Incest मैं अपने परिवार का दीवाना - Page 16 - SexBaba
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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 134

दिलीप- थोड़ी देर तक मैं सबके साथ बैठा रहा फिर मुझे एक आइडिया आया बड़ी नानी आज क्यूँ ना हम सब शहर घूमने जाएँ वहीं हम खाना भी खा लेंगे और आप सब घूम फिर भी लीजिएगा

बड़ी नानी- मैं नही जाउन्गी तुम सब जाओ

बड़ी मामी- मेरा भी मन नही है

दिलीप- किरण मौसी आप भी बोल दीजिए कि आप नही जाएँगी

सब तो नही बोल ही चुकी हैं यह कहके मैं अपने रूम में आ गया

मुझे कोई घूमना थोड़ी ही अच्छा लगता है

मैं तो बस चाहता था कि आज अपनी फॅमिली के साथ अच्छे से एंजाय कर लूँ

1 महीना 10 दिन तो मैं बिज़ी ही रहूँगा

मैं टाइम देखा तो 11एएम हुआ था मन नही लग रहा था

विदू को फोन भी नही कर सकता था

उनका यह फाइनल एग्ज़ॅम था

वो तो अभी पढ़ाई कर रही होंगी

फिर भी मैने फोन लगाया

एक रिंग भी पूरा नही हुआ कि विदू फोन उठा ली

विदू- कैसे हैं आप

दिलीप- ठीक हूँ आप कैसी हैं

विदू- मेरे पतिदेव ठीक तो मैं भी ठीक

दिलीप- आप पढ़ाई कर रही थी ना

विदू- आपको कैसे पता

दिलीप- आपका पतिदेव जी हूँ

विदू- बड़े आए

दिलीप- एक बात पुच्छू

विदू- पूछिए

दिलीप- कल आपने यह क्यूँ कहा कि हम रात में ही बात करेंगे

विदू- रात को आपकी मीठी आवाज़ सुनने के बाद बहुत अच्छी नींद आती है

दिलीप- क्यूँ दिन को मेरी आवाज़ मीठी नही लगती

विदू- दिन में आपसे बात करती हूँ तो हर वक़्त आपकी याद आती है

मैं ही जानती हूँ कि मैं आपके बिना कैसे रहती हूँ

अगर कोई मुझे आपके साथ बात करते हुए सुन ले

तो वो मुझे पागल समझेगा

दिलीप- उसके दाँत तोड़ दूँगा आप कभी ऐसा मत बोलना मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ

और मैं जानता हूँ मैं आपसे जितना प्यार करता हूँ उससे कई ज़्यादा आप मुझसे प्यार करती हैं

विदू- रोना तो मेरा स्टाइल है आप क्यूँ रो रहे हैं

दिलीप- [आपको अगर बताऊ कि मैं आपके लायक नही हूँ आप के प्यार के सामने मेरा प्यार तो कुछ भी नही है

मैं तो सोचा भी नही कि मुझे इतना प्यार करने वाली लड़की मिलेगी]

विदू- क्या हुआ आप कुछ बोल नही रहे हैं

दिलीप- नही बस कुछ सोच रहा था

विदू- आज आप पढ़ाई क्यूँ नही कर रहे हैं

दिलीप- ऐसे ही बचपन से सनडे को पढ़ाई नही करता हूँ मन ही नही करता है

विदू- वानु की तबीयत कैसी है

दिलीप- ठीक है

विदू- दो तीन दिनो से उससे बात कर रही हूँ वो ना पहले की तरह हँसती है ना पहले की तरह मेरे साथ बात करती है

मैं कुछ पूछती हूँ तो हाँ या ना में जवाब देती है

दिलीप- [डर तो लग रहा था लेकिन बताना तो था ही] वो मुझसे नाराज़ है

विदू- क्यूँ

दिलीप- [मैं विदू को सिर्फ़ इतना बताया कि मैं नई मामी के साथ 1घंटा पढ़ाई करता हूँ इसीलिए वँया मुझसे नाराज़ है

फिर मैं चुप हो गया]

विदू- आप मुझे पूरी बात बताइए कि आपने ऐसा क्यूँ किया

दिलीप- मैं 18साल तक आप सबके साथ नही था लेकिन मुझे इससे कोई फरक नही पड़ता था हाँ दुख होता था लेकिन आज आप सब मेरे साथ है मेरी फॅमिली हैं मेरी फॅमिली में से अगर कोई मुझसे बात ना करे तो मुझे बहुत दुख होगा

दिलीप- वैसे ही वो लड़की जिससे बड़े मामा शादी करके इस घर में लाए आप में से कोई भी ना उससे बात करता है

और ना ही उसे देखना चाहता है लेकिन अब उसका हमारे सिवा कोई नही है आपको पता है दिन भर जब हम सब बाते करते हैं तो वो गेट के पीछे से छुप्के हमे देखती है हमारे खुश होने पर वो मुस्कुराती है हमारे दुख होने पर वो उदास हो जाती है

क्यूंकी वो हमे अपना मानती है आप के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ अब आप बताइए कि आप क्या चाहती हैं आप जो कहेंगी मैं करूँगा

थोड़ी देर तक विदू चुप रही

विदू- आप समझते हैं कि हम सब उससे इस लिए गुस्सा हैं कि वो पिताजी की दूसरी बीवी है मैं उससे इसलिए बात नही करती हूँ कि मेरी माँ उससे बात नही करती है आपको पता है दिन में कितना भी अंधेरा हो जाए उससे कोई फरक़ नही पड़ता

लेकिन रात को एक दिया भी जलता दिख जाए तो हम लोग खुश हो जाते हैं माँ भी उसी दिया की तरह होती है

माँ खुश रहेगी तो उसके बच्चे खुश रहेंगे आप अगर वँया को मनाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले माँ को मनाना होगा

मा अगर उसको अपना लेंगी तो वँया भी अपनाएगी मैं भी अपनाउंगी सब उसको अपना लेंगे

फिर विदू फोन काट दिया,..
 
अपडेट 134बी

दिलीप- वैसे विदू की बात सही भी थी अब अगर बड़ी मामी को मनाना है तो एक ऐसा आइडिया सोचना पड़ेगा जिससे बड़ी मामी ही नही सब नई मामी को अपना लें

[वँया का रूम]

[वँया अपने रूम में इधर से उधर गुस्से में चले जा रही थी]

वँया- बेवकूफ़ गधा कही का समझता क्या है अपने आपको मुझसे पूछा भी नही मैं क्या मना कर देती एक नंबर का गधा है गधा मैं अगर बोली क़ि मुझसे बात मत करना तो क्या सच में मुझसे बात नही करेगा उपर से बिना किसी से बात किए उपर चला गया पर है तो मेरा राजकुमार सबसे अच्छा तभी तो मैं सबको उसके लिए मनाई अपनी कसम देके घूमने जाने के लिए और तो और पापा से भी पर्मिशन ले ली और सबको यह भी बोल दी कि आप अगर दिलीप को बताएँगी कि आप सब मेरे कहने पे उसके साथ शहर घूमने जा रही हैं तो वो सोचेगा कि आप सब उससे प्यार नही करती बड़ी दादी तुरंत हाँ कह दी

देखना अगर मुझे लेने आया तो मैं जाउन्गी ही नही

सच में नही जाउ

और नही तो क्या

नही मैं जाउन्गी

वो बुलाने आएगा तो मैं ज़रूर जाउन्गी

मेरा प्यारा दिलीप

[दिलीप का रूम]

कोई गेट नॉक करने लगा

मैने गेट खोला तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी

बड़ी नानी बड़ी मामी किरण मौसी सब मुस्कुरा रही थी

बड़ी नानी- बेटा अभी तक तू तय्यार नही हुआ

दिलीप- किस लिए

बड़ी मामी- क्यूँ हमे घुमाने नही ले जाएगा

दिलीप- 2 मिनिट में रेडी होता हूँ

फिर तो मैं इतनी जल्दी तय्यार हुआ कि वर्ल्ड रेकॉर्ड बन जाता

सबसे जल्दी कपड़े बदलने वाला इंसान

जब मैं नीचे पहुँचा

तो तीनो मेरा इंतेज़ार कर रही थी

लेकिन वँया नही दिखी

दिलीप- मामी वँया कहाँ है

बड़ी मामी- रूको मैं देखती हूँ

दिलीप- आप रुकिये मैं देखता हूँ

मैं उपर आ गया डर भी लग रहा था

कि कही और ज़्यादा नाराज़ हो गयी तो

लेकिन मैं बेवकूफ़

वँया के रूम का गेट नॉक किया

वँया गेट खोलके मुझे देखने लगी

फिर अपना मुँह फेर ली

मैं अंदर गया अलमारी खोला

वँया का मुँह खुला का खुला रह गया

मैं सभी कपड़ों में वो ड्रेस ढूँडने लगा

जो वँया मेरी पसंद का ली थी

आख़िर के वो ड्रेस मुझे मिल गयी

मैं वो ड्रेस निकालके बेड पे रख दिया

और वँया के स्टडी टेबल पे बैठके

एक कॉपी में लिखा

कपड़े पहेन कर नीचे आ जाओ अपने लिए नही तो अपनी माँ के लिए

बाकी तुम्हारी मर्ज़ी

मैं वो कॉपी वँया के हाथ में दे दिया

और रूम से बाहर आ गया

ठीक 10 मिनिट बाद वँया नीचे आ गई

दूसरी वाली ड्रेस पहेन कर

मेरे लिए तो यही काफ़ी था

फिर हम सब गाड़ी में बैठे कालिया गाड़ी चलाने लगा

हम उसी शहर जा रहे थे

मुझे तो विदू को किस करना याद आ गया

जहाँ मैं अपनी बहनो के साथ शॉपिंग करने गया

यह वाला शहर सबसे ज़्यादा गाओं से नज़दीक था

पहली बार किरण मौसी बड़ी मामी बड़ी नानी1 घंटे बाद हम पहुँचे शहर लखन हमे एक अच्छे से रेस्टोरेंट लेके गया

हम सब ने ऑर्डर दिया

लखन गेट पे खड़ा हुआ था

मैं लखन के पास गया

यहाँ क्या कर रहे हो जाके कुछ ऑर्डर करो

लखन- छोटे मालिक मैं अपने घर पे ही खाना ख़ाता हूँ

दिलीप- खाना खाओ

[लखन कुछ बोलना चाहता था]

और यह हमारा हुक्म है

फिर मैं सबके साथ बैठ गया

हमारा ऑर्डर आचुका था हम सब खाना ख़ाके बाहर आगये

दिलीप- अब चलके शॉपिंग करते हैं

बड़ी नानी- नही बेटा तबीयत ठीक नही है

दिलीप- ठीक है घर चलते हैं

[लखन गाड़ी चलाने लगा

हमे घर पहुँचते शाम हो गयी

मैं बड़ी नानी को रूम में लेके गया

बड़ी नानी बेड पे लेट गयी

फिर मैं अपने रूम में आ गया...
 
अपडेट 135

दिलीप- किरण मौसी और बड़ी मामी किचन में चली गयी

मैं सोचने लगा कि किरण मौसी से सच कैसे पता करूँ

वो कभी नही बताएँगी

मेरी जिंदगी में ही ऐसी ट्रॅजिडी होती है

पूरे स्कूल में फर्स्ट आना है

वँया नाराज़ है

विदू दूर है

छोटी मामी नफ़रत करती है

बड़ी मामी को मनाना है

बिम्ला की बेटी का अलग पंगा

प्रिन्सिपल को पूरी तरह से बर्बाद करना है

और जिसकी वजह मासी की यह हालत हुई है उसकी माँ चोद दूँगा सिर्फ़ एक बार पता चल जाए वो हराम का है कौन

थोड़ी देर बाद मैं खाना खाने नीचे गया

खाना ख़ाके छत पे आ गया

और छत के बिल्कुल साइड में आ गया

एक कदम आगे बढ़ने से मैं नीचे गिर जाता

वँया मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हुई थी

मैने सोचा वँया मेरी तरफ पीठ करके खड़ी क्यूँ रहती है

क्या वो मुझसे इतना गुस्सा है कि मेरी शकल भी देखना नही चाहती

मैं वँया के सामने जाके खड़ा हो गया

मैने देखा वँया की आँखो से आँसू बह रहे थे

ऐसा नही था कि वँया मुझे धमकी दिए हुई थी

इसी लिए मैं वँया के साथ बात नही कर रहा था

मैं जानता था कि वँया मुझसे बहुत नाराज़ है

मुझे जल्द से जल्द बड़ी मामी को मनाना पड़ेगा

मैने वँया का हाथ पकड़ा और नीचे आ गया

वँया अपना हाथ छुड़ा कर अपने रूमे में चली गयी

इसका मतलब जब भी वँया मेरे पीछे छत पे आती थी रोती रहती थी

क्या मैं इतना बुरा हूँ

एक तो मैने वँया को थप्पड़ मारा

दूसरा मैने वँया को रुलाया

आज का दिन कितना अच्छा चल रहा था

मैने सब बर्बाद कर दिया

वँया के आँसू देख कर नींद तो भाग ही चुकी थी

विदू से बात करता तो रो पड़ता

वँया मेरी वजह से अकेली पड़ गई थी

आज किसी से बात भी नही की

विदू मेरी वजह से जान देने की कोशिश कर चुकी है

कहीं वँया भी ऐसा ना करले

वँया ऐसा क्यूँ करेगी

विदू तो मुझसे प्यार करती है

और अगर वँया मेरी कसम तोड़के ऐसा कर बैठी तो

मैं एक कागज पे लिखके वँया के रूम पे आ गया

गेट के नीचे से कागज अंदर डाल दिया

गेट नॉक करके नीचे आ गया

किरण मौसी का रूम भी खुला था लाइट भी ऑन थी

किरण मौसी बेड पे बैठी हुई थी मैं रूम में गया

दिलीप- आप अभी तक सोई नही

किरण मौसी- तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रही थी

दिलीप- आपको पता था कि मैं आउन्गा

किरण मौसी- तुम बिल्कुल अपनी माँ जैसे हो

उसको भी अगर किसी की आदत पड़ जाती तो वो कोई ना कोई बात बनाके उसके पास चली ही जाती थी

बात बाद में करना पहले तुम्हारा सर दबा देती हूँ

[मैं किरण मौसी की गोद में सर रखके लेट गया]

अब बताओ क्या बात है

दिलीप- कुछ नही बस एग्ज़ॅम की टेन्षन है

किरण मौसी- पहले तो तुम ऐसे नही थे

दिलीप- आपको कैसे पता

किरण मौसी- वो इसलिए कि मैं तुमसे बात नही करती थी

लेकिन बड़ी माँ से तो बात करती ही थी

दिलीप- मासी आप कितनी अच्छी हैं

किरण मौसी- मैं तुम्हे अच्छी लगती हूँ

दिलीप- हाँ

किरण मौसी- तुम भी सबकी तरह मुझसे नफ़रत करोगे

दिलीप- कभी नही करूँगा और आपने ऐसा क्यूँ कहा कि मैं भी सबकी तरह आपसे नफ़रत करूँगा

किरण मौसी- कुछ नही अब तुम सो जाओ देखो 12 बज गया है

दिलीप- [फिर मैने अपनी आँखें बंद कर लिया मैं तो सोचा भी नही था कि आज फिर किरण मौसी एमोशनल हो जाएँगी मैं तो सिर्फ़ अपना जी हल्का करने आया था बड़ी नानी की तबीयत ठीक नही रहती थी मैं उनके पास जाता तो वो एक मिनिट में समझ जाती कि मैं परेशान हूँ जैसे जैसे किरण मौसी को मैं जान रहा था मेरा गुस्सा उस हरामी के लिए बढ़ता जा रहा था

किरण मौसी मेरे सर में अपनी उंगली फिरा रही थी पता ही नही चला कब नींद आ गई.,.
 
अपडेट 136

दिलीप- जब मैं वँया का रूम नॉक करके किरण मौसी के रूम में आया

तो वँया ने वो कागज उठा लिया

वँया- क्या लिखा होगा बैल ने

कागज में लिखा था

वँया मैने तुम्हे मारा मैं तुम्हे रुलाया

मैने तुमको इतना दुख दिया

मुझे कभी माफ़ मत करना

तुमने मुझसे एक बात बोली थी

कि मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे लिए पूरे स्कूल में फर्स्ट आओ

अब मैं बोलता हूँ कि तुम मेरे लिए पूरे स्कूल में फर्स्ट आना

मैं जानता हूँ आजकल ना तुम किसी से बात करती हो

और ना ही पहले की तरह खुश रहती हो

हो सके तो अपना ख्याल रखना

वँया यह सब पढ़के रो रही थी

वँया- एक तरफ तुम मुझसे प्यार भी नही करते

दूसरी तरफ तुम मेरे बारे इतना सोचते हो

आख़िर तुम चाहते क्या हो

एक तो तुमने अपनी कसम दी हुई है

वरना मैं अब तक तो अपनी जान दे चुकी होती

शायद तुम विद्या दी की वजह से मुझपे इतना मेहेरबान हो रहे हो

तुमने ऐसा क्यूँ कहा कि हमेशा अपना ख्याल रखना

कहीं तुम मुझे छोड़ कर तो नही जा रहे हो

मैं भी क्या क्या सोचती हूँ

तुम मुझसे थोड़े ही प्यार करते हो

तुम तो विद्या दी से प्यार करते हो

तुम्हे पता है कि अगर तुम ऐसा वैसा करोगे

तो विद्या दी अपने आपको कुछ कर बैठेंगी

एक बार चेक कर लेती हूँ

[वँया मेरे रूम में आ गई

मेरे रूम का गेट खुला था

वँया मुझे रूम में ना देख कर घबरा गयी

उपर के सारे रूम में देख ली

लेकिन मैं नही मिला

वँया और ज़्यादा घबरा गयी वो दौड़के नीचे आई और उसकी नज़र किरण मौसी के रूम पे पड़ी

मैं किरण मौसी की गोद में सर रखके लेटा हुआ था वँया रोते हुए अपने रूम में आ गई]

दिलीप- सुबह में उठके तय्यार हुआ

नाश्ता करके अखाड़े पहुँचा

वहाँ से बिंला के घर

शांति की चुदाई करके तालाब के पास आ गया

बस मेरे पास दो दिन थे

बिम्ला की बेटी को समझने का

10 मिनिट बाद बिम्ला की बेटी आती हुई दिखाई दी फिर वो मेरे पास आ गई

दिलीप- अब बताओ क्या करना है

बिम्ला की बेटी- पहले आप बताइए कि आप मुझे कैसे टच करेंगे

दिलीप- क्या मतलब हाथ से टच करूँगा

बिम्ला की बेटी- ऊ ठीक है मुझे आप पे पूरा विश्वाश है

दिलीप- बताओ कहाँ पे टच नही करना है

बिम्ला की बेटी शरमाने लगी

दिलीप--अरे बताओ भी

बिम्ला की बेटी- यहाँ पे यहाँ पे और यहाँ पे

दिलीप- मतलब बूब्स पे चूत पे और गान्ड पे

बिम्ला की बेटी का मुँह खुला का खुला रह गया

अब देखो मैं तुम्हे आज और कल 30 30 मिनिट तक टच करूँगा

तीनो जगह छोड़ कर कहीं पे टच कर सकता हूँ

बिम्ला की बेटी- यहाँ तो खुला है कोई देख लेगा तो

दिलीप- यहाँ पे थोड़े ही टच करूँगा वो जो वहाँ पे गुफा देख रही हो वहाँ चलते है

बिम्ला की बेटी- मैं वहाँ पे नही जाउन्गी

दिलीप- क्यूँ

बिम्ला की बेटी- गाओं वाले कहते हैं वहाँ पे भूत रहते हैं

दिलीप- मैं भूतो का राजा हूँ अब चलो मैं बिम्ला की बेटी जैसे ही गुफा के पास पहुँचे कुछ आवाज़े आने लगी

मैं तो समझ गया कि अंदर पक्का चुदाई चल रही है बिम्ला की बेटी वापस जाने लगी

मैने उसका हाथ पकड़ लिया

दिलीप- कहाँ जा रही चलो तो देखते हैं और हां मैं तुमसे वादा कर चुका हूँ

मैं और बिम्ला की बेटी गुफा के बिल्कुल पास आगये

हम दोनो की नज़र जैसे ही अंदर पड़ी मुझे तो कुछ नही हुआ

बिम्ला की बेटी को साँप सूंघ गया

कैसे हमारे सरपंच जी की बेटी शहर की लड़कियो से भी दो कदम आगे निकली

मैने उस साइट पे ऐसा देखा था जो अवनी ने मुझे बताई थी

सरपंच की बेटी एक लड़के का लंड मुँह में लिए हुई थी

दूसरे लड़के का लंड अपनी चूत में लिए हुई थी दोनो लड़को का लंड मेरे आधे लंड के बराबर था

एक सरपंच के पड़ोस में रहता था दूसरा गाओं के मुखिया का सुपुत्र था

मैने सोचा मौका अच्छा है बिम्ला की बेटी को आज ही समझा देता हूँ कि मजबूरी क्या होती है

लेकिन मेरा लंड भी तो खड़ा हो चुका था

और मैं बिम्ला की बेटी को वादा किया था कि हाथ से टच करूँगा.,.
 
अपडेट 136अ

दिलीप- मैने अपना टच वाला फोन निकालके साइलेंट पे डाला

वीडियो रेकॉर्डिंग ऑन करके बिम्ला की बेटी के हाथ में दिया

बिम्ला की बेटी सरपंच की बेटी की चुदाई रेकॉर्ड करने लगी

मैने अपना एक हाथ बिम्ला की बेटी की कमर पे रख दिया

बिम्ला की बेटी का बदन काँप उठा

पहली बार बिम्ला की बेटी को कोई लड़का टच किया था

मैं अपना दूसरा हाथ बिम्ला की बेटी की गर्दन पे रख दिया

बिम्ला की बेटी मेरी तरफ देखी

मैं मुस्कुरा दिया

मैं बिम्ला की बेटी की कमर सहलाने लगा

पर इससे ज़्यादा फरक नही पड़ने वाला था

मैं बिम्ला की बेटी की गर्दन को भी सहलाने लगा

उधर सरपंच की बेटी की चुदाई बड़े जोरो से चल रही थी

और इधर बिम्ला की बेटी का गला सुख रहा था

थोड़ी देर तक मैं बिम्ला की बेटी की गर्दन और कमर सहलाता रहा

[मैने बिम्ला की बेटी के हाथ में मोबाइल इसलिए दिया ताकि वो अपने बूब्स और अपनी चूत ना सहला सके

इससे बिम्ला की बेटी अपना कंट्रोल खो देती

बिम्ला की बेटी अब मुझपे ज़्यादा ध्यान नही दे रही थी

उसकी नज़र तो सरपंच की बेटी की चुदाई पे टिकी हुई थी

मैने अपना एक हाथ बिम्ला की बेटी की कमीज़ के अंदर डाल दिया

और बिम्ला की बेटी की नंगी पीठ सहलाने लगा

मेरा हाथ बार बार बिम्ला की बेटी की ब्रा की स्ट्रीप पे लग जाता

बिम्ला की बेटी का बदन अब हिलने लगा

मैने अपना दूसरा हाथ भी बिम्ला की बेटी की कमीज़ में डाल दिया

और बिम्ला की बेटी के पेट को सहलाने लगा

इधर मेरे लंड में दर्द हो रहा था

उधर सरपंच की बेटी को दूसरा लड़का चोद रहा था

और पहला सरपंच की बेटी के मुँह में लंड डाले हुए था

यह सब देख कर तो मेरी भी हालत पतली हो रही थी

तो बिम्ला की बेटी का क्या हाल हो रहा होगा

उपर से मैं उसके पेट और पीठ दोनो सहला रहा था

बिचारी तो सोच रही होगी कि मैं क्यूँ मना की

मेरे बूब्स और चूत को टच करने के लिए

मैं अब बिम्ला की बेटी की नाभि के साइड वाले हिस्से को सहला रहा था

नाभि को सहला नही सकता था

बिम्ला की बेटी झड जो जाती

मैं अपना दूसरा हाथ बिम्ला की बेटी के गर्दन के आगे वाले हिस्से पे ले गया

जहाँ पे लड़को को भी गुदगुदी होने लगती है

बिम्ला की बेटी के हाथ से मोबाइल नीचे गिरने वाला था

मैने जल्दी से मोबाइल ले लिया

और अपनी जेब में रख लिया

बिम्ला की बेटी अपना हाथ बूब्स पे रखने वाली थी कि

मैने उसके दोनो हाथों को पीछे लाके पकड़ लिया

बिम्ला की बेटी की शकल रोने जैसी हो गयी

लेकिन मैं बिम्ला की बेटी को बताना चाहता था

कि उसकी माँ मुझसे क्यूँ चुदवाती है

बिम्ला की बेटी की साँसे तेज चलने लगी थी

उसकी आँखें लाल हो गयी थी

दिलीप- क्या हुआ अब समझी कि मजबूरी क्या होती है

बिम्ला की बेटी अपनी गर्दन हाँ में हिलाने लगी

दिलीप--अब बोलो अपनी माँ से नफ़रत करोगी

बिम्ला की बेटी- नही

दिलीप- अपनी माँ से माफी माँगोगी

बिम्ला की बेटी- हाँ

दिलीप- दिल लगाके पढ़ाई करोगी

बिम्ला की बेटी- हाँ

दिलीप- फिर किसी की चुदाई देखेगी क्यूंकी सब मेरे जैसे तो नही होंगे

बिम्ला की बेटी- कभी नही देखूँगी

दिलीप- अपनी हार मानती हो

बिम्ला की बेटी मेरे सीने पे हाथ रख दी

मैने बिम्ला की बेटी को पीछे से गले लगा लिया

एक हाथ बिम्ला की बेटी के बूब्स पे रक्खा

दूसरा हाथ बिम्ला की बेटी की चूत पे

बिम्ला की बेटी खुश भी लग रही थी और शर्मा भी रही थी

मैं बिम्ला की बेटी की गान्ड पे अपना लंड रगड़ने लगा

बिम्ला की बेटी की चूत सहलाने लगा

मैं बिम्ला की बेटी के बूब्स मसल्ने लगा

बिम्ला की बेटी आहे भरने लगी लेकिन वो सरपंच की बेटी की सिसकियो से बहुत कम थी

दिलीप- शलवार के अंदर हाथ डालके चूत सहलाऊ

बिम्ला की बेटी को तो इस वक़्त झड़ने से मतलब था

बिम्ला की बेटी इतनी ज़ोर्से अपनी गर्दन हिलाई कि मुझे हँसी आ गई

मैं बिम्ला की बेटी की शलवार में अपना हाथ डालने लगा

शलवार बहुत टाइट थी

फिर भी मैने हाथ डाल दिया

बिम्ला की बेटी पैंटी भी पहने हुई थी

मैने अपना हाथ पैंटी के अंदर डाल दिया

बिम्ला की बेटी का बदन झटके खाने लगा

बिम्ला की बेटी की चूत बालो से भरी हुई थी

मैं और देर नही कर सकता था

मैं बिम्ला की बेटी की चूत मसल्ने लगा

बिम्ला की बेटी मोन कर रही थी

बिम्ला की बेटी की चूत मसल्ने से यह तो पता चल गया था कि बिम्ला की बेटी कुँवारी है

लेकिन मुझे इससे क्या

थोड़ी देर तक बिम्ला की बेटी की चूत मसलता रहा

फिर झटको के साथ बिम्ला की बेटी की चूत पानी छोड़ने लगी

मैने अपना हाथ बिम्ला की बेटी के मुँह पे रख दिया

जब बिम्ला की बेटी ने अपनी टंकी खाली कर दी तो मैने उसकी शलवार से अपना हाथ निकाल लिया

दिलीप- अब सीधा स्कूल जा

बिम्ला की बेटी शरमाती हुई चली गयी

दोनो लड़को का शायद निकलने वाला था

मैं एक झटके में गुफा अंदर चला गया

तीनो की नज़र मुझपे पड़ी

तीनो का पानी नही निकला

लेकिन तीनो की गान्ड ज़रूर फॅट गयी...
 
अपडेट 137

दिलीप- पहले तो मुझे गाओं में कोई नही जानता था

लेकिन जिस दिन प्रिन्सिपल का पंगा हुआ था

उस दिन से गाओं का हर एक आदमी मुझे जानता है

मुझे देख कर तीनो की फटी पड़ी थी

लेकिन मैं कुछ और सोचे हुआ था

दिलीप- तुम दोनो इसकी इज़्ज़त लूट रहे हो लगता है तुम प्रिन्सिपल को भूल गये हो

मेरी बात सुनके दोनो लड़को की फॅट गई लेकिन सरपंच की बेटी के चेहरे पे मुस्कान आ गई

सरपंच की बेटी- [इस बार तो लंबा शिकार फँसा सीधा ठाकुर]सरपंच की बेटी मेरे पास आ गई

और मेरा कंधा पकड़ ली

वोही दामिनी वाला सीन

सरपंच की बेटी- मुझे बचा लीजिए छोटे मालिक मुझे बचा लीजिए

लड़का1- रंडी आ गई ना अपनी औकात पे

दिलीप- ज़ुबान संभाल कर एक तो इसका रेप करते हो उपर से गाली देते हो

लड़का2- हम इसका रेप नही कर रहे थे यही हमसे चुदवाने आई थी

दिलीप- मैं तुम्हे चूतिया दिखता हूँ कोई भी लड़की एक लड़के से चुदवाती है

यह कोई रंडी थोड़ी है जो तुम दोनो से चुदवायेगी

और मैने खुद सुना कि यह तुम दोनो को गाली दे रही थी

सरपंच की बेटी- हाँ छोटे मालिक इन्दोनो ने मिलके मेरी जिंदगी बर्बाद करदी

लड़का- रंडी भोसड़ी

दिलीप- बोला ना गाली मत दो

लड़का1 लड़का2 के कान में खुसुर फुसुर करने लगे

लड़का1- अबे इससे डरने की ज़रूरत नही है हम दोनो मिलके इसको बेहोश कर देते हैं

फिर यह रंडी हमारा ही साथ देगी हम गाओं में फैला देंगे कि यह इसका रेप कर रहा था

हम दोनो ने इसको बेहोश किया और इसकी इज़्ज़त बचाई

लड़का2- लेकिन वो ठाकुर का भांजा है

लड़का1- अबे पूरा गाओं जानता है बड़े ठाकुर रेपिस्ट का नाम सुनके उसकी जान पहले लेते हैं झूठ या सच बाद में तय करते हैं

लड़का2- तो प्रिन्सिपल को क्यूँ जिंदा छोड़ दिया गया

लड़का1- अबे वो तो छोटे ठाकुर ने किया था

लड़का2- लेकिन बड़े ठाकुर इसको अपना वारिस बना चुके हैं

दिलीप-यह हराम के क्या खुसुर फुसुर कर रहे थे मैं नही जानता लेकिन मेरे बारे में यह नही जानते कि मैं जब विलेन बनता हूँ तो मेरे से बड़ा विलेन कोई नही होता है

दिलीप- कुत्तो अपना प्लान अपनी गान्ड में डाल दो क्यूंकी लखन तुम्हारी गान्ड मारने आ रहा है

लड़का1- कौन लखन

दिलीप- अबे साले इस गाओं में कितने लखन हैं

लड़का2- दिलीप हमे माफ़ करदो हम कभी दोबारा ऐसा नही करेंगे अबे बोल ना

लड़का1- हाँ हम कभी दोबारा ऐसा नही करेंगे

दिलीप- मुझसे माफी मत माँगो इससे माँगो अगर यह माफ़ करेगी तो मैं किसी को कुछ नही बताउन्गी

दोनो लड़के सरपंच की बेटी से माफी माँगने लगे और सरपंच की बेटी दोनो को माफ़ भी करदी दोनो लड़के भाग गये

दोनो लड़कों के भागते ही मैने एक थप्पड़ सरपंच की बेटी के गाल पे छाप दिया

सरपंच की बेटी नीचे गिर गयी

मैं भी ज़मीन पे बैठ गया

और अपना मोबाइल निकालके सरपंच की बेटी की चुदाई का वीडियो ऑन कर दिया

दिलीप- तू समझी होगी कि तू मुझे बेवकूफ़ बना देगी

सरपंच की बेटी- तो फिर उन लड़कों के साथ मुझे भी क्यूँ नही पकड़ा आपने

दिलीप- वो इसलिए मेरी जान कि तुम तीनो मिलके मेरे खिलाफ कुछ साज़िश करते

अब तू अकेली है और मेरे पास है मेरे सिवा तेरा कोई नही है

अब अगर किसी से चुदवाइ है तो तेरी जिंदगी बर्बाद कर दूँगा

सरपंच की बेटी- तुम होते कौन हो मेरी जिंदगी का फ़ैसला करने वाले

मैं किसी से भी चुदवाऊ तुम्हे उससे क्या

दिलीप [वाह आप से सीधा तुम] देखो मैं सिर्फ़ इतना ही कहूँगा मुझे कोई मतलब नही है कि तुम किससे चुदवाती हो

सरपंच की बेटी- तुम मर्द नही हो क्या एक लड़की तुम्हारे सामने पूरी नंगी है और तुम भाषण चोद रहे हो

दिलीप- तुम जैसी लड़की को मैं अपनी मर्दानगी क्यूँ दिखाऊ और हां याद रखना अगर मेरे साथ गेम खेलोगी तो यह वीडियो लखन के पास भी है तुम तीनो को जान से मारके तालाब में फेंक देगा किसी को लाश भी नही मिलेगी यह कहके मैं अपने घर की तरफ चल दिया

दोनो लड़के एक तरफ छुप्के मेरी और सरपंच की बेटी की बात सुन रहे थे.,.
 
अपडेट 137आ

दिलीप- मैने लखन को फोन लगाया

लखन- जी छोटे मालिक

दिलीप- तालाब के पास दो लड़के हैं खाली गन ले जाओ

और हाँ वो 6 गोली वाली ले जाना गन में गोली नही होनी चाहिए

बारी बारी करके दोनो के माथे पे रखके ट्रिग्गर दबा देना

और हां थोड़ा फिल्मी स्टाइल में धमकाना

लखन- जो हुकुम छोटे मालिक

दिलीप- थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा घर

बड़ी नानी से मिलके अपने रूम में आके पढ़ाई करने लगा

थोड़ी देर बाद वँया मेरे रूम में आ गई

उसके हाथो में बुक्स थी

वो बेड पे मेरे सामने बैठ गयी

वँया- कहाँ थे तुम सुबह से

दिलीप-[मेरा मुँह खुला का खुला रह गया वँया मुझसे बात कर रही थी]

विनय के साथ था

वँया- मुझे माफ़ करदो मेरी वजह से तुम बहुत दुखी हो ना

दिलीप- नही वँया ग़लती मेरी थी तुम क्यूँ माफी माँग रही हो

वँया- आज से हम एक नयी शुरुआत करेंगे तुम मेरी पुरानी बात भूल जाओ और मैं तुम्हारी

दिलीप- ठीक है आज से हम एक नयी शुरुआत करेंगे

फिर वँया मेरे साथ पढ़ाई करने लगी

आज वँया का चेहरा वैसा ही था जैसा मैं उसको याद करता था

वोही मुस्कुराहट वोही बोलने का ढंग

वँया मुझसे बात कर रही थी

यही मेरे लिए काफ़ी था

अब मैं वँया को कभी दुख नही दूँगा

उसको कभी नाराज़ नही करूँगा

बड़ी मामी को भी जल्द ही मना लूँगा

लेकिन वँया इतनी जल्दी मान कैसे गयी

पढ़ाई करते हुए हमे दोपहर हो गयी थी

हम दोनो एक साथ खाना खाने नीचे गये

हम दोनो खाना ख़ाके अपने रूम में आगये

10 मिनिट में ही वँया मेरे रूम में आई

वँया- अपनी नई मामी के पास नही जाओगे

दिलीप- [मैं वँया को देखने लगा]

वँया- ऐसे क्या देख रहे हो

दिलीप- तुम मेरे साथ मज़ाक कर रही हो कोई बात नही आज के लिए डिसकाउंट है तुम्हारे लिए

वँया- मैं कोई मज़ाक नही कर रही हूँ

दिलीप- तुम नाराज़ नही होगी अगर मैं नई मामी के पास जाऊ तो

वँया- अब ज़्यादा नाटक मत करो जाओ जल्दी

दिलीप- मैं पहुँचा नई मामी के रूम पे गेट नॉक किया

नई मामी गेट खोलके मुझे देखने लगी

नई मामी- अंदर आओ

[मैं अंदर जाके बैठ गया]

दिलीप- सॉरी बहुत दिन हो गये

आप यह मत समझना कि मैं आपसे सिर्फ़ मूड होता है तब मिलने आता हूँ

नई मामी- मैं जानती हूँ कुछ दिन से तुम बहुत परेशान हो अब बोलो कॉन्सा चॅप्टर पढ़ना है

[1 घंटा तक नई मामी के साथ पढ़ता रहा

फिर वापस अपने रूम में आ गया

वँया मेरा इंतेज़ार कर रही थी

वँया मुझसे कोई सवाल नही पूछी

वापस हम्दोनो पढ़ाई करने लगे

तभी मेरा फोन बजने लगा

मैं फोन उठाया

लखन- छोटे मालिक काम हो गया है

दिलीप- ठीक है

वँया- अच्छा सुनो कल सुबह एक घंटा जल्दी पढ़ाई करेंगे

दिलीप- 2 घंटा जल्दी पढ़ाई करते हैं

वँया- मज़ाक मत करो

दिलीप- सीरीयस हूँ

फिर पढ़ाई करते करते शाम हो गयी

बड़ी मामी आज हम दोनो के लिए दूध लेके आ गई

मैने तो दूध पी लिया

लेकिन वँया मुँह बनाने लगी

बड़ी मामी- क्या हुआ वानु

वँया- अजीब सा टेस्ट है

मैं नही पीउंगी

बड़ी मामी- चलो जल्दी से पीओ देखो दिलीप कितने आराम से दूध पी गया

वँया- यह तो बैल है

बड़ी मामी- वानु

वँया- सॉरी

दिलीप- मैने वँया के हाथ से दूध का ग्लास ले लिया

मामी आप जाओ मैं पिला दूँगा

मामी चली गयी

दिलीप-अब चलो पीओ

वँया- मैं नही पीउन्गी

दिलीप- पीओ

मैने आँखे दिखाई तो

वँया ने अपना मुँह खोल दिया

मैने गिलास वँया के मुँह पे लगा दिया

एक ही साँस में पूरा दूध पी गयी

मैने अपना रुमाल निकालके वँया का मुँह पोछा

वँया- मैं खुद भी पोछ सकती थी

दिलीप- दूध भी खुद पी सकती थी

फिर वँया अपने रूम में चली गयी...
 
अपडेट 138

दिलीप- शाम तो हो ही चुकी थी

एक दिन में दो मुसीबत ख़तम

बिम्ला की बेटी अपनी माँ से नाराज़ नही है

वँया मुझसे नाराज़ नही

रात में खाना ख़ाके अपने रूम में आ गया

विदू से फोन पे बात करके नीचे आया

किरण मौसी के रूम की लाइट बंद थी

शायद किरण मौसी सो गयी होंगी

मैं वापस अपने रूम में आ गया

बेड पे लेट ते ही मीठी नींद आ गई

सुबह में उठा वोही किया जो रोज करता हूँ

घर से निकल ही रहा था कि वँया मेरे पास आ गई

वँया- जल्दी आ जाना आज से हम जल्दी पढ़ाई करने वाले हैं

दिलीप- वो आज थोड़ा लेट आउन्गा

वँया- तुम जाते कहाँ हो

दिलीप- विनय के घर जाता हूँ और कहाँ जाउन्गा

सिर्फ़ आज के लिए कल से तो बाहर ही नही जाउन्गा

पढ़ाई पढ़ाई और सिर्फ़ पढ़ाई

वँया- देखती हूँ तुम अपना यह प्रॉमिस पूरा करते हो कि नही

दिलीप- मैं कसरत करके बिम्ला के घर आ गया

आज मैने कॉंडम भी लिया पेनकिलर और जेल भी लिया

सोचा आज शांति की अच्छे बजाउन्गा

या यूँ कहे तो आज लास्ट दिन है तो पूरे जी जान से बजाउन्गा

बिम्ला- यह तूने मेरी बेटी को क्या कर दिया

दिलीप- मैने क्या किया

बिम्ला- इतने दिन से मेरे साथ बात भी नही कर रही थी

कल अचानक मुझपे अपना प्यार लुटाने लगी

दिलीप- तो आपको तो खुश होना चाहिए

बिम्ला- खुश तो हूँ लेकिन एक दिन में इतना कैसे बदल गई

दिलीप- आप बेकार में चिंता कर रही है हो सकता है वो किसी बात से परेशान हो

बिम्ला- कहीं वो मुझे तेरे साथ तो नही देख ली

दिलीप- मुझे तो गाली दे देके मार डालती अगर वो हमे साथ देख लेती तो आप बेकार में सोच रही हो

बिम्ला- तू तो मेरे लिए कुछ करता नही है लेकिन मैं तेरा एक काम कर चुकी हूँ

दिलीप- कॉन्सा काम

बिम्ला- अंदर जाके देख ले

दिलीप- मैं शांति वाले रूम में आ गया और शांति के पास बैठ गया

शांति थोड़ा शरमा रही थी

बिम्ला बोल रही थी वो मेरा एक काम कर चुकी है

लेकिन मुझे तो याद ही नही है कि मैने बिम्ला को कोई काम दिया था

दिलीप- आज हमारा चुदाई का आखरी दिन है

शांति- जानती हूँ तुम्हारे जैसा प्यार कोई नही कर सकता

लेकिन थोड़ा आराम से करना

दिलीप- [आराम से करना मैं क्या सोचा था और शांति क्या बोल रही है] आप सच में चाहती हैं कि मैं आराम से करूँ

शांति- हाँ तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है ना तेल भी वहाँ पे रक्खा है धीरे धीरे डालना

दिलीप- [शांति कही पागल तो नही हो गयी और दिन बोलती थी दमदार चुदाई करने को

लेकिन आज बोल रही धीरे डालना आराम से करना तेल लगाके करना शांति कोई कुँवारी थोड़ी है

मुझे तो बिम्ला पे गुस्सा आ रहा था

दिलीप- अभी एक मिनिट में आता हूँ मैं रूम से बाहर आ गया

बिम्ला मुझे देख कर मुस्कुराने लगी मैं बिम्ला के पास गया

बिम्ला कुछ बोलने वाली थी उससे पहले ही मैं उसके हाथ पे चींटी काट लिया

बिम्ला- उईइ माआ

दिलीप-मैने चार पाँच और चींटी काट लिया

बिम्ला- पागल तो नही हो गया है देख मेरा हाथ लाल हो गया

दिलीप- दर्द हुआ ना मुझे भी दर्द हो रहा है आज मैं क्या क्या सोचा था और आपने सब कबाड़ा कर दिया

बिम्ला- यह तू क्या बोल रहा है

दिलीप- बिकुल सही बोल रहा हूँ आप की चुदाई नही कर रहा हूँ इसका मतलब आप मुझसे बदला लेंगी

बिम्ला- मैं कुछ समझ ही नही पा रही हूँ

दिलीप- शांति कह रही है आराम से डालना धीरे डालना तेल लगाके डालना यह था आपका काम

बिंला- [गुस्से में] वो क्या तेरी रखैल है क्या तू उसकी कुँवारी गान्ड मारेगा तो वो तो बोलेगी आराम से डालना धीरे डालना तेल लगाके डालना एक तो भली करो उपर से गाली भी खाओ

दिलीप- [बिम्ला की बात सुनके मेरा दिमाग़ सुन्न हो गया]

आपका मतलब है शांति मुझसे गान्ड मरवाने के लिए मान गयी है

बिम्ला- और नही तो क्या अब जल्दी जा

दिलीप- मैं बिम्ला के गाल को चूम लिया और सीधा शांति के रूम में घुस गया.,,..,
 
अपडेट 138अ

दिलीप- मैं शांति के पास गया आप पहले बता देती तो क्या जाता

शांति- तुम्हे पता नही था

दिलीप- क्या नही पता था

शांति- तुम बड़े बदमाश हो

यही कि तुम आज मेरी गान्ड मारने वाले हो

दिलीप- अब तो पता चल गया अब शुरू करते हैं आप अपने कपड़े उतारो

शांति- तुम ही उतार दो

और हाँ आज मेरी चुदाई ऐसे करना जैसे मैं इस दुनिया की आखरी लड़की हूँ

दिलीप- आप कुछ ज़्यादा नही बोल गयी

शांति- नही और तुम चुदाई कम बातें ज़्यादा करते हो

दिलीप- मैने पहले शांति के सारे कपड़े उतार दिए फिर अपने उतार दिया

शांति मेरे लंड को देख रही थी मैं शांति को जी भरके देख रहा था

आज मैं शांति पर कोई रहम नही करने वाला था

पेनकिलर तो था ही मेरे पास

मैने शांति को अपनी बाहो में ले लिया

मैं शांति के जिस्म को फील कर रहा था

शांति अपनी नाभि पे मेरे लंड को फील कर रही थी

मैं शांति के होंठ पे अपने होंठ रखके चूसने लगा

शांति भी मेरे निचले होंठ को चूस रही थी

शांति पहले के मुक़ाबले ज़्यादा जोश के साथ मेरे होंठ चूस रही थी

मैं भी शांति को पूरे जोश के साथ किस करने लगा

शांति मेरे सर में अपनी उंगली फिरा रही थी

मैं शांति की गान्ड को अपने दोनो हाथो से मसल रहा था

फिर मैने किस तोड़ दिया

मैं और शांति ज़ोर से साँसे लेने लगे

लेकिन आज आराम हराम था हमारे लिए

एक बार फिर हम दोनो के होंठ जुड़ गये

अब शांति मेरी ज़ुबान चूस रही थी

और मैं उसकी गान्ड को मसलके लाल करने लगा

थोड़ी देर किस करने के बाद मैं शांति को बेड पे लेटा दिया

मैं शांति के उपर आगया

और उसकी गर्दन को चूमने लगा शांति आहे भरने लगी

मैं शांति के दोनो बूब्स को दबाने लगा

गर्दन चूमने के बाद मैं शांति के गालो को चूमने लगा

गर्दन को चुमके तो लाल कर ही दिया था

अब गालो को चूम कर लाल करने लगा

और बूब्स के निपल को अपने अंगूठे में पकड़ कर खींचने लगा

शांति को खट्टा मीठा दर्द होने लगा

शांति को गालो को चूमने के बाद मैने शांति को पलट दिया

शांति की पीठ मैं आज तक नही चूमा था

मैं शांति की गर्दन के पीछे वाले हिस्से को चूमने लगा

शांति तो मस्त हो गयी

फिर मैं अपनी ज़ुबान से शांति की गर्दन को चाटने लगा

शांति अपने दोनो हाथो से चादर पकड़ ली

मैं शांति की गर्दन से नीचे आया और शांति की पीठ चूमने लगा

शांति सिसकिया लेने लगा

फिर मैं शांति के पीठ चूमते हुए नीचे आया शांति की कमर पे अपनी ज़ुबान फिराने लगा

शांति को तो यकीन नही हो रहा था

कि मैं इतनी शिद्दत से उसके पूरे जिस्म को चूम रहा था

शांति की पूरी पीठ मेरे थूक से गीली हो चुकी थी

मुझे शांति की गान्ड मारनी थी लेकिन उसको पूरा प्यार भी देना था

मैने वापस शांति को पलटा दिया

शांति की तेज़ सांसो के साथ उसके बूब्स भी उपर नीचे होने लगे

मैं शांति के बूब्स को मुँह में लेके चूसने लगा

दूसरे को हाथो से दबाने लगा

यही मैने दूसरे बूब्स के साथ किया

मैं शांति के बूब्स के चारो तरफ अपनी ज़ुबान फिराने लगा

शांति मस्त होके और ज़ोर से चूसने को बोलने लगा

मैं शांति के दोनो बूब्स को चुस्के लाल कर दिया

फिर मैं शांति के पेट को चूमने लगा

थोड़ी देर बाद मैं जैसे ही शांति के पेट पे अपनी ज़ुबान फिराया शांति की चूत पानी छोड़ दी

फिर भी मैं शांति के पेट पे अपनी ज़ुबान फेरने लगा

और शांति के बूब्स दबाने लगा

शांति को मज़ा आ रहा था कि नही यह मैं नही जानता लेकिन वो सिसकिया बड़े मज़े से ले रही थी

अब बारी थी शांति की चूत चूसने की...
 
अपडेट 138बी

दिलीप- मैं शांति की टाँगो के बीच आ गया

शांति की चूत काफ़ी खुल गयी थी

जब से मैने शांति को चोदा था

शांति की चूत में 2 उंगली आराम से चली जाती थी

अब 3 उंगली जाती है

मैं शांति की चूत पे अपना मुँह रखके चूसने लगा

शांति आह ऊवू कर रही थी

शांति अपनी गान्ड उठा उठाके अपनी चूत चुस्वा रही थी

मैं पूरे जोश के साथ शांति की चूत चूस रहा था

कभी चूत के दाने को अपने मुँह लेके चूस्ता कभी अपनी ज़ुबान से चूत को कुरेदता

अब मेरे लंड में ज़्यादा दर्द होने लगा था

फिर भी मैं शांति की चूत चूस्ता रहा

थोड़ी देर तक चूत चूसने के बाद शांति की चूत पानी छोड़ दी

मैं सारा पानी पी गया

शांति सोची कि अब मैं उसकी चूत नही चुसूंगा

शांति जैसे ही उठने लगी मैने उसकी गान्ड पे थप्पड़ मार दिया

शांति वापस लेट गयी

मैं वापस शांति की चूत चूसने लगा

चूत चुस्ते हुए एक ही बार में मैं अपनी 3 उंगली शांति की चूत में डाल दिया

शांति की आह निकल गयी

मैं बिना रुके अपनी तीनो उंगली से शांति की चूत चोदने लगा

शांति- अया दिलीप और ज़ोर से चूसो मेरी चूत को अया अया तुम तो अभी जवान ही हुए आआह हो और इतना जोश अया उईईइ माआ मर गयी और शांति की चूत एक और बार पानी छोड़ दी सारा पानी मेरे मुँह में आ गया

मैं उठके खड़ा हो गया और बेड से नीचे उतरके शांति के मुँह के पास आ गया

शांति का सर बेड के एक दम किनारे था

मैं अपना लंड शांति के होंटो पे रगड़ने लगा

शांति अपना मुँह खोलदी

मैं एक ही बार में अपना आधा लंड शांति के मुँह में डाल दिया

मेरा लंड शांति के मुँह में जाते ही ठंडा होने लगा मेरे लंड का दर्द भी कम होने लगा

मैं अपना लंड शांति के मुँह में अंदर बाहर करने लगा

शांति अपने हाथो से मेरे आंडो को सहलाने लगी

लेकिन मेरे लंड को टच नही की

मैं शांति के मुँह मे अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था

शांति एक हाथ में मेरे आंडो को दबा ली

मैं मस्त होने लगा

इसी जोश में मैं अपना पूरा लंड शांति के मुँह में डाल दिया

कुछ सेकेंड में मैं वापस शांति के मुँह को अपने आधे लंड से चोदने लगा

मेरा पूरा लंड शांति के मुँह में जाने से चिकना हो गया था

मैं शांति के मुँह से अपना लंड निकाल लिया

शांति बिना कुछ कहे घोड़ी बन गई

मैं तेल लेके बेड पे चढ़ गया

शांति के पीछे आके अपना लंड शांति की चूत पे रगड़ने लगा

शांति अपना मुँह तकिये में दबा ली

मैं शांति की कमर को पकड़ा और पूरी ताक़त से धक्का मारा

मेरा पूरा लंड शांति की चूत को चीरता पूरा समा गया

वैसे तो शांति 3 बार झड चुकी थी

लेकिन उसकी चीख तकिये से बाहर भी आरहि थी

मैं बिना रुके अपना आधा लंड शांति की चूत से बाहर निकालके शांति को चोदने लगा

शांति अभी भी अपना मुँह तकिये में दबाए हुए थी

मैं शांति के बूब्स को अपने हाथो में लेके शांति को चोदने लगा

थोड़ी देर बाद शांति आहे भरने लगी

मैं यही तो चाहता था

मैं पूरा लंड शांति की चूत से बाहर निकाल लिया

और दोबारा एक ही बार में डाल दिया

ऐसा मैं 4 बार किया शांति को फिरसे दर्द होने लगा

इस बार मैं अपना लंड बाहर निकाला और इतना तेज धक्का लगाया

कि अगर मैं शांति की कमर अपने हाथो से नही पकड़े रहता तो शांति सीधा बेड से नीचे गिर जाती

शांति रोने लगी मैने तेल अपने हाथ में लिया शांति की गान्ड पे मलने लगा

शांति को महसूस ही नही हुआ कि उसकी गान्ड पे मैं तेल मल रहा हूँ

उसकी चूत में जो दर्द हो रहा था

अब जब गान्ड के दर्द के लिए चूत का दर्द तो सहना ही पड़ेगा...,..
 
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