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- Dec 5, 2013
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दिलीप- थोड़ी देर तक मैं सबके साथ बैठा रहा फिर मुझे एक आइडिया आया बड़ी नानी आज क्यूँ ना हम सब शहर घूमने जाएँ वहीं हम खाना भी खा लेंगे और आप सब घूम फिर भी लीजिएगा
बड़ी नानी- मैं नही जाउन्गी तुम सब जाओ
बड़ी मामी- मेरा भी मन नही है
दिलीप- किरण मौसी आप भी बोल दीजिए कि आप नही जाएँगी
सब तो नही बोल ही चुकी हैं यह कहके मैं अपने रूम में आ गया
मुझे कोई घूमना थोड़ी ही अच्छा लगता है
मैं तो बस चाहता था कि आज अपनी फॅमिली के साथ अच्छे से एंजाय कर लूँ
1 महीना 10 दिन तो मैं बिज़ी ही रहूँगा
मैं टाइम देखा तो 11एएम हुआ था मन नही लग रहा था
विदू को फोन भी नही कर सकता था
उनका यह फाइनल एग्ज़ॅम था
वो तो अभी पढ़ाई कर रही होंगी
फिर भी मैने फोन लगाया
एक रिंग भी पूरा नही हुआ कि विदू फोन उठा ली
विदू- कैसे हैं आप
दिलीप- ठीक हूँ आप कैसी हैं
विदू- मेरे पतिदेव ठीक तो मैं भी ठीक
दिलीप- आप पढ़ाई कर रही थी ना
विदू- आपको कैसे पता
दिलीप- आपका पतिदेव जी हूँ
विदू- बड़े आए
दिलीप- एक बात पुच्छू
विदू- पूछिए
दिलीप- कल आपने यह क्यूँ कहा कि हम रात में ही बात करेंगे
विदू- रात को आपकी मीठी आवाज़ सुनने के बाद बहुत अच्छी नींद आती है
दिलीप- क्यूँ दिन को मेरी आवाज़ मीठी नही लगती
विदू- दिन में आपसे बात करती हूँ तो हर वक़्त आपकी याद आती है
मैं ही जानती हूँ कि मैं आपके बिना कैसे रहती हूँ
अगर कोई मुझे आपके साथ बात करते हुए सुन ले
तो वो मुझे पागल समझेगा
दिलीप- उसके दाँत तोड़ दूँगा आप कभी ऐसा मत बोलना मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ
और मैं जानता हूँ मैं आपसे जितना प्यार करता हूँ उससे कई ज़्यादा आप मुझसे प्यार करती हैं
विदू- रोना तो मेरा स्टाइल है आप क्यूँ रो रहे हैं
दिलीप- [आपको अगर बताऊ कि मैं आपके लायक नही हूँ आप के प्यार के सामने मेरा प्यार तो कुछ भी नही है
मैं तो सोचा भी नही कि मुझे इतना प्यार करने वाली लड़की मिलेगी]
विदू- क्या हुआ आप कुछ बोल नही रहे हैं
दिलीप- नही बस कुछ सोच रहा था
विदू- आज आप पढ़ाई क्यूँ नही कर रहे हैं
दिलीप- ऐसे ही बचपन से सनडे को पढ़ाई नही करता हूँ मन ही नही करता है
विदू- वानु की तबीयत कैसी है
दिलीप- ठीक है
विदू- दो तीन दिनो से उससे बात कर रही हूँ वो ना पहले की तरह हँसती है ना पहले की तरह मेरे साथ बात करती है
मैं कुछ पूछती हूँ तो हाँ या ना में जवाब देती है
दिलीप- [डर तो लग रहा था लेकिन बताना तो था ही] वो मुझसे नाराज़ है
विदू- क्यूँ
दिलीप- [मैं विदू को सिर्फ़ इतना बताया कि मैं नई मामी के साथ 1घंटा पढ़ाई करता हूँ इसीलिए वँया मुझसे नाराज़ है
फिर मैं चुप हो गया]
विदू- आप मुझे पूरी बात बताइए कि आपने ऐसा क्यूँ किया
दिलीप- मैं 18साल तक आप सबके साथ नही था लेकिन मुझे इससे कोई फरक नही पड़ता था हाँ दुख होता था लेकिन आज आप सब मेरे साथ है मेरी फॅमिली हैं मेरी फॅमिली में से अगर कोई मुझसे बात ना करे तो मुझे बहुत दुख होगा
दिलीप- वैसे ही वो लड़की जिससे बड़े मामा शादी करके इस घर में लाए आप में से कोई भी ना उससे बात करता है
और ना ही उसे देखना चाहता है लेकिन अब उसका हमारे सिवा कोई नही है आपको पता है दिन भर जब हम सब बाते करते हैं तो वो गेट के पीछे से छुप्के हमे देखती है हमारे खुश होने पर वो मुस्कुराती है हमारे दुख होने पर वो उदास हो जाती है
क्यूंकी वो हमे अपना मानती है आप के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ अब आप बताइए कि आप क्या चाहती हैं आप जो कहेंगी मैं करूँगा
थोड़ी देर तक विदू चुप रही
विदू- आप समझते हैं कि हम सब उससे इस लिए गुस्सा हैं कि वो पिताजी की दूसरी बीवी है मैं उससे इसलिए बात नही करती हूँ कि मेरी माँ उससे बात नही करती है आपको पता है दिन में कितना भी अंधेरा हो जाए उससे कोई फरक़ नही पड़ता
लेकिन रात को एक दिया भी जलता दिख जाए तो हम लोग खुश हो जाते हैं माँ भी उसी दिया की तरह होती है
माँ खुश रहेगी तो उसके बच्चे खुश रहेंगे आप अगर वँया को मनाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले माँ को मनाना होगा
मा अगर उसको अपना लेंगी तो वँया भी अपनाएगी मैं भी अपनाउंगी सब उसको अपना लेंगे
फिर विदू फोन काट दिया,..
दिलीप- थोड़ी देर तक मैं सबके साथ बैठा रहा फिर मुझे एक आइडिया आया बड़ी नानी आज क्यूँ ना हम सब शहर घूमने जाएँ वहीं हम खाना भी खा लेंगे और आप सब घूम फिर भी लीजिएगा
बड़ी नानी- मैं नही जाउन्गी तुम सब जाओ
बड़ी मामी- मेरा भी मन नही है
दिलीप- किरण मौसी आप भी बोल दीजिए कि आप नही जाएँगी
सब तो नही बोल ही चुकी हैं यह कहके मैं अपने रूम में आ गया
मुझे कोई घूमना थोड़ी ही अच्छा लगता है
मैं तो बस चाहता था कि आज अपनी फॅमिली के साथ अच्छे से एंजाय कर लूँ
1 महीना 10 दिन तो मैं बिज़ी ही रहूँगा
मैं टाइम देखा तो 11एएम हुआ था मन नही लग रहा था
विदू को फोन भी नही कर सकता था
उनका यह फाइनल एग्ज़ॅम था
वो तो अभी पढ़ाई कर रही होंगी
फिर भी मैने फोन लगाया
एक रिंग भी पूरा नही हुआ कि विदू फोन उठा ली
विदू- कैसे हैं आप
दिलीप- ठीक हूँ आप कैसी हैं
विदू- मेरे पतिदेव ठीक तो मैं भी ठीक
दिलीप- आप पढ़ाई कर रही थी ना
विदू- आपको कैसे पता
दिलीप- आपका पतिदेव जी हूँ
विदू- बड़े आए
दिलीप- एक बात पुच्छू
विदू- पूछिए
दिलीप- कल आपने यह क्यूँ कहा कि हम रात में ही बात करेंगे
विदू- रात को आपकी मीठी आवाज़ सुनने के बाद बहुत अच्छी नींद आती है
दिलीप- क्यूँ दिन को मेरी आवाज़ मीठी नही लगती
विदू- दिन में आपसे बात करती हूँ तो हर वक़्त आपकी याद आती है
मैं ही जानती हूँ कि मैं आपके बिना कैसे रहती हूँ
अगर कोई मुझे आपके साथ बात करते हुए सुन ले
तो वो मुझे पागल समझेगा
दिलीप- उसके दाँत तोड़ दूँगा आप कभी ऐसा मत बोलना मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ
और मैं जानता हूँ मैं आपसे जितना प्यार करता हूँ उससे कई ज़्यादा आप मुझसे प्यार करती हैं
विदू- रोना तो मेरा स्टाइल है आप क्यूँ रो रहे हैं
दिलीप- [आपको अगर बताऊ कि मैं आपके लायक नही हूँ आप के प्यार के सामने मेरा प्यार तो कुछ भी नही है
मैं तो सोचा भी नही कि मुझे इतना प्यार करने वाली लड़की मिलेगी]
विदू- क्या हुआ आप कुछ बोल नही रहे हैं
दिलीप- नही बस कुछ सोच रहा था
विदू- आज आप पढ़ाई क्यूँ नही कर रहे हैं
दिलीप- ऐसे ही बचपन से सनडे को पढ़ाई नही करता हूँ मन ही नही करता है
विदू- वानु की तबीयत कैसी है
दिलीप- ठीक है
विदू- दो तीन दिनो से उससे बात कर रही हूँ वो ना पहले की तरह हँसती है ना पहले की तरह मेरे साथ बात करती है
मैं कुछ पूछती हूँ तो हाँ या ना में जवाब देती है
दिलीप- [डर तो लग रहा था लेकिन बताना तो था ही] वो मुझसे नाराज़ है
विदू- क्यूँ
दिलीप- [मैं विदू को सिर्फ़ इतना बताया कि मैं नई मामी के साथ 1घंटा पढ़ाई करता हूँ इसीलिए वँया मुझसे नाराज़ है
फिर मैं चुप हो गया]
विदू- आप मुझे पूरी बात बताइए कि आपने ऐसा क्यूँ किया
दिलीप- मैं 18साल तक आप सबके साथ नही था लेकिन मुझे इससे कोई फरक नही पड़ता था हाँ दुख होता था लेकिन आज आप सब मेरे साथ है मेरी फॅमिली हैं मेरी फॅमिली में से अगर कोई मुझसे बात ना करे तो मुझे बहुत दुख होगा
दिलीप- वैसे ही वो लड़की जिससे बड़े मामा शादी करके इस घर में लाए आप में से कोई भी ना उससे बात करता है
और ना ही उसे देखना चाहता है लेकिन अब उसका हमारे सिवा कोई नही है आपको पता है दिन भर जब हम सब बाते करते हैं तो वो गेट के पीछे से छुप्के हमे देखती है हमारे खुश होने पर वो मुस्कुराती है हमारे दुख होने पर वो उदास हो जाती है
क्यूंकी वो हमे अपना मानती है आप के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ अब आप बताइए कि आप क्या चाहती हैं आप जो कहेंगी मैं करूँगा
थोड़ी देर तक विदू चुप रही
विदू- आप समझते हैं कि हम सब उससे इस लिए गुस्सा हैं कि वो पिताजी की दूसरी बीवी है मैं उससे इसलिए बात नही करती हूँ कि मेरी माँ उससे बात नही करती है आपको पता है दिन में कितना भी अंधेरा हो जाए उससे कोई फरक़ नही पड़ता
लेकिन रात को एक दिया भी जलता दिख जाए तो हम लोग खुश हो जाते हैं माँ भी उसी दिया की तरह होती है
माँ खुश रहेगी तो उसके बच्चे खुश रहेंगे आप अगर वँया को मनाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले माँ को मनाना होगा
मा अगर उसको अपना लेंगी तो वँया भी अपनाएगी मैं भी अपनाउंगी सब उसको अपना लेंगे
फिर विदू फोन काट दिया,..