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अपडेट. 180
वयोम ......नहीं सकती तुम यही रुको मैं जा कर देखता हूँ कुछ प्रॉब्लम हुई तो आप गुरुदेव से या सूर्य से सम्पर्क करना
अकेले कुछ भी करना खतरनाक हो सकता है
सकती .......तुम ठीक कह रहे हो वयोम इस तरह बिना सोचे समजे हमें कोई कार्य नहीं करना चाइये
वयोम ......ठीक है में जा रहा हूँ कुछ भी गलत लगा मैं आपको सेंकेड दूंगा
सकती ......ठीक है सावधान रहना
वयोम वह से निकल जाता है ज
जंगल की आवर खुद पे आने वाले खतरे से अनजान ............
अब आगे .........
सक्तिपुर ...... अभी सुबह के कोई 11 सादे 11 का समय रहा होगा तभी अजय के फ़ोन पे किसी अनजान no. से कॉल आता है
जिसे एक बार तो अजय इग्नोर कर देता है
रुक्मणि .....तुम्हारे किसी लफंगे दोस्त का हे कॉल होगा तुम्हे बुलाने के लिया
देखो अजय पहले तुम क्या करते थे क्या नहीं मैं नहीं जानती
आवर न जानना चाहती हूँ पर अब तुम कोई भी ऐसा वैसा गलत काम नहीं करोगे जिस से हम सब किसी प्रॉब्लम में पड़े समाज गए तुम
अपने इन आवारा दोस्तों से जितनी जल्दी दुरी बना लव इतना अच्छा है तुम्हारे लिया आवर हम सब के लिया आवर अब तो वो लोग हवेली भी आने लगे है है मुझे ये बिलकुल पसंद नहीं है यहाँ तुम्हारी दो जवान बहने भी है इतने में हे समाज जाओ तुम
अजय ....... माँ वो सब ऐसे नहीं है मैं जनता हूँ हवेली तो सूर्य भी आता है आप उसे तो कुछ नहीं कहती उल्टा उसे तो आप किसी रियासत के राजकुमार जैसा ट्रीट करती है
रुक्मणि ...... मुझे मत समजा मैंने तुमसे ज्यादा दुनिया देखि है किस की नजरो में क्या है
क्या नहीं मुझे किसी से जानने की जरुरत नहीं समजे तुम आवर रही बात सूर्य की वो बीटा है मेरा समजे तुम हमने जितना कुछ गलत करना चाहा सब जानते हुए भी उसने न केवल हमें माफ किया बल्कि अपनी गलतिया सुंदरने का मौका भी दिया
वो किसी रियासत का राजकुमार न होते हे हुए भी सबके दिलो पे राज करता है दिल का राजा है वो ुसपने उन लफंगे आवारा दोस्तों की बराबरी न करो समजे
अभी रुक्मणि कुछ आवर भाड़ पिलाती एक बार फिर से अजय का फ़ोन बज उठा जो रुक्मणि ने फ़ौरन अजय से ले कर कॉल पिछ किया
रुक्मणि .....कोण हो तुम क्यों बार बार कॉल कर रहे हो
सामने से .....चची जी मैं विक्रम बोल रहा हूँ
रुक्मणि .....विक्रम बीटा तुम कहा हो बीटा कितने दिन से तुम्हारी कोई खबर नहीं है
विक्रम .....संत हो जाइये चची जी वो मेरा एक्सीडेंट हो गया था
चची जी अभी भी हॉस्पिटल से डॉक्टर के no.se कॉल कर रहा हूँ
रुक्मणि ......बीटा तुम ठीक तो हो न मुझे बताओ कहा हो तुम मैं अभी आती हूँ वह
विक्रम ...... आप रहने दीजिये चची जी अजय को यहाँ भेज दीजिये पैसो के साथ
रुक्मणि ......तू है कहा बीटा
विक्रम .....छत्तीसगढ़ के एक हॉस्पिटल में हु चची जी अजय को आप भेज देना यहाँ आ कर वो इन no. पे कॉल कर लेगा अब रखता हूँ
विक्रम आगे कुछ सुने बिना हे कॉल कट कर देता है
रुक्मणि ....hello विक्रम बेटे विक्रम....
अजय .....माँ कॉल कट हो गया है
रुक्मणि ......जा तू त्यार होने जा मैं दीदी को बताती हूँ
अजय .....भाई ने मुझे अकेले को आने को कहा है
रुक्मणि .....जितना कहा है इतना कर
अजय अपने पेअर पटकते हुए वह से अपने कमरे की आवर निकल जाता है
रुक्मणि फ़ोन पे जो बात हुई विक्रम से सब गीता ठाकुर को बताती है
गीता ठाकुर उन्ही no. पे कॉल करती जो की वही के किसी वार्डबॉय का no. था कॉल कर जब अपनी तसली कर लेती है तो गीता ठाकुर भी त्यार होने लग जाती है
रुक्मणि ......दीदी सूर्य से इस बारे में बात करनी चाइये सायद....
गीता ठाकुर .....नहीं रुक्मणि वह समय जितना लगे पता नहीं ऐसे में सूर्य को परेशान करना ठीक नहीं
गीता ठाकुर वह अजय त्यार होने रुक्मणि को हवेली आवर गायत्री विधि का ख्याल रखने का बोल कर जैसलमेर के लिया निकल जाते है
गायत्री .....चची जी भाई यहाँ आ रहे उन्हें तो यहाँ के बारे में कुछ भी पता नहीं है
उन्हें जाने के बाद यहाँ का माहौल पूरा बदल दिया है उन्होंने
रुक्मणि ......उन्होंने किसने सूर्य ने हेहेहे तू क्यों चिंता करती है है मेरी बच्ची हम सब है न हम संभल लेंगे विक्रम को वैसे तुम दोनों का ये सब कब से चल रहा है
विधि .....क्या माँ क्या चल रहा है हम दोनों का कुछ भी तो नहीं
रुक्मणि ....ीदार आओ दोनों मेरे पास बैठो
गायत्री आवर विधि दोनों रुक्मणि के अगल बगल सोफे पे बेथ जाती है
रुक्मणि ......अब सच सच बताओ तुम दोनों का सूर्य के साथ क्या चाकर है आवर ये सब कबसे चल रहा है
रुक्मणि की बात सुन विधि आवर गायत्री दोनों की गर्दन जुख जाती है
रुक्मणि .....वैसे मुझे भी पसंद है सूर्य पैर तुम दोनों जानती hi न वो किसी आवर से प्यार करता है फिर भी तुम दोनों उसे हे दिल दे बैठी
गायत्री ......आप सब जानती है चची जी
रुक्मणि ......है मुझे तो पहले हे शक था पैर परषो जब तुम दोनों सूर्य को बहार छोड़ने गयी थी तब मैं भी तुम्हारे पीछे हे आ रही थी तभी तुम तीनो की बात मैंने सुनी सोचा तुम दोनों से बाद में बात करूंगी
विधि की आँखों से तो तप तप कर आंसू बहने लगते है
जिसका अंदाजा रुक्मणि को हो जाता है रुक्मणि अपनी बेटी के प्यार से आंसू पोंछती है आवर उसका सर अपनी गॉड में रख लेती है
रुक्मणि .....देखो तुम दोनों समझदार हो पड़ी लिखी हो जो भी करना सोच समाज कर करना तुम दोनों की वजह से सूर्य पे कोई ऊँगली उठी तो भूल जाउंगी की तुम दोनों मेरी बेटी हो
प्यार करना गलत नहीं है बेटी मैंने भी किया था पैर गलत इंसान से आवर ये समझने में मैंने बहुत देर कर दी मैं नहीं चाहती तुम दोनों को भी वही दिन देखने पड़े क्युकी सूर्य ने भले हे साफ न कहा हो पैर उसने ये साफ कर दिया की वो जीवन भर तुम दोनों का साथ नहीं दे सकता है
गायत्री ...... चची जी आपको बुरा नहीं लगा ये सब जान कर
रुक्मणि .....बुरा जरूर लगा बेटी पैर इस लिया नहीं की तुम दोनों सूर्य से प्यार करती हो बुरा लगा की तुम तीनो हमेशा के लिया एक नहीं हो सकते हो
विधि ..... माँ वो भी तो ठाकुर है उन्हें कोण रोक सकता है
रुक्मणि ......ठाकुर होने का मतलब ये तो नहीं है विधि बेटी की वो समाज को नजरअंदाज कर दे
मन की हम ठुकरा में अभी भी एक से अनेक विवाह परथन है पैर उसकी कोई मज़बूरी अवश्य रही होगी जिसके चलते वह जीवन भर साथ निभाने का वादा नहीं कर रहा आवर तुम दोनों भी उस से ऐसा कोई वादा न लेना जिस से उसे सुख हो या वो मजबूर हो जाये सूर्य बहुत अच्छा लड़का है उसके साथ दोस्ती करो उसे संजो तो तुम उसके मज़बूरी भी समाज जाओगे
अब जाओ अपने रूम में मैं भी थोड़ा आराम करती हूँ
गायत्री आवर विधि तो वह से चली जाती है
पैर रुक्मणि वही बैठे किन्ही भरे विचारो में खो जाती है उसे अपनी बेटियों की चिंता थी .......
परीलोक .....
शालिनी जी ......बीटा सूर्य तुम अपने फूफा जी से मिलने तो जा रहे हो पैर वह उनसे इस बारे में कोई बात नहीं करना आवर उन्हें यही ले आना हम सब यही है तो उनसे यही पे बात कर लेंगे इस बारे में
मेनका जी .....भाबी सा आप चिंता न करो मैं भी तो साथ जा रही हूँ वह
दादी जी .....इसी बात का तो दर है बेचारे जमाई सा की तुम्हारे सामने चलती हे कहा है
मुझे तो दर है कही तुम उन्हें हुकुम हे न सुना दो की.. .पायल प्रीती की सदी सूर्य से होगी यही मेरा फैसला है ....हहहहए
मेनका जी ...... अगर नहीं मने तो ये भी कर दूंगी माँ सा
शालिनी जी ......आप ऐसा कुछ नहीं करेंगी दीदी आप उनसे इस बारे में कोई भी बात नहीं करेंगी वह आवर जल्द से जल्द वह से आ जाये उन्हें ले कर के
मेनका जी ......अब संधान ने आर्डर दे हे दिया अपने समधी को तो मैं क्या कर सकती हूँ
सूर्य .....बुआ सा हमें निकलना चाइये पहले हमें सूर्यगढ़ भी जाना है
मेनका जी ....... ठीक है चलो पैर वो दोनों कहा है
पायल .....माँ हम यही है आवर हमारे साथ जुली भी चल रही है उसे भी परतविलोक का रहन सहन देखना है
सूर्य ......ठीक है पैर आप सायद भूल रही है
हम लोग पिकनिक पे नहीं जा रहे है वह ज्यादा समय नहीं रुकेंगे
शालिनी जी .....अगर उसका साथ जाने का दिल है तो ले कर जाने में क्या प्रॉब्लम है तुम्हे
पायल ......ये लो अब तो ममी जी की भी परमिशन मिल गई है
सूर्य ......ठीक है चलो फिर
सूर्य पायल प्रीती जुली मेनका जी सभी से विदा ले जल्दी लौटने का बोल सूर्यगढ़ के लिया गायब होने जाते है
सूर्यगढ़ ........
वयोम हवेली से गायब होने जंगल पंहुचा
वह वयोम अदृश्य रूप में हे असुरगुरु की तरफ भध रहा था
जैसे हे वयोम जंगल में पंहुचा उसका अहसास असुरगुरु को भी हो गया था
असुरगुरु ......सावधान किसी को हमारे यहाँ होने का पता चल चूका हेयर वह इस वक़्त हमारी आवर हे भध रहा है
असुरगुरु के सावधान करने पे सभी शिष्य सावधान हो जाते है
असुरगुरु ....... ये कोई सदर्न मानव नहीं है जो भी है वो जादुई सक्तियो से परिपूर्ण है हमें आगे का मार्ग इसी के जरिये ज्ञात होगा इस लिया इसको बंदी बनाना बहुत जरुरी है
असुरगुरु वह अपने 6 शिष्यों में से 2 को छोड़ कर खुद वह बाकि चार को गायब कर देते है
उदार वयं इनकी असुर सकती को सीन्स करते हुए इनसे कुछ दुरी पे आ रुकता है अदृश्य रूप में
वयोम ......ये क्या यहाँ तो केवल 2 हे लोग है सकती ने तो यहाँ आदिक लोगो के होने का अंदेशा था
कही ये इनकी कोई चल तो नहीं है मुझे कुछ पल यही प्रतीक्षा करनी होगी जब तक पूरी तरह से आस्वस्त न होने जाऊ की ये कोई जाल नहीं है
वही असुरगुरु को वयोम की ऊर्जा से ज्ञात हो जाता है की जो भी है वह अदृश्य रूप में उनके दोनों शिष्यों पे नजर रख रहा है
( असुरगुरु ....... अगर ऐसे हे उसे कैद करने की कोशिश की तो सायद ये यहाँ से बीच कर निकल सकता है पहले मुझे यहाँ इसे घेरे में बंदना होगा ताकि ये यहाँ से मुक्त न होने सके )
असुरगुरु अदृश्य रूप में हे वह अपने साथ साथ सभी को वयोम को भी अपने मंत्र सकती से उत्पन तेरे में बंद लेता है
वयोम ......नहीं ये नहीं हो सकता ये एक जाल है आवर मैं मूर्खो के भरी इसमें फर्श चूका हूँ अब सकती को कोई संकेत भी नहीं भेज सकता मुझे किसी भी तरह यहाँ से निकलना होगा
वयोम अपना अदृश्य रूप त्याग दोनों असुर शिष्यों के सामने प्रकट होते जाता है
वयोम .....तुम असुर यहाँ क्या कर रहे हो
शिष्य 1......ओह्ह तो तुम हो वो जिन जिसको ऊर्जा यहाँ मौजूद थी आवर तुम्ही से सावधान होने को कह रहे थे गुरुदेव
शिष्य 2 ......अब कोई फायदा नहीं तुम यहाँ कैद हो चुके हो यहाँ से निकलना संभव नहीं है
तभी वयोम तेजी से शिष्य 2 के सीने पे अपने जादुई सोर्ड से वॉर करता है जिस से एक गहरा जखम शिष्य 2 के सीने पे बन जाता है
वयोम ......जिन हूँ पैर इतना भी कमजोर नहीं
वही अपने साथी पे वॉर होता देख बाकि चारो शिष्य आगे बढे पैर असुरगुरु के इसारे पे वही रुक जाते है
असुरगुरु ......संत रहो आवर जो हो रहा है उसे देखो मून हो कर
शिष्य 5 ......पैर गुरुदेव वो
असुरगुरु ......ये केवल एक मोहरा मात्रा है यहाँ जो ऊर्जा अंश मिले थे उन्ही में से एक
अपने साथी को गायगायल देख शिष्य 1 अपनी सोर्ड ले वयोम से टकरा जाता है
व्ायोम कोई सदर्न योद्धा नहीं था जो ऐसे हे हर मान जाता
वयोम दोनों हाथो में सोर्ड ले दोनों असुरो से योध करने लगता है
डेरी डेरी वयोम दोनों असुरगुरु शिष्य पे हावी होने लगता है
दोनों के सरीर से जगह जगह से रकत बाह रहा था
वयोम द्वारा दिए जखम जादुई सोर्ड के थे जिसके चलते जखम अपने आप भर नहीं रहे थे
वयोम ......तुम दोनों अच्छे असुर्योधा हो पैर मेरे सामने ज्यादा टिक नहीं सकते हो तलवारबाज़ी बहुत हुई अब थोड़ा मेरी चुटकी का मज़ा भी चख लो
कहने के साथ हे वयोम ने चुटकी बजे आवर वयोम के के हाथो में 2 रशिया प्रकट हुई जो की वाइट ऊर्जा से परिपूर्ण थी
दोनों असुरसीष्य कुछ समाज पेज उस से पहले हे रशिया दोनों के सरीर को अपने बंदन में बंद कर उन्हें पीड़ा पहुंचने लगी
यही वयोम से भी गलती हो गई अपने सामने 2 असुरो को बंदी देख अपना ध्यान भटकने से वयोम भी खुद को रोक नहीं पाया तभी
वयोम की पीठ पे एक तेज ऊर्जा का प्रहार हुआ जो की असुरगुरु ने हे किया था
वयोम असुरगुरु की ऊर्जा के प्रहार से सामने के विरीक्षा को तोड़ते हुए सामने की चेतन से जा टकराया
असुरगुरु ......तुम सचमुच अच्छे जिनयोधा हो पैर हर योद्धा की एक कमजोरी होती है
तुमने समय से पहले हे सवयं को विजयी घोषित कर योध निति का पहला नियम भूल कर अपना ध्यान योध से हटा दिया
वयं खड़ा हो कर अपने सरीर की मिटटी झाड़ कर असुरगुरु को देखता है जो अपने 4 शिष्यों के साथ खड़े वयोम को हे देख रहे थे
वयोम .....उचित कहा आपने गलती तो मुझसे हुई है
पैर आप असुरु से आवर अपेक्षा भी क्या की जा सकती है
पीठ पीछे वॉर करना आप असुरु के रकत में होता है
शिष्य 5 ......योध में सब जायज होता है
योध में विजय हे महत्व रखती है न की नियम
वयोम एक बार फिर से अपने दोनों हाथो में अपनी जादुई सोर्ड लिया योध के लिया त्यार था
वयोम .....फिर तो कोई नियम भांग होने का मुझे भी मलाल नहीं होगा आ जाओ मरने से पहले तुम सब को भी जहनुम के द्वार तक साथ ले कर जाऊंगा
असुरगुरु ......उसकी कोई आव्सय्कता नहीं है हमें जो जानना है वो बता कर तुम मुक्त हो सकते हो
वयोम ......हाहाहाहा वयोम कभी अपने फ़राज़ से गाडरी नहीं करेगा तुम लोग जिसको तलाश में आये हो उस तक कभी नहीं पहुंच सकते हो आवर पहुंच भी गए तो उसके सामने तुम सब चींटी से ज्यादा कुछ नहीं
असुरगुरु ......जाओ इसे बंदी बना लो
असुरगुरु के आदेश पे चारो शिष्य एक साथ वयोम पे हमला करते है
असुरगुरु अपने शिष्य 1,2 को वयोम के सकती पास से मुक्त कर अपनी ऊर्जा सकती से उन्हें हील करते है
ीदार वयोम डेरी डेरी कमजोर पड़ने लगता है क्युकी एक तो दोनों शिष्य से अभी अभी योध किया ऊपर से असुरगुरु की परचंड ऊर्जा का वॉर झेलना कोई आसान काम नहीं था अभी एक साथ चार असुरो से योध कर रहा था
शिष्य 1,2 ठीक होते हे वयोम पे हमला सुरु कर देते है
वयोम बुरी तरह से जख्मी होने के बाद भी योध कर रहा था साथ हे उन्हें जकाँ दे रहा था
असुरगुरु .....अभी भी तुम्हारे पास समय है जिन क्यों अपने जान देना चाहते हो हमें जो जानना है वो बता दो हम असुरगुरु तुम्हे जीवन दान दे देंगे
वयोम ...... अपने महाराजा से द्रोह कर जीवन जीने से बेहतर है मैं तुम्हारे साथ योध करते हुए अपने प्राण त्याग दूँ
उनके लिया मैं सवयं अपना सीस उनके अपने तलवार से उतर उनके कदमो में अर्पित कृ तो भी काम है फिर तुम असुरो ने कैसे सोच लिया की मैं कुछ भी तुम्हे बताऊंगा वो भी केवल अपने प्राणो की रक्षा के लिया
शिष्य 1,2 ने वयोम के पैरो पे सोर्ड से भरपूर वॉर करता है जिस से वयोम लडख़ड़ा कर जमीं पे गिर जाता है
शिष्य 3,5 के वॉर से वयोम की सोर्ड उसके हाथो से चुत कर जमीं पे गिरते हे गायब होने जाती है
असुरगुरु .....तुम्हे बहुत से अवसर दिया पैर तुम अपने हाट पे आड़े हो तो यही सही इसका सर इसके सरीर से विलख कर दो
वयोम ....... हाहाहाहा
असुरगुरु .......मृत्यु को अपने सामने देख अपना मानसिक संतुलन तो नहीं खो दिया तुमने जो ऐसे अतःष ( हंस ) कर रहे हो
वयोम ......तुम सभी की मृत्यु का दृश्य देख रहा हूँ जब उन्हें मेरी मृत्यु का पता चलेगा तो सवयं महाकाल तुम सभी के प्राण लेने तुम्हारे सामने खड़े होंगे तुम सभी का काल बांके
असुरगुरु वयोम के मुँह से काल सबद सुनते हे उनके हाथ में पकड़ी सोर्ड जो वयोम की गर्दन उड़ने वाली थी
वयोम की गर्दन से टच होने से पहले हे रुक जाती है
तभी एक तेज गर्जना के साथ सूर्य वाइट ड्रैगन पे स्वर असुरगुरु द्वारा बना ऊर्जा घेरा खंडित करते हुए
वह पहुँचता है
असुरगुरु .........पुत्र काल
तभी वाइट ड्रैगन के मुँह से वाइट एनर्जी निकलती है जो सभी शिष्यों से जा टकराती है जिस से सभी वयोम से दूर जा कर गिरते है
सूर्य इस वक़्त काल रूप में था इस लिया असुरगुरु को काल को पहचानने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा
असुरगुरु काल को वाइट ड्रैगन पे सवार देख चिंता में पद जाते है
काल वाइट ड्रैगन के ऊपर से चलन लगा कर वयोम के सामने उतरता है
काल ......वयोम आप ठीक तो हो न
काल वयोम के रकत रंजीत सरीर को देख कर भी अगर अपने क्रोध को रोले रखा था तो केवल इस लिया की वो असुरगुरु थे मानसी के पिता
वयोम ...... मैं ठीक हूँ भाई आप यहाँ कैसे
तभी वह मानसी प्रकट होती है जिसको नजर सबसे पहले वयोम के लहूलुहान सरीर पे पड़ती है
मानसी .....भाई आपकी ये हालत कैसे हुई मुझे बताये मैं उसे जिन्दा नहीं छोड़ूंगी
मानसी की गुस्से भरी गुर्राहट सुन असुरगुरु का ध्यान भी मानसी पे जाता है
मानसी .....बाबा आप यहाँ पे
काल वयोम को अपने हीलिंग पावर से ठीक कर देता है
काल .....गुरुवार ये सब क्या है आपसे ये उम्मीद नहीं थी आपने वयोम पे हमला करवाया
मानसी सूर्य की बात सुन असुरगुरु को देखने लगती है
मानसी ......बाबा क्या ये सच कह रहे है आपने हे वयोम पे हमला करवाया है
वयोम ......मानसी संत हो जाओ इनकी कोई गलती नहीं है
मानसी .......आप संत रहो भाई मुझे बाबा से जानना है
असुरगुरु ......है पुत्री मानसी मेरे हे आदेश पे वयोम पे हमला हुआ था
मानसी ......वही तो मैं जानना चाहती हूँ बाबा आपने वयोम भाई पे हमला क्यों किया
असुरगुरु ......मैं कुछ समय से परतविलोक पे मौजूद ऊर्जा का पता कर रहा हम कुछ समय पहले मुझे यहाँ पे उपस्थित ऊर्जा का पता चला आज जब यहाँ पहुंच कर उस ऊर्जा के विषये पता कर रहा था तब मुझे वयोम की ऊर्जा का ाबश हुआ आवर हमने इसे कैद करने की कोशिश की यहाँ मौजूद ऊर्जा के मुख्या स्त्रोत के लिया
वयोम ...... तब इन्होने मुझे यहाँ कैद करने की कोशिश की यहाँ से निकलने के लिया मैंने हे इनके साथियो पे वॉर किया
इनमे इनकी गलती नहीं है मानसी
काल ......आप उन ऊर्जा स्थार्थ का पता क्यों कर रहे है गुरुवार
असुरगुरु ....... क्युकी मुझे महाकाल अंश का पता करना है जिनका जनम परतविलोक पे हुआ है
गुरुदेव के खुलाशे को सुन कर मानसी सूर्य को देखने लगती है आवर वयोम भी पैर दोनों की सोच अलग अलग थी
काल ...... आपको ज्ञात है की कोण है महाकाल का वो दिव्या अंश जिसे आप ढूंढ़ने का प्रयाश कर रहे है
असुरगुरु ....... मुझे उसका वास्तविक परिचय ज्ञात नहीं पैर बहुत जल्द ज्ञात हो जायेगा
सूर्य ........ मुझे आपसे एकांत में बात करनी है अपने शिष्यों को यहाँ से भेज दीजिये उनकी तामसिक ऊर्जा मेरे ड्रैगन को क्रोधित कर रही है
असुरगुरु के इसरा करते हे उनके शिष्य वह से गायब होने जाते है
सूर्य ...... आप नरकासुर के लिया ये सब कर रहे है न गुरुवार
असुरगुरु ......है पैर ये पूर्ण सत्य नहीं है पुत्र काल आवर मुझे क्षमा करना पुत्री तुम्हारे भाई पे हमला करने के लिया
मानसी ......क्या आप बाबा को सत्य बताएंगे
सूर्य ........ तुम क्या चाहती हो मानसी क्युकी ये सत्य जितना काम किसी को ज्ञात हो उतना सब के लिया अच्छा है
तुम्हारे बाबा को सत्य बता सकता हूँ किन्तु असुरगुरु को नहीं क्षमा करे गुरुवार
असुरगुरु ......पुत्री मानसी पुत्र काल उचित कह रहा है तुम्हारा बाबा होने के साथ साथ मुझपे असुरगुरु पढ़ की भी जिम्मेदारी है
पुत्री मानसी तुम्हारी ऊर्जा दिनपर्ती दिन भड़ती जा रही है
मानसी .....बाबा आप मेरे ड्रैगन से मिलेंगे
असुरगुरु .........तुम्हारा ड्रैगन आवर पुत्र काल तुम भी पहले से आदिक ऊर्जावान वह सक्तिसाली परतीत हो रहे हो मुझे
मानसी .......जी बाबा ब्लैक ड्रैगन सामने आओ
मानसी के कहते हे ब्लैक ड्रैगन वह सबके सामने आ जाता है
असुरगुरु ...... ये तो बहुत हे विशालकाय है
आवर दिव्या भी
सूर्य ......है गुरुवार मानसी इसकी दरक है अब आप समाज हे गए होंगे
असुरगुरु ....... है पुत्र काल पुत्री मानसी की ऊर्जा में आये बदलाव की बझा है ब्लैक ड्रैगन
सूर्य ......गुरुवार आपसे निवेदन है की फिर से आप किसी आवर ऊर्जा की तलाश में किसी पे हमला नहीं करेंगे क्युकी यहाँ जो भी ऊर्जा अंश मौजूद है वो सभी मुझसे जुड़े है
आपको कुछ भी जानना हो मुझसे सम्पर्क कीजिये वयोम मानसी का हे नहीं मेरे लिया भी बड़े भाई सामान है आपके स्तन पे कोई अन्य होता तो सायद अभी तक अपनी मृत्यु सेक्स पे लेता होता
आप जिस अंश की तलाश में है उस तक उसकी इच्छा के बिना नहीं पहुंच सकते है
असुरगुरु ........क्या तुम जानते हो पुत्र काल उसे
सूर्य .......बहुत अच्छी तरह से गुरुवार समय आने पे आपसे भी उसकी भेट होगी अब आज्ञा दीजिये
असुरगुरु .......उचित है पुत्र
सूर्य वयोम मानसी तीनो असुरगुरु को परनाम कर वह से चले जाते है
कुछ समय पश्चात असुरगुरु भी अपने मन में कई सवाल लिया वह से निकल जाते है ...........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स.........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........
वयोम ......नहीं सकती तुम यही रुको मैं जा कर देखता हूँ कुछ प्रॉब्लम हुई तो आप गुरुदेव से या सूर्य से सम्पर्क करना
अकेले कुछ भी करना खतरनाक हो सकता है
सकती .......तुम ठीक कह रहे हो वयोम इस तरह बिना सोचे समजे हमें कोई कार्य नहीं करना चाइये
वयोम ......ठीक है में जा रहा हूँ कुछ भी गलत लगा मैं आपको सेंकेड दूंगा
सकती ......ठीक है सावधान रहना
वयोम वह से निकल जाता है ज
जंगल की आवर खुद पे आने वाले खतरे से अनजान ............
अब आगे .........
सक्तिपुर ...... अभी सुबह के कोई 11 सादे 11 का समय रहा होगा तभी अजय के फ़ोन पे किसी अनजान no. से कॉल आता है
जिसे एक बार तो अजय इग्नोर कर देता है
रुक्मणि .....तुम्हारे किसी लफंगे दोस्त का हे कॉल होगा तुम्हे बुलाने के लिया
देखो अजय पहले तुम क्या करते थे क्या नहीं मैं नहीं जानती
आवर न जानना चाहती हूँ पर अब तुम कोई भी ऐसा वैसा गलत काम नहीं करोगे जिस से हम सब किसी प्रॉब्लम में पड़े समाज गए तुम
अपने इन आवारा दोस्तों से जितनी जल्दी दुरी बना लव इतना अच्छा है तुम्हारे लिया आवर हम सब के लिया आवर अब तो वो लोग हवेली भी आने लगे है है मुझे ये बिलकुल पसंद नहीं है यहाँ तुम्हारी दो जवान बहने भी है इतने में हे समाज जाओ तुम
अजय ....... माँ वो सब ऐसे नहीं है मैं जनता हूँ हवेली तो सूर्य भी आता है आप उसे तो कुछ नहीं कहती उल्टा उसे तो आप किसी रियासत के राजकुमार जैसा ट्रीट करती है
रुक्मणि ...... मुझे मत समजा मैंने तुमसे ज्यादा दुनिया देखि है किस की नजरो में क्या है
क्या नहीं मुझे किसी से जानने की जरुरत नहीं समजे तुम आवर रही बात सूर्य की वो बीटा है मेरा समजे तुम हमने जितना कुछ गलत करना चाहा सब जानते हुए भी उसने न केवल हमें माफ किया बल्कि अपनी गलतिया सुंदरने का मौका भी दिया
वो किसी रियासत का राजकुमार न होते हे हुए भी सबके दिलो पे राज करता है दिल का राजा है वो ुसपने उन लफंगे आवारा दोस्तों की बराबरी न करो समजे
अभी रुक्मणि कुछ आवर भाड़ पिलाती एक बार फिर से अजय का फ़ोन बज उठा जो रुक्मणि ने फ़ौरन अजय से ले कर कॉल पिछ किया
रुक्मणि .....कोण हो तुम क्यों बार बार कॉल कर रहे हो
सामने से .....चची जी मैं विक्रम बोल रहा हूँ
रुक्मणि .....विक्रम बीटा तुम कहा हो बीटा कितने दिन से तुम्हारी कोई खबर नहीं है
विक्रम .....संत हो जाइये चची जी वो मेरा एक्सीडेंट हो गया था
चची जी अभी भी हॉस्पिटल से डॉक्टर के no.se कॉल कर रहा हूँ
रुक्मणि ......बीटा तुम ठीक तो हो न मुझे बताओ कहा हो तुम मैं अभी आती हूँ वह
विक्रम ...... आप रहने दीजिये चची जी अजय को यहाँ भेज दीजिये पैसो के साथ
रुक्मणि ......तू है कहा बीटा
विक्रम .....छत्तीसगढ़ के एक हॉस्पिटल में हु चची जी अजय को आप भेज देना यहाँ आ कर वो इन no. पे कॉल कर लेगा अब रखता हूँ
विक्रम आगे कुछ सुने बिना हे कॉल कट कर देता है
रुक्मणि ....hello विक्रम बेटे विक्रम....
अजय .....माँ कॉल कट हो गया है
रुक्मणि ......जा तू त्यार होने जा मैं दीदी को बताती हूँ
अजय .....भाई ने मुझे अकेले को आने को कहा है
रुक्मणि .....जितना कहा है इतना कर
अजय अपने पेअर पटकते हुए वह से अपने कमरे की आवर निकल जाता है
रुक्मणि फ़ोन पे जो बात हुई विक्रम से सब गीता ठाकुर को बताती है
गीता ठाकुर उन्ही no. पे कॉल करती जो की वही के किसी वार्डबॉय का no. था कॉल कर जब अपनी तसली कर लेती है तो गीता ठाकुर भी त्यार होने लग जाती है
रुक्मणि ......दीदी सूर्य से इस बारे में बात करनी चाइये सायद....
गीता ठाकुर .....नहीं रुक्मणि वह समय जितना लगे पता नहीं ऐसे में सूर्य को परेशान करना ठीक नहीं
गीता ठाकुर वह अजय त्यार होने रुक्मणि को हवेली आवर गायत्री विधि का ख्याल रखने का बोल कर जैसलमेर के लिया निकल जाते है
गायत्री .....चची जी भाई यहाँ आ रहे उन्हें तो यहाँ के बारे में कुछ भी पता नहीं है
उन्हें जाने के बाद यहाँ का माहौल पूरा बदल दिया है उन्होंने
रुक्मणि ......उन्होंने किसने सूर्य ने हेहेहे तू क्यों चिंता करती है है मेरी बच्ची हम सब है न हम संभल लेंगे विक्रम को वैसे तुम दोनों का ये सब कब से चल रहा है
विधि .....क्या माँ क्या चल रहा है हम दोनों का कुछ भी तो नहीं
रुक्मणि ....ीदार आओ दोनों मेरे पास बैठो
गायत्री आवर विधि दोनों रुक्मणि के अगल बगल सोफे पे बेथ जाती है
रुक्मणि ......अब सच सच बताओ तुम दोनों का सूर्य के साथ क्या चाकर है आवर ये सब कबसे चल रहा है
रुक्मणि की बात सुन विधि आवर गायत्री दोनों की गर्दन जुख जाती है
रुक्मणि .....वैसे मुझे भी पसंद है सूर्य पैर तुम दोनों जानती hi न वो किसी आवर से प्यार करता है फिर भी तुम दोनों उसे हे दिल दे बैठी
गायत्री ......आप सब जानती है चची जी
रुक्मणि ......है मुझे तो पहले हे शक था पैर परषो जब तुम दोनों सूर्य को बहार छोड़ने गयी थी तब मैं भी तुम्हारे पीछे हे आ रही थी तभी तुम तीनो की बात मैंने सुनी सोचा तुम दोनों से बाद में बात करूंगी
विधि की आँखों से तो तप तप कर आंसू बहने लगते है
जिसका अंदाजा रुक्मणि को हो जाता है रुक्मणि अपनी बेटी के प्यार से आंसू पोंछती है आवर उसका सर अपनी गॉड में रख लेती है
रुक्मणि .....देखो तुम दोनों समझदार हो पड़ी लिखी हो जो भी करना सोच समाज कर करना तुम दोनों की वजह से सूर्य पे कोई ऊँगली उठी तो भूल जाउंगी की तुम दोनों मेरी बेटी हो
प्यार करना गलत नहीं है बेटी मैंने भी किया था पैर गलत इंसान से आवर ये समझने में मैंने बहुत देर कर दी मैं नहीं चाहती तुम दोनों को भी वही दिन देखने पड़े क्युकी सूर्य ने भले हे साफ न कहा हो पैर उसने ये साफ कर दिया की वो जीवन भर तुम दोनों का साथ नहीं दे सकता है
गायत्री ...... चची जी आपको बुरा नहीं लगा ये सब जान कर
रुक्मणि .....बुरा जरूर लगा बेटी पैर इस लिया नहीं की तुम दोनों सूर्य से प्यार करती हो बुरा लगा की तुम तीनो हमेशा के लिया एक नहीं हो सकते हो
विधि ..... माँ वो भी तो ठाकुर है उन्हें कोण रोक सकता है
रुक्मणि ......ठाकुर होने का मतलब ये तो नहीं है विधि बेटी की वो समाज को नजरअंदाज कर दे
मन की हम ठुकरा में अभी भी एक से अनेक विवाह परथन है पैर उसकी कोई मज़बूरी अवश्य रही होगी जिसके चलते वह जीवन भर साथ निभाने का वादा नहीं कर रहा आवर तुम दोनों भी उस से ऐसा कोई वादा न लेना जिस से उसे सुख हो या वो मजबूर हो जाये सूर्य बहुत अच्छा लड़का है उसके साथ दोस्ती करो उसे संजो तो तुम उसके मज़बूरी भी समाज जाओगे
अब जाओ अपने रूम में मैं भी थोड़ा आराम करती हूँ
गायत्री आवर विधि तो वह से चली जाती है
पैर रुक्मणि वही बैठे किन्ही भरे विचारो में खो जाती है उसे अपनी बेटियों की चिंता थी .......
परीलोक .....
शालिनी जी ......बीटा सूर्य तुम अपने फूफा जी से मिलने तो जा रहे हो पैर वह उनसे इस बारे में कोई बात नहीं करना आवर उन्हें यही ले आना हम सब यही है तो उनसे यही पे बात कर लेंगे इस बारे में
मेनका जी .....भाबी सा आप चिंता न करो मैं भी तो साथ जा रही हूँ वह
दादी जी .....इसी बात का तो दर है बेचारे जमाई सा की तुम्हारे सामने चलती हे कहा है
मुझे तो दर है कही तुम उन्हें हुकुम हे न सुना दो की.. .पायल प्रीती की सदी सूर्य से होगी यही मेरा फैसला है ....हहहहए
मेनका जी ...... अगर नहीं मने तो ये भी कर दूंगी माँ सा
शालिनी जी ......आप ऐसा कुछ नहीं करेंगी दीदी आप उनसे इस बारे में कोई भी बात नहीं करेंगी वह आवर जल्द से जल्द वह से आ जाये उन्हें ले कर के
मेनका जी ......अब संधान ने आर्डर दे हे दिया अपने समधी को तो मैं क्या कर सकती हूँ
सूर्य .....बुआ सा हमें निकलना चाइये पहले हमें सूर्यगढ़ भी जाना है
मेनका जी ....... ठीक है चलो पैर वो दोनों कहा है
पायल .....माँ हम यही है आवर हमारे साथ जुली भी चल रही है उसे भी परतविलोक का रहन सहन देखना है
सूर्य ......ठीक है पैर आप सायद भूल रही है
हम लोग पिकनिक पे नहीं जा रहे है वह ज्यादा समय नहीं रुकेंगे
शालिनी जी .....अगर उसका साथ जाने का दिल है तो ले कर जाने में क्या प्रॉब्लम है तुम्हे
पायल ......ये लो अब तो ममी जी की भी परमिशन मिल गई है
सूर्य ......ठीक है चलो फिर
सूर्य पायल प्रीती जुली मेनका जी सभी से विदा ले जल्दी लौटने का बोल सूर्यगढ़ के लिया गायब होने जाते है
सूर्यगढ़ ........
वयोम हवेली से गायब होने जंगल पंहुचा
वह वयोम अदृश्य रूप में हे असुरगुरु की तरफ भध रहा था
जैसे हे वयोम जंगल में पंहुचा उसका अहसास असुरगुरु को भी हो गया था
असुरगुरु ......सावधान किसी को हमारे यहाँ होने का पता चल चूका हेयर वह इस वक़्त हमारी आवर हे भध रहा है
असुरगुरु के सावधान करने पे सभी शिष्य सावधान हो जाते है
असुरगुरु ....... ये कोई सदर्न मानव नहीं है जो भी है वो जादुई सक्तियो से परिपूर्ण है हमें आगे का मार्ग इसी के जरिये ज्ञात होगा इस लिया इसको बंदी बनाना बहुत जरुरी है
असुरगुरु वह अपने 6 शिष्यों में से 2 को छोड़ कर खुद वह बाकि चार को गायब कर देते है
उदार वयं इनकी असुर सकती को सीन्स करते हुए इनसे कुछ दुरी पे आ रुकता है अदृश्य रूप में
वयोम ......ये क्या यहाँ तो केवल 2 हे लोग है सकती ने तो यहाँ आदिक लोगो के होने का अंदेशा था
कही ये इनकी कोई चल तो नहीं है मुझे कुछ पल यही प्रतीक्षा करनी होगी जब तक पूरी तरह से आस्वस्त न होने जाऊ की ये कोई जाल नहीं है
वही असुरगुरु को वयोम की ऊर्जा से ज्ञात हो जाता है की जो भी है वह अदृश्य रूप में उनके दोनों शिष्यों पे नजर रख रहा है
( असुरगुरु ....... अगर ऐसे हे उसे कैद करने की कोशिश की तो सायद ये यहाँ से बीच कर निकल सकता है पहले मुझे यहाँ इसे घेरे में बंदना होगा ताकि ये यहाँ से मुक्त न होने सके )
असुरगुरु अदृश्य रूप में हे वह अपने साथ साथ सभी को वयोम को भी अपने मंत्र सकती से उत्पन तेरे में बंद लेता है
वयोम ......नहीं ये नहीं हो सकता ये एक जाल है आवर मैं मूर्खो के भरी इसमें फर्श चूका हूँ अब सकती को कोई संकेत भी नहीं भेज सकता मुझे किसी भी तरह यहाँ से निकलना होगा
वयोम अपना अदृश्य रूप त्याग दोनों असुर शिष्यों के सामने प्रकट होते जाता है
वयोम .....तुम असुर यहाँ क्या कर रहे हो
शिष्य 1......ओह्ह तो तुम हो वो जिन जिसको ऊर्जा यहाँ मौजूद थी आवर तुम्ही से सावधान होने को कह रहे थे गुरुदेव
शिष्य 2 ......अब कोई फायदा नहीं तुम यहाँ कैद हो चुके हो यहाँ से निकलना संभव नहीं है
तभी वयोम तेजी से शिष्य 2 के सीने पे अपने जादुई सोर्ड से वॉर करता है जिस से एक गहरा जखम शिष्य 2 के सीने पे बन जाता है
वयोम ......जिन हूँ पैर इतना भी कमजोर नहीं
वही अपने साथी पे वॉर होता देख बाकि चारो शिष्य आगे बढे पैर असुरगुरु के इसारे पे वही रुक जाते है
असुरगुरु ......संत रहो आवर जो हो रहा है उसे देखो मून हो कर
शिष्य 5 ......पैर गुरुदेव वो
असुरगुरु ......ये केवल एक मोहरा मात्रा है यहाँ जो ऊर्जा अंश मिले थे उन्ही में से एक
अपने साथी को गायगायल देख शिष्य 1 अपनी सोर्ड ले वयोम से टकरा जाता है
व्ायोम कोई सदर्न योद्धा नहीं था जो ऐसे हे हर मान जाता
वयोम दोनों हाथो में सोर्ड ले दोनों असुरो से योध करने लगता है
डेरी डेरी वयोम दोनों असुरगुरु शिष्य पे हावी होने लगता है
दोनों के सरीर से जगह जगह से रकत बाह रहा था
वयोम द्वारा दिए जखम जादुई सोर्ड के थे जिसके चलते जखम अपने आप भर नहीं रहे थे
वयोम ......तुम दोनों अच्छे असुर्योधा हो पैर मेरे सामने ज्यादा टिक नहीं सकते हो तलवारबाज़ी बहुत हुई अब थोड़ा मेरी चुटकी का मज़ा भी चख लो
कहने के साथ हे वयोम ने चुटकी बजे आवर वयोम के के हाथो में 2 रशिया प्रकट हुई जो की वाइट ऊर्जा से परिपूर्ण थी
दोनों असुरसीष्य कुछ समाज पेज उस से पहले हे रशिया दोनों के सरीर को अपने बंदन में बंद कर उन्हें पीड़ा पहुंचने लगी
यही वयोम से भी गलती हो गई अपने सामने 2 असुरो को बंदी देख अपना ध्यान भटकने से वयोम भी खुद को रोक नहीं पाया तभी
वयोम की पीठ पे एक तेज ऊर्जा का प्रहार हुआ जो की असुरगुरु ने हे किया था
वयोम असुरगुरु की ऊर्जा के प्रहार से सामने के विरीक्षा को तोड़ते हुए सामने की चेतन से जा टकराया
असुरगुरु ......तुम सचमुच अच्छे जिनयोधा हो पैर हर योद्धा की एक कमजोरी होती है
तुमने समय से पहले हे सवयं को विजयी घोषित कर योध निति का पहला नियम भूल कर अपना ध्यान योध से हटा दिया
वयं खड़ा हो कर अपने सरीर की मिटटी झाड़ कर असुरगुरु को देखता है जो अपने 4 शिष्यों के साथ खड़े वयोम को हे देख रहे थे
वयोम .....उचित कहा आपने गलती तो मुझसे हुई है
पैर आप असुरु से आवर अपेक्षा भी क्या की जा सकती है
पीठ पीछे वॉर करना आप असुरु के रकत में होता है
शिष्य 5 ......योध में सब जायज होता है
योध में विजय हे महत्व रखती है न की नियम
वयोम एक बार फिर से अपने दोनों हाथो में अपनी जादुई सोर्ड लिया योध के लिया त्यार था
वयोम .....फिर तो कोई नियम भांग होने का मुझे भी मलाल नहीं होगा आ जाओ मरने से पहले तुम सब को भी जहनुम के द्वार तक साथ ले कर जाऊंगा
असुरगुरु ......उसकी कोई आव्सय्कता नहीं है हमें जो जानना है वो बता कर तुम मुक्त हो सकते हो
वयोम ......हाहाहाहा वयोम कभी अपने फ़राज़ से गाडरी नहीं करेगा तुम लोग जिसको तलाश में आये हो उस तक कभी नहीं पहुंच सकते हो आवर पहुंच भी गए तो उसके सामने तुम सब चींटी से ज्यादा कुछ नहीं
असुरगुरु ......जाओ इसे बंदी बना लो
असुरगुरु के आदेश पे चारो शिष्य एक साथ वयोम पे हमला करते है
असुरगुरु अपने शिष्य 1,2 को वयोम के सकती पास से मुक्त कर अपनी ऊर्जा सकती से उन्हें हील करते है
ीदार वयोम डेरी डेरी कमजोर पड़ने लगता है क्युकी एक तो दोनों शिष्य से अभी अभी योध किया ऊपर से असुरगुरु की परचंड ऊर्जा का वॉर झेलना कोई आसान काम नहीं था अभी एक साथ चार असुरो से योध कर रहा था
शिष्य 1,2 ठीक होते हे वयोम पे हमला सुरु कर देते है
वयोम बुरी तरह से जख्मी होने के बाद भी योध कर रहा था साथ हे उन्हें जकाँ दे रहा था
असुरगुरु .....अभी भी तुम्हारे पास समय है जिन क्यों अपने जान देना चाहते हो हमें जो जानना है वो बता दो हम असुरगुरु तुम्हे जीवन दान दे देंगे
वयोम ...... अपने महाराजा से द्रोह कर जीवन जीने से बेहतर है मैं तुम्हारे साथ योध करते हुए अपने प्राण त्याग दूँ
उनके लिया मैं सवयं अपना सीस उनके अपने तलवार से उतर उनके कदमो में अर्पित कृ तो भी काम है फिर तुम असुरो ने कैसे सोच लिया की मैं कुछ भी तुम्हे बताऊंगा वो भी केवल अपने प्राणो की रक्षा के लिया
शिष्य 1,2 ने वयोम के पैरो पे सोर्ड से भरपूर वॉर करता है जिस से वयोम लडख़ड़ा कर जमीं पे गिर जाता है
शिष्य 3,5 के वॉर से वयोम की सोर्ड उसके हाथो से चुत कर जमीं पे गिरते हे गायब होने जाती है
असुरगुरु .....तुम्हे बहुत से अवसर दिया पैर तुम अपने हाट पे आड़े हो तो यही सही इसका सर इसके सरीर से विलख कर दो
वयोम ....... हाहाहाहा
असुरगुरु .......मृत्यु को अपने सामने देख अपना मानसिक संतुलन तो नहीं खो दिया तुमने जो ऐसे अतःष ( हंस ) कर रहे हो
वयोम ......तुम सभी की मृत्यु का दृश्य देख रहा हूँ जब उन्हें मेरी मृत्यु का पता चलेगा तो सवयं महाकाल तुम सभी के प्राण लेने तुम्हारे सामने खड़े होंगे तुम सभी का काल बांके
असुरगुरु वयोम के मुँह से काल सबद सुनते हे उनके हाथ में पकड़ी सोर्ड जो वयोम की गर्दन उड़ने वाली थी
वयोम की गर्दन से टच होने से पहले हे रुक जाती है
तभी एक तेज गर्जना के साथ सूर्य वाइट ड्रैगन पे स्वर असुरगुरु द्वारा बना ऊर्जा घेरा खंडित करते हुए
वह पहुँचता है
असुरगुरु .........पुत्र काल
तभी वाइट ड्रैगन के मुँह से वाइट एनर्जी निकलती है जो सभी शिष्यों से जा टकराती है जिस से सभी वयोम से दूर जा कर गिरते है
सूर्य इस वक़्त काल रूप में था इस लिया असुरगुरु को काल को पहचानने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा
असुरगुरु काल को वाइट ड्रैगन पे सवार देख चिंता में पद जाते है
काल वाइट ड्रैगन के ऊपर से चलन लगा कर वयोम के सामने उतरता है
काल ......वयोम आप ठीक तो हो न
काल वयोम के रकत रंजीत सरीर को देख कर भी अगर अपने क्रोध को रोले रखा था तो केवल इस लिया की वो असुरगुरु थे मानसी के पिता
वयोम ...... मैं ठीक हूँ भाई आप यहाँ कैसे
तभी वह मानसी प्रकट होती है जिसको नजर सबसे पहले वयोम के लहूलुहान सरीर पे पड़ती है
मानसी .....भाई आपकी ये हालत कैसे हुई मुझे बताये मैं उसे जिन्दा नहीं छोड़ूंगी
मानसी की गुस्से भरी गुर्राहट सुन असुरगुरु का ध्यान भी मानसी पे जाता है
मानसी .....बाबा आप यहाँ पे
काल वयोम को अपने हीलिंग पावर से ठीक कर देता है
काल .....गुरुवार ये सब क्या है आपसे ये उम्मीद नहीं थी आपने वयोम पे हमला करवाया
मानसी सूर्य की बात सुन असुरगुरु को देखने लगती है
मानसी ......बाबा क्या ये सच कह रहे है आपने हे वयोम पे हमला करवाया है
वयोम ......मानसी संत हो जाओ इनकी कोई गलती नहीं है
मानसी .......आप संत रहो भाई मुझे बाबा से जानना है
असुरगुरु ......है पुत्री मानसी मेरे हे आदेश पे वयोम पे हमला हुआ था
मानसी ......वही तो मैं जानना चाहती हूँ बाबा आपने वयोम भाई पे हमला क्यों किया
असुरगुरु ......मैं कुछ समय से परतविलोक पे मौजूद ऊर्जा का पता कर रहा हम कुछ समय पहले मुझे यहाँ पे उपस्थित ऊर्जा का पता चला आज जब यहाँ पहुंच कर उस ऊर्जा के विषये पता कर रहा था तब मुझे वयोम की ऊर्जा का ाबश हुआ आवर हमने इसे कैद करने की कोशिश की यहाँ मौजूद ऊर्जा के मुख्या स्त्रोत के लिया
वयोम ...... तब इन्होने मुझे यहाँ कैद करने की कोशिश की यहाँ से निकलने के लिया मैंने हे इनके साथियो पे वॉर किया
इनमे इनकी गलती नहीं है मानसी
काल ......आप उन ऊर्जा स्थार्थ का पता क्यों कर रहे है गुरुवार
असुरगुरु ....... क्युकी मुझे महाकाल अंश का पता करना है जिनका जनम परतविलोक पे हुआ है
गुरुदेव के खुलाशे को सुन कर मानसी सूर्य को देखने लगती है आवर वयोम भी पैर दोनों की सोच अलग अलग थी
काल ...... आपको ज्ञात है की कोण है महाकाल का वो दिव्या अंश जिसे आप ढूंढ़ने का प्रयाश कर रहे है
असुरगुरु ....... मुझे उसका वास्तविक परिचय ज्ञात नहीं पैर बहुत जल्द ज्ञात हो जायेगा
सूर्य ........ मुझे आपसे एकांत में बात करनी है अपने शिष्यों को यहाँ से भेज दीजिये उनकी तामसिक ऊर्जा मेरे ड्रैगन को क्रोधित कर रही है
असुरगुरु के इसरा करते हे उनके शिष्य वह से गायब होने जाते है
सूर्य ...... आप नरकासुर के लिया ये सब कर रहे है न गुरुवार
असुरगुरु ......है पैर ये पूर्ण सत्य नहीं है पुत्र काल आवर मुझे क्षमा करना पुत्री तुम्हारे भाई पे हमला करने के लिया
मानसी ......क्या आप बाबा को सत्य बताएंगे
सूर्य ........ तुम क्या चाहती हो मानसी क्युकी ये सत्य जितना काम किसी को ज्ञात हो उतना सब के लिया अच्छा है
तुम्हारे बाबा को सत्य बता सकता हूँ किन्तु असुरगुरु को नहीं क्षमा करे गुरुवार
असुरगुरु ......पुत्री मानसी पुत्र काल उचित कह रहा है तुम्हारा बाबा होने के साथ साथ मुझपे असुरगुरु पढ़ की भी जिम्मेदारी है
पुत्री मानसी तुम्हारी ऊर्जा दिनपर्ती दिन भड़ती जा रही है
मानसी .....बाबा आप मेरे ड्रैगन से मिलेंगे
असुरगुरु .........तुम्हारा ड्रैगन आवर पुत्र काल तुम भी पहले से आदिक ऊर्जावान वह सक्तिसाली परतीत हो रहे हो मुझे
मानसी .......जी बाबा ब्लैक ड्रैगन सामने आओ
मानसी के कहते हे ब्लैक ड्रैगन वह सबके सामने आ जाता है
असुरगुरु ...... ये तो बहुत हे विशालकाय है
आवर दिव्या भी
सूर्य ......है गुरुवार मानसी इसकी दरक है अब आप समाज हे गए होंगे
असुरगुरु ....... है पुत्र काल पुत्री मानसी की ऊर्जा में आये बदलाव की बझा है ब्लैक ड्रैगन
सूर्य ......गुरुवार आपसे निवेदन है की फिर से आप किसी आवर ऊर्जा की तलाश में किसी पे हमला नहीं करेंगे क्युकी यहाँ जो भी ऊर्जा अंश मौजूद है वो सभी मुझसे जुड़े है
आपको कुछ भी जानना हो मुझसे सम्पर्क कीजिये वयोम मानसी का हे नहीं मेरे लिया भी बड़े भाई सामान है आपके स्तन पे कोई अन्य होता तो सायद अभी तक अपनी मृत्यु सेक्स पे लेता होता
आप जिस अंश की तलाश में है उस तक उसकी इच्छा के बिना नहीं पहुंच सकते है
असुरगुरु ........क्या तुम जानते हो पुत्र काल उसे
सूर्य .......बहुत अच्छी तरह से गुरुवार समय आने पे आपसे भी उसकी भेट होगी अब आज्ञा दीजिये
असुरगुरु .......उचित है पुत्र
सूर्य वयोम मानसी तीनो असुरगुरु को परनाम कर वह से चले जाते है
कुछ समय पश्चात असुरगुरु भी अपने मन में कई सवाल लिया वह से निकल जाते है ...........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स.........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........


















