Incest यह क्या हुआ - Page 17 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

राजेश को कंधे का सहारा देकर, स्वीटी राजेश को उसके कमरे मे लायी। कमरे में पहुंचते ही राजेश बेड पर सो गया, वह नशे में था।

Switi _लो भैया आपतो आते ही, बिना जूता और कपड़ा निकाले ही सो गए। ओ जो मुझे ही निकालना होगा।

स्वीटी राजेश का जूता निकाल दी। फिर उसके शर्ट का बटन खोल कर उसे पेट के बल लिटाया और उसका शर्ट भी निकाल दी।

राजेश नशे की हालत में लड़खड़ाते जुबान से बोला ,,

Switi रहने दे, क्या कर रही है, जाओ तुम भी सो जाओ।

स्वीटी _भैया, अपने कपड़े तो निकाल लो, कही मां आ गई तो उन्हे पता चल जाएगा की आप शराब पीकर आए हो और बिना कपड़ा निकाले सो गए।

राजेश नशे में बोला,,

अरे स्वीटी, तू तो बड़ी समझदार हैं, निकाल दे मेरा पेंट भी,,

स्वीटी ने राजेश के जींस का बटन खोल कर जैसे ही पैर से नीचे की ओर खींचा,

स्वीटी की नजर राजेश के अंडर वियर पर गई।

अंडर वियर पर एक बड़ा सा उभार से साफ पता चल रहा था की राजेश का land अंडर वियर के अन्दर खड़ा हुआ है।

स्वीटी ने जींस को पैरो से खींचकर अलग कर देने के बाद, वह उस उभार को ही देखने लगी। स्वीटी की का मन राजेश के land Ko पकड़ने का होने लगा।

उसकी शरीर में रक्त संचार बड़ गई।

जींस के उतरते ही राजेश का land को थोड़ा आजादी मिलने से वह और फूल गया।

स्वीटी के अंदर अजीब सी बेचैनी पैदा होने लगी। उसका मन राजेश का land को देखने, पकड़ने का होने लगा, उसकी chut फूलने पिचकने लगी।

स्वीटी _भैया आपको बाथरूम वगेरा तो नही जाना है न। कही ऐसे हालत में बाथरूम गए तो आप गिर सकते हैं,आपको चोट लग सकती हैं।

मै तो कहती हूं चलो मैं आपको बाथरूम ले चलती हूं।

राजेश _स्वीटी पेशाब तो लगी है पर तू रहने दे तू जा अपने कमरे में जाकर सो जा, राजेश लड़खड़ाते हुवे जुबान में कहा।

Switi _भैया मैंने पहले भी तो पेशाब करने में तुम्हारी मदद की है चलो, आप पेशाब कर लो, कही प्रेसर ज्यादा बढ़ गया तो, दिक्कत हो जायेगी।

स्वीटी ने राजेश का हाथ पकड़ कर खींचा,,

और बेड से उठाकर अपने कंधे से सहारा दिया,,

राजेश _switi रहने दे तू क्यू तकलीफ उठा रही है, तू बड़ी जिद्दी है,, नशे में लड़खड़ाते जुबान से कहा,,

स्वीटी _भैया, मै तुम्हारी बहन हूं तुम्हारी इतनी मदद नहीं कर सकती।

राजेश को कंधे से सहारा देकर स्वीटी राजेश को बाथरूम ले गई।

स्वीटी_ लो भईया, आप पेशाब कर लो।

रुको मैं आपका अंडर वियर थोड़ा नीचे कर दू।

स्वीटी ने राजेश का अंडर वियर को कमर से नीचे जांघो तक खीच दिया।

राजेश का land हवा में आजाद हो चुका था।

राजेश का खड़ा land देखकर स्वीटी की boor में पानी भर गया।

उसकी सांस तेज हो गई।

उसकी दिल की धड़कन बड़ चुकी थी।

स्वीटी _भैया अब पेशाब करो।

राजेश ने दबाव डाला,land से मूत की धार निकली जो इधर उधर बाथरूम की दीवारों पे जाने लगी।

स्वीटी _ओ हो भईया, पेशाब तो इधर उधर जा रहा है। पकड़ कर करो ना,,

राजेश तो नशे में था, वह एक हाथ से पकड़ कर पेशाब करने लगा पर वह बाथरूम की दीवारों पर ही मूतने लगा।

स्वीटी _ओहो भैया, स्वीटी ने राजेश के land को अपने हाथों से पकड़ लिया।

लो भैया अब करो।

राजेश ने प्रेसर डाला, अब पेशाब सही जगह पर गिरने लगा।

राजेश का land खड़ा होने के कारण पेशाब रूक रूक कर निकलने लगा।

जब पेशाब निकलना बंद huwa तब

Switi _भैया हो गया क्या?

Rajesh _स्वीटी और तो लगी है पर पेशाब बाहर नहीं आ रही। नशे में कहा,

स्वीटी ने राजेश के लेंड को आगे पीछे हिलाई, उसे मूठ मारी, जिससे से राजेश का पेशाब रूक रूक कर बाहर निकलने लगा।

लेकिन switi की मुलायम हाथों से रगड़ खाने से राजेश के land और तन कर सख्त हो गया।

वैसे भी सुजाता और रीता की जबरदस्त chudai करने के बाद भी राजेश अभी तक झड़ा नहीं था, जिसके कारण उसका land में तनाव बना huwa था जब स्वीटी ने मूठ मारा तो land पूरी तरह अपनी

अपनी औकात में आ गया।

अब राजेश को स्वीटी का मूठ मारना बहुत अच्छा लग रहा था।

इधर स्वीटी की boor से भी पानी छुटने लगा था।

स्वीटी _भईया आपका तो एकदम सख्त हो गया हैअब लगता इससे मूत नही, दूसरा पानी बाहर आना चाहता है, क्या मै आपका दूसरा पानी निकालने में मदद कर दू।

राजेश _switi कही मां आ गई तो,

स्वीटी _भईया, मै जल्दी से कर देती हूं चलो बेड में चलते हैं, आप ठीक से खड़े नही हो पा रहे।

स्वीटी ने राजेश को सहारा देकर बेड पे ले जाकर लिटा दिया, और उसका अंडर वियर निकाल दिया।

फिर उसने अपनी नाइटी निकाल दिया।

वह सिर्फ पेंटी और ब्रा में थी। उसकी चूची ब्रा से बाहर आने बेताब थे।

राजेश नशे में था, जब राजेश ने switi को देख तो वह उसे कामुक औरत नजर आने लगा।

स्वीटी ने बेड पर बैठ गई और राजेश के land को मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश के land पर रीता की boor का पानी सुख कर जम गया था।

जब स्वीटी ने land मुंह में भर कर चूसने लगी तो उसे land का सी नमकीन लगा।

Switi _भैया, तुम्हारे land का स्वाद नमकीन लग रहा है कही तुमने किसी की boor तो नही मारी।

राजेश _अरे, हा स्वीटी दो औरतों की boor चोदा लेकिन झड़ा नहीं हूं।

स्वीटी _भैया, तभी जब तुम यहां आए तनी से आपका land तना हुआ है।

स्वीटी ने राजेश का land मुंह में भर कर सका सक चूसना शुरु कर दी।

राजेश को बहुत अच्छा लग रहा था, वह स्वीटी की सिर का बाल पकड़ लिया।

कुछ देर चूसने के बाद switi ने अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी, और पुरी नंगी हो गई।

राजेश नसे में था, उसे switi किसी कामुक स्त्री नजर आने लगा।

वैसे भी switi बहुत खुबसूरत थी उसका पुरा बदन एकदम तराशा huwa था, उसकी चूची बड़ी बड़ी सुडौल हो चुकी थी,boor एकदम मस्त फूली हुई चिकनी, जिसे देखकर राजेश का land और शख्त हो गया।

स्वीटी _भईया, आप मेरी चूची चूसो ना, मुझे भी अछा लगेगा।

स्वीटी ने अपना एक चूची राजेश के मुंह में डाल दिया।

राजेश को नशे में स्वीटी एक बच्ची नहीं बल्कि एक कामुक औरत नजर आ रहा था।

वह देती की चूची को मुंह में भर कर चूसने लगा।

स्वीटी _सिसकने लगी।

राजेश स्वीटी के दोनों चुचियों को मसल मसल कर पीने लगा।

स्वीटी बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

उसकी boor से पानी झरने की तरह बहने लगा।

स्वीटी_भैया आप मेरे ऊपर आकार चूसो।

Switi बेड पर लेट गई और राजेश को अपने ऊपर खींच लिया।

इधर राजेश को भी चोदने का बड़ा मन हो रहा था, वह दो औरतों को जबरदस्त चोदने के बाद भी झड़ा नहीं था, उसका land फिर से boor खोज रहा था।

नशे में राजेश को switi एक बच्ची नहीं बल्कि एक कामुक और प्यासी औरत नजर आ रहा था।

वह स्वीटी के ऊपर आ गया और उसकी चूची को मसल मसल कर पीने लगा।

स्वीटी बहुत अधिक chudas हों गई,

राजेश उसकी नाभी को चूमते हुए नीचे गया और मस्त फूली हुई chut को मुंह में भर कर चूसने लगा।

राजेश की इस हरकत से switi आनंद के मारे सिसकने एवम चीखने लगी।

Switi _भैया मुझे बर्दास्त नही हो रहा चोदो मुझे नही तो मर जाऊंगी। आह मां,, चोदो मुझे दिखाओ अपनी मर्दानगी,,switi चिल्लाई।

राजेश भी नशे में था, वह भूल गया की उसकी मां ने switi se दूर रहने कहा है।

उसे भी boor चोदकर झड़ने की प्रबल इच्छा हो रही थी।

राजेश switi की टांगो को फैला कर इसके बीच में आ गया।

राजेश ने अपना land switi की boor के फांकों के बीच रखा।

Switi _डाल दो भैया, बना दो मुझे कली से फूल।

राजेश ने एक हल्का सा दक्का मारा पर land boor में नही गया, फिसल गया।

Switi ने अपने मुंह में अपनी ब्रा डाल ली।

राजेश का land अपने हाथों से पकड़ कर अपने boor के छेद पर रखा और बोला।

Switi _भैया, अब मारो।

राजेश ने एक जोर के धक्का मारा।land boor की झिल्ली को फाड़कर अंदर घुस गया।

स्वीटी दर्द से चीखना चाही पर घू घु करते रह गई।

उसकी boor का सिल टूट चुका था, खून बहने लगा।

राजेश को भी चोदने का बड़ा मन हो रहा था वह नशे मे था, वह land को थोड़ा बाहर खींचा और फिर से गछ से पेल दिया।land इस बार सरसरता huwa आधा अन्दर घुस गया।

स्वीटी के तेज दर्द huwa, उसकी आंखों में आंसू आ गया।

वह चीखना चाही पर मुंह में कपड़ा होने के कारण चीख न पाई।

इधर राजेश जोश में था वह झड़ना चाहता था।

वह रुका नही और land को boor से बाहर खींच कर घच घच्च चोदना शुरू कर दिया।

Boor से खून निकल कर बेड सीट परटपक रहा था।

इधर राजेश ने chudai बंद नहीं किया gach gach चोदना जारी रखा।

और land धीरे धीरे boor को खोलने लगा अपनी जगह बनाने लगा।

स्वीटी को दर्द हो रहा था।

पर वह राजेश को रोकी नही सारा दर्द सह ली, क्योंकि ये मौका वह खोना नही चाहती थी।

धीरे धीरे switi का दर्द कम होने लगा और मजा मिलना अब सुरू होने लगा।

राजेश स्वीटी की चूची को मसल मसल कर gach gach चोदना जारी रखा,। अब boor से खून निकलना बंद हो गया और फिर पानी छूटना सुरू हो गया।

Switi को अब chudai में मजा आना शुरू हो गया वह राजेश की कमर को कस लिया।

इधर राजेश का land switi के boor में एकदम कसा कसा हुआ अंदर बाहर हो रहा था।

राजेश को बहुत मजा आ रहा था।

राजेश झड़ना चाहता था इसलिए बिना रुके gach gach boor चोदे रहा था।land को boor ने पुरी निगल लिया था।

इधर स्वीटी को दर्द के साथ मजा आना शुरू हो गया था।

उसके मुंह से सिसकारी निकल कमरे में गूंज रहा थी।

इधर राजेश पूरे जोश में आकर switi की boor खोदने में लगा हुआ था।

स्वीटी की boor से पानी झड़ना सुरु हो गया।

स्वीटी को भी अब बहुत मजा आने लगा।

वह जन्नत में पहुंच गई। जिस चीज को पाने वह कितने दिनों से तड़फ में थी आखिर आज उसे मिल ही गई।

स्वीटी भी कमर उछाल उछाल कर राजेश का साथ देने लगी।

इधर राजेश पूरे जोश में land को बुर में पेले जा रहा था। लन्ड गपा गप अंदर बाहर हो रहा था।

स्वीटी तो स्वर्ग की सैर कर रही थी। वह ख़ुद को रोक न सकी और आह मां मर गई आह मैं,,, गई,,,

वह झड़ने लगी,,

इधर राजेश रुका नही और लागतार दनादन चोदता रहा और वह भी,,, आह मां आह करके कराहते हुवे स्वीटी की बुर में ही लंबी लंबी पिचकारी मारते हुवे झड़ने लगा।

फिर स्वीटी को जब राजेश का वीर्य योनि में जाते हुवे महसूस की तो वह उस परम आनद को फिर से प्राप्त कर फिर से झड़ने लगी।

राजेश बेड पर ही एक और लुड़क गया।

स्वीटी कुछ देर राजेश से चिपकी रही।

फिर वह जब बेड से उठी तो उसे अपनी बुर में तेज जलन और दर्द महशूष की। वह ठीक से चल नही पा रही थी।

वह किसी तरह बाथरूम गई और पानी से नहाने लगी बुर से वीर्य अभी भी निकाल रहा था।

उसे अपनी बुर की हालात देख मुस्कुराने लगी।

वह अपनी कपड़ा उठाई और अपने कमरे में जाकर ऐसे ही नंगी सो गई।
 
राजेश जब सुबह उठा, तब अपने को बिस्तर पर नंगा लेटा पाया, उसने याद करने की कोशिश किया की कल क्या हु़वा। उसे याद आया की कल रात पार्टी में दोस्तो ने जबरदस्ती शराब पीला दिया था और शराब के नशे में घर पहुंचा था, तब स्वीटी ने दरवाजा खोली।

उसके बाद स्वीटी ने ही सहारा देकर कमरे तक लाया था।

उसके बाद उसके बाद उसे लगने लगा की जरुर उनसे बहुत बड़ी गलती हुई है।

तभी उसकी नजर बेड पर पड़े लाल धब्बे पर पड़ा।

राजेश _ये बेड पर लाल धब्बा कैसे आया।

वह उस धब्बे को उंगली से रगड़ कर देखा।

राजेश _ये तो खून के धब्बा लग रहा है।

राजेश जब सुबह उठा, तब अपने को बिस्तर पर नंगा लेटा पाया, उसने याद करने की कोशिश किया की कल क्या हु़वा। उसे याद आया की कल रात पार्टी में दोस्तो ने जबरदस्ती शराब पीला दिया था और शराब के नशे में घर पहुंचा था, तब स्वीटी ने दरवाजा खोली।

उसके बाद स्वीटी ने ही सहारा देकर कमरे तक लाया था।

उसके बाद उसके बाद उसे लगने लगा की जरुर उनसे बहुत बड़ी गलती हुई है।

तभी उसकी नजर बेड पर पड़े लाल धब्बे पर पड़ा।

राजेश _ये बेड पर लाल धब्बा कैसे आया।

वह उस धब्बे को उंगली से रगड़ कर देखा।

राजेश _ये तो खून का धब्बा लग रहा है।

राजेश का दिल घबरा गया, कही कोई अनर्थ न हो गया हो।

वह अपना लोअर और टी शर्ट पहन कर स्वीटी के रूम की ओर गया।

वह दरवाजा खटखटाया, स्वीटी इस समय नंगी सोई हुई थी।

दरवाजा खटखटाने की आवाज़ सुन कर वह, घबरा गई कही मां तो नही आ आई है।

वह अपने सारे कपडे छुपाई और अपनी बदन पर टावेल लपेट ली।

उसकी chut सूज गया था, उसे दर्द महशूस हो रहा था।

लंगड़ाती हुई वह दरवाजा केपास पहुंचीऔर दरवाजा खोली ।

स्वीटी _भैया आप, इस समय।

राजेश _हा स्वीटी, कल रात मैं घर आया तो नशे में था। मुझे डर है कि कुछ अनर्थ न हो गया हो, मै तुमसे पूछने आया हूं।

स्वीटी _आओ भैया अंदर आओ।

स्वीटी अंदर गई तो लंगड़ाते हुवे गई।

राजेश _स्वीटी तुम लंगड़ा क्यू रही हो? कहीं चोंट लगी है क्या?

स्वीटी बेड पर जाकर बैठ गई।

स्वीटी _भैया ये दर्द आपने दिए है।

राजेश _स्वीटी ये तुम क्या कह रही हो, सच सच बताओ की कल रात क्या huwa था।

स्वीटी _भैया, कल रात वो सब हो गया जो नही होना चाहिए था।

तुमने शराब के नशे में मेरी सिल तोड़ दी।

राजेश _स्वीटी ये तुम क्या कह रही हो, कह दो की ये सब झूठ है, मै ऐसा नहीं कर सकता।

स्वीटी _मै सच कह रही हूं भैया, तुम्हें यकीन नही हो रहा है तो, अपने बेड को देखना उसमे निशान होगा।

और ये देखो मेरी बुर की आपने क्या हालात कर दी है।

स्वीटी ने टावेल हटा कर अपनी बुर दिखाया।

राजेश ने स्वीटी की बुर की ओर देखा। जो बुरी तरह सूजा huwa दिख रहा था।

राजेश ने अपना सिर पकड़ कर बेड पर बैठ गया।

राजेश _हे भगवान, ये क्या हुआ, आखिर मुझसे ये अनर्थ कैसे हो गया?

मां को पता चलेगा तो,, क्या होगा? मां मुझ पर कितना भरोसा करती है? मै उसके सामने कैसे जाऊंगा?

मां के सवालों का सामना कैसे करूंगा।

राजेश की आंखो से आंसू बहने लगा।

स्वीटी _भैया ये क्या? आप रो रहे है?

स्वीटी भैया, आप रोइए मत। इसमें गलती मेरी भी है मैंने आपको रोका नहीं।

मै भी काम वासना के वशीभूत हो गई थी।

जो हो रहा था वह हो जानें दिया, इन सबके लिए आप अकेले जिम्मेदार नहीं हैं।

राजेश _नही स्वीटी इन सब के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं। तुम तो अभी बच्ची हो। क्या अच्छा है क्या बुरा है इसकी समझ अभी तुम्हें नही है।

गलती मेरी है मै शराब पीकर घर आया और शराब की नशे में तुम्हें एक औरत समझ कर इतना बड़ा अनर्थ कर बैठा।

स्वीटी _भईया, जो huwa उसे भूल जाओ, तुम्हें आत्मग्लानि करने की जरूरत नहीं।

रही बात मां की जानने की तो मां को पता नही चलेगा, इस बारे में आप चिंता न करे।

राजेश _पर, मां को पता चला तो,,,

स्वीटी _जब पता चलेगा, मै सम्हाल लूंगी आप टेंशन न ले।

राजेश _पर स्वीटी, मुझे आत्मग्लानि महसूस हो रही है। मै मां से आंख मिला कर बात नही कर सकूंगा। मैंने उसका भरोसा तोड़ा है।

स्वीटी _भैया मैंने कहा न आपको आत्मग्लानि महसूस करने की जरूरत नहीं है।

दुनिया में कई भाई बहन है जिनके बीच ऐसा संबंध बन जाते है। हम अकेले नही है?

स्वीटी ने राजेश के सिर के अपने सीने से लगा कर उसके बालो को प्यार से सहलाते हुवे समझाने की कोशिश करने लगी।

राजेश _बेड के चादर के ऊपर जो खून के धब्बे लगे हैं। मां की नजर उस पर पड़ी तो।

स्वीटी _वह चादर मै बदल दूंगी वैसा ही चादर मेरे रूम में भी है।

मै उसे ले आती हूं, अब चलो तुम भी अपने कमरे में, कही मां यहां आ गई तो सवाल पूछेगी?

राजेश अपने कमरे में आ गया, स्वीटी भी अपने शरीर पर नाइटी डाल लंगड़ाती हुई राजेश के कमरे में पहुंची।

राजेश _स्वीटी मां पूछेगी की तुम लंगड़ा कर क्यू चल रही हो तो क्या जवाब दोगी?

स्वीटी _मै मां से बोल दूंगी की, नहाते समय मेरा पैर साबुन पर चला गया तो मैं फिसल कर गिर गई।

कमर पर मोच आ गई है।

स्वीटी, अपने कमरे से लाई वैसे ही चादर को राजेश के बेड पर बिछा दी और राजेश की रूम का खून का धब्बा लगा चादर अपने साथ ले गई।

जाते समय,, स्वीटी बोली,,

अछा भैया अब मै अपने कमरे में चलती हूं तुम घर में बिल्कुल नार्मल व्यवहार करना जैसे कुछ हुआ ही नहीं है।

स्वीटी अपने कमरे में जाकर उस चादर को फैला कर देखने लगी और मुस्कुराने लगी।

स्वीटी उस चादर को धोने के लिए बाथरूम ले जा रही थी कि तभी वह कुछ सोंचि और रूक गई।

स्वीटी _नही मै इसे धोऊंगी नही, इसे अपने पास सम्हाल कर रखूंगी।

यह भैया और मेरी प्रथम मिलन की निशानी है, यह मुझे हमेशा याद दिलाएगी। मेरी भईया की प्यार की।

वह उस चादर को छुपा कर रख दी।

इधर राजेश आज पहले अच्छे से नहा लिया, क्यू की उसके शरीर से अभी भी शराब की बू आ रही थी।

नहाने के बाद वह जिम के लिए निकला।

जब वह जिम के लिए निकला, उसने अपनी मां सुनीता को किचन में काम करते देखा।

राजेश _गुड मॉर्निंग मां।

सुनीता _अरे उठ गया बेटा, मै तो सोच रही थीं की तुम कल देर रात में आए हो तो लेट से उठोगे।

माफ करना बेटा मै कल रात स्वीटी को चेता कर सो गई ।

राजेश _मॉम माफी तो मुझे मांगनी चाहिए, मेरे कारण आपको परेशानी होती है।

तभी सुनीता राजेश के पास आई।

सुनीता _बेटा, तु ये क्या कह रहा है, तुम्हारे कारण मुझे परेशानी।

लोग आज चारो तरफ तुम्हारी तारीफ कर रहे है मै धन्य हूं जो मेरे कोख से तू जन्म लिया।

राजेश _सच मां तुम मुझसे नाराज़ नही हो।

राजेश अपनी मां को सीने से लगा कर कहा।

सुनीता ने भी राजेश को अपने सीने से लगा लिया।

राजेश _नही बेटा मै तुमसे नाराज नहीं हूं। मुझे तुम पर गर्व है।

राजेश _ओह थैंक यू मॉ।

सुनीता _अब जाओ बेटा, तुम जिम से जल्दी आना मै तुम्हारे लिए तुम्हारे मन पसंद का नाश्ता बना रही हूं।

राजेश _ठीक है मॉ।

राजेश जानें लगा,, तभी सुनीता बोल पड़ी

मै खुश हूं की मेरा बेटा अब शरीफ हो गया है,,

राजेश जो जा रहा था वह रुक गया,,,

राजेश _मां तुमने कुछ कहा?

सुनीता _मेरा बेटा अब शरीफ हो गया है, यह बोली।

राजेश _ऐसा क्यू लगा?

सुनीता _अपनी मां के साथ बदमाशी जो नही कर रहा है।

राजेश सुनीता के पीछे गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया।

सुनीता _अरे क्या कर रहा है छोड़ मुझे फिर से बदमाशी करने लगा।

राजेश _मेरी मां को मेरा बदमाशी करना अच्छा लगता है इसलिए।

राजेश ने सुनीता को पीछे से जकड़ कर अपना land उसकी गाड़ के दरार में घुसा दिया।

फिर उसकी गाल को चूम लिया।

सुनीता _अरे छोड़ मुझे, कही स्वीटी या तुम्हारे पापा आ गए तो क्या समझेंगे?

राजेश _कहेंगे, एक बेटा अपनी मां से प्यार कर रहा है?

सुनीता _ऐसे चिपक कर कोई प्यार करता है क्या?

राजेश _हम तो करते है अपनी मां से।

राजेश ने अपनी मां का मुंह अपनी ओर किया फिर उसकी ओंठ अपने मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुनीता _ऊं हूं,, बेशरम छोड़ मुझे। तू बड़ा गंदा है।

राजेश _मां हमने आपका मान सम्मान बढ़ाया इसका इनाम तो हमे मिलना चाहिए न।

सुनीता _कैसा इनाम चाहिए तुम्हें?

राजेश _जन्नत की सैर करने वाला?

सुनीता _मै कुछ समझी नहीं।

राजेश ने धीरे से सुनीता के कानो में कहा,,

राजेश _मुझे आपके साथ जन्नत की सैर करनी है।

यहां तो कहीं जन्नत नही जहां तू सैर करना चाहता है।

राजेश और सुनीता दोनों उत्तेजित हो गए थे।

राजेश ने खड़े land को सुनीता के गाड़ में दबाते हुवे कहा।

राजेश ने सुनीता की कानो में धीरे से कहा,,

आप ही तो बताई थीं न ओ करने से जन्नत जैसा मज़ा आता है?

सुनीता _मैंने कब कहा? मुझे तो नही पता की क्या करने से जन्नत जैसा मज़ा आता है? कुछ ठीक से बताओ,मै भी तो जानू।

राजेश _ओ मां मैं कैसे कहूं मुझे शर्म आ रही है।

सुनीता _अच्छा, शर्मा रहा है तो जन्नत की सैर कैसे करेगा?

बोलो इनाम में क्या चाहिए, शर्म छोड़ कर खुल कर बताओ।

राजेश _कही तुम नाराज हो गई तो।

सुनीता _अच्छा बाबा नाराज नहीं होऊंगी अब बताओ क्या चाहिए तुम्हें इनाम में?

राजेश ने सुनीता की कानो में धीरे से कहा, आपकी chut,

और सुनीता की बुर को कपड़े के ऊपर से सहला दिया।

पहले तो सुनीता सिहर उठी, पर अपने को सम्हालती हुई बोली।

सुनीता _चल हट, छोड़ मुझे ,ये चीज नही मिल सकती तुम्हें इनाम में । कुछ दूसरा चाहिए तो बोलो।

राजेश _न, मुझे तो यही चाहिए, बस अब देना न देना आपकी मर्ज़ी।

सुनीता _ठीक है, आगे सोचेंगे, कभी मन किया इनाम देने की तो,,,

राजेश खुश हो गया,,

राजेश _मां सच, मुझे इंतजार रहेगा उस पल का।

अब मैं चलता हूं, बाई मां,

सुनीता _bye बेटा।

राजेश जिम चला गया और वहां 1घंटा पसीना बहाने के बाद घर आया और आते समय मेडिकल से दर्द निवारक गोली और सूजन कम करने का मलहम खरीद लिया।

राजेश जब घर आया।

सुनीता _आ गया बेटा।

राजेश _हां मां।

सुनीता _जाओ बेटा नहाकर जल्दी तैयार हो जाओ फिर मै नाश्ता लगाती हूं।

स्वीटी को भी कह देना नहाकर तैयार हो ने, वह भी अभी तक कमरे से निकली नही है।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश स्वीटी के कमरे में गया, जो अभी भी लेटी थी।

राजेश _स्वीटी, देखो मैं क्या लाया हूं?

ये दवाई।

स्वीटी _ओह थैंक यू भईया।

राजेश _मां तुम्हें नहाकर तैयार हो ने बोली है नाश्ता के लिए।

स्वीटी _ठीक है भईया।

राजेश _स्वीटी तुम ठीक तो हो न, मुझे माफ कर दो कल की गलती के लिए।

स्वीटी _भईया मैंने कहा न इसमें मेरी भी गलती है, आपको माफी मांगने की आवश्यकता नहीं।

राजेश और स्वीटी दोनों नहाकर तैयार होकर नाश्ता के लिए डाइनिंग हॉल में पहुंचे, वहा शेखर और सुनीता पहले से मौजूद थीं।

जब सुनीता ने स्वीटी को लंगड़ाकर चलती हुई देखी,,

सुनीता _स्वीटी, तुमको क्या huwa हैं,लंगड़ाकर क्यू चल रही हो ।

स्वीटी _ओ मां क्या है न की मै बाथरूम में नहा रही थी कि मेरा पैर फिसल गया।

शेखर _ओह बेटा ज्यादा चोट तो नही आई।

Switi _ओह पापा, कमर पे थोड़ा मोच आ गया है, पर मै ठीक हू चिंता की कोई बात नही।

शेखर _बेटा अगर ज्यादा प्रॉब्लम हो तो डॉक्टर को दिखा देना।

स्वीटी _नही पापा ज्यादा चोंट नही आई है, मैंने मूव से नहाने के बाद मालिश की काफी राहत मिली है मै ठीक हो जाऊंगी।

सुनीता _स्वीटी, अगर ज्यादा प्रॉब्लम हो तो मैं तुम्हें डॉक्टर के पास ले चलूंगी।

स्वीटी _मां, कहा न ज्यादा चोट नहीं आई है मै ठीक हो जाऊंगी।

फिर सभी नाश्ता करने लगे।

अगले 3दिन स्वीटी घर में ही रही।

कालेज नही गई तीन दिन बाद उसकी chut का सूजन खत्म हो चुका था। वह अब लंगड़ाकर नही चल रही थीं।

सुनीता सुबह स्वीटी के रूम में पहुंची।

सुनीता _बेटा अब तुम्हारा कमर दर्द कैसा है?

स्वीटी _मां अब मै बिल्कुल ठीक महसूस कर रही ही।

सुनीता _बेटा, वार्षिक एग्जाम बिल्कुल पास आ गया है। कालेज मिस करना ठीक नहीं।

स्वीटी _जानती हूं मां, आज से मैं कालेज जाऊंगी।

सुनीता _गुड बेटा।

स्वीटी और राजेश दोनों बाइक से कालेज के लिए निकले रास्ते में,,

राजेश _स्वीटी तुम हमारे बीच जो huwa उसका जिक्र किसी न करना अपने सहेलियों से भी नही।

स्वीटी_ भईया मै इतनी नादान भी नहीं की ऐसी बाते किसी से शेयर करुंगी।

आज रोहन और उसके दोस्त भी लगभग ठीक होकर कालेज आ रहे थे।

राजेश और भगत, दोस्तो के साथ कैंटीन में बैठे थे तभी वहां रोहन और उसके दोस्त भी वहा पहुंचे।

राजेश _आओ रोहन बैठो,,

अब कैसी तबियत है तुम्हारी?

रोहन ने राजेश को को गले लगाया।

रोहन _ठीक हूं भाई।

सब आपकी ही मेहरबानी है जो हम आज सही सलामत है।

आप लोग कैसे है?

राजेश _हम सब तो मजे में है अब आप लोग ठीक हो कर आ गए हो तो अब मजा दोगुना हो जायेगा।

भगत ने वेटर से सबके लिए काफी मंगाया।

सभी एक दूसरे से बातचीत करते हुवे काफी का आनंद लेने लगे।

क्लास की बेल लगने पर सभी अपने अपने क्लास में चले गए।

दोपहर लंच के समय स्वीटी , रोहन से मिली,

स्वीटी _हाई रोहन कैसे हो, अब तुम्हारी तबियत कैसी है।

रोहन _मै अब बिल्कुल ठीक हूं, स्वीटी ।

चलो थोड़ा गार्डन में बैठते है।

दोनों गार्डन पे पेड़ के नीचे बैठ कर वार्तालाप करते हैं।

स्वीटी _कुछ दिनों में एक्जाम सुरू होने वाला है, अब तो पढ़ाई पर फोकस करना पड़ेगा।

रोहन _हा, वो तो है।

स्वीटी , तुम मेरे साथ डिनर पर जानें बोली थी। कब चले?

स्वीटी _हा, कहा था?

पर इसके लिए घर वालो से कोई बहाना बनाना पड़ेगा।

देखती हूं आज कोई बहाना मिला तो मैं फोन कर बताउंगी।

रोहन _ठीक है, मै इंतजार करूंगा, तुम्हारी फ़ोन का।

इधर कैंटीन में राजेश भगत, निशा और सीमा बैठ कर बाते कर रहे थे तभी रिया और उसकी सहेली वहा पहुंची।

रिया _हाई राजेश, हाई निशा, कैसे है आप लोग।

राजेश _ओह,हाई रिया हम सब अच्छे है, पर तुम यहां, पहली बार देख रहे हैं कैंटीन में।

रिया _मै आप ही लोगो से मिलने आई थी। माफी मांगने।

राजेश _उस दिन नशे में आपके साथ बदतमीजी करने लगी थी। अच्छा किया निशा जो तुमने मुझ थप्पड़ मारा।

मुझे अहसास कराई की मै गलत कर रही थीं।

लगता है निशा तुम अब भी मुझसे नाराज़ हो।

निशा _ओह माफी तो मुझे मांगनी चाहिए, मैंने कुछ ज्यादा रिएक्ट कर दिया, सबके सामने मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।

सॉरी

रिया _निशा, कुछ समय तो मुझे बुरा लगा पर बाद में मुझे अहसास huwa की सच में मै गलत कर रही थी। इस लिए अपनी मन की बात आप लोगो से कहने आई थी।

भगत _अब जो huwa उसे भूलना ही बेहतर है। बताइए किसको किसको काफी पीना है।

रिया _आज काफी मै पिलाऊंगी,सबको।

रिया ने सबके लिए काफ़ी का आर्डर दिया।

सीमा _रिया,अगर आप को बुरा न लगे तो एक बात पूछूं।

रिया _सीमा, जो भी पूछना है बेझिझक पूछ सकती हो, मै बुरा नही मानूंगी।

सीमा _विकी और तुम तो बड़े अच्छे दोस्त थे, फिर आप दोनों का ब्रेक अप कैसे हो गया?

रिया _सीमा, विकी मुझसे शादी के लिए प्रपोज किया था,पर उसमे वो बात नही है, जो मुझे मेरे पति में देखना चाहती हूं।

मैंने शादी के लिए मना कर दिया, तो उसे बुरा लगा।

फिर उसके पास कुछ मेरी कुछ पर्सनल फोटोग्राफ्स है जिसको दिखाकर वह मुझे ब्लैक मेल करने लगा।

बाद में मुझे पता चला कि उसकी नजर मेरी दौलत पर थी। सच्चाई पता चलने पर मैंने उससे ब्रेक अप कर लिया।

आज के समय में सच्चा प्यार मिलना काफी मुस्कील होता है।

सीमा _हूं, वो तो है।

इतने में वेटर काफी लेकर आ गया।

सभी काफी पीने लगे।

रिया _आप लोगो के साथ काफ़ी पीना अच्छा लगा, सोच रही हूं, लंच के समय मै भी कैंटीन में आ जाया करू। आप लोगो के साथ काफ़ी पीने, आप लोग बुरा तो नही मानेंगे।

भगत _नही, रिया जी इसमें बुरा मानने की क्या बात है? यह कैंटीन तो सबके लिए है। और हम यहां के छात्रसंघ के अध्यक्ष है, तो हमारी जिम्मेदारी हैं, यहां के स्टूडेंट्स को कोई समस्या हो तो उसका समाधान करना। अगर विकी तुम्हें परेशान करे तो बताना हम उनसे बात करेंगे।

रिया _ओह थैंक यू भगत? सच में तुम एक दिन जरूर बड़ा नेता बनोगे। नेता बनने के सारे गुण तुम्ममे मौजूद है।

तो क्या आज से मैं आप लोगो को अपना दोस्त समझू?

राजेश _क्यू नही रिया जी, यहाँ के सभी स्टूडेंट्स को हम अपना दोस्त मानते हैं।

रिया _ओह राजेश आप लोग कितने अच्छे है।

तभी क्लास के लिए बेल बजी।

निशा _बेल लग चुकी है अब हमे क्लास के लिए निकलना चाहिए।

राजेश _ओ हा, चलो भगत हम भी निकलते हैं।

अच्छा रिया जी हम चलते हैं, फिर मिलेंगे।

रिया _ओके राजेश बाई।

उन लोगो के जानें के बाद।

रिया की सहेली, रिया से बोली,,

रिया, हमे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम वही रिया हो, निशा ने तुम्हारा सबके सामने अपमान किया है ये तुम कैसे भुल सकती हो?

रिया _मै वह अपमान भूली नहीं हूं। आज भी जब मैं निशा को देखती हूं तो मुझे थप्पड़ की गुंज सुनाई पड़ती है। अपना बदला लेने के लिए इन लोगो से दोस्ती करना जरूरी है।

मै राजेश को निशा से छीन लूंगी। वह राजेश का शक्ल देखना भी पसंद नही करेगी।

तब मेरा बदला पुरा होगा।

शाम को 7बजे स्वीटी सुनीता से,,

स्वीटी _मां, आज मेरे कालेज की एक सहेली का जन्म दिन है तो मुझे इनवाइट की है।

नही जाऊंगी तो बुरा मान जाएगी।

सुनीता _ठीक है चली जाओ पर 9बजे तक आ जाना।

स्वीटी _थैंक यू मां।

रास्ते में स्वीटी ने रोहन को फोन किया

स्वीटी _रोहन अभी कहा हो मै रास्ते में तुम्हारा वेट कर रही हूं।

रोहन _स्वीटी मै बस पहुंचने वाला हूं।

थोड़ी देर में रोहन वहा पहुंच गया फिर दोनों फाइव स्टार होटल में गए। वहा पर रोहन ने दोनों के मन पसंद डीस का आर्डर किया,,

दोनों वार्तालाप करते हुवे डिनर करने लगे। डिनर करने के बाद जब स्वीटी जानें को हुई,,

रोहन _स्वीटी, मुझे तुमसे कुछ कहना है।

स्वीटी _बोलो रोहन, ऐसा क्या बात है जो कहना बाकी रह गया है?

रोहन _रोहन हिचकते हुए कहा,, दरसल स्वीटी पता नही तुम कैसा फिल करोगी?

स्वीटी _जो भी कहना है कह दो मैं बुरा नही मानूंगी।

रोहन _मुझे तुमसे प्यार,,,,,,,हो,,, गया,,,

स्वीटी _क्या? क्या तुम सच कह रहे हो।

रोहन _हां स्वीटी, आई लव यू सो मच।

तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो? मै जानना चाहूंगा।

स्वीटी _रोहन, मै तुम्हें एक अच्छा दोस्त समझती हूं, इस बारे में कभी मैंने सोचा नहीं है।

रोहन _ठीक है स्वीटी मुझे कोई जल्दी नहीं है, इस बारे में सोचो फिर बाद में जवाब दे देना।

स्वीटी _ठीक है रोहन इस बारे में मै सोचूंगी।

अब चले,,

रोहन _ठीक है स्वीटी मै तुम्हारे जवाब का इंतजार करूंगा।

अगले दिन संडे होने के कारण कालेज में छुट्टी थी।

सुजाता ऑफिस से राजेश को फ़ोन की,,

राजेश इस समय घर पर पढ़ाई कर रहा था।

सुजाता _जानू क्या कर रहे हो?

राजेश _घर में पढाई कर रहा हूं, मैम एग्जाम अब पास आ गया है।

सुजाता _क्या तुम्हें मेरी याद नही सताती?

राजेश _याद तो सताती है पर क्या करु जान पढ़ाई भी तो जरूरी है।

सुजाता _मुझे आज तुम्हारी कुछ ज्यादा ही याद आ रही है। चलो न हम कहीं लॉन्ग ड्राइव पर चलते हैं। मुझे तुम्हारे साथ कुछ समय बिताना है।

प्लीज।

राजेश _ठीक है डियर।

सुजाता _एक काम करो,तुम मेरे ऑफिस ही आ जाओ, हम यहां से कहीं लॉन्ग ड्राइव पर चलेंगे।

राजेश _ठीक है, बेबी मै अभी आता हूं।

राजेश तैयार होकर घर से निकला,

सुनीता _बेटा कहा जा रहा है?

राजेश _मां ओ दोस्त के पास जा रहा हूं कुछ काम था।

सुनिता _बेटा अब घूमना फिरना बंद करो और पढ़ाई पर ध्यान दो, सामने एग्जाम है।

राजेश _जानता हूं मां, बस थोड़ा माइंड फ्रेश करने के लिए जा रहा हूं।

सुनिता _ठीक है बेटा जल्दी आ जाना।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपना बाइक लेकर सुजाता की ऑफिस पहुंचा।

राजेश ने सुजाता को फ़ोन किया।

राजेश _बेबी मै ऑफिस के बाहर हूं।

सुजाता ने गेट पर बैठा गार्ड को फ़ोन किया, बाहर एक राजेश नाम का लड़का खड़ा होगा उसे मेरे केबिन में ले आओ।

गार्ड ऑफिस से बाहर निकल कर देखा , उसे एक लडका खड़ा नजर आया। वह उसके पास गया

गार्ड _क्या तुम राजेश हो?

राजेश _हा।

गार्ड _आपको मैडम ने बुलाया है।

राजेश गर्द के साथ ऑफिस के अंदर गया।

वहा के कर्मचारी लोग राजेश को देखने लगे।

गार्ड ने राजेश को सीधा सुजाता के रूम में ले गया।

गार्ड _सर आप अंदर जाइए।

राजेश अंदर गया।

सुजाता अपने चेयर पर बैठी थी।

वहा पर सीमा के पापा मौजूद थे जो सुजाता के साथ किसी विषय पर डिस्कस कर रहा था।

सुजाता राजेश को देखते ही,,

आओ राजेश बैठो, हमारे ऑफिस में आपका स्वागत है।

सुजाता ने सीमा के पापा से कहा सिन्हा जी आप राजेश को जानते हैं न।

सिन्हा _मैम ये निशा और सीमा बिटिया के कालेज में पड़ता है न । आपके शादी की सालगिरह में खूब रंग जमाया था। नौजवान ने,

हैलो राजेश कैसे हो?

राजेश _हैलो सर, मै ठीक हू।

सिन्हा जी _मै सीमा का पापा हूं, बडी तारीफ करती है सीमा तुम्हारी।

सुजाता _सिन्हा जी आप शायद नहीं जानते हमारी कंपनी को मुशीबत से इसने ही बाहर निकाला।

सिन्हा जी _ओह, थैंक यू राजेश।

सुजाता _सिन्हा जी राजेश से मुझे कुछ काम है, हम बाद में डिस्कस करेंगे ।

सिन्हा _ठीक है मैम।

सीमा के पापा अपने वहा से चला गया।

सिन्हा जी के जाते ही सुजाता अपने चेयर से उठी।

और अपने दोनों हाथ राजेश के गले में डाल दी।

आ गया मेरा हीरो,,

कैसा लगा मेरा ऑफिस?

राजेश _बहुत बढ़िया।

सुजाता _और ऑफिस की मालकिन।

राजेश _उससे भी बढ़िया।

सुजाता _चल झूठा कही का, मै तुम्हें इतनी अच्छी लगती तो दिन रात मेरे नाम का माला जपते।

मुझे भूल नहीं जाते।

राजेश _तुमको कैसे भुल सकता हूं, मेरे जानें बहार।

तुम तो मेरे दिल में बसती हो।

सुजाता _अच्छा क्या मंगा ऊ तुम्हारे लिए, चाय या काफी।

राजेश _नही मुझे चाय या कॉफी पीने का मन नहीं है।

सुजाता _तो क्या पीने का मन है?

बोलो, नही तो बाद में बोलोगे की पहली बार आफिस आया हूं कुछ पिलाया ही नहीं।

राजेश _रहने दो हमे जो पसंद है वो पिलायेंगी।

सुजाता _क्या? बोलो , क्या पीना है।

राजेश _दूध

सुजाता _तो पिलो न रोका किसने है।

सुजाता राजेश को अपने चेयर में बिठा दिया और खुद उसकी ओर मुंह कर उसकी ओंठ को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी।

राजेश भी उसका साथ देने लगा।

उसके बाद सुजाता ने अपना एक चूची बाहर निकाल कर राजेश के मुंह में डाल दिया,,

लो दूध पिलो।

राजेश सुजाता की दूदू मसल मसल कर पीने लगा।

सुजाता सिसकने लगी।

कुछ देर दूदू से खेलने के बाद।

राजेश ने सुजाता को गोद से उतारा और खड़ा होकर अपने पेंट का चैन नीचे कर land बाहर निकाल लिया।

सुजाता नीचे बैठे गई और राजेश का land मुंह में भर कर चूसने लगी।

Land लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया।

अब राजेश ने सुजाता को मेज पर लिटा दिया।

उसकी पेंटी खींचकर निकाल दिया।

उसकी chut को चाटने चूसने लगा, जिससे सुजाता अत्यंत उत्तेजित होकर, सिसकने लगी उसकी chut से पानी झरने की तरह बहने लगी।

राजेश ने अपना land पकड़ा और सुजाता की दोनो टांग फैला कर बुर के छेद पर रख कर एक जोर का धक्का मारा।

एक ही झटके में land boor को फाड़कर सरसराता huwa आधे से ज्यादा अंदर चला गया।

सुजाता के मुंह से उई मां,, निकल गई।

राजेश सुजाता की दोनो चुचियों को मसल मसल कर अपना land सुजाता की बुर में gach gach पेलने लगा।

सुजाता के मुंह से मादक सिसकारी निकल कर कमरे में गूंजने लगा।

कुछ ही देर में land पूरा बुर में जड़ तक घुस कर अदंर बाहर होने लगा।

सुजाता स्वर्ग का सुख प्राप्त करने लगी।

राजेश इसी पोजीशन में सुजाता को कुछ समय तक दनादन चोदता रहा जब तक वह झड़ ना गई।

कुछ देर सुजाता मेज पर लेट कर सुस्ताने लगी फिर राजेश ने सुजाता की चेयर पर बैठ कर उसे अपने गोद पर बिठा कर उसकी होठ को चूसने एवम चुचियों से खेलने लगा।

सुजाता फिर गर्म हो गई तब राजेश ने सुजाता को थोड़ा उठाया और अपना land उसकी बुर में डाल दिया।

अब सुजाता राजेश के land पर उछल उछल कर चुदने लगी।

एक बार फिर से दोनों जन्नत में पहुंच गए, सुजाता की मादक सिसकारी कमरे में फिर से गूंजने लगीं।

कुछ देर में ही सुजाता फिर से झड़ने लगी।

सुजाता _राजेश अब बस करो, चलो कहीं घूमने चलते हैं बाकी वही कही करेंगे।

सुजाता और राजेश दोनों अपना कपड़ा ठीक कर आफिस से निकल गए।

राजेश और सुजाता दोनों कार से एकांत जगह की ओर जानें लगे जहां उसे देखने वाले कोई न हो।

इधर मौसम भी आज खराब था, रास्ते में बारिश शुरू हो गई। रास्ते मेंसुनसान जगह देखकर राजेश ने गाड़ी रोक दिया। दोनों एक दूसरे के आंखो में देखने लगे।

दोनों कार से बाहर निकल कर एक दूसरे की आंखो मे देखते हुए गीत गाने लगे।

आंखो से तुमने ये क्या कह दिया।

दिल ये दीवाना तड़फ ने लगा।

तन्हाई में हम मिले इस तरह बारिश में सोला भड़कने लगा ।

गाना खत्म होने के बाद दोनों कार में ही बैठ कर जी भर कर सेक्स किया।

और अंत में राजेश ने सुजाता की योनि में अपना सारा बीज छोड़ दिया।

दोनों कुछ देर सुस्ताने के बाद।

दोनों भीग चूके थे।

राजेश ने रास्ते में एक होटल देख गाड़ी रोक दिया और एक कमरा ले लिया, सुजाता कमरे में रुकी रही राजेश ने पास के शो रूम से सुजाता के लिए साड़ी ले आया और अपने लिए भी कपड़े खरीद लिए। उसे लेकर होटल में आया और राजेश और सुजाता दोनों अपने गीले कपड़े उतार दिया फिर दोनों एक दूसरे के भीगे बदन को देख कर फिर गर्म हो गए।

दोनों के बीच फिर से जमकर सेक्स हुआ।

राजेश ने खाने का आर्डर दिया। दोनों ने खाना खाया और कपड़े पहन कर वहा से चले गए।

राजेश जब घर पहुंचा काफी देर हो चुका था।

सुनिता _बेटा बडी देर कर दी आने में।

और ये किसका कपड़ा पहन आया, जाते समय तो दूसरा कपड़ा पहना था।

राजेश _हां मां, बारिश मे कपड़ा भीग गया था तो दोस्त ने अपना कपड़ा दे दिया, पहनने को।

राजेश अपने कमरे में जाकर फिर से पढ़ाई में लग गया।

अगले दीन राजेश जब सुबह उठा , वह सीधा किचन में गया।

और अपनी मां को पीछे से बाहों में भर कर बोला,,

गुड मॉर्निंग मां, शादी की सालगिरह मुबारक हो मां।

सुनिता _गुडमॉर्निंग बेटा, तुम्हें आज शालगिरह का दिन याद है।

राजेश _मां कैसे भुल सकता हूं, यह दिन।

मां आज तो पार्टी चहिए।

सुनिता _पार्टी अपने पापा से मांगना।

उनको तो समय ही नहीं मिल पाता, अपनी ड्यूटी से।

राजेश _मै आज पापा से बात करूंगा की आज जल्दी छुट्टी लेकर घर आ जाए फिर हम शाम को कही घूमने चलेंगे और किसी अच्छे से होटल में खाना खायेंगे।

पापा से कहूंगा की आज आप को नाराज नहीं करेंगे। आज रात आपकों जी भर कर प्यार भी करेंगे।

आज पापा को न मत कहना।

सुनीता शर्मा गई, चल हट बेशरम।

मां से गंदी बाते करता है।

राजेश _आज के दिन तो हर मर्द अपनी औरत को प्यार करता है न इसमें गंदा क्या है?

सुनीता _गंदा वो नही, गंदा ये है की तू अपनी मां से ये सब बोल रहा है।

सुनीता ने राजेश की कान खींचते हुए कहा,,

राजेश _मां छोड़ो न दर्द होता है।

अब नहीं बोलूंगा बस।

अब आया न लाइन पे,,

अच्छा मां मैं चलता हूं जिम के लिए,,

सुनीता _हू,, वैसे मुझे नही लगता की तुम्हारे पापा मुझे खुश कर पाएंगे,,

राजेश _मां आपने कुछ कहा,,

सुनीता _नही तो,,,

फिर राजेश सुनीता के पास जाकर उसके कानो पर कहा,,

मां, अगर पापा आपको खुश न कर पाए तो आप निराश न होना आपका बेटा है न आपको खुश करने के लिए,

सुनीता ने बेलन उठा कर राजेश को मारने लगीं,,

चल हट बदमाश,,

राजेश वहा से भाग गया।
 
सुबह जब सभी नाश्ता करने के लिए डाइनिंग टेबल पर बैठे थे,,

राजेश _आज तो स्पेशल दिन है, आज हमे पार्टी चाहिए। क्यू स्वीटी?

स्वीटी _हां पापा भईया, सही कह रहे हैं। आज तो पार्टी बनती है।

शेखर _तो क्या सोचा है तुम लोगो ने?

राजेश _पापा क्यू न हम शाम को कोई फिल्म देखने चले। कितने दिन हो गए हम लोगो को साथ में किसी टाकीज में फिल्म देखे। फिर वहा से हम किसी अच्छे से होटल में डिनर करेंगे।

शेखर _सुनीता तुम्हारा क्या विचार है।

सुनीता _बच्चो की खुशी में मेरी खुशी हैं जी।

शेखर _पर बेटा, कोई फिल्म भी तो अच्छी लगीं होनी चाहिए, नही तो बेकार में सर दर्द होने लगेगा।

राजेश _पापा, दोस्तो ने बताया है की अभी बहुत ही बढ़िया, कामेडी और हारर फिल्म रिलीज हुई है स्त्री२ लोग बडी तारीफ कर रहे हैं फिल्म की ,क्यू न हम वही देखने चले?

शेखर _अच्छा ठीक है।

ये बताओ मुझे कितना बजे घर पहुंचना है।

राजेश _पापा, फिल्म तो शाम 6बजे शुरू होगी। आप शाम को 5बजे के पहले घर आ जाना। आखिर तैयार होने में भी तो समय लगेगा।

शेखर _अच्छा ठीक है बाबा मै शाम को 5बजे तक घर पहुंच जाऊंगा।

राजेश _पापा आते समय, फूल चौक से,मां के लिए एक गजरा ले आना। क्यू कि आज मां दुल्हन की तरह लगना चाहिए।

सुनीता _चुप बदमाश कही का। नही जी ये गजरा वजरा लाने की कोई आवश्यकता नहीं।

शेखर _अरे बच्चे आपको दुल्हन के रूप में देखना चाहते है भई, तो उन की इच्छा तो पूरी करनी पड़ेगी।

सुनीता _आप भी न बच्चो के बातो में आ जाते हैं।

स्वीटी _मां आज मै आपको तैयार करुंगी, देखना एक दम नई नवेली दुल्हन लगेंगी।

सुनीता _चुप कर, तू भी दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है। मां को दुल्हन की तरह सजाएगी। क्या मै तुम्हारी सहेली हूं? जो मुझे दुल्हन की तरह सजाएगी।

तभी सुनीता का मोबाइल बजने लगा।

सुनीता ने अपना मोबाइल देखा, प्रिया ने काल की थी।

प्रिया _हेलो बुवा!

सुनीता _हेलो प्रिया।

प्रिया _शादी की सालगिरह मुबारक हो, बुवा।

राजेश ने याद दिलाया था की आज आपका और फूफा जी की शादी की सालगिरह है।

सुनीता _ओह, थैंक यू। प्रिया बेटा।

प्रिया _बुआ, आज तो जरूर राजेश ने कोई प्लानिंग बनाया होगा।

सुनीता _अभी सभी नास्ता कर रहे हैं, राजेश ने अपने पापा से कहा है की आज शाम को कोई फिल्म देखने चलने फिर किसी अच्छे से होटल में डिनर करने।

प्रिया _ओह ये टू बडी अच्छी बात है। बुवा हमे नही बुलाएंगी क्या, डिनर में।

सुनीता _ओह, सुनीता बेटा, तुम लोग भी चलना साथमें दामाद जी को भी ले आना।

प्रिया _बुआ, तुम्हारे दामाद जी का तो मैं कोई गारंटी नहीं ले सकती क्यू की कब कोई सिरियस केश आ जाए, कहा नही जा सकता, पर मै और पिंकी जरूर आ जायेंगे।

कितना बजे आना है?

राजेश _मां, फ़ोन मुझे दो मैं बात करता हूं दीदी से।

सुनीता _प्रिया बेटा, राजेश तुमसे बात करना चाहता है, लो बात करो, उन्ही से पूछ लेना, कब पहुंचना है?

सुनीता ने फोन राजेश को दे दिया।

राजेश _हेलो, दी।

प्रिया _हेलो, मेरा गोलू भाई, बोलो कितना बजे आना है।

राजेश _दी आप आप 4:30 तक पहुंच जाओ। और मां के लिए एक अच्छी सी दुल्हन का ड्रेस लेती आना। और पापा के लिए दूल्हे का।

प्रिया _भाई, एक काम करना मै 4बजे तुमको काल करुंगी तुम कालेज से सीधा मॉल आ जाना दोनों मिलकर बुवा और फूफा जी के लिए ड्रेस चूज करेंगे।

राजेश _हां ये आइडिया ठीक रहेगा।

ओके दी बाई, शाम को मिलेंगे।

प्रिया _ओके बाई राजेश।

सुनीता _ये कुछ ज्यादा नही हो रहा है।

Switi _मां कुछ ज्यादा नही, भईया मै भी चलूंगी आपके साथ।

राजेश _ठीक है।

नाश्ता करने के बाद, शेखर अपना आफिस जानें के लिए तैयार huwa वह सुनीता को आवाज़ लगाया।

सुनीता कमरे में पहुंची।

शेखर ने सुनीता को बाहों मे जकड़ लिया।

सुनीता _छोड़ो न जी ये आज आपको क्या हो गया है?

शेखर _मेरी जान आज हमारी शादी की सालगिरह है, आज प्यार तो बनता ही है।

सुनीता _अभी छोड़ो, रात में करना जो भी करना है।

सुनीता का दिल धड़कने लगा ।

शेखर, सुनीता को जकड़ कर एक हाथ से उसकी चूची मसलने लगा और उसकी गालों को चूमने लगा।

सुनीता सिसकने लगी।

सुनीता _अजी छोड़ो ना जो भी करना है, रात में करना।

कुछ देर मसलने के बाद शेखर ने सुनीता को छोड़ दिया ।

शेखर _अच्छा बताओ जान, आज तुम्हें कुछ चाहिए क्या?

सुनीता _मुझे कुछ नही चाहिए जी, बस आप समय पर घर आ जाना ।

शेखर _ठीक है जानेमन।

शेखर ने सुनीता की गालों पर एक और किस लिया और अपना आफिस चला गया।

इधर राजेश और स्वीटी भी समय पर कालेज के लिए अपने घर से बाहर निकले।

तभी राजेश _अरे स्वीटी मै मां से पूछना तो भूल ही गया की आज कोई सामान लेते हुए आना है क्या?

मै अभी पूछ कर आता हूं।

स्वीटी _ओ हो भैया, समय हो गया है, जल्दी करना।

राजेश _, बस अभी आया।

राजेश अपने मां के रूम में गया।

सुनीता इस समय गुनगुनाते हुए,कपड़े जमा रही थी।

राजेश _मां

सुनीता चौंकी।

सुनीता _अरे बेटा तुम लोग अब तक कालेज के लिए निकले नही।

राजेश _मां वो मै पूछने आया था कि आज कोई सामान की आवश्यकता तो नही है मैंकालेज से आते समयले आता।

सुनीता _नही बेटा। ऐसे तो किसी चीज की आवश्यकता नहीं है।

राजेश _ओह ठीक है।

राजेश ने सुनीता को पीछे से अपनी बाहों में ले लिया।

सुनीता _अरे ये क्या कर रहा है छोड़ मुझे।

राजेश _क्या बात है मॉम आज बडी खुश लग रही हो?

कितने सालों बाद आपको कुछ गुनगुनाते हुए सुना। आखिर मै भी तो जानू,,

सुनीता _नही तो ऐसी कोई बात तो नही।

अकेली होने पर गुनगुना लेती हूं, अब तुम अचानक से आ गए तो तुमको कुछ अलग लगा,,

राजेश _सच में ऐसा है,,,

मै तो कुछ और ही समझ बैठा था।

सुनीता _अच्छा, मै भी तो सुनु की तुम्हें क्या लगा?

राजेश _मुझे तो लगा की आज आप और पापा फिर दूल्हा दुल्हन बनोगी फिर पापा रात में आपका घूंघट उठा कर,,,,,,,,,,, वो करेंगे,,, इस लिए आप खुश है

सुनीता _वो क्या? मै कुछ समझी नहीं,,

राजेश _वही जो दूल्हा और दुल्हन सुहाग रात को करते है?

सुनीता _क्या करते है?

राजेश _

मां आप भी ना जान बूझ कर बडी भोली बनती हैं।

सुनीता _अरे सच बाबा मुझे नही मालूम,,

सुहागरात के दीन दूल्हा दुल्हन क्या करते है?

थोड़ा खुलकर बताओ।

राजेश का land खड़ा हो गया था, वह अपना land Ko सुनीता की गाड़ में दबाते हुए बोला,,

रहने दो आप बुरा मान जाएंगी ,,

इधर सुनीता भी पहले अपने पति फिर अपने बेटे की हरकतों से बहुत गर्म हो चुकी थीं। उसकी boor से पानी बहने लगा था।

सुनीता को भी बड़ा अच्छा लग रहा था,,

सुनीता _अरे बुरा नही मानूंगा,, सुहाग रात के दिन दूल्हा और दुल्हन क्या करते हैं?

राजेश _ठीक है थोड़ा अपना कान इधर लाना,,

सुनीता _हूं, लो अब बताओ ,,

राजेश ने सुनीता को कस कर जकड़ लिया ओर धीरे से उसकी कानो में कहा,,chudai

सुनीता का दिल जोड़ो से धड़कने लगी ,,

वह राजेश को धक्का देते हुए कहा,,

छी बेशरम,, कितनी गंदा शब्द बोलता है अपनी मां से,

तू सच में एक दम बिगड़ गया है,,

राजेश सुजाता को फिर से जकड़ लिया, और उसकी कानो में कहा,,

मैंने तो कहा था की आप बुरा मान जाएगी,, आप ने सुनने की जिद की,,

सुनीता _मुझे क्या पता था तू ये शब्द बोलेगा, अपनी मां से,

राजेश _कौन सा शब्द मां,,

सुनीता _अरे वही जो तुमने अभी बोला है।

राजेश _मां कौन सा शब्द बोला मैंने जो तुम शर्मा गई,, मै भी तो जानू।

सुनीता _अरे वही जो पति और पत्नी के बीच होता है।

राजेश _मै समझा नहीं मां खुल के बताओ,

सुनीता _अरे वही,, जो तू अभी बोला,,

राजेश_क्या मां, ठीक से बताओ क्या बोला मैं,,

सुनीता_अरे वही,, बाबा,,,,chudai,

सुनीता शर्म के मारे अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छिपा ली।

इधर राजेश का land और अकड़ गया।

राजेश ने सुनीता के कानो में धीरे से कहा,

मां आज रात पापा आपकी जी भर कर chudai करेंगे इसलिए आप खुश हैं। सच है न,,

सुनीता _चल हट बेशरम कही का,, चल जा अब कालेज,,

सुनीता राजेश को धकेलते हुए अपनी कमरे से बाहर निकाल दी,,

राजेश _ma एक किस तो दे दो,,

सुनीता _न, आज कुछ नही,, आज मै तुम्हारे बाप की अमानत हूं।

राजेश_ठीक है मां बाई,

जाते हुवे सुनीता को फ्लाइंग किस दे दिया।

सुनीता राजेश को मारने का इशारा की।

राजेश और स्वीटी दोनों कालेज निकल गए,

रास्ते में ,,

स्वीटी _भैया, आपने आने में इतनी देर क्यू कर दी।

राजेश _अरे स्वीटी, मां बाथरूम में थी ना इसलिए उसको बाहर आने में लेट हो गया,,

स्वीटी _अच्छा, यही बात है या कुछ और,,

राजेश _यही बात है स्वीटी, और कुछ नहीं,

स्वीटी _अच्छा, तो आपका ये क्यू खड़ा है?

स्वीटी ने राजेश के खड़े land पर हाथ फेरते हुए कहा ,, राजेश _स्वीटी ये क्या कर रही हो कोई देखेगा तो क्या कहेगा?

स्वीटी ने राजेश के land को पेंट के ऊपर से सहलाते हुए कहा,,

स्वीटी_पहले ये बताओ कि आपका खड़ा क्यू है?

कही मां की शादिकी सालगिरह तो सेलिब्रेट नही करने लग गए थे।

राजेश _स्वीटी, ये कैसी बाते कर रही हो,,

स्वीटी _भोले तो ऐसे पहले मां के साथ कभी कुछ किया ही नहीं, अब तक 4/5बार मां की ले ही चूके हो।

स्वीटी ने राजेश का land सहलाते हुए कहा,,

राजेश _स्वीटी, ये क्या कर रही हो, कोई देखेगा तो बदनामी होगी छोड़ो।

स्वीटी _और भईया, कही तुम्हारे दोस्तो और निशा ने देख लिया तुम्हारा land खड़ा है तो क्या समझेंगे आपके बारे में।

मै तो कहती हुं चलो किसी होटल में चलते हैं मै तुम्हें झाड़ दूंगी फिर कालेज निकलेंगे।

राजेश _पहले तू इसे सहलाना बंद कर, फिर ये अपने आप नार्मल हो जायेगा। तुम तो उसे और भड़का रही हो।

स्वीटी _भईया अब तो मैं भी गर्म हो गई हूं।

राजेश _स्वीटी, ये तुम क्या कह रही हो, अपने पर काबू रखना सीखो।

और छोड़ो इसे अब कालेज पहुंचने वाले है।

स्वीटी ने राजेश का land सहलाना बंद कर दिया।

दोनों कालेज पहुंचे,,

राजेश का land कुछ देर बाद नार्मल होने लगा,,

जब राजेश नार्मल huwa तब वह क्लास में गया।

छूटी के समय 4बजे प्रिया ने राजेश को काल की।

प्रिया _राजेश तुम मै x मॉल पे तुम्हारा वेट कर रही हूं।

राजेश _ओके दी मै अभी पहुंचा।

कुछ देर में राजेश स्वीटी को लेकर शॉपिंग मॉल पहुंचा, जहा प्रिया वेट कर रही थी।

शॉपिंग मॉल में स्वीटी, राजेश और प्रिया तीनो की पसन्द से शेखर और सुनीता के लिए कपडे खरीदने के बाद साथ ही प्रिया ने अपने पिंकी और राजेश और स्वीटी के लिए भी कपडे खरीद लिए।

जब वे घर पहुंचे तो पांच बज चूके थे।

राजेश _ओ हो समय काफ़ी हो चुका है, सब फटाफट तैयार हो जाओ।

प्रिया ने सुनीता और शेखर के लिए लाए कपड़ो को सुनीता को दे दिया। और तैयार होने बोल दिया।

और अपने स्वीटी और पिंकी के कपडे लेकर स्वीटी के कमरे में चली गई। फिर सभी तैयार होने लगे।

कुछ देर में शेखर भी आ गया वह सुनीता के लिए गजरा लाया था, जो उसने सुनीता को दे दिया।

शेखर भी अपने कमरे में तैयार हो ने लगा।

राजेश और शेखर तो जल्द ही तैयार हो गए और हाल में बैठ कर महिलाओं का इंतजार करने लगे।

शेखर _चलो भई सभी जल्दी करो, हम लेट हो रहे हैं।

शेखर _बेटा, अपनी मां से जाकर बोलो थोड़ा जल्दी करे। हम लेट हो रहे हैं।

राजेश अपनी मां के कमरे में गया जो बालो पे गजरा लगा रही थी।

राजेश पीछे से देख रहा था, सुनीता को लगा की उसका पति है,,

सुनीता जब तैयार हुई, वह पीछे मुड़ी और बोली कैसी लग रही हूं जी।

राजेश _मां, सच में आप स्वर्ग की अप्सरा, मेनका लग रही है, जिसने विश्वामित्र की तपस्या भंग कर दिया था।

सुनीता _अरे बेटा तुम मै तो तुम्हें तुम्हारा पापा समझ बैठी थीं।

राजेश _मां, पापा ने ही मुझे भेजा है, आपको जल्दी तैयार होने को बोलने के लिए। सच में मां तुम इस दुल्हन की ड्रेस में बहुत ही खुबसूरत और हॉट लग रही रही हो।

सुनीता _चल हट बदमाश तू फिर से शुरू हो गया।

राजेश, सुनीता के पास गया और उसे आईने के सामने खड़ा कर पूछने लगा।

देखो, तुम्हारी खूबसूरती देखकर तो आईना भी शर्मा रहा है।

राजेश ने सुनीता को पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया।

सुनीता _अरे छोड़ो क्या कर रहा है?

आज मैं तुम्हारे पापा की अमानत हूं। मुझसे दूर रहो।

राजेश _हाय पापा भी कितने किस्मत वाला है जो अप्सरा सी खुबसूरत बीवी मिली है।

सुनीता _अरे तू चिन्ता मत कर मै तेरे लिए भी कोई अप्सरा, सी दुल्हन ढूंढूंगी। मुझसे भी सुंदर।

राजेश _नही मां, इस दुनिया में तो आपसे सुन्दर महिला भगवान ने बनाया ही नहीं है।

सुनीता _हूं, मुझे बहकाने की कोशिश कर रहा है। आज मै तुम्हारी बातों में नही आने वाली। आज मै सिर्फ तुम्हारे पापा की हूं, समझे।

चल अब छोड़ मुझे, कही तुम्हारे पापा न आ जाए।

राजेश _गजरे की खुशबू सूंघने लगा।

हाय मां क्या खुशबू है गजरे की फूलो की? मन तो कर रहा है कि,,

सुनीता _क्या कर रहा है, तुम्हारा मन।

राजेश _अपनी गोद में बिठाकर जी भर कर प्यार करू?

सुनीता _तू आज सिर्फ सपना देख, मै आज सिर्फ अपने पति की हूं, समझे।

चल अब चलते है।

राजेश _मां थोड़ी देर और रुको न।

सुनीता _न यहां और रुकी तो, पता नही तू कोई कांड कर देगा।

अब चल,

सुनीता राजेश का कान खींचकर, कमरे से बाहर लाया।

इधर जब दोनों कमरे से हाल में आए। तो राजेश की नजर, प्रिया और स्वीटी पर पड़ी।

राजेश दोनों को देखते रह गया।

क्यू की दोनों खूबसूरती में सुनीता को टक्कर दे रही थीं।

प्रिया स्वर्ग की अप्सरा रंभा तो स्वीटी, उर्वशी से कम नहीं लग रही थी।

तीन तीन खुबसूरत और हॉट औरतों को देखकर राजेश का मुंह खुला का खुला रह गया।

स्वीटी _भैया, कहा खो गए आप।

कैसी लग रही हैं हम लोग इस ड्रेस में?

दोनों लहंगा और चोली में थी। ऊपर में चुनरी डाली थी।

चुनरी के अदंर से ही दोनों की मखमल जैसा बदन दमक रहा था।

राजेश _तुम दोनो बहुत ही खुबसूरत लग रही हो।

पिंकी _और मामू मै।

राजेश _अरे भांजी, तुम तो बिलकुल परी लग रही हो।

शेखर _अब चलो भई हम लेट हो रहे हैं।

वे सभी, सिनेमा घर पहुंचे।

राजेश ने टिकट पहले से बुक करा लिया था ।

बालकनी का टिकट बुक कराया गया था। सामने की सारी सीट भर चुकी थी। पीछे के दो पंक्ति ही खाली थी।

पीछे से दूसरी पीढ़ी पर सुनीता, शेखर, स्वीटी और पिंकी बैठ गई। और उसके जस्ट पीछे राजेश और प्रिया बैठ गए।

जब फिल्म शुरू huwa तो लाइट ऑफ कर दिया गया। जिससे बालकनी में पुरा अंधेरा छा गया। एक दूसरे को कोई देख नहीं पा रहे थे।

पीछे वाली पंक्ति में सिर्फ प्रिया और राजेश ही बैठा था।

सुनीता, स्वीटी, शेखर और पिंकी का ध्यान फिल्म देखने पर था।

इधर राजेश ने प्रिया के कानो में धीरे से कहा,,

दी आज आप सच में बहुत खुबसूरत और हॉट लग

रही हो।

प्रिया _हुं, मुझे पता है आज तुम हम तीनो को छुप छुप कर ताड़े जा रहे हो, तुम्हरा इरादा नेक नही लग रहा। प्रिया ने राजेश के कानो में धीरे से कहा,,

राजेश _दी, जब एक मर्द के सामने तीन तीन अप्सरा हो तो वह अपने में काबू कैसे रख पाएगा?

प्रिया _मतलब तू अपने को काबू में नहीं रख पा रहा है।

राजेश _, दी मै अपने को काबू में तो रख लूं। पर ये काबू में रहे तब न।

प्रिया _मै समझी नहीं।

राजेश ने प्रिया की एक हाथ पकड़ कर अपने पेंट पर बने तंबू पर रख दिया।

राजेश _मै इसकी बात कर रहा हूं।

प्रिया _तेरा तो पुरा खड़ा है re

प्रिया राजेश की land को सहलाने लगीं।

राजेश का land एकदम सख्त हो गया।

राजेश को दर्द huwa आह

प्रिया _क्या huwa re?

राजेश _दी तुम्हारा छोटा गोलू, आजाद होने के लिए छटपटा रहा है।

प्रिया _तो कर दो ना इसे आजाद, अंधेरे में कौन देखने वाला है। राजेश के कान में धीरे से बोली।

राजेश _दी सच में।

प्रिया _हां।

राजेश ने अपने पेंट जींस का चैन खीच कर अपना land बाहर निकाल लिया।

प्रिया ने उसे अपने एक हाथ से पकड़ कर सहलाने लगी।

प्रिया _ये तो एकदम सख्त हो गया है।

प्रिया land पे मूठ मारने लगीं।

राजेश _दी बहुत अच्छा फील हो रहा है।

प्रिया राजेश के land पे मूठ मार रही थी

और राजेश प्रिया की ओंठ चूस कर उसकी चूची मसल रहा था जिससे प्रिया भी बहुत गर्म हो गई। उसकी बुर पानी छोड़ने लगा।

इधर सभी फिल्म देखने में मशगूल थे।

बीच बीच में प्रिया सुनीता से बात चीत करती थीं। ताकि किसी को पता न चले की पीछे क्या चल रहा है।

राजेश _दी थोड़ा चूसो न।

प्रिया नीचे झुक कर राजेश का land मुंह में लेकर चूसने लगी।

कुछ देर तक land चूसवाने के बाद। राजेश ने प्रिया को सीधा किया।

और उसकी कानो में कहा, दी अपनी चूची निकालो न मुझे पीना है।

प्रिया ने अपनी चोली का बटन खोल दिया और ब्रा खिसका दिया।

राजेश, चूची पर टूट पड़ा वह बारी बारी से दोनों चुचियों को चूसने एवम मसलने लगा।

जिससे प्रिया बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

राजेश ने प्रिया को खड़ा किया और उसे अपने गोद में बिठा दिया।

प्रिया ने राजेश से कहा,देखो राजेश मेरा चौथा माह चल रहा है, तुम्हरा बहुत लंबा है ज्यादा जोर का झटका मत मारना नही तो बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है।

राजेश ने धीरे से कहा, ओके दी।

अब प्रिया अपनी पेंटी नीचे खिसका दी और लहंगा ऊपर उठा कर राजेश के land को पकड़ कर अपनी बुर में रख कर बैठ गई।

बुर एकदम गीला हो चुका था तो land बिना किसी रुकावट के सरसराते हुवे अदंर चला गया

अब राजेश अपने दोनों हाथो से प्रिया की चूची पकड़ कर मसलना सुरू कर दिया और प्रिया राजेश के land पर धीरे धीरे उछल उछल कर चुदने लगी।

दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था। फिल्म में क्या हो रहा है उनका ध्यान नहीं था। इधर दोनों chudai का परम सुख को प्राप्त कर रहे थे।

दोनों जन्नत की सैर कर रहे थे।

किसी को सक न हो इसलिए प्रिया, बीच बीच में सुनीता से बात चीत कर रही थीं। इधर शेखर,switi पिंकी और सुनीता पीछे की गतिविधि से अनजान फिल्म का मज़ा ले रहे थे और पीछे प्रिया और राजेश जवानी का मज़ा ले रहे थे।

प्रिया इसी पोजीशन में राजेश से चुदाती रही। राजेश भी नीचे से हल्का हल्का धक्का मार कर land को पुरा गहराई तक ले जानें की कोशिश कर रहा था । और प्रिया उछल उछल कर chud रही थीं, करीब आधा घंटा तक इसी पोजीशन पर chudai चलता रहा, प्रिया दो बार झड़ चुकी थीं।

पर राजेश कहा झड़ने वाला था, जब तक वह बुर को रगड़ रगड़ कर जोर जोर से न चोदे उसका land का पानी नहीं छूटता था।

प्रिया _राजेश, मै दो बार झड़ चुकी हू, अब और नही, वैसे अब लगता है इंटर वेल का समय हो चुका है लाइट चालू हुई तो हम पकड़े जाएंगे।

प्रिया राजेश के land से उठ गई अपने कपडे ठीक कर बैठ गई।

राजेश ने भी अपना land जींस के अदंर कर लिया।

फिर दोनों फिल्म देखने लगे, कुछ देर में ही इंटर वेल हो गया बालकनी का लाइट ऑन कर दिया गया।

राजेश _भई, किसी को कुछ खाना है क्या, मै ले आता हूं।

पिंकी _मामू मेरे लिए पॉपकॉर्न ले आना।

स्वीटी _भईया मेरे लिए भी।

राजेश पॉपकॉर्न लाने चला गया।

स्वीटी _मां मुझे बाथरूम जाना है।

सुनीता _सुनो जी आप यही बैठ कर ये पर्स वगेरा, पर सम्हाल कर रखना हम बाथरूम से आ रहे हैं।

शेखर _ठीक है, सुनीता।

सभी महिलाएं बाथरूम चली गई। वहा फ्रेस होकर सभी वापस लौटी तो राजेश पॉपकॉर्न लेकर आ चुका था।

स्वीटी _प्रिया दी, आप आगे बैठ जाइए मैं पीछे भईया के साथ बैठती हूं।

प्रिया _ठीक है, स्वीटी।

फिल्म फिर से सुरू huwa, सभी पॉपकॉर्न खाते हुवे मूवी देखने लगे।

बालकनी का लाइट ऑफ कर दिया गया।

सभी लोगो का ध्यान मूवी पर था।

इधर स्वीटी ने राजेश के कानो में धीरे से कहा,,

भईया, क्या चल रहा था पीछे,,

राजेश _स्वीटी मै कुछ समझा नही,,

स्वीटी _भैया आप नादान न बनो, मुझे पता है तुम्हारे और प्रिया दी के बीच इन्टर वेल के पहले क्या चल रहा था?

राजेश _स्वीटी , कुछ भी तो नही, लगता है तुमको कुछ वहम huwa है।

स्वीटी _मैंने प्रिया दी के मुख से हल्की हल्की सिसक सुनी, ऐसी आवाजे औरते तभी निकालती है जब वह chud रही हो।

राजेश _स्वीटी तुमको कोई गलतफहमी huwa है, ऐसा कुछ भी नहीं।

स्वीटी _अच्छा तो तुम्हारा तना huwa क्यू है, स्वीटी ने राजेश के जींस के ऊपर से land के ऊपर हाथ फेरते हुवे कहा।

राजेश _स्वीटी छोड़ो, ये क्या कर रही हो। धीरे से कानो में फुसफुसाते हुवे कहा,,

स्वीटी _वही कर रही हुं जो इंटरवेल के पहले प्रिया दी कर रही थीं।

स्वीटी राजेश के land को जींस की ऊपर से अपने हाथ से रगड़ने लगी।

राजेश का land न चाहते हुवे भी और शख्त होने लगा।

राजेश _स्वीटी, मत करो न, मां को पता चल गया तो अनर्थ हो जायेगा।

स्वीटी _मां और पापा तो मूवी का मज़ा ले रहे है। उन्हे पता नही चलेगा।

राजेश _ओ हो, क्या मुसीबत है?

स्वीटी अब राजेश के जींस का चैन खोल कर उसका land बाहर निकाल ली। हाथ से मूठ मारने लगीं।

स्वीटी, मूठ मारते हुवे,सुनीता से बात करने लगी ताकि पीछे क्या चल रहा है किसी को पता न चले,,

राजेश _switi अब बस करो, मां को पता चला गया तो अनर्थ हो जायेगा।

स्वीटी कहा रुकने वाली थी।

वह झुकी और राजेश का land अपनी मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश, प्रिया की लेने के बाद भी झड़ा नहीं था इसलिए स्वीटी की हरकत से वह भी बहुत गर्म हो गया। उसका land स्वीटी के मुंह में झटके मारने लगा। लौड़ा चुस्वाने में राजेश को बहुत मज़ा आने लगा।

तो वह स्वीटी का सिर पकड़ कर अपने land Ko उसकी मुंह में और अधिक अदंर धकेलने की कोशिश करने लगा।

स्वीटी ने अपनी चोली का बटन खोल दी ब्रा ऊपर सरका कर चूची बहार निकाल दिया।

फिर राजेश के कान में धीरे से कहा,,

स्वीटी _भईया चूसो न,,

राजेश भी स्वीटी की चूची पकड़ कर मुंह में भर लिया और एक चूची मसलने तो दूसरे को चूसने लगा।

स्वीटी उत्तेजित होने लगी,, उसकी बुर में पानी भर ने लगा।

वह हल्की हल्की सिसकने लगी।

राजेश को भी चोदने का मन हो रहा था। वह झड़ना चाहता था। इसलिए वह एक हाथ से स्वीटी की बुर को लहंगा के ऊपर से रगड़ने लगा।

स्वीटी की पेंटी गीली होने लगी।

इधर बाकी लोग पीछे चल रही गतिविधियों से अनजान होकर मूवी का मज़ा ले रहे थे।

बुर रगड़ने से स्वीटी, बहुत ज्यादा गर्म हो गई।

वह अपने सीट से उठी और अपना पेंटी उतार कर अपने मुंह में ठूस ली फिर अपना लहंगा ऊपर उठा कर राजेश के land को पकड़ करअअपनी बुर की छेद पर रख, बैठने लगी।

वह बहुत धीरे धीरे बैठने लगी।

क्यू की उसकी बुर अभी राजेश की land के हिसाब से छोटी एवम टाइट थी।

इसलिए वह आहिस्ता आहिस्ता land को बुर में लेने लगीं ताकि दर्द न हो, चूंकि स्वीटीकी योनि पूरी तरह गीलीथी अतःराजेश काland Ko निगलने में ज्यादा परेशानीनहीं को । थोड़ा दर्द जरूर huwa पर वह दर्द सह गई और कुछ देर में ही समूचा land स्वीटी के बुर में समा गया।

उसके बाद स्वीटी land पर उठक बैठक लगा कर chudna सुरू कर दिया।

राजेश को भी झड़ने की इच्छा था तो वह भी स्वीटी का साथ देने लगा वह स्वीटी की चूची मसलने लगा।

स्वीटी तो जैसे जन्नत में पहुंच गई।

राजेश को भी स्वीटी की टाइट बुर चोदने में बहुत मजा आने लगा।

स्वीटी,राजेश के land पर उछल उछल कर चुदने लगी,chudai का परम सुख को प्राप्त करने लगी।

और कुछ ही देर में स्वीटी झड़ने लगी।

झड़ने के बाद वह राजेश के land पर ऐसी ही बैठी रहीं।

और सामने बैठी अपनी मां और पापा से बात करने लगी, ताकि उन्हें कुछ शक न हो।

इधर राजेश का land स्वीटी की बुर में झटके मार रहा था।राजेश स्वीटी की चूची को चूस एवम मसल रहा था, जिससे स्वीटी फिर गर्म हो गई उसकी बुर फिर पानी छोड़ने लगी

अब राजेश स्वीटी की कमर को पकड़ कर अपने land पर धीरे धीरे उपर नीचे कर चोदने लगा। जिससे स्वीटी और राजेश दोनों को बहुत मज़ा आने लगा।

राजेश स्वीटी को जोर जोर से चोद ना चाहता था ताकि वह झड़ सके पर वह ऐसा नहीं कर पा रहा था, क्यू की जोर जोर से चोदने से स्वीटी की चीख निकल सकती थीं जिससे सभी लोगो को पता चल सकता था कि पीछे क्या चल रहा है। राजेश धीरे धीरे ही स्वीटी को चोदता रहा, और स्वीटी धीरे धीरे उछल उछल कर chud रही थी।

तभी फिल्म में वह गाना आया,,

आज की रात हुस्न का मज़ा आंखो से लीजिए,,,

यह गाना सुरू होते ही साउंड का आवाज़ बड़ा दिया गया, लोगो सिटी बजाने लगे,,

राजेश को झड़ने का एक मौका मिल गया,,

वह स्वीटी कि कमर को पकड़ कर अपने land पर पटक पटक कर जोर जोर से चोदने लगा,

स्वीटी भी उछल उछल कर चुदने लगी,land गच गाच बुर को फाड़कर अंदर बाहर होने लगा।

राजेश पूरे जोश में था, वह बिना रुके भच भाच switi को चोदने लगा, गाने की शोर शराबे में chudai की आवाज़ दब गया।

स्वीटी की बुर बहुत टाइट थी तेज रगड़ के कारण राजेश शीघ्र ही झड़ने की स्थिति में पहुंच गया।

गाने के खतम होने के कुछ सेकंड पहले ही, स्वीटी को जोर जोर से चोदते हुए झड़ने लगा,

उसके land से गर्म वीर्य की लम्बी लम्बी पिचकारी छुट कर स्वीटी की बुर को भरने लगा।

गर्म वीर्य अपने योनि में जाते हुवे महसूस कर स्वीटी को एक परम आनद का अनुभव huwa और वह भी झड़ने लगी।

दोनों झड़ने के बाद, दोनों राहत का सांस लिया और कुछ देर दोनों ऐसे ही बैठे रहे।

उसके बाद switi राजेश के land से उठी और अपने सीट पर बैठ कर सुस्ताने लगी।

स्वीटी और राजेश ने अपना कपड़ा ठीक किया।

और किसी को शक न हो, दोनो अपने मां पापा और प्रिया दी से बात चित करने लगे।

कुछ देर बाद मूवी खत्म हो गया। सभी ने कहा मूवी अच्छी थीं

वहा से वे सभी होटल पहुंचे।

राजेश ने वेटर से एक केक आर्डर किया।

केक काट कर सुनीता और शेखर ने शादी की सालगिरह सेलिब्रेट किया, सभी ने उन्हें सालगिरह की बधाई दिया।

राजेश ने सभी की पसिंदीदा भोजन का लिस्ट बनाया और उसका आर्डर कर दिया।

होटल में नाचने गाने का भी व्यवस्था था।

सभी नाचने गाने लगे।

राजेश ने सुनीता को डांस के लिए प्रपोज किया।

सुनीता _न बाबा ना, मुझे शर्म आती है, मै नही नाचूंगी।

सभी के जिद करने पर सुनीता राजेश के साथ नाचने लगी।

सभी तालिया बजाने लगे।

उसके बाद शेखर और सुनीता को साथ नचाया गया। फिर सभी नाचने लगे।

सभी नृत्य का आनद उठा रहे थे की वेटर ने कहा भोजन तैयार हो गया है।

उसके बाद सभी डिनर करने लगे।

डिनर करने के बाद, सभी होटल से निकले

प्रिया ने एक बार फिर अपनी बुआ और फूफा को सादी की सालगिरह की शुभकनाए देकर, सुनीता को आंख मारी।

सुनीता शर्मा गई,,,

प्रिया और पिंकी वहा से अपने घर चली गईं।

इधर जब सभी घर पहुंचे उस समय रात के 11बज चूके थे।

घर पहुंचते ही स्वीटी, अपने कमरे में गई कपडे चेंज की और सो गई, वह थक चुकी थीं।

राजेश भी अपने कमरे में जाकर अपना शर्ट पैंट उतार, लोवर पहन कर सोने लगा।

इधर सुनीता घर का मेन दरवाजा बंद की फिर अपने कमरे में पहुंची जहा शेखर उसके आने का इंतजार कर रहा था।

जब सुनीता कमरे में पहुंची, शेखर ने सुनीता को अपनी गोद में बिठा लिया।

सुनीता _छोड़ो न जी ये क्या कर रहे हैं आप?

शेखर _आज तो हमारी शादी की सालगिरह है, आज तो प्यार बनता है। अगर आज प्यार ना किया तो तुम ही बोलोगी की आज के दिन भी ऐसे ही सो गए।

सुनीता _चलो कम से कम आज के दिन तो अपना फर्ज याद है।

शेखर सुनीता की गालों को चूमने लगा।

सुनीता शर्माने लगी,,

शेखर _हाय हाय मेरी आज भी वही लज्जा जो शादी की पहली रात थी।

सुनीता _लज्जा ही तो औरतों की सबसे बड़ा गहना है।

शेखर _सही कहा तुमने।

पर आज कल की औरतों में लज्जा कहा रहती है, मै तो खुश किस्मत हूं तुम्हारी जैसी बीवी पाकर।

उसके बाद शेखर ने सुनीता को बेड में लिटा दिया। और उसकी गालों ओंठ चूमते हुए उसकी गर्दन चूमता huwa नीचे उसकी चूची तक पहुंच गया, अपने हाथो से उसकी चोली की बटन खोल ब्रा सरका कर चूची आजाद किया और उसे मसलने लगा।

सुनीता सिसकने लगी।

शेखर नीचे आगे बड़ा और सुनीता की नाभी चूमने लगा फिर उसकी लहंगा उठा कर उसकी पेंटी खीच कर निकाल दिया।

वह अपना पजामा, निकाल कर अपना अंडर वियर नउतार कर बेड में आ गया।

वह सुनीता की टांगो को चौड़ी कर उसके बीच में आ गया।

अपना मीडियम साइज का land सुनीता की बुर में रख कर एक धक्का मारा।

सुनीता तोसुबह से ही गर्म थी, कि आज वह अपनी पति से चुदेगी।

उसकी बुर सुबह से ही पानी छोड़ रही थी।

जब शेखर ने बुर में land को डाला तो उसका land सरसरा ता huwa एक ही बार में पुरा अदंर चला गया।

सुनीता सिसक उठी।

शेखर ने land को बुर में अदंर बाहर करना शुरू किया।

करीब 5मिनट अदंर बाहर करने से ही उसका land का पानी छूट गया। और वह एक और लुड़क गया।

इधर सुनीता अब तक झड़ी नहीं थी।

कुछ देर में ही शेखर की नाक बजने लगा।

सुनीता की आंखो से नींद कोशो दूर था वह झड़ी नहीं थी ।

उसकीबुरo की खुजली और बड़ चुकी थी।

वह अपने पति से निराश हो गई, अपनी उंगली को बुर में डाल कर रगड़ने लगी, बुर की खुजली बड़ने की बजाय और बड़ने लगी।

उसे तेज chudai की बडी इच्छा होने लगीं।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे?

कुछ देर बेड में लेट कर अपनी उंगली से ही खुद को शांत करने की कोशिश करने लगी। मन शांत होने के बजाय बगावत पर उतर आई, और वह बेड से उठी।

अपने कपडे ठीक की, आईने पे खुद को देखी थोड़ा मेकप की अपने पूरे बदन पर इत्र छिड़की और अपने कमरे से निकल कर राजेश के कमरे की ओर जानें लगी।

 
सुनीता अपने बेड से उठी और आईने के सामने आकर, अपने कपड़े ठीक की, थोड़ा मेकप किया अपने शरीर पर सुगंधित इत्र को छिड़की और राजेश की कमरे की ओर जानें लगी।

जब वह राजेश के कमरे के सामने पहुंची, उसने दरवाजे को धक्का दिया पर दरवाजा खुला नही, अदंर से बंद था।

सुनीता दरवाजा खटखटाना चाही, पर उसे लगा की दरवाजा खटखटाई तो स्वीटी उठ जाएगी।

वह निराश हो गई। उसकी chut में आग जो लगी थीं।

वह निराश होकर, अपने कमरे में जाकर फिर से लेट गई। और सोने की कोशिश करने लगीं।

लेकिन उसकी बुर की खुजली गई नही थी, वह अपनी बुर को जैसे ही खुजाई,chut की खुजली और बढ़ने लगी। वह अपनी एक उंगली से अपनी बुर की भगनाशा रगड़ने लगी, जिससे उसकी chut की आग और धधकने लगी, अब उसे बर्दास्त करना मुस्किल हो गया।

वह अपने पति की ओर देखा जो इस समय नींद में खर्राटे भर रहा था।

उसे पहली बार अपने पति पर गुस्सा आया,

देखो तो इन्हे तो मेरी कोई चिंता ही नही है, मेरी chut में आग लगा कर कैसे बेफिक्र होकर सो रहा है।

अगर यह आग नही बुझी तो लगता है आज मै मर ही जाऊंगी।

तब उसने अपने मोबाइल पे राजेश को मिस काल किया।

राजेश सो रहा था।

जब उसकी मोबाइल बजने लगा तो, उसकी नींद खुल गई।

उसने देखा मां ने काल किया है,, इस वक्त

उसने काल उठाया, पर सुनीता ने काल काट दी।

राजेश _मां ने मोबाइल रख दिया,,, आखिर बात क्या है?

इधर सुनीता ने राजेश को वॉट्सएप पे मेसेज की,,

बेटा सो गया था क्या?

राजेश ने वॉट्सएप पर मेसेज पड़ा, और जवाब दिया,,

राजेश _मां इस समय , कुछ काम था क्या?

सुनीता ने और राजेश के बीच चैटिंग होने लगीं,,

सुनीता _हां, बेटा काम तो था, पर सोचती हूं रहने ही दो, क्यू खामोखा तुम्हारी नींद खराब करू।

राजेश _मां बताओ ना, क्या काम है इसमें नींद खराब की क्या बात? आपके लिए तो मैं सारी उम्र जागने तैयार हूं।

सुनीता _वो बेटा क्या है कि आज काफी दिनों बाद होटल में डांस की न तो लगता है मेरी कमर पकड़ लिया। कमर दर्द कर रही है। मूव से मालिश कर देते तो, कुछ राहत मिल जाती।

राजेश _बस इतनी सी बात, मै तो डर ही गया था। कही कोई बड़ी समस्या तो नहीं।

सुनीता _नही बेटा, और कोई समस्या नहीं है।

तुम्हारे पापा तो नींद में खर्राटे भर रहा है,उसे जगाना उचित नहीं समझी।

राजेश _पर मां आज तो आप दोनों की सादी की सालगिरह है न, आज तो पापा को जागना चाहिए। आज भी इतना जल्दी सो गया।

सुनीता _अरे बेटा तुम्हारे पापा जाग कर करेंगे भी क्या?

राजेश _क्यू मां, आज की रात को पति को जागकर अपनी पत्नी को खूब प्यार करना चहिए।

सुनीता _अरे बेटा, इस उम्र में रात भर जाग कर पत्नी से प्यार करना हर किसी की बस की बात थोड़े ही है।

राजेश _मां इसका मतलब पापा आपको उसकी सैर कराने नही ले गए।

सुनीता _किसकी सैर बेटे मै कुछ समझी नहीं।

राजेश _मां, उसकी सैर मां जहां पति अपनी पत्नी को ले जाता है?

सुनीता _बेटा, मै सच में समझी नहीं, ठीक से बताओ।

राजेश _मां तुम भी न जानकर भी भोली बनती हो।

जन्नत की बात कर रहा हूं,,

सुनीता _बेटा, तुम्हारे पापा तो मुझे कभी नहीं ले गए मुझे जन्नत की सैर कराने।

वैसे भी बेटा ये जन्नत है कहा जो कोई सैर करने जाए।

राजेश _मां ये क्या कह रही हो? आप ही ने तो बताया था कि जब एक मर्द स्त्री को जी भर कर ओ करता है तो स्त्री को जन्नत का मज़ा मिलता है।

सुनीता _क्या करने से स्त्री जन्नत में पहुंच जाती है बेटा, मै कुछ समझी नहीं,,

राजेश _मां आप ने ही तो बताया था, आज भोली बन रही हो,,

सुनीता _अरे बेटा मै ने तुम्हें क्या बताया था मुझे तो कुछ याद ही नहीं रहा,,

खुल कर बताओ।

राजेश _खुल कर, बताया तो आप बुरा मान जाएगी।

सुनीता _अरे नही बेटा मै बुरा नही मानूंगी बताओ,,

राजेश _मां आपने ही तो कहा था कि एक मर्द जब स्त्री को जी भर कर चोदता है तो औरत को खूब मज़ा आता है वह जन्नत में पहुंच जाती है।

सुनीता ने जब चोदता शब्द पड़ी तो उसकी दिल जोरो से धड़कने लगी उसकी बुर पानी छोड़ने ने।

उसने राजेश को मेसेज की,,

सुनीता _औरत को जन्नत में ले जानें के लिए बेटा पुरुष के राकेट काफी मजबूतऔर उसमे ईंधन भी खूब होना चाहिए।

राजेश _मतलब पापा आपको जन्नत की सैर नही करा पाए।

सुनीता _बेटा तुम्हारा पापा का राकेट तो कुछ दूर उड़ान भरने के बाद क्रेश हो जाता है, वो कहा किसी औरत को जन्नत पे ले जायेगा।

राजेश _तो ये बात है?

मां आप बुरा न मानें तो एक बात कहूं,,

सुनीता _क्या? कहो ना,

राजेश _नही मानूंगी बाबा, बोलो।

राजेश _

मां आपको निराश होने की आवश्कता नही है। आप चाहो तो मेरे राकेट में बैठ कर जन्नत की सैर कर लो।

मेरा राकेट में खूब ईंधन है। वह तुम्हें जन्नत की सैर कराकर ही लौटेगा। वैसे आप पहले भी तो मेरे राकेट पे बैठ चुकी हो।

आप ही बताओ मेरे राकेट ने आपको जन्नत की सैर कराया था की नही,,

राजेश _मां, बताती क्यू नही?

ठीक है आपको नही बताना है तो चैटिंग बंद करता हू।

तभी सुनीता ने मेसेज की,

सुनीता _हां,

राजेश _क्या, हां मां पुरा जवाब दो।

सुनीता _मुझे लिखने में शर्म आ रही,,,

राजेश _अच्छा ठीक है मैं जो आपसे पूछुंगा उसका हां या न में सच सच जवाब देना,,,

बोलो दोगी,,,

नही तो चैट करना बन्द करते हैं,,

सुनीता _ठीक है बाबा,, पूछो,

राजेश _ये हुई न बात।

अच्छा बताओ,,,

आज आपको पापा पर बड़ा गुस्सा आ रहा है? हा या न

सुनीता _ये कैसा प्रश्न है?

राजेश _सच सच जवाब दो नही तो mobile रखता हूं।

सुनीता _तुम भी न बहुंट जिद्दी हो,,

राजेश _ये मेरे सवालों का जवाब नही है।

लगता है आपका मन नही जवाब देने की, मै मोबाइल रखता हूं

सुनीता _हां बाबा, मुझे बड़ा गुस्सा आ रहा है तुम्हारे पापा पे।

राजेश _गुड ये हुई न बात।

मेरा दूसरा प्रश्न।

आज आपके कमर पे कोई दर्द नही हो रहा, तुम मुझसे झूठ बोल रही हो।

सुनीता _हां।

राजेश _मेरा तीसरा प्रश्न।

तुम्हें चुदने का बड़ा मन कर रहा है।

सुनीता _छी कितना गंदा सवाल पूछता है, बेशरम कही का।

राजेश _आपको उत्तर नही देना है तो मोबाइल रखो। मै भी सो जाता हूं।

सुनीता _तू तो बेशर्म है ही मुझे भी बेशरम बनने के लिए मजबूर कर रहा है।

राजेश _मां मैंने तो सिर्फ हा या न में जवाब पूछा है।

अब तुमको नही बताना है तो फ़ोन रख दो।

नही तो बताओ, आज तुम्हें चुदने का बड़ा मन कर रहा है न।

सुनीता _हां,,

गुड

राजेश _अब मेरे आखिरी प्रश्न का जवाब दो।

क्या तुम मुझसे चुदवाना चाहती हो,,,

बोलो,,,,

जल्दी जवाब दो,,

नही तो,,,,

चैटिंग बंद करो,,

जल्दी बताओ,,

सुनीता _हा,

सुनीता बडी मुस्किल से लिख पाई, इस समय उसे चुदने का बड़ा मन था। इस लिए बेशर्म बनकर जवाब दें दी।

राजेश _ये हुई न बात।

लेकिन मेरी एक शर्त है?

सुनीता_कैसी शर्त?

राजेश _आज हम सुहाग रात मनाएंगे, कल हनीमून।

सुनीता _मै कुछ समझी नहीं।

राजेश _आज रात भर तो खेलेंगे ही, कल मै कालेज नही जाऊंगा।

और घर में केवल मै और आप रहेंगी।

स्वीति के कालेज से आ जानें तक हनीमून मनाएंगे।

और आप मेरा हर कहा मानोगी। बोलो,,

सुनीता _मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर नहीं,,,

राजेश _ठीक है मत मानो, मै भी सो जाता हूं मुझे भी बडी नींद आ रही है।

ओके गुड नाईट मां। स्वीट ड्रीम्स।

राजेश ने मोबाइल रख दिया।

इधर राजेश के साथ चैटिंग करने के बाद सुनीता की बुर और अधिक पानी बहा रही थी।

उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करे?

इधर राजेश का land भी इस गर्म गर्म चैटिंग से खड़ा होकर झटके मार रहा था।

उसे लग रहा था कि मां उसके कमरे में जरूर आएगी।

इधर सुनीता को बर्दास्त नही हो रहा था आखिर वह मजबूर होकर राजेश की कमरे की ओर जानें से पहले कीचन में गई और बादाम वाली दूध गिलास में ले लिया।

वह राजेश के कमरे के पास जाकर,दरवाजे को हल्के से धेकेली दरवाजा खुल गया।

राजेश को यकीन था की उसकी मां जरूर आएगी।

वह दरवाजे को खोल कर रखा था।

जब कमरे के अदंर प्रवेश की सुनीता ने अपने सिर पर घुघट डाल ली।

राजेश अपने बेड से खड़ा हो गया।

राजेश _मां मुझे यकीन था आप जरूर आएंगी।

सुनीता ने गिलास आगे बढ़ाते हुवे बोली,,

लो ये दूध पिलो,,

राजेश ने सुनीता को बेड में बिठा दिया।

राजेश _मै यह दूध तभी पियूंगा जब तुम मेरा शर्त मानोगी।

बोलो क्या तुम्हें मेरा शर्त मंजूर है?

सुनीता ने घूंघट के अदंर से हा में सिर हिलाया।

राजेश _ये हुई न बात!

राजेश _अब देखना मै कैसे आपको 18घंटे तक जन्नत की सैर कराता हूं?

राजेश दूध का गिलास लेकर, पीने लगा।

दूध पीने के बाद वह बेड पर चढ़कर सुनीता के सामने बैठ गया।

अपने दोनों हाथों से घूंघट पकड़ कर धीरे धीरे उपर उठाया।

सुनीता अपनी आंखे बंद कर रखी थी ।

राजेश _सुनीता की चेहरे को देखकर बोला।

मां कितनी खुबसूरत हो तुम, स्वर्ग की अप्सरा मेनका लग रही हो।

आंखे खोलो न।

सुनीता अपनी दोनों हाथी से अपनी चेहरा छिपाने लगी।

सुनीता _मुझे शर्म आ रही।

राजेश ने अपने दोनों हाथों से सुनीता की हाथ को पकड़ कर हटाया फिर उसकी माथे को चूम लिया।

सुनीता अपनी आंखे फिर से बंद कर ली।

राजेश अब सुनीता की ओंठ को चूमा।

सुनीता सिसक उठी।

राजेश सुनीता की गालों फिर गर्दन को चूमते हुए नीचे बड़ा।

उसकी चुनरी निकाल कर अलग कर दिया।

अब वह घाघरा और चोली में थी।

राजेश ने सुनीता को बेड पे लिटा दिया।

फिर उसकी गर्दन चूमते हुए नीचे बढा।

वह उसकी चोली का बटन खोल दिया।

सुनीता ब्रा नही पहनी थी।

चोली खुलते ही, सुनीता की चूची आजाद हो गया। राजेश ने दोनों चूचियों को मुंह में भर कर बारी बारी से चूसने एवम मसलने लगा।

सुनीता और अधिक गर्म हो गई, उसकी बुर पानी छोड़ने लगी।

राजेश नीचे गया और सुनीता की नाभी को चूमते चाटने लगा।

सुनीता के मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

राजेश घाघरा को भी निकाल कर फेंक दिया। सुनीता पेंटी पहनी नही थी।

घाघरा खुलते ही, मस्त फूली हुई चिकनी chut राजेश के आंखो के सामने आ गया।

राजेश देर न करते हुए सुनीता की बुर को चाटने लगा।

जिससे सुनीता अत्यंत कामोत्तेजित हो गई।

सुनीता _बस कर बेटा, मुझसे और बर्दास्त नही होगा।

पर राजेश नही रुका, वह चाटता रहा।

सुनीता से बर्दास्त करना मुस्किल हो गया। वह अत्यंत उत्तेजित हो कर अपना सर पटकने लगी।

सुनीता _आह मां,, मर जाऊंगी मैं, बस कर अब चोद मुझे।

बेटा अब चोदो मुझे, मै मर जाऊंगी,,,,

सुनीता चीखी,,,

राजेश रुका नहीं और बुर की भग्नाशा को चाटने लगा।

सुनीता _आह मां मर गई मै,,,

अब चाटना बंद कर चोद मुझे,,

सुना नही, भड़वे मैंने क्या कहा?

अगर तू अपने मां का दूध पिया है तो चोद मुझे मादरचोद।

हवस में आकार सुनीता के मुंह से अब गाली निकलने लगी।

राजेश मुस्कुराने लगा,,

सुनीता _अरे भड़वे, तूने सुना नही मैंने क्या कहा? अब फाड़ मेरी बुर अपने घोड़े जैसी लैंड से। साले मुझे तड़फा रहा है,,,

राजेश _साली, गाली बकती है।

रण्डी की तरह, अब देख तेरी बुर कैसे फाड़ता हू।

राजेश ने अपना सारा कपड़ा निकाल कर पुरा नंगा हो गया।

और अपना लैंड सुनीता के मुंह में डाल दिया।

ले साली चूस, पहले मेरे लौड़े को।

सुनीता राजेश के land को मुंह में लेकर चूसने लगे।

राजेश उसका सिर पकड़ कर land उसके मुंह में अदंर बाहर करने लगा।

सुनीता, खो खो, करने लगी,,,

राजेश अब खड़ा हो गया।

वह सुनीता की कमर को उठाया और उसके नीचे तकिया लगा दिया।

फिर उसकी टांगो को फैला कर खुद उसके बीच उकड़ू बैठ गया।

अब राजेश अपना land पकड़ कर सुनीता की योनि द्वार में रख कर एक जोर का धक्का मारा।

फ़च की आवाज़ करता huwa लौड़ा बुर चीरकर आधा से ज्यादा अदंर चला गया ।

सुनीता _शाबास मेरे शेर,,, एक और जोर लगा, डाल दे पुरा अदंर,,

राजेश _ले साली,,,,

राजेश एक और जोर का धक्का मारा, पुरा land बुर के अदंर चला गया।land का टोपा सीधा बच्चे दानी से टकराया।

सुनीता _आह मां, मर गई रि,,,

राजेश अब दोनों हाथो से सुनीता की मस्त सुडौल चुचियों को थाम कर अपना लौड़ा सुनीता की बुर मे दनादन पेलना शुरु किया।

सुनीता के मुंह से चीख एवम कामुक सिसकारी निकल कर कमरे मे गूंजने लगी ।

राजेश इसी पोजीशन में लगातार सुनीता की गच गच चोदने लगा।l

सुनीता की योनि से पानी झरने की तरह बह रही थी।land बिना किसी रोक टोक के गप गप अदंर बाहर हो रहा था जिससे सुनीता जन्नत में गई।

वह राजेश को अपने टांगो से जकड़ ली और अपनी क़मर उसका सहयोग करने लगी।

राजेश _ले साली ले,, एक और ले आज तो तेरी बुर फाड़के ही रहूंगा। तेरी सारी खुजली आज ही दूर कर दूंगा।

सुनीता _चोद साले चोद, अपनी मां को और जोर से चोद, मादरचोद, बुझा मेरी प्यास, और जोर लगा, मेरी दूध नहीं पिया है क्या फाड़ मेरी chut

राजेश _साली रण्डी, आज से तुम मेरी रखैल है, तुम्हें तो रोज ही चोदूंगा, क्या मस्त मॉल है तू।

कसम से तेरी chudai में जो मजा आता है वह और कही नही,,

ले भोंसड़ी के chud अपने बेटे से,

राजेश और जोर जोर से चोदने लगा,

सुनीता _चोद भड़वे चोद, मै आने वाली हु, और जोर लगा,, सारी ताकत खतम हो गई क्या साले,,, चोद मुझे,,,

राजेश _और कस कस कर चोदते हुवे, दोनों हाथो से सुनीता की मस्त सुडौल चुचियों को मसल मसल कर दनादन चोदता रहा। ले साली, ले,,chud अपने बेटे के land से ,,,,

सुनीता अपने को और रोक न सकी और चीखते हुए झरने लगी,,

आह मां,, मै गई रि,,,,,, आह,,,,

वह राजेश को कसकर लपेट ली।

राजेश सुनीता के उपर लेट कर, उसकी ओंठ चूसने लगा।

सुनीता बिलकुल मूर्छित अवस्था में पड़ी रही।

राजेश भी अपना खड़ा land सुनीता की बुर में डालकर सुस्ताने लगा और अपना खोया ताकत फिर से प्राप्त करने लगा।

जब सुनीता होस में आई,,,

सुनीता _बेटा अब बस करो,,,

राजेश _क्या huwa मां शर्मा क्यू रही हो।

सुनीता _छी मै हवस में आकर, कितनी गंदी गंदी गालियां बक रही थी,,,

राजेश _मां मुझे, बुरा नही लगा,, मुझे तो और ज्यादा मज़ा आया, तुम्हारि मुंह से गालियां सुनकर मेरा जोश और बढ़ जाता है?

सुनीता _क्या तू सच कह रहा है?

राजेश _हां, बडा मजा आता है जब आप मुझे मादर चोद कहती है।

सुनीता _अच्छा,,

मै थक गई हूं थोड़ा सुस्ताने दे फिर कर लेना,,

Rajesh _क्या कर लूंगा? मै समझा नही?

सुनीता _अरे चोद लेना अपनी मां को। तू पुरा बेशरम है और मुझे भी बेशरम बना दिया है।

राजेश _सच मां तुम्हारी chudai में जो मजा आता है। वैसा कही और नही,,

सुनीता _चल हट झूठा कही का मेरी ढीली बुर में ज्यादा मज़ा आता है?

अब तक तूने कोई कुंवारी chut नही मारी है न इसलिए,,

जिस दीन तूने कुंवारी chut मार लिया अपनी मां की chut भूल जाएगा ।

सुनीता को मालूम नही था की राजेश ने स्वीटी का सिल तोड़ चुका है।

राजेश _अरे नही मां, जिस बिल से निकले हो उसी बिल में जानें में जो मजा है न वो मजा कही और नही। एक अलग ही मजा आता है।

सुनीता _अच्छा तो ये बात है।

राजेश _मां, अब दूसरा राउंड हो जाए।

सुनीता _बेटा, पहले मुझे तैयार तो करो।

राजेश सुनीता की बुर से अपना land निकाला और उसकी बुर को मुंह में भर कर चूसने लगा।

कुछ ही देर में फिर से सिसकने लगी,,

उसकी बुर में फिर से पानी भर गया।

सुनीता _बेटा, अब बस कर, अब चोदो मुझे,, अपने मूसल जैसे land से।

राजेश बुर चाटता रहा,, जिससे सुनीता फिर बहुत गर्म हो गई,,,

सुनीता _अबे कुत्ते, चाटता ही रहेगा की चोदेगा भी,,

तेरा बाप तो सिर्फ आग लगा ना जनता है बुझाना नही, साले तुभी सिर्फ चाट चाट कर आग भड़का रहा है,,, चोद मुझे भड़वे चोद अपनी मां को,,,

राजेश _साली रण्डी, तुम्हें तो kutiya बनाकर चोदूंगा। बन साली kutiya साली लौड़ी के,,,

सुनीता kutiya बन गई।

राजेश उसकी चुतड़ को चाटने लगा। उसकी गाड़ चाटने लगा।

जिससे सुनीता की हालात और खराब हो गई,,

सुनीता _अब डाल न re हराम खोर, क्यू तडफा रहा है अपनी मां को,, रण्डी की तरह चोद भड़वे,,,

राजेश _ले साली सम्हाल मेरे लौड़े को,,,

राजेश ने सुनीता की योनि के द्वार पर रख कर एक जोर का धक्का मारा जिससे land बुर को फाड़कर सरसराता huwa एक ही बार में अदंर घुस गया।

सुनीता _आह मां,,

कितना बडा है रि तेरा पुरा अदंर तक ठोकता है साला।

लगता है पेट में किसी ने रॉड डाल दिया है।

अब राजेश सुनीता की क़मर पकड़ कर अपने लौड़े को सुनीता की बुर में डालना शुरू कर दिया।

Land बुर में गच गच अदंर बाहर होने लगा।

सुनीता फिर सी एक बार जन्नत मे पहुंच गई।

सुनीता _, क्या मस्त चोदता है रि तू, आह मां,,,

आह सच में स्वर्ग की सैर कराता है re,,

आज से मैं तेरी रखैल,

मेरी असली मर्द तू है,,,

राजेश _साली, मै जब मांगूंगा मुझे देगी बोल।

सुनीता _हा, मै तेरी रखैल तू जब चाहेगा तुम्हें दूंगी,,

आह चोदो मुझे और जोर से,,

आह मां,,, मर जाऊंगी,,,

Chudai में ऐसा मज़ा, आह,, तू ही मेरा इस शरीर का असली मालिक है।

भोगों मुझे,,,,,

सुनीता चीखी _

राजेश,_, ले साली,kutiya,chud अपने बेटे के land से, जिस से ये बाहर निकला है आज फिर अदंर जाकर ही मानेगा ये,,

ले एक और ले

राजेश दनादन चोदता रहा,,

सुनीता की कामुक सिसकारी कमरे में गूंजती रही,,,

सुनीता _, आई,, आए आह मां ई,,,,

चोदो मुझे और जोर जोर से, चोदो मादरचोद,,,, अरे मैं तो भूल ही गई थीं की तू अपनी बहन प्रिया को भी चोद कर बहन चोद बन गया है।

राजेश _, अरे हां हा, मै मादरचोद हू, मै बहंचोद हू। मै मामी चोद भी हूं।

ले chud मुझसे, ले और ले साली, मर्दखोर कही की।

राजेश और जोर जोर से चोदने लगा।

कमरे में gach gach फैच फाच की आवाज़ गूंज रही थी।

सुनीता तो जन्नत की सैर कर रही थीं लगातार उसके मुंह से मादक सिसकारी निकल कर कमरे मे गूंज रही थी।

आह उन,, आह उई मां,,,

राजेश gach gach बुर चोदे जा रहा था। तभी उसकी नजर सुनीता की गाड़ पर पड़ी जो फूल और पिचक रहा था।

राजेश ने एक उंगली सुनीता की गाड़ में घुसा दिया।

सुनीता _अबे साले, पहले मेरी बुर की प्यास तो बुझाले तब गाड़ मारने की योजना बनाना,,

राजेश _चुप साली, बाकचोदी कही की क्या मस्त गाड़ है तेरी आज तो मैं गाड़ और chut दोनो फाडूंगा,

और राजेश एक उंगली गाड़ में डालकर अदंर बाहर करते हुए, दनादन बुर चोदने लगा।

सुनीता की तो हालत खराब होने लगीं। गाड़ और बुर दोनों की chudai होने से उसे अलग ही मजा मिलने लगा,

आह मां, आह, कुत्ते मै आने वाली हूं, और जोर जोर से चोद, मादर चोद,,,

राजेश ले साली रण्डी, ले आज तो तेरी बुर की सारी प्यास बुझा दूंगा।

ले एक और ले,,

राजेश और जोर जोर से gach gach चोदने लगा।

राजेश अब दो उंगली गाड़ में डालकर अदंर बाहर करने लगा।

सुनीता की जमकर chudai से वह अपने को रोक न सकी और सुनीता चीखते हुए,,

आह मां,, आह मैं गई,, मां,,,

सुनीता झड़ने लगी,,,

और बेड पर लुड़क गई।

राजेश उसके ऊपर ही लेट कर सुस्ताने लगा।

राजेश अपना land बुर से निकाला और एक ओर लुड़क गया।

उसका land अभी भी हवा में खड़ा हो कर झटकेमार रहा था, जिसे अपने हाथ से सहलाने लगा।

कुछ देर ऐसे ही दोनों पड़े रहे।

कुछ देर बाद,,

राजेश _मां आप ठीक तो है न।

सुनीता _हूं,,,

राजेश _मां इधर तो देखो।

सुनीता _न मुझे शर्म आ रही है।

राजेश _पर क्यू?

सुनीता _छी, मै कितनी गंदी गंदी गालियां दे रही थी।

आज से पहले मैंने कभी ऐसी गालियां नही दी है।

पता नही हवस में मुझे आज क्या हो गया है।

पता नही तू मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा।

राजेश _, मां, मैंने कहा न, मुझे भी मज़ा आया। तुम्हारे मुंह से गालियां सुनकर मेरा जोश बड़ जाता है।

इधर देखो न मेरा land तो अभी भी झटके मार रहा है, आपकी बुर में जानें के लिए।

सुनीता _न बाबा अब मैं थक गई हूं। अभी और नही।

राजेश _मतलब तुम्हारी बुर की आग बूझ गई।

सुनीता _हा,

राजेश _पर मेरा तो अभी huwa नही है न।

अभी तो मेरे land की प्यास बुझा नही है।

सुनीता पीठ के बल लेट गई।

उसने देखा राजेश का land और काफी लंबा और मोटा हो गया था जो हवा में झटके मार रहा था।

सुनीता _मतलब जब तक तू झड़ेगा नही, मुझे छोड़ेगा नही।

राजेश _तुम ही ने तो कहा था न अभी की आज से मैं तुम्हारा मर्द हूं।

तो क्या अपने मर्द को ऐसे ही बीच में छोड़ दोगे।

सुनीता _बाते बनाना तो कोई तुमसे सीखे। अभी मैं थक गई हूं बाबा, मुझे सुस्ताने दे। मुझे प्यास भी लगी है।

राजेश _मै तुम्हारे लिए पानी लेकर आऊ।

सुनीता _अरे नही, मै पानी पी कर आती हूं।

राजेश _कही आप भाग तो नही जाएंगी।

सुनीता _अरे नही बाबा, अपने मर्द को छोड़ कर भागी तो नुकसान मेरा ही है।

राजेश _वो कैसे?

सुनीता _तुम कही और मुंह मारने लगोगे।

सुनीता बेड से उठी और किचन की ओर जानें लगी।

जब वह दरवाज़े की ओर जा रही थीं तो उसकी मटकते चूतड को देखकर राजेश का land और झटके मारने लगा।राजेश अपने land को अपने हाथो से सहलाने लगा।

दरवाज़े से बहार निकलने से पहले जब सुनीता मुड़कर राजेश की ओर देखी दोनों की नजरे मिली, सुनीता शर्म के मारे पानी पानी हो गई।

सुनीता किचन में जाकर, पेट भर पानी पी।

फिर वह अपने बेड रूम की ओर गई। उसने देखा उसका पति अभी भी घोड़े बेच कर सो रहा है।

वह अपने कमरे में जाकर अपने आलमारी से चिकनाई वाला क्रीम ले ली, और अपने कमरे से निकल कर सीधे राजेश के कमरे की ओर चली गईं।

इधर राजेश अपने land को सहलाते हुवे,सुनीता की आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।

सुनीता जब कमरे में पहुंची, उसकी नजर राजेश के land पर गया जो अभी भी हवा में झटके मार रहा था। जिसे देखकर सुनीता मुस्कुराने लगी।

सुनीता कमरे में आने के बाद राजेश के बगल में आकर लेट गई।

राजेश एक हाथ से अपने land तो दूसरे हाथ से सुनीता की बुर रगड़ने लगा।

सुनीता का शरीर फिर गर्म होने लगा।

राजेश सुनीता के उपर आ गया और उसकी ओंठ को चूसने लगा।

राजेश _sunita की बुर चाटने लगा।

जिससे सुनीता फिर गर्म होने लगीं।

आह उन, आह,,,

सुनीता जब पूरी तरह गर्म हो गई।

वह बेड से उठी और राजेश को भी बेड से नीचे ले आया। फिर नीचे बैठ कर राजेश की land को मुंह में भर कर चूसने लगीं।

राजेश सुनीता का सिर पकड़ कर अपना land उसके मुंह में अदंर बाहर करने लगा।

कुछ देर तक मुंह चोदने के बाद राजेश ने तकिया फर्श पर रखा और नीचे फर्श पर पीठ के बल लेट गया।

और सुनीता को अपने उपर आने का इशारा किया।

सुनीता राजेश के land के उपर आकार खड़ा हो गई और राजेश के land को पकड़ कर अपने योनि के मुंह में रखकर बैठ गई।

Land सरसराता huwa अदंर चला गया।

अब सुनीता राजेश के land के उपर उछलने लगी।

राजेश ने सुनीता की क़मर को पकड़ कर नीचे से land को उसकी बुर में ठेलने लगा।

सुनीता राजेश के land पर उछल उछल कर चुदने लगी।

कमरे में गिर से fach fach की आवाज़ और सुनीता की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

सुनीता फिर से जन्नत में पहुंच गई।राजेश सुनीता की क़मर पकड़ कर अपने land पर पटक पटक कर चोदने लगा।

दोनों पूरे जोश में थे, और संभोग सुख के परम आनंद को प्राप्त कर रहे थे,,

तभी सुनीता land को बुर से बाहर निकाल कर जोरसे चीखते हुवे,मूतने लगी।

आह मां, आह,,,

उसकी मूत की तेज धार राजेश के सीने पर गिरने लगा।राजेश मुस्कुराने लगा।

सुनीता फिर से land को बुर में डाल कर उछल कर कर चुदने लगी।

राजेश भी उसकी क़मर को पकड़ कर अपने land पर पटक पटक कर चोदने लगा कि कुछ देर में ही सुनीता फिर से land योनि से बाहर निकाल कर मूतने लगी।

सुनीता फिर से योनि में land डालकर चुदने लगी, फिर कुछ देर बाद मूतने लगी।

राजेश को अपनी मां को मूत ते देख मजा आ रहा था। उसका जोश और बढ़ता जा रहा था।

जीतना पानी पी थी वह मूत के बाहर निकाल दी उसके बाद वह अपने कमरे से लाई क्रीम अपनी गाड़ में भर कर राजेश के land पर चुपड़ दिया।

फिर लैंड को पकड़ कर अपनी गाड़ की छेद पर उसका टोपा रख कर अदंर डालने की कोशिश करने लगीं।

धीरे धीरे land गाड़ में उतरने लगा। जब आधा land गाड़ में घुस गया वह धीरे धीरे लैंड के ऊपर उछलने लगी।

कुछ देर में ही land ने गाड़ में अपनी जगह बना लिया।

अब राजेश भी नीचे से धक्का मार मार कर सुनीता की गाड़ मारने लगा।

सुनीता के मुंह से सिसकारी निकल कमरे में गूंजने लगा।

कुछ देर बाद सुनीता राजेश के उपर लुड़क गई।

सुनीता _बेटा अब मै थक गई।

सुनीता राजेश के उपर से उठा राजेश ने सुनीता को बेड पकड़कर झुका दिया और स्वयं उसके दोनों टांगो के बीच आ गया।

अपने land को सुनीता की योनि के मुख पर रख एक जोर का धक्का मारा। एक ही बार में सरसरता huwa land योनि में उतर गया।

अब राजेश सुनीता की क़मर पकड़ कर gach gach बुर चोदने लगा।

सुनीता की मुंह से फिर कामुक सिसकारी गूंजने लगी।

फिर से वह जन्नत की सैर करने लगीं।

हवस में उसकी मुंह से,,,,

आह चोद साले और चोद फाड़ दे मेरी chut बुझा दे इसकी प्यास,,,

राजेश,, ले साली रण्डी, ले chud अपने बेटे की land से,,,

राजेश जोर जोर से बुर चोदने लगा,,,

तभी वह अपना land boor से निकाल कर सुनीता की गाड़ में रख कर जोर का धक्का मारा।

सुनीता चीख उठी,,

सुनीता _अबे लौड़े का, ये बुर नही गाड़ है? ऐसे गाड़ मांरेगा तो कल मै हग नही पाऊंगी, बहेंचोद कही का।

राजेश _और चीख साली मै आज तेरी गाड़ फाड़ के रहूंगा।

ले साली ले और ले,राजेश और जोर जोर से गाड़ मारने लगा,,

सुनीता _अबे छोड़ मादरचोद, मेरी गाड़ फट जाएगी।

राजेश _साली kutiya तेरी गाड़ फाड़ना ही तो है।

राजेश और जोर जोर से गाड़ मारने लगा।

पर गाड़ की तेज रगड़ के कारण वह खुद को रोक न सका और आह मां आह आह,,,

वह गाड़ के अदंर ही झड़ने लगा।

सुनीता भी गर्म गर्म वीर्य को अपने गाड़ में जाती हुई महसूस की और झड़ने लगीं।

दोनों काफी थक गए थे एक दूसरे के बाहों में सो गए।

कुछ देर बाद सुनीता की नजर घड़ी पर पड़ी,,,

सुबह के 5बज गए थे,,

सुनीता _बेटा मेरा नहाने का समय हो गया है।

अब मैं चलती हूं अपने कमरे में,,,

सुनीता अपने कपडे पहन ली, और कमरे से जानें लगी,,

तभी राजेश ने कहा मां तैयार रहना अभी हनीमून बांकि है।

सुनीता _चुप बेशरम इतना करने के बाद भी मन नही भरा है। वह मुस्कुराते हुवे अपने कमरे की ओर जानें लगी।

 
सुनीता राजेश के कमरे से निकलने के बाद सीधा अपने कमरे में गई। वहा पहुंची तो शेखर अभी भी सोया huwa था।

वह सीधा बाथरूम में घुस गई और प्रतिदिन की तरह फ्रेस होने के बाद नहाने लगी।

नहाते समय अपनी chut और गाड़ की रगड़ रगड़ कर अच्छे से सफाई की वह अपने chut और गाड़ की हालत देखकर मुस्कराने लगीं।

कमबख्त ने क्या हाल बना दिया है मेरी गाड़ का। बुरी तरह से गाड़ मारा है। पुरा सूजा दिया है बडी मुस्किल से हग पाई।

रात की chudai से तो मेरी मूत ही निकल गई। वह लज्जित महशुस करने लगीं।

छी मै अपने बेटे के सामने उसके शरीर के उपर ही मूतने लगी।

हवस मै बिल्कुल अंधी हो गई थी।

हे भगवान आज तो हनीमून मनाने की बात कह रहा था।

पता नही दिन भर में मेरी chut और गाड़ का और क्या हालत करेगाअपने घोड़े जैसे land से।

वह नहाते हुवे यही सब सोच रही थी।

जब वह नहाकर बाहर निकली तो, शेखरअभी भी सोया huwa था।

वह पेटीकोट, ब्लाउज और साड़ी पहन कर तैयार हुई।

पूजा रूम में चली गईं। और पूजा करने के बाद अपने कमरे में आई।

सुनीता _अजी उठने का समय हो गया है। और कितने देर तक सोएंगे आप, आज ड्यूटी पर नहीं जाना है क्या?

शेखर ने आंखे खोला।

शेखर _रात को थोड़ा लेट से सोया था न समय सुबह समय के पता ही नहीं चला।

शेखर बेड से उठ कर घर में ही थोड़ा व्यायाम और योगा किया, फिर अखबार पढ़ने के बाद पौधो को पानी दिया। फिर बाथरूम में जाकर नहाने लगा।

इधर सुनीता किचन में काम करने लगीं।

स्वीटी भी समय पर उठ कर प्रतिदिन की तरह दैनिक दिनचर्या करने लगी।

इधर राजेश रात भर सुनीता की chudai कर थक गया था।

तो वह घोड़े बेच कर सो रहा था।

शेखर और स्वीटी को सुनीता ने समय पर नाश्ता करने के लिए आवाज़ दिया।

दोनों डाइनिंग टेबल पर नाश्ता करने पहुंच गए।

शेखर _सुनीता, राजेश कहा है? नाश्ता करने के लिए अभी तक नही पहुंचा।

स्वीटी _हां मां, भईया कहा है।

सुनीता _राजेश अपने कमरे में आराम कर रहा है? उसका सिर दर्द कर रहा था तो दवाई लेकर फिर से सो गया। कह रहा था कि वह आज कालेज नही जायेगा।

शेखर _अरे, मुझे अभी बता रही हो, ज्यादा चिन्ता वाली बात तो नही।

सुनीता _नही जी, दवाई लिया है ठीक हो जायेगा ज्यादा चिन्ता की बात नही।

नाश्ता करने के बाद शेखर अपना आफिस चला गया।

स्वीटी राजेश के कमरे में गई उसने देखा की सच में राजेश सोया हुआ था। स्वीटी ने उसे जगाना उचित नहीं समझा।

स्वीटी भी समय पर कालेज पहुंच गई।

इधर किचन का काम निपटा लेने के बाद, सुनीता अपने कमरे में गई, और खुद को आईने में निहारी और थोडा मेकअप की।

फिर राजेशके कमरे की ओर जानें लगी।

जब वह उसके कमरे में पहुंची, वह राजेश के सिर के पास जाकर बेड में बैठ गई।

राजेश के सिर को सहलाते हुवे बोली।

सुनीता _और कितनी देर तक सोएगा बदमाश उठ जाओ।

अपनी मै के स्पार्स और आवाज़ सुन कर राजेश उठ गया।

राजेश _मां, आप कब आई।

सुनीता _जस्ट अभी।

चलो अब उठ जाओ, 10बज चुका है और कितने देर तक सोएगा।

राजेश _क्या दस बज गया? मुझे तो समय का पता ही नहीं चला।

सुनीता _तुम्हारे पापा आफिस चला गया है और स्वीटी कालेज आज तुम्हें कालेज नही जाना क्या?

राजेश _, मां, अब मै कालेज कितने बजे जाऊंगा। अगर कालेज ही भेजना था तो थोड़ा जल्दी उठा देती।

बोलो क्यूं नहीं उठाई।

सुनीता _हूं, मै सोंची तुम रात भर जागे हो, तो मुझे तुम्हें जल्दी उठाना उचित नहीं लगा।

राजेश _सच बताओ यही बात है की कुछ और

सुनीता _और क्या बात हो सकती है?

राजेश _कही आप भी तो हनीमून मनाने के मूड में तो नहीं।

सुनीता _चल हट बदमाश , कुछ भी बोलता है।मै भला ऐसे क्यू सोचूंगी?

वैसे भी कल तुमने मेरी जो हालत की है उसके बाद मेरी और हिम्मत नही।

राजेश _पर हमारा मूड तो है। खुद ही देख लो।

राजेश ने अपने ऊपर डले चादर को हटाया।

वह अभी नंगा ही लेटा था। उसका land खड़ा huwa था।

सुनीता _ढक इसे बेशरम सुबह सुबह मुझे अपना घोड़ा दिखा रहा है।

वैसे रात भर दौड़ लगाने के बाद भी तेरा घोड़ा थका नही है।

राजेश _मां , मै भले ही थक जाऊ लेकिन ये घोड़ा नही थकता।

सुनीता _चल अब उठ कर नहा ले, फिर मै तेरे लिए नाश्ता लगाती हूं।

राजेश _मां, पता है तुमनेरात मुझसे क्या कहां था?

सुनीता _क्या बोली थी, मुझे तो कुछ याद नहीं।

राजेश _तुमने कहा था की आज से जो तुम बोलोge वही करुंगी।

सुनीता _पर बेटा रात गई बात गई। तुम भूल जाओ ऐसा मैंने तुमसे कुछ कहा भी होगा तो।

राजेश _मां, आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकती?

आप अपनी बातो से नही मुकर सकती।

सुनीता _लो मुकर गई, बोलो क्या करोगे?

राजेश _मै आपसे बात नही करूंगा और इस कमरे से दिन भर बाहर नहीं निकलूंगा। कुछ खाऊंगा पियूंगा भी नहीं।

जाओ आप मेरे कमरे से।

सुनीता _ओ हो हो मेला बेटा तो नाराज हो गया।

बोलो किया चाहते हो?

राजेश _, ये हुई न बात।

आज मै सिर्फ टावेल में रहूंगा, और आप सिर्फ पेटीकोट में।

सुनीता _न बाबा, मुझे बडी शर्म आयेगी।

मेरी दूदू देखकर तेरा खड़ा ही रहेगा और मेरे ऊपर दिन भर चढ़ने की कोशिश करेगा। वैसे भी रात में तूने मेरी हालात खराब कर रखी है।

राजेश _ठीक है फिर जाओ अपने कमरे में, मेरी कमरे की दरवाजा अब पापा के आने के बाद ही खुलेगा।

सुनीता _तू न बडा जिद्दी है, हमेशा अपनी बात ही मनवाता ।

ठीक है मैं तेरी बात मानता हूं पर मेरी भी एक शर्त है।

राजेश _कैसी शर्त?

सुनीता _तू मेरे साथ जबरदस्ती नहीं करेगा।

राजेश _प्रामिश, आप जब कहेंगी, तभी करूंगा। जबरदस्ती नहीं।

अब चलो निकालो अपनी साड़ी।

सुनीता _अपनी आंखे बन्द करो।


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जैसे ही सुनीता अपना साड़ी खोली, अपना साड़ी राजेश के मुंह में फेकी, राजेश आंखे खोल कर सुनीता की ओर दौड़ा और उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया

सुनीता _अरे क्या कर रहा है छोड़ो मुझे। तुमने कहा था कोई जबरदस्ती नहीं करोगे।

राजेश _ठीक है,सॉरी।

चलो अब चोली भी उतार दो।

सुनीता _न, मुझे शर्म आ रही है।

राजेश _मै आंखे बन्द कर लेता हूं।

राजेश ने अपनी आंखे बन्द कर ली।

सुनीता ने अपनी चोली भी उतार दी और अपनी दोनों हाथो से अपनी चूची छुपा ली।

राजेश ने आंखे खोला।

सुनीता शर्म के मारे गड़ी जा रही थी।

सुनीता _देखो तुम मुझसे दूर ही रहना।

राजेश _ठीक है।

चलो अब मुझे नहलाओ।

सुनीता _क्या?

राजेश _तुमने तो कहा था न कि आज मेरी सारी बाते मानोगी।

सुनीता _क्या मुसीबत है?

राजेश बाथरूम मे चला गया।

मां अदंर आओ।

सुनीता अपनी चूची छिपाते हुए अदंर गई।

राजेश_, मुझे मूत आ रही है!

सुनीता _, तो मूत लो।

राजेश _तुम मूतने में मेरी मदद करो।

सुनीता _वो कैसे?

राजेश _अपने हाथों से पकड़ कर मुतवाओ।

सुनीता _न न मै ये नही करने वाली।

राजेश _आपने कहा था कि आज मेरी सारी बाते मानोगी।

सुनीता _देखो मुझे बडी शर्म आयेगी। तुम अपने आंखे बन्द करो।

राजेश _ठीक है।

राजेश ने अपनी आंखे बंद कर लिया।

सुनीता राजेश के पीछे खड़ी हो गई और एक हाथ से उसका land पकड़ लिया।

सुनीता _लो, अब मूतो।

राजेश _मूत ऐसे ही थोड़ी बाहर आयेगी, थोड़ा हिलाओ।

सुनीता _ओ हो क्या मुसीबत है?

सुनीता ने राजेश का land अपने हाथ से पकड़ कर आगे पीछे हिलाने लगी।

राजेश _हां ऐसे ही।

सुनीता _अब जल्दी मूतो।

राजेश का land सुनीता के हाथ लगने से और अकड़ गया।

सुनीता _तुम्हारा घोड़ा तो और अकड़ रहा है। जल्दी मूतो।

राजेश land पर दबाव बढ़ाया।

मूत रुक रुक कर पिचकारी मारने लगा।

सुनीता आगे पीछे हिलाती रही।

राजेश _आह, उन,,, बहुंत अच्छा फील हो रहा है। थोड़ा और हिलाओ।

आह उन,,,

राजेश का मूत रुक रुक कर बाहर आ रहा था। जब मूत बाहर निकलना बंद हो गया।

सुनीता _मेरे ख्याल से तुम्हारी सारी मूत बाहर आ गई है।

राजेश ने आंखे खोला तो। उसकी नजर सुनीता की चूची पर गया।

सुनीता शर्मा गई वह अपने दोनों हाथों से अपनी चूची छुपा ने लगी।

राजेश मुस्कुराने लगा।

राजेश _अब मुझे शौच करना है।

सुनीता _तो क्या वो भी मै कराऊंगी?

राजेश _न, मै कमोड पर बैठ रहा हूं। आप यही रहो।

सुनीता _न,मै बाहर बैठ रही हूं। जब हो जाय तब बताना।

सुनीता बाहर चली गईं।

राजेश मुस्कुराने लगा।

शौच करने के बाद राजेश ने,,

राजेश _मां, मैंने शौच कर लिया है, अब मुझे नहला दो।

राजेश ने सावर आन कर दिया।

और नहाने लगा।

सुनीता अदंर गई।

सुनीता _सावर बन्द करो नही तो मैं भीग जाऊंगी।

राजेश _मां, आप तो सिर्फ पेटीकोट में हो। भीग गई थी क्या होगा दूसरा पेटिकोट पहन लेना।

सुनीता ने सावर बंद कर दिया।

चलो मैं साबुन लगा देती हूं।

सुनीता ने राजेश को नीचे बैठने कहा।

राजेश नीचे बैठ गया।

फिर सुनीता उसकी बालो पर साबुन लगाने लगीं।

दोनों हाथो से साबुन लगाने से उसकी चूची आजाद हो गई। जिससे वह राजेश के आंखो के सामने झूलने लगे।

जिसे देखकर राजेश का land अकड़ कर लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया।

राजेश को चूची पकड़ने की इच्छा हो रही थी। पर सुनीता ने मना किया था।

राजेश _मां, आज आप को भी मेरे साथ नहाना है।

सुनीता _न बाबा मै नहा चुकी हूं।

राजेश _देखो, हनीमून मे मर्द और औरत दोनों साथ नहाते हैं। आप मना नही कर सकती।

सुनीता _अब खड़ा हो जाओ पेट पर साबुन लगा दू।

राजेश खडा हो गया।

उसका खड़ा land सुनीता के आंखो के सामने आ गया।

वह मुस्कुराने लगी।

और राजेश के पेट पर साबुन लगाने लगीं।

धीरे धीरे वह नीचे गई।

वह राजेश के land के पास पहुंच गई।

सुनीता _मां, अपने छोटे बेटे को भी साबुन से अच्छे से धो दो।

कल कुवे और खाई में खूब डुबकी लगाया है।

सुनीता _चुप बेशरम।

राजेश मुस्कुराने लगा।

इधर सुनीता ने राजेश के land पर साबुन लगा कर मूठ मारना शुरू कर दिया।

राजेश _आ मां, आह,, बहुंत अच्छा फिल हो रहा है।

सुनीता ने land के सुपाड़े की चमड़ी को हटाकर अच्छे से सफाई की।

राजेश की घोड़े जैसे land को छूने मूठ मारने से सुनीता भी गर्म होने लगी।

साबुन लगा लेने के बाद राजेश ने सावर चालू कर दिया।

सुनीता और राजेश दोनों के उपर सावर का पानी गिरने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने सावर बंद कर दिया।

मां अब मै आपको साबुन लगाऊंगा।

राजेश ने सुनीता की पीठ पर साबुन मलने लगा।

फिर उसके पीछे खड़ा होकर गले फिर हाथो में फिर उसके सीने की ओर आगे बडा।

उसकी चुचियों को मसल मसल कर साबुन लगाने लगा।

सुनीता सिसकने लगी।

राजेश _क्या huwa मां, सिसक क्यू रही हो?

सुनीता _तुम्हारी हरकतों, से गुदगुदी हो रही है।

राजेश ने सुनीता की पेट और नाभी पर भी खूब मल मल कर साबुन लगाया।

जिससे सुनीता बहुत ज्यादा गर्म होने लगी। वह तेज तेज सांस लेने लगीं।

राजेश _मां, आपका पेटीकोट उतार दो साबुन Lलगाते नही बन रहा है।

सुनीता _ तुम ही उतार दो।

राजेश ने पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया। पेटी कोट सरसराता huwa नीचे गिर गया।

राजेश ने जैसे ही सुनीता की chut में साबुन लगाया, सुनीता सिसक उठी।

राजेश ने बुर में उंगली डाल कर अच्छे से बुर की सफाई करने लगा। जिससे सुनीता की उत्तेजना एक दम से बड़ गई।

उसकी बुर से पानी बहने लगा।

राजेश बुर में उंगली डालकर रगड़ रगड़ कर सफाई करने लगा, जिससे सुनीता की हालत एक दम खराब हो गई।

सुनीता _हो गया बेटा बस कर, सुनीता कपकपाते आवाज़ में बोली।

राजेश सुनीता को पीछे घुमाया और उसकी चूतड पर साबुन मलने लगा।

सुनीता की उत्तेजना चरम पर पहुंच गई।

फिर जब राजेश सुनीता की गाड़ में उंगली डाल कर सफाई किया तो, सुनीता की मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगीं।

राजेश गाड़ की सफाई के बाद फिर chut पर साबुन लगाया और हाथ से रगड़ने लगा।

सुनीता का पुरा शरीर कपकपाने लगा।chut से पानी झरने की तरह बहने लगा।

सुनीता _आह मां, उन आह बेटा बस कर,, आह मां मै मर जाऊंगी।

मादरचोद बस कर,,,

मुझसे बर्दास्त नही हो रहा,,

राजेश _मां आपकी chut से तो पानी बह रहा है।

सुनीता _साले ऐसी हरकत करेगा तो पानी निकलेगा ही,,,

अब देख क्या रहा है बहेंचौद, बुझा मेरी प्यास, पूरे शरीर में आग लगा दी तूने,,

राजेश मुस्कुराने लगा।

राजेश _ले मेरी रण्डी,chud मुझसे।

राजेश ने अपना land सुनीता की बुर में सेट कर एक जोर का धक्का मारा,land एक बार में ही सरसराता huwa अदंर घुस गया।

सुनीता बाथरूम के नल को पकड़ कर नीचे झुक गई। राजेश सुनीता की क़मर पकड़ कर, गच गच बुर चोदना शुरू कर दिया।

सुनीता की मादक सिसकारी बाथरूम में गूंजने लगा।

सुनीता ने सावर चालू कर दिया।

दोनों के उपर पानी गिरने लगा।

इधर राजेश गपागप बुर में अपना land पेलने लगा।

सुनीता जन्नत में पहुंच गई।

सुनीता _चोद साले और जोर से चोद, बहुंत मज़ा आ रहा है।

तू पुरा सांड है। गजब का चोदता है।

राजेश _ले chud मेरे land से, ले एक और ले, मेरी चुड़क्कड मां,chud अपने बेटे की land से, क्या मस्त मॉल है तू।

दोनों के बीच काफी देर तक इसी पोजीशन में घमासान chudai चलता रहा।

फिर राजेश सुनीता को अपने लैंड पर उठा कर कमोड पर बैठ गया।

और उसकी क़मर उठा उठा कर chudai करने लगा।

सुनीता _आह मां मर गई मै, साले और चोद अपनी मां को, बुझा मेरी प्यास।

राजेश _ले साली, ले और ले,chud मेरे मूसल से।

राजेश इसी पोजीशन में कुछ देर तक चोदने के बाद।

कमोड से उठ गया और नीचे फर्श पर लेट गया।

और उसका land हवा में लहराने लगा।

सुनीता राजेश के land को पकड़ी और अपनी बुर के छेद पर सुपाड़े को सेट कर बैठ गई।

Land सरसराता huwa बुर में जड़ तक घुस गया।

सुनीता चिहुंक उठी,, आह मां।

साला कितना बडा land है तेरा ऐसा लगता है पेट फाड़कर गले से बाहर आ जायेगा।

सावर से पानी दोनों के ऊपर गिर रहा था।

सुनीता अब राजेश के land पर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश भी उसकी कमर पकड़ कर नीचे से कमर उठा उठा कर land को बुर में और अधिक घुसाने का प्रयास करने लगा।

दोनों जन्नत का सुख भोगने लगे।

सुनीता को इतना मज़ा आ रहा था कि वह बिना रुक land पर जोर जोर से उछल उछल कर chud रही थी, कि तभी उसने land को बुर से बाहर निकाल दी और जोर से चीखते हुए मूतने लगी,

आह मां, आह आह,, माई,,

उसकी मूत सीधे राजेश की चेहरे पर जानें लगा, दो तीन पिचकारी तो सीधा राजेश के मुंह में गया।

राजेश ने सुनीता की मूत मुंह में भर लिया।

फीर सुनीता की मुंह में पुरकी मारा।

कुछ मूत तो राजेश के पेट में चल गया।

राजेश _मां क्या स्वाद हैतुम्हारी मूत की एक दम नमकीन।

इधर सुनीता हवस में अंधी हो चुकी थी। उसे होश नही था। वह जोश में थी।

वह land को बुर में डाल कर फिर जोर जोर से उछल उछल कर चुदने लगी।

कुछ देर बाद फिर से वह chikhte हुवे मूतने लगीं,,

आह मां,,, आह,, माई ई,,

राजेश के फेस पर मूत की कई पिचकारी मारी। एक दो पिचकारी राजेश के मुंह में गया।

राजेश सुनीता की मूत पीने लगा।

राजेश _आह गजब की,,

सुनीता _, पी ले साले, मादरचोद,,, पी मेरी मूत,,,

सुनीता हवस में अंधी होकर बोली,,,

फिर सुनीता land में उछलना सुरू कर दी।

राजेश भी उसकी चूची मसल मसल कर चूतड उपर उठा उठा कर सुनीता का सहयोग करने लगा।

सुनीता खुद को रोक न सकी और चीखते हुवे झड़ने लगी।

आह मां आई,, मै गईं रि आह,,,

वह राजेश के उपर लुड़क गई।

इधर सावर का पानी दोनों के उपर गिर रहा था। कुछ देर तक यू ही लेट कर सुस्ताने के बाद,,,

राजेश _मां आप ठीक तो है न

सुनीता _हूं,,

कुछ देर तक ऐसे ही सुस्ताने के बाद दोनों उठे और सावर के पानी से नहाने लगे।

नहाकर जब दोनों बाथरूम से बाहर आए।

सुनीता _मेरे तो पूरे बाल गीले हो गए। अब इसे खुले ही रखने पड़ेंगे।

राजेश _अच्छे है, खुले बालो में आप और ज्यादा हॉट लगोगी।

सुनीता _चुप बेशरम।

सुनीता अपनी शरीर को टावेल से पोछने के बाद उसे लपेट ली।

सुनीता _तुम तैयार होकर डाइनिंग टेबल पर आ जाओ। नाश्ता के लिए।

राजेश _मां अब तैयार क्या होना सिर्फ टावेल में ही तो रहना है। और अपको भी याद है न सिर्फ पेटीकोट में रहोगी।

सुनीता _इतना होने के बाद भी जी नही भरा है।

राजेश _मां मेरा कहा huwa है अभी, देखो तो वे अभी तक अकड़ा हुआ है, इसका पानी अभी कहा निकला है।

सुनीता _चुप बेशर्म।

सुनीता अपने कमरे में चली गई। और अपनी बालो को सुखाने लगी। फिर एक पेटीकोट पहन ली।

इधर राजेश भी अपने शरीर को पोछने के बाद एक टावेल लपेट कर।

नाश्ता के लिए डाइनिंग टेबल पर पहुंच गया।

राजेश _मां जल्दी नाश्ता लगाओ, बडी भूख लगी है।

सुनीता _अभी लाया बेटा।

सुनीता नाश्ता लेकर डाइनिंग टेबल पर पहुंची।

वह सिर्फ पेटीकोट में थी।

राजेश मुस्कुराने लगा।

सुनीता _क्या huwa मुस्कुरा क्यू रहा है?

राजेश _बस ऐसे ही।

सुनीता _चलो अब नाश्ता करो।

राजेश _आप अपने हाथो से नाश्ता कराओ।

सुनीता _अच्छा,पता नही और क्या क्या करना पड़ेगा?

सुनीता _नाश्ता का टुकड़ा लेकर राजेश को खिलाने लगी।

राजेश _ऐसे नही।

सुनीता _फिर कैसे?

राजेश _पहले मेरे गोद में बैठो।

फिर खिलाओ।

सुनीता _पहले जब तू छोटा था तो तुमको अपनी गोद में बिठा कर खिलाती थी।

अब तू बडा हो गया है, अब मुझे अपनी गोद में बिठा कर खिलाना चाहता है।

राजेश _, हा, सही समझी।

तुम मुझे खिलाना मै आपको खिलाऊंगा।

सुनीता _अच्छा।

सुनीता राजेश की गोद में आ कर बैठ गई।

और राजेश को नाश्ता का टुकड़ा खिलाने लगी।

राजेश ने भी नाश्ता का टुकड़ा लिया और सुनीता को खिलाई।

राजेश _मां, सिर्फ नाश्ता खिलाओगी दूध नहीं पिलाओगी।

सुनीता _पहले नाश्ता कर लो फिर दूध लाऊंगी बादाम वाली।

राजेश _मै तो नाश्ता के साथ साथ दूध भी पियूंगा।

ये वाली।

राजेश ने सुनीता की चूची मसल दिया।

सुनीता सिसक उठी।

राजेश ने एक चूची मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुनीता _अरे छोड़ बेशरम, वैसे भी इसमें दूध कहा आता है जो पिएगा।

राजेश _तो क्या huwa चूस कर ही मन बहला लूंगा।

राजेश नाश्ता का टुकड़ा मुंह में डाल कर चबाने के बाद चूची मुंह में भर कर मसल मसल कर पीने लगता, जिससे सुनीता फिर उत्तेजित होने लगीं।

राजेश का land तो पहले से ही तना हुआ था। सुनीता की चूतड से दब कर और झटके मार रहा था जिसका एहसास सुनीता को हो रहा था। जिससे उसके शरीर में उत्तेजना बड़ने लगी।

इधर राजेश अब सुनीता की पीठ चूमने चाटने लगा। साथ में नाश्ता भी जारी था।

दोनों एक दूसरे को नाश्ता करा रही थे।

मां ये लो नाश्ता का टुकड़ा अपने मुंह में भर कर रखो फिर मै आपके मुंह से इसे खाऊंगा।

सुनीता _छी तू बिलकुल बेशरम हो गया है।

सुनीता ने नाश्ता का टुकड़ा अपने मुंह में लिया।

राजेश सुनीताकी मुंह से नाश्ता अपने मुंह में भर कर सुनीता की ओंठ चूसते हुवे। नाश्ता चबाने लगा।

सुनीता बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

उसकी बुर पानी छोड़ने लगा।

तीन चार बार ऐसे ही करने से सुनीता की हालात खराब हो गई।

राजेश ने सुनीता को खड़ा किया और अपना टावेल खोल दिया।

राजेश ने सुनीता की पेटीकोट ऊपर उठा कर सुनीता को अपने land पर बिठा दिया।

राजेश अब फिर से सुनीता के मुंह से नाश्ता अपने मुंह में भर कर खाने लगा, बीच बीच में वह चूची पीने और मसलने लगता।

सुनीता अत्यंत काम विहिल हो गई।

वह थोड़ी उठी और राजेश के land को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी बुर की छेद पर रख कर बैठ गई।

बुर एक दम गीली थी बिना किसी रुकावट के land बुर में सरसरता huwa पूरा अदंर घुस गया।

अब सुनीता राजेश की land पर थोड़ा थोड़ा उछल उछल कर चुदने लगी।

दोनों नाश्ता भी कर रहे थे और संभोग भी जिससे दोनों को परम आनंद मिलने लगा।

बीच बीच में राजेश सुनीता की क़मर पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगता।

फिर दोनों नाश्ता निगलते यही प्रक्रिया चलता रहा जब तक नाश्ता खत्म नहीं हो गया।

जब नाश्ता खत्म huwa राजेश खडा हुआ और सुनीता को डाइनिंग टेबल पर पेट के बल लिटा कर गच गच चोदने लगा।

पुरा हाल सुनीता की कामुक सिसकारी से गूंजने लगा।

उसके बाद राजेश ने सुनीता को डाइनिंग टेबल पर पीठ के बल लिटा कर उसकी टांगों को उठा कर दनादन चोदने लगा।

सुनीता तो जन्नत में पहुंच गई,,

सुनीता _आह, चोद मेरे राजा,, और जोर से चोद, बना दे भोसड़ा मेरे बुर को। साली बहुत खुजाती है।

राजेश _ले मेरी रानी, ले एक और ले, आज तेरी बुर की पूरी प्यास बुझा दूंगा।

राजेश कुछ देर इसी आसन में चोदता रहा उसके बाद सुनीता को उठा कर सोफे पर ले गया और सुनीता को अपनी land पर बिठा कर उसकी ओंठ चूसने लगा।

सुनीता भी उसका साथ देने लगी।

फिर राजेश सुनीता की क़मर पकड़ कर गच गच चोदने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने सुनीता को घुमा दिया अब उसका पीठ राजेश की ओर हो गया।

इस आसन पर सुनीता राजेश के land पर उछल उछल कर चुदने लगी। और संभोग का परम आनंद को प्राप्त करने लगी।

इस आसन में दोनों के बीच घमासान chudai चला।

सुनीता झड़ गई।

दोनों सोफे में लेटकर सुस्ताने लगे।

कुछ देर बाद,,

सुनीता _अब छोड़ो, मुझे किचन पे काम करना है, तुम कमरे मे जाकर आराम करो।

राजेश _ठीक है, मै कमरे मे जा रहा हूं पर अपने नही आपके और पापा के। हम आज साथ ही सोएंगे।

सुनीता _पुरा बेशरम बन गया है।

राजेश _हां और जल्दी आना रूम में मेरा अभी बडा मन है।

सुनीता _इतना करने के बाद भी तू थका नही है?

राजेश _chudai कटके जो थक जाए ओ मर्द ही क्या?

सुनीता _अच्छा मै भी देखती हूं तू कितना बडा मर्द है।

तू चल मै अभी आई।

राजेश सुनीता के कमरे मे जाकर इंतजार करने लगा।

वह झड़ा नहीं था, उसे और चोदने का मन कर रहा था।

कुछ देर बाद सुनीता कमरे में आई।

राजेश इस समय अपने land सहला रहा था।

राजेश _आ गई मेरी जान,,

चल चूस मेरा लौड़ा,,

इंतजार कराती है साली अपनी असली मर्द को चल चूस मेरे लौड़े को। रण्डी कही की।

सुनीता राजेश की land को अपनी मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश सिसकने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने सुनीता को बेड पर लिटा दिया और उसका chut चाटने लगा।

सुनीता फिर से उत्तेजित हो गई,,,

आह मां उन,, आई,

सुनीता _अब चोद न re भड़वे, सिर्फ चाट ता रहेगा क्या?

राजेश _साली छिनाल। देख अब मै तुम्हें कैसे चोदता हूं।

राजेश ने सुनीता को अपनी गोद में उठा लिया। और land पे बिठा कर, हवा में उछाल उछाल कर भच भ च चोदने लगा।

कमरे में सुनीता की चीखने और chudai की गच गच आवाज़ गूंजने लगा।

कुछ देर तक राजेश ने ऐसे ही सुनीता को चोदता रहा फिर बेड पर लिटा कर अलग अलग तरीकों से तब तक चोदता रहा जब तक सुनीता झड़ न गई।

फिर सुनीता, थक कर सो गई।

राजेश भी सोने की कोशिश करने लगा।

करीब दो बजे सुनीता उठी।

सुनीता _बेटा, क्या बनाऊं लंच में?

राजेश _मां जो तुम्हारा मन हो बना कर खिला दो।

सुनीता _अरे तुम्हारा तो अभी तक खड़ा है। पता नहि तू कब झड़ेगा। सुबह से मुझे तीन बार झाड़ चुका है।

राजेश _मां मै 4बजे के पहले झडूंगा नही।

सुनीता _अच्छा, तब तक मुझे चोदता ही रहेगा।

राजेश _हां।

सुनीता _, मान गई तेरी मर्दानगी को,

राजेश _अभी तो और देखना banki है।

अब तुम किचन में लंच बनाएगी, मै पीछे से चोदता रहूंगा।

सुनीता _तू पुरा पागल हो गया है।

राजेश _पागल नही दीवान आपका।

सुनीता, मुस्कुराने लगीं।

राजेश _चलो पहली चूसो मेरा औजार।

सुनीता कुछ देर राजेश का लैंड चूसी।

फिर वह किचन में चली गई। भोजन बनाने राजेश भी चला गया।

सुनीता किचन में खाना बनाने लगीं। राजेश पीछे से अपना मूसल सुनीता की बुर में डालकर चोदने लगा।

कुछ देर बुर मारने के बाद वह किचन से घी निकाल कर अपने land और सुनीता की गाड़ में भर दिया

फिर सुनीता की गाड़ मारने लगा।

कभी गाड़ तो कभी बुर में land डाल कर खूब चोदता जिससे दोनो को संभोग का अपार सुख मिल रहा था ।

लंच बन जानें के बाद, राजेश डाइनिंग टेबल पर सुनीता को लच करते हुए खूब चोदा।

लंच करने के बाद दोनों फिर से सुनीता के बेड रूम में पहुंच गए और राजेश ने सुनीता को जमकर भोगा।

सुनीता की सारी प्यास बुझ कर बुर और गाड़ दोनों सूजा कर, सुनीता के मुंह में झड़ गया।

सुनीता राजेश का सारा वीर्य पी गई ,,

कुछ देर सुस्ताने के बाद,

Sunita_, बेटा अब तुम अपने कमरे में जाओ, स्वीटी कालेज से आती ही होगी।

राजेश अपने रूम में चला गया। वह काफ़ी थक गया था अपने कमरे में जाकर दो गया।

 
अगले दिन जब सुबह राजेश जिम जानें के लिए अपने कमरे से बाहर निकला, वह कीचन में गया जहां सुनीता काम कर रही थी।

राजेश पीछे से सुनीता को अपने बाहों मे भरते हुए कहा,

राजेश _गुड मॉर्निंग मां।

सुनीता _गुड मॉर्निंग बेटा।

अरे क्या कर रहा है छोड़ो,

राजेश _अपनी मां को प्यार कर रहा हूं।

सुनीता _कल इतना प्यार करके भी जी नही भरा है।

राजेश _मां, प्यार करने से जी भरता है क्या? मुझे तो जितना प्यार करता हूं। उतना ही और प्यार करने का मन करता है।

सुनीता _बेटा मुझे तुमसे कुछ बाते करनी थीं।

राजेश_बोलो मां, क्या बात करनी है,बोलो?

सुनीता _बेटा, मै चाहती हूं की तुम अब सिर्फ पढाई पर ध्यान दो। एक्जाम पास आ गया है।

ये प्यार व्यार तो बाद मे भी होता रहेगा।

पर यह समय पढ़ाई पर ध्यान देने का है।

यह समय तुम्हें दोबारा नहीं मिलेगा।

प्यार के लिए तो पूरी उम्र पढ़ी है। इसलिए मैं चाहती हूं एक्जाम तक अब तुम सिर्फ अपनी पढ़ाई पर फोकस करो।

मुझे तुमसे बडी उम्मीदे है।

मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा पढ़ लिखकर बडा अफसर बने।

राजेश _मां, मै जानता हूं। आपको मुझसे क्या अपेक्षाएं है?

मां मै कड़ी मेहनत करूंगा आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए।

मैं आपसे वादा करता हूं कि जब तक एक्जाम नही हो जाता। मै औरतों से दूर ही रहूंगा।

सुनीता _मुझे तुमसे यही उम्मीद थी बेटा।

राजेश _ठीक है मां अब मै जिम के लिए निकलता हूं।

सुनीता _ठीक है बेटा।

जिम से आने के बाद राजेश, स्नान कर, स्वीटी और शेखर के साथ बैठकर डिनर किया।

फिर स्वीटी के साथ कालेज निकल गया।

कालेज में लंच के समय, रोहन और स्वीटी कालेज के गार्डन में बैठे थे।

रोहन _स्वीटी, अभी तक तुमने मेरे बारे में अपनी खयालात नही बताई।

मुझे बडी बेशब्री से इंतजार है, तुम्हारे जवाब का।

स्वीटी _रोहन, मुझे थोड़ा और वक्त चहिए, मैंने इस बारे में अब तक ठीक से सोंचा नही है।

हा मै तुम्हें अपना सबसे अच्छा दोस्त मान लिया है।

पर उसके आगे की सोचने के लिए मुझे और समय चाहिए।

रोहन _ठीक है, स्वीटी तुम और समय ले लो, मुझे जवाब का बेसब्री से इंतजार रहेगा।

इधर राजेश और भगत किसी काम से क्लास में ही रुके थे।

जबकि सीमा, निशा कैंटीन में राजेश का वेट कर रहे थे।

तभी रिया अपनी सहेलियों के साथ पहुंची।

रिया _हाई निशु।

निशा _हाई

रिया _यार राजेश और भगत कही दिखाई नहीं दे रहे।

सीमा _वे लोग आते ही होंगे।

रिया _निशु क्या मै यहां बैठ जाऊ।

निशा _क्यू नही?

रिया _थैंक यू

वैसे यार उस दिन तुमने चाटा बड़ी जोर से मारी थी। पुरा नशा उतर गया था मेरा।

निशा _उसके लिए मैं माफी मांग चुकी हूं।

रिया _ओ हा यार मैं तो मजाक कर रही थीं। वैसे तुम बडी किस्मत वाली हो।

निशा _वो कैसे?

रिया _यार, अब देखो न कालेज की सारी लड़कियां राजेश पर मरती हैं और राजेश तुम पर।

सीमा _तुम ये कैसी कह सकती हो कि राजेश निशा पर मरता है।

रिया _अरे यार सब दिखता है।

जब भी कोई लड़की राजेश से कुछ पूछती है या कहना चाहती है, राजेश निशा की ओर देखने लगता है।

जैसे शादी शुदा मर्द किसी लड़की से बात करने से पहले अपनी पत्नि की ओर देखता है कही ओ बुरा न मान जाए।

सीमा _हा, राजेश और निशा एक दूसरे को पसन्द करते है। तो एक दूसरे का ख्याल तो रखेंगे ही।

निशा, सीमा की ओर देखने लगीं।

रिया _हां ये तो है भई।

बडी लकी है यार निशु तुम।

काश मेरे पास भी ऐसा कोई बॉय फ्रेंड होता।

सीमा _क्यू सहर में लडको की कमी है क्या?

रिया _हाय, लड़के तो बहुत देखे है पर राजेश जैसा नहीं।

तभी राजेश और भगत भी वहा पहुंच गए।

रिया _हाई राजेश,

राजेश _हाई, रिया, हाई सीमा

रिया _आओ बैठो, आप लोग, काफ़ी आर्डर करू की और कुछ लेना है।

भगत _भाई को काफ़ी पसन्द है तो काफ़ी ही ऑर्डर कर दीजिए, रिया जी।

रिया _ओके,

रिया ने सबके लिए काफी ऑर्डर कर दिया।

भगत _वैसे रिया जी, विकी आपको फिर परेशान तो नही कर रहा ।

रिया _नही भगत जबसे मैंने आप लोगो के साथ उठना बैठना शुरु की है, वह मुझे ब्लैक मेल करना बन्द कर दिया।

भगत _ओह ये तो अच्छी बात है, फिर भी अगर आपको जरूरत महसूस हो तो हम उनसे बात करेंगे।

तुमको तो क्या शाला किसी भी लड़कियो के साथ, ऐसा करने का सोचेगा भी नहीं।

रिया _ओह थैंक यू भगत आप लोग कितने अच्छे है। मै आप लोगो के ग्रुप में पहले क्यू नही आई?

वैसे कुछ दिनों के बाद कॉलेज में एक्जाम शुरू हो जाएगी, फिर हम लोग मिल नही पाएंगे। इस्का मुझे अपसोश हो रहा है।

वैसे ये तो आप लोगो के कालेज का अंतिम साल है।

कालेज के बाद आगे आप लोगो का क्या प्लानिंग है?

भगत _भाई मै तो राजनीति में जाऊंगा।

राजेश भाई ने तो डिसाइड कर लिया है कि वह आई ए एस अफसर बनकर अपनी मां का सपन पुरा करेगा।

भगत _वैसे आपने क्या सोचा है, एमबीए के बाद।

रिया _भई मै तो एमबीए मेरे मॉम डैड के कहने पर कर रही हूं, वे तो एमबीए के बाद मेरी शादी कराना चाहते है। मेरी इच्छा तो अभी शादी करने की बिलकुल नहीं है। ये भी कोई शादी करने की उम्र है।

ये तो लाइफ को एंजॉय करने के दीन है।

सीमा _सबकी अपनी अपनी सोच है।

वैसे आपको शादी कर लेनी चाहिए।

रिया _वो क्यू ?

सीमा _लाइफ एंजॉय करने के चक्कर में कहीं फिर बुरा फस गई तो।

सभी हसने लगे,,,

रिया _तुम भी सही कह रही, शादी तो कर लू, पर कोई पसन्द का लडका मिलना भी तो चाहिए। जब तक न मिल जाय, रिस्क तो लेना ही पड़ेगा,,

सभी लोग फिर हसने लगे,,,

रिया _वैसे निशा, तुम चुप हो कुछ बोल नहीं रही।

लगता है तुमको मेरा तुम्हारे ग्रुप में शामिल होना अच्छा नहीं लग रहा।

निशा _नही ऐसी कोई बात नही है, मै तो आप लोगो की बाते सुनकर एंजॉय कर रही हूं।

वेटर ने सबके लिए काफी लगाया, सभी काफी पीने लगे।

कुछ देर बाद घंटी लगी ।

सभी अपने अपने क्लास में चले गए।

रिया की सहेली _रिया हम लोगो को तो कुछ समझ नहीं आ रहा है, तुम तो निशा से अपने अपमान की बदला लेना चाहती थीं।

पर तुम तो कुछ और ही कर रही,,,

रिया _मै निशा के द्वारा लगाया गया थप्पड़ को कभी भूल नही सकता, मै इन लोगो का विश्वास जीत कर अपने अपमान का ऐसा बदला लूंगी कि,,,,

सहेली _अब बस करो,, किसी को तुम्हारी योजना के पता नहीं चलना चाहिए ।

राजेश अब अपनी मां से किए वादे के अनुसार। कालेज से आने के बाद घर में पढाई में लग जाता और देर रात तक पढ़ाई करता ।

वह सेक्स के बारे में सोचना छोड़ दिया था।

सुजाता काल करके राजेश को बुलाती पर राजेश परीक्षा की तैयारी की बात कर सुजाता को मना कर देता।

सुनीता ने स्वीटी को भी पढाई पर ध्यान देने की बोलकर उसकी इधर उधर जानें पर प्रतिबंध लगा दी थीं। स्वीटी भी कालेज से आने के बाद घर में देर रात तक परीक्षा तैयारी करने लगीं।

सीमा और निशा भी तैयारी में लग गए।

कुछ दिन बाद एक्जाम शुरू हो गया।

पहले पेपर के दिन कालेज जानें के समय,,

राजेश ने सुनीता का पैर छूकर आशीर्वाद लिया,,

राजेश _मां आज मेरा पहला पर्चा है, आशीर्वाद दो की पर्चा अच्छा जाय।

सुनीता _सुनीता ने राजेश की माथे को चूमते हुए कहा।

बेटा मेरा आशीर्वाद हमेशा आपके साथ है ।

वैसे भी तुम्हारी मेहनत को देखकर मुझे पुरा यकिन है तुम मेरी अपेक्षाओं पर जरूर खरा उतरो ge।

राजेश _थैंक यू मां

सुनीता _जाओ बेटा।

राजेश कालेज चला गया।

राजेश का पर्चा बहुत अच्छा गया।

घर आने पर,,

सुनीता _आ गया बेटा।

राजेश _हा मां

सुनीता _कैसा गया बेटा पर्चा।

राजेश _बहुत अच्छा मां।

सुनीता _जाओ बेटा अपने कमरे मे जाकर फ्रेस हो जाओ मैं काफी लेकर आती हूं।

राजेश _ठीक है मां।

अगले स्वीटी की पर्चा थी। वह सुनीता से आशीर्वाद लेकर कालेज पर्चा दिलाने गई।

कालेज से आकर सुनीता को बताई की उसका पर्चा बहुत अच्छा गया है।

राजेश और स्वीटी दोनो देर रात तक जग कर पढाई करता, सुनीता उन दोनो का रात जग कर ख्याल रखती। पानी चाय या काफी पिलाती रहती।

इधर निशा और सीमा भी देर रात तक पढ़ाई कर रही थीं।

करीब एक माह तक एक्जाम चला।

राजेश _मां आज अंतिम पर्चा है, आशीर्वाद दो आज का पर्चा भी बांकी पर्चो की तरह अच्छा जाय।

सुनीता _मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है देखना तुम्हारी मेहनत जरूर रंग लायेगा।

राजेश कालेज चल गया।

अंतिम पर्चा भी बहुत अच्छा गया।

पर्चा दिलाने के बाद राजेश , भगत और उसके दोस्त कैंटीन में बैठे थे।

भगत _भाई आज एक्जाम खत्म हो गया।

चलो आज कोई मूवी देखने चलते है।

सभी दोस्तो के कहने पर राजेश भी तैयार हो गया।

शाम को सभी ने मूवी देखने का प्लानिंग बनाया।

इधर राजेश घर पहुंचा और मां को बताया की अंतिम पर्चा भी बहुत अच्छा गया।

सुनीता खुश हुईं।

सुनीता _देखना मेरा बेटा का मेहनत जरूर रंग लायेगा।

इधर जब राजेश अपने कमरे मे आराम कर रहा था, तभी सुजाता ने काल किया।

सुजाता _हाई जान कैसे हो?

राजेश _अच्छा हूं मैम, आप कैसी है?

सुजाता _कैसी अच्छी हो सकती हूं, पूरे एक माह हो गए हमे मिले। पता है ये एक माह एक बरस के बराबर बीती है। अब और नही तड़फना अब तो एक्जाम भी खत्म हो गया।

सुनो मै आफिस में तुम्हारा वेट कर रही। तुम आ जाओ।

राजेश _मैम, आज तो दोस्तो ने मूवी देखने का प्लान बनाया है।

सुजाता _ओहो, मै कुछ नहीं सुनूंगी, तुम्हें आना ही होगा।

राजेश _ पर मै दोस्तो को क्या बोलूंगा? हम कल मिलते हैं। प्लीज बेबी।

सुजाता_देखो तुम अभी नहीं आए तो मैं तुमसे कभी बात नही करुंगी।

राजेश _ओ हो ये कैसी मुसीबत है?

सुजाता _अच्छा तो अब तुम्हें मै मुसीबत लगने लगीं।

राजेश _आई हो बेबी मैंने ऐसा तो नहीं कहा,,

सुजाता _मै सब समझती हूं तुम कोई न कोई बहाना बनाकर मुझसे दूर होते जा रहे हो।

राजेश _ठीक है बाबा, मै आ रहा,,,,

सुजाता खुश हो गई,,,

जल्दी आओ मैं वेट कर रही,,,

राजेश अपना कपड़ा पहना और सुनीता के पास जाकर बताया,,

राजेश _मां, मै दोस्तों के घर जा रहा हूं, वहा से हम मूवी देखने जानें वाले है। मुझे आने में थोड़ी देर होगी।

सुनीता _ठीक है बेटा, पर जल्दी आना।

राजेश _, ठीक है मां।

राजेश अपना बाइक लेकर सीधा सुजाता की आफिस पहुंचा।

और जब वह सुजाता की केबिन में पहुंचा,,

सुजाता का दिल जोरो से धड़क रहा था।

जब राजेश अदंर गया। सुजाता दरवाज़े के पास ही खड़ी थी। वह दरवाजा बंद कर दी।

राजेश ने पीछे मुड़कर देखा,,

सुजाता ने अपने दोनो हाथ राजेश के गले में डाल दिया,,

सुजाता _, बच्चू बहुत तड़फाया है मुझे बोलो तुम्हें क्या सजा दू।

राजेश _जो सजा देनी चाहो, मंजूर है।

सुजाता ने राजेश का ओंठ अपनी मुंह में भर लिया और चुसने लगी।

राजेश भी सुजाता की कमर पर हाथ रख दिया और उसकी ओंठ चूसने लगा।

दोनों जी भर कर एक दूसरे को चूमने चाटने लगे।

सुजाता आगे बडी और राजेश के पैंट का चैन खीच कर उसका land बाहर निकाल कर चुसने लगी।

राजेश सुजाता की बालो को सहलाता रहा। और मजा लेता रहा, काफी दिनों के बाद वह भी land चूसा रहा था। उसका land एकदम सख्त हो गया।

अब राजेश ने सुनीता को डेस्क पर लिटा दिया और उसकी पेंटी खींचकर निकाल दिया, फिर उसकी chut चाटने लगा।

सुजाता बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई।

फिर राजेश ने सुनीता की टांगो को फैलाया और उसके बीच में आ गया फिर अपना मूसल उसकी योनि की द्वार में रख कर जोर का धक्का मारा,land एक ही बार में बुर चीरकर सरसराता huwa अदंर घुस गया।

अब उसकी दोनो चूची को मसल मसल कर गच गच चोदने लगा।

कुछ ही देर में दोनो स्वर्ग की सैर करने लगें।

कुछ देर बाद राजेश ने सुनीता को घोड़ी बनाकर फच फच चोदने लगा।

दोनों संभोग की अपार सुख को प्राप्त करने लगें।

कुछ देर तक इसी पोजीशन में चोदने के बाद राजेश चेयर पर बैठ गया और सुनीता उसकी गोद में बैठ कर चुदने।

कमरे में सुजाता की कामुक सिसकारी गूंजने लगी।

करीब एक घंटा दोनो के बीच chudai का खेल चला इस दौरान सुजाता चार बार झड़ कर थक गई।

सुजाता _राजेश अब बस करो मै थक गई।

राजेश _पर मै तो झड़ा नहीं हूं, बेबी।

सुजाता _तुम एक काम करो अपने साथ निशा और सीमा को भी फिल्म दिखाने ले जाओ, उन दोनो का भी एकजाम के बाद माइंड फ्रेश हो जायेगा।

फिर तुम निशा को छोड़ने घर आ जाना फिर मेरे साथ डिनर करना उसके बाद तेरे मूसल का पानी निकाल दूंगी।

राजेश मुस्कुराने लगा,,

राजेश _कही निशा को हमारे बारे में पता चल गया तो,,

सुजाता _बोल दूंगी,राजेश तुम्हारे नए पापा है,

वह हसने लगी,,

राजेश _क्या?

निशा को मेरी बेटी बनाओगी?

ओ नो,,,,

सुजाता हसने लगी,,

अरे मै मजाक कर रही थी,

पर,,,,

राजेश _पर क्या?

अगर तुम बनने तैयार हो तो,,,

मैं तुम्हें निशा की पापा बनाने तैयार हूं,,

राजेश _न ऐसा मत करना नही तो मैं मां को मुंह दिखा ने लायक नहीं रहूंगा।

सुजाता _अच्छा ठीक है बाबा,मत बनो निशा के पापा।

पर तुम रात को डिनर मेरे साथ करोगे।

निशा और सीमा को भी मूवी दिखाने ले जाओ। मै निशा से बात करती हूं।

राजेश _ok

 
सुजाता ने सीमा को फोन लगाया,,

सीमा ने काल रिसीव की

सुजाता _हेलो सीमा बेटा,

सीमा _नमस्ते आंटी, आंटी कुछ काम था क्या है?

सुजाता _सीमा बेटा, राजेश बता रहा था कि एक्जाम खत्म होने पर, आज दोस्तो के साथ मूवी देखने का प्लान बनाया है।

मैं सोच रही हूं कि तुम और निशा भी राजेश के साथ मूवी देखने चले जाओ। तुम लोगो का भी माइंड फ्रेश हो जायेगा।

सीमा _आंटी ये तो बडी खुशी की बात है, कितने दिन हो गए हमे किसी टाकीज पे मूवी देखे।

मै निशा से कहती हूं, मुझे यकीन हैं वो न नही कहेगी।

सुजाता _ठीक है बेटा।

सीमा और निशा घर में ही थी।

निशा _, क्या huwa किसका काल था।

सीमा _आंटी का।

निशा _मॉम का

सीमा _हा हा तुम्हारी मॉम का।

निशा _क्या कह रही थी मॉम?

सीमा _आंटी कह रही थी कि राजेश और उसके दोस्तो नई आज मूवी देखने का प्लान बनाया है, तुम दोनो भी राजेश के साथ चली जाओ। तुम दोनो का माइंड फ्रेश हो जायेगा।

निशा _नही, मेरा मन नही है।

सीमा _क्यू? कितने दिनों बाद आंटी इजाजत दे रही है मूवी देखने जानें की, ओर तुम नहीं बोल रही हो।

निशा _पता नही, मेरा मन क्यू राजेश के साथ कही जानें का मन नहीं करता।

सीमा _मै जानती हूं तुम तुम ऐसा क्यू चाहती हो।

क्यू की तुम्हें डर है की राजेश के साथ रह कर तुम कमजोर न पढ़ जाओ।

पिछली बार पार्टी में लफड़ा कर बैठी थी।

रिया को थप्पड़ जड़ कर।

क्यू यही बात है न?

निशा _मुझे नही पता।

सीमा _चलो न यार कितने दिन हो गए टाकीज में हमे मूवी देखे। मेरे खातिर चलो। प्लीज,,,

सीमा के द्वारा काफी जिद करने पर,,,

निशा _ठीक है, तुम्हारे खुशी के लिए,,,

सीमा _ओह थैंक यू निशा,,,

सीमा ने सुजाता को फोन कर बता दिया कि निशा चलने को तैयार है।

सुजाता ने कहा की राजेश तुम दोनो को लेने आएगा, तुम दोनो तैयार रहना,,,

सीमा _ठीक है आंटी।

सीमा ने निशा को बताया कि राजेश हमे लेने आएगा हमे तैयार रहने बोली है।

निशा _इसमें तैयार होने की क्या बात है, हमे किसी पार्टी में थोड़ी ही जा रहे हैं। हम इसी ड्रेस में ठीक है।

वैसे भी किसी को दिखाना तो है नही।

सीमा _यार तुम भी न मन में बिल्कुल निराशा पाल कर बैठ गई हो, मै तो कहती हूं तुम आंटी को सब बता दो की तुम राजेश से प्यार करती हो।

अगर तुम नही कह सकती तो मुझे बोलो मैं आंटी से बात करु ।

निशा _खबरदार तुमने मॉम से इस बारे में कुछ बोली तो, मै मॉम के खुशी लिए एक राजेश तो क्या हजारों राजेश छोड़ने के लिए तैयार हूं।

यह बोलते हुवे उनकी आंखों से आंसू बहने लगीं।

सीमा ने जब निशा की आंखो में देखा,,

सीमा _ये क्या तुम्हारी आंखो में आंसू।

मै जानती हूं ये सब बोलना आसान है, तेरे अंदर क्या बीत रही होगी मै अच्छी तरह समझती हूं।

सीमा ने निशा को गले लगा कर वह भी रोने लगी।

कुछ देर बाद नौकर ने कमरे का दरवाजा खटखटाया ,

नौकर _बिटिया, राजेश बाबू आया हैं नीचे आप दोनो का इन्तजार कर रहा है।

सीमा _उनसे कहना हम थोड़ी देर में नीचे आ रहे है।

नौकर चला गया और नीचे जाकर राजेश को सूचना दिया,,

राजेश हाल में बैठ कर इन्तजार करने लगा,,

सीमा और निशा दोनो ने ड्रेस चेंज की और थोड़ी सी मेकप कर नीचे चली गईं।

सीमा _हेलो राजेश, कैसे हो?

राजेश _मै तो ठीक हूं, आप दोनो कैसी है?

सीमा _हम दोनो भी ठीक है।

राजेश _मैम ने कहा कि आप दोनो को भी मूवी दिखाने ले जाएं।

सीमा _चलो हम रेडी है।

राजेश ने अपना बाइक वही छोड़ दिया और निशा की कार लेकर तीनो मूवी देखने निकल पड़े,,

रास्ते में,,

राजेश _निशा जी आप चुप है कुछ बोल नहीं रही,,

वैसे आप लोगो का मूवी देखने का मन तो है न, कि मैम के कहने के कारण जा रही हो।

सीमा _राजेश मै तो काफी खुश हूं कितने दिनों बाद जा रहे है किसी टाकीज में मूवी देखने, पर निशा का शायद मूवी देखने का मन नहीं,,

राजेश _क्यू निशा जी आपको मूवी देखना पसन्द नहीं क्या?

निशा _नही ऐसी कोई बात नहीं।

राजेश _फिर,,

निशा _ऐसे ही,,

राजेश _कोई बात नही निशा जी, मूवी तो एक बहाना है असल में तो एक्जाम के कारण दोस्तो से ठीक से मेल मिलाप नही हो पा रहा था, तो मिलने एवम गपसप करने का एक बहाना है, मूवी देखना।

वैसे आपको किस हीरो की मूवी पसन्द है शाहरुख सलमान या अजय देवगन की।

निशा _आपको किसकी पसन्द हैं।

राजेश _मेरा तो कोई विशेष पसन्द है , है नही स्टोरी अच्छी हो और लोग फिल्म की तारीफ करे तो चला जाता हूं, दोस्तों के साथ मूवी देखने।

निशा _मेरी भी कोई विशेष पसन्द का नही,,

राजेश _ओह, मुझे तो लगा की शाहरुख की फिल्म आपको विषेश पसन्द होगी।अधिकांश युवतियां को शाहरुख की मूवी पसन्द होती है।

सीमा _हमारी मैम साहिबा उन लड़कियो में नही है।

राजेश _लो हम टाकीज पहुंच गए।

वहा पर भगत और उनके दोस्त पहले से मौजूद थे जो राजेश का इन्तजार कर रहे थे।

भगत _भाई कहा रह गए थे हम कब से इन्तजार कर रहे थे।

राजेश _मै निशा और सीमा को लेने उनका घर चला गया था।

सीमा _हेलो भगत कैसे है आप लोग?

भगत _नमस्ते सीमा और निशा जी हम तो आज बहुत खुश है एक्जाम का बोझ जो उतर गया। इसलिए तो आज मूवी देखने का प्लान बनाया गया है बडी खुशी हुई आप लोग भी मूवी देखने आए हैं।

तभी रिया और उसकी सहेलियां भी टाकीज पहुंची,,

रिया _हाई राजेश , हेलो भगत कैसे हैं आप सभी?

भगत _अरे रिया जी आप भी, ये तो चौकाने वाली बात है।

रिया _मुझे पता चला की आप लोग मूवी देखने जानें वाले है तो हम लोग भी आ गए।

निशा और सीमा मन ही मन में रिया को गाली देने लगीं, ये चुड़ैल यहां भी पहुंच गई।

राजेश _यार यहां तो काफी भीड़ लग रही है। टिकट तो मिलेगी न।

रिया _उसकी चिंता आप लोग न कीजिए, इस टाकीज के मालिक से मैंने बात कर ली है जितनी सीट चाहिए मिल जाएगी।

भगत _भाई वैसे कौन सी सीट चाहिए बालकनी की या लोवर की।

दोस्त लोग _भाई हम परदे के सामने बैठेंगे।

भगत _क्यू बे?

दोस्त लोग _भाई जब फिल्म में सॉन्ग आएगा न तो नाचेंगे?

भगत _ये भी ठीक है। आखिर हम इंजॉय करने ही आए है?

राजेश _सीमा जी आप लोग कहा बैठना पसन्द करेंगी?

सीमा _निशा कहा बैठेंगे?

निशा _सामने बैठेंगे तो सिर दर्द करेगा।

मै तो हाल के बीच में बैठूंगी।

राजेश _ठीक है।

भगत देखो, बीच वाली सीट मिल जाए तो।

रिया _मै टाकीज के मालिक से बात कर लेती हूं सभी के लिए हाल के बीच वली पंक्ति में सीट के लिए।

भगत _अच्छी बात है रिया जी।

रिया ने बात टाकीज के मालिक से बात की और मन वहा सीट मिल गया।

सभी हाल में प्रवेश किए।

राजेश बीच में बैठ गया, उसके बाजू में निशा फिर सीमा। एक और रिया और उसकी सहेलियां।

उनके दोस्त सामने वाली पंक्ति में बैठ गए।

दोस्त लोग खाने पीने की चीजे ले आए थे।

वे सभी मूवी का मज़ा लेने लगे।

जब कोई सॉन्ग चलता दोस्त लोग सिटी बजातेऔर नाचने लगते।

इधर निशा को रिया का राजेश के बगल में बैठना पसन्द नहीं आ रहा था। वह बार बार रिया की ओर देखती कही वह राजेश के साथ कोई हरकत तो नही कर रही।

राजेश दोस्तों से पॉप कार्न मांगा,

राजेश ने निशा की ओर पॉप कार्न बढ़ाते हुए कहा,,

निशा जी लीजिए न पॉप कार्न,,

रिया _राजेश मुझे भी खाना है पॉप कार्न, मुझे भी दो।

राजेश ने पॉप कार्न का अपने हाथ में रख लिया रिया और निशा और राजेश पॉप कार्न निकाल कर खाने लगे।

दोस्तो ने सभी को उनकी पसन्द की चीजे खाना के लिए बांट दिए जो वे लेकर आए थे।

सभी कुछ न कुछ खाते हुए फिल्म का मज़ा लेने लगे।

दोस्त ने बीच बीच में सिटी बजाते और नाचने लगते।

इंटर वेल में सभी ने इंजॉय किया और मूवी कब ख़त्म हुआ पता ही नहीं चला।

रिया _यार आप लोगो के साथ मूवी देखने में तो मज़ा ही आ गया।

कभी और प्लानिंग बने तो हमे भी बताना।

भगत _ओह रिया जी क्यों नहीं?

रिया _यार अब सभी लोग यहां मौजूद हैं तो चलो न किसी अच्छी सी होटल में चलकर डिनर करते हैं।

क्यू राजेश क्या कहते हो?

राजेश _यार बुरा मत मानना निशा की मॉम ने डिनर के लिए कहा है, मैंने हां कह दिया है, यदि होटल चला गया तो, वह बुरा मान जायेगी।

रिया _ओह कोई बात नही, फिर कभी कर लेंगे साथ में डिनर।

इसके बाद सभी दोस्त अपने अपने घर के लिए निकल गए।

भगत _भाई, कल मिलते हैं हम लोग।

राजेश _ठीक है भगत।

निशा, राजेश और सीमा तीनो कार से घर निकल गए। जब वे घर पहुंचे तब सुजाता उन लोगो का ही इन्तजार कर रहे थे।

सुजाता _आ गए तुम लोग।

सीमा _हां आंटी।

सुजाता _कैसा था मूवी, इंजॉय किए की नही।

सीमा _हां आंटी खूब मज़ा आया।

क्यू निशा?

सुजाता _डिनर तैयार हो गया है। तुम लोग फ्रेस हो कर डाइनिंग टेबल पर आ जाओ।

राजेश चलो तुम भी फ्रेस हो जाओ।

सुजाता ने राजेश को मेहमानों वाले एक कमरे मे ले गया।

सीमा, निशा के साथ उसकी कमरे मे चली गई।

जब राजेश और सुजाता कमरे मे गए।

सुजाता ने राजेश के गले में अपने दोनो हाथ डाल कर बोली,

जब से इन्तजार कर रही थी तुम्हारे आने का?

मेरे मजनू,,,

सुजाता राजेश का ओंठ, चुसने लगी।

राजेश भी सुजाता की ओंठ चुसने लगा।

कुछ देर तक एक दूसरे के किस करते रहे फिर,,

सुजाता _अब जाओ बाथरुम में फ्रेस हो जाओ, पहले डिनर कर लो उसके बाद जो करना है कर लेना,,

राजेश _डिनर के बाद रुका तो निशा और सीमा जी क्या समझेंगी?

सुजाता _मै निशा से कह दूंगी, मुझे राजेश से कुछ काम है।

फिर तुम अपना काम कर लेना।

राजेश _कौन सा काम?

सुजाता _अरे वही काम जो आफिस मे अधूरा हुवा था।

राजेश _मै तो कहता हूं वह काम अभी कर लू, डिनर के बाद, सीमा और निशा को तुम्हारे कमरे में रुकना, अच्छा नही लगेगा।

सुजाता _तुम बहुत देर में झड़ते हो, डिनर के लिए लेट हो जायेगा।

अब चलो जाओ बाथरुम में फ्रेस हो कर नीचे आ जाना मै डिनर के लिए वेट कर रही।

राजेश _ओके।

सुजाता नीचे आ गई।

कुछ देर बाद निशा, सीमा डाइनिंग टेबल पर पहुंच गई उसके बाद राजेश भी।

खाने में बहुत सारे व्यंजन बने थे,राजेश , निशा और सीमा तीनो के पसन्द के।

राजेश _यहां तो मेरे सारे पसंदिदा व्यंजन बना huwa है, समझ नहीं आ रहा शुरुवात कहा से करू?

सुजाता _राजेश पहले ये खाओ, इसे मैंने तुम्हारे लिए अपने हाथो से बनाई है।

लो टेस्ट करो।

सुजाता ने व्यंजन चम्मच में निकालकर राजेश की ओर बढ़ाया।

राजेश ने व्यंजन चखा,,

राजेश _वाउ, व्यंजन बहुत स्वादिष्ट बना है।

निशा जी आप भी इसका टेस्ट लीजिए न, सच में मैम ने बहुत स्वादिष्ट व्यंजन बनाया है।

राजेश ने व्यंजन चम्मच से निकालकर कर निशा की ओर बढ़ाया।

निशा थोड़ा तुम भी चख कर देखो,

निशा राजेश की ओर देखने लगीं। उसने व्यंजन मुंह में ले लिया।

राजेश _राजेश, है न बडा स्वादिष्ट।

निशा ने हा में सर हिलाया।

सभी डिनर करने में व्यस्त थे तभी सुजाता को शरारत सूझी

सुजाता राजेश के बगल में बैठी थी।

वह एक हाथ से राजेश के land को सहलाने लगी।

राजेश चौंका, वह अपने पैंट की ओर देखा सुजाता उसकी land सहला रही थीं।

राजेश ने सुजाता की ओर देखा सुजाता ऐसा एक हाथ से डिनर करने में व्यस्त थी दूसरे से land सहलाने।

राजेश ने सीमा और निशा की ओर देखा।

निशा और सीमा दोनो डिनर करने में व्यस्त थे।

राजेश ने सुजाता की आंखो में देख कर इशारा किया।

ऐसा न करने की,,

सुजाता मुस्कुराने लगीं।

वह लगातार सहलाती रही।

जिससे राजेश का land तन गया।

सीमा _राजेश क्या huwa खा क्यों नहीं रहे?

अभी तो खाने की बडी तारीफ कर रहे थे,,,

सुजाता लगातार land सहला रहीं थी।

सुजाता _हां राजेश कुछ प्रॉब्लम है क्या?

राजेश _न में सर हिलाया।

सुजाता _फिर खाओ।

राजेश को डर था कि सुजाता की हरकतों का पता निशा और सीमा को न चल जाए।

इधर सुजाता ने राजेश का चैन खीच कर। राजेश का land बाहर निकाल दिया। और राजेश के land पर मूठ मारने लगी।

राजेश के land तनकर खूब मोटा हो गया।

राजेश को बहुत अच्छा लगने लगा।

उसके मुंह से आह निकल गया,,

निशा ने राजेश की ओर देखा।

निशा _राज क्या huwa? कोई प्रॉब्लम है।

राजेश _न,,

निशा _फिर ये आवाज़ कैसी?

राजेश _लगता है भोजन में कंकड़ था।

सुजाता _क्या? ऐसा कैसे हो सकता है भोजन में कंकड़, ये नौकर भी न,,, भोजन बनाने में लापरवाही करते है इन लोगो की खबर लेनी पड़ेगी।

राजेश ने गुस्से से सुजाता की ओर देखा।

सुजाता _मुस्कुराने लगीं।

वह लगातार मूठ मारने लगी एक हाथ से।

निशा और सीमा सामने बैठे थे उन्हे सुजाता की हरकतों का पता नहीं चल पा रहा था।

लेकिन उन दोनो को लगने लगा था कि कुछ गडबड है।

सीमा _राज कुछ देर से देख रही हूं कि तुम खाने में फोकस ही नही कर पा रहे हो। कुछ प्रॉब्लम है क्या?

राजेश _मेरा पेट भर गया, अब मैं और नही खा पाऊंगा।

निशा _राज इतनी जल्दी, अभी तो तुम कुछ खाए ही नहीं।

सुजाता _देखो राजेश मैंने बड़े प्यार से तुम्हारे लिए ये व्यंजन बनाए है। इन सबको तुम्हें खत्म करना पड़ेगा।

सीमा _हा, आंटी ठीक कह रही।

राजेश _जी कोशिश करता हूं।

इधर सुजाता को बडा मजा आ रहा था। इस खेल में।

कुछ देर बाद वह राजेश के land पर तेज तेज मूठ मारने लगी।

राजेश की हालत खराब होने लगा।

राजेश का धैर्य जवाब दे गया, आह, मां,, आह कराहते हुवे, land से वीर्य की लम्बी लम्बी पिचकारी मारने लगा।

जो सामने बैठी सीमा की टांगो पे गिरने लगा।

सीमा चौकी उसके टांगो पर गीलापान महसूस किया जो गर्म लग रहा था।

निशा _क्या huwa राज, तुम कराह क्यू रहे।

कही चोट लगी है क्या।

राजेश कुछ देर बाद राहत की सांस लेने के बाद,,

राजेश _ लगता है मेरे पैर का नस अकड़ गया था।

तेज दर्द huwa

सुजाता _खाना खा लो फिर मै मूव से मालिश कर दूंगी।

इधर सीमा ने उस गीलेपन को अपने हाथ से छूकर देखा।

काफी चिपचिपा लगा।

उसने उसे सूंघ कर देखा।

अजीब सा गंध जो आज से पहले कभी नहीं सुंघी थी।

सीमा अपने मन में,, ये आया कहा से,,,

अचानक मेरे टांगो पर, और ये है क्या?

सीमा _वह अपने सीट से उठी,,

निशा _अब तुमको क्या हुआ?

सीमा _मेरा हो गया,,

सीमा हाथ धोने वाशबेसिंग के पास गईं।

अपने टांगो को देखने लगीं वहा बहुत सारा चिपचिपा पदार्थ लगा huwa था।

वह हाथ धोए फिर उस चिपचिपे पदार्थ को उंगली में ले कर देखने लगी।

आज से पहले वह कभी किसी पुरुष का वीर्य देखी नही थी।

पर उसने वीर्य के बारे में सुनी और पड़ी जरूर थी की पुरष का वीर्य काफी गाड़ा, चिपचिपा, सफेद और स्वाद में नमकीन होता है।

उसने उसे चख कर देखा।

नमकीन लगा,,,

उसे लगने लगा कि ये वीर्य हो सकता है, पर मेरे टांगो पर अचानक से आया कैसे?

कही ये राज का वीर्य तो नही,,,

जब मेरे टांगो पर आया उस समय राजेश के मुंह से कराहने की आवाज़ निकल रहा था।

हे भगवान, ये राजेश का वीर्य मेरे टांगो पर।

वह बाथरुम में चली गईं। और अपने टांगो और कपड़ो पर लगे वीर्य को साफ कर ने के लिए अपनी रुमाल निकाल ली और पोछने ही वाली थी की वह रुक गई।

पता नही उसे क्या huwa, उसकी शरीर में अजीब से बेचैनी बढ़ गई। पूरे शरीर में रक्त संचार बड़ गया और सांसे तेज हो गई।

वह राजेश के वीर्य को अपने हाथ से इकट्ठा कर उसे देखने लगी।

उसे सूंघती रही।

उसकी सांस तेज तेज चल रही थी, पता नही उसे क्या हुआ वह राजेश के वीर्य को चाट ली। और निगल गई।

तभी निशा बाथरुम में आई,

सीमा तुम बाथ रूम में क्या कर रही हो? और तुम्हारी सांस तेज क्यू हो गई है?

सीमा हड़बड़ा गई,,,

सीमा _कुछ नही, मूत आ रहा था तो, मूतने आई थीं।

निशा को कुछ अजीब लगा।

सीमा _पर तुम यहां,,

निशा मै देखने आई की तुम अचानक से उठ कर बाथरुम में चली आई, कोई प्रॉब्लम तो नही,,,

सीमा _अरे नही ऐसी कोई बात नही,,,

तुम चलो मैं फ्रेस होकर आती हूं।

इधर राजेश _मैम ये कैसी शरारत है सीमा और निशा को पता चल जाता तो,,

सुजाता _हसने लगीं, मुझे तुम्हारी हालत देखकर मजा आ रहा था।

सॉरी ।

वैसे ऑफिस में तुम झड़े नही थे।

तो तुम्हें यही झाड़ कर राहत दी। वैसे कैसा लगा?

राजेश _मै तो डर गया था कही निशा और सीमा को पता न चल जाए की आप टेबल के नीचे क्या गुल खिला रही हो।

सुजाता हसने लगी।

राजेश _अच्छा, अब मै चलता हूं, रात भी काफी हो गई है। मां परेशान हो रही होगी।

सुजाता _ओके। हा जरा सुनो।

राजेश _क्या?

सुजाता _परशो होली है? सुबह आ जाना, मुझे रंग लगाने, पहले तुम ही लगाओगे मुझे रंग।

राजेश _क्या?

सुजाता _हां, नही आए तो होली नही खेलूंगी।

तभी सीमा और निशा भी वहा आ गई।

राजेश ने उन दोनो से इजाजत लेकर घर निकल गया।

इधर रिया और उसकी सहेलियां होटल में डिनर कर रहे थे।

एक सहेली_यार रिया तुम तो निशा से अपने अपमान का बदला लेना चाहती थीं, पर अब तक ऐसा कुछ नहीं की।

रिया _अब वो समय आ गया है। निशा को रुलाने का।

सहेली _वो कैसे?

रिया _परशो, होली है न, उस दिन देखना क्या करती हूं?

सहेलियां_क्या करने वाली है उस दिन?

रिया _राजेश को सिर्फ चूमने सी उसने सब के सामने मेरे गालों पर थप्पड़ जड़ा था न, देखना होली की दिन, राजेश जब अपनी पिचकारी से हम सब पर अपना पानी डालेगा।

उसका वीडियो बनाएंगे। और फिर निशा के भेज देंगे।

सहेलियां _क्या? पर ये होगा कैसे?

रिया _कैसे होगा ये मुझ पर छोड़ दो।

एक सहेली _यार क्या सच में ऐसा होगा, राजेश हम सबके उपर अपने पिचकारी से रंग डालेगा। हाय मैं कितनी बार सपने में राजेश को देखकर झड़ी हूं। अगर ऐसा हो गया तो, सच में यह जीवन में होली का सबसे बड़ा गिफ्ट होगा।

एक सहेली _यार मेरे बुर में तो अभी से पानी छूटने लगा है, पता नही मै २दिन तक कैसे इन्तजार करुंगी।

एक सहेली _यार तू हम लोगो के साथ मजाक तो नही कर रही न।

राजेश की पिचकारी से हमे भी खेलने देगी न।

रिया _जानती हूं साली रंडियों,तुम सब सपने में राज से चुदती हो।

ये सपना तुम लोगो का मै पुरा करूंगी।

पर हमारी योजना की भनक भी किसी को नही लगना चाहिए।

सभी सहेलियां _तुम बेफिक्र रहो किसी को कुछ नहीं बताएंगे।

रिया _तो ठीक है, तो अपनी अपनी बुर को सजा कर रखो होली के दिन के लिए।

राज अपने पिचकारी से उसमे अपना पानी डालेगा।

सभी हसने लगे।

इधर राजेश जब घर पहुंचा।

सुनीता दरवाजा खोली।

सुनीता _आ गया।

राजेश _, हा मां ।

सुनीता _खाना खाया है कि लगाऊं।

राजेश _मां, आपको तो बताया ही था खाना खाकर आऊंगा।

सुनीता _हा, बताया तो था, फिर भी,,,

राजेश ने सुनीता को अपनी बाहों मे भर लिया,,

सुनीता _छोड़ो मां की चिंता होती तो इतना रात नही करते, जाकर सो जाओ अपने कमरे मे।

राजेश _लगता है मेरी मां मुझसे नाराज़ हैं।

सुनीता _मैंने कितने प्यार से तुम्हारे पसन्द की सब्जी बनाई थीं। और तुमने खा कर आने की बात कह दिया।

राजेश _ओह सॉरी मॉम, आप कहो तो और खा लूं।

चलो खाना लगा दो।

सुनीता _रहने दो ज्यादा खायेगा तो पेट दर्द करेगा?

अब जाओ सो जाओ रात काफी हो गई है।

राजेश _ओके मां, गुड नाईट।

सुनीता ने राजेश के माथे को चूम कर, गुड नाईट मेरा प्यारा बेटा,

अगले दिन सुबह, राजेश उठा और जिम के लिए निकल गया। छूटी का दिन था तो आज शेखर भी ऑफिस नही गया था।

सभी नास्ते के लिए डाइनिंग टेबल पर बैठने वाले ही थे की किसी ने दरवाजे की घंटी बजाई।

जब सुनीता दरवाजा खोली, सामने रीता उसका पति और रोहन खड़ा था।

रीता _नमस्ते, सुनीता जी,

सुनीता _जी, नमस्ते,,, आप लोग, ,,

रीता _आप मुझे पहचानती है न,,,

सुनीता _जी आपको कौन नही पहचानेगा, आप लोग बड़े उद्योग पति है। आपके बारे में तो अखबारों, टीवी चैनलो पर खबर आता ही रहता है।

पर आप लोग हमारे घर।

रीता _आप चौकिए मत, दरअसल मैं तो उसी दिन आने वाली थी जब राजेश ने रोहन की जान बचाया।

पर काम में व्यस्तता के कारण आ नही पाई।

सुनीता _ओह, आइए न, आइए भाई साहब, आइए रोहन बेटा।

संजय _शुक्रिया भाभी जी।

रोहन _थैंक यू आंटी।

सुनीता _, बेटा राजेश देखो कौन आए है।

राजेश _अरे रीता मैम, रोहन तुम लोग, अंकल भी।

राजेश _नमस्ते अंकल।

सभी एक दूसरे को अभिवादन किए।

सुनीता _रीता जी क्या पियेंगी आप लोग चाय या काफी।

रीता _सुनीता जी, रहने दीजिए न इसकी कोई आवश्यकता नहीं,

सुनीता _ऐसा कैसे हो सकता है आप लोग पहली बार हमारे घर आए है।

मै काफी बना देती हूं।

रीता _जी ठीक है।

राजेश कैसा गया पर्चा तुम्हारा।

राजेश _बहुत अच्छा मैम।

रीता _और स्वीटी तुम्हारा

स्वीटी _जी आंटी, बहुत अच्छा।

रीता _गुड

सुनीता सबके लिए काफी बना कर ले आई।

सभी काफी पीने लगे।

रीता _सुनीता जी, हम तो राजेश के अहसान का बदला कभी चुका ही नहीं सकेंगे।

अगर राजेश नही होता तो, पता नही रोहन का क्या होता। हमारा तो सब कुछ लूट जाता।

शेखर _बहन जी, ये तो राजेश का फर्ज बनता है। इसमें अहसान कैसा?

रीता _फिर भी भाई साहब हर कोई ऐसा नहीं सोचता। आप लोग बड़े दिल वाले है। बच्चो को बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं।

आप लोगो से एक और बात करनी थीं।

सुनीता _जी कहिए न, निः संकोच कीजिए।

रीता _आप लोगो को पता ही होगा कि रोहन और स्वीटी एक दूसरे के अच्छे दोस्त हैं।

रोहन स्वीटी को पसन्द भी करता है।

आप लोगो को ऐतराज न हो तो, मै स्वीटी को अपने घर की बहु बनाना चाहती हूं।

सुनीता _रीता जी, ये आप क्या कह रही है। आप इतने बड़े लोग है और कहा हम, साधारण लोग।

रिश्तेदारी तो बराबर के बीच होनी चाहिए न।

रीता _सुनीता जी,राजेश और स्वीटी जैसे बच्चे है आपके पास, आप तो हम लोगो से ज्यादा धनी है।

वैसे भी हमें एक सुशील और संस्कारी बहु चहिए।

जो स्वीटी में है, हमे और कुछ नहीं चाहिए।

सुनीता _रीता जी आपको तो मालूम हैं आजकल शादी ब्याह के मामलो में बच्चो से भी राय लेनी जरूरी है। पहले जैसा समय नहीं रहा जन्हा माता पिता ही सारे फैसले लेते थे।

रीता जी _जी सुनीता जी आप बिलकुल सही कह रही हैं। आप बच्चो से उनकी राय पूछ लीजिए।

जैसे ही रीता ने स्वीटी को बहु बनाने की बात छेड़ी वह शर्मा कर अपने कमरे मे जा चुकी थी।

सुनीता, स्वीटी के कमरे मे पहुंची। राजेश और शेखर को भी साथ आने को कहा,

सुनीता _स्वीटी क्या तुम्हें रोहन पसन्द है।

स्वीटी ने जवाब नही दिया शर्माने लगी।

सुनीता _स्वीटी, अगर रोहन तुम्हें पसन्द नहीं है तो साफ साफ बता दो, मै मना कर देती हूं।

बताओ क्या तुम्हें रोहन पसन्द है।

स्वीटी ने हा में सिर हिलाया।

सुनीता _हूं, कब से चल रहा था तुम लोगो का मुझे बताया ही नहीं।

स्वीटी _मां ऐसा कुछ भी नहीं है, हम सिर्फ अच्छे दोस्त थे।

सुनीता _राजेश तुम्हारा क्या खयाल है रोहन के बारे में।

राजेश _रोहन में पहले अहम की भावना था पर पहले से काफी ज्यादा बदलाव आया है, उसमे वह अब अच्छा लडका बन चुका है मां।

सुनीता _और आपकी क्या राय है जी।

शेखर _दोनो बच्चे राजी है तो मेरे विचार कैसे अलग हो सकते हैं भाग्यवान।

सुनीता _सुनो स्वीटी, शादी के पहले ऐसा कुछ भी गंदी हरकत न करना जिससे हमारी नाक कट जाए।

स्वीटी _मां, मुझे इसकी चिंता है।

सुनीता _मुझे तुमसे यही उम्मीद है।

सुनीता , वहा से चली गई। राजेश और शेखर भी।

रीता _सुनीता जी, क्या बोली स्वीटी ने। उन्हे इस रिश्ते से एतराज तो नही।

सुनीता _ रीता जी स्वीटी को भी रोहन पसंद है, पर अभी तो उसकी पढाई बाकी है।

दो साल बाद ही उसकी शादी के बारे में सोचेंगे।

रीता _सुनीता जी, हमे भी कोई जल्दी नहीं है। अभी तो रोहन को भी पढाई करनी है।

दो साल बाद शादी करेंगे

तब तक हम कोई अच्छा सा मूर्हत देखकर शादी की घोषणा कर देंगे।

सुनीता _ठीक है रीता जी,

शेखर _भाग्यवान अब तो मुंह मीठा कराइए मेहमानों का।

रीता _बेटा रोहन, अपने से बड़ों का आशीर्वाद लो।

रोहन ने, शेखर, सुनीता, अपने मॉम डैड का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। जब राजेश का पैर छूना चाहा तो, राजेश ने उसे गले लगाया।

सुनीता ने स्वीटी को आवाज़ लगाई। स्वीटी शरमाते हुवे वहा पहुंचीं।

और सबका पैर छूकर आशीर्वाद ली,,,,,,,,,,
 
अगले दिन भगत ने राजेश को काल किया,,

राजेश _बोलो भगत।

भगत _भाई कई पार्टी के लोग मुझसे संपर्क कर रहे हैं। मुझे अपने पार्टी में शामिल करना चाहते है, वे बडा पद का ऑफर भी कर रहे है। क्या करना चाहिए? आपसे सलाह लेना था।

राजेश _ठीक है भगत मै तुम्हारा घर पहुंचता हूं। वही डिसाइड करेंगे। की आगे क्या करना है?

भगत _ठीक है भाई मै आपका वेट कर रहा हूं।

राजेश घर में नाश्ता करने के बाद तैयार होकर घर से निकल रहा था कि सुनीता ने राजेश को कही जाते देखा।

सुनीता _बेटा कहा जा रहा है?

राजेश _मां, मै भगत से मिलने जा रहा हूं कुछ काम है।

सुनीता _लंच बनाऊंगी कि नही।

राजेश _फोन कर बताऊंगा मां।

सुनीता _ठीक है बेटा।

राजेश अपना बाइक लेकर भगत के घर पहुंच गया, कौशल्या देवी के घर जहां भगत किराया पर रहता था।

बाहर का गेट बन्द था, तो दरवाज़े का बेल बजाया।

कौशल्या देवी दरवाजा खोली।

कौशल्या देवी _अरे राजेश तुम, कितने दिन बाद आए हो।

राजेश _मां जी, भगत से मिलने आया था।

कौशल्या देवी _सिर्फ भगत से, मुझसे नही, मुझसे नाराज़ हो क्या? तुम तो अपनी आंटी को भूल ही गए।

राजेश _नही मां जी ऐसी कोई बात नही। आपको तो मैं हमेशा याद करता हूं।

कौशल्या देवी _चल झूठा कही का।

भगत ऊपर होगा।

तभी भगत भी नीचे आ गया।

भगत _भाई, आ गए, मै आप ही का वेट कर रहा था।

राजेश _हां, चलो ऊपर चल कर बात करते हैं।

दोनो उपर कमरे मे जाने लगते हैं।

कौशल्या देवी _मै कुछ बना दू क्या?

राजेश _मां जी, मै तो अभी नाश्ता करके आ रहा हूं। काफी बना देना।

कौशल्या देवी _ठीक है।

राजेश और भगत कमरे में पहुंचे।

राजेश _काफी दिन हो गया, सिगरेट पिए, रखा है क्या बे।

भगत _है न भाई।

भगत ने राजेश को सिगरेट निकालकर दिया।

लो भाई।

राजेश ने सिगरेट मुंह में लिया, भगत ने लाइटर से सिगरेट जलाया।

राजेश सिगरेट पीने लगा।

भगत _भाई कल होली है, कल तो जम कर मस्ती करेंगे।

सुना है रिया अपने फार्म हाउस में, कल होली का प्रोग्राम बनाया है। आपको पता है कि नही।

राजेश _हूं, बुलाई तो है, पर डिसाइड नही किया है, जाना है कि नही।

भगत _भाई, मुझे किस पार्टी को ज्वाइन करना चाहिए, इसके बारे में सोचा है।

राजेश _देखो भगत, जितने भी पुरानी और बडी पार्टी है, उसमे बड़े बड़े नेता लोग जुड़े हुए हैं।

अगर इन पार्टियों को ज्वाइन करोगे, तो ये लोग सिर्फ तुम्हारा इस्तमाल करेंगे।

जब सत्ता मिल जाएगी, तब बडा पद वो खुद ले लेंगे। और तुम्हें कहेंगे की, तुम अभी पार्टी में नए हो, तुम्हारे पास अभी काफी समय है।

यह कह कर शीर्ष नेतृत्व तुम्हें एक कार्यकर्ता या छोटा मोटा पद देकर ही संतुष्ट करने का प्रयास करेंगे।

और बड़े नेता तुम्हें आगे बड़ने नही देंगे।

भगत _तो भाई, क्या करना चाहिए?

राजेश _मै तो कहता हूं कि ऐसा पार्टी ज्वाइन करो, जो यहां के लिए नई हो। जिसमे कोई बडा नेता शामिल न हो।

वह पार्टी तुम्हारे मेहनत के दम पर आगे बड़े, जिससे पार्टी में तुम्हारी ही चले।

भले ही तुम्हें कुछ सालो तक संघर्ष करना पड़े।

भगत _भाई कुछ नई पार्टियां है जो इस राज्य में अपनी जमीन तलाश रही है वे किसी दमदार चहेरे की तलाश में है जो पार्टी को आगे ले जा सके।

मुझे कौन सी पार्टी ज्वाइन करना चाहिए।

राजेश _भगत, मैंने इस बारे में काफी सोचा, और मुझे तुम्हारे लिए आम गरीबों की पार्टी एजीकेपी अच्छा लगा।

उस पार्टी में कोई बडा नेता नही है, उसे एक बडा चहेरा की तलाश है। लोगो के मन में इस पार्टी के प्रति अच्छा रिस्पॉन्स दिखाई पड़ रहा है। क्या इस पार्टी वालो ने तुमसे संपर्क किया था।

भगत _भाई, इस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मुझे काल किया था, उसने पार्टी के युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया है।

राजेश _ये तो अच्छी बात है, तुम उनको हा कह दो।

भगत _ठीक है भाई।

मै अभी उन्हे काल कर पार्टी में शामिल होने की बात कह देता हूं।

भगत ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को काल किया।

शीर्ष नेतृत्व _बोलो भगत, क्या सोचें हो?हमारी पार्टी में शामिल होने के बारे में।

भगत _सर मै आपके पार्टी में शामिल होने के लिए तैयार हूं।

शीर्ष नेतृत्व _ये तो हमारी पार्टी के लिए खुशी की बात है।

देखो भगत इक सप्ताह बाद,हमारी पार्टी का वहा एक बडा समारोह होने वाला है। जिसमे मै उपस्थित रहूंगा। मेरी उपस्थिती में तुम्हें हमारी पार्टी में शामिल होने, सदस्यता की सपथ दिलाया जाएगा एवम युवा मोर्चा के अध्यक्ष चुना जाएगा।

मै राज्य के पार्टी अध्यक्ष को इस बारे में जानकारी दे दूंगा। वह तुमसे संपर्क में रहेगा और आगे की रणनीति से तुम्हें अवगत कराएगा।

भगत _ठीक है सर।

भगत ने इन सारी बातों की जानकारी राजेश को दिया।

राजेश _भगत अब तुम एक काम करो,तुम्हारे सोशल मीडिया पे जितने भी दोस्त एवम फालोवर्स है उन्हे इस बात की जानकारी दो की तुम agkp पार्टी ज्वाइन करने वाले हो।

साथ हो सभी दोस्तों को इस पार्टी का सदस्य बनने एवम उस दिन सबको उपस्थित होने को कहो।

भगत _ठीक है, भाई।

तभी कौशल्या देवी काफी लेकर आई।

कौशल्या Devi ने जैसे ही काफी का ट्रे राजेश की ओर बढ़ाया।

उसकी साड़ी का पल्लू गिर गया। उसकी बडी बडी चूचियां।राजेश के आंखो के सामने आ गया।

राजेश उसकी चूची को देखने लगा।

कौशल्या _क्या देख रहा है re

लगता है काफी नही दूध पीने का मन कर रहा है तेरा।

भगत _मां जी, भाई को दूध पिए काफी समय हो गया है आपका। थोड़ा दूध पिला दो।

कैशिल्या _पहले काफी पिलो, कुछ देर बाद एक और दूध पिलाने वाली आने वाली है। फिर दोनों मिलकर तुम दोनो को दूध पिलाएंगे।

राजेश _मां जी और किसको बुला लिया , आपने।

कौशल्या _भीमा की मां मालती को, राजेश घर आए तो बताना, कितने दिन हो गए, उनसे मिले।

भगत _मतलब होली के एक दिन पहले ही भाई के पिचकारी से रंग डलवाने का सुख मिलने वाला है।

कौशल्या _अब कल का तो पता नहीं,राजेश के पास हम लोगो के लिए समय होगा कि नही। इसलिए आज ही होली मना लेते हैं।

भगत _भाई, इन लोगो के साथ होली खेलकर आज इन लोगो की मनोकामना पूर्ण करो।

कल तो हमें दोस्तों के साथ होली खेलने के कारण समय नहीं मिलने वाला, इन लोगो के साथ होली खेलने का।

मां जी कुछ खाने का भी इंतजाम कर दीजिए।

खाली पेट होली मनाने में मजा नहीं आएगा।

कौशल्या _ठीक है। बस एक घंटे में सब तैयार हो जाएगा।

तब तक थोड़ा इन्तजार करिए। तब तक मालती भी आ जाएगी।

कौशल्या नीचे किचन में जाकर व्यंजन बनाने लगीं।

इधर राजेश और भगत, पार्टी में शामिल होने के बाद की कार्य योजना बनाने लगे।

इधर कुछ देर बाद मालती 4अन्य औरतों के साथ जो भीमा के दोस्तों की मां थी को लेकर कौशल्या देवी के घर पहुंचे।

सभी व्यंजन बनाने में कौशल्या देवी की मदद करने लगें।

मालती देवी _हाय, कितने दिनों बाद आज फिर सामूहिक chudai होगी। मुझे तो बहुत मज़ा आता है। सामूहिक chudai में।

कौशल्या देवी _सभी अपनी बुर की सफाई करके आई हो की नही।

मालती _सभी बुर को तैयार करके आई है।

कशिल्या देवी हसने लगी।

मालती _दीदी , घर में गुलाल है कि नही, आज राज के साथ होली खेलने के लिए।

कौशल्या _अरे गुलाल तो मंगाई हाई नही, अभी भगत को भेजती हूं दुकान से हर्बल गुलाल लेके आ जाए।

कौशल्या देवी ने भगत को काल किया और रंग लाने को कहा।

भगत दुकान से तीन चार रंगो का हर्बल गुलाल avm बियर का बोतल ले आया।

बाहर का गेट बन्द कर दिया गया।

राजेश को नीचे बुलाया गया।

बड़े से हाल में सभी लोग बैठे थे।

राजेश जब नीचे गया।

उसने देख सभी औरते सोफे पर बैठी है। राजेश को देखकर सभी मुस्कुराने लगे।

मालती _राजेश, तुम्हारी समस्या का समाधान हो जाने के बाद तो बिलकुल हमे भूल ही गए।

पर हम औरते जो मर्द हमको भा जाय उसे ता उम्र नही भूलते।

कितने दिन बाद, हम मिल रहे है।

राजेश _माफ करना, आंटी, कालेज में एक्जाम चल रहा था न, तो पढ़ाई पर ही फोकस कर रहा था।

मालती _वैसे, अच्छे दिन आए हो कल होली है। होली की अग्रिम शुभकामनाएं । आज कई संस्थानों में होली मना रहे हैं। तो क्यू न हम भी आज ही होली मनाले।

राजेश _भई यहां तो होली मनाने की सारा इंतजाम हो गया है, लग रहा है। अब सभी लोग की यही इच्छा है तो मैं रंग में भंग कैसे डाल दूं।

भगत कोई होली की म्यूजिक लगाओ।

सब नाचेंगे होली है भई।

कौशल्या खाने पीने की चीजे ले आई।

कौशल्या _पहले कुछ खा पी लो, तब नाचने और झूमने का मन बनेगा।

कौशल्या के पति, हलवाई था दुकान में होली के लिए भांग वाली मिठाई बनाया गया था। वह मिठाई घर में भी ला रखा था ताकि दोस्त यार जब घर आए तो होली इंजॉय कर सके।

कौशल्या को पता नही था की किस मिठाई में भांग मिला है।

वह मिठाई का डिब्बा फ्रिज से निकाल कर ले आई।

कौशल्या _चलो पहले सभी कुछ खा लो।

B

भगत ने होम थियेटर पर होली गीत लगा दिया।

भगत गिलास में सबके लिए बियर डाला फिर पीने को कहा।

कौशिल्या _ न बाबा, मैंने कभी नहीं पी है। मै नही पियूंगी।

भगत _मां जी, थोड़ा पीकर तो देखो, तभी तो झूमने का मन करेगा।

वैसे भी बियर में नशा होता कहा है।

लीजिए ना सभी, रंग तो तभी जमेगा।

राजेश _इसमें ज्यादा नशा नहीं होता। डरने की कोई बात नही।

मालती _दी, पहली बार ले के देखते हैं आखिर, पता तो चले, कैसा लगता है पीने के बाद।

कौशल्या _ठीक है, लाओ दो।

सभी महिलाएं बियर की गिलास लेकर पीने लगी।

और खाने का भी मज़ा लेने लगीं।

महिलाओं को थोड़ा थोड़ा नशा चढ़ने लगा।

भगत _क्यू मां जी, कुछ लगा क्या?

कौशल्या _नही re मुझे तो कुछ असर ही नहीं हो रहा।

भगत _एक एक गिलास और बना दू।

मालती _ठीक है, बना दे।

कौशल्या _अरे तुम लोगो ने तो मिठाई खाया ही नहीं।

लो पहले मिठाई तो खा लो।

राजेश के मुंह में कौशल्या ने मिठाई ठूस दिया।

कौशल्या _कैसा है?

राजेश _बडा अच्छा स्वाद है मिठाई का।

कौशल्या _तो और खा न ले।

दो फीस और खा लिया राजेश ने।

भगत ने भी दो फीस खाया।

उन्हे पता नही था कि उसमें भांग मिला है।

सभी ने खातेखाते एक एक गिलास और बियर पी लिया।

सभी को नशा चढ़ने लगा। वे गाने पे झूमने लगे।

सबको धीरे धीरे नशा चढ़ने लगा।

वे झूमने लगीं।

भगत _कैसा लग रहा है, आंटी?

मालती _मेरा तो झूमने का मन कर रहा है।

भगत _तो नाचो न।

सभी औरते नाचने लगे।

इधर राजेश को भांग का नशा चढ़ने लगा।

उसे ऐसा लगने लगा जैसे हवा में उड़ रहा है। साला ये क्या हो रहा है?

राजेश भी औरतों के साथ नाचने लगा।

औरतों के बदन में गालों में गुलाल लगाने लगा।

तभी कौशल्या का मस्ती सूझी वह मालती की साड़ी को पकड़ कर खींचने लगी, मालती गोल गोल घूमने लगी। वह सिर्फ पेटीकोट में रह गई।

उसके बाद मालती ने दूसरी औरत की साड़ी खींचने लगी। इस प्रकार सभी महिलाएं। सिर्फ पेटीकोट और साड़ी में रह गई।

उनकी हिलती हुई चूची को देखकर राजेश और भगत का land तन गया।

उन दोनो के उपर भांग का नशा भी चढ़ चुका था।

कौशल्या ने राजेश का शर्ट उतार दिया। मालती ने भगत का।

अन्य औरतों ने उसके पेंट निकाल दिया।

उसके अंडर वियर में तंबू बना देख। सभी औरते जोश में आकर और झूमने लगी।

राजेश और भगत भी मस्ती में आ गया।

भगत अब होम थियेटर पर अश्लील गाना चला दिया

गाना सुनकर सभी chudai के मूड में आ गए।

राजेश ने मालती को अपने ओर आने का इशारा किया।

मालती राजेश के पास आई।

राजेश जी भर के उसकी ओंठ कोमुंह में भर कर चूसा। फिर उसकी गालों रंग मला।

राजेश आगे बडा और उसकी चोली उतार दिया। उसकी दूदू को हाथो से मसल मसल कर खूब चूसा फिर उसमें भी रंग लगाया उसकी चोली उतार दिया।

मालती अब सिर्फ पेटीकोट में थी।

उसके बाद कौशल्या देवी को पास आने का इशारा किया।उसके भी ओंठ चूसा। गालों पर रंग लगाया। फिर चोली उतार कर दूदू को खुब मसला और चूसा। कौशल्या मादक सिसकारी लेने लगीं।

उसकी दूदू में रंग मला। फिर उसकी सपाट पेट को चूमा उसमे रंग लगाया।

इस प्रकार एक एक सभी औरतों की चोली उतार दिया।

सभी अपनी चूची मसल मसल कर राजेश और भगत को गंदा गंदा इशारा करते हुवे नाचने लगी।

राजेश और भगत दोनो जोश में थे उन दोनो पर भांग का नसा भी चढ़ गया था।

राजेश ने मालती को इशारा किया मालती उसके पास आई।

राजेश ने मालती की पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया।

मालती पूरी नंगी हो गई।

क्यू की औरते ब्रा और पैंटी पहनकर नही आईथीं।

वे घर से ही चिकनी होकर बिना ब्रा और पेंटी के आई थी।

राजेश ने उसकी चूतड पर रंग लगाया। फिर उसकी बुर में उंगली डाल कर तेजी अदंर बाहर करने लगा।

मालती सिसकने लगी,, आह उई मां आई,,

उसके बाद मालती ने राजेश का अंडर वियर निकाल दिया, राजेश का मूसल देख सभी औरते अपनी बुर खुजाने लगीं सभी बियर के नसे में झूम रहे थे।

मालती राजेशका land मुंह में भर कर चूसने लगी।

इधर भगत मालती की बुर चाटने लगा।

Land की चुसाई से land और शख्त हो गया।

अब राजेश मालती के पीछे गया और अपना land उसकी बुर के छेद में रख कर gach से पेल दिया।

Land सरसराता huwa अदंर घुस गया।

राजेश भांग के नशे मे मालती के बुर को दनादन चोदने लगा। लन्ड मालती के बच्चे दानी को ठोकने लगा। मालती के मुंह से आह उह उई मां आह निकलने लगा।

राजेश तब तक चोदता रहा जब तक मालती झड़ नही गई।

उसके बाद राजेश ने कौशिल्य देवी को इशारा कर बुलाया।

उसकी पेटीकोट का नाड़ा खींचा। उसकी चूतड पर रंग मला।

कौशल्या देवी से अपना land chusaya ,

भगत उसकी बुर चाट रहा था।

फिर राजेश ने कौशील्य देवी की बुर की धज्जियां उड़ाने लगा।

एक एक कर के सभी औरतों को घोड़ी बनाकर गाने के धुन में जम कर चोदा और सब को एक एक बार झाड़ दिया।

इधर भगत न औरतों की गाड़ मारना सुरू कर दिया।

राजेश सोफे पर बैठ गया, और मालती को अपने land पर बैठने का इशारा किया, मालती राजेश के land पर बैठ गई।

राजेश मालती की चूतड उछाल उछाल कर चोदने लगा।

फिर भगत ने मालती की गाड़ में अपना land डाल दिया।

राजेश और भगत मालती की बुर और गाड़ की एक साथ chudai करने लगें।

इधर सभी औरते गाने में झूम रही थी।

मालती के फिर से झड़ने के बाद, दूसरी औरत की बुर और गाड़ में land डालकर चोदने लगा।

इस प्रकार एक एक कर सभी औरतों की बारी बारी बुर और गाड़ दोनों की एक साथ कुटाई करने लगा।

कमरे मे गाने के साथ साथ औरतों की आह उह की आवाज़ गूंज रहा था।

Chudai का यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक राजेश और भगत झड़ नही गया।

सभी औरते चार बार झड़ चुकी थी।

सभी की बुर और गाड़ को चोद चोद कर सूजा दिया गया।

करीब दो घंटे तक यह खेल चला सभी थक कर सोफे पर लुड़क गए।

नशा भी उतर गया था।

घड़ी पर समय देखा तो 4बज चूके थे।

सभी बाथरुम में जाकर नहाए फिर अपने अपने कपडे पहन ने लगे।

यह होली सबके लिए यादगार बन गया था।

कुछ देर सुस्ताने के बाद, सभी औरते अपनी सूजी हुई chut लेकर अपने अपने घर चली गई।

राजेश _, अब मुझे भी निकलना होगा।

भगत _ठीक है भाई कल मिलते हैं फिर से रंग जमाने।

आज तो मज़ा ही आ गया।

कौशल्या देवी _मै काफी बना देती हूं, पी कर जाना।

राजेश _ठीक है मां जी।
 
अगले दिन सुबह जब सुनीता उठी, वह अपने पति की ओर देखी जो गहरे नींद में सो रहा था। सुनीता बाथरुम में जाकर फ्रेस हो कर नहाने लगी नहाने के बाद पूजा कक्ष में जाकर पूजा पाठ करने लगी।

पूजा करने के बाद फिर वह अपने कमरे मे आई।

शेखर अभी भी सोया था।

सुनीता _अजी, उठो न, आज होली है, आज तो जल्दी उठ जाइए।

शेखर ने आंखे खोला।

शेखर _क्या huwa भाग्यवान।

सुनिता_याद दिलाना पड़ेगा क्या? आज होली है, और आज भी देर तक सो रहे हैं।

झूठी गुस्सा दिखाते हुए कहा।

शेखर _ओह, सॉरी डार्लिंग।

सुनीताअपने हाथो में गुलाल ले रखी थी।

उसने शेखर के माथे पर गुलाल का टिका लगाया, हैपी होली जी।

और आशीर्वाद लिया। फिर जाने लगी।

शेखर ने उसकी हाथ पकड़कर रोक लिया।

शेखर _थोड़ा इधर तो आओ मेरी जान।

शेखर ने सुनीता को अपनी गोद में बिठा लिया।

और उसकी ओंठ चूम कर कहा,,

शेखर _हैप्पी होली डार्लिंग।

शेखर ने सुनीता को बाहों मे भर लिया।

और उसकी गालों पर किस करने लगा।

सुनीता _रहने दो अपना दिखावटी प्यार, अगर इतना ही प्यार होता तो मुझे उठाना नही पड़ता।

शेखर _ओह मेरी जान नाराज हैं, सॉरी मेरी रानी।

सुनीता _अब हो गया तो छोड़ो मुझे कीचन में आज बहुत काम करना है।

शेखर _रंग तो लगा लेने दे मेरी जान।

शेखर, सुनीता की चूची को मसलने लगा।

सच में आज भी तुम कितनी जवान और सुन्दर लगती हो।

सुनीता _अच्छा, आज बड़े रोमांटिक मूड में लग रहे हो।

शेखर _आज तो है ही रोमांस करने के दिन।

शेखर ने सुनीता की ब्लाउज का बटन खोल कर चूची बाहर निकाल कर मसलने लगा। उसकी गालों पर गुलाल लगाने लगा।

सुनीता सिसकने लगीं।

सुनीता _आह छोड़ो न क्या कर रहे हैं आप।

शेखर _आज तो होली है, मेरी रानी आज तो करने दो । नही तो तुम ही बोलोगी कि मेरी तो फिक्र ही नहीं।

शेखर सुनीता की चूची मसल कर पीने लगा।

सुनीता गर्म होने लगी।

उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

आह, उन, अब बस भी करो, कितना मसलोंगै जी।

शेखर का land भी खड़ा हो चुका था।

उसके पजामा में land तन चुका था। जिसका एहसास सुनीता को huwa

सुनीता _लगता है आज अपनी पिचकारी से रंग डालने का इरादाहै।

शेखर _हां मेरी रानी, आज तो अपनी पिचकारी से तुझपे रंग डालूंगा।

चल लेट जा बेड पे।

सुनीता शेखर के गोद से उठी और बेड पे लेट गई।

शेखर उसकी पेटी कोट को उपर चढ़ा कर उसकी पेंटी निकाल दिया।

शेखर _हाय, आज तो बडी चिकनी लग रही है तेरी बुर।

शेखर, सुनीता की बुर को सहलाने लगा।

सुनीता, उत्तेजित हो कर मादक सिसकारी निकालने लगी।

सुनीता _अजी अब अब अपनी पिचकारी तो बाहर निकालो। रंग नही डालने क्या?

शेखर _अभी निकाला मेरी जान।

शेखर अपना पजामा निकाल कर land बाहर निकाल दिया।

सुनीता _आज तो आपका पिचकारी काफी बडा लग रहा है।

शेखर _तुम्हें पानी से नहलाने के लिए तैयार है मेरी जान।

सुनीता _तो डाल दीजिए न।

शेखर _ले मेरी रानी।

शेखर सुनीता की टांगे चौड़ी कर उसकी बुर पे अपना land को रगड़ा फिर उसकी छेद पे टोपा रख कर, एक जोर का धक्का मारा।

Land सरसराता huwa एक ही बार में अदंर घुस गया।

सुनीता _आह मां।

शेखर _क्या huwa मेरी जान।

सुनीता _आज तो बड़े जोश में है आप। लगता है आज के दिन के लिए ही अपना पानी बचा कर रखे थे।

शेखर _हा मेरी रानी, सही कहा।

ले chud मुझसे।

शेखर जोर जोर से land को सुनीता की बुर में अदंर बाहर करने लगा।

सुनीता की बुर की पानी से गीला होकर land फ्च fach की आवाज़ करता huwa अदंर बाहर होने लगा।

शेखर भी जोश में आकर तेज तेज चोदने लगा।

सुनीता को भी बहुत मज़ा आने लगा।

वह बहुत गर्म हो गई, अपनी गाड़ ऊपर उठा उठा कर। शेखर का सहयोग करने लगी।

शेखर, भी तेज तेज चोदने लगा।

पर ये क्या शेखर खुद को ज्यादा देर तक रोक न सका और झड़ने लगा।

अपने पिचकारी का पानी सुनीता की बुर में भरने लगा।

और हांपते हुवे, बेड पर सुनीता के एक ओर लुड़क गया।

सुनीता झड़ी नहीं थी। वह चरम अवस्था में पहुंचती उसके पहले ही, शेखर ढेर हो गया।

सुनीता को बहुत गुस्सा आया पर वह कर भी क्या सकती थी।

सुनीता उठी और बाथरुम में घुस गई। अपनी बुर को पानी से धोने लगी। उंगली डाल कर बुर की सफाई करने लगीं।

जब वह बाथरुम से बाहर निकली, राजेश अपना पजामा पहन चुका था।

शेखर _मज़ा आया न मेरी जान।

सुनीता _हां जी, आज तो आप काफी जोश में थे।

शेखर _अब तो मुझसे शिकायत नहीं न।

सुनीता ने झूठी मुस्कान लाकर, हां कहा।

सुनीता कीचन में चली गईं।

इधर राजेश भी उठ कर फ्रेस हो गया था। वह हाल में आया।

उसने शेखर को देखा।

राजेश _हैप्पी होली पापा।

राजेश ने शेखर को गुलाल लगाकर आशीर्वाद लिया।

शेखर _हैप्पी होली बेटा। खुश रहो।

राजेश _पापा मां कहा है?

शेखर _बेटा, तुम्हारी मां तो कीचन में होगी। कह रही थी की आज कीचन में बहुत काम है?

राजेश_पापा आपने मां को रंग लगाया कि नही।

शेखर _बेटा मैने तो तुम्हारे मां के साथ होली खेल लिया जाओ अब तुम भी अपनी मां के साथ होली खेलो, अच्छे से रंग लगाना अपनी मां को।

राजेश _जी पापा।

राजेश कीचन में चला गया।

शेखर पौधो को पानी देने गार्डन में चला गया।

राजेश जब कीचन में गया तो सुनीता बर्तन धो रही थी।

राजेश पीछे से गया और सुनीता को अपनी बाहों में भर लिया।

राजेश _हैप्पी होली मां।

राजेश ने गुलाल हाथो में ले कर उसकी गालों पर मलने लगा।

सुनीता _अरे क्या कर रहा है छोड़ो। बस हो गया और कितना लगाएगा।

राजेश _पापा ने कहा है अच्छे से रंग लगाना अपनी मां को।

सुनीता _अच्छा और क्या कहा है तुम्हारे पापा ने।

राजेश _पापा ने कहा कि मैंने तुम्हारे मां के साथ होली खेल लिया अब तुम जाकर अपनी मां के साथ होली खेलो।

सुनीता _अच्छा, ऐसा कहा।

राजेश _हां।

सुनीता मुस्कुराने लगी।

राजेश _मां, आज होली है एक चुम्मा तो दो।

राजेश ने सुनीता को अपनी बाहों मे जकड़ कर धीरे से उसकी कानो मे कहा।

सुनीता _पूरे गाल में तो रंग मल दिया अब चुम्मा कहा लेगा।

राजेश _गालों पे नही तो यहां दे दो।

राजेश ने सुनीता का पेट सहलाते हुए धीरे से कहा।

सुनीता _चल हट कोई देख लेगा न तो होली खराब हो जाएगी।

राजेश _कोई नही है, पापा तो पौधो को पानी देने बाहर गार्डन पे गया है। स्वीटी तो सो रही है।

सुनीता _पहले देखा कोई है तो नही।

राजेश देखने के लिए कीचन से बाहर आया।

कोई नजर नहीं आया।

वह फिर कीचन में चला गया। और सुनीता को अपनी बाहों मे जकड़ लिया।

राजेश _बाहर कोई नहीं है चलो अब किस करने दो।

राजेश ने सुनीता को अपनी ओर घुमा दिया।

राजेश नीचे बैठ गया और सुनीता की साड़ी को उसके पेट से हटा दिया।

फिर उसकी नाभि को चूमने लगा।

सुनीता _सिसकने लगीं।

आह उन,,,,

सुनीता राजेश की बालो को सहलाते हुए कहा,

आह उन,, अब बस कर कितना चूमेगा?

राजेश _मां, आज जीभर के चूमने दो न होली है।

सुनीता _सिसकने लगीं।

सुनीता _बस कर कोई आ जाएगा।

आह उन,,,

तभी राजेशसाड़ी को पल्लू को नीचे गिरा दिया। सुनीता की पेट चूमते हुवे ऊपर की ओर गया।

फिर उसकी गर्दन को चूमने लगा।

सुनीता सिसकने लगीं।

राजेश, सुनीता को पीछे घुमा दिया और उसे कस कर जकड़ लिया। अपना land सुनीता की गाड़ में धसा दिया।

अपने दोनों हाथों से सुनीता की चूचियां मसलने लगा।

सुनीता सिसकने लगीं ।

आह मां उन,, क्या कर रहा है छोड़ो न, कोई,, आ,,, जा,,

आह मां,, उन,,

राजेश भी गर्म हो गया था उसका land तन कर लंबा और मोटा हो गया था। जिसका एहसास पाकर सुनीता की बुर पानी छोड़ने लगी। वैसे वह पहले से ही गर्म थी।

राजेश ने सुनीता की ब्लाउज का बटन खोल कर उसकी चूची बाहर निकाल दिया, उसकी चूची मसल मसल कर पीने लगीं।

सुनीता बहुत अधिक उत्तेजित हो गई।

मादक सिसकारी उसके मुंह से निकलने लगी।

सुनीता एक हाथ पीछे ले जाकर राजेश के land Ko पकड़ कर सहलाने लगी।

राजेश समझ गया कि उसकी मां chudna चाहती है।

राजेश अपना पैंट का चैन खींचकर अपना land बाहर निकाल कर सुनीता की हाथ में थमा दिया।

सुनीता land सहलाने लगी।

अब राजेश ने सुनीता को उठा कर कीचन के पाटे पर लिटा दिया।

सुनीता की टांगो को फैला दिया। सुनीता पेंटी नहीं पहनी थी।

मस्त फूली हुई चिकनी chut राजेश के आंखो के सामने आ गया।

राजेश का land हवा में ठुमकने लगा।

राजेश सुनीता की बुर चाटने लगा।

सुनीता के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

आह उन उई मां आई,, बेटा,, आह,,

सुनीता _बेटा जल्दी कर कोई आ जाएगा?

राजेश, ने अपना land को टोपा सुनीता की बुर के छेद पे रख कर एक एक जोर का धक्का मारा,

Land बुर को फाड़कर सरसराता huwa अदंर चला गया।

अब राजेश दोनो हाथो से सुनीता की दूदू को मसल मसल कर, गपागप बुर चोदने लगा।

कमरे मे फच फच की आवाज़ गूंजने लगा।

तभी शेखर पौधे पे पानी डालते हुए कीचन के खिड़की जो खुली हुई थी, के पास आ गया।

उसने राजेश को कीचन में हिलते देखा।

वह राजेश के सीने के ऊपर भाग को ही देख पा रहा था।

शेखर _अरे बेटा तू कीचन में क्या कर रहा है और ये आवाज़ कैसी है?

राजेश अपने पिता जी को देखते हुए और बुर चोदते हुए, चूचियां मसलते हुए कहा।

राजेश _पापा मै कीचन में मां की मदद कर रहा हूं। मै आटा गूथ रहा हूं।

शेखर _ये तो बडी अच्छी बात है।

पर तुम्हारी मां दिखाई नहीं दे रही।

सुनीता _मै कीचन की सफाई कर रही हूं जी।

तभी राजेश ने एक जोर का धक्का मारा land का टोपा सीधा सुनीता की बच्चेदानी से टकराया।

सुनीता _उई मां।

शेखर _क्या huwa सुनीता चीख क्यू रही हो?

सुनीता _कुछ नही जी काकरोच था।

इधर राजेश दनादन बुर में land पेले जा रहा था। सुनीता और राजेश दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था।

दोनो जन्नत का सुख भोग रहे थे।

इधर स्वीट अपने रूम से निकल कर घर के सदस्यों को ढूंढने लगी रंग लगाने।

वह कीचन पे आई। कीचन का दृश्य देखकर वह दंग रह गई।

सुनीता और राजेश दोनों chudai में लीन थे।

यह दृश्य देखकर स्वीटी भी बहुत गर्म हो गई। उसकी chut पानी छोड़ने लगी।

वह एक हाथ से अपनी बुर सहलाते हुए।chudai का खेल देखने लगी।

इधर राजेश सुनीता की बुर पे अपना land गपागपडाले जा रहा था।land boor की पानी से गीला हो कर सर सर अदंर बाहर हो रहा था जिससे दोनो को परम आनंद की प्राप्ति हो रहा था।

राजेश _पापा आटा गूथने में बडा मजा आ रहा है।

शेखर _काम को अगर मजा लेकर किया जाए तो कोई भी काम कठिन नहीं रह जाता बेटा।

सुनीता _हा जी, आपने सही कहा। राजेश तो बहुत अच्छा आटा गूथ रहा है ।

काश आप भी सिख लिए होते तो,,,

शेखर _सुनीता, तुमने तो कभी मुझसे कहा ही नहीं,, आटा गूथने,,

सुनीता _हां जी आप बैंक की ड्यूटी करके थक जाते हैं न इसलिए नही कहती।

अब राजेश है न मेरी मदद करने,,

क्यू राजेश?

राजेश _हां मां, आप जब कहे मै तैयार हूं आपकी मदद करने।

वैसे मैं अच्छे से कर रहा हु न।

सुनीता _हा बेटा, तुम बहुत अच्छे से कर रहे हों। हा ऐसे ही करते रहो।

सुनो जी राजेश तो बहुत जल्दी सीख गया।

शेखर _आखिर बेटा किसका है?

सुनीता _जानती हू, बेटा तुम्हारा है, पर सिखाया तो मैने न।

हा और थोडा जोर लगाओ बेटा,,

राजेश और जोर जोर से चोदने लगा।

सुनीता _हा ऐसे ही।

सुनीता बहुत अधिक उत्तेजित हो गई और खुद को रोक न सकी वह राजेश को जकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश ने chudai करना बन्द कर दिया।

और राजेश भी सुस्ताने लगा।

इधर स्वीटी की हालात खराब हो चुकी थी।

उसे चुदने की तीव्र इच्छा होने लगीं।

वह राजेश का कीचन के बाहर आने का इंतजार करने लगीं।

 
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