Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 8 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 53

रूपा देवी .....कल को ये भी उसके जैसे भाग गई तो फिर ढूंढ़ते रहना इनको भी जैसे आज तू दंड रहा है

जोरावर .....मैं क्यों ढूंढ़ने लगा भला उसको

रूपा देवी ......कुछ दिन पहले किस से बोल रहा था फिर तू फ़ोन पे वही था न तेरा दोस्त महेंद्र ठाकुर

विक्रम सिंह ......रूपा चुप कर के खाना खा आवर अगर दुबारा बचिए पे गुस्सा किया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा कह देता हूँ

खाना खाओ आवर जाओ अपने अपने रूम में

सब खाना खा कर अपने अपने रूम की आवर निकल जाते है ......

अब आगे ........

लेट रात तक सूर्य फॅमिली दिल्ली पहुंच चुकी थी

शिव अपने फॅमिली के साथ होटल में स्टे करता है

सूर्य ......डैड हम कब दादू से मिलेंगे

शिव ......बीटा थोड़ा वेट करो हम कल चल तो रहे है बस अब सो जाओ

सूर्य ......OK माँ डैड गुड नाईट

सूर्य दोनों के बिच लेट जाता है

रात तक़रीबन 2 बजे के आसपास सूर्य फिर से बड़बड़ाने लगता है

जिअ से शिव आवर शालिनी के आँखे खुली जाती है

सूर्य नींद में हस्ते हुए

सूर्य ........स्वीटी मैं आ गया हूँ अब कभी तुजसे दूर नहीं जाऊंगा

शिव .......शालू देखो हमारा बेटे को कैसे बहु को याद कर आपने देख रहा है

shalu.....ha देखो तो जार्स इसका चेहरा कितना खुश है मेरा बच्चा

शालिनी अपने बेटस को अपनी आवर गुमा कर अपने सीने से चिपका लेती है

कुछ देर में हे सूर्य का बड़बड़ाना बंद हो जाता है

वही �किरण भी किसी का सपना देख रहे थी

जिसका भी सपना वो देख रहे थी वो कुछ खास हे था �किरण के लिया जो की उसके चेहरे पे चाय खूबसूरत मुस्कान बता रहे थी

सुबह सबसे पहले सूर्य उठ जाता है

आवर अपने माँ डैड को भी सुबह जल्दी हे जगह देता है

शालिनी ......लगता है मेरा बेटे को कुछ ज्यादा हे जल्दी है दादा दादी नाना नानी से मिलने की

शिव ......चलो भाई बेटे के चाकर में कही बीबी के हाथो हे न पिट जॉन जल्दी हे त्यार hi कर एयरपोर्ट की आवर निकलते है

सूर्य .......डैड हम बी कार जायेंगे यहाँ से

शिव .......बीटा उसमे काफी टाइम लगेगा

सूर्य .....प्लेसेस डैड

शालिनी ......OK बीटा शिव आप नई कार ले लीजिये उस से हे चले है हम

शिव कार को किसी कार शोरूम की आवर गुमा देता है वह से नई कार ले कर

निकल पड़े सूर्यगढ़ की आवर जो की लगभग 5,6 हर का बी रोड रास्ता था

सूर्य .......डैड देखिये कितने अच्छा जगह है यहाँ के लोग देखो कैसे गम रहे है ी लव इंडिया

शालिनी .......लगता है जी अब आपको यही पे अपना बिज़नेस सेट कर लेना चाइये मुझे नहीं लगता सूर्य वापिस जायेगा

शिव .......मैं भी यही रहा चाहता हूँ शालू पैर माँ बाबा के साथ

अगर उन्होंने हमें सवीकार किया तो हम यही पे रहेंगे

ऐसे बात करते हुए ये लोग 4 हर की ड्राइव करते हुए जयपुर के पास पहुंचे

सूर्य .....डैड मुझे भूख लगी है

शिव .....OK बीटा कोई अच्छा आ होटल देख कर खाना कहते है वैसे भी दोपहर होने को है

सूर्य .....होटल नहीं पापा वो टास्ते पे स्टाल लगता है न बाद वाला वही पे खाएंगे खाना

शिव ......हाहाहा यू मैं दाभे पे

सूर्य .....है डैड वो देखे वही खाना कहते है

शिव आगे एक पंजाबी दाभे पे कार रोक देता है

सूर्य जल्दी से कार रुकते हे निचे उतर जाता है

शालिनी .....अरे बीटा आराम से हम भी आ रहे है

सूर्य अच्छे से दाभे में गम गम कर देखता है

दाभे वाले सरदारजी

सरदारजी ......तुस्सी के वेख रहे हो पुत्रजी

सूर्य उनकी देखने लगा कुछ समाज तो आया नहीं सूर्य को सरदारजी क्या होल

पीछे से आया हुआ शिव

शिव ....नमस्ते अंकल जी वो मेरा बीटा है उनसे आज दभा पहली बार देखा है तो कुछ ज्यादा हे खुश जो गया

आवर उसको पंजाबी समाज नहीं आती आवर माफ कीजियेगा मुझे भी पंजाबी नहीं आती

सरदारजी ......कोई बात बीटा जी आप बैठो बीटा अभी खाना लगवाता हूँ

सूर्य .....डैड हम बहार बेथ कर हे खाना कहते है

शालिनी शिव के मन में कुछ बोलती है

शिव ....अंकल जी यहाँ कोई लेडीज बाथरूम है क्या

सरदारजी ......है बीटा जी है तो सही पर वो सायद ठीक नहीं है आप अंदर जाओ बेटी के ले कर मेरा बाथरूम उसे कर लो यहाँ बहार में सराबी नसेड़ी लोग बाथरूम ख़राब कर देते है

शिव सूर्य आवर शालिनी को अंदर भेज देता है

शिव .....शुक्रिया अंकल जी

सरदारजी .....बीटा जी कोई बात नहीं बिटिया को परेशानी न hi बस इस लिया हे किया

अभी ये लोग बात कर रहे थे की एक कार वह आ कर रूकती है जिसमे सरब से जुलते 4,5 लोग 30,35 के आगे के उतारते है हाथ में सरब की बोतल सब नशे में झूम रहे थे

दाभे पे काम करने वाला एक लड़का इन सबको के पास पानी रख खाने का आर्डर लेता है आवर चला आया है कुछ देर में सेबल सामने खाना रख कर वो अपने काम में लग जाता है

ीदार सूर्य आवर शालिनी भी बाथरूम से फ्रेश hi कर आ गए थे

सरदारजी .....बीटा जी आप यही पे बेथ कर खाना खाया बिटिया साथ में है आवर बहार वो सराबी बे थे है कुछ ऊंच नीच जो जाएगी

शिव ने एक बार सबको देखा फिर उनसे अंदर बेथ न हे ठीक समजा क्युकी शालिनी भी साथ थी आवर सूर्य भी साथ था

तीनो का खाना लग गया तीनो आराम से मज़े से खाना खाया रहे थे

तभी उनमे से एक की नज़र शालिनी पे पेड जो इस वक़्त लाल साड़ी में लाल पारी से काम नहीं लग रहे थी





सराबी 1.....वह देख भाई क्या जबरदस्त लाल मिर्च है

उसकी बात सुन कर सबकी नज़र उस तरफ गई जहा पे ये तीनो खाना खा रहे थे

.सराबी.2 .....भाई मॉल तो कड़क सरब है

मिसाल भी खुद के जैसे गिस्सी पीठि दे दे

इनका बॉस या लीडर

बॉस .....देख क्या रहे hi उठा लो साली को अभी पूरा मिरच मसलते है

एक एक करके अपने बोतल सरब की पि कर ख़तम करते है

आवर शालिनी की आवर बैश जाते है

सरदारजी इन को देख लेता है पैर वो भी कुछ करने में असमर्थ था रोजी रोटी जो चलनी थी

बॉस शालिनी के पास पहुंच कर निचे जुकता है

शिव ......ये क्या बतमीज़ी है दूर हटो वह से

बॉस .....हाय वाली क्या थिंक लाल मिरच है

इसको चखने में मज़ा आएगा

शालिनी को फार लगने लगता है क्युकी वो 5 थे आवर शिव अकेला

सूर्य ......माँ आप ठीक तो है

शालिनी अब अपने बेटे को क्या जबाब देती

शिव खड़ा hi कर उस बॉस को देखा दे देता है

शिव .....मैंने बोलै न दूर हटो यहाँ से सेल सराबी कही के

अपने बॉस को देखा देते देख चारो शिव को पकड़ लेते है

शालिनी ......छोड़ो मेरे पति को वार्न्स अच्छा नहीं होगा

बॉस शालिनी का हाथ पकड़ लेता है

अपनी माँ के साथ ऐसे बतमीज़ी होते देख सूर्य का गुस्सा बढ़ने लगता है

जब शिव की नज़र अपने बेटे पे पड़ती है वो उसको कुछ बुरा होने का फार लगने लगता है

वही बॉस अपने एक हाथ को शालिनी के सीने की आवर बढ़ता है

बस यही गलती कर दी बॉस ने

सूर्य आगे बैश कर उस हाथ को पाकः कर एक जोर का जड़का करता है

बॉस के कंडे से एक काट जैसे आवाज निक्की आवर उसके साथ हे उस ढाबे में बॉस की चीख गूंजने लगी

बॉस अपने कंडे को पकड़ कर छिलने लगा शालिनी जल्दी से सूर्य की आवर लपकी पर जैसे उसकी नज़र सूर्य की गुस्से में जाती आँखे देखि उसके पेअर वही काम गए

सूर्य आगे बाद कर शिव को पकडे सरबियो पे टूट पैड्स

सरदारजी शालिनी शिव आवर कुछ लोग जो धभे पे या तो खाना खाना आये थे या फिर यही काम करने वाले होने

सब बस सूर्य का तांडव देख रहे थे

देखते हे देखते 5 की हड़िया तोड़ डाली सूर्य ने

कोई खटिया पे पड़ा था तो कोई खटिया के निचे

अभी भी सूर्य गुस्से में फुंकार रहा था

सूर्य .......मेरे माँ को चुहेगा इस हाथ से टच किया था माँ को

सूर्य बॉस के उस हाथ को पकड़ जिस से शालिनी को पकड़ था

बॉस के छाती पे पैर रख कर सूर्य ने देखते हे देखते उस बॉस की बॉडी से उसका हाथ हे अलग कर दिया

किसी को यकीं हे नहीं आ रहा था की एक ### साल का लड़का इतना खतरनाक भी हो सकता है

बॉस का हाथ उखाड़ने से खून के फुहार सूर्य के पैरो में आ पेड

सूर्य दूसरे हाथ को पकड़ कर इस हाथ से तुमने मेरी माँ को चुना चाहा न सूर्य उसके दूसरे हाथ को पकड़ कर खींचने हे जा रहा था की शालिनी ने सूर्य को गले से लगा लिया

शालिनी .......बीटा उसको छोड़ दो वो मर जायेगा

सूर्य .......मार डालूंगा जिसने भी आपको प्रॉब्लम दी फिर चाइये वो कोई भी

शालिनी .....नहीं बीटा तू तो मेरा अच्छा बीटा है न छोड़ दे उसको

शालिनी किसी तरह सूर्य को शांत करती है shan't होते हे सूर्य बेहोश जो कर अपनी माँ के बाँहों में हे झूल जाता है

शिव आगे बढ़ कर सूर्य को संभालता है

कुछ देर बाद एम्बुलेंस में डील कर इन सरबीओ को वह से रवाना कर दिया जाता है

शालिनी सूर्य के मच पे पानी मार कर होश में लगी है

शालिनी ....बीटा सूर्य आप ठीक है न

सूर्य .....मुझे क्या हुआ है माँ मैं तो ठीक हम आप मुझे लेता क्यों राखी है आवर वो बाद अंकल कहा गए

शिव शालिनी के साथ बाकि सबको भी जतका लगा

अभी शिव कुछ बोल्ट्स उस से पहले हे

सरदारजी ......बीटा जी वो लोगो को पुलिस ले गई आप चिंता न करो

सरदारजी शिव को एक तरफ बुला कर बीटा जी आप जल्दी यहाँ से निकलो आवर अपने बेटे को किसी बाबा को दिखाओ इसको कुछ न बताना आज के बारे में

शिव .....जी अंकल जी

शिव .....चलो हम चले है

सरदारजी ....रुको बीटा जी आप

सरदारजी अंदर जा कर एक बॉक्स लता है

ये लीजिये बीटा ये आपके लिया है इसको घर पे खोलना आवर उसमे जो भी जो उसको हमेशा अपने पास रखना

सूर्य .....थैंक यू सरदारजी

तीनो हे वह से निकल गए अपने सफर की आवर

कुछ देर कार में खामोशी रहे

सूर्य .....माँ मुझे नींद आ रहे है मैं लेट जाता हु.

शालिनी सूर्य को अपनी ग्लैड में सुला लेती है

कुछ देर में सूर्य सो जाता है है

शिव ......शालू तुमने वो देखा जब उसने तुम्हारे साथ में बतमीज़ी करने की कोशिश की

शालिनी ........शिव सूर्य को कुछ तो हुआ है वो बदल रहा है उसका गुस्सा उसके कण्ट्रोल से बहार होगा जा रहा है या फॉर ये कुछ आवर हे है

शिव ......पता नहीं मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा की सूर्य के अंदर इतनी ताकत इतना गुसा कहा से आ गया अचानक से एज्ड तुम नहीं रोकती तो वो सायद उस सराबी को जान से हे मर देता

02,30 जानते बाद ये सब सूरजगढ़ की सीमा के बहार थे क्युकी सूर्यगढ़ का रास्ता सूरजगढ़ जो कर हे गुजरता है

शालिनी .......शिव मुझे बहुत दर लग रहा है किसी ने हमें यहाँ देख लिया तो

शिव .....अब जो होगा देखा जायेगा कब तक ऐसे भागते रहेंगे

शिव कार को आगे बढ़ा देता है

कुछ लोग टास्ते में मिले भी जिनको शिव आवर शालिनी ने पहचानी लिया किन्तु बिना बोले हे लोग आगे बढ़ते रहे

किन्तु कोई था जो शिव आवर शालिनी को देख चूका था आवर पहचान भी लिया था

शिव आवर शालिनी की कार के निकलते हे उसमे अपनी बाइक उनके पीछे लगा दी

साथ हे किसी को फ़ोन कर दिया शिव आवर शालिनी का लौटने की खबर दे दी थी ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ........
 
सॉरी भाई लोगो कल रात से तबियत ख़राब था सर्दी के कारन

अभी अपडेट लिखूंगा

दोपहर में थोड़ा ठीक था तो रुद्रानदेव पे अपडेट दिया

अभी आइल देता हूँ
 
अपडेट. 54

शिव .....अब जो होगा देखा जायेगा कब तक ऐसे भागते रहेंगे

शिव कार को आगे बढ़ा देता है

कुछ लोग टास्ते में मिले भी जिनको शिव आवर शालिनी ने पहचानी लिया किन्तु बिना बोले हे लोग आगे बढ़ते रहे

किन्तु कोई था जो शिव आवर शालिनी को देख चूका था आवर पहचान भी लिया था

शिव आवर शालिनी की कार के निकलते हे उसमे अपनी बाइक उनके पीछे लगा दी

साथ हे किसी को फ़ोन कर दिया शिव आवर शालिनी का लौटने की खबर दे दी थी ............

अब आगे ........

कुछ आधे घंटे के बाद शिव फॅमिली सूर्यगढ़ की सिम्स में इंटर करती है .

वही साध्वी जो सूर्यगढ़ के बहार जंगल की तरफ एक पहाड़ी पे एक छोटी चेतन पे ध्यान में बैठो थी उसमे आँखे खोल ली

साध्वी .......वो आ चूका है वर्षो बाद एक बार फिर से वो लौट आया है

साध्वी ध्यान से उठ कर अपना कमंडल आवर डमरू ले कर सूर्यगढ़ के अंदर के आवर तेजी से बढ़ने लगी

कुछ 5,7 मिंट बाद एक खूबसूरत हवेली के मुख्या गेट के पास कड़ी थी

2,4 मिंट हे गुजरे होंगे की शिव ठाकुर की कार साध्वी के पास आ कर रूकती है

सूर्य आराम से अभी भी सोया हुआ था

शालिनी .....शिव हम पहुंच तो गए है पैर मुझे बहुत दर लग रहा है

shiv.......himat से काम लो फटी तो मेरी भी पड़ी है शालू

तभी साध्वी कार का पिछले दूर खोल देती है

जिसपे सूर्य शालिनी के गॉड में सरब रख कर सोया हुआ था

सधी सूर्य के चेहरे पे बेस प्यार से हाथ फिरती है

शालिनी ......ये आप क्या कर रहे है

साध्वी .......देवी सूर्य को उठाये

शिव आवर शालिनी दोनों को जतका लगता है क्युकी किसी को भी नहीं पता था की शिव आवर शालिनी को कोई बीटा है या बेटी है आवर न किसी को उसका नाम पता था

शालिनी .....मई आप कोण है आवर मेरे बेटे का नाम कैसे जानती है

शिव भी कार बंद कर के बहार आ चूका था

तभी किसी ने मुख्या गेट खोला

जिसको देखते हे शिव आवर शालिनी की फैट गया क्युकी सामने कोई आवर नहीं बाकि खुद

परताप ठाकुर खड़ा था अपनी अपने हाथो में दुनाली गन लिए

( सूर्य के रिश्ते से हे सबको बुलाऊंगा जैसे परताप ठाकुर है दादा जी )

दादा जी ........तुम्हारे हिमत कैसे हुए फिर से हमारी देहलीज़ पे आने की भूल गए हमें क्या कहा था

आवर गन शिव पे तन देते है दादा जी

तभी जल्दी से शालिनी कार से बहार आती है आवर दादा जी के सामने कड़ी hi जाती है

शालिनी के ऐसे जल्दी में निकल ने पे सूर्य की भी नींद खुल जाती है

आवर जब सूर्य की बहार अपने माँ पे पड़ती है जिनसे 2 से 3 फिट सूरे पे किसी बुजुर्ग को गन अपने माँ पे तने हुए देखता

ये सीन देख कर सूर्य के एक पल में हे नींद के जगह गुस्से ने ले ली थी

सूर्य तेजी से कार से उतरता है आवर तेजी से अपने माँ की आवर लपकता है

दादा जी किसी बच्चे को बिच में आया देख गन थोड़ी निचे करते है

तो शालिनी को लगता है की गन सूर्य पे तन रहे

एक माँ का कलेजा हे कैंप गया

शालिनी की आँखों से आंसू बहने लगते है आवर अपनी माँ की आँखे नाम देख सूर्य का पारा हाई होने लगता है

गुस्से में सूर्य ने अपने दादा जी को देखा दे दिया

जिस से दादा जी 3,4 फिट पीछे लड़की के मुख्या दरवाजे के किवाड़ ( दूर के पीला जो दो भागो में बंद किये जाते है )

से जा तक्र्य लड़खड़ाते हुए

सूर्य गुस्से में अपने दादा से गन छीन कर उन्हें पे तन देता है

सूर्य .....आपकी हिमत कैसे हुए मेरे माँ डैड पे गन तन्ने की

सूर्य गन अपने दादा के छाती पे लगा देता है

तभी कुछ काम से बहार निक्की जानवी देवी ( दादी जी ) की बहार शालिनी पे पड़ती है आवर उसके पीछे खड़ा शिव पे

पैर जब दोनों की नज़र का पीछे किया थो जानवी का हलक सूखने लगा

वो दोड़ती हुए आने लगी

सूर्य. ......जान से मर डालूंगा तुम्हारे हिमत कैसे हुए मेरे माँ डैड की तरफ गन करने की

सूर्य के गुस्से को एक बार दिन में शिव आवर शालिनी देख चूका थे

शालिनी जल्दी से आगे बढ़ी

शालिनी .....सूर्य बीटा गन निचे करो ये आपके दादा जी है इनकी गलती नहीं है बस ये ठोस गुस्से में थे

सूर्य शालिनी की बात सुन कर कुछ शांत हुआ था पैर पूरी तरह से नहीं आवर नहीं उसमे गन हटाई

तभी वह पे एक आवर कार रूकती है

जिसमे बैठे साक्ष ने जब अपने पिता पे गन रानी हुए देखि तो वो भी दौड़ कर उनके पास आये

महेंद्र ठाकुर ..( बेस पापा )/

b.Papa .......बच्चे बंदूख हटाओ गोली चल जाएगी कहते हुए उन्होंने सूर्य के कंडे पे हाथ रखा

जैसे हे सूर्य पलटा तो शिव ने बिच में आ कर उसके सीने लगा लिया आवर शालिनी ने उसके आँखे देख दी

दादी जी ......ये सब क्या हो रहा यहाँ मेरी तो जब हे निकल दी

वही दादा जी अभी भी सूर्य के देख रहे थे आवर इनको देख कर लग रहा था जैसे किसी ने उनके सामने कोहिनूर रख दिया हो

दादी जी बिना किसी को कुछ बोले सूर्य की तरफ बढ़ने आवर शिव से चढ़ा कर अपनी तरफ घुमाया

दादा जी ......तू मेरा पोता है जानवी देख मेरा पोता सूर्य ठाकुर मेरा पोता

कहते हुए सूर्य को अपने गले लगा लेते है आँखों में आंसू पर चेहरे पे देर सरे ख़ुशी

महेंद्र भी अपने चोरे भाई शिव से गले लग कर मिलता है वही शालिनी अपने सर पे साड़ी करके दादी जी के पेअर चूसने के लिया जोकि तो दादी ने भी सब भुला कर बहु को गले से लगाया

साध्वी ......ठाकुर हमें नहीं मिलाओगे क्या अपने वारिस से

साध्वी को देख कर आवर उसकी वॉर इस वाली बात सुन कर महेंद्र को साध्वी से की पहली मुलाकात याद आ जाती जो कल सुबह हे की थी

दादा जी ......आये देवी आप भी अंदर चलिए हमारे साथ में हे

आवर तू भी चल नालायक ( शिव) घर के अंदर तेरी कबर बाद में लेता हूँ

दादी जी ....बेटी शालिनी चलो तुम भी अंदर चल

b.Papa आगे बढ़ कर सूर्य को अपने पिता से ले कर कंडे पे बैठा लेता है

सूर्य .....अंकल निचे उतरो मैं घिर जाऊंगा

शिव ......बीटा ये तुम्हारे बड़े पापा है महेंद्र ठाकुर

सूर्य ......बड़े पापा निचे उतरो मैं घिर जाऊंगा

b.Papa .....तू चिंता न कर बीटा तुम्हे तो पुरे सूर्यगढ़ में गुमाऊँगा अपने कंडे पे बैठा कर

बात करते हुए सब अंदर आये है

शिव .....भाई सा हवेली बड़ी हुए लग रहे है

b.Papa .....है छोटे पूरी हवेली को मॉडर्न लुक में बदल दिया है

शिव ....बहुत खूबसूरत लग रहे है भाई सा

सभी लोग बात करते हुए हॉल में आये है तभी

जानवी देवी पूजा घर से पूजा का थल ला कर शिव सूर्य शालिनी का तिलक करती है

देखते हे देखते सब घर वाले एकता होने लगता है

रेखा ठाकुर ....देवर जी अब जा कर टाइम मिला है आपको आने का

शिव ....माफ करना भाबी सा पापा के दर से कभी इंडिया आया हे नहीं आज भी आपके बेटे की जिद की वजह से हे हम यहाँ है

दादी जी .....अच्छा तो इसमें तेरी मर्ज़ी नहीं थी फिर तू निकल यहाँ से मेरे बेटी आवर पोता मेरे पास है अब निकल

सूर्य ......नहीं दादी पापा को न निकालिये ये बहुत अच्छे है बस दादू आवर आपसे डरते है

दादा जी ....चल मेरे पोते के लिया तुम दोनों को माफ करता हूँ

कोमल ......दादू क्या ये मेरा भाई है

दादी जी ....है कोमल बीटा ये आपके चोरे भाई सूर्य ठाकुर है आवर बीटा ये आपकी दीदी है कोमल

शिव .....माँ सा ये प्यारी सो लड़की कोण है

दादा जी ......तुम्हारे छोटी बहन है राधा ठाकुर

शिव कुछ बोलने वाला था की महेंद्र के इसारे पे चुप हो जाता है

सूर्य आगे बढ़ कर राधा हाथ पकड़ कर सोफे पे बैठा देता है

सूर्य .......राधा मैं आपको क्या कह कर बुलुं

शालिनी .....वो आपकी बुआ सा है तो बुआ आ hi बुलाना आवर क्या

राधा .....जो भी तुम्हारे दिल करे

सूर्य राधा के पास हे कोमल को बैठा देता है आवर दोनों के गलो पे एक एक किश कर देता है

बदले में कोमल आवर राधा दोनों सूर्य को अपने बिच बैठा कर दोनों गलो पे एक साथ दोनों किश करती है

सूर्य को सररत सूजती है

सूर्य ....बस दीदी एक बार आवर

सूर्य की बात सुन सब इनको देखने लगते है

जैसे दोनों किस करने के लिया सूर्य के गलो पे होंटो रकने वाली थी वैसे हे सूर्य अपनी गर्दन पीछे कर देता है

कोमल आवर राधा के होंठ एक दूसरे से जा चिपके

जिसे देख सब हसने लगे

सूर्य....... हाहाहा दीदी ने बुआ को किश किया लिप पे

सूर्य की बात सुन दोनों उसको पकड़ लेती है आवर पुरे चेहरे पे किस की बरसात सो कर देती है

B.mummy ......अरे बस करो दोनों क्या बचे को पूरा हे खाने का इरादा है क्या

ीदार आजा मेरा बीटा

सूर्य भी दोनों के बिच से उठ कर अपने b.mummy के पास चला जाता है

जहा b.mummy भी सूर्य के गलो पे अपनी चाप छोड़ देती है

दादी जी .....लो अब तो देखा बेटी भी बच्चो के साथ बची बन गई

इस बिच सब साध्वी को भूल गए की वो भी यहाँ है

साध्वी बस सूर्य के हरकते सररते हे देख रहे थी

तभी दादी जी की नज़र इन पर पड़ती है

दादी जी .....माफ करना हम आपको कल पैन तक नहीं पूछो

रेखा बेटी जाओ आवर जलपान की वय्वस्ता करो

साध्वी .....उसकी कोई जरुरत नहीं है माता जी मुझे तो बस आपके पोते से मिलना था

B.Papa ......माँ सा आपको पता है कल सुबह हे इन्होने बोल दिया शिव का घर लौटने का इसरा कर दिया था जब मैं घर से निकल था तब

शिव .....ऐसा कैसे हो सकता है हम तो चले हे कल दोपहर को है वह से

आवर इनको सूर्य का नाम पता था जबकि हमें किसी को भी नहीं बताया था

साध्वी ......आप ये सब बाते छोड़िये आवर मुझे ये बताये की सूर्य के ठीक होने के बाद से क्या क्या बदलाव आ रहे है

दादा जी .....क्या मतलब ठीक होने से सूर्य को कोई बीमारी थी क्या

शालिनी .....बाबू जी वो एक साम पहले सूर्य का एक्सीडेंट हुआ था हिज कारन सूर्य पिछले एक साम से कोमा में था

अभी एक हफ्ते पहले हे ठीक हुआ है

दादी जी .....आवर टुम दोनों ने हमें खबर तक नहीं की

दादी आवर दादा के साथ साथ सबकी आँखों में आंसू थे

किसी को पोते को ले कर तो किसे के भाई को ले कर

तो किसी को सूर्य में अपना बीटा नज़र आ रहा था

शिव .....सॉरी पापा मैं आपसे बहुत दर गया था इस लिया कभी भी कॉल करने की हिमत हे नहीं जूठा पाया

सूर्य ......दादू दादी मैं ठीक हूँ अब आपने टेंशन न लीजिये आवर अब से मैं आपके पास हे रहूँगा क्यों पापा

दादा जी .....उस से क्या पूछ रहा है मेरा पोता मेरे पास हे रहेगा हमेशा अगर जिसने जाने की कोशिश की तो रेंज न तोड़ दू इनकी

दादी जी .....थोड़ी देर पहले का आप भूल गए है सायद खुद को पहलवान कहते हो सूर्यगढ़ का

दादा जी को सूर्य का वो गुस्से भरा चेहरा ीक बार फिर से नज़र आ जाता है

शालिनी .....वो सूर्य को जबसे ठीक हुआ है तब से गुस्सा बहुत आया है आवर उसकी आँखे लाल नीली होने लगती है हमें भी आज हे पता चला एक बार आज सुबह आवर एक बार जब बाबू जी हम पे गन तानी थी तब

दादा जी .....माफ करना बेटी मैंने गुस्से में शिव को डरने के लिया ऐसा किया मुझे क्या पता मेरे शिव का रूद्र मुझपे हे भरी पद जायेगा

परन्तु सुबह ऐसा क्या हक गया

शिव ....वो पापा सूर्य को दाभे पे खाना खाना था तो वही खाना खा रहे थे तभी कुछ सराबी वह आये आवर शालिनी के साथ ......

............. ........... यही सब हुआ था

आज सुबह वो तो अच्छा हुआ शालिनी से सूर्य को shan't कर दिया

वर्ण ये गुस्से में जान ले लेता इन 5 की वही पर

साध्वी .....कोमल राधा आप सूर्य को घर नहीं गुमाओगी क्या

साध्वी का इसरा समाज दादी जी ने इनको वह से भेज दिया ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........
 
अपडेट. 55

शिव ....वो पापा सूर्य को दाभे पे खाना खाना था तो वही खाना खा रहे थे तभी कुछ सराबी वह आये आवर शालिनी के साथ ......

............. ........... यही सब हुआ था

आज सुबह वो तो अच्छा हुआ शालिनी से सूर्य को shan't कर दिया

वर्ण ये गुस्से में जान ले लेता इन 5 की वही पर

साध्वी .....कोमल राधा आप सूर्य को घर नहीं गुमाओगी क्या

साध्वी का इसरा समाज दादी जी ने इनको वह से भेज दिया ...........

अब आगे ..........

कुछ देर बाद साध्वी सूर्य के बारे में कुछ बारे जानने के बाद

दादा जी को सूर्य की सीख्शा के बारी में बता कर वह से चली जाती है

ये सब भी अपने अपने ग्रुप बना कर बातो में लग जाते है

मम्मी माँ दादी राधा

डैड दादा जी b.Papa

कोमल सूर्य को पूरा घर दिखती आवर अपने साथ रखती

सूरजगढ़ ........

सूरजगढ़ में भी आज माहौल कुछ बदला हुआ लग रहा था

जोरावर सिंह आज बहुत खुश था क्युकी उसको खबर मिल चुकी थी की उसकी लाड़ली लौट आई है

सब लोग अपने अपने रूम में थे सोने की तयारी कर रहे थे

जोरावर सिंह अपने दोस्त महेंद्र से बात करके अभी अभी लौटा था अपने रूम में जहा प्रिय उसकी वाइफ उसका इंतजार कर रहे थी

जोरावर .....प्रिय आप सोई नहीं अभी तक

प्रिय ......जी बस अभी सोने जा रहे हूँ पैर आपको क्या हुआ है

आप खुश भी है आवर उधास भी है

जोरावर .......मेरी लाड़ली लौट आई है

साथ में उसका बीटा भी आया है

प्रिय ......ये आप किस की बात कर रहे हो

जोरावर ......शालिनी लौट आती है अभी अभी महेंद्र से बात हुए मेरी मैंने अपनी बहन को देखा वो आज भी उतनी हे प्यारी है

प्रिय ......क्या सच में शालू लौट आई है पैर माँ पिताजी को पता चला तो क्या होगा

जोरावर ......माँ कुछ नहीं कहेगी शालू में उनकी जान बस्ती है फार है तो बस पिताजी का आवर सूर्य का

प्रिय ......पिताजी का तो समाज आता है पैर ये सूर्य कोण है

जोरावर ......तुम जब देखोगी तब पता चल जायेगा की सूर्य कोण है

फिर अपने दादा जी आवर सूर्य की आज की दोनों घटना महेंद्र से जो सुनी थी वो सब प्रिय को बताता है

तभी जोरावर का फ़ोन पे कोई मैसेज आता है

जोरावर जब फ़ोन देखता है तो उसमे शिव सूर्य आवर शालिनी की फोटो थी

जोरावर ......प्रिय तुम पूछ रहे थी न की सूर्य कोण है लो देखो सूर्य ठाकुर तुम्हारे भांजे की फोटो

प्रिय जल्दी से अपने पति का फ़ोन लेती है आवर पहले शिव का फिर शालिनी का पिछ देखते है कुछ देर देखने के बाद सूर्य की पिछ देखते है

प्रिय के बदलते हावभाव जोरावर देख लेता है

जोरावर ......क्या हुआ प्रिय अपने भांजे को देख कर खुश नहीं हुए

प्रिय ......ये ये तो वही चेहरा है जी

जोरावर .....जनता हूँ प्रिय आवर मुझे भी इस बात की चिंता है क्युकी पिताजी ये कभी होने नहीं देंगे आवर सूर्य के बारे में जो सुना है मुझे नहीं लगता की वो रुकने वाला है वो आज नहीं तो कल यहाँ आएगा आवर इन तीनो की मुलाकात जरूर होगी

प्रिय ......मैं क्या कही हूँ जी आप कुछ दिन के लिया दोनों को उनके मां के यहाँ भिजवा दीजिये

जोरावर ......उस से क्या होगा एक न एक दिन तो सामना होना है इनका

प्रिय .......तो फिर क्यों न हम दोनों का एडमिशंस मेरे भाई के यहाँ करवा देते है एक हफ्ते बाद वैसे भी इनका स्कूल खुलने वाला है मेरा भाई की कोई औलाद नहीं है वो भी खुश हो जायेगा

जोरावर ......ठीक है मैं कल हे संजय के साथ दोनों को भिजवा देता हूँ

जोरावर अपने कपडे चेंज कर अपने बीबी को बाँहों में भर कर सो जाता है

वही ऊपर रूम में सपना आवर �किरण

सपना .....क्या बात है छोटी तू आज बड़ी खुश है

किरण ......ऐसा कुछ नहीं है दीदी मैं तो हमेशा खुश रहती हूँ

पैर आज सुबह से पता नहीं क्यों मुझे बहुत अच्छा लग रहा है

जैसे मेरे आपनो का राजकुमार मेरे पास आ रहा है

सपना ......क्या बात है लगता है आपने कुछ ज्यादा हे देख रहे हो

आवर आज सुबह तू गुस्सा क्यों हुए थे दादी सा पे

किरण .....सॉरी दीदी पर मुझे खुद नहीं पता ऐसा क्यों हुआ था

सपना ......चल सो जा अपने राजकुमार के आपने नहीं देखने है क्या तुम्हे

�किरण ....क्यों आपका भी तो वही राजकुमार है हेहेहे

सपना ......चल चल अब सो जा गूडनिघत स्वीटी उम्म्म्मः

किरण .....गुड नाईट दीदी उम्म्म्मः

दोनों बहने एक दूसरे को बाँहों में भर कर सो जाती है

वहीँ सूरजगढ़ के सीमा में साध्वी जी अपनी कुटिया में आराम से एक चटाई नुमा बिस्तर पे लेती हुए थी

तभी उसे किसी की आहात मुलती है

साध्वी जी सतर्क हो जाती है

कुछ देर गौर से सुनने के बाद जब आवर कोई आवाज नहीं होती है तो वो आराम से लेट जाती

तभी एक साया जैसा कुछ साध्वी की कुटिया में प्रकट होता है

साध्वी जल्दी से उठ कर बेथ जाती है

साध्वी जी ......परनाम आप यहाँ वो भी इस वक़्त

साया ......कल्याण हो पुत्री यहाँ तुम्हारे पिता तुमसे मिलने आया है

साध्वी जी .....जी पिताजी आप यहाँ कैसे

saya....putri हमें तुम्हे जो कार्य सौंपा है तुम उसको आज से हे आरंभ करो आवर कल हे हम कुछ विशेष योद्धा आपके यहाँ भेज रहे है जिनको इसे जंगल में रह कर उसको शिक्षा देनी होगी आवर तुम्हे केवल उसके सरीर को वज्रा का बनाना है आवर योग ध्यान की शिक्षा देनी है

साध्वी ..किन्तु पिताजी ये कैसे संभव है

साया ......ये लो ये दिव्या ोस्दिया है तुम इनका प्रयोग करोगी आवर तुम्हे इस जंगल के अंदर कुछ आवर ोस्दिया मिल जाएगी किन्तु याद रहे उसको पता नहीं चलना चाइये पुत्री की तुम कोण हो

कुछ देर साया साध्वी जी बात करते है फिर वह स्व निकल जाते है

साध्वी जी इन ओसधियो को संभल कर रख देती है

सुबह भरम मुहरत में हे साध्वी स्नान आदि कर पूजा पथ से निविरत हो कर

हवेली की आवर चल देती है

हवेली में अभी तक ज्यादा तर लोग सोये हुए थे केवल कुछ नौकर चाकर दादा जी आवर दादी जी उठे थे

साध्वी जी के डिअर खटखटाने पे एक नौकर ने गेट खोला

नौकर ......परनाम साध्वी जी किश से मिलना है आपको

साध्वी जी .....ठाकुर जी से कहिये की साध्वी जी उनसे मिलना चाहती है

नौकर साध्वी जी को ेब बैठक में बैठा कर ठाकुर जी को सन्देश पंहुचा देता है

कुछ देर बाद दादा जी आवर दादी जी भी बैठक में पहुंच जाते है

दादा जी ......आप आवर इतनी सुबह सुबह यहाँ कैसे

साध्वी जी .......हमें सूर्य को आज से हे उसका गुस्सा shan't करने की सीख्शा देनी होगी क्युकी सूर्य का गुस्सा दिन न दिन बढ़ता जायेगा

दादी जी .....किन्तु वो तो अभी अभी तो ठीक हुआ है

साध्वी जी .....उसकी चिंता आप न करे उसका इलाज हम खुद कर देंगे

तभी वह शिव आवर महेंद्र भी आ पहुंचे

दोनों ने साध्वी जी को परनाम किया आवर बेथ गए

दादा जी ......शिव बीटा सूर्य उठ गया क्या

शिव .....जी पिताजी वो उठ चूका है क्यों क्या हुआ

दादा जी .....कुछ नहीं हम बस उसके साथ गुमने जा रहे है उसको बुला कर लाओ

शिव वह से चला जाता है कुछ देर बाद हे दादा जी सूर्य को ले कर साध्वी जी के साथ निकल जाते है

सूर्य ......दादा जी हम कहा जा रहे है

दादा जी .....बीटा है जंगल में गुमने जा रहे है आवर अब से आपको रोज वह जहा होगा इनके ( साध्वी जी ) पास आवर जैसे ये कहे वैसे हे करना होगा

सूर्य .......ठीक है दादा जी पैर आपको भी हमारे साथ आना होगा रोज .

दादा जी साध्वी की आवर देखते है जो की गर्दन है में जुका कर है करती है

दादा जी ......ठीक है बीटा है भी आपके साथ चैलेंज

कुछ हे देर में ये सब जंगल के अंदर थे जहा पे

साध्वी जी ने सूर्य की सीख्शा आरम्भ करनी थी

वही 2 आदमी आवर भी थे जो कुछ काम कर रहे थे

साध्वी जी .....ठाकुर जी ये दोनों सूर्य को प्राचीन कल की युद्ध कला की सीख्शा देंगे आवर हम योग साधना की ध्यान लगाने की

ठाकुर जी ......ठीक है देवी जैसा आप कहे

साध्वी जी ......आप एक ज़माने में अच्छे पहलवान रह चुकी है आपको भी सूर्य को मॉल युद्ध की सीख्शा देनी होगी

ठाकुर जी .....क्या सूर्य इतना सब कुछ एक साथ शिख जायेगा उसका सरीर उसका साथ देगा

साध्वी जी ....कुछ वक़्त लगेगा उसके बाद आप देखना सूर्य की सिखने की क्षमता

साध्वी जी सूर्य को ले कर एक आवर चल दी कहा जमीं पे दो आसान लगा हए थे

साध्वी जी .....सूर्य आप जैसा हम करे वैसे हे आपको करना है

सूर्य .....हम ये सब क्यों कर रहे है

साध्वी जी .....ताकि तुम अपने परिवार की सुरक्षा कर सको आवर आप अपने गुस्से को काबू में रख पाओ

सूर्य..... जी ठीक है जैसा आप का होगी वैसे हे करूंगा मैं

साध्वी सूर्य को ध्यान योग की किर्या बताने लगता है आवर सूर्य भी वैसे हे करता है

लगातार 2 जानते के बाद भी सूर्य ठीक से ध्यान नहीं कर पता है

उसका ध्यान बार बार भटक रहा था

साध्वी जी ......सूर्य चिंता न करो डेरी डेरी सब शिख जाओगे

अब जाओ इन दोनों के पास तुम्हे जो वो कहे वही करना

सूर्य ....जी

सूर्य वह उनके पास चला जाता है

1 ...वयोम 2 ....सकती

वयोम .....आवो बीटा मैं हूँ वयोम आवर ये है मेरा मित्र सकती हम तुम्हे युद्ध कला सिखाएंगे

सूर्य ......जी ठीक है

वयोम ....वो सामने जो पहाड़ी पे तुम्हे लाल दवाज दिख रहा है न ( लगभग 3 कम दूर पहाड़ी पे )

सूर्य .....जी दिख रहा है

वयोम .....तुम्हे उसके 2 चाकर करने है दौड़ते हुए

चलो सुरु हो जाओ

सूर्य .....व्वो बहुत दूर है मैं कैसे वह तक पहुँचूँगा

सकती .....अपने परवर के रक्षा करनी है न

सूर्य ......जी ठीक है जाता हूँ

सूर्य तेजी से पहाड़ी की तरफ दौड़ने लगा कुछ 20,मिंट बाद जब पहाड़ी के पास पंहुचा तो सूर्य पूरी तरह से पसीने में भीग चूका था

सकती .....क्या पहले दिन हे इतना कठोर होना जरुरी है

वयोम ....मैं नहीं जनता ये कोण है क्यों हमें इसको शिक्षा देने को कहा है किन्तु ये कुछ खास जरूर है तभी हम यहाँ है

सकती .....ठीक है पर आज के लिया थोड़ी सकती काम करो शिक्षा के साथ साथ आगे बढ़ो

जब सूर्य इनके पास पंहुचा तो पूरी तरह से नाहा चूका था पसीने से

कुछ देर सकती के साथ अभ्यास करके सूर्य साध्वी के पास पंहुचा जहा पे उन्होंने सूर्य को कोई कड़वा काढ़ा पिलाया

सूर्य अपना मुँह बनाते हुए पि लिया

आवर अपने दादा जी के साथ घर के तरफ निकल गया.......

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अपडेट. 56

सकती .....ठीक है पर आज के लिया थोड़ी सकती काम करो शिक्षा के साथ साथ आगे बढ़ो

जब सूर्य इनके पास पंहुचा तो पूरी तरह से नाहा चूका था पसीने से

कुछ देर सकती के साथ अभ्यास करके सूर्य साध्वी के पास पंहुचा जहा पे उन्होंने सूर्य को कोई कड़वा काढ़ा पिलाया

सूर्य अपना मुँह बनाते हुए पि लिया

आवर अपने दादा जी के साथ घर के तरफ निकल गया.......

अब आगे .........

दादा जी ......सूर्य बीटा यहाँ पर आ

कर के कैसा लग रहा है

अभी कोई प्रॉब्लम तो नहीं हो रहे है न तुम्हे

सूर्य .......दादू पहले तो बहुत थकन हुए थी पैर जब से वो कड़वा दवाई लिया है तब से ठीक लग रहा है

दादा जी ......बीटा अब से हम यहाँ पैर रोज आएंगे पैर तुम यहाँ पे जो भी हुआ वो किसी को न बताना समजे

सूर्य .......ऐसा क्यों दादू फिर घर पे क्या बोलेंगे हम

दादू ........घर पे बोलना तुम बस ध्यान लगाना शिख रहे हो जिस से तुम्हारा गुस्सा कभू में रहे

सूर्य .......ठीक है दादा जी दादा जी आप भी पहलवान है न मुझे भी पहलवान बनना है

दादा जी ......चलो फिर आज तुम्हे देसी अखाडा दिखा देता हूँ

कुछ देर बाद हवेली के पीछे की तरफ बंद अखाड़े में थे दोनों हे

सूर्य ......दादा जी यहाँ तो कोई नहीं है

दादा जी ......हाहाहा मैं हूँ न चलो आज तुम्हे अखाड़े के बारे में बताता हूँ आवर उसके नियम भी समजता हूँ कल से हम अखाड़े में खुलती शिखेंगे

कुछ देर दादा जी सूर्य को अखाड़े के विषय में समजते है आवर कुछ नार्मल एक्सरसाइज भी करवाते है जिस से सरीर को कैसे त्यार किया जाता है मुकाबले से पहले

लगभग 1 हर के बाद दोनों दादा पोता हवेली लौट आये

सूर्य फ्रेश होने चला जाता है आवर दादा जी दादी को सूर्य की खुराक के बारी में बताता है

शिव ......तो कैसा रहा आज का एक्सपीरियंस सूर्य के लिया पापा

दादा जी ......बीटा अभी वो बच्चा है बस फ़िलहाल उसका गुस्से को कभू करना शिकाय जायेगा ध्यान योग से फिर देखते है

दादा जी आवर पापा की कुछ देर ऐसे हे बात होती सूर्य को ले कर तब तक सूर्य भी वह आ जाता है

दादी जी ....सूर्य ये लो नास्ता करो आज से तुम्हे ये सब खाना है आवर पूरा ख़तम करना है

सूर्य .....दादी इतना खाना मुझसे नहीं होगा प्लेसेस आवर ये क्या है दादी ( सूर्य अपने सामने देखे अदा लीटर मिल्क से भरे चंडी के गिलास की आवर इसरा करता है )

दादा जी ......बीटा इस खाने से तुम्हारे सरीर को ताकत मिलेगी आवर तुम ज्यादा म्हणत कर पाओगे

किसी तरह सूर्य वो अदा लीटर ढूढ आवर डेस्क गई से बंद पराठे ख़तम करता है

महेंद्र .....चलो नास्ता हो गया है तो मेरे साथ चलो तुम आज हम गुमने चलेंगे

सूर्य ......क्या सच में b.Papa आवर कोण कोण जायेगा हमारे साथ में

B.Papa ......बस हम दोनों आवर कोई नहीं बीटा

सूर्य.... फिर मैं नहीं जाऊंगा आपके साथ

b.Papa ......अच्छा तो फिर तुम बताओ जिसको साथ ले कर चलना है

सूर्य .....कोमल दीदी आवर राधा हुआ भी साथ चलेगी तो हे मैं चलूँगा

सूर्य की बात सुन राधा आवर कोमल भी खुश हो जाती है

महेंद्र ......ठीक है बीटा कोमल राधा तुम भी त्यार जो जाओ आवर अपने भाई को भी त्यार करो हम आज बड़े सहर चलेंगे

दादा जी .....वह क्यों बीटा हमारा सहर है न

महेंद्र ......पापा मुझे कुछ काम भी है आवर बच्चो को शॉपिंग भी करवा देता हूँ लगे हाथ

दादी जी .....ठीक है पैर बच्चो को अकेला नहीं छोड़ना बीटा

महेंद्र .....ठीक है आप चिंता न करो

दादा जी ......सौदान रहना बीटा तुम्हारे साथ में बच्चे भी है

कुछ देर बाद महेंद्र तीनो को ले कर सहर की तरफ निकल जाता है किसी को मैसेज करते हुए

अभी सूर्य को घर से निकले हुए अदा जानता हे हुआ था की हवेली पे जरवर सिंह राणा पहुंचते है

शालिनी अपने बड़े भाई को देखते हे

जोरावर की आवर दौड़ पानी आँखों में आंसू किये

जोरावर भी इतने सालो बाद अपनी लाड़ली बहन को देख बहुत खुश हुआ

शालिनी ......भैयाआ

कहते हुए सीने लग जाती है पैर जोरावर शालिनी को खुद से अलग कर देता है

शिव दादा दादा b.mummy भी इनके पास चले आये

शालिनी को बहुत दुःख हुआ जब जोरावर ने शालिनी को खुद से अलग किया तो

शालिनी अपनी भीगी हुए आँखों से एक बार अपने बड़े भाई को देखा आवर पलट कर जाने लगी

तो रेखा ने उसका हाथ थान लिया

दादा जी .....जोरावर ये क्या बात हुए भला

जोरावर ......माफ करना बाउजी क्या इन दोनों ने किया वो ठीक था

दादी जी ......बीटा गलती सब से हो जाती है अपनी लाड़ली बहन को माफ नहीं करेगा क्या

दादी के इसारे पे रेखा शालिनी को जोरावर की आगे कर देती है

जोरावर अपनी बहन के बहते हुए आंसू आवर दर्द भरे चेहरे को देख नहीं पता है आवर खुद से हे अपने गले लगा लेता है

जोरावर ......क्यों क्यों किया शालू तुमने ऐसा काम से काम मुझे तो अपने आवर शिव के बारे में बता सकती थी तुम क्या इतना भी यकीं न था अपने इस भाई पे

शालिनी .......माफ कर दीजिये भैया हम उस से सदी नहीं करना चाहते थे हम शिव से प्रेम करते थे

जोरावर .......चल अब घर चल तुम्हारी भाबी तुम्हारा इंतजार कर रही है

तभी शिव आगे आ कर जोरावर के पेअर चुने की कोशिश करता है

जोरावर अपने पेअर पीछे खींच लेता है

जोरावर .....ये क्या कर रहे hi शिव अब आप हमारे छोटे भाई होने से पहले शालू के पति हो हमारे जीजा श्री

दादा जी ......है बीटा अब तुम दोनों का रिस्ता बदल चूका है

जोरावर शिव को गले लगा लेता कुछ देर ऐसे हे गेले सिक्वे दूर करते है

शालिनी खुद अपने भाई की लिया खाना बनती है

एक तरह से शालिनी के लिया अपने ससुराल में पहली रसोई थी जोरावर तो अपनी बहन के हाथो से बंद खाने की तारीफ पे तारीफ किये जा रहा था

शालिनी के हाथो बना खाना सबको पसंद आया था क्युकी खाना बना हे बहुत लाज़बाब था

दादा जी .....बीटा मेरा दोस्त कैसा है

जोरावर ......बाउजी पापा आज भी आपको याद करते है भले हे दोनों परिवारों में सम्बंद बिगड़ चूका हो

पैर वो आज भी आपकी आवर पापा की अखाड़े वाली तस्वीर देख कर उदाश हो जाते है आपको याद करके

शालिनी .....भैया क्या माँ पापा आज भी नाराज़ है हम पे

जोरावर ......शालू नाराज़ तो नहीं है पैर गुस्सा जरूर है आखिर जो भी क्यों न तुम दोनों ने काम हे ऐसा किया था

शिव ......हमें माफ करे भैया पैर हम एक दूसरे से प्रेम करते थे आवर बाउजी ने जिसको चुना शालू के लिया अच्छा लड़का नहीं था

दादा जी ......ये तुम कैसे कह सकती हो

शिव .....क्युकी वो पहले से दादी सुधा था उसके आलरेडी बचे भी थे जब शालू आवर मैंने पता किया तब हमें पता चला की उसमे बहुत से लड़कियों के साथ गलत किया बहुत से लड़कियों ने उसके करना खुदखुशी की है

जोरावर ......अगर ऐसे बात थे तो हमें बताना चाइये था तुम दोनों को उसके बारे में आवर तुम दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हो ये हमसे क्यों छुपाया

शालिनी .....महेंद्र भाई साहब को पता था हम दोनों का मैंने हे उनकी कसम दी थी आपकी दोस्ती की

की वो आपको कुछ न बताये इस बारी में हम तो पापा के कहे अनुसार उस से सदी भी करने को त्यार थे एक दूसरे को भुला कर

मैं शिव को भूलने को त्यार नहीं थी पैर शिव ने पापा की ेजात के खातिर मुझसे हे दूर होने का फैसला किया वो तो अच्छा हुआ इनका कोई दोस्त था जिसने हमें उसकी सचाई बताई फिर जब हमें खुद पता किया तो बहुत कुछ सामने आया

दादा जी ........शिव तुम्हे इतना सब पता तो फिर हमें पहले हे क्यों नहीं बताया

शिव .....कैसे बताता आपको पापा हम जब आये थे आपके पास तो आपने बिना कुछ सुने हे घर से निकल दिया

हमने कितनी कोशिश की आपको सच बताने की पैर आपने तो शालू से रिस्ता हे ख़तम करने को कह दिया हम भी ठाकुर है कैसे अपने वचन से पीछे हैट जाते पापा

दादा जी ......तुमने उसको मार कर अच्छा किया नहीं तो हम खुद उसे अपने हाथो मर देते

शिव ....आप जिसको बात कर रहे हो पिताजी

हमने किसको मारा है

जोरावर .......सक्तिपुर के दुर्जन ठाकुर के भाई दुस्यंत ठाकुर को जिसका रिस्ता शालू से हुआ था

शिव .....क्या वो मर चूका है पैर भैया उसको हमें नहीं मारा था है हमें उसकी पिटाई जरूर की थी जब उसमे शालू को उठाने की कोशिश की थी

शालिनी .....है भैया इन्होने बस उसके हाथ पेअर हे तोड़े थे

दादा जी .....फिर उसको किसने मारा जसके चले दुर्जन ठाकुर क्या पूरा सक्तिपुर हमारा दुसमन बना हुआ है

शिव ......पता नहीं बाउजी जब उसमे शालू को उठाने की कोशिश की उसके बाद हे मैं आवर शालू विदेश चले गए हमें तो पता भी नहीं था की वो मर चूका है

दादी जी .......अब छोड़ इन सब बातो को वो था हे इस लायक

जोरावर ......बाउजी आप सब मेरा साथ चलो आवर शालू तुम भी घर चलो अब आवर ये दुश्मनी नहीं होगी दोनों परिवारों के बिच

शालिनी ....पैर भैया वो सूर्य तो बहार गया है बड़े भैया के साथ में

( जोरावर ..उसको मैंने हे भेजा है शालू महेंद्र से कह कर )

जोरावर ......कोई बात नहीं शालू अब तो मिलना जुलना लगा रहेगा मैं अपने भांजे को लेने फिर आ जाऊंगा

बाउजी आप हे कहो न

दादा जी .....ठीक है बेटी त्यार हो जाओ सब मुझे मेरे दोस्त से मिलना है बरसो बाद .....

सक्तिपुर ........

एक बहुत बड़ी पुराणी हवेली जिसने चारो तरफ कुछ आदमी गन लिए खड़े थे

कुछ बहार बगीचे में बे थे हुए थे

तभी वह कोई आया है

aadmi.......parnam ठाकुर साहब ठाकुर साहब आपसे अकेले में बात करनी है

दुर्जन सिंह .....कहो भीमा क्या खाना है

भीमा ......ठाकुर साहब वो शिव लौट आया है

दुर्जन सिंह .....कोण शिव लौट आया है

भीमा ........वही शिव जिसने आपके भाई दुस्यंत ठाकुर को मार दिया था आवर उनकी मंगेतर को बाघा ले गया था वो कल लौट आया है अपने परिवार के साथ

दुर्जन सिंह भीमा की बात सुन कर गुस्से में बिलबिला उठा आवर भीमा को कास कर थपड जड़ दिया

दुर्जन सिंह .......वो कल लौट आया आवर तुम मुझे अब बता रहे हो

भीमा ......माफ लीजिये मालिक मुझे अभी अभी पता चला जब महेंद्र ठाकुर के साथ एक लड़के को सक्तिपुर बाईपास से जाते हुए देखा तब वह पे किसी ने बताया की ये सूर्यगढ़ के शिव ठाकुर का बीटा सूर्य है

दुर्जन सिंह ......शाबाश भीमा अब देखता हु मैं कैसे सूर्यगढ़ के ठाकुर मेरे पैरो में गिर कर नक् रगड़ता है

अपने कुछ आदमियों को ले जाओ आवर जब वो लौटे तो इन सबको को हमारे पुराणी हवेली उठा लाओ

भीमा ......जी ठाकुर साहब

भीमा अपने साथ कुछ 6,7 लथेथ आदमी ले कर निकल गाय .......

महेंद्र सूर्य कोमल राधा

सहर पहुंच चुके थे

सूर्य .....बड़े पापा ये तो बहुत अच्छा सहर है

महेंद्र .....है बीटा सूर्य ये हमारे नजदीक सबसे अच्छा सहर है

यहाँ आपको हद वो चीज़ मिल जाएगी जो आपको जरूरत हो

कोमल .....पापा हमारा शॉपिंग मॉल भी तो यही है न जो चाचा जी के नाम पे है

राधा .......है कोमल चलो पहले वही चलते है क्यों भैया

महेंद्र ......है क्यों नहीं राधा मुझे भी काम है आवर तुम सब की भी शॉपिंग हो जाएगी

सब मॉल की आवर निकल जाते है

सूर्य बहुत खुश था रोड पे चले रंग बिरंगे पोस्को में महिलाओ आवर आदमियों को देख कर

सूर्य .....b.Papa ये देखिये इनके कपडे कितने अच्छे है

महेंद्र .....बीटा ये राजस्थानी पोशाक है धोती कुरता आवर पगड़ी

गाँवो में यही पहना जाता है

आवर इन महिलाओ ने जो पहना है उसको बोलते है

गगरा चोली आवर लुगदी जो की राजस्थान की पारम्परिक पोशाक है पहले सब यही पहनते थे समय के साथ साथ सहर में मॉडर्न कपडे पहने लगे

ऐसे हे बात करते हुए ये लोग शॉपिंग मॉल पहुंचे

महेंद्र अपने ऑफिस में ले जा कर सूर्य का परिचय दिया राधा आवर कोमल को पहले हे जानते थे सब क्युकी वो पहले भी आ चुकी थी यहाँ पे

एक लड़की को इनके साथ भेज कर शॉपिंग करने का बोल देता है

आवर खुद महेंद्र अपने काम में लग जाता है ............

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कोपड़ाते 57

ऐसे हे बात करते हुए ये लोग शॉपिंग मॉल पहुंचे

महेंद्र अपने ऑफिस में ले जा कर सूर्य का परिचय दिया राधा आवर कोमल को पहले हे जानते थे सब क्युकी वो पहले भी आ चुकी थी यहाँ पे

एक लड़की को इनके साथ भेज कर शॉपिंग करने का बोल देता है

आवर खुद महेंद्र अपने काम में लग जाता है ............

अब आगे ..........

वही जोरावर सिंह राणा शिव दादा दादी शालिनी आवर रेखा मम्मी को ले कर सूरजगढ़ पंहुचा

कुछ 20 मिंट बाद हे जोरावर सबको ले कर हवेली पंहुचा जहा

मुख्या गेट से होती हुए जोरावर कार को हवेली के में गेट पे रोकता है

इस वक़्त दोपहर का समय था इस लिया

घर के ज्यादातर मेंबर्स अपने अपने रूम में आराम कर रहे थे

नाना जी विक्रम सिंह राणा अभी कार की आवाज सुन कर बहार निकले हे थे की अपने बरसो पुराने दोस्त को सामने खड़ा देख कर पल भर के लिया तो ख़ुशी गम दर्द गुस्सा के एक्सप्रेशन देखने को मिले पैर जैसे हे नज़र शिव ठाकुर पे पड़ी विक्रम सिंह का चेहरा पुरे गुस्से में लाल होने लगा

नाना जी ....तुम्हारी हिमत कैसे हुए मेरे दहलीज़ पे आने की

दादा ji......vikram अपने दोस्त से नहीं मिलेगा क्या

नाना जी ......कैसा दोस्त किसका दोस्त मेरा वो दोस्त तो 14 साल पहले हे मर चूका है

नाना जी की बात सुन कर दादा जी गुस्से में नाना जी के काश कर थपड मरते है

सबके चेहरे पे हवइया उड़ने लगी की ये क्या हो गया शिव आवर संजय अपने अपने पिता की आवर बढे हे थे की जोरावर की हंसी सुन कर रुक गए

तभी दादा जी के गलो पे चाताक कर के एक चांटा पड़ता है

दादा जी .......आअह्ह्ह मर डाला राणा आज भी तेरा हाथ वैसा हे है

नाना जी .......क्यों ठाकुर तुम्हे क्या लगा था की राणा की हड़िया कमजोर हो गई है

तभी शालिनी कार से बहार निकलती आज

साथ में दादी जी b.mummy रेखा जी

दादा जी .....देख मेरी बेटी आई है आज तेरे घर क्या तू यही पैर खड़ा रखेगा हमें

रूपा देवी अपनी बेटी को देख कर खुश होती है पैर साथ में जानवी देवी आवर रेखा को देख कर उसको अपनी बेटी का घर से बग्न भी याद आ जाता है

रूपा देवी ......क्यों आई है तू यहाँ अब भी कुछ कमी रह गयी है क्या पुरे राजपुताना में हमारी नक् कटवाने में

अपनी माँ के मुँह से ऐसे तीखे सबद सुन शालिनी की आँखों में आंसू आवर दिल दर्द से भर उठा

जहा शालिनी को इंटने वर्षो बाद अपने परिवार को देखने आवर मिलने की ख़ुशी थी वही अपने माँ द्वारा ऐसे दिल को चिर देने वाले सबद अपने लिया सुन कर शालिनी की हिमत जबाब दे देती है शालिनी पेअर कपङे लगे है जैसे उसके पैरो में जान हे बाकि न हो

जल्दी से रेखा ने शालिनी को संभाला पैर तब तक शालिनी बेहोश हो चुकी थी क्युकी शालिनी को अपनी माँ से बहुत गहराई लगाव था

rekha......shalini शालिनी उठी क्या हुआ तुम्हे शिव देखो शालिनी को क्या हुआ है

रेखा की बात सुन कर रूपा देवी के भी पेअर कपङे लगे

शिव जल्दी से शालिनी को उठा कर कार की तरफ बढ़ा हे था की जोरावर रूपा देवी ने शिव का रास्ता रोक लिया

शिव ......माँ हैट जाये सामने से

विक्रम सिंह .....शिव शालू को अंदर ले चलो वो बेहोश हो गई है

शिव अपनी माँ की आवर देखता है

जानवी देवी .....बीटा अंदर ले चलो बहु को

जोरावर .....संजय जाओ डॉक्टर को ले कर आवो जल्दी

शिव जोरावर के साथ में शालिनी को अंदर ले जा कर एक बीएड पे सुला देता है

वही मॉल में सूर्य को अचानक गर्बराहट होने लगी

सूर्य .....बुआ हमें घर चलना है

राधा .....क्या हुआ सूर्य अचानक अभी तो शॉपिंग भी नहीं हुए है हमारी

सूर्य गुस्से में

सूर्य ......मैंने बोलै न मुझे घर जाना है

सूर्य की बात सुन कर राधा कोमल आवर जो साथ में लड़की थी वो दर जाती है

राधा सूर्य को ले कर महेंद्र के पास पहुंची सूर्य अभी भी गुस्से में था

महेंद्र .....क्या हुआ राधा शॉपिंग हो गई क्या इतनी जल्दी

कोमल .....पापा सूर्य घर जाने को बोल रहा है पता नहीं अचानक इसे क्या हुआ है

महेंद्र ......बीटा क्या हुआ अभी तो ठीक से शॉपिंग भी नहीं की तुमने

सूर्य ......मुझे माँ के पास जाना है अभी के अभी हम घर जा रहे है

सूर्य लगातार अपनी माँ को कॉल कर रहा था जो की शालिनी घर पे हे भूल गई थी

अपनी माँ के फ़ोन न उठा ने पे सूर्य का गुस्सा आवर चिंता बढ़ती जा रहे थी

सूर्य ने बिना कुछ कहे तेजी से मॉल से बहार की आवर जाने लगा

सूर्य को ऐसे जाता देख महेंद्र कोमल राधा जल्दी से उसके पीछे लपके

राधा .....सूर्य रुको कहा जा रहे हो ऐसे हे

पैर सूर्य तो बिना सुने जिअ कार से आये थे उसकी तरफ बढ़ रहा था

जैसे हे सूर्य ने कार का फॉर खोला वैसे हे महेंद्र ने सूर्य के कंडे पे हाथ रख रोका

सूर्य ने पलटने के साथ हे गुर के महेंद्र को देखा सूर्य की लाल होती आँखे देख महेंद्र ने ड्राइविंग सहित संभाली आवर बिना कुछ बोले हे हे सब बेथ गए कार में

आवर निकल चले सूर्यगढ़ की आवर जहा टास्ते में भीमा अपने साथियो के साथ इनका इन्तजार कर रहा था

महेंद्र बार बार जोरावर को कॉल कर रहा था क्युकी उसका सूर्य के गुस्सा होने का करना समाज नहीं आया वो जोरावर को लौटने का बता रहा था

क्युकी जोरावर ने हे सूर्य को बहार ले कर जाने का बोलै था .....

कुछ देर बाद हे संजय डॉक्टर को ले कर आ गया था

तब तक शालिनी को भी होश आ चूका था

डॉक्टर शालिनी को नींद का इंजेक्शन लगा कर चला गया था आवर सबको बता दिया था की ज्यादा चिंता के कारन आवर सदमे के कारन ये बेहोश हो गई थी कुछ देर आराम करेंगी तो ठीक जो जाएगी मैं इन्हे नींद का इंजेक्शन दे दिया है

रूपा देवी अपनी बेटी के सर को गॉड में रख कर बैठी हुए आंसू भ रहे थी

रूपा देवी ......मुझे माफ कर दे मेरी बच्ची शालू मुझे नहीं पता था तू मेरे गुस्से के बझा से ....

जानवी देवी .....दीदी आप ऐसा क्यों सोच रहे हो कुछ नहीं हुआ है शालिनी को वो ठीक है

रेखा ....है माजी आप चिंता न करो कुछ नहीं हुआ है मेरी बहन को

तभी जोरावर का फ़ोन बजने लगता है

जोरावर ....है hello कोण बोल रहा है

महेंद्र ......यार मैं बोल रहा हूँ महेंद्र तेरा दोस्त कहा है तू

जोरावर .....मैं घर पे हूँ सब के साथ क्यों क्या हुआ

महेंद्र .....हम घर लौट रहे है मैं टास्ते में हे हूँ

जोरावर ....क्या पैर तुम तो साम तक आने वाले थे न फिर अभी कैसे

महेंद्र ......यार पता नहीं सूर्य को क्या हुआ है वो बहुत गुस्से में है बार बार शालिनी को कॉल कर रहा है आवर घर जाने की ज़िद करने लगा तो मुझे ले कर हे आना पड़ा

जोरावर ......यार एक प्रॉब्लम जो गई थी वो माँ सा ने गुस्से में शालू को कुछ कह दिया था तो वो बेहोश हो गई थी .....

mahendra.....kyaaaa क्या हुआ शालू......

जोरावर .....hello क्या हुआ महेंद्र आवर ये आवाज कैसे थी

दरशल सामने भीमा अपने आदमियों के साथ खड़ा था बिच सड़क पैर रास्ता रोके हुए

महेंद्र .....भीमा यहाँ क्या कर रहा है

फ़ोन अभी भी चालू हे था

दूसरी तरफ फ़ोन पे भीमा का नाम सुनते हे जोरावर के कान खड़े हो गए

जोरावर .....hello महेंद्र क्या हुआ आवर भीमा कहा मिल गया तुम्हे

जोरावर की बात सुन कर दादा जी के कान भी खड़े हो गए

दादा जी .....बीटा महेंद्र के साथ बच्चे भी है उसे भीमा कहा मिल गया

जोरावर .....महेंद्र कहा hi तुम इस वक़्त मैं अभी आता हूँ

महेंद्र ......मैं सक्तिपुर बाईपास पे हूँ भीमा अपने7,8 लठेतो के साथ बिच सड़क पे रास्ता रोले खड़ा है यार बच्चे भी साथ में है

जोरवार .....तू चिंता नाना कर मैं अभी आता हूँ अपने आदमियों को ले कर

दादा जी ....रुको मैं भी चला हूँ

shiv....Papa मैं भी चलूँगा वह सूर्य भी है आवर अगर कुछ भी गलत हुआ तो वो किसी के बस में नहीं आने वाला शालिनी अभी भी नींद में है

जल्दी हे जोरावर शिव नाना जी दादा जी अपने कुछ आदमियों के ले कर निकल गए संजय को यही छोड़ कर

महेंद्र ....बीटा आप लोग बहार नहीं निकलना मैं देखता हूँ इनको

सूर्य पुरे गुस्से में था क्युकी उसको जल्दी से जल्दी अपने माँ के पास जाना था पैर भीमा की वजह से उसको यहाँ रुकना पड़ा था

भीमा .....आओ ठाकुर आओ मैं तुम्हारा हे इंतजार कर रहा था आज इस शिव ठाकुर के पिले के साथ साथ तुम सबकी भी सेवा करने का मौका मुझे मिला है मेरे मालिक से

भीमा आवर उसके आदमियों ने कार को घेर लिया अब महेंद्र खुद को अकेला महसूस कर रहा था

सबको कार से बहार निकल लिया था

महेंद्र .....भीमा तुम्हे जो करना है मेरे साथ करो बच्चो को जाने दो

भीमा ....हाहाहा जाने कैसे दूँ ठाकुर ये तेरी बहन तो बहुत खूबसूरत है रे इसका राश चख कर मालिक बड़ा खुश होगा रे

भीमा राधा का हाथ पकड़ लेता है

बाकि सब भी हसने लेट है

राधा के आँखों में आंसू देख महेंद्र आगे बढ़ा हे था की भीमा ने राधा को अपने आदमी की आवर दाखिला आवर महेंद्र को चांटा मर दिया

वही जिसने राधा को पकड़ था वो राधा के साथ छेद कहानी करने लगा

तभी सूर्य को जिसने पकड़ रखा था अचानक हे उसकी चीखे निकलने लगी

सबका ध्यान जब उस आवर गया सूर्य के सामने सड़क पे वो आदमी तड़प रहा था उसके सर से खून पानी की तरह बाह रहा था

देखता है ऐसा क्या हुआ आवर कैसे

भीमा ने जैसे महेंद्र को तपाद मारा सूर्य की नज़र अपने बड़े पापा पे पेड फिर उनकी बगल में खड़े आदमी का हाथ राधा की कमर में देखते हे अब तक अपने गुस्से को किसी तरह रोके हुए था वो बंद टूट गया आवर सूर्य को जिसने पकड़ था पीछे से सूर्य ने उसका हाथ पकड़ कर अपने सर पे से गुहा कर सड़क पे दे मार जैसे डोभी कपडे को पत्थर पे मरता है

भीमा जल्दी से अपने आदमी की तरफ लपका जैसे हे निचे हुआ सूर्य ने भीमा के सीने पे काश कर लत मरी भीमा के मुँह से जोरदार चीख निकली आवर 2,3 गुलठिया कहते हुए 7, 8 फिट दूर सड़क पे फसर कर अपने सीने को दबा कर चिकने लगा

सूर्य .......मेरे पापा पे हाथ हटाएगा सेल

जैसे हे सूर्य की दहाड़ सुनी महेंद्र की नज़र सीधा सूर्य की जलती हुए आँखों पे जिनमे इस वक़्त जवालामुखी फैट फटी थी

सूर्य उस आवर बढ़ गया जिसने राधा को पकड़ा था

जैस हे सामने जा कर खड़ा हुआ सूर्य ने उसका वही हाथ पकड़ जिस से राधा की कमर पकड़ी थी आवर गुस्से से उसकी आँखों में देखते हुए एक जड़का मार जिसने साथ हे हड़िया फूटने के साथ हे एक करना भेदी चीख गूंजने गई

तभी पीछे से किसी ने सूर्य के कंडे पे लाठी से सर किया सूर्य के मुँह से बहुत जोर से चीख निकली

सूर्य ....मायआ...

सूर्य की चीख सुन कर महेंद्र जो अभी तक बस सूर्य के गुस्से से जड़ हो गया था उसकी तन्द्रा टूटी आवर किसी घायल शेर की जैसे महेंद्र भी एक आदमी से लाठी ले कर टूट पड़ा

देखते हे देखते भीमा सहित सब सड़क पे तड़प रहे थे

वही सूर्य ने उस आदमी के हाथ को थम लिया जिसने राधा के साथ बतमीज़ी की आवर एक हे जटके में उसका हाथ उसके सरीर से अलग कर भीमा की तरफ बढ़ गया

वो आदमी कुछ देर तड़पता रहा फिर बेहोश हो गया

सूर्य को ऐसे उस आदमी का हाथ उखड़ते देख राधा कोमल आवर महेंद्र तीनो की हे घिग्गी बंद गई

तभी वह जोरावर आवर बाकि सब भी पहुंच गए

सूर्य भीमा के छाती पे बेथ कर दोनों गाला पे एक के बाद एक चाताककक चटाककज करके तब तक लगा रहा जब तक भीमा के दोनों कानो से आवर मुँह से खून न बहने लगा

भीमा .....मुझे माफ कर दो ठाकुर मुझसे गलती हो गई

सूर्य ......तुमने इसे हाथ से मेरे पापा को चांटा मार था न

सूर्य की बात सुन कर शिव समाज गया की सूर्य के क्या इरादे है

शिव ......नहीं बीटा ऐसा मत करना छोड़ दो उसे

सूर्य ने एक बार पलट कर देखा आवर अपने गर्दन न में गिला दी

सूर्य .......क्या कहा था तूने शिव ठाकुर के पीला

राधा बुआ ीदार आना

सूर्य के ऐसे कहने पे राधा के सरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई

सूर्य .....राधाआ

राधा जल्दी से आगे बढ़ आवर डरते हुए सूर्य के पास कड़ी जो गई

सूर्य .....क्या कहा था तूने इनको देख कर है है ठाकुर तेरी ये बहन बहुत खूबसूरत है रे इस का राश चक कर मालिक बड़ा खुश होगा रे

भीमा .....मुझे माफ कर दो ठाकुर मुझे बॉक्स दो ठाकुर गलती हो गई

सूर्य .....कोण है तेरा मालिक

भीमा .....सक्तिपुर के दुर्जन ठाकुर है उनके हे कहने पे मैं तुम सबको उठा ने आया था

सूर्य भीमा के सीने पे बे थे बे थे हे कंडे के दोनों झोड़ पे एक एक पंच मरता है

जिस से भीमा की कंडे की दोनों हड़िया टूट गई

भीमा चिकने लगा छिलने लगा

जोरावर .....शिव सूर्य को रोको नहीं तो वो उसको जान से मर डालेगा

शिव .......नहीं रोक सकता भाई सा उसका गुस्सा सर्फ शालू हे shan't कर सकती है

या फिर जिसने लिया उसको गुस्सा आया वो

दादा जी ......राधा बेटी सूर्य को रोको सायद तुम उसका गुस्सा shan't कर सकती होने या फिर कोमल

अभी कोई कुछ आवर बोल्ट्स तभी भीमा के इन आवर चीख सुनाई देती है उसके बाद सर भीमा के मुँह से बस खून हे खून निकल रहा था

दरशल सूर्य को राधा के लिया भीमा द्वारा कहे गए सबदो के करना सुरना ने भीमा की जुबान को पकड़ कर उसके दांतो के बिच करके निचे वाले कंडे पे प्रहार किया जिस से भीमा की जुबान 1 इंच काट कर अलग हो गई

राधा आवर कोमल ने जल्दी से सूर्य को दोनों आवर से खुद से चिपका लिया जिस से देते देते सूर्य का गुस्सा कुछ shan't हुआ पैर जैसे हे गुस्सा संत हुए उसको अपनी माँ के पास जाने वाली बात याद आई

सूर्य दोनों से अलग हो कर कार ले तरफ लपका

शिव .....रुको बीटा सूर्य कहा जा रहे हो

अभी सूर्य पीछे पलटा हे था की उसके कंडे में दर्द होने लगा आवर सूर्य चीखते हुए बेहोश जो गया पास खड़े जोरावर ने जल्दी से सूर्य को निचे सड़क पे गिरने से रोक कर गॉड में उठा लिया

महेंद्र ......शिव जल्दी से सूर्य को हॉस्पिटल ले चलो उसके कंडे पे लाठी से प्रहार हुआ है

दादा जी .....क्या

महेंद्र ......है पापा बाकि मैं आपको बाद में बताता हूँ

दादा जी ....चलो जल्दी यहाँ से आवर जोरावर बीटा जरा मुझे इस दुर्जन का no.laga कर देना

महेंद्र आवर बाकि सब गडोयो में बेथ कर हॉस्पिटल की तरफ निकल गए ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........
 
अपडेट. 58

महेंद्र ......शिव जल्दी से सूर्य को हॉस्पिटल ले चलो उसके कंडे पे लाठी से प्रहार हुआ है

दादा जी .....क्या

महेंद्र ......है पापा बाकि मैं आपको बाद में बताता हूँ

दादा जी ....चलो जल्दी यहाँ से आवर जोरावर बीटा जरा मुझे इस दुर्जन का no.laga कर देना

महेंद्र आवर बाकि सब गडोयो में बेथ कर हॉस्पिटल की तरफ निकल गए ...........

अब आगे ....

दुर्जन सिंह भीमा का इन्तजार कर रहा था अपनी पुराणी हविली जहा उसने न जाने कितनी लड़कियों औरतो की ेजात आबरू लूटी थी कितने हे बच्चो को अनाथ किया था

दुर्जन सिंह का काम हे कुछ ऐसा था जिस से सक्तिपुर वाले भी बहुत से no जवान उसके दुसमन बन बैठे थे जिनके परिवार दुर्जन आवर उसके भाई बेटे के कारन बर्बाद हो चुके थे

वो सब चोरे छुपे दुर्जन की खबर उसके दुश्मनो तक पहुंचते थे

दुर्जन का मुख्या काम था ड्रग्स आवर हतियारो की तस्करी करना सक्तिपुर इ कुछ हे दूरिंग पे दूसरी कंट्री का बॉर्डर जो लगता था

दुर्जन सिंह अभी गुस्से में अपने हवेली में गम रहा था तभी उसका एक आदमी बगता हुआ आया है

आदमी ......मालिक भीमा को ठाकुर आवर उसके बेटे ने बहुत मारा साथ हे भीमा की जुबान भी काट दी

दुर्जन सिंह .......क्या चलते हो आज दोपहर में तो नहीं चढ़ा ले है रात की

आदमी .....मालिक मैं सच बोल रहा हूँ

तभी दुर्जन का फ़ोन गंगना उठा

दुर्जन ने गुस्से में बिना no.dekhe हे फ़ोन उठा आवर कान से लगा लिया

दुर्जन ......hello कोण

सामने से ....परताप ठाकुर बोल रहा हूँ दुर्जन सिंह

दुर्जन सिंह .....तेरी हिमत कैसे हुए परताप ठाकुर मुझे फ़ोन करने की

दादा जी ......वैसे हे जैसे अभी कुछ देर पहले तेरे खास पहेलवान की हुए थी मेरे परिवार पे बुरी नज़र डालने की

आवर सुन मेरी बात कान के साथ बाकि चढ़ खोल कर दुबारा सूर्यगढ़ या सूरजगर की तरफ तूने अपनी गन्दी नज़र डाली तो मैं कुछ नहीं करुगा पैर सूर्यगढ़ का वरिष्ठ तुम्हे कुत्ते की माउथ मरेगा हे नहीं कुत्ता बना कर छोड़ेगा

दुर्जन .......बहुत बोल रहे होंगे ठाकुर

दादा जी .....ठाकुर नहीं ठाकुर परताप सिंह

तुम्हे एक बात बताना तो मैं भुला हे गया दुर्जन तुम्हारे 8 आदमियों को हम में से किसी ने नहीं मारा तुमने जिसको उठा कर लेन को कहा था न भीमा से उसने हे तेरे आदमियों की मार की खुद का पिछवाड़ा बचा कर रख बच्चा समाज कर उसे दिखाया तो किसी आवर को मुँह दिखने लायक नहीं रहेगा

दुर्जन सिंह .....हाहाहा ठाकुर तूने बहुत अच्छा किया जो मुझे अपने शेर की सचाई बताई पैर तू चिंता न कर ठाकुर दुर्जन सिंह तुम्हे पूरा मौका देगा इस बार विजय उत्सव में मैं उसको चुनौती दूंगा आवर तुम कुछ नहीं कर पाओगे

दादा जी .......वो तो वक़्त बताएगा एक सचाई आवर सुन तेरे भाई डिस्टेंट को शिव ने मारा जरूर था पर उसकी जान नहीं ले पहले उसका तो पता करके

दादा जी की बात सुनते हे दुर्जन सिंह किसी बर्फीले पानी के जैसे ठंडा हो गया

दुर्जन ......नहीं तुम झूट बोल रहे होंगे ठाकुर अपने बेटे को बच्चन के लिया

दादा जी .....खुद पता करो दुर्जन मुझे झूट बोलने की जरूरत नहीं आवर मेरे बेटे को छोड़ सूर्यगढ़ आवर सूरजगढ़ की तरफ उतने वाली हर उस बुरी नज़र का सामना करने के लिया सूर्यगढ़ का वरिष्ठ .सूर्य शिव ठाकुर खड़ा है

कॉल कट ...

दुर्जन ........ठाकुर कुछ भी हो जाये मैं तुम्हे आवर तुम्हारे परिवार को नहीं बक्सने वाला

भले हे फिर चाहे दुस्यंत की मौत में तुम्हारा बीटा दोषी जो या न हो

तुम्हारे बेटे शिव आवर शालिनी की वजह से मेरे पिता ने आत्महत्या की थी कैसे भुला सकता हूँ मैं उस पल को

तभी दुर्जन के एक दूसरा सॅटॅलाइट फ़ोन जुस्पे बायो बीप की आवाज होने लगी

दुर्जन no.dekhte हे हवेली में बंद ख़ुफ़िया रूम की आवर निकल गया ...........

सूर्य को सूर्यगढ़ के हे एक हॉस्पिटल में ले कर पहुंचे तो वह दादा जी को देख जल्दी हे डॉक्टर ने सूर्य को चीख किया जो अभी अभी होश में आया था

कुछ देर डॉक्टर्स ने सूर्य को चेक किया

डॉक्टर .......ठाकुर साहब जबरन वाली कोई बात नहीं है सायद बच्चे ने कुछ ज्यादा हे जोर दाल दिया दीमक पे जिस से कुछ देर के लिया बेहोश हो गया

महेंद्र .....डॉक्टर सूर्य को कंडे पे भी चोट लगी है

डॉक्टर .....ठाकुर साहब मैंने पूरी जाँच के है बच्चा बिलकुल ठीक है उसकी बॉडी पे कोई चोट का नीसाण या सूजन कुछ भी नहीं है

वैसे आप एक बार खुद को चेक करवा लीजिये आपके गाल पे सूजन दिख रहे है

सूर्य .....पापा माँ कहा है

शिव ........बीटा वो आपकी माँ आपकी नानी के यहाँ गई है

इनसे मिलो ये आपके ननु है विक्रम सिंह राणा जी . आवर ये आपके मां जी .जोरावर सिंह राणा .

सूर्य अपने मां आवर नाना के चरण छू कर परनाम करता है

दादा जी .....क्या बात है बीटा सूर्य अपने नाना के पेअर चूहे आवर हमारे सीने पे तो बन्दुक हे तान दी थी पहली मुलाकात में

नाना जी ....क्या सच में परताप

सूर्य .....नाना जी दादा जी का पूरा नाम लीजिये ठाकुर परताप सिंह

दादा जी .....शाबाश मेरे शेर ये हुए न बात

इतने में महेंद्र भी आ जाता है

शिव ....पापा घर चले शालिनी....

अभी शिव ने इतना हे बोलै था की जोरावर ने उसको रोकते हुए सूर्य की आवर इसरा किया सब जोरावर का इसरा समाज गए

कोमल .....पापा घर चले अब हम

नाना जी .....चलो शिव सूर्य आवर दोनों बच्चियों को तुम अपने साथ ले कर चलो हम भी आते है आवर है बच्चो को सूरजगढ़ हे ले कर चलना है

शिव राधा कोमल सूर्य को एक कार से ले कर निकल गया सूरजगढ़ की आवर

वही पीछे से 2 कार में दादा जी नाना जी मां जी बड़े पापा

आवर कुछ आवर 2,3 आदमी आये थे सब चल दिए सूरजगढ़ की आवर

नाना जी .....महेंद्र बीटा ये सब क्या था सूर्य इतने गुस्से में क्यों था

महेंद्र ...बाउजी गुस्सा तो मुझे भी बहुत आ रहा था जब उन्होंने राधा के लिया भीमा ने गलत बोलै आवर उसके आदमियों ने राधा के साथ बतमीज़ी की पैर आप तो जानते जो भीमा अकेला मुँह जैसे 3,4 पे भरी फिर उसके 6,7 आदमी आवर थे मुझे बच्चा का दर था की अगर मैंने कुछ किया तो उनको न कुछ कर दे

आवर पता नहीं सूर्य जो पहले हे किस बात को ले कर गुस्सा था उसका गुस्सा फुट पड़ा

पापा जब सूर्य ने आप पे बंदूख तन राखी थी तब भी गुस्से में उसकी आँखे

दादा जी .....मुझे पता है बीटा सूर्य गुस्से में किसी को भी नहीं बक्सा आवर खुश कर जब कोई उसके परिवार को दुःख पहुचाये फिर चाइये वो कोई अपना हे क्यों न हो

जोरावर .....महेंद्र सूर्य को गुस्सा कब आया था कही उस वक़्त तो नहीं जब शालू बेहोश हो गई थी

महेंद्र .....क्या हुआ शालिनी को आवर अगर शालिनी बेहोश hi गई थी तो सूर्य को वह क्यों भेजा आपने

दादा जी .....बीटा शिव से कहो के वो सूरजगढ़ बहरी रस्ते से पहुंचे घर पे

महेंद्र जल्दी हे कॉल कर शिव को सब समजा देता है

वही घर पे

नानी जी दादी जी बड़ी मम्मी दोनों ममिया आवर छोटे मां जी

भी इनका हे इन्तजार कर रहे थे

नानी जी .......पता नहीं वो कमीना दुर्जन कब हम सबका पीछे छोड़ेगा

दादी जी .....इस्वर हे जाने कब उस पापी से यहाँ के लोगो को मुलती मिलेगा

संजय .....पता नहीं माँ सा पुलिस वाले भी क्यों उसको गोली नहीं मर देते कोनसा ऐसा गलत काम नहीं जो वो नहीं करता है

पता नहीं वह क्या होगा रहा होगा मुझे भी उनके साथ जाना चाइये

प्रिय .....आप रुकिए संजय आपके भाई सा को कॉल करती हूँ

अभी प्रिय कॉल करते की उस से पहले हे जोरावर की कार सबको अंदर आती हुए नजर आती है

b.mummy ....लगता है वो लोग आ गए है

दादी ji.....beta आप दोनों शालिनी के साथ रुको हम आते है अभी

संजय .....माँ सा भाई सा आवर बाकि सब यही आने वाले है

कुछ हे देर बाद जोरावर महेंद्र दादा जी नाना जी

सब बैठक में आ पहुंचे

b.mummy .....पापा जी मेरा बीटा सूर्य कोमल राधा कहा है आवर नहीं शिव आपके साथ आया है

नाना जी ....बेटे वो बस अभी आते हे होंगे क्या शालिनी ठीक है क्या वो जाग गई

b.mummy .....नहीं बाउजी वो अभी भी सो रही है

महेंद्र .......सूर्य को कोई भी ये बात नहीं बताएगा की शालिनी बेहोश हुए थी उसको बस इतना बोलना की वो सो रहे है तक गई थी इसल लिया

नानी जी .....ऐसा क्यों बीटा

तभी शिव भी आ जाता है

महेंद्र माँ सा सूर्य को सच मत बताना

शिव के कार रोकते हे सूर्य दूर खोल कर उतर जाता है आवर सीधा अपने b.mummy की आवर बढ़ जाता है

सूर्य .....b.mummy माँ कहा है

शिव देखा की आवर न में गर्दन हिलता है

b.mummy ....क्या हुआ बीटा आप सब तो शॉपिंग के लिए गए थे न

सूर्य .......मुझे माँ से मिलना है

वही सन्ति ममी आवर प्रिय ममी बस दोनों हे सूर्य को देख रहे थी

रूपा देवी का भी कुछ कुछ ऐसा हे हल था

रेखा सन्ति को चुप रहे का इसरा करती है

b.mummy .....सूर्य आपकी माँ थक गई है इस लिया वो आराम कर रही है चलो मैं ले कर चलती हूँ

सूर्य के साथ में कोमल आवर राधा भी चल पड़ी

जैसे सूर्य ने अपनी माँ को देखा वो दौड़ के शालिनी के पास गया आवर अपनी माँ के माथे को चुम लिया

सूर्य ........माँ उठिये मुझे भूख लगी है

जैसे हे सूर्य ने अपनी माँ का हाथ पकड़ के खिंचा शालिनी भी आँखे खोल दी

सूर्य ......माँ भूख लगी है ुटिये

शालिनी सूर्य के पीछे खड़े सभी को देख कर चौंक गई फिर खुद को किसी रूम में बीएड पे लेता देख फ़ौरन उठ बैठी जटके से उतने के कारन या फिर नींद के इंजेक्शन की वजह से थोड़ी लड़खड़ा गई

सूर्य ......माँ आप ठीक तो है न

शालिनी .....अह्ह्ह है बीटा मैं ठीक हूँ बस थोड़ा चाकर आ गया था

सूर्य .....आप रेस्ट करो बड़ी मम्मी खाना लगे माँ के लिया

देखा जल्दी से रसोई में से खाना ले आती है

सूर्य बीएड पे अपने माँ के साथ बेथ जाता है

सूर्य .....राधा बस कोमल दीदी आप भी आवो

दादी जी ......माँ बेटी तुम दोनों भी खा लो खाना हम सब तो पहले हे खा चुके है

शालिनी ......माँ मैंने भी तो पहले खा लिया था

नानी ji.....beti अपने माँ को माफ करदे आवर खाना खा ले देख तेरा बीटा तुम्हे खिला रहा मना मत कर

शालिनी अपनी माँ की बात सुन कर बहुत खुश होती है

सूर्य ......माँ आह कीजिये

सब यही सोच रहे थे की कुछ देर पहले ये कैसे किसी पागल हठी की तरह जो सामने आ रहा था उसको कुचल रहा था अभी कैसे मासूम बन गया है

सूर्य ने अपनी माँ को निकला खिलाया फिर कोमल को आवर लास्ट में राधा को

शालिनी ने भी सूर्य को खाना खिलाया तभी संजय सूर्य के पास आता है

संजय .......अपने मां को नहीं खिलायेगा क्या सूर्य

सूर्य अपनी माँ की तरफ देखता है

शालिनी ....ये तुम्हारे संजय मां जी है मेरे बड़े भैया

सूर्य बिना कुछ बोले एक निकला संजय को खिला देता है तो

प्रिय ममी आवर सन्ति ममी भी बिच में आ कड़ी हुई

दोनों एक साथ .....हम भी तुम्हारी ममी है

सूर्य ........तो क्या हुआ मैं हे खिलाऊंगा क्या

मां जी देखो आप दोनों की बिटिया क्या बोल रहे है

शालिनी .....सूर्या

सूर्य ......सॉरी माँ सा ममी जी दोनों सूर्य के पास आती है सूर्य दोनों को एक एक निकला खिलता है

सूर्य .....माँ मेरा हो गया

कह कर उठ जाता है आवर मौका देख अपने दोनों मामियो के गलो पे किश कर के बहार बैग जाता है

दादी जी .......बीटा जोरावर संजय बेचा कर रखना अपनी बीबियो को अपने भांजे से हे हेहेहे

दादी जी की बात सुन प्रिय ममी सन्ति ममी दोनों शर्मा गई आवर बाकि सबकी हंसी चुत जाती है

जोरावर .......कोई नहीं माँ सा ऐसे शेर दिल भांजे पे एक क्या दस बिबिया भी कुर्बान

प्रिय ......क्या कहा आपने बाद में मिलना आप तब देखते हूँ

दादा जी .......चल भाई विक्रम हम बहार चलते है

कुछ अपनी पुराणी आधे हे ताज़ा कर ले

नाना जी .....जोरावर बीटा जरा मेरा पुराण वाला चुका तो निकलना आज बरसो बाद फिर से दोनों दोस्त एक साथ पिएंगे .........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .....

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ........
 
अपडेट. 59

जोरावर .......कोई नहीं माँ सा ऐसे शेर दिल भांजे पे एक क्या दस बिबिया भी कुर्बान

प्रिय ......क्या कहा आपने बाद में मिलना आप तब देखते हूँ

दादा जी .......चल भाई विक्रम हम बहार चलते है

कुछ अपनी पुराणी आधे हे ताज़ा कर ले

नाना जी .....जोरावर बीटा जरा मेरा पुराण वाला चुका तो निकलना आज बरसो बाद फिर से दोनों दोस्त एक साथ पिएंगे .........

अब आगे ..........

सब लोग इस वक़्त बहार गार्डन में बे थे हुए टिया कॉफ़ी की चुस्किया ले रहे थे

शिव आवर शालिनी ने सबको सच बता दिया था की क्यों दोनों को बग्न पड़ा

शालिनी .....भाबी बच्चे कहा है जब से आये है तब से दिखाई हे नहीं दिए

प्रिय ममी ......शालू वो आज सुबह हे अपने मां के यहाँ गए है काफी टाइम से जाने की दीद कर रही थी दोनों हे ( झूट )

शालिनी .....भाबी काम से काम आज भैया के आने तक हे रोक लिया होता हम भी मिल लेते उनसे वैसे बताया नहीं आपने दोनों के बारी में

अब प्रिय ममी बड़े मां की आवर देखते है की क्या बताये

जोरावर ......शालू मुझे आवर संजय को एक एक बेटी है मेरी बेटी सपना आवर संजय की बेटी का नाम किरण है वो दोनों हमेशा साथ में हे रहती है

अगर कोई एक कही जाये तो दूसरी भी जाएगी हे जाएगी

शालिनी ......चलो कोई बात नहीं बाद मिल लेंगे अपनी दोनों भतीजियों से

दादी जी ......ये कोमल आवर सूर्य कहा गए अभी तो यही थे

नानी जी ........यही कही गम रहे होंगे बच्चे है आ जायेंगे

दादा जी ......महेंद्र बीटा अब हमें घर भी चलना चाइये

नाना जी ......ये क्या बात हुए यार आज बरसो बाद मिले है

दादा जी .....यार विक्रम रुकना तो मैं भी चाहता हूँ अपने दोस्त के साथ पैर अभी नहीं रुक सकता कुछ काम है उन्हें भी जल्दी हे ख़तम करना है

आवर वैसे भी अब तुम्हे आना है पुरे परिवार के साथ सूर्यगढ़ समजे न

जोरावर ......बाउजी काम से काम आज आज तो रुक जाये

दादा जी .....नहीं रुक सकता बीटा है मैं आवर सूर्य चले है बाकि आप सब कल आ जाना आराम से

शिव ......फिर हम यहाँ सूर्य आवर आपके बिना क्या करेंगे पापा

नाना जी ......यार सूर्य को तो तुमने दे काम से काम तुम्हे काम है तो

नानी जी ....भाई सा सूर्य का जाना जरूरी है तभी वो जा रहे है सूर्य को ले कर हम फिर कभी आते है न अब तो आना जाना लगा हे रहेगा

कुछ देर बाद सब निकल गए इजाजत ले कर सूर्यगढ़ की आवर

वही दुर्जन सिंह अपने कुछ भरोसेमंद साथियो को लिया तेजी से कही जा रहा था

दुर्जन सिंह ......हमें जल्दी हे बॉर्डर तक पहुंचना है वह हमारे कुछ मेहमान आये हुए है

बॉर्डर पार से समाज गए न आवर राणा तुम उनकी हर इच्छा का ध्यान रखोगे वो कुछ दिन यहाँ रुक कर आगे चले जायेंगे

राणा ....जी ठाकुर साहब

दुर्जन सिंह .....उनको हमारे जंगल फार्महाउस पे रखना है आवर कुछ लड़किया का इंतजाम कर देना उनके लिया

राणा .....ठाकुर साहब लड़किया उठाने का काम तो भीमा करता था वो तो अभी हॉस्पिटल में है

दुर्जन सिंह .....काम hi जाना चाइये राणा नहीं तो तुम जानते हो मुझे अगर लड़किया नहीं पहुंची तो तुम्हारे घर की लड़किया फार्महाउस पे होगी

राणा .....नहीं नहीं ठाकुर साहब मुझे माफ कीजिये काम हो जायेगा ( मेरा भी वक़्त आएगा दुर्जन सिंह तेरी गांड मरने का बहुत फुदकता था भीमा के डैम पे बस एक बार सूर्यगढ़ का ठाकुर से पन्गा कर इस बार ऐसा चक्रवयू रचूंगा जिस से तू भी अपने भाई के पास होगा मेरे परिवार पे बहार डालेगा )

दुर्जन सिंह .......उसमे हे सबकी फायदा है

कुछ देर बाद सड़क ख़तम जो जाती है दुर्जन के कहने पे दोनों कार कच्चे टास्ते से होती हुए बॉर्डर की तरफ बढ़ गई

लगभग एक जानते बाद दुर्जन ने कार को एक आवर रोकने को कहा

दुर्जन सिंह .....राणा तुम सब यही हमारा इन्तजार करो हम कुछ देर में आते है कोई आवाज नहीं

राणा .....जी ठाकुर साहब

दुर्जन सिंह एक काळा लबादे में खुद को रख कर एक टोर्च ले कर बॉर्डर लाइन की तरफ निकल गया

rana......ye ठाकुर साहब के मेहमान कही बॉर्डर क्रॉस कर के तो नहीं आने वाले है

हरिया .......पता नहीं बॉस ये ठाकुर साहब कब क्या करते है

राणा ......हमें क्या करना है

हरिया .....बॉस एक बात कहु अगर बुरा न मनो तो

राणा ......हड़िया तू मेरा खास आदमी है बोल क्या बोलना चाहता है

हरिया ........बॉस हमने ठाकुर साहब के लिया कितनी हे बार जान झोकीम में डाली है फिर भी आज उन्होंने आपके परिवार तक को बिच में ले आये

राणा ......जनता हूँ तुम क्या कह रहे हो हरिया मेरा भी वक़्त आएगा इसको इसके भाई के पास न पंहुचा या तो मेरा नाम भी राणा नहीं बस वक़्त का इन्तजार कर फिर देख दुस्यंत के जैसा हे हाल उसका करेंगे

हरिया ......बॉस एक बात कहूं इसकी beti........chataaaak

हरिया आगे कुछ बोलता उस से पहले हे उसके गाल पे राणा का एक जोरदार थपड पड़ा

राणा .......हरिया अपनी जुबान को लगाम दो भले हे हमने बहुत से पाप किये गलत डंडे किये है पैर हमने कभी किसी की बहु बेटी पे नियत खोटी नहीं की ये तुम जानते हो

हरिया ......बॉस मुझे माफ कर दे गलती हो गई

( एक बार दुर्जन को टास्ते से जाता दो फिर देखना ये हरिया क्या करता है क्या मुझे पता नहीं सेल कुत्ते मेरी वो रंडी बीबी रात भर तेरे निचे पड़ी रहती है )

लगभग एक जानते बाद दुर्जन वापिस लौटे उसके साथ में 3 आदमी आवर भी थे

दुर्जन सिंह .....राणा जल्दी निकलो यहाँ से इस से पहले कोई हमें देखे

राणा .......जी ठाकुर साहब

दुर्जन सिंह सबको ले कर जल्दी हे वह से निकल जाता है

साथ में बाकि लोग भी निकल गए

दुर्जन सिंह ........राणा ये हमारे खास मेहमान है करीम साहब आवर ये दोनों इनके आदमी है

करीम साहब यही कुछ वक़्त रुकेंगे आवर इनके दोनों आदमी कल यहाँ से आगे निकल जायेंगे इनका पूरा ख़तम तुम रखोगे

राणा .....जी ठाकुर साहब

करीम .......बिरादर हमने हमारे यहाँ की गरम बिरयानी

( जवान लड़की. )

बहुत चखी है हिंदुस्तानी गरम बिरयानी का बंदोबस्त किया की नहीं

दुर्जन सिंह .......करीम साहब आप चिंता न करो आप जिसपे निगाह डालोगे वही आपकी होगी

करीम ...हमारे बच्चो के लिया भी कुछ अच्छा सा इंतजाम करना बिरादर

दुर्जन सिंह .....3,4 जान लड़कियों को उठाओ आवर इनके पास पंहुचा देना

राणा ......ठाकुर साहब अगर करीम साहब को प्रॉब्लम न hi तो एक बात कहूं

करीम .....बोलो बिरादर राणा क्या कहना चाहते हो

राणा ......करीम साहब हमें पहुंचते पहुंचते आदि रात से ऊपर हो जायेगा क्यों न आज आप रेस्ट करे कल सुबह हे आपके लिए जान लड़किया आपके सामने होगी

करीम .....हमें मंजूर है बिरादर पैर हमारे बच्चो के लिया तो चाइये ये कल सुबह हे निकल जायेगा आगे

राणा .....इनके लिया जवान तो अभी रात में मुल्किल है पैर इनका इंतजाम मैं कर दूंगा आप बेफिक्र रहे

करीम ......ठीक है बिरादर ........

सूर्यगढ़ .....

साम 7 बजे तक सूर्य फॅमिली घर पहुंच चुकी थी

दादा जी .....सूर्य बीटा चलो हम गम कर आते है

सूर्य ......दादा जी हम डिनर के बाद चलेंगे वाक पे अभी नहीं उस से आपकी हेल्थ भी अच्छा रहेगी

दादी जी ......सुन लो आपका बीटा क्या बोल रहा है आपको. की आप बूढ़े हो गए है

शिव .....ये बात आपने सच कही माँ सा पहले पिताजी जब बहार निकलते थे तो ऐसा लगता था जैसे को शेर अपनी गुफा से गुमने निकला हो

दादा जी ......बीटा बाप है हम तेरे हमें हे समजने चले हो

आज भी अखाड़े में हमें कोई टक्कर नहीं दे सकता है

महेंद्र .....है ये सच पापा आपने ऐसे ठोस आपको सूर्यगढ़ का पहलवान थोड़े कहते है

दादी जी .......रेखा बेटी शालिनी आप खाना लगाओ इन सब चाकर में न हे पदों

रेखा ....जी माँ सा अभी लगते है आप बच्चो को बुलवा लीजिये

वही एक रूम में राधा सूर्य कोमल

कोमल ......भाई आज आपने क्या फाइट की मज़ा हे आ गया आपने फाइट करना कहा से सीखा भाई

सूर्य ......दीदी मुझे फाइट करनी कहा आती है बस मैंने तो एक्शन मूवीज देखि है

राधा ......फिर तुमने उन सब को मारा कैसे आवर तुम में इतनी ताकत है ये तो हमें पता भी नहीं था कैसे तुमने उस आदमी का हाथ हे उखड दिया था जिसने मुझे चूहा था

( सूर्य ....ये बुआ आवर दीदी क्या बोल रही है मैंने किस को मारा आवर मैंने जिसका हाथ उखाड़ा था )

सूर्य .....पता नहीं बुआ मैं तो कार में हे बेहोश hi गया था

राधा आवर कोमल दोनों सूर्य की बात सुन कर एक दूसरे को सवालिया नज़रो से देखने लगती है तभी वह शिव ठाकुर आते है

शिव .....चलो बच्चो डिनर टाइम hi गया है चल कर डिनर करो

सूर्य .....OK पापा मैं फ्रेश जो कर आता हु

सूर्य वह से निकल गया बाथरूम में

शिव ......आप दोनों को क्या हुआ है ऐसे सकल क्यों बना राखी है आप दोनों ने

राधा .....भैया सूर्य को कोई बीमारी है क्या

शिव ......नहीं तो राधा क्यों क्या हुआ

कोमल .....चाचा जी हम अभी भाई से पूछ रहे थे की उन्होंने गुंडों को कैसे मारा फाइट कहा से शिखी पैर वो तो बोलता है की उसने किसी को नहीं मारा वो तो कार में बेहोश हो गया था

शिव ......बीटा आप सूर्य से इस बारे में कोई बात न करना क्युकी जब वो गुस्से में होता है तब का उसे कुछ याद नहीं रहता है

जब उसका गुस्सा हद से ज्यादा बढ़ जाता है तो वो बेहोश हो जाता है गुस्से में क्या किया क्या हुआ वो सब भुला देता है

तो आप फिर कभी इन सब बातोबका जीकर न करना

सूर्य .....किस बात का पापा

शिव .....कुछ नहीं बीटा बस हम ऐसे बे बातबात कर रहे थे चलो सब डिनर करने ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............
 
अपडेट. 60

शिव ......बीटा आप सूर्य से इस बारे में कोई बात न करना क्युकी जब वो गुस्से में होता है तब का उसे कुछ याद नहीं रहता है

जब उसका गुस्सा हद से ज्यादा बढ़ जाता है तो वो बेहोश हो जाता है गुस्से में क्या किया क्या हुआ वो सब भुला देता है

तो आप फिर कभी इन सब बातो का जीकर न करना

सूर्य .....किस बात का पापा

शिव .....कुछ नहीं बीटा बस हम ऐसे बे बातबात कर रहे थे चलो सब डिनर करने ............

अब आगे .......

दुर्जन सिंह अपने साथियो के साथ तक़रीबन रात 2 बजे के लगभग पुराणी हवेली पंहुचा

दुर्जन Singh.......rana करीम साहब को खास रूम में पंहुचा दो आवर इनके साथियो की वय्वस्ता तुम खुद देख लेना

राणा .....जी ठाकुर साहब

दुर्जन सिंह कार ले कर हवेली से निकल गया

दूसरी हवेली के लिया जहा वो अपनी फॅमिली के साथ रहता है

राणा ......हरिया मैं करीम साहब को उनके रूम तक पहुँचता हूँ तुम िनिन दोनों को उनके रूम तक पंहुचा दो

आवर है इनके लिया कोई गैंग के ोुरत का इंतजाम कर दो जो की पैसे ले कर इनकी रात रंगीन करे

हरिया .....जी बॉस मेरी नजर में कुछ जान ोुरते है तो सही पैर पैसा ज्यादा लगेगा बॉस

राणा .....ठीक है पैर किसी के साथ जबरदस्ती न हो आवर ले 20000 इतने से काम होते जायेगा

hariya......ji बॉस काम होते जायेगा

हरिया दोनों को रूम में छोड़ कर रात के अंदर में बहार निकल गया कुछ 30 मिंट बाद जब वो वापिस लौटे तो उसके साथ में 2 औरते थी जो देखने में 34 से 37 साल के बिच गदराई हुए औरते थी

राणा ......हरिया बहुत अच्छा मॉल ले कर आया है दे तू तो

हरिया .....जी बॉस

राणा .......दोनों अपनी मर्जी से तो आई हो न तुम

दोनों .....जी राणा जी हम अपनी मर्जी से हे यहाँ आई है

राणा .....हरिया तुम उन दोनों के लिया सरब का बंदोबस्त कर इनको ले कर हम आते है है

हरिया .....जी बॉस ( साला हरामी मुझे पता था तू इनकी छूट चेक किये बिना जाने नहीं देगा .

अच्छा मैंने पहले दोनों की छूट बजा ली अभी तू चाट मेरे लैंड का पानी इनकी छूट से )

हरिया वह से निकल गया आवर राणा दोनों की छूट चाटने लगा 30 मिंट दोनों की बजने के बार दोनों को त्यार करके करीम के साथ आये हुए आदमियों के रूम में दोनों छोड़ कर वह सुबह आने का बोल कर निकल गया

हरिया बहुत खुश होना रहा था राणा के लिया खुद के दिल में जलती आग को कुछ ठंडक जो मिली थी ये सोच कर के की राणा ने उसके छोड़ी हुए छूट छाती

हड़िया एक बोतल सरब की ले कर चल दिया अपने घर जहा बच्चो खुची आग अपनी बीबी की छूट आवर गांड मर मर कर ठंडी करेगा

वही बॉर्डर पे गुस्त पे निकले आर्मी के कुछ जवानो को किसी के बॉर्डर पर से आने की खबर मिलते हे पुरे बॉर्डर की जाँच की जहा उनको 3 बन्दे दूसरी कंट्री से इंडिया में घुसने के पैरो के नीसाण मिल चुके थे

जल्दी हे ार्यं जवानो ने बॉर्डर इंचार्ज को वायरलेस के माद्यम से खबर पंहुचा दी

बॉर्डर इंचार्ज ........देवीशंकर पाण्ड्य आगे ...40 ईयर

संकर पाण्ड्य ......जल्दी से जल्दी पता करो वो कोण थे आवर कहा पे गए

अभी संकारपांड्य अपनी टीम को सब समजा हे रहा था की तभी उसके फ़ोन पे मैसेज आया है जिनमे करीम आवर उसके दो साथियो की पिछ थी

संकर पाण्ड्य ...... जवानो ये वो तीन साक्ष है जिन्होंने इंडियन बॉर्डर क्रॉस किया है

इनमे से ये एक आतंकी संगठन का लीडर है ....रहमत करीम खान .....किसी भी हालत में इसको हमें जिन्दा पकड़ना होगा

तभी एक फुजि अपना हाथ ऊपर करता है

संकर पाण्ड्य ....यस विजय सिंह

विजय सिंह ......सर अगर करीम खान यहाँ पे है कोई उसकी हेल्प कर सकता है तो बॉर्डर से कुछ जानते के दुरी पे सक्तिपुर है वह की ठाकुर का कुछ न कुछ लिंक hi सकता है

संकर पाण्ड्य .....तुम इतना यकीं से कैसे बोल सकते हो विजय

की वो लोग सक्तिपुर के साथ से हे मदद लेंगे

विजय ......सर मैं सूरजगढ़ से हूँ

सकतपुर का ठाकुर अपने नाम के जैसा हे है

दुर्जन सिंह ठाकुर कोई ऐसा काम नहीं जो नहीं करता हो वो चोरी लूट मार मर्डर बलात्कार ड्रग्स हथियारों की तस्करी कोई ऐसा डंडा नहीं जो वो नहीं करता हो

संकर पाण्ड्य ......क्या वही के पुलिस ऑफिसर्स उसके खिलाफ एक्शन नहीं लेते है क्या

विजय .....सर सबको पैसे मिल जाते है जो नहीं बिकता है उसको या तो ख़तम कर दिया जाता है या फिर दुर्जन का आदमी भीमा उनकी बीबी बच्चो को उठा लेता

संकर पाण्ड्य .....OK मैं तुम्हे परमिशन देता हूँ तुम अभी अपनी एक टीम बनाओ आवर अभी निकलो सकती पुर के लिया बिना किसी के नजर में आये पूरी जानकारी निकालो की करीम खान इस वक़्त सक्तिपुर में है या निकल चूका है जरूरत पड़े तो गोली सीधा उनके सर में मारो पैर किसी को पता न चले की उसमे आर्मी इन्वोल्वेद है

विजय .....जी सर ऐसा हे होगा

कुछ देर बाद विजय अपने 3 आर्मी साथियो के साथ रात के अंदर में सक्तिपुर के तरफ निकल गए कुछ हथियारों के साथ

संकर पांडेय .......जवानो तुम सब भी वास् पास के इलाको में फ़ैल जाओ बिना किसी के नज़र में आये करीम खान का पता करो

कुछ देर बाद 4,4 के ग्रुप में 2 टीम आम भेष में आसपास के इलाको में निकल गई

संकर पाण्ड्य अपने बड़े ऑफर्स को इसकी पूछना पास आउट करता है

सूर्यगढ़ ......

सूर्य आज भी अपनी बुआ आवर बहन के साथ सोया हुआ था सुबह के तक़रीबन तीन बजे होंगे की सूर्य राधा को पुकारते हुए उठ जाता है

सूर्य की आवाज सुन कर राधा आवर किताब भी उठ जाती है

राधा ....क्या हुआ सूर्य तुम चिलए क्यों

सूर्य .....कुछ नहीं बुआ बस बुरा सपना था

राधा सूर्य को पानी पिलाती है आवर उसके मैथ्स से पसीना पांच कर सूर्य को अपने से चिपका कर सुलाती है पीछे से कोमल भी सूर्य से चिपक कर सो जाती है

पैर सूर्य की नींद ुधि चुकी थी

ऐसा क्या सपना देखा था सूर्य ने राधा का जो वो इतना दर गया था

लगभग 2 जानते अपने हे विचारो में सूर्य खोया रहा वो तो बहार से जब दादू की आवाज सुनाओ दी तब उठा राधा आवर कोमल को सोया देख दोनों के गाल पे किश करके

सूर्य ......आपको कुछ नहीं होगा बुआ जब तक मैं जिन्दा हूँ आपको कोई छू भी नहीं सकता

जल्दी से सूर्य फ्रेश हो कर बहार निकल जाता है

सूर्य .....परनाम दादू चले जंगल

दादू .....शाबाश मेरे शेर एक हे आवाज पे जग गया चल मैं तेरी दादी को बोल कर आया आता हूँ

15 मिंट बाद हे सूर्य साध्वी जी के सामने था

जहा वयोम आवर सकती भी उसकी हे प्रतीक्षा में थे

सूर्य साध्वी जी वयोम सकती तीनो के पेअर छू आशीर्वाद लेता है

साध्वी जी .......सूर्य त्यार हो तुम अपनी शिक्षा के लिया

सूर्य ......जी मैं त्यार हूँ

साध्वी जी सूर्य को अपनी इन्द्रियों पे ध्यान लगाना दिखने लगती है

आज सूर्य को कल के मुकाबले काम परेशानी हुए

डेरी डेरी सूर्य का ध्यान एकाग्रचित होने लगा

2 हर चले इस ध्यान योग से सूर्य को अपने अंदर अलग हे ताकत का संचार होता हुआ महसूस होने लगा

साध्वी जी सूर्य के लिए जदहि बूटियों से निर्मित काढ़ा त्यार करने लगी वही

वयोम सूर्य को रनिंग करवाने लगे आज सूर्य को 2 की जगह 4 चाकर लगाने के लिया बोलै गया जिस से सूर्य की हालत कल जैसे हे हो गई थी

सकती ने भी सूर्य को प्राचीन मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देनी सुरु कर दी

सकती ......सूर्य अपने मन को एकाग्र कर के अपनी शिक्षा ग्रहण करो

अगर बार बार अपने ध्यान को भटकने डोज तो मेरी दी हुए शिक्षा का कोई मतलब नहीं होगा

सूर्य .....मुझे माफ कीजिये पता नहीं क्यों मेरा ध्यान बार बार भटक रहा है

वयोम जो काफी देर से सूर्य को देख रहा था वो आखिर बोल हे उठा

वयोम .......क्या बात है सूर्य तुम्हारा ध्यान कही आवर है तुम आज कल से बेहतर कर रहे होंगे किन्तु बिच बिच में तुम अपना ध्यान भटका रहे हो कोई परेशानी है क्या

surya......kya मैं आप से कुछ बात कर सकता हूँ

सकती आवर वयोम ......कहो सूर्य क्या हुआ

सूर्य ......आज सुबह राधा को ले कर जो सपना देखा उसके बारे में बता देता है

वयोम ......सूर्य तुम्हे चिंता नहीं करना चाइये ये बस एक सवपन मात्र है

सकती ......या फिर ये एक संकेत है जो आने वाले समय में सच हो सकता है

अब तय तुम्हे करना है की तुम क्या करना चाहते खुद को अपने परिवार की रक्षा करने योग्य बनाना या फिर हाथ पे हाथ रख अपने परिवार को खोना चाहते हो

सूर्य .....आप हे बताये मैं क्या कृ फिर जिस से मैं अपने परिवार को खतरे में डेल उनकी रक्षा कर सकू

सकती ......एक मार्ग है किन्तु बहुत हे कठिन है तुम्हे उसके लिया बहुत म्हणत करनी होगी

सूर्य ......मैं कुछ भी करने को त्यार हूँ बस आप मुझे बताएंगे करना क्या होगा मुझे

सकती .....तुम्हे आवर ज्यादा टाइम देना होगा अपनी शिक्षा को

आवर आदिक कठिन परिश्रम करना होगा

सूर्य ......मैं त्यार हूँ

वयोम .......ठीक है आज से आवर अभी से तुम्हारी असली शिक्षा सुरु होती है

जब तक तुम उस पहाड़ी के 10 चाकर नहीं लगा लेते हो तुम्हे एक बून्द भी पानी की पिने को नहीं मिलेगी

सूर्य ......जी

सूर्य पहाड़ी की आवर दौड़ लगा दिया

वयोम .......सकती क्या सूर्य हमारी ट्रेनिंग को सहन कर पायेगा

सकती .......है वयोम आज हे तुम्हे पता चल जायेगा बस तुम देखते रहो

वयोम ......तुम ऐसा कैसे कह सकते हो

सकती .......क्युकी कल मैंने सूर्य की छुपी हुए एनर्जी को सेंस किया था जब मैं अपने ध्यान में था

कल कुछ लोगो ने सूर्य के परिवार पे हमला किया था

तब गुस्से में सूर्य ने उन सब की जो पिटाई की थी वो मैं देखि थी अपने योग सकती से

सकती ने फिर वो दृश्य वयोम को दिखा ये तो वयोम को यकीं नहीं हुआ की

कैसे एक ## साल का लड़का 8 पहलवानो की हड़िया तोड़ सकता है

सकती ..... अब समजे तुम मेरे दोस्त मैं क्यों कह रहा हु

वयोम .....सच कहा यार तुमने पैर हमें उसके गुस्से को हे उसका हतियार बनाना होगा तब हे ये सब संभव होगा

सकती ......नहीं अभी वो इतना भी सक्षम नहीं है क्युकी गुस्से में जो ऊर्जा उसे करता है उसके कारन ये बेहोश हो जाता है सूर्य का सरीर अभी भी त्यार नहीं उसके उर्ग्र ऊर्जा को कण्ट्रोल करने में

वयोम ......उसकी चिंता तुम न करो मित्र अभी सूर्य को कुछ वक़्त लगेगा तब तक मैं आता हु कुछ ले कर के जिस से सूर्य का सरीर बहुत जल्दी उसकी उग्र ऊर्जा को सँभालने योग्य जो जायेगा

वयोम जंगल की आवर निकल गया

सकती वह से साध्वी जी के पास पंहुचा आवर उन्हें सब कुछ कह सुनाया सूर्य के सपने को

आवर उन दोनों ने सूर्य के लिया जो सोचा है वो सब भी बता दिया

साध्वी ......ठीक है आप दोनों को जो ठीक लगे वो कीजिये किन्तु याद रहे फ़िलहाल ऐसा कुछ न करना जिस से उसकी उग्र ऊर्जा अनियंत्रित जो जाये

सकती .....जी आप निश्चित रहे ऐसा कुछ नहीं होगा

साध्वी जी ......ठाकुर जी आज से कुछ समय के लिया सूर्य को पूरा दिन यही पे रहना होगा आवर ट्रेनिंग करनी होगी आगे से आप सूर्य के साथ यहाँ न आये

दादा जी .....ये आप क्या बोल रहे है देवी वो अभी बच्चा है वो इतनी कड़ी ट्रेनिंग सहन नहीं कर पायेगा

साध्वी जी .....उसकी आप चिंता न करो ठाकुर जी उसका मार्ग है मेरे पास

दादा जी .....आवर वो मार्ग क्या है

साध्वी जी अपनी कुटिया से कुछ लग कर ठाकुर जी को दिखाई है

जिसे देख कर

दादा जी .......क्या इस से ये सूर्य उस काबिल hi जायेगा क्या जिस से वो इस करदी ट्रेनिंग को सहन कर पाए

साध्वी जी ......उसके साथ कुछ आवर बड़ी बूटियों का मिश्रण होगा बस एक हफ्ते के अंदर आप खुद सूर्य को देख कर यकीं नहीं कर पाओगे

दादा जी .....मुझे अभी भी सूर्य की चिंता हो रही है

साध्वी जी .......आप चिंता न करे ठाकुर जी ये देखने में भले हे सदर्न शिलाजीत लगती है किन्तु उसके साथ में कुछ दुर्लभ बड़ी बूटियों को मिला दिया जाये तो ये किसी भी सामान्य इंसान के लिया अमृत सामान हो जाती है बस ये कमर नहीं बना सकती किन्तु सरीर की सामान्य समय को 100 गुमना बचा देती है

प्राचीन कल में राजा महाराजाओ को इसका सेवन इस लिया हे करवाया जाता था

किन्तु इसने भी एक समस्या है सामान्य इंसानो के लिया जो मुझे नहीं लगता सूर्य को होगी

दादा जी .....मैं कुछ समजा नहीं क्या सूर्य सामान्य इंसान नहीं है

साध्वी जी ........है सूर्य सामान्य इंसानो की गिनती में नहीं आता इस से सूर्य का पुरषार्थ बहुत बढ़ जायेगा जो की कोई भी एक ोुरत सूर्य को संभल पाने में सक्षम नहीं होगी

दादा जी .....फिर तो बहुत बड़ी समय हो जाएगी सूर्य को

साध्वी जी .....हेहेहे आप उसकी चिंता न करे ठाकुर जी क्युकी सूर्य ठाकुर है आवर आप ठाकुरो में तो आज बहुत भी विवाह पार्था

( एक से आदिक विवाह करना )

चलती है सूर्य का तो वैसे भी बहुत से विवाह पहले से हे तय है

दादा जी .......क्या आप मुझे कुछ आवर भी बताएंगे सूर्य के विषय में

साध्वी जी .......फ़िलहाल कितना उचित था मैंने आपको बता दिया है

आवर आप सूर्य के गुस्से को ले कर चिंता में उस को त्याग दीजिये साथ हे अपनी बेटी के विवाह का विचार जो कर रहे है उसका भी त्याग कर दीजिये क्युकी की जो संभव हे न हो उसको करने का प्रयाश हमेशा विनाशकारी हे होता है

दादा जी बस मुँह फाडे साध्वी जी को देख रहे थे

साध्वी जी .........ज्यादा सोच विचार न कीजिये उचित समय आएगा तब आपको पता चल जायेगा

राधा ने अपना जीवनसाथी अपने पूरा जनम से हे चुन लिया है वक़्त आने पे आपको हे सबसे पहले पता चलेगा

दादा जी ......क्या वो सुर......

साध्वी जी ......भविष्य में जो भी गठित होने वाला है उसको ले कर आज को ख़राब नहीं करना चाइये अब आप जाये सूर्य को मैं साम को खुद ले कर आती हु हवेली पे

दादा जी ......जी शुक्रिया आया दे

दादा जी वह से चले गए

साध्वी जी फिर से कुछ बड़ी बिटिया त्यार करने लगी

वही सूर्य 8 चाकर लगाने के बाद थक कर चूर हो चूका था पैर सकती बार बार सूर्य को रात का सपना यद् दिला कर सूर्य को दौड़ने पे मजबूर कर रहा था

गिरते पड़ते सूर्य ने ढाई जानते में 10 राउंड पुरे किये

साध्वी जी ......सूर्य ये लो ये दर्व्य पि लो इस से तुम्हे आराम मिलेगा

सूर्य .....बिना देखे हे उस दर्व्य को पि जाता है कुछ देर बाद हे सूर्य को अपने सरीर अलग हे ताकत के साथ में बे- हीनता

तपिश गर्मी महसूस होने लगी

सूर्य ......ये मुझे क्या हो रहा है

मुझे इतने तेज हरामी आवर जलन क्यों महसूस हो रहे है

साध्वी जी .....सूर्य को ध्यान अवस्था में लगाओ तुम्हे रहत मिलेगी

सूर्य साध्वी जी के कहने अनुसार करने लगता कोई आड़े जानते बाद सूर्य को रहता मिली

सकती .....सूर्य अब तुम्हे कैसा महसूस हो रहा है

सूर्य .....बहुत अच्छा लग रहा है पूरी ताकवत उतर गई है आवर मुझे अपने अंदर भी बहुत अच्छा लग रहा है

वयोम ......तो फिर त्यार हो जाओ आज के लिया रनिंग बहुत hi गयी बाकि के अभ्यास के लिया त्यार hi

सूर्य .....जी गुरु जी मैं त्यार हूँ

साध्वी जी .....सूर्य तुम इन्हे गुरु नहीं मास्टर कह कर सम्बोदित कर सकते हो

सूर्य ....जी साध्वी जी

कुछ देर बाद हे सूर्य सकती से साथ युद्ध अभयश करने लगा

सूर्य के सकती को देख कर वयोम भी चकित था क्युकी सूर्य पूरी समय से सकती के साथ पीछे 2 हर से लगातार बिना रुके शिकणे में लगा हुआ था

सकती ......सूर्य अब तुम कुछ देर आराम करो इसने बाद वयोम तुम्हे अस्त्र सस्त्र की शिक्षा देगा

सूर्य .....मास्टर मैं त्यार हूँ

सूर्य की बात सुन सकती साध्वी जी की आवर देखते है

साध्वी जी के है में इसरा करने पे वयोम सूर्य को पहले लाठी से करने के शिक्षा देने लगा

सकती ......ये क्या होगा रहा है देवी ऐसा क्या दिया है आपने सूर्य को जो वो इतने उत्साह में है जबकि मुझे भी हलकी हलकी ताकवत जो रहे है

साध्वी जी .......सूर्य को अमृतकुंजी दिया है मैंने

सकती ....क्याआ .....

साध्वी जी ......है सकती सूर्य ने जो पिया था वो अमृतकुंजी दर्व्य था

सकती ......किन्तु वो तो किसी भी सामान्य मनुस्य के लिया बहुत जातक होता है

साध्वी जी ......तुम भुला रहे हो सकती की तुम यहाँ क्यों हो उस लोक से तुम्हे इस लोक में क्यों भेजा गया है

अगर सूर्य कोई सामान्य मनुस्य होता तो तुम्हे यहाँ होने की आव्सय्कता भी नहीं थी

सकती ......मुझे माफ करे देवी मैं कुछ पल के लिया मुझे मिले आदेश भूल गया था

साध्वी जी ......सकती मुझे लगता है बहुत जल्दी तुम दोनों को अपनी ऊर्जा को खोलना होगा क्युकी अगर ऐसा हे रहा तो बहुत जल्दी तुम दोनों सूर्य को संभल नहीं पाओगे

सकती ने साध्वी की आवर देखा तो उनकी नज़र कही आवर थी

सकती ने जब नजरो का पीछा किया तो वो सूर्य आवर वयोम को देख थी थी

साध्वी .......सकती अंदर जा कर वयोम आवर खुद के लिया ॉडी बना लो तुम दोनों को हे जरूरत पड़ने वाली है

सकती .....उचित कहा आपने

सकती कुटिया में चला जाता है आवर साध्वी जी के होंटो पे मुस्कान तेर जाती है

साध्वी जी ....लगता है मुझे उन से संपर्क करना होगा सकती आवर वयोम इस काबिल नहीं की ज्यादा टाइम सूर्य को बिना अपनी ऊर्जा खोले सूर्य के सामने टिक पाए ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........

नाईट में अपडेट न देने की लिया माफी चाहता हु घर पे कुछ मेहमान आ जाने के कारन अपडेट लिख नहीं पाया
 
अपडेट. 61

सकती ने साध्वी की आवर देखा तो उनकी नज़र कही आवर थी

सकती ने जब नजरो का पीछा किया तो वो सूर्य आवर वयोम को देख थी थी

साध्वी .......सकती अंदर जा कर वयोम आवर खुद के लिया ॉडी बना लो तुम दोनों को हे जरूरत पड़ने वाली है

सकती .....उचित कहा आपने

सकती कुटिया में चला जाता है आवर साध्वी जी के होंटो पे मुस्कान तेर जाती है

साध्वी जी ....लगता है मुझे उन से संपर्क करना होगा सकती आवर वयोम इस काबिल नहीं की ज्यादा टाइम सूर्य को बिना अपनी ऊर्जा खोले सूर्य के सामने टिक पाए ............

अब आगे .........

सूर्य साम तक सकती आवर वयोम के साथ युद्ध अभ्यास करता रहा

साम को साध्वी जी खुद सूर्य के साथ हवेली पहुंची सूर्य का पूरा बदन इस वक़्त थक कर चूर था

शालिनी आवर दादी जी ने जैसे हे सूर्य की हालत देखि दोनों का दिल जबरन लगा

क्युकी सूर्य पूरी तरह थका हुआ था वो ठीक से चल भी नहीं प् रहा था

शालिनी .......क्या हुआ मेरे बेटे को ये ऐसे इस हालत में क्यों है

साध्वी ji......gabrane की जरूरत नहीं है शालिनी आज के अभ्यास से सूर्य थक गया है

सूर्य जाओ आवर जा कर गरम पानी से स्नान कर लो

सूर्य ......जी साध्वी जी

सूर्य राधा के साथ चल देता है

साध्वी जी .......ठकुराइन ये लीजिये इस आयुर्वेदिक तेल से सूर्य के स्नान करने के बाद मालिश कर दीजियेगा सरीर पे जिस से उसकी ताकवत दूर हो जाएगी

आवर आप गबराये न सूर्य को कुछ नहीं हुआ है न कभी कुछ होने दूंगी

साध्वी जी दादी से को सब कुछ समजा कर निकल गई वापिस जंगल की आवर

सपना आवर किरण को अपने मां के यहाँ 2 दिन hi गए थे

किन्तु वो अभी भी समाज नहीं पाए थे की उन्हें ऐसे क्यों भेजा यहाँ पे घर पे फ़ोन करने पे उनको अपनी बुआ (शालिनी) आवर फूफा (शिव ) के बारी में पता चला पैर जोरावर के जोर देने पे दोनों की स्टडी अब उनके मां के यहाँ करने की बात दोनों को माननी पड़ी

किरण .....ये क्या हो रहा है दीदी

b.Papa तो कभी भी हमें सूरजगढ़ से भी बहार नहीं जाने देते थे फिर अचानक से इस सहर में पड़ने के लिया क्यों

सपना ....पता नहीं स्वीटी पापा के दीमक में क्या चल रहा ये तो वही जाने पैर बात कुछ तो जरूर है वैसे भी ये सहर भी अच्छा है वैसे भी कुछ साल बाद से हमें यही पैर स्टडी करने आना हे था सूरजगढ़ में अभी तक कोई कॉलेज तो है नहीं

किरण ......बात वो नहीं है दी मुझे बात कुछ आवर हे लग रही है खेर छोड़ो इन सब बातो को चलो छोड़ते मां जी आज हमें शॉपिंग पे ले जा रहे जल्दी रेडी हो जाओ

कुछ देर बाद सपना किरण अपने छोटे मां जो अभी कोई 21 ,22 इयर्स के है कॉलेज गोइंग उनके साथ शॉपिंग के लिया निकल गई

सॉर्ट इंट्रो सपना मां फॅमिली ...

1. .....समीर ठाकुर बड़े मां 28 इयर्स (सपना,) पुलिस अफसर

2. ......ज्योति ठाकुर बड़ी ममी 25 ईयर (सपना,) हाउसवाइफ इनको अभी कोई बच्चा नहीं हुआ है सपना आवर किरण को हे अपने बच्चे मानते है

3 .....इंदरजीत ठाकुर 21 इयर्स चाहते मां अभी ुनमर्रिएद है स्टडी कर रहे है ........

विजय सिंह अपने साथियो के साथ सुबह के 5 बजे के लगभग सूरजगढ़ पंहुचा

कुछ देर अपने साथियो के साथ विश्राम करने के बाद विजय अपना आवर अपने साथियो का भेष बदल कर अलग अलग मार्ग से सूर्यगढ़ से होते हुए सक्तिपुर पहुंचे जहा वो सब बिना किसी के नज़र में आये करीम खान आवर उसके साथियो का पता करने लगे

सुबह से दोपहर होने को आई पैर अभी तक विजय आवर उनके साथियो को कोई भी सुराख़ हाथ नहीं लगा जिस से उनको कुछ पता चले दोपहर

विजय दुर्जन सिंह के हवेली के पास किसी मजदुर का भेष धार कर निगरानी कर रहा था

तभी दुर्जन सिंह आवर राणा को कार से कही जाते हुए देखता है

विजय उन दोनों का चोरे छुपे पीछे करने लगता है

कुछ देर बाद कार दुर्जन सिंह की पुराणी हवेली पे रूकती

विजय ......ये दुर्जन सिंह यहाँ इस पुराने खंडहर जो चुकी हवेली में क्या करने आया है कही यही पे तो

विजय सिंह अपने 3 साथियो को अलर्ट रहने का बोल देता हे

विजय के बाकि साथी

अफसर 1.,2 ,3 के नाम से लिखूंगा

विजय .....अफसर 3 तुम सक्तिपुर बस स्टैंड पे नजर रखो

अफसर 2 तुम सक्तिपुर बाईपास पे नजर रखो करीम खान यही पे है मुझे लगता है ऑफिसर्स 1 तुम यही पे दूर से हवेली नजर रखो मैं किसी तरह अंदर जिसने की कोशिश करता हूँ

अफसर 1......विजय ये रिस्क न लो अगर तुम किसी के नजर में आ गए तो हमारा पूरा मिशन फ़ैल हो जायेगा

हमें पहले कन्फर्म करना चाइये उसके बाद कोई आवर एक्शन लेना चाइये

विजय को भी ऑफिसर्स के बात ठीक लगी क्युकी वो अच्छी तरह से जनता था की वो किसी के नज़र में आया तो जिन्दा वापिस नहीं जायेगा आवर उसका मिशन भी फ़ैल हो सकता

20 मिंट बाद हवेली से एक कार निकले

जो हड़िया ड्राइव कर रहा था

जैसे हे विजय ने चुप कर दूरबीन से कार के बैक सहित पे देखा

देखते विजय करीम के साथियो की अपने इंचार्ज संकर पाण्ड्य जी द्वारा दी गई तस्वीर से मिलाया जो की मैच हो गई

विजय ...... अफसर 3 ,2 अलर्ट रहो करीम के दोनों साथी बाईपास या में स्टैंड से निकलेंगे रेड कार no **00 में है

जल्दी हे हरिया कार को बाईपास से निकलते हुए सहर की तरफ निकल गया

विजय ...ऑफिसर्स 1 तुम यही पे रुको आवर दूर से नज़र रखना कुछ भी हो तुम आंध्र नहीं जाओगे आवर फ़ौरन हमें या पाण्ड्य सर को इन्फॉर्म करोगे हम इन दोनों के पीछे जा रहे है

विजय अपने 2 साथियो को 2 बाइक से हरिया का पीछा करने लगे उचित दूसरी बनाये हुए

विजय किसी को कॉल करते हुए तेजी से बाइक चला रहा था

कुछ देर रिंग होने के बाद कॉल अटेंड हुआ

विजय .....जय हिन्द सर

पाण्ड्य ....जय हिन्द विजय कुछ पता चला करीम आवर उसके साथियो का

विजय .....जी सर करीम यही सक्तिपुर में है अभी अभी करीम खान के दोनों साथी सहर के तरफ निकले है मैं ऑफिसर्स 2,3 उनका पीछे कर रहे है

पाण्ड्य .....गुड वर्क ऑफिसर्स विजय करीम के दोनों साथियो को गोली मर दो बिना कोई एविडेंस छोड़े

विजय .....जी सर आवर करीम का क्या करना है

पाण्ड्य .....करीम जिन्दा पकड़ जाये तभी हम दुर्जन सिंह को दबोच सकते है तुम थोड़ा इन्तजार करो मैं कुछ फाॅर्स भेज रहा हूँ तुम्हारी हेल्प के लिया अगर तुम करीम को जिन्दा पकड़ पाए तो ठीक नहीं गोली मैट हे पूरी टीम बिना किसी के नज़र में आये लौट आना अपनी ड्यूटी पे

विजय ....यस सर जय हिन्द सर

पाण्ड्य ....जय हिन्द विजय आल थे बेस्ट फॉर मिशन

कॉल कट ...

हरिया कार को तेजी से चलते हुए सहर से निकल रहा था विजय भी अपने साथियो के साथ उसके पीछे चिपका हुआ था

सहर से बहार 4,5 कम बाद एक छोटा सा जंगल लगता वो एरिया कुछ 2,3 कम का सुनसान इलाका था

विजय ....ऑफिसर्स यही मौका है इन तीनो को ख़तम करने का

विजय आवर ऑफिसर्स 2,3 ने कार के दोनों साइड अपने बाइक लगा

देखे हे देखते हरिया की खोपड़ी से सीसा तोड़ते हुए गोली निकल गयी कार अपना कण्ट्रोल खो कर सड़क से निचे उतर जंगल की तरफ कुछ देर दौड़ती रहे फिर एक पेड से टकरा कर रुक गई

करीम के दोनों साथियो को हलकी हलकी चोट लगी थी जैसे वो अपने हथियार ले कर बहार निकले विजय आवर उसके साथियो ने दोनों पे जो लिया चलनी सुरु कर दी

Vijay.....officers कार के आयल टैंक को निशाना बनाओ हमें इनकी जरूरत नहीं है

अफसर 2 विजय की बात सुन थोड़ा पीछे से गम कर दूसरी तरफ जाता है आवर आयल टेंक पे गोली मरता 3 गोली पे पे तेज ब्लास्ट होता है क्युकी कार के अंदर रखे बॉम्ब्स भी उस दमके के साथ ब्लास्ट हो जाते है

देखते हे देखते हरिया आवर करीम के दोनों साथी उस ब्लास्ट के चलते आग के हवाले हो जाते है

विजय .....चलो यहाँ से जल्दी से निकलो

विजय के आर्डर मिलते हे तीनो वह से निकल जाते है

पीछे करीम के साथी जिन्दा उस आग के हवाले हो चुके थे

वही दूर खड़ा राणा ये सब बड़े मज़्ज़े से देख रहा था

राणा .....चलो अच्छा है मेरा काम इन लोगो ने कर दिया पैर ये है कोण आवर इन लोगो को कैसे पता चला की ये दोनों करीम के आदमी है

मुझे क्या मेरा काम तो हो गया है पैर बेचारा मेरा हरिया मारा गया

अब सेल की बीबी की जैम कर लूंगा हमेशा बिच में टपक पड़ता था

चंपा चमेली का गजरा लगा कर त्यार रह तेरा यार राणा आ रहा है

राणा अपनी कार ले वह से निकल गया

किसी ने पुलिस को कॉल कर इस ब्लास्ट की जानकारी दे दी जल्दी हे ये सब न्यूज़ में था

जब दुर्जन आवर करीम को न्यूज़ द्वारा पता चल गया था

करीम ......ये क्या है दुर्जन मेरे दोनों आदमी मरे गए

दुर्जन सींग ....करीम साहब मेरा भी तो एक आदमी मारा गया है मुझे नहीं पता ये हुआ कैसे

दुर्जन कुछ देर किसी से बात करता है फिर करीम से

दुर्जन .....करीम साहब आपके यहाँ होने की खबर लग चुकी है इंडियन आर्मी को

करीम ......क्या ये कैसे हुआ

दुर्जन .....मेरे खबर ने खबर दी है की कुछ आर्मी ऑफिसर्स की टीम आपको पकड़ ने के लिया निकल चुकी है

करीम .....मुझे फ़ौरन यहाँ से निकलना होगा

दुर्जन ......आप जाओगे कहा

करीम ....वो मैं देख लंग्स मुझे बस कुछ पैसे आवर हथियार चाइये आवर एक कार भी

दुर्जन सिंह अपनी जान बच्चन के लिया जल्दी हे सब इंतजाम कर देता है साम को जैसे हे अंदर होता है वैसे हे करीम खान हवेली से निकल जाता है

जिसको विजय आवर ऑफिसर्स 1 को पता चल गया था

दोनों हे अंदर में अपने बाकि टीम के साथ उसका पीछा करने लगे

पीछे से दुर्जन ने अपने हवेली से अपनी 2no.mall वह से गायब करवा दिया था

रात के तक़रीबन 11,12 बहने करीम खान को विजय की टीम ने घेर लिया कुछ देर दोनों तरफ से गोलिया चलने के बाद करीम खान मारा गया विजय ने बहुत कोशिश की करीम खान को जिन्दा पकड़ ने की ताकि वो दुर्जन सिंह को भी सजा दिलवा सके पैर ऐसा हुआ नहीं

विजय ने मिशंस की पूरी जानकारी अपनी पाण्ड्य सर तक पंहुचा दी उनको करीम खान के मरे जाने पे थोड़ी निराशा तो हुए पैर वो खुश भी था की एक आतंकी संगठन का सरगना मारा गया

विजय को कुछ दिन सूरजगढ़ में चूतिया बिताना का कह कर बाकि टीम को बापिस बुला किया कुछ आर्मी जवान भी बगल हुए थे इस बिच करीम खान के हमें से ........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........

नाईट तक एक आवर अपडेट आएगा
 
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