से केक टूट कर विशाल के टीशर्ट में चला जाता है...

ये अलका के तरफ गलती कहो या ये भी कह सकते है की अपने माँ के इस हरकत से विशाल को भी एक मौका मिल गया था की वो भी केक को अपने माँ के गले पे मेल और वो करता भी वैसा hi है


विशाल सीधा अपना हाथ केक के ऊपर डालता है और मुट्ठी भर के केक उठा के सीधा अपने माँ अलका के मुँह पे मॉल देता है... इस से बचने के लिए अलका भागने की कोशिश करती है और विशाल अपनी माँ को पकड़ क बाकि जगहों पे भी केक मलने लग जाता है... जिस से उसका हाथ अलका के ड्रेस के अंदर चला जाता है और वो पूरा केक अलका के चूचियों पे मॉल देता है...





और केक मलने क्र बहाने अपनी माँ के चूचियों से खेलने लग जाता है... चूचियों पे केक मलते मलते कल अलका का ड्रेस सोल्डर से निचे गिर जाती है उसे पता भी नहीं चलता और माँ अलका की चूचिया विशाल के सामने आ गयी जो उसके दबाने से लाल हो चूका था









चूचियों के आज़ाद हो जाने से अब विशाल को उसे दबाने में कोई परेशानी नहीं हो रही थी और वो पहले से ज्यादा जोर से उन्हें मसलने लगा ... अलका को तेज़ दर्द के साथ एक मीठे मजे का एहसास भी होने लगा

मौके की नजाकत को देखते हुवे विशाल ने अपने होंठ अलका के गर्दन पे रख दिए जो किसी औरत के अंदर के आग को भड़काने का सबसे नाजुक कदम होता है और अलका तो पहले से hi वासना के आग में जल रही थी इस दोहरे हमले ने आग में घी डालने का काम किया था...

अलका- क्या कर रहा है विशाल...

विशाल- माँ केक खा रहा हु माँ आपके गर्दन पे लग गया है

अलका- ऐसे????

विशाल- अब तो ये और भी टेस्टी हो गया है माँ..

और जीभ से अलका के गर्दन को चाटने लगा

अलका- aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh मममममममम

विशाल- माँ आप भोत हॉट हो

अलका- और कितनी बार हॉट कहेगा( छोड़ hi देना )

विशाल- सॉरी माँ अगर आपको बुरा लगा हो तो बूत ट्रस्ट में आप भोत हॉट और सेक्सी हो

अचानक अलका के पलट जाने से विशाल का लुंड सीधे अलका के गांड के दरारों में जा घुसा.... अलका को जैसे मनो बिजली का झटका लगा हो

अलका- ाआउउउउउउउउक्कछहहहहहहह कुछ चुभ रहा है बेटे.....

विशाल भी अपने लुंड का दबाव उसके गांड में बनाते हुवे उसके नंगे पीठ पे तो कभी गर्दन पे किश करता रहा

वो जान चूका था की उसकी माँ इस वक़्त इतनी गरम है की अगर वो इस वक़्त लगाम अपने हाथ में ले लेगा तो अपनी माँ छोड़ सकता है....






अलका जैसे पीछे अपना सर घूमती है उसके उसके नरम रसीले होंठ विशाल के होंठो से जा मिलते है और दोनों माँ बेटे के बिष किश हो जाती है

उउउउम्मम्मम्मम्मम विशाल अलका के होंटो का रास पिने लग जाता है और अलका भी उसका साथ देने लगती है उसे इस बात की कोई परवाह नहीं की इस वक़्त उसके गांड में अपना लुंड घुसा के उसके चूचियों को मसलते हुवे जो सख्स उसे चुम रहा है वो कोई और नहीं उसका अपना सागा बीटा विशाल है ये बात तो सच होते नजर आ रही है की जब जिस्म की आग भड़क उठती है तो कोई रिश्ता नजर नहीं आता ..... अगर नजर आता है तो सिर्फ छूट और लुंड





विशाल अपनी माँ के होंटो को पागलो की तरह चूस रहा था और अलका भी इसमें अपने बेटे का बराबर साथ दे रही थी..... अलका के छूट भी अब मनो रुकने का नाम नहीं ले रही थी उसका कामर्स उसके जांघो से होते हुवे निचे को बहने लगी फिर भी ऊपर के मन से अलका कहती है

अलका- आआआहहहहहहह विशाल क्या कर रहा है मैं माँ हूँ तेरी

विशाल- अपने माँ से पैर कर रहा हु माँ

अलका- आह्ह्हह्ह्ह्हह्हआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये गलत है बेटे

विशाल- ी डोंट ठनक सो माँ

अलका- विशाल चोर दे बीटा .....

विषला- बस माँ थोड़ी देर और प्यार करने दो अपने सेक्सी माँ को प्लस और विशाल आगे से अपना हाथ अलका के छूट पे रख देता है... जिस से अलका को एक बहुत तेज़ करंट लगती है और वो झटके से विशाल से अलग होते हुवे कहती है

alka-nahi बीटा ये गलत है मैं तुम्हारी माँ हूँ और तुम मेरे साथ ये सब कर रहे हो छियईईई शेम ों यू

और भाग के अपने रूम में चली जाती है

विशाल को समझ नहीं आता ये अचानक से क्या हुआ सारा खेल कैसे पलट गया कही उसने जल्दबाजी तो नहीं दिखा दी अब वो किस मुँह से माँ के पास जायेगा उसका लुंड ऐसे मुरझाया जैसे किस बैलन से हवा निकल गयी हो और हवा तो विशाल की निकली थी

अलका अपने कमरे में जाते hi तेज़ तेज़ हफ्ते हुवे खुद से सवाल करने लगी ये क्या हो गया अलका तुम्हे हवस में तुम इतनी पागल हो गयी की बेटे के साथ hi ये सब ची ये गलत है विशाल क्या सोचेगा मेरे बारे में की उसकी माँ उसका लुंड लेने के लिए तैयार हो गयी थी no मुझे इसे ठीक करना होगा और ये सोच के अलका वाशरूम में खुद को साफ़ करने चली गयी.... बाथरूम से आने के बाद अलका को बेचैनिन होने लगती है उसे लगता है उसने गलत करा अपने बेटे को दन्त कर जब की गलती उसकी भी थी उसने hi अपने बेटे के हवस की आग को बढ़ाया था जब वो बाथरूम में घोड़ी बन के अपने बेटे को अपने गांड का दर्शन करवा रही थी...

पर ये तो थी एक माँ के दिल की बात बूत जो आग आज तीसरी बार उसके बेटे ने उसके जिस्म के साथ खेल के उसके अंदर जगा दी थी वो आग तो अभी शांत नहीं हुई थी... उसपे उसके गांड में विशाल का मोटा लुंड कपडे के होने के बावजूद इतने गहराई तक चला गया था की अगर कपडा न होता तो उसकी गांड के छेद को चीरते हुवे अंदर चला जाता और उस चुभन का एहसास उसे अब भी अपने गांड के छोटे छेद पे हो रह था ककी अलका की गांड अभी कुंवारी hi थी....


इस उधेड़बून्द में अलका का दिमाग काम नहीं कर पा रहा था जहां उसका जिस्म उसकी वासना एक लुंड की मांग कर रहा था तो उसका दिल इस बात को राजी नहीं की किसी गैर ले साथ कुछ ऐसा वैसा करो वो भी अपने बेटे के साथ...

यही सोच में उसका हाथ वापस अपने छूट पे चला जाता है वोअपने पति अशोक को कोसने लगती है... अशोक तुम यह क्यों नहीं हो मेरे आग को ठंडा करने के लिए मई इस आग को कैसे शांत करू...

आज न जाने क्यों मेरी ये छूट मेरी बात नहीं मान रही है मुझे क्या हो गया है कही ड्रिंक में किसी ने कुछ मिलाया तो नहीं था अब मई क्या करू कैसे शांत करू खुद को कहते हुवे तेज़ तेज़ ऊँगली अपने छूट में करने डालने लगती है

साथ hi उसके मुँह से निकल जाता hai...bete विशाल तू सच में कितना बड़ा हो गया है तेरा लुंड मेरे गांड में घुस hi चूका था तू अपनी माँ छोड़ने के सपने देख रहा है बेटे ....

तो छोड़ दे आ के देख तेरी माँ कितनी तड़प रही है शांत कर दे अपनी माँ को आ कर घोड़ी बना के छोड़ मुझे मेरे बेटे...

मई मना करू तू फिर भी मत मानेरे छूट की आग को शांत कर दे आ क

अलका को खुद नहीं पता वो इस वक़्त क्या बोल रही थी उसे बस खुद को शांत करना था चाहे जैसे भी हो

तभी अलका को लगता है की उसके बेटे ने उसके लिए केक वगैरह लाया और वो उसे दन्त दी है उसे इस बात की गिल्ट भी होती है

वो अपने बेटे विशाल को देखने क लिए बहार जाती पर वो हॉल में नहीं दीखता फर वो उसे देखने उसके बैडरूम में जाती है खा एक सिसकारी को आवाज़ आती है वो समझ जाती है की सुका बीटा ब्लू फिल्म देख रहा है क्यूंकि भले वो नशे में थी पर जब वो घर में आयी थी तब उसने ये देख लिया था की उसका बीटा पोर्न देख रहा है

जैसे hi अलका विशाल के रूम में देखने क लिए अपना सर घुसती है वो देखती है विशाल एक माँ बेटे की चुदाई देख रहा है... अपने गलती को सुधरने और अपने बेटे को मानाने के चक्क्र में अलका भूल hi गयी थी की वो अपने रूम से नंगी निकली थी बिना ब्रा पंतय के.. जब स्क्रीन की लाइट उसके जिस्म पे पड़ती है तो उसे एहसास होता है की उसने ये क्या गलती कर दी है ....

इस पोर्न में अलका को वो हेरोइन हेरोइन नहीं बल्कि खुद को इमेजिन करने लगी और वो लड़का उसे विशाल दिखने लगा

तभी अनायास hi उसके मुँह से निकल पड़ा इसकी माँ तेरी माँ से ज्यादा हॉट है क्या....?

ये आवाज़ जैसे विशाल के कानो में जाती है वो दूर की तरफ देखता है झा उसकी माँ अलका कुछ ऐसी अवस्था में थी.....












 
part -7 मेगा अपडेट

इस कड़ा के की ठण्ड में खान लोग ब्लैंकेट के अंदर होने के बावजूद घर में हीटर चलते है तो वही अलका अपने कामाग्नि में इतनी कामातुर हो गयी की एक डैम नंगी hi बेटे के कमरे में चली गयी हलाकि की वो परदे के पीछे है पर ये पर्दा उसके कामुक गदरायी बदन को छुपाने में नाकाम है और तो और खुद अलका भी अपने जिस्म की नुमाईश करने से बाज नहीं आ रही है ...


विशाल की नज़र अपनी माँ अलका के जिस्म पे जैम जाती है और जमे भी क्यों न टीवी पे चल रहे पोर्न को सच में जीने का टीम सायद आ गया था..

अलका- क्या देखता रहता है इन रंडियो को ....? क्या ये मुझ से ज्यादा सूंदर सेक्सी या हॉट है

देख अपनी माँ की चूचिया इस रैंड से काम है क्या





ये मेरी मखमली जंघे dekh....inhe चुना नहीं चाहेगा...

रुक तुझे और दिखाऊ. ये मेरी छूट देख यही से तू निकला था यह सर्फ तेरे बाप का लुंड गया है आज तू भी इसका स्वाद चख ले और अपने साथ मेरे प्यास को भी बुझा दे मेरे लाल यूँ अपने लोडे को मसल के उसके साथ अन्याय न कर....

विशाल अब भी बहुत बने देख रहा था उसका मन तो था की जा क अपनी माँ को अपने बहो में भर ले और हर वो काम करे जो पोर्न में वो देख रहा था पर उसके लिए ये जो हो रहा था शॉकिंग था...

अलका- अभी भी तू बैठा है तो ये देख जिसपे पूरी दुनिया मरती है मेरी गांड देख कैसी लगी तुझे आज तक तेरे बाप को भी हाथ नहीं लगाने दिया ायजा तू मसल मेरे चूतड़ों को





दूध पियेगा मेरे चूचियों का या मेरे छूट का रास चखना है

अलका चलते हुवे विशाल के बीएड के पास गयी और उसके लुंड को मुठी में भरते हुवे उसके आँखों में देखते हुवे कहती है ये तो भोत सख्त है विशाल ये तो मेरी प्यास बुझा देगा मुझे अपना पानी पिलायेगा न बीटा...

और यह विशाल के सब्र का भी बांध टूट जाता है वो खींच के अपनी माँ को अपने ऊपर लता है और अलका भी उसके गॉड में जा के नंगी hi बैठ जाती है





और दोनों एक दूसरे को पागलो की तरह चूमने चाटने लगते है आपका तो पहले से hi नंगी थी उसने विशाल के शॉर्ट्स को भी झटके से खींच के उसे पूरा नंगा कर दिया...

दोनों एक दूसरे में ऐसे गूथ गए जैसे सांप...

विशाल का लुंड अलका के नाभि में ठोकरे मार रहा था....

वो अलका के चूचियों को भोत बुरी तरह मसल रहा था और अलका हवस की आग में इस तरह कल रही थी की उसे दर्द का एहसास तक नहीं था...

वो सच में टीवी पे चल रहे पोर्नस्टार को पीछे चोर चुकी थी...

अलका- आआअह्हह्ह्ह्ह विष्ठ्हललल पिजा सारा दूध

विशाल- आअह्हह्ह्ह्ह माँ भोत मजा आ रहा है तुम्हे नंगा देख के

अलका- मेरे छाती को चुम मेरे गर्दन नाभि पीठ सब को चुम मेरे रोम रोम से जो आग भड़क रही है उसे शांत कर मेरे बेटे नोच दाल मुझे...... इस रंडी से भी ज्यादा गरम तरीके से छोड़ना अपनी माँ को आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मायआ क्या हो रहा है मुझे ाजजकजज

विशाल- ऑफकोर्स मेरी सेक्सी माँ

अलका- तेरा लुंड जब मेरे गांड में ठोकरे मर रहा था मुझे तो लगा तू मर्द बन गया है पर तू तो मेरे एक दन्त से दर गया...

विशाल- तो क्या करता माँ आफ्टरऑल यू अरे माय माँ...

अलका- अरे मेरे भोले बालम मुझे तो लगा तू जबरदस्ती करेगा मुझे खींच के अपनी बहो में भरेगा मुझे चूमेगा चाटेगा मेरे उरोजों को करेगा और.....

विशाल- और क्या माँ

अलका- और वही सोफे पे पटक के मुझे छोड़ेगा मुझे अचे से रगड़ेगा इतना की मेरी साडी प्यास बुझा जाये पर तू तो दर गया...

विशाल- सूर्य माँ

अलका - श्री नहीं सजा मिलेगी इस बात क्र लिए

विशाल- कैसी सजा

अलका- तू बस देख और ये कहते हुवे अलका अपनी भरी भरकम गांड विशाल के मुँह पे रख देती है और कहती है चाट इसे पूरा अंदर तक जीभ दाल के चाट अलका इतना पागल हो गयी थी की वो खुद अपने दोनों चुत्रो को फैला रही थी नाखुनो से नोच रही थी ताकि उसका बीटा ज्यादा से जयादा जीभ को अंदर दाल सके .....आअह्ह्ह छहत्तत्त और अन्दर दाल अपनी जीभ एक दो ऊँगली भी दाल दे ..









और कूद आगे झुक के विशाल के लुंड के साथ खेलने लगती है....

विशाल के जीभ जैसे hi अलका के छूट के अंदर जाता है . उसके छूट के अंदर जो मोठे डेन उसे परेशां कर रही थी वो और ज्यादा भड़क गयी और एक तेज़ इसकी के साथ अलका मूतने लगी अपने बेटे के hi मुँह पे जिसके लिए विशाल जरा भी रेडी नहीं था पर अलका भी क्या करे पीछे 4-5 घंटे से उसके छूट के साथ खेलवाड़ हो रहा था उसकी छूट भी कब तक इस पानी को रोक पति इसे तो बहना hi था....

अलका के चेहरे पे एक सुकून और हवस का मिलजुला रूप देखा जा सकता था उसे इस बात का कोई पछतावा नहीं था की वो अपने बेटे को अपना मिट पीला रही है उसे तो बस चरमसुख चाइये था जिसके लिए

आज वो लाज शर्म को कही चोर आयी थी

अब जैसा की आप सभी को पता है अलका के पुरे जिस्म में जो आकर्षण का केंद्र है वो है उसकी गांड जो की इस वक़्त विशाल में चेहरे पे था और विशाल को भी अपनी माँ का गांड भोत पसंद था छूट को छत्ते हुवे उसने एक ऊँगली गांड में डालनी चाहिए लकण वो छेद इतनी टाइट थी की उसकी जा hi नहीं पा रही पर अलका की चोख जरूर निकल गयी

अलका- आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कर रहा है वह नहीं तू बस छूट चाट मेरी गांड पे नज़र मत दाल मेरे

विशाल- छूट को चाट तो रहा hi था साथ hi उसने उसमे अपने बिच की ऊँगली भी दाल दी...

अलका- आआआहहहहह माआआ ऐसे hi छोड़ अपनी जुबान से

फर दोनों पोजीशन चेंज करते है और अलका निचे लेट जाती है और विशाल उसके चुचो को चूसने लगता है

अलका--- आआह्ह्ह्हह्ह ूउम्मम्मम्मम निचोड़ दाल इसे सारा दूध पिजा

विशाल फर थोड़ा निचे पेट और पेट से नाभि की तरफ आता है .... अलका के नंगे मांसल पेट को देख विशाल से रहा नहीं गया और उसने उसे भी मसल दिया

अलका- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भोत सही जा रहा है दो आईटी जो ों बेबी

विशाल फर उस जगह आ जाता है जहां आने का इंतज़ार अलका भी कर रही थी यानि उसकी छूट पे

विशाल पहले उसके छूट को सूंघता है फर उसमे 2 ऊँगली दाल के उसका रास निकल के अपने मुँह में दाल के चूसने लगता है ऐसा करते अलका विशाल को देख रही थी और ये चीजे उसे और भड़का रही थी वो फ़ौरन अपनी टंगे खोल ली जिस से की उसकी छूट और खुल के दिखे..

विशाल ने दुबारा ऊँगली उसके छूट में दलिएर ढेर सारा रास उसके ऊँगली से लिपट के बहार आ गया पर इस बार उसने ऊँगली अपने मुहे डालने के बजाये अलका के मु में दाल दिया और अलका उसे बड़े चौ से चूसने लगी पर विशाल के माँ का छूट का रास था तो इस्पे अलका अकेले मजे कैसे ले सकती थी आज तो इस्पे सब से जायदा हक़ विशाल का था सो वो तुरंत अपनी जुबान को अपने माँ के मुँह में दाल देता है और दोनों फर से एक लम्बी किश करने लगते है किश के बहाने वो अलका के छूट का रास अलका के मुँह से पि रहा था...

पुरे कमरे का माहौल बहुत hi कामुक और उत्तेजना से भर गया था

अलका को जिसमे को जिस अंग की जितनी तारीफ करो काम है अभी विशाल छूट केके लिया भी नहीं था की उसकी मखमली जंघे जैसे विशाल को इशारे से बुला रही हो आप मेरे साथ भी खेलो देखो मेरा शेप कितना सुडौल है एक बाल नहीं गोरी और मुलायम ऐसे जैसे माखन

विशाल अलका के जांघो को मसलने और काटने लगा...

दरअशल अलका जैसी औरत उसके हाथ तो लग गयी थी पर उसे ये समझ नहीं आ रहा था की वो क्या क्या करे क्यों की यह सिर्फ छूट और छूट नहीं बल्कि पूरा का पूरा बुफे लगा हुआ था....

अलका- आआअह्ह्ह्हह विशाल बेटे कुछ कर शांत कर मेरे इस आग को

विशाल- कुछ ज्यादा hi आग लगी है लगता है आपके उसमे

अलका- किस्मे....?

विशाल ऊँगली से छूट की तरफ इशारा करता है....

अलका- तो छूट बोलना पागल तू तो लड़की को तरह शर्मा रहा hai...(Agar राजीव ने ड्रिंक में सेक्स गोली न मिले होती तो सायद अलका भी इतना खुल के न बोल पाती... ये सब खुला पैन इस दवा का hi असर था... और अगर अलका घर न आती तो ये रान्दीपन ऑफिस या किसी कलेग के फ्लैट पे दिखा रही होती.. पर फसल बोया राजीव और काट विशाल रहा है..)

विशाल- यस माँ आपके छूट में भोत आग लगी है

टीवी पे अभी भी पोर्न चल hi रहा था..

अलका को फंतासी आयी की उसका बीटा इसे रंडी की तरह गली दे दे के चोदे ये जो उसका बीटा आप आप माँ माँ रेस्पेक्ट दे कर बात कर रह है उसे मजा नहीं दे पा रहा है ..

अलका को लगा की उसे hi विशाल को खोलना पड़ेगा अगर उसे अपनी छूट शांत करवानी है....

इसे किसी भी तरह जल्दी से जल्दी विशाल का लुंड अपने छूट में लेना था..

वो विशाल को खड़ा करती है और खुद उसके निचे बैठ जाती है और उसके लुंड को पकड़ क आगे पीछे करने लगती है

विशाल- आअह्ह्ह्हह माँ

अलका- इतना लम्बा मोटा हथ्यार छुपा के रखा था अपनी माँ को छोड़ नहीं सकता कब से तड़प रही हु

विशाल- यस माँ और खुल के अलका के चुचो को मसलने लगता है

अलका अपनी जुबान विशाल के टोपे पे फेरती है..

विशाल के मनो जान निकल के मस्ती के सातवे आसमान पे उड़ने लगा हो

विशाल- आआह्ह्ह्हह माँ

तभी अलका एक डैम गैप से अपने बेटे का लुंड थोड़ा फर थोड़ा और कर के मुँह में भरने लगती है...

लेकिन विशाल का लुंड इतना बड़ा और मोटा था की अलका का पूरा मुँह खुलने क बाद भी नहीं जा पा रहा था...

अलका बड़े मन से अपने बेटे का लुंड चुस्ती है उसे पता था जितना अचे से वो ये हथ्यार तैयार करेगी उतने अचे से उसके खेत की जुताई होगी...

धीरे धीरे अलका पूरा लुंड अपने हलक में उतर लेती है... वो अपने बेटे को पूरा जन्नत दिखा देना छह रही थी और इसके लिए वो कोई कसार नहीं चोर्ने वाली थी









विशाल- माँ आपका मुँह तो भोत ज्यादा गरम है और आप सूचक भी उसकी तरह कर रहे हो

अलका- किसकी tarah(halaki वो समझ जाती है की विशाल का इशारा पोर्नस्टार की तरफ था)

विशाल- स्क्रीन की और ऊँगली कर के बतात है

अलका- ाचा उस रैंड ....? तू अपनी माँ को रैंड बुलाना चाहता है...?

विशाल की फैट जाती है उसे लगता माँ बुरा न मन जाये

विशाल - no माँ मेरा वो मतलब नहीं था

अलका- अरे बोल तेरा जो मन करे बोल रैंड बोल अलका बोल अलका रंडी बोल

विशाल- no.mom it's ok

अलका- मैंने खा न मुझे बुरा नहीं लगेगा

विशाल- ok माँ

अलका- उसके ाँद को दबा देती है और लुंड पे दन्त लगा देती है...

विशाल- आअह्ह्ह्ह साली रैंड दन्त चुभोती है और एक छठा अपनी माँ के गाल पे एक थप्पड़ मार देता है...





अलका- यस that's लिखे माय बेबी के ओने मोरे टाइम

विशाल- एक और छठा अलका के मुँह पे मरता है और उसके बाल पकड़ के खींच देता है और अभी तक जो अलका लगाम अपने हाथ में लिए थी अब विशाल लेने लगता है..

विशाल अलका की मुँह छोड़ने लगता है आआह्ह्ह्ह चूस साली रंडी तूने बड़ा तंग किया है मुझे और तेज़ झटके के साथ अलका के गाल पे तो कभी मुँह पे छठा मरता रहता है अलका को भी ये हुमिलिएशन ाचा लग रहा था

विशाल- अलका को बाल से पकड़ क उठता है और बिरतार पे पटक देता है

अलका - उसके आँखों में देखते हुवे आआआअह्हह्ह्ह्हह अब छोड़ मेरे बेटे

विशाल- छोडूंगा पर तेरे कहने से नहीं जब मुझे छोड़ना हो

अलका- तो अब.....?

विशाल अलका के गर्दन को बीएड के किनारे लता है और खुद जमीन पे खड़ा हो के उसके मुँह में लुंड घुसाने लगता है ऐसा करने से विशाल का लुंड पहले से ज्यादा अंदर तक जाने लगा...









अलका के आंसू और कुघ आने लगे पर उसने जो छूट अपने बेटे को दो ये उसी का नतीजा था...

अलका- आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ग्गगगगगगहगह

विशाल- और चूस मेरे लोढ़ा मेरी रंडी माँ

वो अलका के नक् भी बंद का देता था जिस से अलका बेचारी तड़प उठती थी पर विशाल को अलका पे कोई दया नहीं आ रही थी अब अलका उसके लिए एक रंडी थी जिसे वो ठंडा करने वाला था और अलका को भी तो यही चाइये था





लुंड मुँह में डालते हुवे विशाल अलका के शरीर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं था जिसे अपने मुठी से मसल न हो और कहते न मारे हो.. अलका का पूरा शरीर लाल हो चूका था इस तरह इतनी बेरहमी से तो उसे कभी अशोक ने भी कभी नहीं छोड़ा था जो उसका छोटा बीटा विशाल उसकी पत्नी अपनी माँ या आज रात की रैंड अलका के साथ कर रहा था..

अलका- दर्द में बिलखने लगी थी पर उसे इसमें सेंसेशन भी मिल रहे थे उसे ये वाला ट्रीटमेंट और चाइये था विशाल जितना मरता अलका उसे मोरे कह के और उकसाती थी ..

विशाल उसके छूट पे मरता और वो मूत के धार बहाने लगती जिस्म के इस खेल 2 घंटे हो चुके थे लेकिन अलका के छूट को अभी तक लुंड नहीं मिला था जिसके लिए वो पागल हो रही थी विशाल तो जैसे आज अलका के जिस्म को खा जायेगा कुछ ऐसा कर रहा था अपने कभी अलका के चुचिओ को चुस्त तो कभी ताहपाद मरता कभी अलका के पेट तो कभी जांघो तो कभी छूट पुरे श्री को चाट के या काट के गीला कर दिया था हर जगह उसके दन्त के या हाथ के निशान चाप गए थे अलका ने इसकी उम्मीद भी नहीं की होगी की उसका बीटा उस के साथ इतना बेरहम हो जायेगा...

अचानक अलका विशाल के गिरफ्त से निकल क भगति है और कहती है

अलका- मादरचोद छोड़ेगा भी या मुँह में hi झाड़ जायेगा

विशाल- साली रैंड भाग खा रही है आज तुझे असली चुदाई दिखता हु और वापस से उसके बाल पकड़ के खींचता है और फर उसके होंटो को चूसने लगता है

Uuuuuuuuuummmmmmm

फर वो घडी आ गयी जिसका इंतजार अलका को पिछले कई घंटो से थी जिसने उसे आज एक माँ से एक रंडी बनने पे मजबूर कर दिया

विशाल अलका के गर्दन पकड़ के उसे किसी पुतले की तरह उठा के बीएड पे फ़ेंक देता है ये साडी बेरहमी अलका को और ज्यादा उकसा रही थी...





और फिर उसकी मखमली टैंगो को पकड़ के अपनी तरफ खींचता है जिस से उसकी टंगे हवा में लहरा जाता है और छूट खुल उसके कमर से टकरा जाती है ...अलका को समझ आ जाता है अब उसकी चुदाई होने वाली है वो एक तक अपने बेटे विशाल को देखते रहती है मनो वो जानना चाहती हो अब क्या करेगा...

विशाल अपने लुंड को अलका के छूट पे रगड़ता है.....

अलका--- आआह्ह्ह्हह्ह हह फ़क में

विशाल- एक किश करता है और एक तेज़ झटका मरता है जिस से उसका टोपा उसकी माँ के छूट को चीरते हुवे

अंदर घुस जाता है....









अलका की तो मनो जान निकल जाती है वो भोत जोर से चीखती है

अलका- आआआअह्ह्ह्हह maaaaaaaaaa

लकण विशाल उसे चुम रहा था तो उसकी आवाज़ उन्दोनो के गले में hi घुट जाती है...

लेकिन अलका की ये चीख विशाल क लिए प्राउड मोमेंट था ककी अलका जैसी भरे जिस्म की औरत की चीख निकलवाना हर किसी के नहीं बल्कि सर्फ एक असली मर्द के बस की बात है...

अभी विशाल का टोपा या उस से थोड़ा ज्यादा hi गया था की अलका की छूट में जैसे किसी ने चीरा मर दिया हो अभी आधा लुंड तो जाना बाकि था..

विशाल ने जोश में आ क एक और तेज़ झटका मारा और इस बार उसका पूरा लुंड उसकी माँ अलका की छूट चीरते हुवे उसके बच्चेदानी से जा टकराया वही जगह जहां कभी वो 9 महीने बिताया था...

विशाल का ये झटका अलका से बर्दाश्त कर पाना मुश्किल था वो इतने जोर से चीखती की उसकी आवाज़ अगर कॉलोनी में कोई जाग रहा हो तो पक्का सुन लिया होगा

अलका- aaaaàaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मादरचोद रंडी की औलाद फाड् दी मेरी छूट बहन के लुंड आआआह्ह्ह्ह मायआ बचाओ

विशाल- क्या हुआ मेरी रंडी माँ अभी तो कह रही थी रेहम मत करना और एक hi झटके में ये हाल हो गया

विशाल अपना लुंड निकलता है दुबारा एक तेज़ झटके के साथ पूरा जड़ तक अलका के छूट में पेल देता है

अलका- तेरी माँ की छूट मादरचोद तेरी माँ हु मादरचोद कोई रंडी नहीं आराम से छोड़ ले

इस झटके से अलका को ऐसा लगता है जैसे विशाल का लुंड उसके मुँह से बहार आ जायेगा.

पर विशाल पे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता वो अलका पे बिना कोई रेहम दिखाए छोड़ना सुरु कर देता है और जितना अलका झटको से रोटी उतना उसके चेहरे पे कहते मरता अलका का चेहरा बिलकुल लाल हो जाता है और विशाल उसे बेरहमी से छोड़ता रहता है

अलका- यस यस यस फ़क में फ़क में हर्डर बेब और तेज़ छोड़ फाड़ दे मेरी छूट मई तो तुझे बचा समझती थी तू तो मादरचोद निकला

विशाल- जब तेरी जैसी गरम माँ हो तो मादरचोद बनना पड़ता है वर्ण तू किसी और की रैंड बन के उसका बिस्तर गरम करेगी साली चिनार और एक छठा उसके चुचो पे मार देता है

अलका- और मार थोड़ा तेज मार भोत ाचा लग रहा है कहते हुवे अलका झड़ने लगती है पर विशाल अभी भी हार नहीं मैंने वाला था इस बिच अलका 2 बार झाड़ चुकी थी...

विशाल- अलका मेरी माँ मेरी रांड मेरी चिनार मम्मी...

अलका- यस माय मास्टर

विशाल - चल अपनी गांड बहार निकल और घोड़ी बन जा...

अलका बिना देर किये घोड़ी बन गयी और अपने चूतड़ों को फैला के उसे अपनी छूट के दर्शन करने लगी साथ hi पीछे मुद के वो विशाल को देखने लगी की अब वो क्या करता है





विशाल- अपनी माँ की कमर पकड़ता है और लुंड सेट कर क्र एक जोर का झटका लगता है ... झटका इतना तेज़ था की अलका आगे को गिर जाती है

विशाल वापस उसे पकड़ क अपनी और खींचता है और एक के बाद एक 4-5 थप्पड़ उसके मोठे फुल्ले हुवे चूतड़ों पे लगा देता है

अलका- आआह्ह्ह्हह्ह

विशाल को उसके चूतड़ों की थिरकन इतनी अछि लगती है की वोऔर मरने लगता है और तेज़ तेज़ छोड़ता है अपने घोड़ी बने माँ को... अलका का दिमाग काम करना बंद कर देता है उसे समझ नहीं आता की ज्यादा दर्द उसे चुदाई से हो रही है या विशाल के पिटाई से लेकिन एन्जॉय वो दोनों को कर रही थी





अलका- आआआअह्ह्ह्हह मेरे विशु और तेज़ छोड़ डैम नहीं है क्या याफिर इतने से थक गया....

विशाल- ाचा रंडी अभी तो रही थी अब मुझे चैलेंज कर रही है तो ये ले

वो पीछे से अलका के बाल पकड़ के खींचता है जिस से अलका की गर्दन हवा को हो जाती है और तेज़ तेज़ झटके लगाने लगता है





दरअशल अलका को चाइये भी यही था तभी वो विशाल को उसका रही थी

अलका - दर्द और मजी चीखने छिलने लगती है छूऊऊडड़ड पहह्हह्हआददददद डीई मेरी छूट मेरे बेटीएएएएए आज से तू मादरचोद बन गया मुझे रंडी बना दिया तूने छोड़ फाड् दे मेरी छूट और तेज़

विशाल भी बराबर से मुक़ाबला कर रहा था मनो दोनों माँ बेटे में जुंग लगी हो और कोई भी हथ्यार न डालना चाहता हो

विशाल को एक शरारत सूझी अलका को छोड़ते हुवे उसकी माँ की मखमली गांड उसे काफी उत्तेजित कर रही थी उसने अलका से खा अपने चूतड़ फ़ैलाने को और अलका ने फैला भी लिया तभी विशाल ने अपने हाथ के 3 ऊँगली को अपनी माँ के मुँह में दाल दिया जिसे हवस से भरी अलका चूसने लगी बिना ये सोचे की आगे क्या होने वाला है

विशाल वापस ऊँगली अलका के मुँह से निकलता है और अलका की छूट में दाल देता है अलका की एक आह निकल जाती है

अलका---- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अब क्या हाथ भी डालेगा ुउउइइइइ माआआ

विशाल हस्ते हुवे छूट से रास से सनी ऊँगली निकलता है और अलका के गांड के छेद में दाल देता है .. ऊँगली अंदर जा तो नहीं रही थी पर विशाल ने जबरदस्ती ूँगी थुश hi दिया...

एक तो अलका की गांड इतनी टाइट की उसमे एक पेंसिल भी न जाये और यह विशाल ने ऊँगली दाल दी





छूट में लुंड गांड में ऊँगली अलका इस दोहरे वॉर को सेह न सही और एक बार फर से झाड़ गयी और इस बार इतना कड़ी जितना वो मूत भी नहीं पति इतना कामर्स उसके छूट में बहा दिया था अब उसे अपने छूट में जलन होने लगी उसे बस कैसे भी विशाल को झड़ना था वर्ण आज उसकी गर्मी के साथ उसका बीटा जान भी निकल देगा

लेकिन ये 3रद डिस्चार्ज ने अलका को जैसे बेसुध कर दिया उसमे बोलने तक की जान नहीं बची थी मुश्किल से बेहोश होते होते बची है....





इधर अपना हीरो विशाल रुकने का नाम hi नहीं ले रहा है वो झटके मरे जा रहा है....

अलका अब रोने लगी रेहम की भीख मांगने लगी चोर दे मेरे बेटे अब मुझसे सहा नहीं जा रहा है मई मर जाउंगी, मई माँ हु तेरी तरस खा

मई चूस के तेरा पानी निकल देती हु आगे आजा पर विशाल पे कोई असर नहीं

विशाल- चुप साली चिनार खुद का हो गया तो नखरे करती है हरामज़ादी कुटिया और तेज़ तेज़ कहते उसके चूतड़ों पैर मरने लगता है

अलका ये बर्दाश्त होना मुश्किल था वो तेज़ तेज़ चीख और रो रही थी

अलका- aaajhhhhhhhhhh छोड़ और छोड़ड़ड़ड़ फ़ाड़द्द दे मेरे छूट को छोड़ मेरे बेटे छोड़ मादरचोद अपने बाप की बीवी को छोड़

विशाल - आअह्ह्ह्हह अलका मेरी जान ये हुई न बात तेरे में जितनी गर्मी है अभी तू एक साथ 2-3 लुंड ले लेगी और डकार भी नहीं maregi...tujhe तो साली मई अपनी रखैल बनाऊंगा

अलका- बना ले अपनी रखैल अपने दोस्तों से भी छुड़वाना रखैल बना क रोज रात को अपने बाप के सामने छोड़ना

ये साडी बाटे वो विशाल को उत्तेजित करने के लिए बोल रही थी ताकि उसका डिस्चार्ज हो और अलका की जान छूटे और हुवा भी वैसा hi

विशाल- माँ मेरा आने वाला है

अलका- अंदर मत निकलना मुझे तुम्हारा पानी टास्ते करना है

विशाल अलका के आगे आता है और अपना लुंड अलका के मुँह में दाल देता है और देखते देखते अपना सार माल अलका के मुँह में भर देता है ...









विशाल का पानी इतना निकला था की अलका का पूरा मुँह भर घर था और अलका अपने बेटे के गरम गधे सफ़ेद पानी को गाठ गाठ कर के पि गयी और बचे हुवे को जुबान से चाट चाट के साफ़ कर दी...

विशाल अपने माँ के फेस को पकड़ा और उसपे थूक दिया थूऊऊऊ

अलका को ये भी काफी उत्तेजित कर गयी और वो उसके थूक को अपने चेहरे से साफ़ कर क चाट गयी...





अलका पूरी तरह से तृप्त हो गयी थी उसका रोम रोम चुदाई का दर्द बयां कर रहा था शरीर का ऐसा कोई अंग नहीं जहां दन्त और उंगलिओ के निशान न हो फर चाहे वो उसका चेहरा हो छाती हो पेट गांड पिट या कामर्स से बेहतर छूट...

इस भीषण ठण्ड में भी दोनों माँ बेटे पसीने से लथपथ मनो एक जुंग लड़ के आये हो और देखा जाये तो जुंग hi तो थी..

अलका का गोरा बदल बिलकुल लाल हो गया था उसे देख क कोई भी बता सकता था की किसी ने बड़े बेरहमी से छोड़ा है उसे ...

घडी में कोई सुबह के 9 बज रहे थे इधर कमरे में फोन की घंटी बजी रही होती है ...कॉल उसके बड़े बेटे आदित्य का था जो अपनी माँ को बड़ी विश करने के लिए काफी देर से फोन कर रहा था जब उसने फोन की तरफ देखा फर कमरे को देखा तो पाया की ये सब एक सपना था पर सपना इतना रियल कैसे हो सकता है जब उसकी नजर पहले खुद पे और फर अपने बेडशीट पे जाती है तो वो शर्मा जाती है वो बिलकुल नंगी अपने रूम में लेती थी

और उसका पूरा बेडशीट उसके कामर्स से भीगा हुआ tha..jaise उसने मुता हो अपने बीएड पे उसे अब भी सपना और रियल में फ़र्क़ का पता नहीं लगता तो वो गाउन पहन के विशाल के कमरे में जाती है तो देखती है विशाल बड़े मासूमियत के साथ सो रहा था...

उसे अपने बेटे पे बड़ा प्यार आता है वो मन में कहती है कितना भोला है मेरा बीटा विशु और मई क्या क्या सोचती हु की कैसी माँ हु मैं

वो जैसे विशाल का दूर बंद क्र क बहार को आती है उसकी नज़र विशाल के तने हुवे लुंड पे पड़ती है और उसकी सांसे अटक जाती है ये सच में सपने वाले लुंड के जैसा hi था... वो सपना और रियलिटी में कंफ्यूज हो गयी थी वो भाग के अपने कमरे में जाती है और शीशे के आगे नंगी हो जाती है और अपने शरीर पे बने वो निशान ढूंढ़ने लगती है जो कल रत विशाल ने उसे दिया था पर ऐसा कुछ नहीं मिलता वो अपने छूट को भी देखती है बूत वह भी वैसा कुछ नहीं मिलता जिस से उसे लगे की वो रात में अपने बेटे से चूड़ी है फिर वो कन्फर्म हो गयी की ये सपना hi है

और गीले बेडशीट को मशीन में डालने के लिए उठती है तो दीखता है की उसका गद्दा भी पूरा भीगा हुआ है वो भोत शर्मा जाती है उसके गाल खुद से लाल होने लगते है..

अलका मम hi मन सोचती है अगर सपने में उसने मेरा ये हाल कर दिया तो जब सच कभी मुझे छोड़ेगा अपना लुंड मेरी इस फूल सी छूट में डालेगा तब मेरा और मेरे इस छूट का क्या होगा ...

ची ची मई ये क्या सोच रही हूँ वो मेरा छोटा सा बीटा है प्यारा सा वो ऐसा क्यों करेगा अपनी माँ के साथ

लेकिन लुंड तो उसका काफी दमदार है अलका और सपने का असर ये होता है की उसकी छूट में कुलबुलाहट होने लगती है पानी खुद से रिसने लगता है ककी चूड़ी तो वो अभी तक नहीं है.... उसकी छूट को तो अभी तक शांति नहीं मिली है न कोई लुंड मिला hai....jhan उसके मन में उसके बेटे विशाल के लिए ममता थी करुणा था तो वही उसकी छूट बगावत पे उतर आयी थी सपना hi सही पर उसके छूट ने विशाल के लुंड का वर्चुअल टास्ते ले लिया था और अब उसे वही स्वाद असलियत में चाइये

तो देखते है ममता की जीत होगी या हवस का

स्टे तूने गाइस आगे और भी धमाके होंगे,😉😉

 
part-8

साल का पहला दिन अलका अपने बालकनी में बैठे धुप का आनंद ले रही थी..

उसने आज लाल साड़ी बैकलेस ब्लाउज पहना था जिसमे पीछे बस एक पतली डोरी बंधी बाकि उसका पूरा पीठ बिलकुल नंगा था...

पतली कमर जिस से निचे बंधी लाल साड़ी जो थोड़ा आर निचे हो जाये तो उसके भरी गद्देदार चूतड़ों की झलकियां मिल जाये ..

पीठ पे ब्लाउज के नाम पे सिर्फ एक पतला सा क्नॉट.. चौड़ा कन्धा और उसपे उसकी पतली सुराही सी गर्दन और उसके बिखरी लेट.. इन सब पे पड़ता सुनहरी धुप इस अवस्था में अलका किसी काम देवी का अवतार लग रही थी जो किसी का भी इमां डगमगा दे....






उसके बगल में गमले में कुछ फूल भी उगे हुवे थे पर अलका का गोरा बदन इस फूल से भी नाजुक दिख रहा था जिसे निचोड़ो तो उसके पोर पोर से रास बहने लग जाये और वो रास कोई आम रास नहीं कॉमर्स है... पीठ को जैसे छू लो तो कही गन्दा न हो जाये ऐसा लुभावना दृश्य था...

पर इनसब बाटे से अनजान अलका अपने ख्यालो में खोयी थी...

शराब का नशा उतर चूका था और बाईट रात की साडी घटनाये उसके दिमाग में किसी फिल्म की तरह चलने लगी थी... जिसे सोच सोच के वो कामुक और चिंतित दोनों हो रही थी...

कैसे राजीव ने उसके ड्रिंक में कुछ मिला क उसका फायदा उठाना चाहा

कैसे उस ड्रिंक की नशे में वो बिच सड़क पे किसी आदमी की कार में इस से छोड़ने के लिए नंगी हो गयी और फर कैसे उसने अपने बेटे को अपने जलते जिस्म का दर्शन कराया जब वो केक करने के लिए चेंज करने गयी थी... उसे पता था उसका बीटा उसे देख रहा है इसके बावजूद उसने अपनी छूट में लगे आग के वजह अपने बेटे को hi उत्तेजित कर दिया और कैसे उसका बीटा उत्तेजित हो कर केक मलने क्र बहाने के उसके चुचिओ से खेलने लगा और अपने लोडे का आकर अपनी माँ के गांड को बता दिया था..

इन सब से तो अलका सायद उबार भी जाती लेकिन जो चुदाई विशाल ने उसकी सपने में को थी वो उसके अंदर के कामाग्नि को इतना ज्यादा भड़का देती है उसके ख्याल से hi अलका का छूट रिसने लगता है उसकी पंतय गीली जाती है और उसका काम रास उसके पंतय से बहते हुवे उसके जांघो में फ़ैल जाती है पर इनसब बातो से दूर अलका के मन में विशाल के लिए भावनाये जाग गयी थी..

वो अपने बेटे विशाल जिसे वो बचे को नज़र से देखती आ रही थी अचानक से उसमे उसे मर्द नज़र आने लगा और वो सोचने लगती है विशाल का लोढ़ा कितना टाइट और मोटा लग रहा था जब वो मुझे शीशे में देख के मुठ मार रहा था काश मुझे उसका रास पिने को मिल जाये तो मेरा गाला और मेरी ये छूट दोनों शांत हो जाये . (अपने मन में वो खाने लगती है कैसे उसने मुझे रगड़ा था उसे मैंने एक बार रंडी कहने की छूट क्या दे दी उसने तो रंडी hi समझा लिया और जानवरो की तरह छोड़ा मुझे, थूका भी था मेरे मुँह पे पर उसका थूक भी कितना टेस्टी था युम्म्म..






ऐसे जानवरो वाला सलूक तो उसके बाप ने भी कभी नहीं करा मेरे साथ और मेरा सागा बीटा मुझे कितने बेरहमी से छोड़ा है .. चोदे भी क्यों न फ्री की इतनी हॉट रंडी जो मिल गयी थी और वो भी तो गबरू जवान हो गया है..) यही सब सोच में वो डूबी थी इधर धुप उसे थोड़ी तेज़ लगने लगी उसके गोर जिस्म को सूर्य की किरणे अपने तपिश से लाल करने lagi..uske कंधे और पीठ पर पसीने की बुँदे किसी मोती की तरह चमकने लगती है...... आआअह्हह्ह्ह्ह ऊपर वाले क्या बाला की चीज बनायीं है और बनाए के हैवानो के बिच चोर दिया जो मौका लगते hi इसके जिस्म को नोच नोच के खा जायेंगे और इसे निचोड़ कर इसके शरीर से निकले रास को किसी शहद की तरह पी जायेंगे....





अलका अपने ख्यालो से निकलते हुवे और अंगड़ाई लेते हुवे उसके मुँह से निकल जाता है ओह्ह्ह्ह माआआ क्या करू मई कैसे शांत करू अपने इस आग को और उसका हाथ अपने छूट पे चला जाता है तो वो देखती है उसकी पंतय तो पूरी गीली हो चुकी थी और उसका काम रास उसके जांघो में फ़ैल चूका था... वो उठ के वाशरूम में जा के चंगे करने की सोचती है और अपने कमरे की तरफ चल देती hai...par रस्ते में उसके सपने का हीरो उसके बेटे विशाल का कमरा था जाते जाते वो सोचती है एक बार विशाल को देख लू वो क्या कर रहा है

(इधर विशाल की हालत थोड़ा बताता चालू फिर अलका की तरफ चलेंगे)

रात में जो भी वाकया हुआ उस से विशाल भी काफी उत्तेजित था उसे रह रह के अपनी माँ का जिस्म hi नज़र आ रहा था कैसे उसकी माँ अपने hi छूट का रास चाट रही थी.. कैसे वो गांड निकल निकल क ज्यादा से ज्यादा ऊँगली घुसाने की कोशिश कर रही थी जिस से उसका गांड कुछ ज्यादा hi बहार आ जा रहा था... केक कटाई के बहाने विशाल ने कैसे अपने माँ के चुचिओ को दबाया और उसके गांड में अपने लुंड घुसा दिया था बेशक वो कपडे के ऊपर से था पर वो एहसास सच में गांड मरने से काम भी नहीं था ..... अगर उसने जल्दबाजी में अपनी माँ के छूट को न चुवा होता बल्कि थोड़ा और गरम करता तो सायद कल वो अलका को छोड़ पारा पर इनसब के ऊपर बेस

हरे को दन्त पद गयी अपनी सगी माँ को छोड़ने की कोशिश के लिए इनसब सोच से वो भी उत्तेजित हो रहा था और उसकी उत्तेजना को काम करने का एक hi साधन था पोर्न)

विशाल अपने कमरे में बैठा पोर्न देख रहा था और अपने लुंड को पेंट से बहार निकले मसल रहा था ...

जैसे hi अलका ने विशाल का दूर नॉक किया विशाल सामान्य अवस्था में आने की कोशिश करने लगा और अपना लैपटॉप 💻 एक डैम से बंद कर दिया लेकिन जो चीज छुपाने की जरुरत थी वो तो बहार hi रह गयी और वो चीज था उसका मोटा लम्बा बिलकुल तना हुआ लुंड जो रात से hi अलका के बारे में सोच रहा था उसके बाद पहले पोर्न और अब फर से सामने कड़ी हमारी कामदेवी अलका को देख के फुफकारने लगा...






विशाल- (जल्दी से बल्कणत अपने ऊपर लेते हुवे) यस माँ (रत क हुवे घटना से उसकी हिम्मत नहीं थी अपनी माँ से नजरे मिलाने की सो वो इधर उधर देखने लगता है...)

अलका उसके कमरे में एंटर करते हुवे उसके पास जाती है और उसके बालो में हाथ फेरते हुवे..

अलका- क्या कर रहा था मेरा बेबी...

विशाल- कुछ खास नहीं माँ वाचिंग मूवी (इस वक़्त अंकित का लुंड इतना टाइट था की बल्कणत भी तम्बू बन गया था) और हो भी क्यों न अलका का रूम hi इतना मादक था..

पीछे से नंगी आगे से आधी नंगी चूचिया जिसे देख कोई भी उत्तेजित हो जाये और विशाल तो रात से hi उत्तेजित है..

अलका- (उसके बने तम्बू को देखते हुए समयले के साथ कहती है) फिर मुझे देख के बंद क्यों कर दिया

विशाल- no माँ ऐसा कुछ नहीं है आप एक डैम से आये तो हिट ऑफ़ थे मोमेंट थ्ट्स आईटी..

अलका समझ जाती है है की वो क्या देख रहा था उसका मन होता है वो भी बैठ के साथ देखे और देखे की क्या खास बात है इन फिल्मो में जो उसका बेटे सारा टाइम यही देखता रहता है जब घर में खुद उसकी माँ उन सब से किसी भी एंगल से काम नहीं लकण उसका बेहटा कामर्स उसे उनकंफर्टबले बना देता है और उसे पंतय चेंज करने की जरुरत महसूस पहले होती है...

अलका- ok एन्जॉय

और अपने कमरे में जाने लगती है

विशाल अलका को जाते हुवे एक तक देखने लगता है..

अलका का पिछवाड़ा देखने लायक था...

ब्लाउज की क्नॉट तो बस नाम की थी उसका पूरा पीठ बिलकुल नंगा और धुप की वजह से उसका गोरा जिस्म लाल पद गया था जो उसे और कामुक बना रहा था...

साड़ी भी उसने कुछ ज्यादा निचे कर ली थी कमर के बिलकुल निचे जहां से चूतड़ सुरु होता है और गांड की कटाव साफ़ देखि जा सकती थी...






ये सब काम था क्या जो वो उसके मन में विशाल को उकसाने की शरारत सूझी उसने साड़ी थोड़ी और निचे की मनो अब उसकी गांड दिख hi जाएगी और किसी सामान को ुतःने के बहाने निचे झुकी क्यूंकि अलका भी ये बात अचे से जानती थी के उसके गांड के वॉर को झेल पाना मुश्किल था ...





और अपने गांड लचकते हुवे विशाल के कमरे से निकल गयी...

विशाल अलका को जाते देखता रहता है उसे कुछ समझ नहीं आता उसकी माँ चाहती क्या है क्यों उसे उसका रही है जब छोड़ने देना hi नहीं है


विशाल अपनी मम्मी के भरे हुए भरी भरकम जिस्म को ऊपर से निचे तक देखता हुआ अपने मन मई सोचता है, है कितनी गदराई हुई है मेरी मम्मी, पूरी नंगी करके चिपकने पर कितना अच्छा लगता होगा, और विशाल के मुँह से अपने लैंड को सहलाता हुआ एक आआह्ह्ह्हह्ह ममममममम काश निकल जाता है

कमरे में पहुंचते hi अलका ने पाया की उसकी पंतय पूरी गीली हो चुकी है और उसका काम रास उसके छूट से निकल के उसके जांघो में फ़ैल गया है










अलका उत्तेजना में आ के एक एक कर के अपने कपडे उतरने लगती है.. अभी तो वो बड़े सूख से सजी सवारी थी और अभी hi खुद को नंगी करने लगी... एक पंतय hi तो गीली हुई थी चाहती तो सिर्फ पंतय बदल सकती thi...par अलका के अंदर की औरत के साथ साथ उसके अंदर की रांड जाग गयी थी उसके बदन की तपिश इतनी बढ़ गयी ठोस जिसे वो बर्दाश्त hi नहीं कर पा रही थी... कपडा तो बहुत बड़ी चीज है इस वक़्त उसे एक धागा भी अपने सरीर पे नहीं चाइये था ... खिड़की से आती ठंडी हवा उसके कामाग्नि को और भड़का देती है उसका रोम रोम खड़ा होने लगता है वो बीएड पे जा के अपनी छूट मसलने लगती है और अपनी दोनों उंगलिया एक साथ दाल के अंदर बहार करने लगती है साथ hi अपने दूसरे हाथ से अपनी गोल कठोर हो चुके चूचियों को मसलना सुरु कर देती है तो कभी अपने कड़क निप्पल को मरोर देती है.. अपने वासना में वो पूरी तरह पागल हो चुकी है... उसके मुँह से अनायास hi आआअह्ह्ह्हह विष्हहाआलललल मेरे बेटे निकल जाता है जिसका उसे कोई पछतावा नहीं था वो इस वक़्त अपने पति को नहीं बल्कि विशाल को याद कर के अपनी छूट में उंगलिया लेले जा रही थी..

वो इतनी कामातुर हो गयी थी की उसने दरवाजा भी नहीं लगाया था दरवाजा बिलकुल खुला चोर दिया था मनो विशाल को न्योता दे के आयी हो की मई कमरे में नंगी मिलूंगी इन पोर्न को चोर और अपनी माँ को छोड़ के असली चुदाई के मजे ले ... तू चाहे तो इन रंडियो की तरह hi छोड़ना मई तुम्हे नहीं रोकूंगी... तू अपनी घोड़ी बना कुट्टी बना जैसे मन करे छोड़ मुझपे थूक अपना रास पीला अपने थप्पड़ छतो से मेरे जिस्म को लाल कर दे मई फिर भी तुझे नहीं रोकूंगी.. बस मेरे इस छूट की आग को शांत कर दे अपनी रंडी बना ले आज तू मुझे

अलका--- आआअह्ह्ह्हह विशाल क्यों नहीं दिख रही तुझे अपने माँ को तड़प आजा बीटा बुझा दे मेरी प्यास लूट ले अपने माँ को नोच दाल मेरे इन चूचियों को और पि जा सारा रास आआह्ह्ह्हह मायआ

और इसी ख्यालो के साथ भोत तेज़ झाड़ जाती है... और भोत तेज़ सीत्कारी के साथ जोर से चीला देती है vvviiiiiiisssshhhhhhaaaalllllllllll फ़क मीटीए

जिसकी आवाज़ विशाल के कमरे में भी चली जाती hai...aur विशाल सुन भी लेता है

इधर झड़ने के बाद अलका पास्ट पद जाती है उसकी आंखे बंद वो लम्बी गहरी सांसे लेने लगती है विशाल जैसे hi कमरे में आता है तो देखता है उसकी माँ बिलकुल नंगी बीएड पे आंख बंद किये लेती हुई हांफ रही है..


वो कमरे में घुस के अपनी माँ की मखमली जांघो से होते हुवे उसके गीली छूट में अपनी उंगलिया फेरते हुवे कहता है माँ तुमने मुझे बुलाया....?





अलका- हाँ मेरे बेटे देख तेरी माँ की पंतय और मेरी ये छूट कितनी गीली हो रही है





देख मेरा ये छूट ये कल से बेहटा hi जा रहा है रुकने का नाम hi नहीं लेता तू मदद नहीं करेगा अपनी माँ की





विशाल- जरूर मेरी माँ और वो अलका की छूट में अपनी ऊँगली डालते हुवे कहता हाउ माँ तुम्हारी ये छूट उंगली से नहीं शांत होने वाली इसे ये चाइये कहते हुवे विशाल अपना पंत उतर लेता है और उसका लम्बा मोटा लुंड अलका के नज़रो के सामने लहराने लगता है अलका बिना देर किये उसका लुंड अपने हाथमे थम लेती है और एक मादक सिसकारी के साथ

अलका- आआअह्हह्ह्ह्हह विशु ये तो भोत मोटा और बड़ा है ये तो मेरी छूट का भोसड़ा बना देगा मेरे बचे..

विशाल- तुझे शांति भी तभी मिलेगी माँ सिर्फ ऊँगली डाल के नहीं अलका उसके लुंड को मसलने लगती है

अलका- मेरे ऊपर आजा विशाल खड़ा क्यों है


विशाल बिना देर किये अपने माँ के ऊपर आ जाता है और अपने होंठ अपनी माँ के सुलगते जिस्म पे रख देता है और फिर सुरु होता है एक वाइल्ड किसिंग का दौर जैसे दोनों एक दूसरे को खा hi जायेंगे दोनों तड़प अपने चरम पे थी आज इस बिस्तर पे न कोई माँ थी न कोई बीटा था अगर था तो दो सुलगते जिस्म जिसे जल्दी शांत न किया गया तो जाने इस आग में क्या कुछ जल जायेगा...

अंकित अलका के चूचियों को किसी मिटटी की क्ले की तरह मसल रहा था वो जितना जोर लगता अलका को उतना hi मजा आता था...

जो इस बात का साबुत था की औरत के अंदर की आग भड़क जाये तो एक सरीफ सुशिल औरत भी रंडी बन जाती है जहां वो पराया मर्द तो चोरो वो अपने बेटे के लुंड निगलने से भी बाज नहीं आती...

अलका- विशु उतर मैं तुझे कुछ दिखती हु..

विशाल- मन में अब क्या दिखाना बाकि रह गया इस रंडी को और वो अलका के ऊपर से उतर जाता है

अब विशाल निचे था और अलका उसके मुँह के ऊपर अपने भट्टी जैसी छूट रख के बैठ जाती है और खुद उसके लुंड की तरफ झुक के उसका लुंड गैप से मुँह में भर ले के चूसना शुरू कर देती है है






विशाल भी अलका की छूट को अपने दोनों हाथो से खोल के उसमे जीभा दाल के जीभ से hi अपनी माँ की छूट छोड़ने लग जाता है...

इस पोस्टिव में काफी मजे ले लेने के बाद विशाल का मन थोड़ा वाइल्ड होने का होता है तो वो अपनी माँ को निचे उतरने के लिए कहता है

अलका भी विशाल के कहने पे बिस्तर से निचे उतर जाती है पर उसकी आंखे अब भी विशाल को hi घर रही थी मनो कोई कुटिया अपने मालिक को बड़े हसरत से देख रही हो और मालिक उसके लिए बिस्कुट का टुकड़ा लिए खड़ा हो...










अलका भी अपने मालिक को खुश करने में कोई कसार नहीं चूर्ण चाहती थी वो किसी भी शर्त पे अपने मालिक अपने बेटे विशाल को इतना खुश कर देना चाहती थी की उसकी जो ये आग रह रह के भड़क रही है वो उसका बीटा बुझा दे और अलका को रहत मिले..





अलका की इन हरकतों ने विशाल को इतना हाई कर दिया की वो एक hi झटके में पूरा लुंड अपनी माँ के मुँह में पेल देता है और लुंड भी उसके नाम की तरह hi इतना विशाल था की उसके गले की जड़ तक चला जाता है





अगर विशाल बड़े लुंड का मालिक था तो उसकी माँ अलका भी कोई साधारण औरत नहीं है वो साक्षात् कामदेवी है जिसके बदन की तपिश बर्दाश्त करना हर किसी के बस की बात नहीं और होता भी वैसा hi है अलका के मुँह की गर्माहट के सामने विशाल का लुंड ज्यादा टिक नहीं पाया और वो झटके कहते हुवे अलका के मुँह में hi झाड़ गया... अलका भी उसका बराबर साथ देते हुवे अपने बेटे के लुंड से निकले रास का गता गाठ पि गयी और तब तक अपने बेटे के लुंड को अपने मुँह से नहीं निकला जब तक उसका एक एक बून्द अपने गरम गले में न निचोड़ लिया हो..





ये मुँह चुदाई कितना भयका दर्दनाक था वो अलका के चेहरे को देख के अंदाज लगाया जा सकता था वो दर्द में इतना बिलबिला गयी थी की उसके आँखों का काजल उसके आंसुओ के साथ नेहते हुवे उसके पुरे चेहरे पे फ़ैल गया था .

पर इस रंडी की छूट में पता नहीं कौन सी आग भड़क गयी थी इसे अब इस दर्द का कोई एहसास नहीं था वो लुंड लेने के लिए पूरी तरह से तैयार थी बस देर था तो उसके मालिक यानि बेटे विशाल के दुबारा तैयार होने की और उसी के कोशिश में अलका उसके लुंड को चाट चाट के रेडी करने लगती है ताकि उसका बीटा उसकी एक भीषण चुदाई कर उसके छूट की आग

को को शांत करे

अलका पुरे जोश में विशाल का लुंड चाट के खड़ा करने की कोशिह कर रही

विशाल- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआआआ

और ईसिस आवाज़ के साथ अलका की आंखे खुल जाती है और हमारी कामदेवी
अलका जो आंख बंद किये हांफ रही थी और अपने सपने में खोयी हुई थी जहां इस बार फर से उसके बेटे ने उसके मुँह को बड़े बेरहमी से छोड़ा और अपना गरम पानी पिलाया था...

जब उसने दरवाजे की तरफ देखा तो विशाल दबे पांव बड़े तेज़ी से अपने कमरे की तरफ भाग रहा था..


ये एक बार फिर था जब विशाल ने ख्यालो में आ के अपनी माँ के छूट का पानी निकल दिया था

अलका ने उसे देख के एक कामुक और तसल्ली वाली स्मैल दी और बुदबुदाते हुवे कहती है क्यों दर रहा है तेरे लिए तो दरवाजा खुला छोरा था तेरी माँ तेरे hi सपनो में तो खोयी हु कल छोड़ क्यों नहीं देता अपनी माँ को आ कर क्यों दर के भाग रहा है... कब तक सिर्फ सपने में hi अपने लुंड का पानी पिलायेगा हक़ीक़त में थुश दे अपना लुंड अपनी माँ के मुँह में मैं कौनसा मन करुँगी तुझे..

पर दोनों के बिच माँ बेटे की दीवार थी जिसे तोडना कोई आसान काम नहीं था इसके लिए किसी एक को खुल के हिम्मत दिखानी होगी थोड़ा बेशरम बनना होगा पर ये काम करेगा कौन अलका तो माँ है औरत है और विशाल तो एक दन्त से hi दर गया है और डरे भी क्यों न माँ के छूट में अपना लोढ़ा डालना कोई मजाक थोड़े न है...

अलका उठ के अपने कमरे का दरवाजा बंद करती है और वाशरूम में जा के खुद को साफ़ करती है और वापस से अपने कपडे पहन लेती है.

उसके छूट की लावा बह जाने से और शरीर पे ठन्डे पानी के पड़ने से जो आग उसके अंदर भड़क रही थी वो फ़िलहाल क लिए शांत हो गयी थी और कामाग्नि के शांत होते hi उसके अंदर की माँ जाग जाती है उसे गिल्ट होने लगता है की ये उसने क्या कर दिया ये सही नहीं है वो अशोक को धोका नहीं दे सकती ... यही सब सोच के साथ वो अपने किचन में चली जाती है और लंच बनाने लगती है इन सब में कोई 2-3 घंटे निकल गए और इस बिच उसे एक बार भी कोई गंदा ख्याल नहीं आया ...






उसने विशाल को आवाज़ दी दोनों ने साथ में लंच किया और दोनों अपने अपने कमरे में चले गए...

अलका के पास करने को कुछ खास था नहीं और थकी हुई तो थी hi तो बीएड पे पड़े पड़े उसकी आंख लग गयी और वो सो गयी ...
 
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