Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 25 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 197

सूर्य किरण विवाह समारोह ...

चंद्रभान जी .... फिर ऐसे लड़के से रिस्ता

नाना जी ....... आप गलत सोच रहे है वो मेरा नाती भी है गुस्सा तभी आता है जब कोई गलत करता है वैसे दिल का बहुत अच्छा है

कभी फुर्सत में मिलवाता हूँ आपको उस से

एक रूम में जहा किरण को सजाया जा रहा था वह किरण आवर सपना की कुछ आस प्रदोष की भैया आवर हम उम्र शी लिया

किरण को अपने अपने अनुभव बया कर रही थी मस्ती मजाक के साथ

वही बहार विजय आवर पाण्ड्य जी अपने काम पे लग चुके थे

ताकि किसी को कोई परेशानी न हो बारात सूरजगढ़ पहुंच चुकी थी आवर उसका संकेत शिव ने जोरदार आतिश बजी कर सभी को दे दिया था अभी बारात हवेली ी पहुंचे 1 हर से भी ऊपर का समय लेने वाली थी ...............

अब आगे ........

सक्तिपुर .......... रुक्मणि जी गीता जी दोनों को सूर्य की सदी में समय पे सरिक होना था पैर वो दोनों हे काफी लेट हो चुकी थी

रुक्मणि जी ..... दीदी हमें बहुत लेट हो गया है विधि से बात हुई मेरी अभी अभी वो लोग तो सूरजगढ़ पहुंच भी गए है कुछ देर में बारात विवाह मंडप में होगी

गीता जी ....... है हम बहुत लेट हो गए है चलो चलते है सब सामान रखवा लिया है न कार में

रुक्मणि जी ...... जी दीदी पैर क्या अजय को आपने समजा दिया है

गीता जी ....... है मैंने उसे समजा दिया है आवर विक्रम को डॉक्टर नींद का इंजेक्शन लगा दिया है सुबह तक उसकी आँख नहीं खुलेगी

रुक्मणि जी आवर गीता जी कुछ सामान अपने साथ ले कर रूम से निकल जाते है

हॉल में अजय बैठा इन्हे हे देख रहा था

गीता जी ....... अजय हवेली का ख्याल रखना कुछ देर में हम लोग आ जायेंगे आवर कोई प्रॉब्लम हो तो कॉल कर देना राणा भी कुछ देर में तुम्हारे पास आ जायेगा

अजय ...... ठीक है बड़ी मम्मी आप चिंता न करो

गीता जी रुक्मणि जी वह से निकल जाती है कार ले कर सूरजगढ़ की आवर

अजय ...... वो दोनों पहले हे जा चुकी है आप भी निकल गई आज तो यही पार्टी करूंगा अपने दोस्तों के साथ

अजय अपने फ़ोन से अपने दोस्तों को कॉल करता है पार्टी के लिए ला जो कुछ हे देर में आने को त्यार हो गए थे

अजय ...... एक बार राणा अंकल को कॉल कर लेता हु की वो आ रहे है की नहीं अगर यहाँ वो आये तो मुझे फार्महाउस जाना होगा

अजय ......hello राणा अंकल आप हवेली आ रहे हो न

राणा ....सॉरी बीटा मुझे कुछ काम से अच्चानक सहर जाना पद रहा है अगर कुछ जरुरी हो तो मैं किसी आवर को भेज देता हूँ

अजय .....नहीं अंकल उसकी जरुरत नहीं है यहाँ मैं सब संभल लूंगा

राणा ....... ठीक है बीटा कुछ भी जरुरत हो कॉल कर देना

अजय ...... जी अंकल

अजय कॉल कट कर देता है आवर आवर पार्टी की तयारी करने लगता है लिखे बेयर आदि को फ्रीज में रख देता है आवर कुछ बोतल बढ़िया सरब की

अजय किसी को कॉल कर मट्टन चिकन आदि लेन को कहता है

लगता खूब जोर शोर से पार्टी करने का सोचा है अजय ने

सूरजगढ़ ...........

सूर्य घोड़ी पे सवार डेरी डेरी अपने नाना जी की पुराणी हवेली की आवर भाड़ रहा था परिवार की ज्यादातर लड़किया जो सदी में शामिल हुई थी वो कुछ देर नाच गाने के बाद कार से सीधा हवेली जा पहुंची किरण के पास

कोमल ....... वाओ स्वीटी तुम तो बहुत खूबसूरती लग रही हो

राधा ....... पहले से हे हम सब से खूबसूरत है आवर आज तो अपने पिया जी की दुल्हन बानी है खूबसूरती आवर कुदरती निखार से दमक रही है स्वीटी तो

किरण ....... आप सब यहाँ पे है उनके साथ कोण है

राधा ........ अभी से उनकी चिंता हो रही है चिंता न करो वो सीधा यही आएगा कही आवर नहीं जाने वाला इस चाँद को छोड़ कर हेहेहे

किरण ...... बुआ आप भी न

राधा ...... देख स्वीटी फिर मुझे बुआ मत कहना यार हम बहने है भूल मत

किरण आगे भध राधा के दोनों गाल चुम लेती है

किरण .......हेहेहे अब आप न ये नकली गुस्सा हटालो अपने खूबसूरत चेहरे से ये आप पे अच्छा नहीं लगता

कोमल ...... वैसे बुआ आप बुआ कहने पे क्यों छोड़ जाती है पहले तो नहीं चिश्ती थी

राधा ......कोमल तुम भी अरे दुल्हन वो हम मैं नहीं तंग खिचड़ी है तो उसकी खींचो

वैसे वो अपनी एक्सपीरियंस होल्डर सपना कहा है उसने कुछ ज्ञान अपनी दुल्हन स्वीटी को दिया की नहीं फर्स्ट नाईट का

राधा के मुँह से ऐसे खुले आम फर्स्ट नाईट की बात सुन किरण शर्माने लगती है

कोमल ......है है अपनी बनो तो अभी से शर्मा रही है

अभी काफी टाइम है उसमे क्यों सपना

सपना ...... तुम सब का no. भी जल्दी हे लगने वाला है वैसे अभी मेर्री जी थी न यहाँ वो कहा गई

राधा ....... आवर कहा आपके चाचा जी विजय जी से मिलने गई होंगी बेचारे बड़ी आस भरी नजरो से देख रहे थे आते वक़्त मेर्री जी को

सपना ...... मतलब की उनके बिच

कोमल ....... आपको पता नहीं है क्या स्वीटी ने बताया नहीं क्या

ीदार सूर्य की बराड़ हविले के द्वार पे पहुंच चुकी थी इस लिया अलीना पायल प्रीती मानसी सोफिया सानिया मानवी माया के साथ किरण की आवर निकल गयी

सूर्य के साथ मानसी राधिका दीप्ती विधि गायत्री मेनका जी शालिनी जी रेखा जी हे बचे थे

जैसे हे सभी को बारात द्वार पे आने की खबर मिली

किरण तेजी से अपने रूम से बहार निकल द्वार पे घोड़ी पे स्वर सूर्य को देखती है





पायल ....... अरे स्वीटी आराम से इतनी भी जल्दी क्या है वो तुम्हारे लिया हे आया है

किरण सब बाटी को नजर अंदाज कर बस घोड़ी पे स्वर सूर्य को हे देख रही थी

सूर्य भी घोड़ी पे बैठा ीदार उधर देख रहा था

तभी सूर्य हवेली की पूरी मंजिल पे देखता है

सूर्य की नजर अपनी आवर उत्ते देख किरण फ़ौरन सपना की यह में चुप जाती है

सपना ...... तुमने तो देख लिया स्वीटी अब उन्हें भी देख लेने दो खुद को

किरण न में गर्दन हिला देती है

राधा ...... तुम समाजी नहीं सपना अपनी स्वीटी सूर्य के साथ आँख मिचोली खेल रही है सुहागरात से पहले वाली

कितन थोड़ा जोर से राधा के कूल्हों पे चिकोटी काट लेती है

राधा ........ अह्हह्ह्ह्ह स्वीटी

कोमल ....... क्या हुआ बुआ

राधा ........ कुछ नहीं बुआ की बची

उदार सूर्य सपना को इसरा करता है सामने से हटने का पैर किरण के मन करने पे सपना न में गर्दन हिला देती है

वही द्वार पे प्रिय जी सन्ति जी कुछ महिलाओ के साथ द्वार पे पहुंची है तिलक थल ले कर वर का स्वागत करने के लिया

सूर्य घोड़ी से उतर द्वार पे सुसज्जित चौकी पे आ खड़ा होता है

सन्ति जी की एक तो हिघ्त सूर्य से काम थी ऊपर से सूर्य चिकि पे खड़ा था था जिस से सूर्य के माथे तक हाथ नहीं जा प् रहा था

प्रिय जी ..... जमाई सा थोड़ा निचे जुखो

मेनका जी ...... नहीं सूर्य अभी से जखन मत

सन्ति जी ...... शालिनी दीदी आप हे कहो न

मेनका जी ....... आज वो आपकी ननद बाई सा नहीं आपकी संदन जी है

शालिनी जी ....... सूर्य

सूर्य जी ..... माँ पैर पहले तिलक बड़ी मम्मी करेगी तभी जुखुन्गा

रेखा जी ......मैं क्यों बीटा

शालिनी जी ......ठीक है प्रिय भाबी सा आप तिलक कीजिये वो आपके लिया कह रहा है

प्रिय जी .....पैर मैं कैसे रीती अनुसार तो जमाई सा का तिलक उसकी सास करती है दीदी

दादी जी बिच में आते हुए

दादी जी ....... बेटी किरण तुम दोनों की बेटी है इसमें इतना सोचना क्या आवर तुम दोनों के सामने तुम्हारा जमाई नहीं तुम दोनों का बीटा खड़ा है अब तिलक करो यही पे रोके रखना है क्या

प्रिय जी ....... जी माँ सा

प्रियाजी थल में रखे तिलक से सूर्य का तिलक कर चावल आदि लगा कर रीती पूर्ण करती है उसके बाद सन्ति जी तिलक कर सूर्य का नक् पकड़ कर खिचड़ी है

( ये भी एक रसम है जो सास द्वारा पूरी की जाती है )

सन्ति जी सूर्य हाथ थम उसे दवार के भीतर प्रवेश करती है

सूर्य को रोहन सोहेल आवर मनु एक तरफ बने भव्य स्टेज पे ले जाते है

जहा पहले से कुछ सोफे आवर दो सिंघासन लगे हर थे उनके से एक पे सूर्य को बैठा दिया जाता है

कुछ हे देर बाद वह ऋषि वर आते है आवर कुछ विधि पूरी कर दुल्हन को वरमाला के लिया आमंत्रित किया जाता है

कुछ देर बाद सभी लड़कियों के बिच घिरी घूंघट निकले किरण को स्टेज पे लाया जाता है

सूर्य ने भरकश प्रयाश किये किन्तु वह किरण के चेहरे को नहीं देख पाया

रोहन .......भाई इतना उतावला पैन ठीक नहीं वो सिर्फ तुम्हारी है अब जीवन भर का साथ है देखते रहना उन्हें

सूर्य ....... ऐसी बात नहीं है रोहन भाई

रोहन ......भाई मैं भी इस डोर से गुजर चूका हूँ हाहाहा समाज सकता हूँ तुम्हारी इस्थिति

सभी लड़किया किरण को ले स्टेज पे सूर्य के सामने कड़ी हो जाती है

सपना ...... कितने उतावले हो रहे है स्वीटी को देखने के लिया

अब जी भर के देख लीजिये अपनी स्वीटी को जीजा सा

सूर्य ........ क्या कहा जीजा सा

सपना .....क्यों जेब खली करने से बचना चाहते हो मुँह दिखाई तभी होगी जब 51000 रस नेग में मिलेगा हमें

रोहन ........हहहह भाई लो करलो दर्शन दुल्हन के 51000 रस है एक जलक देखने के

सूर्य सोहेल को देखता

सोहेल ....... ठीक है भाई अभी लता हूँ

सोहेल तेजी से एक तरफ जाता है आवर एक बेग ले कर आता है

सोहेल उसे खोल कर उसमे से एक 500 की गाड़ी निकल कर गिने लगता है

सपना सोहेल के हाथ से नोटों की गाड़ी ले लेती है आवर किरण के सर से वॉर कर घोड़ी वाले को दे देती है

सपना ......हमें पैसे नहीं चाइये वो तो हम बस परख रहे थे

सूर्य ...... कभी अकेले में मिलना फिर बताऊंगा अब तो देखने दो

सभी किरण को सूर्य के सामने छोड़ थोड़ा पीछे हो जाती है

किरण मुस्कुराते हुए अपना गुणगाहट ऊपर करती है





सूर्य तो बस उस खूबसूरत चंद्र सामान तेज दमकते हुए खूबसूरत चेहरे में खो चूका था जैसे हे सूर्य की नजरे किरण की नजरो से मिली

सूर्य का हाथ खुद बा खुद किरण के गुलाबी गलो की तरफ भाड़ चले

पैर ही रे किस्मत सपना फिर से किरण को पीछे खींच लेती है

सपना ......नेग मुँह दिखाई का था न की फ़िलहाल दुल्हन को चुने का

ऋषि वर ...... बच्चो वरमाला का समय हो चूका है

सूर्य किरण सपना को घर के देखते है जैसे दोनों की चाहत के बिच सपना आ गई हो

सपना ......ऐसे क्या घर रहे हो साली हूँ इतना हक़ तो बनता है

रोहन ........ भाई साली तो आदि घरवाली भी होती है न

सपना ...... है होती है पैर आदि नहीं पूरी बनाने की निकट करो तब जाने क्यों जीजा श्री

सूर्य ...... वो वक़्त भी आएगा आवर याद है न मेरा वादा

सपना ......कोनसा वडा

सूर्य आगे जुक कर सपना के कान में डेरी से कुछ कहता है

जिसे सायद किरण ने भी सुन लिया था दोनों के चेहरे सरम से लाल हो जाती है

ऋषि वर दोनों को वरमाला देते है एक दूसरे को पहनने के लिया





ऋषि वर ......पुत्री किरण वर को जैमल ा पहनाओ

रोहन आवर सोहेल दोनों सूर्य को ऊपर उठा लेते है

रोहन ..... अब डालो वरमाला

किरण सूर्य की आवर देखती है

सूर्य...... भयो क्यों मेरा घर बसने से पहले जगदा करवाना चाहते हो

तभी कही से वयोम महाशय आते है स्टेज पे

वयोम ...... आप को एतराज न हो तो मैं उठा लूँ आपको जैसे मानसी मेरी बहन है वैसे हे आप भी

किरण सूर्य को देखती है जैसे इजाजत लेना चाहती हो

सूर्य के है में पलके झपकते हे किरण है में इसरा करती है वयोम बहुत सभ्य तरीके से किरण को ऊपर उठा कर वरमाला डलवाता है सूर्य भी किरण को जैमल ा पहना देता है

दोनों को निचे उतर ते हे स्टेज के चारो तरफ लगी आतिश बजी से एक्के बाद एक दमके आकाश में होते है

बाकि सभी दोनों पे गुलाब की पंखुड़ियों की पुष्प वर्षा करने लगते है





ऋषि वर जयमाला पूर्ण करवा वह से फैरो की तयारी के लिया हवन बेचीं की आवर निकल जाते है किरण वह सूर्य को वही दोनों सिंघासन पे बैठाया जाता है बाकि सब भोजन आदि या किसी न किसी विशेष कार्य में लग जाते है कुछ एक घंटे बाद

किरण को भीतर ले जाया जाता है फैरो के लिया त्यार करने हेतु ीदार शिव सूर्य को विवाह विधि पे ले जाते है

जहा ऋषि वर दशहरा मंत्रो उच्चारण के साथ सूर्य विवाह बेचीं अग्नि में आहुति देता है

कुछ आधे जानते चले इस सिलसिले के बाद ृषिव वर फैरो के लिया कन्या को आमंत्रित करते है

सभी बड़े बुज़ुर्ग इस वक़्त विवाह विधि के पास मौजूद थे क्युकी फैरो का समय हो चूका था

कुछ आवर विधि पूर्ण करने के पश्चात प्रिय जी वह सन्ति जी बाकि महिलाओ के साथ लोकगीत गाते हुए किरण को सूर्य लेफ्ट साइड में बैठा दिया जाता है





ऋषि वर विवाह फैरो के मंत्र उच्चारण कर विवाह विधि सुरु करते है

ऋषिवर के कहे अनुसार सूर्य किरण का घटजोड़ किया जाता है जो संजय जी के आग्रह पे प्रिय जी आवर जोरावर जी करते है

दोनों भयो का एक दूसरी के पार्टी ये प्रेम हे तो था जहा पिता अपनी पुत्री के विवाह में होने वाला हर अदिकार अपनी पिता सामान बड़े भाई वह माँ सामान भाभी को दे रहा था

ऋषिवर....... वधि के माता पिया आगे आये आवर कन्यादान विधि को पूर्ण करे

जोरावर जी ......संजय भौ दांतो आगे आओ ये विधि तुम्हे हे पूर्ण करनी है

संजय .......भाई सा आप हे विधि पूरी कीजिये किरण हमारी बेटी अवश्य है पैर वो हमेशा हम से ज्यादा आपके दिल के करीब रही है हम से ज्यादा आप दोनों का हक़ है इस विधि पे

नाना जी .....मुझे ख़ुशी है की तुम दोनों मेरे बचे हो पैर बीटा रीती तिवाज अपने नियम से चलते है तुम दोनों को हे किरण का कन्यादान ( वाग्दान ) करना चाइये

ऋषिवर ....... आप दोनों इस विधि को पूर्ण कर सकते है किन्तु जिन्होंने जनम दिया उनका इस पे पहला हक़ है

ऋषिवर की बात सुन जोरावर संजय सन्ति जी प्रिय जी चारो मिल कर किरण का हाथ सूर्य के हैंतो में सौंप ते है आवर ऋषिवर के कहे अनुसार सूर्य किरण के हठी में जल वह ढूढ से इस विधि को पूर्ण करते है

विधि पूर्ण होते हे शालिनी जी एक थाल आगे बढाती है जिसमे एक खुला बॉक्स रखा हुआ था जिसमे एक खूबसूरत डायमंड लगा मंगलसूत्र था

सूर्य मंगलसूत्र उठा किरण के गले में बंद देता है

ऋषिवर ........वर कन्या की मांग को सिंदूर से सुसज्जित कर फैरो के लिया खड़े हो जाये





सूर्य सोने के सीके से पे सिंदूर ले किरण की मांग भर देता है

कुछ कतरे सिंदूर के किरण के चहरे पे आ गिरते है

जिन्हे बड़ी सफाई से कोमल आगे भाड़ अपने रूमाना से बिना मेकउप करण किया साफ कर देती है

ऋषिवर के मंत्रो उच्चारण के साथ हे सूर्य किरण के फेरे सुरु हो जाते है





ऋषिवर के कहे अनुसार फैरो के साथ साथ सूर्य किरण एक दूसरे को वचन देते हुए फेरे पूर्ण करते है

फेरे पूर्ण होते हे सभी दोनों पे पुष्पों की वर्षा कर दोनों को आसिष देते है

विवाह पूर्ण होते हे सूर्य किरण को मंडप से एक बार फिर स्टेज पे ले जाया जाता है जहा

सभी बड़े बुजुर्ग उपहार आदि के साथ इन दोनों नए जीवन के लिया ढेरो सुभकामनाये आवर अपना अमूल्य आशीर्वाद देते हुए पिछ आदि बनाये है

कोई एक एक घंटे से ऊपर चले आशीर्वाद कार्यक्रम के बाद किरण वह सूर्य को हवेली के भीतर ले जाया जाता है

आवर बाकि जो कुछ रस्मे बची थी उसे पूरी कर भोजन के लिया बैठा दिया जाता है

इन सब में रात का एक बज गया था सूर्य को रुक्मणि वह गीता जी के आने के बारे में फैरो के वक़्त पता चला था जब दोनों सूर्य से लेट आने की मांफी मांगी थी

( कल के अपडेट में मैंने एक विवाह रसम को नहीं लिखा था जो थोड़ी विचित्र थी हमारे यहाँ राजस्थान में बहुत से इलाको में विवाह में इस रसम को भी मन जाता है आवर कुछ इलाको में नहीं

दूल्हा जब घर से निकलता है घोड़ी पे स्वर हो कर तब अपनी माँ का स्तन पैन करता है ये एक रिवाज है केवल रिवाज पूरा करने के लिया एक बार अपनी माँ के स्तन ( बूब्स निप्पल्स )/को मां में ले कर इस रसम को निभाया जाता है

)

कल के अपडेट में इसे ऐड करना भूल गया था )

परीलोक .......

सूर्य की विवाह स्टाल पे पहुंचने के कुछ देर पश्चात हे किरण पालकी में स्वर हो विवाह स्टाल पे पहुँचती है

जहा गुरुदेव वह ऋषि वर द्वारा दोनों को वरमाला आदि रीती पूर्ण करवाने के बाद मंत्रो उच्चारण के साथ किरण वह सूर्य की विवाह विधि आराम कर दी जाती है

किरण वह सूर्य को विवाह विधि पे बैठा दोनों से हवन में आहुति डलवाई जाती है

फिर वही वाग्दान ( कन्यादान ) की विधि के पश्चात

वचनो के साथ विवाह के फेरे लिए जाते है

इसी तरह सूर्य किरण को मंगलसूत्र पहना कर किरण की मांग भर जन्मो जनम के लिया किरण को अपनी जीवन संगिनी बना चूका था

किरण वह सूर्य सभी ऋषि गुरुदेव वह अपने बड़े बुजुर्ग का आशीर्वाद ले गुरुदेव के साथ मंदिर की आवर निकल जाते है जहा पूजा आदि कर परबु वह देवी माँ का आशीर्वाद लेते है

गुरुदेव ......पुत्र सूर्य पुत्री किरण तुम दोनों का विवाह बिना किसी विज्ञानं के परबु की इच्छा से पूर्ण हुआ

अब तुम दोनों हे अपने इस नए जीवन की सुरुहत करने जा रहे हो

इस लिया मेरा वचन याद रखा पुत्र सूर्य पुत्री किरण पति पत्नी के सम्बन्ध बहुत से चुनौती तुम दोनों के जीवन में आएगी पैर तुम्हे कभी भी घबराना नहीं है बल्कि एक दूसरे का पूरे बन हर आने वाली समस्या का समाधान करना है

सूर्य ...... जी गुरुदेव

गुरुदेव ....... पुत्री किरण तुम ये तो जानती हो की पुत्र सूर्य के जीवन में बहुत सी पत्नियों का योग है

किरण ......जी गुरुदेव मैं जानती हूँ ये सत्य

गुरुदेव ....... पुत्री भले हे वो सब तुमसे उम्र आवर अनुभव में बड़ी हो सकती है किन्तु पुत्र सूर्य की पत्नी के रूप में वो सभी तुमसे छोटी तुम्हारी छोटी बहनो के रूप में होंगी तुम्हे सभी को अपनी छोटी बहन मन सभी को एक रिश्ते में बाँड्ने है जहा एक दूसरे के पार्टी केवल प्रेम भाव हो विश्वाश हो जनता हु बहुत से मुस्किले होंगी पैर तुम दोनों हर उस मुश्क का सामना कर सकते हो मुझे यकीं है बस कभी भी किसी के बिच मतभेद भले हे आ जाये पैर मनभेद नहीं आने चाइये कभी कभी घाटी नक्षत्र के प्रभाव से हम भी परववित हो गलत को उचित तहत देते है इस लिया जब भी बात अपनों की हो एक न हजार बार सोच के बाद हे अपना फैसला सबके सामने रखना बेटे क्युकी एक गलत फैसा एक भरे पुरे परिवार को तबाह कर देता है

बाकि परबु आवर देवी माँ का आशीर्वाद सदैव तुम दोनों पे बना रहेगा

किरण ....जी गुरुदेव मैं हमेशा आपकी बात का मान रखूंगी

सूर्य .......जब तक परबु आवर देवी माँ के आशीर्वाद के साथ साथ आपका आशीर्वाद है गुरुदेव हम हर मुश्किल का सामना कर सकते है

गुरुदेव ......आप दोनों से यही अपेक्षा थी पुत्र सूर्य पुत्री किरण

मेरा आसिष हमेशा तुम सभी के साथ है सदैव सौभाग्यवती भाव पुत्री चिरयावन प्राप्ति अस्तु पुत्र सूर्य

गुरुदेव दोनों को ले कर विवाह मंडप में पहुंचते है जहा पे किरण की विदाई की तयारी चल रही थी

रानी पारी के आग्रह पे किरण की विदाई रानी महल से होने वाली थी सूर्य महल के लिया

जहा शालिनी जी रेखा जी आवर दादी जो ने पहले से हे पूरी तयारी कर ली थी ..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................

दोस्तों कल की सदी है तो सायद अपडेट नहीं दे पाउँगा ...............
 
अपडेट. 198

किरण ....जी गुरुदेव मैं हमेशा आपकी बात का मान रखूंगी

सूर्य .......जब तक परबु आवर देवी माँ के आशीर्वाद के साथ साथ आपका आशीर्वाद है गुरुदेव हम हर मुश्किल का सामना कर सकते है

गुरुदेव ......आप दोनों से यही अपेक्षा थी पुत्र सूर्य पुत्री किरण

मेरा आसिष हमेशा तुम सभी के साथ है सदैव सौभाग्यवती भाव पुत्री चिरयावन प्राप्ति अस्तु पुत्र सूर्य

गुरुदेव दोनों को ले कर विवाह मंडप में पहुंचते है जहा पे किरण की विदाई की तयारी चल रही थी

रानी पारी के आग्रह पे किरण की विदाई रानी महल से होने वाली थी सूर्य महल के लिया

जहा शालिनी जी रेखा जी आवर दादी जी ने पहले से हे पूरी तयारी कर ली थी ..........

अब आगे .........

सूरजगढ़ पुराणी हवेली .........

बारात में शामिल सभी मुख्या लोगो को छोड़ सूर्यगढ़ के ज्यादातर लोग मध्यरात्रि को फैरो के पश्चात सूर्य ग्रह लौट गए थे

कुछ गिनने चुने लोग हे वह मौजूद थे जो ज्यादातर बुजुर्ग थे जो दूल्हा दुल्हन की विदाई के साथ हे सूर्यगढ़ लौटने वाले थे

सुबह के यही कोई चार साढ़े चार बजे तक रेखा जी दादी जी मेनका जी दीप्ती माँ राधिका फातिमा जी आदि सूर्यगढ़ के लिया निकल गए थे

उन्हें किरण के घर प्रवेश की तयारी जो करनी थी

ीदार सूरजगढ़ हवेली में दूल्हा दुल्हन हवेली में िस्थितः कुल मंदिर में पूजा आदि कर विदाई के लिया त्यार थे

जैसे जैसे विदाई का समय नजदीक आ रहा था वैसे वैसे सन्ति जी की आँखों में नमी भड़ती जा रही थी ऐसा हे हाल कुछ जोरावर आवर रेखा जी का था

किरण का मुख मंडल जो अभी तक ख़ुशी से दमक रहा था जैसी हे विदाई के समय गया जाने वाला लोक गीत सुरु हुआ उसकी भी आँखे नाम होने लगी

जोरावर जी ....... शालू मेरी स्वीटी का ख्याल रखना उस से अनजाने में कोई गलती हो तो अपनी बची समाज कर माफ़ कर देना

शालिनी जी ....... कैसी बाते कर रहे हो भाई सा क्या स्वीटी मेरी बेटी नहीं मैं उसे बहु के रूप में नहीं बेटी की रूप में ले कर जा रही हूँ जहा उसकी ख़ुशी मेरे बेटे की ख़ुशी से भाड़ कर होगी इस लिया स्वीटी की आप चिंता न करो वो अपने घर जा रही है न की ससुराल आवर फिर दोनों हवेली के बिच फरक हे कितना जब उसका दिल करे वो या आप कभी भी आ सकते है

दादा जी ........ जोरावर बीटा जैसी पहले किरण उस हवेली की बेटी थी आज भी वो उस हवेली की बेटी है

बस अब थोड़ा रिस्ता बदल गया है पैर दिल में जगह तो वही है न

प्रिय जी आगे भाड़ किरण को अपने गले से लगा लेती है

जिस से अभी तक खुद संभाले हुए थी किरण उसकी रुलाई फिट पड़ती है

शालिनी जी ...... भाबी सा क्या कर रही है आप ऐसे ख़ुशी के मोके पे मेरी बेटी को रोटी हुए विधा करेंगी क्या

प्रिय जी शालिनी के सामने हाथ जोड़ती है जिसने देख शालिनी जी फ़ौरन उनके हाथ खोल देती है

शालिनी जी ......भाबी सा ऐसा फिर दुबारा नहीं करना ऐसा हाथ जो कर आप मुझे शर्मिंदा कर रही है

प्रिय जी ......... शालिनी जी इसे बहुत नाजो से पला है हमने हमारे घर की जान बस्ती है इसमें आज इस जान को आपके हठी में सोफ्टी हूँ

शालिनी जी ........भाबी सा वह भी ये हम सब की जान बन कर हे रहेगी हम सब की ख़ुशी से भरकर मेरी बेटी की ख़ुशी की अहमियत होगी

सूर्य ...... क्या बड़ी मम्मी आप तो ऐसे रो रही है जैसी मैं स्वीटी को बहुत दूर ले कर जा रहा हूँ 20 मिनट्स का रास्ता है जब भी दिल करे आ जायेगा या मुझे याद कर लीजियेगा मैं आ जाऊंगा आपकी बहु को ले कर आपके घर

शालिनी जी .......बदमाश बहु नहीं बेटी है

सूर्य ....... इन्होने मुझे अपना बीटा मन है क्यों बड़ी मम्मी अब बेटे की बीबी तो बहु हुई न

प्रिय जी ....... तू मेरा बीटा पहले है जमाई सा बाद में तुझे जो ठीक लगे बुलाना

समाज के नियम भी कैसे कैसे होते है जो माता पिता खुद भूखे प्यासे रह कर अपनी संतान के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिया म्हणत आवर संघर्ष करते एक दिन वही अपनी जिगर के टुकड़े को किसी अनजान के हाथो सौंप देते

खुद की संतान हे विवाह के बाद परै हो जाती है

जिसकी ऊँगली पकड़ कर पिता चलना सिखाता

माता अपने सेने से लगा हर दूप चाव हर दुःख दर्द से अपनी संतान को सुरक्षा प्रदान करती

ये जानते हुए भी की एक दिन कोई राजकुमार घोड़े पे स्वर हो आएगा आवर उसकी नाजो से पाली बची को ुशी से दूर ले जायेगा माँ बाप के लिया ये एक ऐसा दोहरा समय होता है जिसे सब्दो से नहीं समजा जा सकता जहा बेटी के नए जीवन की ख़ुशी होती है वही उस दूर जाने की उससे बिछड़ने का दुःख भी

ऐसी हे माहौल में किरण जो इस परिवार की जान थी

उसकी विदाई की जाती है सभी की आँखे नाम थी

वो सब तक तक वही खड़े अपनी घर की ख़ुशी को अपनी भीगी आँखों से ओझल होते तब तक देखते रहे जब तक उनकी आँखों से ओझल न हो गई

कार में बैठी किरण अभी भी सुबक रही थी जिसने एक तरफ कोमल ने संभाला हुआ था वही दूसरी तरफ सपना उसे संभल रही थी

शालिनी जी के कहने पे हे सपना किरण के साथ विदाई में आई थी

जैसे हे सुराजघर सूर्यगढ़ की सीमा पे पहुंचे तो वह पहले से शालिनी जी की कार कड़ी थी जिसने देख रोहन ने सूर्य वाली कार रोक दी

वह सीमा पूजा की ( काकड़ पूजा ) रसम पूरी कर सूर्यगढ़ के लिया निकल गया

सूर्यगढ़ ........

किरण सूर्य के सूर्यगढ़ हवेली पहुंचते हे नवविवाहित वर वधु के मंगल गीतों के साथ स्वागत किया जाता है

जहा किरा चावल से भरे कलश को पेअर मर कर रसम पूरा कर वधु के रूप में प्रवेश करती है

सुबह के 5 सवा 5 का समय हो चूका था

लड़किया थकी हुई थी इस लिया दादी जी ने सर्वे प्रथम वर वधु से पूजा करवा उन्हें विश्राम करने उनके कक्ष में भेज दिया

किरण सपना कोमल तीनो सूर्य के रूम में विश्राम करने लगती है

सूर्य रोहन मानव सोहेल के साथ छठ पे बने स्टोर रूम में जा कर लेट जाता है क्युकी बाकि सभी रूम में बाकि मेहमान सोये हुए थे

एक तो दिनभर की भसगदौड ऊपर से सभी की रात की नींद बड़े बुजुर्गो को छोड़ लगभग सभी लोग सो रहे थे

लगभग दोपहर को सूर्य की आँखे तब खुली जब सपना ने उसपे पानी दाल कर उठाया

सपना ......... उठ जाये जीजा सा दोपहर हो गई है

सूर्य ....... ऐसे भी कोई उठता है क्या सपना आवर ये जीजा साली का नाटक बंद करो

सपना....... मैं तो नहीं करुँगी आपकी बड़ी साली हूँ

सूर्य खुद को रूम में अकेला देख सपना को दबोच लेता है

आवर वही गेले बिस्तर गिरा कर सपना के ऊपर आ जाता है

सूर्य के बीघे हुए बालो से पानी की बुँदे तप तप कर सपना के मुँह पे गिरने लगती है

साथ सपना का सीना तेज चलती सांसो से सूर्य के सीने से बार बार टच हो रहा था

सपना ....... छोड़ो न कोई देख लेगा इतने मेहमान है घर में

सूर्य ....... ये मुझे सताने से पहले सोचना चाइये था मेरी जान अभी तो मुँह मीठा किये बिना जाने नहीं दूंगा

सपना ...... हेहेहे बस इतनी सी बात अभी लीजिये आपके लिया मिठाई लेकर आती हूँ

सूर्य ....... कुछ ज्यादा चालक नहीं हो गई हो कल से

सपना ........ मैंने क्या किया उम्मम्मम्हा

सपना की बात पूरी होती उस पहले हे सूर्य सपना के गीले होंटो को अपने होंटो में कैद कर लेता है

कुछ देर बाद जब किसी की आने की आहात होती है तो सूर्य सपना से अलग होता है

तभी दूर नॉक होता है दूर लॉक नहीं था तो कोमल आवर सोफिया दोनों रूम के अंदर आती है

कोमल ........ ये आपकी क्या हुआ आप भी बे हुए क्यों है यहाँ बारिश हुई थी क्या आवर सपना आप भी भीगी हुई है

सूर्य ........ इस सपना की बची ने मुझे पूरा भिगो दिया

सपना ........ मैं क्या करती आप को कितना जगाया आप उठे हे नहीं ( जूथ) तो मुझे आप पे पानी डालना पड़ा जीजा जी

कोमल सपना की बात सुन मंद मंद मुस्कुरा रही थी सूर्य को दाल में कुछ कला लगा

सूर्य ........ कोमल तुम भी मिली हुई हो इस से

कोमल ........ मैंने कुछ नहीं किया ये सब राधा आवर सानिया का प्लान था

सूर्य ......... देख लूंगा सब को एक एक करके मुझसे बच कर कही नहीं जा सकती है

सोफिया तो बस एक तक सूर्य किभिज्ञ हुई बनियान में से सूर्य के छोड़ने सीने वह उस पे बने गहरे कटाव को देख मंत्र मुग्धा सी हो गई थी

कोमल ........सोफी क्या हुआ कहा खो गई आवर आप भी निचे आ जाइये सब खाने पे इंतजार कर रहे है

सूर्य ....... मेरे कपडे ले आएँगी आप मैं यही फ्रेश हो जाता हूँ

कोमल ......... आपकी साली मिली है न आपको दहेज़ में ुशी को कहिये चलिए सोफी

कोमल सपना सोफिया तीनो निचे चल देती है

वही सूर्य ुशी रूम के बाथरूम में गेस जाता है

अपने कपडे उतर कर नहाने लगता है वही जब कोमल सूर्य के रूम से कपडे ले कर सोफिया के साथ लौट रही थी ठीक ुशी वक़्त शालिनी जी कोमल को किसी काम से बुलाती है

कोमल...... मम्मी आपने बुलाया कुछ काम था क्या

शालिनी जी ....... है कोमल बेटी तुमसे एक काम था

कोमल ....... मैं उनके कपडे दे आती हूँ फिर आपके पास आती हूँ

शालिनी जी ....... किसके कपडे बेटी आवर तुम क्यों ले कर जा रही

कोमल ...... मम्मी ये सूर्य के कपडे है वो ऊपर स्टोर रूम में फ्रेश हो रहा है

शालिनी जी ...... सोफिया बीटा तुम दे आओगी सूर्य को उसके कपडे कोमल से कुछ काम था मुझे

सोफिया ....... जी आंटी जी मैं ले जाती हूँ उनके कपडे आप चिंता न करे

सोफिया सूर्य के कपडे ले वह से ऊपर की आवर निकल जाती है

शालिनी जी अलमारी से कुछ सामान निकल कर कोमल को देती है आवर उसे कुछ समजा कर भेज देती है

ीदार ऊपर सोफिया सूर्य के कपडे ले कर पहुंची तब तक सूर्य बाथरूम में गुस्स कर कपडे उतर चूका था

सोफिया जब रूम को दूर खिलती है तो सूर्य को लगा सपना आई होगी उसके कपडे ले कर सूर्य मस्ती करने के इरादे से बाथरूम को हल्का सा खोल कर फिर से शावर ों कर नहाने लगता है

ीदार सोफिया सूर्य के कपडे रख वापिस बहार जाने को होती है तभी सूर्य सपना के नाम से उसे आवाज देता है आवर टॉवल देने को बोलता है

अब सोफिया क्या करती वह बाकि कपडे वही बीएड पे छोड़ टॉवल ले बाथरूम की आवर झड़ी जैसे हे बाथरूम के दूर को हाथ लगाया वो खुलता चला गया सामने सूर्य पूरी तरह से नंगा आँखे बंद किया शावर का मज़ा ले रहा था





सोफिया की नजरे जैसे हे सूर्य के नंगे सरीर से होते हुए उस बड़े से जुलते हुए पेंडुलम पे जा कर अटक जाती है

ऐसा नहीं है की सोफिया पहली बार किसी रियल लिंग को देख रही है उसने सोहेल वह सलमा का सेक्स काफी बार देखा था पैर इतने पास से आवर इतना बड़ा पहली बार देख रही थी

सोफिया के हाथो से टॉवल वही चुत कर निचे घिर जाता है

सूर्य की नजर जब गेट की आवर जाती है तो उसे सोफिया का चेहरा पीछे की आवर हत्ता नजर आता है





सूर्य ....... ये मेरा भरम था या फिर सच में मैंने सोफी को गेट पे देखा

सूर्य वही गेट पे पंहुचा तो उसे तेजी से बहार निकलती सोफिया की पीठ नजर आती है

सूर्य ...... ओह गॉड ये तो सोफिया हे थे सपना के चाकर में ये फर्श गई

सूर्य वही पड़े टॉवल को उठा कर अपने सरीर को साफ कर रूम में बीएड पे रखे कपडे बदल कर निचे आ जाता है जहा उसकी नजरे सोफिया को तलाश रही थी

तभी उसे राधा दिखाई देती है एक बार आवर कन्फर्म करने के लिया वह राधा से पूछने का सोचता है ( परतविलोक पे जो सूर्य है वह अपनी सक्तियो को उसे नहीं कर सकता है केवल शारीरिक वह मानसी बल हे मिला है उसे सूर्य से )

सूर्य ........ राधा यहाँ आना तो जरा

राधा ........ क्या हुआ आप कुछ परेशान है क्या

सूर्य ......है वो ऊपर के रूम में मेरे कपडे कोण रखने गया था

राधा ......वो तो कोमल थी क्यों क्या हुआ

तभी कोमल बहार से कुछ लड़कियों के साथ अंदर आती है जो आस प्रदोष की लड़किया थी

कोमल .....क्या हुआ बुआ

राधा ....... सूर्य के कपडे तुम हे ले कर गई थी न ऊपर

कोमल ........ नहीं बुआ मुझे शालिनी मम्मी ने काम से भेज दिया था इस लिया कपडे सोफिया ले कर गई थी क्यों क्या हुआ

राधा ....... सूर्य पूछ रहा था इस लिया पूछा

कोमल ...... क्या हुआ सूर्य

सूर्य ......कुछ नहीं माँ कहा है भूख लगी है

सूर्य वह से बहाना कर किचन की आवर निकल जाता है

कोमल ........ इन्हे क्या हुआ

राधा ........कुछ तो हुआ है इनके आवर जो ऊपर गया था उसके बिच ुशी वजह से कुछ परेशान है

सूर्य जब किचन में पंहुचा तो वह मानसी मेनका जी राधिका जी शालिनी जी आवर सानिया कुछ काम में लगी हुई थी

सूर्य सीधा जा कर अपनी माँ शालिनी जी को पीछे से गले से लगा लेता है आवर दोनों गलो को चुम कर शालिनी जी से गुड आफ्टरनून बोलता है

शालिनी जी को अपने नितम्बों पे सूर्य का मुसल की हलकी गर्माहट मह्सुश हो रही थी जिस से उनके सरीर में जुरजूरी से दौड़ जाती है पैर खुद को सँभालते हुए सूर्य की गिरप्त से निकल कर सूर्य के माथे वह गलो को चुम लेती है

मेनका जी ........ अब तो सदी हो गई है अब तो मम्मी से चिपकना बंद कर अपनी बीबी से जा कर चिपक

सूर्य ........ क्यों बुआ डार्लिंग आपसे नहीं चिपका तो तने मार रही हो क्या

सूर्य की बात सुन शालिनी जी हँसते हुए सूर्य के सर पे हलके से प्यार से चपेट लगा देती

शालिनी जी ........ अपनी बौ सा डार्लिंग बोलते हुए जरा भी सरम नहीं आती नालायक बदमाश कही के स्वीटी से बोल कर तेरे कान खिचवाने पड़ेंगे

मेनका जी ....... भाबी सा ये मेरे बेटे आवर मेरे बिच की बात है वो मुझे डार्लिंग कहे या कुछ आवर आप गुस्सा क्यों होती है ये हम दोनों का आपसी मामला है

सूर्य आगे भाड़ मेनका जी को गले से लगा लेता है आवर दोनों गलो को चूमते हुए मेनका जी के भरी पिछवाड़े को सहला देता है जिस से एक आह्ह्ह्ह निकल जाती है

शालिनी जज .... .. क्या हुआ दीदी

मेनका जी ........कुछ नहीं भाबी सा बस लगता है थोड़ा ज्यादा जोर दिखा दिया अपनी बूढी बुआ पे हेहेहे

सूर्य ........ Hello एवरीवन गुड आफ्टरनून

राधिका जी ...... देवर जी ऐसे सूखा सूखा गुड आफ्टरनून नहीं चलेगा क्यों मजी ( शालिनी जी )

शालिनी जी ...... ये तुम दोनों देवर भाबी जानो आवर है बीटा आज अपनी भाबी के हाथ से हे खाओ चलो दीदी यहाँ रहे तो ये कुछ भी काम नहीं करने देगा

शालिनी जज की बात सुन राधिका के होंटो पे कुटिल मुस्कान आ जाती है आवर मेनका शालिनी जी के निकलते हे राधिका जी लपक लेती है सूर्य को

राधिका काश कर सूर्य से गले मिलती है जिस से उनकी कोमल मुलायम सीना सूर्य के सकत सीने पे अपना कोमल अहसास करवा जाता है

सानिया मौका देख बाकि सभी को ले कर बहार निकल जाती है ये कोई इसरा था या कुछ आवर ये वही लोग जाने

किचन में सूर्य वह खुद को अकेला देख राधिका एक कदम आवर भारती है आवर जल्दी से सूर्य के होंटो को चुम कर पलट जाती है जैसे कुछ हुआ हे न हो

( सूर्य ...... इनके दिमाग में कुछ तो खिचड़ी पाक रही है

कल भी इन्होने बारात में ऐसी हे कुछ हरकत की मुझे पता करना होगा )

राधिका जी ........ ये लीजिये खाना त्यार है आपका

सूर्य ......क्या बाकि सभी ने खा लिया खाना

राधिका जी .......जी नहीं अभी कुछ लोग बचे हुए है

तभी वह सूर्य को ढूंढ़ते हुए दादी जी आ पहुंची

दादी जी ......तुम यहाँ हो मैं तुम्हे बहार दंड रही थी यशा क्या कर रहे हो

सूर्य .....दादी जी भूख लगी है खाना खा रहा हूँ

दादी जी ...... तुम यहाँ खाना खा रहे हो आवर वह स्वीटी तुम्हारे इन्तजार में भूखी बैठी है गधे कही के

सूर्य ....... मैंने क्या किया है दादी सा ो मुझे गधा बोल रही है आप

दादी जी ...... बेटी राधिका दोनों का एक थाल में खला लगाओ आवर इसके रूम में ले आओ आवर तुम चलो मेरे साथ

दादी जी सूर्य को अपने साथ ऊपर उसके रूम में ले जाती है

जहा किरण सपना पायल प्रीती सोफिया मानवी राधा आवर बहुत से लड़किया बैठी हुई थी

दादी जी सूर्य को वही किरण के पास में बैठा देती है

दादी जी ...... देख ले किरण बेटी तेरे भुखार पति को तू यहाँ भूखी प्यासी बैठी है आवर ये किचन में खाना खाने को बैठा था

सूर्य .......दादी सा भूख लगेगी तो खाऊंगा हे न

मानवी ......भैया आपको पता नहीं है क्या सदी के बाद पति पत्नी पहली बार एक साथ भोजन करते है एक थाल से

मानवी की बात सुन सूर्य दादी जज को देखता है जो मुस्कुराते हुए मानवी के सर पे हाथ फिर रही थी

दादी जी ...... है बीटा इस से पति पत्नी के बिच के सम्बन्ध मधुर आवर सुदृढ़ होते है

सूर्य ....... सॉरी दादी सा सॉरी स्वीटी मुझे इस बारे में किसी ने बताया नहीं था

राधिका एक थल में खाना ले कर आती है आवर वह रख देती है

दादी जी के कपङे पे किरण एक निवाला बना कर सूर्य को खिलाती है आवर ऐसा हे सूर्य करता है

उसके बात तो वह परिवार आवर रिश्ते में मौजूद सभी लड़किया खुद हे सूर्य आवर किरण को एक एक निवाला खिलाती है ये केवल मजाक मस्ती के लिया हे किया था पैर दादी जी को बहुत अच्छा लगा ये देख कर की सभी में कितना प्रेम है

सूर्य उठने लगा तो दादी जी ने उसे थाल में नेग डालने को कहा

सूर्य अपने जेब चेक करता है तो उसका फर्श उसमे नहीं था वो वही ऊपर रूम में भूल गया था

कोमल .......क्या हुआ

सूर्य ....वो मेरा फर्श ऊपर हे रह गया सायद

दादी जी ....... बेटी राधिका तुमने इसे काजल लगाया था इस लिया इस नेग पे भी भाबी होने के नाते तुम्हारा हक़ है तुम्हारी जो इच्छा हो वो मांग लो

सूर्य ......ठीक है फिर भाबी जी आप हे बताये आपको नेग में क्या चाइये

राधिका जी ....... अच्छे से सोच लीजिये बाद में मुकर नहीं जाना

सूर्य ......ठीक है मैं वडा करता हूँ अब बताये क्या चाइये आपको

राधिका जी .......स्वीटी देख रही हो तुम्हारे सामने वडा कर राग है

किरण .....जी भाबी जी आप चिंता न ी ये भूल भी जाये तो मुझे याद दिला देना

radhika.....fir ये तय रहा जब मुझे कुछ चाइये होगा तब आपसे कह दूंगी

सूर्य ......ठीक है मैं आपकी एक इच्छा पूरी करने का वादा करता हूँ

सूर्य के वादा करते हे राधिका का आवर दीप्ती दोनों का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा

दादी जी सूर्य किरण को वही छोड़ सभी को बहार ले जाती है

ताकि दोनों एकांत में कुछ समय बिता सके

सभी के जाते हे सूर्य किरण को अपनी बहो में लिया हुए लेट जाता है

सूर्य ......... स्वीटी तुम खुश तो हो न

किरण ........ ये आप ऐसी बाते क्यों कर रहे है जिस सपने को देखने के साथ मैं बड़ी हुई आज वो सपना पूरा हुआ है मैं बहुत खुश हूँ जान इतना की सब्दो में बया नहीं कर सकती बस थोड़ा दुःख है तो वो मम्मी बड़ी मम्मी पापा से दूर हो जाना

सूर्य ....... ऐसा क्यों सोचती हो आवर फिर सूर्यगढ़ आवर सूरजगढ़ में दुरी हे कितनी है

सूर्य अपना फ़ोन निकल कर प्रिय जी को कॉल मिलता है दूसरी हे रिंग में प्रिय जी फ़ोन उठा लेती है

प्रिय जी ....... कैसे हो जमाई सा

सूर्य .......... अच्छा हूँ बड़ी मम्मी आप सब कैसे है

किरण .....मुझे दीजिये न फ़ोन मुझे बात करनी है मम्मी से

सूर्य ....... लीजिये आपकी लाड़ली बात करना चाहती बड़ी उतावली हो रही है

प्रिय जी ....... मुझे भी उस से बात करनी है बीटा

सूर्य किरण को फ़ोन थमा देता है किरण सूर्य के सीने पे सर रखे बात करने लगती है

सूर्य बस किरण के चेहरे पे पल पार्शियल भड़ती ख़ुशी को देख खुश हो रहा था

तभी उसे कुछ मस्ती सकती है

सूर्य अपना हाथ किरण के ब्लाउज के पास से फिरते हुए डेरी से किरण के सीने को सहला देता है

जिस से अननयष हे किरण के मुँह से सीकरी निकल जाती है जो साफ़ साफ प्रिय जी भी सुन लेती है आवर समाज भी जाती है की कुछ हुआ है

प्रिय जी ...... क्या हुआ बेटी स्वीटी

किरण ......... देखो न मम्मी ये सूर्य मुझे छेद रहा है

प्रिय जी ........ हेहेहे बेटी अब वो सूर्य तुम्हारा भाई नहीं तुम्हारा पति है ऐसे पति का नाम नहीं लेते कुंवर सा या कुंवर जी कहा करो अपनी आदत बदल लो बेटी

किरण के चेहरे को उदाश होता देख सूर्य को अपनी गलती का अहसास होता है आवर वह किरण से फ़ोन ले कर प्रिय जी को सॉरी बोलता है

सूर्य ....... सॉरी मम्मी आप स्वीटी को कुछ न कहिये मेरी हे गलती है आपसे बात करते हुए मजाक में मैं हे उसे छेद रहा था

प्रिय जी ........ जानती हूँ जमाई सा

सूर्य .........जमाई सा नहीं मम्मी बीटा कहोगी तो मुझे भी एक माँ आवर मिल जाएगी

प्रिय जी ....ठीक है बीटा

सूर्य ...... देखिये न ये स्वीटी उदाश हो गयी अब आप हे संजो न इसे

सूर्य फ़ोन किरण के कण से लगा देता है कुछ देर बात करने के बाद किरण फिर से ुशी तरह ख़ुशी से चहकने लगती है

उसके बाद किरण अपनी मम्मी दादी जी पापा बड़े पापा दादी जी बाकि लोगो से भी बात करती है

कोई एक जानते लम्भी चली बात से सूर्य को पता भी नहीं चला कब आँख लग गई किरण को संग लिया हुए

किरण फ़ोन साइड में रख सूर्य के सीने पे कोहनी के बल हो सूर्य को सोते हुए निहारने लगती है

कुछ देर देखने के बाद किरण सूर्य को छोटा सा चुम्बन कर उसके सीने पे लेट जाती है सूर्य प्यार से स्वीटी के सर को नींद में हे सहलाता रहा जिस से किरण भी सुकून भरी नींद में डूबी चली गई साम को कोई 5 बजे के आस पास दूर नॉक होने पे आँखे खुली किरण अपने भरी भरकम कपडे को ठीक कर रूम खिलती है सामने मेनका जी आवर शालिनी जी कड़ी थी

शालिनी जी .......क्या हुआ स्वीटी सो गई थी क्या

किरण ....... जी मम्मी पता नहीं कब आँख लग गई

शालिनी जी .......कोई बात नहीं बेटी तुम भी ताकि हुई थी रेस्ट करना भी जरुरी था

कहते हे किरण का प्यार से माथा चुम लेती है

मेनका जी .....सूर्य उठ बीटा त्यार हो जा हुए आवर मुँह दिखाई की रसम करनी है

सूर्य ...... जी बुआ सा सूर्य वह से कपडे ले कर स्टोर में चला जाता है

ीदार निचे किरण फ्रेश हो बहार आती है जहा सपना राधिका सोफिया किरण को त्यार करती है बाकि रस्मे पूरी करने के लिया किरण को त्यार कर निचे हाल में लाया जाता है जहा काफी संख्या में महिलाएं मौजूद थी उनके बिच निचे गड्ढे पे किरण को बड़ा सा घूँघट दाल कर बैठा दिया जाता है





कुछ देर बाद सूर्य भी मानव सोहेल रोहन के साथ वही आ पहुंच जो की दूल्हे की पोषक में हे था

मेनका जी सूर्य को किरण की बगल में बीटा देती है आवर कोमल द्वारा लाया गया ढूढ बड़े से परत ( थाल ) में दाल कर कुछ कुमकुम वह गुलाब की पाटिया दाल जुए की रसम की तयारी की जाती है

जिसमे मेनका जी एक अंगूठी दाल कर रसम को सुरु करती है

इसमें 3 बार अंगूठी डाली जाती है जो 2 बार निकल लेता है वही विजेता घोषित किया जाता है

मेनका जी के अंगूठी डालते हे सूर्य की तरफ बस रोहन मानव सोहेल आवर एक दो लड़के जो पडोशी थे वो थे बाकि सभी लड़किया किरण के सपोर्ट में थी

राधिका ......देवर जी ये रसम हे तय करेगी की रूम में राज किसका होगा आप जीते तो आपका नहीं तो किरण का हुकुम चलेगा हमेशा आवर आपको मन्ना होगा

सूर्य ....... भाबी जी अभी भी उनका हे हुकुम चलता है

देखा नहीं मेरे भाई आवर दोस्तों के अलावा सभी उन्हें हे सपोर्ट कर रहे है

रोहन ......कोई नहीं भाई देख लेना सब को एक एक कर

राधिका जी ......डरते थोड़े हे है हम भी त्यार है देख लेना कभी भी

रोहन .......हेहेहे भाई पहले तो अपनी इस भाबी को हे देखना

सूर्य .......ठीक है भाई no. भाबी से हे लगता हूँ

इस बिच अच्छा सा मौका देख कोमल ने चालाकी दिखते हुए थाल को टेड़ा कर दिया आवर अंगूठी किरण के हाथो जा पहुंची

मनु .......भाई ये चीटिंग है कोमल तुमने चीटिंग की है

कोमल ......... मनु भाई इसे चीटिंग नहीं दिमाग का इस्तेमाल करना कहा जाता है

इस बार फिर से डाली अंगूठी तो सूर्य के हाथ सूर्य ने फ़ौरन बहार निकल लिया

मेनका जी ...... मुकाबला बराबरी पे है अब जो जीतेगा वही राज करेगा

किरण सूर्य को गुर कर देखती है वही बाकि लड़किया भी

( सूर्य ......बीटा सुहागरात में इनसे बचना है तो अभी हारना ठीक रहेगा नहीं तो इनसे जान नहीं चुठ्ने वाली )

इस बार सूर्य जान बुज कर हर गया किरण को विजेता घोषित करते हे सभी लड़किया ख़ुशी से नाचने लगी

रोहन ...... भाई नाक कटवा दी मेरी बीबी के सामने हे

सूर्य .......भाई अगर हमारे हरने से इतना के चेहरे पे ख़ुशी आये तो हर बार हरने को त्यार हूँ

किरण ...... बुआ सा कुंवर जी जानबुज कर हार गए है

मेनका जी ......जानती हूँ बेटी ये हार कर भी जीत गया रसम भले हे हार गया पैर इसने तुम्हे हमेशा के लिया जीत लिया यही तो वो अटूट नंदन है जो पति पत्नी के बिच होता है जहा अपनी पत्नी की ख़ुशी के लिया पति हस्ते हस्ते अपनी जीत को भी हार में बदल देता है

दादी जी .......सही कहा मेरी बची रस्मे होती है हे इस लिया ताकि पति पत्नी के बिच के प्रेम को समाज सके

अब तुम्हारा कोई काम नहीं है अब यहाँ मुँह दिखाई की रसम होंगी अब तुम लोग बहार जाओ मर्दो का कोई काम नहीं यहाँ

मानव ....... दादी सा मैं भी जाऊ

मानवी ......क्या आप मर्दो में नहीं आते है जाइये बहार

चारो बहार निकल आते हो अंदर किरण की मुँह दिखाई आदि रस्मे चलती रहती है

लगभग सूर्यगढ़ से सभी महिला मुँह दिखाई की रसम में शामिल हुई थी सभी किरण की खूबसूरती की तरफ करते नहीं तक रही थी कोमल ने इस ख़ुशी के पल की बहुत से तस्वीरें आवर वीडियोस निकली थी ताकि बाद में फिर से इस खुशियों भरे पल को याद किया जा सके ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..................

नेक्स्ट अपडेट सूर्य किरण फर्स्ट नाईट पे............
 
अपडेट 199

दादी जी .......सही कहा मेरी बची रस्मे होती है हे इस लिया ताकि पति पत्नी के बिच के प्रेम को समाज सके

अब तुम्हारा कोई काम नहीं है अब यहाँ मुँह दिखाई की रसम होंगी अब तुम लोग बहार जाओ मर्दो का कोई काम नहीं यहाँ

मानव ....... दादी सा मैं भी जाऊ

मानवी ......क्या आप मर्दो में नहीं आते है जाइये बहार

चारो बहार निकल आते हो अंदर किरण की मुँह दिखाई आदि रस्मे चलती रहती है

लगभग सूर्यगढ़ से सभी महिला मुँह दिखाई की रसम में शामिल हुई थी सभी किरण की खूबसूरती की तरफ करते नहीं तक रही थी कोमल ने इस ख़ुशी के पल की बहुत से तस्वीरें आवर वीडियोस निकली थी ताकि बाद में फिर से इस खुशियों भरे पल को याद किया जा सके ...........

अब आगे ...........

परीलोक सूर्य महल ......... यही भी सूर्य किरण की वो सभी रस्मे निभाई गई जो परतविलोक में सूर्यगढ़ हवेली में निभाई गई थी

सभी रस्मो के बाद सभी ने मिल कर रात का भोजन ग्रहण किया

सभी के भोजन करने के पश्चात मेनका जी राधा आवर कोमल पायल को सूर्य वह किरण के कक्ष को सुहागरात के लिया सजाने को कहती है

मेनका जी की बात मन कोमल राधा पायल तीनो सूर्य के रूम की आवर भाड़ जाते है

जब तीनो रूम में पहुंची तो रूम पहले हे से बहुत खूबसूरती से सजाया हुआ था

पायल .......लगता है किसी आवर ने इसे पहले हे सजा दिया है

राधा ...... क्या नसीब है है अपने हे होने वाले पति की सुहाग सहेज सजाने का कार्य भी हमें हे मिला

कोमल ....... आप तो होने वाली पत्नी हो बुआ पैर मेरा सोचिये एक तरह से मैं उनकी पत्नी बन चुकी हूँ फिर भी अपनी पति की सहेज सजाने चली आयी हेहेहे

पायल ........ अच्छा है न पहले से हे प्रैक्टिस हो जाएगी सुहाग सहेज सजाने की तो अपने टाइम पे पहले हे थी कर लेना हेहेहे

राधा ........पैर ये किया किसने है तभी वह रिद्धि जिनिशा पारिजात प्रकट होती है

जिनिशा ...... ये हमने किया है क्या कुछ कमी रह गई है

राधा ......कमी नहीं है कोई भी बहुत हे खूबसूरत तरीके से सजाया है आप तीनो ने पैर ये आप भूल गई ये हक़ बड़ी भाबी या बुआ का होता है

रिद्धि पारी ......मैं जानती हूँ इस लिया हमने कुछ कमी रख छोड़ो है उसे आप पूरी कर दो ताकि ये रसम पूरी हो सके






राधा आगे भाड़ कुछ खूबसूरत पुस्पा उस सजाये हुए सुहाग सहेज पे ऐड करके रसम पूरी करती है

कोमल ......चलो ये कार्य तो पूरा हुआ अब फ़िलहाल दुल्हन को उनके रूम तक लिवाय जाये ताकि आपने नया सदर सुरु कर सके

राधा ........ वो ठीक है पैर द्वार रुके पे क्या मांगने का सोचा है इस बारे में तो कुछ सोचा हे नहीं

जूलिया....... ये क्या होता है

राधा ........ तुम्हे पता नहीं क्या जुली

जूलिया ......नहीं मुझे इस बारे में कुछ भी मालूम नहीं

कोमल ......कोई नहीं जल्दी हे समाज जाओगी

चलो स्वीटी को त्यार कर उसके रूम में ले कर आये

जिनिशा को छोड़ सभी वह से निकल जाते है

जिनिशा के दीमक में कुछ खुराफात चल रही थी

उसने जादू से कुछ कैमरा का इंतजाम किया आवर वह छुपा कर लगा दिया अब उन्हें कोई देख नहीं सकता था

जिनिशा .......स्वीटी पिछले जनम में बहुत लाइव मिलान देखे थे आपने सपना आवर सरताज के इस बार आपकी बारी

सभी कैमरा को अदृश्य कर वह से लौट गई

वही सूर्य महल के भोजनालय में शालिनी जी आवर मेनका जी ढूढ त्यार कर रही थी जिसमे न जाने क्या क्या ड्राई फ़ूड मिक्स किया था

मेनका जी ....... वैसे भाबी सा कल तक जो बचे हमारी आँखों के सामने नंगे घूमते थे देखा कितनी जल्दी बड़े हो गए

शालिनी जी ....... सही कहा दीदी आपने कल तक जो हमारी चौथी से चिपके ढूढ पिटे थे आज उनकी सुहागरात का ढूढ त्यार किया जा रहा है हेहेहे

शालिनी जी ....... विजय जी है न अब आपका ढूढ पिने के लिया दीदी हेहेहे

मेनका जी .......अब उनके वो बात नहीं रही भाबी सा वैसे कल की रसम कैसे रही एक बार फिर अपने बेटे को अपनी चूचियों पीला कर कैसा लगा आपको हहहहए

शालिनी जी ....... आप पीला कर देखना पता चल जायेगा आपको की कैसा लगा आवर वो सिर्फ रसम थी ऐसावैसा कुछ मत सोचना

मेनका जी ...... मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं है मैं तो अभी पायल प्रीती को पीला सकती हूँ बस ढूढ आना चाइये हेहेहे

शालिनी जी .......मैं सूर्य की बात कर रही हूँ आप पिलाओ फिर बताउंगी

मेनका जी ......मैंने तो अभी कुछ दिन पहले हे पिलाया था मुझे तो ाचा....

मेनका जी फ्लो फ्लो में शालिनी जी के सामने अपना आवर सूर्य का सम्बन्ध कुछ हद तक खोल दिया

शालिनी जी की आँखे छोड़ी हो चुकी थी आचार्य से वही मेनका जी की नजरे जुख गई थी

शालिनी जी ........ ीदार देखिये दीदी आपको सूर्य की कसम सच बताये

मेनका जी सूर्य की कसम सुन बुर्ज तरह से फर्श चुकी थी

शालिनी जी .......सॉरी दीदी मुझे आपको सूर्य की कसम नहीं देनी थी जानती हम आप भी उस से उतना हे प्यार करती है जितना की मैं या बाकि सब मैं अपनी कसम वापिस लेती हूँ

मेनका जी भीगी हुए पलकों से शालिनी जी को देखती है

मेनका जी...... मुझे माफ कर देना शालिनी पैर मैं सूर्य से प्यार कर बैठी जब से मुझे मेरी पुराणी यादे मिली है मैं ठीक से सो नहीं प् रही थी आवर एक दिन किसी आवर के साथ देख मैं खुद को सूर्य के साथ सम्बन्ध बनाने से रोक नहीं पायी

कह कर मेनका जी अपने कक्ष की आवर दौड़ गई उन्हें सर्मिंदगी हो रही थी वो शालिनी जी से नजरे नहीं मिलाप रही थी इस लिया अपने रूम में जाना हे सही समजा

मेनका जी के जाने के बाद शालिनी जी की आँखों के सामने मेनका जी आवर सूर्य की एक अलग हे चाबी बनने लगी जिसमे दोनों एक दूसरे के नंगे जिसम को प्यार से भोग रहे थे

शालिनी जी के जिसम में रह रह कर उस दृश्य से कामुक लहरे उत्पन्न होने लगती है फिर अचानक से उनकी आँखे बंद हो जाती है आवर उन्हें कल का वो दृश्य दिखाई देता है जिसमे सूर्य घोड़ी पे स्वर होने के बाद रसम निभाने के लिया शालिनी आवर रेखा जी दोनों के बरी बरी से स्थान पान करता है उस वक़्त शालिनी जी को जो सुख अनुभव हुआ था वो अकल्पनीय था एक पल के लिया जैसे सर्दी में सरीर आदिक ठण्ड के कारन जुरजूरी लेता है ठीक वैसा हे शालिनी जज के साथ हुआ आवर ुशी वक़्त उन्हें अपनी योनि से बहुत अत्यधिक मात्रा में रिसाव होता महसूस हुआ

शालिनी जी ढूढ को साइड में रख तेजी से अपने कक्ष की आवर निकलती है रस्ते में उन्होंने मेर्री को सूर्य किरण के लिया ढूढ रूम में पहुंचने का बोल अपने रूम की आवर निकल जाती है बिना कुछ सुने

रूम में पहुंचते हे रूम लॉक कर सीधा बाथरूम में जा कर अपनी साड़ी खोल कर एक एक वस्त्र अलग कर जब अपने गोरी सरीर से वाइट पेंटी हटाने के लिया एलास्टिक्स में हाथ डालती है अनन्याश हे उनकी उँगलियाँ कमल तोय से जा तक रति है जहा पूरा हिंसा योनि राश से चिपचिपा हो चूका था

शालिनी जी अपने पेंटी उतर अपनी योनि पे हाथ फिरती है तो उनके मुँह से एक तेज कामुक सीकरी के साथ योनि में रुका हुआ योनिरस उनके हाथ को भिगोने लगता है

शालिनी जी अपनी योनि राश से भीग बुए हाथ को देखते हुए पता नहीं क्या सोच कर उसे अपने नक् के करीब कर सूंघने लगती है

योनिरस से निकली कामुक गंध शालिनी जी की काम जवलयर भड़का देती है

शालिनी जी शावर के निचे कड़ी हो अपनी योनि को सहलाने लगती है बार बार उनकी आँखों के सामने सूर्य का विशाल लिंग मेनका जी की योनि के अंदर बहार होता नजर आ रहा था कुछ हे देर में शालिनी जी अपना होश खो कर खुद को उस दृषिया में सूर्य के लिंग को अपनी योनि के अंदर बहार होते हुए आँखे बंद किये इमेजिन करने लगती है

शालिनी जी .......उम्मम्मम्म अह्हह्ह्ह्ह बीटा अह्हह्ह्ह्ह छोड़ अपनी माँ को अह्ह्ह्ह ऐसे हे बहुत प्यार करती हूँ तुजे छोड़ अपनी माँ की छूट को जिस से तुम्हारा जनम हुआ है






पूरा बाथरूम शालिनी जी की अति कामुक सिसकारियों से गुजने लगा था

ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक की शालिनी जी की योनि ने अपना सयम न खो दिया

शालिनी जी के भीतर से गरब वीर्य की गुहार जब निकली तो बस उन कामुक सिसकारियो में एक नाम था तो वो था सूर्य का

जब शालिनी जी की सांसे सयंत हुई तब उन्हें अहसास हुआ की उनके साथ क्या हुआ है

जहा उन्हें इस ओर्गास्म से अपना सरीर हल्का फुल्का मह्सुश हो रहा था वही उनके मन के में बड़ी जोरो से उत्कल पुथल मची हुई थी

जितना ज्यादा वो इस घटना के विषय में सूचित उतनेउनके निप्पल्स टाइट हो रहे थे फिर से कामुकता उनके सरीर मेभडने लगी थी






शालिनी जी सभी विचारो को छिटक कर शावर के निचे ख़फ़ी देर तक कड़ी रही जब उनका मन संत हुआ तब वह अपने सरीर पे वही राखी पतली से वाइट निघ्त्य दाल बाथरूम से बहार निकल जाती है





बहार कोई गेट नॉक कर रहा था तो शालिनी जी ने रूम का दूर खोले बिना हे हे अंदर से पूछा की कोण है नहर उनके पति देव शिव ठाकुर थे

शालिनी जी ने जैसे रूम खोला शिव शालिनी को इस तरह पतली से निघ्त्य जो थोड़ी बहुत भीगे सरीर से चिपके हुए शालिनी जी के सामने के उन्नत शिखर लगभग अपनी शेप दिखा रहे थे

शिव ......क्या बात है शालू आज सुहागरात सूर्य किरण की है पैर तुम्हे देख कर मेरा भी दिल कर रहा है की फिर से सुहागरात मन ली जाये

शालिनी जी ....... आज तक आपको मैंने रोका है कभी जो आज रोकूंगी पैर पहले जो जरुरी है फिनिश कर लू फिर जो आपका दिल करे

शिव शालिनी को किस कर अपनी ख़ुशी का इजहार कर बहार निकल जाता है वही शालिनी जी दूसरे कपडे दाल बहार निकल जाती है

किरण को दुल्हन की तरह सजाने के बाद पायल प्रीती कोमल अलीना सपना उसे सूर्य के रूम में सजी हुई सुहाग सहेज पे ले जा कर बैठा देते है घूँघट निकल कर

वही मेर्री जी शालिनी के बताये अनुसार एक चंडी के बड़े से गिलाश में वो ढूढ दाल कर सूर्य के रूम तक पंहुचा देती है

अब बस इन्तजार था तो सूर्य का जिसके लिया बाकि लड़किया रास्ता रोके कड़ी थी की कब सूर्य आये






जैसे हे सूर्य अपने रूम के द्वार पे पहुँचता है सभी लड़किया द्वार रोक कर कड़ी हो जाती है

सूर्य ......क्या हुआ अब अंदर भी जाने दो

कोमल .....ऐसे कैसे पहले हमें सगुन दो तभी रूम में अपनी बीबी के पास का सकोगे

सूर्य ......क्या कोई आवर रास्ता नहीं है

पारिजात ......हमने सभी रस्ते बंद कर रखे है जान बस यही रास्ता है

सूर्य ....... ठीक है फिर आप हे बोलो क्या चाइये

पायल ......ज्यादा कुछ नहीं बस एक वादा की आप हमेशा ऐसे हे स्वीटी की बात का मन रखेंगे

सूर्य ..... क्या तुम लोगो को कुछ नहीं चाइये अपने लिया

कोमल ......ये हमारे लिया हे है जो हमने माँगा है

सूर्य .......ठीक है मैं वादा करता हूँ की किरण या तुम सभी की जायज मांग को पूरा करने का वचन देता हूँ

कोमल आगे भाड़ सूर्य के होंटो को चुम कर द्वार से अलग हो जाती है एक एक कर सभी ऐसा हे करती है सिवाय रिद्धि पारी के जो अभी भी सूर्य को देख रही थी

जिनिशा .......रिद्धि दीदी कुछ नहीं करेगी आपको हे पहल करनी होगी

कहते हुए रिद्धि पारी को सूर्य की आवर दाखिल देती है जो सीधा सूर्य के सीने से जा लगती है

सूर्य रिद्धि पारी की ठुड्डी के नीचे से ऊँगली से उसका चेहरा ऊपर करता है

कुछ पल आँखों में देखने के बाद जब रिद्धि पारी सरम से अपनी पलके बंद कर लेती है तो सूर्य खुद से अपने होंठ रिद्धि के कांपते लरजते गुलाब की पंखुड़ियों सामान होंटो पे लगा देता आवर एक प्यारा सा छोटा सा किश कर आगे भाड़ जाता है

रिद्धि पारी तो बस ुशी लम्हे में खोई रही जब तक पारिजात ने उसे सपनो की स्वपन नगरी से बहार न निकला हिला का






सूर्य की कदमो की आहात सुन किरण की मुखी हुई नजरे रूम के द्वार की तरफ जाती है जहा सूर्य खड़ा था द्वार बंद किये

सूर्य आगे भाड़ अपने सर पे बाँदा सफ्फा उतर कर वही पास के सोफे पे रख देता है






किरण जो एक पतली पारदर्शी चुनार ओढ़े हुए थी

उसके सामने जा बैठा आवर प्यार से उस परदे के पीछे चिप्स चेहरे को अपनी स्वीटी को निहारने लगता है






काफी देर तक जब सूर्य की आवर से कोई पर्तिकिर्या नहीं आई तो किरण ने एक बार फिर अपनी नजरे उठा कर देखा तो सूर्य उस खूबसूरत चेहरे में खोया हुआ था

किरण .......ऐसे क्या देख रहे हो कुंवर सा

सूर्य ........अपनी दुनिया जहा को जिसके लिया जन्मो जनम इन्तजार किया आज वो इन्तजार ख़तम हुआ आज ये किरा हमेशा के लिया आने सूर्य में समाहित हो एकाकार हो जाएगी दो जिसको के मिलान के साथ साथ दो अतृप्त आत्माओ का सम्पूर्ण मिलान होगा

किरण आगे भाड़ सूर्य के पांव चुने की कोशिश करती है तो सूर्य उसे रोक देता है

सूर्य ......समाज की नजरो में भले ये उचित लगे पैर ऐसे पल में तुम मेरा अर्धांग हो तुम में आवर मुझे कोई फरक नहीं स्वीटी यहाँ जो धड़कन है वो मैं हूँ ( सीने पे ऊँगली रखते हुए )आवर यहाँ पे तुम ( अपने दिल पे किरण का हाथ रखते हुए ) दोनों है तो ये सूर्य आवर किरण है नहीं तो कुछ भी नहीं

तुम जननी हो किरण इस लिया तुम्हारा स्थान हमेशा मुझसे ुछौर उत्तम रहेगा

सूर्य डेरी से किरण का घूँघट उठा कर सर के पीछे करते है






सूर्य ....... आज मेरी मन मंदिर की देवी मेरे सामने है जिंदगी बिट जाये पैर ये पल कभी ख़तम हे न हो

किरण ......क्या इतना प्रेम करते है हमसे

सूर्य ........ ऐसा कुछ नहीं इस भारमंद में जोतुम्हारे पार्टी मेरे प्रेम को मैप सके

किरण .......आवर मम्मी से कितना प्रेम करते हो

सूर्य ........ जितना हम आपसे करते है उतना हे माँ से करता हूँ इस से ज्यादा मैं बया नहीं कर सकता आप अपनी मुँह दिखाई में कुछ भी मांग सकती है

किरण ....... जब हमारी इच्छा होगी हम तब आपसे मांग लेंगी कुंवर जी

सूर्य ....... उचित है पैर ये कुंवर जी नहीं हमें आप वही कह कर पुकारे जो पहले पुकारती थी हमारे नाम से

किरण मुस्कुराते हुए न में गर्दन हिलने लगती है

वही सूर्य कुछ मंत्र जप करता है अपने मन में जिस से जो सूर्य पुर किरण परतविलोक में इस वक़्त अपने रूम में थे वो गायब हो सूर्य किरण के सरीर में समाहित हो जाते है

दोनों के सरीर में अपना अपना अंश समाहित होते हे

वह जो कुछ भी हुआ सब दोनों को पता चल जाता है

सूर्य किरण को डेरी डेरी बीएड पे लिटा किरण के सरीर से एक एक कर पहले जेवेलरी हटा देता है आवर फिर किरण केखूबसुरा चेहरे आवर सरीर पे अपने चुम्बन अंकित करते हुए बाकू वस्त्र भी हटा देता है

अब केवल किरण ब्रा पंतय में लेते हुए थे

तभी किरण की नजर वह मौजूद अदृश्य कैमरा पेपडती है

किरण डेरी से सूर्य को अपने पास करके सूर्य को कैमरा के विषय में बताती है

सूर्य आँखे बंद कर देखता है तो उसे जिनिशा का चेहरा नजर आता है इन सबके पीछे

सूर्य .......ये जीनु की कारस्तानी है स्वीटी

किरण आँखे बंद कर सभी कैमरा गायब कर देती है

इस दौरान सूर्य अपने कपडे निकल कर किरण के अर्दनग्न सरीर को चूमने लगता है






जैसे जैसे सूर्य किरण की खूबसूरत जिसम को अपने प्रेम से अभी बूत कर रहा था वैसे वैसे किरण के मुँह से मधुर सिसकारियां प्रस्फुटित होने लगती है

कुछ हे पालो में किरण सूर्य के ऊपर थी

आवर सूर्य की आँखों में बड़े प्यार से जनकः रही थी






सूर्य .......क्या इस मिलान की रात को ऐसे हे निकलने का इरादा है

ककीरण ........ बिलकुल नहीं जिस पल की इतने लम्बे समय से प्रतीक्षा थी वो पल ऐसे जाया नहीं होने दूंगी

कहते हुए किरण सूर्य के एक अकड़े हुए चुनचाक को मुँह में भर अपनी गीली जीब से कुरेदने लगती है

इस से सूर्य के पुरे जिसम में एक अजीब सी सनसनाहट होने लगती है उसके पेट की सभी मस्पेसियो में खिचाव सा होने लगता है

किरण निरंतर सूर्य को अपने काम क्रीड़ा से तड़पने में लगी हुई थी वही सूर्य के न चाहते हुए भी उसके मुँह से तेज सांसो को साथ हालिक हलकी सिसकारियां निकलने लगती है

सूर्य से जब बर्दास्त नहीं हुआ तो उसके किरण की कोमल मखान जैसे मुलायम नितम्ब अपने सकत हठी में थम किरण को अपनी गॉड में लिए हुए बीएड पे बेथ गया






सूर्य किरण की पतली जुलाई गुलाब की कच्ची पंखुड़ियों को अपने होंटो में कैद कर उनके रिश्ते शरबत को पिने लगता है साथ हे निरंतर नितम्बों को सहलाने जारी रखते हुए





कुछ देर बाद सूर्य ुशी अवस्था में लिया हुए किरण के सरीर से ब्रा अलग कर देता है





आवर उन खूबसूरत कड़क आकड़े हुए चुनचाक को अपने मुँह में भर पिने लगता है

जैसे उनमे अमृत राश भरा हो सूर्य निरंतर किरण के घोष से भरे घोष उभारो को सह लेट हुए पिने लगता है निचे से किरण की गिल्ली पंतय पे से अपने भुजंग काम दंड की रगड़ते हुए






किरण ...... कुंवर सा उम्... अह्हह्ह्ह्ह हम हवा में ुध रहे है

सूर्य ........बस कुछ पल आवर जान आप सच मच स्वर्ग की शेरे करेंगी

सूर्य निचे किरण के पीट को चूमते हुए किरण की कामराश से भीगी हुई पेंटी उसके जिसम से अलग कर अपना मुँह वह लगा देता है

किरण की ारदखिले पुस्पा से निकलती सम्मोहित कर देने वाली कामुक गंध सूर्य के नाथू no से से होती हुए उसके दिमाग के भरने लगती






जैसे हे सूर्य अपनी गरम जुबान से स्वीटी की योनिकुंड को कुरेदने लगता है

वैसे हे किरण का सर रंजना जाता है रह रह कर किरण की कमर अपने आप उचकने लगती है

किरण सूर्य के सर को अपनी योनिकुंड पे दबाने लगती है

सूर्य के निरंतर प्रयाश से किरण जल्दी हे अपनी योनि खुद में चले अमृत राश सूर्य के मुँह में छोड़ देती है जिसे सूर्य बढे हे प्रेम से मधुरेश को चाट पूछ कर पूरा साफ कर देता है

कुछ पल के इन्तजार के बाद किरण सूर्य को किश करने लगती है

अपनी योनि राश को चखने पे किरण आवर भी उग्र हो जाती है आवर सूर्य की पीठ को अपने नाखुनो से कुरेदने लगती है

जैसे हे किश मातम हुआ किरण सूर्य को बीएड पे लिटा कर उसकी आँखों में देखते हुए सूर्य की अंडरवियर सुथार कर बीएड के निचे दाल देती है

किरण सूर्य की आँखों में देखते हुए सूर्य के सुराख़ लाल ढकते लिंगमुण्ड को






किरण बिना कुछ कहे सूर्य के उस रक्तिम सूपड़ा को अपनी जीब से चाटने के साथ हे मुँह में भर एक ले के साथ अंदर बहार करने लगती है





डेरी डेरी मज़े के आलम में सूर्य की आँखे बंद होने लगती है ोुर्राह रह कर सूर्य का भुजंग लिंग किरण के मुँह में ठुमके मरने लगता है





किरण कभी सूर्य को देख उसके लिंग को मुँह में भर्ती तो कभी उन जुलती हुए अंडकोष को अपने मुँह में भर खींचती

सूर्य को अहसास होने लगा आवर किरण को भी की सूर्य कभी भी अपनी पीक पे पहुंच सकता है

सूर्य की नशे अत्यधिक रक्त परवाह से नीली हो उभरने लगती है

वही लिंगमुण्ड अत्यधिक रक्तपर्वाह के चलते चेरी के जैसे बिलकुल लाल हो कर चमक रहा था

सूर्य ........ अह्ह्ह्ब्हहभ स्वीटी रुक जाओ मान्यता मैं अपना नियंत्रण खो दूंगा अह्हह्ह्ब्ब्ब्ब अपना मुख से लिंग को बहार निकला

सूर्य की बात सुन किरण आवर तेजी से सूर्य को मुखमैथुन का आनंद देने लगती है

सूर्य ......... अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह स्वीटी उम्मम्मम्म ी ऍम किंग माय लव अह्हह्ह्ह्ह

किरण ......... कुढ़ को रोको नहीं कुंवर जी आज की रात हमारे मिलान की रात है

किरण की बात सुन सूर्य मुस्कुराते हुए खुद को किरण के हवाले कर देता है

अगले 2 मिनट्स में हे सूर्य के लिंग से निकला गरम लावा किरण के गले से होते हुए आड़े से ज्यादा किरण के पीट में चला जाता है

किरण बीएड से उठ बाथरूम में जा खुद को अच्छे से साफ़ करती है इतने में सूर्य भी थका हुआ सा किरण के पीछे से उसे भाहो में भर लेता है ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..............

सूर्य किरण की फर्स्ट नाईट इसी अपडेट में देने वाला था बूत वर्ड लिमिट पूरी हो गई सो बाकि का अपडेट कल दूंगा .....
 
अपडेट. 200

सौरीगढ़ ....... रात को सूर्य को रोहन आवर सोहेल दोनों मिल कर फर्स्ट नाईट का ज्ञान बाँट रहे थे

जैसे की सूर्य इन सब से अनजान अन्य किसी लोक से यहाँ पंहुचा हो

सूर्य ......अरे भाई मैं भी यही का हूँ मुझे भी पता है इतना तो

सोहेल ....... जनता हूँ कितना पता है जब कोई लड़की पास आती है तो दूर भागता है याद है वो मेरी गफ की फ्रेंड्स जब तुम घर आये थे हम लोग गुमने मार्किट गए तब उस से मुलाकात हुई थी

सूर्य ......मुझे अच्छे से याद है पैर वह तो ऐसा कुछ नहीं हुआ था

सोहेल ......रोहन भाई वो लड़की इसे देखते हे पसन् करने लगी थी पैर इन महाशय पे जैसे कोई असर हे नहीं हुआ हो

सूर्य ......तो इसमें गलत क्या है रोहन भाई उस वक़्त मेरे लिया जरुरी थी तो अपनी ट्रैंनिंग जिसके लिया मैं पुणे गया था आवर दूसरी बात उस वक़्त मैं लड़कियों के पास जाने पे अजीब सा मह्सुश करता था इस लिया मैं ज्यादातर समय ट्रैंनिंग या ध्यान में हे रहता था

सोहेल .......ये तुमने सही कहा भाई रोहन भाई आपको पता है जब ये ट्रैंनिंग के लिया पुणे पंहुचा था तब इसकी आगे 17 इयर्स थी जिस आगे में हम कॉलेज में लड़कियों के पीछे भागते है

रोहन ........ सुरु सुरु में जब भी पापा से तुम्हारी विषय में चर्चा होती तो अजीब लगता था की ऐसा कोण है जिसकी पापा तारीफ करते थकते नहीं कभी कभी तो मुझे ऐसा लगता है की तुम्हारा दोहरा चरित्र है

सूर्य .....हाहाहा आपको ऐसा क्यों लगता है भाई

रोहन ........ उसकी वजह है सूर्य मैं तुम्हे छोटा भाई मंटा हूँ आवर साथ हे एक ाचा दोस्त भी एक दिन मैंने पापा से तुम्हारे बारे में जानने के लिया पूछा तब उन्होंने तुम्हारे किस्से मुझे बताये जो की यकीं करने लायक नहीं थे मेरे लिया पैर फिर उन्होंने मुझे तुम्हारे उस ओप्रशन के बारे में बताया जो अभी कुछ दिन पहले आवर एक रूस में किया था तब मुझे यकीं हूँ इस लिया कह रहा हूँ की तुम जो हो वो दिखते नहीं आवर जो दिखते हो वो हो नहीं

सोहेल ......ये आपने बिलकुल सही कहा भाई उनमे से एक मिशन में मैं भी था उन किडनैप हुए आर्मी जवानी में मैं भी था

उसने अकेले हे बड़ी आसानी से कुछ हे देर में 300 ,350 से ज्यादा आतंकियों को ख़तम कर दिया उनके कैंप के साथ बिना एक भी खरोच आये

सूर्य ....... आप भी क्या बाते ले कर बेथ गए

रोहन ....... सही कहा वैसे हनीमून का क्या प्लान है कहा जाने का सोचा है तुमने सूर्य

सूर्य .....अभी कुछ सोचा नहीं

सोहेल ......भाई अब तो सब भाबी की मर्जी से होगा क्यों सही कहा न

सूर्य ...... है ये भी सही है क्युकी मुझे तो बहार जाने के बहुत से मोके मिलते रहते है जहा किरण की इच्छा होगी वही जायेंगे अच्छा मैं चलता हूँ

रोहन .....संभल कर गबरना नहीं नहीं तो पहली हे रात में नक् काट जाएगी

सूर्य ......ऐसी नौबत कभी नहीं आएगी भाई

आप संभल कर कही भाबी जी के सामने आपकी न काट जाये नाक हाहाहाहा

सोहेल .....भाई उसकी चिंता न करो उम्र में बचा है पैर सरीर से पूरा अरबी घोडा है वो

रोहन ......तुम्हे कैसे पता

सोहेल .....भाई 6 मोनथस एक हे रूम में रहे है इतना तो पता चल हे जाता है ये पूरा का पूरा एब्नार्मल है मंद ताकत आवर बाकि मामलो में भी अब आप खुद हे समाज जाये

सोहेल स्टोर रूम से दो बेयर की बोतल निकल कर लता है एक खुद आवर एक रोहन को दे देता है

वही सूर्य जब अपने रूम की तरफ पंहुचा तो पूरा हलियारा लड़कियों से भरा पड़ा था

सपना राधा कोमल पायल प्रीती अलीना सानिया सोफिया माया संधि निधि विधि गायत्री मानवी मानसी राधिका मेर्री जी

सूर्य ........ आप सब यहाँ क्या कर रही है सोना नहीं है क्या

अलीना ......hello मर .चुपचाप अपनी जेब ढेली करो हमें रिस्वत दिए बिना अंदर जाना मुश्किल हे नहीं नामुमकिन है

सूर्य ......अभी जाने दो कल देता हूँ सबको मुझे नींद आ रही है

राधिका .......देवर जी ये मामला कल पे उधर छोड़ने वाला नहीं है

सूर्य .....क्यों आपने भी तो उधर छोड़ रखा है

संधि ......उनका प्लान कुछ आवर है ी मैं उन्हें कुछ आवर चाइये होगा

सूर्य ......देखो मेरे पास तुम सबके लिया एक ऑफर है अभी चाइये तो पैसे दे सकता हूँ आवर है कल तक का वेट करती हो तो तुम सभी को एक सेठ गोल्ड कंगन मेरी तरफ से बोलो मंजूर है तो ठीक नहीं तो ये लो जितना है उतना रख लो ( सूर्य अपना फर्श उनकी आवर कर देता है )

अलीना .......ठीक है कल तक का वेट करते है पैर सब कंगन तुम्हारी पसंद के होने चाइये

सूर्य .......ok दोने

सूर्य के है करते हे सभी रूम में जाने के लिया रास्ता छोड़ देते है सूर्य

रूम में पहुंच कुछ समय इन्तजार करते है आवर उसके बाद दोनों गायब हो कर परीलोक पहुंचते है

जहा सूर्य आवर किरण दोनों असली सूर्य किरण में समाहित हो जाते है

परीलोक .......

ीदार सूर्य किरण को ले कर बाथरूम से अपने रूम में आता है आवर किरण को बीएड पे लिटा कर चूमने लगता है

डेरी डेरी सूर्य किरण की ठन्डे हो चुके जिसम में अपने चुम्बनों से काम जवाला भरने लगता है

किरण सूर्य द्वारा अपने सरीर पे हो रहे निरंतर चुम्बन आदि से गरम होने लगती है

वही सूर्य किरण की गर्दन को चूमने के बाद डेरी डेरी गर्दन से निचे उतर ते हुए किरण की उन सफ़ेद उभारो के बिच अंकित खायी में अपनी जुबान से चाटने लगता है





किरण मदहोशी के आलम में सूर्य के सर को सह लेट हुए अपने सीने में दबाने लगती है

सूर्य अपनी एक ऊँगली अपनी थूक से गीली कर किरण की योनि को कुरेदने लगता है किरण की योनि में हल्का गीलापन के साथ मीठी मीठी खारिश होनी सुरु हो जाती है





किरण ........ उम्म्म्म अह्ह्ह्हह जान आपकी आग़ोश में बहुत सुकून है उम्म्म्म अह्ह्ह्हह बस ये पल कभी ख़तम हे न हो

सूर्य ......उम्मम्मम सही कहा जान फिर तुम्हारी बाकि बहनो का क्या

किरण ...... सभी को सब मिलेगा आका साथ प्यार आवर समय भी भले हे मुझे आपका पूरा समय न मिले

सूर्य ........ तुम्हारी यही सोच मुझे सबसे पहाड़ी लगती है जितनी तुम चंचल हो स्वीटी उतनी हे सुलझी हुई सभी की ख़ुशी का ख्याल रखने वाली पैर तुम मेरी चाहत नहीं मेरी धड़कन हो तुमसे ज्यादा समय मैं भी दूर नहीं रह पाउँगा





किरण ........ अब समय मत गवाए आवर हमारे मिलान को आगे भदैये

सूर्य .....जो हुकुम महारानी साहिबा का

किरण सूर्य को सर को अपने दोनों हठी में थम अपनी कमरष से गीली योनि पे लगा देती है

अपनी उंगलियों से कामराज से भीगी हुई योनि की गुलाबी चिपकी हुईं पंखुड़ियों को खोल कर सूर्य को आमंत्रण देती है





सूर्य बिना किसी विरोध के अपने होंठ किरण की योनि से लगा देता है





सूर्य किरण की योनि को खोल कर भीतर का हिस्सा देखता है जो पूरी तरह से बंद था

सूर्य किरण की नाजुक से योनि को देख कर अपने मुसल को देखता है

जिसे देख सूर्य को किरण को आगे होने वाले दर्द का का अनुमान कर हे गब्रहत होने लगती है

जिसे किरण जल्दी हे मह्सुश कर अपनी आँखे खोल देती है

किरण ........आप चिंता न करो जितना नाजुक आप समाज रहे है उतनी मई हूँ नहीं भले हे मुझे इन सब का अनुभव नहीं है पैर इतना यकीं कीजिये मुझे कुछ नहीं होगा

सूर्य ......पैर स्वीटी ये बहुत बड़ा है आवर तुम्हारी योनि बहुत नाजुक तुम्हे बहुत तकलीफ होगी

किरण .....ये सफर मेरे लिया बहुत मायने रखता है कुंवर सा आज मैं एक लड़की से औरत बन जाउंगी ये एक नया अद्याय होगा मेरे जीवन का आप ऐसे मेरी चिंता न करिये आवर पूरी हिमायत से आगे भेड़िये





सूर्य कुछ समाया आवर किरण की योनि कमरष पिने के बाद

सूर्य अपने अकड़े हुए लिंग पे बहुत साडी क्रीम लगा कर अच्छे से त्यार करता है

आवर कुछ क्रीम किरण की योनि पे लगा कर अपनी ऊँगली से किरण की योनि में प्रवेश करवाता है

जैसे जैसे सूर्य वह किरण के अंगो में घर महत बढ़ती जा रही थी वैसे हे क्रीम तरल रूप ले रही थी





किरण अपने दोनों पैरो को विपरीत दिशा में फैला कर अपनी योनि को जितनी मात्रा में खोल सकती थी खोल कर सूर्य के सामने कर दी

सूर्य का मन अभी भी विचलित था पैर एक न एक दिन तो ये होना हे था

सूर्य खुद को सयंत कर अपने ढकते हुए लिंगमुण्ड को किरण की खुली हुई पे सत्ता कर किरण की जंगो को थम कर हल्का सा पुस करता है





इस दौरान सूर्य की नजर किरण की योनि पे थी जिस से किरण के भाव वो देख नहीं पाया

कुछ पल को किरण के मुख मंडल पे पीड़ा के भाव उबरे

जब सूर्य को अहसास हुआ आवर उसने किरण की तरफ देखा तो किरण ने बड़ी सफाई से अपना दर्द सूर्य से छुपा लिया





सूर्य अपना अदा लिंगमुण्ड जो किरण की योनि में अटका हुआ था उसे वापिस बहार कर लेता है

किरण .....जान ये दर्द एक बार होना हे है कब तक ऐसे डरते रहोगे आपको मेरी कसम है अब आप नहीं रुकेंगे

सूर्य ......ये आपने अच्छा नहीं किया स्वीटी

इस बार सूर्य ने अपनी ताकत का उसे करते हुए किरण की योनि पे प्रहार किया तो किरण की योनि को छोड़ते हुए लगभाई सूपड़ा सहित 4 इंच लिंग अंदर जा कर रुका





किरण के मुँह से कोई चीख तो नहीं निकली किन्तु उसकी आँखों से बहते आंसू आवर लिंग के साइड से निकलते योनि रकत ने सूर्य को किरण के दर्द का अहसास करवा दिया था

सूर्य की आँखों से भी आंसू बहने लगे जिन्हे देख किरण सूर्य के आंसू पोछती है आवर उसे आगे भड़ने का इसरा करती है

सूर्य किरण की कसम में बंधा मजबूरन अपने लिंग को बहार कीच कर एक बार फिर से तेज प्रहार करता है सूर्य का लिंग सरसराता हुआ लगभग 1 इंच को छोड़ कर पूरा किरण की योनि में समां गया

किरण ......... Ahhhhhhhhhh मुम्ममय

सूर्य ........सॉरी स्वीटी मुझे माफ कार्डो

किरण ......आप क्यों माफ़ी मांग रहे है मैंने हे तो आपको कसम दी थी

सूर्य ......मैं अभी जादू से सारा दर्द गायब कर देता हूँ

किराम ....... नहीं ये दर्द मुझे सहना है कुंवर सा यही वो अहसास है जो हर लड़की औरत बनते हुए मह्सुश करती है

कुछ देर सूर्य किरण के उभारो को चिंता है सुस्ता है जिस से किरण को थोड़ा रहत मह्सुश होती

जब किरण खुद हे अपनी कमर को हलके हलके चलने लगती है तब सूर्य बहुत हे माध्यम गति से अपने लिंग को किरण की योनि में अंदर बहार करना सुरु करता है





कुछ समय तो किरण को पीड़ा हुई किन्तु जैसे जैसे योनि की कसावट काम हुई लिंग पे किरण के सरीर में गर्मी भड़के लगती है

आवर किरण अपने दर्द से परे मज़े के सफर की आवर निकल पड़ती है

किरण .......... उम्मम्मम्म अह्हह्ह्ह्ह कुंवर सा अब ाचा लग रहा है अहहहहहहजहह पहले पता होता की इस मिलान में इतना सुकून है तो मैं पिछले जनम में हे आपकी हो जाती hi

सूर्य डेरे डेरे अपनी स्पीड को बढ़ाते हुए किरण की योनि में पम्पिंग करना सुरु कर देता है





सूर्य ......... उफ्फफ्फ्फ़ तुम बहुत नाजुक हो स्वीटी पता नहीं कैसे तुमने इतना दर्द झेलना है

ककीरण ........उम्मम्मम्म मेरे भोले बालम जी आप भूल रहे है मेरा सरीर सुनहरी ड्रैगन की तरह मजबूत है जब मेर्री जी आपको संभल सकती है तो क्या मैं उनसे भी नाजुक हूँ

सूर्य ......उम्मम्मम्म प्लेसेस इस वक़्त किसी आवर की बात नहीं स्वीटी

किरण अपनी योनि के अंदर बहार होते लिंग को देख रही थी





जिस से किरण आवर ज्यादा उत्तेजित होने लगती है

आवर इसका असर किरण की योनि पे होता है जो अपनी कसावट सूर्य के लिंग पे कस्ती जा रही थी

किरण ......ummmm.kunvar सा तेजी से कीजिये न

सूर्य मज़ा लेते हुए

सूर्य ......क्या कृ किरण खुल कर कहो न

किरण ......वही जो कर रहे है आप

सूर्य ...... वही तो पूछ रहा हूँ मैं आपसे

किरण सूर्य को नकली गुस्से से गुरति है

जिसे देख सूर्य की हंशी चुत जाती है

किरण ......मैं झाड़ने वाली हु प्लेसेस जल्दी कीजिये

किरण तेजी से अपनी दोनों चूचियों को मसलने लगती है जिसे देख सूर्य किरण की जंगो कक विपरीत दिशा में फैला कर तेजी से चुदाई करने लगता है





कुछ एक मिनट्स बाद हे किरण की कमर किसी कमान की तरह उठी आवर कांपते हुए ठाड़ से बीएड पे जा गिरी

किरण की जंगे आवर कमर बुरी तरह से कैंप रहे थे जैसे

अभी अभी सर्दी में बर्फीले पानी में नाहा कर निकली हो

सूर्य किरण के बूब्स को सहलाते हुए किरण को किश करता है जिस से जल्दी हे किरण संत हो जाती है

सूर्य किरण की योनि से अपना लिंग बहार निकलता है जो लालिमा लिया हुआ था किरण के रकत वह योनि राश के मिलान से

सूर्य किरण के बगल में लेट जाता है कुछ पल बाद किरण बीएड पे उठ बैठी आवर सूर्य के छठ को सलामी देते लिंग को साफ कर अपने मुँह में समाहित कर चूसने लगती

सूर्यका आगरा लिंगमुण्ड अत्यादितिक मात्रा में फुल्ल हुआ था जिस से किरण को मुँह में लेने थोड़ी बहुत परेशानी हो रही थी

को





किरण लिंग के हर हिस्से पे अपनी जुबान फिरते हुए

लिंग में एक नयी ऊर्जा का संचार कर रही थी

डेरी डेरी इसका असर सूर्य पे भी होने लगता है जब हलकी हलकी कमर ऊपर उठ नृत्य करने लगती अपनी हे थिरकन में





सूर्य किरण को अपने ऊपर खींच लेता आवर उसकी कोमल कोमल मधभरे होंटो पे अपने होंठ रख चूसने लगता है

किरण अपनी गीली योनि की फंखे सूर्य के लिंग पे रगड़ते हुए आगे पीछे होने लगती है

कुछ देर दोनों ये करम चलता है फिर किरण सूर्य के लिंग को थम अपनी योनि की आवर रास्ता दिखागति है

कुछ मुस्किलो के बाद सूर्य का लिंग किरण की योनि में आड़े से ज्यादा फिट हो चूका था

किरण को एक बार फिर से दर्द होता है सूर्य उसे कुढ़ पे जुखाते हुए चूमने लगता है साथ हे अपनी कमर को हिला हलके हलके कितनी की योनि भिड़ने लगता है





सूर्य किरण जैसे जैसे अपने इस मिलान के अंतिम चरण की आवर भाड़ रहे थे इनके सरीर से सुनहरी आवर वाइट ऊर्जा प्रस्फुटित हो इन्हे अपने घेरे में ले रही थी





ऊर्जा के समावेश के प्रभाव में दोनों हे उत्तेजित हो एक दूसरे में समाहित होने लगते है

एक वक़्त ऐसा भी आया की दोनों के सरीर के बहार वाइट एंड गोल्डन ऊर्जा कवच जैसे कुछ निर्मित हो चूका था

सूर्य आवर किरण का मिलान कोई एक जानते चला उसके पश्चात सूर्य अपने लिंग से निकला वीर्य किरण की योनि में भर ुशी पे लेट जाता है

दोनों उस ऊर्जा में घिरे एक दूसरे के बहो कब गहरी नींद में पहुंच गए उन्हें भी ज्ञात नहीं हुआ

सूर्य आवर किरण के नींद में जाते हे वो ऊर्जा दोनों में समाहित हो गायब हो जाती है

ुशी दौरान किरण आवर सूर्य के सरीर से उनके अंश बहार निकलते है आवर परतविलोक सूर्यगढ़ हवेली अपने कक्ष में लौट जाते है

थड़ा पीछे चलते है ......

रात में शिव ने अपने कहे अनुसार शालिनी जी से सम्भोग किया

जहा एक तरफ किरण सूर्य की सुहागरात हुए वही शिव की इच्छा पे शालिनी जी ने वैसा हे लाल सुहाग जोड़े में शिव से फिर से सम्बन्ध बनाये

पैर आज जैसे वो इस मिलान में पूरी तरह शिव के साथ नहीं थी

शालिनी जी को चरम सुख प्राप्त हुआ किन्तु उस दौरान बंद आँखों के सामने आकाश शिव का नहीं

बल्कि सूर्य का था शिव तो शालिनी जी से मिलान कर संतुष्ट हो कर सो जाता है

किन्तु शालिनी जी खुद में हो रहे बदलाव से असमंजश की स्थायी में पहुंच खुद से हे दावन्द करने लगी

शालिनी जी बीएड से उठ कर अपनी योनि से बहते हुए शिव के वीर्य को साफ कर बाथरूम में जा पहुंची आवर शावर के निचे कड़ी हो अपनी आँखे बंद कर

सूर्य आवर मेनका के सम्बन्ध के विषय में गहन विचारो में खो जाती है

जहा एक आवर उन्हें इस सम्बन्ध से दुःख हो रहा था

वही उन्हें अच्छा भी लग रहा था न जाने कब तक वो ुशी तरह शावर के निचे खड़े अपने विचारो में दुभि रही आखिर उन्होंने मेनका से इस विषय पे खुल कर चर्चा करने का फैसला किया

आवर अपने नंगे भीगे सरीर को टॉवल से साफ कर पतला सा गाउन अपने सरीर पे दाल कर शिव के साथ वही बीएड पे लेट गई

कब उनकी आँख लगी ये उन्हें भी ज्ञात नहीं हुआ

सुबह किसी ने जब दूर नॉक किया तब जा कर उनकी आँखे खुली तो वह बीएड पे अकेले सोये हुए थे

सायद शिव फ्रेश होने बाथरूम गया हुआ था

शालिनी जी उठ कर दरवाजा खिलती है आवर कुछ देर बाद आने का बोल कर अलमारी से कपडे निकल बाथरूम में चली जाती है जहा शिव सरीर पे टॉवल लपेटे सामने खड़ा था

शिव गुड मॉर्निंग बोल शालिनी को किश कर बहार निकल जाता है ..............

अपडेट पोस्ट फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..................
 
अभी थोड़ा बहुत लिखने की कोशिश करुगा अपडेट पे पकड़ बानी तो जल्दी पोस्ट कर दूंगा नहीं तो दोपहर बाद हे पोस्ट कर पाउँगा
 
अपडेट. 201

आवर अपने नंगे भीगे सरीर को टॉवल से साफ कर पतला सा गाउन अपने सरीर पे दाल कर शिव के साथ वही बीएड पे लेट गई

कब उनकी आँख लगी ये उन्हें भी ज्ञात नहीं हुआ

सुबह किसी ने जब दूर नॉक किया तब जा कर उनकी आँखे खुली तो वह बीएड पे अकेले सोये हुए थे

सायद शिव फ्रेश होने बाथरूम गया हुआ था

शालिनी जी उठ कर दरवाजा खिलती है आवर कुछ देर बाद आने का बोल कर अलमारी से कपडे निकल बाथरूम में चली जाती है जहा शिव सरीर पे टॉवल लपेटे सामने खड़ा था

शिव गुड मॉर्निंग बोल शालिनी को किश कर बहार निकल जाता है ..........

अब आगे .........

असुरलोक ............... वातापी सत्यता जब चुकी थी द्वारिका की किन्तु वो किसी की सहायता नहीं ले सकती थी इस लिया उसने बिना किसी की सहायता के हे असुरगुरु को कैद से मुक्त करवाने का निर्णय लिया आवर साथ हे मायावी असुरगुरु पे नजर रखना आरम्भ किया

इसी दौरान असुरगुरु के चारो असुरशिष्य असुरलोक पहुंच चुके थे किन्तु जब वो असुरलोक पहुंचने कर असुरगुरु से मानसिक संपर्क इस्थापित करते है तो इसमें उन्हें असफलता की सिवाय कुछ हाथ नहीं लगता

शिष्य 2 ...... असुरगुरु सायद असुरलोक में भी मौजूद नहीं है हमें यही रह कर उनकी प्रतीक्षा करनी होगी

शिष्य 3 ........ किन्तु लैब तक हमें असुरमहल से कोई जानकारी मिल सकती है असुरगुरु के विषय में क्या पता वो असुरराज नरकासुर के किसी कार्य हेतु किसी अन्य लोक गए हो

शिष्य 2....... तुम उचित कह रहे हो किन्तु हमें ये कार्य गुप्त रूप से करना होगा किसी की नजरो में आये बिना

चारो शिष्य असुर महल की तरफ भाड़ जाते है गुप्त रूप से असुरगुरु के विषय में जानकारी जुटाने के लिया

एक एक कर चारो असुर महल में गुप्त रूप में अपना अपना स्थान ले लेते है कोई सैनिक रूप में तो कोई सेवक रूप में

मायावी असुरगुरु महल से बहार होने पे उनकी भेंट उनमे से फ़िलहाल किसी से नहीं हो पति

ीदार द्वारिका प्रतिदिन नगीना वह विशुद्धि को वातापी द्वारा बदला हुआ दर्व्य महामहिम का दिया हुआ दर्व्य समाज प्रतिदिन उन दोनों को उसका सेवन करवाने लगती है

कनकसुर रोज उस रेड दर्व्य का सेवन कर नगीना आवर विसुद्धि को प्रतिदिन चोरी छुपे सम्भोग सुख देने लगता है

इस दौरान शिष्य 2 को असुरमहल में हो रही गतिविधियों के विषय में कुछ तथ्य सामने आने लगते है

एक दिन वातापी मध्यरात्रि को असुरमहल से निकल असुरगुरु को जहा लाईड रखा था उस गुफा की आवर निकल जाती है

शिष्य 2 सामान्य दुरी के साथ वातापी का पीछा करता है

वातापी को इसका आभाष हो जाता है की कोई उसका पीछा कर रहा है

वातापी जैसे हे महल से देय निर्जन स्थान पे पहुँचती है

वह अपनी मायावी विद्या का प्रयोग करती है

शिष्य 2 संभल पता या कुछ आवर कर पता उस से पहले हे वह मायावी राशि में बंद चूका था

वातापी ........ कोण हो तुम आवर हमारा पीछा क्यों कर रहे किसने तुम्हे हम पे नजर रखने को कहा सत्य जानने के हमारे पास आउट भी बहुत से मार्ग है

शिष्य 2 अपना भरकश प्रयाश करता है

किन्तु वातापी द्वारा की उपयोग की गई मायावी विद्या का उसके पास कोई तोड़ नहीं था

उल्टा जितना वो उस मायावी राशि से बहार निकलने का पर्यटन करता उतना वह राशि उसके सरीर को जकड़ने लगती है

वातापी ....... हम तुम्हे अंतिम अवसर देते है अपना वास्तविक परिचय दो ानयता हम तुम्हारे सरीर से तुम्हारी आत्मा को विलख करने में आदिक समय नहीं लगेगा

कहते हुए वातापी अपनी माया का प्रयोग एक बात फिर से शिष्य 2 पे करती है आवर अबले हे पल शिष्य 2 एक नुकीले पिंजरे में बंद हो गया जिस से निकले हुए लव के वो नुकीले तीर शिष्य 2 के सरीर पे जखम बनाने लगते है

शिष्य 2 दर्द से चीखना चाहता था पैर उसके मुँह से आवाज तक नहीं निकल रही थी

अपनी समस्त सक्तियो का प्रयोग करने के बाद भी शिष्य 2 को जब कोई मार्ग नजर नहीं आता तो उसने सत्य बोलना हे उचित समजा

शिष्य 2..... मैं असुरगुरु शिष्य 2 हूँ मैं यहाँ असुरगुरु की तलाश में आया हूँ बहुत समय से उनसे सम्पर्क न हो पाने के करम परतविलोक से हमें असुरलोक आने को विवश होना पड़ा

वातापी ....... अपनी वास्तविक रूप में हमारे समकक्ष आओ

शिष्य 2 अपने वास्तविक रूप में वातापी के सामने आता है

शिष्य 2 ...... यही मेरा वास्तविक सत्य है आप अवश्य असुर यौवरानी वातापी है क्युकी गुरुदेव ने हमें आपके मायावी विद्या के विषय में बताया था

हमें कसम करे हम जब किसी को मध्यरात्रि असुरमहल से चोरी छुपे बहार निकलते देखा तो पीछा करने लगे हमें ज्ञात नहीं था की ये आप है

वातापी ....... असुरगुरु द्वारिका की कैद में है किसी बहुत बेस सडयंत्र के तहत उन्हें कैद किया गया है

शिष्य2 ....... ये संभव नहीं है असुरगुरु को कोई अपने कैद में नहीं रख सकता है

वातापी ......ये सत्य है असुरगुरु हमारे लिया पिता सम्मान है हम असत्य नहीं कर रहे है

शिष्य 2 .......किन्तु महारानी द्वारिका ऐसा क्यों करेंगी आवर असुरगुरु कैद में है तो फिर असुरराज नरकासुर ने कुछ किया क्यों नहीं

वातापी ......ये स्थान इन सब बातो के लिया नहीं है तुम मेरे साथ आओ यहाँ हम किसी की भी नजरो में आ सकते है

वातापी शिष्य 2 को ले कर अज्ञान्त स्थान के लिया गायब हो जाती है

शिष्य2 ......यौवरानी हम कहा है आवर ये कोनसा स्थान है

वातापी ....... ये हमारे पिता श्री मयासुर का गुप्त मायावी कक्ष है जिसके विषय में किसी को ज्ञात नहीं केवल हमें छोड़ कर

शिष्य2 ....... आपने बताया नहीं की असुरगुरु के कैद में होने के पश्चात भी असुरराज नरकासुर ने कुछ किया क्यों नहीं उन्हें कैद से मुक्त करने के लिया

वातापी ....... जितना तुम इस सडयंत्र को सामान्य सडयंत्र समाज रहे हो उतना हे उलझा हुआ है

हम सावयक इस सडयंत्र की तह तक पहुंचने का भरकश प्रयाश कर रहे किन्तु न तो हम असुरगुरु को मुक्त कर पाए आवर न इस सडयंत्र के मुख्या षड्यंत्रकर्ता तक पहुंच पाए ( जूथ ) असुरराज नरकासुर को इस विषय में कुछ भी ज्ञात नहीं है

शिष्य 2 ....... इतने समय स असुरगुरु असुरलोक से गायब है उनको इस विषय में कुछ भी संदेह नहीं हुआ ऐसा संभव नहीं है यौवरानी कही इन सब के पीछे ...

वातापी .......असुरगुरु गायब होते तो अवश्य उनकी खोजबीन की जाती आवर सत्य तक पंहुचा जा सकता था किन्तु असुरगुरु के स्थान पे अन्य किसी मायावी ने असुरगुरु का रूप दर्जन कर उनकी अनुपस्थिति सभी की नजरो से छिपा दी आवर सवयं असुरगुरु पढ़ पे आसीन हो गए

शिष्य 2 को वाटीपी द्वारा बताये सत्य से अपने गुरु के पार्टीज जो प्रेम था उसके चलते उसे क्रोध आने लगता है

वातापी ....... अपने क्रोध को अपने नियंतरण पे रखो शिष्य 2 तुम्हारी एक मूर्खता से उन्हें ज्ञात जो सांता है की हम उनके विषय में सत्य जान चुके है ऐसे में वो सभी जो इस सडयंत्र से जज है सभी सचेत हो जायेंगे हो सकता हमें भी कैद कर लिया जाये या मृत्यु दे दी जाये क्युकी असुरमहारानी द्वारिका भी महल से गायब है उनके स्थान पे मायावी दृश्टिका ने द्वारिका रूप दर्जन कर उनका स्थान लिया हुआ है

शिष्य 2 ....... फिर आप हे बताये हम क्या करे जिस से असुरगुरु को मुक्त किया जा सके आवर इस सडयंत्र को निष्फल कर सभी को दंड दिया जा सके

वातापी ....... अभी तक हम केवल अकेले थे इस लिया हम इस सडयंत्र के सडयंत्र करता तक पहुंचने में असफल रहे किन्तु तुम अगर साथ दो तो हम सिगरा उसकी टैग तक पहुंच सकते है

शिष्या 2 ........आज्ञा करे हम उसके लिया कुछ भी करने को त्यार है

वातापी ....... तुम किसी ऐसे असुर को जानते hi जिस पे हम विश्वाश कर कोई कार्य सौंप सके

शिष्य2 ...... है कुछ आवर गुरु शिष्य है जिनपे मैं विश्वाश कर सकता हूँ

वातापी ....... क्या वो सभी विश्वाश योग्य है हम नहीं चाहते की एक गलती से वो सब सावधान हो जाये

शिष्य 2 ...... जितना आप मुझपे विस्वाश कर सकती है उतना हे उन तीनो पे कर सकती है

वातापी ......किन्तु जहा तक असुरगुरु ने बताया तुम 5 शिष्य थे उनके

शिष्य 2 ...... शिष्य 1 असुरगुरु के आज्ञा की अवेहलना कर उनके विरुद्ध काल के वास्तविक सत्य का पता करने उनके पीछे गया है

गुरुदेव का आदेश था की कोई भी काल के समीप भी न जाये ानयता वो मारा जायेगा

वातापी ....... ये काल कोण है हमने इसमें विषय में कुछ भी ज्ञात नहीं क्या तुम हमें विस्तार से इसके विषय में बताओगे

शिष्य 2 ...... हम भी ज्यादा कुछ नहीं जानते है काल के विषय में किन्तु जो देखा वो अद्भुत था उसकी ऊर्जा सकती जिसकी कोई सीमा नहीं साक्षात मृत्यु देव हो जैसे

असुरगुरु उन्हें अपने पुत्र सामान मानते है

काल असदारन दिव्या सक्तियो से परिपूर्ण एक दिव्या योद्धा है

आवर उसका वो दिव्या वाइट ड्रैगन जो उसका वहां है उतना हे समय आवर खूंखार

शिष्य 2 वातापी को वयोम के साथ हुई मुठभेड़ की विस्तृत जानकारी देता है जहा उसे मानसी के विषय में भी पता चलता है

वातापी ...... आवर ये मानसी कोण है जिसको असुरगुरु ने पुत्री का स्थान दिया है

शिष्य 2 ......हम नहीं जानते मानसी के विषय में ( जूथ ) क्युकी गुरुदेव ने कभी इस बारे में हमसे कोई चाचार नहीं की किन्तु वो भी सदर्न नहीं है ब्लैक ड्रैगन प्रिंसेस की उपदि प्राप्त है उसे

वातापी ........ अभी हमारे सामने बहुत हे महत्व पूर्ण विषय है फ़िलहाल तुम मायावी द्वारिका पे दृस्टि बनाये रखो अपनी आवर अपने साथी शिष्य को विशुद्धि आवर नगीना की हर गतिविधि पे नजर रखने को कहो बिना हमारे विषय में बताये

शिष्य 2 ...... उचित है जैसा आप कहे

वातापी ....... असुरमहल में हम तुम्हे नहीं जानते इस का ख्याल रखना जो भी जानकारी मिले तो इस मंत्र का प्रयोग कर तुम इस गुप्त मायावी स्थान पे चले आना आवर हमसे सम्पर्क करना

शिष्य 2 ..... उचित है आज्ञा दीजिये

शिष्य 2 ुशी मंत्र का प्रयोग कर वह से गायब होते बाकि शिष्य के पास पहुंचे आवर उन्हें क्या करना कैसे करना समजा कर अपने स्थान पे लौट गया एक सदर्न असुर सेवक के रूप में

वही वातापी काल वह मानसी के विषय में सोचने लगती है

परीलोक सूर्य महल .............

सुबह किरण जब उठी तो सबसे पहले सूर्य पे उसकी नजर पड़ती है जो किरण की निर्वस्त्र सरीर से चिपके हुए किरण के ुनत सीने में मुँह छुपाये अभी भी सोया हुआ था

किरण ........ कुंवर सा आपको ऐसे सोया हुआ देख कर कोई कह भी नहीं सकता की आपकी सदी होने गई है

अभी भी किसी मासूम बचे के जैसे सोते है आप जैसे एक मासूम नवजात अपनी माता के सीने से लग कर दुनिया जहा की बुराई से महफूज अपनी माता की आँचल में सुरक्षित

सूर्य ....... सुभप्रभात स्वीटी मिलान की पहली सुबह मुबारक हो आपको

किरण ....... सुभप्रभात कुंवर सा आपको भी हमारे मिलान की ढेरो सुभकामनाये

अब अपना हाथ हटा लीजिये हमारे अंग से हमारे विवाह का प्रथम सूर्यौदय है हमें समय से उठ कर अपने सभी बड़ो का आशीर्वाद लेना चाइये

सूर्य ......आपसे देय होने की इच्छा बिलकुल भी नहीं है हमारी

आप ऐसे हे हमारे संग हमारे आग़ोश में let's रहिये आपके आगोश में बहुत शुकुन आवर सन्ति मुलती है

किरण ....... सन्ति तो हमारी माता श्री है आवर आपकी सास उनका नाम इज्जत आवर सम्मान से लीजिये कुंवर सा

सूर्य ....... जो हुकुम महारानी सा उम्म्म्मः उम्म्म्मः

सूर्य द्वारा सुबह सुबह अपने अकड़े हुए निर्वस्त्र गुलाबी रंगत लिए निप्पल्स को मुख में भर के चूसने पे किरण की योनि द्वार तक मस्ती की एक लहार से दौड़ जाती है

किरण ........ उम्म्म्मःहःहज कुंवर सा रुक जाये सुबह सुबह ये सब करना आपको शोभा नहीं देता हमें त्यार होना है हमारे विवाह के पश्चात पार्टम दिवश है हमें पूजा आदि कर रसोई संभालना है

सूर्य ......उम्मम्ममाहहह उम्मम्मम उन सब कार्यो के लिया इतनी परिया है आप क्यों करेगी ये सब कार्य

किरण ........ कुंवर सा आप भूल रहे है हम आपकी अर्धागिनी होने के साथ साथ इस परिवार की जीएस्ट बहु भी है भले हे सब हमें पुत्री सामान प्रेम करे किन्तु हमें अपना कर्तव्य नहीं भूलना चाइये

सूर्य को पीछे न हत्ता देख किरण अपने जादू का प्रयोग कर सूर्य को हवा में हे निर्वस्त स्थम्बित (स्टेचू ) कर हँसते हुए बिस्तर से उठ जाती है आवर अपने वस्त्र ले सनान कक्ष की आवर भाड़ जाती है

सूर्य .....उन्न्नन ुन्नन

किरण ...... कुंवर सा जब तक हम सनान आदि से निवृत हो आउट नहीं आते आप ऐसे हे रहेंगे

तभी सूर्य हवा में छलांग लगा कर किरण के सामने आ खड़ा होता है किरण का मुँह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया

सूर्य ...... उम्म्म्मः अब ऐसे न देखो अब आपकी सकती हमारी इच्छा के विरुद्ध हम पे कोई प्रभाव नहीं दाल सकती हमारे मिलान से हमारी आत्मा हे नहीं सकतिया भी एक हो गई है

किरण ...... जाने दीजिये न कुंवर सा हमें सच में विलम हो रहा है

सूर्य ...... उचित है हम साथ में हे सनान करते है

किरण .....नहीं आप वह भी हमारे साथ ऐसे हे करेंगे तो हम सनान कैसे कर पाएंगे

सूर्य ...... नहीं अब हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे चलिए हम हे अपनी स्वीटी को ले चलते है

कहते हुए सूर्य किरण को अपने गॉड में उतना लेता है आवर सनान कक्ष की आवर भाड़ जाता है

सूर्य का बुजंग लॉन्ग सुबह सुबह अपनी पूरा आकर में किरण के माद्यम आकर के गोर मुलायम नितम्बो पे अपना अहसास करवा रहा था

किरण ......कुंवर सा आपने तो कहा था आप कुछ नहीं करेंगे

सूर्य .......इसमें हमारा कोई दोष नहीं है एक यही है जो हमारी इच्छा से बहार है सवयं अपनी इच्छा का मालिक हेहेहे

कुछ मस्ती मज़ाक के बाद सूर्य आवर किरण दोनों सनान आदि से मीवृत हो त्यार हो कक्ष से बहार निकल जाते है

आवर सभी बड़ो के पेअर छू कर उनसे अपने नवजीवन के किये आशीर्वाद लेते है

सूर्य गुरुदेव वह बाकि सभी जो परिमहल में मौजूद थे उन सभी को सूर्य महल में आमंत्रित करता है

कुछ हे देर में गुरुदेव रानी पारी बना जी नैनो जी j.mama जी संजय मां जी प्रिय ममी जी सन्ति ममी जी नागराज महावीर नागरानी पूर्वी प्रेतराज j.King सभी ऋषि सूर्य महल पहुंचते है

सूर्य किरण अपनी बहनो ( जिनिशा सपना रिद्धि पारिजात रिद्धि जीनत ) आदि से गेम मुलती है वही बाकि सभी बड़ो से आशीर्वाद लेती है

किरण ......मम्मी जी आप सभी बेथ कर चर्चा कीजिये मैं आप सभी के लिया सुबह का भोजन त्यार करती हूँ

शालिनी जी ........ उसकी कोई जरुरत नहीं है स्वीटी बीटा तुम्हे इन सब कामो से देय रहना है

किरण...... ऐसे कैसे मम्मी जी

दादी जी ...... बेटी शालिनी ठीक कह रही है

किरण ...... माँ सा विवाह के पश्चात घर की बहु को हे पहली रसोई त्यार करनी होती है न यही हमारे रीती रिवाज है फिर आप हमें क्यों रोक रही है

किरण की बात सुन सभी के चेहरे पे मुस्कान आ जाती है वही सन्ति जी भीगी हुई पलकों से अपने बेटी की ऐसे संजरी वाली बात सुन सोफे से उठ कर उसे अपने सीने से लगा लेती है

सन्ति जी ......जीती रह मेरी गुड़िया मुझे तो पता हे नहीं था की मेरी स्वीटी इतनी समझदार भी है

दादी जी ...... बेटी रसम होती है पैर तुम पहले इस परिवार की बेटी हो बाद में बहु

किरण ........ दादी माँ सा आप हे समजाओ न माँ सा को आप हे तो कहती है हमें हमारे सभी रीती नियमो का पालन करना चाइये

नानी जी ...... बेटी तुम जो कह रही हो वो बिलकुल सही है पैर इस मामले में अपनी नहीं मम्मी से हे कहो मैंने कुछ कहा तो वो मुझपे हे गुस्सा हो जाएगी की उसकी लड़की को मैंने ऐसा क्यों कहा क्यों शालू बेटी अब दे कबाब अपने बेटी बहु को

सूर्य ....... माँ करने दीजिये न जब स्वीटी की इच्छा है तो

सन्ति जी .....देखा दीदी जमाई सा एक हे रात में बीबी के पक्ष में बोलने लगे है

सदी से पहले चुकी ठीक से नहीं पिलाई थी क्या आपने ( यहाँ केवल महिलाये है आवर सूर्य बाकि पुरुष महल के बहार उद्यान में )

सन्ति जी की बात सुन सूर्य तो उन्हें किसी अजूबे की तरह देख रहा था उसे यकीं हे नहीं होने रहा था की सन्ति ममी जी ऐसे मज़ाक भी करती है

प्रिय जी ....... छोटी ( सन्ति जी )/बात तो तुम्हारी सही है क्यों संदन जी अपने लड़के को ठीक से चुकी का स्वर नहीं दिया था क्या जो एक हे रात में बीबी के पक्ष में बोलने लगा

बड़ी संदन जी आप हे पीला देती अपनी चुकी अपने लड़के को

रेखा जी ..... मैंने तो पिलाई थी संदन जी पे लगता है चुकी में दीद काम उतरने लगा मेरे एक काम करिये आप भी तो उसकी बड़ी मम्मी है आप हे पीला दीजिये अपनी चुकी आपको ढूढ कुछ ज्यादा हे उतरता है बड़ी बड़ी जो है हहहहए

अब मारा रेखा जी ने नहले पे दहला आवर उदार प्रियव ममी जी सरम के मरे क्लीन बोल्ड

सभी लड़कियों आवर औरतो की हंसी चुत जाती जय

सूर्य माहौल से बचने के लिया बहार भागना हे बेहतर समजा

शालिनी जी ....... भाबी सा काम से काम अपने भांजे का तो ख्याल किया होता

सन्ति जी ....... अब वो जमाई सा भी है सास के साथ मस्करी करेगा तो ऐसा हे कबाब मिलेगा न संदन जी

दादी जी .......स्वीटी बीटा तुम्हारी यही इच्छा है तो अपनी इच्छा पूरी कर लो आवर तुम सब भी अपनी भाबी बहन की मदद करो जा कर

पैर ये आज पहली आवर आखरी बाद है बेटी उसके बाद नहीं समाज गई न

किरण ...... जी माँ सा पैर कभी कभी तो

शालिनी जी ....... ठीक है ठीक है कभी कभी बना लेना अपने कुंवर सा के लिया

किरण आगे भाड़ शालिनी जी के गले से लग उनके फुल्ली हे दोनों जुलाई गाल चुम लेती है

ुशी दौरान कुछ अजीब सा हुआ जो किरण को मंद में जतका दे गया

किरण एक बार शालिनी जी को देख कर मुस्कुराते हुए रसोई की आवर निकल गयी बाकि लड़किया भी किरण के पीछे पीछे मदद को चल दी

वही बहार सूर्य पंहुचा तो सभी उद्यान में किसी न किसी चर्चा पे लगे हुए थे

सूर्य ने यही उचित मौका देखा गुरुदेव से बात करने का

सूर्य ......... गुरुदेव विवाह बिना किसी भिगान के सम्पन हुआ

अब हमें परतविलोक लौट जहा चाइये आपका क्या विचार है इस विषय में

दादा जी ....... है गुरुदेव हम भी आपसे इस विषय में बात करने वाले थे

गुरुदेव ......... आप कह तो उचित हे रहे है पैर सिगरा हे आपको वापिस भी आना होगा

दादा जी ....... ऐसा क्यों गुरुदेव

गुरुदेव ........ क्युकी कुछ समय पश्चात सूर्य की पुत्री पारिजात वह जीनत के साथ विवाह होना तय हुआ है परबु इच्छा से

सूर्य .......क्या पैर इतनी जल्दी

जोरावर जी .....आप क्यों चौंक रहे हो जमाई सा

सूर्य ....... मां जी

जोरावर जी ...... ठीक है ठीक है भांजे

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य जीनत आवर पुत्री पारिजात से पूर्व तुम्हे पुत्री मानसी से विवाह करना होगा जो की परतविलोक में हे होगा असुरगुरु द्वारा क्युकी असुरलोक अभी तुम्हारा जहा उचित नहीं है

सूर्य ....... किन्तु गुरुदेव ये सब इतनी सिगरता से क्यों hi रहा है

गुरुदेव ......पुत्र सूर्य नियति जो निर्धारित करती है वो अकारण नहीं होता अवश्य किसी न किसी घटना करम से जुड़ा होता है

सूर्य ....... जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

गुरुदेव ....... अभी कुछ समय है पुत्री जीनत आवर पुत्री पारिजात से विवाह करने इस बिच तुम्हे नागलोक जाना होगा ताकि पुत्री कोमल अपनी समस्त नागसाक्ति प्राप्त कर सके आवर किसी आवर को उसके किये का दंड भी प्राप्त हो

नागराज महावीर ..... हम आपकी प्रतीक्षा में रहेंगे. जमता जब आप आवर पुत्री कोमल नागलोक में अपने पवन दर्शन देंगे

सूर्य ...... ऐसा न कहे महाराज

नागराज वीर ........ हमने तो आपको ुशी दिन परबु इच्छा से हमारा स्वीकार कर लिया था किन्तु आपने अभी तक पिता के रूप में स्वीकार नहीं किया है हमें

गुरुदेव ......हाहाहा नागराज महावीर एक बात पुत्री कोमल से विवाह होने दीजिये पुत्र सूर्य सवयं सब स्वीकार कर लेगा क्या पुत्र सूर्य

( सूर्य .......ये आज क्या हो रहा है जहा देखो मेरा हे पोपट बन रहा है पहले सन्ति ममी जी आवर प्रिय ममी जी ने पोपट कर दिया या गुरुदेव ने )

गुरुदेव ...... पुत्र सूर्य विवाह के पश्चात बड़े से बड़ा सुरवीर योद्धा भी अपनी पत्नी के सामने पिंजरे में बंद चूहा हो जाता है तुम तो फिर भी पोपट बने हो

सूर्य ...... जी गुरुदेव समाज गया

J.mama जी ...... क्या समजे भांजे श्री

सूर्य ....... यही की मुझे यहाँ से निकल लेना चाइये मैं चलता हूँ

सूर्य को ऐसा भागते देख सभी के जोरो से ठहाके गूंज उठे सूर्य अपने वाइट ड्रैगन पे स्वर हो परीलोक का भर्मण करने निकल जाता है .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................
 
अपडेट. 202

गुरुदेव ......हाहाहा नागराज महावीर एक बार पुत्री कोमल से विवाह होने दीजिये पुत्र सूर्य सवयं सब स्वीकार कर लेगा क्यों पुत्र सूर्य

( सूर्य .......ये आज क्या हो रहा है जहा देखो मेरा हे पोपट बन रहा है पहले सन्ति ममी जी आवर प्रिय ममी जी ने पोपट कर दिया यहाँ गुरुदेव ने )

गुरुदेव ...... पुत्र सूर्य विवाह के पश्चात बड़े से बड़ा सुरवीर योद्धा भी अपनी पत्नी के सामने पिंजरे में बंद चूहा हो जाता है तुम तो फिर भी पोपट बने हो

सूर्य ...... जी गुरुदेव समाज गया

J.mama जी ...... क्या समजे भांजे श्री

सूर्य ....... यही की मुझे यहाँ से निकल लेना चाइये मैं चलता हूँ

सूर्य को ऐसा भागते देख सभी के जोरो से ठहाके गूंज उठे सूर्य अपने वाइट ड्रैगन पे स्वर हो परीलोक का भर्मण करने निकल जाता है .............

अब आगे .........

u.s.a .......... जेनी अपनी सेक्रेटरी (मेम) दीपिका के सहयोग से जल्दी हे कंपनी के काम काज को समझने लगी थी

जहा जेनी को कोई प्रॉब्लम होती तो दीपिका की हेल्प ले लेती या फिर बोर्ड मीटिंग में प्रॉब्लम से रिलेटेड मसले पे चर्चा कर उसका हल निकल लेती

दीपिका ........ जेनी तुम बहुत जल्द हे सभी काम षिक रही हो ये देख कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम एक अच्छी स्टूडेंट्स के साथ साथ बिज़नेस में भी अच्छी समाज रखती हो

जेनी ......... मेम ये सब आपकी हेल्प के बिना मैं अकेले ये सब संभल नहीं पति मुजमे उतना कॉन्फिडेंस नहीं था जब सूर्य ने मुझे इस कंपनी के लिया सलेक्ट किया था पता नहीं उन्हें मुझपे इतना विश्वाश क्यों था की मैं सब संभल सकती हूँ

दीपिका ........ कुछ तो देखा होगा उन्होंने जो बिना किसी परक के तुम्हे चुना

जेनी ....... ी don't क्नोव मेम

दीपिका ...... जेनी एक बात बताना तुम गॉड में यकीं करती हो

जेनी ......... यस मेम बूत व्हाई यू अरे आस्किंग में मेम

दीपिका ........ तुम्हारे गले में जो गोल्ड पेंडंट है वो गॉड का सिंबल है इस लिया पूछा

जेनी उस पेंडंट को देख कर मुस्कुराने लगती है

जेनी ........ मेनका आंटी ने मुझे दिया था इंडिया जाते हुए

दीपिका ...... सायद तुम उनके लिया खास हो जेनी उसे कभी अपने गले से निकलना नहीं परिस्थिति कुछ भी हो

जेनी ....... जानती हूँ मेम

दीपिका ....... वैसे एक बात आवर पूछनी थी जेनी पिछले 2.3 दिन से देख रही हूँ जब भी ऑफिस से निकलती हूँ एक ब्लैक कार हमेशा ऑफिस के सामने कड़ी रहती है

जेनी ....... दीपिका मेम ये u.s.a है यहाँ कोई भी कभी भी स्टे कर सकता है

दीपिका ...... पता नहीं क्यों बूत तुम सावधान रहना

जेनी ......OK मेम अब चलिए घर जाने का समय हो गया है

जेनी दीपिका अपनी अपनी कार से एक साथ कंपनी से बहार निकलती है अपनी सिक्योरिटी के साथ

दीपिका मेम जेनी को हॉर्न दे कर कार की तरफ इसरा करती है

जेनी वह कड़ी ब्लैक कार पे एक नजर दाल वह से मेनका हाउस की आवर निकल जाती है

कुछ देर बाद वो कार भी वह से निकल जाती है दूसरी आवर जेनी से विपरीत दिशा में

जेनी बार बार मिरर से उस कार को देखने की कोशिश करती है जब कार नजर नहीं आयी है तो जेनी उसे अपने मंद से निकल देती है आवर घर चल देती है

कुछ 20 मिनट्स बाद जेनी मेनका विला पहुंच जाती है जहा उसकी एक कॉलेज फ्रेंड उसके साथ रहती है ताकि जेनी को अकेला फइलल न हो इतने बड़े घर में

( थोड़ा पीछे चलते है )

अफसर 1 मार्क ( नरकासुर गुप्तचर ) के कहने पे जिन तीन लोगो की जानकारी लेने गया था जिनका जेनी के साथ हे किडनैप हुआ था

अफसर 1 द्वारा की गई जाँच में उनका दीद गैंग से कोई लिंक नहीं मिला

जब अफसर 1 ने पूरी रिपोर्ट मार्क को दी तब मार्क को यकीं नहीं हुआ

मार्क अफसर 1 को अन्य किसी काम में लगा कर वह से तीनो की जितनी जानकारी मिली ले कर वह से निकल गया

जैसे हे मध्यरात्रि हुई मार्क अपने वास्तविक रूप में आ गया आवर जा पंहुचा उन तीनो के पास जो गहरी नीड में सोये हुए थे

इस वक़्त मार्क के साथ कोई आवर भी मौजूद था ( जिसे गुप्तचर 1 लिखूंगा बाकियो को गुप्तचर 2.3.4 )

गुप्तचर 1 ...... मार्क इनसे जानकारी ले कर उन्हें ख़तम कर देते है

मार्क ...... नहीं हमें बिना किसी के नजरो में आते अपना कार्य करना है क्या तुम. असुरराज के आदेश भूल गए हो हमें किसी के सामने आते बिना अपना कार्य पूर्ण करना है

गुप्तचर 1 ..... जैसा आप उचित समजे अब आगे क्या करना है इसका निर्णय आप हे कीजिये

मार्क ...... इसके सत्य हुए उसकी सभी यादे हमें प्राप्त करनी है

गुप्तचर 1 ...... जैसा आप कहे

गुप्तचर 1 आगे भाड़ सोये हुए लड़के के मंद से सभी यादे अपने मंद में कॉपी कर लेता है

मार्क ...... बाकि दोनों के साथ भी यही करना है तुम्हे मैं किसी आवशयक करते के लिया जा रहा हूँ मुझे समय लग सकता है

गुप्तचर 1 ..... जी उचित है

मार्क आवर गुप्तचर 1 वह से अपना कार्य शांतिपूर्वक करके एंड हेरे में गायब हो जाते है

गुप्तचर 1 .ुशी तरह रात में बाकि दो से उनकी यादे उनसे ले लेता है

ीदार मार्क केविन से मिलने किसी आवर का भेष धार हॉस्पिटल पहुँचता है तो वह से केविन जा चूका था

ये बात जान कर मार्क को बहुत गुस्सा आया की ऐसा कैसे हो गया

मार्क वह से निकल कर सबकी नजरो से बीच कर फबि चीच का रूप धार वपुष हॉस्पिटल पंहुचा आवर केविन के विषय में पूछताछ करता है

जहा केविन के बारे में किसी को कुछ भी ज्ञात नहीं होता है

तब मार्क हॉस्पिटल में लगे सभी कैमरा फुटेज चेक करता है जिसमे एक कार से केविन हॉस्पिटल से निकलता नजर आता है पैर उसमे ड्राइवर का चेहरा मास्क से छुपा हुआ था

मार्क ...... अपनी क्रिमिनल मंद का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया है तुमने केविन पैर तुम मुझे समझने में भूल कर गए बहुत जल्द हमारी फिर मुलाकात होगी

मार्क वह से जरुरी जानकारी ले कर निकल जाता है

आपमें घर की आवर ( असली मार्क के घर ) जहा असली मार्क को ुशी के घर में बने अंडरग्राउंड रूम में कैद कर रखा हुआ था

वही केविन जोसेफ की हेल्प से फादर ( स्मिथ) तक पहुंच गया था

केविन ने मार्क के साथ जो अनुभव किया था फिर उसके साथ जो कुछ भी हुआ वो सब स्मिथ .....( यहाँ फादर नहीं लिखा रहा हूँ क्या पता फिर कोई रिलीजियस कंटेंट बोल कर रिपोर्ट कर दे हाहाहा )......को बताया

स्मिथ ....... समय रहते तुम वह से निकल गए ये बहुत अच्छा किया केविन तुमने

केविन ......स्मिथ उसे किसी तरह से रोकना होगा

स्मिथ ....... बिना पूरी जानकारी के हम उसे नहीं रोक सकते है

मैं इस बारे में किसी से बात करता हूँ तब तक तुम रेस्ट करो तुम्हारी तबियत ठीक होना जरुरी है एंड ओने मोरे थिंक माय सोन वो तुम्हे मरना नहीं चाहता था वार्न्स ुशी समय मार देता तुम्हे घायल करने का मतलब है की तुम आगे चल कर उसके काम में रुकावट बन सकते थे इस लिया वो तुम्हे अपने रस्ते में आने से पहले हे हटा देना चाहता था

केविन ....... ी क्नोव स्मिथ बूत इस केस में कुछ तो है जिसके पीछे वो है मुझे उस से पहले उस चीज़ या सकाश तक पंहुचा होगा

स्मिथ ......आवर उसके लिया तुम्हे जल्द से जल्द स्वस्थ होना होगा माय सोन

गुड नाईट माय सोन टीम रेस्ट

केविन ........यस स्मिथ

समिट जोसफ के साथ वह से निकल जाता है

आवर केविन वही एक रूम में रेस्ट करने लगता है

क्युकी अभी केविन का सरीर बहुत कमजोर था उसे रेस्ट की बहुत जरुरत थी जल्दी हे केविन थकावट की वजह से गहरी नीड में जा पंहुचा

वही स्मिथ रात भर हिस्टोरिकल बुक्स में अपना सर खपाते रहे मार्क के विषय में जो संकेत केविन ने दिए थे उन्हें हे आदर बना कर मार्क के जानकारी जुटाने में किन्तु स्मिथ के अथक प्रयाश विफल हुए

ऐसे हे केविन को 2 दिन का समय बिट जाता है किन्तु स्मिथ उसे कोई भी सन्तुस्टिक जबाब नहीं दे पते है

इस दौरान मार्क को तीनो लड़को की मंद से ले गई यादो के जरिये बाकि लोगो के विषय में भी पता चलता है

जब उन अभी के मंद जानकारी ली जाती है तो एक हे नाम सामने आता है जो की जेनी का था एक वही थी किसका सम्बंद पायल से था

मार्क अपना सभी काम छोड़ जेनी पे नजर रखने लगता

ऐसे हे उसे नजर रखते हुए 2 दिन का समय निकल जाता है इस दौरान दीपिका की नजर मार्क की कार पे पद जाती है जिसे कुछ संदेह होता है आवर वह इस विषय में जेनी को सावधान करती है

सक्तिपुर ....... ( सूर्य की सदी की नाईट ).......

रुक्मणि वह गीता ठकुराइन के हवेली से निकलने के बाद

अजय रहा को कॉल करता है ये जानने के लिया की वो हवेली आ रहा है की नहीं

अजय को जब रहा की हवेली न आने की खबर मुलती है तब अजय अपने आवारा दोस्तों के साथ हवेली में हे पार्टी रखता है

जहा अजय आवर उसके 3दोस्त सरब बेयर का फुल मज़ा लेते है

चारो नशे में तुन हो जाते है

फ्रेंड 1 ....... याद अजय पिछले कुछ दिनों से पार्टी करने में वो मज़ा नहीं आता है याद तुम साथ होते नहीं आवर ऐसे में हम तीनो को अकेले अकेले मज़ा नहीं आता है

अजय ........ दोस्तों मैं भी मजबूर हूँ क्या करूं मम्मी ने हवेली से निकलना तक बंद कर दिया है

उनकी बात नहीं मंटा हूँ तो पॉज नहीं मिलते आवर बिना पॉज के पार्टी तो होने से रही

फ्रेंड 3 ....... ये बात भी है यार सुना है तुम्हारा बड़ा भाई जो बहार गया था उनका एक्सीडेंट हो गया है अब उन्हें हवेली में रखा है पैर कोई नजर हे नहीं आ रहा है

अजय .......वो रेस्ट कर रहे है आवर बाकि सब सूरजगढ़ सदी में गए है

तभी तो पीछे से पार्टी का प्लान बनाया यार

दोस्त 1 ....... अजय फिर तो तुम्हे भी जहा चाइये था सदी में क्या पता कोई मस्त मॉल मिल जाता मसलने के लिया

अजय ...... वह ऐसा कुछ करता तो सुबह का सूरज नहीं देख पता वह एक कोने में बैठने से अच्छा था यही तुम लोगो के साथ पार्टी कृ

दोस्त 1 ...... यार तुम ठाकुर हो सक्तिपुर के तुम्हे कोण मार सकता है

अजय ......वही जिसने बेस पापा आवर चाचा सकती सिंह को मार्स था उसकी की सदी है आज सूरजगढ़ में सब वही गए है

अब तक सन्ति से बेयर की चुस्किया ले रहा दोस्त 2 के कान अजय की बात से खड़े हो जाते है

दोस्त 2 ...... जहा तक हम सब जानते है तुम्हारी तो दुश्मनी है न उस से जिसने तुम्हारे बड़े पापा ठाकुर दुर्जन सिंह की बलि दी थी आवर साथ हे ठाकुर सकती सिंह की भी तुम लोगो की दुश्मनी लैब ख़तम हो गई

अजय इस वक़्त नशे में था उसे पता नहीं क्या बोलना है क्या नहीं

अजय ....... पता नहीं उस सूर्य ने क्या गुट्टी पिलाई की मेरी मम्मी बड़ी मम्मी बहने सब उसकी बात मानती है अब तो ऐसा लगता है जैसे वही इस हवेली का बड़ा बीटा हो

दोस्त 2 ...... क्या तुम्हारा बड़ा भाई ठाकुर विक्रम सिंह जनता है इस बारे में जैसे तुमने बताया था की तुम्हारा भाई सूर्य को मरना चाहता है मुझे नहीं लगता की उसे कुछ पता होगा

अजय ......सही कहा उन्हें नहीं पता है कुछ भी आवर तुम लोग भी मत बताना

दोस्त 2 .....हम किसी को नहीं बताएंगे क्यों दोस्तों

दोस्त 1,3 ..... है बिलकुल हमें क्या करना है उन्हें बता कर

दोस्त 2 इस दौरान अजय द्वारा कही हर बात अपने फ़ोन में रिकॉर्ड कर रहा था जैसे उसके शैतानी दिमाग में कुछ बहुत बड़ा प्लान चल रहा हो

दोस्त 2 ....... यार अजय एक बात कही बुरा मत मन्ना हम दोस्त काम भाई ज्यादा है

अजय सोफे पे लुड़कते हुए

अजय ...... बोल न भाई तुम्हारी बात का क्या बुरा मन्ना

दोस्त 2 .... मैंने सुना है सूर्य ठकुराइन बहुत हे हैंडसम आवर चालू लड़का है कही उसका प्लान हवेली में घुसने के पीछे हमारी बहन गायत्री आवर विधि को फ़साने का तो नहीं है दोनों बहने सक्तिपुर में सबसे खूबसूरत है मुझे लगता है की हो न हो जरूर सूर्य ठाकुर उन्हें फ़साने लिया हे सब कर रहा है

अजय ........ नहीं वो उसे भाई मानती है वो ऐसा नहीं कर सकता उसने हे तो विक्रम भाई सा को पुलिस से बचाया है

दोस्त 1 ........ वैसे उसकी सदी किस से हो रही है सूरजगढ़ में क्युकी वह तो उसका ननिहाल भी है न

अजय ......उसके चोरे मां की बेटी से

दोस्त 2 ..... जब वो अपनी हे मां की बेटी को पता सकता है जो रिश्ते में उसकी बहन थी तो फिर यहाँ तो ऐसा कोई रिस्ता भी नहीं है भाई

दोस्त 2 अजय के दिमाग सूर्य के खिलाप शक का बीजारोपण कर चूका था

अजय को ऐसा सोचता देख दोस्त 2 दोस्त 1 को इसरा करता है

दोस्त 1 ......भाई मैं भी इस बात से सहमत हूँ तुम खुद हे सोचो जो लड़का अपने सेज मां कज बेटी को कैसा सकता है वो हमारी बहनो के साथ क्या नहीं कर सकता उसे अपनी बहनो से देय रखना भाई अगर कोई आवर होता तो हमें कोई दिकत नहीं पैर हम तीनो गायत्री आवर विधि को अपनी बहन मानते है कल को कुछ इंच बिच हो गयी तो सब हवेली पे थूकेंगे

अजय ......तुम ठीक कहते हो मैं इस बारे में सोचा हे नहीं

अब मुझे कैसे भी करके उसे हवेली से दूर रखना है

दोस्त 2 ......यही वही रहेगा भाई इस से बहाने भी बीच जाएगी आवर उसका प्लान फ़ैल कर के तुम उसे हरा भी पाओगे काम से काम कुछ तो सन्ति मिलेगी अब रात बहुत हो गई है हमें निकलना चाइये क्यों दोस्तों

अजय ...... ठीक है पैर ध्यान से जनम तुम लोग

दोस्त 2 ......मैं ड्राइविंग करूंगा मुझे नशा काम है

तीनो अजय को बे बोल कर हवेली से निकल जाते है

वही अजय हॉल में बैठा हुआ उन्हें विचारो में खो जाता है जो अभी अभी उसके दोस्तों ने उसके दिमाग में डेल थे

तीनो एक कार में बेथ हवेली से सिटी 1 की तरफ निकल जाते है

दोस्त 1 ...... भाई तुमने ये सब अजय से क्यों कहा कुछ समाज नहीं आता जबकि सूर्य ठाकुर तो बहुत अच्छा लड़का है

दोस्त 2 ...... क्युकी मुझे विधि चाइये अगर सूर्य ठाकुर की दखल हवेली में रही तो वो कभी मेरी नहीं होने पायेगी ये मैं अच्छे से जनता हूँ

दोस्त 3 ..... वैसे मैंने भी गायत्री पे बहुत बात तरय किया पैर वाली हाथ हे नहीं आ रही थी ज्यादा कुछ कर नहीं सकता क्युकी ये सेल ठाकुर है पता चलता तो मेरी हे गांड में लोहा भर देते

दोस्त 1 ..... भाई क्या ये सही होगा क्युकी अजय हमारा दोस्त है

दोस्त 2 ......अबे चुटिया है क्या तुम बस साथ दो फिर देखो मेरा कमल पॉज आवर छूट दोनों मिलिगे जिंदगी भर

दोस्त 3 ...... तुम्हारे दिमाग में चल क्या रहा है भाई

दोस्त 2 ......अभी कुछ सोचा नहीं है पैर सोच लूंगा बहुत जल्दी सोने के अंडे देने वाली मुर्गी हाथ लगी है अभी तो

तीनो आगे का प्लान बनाते हुए सिटी 1 पहुंचे गए जहा दोस्त 1 ने अपने दोनों दोस्तों को घर छोड़ कर अपनी कार ले कर निकल जाता है

दूसरे दिन सुबह जब रुक्मणि जो आवर गीता सुबह सुबह 5 सादे 5 को हवेली पहुंची तो अजय सोफे पे लेता हुआ मिला वह मट्टन चिकन व्हिस्की बेयर आदि की खाकी बॉटल आवर सामान भीकृ हुआ पड़ा था

रुक्मणि जी .....दीदी ये सब क्या है सुबह सुबह

गीता ठाकुर ..... देख नहीं रही hi क्या यहाँ रात घर नबाब जाड़े ने अपने आवारा दोस्तों के साथ पार्टी की है लगता है

रुक्मणि जी ........ इसे तो मैं देखती हूँ दीदी

गीता ठाकुर .....रहने दे अभी वो सो रहा है

रुक्मणि जी गीता ठाकुर की कोई भी बात सुने बिना वही पास में रखना पानी का भरा मुगे पूरा का पूरा अजय पे खली कर देती है

अजय हड़बड़ी में जल्दी से सोफे से उठा इस दौरान निचे गिरे पानी से अजय का पेअर कुछ लड़खड़ा गया कुछ तो सरब का नशा आवर कुछ पानी की वजह से हुई फिसलन की वजह से अजय ददम कर फर्श पे गिर गया उसके हाथ की कोहने पे कुछ आदिक हे चौथ लगी जिसकी वजह से अजय की चीख निकल जाती है

रुक्मणि आवर गायत्री तेजी से अजय को उठाने के लिया आगे भड़ी पैर अजय दोनों का हाथ जोर से जातक देता

रुक्मणि जी ....... सॉरी बीटा मुझे माफ कर दो

तुम्हे ज्यादा लगी तो नहीं न

अजय भीगी हुई आँखों से गुस्से से रुक्मणि जी को गुरता है आवर तेजी से अपने रूम की तरफ निकल जाता है बिना कुछ भी होल

गीता ठाकुर ....... मैंने मन किया था न छोटी तुझे देख लिया क्या हो गया

रुक्मणि जी ...... सॉरी दीदी मुझे गुस्सा आ गया था एक तो उसे हवेली का ध्यान रखने के लिया छोड़ा था दूसरा फिर से उसके आवारा दोस्त हवेली में आते यही सब सोच कर मुझे गुस्सा आ गया था

गीता ठाकुर ........गुस्सा तो मुझे भी आ रहा था रुक्मणि पैर किसी को इस तरह से नींद से जगाओगी तो उसे भी गुस्सा आएगा हे सुपर से फिसलने के करम उसे चोट भी लग गई है अब तुम भी जाओ आवर आराम करो ठीक है उस से मैं बाद में बात करती हूँ मैं उसे समजा दूंगी

रुक्मणि जी ...... आप चाइये दीदी मैं ये सब साफ सफाई कर के आयी हूँ

गीता ठाकुर .....तुम भी थकी हुई हो आराम करो सुबह नौकरानी सब साफ कर लेगी

रुक्मणि जी ...... ठीक है आप चलिए दीदी मैं अभी आती हूँ

गीता ठाकुर के जाने के बाद रुक्मणि वह से सभी कचरा पट्टी जाता कर साफ कर देती है आवर अपने रूम में जा कर लेट जाती है

ीदार अजय गुस्सा में अपने रूम को लॉक किये ीदार उदार गम रहा था

जैसे की कोई बहुत हे महत्वपूर विषय में सोच विचार कर रहा हो ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स. ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स. ................
 
अपडेट 203

रुक्मणि जी ...... आप चाइये दीदी मैं ये सब साफ सफाई कर के आयी हूँ

गीता ठाकुर .....तुम भी थकी हुई हो आराम करो सुबह नौकरानी सब साफ कर लेगी

रुक्मणि जी ...... ठीक है आप चलिए दीदी मैं अभी आती हूँ

गीता ठाकुर के जाने के बाद रुक्मणि वह से सभी कचरा पट्टी हटा कर साफ कर देती है आवर अपने रूम में जा कर लेट जाती है

ीदार अजय गुस्सा में अपने रूम को लॉक किये ीदार उदार गम रहा था

जैसे की कोई बहुत हे महत्वपूर विषय में सोच विचार कर रहा हो ...............

अब आगे .........

सूर्यगढ़ ........
विवाह के दूसरे दिन

सूर्य अपने नियमित समय से उठ कर ध्यान योग के लिया हवेली की पीछे की तरफ जाता है

जहा सुबह सुबह सूर्यकांत सर टहल रहे थे सूर्य उन्हें देख उनके पास चला जाता है

सूर्य .......सुभप्रभात अंकल जी आप भी इतनी सुबह उठ जाते है

सूर्यकांत जी ...... शुबप्रभात सूर्य आप बैठा साथ टहलते हुए बात करते है


सूर्य भी उनके साथ हो लेता है

सूर्यकांत जी ..... बेटे आर्मी में रह रह कर अब तो आदत हो गई है इन सब की अब तो हालत ये की अपना रूटीन पूरा न कृ तो सरीर में जकड़न से होने लगती है

सूर्य ..... बिलकुल अंकल तभी तो आप इस उम्र में भी इतने फिट है अभी तक बाल पुरे काळा है

सूर्यकांत जी ...... हाहाहा बीटा ये सब हेयर कलर का कमल है

वैसे अब आगे क्या सोचा है सूर्य तुमने

सूर्य ...... क्या मतलब अंकल

सूर्यकांत जी ...... अब सदी तो हो गई है तो तुम्हारी जिम्मेदारी भी भाड़ गई है परिवार के पार्टी किन्तु समाज के पार्टीज अपनी जिम्मेदारी मत भूल जाना बीटा

सूर्य ....... आप ऐसा क्यों सोचते है अंकल भले हे सदी हो गई है पैर मैं तो वही हूँ न

सूर्यकांत जी ....... हाहाहा बीटा जी मैं भी इस दौर से गुजर चूका हूँ नहीं नयी सदी होने पे बाकि किसी काम में मन नहीं लगता है सिवाय अपनी बीबी के

सूर्य ....... ऐसा कुछ नहीं है अंकल जी

सूर्यकांत जी ...... अच्छी बात है बीटा कुछ समय अपनी बीबी आवर परिवार के साथ बिताओ फिर तुम्हे अपनी ड्यूटी भी ज्वाइन करनी है

सूर्य ...... जनता हूँ अंकल पैर अभी ड्यूटी ज्वाइन नहीं कर सकता हूँ है अगर बिच में जहा आपको मेरी जरुरत पेज मैं हाजिर हो जाऊंगा जब भी आप कहो

सूर्यकांत जी ...... ठीक है बीटा वैसे हनीमून के लिया कहा जा रहे हो हाहाहा

सूर्य ...... क्या अंकल आप भी

सूर्यकांत जी ..... बर्खुदार यही तो मोजज मस्ती गुमने फिरने के दिन है तो एन्जॉय करो आवर है एक बात आवर रोहन आवर राधिका की भी अपने साथ ले बना ुशी बहाने वो भी गम फिर लेंगे आवर क्या पता इस ट्रिप से लौटने के बाद मुझे भी दादा बनने की ख़ुशी खबरि सुनने को मिल जाये

सूर्य .....अभी कुछ सोचा नहीं है अंकल

सूर्यकांत जी .......तो सोचो बीटा जी ये दिन बाद बात नहीं आने वाले

( सूर्य ..... अब आपको क्या बताऊं मेरी लाइफ में ये दिन बात बात आने वाले है )

सूर्यकांत जी ......जाओ आवर अपनी प्रैक्टिस पूरी करो मैं चलता हूँ ठाकुर सबब इन्तजार कर रहे होंगे

सूर्य ..... जी अंकल

सूर्यकांत सर वह से हवेली के अगले हिस्से की आवर निकल जाते है सूर्य उन्हें जाते हुए देखता रहा

उदार हवेली में कुछ लोगो को छोड़ कर लगभग सभी उठ चुके थे

सपना जो कोमल के साथ थी रात में वो उठ कर फ्रेश हो सीधा रसोई घर पहुंची जहा मेर्री आवर शालिनी जी सभी के लिया टिया कॉफ़ी त्यार कर रही थी

शालिनी जी ......क्या हुआ बेटी कुछ चाइये था क्या तुम्हे

सपना ...... जी मम्मी जी वो स्वीटी के लिया कॉफ़ी

सपना के मुँह से मम्मी जी सुन शालिनी जी मुस्कुराने लगती है

शालिनी जी ..... अच्छा है अभी से आदत डील रही हो रुको मैं अभी कॉफ़ी देती हूँ बेटी

कुछ हे देर में सपना अपनी वह किरण की कॉफ़ी ले कर ऊपर रूम में पहुँचती है

सपना ...... स्वीटी उठो आवर कॉफ़ी पियो

किरण सपना से कॉफ़ी ले कर वही बीएड पे बेथ चुस्किया लेने लगती है

किरण ...... ऐसे क्या देख रही हो दी कुछ लगा है क्या

सपना .....नहीं नहीं बस तुम्हारे चेहरे पे आई इस खूबसूरती को देख रही हूँ एक हे रात में इतना निखार वह भाई वह

किरण ...... निखार तो आप भी रही हो दीदी

सपना ........ ये मेकउप का कमल है स्वीटी डार्लिंग आपकी तरह सुहागरात का नहीं हेहेहे

राधिका जी ...... ये बात बिलकुल सही कही सपना तुमने अपनी स्वीटी तो एक हे रात में निखार गई है

सुहागरात का कुछ ज्यादा हे अच्छा असर हुआ है

किरण .....भाबी आप भी

राधिका ..... हे लो स्वीटी इस से तुम्हे आराम मिलेगा

किरण ..... ये क्या है भाबी जी

राधिका ..... इस का उसे अपने प्रिवेट part पे करना इस से तुम्हे आराम मिलेगा चलने फिरने में हेहेहे

राधिका की बात सुन किरण सरम से अपना सात जुखा लेती है

राधिका .....हेहेहे देखो तो कैसे शर्मा रही है लड़ो रानी

किरण ...... प्लेसेस भाबी

राधिका ..... OK OK ठीक है बाबा चलो जरा मेरे साथ बाथरूम चलो

किरण ...... वो किश लिया भाबी जी

राधिका ..... ताकि तुम्हे क्रीम लगा सकू देवर जी घोड़े जैसे है कुछ ज्यादा हे डेमेज न कर दिया हो

किरण ...... जी नहीं मैं बिलकुल ठीक हूँ आप टेंशन न लो

राधिका ...... मुझे शालिनी जी आंटी ने भेजा है तुम्हारी हालत देखने के लिया अब देख लो क्या करना है

वैसे चद्दर कहा है तुम्हारी नाईट वाली मुझे दो मैं साफ कर देती हूँ

किरण ....... नहीं नहीं आप रहने दीजिये न

राधिका किरण के कॉफ़ी ख़तम करते हे उसे अपना सहारा दे कर कड़ी करती है किरण मन करती रही पैर राधिका किरण की एक न सुनी आवर उसे सहारा दे बाथरूम में ले जाती

किरण ...... भाबी अब आप जाइये मैं खुद से फ्रेश हो जाउंगी

राधिका ..... हेहेहे स्वीटी मुझसे कैसे सरम मैं भी तुम्हारी तरह औरत हे हूँ बस तुम से थोड़ी बड़ी जो तुम्हारे पास है वही मेरे पास है

किरण .....प्लेसेस भाबी मुझे सरम आ रही है

राधिका ....... ठीक है स्वीटी मुझे एक बात चेक करने दो उसके बाद मैं चली जाउंगी

अगर सब ठीक है तो कोई बात नहीं वर्ण तुम्हे हे परेशानी हो सकती है

किरण ...... ठीक है पैर आप एक बार देख कर चली जाएँगी

राधिका ...... ठीक है स्वीटी

राधिका आगे भाड़ किरण की रेड पेंटी निचे खिसकने लगती है

किरण अपनी आँखे बंद कर लेती है उसके साथ ऐसा पहली बार हो रहा था

राधिका ने अच्छे से किरण की योनि को देखा जो लगभग ठीक थी हलकी सुजनसे दोनों लिप्स हलके खुले वह सुज्जे हुए थी

राधिका ...... स्वीटी चिंता की कोई बात नहीं है सब परफेक्ट है फ्रेश होने के बाद ये क्रीम लगा लेना जिस से तुम्हे और बेहतर लगेगा

किरण ...... जी भाबी जी अब आप बहार जाइये

राधिका ..... मैं सोच रही हूँ क्यों न हम दोनों साथ में नाहा ले हेहेहे

किरण .......प्लेसेस भाबी अब जाइये

राधिका ...... अच्छा बाबा जाती हूँ अभी मुझे इतना शर्मा रही हो रात में देवर जी को कुछ करने भी दिया था की नहीं हहहहए

किरण ....... आप हे पूछ लेना अपने देवर जी से की उन्होंने क्या किया और क्या नहीं

राधिका हस्ते हुए वह से बहार निकल जाती है

कुछ देर बाद किरण त्यार होना निचे आती है

सूर्य भी अब तक अपनी प्रैक्टिस कर लौट आया था

सूर्य ....... आप सब त्यार होना जाइये हम लोग सहर चल रहे है

शालिनी जी ....... क्या हुआ सहर क्यों जा रहे हो सूर्य बीटा

सूर्य ....... कुछ नहीं माँ वो इन सभी को कुछ दिलवाना था

शालिनी जी ....... सिर्फ बच्चियों को हे या हम सब को भी

सूर्य .......उम्म्म्मः माँ क्या चाइये आपको मुझे बताइये आपके लिया तो जान भी हाजिर......

शालिनी जी ......चुप सुबह सुबह ऐसा नहीं कहते तुम सब गम फिर आओ हम यही ठीक है

सूर्य ......जी माँ ी लव यू माँ यू अरे थे बेस्ट माँ इन थे वर्ल्ड

रेखा जी ...... सुबह सुबह किध बात को मनवाने के लिया मास्क्स लगाया जा रहा है

सूर्य ...... कुछ नहीं बड़ी मम्मी बस सहर जा रहा हूँ आपको कुछ चाइये क्या

रेखा जी मुस्कुराते हुए सूर्य की बगल में आ कड़ी होती है

सूर्य शालिनी जी से अलग हो रेखा जी को पीछे से बहो में भरते हुए
गाल चुम लेता है

रेखा जी प्यार वह सनेह से सूर्य के गाल सहला देती है

रेखा जी ...... तुम सब हे गम फिर आओ हमें कुछ नहीं चाइये तुम्हे कुछ पसंद आये तो अपनी तरफ से ले लेना

सूर्य ......जी मम्मी वैसे बेस पापा कहा है बहार भी नहीं दिखे

रेखा जी ..... बीटा वो किसी काम से बहार गए है कल लौटेंगे

सूर्य ....... मम्मी संभल कर कही बड़े पापा बहार कोई आवर बड़ी मम्मी की तयारी में तो नहीं है आजकल बहार कुछ ज्यादा हे जा रहे है

रेखा जी ........ जाने दे बीटा अब वो बूढ़े हो गए है वैसे भी मेरा बीटा है न मेरे पास मुझे आवर क्या चाइये अब नौटंकी पूरी हो गई है तो जा कर फ्रेश होने जा मैं नास्ता लगाती हूँ सबका

सूर्य ...... OK मम्मी ुम्मम्हा bye कोमल मेरे कपडे निकल देना

कोमल ......जी ठीक है

रेखा जी ......( डेरी से )अभी से हुकुम देने लगा मेरी बेटी को अभी तो सदी भी नहीं हुई है

सूर्य ...... वो तो कब की हो गई माय स्वीट मम्मी यकीं न हो तो ुशी से पूछ लीजिये आवर देख लीजिये

सूर्य वह से ऊपर निकल जाता है रेखा जी को सोचता हुआ छोड़ कर

कुछ देर बाद सभी नास्ता कर सहर जाने के लिया त्यार हो जाते है

किरण कोमल राधा राधिका सानिया सोफिया मानसी संधि माया सपना मानवी मेर्री अलीना

सूर्य रोहन सोहेल मानव को बोल 4 कार्स निकलवाता है टेकिंग किसी को कोई प्रॉब्लम न हो आने जाने में

सभी अपनी सुविधा अनुसार बेथ कर सहर की तरफ निकल जाते है

रस्ते में सूर्य सभी को सक्तिपुर की हवेली ले कर जाता है जहा विधि आवर गायत्री को अपने साथ ले कर जाने की परमिशन लेता है

गीता ठाकुर हाशि ख़ुशी दोनों को त्यार होने का बोल देती है

इस दौरान अजय सूर्य को हवेली में देख वी भी इतनी लड़कियों के साथ उसे अपने दोस्त की बात पे यकीं होने लगता है

इसके चलते वह सूर्य की गुस्से में देख रहा था

पैर वह कुछ कर नहीं सकता था खुद हे अपने गुस्से में जलता रहा

कुछ हे देर में गायत्री आवर विधि त्यार हो कर निचे आ गई

विधि ...... मुझे आपके साथ चलना है

किरण ...... ठीक है विधि तुम हमारी कार में हमारे साथ चलना क्यों कुंवर जी

सूर्य .....बिलकुल क्यों नहीं रुकू चची जी आपकी बेटी को बाघा कर ले जा रहा हूँ आपको कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न

रुक्मणि जी ..... भागने से पहले अच्छे से देख लेना कोनसी को भगा कर ले जा रहे हो मेरी दोनों बेटियों में से

सूर्य .......हम्म्म्म दोनों हे खूबसूरत है सोच रहा हूँ दोनों को हे ले कर भाग जॉन आप क्या कहती हो चची जी

गीता ठाकुर ...... जो तुझे ठीक लगे कर मुझे कोई परेशानी नहीं है अच्छा है दोनों बहने एक साथ रहेंगी हेहेहे

राधिका जी ...... जाता अपनी बीबी को भी देख लो कही ऐसा न हो रात में रूम के बहार संस पड़े क्यों स्वीटी

किरण ...... भाबी जी मेरी तरफ से सब चुत है उन्हें

गीता ठाकुर ...... सभाल कर जहा बीटा आवर है दोपहर का खाना हमारे यहाँ तुम सब का

सूर्य ....... सॉरी चची जी आज नहीं फिर कभी आज का प्लान बहार का है अब चलता हूँ जल्दी आऊंगा क्यों भाई अजय आप क्यों गुमसुम खड़े हो

सूर्य रुक्मणि वह गीता से गले मिल कर सबको ले कर निकल जाता है

अजय ....... आप सब इस्पे इतना यकीं क्यों करती है

जब मेरे दोस्त हवेली आते है तो आप मुझपे गुस्सा होती है आवर अभी ये सूर्य क्या बोल रहा था

गीता ठाकुर ........ अजय मैं देख रही हूँ कल से तुम कुछ भी अनाप सनाप बोले जा रहे हो हुआ क्या है तुम्हे

अजय ..... मुझे कुछ नहीं आप चारो को हुआ है जो बिना सोचे समजे किसी की भी बातो में आ जाती हो मुझे सूर्य का हवेली आना पसंद नहीं आवर माँ उसका मेरी बहनो से बात करना

रुक्मणि जी .... ... तुम्हारे दिमाग में गन्दगी भरी पड़ी है आवर ये सब तुम्हारे उन आवारा दोस्तों की वजह से है आज के बाद मुझे पता चला की तुम उमसे मिले या बात की तो देख मैं तुम्हारी क्या हालत करती हूँ सामने आवर दुबारा सूर्य को गलत बोलने से पहले खुद अपने गिरेबान में जरूर झाँख लेना

अजय ......आपको जो सोचना है सोचोये बस दुबारा वो इंसान हवेली में या मेरी बहनो के आस पास नजर न आये

गीता ठाकुर ....... अजय तुम बहुत बोल चुके हो सूर्य के खिलाफ अब अगर एक भी सबद निकला अपनी जुबान से तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा सामने छुआछाप अपने रूम में जाओ अभी के अभी

अजय गुस्से में पेअर पटकता वह से अपने रूम में चला जाता है

रुक्मणि जी ...... दीदी उसे आखिर हुआ क्या है ये ऐसा क्यों कर रहा मुझे दर है की कही ये कुछ गलत न कर बैठे

गीता ठाकुर ...... रुक्मणि तुम जो समाज रही हो बात इतनी भी सरल नहीं है

रुक्मणि ...... क्या मतलब दीदी मैं कुछ सामजी नहीं

गीता ठाकुर ....... रुक्मणि कोई तो है जो अजय को गलत रास्ता दिखा रहा है उसके कान भाड़ रहा है सूर्य के खिलाफ आवर हो न हो ये काम जरूर उसके किसी दोस्त का है

रुक्मणि...... आपको इतना यकीं क्यों है दीदी की अजय को कोई भड़का रहा है आवर वो उसके दोस्तों में से हे कोई है

गीता ठाकुर रुक्मणि की जबाब देने की जगह किसी को कॉल करने लगती है

रुक्मणि गीता ठाकुर को पर्सन वाचक दृस्टि से देखने लगती है

ककुछ रिंग के बाद कॉल अटेंड होता है

गीता ठाकुर ......hello रहा मैं हवेली से गीता ठाकुर बोल रही

हूँ

राणा ......जी ठकुराइन कहिये कैसे याद किया

गीता ठाकुर ..... तुम परषो रात हवेली आते थे तब यहाँ कोण कोण था

राणा ......माफ कीजिये ठकुराइन मैं आपको बताना भूल गया था उस रात मैं हवेली नहीं जा पाया मुझे जरुरी काम से रात को हे दूसरे सहर जहा पद गया था मैंने अजय को बताया था जब उसने हवेली आने का पूछा था

गीता ठाकुर ...... ठीक है अभी तुम कहा hi कुछ जरुरी काम है

राणा ......अभी सिटी 1 आया हूँ कुछ काम से

गीता ठाकुर .......तुम्हे मेरा एक काम करना है

राणा .....जी ठकुराइन बोकिये

गीता ठाकुर ...... सिटी 1 में अजय के दोस्त रहते है उनकी पूरी जानकारी चाइये यहाँ तक की दिन में वो कितनी सांसे लेते है

सब कुछ जितना जल्दी हो सके

राणा ..... जी ठकुराइन मैं अभी से काम पे लग जाता हूँ

गीता ठाकुर ......किसी को पता न चले अजय को भी नहीं

राणा ....जी ठीक है ठकुराइन

कॉल कट .......

रुक्मणि .....कहा कहा राणा ने दीदी

गीता ठाकुर ........ राणा उस दिन हवेली नहीं आया था इसका मतलब हो न हो उस रात यहाँ जो पार्टी अजय ने की वो उनके साथ हे थी आवर ुशी रात यहाँ ऐसा कुछ हुआ है जिसका असर अजय पे है

मैंने राणा को काम पे लगा दिया है बहुत जल्द सब पता चल जायेगा

रुक्मणि .....जी दीदी जो भी कीजिये सब जल्दी कीजिये अगर इस बिच विक्रम को अजय ने कुछ बता दिया तो अभी के लिया ठीक नहीं होगा

गीता ठाकुर ....... वही कहा तुमने वैसे भी विक्रम अब वो विक्रम नहीं रहा है जिसे हम समजा सके

रुक्मणि .....क्या मतलब दीदी

गीता ठाकुर ......कुछ नहीं

परीलोक.........

रानी पारी .......गुरुदेव इतना जल्दी इनका परतविलोक जाना जरुरी थोड़े है

अभी अभी तो सदी हुई कुछ समय आवर यहाँ रुकते तो हमें भी अच्छा लगता

गुरुदेव ....... इंसान को करम अपनी करम भूमि से जुड़ कर हे करना पड़ता है रैंक पारी वही पुत्र सूर्य की करम भूमि है

आवर फिर बहुत जल्द इनकी फिर से वापसी भी तो हो रही है जल्दी हे राजकुमारी पारिजात वह जीनत का विवाह पुत्र सूर्य से होने वाला है जो की परीलोक में हे होगा

गुरुदेव के इस खुलासे से सभी लड़किया आवर महिलाये चौंक जाती है

पुरुषो को सुबह हे गुरुदेव ने उद्यान में इस विषय में बता दिया था

रानी पारी ......ये तो आपने बहुत हे ख़ुशी की सुचना दी है गुरुदेव

ीदार पारिजात वह जीनत अपने विवाह की बात सुन ख़ुशी से फुल्ले नहीं संहा रही थी

वही बाकि लड़कियों को उन्हें छेड़ने का अच्छा मौका मिल गया था

दादी जी ......बेटी रानी पारी अब तो जल्दी हे फिर से आपके परीलोक में आना पड़ेगा

रानी पारी .....परीलोक हम सबका है मजी जितना अदिकार पुत्री पारिजात का उतना हे बाकि सभी पुत्रियों का है

शालिनी जी .....भद्दे हो रानी पारी जी जल्दी हे हम संदी बनने वाले है

रानी पारी ......भले हे संदी बन जाये पैर हमारा रिस्ता सखी आवर बहनो का हे रहेगा हमेशा आवर आपको भी बहुत बहुत भद्दे हो सखी अब तो उस पल का इन्तजार है जब आप हमारे जमता के साथ फिर से हमें सेवा का अवसर देंगी

गुरुदेव ....... हमारे विचार से रात्रि को आप सब परतविलोक के लिया निकले जिस से किसी को कोई समस्या न हो

दादी जी ......जैसी आपकी आज्ञा गुरुदेव

गुरुदेव .......पुत्री जूलिया आपको कुछ समय यही रहना होगा

किरण ......ऐसा क्यों गुरुदेव जूलिया भी तो हमारे साथ जा सकती है

गुरुदेव .....बिलकुल जा सकती है पुत्री किरण किन्तु ऐसे अच्चानक से नहीं क्युकी आप सभी का अंश इस वक़्त परतविलोक में मौजूद है किन्तु पुत्री जूलिया का नहीं एक दो दिवश के पश्चात पुत्री जूलिया को हम सवयं परतविलोक ले आएंगे

जूलिया .....जैसा आप उचित सामने गुरुदेव दीदी एक दो दिवश की तो बात है

किरण ......ये तुम खुद को समजाओ मुझे नहीं

पारिजात .......स्वीटी दीदी आप चिंता न करे हम सब है न जुली का ख्याल रखने के लिया

किरण ......जानती हूँ आप सब इनका ख्याल रखेंगी

शालिनी जी .....बेटे स्वीटी सूर्य कहा है

किरण ......मम्मी जी कुंवर जी मंदिर गए हुए है कुछ देर में लौट आएंगे

शाकिनी जी ......अच्छी बात है बेटी तुम सब भी अपनी तयारी कर लो रात को निकलना है हमें

सभी अपनी अपनी तयारी में जुट जाते है

वही रैंक पारी शालिनी जी को अपने साथ ले एक गुप्त कक्ष में चल देती है

जहा रानी पारी उन्हें कुछ सामान देती है जो विशेष था

कुछ देर बाद सूर्य भी लौट आता है

रात में सभी एक साथ हाशि ख़ुशी भोजन करते है

सूर्य सभी लड़कियों से ( जो यही परीलोक में रुकने वाली थी ) एक एक कर मिलता है आवर उनके साथ कुछ पल प्यार भरे वयतीत करता है अंत में रिद्धि पारी के कक्ष में पहुँचता है जहा रिद्धि पारी ुशी का बेसब्री से इन्तजार कर रही थी

सूर्य को देखते हे रिद्धि पारी दौड़ कर सूर्य के सीने से आ लगती है

सूर्य .......क्या हुआ रिद्धि आप ऐसे

रिद्धि ........ हमें अपने साथ ले चलिए सूर्य हम आपके बिना नहीं रह सकते है

सूर्य ......आपको हुआ क्या है आप इस तरह पहले तो कभी कमजोर नहीं पड़ी फिर आज ऐसा क्या हो गया

रिद्धि ......हम आपसे प्रेम करते है बहुत ज्यादा आवर आपसे देय नहीं रह सकते है आप चाहे तो हम आपके साथ साध्वी रूप में चलने को त्यार है

सूर्य ......उसकी कोई आव्सय्कता नहीं है

हम हर सुबह भरम मुहरत में आप सब से मिलने रोज आते रहेंगे भले हे कुछ पल हे वही

आवर ये क्या आपकी इन खूबसूरत झील से नीली आँखों में ये नमी क्यों

मैंने तो सुना था परिया कभी नहीं रोटी है

रिद्धि ......क्यों हमें दुःख ख़ुशी का अनुभव नहीं होता या हमारे सीने में दिल नहीं होता

रिद्धि सूर्य की आँखों में देखते हुए अपने पर के पंजो पे हो कर अपना चेहरा सूर्य के चेहरे के नजदीक कर है आवर अपने नरम नरम होंठ सूर्य के होंटो से मिलान करवा कर आँखे बंद कर लेती है

रिद्धि पारी का ये पौला चुम्बन था जो वो खुद से सूर्य को कर रही थी

सूर्य रिद्धि के खूबसूरत चेहरे को गौर से देखता है तो उसे रिद्धि के मंद में चल रहे विचार सुनाई देंगे लगते है

सूर्य आँखे बंद किये रिद्धि के कोमल ाड्रो को चूमने लगता है डेरी डेरी रिद्धि को इस चुम्बन में अद्भुत मज़ा आता है

ऐसा रिद्धि अपने जीवन में पहली बाद मह्सुश कर रही थी

पैर जल्द हे उन्हें अलग होना पड़ता है जब रिद्धि की सांसे भरी हो जाती है तब

रिद्धि हफ्ते हुए सूर्य को देख रही थी वही सूर्य की नजर रिद्धि के सुडोल सीने पे जा अटकी

रिद्धि ........सुधर जाये अभी वह नजर भी नहीं डालना

सूर्य .....आप बहुत खूबसूरत है रिद्धि आवर आपका ये दिल भी

कहते हुए सूर्य रिद्धि के राइट साइड उभर के जस्ट ऊपर अपना हाथ रख देता है

रिद्धि ......ये आप बिना हाथ रखे भी कह सकते थे

रिद्धि की बात सुन सूर्य अपना हाथ उठाने हे वाला था

की रिद्धि ने उसे अपने हाथ से वही थाम लिया अपने सीने पे

रिद्धि ......यहाँ केवल आप रहते है हमारे वजूद पे केवल आपका अदिकार है सरीर हे नहीं हमारी आत्मा भी आपकी है बस हमें कुछ पल सुकून से आपकी बहो की पनाह में रहना है

सूर्य रिद्धि को अपने सीने से लगा लेता है कुछ 10 ,12 मिनट्स बाद किरण कोमल दोनों सूर्य को बुलाने आती है

सूर्य कोमल किरण के साथ साथ रिद्धि को भी ले कर सभी के पास पहुँचता है

सभी से गले मिल सूर्य आवर उसका परिवार सभी से विदा लेता है

सूर्य सभी को ले वह से सूर्यगढ़ के लिया गायब हो जाता है .........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............
 
अपडेट 204

असुरलोक विवरण

रिद्धि ......ये आप बिना हाथ रखे भी कह सकते थे

रिद्धि की बात सुन सूर्य अपना हाथ उठाने हे वाला था

की रिद्धि ने उसे अपने हाथ से वही थाम लिया अपने सीने पे

रिद्धि ......यहाँ केवल आप रहते है हमारे वजूद पे केवल आपका अदिकार है सरीर हे नहीं हमारी आत्मा भी आपकी है बस हमें कुछ पल सुकून से आपकी बहो की पनाह में रहना है

सूर्य रिद्धि को अपने सीने से लगा लेता है कुछ 10 ,12 मिनट्स बाद किरण कोमल दोनों सूर्य को बुलाने आती है

सूर्य कोमल किरण के साथ साथ रिद्धि को भी ले कर सभी के पास पहुँचता है

सभी से गले मिल सूर्य आवर उसका परिवार सभी से विदा लेता है

सूर्य सभी को ले वह से सूर्यगढ़ के लिया गायब हो जाता है ........

अब आगे ........

असुरलोक ....... असुरमहल में चारो तरफ मांस आवर मदिरापान का लुत्फ़ लिया जा रहा था

चारो आवर ख़ुशी का माहौल बना हुआ था असुरमहल में

हो भी क्यों न क्युकी कल असुरराज नरकासुर की दोनों पुत्री राजकुमारी नगीना वह विसुद्धि का विवाह जो होने जा रहा था विकटासुर वह नागसूर से

इन कुछ दिनों में जब से विसुद्धि आवर नगीना के विवाह सम्बंद पे सभी ने सहमति दी है

तभी से द्वारिका आवर नरकासुर दोनों के बिच के रिश्ते में जो पहले से कड़वाहट थी वो डेरी डेरी ख़तम हो चुकी थी

द्वारिका आवर नरकासुर के बिच फिर से उनके सम्बंद मधुर हो चुके थे

किन्तु कोई था जो इस सम्बंद से हे नहीं इस विवाह से भी दुखी था वो कोई आवर नहीं कंटकासुर पत्नी वातापी थी क्युकी एक वही थी जो इस विवाह के पीछे के सत्य से अवगत थी किन्तु पूर्ण रूप से नहीं

इस बिच शिष्य 2 आवर बाकि तीनो असुरगुर शिष्य निरंतर विसुद्धि नगीना द्वारिका पे नजर रखे हुए थे

पल पल की खबर हर मध्य रात्रि को शिष्य 2 वातापी द्वारा बताये गुप्त स्थान पे वातापी को देता रहता था

किन्तु उस से वातापी को कोई सहायता नहीं मिल रही थी आवर न कोई ऐसा मार्ग नजर आ रहा था जिस से वह इस विवाह को रोक सके खुल कर वह न तो कंटकासुर का समजा कर उसे रोक सकती थी आवर न वो किसी आवर के सामने आ सकती थी

वातापी ...... शिष्य 2 हमें कुछ भी करके इस विवाह को रोकना होगा किन्तु कैसे इसका कोई मार्ग हमें नजर नहीं आ रहा है

शिष्य 2 .....यौवरानी हम किसी आवर से भी तो सहायता ले सकते है

वातापी ...... कदापि नहीं क्युकी इस से हमारा भेद द्वारिका के समक्ष खुल सकता आवर वह कोई न कोई आवर मार्ग अवश्य निकल ले

तुम मायावी द्वारिका के वास्तविकता से परिचित नहीं हो यहाँ वास्तविक महारानी द्वारिका होती तो हमारे सफल होने की उम्मीद की जा सकती थी किन्तु ये मायावी द्वारिका हमारी सोच से बहुत आगे है

शिष्य 2 ..... हम कुछ समजे नहीं यौवरानी जी

वातापी ...... असुरगुरु को करने के बहुत समय पूर्व से इस सडयंत्र को रचा जा रहा था जिसका भूल वाश मैं भी सहयोग करती रही असुरगुर समाज कर किन्तु आज जब सभी विषयो पे पुनः विचार करती हूँ तो मुझे मेरी मुर्क्त का अहसास होता है की कैसे मैंने इतनी बड़ी मूर्खता कर दी

शिष्य 2 ....... यौवरानी एक मार्ग है असुरगुर को कैद से मुक्त करने का किन्तु कितना सफल होगा हम उसका परिणाम नहीं निकल सकते है

वातापी ......ऐसा कोनसा मार्ग है जो हमें ज्ञात नहीं

शिष्य 2 .......काल ..अगर वो चाहे तो असुरगुरु को मुक्त करवा सकते है किन्तु हम नहीं जानते की उस से हमारी भेट कैसे होगी आवर क्या वो हमारी सहायता करने के लिया त्यार होंगे

वातापी ......... हमने इस और तो कभी सोचा हे नहीं मार्ग हमारे सामने हे था किन्तु हम उसे पहचान हे नहीं पाए कल सुबह विवाह है हमारे पास कल सूर्यौदय तक का समय है इतने काम समय में क्या हम काल से भेंट कर पाएंगे

शिष्य 2 ..... किन्तु असुरगुर ने हमें काल से देय रहने का आदेश दिया था किसी भी परिस्थिति में हम काल से दुरी बनाये रखे जब तक गुरुदेव हमें आज्ञा न दे या फिर सवयं काल हमसे सम्पर्क न करे

वातापी ....... आपने एक कन्या के विषय में भी बताया था मानसी जिसे असुरगुरु अपनी पुत्री मानते है क्या वो कन्या असुरगुरु को कैद से मुक्त करवाने में हमारी सहायता कर सकती है

शिष्य 2 ...... हमें उम्मीद तो है किन्तु उस तक पहुंचने से पहले हमारा सामना काल से होगा

वातापी ...... हमें अपना अंतिम प्रयाश अवश्य करना चाइये

शिष्य 2 ...... उचित है हम त्यार है ज्यादा से ज्यादा क्या होगा काल हमारे प्राण ले लेगा किन्तु गुरुदेव के लिया अपने प्राण त्यागने का अवसर मिला तो हम सवयं को भाग्यशाली समझेंगे यौवरानी जी

वातापी ......हमें सिगरा हे परतविलोक के लिया निकलना होगा शिष्य 2 किन्तु उस से पूर्व बाकि शिष्य को सचेत कर दो की हम कुछ समय के लिया असुरलोक से बहार जा रहे है

शिष्य 2 .....जी यौवरानी जी किन्तु आपकी अनुपस्थिति में आप पे किसी को भी संदेह हो सकता है

वातापी ......हम जानते है अब वक़्त आ चूका है अपनी माया का प्रयोग करने का

वातापी मंत्र िचारण कर एक सुनहरा खंजर प्रकट करती है

आवर अपने हाथ में एक गहरा कट लगा कर कुछ अपने रकत की बुँदे वह डालती है

देखते हे देखते वह चारो आवर दुन्वा दुन्वा फ़ैल जाता है

वह किसी को कुछ भी दिखाई नहीं देता है

3,4 मिनट्स बाद वह से जब दुन्वा जाता तब सामने एक आवर वातापी कड़ी थी जैसे वातापी सवयं को मिरर में देख रही हो

वातापी ..... तुम्हे हमारे लौटने तक हमारा स्थान पे रह कर हमारा दायित्वा निभाना है माया किसी को तुम पे कोई संदेह न हो इस का ख्याल रखना

माया .....जी यौवरानी जी आप निश्चित रहे हमारी वास्तविकता किसी अन्य के सामने नहीं आएगी

किन्तु जब तक आप हमें सवयं में समाहित नहीं कर लेती है आपका हाथ ुशी घायल अवस्था में रहेगा

शिष्य 2 .....ये कैसे माया है यौवरानी हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा

वातापी .....इसका केवल परिचय माया है किन्तु ये वास्तविकता में हम हे है न की हमारा अंश या कोई माया हमारी आत्मा हनारा मदतिसक एक दूसरे से जुड़े है या ये की आत्मा एक है किन्तु सरीर 2 किसी एक को नस्ट किया तो दूसरा सवयं नस्ट हो जायेगा

शिष्य 2 .....यौवरानी जी आप अपने प्राण क्यों संकट में दाल रही है असुरगुरु के लिया

वातापी ........ असुरगुरु केवल गुरु नहीं हमारे लिया पिता श्री सम्मान आदरणीय है

वातापी .......रात्रि का एक पहर बिट चूका है हमारे पास केवल तीन पहर का समय शेष है सूर्यौदय के साथ हे हमें लौटना होगा

शिष्य जी ......यौवरानी जी

वातापी आवर शिष्य 2 उस गुप्त स्थान से निकल शिष्य 2 बाकि षुष्यों को दिशा निर्देश दे कर वातापी संग परतविलोक काल वह मानसी की खोज में निकल जाते है

इस बात से अनजान की काल (सूर्य ) आवर मानसी इस वक़्त परतविलोक पे मौजूद हे नहीं है वो तो परीलोक में अपनी स्वीटी के साथ इसवक्त प्रेम मिलान में खोये हुए है

सूर्यगढ़ .........

शिष्य 1 जो काल की वास्तविकता जानने असुरगुरु के आदेश की अवहेलना कर काल की खोज में निकला था

उसने वही से सुरुहत की जहा असुरगुरु ने वयोम को बंदी बनाया था

किन्तु इस बारे कुछ विचित्र हुआ वह पहले जो वयोम सकती sadhvi.(ridhi ) सूर्य के ऊर्जा अंश थे ( तत्वा आदि के) वो सब शिष्य 1 मह्सुश नहीं कर प् रहा था

क्युकी वाइट ड्रैगन ने वह से लौठते वक़्त सभी ऊर्जा अंश अपने भीतर समाहित कर किये थे केवल सूर्य को हे इसका ज्ञान था

शिष्य 1 को निराशा के सिवाय कुछ नहीं मिला वह से

शिष्य 1 अपना कार्य जारी रखते हुए अस्स पास की छोटी से छोटी ऊर्जा संकेत में नजर रखने लगा

ऐसे हे समय गुजरता रहा किन्तु इस बिच ऐसे कोई भी घटना नहीं घाटी जिस से उसे किसी ऊर्जा के परतविलोक पे होने का संकेत प्राप्त हो

ीदार वातापी आवर शिष्य 2 परतविलोक पहुंचे चुके थे

किन्तु उन्हें भी कोई मैरी नजर नहीं आ रहा था की वो काल वह मानसी तक कैसे पहुंचे

ववतापी ...... हम परतविलोक के किस हिस्से में शिष्य2 आवर तुम्हारी काल नमक उस योद्धा से भेंट कहा हुए थी

शिष्य2 वातापी को ले कर गुफा से गायब हो जाता है वह के लिया जहा काल से भेंट हुई थी उनकी

वातापी ......क्या यही वो स्थान है

शिष्य 2 ..... जी यौवरानी जी ुशी स्थान पे हमसे काल वह मानसी की भेंट हुए थी

वातापी निचे बेथ कर वह की जमीं को स्पर्श कर कुछ मंत्रो उच्चारण करती है

किन्तु उसे किसी भी ऊर्जा का अहसास नहीं होता है

2,3 प्रयाश के पश्चात भी कुछ नहीं मिला उन्हें

वातापी ...... यहाँ तो ऐसी किसी ऊर्जा का अंश या संकेत नहीं मिल रहे जिस से हम काल या मानसी की ऊर्जा को परतविलोक पे खोज पाए कही आपने हमें असत्य घटना करम का विवरण तो नहीं दिया सवयं से काल्पनिक रचना कर के

शिष्य 2 .....नहीं यौवरानी जी हम असत्य नहीं कह रहे

यही वो स्थान है जहा हम असुरगुरु के साथ किसी दिव्या ऊर्जा के संकेत प्राप्त होने पे उसकी खोज माये थे ुशी दौरान हमें एक जिन किसका परिचय मानसी ने वयोम वह काल ने वयोम के रूप में दिया

वातापी ....... फिर हमारी मायावी विषय उस ऊर्जा संकेत को खोज क्यों नहीं प् रही है हमारे पास समय आदिक नहीं है

तभी वातापी शिष्य 2 के सामने जा कड़ी होती है

वातापी ...... उस समाया यहाँ जो भी घटना घटित हुए उस के विषय में सोचिये शिष्य 2

शिष्य 2 ....जी यौवरानी जी

वातापी मंत्रो उच्चारण करती हुए अपना रकत रंजीत हाथ शिष्य 2 के सर पे रख आँखे बंद कर लेती है

कुछ हे देर में उस दिन शिष्य 2 ने जो दृश्य यहाँ देखा था वो सब वातापी की बंद आँखों के सामने किसी चलचित्र की तरह चलने लगते है

किन्तु इस दौरान वातापी की ऊर्जा सकती बहुत आदिक मात्रा में उसे हो जाती है वही शिष्य 2 को भी असहनीय पीड़ा का समजा करना पड़ता है

वातापी हफ्ते हुए अपना हाथ शिष्य 2 के सर से हटा देती है

वही उस स्थान से कुछ दुरी पे शिष्य 1 मानवी रूप में रह कर नजर रखे हुए था

उसे शिष्य 2वह वातापी की ऊर्जा सकती का अहसास होता है तो वह भी इस आवर चला आता है

शिष्य 1 ...... शिष्य 2 तुम तो असुरलोक प्रस्थान कर चुके थे न

शुष्य 2..... कोण हो तुम आवर मेरे विषय में कैसे जानते हो

दरशल शिष्य 1 इस वक़्त मानव रूप में था आवर अच्चानक से शिष्य 2 के सामने आ जाने पे वह उसकी ऊर्जा को पहचानने में चूका जाता है

शिष्य 1 अपने वास्तविकता रूप में लौट आता है तब कही शिष्य 2 उसे पहचान पता है

शिष्य 1 ...... तुम इस स्थान पे क्या कर रहे हो शिष्य 2 आवर ये सुन्दर असुर यौवती कोण है

शिष्य 2..... में रहो शिष्य 1 ये असुरराज नरकासुर के बधु असुरकुमार कंटकासुर जी की पत्नी यौवरानी वातापी जी है

शुष्य 1 .....हमें कसंहा करे यौवरानी जी हमें आपके विषय में ज्ञात नहीं था किन्तु आप सब असुरलोक से यहाँ पे क्यों आते है वो भी इस वक़्त मध्यरात्रि को यौवरानी जी आपका हाथ तो जख्मी है किसी ने आप पे प्रहार किया है क्या

वातापी ...... हम यहाँ किसी विशेष कार्य के लिया आये है

तुम तो काल की वास्तविकता जानने के विषय में निकले थे क्या तुम्हे कुछ सफलता मिली

शिष्य 1 ......जी नहीं यौवरानी जी यहाँ पे जो ऊर्जा संकेत थे वो सभी गायब हो चुके है

हमें कोई आवर मार्ग मिला नहीं तो हम यही पे रह कर यहाँ आने वाले पे नजर बनाये हुए है

किन्तु आप किध विशेष कार्य हेतु असुरलोक से परतविलोक आये है

शिष्य 2 .....हम भी काल मानसी की खोज पे निकले है

वातापी .....दरशल हमने जब काल वह मानसी के विषय में सुना तो हमसे रहा नहीं गया इस लिया हम उनसे भेट करने से खुद को रोक नहीं पाए

शिष्य 2 वातापी के जूथ बोलने पे उसे पार्शवाचक दृस्टि से देखता है वातापी उसे न में इसरा कर सच बताने से मन करती है

शिष्य 1 ...... मुझे तो अभी तक ऐसा कोई मार्ग नहीं मिला जिस से काल तक पाहुवह सकू आप भी प्रयाश करके अवश्य देख लीजिये

वातापी ...... यहाँ सबसे नजदीक महानगर कोनसा है

शिष्य 1 ......सूर्यगढ़ यहाँ के सबसे नजदीकी महानगर है उसके साथ हे कुछ दुरी पे सूरजगढ़ वह सक्तिपुर किन्तु आप क्यों जानना चाहती है यौवरानी जी

वातापी ....... क्या आपने इन तीनो महानगरों में खोजबीन की किसी असदारन मानव या असदारन कन्या के विषय में जहा तक हमें शिष्य 2 से काल के विषय में ज्ञात हुआ है वो सवयं की वास्तविकता सभी से छुपाये रहते है

ऐसे में वो इंसाने के बिच किसी आवर रूप में रहते हो

शिष्य 2 .....हमने कभी इस आवर अपना ध्यान दिया हे नहीं

वातापी ....... इस वक़्त मध्य रात्रि है ऐसे में हम किसी से भी कोई जानकारी नहीं ले सकते है

शिष्य 1 ........ है किन्तु अगर कोई इंसाने असदारन है आवर वह यही तीनो महानगरों में से होगा तो सामान्य जब भी कुछ न कुछ तो जानते हे होंगे

वातापी ...... उचित कहा हम तीनो को अलग अलग जाना होगा आवर आवर किसी से जानकारी जुटानी होगी

शिष्य 1 ......मैं सक्तिपुर से जानकारी जुटाने जा रहा हूँ

वातापी .....सूर्यौदय से पूर्व यही पे भेट होगी हम तन्नो की

शिष्य 1 .....जी यौवरानी जी

शिष्य 1 वह से गायब हो सक्तिपुर की तरफ भाड़ गया

शिष्य 2 ...... आपने शिष्य 1 को सत्य से अवगत क्यों नहीं करवाया यौवरानी जी

वातापी ........ अभी आपको विस्तार से समजने का समय नहीं है क्युकी सूर्यौदय में केवल एक पहर का समय है आवर हमें सिगरा हे लौटना होगा

शिष्य 1 .....जी यौवरानी जी मैं सूरजगर जा रहा हम आप सूर्यगढ़ में पता कीजिये

दोनों अपने अपने रस्ते निकल जाते है

शिष्य 1 जब सक्तिपुर पहुँचता तो उसे वह अपनी हे तरह की ऊर्जा का अहसास हुआ किन्तु वो बहुत काम थी

शिष्य 1 ...... ( खुद से ) यहाँ आसुरी सकती के संकेत मिल रहे है किन्तु ये किसी असुर के नहीं हो सकते क्युकी किसी भी असुर की ऊर्जा सकती इतनी निम्न ( काम ) सत्तर की नहीं हो सकती ये किसी मनुष्य की ऊर्जा सकती है जो किसी आसुरी सकती का उपासक है या फिर उसके पास कुछ तो ऐसा है जिसमे असुर ऊर्जा समाहित है मुझे पहले इसके विषय में पता करना होगा

शिष्य 1अदृश्य रूप धार आसुरी ऊर्जा का पीछा करते हुए

ठाकुर दुर्जन सिंह की हवेली आ पहुँचता है

अदृश्य रूप में शिष्य 1 सावधानी से विक्रम के कक्ष तक पहुँचता जो की बंद था

शिष्य 1 ......आसुरी सकती का जो भी दरक या उपासक है वह अवश्य इस कक्ष के भीतर मौजूद है उसे से मुझे वो ऊर्जा संकेत मिल रहे है

शिष्य 1 डेरी से रूक के दूर को खोल कर भीतर परवेश करता है जहा सामने विक्रम सोया हुआ था

शिष्य 1 पुरे कक्ष को सन करता है पुरे कक्ष में विक्रम के अलावा किसी आवर स्थान से ऊर्जा संकेत नहीं मिले

शिष्य 1 ..... कोण है ये मानव जो आसुरी ऊर्जा का दरक है देखने से ये अभी भी बच्चा लगता है न की कोई उपाशक (भक्त ) इस तक ये असुर ऊर्जा अंश कैसे पंहुचा होगा मुझे उसके विषय में ज्ञात करना होगा

शुष्य 1 आगे भाड़ विक्रम के माथे पे हाथ रख उसकी यादो में झाकने की कोशिश करता है किन्तु उसे वह असफलता हे मुलती है

शिष्य 1 .....ये कैसी ऊर्जा सकती जो एक मानव के मस्तिष्क में झख्ने से मुझे भी रोक रही है एक बात आवर प्रयाश करता हूँ

शिष्य 1 एक बात फिर से प्रयाश करता है किन्तु इस बात भी वही हुआ किन्तु शिष्य 1 से एक कालू ऊर्जा निकल विक्रम में समाहित हो गई जिस से विक्रम के सरीर को झटका लगा

विक्रम को हिलता देख शिष्य 1 वह से गायब हो गया

वही वातापी स्वयं (डॉग कुत्ता ) रूप चार सूर्यगढ़ में काल की तलाश में ीदार उधर गम रही थी

इस बात से अनजान की किसी आवर के क्षत्र में मंचा रूप धरना कभी स्वस्थ्य के लिया कितना हानिकारक हो सकता है

जिस जिस गली से वातापी गुजरती कोई न कोई कुत्ता तंग उठा कर उसके पीछे लगने की कोशिश करता

अब बेचारे कुत्तो को क्या पता की ये कोण है उन्हें तो बस सुख द्वार नजर आ रहा था वातापी का पंच के निचे छुपाये हुए

वातापी अपनी ेजात आवारा कुत्तो से बचने के चाकर में ये भी भूल गई की वो एक मायावी असुर स्त्री है महँ असुर मयासुर की पुत्री

काफी दौड़ने भागने के बाद भी कुछ झुंड में आये कुत्तो ने एक दो बार अपना हतियार वातापी की सुखद्वार से भिड़ा हे दिया

वो तो अच्छा हुआ गर्मी की वजह से बहार सोया हुआ बुजुर्ग कुत्तो की आवाज से परेशान हो कर एक दो पत्थर मार कर उन्हें वह से भगा दिया इस बिच वातापी अपनी जान बचा कर दूसरी तरफ दौड़ गयी

अभी कुछ हे दूर पहुंचे थी की वातापी को एक तेज जतका लगा आवर वह को को करती हुए उड़ते हुए दिवार से जा टकराई आवर बेहोश हो गई

ये स्थान था सूर्य ठाकुर की हवेली जिसे सूर्य ने सुरक्षा कवच से सुरक्षित कर रखना था अदृश्य रूप में

ुशी सुरखा कवच से वातापी टकराई थी जिसके परिणाम सवरूप वातापी को तेज जड़का लगा आवर ुशी से वो बेहोश हो गई थी

वही शिष्य 2 को सूरजगढ़ में ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिस से उसे कोई उम्मीद नजर आया काल तक पहुंचने की

शिष्य 2 वह से ुशी स्थान पे लौट जाता है जहा पे वातापी ने सूर्यौदय से पहले मिलने को कहा था

शिष्य 2 काफी समय तक इन्तजार करता रहा किन्तु वातापी नहीं लौटी उसे अब चिंता होने लगती थी

आवर सूर्यौदय भी किसी भी पल हो सकता था

अंत में शिष्य 2 वातापी की ऊर्जा के माध्यम से उसे खोजते हुए वातापी तक पहुँचता है इस दौरान सूर्यौदय भी हो चूका था

शिष्य 2 वातापी को सावन रूप में मूर्छित देख उसे वह से उठा कर गायब हो जाता है असुर लुक के लिया ...........

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अपडेट. 205

वही शिष्य 2 को सूरजगढ़ में ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिस से उसे कोई उम्मीद नजर आया काल तक पहुंचने की

शिष्य 2 वह से ुशी स्थान पे लौट जाता है जहा पे वातापी ने सूर्यौदय से पहले मिलने को कहा था

शिष्य 2 काफी समय तक इन्तजार करता रहा किन्तु वातापी नहीं लौटी उसे अब चिंता होने लगती थी

आवर सूर्यौदय भी किसी भी पल हो सकता था

अंत में शिष्य 2 वातापी की ऊर्जा के माध्यम से उसे खोजते हुए वातापी तक पहुँचता है इस दौरान सूर्यौदय भी हो चूका था

शिष्य 2 वातापी को सावन रूप में मूर्छित देख उसे वह से उठा कर गायब हो जाता है असुर लुक के लिया ...........

अब आगे ............

सूर्यगढ़ ........... मध्यरात्रि को सूर्य अपने परिवार सहित सूर्यगढ़ हवेली पहुंच चूका था

इस वक़्त मध्य रात्रि का पहर रहा था सूर्य बिना किसी को परेशान किये बाकि सभी को उनके रूम में या फिर जहा जो इस वक़्त था वह पंहुचा देता है इसमें सूर्य ने अपनी सकती का उपयोग किया ताकि रात्रि के इस समय किसी अन्य को किसी भी तरह की परेशानी न हो

सभी अपने अपने स्थान पे पहुंचे हे उनके पहले से यहाँ मौजूद अंश उनके सरीर में समाहित hi जाते है किसी हवा के झोके के सामान

सूर्य किरण को ले अपने कक्ष में पहुँचता है जहा दोनों के अंश उन्ही का इन्तजार कर रहे थे जैसे उन्हें पहले से ज्ञात हो

दोनों के अंश दोनों में समाहित हो गए

किरण ........ अपना आसियाना अपना हे होता है फिर चाहे वो एक छोटा आसियाना हे क्यों न हो

परीलोक में सब कुछ था सभी महत्वपूर्ण सुख सुविधाएं किन्तु अपने आसियाने में जो सुकून है वो किसी वही महल में भी नहीं

सूर्य ....... स्वीटी मिलान के पश्चात तुम में मुझे अलग हे स्वीटी नजर आने लगी है किन्तु मुझे मेरी वही स्वीटी चाइये जो बेबाक चंचल सभी को अपनी नटखट हरकतों से बसने वाली

किरण ......हम कुछ समजे नहीं कुंवर सा

सूर्य किरण को बीएड पे लिटा कर खुद से हे किरण के अंग वस्त्रो के निचे हाथ दाल किरण के माध्यम आकर के खूबसूरत उभर को सहलाते हुए किरण के खूबसूरत निखरे हुए चेहरे को चूमने लगता है

सूर्य ........ तुम काफी समझदार हो गई जो स्वीटी पैर मुझे ये स्वीटी नहीं वही पुराणी स्वीटी चाइये

किरण .......उम्म्म्महहह कुंवर सा अब हम आपकी अर्धागिनी है आवर इस परिवार की बहु भी हम हर वक़्त नादानी नहीं करते है अब आपको भी सवयं की जिम्मेदारी समझनी होगी

सूर्य ......वो सब हनीमून से लौटने के बाद अभी तो मुझे हनी टेस्ट करना है

कहते हुए सूर्य निचे खिसक जाता है आवर किरण की योनि के हलके यहते हुए लिप्स को अपने होंटो में भाड़ लेता है





किरण की योनि से आ रही हलकी हलकी गंध सूर्य के नाक से होते हुए उसके दिमाग में पहुंचने लगती है

सूर्य सब कुछ भुला कर किरानी की योनि को चूसने लगता है उस अमृत की तलाश में जो किरण के योनि से मंथन के पस्चान निकलने वाला था





पर प्रतिपल किरण की सिसकारियां रूम में गूंजने लगती है

किरण का एक हाथ अपने माध्यम ुनाथ उभारो को सहलाने में वयस्थ था तो दूसरे हाथ से वह सूर्य के सर को सहलाते हुए अपनी योनि पे सबब बनिये हुए थे

किरण की कमर किसी वाद्य यन्त्र की ताल पे जैसे नरिसत्य कर रही हो

कुछ 7,8 मिनट्स के म्हणत से सूर्य को वो प्राप्त हो चूका था जिसके लिया सूर्य ने इतनी म्हणत की

किरण अपनी योनि से योनिरस को परवाह कर शीतल पढ़ चुकी थी

सूर्य का भुजंग नागदंड अभी भी अपने रुद्ररूप में खड़ा था सूर्य ने आँखे बांड कर ली आवर किरण को बहो में भर कर उसे चूमने लगता है

किरण को अपने गालो पे हल्का गीलापन मह्सुश होता जो कुछ आवर नहीं सूर्य के मुख पे लगा किरण का कमरष था

किरण .....ची कुंवर जी पहले आप अपना चेहरा साफ कीजिये जा कर

सूर्य ......ये गलत है स्वीटी

किरण ......जाइये न कुंवर जी

सूर्य ........ ठीक है बाबा जा रहा हूँ

सूर्य बाथरूम में जा कर अपना चेहरा साफ कर किरण के समीप आ लेता

किरण ...... अब आपको संतुष्ट करने की मेरी बारी है कुंवर जी

किरण जैसे हे सूर्य के लिंग को थामे के लिया आगे हाथ बढाती है सूर्य किरण का हाथ थाम लेता है

सूर्य ......उसकी जरुरत नहीं स्वीटी ये तभी संतुष्ट होगा जब ये यहाँ जायेगा (योनि को सहलाते हुआ ) आवर हम तभी फिर से मिलान करेंगे जब हनीमून पे जायेंगे

किरण ....... पैर आपको ऐसे परेशानी होगी मई. हाथ या मुँह से तो कर सकती हु न

सूर्य आँखे बंद कर मन हे मन कुछ करता है तो उसके मंद से एक हलकी लाल रौशनी निकल कर गायब हो जाती है

सूर्य .......ये लो अब कोई प्रॉब्लम नहीं है मैं संतुष्ट हो गया

किरण ......ये लाल ऊर्जा कैसे थे जो अभी अभी आपके मस्तिष्क से निकली

सूर्य ...... ये वही सम्भोग ऊर्जा थे जिस से लिंग में तांडव बना हुआ था मैंने इसे अपने सरीर से नहर निकल दिया क्युकी हमारे मिलान के पश्चात हस्तमैथुन या मुखमैथुन से मुझे पूर्ण संतुष्टि प्राप्त नहीं हो सकती पूर्ण सम्भोग हे मुझे संतुष्ट कर सकता है

किरण .......इस से तो आपको बहुत समस्या होगी कुंवर जी

सूर्य .....नहीं स्वीटी क्युकी मैं अपनी इच्छा से इसे नियंत्रित कर सकता हूँ अपनी इच्छा अनुसार समय काम या बढ़ा सकता हूँ

किरण ....... ये कैसे सकती है कुंवर जी

सूर्य ....... सायद ये नियति की इच्छा हो क्युकी भविष्य में इतनी पत्निया जो होने वाली है मेरी

किरण ......आवर जो लाल रौशनी आपके मस्तिष्क से निकली वो किसी आवर में समाहित हो गई तो क्या उसपे भी असर होगा

सूर्य .......मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं स्वीटी

किरण ......कुंवर जी आप भी न बिना पूर्ण ज्ञान के कोई भी सकती उसे कर लेते हो जभी उसके परिणाम के विषय में सोचते तक नहीं

सूर्य ......क्या मतलब

किरण ...... मतलब हवेली में इतने लोग मौजूद है आपकी वो ऊर्जा किसी में समाहित हो गई तो क्या होगा इस बारे में सोचा आपने

अब जा कर सूर्य के माथे पे बल पड़ा

सूर्य वही आसान लगाकर ध्यान में पूरी हवेली को सन करता है जहा उसे पता चलता है की उसकी ऊर्जा किस में समाहित हुए है

सूर्य आँखे खोलता है तो वह थोड़ा परेशान हो चूका था

किरण ......कुंवर जी इस लिया मैंने आपको कहा था अधूरा ज्ञान हमेशा घातक होता है

सूर्य ......मतलब तुम जान गई हो की ......

किरण .....इस्सस कुछ भी कहने की आव्सय्कता नहीं

सूर्य ......किन्तु समय के साथ ऊर्जा का प्रभाव सरीर पे होना तय है

किरण .....मैं कोई मार्ग निकल लुंगी अभी आप विश्राम कीजिये

किरण सूर्य को अपने नंगे सीने से लगा कर सिलने लगती है अभी भी सूर्य के मंद में वही चेहरा गम रहा था जिसने वो ऊर्जा ग्रहण की

किरण ........ आप से कुछ कहे कुंवर जी

सूर्य ......हम्म्म

किरण ....... क्या हम वह चल सकते है जहा आपका बचपन गुजरा मुझे वो घर देखना है जहा आपने चलना शिका था जहा आपने मम्मी के साथ ढेरो सररते की

किरण सूर्य का मंद को दूसरी तरफ करना चाहती थी

आवर उसने जो टॉपिक छेड़ा था वो बिलकुल सही था सूर्य कुढ़ कुछ पल अपने ुशी घर की यादो में खोने लगता है जहा उसने अपने पूरा बचपन बिताया था

किरण .......आपने बताया नहीं

सूर्य ........मैं सोच रहा हूँ क्यों न हम हनीमून वही u.s.a में मनाये

किरण .......जैसा आपको ठीक लगे कुंवर जी

सूर्य ......फिर ये तय रहा हम चारो कल हे निकालेंगे

किरण .....ये बाकि 2 कोण है

सूर्य .......रोहन भाई आवर राधिका भाबी क्युकी ये हनीमून ट्रिप वही स्पांसर कर रहे है

सूर्य अपना मोबाईल ले कर राधिका आवर रोहन को मैसेज कर कल के लिया बोल देता है

किरण आवर सूर्य कुछ समय तक बात चित करने के बाद दोनों एक दूसरे के बहो में सुकून से सो जाते है ............

सक्तिपुर .........

शिष्य 1 रात विक्रम से माइन के बाद भी वह सक्तिपुर में रुका हुआ थॉशे जानना था की विक्रम में मौजूद असुर अंश कहा आवर कैसे मिला

किन्तु इस के लिया उसका विक्रम से मिलना भी जरुरी था

वही रात में शिष्य 1 से निकली ऊर्जा ने विक्रम को पूरी तरह से ठीक कर दिया था किन्तु वह मूर्छित था उस ऊर्जा के वजह से

इस आवर किसी का ध्यान नहीं गया सुबह भी रुक्मणि जी वैसे हे विक्रम से दुरी बनाये हुए थे जब से उनका मन साफ हुआ तब से उन्होंने विक्रम से दूर रहना हे बेहतर समजा वही गीता ठाकुर केवल तभी उस रूम में जाती जब कुछ जरुरी हो बाकि विक्रम की दवा दारू सब नौकर चाकर हे देख लेते थे इस लिया इस आवर किसी का ध्यान नहीं गया

वही सुबह सुबह हवेली में सूर्य के आ जाने से विधि आवर गायत्री उसके साथरकेट निकल गई थी आवर अजय गुस्से में अपने रूम में बंद हो कर बेथ गया

विक्रम को करीबन दोपहर से कुछ समय पहले हे होश आया खुद को पहले से बेहतर वह स्वस्थ देख उसे आचार्य हुआ

विक्रम .......मैं एक हे रात में ठीक कैसे हो गया आवर मुझे पहले से अच्छा आवर ताकत वॉर मह्सुश हो रहा है

विक्रम डेरी डेरी बीएड से खड़ा हो कर चलने की कोशिश करता तो उसे किसी तरह का कोई दर्द महसूस नहीं हो रहा था बल्कि उसके सरीर में पहले से कही आदिक स्पूर्ति वह तेजी आ गई थी

विक्रम खुद को ताकतवर मह्सुश कर रहा था

विक्रम सबसे पहले फ्रेश होने के लिया बाथरूम में गुस्स गया वह खुद को अच्छे से रगड़ रगड़ के नहाया इस दौरान बहुत समय से सेक्स से दूर रहने की वजह से उसके लिंग में कुछ ज्यादा हे तांडव आ रहा था

मजबूरन विक्रम को हाथ का प्रयोग करना पड़ता है कोई एक हर के बाद विक्रम नाहा कर बहार निकलता है त्यार हो अपने रूम की अलमारी से कुछ पैसे ले कर बहार निकल जाता है

विक्रम जब हॉल में आया तो उसे कुछ आवाजे सुनाई दी जैसे कोई रसोई में खाना बना रहा हो

विक्रम चुप चाप वह जाता है तो ये कोई आवर नहीं रुक्मणि थी जो की खाना बना रही थी लगभग बन हे गया था

रुक्मणि जी को अकेले में देख विक्रम कुछ पल उसके गदराये हुए जिसम को आँखों से हे भोगा है

इस दौरान निरंतर अपने हाथ से लिंग को सहला रहा था

जिस से वो पहले की तरह फिर से आकडने लगता है

विक्रम आगे भाड़ रुक्मणि जी को पीछे से अपने आग़ोश में भर लेता है अपने दोनों हाथ विक्रम रुक्मणि जी की बड़े बड़े स्तनों पे रख कर कुछ ज्यादा हे जोर से दबा देता है

जिस से रुक्मणि जी की चीख निकल जाती है एक तो वो पहले हे विक्रम के इस तरह बहो में भरने घबरा गयी थी ऊपर से उनकी चूचियों को इस तरह दबाये जाने पे रुक्मणि जी विक्रम को खुद से दूर दाखिल कर जनतेदार चांटे दोनों गलो पे रसीद कर देती है

रुक्मणि जी की आँखे हलकी भीगी हुई थी दर से पैर जब सामने विक्रम दिखा तो उन्हें ख़ुशी हुई की वो ठीक हो गया पैर तब तक विक्रम गुस्से में रुक्मणि जी को चांटा मर दिया था आवर ये दृश्य गीता ठाकुर वह अजय भी देख चूका था

जदारशल जब रुक्मणि जी की चीख निकली उस समय अजय छठ से निचे हे आ रहा था अपने दोस्तों से फ़ोन बात करके वही गीता ठाकुर दोपहर के भोजन करने के लिया

रुक्मणि जी को चांटा मरते देख अजय तेजी से भाग पैर तब तक विक्रम का गुस्से से भरा चांटा रुक्मणि जी के गाल वह होंटो पे पद चूका था

रुक्मणि जी को इसकी उम्मीद कटाई न थी की विक्रम ऐसा करेगा

रुक्मणि जी इस से संभल नहीं पायी आवर फिरते हुए उनका सर पास में लगे बर्तन दोने वाले वाश बेसिन से टकरा गया

अजय जल्दी से अपनी मम्मी को संभालता है

इसी बिच गीता ठाकुर भी विक्रम पे हाथ साफ कर देती है

विक्रम गीता ठाकुर को डंका दे कर वह से हैवे ले से बहार निकल जाता है आवर एक कार ले कर गुस्से में दौड़ते हुए निकल जाता है

बहार बूढ़े के रूप में हवेली पे नजर रखे शिष्य 1 विक्रम को देख उसके पीछे लग जाता है

गीता ठाकुर .......रुक्मणि मेरी बहन तुम ठीक तो हो न

रुक्मणि जी ......दीदी मैं ठीक हूँ अह्ह्ह्हह बस सर में थोड़ा दर्द है

गीता ठाकुर जब ठीक से रुक्मणि जी के सर को देखती है तो वह से खून निकल रहा था

वही रुक्मणि जी के होंठ भी कुछ फैट गए थे विक्रम के थप्पड़ से

गीता ठाकुर ......हे बागवान तुम्हारा तो खून निकल रहा है अजय जा जल्दी से हॉस्पिटल से डॉक्टर को ले कर

अजय जो पिछले कुछ दिनों से रुक्मणि से नाराज था पल भर में उसकी नारंगी ख़तम हो गयी अब वह गुस्सा था तो विक्रम के लिया

अजय जल्दी से कार ले कर वही सक्तिपुर के हॉस्पिटल की तरफ कार दौड़ा दी

गीता ठाकुर रुक्मणि जी को सहारा दे कर वही हाल में रखे सोफे पे ले जाती है

रुक्मणि जी ....... दीदी मुझे माफ कर दीजिये मैंने जान बुज कर विक्रम को चांटा नहीं मारा था मुझे नहीं पता था की वो विक्रम था मैं घबरा गई थी जब किसी ने जोर में मुझे कांडा आवर मेरा सीना दबाया तो

गीता ठाकुर....... मुझे उसे यहाँ लाना हे नहीं चाइये था मेरी बहन मर्मर जाने दिया होता उसे वही तो अच्छा होता आज उसने तुम्हारे साथ जो हरकत की है एक बीटा कभी ऐसा नहीं कर सकता मैंने एक मौका दिया था ये सोच कर की वो सुधर जायेगा हम उसे सही रस्ते पे ले आएंगे पैर सब पे उसकी बुरी नियत ने पानी फेयर दिया

रुक्मणि जी ........ दीदी उसे एक बार माफ कर दीजिये

गीता ठाकुर .....नहीं रुक्मणि उसने ये हरकत आज पहली बार नहीं की है पहले भी वो मुझे अपनी गन्दी नियत ख़राब कर चूका है आज तुमपे हाथ दाल कर अपने इरादे जाता दिए कल को मेरी बच्चियों के साथ नहीं नहीं आज आवर अभी से विक्रम मेरे लिया मर गया है अगर उसने हवेली में पेअर रखा तो मैं कुढ़ उसे गोली मर दूंगी

कुछ हे देर में अजय डॉक्टर को ले कर आता है जो रुक्मणि जी की सर पे पट्टी कर इंजेक्शन लगा कर चेहरे पे लगाने के लिया कोई क्रीम आवर कुछ टेबलेट दे कर निकल जाता है

अजय आवर गीता ठाकुर दोनों मिल कर रुक्मणि जी को उसके रूम में लिटा कर आ जाते है

अजय ......बड़ी मम्मी भाई सा ने ये अच्छा नहीं किया माँ के साथ

गीता ठाकुर ...... बेटे मेरी हे गलती है जो उसे यहाँ ले कर आई

आज के बाद विक्रम इस हवेली में नजर नहीं आना चाइये आवर तुम भी उस से दूर रहो बीटा ये वो विक्रम नहीं है जो तुम्हारा भाई हुआ करता था

साम के करीब सूर्य विधि आवर गायत्री को वही हवेली के बहार छोड़ कर बाकि सभी के साथ निकल जाता है

विधि जब अपनी माँ के रूम में पहुंची तो अपनी माँ की हालत देख उसने गीता ठाकुर से पूछा तो उन्होंने सब सच बता दिया ( ेजात पे हाथ डालने वाली बात को छोड़ कर )/ विधि को विक्रम से दूर रहने को कहा ोउ गायत्री को भी दूर रहने की सलाह दी

वही विक्रम जब सिटी 1 के मॉल में पंहुचा जहा उसे अपने लिया नया फ़ोन लेना था वह इत्तफाक से उसे अजय के वही तीनो दोस्त भी मिल जाते है कुछ देर विक्रम से बात कर दोस्त 2 उसका no. ले कर वह से चला जाता है

दोस्त 2 .......यार मुझे एक काम याद आ गया है दोस्त 1 तुम घर जाओ हम कल मिलते है

दोस्त 1 वह से अपनी बाइक ले कर निकल जाता है

दोस्त 3 .....क्या हुआ यार क्या काम याद आ गया

दोस्त 2 ......अरे ऐसा कुछ नहीं है यार बस उस से पीछा छुड़ाना था

मेरे दिमाग में एक प्लान है जिस से विधि आवर गायत्री तो मर्लिगी हे आवर कुछ पैसे भी मिल जायेंगे अपनी मौज मस्ती के लिया

दोस्त 3 ......फिर बोल न यार क्या प्लान है

दोस्त 2 ....... विक्रम अब ठीक हो चूका है यही मौका है इसके कानो तक इसके दुसमन सूर्य की खबर पहुंचने का बस किसी का मोबाइल उड़ाना होगा बाकि मैं देख लूंगा

दोस्त 3 ......ये काम तो मैं चुटकियो में कर दूंगा बस तू देखता जा पैर प्लान क्या है मुझे भी तो बता यार हम पार्टनर है दोनी

दोस्त 2 दोस्त 3 सारा प्लान समजा देता है जिस से दोस्त 3 भी त्यार हो जाता है

दोनों वही आस पास गुजरने वालो पे नजर रखे हुए थे की किसका फ़ोन उड़ाना है

कुछ हे देर में उन्हें एक बकरा मिल जाता है

दोस्त 2 ......वो देख मिल गया बकरा अभी ये फ़ोन पे लगा हुआ है मैं बाइक उसके पास से निकलूंगा तुम निकलते वक़्त फ़ोन मर लेना

दोस्त 3 ....... ठीक है भाई

दोनों प्लान को अंजाम दे वह से निकल जाते है पीछे से फ़ोन वाला लोंदा चोर चोर चिलता रहा ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................
 
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