Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 21 - SexBaba
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Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

जो रीडर्स सेक्स नहीं देखना चाहते उन् लोगो से अनुरोध है की आप सेक्स को न पढ़े और आगे बढ़ जाए. ये हरम बेस्ड इन्सेस्ट कहानी है. ये तोह होएगा hi. मुझे पता है कहा क्या दिखाना है. अगर आपको सेक्स नहीं देखना तोह आप मूव ों करे. पर कहानी में सेक्सुअल टोन रहेगा hi रहेगा. पढ़ना न पढ़ना आपके ऊपर है. प्लॉट्स तोह अपने हिसाब से hi जायेंगे. और इंटिमेसी का असर किसी भी अर्च पर नहीं पड़ेगा.
 
कुछ बहुत खतरनाक प्रेपर हो रहा है. :डी
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 129 ~ नई मैसेज

अब तक...

भावना : M-Mujhe माफ़ कर दे! मुझे माफ़ कर दे बेतु!!!! *स्निफ्फ* I'm सॉरी!!! फॉर एवरीथिंग!!! *स्निफ्फ*

वीर (स्माइल्स) : It's okay...! माँ!!!

भावना को लगा था वह आसुओ को रोक लेगी. पर वीर के मुँह से आखिर शब्द सुनते hi...! अब उसके ासु न रुके. और वह लगातार सिसकी ले ले के रोटी चली गयी.

और ये दिवाली की रात भी वही समाप्त हो गयी.


अब आगे...



*स्क्रीईईएक्सक्छःह*

गाडी आके घर के सामने रुकी. अंदर से वीर, रागिनी, आरोही, काव्य और श्वेता बाहर आये. सुबह सुबह hi रागिनी कार लेके उन्हें स्टेशन पर pick-up करने चली गयी थी.

तोह वही ऑटो में भावना, तेज, सुमन और पूर्वी आ रही थी. उनके आते hi घर के अंदर से आभा ने बाहर आ कर गेट खोला और उन्हें अंदर बुलाया.

रही बात उन् दासियो की? तोह वीर ने उन्हें मुंबई आने का कह दिया था. रजत का वीरान पड़ा घर उन् सब के लिए सबसे सही जगह थी ठहरने की. वो घर फुल फर्निश्ड भी था.

साथ hi भावना ने तय कर लिया था की अब से वह अपने बेटे वीर के साथ hi रहेगी. और वीर भला कहा मन करने वाला था? उसी कोई दिक्कत नहीं थी. दिक्कत बढ़ी थी तोह वह थी श्वेता के लिए.

उसके लिए ये किसी खौफ से काम नहीं था. पर उसने ज़रा भी विरोध नहीं किया. उससे जैसे एक मौका मिल गया था. वह जानती थी भावना समेत सभी वीर से नाराज़ है. तोह इस से बेहतर स्वर्णिम अवसर और क्या hi हो सकता था वीर को अपना प्यार दिखाने के लिए?

जहा सब वीर से नज़रे फेरर उस से बात करने में hich-kichaane वाले थे. श्वेता उल्टा वीर के निर्णय को सही ठहरा के उस से क़रीबी बनाने की कोशिश करने वाली थी.

इस समय वीर को कोई चाहिए था उससे सांत्वना देने वाला. उससे सही maan'ne वाला. और श्वेता भली भाति जानती थी उससे क्या करना है.

अंदर आते hi सबसे पहले भावना की नज़रे घर पर गयी और फिर पोर्च में कड़ी उस सफ़ेद रोल्स रोये घोस्ट पर. उसने जैसे hi कार देखि उसका मुँह ताजुब के मारे खुल गया. वह दांग रह गयी. और वह अकेली नहीं थी. तेज और पूर्वी का भी यही हाल था.

भावना : बीटा? Y-Ye?

वीर : ओह्ह्ह! हाँ! ये गिफ्ट में मिली है!

उसके इतना कहते hi उन् सब की हालत और खराब हो गयी. वह सब जानती थी की इस कार की कीमत करोडो में थी. ऊपर से वीर का ये कहना की ये गिफ्ट में मिली है. उनके दिमाग का फ्यूज hi उड़द गया था.

तेज : व्हाटट? गिफ्ट में? किसने दी?

वीर : उम्! है एक!

तेज : लड़की है या लड़का?

वह अचानक उसके क़रीब आके उसकी आँखों में देखते हुए पूछी,

वीर : हँ?

तेज : लड़की है या लड़का? तेल्ल में!

वीर : लड़की!

तेज : अरे यू डेटिंग हेर????

वीर : व्हाट? No! She's आलरेडी मैरिड. चलिए अंदर!

बैग्स उठा के वीर उन्हें अंदर ले गया. और उसके पीछे पीछे बाकी सब भी चल दी. पर तेज वही खड़े जैसे मूर्ति की तरह जम्म गयी. और न जाने क्या क्या bad-badaane लगी,

'There's no वे! There's लिटेराल्ल्य no वे! No वे ये कार सिर्फ गिफ्ट में दी गयी है.'

उसने अपना फ़ोन निकाल के फटाफट कार के मॉडल का नाम गूगल पर सर्च किया. और कीमत देखते hi उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी. उसका शक अब यकीन में बदल गया.

'ी वास् फूकिंग राइट! There's no वे की ये कार उस औरत ने सिर्फ गिफ्ट में दी है. एंड she's आलरेडी मैरिड? There's समथिंग गोइंग ों.'

अंदर आते hi सभी ने अपना अपना सामान रखा. पर काव्य जो अब तक खुद को संभाले हुए थी वह रो पड़ी.

रागिनी : काव्य?

उससे रोटा देख रागिनी उसके समीप आयी. सभी चिंतित हो उठे. और रोये भी क्यों न बेचारी. उसके पिता ने इतना बड़ा काण्ड जो किया हुआ था. पहले भाई और अब पिता. काव्य को जहा पहले बेहला फुसला के चुप करा दिया गया था अब फिरसे वही पैतरा उस पर काम नहीं आने वाला था.

क्युकी मुंबई आते hi उसकी घबराहट इतनी बढ़ गयी की वह खुद को संभाल न पायी. और उसकी इस घबराहट के चलते आरोही पर भी असर हुआ. हमेशा शांत रहने वाली आरोही भी अब बेहद बेचैन थी.

वीर सब जानता था. काव्य के ऊपर इस वक़्त क्या गुज़र रही थी. उसका तोह पूरा परिवार hi बिखर रहा था. उसके पास जाते हुए झुक कर उसने काव्य को देखा,

वीर : मेरी तरफ देख काव्य!

रागिनी : काव्य! काव्य...! रौ मत बीटा!

काव्य अपने ासु पॉच धुंदली हो चली आँखों से वीर को देखि.

वीर : क्या चाहती हो तुम?

काव्य : *स्निफ्फ* ???

वीर : तुम क्या चाहती हो? बोलो!

काव्य आरोही की तरह नहीं थी. उसका दिमाग ऐसी सीटुएशन्स में काम करना बंद कर देता था. वह रट हुए वीर के सीने से लग गयी और उससे जो सही लगा उसने बोल दिया,

काव्य : डैड!! डैड ने ऐसा क्यों किया?? *स्निफ्फ* भैया!!! भैया! में चाहती हु सब कुछ पहले जैसा हो जाए. *स्निफ्फ*

वीर : ये अब मुमकिन नहीं काव्य!

काव्य : B-Bhaiyyyaaa!! *स्निफ्फ* D-Dad के साथ क्या होगा? क्या डैड और हमे सब घर से निकाल देंगे? माँ?? हमारा क्या होगा? *स्निफ्फ*

वीर : में नहीं जानता काव्य!

काव्य : न्यूऊओ!!! *स्निफ्फ* आप मुझे दर्रा रहे हो भैय्या!! *स्निफ्फ*

सभी दोनों भाई बहनो को हमदर्दी से देख रहे थे. उन्हें आभास था की अब कुछ बुरा घटित होने वाला था. एक की गलती की सजा आज कितनो को भुगतनी पद रही थी.

आरोही : वीर!

वीर : हम्म?

आरोही वीर को कुछ देरर देखि. वह अब तक इस मामले पर अपनी चुप्पी बांधे हुए थी. और जैसे सही मौके का इंतज़ार कर रही थी. वीर के नज़दीक आके वह अचानक hi,

वीर : !!??? ये क्या कर रही हो आप???

वह उसके पेर्रो पर गिर पड़ी. स्तब्ध होक वीर ने अपनी बहिन को उठाया.

आरोही : पहले प्रांजल! और अब डैड!!! न जाने कबसे मेरी फॅमिली तुम्हारी फॅमिली के खिलाफ ये अन्याय करती आ रही थी. हमे माफ़ कर देना वीर. काव्य! चलो यहाँ से!!

कहके वह तेज़्ज़ क़दमों के साथ बाहर को निकली. पर पोर्च तक आते hi वीर ने उसके हाथ को पकड़ खींच लिया,

आरोही (नम्म आँखों से) : लेट जो वीर!! लेट जो!! जाने दो! वे don't डेसेर्वे तो बे हेरे!

वीर : क्यों भला?

आरोही : Don't मेक में रिपीट. तुम जानते हो!!! आखिर हम उन्ही बाप की बेतिया है. इस पाप के भागीदारी हम भी है. प्रांजल की बात भूली नहीं हु में. और अब ये. में तुमसे नज़रे नहीं मिला पाऊँगी. प्लीज! जाने दो!

उसने अपना मुँह फेरर लिया. वीर ने बिना कुछ कहे उसकी कमर थामी और अपने हाथ दाल,

आरोही : !!????

उसने जोरर से आरोही को अपने सीने से लगा लिया. हैरत में आरोही अपने भाई को देखती रही. उसकी गरम सासें उसके मुँह पर पद रही थी.

वीर : उस घर से पहले से hi मेरा मैं मुटाव था. फिर भी आपके संग सम्बन्ध बने न? तोह फिर आज क्यों परवाह कर रही हो आप? क्यों डर रही हो? क्यों बर्ताव कर रही हो ऐसे जैसे की हमारे सम्बन्ध में दूरिया आने वाली हो?

आरोही : तोह क्या दूरिया नहीं आएँगी वीर? बताओ मुझे! I'm क्लोएलेस्स टुडे! कुछ समझ नहीं आ रहा! सब बिखर रहा है. प्रांजल जा चूका है. डैड ने ये किया. न जाने अब क्या होगा. अगर गलती से भी माँ इस में शामिल निकली तोह में-

वीर (फ्रोंस) : तोह? तोह क्या करेंगी आप?

आरोही (लम्बी सास लेते हुए) : कुछ नहीं! मुझे जाने दो!

वीर : छुपाने की कोशिश मत कीजिये मुझसे.

आरोही : वीर प्लीज!!!!

वीर : में लेके चलूँगा आप दोनों को! अकेले कही नहीं जा रही आप.

आरोही : वीईएएररररर!!!!

पर वीर अपने निर्णय पर अडिग रहा. और आरोही की आँखों में ासु आ hi गए,

आरोही : P-Pleaaaaseee!!

वीर : No! क्यों ज़िद्द कर रही हो आप?

आरोही : क्युकी डर रही हु में! *स्निफ्फ*

उसका हाथ काँप रहा था. उस नरम हथेली को थाम वीर ने उससे आश्वाशन दिया.

वीर : ी प्रॉमिस यू!

आरोही : ?

वीर : प्रांजल की तरह में इस मटर में इंटरफेरे नहीं करूँगा. क्युकी आप जानती है मेरा तरीक़ा...!

आरोही : ी...

वीर : आप दोनों को लेके चलूँगा. ज़ाहिर है जो होगा, वह दादा जी hi तय करेंगे. में दूर रहूँगा. और आपके और काव्य के साथ. आपके पिता ने जो कुछ भी किया, उसका दोष न hi कभी आप पर जायेगा और न hi काव्य पर.

इतनी बड़ी बात कह के वीर ने आरोही की एक चिंता को दूर कर दिया था. वो भावुक होते हुए उसके गले से लग गयी,

आरोही : थैंक यू!

वीर : Don't मेंशन आईटी. और चल के काव्य को समझाइये. इस वक़्त उससे संभालना है हमे.

आरोही : हाँ! वेट! D-Dada जी!? उनके चेस्ट में पैन हुआ था न?

वीर : Don't वोर्री! मेरी फ़ोन पर बात हुई है. ठीक है वह. माइनर चेस्ट पैन था. वह सब अभी हॉस्पिटल में hi है. चेक उप के लिए.

आरोही : O-Okay!

दोनों पुनः अंदर आये तोह आरोही और बाकी सभी काव्य को संभालने में लग गए. और उसके शांत होने के बाद,

पूर्वी : वीर? अब ज़रा एक कप चाय मिलेगी? क्युकी मुझे फिर निकलना भी है.

वीर : इतनी जल्दी?

पूर्वी : हाँ तोह? इतने दिन बाहर रही में, तुम्हारे मौसा जी की हालत खराब हो गयी होगी मेरे बजर्र.

वीर : पर अभी तोह आये हो आप!

पूर्वी : तोह तुम भी तोह नहीं आये हो.

वीर : में आ चूका हु आपके यहाँ एक बार. आप तोह अभी आयी हो. और अब hi जा रही हो.

रागिनी : हाँ! रुकिए न थोड़ी देरर और.

पूर्वी : अरे आती रहूंगी न.

वीर : पता नहीं फिर कब आओगी आप.

पूर्वी (स्माइल्स) : वीकेंड्स पे आ जाय करुँगी. और वैसे भी...! अभी ये मसले हल करलो पहले. ये सब ज़्यादा ज़रूरी है.

वीर : हम्म!

इतने में अंदर से सोनाली सभी के लिए जब चाय लेके आयी तोह सुमन ने अपनी बेटी का परिचय दिया,

सुमन : दीदी! ये रही मेरी बेटी! सोनाली! और ये है मेरी बहु. आभा!

भावना (स्माइल्स) : ओह्ह! तोह ये है तुम्हारी बेटी. पर ये तुमपे बिलकुल भी नहीं गयी है. में देख के hi बता सकती हु.

सुमन (स्माइल्स) : आप ने एकदम सही कहा है.

वीर : क्या निधि ma'am के घर गयी थी तुम फिर? उनसे पढ़ने?

सोनाली : हम्म? हाँ! रोज़ जाती हु शाम को.

वीर : Okay!

जब चाय पी के सभी फुर्सत हुए तोह पूर्वी वीर का हाथ थाम उससे बाहर ले आयी. और ऊपर टेरेस पर जाती सीढ़ियों पर उससे बिठा के उसके बगल से बैठ गयी,

पूर्वी : तुमसे कुछ बात करनी है.

वीर : कहिये!?

पूर्वी : देखो! तुम और भावना अभी अभी मिले हो. तेज भी. और अभी जो स्थिति बानी हुई है तोह ऐसे में खीज आना, गुस्सा होना, ये सब आम होता है. तुम समझ रहे हो न?

वीर : साफ़ साफ़ कहिये मासी!

पूर्वी : मेरा मतलब है. किसी का गुस्सा किसी के सर्र मत उतरने देना. धीरे धीरे अपनी माँ, बहिन को और जानो. उनसे बातें करो. हाँ?

वीर : ये भी कोई केहनी की बात है?

पूर्वी : में जानती हु बीटा तुम समझदार हो. पर बस...! कुछ होने मत देना. भावना को अब जाके सौ दर्दो के बाद एक सुख प्राप्त हुआ है. उसके होंठो पर ये मुस्कान बनाये रखना.

वीर : आप चिंता मत करिये!

पूर्वी : प्रॉमिस?

वीर : प्रॉमिस!

पूर्वी मुस्कुरायी और प्यार से वीर के गाल को खींच उससे निहारने लगी.

पूर्वी : एक बात का जवाब दे.

वीर : पूछिए!

पूर्वी : पारिजात में वह सब क्यों किया बेतु? जानता है हम सब को कितनी तकलीफ हुई है उसके बाद से? चेहरे पर नाराज़गी अभी दिख नहीं रही क्युकी सब अभी तुम्हारे चाचा को लेकर चिंता में है. वर्ण सब के दिल को ठेस पहुची है. क्या ज़रुरत थी?

वीर इस प्रश्न पर मौन रह गया. उसने नज़रे फेरर धीरे से बोलै,

वीर : वह करना ज़रूरी था मासी!

पूर्वी : क्या ख़ाक ज़रूरी था!? अगर...! अगर इतना hi कण्ट्रोल नहीं हो रहा था तोह मेरे पास आके कहता. में ढूंढ देती तेरे लिए एक गफ. तुझे देख के तोह मेरी सोसाइटी की लड़किया हस्सी ख़ुशी राज़ी हो जाती. बोल देता मेरे से की मासी मुझे एक गफ चाहिए. सब शेयर कर सकता है तू मेरे साथ. तुझे पता है न? फिर उन् औरतो के साथ!?

वीर : मेने कहा न मासी! वह ज़रूरी था. यु समझ लीजिये की मेने एक पास फेका है. और वह पास अभी घूम रहा है. अगर उसके ऊपर वही अंक आया जिसके बारे में में सोच रहा हु, तोह मेरा अनुमान एकदम सटीक निकल जायेगा. फिर आपको सब पता चल जायेगा की मेने ऐसा क्यों किया था.

पूर्वी : तेरी बातें मेरे बिलकुल पल्ले नहीं पद रही है.

वीर (स्माइल्स) : आपको उससे समझने की भी ज़रुरत नहीं है अभी. आप बस इतना समझिये की चाहे कुछ भी हो जाए, माँ, तेजू दी और आपको कोई तकलीफ नहीं होएगी. सिवाए इस पारिजात घर के.

पूर्वी : बस वही तोह एक तकलीफ है बेतु.

वीर : मेरे हाथ बंधे है इसमें.

पूर्वी : तू आज़ाद है. तू चाहे तोह उन्हें अभी मन कर दे. और फिर देखना, कैसे सब वापस से खुश हो जायेंगे. कर के तोह देख.

वीर : मेने कहा न मासी! मेरे हाथ बंधे है. अब पास फेक चूका हु. इंतज़ार करना है अब मुझे.

पूर्वी : J-Jaisa तुझे सही लगे फिर. चल! अब में चलती हु.

वीर : आती रहना!

पूर्वी : हम्म!

पूर्वी उठने को हुई तोह इतने में वीर ने झट्ट से आगे बढ़ के उसके गाल को चूम लिया. और वह बेचारी अचानक की इस चुम्बन से हड़बड़ा गयी.

पूर्वी : !!!????

वीर : *स्माइल्स*

पूर्वी (ब्लशेस) : तू!!! ये क्या था???

वीर (स्माइल्स) : अभी तोह कह रही थी आपसे सब शेयर कर सकता हु!?

पूर्वी (ब्लशेस) : हाँ तो वो तो बातो के लिए कहा था.

वीर : ओह्ह! मुझे लगा किश भी शेयर कर सकता हु.

पूर्वी : मारूंगी न एक तमाचा!

दोनों एक दूसरे को देख पुनः मुस्कुराये. वीर की हथेली थाम वह उठी,

पूर्वी : चल! अब चलती हु!

वीर : में चोरर के आता हु न!

पूर्वी : नहीं! इसकी ज़रुरत नहीं है. तेरा रहना अभी यहाँ ज़्यादा ज़रूरी है. और वैसे भी, मेरा घर कोई लंदन में नहीं है. थोड़ी hi दूर है. चली जाउंगी!

वीर : तोह एक काम करने दीजिये मुझे. आप टैक्सी नहीं ढूढेंगी. में कैब कर देता हु.

पूर्वी : ठीक है. और कॉल कर के मुझे खबर देते रहना.

वीर : हम्म!

फिर पूर्वी के लिए कैब कर वीर ने उससे बैठाया और घर भिजवा दिया.

भावना को तब तक रागिनी अपना घर दिखा रही थी. बीच बीच में उस घर को लेके बाते भी होती. कभी रागिनी अपना दुःख दर्द बया करती तोह कभी भावना. और दोनों hi बड़ी जल्दी एक दूसरे से घुलने मिलने लगी.

रागिनी जान बूझ के भावना से दोस्ती अच्छी करने में लगी हुई थी. आखिर वीर की असल माँ थी वह. सासु माँ से तोह दोस्ती करना ज़रूरी hi था.

तोह वही वीर तेज को लेके अपने कमरे में ले गया,

वीर : लाइए हाथ!

तेज : I-It's okay! तुम रहने दो!

वीर : मेने कहा न लाइए!

तेज : आरोही कर देगी न!

वीर : आरोही दी काव्य के साथ है. उनका आपस में रहना ज़रूरी है. तोह अगर आपको मुझसे कोई प्रॉब्लम नहीं है तोह...!

तेज (ब्लशेस) : मुझे क्यों भला प्रॉब्लम होएगी!?

वीर : सो!?

शर्माते हुए तेज ने अपनी पलके उठा के वीर को देखा और फिर निचला होंठ दातो टेल दबाये वह राज़ी हो गयी,

तेज : ठीक है!

कहते हुए उसने एक झटके में अपना टॉप उतार दिया. अंदर उसने एक ब्लैक स्पोर्ट्स ब्रा पहनी हुई थी.

तेज (ब्लशेस) : लो! जल्दी करो!

पल भर के लिए वीर खुद mantra-mugdh रह गया उससे देख. उसके उरोजों के उभार पर एक टिल भी था. अपना ध्यान भांग होने से बचा के वीर नीचे बैठा और तेज की बाज़ू से वह ड्रेसिंग निकालने लगा.

तेज : अब ठीक हो गया होगा. अगली ड्रेसिंग की ज़रुरत नहीं है.

कही न कही तेज भी ये दिखाना चाहती थी की वह ओपन माइंडेड बहिन थी उसकी. इन् सब से उससे फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला था. वह जताना चाहती थी की वह इन् कपड़ो में भी उसके समक्ष आसानी से सामने आ सकती है.

वीर : हम्म! पर आपको चोट पर तुबे तोह लगाना hi होगा. और इससे खुला चोरर्ण होगा.

तेज : तोह में क्या ऐसे hi घर में घुमु?

वीर : अगर मुझसे प्रॉब्लम न हो तोह! क्युकी मेरे अलावा इस घर में बाकी सब लेडीज hi है. और मुझे नहीं लगता उनसे आपको कोई दिक्कत होगी.

तेज (ब्लशेस) : F-Fine!!! पर अब मुझे नहाना भी तोह होगा. ये बाद में करना था.

वीर : बाद में फिरसे कर दूंगा.

तेज के गाल पूरे लाल हो चले.

तेज : उन् औरतो के साथ-!?

वीर : उस बारे में मुझे कोई बात नहीं करनी है अभी.

तेज : यू-!! टच! फाइन! तोह वह औरत कौन है?

वीर : कौन औरत?

तेज : वही औरत जिसने तुम्हे 7 करोड़ की कार गिफ्ट की है. जो नीचे पड़ी हुई है.

वीर : उम्! पड़ी नहीं है. वह राखी हुई है वह.

तेज (ब्लशेस) : हाँ वही! कौन है वह औरत?

वीर : व्हाई अरे यू सो इंटरेस्टेड इन हेर?

तेज : क्या तुमपे मेरा इतना भी हक़ नहीं है? नहीं जान सकती क्या? की कौन है वो औरत जिसने मेरे भाई को इतना महंगा गिफ्ट दिया है?

वीर : हक़ तोह है! बिलकुल जान सकती हो आप!

तेज : तोह फिर? कहो अब!!

वीर (शिघ्स) : उनका नाम सुहाना है. वह हमारे देश की क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स ऑटोमोबाइल्स कंपनी के मालिक की बड़ी बेटी है. उनका पति एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी का सीईओ भी है.

तेज (हैरत में) : वो ऑटोमोबाइल कंपनी? मेने पढ़ा है उसके बारे में. पर उसके मालिक की बेटी का नाम तोह सोनिआ है.

वीर : सोनिआ जी तोह छोटी बेटी है. बड़ी तोह सुहाना है.

तेज (शॉकेड) : T-Tum उससे भी जानते हो?

वीर : हम्म? वेल यस!

[Jaante hai? We fucking played holi with them. Tell her!]

'शठ!'

तेज को एक के बाद एक झटके लग रहे थे. ये उसका भाई मुंबई में रह के कर क्या रहा था? इतनी ुचि पहचान? बेचारी इतने में hi हैरत में थी. न जाने आगे क्या हाल होने वाला था उसका.

तेज : तोह उसने तुम्हे ये गिफ्ट क्यों दिया?

वीर : कंपनसेशन के रूप में!

वीर को यहाँ झूठ कहना hi पड़ा. सच नहीं बता सकता था.

तेज : कंपनसेशन? कैसा कंपनसेशन?

वीर : में लॉस वेगास गया था उनके साथ तोह-

तेज (चिल्लाते हुए) : लास वीगासस???

वह उठ कड़ी हुई. उसके जोरर से चींखते hi वीर ने अपने दोनों कानो पर हाथ रख लिए.

वीर : इसमें उठने की कोई ज़रुरत नहीं थी यू क्नोव?

तेज (ब्लशेस) : S-Sorry!

वीर : एंड तहत वास् लाउड!

तेज (ब्लशेस) : कहा न सॉरी! लॉस वेगास में क्या कर रहे थे तुम? उस औरत के साथ?

वीर : ये प्रश्न ब्लामे जैसा क्यों साउंड कर रहा है?

तेज (ब्लशेस) : I'm नॉट ब्लेमिंग यू! I'm आस्किंग यू! जस्ट तेल्ल में!!!

वीर : वह मेरी फ्रेंड है. दोनों hi एक्चुअली. मिस सोनिआ भी और मिस सुहाना भी. मेने बिज़नेस शुरू किया था और उन्हें बिज़नेस के लिए hi लॉस वेगास जाना था. तोह मुझे ओप्पोर्तुनिटी देने के लिए वो मुझे साथ ले गयी थी.

तेज : कैसी ओप्पोर्तुनिटी?

वीर : ताकि में बिज़नेस के बारे में और जान सकू.

तेज : O-Ouch!! क्रीम बहुत ठंडी है. धीरे धीरे लगाओ!

वीर : आहिस्ता से hi लगा रहा हु. नाउ सीट स्ट्रैट!

तेज : तोह? कितने दिन का टूर था तुम्हारा?

वीर : लेस्स थान 2 वीक्स.

तेज : लेस्स थान 2 वीक्स??? इतने दिन क्या कर रहे थे तुम वह? और रुके कहा थे?

वीर : हम्म? टाइम तोह लगता hi है न. जब आप ेगीपत जा सकती हो हफ्तों के लिए तोह क्या में लॉस वेगास नहीं जा सकता कुछ दिनों के लिए?

तेज : M-Mere वर्क से कपड़े मत करो. हमारा तोह इंस्पेक्शन का काम था. समय लगता है. पर तुम इतने दिन उस औरत के साथ कहा रुके थे?

वीर : उनकी फ्रेंड के यहाँ!

तेज : लड़का या लड़की?

वीर : हँ?

तेज : उसकी फ्रेंड लड़की थी या फिर लड़का?

वीर : ऑब्वियस्ली लड़की!

तेज : ी कनेव ित्त्त!!!

वीर : व्हाट!!!?

तेज : तेल्ल में होनेस्त्ली वीर!!! क्या चक्कर चल रहा है तुम्हारा उस मैरिड लेडी के साथ? हाँ?

वीर : मेने कहा न! You're थिंकिंग तू मच. उनकी फ्रेंड भी मैरिड है और उनके हस्बैंड भी साथ में hi थे हमारे.

तेज ये सुन्न थोड़ा शांत हुई.

तेज : तोह? फिर वो कंपनसेशन कैसा?

वीर : लॉस वेगास में उन् पर अटैक हुआ था एंड ी सेव्ड हेर.

तेज : हहह!?

वीर : उनकी जान जाते जाते बची थी सो...! मेने उन्हें बचाया था तोह मुझे थैंक यू कहने के बदले में उन्होंने ये कार गिफ्ट की.

तेज : 7 करोड़ की कार?

वीर : उनके लिए 7 करोड़ 7 रुपये जैसे है. सेकण्ड्स में लाखो कमाती है वह.

तेज : Okay!

वीर : अब खुश?

तेज : हम्म?

वीर : सारे जवाब अपने भाई के मुँह से निकलवा लिए.

तेज (ब्लशेस) : Th-That's नॉट व्हाट ी वास् दोंग.

वीर (स्माइल्स) : ओह्ह! राइट! में hi गलत था. अन्य्वयस! अब इससे खुला hi रखना. ऑलराइट?

तेज (नॉड्स) : हम्म!

जब वह जाने के लिए हुआ तोह तेज ने उससे पुकार के फिर रोक लिया,

तेज : हे!

वीर : हम्म?

तेज : उनसे फ्रेंडशिप कैसे हुई तुम्हारी?

वीर : सीरियसली नाउ?!

तेज : मुझे jaan'na है!

वीर : आपको पता है आलरेडी.

तेज : हँ? मुझे पता है? No ी don't!

वीर : मेरा एक्सीडेंट हुआ था. में एडमिट था? घर से कोई देखने नहीं आया था!? निधि ma'am ने यही तो बताया था न आपको?

तेज : येह बूत-

वीर : जिस कार से एक्सीडेंट हुआ था वह मिस सोनिआ की hi थी.

तेज : ओह!

वीर : और फिर हम एक दूसरे के कांटेक्ट में आये.

तेज : ताजुब होता है!

वीर : किस बात का?

तेज : ी मैं इतनी बड़ी कंपनी की ओनर मेरे भाई से फ्रेंडशिप करि हुई है? उससे क्या मिला तुमसे दोस्ती कर के? वे अरे नॉट फिल्थी रिच आफ्टर आल.

वीर (स्माइल्स) : सोज़ I'm स्पेशल!

तेज (रोल्स आईज) : दुह!!!

वीर (स्माइल्स) : यू don't एग्री?

तेज : लिखे हेलल ी विल!

वीर : रेस्ट कर लीजिये! में काव्य और आरोही दी को लेके उस घर जाऊंगा. अगर आपको चलना हो तोह आप चल सकती हो.

तेज : मुझे तुम्हारे चाचा जी की कोई परवाह नहीं है. बूत ी दो केयर फॉर आरोही एंड काव्य.

वीर : वह आपके भी चाचा जी है!

तेज : में उन्हें नहीं मानती! ी ओनली कंसीडर आरोही एंड काव्य अस माय सिस्टर्स. बाकी सब? जो तो हेलल!

वीर : करना तोह में भी बहुत कुछ चाहता था. पर आरोही दी और काव्य के लिए मेने इस मामले में दखल देने से खुद को रोक लिया है.

तेज : दो अस यू विश थें! में भी चलूंगी!

वीर (ग्लान्सेस) : ओह!?

तेज : नॉट बिकॉज़ I'm इंटरेस्टेड. तुम्हारी 7 करोड़ की गाडी में घूम के तोह देखु कैसी है.

वीर (स्माइल्स) : नॉट बिकॉज़ यू अरे इंटरेस्टेड. राइट?

तेज (ब्लशेस) : Y-Yes! ऑफ़ कोर्स!

वीर : फाइन थें! I'll वेट!

कहते हुए वह कमरे से बाहर निकल गया. और उसके जाते hi तेज के चेहरे पर लाली चढ़ गयी. न जाने वह कैसे अब तक इतना लम्बा कन्वर्सेशन वीर से मेन्टेन कर ली.

उसका दिल ज़र्रों से धड़क रहा था. पर अंदर hi अंदर वह बेहद खुश थी. पारिजात की घटना के बाद से वह तड़प रही थी बात करने के लिए पर बार बार ावकवर्डनेस्स बीच में आ रही थी.

तोह एकमात्र हल था. उसकी खुद की straightforward-ness.

एक डर भी था की कही वीर उससे इर्रिटेटिंग बहिन समझ के और दूर न हो जाए. पर ऐसा हुआ नहीं. उल्टा वीर उसके सारे सवालों के जवाब देता गया. और तोह और कन्वर्सेशन बेहद स्मूथली गया.

वह ये नहीं जानती थी की आज तक किसी ने भी वीर से इस तरह डिमांडिंग टोन में बात नहीं करि थी. ऐसा कोई भी नहीं था उसकी ज़िन्दगी में जो ऐसे लगातार उस से सवाल पूछे हर्र चीज़ को लेकर. ये सब कुछ उसके लिए नया था. और इसलिए वह तेज के सवालों के उत्तर देता गया.

तेज को जैसे एक ओपनिंग मिल गयी थी अब. वह अपनी सांसें दुरुस्त कर अपनी बाज़ू पर लगी क्रीम को देखि. और khus-pusaate हुए बोली,

"ी एग्री! यू अरे स्पेशल...! डुबो!"

***

*Vrooooooooooom*

कार घर से निकली.

वीर को खबर लग गयी थी की मनोरथ, बृजेश और विवेक हॉस्पिटल से निकल घर जा रहे है. और इसलिए वह काव्य आरोही और तेज को लेके निकल पड़ा.

अब सब कुछ स्पष्ट होने वाला था. एक नया हंगामा खड़ा होने वाला था. दोनों बहनो का हाल बेहाल था. और उन्हें कम्फर्ट देने के लिए तेज उनके साथ थी.

7 करोड़ की गाडी में बैठना तोह बस बहाना था. वह सच में सब कुछ jaan'na चाहती थी और अपनी बहनो को सपोर्ट भी करनी चाहती थी.

तोह वही वीर सिर्फ एक सच jaan'ne निकला था. दूसरे सच से तोह वह पहले hi वाक़िफ़ हो चूका था.

उस तस्वीर का सच!

वीर को पता लग चूका था.

हरिकीर्तन और भानु प्रताप के शरीर लाश में बदलते hi उससे,

*डिंग*

[Past Illustration has been invoked.]

*डिंग*

[Do you want to see this person's past?]

'यस!'

उससे सब पता लग गया था. वह तस्वीर कैसे ली गयी थी. किस से ली गयी थी. और कब ली गयी थी.

पर दूसरा सच जो उससे अभी jaan'na था वह था~

करुणेश ने आखिर ऐसा किया क्यों? क्या वजह रही होगी जो वह अपने hi घर के सदस्य की पीठ में छुरा घोपने राज़ी हो गया!?

बस यही सत्य वीर को jaan'na था.

'पारी?'

[At you service Master!]

'शो में माय फुल स्टेटस.'

[Right away!]

*डिंग*





अपने सामने फुल स्टेटस देख वीर को कुछ नया नज़र आया.

उससे ओने टाइम उसे वाली लीजेंडरी स्किल मिल चुकी थी मिशन कम्पलीट करने के बाद. पर इसके बारे में अभी तक उसने पारी से बात नहीं की थी.

'सिर विज़न हँ!?'

[Kya aap chaahte hai mein explain karu?]

'No! नॉट नाउ!'

उसने स्वाइप कर अगली विंडो देखि तोह उसमे उससे नयी फवौराबिलिटीज़ नज़र आयी.





पूर्वी का नाम भी चढ़ गया था उसमे.

'हम्म! हँ? सर्वेन्ट्स?'

[Tap on it and see it!]

सर्वेन्ट्स के नए तब को क्लिक कर उसने जैसे hi खोला तोह उससे नज़र आया,

'ओह्ह्ह!!'





'सो निहारिका isn't ा स्लेव फॉर नाउ!'

[Woh abhi bhi ziddi hai. Ek do dose aur usse milenge toh I'm sure uska naam Favourability waale panel me dikhne lagega. With Slave as her status.]

'मुक्त, वर्षा, सुधा अरे नॉट क्वालिफाइड फॉर स्लेव? मतलब?'

[Harr koi slave nahi ho sakta Master! They are simply not qualified.]

'क्वालिफिकेशन के लिए क्या लगता है तोह?'

[Aapka unse physical + emotional touch. Their capabilities. Their beauty. And their quality.]

'क्वालिटी? यू मैं-!?'

[Yes! Wahi!]

'पर वह तीनो कैपेबिलिटीज में तोह कही पीछे नहीं है. राइट? फिजिकली एक्टिव भी हु अब में उनके साथ. वह सुन्दर भी है अपने आप में. तोह फिर!?'

[No! Aapka unse emotional touch utna nahi hai. Suman ki tarah woh aapki family se linked nahi hai. They are not over the top beauty.]

'तोह फिर सैली के आगे क्यों नहीं लिखा है? क्या इसका मतलब ये है की वह स्लेव में तब्दील हो सकती है?'

[Yes!]

'कैसे? सैली भी तोह मुक्त की तरह उसका रंग रूप पायी है. और उसमे तोह अभी उतनी कैपेबिलिटीज आयी भी नहीं है.'

[But future me toh aa sakti hai. You're forgetting one point.]

'व्हाट?'

[She's a virgin!]

'ओह्ह्ह!'

[Jo ki bada plus point hai. She's dark in colour but she's gorgeous as well. She's learning from all three of them. So!?]

'ी सी! समझ गया.'

[Hmm!]

'ये बैकग्राउंड कलर घटिया है पर!'

[Do you want me to change it?]

'यस प्लीज!'

[How about this?]





'ओह्ह! मच बेटर! थैंक यू!'

[I knew you'll like it. You're welcome!]

पारी के साथ बात कर वीर को काफी चीज़े क्लियर हो गयी थी. पर गाडी में माहौल हर्र गुज़रते पल बिगड़ता hi जा रहा था.

जैसे hi वह सभी घर पहुचे, काव्य गाडी से उतर अंदर को भागी,

"मां??? मां?????"

चिल्लाते हुए वह सीधा अपनी माँ सुमित्रा को ढूंढ़ने लगी.

सुमित्रा जो किचन में hi थी वह काव्य की आवाज़ सुन्न सब काम चोरर बाहर निकल के आयी.

सुमित्रा : आ गयी तुम? बीटा पता है न तुझे में कितनी चिंता में आ जाती हु जब भी तुम बिना बताये घर से जाती हो? घर से झूठ बोल के क्यों गयी थी तुम दोनों?

काव्य रट हुए अपनी माँ के गले से लग गयी,

काव्य : मां!!! W-Wo सब चोर्रो! *स्निफ्फ* मां बहुत बुरा होने वाला है. *हइच* पापा!!! पापा ने...! *स्निफ्फ*

बेटी की हालत देख सुमित्रा की बॉहे तुरंत hi चिंता में सिकुड़ गयी,

सुमित्रा : क्या हुआ? रो क्यों रही है?

पीछे से भागते हुए आ रही आरोही ने उसका जवाब दिया,

आरोही : M-Mom! बहुत बुरा हुआ है. बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली है.

सुमित्रा : तुम दोनों मुझे ऐसे दर्रो मत. K-Kya हुआ है?

"वह दोनों सही कह रही है!" इतने में हॉल के दरवाज़े से वीर की आवाज़ आयी.

उससे देखती hi सुमित्रा चकित रह गयी.

सुमित्रा : वीर?

वीर : थोड़ी देरर में आपको सब पता चल जायेगा!

सुमित्रा (फ्रोंस) : K-Kya हो रहा है? तुम सब पहेलियाँ क्यों बुझा रहे हो? मुझे बताते क्यों नहीं?

काव्य : मम्मा! *स्निफ्फ* पापा ने- *स्निफ्फ*

सुमित्रा : पापा ने क्या? बोल!!!

"करनेशहहह!!!!!!"

इतने में बाहर से बृजेश की ज़ोरदार आवाज़ आयी जिससे सुन्न काव्य, आरोही और सुमित्रा तीनो के बदन काँप उठे.

*थुड़*

दरवाज़े ऐसे गुस्से में खुले की थोक पीट की आवाज़ से तीनो घबरा गयी.

सुमित्रा : J-Jeth जी? K-Kya हुआ है?

बृजेश : करुणेश किधर है???

सुमित्रा की हालत खराब हो चली. आज तक उसके जेठ जी ने उस से कभी भी करुणेश का नाम लेके उसके बारे में नहीं पूछा था. क्या इसी मुसीबत की बात कर रही थी उसकी बेतिया?

सुमित्रा : W-Wo! वो सबसे ऊपर है! T-Terrace पे! Ph-Phone पर बात कर रहे... है...!

बेचारी की जुबां लड़खड़ा गयी. बृजेश ने एक झलक तेज पर डाली जो आरोही और काव्य को संभालने में मदद कर रही थी. फिर वीर पे, जो हाथ में हाथ बांधे उससे hi देख रहा था.

मुट्ठी कस्ते हुए वह टेरेस की ऑर्डर जाने के लिए हुआ. तोह इतने में मनोरथ और विवेक अंदर आये.

बृजेश : पापा जी! आप कुछ नहीं बोलेंगे अब. वैसे hi कल आपको दर्द उठ गया था. आज हम दोनों के बीच कोई नहीं आएगा.

मनोरथ : ये मामूली दर्द मुझे अभी मार नहीं सकता. ऊपर वाले ने अभी ज़िंदा रखा है मुझे. इस नमूने को उसकी सजा देने के लिए...! बुला के लाओ उससे! आज सिर्फ मेरी लाठी चलेगी.

लाठी की पुकार शायद करुणेश ने भी सुन्न ली थी. क्युकी वह नीचे hi आ रहा था.

हॉल में जैसे hi उसने उन् सब को इखट्टा देखा तोह ऐसा लगा जैसे मानो उससे सांप सूंघ गया हो. वह वही जम्म के रह गया.

'ये सब? यहाँ!?' सोचते हुए उसने बारी बारी सभी को देखा.

वीर और तेज का होना उसके पल्ले hi नहीं पड़ा. दिमाग के ऊपर से hi निकल गया. साथ hi मनोरथ और बृजेश की गुस्सैल भरी नज़रे भी उसकी कुछ समझ में नहीं आ रही थी.

करुणेश : अरे? पापा जी? आ गए आप?

मनोरथ : पापा जी के बच्चे-!!!

और मनोरथ अपनी छड़ी लेके उस पर टूट पड़े.

करुणेश : P-Papa जी?? Y-Ye क्या कर रहे हो आप?

मनोरथ : तुझ जैसे दुष्ट को सबक सीखा रहा हु हराम जाड़े!!!

*टूट* *टूट*

छड़ी पर छड़ी चलती गयी और करुणेश के परर तोह कही पीठ पर पड़ती गयी. सुमित्रा भयभीत होते हुए भाग के आयी,

सुमित्रा : P-Papa जी!! पापा जी रुकिए!! ये क्या कर रहे है आप?

उसके ासु निकल आये. पीछे कड़ी आरोही और काव्य भी रो रही थी. और तेज उन्हें पकडे हुए थी.

मनोरथ : आज रोक मत बहु. इस कमीने ने जिस थाली में खाया, उसी थाली में छेड़ किया है. इससे तोह में आज चोरडूंगा नहीं!!!

बृजेश जो अब तक चुप था, उसने करुणेश की कल्लोर पकड़ी और जोरर से,

*थुड़*

"ायरगगह!" उससे दिवार से भिड़ा के उसकी आँखों में आग बबूला होक देखा.

बृजेश : क्यों किया तूने ऐसा?? बोल!! क्योऊ??

करुणेश : Y-Ye आप दोनों-!? ुररग़ह!! K-Kya कह... रहे हो?

मनोरथ : सवाल का जवाब दे नीच!!! तुझे शर्म नहीं आयी ऐसी घिनौनी हरकत करते हुए? अरे तेरे कारण एक पूरा परिवार उजाड़ गया. और तू है की-

*टूट* *टूट*

करुणेश : ाअररघ्ठ!

मनोरथ : तुझे अपना बीटा कहते हुए भी शर्म आती है मुझे.

बृजेश : बोल!!! भावना की झूठी तस्वीर के पीछे तेरा hi हाथ था न?? बोल!!!!

उसके इतना कहते hi सुमित्रा की आँखें ऐसे फैली जैसे उसने भूत देख लिया हो. तोह वही करुणेश हक्का बक्का होक एकदम सुन्नन होक रह गया.

बृजेश : जवाब दे!! जवाब दे वर्ण में-

बृजेश को लगा की वह हावी होएगा पर अगले hi पल करुणेश ने उससे धक्का देके खुद से दूर कर दिया.

करुणेश : हाँ! हाहाहाहाहा! हाँ!!! हैं! हाँ! हाँ!!! हां में hi था!!! मेने hi किया था! हाहाहाःहाहा!!

अचानक hi वह का अट्मॉस्फेरे बदल गया. अब कमरे में बस करुणेश की हैवानो वाली हस्सी गूँज रही थी. सुमित्रा का तोह जैसे मानो सारा संसार hi उजाड़ गया. वह अपने घुटनो के बल ज़मीन पर गिर पड़ी.

वीर अभी भी चुप चाप अपने हाथ बांधे दूर से करुणेश को देख रहा था. उसकी नज़रे बाज की तरह उस पर फिक्स्ड थी.

करुणेश : और ये सब किया मेने...! इनके कारण!!! इनकी वजह से!!!

अपनी ऊँगली उठाते हुए उसने बृजेश की ऑर्डर तान दी!

बृजेश : ???

सब के मैं में नए सवाल उठ खड़े हुए.

करुणेश : हाँ! इनकी वजह से!

बृजेश : Y-Ye तुम-

करुणेश : सही कह रहा हु!!! और सही सुन्न रहे हो आप सब.

करुणेश जानता था वह अब इस से भाग नहीं पायेगा. उसका मुँह फिर जब खुला तोह उन् सब को अतीत में ले गया.

***



"क्या बात है? आज बड़े खुश लग रहे हो आप?" सुमित्रा कपडे तेहते हुए अपने पति को देख बोली,

करुणेश के चेहरे पर ख़ुशी साफ़ झलक रही थी.

करुणेश : खुश क्यों नहीं होऊंगा? भैया ने साफ़ साफ़ कह दिया है.

सुमित्रा : क्या?

करुणेश : वह जा रहे है हरिकीर्तन ताऊ जी के यहाँ. उनका मैं ये ज़मीन वगैरह में नहीं लगता. उन् ने कल hi पापा जी और मेरे सामने बोल दिया की, ' मुझे तोह भाई नए नए शहर घूमने है. गांव घूमने है. में बड़े पड़ की नौकरी करूँगा कोई. मुझे ये सब नहीं चाहिए.'


सुमित्रा : फिर?

करुणेश : फिर क्या? उन्होंने कहा की जो भी है करुणेश को देदो. ः! में तोह शुरू से hi ज़मीन और पेट्रोल पंप पर म्हणत कर रहा हु. तोह मेरी म्हणत का फल तोह मुझे मिलना hi चाहिए न? है न? क्या कहती हो तुम?


सुमित्रा : P-Par हक़ तोह उनका भी है न? अगर उन्होंने ऐसा कह दिया है तोह वह बात अलग है पर-

करुणेश ने पलट के जैसे hi सुमित्रा को गुस्से भरी नज़रो से देखा तोह बेचारी की रूह काँप गयी. उसका शरीर कांपने लगा.

करुणेश आये दिन उससे मारता था. और क्यों मारता था ये बात सुमित्रा भली भाति जानती थी.

क्युकी उसका पति अपने बड़े भाई से जलता था. करुणेश की शादी पहले hi सुमित्रा से कर दी गयी थी. सुमित्रा एक गरीब खानदान से थी.

दहेज़ में ना के बारबार hi कुछ करुणेश को मिला था. तोह वही बृजेश अपनी ज़िद्द के चलते मैं मर्ज़ी काम करता. उससे शादी नहीं करनी थी तोह मनोरथ बड़े बेटे के दुलार के आगे हार जाते. और उसकी शादी फिर ताल जाती. पर करुणेश के साथ ऐसा न हुआ.


और बदले में? उसके अंदर की जलन और बढ़ती गयी.

और फिर उसका गुस्सा?

सुमित्रा पर निकलता. फिर भी वह चुप रहती. मजबूर थी. क्या करती!?

करुणेश : पापा जी ने साफ़ साफ़ बोलै है की वह मुझे सब दे चुके है. अब भैया को जो करना है करे. अगर वह चाहेंगे तोह में उनके काम में पैसा भी लगा दूंगा. उसमे कोई बड़ी बात नहीं है. हम्फ!

सुमित्रा : लेकिन! ज़मीन और जायदाद पर तोह आप दोनों का बारबार-

*चाताआआकककककक*


एक ज़ोरदार तमाचा आके सुमित्रा के गाल पर पड़ा. वह लड़खड़ा के बिस्तर पर गिर गयी.

करुणेश : एक तोह तुमसे शादी करके परेशान हु. ऊपर से कभी भी ढंग की बात नहीं बोलनी है तुम्हे. चुप चाप खाना बनाओ, झाड़ू पोछा बर्तन करो और दुआ करो...! की मेरी क़िस्मत को किसी की नज़र न लगे. समझ गयी?

सुमित्रा अपना गाल पकडे बस रोटी रह गयी.

पर करुणेश जो महल बना रहा था वह असल में राइट का निकला. क्युकी कुछ hi पालो में वह धेरर हो गया था.

बृजेश जब हरिकीर्तन के घर से लौटा तोह उसके अंदर अलग hi गुरूर सवार था.


बृजेश : पापा जी! बाजीपुर के सबसे बड़े खानदान और राज घराने की लड़की से मेरे विवाह की बात चलाइये. लड़की भी राज़ी है और में भी. में मिल आया हु. हुआ कुछ ऐसा की-

जैसे जैसे वह घटना का वर्णन करता गया. करुणेश के चेहरे से उसका रंग उड़ता चला गया.

उसके अंदर की ईर्ष्या निरंतर बढ़ती चली गयी. और गुस्सा ज़ाहिर है...

*चाताआआकककककक*

"आनननहहह!"

सुमित्रा पर निकलता.


करुणेश : ये पापा जी को बड़े बेटे के अलावा कुछ दीखता नहीं है क्या??? वह देखो!!! भैया की शादी किस से हो रही है?? बिजईपुर का राजा महाराजा वाला घर है वह. और एक में हु की...!!! और एक तू है!!! जिसके बाप की न कोई पहचान है न कोई अत पता...!

सुमित्रा सिसक सिसक कर रोटी रही. पर यही सच्चाई थी.

करुणेश : साला दिमाग खराब कर के रख दिया है.

पर जैसे, उसके अरमानो पर पानी फिरना अभी और बाकी था.

बृजेश : अरे पापा जी! शादी हो गयी है तोह अब में कहा घर से दूर जाऊंगा? में वह ज़मीन के लिए राज़ी हु और पेट्रोल पंप भी संभाल लूंगा.


मनोरथ : मेने तोह तुमसे पहले hi कहा था. तुम hi नहीं माने! ये लो छवि! ज़मीन के पास के घर की है. कल पंप जा के भी परिचय दे देना अपना.

बृजेश : ः! जी!

करुणेश की स्थिति ऐसी थी की काटो तोह खून नहीं. एक आँख भी नहीं भा रहा था उसका अपना भाई बृजेश!

पर क्या कर सकता था वह? कुछ भी नहीं!

दिन प्रतिदिन उसके अंदर की गुस्से से भरी ज्वाला रोज़ज भड़कती और उसमे जलती कौन? बेचारी सुमित्रा!!!


पर वह कहते है न की डूबते को तिनके का सहारा!

हरिकीर्तन और भानु प्रताप के आते hi उससे जैसे एक उमंग नज़र आयी.

हरिकीर्तन : बेटे! जिस ठोस दिवार को तोडना है. उसकी दरार मिल गयी है.

भानु प्रताप : कैसे पिता जी?

हरिकीर्तन : मनोरथ का अपना लड़का उससे और बृजेश को गुस्से से देख रहा था. क्या तूने देखा नहीं!

भानु प्रताप : क्या सच?

हरिकीर्तन : हम्म! चल मेरे साथ!


भानु प्रताप : कहा?

हरिकीर्तन : कान भरने!

दोनों करुणेश से घुलने मिलने लगे.

हरिकीर्तन : भाई मेने सुना है आधा आधा बाँट दिया मनोरथ ने तुम्हे सब?

करुणेश : बड़ी ज़मीन नहीं बाटी है. वह पापा जी अपने पोटो को देंगे.

हरिकीर्तन : अरे भाई बड़ी जमीन की कौन बात कर रहा है. हम तोह ी वाली जमीन की बात कर रहे. और सुना है पेट्रोल पंप भी बात दिए?


ये सुन्न करुणेश का मुँह फूल गया.

हरिकीर्तन : टच! टच! टच! भाई ये तोह बहुत गलत हुआ. मतलब म्हणत करो तुम! और फल ले जाए कोई और!?

भानु प्रताप : सही कहा पिता जी! अब देखो मेरी भी बहिन है एक. पर पिता जी ने साड़ी ज़िम्मेदारी मुझे सौपी है. जमीन का एक इंच भी बहना को नहीं दिया. पूछो क्यों?

करुणेश : K-Kyu?

भानु प्रताप : अरे भाई क्युकी सारा दिन रात मेने म्हणत करि है जमीन पे. बहना का क्या है? वह तोह ब्याह करके निकल जाएगी. बाद में हमारे बीवी बच्चे होंगे तोह उनका क्या? इसलिए पिता जी ने पहले hi सब कुछ मेरे नाम कर दिया.


हरिकीर्तन : हाँ तोह? दिमाग से चलना पड़ता है बीटा! मनोरथ ने बड़ा गलत किया. टच टच!

आये दिन यही बातें चिढ़ती और करुणेश अंदर hi अंदर अपना गुस्सा इखट्ठा करता गया.

हरिकीर्तन : अरे तुम्हे काली करतूते नहीं पता क्या इस भावना की?

करुणेश : हँ?

हरिकीर्तन : अरे भाई जानी दुश्मन है इनका परिवार हमारे से. ये तोह तुम जानते hi हो. मनोरथ जानता नहीं है की कितनी बड़ी आफत मोल ली है अपने सर्र उसने इस लड़की को बहु बना कर. अब में तोह एक बार में सब सही कर दू पर साथ तोह चाहिए न किसी का? अकेले कैसे होगा भला?

करुणेश : K-Kaisa साथ?


हरिकीर्तन : भाई में तोह एक तीर से तीन शिकार करवा दू.

करुणेश : तीन?

हरिकीर्तन : हाँ! देखो! वह लड़की मुसीबत की जड़ है हम सब के लिए. हम तोह चाहते है की भाई ऐसी लड़की हमारे परिवार से दूर रहे. पहला ये हो गया. दूसरा ये की भाई मनोरथ का अपना परिवार बचेगा. है न? किसी अन्य सुशील संस्कारी लड़की से ब्याह करवा देंगे बृजेश का. और तीसरा ये की-

करुणेश : !!?

हरिकीर्तन : अरे भाई भावना के जाते hi हो सकता है बृजेश का इरादा बदल जाए और पेट्रोल पंप और जमीन फिरसे तुम्हारे हाथो में? हुए न एक तीर से तीन शिकार?


करुणेश : क्या करना होगा मुझे?

हरिकीर्तन के होंठो पर उस वक़्त एक कुटिल मुस्कान थी.

"आओ! धीरे धीरे आओ! शोर नहीं!!!"

किवाड़ खोल हरिकीर्तन एक अधनंगे आदमी को कमरे में घुसेड़ रहा था. भावना अपने वस्त्र पहने अकेले वह सो रही थी.

करुणेश : K-Kya ये सब ठीक है? ये आदमी कौन है?

हरिकीर्तन (विंक्स) : भाड़े का है! अरे, इसके बाद ये तुम्हे शहर में कभी दिखेगा hi नहीं.

करुणेश : अच्छा?


हरिकीर्तन : चल रे! लेत जा!

वह आदमी सोती हुई भावना के बगल से आके लेता, ध्यान रखते हुए की वह जागे न. भावना वैसे hi गहरी नींद में थी.

हरिकीर्तन : चल चल चल! फोटू खींच!!!

बगल में खड़ा भानु पास गया और अलग अलग तस्वीर निकाल सब के सब फिर वह से नौ दो ग्यारह हो गए.

करुणेश : A-Ab?

हरिकीर्तन : अब क्या? ी तस्वीरें जा के अपने भाई को दिखा दो! और क्या?


करुणेश : वह पूछेंगे की ये कहा से आयी?

हरिकीर्तन (स्माइल्स) : तोह कहना की किसी ने कूरियर की है. नाम पता नहीं भेजा. और इतना ज़रूर कह देना. की... 'भैया! कही ये तस्वीरें भाभी के 1 साल गए विदेश से तोह नहीं?'

करुणेश : पर उन्होंने और सवाल किये तोह?

हरिकीर्तन : बेवफाई के दर्द के आगे उससे और कुछ नज़र नहीं आएगा बिटवा! तुम जाओ तोह!

और उसके बाद...!

सब उजाड़ गया. रिश्ते नाते सब टूट गए. हरिकीर्तन और भानु प्रताप करुणेश को चुटिया बना के फुर्र हो गए.


सब बर्बाद हो गया था.



***

बोलते बोलते जैसे hi करुणेश रुका. एक सन्नाटा वह छा गया.

उसके बाद जो होना था वही हुआ. मनोरथ और बृजेश दोनों ने hi मार मार के गालिया बक बक के करुणेश को घर से बाहर निकाल दिया.

जो हाल उसके बेटे का हुआ था, वही उसका भी हुआ.

पर दुखो का पहाड़ तोह सबसे ज़्यादा सुमित्रा, काव्य और आरोही पर hi टूटना था.

तेज : सब ख़त्म हुआ! आखिर!

तेज वीर के ड्राइवर वाली बगल सीट पर विराजमान होक बोली,

पर वीर मौन था. वह वह से निकल चुके थे जब अचानक hi,

*रिंग*

उसके फ़ोन पर एक नोटिफिकेशन आया.

'हम्म?'

स्क्रीन ों कर जैसे hi उसने देखा तोह उसके रौंगटे खड़े हो गए.

एक मैसेज था.

जिसमे बस तीन शब्द hi लिखे थे.



"आईटी है बेगुन!"
.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

ी सौगत ा सीवियर कोल्ड. सो that's व्हाई थिस अपडेट गोत लेट. बूत हे! It's थे 4तह मेगा अपडेट. विलेज अर्च यही समाप्त होता है. अगले अपडेट से क्रिमसन अर्च स्टार्ट हो जायेगा. पर उसके पहले में एक ब्रेक ले रहा हु. क्रिमसन अर्च की चीज़ो को तैयार करने के लिए. तोह लाइक्स ठोकने का और रेवोस रखना का. तब तक के लिए,


धन्यवाद!!! ✨
 
रमैनिंग कमैंट्स के रिलीज समय मिलते hi. :फाइव:

मुझे कोल्ड हुआ है. सर्दी जकड ली है. वैसे में ये अपडेट सीधा ब्रेक के बाद देने वाला था. और विलेज अर्च को 128 अपडेट पे hi एन्ड करने वाला था पर जैसे तैसे मेने ये कम्पलीट किया. लगातार चौथा मेगा अपडेट है ये! अब नए उपदटेस से मुलाक़ात क्रिमसन अर्च में hi होगी. तोह बने रहिएगा. कीप सपोर्टिंग अस उसुअल!
 
अपडेट - 130 ~ थे पर्पस

अब तक...

*रिंग*

उसके फ़ोन पर एक नोटिफिकेशन आया.

'हम्म?'

स्क्रीन ों कर जैसे hi उसने मैसेज देखा उसके रौंगटे खड़े हो गए.

एक मैसेज था.

जिसमे बस तीन शब्द hi लिखे थे.

"आईटी है बेगुन!"


अब आगे...

"सुबह की दौड़ के लिए जा रहे हो?"

आवाज़ थी भावना की जो मुस्कुरा कर हॉल में बैठी अखबार पढ़ रही थी. और आवाज़ केंद्रित थी वीर की ऑर्डर जो अपना ट्रैकसूट पहने ऊपर अपने कमरे से नीचे आ रहा था.

वीर : इतनी जल्दी उठ गयी आप? सुबह के 6 बज रहे है.

भावना (स्माइल्स) : में जल्दी hi उठती हु बीटा. तोह? जॉगिंग?

वीर : जॉगिंग भी और कसरत भी.

भावना ध्यान से अपने बेटे को देखती रही. कैसे ट्रैकसूट उसके गठीले जिस्म से कस के चिपका हुआ था.

भावना : तुमने गयम किया है?

वीर : !!? नहीं तोह! क्यों?

भावना : तोह ऐसी फिटनेस?

वीर (स्माइल्स) : आपको पसंद नहीं?

भावना (स्माइल्स) : ये सवाल अपनी गर्लफ्रेंड से करना.

वीर (श्रृग्स) : ी don't हैवे ओने.

भावना : जैसे की में विशवास करुँगी.

वीर : ी रियली don't-

भावना : मुझसे क्या छिपाना? बता दो! कौन है वह?

वीर : नहीं! आप समझ नहीं रही है. ी रियली don't हैवे-

भावना (शिघ्स) : आज कल के बच्चे! पता नहीं इतना शर्माते क्यों है अपने पेरेंट्स से बाते शेयर करने में.

वीर : No वेट-

भावना : ठीक है! जब सही लगे तब बता देना.

वीर ने एक आह भरी और सर्र हिला के वह बाहर को जाने लगा. तोह,

भावना : वीर!

वीर (तुरंस बैक) : हम्म?

भावना (फ्रोंस) : एक ज़रूरी बात करनी है. तुम होक आओ. फिर साथ में बैठते है.

वीर : ऑलराइट.

और वह बाहर निकल गया.

***

एक बहुत बड़ा तूफ़ान आने वाला था. और उसका संकेत उससे उस मैसेज के ज़रिये मिल चूका था.

"आईटी है बेगुन!"

उस अनजान आदमी का मैसेज जिसने वीर की नींद हराम कर के राखी हुई थी. क्रिमसन फेस्टिवल शुरू हो चूका था ये बताने के लिए वह मैसेज था. दूसरे शब्दों में, वह आदमी ये भी बतलाना चाह रहा था की वीर की मौत का काउंटडाउन भी शुरू हो चूका है.

और वीर एक पल भी बर्बाद नहीं जाने दे सकता था. अपनी माँ और उनके अतीत का इतना बड़ा राज़ jaan'ne के बाद ये मसला वह सुलझा चूका था. अब समय था आगे आने वाली मुसीबत के लिए खुद को तैयार करने का. और यही वह कर रहा था.

सुबह का उसका रूटीन hi एक्सरसाइज से शुरू होता. न सिर्फ वह रनिंग करता बल्कि इंटरमीडिएट मार्टिकल आर्ट्स को परफेक्ट करना भी उसका मक़सद रहता.

क्युकी जितनी जल्दी ये परफेक्ट होगी उतनी hi जल्द वह एडवांस्ड मार्टिकल आर्ट्स खरीद पायेगा. और वह ये बात जानता था की इस अनजान बन्दे से लड़ने के लिए सिर्फ इंटरमीडिएट मार्टिकल आर्ट्स से कुछ नहीं होने वाला था.

दिन में कभी वह बलहार के आदमियों के संग फाइट लेता. जहा वह खुद अकेला रहता और सामने 10 से 15 लोग. और धीरे धीरे वह नंबर्स को बढ़ाने लगा.

अभी वह पार्क में बैठे एक ब्रेक ले hi रहा था जब उससे ध्यान आया की उसने इस स्क्रॉल का उसे आज तक नहीं किया.

'पारी!'

[Yes Master!]

'प्रॉफिट पथ हमने आज तक उसे नहीं किया. है न?'

[Yes!]

'तोह उसे करो.'

[It will take 100 Fame Points Master.]

'व्हाट? स्क्रॉल खरीदने के लिए hi कितने पॉइंट्स वास्ते करने पड़ते है. और तुम कह रही हो की अब उसी स्क्रॉल को उसे करने के लिए मुझे और फेम पॉइंट्स स्पेंड करने पड़ेंगे?'

[Yes! Par sirf iss scroll ke liye master. Aapko Mystic Touch ke liye toh kabhi bhi kuch spend nahi karna pada na?]

'येह! लेकिन वह अपने आप hi एक्टिवटे होता है.'

[Kya aap chaahte hai woh harr samay on rahe?]

'नहीं! फिर तोह वह समस्या बन जायेगा पारी.'

[Hmm! Isliye ye wala scroll thoda special hai. Aap points use kariye. Aur khud dekhiye.]

'ऑलराइट दो आईटी थें!'

*डिंग*

[100 Fame Points have been used in Profit Path.]

*डिंग*

और अगले hi पल वीर के मैं में सामने एक विंडो खुल गयी. वीर उससे पढ़ एक सोच में पद गया.





'थिस इस-'

[Yahi hai Profit Path Master. Usne Path de diya hai. Usse samajhna aur execute karna aapke upar hai.]

पथ को देखते hi वीर मुस्कुराया.

'अवेसमे! थिस इस अवेसमे! हलाकि इसमें से बहुत कुछ मेने पहले hi सोच लिया था. लेकिन पेर्फुमेस, फार्मर्स, लैंड और सप्लाई. थी अरे गुड आइडियाज. ी गोत आईटी. तू गुड! तोह ये काम करता है प्रॉफिट पथ.'

[Yes! Ek aur note master.]

'व्हाट इस आईटी?'

[Jab tak aap isse execute nahi karte. Aap dusra path nahi draw kar sakte.]

'ओह्ह!'

[So do execute it please. Kyuki humare paas bilkul time nahi hai Master. Unknown person kabhi bhi kahi se bhi attack kar sakta hai. Mein kehna nahi chaahti. But we are weak.]

'ी क्नोव!'

[Aur ek baat-]

'से!'

[Master! We have to move smartly. Sabse pehla sawaal. Uss insaan ka maqsad kya hai? What is his purpose?]

'पर्पस हँ!'

[Yes! Kya humne usse kisi tarah se provoke kiya hai?]

'होनेस्त्ली पारी, मुझे वाक़ई नहीं पता. ओनली गेस ी कैन मेक इस सोमेहो ी मई हैवे प्रोवोक्ड हिम बी एक्सपोसिंग हाउस ऑफ़ थे किलर्स. पर क्या वह हाउस ऑफ़ थे किलर्स से रिलेटेड था? क्या इसलिए बदले में वह मुझे मारना चाहता है क्युकी मेने हाउस ऑफ़ थे किलर्स के बड़े क्रिमिनल्स का सफाया कर दिया?'

[Agar aisa hai toh fir usne aapko uss time maara kyu nahi? Woh asaani se maar sakta tha. We were surrounded. Kya Suhana ko nuksaan bhi ussi ne pohuchaaya tha? We must know every detail.]

'यही समझ नहीं आ रहा पारी. इसलिए में आतिश या स्लोगन के मटर से भी ज़्यादा अन्सियस हु. वह दोनों मेरे पीछे क्यों पड़े थे में जानता था. पर यहाँ- ी हैवे no क्लू ात आल. ऊपर से उसके पास भी सिस्टम है.'

[And a stronger one at that.]

'राइट!'

[Isliye Master. We have to get strong as soon as possible.]

'येह! अन्य्वयस, let's जो! माँ को कुछ बात करनी थी.'

घर लौटते hi वीर भावना के कमरे में गया.

जो की असल में रागिनी का कमरा था जो उसने भावना को दे दिया था.

'शायद अब नया घर लेना hi पड़ेगा.'

*नॉक* *नॉक*

दरवाज़े khat-khataate hi अंदर से आवाज़ आयी,

"आ जाओ वीर!" वह ये सुन्न अंदर दाखिल हुआ.

वीर : आपको पता था में हु?

भावना (स्माइल्स) : और कौन हो सकता था?

वीर : घर में इतने लोग है. कोई भी हो सकता था.

भावना (स्माइल्स) : रागिनी तोह सो रही होगी. तुम्हारी सौतेली माँ 7:30 बजे के आस पास उठी थी कल. तोह आज भी शायद उतने hi समय उठेंगी!?

वीर : ...

भावना : आभा जल्दी उठती है. और वह नहाने धोने में लग जाती है. सोनाली सो रही होगी. रही बात सुमन की तोह वह ज़रूर उठ के नाहा धो के घर के कामो में लग गयी होगी.

वीर : ...

भावना : तेज की सुबह की आदत में जानती हु. और भूमिका कल होटल के लिए 8 बजे उठी थी. शायद वही उसका टाइम है? बचे तुम! जिस से मेने कहा था कुछ देरर पहले की मुझसे बात करने आना. तोह? क्या लगता है? और कौन हो सकता है?

वह मुस्कुरायी.

वीर : स्पॉट ों.

भावना (स्माइल्स) : इधर आओ. मेरे पास बैठो.

उसने हथेली से अपने बगल की जगह को thap-thapa कर उससे बुलाया. वीर चुप चाप आके अपनी माँ के बगल से विराजमान हो गया.

भावना : तुमसे एक ज़रूरी बात करनी है. शायद एक नहीं. एक से ज़्यादा होंगी.

वीर : कहिये!

भावना (स्माइल्स) : कैसी चल रही है तुम्हारी कॉलेज लाइफ?

वीर : हँ? ये पूछना था?

भावना : Mm-Hmm!

वीर : मुझे नहीं पता.

भावना : क्या मतलब?

वीर : मतलब ये की में सिर्फ एक्साम्स देने जाता हु.

भावना : और बाकी का तुम्हारी निधि ma'am संभाल लेती है.

वीर : येह! ेहठ!?? वेट- ी मैं- ी मैं आपको कैसे? ओह्ह! तेजू दी! येह! वो- वो मेरी अटेंडेंस देख लेती है. मेरे सेशनल्स का ध्यान रख लेती है.

भावना : मुझे मिलना होगा उनसे जल्द hi.

वीर : क्यों?

भावना (स्माइल्स) : उन्हें थैंक यू कहने और किस लिए.

वीर : ओह्ह!

भावना : और बाकी टाइम क्या करते हो?

वीर : भाभी ने बताया नहीं आपको? फ़ूड ट्रक शुरू किया है मेने. सोनाली और वर्कर्स संभालते है.

भावना : बताया था. पर तुम्हारे मुँह से sunn'na था. जब वह सब संभालती है तोह तुम क्या करते हो?

वीर : ी लुक फॉर इतर बिज़नेस ओप्पोर्तुनिटीज़.

नज़रे फेरर वीर ने जवाब दिया.

भावना : सच?

वीर : H-Haan!

भावना : कितना पैसा कमा रहे हो बीटा?

वीर : क्यों?

भावना : क्या नहीं पूछ सकती?

वीर : इतना समझिये की अभी लाखो में कमा रहा हु.

भावना : इतना पैसा सिर्फ फ़ूड ट्रक से?

वीर : नहीं! शेयर्स खरीदे है कुछ. कम्पनीज में इन्वेस्ट करना शुरू किया है.

भावना : इन् सब में मदद तोह की होगी किसी ने.

वीर : हम्म!

भावना : कौन है वह?

वीर : आपको क्यों jaan'na है?

भावना : मेरे बेटे के shubh-chintak है. Jaan'na तोह होगा hi न?

वीर : है कुछ लोग. बड़ी फॅमिली से है. काफी बड़ी. लउकीली हम फेमिलिअर है एक दूसरे से. और एक दूसरे की मदद करते रहते है.

भावना : तुम्हारा उद्देश्य क्या है?

वीर : हँ?

भावना : तुम्हारे जीवन का उद्देश्य!? पर्पस!? एआईएम!?

वीर की हालत अभी ऐसी थी जैसे किसी परीक्षा में बैठे विद्यार्थी के पेपर में सिलेबस के बाहर का प्रश्न आ गया हो.

थोड़ी hi देरर पहले वह पारी से अनजान आदमी के पर्पस को लेकर बात कर रहा था.

पर उसका खुद का पर्पस क्या था? उसकी ज़िन्दगी का लक्ष्य? वीर के मैं में एक उत्तर आया. पर इसके पहले की वह जवाब दे पाटा, भावना ने अपनी बात रख उसकी बोलती hi बंद कर दी.

भावना : पैसा कमाना? और अधिक पैसा कमाना? फिर और अधिक? अच्छी पत्नी पाना? सुन्दर बाल बच्चे होना? नया घर, नयी गाडी, समाज में इज़्ज़त? यही सब?

वीर : ...

भावना : बोलो? यही सब न?

वीर : हाँ! बिलकुल! तोह क्या ये गलत है? हर्र आदमी तोह इन्हे hi पाना चाहता है न? फिर जीवन के उद्देश्य का मतलब hi क्या? पैसा होगा तोह आप आज के संसार में जी पाओगे. अच्छी पत्नी होगी तोह घर बार को अच्छे से संभाल पायेगी. बाल बच्चे होंगे तोह आगे की पीढ़ी को बढ़ाएंगे. इसके अलावा और क्या उद्देश्य है जीवन का?

भावना अपने बेटे की थोड़ी तेज़्ज़ आवाज़ सुन्न हौले से मुस्कुरायी और कुछ शान तक बस उससे देखती रही.

वीर : बोलिये!?

उसने नज़रे नीचे कर आहिस्ता से फिर बोलना शुरू किया,

भावना : मुझे एक बात बताओ वीर.

वीर : ??

भावना : संसार में आबादी कितनी होगी अभी?

वीर : अराउंड 8 बिलियन!?

भावना : मुझे बताओ की लगभग हर्र इंसान इन्ही 5-6 चीज़ो के पीछे क्यों भाग रहा है? पढ़ाई! पैसा! शादी! बच्चे! घूमना फिरना! खाना पीना!?

वीर : आप ऐसे कह रही हो जैसे ये सब गलत है.

भावना : मेने तोह कहा hi नहीं वीर की ये गलत है.

वीर : तोह फिर ये सवाल क्यों?

भावना : तुम्हे कुछ अजीब नहीं लगता?

वीर : अजीब क्या?

भावना : की दुनिया का लगभग हर्र इंसान बस इन् 4-5 चुनिंदा चीज़ो के पीछे hi भाग रहा है? कुछ समझ आया?

वीर : ...

भावना : क्युकी समाज ने इंसानो को आज वैसा बनाया हुआ है वीर.

वीर : ??

भावना : अच्छी शिक्षा नहीं होगी तोह नौकरी नहीं मिलेगी. नौकरी नहीं होगी तोह शादी नहीं. शादी नहीं तोह फिर बच्चे नहीं. फिर क्या घूमना फिररणा और क्या खाना पीना. ज़िन्दगी खोकली हो जाएगी. यही न?

वीर : ी-

भावना : कभी इस नज़रिये से नहीं देखा की यही समाज हमे मजबूर करता जा रहा है. एक सा रास्ता अपनाने के लिए हमे धकेल रहा है.

वीर : तोह आप क्या चाहती है?

भावना : में चाहती हु की तुम अपना लक्ष्य ढूंढो मेरे बच्चे. तुम दुनिया में आये हो. क्या सिर्फ यही करने? जिन बातो को मेने गिनाया!?

माँ की बात का बोध होते hi वीर के रौंगटे खड़े हो गए. एक एक शब्द सच था. उसने अब तक इस नज़रिये से क्यों नहीं देखा था? क्या वाक़ई सिर्फ यही ज़िन्दगी है?

वीर : ी सी! समझ गया. आप चाहती है की में अपने जीवन का उद्देश्य धुन्धु? तोह में उससे ढूंढूंगा. और वह पैसा कमाने से अलग होगा.

भावना : पैसा कमाना बुरी बात नहीं है वीर. कमाओ! खूब कमाओ! पर एक लक्ष्य होना ज़रूरी है.

वीर : आपका लक्ष्य क्या है?

भावना : मेरा लक्ष्य? वह मिटत गया. अब जो बचे कूचे उद्देश्य है वह है एक माँ की ज़िम्मेदारी निभाना. और इतिहास के पन्नो की सच्चाई jaan'na.

वीर : ेष्कावतिओं एंड रिसर्च...!?

भावना : हम्म! अब एक आखिरी सवाल. तुम कौन हो?

वीर : व्हाट?

भावना : कौन हो तुम?

वीर : में-

भावना : अगर ये कहने जा रहे हो की मेरे और बृजेश की संतान हो, नाम वीर है, इस इस परिवार से हो तोह अभी ठहर जाओ वीर. में अपने बेटे से बेटर एक्सपेक्ट करती हु. तोह अब बताओ. कौन हो तुम?

वीर शांत रह गया.

भावना (स्माइल्स) : तुम नहीं बता सकते.

वह सही थी. वीर के मुँह से कुछ न निकला. सिस्टम के बारे में वह बता नहीं सकता था. और ये भी नहीं कह सकता था की वह भावना का बीटा है. तोह कौन था वीर? उसके मुँह पर जैसे ताला लग गया. इतना असहाय उसने अपने आप को कभी महसूस नहीं किया था. वह अपनी hi पहचान नहीं बता पा रहा था?

भावना : तुम्हे पता है तुम क्यों इसका जवाब नहीं दे पा रहे?

वीर : N-No ी don't-

भावना : क्युकी तुम्हे तुम्हारा उद्देश्य hi नहीं पता बीटा. जिस दिन तुम ये पता लगा लोगे की तुम्हारा उद्देश्य क्या है. तुम ये भी पता लोगे की तुम कौन हो.

वीर : ...

भावना : सुबह सुबह इन् बातो से तुम्हारे दिल को चोट पहुचाने के लिए माफ़ करना मुझे. पर मुझे यही समय मिला अकेले में तुमसे बात करने के लिए.

वीर : N-Nahi! सॉरी कहने की आपको ज़रुरत नहीं. आप सही हो. ी गेस ी नेवर गोत टाइम तो थिंक अबाउट थिस.

भावना (स्माइल्स) : यू हैवे टाइम नाउ!

वीर (नॉड्स) : ममम!

भावना : एंड में तू!

वीर को अपने गाल पे एक नरम हथेली महसूस हुई.

'हहहह!!?'

वीर : Th-Thank यू!

और उसकी आँखें नम्म हो गयी.

भावना (स्माइल्स) : जब भी लगे की कोई उलझन है. तोह बिन सोचे समझे आ जाना. में यही मिलूंगी.

वीर (नॉड्स) : ममम!

वह उठा और बाहर जाने को हुआ तोह एक बार फिर भावना ने उससे पुकारते हुए रोका,

भावना : एक अंतिम बात याद रखना वीर!

वीर : !!

भावना : तुम्हे पैसा बनाना है मेरे बच्चे. पैसा तुम्हे बनाये, ऐसा न बन्न जाना.

वीर : में याद रखूँगा. माँ!

बोल वह निकल गया.

***

रात हुई और कल की तरह जो नहीं होना चाहिए था वही हुआ. तेज और भूमिका की मौन लड़ाई.

होटल से आने के बाद, भूमिका तेज से जब पहली बार मिली तोह ऐसा लगा जैसे ये लड़की उससे अभी जान से मार देगी.

वह उससे घूरती रही. पर बातो के मामले में दोनों के मुँह से एक छू तक नहीं निकला. और ये घर के बाकी सदस्यों को दुविधा में डाले हुए था.

जैसे तैसे डिनर के बाद सब अपने अपने कमरे में पहुचे.

वीर अपने कमरे को व्यवस्थित करने में लगा था जब तेज अचानक से उसके कमरे में आ गयी.

तेज : वीर?

वीर : हम्म?

तेज (स्माइल्स) : हम साथ में hi सो रहे है न?

वीर : हँ?

तेज : T-Tum मेरे साथ नहीं सोना चाहते?

वीर : उम्! नहीं! बात वो नहीं है-

तेज : तोह?

वीर : ऑलराइट! आइये!

तेज मुस्कुरा के वापस पलटी और भागती हुई अपना कुछ ज़रूरी सामान लेने चली गयी. उसके पूरे गाल लाल हो रखे थे. इतनी हिम्मत करके उसने ये पूछा था. डायरेक्टली बात करना आसान दीखता था. पर था नहीं. जो sharm-o-hayaa वो महसूस कर रही थी ये सिर्फ वही जानती थी.

इधर वीर उसके जाने से कन्फ्यूज्ड रह गया. तेजल दी आ रही थी या नहीं? भाग क्यों गयी? क्या उन्हें अब नहीं सोना?

वही श्वेता अपने कमरे में अपनी बेटी भूमिका को झटके पे झटके देने में लगी हुई थी.

श्वेता : ये लो!!! जाओ अब जल्दी से!

उसने भूमिका के हाथो में उसका तकिया पकड़ाते हुए कहा.

भूमिका : W-What? माँ?

वो बेचारी असमंजस में रह गयी. ये उसकी माँ को अचानक से आज हो क्या गया था?

श्वेता : ऐसे मुँह फाड़ के मत देखो मुझे. जाओ जल्दी! क्या तुम्हे अपने भाई के साथ नहीं सोना? शर्म आती है?

भूमिका : माँ! A-Aapko ये क्या हो गया है? अचानक से आप-

श्वेता : चुप कर! वो तेजल अपने भाई के साथ चिपकने में लगी हुई है. अगर तुमने अब पहल नहीं करि न तोह वह वीर को अपनी मुट्ठी में कर लेगी. चलो अब जल्दी! तुम भी उसकी बहिन हो. उनके बीच जाओ! वैसे hi तुम्हारी बात वीर से ना के बराबर hi होती है. अपने गीले शिकवे दूर करो. यही सही मौका है. जाओ!

भूमिका : M-Mom पर-

पर श्वेता कहा maan'ne वाली थी? उसने भूमिका को पीठ पर धक्का देके अपने कमरे से बाहर निकाल दिया.

श्वेता (स्माइल्स) : गुड लक! खूब चिपक के सोना!

भूमिका : E-Ehhhh? Wh-What? माँ?? माँ वेट-

*थुड़*

और दरवाज़ा पीछे से बंद हो गया.

भूमिका बेचैन होती हुई वीर के कमरे के पास पहुची. और दरवाज़े की देहलीज़ पर आ कर वो कड़ी वीर को देखि जो अपने बिस्तर पर साफ़ बेडशीट बिछाने में लगा हुआ था.

भूमिका : V-Veer!

वीर : हँ?

पलट के वीर ने देखा तोह पाया की उसकी वो बहिन उसके सामने थी जिसने कभी उससे pehchaan'ne से hi मन कर दिया था.

वीर : ओह्ह!? आप यहाँ? घर में hi कही रास्ता तो नहीं भटक गयी?

भूमिका : में- वह...!

शर्मिंदगी से भूमिका ने अपना सर्र झुका लिया. वीर वापस से बेडशीट व्यवस्थित करने में लग गया.

वीर : उनलेस यू हैवे सम मटर, यू wouldn't बे हेरे, राइट?

उसकी बात सुन्न वह अपने तकिये को कस के अपने सीने में दबा ली.

यही वो पल होते थे जिनसे भूमिका हमेशा दूर रहना प्रेफर करती थी. क्युकी वो ग्लानि के भार को संभालने में बेहद hi कच्ची थी. एक नाज़ुक ीत की तरह थी वह जिसपर ग्लानि की पूरी इमारत दबाव डाले हुए थी.

न जाने... कब टूट के बिखर जाए.

शायद वीर से ज़्यादा बात न होना hi एक कारण था जो अब तक उससे टूटने से बचाये हुए था.

उसकी आँखें अपने आप धुंधली हो चली.

भूमिका : M-Mein कुछ कहना चाहती हु.

वीर : हम्म?

भूमिका : M-Mera इरादा कभी भी तुम्हारे दिल को ठेस पहुचना नहीं था वीर. मेरी बातो का... ी... ी क्नोव तुम मेरी बात का विशवास नहीं करोगे. जो कुछ भी मेने किया. वो जान बूझ के नहीं किया था. और अगर मजबूरी में भी था. तोह- तोह उसकी ज़िम्मेदार हमेशा में खुद hi रहूंगी.

वीर : ...

भूमिका : तुमने जो कुछ भी मेरे और माँ के लिए किया उसके लिए 'थैंक यू' शब्द भी अब मज़ाक जैसा लगता है. कोई भी इंसान इतना होने के बाद ऐसा नहीं कर सकता जो तुमने किया है. एंड ी एकनॉलेज आईटी.

वीर : ...

भूमिका : बूत अपार्ट फ्रॉम रिग्रेट, ी don't क्नोव व्हाट तो दो. Sh-Shayad... यही मेरी डेस्टिनी है? जीवन भर रपेन्ट करना. एहसास करते रहना की कितनी ज़्यादती की है हम माँ बेटी ने तुम्हारे ऊपर. और-

वीर : के इन!

भूमिका : हँ!???

अचानक वीर के शब्द सुन्न, भूमिका भौचक्की रह गयी. उसका बदन हिल गया.

वीर अपनी पीठ उसकी ऑर्डर किये था तोह उसके चेहरे पर इस वक़्त क्या हाव भाव थे ये वह देख न सकीय.

वीर (तुरंस) : ी साइड के इन!

भूमिका ने एक गहरी लम्बी सांस ली. दिल उसका ज़र्रों से धड़क रहा था. क्या उसका भाई गुस्से में था? क्या वह कुछ उससे सुनाने वाला था? ऐसे तमाम विचार उसके मैं में एक शान में आके गुज़र गए.

घबराहट को साथ लिए वह आगे बढ़ी. ये सोच के की वीर जो कुछ भी करेगा वह उसका विरोध नहीं करेगी. क्युकी गलती हमेशा से उसकी hi रही है.

पर वीर ने ऐसा कुछ भी न किया,

वीर : नाउ से! क्यों आयी हो आप यहाँ?

सवाल सुन्न भूमिका ने एक राहत की सांस ली. वह जो सोच रही थी वैसा कुछ भी नहीं था.

भूमिका : में-

वीर (नॉड्स) : Mmm-hmm!

भूमिका : C-Can-

वीर : येह!?

भूमिका (ब्लशेस) : C-Can ी स्लीप विथ यू?

उसने तपाक से बोल दिया. पर फ़ौरन hi वापस से निराशा उसके चेहरे पर झलकी,

भूमिका : N-No! फॉरगेट व्हाट ी जस्ट साइड. में... में चलती हु.

मुड़के एक क़दम hi आगे बढ़ाया था की,

वीर : वेट!

भूमिका (तुरंस) : ??

वीर : आज अचानक से क्यों आपको मेरे साथ सोना है?

काश कोई बिल होता, जिसमे भूमिका अपना सर्र दे पाती. जो हया वह अभी महसूस कर रही थी वह असीम थी.

भूमिका : W-Woh... वह रागिनी भाभी ने अपना रूम तुम्हारी माँ को दिया है. और सुमन आंटी मेरी माँ के कमरे में सोयेंगी उनके साथ. तोह इसलिए शायद उन्होंने मुझे यहाँ-

ये भूमिका का लॉजिक था. पर असल बात तोह कुछ और hi थी.

वीर का ख़याल तुरंत hi इस घटना को अंजाम देने वाली महिला पर गया.

'ी कनेव आईटी. आईटी वास् हेर इनडीड!'

श्वेता!!!

भूमिका : I'm- I'm सॉरी! में चलती हु.

वीर : आप सो सकती हो.

भूमिका : हहहह!!!???

वीर : मेने कहा आप सो सकती हो.

उसने नज़रे फरते हुए जवाब दिया. पहले वो मन करने वाला था पर उसकी तेजू दी बिना कोई कन्फर्मेशन दिए भाग गयी थी तोह मन करने का कोई रीज़न hi नहीं था वीर के पास.

वीर की क़िस्मत अक्सर उसके मज़्ज़े लिया करती थी. आज भी वही हुआ. यहाँ उसने भूमिका को मंज़ूरी दी और वह से तेज अपना ज़रूरी सामान हाथो में लिए दौड़ती हुई उसके कमरे में आ धमकी.

तेज : आ गयी में... हम्म!!!??

अब मंज़र कुछ ऐसा था की तीनो एक दूसरे को हैरानी में देख रहे थे.

*साइलेंस*

'सहित!!!'

जब से भूमिका और तेज आपस में मिली थी. तब से hi दोनों के बीच एक अदृश्य टकराव जन्म ले चूका था. तेज ने भूमिका के साथ वैसा बर्ताव तोह नहीं किया जैसा उसने श्वेता के संग किया था पर दोनों में दोस्ती भी नहीं थी. नज़रो से नज़रे hi टकराती थी बस और एक ख़ामोशी फेल जाती थी.

तेज (फ्रोंस) : व्हाई इस शी हेरे?

कमाल की बात ये थी की भूमिका तेज से उम्र में बड़ी थी. उसके बाद भी तेज कही से भी कमज़ोर प्रतीत नहीं हो रही थी. उल्टा वह भूमिका पर हावी hi नज़र आती थी.

वीर : मुझे लगा आप चली गयी. और इन्हे भी मेरे साथ सोना था तोह-

तेज (सुप्रिसेंड) : और तुमने हाँ कह दिया?

वीर : व्हाई won't ी?

तेज : तहत-

वह मौन रह गयी. हाँ कह दिया तोह उसमे क्या? तेज ये बात भूल रही थी की भूमिका वीर के संग कई महीनो से रह रही थी. वही उससे तोह अभी कुछ hi दिन हुए थे अपने भाई के आस पास रहते हुए.

तेज (स्माइल्स) : ठीक है! तोह में बीच में सोऊंगी.

वह मुस्कुरायी. जो असल में एक मुस्कराहट नहीं थी. तरकीब लगायी थी उसने. ज़ाहिर है ऐसा करने से वीर फिर भूमिका के बगल से नहीं सो पायेगा.

भूमिका : N-No! V-Veer को बीच में सोना चाहिए.

वीर : ऑफ़ कोर्स ी विल. वर्ण न जाने क्या होयेगा आप दोनों के बीच.

तेज : यू-!!!!

Be-mann से तेज वीर के दायी ऑर्डर लेती तोह वही भूमिका उसके बायीं ऑर्डर. एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ था. कमरा ावकवर्डनेस्स से भर गया.

दोनों बहनो के बगल से लेते वीर उनके बदन की महक को सूंघ पा रहा था. उसने अपनी आँखें बंद कर ली.

तेज अपनी चोट का बहाना कर वीर की तरफ मुड़ी और उसके सीने पर अपना हाथ रख दी. कितनी मज़बूत छाती थी. उससे महसूस हो रहा था. वह पल याद आया जब उसने पहली बार वीर को बिना शर्ट के देखा था. फिर वह पल जब श्याम के घर में वह वाशरूम से निकला था.

'क्या अभी भी वही खुस्भु-!?'

मैं में एक विचार आया उसके. आगे बढ़ उसने वीर की गर्दन के समीप अपना चेहरा किया और,

*स्निफ्फ*

'अह्ह्ह!!!'

ये वही खुशबु थी. तेज को न जाने अंदर से क्या हुआ पर उसकी पकड़ वीर की छथि पर मज़बूत हो गयी.

उसने अपनी एक टांग उठा के वीर की टैंगो पर चढ़ाई. और चिपके चिपके वो उस खुशबू को पुनः सूंघने में लग गयी.

'व्हाट- व्हाट इस थिस फ्रेग्रेन्स? *स्निफ्फ* It's सो गुड!!!'

इधर भूमिका भी बड़ी हिम्मत करके वीर के सीने पर हाथ राखी. पर तेज जो लगातार हाथ फिराए जा रही थी, उसका हाथ भूमिका के हाथ से टकरा गया.

दोनों बहनो को एक झटका लगा और दोनों hi एक दूसरे को देखि.

गुस्से में आके तेज ने भूमिका का हाथ पकड़ सीधा वीर के सीने से अलग कर दिया. और खुद चिपक गयी.

भूमिका : !!??

एक खींचा तानी शुरू हुई. भूमिका लगातार कोशिश कर कर के अपने हाथ परर वीर पर जमाती और तेज बार बार भूमिका के हाथ और परर को पकड़ के उन्हें हटा देती. ये बिन आवाज़ की लड़ाई कई मिंटो तक चलती गयी.

आम तौर पर वीर को आँख खोलने पर ऊपर की सीलिंग नज़र आणि चाहिए थी. परन्तु उससे अभी दो हाथ आपस में लड़ते हुए दिखाई दे रहे थे जो किसी बिल्लियों की हाथापाई से काम नहीं था.

और अगले hi शान,

*थुक्क्सक्ककककककककक*

*थूऊक्ककककककक*

"अह्ह्ह्हहनननन!"

"न्नन्न~"

उसने उठ के अपने तकिये से दोनों के सर्र पर तपली दे मारी.

तेज : K-Kyu?

वीर : अब अगर आप दोनों चुप चाप सोई नहीं न. तोह दोनों रूम के बाहर होंगी.

तेज अपने होंठ दातो टेल दबाये चादर के अंदर दुबक के घुस गयी. तोह वही भूमिका ने अपने परर सिकोड़ आँखें बंद कर ली.

एक राहत की सास लेते हुए वीर फिर सोया.

लेकिन रात के 2 बजे ये उसकी गर्दन को कौन चबा रहा था?

'हहहह!?'

नींद खुली तोह नज़ारा देख वो हक्का बक्का रह गया. उसके ऊपर भूमिका लेती हुई थी. उससे कस के जकड़े वो उसकी गर्दन होंठो से चबाने में लगी हुई थी.

उसकी लार बहके वीर के सीने तक बहती चली गयी. जिस वजह से वीर की नींद खुल गयी.

'व्हाट थे फ़क!!!?'

भूमिका पूरी तरह से नींद में थी. उसके सुडोल उरोज वीर की सीने से कस के दबे हुए थे.

'वेट! ये तोह... ये तोह नींद में है कम्प्लीटली.'

वीर : हे!!! हे!! भूमिका दी!?

पर उसके झुंझलाने पर भी भूमिका न उठी. न जाने क्या bad-badaaye जा रही थी.

उससे साइड में वापस लिटा के जब वीर दुबारा अपनी पोजीशन पे आया तोह भूमिका फिर चिपक गयी.

'एक मिनट! Don't तेल्ल में... इनको... इनको बिमारी है इसकी. नींद में इधर उधर होने की आदत!? तोह श्वेता ने इसलिए...!? सहित!!!! व्हाट इस शी ट्राइंग तो अचीव?'

पर अचानक से,

"मां मत करो न... वीर को..."

वीर चुप्पी साढ़े भूमिका में चेहरे को देखता रहा. क्या वह सपने में भी ग्लानि की नीचे दबी हुई थी?

पास से देखने पर उससे एक ये भी एहसास हुआ की भूमिका सच में कितनी सुन्दर थी.

दोनों तेज और भूमिका को अपने से लगा के वह सो गया.

अगर वो अनजान शख्स उससे मारने आ रहा था तोह आये. अपने परिवार को वो कुछ नहीं होने देगा. वो तैयार रहेगा.

'के ात में थें!'

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आज के लिए इतना hi गाइस.

क्रिमसन अर्च शुरू हो गया है. 2-3 उपदटेस ऐसे स्लो जायेंगे और उसके बाद अर्च का मैं प्लाट पेस पकड़ेगा. मेरी तबियत अभी खराब hi है. तोह सचेडूले ऊपर नीचे हो सकता है उसका ध्यान रखियेगा. बाकी लाइक्स थोक के जाने का और अपने रेवोस रखने का. पता है न!?


धन्यवाद! ✨
 
अर्च की शुरुआत लाइट वे में होगी. धीरे धीरे सीक्वेंसेस इंटेंस होते जायेंगे. इस बात का ध्यान रखियेगा. ✨
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 131 ~ Ragini's राग


अब तक...

वीर चुप्पी साढ़े भूमिका में चेहरे को देखता रहा. क्या वह सपने में भी ग्लानि की नीचे दबी हुई थी?

पास से देखने पर उससे एक ये भी एहसास हुआ की भूमिका सच में कितनी सुन्दर थी.

दोनों तेज और भूमिका को अपने से लगा के वह सो गया.

अगर वो अनजान शख्स उससे मारने आ रहा था तोह आये. अपने परिवार को वो कुछ नहीं होने देगा. वो तैयार रहेगा.

'के ात में थें!'


अब आगे...

"यह है तुम लोगो का घर. आओ!" वीर ने एक बड़े घर का दरवाज़ा खोलते हुए कुछ औरतो को अंदर बुलाया.

ये सब वही थी. पारिजात घर की औरते. मुक्त, सुधा, वर्षा और सैली. चारो मुंबई नगरी पधार चुकी थी और अपने नए रुकने के स्थान को देख वह सभी ताजुब में रह गयी. घर काफी बड़ा था और पहले से ग्रहस्ती की कई चीज़े मौजूद थी.

घर किसी और का नहीं, रजत का hi था. जो अब वीर का हो चूका था. बलहार के आदमियों ने मिलके घर से रजत और उसकी माँ के कपडे लट्टे, फोटो फ्रेम्स, अथवा कई अन्य चीज़ो को अलग कर दिया था. और पारिजात की महिलाओ के लिए एक बढ़िया निवास स्थान में तब्दील कर दिया था.

सुधा : मालिक! घर तोह काफी बड़ा है.

वीर : अब तुम सब यही ठहरेगी.

मुक्त : जी मालिक!

वीर : सामान रख दो! मुझे तुम सब से कुछ बात करनी है.

वीर सोफे पर बैठा और सभी महिलाओ को उसने बैठने के लिए कहा. वह सब उसके सामने एक पलंग पर विराजमान हो गयी.

वर्षा : क्या बात है मालिक?

वीर : में तुम सब की मदद चाहता हु.

मुक्त : मदद? कैसी मदद?

वीर : तुम सब अपने अपने छेत्रो में निपुड़ हो. काबिल हो. मुझे उन्ही छेत्रो में तुम्हारी मदद चाहिए. सरल शब्दों में, मुक्त मुझे तुम्हारी मदद राजस्थानी खाने में चाहिए, वर्षा तुम्हारी मदद औषधियों और सुगंधो में चाहिए, सुधा तुम्हारी मदद कपड़ो के व्यापार में चाहिए और सैली! तुम्हारे लिए भी कुछ सोचा है मेने. तोह क्या तुम सब मदद करोगी?

वह सभी एक दूसरे को देखि और फिर हामी में सर्र हिलाते हुए बोली,

"हम तैयार है मालिक!"

वीर (स्माइल्स) : गुड! अब जब तक में तुम लोगो को जानकारी नहीं देता तब तक यही रुको. घर में हर्र सामान उपलब्ध है. बाहर जाने की कोई ज़रुरत नहीं है. बाद में में खुद बताऊंगा तुम्हे क्या करना है.

सभी एक साथ : जी मालिक!

वीर फिर वह से निकल गया. और वो सभी अपने नए मालिक के संरक्षण में आते hi उनकी तारीफों के पल बाँधने लगी.

मुक्त : मालिक कितने अच्छे है न? वह हमे काम दे रहे है.

वर्षा : सच कहा. यही तोह में चाहती थी. अगर मालिक सिर्फ मेरे शरीर के लिए मेरा उपयोग करते तोह अंदर hi अंदर मुझे बेहद निराशा होती. परन्तु उन्होंने हम सब के लिए काम ढूंढा है. इस से बेहतर और कुछ भी नहीं हो सकता. वह हमारी क्षमता से वाक़िफ़ है.

सुधा : एकदम सही कहा वर्षा. अगर कोई और होता तो केवल हमारे तन्न को भोगता. और शायद हमे जानवरो की तरह रखता. क्या कुछ नहीं करता. पर मालिक अलग है. हमे उनकी तन्न मैं धन से सेवा करनी है.

वर्षा : हम्म!

मुक्त : बिलकुल!

***

वह वीर उन् महिलाओ की व्यवस्था में लगा हुआ था तोह यहाँ घर पर रागिनी अपना प्लान सेट कर रही थी. सभी को चाय का एक एक कप पकड़ाते हुए वह एक कुर्सी पर आ कर बैठी,

रागिनी : मुझे आप सब से बात करनी है.

उसने सभी का ध्यान खींचते हुए कहा.

रागिनी : देखिये! वीर का जन्मदिन अभी अभी निकला है. पर हमने उसके लिए कुछ भी नहीं किया. उसका बर्थडे सेलिब्रेट hi नहीं किया हमने. पिछले साल भी हम नहीं कर पाए थे क्युकी वह घर पर hi नहीं था.

सामने बैठी भावना ने ये जब सुना तोह अपने बेटे वीर की बात उससे याद आ गयी. उस वक़्त वह जयपुर में था. और वह खुद उस से मिली थी. पर पहचान न पायी. आज एक साल बाद वह उसके साथ है. रागिनी की बात भावना को एकदम सही लगी. जब इतना कुछ वीर ने सब के लिए किया है तोह उसका जन्मदिन धूम धाम से मनाना भी सब का फ़र्ज़ बनता है.

भावना : तुम सही कह रही हो.

श्वेता : H-Haan! वीर का बर्थडे हमे ज़रूर सेलिब्रेट करना चाहिए. भूमिका अभी होटल में इन्फॉर्म कर दो की-

रागिनी : ऐसे नहीं तै जी!

श्वेता : हँ!?

रागिनी : अपनी hi होटल में आप पार्टी रखोगी?

श्वेता : तोह इसमें क्या बुराई है?

रागिनी : माना की हमारी होटल अच्छी है पर थोड़ा सोचिये तोह-

भूमिका : मेरे ख्याल से भाभी ठीक कह रही है. हमे किसी और अच्छी होटल में पार्टी रखनी चाहिए.

श्वेता : भूमि?? तू कह रही है हमारी होटल खराब है?

श्वेता के दिल में दर्द उठा. इतने सालो से उसने अपनी दूसरी बेटी की तरह पाला था होटल को. तोह ऐसे में कोई होटल की बुराई करे तोह दर्द तोह होना hi था.

भूमिका : माँ! ये बात आप भी जानती है की सिटी में हमारी होटल से कई गुना अच्छी और भी होटल्स मौजूद है. हम आउटडेटिड हो रहे है. इतना ड्रामेटिक मत बनाइये इससे प्लीज.

श्वेता : आउटडेटिड-!? ड्रामेटिक? हे भगवान्! अब मेरी होटल का क्या होगा?

भूमिका : उघ~ माँ! फिरसे शुरू मत होना प्लीज!

तेज : तोह इसका मतलब एक सुर्पीसे पार्टी? वीर को अच्छा लगेगा. माँ? आप क्या कहती हो?

भावना (स्माइल्स) : में तोह तैयार hi हु न.

तेज : मेरे भाई का b'day ठीक से कभी मनाया hi नहीं गया है. ये b'day उसके लिए सबसे स्पेशल होना चाहिए. में एक बहुत अच्छी होटल में उसके लिए पार्टी रखूंगी.

रागिनी : में नहीं तेजल! हम! हम उसके लिए पार्टी रखेंगे. इसलिए तोह आप सबके सामने मेने ये बात राखी है.

तेज : तोह? फिर क्या करना है?

रागिनी : सबसे पहला टास्क. जो की मुश्किल है...

वह सभी कान लगाए उससे देखने लगी.

रागिनी : हम में से किसी को वीर को घर से दूर रखना होगा रात तक के लिए. वर्ण उससे सब पता चल जायेगा.

तेज : ओह्ह! सूरे! ये काम में-

रागिनी : नहीं तेजल!

तेज : हँ?

रागिनी : ये काम में करुँगी. तुम्हारे मुँह से गलती से भी कुछ निकला तोह दिक्कत हो जाएगी.

तेज : नहीं! में इतनी आसानी से-

रागिनी : ये काम कठिन है. दिन भर वीर को कामो में फसा के रखना होगा. में ये काम बखूबी कर लुंगी. मुझे उसकी पसंद na-pasand के बारे में सब मालुम है. उससे कैसे व्यस्त रखना है में जानती हु. तोह ये काम आप सब मुझ पर चोरर दो.

सुमन : ठीक है! अब हमारा काम भी हमे बता दीजिये रागिनी जी!

रागिनी : तेजल और भूमिका. और आप दोनों तै जी.

भावना और श्वेता : हम्म?

रागिनी : आप चारो होटल का काम संभालेंगी. कौन सी होटल करनी है, क्या डेकोरेशन रखना है, क्या मेनू होना चाहिए ये सब में आप पर चोररटी हु.

भावना : ठीक है!

श्वेता : O-Ok!

पल भर के लिए भावना और श्वेता ने एक दूसरे को देखा, श्वेता 'हम्फ' कर अपना मुँह फेरर ली, तोह वही भावना बस हौले से मुस्कुरा बैठी.

तेज और भूमिका भी एक दूसरे को देखि, पर बोली कुछ नहीं.

रागिनी : सुमन जी?

सुमन : हम्म?

रागिनी : आभा और आप, निमंत्रण देंगी. आपको पता है न किस किस को बुलाना है?

सुमन (मुस्कुराते हुए) : जी!

आभा : माँ जी? मेरा क्या काम है इसमें?

सुमन : बात तुम hi करोगी आभा. में सिर्फ तुम्हे फ़ोन लगा के दूंगी जिन्हे हमे बुलाना है.

आभा : ओह्ह!

रागिनी (स्माइल्स) : बहुत खूब! और आप hi दोनों को ये देखना है की सभी लोग समय से तैयार होक पहुचे. हमारे घर से भी. ठीक है?

आभा और सुमन : जी!

रागिनी : सोनाली तुम!

सोनाली : ेहः?

रागिनी (स्माइल्स) : तुम्हारा काम है-

सोनाली : *गुलप्स*

रागिनी (स्माइल्स) : केक लाना!

सोनाली : C-Cake?

रागिनी : हाँ बाबा केक! केक कटेगा तभी तोह b'day मानेगा न? बिना केक के केसा b'day? तुम्हारा काम है की एक अच्छा सा केक बनवा के लाओ. वीर को चॉकलेट पसंद है. मदद के लिए तेजल या भूमिका से पूछ सकती हो की केसा बनवाना है. केक बड़ा होना चाहिए. ठीक?

तेज (खुसपुसाते हुए) : तोह उससे चॉकलेट पसंद है...!

सोनाली : उघ! इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी मुझे क्यों-!?

रागिनी : ऐसा कुछ नहीं है. काम सभी अपना अपना अच्छे से करना.

सोनाली : कही केक मेरे हाथ से गिर गया तोह? कही कुछ खराब हो गया तोह? वह गीदड़ मुझे नहीं चोर्रेगा.

रागिनी : तोह सब तैयार है न?

सोनाली : आआआ~ मेरी कोई सुन्न hi नहीं रहा है.

सभी ने प्रफुल्लित होक हामी भर रागिनी को अपना आस्वाशन दिया. सिवाए सोनाली के. उससे लग रहा था सबसे बड़ा और भारी बोरा उसके hi सर्र लादा गया था.

रागिनी के निर्देश मिलने के बाद सभी अपने कामो में लग गयी. रागिनी गाना gun-gunaate हुए किचन की ऑर्डर जाने लगी जब एक पीछे से आयी आवाज़ ने उससे रोक लिया,

"मेरे बेटे के संग-! कब से रह रही हो?"

पलट के उसने देखा तोह पाया की भावना कड़ी हुई थी.

रागिनी : T-Tai जी! A-Aap-

भावना : तुमने जवाब नहीं दिया!?

रागिनी : H-Huh!!?

भावना : मेरे बेटे के संग इस घर में कबसे रह रही हो?

अचानक इस सवाल को सुन्न वह थोड़ा घबरा गयी.

रागिनी : L-Lagbhag एक साल हो गया. शुरुआत में सिर्फ में और वीर थे, उसके बाद-

भावना : सिर्फ तुम और वीर? एक देवर और भाभी? अकेले? एक छत के नीचे?

रागिनी : W-Woh-

भावना : हम्म?

रागिनी : में- में वह-

भावना : में वह क्या?

रागिनी : उम्म्म- B-Baad में सुमन जी और बाकी सब भी जुड़ गयी, फिर तै जी आयी और भूमिका भी. और अब आप सब.

भावना : पर शुरुआत में तोह सिर्फ तुम और वीर hi थे न?

रागिनी : J-Jii!

भावना : तोह तुम hi बताओ, ऐसे में एक देवर भाभी का घर में अकेले रहना...! क्या सही है?

रागिनी ने कुछ भांपा और फिर अपनी घबराहट दूर कर वह निडर होक पूछी,

रागिनी : आप कहना क्या चाह रही है?

भावना (स्माइल्स) : में तोह सिर्फ पूछ रही हु!

रागिनी : क्या आप मुझपे आरोप लगा रही है?

भावना शांत रही, बस मुस्कुरा के रागिनी को देखती रही.

रागिनी : वीर ने मुझे एक नयी ज़िन्दगी दी है. उसकी वजह से इस रागिनी को एक नया जीवनदान मिला है. अगर वो न होता तोह शायद आज में और मेरा परिवार भी ज़िंदा न होते. उसने hi मुझे एहसास दिलाया की जिस राह पर में चल रही थी वह प्रेम की एक झूठी राह थी. ये घर सिर्फ घर नहीं है. मेरी और वीर की इस से यादें जुडी है. भले hi हमने अभी ज़्यादा वक़्त नहीं गुज़ारा है यहाँ. पर कठिन परिस्थितियों से निकलते वक़्त इस घर ने हमे छाव दी है.

भावना : ...

रागिनी : और इसलिए, मेरे दिल में उसके लिए आदर भी है, प्रेम भी और परवाह भी. अब आगे आप जो समझना चाहे समझे.

कहते हुए वो पलटी, न hi फिर उसने भावना को पलट के देखा और न hi वह फिर रुकी. पीछे कड़ी भावना बस उससे जाते देखती रही. परन्तु, होंठो पर एक अजीब मुस्कान थी. न जाने क्या सोच रही थी.

तोह वही यहाँ भूमिका और तेज की लड़ाई हर्र बार की तरह जारी hi थी.

तेज : मेने कहा न ये होटल कर रहे है हम.

भूमिका : नहीं! इस होटल की सर्विस अच्छी नहीं है. में कह रही हु न-

तेज : व्हाट दो यू मैं 'अच्छी नहीं है'? लिटेराल्ल्य, 4.5 स्टार रेटिंग है.

भूमिका : रेटिंग्स पर मत जाओ, वह बढ़ा दी जाती है उनके hi स्टाफ द्वारा. में खुद होटल संभालती हु, मुझे पता है वह किसी सर्विस है. व्हाई अरे यू नॉट त्रुस्तिंग में?

तेज : बिकॉज़ यू अरे नॉट ट्रस्टवर्ती!

भूमिका : T-Tum-

तेज : व्हाट?

भूमिका : तुम बहुत ज़िद्दी हो!

तेज : हहहहहह!!? एक्सक्यूज़ में??? क्या कहा आपने? में ज़िद्दी हु? हाँ? में ज़िद्दी हु?

आभा : अगर आप दोनों ऐसे hi झगड़ती रही, तोह शाम हो जाएगी. और फिर में आमंत्रण कैसे दूंगी लोगो को?

तेज : तोह इन्हे समझाओ आभा, की मुझे मेरे भाई का b'day सेलिब्रेट करने के लिए इनकी हेल्प की ज़रुरत नहीं है. और न hi इनकी रेकमेंडेड होटल में हमे जाने की ज़रुरत है.

आभा बेचारी दोनों का झगड़ा देख सेहम के चुप चाप कड़ी रह गयी. दोनों अभी भी झगड़ने में लगी हुई थी जब अचानक hi वह वीर आ गया. और सामने का नज़ारा देख हैरत में रह गया. तेज और भूमिका दोनों के हाथो में एक टेबलेट था जिससे दोनों छीनने में लगी हुई थी. और दोनों किसी जंगली बिल्लियों से काम नहीं लग रही थी.

वीर : आप अब तक होटल नहीं गयी?

भूमिका : अहह! वो-

इस से पहले की भूमिका वीर के प्रश्न में फास्स्टि, तेज ने अचानक hi भूमिका को बगल से अपने गाला से लगा लिया,

भूमिका : अह्ह्ह!!!?

तेज : K-Kuch नहीं वीर! हम आपस में दोस्ती कर रहे थे. है न?

भूमिका : E-Ehhhhhh!?

तेज (खुसपुसाते हुए) : व्हाट अरे यू दोंग???? हुग में!!!! हुग में नौवववव!!!

भूमिका (नॉड्स) : O-Okay!

तेज की खुसपुसाहट सुन्न, इशारा समझ भूमिका ने भी अपने हाथ उसकी कमर पर लपेट दिए. और दोनों के गाल एक दूसरे से लग गए. वह दोनों फ़र्ज़ी मुस्कान वीर को दिखाने माँ लगी हुई थी.

तेज : हहै~

भूमिका : ाहः~

वीर : :हँ:

तेज : हैः~

भूमिका : अहा~

वीर (फ्रोंस) : यू तवो सीम ा लिटिल तू क्लोज. Don't यू?

तेज : हेहेहे~ N-Nahi तोह? है न? हम तोह बस फ्रेंडशिप कर रहे है.

भूमिका (नॉड्स) : R-Right!

तेज : और तुम्हे तोह खुश होना चाहिए न की हम दोनों आपस में क़रीब आ रहे है!?

वीर : वेल-

इनकी पोल खुलती की तभी वह रागिनी इन्हे बचाने आ गयी,

रागिनी : वीर! तुम आ गए.

वीर : हम्म! कुछ काम था?

रागिनी : हाँ! फ्री हो न?

वीर : फ्री तोह नहीं, पर कहिये. क्या काम है?

रागिनी : तोह तुम मुझे शॉपिंग पर लेके चल रहे हो. अभी!!

वीर : अभी??

रागिनी : क्यों? नहीं ले जाओगे?

वीर (स्माइल्स) : चलिए!

रागिनी (स्माइल्स) : थैंक यू सो मच!

*छू~*

अगले hi पल रागिनी के लाल रसीले होंठ वीर के गाल पर थे. पीछे बैठी तेज ने जब ये देखा तोह उसका मुँह खुला का खुला रह गया.

तेज : Y-You-??

लेकिन रागिनी तोह आज फुल प्लानिंग में थी. दोनों बहनो को आँख मारते हुए वह वीर को वह से लेके रवाना हो गयी. वीर ने अपनी रोल्स रोये घोस्ट hi निकाली हुई थी.

दोनों किसी कपल से काम नहीं लग रहे थे. रागिनी आज बेहद ख़ूबसूरत लग रही थी. पीली साड़ी पहने, लालम लाल रसीले होंठ लिए, वह पूरी हसीना सी प्रतीत हो रही थी.

वीर : आज आप बहुत सुन्दर लग रही हो भाभी!

रागिनी : भाभी?

वीर (स्माइल्स) : रागिनी!

रागिनी (स्माइल्स) : मुझे दुबारा याद न दिलाना पड़े.

वीर (स्माइल्स) : जी!

रागिनी : गुड!

वीर : तोह? आज क्या khareed-daari करने चल रहे है हम?

रागिनी ने एकदम से वीर के हाथ के ऊपर अपना हाथ रखा,

वीर : ??

रागिनी (सडक्टिवेली) : तुम्हे सच में लगता है मेने तुम्हे शॉपिंग के लिए घर से बाहर निकाला?

जब वीर को समझ आया की रागिनी के इरादे क्या थे तोह उसके लुंड ने अपने आप एक झटका मार दिया. मुँह में मौजूद थूक गुटक वह रागिनी को देखा,

वीर : यू मैं~

रागिनी : क्या कहा था तुमने? में लौट के आ जाऊंगा तोह अपना जवाब आपको दे दूंगा.

वीर : Y-Yes!

रागिनी : कहा है तुम्हारा जवाब?

वीर : में-

रागिनी: बहुत hi मज़ा आया था न तुम्हे जब मेरे साथ वो कर के गए थे? और में तुम्हारी यादो में रातो रात तड़पती रही. हँ?

वीर : K-Kya कर के गया था में?

रागिनी : भोले बन्न रहे हो वीर?

वह और नज़दीक आयी और वीर के चेहरे से एक इंच के फासले से बोली,

रागिनी : अपनी भाभी की छूट पर मुँह मार कर गए थे तुम. भूल गए? या याद दिलो?

वीर : एहम-

रागिनी (स्माइल्स) : अब जहा में ले जा रही हु, वह चुप चाप चलो. Okay?

वीर : यस ma'am!!!

रागिनी : गुड!

रागिनी के बताये गए स्थान पर जब दोनों पहुचे तोह वीर आश्चर्य में था.

वीर : ये होटल!?

रागिनी : तुम्हे पसंद आयी?

वीर : येह! काफी बड़ी है.

रागिनी : रात तक के लिए हमारा रूम बूकेड है.

उसके कहने पर वीर शर्माते हुए उससे देखा. रागिनी भी अंदर से शर्मा रही थी, पर दिखाना नहीं चाहती थी क्युकी वह बड़ी थी उम्र में. उसने हौले से वीर का हाथ थामा,

रागिनी : आज कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा. सिर्फ तुम होंगे, और में!

वीर : दो यू रियली वांट थिस?

रागिनी : यस!! एसससस!!! मेरे जजमेंट को अब और क्लाउडेड मत करो वीर. में पूरे hosho-hawaas में हु और जानती हु मुझे क्या चाहिए.

वो वीर को थामी और उससे अपने हाथो में पकडे होटल के अंदर घुस गयी. रूम में आते hi वीर के सामने खिड़की से जुहू बीच का शानदार नज़ारा था.

वीर : ब्यूटीफुल! पर काफी महंगा पड़ा होगा.

रागिनी : तुमसे कीमती कुछ नहीं मेरे लिए अब.

उसने अपना सामान रखा और कमरे को अंदर से लॉक कर वह वीर के पीछे पीछे आयी और उसके सीने में अपने हाथ डालते हुए उसकी पीठ से लग के कड़ी हो गयी. दोनों एक दूसरे के बदन की खुशबू को सूंघ पा रहे थे.

वीर : आज़माइये मत! वर्ण आप खो दूंगा में!

रागिनी : यही तोह चाहती हु में!

कहते हुए उसने अपने तपते होंठ वीर की गर्दन से लगा दिए,

वीर : सससससस~

अचानक के हमले से वीर अपनी गर्दन सिकोड़ने पर मजबूर रह गया.

*छू~* *छू~*

*स्लुर्प* *स्लुर्प*

*पूछ* *पूछ*

रागिनी किसी भूखी शेरनी की तरह अपना आहार ढूंढने लगी.

वीर ने पलट के उसकी पतली कमर को थामा और खींच के उससे अपने सीने से लगा लिया. दोनों एक दूसरे के क़रीब आये और जैसे hi 1 कम की दुरी बची थी, दोनों चुम्बक के भाति एक दूसरे के होंठो की तरफ खींचे और फिर जानवरो की तरह एक दूजे को चूमने लगे.

"उम्मम्मम्म~" "स्स्स्सस्स्स्स~" "आह्ह्ह्हन्णंन्न~" "नॉममममममम~~~"

"मममममममम~' *स्लुर्प* *किश*

वीर को धक्का देके वह बिस्तर पर बैठी, और धीरे धीरे अपने अंगो से उसने कपडे निकालना शुरू कर दिए. पहले साड़ी, फिर पेटीकोट, फिर ब्रा और अंत में पंतय.

उसने सब कुछ उतार दिया. बस बाकी था तोह वह था उसका श्रृंगार. हाथो में बँगलेस, गले में वीर द्वारा पहनाया गया पेंडंट, और माथे पर बिंदी.






रागिनी अपने परर सिकोड़े वीर को देखि. वीर mantra-mugdh था. ऐसी खूबसूरती अलौकिक थी. उससे विशवास नहीं हो रहा था की वह रागिनी जैसी सुन्दर नारी को भोगने जा रहा था.

उसके बाद अपनी दोनों टाँगे खोल रागिनी ने अपने द्वार के दर्शन दिए, और अपनी मुनिया पर ऊँगली फेरर वह वीर को रुझान लगी,





रागिनी : इससे hi भोग के गए थे न तुम? अब आज फिरसे मौका है तुम्हारे पास. इससे सही से भोगने का.

वीर : अरे यू सूरे आप ये यही करना चाहती हो?

रागिनी : तोह और कहा? तुम चाहते हो ये हम घर पर करे?

वीर : होटल में हिडन कामर्स भी तोह हो सकते है?

रागिनी : ये एक रेपुटेड होटल है, तोह तुम्हे इस बात की चिंता करने की कोई ज़रुरत नहीं.

वीर : सो, यू हैवे मेड उप योर मंद हँ!?

रागिनी : यस! नाउ के एंड फ़क में वीर!!! फ़क में!!!

वह अपना नंगा बदन प्रस्तुत कर उत्तेजना में बोली.





वीर फिर न रुका. उसने कई मौके दिए थे रागिनी को और गहराई में सोचने के लिए. पर, रागिनी का फैसला अडिग था. और जब सामने से बार बार न्योता दिया जाए, तोह वीर उससे कदापि ठुकराने वाला नहीं था.

वह कूड़ा और रागिनी की छूट पर टूट पड़ा. वह रसीली छूट उससे आमंत्रण दे रही थी. अपनी जीभ का बेहतरीन इस्तेमाल कर वीर ने अपना पूरा मुँह रागिनी की छूट में दे मारा.





"अह्हह्ह्णणणणणण maaaaaaaaaaa~"

सिसकते हुए रागिनी ने वीर के बालो को अपने हाथो में जकड लिया. वीर अपना एक हाथ ऊपर ले गया और उन् स्वादिष्ट ामो को भी उसने निचोड़ना शुरू कर दिया.

ये उसकी भाभी की छूट थी. कभी वीर ने अपने सपने में भी नहीं सोचा था की उस से बात तक न करने वाली वही भाभी आज उसके सामने नंगी होक छोड़ने को कहेगी.

आज कही न कही, वीर का ईगो हाई था. उससे खुद पर प्राउड भी था. टांग उठा के वीर ने छूट को और जोरर से चाटना शुरू किया तो रागिनी मदहोश होक रह गयी. इसी...! इसी एहसास के लिए तोह वह रातो रात तदपि थी.





जैसे hi उसका पानी निकला, रागिनी का बदन झटके खा कर रह गया. वीर उठा और अपने कपडे उतार उसने अपना लुंड प्रस्तुत किया. अब रागिनी की बारी थी सेवा करने की.

वह वीर के लुंड को देखि. ये पहली बार था जब वह वीर को नग्न अवस्था में देख रही थी. देख के hi उसके होश उड़े हुए थे.

'I-Itna बड़ा? क्या में इससे अंदर ले भी पाऊँगी?'

आगे बढ़ उसने वीर के लुंड को थामा और उसके सुपाड़ी को पहले चूमा.

*छू~*





"H-Haaahhhh!" वीर के मुँह से एक सिसकी छूटहि. रागिनी उसके सुपाड़ी को प्यार से चूम रही थी.

रागिनी : मुझे ब्लोजॉब का उतना एक्सपीरियंस नहीं है वीर! पर तुम्हे दे दे के hi सीखूंगी.

वीर : यू अरे आलरेडी दोंग गुड!

वो मुस्कुरायी, और मुँह खोल पूरा सुपाड़ा उसने अपने मुँह में भर लिया. वीर के लिए ब्लोजॉब तोह क्या वह कुछ भी करने तैयार थी.





"ुररग़ह~' कराहते हुए वीर उसके सर्र पर हाथ रख उससे गाइड करता गया. और रागिनी अच्छी तरह से चूसती गयी. पर झाररने से पहले, वीर ने रागिनी को कुटिया बनाया और उसके पीछे आके खड़ा हो गया.

रागिनी : Don't थिंक नाउ वीर माय बेबी, जस्ट पूत आईटी इन!!!

वीर ने सुपाड़ा छूट की दीवारों को खोल अंदर लगाया. रागिनी का बदन ठिठुर गया. और अगले hi शान,

*खछःह*

उसने धक्का मार लुंड अंदर पेल दिया.





रागिनी के दोनों हाथ मुट्ठी बन्न बेडशीट पर कस गए. उसकी आँखों से ासु निकल आये. ये दर्द के भी थे, ख़ुशी के भी और दुःख के भी.

ख़ुशी इस बात की, की आखिर कार उसने अपने आप को वीर को सौंप दिया था और वीर ने उससे स्वीकार लिया था. दुःख इस बात का की वह कभी वीर को अपना अनछुए यौवन पेश न कर पायी. कोई और उससे पहले भोग चूका था. कोई ऐसा जिसके बारे में सोचके भी उससे घिन आती थी. और दर्द इसका की वीर का लिंग उसके लिए अब तक का सबसे बड़ा लिंग था. तोह दीवारे और चौड़ी हो रही थी. दर्द तोह लाज़मी hi था.

रागिनी के संभल जाने के बाद, वीर ने फिर ताबड़तोड़ धक्के मारे,

'ंघहहहहहह~ V-Veer!! वीइरररर! ओह्ह्ह वीर!!! क्लेम में वीर!"

"मेरे अंग अंग पर अपनी छाप चोरर दो वीर! आआअह्ह्ह्णण माआआआ~"

"Y-Yesssssss ओह्ह गॉडडडडडड!!!!"

*फट्ट्ट्ट* *फट्ट्ट्ट* *फट्ट्ट्ट*

उसके बालो को हाथ में क़ैद किये, वीर रागिनी को घोड़ी बना के उसकी छूट मारने में लगा था.





ये एक शो था की वीर कैसे रागिनी को एक मर्द क तरह क्लेम कर रहा था. रागिनी ने आज जो राग गाय था, वह उससे और साथ hi साथ इन् चार दीवारों को भी याद रहने वाला था.

"P-Please वीर! A-Andar! अंदर! ी वांट आईटी इनसाइड!!!"

उसकी इच्छा को पूरा कर वीर ने अपना वीर्य उसकी छूट के अंदर hi उड़ेल दिया. इसी के साथ वह भी झरर गयी और दोनों आपस में चिपक के लेत गए. रागिनी उसके सीने पर सर्र रख लेती हुई थी.

उसने वीर का हाथ अपने हाथो में लिया, उससे देखा और बोली,

रागिनी : मेने तुमसे शादी क्यों नहीं की वीर?

वीर : बिकॉज़ ी वास् तू यंग.

रागिनी : काश में भी तुम्हारी तरह यंग होती.

उन् बातो में एक अजीब सा दर्द था जो वीर को भी महसूस हुआ.

वीर : आप यंग hi हो!

रागिनी : काश तुम्हारी ham-umr की होती.

वीर : ...

रागिनी : वीर!

वीर : हम्म?

रागिनी : आज में बहुत खुश हु. थैंक्स फॉर दोंग आईटी. थैंक्स फॉर नॉट नेग्लेक्टिंग में. थैंक्स फॉर अक्सेप्टिंग में. एंड...

वीर : ??

रागिनी : ी लव यू~

उसने पुनः वीर के होंठ चूम लिए.

परन्तु वीर की बॉहे चिंतन में सिकुड़ी हुई थी. क्या वह बता दे की पारिजात में क्या हुआ था? क्या बता दे की आगे भी उसके रिलेशन्स कई औरतो के संग बन्न सकते है?

पर रागिनी की मुस्कान, उसकी ख़ुशी देख वीर की हिम्मत न हुई. और आज उसने बताने से खुद को पीछे कर लिया. किसी और समय...!

रागिनी : तुम्हारी लिए एक सरप्राइज है. फुफु~

वीर : सरप्राइज? कैसा सरप्राइज?

रागिनी : हहै~

***

और न जाने कब समय यु hi गुज़र गया. रागिनी ने वीर को उसके कपडे दिलवाये और खुद भी धेरर साड़ी शॉपिंग की.

जब शाम के 7:30 बज गए तोह वह उससे दूसरी होटल लेके पहुँच गयी. वीर टोटली क्लोएलेस्स था. उससे समझ नहीं आ रहा था की भला रागिनी ने और कितने प्लान्स बनाये हुए थे.

परन्तु जैसे hi वह होटल के अंदर पहुचा,

*पॉप* *प्लॉप* *पॉप*

पार्टी पोप्पेर्स जोरर जोरर से शोर करके फूटे और ऊपर से चमकीले पेपर के टुकड़े हर्र जगह गिरने लगे. जब सामने का नज़ारा वीर ने देखा तोह वह भावुक रह गया.

सामने हर्र कोई मौजूद था. उसकी माँ से लेके, आरोही काव्य, उसके दादा जी, सुमित्रा, यहाँ तक की कारन और कृतिका भी आये हुए थे.

सिवाए विवेक और बृजेश के. उन्हें वैसे hi इन्विते नहीं किया गया था. और अगर करा भी जाता तोह शायद hi वह आते. बृजेश तोह शायद आ भी जाता पर विवेक के बारे में यही कहना मुश्किल था.

वीर : Y-Ye सब-!?

रागिनी (स्माइल्स) : तुम्हारा b'day कभी ढंग से सेलिब्रेट नहीं किया गया. ये हमारी ऑर्डर से है. वीर! हैप्पी बर्थडे!

एक ासु की बूँद उसके गाल से होक गुज़री तोह रागिनी ने तुरंत hi अपने अंगूठे से उसके ासु पॉच दिए.

रागिनी : It's टाइम तो एन्जॉय पागल. रट नहीं है-

वीर : ी-

रागिनी : रौ मत वर्ण में भी रोने लगूंगी पागल!

वह निशब्द था. ये कभी भी उसने एक्सपेक्ट नहीं किया था. कोई उसका b'day ऐसे मनाये? आज तक कभी उससे फोटोग्राफ्स में साथ नहीं लिया जाता था. पर आज ये सब मौजूद थे. उसके संग, उसका बीता हुआ जन्मदिन मनाने.

"भैय्यियाआ~"

काव्य हर्र बार की तरह दौड़ती हुई आयी और उसके सीने से लग गयी.

वीर : K-Kavya!!!

काव्य : भैया! हैप्पी बर्थडे!

गोल्डन फ्रॉक में वह किसी पारी से काम नहीं लग रही थी.

वीर (स्माइल्स) : थैंक यू! काव्य!

पीछे से आरोही भी चलती हुई आयी. उसके हाथो में एक गिफ्ट था. उसने सीधा आगे बढ़ा के वह वीर को थमा दिया.

आरोही : फॉर यू~

वीर : हँ?

आरोही (स्माइल्स) : हैप्पी बर्थडे!

और शर्मा के उसने आहिस्ता से वीर को गाल पे एक छोटा सा पर मीठा सा किश कर दिया.

वीर (ब्लशेस) : थैंक यू! आरोही दी! पर आप सब ऐसे अचानक से~

इतने में सुमित्रा भी आगे आयी. उसकी आँखों के नीचे झाइयां थी. करुणेश और प्रांजल के जाने के बाद उसकी हालत बेहद खराब हो गयी थी. जैसे तैसे आरोही और काव्य ने उससे संभाला. पर अब आगे तोह बढ़ना hi पड़ेगा. अपनी सन्तानो को चोरर कहा जा सकती थी वह.

सुमित्रा : जन्मदिन की शुभकामनाये वीर.

वह आगे आयी. वीर ने जब परर पड़ना चाहे तोह उसने वीर को गले से लगा लिया.

और सही समय देख के वीर ने अपनी बात सुमित्रा के कानो में धीरे से रख दी,

वीर : ऐसा मत सोचना की चाचा के जाने से आप टूट गयी हो और अब कुछ नहीं बचा चची. में हु अभी. जब तक में रहूँगा...! आरोही दी और काव्य की चिंता आपको करने की कोई ज़रुरत नहीं है. आपको कभी भी कोई भी ज़रुरत पड़े. आप मुझे कह सकती हो.

शब्द कुछ hi थे. पर उनमे ताक़त बेहद थी. उनका भार अत्यधिक था. सिर्फ बोलने के लिए hi हिम्मत लगती थी आज के ज़माने में.

सुमित्रा की पकड़ वीर पे और मज़बूत हो गयी. वह अपने ासु पॉच, सर्र हाँ में हिला के पीछे हो गयी.

मनोरथ भी आगे आये तोह वीर ने उनके परर छुए,

वीर (स्माइल्स) : अब कैसी है आपकी तबियत?

मनोरथ : मुझे क्या हुआ? अरे जब तक अपने पोते की शादी नहीं देख लेता तब तक कोई मुझे इस दुनिया से नहीं ले जा सकता. हाहाहाहा~

दोनों हस्स पड़े. मनोरथ ने फिर एक सोने की चैन वीर को थमाई और साथ hi शगुन का एक लिफाफा भी.

इतने में रागिनी के Mata-pita आगे आये. दिनेश और रोहिणी! वो भी आये हुए थे.

दोनों के परर वीर ने छुए तोह दिनेश ने आशीर्वाद देते हुए कहा,

दिनेश : मुझे याद है अच्छे से. वह तुम hi थे जिसने हमे बचाया था. रोहिणी! ये देखो! यही है वीर. हाहाहा~

रोहिणी : हाँ हाँ! एक बार मिल चुकी हु. आप तोह ऐसे बता रहे हो जैसे हम पहली बार मिल रहे है. हम्फ~

दिनेश : ेहः? मिल चुकी हो? अरे भाई मुझे याद क्यों नहीं आ रहा कुछ?

रोहिणी : बादाम खाया करो. रोज़ बोलती हु पर खाना नहीं है आपको.

रागिनी अपने माता पिता की हरकतों को देख शर्मा के सर्र झुका ली. पर वीर और बाकी सब उनकी इन् हरकतों को पूरी तरह से एन्जॉय कर रहे थे.

रोहिणी (स्माइल्स) : अरे में जानती हु अच्छे से वीर को. मेरे घर के दीपक को बुझने से बचाया है इसने. जग जग जियो मेरे बच्चे. खूब तरक्की करो.

*मुआअह्ह्ह*

और उसने वीर के गाल को चूम लिया. फिर अपनी ऑर्डर से उससे गिफ्ट देके वो दोनों भी साइड हो गए.

ये देख, रागिनी ने वीर के बाज़ू में चिकोटी काटी,

रागिनी : गेटिंग तू मान्य किस्सेस हँ?

वीर (स्माइल्स) : ओह्ह! अरे यू गेटिंग जेलस?

रागिनी (ब्लशेस) : Wh-Whaaaattttt? N-No!!! पागल!!!

उसने अगले आने वाले लोगो को देखा तोह पाया सामने कारन और कृतिका थे.

कारन : कोई इनफार्मेशन नहीं. कोई ठिकाना नहीं. ये भी कोई दोस्ती है? लिखे मुझे आना पड़ता है तुम्हारी खबर लेने. लुक ात में! कारन! में कारन तुम्हारे पीछे पीछे भाग रहा हु. डैड देखेंगे तोह हड्डी पसली एक कर देंगे मेरी.

वीर : It's योर ऑनर. रेस्पेक्ट आईटी.

कारन : रेस्पेक्ट माय अस्स-

रागिनी (फ्रोंस) : कारन!

कारन : एहम! सॉरी फॉर थे लैंग्वेज भाभी!! हम्फ~ वैसे में यहाँ आता नहीं. बूत यू क्नोव...! I-I चामे फॉर थे फ़ूड.

उसकी नज़रे बगल में कड़ी कृतिका की ऑर्डर गयी तोह बेचारी वह शर्मा के रह गयी. उन् दोनों के बीच में खिल रहे गुलाब को वीर इधर तुरंत hi भांप गया,

वीर : यू चामे फॉर थे फ़ूड और यू चामे फॉर थे मूड?

कारन : *कुघ* *कुघ*

अचानक hi बेचारे को ठसका लग गया.

कारन (ब्लशेस) : Wh-What ब्लासफेमी!! हम्फ~ में...! में ऑब्वियस्ली फ़ूड के लिए आया हु. सुना है यहाँ का फ़ूड अच्छा है. A-Aur ये रहा तुम्हारा गिफ्ट. हम्फ!!

उसने वीर के हाथो में जोरर से एक गिफ्ट का पैकेज थमाया. और बिना कुछ कहे, वो पलट के वह से दूर निकल गया.

वीर : ये लड़का भी न...! *शिघ्स* रूठी हुई गफ की तरह एक्ट करता है.

रागिनी (गिगल्स) : फुफुफु~

कृतिका (ब्लशेस) : V-Veer भैया!! Y-Ye मेरी तरफ से. हैप्पी बर्थडे!

वीर : ओह्ह! थैंक यू कृतिका! You're लुकिंग गॉर्जियस.

न जाने वीर को क्या सूझा पर उसके होंठो पर एक कुटिल मुस्कान सज्ज गयी. उसने गिफ्ट लेते हुए कृतिका को कस के हुग कर लिया. और बेशक, जैसे hi उसकी नज़रे कारन से मिली.

'ोूउउ fuckkkkerrrr!!!Damnnn यू वीररररर!!!' कारन मैं में चिल्लाया. उसका चेहरा देखने लायक था.

मैं hi मैं हस्ते हुए वीर ने कृतिका को चोर्रा. पर उस बेचारी के गाल शर्म के मारे पूरे टमाटर की तरह लाल पद चुके थे.

"माहाम्म्मूउऊउउउउ~" ये आवाज़ सुन्न वीर को सोचने की भी ज़रुरत नहीं थी की ये कौन था.

ये तोह उसकी लाड़ली थी. सबसे चहीती. उसकी सबसे प्यारी जूही!!

वीर (स्माइल्स) : जुहीई!!!

जूही : मामुउउउ!!!

वह दौड़ के आयी और वीर की टांग से चिपक गयी. वीर ने फ़ौरन hi उससे ऊपर को उठाया और अपने कंधो पर बैठा लिया.

सामने से निधि ma'am और श्रेया भी आ रही थी. निधि के हाथो में ध्रुव भी मौजूद था.

जैसे hi वीर ने निधि को देखा वह उन्हें देखता hi रह गया. आज काली साड़ी में वह मौजूद थी. इसके पहले उसने आज तक निधि को काली साड़ी में कभी नहीं देखा था. क्युकी निधि पहनती hi नहीं थी. कॉलेज, पड़ोस, आते जाते रास्तो में गन्दी नज़रो से बचने के लिए वह ये रंग कभी भी नहीं पहनती थी.





पर आज...! आज उसने पहना हुआ था. और वीर को समझ आ गया था की ऐसा वह क्यों करती थी. काले रंग में वह क़यामत जो लगती थी.

निधि (स्माइल्स) : हैप्पी बर्थडे वीर!!!

वीर : थैंक यू! Ma'am!!

आज भी वही खुमारी थी. चाहे कितना hi समय क्यों न बीत गया हो. निधि को देख आज भी वीर की धड़कने तेज़्ज़ होती थी. और निधि का भी यही हाल था.

वीर : आप बहुत ख़ूबसूरत लग रही हो.

सुनते hi निधि लाज के मारे नज़रे फेरर ली.

श्रेया : है न? में भी दी को कबसे यही कह रही हु की ब्लैक उनको बहुत सूट करता है और उन्हें अक्सर pehan'na चाहिए. पर ये कह रही थी की ये सिर्फ आज के लिए है.

श्रेया ने जब सच्चाई बतायी तोह निधि की शर्म और बढ़ गयी और वह किसी बच्ची की तरह सर्र झुका के कड़ी रही जैसे मानो उसकी चोरी पकड़ी गयी हो.

श्रेया : हे हे! बी थे वे! तुम्हारी तोह मस्त पार्टी हो गयी यार! हाँ?

वीर (स्माइल्स) : दबा के खाना!

श्रेया : हेहेहे ऑफ़ कोर्स! ऑफ़ कोर्स! यू क्नोव में सो वेल!

उसके बाज़ू पर हाथ मारते हुए उसने अपना गिफ्ट थमाया और वह साइड हो गयी. सिवाए जूही के. वह अभी भी अपने मामू के कंधो पर बैठी हुई थी.

उसके बाद वीर के अपने लोग आगे आये. श्वेता पहले थी.

श्वेता : V-Veer! हैप्पी बर्थडे मेरे बच्चे!!

उसने गिफ्ट थमाया और उसके गले से लग गयी.

वीर : थैंक यू!

भूमिका ने भी कुछ प्रेपर किया था. छोटा सा गिफ्ट था पर पैकेजिंग बड़ी hi प्यारी थी.

भूमिका : हैप्पी बर्थडे वीर! थिस इस फॉर यू!

वीर : ओह्ह! थैंक्स ा लोट!

सुमन और आभा भी आगे आयी. सभी को निमंत्रण उन्होंने hi तोह दिया था.

सुमन : जन्मदिन की शुभकामनाये वीर जी! ये मेरी और मेरी बेटी आभा की ऑर्डर से.

आभा : जन्मदिन मुबारक हो वीर जी!

वीर (स्माइल्स) : शुक्रिया!!!

आखिर में भावना और तेज आगे आयी. तेज ने आते hi उससे अपने गले से लगा लिया,

वीर : ये सब आपने प्रेपर किया था?

तेज : आईडिया रागिनी भाभी का था. पर प्रेपर हम सब ने किया. तुम्हे पसंद आया?

वीर (स्माइल्स) : बहुत!

तेज (स्माइल्स) : That's व्हाट मैटर्स तो में.

भावना (स्माइल्स) : हैप्पी बर्थडे बीटा.

वीर : M-Maa!

वीर खुद आगे आके भावना के गले से लग गया.

भावना : ये गिफ्ट मेरी तरफ से.

उसने एक ख़ूबसूरत सा पैकेज उसके हाथो में दिया.

तेज : और ये मेरी तरफ से.

वीर के हाथो में गिफ्ट्स hi गिफ्ट्स थे. तोह उसका ये हाल देख रागिनी ने उसकी मदद की.

गिफ्ट्स को रख उसकी नज़रे किसी को ढूंढ़ने लगी और जैसे उस शख्स की भी लम्बी उम्र थी. क्युकी तभी वह शख्स भी आ गया,

"फेव!!! पहुँच गए!!!"

वीर (स्माइल्स) : मासी!

पूर्वी : हे भगवान्! लेट तोह नहीं हुई न?

वीर : No! यू अरे जस्ट ों टाइम.

पूर्वी : थैंक गॉड!!!

वह आगे आयी. बगल से उसका पति अरुण भी साथ में था.

पूर्वी : वीर! ये तुम्हारे मौसा जी है.

वीर ने परर छुए तोह अरुण ने गले से लगा लिया,

अरुण : तुम्हे बचपन में देखा था बीटा. आज तुम इतने बड़े हो गए हो. तुम्हे देख मुझे बहुत ख़ुशी हुई.

वीर (स्माइल्स) : मुझे भी!

पूर्वी आगे बढ़ी और वीर के माथे और गालो को चूम ली,

पूर्वी : हैप्पी बर्थडे बेतु. भले hi बिलेटेड हैप्पी बर्थडे है. लेकिन तुम्हे एन्जॉय ऐसे करना है जैसे ये रियल हो okay?!

वीर (स्माइल्स) : जी! थैंक यू मासी.

उसके बाद अब केक काटना था. पर जैसे hi सब लोग सामने आये तोह देखा केक तोह अभी तक लगा hi नहीं था.

"आ गयी में~ में आ गयी... हाह हाह हाह!!" सोनाली दौड़ती हुई एकदम से आयी. उसके हाथो में केक था.

उसकी हालत देख वीर अंदर hi अंदर मुस्कुरा बैठा.

सोनाली : Y-Ye- ये लो भाई केक. हाह हाह!!!

केक रखते hi वह किसी भैंस की तरह कुर्सी पर पसर गयी. उससे अब कोई मतलब नहीं था दीं दुनिया से की क्या हो रहा था. वह बस लम्बी सासें लिए खुद को दुरुस्त करने में लग गयी.

सोनाली : O-Oye!!

वेटर : यस ma'am!?

सोनाली : कुछ ठंडा लाओ *हफ़* अभी!!!

वेटर : सूरे ma'am!

सोनाली : *हफ़* *हफ़* में जानती थी. ये सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी वाला काम मेरे hi सर्र पे थोपा गया है. *हफ़* *हफ़* अब अगर किसी ने कहा न की केक घटिया है या ये कमी है वह कमी है. कसम से... मेने उनकी हड्डिया तोड़ देनी है. *हफ़*

केक कटा, और सभी ने वीर के लिए हैप्पी बर्थडे सांग गाय. जूही अभी भी कंधो पर सवार थी. उससे मज़ा आ रहा था. निधि के लाख मनाने के बाद भी वह नीचे न आयी.

केक सच में बहुत अच्छा था. वीर को बारी बारी सभी ने केक खिलाया. और उसके बाद खाना पीना शुरू हुआ.

सब खाने में जुट गए, तोह वीर केक के कुछ पीसेज लेके सोनाली के पास आया.

वीर (स्माइल्स) : केक के लिए शुक्रिया. ये लो!

सोनाली एक पल के लिए उससे देखि फिर उसके हाथ से कटोरी लेके वह केक खाने में लग गयी.

सोनाली : केक ठीक है न?

वीर : हम्म? बहुत अच्छा है. क्यों? क्या हुआ?

सोनाली : नहीं! बस वही पूछना था.

वीर (स्माइल्स) : और अगर में कहता की उतना अच्छा नहीं है तोह?

सोनाली : तोह तुम्हारा मुँह नोच लेती.

वीर : हाहाहाःहाहा!!!

वीर हस्ते हुए उठा और वो कारन के पास गया जो कृतिका को खाना परोसने में लगा हुआ था.

कारन : यू क्नोव ये डिश बहुत अच्छी है. इससे पहले बॉईल किया जाता है और फिर-

कारन ने पूरी खाने की प्रोसेस बता डाली उस डिश की. और कृतिका भी उसकी हर्र बात सुन्न रही थी.

वीर : अबे इतनी देरर में तोह खाना ठंडा hi हो जायेगा जितनी देरर में तू ये सुनाएगा.

कृतिका : पफटत~

कारन : तुझे टांग अड़ाने के अलावा कुछ आता है?

वीर : हाँ! आता है! तेरी तरह फ़िज़ूल के बाते न करना.

कारन : हम्फ!

वीर : मिस करा नहीं आयी?

कारन (फ्रोंस) : मेने उन्हें बताया नहीं.

वीर : हँ?

कारन : Don't टेक में रॉंग पर मेने उनकी भलाई के लिए किया ये. आज कुछ इम्पोर्टेन्ट गेस्ट्स आये हुए है घर में. अगर में उन्हें बताता तोह वह यहाँ आती. बाद में डैड से उन्हें दांत पड़ती. सो ी-

वीर : It's okay!

कारन : हम्म! इसलिए में आया. मुझे खुद बहाना बना के आना पड़ा. ज़रूर रघु और जस्सी को मेरे पीछे भेजा होगा डैड ने. बूत थैंक्स तो आवर फ्रेंडशिप. वो दोनों मेरी कंप्लेंट नहीं करेंगे.

वीर : ी सी!

कारन : अगर तुम दीदी से मिलना चाहते हो तोह कल मिल सकते हो. कल वो थोड़ी देरर के लिए फ्री रहेंगी.

वीर : यस! ी दो वांट तो मीट हेर. ुरगेंटली.

कारन : कल घर चले जाना थें. में नहीं रहूँगा. I'll बे बिजी टुमारो.

वीर : सूरे!

वीर करा की खबर लेके जब एक ऑर्डर बढ़ा तोह उसके परर जम्म के रह गए. दूर बैठी निधि अपना ब्लाउज ठीक करने में लगी हुई थी. शायद उसने ध्रुव को दूध पिलाया था अभी अभी.

वीर जैसे hi उसके पीछे आया तोह आहात पाके वह पीच को हल्का सा मुड़ी,

निधि : वीर?





वीर के सामने निधि की नंगी गोरी मखमली पीठ थी. आज भी रजत वीर की आँखों में एक चुटिया hi था जो ऐसी सुन्दर बीवी को अपने हाथो खो बैठा. पर शुक्रिया उसका काम से काम वीर के पास अब एक चांस था.

वीर धीरे से एक कुर्सी पर बैठा,

वीर : आपको पता है आप क्या केहर धा रही हो आज?

निधि : मस्का लगा रहे हो वीर?

वीर : मस्का? नहीं तोह!? में तोह सच कह रहा हु.

निधि : सेशनल्स उतने hi मिलेंगे जितने में दूंगी. तुम्हारे मस्का लगाने से कुछ नहीं होगा.

वीर सोच में पद गया. फिर उससे अंदर hi अंदर हस्सी आयी. क्या उसकी ये नादान ma'am सच में ये समझ रही थी की वह यहाँ अपने सेशनल्स बढ़वाने आया है?

वीर : बिकम माइन!

*साइलेंस*

उन् दो शब्दों को सुनते hi निधि का शरीर काँप उठा. वह भौचक्की रह गयी. क्या कहा वीर ने?

वह eka-ek झट्ट से पलटी और उससे देखि,





निधि : क्या?

वीर ने पर कुछ न कहा बस मुस्कुराया.

निधि : A-Ahinda से ऐसा मज़ाक मत करना वीर.

वह कड़ी हुई और सर्र झुका के वह से निकल गयी. उसकी धड़कने बेहद तेज़्ज़ थी. वीर जानता था की निधि के खुद के दिल में क्या था. क्या वह वाक़िफ़ नहीं था? ज़रूर था. तभी तोह हिम्मत कर आज उसने ये कह दिया. अगर पहले की निधि होती तोह एक थप्पड़ रसीद देती. पर आज की निधि...! सिर्फ उससे एक छोटी मोती धमकी देके निकल गयी. क्युकी वह खुद अंदर से उस से प्यार करने लगी है. वीर को ाभाद हो चूका था. पर सही समय का इंतज़ार करना था उससे.

धूम धाम से बड़े hi अच्छे इ वीर का ये जन्मदिन गुज़रा. एक एक करके सभी अपने अपने घर को निकल गए.

बचे थे तोह सिर्फ आरोही और वीर, जो गाडी में गिफ्ट्स लाड रहे थे. तेज बाकी को लेके घर निकल गयी थी.

आरोही : तुम्हे पसंद आया?

वीर : क्या?

आरोही : आज का सेलिब्रेशन?

वीर (स्माइल्स) : बहुत!

वह मुस्कुरायी और वीर के संग गिफ्ट्स को उठा के गाडी में रखने लगी.

वह दोनों बेहद क़रीब थे,

आरोही : में ये कह रही थी की-

वीर : हम्म? क्या-

आरोही की बात sunn'ne वीर जब एकदम से पलटा तोह काम स्पेस होने की वजह से एक बार फिर,

[Oh damn!]

जो नहीं होना चाहिए था वह हो गया. दोनों के होंठ आपस में टकरा गए. आरोही के गालो का पारा ऐसे चढ़ा जैसे गर्मी में तापमान चढ़ता है. वह एकदम से पीछे हुई और दौड़ के सीधे कार के अंदर जा के बैठ गयी.

'फूऊकककककक!!!'

[...]

'प्लीज तेल्ल में. आईटी वास् अगेन ान एक्सीडेंट. राइट?'

[...]

'राइट...???'

[....]

'फूऊक्कककककक!!!!'

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

ये अपडेट शार्ट में निपटने वाला था नार्मल अपडेट की तरह. पर चुकी इसमें स्लाइस ऑफ़ लाइफ सीन्स थे. इसलिए मेने इससे अच्छे से और बड़े में लिखा. क्युकी मेरे मैं में आया की इन् सीन्स को और अच्छे से दिखाना चाहिए. तोह 2 उपदटेस और ऐसे रहेंगे जो अभी क्रिमसन अर्च के मैं प्लाट से अलग होंगे. और 2 उपदटेस के तुरंत बाद हमारा मैं प्लाट क्रिमसन फेस्टिवल का शुरू हो जायेगा. तोह लाइक्स थोक के जाने का और रेवोस रखने का. जो लोगो के लिए hi मेगा अपडेट दिया है.


धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 132 ~ सिर विज़न

अब तक :

वह एकदम से पीछे हुई और दौड़ के सीधे कार के अंदर जा के बैठ गयी.



'फूऊकककककक!!!'

[...]

'प्लीज तेल्ल में. आईटी वास् अगेन ान एक्सीडेंट. राइट?'

[...]

'राइट...???'

[....]



'फूऊक्कककककक!!!!'

अब आगे :

“आराम से दी!! आराम से!” एक ख़ूबसूरत जवान लड़की अपनी बड़ी बहिन को आहिस्ता से संभाल कर ले जा रही थी.

कार में उससे बैठाते हुए, उसने ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे आदमी को देखा और बोली, “प्रकाश अंकल, दी को संभाल कर ले जाना प्लीज!!”

प्रकाश : ये भी कोई केहनी की बात है मिस? आप निश्चिन्त रहिये.

लड़की कोई और नहीं, सोनिआ थी जो ाफी बड़ी बहिन सुहाना को हॉस्पिटल से लीव करवा के घर ले जा रही थी. परन्तु, हॉस्पिटल की कुछ फॉर्मलिटीज के लिए उससे रुकना पड़ा.

सुहाना : इसके बाद तुम सीधे मुंबई के लिए निकल रही हो. ठीक है न?

सोनिआ : में अभी जाना नहीं चाहती पर सिर्फ आपके कहने पे मुझे जाना पद रहा है.

सुहाना : बिलकुल! क्युकी अब यहाँ तुम्हारी ज़रुरत नहीं है. बिज़नेस पर ध्यान दो! तुमने वैसे hi बहुत दिन मेरी khatir-daari में वास्ते कर दिए है.

सोनिआ : एक बहिन की सेवा करना समय की वास्तगी है?

सुहाना : सोनू!! तुम ज़रुरत से ज़्यादा परवाह कर रही हो बेबी. में ठीक हु. सच में!

सोनिआ : यू वेरे शॉट! और आप कह रही हो आप सही हो?

सुहाना : अब तोह ठीक हु न पर!?

सोनिआ : बस इसलिए आपकी बात मान रही हु. वर्ण में यहाँ आपको अकेला चोरर के जाती hi नहीं.

सुहाना : अकेली कहा हु? दिव्या है न? और प्रकाश अंकल भी तोह है अब.

सोनिआ : That’s व्हाई! अन्य्वयस, अगर आपको कोई भी तकलीफ होती है तोह-

सुहाना : तोह में be-jhijak तुम्हे बता दूंगी. यही न? पता है बाबा मुझे.

सोनिआ : फाइन! Th-Then I’m लीविंग.

सुहाना (स्माइल्स) : हम्म! में भी चलती हु. I’ll के सून. Okay?

सोनिआ अगले hi शान भावुक हो, विंडो से hi सुहाना के गले लग गयी.

सुहाना : हे! मेने कहा न में जल्दी आ जयुंगी. रो क्यों रही हो?

सोनिआ : K-Kaha रो रही हु?

सुहाना (स्माइल्स) : चलो चोर्रो अब! प्रकाश अंकल देखो हस्स रहे है तुम पर. इतनी बड़ी हो गयी फिर भी बात बात पर रोने लगती हो.

सोनिआ : प्रकाश अंकल नहीं हस्ते मुझ पर. और में रो नहीं रही.

सुहाना : ठीक है मान लिया. नाउ हैप्पी?

सोनिआ : प्रॉमिस में आप जल्दी आएँगी.

सुहाना : तुम जानती हो की में प्रॉमिसेस नहीं करती सोनू.

सोनिआ : प्रॉमिस में!!!

सुहाना : सोनुउउउ!!! ज़िद्द अच्छी नहीं!

सोनिआ : तोह में भी नहीं जा रही फिर.

सुहाना : सोनू!! बात को समझो!

सोनिआ : तोह प्रॉमिस करिये. सिंपल!

सुहाना (शिघ्स) : ठीक है! प्रॉमिस तोह नहीं कर रही. बूत I’ll तरय माय लेवल बेस्ट तो के बैक. और तुमको खबर भी देती रहूंगी.

सोनिआ : फाइन! आप maan’ne वाली तोह हो नहीं. Th-Then bye! टेक केयर! Okay?

सुहाना (नॉड्स) : Mmm-Hmmm!! हैवे ा सेफ जर्नी.

न चाहते हुए भी, सोनिआ को वह से जाना पड़ा. अपनी बड़ी बहिन के लिए उसकी चिंता साफ़ देखि जा सकती थी. उसके जाते hi,

सुहाना (शिघ्स) : प्रकाश अंकल, जल्दी चलिए. दिव्या के घर पर मुझे जल्दी पहुचना है.

प्रकाश : जी!

और प्रकाश ने ड्राइवर को आर्डर देके गाडी आगे बढ़वा दी. कुछ hi पालो में वह दिव्या के आलिशान घर के बाहर थे.

प्रकाश : घर पर तोह लॉक लगा हुआ है मिस.

सुहाना : हम्म! घर की के मेरे पास है. दिव्या मुझे देके गयी थी. वह लेट नाईट आएगी. आज उससे ज़्यादा काम है.

प्रकाश : ओह्ह!

सुहाना : करा की कोई इन्फो?

प्रकाश : उनकी तोह नहीं. पर इस से याद आया की…

बोलते हुए वह अचानक, सुहाना के नज़दीक आया और उसके कान में झुकते हुए कुछ कहा जिससे सुन्न सुहाना की आँखें आश्चर्य के मारे फेल गयी.

सुहाना : क्या कहा आपने?

परन्तु, प्रकाश मौन रहा. और उसकी चुप्पी साफ़ साफ़ बतला रही थी की अभी अभी उसने जो खबर दी वह शाट प्रतिशत सच थी.

सुहाना (फ्रोंस) : अच्छा हुआ मेने सोनू को कोई प्रॉमिस नहीं दिया. आप जा सकते है.

प्रकाश : पर आप यहाँ अकेले?

सुहाना : मेरी चिंता मत करिये. मेरी एक डॉक्टर फ्रेंड आ रही है. वह मेरा ख्याल रख लेगी. आप जाइये.

प्रकाश : जैसा आप कहे. अगर मेरी ज़रुरत पड़े तोह-

सुहाना : बिलकुल! में आपको कॉल कर दूंगी.

सर्र हाँ में हिलाते हुए प्रकाश अगले hi शान वह से निकल गया. वह कुछ hi दुरी पर स्थित एक होटल में रुका हुआ था. ताकि सुहाना को अगर ज़रुरत पड़े तोह वह मदद के लिए फ़ौरन हाज़िर हो सके.

एक लम्बी आह चोररटे हुए सुहाना दरवाज़ा खोल घर के अंदर आयी. हफ्तों बाद घर की हवा लेते hi उसने एक चेन्न की सांस ली. पूरे समय हॉस्पिटल में रहने के कारण उससे हर्र वक़्त दवाइयों की hi गंध का सामना करना पड़ता था.

अंदर आते hi वह एक बिस्तर पर आराम से पेट के बल लेत गयी. अपनी पीठ को आराम देने के लिए. वह चल फिर सकती थी, पर अभी हैवी काम करने से उससे मनाही थी.

तभी दरवाज़े की घंटी बजी और जिसका उससे इंतज़ार था वह शख्स आ चूका था. दरवाज़ा खुलते hi एक सुन्दर सी स्त्री अंदर आयी,

सुहाना : इतना बड़ा बैग? यू चामे प्रेपरेड़ हँ?

वह औरत मुस्कुरायी और अपना बैग रख सोफे पर बैठ गयी.

“तुमने मुझे बुलाया, और में न औ? ऐसा हो सकता है?”

सुहाना : हम्फ! यू didn’t के फॉर में. यू चामे बिकॉज़ ी पेड यू हेअविलय.

“एहम! पैसा ज़रूरी है सुहाना. बी थे वे ये घर क्यों? होटल में क्यों नहीं?”

सुहाना : ये घर मेरी फ्रेंड का है. उसके यहाँ होते हुए अगर में होटल में रुकी तोह वह मुझे कच्चा चबा जाएगी.

वह औरत हस्सी. और फिर बिना सुहाना के कुछ कहे hi, घर में वाशरूम ढूंढ फ्रेश होने चली गयी.

उसने अपने तैयार होने में इत्मीनान से पूरा समय लिया. वह घर में ऐसे घूम रही थी जैसे मानो ये उसका hi घर हो.

“सो? क्या तुम मेरे साथ अपनी इस स्टोरी को शेयर करना चाहोगी?”

सुहाना : की मुझे बुलेट कैसे लगी? No थैंक यू! मुझे और अपने सीक्रेट्स नहीं शेयर करने.

वह फिरसे हस्सी,

“हाहाहाहा~ डिअर! में आज नहीं तोह कल तुम्हारे मुँह से वह निकलवा hi लुंगी.”

सुहाना (फ्रोंस) : जस्ट बिकॉज़ यू अरे ा साइकोलोजिस्ट, doesn’t मैं यू कैन इंटरफेरे इन माय बिज़नेस.

“में सिर्फ साइकोलोजिस्ट नहीं हु सुहाना. में तुम्हारी पर्सनल साइकोलोजिस्ट हु.”

उसने अदब से कहा. उसकी आँखों में एक आत्मविश्वास था जिसके चलते सुहाना के माथे पर शिकन की लकीरे छा गयी.

सुहाना : मरस. अशिता! I’m वार्निंग यू! आप सिर्फ मेरी पर्सनल साइकोलोजिस्ट हो. नॉट माय माँ.

अशिता हस्सी,

अशिता : हाहाहाहा~ हे!! तुम एक जोके भी नहीं ले सकती सुहाना? सीरियसली? लगता है तुम्हारे ऊपर काफी म्हणत करनी होगी मुझे.

सुहाना : हम्फ. व्हाटएवर.

अशिता : ऑलराइट! तोह शुरू करे?

सुहाना : दो व्हाट यू वांट.

अशिता मुस्कुराते हुए डाइनिंग टेबल के समीप आयी और उसने फ्रूट बास्केट में से दो संतरे हाथ में लेते हुए सुहाना को दिखाए.

अशिता : ये क्या है?

सुहाना : हँ? ऑरेंज!?

अशिता : हम्म! अब मान लो की ये दो संतरे तुम्हारी 2 पर्सनालिटीज है सुहाना.

सुहाना : …

अशिता ने एक संतरे को पूरी तरह से छीला और दुसरे को जो का त्यों रहने दिया.

अशिता : ये संतरा देख रही हो? जो छिला हुआ नहीं है.

सुहाना : हम्म!

अशिता : ये तुम्हारी बाहरी पर्सनालिटी है सुहाना. और अब ये छिला हुआ संतरा देख रही हो?

सुहाना : That’s माय इतर पर्सनालिटी?

अशिता (स्माइल्स) : एक्साक्ट्ली माय डिअर. थिस इस योर इनर पर्सनालिटी. और हमे इन् दोनों को एक करना है. इन्हे मर्ज करना है, ताकि तुम कम्प्लीटली पहले की तरह नार्मल हो सको.

सुहाना : एंड?

अशिता : एंड सो… वे विल स्टार्ट विथ आवर गेम टेस्ट अगेन.

सुहाना : ओह no! प्लीज! कुछ भी पर वह नहीं.

अशिता : व्हाट दो यू मैं ‘वह नहीं’ हँ? में पूरी तैयारी के साथ आयी हु. गेट रेडी!

अपने बैग में से उसने फटाफट एक गेमिंग कंसोल निकाला.

सुहाना : सीरियसली?

और उससे टीवी से कनेक्ट कर अशिता सुहाना को पकड़ के सामने बैठा दी. सुहाना के हाथो में रिमोट थमाते हुए उसने कहा,

अशिता : फाइटिंग गेम से शुरू करते है.

सुहाना : कही मेने अपने पैसे वास्ते तोह नहीं कर दिए इन्हे बुला के?

अशिता : शट उप! I’m थे फिनस्ट साइकोलोजिस्ट इन इंडिया. तभी तोह तुमने मुझे हिरे किया है.

सुहाना को जो सबसे ज़्यादा na-pasand था, वह यही था. एक फाइटिंग गेम खेलना. वह गेम्स में बेहद बेकार थी. अशिता उससे जान बूझ के ये गेम्स खिलवाती थी, जिसके चलते सुहाना लगातार उन् गेम्स में हारती थी.

जिस वजह से उसके अंदर फ़्रस्ट्रेशन बिल्ड उप होता था, और उसकी स्प्लिट पर्सनालिटी गुस्से के चलते बाहर आ जाती थी.

आज भी अशिता का इरादा कुछ ऐसा hi था. पर,

सुहाना : हे! लिटेराल्ल्य, 20 राउंड्स हो चुके है और सिंगल मैच भी नहीं जीता है मेने. Let’s जस्ट स्टॉप okay?

जब सुहाना ने ये कहा, तोह अशिता हैरानी के मारे उठ के कड़ी हो गयी. उसका चेहरा देखने लायक था.

सुहाना : K-Kya हुआ?

अशिता ने उससे अगले hi पल जोरर से पकड़ के झुंझलाया.

अशिता : तुम मेरे अलावा भी किसी को दिखा रही हो? हँ?

सुहाना : अहह! Wh-What? N-Noooo!

अशिता : सच सच कहो!

सुहाना : M-Mein सच कह रही हु.

वह हैरत में पीछे हुई,

अशिता : I-Impossible!

सुहाना : क्या हुआ है?

अशिता : सच सच कहो सुहाना. T-Tum- तुम किसी से मिली हो?

सुहाना : आप कह क्या रही हो मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा.

अशिता : सुहाना, थिस इस वैरी इम्पोर्टेन्ट. हमने पहले भी ये टेस्ट्स किये हुए है और तुम्हे पता है तुम कैसे रियेक्ट करती थी?

सुहाना : !!!?

अशिता : तुम गुस्से में आ जाती थी. तुम्हारी दूसरी पर्सनालिटी एक्टिव हो जाती थी. तुम रेमोटेस को इधर उधर फेक देती थी, गालिया बकने लगती थी और सब कुछ तहस नहस कर देती थी. कुछ याद आया?

सुहाना : Th-That’s-

अशिता : पर अब देखो अपने आप को. तुम्हे ज़रा भी गुस्सा नहीं आया. तेल्ल में होनेस्त्ली. तुम किसी नए शख्स के कांटेक्ट में आयी हो न? उसी ने तुम्हे इन्फ्लुएंस किया है न? क्युकी में मान hi नहीं सकती की बिना उसके तुम में अंतर आ जाए. कहो! कौन है वह?

उसके जोरर देने पर अपने आप सुहाना का ध्यान उस एक शख्स पर चला गया. और उस लड़के की छवि उसके मैं में आयी.

वीर!!

उसके बारे में सोचते hi सुहाना के गाल शर्म से लाल हो गए. वही तोह था. वही तोह था एक जिसने उसके गुस्से पर काबू पाया था. क्या उसके hi कारण वह बदल रही थी?

अशिता एक माहिर आब्जर्वर थी. एक पल में भांप गयी वह की ये हाय किस लिए थी.

अशिता : ओह माय गॉड!! अरे यू हैविंग ान अफेयर सुहाना?

सुहाना (पानिक्स) : Wh-What? No वैयय्य! शट उपपपपप!! एंड don’t टॉक नॉनसेंस.

अशिता : तुम मुझे बेवक़ूफ़ नहीं बना सकती. जल्दी बताओ!

सुहाना (ब्लशेस) : वो-

अशिता : हाँ! हाँ! कहो भी!

बेसब्री से आगे बढ़ वह सुहाना की ऑर्डर झुकी. उस अनजान शख्स का नाम ज़ाहिर होने hi वाला था. पर, अगले hi शान-

सुहाना : न्यूऊऊ! यू इडियट! गेट लॉस्ट~

सुहाना ने बगल में रखा कुशिओं उठा के सीधे अशिता के मुँह पे दे मारा,

“ुघठिआआआ~” वह धड़ाम से सोफे पर गिरी.

सुहाना अपनी पलके झुकाये, सुर्ख लाल चेहरा लिए वह से उठ के भाग गयी.

‘ी कन्नोत तेल्ल एनीवन.’

***


मुंबई

Ragini’s हाउस

मॉर्निंग ~ 9:12 ऍम

सुबह सुबह यहाँ वीर के घर में भी शोरगुल मचा हुआ था.

तेज : H-Hey! में खोल रही हु न, तोह आपको भी यही क्यों खोलना है?

भूमिका : क्युकी लास्ट वाला तुमने मुझसे छिना के खोला. तोह ये वाला में खोलूंगी.

तेज : Y-You-

भूमिका : दो मुझे!

तेज : आप मुझे गुस्सा दिला रही हो! ुर्घ~

एक बार फिर दोनों आपस में झगड़ने में लगी हुई थी. वीर को दिए गए गिफ्ट्स खोल रही थी वह. और उस में भी उनकी छीना झपटी चालु थी.

वीर जैसे hi नीचे आया वह ये नज़ारा देख ताजुब में रह गया.

वीर : वोह~

तेज : वीर! फाइनली! इनसे कहो की ये तुम्हारे गिफ्ट्स को टच न करे.

भूमिका : अहह! क्यों? में क्यों नहीं?

तेज : क्युकी ये मेरे भाई के है. और में हु यहाँ इन्हे ुँवरप करने के लिए. आप बच्चियों की तरह बेहवे क्यों कर रही हो?

भूमिका : में? में बच्चियों की तरह? में तुम्हे सीखा रही हु. यू अरे ओपनिंग थम थे रॉंग वे. इन्हे ऐसे नहीं खोला जाता. यू हैवे तो बे केयरफुल.

तेज : ओह शट उप! मुझे आपसे नहीं jaan’na गिफ्ट्स कैसे खोलते है. गिफ्ट्स खोलने के लिए hi होते है. जैसे चाहे खोलो.

भूमिका : नूवो~

तेज : अर्घ! चोर्रो! चोर्रो वर्ण गिर जायेगा.

भूमिका : No! तुम चोर्रो!

इनकी खींचा तानी में वह गिफ्ट का रेपर दोनों ऑर्डर से फटा और गिफ्ट उछालते हुए नीचे गिर गया.

तेज : अह्ह्ह्ह!

भूमिका : !!!!

वीर : आप दोनों!!!

तेज : S-Sorry वीर! बूत ये सब इनकी वजह से. इनकी hi गलती है.

भूमिका : क्या? N-Nahi! वीर! में-

वीर : दोनों जनन! शांत!

उसकी एक तेज़्ज़ आवाज़ में दोनों दर्री हुई बिल्लियों की तरह शांत होक रह गयी.

आभा : अच्छा हुआ आप आ गए. वर्ण आज न जाने कितने तोहफे टूट जाते.

वीर (शिघ्स) : सीरियसली! आप दोनों भी! ओह्ह??

झुकते हुए वीर ने आरोही के द्वारा दिया गया गिफ्ट उठाया.

उसमे कफलिंक्स का सेट मौजूद था. उन्हें देखते hi वीर के होंठो पर मुस्कान सज्ज गयी.

‘आरोही दी! अस एक्सपेक्टेड ऑफ़ हेर. कितने ध्यान में रख के ये गिफ्ट दिया उन्होंने.’

वह उठा और उन् दोनों को देखा.

वीर : अन्य्वयस! में कुछ काम से जा रहा हु. आप गिफ्ट्स खोल सकती हो बूत don’t यू डरे फाइट. Okay?

तेज : कहा जा रहे हो तुम?

वीर : एक ज़रूरी काम है.

तेज : क्या मुझे नहीं बता सकते?

वीर : बिज़नेस रिलेटेड है.

तेज : O-Okay!

भूमिका : वीर! मुझे भी तुमसे एक ज़रूरी बात करनी है. अकेले में!

तेज : हाआआअह्ह्ह्हह???

भूमिका : तोह प्लीज! अगर टाइम मिल सके तोह~

वीर : सूरे!

भूमिका : थैंक यू!

तेज : व्हाटट? आपको क्या बात करनी है उस से अकेले में? हँ?

पर वीर के पास समय नहीं था उनकी tu-tu me-me sunn’ne का. आज उससे एक सबसे अहम् काम निपटाना था.

करा का मिशन!!!

वीर नहीं जानता था वह ये कैसे करने वाला था. पर आज कैसे भी करके वह कुछ न कुछ हासिल करना hi चाहता था.

कारन ने कहा था आज करा फ्री रहेगी. वीर ये मौका अपने हाथ से नहीं जाने दे सकता था.

इसलिए उसकी बिल्डिंग के बाहर आके hi वह ृक्क गया. उससे याद था की ये घर नहीं, पूरी की पूरी इमारत थी.

बाहर धेरर साड़ी सिक्योरिटी तैनात थी. क़रीब पॅहुचते hi गार्ड्स उस से सवाल पूछने में लग गए.

वीर ने कई बार बताया की वह करा को जानता है और करा उससे, पर ये बात गार्ड्स ने न मानी.

और अभी वह कारन को कॉल कर उन्हें प्रूफ देने hi वाला था जब ऊपर से नीचे आते एक शख्स ने वीर को पहचान लिया.

“उससे अंदर आने दो!” गार्ड्स ने जैसे hi ये सुना, वह सभी पीछे हट गए.

सामने जस्सी था!

वीर : ओह्ह! हे!

जस्सी : आज अचानक यहाँ?

वीर : में मिस करा से मिलना चाहता था.

जस्सी : क्या में पूछ सकता हु क्यों?

वीर : बिज़नेस से रिलेटेड.

जस्सी कुछ देरर तक उससे देखता रहा, फिर उसने वीर को रास्ता देते हुए कहा,

जस्सी : मिस ऊपर है अपने रूम में. तुम्हे पता है न कौनसी फ्लोर पे है उनका रूम?

वीर : हाँ! में पहले एक बार आ चूका हु.

जस्सी : गुड! यू कैन जो!

वीर : थैंक्स फॉर थे हेल्प!

जस्सी ने कोई जवाब न दिया. बस हाँ में गर्दन हिला के वह आगे बढ़ गया.

और इधर एंट्रेंस की एक्सेस पाते hi वीर लिफ्ट में चढ़ करा के रूम वाले फ्लोर पर चल दिया. पिछली बार जब वह आया था तोह जूलिया ने उससे बताया था की करा को लिफ्ट्स पसंद नहीं है. इसलिए उसका रूम फर्स्ट फ्लोर पर hi बनवाया गया था. वीर ने तभी उस इन्फो को अपने दिमाग में स्टोर कर लिया था.

‘फ़क! आईटी स्टिल सुरपरिसेस में एवेरीतिमे. जस्ट हाउ मैसिव थिस हाउस इस?’

[Ye ghar nahi hai Master. It’s a fucking skyscrapper.]

‘यू अरे राइट!’

फ्लोर पर आते hi, उससे कई चीफ्स लम्बी लम्बी ट्राली ले जाते हुए दिखाई दिए. तोह कही कुछ मैड्स सामान लेके इधर से उधर हो रही थी.

‘कितने लोग रहते है यहाँ?’

[Family me sirf teen log hai. Par uss se zyaada workers hai yaha. Ajeeb hai na?]

‘बेहद!’

[Itni badi building hai. Itni space hai. Fir bhi ek loneliness hai iss building me. I can feel it. Aisa lagta hai kabhi iss building ne parivaar ki khushiyaan nahi dekhi.]

‘तुम सही हो पारी! और इसलिए, मुझे उन्हें ठीक करना hi होगा.’

[Kehna asaan hai Master!]

‘हम देखते है हम क्या कर सकते है.’

चलते चलते वह जैसे hi कमरे के बाहर पहुचा तोह दरवाज़े को नॉक किया. पर नॉक करते hi दरवाज़ा अपने आप खुल गया.

संकोच में क़दम बढ़ाते हुए वह अंदर प्रवेश किया तोह उससे कोई भी दिखाई नहीं दिया.

‘स्ट्रेंज!’

कमरा इतना बड़ा था की उससे समझ नहीं आ रहा था की ये कमरा hi था या हॉल?

“मिस करा?” आवाज़ देते हुए जैसे hi वह एक ऑर्डर मुदा तोह-

“O-Ohhh!!!”





उसके सामने सफ़ेद बाथरोब डाले वह गीले बालो में कड़ी हुई थी. करा!! उसकी पेनी नज़रे वीर पर hi तिकी हुई थी. और उसके बगल से कड़ी जूलिया, hair-dryer लिए उसके बाल सुखाने में लगी हुई थी.

वीर : ी-

जूलिया : ओह्ह! It's यंग मास्टर वीर!

वीर को पुनः देख जूलिया चहक उठी. एक बार फिर उसके मुँह से वह होनोरिफिक्स सुन्न, वीर को अजीब लगा. ये जूलिया उससे यंग मास्टर कहके सम्बोधित क्यों करती थी? पर लास्ट टाइम उसने वीर से परमिशन ले ली थी उससे ऐसे पुकारने की. तोह अब भला वह कैसे मन कर सकता था.

वीर : उम्! H-Hello! ी थिंक ी चामे ात थे रॉंग टाइम.

वह मुड़ने के लिए हुआ तोह करा ने उससे पुकारा,

करा : वेट!!

वीर : ???

करा : व्हाई अरे यू लीविंग?

वीर : उम्!? आप रेडी हो रही हो. में बाद में आ जाता हु.

करा : I’m आलरेडी दोने विथ थे बाथ. यू कैन स्टे!!!

वीर : O-Ohh!!

जूलिया (स्माइल्स) : प्लीज, हैवे ा सीट यंग मास्टर.

वीर : सूरे!

एक सोफे पर विराजमान होते हुए वीर अपने आप hi करा को तिरछी नज़रो से देखने लगा. वह बेहद ख़ूबसूरत थी. पता नहीं क्यों, पर उससे देखते hi एक अजीब सी फीलिंग आती थी उसके दिल में. जिससे वह समझ नहीं पा रहा था. क्या थी ये अनुभूति?

करा का और hi अलग था. वह जैसे खींचता था वीर को अपनी ऑर्डर.

करा जब तैयार हुई तोह वह आके वीर के सामने बैठ गयी. और इधर जूलिया फ़ौरन hi वीर के लिए कॉफ़ी बनाने लगी.

*डिंग*

[Julia’s favorability : 45]

[Mujhe laga aap dekhna chaahte the.]

‘ओह्ह! इनडीड! थैंक्स पारी!’

करा : कारन ने बताया था तुम आओगे. सो?

करा ने उसका ध्यान पुनः खींचा. वीर उठाते हुए उसके सामने आया.

वीर : ी थिंक मेने डीडे कर लिया है.

करा : ओह्ह? कॉन्ट्रैक्ट के बारे में? थे ओने वे तालकेद अबाउट एअरलिएर?

वीर : हाँ!

करा : में सुन्न रही हु.

वीर : में रेडी हु. ी मैं मेने सोच लिया है मुझे किस वे में आगे बढ़ना है.

करा : तेल्ल में!

वीर : वेल! आपने कहा था में दो तरीके से आगे बढ़ सकता हु. या तोह में शुरू से एक बिल्डिंग को बनवौ. और फिर अपना बिज़नेस स्टार्ट करू. या फिर अबंदोनेद बिल्डिंग्स को खरीद उन्हें रेनोवेट करवौ और फिर अपना बिज़नेस स्टार्ट करू.

करा : एंड यू चोसे थे सेकंड वे. राइट?

वीर (सुरप्रीसेड) : That’s-

करा : व्हाई थे सुरप्रीसेड फेस? में जानती थी तुम यही वे चूसे करोगे.

वीर : कैसे?

करा : वाइज पीपल थिंक ालिके वीर!

कहते हुए उसने पलके उठा के वीर को देखा.





बुद्धिमान लोग एक सा सोचते है. और ये बात सत्य थी.

करा : यू कैन सीट डाउन! ी won’t चार्ज यू फॉर तहत.

वीर : S-Sure!

करा : स्क्रैच से बिज़नेस स्टार्ट करने के लिए, प्रॉपर्टी का एक अच्छी लोकेशन में होना ज़रूरी है. थें, तुम उस लैंड पर बिल्डिंग को स्क्रैच से बनवाओगे. आईटी विल टेक टाइम, मनी, एंड योर हार्ड वर्क अस वेल.

वीर : राइट!

करा : थें स्टाफ सिलेक्शन, प्रमोशन, अद्वेर्तिसेमेन्ट्स, मेंटेनेंस, ेट्स. ये करना होगा. तब जाके बिज़नेस इनिशियल स्टेज पे आएगा.

वीर : हम्म!

करा : सो उलटिमटेली, थिस इस टाइम कोन्सुमिंग.

वीर : एक्साक्ट्ली!

करा : बेटर ऑप्शन ये है की तुम not-in-use बिल्डिंग्स को टारगेट करो.

वीर : यस!

करा : बिल्डिंग तुम्हारी नहीं रहेगी तोह तुम्हे बिज़नेस फ्लॉप होने की उतनी टेंशन नहीं रहेगी. यू जस्ट हैवे तो रेनोवेट आईटी.

वीर : पर स्टाफ का क्या? अद्वेर्तिसेमेन्ट्स?

करा के होंठो पर एक हलकी सी मुस्कान आयी,

करा : जब एक पुरानी बिल्डिंग को ओन किया जाता है, तोह उसके साथ उसके बेनिफिट्स भी आते है वीर.

वीर : यू मैं-

करा : एक पुरानी बिल्डिंग पहले से hi पब्लिक की नज़रों में रहती है. उन्हें बस ये पता लग्न चाहिए की अब उस जगह पर कोई और बिज़नेस शुरू हो चूका है. और ऐसे में अद्वेर्तिसेमेन्ट्स की रिक्वायरमेंट्स ज़्यादा नहीं रहती.

वीर : क्युकी लोग चलते फिररते hi जान सकते है की कुछ नया यहाँ खुलने वाला है.

करा : करेक्ट.

वीर : पर स्टाफ?

करा : स्टाफ सर्च करना इजी नहीं?

वीर : ी थिंक ये कॉम्प्लिकेटेड होता है.

करा : बूत नॉट इन योर केस.

वीर : कैसे?

वीर के सवाल पूछने पर करा फिर मुस्कुरायी. अब ये मुस्कराहट थी? या फिर बस होंठो का ऊपर उठना? ये कहना मुश्किल था. जूलिया इतने में वीर के हाथो में एक कॉफ़ी का कप थमाते हुए उसके बगल से कड़ी हो गयी.

वीर : थैंक यू!

जूलिया (स्माइल्स) : यू don’t हैवे तो थैंक में, यंग मास्टर! It’s माय प्लेअसुरे.

करा : ये इजी है वीर!

वीर : हम्म?

करा : स्टाफ सिलेक्शन! यू कैन लीव तहत तो में.

वीर : O-Ohh!

करा : सो? क्या बिज़नेस सोचा है?

वीर : क्लोथ्स का!

करा (फ्रोंस) : अरे यू सूरे?

वीर : यस!

करा : तुम्हे क्या लगता है? ये टॉप कितने का होगा? थे ओने व्हिच I’m वेअरिंग.

वीर : प्रॉबब्ली ा फ्यू ठोसँदस?

करा : जूलिया? हाउ मच वास् थिस ओने?

जूलिया : 1745$ मिस!

इस से पहले की वीर मैं में कैलकुलेट करता, पारी ने पहले hi उसके सामने रिजल्ट्स रख दिए.

[Master! Uska top 1 lakh, 42 thousand, 5 hundred, 49 rupees ka hai.]

जब वीर ने कीमत सुनी, तोह उसके गले से कॉफ़ी बड़ी hi मुश्किल से अंदर गयी. भले hi वह क्रोरेपति कहलाने लगा था. पर एक लाख के ऊपर का साधारण सा कपडा देख उसका मैं शांत न रह पाया.

करा आगे बढ़ उसकी ऑर्डर झुक के बैठी,

करा : व्हेन ी बुय क्लोथ्स, ी don’t सी प्राइस टैग्स. ी ओनली लुक फॉर 3 थिंग्स. क्वालिटी, कम्फर्ट एंड लास्तलय, वो मुझ पर जांच रहा है या नहीं.

वीर : पर एवरेज पीपल इतनी महंगी ड्रेसेस नहीं लेते राइट?

करा : अगर तुम्हे ऐसे छोटे बिज़नेस करने है थें I’m सॉरी वीर. ी won’t इन्वेस्ट. लुक फॉर समवन ेल्स. प्रॉबब्ली सोनिआ!

[Oooooooooooooooo~]

वीर की बॉहे एक चिंतन में सिकुड़ी. करा ट्रूली वास् ा प्रोफेशनल लेडी. उसकी अपनी hi एक क्लास थी.

वीर : फाइन थें! में आपकी हेर टर्म्स से रेडी हु.

करा : No! यू नीड तो अंडरस्टैंड थिस फर्स्ट. आंसर माय क्वेश्चन.

वीर : पूछिए!

करा : क्या तुम्हारा क्लॉथ ब्रांड in-future मुझे ऐसी शामे सटिस्फैक्शन प्रोवाइड कर सकता है? क्या तुम मुझे इस ब्रांड से हट के अपने ब्रांड के क्लोथ्स pehen’ne के लिए मजबूर कर सकते हो? िफ़ यस, थें कोंग्रटुलतिओन्स. वे हैवे ान एग्रीमेंट. िफ़ no, थें… यू क्नोव थे आंसर.

वीर : यस!

करा अगले hi पल अपनी जगह से उठी,

करा : गेट रेडी थें! वे अरे लीविंग!

वीर : हँ?

कहते हुए वह अंदर चली गयी.

वीर : वेयर दीद शी जो?

जूलिया (स्माइल्स) : तो चेंज हेर क्लोथ्स.

वीर : अगेन?

जूलिया (स्माइल्स) : यस! अगेन!

करा एक बार फिर कपडे बदल हाज़िर थी. वीर उसकी हर्र अदा पर लट्टू होता जा रहा था.

उससे साथ में लेते हुए वह नीचे की ऑर्डर गयी. जस्सी पहले से hi वह मौजूद था,

जस्सी : कही जा रही है मिस?

करा : यस! तुम्हे फॉलो करने की ज़रुरत नहीं. I’m गोइंग फॉर ा शार्ट राइड.

जस्सी : J-Jii!

वीर चुप चाप खड़ा हुआ था. अगले hi पल बेसमेंट से एक लक्ज़री मेरसेदेज़ कार बाहर आयी और उनके सामने आके कड़ी हो गयी.

करा : लीव! में खुद ड्राइव करुँगी.

उसकी बात मानते हुए ड्राइवर तुरंत hi बाहर निकल गया.

जस्सी : M-Miss? आप ड्राइव क्यों कर रही है?

करा : क्युकी में ड्राइव करना चाहती हु.

जस्सी : ठीक है! संभाल के चलिएगा.

जस्सी को बिना जवाब दिए, करा अंदर बैठी. और वीर उसके बगल वाली सीट पर बैठ गया. कुछ hi पालो में वह दोनों बाहर थे.

‘माफ़ कीजिये मिस! पर में अपनी ड्यूटी नहीं चोरर सकता.’

मैं में जस्सी सोचते हुए अपनी बाइक उठाया और उनके पीछे पीछे चल दिया.

वीर : हम कहा चल रहे है?

करा : तुम्हे बिल्डिंग नहीं देखनी?

वीर : ओह्ह! बिल्डिंग देखने. सूरे!!

वीर बगल से करा के हुस्न को देख उसमे खोया हुआ था. तभी उससे एक वाइल्ड थॉट आया.

‘मेने इनके स्टैट्स कभी चेक नहीं किये. पारी?’

[Alright!]

और अगले hi शान-

*डिंग*

जैसे hi करा के स्टैट्स सामने आये, वीर की आँखें फटी की फटी रह गयी. क्युकी,

[Kaera’s stats :

Strength : 52 ⬆️

Intelligence : 150 ⬆️

Agility : 48 ⬆️

Endurance : 60 ⬆️

Appearance : 145 ⬆️]

वीर की नज़रे इंटेलिजेंस पर तिकी हुई थी. 150 का इंटेलिजेंस. उसकी बोलती बंद हो चुकी थी. और ऊपर से 145 का अपीयरेंस. ये किस प्रकार के अंक थे?

‘वेट! Y-Ye ार्रोस? ये ार्रोस किसलिए?’

[Uska matlab ye hai ki abhi woh stats aur badh sakte hai. Apni limit par nahi pohuche hai.]

वीर के मैं में एक विस्फोट सा हुआ जैसे.

करा : हम्म? व्हाट इस आईटी?

जैसे hi वह मुद के उससे देखि, वीर उसकी सुंदरता में hi खो गया.





वीर : अहह! N-Nothing!

‘She’s तू गॉर्जियस.’

[How many things did she sacrifice to achieve this level?]

‘उनके सारे इमोशंस पारी! एक रोबोट की तरह काम करते रहने पर hi आप इस लेवल पे आते हो.’

[We must cure her!]

करा जगह जगह गाडी ले जाते हुए वीर को तरह तरह की बिल्डिंग्स दिखवा रही थी और उनका पूरा ज्ञान देने में लगी हुई थी.

जिसकी वजह से वीर ने एक लोकेशन डीडे भी कर ली.

करा : आस्क कारन फॉर हेल्प! वो real-estate में एक्टिव है. बिल्डिंग के ओनर से वो तुम्हारी बात ैसिलय करवा देगा. थें के तो में. We’ll सिग्न थे कॉन्ट्रैक्ट.

वीर : Okay! थैंक यू!

करा : थैंक यू? फॉर व्हाट?

वीर : आपने इतनी मदद की, इसलिए.

करा कुछ न बोली. बस ड्राइव करती रही. वो एक रास्ते से गुज़र रहे थे जब अचानक hi गाडी की रफ़्तार अपने आप काम हो गयी. करा खिड़की के बाहर कही देख रही थी.

धीरे धीरे गाडी पूरी तरह से रुक गयी और उनके बगल से एक बेहद बड़ा सा घर बना हुआ था. घर पुराना था. ऐसा लग रहा था उससे कई सालो से खाली चोर्रा गया था.

वीर ने जैसे hi उस घर को चेक किया तोह एक बार फिर आश्चर्य में रह गया. वह करा का पुराना घर था.

कार से उतर वह आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ़ी. घर के बाहर अभी भी एक गार्ड मौजूद था. शायद उसके पिता ने इस गार्ड को यहाँ घर की रखवाली के लिए रखा हुआ था. ताकि कोई घुसपैठ इसका फायदा न उठाये.

गार्ड करा को देख अपने आप सलूट मार खड़ा हो गया.

गार्ड : मैडम!

करा बिना उस पर ध्यान दिए hi चल दी. उसके क़दम khud-ba-khud आगे बढ़ रहे थे. वह जैसे एक ट्रांस में जा चुकी थी. वीर ने उसका पीछे किया.

करा : थिस वास्-

वीर : योर ओल्ड हाउस?

करा : Y-Yes!

अपने पर्स से उसने एक छवि निकाली, और ताले पर लगा के वह ताला खोल दिया.

बिना वीर का इंतज़ार किये hi वह अंदर घुस गयी. अंदर धुल मौजूद थी. सामान कुछ कुछ अभी भी रखा हुआ था.

करा हर्र एक हिस्से को बड़े ध्यान से देख अंदर जाती जा रही थी. वह सीढिया जिनसे बचपन में वह उतरती और चढ़ती, वह हॉल जहा बैठ उसका परिवार साथ होता था, वह स्टडी स्पेस जहा एक के बाद एक प्रोफेस्सोर्स आके उससे घंटो तक पढ़ाते.

उससे काफी कुछ याद था. वह ऊपर को बढ़ी और एक फेमिलिअर जगह आते hi वह ृक्क गयी.

सामने गिलास विंडो थी एक जहा से नीचे का पूरा नज़ारा देखा जा सकता था. घर का लॉन यहाँ से साफ़ दिखाई पड़ता था.

और उससे याद आया, यही वह जगह थी जहा से वह अपने छोटे भाई को बाहर खेलते हुए देखा करती थी. और वह अंदर hi एक चिड़िया की तरह पिंजरे में बंद रह जाय करती थी.

वीर बारीकी से हर्र हिस्से को देख रहा था और उन्हें चेक भी कर रहा था. कुछ हिस्से काले पड़े हुए थे. ऐसा लग रहा था जैसे घर में कभी आग भी लगी हो.

वीर : क्या घर में आग लगा थी?

करा : Y-Yes!

वीर : ???

करा : 3 ट्राजेडीएस हप्पेनेड हेरे. That’s व्हाई माय फादर लेफ्ट थिस होम.

वीर : कैन यू शेयर?

करा : मेरी माँ- शी- शी डीएड हेरे! थें तेरे वास् फायर तू. वह- वह आग-! ी रेमेम्बेर! और वह एक-

वीर : ?

करा : मर्डर! गार्डन में! मुझे याद है! तेरे वास् ब्लड! क्रिमसन रेड इन कलर-

करा को कुछ पल अकेला चोरर वीर इधर उधर चीज़ें टटोलने लगा. उससे अभी 10 मिनट hi हुए थे जब उसने एक सनसनी खेज खोज की.

एक कप्बोर्ड को खिसकाते हुए उससे दीवार में कुछ नज़र आया. एक प्रकार का ड्रावर था. बाहर उससे खींचते hi उसके सामने एक डायरी प्रकट हुई.

उससे खोल जैसे hi उसने अंदर देखा, उससे एक और बड़ा झटका लगा.

‘पारी!’

[Yes?]

‘दो आईटी!’

[Do what? Wait! Kahi aap? No! No! Aap aisa nahi kar sakte.]

‘मेने कहा न. दो आईटी!’

[But Master- Finally ab jaake aap apne pendant ka raaz jaan sakte ho. Itna bada raaz jaan’ne ka mauka hai aapke paas. Kya aap sach me?]

‘मिस करा से बढ़ कर नहीं है पारी. ी कन्नोत लूज़ हेर.’

[B-But- Aisi skill dobaara nahi milegi master.]

‘पारी!!’

[Theek hai toh!]

*डिंग*

[Seer Vision has been used.]

करा को उसके बाद जल्द से जल्द घर वापस चोरर वीर अपनी हिम्मत बांधे घर लौटा. घर में घुसते hi वह लड़खड़ा के अपने कमरे में गया और फिसल के अपने बिस्तर पर गिर वह बेहोश हो गया.

[Maaasterrr!!!]

***

3 दिन गुज़र गए. करा के मिशन के लिए अब सिर्फ दो दिन शेष थे. वीर दुबारा करा से मिलने गया.

और उस से मिलते hi उसने एक डायरी करा को थमा दी.

करा : क्या है ये?

वीर : लास्ट टाइम आपके पुराने घर से मिली थी. आपको देना भूल गया था. अभी याद आया तोह ले आया. सॉरी!

करा : ओह्ह!

वह उससे थाम जैसे hi पढ़ना शुरू की, उसके माथे पर चिंता की लकीरे बन्न गयी.

वीर को यु अकेला चोरर वह एक कमरे में घुसी और खुद को लॉक कर ली.

वीर ने अपना काम कर दिया था. अब बस उससे नोटिफिकेशन का इंतज़ार था. पर वह ये नहीं जानता था की करा 2 दिनों से उसी कमरे में खुद को बंद करके रखे हुए थी.

जब फाइनली, मिशन की टाइम लिमिट समाप्त हुई तोह वीर को एक और बड़ा झटका लगा. क्युकी जिस नोटिफिकेशन का वह इंतज़ार कर रहा था वह तोह आया hi नहीं. मिशन ख़तम हो चूका था तोह नोटिफिकेशन तोह आना hi चाहिए था. पर वो नहीं आया,

और जो आया, उससे देख वीर के होश उड़द गए.

*डिंग*

[Kaera’s favorability has dropped to 50.]

‘Wh-What???? N-Noooooo!!’

.

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

एक अपडेट और है अगला वाला, जिसमे कुछ और दिखाया जायेगा. और उसके बाद से हम सीधा क्रिमसन फेस्टिवल पर लग जायेंगे. इस अपडेट में प्रकाश और सुहाना का एक कनवो था जिससे मेने अभी सुबह hi हटा दिया है. मॉडरेशन किया है फिरसे. तोह देररि के लिए माफ़ी चाहता हु. बाकी, लाइक्स ठोकने का और रेवोस रखने का.


धन्यवाद!
 
अपडेट - 133 ~ लबीरिंथ एंड इनविटेशन

अब तक...

मिशन ख़तम हो चूका था तोह नोटिफिकेशन तोह आना hi चाहिए था. पर वो नहीं आया,

और जो आया, उससे देख वीर के होश उड़द गए.

*डिंग*

[Kaera’s favorability has dropped to 50.]

‘Wh-What???? N-Noooooo!!’


अब आगे...

वीर ने अपनी आँखें बंद की या यु कहे की उसकी आँखें अपने आप hi बंद हो गयी. उसके शरीर को एक झटका लगा और उसकी कांशसनेस ड्रिफ्ट होक कही और hi चली गयी.

‘ये- ये कहा हु में?’

उससे कुछ भी दिखाई नहीं दिया. चारो ऑर्डर अन्धकार hi अन्धकार फैला हुआ था. ऐसा लग रहा था मानो वह अँधेरे में डूबे किसी स्पेस में हो.

‘P-Pari? परीई???’

[M-Maaste…. r…. Maaste….. r…. K…y….a a…a…p m… u…. j… h… e……………….]

‘पारी?????’

जो आवाज़ वीर को पारी की सुनाई दे रही थी, वह धीरे धीरे गायब हो गयी. और एक घनघोर सन्नाटा छा गया. वह न hi कुछ सुन्न पा रहा था और न hi कुछ देख पा रहा था.

वह अपने बदन के अंगो को भी महसूस नहीं कर पा रहा था.

एक भयानक घबराहट जन्म ली.

‘परीइइइइइइइ????????’

पारी को पुकारने का कोई फायदा न हुआ. ऐसा लगा जैसे वह पूरी तरह से उस से अलग हो चूका था.

‘कलम डाउन वीर! कलम योरसेल्फ डाउन!’

उसने एक लम्बी सांस ली और खुद को शांत किया. अपनी तेज़्ज़ धड़कनो को थोड़ा थाम उसने ध्यान लगाया.

‘पारी मुझे सुन्न नहीं पा रही. और न hi पारी को में. इसका मतलब हमारे कनेक्शन के बीच कुछ ऐसा है जो हमे एक दूसरे से बात करने से रोक रहा है.’

उसने फ़ौरन hi अपनी स्थिति का आकलन किया. उससे याद आया की चाँद पालो पहले वह पारी को निर्देश दे रहा था.


‘दो आईटी पारी!’

[P-Par Master!? Finally aapke paas mauka hai apne pendant ke raaz ke baare me jaan’ne ka. Aisi skill dobaara nahi milegi.]

‘मेने कहा न! दो आईटी!’

[P-Par-]

‘परीई!!!!!!’

[Theek hai toh!]

*डिंग*

[Seer Vision has been used.]


यही हुआ था. हाँ! यही तोह हुआ था.

वीर को याद था अच्छे से. उससे ये भी याद आया की पारी ने सिर विज़न के बारे में क्या बताया था.

[Seer Vision ~

Description : Grants the vision of a seer. The skill allows the user to instantly witness the past related to anything. Beware! Mental pain is guaranteed. If the user fails to reclaim the memory, skill will terminate automatically.]

अब सब कुछ सेंस बना रहा था. ये वह लीजेंडरी स्किल थी जो उससे किसी भी वास्तु से सम्बंधित उसका अतीत पूरा का पूरा दिखा सकती थी.

एक प्रकार से ये उसके ‘चेक’ फंक्शन की तरह hi थी. पर उस से कही ज़्यादा आधुनिक. जो चेक फंक्शन नहीं देख सकता था वह सिर विज़न देख सकता था.

अब उससे समझ आया की क्यों पारी इतने पीछे लगी हुई थी की वह इससे अपने पेंडंट पर इस्तेमाल करे. अगर उसने ऐसा किया होता, तोह पेंडंट का राज़ एक झटके में खुल के सामने आ जाता. लेकिन क्या पेंडंट का राज़ मिस करा से ज़्यादा ज़रूरी था?

वीर के लिए ~ नहीं!

और इसलिए, उसने ऐसी स्किल को डाव पर लगाने से पहले एक बार भी नहीं सोचा.

दिक्कत यही थी की इसके इस्तेमाल के साथ साथ आने वाले भयानक मानसिक दर्द को भी झेलना था. और इतना hi नहीं, अगर किसी कारण वश वो छिपी हुई याद को पाने में नाकाम होता है तोह स्किल वही अपने आप बंद हो जाएगी.

दूसरे शब्दों में, स्किल बर्बाद चली जाएगी.

ये बहुत रिस्की था. क्युकी जोखिम भी था और सफलता की कोई गारंटी भी नहीं.

‘अगर डिस्क्रिप्शन को ध्यान में रखा जाए तोह मुझे मेमोरी रेट्रिएवे करनी है. That’s राइट! मुझे सिर्फ उस पर hi ध्यान देना है.’

वीर ने सही दिशा में सोचना शुरू किया.

उसने ये स्किल उस डायरी पर इस्तेमाल की थी जो उससे करा के पुराने घर में कही छिपी हुई मिली थी.

वीर के मैं में कई सवाल थे. जैसे की वह डायरी वह कर क्या रही थी? क्या कभी करा या किसी और को इस डायरी के बारे में पता नहीं लगा? ऐसे अनेको सवाल से वह जूझ रहा था. पर फिलहाल इनके लिए समय नहीं था.

करा के इमोशंस को बाहर लाने के लिए उससे एक स्ट्रांग इमोशनल इम्पैक्ट देना ज़रूरी था. एक प्रकार का इमोशनल ब्रेकडाउन. जब डायरी खोल वीर ने अंदर देखा तोह वह समझ गया था उससे क्या करना है.

अभी उसने खुद को संभाला hi था की तभी,

‘ुर्घह्ह~’

अचानक से एक बार फिर उसकी कांशसनेस कही ड्रिफ्ट होने लगी.





‘ाआररग्गहह~’

ऐसा लगा मानो जैसे उससे कोई खींच के कही ले जा रहा था. उसके मस्तिष्क में एक भयानक दर्द उठा.

दर्द के मारे उसने आँखें बंद कर ली, और जब सब कुछ शांत होने के बाद उसने आँख खोल देखा तोह,





उसके सामने एक लबीरिंथ मौजूद था. यानी एक bhool-bhulaiyaa. एक प्रकार का मज़े.

‘ये तोह एक-!!?’

वह ashcharya-chakit रह गया. आस पास उसने देखा, दूर दूर तक कोई नज़र नहीं आया. सिर्फ एक hi रास्ता था उसके लिए और वह था इस लबीरिंथ में घुसना.

‘शायद इसलिए स्किल में लिखा हुआ था की अगर मेमोरी रेट्रिएवे करने में फ़ैल हुए तोह ये बंद हो जाएगी. ी गेट आईटी नाउ. समझ गया ये टफ क्यों है इतना.’

‘बूत क्नोव थिस… I’m नॉट गोंना फॉल बैक!’

निडर होक वह अंदर चल दिया.

अंदर घुसते hi,


“Eaaaaaaaaaarrrrghhhhh~”

*स्क्रीीीीछहहहहहह*

“Aaaaaaaaaaaaaaaaaaa”

“दिए! दिए! दिए!!!!”

“Noooooooooo~”


कान के परदे फाड़ देने वाली अलग अलग चींखे और आवाज़ें सुनाई पड़ने लगी. अपने कानो पर हाथ रख वह आगे बढ़ा,

*हइच* *हइच*

“ुवाआआ~”


कही किसी छोटे से बच्चे की रोने की आवाज़ उससे सुनाई देती, तोह कही किसी महिला के रोने की. ये जगह किसी भूतिया जगह से काम नहीं थी.

‘क्या ये सब? करा की यादो का हिस्सा है? या फिर डायरी की?’

एक बड़ा सवाल और खड़ा हुआ.

वह चल hi रहा था जब उसके सामने अचानक एक काली धुंध सी छाने लगी. भयानक काला धुआँ इखट्टा हुआ और उसका एकमात्र रास्ता रोक दिया.

‘थिस स्टिल won’t स्टॉप में!’

बिना घबराये वह उस काले धुए में घुस गया. और घुसते hi,

“Aaaaaaaaaarggghhhhhhhhh!!”

उसकी दर्द के मारे चीख निकालनी शुरू हो गयी. फिर अगले hi शान,


“पागल लड़की!”

“हाहाहाहाहा!!”

“तुम अजीब हो! अजीब! हमे तुमसे दोस्ती नहीं करनी! हटो मेरी बेंच से!!”

“मम्मी देखो! वह लड़की कितनी अजीब है.”

“अरे ये लड़की पागल है. हेहेहे~ कुछ बोलती hi नहीं है.”

“ोये इसकी छोटी खींचो देखो कैसे रोयेगी हहै”

“हे देखो तोह कितना पैसा है साली के पास.”

“मेने सुना है इसके पापा बहुत बड़े बिजनेसमैन है.”

“तभी तोह पैसो पे ऐश करती है. हम्फ! ी हेट सुच पीपल.”

“सही कहा. घमंड तोह देखो! जैसे अपने आप को कोई महारानी समझती हो.”

“बाप ने ज़रूर टीचर्स, प्रिंसिपल को पैसे दिए होंगे. तभी तोह कभी कुछ बोलते नहीं है इसको.”

“क्या hi कर लेगी इतना पढ़ के? रौब तोह देखो ज़रा इसका. देखो तोह, कैसे कार से उतर रही है. जैसे दुनिया में इसके hi पास महंगी कार है.”

“साली पर है बहुत हॉट यार! इसका बाप अगर इतना वज़नदार न होता तोह अपने लौड़े पे बैठाया होता मेने इससे. हाहाहाहा!”


कुछ ऐसी अनेक बाते वीर के कानो में गूंजने लगी. वह हफ्ते हुए जैसे hi उस धुंध से बाहर आया, उसकी सांसें उखाड़ने लगी.

एक अजीब सा दर्द उसके सीने में उठा. साथ hi गुस्सा भी.

‘क्या ये करा की बुरी यादें है? I-Iska मतलब सिर विज़न मुझे सिर्फ डायरी की hi नहीं, डायरी से जुड़े इंसान की भी यादें दिखा सकता है?’

धीरे धीरे वीर के कानो से वह आवाज़ें गायब हुई.

‘ऐसे और कितने दर्द आप अपने सीने में दबा के राखी हो हँ?’

वह bhool-bhulaiyaa में अनुमान लगा के रास्तो पर मुड़ता गया.

अभी कुछ देरर hi हुई थी जब सामने उससे एक छोटी बच्ची दिखाई दी. वह फ्रॉक पहने नीचे ज़मीन पर बैठे अपना सर्र झुका के रो रही थी.


*हइच* *हइच*

“मां!”


वीर को ज़रुरत नहीं थी ये समझने की की सामने बैठी ये छोटी सी बच्ची कौन थी.

“मां! में अजीब हु क्या? सब मुझे अजीब क्यों कहते है? *हइच* सब मुझ से दूर क्यों भागते है? *हइच* मां! वापस आ जाओ न! में अब बिलकुल शैतानी नहीं करुँगी. *हइच* मां!”

वीर आगे बढ़ा,

“नहीं! नहीं करा! तुम बिलकुल अजीब नहीं हो.”

वह कहते हुए आगे आया. उसने करा को छीना चाहा पर उसके छींटे hi वह लड़की एक धुए में तब्दील हो गयी.

लबीरिंथ उसके साथ जैसे खेल रहा था.

ऐसे कई काली धुंध से गुज़रते हुए और दर्द पे दर्द सहते हुए वह जैसे तैसे अपनी मंज़िल के क़रीब पहुँच hi गया.

इस बार उसके सामने कोई काली धुंध नहीं थी. सामने था एक उजाला. पीला प्रकाश जो उसकी आँखों को chaka-chaundh किये हुए था.

वह उस प्रकाश की ऑर्डर बढ़ा और जैसे hi रौशनी की किरण के संपर्क में वह आया, एक बार फिर वह खींचता हुआ कही और चला गया.

फिर सब कुछ. उससे सब कुछ नज़र आ गया. मेमोरी रेट्रिएवे हो चुकी थी. और उसके बाद,

*हफ़* *हफ़* *हफ़*

[Maaasteerrr!!]

उसके कानो में आवाज़ आयी. वह वापस से अपने होश में आ चूका था. पर उसकी हालत अब बिगड़ रही थी. सर्र भन्ना रहा था.

[Master you did it! You finally did it.]

वह पसीने से लथपथ था. पारी को जवाब देने तक के लिए वो अपनी सासें दुरुस्त नहीं कर पा रहा था.

आँखों में नमी भी थी. उसने अपने हाथो में मौजूद उस डायरी को देखा और अपनी t-shirt के अंदर दबा के छुपा लिया.

करा जिससे वीर की एब्सेंस के बारे में जब ध्यान आया, वह फ़ौरन hi उससे ढूंढते हुए वह आयी,

करा : यू अरे हेरे!? व्हाट हप्पेनेड?

वीर : N-Nothing! मेरा बस परर फिसल गया था.

वह हफ्ते हुए उठा.

[Master! This is bad! Jald hi skill ke side-effects aapko hit karenge. Aap yu hi yaha khade nahi reh paoge. Jaldi se nikaliye yaha se. Quick!]

वीर ने वही किया भी! उसने अपनी हिम्मत बाँध खुद को ज़रा भी ेक्सहॉस्टेड शो नहीं किया. पर अंदर से उससे ऐसा लग रहा था जैसे उसकी साड़ी शक्ति किसी ने चूस ली हो.

[Hang in there Master! Bas thodi derr aur!]

वीर जैसे तैसे अपने घर पहुचा. किस्मत की बात थी ये की तब हॉल में कोई भी मौजूद नहीं था. और दरवाज़ा भी लॉक नहीं था. शायद सारा महिला मंडल एक कमरे में बैठ गुप्षुप में लगा हुआ था. इसका फायदा उठा के वीर सीधा अपने कमरे में घुसा,

*क्लिक*

दरवाज़ा लॉक करते hi उसने सबसे पहले डायरी को छिपा के रखा. वह जानता था उसके साथ उससे क्या करना था. पर अब और नहीं,

[Master!!!]

वह लड़खड़ाया और अपने बिस्तर पर गिर बेहोश हो गया.

वह शाम तक बेहोशी में hi था. और उससे होश भी आया तोह दरवाज़े पीटने के शोर से.

*बममममम* *बायंमममम*

“वीईईएर!!!! वीर खोलो! वीर???”

आवाज़ तेज की थी.

फ़ौरन उठ उसने दरवाज़ा खोला. और अपने भाई को सही सलामत देख तेज ने एक राहत की सांस ली. वीर ये देख के भी हैरत में था की सभी लोग उसके दरवाज़े के बाहर खड़े हुए थे.

उसकी माँ, श्वेता, आभा, सुमन, रागिनी. सोनाली और भूमिका बस नहीं थी क्युकी इस समय वह दोनों hi काम पर गयी हुई थी.

वीर : आप सब यहाँ?

तेज : और नहीं तोह क्या? जब हमे पता चला की तुम घर आ गए हो तोह तुम्हे आवाज़ लगाई पर तुमने दरवाज़ा खोला hi नहीं.

भावना : हमे लगा की तुम सो रहे होंगे बीटा. पर जब शाम हुई तोह तेज के साथ साथ फिर हमे भी चिंता होने लगी और इसलिए-

वीर : अह्ह्ह! समझा! नहीं! एक्चुअली में सो hi रहा था.

तेज (फ्रोंस) : रियली?

वीर : ऑफ़ कोर्स!

भावना : अच्छा चलो! अब उठ गए हो तोह हाथ मुँह धोलो. और नीचे आ जाओ. सुमन! चाय बना लो.

सुमन : जी!

रागिनी : अरे? आप क्यों तकलीफ करती हो? में हु न! में बनाती हु.

जाते जाते रागिनी ने वीर को देखा और शर्मा के वह से निकल गयी. अपने hi हाथो की चाय वह वीर को पिलाना चाहती थी.

वीर : M-Mein आता हु. आप सब चलिए!

सब वह से नीचे चल दिए. सिवाए आभा के. वह नज़रे झुकाये वही कड़ी रही.

आभा : A-Aap! आप ने झूठ कहा न?

वीर जो हाथ मुँह धोने वाशरूम जा hi रहा था, अचानक hi उसके क़दम ये सुन्न वही ृक्क गए.

वो पलटा और आभा को देखा,

आभा : W-Wo में जब सबके लिए पानी ऊपर लेके जा रही थी तब आपको लड़खड़ाते हुए अपने कमरे में जाते देखा था. A-Aap ठीक तोह हो न?

वीर बिना कुछ कहे आगे बढ़ा, आभा घबराते हुए पीछे हुई और दीवार से जा भिड़ी. उसके सामने आके वीर ने अपना एक हाथ जोरर से दीवार पर मारा जो आभा के कान के बगल से होक गुज़रा.

बेचारी डर के मारे किसी छिपकली की तरह दीवार से चिपक के रह गयी.

आगे उसके कान की तरफ वीर झुका,

वीर : और ये बात किसी को पता लगने न पाए. हम्म?

आभा ने जोरर से अपना सर्र हाँ में हिलाया. यहाँ वास्तव में उसने वीर की चोरी पकड़ी थी, पर लग ऐसा रहा था जैसे वह खुद वीर के चंगुल में फास्सी हो.

वीर (स्माइल्स) : गुड!

आभा की चीन को हाथ में लेके उसने उसका चेहरा ऊपर किया और उन् गुलाबी होंठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया. वह कसमसा के रह गयी.

“नननननन~”

जब तक वीर का मैं न भर गया तब तक उसने उन् रसीले होंठो का अच्छे से रस्सपान किया.

आभा को चोरर वह फ्रेश उप होक जब नीचे आया, तोह सब साथ बैठे चाय पी रहे थे. वह भी अपनी जगह पर बैठ चाय पीने लगा और अपनी सोच में पद गया.

[Kya aapne decide kar liya hai?]

‘हम्म!’

[Aap ye waali skill lena chaahte ho na?]

‘यस पारी!’

[Okay!]

*डिंग*

[5000 points have been used.]

[Kaafi mehngi hai par useful hai.]

‘थैंक्स!’

[Ab aap kaisa mehsoos kar rahe ho?]

‘तुम जानती तोह हो. फिर क्यों पूछ रही हो?’

[Kyuki mein bina aapki permission ke aapke mann me nahi jhaakna chaahti. Physically toh mein jaanti hu aap theek ho ab. But mentally? Uska jawaab aap hi mujhe dijiye.]

‘में ठीक हु पारी!’

[Ek legendary skill hamesha ek keemat ke saath hi aati hai Master.]

‘ी क्नोव!’

[Aapko yaad hai na? Pitcher ko maarte samay bhi aapne legendary skill use kii thi.]

‘वह लीजेंडरी स्किल थी?’

[Of course Master! Sylvia’s venom cure!! Ek legendary skill hi toh thi. Farq sirf itna hai ki tab aap asaani se legendary skill ko purchase kar sakte the kyuki tab system meharban tha. Par ab sirf mission ke zariye hi ye mil sakti hai.]

‘ी सी!’

[Aur aapko yaad hai na Sylvia’s venom cure ko istemaal karne ke baad aapke saath kya hua tha?]

‘येह! ी रेमेम्बेर! वाइट ब्लड सेल्स ज़्यादा मात्रा में बढ़ गए थे और पाइजन को बाहर किये थे. ी सुफ्रेड ा लोट ऑफ़ पैन. मुझे अच्छे से याद है. ः! दिव्या का चेहरा तब देखने लायक था. एंड- मिस सुहाना तू!’

सुहाना की एक छवि उसके दिमाग में आयी.

[Yes! Toh ab yaad rakhiyega kisi bhi legendary skill ko istemaal karne se pehle. Kuch na kuch side-effects hote hi hai inke. Kyuki ye aapke planet ke laws ke against jaati hai. They are too powerful. Aap dekh hi chuke ho.]

‘लॉज़ के अगेंस्ट तोह तुम भी हो पारी!’

[Well! Yes!]

वीर मुस्कुराया,

‘में ध्यान रखूँगा पारी!’

[Good thing!]

3 दिन गुज़र गए. और वीर अपने उस एक काम में लगा रहा. और अंत में वह करा के पास गया और उससे डायरी थमा आया.

2 दिन और गुज़रे. करा के मिशन की लास्ट डेट ख़तम हो चुकी थी. पर सिस्टम की तरफ से कोई भी मैसेज नहीं आया था मिशन के लिए. जो आया था वह था एक नोटिफिकेशन.

जिससे पढ़ वीर और चिंता में डूब चूका था. करा की फवोराबिलिटी घाट के 50 पर आ चुकी थी. ये सब हो क्या रहा था?

नोटिफिकेशन क्यों नहीं आ रहा था.

‘पारी? व्हाट थे हेलल इस गोइंग ों?’

[Mein bhi confused hu Master. Notification aa jaana chahiye tha.]

‘अगर वह मुझे हेट करने लगी है तोह मुझे चलेगा पारी पर उनके साथ कुछ गलत नहीं होना चाहिए. ी कन्नोत सी हेर फॉल लिखे थिस.’

[Shayad-]

‘शायद क्या पारी प्लीज बोलो. में बेचैन हु यहाँ. वह ठीक है न?’

[Master! Aapne apna kaam kar diya hai. Don’t worry!]

‘Don’t वोर्री? कारन का मैसेज आया है मुझे पारी की मिस करा ने खुद को 2 दिन तक अंदर रूम में बंद कर के रखा था. और फिर अचानक से उनकी फवोराबिलिटी काम हो जाना. ये सब क्या है? कह दो की वह मुझे हेट कर रही है. न की उनके इमोशंस हमेशा हमेशा के लिए चले गए है.’

[Master aisa ho sakta hai ki-]

‘K-Kya?’

[Shayad wo cheezo ko process kar rahi hai. Aur abhi tak kisi decision par nahi pohuchi hai. Shayad unhone kuch socha hai par abhi uss par poori tarah se atal nahi hai. Aur isliye mission clear ka notification hume nahi mila hai.]

‘....’

[Yes! Yahi kaaran hai Master! Ab aap ready rahiyega!]

‘हँ?’

[Woh aapko hate bhi kar sakti hai. Ya pyaar bhi. Hume jald pata lag jayega.]

‘ी होप वो ठीक हो जाए!’

***

अगली सुबह वीर की आँख जब खुली तोह भूमिका उसके सीने से जोरर से लगी हुई थी. और उसने खुद ने भूमिका को अपने सीने में कस के भींचा हुआ था. उसके दूध वीर की छथि में दहस्से हुए थे.

वीर maan’na तोह नहीं चाहता था पर ये एहसास अलौकिक था.

उसके बगल से तेज भी लेती थी पर वह घोड़े बेच के ओढ़ने वाली चादर के ऊपर hi सो रही थी.

वीर ने अलग होने का प्रयास किया की इतने में hi,

भूमिका की आँखें खुल गयी. दोनों एक दूसरे को देखते रहे. समय जैसे रुक गया था. और जब कुछ देरर बाद उन्हें ध्यान आया, तोह फिर टूटा उनपे शर्म का पहाड़.

वीर (ब्लशेस) : I-I’m सॉरी! में वो नींद में-

भूमिका (ब्लशेस) : I-It’s okay! Y-You कैन होल्ड में i-if यू वांट.

वीर : यह?

वीर हक्का बक्का रह गया. क्या उसने अभी अभी सही सुना? वीर ने उसकी बात मान उससे जकड़े रखा.

वीर : आप मुझसे कुछ- अकेले में बात करना चाहती थी?

भूमिका : हम्म? H-Haan! मेने कुछ डीडे किया है. क्या हम रात में बात कर सकते है?

वीर : S-Sure!

और उसके बाद उसकी हाय फिरसे लौट आयी. सुर्ख लाल गाल लिए वह chhat-pataati पलकों को ऊपर कर कभी वीर को देखती तोह कभी कही ऑर्डर. पर दोनों कुछ देरर तक यु hi एक दूसरे की बाहो में बने रहे जब तक नीचे शोरगुल न मचने लगा.

क्या कभी ऐसी सुबह वीर के घर में हो सकती है जब चेहेल पहल न हो?

आज की सुबह सोनाली बहक चुकी थी.

डाइनिंग टेबल पर बैठे वीर को वह झुंझलाये जा रही थी.

सोनाली : O-Oye!! तुम सुन्न रहे हो न मेरी बात?

वीर : सुन्न रहा हु!

सोनाली : फिर भी तुम्हारे कानो में जू नहीं रेंग रही? ाररी! में कह रही हु हमारे ट्रक के कर्मचारी काम छोड़ भाग रहे है. उनका आत्मविश्वास गिर रहा है. A-Aur- और आज कोई आने वाला है. कोई बड़ी हस्ती. मुझे प्राची ने बताया है. ोईई!

प्राची वीर के फ़ूड ट्रक में काम करने वाली एक लड़की थी. वह सोनाली की मदद करवाती थी. और कुछ कुछ रेसिपीज भी बना लेती थी.

वीर : सुन्न रहा हु!

वीर के लगातार इस िग्नोरैंट ऐटिटूड को देख सोनाली का माथा और ठनक उठा.

सोनाली : T-Tum-!!!! जाओ! भाड़ में जाओ! हम्फ! मेरा काम था बताना, मेने बता दिया. आगे तुम जानो और तुम्हारा काम जाने.

और अगले hi पल वह मुँह फुला के बैठ bad-badaane लगी,

“एक तोह मदद करो, ऊपर से महाशय को कोई परवाह नहीं है. में कोई काम वाली बाई हु? जो इतना काम थोपते hi जा रहे हो. अगर किसी दिन ये काम का बोझ मेरी जान ले लिया तोह भी मुझे आश्चर्य नहीं होगा. कोई नाज़ुक सी लड़की को इतना काम देता है भला? इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी कोई खुद भी अकेले नहीं उठाता, पर यहाँ देखो. में हु! जो-”

उसके non-stop रेडियो को सुन्न वीर ने उसकी ऑर्डर देखा,

वीर : तुम्हारा नाश्ता ठंडा हो रहा है!

सोनाली : H-Huh? *ब्लशेस* h-haan तोह खा रही हु. नाश्ता यही है, कही उड़द के नहीं चला जायेगा.

वीर मंद मंद मुस्कुराते हुए उसके इस chulbule-pann का लुत्फ़ लेता गया.

और नाश्ता ख़तम करते hi वह उठा.

वीर : चलो!

सोनाली : हँ?? कहा?

वीर : फ़ूड ट्रक के लिए, और कहा? अभी थोड़ी देरर पहले तुम hi तोह चिल्ला रही थी न?

सोनाली : O-Oohh!

तेज : वीर कहा जा रहे हो?

वीर : बिज़नेस टाइम तेजू दी! आप वह बोर हो जाओगी. में आपके लिए लौट के कुछ लाऊंगा न. *स्माइल्स*

तेज (ब्लशेस) : ठीक है! में वेट करुँगी!

रागिनी : A-Aur मेरे लिए वीर?

वीर (स्माइल्स) : आपके लिए भी लाऊंगा भाभी!

रागिनी (ब्लशेस) : मुझे इंतज़ार रहेगा!

दूर बैठी भावना इस कन्वर्सेशन एक्सचेंज को बड़े hi गौर से सुन्न रही थी और देख भी रही थी.

इधर सोनाली वीर का पीछा करता हुए फ़ौरन hi बाहर आयी. वीर ने अपनी रोल्स रोये घोस्ट निकाली हुई थी. सोनाली जब अंदर बैठी तोह कार की खूबसूरती को देखती रह गयी.

वीर : क्या हुआ?

सोनाली : वह- में पहली बार बैठ रही हु इसमें.

वीर : ओह्ह!

जल्द hi वह दोनों फ़ूड ट्रक के सामने थे. ये वीर का पहला वाला फ़ूड ट्रक था जो उसने सबसे पहले खरीदा था. और सोनाली भी इसी में काम करती थी.

दोनों उतर के जब ट्रक पर पहुचे तोह सोनाली ने छवि से ट्रक को खोला. वीर फिर उससे लेके सिटी साइड चल दिया.

डेली की अपनी जगह पर ट्रक को लगा के सेट करने के बाद, वह कस्टमर्स के आने का इंतज़ार करने लगे.

जब प्राची और बाकी सभी ने वीर को देखा तोह वह सब हैरान रह गए. वीर कभी भी इस तरह उनके ट्रक के अंदर नहीं आता था. आज ऐसा क्या स्पेशल था?

वीर : तोह बात क्या है?

सोनाली : वह-

प्राची : सर में बताऊ?

वीर : सूरे!

प्राची : बात ये है की लड़को में मोटिवेशन गिर रहा है. वह फ़ूड ट्रक की जगह कही और भाग रहे है. उन्हें ये काम नहीं करना. उनका कहना है की यहाँ काम किया तोह हमेशा के लिए यही फसे रह जायेंगे. कुछ कर नहीं पाएंगे.

सोनाली : देखा जाए तोह उनकी बात सही भी है. मुझे hi देख लो!

उसने टॉन्ट मारा. वीर ने जब उससे घूर के देखा तोह वह शांत हो गयी.

वीर : समझा! क्या तुम में से किसी ने उन्हें ये नहीं बताया की जल्द hi हमारा बिज़नेस बहुत बढ़ने वाला है?

सोनाली : ेहः?? ये क्या नयी नयी तुम फेक रहे हो अब?

वीर : ओह्ह! इस नादान लड़की को भी नहीं मालुम.

सोनाली (भड़कते हुए) : ोईए! नादान किस्से कहा?

वीर : अन्य्वयस! प्राची! में तुम्हे बता दू की जल्द hi हमारा बिज़नेस बढ़ने वाला है.

प्राची : ये तोह अच्छी बात है सर! तोह क्या में उन्हें फ़ोन कर ये बता दू? मुझे यकीन है वह वापस लौट आएंगे.

वीर (स्माइल्स) : और यही तोह में नहीं चाहता!

प्राची : हँ?

वीर : जो लोग एक अच्छे खासे चलते बिज़नेस से अभी भाग गए, ज़रा सोचो की जब बिज़नेस सच में कभी अगर मंदा पद गया तोह क्या करेंगे वह?

प्राची : W-Woh-!!

वीर (स्माइल्स) : ये अच्छा हुआ की वह चले गए. हमे उनकी ज़रुरत नहीं.

सोनाली : पर उनके जाने से बाकी लोगो में आत्मविश्वास गिर गया है. और उनका मैं मचल रहा है काम छोड़ने के लिए.

वीर : तोह उसका हल है उनका आत्मविश्वास बढ़ाना!

प्राची : W-Woh कैसे?

वीर (स्माइल्स) : उसी के लिए तोह में आया हु यहाँ!

कहते हुए उसने अपनी शर्ट उतार के अपनी कमर पर बाँध ली, और बस एक ब्लैक t-shirt में आ गया.

वीर : आज उन्हें बताया जायेगा की एक शेफ होना कितनी रिस्पांसिबिलिटी का काम होता है.

जब उसकी आँखों में वह तेज प्राची ने देखा तोह वह mantra-mugdh होक रह गयी.

प्राची : S-So कूल!

वीर : सोनाली! सारे फ़ूड ट्रक्स पर कॉल कर उन्हें यहाँ बुलाओ.

सोनाली ने बात मान सभी को वह बुला लिया. लड़के और लड़किया सभी लोग थे. ये सभी मिल के वीर के अलग अलग फ़ूड ट्रक्स को संभालते थे. प्राची इन् सब से हिसाब लिया करती थी और सोनाली को देती थी. और बाद में सोनाली उससे मैनेज कर वीर को सौपती थी.

कुछ इस तरह से ये चैन काम करती थी. ख़ास बात ये थी की वीर के फ़ूड ट्रक्स भलाई दिखने में एक जैसे थे परन्तु सभी के मेनुस अलग अलग हुआ करते थे.

कोई सिर्फ सुबह को लगता था और नाश्ता सर्वे करता था तोह कोई दिन में लग के थाली सिस्टम पर बेस्ड था. कोई फ़ास्ट फ़ूड सर्वे करता था तोह कोई शेक्स एंड ब्लेंड्स के लिए था. उसके पास हर्र तरह की वैरायटी मौजूद थी.

जब सभी एकत्र हुए तोह वीर ने उन्हें एक लेक्चर दिया की शेफ होना अपने आप में कितना ज़िम्मेदारी वाला काम था. आज वह उन् सब को करके दिखाने वाला था.

लाइन से सभी ट्रक्स लग गए.

शुरुआत में तोह गिने चुने लोग hi आये पर जैसे hi लोगो की दिनचर्या के वर्किंग हॉर्स ख़तम होने का समय हुआ, जब सूरज की किरणे आहिस्ता आहिस्ता छटती गयी तोह इलाके में चेहेल पहल बढ़ गयी. मौसम भी थोड़ा शीतल हो उठा.

थका हारा आदमी काम के बाद अपने कलगुएस के साथ खाने पीने के लिए निकलने लगा. और फिर वीर ने शुरू किया अपना जादू.

जैसे hi उसके हाथ किचन के सामानो पर पड़े वह जैसे एक अलग hi दुनिया में चला गया.

बहुत hi काम मौका मिलता था उससे अपनी कुकिंग स्किल्स दिखाने का. ऑफ़ कोर्स! उसके पास वो जो थी!

अब्सोलुटे शेफ!!!!

प्राची (इन शॉक) : S-Sir को कुक करना भी आता है??

सोनाली : हाँ!

सोनाली ये maan’na तोह नहीं चाहती थी पर दांत पीसते हुए उससे ये maan’na hi पड़ा की पूरे घर में वीर से बेहतर खाना कोई नहीं बना पाटा था.

प्राची एक स्टूडेंट की तरह वीर के इर्द गिर्द घूमने लगी. वो नोट्स ले रही थी.

प्राची : अहह? आयल के साथ बटर?

वीर : बटर एक्सेसिवे हीट में जल्दी जल जाता है प्राची. तोह उससे थोड़ा बचाने के लिए ये आयल.

प्राची : ओह्ह्ह्ह!

उसने फ़ौरन hi अपने नोटपैड में उससे नोटेदोन कर लिया. वह वीर को प्रशंसा भरी नज़रो से देख रही थी. इतने में दो ऑफिस की लड़किया आयी और वीर को उसका पहला आर्डर भी मिल गया.

वीर (स्माइल्स) : ऑलराइट!

वीर के बारीक से बारीक चीज़ को देख और उसकी प्रेसीसे कुलिनरी स्किल्स को देख, न सिर्फ वह मौजूद प्राची और अन्य, बल्कि सोनाली भी उसकी इस अदा पर मोहित हो गयी.

वह अब सिर्फ खाना नहीं बना रहा था, वह अब एक आर्टिस्ट की तरह था जिसकी कला का प्रदर्शन वो सभी देख पा रहे थे.

वीर ने जब वो आर्डर उन् लड़कियों को दिया तोह दोनों एक्ससिटेड होक जाके खाने में लग गयी.

“ओह्ह्ह्ह माय गॉडडडडड!!! कितना टेस्टी है~”

“हम्म~ पर तुमने उससे नहीं देखा? शेफ को? वो तो और टेस्टी होगा.”

“हहहहहए~ हाँ!”

देखते hi देखते भीड़ जमा होने लग गयी और वीर के फ़ूड ट्रक्स भारी व्यस्त हो गए. वह इधर से उधर आर्डर कम्पलीट करने में hi लग गए.

प्राची भावुक हो उठी. आज तक उसने इतनी भीड़ कभी नहीं देखि थी. हर्र गुज़रते पल वीर के लिए उसकी इज़्ज़त बढ़ती hi जा रही थी.

वीर : प्राची!! इन्हे फ्रायर में डालो!!!

प्राची : एसससस सिर्रर्र~

वीर : सोनाली! रोल्स को व्रैप करो!

सोनाली : हाँ! K-Kar रही हु!

वीर : एक अच्छा शेफ अपने स्वार्थ के लिए नहीं, दुसरो के लिए कुक करता है. समझे???

“एससससस सिर्रर्र!!!!!”

वीर ने आते hi अपनी उपस्थिति से पूरी काय पलट कर दी थी.

प्राची बाहर जाके लोगो से जब फीडबैक लेने गयी तोह यहाँ वीर ने मौका देख अचानक से सोनाली को पीछे से पकड़ लिया.

वह फ्रायर से फ्रेंच फ्राइज निकाल रही थी, पर वीर उसकी कमर को पकडे अपना चेहरा उसके कंधो पर झुकाये खड़ा था.

अकस्मात् इस हमले से सोनाली भौचक्की सी रह गयी. इसके पहले की वीर को वह मन कर पाती, वीर का हाथ ऊपर चला गया और सोनाली मूर्ति की तरह जम्म के रह गयी.

उसका हाथ सोनाली के दूध पर था.

सोनाली के गालो का पारा ऐसे चढ़ा जैसे मानो उससे बुखार आ गया हो.

सोनाली (ब्लशेस) : चोर्रो! Ch-Chorro वर्ण में- मुँह तोड़ दूंगी तुम्हारा.

पर वीर उसके उरोजों को मसलने में लगा हुआ था.

वीर (स्माइल्स) : अब क्या कहना है तुम्हारा? तुम कह रही थी बिज़नेस में मंडी आ रही है? लोग जा रहे है. हम्म? तोह ये भीड़ कैसी है?

सोनाली (ब्लशेस) : न्नन्न~ हआ~ हआ~ छोर्रो! J-Jaldi~ प्राची आती होगी! चोर्रो!!!

वीर : नहीं चोरडूंगा!

सोनाली : कुत्ते कमीने!!!! चोररर!! ाहहननन~ ननणणन~

वीर पूरी लगन से उन् थानों को मसलने लगा. उसने सोनाली को पहली बार छुआ था और वो ज़रा भी नाराज़ नहीं था.

पर उससे जल्द hi सोनाली को चोरर्ण पड़ा क्युकी प्राची आ रही थी.

प्राची : S-Sir! बुरी खबर! वह फेमस हस्ती आ चुकी है और आपसे मिलना चाहती है.

वीर जब बाहर आया तोह उसके सामने एक बिज़नेस सूट में लेडी कार के पास कड़ी हुई थी.

उसके पास आते hi उसने खुद hi हाथ आगे बढ़ाया,

“मिस्टर वीर?”

वीर : यस! और आप?

वैसे तोह उसने पहले hi चेक कर लिया था पर फॉर्मेलिटी करना तोह ज़रूरी था.

“में तमन्ना!”

वह बोली और अपने हाथ मोड़ कड़ी हो गयी.

वीर : क्या मदद कर सकता हु आपकी?

तमन्ना : दो यू क्नोव हु ी ऍम?

वीर : No!

वीर के नॉलेज पर हस्ते हुए वह गुरूर में बोली,

तमन्ना : में एक फ़ूड क्रिटिक हु.

वीर : ओह्ह्ह!

तमन्ना : मेरा काम है फेमस होटल्स, रेस्टोरेंट्स में जाके वह का खाना टास्ते करना और उसके बारे में लिखना. अपने रेविएवस देना. मेरा एक रिव्यु अच्छे खासे चलते फिररते होटल को सड़क पर ला सकता है.

वीर शांत था. क्युकी वो सच कह रही थी.

तमन्ना : में खुद मुंबई से हु. अभी तक बाहर थी, कुछ हफ्ते पहले hi लौटी हु. में अक्सर ट्रेवल करती रहती हु. इस फ़ूड ट्रक को मेने पहले कभी नहीं देखा था. ी गेस ये अभी हाल hi में खुला है!?

वीर : जी!

तमन्ना : कल में यहाँ से गुज़री तोह बी चांस यहाँ आयी. मेनू पर एक सिग्नेचर डिश देख मेने उसकी डिमांड की तोह पता लगा की वो डिश सिर्फ ट्रक के ओनर को hi बनानी आती है. वर्कर ने कहा था की में कल औ तोह इसलिए यहाँ आयी हु.

वीर : थें के, प्लीज!

तमन्ना : उस से पहले, एक वाक हो जाए?

वीर : क्यों नहीं!

वीर जानता था वह क्या करना चाह रही थी. वह ओनर से पहले बाते करती थी, उनके रवैय्ये को नोटिस करती, उन्हें जान बूझ के गुस्सा भी दिलाती थी ताकि वो उसके जाल में फस्स जाए और फिर वो उनके बारे में सब कुछ लिख सके. वीर के साथ भी वो वही करने वाली थी.

तमन्ना : तुम जानते हो में नंबर 1 फ़ूड किस देश का मानती हु?

[Huh? What the hell? Master? Hume iski bakwaas kyu sunn’na pad raha hai?]

‘शांत पारी!’

वीर : किस देश का ma’am?

तमन्ना (स्माइल्स) : ऑफ़ कोर्स, इटली! इतालियन फ़ूड बेस्ट है!

वीर : और सेकंड पे?

तमन्ना : मेक्सिकन फ़ूड!

वीर : थर्ड?

तमन्ना : ऑफ़ कोर्स! It’s फ्रेंच फ़ूड एंड स्पेनिश फ़ूड!

वीर : और हमारा इंडियन फ़ूड?

तमन्ना : फोर्थ!

वीर : फोर्थ क्यों?

तमन्ना : अपने सामने देखो!

चलते चलते वह दोनों hi एक चौपाटी के नज़दीक पहुँच चुके थे.

तमन्ना : देखो लोगो को! कैसे ठूस रहे है! हाइजीन देखो! साफ़ सफाई देखो!

वीर : पर कुछ लोग तोह ग्लव्स पहने है. उनके स्टाल्स भी साफ़ है.

तमन्ना : यही तो दिक्कत है न. सिर्फ कुछ लोग मिस्टर वीर! पता नहीं लोगो को सेंस कब आएगा. पता नहीं ये सब कब सुधरेंगे. फ़ूड को कचरे की तरह ट्रीट नहीं किया जाता. आईटी शुड बे हांडलेड देलिकटेली विथ हाइजीन.

वह करीब 15 मिनट तक bad-badaati रही. जब वीर ने उससे अचानक से रोक दिया,

वीर : ओने डे!

तमन्ना : हँ?

वीर : I’ll रेवोलुशनिजे थे व्होले फ़ूड इंडस्ट्री.

तमन्ना : व्हाट?????

वीर पलटा और अपने जेब में हाथ दाल चल दिया,

वीर : के! I’ll शो यू व्हाट थे रियल फ़ूड इस!

वीर ने तमन्ना को फिर अपनी एक सिग्नेचर डिश बना के दी. जो की कुछ नहीं एक रोल था.

तमन्ना डिसअप्पोइंट होते हुए वो रोल उठायी और अपने मुँह में डाली. जैसे hi स्वाद, वह फ्लेवर उसके टास्ते बड्स को हिट किये, वो वही जम्म गयी.

वीर : तमन्ना ma’am??

पर कोई जवाब नहीं आया. अगले hi पल तमन्ना हाथो में वो रोल लिए भागी और अपनी कार में बैठ गयी. पालक झपकते कार भी वह से रवाना हो गयी.

‘व्हाट थे फ़क!!’

वीर यहाँ कन्फ्यूज्ड hi था जब उसके फ़ोन पर एक मैसेज आया और फ़ोन विबरते हुआ,

*बुज़ज़्ज़ज़*

मैसेज पढ़ते hi वीर के माथे पर चिंता की लकीरे छा गयी.

मैसेज में लिखा था~


“ी नीड यू! असप!”

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

अपडेट 5.3क वर्ड्स का है. तोह मुझे बोलना न पड़े. दबा के लाइक्स ठोकने का और रेवोस देने का. अगले अपडेट से क्रिमसन अर्च का मैं प्लाट शुरू हो जायेगा. तब तक के लिए,

धन्यवाद! :शकहैड्स:
 
अपडेट - 134 ~ क्रिमसन फेस्टिवल

अब तक…

अगले hi पल तमन्ना हाथो में वो रोल लिए भागी और अपनी कार में बैठ गयी. पालक झपकते कार भी वह से रवाना हो गयी.

‘व्हाट थे फ़क!!’

वीर यहाँ कन्फ्यूज्ड hi था जब उसके फ़ोन पर एक मैसेज आया और फ़ोन विबरते हुआ,

*बुज़ज़्ज़ज़*

मैसेज पढ़ते hi वीर के माथे पर चिंता की लकीरे छा गयी.

मैसेज में लिखा था~

“ी नीड यू! असप!”


अब आगे :

हर्र बार की तरह आज सुबह भी वीर के घर में कोहराम मचा हुआ था. अब तोह जैसे वीर को भी आदत लग गयी थी. इस शोरगुल की और साथ hi साथ-

अपना बैग पैक करने की.

पैकिंग? किस लिए? पैकिंग इसलिए क्युकी बुलावा जो आ चूका था उससे. पर हर्र बार की तरह दिल भी टूटने थे.

“क्यों वीर? अब कहा? तुम ये बार बार क्यों भला-!?”

रागिनी की उदासी भरी आवाज़ उसके कानो में पीछे से पड़ी.

वह हॉल में hi सबके सामने पैकिंग कर रहा था और सभी उसी पर नज़रे गड़ाए हुए थे. रागिनी को देख ऐसा लगा जैसे बेचारी अभी रो देगी. उसके चेहरे के हाव भाव पढ़ना बेहद hi आसान था. और भावना वही कर भी रही थी. ऊपर से नीचे तक रागिनी की हरकतों को वो परख रही थी.

वह चेहरे पर चिंता और बेचैनी, आँखों में एक बेबसी, और यु उसके जी का मचलना. भावना की आँखों से कुछ भी चूत कर नहीं जा रहा था.

रागिनी जब जब वीर के क़रीब आती, वीर किसी पतंग की तरह ढील खा के और दूर उड़द जाता. ये तोह जैसे अब हर्र बार का hi हो गया था. परन्तु, अब वीर उन् सब को कैसे समझाता? सिस्टम और अन्य राज़ो को वह बाहर आने नहीं दे सकता था. वह अपनी जगह मजबूर था. उन् सब को सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी भी तोह उसके hi सर्र थी.

वीर : भाभी! में जल्द आ जाऊंगा! आप चिंता मत करिये.

उसने फटाफट सूटकेस में अपने कुछ कपडे और ज़रूरी सामान डालते हुए कहा. पर पीछे कड़ी रागिनी को उसकी हर्र बात और बेचैन कर रही थी.

तेज : पर? पर ये अचानक से पेरिस क्यों वीर? एक मिनट! कही तुम उस सीक्रेट लव वाली लेडी से तोह नहीं मिलने जा रहे न?

वीर : हैं???

भावना : सीक्रेट लव वाली लेडी?

अपने बेटे की लव लाइफ से जुड़ा सवाल सुन्न, भावना का बदन सीधा हो गया. और न सिर्फ उसका बल्कि रागिनी भी बॉहे सिकोड़ उससे देखने लगी.

तेज : और कौन? वही लेडी जिसने तुम्हे ये इतनी महंगी गाडी गिफ्ट की है!

अपनी बहना की बात सुनते हुए वीर हिस्सा,

वीर : ः~ ऐसा कुछ भी नहीं है. वह वह वेगास में है. या शायद मुंबई लौट भी आयी हो. पेरिस में में किसी और काम से जा रहा हु.

तेज (फ्रोंस) : किस काम से?

वीर : बिज़नेस के!

तेज : कैसा बिज़नेस?

वीर (श्रृग्स) : बिज़नेस तेजू दी!

तेज : किस से बिज़नेस करने जा रहे हो वह?

वीर : क्लाइंट है वह दी! बड़ी कंपनी का. ज़ाहिर है की किसी एक इंसान से तोह बिज़नेस करूँगा नहीं? कंपनी के संग hi संभव है न ये?

तेज : तोह ऐसे अचानक से क्यों? इतनी क्या इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है?

वीर : क्युकी उनका सचेडूले होता है. वह मेरे लिए तोह बैठे hi नहीं रहेंगे न?

तेज : किस कंपनी से मिलने जा रहे हो?

वीर (शिघ्स) : तेजू दी! पेरिस के लिए हमे वीसा कब नहीं लगता?

तेज : जब आप बिज़नेस के लिए जा रहे- अहह!? तोह-!?

वीर मुस्कुराया और उसने अपना फ़ोन तेज के सामने कर स्क्रीन पर एक मसाज दिखाया.

मैसेज में वीर की फ्लाइट की टिकट थी शाम की. मुंबई से पेरिस. बिज़नेस क्लास. अगर बिज़नेस के सिलसिले में पेरिस जाना हो तोह वीसा की ज़रुरत नहीं पड़ती थी. ऐसा विजिटर काम से काम 90 दिनों तक वह ठहरने के लिए अल्लोवेद था.

जब तेज ने मैसेज पढ़ा तोह कही न कही अब उससे वीर पे यकीन होना शुरू हो गया. क्युकी बिना बिज़नेस के काम के लिए जाने पर वीसा लगता hi था.

और वीर अगर बिना वीसा के जा रहा था तोह बात स्पष्ट थी. वह बिज़नेस सम्बंधित काम के लिए hi जा रहा था.

तेज : T-Toh क्लाइंट कौन है?

वीर : मुझे कैसे पता होगा दी? कंपनी से वह किसी को भी मिलने के लिए भेज सकते है.

तेज : ओह्ह्ह!

भावना : किस विषय में बिज़नेस कर रहे हो?

जब भावना ने ये सवाल पूछा तोह कुछ देरर के लिए वीर शांत रह गया. उसकी ख़ामोशी देख तेज का शक फिरसे बढ़ने लगा.

वीर (स्माइल्स) : फ़ूड इंडस्ट्री से रिलेटेड hi है माँ~

वह और भावना एक दूसरे को कुछ शान तक देखते रहे.

भावना : बस?

वीर : और शायद कुछ गुड्स सप्लाई?

भावना : समझी!

वीर : हम्म!

पीछे कड़ी श्वेता जो अब तक मौन थी, वह कैसे चुप रह सकती थी? सब बारी बारी वीर पर हक़ जमा के उस से प्रश्न पर प्रश्न पूछ रहे थे. उसकी प्राइवेसी की धज्जिया उड़ा रहे थे. यही सही वक़्त था अपना प्यार वीर को दिखाने का. वह फ़ौरन आगे आयी और उसने वीर के हाथ को थामा,

श्वेता : P-Par वीर? बीटा तुम रुकोगे कहा? ऐसे अकेले जा रहे हो? इतने बड़े देश में, इतनी बड़ी सिटी में अकेले कैसे सब मैनेज करोगे? तुम्हारा खाना पीना? M-Mein भी चलती हु तुम्हारे साथ.

और उसने अपना डाव खेल दिया. जहा सब वीर के मुँह से जानकारी निकलवाने में लगे हुए थे, वही श्वेता ने ऐसा कुछ भी करने का प्रयास नहीं किया. वह जैसे ये दिखाना चाह रही थी की वीर जहा जिस काम से जाना चाहे जा सकता है. उससे तोह बस उसके khaan-paan और रहने की फिक्र है.

कही न कही ये काम भी कर गया. क्युकी वीर को आसानी हुई. अब उससे एक और शख्स को नहीं समझाना पड़ा. कही न कही उससे अंदर से अच्छा भी लगा की श्वेता को उसकी चिंता थी.

ख़ास बात ये थी की भले hi श्वेता मौके का फायदा उठा के वीर के क़रीब आने की कोशिश करती थी पर उसकी चाहत सच्ची थी. उसका लगाव और प्रेम कोई ढोंग नहीं था.

हमेशा से hi उसके दिल में एक बेटे के लिए एक रिक्त स्थान हुआ करता था. जिससे वीर ने अब अपने नाम से भर दिया था. अब तोह वह उसकी आँखों का तारा बन्न चूका था. और वीर भी उसके प्यार को समझता था. जानता था की श्वेता के संग अतीत में क्या गुज़री है.

तोह वही दूर बैठी भावना अपनी सौतन को अपने बेटे से चिपके एक अलग सी मुस्कान लिए देख रही थी.

जैसे hi श्वेता ने भावना को देखा,

श्वेता : हँ!?

उसने अपनी पकड़ वीर के हाथ पर और मज़बूत कर दी. वीर की असली माँ उससे रहस्यमयी मुस्कान लिए घूर रही थी. श्वेता बेचारी डर के रह गयी. वह अभी एक बच्ची की तरह महसूस कर रही थी जिससे ये भय था की कही कोई उसका mann-pasand गुड्डा छिना के न भाग जाए.

परन्तु, बगल में कड़ी तेज को ये सब बिलकुल भी नहीं कुसा रहा था. उसका तोह मैं कर रहा था की अभी श्वेता को खींच के वीर से अलग कर दे. लेकिन उसने खुद को ऐसा करने से रोका.

भावना के संग aankh-michauli करते हुए श्वेता कभी उससे देखती तोह कभी वीर को,

श्वेता : M-Mein चलती हु न बेतु! में तुम्हारी मदद करवा दूंगी वह. H-Haan? Okay?

वीर (स्माइल्स) : सोचने के लिए शुक्रिया. बूत इसकी ज़रुरत नहीं है. में अकेले जाऊंगा तोह ट्रेवल जल्दी कर पाउँगा वह. और जितना जल्दी सब होयेगा उतनी hi जल्दी में वापस भी आ पाउँगा.

श्वेता (बेचैनी में) : P-Par-

वीर ने उसका हाथ थामा,

वीर (स्माइल्स) : जल्दी आऊंगा न! Don’t वोर्री!

जब वीर ने उस से इतने प्यार से कहा तोह श्वेता उसकी सूरत में hi कही खो गयी. वह मॉम की तरह पिघल के रह गयी. उसका दिल बाग़ बाग़ हो उठा. जैसे मानो उसकी म्हणत सफल हो गयी हो. वीर के मुँह से अपने लिए प्यार भरे शब्द सुन्न के hi वह सब कुछ भूल गयी.

श्वेता : O-Okay~

‘फेव! इन्हे मनाना उतना कठिन नहीं था.’ वीर ने एक राहत की सास ली.

[Well! Abhi aur bhi logo ko manaana hai aapko.]

रागिनी : तोह में चली जाती हु न. में तुम्हे स्लो डाउन नहीं करुँगी वीर.

वीर : नहीं भाभी! मेने अभी तोह कहा. वह मुझे ट्रेवल करना पड़ेगा. आपके लिए कनविनिएंट नहीं रहेगा. और वैसे भी, अब मेरी फ्लाइट आज की बुक हो चुकी है. अब फ्लाइट्स मिलती भी है या नहीं क्या पता.

रागिनी : तुम टेंशन मत लो, ज़रूर मिल जाएगी.

इस से पहले की वह आगे बढ़ मोबाइल पर टिकट्स देखती, वीर ने उससे रोक दिया.

वीर (स्माइल्स) : भाभी~

वीर के चेहरे पर वह नरम सी मुस्कराहट देख रागिनी फिर हार गयी. अपने निचले होंठ को दातो टेल कुतरते हुए वह सर्र झुका के कड़ी हो गयी. हर्र बार यही होता था उसके साथ. हर्र बार वीर उसके साथ ऐसा करता था. वह निराश थी. गुस्सा भी.

रागिनी के हाव भाव पढ़ वीर समझ गया था की उससे जाने से पहले अपनी भाभी को मनाना बेहद ज़रूरी था.

खर्र! बैग पैकिंग समाप्त हुई. आज भूमिका और सोनाली दोनों hi काम पर नहीं गयी. क्युकी वीर आज कई दिनों के लिए घर से जा रहा था, तोह वह दोनों भी ठहरी हुई थी.

और समस्त परिवार वीर के कमरे में इखट्टा था. बीएड पर वीर, तेज, भूमिका, आभा और सोनाली बैठी हुई थी. तोह वही नीचे चटाई पर रागिनी, सुमन, श्वेता और भावना.

वीर : मुझे आप सब से कुछ बात करनी है. या यु समझ लीजिये की आप सबकी मदद चाहिए.

श्वेता : कैसी मदद बेतु?

भावना : हम्म?

तेज : कहो वीर!

वीर ने एक गहरी सांस ली.

[Yes! Ye sahi samay hai Profit Path ko lay down karne ka Master. Jitni jaldi ye execute hoga, hum new profit path ko dekh payenge. Behtar hoga ki hume naya profit path waha Paris me hi mil jaaye. Toh waha ki business opportunities ko hum hathiya payenge Master.]

‘मुझे फिरसे वो पथ शो करो पारी!’

[Right away Master!]

और वीर के सामने पुनः एक बार वही पथ खुल गया.





‘हम्म! ी सी!’

रागिनी : क्या बात है वीर? कहो न!

वीर : ओह्ह्ह! H-Haan! में कह रहा था की क्या आप सब मेरी मदद मेरे बिज़नेस में करेंगी?

और सबसे पहला रिस्पांस भावना का hi था.

भावना (स्माइल्स) : में सोच hi रही थी की आखिर कब तुम हम से ये बातें साझा करोगे. आखिर कब से इससे अपने ज़हन में दबाये हुए थे?

वीर : उम्~ वह-!

भावना : कोई बात नहीं! देरर आये दुरुस्त आये! कहो! क्या करना है हमे?

वीर : दरअसल! श्याम जी से कह के मेने कुछ किसानो की मांग की है.

तेज : किसान? किस लिए?

[Ekdum sahi direction me jaa rahe ho aap Master.]

वीर : तेजू दी! दादा जी ने मुझे ज़मीन दी हुई है. उसका इस्तेमाल तोह करना hi था. वह ज़मीन उपजाऊ है. वह खेती हो सकती है. इसलिए श्याम जी से मेने किसानो को भेजने के लिए कहा हुआ है.

रागिनी : तोह तुम अब खेती करोगे वीर?

वीर : भाभी ऐसा है की, मेरा बिज़नेस फ़ूड में है अभी. ज़रा सोचिये की अगर मेरे पास खुद की खेती हो, जहा से फ़ूड ट्रक में इस्तेमाल होने वाली ताज़ा सब्ज़िया मिल सके. और तोह और में उन्हें बाजार में सप्लाई करने लागु. तोह इस से क्या होगा?

वीर प्रॉफिट पथ के पहले पथ को अच्छी तरह से डिकोड कर चूका था. उससे पता था किस दिशा में आगे बढ़ना है और किन लोगो को आगे लेके बढ़ना है.

उसके प्रश्न का उत्तर श्वेता ने दिया जो नीचे पालथी मारे बैठी हुई थी,

श्वेता : बेतु बहुत बढ़िया! तुमने एक एफ्फिसिएंट तरीक़ा खोजै है. तुम न सिर्फ अपना खर्चा बचाओगे बल्कि अब और ज़्यादा कमा सकते हो. इस से उन् किसानो को भी एक काम मिल जायेगा. उनकी आमदनी होने लगेगी जो अब तक नहीं हो रही थी. और तोह और तुम्हारे कस्टमर्स को जब फ्रेश फ्रूट्स, वेजटेबल्स का खाना मिलेगा तोह बिज़नेस में बढोतरी होनी hi है.

एक बिज़नेस लेडी होने के नाते, श्वेता पल भर में hi वीर का प्लान समझ गयी थी.

वीर : जी! यही मेरा प्लान है. आल्सो, वर्षा को पेड़ पौधों का बहुत नॉलेज है. उससे फूलो से बनायीं जाने वाली सुगंध और पौधों से बनायी जाने वाली आयुर्वेदिक औषधियों को बनाना आता है. उस बारे में भी मेने कुछ सोच के रखा है.

रागिनी : वर्षा? कौन?

भूमिका : हम्म?

वीर के संग जो औरते गयी थी जयपुर वह पारिजात की औरतो से वाक़िफ़ थी. पर भूमिका, रागिनी, सोनाली और आभा नहीं. इसलिए ये नाम उनके लिए नया था.

श्वेता : तुम सब उनके बारे में नहीं जानती. रहने दो!

श्वेता न वह बात बताना ठीक न समझा. रागिनी बस एक सोच में डूबी ऊपर बैठे वीर को देखती रही जैसे एक बीवी देखती है जब उसका पति कोई अनजान महिला का नाम ले.

वीर : और इसलिए- में ये सारा काम अभी 3 लोगो को सौपना चाहता हु.

उसके इतना बोलते hi सभी औरते एक दूसरे को देखने लगी.

वीर (स्माइल्स) : भाभी!

रागिनी : हहहह!?

वीर : आप, तेजू दी और आरोही दी!

तेज : आरोही??

वीर : हम्म! आरोही दी से अभी मेरी बात नहीं हुई है पर उन्हें शामिल करना चाहूंगा में.

तेज : तोह मुझे क्या करना है?

वीर : अभी मेने बताया तोह दी! आप लोगो को hi ये मिलके मैनेज करना होगा. क्या आप सब करोगी?

रागिनी तोह चाहती hi यही थी. हमेशा से hi वह वीर के काम आना चाहती थी. उसके बिज़नेस में उसका हाथ बताना चाहती थी.

रागिनी (गहरी सांस लेते हुए) : तुम चिंता मत करो वीर! में सब समझ गयी हु. और हम सब मिलके सब देख लेंगे. तुम्हे फिक्र करने की कोई ज़रुरत नहीं!

वीर (स्माइल्स) : आपसे यही उम्मीद थी मुझे!

भूमिका : V-Veer! मुझे भी तुमसे कुछ कहना है.

वीर को ध्यान आया की भूमिका पिछली सुबह भी यही कह रही थी.

वीर : कहिये!

भूमिका : W-Woh-

वीर : हम्म!?

भूमिका : M-Mein- में तुम्हे हमारी होटल देना चाहती हु.

उसके वाक्य ने वह बैठे सभी को हैरत में दाल दिया.

वीर : व्हाटट??

सबसे ज़्यादा झटका वीर को hi लगा. जिस होटल को वर्षो से माँ बेटी ने मिलके बढ़ाया, आज वह उससे देना चाहती थी? क्यों?

भूमिका : H-Hmm! मेने बहुत सोचा है इस बारे में. और मुझे ये सही लगता है. अगर हम सब एक परिवार का हिस्सा है तोह ये मेरा होटल, मेरा बिज़नेस नहीं होना चाहिए न? K-Kya ये कहना सही नहीं होगा ~ ‘हमारा बिज़नेस’??

भूमिका का मासूम सा चेहरा जब वीर ने नज़दीक से देखा, खासकर उसके गोर गालो पर गिरती हुई उसकी काली ज़ुल्फ़े तोह वीर के खुद के गाल हलके लाल हो चले.

‘शी- She’s क्यूट!’

[Ahem!]

श्वेता : हे भगवान्!

श्वेता अचानक कड़ी हो गयी.

श्वेता : ये मेने पहले क्यों नहीं सोचा? बीटा तुमने 100 टक्के की बात कही है. जब हम सब साथ साथ है तोह ये मेरा तेरा क्या? वीर! भूमि सही कह रही है.

वीर : हँ?

श्वेता का दिल gad-gad हो उठा. उसकी बेटी ने इतना बेहतरीन सुझाव दिया था. अब तोह जैसे वह वीर के क़रीब आते हुए खुद को मैं में hi आसानी से देख पा रही थी.

वीर : पर-

श्वेता : पर वर कुछ नहीं. बिलकुल! तुम दोनों का हक़ है उसपे. जब भूमि मेरी बच्ची है तोह तुम भी तोह मेरे बेटे हो. और वैसे भी मेने तोह वह होटल प्रांजल के हाथो खो दी थी, तुम्ही तोह लाये थे न उससे. तोह वो तोह वैसे hi तुम्हारी हो गयी.

तेज दोनों को इस क़दर देख व्याकुल हो गयी.

तेज : M-Mom!?

वो भावना को चिंता में देखि. क्या ये दोनों सौतेली माँ बेटी उसके भाई को छीन के ले जाने वाली थी? पर भावना ने उससे शांत रहने का इशारा किया.

भूमिका : एक्चुअली, वीर! H-Hum ये कर सकते है की- तुम्हारे फ़ूड ट्रक पर एक लेबल लगा दे.

वीर : लेबल?

भूमिका : लिखे- ओन्ड बी होटल प्रेस्टीज. इस से लोगो को पता चलेगा की फ़ूड ट्रक शहर की एक बड़ी होटल का हिस्सा है. साथ hi हमारी होटल का भी अद्वेर्तिसेमेन्ट हो जायेगा.

आईडिया सुनते hi वीर सुरप्रीसेड रह गया.

[Woah! She’s intelligent.]

होटल प्रेस्टीज श्वेता और भूमिका की होटल का नाम था. अगर ट्रक पर ये लेबल चढ़ जाए की ट्रक शहर की जानी मानी होटल प्रेस्टीज द्वारा चलाया जा रहा है तोह ज़ाहिर है इस से दो काम होने वाले थे. होटल का अद्वेर्तिसेमेन्ट. और साथ hi लोगो को ये पता चलता की फ़ूड ट्रक खाली फ़ूड ट्रक नहीं, बल्कि एक बड़ी होटल का हिस्सा है.

एक तीर से दो शिकार.

पर इतना hi नहीं, वीर और भूमिका एक दूसरे के बिज़नेस में अब ट्रांसपेरेंसी रख सकते थे. यानी वह एक दूसरे का बिज़नेस देख सकते थे. और तोह और घर पर बैठी श्वेता भी उनसे जुड़ सकती थी. सुझाव बहुत hi ज़्यादा ज़बरदस्त था.

श्वेता : एक्सीलेंट आईडिया मेरी बच्ची! बिलकुल! हम यही करेंगे!

वीर बस मुस्कुरा के रह गया.

और इसी के साथ वीर ने अपनी बिज़नेस प्लानिंग को अपने घर की औरतो के ऊपर सौंप दिया.

***

कुछ hi घंटो में शाम होने वाली थी और रागिनी की हालत ख़राब हो राखी थी.

जानती थी वह की ये कितना जोखिम बड़ा काम था, पर अब उस से ज़रा भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था. वीर के कमरे में उसकी सफाई के बहाने वह दरवाज़ा अंदर से बंद की हुई थी और इधर से उधर टहल रही थी.

जब अचानक से दरवाज़े पर नॉक हुई. रागिनी ने खुश होते हुए दरवाज़ा खोला और उसके सामने वीर था.

वीर : आप जानती हो ये कितना रिस्की है?

रागिनी : मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा वीर! टेक में नाउ~

वीर को उसकी कल्लोर से पकड़ते हुए अंदर खींच उसने दरवाज़ा बंद कर दिया.

और उन् दोनों के होंठ एक दूसरे से भीड़ गए. रागिनी अपने लबो से वीर के लबो को चबा रही थी. वह इतनी खतरनाक किसर बन्न चुकी थी की वीर खुद हैरत में था.

इस से पहले वीर ने सिर्फ दिव्या को hi एक क्रेजी किसर माना था पर रागिनी ने सभी औरतो को किसिंग के मामले में अब पछाड़ दिया था. वह पूरा का पूरा मुँह hi चूम डालती थी. उसकी किश इतनी स्लॉपी होती थी की थूक और लार से उन् दोनों के मुँह अक्सर सन्न जाय करते थे.

और एक और अजीब सा चस्का चढ़ा हुआ था उससे. या यु कहे की एक फेटिश~

रागिनी : न्नन्न~ J-Jaldi दो! जल्दी दो न बेबी~

अपना मुँह खोल, जीभ बाहर निकाल वह किसी चीज़ की मांग करने लगी.

वीर (स्माइल्स) : आप बहुत डर्टी हो रही हो आज कल!

रागिनी : उम्म्म्म~ ी वांट तो बे डर्टी वीर! ी वांट तो बे डर्टी!! लेकिन सिर्फ तुम्हारे लिए! P-Pleaseeee~ दे दो नाआ~

वीर के मुँह से जैसे hi फिर थूक निकला वह सीधा जाके रागिनी के मुँह में टपका और पालक झपकते hi,

*गुलप्स*

वह उससे निगल गयी.

“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह~~”

उसके बाद तोह वह दोनों एक दूसरे पर टूट पड़े. बिस्तर पर लेती रागिनी उससे बाहे फैला फैला के बुलाई,










और दोनों के बीच एक क्विक सेक्स आखिर हो hi गया.

वह दोनों नहीं जानते थे की नीचे मौजूद सुमन पीठ पीछे उनकी मदद कर रही थी ताकि दोनों किसी भी तरह पकडे न जाए.

***

जाने का समय हो चूका था. सभी उदास थे, पर सबसे ज़्यादा तेज और रागिनी hi थी.

भावना उसके नज़दीक आयी,

भावना : मेरे लिए कुछ काम नहीं बताया?

वीर : है न आपके लिए भी काम!

भावना : क्या?

वीर : जब तक में वापस न आ जाऊ तब तक आप अपनी जॉब के लिए कही भी बाहर नहीं जाएँगी.

भावना : P-Par?

वीर : मेने कहा न! जब तक में लौट न औ आप कही भी बाहर नहीं जाएँगी.

भावना : लेकिन क्यों?

वीर : बस मेरी बात मानिये.

भावना : क्या मुझे जान का खतरा है?

वीर मौन रहा. और उसकी चुप्पी को भावना फ़ौरन hi समझ गयी.

भावना : नहीं जाउंगी! अब खुश?

वीर : हम्म!

भावना : ये दही शक्कर खा लो! शुभ काम के लिए जा रहे हो तोह इससे खा के जाओ. तुम्हारा काम सफल होगा.

माँ के हाथ से दही शक्कर खा के वीर जाने के लिए हुआ तोह भावना ने फिर एक बार उससे रोक लिया.

वीर : अब क्या हुआ?

वह कुछ न बोली. बस अपनी कलाई पर बंधा उसने एक काला धागा उतारा और वीर की कलाई पर बाँध दिया.

वीर : ये क्या है?

भावना : कुछ नहीं है.

वीर : अरे? बताइये न क्या है ये?

भावना : कहा न कुछ नहीं है! जाओ अब!

वीर ने धागे को चेक किया. पर वह एक साधारण धागा hi था. उसकी समझ में नहीं आया की जब धागा मामूली था तोह उसकी माँ बाँध क्यों रही थी?

खर्र! वह बारी बारी सभी के गले से लगा. तेज उसके गले से जब लगी तोह उसने शर्माते हुए उसके गाल भी चूम लिए.

तेज :J-Jaldi आना! Okay?

वीर (स्माइल्स) : हम्म!

तोह वही भूमिका संकोच के चलते आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. श्वेता, भावना ने भी प्यार किया उससे.

और वीर ने जब अपनी बाहे khud-ba-khud फैलाई तोह भूमिका धीरे से आगे बढ़ उसके गले से लग गयी.

रवानगी किसी को भी नहीं भाति थी. परन्तु, वीर का जाना ज़रूरी था.

उन् सब को अंतिम बार टाटा bye-bye करते हुए वह रागिनी के साथ कार में निकल गया.

उसके जाते hi घर अगले hi पल सूना सूना सा हो गया. तेज अपना मूड ऑफ लिए अंदर को जाने लगी. तोह भूमिका उससे देख बोली,

भूमिका : H-Hum- हम वीर की हेल्प करने के लिए कुछ डीडे कर लेते है?

तेज ने उससे एक बार देखा और चेहरा वापस से झुका के वह अंदर चली गयी. बेचारी भूमिका तोह बस उससे चीयर उप करने की कोशिश कर रही थी. पर शायद तेज को उभरने में कुछ समय लगने वाला था.


बाहर जो अभी भी कड़ी हुई थी वह थी भावना. काफी समय बाद उसके माथे पर चिंता की लकीरे छायी हुई थी.

‘आखिर!? झूठ बोल के जाने की क्या ज़रुरत पद गयी मेरे बच्चे?’

वह अपने मैं में कही. उस रास्ते को ताकती रही जहा से गुज़र के वीर गया हुआ था.

6 बजे के आस पास की फ्लाइट थी. करीबन वीर को 30 घंटे का सफर तय करना था.

फ्लाइट पर बैठने से पहले रागिनी ने उससे बोहोत प्यार किया. बेचारी का बिलकुल मैं नहीं हो रहा था वीर से अलग होने का. जैसे तैसे वीर ने उससे कंसोल किया और फ्लाइट में बैठ रवाना हो गया.

30 घंटे के सफर के बाद वह फाइनली पेरिस पहुँच गया.

चार्ल्स दे गुल्ले एयरपोर्ट पर प्लेन लैंड किया और वीर प्लेन से बाहर आया. रात के 12 के क़रीब समय हो चूका था. और उसके नज़रे किसी की तलाश में थी.

एयरपोर्ट पर भी ना मात्र की भीड़ थी. ढूंढते hi वह जैसे hi थोड़ा आगे बढ़ा, उससे वह शख्सियत दिखाई देगी जिसके लिए वह यहाँ तक इतनी दूर आया था.

उसके सामने खूबसूरती की वह बाला कड़ी हुई थी.






अवा!!!

या यु कहे की,

नतालया!!!

***


ुशान्त आइलैंड, फ्रांस

नाईट ~ 12:36 ऍम


इस टापू के ठीक थोड़ी दूर पर एक क्रूज समुन्दर में ठहरा हुआ था.





वह बेहद विशाल था. लाइट्स से पूरा जगमग हो रखा था. जहाज बड़ा ज़रूर था पर लोग सिर्फ गिनती के hi थे. सभी की आँखों पर एक डेकोरेटिव मास्क था.

मंद मंद म्यूजिक की धुन पे, हाथ में रेड वाइन का ग्लास लिए वह सभी झूमने लगे. जब एक आदमी ने उनका ध्यान खींचा,

“लेडीज एंड जेंटलमैन!!”

मिछ पर उसकी आवाज़ सुन्न, सब उसकी ऑर्डर देखे. उसने एक सूट पहना हुआ था. पर आँखों पर उसके भी वही डेकोरेटिव मास्क था.

“समय आ गया है की हमारे पहले फ़ूड का लुत्फ़ उठाया जाए.”

“यययययययय~” वह मौजूद सभी चीयर करने लगे.

शायद कोई खाने की डिश थी? कुछ बेहतरीन सा भोजन? वह इंसान भी झूमते हुए आगे बढ़ा.

आम तौर पर ये एक बड़े रईस लोगो की पार्टी प्रतीत हो रही थी. पर आगे जो घटित होने वाला था उससे देख के अच्छा से अच्छा की रूह काँप उठती.

वह आदमी गुनगुनाते हुए क्रूज की एक खुली रेलिंग के नज़दीक आया.

“फ़ूड! फ़ूड! फ़ूड! फ़ूड!” सभी फिरसे शोर करने लगे.

वह पुनः आगे बढ़ा. और जैसे hi वह रेलिंग के छोर्र पर पहुचा.

छोर्र से लगे एक लकड़ी का प्लान्क जुड़ा हुआ था. जिसके ऊपर,

एक व्यक्ति खड़ा था. उसके हाथ परर बंधे हुए थे. और मुँह पारर कपडा ठूसा था. आँखों से ासु निरंतर बहते जा रहे थे.

वह ऊपर वाले से दुआ कर रहा था. पर ऊपर वाले ने एक न सुनी. क्युकी अगले hi शान,

*बमममम*

उससे पीछे से एक ज़ोरदार लात पड़ी और वह हवा में उछालते हुए समुन्दर में जा गिरा. लोग दौड़ते हुए रेलिंग के नज़दीक आये और नज़ारा देखने लगे. कुछ तोह अपना फ़ोन निकाल रिकॉर्ड करने लगे.

उन्हें मज़ा आ रहा था. इस फेटिश के लिए hi तोह वह ढेर्रो खर्च करते थे और समाज से छुप के अपनी डार्क देसिरेस को पूरा करते थे.

पानी में गिरा आदमी छाप छाप कर के तड़पने लगा. उससे टेरर्ना नहीं आता था. और पानी में होती हलचल महसूस करते hi अगले hi पल,

*कहाआआआक्कक्कछहहहह*

“Oooooooooo~~~”

“Buuuuuuuuuuuuu~”

“वोओओओहूऊऊऊओ~”

लोग तालिया बजाने लगी. उस आदमी को समुन्दर में मौजूद शार्क ने दो टुकड़ो में काट के रख दिया था.

समुद्र का पानी लहू लुहान हुआ और लाल रंग उसकी ऊपरी सतह पर बिछ गया.






जिसने लात मारी थी सभी ने उसके लिए ताली बजायी और अपने कोट को एडजस्ट कर वह अपने हाथ फैला के जनता के सामने झुक गया.

*बोऊं* *बोओओओओम*

*स्वूऊऊऊसस्सश्ठ*

उसके झुकते hi पीछे आइलैंड से हवा में आतिशबाज़ी हुई और आसमान में अलग अलग रंग बिखर गए.

पास कड़ी एक लड़की उसके क़रीब आयी,

लड़की : फेस्टिवल की शुरुआत कमाल की हुई है. कुछ कहना चाहोगे?

आदमी ने बिना कुछ कहे उस लड़की को अपनी बाहो में लिया और उससे जोरर से चूमा.

चूमने के बाद उससे साइड कर वह रेलिंग के पास गया और आहिस्ता से बोलै,


“रंगो का मिश्रण है क्रिमसन.

खून का रंग है क्रिमसन.

मुझसे किस्मत भी हारती है स्वीटी,

क्युकी में hi हु क्रिमसन!!”


लड़की (स्माइल्स) : तोह... अब क्या करना है?

क्रिमसन (स्माइल्स) : कुछ नहीं! मेरा शिकार… आ चूका है.

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आज के लिए इतना hi गाइस.

अपडेट नार्मल साइज का है. 4.2क वर्ड्स. क्रिमसन फेस्टिवल स्टार्ट हो चूका है. दबा के लाइक्स थोक के जाने का और रेवोस रखने का. यहाँ से अब जो होगा वह बवाल hi होगा.


धन्यवाद!
 
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