- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 36,859
अपडेट. 115
कोमल .........अपनी राधा से पूछो वही हटाएगी मैं जा रही हूँ शालिनी मम्मी के साथ जाना है आपको सूरजगढ़ तो त्यार हो कर निचे आओ
कोमल तो वह से निकल गई
सूर्य .....ये दी क्या बोल रही थी
राधा .....सही तो बोल रही थी तुम्हारा हाथ मेरे टॉप में मेरे सीने पे था उसने सं देख लिया ऊपर से रूम भी खुला था वो तो अच्छा है कोई आवर नहीं आया
सूर्य .........ओह सहित ये क्या कर दिया अब दी का सामना कैसे करुगा मैं
राधा ......तब तो बड़े मज़े ले रहे थे नींद में अब करो भरपाई ........
अब आगे .......
असुरलोक ......
कंटकासुर अभी अपनी पत्नी के साथ सेक्स कर रहा था बड़े हे दुहदार तरीके से जिसमे उसकी पत्नी पूरा सहयोग कर रही थी
वातापी ......आआअह्ह्ह्ह स्वामी आवर जोर से अह्ह्ह बर्षो बाद आपके संग सम्भोग सुख प्राप्त कर हम तृप्त हो जाना चाहते है स्वामी
कंटकासुर बड़ी बेहरहमी से वातापी को घोड़ी बनाये पीसतिओं के भाटी वातापी की छूट की धजिया ुधा रहा था

नगीना ......देखो विशुद्धि वातापी आवर ब्रता कंटकासुर सम्भोग किर्या का आनंद ले रहे है
विशुद्धि ......हम कर हे क्या सकते है नगीना हम जब भी किसी के समीप जाते है सामने से असुर भाग जाते है
नगीना .......लगता है जब तक पिता श्री आज़ाद नहीं होते हमारा विवाह भी संभव नहीं है
नगीना .......यहाँ बरताओ को सम्भोग करते देख सरीर में तीव्रता से सम्भोग की इच्छा होती है
कंटकासुर वातापी के छूट से अपना लम्बा तगड़ा लैंड निकल कर लेट जाता है
कंटकासुर का भयंकर लैंड देख विसुद्धि आवर नगीना अपनी छूट को सहलाये बिना न रुक सकीय
( वातापी .....तो दोनों चुड़ैल यही पे चुप कर देख रही है अब आएगा मज़ा तुम दोनों को बहुत मज़ा आता है न मेरे स्वामी की बुराई कर उनका मखुल (मजाक ) ुधा कर आज तुम दोनों की छूट की खुजली न बढ़ा दी तो वातापी मेरा नाम नहीं एक दिन मेरे सामने तुम दोनों अपने इस भाई से सम्भोग करोगी )
कंटकासुर .....कहा खोये हो वातापी हम प्रतीक्षा कर रहे है
वातापी आगे भाड़ कंटकासुर के विशाल लिंग पे अपनी खुली हुए छूट तीखा कर बेथ जाती है सरदारस्य हुआ पूरा लैंड 2 हे जातको में वातापी अपनी छूट में निगल लेती है
( नगीना ....कस यहाँ वातापी के स्थान पे ब्रता कंटकासुर मुझे भोग रहे होते उम्म्म्महहह कितना आनंदमयी होगा वो पल जब ब्रता कंटकासुर का विशाल लिंग मेरा को मर्या भांग कर मुझे सवर्गीय सम्भोग आनद प्रदान करेंगे )

वातापी ......सवामी आप क्रोधित न हो तो आपसे हम कुछ पूछे
कंटकासुरी अपने लिंग को वातापी की योनिकुंड में अंदर बहार करते हुए वातापी की बड़ी बड़ी चुचुईयो को मसलते हुए
कंटकासुर ......हम आप पे कभी क्रोधित नहीं होते वातापी पूछो क्या पूछना है आपको
वातापी .....आप सम्भोग किये बिना रह नहीं सकते है फिर आप इतने लम्बे समय परतविलोक पे कैसे रहे
कंटकासुर .....हम वह भी अपनी इच्छा अनुसार सम्भोग करते है वह महिलाओ की आवर कन्याओ की कोई कमी नहीं है जब हमारी इच्छा हो हम सम्भोग करते है
वातापी .........आपको नगीना आवर विसुद्धि को देख सम्भोग करने की इच्छा होती है क्या
कंटकासुर .....ये कैसा वायरत अनर्गल वार्तालाप कर रही हो वो बहने है हमारी
वातापी ....हम्म्म समाज गई स्वामी
कंटकासुर ....क्या समाज गई तुम
वातापी .....यही की आप अपनी दोनों वाहनों को भी भोगना चाहते है
( वातापी आवर कंटकासुर के बाते दोनों बहने बड़े हे ध्यान से सुन रही थी )
कंटकासुर ......ऐसे मूर्खतापूर्ण बाते न करो हमें कब कहा
वातापी अपने लम्बे नाखुनो से कंटकासुर की गांड को कुरेदने लगती है जिस से कंटकासुर आवर तीव्रता से वातापी को चिढ़ने लगता है
वातापी .....अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे हे स्वामी अपनी परचंड लिंग से हमारी योनि में प्रहार कीजिये
इस वक़्त हम नहीं हमारे स्थान पे आपकी बहन नगीना से आप सम्भोग कर रहे है उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह
वातापी की बात सुन कंटकासुर बड़ी बेहरहमी से वातापी की छूट मरते हुए उसके बड़ी बड़ी चूचियों को काटने लगता है जिनसे हल्का हलके रकत भी कंटकासुर के मुँह में जाने लगता है
कंटकासुर .......अह्ह्ह्हह नगीना मेरी बहन जब से तुम्हारी जवानी की खुसबू ले है मैं तुम्हे भोगना चाहता हूँ
नगीना( वातापी ) .......आवर जोरो से काटिये अपनी नगीना के वक्षो को ब्रता कंटकासुर हम भी आपको भोगने को तड़प रहे है भारत श्री
कंटकासुर अपनी पत्नी के स्थान पे अपनी बहन नगीना को देख रहा था
1 गुंथे से ऊपर कंटकासुर से पूरी जान लगा कर वातापी को नगीना समाज कर इस कदर छोड़ा की वातापी की फटी हुई छूट से खून बहने लगा जैसे
वहीँ नगीना आवर विसुद्धि कंटकासुर आवर वातापी की सम्भोग आवर अपनी पार्टी अपने भाई का पागलपन देख न जाने कितनी बार बिना छूट को चूहे हे पानी बहती रही जब कंटकासुर का सम्भोग शास्त्रार्थ ख़तम हुआ तो दोना वह से अपने कक्ष में लौट गई
कंटकासुर .......हमें माफ कर दे वातापी हमने आपकी योनि ( छूट ) आवर वक्षो ( चूचियों ) को जख्मी कर दिया
वातापी ......आप चिंतित न हो स्वामी हम अभी खुद को ठीक कर लेंगे
वातापी अपनी माया का प्रयोग कर कंटकासुर के सामने भरम पैदा करती है जिस से कंटकासुर को लगता है की वातापी पूर्ण रूप के ठीक हो गई
वातापी .....देखिये सभी जखम भर चुके है
अब बताये क्या सत्य में आप अपनी बहनो को भोगना चाहते है
कंटकासुर ........है ये सत्य है जब हमने उन्हें वर्षो बाद देख तो हम उनकी तरफ भोगने के लिया आकर्षित होने से खुद को रोक नहीं पाए हमें माफ कर दे हम आपसे हे प्रेम करते है किन्तु हम सम्भोग से दूर भी नहीं रह सकते है
वातापी ......फिर हम आपसे कुछ मांगे आप मना तो नहीं करेंगे न हमें
कंटकासुर .......सम्भोग को छोड़
आप कुछ भी मांग लीजिये हम सम्भोग करना बंद नहीं कर सकते है
वातापी ......हम ऐसा कुछ नहीं मांगेगे जिसके चलते आपको कोई परेशानी हो हम बस आपको ये कार्य करने को हे कह रहे है स्वामी ******* ******* ******
******* ******** ***********
कंटकासुर .......क्या मतलब आप जो कह रही है वो सत्य नहीं हो सकता है
वातापी .......यही सत्य है स्वामी आप भले हे न मनो पैर सत्य चुप नहीं सकता है
वातापी सामने दीवार पे कुछ दृश्य चला कर कंटकासुर को दिखती है जिसने देख कंटकासुर दुखी हो कटा है
कंटकासुर ......हमें माफ कर दे वातापी हम आपकी पीड़ा को समाज हे नहीं पाए अब जैसा आप कहेंगी हम वैसा हे करेंगे
वातापी ......किन्तु किसी आवर को इसका पता नहीं चलना चाइये स्वामी
अभी ये लोग बात कर हे रहे थे की किसी ने इनके दूर को नॉक किया
वातापी ....हम बाद में इस विषय पे चर्चा करेंगे स्वामी आप सबके साथ पहले जैसा हे व्यव्हार कीजिये
कंटकासुर ........हम्म्म हम चलते है माता श्री ने बुलाया है.......
सूरजगढ़ ...........
नानी जी .....बेटी प्रिय ये आज इन दोनों को क्या हुआ है
प्रिय ......क्या हुआ माँ सा किसको क्या हुआ है
प्रिय अपने रूम से बहार निकल कर अपनी सास से पूछती है
नाना जी ........देखो तो जो कभी खुद की चाय कॉफ़ी तक नहीं बनती है वो दोनों किचन में कब से लगी हुई है पता नहीं क्या बना रही है
मां जी ...... मैं देखती हूँ माँ सा
इनका पता नहीं किचन का क्या हॉल किया होगा इन दोनों ने
प्रिय ममी जी जब किचन में पहुंची तो किरण आवर राधा खाना बनाने के सामान की लिस्ट त्यार कर रही थी
प्रिय ममी जी ......तुम दोनी किचन में क्या कर रही हो
सपना ....मम्मी आज खाना हम दोनों बनाएगी आप बहार जाये
सन्ति ममी जी ......देखो न जीजी इन दोनों ने मुझे भी किचन से बहार कर दिया है
प्रिय ममी जी सपना के हाथ से लिस्ट ले कर देखती है
प्रिय ममी जी ......आज कोई स्पेशल गेस्ट आ रहे है क्या घर पे तुम दोनों के
अपनी मम्मी की बात सुन सपना आवर किरण एक दूसरे को देखने लगती है
प्रिय ममी जी .....मुझे बताओ क्या क्या बुनना है मैं बना देती हूँ
किरण ......नहीं मम्मी आज का खाना हम हे बनाएगी प्लेसेस आप कुछ नहीं कहेंगी
सन्ति ममी जी ....पैर तुम दोनों को खाना कहा बनाना आता है
kiran........wo आप हम पे छोड़ दे मम्मी हम बना लेंगे
प्रिय ममी जी .....ठीक है स्वीटी मुझे यकीं है तुम दोनों अच्छा हे खाना बनाओगी आल थे बेस्ट चलो छोटी इनको करने दो जो ये कर रही है
किरण ......थैंक यू मम्मी प्लेसेस ये सामान मंगवा दीजिये
प्रिय ममी जी लिस्ट ले कर बहार जाती है आवर नौकर से बोल सामान लेन को कहती है
नानी जी बहार नाना जी के पास चली जाती है
नानी जी .....पता है आपको आज आपकी दोनों पोटिया ने क्या किया है
नाना जी ....... अब क्या कर दिया उन दोनों ने देखो तुम उनपे गुस्सा नहीं करोगी जब देखो तब उनपे भड़कती रहती हो
नानी जी ........मैं कहा गुस्सा करती हूँ आप बे बझा हे पीछे पड़े रहते हो
नाना जी ........क्या किया उन दोनों ने
नानी ji......aaj उन दोनों ने अपनी अपनी माँ की किचन से बहार कर दिया ये बोल कर के की आज का खाना वो दोनों बनाएगी
नाना जी ........तो क्या हुआ वो मेरी पोटिया है कुछ भी कर सकती है
नानी जी ........पता है आपकी पोटिया है इस लिया हे उन्हें सर पे बैठा रखा है आपने
तभी वह हवेली में एक कार आ कर रिक्ति है
नानी जी .......ये किसकी कार है जी कोण आया है
नाना जी ......ये तो जमाई सा शिव की कार है
तभी पिछले दूर से कार में से कोमल आवर शालिनी उतरती है
आवर अगला दूर खोल सूर्य बहार निकलता है
नानी जी ......ये तो मेरी बची शालू है जी
नाना जी .......मेरा शेर आया है साथ में
नाना जी आवर नानी जी दोनों हे कार की तरफ भाड़ जाते है
सूर्य आगे भाड़ अपनी नानी जी के पेअर चउथा है
सूर्य .....परनाम नानी जी कैसे है आप
नानी जी ........जीते रहो बीटा सूर्य
सूर्य .....परनाम ननु कैसे है आप लगता है नानी जी अभी भी आपकी क्लास लगा रही है
नाना जी .......सुन लिया ठकुराइन अब तो ये भी मेरी टंगे कीच रहा है
कोमल आगे भाड़ नाना जी आवर नानी जी के पेअर चुटी है
नाना जी .....कैसे है मेरी बच्ची कोमल
कमल ....मैं ठीक हूँ नाना जी आप कैसे है
नाना जी ......सब अच्छा है बेटी चलो अंदर चलते है
शालिनी ......बाउजी बाकि सब कहा है
नानी जी .......तुम्हारी दोनों भाबी अंदर है आवर भतीजियां भी बाकि तुम्हे पता हे है
नाना जी ......हवेली में सब कैसे है बेटी
शालिनी ......हेहेहे बाउजी भी अच्छे है पापा कल साम को आएंगे वो आपको याद कर रहे थे
पाछो लोग अंदर आ जाते है
कोमल .........नानी जी सपना दी आवर किरण कहा है
कोमल की आवाज सुन किरण बहार निकलती है
सामने सूर्य को खड़ा देख वही किरण के पेअर खुद बा खुद रुक जाते है
जैसे हे शालिनी की नजर किरण पे पड़ी वह उस तरफ भाड़ गई जब पास से देखा तो कपड़ो पे हल्दी चिली पाउडर आवर आता लगा हुआ था जिसे देखते हे शालिनी के चेहरे के भाव बदलने लगे
शालिनी ..........ये क्या है माँ पापा घर में नौकर नहीं है क्या जो आपने मेरी बच्ची को किचन में लगा रखा है
शालिनी अपना रुमाल निकल किरण का चेहरा साफ करती है
नानी जी ......बेटी इन्होने जिद करि की आज वही खाना बनाएगी
शालिनी ......आवर आपने इनको इजाजत दे दी क्यों यही न
आवर आप दोनी भाबी सा आपने भी नहीं रोका इनको स्वीटी सपना जावा जा कर कपडे बदल कर आओ
किरण .....बुआ सा आप गुस्सा मत कीजिये मैंने आवर दीदी ने हे जिद की थी की आज का डिनर हम त्यार करेंगे बस थोड़ा सा रहा है प्लेसेस उसके बाद हम कपडे भी बदल लेंगे
शालिनी ......चुप चाप जाओ दोनों आवर कहा कर कपडे बदल कर आओ कोमल बेटी ेंजो ले कर जाओ
कोमल .....जी मम्मी
सूर्य तो बस अपनी माँ को देखे जा रहा था सूर्य को उनपे बहुत प्यार आ रहा था जिस तरह किरण के लिया फ़िक्र आवर प्यार दिखाया
कोमल किरण सपना तो निकल गई रूम
प्रिय ममी जी .....शालू अब गुस्सा थूक भी दे उन्होंने ये सब तुम्हारे लिया किया दन्त हमें पद गई
शालिनी .....भाबी सा जो भी हो पैर आपने उनको अकेले तो ये नहीं करने देना चाइये था
नाना जी .....शालू अब छोड़ इनको बेटी प्रिय जाओ आवर बाकि खाना त्यार करो चल सूर्य तुम मेरे साथ चल
सूर्य अपने नाना जी के साथ बहार निकल जाता है
अभी खाना खाने में वक़्त था थोड़ा
सूर्य .....नाना जी दोनों मां जी घर कब आते है
नानी जी .....बीटा संजय तो रोज घर आ जाता है पैर जोरावर कभी कभी हे आता है
सूर्य ......आपको दादू बहुत याद कर रहे थे
नाना जी ......कोई नहीं कल आ तो रहा हे है मेरा दोस्त आवर न भी आता तो मैं चला जाऊंगा
कुछ देर बहार टहलने के बाद सूर्य आवर नाना जी घर लौट आते है
संजय मां जी भी घर लौट आये थे
सबने मिल कर खाना खाया
सूर्य .....स्वीटी खाना बहुत हे अच्छा बना है
शालिनी .......है बेटी खाना वाकई में बहुत स्वादिस्ट है खाश कर ये पालख पनीर गोभी के पराठे यहाँ पे ज्यादा तर डिश सूर्य को बहुत पसंद है
नाना जी ......ये तो सच कहा बेटी तुमने आज पहले बार मेरी पोतियो ने किचन में पेअर रखा आवर पहली बार में हे सबका दिल खुश कर दिया
प्रिय ममी जी ....बाउजी खाना जो स्पेशल बनाया है दोनों तो स्वादिस्ट तो बनना हे था क्यों स्वीटी सपना तुम दोनों को पहले से पता था न की शालू आवर सूर्य यहाँ आ रहे है हमें क्यों नहीं बताया
शालिनी ......उन्हें मैंने हे मना किया था भाबी सा
नानी जी ........अब समाज आई बात तो ये सब तयारी तुम्हारे स्वागत में हो रही थी
शालिनी .....आपको कोई शक है क्या माँ सा दोनों मेरी बछिया है आवर आप इनपे गुस्सा कारनामे काम करो बुढ़ापे में बप हाई हो जायेगा आपका
नानी जी ......मैं कहा कुछ बोलती हूँ इनको
नानी की बात सुन सबकी हाशि चुत जाती है ........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............
कोमल .........अपनी राधा से पूछो वही हटाएगी मैं जा रही हूँ शालिनी मम्मी के साथ जाना है आपको सूरजगढ़ तो त्यार हो कर निचे आओ
कोमल तो वह से निकल गई
सूर्य .....ये दी क्या बोल रही थी
राधा .....सही तो बोल रही थी तुम्हारा हाथ मेरे टॉप में मेरे सीने पे था उसने सं देख लिया ऊपर से रूम भी खुला था वो तो अच्छा है कोई आवर नहीं आया
सूर्य .........ओह सहित ये क्या कर दिया अब दी का सामना कैसे करुगा मैं
राधा ......तब तो बड़े मज़े ले रहे थे नींद में अब करो भरपाई ........
अब आगे .......
असुरलोक ......
कंटकासुर अभी अपनी पत्नी के साथ सेक्स कर रहा था बड़े हे दुहदार तरीके से जिसमे उसकी पत्नी पूरा सहयोग कर रही थी
वातापी ......आआअह्ह्ह्ह स्वामी आवर जोर से अह्ह्ह बर्षो बाद आपके संग सम्भोग सुख प्राप्त कर हम तृप्त हो जाना चाहते है स्वामी
कंटकासुर बड़ी बेहरहमी से वातापी को घोड़ी बनाये पीसतिओं के भाटी वातापी की छूट की धजिया ुधा रहा था

नगीना ......देखो विशुद्धि वातापी आवर ब्रता कंटकासुर सम्भोग किर्या का आनंद ले रहे है
विशुद्धि ......हम कर हे क्या सकते है नगीना हम जब भी किसी के समीप जाते है सामने से असुर भाग जाते है
नगीना .......लगता है जब तक पिता श्री आज़ाद नहीं होते हमारा विवाह भी संभव नहीं है
नगीना .......यहाँ बरताओ को सम्भोग करते देख सरीर में तीव्रता से सम्भोग की इच्छा होती है
कंटकासुर वातापी के छूट से अपना लम्बा तगड़ा लैंड निकल कर लेट जाता है
कंटकासुर का भयंकर लैंड देख विसुद्धि आवर नगीना अपनी छूट को सहलाये बिना न रुक सकीय
( वातापी .....तो दोनों चुड़ैल यही पे चुप कर देख रही है अब आएगा मज़ा तुम दोनों को बहुत मज़ा आता है न मेरे स्वामी की बुराई कर उनका मखुल (मजाक ) ुधा कर आज तुम दोनों की छूट की खुजली न बढ़ा दी तो वातापी मेरा नाम नहीं एक दिन मेरे सामने तुम दोनों अपने इस भाई से सम्भोग करोगी )
कंटकासुर .....कहा खोये हो वातापी हम प्रतीक्षा कर रहे है
वातापी आगे भाड़ कंटकासुर के विशाल लिंग पे अपनी खुली हुए छूट तीखा कर बेथ जाती है सरदारस्य हुआ पूरा लैंड 2 हे जातको में वातापी अपनी छूट में निगल लेती है
( नगीना ....कस यहाँ वातापी के स्थान पे ब्रता कंटकासुर मुझे भोग रहे होते उम्म्म्महहह कितना आनंदमयी होगा वो पल जब ब्रता कंटकासुर का विशाल लिंग मेरा को मर्या भांग कर मुझे सवर्गीय सम्भोग आनद प्रदान करेंगे )

वातापी ......सवामी आप क्रोधित न हो तो आपसे हम कुछ पूछे
कंटकासुरी अपने लिंग को वातापी की योनिकुंड में अंदर बहार करते हुए वातापी की बड़ी बड़ी चुचुईयो को मसलते हुए
कंटकासुर ......हम आप पे कभी क्रोधित नहीं होते वातापी पूछो क्या पूछना है आपको
वातापी .....आप सम्भोग किये बिना रह नहीं सकते है फिर आप इतने लम्बे समय परतविलोक पे कैसे रहे
कंटकासुर .....हम वह भी अपनी इच्छा अनुसार सम्भोग करते है वह महिलाओ की आवर कन्याओ की कोई कमी नहीं है जब हमारी इच्छा हो हम सम्भोग करते है
वातापी .........आपको नगीना आवर विसुद्धि को देख सम्भोग करने की इच्छा होती है क्या
कंटकासुर .....ये कैसा वायरत अनर्गल वार्तालाप कर रही हो वो बहने है हमारी
वातापी ....हम्म्म समाज गई स्वामी
कंटकासुर ....क्या समाज गई तुम
वातापी .....यही की आप अपनी दोनों वाहनों को भी भोगना चाहते है
( वातापी आवर कंटकासुर के बाते दोनों बहने बड़े हे ध्यान से सुन रही थी )
कंटकासुर ......ऐसे मूर्खतापूर्ण बाते न करो हमें कब कहा
वातापी अपने लम्बे नाखुनो से कंटकासुर की गांड को कुरेदने लगती है जिस से कंटकासुर आवर तीव्रता से वातापी को चिढ़ने लगता है
वातापी .....अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे हे स्वामी अपनी परचंड लिंग से हमारी योनि में प्रहार कीजिये
इस वक़्त हम नहीं हमारे स्थान पे आपकी बहन नगीना से आप सम्भोग कर रहे है उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह
वातापी की बात सुन कंटकासुर बड़ी बेहरहमी से वातापी की छूट मरते हुए उसके बड़ी बड़ी चूचियों को काटने लगता है जिनसे हल्का हलके रकत भी कंटकासुर के मुँह में जाने लगता है
कंटकासुर .......अह्ह्ह्हह नगीना मेरी बहन जब से तुम्हारी जवानी की खुसबू ले है मैं तुम्हे भोगना चाहता हूँ
नगीना( वातापी ) .......आवर जोरो से काटिये अपनी नगीना के वक्षो को ब्रता कंटकासुर हम भी आपको भोगने को तड़प रहे है भारत श्री
कंटकासुर अपनी पत्नी के स्थान पे अपनी बहन नगीना को देख रहा था
1 गुंथे से ऊपर कंटकासुर से पूरी जान लगा कर वातापी को नगीना समाज कर इस कदर छोड़ा की वातापी की फटी हुई छूट से खून बहने लगा जैसे
वहीँ नगीना आवर विसुद्धि कंटकासुर आवर वातापी की सम्भोग आवर अपनी पार्टी अपने भाई का पागलपन देख न जाने कितनी बार बिना छूट को चूहे हे पानी बहती रही जब कंटकासुर का सम्भोग शास्त्रार्थ ख़तम हुआ तो दोना वह से अपने कक्ष में लौट गई
कंटकासुर .......हमें माफ कर दे वातापी हमने आपकी योनि ( छूट ) आवर वक्षो ( चूचियों ) को जख्मी कर दिया
वातापी ......आप चिंतित न हो स्वामी हम अभी खुद को ठीक कर लेंगे
वातापी अपनी माया का प्रयोग कर कंटकासुर के सामने भरम पैदा करती है जिस से कंटकासुर को लगता है की वातापी पूर्ण रूप के ठीक हो गई
वातापी .....देखिये सभी जखम भर चुके है
अब बताये क्या सत्य में आप अपनी बहनो को भोगना चाहते है
कंटकासुर ........है ये सत्य है जब हमने उन्हें वर्षो बाद देख तो हम उनकी तरफ भोगने के लिया आकर्षित होने से खुद को रोक नहीं पाए हमें माफ कर दे हम आपसे हे प्रेम करते है किन्तु हम सम्भोग से दूर भी नहीं रह सकते है
वातापी ......फिर हम आपसे कुछ मांगे आप मना तो नहीं करेंगे न हमें
कंटकासुर .......सम्भोग को छोड़
आप कुछ भी मांग लीजिये हम सम्भोग करना बंद नहीं कर सकते है
वातापी ......हम ऐसा कुछ नहीं मांगेगे जिसके चलते आपको कोई परेशानी हो हम बस आपको ये कार्य करने को हे कह रहे है स्वामी ******* ******* ******
******* ******** ***********
कंटकासुर .......क्या मतलब आप जो कह रही है वो सत्य नहीं हो सकता है
वातापी .......यही सत्य है स्वामी आप भले हे न मनो पैर सत्य चुप नहीं सकता है
वातापी सामने दीवार पे कुछ दृश्य चला कर कंटकासुर को दिखती है जिसने देख कंटकासुर दुखी हो कटा है
कंटकासुर ......हमें माफ कर दे वातापी हम आपकी पीड़ा को समाज हे नहीं पाए अब जैसा आप कहेंगी हम वैसा हे करेंगे
वातापी ......किन्तु किसी आवर को इसका पता नहीं चलना चाइये स्वामी
अभी ये लोग बात कर हे रहे थे की किसी ने इनके दूर को नॉक किया
वातापी ....हम बाद में इस विषय पे चर्चा करेंगे स्वामी आप सबके साथ पहले जैसा हे व्यव्हार कीजिये
कंटकासुर ........हम्म्म हम चलते है माता श्री ने बुलाया है.......
सूरजगढ़ ...........
नानी जी .....बेटी प्रिय ये आज इन दोनों को क्या हुआ है
प्रिय ......क्या हुआ माँ सा किसको क्या हुआ है
प्रिय अपने रूम से बहार निकल कर अपनी सास से पूछती है
नाना जी ........देखो तो जो कभी खुद की चाय कॉफ़ी तक नहीं बनती है वो दोनों किचन में कब से लगी हुई है पता नहीं क्या बना रही है
मां जी ...... मैं देखती हूँ माँ सा
इनका पता नहीं किचन का क्या हॉल किया होगा इन दोनों ने
प्रिय ममी जी जब किचन में पहुंची तो किरण आवर राधा खाना बनाने के सामान की लिस्ट त्यार कर रही थी
प्रिय ममी जी ......तुम दोनी किचन में क्या कर रही हो
सपना ....मम्मी आज खाना हम दोनों बनाएगी आप बहार जाये
सन्ति ममी जी ......देखो न जीजी इन दोनों ने मुझे भी किचन से बहार कर दिया है
प्रिय ममी जी सपना के हाथ से लिस्ट ले कर देखती है
प्रिय ममी जी ......आज कोई स्पेशल गेस्ट आ रहे है क्या घर पे तुम दोनों के
अपनी मम्मी की बात सुन सपना आवर किरण एक दूसरे को देखने लगती है
प्रिय ममी जी .....मुझे बताओ क्या क्या बुनना है मैं बना देती हूँ
किरण ......नहीं मम्मी आज का खाना हम हे बनाएगी प्लेसेस आप कुछ नहीं कहेंगी
सन्ति ममी जी ....पैर तुम दोनों को खाना कहा बनाना आता है
kiran........wo आप हम पे छोड़ दे मम्मी हम बना लेंगे
प्रिय ममी जी .....ठीक है स्वीटी मुझे यकीं है तुम दोनों अच्छा हे खाना बनाओगी आल थे बेस्ट चलो छोटी इनको करने दो जो ये कर रही है
किरण ......थैंक यू मम्मी प्लेसेस ये सामान मंगवा दीजिये
प्रिय ममी जी लिस्ट ले कर बहार जाती है आवर नौकर से बोल सामान लेन को कहती है
नानी जी बहार नाना जी के पास चली जाती है
नानी जी .....पता है आपको आज आपकी दोनों पोटिया ने क्या किया है
नाना जी ....... अब क्या कर दिया उन दोनों ने देखो तुम उनपे गुस्सा नहीं करोगी जब देखो तब उनपे भड़कती रहती हो
नानी जी ........मैं कहा गुस्सा करती हूँ आप बे बझा हे पीछे पड़े रहते हो
नाना जी ........क्या किया उन दोनों ने
नानी ji......aaj उन दोनों ने अपनी अपनी माँ की किचन से बहार कर दिया ये बोल कर के की आज का खाना वो दोनों बनाएगी
नाना जी ........तो क्या हुआ वो मेरी पोटिया है कुछ भी कर सकती है
नानी जी ........पता है आपकी पोटिया है इस लिया हे उन्हें सर पे बैठा रखा है आपने
तभी वह हवेली में एक कार आ कर रिक्ति है
नानी जी .......ये किसकी कार है जी कोण आया है
नाना जी ......ये तो जमाई सा शिव की कार है
तभी पिछले दूर से कार में से कोमल आवर शालिनी उतरती है
आवर अगला दूर खोल सूर्य बहार निकलता है
नानी जी ......ये तो मेरी बची शालू है जी
नाना जी .......मेरा शेर आया है साथ में
नाना जी आवर नानी जी दोनों हे कार की तरफ भाड़ जाते है
सूर्य आगे भाड़ अपनी नानी जी के पेअर चउथा है
सूर्य .....परनाम नानी जी कैसे है आप
नानी जी ........जीते रहो बीटा सूर्य
सूर्य .....परनाम ननु कैसे है आप लगता है नानी जी अभी भी आपकी क्लास लगा रही है
नाना जी .......सुन लिया ठकुराइन अब तो ये भी मेरी टंगे कीच रहा है
कोमल आगे भाड़ नाना जी आवर नानी जी के पेअर चुटी है
नाना जी .....कैसे है मेरी बच्ची कोमल
कमल ....मैं ठीक हूँ नाना जी आप कैसे है
नाना जी ......सब अच्छा है बेटी चलो अंदर चलते है
शालिनी ......बाउजी बाकि सब कहा है
नानी जी .......तुम्हारी दोनों भाबी अंदर है आवर भतीजियां भी बाकि तुम्हे पता हे है
नाना जी ......हवेली में सब कैसे है बेटी
शालिनी ......हेहेहे बाउजी भी अच्छे है पापा कल साम को आएंगे वो आपको याद कर रहे थे
पाछो लोग अंदर आ जाते है
कोमल .........नानी जी सपना दी आवर किरण कहा है
कोमल की आवाज सुन किरण बहार निकलती है
सामने सूर्य को खड़ा देख वही किरण के पेअर खुद बा खुद रुक जाते है
जैसे हे शालिनी की नजर किरण पे पड़ी वह उस तरफ भाड़ गई जब पास से देखा तो कपड़ो पे हल्दी चिली पाउडर आवर आता लगा हुआ था जिसे देखते हे शालिनी के चेहरे के भाव बदलने लगे
शालिनी ..........ये क्या है माँ पापा घर में नौकर नहीं है क्या जो आपने मेरी बच्ची को किचन में लगा रखा है
शालिनी अपना रुमाल निकल किरण का चेहरा साफ करती है
नानी जी ......बेटी इन्होने जिद करि की आज वही खाना बनाएगी
शालिनी ......आवर आपने इनको इजाजत दे दी क्यों यही न
आवर आप दोनी भाबी सा आपने भी नहीं रोका इनको स्वीटी सपना जावा जा कर कपडे बदल कर आओ
किरण .....बुआ सा आप गुस्सा मत कीजिये मैंने आवर दीदी ने हे जिद की थी की आज का डिनर हम त्यार करेंगे बस थोड़ा सा रहा है प्लेसेस उसके बाद हम कपडे भी बदल लेंगे
शालिनी ......चुप चाप जाओ दोनों आवर कहा कर कपडे बदल कर आओ कोमल बेटी ेंजो ले कर जाओ
कोमल .....जी मम्मी
सूर्य तो बस अपनी माँ को देखे जा रहा था सूर्य को उनपे बहुत प्यार आ रहा था जिस तरह किरण के लिया फ़िक्र आवर प्यार दिखाया
कोमल किरण सपना तो निकल गई रूम
प्रिय ममी जी .....शालू अब गुस्सा थूक भी दे उन्होंने ये सब तुम्हारे लिया किया दन्त हमें पद गई
शालिनी .....भाबी सा जो भी हो पैर आपने उनको अकेले तो ये नहीं करने देना चाइये था
नाना जी .....शालू अब छोड़ इनको बेटी प्रिय जाओ आवर बाकि खाना त्यार करो चल सूर्य तुम मेरे साथ चल
सूर्य अपने नाना जी के साथ बहार निकल जाता है
अभी खाना खाने में वक़्त था थोड़ा
सूर्य .....नाना जी दोनों मां जी घर कब आते है
नानी जी .....बीटा संजय तो रोज घर आ जाता है पैर जोरावर कभी कभी हे आता है
सूर्य ......आपको दादू बहुत याद कर रहे थे
नाना जी ......कोई नहीं कल आ तो रहा हे है मेरा दोस्त आवर न भी आता तो मैं चला जाऊंगा
कुछ देर बहार टहलने के बाद सूर्य आवर नाना जी घर लौट आते है
संजय मां जी भी घर लौट आये थे
सबने मिल कर खाना खाया
सूर्य .....स्वीटी खाना बहुत हे अच्छा बना है
शालिनी .......है बेटी खाना वाकई में बहुत स्वादिस्ट है खाश कर ये पालख पनीर गोभी के पराठे यहाँ पे ज्यादा तर डिश सूर्य को बहुत पसंद है
नाना जी ......ये तो सच कहा बेटी तुमने आज पहले बार मेरी पोतियो ने किचन में पेअर रखा आवर पहली बार में हे सबका दिल खुश कर दिया
प्रिय ममी जी ....बाउजी खाना जो स्पेशल बनाया है दोनों तो स्वादिस्ट तो बनना हे था क्यों स्वीटी सपना तुम दोनों को पहले से पता था न की शालू आवर सूर्य यहाँ आ रहे है हमें क्यों नहीं बताया
शालिनी ......उन्हें मैंने हे मना किया था भाबी सा
नानी जी ........अब समाज आई बात तो ये सब तयारी तुम्हारे स्वागत में हो रही थी
शालिनी .....आपको कोई शक है क्या माँ सा दोनों मेरी बछिया है आवर आप इनपे गुस्सा कारनामे काम करो बुढ़ापे में बप हाई हो जायेगा आपका
नानी जी ......मैं कहा कुछ बोलती हूँ इनको
नानी की बात सुन सबकी हाशि चुत जाती है ........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............





















