Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 5 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

अपडेट- 27 ~ ा लेसन तो बे तौह्त (2)

अब तक....

वीर (मैं में) : भूमिका... दी...

भूमिका (मैं में) : व्... वीईएर!!!???

दोनों एक दूसरे को देख रहे थे. वीर के चेहरे पे जहा कोई भाव नहीं थे तोह वही भूमिका एकदम स्तब्ध सी कड़ी उससे hi देख रही थी. सबसे पहला सवाल मैं में यही था. क्या ये वही वीर है!?

अब आगे...

भूमिका एक प्रोफेशनल अत्तिरे में वह भौचक्की सी कड़ी सामने बैठे वीर को देखे जा रही थी.

क्या ये वही वीर था!?

कैसे!?

जिस वीर को उसने घर से निकलता हुआ देखा था, ये वीर...

ये वीर उस वीर से कही ज़्यादा स्मार्ट, आकर्षक, और कुछ अलग सा प्रतीत हो रहा था.

पर उस से भी बड़ा सवाल था की वीर यहाँ क्या कर रहा था!? और वो भी सोनिआ जैसी अमीर लेडी के साथ!? वो भी उसके बगल में बैठ कर!?

उससे सुबह hi पता लगा था की आज सोनिआ मिस उसकी होटल में फिरसे आने वाली है. और वो सोनिआ को जानती थी. क्युकी अक्सर सोनिआ उसकी होटल में कॉफ़ी पीने आया करती थी. तोह थोड़ी बोहत पहचान उसकी उस से हो चुकी थी. आज वो किसी काम के चलते लेट हो गयी थी होटल आने में और इसलिए वो होटल में आते hi सीधा सबसे पहले सोनिआ के hi पास आयी उससे वेलकम करने.

क्युकी वही हमेशा उसका वेलकम करती थी. पर आज...

आज उससे एक झटका सा लगा जब उसने अपने उस सौतेले भाई को देखा जिससे कुछ हफ्ते पहले घर से निकाल दिया गया था. और उससे अब और भी अजीब सी फीलिंग्स आ रही थी.

घर में वीर उसके सपनो में कई बार आ चूका था और हर्र बार उसका अंतर्मनन उस से ये सवाल पूछता था की क्या जो भी कुछ वीर के साथ वो सभी कर रहे है, क्या वो सही है!?

ये बात उसने अपनी माँ, श्वेता को भी बतायी थी. पर उसकी माँ ने केवल ये कह के बात ताल दी थी, की वो जो भी कर रहे है अपने लिए कर रहे है और उसमे कुछ भी बुरा नहीं है. जब वीर से आज तक उसने बात hi ना की तोह फिर उसके लिए हमदर्दी क्यों फील करना!?

ये श्वेता के बोल थे पर कही न कही, भूमिका को डर ज़रूर रहता था.

वो अभी एकदम स्तब्ध सी कड़ी हुई वीर को देख रही थी की उसके बगल में बैठी सोनिआ ने दोनों की hi नज़रो को भांपा और पूछा,

"यू... यू बोथ क्नोव एच इतर!?"

उसने खड़े होते हुए कहा. उसकी अचानक आयी आवाज़ जैसे भूमिका को होश में लायी और वीर और उसने दोनों ने hi साथ में जवाब दिया.

वीर : She's माय सीस...

भूमिका : No ी don't...

और अगले hi पल एक ख़ामोशी सी छा गयी.

पर भूमिका को जैसे नेक्स्ट सेकंड hi रीलीज़ हुआ की उसने क्या कह दिया. वो कहना तोह यही चाहती थी पर उसने ये तब कहा जब वीर ने जस्ट उससे उसकी बहिन कहके इंट्रोडस किया.

एक प्रकार से जहा वीर ये एक्सेप्ट कर रहा था की वो उसकी बहिन थी तोह वही दूसरी तरफ भूमिका खुद इस बात को झुटला रही थी.

शर्मिंदगी!

अब उसके मैं में वो विचार आने फिरसे शुरू हो गए थे जिन्हे वो कबसे दबायी हुई थी. बेचैनी के मारे उसका सीना ऊपर नीचे होने लगा.

वो अपना मुँह खोल खुद को करेक्ट करती पर उसके पहले hi वीर बोल उठा.

"यह! राइट!! राइट! वे... वे don't क्नोव एच इतर..." कहते हुए उसने एक मुस्कान के साथ अपनी नज़रे फेरर ली.

जिस ावक्वार्ड माहौल से भूमिका बचना चाह रही थी वो तोह वीर ने hi यु दूर कर दिया था उसके लिए ये एग्री कर के. की वो दोनों hi एक दूसरे को नहीं जानते. अब भूमिका को तोह यहाँ राहत की सास ले लेनी चाहिए थी.

पर...

ऐसा हुआ नहीं.

उल्टा भूमिका और भी ज़्यादा अजीब फील करने लगी. उसकी बेचैनी और भी बढ़ चुकी थी. वीर को यु मुस्कुराते हुए उसकी बात पर एग्री करते पता नहीं क्यों पर...

भूमिका को ज़रा भी अच्छा नहीं लग रहा था. वो उस वक़्त क्या फील कर रही थी वो खुद नहीं बया कर सकती थी. ऐसी फीलिंग उससे इसके पहले कभी नहीं हुई थी. और ये फीलिंग बोहत hi ज़्यादा दर्द दे रही थी उससे अंदर से. वीर की मुस्कान जैसे चींख चींख के उस से कह रही थी की तुम लोगो ने बोहत गलत किया है मेरे साथ. भूमिका अंदर hi अंदर बेहद डर रही थी...

भूमिका : ी...

उसके होंठ खुले पर दिमाग जैसे काम करना बंद कर दिया था. उससे सूझ hi नहीं रहा था की क्या कहा जाए.

बगल में कड़ी सोनिआ चुप चाप सामने हो रहे सन को बड़ी hi हैरानी से देख रही थी. पर बोली कुछ नहीं.

अंत में भूमिका ने जब देखा की वीर बिना उसकी तरफ देखे, उस से नज़रे फ्री वापस अपनी सीट पर बैठ चूका है तोह उसने जैसे तैसे अपनी हिम्मत जुताई और सोनिआ को देखा.

भूमिका : ी... ी हैवे सम अर्जेंट वर्क मिस. प्लीज! प्लीज एन्जॉय! िफ़ यू नीड एनीथिंग, यू कैन जस्ट आस्क थे मैनेजर. नाउ, प्लीज... एक्सक्यूज़ में!

कहते हुए वो वीर को एक अंतिम बार देखि, पर वीर ने उसकी तरफ एक बार भी पलट के नहीं देखा. अपना निचला होंठ दातो से बेचैनी में दबाये वो वह से तेज़्ज़ कदमो के साथ निकल गयी.

उसके पलटते hi वीर ने अपनी नज़रे टेढ़ी कर उससे देखा. बड़ी hi घबराई और बेचैन सी लग रही थी वह. और कुछ hi पालो में वो वीर की नज़रो से ओझल हो चुकी थी.

पर वीर ने एक काम ज़रूर किया था जब वो इधर कड़ी हुई थी. और वो था..

'चेक!'

[ नाम - भूमिका

आगे - 25 इयर्स.

बायो - भूमिका एक बेहद hi सवेंदनशील लड़की है. वो अपनी होटल को अपनी माँ के साथ आगे बढ़ा के पूरे शहर में अपनी होटल का नाम करना चाहती है. उसके कई सारे सपने है जो केवल उसके करियर यानि की उसकी अपनी होटल से hi जुड़े हुए है. माँ की कही गयी बातो पर चलती है क्युकी उसकी माँ hi उसकी सबसे बड़ी आइडल है. मैं में कई सवाल है उसके और एक गहरी चिंता, साथ hi साथ एक अजीब सा डर भी जिससे वो समझ नहीं पा रही है.

फवौराबिलिटी - 14

रिलेशनशिप - स्टेप सिस्टर.]

'14 फवौराबिलिटी?? ी नेवर थॉट की उनकी फवौराबिलिटी इतनी होगी मेरे लिए!? मुझे तोह लगा था जीरो होगी.'

[Still, ye bhi kam hi hai master. Wo aapki behan hai Sauteli. Aisa kese ho sakta hai!? Aap log ek hi ghar me rehte the.]

'वेल! कभी बात hi नहीं होती थी. उस हिसाब से तोह ये 14 भी ज़्यादा है मेरे लिए.'

[Baat nahi hoti thi!? Hmm... I searched your memories. Waqai! Aapki toh baat hi nahi hoti thi. Just how ridiculous this is... Aap Hi, Hello bolte the and she just used to see you and ignore!? How can she!?]

'वेल! शी doesn't हैवे अन्य इंटरेस्ट इन में सो...'

[And she'll pay for that!!]

'हँ!?''

पता नहीं क्यों पर पल भर के लिए वीर को पारी की आवाज़ में नाराज़गी और गुस्सा दोनों hi फील हुआ.

***

इधर भूमिका तेज़्ज़ कदमो के साथ चलते हुए सीधे अपने केबिन में आयी और दरवाज़ा अंदर से hi लॉक करके वो दरवाज़े से सत् के कड़ी हो गयी.

'व्हाई!? व्हाई इस हे हेरे? जस्ट व्हाई? ी... व्हाई इस हे विथ मिस सोनिआ? वो उन्हें कैसे जानता है? हे... हे साइड ी वास् हिज सीस... एंड ी... ी डिनाइड आईटी. क्या मेने सही किया था!?'

उसने खुद से सवाल किया और पल भर के लिए अपनी माँ, श्वेता को इमेजिन किया की यदि वो यहाँ होती तोह क्या जवाब देती?

मेरी बच्ची! तुमने एकदम सही किया. भूल जाओ उससे. वो अब हमारे घर का सदस्य नहीं है मेरी बच्ची. हमे बस अपने ऊपर ध्यान देना है बेटी. हमने वादा किया था न? की हम हमेशा एक दूसरे का साथ देंगे? और केवल अपने लिए hi सोचेंगे? तोह भूल जाओ सब कुछ मेरी बच्ची.

भूमिका को जैसे अपनी माँ के बोल मैं में hi सुनाई दे रहे थे. यदि वो यहाँ होती तोह ऐसा hi कुछ कहती.

पर इसके बावजूद, उसका अंतर्मनन चींख चींख के कह रहा था की...

जो कुछ भी उसने वीर के साथ किया, वो नहीं करना चाहिए था. बाहर भी उसने जो अभी कहा, उसके चलते उससे अब ग्लानि के भाव आ रहे थे. साथ hi साथ एक अजीब सी बेचैनी जो उसके दिल को अंदर से hi निचोड़ती जा रही थी.

***

इधर वीर अपनी सौतेली बहिन भूमिका के hi बारे में सोच रहा था तोह पारी की आवाज़ उससे होश में लायी,

[Master! Sonia is looking at you... You have to explain it to her.]

'हँ? यह! येह... राइट!'

सोनिआ हैरत में भूमिका को जाते देखि और फिर वीर को. वो बैठी और वीर से पूछने hi वाली थी की वीर खुद hi बोल पड़ा.

वीर : यू सीम सुरप्रीसेड!?

सोनिआ : ऑफ़ कोर्स ी ऍम... वो...

वीर (स्माइल्स) : मुझे लगा था जैसे आपने मेरी साड़ी डिटेल्स निकलवा ली, इन्क्लूडिंग माय फ़ोन नंबर तोह ये भी आपको पता hi होगा...

सोनिआ : ?? हँ? No... I'm सॉरी वीर बूत...

वीर : She's माय सिस्टर!

सोनिआ : ???

वीर : ...

सोनिआ : No वाआयीयी!!!

वीर : *स्माइल्स*

सोनिआ : ओह्ह गॉड! ओह न्यू! मेने ये... ट्रस्ट में वीर! मेरा बिलकुल भी ऐसा कोई इरादा नहीं था. की तुम्हे... तुम्हे यहाँ मेने जान बूझ के बुलाया हो. ी रियली... ी रियली didn't क्नोव अबाउट थिस ात आल.

वीर : Don't वोर्री! मेने ऐसा कभी नहीं समझा. सो, यू don't हैवे तो...

सोनिआ : ओह थैंक गॉड! राइट! मेने प्रकाश अंकल से कह के तुम्हारे बारे में इनफार्मेशन निकलवाई थी बूत... ी ओनली क्नोव की तुम्हारी कुछ बहने है और भाई एंड तुम्हारे डैड क्या काम करते है एंड आल. बूत इतना डिटेल्स में मुझे इन्फो नहीं थी. मुझे बिलकुल भी नहीं पता था..

वीर : अस ी साइड... It's okay!

सोनिआ : येह! थैंक्स! सो!?? उम्... ी मैं... She's योर सिस्टर. तोह वो ऐसे क्यों...!?

वीर : She's माय स्टेप सिस्टर. एंड रही बात वो ऐसा क्यों बेहवे कर रही है थें... ी थिंक it's पर्सनल!?

सोनिआ : अहह! राइट! सॉरी! िफ़ it's पर्सनल थें...

सोनिआ वीर से नज़रे चुराते हुए इधर उधर देखने लगी और मैं में अपने hi विचारो में लीं हो गयी.

'इतने दिनों से में भूमिका से यहाँ मिलती आयी. और वो वीर की स्टेप सीस है!? थैंक गॉड की वीर ने मुझे गलत नहीं समझा. वर्ण वो यदि ये सोच लेता की मेने उसका मज़ाक बनाने के लिए यहाँ जान बूझ के उसकी बहिन की होटल में उससे बुलाया है तोह गड़बड़ हो जाती. वैसे hi वो पहले की मिसुन्दरस्टण्डींग मेने दूर नहीं की है, और उसी के लिए तोह मेने उससे बुलाया है यहाँ. पर... वीर की बहिन... वो ऐसे क्यों रियेक्ट कर रही थी!? लिखे ी क्नोव की वीर के डैड ने उससे घर से निकाला था. बूत... क्या उसकी बहिन भी... वैसी hi है!? मुझे भूमिका से बात करते हुए तोह ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ.'

वीर : एहम!!!

सोनिआ : हँ!? यह! येह... वो...

वीर : व्हाई दीद यू कॉल में!?

सोनिआ : यह! राइट! वीर... मेने तुम्हे इसलिए बुलाया था... वो पिछली मुलाक़ात में हमारे बीच जो भी बातें हुई थी पैसो को लेकर वो एक मिसुन्दरस्टण्डींग थी. ट्रस्ट में, मेरा ऐसा कोई भी इरादा नहीं था जैसा सुहाना दी ने तुम्हे बताया था. लिखे... पैसे से तुम्हारा एहसान चुकाना एंड आल... में वो सब इसलिए करना चाहती थी बिकॉज़... मेरे पास तुम्हे देने के लिए कुछ और नहीं है वीर. एंड ी थॉट... की यू अरे डेफिनिटेली इन नीड ऑफ़ मनी. आईटी विल हेल्प यू... ट्रस्ट में... मेरा उसके पीछे कोई भी गलत इंटेंशन नहीं था. ी जस्ट...

वो बिना चुप हुए बस बोलती hi जा रही थी. और वीर का यु उससे बिना कोई भाव के देखना जैसे उससे और अपने आप को बेगुनाह साबित करने में मजबूर करता जा रहा था. वो वीर की खामोशी देखती और अपने निचले होंठ को दबाते हुए फिरसे अपने बोल चालु कर देती. वो कोई भी कसार नहीं चोरर रही थी उससे कन्विंस करने में.

और अंत में वीर फाइनली उसकी बातें सुनते सुनते मुस्कुराया जिसके चलते सोनिआ चुप हो गयी.

सोनिआ : ???

वीर (स्माइल्स) : ी गेट आईटी. It's ऑलराइट! आपका कोई गलत इंटेंशन नहीं था. थें, ी don't ब्लामे यू.

सोनिआ (शिघ्स) : ओह्ह्ह गॉड! थैंक यू सो मच... थैंक यू! फाइनली!

वो अभी बैठे hi हुए थे की अचानक से आ रही चहल पहल की आवाज़ सुन्न दोनों के चेहरे एंट्रेंस की ऑर्डर मुद गए और उन्होंने देखा की...

सुहाना 5 से 6 लेडीज के साथ हस्ती हुई अंदर आ रही है.

'फ़क! व्हाई हेर!?'

[Even I don't like her master.]

वो हस्ते हस्ते सोनिआ के पास आयी और उसके गले से लग गयी.

सुहाना : माय सोनू! ले आयी न!?

सोनिआ : हम्म!

सुहाना ने फिर बगल में बैठे वीर को देखा और उससे देखती hi उसकी बॉहे चढ़ गयी.

सुहाना (शॉकेड) : तुममम!?? व्हाट अरे यू दोंग हेरे?

सोनिआ : डीइइइइइइइ!!!! मेने बुलाया है उससे. में आपके लिए ले आयी हु न, अब आप जाइये न बातें करिये अपनी फ्रेंड्स के साथ.

सुहाना : वो तोह में करुँगी hi. पर इससे क्यों बुलाया है तुमने यहाँ पर!?

सोनिआ : ी हैवे माय रेअसोंस. अब आप जाइये प्लीज.

सुहाना : ऑफ़ कोर्स I'll जो. पहले वो दो तोह...

सोनिआ : हम्म ये लीजिये और बोहत संभल के हां!?

सुहाना : ी क्नोव बाबा...

सोनिआ ने फिर एक पैकेट के अंदर से एक बॉक्स निकाला एयर सुहाना को थमा दिया.

सुहाना ने वो छोटा बॉक्स अपने हाथ में लेते hi वीर को देखा और पता नहीं क्या सूझा पर वो मुस्कुरायी.

वो वही मुस्कान लिए वीर के पास आयी और उसके बगल से कड़ी हो गयी.

सुहाना : गर्ल्स! के हेरे!!!

पीछे कड़ी एक से एक सुन्दर महिलाये जो उसकी hi उम्र यानी की 29-30 साल की जो प्रतीत हो रही थी और नेवली मैरिड थी वो आगे बढ़ ख़ुशी के मारे उसके पीछे से आके साथ में कड़ी हो गयी.

सभी लेडीज वीर के एकदम पास कड़ी हुई थी. और सबकी नज़रो से वीर के नैन टकराये. न चाहते हुए भी वीर यहाँ शर्मा गया. इतनी साड़ी एक साथ औरतो को ऐसे अपने करीब कभी नहीं पाया था उसने आखिर.

एक कुटिल मुस्कान देते हुए सुहाना ने बॉक्स खोला और उसके अंदर एक और बेहद hi छोटा सा बॉक्स निकला. एक रिंग का बॉक्स.

जैसे hi सुहाना ने उससे खोला...

सभी की नज़रो में एक बेहद hi ख़ूबसूरत सी रिंग दिखाई दी.

एक डायमंड रिंग.

करीब 5 से 10 कैरट के बीच की थी वो डायमंड रिंग.

इतनी सुन्दर की साड़ी लेडीज वह मुँह खोले एकदम शांत पद गयी.

सुहाना खुद रिंग देख के मानो खो सी गयी थी उसमे. इतनी आकर्षक, इतनी ख़ूबसूरत रिंग उसने शायद hi पहले कभी देखि थी.

सुहाना : It's ब्यूटीफुल राइट!?

वीर : ...

सुहाना (स्माइल्स) : दो यू क्नोव हाउ मच आईटी कॉस्ट्स?

वीर : ....

सुहाना (स्माइल्स) : फूकिंग 1.57 क्रोर्स...

मानो एक बम सा गिराया था सुहाना ने प्राइस डिस्क्लोसे करते hi. साथ में कड़ी सभी लड़कियों की प्राइस सुन्न के hi हालत खस्ता हो गयी थी.

1.57 करोड़ की अंगूठी!?

सुहाना (स्माइल्स) : विथ ा ब्रिलियंट कट... बताओ! कभी देखि है ऐसी अंगूठी!?

उसने बॉक्स आगे करते हुए वीर के चेहरे के सामने किया जैसे मानो उसके मुँह में hi घुसेड़ देगी. हालत तोह वीर की भी सही नहीं थी अंदर से प्राइस sunn'ne के बाद. पर उन् सब के बावजूद उसके अपने चेहरे पर कोई भी भाव नहीं व्यक्त किया.

वो बस एक्सप्रेशनलेस सुहाना को देख रहा था, जैसे मानो अंगूठी थी hi नहीं उसके सामने.

सुहाना : बोलो!? कभी देखि है ऐसी रिंग? रिंग चोर्रो कभी ज़िन्दगी में 1.57 क्रोर्स रुपये सुने है किसी के मुँह से? कभी इतना महंगा सामान देखा है?

सोनिआ (फ्रोंस) : डीई! व्हाट अरे यू...!?

सुहाना : शांत सोनू! लेट में टीच हिम समथिंग.

वीर : ...

सुहाना : बोलो!? कभी देखा है? ी गेस ये रिंग तुमसे भी महंगी होगी हाहाहाहा~

उसकी बातें सुन्न उसके साथ आयी लेडीज भी हस्सन लगती है. वही सोफिस्टिकेटेड वे में, एक हाथ से अपना मुँह ढकते हुए हल्का हल्का खिल खिला के हस्सना, जैसे मानो बोहत hi प्यारा सा जोके मारा था सुहाना ने. पैसा बोलता है. सुहाना के पास पैसा था जिसके चलते उसके साथ आयी उसकी सहेलिया भी उसकी बात पर हस्स रही थी ये जानते हुए भी की किसी की बेइज़्ज़ती करना सही बात नहीं थी.

इतना सेंस उन् सभी में था. पर पैसा जैसे सब को झुका देता है.

वीर अभी भी बिना कोई रिएक्शन दिए केवल सुहाना को देख रहा था. सुहाना भी जैसे जानती थी की आखिर कब तक ऐसे देखेगा. वो जैसे वीर को बताना चाहती थी की पैसा hi सब कुछ है और वीर से क़ुबूल करवाना चाहती थी की पैसा hi सब कुछ है. बड़ी बड़ी डींगे मारी थी उस दिन वीर ने उससे ये कह के की पैसा एक दिन उससे ले डूबेगा. उस बात को भूली नहीं थी सुहाना. आज वो यही साबित करना चाहती थी की इसी पैसे से वो वीर को इस बार शर्मिंदगी के सागर में डुबोएगी.

सुहाना : यू क्नोव गर्ल्स!?

गर्ल्स : हम्म?

सुहाना : थिस गाए... फुफु~ माय डरेस्ट सिस्टर सोनू ोफ्रेड हिम मनी... एंड थिस गाए... यू क्नोव व्हाट हे दीद???

वो सभी प्रश्न भरी आँखों से उससे देखि...

सुहाना : थिस गाए फूकिंग रिजेक्टेड आईटी... हाहाहाहा~

"व्हाट!?"

"No वैयय्यी!"

"रियली!?"

"हु थे हेलल रेजेक्ट्स मनी?"

"I'm सॉरी तो से! बूत अरे यू नट्स बॉय?"

"लिखे सीरियसली!?"

वो कड़ी सभी वीर पे एक एक करके अपने प्रश्नो से ताने मारने लगी. उसपे तंज कस्सणे लगी.

पर वीर फिर भी नहीं डगमगाया...

उसकी आँखों में जैसे एक संकल्प था. दृढ़ता थी. की वो चाहे कुछ भी हो जाए इन् फ़िज़ूल की बातो से नहीं डगमगाएगा.

और कही न कही उसका ये ऐटिटूड सुहाना को और भी ज़्यादा गुस्सा दिला रहा था. इतना सब कुछ कह देने की बाद भी वीर ने कोई रिएक्शन नहीं दिया था जिसके चलते अब सुहाना का पारा चढ़ रहा था. उससे तोह लगा था जल्द hi वीर उस से माफ़ी मांग के कहेगा की आप सही हो और में गलत.

पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. उल्टा वीर की वो स्तर उससे और भी ज़्यादा पइसस ऑफ कर रही थी.

"ोुउउउउ" अपने दांतो को मीस्ते हुए उसने घर के वीर को देखा.

और फिर अपने एक हाथ उसकी टेबल पर पटकते हुए चिल्लाई,

सुहाना : Don't थिंक ी don't अंडरस्टैंड. ी क्नोव तुम अंदर hi अंदर सेहम गए हो राइट? यू don't हैवे अन्य आंसर नाउ. कहा गयी तुम्हारी वो आदर्श वाली बातें? वो बड़ी बड़ी जो तुम फलसफा की बातें फेक रहे थे उस दिन? क्या कहा था तुमने? मुझ में घमंड है पैसो को लेकर? तोह हां है मुझ में घामड़ पैसो का क्युकी मेरा पास पैसा है. समझे यू इडियट!? ी हैवे फूकिंग मनी.

वीर : .....

सुहाना : ोूउउ.... ोूउउ... ी क्नोव यू अरे सकारेद नाउ. मेने बोलती जो बंद कर दी अब तुम्हारी. मनी कैन बुय एवरीथिंग इडियट. एवरीथिंग! इवन हैप्पीनेस. बेवक़ूफ़ होते है वो लोग जो कहते है मनी can't बुय हैप्पीनेस. सब कुछ तोह पैसा hi है. ये वही लोग कहते है जिनके पास पैसा नहीं होता. मनी ब्रिंग्स यू हैप्पीनेस. खुशिया देता है पैसा. पैसे से कभी कोई उदास रह hi नहीं सकता. सब कुछ पॉसिबल है पैसे से. समझे!? एंड यू फूकिंग कीप तहत इन योर मंद नाउ.

[What the helllll!? What is up with her?? I'll kill this fucking bitch. How dare she!?? How dare she insult my master!? You don't know fucking bitch who my master is... You have no idea you moron. He'll become a King. A fucking King. You're not even worthy to become my master's servant bitch... You... Master! Teach her a fucking lesson. Make her your bitch. Show her who you are... Master... Master!?? Masterrrr????]

पारी को न जाने एकदम से क्या हो गया था की वो नॉनस्टॉप इतनी गालिया दी सुहाना को की वीर खुद स्तब्ध रह गया था. उसकी बोलती बंद हो गयी थी पारी का ऐसा बर्ताव देख. पर वीर फिर भी कुछ नहीं बोलै. न hi सुहाना को और न hi पारी को.

[Ahh... Ahem! *Cough* I'm... I'm sorry Master! I got carried away.]

सुहाना : Let's जो गर्ल्स! आओ! Let's मूव तो आवर टेबल. हे doesn't क्नोव एनीथिंग अबाउट मनी.

वो कहते हुए वीर के बगल से किसी हवा के झोके की तरह निकल गयी. और साथ hi साथ उसके संग आयी सहेलिया भी.

उनके पीछे वाली hi टेबल पर वो सभी जाके बैठी और बारी बारी रिंग देखने लगी.

इधर वीर की नज़र जैसे hi सोनिआ पर पड़ी उसने देखा की वो....

अपना निचला होंठ जोरर से भींचे वीर को बड़ी hi हमदर्दी और उदासी से देख रही थी. मानो बस रो hi देगी.

उसके होंठ खुले पर फिर बंद हो गए. क्या जवाब दे वो वीर को कुछ सोच नहीं पा रही थी.

"I'm सॉरी!"

कुछ देरर बाद फाइनली उसके मुँह से ये दो शब्द निकले.

"I'm सॉरी!"

फिरसे...

उसके बाद जैसे उसने कई बार ये शब्द कह डाले.

सोनिआ : दी... वो ऐसी hi है. ी कन्नोत कण्ट्रोल हेर. ी shouldn't हैवे कॉल्ड यू हेरे. मेने... मेने तुम्हे यहाँ अपनी मिसुन्दरस्टण्डींग दूर करने के लिए बुलाया था. एंड लुक... क्या हुआ!? एक और नयी मिसुन्दरस्टण्डींग कड़ी हो गयी... I'm सो सॉरी! दी की तरफ से भी... प्लीज! वीर! Don't टेक आईटी तो योर हार्ट.

वीर : ....

[Master!!! 🥺 Atleast... Talk to me.]

वीर इस वक़्त न hi मैं में कुछ सोच रहा था और न hi कोई जवाब दे रहा था. उसकी नज़र एकदम एकदम स्थिर थी. वो खुद मौन था, पर उसका ये मौन जैसे सब पे भारी पद रहा था. यहाँ तक की सुहाना भी पइसस ऑफ होक चली गयी थी उसके इस मौन के कारण.

सोनिआ : दरअसल, वो रिंग... वो रिंग डैड ने बनवा के मंगवाई है बाहर से. एंड it's डायमंड. अराउंड 8 तो 9 करतस. कल माँ का b'day है इसलिए, डैड वांटेड तो सरप्राइज हेर. ये अब तक की सबसे महंगी रिंग है जो डैड माँ को देने जा रहे है. एंड, दी वांटेड तो फ्लॉन्ट... उन्हें ये सब अच्छा लगता है... अपनी फ्रेंड्स को ये सब दिखाना. वो शुरू से hi ऐसे रही है. इसलिए...

वीर : .....

सोनिआ : प्लीज! Don't बे लिखे तहत वीर... यू अरे मेकिंग में नर्वस... ात लीस्ट कुछ तोह बोल दो. ी क्नोव तुम बेहद नाराज़ हो मुझसे. प्लीज! ात लीस्ट से समथिंग.

वीर और उसकी बात चल रहे 15 मिनट्स गुज़र चुके थे जिसमे वीर ने अब तक कुछ नहीं कहा था. वो बस सोनिआ की hi बातें सुनता जा रहा था. और सोनिआ बेचारी को ये और भी ज़्यादा नर्वस कर रहा था.

वो अभी कुछ और बातें रखती की तभी एकदम से लाइट्स साड़ी बंद हो गयी.

सोनिआ : लाइट्स!??

वैसे तोह दिन का समय था पर अंदर से होटल पूरी लाइट्स पे hi डिपेंडेंट रहती थी क्युकी बाहर की रौशनी नहीं आती थी स्पेशल रिजर्वेशन एरिया में. लोग डिम लाइट्स में hi बातें करना पसंद करते थे इसलिए वो एरिया hi वैसा बनाया गया था.

करीब 5 मिनट लग गए जब लाइट्स वापस से आयी.

सुहाना : व्हाट थे हेलल? ये लाइट्स क्यों चली गयी थी अचानक से!?

गर्ल : हम्म!? ोइये सुहाना!? रिंग कहा है??

सुहाना : हँ!??

मानो ये बात सुनते hi सुहाना का दिल जोरर से धड़क उठा.

उसने अपने सोफे के बगल में देखा जहा पहले रिंग का बॉक्स रखा हुआ था. पर वो छोटा बॉक्स अब गायब था.

और ये भांपते हुए उसकी आँखें फैलती चली गयी.

"न्यूऊऊऊ!!!"

वो हड़बड़ा के कड़ी हुई और शोर मचाते हुए इधर उधर सामान करते हुए देखने लगी. और कुछ hi पालो में वह का महुअल शांत से एकदम अस्त व्यस्त हो गया.

शोर शराबा सुनते hi सोनिआ भी उठी और भागते हुए सुहाना के पास आयी.

सोनिआ : क.. क्या हुआ?

सुहाना (घबराते हुए) : S...Sonu! सोनू! मेरी बहिन... सोनू रिंग... वो रिंग... रिंग कही नहीं मिल रही...

सोनिआ (शॉकेड) : व्हाआआआत्तत्त!???

और अगले hi पल सुहाना जो कुछ देरर पहले hi इतना हस्स रही थी वो मोठे मोठे ासु बहाते हुए रोने लगी.

[That's what you get bitch!! Hahahaha~ Master! Look at her... She totally deserved it. Fuck you bitch.]

सोनिआ से लिएपटटे हुए वो जोरर जोरर से रोने लगी. और वह का महुअल khush-haal से एकदम तेनसेद हो गया.

सुहाना (क्रिस) : मेने यही राखी थी. ट्रस्ट में! मेने जस्ट यही राखी थी सोनू... बूत अचानक से लाइट गयी एंड उसके बाद... उसके बाद जैसे hi लाइट आयी बॉक्स यहाँ नहीं था... ी... डैड बोहत गुस्सा होएंगे सोनू... माँ के लिए... आईटी... आईटी वास् सरप्राइज गिफ्ट... सोनू... सोनुउउउउउउ.... *स्निफ्फ* सोनुउउउ...

वो लिपटे हुए जोरर जोरर से रो रही थी. सोनिआ ने खुद को संभालते हुए सीधा होटल के मैनेजर को बुलाया. उससे साड़ी बात बतायी और सभी स्टाफ की तलाशी लेने को कहा. यहाँ तक की सभी कामर्स के कक्तव भी चेक करने को कह दिया.

भूमिका को जब ये बात पता चली तोह वह भागती हुई रिजर्वेशन एरिया में आयी और वह का माहौल देखते hi उसकी हालत पतली हो गयी.

1.57 करोड़ की रिंग... उसके होटल से चोरी हो गयी!??

मानो जैसे सारे होटल से जुड़े सपने उसको अपनी आँखों के सामने बिखरते दिख रहे थे.

उसने सोनिआ की बात रखते हुए सब कुछ उसके सामने प्रस्तुत कर दिया. कक्तव फूटगेस से लेकर स्टाफ की तलाशी तक.

पर जो रिजल्ट मिला...

वो हिला देने वाला था.

न तोह स्टाफ के पास से कुछ मिला, न hi वह के पूरे एरिया से.

सबसे चौंका देने वाला सच था कक्तव का सच. जब लाइट गयी तोह कक्तव काम करना hi बंद कर दिया था. और जैसे hi लाइट आयी, वापस से चालु हो चूका था.

मानो जैसे किसी ने प्लान के साथ चोरी की हो.

और जैसे hi ये बात सबको समझ आयी...

सुहाना (क्रिस) : न्यूऊओ!!! थिस can't बे... नूवो...

वो रोने लगी... पर तभी उसके कानो में आवाज़ पड़ी...

"मनी कैन बुय हैप्पीनेस!"

उसने देखा...

सामने वीर अपने जेब में हाथ डाले खड़ा हुआ था.

वीर : Didn't यू साइड तहत फ्यू मिनट्स एगो!? मनी कैन बुय हैप्पीनेस. पैसा सब कुछ है. पैसा hi खुशिया लाता है. पैसे से hi आप खुश रहते हो? पैसे से कभी कोई उदास रह hi नहीं सकता. Didn't यू साइड तहत!? थें व्हाई दो यू लुक साद नाउ? मुझे तोह अभी केवल यही दिखाई दे रहा है की... पैसे से... यू अरे नॉट इवन हैप्पी... लुक! हाउ डिस्ट्रेस्सेड यू अरे. लुक ात योरसेल्फ. कहा गए अब वो शब्द??? हम्म?? ी can't हेअर थम...

वीर की बात से इस बार सुहाना की बारी थी बोलती बंद हो जाने की. वो आँखें फाड़े वीर को देख रही थी. उसके होंठ thar-thara रहे थे, पर एक भी शब्द विरोध का बाहर नहीं आ रहा था.

वीर : रेमेम्बेर! पैसो का घमंड हमेशा ले डूबता है.

वो इतना बोलै और पलट के वह से जाने लगा, भूमिका समेत सभी लोगो को आश्चर्य भाव में चोरर...

पर तभी...

*डिंग*

[Mission : The Chase


इन्फो - चेस डाउन थे अननोन गाए एंड ब्रिंग बैक थे डायमंड रिंग.

रिवार्ड्स - 1) ?? पॉइंट्स.

2) लाइफ टाइम फवौर फ्रॉम सुहाना.

टाइम लिमिट - 6 डेज.]

'फूऊक्कककककककक!!!'

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


Don't फॉरगेट तो लिखे.
 
अपडेट विल के. आईटी विल टेक टाइम बूत आईटी विल के.
 
अपडेट - 28 ~ थे चेस

अब तक...

*डिंग*

[Mission : The chase

इन्फो - चेस डाउन थे अननोन गाए एंड ब्रिंग बैक थे डायमंड रिंग.

रिवार्ड्स - 1) ?? पॉइंट्स.

2) लाइफ टाइम फवौर फ्रॉम सुहाना.

टाइम लिमिट - 6 डेज.]


'फूऊक्कककककककक!!!'

अब आगे...

वीर के भूमिका की होटल से चले जाने के बाद सबसे बड़ा झटका इस वक़्त होटल में hi कड़ी भूमिका को लगा था. उसके होटल से इतनी कीमती डायमंड की रिंग चोरी हो जाना, ऊपर से वो रिंग किसी ऐसे वैसे व्यक्ति की नहीं थी. सोनिआ जैसी हस्ती उसके होटल में थी, साथ hi साथ वीर का वह आ जाना.

इस वक़्त वो टेंशन के चक्रव्यूह में फास्सी हुई थी. झटका उससे रिंग के चोरी होने से तोह लगा hi था पर अभी अभी जो उसने देखा वो सब कुछ उससे और दांग करते जा रहा था.

वीर सोनिआ के साथ साथ बैठा था, एकदम बराबरी से, उसके बाद वीर ने सुहाना को ऐसे शब्द बोले की वो देखती रह गयी. ऐसा लग रहा था मानो, एक पैरेंट अपने बच्चे को समझा रहा है. और सबसे ज़्यादा हैरान कर देने वाली बात की...

सुहाना कुछ नहीं बोली. भूमिका जानती थी की सोनिआ और उसकी बहिन सुहाना में ज़मीन आसमान का अंतर था. वो जानती थी की सुहाना किस टाइप की औरत थी. उसके बावजूद, वीर के द्वारा इतना sunn'ne के बाद वो कुछ न बोली.

भूमिका देख पा रही थी की सुहाना आँखें फाड़े वीर को जाता हुआ देख रही थी पर बोल कुछ भी नहीं पा रही थी.

'W-What!? व्हाट जस्ट हप्पेनेड?'

मैं में कई सवाल लिए उससे मजबूरन पहले अंगूठी की गुत्थी सुलझाने में लग्न पड़ा.

पुलिस को आलरेडी इन्फॉर्म कर दिया था सोनिआ ने. पर सुहाना के कहने पर की अंगूठी चोरी होने की बात उनके डैड को न बतायी जाए, सोनिआ ने पुलिस वालो को केवल अपने से hi कांटेक्ट में रहने के लिए कह दिया.

न केवल यही, सोनिआ ने ज्वेल्लेरी शॉप वाले को भी साड़ी बातें बता दी और उस से हेल्प करने के लिए रिक्वेस्ट करि. पहले तोह वो नहीं माना पर सुहाना और सोनिआ दोनों ने hi जब कई बार रिक्वेस्ट करि तोह उससे आखिर में maan'na hi पड़ा.

कल उनकी माँ का b'day था और सोनिआ और सुहाना के डैड कल बेसब्री से अपनी वाइफ को अंगूठी देने के इंतज़ार में थे. ज्वेल्लेरी वाले को बस झूठ कहना था की डायमंड रिंग किसी चीज़ के चलते लेट हो गयी है और bann'ne में थोड़ा और टाइम लग जाएगा.

उससे इस झूठ कहने पे ज़ाहिर सी बात थी की दांत पड़ने वाली थी पर यही पे सोनिआ और सुहाना ने उससे आस्वाशन दिया की वो दोनों hi अपने डैड को समझा देंगी और संभाल लेंगी.

खर्र! यहाँ से बाहर निकल के वीर मानो इस वक़्त खुद की किस्मत को कोस रहा था.

'Wtf पारी!? Wtf!? रिंग ढूंढ के लौ में!? रियली? अरे यू किडिंग में? कितने अच्छे से मेने उस सुहाना की बच्ची का मुँह बंद किया था और अब उसी के लिए रिंग धुंडु? फूक्कक्कककककक!'

[I-I... I can't help it master.]

'फुक्कक्ककककक! दमममनननन!'

[...]

'एंड व्हाट थे हेलल इस थिस मिशन? हँ? चेस डाउन थे अननोन गाए? अबे जब पता hi नहीं की किसने चुराई है तोह कहा से धुंडु उससे? एंड हाउ ऍम ी सुप्पोसेद तो चेस हिम? कौन है वो, कहा है वो मुझे कहा पता है कुछ? और इस बार लोकेशन क्यों नहीं मिली मुझे उसकी?'

[Master! Don't worry! Maybe mission will get updated. Aur uske baad kuch aur details aapko shayad mile. Mein assume kar rahi hu ki jisne bhi ring churaayi hai wo abhi iss waqt ek jagah par nahi hai. Isliye system didn't gave you the exact location. Ragini ke case me alag tha. She was kidnapped and was held as a hostage in that building. So, aapko waha system ne location dii thi.]

'ी सी!'

अपनी अपाचे को रेप्ट हुए वीर एक सोसाइटी के बाहर पहुचा और गाडी रोक के वह खड़ा हो गया.

[You missing Juhi!?]

'हम्म!'

[Then go and meet her.]

'यू क्नोव ी can't. वो पीछे पद जाएगी. में उससे रुलाना नहीं चाहता.'

वीर सोसाइटी में hi गाडी पर बैठे ऊपर निधि के फ्लैट की बालकनी में देख रहा था की अचानक पीछे से उसके कानो में एक आवाज़ आयी,

"वीर!?"

'हँ!?'

पलट के जैसे hi उसने देखा तोह सामने श्रेया और उसकी ऊँगली पकडे जूही कड़ी हुई थी. श्रेया एकदम स्तब्ध अपना मुँह खोले उससे देख रही थी.

"वीईएएरररर माहामुउउउउउ!"

जूही अचानक hi चिल्लाई और श्रेया के हाथ से अपनी ऊँगली चुराते हुए तेज़्ज़ कदमो के साथ भागती हुई सीधा वीर के पास आयी.

और...

"वीर मामुउउउ!"

आते hi उसके परर से चिपक गयी.

"जूही!!!"

एक पल नहीं लगा, की वीर ने फौरन hi गाडी से उतर कर जूही को अपनी गॉड में उठा लिया. और उससे गॉड में लेते hi जूही किसी बन्दर की तरह उसके गले से लग के चिपक गयी.

"माहामुउउउ!"

कुछ देरर तक बस खामोशी hi छायी रही.

श्रेया धीरे धीरे आगे बढ़ी और वीर के समीप आयी. उसके हाथ में एक थैली थी जिसमे कुछ सब्ज़िया नज़र आ रही थी. और वीर समझ गया था की श्रेया डिनर के लिए सब्ज़िया लेने गयी थी. ये काम निधि और वीर करते थे कॉलेज से साथ में लौटते वक़्त. पर लगता है, उसके जाने के बाद से घर का रूटीन कई हद्द तक बदल चूका था.

श्रेया ने बोहत hi हलकी सी एक मुस्कान दी और बोली,

"कैसे हो?"

वीर : I-I'm गुड. आप?

श्रेया (स्माइल्स) : I'm ट्राइंग तो बे गुड.

उसके बोल सुन्न, वीर को बिलकुल भी अच्छा न लगा. जिस हाल में वीर ने श्रेया को लास्ट टाइम देखा था. वो जान गया था की श्रेया भी बोहत उदास है और एक सुखी ज़िन्दगी जीने के लिए अथक प्रयास कर रही है.

श्रेया : सो? किधर हो अभी तुम?

वीर : में... वो... भाभी के यहाँ.

श्रेया : ?? Bh-Bhabhi?

वीर : हम्म!

श्रेया (फ्रोंस) : पर...

वीर : It's okay! बोहत सी बातें सॉर्ट आउट हो चुकी है. There's no नीड तो वोर्री नाउ.

श्रेया : िफ़ यू से सो.

वीर : उम्... वो... H-How's शी?

उसके सवाल पर श्रेया ने कुछ पल उससे देखा फिर मायूसी भरी एक मुस्कान देते हुए बोली,

"She's साद..."

वीर : ...

श्रेया : एंड ब्रोकन...

वीर : ...

श्रेया : डेस्पेरेट...

वीर : ...

श्रेया : एंड...

वीर : बस... प्लीज! I-I क्नोव... एंड प्लीज, उन्हें मत बताना. वो मुझे फिरसे वापस लाने की ज़िद्द करेंगी. एंड, यू क्नोव में राइट? में ऐसे नहीं रह सकता. I-I... ी हैवे तो जो नाउ.

वीर ने कहते हुए जैसे hi जूही को उतारना चाहा तोह वो चिल्लाते हुए और जोरर से उसकी शर्ट को भींचते हुए उस से चिपक गयी.

वीर : J-Juhi!? वीर मामू को काम है. प्लीज! जाने दो उन्हें.

जूही : Niiiiiiiiiiii...

वीर : मामू तुम्हारे लिए चॉकलेट्स लाएंगे!

जूही : Niiiiiiiiii...

वीर : जूही! प्लीज!

पर जूही तोह जैसे maan'ne को hi तैयार नहीं थी.

श्रेया : सब तुम्हारी गलती है. अब भुगतो! क्यों इतना प्यार देते हो जब झेला नहीं जाता? अब तुम hi सम्भालो, में कोई मदद नहीं करने वाली.

'पारी!? श्रेया जी की फवौराबिलिटी कितनी है?'

[38]

'ओह्ह्ह! ी नेवर थॉट की उनकी फवौराबिलिटी इतनी होगी. वेट! ी नेवर चेक्ड जूही. जूही की कितनी है? क्या में उसकी देख सक..'

[72]

'हँ!?'

[I said, 72]

'Wtf?????'

वीर ने अपना चेहरा मोड़ वापस से जूही को देखा जो इस वक़्त उस से लिपटी हुई थी और कही से भी उसके इरादे वीर को चौररने के नज़र नहीं आ रहे थे. उसका अपने प्रति इतना प्यार देख, और उससे ऐसे हाल में चौररने के लिए वीर को न जाने क्यों पर खुद पे hi गुस्सा आने लगा.

'I-I... दमन आईटी! I'll फिक्स एवरीथिंग. I'll फिक्स एवरीथिंग सून. I'll मेक थम हैप्पी. थोड़ा समय और जूही. थोड़ा समय और... देखना... तुम्हारे मामू सब कुछ सही कर देंगे.'

[🥺]

जूही के गालो को चूमते हुए वीर ने न जाने उसके कान में ऐसा क्या कहा की जूही पलट के उससे देखि और फिर पूछी,

जूही : पक्का?

वीर (नॉड्स) : पक्का!

जूही : हम्म!

और अगले hi पल जूही अपने आप से वीर की गॉड से उत्तरी और श्रेया के पास झट्ट से आके उसकी ऊँगली पकड़ ली.

श्रेया (सुरप्रीसेड) : ऐसा क्या कहा तुमने इससे?

वीर (स्माइल्स) : वो हमारा सीक्रेट है.

श्रेया : तुम दोनों भी...

वीर : ी हैवे तो लीव नाउ.

श्रेया (फ्रोंस) : एक बार एटलीस्ट उनसे मिल लेते.

वीर : नहीं! उनसे मिलूंगा तोह... वो मुझे रोक लेंगी. ी मस्ट लीव. अर्जेंट काम है. एंड... यदि कोई भी दिक्कत हो, यू हैवे तो कॉल में no मटर व्हाट. Okay!?

श्रेया : O-Okay! ी विल!

वीर : हम्म!

और वीर निधि के सोसाइटी से निकल पड़ा अपनी दूसरी डेस्टिनेशन की ऑर्डर.

जो की था उसका अपना ~ कॉलेज.

डिपार्चर होने में बस कुछ hi मिनट बाकी थे और वीर खड़े हुए कैंपस की एंट्रेंस में hi नज़रे गड़ाए हुए था. उसकी बाइक अभी भी चालु थी.

कुछ देरर में hi डिपार्चर हुआ और वीर की नज़रे जिससे धुंध रही थी वो उससे दिखाई दी.

निधि एक नेवी ब्लू साड़ी में बाहर आयी, वो किसी लड़की को चलते चलते कुछ समझा रही थी.






वीर की आँखें निधि को देखते hi उसपे hi टिक गयी. जैसे वो मानो किसी चुम्बक की तरह थी जिस से नज़रे हटाना मुश्किल था.

बेहद ख़ूबसूरत!

पता नहीं इससे संजोग कहे या किस्मत पर निधि की नज़रे अचानक hi वह गयी जहा वीर खड़ा हुआ था.






'सहित!'

वीर ने जैसे hi भांपा की निधि इधर देखने वाली है तोह उसने गाडी को तुरंत hi ऑक्सेलेराते करके आगे बढ़ा दिया.

निधि : ?????

'हँ!?? क्या वो...!? वीर था!? No! उसके पास गाडी नहीं है. थें व्हाई दीद हे...?? हे लुक्ड लिखे वीर. क्या ये मेरा वहां है या वाक़ई वो वह पे था? ऍम ी थिंकिंग तू मच?'

वो सोचते सोचते अपनी गाडी की ऑर्डर चल दी.

इधर वीर लौट के जैसे hi रागिनी के घर आया तभी...

*डिंग*

[Mission updated :


इन्फो : चेस डाउन थे अननोन गाए एंड ब्रिंग बैक थे डायमंड रिंग.

लोकेशन : XXXXXXXXXXX ट्रैन फ्रॉम मुंबई तो जयपुर.

टाइम : 11 : 15 पं

रिवार्ड्स : 1) ?? पॉइंट्स.

2) लाइफ टाइम फवौर फ्रॉम सुहाना.

टाइम लिमिट - 6 डेज.]

'हँ? Wtf!??? जयपुर? ट्रैन? मज़ाक चल रहा है क्या? कौन गांडू है ये जो चुरा के भागा है मक? व्हाट नॉनसेंस इस थिस? पारी? थे फ़क इस थिस? ी हैवे तो जो जयपुर? राजस्थान क्यों जा रहा है ये गांडू? हु थे हेलल इस थिस गाए? इतना मारूंगा न साले को. साला इधर hi नहीं घूम सकता था? शीट्ट्ट्ट! रिजर्वेशन का क्या पारी!? तक गांड मार लेगा बीजा रिजर्वेशन के बैठे तोह. फुक्कक्ककककक! अब तोह रिजर्वेशन भी नहीं मिलेगा.'

[Aapko bina ticket ke hi travel karna hoga. You will have to chase him inside the train.]

पारी की बात सुनते hi वीर के शरीर के रोये खड़े हो गए. उससे न जाने कैसे कैसे मोड़ पर लाके खड़ा कर रहे थे ये मिशंस. उस दिन रंगा के खिलाफ लड़ाई में जैसे उसकी जान जाते जाते बची थी. और अब ये...

बिना टिकट के एक अनजान आदमी को ट्रैन में ढूंढ़ना जिसने 1.57 क्रोर्स की रिंग चुराई है.

[Start your packing and prepare. Aapko paise lagenge. Also, jitna bhi zaroori samaan hai sab bag me rakh lijiye.]

'बूत... M-Mene कभी ऐसे ट्रैन में बिना टिकट के...'

[Don't worry! You are not alone.]

पारी के साथ होने से वीर की बेचैनी थोड़ी बोहत काम तोह हुई थी पर अंदर से जो डर था वो अभी भी ख़तम नहीं हुआ था.

डर था एक अनजान से.

उससे नहीं पता था वो किस दिशा में जा रहा है, कौन है जिसने चुराई है रिंग, उससे कुछ भी नहीं पता था. और यही डर वीर को सत्ता रहा था.

'शो में माय स्टैट्स!'

[ स्टैट्स :

स्ट्रेंथ - 50/100

इंटेलिजेंस - 35/100

अगिलिटी - 30/100

ेंदुराने - 30/100

अपीयरेंस - 22/100]

'फेव! लुक्स बेटर थान बिफोर.'

[Don't worry! I'll guide you.]

'हम्म!'

वीर ने पैकिंग शुरू कर दी थी. जब रागिनी उससे शाम के वक़्त स्नैक्स खाने के लिए बुलाने गयी तोह वो हैरान हो गयी की वीर अपने बैकपैक में सामान रखे जा रहा था.

रागिनी : कहा जा रहे हो वीर!?

वीर : काम से शहर से बाहर जा रहा हु.

रागिनी (शॉकेड) : व्हाआटट!?

वीर : जीई! प्लीज! पूछना मत. अभी नहीं बता सकता. मेरा जाना ज़रूरी है.

रागिनी : H-Huh!? No! वेट! W-What!?? ये तुम क्या..?

वीर : Don't आस्क में भाभी! बस इतना समझ लीजिये मुझे जल्द से जल्द अभी किसी अर्जेंट काम के लिए जाना है.

रागिनी : P-Par ऐसे अचानक से कहा वीर? और शहर के बाहर किस लिए? कौन रहता है शहर के बाहर जिस से मिलने जा रहे हो? कहा जा रहे हो? कौन से शहर? और अकेले कैसे? मुझे बताया क्यों नहीं? क्या काम है...!?

वीर : भाभी! प्लीज! शांत! ी कन्नोत तेल्ल यू थे डिटेल्स. बूत... ट्रस्ट में, I'll बे फाइन. कुछ काम है. बोहत अर्जेंट.

रागिनी : ...

वीर : प्लीज!

रागिनी : प्रॉमिस में you'll तेल्ल में. वापस आने के बाद. प्रॉमिस में.

वीर : ी... *शिघ्स* फाइन! ी प्रॉमिस.

और उस से प्रॉमिस लेते hi रागिनी झट्ट से भागते हुए नीचे गयी और कुछ देरर बाद ऊपर आयी.

आते hi उसने कई सारा कॅश वीर को थमा दिया.

रागिनी : टेक थिस! एंड हां, में न नहीं सुनूंगी. तुम्हारे लिए में टिफ़िन भी बना के रख रही हु. सो वेट!

वीर : भाभी! इसकी कोई ज़रुरत नहीं है. में पिकनिक के लिए नहीं जा रहा.

पर रागिनी ने तोह जैसे एक न सुनी. उससे पूरा रेडी कर दिया जाने के लिए. जैसे एक पैरेंट अपने बच्चे को स्कूल भेजने से पहले रेडी करता है बिलकुल वैसे hi.

रात के 10 बज चुके थे और वीर घर से निकलने वाला था.

रागिनी : बे सेफ.

वीर : हम्म!

रागिनी : तुम्हारा... तुम्हारा b'day...

वीर : ??

रागिनी : 2 दिन बाद है. विल यू के बी थें?

वीर : ी... ी won't बे अबले तो. सॉरी!

रागिनी : ....

वीर : रियली... ी... I'll तरय...

रागिनी : I'll वेट! बे सेफ.

वीर : Bye!

रागिनी : B-Bye!

और वीर घर से स्टेशन के लिए चल पड़ा.

स्टेशन पॅहुचते hi उसकी धड़कने और तेज़्ज़ हो चुकी थी.

*हफ़* *हफ़*

उसकी सासें जोरर जोरर से चल रही थी.

[Caaaaalmmm downnnn master!]

'Y-Yeahhh!'

[Don't worry! I'm here!]

'येह!'

[Kya aapne iske pehle kabhi train me akele safar nahi kiya?]

'नेवर!'

[I see! You'll have to be wary of TC. Uss se bach ke rehna hoga.]

'येअहहह!'

और जिस समय का इंतज़ार था वो आ hi गया.

ट्रैन प्लेटफार्म पर आ चुकी थी. रात के 11:15 हो चुके थे और रात के समय में ठण्ड भी महसूस करि जा सकती थी.

*फूऊऊऊ*

एक गहरी सास चोरर वीर ट्रैन में घुसा. वो स्लीपर कोच में hi घुसा. टिकट नहीं थी उसके पास. केवल अपना एक बैकपैक डाले वो अंदर घुस गया.

*डिंग* *डाँग*

"यात्री गढ़ कृपया ध्यान दे..."

बाहर स्टेशन पर शोर शराबा चालु था. कई सारे लोग आ रहे थे और जा रहे थे. ट्रैन में घुसते hi वीर एक जगह ढूंढ़ने लगा. क्युकी ट्रैन मुंबई से hi बन्न के जाती थी तोह अभी स्टेशन पर लगते टाइम पूरी खाली पड़ी हुई थी. और भीड़ मुंबई से hi पहले घुसी.

कुछ hi पालो के अंदर ट्रैन काफी कुछ भर चुकी थी.

वीर एक राछ की बिरथ पे बैठ गया. और आने जाने वाले लोगो को देखने लगा जो सामान लेके इधर उधर कोच में घुसते जा रहे थे.

'सहित! हाउ ऍम ी सुप्पोसेद तो फंड हिम. इतने सारे लोगो के बीच. पारी! ी can't... थिस इस मैडनेस.'

[Use the elimination method.]

'हँ?'

[Aapko sabhi ko check karne ki zaroorat hi nahi hai. First we'll try the elimination approach.]

'व्हाट दो यू मैं बी तहत?'

[It's exactly as it sounds.]

'???'

[Unhe check kariye jo kam samaan leke enter hue hai. Probably young logo ko. Jo thode badmaash se bhi nazar aate hai unhe bhi. And check only boys. I don't think ki koi ladki ne ye chori ki hai.]

'बूत व्हाट िफ़ थे अरे पार्टनर्स? ऐसा भी तोह हो सकता है की लड़का लड़की ने मिल के चोरी की हो और सेफ्टी के लिए लड़का रिंग लड़की को देदे ताकि किसी को शक न हो?'

[Hmm! You can be right too. Uske liye hum dusri approach try karenge. You have enough time. Train kal 2 baje ke aas paas Jaipur pohuchegi. You have more than enough time.]

'बूत... यदि वो बीच में hi किसी स्टेशन में उतर गया तोह!?'

[Mission will get updated. So don't worry!]

'ी सी!'

[Nazar banaaye rakhiye. Keep checking. Iss coach me jitne bhi hai sabhi ko check kar daalo. And then...]

'ी क्नोव... ी गोत आईटी.'

वीर उठा और धीरे धीरे चलते हुए हर्र एक शक्श पे नज़रे दाल उससे आहिस्ता आहिस्ता चेक करता गया. कभी वो कुछ देरर वही खड़ा हो जाता और जैसे तैसे कर उन्हें चेक कर उनका स्टेटस रीड करता. और जब कोई न मिलता तोह वापस से आगे बढ़ जाता.

उससे न जाने कितने लोग मिले. कोई खाना खाने में बिजी था तोह कोई बर्थ पे चादर बिछा रहा था, कोई अपने बैग्स सेट कर रहा था तोह कोई हस्सी मज़ाक में लगा हुआ था.

पर वीर यहाँ एकदम तेनसेद था. एक गलती... और उसके हाथ से चोर यु निकल के भाग सकता था.

'चेक!'

[Name - Nishant...]

'चेक'

[Name - Mohit...]

'चेक'

[Name - Baldev...]

'चेक'

'चेक'

'चककककक!!'

.

.

.

'चकककक! दमममन्त्र ित्तत्त!!!'

[...]

'पूरा कोच छान मारा ये. बूत यहाँ नहीं है वो.'

[You just searched one coach. 20 se zyaada honge abhi toh.]

'फूऊक्ककककक!'

अभी वीर दूसरे कोच में घुसा hi था की एक आवाज़ ने उसके कान खड़े कर दिए.

"टिकट... टिकट!"

'शीयीत्ततत्तत!!!'

सामने hi उसके टिकट चेकर खड़ा हुआ था. वही काला ब्लेजर और काला पंत डाले.

वीर palat'te हुए तेज़्ज़ कदमो के साथ वाशरूम की ऑर्डर भागा.

पर...

वो अकेला नहीं था...

जैसे उसके साथ कोई और भी भागा. वीर ने जैसे hi वाशरूम का गेट खोला, अंदर घुसा और गेट वापस से बंद करने के लिए हुआ की तभी...

उस से पहले hi एक और शख्स उसके साथ अंदर घुस गया.

'Wtf?????'

[...]

बाहर वाशरूम के पास वाली बर्थ्स में बैठी कुछ महिलाओं ने जैसे hi ये देखा तोह उनके मुँह खुले के खुले रह गए.

"हैए दिया!"

"बाप रे!!! कैसे कैसे शौक रहते है रे..."

"वहीइ! क्या देख लिया मेने भी. दो मरद एक साथ एक बाथरूम में."

"कैसे भागते हुए अंदर गए."

"न जाने क्या कर रहे होंगे अंदर!"

"धत्त्त! अब तू क्या सोचने लगी?"

इधर बाहर हो रहे सन से अनजान वीर इस वक़्त हक्के बक्के खड़े अंदर आये व्यक्ति को देख रहा था.

'यूओ wtf?? व्हाट थे हेलल इस रॉंग विथ थिस ढूढे?'

लड़का : वो... असल में... मेरे पास टिकट नहीं है. इसलिए.

वीर : हँ?

लड़का : ...

वीर : ओह्ह! वो... मेरे पास भी एक्चुअली...

लड़का : अच्छा!

और बस इतना बोल वो चुप हो गया.

'दमन! मेरी तरह ये भी बिना टिकट के सफर कर रहा है.'

वीर और वो लड़का यु hi खड़े रहे. तक के जाने का दोनों hi वेट कर रहे थे. और अंदर माहौल इतना ावक्वार्ड था की पूछो मत.

जगह मूतने के लिए थी, पर मूतने वाला कोई नहीं था. अंदर 2 लोग थे. पर बस अजीबो गरीब माहौल था.

'फूऊक्कककककककक!!'

वीर ने ख़ामोशी में hi खड़े रह के सामने उस बन्दे को देखा. दिखने में उम्र में उस से बड़ा प्रतीत हो रहा था. हाथ में एक छोटा सा काला बैग.

सर पे टोपी और जेब में चश्मे. वीर ने देखा की वो लड़का कुछ बात नहीं कर रहा था और न hi उस से नज़रे मिला रहा था.

ये भांपते hi वीर की बॉहे सिकुड़ी पर तभी...

वो बाँदा गेट खोल बाहर निकलने लगा.

'चेक!'

[Mission Target

Name - Jatin


आगे - 28

बायो - जतिन, अपने बॉस का राइट हैंड आदमी. जीवन में केवल पैसा कमाना hi उद्देश्य है. हाथ की सफाई और चोरियों के लिए जाना जाता है. पेशे से गुंडा है.

फवौराबिलिटी - 0

रिलेशनशिप - स्ट्रॉन्गेर्स.]

ऊपर लिखे दो शब्द ~ मिशन टारगेट

साफ़ साफ़ बतला चुके थे की उसका मतलब क्या था.

यही इंसान था टारगेट.

उन् शब्दों को देखते hi उसकी आँखें फैलती चली गयी...

"सहित!!! यू बास्टर्ड!!"

वीर चिल्लाया और आगे बढ़ वाशरूम से निकल उससे जकड़ने के लिए उसने अपने हाथ बढ़ा के उस जतिन के पीछे की शर्ट थामी.

पर जैसे जतिन ने फौरन hi भांप लिया था.

और अगले hi पल...

*थुड़*

एक ज़ररदार धक्का उसने वीर को घूमते हुए दिया और उससे साइड में धकेल दिया.

वाशरूम के बगल से hi ट्रैन का दरवाज़ा था जो की बदकिस्मती से खुला हुआ था...

[...]

वीर की आँखों ने जैसे उस एक शान में अपनी मौत देखि...

उसकी बॉडी आगे की ऑर्डर झुकती हुई बाहर hi गिरती की तभी...

'हँ!??'

एक खिचाव सा महसूस हुआ उससे अपनी शर्ट के पीछे.

और अगले hi पल...

किसी ने जोरर से उससे खींच के पीछे किया.

"हाह.... हह!!!"

जोरर जोरर से सासें लेते हुए वीर अचानक hi वही घुटनो के बल गिर गया.

साइड में खुले दरवाज़े से आ रही हवा और ट्रैन की आवाज़ जैसे उसके दिमाग में घंटी बजा रही थी और बता रही थी की वो मरर्ते मरर्ते बचा है.

उसके बाल हवा से इधर उधर हो रहे थे और सासें एकदम ट्रैन की रफ़्तार के माफ़िक़...

"ठीक हो न भाई??"

तभी एक आवाज़ उसके कानो में पड़ी.

उसने देखा की एक उसके hi जितनी उम्र का लड़का खड़ा हुआ था. दिखने में कोई अमीर या मिडिल क्लास फॅमिली का नहीं लग रहा था. बोहत hi सिंपल से कपडे पहने हुए था.

वीर : वो...

लड़का : मेने देखा था... वो लड़का तुम्हे धक्का देके गया. मादरचोद साला. कोई दुश्मनी है क्या उस से? जान लेने जा रहा था वो तुम्हारी.

वीर : में उससे hi ढूंढ रहा था. अन्य्वयस! T-Thanks फॉर सेविंग में.

लड़का : इतनी अंग्रेजी नहीं आती भाई. इतनी अंग्रेजी आती तोह में बिना टिकट सफर नहीं कर रहा होता. हाहाहा~

वो हस्ते हुए वीर को उसका हाथ पकड़ उठाया.

लड़का : क्या नाम है वैसे?

वीर : में वीर... और तुम?

लड़का : गोलू बुला सकते हो. तोह? वो सब क्या था?

वीर : कुछ नहीं! बस...

गोलू : पुरानी दुश्मनी?

वीर : हँ!? शीट्ट्ट्ट! कहा गया वो...! मुझे जाना होगा.

बिना पीछे मुड़े वीर आगे भागते हुए कोच में घुस गया.

"अरे... सुनो तोह..."

गोलू की आवाज़ आयी पीछे से पर वीर न रुका. इस वक़्त सबसे ज़्यादा ज़रूरी काम था उस जतिन को पकड़ना.

'दामननन ित्त्त! दमन आईटी! दमन आईटी! दमन आईटी! सीईट्टत्त!!! हे वास् राइट तेरे... आसानी से दबोच लिया होता मेने उससे. शीत्तत्त! फुक्कक्कखकक! वेयर दीद हे वेंट??'

[It's okay! Kam se kam we know his name and his appearance now. And... Aap... For a second I got scared there. But thanks to him. Usne aapko pakad liya sahi waqt pe peeche se.]

'Y-Yeah!!'

वीर ने ज़्यादा कुछ न कहते हुए अपने कदम बढाए. उसका दिल इतनी जोरर से धड़क रहा था मानो जैसे बाहर hi आ जाएगा.

पल भर के लिए उसके मैं में एक सवाल आया की...

यदि आज उसकी यहाँ मौत हो जाती तोह?

निधि का क्या होता!? जूही!?? काव्य? श्रेया!? क्या होता इन् सब का?

वीर तोह इन् सभी को फिरसे कभी न देख पाटा. ये ख़याल आते hi उसके डर के मारे रौंगटे खड़े हो गए.

शायद अब उससे इस बात का आभास हो गया था की आखिर क्यों आदमी मौत से इतना डरता है.

*हफ़* *हफ़*

[Calm down! Calm down master!]

'...'

[Lambi saasein lijiye. Don't worry! We'll find him. 6 days. Y-You have 6 days.]

'H-Hmm!'

खुद को काबू में कर वो आगे बढ़ा. ट्रैन एक स्टेशन पर पहुँच चुकी थी.

न जाने वो जतिन किधर पे छुपा हुआ था पर इतना तोह पक्का था की उसकी मंज़िल भी जयपुर hi थी.

यदि वो यहाँ से भाग गया होता तोह पक्के से मिशन अपडेट हो चूका होता और वीर को नयी लोकेशन मिल गयी होती.

पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था. इसका मतलब साफ़ था.

जतिन इधर hi कही था.

ट्रैन से उतारते हुए वीर स्टेशन में इधर उधर नज़रे मारते हुए पूरे एरिया को स्कैन करने लगा. इस वक़्त जतिन को ढूंढ़ना, उसके लिए किसी खेत में सुई ढूंढ़ने जितना कठिन काम था.

'डमनणणन ित्तत्त!!!'

रात के 3 बज रहे थे और वीर को अब नींद आना शुरू हो चुकी थी.

पारी के कहने पर उसने थोड़ी देरर आराम करना hi बेहतर समझा. एक खाली जगह मिलते hi वीर वह बैठ गया.

मंज़िल यदि उस जतिन की भी वही थी तोह आराम करने में कोई हर्ज़ नहीं था.

आखिर वो जतिन भी इस वक़्त कही न कही छुप के आराम hi फार्मा रहा होगा.

रात भर के समय पता नहीं कैसे निकल गया, वीर की जब नींद खुली तोह आलरेडी 7:30 बज चुके थे.

मिशन में कोई चंगेस नहीं आये थे इसका मतलब, जतिन अब भी ट्रैन में hi कही मौजूद था.

एक बार फिर वो अपने मिशन को अंजाम देने के लिए रेडी हुआ पर...

पर या तोह इससे अब बडकसीमती कहे या एक इत्तेफ़ाक़ पर वीर को जतिन कही भी नहीं मिला.

शायद जतिन जैसे समझ चूका था की वीर उसके पीछे है और वो मौका देख के हर्र स्टेशन पर उतर उतर के जैसे अपनी पोजीशन बदल रहा था. एक बात और थी, वो ये की उसके पास कैप और चश्मा था.

वो बदल बदल के अपना उन्हें पहनता और एक कोच से दूसरे कोच में जाता रहता.

देखते hi देखते वीर की ट्रैन अपनी डेस्टिनेशन पर पहुँच चुकी थी.

वीर की आँखें काम सोने के कारण एकदम लाल हो चुकी थी. साथ hi साथ उसने रागिनी के द्वारा भेजा गया टिफ़िन तक नहीं खाया था. भूक भी ज़ोरो की लगी थी उससे.

'I'll किल हिम. तहत बास्टर्ड. हे वास् गोइंग फॉर थे किल. उसने ज़रा भी नहीं सोचा मुझे धक्का देने से पहले...'

वीर ट्रैन से बाहर आया और फिरसे...

उसने देखा...

एकदम भक्कम भीड़ थी स्टेशन में. पूरा भरा हुआ था. ऐसे में उससे उस जतिन को ढूंढ़ना था जो अब न केवल ट्रैन में रहने वाला था बल्कि पूरे जयपुर में कही भी जा सकता था.

'दमंत्र ित्त्त!! जस्ट वेयर दीद हे वेंट???'

उसने खीजते हुए मैं में चिल्लाया. लगता है... ये सफर उसका... लम्बा होने वाला था.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


पसंद आये तोह लिखे कर देना.
 
मेगा अपडेट

(दिवाली स्पेशल)


अपडेट - 29 ~ सेविंग ा दमसेल इन डिस्ट्रेस

अब तक...

एकदम भक्कम भीड़ थी स्टेशन में. पूरा भरा हुआ था. ऐसे में उससे उस जतिन को ढूंढ़ना था जो अब न केवल ट्रैन में रहने वाला था बल्कि पूरे जयपुर में कही भी जा सकता था.

'दमंत्र ित्त्त!! जस्ट वेयर दीद हे वेंट???'

उसने खीजते हुए मैं में चिल्लाया. लगता है... ये सफर उसका... लम्बा होने वाला था.


अब आगे...

जिस रात वीर ट्रैन में बैठ के जयपुर जा रहा था, उस hi दिन काव्य और आरोही कॉलेज से चूत कर घर जा रही थी. पर उस दिन उनके साथ कुछ उनुसुअल सा घटित हुआ. कुछ ऐसा जो चिंता में डालने वाला विषय था.

काव्य छूटते hi नीचे आयी और स्कूटी के पास कड़ी, अपनी बड़ी बहिन आरोही का वेट करने लगी.

वैसे तोह उन्हें कार से ड्राइवर चौररने आता था. पर आज कार किसी जगह बिजी थी. और इसके चलते वो दोनों hi स्कूटी से आयी थी. आरोही उससे अपने साथ बैठा के लायी थी.

जब आरोही की क्लास छूटहि तोह वो नीचे आयी और काव्य को स्कूटी के पास खड़ा देख वो मुस्कुरायी.

आरोही : चले!?

काव्य : हम्म? ओह्ह! हम्म!

आरोही ने नोटिस किया की काव्य कुछ चिंतित सी लग रही थी.

आरोही : क्या बात है!?

काव्य : हँ? N-Nahi तोह? कुछ नहीं...

आरोही (फ्रोंस) : Don't लिए. तेल्ल में! क्या हुआ?

काव्य : W-Wo...

आरोही : ??

काव्य : वीर भैया आज कॉलेज नहीं आये. न hi उन्होंने मेरे भेजे गए मेस्सगेस का रिप्लाई किया.

काव्य की बात सुन्न आरोही उससे बॉहे सिकोड़ते हुए घुरि. वीर का ज़िक्र आते hi न जाने क्यों उसकी जुबां पे ताला लग जाता था.

और उससे उस दिन का सन याद आने लगता जिस दिन वीर काव्य को उसकी क्लास में चौररने गया था.

वीर की बात आते hi आरोही ने टॉपिक वही पे क्लोज कर दिया.

आरोही : चलो!

काव्य : हम्म!

वो दोनों स्कूटी पे बैठ अपने रास्ते निकल गयी पर बीच रास्ते तक आते आते hi आरोही को जैसे कुछ गड़बड़ महसूस हुई. और वो तेज़्ज़ तेज़्ज़ अपनी गाडी ट्रैफिक में लहराते हुए चलाने लगी.

काव्य : दी??? आप इतनी तेज़्ज़ क्यों चला रही हो. हम भीड़ जाएंगे...

आरोही : ...

काव्य : डीईई!???

आरोही : समवन इस फोल्लोविंग उस.

काव्य (शॉकेड) : हँ??

आरोही की बात सुनते hi काव्य एकदम चकित रह गयी. उसने पीछे मुद के देखा तोह एक आदमी पूरा हेलमेट लगाए बाइक पे उनके पीछे आ रहा था.

आरोही : Don't लुक.

उसने वारं किया. आरोही मिरर में काफी टाइम से उस बन्दे को अपने पीछे आता देख रही थी. जहा जहा वो टर्न ले रही थी वही वही वो भी टर्न ले रहा था. और जैसे hi उससे इस बात का आभास हुआ उसकी धड़कने तेज़्ज़ हो गयी.

काव्य उसके साथ थी. और काव्य की उसके कपड़ो पर ज़र्रों की पकड़ hi बता रही थी की वो दर्री हुई है.

काव्य : D-Dii! वो हमे फॉलो क्यों कर रहा है? M-Mein पुलिस को फ़ोन लागू?

आरोही : न्यू! Don't वोर्री! बस पकड़ के बैठी रहो. हम पहुचने hi वाले है.

जैसे hi घर के मोड़ के लिए टर्न आया, आरोही ने जोरर से अक्सेलरेशन देते हुए स्कूटी सीधा सोसाइटी में घुसेड़ दी.

काव्य ने पलट के देखा...

पर...

इस बार वो आदमी दूर दूर तक कही नज़र नहीं आया.

आरोही : हम्फ! स्टॉकर्स! इतनी hi दम रहती है इनकी. राह चलती लड़कियों को देखना, घूरना, उन्हें फॉलो करना और उन्हें चेररणा.

काव्य : H-He won't के r-right?

आरोही : नौपे! इस से ज़्यादा उनकी औकात नहीं रहती. Let's जो!

और आरोही, काव्य को बैठाये वह से अपने घर की तरफ गाडी आगे बढ़ा देती है.

पर बाहर कौन था?

उन्हें इस बात का शायद ज़रा भी अंदाजा नहीं था.

***

वही यहाँ भूमिका की होटल से रिंग चोरी हो जाने के बाद जब पुलिस वगैरह को खबर करके सुहाना और सोनिआ घर आयी तोह इस वक़्त वो दोनों hi भयंकर टेंशन में थी.

सुहाना कमरे में इधर से उधर बेचैन हालत लिए टहल रही थी और बार बार चिंता के मारे कुछ कुछ बड़बड़ाते जा रही थी.

फिर अचानक hi उसकी आँखें पल भर के लिए कुछ सोच के फेल गयी और वो पलट के फौरन hi सोनिआ को देखि जो बिस्तर पर hi चिंता के मारे बैठी हुई थी.

सुहाना : कही...

सोनिआ : ??

सुहाना : कही वो वीर ने hi तोह...!?

सोनिआ : ???

सुहाना : कही उसने hi तोह रिंग नहीं चुराई? हां! यही हुआ होगा! वो तोह मुझसे चिढ़ा हुआ था पहले से hi. हां! ज़रूर! ये उसी का किया धरा है. मुझे नीचे दिखाने के लिए वो...

वो आगे बोलती की उसके पहले hi उसके होंठ वही रुक गए.

क्युकी सामने सोनिआ उससे बड़ी hi नम्म आँखों से और थोड़े गुस्से में देख रही थी.

सुहाना : हँ? S-Sonu? K-Kya हुआ? तू ऐसे...!?

सोनिआ : क्या आप ये कहना चाह रही है की मेने चोरी की?

सुहाना : हँ? व्हाट!? ये...

सोनिआ : वीर मेरे साथ बैठा हुआ था. व्हाट अरे यू ट्राइंग तो इम्पली दी?

सोनिआ के बात सुनते hi सुहाना की बोलती बंद हो गयी और उसने अपना सर्र झुका लिया.

सोनिआ : हे वास् विथ में... थें हाउ कैन हे?? एंड व्हाई वोउल्ड हे?

सुहाना : पर... लाइट गोल थी. और m-maybe... उसने...

सोनिआ (ुचि आवाज़ में) : हे वास् विठह्ह मई...

सुहाना : H-How दीद यू क्नोव? लाइट o-off थी...

सोनिआ : बिकॉज़ ी वास् होल्डिंग हिज हैंड...

सुहाना : हँ!???

सोनिआ : ....

और अगले hi पल सोनिआ वह से बाहर निकल के भाग गयी.

सुहाना केवल उससे जाते हुए hi देखती रह गयी. उसकी बहिन का व्यवहार दिन प्रतिदिन बदलता जा रहा था. पर उससे सबसे ज़्यादा अभी इस अंगूठी की टेंशन थी. भला क्या जवाब देगी कल वो अपने डैड को?

***

उस दिन के अगले दिन, यहाँ मुंबई में hi एक बस्ती के पास किसी अड्डे पर कई सारे लड़के इखट्टा हुए थे.

रंगा इन्ही सब के साथ एक जगह बैठा सिगरेट के काश लगाने में बिजी था.

उसने अपना फ़ोन निकाला और अपने भौ, आतिश को कॉल लगाया.

*रिंग* *रिंग*

आतिश : बोलो रंगा!

रंगा : भौ! काम हो गया है. जतिन कामयाब रहा. ट्रैन में बैठ गया है और आपकी बतायी गयी जगह पे भी पहुँच जाएगा.

आतिश : बढ़िया! इससे कहते है एक तीर से दो निशाने. रिंग के खो जाने से सब कुछ अस्त व्यस्त होने लगा होगा. और यही मौका है फाल्ट ढूंढ़ने का. सिक्योरिटी में अंतर ज़रूर आएगा क्युकी अभी दोनों hi बहने झेप गयी होंगी रिंग चोरी होने से. न केवल में अब उस सोनिआ को पकड़ सकता हु बल्कि साथ hi साथ रिंग को बेच भी सकता हु जिसके चलते कुछ मुनाफा भी हो जाएगा हाहाहा~

रंगा : भौ! आपने जतिन को कहा का एड्रेस दिया है!?

आतिश : मेरा पुराना दोस्त है. ड्रग डीलिंग करता था पहले पर अब हीरे जवारातो और एंटीक चीज़ो में डील करता है. उसी के पास भेजा हु. वो अच्छा दाम दिलवा देगा अंगूठी का.

रंगा : ओह्ह्ह्ह!

आतिश : क्या तुमने अपने चूहे को सबक सिखाया?? यदि नहीं तोह जल्दी वो काम कर लेना. मुझे दुबारा बहाने नहीं चाहिए.

रंगा : J-Jii! भौ!

पर उसकी बात sunn'ne के पहले hi कॉल कट हो चूका था.

ये सारा का सारा प्लान आतिश का hi था. अंगूठी को चोरी करवाने से ज़ाहिर सी बात थी की सिचुएशन क्रिएट होएगी और सिक्योरिटी भी अस्त व्यस्त रहेगी. इसी बीच वो सोनिआ को बंधी बनाने का प्लान किया हुआ था.

साथ hi साथ जतिन को रंगा ने hi चूसे किया था. जतिन चोरियों में माहिर जो था.

होटल के hi कण्ट्रोल रूम में मौजूद स्टाफ में से जतिन की पवन नाम के आदमी से पहचान थी. जिसके चलते उसने इस चोरी को अंजाम दिया था.

जतिन ये कहके होटल में घुसा था की वो रूम्स के A.C सही करने आया है.

न केवल पवन ने जतिन को अंदर करवाया बल्कि साथ hi साथ उसने hi लाइट्स ऑफ करि थी और कामर्स शट डाउन किये थे जिसके चलते जतिन रिंग को चुराने में कामयाब था.

उसके हाथो की सफाई पर तोह रंगा भी उसकी तारीफ करता था.

रंगा ने रिंग के बारे में सोचना चोरर, अपने किसी चेले को फ़ोन किया. और अपने चेले की बात सुनते hi उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

"अब बताऊंगा तुझे चूहे."

***

इधर मुंबई से कोसो दूर, राजस्थान में वीर एक टेम्पो में बैठे किसी गांव की तरफ प्रस्थान कर रहा था.

टेम्पो में कई सारे लोग घुसे पड़े थे और वीर अपने मुँह पे एक साफा बांधे और अपना बैग टाँगे सीट पर बैठा हुआ था. दछक्को से कभी वो इधर होता तोह कभी उधर. पर उसकी निगाहें कही खोयी हुई सी थी.

'ी मस्ट फंड हिम.'

स्टेशन से निकलने के कुछ देरर बाद hi मिशन अपडेट हो चूका था जिसमे उससे लोकेशन एक गांव की दी गयी थी.

जतिन उसी गांव में जा रहा था. उसका मक़सद क्या था ये वीर नहीं जानता था पर इतना ज़रूर जानता था की आज कैसे भी कर के उससे अंगूठी को हथियाना hi था.

जब टेम्पो रुकी तोह वीर को होश आया. और उसने सामने ड्राइवर को प्रश्न भरी निगाहो से देखा.

"इसके आगे नहीं जाएगी टेम्पो साहब. आगे रास्ता खराब है. इधर hi उतरना होगा."

वीर : क्या कोई और रास्ता नहीं है!?

ड्राइवर : है पर लम्बा है. पीछे से घूम के जाना रहा. अब टेम्पो वापस से वह नहीं जाएगी. यहाँ से लौटने की सवारी लेते हुए स्टेशन जाएगी सीधे.

'सहित!!'

न चाहते हुए भी वीर को वही उतरना पड़ा. उसने ड्राइवर को पैसे दिए और अपना बैग लिए आगे चल दिया.

रास्ता वाक़ई खराब था. कीचड भी था और शायद रास्ते का निर्माड हो रहा था पर बीच में hi काम रोक के लगता कारीगर निकल चुके थे.

उसने देखा आने जाने वाले लोग सभी पैदल बगल से अपना परर कीचड से बचाते हुए निकल रहे थे. कुछ साइकिल को उठाते हुए रास्ता क्रॉस कर रहे थे.

कूदते फांदते, कीचड से बचते जैसे तैसे वीर उस रास्ते के आगे आया. आगे का रास्ता भी कच्चा था पर अब वो कीचड नहीं था और न hi सड़क उबड़ खाबड़ थी.

ये हिस्सा गांव का बाहरी हिस्सा था. जैसे जैसे वीर गलियों से होते हुए अंदर जा रहा था, उससे आस पास दुकाने और कच्चे घर नज़र आते जा रहे थे.

वीर को आस पास के लोग ऐसे घर के देख रहे थे जैसे मानो एलियन को देख रहे हो.

यहाँ घर घर कोई गाय पाला हुआ था तोह किस के घर भैंस. कुल मिलाके उधर का व्यू वीर को प्रॉपर गांव वाली फीलिंग दे रहा था.

[So? Kaha chal rahe hai hum?]

'एक जगह ढूंढ़नी होगी. ताकि ये बैग कही रख सके. और फिर उससे ढूंढ़ने निकल सकू में.'

[Hmm! I agree!]

'बी थे वे.. तुम लेवल 4 पर कब पहुँचोगी?'

[As soon as you complete this mission. 😁 Also, naye features bhi unlock hoenge. And, new skills bhi. Jo basic skills thi, unka Moderate level unlock ho jaega.]

'ओह्ह! सो अब में डायरेक्टली मॉडरेट लेवल स्किल ले सकता हु. There's no नीड तो...'

[No way master! Aapko basic leni padegi. Uske baad hi aap wahi skill moderate level ki purchase kar paoge.]

'हँ!?'

[For example- Yadi aapko Moderate Cooking Skill chahiye. Toh isse paane ke liye aapko pehle Basic cooking skill leni padegi. Otherwise wo kaam nahi karegi.]

'सहित!'

[Aapko kya laga? Ki seedha upar level ki skill purchase kar loge? 😁]

'Y-Yeah!'

[Hehe~]

अभी वो पारी से और बातें करता और उस से और सवाल करता पर इसके पहले की वो कुछ पूछ पाटा सामने से आ रहे शोर ने उसका ध्यान भटका दिया.

"चोर्रो... चोर्रो माँ को... चोरररओओओओओओ!!!"

एक लड़की चिल्लाते हुए एक आदमी के हाथ को पकडे हुए थी और पूरी कोशिश कर रही थी की उसके हाथ को झंझोर सके.

उस आदमी के हाथ ने एक औरत के बाल जकड़े हुए थे. और वो औरत दर्द भरा चेहरा लिए खुद को चुर्राने की कोशिश कर रही थी.

साथ hi साथ यही नहीं एक और लड़का किसी लड़की को पकड़ के घसीट रहा था.

और इन्ही दोनों आदमियों के चंगुल से उन् दो औरतो को चुर्राने के लिए वो लड़की अथक प्रयास किये जा रही थी.

वीर ने कुछ सोचा और अपना फ़ोन निकाला की कुछ पल बाद hi...

"में कहती हु चोररररूओ."

*चटाक*

"चल हत्तत्त!"

उस आदमी ने एक ज़ररदार झापड़ उस लड़की मारा तोह बेचारी सीधा नीचे गिर पड़ी.

वीर ने बॉहे सिकोड़ते हुए सामने चल रहे दृश्य को देखा. उसने फिर अगल बगल देखा तोह उससे एक और झटका लगा. आस पास के लोग नज़ारा देख रहे थे पर कोई भी कुछ बोल नहीं रहा था न hi विरोध कर रहा था.

सब ऐसे देख रहे थे जैसे मानो उनके सामने वो दृश्य हो hi नहीं रहा था.

'थे... हाउ कैन थे टर्न ा ब्लाइंड ऑय तो थिस?'

[Yahi Duniya hai master. Khud ko musibat me kyu daalna? Yahi soch ke koi bhi madad nahi kar raha hai. Will you act?]

'ी...'

वीर ने एक बार फिर सामने उस औरत को देखा जो दर्द से अपने निचले होंठ को भींचे हुए थी ताकि उसकी आवाज़ न निकले. वो इस से पहले मैं में कुछ कह पाटा की तभी...

*डिंग*

[Mission : Save the Damsel in distress.

Rewards : ?? Points.

Time Limit : 1 Hour.]

'व्हाट थे हेलल???'

[Isme mera koi haath nahi hai. You know right?]

अब तोह उससे आगे बढ़ना hi था.

इधर वो आदमी उस औरत को खींचते हुए आगे बढ़ hi रहा था जब उसके कंधे पे एक हाथ पड़ा.

पीछे देखा तोह एक अनजान युवक मुँह में साफा बांधे खड़ा हुआ था.

और उससे देखते hi वो खीजते हुए चिल्लाया,

"हटतट री!!"

वीर के हाथ को झटकते हुए वो वापस से पलट के आगे बढ़ने hi वाला था की एक बार फिर उसके कंधे पर हाथ पड़ा पर इस बार हाथ सिर्फ ठहरा hi नहीं, उस हाथ की पकड़ ने उसके कंधे को पकड़ते हुए उससे घुमाया और...

*पुऊवववववववव*

एक जोर्डरर घुसा सीधे उसके चेहरे पर पड़ा और वो आदमी नीचे धड़ाम से गिर पड़ा.

दूसरा लड़का ये देख वीर की तरफ आगे बढ़ा और उसने अपने हाथ चलाया पर वीर साइड होक आराम से उसका वो हाथ पकड़ लिया और मरोड़ दिया.

जैसे hi वीर ने हाथ मरोड़ा और उसके पीछे गया तभी उस लड़के ने दूसरा हाथ पीछे मुद के वीर के सर्र पर मारना चाहा.

पर...

सर्र को आसानी से झुकाते हुए वीर उस हमले से भी बच गया और अब ज़्यादा खेल खेलना उससे सही नहीं लगा.

उसने उस लड़के को अपनी ऑर्डर खींचा, मुट्ठी कस्सी और...

*पुव्वव्वव्वव्व*

एक घुसा सीधा मुँह पे जड़ दिया.

"ाआर्गग्ठ्ठ!!"

कराहते हुए वो नीचे गिरा तोह वीर ने अपनी नज़रे उन् दोनों पर से हटा के उस लड़की को देखा जो नीचे गिरी हुई थी.

वीर : यहाँ थाना किधर है?

लड़की : Y-Yaha से थोड़ी दुरी पर...

वीर : चलो फिर! इन् दोनों को ले चलता हु में.

वो लड़की हां में सर्र हिलायी और फौरन hi उठ के वीर को रास्ता बताते हुए आगे चलने लगी.

इधर वीर दोनों को मारते मारते घसीटते हुए ले जा रहा था. दोनों के स्टैट्स वाक़ई काम थे और इसलिए वीर ने एक्शन लेने का रिस्क लिया था.

ये वो आदमी थे जो बस औरतो पे उन्हें मार के अपनी मर्दानगी जताते थे. असली मर्द के सामने इनकी हवा निकल जाती थी.

जैसे hi वीर थाने पोचचा, उसने दोनों को वही पटक दिया.

वीर : जाओ! साड़ी बात बताओ.

लड़की : H-Hmm!

वह के अफसर ने जैसे hi उस लड़की की बातें सुनी तोह वो दो आदमी भी अपनी चिकनी चुपड़ी बातो से झूठ बोल अफसर को बहलाने फुसलाने लगे.

अफसर : कोई सबूत है?

लड़की : हँ??

अफसर : सबूत के बिना कैसे हवालात में दाल दू?? कल को यही बात ये कहके तुम्हे यहाँ पे ले आये की तुम इससे मार रही थी तोह? सबूत लाओ उसके बाद hi आगे की कार्यवाही होगी...

"ये तोह काफी होगा सबूत के लिए है न?"

सभी के कानो में अचानक hi वीर की आवाज़ पड़ी जिसके हाथ में मोबाइल था और एक वीडियो चल रहा था.

वीडियो उसी समय का था जब वो आदमी उस औरत को घसीट के ले जा रहा था और उस लड़की को थप्पड़ मार रहा था.

बस!

उस से ज़्यादा किसी चीज़ की ज़रुरत नहीं थी. दोनों hi आदमी सलाखों के पीछे थे फिलहाल के लिए तोह. जब तक की उन्हें चुर्राने वाला कोई नहीं आ जाता.

वीर और वो लड़की घर के लिए लौट रहे थे तोह वीर को कई बातें jaan'ne को मिली. सबसे पहली यही की लड़की का नाम ~ सोनाली था.


सोनाली ~





वीर : तोह वो तुम्हारा बाप था?

सोनाली : सौतेला... सौतेला बाप.

सौतेला शब्द सुनते hi वीर को अपनी सौतेली माँ, श्वेता की याद आ गयी.

वीर : और वो तुम्हारा भाई?

सोनाली : सौतेला भाई!

वीर : हम्म! तोह? क्यों कर रहे थे वो ऐसा?

सोनाली : जुआ...

वीर : हम्म?

सोनाली : जुआ में हार गए थे दोनों बाप बेटे. तोह माँ और भाभी को उठा के ले जा रहे थे. उनकी इज़्ज़त का फालूदा करने. या ये कहु को इज़्ज़त लुटवाने. हराम खोर कही के... जुआ और शराब बस यही काम है.

सोनाली के चेहरे पर इतना गुस्सा था, साथ hi साथ उसके शब्द भी एकदम कटु और तीखे निकल रहे थे अपने सौतेले भाई और बाप के लिए.

जैसे hi वीर और सोनाली घर के पास पहुचे तोह उन्होंने देखा की दोनों औरते बाहर hi कड़ी हुई थी.

और तभी...

*डिंग*

[Mission ~ 'Save the Damsel in Distress' has been completed.]

[30 points have been rewarded.]

'तू इजी.'

घर के सामने आते hi उसकी नज़र उन् दोनों महिलाओ पर पड़ी.

'हम्म??'

और इस बार वीर ने उस औरत को गौर से देखा तोह वो हैरान रह गया. वो वाक़ई एक ख़ूबसूरत औरत थी. एक अलग सी hi बनावट थी उसकी जो उससे आकर्षित कर रही थी.

'चेक!'

[Name - Suman

Age - 37 years.

Bio - Suman! Ek boht hi sehansheel aurat hai. Apni bahu aur beti ko boht chaahti hai. Kayi saalo se behad pareshaan hai. Kisi anmol cheez ki talaash me hai.

Favourability - 30

Relationship - Strangers]

'अनमोल चीज़ की तलाश!? व्हाट डस तहत मैं? वेट! फवौराबिलिटी 30? Wtf??? वे जस्ट मेट. हाउ कैन...!?'

[Maybe it's because you saved her.]

'येह! M-Maybe. बूत स्टिल...'

वीर सुमन को घर के देख रहा था की उसने अचानक भांपा की सुमन खुद उससे आँखें फाड़े देख रही थी.

वो भौचक्की सी वीर को देख रही थी. कभी वो उसके चेहरे को देखती तोह कभी सीने को और उसके होंठ खुल रहे थे और फिर बंद हो रहे थे.

'हँ?'

अचानक hi वो तेज़्ज़ कदमो के साथ आयी और उसके पेर्रो पर गिर गयी.

सुमन : M-Mere परिवार की मदद करने के लिए... A-Apka बोहत बोहत धन्यवाद! में... में...

वीर : अरे अरे!? ये आप क्या...??

उसने अगले hi पल सुमन को उसके कंधे से पकड़ के उठाया और उसके हाथ सुमन के नग्न हाथ से जब स्पर्श हुए तोह वीर ने फौरन hi हाथ पीछे कर लिए. मानो एक घंटी सी बजी उसके दिमाग में... और उससे ऐसा करना सही नहीं लगा. उससे ऐसा लगा की यदि उसने ऐसा फिर किया तोह ये बोहत गन्दी आदत बन्न बैठेगा.

गांव की औरतो में एक अलग hi चार्म होता है. और यही चार्म वीर को जैसे इतना आकर्षित कर रहा था की उसकी नज़रे सुमन पर से हट hi नहीं रही थी.

वो साड़ी पहन ने का गांव का ढंग, उसका शरीर जो की वाक़ई पतला भी था पर हल्का गदराया हुआ भी.

गेहुआ रंग, नैन नक्श एकदम ऐसे की उन् नैनो से शबनम पीने का मैं करे.

सुडोल छथि और सूरत ऐसी की हर्र मर्द को एक बार पलट के देखने पर मजबूर कर दे. 37 की उम्र होने के बावजूद वो कही से भी 37 की नहीं लग रही थी.


सुमन~





पर सबसे चौकाने वाली बात थी उसका यु अजीब निगाहो से वीर को देखना.

उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी और वो एक तक वीर को देखे जा रही थी.

सुमन : J-Jii M-Mein सुमन...

वीर : मुझे पता है.

सुमन : हँ??

'फुकककक!'

वीर : M-Mera मतलब है. आपसे मिलकर ख़ुशी हुई.

सुमन : ओह्ह! Aap-Aapka नाम!?

वीर : जी मेरा नाम वीर है.

सुमन : V-Veer... वीर...

सुमन कुछ सोच वीर का नाम बुदबुदाने लगी जैसे मानो रटने की कोशिश कर रही हो.

सुमन : K-Kya आप यहाँ से hi हो?

वीर : जी नहीं! में मुंबई से हु.

सुमन (फ्रोंस) : तोह क्या आपके... आपके घरवालों में से कोई यहाँ का है?

वीर : हम्म? नहीं तोह. जहा तक मुझे पता है ऐसा कोई भी नहीं है.

सुमन : J-Jii! अच्छा! इन्... इनसे मिलिए. ये है मेरी बहु आभा.

सुमन ने इशारा करते हुए एक औरत को आगे बुलाया. ये वही औरत थी जिससे खींच के वो लड़का ले जा रहा था.


आभा ~





अब जब वीर ने उससे गौर से देखा तोह पाया की ये लड़की भी ख़ूबसूरत थी. पर इसमें अभी वो चार्म नहीं था जो सुमन में मौजूद था.

आभा : J-Jii! Dh-Dhanyavaad!

वीर : It's okay!

आभा : हम्म!?

'अहह! शी doesn't कनौस इंग्लिश.'

वीर : मेरा मतलब था... कोई बात नहीं.

आभा : J-Jii!

सुमन : और ये है मेरी बेटी ~ सोनाली!

वीर : ओह्ह हां! हम एक दूसरे को जान चुके है.

सुमन : अच्छा!? ये... ये तोह अच्छी बात है. एक बार फिर... मुझे और मेरे परिवार को बचाने के लिए बोहत बोहत धन्यवाद!

वीर : अरे ऐसा कह के आप मुझे...

'हम्म?'

वो कहते कहते ृक्क गया क्युकी यु सुमन का एकदम अजीब निगाहो से देखना उससे बोहत hi ज़्यादा दुविधा में दाल रहा था.

'फ़क! व्हाई इस शी लुकिंग में लिखे तहत?'

[Who knows!?]

सुमन : कहिये न...

वीर : वो... बार बार धन्यवाद देके आप मुझे शर्मिंदा कर रही है.

सुमन : अहह!? नई... में तोह बस... धन्यवाद दे रही थी. दिल से.

वीर (ब्लशेस) : जी!

सुमन : आप यहाँ किसलिए आये है? आप इधर के नहीं है तोह!?

वीर : कुछ काम था.

सुमन ने देखा की वीर इधर उधर देख रहा था जैसे मानो कुछ ढूंढ रहा हो.

सुमन : किस्से ढूंढ रहे है आप?

वीर : ओह्ह! यहाँ कोई ठहरने की जगह मिलेगी क्या?

सुमन : हँ?

वीर उसके उत्तर का वेट hi कर रहा था की अचानक hi उसका हाथ सुमन ने अपने हाथो में थामा और उससे खींच के घर की ऑर्डर ले जाने लगी.

वीर : H-Huh?

सुमन (स्माइल्स) : आप हमारे घर में hi ठहरोगे!

'हँ? Wtf???'

[She got attracted to you or what? Haha~]

न केवल वीर, बल्कि सुमन की बहु, आभा और उसकी खुद की लड़की, सोनाली तक सुमन की इस बात से दांग थी. क्या कहा था अभी अभी सुमन ने? की वीर उनके साथ रहेगा? वीर? एक अनजान युवक जिस से मिले अभी कुछ मिनट भी नहीं हुए. वो साथ में रहेगा?

सुमन : आइये न! A-Aur हो सके तोह... मुझे 'आप' नहीं 'तुम' कहके सम्बोधित करियेगा.

वीर : ?? No वे!!! आप मुझसे उम्र में बड़ी है. तोह भला में ऐसे कैसे...?

सुमन : में आपसे निवेदन करती हु.

वीर : ??

सुमन : कृपया कर मुझे 'तुम' कहके hi बुलाइये.

वीर : पर...

सुमन : ये मेरा आग्रह है.

न चाहते हुए भी वीर को सुमन की बात maan'ni hi पड़ी. आखिर वो इस वक़्त बड़ी hi आशा भरी नज़रो से जो देख रही थी उससे.

गांव में अधिकतर घर कच्चे थे पर सुमन का घर कुछ पक्के मौजूद घरो में से एक था वह.

वीर को सोनाली के मुँह से उसके घर की स्थिति के बारे में आईडिया लग चूका था. सोनाली का सौतेल बाप था ~ पुष्पेंद्र.

सौतेला भाई था ~ अमित, जो की साथ hi साथ आभा का पति भी था. दारु और जुए का दोनों बाप बेटे को ऐसा नशा था की आज वो दोनों नशे में hi अपनी hi घर की महिलाओ को बेचने तैयार थे.

खुशकिस्मत थी उनकी जो वीर सही समय पर उधर पहुँच चूका था, वर्ण न जाने क्या हो रहा होता उनके साथ.

कुछ hi पालो में वीर घर के अंदर था और एक बिस्तर पर बैठा हुआ था.

वीर : M-Mujhe नहीं लगता की ऐसे टाइम पे... ी मैं जब आपके हस्बैंड बाहर हो... तोह मेरा रुकना सही होगा. और हां, मुझे नहीं पता था की वो दोनों आप दोनों के पति है. ये बात मुझे वह पता चली.

सुमन (स्माइल्स) : आपको चिंता करने की कोई ज़रुरत नहीं है माँ... मेरा मतलब है... वीर जी!

वीर : ??

सुमन : आपने जो भी किया एकदम सही किया. दरअसल, वो मेरा दूसरा पति है. मेरे पहले पति का देहांत हुए कई साल हो चुके है. पहले पति से मुझे सोनल हुई. वही अमित उसका लड़का जो उससे अपनी पहले पत्नी से हुआ. और आभा अमित की hi पत्नी है.

वीर : समझा!!

सुमन : पुष्पेंद्र के साथ रहना एक मजबूरी थी. आखिर एक महिला बिना मर्द के नहीं जी सकती. पर माँ... मेरा मतलब है, वीर जी!! मेने कभी पुष्पेंद्र के साथ सम्भोग नहीं किया. वो हमे रहने के लिए घर दे रहा था और हम उससे सुविधाएं. यानी की खाना बनाना, साफ़ सफाई, कपडे धोना... सब कुछ. सिवाए शारीरिक सम्बन्धो के.

'Wtf??? व्हाई इस शी टॉकिंग अबाउट हेर सेक्स लाइफ विथ में?'

इधर आभा और सोनाली का भी शामे हाल था. वो मुँह खोले स्तब्ध सी सुमन को देखे जा रही थी.

सुमन : कुछ मजबूरिया थी जिनके चलते हमे घर चोरर्ण पड़ा और रहने के लिए स्थान चाहिए था तोह पुष्पेंद्र से मेने शादी की. क्युकी हमे पनपने के लिए एक घर चाहिए था.

वीर : वो जब इतना कर सकता है तोह...

सुमन : नहीं माँ... वीर जी! शादी के वक़्त hi मेने कह दिया था की... जिस दिन उसने मेरे साथ ज़बरदस्ती करि, उसी दिन अपने प्राण त्याग दूंगी. उससे एक महिला चाहिए थी घर चलाने के लिए.

वीर : ओह्ह!

सुमन : खर्र! बोहत हो गयी बातें. आइये माँ... वीर जी! में आपको हाथ मुँह धुलवा देती हु.

और सुमन के साथ आँगन के पास hi लगे बाथरूम में जाके वीर ने अपने हाथ परर धोये. बाथरूम तोह नहीं कहेंगे बस एक कमरा था बोहत छोटा जिसमे टॉयलेट सीट की व्यवस्था थी.

वीर दिन से शाम तक सुमन के घर hi था. शाम को वो कुछ बहाना करके जैसे तैसे घर से निकला और गाँव में hi जतिन को ढूंढ़ने निकल पड़ा.

एक गेस्सिंग थी उसकी की शायद...

शायद मिशन अपडेट हो जाए और कोई नयी लोकेशन मिल जाए उससे. और ठीक वैसा hi हुआ. जब वो रात के करीब 10:30 बजे बाजार के इलाके से थोड़ा दूर कही चला जा रहा था तोह उसकी नज़र दो शाल पहने आदमियों पर गयी जो रोड से साइड में खड़े बड़ा hi छुप के बाते कर रहे थे.

और जैसे hi वीर ने उन्हें चेक किया.

उसके चेहरे पे एक मुस्कान फेल गयी. क्युकी उनमे से एक उसका मिशन टारगेट था.

'फाउंड हिम!'

मुट्ठी कस्ते हुए वो वही उस जतिन को दबोचना चाहता था पर जैसे तैसे खुद को कण्ट्रोल कर वो वही रुका रहा.

खाली एक पीले रंग की स्ट्रीट लाइट जल रही थी जिसके चलते नज़ारा उतना स्पष्ट नहीं दिख रहा था.

जैसे hi जतिन उस आदमी से बात कर अलग डायरेक्शन में जाने के लिए हुआ. वीर ने उसका पीछा शुरू करना शुरू दिया.

पर जैसे जतिन को अगले hi पल इस बात का एहसास हुआ और वो बिना पीछे मुड़े hi तेज़्ज़ कदमो के साथ आगे भागा.

वीर कहा इस बार पीछे रहने वाला था? जितनी भी अगिलिटी थी उसकी, उसका पूरा इस्तेमाल कर वो भी तेज़्ज़ तेज़्ज़ भागते हुए उसका पीछा किया.

और किसी एक जगह पे आके वो ृक्क गया.

सामने भैंसो का एक पुराना तबेला था जो शायद अब इस्तेमाल नहीं किया जाता था.

हर्र जगह इतना अँधेरा था की वीर को कुछ दिखाई तक नहीं दे रहा था. और न hi जतिन को.

जतिन छुपा तोह तबेले में hi था पर रौशनी जैसे उनकी परेशानी बांके कड़ी हुई थी. अँधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और वीर बस आहिस्ता आहिस्ता अपने कदम तबेले की तरफ बढ़ा रहा था.

पर उससे डर था...

की कही जतिन कोई सरप्राइज अटैक न करदे उसपे किसी हथियार से.

इसलिए...

'चेक!'

जैसे hi वीर ने चेक कहा. उससे तबेले के अंदर छुपे जतिन के सर्र के ऊपर उसकी स्टेटस विंडो नज़र आ गयी.

और अब उससे अँधेरे का कोई डर नहीं था. स्टेटस विंडो अपने आप में नीले रंग से चमकती थी.

एक ईविल सी मुस्कान लिए वीर तबेले के पीछे जा पहुचा.

'किधर गया साला?' जतिन मैं में सोच दुबक के छुपा हुआ था जब अचानक उससे अपने कंधे पे एक हाथ महसूस हुआ.

जैसे hi उसने पीछे मुद के देखा...

"सरप्राइज मोथेरफुचका..."

*बाहानगगगगगगग!"

एक घुसा उसके गालो पे किसी ट्रैन की रफ़्तार जितनी तेज़्ज़ आके पड़ा. वो हमले से गिर पाटा पर उसके पहले hi किसी ने उसकी कल्लोर को पकड़ के खींचा और फिरसे...

*बायअंगगगगगग!*

एक और घुसा उसके उसी गालो पे जड़ दिया. दो घुसो के बाद hi जतिन के मुँह से खून निकलना शुरू हो चूका था. फुल 50 स्ट्रेंथ पंचेस थे वीर के ये.

वो चारो खाने चित्त हो चूका था. केवल भागने में तेज़्ज़ था वो बाकी एक बार पकड़ में आ जाए उसके बाद जतिन जैसे किसी चूहे की तरह था जिससे वीर ने राउंड दिया था.

'हम्फ! तू इजी!'

वीर ने जैसे hi उसका जेब टटोला, तोह उससे जिस चीज़ की तलाश थी. वो आखिर मिल hi गयी.

जतिन के ऊपर वीर ने फिर ऐसा गुस्सा निकाला की उसकी हालत बेहाल कर दी.

बेचारी पारी तक कुछ न बोल पायी.

और उससे उस हाल में hi चोरर वीर सुमन के घर की ऑर्डर निकल पड़ा.

घर का रास्ता उससे याद नहीं था पर यही पे पारी ने उसकी मदद की. सिस्टम का फीचर ट्रैकर जो था वो रास्ते को मेमोरीज़े कर लेता था.

ये एक इनबिल्ट फंक्शन था जिससे वीर ने इस्तेमाल किया और फाइनली वो सुमन के घर लौट आया.

***

अंदर आते hi उससे माहौल कुछ अलग सा लगा.

सभी सो रहे थे लगता और केवल एक hi पीले रंग का बल्ब जल रहा था.

किवाड़ खुले हुए थे जैसे शायद वीर के लिए कोई जाएगा हुआ था.

वीर अंदर आया और आँगन में उसने हाथ मुँह धोये और अपनी शर्ट उतार साइड में टांग दी.

बदन से पसीने को गीले कपडे से पोछा और वो कमरे की तरफ बढ़ा...

बैग में से वो अभी अपने लिए नयी टी शर्ट ढूंढ hi रहा था जब उससे अपने पीछे से एक आवाज़ आयी...

*क्लिक*

किवाड़ की चटकनी बंद हुई और दरवाज़े के सामने सुमन कड़ी हुई थी. उसके दोनों हाथ उसके पीछे थे जो चटकनी को बंद कर चुके थे.

'हँ?'

*छम छम*

वो धीरे धीरे आगे बढ़ी, उसकी पायल की आवाज़ hi केवल उस सन्नाटे में सुनाई दे रही थी.

पास आते हुए जैसे hi उसने वीर की नग्न छाती को देखा तोह उसके गाल सुर्ख लाल पद गए.

मात्र एक पीले बल्ब की रौशनी में वीर उससे देख पा रहा था. उसने भूरे रंग का ब्लाउज पहना हुआ था, साड़ी का पल्लू पहले से hi उसकी छथि से अलग था जिसके चलते सुमन का आधा क्लीवेज वो देख पा रहा था.

"आप परेशान हो. है न?"

वो बोलते हुए उसके और समीप आयी और उसके बगल से आके बैठ गयी.

हलकी रौशनी में वो अलग hi क़यामत लग रही थी.

'व्हाट थे हेलल?'

[System is going into sleep mode.]

'हँ??? Wtf??? परीईई??? व्हाट स्लीप मोड??? के बैक...'

[Enjoy the night!]

'हँ??? के बैक हेरे यू इडियट पीेछे ऑफ़ सहित... परीइइइइइ!!? परीईई???? फुसक्कक्कककककककक!!!'

अगले hi पल सुमन ने उसके दोनों हाथो का थामा और उठाते हुए अपने चेहरे के पास लायी और अपने कोमल नरम होंठो से उन्हें चूम ली.

'????'

फिर वो बड़ी hi अजीब सी निगाहो से उससे देखि और उसके सीने को. और फिर उसके हाथो को नीचे ले जाते हुए उसने वीर के दोनों हाथ अपने दोनों दूध की थैलियों पर रख दिए.

'सीईट्टत्त!!!'

ये एहसास पाते hi वीर की आँखें अपने आप बंद हो चली.

उसके हाथ उन् दो ामो पर जोरर से कैसे हुए थे. सुमन खुद जोरर जोरर से सासें ले रही थी जिसके चलते उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी और वीर के हाथ भी उसी रदम में ऊपर नीचे हो रहे थे.

"ये... ये आप क्या!?"

वीर ने बोलना चाहा पर अगले hi पल उसका मुँह बंद का बंद रह गया जब सुमन ने आगे बढ़ के उसके होंठ अपने मुँह में भर किये.

"मममपहहह!????"

और दोनों बिस्तर पर गिर पड़े...

*स्लुर्प*

"मममममम"

"सससससस"

न जाने किसी किसी आवाज़ें आ रही थी जब दोनों के मुँह आपस में भिड़े हुए थे.

वीर को लास्ट टाइम सेक्स किये काफी समय हो चूका था. तब से अब तक उसके अंदर इतना फ़्रस्ट्रेशन भरा हुआ था जिससे रिलीज़ उससे करना hi था. आज शायद उसका धेरर सारा स्ट्रेस रिलीज़ होने वाला था. स्ट्रेस के अलावा भी कुछ और रिलीज़ होने वाला था.

जब दोनों की सासें फूल जाने पर अलग हुए तोह दोनों के होंठो से लगा हुआ एक थूक का ब्रिज बन्न गया.

सुमन की आँखों में वासना साफ़ साफ़ झलक रही थी. वही वीर की खुद की आँखे कही जैसे खो सी गयी थी.

अपने हाथो को पीछे ले जाते हुए सुमन ने ब्लाउज खोला और झटके से अपने सीने से गिरा दिया. उसके बाद का नज़ारा जो दिखा, उससे देख के वीर मानो पागल से हो गया था.

आम नहीं, खरबूजे थे.

इतने सुडोल और इतने आकर्षक की पूछो मत.

उसने अपना थूक निगला और सामने मौजूद उन् स्तनों को घूरे जा रहा था.

सुमन तोह एक आग का शोला थी. और जैसे अगले hi पल वीर को ये आग महसूस हुई जब सुमन ने उसके सर्र को पकड़ के अपने दोनों स्तनों के बीच में खींच लिया और पूरा जकड के दबा लिया.

'फुसक्कक्कककककक!'

पता नहीं सुमन ने ऐसा क्या किया था जिसके चलते वीर के अंदर कुछ ट्रिगर हो गया.

और फिर न तोह उसने आव देखा न ताव.

सुमन को अपने नीचे कर उसकी छूछीयो को ऐसे मरोड़ा, ऐसे निचोड़ा की जोरर जोरर से कमरे में उसकी सिसकिया गूंजने लगी.

कुछ hi पालो में दोनों hi नग्न अवस्था में आ चुके थे. और वीर जैसे किसी और hi दुनिया में जा चूका था.

उसने अपना लुंड सुमन की बालो से भरी छूट पर लगाया और धक्के दे दे के उससे पूरा अंदर जड़ तक पहुचा दिया.

"आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह!"

वो सिसकिया लेते हुए वीर को जकड़े रही. पर हर्र धक्का उससे झंझोर के रख देता.

ताबड़तोड़ चुदाई के चलते पूरा बिस्तर चरर मर्डर की आवाज़ कर रहा था और ये आवाज़ कोई और भी दूसरे कमरे में सुन्न रहा था.

बगल के कमरे में खाट पर लेती आभा अपनी दोनों टांगो के बीच अपना हाथ डाले हुए थी. उसके गाल पूरे गुलाबी हो चुके थे. अपनी सासु माँ की सिसकिया सुन्न उसकी खुद की छूट में हलचल हो रही थी जिससे वो जोरर से मॉल के मिटाना चाह रही थी.

सोनाली तोह सो चुकी थी तोह उससे कुछ अंदाजा नहीं था. पर...

आभा को हर्र एक चींख, हर्र एक सिकसिया और उन् धक्को की आवाज़ भली भाति सुनाई दे रही थी.

और कुछ इस hi प्रकार ये रात उन् सभी के लिए यादगार बन्न गयी.

अगली सुबह जब वीर की आँख खुली तोह उससे अपने ऊपर कुछ भार सा महसूस हुआ.

जैसे hi उसने आँखें खोले के देखा तोह पाया की...

सुमन एकदम नंगी अपनी दोनों दूध की थैलिया उसके सीने पर टिकाये उससे hi निहार रही थी और मुस्कुरा रही थी.

उसके बाद वो बोली,

"सुबह हो गयी... Ma-Maalik!"

'हँ?? वेट!!!! व्हाट दीद शी सैय्य्य???'

.

.

.

.

.

.

.

.

आज एक लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


लिखे कर देना पैसांद आये तोह.

एंड सॉरी फॉर थे वेट. 😁
 
अपडेट - 30 ~ थे बेस्ट गिफ्ट

अब तक...

जैसे hi उसने आँखें खोल के देखा तोह पाया की...

सुमन एकदम नंगी अपनी दोनों दूध की थैलिया उसके सीने पर टिकाये उससे hi निहार रही थी और मुस्कुरा रही थी.

उसके बाद वो बोली,

"सुबह हो गयी... Ma-Maalik!"

'हँ?? वेट!!!! व्हाट दीद शी सैय्य्य???'


अब आगे...

मुंबई...

ात Nidhi's होम...

सुबह सुबह निधि बड़ी hi परेशान सी हॉल में hi सोफे पर विराजमान थी. हाथो में फ़ोन था और आँखों में नमी.

'हे doesn't इवन रिलीज तो में. फ़ोन करती हु तोह वो भी नहीं उठाना है उससे. क्या इतना बुरा लगा है उससे मेरी बातो का? जो अब वो मुझसे बात भी नहीं करना चाहता? क्या हो गया था मुझे भी उस दिन? उस... उस दिन इतना कैसे भड़क गयी में उसपे? मेरी hi गलती है. बुरा लगा है उससे तभी तोह देखो न... न मेरे कॉल्स उठा रहा है, न मेरी बातें मान रहा है कॉलेज रोज़ आने की, न मेस्सगेस सीन कर रहा है. इतना... He's... He's स्टुपिड... इडियट... पागल... हे...'

निधि बेचारी, वीर के hi बारे में सोची जा रही थी. आखिर उसका कांटेक्ट जो नहीं हुआ था वीर से उस रात से. बेचैनी से भरपूर थी वो इस वक़्त. ऊपर से रजत का अलग टेंशन. कही रजत ने वीर को किसी परेशानी में तोह नहीं दाल दिया. धेरर सारे सवाल उमड़ रहे थे उसके मैं में.

अपनी आँखों में बन्न रहे आसुओ को पॉच वो उठने hi वाली थी की उसकी जांघ पे उसके गाउन को किसी ने पकड़ के खींचा,

देखा तोह जूही थी जो अभी अभी अपनी आँखें मलते हुए उसके पास आयी थी.

"उठ गयी मेरी बच्ची!?" निधि ने उससे थामते हुए अपने सीने से लगा लिया.

जूही : मममम

निधि : चलो! रेडी कर दू तुम्हे. स्कूल भी जाना है.

जूही : मम्मी आप यहाँ क्यों बैठी हो? टिफ़िन में क्या रखोगी आज?

निधि : कुछ नहीं बेतु. तुम्हारे वीर मामू... बोहत तंग करते है तुम्हारी मम्मी को...

जूही : ममम? वीर मामू!? वीर मामू से तोह में परसो hi मिली थी ेहेहेहे~

जूही की बात सुनते hi जैसे निधि को एक झटका लगा. उसकी बेटी भला कब और कहा मिल ली वीर से?

निधि : ??? तुम?? कहा!??? कहा मिली थी बीटा वीर से? वो तोह...

जूही : हम्म? परसो जब में मासी के साथ बाजार गयी थी तोह वह से जब आये... तोह वीर मामू नीचे hi खड़े थी बाइक पे.

'बाइक!??? तहत मीन्स... आईटी वास् हिम!!!!!!!'

निधि अपनी बच्ची को कस के थामे उससे घर रही थी. और उस से जल्दबाज़ी में सवाल करते जा रही थी. जैसे मानो वीर से जुडी हर्र एक इनफार्मेशन वो जूही से jaan'na चाहती थी.

निधि : T-Toh? F-Fir क्या हुआ? क्या कहा उसने? आपके वीर मामू ने?

जूही : वो बोले उन्हें कुछ काम है और चले गए... मम्मी! मुझे टॉयलेट आयी है...

जूही इतना बोल निधि के ाचल से निकल तेज़्ज़ कदमो के साथ अंदर वाशरूम में भाग गयी.

पर निधि का सवाल पूरा नहीं हुआ था. सबसे बड़ा सवाल की वीर इस वक़्त कहा रह रहा है...?? ये तोह वह पूछना hi भूल गयी.

ये ख़याल आते hi जैसे hi वो पलटी और जूही को आवाज़ लगाने वाली थी की तभी, उसने देखा की श्रेया दरवाज़े की देहलीज़ पे खड़े उससे hi देख रही है.

'???'

श्रेया : Don't वोर्री! वो अपनी भाभी के साथ रह रहा है. रेमेम्बेर? वही भाभी... जिन्हे वो उस दिन बचाने गया था?

निधि (सुरप्रीसेड) : तुम्हे...?? नू!!! वो तुमसे मिलने आया और तुमने मुझे बताया तक नहीं श्रेया? इतनी बड़ी बात...

श्रेया : चिल!!! उसका कहना है की वो आपके साथ नहीं रह सकता. क्युकी वो आपकी सिचुएशन जानता है और वो गिल्ट कॉन्ससियस बाँदा है. उस से ऐसे नहीं रहा जाएगा. इसलिए, वो वह रह रहा है.

निधि : और कौन था जिसने उससे मेरी सच्चाई के बारे में बताया!? हां?

श्रेया : ी...

निधि : मेने तुम्हे मन किया था न श्रेया? मेने मन किया था न? फिर क्यों तुमने उससे...

वो श्रेया को अच्छी खासी सुनाती पर तभी उससे कुछ शब्द याद आ गए.

'श्रेया जी को मत डाटियेगा, उन्होंने मुझे वो सब बताना ज़रूरी समझा इसलिए बताया था शायद.'

और बस...

निधि के खुले होंठ अपने आप hi बंद हो गए. लेटर में वीर ने स्पष्ट लिखा था की श्रेया जी को न डांटा जाए. अब भला निधि उसकी बात कैसे नहीं रखती? उसकी मौजूदगी न होने पर भी, इस तरह से उसका महत्व बन्न चूका था उसके घर में.

"इडियट...!"

वो बड़बड़ाती हुई उठी और सीधे किचन में चली गयी.

पर सामने कड़ी श्रेया सब कुछ देख पा रही थी. वो देख पा रही थी की कितना सिग्नीफिकेन्स था वीर का निधि के ऊपर और साथ hi साथ जूही पर भी... इवन उसके खुद के ऊपर भी.

वो खुद एक गहरे चिंतन में डूब गयी.

'ी वंडर हाउ आईटी वोउल्ड लुक िफ़ हे वास् माय Sister's हस्बैंड!...'

'????'

'हँ?? Wtf!?? वेट! में क्या सोचने लगी??'

अपना सर्र हिलाते हुए वो अंदर चली गयी.

***

राजस्थान...

ात Suman's होम...

वीर : हम्म! तोह अब बताओगी की ये क्या चक्कर है? क्यों मुझे आप...

सुमन : तुम कहके बुलाइये मुझे मालिक... तुम... तुम कह के... कृपया कर!

'शी..'

वीर (शिघ्स) : हम्म! तोह अब बताओगी को ये सब क्या चक्कर है? क्यों तुम... क्यों तुम मुझे मालिक कह के बुला रही हो?

वीर कल की हुई घटना के बाद मैं में धेरर सारे सवाल लिए हुए था. अब चुकी वो दोनों का hi क्लियर मंद था, वीर ने फौरन hi सवाल पूछना सही समझा.

वो इस वक़्त उसी बिस्तर पर बैठा हुआ था जिसपे कल रात दोनों ने hi रंगरेलिया मनाई थी. उसके पेर्रो के पास उसकी जांघ पर हाथ रखे सुमन बैठी हुई थी जो केवल मुस्कुरा के वीर को देखे जा रही थी.

सुमन (स्माइल्स) : ये तोह होना hi था एक न एक दिन मालिक!

वीर (फ्रोंस) : क्या मतलब!?

सुमन : मालिक! ये तोह होना hi था... जिस पल मेने आपका सीना देखा था.

'मेरा सीना!?'

सोचते हुए वीर ने जैसे hi अपने सीने पर नज़र मारी तोह उससे नज़र आया...

उसका पेंडंट. वही पेंडंट जो उसकी माँ ने दिया था. वो शर्ट के बाहर hi था.

'हँ!?? सो... That's व्हाई शी केपट लुकिंग ात में लिखे तहत!?'

वीर ने अपने हाथो में उस पेंडंट को थामा जो एक सोने की चैन का था और उसमे एक बड़ा hi अनोखा सा नीला पत्थर चिपका हुआ था.

वीर : तुम्हारा मतलब है ये?? मेरा पेंडंट?

सुमन (नॉड्स) : जी हां मालिक! यही! और इसलिए आज से ये सुमन आपकी दासी है.

'हँ??? Wtf?? दीद ी हर्ड तहत राइट!?'

[Hahaha~ You don't know. You just found the diamond. Wo Heere ki anguthi kuch bhi nahi, asli heera toh ab aapko mila hai master. Haha~ Who needs a diamond ring? When you can have a slave? Hahaha~]

'ओह के ों पारी! थिस इस सीरियस.'

[Hehe~]

वीर (पेंडंट पकड़ते हुए) : इसमें ऐसा क्या है?

सुमन (सुरप्रीसेड) : मालिक? क्या आपको वाक़ई कुछ नहीं पता इसके बारे में?

वीर : हम्म? नहीं! क्यों?

सुमन वीर को ऐसे देख रही थी जैसे मानो कोई भूत देख लिया हो.

सुमन : मालिक!??? या तोह आप मज़ाक कर रहे है या अनजान बन्न रहे है.

वीर : देखो सुमन...

सुमन : *स्माइल्स*

वीर : ???

सुमन : मुझे अच्छा लगा आपने आखिर कार मुझे मेरे नाम से बुलाया. और मेरा ये अनुरोध है की... आगे भी... आगे भी मालिक... ऐसे hi मुझे बुलाये.

वीर : एहम! हां! तोह देखो सुमन... में वाक़ई कुछ भी नहीं जानता हु. तुम क्या कह रही हो मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है.

सुमन : पर ऐसा कैसे हो सकता है!? हँ!?? ज़रा रुकिए मालिक...

वो हैरान होते हुए कुछ सोचती है और फिर वीर को पुनः देखती है,

सुमन : ये आपको किसने दिया? आपके पास ये कैसे आया?

वीर : हम्म? ये!? ये मेरी माँ ने मुझे जन्म के वक़्त पहनाया था.

सुमन (शॉकेड) : आपकी माँ ने!?

वीर (फ्रोंस) : हम्म! तुम... क्या तुम कुछ जानती हो?

सुमन : आपकी... आपकी माँ का नाम क्या है!?

वीर : भावना!

सुमन ये सुनते hi फौरन कड़ी हो गयी है और मुँह फाड़े वीर को देखने लगी. स्तब्ध निगाहो से वो उससे घर रही थी.

सुमन : Bh-Bhavana!?

'There's समथिंग रॉंग!'

[Ask her every possible detail master! Something is fishy!!!]

'एअआहहह!!'

वीर (फ्रोंस) : तुम! कुछ ज़रूर जानती हो. है न!?

वीर ने खड़े होते हुए अगले hi पल किवाड़ की चटकनी अंदर से hi बंद कर लॉक लगा दिया.

वीर : जवाब दो!!

सुमन हां में सर्र हिलायी और तेज़्ज़ कदमो के साथ अलमारी की तरफ गयी, उससे खोल वो कुछ hi पालो के अंदर एक छवि ढूंढ के लायी.

उसके बाद वो नीचे झुकी और उसी बिस्तर के नीचे से उसने एक पति सरका के निकाली.

सुमन की हर्र एक हरकत वीर देख रहा था और उसका दिल जोरर से धड़क रहा था. ज़रूर... ज़रूर कुछ न कुछ उससे पता चलने वाला था जिसके चलते उससे शायद झटके भी लग सकते थे.

अंदर पति में से उसने एक तस्वीर निकाली जो फोटो फ्रेम में सजी हुई थी और वीर की तरफ बधाई.

'??'

सवालिए नज़रे लिए जैसे hi उसने वो फोटो देखि...

उससे दिखाई दिया की एक बेहद hi शानदार सा महल या हवेली कह लो जो काफी बड़ी थी और फूलो से सजी हुई थी. कोई भी इंसान नहीं था फोटो में. केवल एक महल जितनी बड़ी हवेली hi थी.

वीर (फ्रोंस) : इसका मतलब क्या है!?

सुमन : मालिक! में आपको ज़्यादा कुछ नहीं बता सकती. केवल इतना hi बता सकती हु की...

में और मेरा परिवार, मेरे पूर्वज असल में...

हमेशा से इस हवेली में रहने वाले लोगो की सेवा करते आये है. इतने पहले से की सही अनुमान लगाना नामुमकिन है.

वीर : कौन है ये लोग? और ये हवेली?

सुमन : में नहीं बता सकती. मुझे माफ़ कीजियेगा. में वचन बढ़ हु. बस इतना जान लीजिये की... में और हमारे पूर्वज इस हवेली के लोगो के सेवक थे और है और आने वाले समय में भी रहेंगे.

वीर : पर तुमने अभी अभी कहा की तुम मेरी दासी...!? वेट!! हँ??

जैसे उससे रीलीज़ हुआ...

सुमन (स्माइल्स) : ....

वीर : इसका मतलब तोह यही हुआ की... में इस हवेली से हु... जो की बिलकुल भी सच नहीं है.

सुमन : ये जो आपके गले में टेंगा हुआ है न??

वीर : हम्म!

सुमन : ये मेने इस हवेली में रहने वाले लोगो के पास देखा था. और... ये उनका बेशकीमती गहना था.

वीर (सुरप्रीसेड) : यदि इस हिसाब से चले तोह... Doesn't तहत मीन्स की मेरी माँ... वो इस हवेली के लोगो में से एक थी?

सुमन : ....

वीर : ये लोग कहा है अभी? ये हवेली किधर है?

सुमन : में नहीं बता सकती मालिक! में वचन बढ़ हु.

वीर : दम्मंन आईटी!!! तोह... तोह ये तोह बता सकती हो न की तुम्हे ये वचन किसने दिया?

सुमन (नॉड्स) : मेरी नानी ने...

वीर : नानी? Okay!! G-Good! तोह चलो... कहा है वो? M-Mujhe उनसे मिलना है.

सुमन : माफ़ कीजियेगा पर... वो अब इस दुनिया में नहीं है मालिक!

'फूऊक्कक्कककककककक!!!!'

'There's समथिंग रॉंग!! यदि सुमन का कहना है की वो और उसका परिवार इन् हवेली के लोगो की सेवा करता था तोह यहाँ तोह वो मेरी सेवा कर रही है. केवल मेरे पेंडंट देखने के बाद. क्युकी उसके हिसाब से ये पेंडंट उन् हवेली के लोगो का बेशकीमती गहना था. तोह फिर माँ के पास कैसे आया ये पेंडंट? दीद शी स्टॉले आईटी? No ी don't थिंक सो. इसका मतलब तोह बस यही दर्शा रहा है की माँ इन् हवेली वाले लोगो के बीच की एक सदस्य थी. या फिर उन्होंने माँ को ये गहना दिया हो? पर वो इतना बेशकीमती गहना क्यों देंगे भला? ाआर्डरह्ह्ह्हह्ह!!!'

वीर ने खीजते हुए अपने बाल नोचे. इतने सारे सवाल उमड़ रहे थे की उसकी कुछ सूझ नहीं रहा था क्या करे.

[Don't worry! Ye kaafi uljhi hui gutthi hai. Atleast aapko apni Mom ke baare me kuch information mili.]

'याहहह! No वेट....'

कुछ सोचते हुए वो फौरन hi पलटा और सुमन से पूछा,

"तोह क्या तुम मेरी माँ को जानती हो? भावना?"

सुमन वीर को देखि और फिर ना में सर्र हिला दी.

सुमन : नहीं मालिक!! में उन्हें नहीं जानती.

वीर (फ्रोंस) : पर तुम्हारे हाव भाव तोह कुछ और hi थे जब तुमने मेरे मुँह से उनका नाम सुना था.

सुमन : जैसा की मेने कहा मालिक. में उन्हें नहीं जानती. रही बात मेरे हाव भाव की... तोह में इस से ज़्यादा कुछ भी कहने के लिए वचन बढ़ हु मालिक. मुझे माफ़ कर दीजिये मालिक!

सुमन को वीर ने गौर से देखा और अंत में एक आह भरी. क्युकी सुमन को देख के hi पता लगाया जा सकता था की वो बिलकुल भी झूठ नहीं बोल रही थी.

अभी वो बैठा hi हुआ था की तभी उसका फ़ोन बजने लगा,

स्क्रीन पे देखा तोह...

'रागिनी भाभी!?'

वीर : Hello?

रागिनी : हैप्पी बर्थडे वीईईएएरररर!!

रागिनी की खिल खिलाती हुई आवाज़ उसके कानो में पड़ी. और ये सुनते hi वीर के होंठो पे एक मुस्कान फेल गयी.

'ी ऑलमोस्ट फॉरगॉट... की आज तोह मेरा b'day है. भाभी को याद था!? ी वंडर... और किस्से याद होगा?'

[Fuck! It's your birthday master!? Happy Birthday my dear master.]

'थैंक्स पारी!'

[Ab gift ke taur pe fataak se mujhe Level 4 pe pohuchao.]

'गिफ्ट जिसका b'day होता है वो नहीं देता इडियट. विश करने वाले देते है उससे.'

[Huh? Ohh yeah! Fuck! I forgot! Ahahaha~]

वीर (शिघ्स) : थैंक यू भाभी!

रागिनी : वेलकम! तोह!? वो... वो... तुम आ रहे हो न? कब तक आओगे?

वीर : कल! आज रिजर्वेशन करवा लूंगा. और आज रात में बैठ जाऊंगा. सो कल तक...

रागिनी की तभी उधर से थोड़ी उदासी भरी आवाज़ आयी,

"तोह! तुम b'day पर यहाँ नहीं रहोगे मतलब."

वीर : चाहता हु पर पॉसिबल नहीं है. कल hi आ पाउँगा.

रागिनी : वेल! राइट! कल थें... ी हैवे ा सरप्राइज फॉर यू! कल आओ... एंड... अच्छे से सफर करना okay?

वीर (स्माइल्स) : जीई!

रागिनी : Okay! तोह... में राखु..!?

वीर (स्माइल्स) : जी!

और कॉल एन्ड हो गया.

बेचारी रागिनी कॉल तोह बड़ी hi उत्साह से लगाई थी. पर उससे विश करने के बाद समझ hi नहीं आ रहा था की अपने देवर से भला अब और क्या बातें करे. और इसके चलते उससे खुद पे शर्म आ रही थी. वो जल्द से जल्द फ़ोन राखी और खुद को बातें सुनाते हुए अंदर चली गयी.

***

वीर का बर्थडे तोह था hi पर साथ hi साथ आज किसी और का भी b'day था. वो शख्स और कोई नहीं बल्कि सुहाना और सोनिआ की माँ थी ~ नमृता!

एक बड़ी सी होटल में एक पूरा हॉल बूकेड था. पूरे हॉल को सजाया गया था. अंदर धेरर साड़ी लाइट्स जल रही थी और मंद मंद आवाज़ में इंस्ट्रुमेंटल म्यूजिक चल रहा था.

वेटर्स में साड़ी की साड़ी ख़ूबसूरत लड़किया थी जो ख़ूबसूरत सी अत्तिरे पहने गेस्ट्स को कही कोल्ड ड्रिंक्स तोह कही स्नैक्स सर्वे कर रही थी.

तोह कुछ एंट्रेंस पे उनके स्वागत के लिए कड़ी हुई थी.

गेस्ट्स भी एक से बढ़ के एक थे. सभी रईस और बड़े घरानो से बिलोंग कर रहे थे.

माहौल कुल मिलाके बोहत खुशनुमा था पर...

पर इस वक़्त उसी होटल के एक कमरे में दो बेहद hi ख़ूबसूरत औरतें अत्यंत hi चिंतन में डूबी हुई थी.

ये और कोई नहीं बल्कि सुहाना और सोनिआ hi थी.

सुहाना इधर से उधर टहलते हुए खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी.

"कुछ नहीं होगा सुहाना! फेव! कलम डाउन! फेव!"

सोनिआ : वो आते hi होंगे.

सुहाना : तुम मुझे और दर्रा रही हो सोनू!

पर सुहाना की बात पे सोनिआ कुछ न बोली बस मुँह फेरर के कही और देखने लगी.

और उसका ये रुखापन सुहाना को अंदर hi अंदर तड़पा रहा था. वो सोनिआ के समीप आयी और उसके चेहरे को अपने हाथो से घुमाते हुए अपनी ऑर्डर की.

सुहाना : अब भी नाराज़ हो मुझसे?

सोनिआ : ....

सुहाना : सोनऊ! प्लीज! Don't! तेरे बिना अधूरी हु में ये बात तू भी जानती है. और में तुझसे माफ़ी मांग चुकी हु न. मेने माना है न की उस वीर ने रिंग नहीं चुराई होगी क्युकी तुम उसके साथ थी. तोह अब क्या दिक्कत है?

सोनिआ : ....

सुहाना : सोनू!!! माफ़ कर दे!!! देख! में कान पकड़ती हु.

वो कान पकड़ पाती की उसके पहले hi दरवाज़ा खुला और एक आदमी अंदर आया. ऊपर से लेके नीचे तक वो महंगे कपड़ो से सजा हुआ था.

सोनिआ : डैड!?

सोनिआ और सुहाना के पिता, यानी की देश की जानी मानी ऑटोमोबाइल्स कंपनी के मालिक ~ शैलेन्द्र.

शैलेन्द्र : बोलो! क्या बात है? तुमलोगो को बीटा वह हॉल में रहना था. सभी गेस्ट्स क्या सोचेंगे?

सुहाना अपने पिता को देख एकदम काँप रही थी. आखिर कैसे वो बताएगी की जो रिंग वो देने वाले है. वो तोह चोरी हो चुकी है.

सोनिआ : दी को आपसे कुछ कहना है.

शैलेन्द्र : हम्म? क्या बात है बीटा? जल्दी कहो... बाहर भी जाना है. तुम्हारी माँ भी रेडी हो hi गयी है.

सुहाना सोनिआ को हैरानी भरे भाव से घर रही थी. अंदर आने से पहले hi सोनिआ ने उस से कहा था की सोनिआ उसकी मदद करेगी. पर यहाँ तोह वो जैसे उसकी तरफ देख hi नहीं रही थी.

'ओह no!!! सोनू!!! She's रियली माध...'

यहाँ सोनिआ अपने अलग hi विचारो में लीं थी.

'मेने कितना कॉल किया वीर को. की आज पार्टी है. ी वांटेड तो से सॉरी तो हिम अगेन. पर... अभी तक उसका कोई रिप्लाई न आया. हे प्रॉबब्ली हट्स में नाउ. आखिर... दी ने उसकी इतनी बेइज़्ज़ती की है की वो मुझे hi इन् सब का कारण समझ बैठा होगा. पर वीर... कैसे बताऊ तुम्हे... सच्चाई!?'

शैलेन्द्र : बोलो बीटा!

सुहाना : वो... वो...

शैलेन्द्र : हां?

सुहाना : असल में...

शैलेन्द्र : अरे बोलो भी...

सुहाना : वो डेढ़ करोड़ की रिंग चोरी हो चुकी है.

वो एक सास में बोल गयी.

और अगले hi पल...

पूरे कमरे में सन्नाटा सा छा गया.

शैलेन्द्र : ???

सोनिआ : ....

सुहाना : ....

शैलेन्द्र : K-Kya? क्या कहा तुमने?

सुहाना : वो... वो... डेढ़ करोड़ वाली रिंग... जो आप माँ को देने वाले थे वो... वो चोरी हो गयी है.

और अगले hi पल शैलेन्द्र की आँखें फैलती चली गयी.

उसके बाद जब सुहाना ने पूरी सच्चाई बतायी तोह शैलेन्द्र का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुँच चूका था.

वो आग बबूला होक सुहाना और सोनिआ दोनों को देख रहा था.

ऐसा लग रहा था की किसी भी वक़्त वो दोनों को तमाचा जड़ देगा.

पर उसने ऐसा किया न...

"कल तक यदि रिंग नहीं मिली... तोह सुहाना... हम्फ!"

दांत मीस्ते हुए वो अगले पल hi मोबाइल निकाल कान से लगाया और बाहर निकल के...

*स्लामममम*

जोरर से उसने दरवाज़ा बंद कर दिया.

और सुहाना ये देखते hi बिलखते हुए रोने लगी. वो जानती थी की जब उसके डैड कुछ नहीं बोलते थे तोह वो कितना नाराज़ और गुस्से में रहते थे. सोनिआ से चिपक के वो रोने लगती है.

अब उससे वीर के कहे शब्द याद आ रहे थे.

"Didn't यू से तहत फ्यू मिनट्स एगो!? मनी कैन बुय हैप्पीनेस. पैसा सब कुछ है. पैसा hi खुशिया लाता है. पैसे से hi आप खुश रहते हो? पैसे से कभी कोई उदास रह hi नहीं सकता. Didn't यू से तहत!? थें व्हाई दो यू लुक साद नाउ? मुझे तोह अभी केवल यही दिखाई दे रहा है की... पैसे से... यू अरे नॉट इवन हैप्पी... लुक! हाउ डिस्ट्रेस्सेड यू अरे. लुक ात योरसेल्फ. कहा गए अब वो शब्द??? हम्म?? ी can't हेअर थम..."

इस वक़्त भी...

वो रो रही थी. और कही से भी हैप्पी नहीं थी. उसके शब्द जैसे एकदम सही साबित हो रहे थे. पता नहीं क्यों पर इस बार सुहाना को वीर का ध्यान आते hi... इस बार उससे गुस्सा नहीं आया. केवल रुलाई hi चूत रही थी.

***

इधर वीर रिजर्वेशन करवा के जयपुर के स्टेशन पहुँच चूका था. रागिनी के दिए गए पैसे वाक़ई बोहत काम आये थे उसके लिए.

न केवल सुमन ने इधर अपने घर में पूरा ताला लगा दिया बल्कि वो अपने घर की छवि भी पड़ोस में दे आयी ये कहके की यदि उसका पति वापस से आये तोह उससे ढूंढ़ने की कोशिश न करे.

केवल सुमन hi नहीं, आभा और सोनाली भी उसके संग थी. सुमन का कहना था की अब वो वीर की दासी है तोह हर्र पल उसके आस पास hi रहेगी और उसकी सेवा करेगी.

शाम को भी सुमन के आकर्षण के चलते वीर से रहा न गया और उसने एक बार और सुमन को पेल दिया.

पहली बार में जो सेक्स उसने सुमन के साथ किया था उसके चलते उससे 35 पॉइंट्स मिले थे और उससे बचाने के 30 पॉइंट्स. तोह कुल मिलाके उसके पास 65 पॉइंट्स मौजूद थे जिन्हे वो स्पेंड नहीं किया था.

वो घर लौटने के बाद hi इन् पॉइंट्स का सही इस्तेमाल कैसे करना है ये डीडे करने वाला था.

अब चुकी आ तोह गया था वो स्टेशन पर उसने देखा की सोनाली बड़े hi गुस्से से उससे देख रही थी. और बात भी नहीं कर रही थी. बस देखती और गुस्से से आग बबूला हो जाती. पर बोलती कुछ नहीं. वीर ने भी इग्नोर करना hi बेहतर समझा फिलहाल के लिए.

ट्रैन आ चुकी थी रिजर्वेशन उनका एक 1 कोच में था. वीर सामान रख के अभी बाहर hi आके कुछ चिप्स और बिस्किट्स खरीदने में लगा हुआ था जब उससे सुनाई दिया,

"भैया!! ू भैया! Hello जी!?"

उसने देखा तोह पाया की सामने एक दूसरी ट्रैन में एक महिला खिड़की से अपना एक हाथ निकाले किसी को आवाज़ लगा रही थी.

वीर कुछ सोच आगे बढ़ा तोह अगले hi पल उस महिला की नज़र वीर पर गयी.

दोनों की नज़रे जब आपस में टकराई तोह उस महिला ने फौरन hi फिरसे पुकारा,

"बेटा! सुनो..."

उसने हाथ से इशारा करते हुए वीर को बुलाया.

वीर जब उसके समीप आया तोह थोड़ा हैरान रह गया. पास से गौर से जब उसने देखा तोह पाया की...

वो महिला वाक़ई ख़ूबसूरत थी. और साड़ी नहीं बल्कि एक काली टी शर्ट पहनी हुई थी. जिसमे उसकी गोरी त्वचा अलग hi खिल के दिखाई दे रही थी.

वीर : जीई!?

औरत : बीटा! क्या तुम मेरे लिए वह शॉप से एक पानी की बोतल ला डोज प्लीज? में खुद ले आती पर... मेरी बैक में थोड़ा पैन है.

वीर (स्माइल्स) : सूरे!

औरत : ओह्ह! Th-Thank यू बीटा!

वीर (स्माइल्स) : इसमें थैंक्स केसा? आप रुकिए! में आता हु.

वीर उसके दिए गए पैसो से एक बोतल लिया और अपनी तरफ से उसने एक बिस्कुट का पैकेट भी लिया और वो लेके उस औरत के पास आया.

औरत (सुरप्रीसेड) : ये!?

वीर (स्माइल्स) : ये मेरी तरफ से... रख लीजिये! बैक में पैन है आपकी. आगे स्टेशन में आपको उतरना न पड़े.

औरत कुछ देरर के लिए उससे देखि और फिर एक बड़ी hi प्यारी सी मुस्कान उसने दी.

न जाने क्यों पर वो मुस्कान देख वीर एकदम शांत पद गया.

औरत : थैंक यू बीटा! वैसे इसकी कोई ज़रुरत नहीं थी पर फिर भी थैंक यू! और रुको...

तभी वो अपने बगल में रखे बैग से कुछ टटोलती है और एक कैंडी का पैकेट उससे थमा देती है.

औरत : ये मेरी तरफ से... ः~

वीर (स्माइल्स) : इसकी कोई ज़रुरत नहीं...

औरत : न न! ः~ अब ये रखना पड़ेगा. थैंक यू वन्स अगेन.

वीर (स्माइल्स) : जी! चलता हु! सेफ जर्नी!

औरत (स्माइल्स) : Okay! यू तू!

और तभी उस औरत की ट्रैन और साथ hi साथ वीर की भी ट्रैन चलने लगती है.

एक बार फिर वो वीर को खिड़की से देखती है तोह पाती है की वीर भी उससे hi देख रहा था. दोनों बस मुस्कुरा देते है.

वीर लपक के ट्रैन में चढ़ता है पर अचानक उससे पता नहीं क्या सूझता है की...

वो पलट के एक बार फिर उस औरत को देखता है और...

'चेक!'

[Alias name - Geeta

Real Name - Bhavana Singh.

Bio - Bhavana! Ek behad hi strong woman hai. Boht peeda me hai jo kayi saalo se wo bardaasht karti aa rahi hai. Loves her daughter too much. Ek aas hai usse. Aur kisi ki talaash. Peshe se Archeologist hai.

Favourability - 70

Relationship - Mother.]

और ये पढ़ते hi वीर को उसकी लाइफ का सबसे बड़ा झटका लगा था.

आज उससे अपने जन्मदिन पर कोई गिफ्ट मिला हो न मिला हो. ये जैसे...

उसके लिए बेस्ट गिफ्ट था.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


Don't फॉरगेट तो लिखे. 😁
 
अपडेट - 31 ~ ान इरोटिक नाईट एंड अनवांटेड गेस्ट्स

[Note - This update will focus majorly on sex. It's a bit kinky too.]

अब तक...

[Favourability - 70

रिलेशनशिप - मदर.]

और ये पढ़ते hi वीर को उसकी लाइफ का सबसे बड़ा झटका लगा था.

आज उससे अपने जन्मदिन पर कोई गिफ्ट मिला हो न मिला हो. ये जैसे...


उसके लिए बेस्ट गिफ्ट था.

अब आगे...

कहते है न समय किसी के आगे नहीं झुकता. वीर के साथ भी कुछ ऐसा hi था. ट्रैन में वो चढ़ तोह गया था पर...

पर जैसे hi उसने उस औरत को चेक किया...

उसके होश उड़द चुके थे. वो भौचक्का सा बस ट्रैन के दरवाज़े की देहलीज़ पे खड़ा रहा और भावना की ट्रैन उसकी आँखों के सामने उस से दूर जाती जा रही थी. या यु कहे की उसकी बरसो से बिछड़ी माँ जो अभी अभी उससे मिली थी, वो अब उसकी आँखों से ओझल होती जा रही थी. आज शायद उसने पहली बार इतने मैं से उपरवाले से गुहार लगायी होगी की काश...

काश ये वक़्त थम जाए, काश वो अपनी माँ तक फिरसे पहुँच जाए. पर...

समय तोह समय है. जो कभी रुकता नहीं.

जब तक वीर को रीलीज़ हुआ, भावना की ट्रैन काफी आगे जा चुकी थी और चुकी वीर की खुद की ट्रैन अपोजिट डायरेक्शन में जा रही थी तोह दुरी कब अचानक से बढ़ गयी इस समय का पता hi नहीं चला.

"न्यूऊऊओ...."

वो चिल्लाया और दरवाज़े के बाहर लटका...

[No maaassterrr!!! Andar hoiye! It's dangerous! Maaasterrrrr!!!!]

पर पारी के बोल जैसे उसके कानो में काम hi नहीं कर रहे थे. उसकी आँखों से ासु कब बहने लगे उससे पता hi न चला. एहसास तोह तब हुआ जब गालो पे कुछ गीलेपन महसूस हुआ.

[Maaaasttteeeeerrrrr! Pleeeaaaassseee!!!]

'हहहह!?'

जब पारी ने जोरर से उसके मैं में चिल्लाया तब जाके कही वीर को होश आया. उसने देखा की जिस ट्रैन में भावना बैठी थी वो जा चुकी है और उस से और भी दूर होती जा रही थी.

2 कदम पीछे होते hi वीर अपने घुटनो पे गिर पड़ा. उसके हाथ थार था रहे थे. उसके एक हाथ में उसकी माँ का दिया हुआ वो कैंडी का पैकेट था.

ासु रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. आज कितने दिनों बाद रोया था वह. उन्ही कांपते हाथो से उसने अपना पेंडंट भींच लिया जैसे मानो उससे डर था की कोई उससे छिना के ले जाएगा.

'परीई!!! *स्निफ्फ* परीइ...'

[Master!]

'She's अलाइव पारी... She's अलाइव. शी...'

इस वक़्त वीर को किसी बात से सबसे ज़्यादा संतुष्टि थी तोह वो यही थी की...

उसकी बिछड़ी माँ ज़िंदा थी. उन्हें कुछ भी नहीं हुआ था. उसकी प्यारी माँ एकदम सही सलामत थी. ये जैसे उसके लिए किसी ख़ज़ाने से काम नहीं था.

[Yes master! I told you right? She might be alive.]

वीर हां में सर्र हिलाते हुए अपने ासु पोछने लगा जो उसके खुले हाथो की लकीर पर यु टपक रहे थे.

'आज मेरा b'day है पारी. पर... B'day ख़तम होने से पहले... शी... लुक! *स्निफ्फ* शी गावे में थिस पारी... लुक! *स्निफ्फ* It's थे बेस्ट गिफ्ट पारी... *स्निफ्फ* It's थे बेस्ट...'

[Master!!]

अभी वो कुछ और कह पाटा पारी से की तभी उसके कानो में आवाज़ पड़ी,

"मालिक???"

देखा तोह पाया की सुमन हैरत भरे अंदाज़ में उससे देख रही थी.

वो अगले hi पल फौरन hi आगे बढ़ी और वीर के पास झुक के उसके हाथ को पकड़ ली.

सुमन : मालिक?? आप... आप रो रहे है? क्योऊ? क्या हुआ मालिक?? कहिये न कुछ...

वीर : M-Mein... ठीक हु सुमन. कुछ नहीं हुआ है.

सुमन : इस बात से तोह झूठ भी शर्मा जाए. मालिक! ज़रूर कुछ बात है. कृपया कर मुझे बताइये. K-Kya... क्या आपको अभी मुझपे भरोसा नहीं है मालिक?

वीर : वो बात नहीं है सुमन. बस! आज में बोहत खुश हु. *स्माइल्स*

सुमन (फ्रोंस) : पर आप...

वीर : मेने कहा न की...

वो सुमन की तरफ पलटा और आगे कुछ कहता की तभी सुमन के उरोज जो आधे उसके ब्लाउज से झांक रहे थे वो उसकी नज़र में आ गए.

और वीर ने शर्माते हुए मुँह फेरर लिया. ये समय उस तरफ ध्यान देने का नहीं था. पर जैसे आज उसकी नहीं चलने वाली थी.

सुमन थी तोह एक औरत. और वो भी एक्सपीरियंस वाली. भला कैसे नहीं भाँपती वो की उसके मालिक अभी अभी क्या देख रहे थे.

अपने हाथो से उसने अपने मालिक के चेहरे को अपनी तरफ किया और बोली.

सुमन : ऐसे चोरी चोरी क्यों देखना? जब आप...

कहते हुए उसके खुद के गाल सुर्ख लाल पद गए और अगले hi पल उसने वीर का हाथ थामा और उससे उठा के अपने अधनंगी छाती से लगा दिया.

सुमन : जब आप इन्हे जब चाहे तब थाम सकते हो!?

और बस उसका इतना कहना hi था की पता नहीं वीर को क्या हुआ अचानक hi वो अंदर से बोहत ज़्यादा गरम महसूस करने लगा. जैसे मानो उबाल सा आ रहा हो उसके अंदर एक.

'सहित! W-What इस थिस फीलिंग!? I-I वांट हेर... ाररर्घ!! पारी...'

[It's activated I guess.]

'हँ!?'

[The Alpha Trait function.]

'हहह? K-Kya कह रही हो पारी...'

[I will explain later Master. Abhi itna samajh lijiye ki you are no longer a beta male. Ab aap me ek Alpha male ke traits aane shuru ho jaenge. Mein baad me samjhaungi. Filhaal...]

[System has entered into the sleep mode.]

'परीइ? हँ??? परीई!!?? शीत्तट!!!!'

"मालिक!!!?" सुमन ने उसके हांथो को और कस के थामा पर उसका ऐसा करना जैसे वीर को और भड़का रहा था.

'सुमन... जाओ प्लीज!!! Don't... जस्ट don't...'

वो कहना तोह चाहता था पर जैसे उसके शब्द नहीं निकल रहे थे.

और जैसे hi सुमन ने उसके हाथ पे हाथ रख अपने उरोज डब्वाये...

बस...

वीर उठा और सुमन को उसने दबोचते हुए दरवाज़े के पास hi लगे बाथरूम के अंदर कर दिया और खुद भी अंदर हो गया.

उसने अंदर से गेट बंद किया और उसके बाद सुमन के रसीले होंठो को अपने मुँह में भरना शुरू कर दिया. सुमन अचानक हुए इस वार से थोड़ी चौंकी ज़रूर थी पर अंत में उसने अपने मालिक को पूरी तरह से आमंत्रित करते हुए खुद को उनके हवाले चोरर दिया.

हाथ फिराते हुए उसने सुमन की साड़ी का पल्लू उसके सीने से हटाया और गर्दन पे अपने होंठ रख उससे चूसने लगा.

"आअह्ह्ह! मालिक...!!!"

सिसकी लेते हुए सुमन की आँखें बंद हो गयी.

उसके हाथ अपने मालिक के सर के पीछे लिपट गए और वो उसके बालो को हाथ में भर सहलाने लगी, उससे अपने से चिपकाने लगी.

और पल भर में hi वीर ने उसका ब्लाउज और ब्रा निकल के उसकी छूछीयो को आज़ाद कर नंगा कर दिया. उन् रसीले ामो को मुँह में भरते हुए उसने बड़ी hi बेरहमी से उन्हें निचोड़ना और चूसना शुरू कर दिया. और सुमन बस सिसकिया लेती रही.

वीर : आज तुम्हे ऐसा छोडूंगा की तुम्हारी छूट की बरसो की प्यास मिट जाएगी मेरी सुमन...

जोश जोश में वीर के मुँह से अश्लील भरे शब्द निकलना शुरू हो गए.

सुमन : जी... जी मालिक!

सुमन अपने मालिक के इस नए रूप को देख hairat-angez में खुद हामी भर दी.

और इधर वीर ने न कुछ बोलै न hi कुछ सुना, उसने बस सुमन को नीचे बैठाया और उसकी आँखों में आँखें डालते हुए अपने जीन्स की बटन खोली, ज़िप उतारी और अंडरवियर नीचे करते हुए अपना लुंड सुमन के चेहरे के सामने कर दिया. उसका लिंग उचकते हुए एकदम से बाहर आया जिसकी मादक सी महक सुमन की नाक में पड़ी और वो पास आते हुए लुंड की महक को जी भर के सूंघने लगी.

उसकी आँखें बंद हो चुकी थी और वो इस अध्भुत एहसास में डूबती चली गयी.

वीर अपना लुंड सुमन के चेहरे पर धीरे धीरे फिर रहा था. उसके गालो पे, उसके माथे पे, उसके होंठो पे, उसकी नाक पे, हर्र जगह वो अपना लिंग मॉल रहा था जैसे मानो लुंड से उसका make-up कर रहा हो. जैसे मानो वो चाह रहा हो की बस मेरे गुप्त अंग की महक hi तुम्हारे चेहरे से आणि चाहिए.

सुमन ने आँखें खोल अपने मालिक के लुंड को अपने दोनों हाथ में लेके उठाया बिलकुल वैसे जैसे कोई तालाब से अपने दोनों हाथो में पानी को भरके उठाता है.

उसने आगे बढ़ उसके लुंड का वो लाल सुपाड़ा अपने होंठो से चूमा.

*छू*

और ये एहसास पाते hi वीर की आँखें बंद हो गयी. सुमन ने आहिस्ता आहिस्ता हर्र एक जगह पे अपनी चुम्बनों का वार जारी रखा.

ऐसी कोई जगह नहीं बची थी जहा पर उसने अपने होंठो से चूमा ना हो. कई जगह तोह उसके होंठो की वो मैरून लिपस्टिक भी लुंड पे छाप चोरर चुकी थी. वो जैसे अपने होंठो से सबूत चोरर रही थी की मेने अपने मालिक के लुंड को चूमा है.

वीर ने बड़े hi प्यार से सुमन के सर पर हाथ फेरा जैसे मानो वो उसकी कोई पालतू बिल्ली हो. और हर्र बार की तरह अपने सर्र पर हाथ को महसूस करते hi उसका बदन सिहर उठा. ये न जाने आज कल उसके मालिक की नयी आदत बन्न गयी थी. जब भी वो उनसे चिपकती या उनके लिंग को चुस्ती तोह हमेशा उसके मालिक उसके सर्र पर हाथ फरते और न जाने क्यों... एक सिहरन सी दौड़ जाती थी सुमन के बदन में.

अपनी जीभ निकालते हुए सुमन ने अपने मालिक के अंडकोषों को चाटना शुरू किया. हर्र बार जुबां फिराते hi उसके अंडकोष भी ऊपर की ऑर्डर उठ जाते और जीभ से अलग होते hi वो नीचे गिर जाते.

कभी वो उन्हें मुँह में भर्ती तोह कभी पप्पिया देती. तोह कभी मुँह में भर के hi उन्हें चूसती और जुबां फिराती. उसकी जुबां एकदम गरम थी और ये हरकत वीर को सातवे आसमान पर पहुचा रही थी.

उस गरम गरम गीली जुबां के अध्भुत एहसास में वीर खोया हुआ था.

अगले hi पल सुमन ने लुंड को अपने मुँह में भर लिया और शुरू हो गयी वीर की ब्लोजॉब.

*गवक* *गवक*

*स्लुर्प* *स्लुर्प*

की आवाज़ों से सुमन का मुँह तेज़्ज़ी से आगे पीछे हो रहा था. उसके हाँथ वीर की चुत्तड़ो पर बंधे हुए थे और उससे सेहला रहे थे.

और वीर बस प्यार से सुमन का सर सहलाये जा रहा था. जैसे जैसे वो सहलाता, सुमन मममम मममम करके अपनी आँखें बंद कर लेती.

देखते hi देखते दोनों के hi जिस्म से कपडे उतर चुके थे और वीर ने कपडे जहा साफ़ जगह मिली वही टांग दिए या रख दिए.

सुमन नीचे अपने घुटनो पर बैठ अपने मालिक के लुंड की सेवा अपने मुख से कर रही थी. अपने मालिक के लुंड को वो अपने जीभ से नेहला रही थी, उससे गीला कर रही थी, चाट के वो लुंड को साफ़ कर रही थी.

वीर (स्माइल्स) : केसा है स्वाद!?

वीर के सवाल पर सुमन ने अपनी नज़रे ऊपर करि और बोली,

सुमन : अध्भुत मालिक! मेरा बस चले तोह में इससे अपने मुँह में hi रखे राहु मालिक...

*मुआह*

कहते हुए उसने उसका सुपाड़ा चूम लिया.

वीर (तेज़्ज़ सासें लेते हुए) : मेरा भी मैं करे तोह में तुम्हारे अंदर hi इससे राखु.

अपने अंगूठा उसने सुमन के गुलाबी होंठो पर फेरा और तेज़्ज़ सासें लेकर पूछा,

"क्या हो तुम मेरी सुमन!?"

सुमन जैसे जानती थी. वो आज अपनी मालिक की इस अजीब स्थिति का अनुमान लगा चुकी थी. वो कड़ी हुई और नग्न हालत में hi अपने मालिक के क़रीब आयी. वीर के सीने में एक हाथ रख और दूसरा हाथ उसके गुप्त अंग पर ले जाते हुए, वो अपनी दूध की थैलिया उसकी छथि पर टिकाते हुए कान के समीप आयी और बोली,

"में जानती हु आप क्या sunn'na चाहते है."

वीर : K-Kya? क्या sunn'na चाहता हु में भला?

सुमन (स्माइल्स) : यही की...

वीर : हम्म!??

सुमन (स्माइल्स) : में आपकी रखेल हु.

'फुक्ककककककक'

और ये सुनते hi वीर के अंदर का उबाल जैसे बाहर आ चूका था.

उसने जोश जोश में सुमन को बैठाते हुए सीधे लिंग उसके मुँह में उतार दिया.

सुमन अपने मुँह की रफ़्तार बढ़ाते हुए अपने मालिक को परम सुख प्रदान कर रही थी.

और कुछ देरर की लुंड चुसाई के बाद वीर ने उससे उठाया और उससे पलटते हुए उसका एक परर उठा के साइड में रखवा दिया.

मुलायम गांड देखते hi वीर का लुंड एक झटका मार दिया. उसने बड़े hi प्यार से सुमन की गोरी गांड पर हाथ फेर्रा और फिर दो तमाचे जड़ दिए.

*चटाक*

"आअह्ह्ह!!!" वो चिल्लाई.

वीर : हल्ला नहीं!

सुमन (ब्लशेस) : जी... जी मालिक!

अपने दोनों अंगूठो से उसने पहले सुमन की चुत्तड़ो के गालो को अलग किया तोह उससे सुमन की गांड का भूरा छेड़ उससे नज़र आया और वो देखते hi एक बार फिर वीर का लुंड भड़क उठा और एक झटका मार दिया. उसकी गांड के छेड़ पर वीर ने अपना अंगूठा फेरा तोह बेचारी सुमन हिल के रह गयी.

वीर : इसका... इसका उद्धघाटन बाद में करूँगा.

सुमन (ब्लशेस) : में... में इंतज़ार करुँगी मालिक.

वीर : यही बातें तोह तुम्हारी पसंद है मुझे सुमन.

वीर ने वापस से उससे अपनी ऑर्डर घुमाया और उसकी गर्दन पे अपने होंठ चलाने लगा. सुमन की गर्दन को चाटने के बाद वीर ने जोरर जोरर से उससे काटना शुरू कर दिया जैसे मानो वो कोई वैम्पायर था और सुमन उसका शिकार.

वीर उसके गले और गर्दन में हिक्कीस पे हिक्कीस दे रहा था और निशाँ बनाता जा रहा था ताकि जब भी सुमन को कोई देखे और उसके गले पे नज़र डाले तोह लोगो को पता लग जाए की वो बेरहमी सी चूड़ी है. और वो किसी की अमानत है.

"ओह्ह्ह्ह मालिक.... स्स्सस्स्स्स.... "

झटके पे झटके लेते हुए सुमन अपने मालिक के हर्र एक वार को आमंत्रण दे रही थी और सिसकिया ले रही थी. इतना हक़ कभी किसी मर्द ने नहीं जताया था उस पर.

उसकी गर्दन पर अच्छी तरह से अपने दातो और होंठो की निशानी चौररने के बाद, वीर ने नीचे हाथ ले जाते हुए सुमन की बालो से ढकी छूट के लबो को अलग किया तोह उससे सुमन की गुलाबी छूट नज़र आयी. उसके गुप्त अंग के बाल उससे और भी ज़्यादा मदहोश कर रहे थे.

वीर के लुंड में खुद hi थोड़े बाल थे तोह ये उसके लिए और भी एक्ससिटिंग था.

वीर : घर पहुँच के हम दोनों hi अपने गुप्तांग शेव करेंगे. उसके बाद तुम्हारी साफ़ छूट मारूंगा.

उसने उसकी छूट को सहलाते हुए कहा.

न जाने आज वीर को क्या हुआ था की वो अपशब्द का प्रयोग खुल के कर रहा था और ये बात जैसे सुमन को पागल कर रही थी.

सुमन (लम्बी सासें लेते हुए) : जी... जीई... मालिक!

वीर : तुमने पहले कभी अपनी छूट के बाल साफ़ किये है सुमन?

सुमन (झटके लेते हुए) : हां... सससससस... हां... मालिक! रेजर से पहले.... पहले किया करती थी. पर अभी काफी समय से नहीं किये है.... आअह्ह्ह्हह...

वीर (स्माइल्स) : घर पहुँच के ये जंगल में साफ़ कर दूंगा.

बोलते हुए उसने सुमन की झाटो को अपनी उंगलियों में ले लिया और धीरे धीरे खींचने लगा.

सुमन : आअह्ह्ह्हह!!! ससससस... मालिक आप क्यों कष्ट करते हो? में... में कर लुंगी. ये... ये सब... गंदगी के काम... में... में कर लुंगी...

वीर (स्माइल्स) : मुझे तुम्हारी हर्र एक चीज़ पसंद है...

सुमन (ब्लशेस) : पर मालिक...!?

इस से पहले की वो और विरोध करती, वीर ने उसकी बुर को जोरर से भींच लिया, जिसके चलते बेचारी सुमन का मुँह खुला का खुला रह गया.

वीर : मेने कहा न...!? तुम्हारी बुर सिर्फ में साफ़ करूँगा.

कहते हुए उसने सुमन के कान का निचला हिस्सा अपने मुँह में भर लिया जिसके चलते सुमन का शरीर एक झटका खा गया और वो बड़ी hi धीमी सी आवाज़ में बोली,

सुमन : जो... जो... हुकुम मालिक!

और अगले hi पल वीर ने अपना लुंड सुमन की छूट पर सेट किया, सुपाड़ी से उसने छूट की फाको को हटा के बीच में छेद की ऑर्डर किया और एक ज़ोरदार धक्के के साथ उसका लुंड सनसनाता हुआ अंदर घुस गया.

"Aaaaaaaaaaaaaahhhnnnnnn!!"

कराह भरते हुए सुमन ने आँखें बंद कर ली और अपनी मुनिया से लुंड को भीचते हुए वो अपने मालिक के हथियार का स्वागत करने लगी.

वीर ने सुमन के मुँह पर अपना हाथ रखा और ज़ोरदार धक्को के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी.

"आआआह्णणन्न"

"उम्मम्मम्मम्म"

"Uiiiiiiiiii"

"मममममपहहहहहह"

और सुमन की धीमी धीमी सिसकिया बाथरूम में फेल गयी.

जहा एक तरफ ट्रैन ने रफ़्तार पकड़ी हुई थी तोह वही साथ hi साथ वीर के धक्को ने भी रफ़्तार पकड़ ली थी. जहा ट्रैन छुक छुक कर के आवाज़ निकालते हुए अपनी मंज़िल तय कर रही थी, तोह वही...

*फट* *फट*

वीर के धक्के भी अलग आवाज़ निकालते हुए अपनी मंज़िल तय कर रहे थे.

उसकी कमर हर्र धक्के के साथ जाके सुमन की गद्दीदार गांड से टकराती और मादक आवाज़ उत्पन्न करती. और हर्र एक धक्के पे सुमन का शरीर पूरी तरह से हिल जाता, यदि वीर ने उससे जोरर से जकड़ा न होता तोह वो एक hi धक्के में गिर जाती.

वीर के अंडकोष सुमन की बाहरी छूट के लबो से जा के टकराते और आवाज़ करते. हर्र धक्का सुमन को झंझोर कर रख दे रहा था. वो बस आँखें बंद किये रेल गाडी में hi अपनी खुद की सिसकियों की रेल गाडी चलाये जा रही थी.

और कुछ देरर बाद hi...

वीर (कराहते हुए) : आह! मेरा होने वाला है...

*फच्च* *फच्च*

और कुछ सेकण्ड्स बाद hi वीर के लुंड से एक सफ़ेद धार की पिचकारी निकली और सुमन की छूट को अंदर से भिगो के रख दी. भिगो क्या दी बल्कि छूट को लबालब भर दिया वीर ने अपने वीर्य से.

"आआह्ह्ह्ह!!! माहाआलोककककक!!!" एक लम्बी आह भरते हुए वो खुद तीसरी बार जहर गयी.

सुमन की पीठ पर अपना भार रखते हुए वीर उसकी नरम नरम छुछिया सहलाने लगा.

वीर : इनसे मेरा मैं hi नहीं भरता. काश इनमे दूध होता...

सुमन (सास काबू में करते हुए) : माफ़ करना मालिक. अब इनमे दूध नहीं. पर दुबारा आ सकता है... यदि...

वीर : यदि!?

सुमन (ब्लशेस) : यदि में गर्भवती हो जाऊ...

उसने पलट के देखते हुए कहा तोह वीर बस हस्स दिया. पर कही न कही सुमन जैसे चाह रही थी की उसके मालिक वो शब्द कहे जो वो sunn'na चाहती थी.

"ओह्ह्ह फ़क!!" और तभी वीर को कुछ एहसास हुआ.

'शीट्ट्ट्ट!'

उसको प्रेशर बना...

प्रेशर इतनी तेज़्ज़ आया की वो उससे रोक न पाया.

पानी जो पी लिया था इतना स्टेशन में आने के पहले.

और अगले hi पल...

एक ज़ोरदार पेशाब की धार वीर के लुंड से निकली...

पर...

उसका लुंड अभी भी सुमन की छूट में hi था...

और जैसे hi सुमन को पेशाब की पहली गरम गरम बूँद का एहसास अपनी छूट के अंदर हुआ, उसका बदन हिल उठा. आँखें पलट गयी...

मुँह खुला का खुला रह गया...

और वो सर ऊपर कर झटके पे झटके लेने लगी. ये क्या अजीब एहसास था जो हो रहा था उससे? ऐसी अनुभूति उसके जीवन काल में आज तक उससे नहीं हुई थी. और सबसे आश्चर्य जनक बात ये थी की उससे ये अनुभूति कही से भी बुरी नहीं लगी. उल्टा वो महसूस कर उससे ऐसा लगा जैसे वो किसी अलग hi दुनिया में पहुँच चुकी है.

सुमन उस एहसास को शब्दों में बया न कर सकती थी. वो बस इस अद्भुत अनुभूति में लीं थी.

उसमे खोयी हुई थी...

वीर की गरम गरम पेशाब उसकी छूट से ृस्टि हुई नीचे उसकी जांघो और टांगो से बहती हुई टॉयलेट के चैम्बर में जा रही थी.

"सहित!!!!"

ये एहसास केवल सुमन के लिए hi नहीं बल्कि वीर के लिए भी एकदम अलग था. इस से पहले उसने ऐसा कभी नहीं किया था और न hi ऐसा कुछ अनुभव किया था. सुमन के नंगे बदन को जोरर से भींचे हुए उसने अपनी साड़ी पेशाब उसकी छूट में भर दी. और वही पेशाब उसकी खुद की टांगो से भी बहते हुए नीचे गिर रही थी.

जब वीर ने अपनी टंकी खाली करि तोह लम्बी सास लेते हुए उसने अपना लुंड सुमन की छूट की गहराइयो से आज़ाद किया.

*पूछ*

करते हुए लुंड पेशाब और वीर्य से सना बाहर आया. और अगले hi पल सुमन घुटनो के बल नीचे पसर गयी.

लम्बी लम्बी सासें लेते हुए उसकी छुछिया ऊपर नीचे हो रही थी. पसीने से उसके बाल पूरे गीले हो चुके थे और बिखर चुके थे. वीर ने बड़े hi प्यार से उसका सर सहलाया तोह वो आगे बढ़ी और अपने मालिक का पेशाब से सना लुंड अपने हाथो में भर ली.

वीर : साफ़ करो सुमन...

सुमन का ये बात सुनते hi बदन हिल उठा. एक सिहरन दौड़ गयी उसके पूरे नंगे बदन में. मानो एक करंट का झटका उसके बदन से होते हुए निकला हो. उसने नज़रे उठा के मूट से साणे लुंड को देखा और कापते हुए उसने अपने होंठ खोले की तभी वीर की आवाज़ उसके कानो में पड़ी,

"ये लो! मेने नल चालु कर दिया है.

उसने देखा की वीर वही पीछे लगे बेसिन की ऑर्डर इशारा कर रहा था. और ये देखते hi और सोचते hi की वो अभी क्या करने जा रही थी, उसका शरीर झटके लेने लगा और उसकी छूट ने पानी चोरर दिया. अपना निचला होंठ उसने दातो से जोरर से दबाया और हां में धीरे से सर्र हिलाते हुए वो अपने मालिक के लुंड और उनके पेर्रो को पानी से साफ़ करने लगी.

उसने अपनी पंतय उठायी और उस से अपने मालिक के गीले लुंड और परर को पोछने लगी.

अंत में जब सब कुछ साफ़ हो गया. सुमन ने अपने मालिक को प्यार से आहिस्ता आहिस्ता कपडे पहनाये पर खुद अभी भी नंगी hi थी. जब वीर ने सारे कपडे पहन लिए तोह वो बाहर निकलने से पहले बोलै,

"जल्दी आओ! अपनी छूट और मुँह दोनों साफ़ कर लेना. मेरी बर्थ पर तुम मुझे 15 मिनट के अंदर दिखनी चाहिए."

और इतना बोल वो बाहर निकल गया.

सुमन बस झटके पे झटके लेती रही. ऐसा अध्भुत सम्भोग उसने आज तक अपने जीवन में नहीं किया था. उससे तोह पता भी नहीं था की सम्भोग में इतना मज़ा भी आ सकता है. आज जैसे उससे एक नए एहसास के बारे में पता चला था.

अपनी छूट को मलते हुए उसने धीरे धीरे अपनी छूट में दो उंगलिया डाली और अंदर अपने मालिक की पेशाब को निकालने लगी. उसने जोरर से प्रेशर लगाया और तभी...

*सररररररररर*

की आवाज़ करते हुए उसकी छूट के अंदर से वीर का मूट बाहर निकलने लगा. कितनी अजीब बात थी. वो मूट तोह रही थी पर मूट उसका नहीं था. उसके मालिक का था जो अभी अभी वो उसकी छूट में भरके गए थे. केवल पेशाब hi नहीं, उससे याद आया की इस पेशाब में उसका अपना पानी और उसके मालिक का वीर्य भी मिला हुआ था.

पानी से धो धो के सुमन ने अपनी छूट साफ़ की. ये उसकी मालिक की पेशाब थी जो उसकी योनि में से गिर रही थी. पेशाब की बूंदे उसकी बाहरी छूट में और झाटो में सजी हुई थी.

अपनी उंगलियों में लगे पेशाब को वो घूरती और उसका बदन फिर झटका खाता और गाल गुलाबी पद जाते. बड़ी hi मुश्किल से उसने छूट और अपने मुँह को जल्दी जल्दी साफ़ किया और फिर अपनी टाँगे साफ़ की जिनसे बहके मूट निचे गिरी थी.

अपने कपडे पहन वो बाहर निकली, पल भर के लिए वो कोच में आयी और टूथब्रश, टूथपेस्ट और साबुन लेके वो वापस से बाथरूम में घुस गयी.

उसके मालिक ने आदेश दिया था उससे. की छूट और मुँह साफ़ करके आना. इसलिए वो अच्छे से मंजन कर रही थी और अपनी छूट को भी उसने साड़ी उठा के नीचे बैठ के साबुन से मॉल मॉल के साफ़ किया जब तक की उसकी प्यारी मुनिया वापस से सुगन्धित न हो गयी.

उसने अपनी बुर के बालो को धीरे से अपने हाथो में भरा, और तभी वीर के बोल उसके कानो में गूंज गए.

"तुम्हारी बुर में साफ़ करूँगा."

ये सोच के सुमन के दिल की धड़कन तेज़्ज़ हो गयी और उसका बदन कसमसा गया.

फिर उससे वो भी याद आया जब वीर उसकी गांड के छेद को मॉल रहा था और कह रहा था,

"इसका उद्धघाटन बाद में करूँगा."

सोचते hi सुमन की सासें तेज़्ज़ हो गयी. क्या होगा जब उसके मालिक का वो मुस्सल लुंड उसकी गांड को चीरते हुए अंदर जाएगा!?

इधर जैसे hi वीर कोच में आया तोह सोनाली उससे घूर के बेहद गुस्से में देख रही थी.

'अहह! सो शी कनौस... तभी... वेल! ी don't केयर नाउ.'

'चेक'

और मैं में hi उसने सोनाली चेक किया.

[ नाम - सोनाली

आगे - 18

स्टेटस - Suman's डॉटर फ्रॉम हेर फर्स्ट हस्बैंड.

बायो - सोनाली! एक बेहद hi चंचल स्वभाव की लड़की है. पर उतनी hi गुस्सैल भी. माँ से अत्यंत प्रेम करती है. कई सारे सपने थे जो उसके बिखर चुके है. पढ़ना चाहती है, पर घर को स्थिति के चलते पढ़ाई काफी समय पहले चूत गयी.

फवौराबिलिटी - 5

रिलेशनशिप - फॅमिलियर्स.]

'ओह्ह? एटलीस्ट 5 तोह है फवौराबिलिटी. फेव! हम्म? शी वांट्स तो स्टडी? I'll सी व्हाट ी कैन दो फॉर हेर.'

सोनाली से नज़रे हटा के जब वीर ने आभा को देखा तोह पाया की वो बेहद ज़्यादा शर्मा के उससे देख रही थी.

'चेक!'

[ नाम - आभा

आगे - 21

स्टेटस - Amit's वाइफ.

बायो - आभा सुमन की बहु है. अपने पति से बोहत परेशान थी. अब बस वो एक अच्छी ज़िन्दगी व्यतीत करना चाहती है. बाहर की दुनिया देखना उसका ख्वाब है. बड़ी बड़ी गाड़ियों में घूमना, बंगले में रहना, अच्छे अच्छे कपडे pehn'na उसका सपना है.

फवौराबिलिटी - 40

रिलेशनशिप - बेनेफैक्टर]

'हँ?? ये तोह पूरे पापा की पारी वाले शौक रखती है. सो शी सीस में अस हेर बेनेफैक्टर हँ!? मिस सोनिआ की तरह में भी इसका मददगार हु. हम्म! ी वंडर मिस सोनिआ का स्टेटस क्या होगा. और उस नकचीदी सुहाना का.'

खर्र! ये रात वीर और सुमन के लिए अध्भुत थी पर सोनाली के लिए नहीं.

वो बिना कुछ बोले hi ऊपर जाके सो चुकी थी और इधर आभा भी ऊपर जाके लेत चुकी थी.

***

अगली दिन जब सभी मुंबई पहुचे तोह टैक्सी में बैठने के बाद सुमन से लेके आभा और सोनाली के मुँह खुले के खुले रह गए थे. इतनी बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स रास्ते में चलती एक से एक महंगी गाड़िया, पार्क्स न जाने क्या क्या वो तीनो अपने जीवन में पहली बार देख रही थी.

आश्चर्य तोह होना hi था. सोनाली भी अपना गुस्सा भूल जैसे मुंबई के नज़ारे को देख खो चुकी थी.

कुछ देरर की दुरी तय करने के बाद वो रागिनी के घर पहुचे और वीर ने दूर बेल्ल बजायी तोह रागिनी गेट खोलने आयी.

जैसे hi उसने गेट खोला तोह वो वीर को देख एकदम खुश हो गयी और उससे अपने गले से लगाने वाली थी की वीर के ठीक पीछे उससे अन्य तीन महिलाये नज़र आयी.

और उन्हें देख उसकी बॉहे सिकुड़ती चली गयी.

रागिनी : वीर?? ये...!? सब...!?

वीर : माफ़ करना भाभी! यदि आपकी परमिशन हो तोह क्या में इन्हे कुछ दिन इधर hi रख सकता हु? आपको कोई ऐतराज़ तोह नहीं न?

रागिनी : हँ?? P-Par... ये सभी!? है कोण?

वीर : ये... *स्माइल्स* इन्होने मेरी बोहत मदद की है. और... ये अब से मेरे क़रीबी है.

रागिनी : ओह्ह्ह!

तभी सुमन आगे बढ़ी और रागिनी के हाथो को थाम ली.

सुमन : आप माली... एहम! आप वीर जी की भाभी है न? तोह... अब से आप हमारी सखा हुई. घर का सारा काम अब आप हम पे चोरर दीजिये. और यदि हो सके तोह कृपया कर हमे रहने के लिए कुछ दिन के लिए...

रागिनी (स्माइल्स) : में समझती हु. चिंता मत करिये. यदि आप वीर के करीबी है मतलब मेरे भी करीबी कहलायी. आज से आप जितने दिन चाहे उतने दिन यहाँ रह सकती है. आइये अंदर. घर इतना बड़ा है. आखिर अब लगा न की घर में कोई रह रहा है.

रागिनी खींच के सभी को अंदर ले गयी.

इधर वीर सारे इन्तेज़ामो से खुश था और अब वो रिंग वापस करने के लिए जाने hi वाला था.

वो जैसे hi दरवाज़े पर आया तोह गेट के बाहर hi उससे कुछ आवाज़ सुनाई दी.

"आइये डैड... आइये माँ!"

और जैसे hi उसने गेट खोला...

सामने विवेक, सुमित्रा और करुणेश कार से उतर के सीधा उसके सामने hi खड़े थे.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!
 
अपडेट - 32 ~ थे कलम बिफोर थे स्टॉर्म.

अब तक...

इधर वीर सारे इन्तेज़ामो से खुश था और अब वो रिंग वापस करने के लिए जाने hi वाला था.

वो जैसे hi दरवाज़े पर आया तोह गेट के बाहर hi उससे कुछ आवाज़ सुनाई दी.

"आइये डैड... आइये माँ!"

और जैसे hi उसने गेट खोला...

सामने विवेक, सुमित्रा और करुणेश कार से उतर के सीधा उसके सामने hi खड़े थे.


अब आगे...

जैसे hi वीर ने गेट से बाहर निकल के सामने देखा तोह वो चौंक गया. और क्यों न चौंकता? सामने उसका बड़ा भाई विवेक और उसके चाचा चची जो खड़े हुए थे.

जब उन् तीनो ने वीर को देखा तोह उनके चेहरे पर भी वही भाव थे जो वीर के चेहरे पर थे.

हैरानी के भाव!

"वीर!??" सुमित्रा के होंठो से अपने आप वीर का नाम उससे देखते hi निकल गया.

करुणेश भी हैरान था और विवेक भी. आखिर वीर रागिनी के घर क्या कर रहा था!?

अगला सन यही था की सभी हॉल में बैठे हुए थे और एक अजीब सी खामोशी छायी हुई थी.

न कोई कुछ बोल पा रहा था न hi कर पा रहा था. माहौल बेहद hi ावक्वार्ड हो चूका था.

और ये अजीब सा सन्नाटा जैसे उस ावकवर्डनेस्स को और बढ़ाता जा रहा था.

करुणेश और सुमित्रा दोनों hi रागिनी को देखते जो उनके सामने hi सोफे पर बैठी हुई थी और फिर वीर को देखते जो उसके बगल से लगे सोफे से बैठा हुआ था.

रागिनी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे. वो एकदम निडर होक बैठी थी जिसके चलते वीर खुद हैरान रह गया. उससे लगा था की उसकी भाभी थोड़ा सेहम गयी होगी यु अचानक अपने सास ससुर को देख के. पर रागिनी तोह जैसे एकदम तैयार बैठी हुई थी.

जैसे मानो वो वेट hi कर रही थी की आओ और पूछिए सवाल और कोशिश करिये मुझे घर ले जाने की.

उसका ये ऐटिटूड देख करुणेश और सुमित्रा की बोलती बंद थी. आखिर कार, कुछ पालो के बाद सुमित्रा ने बड़ी hi हिम्मत जूता के बात शुरू की.

सुमित्रा : B-Beta रागिनी?

रागिनी (स्माइल्स) : जी?

रागिनी की मुस्कान देख सुमित्रा दुविधा में पद गयी और अपने शब्दों को कहने में उसकी hich-kichaahat और जैसे बढ़ गयी.

सुमित्रा : वो... देखो बीटा. हमे घर में सभी को सब कुछ पता चल चूका है. इतनी बड़ी घटना हो गयी... यहाँ तक की अब भी ये पुलिस के साथ लगे हुए है... और वह उस वक़्त क्या स्थिति थी ये हम समझ सकते है. तुम्हारे माँ बाप पे जो बीती वो भी बेहद hi दुखद और चिंता जनक घटना थी.

रागिनी : हम्म!

सुमित्रा : तोह... तोह... बीटा जो कुछ भी वह हुआ वो... वो एक हादसा था. इसके चलते हमे और एकजुट होना चाहिए है न? न की और ऐसे रिश्तो के बीच मिसुन्दरस्टण्डींग पैदा करनी चाहिए.

रागिनी : मेने कब hi मिसुन्दरस्टण्डींग कड़ी की माँ जी? मिसुन्दरस्टण्डींग तोह... आपके hi बेटे ने करि थी. मेरी जान डाव पे लगा के.

रागिनी के हर्र एक शब्द काटे की तरह सुमित्रा को चुभ रहे थे. आखिर बात सच जो थी. उसके अपने hi बेटे से गलती हुई थी और वो जानती थी. पर वो कैसे भी करके ये मामला और नहीं बिगाड़ना चाहती थी.

सुमित्रा : M-Mein जानती हु बीटा. विवेक से गलती हुई है. ये तोह है hi नालायक...

विवेक : हँ? W-Wha...!? व्हाट?? माँ??

सुमित्रा : पर... तुम भी तोह समझदार हो बीटा. ऐसे यु मुँह फेरर के घर से आके यहाँ अकेले रहने लग्न. ये तोह कोई हल नहीं हुआ न समस्या का? हमर बैठ के बात करके इससे सुलझाना चाहिए न?

रागिनी : समस्या?? किसी समस्या? मेरा दिल चोटिल हुआ है माँ जी! मेरा दिल...

बोलते बोलते, रागिनी की आवाज़ तेज़्ज़ हो चुकी थी और आँखों में नमी भी पनपना शुरू हो चुकी थी, जो वीर साइड से गौर से नोटिस कर पा रहा था. पर फिर भी, वो शांत hi रहा.

रागिनी : खुद को मेरी जगह रख के देखिये माँ जी! केसा लगेगा आपको? यदि आप मेरी जगह होती और ससुर जी आपको ये कहते की, "मेरी जान बचा लो और मेरी पत्नी की जान लेलो." केसा लगता आपको? बोलिये?? जवाब दीजीईए!??

और बस...

सुमित्रा का सर्र अपने आप झुक गया. वो नज़रे मिलाने लायक नहीं थी.

करुणेश : रागिनी बीटा... देखो! ये बात हम सभी जानते है और तुम दोनों भी जानते हो की तुम दोनों hi एक दूसरे से बोहत प्यार करते हो. है की नहीं विवेक?

विवेक : ऑफ़ कोर्स डैड! रागिनी! यू दो क्नोव हाउ मच ी लव यू राइट? उन् बातो को तुम सोच रही हो पर उन् बातो को कैसे भूल गयी रागिनी? जब हमने साथ साथ जो टाइम स्पेंड किया, साथ साथ कई जगह घूमने गए, कितने स्वीट मोमेंट्स हमने बिठाये... याद करो. क्या तुम मेरी बस एक गलती के चलते हमारा सारा अतीत भुला डौगी? सब कुछ?

विवेक की बात सुन्न रागिनी की बॉहे सिकुड़ी और पल भर के लिए उससे अपने अतीत के khush-haal पल याद आने लगे. वाक़ई! उसने अपने दिल से विवेक को चाहा था. 2 साल से वो दोनों रिलेशनशिप में थे और उसके बाद hi उन्होंने शादी करि. लगभग तीन साल हो चुके थे उन्हें.

पर फिरसे...

रागिनी को जैसे अगले hi पल वो सन याद आ गया. वो सन जिधर वो बंधी हुई थी, और उसका पति विवेक, खुद की जान की भिनक मांग, अपनी पत्नी की जान डाव पे लगा रहा था.

और ये सोचते hi रागिनी का पारा फिर चढ़ गया.

रागिनी : मेरे दिल पे जो घाट पहुची है. वो तुम नहीं समझोगे विवेक कभी. कभी नहीं!

विवेक : R-Ragini!?

रागिनी : यदि... यदि उस वक़्त उस आदमी ने मेरे सर्र पर रिवाल्वर रख के यही सवाल पूछा होता तोह पता है मेरा जवाब क्या होता? मेरा जवाब होता... की मेरी जान लेलो... पर मेरे सुहाग को कुछ न होने पाए... मुझे लगा था की तुम भी मुझसे उतना hi प्यार करते हो विवेक... पर देखो... देखो! में कितनी गलत थी. देखो... *स्निफ्फ*

और रागिनी के आसुओ का बाँध टूट गया.

वो रोने लगी.

तभी उससे कंधे पे अपने किसी का हाथ महसूस हुआ. जैसे hi उसने अपना सर्र उठा के देखा तोह पाया की...

वीर उससे देख उसके कंधे पर हाथ रखे हुए था. और न जाने क्यों, आज वीर को अपनी तरफ से पहली बार पहल करते देख रागिनी का मैं अंदर से hi बेहद प्रफुल्लित हो उठा. वो अपना हाथ बढ़ा के वीर का हाथ थामती और उसकी भावनाओ को समझती पर...

सामने उसके सास ससुर और उसका पति मौजूद था. वो चाह कर भी... ये न कर सकीय.

इधर वीर के इस छोटे से जेस्चर ने जैसे बाकी सब को हिला के रख दिया. करुणेश और सुमित्रा तोह थे hi हैरान पर विवेक आँखे फाड़े वीर के हाथ को देख रहा था जो इस वक़्त उसकी पत्नी के कंधो पर मौजूद था.

और उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी थी.

और जो उससे नहीं करना चाहिए था वो आखिर उसने कर hi दिया.

विवेक : तुम यहाँ क्या कर रहे हो वीर? अकेले? अपनी भाभी के साथ?

उसका सवाल सुनते hi अगले hi पल रागिनी की आँखें हैरानी के मारे फेल गयी. पर फिर अचानक hi उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी.

'मुझे तोह समझ जाना चाहिए था. तुम से आखिर यही घटिया सोच की उम्मीद थी मुझे विवेक. मेने तुम्हे क्या सोचा था और तुम क्या निकले. पर... दोष तोह मेरा hi है न? जो में ऐसे व्यक्ति से प्यार कर बैठी? बूत थैंक्स तो तहत इंसिडेंट. आखिर मेरी आँखें तोह खुल गयी.'

वो सोचते हुए एकदम असहाय सी चिंतन में डूब गयी.

इधर सुमित्रा अपने बेटे की बात समझते हुए उससे चिल्लाने hi वाली थी की तभी वीर बोल पड़ा.

वीर : क्या कर रहा हु मतलब? में भाभी के साथ hi यही रहता हु.

विवेक : कययय्यआआअ!????

विवेक शॉक के मारे अपनी जगह से उठ गया और उन्हें घूरने लगा.

वीर : व्हाट? उस घर से तोह मुझे वैसे hi निकाल दिया गया है. उसके बाद में अपनी Ma'am के साथ रह रहा था उनके घर. बूत में नहीं चाहता था की उन्हें और परेशानी होये सो ी लेफ्ट. फाइनली, भाभी ने मुझे यहाँ रुकने को कह दिया. सो, I'm हेरे नाउ. अन्य प्रॉब्लम विथ तहत?

विवेक केवल दांत मेस्टा रह गया पर कुछ देरर तक बोल न पाया. अपनी पत्नी को अकेले अपने छोटे भाई के साथ देख, ख़ास कर उस छोटे भाई के साथ जिस से वो बेहद नफरत करता आया है. मिर्ची तोह लगनी थी. गुस्सा भी जायज़ था. पर एक शक भी पैदा हो चूका था. वो शक जो कभी नहीं होना चाहिए था. वो शक जो घटिया सोच का एक प्रतीक था.

और वो कहते है न, गुस्से में आदमी अपना आप खो बैठता है.

वही हुआ.

विवेक (ुचि आवाज़ में) : रागिनीई???? ये सब क्या है??? तुम्हे पता भी है तुम क्या कह रही हो? आस पास के लोग क्या सोचेंगे यदि उन्हें पता लगेगा की एक औरत अपना घर और पति को चोरर के यहाँ अकेले अपने देवर के साथ रह रही है? बोलो?? कोई सेंस है तुम में या नहीं??

विवेक के तीखे बोल पूरे हॉल में गूँज रहे थे . पर रागिनी जैसे हेल्पलेस हो चुकी थी पूरी तरह. वो मुस्कुरायी और फिर एक निराशा और aasha-heen चिंतन में डूब गयी,

'शायद सच hi कहा गया है. की इंसान अपना असली रूप तब hi दिखाता है जब मौत उसके सामने कड़ी हो. विवेक! तुमने भी दिखाया था. और अब तोह तुम्हारे और नए नए रंग मुझे देखने को मिल रहे है. कितनी दुखद गाथा है न मेरी? या फिर यही सही था? हम्म! वीर के साथ भी तोह मेने गलत किया था न? ये उन्ही कर्मो का फल है. उपरवाले की आँखों से कोई अपराध नहीं बचता.'

वो गुस्से से रागिनी को देख रहा था और जवाब की मांग कर रहा था पर बेचारी रागिनी अपने ग़म में hi डूबी हुई थी.

सुमित्रा : वीवीएएएककककक!

सुमित्रा ने यहाँ चिल्लाया पर वो आगे कुछ कह पाती की तभी सभी के कानो में एक आवाज़ पड़ी,

"किसने कहा की वो यहाँ अकेली अपने देवर के साथ रह रही है?"

और तभी सब की नज़रे ऊपर की ऑर्डर गयी तोह देखा की...

सुमन, आभा, और सोनाली तीनो स्टैर्स से नीचे उतर उनकी hi तरफ आ रही थी. और वो आवाज़ भी सुमन की hi थी.

वो ऐसे चल के आ रही थी जैसे मानो इस घर की hi मुखिया हो. उसके चलने का ढंग, उसका पहनावा, बोल चाल में वो वज़न ने जैसे वह मौजूद सभी लोगो को शांत रहने के लिए मजबूर कर दिया.

सुमन : आपकी हिम्मत कैसे हुई अपनी पत्नी पर इतना घटिया लांछन लगाने की? क्या इतना hi भरोसा है आपको उसपे? ऊपर से अपने hi छोटे भाई के सामने? क्या आप में कोई सेंस है?

विवेक (झेपते हुए) : K-Kaun हो आप?

सुमन : में कौन हु? इतना भी नहीं पता आपको? की किसी से नाम पूछने से पहले अपना खुद का परिचय देना चाहिए. खर्र! में सुमन हु. रागिनी की सखा. उसके बचपन की दोस्त. और यहाँ उसके घर रहने आयी हु क्युकी उससे इस दुखद वक़्त में मेरी ज़रुरत थी. ये दोनों मेरी बेतिया है. अब बोलिये! कैसे आपने बिना जाचे परखे ये घटिया सवाल उठाया? और आप दोनों? कैसे संस्कार दिए है अपने बेटे को? क्या ऐसे ले जाने आये है अपनी बहु को? ले जाने आये है या उसके चरित्र पर कीचड उछालने आये है? बोलिये!!!!

सुमन के हमलो ने जैसे तीनो सुमित्रा, विवेक और करुणेश को ऐसे घायल कर दिया था की अब वो अपना मुँह खोलने के लायक नहीं बचे थे.

सुमन : अरे यदि कपड़ो की क़द्र करो तोह कपडे भी आपकी क़द्र करते है. फिर यहाँ तोह ये आपकी बहु है. घर की लक्ष्मी. आपकी हिम्मत कैसे हुई उस लक्ष्मी का अपमान करने की? कुछ hi दिनों में दिवाली का त्यौहार है. जिसमे लक्ष्मी को पूजते है हम. आशा करती हु तब तक आप अपनी इस लक्ष्मी को अपने घर पूरी इज़्ज़त के साथ अपनी गलतियों का पश्चाताप करते हुए यहाँ से ले जाएंगे. पर फिलहाल के लिए... जाइये यहाँ से. मेरी दोस्त को जब आपसे मिलना होगा. वो आपको खुद बुलाएगी या मिलने आ जाएगी. और तब... में बीच में नहीं आउंगी. अब जाइये! और मेरी दोस्त को अकेला चोरर दीजिये.

सुमन इस वक़्त वह कड़ी ऐसी प्रतीत हो रही थी जैसे मानो एक लेक्चर रूम में स्कॉलर खड़ा हो. शर्मिंदगी का ऐसा आईना दिखाया उसने उन् तीनो को की तीनो को hi वह से बिना कुछ बोले hi फौरन निकलना पद गया.

उनके जाते hi जैसे hi सुमन ने पलट के देखा तोह पाया रागिनी रट हुए उससे धन्यवाद दे रही थी. वही जब उसने अपने मालिक को देखा तोह पता चला उनका मुँह हैरत के मारे खुला हुआ था. और ये देख वो मैं hi मैं मुस्कुरायी.

'फुफु~ मालिक दांग रह गए. पर उन्हें अब पता लग गया होगा की... उनकी मुसीबते मेरी मुसीबते है. और हर्र वक़्त हर्र मोड़ पे में उनकी मदद करुँगी.'

इधर वीर हक्का बक्का सा सुमन को घूर रहा था.

'डायमण्णं! व्हाट थे फ़क जस्ट हप्पेनेड? ी थिंक ी क्नोव की क्यों तुमने सुमन को डायमंड कहा था पारी. दमन! She's ा फूकिंग लीडर. शी हांडलेड तहत सिचुएशन विथाउट इवन कनोइंग थे एक्चुअल ट्रुथ. वास् शी लिसनिंग तो उस थे व्होले टाइम?'

[Haha~ Didn't I told ya?]

सुमन : माफ़ कीजियेगा रागिनी जी. मुझे आपका नाम लेना पड़ा.

रागिनी : H-Huh? N-Nahiii! *स्निफ्फ* आप मुझसे बड़ी हो तोह... *स्निफ्फ* आप मुझे नाम से बुला सकती हो.

सुमन मुस्कुरायी पर कुछ न बोली. अब क्युकी ये समस्या फ़िलहाल के लिए ताल चुकी थी तोह वीर उठा और रागिनी को समझा के बाहर की ऑर्डर जाने लगा तोह सुमन उससे बाहर तक चौररने आयी.

सुमन : मालिक? आप किधर जा रहे है?

वीर : कुछ ज़रूरी काम है सुमन! और मदद के लिए शुक्रिया. यदि तुम न होती तोह पता नहीं ये मामला कैसे निपटता.

सुमन (स्माइल्स) : क्यों न होती में? अब से... हर्र जगह आपके साथ hi रहना है मुझे.

कहते हुए वो क़रीब आयी तोह इस बार वीर ने बिना किसी झिजक के हौले से उसके नरम नरम रस भरे होंठ चूम लिए.

वीर : आता हु. भाभी का ध्यान रखना.

सुमन : हम्म! आप बेफिक्र रहिये मालिक.

और वीर वह से निकल गया.

***

उसका मिशन आखिर पूरा जो नहीं हुआ था. मिशन था~ चेस डाउन थे अननोन गाए एंड ब्रिंग बैक थे डायमंड रिंग.

अब उसने चेस डाउन तोह कर लिया था पर रिंग वापस भी करनी थी.

सोनिआ को कॉल कर उसने उनके घर का एड्रेस ले लिया था. और वो वही की ऑर्डर जा रहा था.

पर रास्ते में hi उसने पारी से उस अल्फा ट्रेट फंक्शन के बारे में जानकारी ली.

'व्हाट इस थिस अल्फा ट्रेट फंक्शन पारी? विस्तार में समझाओ. तुमने कहा था की बाद में तुम सम्झओगि.'

[Yes! Master! It's exactly as it sounds. Yaani ki... Ab aap submissive Beta male nahi rahoge. You will become an Alpha male now. Ek aisa male jisse jhukna aata hi nahi. Jidhar bhi jaaye hamesha top pe rahe. Jis bhi hierarchy me ho, hamesha king rahe uska. That is what Alpha male is.]

'पर उस रात वो सब क्या था? मेरी बॉडी हीट उप होना एंड सडनली मेरा इमोशनल स्टेट से एकदम लुस्फुल स्टेट में चले जाना?'

[It's because of Alpha Trait function Master. Alpha Males, jesa ki mene kaha Submissive nahi hote. Wo jaan de denge ladte ladte par dusre ke saamne jhukenge nahi kabhi. Uss raat aap emotional state me the and Suman ka aapko wese chhuna aur aapko uttejit karna... Uss chakkar me Alpha Trait function trigger ho gaya. Aur ab ye hamesha active rahega.]

'Wh-Whaaatt??'

[Yes! Actually, Master! Levels badhne pe system ka in-built function bhi unlock hota hai. Uss Jatin ko pakadte time waha gaav me aapne yaad hai System ka Path Tracking function use kiya tha?]

'अब जब तुमने उसका ज़िक्र किया है थें येह, ी दो रेमेम्बेर तहत. उसी की वजह से में सुमन के घर तक वापस लौट पाया था.'

[Yes! Master! Wo function tab unlock hua tha jab mein level 2 par pohuchi thi.]

'वेट! Wtf? मुझे नोटिफिकेशन क्यों नहीं मिला था फिर?'

[Because aapne in-built functions ke notifications band kar ke rakhe hai.]

'थे फुसक्कखकक!? थें टर्न थम ों नाउ.'

[Okay!]

*डिंग*

[Notifications for In-built functions have been turned on.]

'गुड!'

[Haan! Toh jesa ki mein bata rahi thi. Ye Alpha Trait function bhi level 3 par unlock ho gaya tha but trigger nahi hua tha. Trigger hone ke liye aapka emotional state me hona zaroori tha. And then Suman ka attraction hua... So you know...]

'हम्म! ी सी!'

[Aapko thoda control me rehna padega. It's serious. Shuruaati daur me thodi dikkate aaengi.]

'Wh-What दो यू मैं?'

[What I'm trying to say is... Ki aapko gussa jaldi aaega, aapko apni pride sabse zyaada pyaari rahegi ab, ladkiya mahilaaye, aurte ab aapko kahi zyaada aakarshak lagengi, bhook zyaada lagegi aapko, aap fitness ke peeche bhi bhaagoge, materialistic cheezo ke liye bhi, so... You will have to control yourself.]

'T-This... थिस इस तू सीरियस.'

[Hmm! Right! So? Do you want to invest points? 65 points available hai.]

'हम्म! स्किल लिस्ट से बेसिक मार्टिकल आर्ट्स स्किल परचेस करो.'

[Are you sure?]

'हम्म! और बाकी के 15 पॉइंट्स... ऐड थम तो माय ेंदुराने.'

[O-Okay!]

*डिंग*

[Basic Martial Arts Skill is available now.]

[15 Points have been added to Endurance.]

'सो? अब उसे कैसे करनी है ये स्किल? टर्न ों करनी है?'

[No master! Ye already turned on rehti hai. You just have to fight now. Martial Arts moves apne aap baahar aaenge. The more you fight the more you will learn and more better you will get. Uske baad aap moderate level martial arts skill buy kar sakte ho.]

'गोत आईटी! नेक्स्ट टाइम यदि वो मिला... रंगा!!! I'm गोंना बीट थे सहित ोुट्टा हिम.'

[Also...]

'हम्म्म?'

[You were sad last night. Kyuki aap apni Mom ki train ka naam nahi padh paaye the. And aapko laga ki ab aap na jaane fir kabhi mil paoge ya nahi. So don't worry! Aapne bhale hi read na kiya ho but I read it. Train ka naam xxxxxxxxxxxxx hai. Ab aapko sirf unn stations par dhyaan dena hai jaha wo train rukti hai. Unhi kisi stations par aapki Mom utri hogi.]

पारी की बात सुनते hi वीर की कल रात से जो बेचैनी भरी हुई थी वो जैसे एक झटके में उसने गायब कर दी.

'Th-Thank यू पारी... ी... ी don't इवन... ी don't इवन हैवे वर्ड्स तो से राइट नाउ... थैंक यू! थैंक यू! आईटी... आईटी मीन्स ा लोट तो में पारी!! ी...'

[It's okay Master! I'm here!]

***

वीर फाइनली पहुँच चूका था सुहाना के घर, एंट्री उससे आसानी से मिल गयी थी क्युकी इस बार सोनिआ ने बोल के रखा था की उसका ख़ास गेस्ट आ रहा है.

बंगले के अंदर आते hi वीर को अलग hi नज़ारा देखने को मिला. एक ऐसा नज़ारा जिससे उसकी अपने सपनो में भी उम्मीद नहीं थी.

सुहाना लाइट से कपड़ो में थी पर ये क्या??

वो रो रही थी...

रो तोह रही थी बेशक पर...!??

वो एक बड़े से टेडी को जकड़े हुए थी और उसपे घुसो की बरसात कर रही थी और बड़बड़ाये जा रही थी.

"फ़क यू चोर.... मर्डर जा तू... तेरे मुँह में कीड़े पड़े... *स्निफ्फ* डैड ने इतना डांटा मुझे ुघ्हूउउ...."

*स्लाआँम्म्म*

*बायअंगगगग*

*Dhhhiiiiiiiiiisshooommmm"

लातो से लेकर घुसो तक हर्र एक वार कर वो बेचारे टेडी का कचूमर बनाये जा रही थी.

और इधर वीर की हालत ये सन देख के hi पतली हो चुकी थी. क्युकी अचानक सुहाना जोरर जोरर से बिस्तर पर खड़े होक हैवानो टाइप हस्सन लगी.

"बुवाहहहहहह~ तू मिल बस जा साले चोर देखना... जिसने भी रिंग चुराई है न... देखना... ी स्वेअर... देखना... क्या हाल करती हु में तुंहारा... ऐसे गर्दन को मरोड़ के न चटका दूंगी... ी... ी विल किल यू... हाहाहाःहाहा~"

'Wh-What थे हेलल? फुक्कक्ककककक! इस शी पोस्सेस्सेड और व्हाट?'

*बाआआआंगगगग*

*सलाआआआअम्म्म*

'फूऊक्कककक! थिस गर्ल इस मैरिड? हु थे फ़क मैरिड थिस क्रेजी वुमन? रिप हेर हस्बैंड...'

[Also that Teddy. 😆]

पर तभी वीर का ध्यान सुहाना के बोल पर गया, 'तू मिल बस जा साले चोर देखना... जिसने भी रिंग चुराई है न... देखना... ी स्वेअर... देखना... क्या हाल करती हु में तुंहारा... ऐसे गर्दन को मरोड़ के न चटका दूंगी... ी... ी विल किल यू... हाहाहाःहाहा~'

और ये आभास होते hi की उसके हांथो में अभी वही रिंग है, उसके पसीने छूटने लगे. उसने अपना थूक निगला...

[Rip you too. 😆 ]

'शीयीत्तट्ठ!!!'

और वो पलटने के लिए हुआ hi था क्युकी उसने सोचा जब सुहाना नार्मल होगी तब आना hi बेहतर होगा....

पर...

पर इस से पहले की वो मुद पाटा...

*वूफ वूफ*

साइड में दूर बंधा एक लैब्राडोर उससे बड़े चाव से देख जीभ निकाल अपनी पूछ मटकाते हुए भौंक दिया.

'ओह्ह्ह्हह फूक्कक्कककककक!!!'

और तभी...

"E-Ehhhh!?" सुहाना पलटी...

वीर ने उससे देखा और उसने वीर को...

दोनों की hi आँखें हैरानी के मारे फैलती चली गयी. ख़ास कर सुहाना की...

उसका हाथ से टेडी चूत के बीएड पर गिर गया...

*गल्प*

***

एक अलग सी खण्डार सी जगह में इस वक़्त एक आदमी टेबल पर अपने दोनों परर रखे, अपने हाथ बांधे एक चेयर पर बैठा हुआ था. उसका चेहरा एक हैट से ढाका हुआ था.

हैट...

यानी आस पास खड़े लोग जानते थे की ये कौन था. उनका बॉस. बोले तोह भौ... आतिश भौ!

पर ये खण्डार का अड्डा तोह रंगा का था. फिर अचानक आतिश भौ खुद क्यों आ गए? और ऊपर से रंगा की कुर्सी पर बैठे थे. खर्र! आतिश रंगा का भी बॉस था तोह ये ज़्यादा सुर्प्रिसिंग बात नहीं थी.

पर दिक्कत ये थी की...

इस वक़्त उनके आतिश भौ बड़े hi खराब मूड में लग रहे थे.

भला ऐसा क्या हो गया था जिसके चलते आतिश भौ आज इतने गुस्से में थे?

कोई कुछ नहीं बोल पा रहा था. उन्हें डर था, की एक आवाज़ करने पर कही... कही उनकी गर्दन hi न उड़द जाए.

तभी उन्हें किसी के कदमो की आवाज़ आयी,

"आइये पिंटू... जा ज़रा चाय का बोल के आ रे बगल वाले दादा के यहाँ."

कहते हुए रंगा अपने अड्डे में एंटर हुआ. पर उसके कदम वही थम गए जब उसने अपने भौ को अपनी कुर्सी पर देखा...

रंगा : Bh-Bhau!? आप? I-Idhar?

आतिश : आओ रंगा... तुम्हारा hi इंतज़ार था.

अपने भौ का आज व्यवहार देख रंगा के पसीने चूत रहे थे.

रंगा : क्या हुआ भौ? A-Aap अचानक आज यहाँ?

तभी आतिश ने अपने चेहरे से हैट हटाई और रंगा को देखा.

खड़े होते हुए वो उसके पास आया और उसके इर्द गिर्द घूमने लगा.

आतिश : तुम्हे पता है क्या हुआ है?

रंगा : K-Kya हुआ है भौ?

आतिश : वो रिंग! क्या हुआ उसका? कुछ पता है?

रंगा : भौ... जतिन! जतिन लेके गया था. और वो बताया था की... की उसने डीलर के आदमी से मिलने जाना था.

आतिश : हम्म! और?

रंगा : और?? तब से... तब से उसकी कोई जानकारी नहीं आयी है भौ.

आतिश : ओह्ह! तोह तुमने ये jaan'ne की कोशिश नहीं करि?

रंगा : भौ! मेने उससे कई बार कॉल किया पर वो उठा hi नहीं रहा है.

आतिश ने तभी अपना फ़ोन खोला और उसमे एक फोटो दिखाई...

फोटो में एक लड़का था... जो की ट्रैन में मौजूद था.

और उस लड़के को देखते hi रंगा की आँखें चौड़ी हो गयी.

रंगा : ये... ये तोह वही है... वो जो... वो जो उस रात उस रागिनी और परिवार को बचा के ले गया था. वीरररर!!!!

आतिश (स्माइल्स) : ओह्ह! राइट! बिलकुल सही.

रंगा : पर ये...

आतिश (स्माइल्स) : ये इमेज मुझे जतिन ने hi भेजी थी. ये बताते हुए की ये लड़का उसका पीछा कर रहा था. साथ hi साथ कल hi मुझे फ़ोन आया था की ये वीर उस से रिंग चुर्रा के ले गया है. तुम इसका मतलब समझ रहे हो न!?

रंगा (घबराते हुए) N-Nahi! ऐसा...

आतिश तभी उसके कान के पास झुका और धीरे से बोलै...

"उस रात भी वही था. जो तुम्हे चकमा देके उन्हें भगा के ले गया था. और एक बात और बताऊ?"

रंगा : H-Huh?

आतिश : क्लब से उस लड़की को उस रात भी वही भगा के ले गया था.

मानो एक बम सा फोड़ा था आतिश ने उससे ये बता कर.

रंगा : ये... ये...

आतिश : तीन गलतिया. तुम्हारी तरफ से. जानते हो न? तीन गलतियों की सजा?

रंगा : *गुलप्स* भौ! भौ... सुनिए...

आतिश बिना कुछ कहे अपना माउथ ऑर्गन जेब से निकाल बजाता हुआ टेबल के पास गया.

उसके माउथ ऑर्गन की ध्वनि वह मौजूद सभी लोगो के रौंगटे खड़े कर रही थी.

रंगा : B-Bhau... माफ़ कर दीजिये... आगे से... आगे से ऐसा...

इसके पहले की वो बोल पाटा...

*बाहानगगगगगग*

अचानक hi गोली चलने की आवाज़ आयी और...

*थुड़*

एक शरीर नीचे ज़मीन पर गिर गया.

रंगा के सर्र को चीरते हुए गोली अंदर घुसी और उसका एक hi बार में काम तमाम कर दी.

चेहरे पे घबराहट लिए hi मर्डर गया वो. वह मौजूद सभी लोगो के बदन सिहर उठे. पंत में मूतने जैसी हालत हो चुकी थी. क्युकी उनके भौ ने अपने ख़ास आदमी को उड़ाया था, रंगा!

"जलसा में तैयारियां करो. इस चूहे को अब में वो सबक सिखाऊंगा की ये विनती करेगा की काश ये पैदा hi न हुआ होता."

और इतना कह के आतिश वह से चला गया.

क्या कहा था उसने? Ja-Jalsa? जलसा में? वह मौजूद लोगो ने जैसे hi ये सुना उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी.

जलसा उनके आतिश भौ की पसंदीदा बिल्डिंग का नाम था. और उस से जुड़ा इतहास को याद कर के hi उनके रौंगटे खड़े हो जाते थे.

.

.

.

.

.

.

आज एक लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!!


लिखे करना मत भूलना.
 
अपडेट - 33 ~ थे फेस्टिव नाईट

अब तक...

"जलसा में तैयारियां करो. इस चूहे को अब में वो सबक सिखाऊंगा की ये विनती करेगा की काश ये पैदा hi न हुआ होता."

और इतना कह के आतिश वह से चला गया.

क्या कहा था उसने? Ja-Jalsa? जलसा में? वह मौजूद लोगो ने जैसे hi ये सुना उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी.

जलसा उनके आतिश भौ की पसंदीदा बिल्डिंग का नाम था. और उस से जुड़ा इतहास को याद कर के hi उनके रौंगटे खड़े हो जाते थे.


अब आगे...

एक बड़े से बंगले में एक बड़े से कमरे में इस वक़्त घनघोर सन्नाटा छाया हुआ था.

और दो शख्स इस समय एक दूसरे को हैरानी से घर रहे थे.

ये और कोई नहीं, वीर और सुहाना hi थे.

सुहाना भौचक्की सी सामने एकदम से अंदर आये वीर को देखे जा रही थी. तोह वही वीर इस वक़्त इस सोच में डूबा हुआ था की अब आगे क्या होने वाला है?

और तभी...

*वूफ वूफ*

एक बार फिर...

साइड में बंधे उस लैब्राडोर की आवाज़ से दोनों को जैसे होश आया और अगले hi पल...

"आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह!!!!!!!!!" सुहाना जोरर से चिल्लाई और...

*वहूऊओऊस्सष्ठ*

एक तकिया हाई स्पीड में वीर की खोपड़ी की ऑर्डर उड़द के आया पर रिफ्लेक्स के चलते उसने फौरन hi अपने सर्र को साइड में कर लिया. तकिया उसके कानो के बगल से निकला और...

*बेम*

पीछे बड़े से दरवाज़े में जाके भीड़ के नीचे गिर गया.

'Wtf??? व्हाई इस शी हिटिंग में? फुसक्ककककक! मुझे निकलना चाहिए यहाँ से.'

वीर : ाहः! ी गेस... रॉंग रूम!

वो पलटने के लिए हुआ पर तभी पीछे से सुहाना चिल्ला पड़ी.

सुहाना : Y-Youuuu... यौऊ! C-Come... बैक... के बैक हेरे... के बैक...

न चाहते हुए भी उससे मुड़ना hi पड़ा.

सुहाना का चेहरा पूरा लाल हुआ जा रहा था. वो ऐसी प्रतीत हो रही थी जैसे मानो अभी क़त्ल कर देगी वीर का.

'वेट! शी... फुक्कखकक! शी सिम्स पिस्सेद. वाक़ई! वो वाक़ई बोहत गुस्से में लग रही है.'

"... सी आईटी!?"

वीर के कानो में कुछ शब्द पड़े. पर वो इतनी धीमी आवाज़ में बोले गए थे की उसको घंटा कुछ सुनाई दिया.

वीर : हँ!??

सुहाना (मुर्मुर्स) : Y-You... दीद यू सी आईटी?

वीर : हँ? W-What??

सुहाना : ोुउउउउउउउउ!!!! Don't मेक में रिपीट. मेने पूछा... दीद यू सी तहत? K-Kya तुमने वो सब देखा? एंड don't यू डरे लिए तो में. नई तोह... नई तोह... में कूपर को तुम्हारे पीछे चोरर दूंगी...

वीर : कूपर?

सुहाना ने इशारा करते हुए साइड में बंधे लैब्राडोर की ऑर्डर अपनी नज़रे करि. उसका कहना था, की सच बताओ, वर्ण वो अपने डोगग्य, कूपर को उसकी गांड के पीछे लगा देगी.

'Wtf? तहत डॉग won't बाईट में राइट? ः~ ी मैं C'mon it's ा लैब्राडोर. लुक it's सो क्यूट...'

*Wooooooooooofffff*

'फुक्कक्कककककक!!!'

[Haha]

सुहाना : B-Bolo जल्दी...

वीर (शिघ्स) : ी... येह! मेने देखा. एंड सॉरी... ऐसे एकदम से अंदर आने के लिए.

अंत में उसने सच कहना hi सही समझा. आफ्टर आल, हे दीद सॉ आईटी थौघ. अब वो झूट नहीं कह सकता था.

पर जैसे hi उसने ये बात क़ुबूल की...

अगले hi पल सुहाना का चेहरा इतना लाल पद गया और वो टेडी को उठा के अपनी गॉड में रख उसके पीछे छुप गयी.

"ुघ्हूऊऊऊ..."

'हँ??? थे फ़क? इस शी क्राइंग?'

अपने कदम उसने धीरे धीरे सुहाना की तरफ बढाए और हौले से उसने टेडी के कान पकड़ उससे हटाया ताकि वो उसका चेहरा देख सके.

और वाक़ई...

'अभी... ये... ये तोह रो रही है.'

[:लाफिंग:]

'Don't लाफ पारी! फुककक!'

वीर : उम्...

वीर की आहात पाते hi सुहाना ने उससे ऐसी आँखें दिखाई जैसे एक बिल्ली दिखाती है जब कोई उसके बच्चो के नज़दीक जाता है तोह.

पर...

वो अपनी गुलाबी गाल फुलाये, आँखों में ासु लिए इस वक़्त.

डरावनी काम... और क्यूट ज़्यादा लग रही थी.

'वेट! ः~ सहित! She's एक्चुअली क्यूट... हँ? ये में क्या सोचने लगा? No वे! ये औरत कही से क्यूट नहीं हो सकती.'

वो सोचना तोह यही चाहता था पर...

सुहाना अपने टेडी को खींच के अपना मुँह जैसे छिपाने की कोशिश कर रही थी उससे देख के वीर के विचार डगमगाने लगे.

'फुसक्कक! She's क्यूट... ी एग्री!'

[:लाफिंग:]

'मेने तुम्हे हस्सन के लिए मन किया है. पारी!!! दमन!!'

[Master! Looks like Suhana has that split personality]

'हँ? स्प्लिट पर्सनालिटी?'

[Yes! Like... Kuch log aise hote hai jinki split personality hoti hai. Like... Wo ek personality ko sabke saamne dikhaate hai. Log sochte hai ki yahi unka vyaktitv hai. Par... Ek personality unki aur hoti hai jisse wo dabaaye rakhte hai. Jinhe wo kabhi kisi aur ke saamne nahi aane dete. Kyuki wo personality wo kabhi bhi dikhaana pasand nahi karte. Unhe darr rehta hai ki... Uske chalte na jaane log kese react karenge. Aur Suhana shayad unme se ek hai. She has a split personality disorder. In fact, ye personality aur dusri personality ka mixture hi asli Suhana hai.]

'दमंत्र!'

[Yeah! Toh ab tak jo aap ne uska behaviour dekha hai. Wo poori tarah se Suhana nahi thi. Aadhi Suhana ki personality ye hai. Timid, shy and cutesy type.]

'वेल... ी हेट तो एग्री बूत शी डस हैवे ा क्यूट साइड.'

पारी उससे और समझाती पर तभी वीर को सुहाना की एकदम मद्धम सी आवाज़ सुनाई दी.

सुहाना : Y-You... यू won't तेल्ल एनीवन राइट?

वीर : ी... ी won't.

सुहाना (सुरप्रीसेड) : हँ? रियली?

वीर (नॉड्स) : Y-Yeah!!

और अगले hi पल वीर को जैसे एक झटका सा लगा. क्युकी नेक्स्ट सेकंड hi, सुहाना ने इतनी प्यारी मुस्कान दी की वीर का खुद का मुँह खुला का खुला रह गया.

पर जैसे ये मुस्कान बस कुछ सेकण्ड्स की hi मेहमान थी.

सुहाना : हँ? वेट! तुम यहाँ कर रहे हो? और अंदर कैसे आये?

वीर ने बिना कुछ कहे hi रिंग का बॉक्स खोल के उसके आगे कर दिया.

और सुहाना की आँखें हैरत के मारे फैलती चली गयी और मुँह खुला का खुला रह गया.

ये रिंग? ये डायमंड रिंग? ये तोह वही रिंग थी. उसके माँ का b'day प्रेजेंट जो उसके डैड देने वाले थे पर कुछ दिन पहले hi उसकी गलती के चलते वो चोरी हो चुकी थी. पर...

पर इस वक़्त वही अंगूठी उसके सामने थी.

"T-This... ये तोह वही..."

उसने हड़बड़ाते हुए वीर से वो रिंग चुर्रायी और उससे गौर से अलग अलग एंगल से देखने लगी.

वाक़ई! No डाउट ये वही रिंग थी.

सुहाना : ये...!? वेट! ये तुम्हारे पास!? कही तुमने...!?

इसके पहले वो बोलती वीर ने उसके होंठो पे अपना हाथ रख उससे चुप करा दिया.

सुहाना (सुरप्रीसेड) : मंपहः?

वीर : भूल के भी इलज़ाम मत लगाना मुझ पे. फ़क! ी ऑलमोस्ट डीएड... बोहत म्हणत से इससे चोर से छिना के लाया हु. टेक आईटी नाउ.

सुहाना : हँ? वेट! व्हाट? तुम... तुम इससे चोर से छिना के लाये? कौन है चोर? तेल्ल में... एंड तुम्हे कैसे पता? कहा है वो? ये सब हुआ कैसे?

वीर ने एक आह भरी. वो जानता था सुहाना ऐसे नहीं मान ने वाली. तोह उसने सब कुछ उससे बताना शुरू किया, पारी का सीक्रेट चोरर के.

उसने अपनी कहानी को घुमाते हुए बताया की कैसे उसने चोर को होटल से भागते हुए देखा था जब वो खुद होटल से बाहर निकला था. कैसे उसने जतिन का पीछा किया, कैसे वो उस गाँव में पहुचा पीछा करते करते और कैसे उसने जतिन को दबोचा और रिंग वापस ली.

सुहाना वीर के मुँह से बात सुनते सुनते अजीबो गरीब एक्सप्रेशंस दे रही थी. कही वो चौंकती तोह कही वो टेंशन में आ जाती, कही वो राहत की सास लेती तोह कही दातो टेल अपना अंगूठा दबा लेती.

जब वीर ने साड़ी वारदात का वर्णन किया तोह अंत में सुहाना ने फाइनली एक राहत की सास ली और रिंग के बॉक्स को जोरर से भींच लिया.

हलाकि अभी भी उससे यकीन नहीं हो रहा था वीर की बात पर. लेकिन उससे इस बात से ज़्यादा ख़ुशी थी की उसके पास रिंग वापस आ चुकी थी. तोह उसने ज़्यादा सवाल जवाब नहीं किये.

वीर : T-Toh मेरा काम हो गया. चलता हु.

सुहाना : W-Waiiiittt!!

वीर : हम्म?

सुहाना : वो... I'll रेमेम्बेर थिस. सो... तेल्ल में? W-What दो यू वांट?

वीर : *फ्रोंस*

सुहाना : नहीं! मेरा मतलब है की... तुम ये वापस लाये सो... हां! वेट!!!

अचानक hi वो दौड़ के गयी और अपने पर्स से न जाने क्या पर कुछ निकाल के लायी.

और उसने वीर का हाथ थाम उसके हाथ में कुछ पकड़ा दिया.

वीर ने देखा तोह...

डेबिट कार्ड!

एक डेबिट कार्ड था जो सुहाना ने उसके हाथो में उससे पकड़ाया. उसने सुरप्रीसेड होते हुए सुहाना को देखा तोह इस बार वो फिर हल्का सा मुँह फुलाते हुए बोली.

"वो... वो... ये तुम रिंग वापस लाये उसके लिए. Don't थिंक की में तुम्हे रिश्वत दे रही हु. It's.. It's नॉट लिखे तहत ात आल. Okay? It's ा पेमेंट फॉर योर हार्डवर्क. इसका पासवर्ड है क्सक्सक्सक्सक्सक्स, आल्सो, मेने तुम्हे उस दिन वो सब कहा उसके लिए s-sorry... सोनू मुझ से बेहद नाराज़ थी इसलिए... I'll... I'll फॉरगिव यू... न्यू! ी मैं... ागरगठ! जस्ट टेक थिस. और अब सवाल जवाब मत करना."

[Take it master. After all, ye aapka hard earned money hai.]

वीर : मेरी एक बात समझ में नहीं आयी.

सुहाना : हँ!??

वीर : जब आप इतने hi पैसे वाले हो तोह इस रिंग के पीछे इतना क्यों रोना? ी मैं एक दो करोड़ तोह आपके लिए हाथो का मेल होगा... सो...

सुहाना : इडियट! It's नॉट अबाउट मनी... पैसा तोह इतना है की...

वीर : ....

सुहाना : उघ! I-I मैं... यस! पैसा है. यदि डैड चाहते तोह उस दिन hi कोई दूसरी रिंग दे देते माँ को.

वीर : थें??

सुहाना : एक्चुअली... बात गिफ्ट की है. बात है समय की. लास्ट ईयर माँ डैड के साथ टूर पे गयी थी फॉरेन तोह वह उन्हें एक पार्टी के दौरान किसी लेडी की रिंग पसंद आ गयी थी. फिर उस लेडी ने बताया था एक बेहद hi मशहूर शॉप का नाम. इस साल डैड उसी शॉप से माँ के लिए एक अच्छी सी रिंग उन्हें देना चाहते थे. बूत दिक्कत ये रहती है की... डायमंड्स में कट्स लगाए जाते है. गुड कट, वैरी गुड कट, ब्रिलियंट कट ऐसे... जिसमे समय लगता है. उसके बाद वो एक्सपोर्ट होते है थें यहाँ आते है. सो आईटी टैक्स टाइम...

वीर : ओह्ह!

सुहाना : येह!! एंड डैड ने ठान लिया था की वो वही की रिंग इस बार वो माँ को देंगे. और उन्होंने ब्रिलियंट कट लगवाने के लिए कहा था. साथ hi में शेप राउंडेड रखने के लिए. तोह आईटी टैक्स टाइम... यही कारण है की वो इतना उदास हो गए थे मुझसे. एंड नाउ तहत थे रिंग इस हेरे... उनकी नाराज़गी अब दूर हो जाएगी. सो... सो... थैंक्स तो यू.

वीर : ओह्ह्ह! W-Well! ी थिंक ी विल लीव नाउ...

सुहाना : वायआइटट!!

वीर : हम्म?

सुहाना : I-I... I'll दो ओने मोरे फवौर.

वीर : हँ? No थैंक्स!

वो बोलते हुए फिरसे पलट के जाने लगा तोह फिर सुहाना ने उसका हाथ थाम उससे रोका.

सुहाना : Y-Youuu! वेट! It's... हां! ये... ये इसलिए है की तुम मेरे सीक्रेट को किसी को न बताओ okay? Don't यू डरे से आईटी. इवन... इवन सोनू को भी नहीं पता है इस बारे में... सो... सो यू मस्ट नॉट... Okay!?

'व्हाट थे हेलल??'

सुहाना : सो... िफ़... िफ़ यू नीड ा जॉब और एनीथिंग लिखे तहत... थें ी कैन हेल्प यू.

इस प्रस्ताव से वीर के मैं में जैसे कुछ आया और वो सुहाना को घर के देखा.

वीर : अरे यू सूरे!?

सुहाना : हँ!? Of-course! I-I ऍम सूरे. बोलो!? जॉब चाहिए!? मेरे हस्बैंड आईटी कंपनी C.E.O है. यू जस्ट नीड तो गिव इंटरव्यू और बस. इंटरव्यू भी फॉर्मेलिटी के लिए hi होगा यदि में उनसे कह दू की तुम्हारी जॉब लगवानी है.

वीर : मुझे तोह नहीं बूत...

सुहाना : हम्म??

वीर (स्माइल्स) : किसी को चाहिए है... I'll कॉल यू लेटर. थैंक्स फॉर थे रिवॉर्ड. एंड हो सके तोह पुलिस के बीच मेरा नाम मत आने देना.

और इतना बोल वो बाहर निकल गया.

सुहाना स्तब्ध निगाहो से केवल उससे जाता हुआ देखती रही. बाद में उससे जैसे ध्यान आया की वीर ने कॉल करने के लिए कहा पर नंबर तोह लिया hi नहीं. और ये सोच वो फिर से उससे bad-badaane लगी.

'He's स्टिल ान इडियट. हम्फ! I-I विल फॉरगिव हिम थिस टाइम. और पुलिस... तोह वो नहीं चाहता की में उसका नाम आने दू? वेल वो स्टूडेंट है तोह ी कैन गेस. हम्फ! ी विल हेल्प यू थिस लास्ट टाइम ओनली...'

"सोनुउउउउ!" और वो फुदकती हुई अंदर चली गयी जहा उसकी बहिन सोनिआ इस वक़्त बाथरूम में नाहा रही थी.

***

वीर उधर से रास्ते में घर की ऑर्डर लौट रहा था और जिस चीज़ का उससे इंतज़ार था वो फाइनली घटित हुई...

*डिंग*

['मिशन ~ चेस डाउन थे अननोन गाए एंड ब्रिंग बैक थे डायमंड रिंग' है बीन कम्प्लेटेड.]

*डिंग*

[50 points have been rewarded.]

[Lifetime favour from Suhana has been achieved.]

*डिंग*

[System has reached Level - 4]

[In-built function 'Check II' has been unlocked.

Description : You can now check the objects.]

'दममममन्त्र! पारी!? That's फूकिंग अमेजिंग. वेट! में अब ऑब्जेक्ट्स चेक कर सकता हु? यानी किसी भी चीज़ को? हँ??'

वो पारी से jaan'ne के लिए उतावला हो रहा था पर तभी...

[Maaaaaaaaasttttteeerrrrrrrrr!!!!]

'हँ? W-What? क्या हुआ?'

[Ehehehehe~]

'???'

[Ehehehehehe~]

'थे फ़क!? पारी? ऐसे बेफालतू क्यों खिल खिला रही हो? यू गॉन इंसाने और व्हाट? मुझे बताओ की ये चेक -ी क्या है? इसका मतलब है की में अब कोई भी ऑब्जेक्ट्स चेक कर सकता हु?'

[Yesssss! Maaaasttterrrr! Ab aap kisi bhi object ko check kar sakte ho and unka description jaan sakte ho.]

'वाओ!!! थिस विल बे उसेफुल!'

वो रास्ते में अपनी गाडी चलाये जा रहा था और आज बेहद खुश था. सब कुछ सही ढंग से हुआ. रिंग भी वापस मिल गयी थी. मिशन भी कम्पलीट हो गए और तोह और सुहाना से फवौर भी मिल गया था.

अभी वो जा hi रहा था की तभी उसकी नज़र रोड के hi साइड में एक बड़े से मंदिर पर गयी. ये शहर के काफी प्रसिद्द मंदिरो में से एक था. पर इस वक़्त उसकी नज़रो ने मंदिर के लिए अपना रुख नहीं बदला था.

कारण था...

उस मंदिर में अंदर जाती हुई...

एक औरत!

एक बेहद hi परिचित औरत. वो औरत जो उसके जीवन में एक आस वापस लेके आयी थी जब उसने सब कुछ चोरर दिया था. वो औरत जिसने उसकी देख भाल तब की थी जब उसके अपनों ने उससे घर से बाहर निकाल दिया था. वही औरत जो न केवल उसकी टीचर थी बल्कि साथ hi साथ एक बेहद hi अच्छी दोस्त भी थी.

और जिस से बातें करते वक़्त वीर का रोम रोम खिल उठता था.

उसकी अपनी...

निधि Ma'am...

"M-Ma'am..." उसके होंठो से अपने आप हौले से वो शब्द निकल पड़े. वो देख पा रहा था की उसकी Ma'am के साथ hi साथ जूही और श्रेया भी थी.

वो तीनो hi अंदर जा रही थी दर्शन के लिए. भीड़ काफी थी और कुछ पालो के अंदर hi निधि उसकी नज़रो से ओझल हो चुकी थी.

पता नहीं उससे क्या सूझा की अगले hi पल वो अपनी बाइक से उतरा और मंदिर के अंदर चल दिया.

मंदिर भी छोटा मोटा नहीं था. अंदर लाइन लगाने के लिए दो भाग थे. बीच में लोहे की जाली थी जो सफ़ेद रंग से पुती हुई थी. जाली के इस तरफ पुरुषो के लिए अलग लाइन थी तोह वही जाली के उस तरफ महिलाओ के लिए दूसरी लाइन. और ऐसे hi कई बार इधर से उधर होते हुए अंदर जाने का रास्ता था.

वीर पुरुषो की लाइन में लग चूका था पर उसकी नज़रे केवल एक शख्स को ढूंढ़ने में लगी हुई थी. वो नहीं जानता था की वो यहाँ क्यों आया है पर उसके कदम जैसे अपने आप चलते जा रहे थे बस.

जैसे उसके परर उसकी अपनी मर्ज़ी से नहीं चल रहे थे.

उसकी नज़रे भगवान् के नहीं, किसी और के दर्शन के लिए जैसे तड़प रही थी.

वो यु आस लिए मंदिर के अंदर आ पहुचा पर निधि कही न नज़र आयी उससे.

उसने प्रार्थना करि,

'हे उपरवाले! वैसे मेने कभी तुमपे उतना विश्वाश नहीं किया. पर यदि तुम मेरी पुकार सुन्न रहे हो, और लोगो की कामनाये पूरी करते हो. तोह... तोह... में आज तुमसे यही मांगता हु... की... मेरी ma'am की ज़िन्दगी से कष्ट दूर कर दो. प्लीज! नहीं चाहता में अब उन्हें और परेशानी में देखना. आज वो भी आस लेके आयी है तुम्हारे पास. चाहे तोह उनके दर्द मुझे दे दो. में यही पीठ पीछे उनकी हिफाज़त करता रहूँगा... पर उनके पास नहीं जा सकता. वर्ण वो मुझे अपने साथ रख लेंगी. और... कही में कोई पाप न कर बैठु. वो नहीं समझती है... की यदि वो मेरे साथ इतना प्यार से व्यवहार करती रहेंगी तोह... तोह... में उनका बन्न के रह जाऊंगा... इसलिए... जल्द से जल्द उनके दुःख दर्द दूर कर दो. बस यही कामना है मेरी.'

वीर ने प्रार्थना कर कुछ पैसे आरती की थाल में चढ़ाये और आरती और प्रसाद लेते हुए वो बाहर आ गया.

प्रसाद को खाने के बाद उसकी नज़र फिर एक बार कुछ दूर साइड में बानी एक जगह पर गयी जहा बैठने के लिए पत्थर की hi एक बेंच टाइप मौजूद थी और साथ hi साथ अगरबत्ती को फ़साने की एक जगह थी.

जिस शख्स की उससे तलाश थी वो आखिर कार उसकी नज़रो में आयी.

निधि झुक के अगरबत्ती उस जगह में खास रही थी. रोज़ की hi तरह वो बेहद hi ख़ूबसूरत लग रही थी. और उस से कुछ hi दुरी पर एक बेंच पर जूही मौजूद थी जो प्रसाद खाने में लगी हुई थी. उसके बगल से कई और बच्चे भी बैठे हुए थे और उनके पेरेंट्स भी. शायद आज छुट्टी के चलते मंदिर में इतनी भीड़ थी वर्ण रोज़ नहीं रहा करती थी.

एक बार फिर...

वीर के कदम अपने आप बढ़ गए...

पर...

वो चाह के भी जा नहीं पा रहा था.

क्युकी उसके सामने वही जाली जो मौजूद थी. उस पार जाने के लिए उससे पीछे से जाना पड़ता जहा जाली ख़तम होती है. पर शायद अब उसके पास उतना समय नहीं था.

वो पास आया और अपने हाथ रख, उन् छोटे छोटे जाली के चौकोर खंडो में अपनी उंगलिया फस्साये वो केवल निधि से बस दो तीन कदमो की दुरी पर मौजूद था. और उससे hi निहार रहा था.

और आखिर कार...

"M-Ma'am!?" उसने पुकार hi दिया.

"हाआअह!?" अगले hi पल निधि जो झुकी हुई थी वो जैसे एकदम से ये परिचित आवाज़ सुन्न कड़ी हो गयी.

वो आवाज़ सुनते hi उसका सीना इतनी जोरर से लम्बी सास लेने के चलते ऊपर हुआ की वो हाफने लगी.

वीर के सामने निधि की पीठ थी. अभी तक निधि ने उससे नहीं देखा था. केवल आवाज़ hi सुनी थी उसकी.

'V-Veer!?? N-Nahi! वो भला यहाँ कैसे...!?'

उसने अपना वहां समझ के उस आवाज़ को इग्नोर करना चाहा पर...

"Ma'am!?"

एक बार फिर...

उस आवाज़ ने जैसे निधि के रौंगटे खड़े कर दिए. इस बार उससे एक पल नहीं लगा. वो फौरन hi पलटी और...

सामने खड़े शख्स को देख उसकी आँखें फैलती चली गयी.

फिर बॉहे सिकुड़ी और फिर...

आँखों में नमी अपने आप आ बसी...

"वीर!!?"

बस! उसके होंठ से यही निकला. आज न जाने कितने दिनों के बाद वो उससे देख रही थी. उसका लेटर पढ़ने के बाद वो कितना रोई थी केवल वही जानती थी. और आज उसके रोने की वजह उसके सामने मौजूद थी.

आखिर... वीर के लिए hi तोह वो इतने दिनों तक रोई थी.

पर जैसे जैसे दिन गुज़र रहे थे. निधि बेहद hi toot'ti जा रही थी. उससे वीर पे गुस्सा रहा था. न वो उसका कॉल उठाता था, न उस से बातें करता था, न hi उस दिन के बाद से मिला था. इन् सब के चलते जैसे वो इतनी खफा हो गयी थी वीर से की बस खरी खोटी सुनाना चाहती थी उससे...

उसके गालो पर अपने आप एक गीलापन सा उससे महसूस हुआ. अपने गाल से आसुओ को पॉच वो उससे देखि और बोली.

निधि : क्यों आये हो अब वीर? K-Kyu? तुम्हे तोह अच्छा लगता है न? अपनी ma'am के कॉल्स नहीं उठाना!? उनसे बातें नहीं करना? हफ्तों हफ्तों तक चेहरा नहीं दिखाना!? ऐसे रूठ जाना!? तोह फिर क्यों? वीर? अब... अब कई आये हो? अपनी ma'am का मज़ाक उड़ाने!? कभी नहीं सोचा की ma'am क्या सोच रही होंगी? उन्हें कितनी टेंशन हो रही होगी तुम्हारे ऐसा करने से!? हँ?? तुम... यु लेट लेट घर आते थे... में कुछ न बोली... और... और मेने थोड़ा सा उस दिन क्या कह दिया... मेने एक गलती क्या कर दी... तुम... *स्निफ्फ* तुम यु नाराज़ होक मुझसे घर चोरर के चले गए??

वीर कुछ न कहा...

बस... उसने अपना सर्र झुका लिया. जाली पर यु सर्र टिकाये वो बस चुप चाप खड़ा रहा.

निधि : K-Kyu आये हो अब वीर!? अब... अब तुम अपनी भाभी के घर रहने लगे हो. मेरे छोटे से घर में अब कहा तुम्हे वो ऐशो आराम मिलेगा...?? है न!? M-Mein कहा तुम्हारी ज़रूरतों का खर्चा उठा पा रही थी!? आखिर... इसलिए... इसलिए तोह तुम गए न? अब भला क्या ज़रुरत तुम्हे इस ma'am की?? पढ़ाई भी चोरर डिज है तुमने अब शायद है न? तोह भला... अब... अब मेरा *स्निफ्फ* मेरा मतलब क्या रह गया.

चाह के भी इस वक़्त वो कुछ कह न सका. या यु कहे की उसके मुँह में शब्द hi न बने.

तोह भला क्या जवाब देता!?

निधि इतना बोल दुबारा पलट गयी और अब फिरसे बस उसकी पीठ hi वीर को नज़र आ रही रही. वो इतना चाह रहा था की काश... काश ये जाली उसके और निधि के बीच न होती. काम से काम उस कंधे पर वो अपना हाथ रख ये जाता पाटा की निधि जैसा सोच रही थी वैसा बिलकुल भी न था.

निधि : यू... यू शुड जो राइट? बोहत काम होंगे तुम्हे... काफी... काफी बिजी जो रहते हो तुम. *स्निफ्फ* सो... मुझ पर समय वास्ते करनी की ज़रुरत नहीं है वीर... काम तोह पहले देखा जाता है... है न!? Y-You शुड जो...

इतना बोल उसने अभी एक कदम आगे बढ़ाया hi था जब अगले hi पल वीर की बात सुन्न उसके कदम वही ृक्क गए.

वीर : परसो...

निधि : ....

वीर : परसो... मेरा जन्मदिन था...

निधि उसकी बात सुन्न एकदम सिहर गयी. और उसके ासु भी बहना जैसे रुक गए थे. पर वो पीछे नहीं मुड़ी... वही स्तब्ध सी बस स्थिर कड़ी रही.

वीर (स्माइल्स) : उस दिन कुछ क़रीबी लोगो ने में मुझे विश किया... काव्य मेरी बहिन... सबसे पहले उसने किया था. उसके बाद श्रेया जी का भी वीडियो कॉल आया था. जूही से भी बात हुई... और तोह कोई है नहीं मेरी ज़िंदगी में... एक शख्स और...

निधि : ...

वीर : आप hi हो. में दिन रात आपके एक मैसेज या कॉल का वेट करता रहा. माना की मेने ः... आपको रिप्लाई नहीं दिया था... पर मुझे लगा था हर्र बार की तरह... उस दिन तोह आप पक्का hi कॉल करोगी... पर ...

निधि : ......!!????

वीर : आपकी बधाई न आयी...

और बस...

उसका इतना कहना था की...

निधि के आसुओ का जो बाँध अभी थम गया था वो एक बार फिर लबा लैब बहना शुरू हो गया. मोठे मोठे ासु उसके गालो से लकीर बना के गिर रहे थे.

न जाने कितना कुछ सुना दिया था उसने वीर को यु खड़े खड़े. पर... उसकी एक बात न सुनी.

वो भूल गयी थी की केवल वही नहीं थी जो नाराज़ थी. केवल वीर की hi गलती नहीं थी. भला उसका जन्मदिन कैसे भूल गयी वो? उससे याद था. हाँ उससे याद था पर काम, व्यस्तता, टेंशन, और रजत से डाइवोर्स के चलते वो जैसे बिलकुल hi भूल गयी थी.

और अब जब उससे इस बात का पता चला तोह...

ग्लानि... केवल ग्लानि के भाव थे. जो पहले से hi मौजूद ग्लानि के भार को और बढ़ा चुके थे.

इतना... की अब उस भार से उठ पाना काफी मुश्किल था.

जब उससे इस बात का एहसास हुआ तोह वो फौरन hi पलटी....

"वीईईइरररररर!!!"

पर...

"??????????"

वीर वह मौजूद नहीं था. और आज पहली बार... निधि को अपने अंदर एक सेंस ऑफ़ लोस्स महसूस हुआ. मानो जैसे उसने बेहद hi कीमती कुछ अपना खो दिया हो. जिससे पाना अब शायद बेहद मुश्किल था.

"N-Noooo!" वो अचानक hi इधर उधर भागते हुए उससे ढूंढ़ने का प्रयास करि... पर...

वीर कही नहीं था.

और वो बिलखती हुई रट रट जूही के पास पहुची. उसकी ऊँगली पकड़ वो फौरन hi मंदिर के बाहर जाने लगी. इस आस में की वीर बाहर गया होगा तोह मिल जाएगा.

पर...

वीर इधर से जैसे hi लौट रहा था की अचानक उसकी शर्ट किसी ने पीछे से पकड़ ली.

पलट के देखा तोह...

श्रेया!!!

'????'

श्रेया : क्यों करते हो ऐसा?

वीर : ी... I'll टॉक तो यू लेटर...

वो जाने के लिए हुआ तोह इस बार श्रेया ने उसका हाथ थाम लिया.

श्रेया : तेल्ल में...!

वीर : ट्रस्ट में! मुझे काम है. आल्सो...

श्रेया : ???

वीर : क्या आप जॉब करना चाहती हो???

श्रेया : हँ??

वीर : िफ़ यू वांट तो... थें मुझे बताना. ी हैवे ान ऑफर ... चलता हु...

वो इतना बोल जाने लगा.

श्रेया : S-Sunoooo टोह्हह्ह....

पर श्रेया की आवाज़ का कोई मतलब न रहा.

वीर... जा चूका था.

***

कुछ दिन गुज़र चुके थे. और आज... दिवाली का इतना बड़ा त्यौहार था.

विवेक संग करुणेश और सुमित्रा रागिनी को वापस से घर ले जाने में असमर्थ थे. और आज की ये दिवाली रागिनी अपने hi घर में मनाने वाली थी. सुमन, आभा, सोनाली और... वीर के साथ.

दिन में वो अपने घर हो आयी थी. तोह अब रात में जाने की ज़रुरत नहीं थी.

आज वो वीर के लिए और सुमन संग बाकी सभी के लिए कई सारे कपडे और अन्य सामान खरीद कर लायी थी. दिवाली का पर्व hi रहता है खुशियों का...

आज रागिनी भी बेहद खुश थी. ये दिवाली भले hi वो घर से अलग मन रही थी. पर यु वीर और अन्य के साथ उससे जैसे कोई कमी नहीं महसूस हो रही थी. थोड़ा ग़म ज़रूर था. पर वो जानती थी... की गहरे ज़ख्मो को भरने में समय तोह लगता hi था.

रात के समय सभी तैयार पूजा ख़तम होने का इंतज़ार कर रहे थे. पूजा लेडीज लोग कर रही थी तोह वीर बाहर hi मौजूद था.

की तभी उससे काव्य का कॉल आया और...

वीर : बोल काव्य!

काव्य : भैया! में और आरोही दी उधर आ रहे है. Okay? पटाखे फोड़ेंगे सब मिलके हहै~

वीर : अरे पर... बाहर पटाखे फुट रहे है. रास्ते में गाडी चलाना खतरे से खाली नहीं है काव्य. मत आओ...

काव्य : नाहीइ! आ रहे है मतलब आ रहे है... bye!

और कॉल एन्ड हो गया.

इधर काव्य फुल एक्ससिटेड आरोही के पीछे बैठ चुकी थी. दोनों hi बेहद hi ख़ूबसूरत ड्रेस पहनी हुई थी.

और गाडी में संग बैठ वो रवाना हो गयी.

पर उन्हें नहीं पता था...

की इस वक़्त उनके पीछे कौन आ रहा था.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


लिखे करना न भूलियो.
 
11 से 11:30 के बीच आ जाएगा.

थोड़ा सा काम बचा है. 😁
 
Back
Top