Incest यह क्या हुआ - Page 15 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

प्लांट के अधिकारियो ने मजदूर यूनियन के पुराने पदाधिकारियों से किसी तरह संपर्क बनाया और उन्हे गुप्त रूप से रात 8बजे बंगले पे कंपनी की मालकिन सुजाता मैडम से मिलने के लिए कहा।

इधर राजेश कंपनी के अधिकारियो से मोबाइलसे संपर्क में रहा और जानकारी लेता रहा।

अधिकारियो ने राजेश को बताया कि मजदूर यूनियन के पुराने पदाधिकारी मैडम से मिलने के लिए तैयार हो गए हैं।

रात के 8बजे सभी पुराने पदाधिकारी लोगों से छिपते छिपाते किसी तरह बंगला में पहुंचे। जब सभी पूर्व पदाधिकारी मीटिंग हॉल में इकठ्ठा हो गए तब राजेश और सुजाता ने हाल में प्रवेश किया।

सभी पूर्व पदाधिकारियों ने सुजाता का अभिवादन किया।

प्लांट के मुख्य प्रबंधक _मैम ये महेंद्र सिंग है, मजदूर यूनियन के पूर्व अध्यक्ष।

महेंद्र सिंग ने हाथ जोड़ सुजाता को नमस्कार किया।

महेंद्र सिंग _मैडम जी आपने हमे कैसे याद किया?

राजेश _महेंद्र सिंग, तुम प्लांट की स्थिति से वाकिफ हो, हड़ताल के कारण हमारे कंपनी मुसीबत बे आ गई है। अगर हड़ताल कुछ और दिन चला तो प्लांट बंद करना पड़ेगा, और यह प्लांट बंद हो गया तो यहां काम करने वाले गरीब मजदूरों के लिए हित में नहीं होगा। इन बातों को ध्यान में न रखते हुए वर्तमान यूनियन लीडर अपने मांगो को लेकर जिद पर अड़ा हुआ है, वह समझौता के लिए तैयार ही नहीं है। आप इस यूनियन के पुराने लीडर रहे हैं। आप से कई मज़दूर जुड़े हुए होंगे। आप मजदूरों और कंपनी दोनों के हित को ध्यान में रखकर, आप हमारा साथ दीजिए।

महेंद्र सिंग_ साहब, हम लोग के साथ साथ कई मजदूर भी चाहते है कि हड़ताल को वापस लिया जाए लेकिन ये राकेश सिंह और उसके साथी गुंडे प्रवृत्ति के लोग हैं उसके खिलाफ जाने से सभी डरते हैं। कोई उनका विरोध नहीं कर पा रहा है।

कम्पनी की हालत जानकर हम भी काफी चिंतित है।

कम्पनी की भलाई के लिए हम आपके साथ है बोलिए हमे क्या करना होगा?

राजेश _अगर तुम लोग हमारा साथ दो तो राकेश सिंह और उसके साथी किसी का कुछ नहीं कर पाएगा।

अन्य पधाधिकारी _बोलिए साहब हमे क्या करना है, हम आपके साथ है।

राजेश _देखिए, जीतने भी मज़दूर हड़ताल वापस लेने के पक्ष में है आप लोग उनसे सम्पर्क कर उन्हे एक जुट करो।

कल मैम हड़ताल मंच पर सभी मजदूरो के सामने अपनी बात रखेगी तुम लोग भीड़ में अलग अलग जगह बैठे रहोगे और मैडम की बातो का समर्थन करोगे।

बस इतना कर दिए तो समझो काल हड़ताल टूटने से कोई रोक न सकेगा।

महेंद्र सिंग _ठीक है साहब हम आपके बताए अनुसार ही कार्य करेंगे?

राजेश _तो ठीक है, कल प्रातः 12बजे मैम मजदूरों के बीच अपनी बात रखेगी, आप सभी अपने समर्थकों को तैयार रखना और इस बात का ध्यान रखना की राकेश और उसके साथियों को इस बात का कोई भनक भी न लगे।

महेंद्र सिंग _ठीक है साहब, आप चिंता न करें इस बात की जानकारी हमारे विरोधियों को बिलकुल नहीं होगी।

राजेश _तो ठीक है आप लोग जाइए और कल की तैयारी में लग जाइए।

सभी लोग वहा से चले गए।

लोगों के जाने के बाद प्लांट के एक अधिकारी ने कहा मैडम भोजन तैयार है, आप लोग डिनर कर लीजिए।

सुजाता _ठीक है, चलिए सभी डिनर कर लेते हैं।

डिनर करने के बाद, अधिकारी अपने घर चले गए।

इधर राजेश और सुजाता अपने कमरे में पहुंचे।

राजेश, सुजाता के कमरे में ही रह कर उसे कल मज़दूरों के सामने किस तरह अपनी बाते रखना है समझाने लगा।

सुजाता _पर राजेश, मज़दूरों के बीच कही मामला बिगड़ गया तो, वहा पर हिंसा भी हो सकता है।

राजेश _हमे हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना होगा, यहां के थाना प्रभारी से कह दो की मैं कल मज़दूरों के बीच अपनी बातो को रखने जा रही हूं किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो उसके लिए अपना पुलिस फोर्स तैनात रखे।

सुजाता _हां, ये ठीक रहेगा।

राजेश _अच्छा मैम रात काफी हो गई है अब आप आराम कीजिए, मै भी अपने कमरे में जाता हूं।

सुजाता _ठीक है, राजेश, गुड नाईट। कल सुबह मिलते है।

राजेश अपने कमरे में सोने चला गया।

अगले दिन, हड़ताल स्थल पर सभी पूर्व पदाधिकारी और उसके समर्थकअपनीतैयारी के साथ मौजूद थे ।

करीब बारह बजे के समय सभी मज़दूर धरना स्थल पर पहुंच गए थे।

मज़दूरों की काफी भीड़ थी। थाना प्रभारी भी अपने दल बल के साथ हड़ताल स्थल पर उपस्थित हो चुके थे।

तभी अधिकारियो ने राजेश को काल कर कहा कि सब तैयारिया हो चुकी है धरना स्थल पर मज़दूरों की काफी भीड़ है। आप लोग धरने स्थल पर पहुंच जाइए।

राजेश _ठीक है हम लोग अभी पहुंच रहे हैं।

मैम चलिए, अब सही समय आ गया है, अपनी योजना को सफल बनाने का।

सुजाता _राजेश सब ठीक तो होगा न।

राजेश _मैम सब ठीक होगा, आप भरोसा रखे।

सुजाता और भगत धरने स्थल के लिए निकल पड़े साथ में बॉडी गार्ड भी था।

कुछ समय में दोनों धरना स्थल पर पहुंच ठीक कुछ समयपहले मुख्य प्रबंधक भी वहा पर पहुंचे थे वह सुजाता और राजेश का इंतजार कर रहा था।

अब तीनों मंच कि और आगे बड़े सभी मज़दूर कंपनी की मालकिन को आश्चर्य से देख रहे थे।

उन्हे इसकी उम्मीद नहीं थी की धरना स्थल पर मैडम पहुंचेगी।

मज़दूर संघ भी आश्चर्य में थे।

मंच पर एक नेता भाषण दे रहे थे।

जैसे ही उसने कंपनी की मालकिन को आते देखा, वह वह कम शब्दों में ही अपनी बाते खत्म कर दी।

प्रबन्धक ने माइक संभाला

उसने माइक पर मजदूरों को बताया की कंपनीआपलोगो की अधिकांशमांगे मान ली है, और आप आप लोगों के लिए ये खुशी की बात है कि मालकिन खुद ही आप लोगो से बात करने आई है।

उम्मीद है आप लोग उनकी बातों को ध्यान से सुनेंगे और मजदूरों और कंपनी की भलाई के लिए हम किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाएंगे।

सुजाता ने माइक अपने हाथो में ले लिया,

सुजाता _मेरे कंपनीके मज़दूर भाईयो, मै आज आपके बीच मालकिन बनकर नही आई हूं। हमारा कंपनी एक परिवार है और मैं और आप सभी इस कम्पनी के सदस्य है, और इस परिवार के मुखिया होने के नाते आपलोगो से मिलने आई हूं।

मेरे भाईयो आप लोगो के मेहनत के कारण से ही हमारा कंपनी बुलंदियों को छू पाया था। लेकिन आज आप लोगो की नाराजगी के कारण हमारा यह कंपनी अपने बुरे दौर से गुज़र रहा है।

मैं आप लोगों को यह बताने आई हूं की हमारी कंपनी आपकी सभी जायज मांगों को मान ली है।

कुछ चीजों पर गतिरोध बना हुआ है जिसे हमे आपस में विचार विमर्श कर उसे भी दूर करना है।

हमारी कंपनी सदा अपने हर सदस्यों का ख्याल रखा है। और आगे आगे भी रखेगी।

मैं यह घोसना करती हूं कि किसी भी मज़दूर भाई का सेवा के दौरान आकस्मिक निधन होता है तो उसके परिवार को 10लाख रुपए दिया जाएगा।

उसके परिवार केएक सदस्य को सेवा पर रखा जाएगा।

किसी भी मज़दूर भाई के साथ कुछ हादसा होता है तो उसका पूरा इलाज कंपनी के द्वारा कराया जाएगा और उसके परिवार को मजदुरी भी मिलती रहेगी।

जब आप इस कम्पनी से सेवामुक्त हो जायेंगे तो जीवकोपार्जन के लिए पेंशन का प्रावधान बनाया जायेगा।

जहां तक वेतन में 50% वेतन में वृद्धि का सवाल है अभी तत्काल में 12% वेतन में वृद्धि की घोषणा करती हूं। यह 12 %वृद्धि हर साल किया जाएगा। जो आसपास के किसी भी कंपनी से कही अधिक है।

साथ ही आपको यह भी बताना चाहूंगी आपको दिवाली पर जो बोनस दिया जाता है वह बोनस अब कंपनी को प्राप्त होने वाले लाभ के बराबर दिया जायेगा।

मेरे भाईयो हमारी कंपनी सदेव आप लोगों के साथ खडा है, आप लोगो की भलाई के लिए कार्य किया है, मै आप लोगों को विश्वास दिलाती हूं की जब कंपनी की स्थिति अच्छी होगी तो आपके हित में और भी फैसले लिए जायेंगे।

अब आगे हमे कंपनी के हित के लिए कार्य करना होगा। क्यू की आज कंपनी की जो स्थिति है। उससे आप सभी भली भांति परिचित हैं।

आप लोगों से मै निवेदन करती हूं की आप लोग कंपनी की हित को ध्यान में रखते हुए अपने काम पर लौट आए, क्यू की कंपनी के हित में ही हम सबकी हित छुपा huwa है।

मैने अपनी बात आप सबके सामने रखी, अब मैं आप लोगों का विचार सुनना चाहती हूं।

तभी महेंद्र सिंग मंच पर आ गया,,

महेंद्र सिंग _भाईयो, हमारी कंपनी की मुखिया का बाते मैने सुना, वह हमारी लगभग सभी मांगे मान चुकी है। भाईयो आज कंपनी की जो स्थिति हैहम सब उससे अंजान नही है, अगर हम सब अपनी जिद पर अड़े रहे तो पता नही कंपनी का क्या होगा? हो सकता है कंपनी ही बिक जाए।

क्या आप चाहते हैं हमारी कंपनी बिक जाए।

बोलिए, यह खामोश रहने का समय नहीं है।

मजदूरों ने कहा नही हम कंपनी को बिकने नही देंगे।

हा मै जानता हूं की हमारे कोई भी मज़दूर भाई नही चाहते की कंपनी बिक जाए।

कम्पनी की भलाई के लिए जरूरी है की जब हमारी अधिकांश मांगे मान ली गई हो तो हमे भी उदार दिखाते हुए काम पर लौट जाना चाहिए।

बोलो कौन कौन मेरे बातो से सहमत हैं।

एक एक करके खड़े होकर पूर्व के मज़दूर यूनियन के पदाधिकारी खड़े होकर महेंद्र सिंग को अपना समर्थन देने लगे।

धीरे धीरे वे सभी मज़दूर जो राकेश सिंह के भय से अपनी आवाज नहीं उठा पा रहे थे वे भी खड़े होकर महेंद्र सिंग का समर्थन करने लगे।

जब राकेश सिंह ने देखा मामला बिगड़ रहा है उसने माइक सम्हाल ली।

राकेश सिंह _साथियों, इन लोगो के बहकावे में आप लोग मत आइए यह महेंद्र सिंग भी कंपनी मालकिन से मिला huwa है। अगर हम आज झुक गए तो हमारी मांगे कभी पूरी नहीं होगी।

तभी एक मज़दूर ने खड़े होकर कहा,

जब कंपनी रहेगी तभी तो हम मांग कर सकेंगे। जब कंपनी ही नहीं रहेगी तो किससे मांग करेगें।

हम तुम्हारे बहकावे में नहीं आएंगे।

आपने हमे बहुत गुमराह किया है।

अब हम वही करेगें जो महेंद्र बाबू कहेंगे।

क्यों भाईयो?

सभी मज़दूर चिल्लाने लगे,

महेंद्र बाबू हम आपके साथ है।

महेंद्र बाबू जिंदा बाद, सुजाता मैडम जिंदा बाद।

तभी मज़दूर यूनियन के एक सदस्य मंच पर आ गया।

साथियों आप लोगो ने मुझे भी हौसला बड़ा दिया सच्चाई सब के सामने रखने की, अब तक मै चुप था क्यू कि मुझे डर था की अगर मैने सच्चाई बता दिया तो यूनियन के पदाधिकारी मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।

साथियों मैने खुद ही अपने आंखो से देखा है यूनियन लीडर को हड़ताल न वापस लेने के लिए हमारे कंपनी के लोगो कुछ लोगो से पैसा लेते हुए।

सभी मज़दूर क्रोधित हो गए,

चिल्लाने लगे, मारो साले को, मज़दूर मंच की ओर बड़ने लगे।

राकेश _ये झूठ बोल रहा है, मुझ पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है।

पर मज़दूर माने नही, और वर्तमान यूनियन के सभी पदाधिकारियों को पीटने लगे।

पुलिस वालो ने मजदूरों को रोकने का बहुत प्रयास किया।पर मज़दूर रुके नहीं।

कुछ लोग राकेश सिंह को मंच से दूर ले गए वहां मजदूरों ने जमकर पिटाई किया।

मामला बिगड़ता देख राजेश ने सुजाता को माइक पर सबको शांत हो जाने के लिए बोलने कहा।

सुजाता _कृपया, आप सभी से निवेदन है कि आप सभी शान्त हो जाइए।

महेंद्र सिंह ने भी कहा साथियों अपने गुस्सा को काबू में रखिए और शांत हो जाइए।

मजदूरों ने यूनियन के पदाधिकारियों की पिटाई रोक दिया।

महेन्द्र सिंग_ भाईयो, इन लोगो को छोड़ दीजिए, कंपनी फैसला लेगी की इनके साथ क्या करना है।

सुजाता _इन लोगो ने लालच में आकर, कंपनी और मजदूरों दोनों के लिए मुसीबत खड़ी की है इसलिए कंपनी सेइन लोगो को बाहर निकाला जाता है।

सभी यूनियन पदाधिकारी की हालत पिटाई से खराब हो चुकी थीं।

वे वहा से जानें में ही अपना भलाई समझा।

अपमान का घुट पीकर वे सभी वहा से चले गए।

महेंद्र सिंह _साथियों, कंपनी को हमारी हड़ताल की वजह से काफी नुकसान पहुंचा है। अब हमारा फर्ज है की हम दिन रात मेहनत कर हमारी कंपनी का मान सम्मान फिर से से वापस दिलाए। हम सबको आज से ही अपने काम पर लग जाना चाहिए।

मैडम जी मै हम सभी मज़दूर भाईयो की ओर से आपसे माफी मांगता हूं।

हम लालची लोगो के बहकावे में आकर अपने कंपनी के साथ साथ अपने ही लिए गड्डे खोद रहे थे।

सुजाता _भाईयो, जो होना था हो गया, कंपनी को आप लोगो की जरूरत है। आप लोग अपने कार्य पर लग जाइए। कंपनी आपके हितों की रक्षा करेगी मै यह आप सभी से वादा करती हूं।

सभी मज़दूर चिल्लाने लगे, सुजाता मैडम ,जिंदा बाद सुजाता मैडम,जिंदा बाद।

फिर सभी मज़दूर फिर से कारखने की ओर चलने लगे। कारखाने का सायरन बजने लगा।

जब सभी मज़दूर अपने कार्य में लग गए।

वहा पर काफी देर तक महेंद्र सिंग, सुजाता राजेश और प्लांट के मुख्य अधिकारियो के बीच सलाह मशविरा होता रहा।

महेंद्र सिंग ने भरोसा दिलाया की आगे ऐसी स्थिति कभी नहीं आएगी।

उसके बाद राजेश और सुजाता, बंगला में आ गए।

सुजाता, राजेश को गले से लगा ली।

ओह राजेश आखिर तुमने कर दिखाया।

राजेश _मैम मैने क्या किया? जो कुछ भी किया आपने किया मैने तो सिर्फ मार्गदर्शन किया।

अब मीडिया वालो को बोलो की सभी न्यूज चैनलों पर यह खबर चलाए।

सुजाता के कहने पर सभी न्यूज चैनलों ने यह खबर चलाने लगे की, सुजाता एंडविशाल ग्रुप्सकी सोनपुर स्थित सीमेंट प्लांट में मजदूरों ने हड़ताल खत्म कर आज से ही काम पर लौटे।

जिसका सकारात्मक असर शेयर मार्केट पर पड़ा और कुछ ही देर में सुजाता की कंपनी के शेयर में तेजी आने लगा।

इधर रीता के सीईओ ने यह बात रीता को बताई की सुजाता की सीमेंट प्लांट के मजदूरों ने हड़ताल वापस ले लिया है।

रीता _हूं, जानती थी यही होने वाला है। उस लड़के के लड़के ने आखिर कर दिखाया।

रीता ने सुजाता को काल की,

सुजाता _बोलो रीता।

रीता _सुना है मजदूरों ने हड़ताल वापस ले लिया।

सुजाता _हां,re, ये सब राजेश की वजह से हो पाया।

रीता _ बधाई हो।जानती हूं, राजेश कुछ न कुछ जरूर करेगा।

वैसे कब वापस आ रही हो।

सुजाता कल दोपहर में निकलेंगे।

रीता _ठीक है, तुम वापस आओ फिर मुलाकात करते हैं।

सुजाता ने निशा को काल की।

सुजाता _बेटी, कैसी हो? तुम्हारे डैड कैसे हैं?

निशा _मॉम मैऔरडैड ठीक है ।आप वहा ठीक तो है न।

निशा _हां बेटा मै भी बिलकुल , बेटी एक खुशखबरी है। मजदूरों ने हड़ताल वापस ले लिया है और आज से ही काम पर लौट आए है।

निशा _मॉम, ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है मॉम।

सुजाता _हा बेटा, ये सब राजेश की वजह से हो पाया।

निशा _मॉम, अब आप लोग जल्दी से वापस आ जाओ। आपके बिना यहां अच्छा नही लग रहा।

सुजाता _कल दोपहर को हम घर के लिए निकलेंगे बेटा, कुछ काम है उसे निपटा कर।

अच्छा बेटा मै फ़ोन रखती हूं अपना और अपने पिता जी का ख्याल रखना।

निशा _ओके मॉम, लव यू।

सुजाता _लव यू टू बेटा।

निशा फ़ोन रखने के बाद,,, अपने कमरे में बेड में लेट कर,,

ओह राजेश आखिर तुमने कर दिखाया,,

वह अपनी मोबाइल के गैलरी पर रखी राजेश के फोटो को देखने लगी और मंद मंद मुस्कुराने लगी।

इधर राजेश और सुजाता डिनर करने के बाद फिर से प्लांट पे काम काज का जायेजा लेने के लिए चला गया।

दिनभर वही रुक कर काम काज देखते रहे जब वहा से लौटे तो रात के 8बज चुके थे।

बंगला में आने के बाद दोनों अपने कमरे में फ्रेश होने लगे, कुछ देर आराम करने के बाद, नौकरानी ने कमरे में आकर डिनर के लिए पूछा।

सुजाता ने नौकरानी को डिनर की तैयारी करने को कह दिया।

और राजेश के कमरे में चली गई।

सुजाता _क्या कर रहे हो राजेश?

राजेश _मैम आप, कुछ नहीं बस आराम कर रहा था।

सुजाता _मुझे लगता हैं तुम किसी के याद में खोए थे।

राजेश _मैम मै किसकी याद में खाऊंगा।

सुजाता _अपनी किसी गर्लफ्रेंड की।

कौन है वो खुशनशीब मै भी तो जानू?

राजेश _मैम, लड़कियों में तो सिर्फ दो ही दोस्त हैं, एक सीमा और दूसरी निशा और तो कोई है नहीं, जिसकी यादों में हम खोए रहे।

सुजाता _चल झूठे कही के ऐसा कैसे हो सकता है? क्या तुमने अभी तक किसी को प्रपोज नही किया।

राजेश _न।

सुजाता _बताओ, तुम्हें कैसी लड़की चाहिए।

राजेश _बिल्कुल आप ही की तरह।

सुजाता _क्या मै इतनी खूबसूरत हूं?

राजेश _ये भी पूछने की बात है। खुद को आईने में देखो, कितनी सुंदर हो स्वर्ग की किसी अप्सरा की तरह।

सुजाता _चल हट झूठा कही, चली डिनर का समय हो गया है।

सुजाता वहा से शरमाते हुवे चली गई।

रात में डिनर करने के बाद वे कुछ देर हाल में ही बैठ कार बात चीत करते रहे। फिर अपने अपने कमरे में सोने चले गए।

कमरे में जानें के बाद, सुजाता अपनी नाइटी पहन ली और बेड पर लेट कर राजेश के द्वारा कही बातो की उसे मेरी जैसी लड़की चाहिए,को याद कर मुस्करा रही थी।

सोने की कोशिश कर रही थी पर नींद नहीं आ रही थी। वह उठी और राजेश के कमरे की ओर चली गई और दरवाजा खटखटाई।

राजेश ने दरवाजा खोला।

राजेश _मैम, आप इस वक्त।

सुजाता _ओह राजेश मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो सोचा तुमसे थोड़ी देर बात चीत कर लू।

कही तुम्हें डिस्टर्ब तो नही कर दिया।

राजेश _नही मैम आइए न।

सुजाता कमरे के अंदर आकर बेड पर बैठ गई।

सुजाता _राजेश, मै सोच रही थी कि यहां आस पास बहुत से मनोरम दृश्य है हम कल सुबह घूमने चले। पास में ही यहां पर एक झरना भी है क्यू ना हम वहा नहाने का मजा ले। पता नहि फिर यहां आने का कब मौका मिले।

राजेश _ओ तो ठीक है मैम पर वहा पर मौजुद लोग यदि तुमको पहचान लिया कि तुम सुजाता और विशाल ग्रुप की मालकिन हो वे सभी नहाना छोड़कर तुम्हें नहाते देखेंगे और वीडियो बनाकर वायरल कर देंगे।

सुजाता _अरे बाबा मै पूरी साड़ी पहनकर नहाऊंगी। और यहां आकर कपडे चेंज करूंगी।

अपने बॉडी गार्ड को भी नही ले जाऊंगी। सिर्फ हम दोनों ही जायेंगे। कोई नही जान पाएगा। हम बिलकुल सिंपल सा ड्रेस पहनेंगे।

क्या तुम मेरी इतनी सी इच्छा पूरी नहीं कर सकते?

राजेश _ठीक है, मैम।

सुजाता _खुश होकर, ठीक है कल सुबह तैयार रहना।

अब मै चलती हूं। तुम भी सो जाओ काफी रात हो गई है।

इधर निशा, अपने बेड पर करवट लेकर लेटी थी और मोबाइल पर राजेश की फ़ोटो को देख रही थी।

उसकी आंख लग गई।

वह सपने देखने लगी,

उसने सपने में देखा की वह राजेश को किसी सुनसान जगह पर नदी किनारे मिलने बुलाई है।

वह काफी देर से राजेश का इंतजार कर रही है और राज काफी देर बाद आया।

राजेश _बोलो निशा, मुझे यहां क्यूं बुलाई?

निशा _पहले ये बताओ तुम्हें लेट कैसे हो गया? मुझे तो लगा की तुम नही आओगे।

राज_तुम बुलाओगी और मैं न आऊं ऐसा भला हो सकता है।

बोलो क्यूं बुलाई?

निशा _मुझे तुमसे कुछ कहना है?

राजेश _कहो न जो कहना है?

निशा _हूं, मुझे समझ नहीं आ रहा ये बात तुमसे कैसे कहूं, मुझे शर्म आ रही।

राजेश _अच्छा ऐसी बात है तो लिखकर बता दो क्या कहना है?

निशा _हा ये ठीक रहेगा।

तुम पीछे मुंह करो।

राजेश पीछे घूम गया।

वहा पर एक बड़ा सा चट्टान था। निशा ने एक सफेद पत्थर का छोटा टुकड़ा उठाया और चट्टान पर i Love you लिख दी और चट्टान के पीछे जाकर छिप गई।

फिर बोली।

राज अब देखो क्या लिखी है मैने।

राजेश ने पीछे घूमकर देखा I love you Raj पड़कर मुस्कुराने लगा।

राजेश ने चट्टान के पीछे गया।

निशा शर्म के मारे अपने दोनों हाथों से अपनी चेहरा छिपा ली।

राज ने उनके दोनों हाथो को चेहरे से हटाकर कहा,,,

सच में।

निशा ने अपनी झुकी नजरो को उठाकर राज की ओर देखा, फिर हा में सिर हिलाया।

राजेश ने निशा को बाहों मे भर लिया।

निशा भी राजेश से लिपट गई।

फिर दोनों गीत गाने लगे,,

हम तुम्हें इतना प्यार करेगें।

हम तुम्हें इतना प्यार करेगें।

कि लोग हमें याद करेगें।

कि लोग हमें याद करेगें।

हम भूले तो हम हरजाई।

तुम भूले तो तुम हरजाई, हो।

हम भूले तो हम हरजाई।

तुम भूले तो तुम हरजाई

हमने आज किया ये वादा

हमने ये आज कसम ये उठाई

साथ जिएंगे साथ मरेंगे

साथ जिएंगे साथ मरेंगे।

की लोग हमें याद करेगें।

कि लोग हमें याद करेगें

हम तुम्हें इतना प्यार करेगें।

गाना खत्म होने के बाद राजेश ने निशा से एक किस मांगा।

निशा _न शादी के बाद।

राजेश नही माना और निशा की पकड़ने के लिए दौड़ा निशा भागने लगी, तभी निशा का पैर फिशल गया और वह जोर से चिल्लाते हुए ओह मां।

तभी निशा की नींद खुल गई,,

उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी।

उसने अपने आसपास देखा, वह समझ गई की वह सपने देख रही थीं।

वह खुद पर शर्मिंदा महसूस करते हुए, राजेश की फ़ोटो को मोबाइल पे फिर से देखी,

तुमने मुझपर ये कैसा जादू कर दिया है।

अब तुम भी सो जाओ और मुझे भी सोने दो।

उसने मोबाइल स्विच ऑफ कर सो गई।
 
अगली सुबह सुजाता सो कर उठने के बाद फ्रेश हुई और राजेश के कमरे में चली गई। राजेश अभी तक सोया ही था।

सुजाता ने दरवाजा खटखटाई, राजेश ने दरवाजा खोला।

सुजाता _ये क्या राजेश तुम अभी तक तैयार नहीं हुवे हो? मैने कल तुमसे कहा था ना कि हम सुबह घूमने चलेंगे।

राजेश _ओह सॉरी मैम, कल लेट से सोया ना इसलिए उठने में लेट हो गई। मै फटाफट अभी रेडी होकर आता हूं।

सुजाता _ओके, जल्दी करना, सुबह का मौसम और ज्यादा सुहावना लगता हैं।

सुजाता नीचे हाल में आकर राजेश का वेट करने लगी।

राजेश कुछ ही समय में तैयार होकर नीचे पहुंचा।

राजेश _चलिए मैम मै रेडी हू।

सुजाता _रुको कॉफी पीकर चलते हैं।

राजेश _हा ये ठीक रहेगा।

सुजाता ने नौकरों सी काफी बनाने पहले ही कह दिया था। दोनों कॉफी पीने के बाद दोनों कार से निकल पड़े। मनोरम दृश्यों का आनंद उठाने और झरने में नहाने। वह ड्राइव और बॉडीगार्ड को साथ नही ले गई।

सोनपुर से निकलकर कुछ दूर चलने के बाद।

प्रकृति की सुंदरता देखते ही बन रहा था। चारो तरफ पहाड़, नदी घने पेड़, तरह तरह के पेड़ पौधे। मन को आनंदित कर रहे थे।

सुजाता _रुको राजेश, देखो कितना सुंदर नजारा है। मन करता है यही बस जाऊं।

चारो तरफ फूलो की खुशबू, मन को आनंदित कर रहा था पक्षियों की आवाजवातावरण में संगीत भर रहा था।

तभी एक बैलगाड़ी सुजाता को जाती हुई दिखाई दी, जिसमे घास फूस ले जाया जा रहा था।

सुजाता _राजेश, मुझे बैलगाड़ी पे बैठना है। गाड़ी रुको।

राजेश _कही बैल गाड़ी से गिर गई तो।

सुजाता _हूं, तुम मुझे इतना कमजोर समझते हो। मै भाई अपने कालेज के दिनों में बेस्ट स्टूडेंट्स थी, समझे।

राजेश _ओह, तब तो आप बैल गाड़ी को सवारी कर सकती हो।

राजेश _ओ बैल गाड़ी वाले भैया, जरा रुकना तो।

बैलगाड़ी वाला _बोलो बाबू, क्या काम है?

राजेश _हमारी मेमसाब आपकी बैल गाड़ी में बैठना चाहती है।

बैलगाड़ी वाला_बिठा दे बाबू जी, मैम साहब को गाड़ी पर, पर थोड़ा सम्हल के बैठने कहना।

राजेश _लो मैम कर लीजिए अपनी बैलगाड़ी में बैठने की इच्छा पूरी।

सुजाता बैलगाड़ी में चढ़ने की कोशिश करने लगी पर वह नाकाम रही।

सुजाता _अब देख क्या रहे हो?, चढ़ने में मेरी मदद करो।

राजेश _ओह,क्यूअगली सुबह सुजाता सो कर उठने के बाद फ्रेश हुई और राजेश के कमरे में चली गई। राजेश अभी तक सोया ही था। सुजाता ने दरवाजा खटखटाई, राजेश ने दरवाजा खोला। सुजाता _ये क्या राजेश तुम अभी तक तैयार नहीं हुवे हो? मैने कल तुमसे कहा था ना कि हम सुबह घूमने चलेंगे। राजेश _ओह सॉरी मैम, कल लेट से सोया ना इसलिए उठने में लेट हो गई। मै फटाफट अभी रेडी होकर आता हूं। सुजाता _ओके, जल्दी करना, सुबह का मौसम और ज्यादा सुहावना लगता हैं। सुजाता नीचे हाल में आकर राजेश का वेट करने लगी। राजेश कुछ ही समय में तैयार होकर नीचे पहुंचा। राजेश _चलिए मैम मै रेडी हू। सुजाता _रुको कॉफी पीकर चलते हैं। राजेश _हा ये ठीक रहेगा। सुजाता ने नौकरों सी काफी बनाने पहले ही कह दिया था। दोनों कॉफी पीने के बाद दोनों कार से निकल पड़े। मनोरम दृश्यों का आनंद उठाने और झरने में नहाने। वह ड्राइव और बॉडीगार्ड को साथ नही ले गई। सोनपुर से निकलकर कुछ दूर चलने के बाद। प्रकृति की सुंदरता देखते ही बन रहा था। चारो तरफ पहाड़, नदी घने पेड़, तरह तरह के पेड़ पौधे। मन को आनंदित कर रहे थे। सुजाता _रुको राजेश, देखो कितना सुंदर नजारा है। मन करता है यही बस जाऊं। चारो तरफ फूलो की खुशबू, मन को आनंदित कर रहा था पक्षियों की आवाजवातावरण में संगीत भर रहा था। तभी एक बैलगाड़ी सुजाता को जाती हुई दिखाई दी, जिसमे घास फूस ले जाया जा रहा था। सुजाता _राजेश, मुझे बैलगाड़ी पे बैठना है। गाड़ी रुको। राजेश _कही बैल गाड़ी से गिर गई तो। सुजाता _हूं, तुम मुझे इतना कमजोर समझते हो। मै भाई अपने कालेज के दिनों में बेस्ट स्टूडेंट्स थी, समझे। राजेश _ओह, तब तो आप बैल गाड़ी को सवारी कर सकती हो। राजेश _ओ बैल गाड़ी वाले भैया, जरा रुकना तो। बैलगाड़ी वाला _बोलो बाबू, क्या काम है? राजेश _हमारी मेमसाब आपकी बैल गाड़ी में बैठना चाहती है। बैलगाड़ी वाला_बिठा दे बाबू जी, मैम साहब को गाड़ी पर, पर थोड़ा सम्हल के बैठने कहना। राजेश _लो मैम कर लीजिए अपनी बैलगाड़ी में बैठने की इच्छा पूरी। सुजाता बैलगाड़ी में चढ़ने की कोशिश करने लगी पर वह नाकाम रही। सुजाता _अब देख क्या रहे हो?, चढ़ने में मेरी मदद करो।

राजेश ओह क्यू नही?

राजेश ने सुजाता को अपनी बाहों में उठा लिया।

सुजाता राजेश की आंखो में देखते हुवे बोली, सम्हाल के बिठाना गिरा न देना।

राजेश ने सुजाता को बैल गाड़ी में बिठा दिया।

बैल गाड़ी वाले ने बैल को हांकना सुरू किया।

बैल गाड़ी में बैठने से सुजाता एक अलग ही रोमांच का अनुभव करने लगी।

वह बैल गाड़ी में बैठ कर प्राकृतिक नजारों का आनद उठाने लगी ।

राजेश बैलगाड़ी के पीछे पीछे धीरे धीरे कार चलाते हुए चलने लगा।

इधर सुजाता का मन नाचने और गाने का कर रहा था।

और वह गाना शुरू कर दी।

कांटो से खीच के ये आंचल

तोड़ के बंधन बांधे पायल

कोई न रोको दिल की उड़ान को

दिल ओ चला, हा हा हा हा

आज फिर जीने की तमन्ना है

आज फिर मरने का इरादा है

आज फिर जीने की तमन्ना है

आज फिर मरने का इरादा है

अपने ही बस में नहीं मै

दिल है कहीं तो हूं कहीं मैं

हो अपने ही बस में नहीं मै

दिल है कहीं तो कही मैं

हो जाने का पया के मेरी जिंदगी ने

हस कर कहा,,,,,,,,,

आज फिर जीने की तमन्ना है

आज फिर मरने का इरादा है

गाड़ी वाला गाड़ी आगे बढ़ाता रहा, वहा के मनोरम दृश्य को देखने सुजाता गाड़ी से उतर गई।

और मनोरम दृश्य को देखने दौड़ने लगी।

राजेश भी कार रोककर उसके पीछे पीछे दौड़ने लगा।

सुजाता फिट नाचने गाने लगी,

कल के अंधेरा से निकल के

देखा है आंखे मलते मलते

हो कल के अंधेरा से निकल के

देखा है आंखे मलते मलते

हो फूल ही फूल जिंदगी बहार है

तय कर लिया,,,,,,

आज फिर जीने की तमन्ना है

आज फिर मरने का इरादा है।

इस प्रकार नाचते गाते वे लोग झरने के पास पहुंच गए।

वहा पर पहले से कुछ लोग मौजूद थे झरने पे नहाने का मजा ले रहे थे।

सुजाता और राजेश दोनों खूबसूरत झरने को देखकर रोमांचित हो गए।

सुजाता _चलो राजेश झरने में नहाने का मजा लेते हैं।

सुजाता आगे आगे और राजेश पीछे पीछे चलते हुए झरने के के पास पहुंच गए।

सुजाता झरने के नीचे जाने लगी

राजेश _मैम संभल कर, कही पैर फिसल न जाए।

सुजाता झरने के नीचे खड़ी हो गई और नहाने लगी।

राजेश सुजाता को झरने के नीचे नहाते हुए देखने लगा।

कुछ लोग और भी नहा रहे थे।

सुजाता _राजेश, वहा क्यू खड़ा है आओ न।

राजेश भी झरने के नीचे चला गया।

दोनों झरने के पानी में नहाने लगे।

नहाते समय पानी में सुजाता की साड़ी उसकी बदन से चिपक गई।

जिससे वह और भी खूबसूरत और हॉट लगने लगीं।

वहा पर मौजुद लोग, सुजाता की खूबसूरती को ही निहारने लगे।

तभी वहां पर सुजाता की कंपनी से निकाला गया मज़दूर यूनियन का एक सदस्य भी मौजुद था।

उसने जब राजेश और सुजाता को नहाते देखा।

वह सदस्य अपने साथी से कहा,,

यार ये तो कंपनी की मालकिन सुजाता और वही लड़का है जिसके कारण हम लोगो को कंपनी से निकाल दिया गया।

ये लोग मजे करने आए हैं, हमे कंपनी से बेइज्जत कर।

मुझे अभी राकेश भाई को बताना चाहिए।

वह व्यक्ति राके श सिंह को काल किया।

राकेश सिंह _क्या है बे, क्यू काल किया।

सदस्य _भैया, सुजाता मैडम और वह लौंडा यहां झरने में नहाने आए है।

खूब इंजॉय कर रहे हैं दोनों,

राकेश _अबे क्या कह रहा है? कोई और होंगे।

इतनी अमीर महिला इस तरह खुले में नहाएगी?

सदस्य _नही भैया ये वही है, मै फ़ोटो खीच कर भेजता हूं।

राकेश _ठीक है भेजो।

उस व्यक्ति ने सुजाता की फ़ोटो खीच कर राकेश सिंह को भेज दिया।

राकेश सिंह ने जब फ़ोटो देखा, तो सुजाता और राजेश को पहचान लिया।

राकेश सिंह ने उस व्यक्ति को फ़ोन किया।

राकेश सिंह _अबे सुन इन लोगो ने कंपनी से हमे अपमानित कर निकलवा दिया, आज हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे हैं।

इनसे बदला लेने का अच्छा मौका मिला है।

तुम इन दोनों पर नजर रख।

मैं अपने साथियों को लेकर वहा पहुंचता हूं।

सदस्य _ठीक है भैया।

इधर राजेश और सुजाता इन बातों से बेखबर नहाने का मजा लेने लगे।

सुजाता ने देखा की झरने का पानी नीचे बहकर जहां जा रहा था वहा एक बड़ा सा कुंड बना था जिसमे कई लोग जल क्रीड़ा कर रहे थे।

सुजाता _राजेश, चलो न हम भी कुंड पर चलते हैं वहा नहाने का मजा लेंगे।

दोनों कुंड में जाकर नहाने लगे।

सुजाता _राजेश तुम भागो मै तुम्हें पकड़ती हूं।

राजेश _मैम रहने दो आप मुझे नही पकड़ पाएंगी।

सुजाता _अच्छा देखते हैं।

सुजाता राजेश की ओर पकड़ने के लिए दौड़ी। राजेश पानी के अंदर से तैरते हुए दूसरे जगह पहुंच गया।

सुजाता निराश हो गई। वह राजेश को पकड़ने की कोशिश करते करते थक गई।

वह निराश हो गई।

अंत में अंतिम बार प्रयास की, इस बार राजेश भागा नही।

सुजाता ने राजेश को जोर से अपनी बाहों मे भर कर करा, लो पकड़ लिया। बच्चू आख़िर तुम पकड़े गए।

सुजाता राजेश को जोर से पकड़कर चिपक गई थी।

राजेश _मैम क्या कर रही हो सब देख रहे हैं अब छोड़ो।

सुजाता _न, तुमने मुझे मुझे बहुत थकाया, इतनी आसानी से छोडूंगी नही।

राजेश _सब देख रहे हैं छोड़ो।

सुजाता ने लोगो की ओर देखा सभी की नजर दोनों पर ही थी। वह शर्मिंदा महसूस करने लगी।

राजेश _मैम अब चलो, काफी देर हो चुकी है।

दोनों कुंड से बाहर निकले। और बाल संवारने लगे।

राजेश _मैम, अब चलो यहाँ से सभी लोग आप ही को घूर रहे हैं।

सुजाता _पर यहां पर तो बहुत लोग नहा रहे हैं फिर मुझे ही क्यू घूर रहे हैं।

राजेश _क्यू की तुम बहुत खूबसूरत और हॉट लग रही हो।

सुजाता _चल हट बदमाश कही का, मुझपे बुरी नजर डालता है।

राजेश _ठीक है मै अपनी आंखे बंद कर लेता हूं।

सुजाता _हां ये ठीक रहेगा, तुम अपनी आंखे बंद कर मेरी उंगली पकड़ कर चलो।

राजेश _अच्छा जी लो आंखे बंद कर लिया, पर तुम तो आंखे बंद करने के बाद भी नजर आ रही हो।

सुजाता _हूं, तो मुझसे बदमाशी कर रहे हो।

राजेश _हूं थोड़ा थोड़ा।

दोनों हसने लगे।

राजेश _मैम ,दोनों थोड़ी देर धूप में खड़े हो जाते हैं।

कपड़ा कुछ सुख जायेगा फिर ऐसे ही घर चले जायेंगे, घर जाकर चेंज कर लेंगे।

सुजाता _हां ठीक है।

इधर राकेश सिंह अपने साथी से राजेश और सुजाता की पल पल की जानकारी ले रहा था।

राकेश सिंह ने अपने साथियों के साथ प्लान बनाया।

राकेश सिंह _देखो वहा झरने के पास लोगो की भीड़ है, हम कुछ नहीं कर पाएंगे।

वे लोग इसी रास्ते से वापस आयेंगे। रास्ता सुनसान है आस पास घने जंगल है। हमे यही पर उन्हें रोकना होगाऔर दोनों को रास्ते से घने जंगल में ले जायेंगे।

फिर अपने अपमान की बदला लेंगे।

उधर कुछ देर रुकने के बाद राजेश और सुजाता कार से अपने घर के लिए निकल पड़े।

इसकी जानकारी राकेश सिंह के साथी ने राकेश को फ़ोन पर बताया।

राकेश सिंह _उन लोग आने ही वाले हैं तुम सब झाड़ियों में छुप जाओ।

राकेश सिंह ने अपने एक साथी को सड़क पर लिटा दिया।

एक बाइक को भी गिरा दिया।

जैसे उसका एक्सीडेंट हो गया हो।

सभी लोग छिप गए।

राजेश और सुजाता इस बात से अंजान वे बात चीत करते हुए कार से वहा पर पहुंचे।

सामने रोड पर किसी व्यक्ति को पड़ा हुआ देखकर राजेश ने कार रोक दिया।

सुजाता _राजेश, कार क्यू रोक दिया?

राजेश _मैम सामने देखो।

लगता है किसी का एक्सीडेंट हो गया है।

मैं देखता हूं।

सुजाता _राजेश और सुजाता दोनों कार से उतरे।

राजेश उस आदमी के पास गया और उसे हिला कर देखा।

वह आदमी अपने हांथ में मिर्ची पाउडर रखा था उसने राजेश की आंखो में मिर्ची पाउडर फेक दिया।

राजेश की आंखो में तेज जलन होने लगीं। वह अपनी आंखे नही खोल पा रहा था।

तभी राकेश सिंह और उसके साथी सामने आए और हसने लगे।

राकेश सिंह _मैडम पहचाना।

सुजाता _राकेश सिंह तुम।

राकेश सिंह _हां मैडम जी मै।

पकड़ लो इन दोनों को और ले चलो जंगल के अंदर।

सुजाता को दो लॉग पकड़ लिए।

सुजाता _छोड़ो मुझे।

इधर बांकी लोग राजेश को पकड़ने लगे लेकिन राजेश को काबू में नहीं कर पा रहे थे।

तभी एक ने बड़े डंडे से राजेश के सिर पर वार किया जिससे राजेश का सिर फट गया वह चक्कर खा कर बेहोश सा हो गया।

साला बहुत छटपटा रहा था।

सुजाता चीखी, राजेश।

राजेश के सिर से खून बह रहा था वह बेशुध सा हो गया।

सुजाता _भगवान के लिए छोड़ दो हमे, तुम लोग बहुत गलत कर रहे हो।

राकेश सिंह _राकेश सिंह जब तक अपने अपमान का बदला नही ले लेता। शांत नहि बैठता। हा हा हा

तुमने हमें अपमानित कर अपने कंपनी से बाहर किया।

इस अपमान का बदला तेरे यार के सामने तेरी इज्जत लूट कर लेंगे।

ले चलो दोनों को जंगल में।

राकेश सिंह के साथी राजेश और सुजाता को घसीटते हुए जंगल के अंदर ले जानें लगे। सुजाता मदद के लिए चिल्लाती रही पर वहा सुनने वाला कोई नहीं था।

राकेश सिंह _ये जगह ठीक है, बांध दो इसके यार को पेड़ से।

सुजाता _नही राजेश को छोड़ दो।

राजेश को रस्सी की सहायता से दो उसके दोनों हाथो को दो पेड़ो से बांध दिया।

राकेश _हाय सच में तू कयामत लग रही है। क्या मस्त मॉल है तू। तुम्हारी लेने में बड़ा मजा आयेगा।

सुजाता _छोड़ दो हमे जाने दो, पुलिस वाले तुम लोगो को छोड़ेंगे नहीं।

किसी को पता चलेगा तब न तुम्हारी चीख किसी को सुनाई नही देगी। इसी लिए तो हम तुम दोनों को यहां पर लाए है जानेमन।

अबे होश में लाओ रe इनके यार को, सुना है हड़ताल तुड़वाने के पीछे इसी लौंडे का दिमाक था।

अब साला अपनी आंखो से अपनी महबूबा की इज्जत लुटते देखेगा। तब हमारे अपमान का बदला पूरा होगा।

राकेश सिंह के साथी राजेश के ऊपर पानी डालने लगे। उसे कुछ कुछ होश आने लगा।

राकेश सिंह _Rajeshके बाल पकड़कर कहा,अबे होश में आ , देख तेरी दिलरुबा का हम क्या हाल करने वाले है। देख अपनी आंखो से, और डालो re पानी इसके ऊपर

राजेश के चेहरे पर और पानी डाला गया। राजेश कुछ होश में आया उसने खुद को पेड़ से बंधा पाया, सामने राकेश सिंह खड़ा था, दो लोग सुजाता को पकड़े हुवे थे, बांकि लोग राजेश के आस पास खड़े थे।

राजेश _राकेश सिंह तू।

कुत्ते छोड़ दे मैडम को क्यू अपनी मौत को दावत दे रहा है।

राकेश सिंह _साले बल चला गया है पर तेरा अकड़ नही गया है। वैसे बॉडी तो काफी अच्छी बना रखी है। पर लगता हैं सिर्फ दिखाने के लिए है।

तेरे आंखो के सामने तेरी महबूबा का इज़्जत लूट कर हम अपने अपमानो का बदला लेंगे। अगर तेरे में दम है तो बचा ले अपनी महबूबा को।

राजेश _कुत्ते, अगर तुमने मैडम को हाथ भी लगाया न तो मां कसम तुम सबका हाथ पाव तोड़ कर रख दूंगा।

सभी लोग राजेश की बात सुनकर हसने लगे,,

हमारा हाथ पांव तोड़ेगा ये,, हा हा हा,,

अभी तू बच्चा है, बात तो बड़ी बड़ी कर रहा है,,

अब तू देख तेरे सामने तेरी मैम की इज्जत कैसे लुटते है?

राकेश सिंह, सुजाता की ओर आगे बड़ा,,

राजेश _कुत्ते, रुक जा, ऐसी गुस्ताखी भी न कर,, क्यू अपनी मौत को बुला रहा है?

राकेश सिंह ने आगे बड़ा और सुजाता की साड़ी के पल्लू को पकड़ लिया।

राजेश _कुत्ते मै कहता हूं रुक जाओ।

इधर राकेश सिंह सुजाता की पल्लू को पकड़ कर खींचने लगा, सुजाता खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगी।

राकेश _आजा मेरी रानी क्या मस्त मॉल है तू, तेरी लेने में तो बड़ा मजा आयेगा।

सभी हसने लगे।

सुजाता _साड़ी की पल्लू छुड़ाने की कोशिश करने लगी,नही छोड़ दो, हमे जाने दो।

तभी राकेश सिंह साड़ी की पल्लू को जोर लगा कर खींचने लगा।

राजेश बहुत गुस्से में आ गया, वह जोर से दहाड़ने लगा,आ,,,,,,

उसने अपनी पूरी ताकत से रस्सी को तोड़ने का प्रयास करने लगा।

राकेश सिंह और उसके साथी हसने लगे।

इधर सुजाता अब राकेश सिंह को रोक पाने में असमर्थ हो गई वह जोर से चीखी, राजेश बचाओ मुझे।

राजेश ने एक बार फिर अपना पूरा जोर लगा दिया , इस बार जिस पेड़ से बंधा था ज्यादा मोटे नही थे, पेड़ ही उखड़ गया।

राजेश को दहाड़ पूरे जंगल में गूंजने लगा।

राकेश और उसके साथी भयभित हो गए।

राकेश _मारो साले को।

एक ने डंडे से राजेश के पीठ पर प्रहार किया, राजेश टस से मस न huwa वह ।

उसने फिर दूसरी बार प्रहार किया राजेश ने उसका प्रहार रोक दिया फिर एक जोर का मुक्का उसके चेहरे पर मारा।

उस व्यक्ति का पूरा दांत बाहर आ गया, उसका मुंह लहुलुहाहन हो गया।

राकेश सिंह के साथियों ने राजेश पर एक साथ धावा बोल दिया। राजेश पर लाठी डंडों से प्रहार किया।

राजेश की पकड़ में जो भी आता उसे बुरी तरह मार कर अधमरा कर देता।

इस तरह एक एक करके राकेश सिंह के सभी साथी जमीन पर लुढ़कते गए, और फिर उठ न सके।

अंत में राकेश सिंह ने चाकू से राजेश पर प्रहार कर दिया,

राजेश की भुजा पर चाकू लगी,

सुजाता चीखी _राजेश,,,

तभी राकेश सिंह ने दूसरा प्रहार किया पर राजेश ने उसका प्रहार रोक एक जोर का लात उसके पेट में मारा, राकेश सिंह हवा में उड़कर दूर जा गिरा।

राजेश ने उसे गर्दन से पकड़कर उठाया और एक जोर का मुक्का उसके मुंह पे मारा मुंह से खून की धार निकल गया।

राजेश बहुत गुस्से में था, वह राकेश सिंह के जांघो पर जोर से प्रहार किया इस प्रहार से उसका जांघ टूट गया, इसके बाद भी राजेश

राजेश _कुत्ते तूने इसी हाथ से मैम को छुआ ने देख इसकी क्या हालत करता हु।

राजेश ने राकेश सिंह के हाथ पर अपने पैर से जोर का प्रहार किया जिससे राकेश सिंह का हाथ टूट चुका था।

राजेश का गुस्सा शांत ही नहीं हो रहा था वह एक पत्थर उठाकर राकेश सिंह को खत्म करने को उठाया।

तभी सुजाता दौड़ते हुवे उसके पास आई और राजेश से लिपट गई।

सुजाता _नही राजेश उसे छोड़ दो, मत मारो।

राजेश _नही मैम इसने तुम्हें हाथ लगाने की जरूरत कैसे की मैं नही छोडूंगा।

सुजाता _नही राजेश, तुम्हें मेरी कसम इसे छोड़ दो, मै नही चाहती की तुम किसी मुसीबत में फसो।

सुजाता की कसम देने से राजेश रुक गया।

राकेश सिंह और उसके सभी साथी उठ पाने की स्थिति में नहीं थे इधर राजेश भी लड़ते लड़ते घायल हो चुका था।

उसके पैर लड़खड़ाने लगे।

सुजाता ने उसको सहारा देकर किसी तरह धीरे धीरे उस जंगल से बाहर निकाला और थाना प्रभारी को सारी घटना के बारे में बता दिया।

थाना प्रभारी तुरंत वहां अपने साथियों के साथ पहुंच गया।

राकेश और उसके साथी बुरी तरह घायल थे उसे अस्पताल ले जाया गया। और राजेश को भी अस्पताल ले जानें के लिए बोला।

राजेश _नही, मुझे घर ले चलिए।

सुजाता _पर राजेश, तुम्हारी हालत बहुत खराब है।

राजेश _मैम मैं नही चाहता की जो भी घटना घटित हुआ उसके बारे में लोगो को पता चले, यह हमारे कंपनी के लिए ठीक नहीं, निवेशकों में गलत संदेश जा सकता है।

सुजाता _ओह, राजेश मुझे ये कंपनी वगैरा कुछ नहीं चाहिए।

मुझे तुम्हारी सलामती चाहिए।

राजेश,_मैम मै ठीक हूं, मुझे घर ले चलिए।

थाना प्रभारी सर इस घटाना के बारे में आप किसी से कुछ न कहना।

थाना प्रभारी _ठीक है राजेश अगर आप लोग यही चाहते हो तो ऐसा ही होगा लेकिन इन सालो को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाऊंगा।

सुजाता गाड़ी चलाकर राजेश को बंगला में ले गया।

बांग्ला में ले जानें के बाद वहा नौकरों की मदद से उसे अपने कमरे में ले जाकर लिटा दिया

और डॉक्टर को बुलाया।

कुछ देर बाद नर्स के साथ डॉक्टर पहुंच गया।

वह राजेश की स्थिति का मुआइना करने लगा।

राजेश के सारे कपड़े उतारने कहा जो जगह जगह फट चुके थे खून धूल और मिट्टी लगे हुए थे।

राजेश के शरीर से पूरे कपड़े उतार कर निर्वस्त्र कर दिया।

सुजाता की आंखो से आंसु निकलने लगे थे।

राजेश की शरीर की पहले अच्छे से सफाई किया गया। राजेश के शरीर के ऊपर एक पतला चादर डाल दिया।

जगह जगह उसके शरीर पर चोट के निशान थे।

डाक्टर ने राजेश के शरीर पर लगे चोटों पर लगाने के लिए मलहम, दर्द निवारक गोली, कुछ एन टीबायोटिक दिया।

उसे इंजेक्शन लगाकर सुजाता से राजेश को आराम करने देने को कहा। डाक्टर ने कहा समय समय पर मलहम लगा ने और दवा खिलाने से कुछ ही दिन में राजेश ठीक हो जायेगा। घबराने की बात नही है।

अभी नर्स को यही छोड़ रहा हूं।

यह राजेश कादेखभाल करेगी।

सुजाता _ठीक है डाक्टर।

राजेश आराम करने लगा।

इधर सुजाता फिर से नहाकर नए कपडे पहन ली।

नर्स रूम में ही कुर्सी पर बैठ कर अपनी मोबाइल पर समय व्यतीत कर रही थी।

नर्स _इनके दवाई का समय हो गया है। इसे उठाओ।

सुजाता ने राजेश के बालो को प्यार से सहलाते हुए राजेश को उठाने लगी।

राजेश अपने आंखे खोला।

सुजाता _राजेश अब कैसा महसूस कर रहे हो।

राजेश_ पहले से बेटर।

नर्स _पहले इसे कुछ खिलाओ। उसके बाद इन्हें मलहम लगा कर दवाई खिलाएंगे।

सुजाता ने काल कर नौकरों को रोटी दाल सब्जी लाने को कहा।

नौकर भोजन लेकर आया।

सुजाता ने राजेश को बेड पर बिठाया और अपने हाथो से खाना खिलाने के लिए आगे बड़ी,,

राजेश _मैम आप ने भोजन की।

सुजाता _राजेश, तुम पहले खा लो फिर मैं खा लूंगी।

राजेश _नही आप भी साथ में खाओगी, तब खाऊंगा।

सुजाता _ओ हो राजेश, मै खा लूंगी न बाबा तुम पहले खा लो।

राजेश _न, पहले तुम खाओ फिर मुझे।

सुजाता ने राजेश को खिलाती फिर वह भी खाती इस प्रकार जब दोनों ने भोजन कर लिया।

नर्स बोली _इसके पूरे शरीर में मलहम लगाना होगा।

राजेश को पेट के बल लिटा दिया राजेश पूरा निर्वस्त्र था। नर्स मलहम लेकर राजेश के पूरे शरीर में मलने लगी।

उसके पीठ कूल्हे फिर पैर।

राजेश को सीधा होकर लेटने कहा।

नर्स ने राजेश के सीने फिर, उसके पेट फिर उसने राजेश के लैंड पर भी मलहम लगाने लगीं।

नर्स राजेश के लंबे land देखकर मुस्कुरा रही थी।

इधर सुजाता को नर्स पर बहुत गुस्सा आ रहा था, उसका मन कर रहा था कि वह नर्स की गालों पर दो चार तमाचा लगा दे ।

पर चोट तो पूरे शरीर पर लगीं थीं तो नर्स ने काफी देर तक राजेश के land उसके अंडकोष पर ऊपर चादर डालकर मालिश किया।

राजेश को भी अच्छा फील हो रहा था।

वह अपना आंख बंद कर लेटा रहा।

इधर सुजाता गुस्से से आग बगुला हो रही थी।

सुजाता _अब नीचे भी मालिश करो।

नर्स _हा, ठीक है।

पैरो की मालिश करने के बाद राजेश को दवा पिलाया गया।

राजेश के शरीर पर चादर ओढ़ा दिया, राजेश को आराम करने कहा गया।

सुजाता ने नर्स से बोली _देखो अब तुम हॉस्पिटल जाओ, मै राजेश की देखभाल कर लूंगी ।

मैं डाक्टर से बात कर ली हूं।

नर्स _ठीक है मैम जैसी आपकी ईच्छा।

नर्स चली गई।

सुजाता को निशा का फ़ोन आया।

सुजाता _बोलो बेटा, तुम और तुम्हारे पापा ठीक तो हो न।

निशा _हा मॉम, मै ठीक हूं। आप और राजेश कैसे है?

सुजाता _हम लॉग भी ठीक है बेटा।

निशा _मॉम, आप लोग आज आने वाले थे।

सुजाता _बेटा, यहां अभी कुछ काम बाकी है, 2_3दिन बाद ही हम आ पाएंगे।

तब तक अपना और अपने डैड का ख्याल रखना बेटी।

निशा _ओके मॉम पर जल्दी आने की कौशिश करना।

सुजाता _मै जितनी जल्दी हो सके आ जाऊंगी बेटा तुम चिंता न करना।

निशा _ओके मॉम, लव यू मॉम बाई

सुजाता _लव यू टू बेटा।

शाम को 6बजे राजेश उठा।

सुजाता _राजेश अब कैसा फील कर रहे हो।

पहले से बेटर।

दर्द से कुछ राहत मिला।

सुजाता _गुड।

राजेश ये सब मेरे कारण ही huwa, मैने ही बाहर घूमने जाने के लिए तुमसे जिद किया।

राजेश मुझे माफ कर दो।

राजेश _मैम इसमें आपकी क्या गलती है? आख़िर आप भी एक औरत हो। हर औरत की एक चाह होती है घूमने फिरने की।

गलती तो उस राकेश सिंह और उसके साथियों की है जो मौके के तलाश में थे।

सुजाता _राजेश तुमने मेरी जान बचाने अपने जान की परवाह नही की ।

राजेश _मैम, निशा ने मुझे आपकी हिफाजत करने के लिए कहा था। अगर आपको कुछ हो जाता तो मैं निशा को क्या जवाब देता।

राजेश को सुजाता ने कुछ फल फूल खाने को दिया।

फिर राजेश को आराम करने कहा।

रात को 8बजे राजेश भोजन करनेफिर को उठाया।

राजेश को सुजाता ने अपने हाथो से खाना खिलाया और खुद भी खाई।

भोजन कर लेने के बाद दोनों एक दूसरे से बाते करते रहे।

करीब दस बजे।

सुजाता _राजेश अब सोने का समय हो चुका है, मै तुम्हारे शरीर में मलहम लगा देती हूं।

सुजाता ने बाथरूम में जाकर अपना साड़ी उतार कर नाइटी पहन ली थीं। नाइटी में सुजाता बहुत खूबसूरत और हॉट लग रही थी।

जब सुजाता नाइटी पहन कर कमरे में आई तो राजेश को उसने घूरते हुवे पाया।

सुजाता _शरमाते हुवे क्या देख रहे हो?

राजेश _आपकी खुबसूरती।

सुजाता _मै तुम्हें इतनी खूबसूरत लगती हूं।

राजेश_हूं।सिर्फ मुझे ही क्यू तुम हो ही खूबसूरत?

सुजाता _चल हट झूठा कही का।

इधर बंगला में सभी नौकर भी सो गए थे।

बंगला में बिल्कुल शांति फैली थी।

सुजाता _चलो अब पेट के बल लेट जाओ पीठ पर मलहम लगा दू।

राजेश पेट के बल लेट गया।

सुजाता उसके शरीर के ऊपर से चादर हटा दिया

जब उसने राजेश के पीठ पर डंडे के निशान देखी तो उसकी आंखे भर आई।

वह राजेश से लिपट गई ओह राजेश तुमने मेरे लिए कितना दर्द सहा है।

वह उनके जिस्मों को चूमने लगा।

और हाथो में मलहम लेकर उसके पीठ पर मालिश करती हुई नीचे बड़ने लगी।

सुजाता ने

राजेश की कमर फिर उसके कूल्हे पर मालिश करने लगी। वह शर्म भी महसूस कर रही थी और उत्तेजना भी।

सुजाता _राजेश अब सीधा लिटा दिया।

राजेश सीधा होकर लेट गया।

राजेश जैसे ही पीठ के बल लेटा उसका land सुजाता के नजरो के सामने आ गया।

उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।

राजेश सुजाता की खूबसूरती को निहार रहा था।

सुजाता किसी तरह अपने दिल की धड़कन को सम्हालते हुए, राजेश के ऊपर झुकी और उसके सीने परडंडेके प्रहार से खून जम जानें से बने निशान को चूमने लगी।

सुजाता _ओह राजेश I love you, तुम कितने बहादुर हो।

सुजाता राजेश के पूरे बदन को चूमता huwa नीचे बड़ा।

जैसे जैसे वह नीचे बड़ रही थीं सुजाता को दिल की धड़कन भी बड़ रही थीं।

राजेश को भी बहुत अच्छा लग रहा था।

सुजाता जब कमर से नीचे पहुंची। वह राजेश के land को देखने लगीं। फिर वह राजेश की चहरे की तरफ देखी। राजेश आंखे बंद कर आने वाला पल का इंतजार में था।

सुजाता ने राजेश के land को हाथ में लेकर पहले चूमा उसे सहलाया फिर उसके सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसने लगीं। कितनी सालो के बाद वह किसी का land मुंह में लेकर चूस रही थी।

इधर सुजाता के मुंह में राजेश अपने land का अहसास पाकर राजेश का शरीर भी गर्म हो ने लगा।

इधर सुजाता ने land मुंह में लेकर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

राजेश का land धीरे धीरे मोटा और लंबा होकर एक दम लोहे की तरह सख्त हो गया।

राजेश के मोटे एवम तगड़े land देखकर सुजाता भी काफी उत्तेजित हो गई थी।

उसकी बुर पानी फेकने लगी थी।

जब से विशाल की तबियत खराब huwa था, उसके पास सुजाता को शारीरिक सुख दे पाने का ताकत नहीं बचा था।

आज राजेश के मोटे और तगड़े land को देखकर, उसकी अंदर की औरत जाग चुकी थीं। वह से राजेश से वह प्यार करने लगीं थीं।

उसे राजेश के इतने मोटे और लम्बे land से प्यार के साथ भय भी लग रहा था।

कही वह राजेश के land को न ले पाई तो ,,

नही मुझे राजेश को हर हाल में संतुष्ट करना है,

वह राजेश की ओंठ की आंखो में देखा । राजेश भी सुजाता की ही देख रहा था।

सुजाता उपर आया और राजेश के ओंठ को मुंह में भरकर चूसने लगा।

राजेश भी उसकी ओंठ चूस कर सहयोग करने लगा।

फिर सुजाता बेड से उठी और खड़ी होकर अपनी नाइटी निकाल दी फिर अपनी ब्रा और पैंटी भी निकाल कर नंगी हो गई।

सुजाता की बड़ी बड़ी सुडौल चुचियों, एक दम गोरा बदन और मस्त फुली हुई चिकनी chut ऐसा लग रहा था कि स्वर्गकीकोई अप्सरा लग रही थी जिसे देखकर राजेशका land हवा में ठुमके लगाने लगा।

सुजाता एक फिर राजेश का land पकड़कर चूसने लगी।

फिर वह बेड में उपर चढ़ गई।

और राजेश की land को हाथ में पकड़ कर अपनी बुर की छेद पर रख कर उसे अंदर लेने की कोशिश करने लगी।

बड़ी कोशिशों के बाद land का टोपा बुर को चीरकर अंदर घुसने में कामयाब huwa। सुजाता ने थोड़ी राहत की सांस ली।

फिर उसने land पर अपनी बुर का दबाव बनाते हुए धीरे धीरे बैठने लगी land बुर में आधे से ज्यादा घुस चुका था।

अब सुजाता ने राजेश की ओंठ चूसते हुए अपना एक चूची राजेश के मुंह में डाल दिया।

राजेश सुजाता की चुचक को मुंह में भरकर चूसने लगा।

सुजाता की मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

उसकी बुर से पानी निकलकर राजेश के land पर बहने लगा।

अब सुजाता बहुत ज्यादा उत्तेजी हो गई वह राजेश के land उठक बैठक करने लगीं।

Land धीरे धीरे बुर में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गया।

सुजाता को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी बुर ने राजेश के land को पूरी तरह निगल गई है।

वह land पर अब उछल उछल कर चुदने लगी।

उसे राजेश से चुदने में बहुत मजा आने लगा। उसके मुख से कामुक सिसकारी निकल कर कमरे में गूंजने लगी।

आह, उन, उई मां आह अन,,

कमरे में फ्च उईफ़च gach gach की आवाज गूंजने लगा।

सुजाता उछल उछल कर पूरा land अपनी बुर में लेने लगीं वह बहुत गर्म हो चुकी थी।

चुद वाने में ऐसा मजा उसे कभी नहीं आया था।

Land बुर को चीरता हुआ गपागप अंदर बाहर हो रहा था।

सुजाता उछल उछल कर जमकर चुद रही थी।

पर वह अपने को ज्यादा देर तक न रोक सकी और आह मां, आह करके झड़ गई, और राजेश के उपर ढेर हो गई।

राजेश का land अभी भी सुजाता की बुर के अंदर खड़ा था।

कुछ देर बाद जब सुजाता होश में आई वह फिर से राजेश के ओंठ चूसने लगीं राजेश भी उसकी ओंठ चूस कर सहयोग करने लगा।

फिर सुजाता राजेश के मुंह में अपने चुचक डालकर चुसवाने लगीं।

सुजाता धीरे धीरे फिर गर्म हो गई।

सुजाता की बुर फिर पानी फेकने लगी।

सुजाता ने राजेश के land पर फिर उछल उछल कर chudna शुरू कर दिया।

फिर से कमरा सुजाता की कामुक सिसकारी से गूंजने लगी।

आह ओह अन अन,, आई,, उन मां,,

राजेश का land सुजाता की बुर के हर हिस्से को अच्छी तरह रगड़ रहा था।

जिससे सुजाता को ऐसा अधभूत आनंद मिल रहा था जिसकी कल्पना उसने कभी नहीं की थी।

दोनों की शरीर की ऊर्जा उसके बुर और land पर ही समाहित हो चुके थे।

राजेश को भी सुजाता को चोदने से ऐसा अनुभव हो रहा था जैसे वह किसी कुंवारी chut को चोद रहा हो। बिल्कुल कसा कसा अंदर बाहर हो रहा था।

सुजाता दो बार झड़ चुकी थी, वह राजेश को हर हाल में संतुष्ट करना चाहती थीं ।

वह फिर से मैदान में डट जाती और उछल उछल कर चुदने लगती। वह राजेश की मर्दानगी की दीवानी हो गई।

कुछ देर अब राजेश भी अपने को और ज्यादा देर तक नहीं रोक सका और आह मां, आह करके कराहते हुवे सुजाता के बुर में ही झड़ने लगा।

गर्म गर्म वीर्य से सुजाता का बुर पूरी तरह भर गया। सुजाता भी एक बार फिर से झड़ गई।

वह बुरी तरह थक गई थी।

वह राजेश के उपर ही ढेर हो गई।

फिर राजेश के बाहों में ही सो गई।

 
अगली सुबह जब सुजाता की नींद खुली। खुद को राजेश के बाहों में निर्वस्त्र लेटी हुईपाकर, शर्म महसूस करने लगी।

उसने राजेश की ओर देखा, जो अभी भी गहरी नींद में सो रहा था।

सुजाता को उस पर बड़ा प्यार आया, वह राजेश की माथा चूम कर बेड से उठी , उसे chut पर दर्द महसूस हुई।वह लंगड़ाती हुई चलकर सीधा बाथरूम में घुस गई।

अपने बुर की हालत देखी, जो कुछ सूजी हुई लग रही थी। वह अपनी बुर की हालत देखकर मुस्कुराने लगी।

वह बाथरुम में फ्रेश होकर नहाने लगी।

वह अपने शरीर की सभी अंगों की अच्छी तरह से सफाई की।

नहाने के बाद वह अपने बदन में टावेल लपेटकर, बाथरुम से बाहर निकली और ड्रेसिंग टेबल के सामने रखी कुर्सी पर बैठे कर अपने को आईने में निहारने लगी।

वह अपने Ko आईने में निहारकर मुस्कुरा एवम शर्मा रही थी।

वह अपने बदन पर सुगंधित तेल लगाने के बाद

वह अपनी आंखो में काजल लगाने लगीं। और अपने होंठो पर हल्का लिपिस्टिक।

वैसे वह सुबह सुबह ये सब लगाती नही थी पर पता नही उसे आज क्यू ये सब करने का उसका मन कर रहा था।

फिर एक नई सूट निकालकर पहन ली।

तभी राजेश की नींद खुल गई।

उसे बाथरुम जाना था, फ्रेश होने के लिए।

वह अपने बेड से उठा, पर लड़खड़ाने लगा।

तभी सुजाता उसे दौड़कर सम्हाली।

सुजाता _राजेश, उठने से पहले,मुझे बता दिए होते, अभी तुम पूरी तरह ठीक नहीं हुवे हो।

राजेश _ओ मैम मुझे बाथरुम जाना था।

सुजाता _चलो,मै ले चलती हूं।

राजेश इस समय निर्वस्त्र था, उसे सुजाता के सामने शर्म महसूस हो रहा था।

पर अकेले बाथरुम जा पाने के स्थिति में नहीं था। अतः वह सुजाता के बाहों के सहारे बाथरुम में गया।

उसे पेशाब लगी थी, उसका land पेशाब के कारण तना हुआ था।

जिसे देखकर सुजाता मन ही मन हस रही थी।

बाथरुम में ले जानें के बाद, राजेश सुजाता को पकड़कर खड़ा रहा और एक हाथ से अपना land पकड़कर मूतने लगा।

सुजाता राजेश को मूतता huwa देखकर मुस्कुराने लगी।

पेशाब कर लेने के बाद,

राजेश _मैम, मुझे कमोड use करना है।

सुजाता ने राजेश को कमोड पर बिठा दिया,

राजेश _मैम आप बाहर जाओ ना, मैम आपको बुलाऊंगा।

सुजाता _मुस्कुराते हुए बोली क्यू शर्म आ रही है क्या? मेरे रहने से।

अच्छा मै बाहर हूं, जब हो जाए तो आवाज देना।

शौच करने के बाद, राजेश ने सुजाता को आवाज दिया।

राजेश _मैम, मुझे नहाना है।

सुजाता _राजेश पहले मैं डाक्टर से पूछ लूंकि तुम्हें नहाना है कि नही।

सुजाता ने डाक्टर को फ़ोन कर पूछी, डॉक्टर ने गर्म पानी से नहलाने को कहा।

सुजाता ने राजेश के लिए गीजर पे पानी गर्म किया, और फिर राजेश को नहलाने के लिए अपनी सूट निकालकर ब्रा और पैंटी में आ गई।

राजेश को गर्म पानी से नहलाने लगी, एंटीसेप्टिक साबुन लगाकर उसकी शरीर की अच्छे से सफाई की।

राजेश _मैम आपको मेरे कारण कितने कष्ट उठाने पड़ रहे हैं।

सुजाता _राजेश, ये जो तुम्हारी हालत हुई है उसके लिए मैं ही जिम्मेदार हूं। तुम्हारे लिए जितनी भी करू, कुछ भी नहीं।

नहाने के बाद शरीर को टावेल से अच्छे से पोछा।

सुजाता _राजेश, अब तुम आराम करो।

एक मिनट, पहले मैं बेड शीट बदल दू।

सुजाता ने राजेश को आराम करने के लिए फिर से लिटा दिया।

कुछ समय बाद डाक्टर आया और राजेश का चेक अप किया।

डाक्टर_राजेश, कोई तकलीफ तो नही, पहले से कैसे महसूस कर रहे हो।

राजेश _जी पहले से बेहतर फील कर रहा हूं।

शरीर में दर्द पहले से कम हो गया है।

डाक्टर _गुड, 2दिनों में तुम पहले की तरह चलने फिरने लगोगे।

डाक्टर ने सुजाता को राजेश के लिए कुछ और दवाई दी और उसके भोजन के बारे में बताया।

उसे भोजन में दाल, रोटी, सब्जी , फल एवम दूध देने को कहा।

डाक्टर के जानें के कुछ देर बाद। नौकर राजेश के लिए भोजन बनाकर लाई।

सुजाता ने अपने हाथो से दाल रोटी सब्जी खिलाया, उसे दूध पिलाया।

फिर राजेश के पूरे शरीर पर मलहम लगाया।

मलहम लगाते समय जब सुजाता ने राजेश की land की मालिश की तो सुजाता की मुलायम हाथो का अहसास पाकर राजेश का land फिर से अकड़ गया।

सुजाता मुस्कुराने लगी।

सुजाता ने प्यार से उसके land को चूमा फिर राजेश की आंखो में देखते हुए उसकी सुपाड़े को मुंह भरकर चूसने लगी।

राजेश ने सुजाता को land चूसते हुए देखता रहा।

कुछ देर land चूसने के बाद।

वह राजेश की बाहों में लेट गई।

उसकी सीने पे सिर रखकर बोली।

सुजाता _राजेश अब समझ में आया की मै बार बार तुम्हारी सपने क्यू देखती थीं।

जब सपने में मै बाढ़ से डूब रही होती तो, मुझे तुम बचाने आते थे।

राजेश _मैम, ये आप क्या कह रही हो, मै और आपके सपने में।

सुजाता _ हा, राजेश, तुम मेरे सपनो में आते थे। मुझे डूबने से बचाने, आज वो सच हो गया।

तभी राजेश को सुनीता का फ़ोन आया।

राजेश _हां मां बोलो।

सुनीता _बेटा, कैसा है तू ।

राजेश _मां ठीक हूं, मै।

सुनीता _घर कब आ रहा है।

राजेश _मां, एक दो दिन और रुकने पड़ेंगे।

सुनीता _बेटा मुझे तुम्हारी बड़ी चिंता हो रही है, तुम जल्दी घर आ जाओ।

राजेश _मां, मेरी चिंता न करो, मै बिल्कुल ठीक हू।

मैं एक दो दिनों में घर आ जाऊंगा।

सुनीता _ठीक है बेटे, अपना ख्याल रखना।

राजेश _ठीक है मां।

सुनीता ने फोन रख दिया।

सुजाता _ओह राजेश, कितना अच्छा होता कि हम यही रह जाते।

मैं तुमसे दूर नहीं रहना चाहती। शहर जाते ही, तुम मुझसे दूर हो जाओगे। I love you राजेश, मै अब तुमसे दूर नहीं रह पाऊंगी।

राजेश _मैम मै आपकी जज्बातों को समझ सकता हूं। लेकिन भावना में आकर हमें ऐसे काम नही करने चाहिए जिससे हमारे परिवार वालो को दुख पहुंचे।उस शहर में तुम्हारी एक बेटी है निशा और मेरी मां और पिता जी ,जो हमारे घर आने का इंतजार कर रहे है। मेरी मां मुझे लेकर न जानें कितने सपने सजोई है। हमे उनकी भावनाओं का कद्र करना चाहिए।

सुजाता _ राजेश, रिश्ते नाते अपनी जगह सही है लेकिन आज तुमने मेरे निरश जीवन में एक नया रंग भर दिया है।

देखो मेरे इन आंखो को, इसमें मैने काजल लगाई है देखो मेरे इन ओंठो को इस पर मैंने रंग चढ़ाया है। मैं तो ये सब करना कब की भूल चुकी थी।

मैं तो अपने लिए कब की जीना ही छोड़ दी थी। सिर्फ निशा के लिए ही जी रही थी, आज पहली बार मेरे मन में मुझे अपने लिए जीने के लिए उमंग पैदा huwa है।

क्या मैं तुम्हें पसंद नही?

राजेश _मैम, ये आप क्या कह रही है?, मै खुशनशीब हूं जो तुम्हारा इतना करीब हूं। जिसने तुम्हारे दिल में जगह पाया। तुम्हारा प्यार पाया। न जानें कितने लोग तुम्हारे करीब आने के लिए तरसते होंगेऔर तुम मेरी बाहों में हो। यह मेरी किस्मत है।

सुजाता _ओह राजेश, तुम मुझे मैम न बोलो,मुझे अपनी जान कहो प्लीज।

इधर सीमा , निशा के घर कालेज जाने के लिए आई।

निशा तैयार हो रही थी।

सीमा _क्या बात है ?मैमसाब आज बड़ी खुश लग हो।

_तू आ गई, तू फ़ोन पर मुझे कुछ बताना चाहती थी, बोलो मेरी बहना को क्या बताना है मुझे।

निशा _सीमा कैसे कहूं मुझे शर्म आ रही है।

सीमा _ओ हो क्या बात है मैं भी तो जानू आख़िर ये शर्म हया किस लिए।

निशा _सीमा, मुझे,,,

सीमा _हा बोलो, तुम्हें क्या,, क्यू शर्मा और घबरा रही हो,,

निशा _सीमा मुझे प्यार हो गया है।

सीमा _हुं तो तुम्हें ये बात आज पता चल रही है कि तुम्हें प्यार हो गया है।

निशा _हां।

सीमा _मै तो बहुत पहले से जानती हूं की तुम राजेश से प्यार करती हो।

निशा _पर वो कैसे?

सीमा _मै इतनी बुद्ध भी नही,,

अब छोड़ो, अच्छा ये बताओ की आगे क्या सोचा है?

राजेश को तुम यह बात जितनी जल्दी हो सके बता दो, अगर उसने किसी और से प्यार कर लिया तो जिंदगी भर पछताएगी।

निशा _सीमा मै क्या करू तुम ही बताओ?

सीमा _तुम राजेश से कह दो की तुम उससे प्यार करती हो।

निशा _मै ये कैसे कह पाऊंगी? मुझसे नही हो पाएगा। कही उसने न कर दिया तो।

सीमा _नही, वो न नही कहेगा।

निशा _क्यू, तुम इतनी विश्वास से कैसे कह सकती हो।

सीमा _क्यों कि वह तुमसे प्यार करता है? मैने उनकी आंखों में तुम्हारे लिए प्यार देखा है।

निशा _चल झूठी कही की,,

सीमा _वह सोनपुर से आएगा तो तुम मौका देख कर उसे अपनी दिल की बात कह देना।

निशा _सीमा तुम मेरी मदद करना न प्लीज।

सीमा _इजहार तो तुमको ही करना पड़ेगा।

मैं भी देखना चाहती हूं, मैम साब अपनी प्यार का इजहार करती हुई कैसी लगती हैं?

निशा _मतलब तू मेरी मजा लेना चाहती है।

सीमा _हूं।

इधर सुजाता रात में राजेश को भोजन कराकर खुद भोजन की उसके बाद अपनी सूट उतार कर बहुत ही सेक्सी नाइटी पहन ली, राजेश सुजाता को नाइटी पहनता huwa देख गर्म होने लगा।

सुजाता ने राजेश के पूरे शरीर पे चुम्बन लेते हुए मलहम लगाने लगी।

राजेश का land तो सुबह से ही तना हुआ था।

राजेश के आंखो में देखते हुए सुजाता एक एक कर अपनी सारे अंतः वस्त्र उतार कर निर्वस्त्र हो गई। और अपनी बालो को खुला छोड़ दी।

सुजाता की इस अवतार को देख राजेश के land झटके मारने लगा।

राजेश के आंखो में देखते हुए उसके करीब गई। उसकी सांसे तेज हो गई थी।

वह राजेश की ओंठ को अपने मुंह में भरकर चूसने लगी। राजेश भी उसका सहयोग करने लगा।

फिर उसके सीने को चूमते हुवे नीचे गई, और राजेश के land को मुंह में भरकर चूसने लगी।

राजेश सुजाता की बालो को प्यार से सहलाने लगा।

कुछ देर तक land चूसने के बाद सुजाता ने अपना दूदू राजेश के मुंह में डाल दिया।

राजेश एक हाथ से सुजाता की दूदू मसल मसल कर पीने लगा।

सुजाता के मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

उसकी सांसे तेज तेज चलने लगी।

अब सुजाता राजेश के land को पकड़ कर उसे अपनी बुर के छेद में रख कर उस पर बैठ गई। फिर राजेश के ओंठ को चूसते हुए।

धीरे धीरे land को बुर में अंदर बाहर करने लगी।

राजेश भी एक हाथ से सुजाता की कमर पकड़ी रखा था।

सुजाता अब राजेश के land पर उछल उछल कर चुदने लगी।

आह मां आह, अन आह, आह,, उन,,,,

राजेश और सुजाता दोनों एक बार फिर संभोग की परम सुख को प्राप्त करने लगे।

कुछ देर में ही सुजाताअपनीचरम अवस्थामें पहुंच कर झड़ गई।

वह राजेश की सीने में लुड़क गई।

कुछ देर बाद फिर से वह अपनी चूची राजेश के मुंह में डाल दी।

राजेश सुजाता की चूची मुंह में भरकर फिर चूसने लगा।

सुजाता अब राजेश की ओर पीठ कर land के उपर बैठ गई।

उसके बाद वह फिर से राजेश के land पर उछल उछल कर चुदने लगी।

कमरा एक बार फिर सुजाता की आह, उह, उन, उई मां, आह, की कराहो से गूंजने लगी।

राजेश की land सुजाता की बुर की गहराइयों को नापने लगा।

Land सुजाता की बच्चेदानी के मुंह को ठोक रहा था जिससे सुजाता बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई।

वह तेज तेज उछलने लगी।

इधर राजेश भी अपना कमर उठाकर land को बुर में और अधिक गहराई तक पहुंचाने की कोशिश करने लगा। उसके बदन का सारा दर्द कही खो गया था।

दोनों जन्नत की सैर पर निकल गए थे।

सुजाता बिना land को बाहर निकाले राजेश की ओर मुड़ गई और फिर उछल उछल कर चुदने लगी।

दोनों एक दूसरे के ओंठ चूसने लगे,

कुछ देर सुस्ताने के बाद सुजाता फिर मैदान सम्हाल लेती।

इस तरह लगभग घण्टे भर की धमकेदार chudai के बाद दोनों झड़ गए।

सुजाता राजेश की सीने में लुड़क कर लेट गई।

सुजाता ,राजेश के land को बुर से बिना बाहर निकाले ही राजेश की बाहों मे सो गई।

जब सुबह सुजाता की नींद खुली, वह राजेश की ओर प्यार से देखने लगी और उसकी बालों को सहलाने लगी।

वह बेड से उठी, बाथरुम में जाकर फ्रेश हुई और बाथरुम से बाहर निकल फिर से निर्वस्त्र ही राजेश की बाहों मे जाकर लेट गई।

इधर राजेश का नींद खुला, वह सुजाता के अपनी बाहों में पाया।

वह सुजाता की बालो को सहलाने लगा।

सुजाता की नींद खुल गई,

एक दूसरे को देखने लगे।

राजेश _मैम आप अभी तक सोई हो।

सुबह के 8बजने को है।

मुझे बाथरुम जाना है।

सुजाता _आज हम दोनों साथ में नहाएंगे।

सुजाता ने राजेश को बाथरुम ले गया फिर राजेश को फ्रेश कराकर।

सावर चालू कर दिया।

दोनो सावर के नीचे खड़े होकर, एक दूसरे को चूमते चाटते हुए नहाने लगे।

राजेश के पूरे बदन पर साबुन लगाकर अपने शरीर को राजेश की बदन से घिसने लगी।

दोनो काफी देर तक नहाने के बाद।

राजेश के शरीर को टावेल से अच्छी तरह पोछकर साफ किया। इस समय दोनो ही निर्वस्त्र थे।

राजेश की बालो पर कंघी की।

उसे बेड पर बिठा दिया, और खुद ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठ कर सजने सवरने लगीं।

बहुत ही सुंदर साड़ी निकालकर पहन ली। और श्रृंगार करने लगी।

सुजाता, इस साड़ी में स्वर्ग की अप्सरा सी लगने लगी।

राजेश सुजाता के पास गया और उसे बाहों में भरकर आईने में देखने लगा।

राजेश _तुम स्वर्ग की अप्सरा लग रही हो।

सुजाता मुड़ी और राजेश से लिपट गई,,

वह गीत गाने लगी,,

आपके प्यार में हम संवरनेलगे

देख के आपको हम निखरने लगे

इस कदर आपसे हमको मोहब्बत हुई

इस कदर आपसे हमको मोहब्बत हुई

टूट के बाजुओं में बिखरने लगे

आपके प्यार में हम संवरने लगे।

रूप की आंच से तन पिघल जायेगा

आग लग जाएगी,मन मचल जाएगा

रूप की आंच से तन पिघल जायेगा

आग लग जाएगी मन मचल जाएगा

ये लब जरा टकराए जो, दिलबर के ओंठ से

चिंगारिया उड़ने लगीं शबनम की चोट से

हम सनम हद से आगे गुजरने लगे

हम सनम हद से आगे गुजरने लगे

इस कदर आपसे हमको मोहब्बत हुई

इस कदर आपसे हमको मोहब्बत हुई

टूट के बाजुओं में में बिखरने लगे

टूट के बाजुओं में बिखरने लगे

आपके प्यार में हम संवरने लगे।

इधर निशा सोनपुर राजेश का आने का इंतजार करने लगी।

वह कालेज से छुट्टीके बाद घर न आकर, सीमा के साथ नदी किनारे चली गईं ।

और राजेश के साथ, बिताए पलो को याद करने लगी।

वह नदी किनारे गीत गाने लगी,,

ऐ हवा मेरे संग संग चल

मेरे दिल में हुई है हल चल

कहे नदिया का पानी कल कल

तुझे आस मिलन की पल पल

है हवा,,,,,,,,

तूने ये कैसा जादू किया है

बिन डोर के मुझे बांध दिया है

तूने ये कैसा जादू किया है

बिन डोर के मुझे बांध दिया है

ऐ हवा मेरे संग संग चल

मेरे दिल में हुई है हल चल,,,

रुक न सकू मै दौड़ी आऊं

फिर कुछ सोच के मै घबराऊ

ऐ हवा मेरे संग संग चल

मेरे दिल में हुई है हल चल,,,,
 
आप सभी का शुक्रिया सपोर्ट करने के लिए, आप लोगो का कमेंट्स पढ़कर ही आगे लिखने के लिए बल मिलता है।
 
सोनपुर में तीन दिन और ठहरने के बाद आख़िर राजेश ओर सुनीता घर के लिए शहर को निकल गए। इन तीन दिनों को उन दोनो ने जी भर कर जिया क्यों की सुजाता जानती थी कि शहर में जानें के बाद वे शायद ही खुल कर मिल पाए।

उन्हे शहर में स्वतंत्रता नही मिलने वाली थी। इसलिए सुजाता ने सोनपुर में हर पल को जी भर के जिया।

इधर राजेश अब ठीक से चलने फिरने लगा था। पर उसकी सिर का चोंट अभी भी पूर्ण रूप से ठीक नहीं huwa था।

जब वे घर पहुंचे तो शाम के 5बज रहे थे। निशा कालेज से घर पहुंच चुकी थी। वह राजेश और अपनी मां कीआने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी।

उसका दिल धड़कने लगा था, राजेश से मिलने के लिए।

जब राजेश और सुजाता घर पहुंचे। निशा तेजी से भागते हुए दरवाजे की चौंखट से झांकते हुए, राजेश को कार से उतरते हुए देखने लगी।

जैसे जैसे वे घर की ओर आने लगें उसकी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी।

जब सुजाता, और राजेश दरवाजे के पास पहुंची निसा ने दौड़कर अपनी मां को सीने से लगा ली।

सुजाता _अरे बेटा क्या हुआ घबराई हुई लग रही है।

निशा _मॉम आप मुझे छोड़कर इतने दिन क्यू रही?

सुजाता _ओह बेटा, मजबूर थी, काम के सिलसिले में रुकना पड़ा।

निशा _मॉम , राजेश के सिर पर ये चोंट कैसी?

राजेश _ओ निशा क्या है न कि हम लोग बाहर टहलने के लिए निकले थे कि मेरा पैर फिसल गया और मेरे सिर पर चोंट लग गया।

निशा _मुझे आप लोगो ने बताया क्यू नही?

राजेश _तुम परेशान न हो जाओ इसलिए,,

राजेश और सुजाता दोनों सोफे पर बैठ कर आराम करने लगें।

सुजाता_बेटा तुम्हारे डैड कैसे हैं।

निशा _मॉम, डैड ठीक है। अभी वह आराम कर रहे हैं।

सुजाता _बेटा राजेश के लिए चाय नाश्ता का प्रबंध करने कहो,,,

निशा _जी मां

राजेश _नही मैम, नाश्ता नही करूंगा। सिर्फ कॉफी ओ भी निशा की हाथो से बनी काफी, मै भी तो जानू निशा को काफी बनाने आती है की नही।

निशा _न बाबा, मै नही बनाऊंगी, मुझे नही आता काफी बनाने, कही बिगड़ गया तो आप लोग मेरा मजाक उड़ावोगे।

सुजाता हंसते हुवे बोली,

निशा ठीक कह रही है राजेश, इसने तो अब तक कीचन के अंदर गई ही नही होगी।

राजेश _क्या? मेरा तो इच्छा था कि निशा जी की हाथो से बना काफी ,पीने का ,पर कोई बात नही ।

नौकरों की हाथ से बनी काफी से काम चला लेंगे।

निशा निराश हो गई, वह राजेश की अपेक्षाओं पे खरी नहीं उतरी।

सुजाता _राजेश, मै काफ़ी बनाकर ले आती हूं।

निशा _नही मॉम, काफी मै ही बना कर लाऊंगी।

सुजाता _क्या? वह हंसने लगीं।

निशा _हां।

निशा मुंह बनाते हुए किचन में चली गईं।

वहा नौकरानी लोगो से पूछने लगी कि काफी कैसे बनाते हैं।

एक नौकरानी ने कहा _बिटिया रहने दे ना मैं बना देती हूं ,घर में इतने नौकरों के होते ,आप काफ़ी बनाए ये हमे अच्छा नही लगेगा।

निशा _ नही, बिमला आंटी काफी तो मैं ही बनाऊंगी।

बताओ क्या करनी है?

नौकरानी के बताए अनुसार निशा ने काफ़ी बनाकर ले आई।

राजेश _वाउ, ये हुई न बात। मुझे पता था तुम कर सकती हो।

निशा _आप तो मेरा मजाक बना रहे थे।

राजेश _वो तो चैलेंज देने के लिए था।

निशा _ अब पीकर बताओ कॉफी कैसी बनी है।

राजेश ने कॉफी पीकर देखा,

निशा _कैसी है, कुछ बोलते क्यू नही?

राजेश _बहुत गंदी,,

निशा का चेहरा उतर गया।

सुजाता और राजेश हसने लगे ।

निशा _मैने तो पहले ही कहा था, मुझसे नही बन पाएगी।

राजेश _ओह तुम तो निराश हो गई, सच में कॉफी बहुत टेस्टी बनी है।

सुजाता _हां बेटा, बहुत अच्छी कॉफी बनाई हो।

निशा _मॉम आप भी इसका साथ दे रहे हो। मेरा मजाक बनाने में।

सुजाता _नही, बेटा मै भला अपनी निशु की मजाक कैसे बना सकती हूं सच में कॉफी बहुत टेस्टी बनी है।

राजेश _हूं।

निशा खुश हो गई।

कॉफी पीने के बाद राजेश बोला

राजेश _मैम अब मै चलता हूं, मॉम राह देख रही होगी।

सुजाता _ठीक है राजेश, ड्राइवर तुम्हें घर छोड़ देगा। हा और आज से ये घर तुम्हारा भी है यहां आते जाते रहना ।तुम्हे यहां आने जानें के लिए किसी की परमिशन लेने की आवश्यकता नहीं है।

राजेश _अच्छा मैम मै चलता हूं।

निशा जी अब मैं चलू।

निशा ने हा में सिर हिलाया।

राजेश जानें लगा, वह कार के पास पहुंचने ही वाला था कि निशा ने राजेश को आवाज दी।

निशा _राजेश!

निशा की आवाज सुनकर राजेश रुक गया।

राजेश निशा के पास आया।

राजेश _, निशा जी कुछ कहना था मुझसे।

निशा_ओ,,,

राजेश _बोलो निशा जी क्या कहना है?

निशा _ओ,,,

राजेश _आप घबरा क्यू रही हो।

निशा _थैंक्स राजेश, हमे मुसीबत सेनिकालने के लिए।

वह राजेश के गले लग गई।

राजेश _तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो तुम्हारे लिए इतना नही कर सकता।

तुम्हें मुझे धन्य वाद देकर शर्मिंदा न करो।

निशा _ओह राजेश तुम कितने अच्छे हो।

राजेश _आप भी तो बहुत अच्छी हो,,,

निशा _राजेश मुझे तुमसे कुछ कहना है?

राजेश _,, बोलो निशा जी क्या कहना है?

निशा _ओ,ओ,,

तुम कॉफी पीने फिर कब आओगे,,

राजेश हसने लगा, जब आप बुलाए

अब मैं चलूं ,

निशा _हा में सिर हिलाया।

राजेश अपना घर चला गया।

निशा राजेश को अपनी दिल की बात कहने की बहुत कोशिश की पर वह बोल ना पाई।

वह निराश होकर अपने कमरे में चली गई और सीमा को फ़ोन कर बताने लगी।

इधर राजेश अपना घर पहुंचा, दरवाजे का बेल बजाया।

सुनीता_लगता है राजेश आ गया,,

वह तेजी से दरवाजे की ओर गई, दरवाजा खोली।

इधर स्वीटी को भी पता था कि राजेश आने वाला है।

वह भी दरवाजे के पास आ गई।

दरवाजा खुलते ही।

सुनिता ने सामने राजेश को देखा,,

राजेश ने सुनिता का पैर छू कर चरणस्पर्श किया।

सुनिता ने राजेश को उठाकर गले लगा लिया।

आ गया मेरा बेटा।

राजेश _हा मां।

सुनिता ने राजेश के सिर पर पट्टी लगा देखा तो

सुनिता _बेटा , तुम्हारे सिर पर चोंट कैसी?

राजेश _कुछ नही huwa है मां, ओ थोड़ा सा खरोच लगा है।

राजेश सोफे पर बैठ गया। सुनिता भी उसके पास बैठ गई।

स्वीटी वही खड़ी थी।

सुनिता _बेटा, बताता क्यू नही तुम्हारे सिर पर चोंट कैसी लगी?

स्वीटी _मां, मुझे तो लगता हैं किसी औरत के चक्कर में ये पिट के आया है।

सुनिता _स्वीटी, ये क्या अनाप शनाप बोल रही है अपने भाई के बारे में।

स्वीटी _फिर बताता क्यू नही, चोंट कैसे लगी?

इनको अपनी मां बाप और बहन की चिंता तो है नही। चला है दूसरे की भलाई करने।

सुनिता _बेटा बताता क्यू नही किसी के साथ मार पीट huwa है क्या?

राजेश _मां, हड़ताल खत्म कराने से मज़दूर यूनियन के कुछ लोग नाराज होकर मूझपर हमला कर दिया।

सुनिता _इतनी बडी बात मुझे बताया क्यू नही?

राजेश _तुम घबरा ना जाओ, इसलिए।

सुजाता _बेटा, मुझे पहले से ही डर था, वहा कुछ दंगा फसाद न हो। अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो, हम लोगो का क्या होता?

स्वीटी _हम लोगो की चिंता होती तो ये वहा जाता ही क्यू?

राजेश _मां मै बिल्कुल ठीक हू, क्या तुम चाहती हो की तुम्हारा बेटा मुस्किलो से भाग कर भगोड़ा कहलाए। अपने दोस्तो की मदद न करने।

सुनिता _नही बेटा, मै ये नही चाहती कोइ तुम्हें स्वार्थी कहे। तभी तो तुम्हें जाने की इजाजत दी।

पर मां हूं ना चिंता तो होगी ही।

राजेश _, ओह मेरी प्यारी मां, तुम्हें तो खुश होना चाहिए की तुम्हरा बेटा, कामयाब होकर आया है।

सुनिता _मुझे तुम पर गर्व है बेटा।

अब तुम अपने कमरे में जाकर आराम करो।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश स्वीटी से बोला,

राजेश _कैसी है मेरी गुड़िया,,,

स्वीटी _आपको मेरी फिक्र करने की आवश्यकता नहीं।

मैं एक दम मजे से हूं।

वह अपना मुंह बनाते, अपने कमरे में चली गई।

और राजेश अपने कमरे में।

रात में सोने के समय, सुजाता ने राजेश को काल किया।

सुजाता _, सो गए क्या?

राजेश _नही मैम , बस सोने की तैयारी में था।

सुजाता _क्या तुम्हें मेरी याद नही आ रही?

तुम मर्द लोग भी कितने आसानी से भूल जाते हो।

राजेश _नही, मैम कैसे भुल सकता हूं आपके साथ बिताए पलो को, मै तो अब भी महसूस कर रहा हूं।

तुम्हारी बदन की खुशबू का अहसास मेरी नाक में अब तक हो रही है।

सुजाता _चुप झूठा कही का।

मैं तुम्हें बहुत मिस कर रही हूं।

राजेश _मै भी।

सुजाता_अच्छा सुनो कल मै तेरी मां से मिलूंगी।

राजेश _क्यू?

सुजाता _डिनर में इनवाइट करने।

जब उसका बेटा ने हमारी कंपनी को मुसीबत से बचाया है तो मां बाप से तो मिलना ही पड़ेगा। नही तो लोग मुझे मतलबी कहेंगे।

राजेश _कितना समय आ रही हो?

सुजाता _सोच रही हूं कल ऑफिस जाते समय आपके मम्मी से मिलती चलूं।

वैसे तुम्हारी मम्मी ने तुम्हारे सिर के चोंट के बारे में पूछी होगी। तुमने क्या बताया?

राजेश _स्वीटी बोल रही थी की किसी औरत के चक्कर में पिटकर आया है।

सुजाता हसने लगी।

राजेश _हस क्यू रही हो?

सुजाता _ठीक ही तो बोली।

राजेश _उन्हे क्या पता बदले में प्यार भी तो खूब मिला?

सुजाता _और नही चाहिए क्या मेरा प्यार? लगता हैं जी भर गया।

राजेश _हाय, इतनी जल्दी जी कैसा भर सकता है? तुम बुलाओ तो सही, तुम्हारा दीवाना हाजिर हो जायेगा। प्यार करने।

सुजाता _अच्छा, देखते हैं। देखो मैंने तुम्हें अपना सबकुछ दे दिया है, मुझे धोखा मत देना प्लीज। मै तुम्हें दूसरी औरत के साथ बर्दास्त नही कर पाऊंगी।

राजेश _ओह, तो मुझे अपनी कैद में रखना चाहती हो।

सुजाता _तुम जो भी समझो। पर तुम सिर्फ मेरे हो।

राजेश _इतना प्यार करती हो मुझसे।

सुजाता _हां, निशा के बाद तुमसे। पर मुझे तुम पर शक हो रहा है, कही तुम मुझे धोखा न दे दो।

क्यू कि तुमने खुलकर अपनी दिल की बात नही बताई है।

राजेश _मै तो उस हर शख्स से प्यार करता हूं जो मुझे प्यार करता है। उन सबमें तुम्हारा स्थान श्रेष्ठ है।

सुजाता _मतलब मै तुम्हारे दिल में विशेष स्थान रखती हूं।

राजेश _बिल्कुल।

सुजाता _ओह, थैंक्स राजेश मै यही सुनना चाहती थी।

आई लव यू राजेश।

राजेश _i Love you जानू

सुजाता _ओके बाय, रात को मेरे सपनो में आना।

राजेश _ओके bye sweetheart

अगले दिन जब राजेश कालेज के लिए निकला।

स्वीटी वही रोड पर खड़ी थी, अपनी सहेली की इंतजार करते।

राजेश _चलो बैठो।

स्वीटी _न, आप जाओ। मै अपनी सहेली के साथ जाऊंगी।

राजेश _तुम अब तक नाराज हो मुझसे।

स्वीटी ने कुछ नहीं कहा,,

राजेश ने फिर switi को बैठने कहा,,,

स्वीटी बाइक में बैठ गई और चुप ही रही।

राजेश _देखो स्वीटीतुम अभी छोटी हो, तुम जो चाहती हो वो ठीक नहीं तुम्हें इन सब चीजों में ध्यान नहीं देना चाहिए।

स्वीटी _मै अब बच्ची नही रही। मेरी क्लास की कई लड़कियां सेक्स कर चुके हैं।

राजेश _सीमा और निशा को देखो, वो कितनी अच्छी है, उनकी तरह क्यू नही सोचती?

स्वीटी _जब मां के साथ कर सकते हो तो मेरे साथ क्यू नही?

राजेश _मां की बात और है। उसे मेरी जरूरत है। पापा काम के बोझ के कारण मां का साथ नही दे बाते।

आखिर वह अपनी भावनाओं को दबाकर कब तक घुट घुट कर जीती रहेगी। इसलिए मुझे मां को बेटे के प्यार के साथ साथ पति का प्यार भी देना पड़ता है।

दोनो कालेज पहुंच गए।

इधर सुनिता किचन में काम कर रही थी। तभी दरवाजे की बेल बजी।

सुनिता _इस समय कौन हो सकता है?

सुनिता ने दरवाजा खोली।

सामने सुजाता खड़ी थी।

सुजाता _नमस्ते दी, सुजाता ने हाथ जोड़ कर कहा।

मैं सुजाता हूं।

सुनिता _आपको कौन नही पहचानेगा, आप सुजाता और विशाल ग्रुप्स की मालकिन है।

सुनीता _आइए न।

सुजाता घर के अंदर आई ओर सोफे पर बैठ गई।

सुनिता _अप बैठिए, मै पानी लेकर आती हूं।

कॉफी लेंगी आप।

सुजाता _जी रहने दीजिए न दीदी, क्यू तकलीफ उठा राही है आप।

सुनिता _इसमें तकलीफ कैसी, पहली बार तो घर सा राही है आप मेरी। ये तो मेरा फर्ज है।

सुनिता कॉफी बनाने लगी।

सुजाता घर का मुआइना करने लगी। कॉफी बनाते समय वह सोचने लगी। पता नहीं अचानक से क्यों आई है। मूझे तो इन बड़े लोगों से डर लगता है।

सुनीता कॉफी लेकर आई।

सुनीता _लीजिए कॉफी लीजिए।

सुजाता _धन्यवाद दी।

सुनिता _सुजाता जी आप कुछ काम से आई थी क्या? राजेश तो कालेज चला गया है।

सुजाता _नही दी मै आपसे ही मिलने आई हूं।

आपको तो पता ही है हमारी कंपनी कितनी मुसीबत में फस गई थी।

राजेश ने अगर मदद न की होती तो हमारी कंपनी डूब चुकी होती। आप बडी किस्मत वाली है दीदी जो इतना होनहार बेटे की मां हो, राजेश की प्रतिभा असाधारण है। उसने बिना किसी स्वार्थ के हमारी मदद की।

सुनिता _ ये आप क्या कह रही है?

निशा राजेश की दोस्त है, दोस्त का परिवार मुसीबत में हो तो उसकी मदद करना उसका फर्ज है।

सुजाता _दी, आपने राजेश को इतने अच्छे संस्कार दिए हैं, उसी का परिणाम है जो कुछ ही समय में सबका दिल जीत लेता है।

राजेश ने हमारी मदद की हमारा भी कुछ फर्ज बनता है इसलिए मैं आज आप लोगो को डिनर में आमन्त्रित करने आई हूं।

सुनिता _सुजाता जी इसकी क्या आवश्यकता है?

सुजाता _नही दीदी, आप लोग आएंगे तो हमें खुशी होगी प्लीज इनकार मत कीजिए।

सुनिता _ठीक है । हम आ जाएंगे।

सुजाता _धन्यवाद दी मै आप लोगों का इन्तजार करूंगी।

अब मुझे इजाजत दीजिए।

सुजाता ने हाथ जोड़ कर जाने की इजाजत मांगी।

सुनिता ने भी हाथ जोड़ कर, हा में सिर हिलाई।

राजेश जब भगत और अन्य दोस्तो से मिला,,

भगत _भाई आपके सिर पर चोंट कैसी?

राजेश _कुछ नही यार, कुछ गुंडे थे जिन्हे सबक सिखाना जरूरी था, उसकी को सबक सिखाते यह चोट लग गई।

भगत _भाई, अगर कुछ कसर बांकी रह गई हो तो हमें बताओ शालो को घर में घुस कर मारेंगे।

राजेश _अरे नही, वो और मार खाने लायक नहीं बचे हैं।

और कैसा चल रहा है कालेज।

भगत _कालेज में तो सब ठीक ही चल रहा है पर भाई तेरे बिना, मजा ही नही आता।

हम तो आप ही का इंतजार कर रहे थे कि आप कब आएंगे।

तभी क्लास की घंटी बजी और सभी क्लास में चले गए।

इधर सीमा और निशा क्लास में,

निशा _सीमा मैने बहुत कोशिश की राजेश को अपने दिल की बात बताने की, पर बता न सकी।

सीमा _हूं, कोशिश जारी रखो। जब भी मौका मिले बता देना।

निशा _मॉम ने आज राजेश और उनकी फैमिली को डिनर के लिए इनवाइट किया है।

सीमा _ओह, ये तो बडी अच्छी बात है, तुम मौका देख कर राजेश से अपनी दिल की बात कह देना।

निशा _पता नही इतने लोगो के बीच मौका मिल पाएगा की नही।

सीमा तुम भी शामिल होना डिनर में।

सीमा _ठीक है।

कालेज में छुट्टी होने के बाद राजेश घर पहुंचा। सुनिता किचन में काम कर रही थी।

राजेश किचन में जाकर अपनी सुनिता को पीछेसे बाहों मे भर लिया।

सुनिता _आ गया मेरा बेटा कालेज से।

राजेश _हा, मां।

सुनिता _पता है, तुम्हारे कालेज जानें के बाद सुजाता आई थी।

राजेश _क्या? पर वो क्यू आई थी?

सुनिता _वह हमे डिनर में आमन्त्रित की है।

राजेश _तो आपने क्या कहा?

सुनिता _वह बार बार निवेदन कर रही थी इसलिए मैं इनकार ना कार सकी।

हमे रात 7: 30बजे उसके घर के लिए निकलना होगा। मैने तुम्हारे पापा को कह दिया है घर जल्दी आने को, उसने हमें तैयार रहने को बोला है।

तुम और स्वीटी भी तैयार हो जाना समय पर।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपने कमरे में चला गया।

, शाम के 7बजने के बाद सुनिता स्वीटी के कमरे में आई।

सुनिता _बेटी तुम जल्दी तयार हो जाओ,

Switi _क्यू मां कहा चलना है?

सुजाता _लो,बेटा मै तो तुम्हें बताना ही भूल गई, बेटा हमे सुजाता जी ने रात्रि भोज के लिए आमन्त्रित किया है। तुम जल्दी तैयार हो जाओ।

स्वीटी _नही, मां, मै नही जाऊंगी।

सुनिता _क्यू क्या huwa?

स्वीटी _क्यू की वहा मेरा जानें का मन नही।

सुनिता _बेटा यू तुम क्या कह रही हो, वे लोग तुम्हारे बारे में पूछेंगे तो हम क्या जवाब देंगे। क्या तुम हमें शर्मिंदा कर्ण चाहती हो।

Switi _, मां अगर वे मेरे बारे में पूछेंगे तो बता देना उसकी तबियत कुछ ठीक नहीं।

सुनिता _अपनी मां से झूठ बुलवाना चाहती है, जल्दी से तैयार हो जाओ, बहुत हो गया तुम्हरा नाटक।

सुनिता वहा से निकल कर राजेश के कमरे में गई।

राजेश _मां,आप।

सुनिता _बेटा जरा मेरे कमरे में आना।

राजेश _क्यू मां कुछ काम था क्या?

सुनिता _हा बेटा।

राजेश सुनिता के पीछे पीछे उसके कमरे में चला गया।

सुनिता _ने अपनी कपड़े की आलमारी खोल के बोली। बेटा मै कौन सी साड़ी पहनु मुझे तो कुछ समझ ही नही आ रहा।

राजेश ने सुनिता को पीछे से बाहों मे भरते हुए कहा, मां आप पर तो कोई भी साड़ी हो खूब जचती है, इतनी सुंदर जो हो।

वो तो हर बेटे को अपनी मां सबसे सुंदर लगती हैं।

राजेश _नही मां, आप सच में बहुत सुंदर है।

सुनिता _अच्छा, अब तारीफ करना बंद कर और बता कौन सी साड़ी पहनू।

राजेश ने एक साड़ी अपनी पसंद की निकाली।

राजेश _मॉम ये साड़ी पहनो, देखना सुजाता मैम तुम्हारे सामने फीकी लगेगी।

सुनिता _सुजाता, भी किसी अप्सरा से कम नहीं है। वह निशा की मां नही बड़ी बहन लगती है।

राजेश _मां, तुम भी तो स्वीटी की मां नही उसकी बडी बहन लगती हो।

सुनिता _अपनी मां की झूठी तारीफ करना बंद करो और जाओ तुम भी तैयार हो जाओ तुम्हारे पापा आते होंगे फिर हम निकलेंगे।

राजेश _मां, मुझे पहन कर दिखाओ कि इस साड़ी में कैसी लगती हो?

सुनिता _अच्छा , ठीक है तुम जाओ अपने कमरे में, थोड़े देर बाद आकर देख लेना कैसी लग रही हूं?

राजेश _नही, मुझे यही रहूंगा।

सुनिता _क्या? मतलब तुम्हें बदमाशी सूझ रही है। चल भाग यहां से बदमाश कही का।

सुनिता ने राजेश को धकेलते हुवे दरवाजे से बाहर कर दी। और मुस्कुराते हुवे आईने के सामने खड़ी होकर साड़ी बदलने लगी।

राजेश निराश होकर अपने कमरे में जाकर, तैयार होने लगा। नया जींस और शर्ट पहन लिया।

राजेश तैयार होकर अपनी मां के कमरे के पास जाकर दरवाजा खटखटाया।

सुनिता ने दरवाजा खोली।

राजेश _राजेश, सुनिता को देखता ही रह गया।

सुनिता _अरे बेटा कहा खो गया।

राजेश _मां, सच में तुम स्वर्ग की कोई अप्सरा लग रही हो।

सुनिता आईने के पास गई और अपनी मंगल सूत्र पहनते हुवे बोली,, हूं तू फिर शुरू हो गया।

राजेश ने सुनिता को पीछे से बाहों मे भर कर आईने में देखते हुए बोला।

राजेश _मां, मै सच कह रहा। तुम सच में अप्सरा लग रही हो। और वह सुनिता की ओंठ चूम लिया।

सुनिता _बदमाश ये क्या कर रहा है? तेरी नियत बिगड़ रही है। छोड़ मुझे तेरे पापा किसी भी समय पहुंच सकते हैं।

राजेश ने सुनिता को पीछे से और कस कर जकड़ लिया। और उसकी गर्दन पर चुम्बन लेने लगा।

सुनिता _बेटा, ये क्या कर रहा है तू? लगता हैं तू फिर बावला हो गया है।

राजेश एक हाथ से सुनिता की पेट सहलाने लगा।

और एक हाथ से उसकी चूची मसलते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा।

सुनिता _, राजेश, छोड़ो भी, तुम्हारे पापा किसी भी समय आ जायेंगे। ये समय नहीं अभी ये सब करने वाली का।

पर राजेश ने अपना कार्य जारी रखा जिसका प्रभाव सुनिता पर ये पड़ा की वह सिसकने लगी।

सुनीता _बेटा छोड़ो न, तुम्हारे पापा आ जायेंगे छोड़ो न, क्या कर रहे हो?

राजेश की हरकतों से सुनीता गर्म होने लगी। उसके मुंह से हल्की हल्की कामुक सिसकारी निकलने लगी।

अब राजेश सुनिता को बेड में ले जाकर अपनी गोद में बिठा कर अपनी दोनो हाथो से उसकी चूची मसलता हुआ, उसके ओंठ चूसने लगा।

राजेश की हरकतों से सुनीता बहुत गर्म हो गई उसकी बुर से पानी छुटने लगी, मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

राजेश का land भी तनकर खड़ा हो गया था।

तभी दरवाजे की बेल बजी।

सुनिता _राजेश अब छोड़ो, तुम्हारा पापा आ गया।

राजेश _नही मां, थोड़ी देर और प्यार करने दो न। बड़ा मन कर रहा है।

सुनिता _अरे बाबा, अब जो भी करना है रात में कर लेना, अभी छोड़ो मुझे।

राजेश _क्या सच में मां, आज रात में प्यार करने दोगी। देखो अपनी बात से मुकर नही जाना।

सुनिता _नही मुकरूंगी बाबा अब छोड़ो भी।

राजेश ने सुनिता को छोड़ दिया। सुनिता दरवाजा खोलने चली गई।

शेखर _अरे भाग्यवान, इतनी देर क्यू हो गई दरवाज़ा खोलने में।

सुनीता _वो क्या है न जी की मैं तैयार हो रही थी।

अब आप भी जल्दी तैयार हो जाइए। बच्चे लोग तैयार हो चुके हैं।

शेखर _ठीक है, डार्लिंग। कुछ देर में

शेखर भी तैयार हो गया फिर चारो कार में बैठकर निशा की घर के लिए निकले गए।

 
धन्य वाद दोस्तों आप सभी का कमेंट्स पड़कर अच्छा लगा , आप सभी का प्रोत्साहन के लिए हृदय से धन्यवाद,
 
शुक्रिया दोस्तो आप सभी का कमेंट्स पढ़कर अच्छा लगा, प्रोत्साहन के लिए आप सभी का हृदय से धन्यवाद,,,,☺️
 
सुनीता अपने परिवार वालों के साथ, सुजाता के घर डिनर के लिए निकल गए थे।

इधर सुजाता तैयार होकर, राजेश और उसके परिवार के लोगो का इंतजार करने लगी।

निशा _मॉम आज तो अप बहुत ही सुंदर लग रही हो। इस तरह श्रृंगार में आपको पहली बार देख रही हूं।

सीमा _हा आंटी, निशा बिल्कुल सही कह रही है आज तो आप बिलकुल नई रूप में लगे रही हो।

सुजाता _अब राजेश ने जो हमारे लिए किया है, वह तो किसी से छुपी नहीं है बेटा अब डिनर में उसके मां और पापा आ रहे हैं तो उनके स्वागत के लिए तैयार तो होना ही पड़ेगा न, ताकि उन्हें भी लगे की उन लोगो के आने से हम बहुत खुश हैं।

निशा _हा मां ये तो आपने सही कहा।

सुजाता _बेटा अब जाओ तुम भी एक अच्छी सी ड्रेस पहन लो, जल्दी वे लोग आते ही होंगे।

निशा _ठीक है मां।

निशा, सीमा के साथ अपनी बेडरूम में चली गई।

निशा _सीमा, क्या पहनूं मैं?

सीमा _कुछ ऐसी ड्रेस जिससे राजेश और उसकी मम्मी पापा आपकी तारीफ करने मजबूर हो जाए।

निशा _ये ब्लू कलर की लहंगा चोली और चुनरी कैसी रहेगी।

सीमा _सुपर्ब।

निशा _जब ब्लू कलर की लहंगा और चोली पहनी तो कयामत ढा ने लगी।

सीमा _wow इस ड्रेस में तो सच में बिल्कुल स्वर्ग की अप्सरा लग रही हो।

उधर राजेश अपनी मम्मी पापा और बहन के साथ निशा के घर पहुंच गए।

विशाल और सुजाता दरवाजे पर खड़े थे।

जैसे ही शेखर और सुजाता घर के अंदर कदम रखे।

विशाल और सुजाता ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया।

सुजाता _आइए दीदी हमारे घर में आप लोगो का स्वागत है, आइए ।

सुनिता _सुजाता जी ये राजेश के पापा है।

सुजाता _भाई साहब।

शेखर _नमस्ते सुजाता जी।

सुजाता _इनसे मिलिए, आप मेरे पति है।

विशाल और शेखर ने हाथ जोड़कर एक दूसरे का अभिवादन किया।

शेखर _भाई साहब आपको कौन नही जानता विशाल एंड सुजाता ग्रुप्स के मालिक हो आप हमारी तरह साधारण इन्सान नहीं है।

विशाल _अरे शेखर जी क्यू आप मुझे शर्मिंदा कर रहे है? आप राजेश के पिता है ,इससे बड़े गर्व की बात और कुछ हो सकती है क्या?

बहुत खुश नसीब है आप।

सुनिता, घर का मुआइना करने लगी।

सुनिता _वाह, सुजाता जी आपका घर तो महलों से भी बड़ा और सुंदर प्रतीत होता है।

विशाल _सुजाता, भाभी जी को घर दिखाओ।

सुजाता _घर तो देखेंगे ही जी पहले चाय पानी तो पी लेने दीजिए।

नौकरों ने पानी लाया।

सुजाता _लीजिए दीदी पानी लीजिए। अपने हाथो से पानी का ट्रे लेकर पानी दी।

सुनिता _धन्यवाद, सुजाता जी।

सुजाता _राजेश तुम भी लो पानी ।

राजेश ने सुजाता की खूबसूरती में कही खो गया।

वह सुजाता की आंखो में देखता रहा। गिलास को सुजाता के हाथ से लेना छोड़कर।

सुजाता बहुत शर्मिंदगी महसूस करने लगी।

सुनिता _बेटा कहा खो गया, गिलास लो।

राजेश हड़बड़ा गया।

राजेश _हा मां।

राजेश भी शर्मिंदा महसूस करने लगा।

सुनिता _ये मेरी बेटी स्वीटी है।

सुजाता _बहुत सुंदर है, बिल्कुल आप पर गई है दीदी।

सुनिता _सुजाता जी निशा बिटिया नही दिख रही है।

सुजाता _दीदी, वो अपने रूम में होगी अपनी सहेली सीमा के साथ।

लो वो, आ रही है।

सभी लोग निशा को सीढ़ी से उतरते हुए देखने लगे।

निशा ने सुजाता का पैर छू कर प्रणाम की।

सुजाता _जी ती रह बेटी, तू सच में चांद की टुकड़ा लग रही है। सुजाता, निशा तो बिलकुल तुम्ही पर गई है।

तभी सुजाता हसने लगी।

सभी लोग आश्चचर्य से देखने लगे।

सुजाता अपनी हसी रोकते हुए बोली।

राजेश ने जब मुझको पहली बार देखा तो मुझे निशा ही समझ रही थी।

वो तो मेरे बताने पर ही जान सका की मैं निशा नही उसकी मम्मी हूं।

क्यू राजेश?

राजेश _मै ही क्यू? कोई भी धोखा खा सकता है।

सुनिता _हूं, राजेश ठीक कह रहा है।

निशा ने शेखर का भी पैर छू कर प्रणाम किया।

शेखर _खुश रहो बेटी, आगे चलकर तुम अपनी मां बाप का नाम रोशन करो।

निशा औरसीमा _हाई स्वीटी कैसी हो?

स्वीटी _निशा मै बिल्कुल ठीक हूं। आप दोनो कैसी है?

निशाऔर सीमा_ हम भी अच्छे हैं।

सुजाता _दी चलो मैं आपको हमारा घर दिखा दूं।

सुनिता और स्वीटी, सुजाता के पीछे चली गई।

इधर विशाल और शेखर आपस मे बात चीत करने लगें।

राजेश _निशा जी सच में आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो।

निशा _ओह थैंक्स राजेश।

सीमा _राजेश, निशा आपसे कुछ कहना चाहती है।

राजेश _बोलो, निशा जी क्या कहना है?

सीमा _निशा, बोल दो राजेश को जो बोलना चाहती हो।

राजेश _हां निशा कुछ कहना चाहती हो, तुम घबरा क्यू रही हो बोलो।

निशा _ओ, मै कह रही थी कि,,

राजेश _हां, बोलो।

सीमा _लगता है निशा मेरे होने से अपनी मन की बात कह नही पा रही। अच्छा मै भी चलती हूं स्वीटी को कंपनी देने आप दोनो एक दूसरे के साथ बाते शेयर करे।

मैं चली।

सीमा चली गई।

राजेश _निशा की हाथ पकड़कर पूछा, बोलो निशा क्या कहना चाहती हो?

निशा _वो, राजेश,,,

राजेश _हां बोलो,,

निशा _ओ,,, आपके मम्मी पापा बहुत अच्छे हैं।

राजेश _हूं, तो इतनी सी बात बोलने के लिए घबरा रही थी। और कुछ बोलना चाहती हो तो बोल दो।

निशा _तुम्हारी मां तुमसे कितना प्यार करती है?

राजेश _, वो तो है।

और कुछ बोलना है?

निशा न में सिर हिलाया।

राजेश _चलो देखते हैं मैम,मॉम को क्या दिखा रही है।

निशा _हूं, आप जाओ मै आती हूं।

उधर सीमा छुप कर देख रही थी। जब राजेश चला गया तब सीमा निशा के पास आई।

सीमा_क्या huwa बोली की नही?

निशा _सीमा, राजेश के सामने मुझे घबराहट सी होती है।

सीमा _मतलब तुम नही बोल पाई।

सीमा ने अपना सिर पकड़ लिया।

सीमा _लगता है कोई दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा।

उधर राजेश सुजाता और सुनिता के पास पहुंच गया।

सुजाता, सुनिता को अपना घर दिखा रही थी।

स्वीटी और सुनिता घर की बडी तारीफ कर रहे थे।

स्वीटी और सुनिता घर के दीवारों पर बने नक्कासी को देख रहे थे।

तभी राजेश ने मौका पाकर सुजाता की कमर पे चिकोटी कांट लिया।

सुजाता चिहुंक उठी।

उई मां,,

सुनिता _क्या हुआ सुजाता जी।

सुजाता _दीदी मेरे कमर पे एक मच्छर ने कांटा।

सुनिता _सुजाता जी ये आप कैसी मजाक कर रही हो?

आपके घर और मच्छर।

सुजाता _हां दीदी सच कह रही हूं, पता नहीं कहा से आ गया, ये मच्छर, और मेरा खून पीने कांट दिया।

बडी तेज जलन हो रही है। देखो तो पूरा चमड़ी लाल हो गया है।

राजेश _मैम आपके पास कोई मलहम होगा तो मुझे दो मै लगा देता हूं आपको राहत मिलेगी।

सुजाता _वो तो मेरे कमरे में है। एक काम कर तू मेरे कमरे में चल वही लगा देना, जल्दी से राहत मिलेगी।

दीदी आप लोग घर देखो, मैं जल्द आती हूं।

सुनिता _ठीक है सुजाता जी, आप कोई मलहम लगा कर आइए। बेटा जाओ सुजाता जी का मदद कर दो।

राजेश _ठीक है मां।

बेडरूम में जानें के बाद।

सुजाता _ये क्या किया राजेश, इतना जोर से क्यू कांटा। पूरी चमड़ी लाल हो गई।

राजेश ने सुजाता को बाहों में भरते हुए कहा _तुम बहुत खुबसूरत और हॉट लग रही हो।

राजेश तो अपने घर में ही गर्म था। वह सुजाता का हॉट लुक देखकर और गर्म हो गया था।

वह सुजाता की चूची मसलने लगा।

सुजाता _अरे छोड़ो कोई आ जायेगा।

तू तो बावला हो गया है।

राजेश _हा, अब तुम इतनी सज धज कर मेरे सामने खड़ी रहोगी तो मै अपने को काबू में कैसे रख पाऊंगा?मै तुम्हारा यह खुबसूरत बदन देख बावला हो गया हूं।

राजेश सुजाता की ओंठ, मुंह में भरकर चूसने लगा।

सुजाता _देखो ये समय ठीक नहीं है। कोइ भी आ सकता है? प्लीज छोड़ो न।

राजेश _न, मुझे करने का बड़ा मन है !

सुजाता _देखो जिद मत करो। कोई आ गया न तो सारा भेद खुल जायेगा।

राजेश _अरे खुलने दो मै किसी से डरता नहीं।

मुझे कुछ नहीं सुनना।

राजेश नीचे झुककर सुजाता की नाभी चाटने लगा।

सुजाता सिसकने लगी। उसकी बुर में पानी भर गया।

राजेश ने देर न करते सुजाता को बेड पे लिटा दिया और उसकी साडी पेटी कोट ऊपर उठा कर पेंटी निकाल कर सूंघने लगा।

राजेश _क्या मस्त खुशबू है?

इसके बाद राजेश देर न करते हुए सुजाता के टांगों के बीच आ गया और उसको chut चाटने लगा।

अपना पेंट नीचे सरका कर land बाहर निकाल लिया।

राजेश, सुजाता की चूची ब्लाउज से बाहर निकाल,कुछ देर उसकी दूदू पीने लगा, कुछ देर तक दूदू पीने के बाद।

अपना लैंड सुजाता की बुर के छेद में टिका कर एक जोर का धक्का मारा।

लन्ड बुर को चीरकर अंदर घुस गया।

अब राजेश सुजाता की टांगे अपने कंधो पर रख कर gach gach बुर चोदने लगा।

राजेश अपने दोनो हाथो से सुजाता की चूचियां दबा दबा कर। लन्ड को बुर में पेलना जारी रखा।

लन्ड पूरी गहराई में जाकर सुजाता की बच्चेदानी को ठोकने लगा।

सुजाता कुछ ही देर में जन्नत की सैर करने लगी।

उसकी मुंह से कामुक सिसकारी निकल कमरे में गूंजने लगी।

आह मां,, उन,, आह,, उन, आई ,,,,

राजेश को भी बड़ा मजा आ रहा था। सुजाता की बुर पे lund डालकर, वह दनादन चोदने लगा।

सुजाता की बुर पे पानी का बाढ सा आ गया। जिसमे राजेश का लन्ड भीग कर और मस्ता गयाऔर गपागप अंदर बाहर होने लगा।

राजेश _आह मेरी रानी, बहुत मजा आ रहा है। सच में क्या मस्त मॉल है तू।

सुजाता _राजेश, और तेज कर आह उई मां मै आने वाली हूं, और जोर से आह, उई मां मर गई,, आह,,

सुजाता राजेश से को जोर से जकड़ कर झड़ने लगी।

सुजाता के झड़ने के बाद राजेश ने अपना land बुर से बाहर निकाल लिया।

और ज्यादा देर तक वहा रुकना ठीक नहीं था कोई भी आ सकता था।

इसलिए वे दोनो अपने कपडे जल्दी से ठीक कर सुनिता के पास आ गए।

स्वीटी दोनो को अजीब से नजरो से देखने लगी।

स्वीटी _पता नही दोनो इतने देर तक क्या कर रहे थे?

सुजाता _माफ करना दीदी ,मलहम दिख नही रहा रहा था इस कारण थोड़ी लेट हो गई।

सुनिता _कोई बात नही सुजाता जी, आपको जलन से राहत तो मिली न।

सुजाता _हां दीदी, राजेश ने अच्छे से मालिश किया जिससे जलन एक दम खत्म हो गया।

स्वीटी राजेश और सुजाता को पैनी नजरो से देखने लगी।

स्वीटी _छोटा सा मच्छर काटने पर इतने देर तक मालिश, मुझे तो लगता है कि इन दोनों के बीच कुछ नई खिचड़ी पक रही है।

इतने दिनो तक दोनो, सोनपुर में साथ बिता कर भी तो आए है? कैसी सजी संवरी है, नई नवेली दुल्हन की तरह। मुझे तो दाल में कुछ काला लग रहा है।

दोनो एक दूसरे को देखकर आंखो ही आंखो में इशारे भी कर रहे हैं।

भईया तो ऐसे भी गदराई घोड़ी का दीवाना है ही। मां का तो ले ही रहा था, लगता है अब अपनी होने वाली सास का भी लेने लगा है।

अपना प्यार सबको बांट रहा है सिर्फ अपनी बहन को छोड़ कर।

सुजाता _दी आप लोगो ने घर तो देख ही लिया ,

चलो अब डिनर करते हैं।

सभी डिनर हाल में आ गए।

यहां नौकरों ने खाने पीने की सभी चीजे टेबल पर सजा कर रख चुके थे।

सुनिता _सुजाता जी इतने सारे व्यंजन बनाने की क्या जरूरत थी?

सुजाता _दी, पहली बार हमारे घर में आए हैं आप लोग। बार बार मौका तो आप लोग देंगे नही खातिर दारी की।

सभी लोग डाइनिंग टेबल पर बैठ गए।

विशाल और शेखर आजू बाजू उसके बाद राजेश फिर स्वीटी फिर सीमा उसके बाद निशा। फिर सुजाता और सुनिता।

सुजाता और राजेश आमने सामने बैठे थे।

सभी लोग खाने पे व्यस्त थे।

सुनिता _भोजन तो बहुत ही स्वादिष्ट है।

शेखर _हा भई, जितनी भी तारीफ किया जाए कम है।

सुजाता _दीदी थोडा और लीजिए न।

सुनिता _बस सुजाता, बहुत खा ली पेट में अब बिल्कुल भी जगह नहीं।

सुजाता _राजेश तुम बिल्कुल चुप हो कुछ बोल क्यू नही रहे। क्या तुम्हे खाना पसंद नही आया? तुम ठीक से खा नही रहे हो।

स्वीटी _लगता है भैया ने डिनर के ठीक पहले कुछ ओर खा या पी के अपना पेट भर लिया।

सभी लोग स्वीटी की बात पर हसने लगे।

राजेश और सुजाता स्वीटी की बातों से झेप गए।

स्वीटी _क्यू भईया मै सही कह रही हूं न।

वैसे क्या खाए या पिए थे हमें भी बताओ।

सुनिता _स्वीटी,,,,,,

स्वीटी _सॉरी मां लगता है मै कुछ ज्यादा ही बोल गई।

निशा _राज आपको डिनर के ठीक पहले कुछ खाना या पीना नहीं खाना चाहिए था। देखो न आप तो बिलकुल भी नहीं खा रहे।

सीमा _वैसे क्या खा या पी लिए थे, हमे भाई तो पता चले, स्वीटी ठीक कह रही है।

सुनिता _अरे तुम सभी तो मेरे बेटे के पिछे ही पड़ गए।

अब उसका मन किया होगा तो कुछ खा पी लिया होगा।

राजेश _कोई प्यार से खिलाएगी तो मना कैसे कर सकता हूं?

सुनिता _किसने प्यार से खिलाया तुम्हे मै भी तो जानू?

शेखर _अरे भाग्यवान, तुम लोग तो राजेश के पीछे ऐसे पड़ गए जैसे उसने कोई बड़ा गुनाह कर लिया हो। अब छोड़ो भी इस मुद्दे को,,,

विशाल _हा ,भाई ,शेखर जी ठीक कह रहा है। क्यू राजेश को परेशान कर रहे हो?

सुजाता _न राजेश को सजा मिलेगी, और उसकी सजा यही है कि सभी लेडीज अपने पसंद का व्यंजन,राजेश को दो दो चम्मच खिलाएंगे।

राजेश _अरे, न बाबा, मै नही खा पाऊंगा।

सुजाता _, खाना तो पड़ेगा ही बच्चू।

पहले कौन खिलाएगा।

स्वीटी _मै उसकी बहन हूं । पहले मै खिलाऊंगी।

अपने भैया को।

स्वीटी ने अपनी पसंद की व्यंजन दो चम्मच राजेश को खिलाई।

स्वीटी _कैसा लगा भईया मेरी पसंद का व्यंजन?

राजेश _वेरी टेस्टी।

उसके बाद सीमा ने खिलाई अपनी पसंद का डिस।

सीमा _कैसा है इसका स्वाद ?, राजेश टेस्ट करके बताना।

राजेश _हूं बहुत ही जायेके दार।

सुजाता _निशा, बेटा तुम खिलाओ।

निशा _मै

सुजाता _हां बेटा।

निशा _पता नही क्यू मुझे राज को जबरदस्ती खिलाना कुछ ठीक नहीं लग रहा है।

राज तुमको क्या पसंद है बताओ मैं अपनी हाथों से खिला देती हूं।

सुजाता _न बेटा चीटिंग नही तुम अपनी पसंद का व्यंजन खिलाओ।

निशा _ठीक है,

निशा ने दो पानी पूरी बनाई और राजेश की ओर आगे बढ़ाते हुवे, बोली

राजेश इसको टेस्ट करो।

राजेश ने अपना मुंह खोला। निशा ने राजेश के मुंह में पानी पूरी भर दिया।

राजेश पानी पूरी खाने के बाद,

राजेश _वाउ,सुपर्ब।

दीदी अब आप भी खिलाओ।बीएम

सुनिता _लो बेटा ये छोले भटूरे टेस्ट करो। राजेश के मुंह की ओर छोले भटूरे अपने हाथ में लेकर बोली।

राजेश ने छोले भटूरे खाया।

राजेश_वाउ, बहुत ही स्वादिष्ट है।

सुजाता _अब मेरी बारी है।

सुजाता ने दो उबला अंडा ली,जो हल्का तला हुआ था उसे बीच से कांटकर उसमे लहसुनकी चटनी भरकर राजेश की ओर बढ़ाया।

सुजाता _राजेश तुम ये खाओ इसकी तुम्हे ज्यादा जरूरत है। इससे तुम्हारे शरीर को ताकत मिलेगी।

राजेश ने अंडा खाने के बाद, उसका जायका की तारीफ किया।

राजेश _लो तुम लोगो ने तो मुझे इतना खिला दिया की, मुझे भोजन पचाने के लिए मेहनत करना पड़ेगा।

सुजाता _तो कर लेना न थोड़ी मेहनत किसने मना किया है? वह हंसने लगी ।

भोजन कर लेने के बाद सभी हाल में आ कर बैठ गए।

राजेश _मैं थोडा गार्डन में टहलता हूं।

राजेश गार्डन में टहलने को जाने लगा।

सीमा निशा से बोली_निशा यह अच्छा मौका है तुमभी जाओ राज के साथ और अपनी दिल की बात बता दो।

निशा _राज रुको मैं भी चलती हूं।

राजेश _ok

निशा और राजेश दोनो गार्डन में टहलने चले गए।

बाकी लोग हाल में बैठकर बात चीत करने लगे।

इधर राजेश और निशा गार्डन में,,,

कुछ देर दोनो इधार उधर की बाते करने के बाद,

राजेश _निशा आगे क्या सोचा है फ्यूचर के बारे में?

तुम अपनी मां बाप की अकेली हो, बडी उम्मीद होगी तुमसे तुम्हारे मॉम डैड को।

निशा _मै तो आगे चलकर अपनी मां की काम में उसकी मदद करना चाहता हूं। वह अकेली ही इतनी बड़ी कंपनी सम्हाल रही है।

राजेश _हा, ये बात तो सही है, तुम्हारा फैसला बिल्कुल सही है।

निशा _राजेश क्या तुम हमारी कंपनी ज्वाइन नही कर सकते? अगर तुम हमारी कंपनी ज्वाइन कर लेते तो,,

राजेश _निशा, मेरी मां की सपना है कि मै आई ए एस अफसर बनू। मै अपनी मां की सपना पूरा करना चाहता हूं।

निशा _राजेश मै तुमसे कुछ बात कहना चाहती हूं।

राजेश _बोलो निशा क्या कहना है।

निशा _मै,,,

तभी switi वहा पर आ गई।

स्वीटी _लो भैया आप यहां पर हो, मै कहां कहा नहीं ढूंढी आपको। घर नही चलना है क्या, मां बुला रही है।

राजेश _हां, चलो।

निशा अब चलते हैं बाद में बता देना जो भी बात है ।

निशा ने हां में सिर हिलाया।

अब चलो, चलते हैं घर वाले हमारा वेट कर रहे है।

सुनिता _लो राजेश और निशा भी आ गई।

सुजाता जी अब हमें इजाजत दीजिए।

सुजाता _दीदी, एक मिनट रुकना।

निशा बेटा,मेरे साथ आना।

निशा , सुजाता के साथ उसके रूम में गई।

वहा पर आलमारी में रखी, तीन गिफ्ट पैकेट निशा को थमाया और उसे नीचे ले जानें बोली।

निशा ने तीनो पैकेट नीचे ले गई। सुजाता भी उसके पीछे पीछे नीचे आ गई।

एक पैकेट सुनिता के हाथों में थमाते हुए बोली।

सुजाता _दी दी आप पहली बार हमारे घर आई है, ये छोटा सा भेट स्वीकार करो।

सुनिता _सुजाता जी, ये भेट मै नही ले सकती। इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

सुजाता _नही दीदी। वे भेट तो स्वीकार करना ही पड़ेगा। हमे खुशी होगी।

जब सुनिता ने वह पैकेट खोलकर देखी। उसके अंदर हीरे का नेकलेस निकला, जो बहुत ही सुंदर था।

सुनिता _इतना कीमती नेकलेश ,ये तो करोड़ों का होगा।

सुजाता जी मै इतनी कीमती नेकलेश नही ले सकती। मुझे माफ कीजिए।

सुजाता _दी दी राजेश ने जो हमारे लिए किया, उसके बदले में तो ये कुछ भी नहीं है। आज ये जो शानो शौकत है राजेश की वजह से है। प्लीज इसे स्वीकार कर लीजिए।

सुनिता _राजेश ने जो किया वह उसका फर्ज था। सुजाता जी। उसके बदले भेट देने की आवश्यकता नहीं है।

सुजाता _दी जब कोई मेहमान, पहलीबार घर आता है तो उसे भेट देने की परंपरा है न बोलो

सुनिता _हा, वो तो है।

सुजाता _आज से तुम लोग हमारे मेहमान हो, और हमारे घर पहली बार आए हो। हम खाली हाथ नहीं जानें दे सकते।

स्वीटी बेटा या तुम्हारे लिए।

स्वीटी _ओह थैंक यू आंटी।

सुजाता ने विशाल से कहा, सुनो जी ये भाई साहब को दे दीजिए।

विशाल _शेखर जी _ये छोटा सा भेट स्वीकार कीजिए।

शेखर _भाई साहब ये भेट देकर हमें शर्मिंदा कर रहे हैं।

निशा _मां आपने राज के लिए कुछ नहीं ली हो क्या?

सुजाता _राजेश को क्या दू समझ ही नहीं आय।

। राजेश मेरे साथ आना। दो चार भेट पसंद की है तुम्हारे लिए तुमको जो पसन्द हो, बता देना।

राजेश _मैम मुझे कुछ नहीं चाहिए, रहने दीजिए न।

सुजाता _कुछ तो भेट स्वीकार करना पड़ेगा।

आओ ऊपर।

सुजाता ने आंखो ही आंखो में राजेश को इशारा की।

इस इशारे को स्वीटी ने भांप ली।

स्वीटी _लगता है कुछ खास है भैया के लिए आंखो से इशारा हो रही है।

इधर राजेश और सुजाता कमरे में पहुंचते ही।

सुजाता _बोलो क्या चाहिए तुम्हे।

राजेश ने सुजाता को बाहों में भर लिया।

राजेश _तुम से बडकर कोई गिफ्ट है क्या मेरे लिए?

सुजाता _तो ले चलो मुझे अपना घर।

राजेश _अब तो तुम मेरी अमानत हो, अब यहां रहो या मेरे घर में।

सुजाता _बाते बनाना तो कोई तुमसे सीखे।

राजेश और सुजाता एक दूसरे की आंखो में देखने लगे।

फिर दोनो एक दूसरे के ओंठ चूसने लगे।

इधर जब दोनो को नीचे आने में देर हो गई।

स्वीटी _लगता है ऊपर दोनो के बीच फिर रासलीला सुरू हो गया है।

वह निशा से बोली।

स्वीटी _निशा दी, लगता हैं भईया अपना भेट चूज नही कर पा रहे हैं। जाओ न तुम भैया की मदद कर दो। हम लेट हो रहे हैं।

सुनिता _ऊपर जाकर देखो बेटा, राजेश इतना समय क्यू ले रहा है?

निशा _ठीक है आंटी।

निशा ऊपर जानें लगी।

जब वह सुजाता के कमरे के पास पहुंची। कमरे का दरवाजा बंद था, पर कुंडी अंदर से लगी नही थी।

निशा _मॉम और राज कमरे का दरवाजा बंद क्यू कर दिए हैं।

वह दरवाजे को थोडा धेकेली, दरवाज़ा थोडा खुल गई।

कमरे में सुजाता की मादक सिसकारी गूंज रही थी।

निशा का दिल जोरो से धड़कने लगा।

वह थोडा सा दरवाजे को और धकेली। उसने जो अंदर देखा उसे देख कर उसकी आंखो से खून की आंसु बहने लगी।

सुजाता राजेश के गोद में बैठी हुई थी और राजेश सुजाता की दुदू पी रहा था। सुजाता आंखे बंद कर सिसक रही थी।

निशा, बुत बनी हुई किसी तरह अपने कमरे में गई और दरवाज़ा बंद कर। दरवाजे पे पीठ रख कर खड़ी हो गई फिर धीरे धीरे नीचे बैठ गई। अपने घुटने मोड़ कर उस पर अपना सिर झुका कर फूट फूट कर रोने लगी।

इधर राजेश और सुजाता दोनो जन्नत की सैर कर रहे थे।

सुजाता _ओह, राजेश थोडा जल्दी करो, नही तो हमारे घर वालो, इतनी देर होता देख आ न जाए।

राजेश अपना स्पीड और बढ़ा दिया।

कुछ देर में ही,राजेश ने सुजाता को एक बार फिर झाड़ दिया।

सुजाता _राजेश अब चलो।

सुजाता और राजेश ने जल्दी से अपने कपडे ठीक किए और नीचे आ गए।

सुजाता _राजेश को तो कोई गिफ्ट, पसंद ही नही आया, अब राजेश का तोहफा उधार रहा।

सुनिता _ सुजाता जी इसमेहमान नवाजीके लिए शुक्रिया ,अब हम चलते हैं।

सुजाता _ठीक है दीदी और आइएगा।

सुनिता _जी जरूर।

शेखर ने विशाल से कहा_अच्छा भाई साहब, अब हमें इजाजत दीजिए।

विशाल _ठीक है शेखर जी। आप लोग आए हमे खुशी हुई।

राजेश _निशा कही दिख नही रही।

सीमा _निशा तो ऊपर ही गई थी आप लोगों को लेट होता देख।

राजेश _मां आप लोग निकलो मै निशा से मिलकर अभी पहुंचता हूं।

सुनिता _ठीक है बेटा तुम जल्दी आना हम बाहर वेट करेगें तुम्हारा।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश ऊपर गया, निशा को इधर उधर देखा कही नही दिखा तो वह उसकी रूम की ओर गया।

इधर निशा, दरवाजे से सट कर बैठ फूटफूट कर रो रही थी ।

राजेश ने आवाज लगाया, निशा निशा कहा हो यार,,,

राजेश की आवाज सुनकर निशा जल्दी से अपनी आंसू पोछी।

और खड़ी हो गई।

राजेश ने दरवाज़ा धकेला।

राजेश _ओह निशा तुम यहां क्या कर रही हो?

मैं तुम्हे कहा कहा नहीं ढूंढा।

निशा_क्या huwa राजेश, मुझे क्यू ढूंढ रहे हो।

राजेश _निशा हम घर जा रहे हैं। तुम मूझसे कुछ कहने वाली थी,,

निशा _मै आपको कुछ कहने वाली थी,,, मुझे कुछ याद नही आ रहा की मै कया कहने वाली थी।

राजेश _ओह, जब याद आए तो फिर कभी बता देना। हम निकल रहे हैं।

राजेश जानें लगा,,

निशा राजेश को जाते हुई देखने लगी।

उसकी आंखो से आंसू तेज धारा बह रही थी।

राजेश कुछ दूर ही गया था कि निशा ने राजेश को आवाज दी,, राजेश रुको,,

राजेश रुक गया।

निशा अपनी आंसू पोंछ कर राजेश के पास पहुंची।

राजेश _बोलो निशा।

निशा _राजेश मै ये कहना चाहती थी कि हम एक अच्छे दोस्त हैं न बोलो ।

राजेश _निशा जी ये भी पूछने की बात है।

निशा _अगर हम अच्छे दोस्त हैं तो मुझे उसी दोस्ती की कसम दो।

राजेश _कैसा कसम निशा जी।

निशा _राजेश, तुम्हे तो पता है मेरे पिता जी बीमार रहते हैं। पता नही वे मां के साथ कब तक दे पाएंगे। भगवान न करे, पर उसे कुछ हो गया तो मेरी मां अकेली हो जाएगी।

मुझे लगता हैं कि मां तुम्हे इस घर का कोई सदस्य की तरह मानने लगी है। मूझसे वादा करो कि तुम हमेशा मेरी मां के सुख दुख में उसका साथ दोगे।

राजेश _निशा, इसमें वादा करने की क्या बात है मैं तो हमेशा आप लोगों के साथ खड़ा रहूंगा। मै तुम्हे विश्वास दिलाता हूं।

निशा _विश्वास नही वादा करो।

राजेश_ठीक है, निशा जी मै आपसे अपनी दोस्ती का का कसम देता हूं। मेरे रहते फिर से कोई तुम लोगो का कोई बुरा नही कर सकेगा , हर दुख सुख में तुम लोगो के साथ खड़ा रहूंगा,ये वादा है तुमसे।

निशा _मुझे तुमसे यही उम्मीद थी राजेश।

राजेश और निशा दोनो नीचे आ गए। निशा किसी तरह अपने आंसुओं को रोक रखी थी।

राजेश _अच्छा मैम अब मैं चलता हूं।

सुजाता _हूं।

बाई सीमा जी।

सीमा _बाई राज।

राजेश चला गया।

राजेश को जाते हुई निशा देखती रही।

सीमा _निशा तुम ऊपर में क्या कर रही थी?

निशा _झूठी मुस्कान लाते हुवे,मेरा, पेट दर्द कर रहा था, तो फ्रेस हो रही थी।

सीमा _लगता है तुमने भी आज कुछ ज्यादा ही खा ली थी।

निशा अब मै भी चलती हूं।

निशा _ठीक है सीमा, ड्राइवर तुम्हे घर छोड़ देगा।

सीमा _ओके निशा बाई।

बाई आंटी।

सुजाता _बाई, बेटा।

सुजाता ने निशा से कहा।

बेटा रात बहुत हो गई है अब तुम भी अपने कमरे में जाकर आराम करो।

निशा _ठीक है मॉम।

निशा _भारी मन से अपने कमरे की ओर जानें लगी।

उनके आंखो से आंसु, अब कहा रुकने वाला था।

किसी तरह वह अपने कमरे में पहुंची।

और अपने कमरे की दरवाज़ा बंद कर फिर से दरवाजे से टिक कर बैठ कर रोने लगी।

वह रोती हुई गीत गाने लगी,,,

बना के क्यू बिगाड़ा रे

बिगाड़ा रे नसीबा, ऊपर वाले, ऊपर वाले

बना के क्यू बिगाड़ा रे

जो तुझको मंजूर नहीं था फूल खिले इस प्यार के

फिर क्यों तूने इन आंखो को रंग दिखाए बहार के

आस बंधा के, प्यार जगा के, बिगाड़ा रे नसीबा

ऊपर वाले, ऊपर वाले।

बना के क्यू बिगाड़ा रे,,,,,,,

 
अगली सुबह जब सीमा कालेज जाने के लिए निशा के घर पहुंची।

सुजाता उसी समय ऑफिस जानें के लिए निकल रही थी

सीमा _आंटी, निशा कहा है?

सुजाता _, सीमा बेटा आज निशा की तबियत ठीक नहीं है, पूछने पर कह रही थी कि उसके सिर में दर्द है। वह आज कालेज नही जाऊंगी, बोल रही थी। अपने को में आराम कर रही है।

तुम बात करके देखो आख़िर बात क्या है?

सीमा _ठीक है आंटी।

सीमा, निशा के कमरे में पहुंची।

निशा सो रही थी, किसी सोच में डूबी हुई थी।

सीमा ने आवाज दी, निशा,,,,,,

निशा ने कोई जवाब नही दिया,,

वह निशा के करीब गई।

बेड पर बैठ कर जब उसके सिर पर हाथ रख बोली,

निशा क्या huwa है तुम्हे? कहा खोई हुई हो?

निशा _सीमा तुम कब आई?

सीमा _मैने तुमको आवाज दी तुमने सुना ही नहीं। कहा खोई हुई हो।

आंटी कह रही थी की तुम्हारी तबियत ठीक नहीं।

निशा _हां, सीमा आज मेरी तबियत ठीक नहीं है, मै आज कालेज नही जा रही।

सीमा _मै तुम्हे अच्छी तरह जानती हूं। तुम्हारी तबियत ठीक न होने पर भी तुम कालेज मिस नही करती,बोलो आख़िर बात क्या है?

तुम्हारी आंखे सूजी हुई लग रही है, जैसे तुम रात भर रोई हो। बताओ मुझे आख़िर बात क्या है?

निशा की आंखो में आंसु आ गए।

निशा _कुछ भी तो नही।

सीमा _निशा तुम रो रही हो, बताओ मुझे आख़िर बात क्या है?

निशा, सीमा के गोद में अपना सिर रखकर रोने लगी।

सीमा _मेरा दिल घबरा रहा है। निशा आख़िर बात क्या है? बताओ मुझे।

निशा _मै तुम्हे नही बता सकती।

सीमा _निशा, ऐसी क्या बात है को मुझे नही बता सकती?अगर तुम मुझे अपनी बहन समझती हो तो बताओ मुझे आख़िर बात क्या है?

निशा _राज किसी और से,,,

सीमा _निशा, ये तुम क्या कह रही हो?

ऐसा नहीं हो सकता। ये तुम्हारा वहम होगा।

क्या ये राज ये बात राज ने तुमसे कहा?

निशा ने न में सिर हिलाया

सीमा _फिर तुम यह कैसे मान ली की वह किसी और से प्यार करता है? मैंने राज की आंखो में तुम्हारे लिए प्यार देखा है?

निशा _मै सच कह रही हूं।

सीमा _कौन है वो?

आख़िर मै भी तो जानू, तुमसे बेहतर राज के लिए।

निशा _मै नही बता सकती?

सीमा _नही सीमा मुझे, बताना ही होगा। मै तुम्हारे आंखो में आंसू नहीं देख सकती बोलो,, कौन है वो, बताओ मुझे।

निशा _नही, सीमा मुझे इस बारे में मत पूछो, मै नही बता सकती।

सीमा _नही निशा मुझे बताना ही होगा तुम्हे तुम्हे, कौन है वो? बोलो

सीमा के बार बार जिद करने पर,,

निशा _पहले तुम वादा करो यह बात किसी को नही बताओगी?

सीमा _क्या मुझ पर भरोसा नहीं?

निशा _, भरोसा नहीं करती तो क्या मैं इतना कुछ बताती।

सीमा _मै हम बचपन की सहेली ही नही बहन जैसी है मै हमेशा तुम्हारी खुशियां ही चाही है। बताओ मुझे कौन है वो?

निशा _मेरी मॉम,,,

सीमा _निशा तुम पागल हो गई हो? तुम्हे पता भी है तुम क्या कह रही हो?

निशा _मै सच कह रही हूं। मैने अपने आंखो से देखा है। दोनो को प्यार,,,,

निशा रोने लगी,,

सीमा _नही ये नही हो सकता !

सीमा भी सोचने में मजबूर हो गई।

सीमा _पर ये सब huwa कैसे?

निशा _शायद, सोनपुर में अकेले रहने के दौरान वे करीब आ गए होंगे।

सीमा _कोई और होता तो मैं तुम्हे कुछ सलाह देती, तुम्हारी मां है, अब आगे जो भी करना है फैसला तुम्हे ही लेना होगा।

निशा _मैने फैसला कर लिया है?

सीमा _कैसा फैसला?

निशा _मै राजेश को अपने दिल से निकाल दूंगी।

सीमा _निशा अगर,आंटी को पता चले की तुम राजेश से प्यार करती हो तो शायद वह राजेश को अपने से अलग कर दे। तुम कहो तो मैं आंटी से बात करू की तुम राज को पसंद करती हो।

निशा _नही, सीमा एसा भूलकर भी न करना, तुम्हे मेरी कसम।

मैं अपनी मॉम से बहुत प्यार करती हूं। डैड के बीमार रहने के बाद, वह जैसे सजना, संवारना, ठीक से हंसना सब भूल चुकी थी।राजेश के आने से उसको पहली बार इतना खुश होते देखा है ।

मैं अपनी मॉम की खुशी के लिए राजेश को अपने दिल से निकाल दूंगी।

सीमा _क्या यह इतना आसान है?

निशा _जानती हूं। राजेश को भूल पाना आसान नहीं इसलिए मैंने एक और फैसला लिया है।

सीमा _कैसा फैसला?

निशा _दो माह बाद एग्जाम खत्म होने के बाद मैं आगे की पढ़ाई के लिए अपनी बुआ के पास लंदन चली जाऊंगी।

सीमा _पर तुम्हारा सपना तो आगे अपनी मॉम का सहारा बनने का है न। उसकी कंपनी को आगे बढ़ाने का।

निशा _मै पढ़ाई के बाद वही किसी नई प्रॉजेक्ट पर काम करूंगी। जिससे मॉम की कंपनी और आगे बड़ सके।

सीमा _ओह निशा, ये सब क्या हो गया?

सीमा ने निशा को अपने सीने से लगा लिया। उसकी आंखो से भी आंसू बहने लगी।

कुछ देर बाद सीमा ने कहा,,,

निशा अब आंसू बहाने से अच्छा है हालात से लड़ना, जो होगा ऊपर वाले पे छोड़ दो।

यहां घर में रहेगी तो अकेली घुट घुट कर अपनी हालात और खराब कर लेगी। चलो मेरे साथ कालेज। मै तुम्हे अकेली नहीं छोड़ सकती।

अगर तुम नही जावोगी तो मै भी कालेज नही जाऊंगी।

निशा _सीमा, मुझ अभागन का साथ छोड़ दो, नही तो मेरे साथ तुम्हारी भी किस्मत खराब हो जाएगी।

सीमा _निशा, मै तो तुम्हारी साया हूं, साया। तू जहा जाएगी हमेशा साथ ही रहूंगी। मैने तो बचपन से ही यह फैसला कर लिया है।

निशा _सीमा,,

सीमा _हां, मेरी बहना।

दोनो एक दूसरे को गले लगा कर रोने लगे।

सीमा _अब चलो, तुम फ्रेश होकर जल्दी तैयार हो जाओ।

इधर राजेश कालेज पहुंचता है।

कैंटीन में,,

भगत _भाई ये पार्टी वाले बार बार काल करके मुझे अपने पार्टी में शामिल होने के लिए फोर्स कर रहे हैं।

राजेश _तुम, उनसे कहो जो भी फैसला लूंगा वह एग्जाम के बाद ही लूंगा।

अभी मुझे अपनी पढ़ाई पर फोकस करना है।

भगत _ठीक है भैया।

राजेश _वैसे तुमने जो फेस बुक और इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट बनाया है उसका क्या हाल चाल है?

भगत _भैया, लाखो फालोवर जुड़ चुके हैं और रोज सैकड़ों नई फालोवर जुड़ रहे हैं। मेरे विचारो को लोग खूब लाइक कमेंट्स और शेयर कर रहे है। अधिकांश लोग तो कह रहे हैं की खुद की नई पार्टी बनाओ। हम आपके साथ है।

राजेश _गुड। फालोवर की संख्या जितनी बड़े अच्छी बात है। तुम उसमे अपनी नई नई विचारो को पोस्ट करते रहा करो।

और अपने फालोवर को अप्रैल तक सब्र रखने बोलो। फिर आगे का प्लान बताया जाएगा।

राजेश _ठीक है भाई।

भगत _आगे कुछ दिनों बाद इंटर कालेज फुटबाल टूर्नामेंट होना है। इसका आयोजन हमारे ही कालेज में होना है।

इसके लिए आवश्यक तैयारियों पर चर्चा के लिए। छात्र संघ और कालेज प्रशासन के बीच दोपहर में बैठक रखा गया है।

राजेश _ये तो अच्छी बात है। टूर्नामेंट में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। दूसरे कालेज से आने वाले छात्रों की सुविधाओ एवम ठहरने की व्यवस्था उनकी सुरक्षा पर चर्चा करना जरूरी है।

भगत _भाई, मीटिंग में हमारे कॉलेज की फुटबाल टीम के चयन पर भी चर्चा होगी। आपको टीम में कप्तान बनाने के लिए मैं पहल करूंगा। नियम के अनुसार जो स्टूडेंट लोकल टूर्नामेंट में भाग लेता है उसी को उसके परफामेंस के आधार पर टीम में शामिल किया जाता है । आप लोकल टूर्नामेंट में भाग नही ले पाए थे, तो आपका इस बार टीम में चयन के लिए, पुराने नियम पर विचार करना पड़ेगा।

राजेश _नही भगत, टीम मेंमेरा चयन के लिए अनावश्यक दबाव मत बनाना। नियम सबके लिए समान होना चाहिए। मैने लोकल टूर्नामेंट में भाग नही लिया था, तो टीम में मेरा चयन करना, नियम विरुद्ध होगा।

भगत _पर भाई लगातार दो बार हमारे कालेज को आप ही ने चैंपियन बनाया है, इस बार आप नही खेलेंगे तो फिर टूर्नामेंट जीतेंगे कैसे?

राजेश _अरे नही हमारे टीम में सब अच्छे प्लेयर्स है। रोहन में भी काबिलियत है, मुझे यकीन है उसके नेतृत्व में सभी खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करेगें।

भगत _भाई, हम जानते है कि रोहन टूर्नामेंट जीतने के लिए जी जान लूटा देगा, पर उसका इगो, कही टीम पर भारी न पड़ जाए।

राजेश _देखते है, क्या होता है? फिर हाल हमारे कालेज को उस पर विश्वास करना ही पड़ेगा।

दोपहर लंच के समय,,

सीमा _निशा, कैंटीन चले कॉफी पीने।

निशा _नही, सीमा अब मै कभी कैंटीन नही जाऊंगी।

सीमा _निशा, शायद तुम भूल रही हो राज तुम्हारा अभी भी बहुत अच्छा दोस्त हैं। उसका प्यार न मिला तो क्या? दोस्ती थोड़े ही छोड़ देगी।

निशा _मुझे डर है कि राज के सामने आने पर मैं कमजोर न पड़ जाऊं।

सीमा _ऐसा नही होने दूंगी, मै तुम्हारे साथ हूं।

चलो।

दोनो कैंटीन में चले गए।

वहा पर राजेश अकेला मिला।

सीमा _हाय राजेश।

राजेश _हेलो सीमा, हेलो निशा जी।

निशा _हेलो राज ।

सीमा _राज आजआप अकेले है।

राजेश _हां, भगत और कुछ दोस्त आज कालेज प्रशासन के साथ मीटिंग अटेंड कर रहे हैं।

राजेश _काफ़ी लेंगी आप दोनो।

सीमा _क्यू नहीं।

राजेश ने तीन कॉफी मंगाया।

राजेश _निशा जी आज आपके चेहरे में कुछ उदास लग रही है। कुछ बात है क्या?

निशा _नही राजेश, वो आंख में कचड़ा चला गया था न इसलिए आंख कुछ ठीक नहीं लग रहा है।

राजेश _दिखाओ अपनी आंखे, फुख मारकर कचरा बाहर निकाल दू। तुमको राहत मिलेगी।

निशा _ओह राजेश कचरा निकल चुका है, तुम्हे परेशान होने की जरूरत नहीं।

राजेश _वैसे निशा जी आपने कल बहुत अच्छा पानी पूरी बनाया था। खा कर मजा आ गया।

निशा _thanks राजेश

सीमा _राजेश तुम इतने दिनो तक सोनपुर में रहे, काफ़ी इंजॉय किए होगे वहा। हमें भी तो बताओ कुछ।

राजेश _वहा की वादियां बहुत अच्छी है, अगर तुम लोग होते तो और मजा आता।

निशा _Rajesh, तुमने हमें बुलाया ही नहीं, अगर तुम बुलाते तो हम वहा जरूर पहुंच ,,,

राजेश _वहा तुम लोगो का जाना थोडा रिस्की था न मज़दूर यूनियन वालो से,,

इसलिए तुम लोग न आए तो ही अच्छा था।

सीमा _तुम्हे चोंट लगी तो आंटी ने काफी अच्छी देखभाल की होगी आपका।

राजेश _ओ हां सुजाता मैम की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। उसने मेरी दिन रात देखभाल की।

उसके बाद तीनो काफी पीने लगे।

सीमा _जब से आप लोग सोनपुर से आए है। आंटी तो आपकी तारीफ करते नही थक रही। लगता है तुमने आंटी पर भी अपना जादू चला दिया है।

राजेश तुमने फ्यूचर के बारे में क्या सोचा है?

राजेश _सीमा जी आप लोग तो जानते ही हो कि आगे मेरा लक्ष्य क्या है?

सीमा _वो तो जानते ही हैं, और तुम अपने लक्ष्य को भी प्राप्त कर लोगे, हमे यकीन है पर उसके बाद क्या?

राजेश _जी मै समझा नही।

सीमा _भई, जिंदगी जीने के लिए हमसफर भी तो चाहिए उसके बारे में बात कर रही हूं।

राजेश _ओह, उसके बारे में तो कुछ सोचा ही नहीं।

सीमा _पर हमे तो लगा कि तुम अपने लिए हमसफर ढूंढ चुके हो।

कैसा हमसफर चाहिए तुमको, हम तुम्हारे दोस्त हैं, शायद हम कुछ मदद कर सके। तुम्हारे आस पास कोई हो तो बताओ। उदाहरण के लिए।

राजेश _मुझे तो सुजाता मैम की तरह सुंदर,काबिल और मां के समान प्यार करने वाली पत्नी चाहिए।

सीमा _ओह, तो तुम निशा को क्यू पसंद नही कर लेते? वह सुजाता आंटी की परछाई ही है और वह मां की तरह तुमको प्यार करेगी?

राजेश खामोश हो गया,,

निशा चीखी ,,

सीमा, ये तुम क्या बकवास कर रही हो?

सीमा को अपनी गलती का अहसास हो गया,,

सीमा _सॉरी निशा मै तो मजाक कर रही थी।

राजेश तुम क्या सोचने लगें, मै तो सिर्फ मजाक कर रही थी।

निशा _राजेश ये लड़की तो पागल है कुछ भी बोल देती है, तुम इसकी बातो को दिल से न लेना।

अच्छा राजेश अब क्लास का समय हो रहा है, हम चलते हैं।

राजेश ने हां में सिर हिलाया।

राजेश निशा को जाते हुए देखने लगा,,,

निशा _सीमा ये तुमने क्या किया? राज को ये सब बोलने की क्या जरूरत थी।

सीमा _सॉरी निशा पता नही, ये सब मेरे मुंह से कैसे निकल गया?

निशा _राजेश अब मेरे बारे में न सोचें तो ही अच्छा है।

तुमने ये ठीक नहीं किया।

सीमा _सॉरी निशा, माफ कर दो मुझे प्लीज, तुम्हारे आंखो की आंसू मुझे देखे नही जाते।

निशा _सीमा तुम मूझसे वादा करो, राज से तुम कभी भी नहीं बताओगी की मैं उससे प्यार करती हूं।

सीमा _निशा, मै तुमसे वादा करती हूं। मैं ये बात राजेश को कभी नहीं बताऊंगी।

इधर राजेश के मन में सीमा की बात ने काफ़ी गहरा प्रभाव डाला था।

कालेज के छुट्टी के बाद राजेश जब घर पहुंचा,,

वह किचन में जाकर, सुनिता को पीछेसे अपनी बाहों में भर लिया ।

सुनिता _आ गया मेरा बेटा।

राजेश _हां, मां।

राजेश ने सुनिता की गालों को चूमने चाटने लगा।

सुनिता _अरे क्या कर रहा है तुमने फिर शैतानी शुरू कर दी।

राजेश _अपनी मां से प्यार कर रहा हूं, इसमें शैतानी क्या?

इधर राजेश सुनिता को और जकड़ लिया, उसका land उसकी गाड़ में धस गया।

जिससे सुनिता सिसक उठी।

राजेश _क्या huwa मां?

सुनिता _अपना छोटू को सम्हालो, गलत जगह जानें की कोशिश कर रहा है।

राजेश _तो सही जगह पहुंचा दो न अपने छोटे बेटे को।

सुनिता _चल हट बदमाश कही का जब देखो तब मस्ती सूझी रहती हैं।

राजेश _थोडा दुदू ही पीला दो ।

सुनिता_जानती हूं, दुदू पीने के बहाने मुझे गर्म करता है ताकि आसानी से तुम्हारी बातो में आ जाऊं।

चल हट, मुझे काम करना है। जाओ अपने कमरे में।

राजेश ने सुनिता की ओंठ को मुंह में भरकर चूस दिया फिर अपने कमरे में भाग गया।

सुनिता _बेशरम कही का, बिल्कुल आवारा बन गया है, और मुस्कुराने लगी।

राज अपने कमरे में जानें के बाद, फ्रेश होकर बेड पार आराम करने लगा।

वह सीमा द्वारा कही गई बातों के बारे में सोचने लगा,,

निशा, सुजाता की परछाई है उसे क्यू पसंद नही कर लेते। वह तुम्हे मां जैसे प्यार भी करेगी।

फिर उसे याद आया,किस प्रकार जब वह निराश हो गया था, तब निशा ने उसे इससे उबारा।

निशा के साथ जो उसने कालेज फंक्शन में परफार्म किया था, वह याद आने लगा।

प्राय के द्वारा कही गई बाते,,

निशा तुम पर मरती है,, इसका तुम्हे अहसास नही। तुम दोनो की जोड़ी सबसे बेस्ट होगी।

फिर उसे अपनी मां की कही बाते याद आया कि तुम अमीर घर की लड़कियों से दूर ही रहना।

राजेश उलझन में फस गया,,

वह मोबाइल में कैद निधा की फ़ोटो निकाल कर देखने लगा।

तभी उसकी मां कमरे में आई।

सुनिता _बेटा क्या कर रहा है?

राजेश _कुछ नही मां, बस आराम कर रहा था।

सुनिता _चलो भोजन के लिए तुम्हारे पापा वेट कर रहे हैं।

राजेश _ठीक है मां, मै अभी आया।

कुछ देर बाद राजेश, भोजन के लिए डाइनिंग टेबल पर उपस्थिति दे दिया था।

शेखर _सुनिता, गांव से भैया ने फ़ोन किया था। बोल रहा था की उसकी बहू को लडकी हुई है। जिसका नामकरण संस्कार अगले संडे को है। हमे निमंत्रण दिया है।

सुनिता _ये तो खुशी की बात है। काश हम जा पाते।

राजेश _मां आख़िर बात क्या है? आप लोग गांव जाते क्यू नही हो? पूछने पर भी आप लोग कुछ बताते नही। वहा ताऊ, ताई, चाचा चाची और भाई बहन सब है, मेरा उनसे मिलने का कितना मन है पर न तुम लोग जाते हो न मुझे जानें देते। आख़िर क्यू?

सुनिता _बेटा, वह बहुत पिछडा गांव है वहा किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। इसलिए हम वहा नही जाते।

राजेश _मां तुम न जाती हो वह समझ आता है पर पापा भी नहीं जाते। जबकि उनके बड़े और छोटे भाई वहा रहते हैं। क्या सुविधा के अभाव होने से कोई अपने भाईयो को भूल सकता है l

शेखर _बेटा, मुझे भी याद आता है मेरे भाईयो का पर हमारा वहा न जानें में भलाई है।

राजेश _पापा आख़िर बात क्या है?

सुनिता _राजेश, कितने बार कहा है? तुम इस बारे में मत पूछा करो।

राजेश _सॉरी मॉम।

रात को सुजाता ने राजेश को काल किया।

सुजाता _क्या कर रहे हो जनाब?

राजेश _मैम आप। कुछ नही सोने की कोशिश कर रहा था।

सुजाता _क्यू नींद नहीं आ रही क्या?

राजेश _हां, किसी के खयालों में खोया था।

सुजाता _कौनहै वह खुशनसीब मै भी तो जानू?

राजेश _आप के शिवा कौन हो सकता है?

सुजाता _अच्छा, तो अभी तक काल क्यू नही किया।

राजेश _अब मुझे क्या पता आप कहा पर हो।

सुजाता _चल झूठा कही का।

अच्छा सुनो, आई मिस यू सो मच

मैं कल शाम को होटल में एक कमरा बुक कर दी हूं।

तुम कालेज से सीधा वही आ जाना, मै वही मिलूंगी।

तुम्हारे बिना रह पाना मुस्किल है मेरे लिए।

राजेश _किसी को पता चल गया तो।

सुजाता _तुम उसकी चिंता मत करो किसी को पता नहीं चलेगा।

अच्छा अब मै रखती हूं बाई।

राजेश _ओके बाई।

अगले दिन सुजाता ने अपने कंपनी के अधिकारियो की मीटिंग रखी थी। कंपनी के अधिकारियो से कंपनीकी स्थिति पर जानकारी लेने।

अधिकारियो ने बताया कि कंपनी के सारे प्रॉजेक्ट फिर से शुरू हो गए है।

हमारे निवेशक फिर से हमारी कंपनी पर भरोसा जता रहे हैं। कंपनी के शेयर में लगातार तेजी बना huwa है। हम बहुत जल्द पुरानी स्थिति को प्राप्त कर लेंगे।

सुजाता ने खुशी जाहिर की।

शाम को 4बजे सुजाता ने राजेश को काल कर होटल के बारे में जानकारी देकर जल्द पहुंचने को कहा।

सुजाता जल्द ऑफिस से निकल कर होटल मे पहुंच चुकी थी।

राजेश कालेज से छुट्टी के बाद फाइव स्टार होटल पहुंचा।

मैनेजर ने राजेश को देखते ही पहचान लिया।सुजाता ने मैनेजर को पहले ही राजेश का फ़ोटो mobile पर सेंड कर दिया था। और कह दिया था की जब वह आए तो मेरे कमरे में बिना किसी पूछताछ के भेज देना ।

जब मैनेजर ने राजेश को देखा,,

मैनेजर _आप राजेश है।

राजेश _जी।

आप मेरे साथ आइए।

राज मैनेजर के पीछे चला गया।

मैनेजर ने राजेश को रूम के बाहर छोड़ कर आया।

राजेश ने सुजाता को काल किया,,मैम मै रूम नंबर 24 के बाहर खड़ा हूं।

सुजाता ने दरवाज़ा खोला। और राजेश कमरे के अन्दर प्रवेश किया।

सुजाता ने दरवाज़ा बंद कर राजेश के गले में अपनी बाहें डाल दिया।

सुजाता _मै कब से वेट कर रही थी।

राजेश ने सुजाता के अपने बाहों मे जकड़ लिया।

आज तो आप बहुत हॉट लग रही हो,,

राजेश ने सुजाता को अपनी गोद में उठा लिया।

वे एक दूसरे की आंखो में देखने लगे।

राजेश ने सुजाता को बेड पे लिटा दिया।

सुजाता उठ कर बैठ गई, और राजेश के ओंठ चूसने लगी।

फिर वह गीत गाने लगी,,,

चलो प्यार मुझे करो,,,

अंग से अंग लगाके, प्रेम सुधा बरसादे,,

दासी तेरी प्यासी रही कितनी जनम,,,

भरो मांग मेरी भरो,,

चलो प्यार मुझे करो,,

बिन तेरे मेरा कोई और नहीं

मेरे प्यार की कच्ची डोर नही

पिया लेके मन की कली

तेरी पूजा करने चली प्रियतमा

चलो प्यार मुझे करो,,

भरो मांग मेरी भरो,,

दिल मेरा है तेरा ये जान ले

मेरी दीवानगी पहचान ले

सांस रुक भी गई जो सनम

लेके आऊंगा फिर मैं जनम प्रियतमा,

चलो प्यार मुझे करो,,

भरो मांग मेरी भरो,,

अंग से अंग लगाके प्रेम सुधा बरसादे

तेरे लिए बेचैन था कितने जनम,,

इधर निशा घर आने के बाद अपने कमरे में आकार राजेश को याद कर गीत गाने लगी,,,

शिकवा नहीं किसी से,,,

किसी से गिला नहीं,,,

नसीब में नहीं था,,

हमको मिला नहीं,,

 
होटल के कमरे में राजेश और सुजाता ने करीब एक घंटे तक समय बिताया।

सुजाता की खुबसूरत जिस्म को देखकर राजेश भी उत्तेजित हो गया। उसका land अकड़ गया। रही सही कसर सुजाता की ओंठो ने पूरा कर दिया। जिससे राजेश का land नाग की तरह फंफनाने लगा।

राजेश के जीभ की कमाल से सुजाता की बुर झरने की तरह पानी बहाने लगी।

राजेश ने सुजाता की जमकर chut बजाया। पूरे समय कमरे में सुजाता की मादक सिसकारी गूंजता रहा,,

उई मां,,, आह,, उन,,, आई,,,,

आह,,, ओह मां ,,, मर गई रि,,, आह,, अन उन ई,,,

आई,,, उह,,

राजेश काम की पूरे 64कलाओं का प्रयोग कर। सुजाता को संभोग सुख प्रदान किया।

सुजाता राजेश की बाहों में जन्नत की सैर कर रही थी। उसे राजेश ने संभोग का ऐसा परम सुख प्रदान किया जिसकी कल्पना तक उसने नही की थी।

इधर राजेश भी सुजाता की खुबसूरत जिस्म पाकर बहुत उत्तेजित होकर पूरे जोश के साथ दनादन बुर की chudai करता रहा।

राजेश को सुजाता की chudai करने में परम आनंद मिल रहा था।

इस एक घण्टे की chudai में राजेश ने सुजाता को तीन बार झाड़ा और अंत में,,, आह, आह मां उन,,

आह करके कराहते हुवे सुजाता के बुर में अपना बीज छोड़ दिया।

दोनो बुरी तरह से थक चुके थे।

सुजाता, राजेश की बाहों में अपना सिर रख कर लेट गई।

सुजाता _राजेश तुम खुश तो हो न।

राजेश _मैम ये भी कोई पूछने की बात है। मैं बडा किस्मत वाला हुं ,जो आपका प्यार मिला।

सुजाता _राजेश सन्डे को मैंने यह होटल बुक कर दी है।

राजेश _क्यू मैम? कोई खास वजह?

सुजाता _तुम्हारा बर्थ डे पार्टी के लिए।

राजेश _मैम आपको कैसा पता चला की सन्डे को मेरा बर्थ डे है।

सुजाता _तुम्हारी मां जब घर आई थी तो बातो ही बातो में मैंने पूछ ली थी।

राजेश _मैम इतने बड़े फाइव स्टार होटल में पार्टी देने की क्या आवश्यकता है?

सुनिता _तुम मेरे लिए खास हो, मेरा फर्ज है तुम्हारे जन्म दिन को खास बनाना।

तुम्हारे कालेज के सभी दोस्तों और रिश्तेदारों को इनवाइट करूंगी।

राजेश _ओह मैम तुम्हे मेरा इतना ख्याल है।

सुजाता _ओह राजेश तुम मुझे अकेले में मैम न कहा करो प्लीज।

सुजाता कहो।

मुझे अच्छा लगेगा।

राजेश _मैम पता नही मुझे क्यू आपका नाम लेना अछा नही लगता।

कुछ देर आराम करने के बाद दोनों अपने कपडे पहने।

सुजाता पहले होटल से बाहर गई। राजेश, सुजाता के जानें के कुछ देर बाद होटल के कमरे से बाहर निकला।

सुजाता ने भगत को काल किया और बताया की उसने राजेश के जन्म दिन पर पार्टी रखी है।

जिसमे राजेश के सारे मित्रो एवम रिस्तेदारो को आमन्त्रित करने की जिम्मेदारी तुम्हारी है।

भगत _मैम ये तो बडी खुशी की बात है, राजेश भाई का बर्थ डे में धूम मचाएंगे।

आप निश्चिंत रहिए। मै सबको आमंत्रित कर दूंगा।

भगत , कालेज के सभी दोस्तों एवम रिस्तेदारो को राजेश के बर्थ डे पार्टी का निमंत्रण पत्र बांटने में जुट गया।

सीमा को कालेज में इस बारे में पता चला,,

सीमा _निशा, कल राजेश का बर्थ डे है और आंटी ने होटल में राजेश का बर्थ डे पार्टी रखी है। जिसमे सभी को आमन्त्रित किया जा रहा है। इस बात से तो साबित होता ही है कि आंटी राजेश को चाहती है।

तुमने क्या सोचा है।

निशा _मेरा तो पार्टी में जाने का मन नहीं कर रहा।

सीमा _राजेश हमारा दोस्त हैं। अगर हम नही जाएंगे तो उन्हे बुरा लगेगा।

निशा _मै बहाना बना दूंगी की मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं। तुम चली जाना।

सीमा _न, मै अकेली नहीं जाऊंगी।

निशा _सीमा तुम भी नही जावोगी, तो राजेश से मिलने पर क्या जवाब देंगे।

सीमा _अब कल सोचेंगे क्या करना है?

राजेश जब कालेज से घर पहुंचा।

सुनिता _राजेश जरा इधर आना।

राजेश _बोलो मां क्या है?

सुनिता _ये मै कया सुन रही हुं? स्वीटी बता रही थीकि

सुजाता ने कल तुम्हारे लिए फाइव स्टार होटल में पार्टी रखी है।

राजेश _हां मां, मैने मैम को मना किया था पर वह नही मानी, बोल रही थी की हमारे लिए इतना किया है तो हमारा भी कुछ फर्ज बनता है।

आप सभी को पार्टी में आने को कहा है।

सुनिता _पता नही बेटा पर मुझे ये सब कुछ अच्छा नही लग रहा है।

जब रीता को पता चला कि सुजाता ने राजेश के लिए पार्टी रखी है उसने सुजाता को काल की।

रीता _हाई सुजी,,, कैसी है?

सुजाता _हाई रीता, मै तो ठीक हूं तुम सुनाओ कैसे याद की।

रीता _क्या मै अपने सहेली से बात भी नहीं कर सकती।

सुजाता _कर सकती हो बाबा कभी भी।

रीता _तुम्हारी कंपनी पर आई विपत्ति तो टल चुकी हैऔर तुम्हारी कंपनी फिर से उचाइयो को छुने के लिए अग्रसर है, इसके लिए बहुत बहुत बधाई।

सुजाता _ओह, थैंक यू रीता।

रीता _सुना है राजेश के लिए तुमने बर्थ डे पार्टी ऑर्गेनाइज की है।

सुजाता _अब राजेश ने हमारी कंपनी के लिए इतना किया तो हमारा भी कुछ फर्ज बनता है। इसलिए मैंने उसकी बर्थ डे पार्टी को सेलिब्रेट करने के बारे में सोंचा।

रीता _ये तुमने अच्छा की।

पर यार हमे नही बुलाओगी पार्टी में।

सुजाता _अरे एक ही तो मेरी सहेली हो, कैसे भूलूंगी मैं। तुम भी आमंत्रित हो पार्टी में।

रीता _ओह थैंक्स, सुजी।

वैसे क्या गिफ्ट दे रही हो राज को उसके जन्म दिन पर।

सुजाता _इसके बारे में तो कुछ सोचा ही नहीं।

रीता _भई आपका गिफ्ट तो कुछ स्पेशल हो होगा।

जो राजेश के लिए सरप्राईज होगा।

सुजाता हसने लगी।

सुजाता _नही, ऐसा कुछ नहीं है।

रीता _चलो कल पता लगा लग ही जायेगाकि तुमने राजेश को क्या गिफ्ट दिया है?

आख़िर संडे की शाम आ ही गया।

सुजाता ने निशा से कहा,,

बेटा जल्दी तैयार हो जाओ हमे राजेश की पार्टी में चलना है

निशा _मॉम मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं मै आराम करूंगी। आप जाइए।

सुजाता _बेटा राजेश तुम्हारा दोस्त हैं अगर तु नही जाएगी तो उसे बुरा लगेगा।

निशा _मॉम आप राजेश से कह देना न कि मेरी तबियत ठीक नहीं वैसे भी मेरे नही जानें से राजेश को कोई फर्क नहीं पड़ेगा ,मॉम।

सुजाता _ठीक है बेटा अपना ख्याल रखना।

निशा _ओके मॉम।

सुजाता ने भगत को काल किया,,

सुजाता _भगत सारी तैयारी हो चुकी है न।

भगत _जी मैम, आप आ जाइए।

सुजाता _बस अब मै निकल ही रही हूं।

आज सुजाता किसी स्वर्ग की अप्सरा की तरह लग रही थी।

उसने राजेश को काल किया।

सुजाता _राजेश, तुम रेडी हो गए।

राजेश _हा, मैम बस तैयार होने वाला हुं।

सुजाता _ओके, मै तुम्हे लेने आ रही हूं हम साथ ही निकलेंगे।

राजेश _मैम मै अपनी बाइक से आ जाऊंगी।

सुजाता _अरे नही, हम साथ ही निकलेंगे।

और सुनो मैने तुम्हारे लिए कुछ शूट पसंद किए है वो पहनना।

राजेश _ओह मैम मेरे पास कपडे है।

सुजाता _राजेश मेरे खुशी के लिए इतना नही कर सकते।

राजेश _ठीक है मैम।

सुजाता , कुछ ही समय में राजेश के घर पहुंच गई।

सुनिता ने दरवाजा खोला।

सुनिता _सुजाता जी आप।

सुजाता _मै पार्टी के लिए होटल निकल रही थी, तो सोचा राजेश को साथ ले लू। आख़िर पार्टी तो उन्ही का है।

सुनिता _आइए बैठिए न।

सुजाता _दी ज्यादा समय नहीं है अपने पास कुछ ही देर में मेहमान पहुंचने लगेंगे।

सुनिता _सुजाता जी इतनी सब करने की क्या आवश्यकता थी।

सुजाता _दी,राजेश ने हमारे लिए इतना किया है तो क्या उसके लिए मैं एक पार्टी अरेंज नही कर सकती।

कहा है राजेश।

सुनीता_वह अपने कमरे में है। अभी बुलाती हूं।

कुछ ही देर में राजेश आ गया।

सुजाता _चलो राजेश हम लेट हो रहे हैं।

राजेश _मां, आप लोग जल्दी आ जाना हम निकल रहे हैं।

सुनिता _ठीक है बेटा, तुम्हारे पापा के आते ही हम लोग भी पहुंच रहे हैं।

सुजाता और राजेश निकल पड़े।

रास्ते में,,

राजेश _मैम, आज तो आप कमाल की लग रही हो।

सुजाता _ओह सच में,,

राजेश _रियली

मैम निशा कहा है?

सुजाता _मैने उनसे कहा चलने के लिए, पर उसकी तबियत कुछ ठीक नही है, वह नही आ पाएगी।

राजेश _क्या?

राजेश को कुछ अच्छा न लगा,,

इधर निशा अपने कमरे में बेड पर लेट कर राजेश की फ़ोटो को देखते हुए,,

उसकी आंखो से आंसू बहने लगे,,

निशा _सॉरी जान मै आज तुम्हारे खास दिन पर तुम्हारे पास नही हूं। मुझे माफ कर दो। जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

उसकी आंखो से आंसू बहने लगे।

वह घर में रखी पियानो बजाने लगी,,,

फिर गाने लगी,,,

ओ साथी रे, तेरे बिना भी क्या जीना,

तेरे बिना भी क्या जीना।

फूलो में कलियों में, सपनो की गलियों में

तेरे बिना कुछ कही न

तेरे बिना भी क्या जीना,,

जानें कैसे अनजाने ही, आन बसा कोई प्यासे मन में

अपना सब कुछ खो बैठे है, पागल मन के पागलपन में

दिल के अफसाने,,,

दिल के अफसाने, मै जानू तू जानें और ये जानेकोई न

तेरे बिना भी क्या जीना ,,

ओ साथी रे,,

हर धड़कन में प्यास है तेरी, सांसों में तेरी खुशबू है

इस धरती से उस अंबर तक मेरी नजर में तू ही तू है

प्यार ये टूटे न,, तू मूझसे रूठे न साथ ये छूटे कभी न

तेरे बिना भी क्या जीना

ओ साथी रे,,

तुझ बिन जोगन मेरी राते, तुझ बिन मेरे दिन बंजारन

मेरा जीवन जलती बूंदे, बुझे बुझे मेरे सपने सारे

तेरे बिना मेरी, तेरे बिना मेरी, ये जिंदगी जिंदगी न

तेरे बिना भी क्या जीना

ओ साथी रे,

तेरे बिना भी क्या जीना,,,

 
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