Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

hotaks

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ही फ्रेंड्स ये मेरा दूसरा स्टोरी है जो मैंने स्टार्ट किया है

इन्सेस्ट .मैजिक .अडुल्टेरी ...है

थोड़ा बहुत सुसेपेंस बे है

( स्टोरी लिकने ंव नया नया हु तो ज्यादा सुसेपेंस की उम्मीद न रखना)

आप सबके सपोर्ट की जरूरत रहेगी दोस्तों

आप सबका छोटा भाई कल्याणसूर्य...
 
अपडेट. 1

अबे रात के को 2 बजे होंगे की एक गांव जो की थोड़ा बहुत प्रगति पे था

उस गांव से एक महिला आवर एक बच्चा बघते हुए जंगल की आवर जा रहे थे

महिला फाटे हुए वस्त्रो में थी ठीक से देखने पे पता चलता है की कोई 20 साल के लगभग आगे रहे होगी

आवर सायद 3.से 4 मंथ की प्रेग्नेंट बे थी

सात में जो बच्चा था क्सक्सक्स साल का था जिसके सरीर पे जगह जगह चोट लगी थी

लड़का महिला का हाथ पकड़ रहा था आवर दोनों उस आवर बाद रहे थे जिस आवर खतरनाक जांगले था

जहा पे दिन के उजाले में बे दर लगता है

सायद इनके पिच्य जो 8 '10 आदमी हटो में लेथ लिया पीछा कर रहे थे

वो इनके लिया उस जंगल से ज्यादा खतरनाक थे

ोुरत ...बीटा सूर्य जल्दी कर वो लोग पोछिए हे आ रहे है

बैग बीटा नै तो वो लोग जान से मर देंगे हम दोनों को

सूर्य ...छोटी माँ हमें दर्द हो रहा है हमसे आवर नै चला जायेगा

छोटी माँ ...नै बीटा थोड़ा आवर हम जंगल तक पहुंच गए है वो लोग जंगल के अंदर नै जायेंगे

भागते भागते दोनों जंगल में गुस्स जाते है

जो पीछा कर रहे थे उनमे से

भीमा ...ये तो उस जंगल में चले गए अब क्या

भीमा ...कालू अगर उनको जिन्दा या मुर्दा हवेली नै ले गए तो छोटी मालिक हम सबको जिन्दा गड देंगे

Mangu...ye साला छोटी मालिक बे पता नै मादरचोद कैसा आदमी है जो अपने हे घर की ोुरत को मरना चाहता है

भीमा ...क्या करे मांगू ये ठाकुर लोग होती हे मादरचोद है गांव की भू बेतिया तो चोरो खुद की भू बेतिया को नै बक्से

kalu...bhima मई नै जा रहा जंगल में मुझे नहीं मरना है

भीमा ....तू हे बता क्या करे कालू

मांगू ...एक काम करे भीमा अरे आज वो पागल लड़की मरी है न रात में जो मंदिर के पास में रहती थी उसी की लॉस का चेहरा बिगड़ कर हवेली ले चलते है बस कुछ अच्छी कपड़ो का बंदोबस्त करना होगा

ताकि उस लॉस को वो कपडे पहना कर बड़ी बहुरानी की लॉस बता दे

कालू ...बात तो ठीक है पर इन बाकियो का क्या करे आवर बड़े मालिक के बेटे सूर्य की लॉस का क्या करे

भीमा ...एक काम कर ये 5 लोग है तुम दोनों 1 ' 1 को ले जा कर ख़तम करो 3 को मई संभालता हु

बाकि बाद में देखेंगे

मांगू आवर कालू सूर्य को ढूंढ़ने के भने एक एक को ले जा कर दूर ख़तम कर दिया ीदार भीमा ने उन तीनो की बारे बारे से गर्दन थोड़ दी

भीमा ...कालू तू जा आवर हवेली से चोरे छुपे बड़ीमलकिन के कुछ कपडे चुरा के ले आ बिना किसी की नज़र में आये

भीमा ...मांगू तू जा आवर मंदिर के पास से वो पागल लड़की की लॉस ले आ

मांगू आवर कालू निकल गए

1 हर बाद दोनों अपना काम कर लौट आये कपडे आवर लॉस के साथ

Bhima...kalu मांगू यार ये मर के बे मेरी इच्छा पूरी कर गई

कालू ..वो कैसे भीमा भाई

bhima...sali को बहुत बार पेलने की कोसिस की जब बे हाथ लगत साली पागल छिलने लगती थी

आज इसकी लॉस के साथ में अपनी इच्छा पूरी करुगा

( वही पास में कड़ी उस पागल लड़की की आत्मा अपनी सरीर के साथ हो रहे ऐसे पाप को देख कर आंसू भ रहे थी

इनका नाम ...राधा लिखुगा

(इसकी नवाज़ किसी को नै सुनाई देगी)

राधा ..तुम लोगो ने मेरा पवित्र सरीर को अपने वासना से अपवित्र किया है

तुम्हे इसका दंड आवश्यक मिलेगा जिस जिस ने मेरा सरीर को अपवित्र किया है वो अपना पुरसरत खो कर एक नामर्द बन जयगाथा कल के सूर्यौदय से पहले

इतना बोल वो आत्मा हंगल में चली गई रोथ हुए)

भीमा कालू मांगू ने अपने हवस उस मेरिट सरीर से मीठा ले आवर उसका चेहरा बिगड़ कर हवेली ले गए

जहा पे 25 साल का लड़का पुरे गुस्से में रूम में टहल रहा था

भीमा के हाथो में लॉस देख कर उसे बहुत दुःख हुवा

भीमा ने जैसे हे लॉस नीची राखी

उस आदमी ने भीमा को जोर से छठा मारा भीमा दूर जा खड़ा हुवा

bhima..chote ठाकुर हमने नै मारा बड़ीमलकिन को ये सूर्य के पिच्य पहाड़ी से खुद गयी दे

सूर्य तो हमें नै मिला इस लिया हमने इनकी लॉस यहाँ ले आये

छोटी ठाकुर ....हस्ते हुए क्या सूर्य मर गया ः ः

तुमने खुद देखा था न अपनी आखो से

भीमा है ...छोटी ठाकुर हमने अपनी आँखों से देखा है पहाड़ी से खुद ते हुए सूर्य को

पहाड़ी के नीचये खून हे खून था सायद किसी शेर ले गया सूर्य को

छोटी ठाकुर ...भीमा तुम जल्दी समसान में जाओ आवर इसकी लॉस को जलने की तयारी करो

फिर हमें बताना

भीमा ...ठीक है छोटी मालिक

आवर भीमा भ से निकल गया

छोटी thakur.....sapna भाबी क्या मिला तुम्हे ये सब कर के

तुम्हे अपने सपनो की रानी बुनना चाहा तुमने हमें इंकार किया

ठाकुर दुर्जन सिंह को

देख लिया हमें इंकार करने का नतीजा अपनी इजात बे लुटवा ली हमसे आवर अपने साथ में बड़े भाई सा की आखरी निज़ामी बे अपने साथ ख़तम कर ली

ः ः

भीमा आये तब तक एक आखरी बार छूट आवर गांड मर ली जाये

फिर तो सपना की सपनो में हे मर पाउगा

दुर्जन सींग 1 जानते तक उस लॉस के साथ में दोनों तरफ से सेक्स किया

( उसको नै पता था उसने अपनी लाइफ की आखरी चुड़ैल की है )

ीदार भीमा ने सब तयारी कर के हवेली आ गया आवर उस लॉस को ले जाने

किन्तु दुर्जन सिंह ने रोक दिया उसके दीमक में कुछ आवर हे चल रहा था

सब रिश्तेदारों को सन्देश पूछा दिया की बड़ीभु पहाड़ी से गिर कर मर गई आवर सूर्य का को जंगली जानवर उठा ले गए

अब चलते है सपना ( छोटी माँ ) आवर सूर्य की तरफ जंगल में जहा पे राधा की आत्मा गई थी

सूर्य आवर सपना दोनों जब जंगल में पहुंचे थे तब उनकी हालत बहुत ख़राब थी मघा मघा चोट आवर खून के नीसाण कपडे फाटे हुए थे

किसी तरह जान बचते हुए वो जंगल के काफी अंदर तक चल दिया

वैसे तो ये जंगल अंदर से बहुत खूबसूरत है किन्तु रात के अंदर में बहुत खतरनाक लग रहा था

सूर्य ...छोटी माँ मुझे प्यास लग रहे है

sapna...beta थोड़ा आवर चल पानी यही कहि मिल जायेगा

कुछ दूर से सपना को पानी की आवाज आयी दोनों डरते हुए उस आवर चल दिए खुद को किसी तरह सम्बल हुए

नदी के पास पहुंच कर दोनों ने जी भर के पानी पिया आवर दर्द आवर थकान से कब बेहोश हुए उन्हें पता हे नै चला

सुबह दोनों को अपना सरीर हिलता हुवा आवर चेहरे पे पानी पड़ने से होश में आये तब आँखे खोली तो सामने एक सफ़ेद दादी में बड़ा खड़ा नज़र आया

Sapna....hame मत मरना हमें मत मरना

बड़ा ... एससससस संत बेटी संत तुम्हे कोई नै मरेगा संत हो जाओ

सपना जैसे हे कड़ी होने को हुयी उसके पुरे बदन में दर्द के लहार दौड़ पड़ी

sapna.....ahhhhhhhh मायआ मर गइईईई

buda...tum लेती रो बेटी हम अबे आये ( सूर्य की आवर देख कर )

तुम इनके साथ में रहना

सूर्य ... जी बाबा

सूर्य के मुँह से बाबा सुन कर बड़ा मुस्कुरा दिया आवर नदी से कुछ दुरी पे बानी अपनी टूटी दुति कुटिया में चले गया ..........
 
अपडेट . 02

सूर्य ... जी बाबा

सूर्य के मुँह से बाबा सुन कर बड़ा मुस्कुरा दिया आवर नदी से कुछ दुरी पे बानी अपनी टूटी दुति कुटिया में चले गया ..........

अब आगे.........

कुटिया में बाबा ने कुछ जड़ी बूटियों का लेप त्यार किया कुछ जड़ी बूटियों का रास निकला

फिर बहार निकल कर नदी की आवर भाड़ गए जाया बे सपना आवर सूर्य थे

बाबा ने दोनों के गावो पे लेप लगाया आवर वो कड़वा रास पिलाया जड़ी बूटियों का बनाया हुवा

बाबा ...बेटी अब तुम्हे कुछ आराम मिला दर्द में

सपना ...जी बाबा अब आराम है आपका बहुत बहुत धन्यवाद् बाबा

baba..beti बाबा बे बोलती है आवर धन्यवाद् बे बोलती है

तुम्हे ऐसे हालत में देख कर हमें ऐसे लगा जैसे हमारी बेटी हे हो सामने

आज बरसो बाद फॉर से तुम्हे देख मेरी बेटी की याद अस गयी

बाबा ..आवर बीटा तुम कैसे जो अब

सूर्य ...जी बाबा थिंक हु बूत भूक लग थे हेयर छोटी माँ

सपना की आँखों वे फॉर सेंत आंसू निकलने लगे

वो सूर्य की सगी माँ नै थी किन्तु माँ से काम प्यार नै करती थी

बाबा ...चिंता न बेटी तेरा बाबा है न तुम्हारे साथ चलो मेरी कुटिया में चाक वही भोजन करना आवर फिर आराम करना तुम दोनों no जल्दी ठीक होने में लिया ताज़ा भोजन आवर भरपूर विश्राम की जरूरत है

तीनो चल दिया कुटिया की आवर यहाँ पे 2 छोटी छोटी घास फ़स की झोपडी थी जिसमे मच खाने पिने का रसन मच जड़ी बुटिया थी

आवर दूसरे में 2 चटाई कुछ पुराणी किताबे 2 ' 3 गात्रियो में कुछ बंद कर रखा तहत पता नै क्या था

तीनो बे फॉल फ्रूट आदि से भूख संत की बाबा सपना आवर सूर्य की आराम करने का बोल कर

अपने झोले में कुछ सीसिया कुछ पाउडर से रखा आवर कुछ समय में आने का बोल कर निकल गए

.................................................................

वही दुर्जन सिंह में पुरे गांव में खबर फैला दी की

बड़े भैया ( शिव ठाकुर ( डेड)

की पत्नी ( सपना ठाकुर ) की पहाड़ी से गिर कर मौत जो गई आवर सूर्य का पता नै चल रहा

दोपहर तक सं रिस्तेदार आवर बाकि का ठाकुर परिवार बे हवेली अस गया था

अब थोड़ा इंट्रो बे जो जाये

इंट्रो हेरे की आवर से

1 ....सुजीत ठाकुर दादा जी आगे 65 इयर्स ज्यादातर बीमार रहते है

2 ...सन्ति ठाकुर ...दादी जी अपने बागवान आवर अपने पति की सेवा में लगे रहती है अपने पोते से बूत प्यार करती है

3 ....माया ठाकुर बुवा जी आगे 35 ईयर

फिगर 35.30.36 हॉट एंड सेक्सी लेडी





4 ....राजेश ठाकुर ...आगे 40 इयर्स

कुछ समय पहले लकवा मर गया था अबे बेट पे हे रहते है

5 मोनिका ठाकुर इनकी बड़ी बेटी

6 ...मनीषा ठाकुर छोटी बेटी

7 ...मानवी ठाकुर ...आगे 33 इयर्स

फिगर .34.30.36

बेऔतिफुल एंड स्माल बोल्ड लेडी





8...सुजीत ठाकुर आगे 37 इयर्स

होटल लाइन में है

इनकी 2 बेतिया है

9 ...रुपाली एंड

10.. दीपाली

दोनों जुड़वाँ है

11..रणजीत ठाकुर बड़े पापा .आगे 32 इयर्स सिटी में अपने फॅमिली के साथ रहते है कार्स का शोरूम है इनका खुद का

12...मधु ठाकुर बड़ी माँ 26 इयर्स हॉट एंड सेक्सी फिगर की मालकिन 34.29.35 ..अपने आपको योग करके के हमेशा फिट रखते है

पब पार्टिश इनका शोक है

इनकी एक बेटी है आवर एक बीटा है





13 ..प्रिय ठाकुर बेटी ुन्देरगे

14 ..परतवि ठाकुर ...दिमागी रूप से विकलांग

15 ...शिव ठाकुर माय डैड .मर चुके है

16 ...सोनाली ठाकुर ...माय माँ मर चुकी है

17 ..सपना ठाकुर ...आगे 22 ईयर ( मेरा पापा की दूसरी वाइफ ) छोटी माँ बहुत हे खूबसूरत

फिगर 34 .29 .34

मुझे बहुत प्यार करती है

18 ..सूर्य ठाकुर गायब है ( हीरो )

19 ...दुर्जन ठाकुर आगे 27 ईयर बहुत हे कमीना हवसी किसम का आदमी सरे 2 no. के काम करता गांव की भू बेटियों की कबे बे इज्जत लूट लेता है

20..कामिनी ठाकुर चची .आगे 23 इयर्स हॉट एंड बोल्ड सेक्सी लेडी ( काम की देवी ) फिगर साइज 34 .28.36

इनकी एक बेटी है

आवर सायद फिर से प्रेग्नेंट है है





दुर्जन का चमचा .गुलाम भीमा मांगू कालू .

अपडेट जारी रहेगा .....
 
अपडेट 2 (बी)

अब ...आगे ......

ठाकुर हवेली में सबको सपना ठाकुर की मरतु से दुख था सिवाय

दुर्जन ..सिंह के है उसको ये दुख जरूर था की उसके हाथ से सपना जैसे खूबसूरत लड़की की छूट निकल गई

भीमा कालू मांगू बे खुस आवर डरे हुए थे

खुश इस लिया की दुर्जन की हाथ से सपना आवर उनकी जान बच गई

दर इस बात का की कहि दुर्जन को पता चला की सपना आवर सूर्य ठाकुर जिन्दा है

तो दुर्जन उनको आवर उनके परिवार को मर डालेगा

गम भरे माहौल में हे सपना ( राधा ) का अंतिम संस्कार किया गया

रणजीत ठाकुर दुर्जन सिंह को ले कर के पुलिस ठाणे पहुंचा आवर सूर्य की मिस्सिंग कंप्लेंट लिखवा दी

दुर्जन सिंह ने चुपचाप इंसेप्क्टर को पैसे खिला दिया की कुछ महीनो का टाइम ले के मारा हुवा बता कर फैले बंद कर दे

इन सब में सबसे ज्यादा दुख

सुजीत ठाकुर आवर सन्ति देवी को था

क्युकी उनका वंस चलने वाला एक हे तो था आवर उनके बेटे आवर भू की आखरी निसानी जो थी

चलते है बाबा की ोिर जंगल में

इस वक़्त साम के 6 बजे होंगे अब दोनों माँ बेटे को दर लगने लगा था क्युकी की जंगल काफी खतरनाक दिख रहा था

आवर बाबा जी बे अबे तक नै लौटे थे दोपहर से

डेरी डेरी समय गुजरता गया पुर इनका दर आवर ज्यादा बढ़ता गया करीब 7 बजे के आस पास किसी ने बहार से आवाज़ लगाई

दोनों माँ बेटे को थोड़ी रहत मिली की बाबा आ गए है

सूर्य ....छोटी माँ आप आराम करे मई देखता हु

सपना ...सम्बल के बीटा

सूर्य ...जी माँ

सपना ...क्या बोलै तुमने ..

surya...kuch नै छोटी माँ

सपना ...नै कुछ तो बोलै था

सूर्य ...वो. वो मैंने आपको माँ बोलै आप गुस्सा मत करना मई छोटी माँ हे बोलूगा आपको

sapna...nai मेरे बेटे तू मुझे माँ हे बोलना आज के बाद

तब तक सूर्य ने झोपडी का द्वार खोल दिया था

बाबा जी अंदर आ चुकी थे

सपना ....बाबा आपने कितनी ढेर लगा दे पता है हम कोटना दर गए थे

बाबा ....माफ करना बेटी तुम दोनों के लिया कुछ कपडे आवर खाने का सामान लेन गया था

उसी में टाइम लग गया मुझे

सपना ....बाबा इन सब की क्या जरूरत थी

बाबा ...जरूरत है बेटी तुम्हे ऐसे कपड़ो में एक बाप को अपनी बेटी को ऐसे देखना शोभा नै देता

आवर वैसे बे इतने पैसो का मई क्या करुगा बेटी

ये सब मेरी बेटी आवर मेरे बेटे के लिया हे है

( एक आवर इसरा करते हुए बाबा ने दिखाया तो सूर्य ने वो झोला खोला उसमे 100 .100 आवर 500 की नोटों की 20 से 25 गाड़िया निकली )

सपना .....बाबा इतने पैसा आवर यहाँ पे ऐसे चोर रखे है कोई चोर ले गया फिर क्या

बाबा जी ....हाहाहा बेटी इस जंगल में कोण चोर आएगा इन्हे चुराने आवर आ बे गए तो ले जाता ये सब मेरे किश काम के

फ़क़ीर आदमी को क्या छाए 2 वक़्त खाना 2 जोड़ी कपडे सोने के लिया एक चाट

सपना ...बाबा यहाँ आपको जंगल में दर नै लगता क्या

बाबा जी ...नै बेटी ये पूरा जंगल मेरा लिया घर जैसा है

आवर अब से तुम दोनों के लिया

सपना बेटी तुम सूर्य के साथ में यहक पे रहोगी

सपना आँखे फाडे देखते हुए बाबा को

Sapna...aapko हमारे नाम कैसे पता बाबा

बाबा ... गबरवो न बेटी जब बहार गया था तब पता चला सुजीत ठाकुर की भू सपना की पहाड़ी से गिर कर मोथ हो गए आवर पोता सूर्य गायब है कोई कहता है शेर खा गए कोई कुछ

बाबा ...किंठ सोचने वाली बात ये है बेटी की तुम जिन्दा हो तो अंतिम संस्कार किसका किया है उन लोगो ने

sapna...pta नै बाबा अगर हम कल रात जंगल में न आते तो वो शैतान दुर्जन ठाकुर फिर से मेरी इजात लूट लेता या फिर मर देता

बाबा ...गुस्से में क्या तुम्हारे इजात लूटी दुर्जन सिंह ने

उस कमीने को मई जिन्दा नै छोड़ूगा

उस हरमजादे ने मेरी फुल से बच्ची की बे इजात लूट ले थी आवर फिर जान से मार दिया था उसको

( ये सब बताते हुए बाबा रोने लगे थे )

सपना ....क्या उस शैतान ने आपकी बेटी को बे नै छोड़ा

बाबा ...है बेटी उस शैतान की गन्दी नजर पद गई थी मेरी बेटी पे

पहले उसने आवर फिर उसके दोस्तों ने मेरी बेटी की इजात लूटी आवर फिर मार के जंगल के किनारे फेंक दिया

सपना ....ऐसे नीच पापी को तो जान स मर देना चाइये बाबा किन्तु हाथ बन्दे हुए है

बाबा .....कुछ सोचते हुए ....बेटी तुम चाहो तो ये काम हो सकता है

किन्तु उस के लिया तुम्हे एक वचन देना होगा

सपना .ऐसा क्या है बाबा मेरा पास जिस के लिया आप मुझसे वचन मांग रहे हो

बाबा ...पहले वचन दो फिर सब बताउगा मई तुम्हे बेटी

सपना .. थीम है बाबा उस पापी से आपका आवर मेरा बदला लेने के लिया मई कुछ बे करुँगी जो आप कहोगे वही करुँगी ये मेरा वचन है

बाबा ... वचन के रूप में अगले 10 साल के लिया सूर्य मुझे सॉफ दो बेटी

सपना ....ये ये आप क्या कह रहे है बाबा यही तो मेरा जीने ला सहारा है

बाबा ....संत बेटी संत हो कर मेरी पूरी बात सुनो फिर अपना फैसला सुनना तुम एक माँ हो इस लिया तुम्हारा जो बे फैसला अपने बेटे के लिया होगा मुझे मंजूर होगा

बाबा ...पहले हम सब खाना खा लेते है देखो सूर्य को तो नींद बे आ गई है

सपना ...आप बैठो बाबा मई खाना लगती हु उठ सूर्य बीटा खाना खले चल खड़ा हो बाबा की साथ हाथ मुँह दो ले

सूर्य ...ठीक है माँ

बाबा ...क्या इसने तुम्हे माँ खा

sapna...ha बाबा अब से मेरा बीटा मुझे माँ बुलाएगा

बाबा ...फिर बीटा सूर्य मेरा साथ में अन्याय क्यों कर रहे हो तुम

सूर्य कबे अपनी माँ की आवर देखता कबे बाबा के

बाबा ...मेरी बेटी तुम्हारी माँ जुई तो मई क्या हुवा बोल भाई

सूर्य ...डेरी से ...नाना जी

सूर्य ने डेरी से बोलै पर दोनों ने सुन लिया आवर उनके चेहरे पे मुस्कान आ गई

बाबा ...बिलकुल ठीक बोलै अब से तू मुझे नाना बोलै कर ठीक है चल हाथ मुँह दो कर अपने बेटी का हाथ का खाना बे खाना है

जल्दी हे सूर्य आवर नाना जी ने खाना खा लिया सपना ने उन दोनों के बाद खाना खा कर सब काम ( जो की बहुत काम थे ) निपटा कर

एक कम्बल ले कर के सूर्य के साथ में लेट गई चटाई पे

दुरी चटाई पे बाबा जी कम्बल ले कर लेट गए

नाना ji...sapna बेटी हम कह रहे थे की तुम सूर्य की देखभाल की जिम्मेदारी हमें दे दो 10 साल तक के लिया

वो तुम्हारे साथ हे रहेगा किन्तु करेगा वो हज जो मई कहुगा

जैसा मैंने खा उसने वैसा किया तो उसको हारने या चोट पहुंचने वाला कोई नै होगा

सपना ....मई समझी नै बात आपकी बाबा

नाना ji...dekho बेटी दुर्जन सिंह से न तो तुम आवर न मई लड़ सकता हु अब मेरी हड़िया बूढी हो गई है

दुर्जन सिंह का मुकाबला करने के लिया मई खुद सूर्य को त्यार करुगा उसको चेतन से बे मजबूत सरीर बना दूंगा

अच्छी से अछए 20 ' 20 योद्धा से अकेला मुकाबला करने यज्ञ बना दुनगा अगर 10 साथ तक जैसे योध विद्या मैंने उसको देना छह रहा वो उसको ग्रहण करे तो

प्राचीन कल के योध कला आवर योग कला में निपुण बना दूंगा

आवर मेरी जड़ी बूटियों से बानी उसकी खुराख उसको हतियो जैसे ताकत देगी

ये जंगल जो तुमने देखा बेटी दिन में ये केवल एक जंगल हे नै है यहाँ पे जड़ी बूटियों का बन्दर भरा पड़ा है

सपना ...क्या सच में ऐसा हो सकता है बाबा

नाना जी ...है बेटी जो जो मैंने बोलै है उसके एक एक सबद सत्य है

तुमने जो थोड़ी देर पहले इतना पैसा देखा था वो यहाँ की नदी से मिले हुए सोना को बेच कर मैंने ये पैसे लिया थे

इस जंगल में जड़ी बूटियों के अलावा बे बहुत कुछ है यहाँ पे नदी में सोना बहुत मात्रा में है

नदी के उस पर एक पुराण गुफा है उसमे आज बे हेरे पाए जाते है

सपना ....बाबा क्या मई बे आप से जड़ी बूटियों का गायन ले सकती हु

बाबा ...क्यों नै मेरी बेटी बिल्कुल ले सकती हो

तो अब बताओ क्या तुम ये वचन देने को त्यार हो की 10 साल तक सूर्य को मेरे द्वारा दी गई शिक्षा लेनी होगी

सपना.... ठीक है बाबा मई सपना ठाकुर अपने बेटे सूर्य के सर पे हाथ रख वचन देती हु

जब तक आप सूर्य को पूर्ण रूप से शिक्षा नै दे देते है आपकी शिक्षा के बिच न ाउगि

बाबा ....कल्याण हो पुत्री तुमने आज मुज फ़क़ीर पे बहुत बड़ा क़र्ज़ चढ़ा दिया है

समय आने पे मई अपना ये क़र्ज़ अवस्य उतरुँगा

सपना ....कैसी बात करते हो बाबा मई आपकी बेटी हु आपने हे मुझे बेटी मन है उस नाते आप पिता हुए मेरे

एक बेटी कबे अपने पिता पे क़र्ज़ नै चढ़ा सकती

अब आप सो जाएये सुभ्रातृ बाबा

सुभ्रातृ बेटी

.......

सुबह को 5 बजे बाबा जी नाहा दो कर कर

सूर्य को आवर सपना को जगाया

बाबा ...सपना बेटी उठो सुबह हो गयी है जाओ तुम आवर सूर्य स्नान आदि कर लो

हम बे पूजा कर के आते है

सपना आवर सूर्य निकल गए नदी की आवर सूर्य तो पूरा नंगा हो कर उतर गया नदी में नहाने

सपना बहार कड़ी रहे

सूर्य ....माँ आप नै नहाओगी क्या

आ जाओ न देखो कितना मज़ा आ रहा है

सपना ...तुम नाहा लो मई बाद में नाहा लुंगी

सूर्य बहार निकल आया आवर अपनी माँ का हाथ पकड़ कर नदी में उतर गया अब सपना सरमाती हुए महान लगी

सपना ने अंदर पे ब्रा पंतय नै पहना था जैसे हे डुबकी लगा के बहार आये

सपने की 34 की सपेद चूचिया सफ़ेद सदी बिगने के कारन नजर आने लगी उसकी चूचियों के अंगूर खड़े हो गए ब्लाउज़ से से बहार नज़र आने लगे सपना न ने जल्दी से नाहा कर के गीले कपडे पहने हे अपने कपडे ले कर एक पेड के पिच्य चली गई आवर कपडे बदलने लगी

सूर्य तो अबे बे नहाने में मस्त था तबे उसकी नज़र गई जहा उसकी माँ कपडे बदल रहे थी

सूर्य को कुछ रेंगते हुए अपनी माँ के तरफ जाता हुवा दिखा

सूर्य वही से माँ माँ चिलता हुवा बागा अपनी माँ की आवर

सपना को लगा की सूर्य को कुछ हुवा है तो वो बिना कपडे पहने हे भागी सूर्य की आवर

बागती हुयी सपना ठोस चूचिया बे ऊपर नीचये हो रहे थे

बैग कर सपने ने सूर्य को अपने बहो में छुपा लिया

सपना ....क्या हुवा मेरे बेटे को बता मुझे क्या हुवा

सूर्य ...मा आप ठीक तो है न आपको सांप ने कटा तो नै न

सपना ...खा है सांप बीटा यहाँ तो कोई सांप नै है

सूर्य ...नै माँ सांप है मई देखा आप जहा कपडे बदल रहे थी वही पे सांप गया था

...कपडे के बारे में बताने पे सपने ने महसूस किया की वो तो सूर्य से पूरी नंगी चिपकी हुयी है

सपना सूर्य को चोर कर भागी कपड़ो की आवर

सूर्य पिच्य पिच्ये सपना आगे आगे सूर्य अपनक माँ की हिलती गांड देखता हुवा अपने माँ के आगे जा कर उनको रोका

सूर्य ...रुको माँ आप यही रुको मई देखता हज सांप गया की नै

जब सूर्य ने देखा सांप वही तो एक लकड़ी से आवाज़ कर के उसको बजाय

सूर्य ...माँ आप अब कपडे बदल लो सांप चला गया

sapna..tum यही रुको मई यही पे कपडे बदल लेती हु

सपना कपडेवलव कर आई पेड के पिच्ये से आवर सूर्य के सामने हे बदलने लगे

सूर्य बे नए कपडे फेन कर चल दिया नाना जी के पास

नाना जी ने दोनों के सरीर पे लगी चोट देगी कल वाली जो लगभग 90/ भर चुकी थी

नाना जी ...सपना बेटी जाओ पूजा कर लो फिर भोजन करना आज से

सूर्य की शिक्षा आराम करता हु

वह मौजूद गॉड की प्रतिमा के सामने हाथ झोड़ कर एक धागा उठा कर सूर्य के हाथ में बंद दिया

नाना जी ...सूर्य आज से तुम्हारी शिक्षा चलेगी तुम मुझे केवल आवर केवल गुरु जी कह कर पुकारोगे आवर मेरा हर खा मानोगे छाए कुछ बे हो जाये

सपना ....है सूर्य बीटा तुम्हे जो बे बाबा सिखाया या खुश बे तुम्हे करने को कहे वही तुम करोगे समाज गए न तुम

सूर्य ....जी माँ जो बे गुरु जी कहेगे वही करुगा मई

गुरु जी ....ठीक है आज के योग का समय तो निकल चूका है

कल से सुबह हमारे साथ में तुम्हे उठना है आवर हमारे साथ में योग आवर ध्यान की शिक्षा लोगे

अबे चलो तुम्हे युद्ध कला सीखने से पहले तुम्हारे सरिए की फुर्ती देखते है

गुरु जी ...तुम्हे सामने जो पहाड़ दिख रहा है तुम्हे एक जानते में 5 चाकर लगाने यहाँ से वह तक का सुरु हो जाओ

सूर्य को 1 चाकर में हे 15 से 20 मिन्ट्स लग गए

5 चाकर लगते हुए 2 हर से से कुछ ऊपर टाइम हो गए पूरा सरीर पसीने से भीग गया था

सूर्य ...गुरु जी कार्य पूरा हुवा

गुरु जी सूर्य तुम बहुत डेरी हो आज तुम्हारा पहला दिन है इस लिया ज्यादा कठिन सिख्सा नै दे

जाओ आवर जंगल से सुखी लकडिया काट कद लाओ

ऐसे हे कोई न कोई काम देते रहे दोपहर में सपना के कहने पे गुरु जी ने भोजन करने को खा सूर्य तो टूट पड़ा खाने पे

फिर साम तक वेदो की पड़े करवाई

रत को गुरु जी ने किसी जड़ी बूटी के तेल से उसकी जैम कर मालिश की

सबने खाना खाया सूर्य को खाना खाने के बाद कुछ पिने को दिया वो बहुत कड़वा था गुरु जी के डाटने पे उसने पि लिया

आवर पेट हे उसको गहरी नींद आ गयी

सपना ...बाबा ये तो सो गया आज जल्दी हे

बाबा ...है बेटी म्हणत बे तो बहुत की है इसने

सरीर अबे इतनी म्हणत का आदि नै हुवा है

सपना ...है बाबा अबे है बे तो बच्चा हे न

बाबा ...बेटी हम एक बात कहना चाहते है ोिर तुम्हारी सहायता बे चाहते है

सपना ...खो बाबा क्या बात है आवर रहे बात सहायता को तो जो मेरे बेटे के लिया सही होगा वो मई जरूर करुँगी छाए उचित हो फिर अनुचित

बाबा ..बेटी हम सूर्य अंदरूनी तो पूरी तरह से मज़बूत बना देंगे

मगर बहरी सरीर को मजबूत करने में मुझे तुम्हारे शाहयता चाइये

sapna...aap बस बताओ मई अपने बेटे के लिया कुछ बे करुँगी

बाबा ..समाज नै आता एक बेटी से उसका बाप ये बात कैसे कहे

सपना ऐसा क्या है बाबा जो आप हिचकिचा रहे है

आपको आपकी बेटी की कसम जो कोई बात है बिना गुमाये साफ साफ खो

एक गहरी सं छोड़ कर

बाबा ...बेटी हम जितनी बेवकाला सूर्य को शिकाये वो तबे काम आ सकती है जब उसका सरीर का कोई बे हिस्सा कमजोर न हो

किसी बे योद्धा के लिया सरीर की एक कमजोरी सामने वाले के विजय का कारन बन सकता है

सपना ...हम जानते है बाबा की सामने वाले योद्धा की कोई बे कमजोरी हमें पता हो तो उसे आसानी से हराया जा सकता है

बाबा ...इसे लिया बेटी हम सूर्य के सरीर का कोई बे हिस्सा कमजोर नै रहने देना चाहते है ुसिबके लिया तुम्हे हमारी सहायता करनी होगी

सपना ...हम सहायता के लिया त्यार है बाबा बताये क्या सहायता करनी होगी हमें

बाबा ...बेटी मैंने एक तेल बनाया है सरीर को मजबूत करने आवर सरीरकी मर्दानगी बढ़ाने के लिया

तुम्हे उस से सूर्य के पुरे सरीर की मालिश करनी होगी रोज रत को जब वो थक कर सो जाये तक

हम कल एक आवर नै कुटिया बना लेंगे दिन में हम उस में सो जाया करेंगे तुम रात को कुटिया में आराम से उस की मालिश कर देना

खास टूर पे उसके मुख्या बैग (_लिंग ..लैंड ) को

सपना कुछ सोचते हुए

ठीक है बाबा मई करूंगी मेरे बेटे के लिया ..........

रीड एंड एन्जॉय ....

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अपडेट. 3

सपना कुछ सोचते हुए

ठीक है बाबा मई करूंगी मेरे बेटे के लिया ..........

अब आगे........

बाबा .....ठीक है बेटी कल रात से हे तुम्हे हे सब करना होगा

सपना ....ठीक है बाबा

बाबा ...सुभ्रातृ बेटी

सपना ....सुभ्रातृ बाबा

दोनों जल्दी हे सो जाते है सुबह बाबा 4 बजे उठे सपना आवर सूर्य की उठा दिया

सूर्य की जो कल थकन थी अब सो पूरी उतर चुकी थी

बाबा ..बेटी जाओ सूर्य आवर तुम सनान आदि कर के जल्दी अस जाओ

दोनों नदी की आवर निकल गए छोटी छोटी झाड़ियों के पीछे का जा कर के टॉयलेट वगैरा कर के नहाने चल दिया थे आज दोनों साथ में नाहा थे थी

आज सपना की इतनी सरम नै अस थे थी

जल्दी हे नहा कर के कपडे बदल कर ( आज सपना ने सूर्य के सामने हे कपडे बदले थे )

जल्दी हे गुरु जी की आवर निकल गए

पूजा करने के बाज आज फिर वही सब हुवा किन्तु कल के मुकाबले 2 गुना ज्यादा म्हणत करनी पेड सूर्य को

बाबा आवर सपना ने मिल कर एक आवर झोपडी बना ली अब दोनों झोपडी के बिच में रसोईघर या स्टोर रूम ( जहा पहले से झड़ी बुटिया आवर रसन रखा था )

ऐसे हे सुबह से साम तक सूर्य की साडी ताकत निचोड़ की बाबा ने

रत में सूर्य खाना कहते हे सो गया

सपना की बाबा ने कैसे बताया ुसिंग तरह से सूर्य की सरीर की मालिश की

ऐसे हे समय निकलता गया आवर आज पुरे 5 मंथ हो चुके थे सपना को जंगल में आये हुए

अबे सपना कबे बे बचे no जनम से सकती थी

जल्दी हे सपना ने एक प्यारी से बच्ची को जनम दिया

जिसका नाम सपना ने किरण रखा

बाबा आवर सूर्य को जब बे फ्री टाइम मिलता दोनों निकल पड़ते नदी की आवर सोना ( स्वर्ण ) निकलने नदी पे पहुंच जाते

आज सूर्य को क्सक्सक्स साल जो गए शिक्षा लेते हुए अपने गुरु जी से

अब सूर्य काफी ताकतवर आवर लम्बा छोड़ा जो चूका

सपना की रोज की जा रहे मालिश बे सूर्य के सरीर आवर औजार पे नजर आ रहे थी

सूर्य का चेहरा आज बे वैसा था जैसा बचपन में सुन्दर आवर क्यूट अपने माँ पापा की परछाई आज बे उसके चेहरे से नज़र आती थी

किरण अब क्सक्सक्स साल की होने को आई गुरु जी ने किरण को बे शिक्षा देने सुरु कर दी खुद की रक्षा करने के लिया

अब रोज दोनों भाई भें ट्रेनिंग लेते आवर बाबा दवारा बनाई हुए दवा पेट आवर सो जाते

सपना ने किराना की मालिश बे स्टार्ट कर दी थी अब

सूर्य को सपना का रोज रात को मालिश करने का पता काफी पहले चल चूका था

सपना अब जागते हुए हे उसकी मालिश करती थे

कबे कबे तो सूर्य सपना की मालिश करते हुए उसके हाथ में झाड़ा जाता था

सपना बाद मुस्कुरा कर रह जाती थी

सपना सूर्य को चाहने लगे थी आवर सूर्य बे सपना को चेंज लगा था जवानी में मैडम रखते हे सं किसी लड़के के साथ होना कोई खास नै था

जब लौंडा खड़ा होने लगे तो चारो तरफ उसे छूट हे नज़र आती है

सपना बे बहुत छुडासी जो चुकी थी

वो रोज सूर्य आवर अपनी बेटी की मालिश के बाद अपनी छूट में अगली करती थी कई बार सूर्य ने बे देखा था

आज गुरु जी को दिया हुवा वचन पूरा जो गया था

आज सूर्य की ट्रेनिंग पूरी हुए थी

जितनी बे पुराणी योध कला थी सूर्य सब शिख चूका था

किरण बे काफी हद तक शिख चुकी थी आज गुरु जी सूर्य को सहर ले कर गए थे किसी से मिलवाने

बाबा ...सूर्य इनसे मेलो हे है मेरा परम मित्र का बीटा

****** सहर के कॉलेज का का डीन ...तुम्हे डॉक्टर बनाना था न

सूर्य ...जी गुरु जी

बाबा ...अब तुम मुझे नाना कह कर बुला सकते जो सूर्य

तुम्हे आयुर्वेद का जितना घ्यान मुझे था तुम्हे आवर तुम्हारे माँ को से चूका हु

सूर्य ....जी नाना जी

बाबा ... आगे से तुम इनके कॉलेज में पड़े करोगे

जो सोना आवर हेरे ले कर आये है सो इनको से दो

सूर्य ने एक दोनों से भरा झोला उनकी आवर कर दिया

आवर एक छोटी फर्श जय पाऊच जिसमे हेरे थे वो बे दे दिया

बाबा ..नीरज बीटा तुम्हे आवर बे कुछ काम खा था उसका क्या हुवा

डॉ .नीरज शर्मा ...आगे 50 ईयर ...बाबा मैंने उसका पता है है सो सब इललीगल होरा है तो संडे को हे वह जा सकते है

बाबा ...ठीक है बीटा आवर घर का क्या हुवा

निर्जर ...बाबा अबे देख रहा हु घर

surya...baba आपको घर क्यों चाइये शेयर में

बाबा ...बीटा सो घर मेरा लिया नै है सो तुम तीनो के लिया है

सूर्य ...क्या मतलब तीनो के लिया है

झा बे अस रहोगे हम आपके साथ रहेंगे

छाए यहाँ या फिर हमारे जंगल वाले घर में

उन

चाचा जी ... आप सहर की बहार जो जंगल है उसकी तरफ जमीं खरीद कर घर बनवा दीजिये नाना जी हमारे साथ हे रहेंगे

नाना जी ...बीटा नै जंगल को चोर कर नै आ सकता

सूर्य .. तबे तो चाचा जी को मैंने जंगल की आवर चार बनाने को खा है आवर माँ बे आपको अकेला नै रहने देती वह पे

नाना जी ...ठीक है बीटा जैसा तुम खो जब तक घर नै बन जाता तब तक तो रह ले अपने जंगल सेल घर में

सूर्य ...है क्यों नै नाना जी

दोनों वह से निकल गए उनको काफी लेट जो गया था घर के लिया

जब घर पहुंचे तो दोनों माँ बेटी इनके चिंता कर थे थे

आज जो कुछ हुवा सब बताया सब खाना खा कर जल्दी सो गए

दूसरे दिन

सुबह सूर्य आवर किरण ऐसे हे घूमते हुए पहाड़ी की आवर निकल गए

इनको 2 आँखे आवर देख रहे थी

ऐसे पहाड़ी पे मस्ती में दोनों भाई भें लड़ थे थे

की अच्चानक किरण का पेअर फिसला सूर्य ....छोटी समल कर

सूर्य ने किरण को तो बचा लिया निचे गिरने से लेकिन खुद को संभल नै पायस आवर पहाड़ी से निचे गिर गया

सूर्य को बहुत से छोटे आये किन्तु सबसे ज्यादा वॉर पे छोड़ लगे

थी

किरण जोर नार से छिलने लगे आवर दौड़ के सूर्य के पास गई

सपना जो अपने झोपडी में थी उसको किरण को छिलने की आवाज सुनी तो कुछ खतरे के दर से वो भागी पहाड़ी की आवर किरण किरण छीलते हुए

बाबा बे सपना के पीछे दौड़ पड़े

सपना ने जी सामने देखा उसकी आंको आंसू बहने लगे सूर्य को सर को पकड़ कर जल्दी से अपनी सदी फैक्स कर चोट पे बाँदा

सूर्य बेहोस था किसी तरह से सूर्य को तीनो ने सहारा से कर कुटिया में ले कर आये

नाना जी ने सूर्य का इलाज सुरु किया

किरण ने जो कुछ वह पे हुवा वो सब बताया

सपना ने किरण को बहुत डांटा उस बिचारि की बे क्या गलती थे

सुबह से साम हो आई सूर्य अबे बे बेहोसी में हे था

रात में जब सब थोड़ा बहुत खाना खा रहे थे तब सूर्य को होसे आये

सूर्य ....ाः मा

सपना ...लेता रहा बीटा तुम्हे चोट लगी है

सूर्य ...माँ दर्द जो रहा है

नाना ...ले हे दवाई पीओ सब कार्ड ख़तम जो जायेगा

दवाई में नीड की जड़ी बुटिया बे थी सूर्य फिर से सो गया

रात को 3 बजे के लगभग सूर्य झोपडी से बहार निकला पिसाब करने तो पास में शिवलिंग के पास किसी लड़की को रोटी हुए देखा

उसको लगा उसकी माँ होगी

सूर्य ....माँ माँ आप यहाँ क्या कर थे है

जैसे हे उस लड़की ने पीछे देखा

सूर्य चौंक गया की हे कोण है आवर यहाँ पे इतनी रात को क्या कर थे है जंगल में आवर ये रो क्यों थे है

सूर्य ...आप कोण है आवर यहाँ पे क्या कर रहे hi

लड़की ीदार उदार देखती है बोलती कुछ नै

सूर्य ..ीदार उदार क्या देख रहे हो आप से हे पूछ रहा हु मई

लड़की ....क्या तुम मुझे देख प् रहे हो

सूर्य ...क्या मज़ाक कर रहे हाउ अब सामने है तो दिखोगी हे न

लड़की ...क्या एच में तुम मुझे देख सकते जो

सूर्य ...आप पागल है क्या

आवर आगे बाद कर उसका हाथ पकड़ता है सूर्य को एक बार तो जतका लगता है किन्तु वो हाथ नै चोरता है

सूर्य ....अब तो यकीं हुवा न या अब बे नै हुवा यकीं

ladki...ha है अब यकीं हुवा है

लड़की ...मेरा नाम राधा है

तुम सूर्य हो न

सूर्य ...आपको मेरा नाम कैसे पता चल

राधा ...नै सब जानती हु तुम्हारे माँ छोटी भें किरण तुम्हारे नाना जी आवर तुम्हारे बारी में

राधा .. अब मुझे जाना होगा तुम कल जो जंगल में शिव मंदिर है वह पे आना तुम्हे बहुत कुछ जानना है अपने बारे में

मई तुम्हे सब बताओगे कल सुबह अकेले आना

सूर्य ...मुझे अबे माँ कहि नै जाने देगी मुझे चोट लगे है न

राधा ...नै तुम पूरी तरह से ठीक हो

सूर्य अपने वॉर पे हाथ फेरता है उसे बिलकुल बे दर्द नै हुवा

उसने वो कपडे की पति हटा कर देखा उसको कोई चोट नै लगे ऐसा लग रहा था ...........

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अपडेट 4

सूर्य अपने सर पे हाथ फिरता है तो उसे बिलकुल बे दर्द नै हुवा

उसने वो कपडे को पति हटा कर

उसको कोई चोट नै लगे ऐसा

लग रहा था ........

अब आगे.......

राधा वह से चली गई सूर्य उसको देखता रहा

फिर पिसाब कर के झोपडी में चला गया सोने

अपने माँ को कैसे के गले लगते हुए अपने बहन को दूसरी आवर से चिपका कर सो गया सुबह उठा

नदी में नहाया सपना के साथ में

सपना ने जब उसकी चोट के बारे में पूछा तो बताया की वो ठीक है नाना जी की दवा से गांव भर गया है

दोपहर का खाना खा के सूर्य निकल चूका घरे जंगल में जिस आवर रात में राधा गई थी

कुछ आड़े जानते के बाद में सूर्य को वो मंदिर दिखा

सूर्य कितना खूबसूरत मंदिर है

( दोस्तों आज का नेट किसी कारन ख़तम हो गया है इस लिया कोई पिछ ऐड नै कर सकता पिछ बाद में अलग से पोस्ट करता हु ...अब बे अपडेट ऑफ डाटा में लिख रहा हु )

सूर्य मंदिर में चला गया वह बागवान शिव के दरसहान किये कुछ समय बिता कर बहार आ रहा था थे उसके सामने एक साधु बाबा आये

सूर्य चौंकते हुए परनाम बाबा

साधु बाबा ....कल्याण हो सूर्य पुत्र

सूर्य ...बाबा आप मुझे कैसे जानते हो मई तो इस आवर आज दूसरी बार आया हु

साधु बाबा ....बीटा ये दुनिया बहुत छोटी है

यहाँ कब कोण खा मिल जाये पता नै चलता

सूर्य ....सच खा आपने बाबा

साधु बाबा ....बीटा कबे किसी की मदद करने में पीछे मत हटना समय आने तुम्हे उसका फल जरूर मिलेगा

surya....ji बाबा चलता हु

साधु बाबा ने सूर्य को आशीर्वाद दिया आवर उसके सर पे हाथ रख मुस्कुरा दिए

सूर्य को एक बार तो ऐसे लगा जैसे साधु बाबा ने अपना हाथ नै रखा हो बल्कि ऐसे लगा जैसे हठी ने अपना पांव रख दिया हो

साधु बाबा ने पकड़ कर सूर्य को बैठता

साधु बाबा ....तुम ठीक तो हो न सूर्य क्या हुवा अचानक

सूर्य ....कुछ नै बाबा सायद कल मुझे चोट लगी थी उसी कारन सायद चाकर आ गया होगा

कुछ देर आराम कर सूर्य बहार निकल गया

साधु बाबा एक रोशनी बन कर गायब हो गया

सूर्य राधा को बहार एक पेड के पास देखा तो उस आवर चल दिया

राधा ....तुम आ गए सूर्य

( सूर्य को घर के देखा आवर मुस्कुरा दी )

लगता है तुम बाबा से मिल चुके है

सूर्य ...मई मिल चूका हु साधु बाबा से वो मुझे अंदर हे मिल गए थे

राधा ...चलो अच्छा किया तुम बाबा से मिल लिया

सूर्य का हाथ पकड़े हुए चलो उस आवर एक जर्ना है वह चलते है वही बात करते है

अच्चन हे सूर्य की नजर अपने उस हाथ पे पड़ी जहा पे

इस वक़्त एक दिव्या ास्त्रो का चित्र बना हुवा था

सूर्य ....अरे मेरा हाथ पे त्रिशूल खा से आ गया मैंने तो कबे बनवाया बे नै था

आज से पहले तो कबे नै था ये चित्र मेरा हाथ में

राधा ....चलो कुछ नै है ये अबे गायब हो जायेगा

सूर्य ...चौंकते हुए गायब हो जायेगा से क्या मतलब है तुम्हारा यहाँ कोई जादू नै चल रहा है जो गायब हो जायेगा फिर से आ जायेगा

राधा ...यहाँ पर बैठो आवर मेरी बात ध्यान से सुन्ना बिच में कुछ मत बोलना आवर डरना तो बिलकुल बे नै

surya...mai भला आपसे क्यों डरूंगा आप जानती हो न मैंने गुरु जी से शिक्षा ली है

राधा ...चल चल ठीक है

अब ध्यान से सुन मेरी पूरी बात

मई एक आत्मा हु आवर साथ में तुम्हारी सबसे छोटी बुवा बे हु

सूर्य हस्ते हुए आप मज़ाक अच्छा करती हो राधा आप

राधा ... सूर्य ये मज़ाक नै है सच है ये मई एक आत्मा हु आवर तुम्हारी छोटी बुवा बे

ये उतना हे सच है जितना तुम सिवह ठाकुर के बेटे हो

तुम्हे अबे बहुत कुछ पता नै है

तुम्हारे छोटे दादा ने हे मेरी माँ को मारा था क्युकी मेरी माँ तुम्हारे दादा से प्रेम करती थी आवर वो एक गरीब अनाथ लड़की थी

जब तुम्हारे छोटे दादा को पता चला तब उन्होंने मेरी माँ को मर डाला आवर मुझे बे मरने की कोसिस की मई तो मर हे गई थी

किन्तु भला हो पुजारी बाबा का जिन्होंने मेरी जान बचाई सर में चोट लगने से मई पागल हो गई थी हमेसा मंदिर में जो बे प्रसाद मिल जाता उसी को खा कर अपनी जिंदगी गुजर लेती थे तुम्हारे छोटे चाचा दुर्जन सिंह को पता चल चूका था की मई उसकी सौतेली बहन हु उसने मेरा गला गोत कर मर डाला

मई तो पागल थी किसी को क्या फरक पड़ना था

पर उस नीच आवर उसके आदमियों ने मेरी मरे हुए सरीर को बे पवित्र कर दिया

आवर मेरी लॉस को तुम्हारी छोटी माँ सपना ठाकुर की लॉस बता कर मेरा अंतिमसंस्कार कर दिया

( राधा ने ये सब रोरी हुए गुड्स में खा था

ये सब राधा के मुँह से जान कर के सूर्य को बहुत दुख हुवा उसकी आंको में राधा के पेय आंसू थे आवर अपने छोटे दादा आवर दुर्जन सिंह के लिया बहिनथा नफरत )

सूर्य ...मुझे नै पता था ये सब बुआ जी मुझे माफ कर दो

राधा ...तुम क्यों माफी मांग रहे हो तुमने कुछ गलत तो नै किया न मेरे साथ में

आवर सुनो सूर्य तुम्हारे पिता को बे दुर्जन सिंह ने तुम्हारे छोटे दादा के साथ मिल कर मारा था

सूर्य गुस्से में

सूर्य ...बुवा मई उन दोनों शेतानो को जान से मर डालूंगा जिन्होंने आपको इतनी तकलीफ पहुंचे आवर मेरा पापा का खून किया नै छोड़ूगा किसी को बे

सबको इसकी सजा भुगतनी होगी

आज मुझे पता चला क्यों माँ ने मुझे इतनी ज्यादा हार्ड ट्रेनिंग दिलवाई नाना जी से

राधा ...सूर्य तुम्हे अपनी गुरु अपने नाना का बदला बे लेना है

सूर्य ....नाना का बदला लेकिन किश से आवर क्यों

राधा ....तुम्हारे नाना की बेटी को दुर्जन सिंह आवर उसके दोस्तों ने मिलकर रपे किया आवर फिर मार के फेंक दिया जंगल में

तुम्हे पुरे ठाकुर खंडन से बदला लेना होगा अपनी बुवा अपनी माँ आवर अपने नाना की बेटी के रपे करने का

सूर्य ....क्या मतलब आपका ....क्या माँ का बे उन्होंने रपे किया है

राधा ...है सूर्य याद है तुम्हे जब तुम हवेली से बजे थे सपना के साथ में तब क्या हो रहा था तुम्हारे माँ के साथ में

सूर्य उस दिन को याद करने लगता है

जैसे जैसे उसको समाज आ रहा था

उसकी आँखे लाल जबड़े कैसे हुए हाथो के नशे मनो अबे फैट जाएगी ऐसा लग रहा था सरीर का पूरा खून उसकी आँखों आवर नशो में एकता हो गया हो

एक बार तो राधा बे दर गई उसकी आँखे देख कर

सूर्य पुरे गुस्से में राहड़ा

सूर्य ...दुर्जन ठाकुर्रर्र आज से तेरी आवर तेरे खंडन की उलटी गिनती सुरु हो गई है

तुमने आवर तेरे खंडन ने जिस जिस के साथ गलत किया सबकी सजा मिलेगी मेरे हाथो से

राधा ...संत हो जाओ सूर्य गुस्से से तुम खुद का आवर अपनी माँ बहन को हे खतरे में दाल डोज

बिना सही योजना के इन जैसे शेतानो से नै उलझा जाता है

राधा ...अब तुम घर जाओ आवर कल सुबह जब तुम सपना की साथ नहाने जाते हो तब नाहा कर सिदा यही पर आना मई तुम्हे यही मिलुंग

तुम्हे मेरे साथ कहि चला है

केवल बाबा को बिताना की तुम दोपहर तक लौट आवोगे

सूर्य ...ठीक है बुवा

अब मई चलता हु देखते देखते राधा सूर्य के सामने गायब हो गई

सूर्य को यकीं हो चूका था राधा ने जो बोलै वो सत्य था

सूर्य घर लौट आये

सपना ...बीटा खा पे था तू देख साम होने को आई है

सूर्य ....बस माँ शिव मंदिर चला गया था घूमते घूमते

सपना ...क्या इतने दूर काम से काम बता कर तो जाना था

किरण ...भाई आज आप मेरे साथ में पड़े नै की न

माँ मुझे हे पड़ती रहे

सूर्य ...कोई न छोटी कल पद लेंगे है साथ में ............

रीड एंड एन्जॉय

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नेक्स्ट अपडेट लेट नाईट या फिर कल
 
अपडेट. 5

सपना ...क्या इतने दूर काम से काम बता कर तो जाना था

किरण ...भाई आज आप मेरे साथ में पड़े नै की न

माँ मुझे हे पड़ती रहे

सूर्य ...कोई न छोटी कल पद लेंगे है साथ में ............

अब आगे.......

रात में सबने खाना क्या आवर सोने को चल दिए

सपना ने किरण की मालिश की आवर काढ़ा पीला कर सुला दिया

सूर्य .....माँ आज मई आपकी मालिश करुगा

आप दिनभर हम सब के लिया कितनी म्हणत करते है

सपना ....बस बस माखन न लगा तुम्हे मज़्ज़े करने है न

surya....kya मतलब माँ

सपना ....कुछ नै मई कह रहे थे पहले तेरी मालिश कर दू

फिर तू मेरी कर देना

सूर्य ....ठीक है माँ आप बे अपने कपडे.

निकल दो वर्ण ख़राब हो जायेंगे

सपना एक नॉटी स्माइल देते हुए

सपना ....है मुझे पता है तुजसे बड़ी हु मई

सूर्य डेरी से पता है आपकी कितनी बड़ी है

सपना ....क्या खा तुमने जरा जोर से बोलना मुझे कुछ सुनाई नै दिया

surya.....kuch नै माँ मैंने कब कुछ बोलै है

सपना ने अपने पुरे कपडे उतर दिए

सूर्य बे पूरा नंगा हो गया

अपनी माँ सपना की गदराई जवानी देख 8 इंच का कहता ( लैंड )

एक जटके में सलामी देने लगा

सूर्य ने आज कुछ आवर बे महसूस किया

आज उसको अंदर में बे बहुत साफ साफ अपनी नंगी माँ नजर आ रहे थे

उसे थोड़ा अजीब बे लग रहा था आवर साथ में उसके लैंड बे पहले से ज्यादा मोटा नज़र आ रहा था

सपना ....सूर्य किरण के पास लेट जाओ पहले तुम्हारे मालिश होगी

सूर्य चुप चाप लेट गया

सपना ने हलकी दिए (दीपक ) की रोशनी में देखा की सूर्य का लैंड पूरा खड़ा हुवा है

sapna.....ye हमेसा ऐसा हे रहता है क्या जब देखो तब सर उठाये सलामी देता रहता है

surya.....nai माँ पता नै आपको देख कर ये ऐसे हे खड़ा हो जाता है

सपना पहले पैरो की मालिश करते है

फिर सूर्य की छाती आवर पेट की

फिर सूर्य को पलट कर अच्छे से उसके खुल्हो ( गांड ) की मालिश करती है

आखिर में अपने हाथो को अच्छे से तेल में बेगहो के

सूर्य के लैंड को पकड़ती है

सपना अपने मन me....aaj ये सूर्य का लैंड अलग क्यों लग रहा है

आज कुछ मोटा लग रहा है आवर इसके लैंड की नशे बे मुझे साफ साफ महसूस हो रहे है

आवर गरम बे आज बहुत है

कहि सूर्य ने इसके साथ कुछ किया तो नै

sapna....tumne इसके साथ कुछ किया है क्या

सूर्य ...किसके साथ माँ

सपना...( अपने हाथ से लैंड की मुठ मरते हुए ांडो की मालिश करते हुए )

अरे जिसकी मई मालिश लार रहे हु तुम्हारे लानंन्द की

surya....nai माँ मैंने तो कुछ बे नै किया था इसके साथ में

surya.....waise माँ इसके साथ आवर क्या किया जाता है इस से तो बस पिसाब हे करते है न

सपना .....है है वही तो मई बोल रहे हु

( मन me....etna बड़ा घोड़े के जैसा लैंड दिनभर जुलता रहता है आवर अबे तक ये बे नै पता की इस से आवर क्या क्या काम होते है

इतना तो तेरे बाण का बे नै था लगता है बाबा के तेल कुछ ज्यादा हे असर कर रहा है इस पे

ऊऊफफफफ कितना गरम है हाथ में लैंड है लईकिन छूट में नै ले सकती

कितने साल हो गए छूट में लैंड लिया हुवा

कैसी किस्मत है मेरी लैंड पास में है फिर बे उसके लिया हे तरसती रहती हु

अब तो कुछ करना हे पड़ेगा )

ीदार सोचते सोचते कब सपना ने अपनी अगली अपनी छूट में दाल अंदर बहार करने लगे पता बे नै चला

जब सूर्य के लैंड की पिचकारी सपना के चेहरे पे पड़ी तब उसको होसे आया

sapna....ye क्या किया तुमने मेरा चेहरा ख़राब कर दिया तुमने पूरा का पूरा

सूर्य .....माफ करना माँ मैंने आपको रुकने को बोलै था किन्तु आप को कुछ सुना हे नै

सपना ने अपने हाथ आवर सूर्य का लैंड एक कपडे से साफ किया

सूर्य से नज़रे बचते हुए अपने जइब निकल कर होंटो पे पास जो गधा सा वीर्य था फ़ौरन चाट गई

सूर्य ने देख लिया किन्तु बोलै कुछ नै सपना अपना चेहरा साफ कर लेट गई

सूर्य ....माँ आप पेट के बल लेट जाओ पहले पीछे से करुगा फिर आगे से

सपना ....क्या खा तुमने पहले पीछे से फिर आगे से

सूर्य ....है तो सही तो खा पहले पीछे से आपकी मालिश होगी फिर आगे से

सपना ....है ठीक है

(अपने मन में ...कबे आगे पीछे से मेरी छूट आवर गांड की बे करदे अपने लैंड से मालिश अब आवर नै रुका जाता मेरे से सूर्य )

सूर्य अपने मन में ...

आठ माँ आपकी तव्चा की नरम आवर चिकनी है आपकी मोती मोती कोमल जंगे जब बे आपकी मालिश करता हु बहुत मज़ा आता है

आपकी ये मटकी जैसे गांड कितने सॉफ्ट है बिलकुल ऐसे लगता है जैसे कोई दो बड़े गुब्बारे में पानी भर कर अपने हटो से दबा रहा हु

उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह माँ आपकी गांड का बुरा सा छेद जी करता अबे आपकी गांड में ताल दाल कर लैंड उतर दू )

सपना अपने मन me.....aaahhhh मेरी जान मेरा बीटा सूर्य आवर मोरे लगाए अपनी सपनाआ की गांड पे तेरे हाथूवो से अपनी गांड मसलवाने में बहुत मज़ा आता है रे

आआअह्ह्ह्हह मारा मई गई डेरी मेरी छूट )

सपना ....बीटा अब सामने से कर दे पीछे से बहुत हो गया

सूर्य ...ठीक है माँ

सपना ....जब तू मेरी मालिश करे तक मुझे माँ नै सपना खा कर मुझे अच्छा लगता है

सूर्य ...ठीक है maa...upsss सॉरी सपना

सपना ....हूउउ

सूर्य सपना की छूट से ले कर के चूचियों तक एक तेल के धार वीरता है

सपना की जंगे छोड़ी कर के जंगो के बिच बेथ कर जंगो के निचे





ऐसे पोज़ में ले आता है बस लैंड अंदर नै डाला था ))))

सूर्य जैसे जैसे चूचियों की मालिश करने आगे झुकता वैसे वैसे सूर्य का 8 इंची कामदण्ड सपना की छूट की फैंको को छोड़ा करते हुए छूट के डेन पे अपने लैंड की चाप छोड़ देता

( सपना अपने मन me....surya मेरी जान गुस्सा दे न अपने घोड़े को मेरी छूट में क्यों तड़पा रहा है अपनी सपना को

ेस्स्स्सस्स्स्स मेरी जान उउउउउफफ्फ कितना गरम लौंडा है

अह्ह्ह्हह्हह मा मेरी छूट फसाद दे न मेरे बेटे क्यों अपनी माँ पे तरस नै आता क्या )

सूर्य मन में ( ..अह्ह्ह्हहए माया आपकी ढूढ कितनी ठोस है कितनी कड़क है

आवर आपकी छूट कितनी नरम आवर गरम है जी करता है उउउउउफफ्फ्फ्फ़ आआअह्ह्ह्ह एक जोर का झटका मरू आवर आपकी छूट फाड् दालु आप मेरी माँ नै होती तो कब की आपकी छूट में अपना लैंड उतर दिया होता

)

दोनों अपने अपने मन में एक दूसरे को छोड़ने आवर चूसने के कामना कर रहे थे किन्तु कोई आगे नै बाद प् रहा था

आखिर में सूर्य ने सपना पे अपने वीर्य की बौछार कर दी सपना अपने छूट पे गरम तरल को महसूस करते हुए झाड़ गई

दोनों हे सूर्य के वीर्य से लिथड़ चुके थे

10 मिंट बाद सपना ने सूर्य को अपने ऊपर से अलग किया

खुद को आवर सूर्य को सूर्य की वीर्य को साफ किया

लेते हुए सूर्य को प्यार से देखते हुए सपना ने एक छोटा सा किश सूर्य के लिप्स पे कर दिया

सपना ...चल अब सो जा अपने कपडे बदल कर

सूर्य ...नै माँ आज मई ऐसे हे सौगा आपके साथ में

आप बे सुबह बदल लेना कपडे

सपना ...आवर तेरी छोटी ने ऐसे देखा हम दोनों को तो क्या होगा

किरण ...कुछ नै होगा माँ अब आप सो जाओ भाई के साथ

ऐसा कहते हुए किरण बे अपने भाई की छोड़ी छाती पे गले में बहे दाल कर सो गई .........
 
अपडेट

नुदे

डेट. 6




सपना ...चल अब सो जा अपने कपडे बदल कर

सूर्य ...नै माँ आज मई ऐसे हे सौगा आपके साथ में

आप बे सुबह बदल लेना कपडे

सपना ...आवर तेरी छोटी ने ऐसे देखा हम दोनों को तो क्या होगा

किरण ...कुछ नै होगा माँ अब आप सो जाओ भाई के साथ

ऐसा कहते हुए किरण बे अपने भाई की छोड़ी छाती पे गले में बहे दाल कर सो गई .........

अब आगे..........

तीनो माँ बेटे एक सात चैन की नींद सो गए

एक जोड़ी आँखे थी जो इनको सुरु से अंत तक की रासलीला देखि थी

अपने मन में कुछ सोचते हुए वो आँखे वह से हैट गई

सुबह 4 बजे सबसे पहले सूर्य की आँखे खुली

सूर्य को महसूस हुवा जैसे किसी ने उसका हाथ पकड़ कर जगाया हो

सूर्य ...कोण है कोण है

सपना ...क्या हुवा बीटा किश को आवड दे रहा है तू सुबह सुबह को

सूर्य ने ीदार उदार देखा एक कोने में राधा जोर जोर से हंस रहे थे

सूर्य ने उसको गुस्से से देखा राधा वह से गायब हो गई

sapna....tu ोदर उदार क्या देख रहा है

सूर्य ....कुछ नै माँ

किरण ....माँ भइया कपडे फेन लो आप कब तक ऐसे हे नंगे घूमते रहोगे

सपना ...मरूंगी एक बड़ी आयी भैया की चमची

किरण भाग कर सूर्य की गौड़ में चढ़ गई सुबह सुबह सूर्य का कामदण्ड वैसे हे सलामी दे रहा था

सूर्य का लैंड किरण की गांड के बिछे झूलता देख सपना की हंसी छूट गई

सपना ...हस्ते हुए पागल लड़की उतर सूर्य के ऊपर से खा चढ़ बैठी है पता बे है तुझे

किरण ....क्या माँ मई तो अपने भाई को गौड़ में हे तो हु

सूर्य ...चल छोटी जल्दी चल हमें नहाने बे जाना है

सूर्य आवर सपने ने कपडे पहने आवर चल दिए नदी की आवर

किरण जल्दी हे नाहा कर अपनी ट्रेनिंग के लिया निकल गई

यहाँ पे सपना ने अपने पुरे कपडे उतर कर नदी में उतर गई

बिलकुल नुदे






सामने का नज़ारा इतना दिलकश हो सकता है सूर्य ने सोचा नै था

सूर्य ने पहले बे अपनी माँ को ऐसे देखा था किन्तु आज उसकी माँ दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की लग रहे थी

आज सूर्य का नजरिया अपनी माँ के लिया बदल चूका था

सूर्य का लैंड इस वक़्त अपनी माँ को नंगी एक जलपरी के रूप में देख रहा था






सूर्य आज पहले बार अपनी माँ को माँ की नजर से न देख एक प्रेमिका की नज़र से देख रहा था

वही कुछ दूर कड़ी राधा ये सब देख मन हे मन मुस्कुरा रहे थे

वो कबे सपना को देखती

तो कबे सूर्य को अपना तगड़ा लैंड हिलाते हुए देखती

सपना बे चोर नजरो से सूर्य को देख रहे थी

की कैसे सूर्य उसे देख कर अपना लैंड हिला रहा था






सपना देख रहे थी की सूर्य उसे देख कर लैंड हिला रहा उसको थोड़ा आवर तड़फना चाइये

ये सोच कर नदी जो झरने से बाह कर आ रहे थी वह चली गई

आवर झरने के पानी के पीछे चुप गई






सूर्य ने देखा सपना झरने की आवर जा रहे है

आवर फिर झरने की पीछे चुप गई बार बार वो अपना चेहरा निकल के सूर्य को देख रहे थे

जो सपना चाहती थे वही हो रहा था सूर्य सपना की चूचिया आवर गांड देखने को व्याकुल हो गया

तबे सपना ने अपने चूचियों को पानी से बहार निकला






सूर्य पूरा पागल हो चूका था ऐसा कमुख रूप अपनी माँ का देख कर

सूर्य .....लगता है माँ आज मेरी गांड मर कर हे छोड़ेगी

पता नै आज माँ कितने खूबसूरत लग रहे है ऐसे

पहले तो ऐसा नै लगती थी मुझे

sapna..kya हुवा सूर्य खा खो गए नहाना नै है क्या मेरे साथ में

सूर्य की मनो तन्द्रा टूटी हो आवर वो लैंड को हिलाते हुए अपनी माँ की आवर भाड़ गया

सपना ने तो एक आवर झटका सोच रखा था सूर्य के लिया

जैसे जैसे सूर्य सपना की आवर भाड़ रहा था

वैसे वैसे सपना एक आवर उचाई से गिर रहा पानी की आवर जा रहे थी

पानी के निचे जा कर सपना ने एक नॉटी स्माइल देते हुए आँख मर दी






बस फिर क्या था ऐसे नज़ारे को देख

सूर्य के लैंड ने आज पहले बार इतना जल्दी आवर इतनी आदिक मात्रा में वीर्य छोड़ा था






सपना ...सूर्य अब जल्दी से नाहा कर चलो बहुत टाइम हो गया है

आज बहुत मस्ती कर्ली हमने

सूर्य ....जी माँ चलिए

दोनों जल्दी नाहा कर कुटिया में पहुंचे सपना बाकि के काम करने लगे

वही सूर्य चल दिया अपने नाना जी की आवर

नाना ji...beta आज कुछ ज्यादा हे टाइम लगा दिया आने में

सूर्य ...जी नाना जी वो पानी में मस्ती करते हुए पता हे नै चला

नाना ji...koi बात नै बीटा

सूर्य .....नाना जी मई पुराने मंदिर जा कर आता हु

नाना जी ...ठीक है बीटा जल्दी आ जाना

सूर्य ...जी नाना जी वो मुझे थोड़ा टाइम लग जायेगा आते हुए

नाना जी ...क्यों बीटा

सूर्य ....वो आ कर बताता हु नाना जी

नाना जज ...ठीक है बीटा जल्दी आने की कोसिस करना

सूर्य... जी नाना जी ..........

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दोस्तों सायद कल मई कोई अपडेट नै दे पाउगा इस लिया

अब एक आवर अपडेट पोस्ट करुगा थोड़े देर में लिख कर के ......
 
अपडेट .....7

नाना ji...koi बात नै बीटा

सूर्य .....नाना जी मई पुराने मंदिर जा कर आता हु

नाना जी ...ठीक है बीटा जल्दी आ जाना

सूर्य ...जी नाना जी वो मुझे थोड़ा टाइम लग जायेगा आते हुए

नाना जी ...क्यों बीटा

सूर्य ....वो आ कर बताता हु नाना जी

नाना जज ...ठीक है बीटा जल्दी आने की कोसिस करना

सूर्य... जी नाना जी ..........

अब आगे.......

सूर्य वह निकल गया कुछ 8 बजे वो मंदिर पूछा

मंदिर में प्रतिमा के सामने हाथ झोड़ परनाम किया

आवर बहार निकल कर राधा की आवर चल दिया

राधा ....क्या बात है आज बड़े थके थके लग रहे हो सूर्य

सूर्य ....खा बुवा मई तो एक डैम फिट हु

राधा ....सूर्य तुम मुझे बुवा नै बोलै कर समझा

मुझे मेरे नाम से पुकारा कर राधा खा कर

सूर्य ....कया राधा ..कह कर मगर आप तो मेरी बुवा हो आवर मुझसे बड़ी बे हो मई आपका नाम कैसे ले सकता हु

राधा ....मई कोई बड़ी नै हु शामे तुम अबे तो मई 18 की जवान लड़की हु

आवर वैसे बे तुम सपना भाबी को तो बड़ा रात में सपना सपना बोल कर बड़े मज़े कर रहा था

surya.muh फाडे राधा को देख रहा था

राधा ...ऐसे क्या देख रहे हो मुझसे कुछ नै छुपा सकते तुम समझे

सूर्य ...जी बुवा जी ( सर्मिन्दा होते हुए )

राधा ...सर्मिन्दा न हो आवर फिर से बुवा न बोलना मुझे ..मुझे राधा कह कर बोलना

सूर्य ....ठीक है राधा

radha...chal चोदे सब आवर मेरी बात ध्यान से सुन बिच में न बोलना जो बोलना है बाद में बोलना समझा

सूर्य ....ठीक है

radha......tumhe मेरे साथ कहि चलना है पहले जा कर के मंदिर में प्रतिमा के पास रुद्राक्ष माला राखी है उसको फेन कर मेरे पीछे पीछे चले आना कुछ बे मत पूछना जैसा मई खु वैसे हे करना

सूर्य बिना कुछ बोले मंदिर गया वह से प्रतिमा को परनाम कर रुद्राक्ष की माला फेनी आवर राधा के पीछे पीछे चल दिया लगभग एक जानते बाद जंगल के दूसरे चोर पे एक पहाड़ी में बानी गुफा की आवर इसरत करते हुए

राधा ....तुम्हे उस गुफा में जाना है वह एक मूर्ति होगी बिना किसी चीज़ को छुए वह पे एक छोटा बॉक्स रखा होगा उसको ले कर के बिना पीछे मुड़े बिना कुछ बोले बॉक्स ले कर बहार आ जाना बाकि जो तुम्हे जानना है वो बाद में बताउगा

ध्यान रहे किसी आवर चीज़ को चुना नै है आवर न पीछे देखना है कुछ हो जाये चाहे कोई रोये चिल्या किसी की बे आवाज पे तुम ध्यान नै डोज समझे न

सूर्य ने गर्दन हिला कर है खा

आवर चल दिया गुफा में

10 मिंट चलने के बाद सूर्य एक शैतानी मूर्ति के पास पहुंचा जहा पे चारो आवर जानवरो की हड़िया हे हड़िया नज़र आ रहे थी

सूर्य...( अपने मन में ) ये कैसे जगह है मनो यहाँ कोई नरभक्षी रहता हो ऐसा लग रहा है

सूर्य सब विचारो को त्याग कर आगे बड़ा उसको यहाँ पे घुटन से हो रहे थी सामने हे उस मूर्ति के पास उसको वो बॉक्स नजर आ गया ( क्युकी वह आवर कोई बॉक्स ) नै था


सूर्य ने उस बॉक्स को देखा आवर आगे बाद कर उस बॉक्स को उठा लिया

जैसे हे सूर्य ने वो बॉक्स उठाया वह अजीब अजीब गुरने की हलकी हाली आवाजी सुन ने लगे

सूर्य को बहुत दर लग रहा था

सूर्य ने बॉक्स को ले कर के सरपट बहार की आवर दौड़ लगा दी पीछे से

उसको ऐसे लगा जैसे किरण की आवाज़ आये आवर वो पीछे देखने वाला था की थे उसे राधा की बाद याद आयी की कुछ हो जाये कोई बे आवाज़ सुने पीछे नै देखना

सूर्य वही पे रुक गया

सूर्य अपने मन में छोटी यहाँ क्यों आएगी वो तो जगह जानती बे नै

जरूर कुछ गड़बड़ है

फिर से उसे आवाज़े सुनने लगे इस बार सपना की आवाज थी सूर्य ने बिना सोचे समझे गुफा से बहार दौड़ लगा दी

सूर्य जब बहार निकला राधा सामने हे कड़ी थी

राधा ...सूर्य जल्दी यहाँ से चलो भागो जल्दी सिदा
मंदिर में हे रुकना

सूर्य ने है का इसरत किया आवर फुल स्पीड में दौड़ पड़ा मंदिर की आवर

आज उसके नाना द्वारा दी हुयी ट्रेनिंग बहुत काम आ रहे थी

लगभग 15 मिंट दौड़ने पे सूर्य मंदिर पहुंचा

सामने कल वाले साधु बाबा बैठे थे

आवो सूर्य ले आये बॉक्स को

सूर्य ...जी बाबा ले आया बॉक्स किन्तु आपको कैसे पता बाबा

बाबा ...मैंने हे खा था राधा बेटी को तुमसे बॉक्स मंगवाने को

राधा बे वह आ गई थी

राधा ..परनाम बाबा कल्याण हो पुत्री

सूर्य ...बुवा ये सब क्या है

राधा ने घर के देखा

सूर्य ....मेरा मतलब ये क्या है राधा आपने मुझे ये बॉक्स लेन को क्यों खा ऐसा क्या है इस बॉक्स में

आवर उस गुफा में वो सब का था जानवरो की हडियो का पहाड़ लगा था वह पे

बाबा ....संत बीटा सूर्य मई बताता हु तुम्हे

इस बॉक्स में 2 रिंग है एक जिनलोक की राजकुमारी की आवर एक है प्रेतलोक के राजा की

तुमने बहुत अच्छा कार्य किया है बीटा बाकि बाटे बाद में बता दूंगा इनको पवित्र करना जरूरी है

सूर्य ....ठीक है बाबा

बाबा अपने काम में लग गए प्रतिमा पे अर्पित किया गया जल आवर ढूढ से दोनों रिंग को पवित्र करने

सूर्य ...राधा जो बाबा बोल रहे है वो क्या सच है

राधा ....है सूर्य ये सच है जो कुछ बाबा ने खा है वो बिलकुल सच है

बहुत कुछ ऐसा है जो तुम्हे जानना होगा वो तुम्हे बाद में बता दूंगी मई

सूर्य .... ठीक है राधा

बाबा... सूर्य यहाँ आवो तुम

सूर्य बाबा के पास चला जाता है

बाबा ने सूर्य को अपने सामने बैठाया आवर सूर्य पे जल छिड़क कर

उसके सामने बॉक्स रख दिया

baba...surya ये लो जिनलोक की राजकुमारी की ये अंगूठी पहल लो

सूर्य ..पर बाबा मई कैसे ये रिंग फेनु ये तो राजकुमारी की रिंग है न

baba......ham जानते है

राधा ....बाबा जो बोल रहे है वही करो सूर्य

सूर्य ....ठीक है बाबा

सूर्य ने जैसे हे जिनि रिंग फेनी सूर्य का सरीर रिंग से निकली नीलो रोसेन से कवर हो गया

कुछ 10 मिंट बाद डेरी डेरी वो नीली रिसने सूर्य में समाहित हो गई

बाबा ...बहुत अच्छे बीटा तुमने एक पड़ाव पर कर लिया

बाबा ...राधा बेटी तुमने बहुत अच्छे इंसान को चुना है तुमने अपने लिया

सूर्य ....बाबा मई कुछ समझा नै आप राधा से किश बारे में बात कर रहे हो

बाबा ....वो तुम्हे खुद राधा बता देगी बीटा अब ये दूसरी अंगूठी बे दर्जन करो

surya...ne वो रिंग बे फेन ले इस बार रेड रंग की रोशनी निकली आवर सूर्य के सरीर में सामने लगी

सूर्य .....आआआअह्हह्ह्ह्हह माआ बहुत दर्द हो रहा है बबाआ

बाबा ....बस कुछ पल बीटा फिर सब दर्द ख़तम हो जायेगा

सूर्य चलने लगा उसकी आँखों से आंसू के साथ में खून निकल रहा था

छीलते छीलते दर्द में सूर्य बेहोश हो गया

बाबा ....बेटी सूर्य का ख्याल रखना अब समय आ गया है तुम्हारे दिए हुए सराफ को पूरा करने का

राधा ...जी बाबा मई त्यार हु

बाबा ...हम अबे सपना को ले कर के आते है

बाबा वह से गायब हो गए आवर सूर्य के घर पे पहुंचे

बाबा को बहार नाना जी मिल गए

नाना जी .....गुरुदेव आप यहाँ सब ठीक तो है न

सूर्य को कुछ हुवा तो नै न

baba.....nai पुत्र सूर्य को कुछ नै हुवा है

बस वो प्रेतराज की सक्तियो को दर्जन करते वक़्त मूर्छित हो गया है

आप तीनो चलो मेरी साथ में जरूरी विस्य पे बात करनी है किन्तु यहाँ नै

नाना जी ...जी गुरुदेव जैसा आप खो

सपना बेटी किरण बेटी जरा बहार तो आना दोनों

सपना ....क्या हुवा बाबा

बहार किसी आवर को देख कर सपना ने अपनी सदी का गुणगट चेहरे पे कर लिया

नाना जी ....सपना बेटी इन से डरने की जरूरत नै है

ये मेरे गुरु है तुम्हारे लिया जैसा मई हु वैसे हे गुरुदेव है

सपना अपना गुणगट हटते हुए

आगे बाद कर पेअर छुए

बाबा ....कल्याण हो पुत्री सदा सौभाग्यवती भाव

सपना आवर नाना जी मुँह फाडे गुरुदेव को देखते है

सपना .....बाबा ये आपने कैसा आशीर्वाद दिया है

नाना जी ....है गुरुदेव सपना बेटी तो विद्वा है फिर ऐसा आशीर्वाद

बाबा ....हमने सोच समाज कर हे आशीर्वाद दिया है आप सब हमारा हाथ पाक्सो

सब एक दूसरे का हाथ पकड़ा आवर बाबा के साथ
मंदिर पहुंच गए

सपना आवर किरण तो मुँह फाडे ीदार उदार देख रहे थे

फिर जब सपना की नज़र बेहोश पड़े सूर्य को देखा जो अबे राधा की गोद में था

सर हवा में आवर बाकि सरीर निचे लेता हुवा था

सपना ...सूर्याअ क्या हुवा तुम्हे

बाबा सूर्य को क्या हुवा है

नाना जी ...कुछ नै हुवा है सूर्य को बेटी वो बस मूर्छित है

फिर बाबा ने जो आज सूर्य ने किया क्या उसके साथ में हुवा सब बता दिया

सपना ने जैसे हे सूर्य को छुआ सूर्य उसको किसी की गौड़ में लेता हुवा देखा

उसने फ़ौरन अपना हाथ खींचा

तो सूर्य के पास कोई नज़र नै आया

sapna...baba यहाँ पे अबे सूर्य किसी की गोद में लेता था अबे खा गया वो साक्ष

baba...khi नै गया है वो बेटी एक बार सूर्य को छू कर फिर से देखो

सपना ने सूर्य को छुआ तो फिर से उसको सूर्य किसी के गोद में लेता हुवा पाया

sapna...baba ये सब क्या है पहले हम गायब हो यहाँ पे पहुंचे आवर अब कबे कोई नज़र आता है कबे नै ये सब है क्या आवर क्यों हो रहा है ये सब

बाबा ...सूर्य को कुछ नै हुवा है जो सूर्य को गोद में ले कर बैठा है वो कोई आवर नै तुम्हारी ननद राधा

जो तुम्हारव गांव में मंदिर में रहती थी सब उसको पागल कह कर बुलाया करते थे

sapna...radha आवर मेरी ननद मई कुछ समझी नै

बाबा .. बेटी बात ये है की.......

........... ............. ..............

................साडी बाटे जो राधा ने सूर्य को बताती थी वो सब दिया

अबे ये सब बात कर रहे थे की सूर्य के मुँह से दर्द भरी सिसकी निकली

sapna...surya तुम ठीक तो हो न सूर्य सबको देख कर है माँ मई ठीक हु

नाना ji....mubarak हो सूर्य बीटा प्रेतलोक आवर जिनलोक के भावी राजा

सूर्य सपना किरण ......क्या राजा आवर मई .सूर्य

बाबा ..गुरुदेव आप हे समझाओ इनको

(अब से मंदिर वाले बाबा को गुरुदेव को नाना जी को बाबा या फिर नाना जी कहूंगा )

गुरुदेव ....बात ये है बेटी की जब सूर्य ने जिनलोक आवर प्रेतलोक की रिंग दर्जन की है तब से समझी ये जिनलोक आवर प्रेतलोक का राजा बन गया अब ये इस पे निर्भर करता है की इसे राजा बनना है या नै

राधा ...सूर्य मुझे तुमसे कुछ आवर बात करनी है जो मैंने तुमसे चौपाई है

सूर्य ....राधा ऐसे क्या बात है जो तुमने चौपाई है

सपना ...तुम किस से बात कर रहे हो

गुरुदेव बता दो बीटा सपना को बिताना क्या है सपना आवर किरण को दिखा हे दो राधा को

सूर्य ...जी गुरुदेव

सूर्य किरण आवर सपना का हाथ पड़ता है तो सामने उनको राधा नज़र आती है

किरण ....क्या ये राधा बुवा की आत्मा है

सूर्य .( हस्ते हुए ) है ये है अपनी राधा बुवा

राधा ...क्या खा तुमने फिर से मुझे बुवा खा

सूर्य ....सॉरी सॉरी राधा

राधा ...सूर्य सपना मेरी बात ध्यान से सुनो

(दोस्तों मई एक बात क्लियर कर देता हु राधा की आवाज या उसे देख पाना तब तक संभव है जब तक सूर्य का हाथ पकडे रहेगी तब तक )

( गुरुदेव ने नाना जी का हाथ पकड़ा था वो सब सुन आवर देख प् रहे थे )

radha...surya तुमने सपना से विवाह करना होगा आवर साथ में मुझसे बे करनी होगी सदी

सूर्य सपना नाना जी .....एक साथ क्याआ ( सपना मन हे मन खुस हो रहे थी बहार से शॉकिंग फेस बना रहे थी )

राधा .....है तुम्हे सपना आवर मुझसे सदी करनी होगी ( सपना की आवर मुस्कुरा कर देखते हुए )

इतना हे नै तुम्हे तुम्हारे खंडन की जितनी बे महिला या लड़की है उन सब से सम्बंद बनाना होगा

है ये तुम पर है की तुम किश किश से सदी करोगे किस से नै

नाना ji...likin सपना बेटी ये दोनों तो माँ बेटे है ये समाज के नियमो की विरुद्ध है कोई बी िंहके रिश्ते को समाज में स्वीकार नै करेगा

गुरुदेव ....समाज की नियमो के विरुद जरूर है

आवर रहे बात रिश्ते की तो इस्वर ने सिर्फ मनु आवर भूमि ( सायद नाम गलत है मुझे याद नै ठीक से )

को हे इंसानो की उत्पति के लिया बनाया था

आज जितनी बे मनुस्य है नर नारी ( आदमी आवर ोुरत)

उन्हें मनु आवर भूमि की संतान है

उस नाते तो जो बे ोति पत्नी के जोड़े है कहि न कहि भाई भें के रिश्ते से जुड़े है

नाना जी ...उचित खा गुरुदेव मुझे सपना बेटी आवर सूर्य बेटे के विवाह से को परेशानी नै है

किन्तु राधा बेटी कैसे सूर्य से विवाह कर पायेगी वो तो एक आत्मा है न

गुरुदेव ....राधा बेटे बे उसी खंडन से है जिसे खुद राधा बेटे ने आत्मा रूप में सराफ दिया था जब उसके माँ के साथ जो कुछ हुवा उसका पता मरने के बाद राधा को पता चला आवर एक पवित्र आत्मा का सराफ कबे खली नै जाता है

राधा ....आवर रही मेरी आत्मा हो कर विवाह कैसे होगा तो उसका हल है मेरे पास

नाना जी ...कैसा हल ै बेटी

राधा ...बाबा मेरी आत्मा को अगर पुरे मन से सपना स्वीकार करे तो हम दोनों की आत्मा एक हे सरीर में बिना किसी को तकलीफ बिना सपना को लास्ट पहुचाये एक सरीर में 2 आत्मा सकती है

आवर साथ में मेरी आत्मा से जुडी हुए सक्रिय बे सपना को प्राप्त हो जाएगी

सपना कुछ देर सोच कर बाबा मई राधा को अपने पुरे मन से बागवान शिव को साक्षी मन स्वीकार करती हु

राधा आगे बाद कर सपना के सरीर में समां गई इस दौरान सपना के साथ में किरण ने बे हाथ पकड़ा हुवा था जिस कर दोनों माँ बेटी को जटके लगे

जब राधा की सकती सपना में समाहित हो रहे थी थे कुछ अंश किरण के सरीर में बे समाहित हो गयी...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स

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दोस्तों कल का कुछ पता नै अपडेट आएगा बे या नै .....
 
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