अपडेट 131
दिलीप- बिम्ला गान्ड मरवाने के लिए तो नही मानी
मैं अपने रूम में आके पढ़ाई करने लगा
पढ़ाई करते हुए शाम हो गयी
फिर भी मैं पढ़ता रहा
रात का खाना ख़ाके मैं छत पे आ गया
मेरे पीछे वँया भी आई
आधे घंटे तक मैं छत पे घूमता रहा
वँया मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी
फिर मैं अपने रूम में आ गया
2 दिन से वँया मुझसे बात नही की थी
पर उसको देख कर ऐसा नही लगता था
कि वो इस बात से परेशान है
थोड़ी देर तक विदू से बात किया
2 दिन से नींद भी नही आरहि थी
मैं नीचे आया किरण मौसी के रूम पे गेट नॉक किया
किरण मौसी- क्या हुआ दिलीप
दिलीप- नींद नही आ रही है
किरण मौसी- आ जाओ अंदर
दिलीप- मैं किरण मौसी की गोद में सर रख के लेट गया
किरण मौसी से बात करने में मुझे झीजक नही होती थी
थोड़ी देर बाद सच में नींद आ गई
सुबह उठके अपने रूम में आके रेडी हो गया
नाश्ता करके छत पे आ गया
वँया भी आई
लेकिन बात नही की
मैं कसरत करने चला गया
कसरत करके बिम्ला के घर आ गया
बिम्ला- तुम मेरा एक काम करोगे
दिलीप- बोलिए
बिंला- मेरी बेटी के साथ थोड़ी देर पढ़ाई करेगा
दिलीप- पहले यह तो बताइए कि हुआ क्या
बिंला- आज कल मेरी बेटी ठीक से पढ़ाई नही कर रही है
कहीं वो फैल तो नही हो जाएगी
दिलीप- आपको कैसे पता आप तो घर पे रहती हैं
बिम्ला- मेरे बेटी के साथ जो लड़की पढ़ती है वो मुझे आज बताने आई थी
कि वो क्लास में पढ़ाई नही करती है
दिन भर पता नही क्या सोचती रहती है
अगर मैं पढ़ी लिखी होती तो तुझे नही कहती
दिलीप- ठीक है शाम में आके पढ़ लूँगा आपकी बेटी के साथ
यह सुनके बिम्ला मुझे किस करने लगी
मैं भी बिम्ला को किस किया
दिलीप- आप यह बताओ कि आप की बेटी कब से पढ़ाई पे ध्यान नही दे रही है
बिंला- यही कुछ 10 15 दिन से
फिर मैं शांति की चुदाई करके घर आ गया
लेकिन मुझे आज शांति थोड़ी उदास लग रही थी
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अब वँया तो मान ही नही रही थी
मैं एक लेटर लिखा कि
तुम मुझसे बात नही करना चाहती मत करो
लेकिन मैं तुम्हारे साथ पढ़ाई करूँगा
तुमको अच्छा लगे या ना लगे
मैं वो लेटर और अपनी किताब लेके वँया के रूम में आ गया
वँया मुझे देख कर चौंक गयी
मैं वँया को वो लेटर दे दिया
वँया वो लेटर पढ़ने लगी
फिर उसने मेरी तरफ देख कर अपनी गर्दन में हाँ में हिला दिया
फिर मैं वँया के साथ पढ़ाई करने लगा
अब सिर्फ़ दस दिन बचे थे एग्ज़ॅम को
पता नही मैं फर्स्ट आउन्गा कि नही
यह तो एग्ज़ॅम के बाद पता चलेगा
अभी तो वँया को मनाना ज़रूरी था
मैं शाम को बिम्ला के घर आ गया
बिंला की बेटी किचन में थी
बिम्ला- अब तू जाके पढ़ाई कर
बिंला की बेटी मेरे साथ पढ़ाई करने लगी
दिलीप- तू आज कल पढ़ाई क्यूँ नही करती
बिंला की बेटी- करती तो हूँ
दिलीप- देख तेरी माँ तुझे कैसे कैसे पढ़ा रही है और अगर तू पढ़ेगी नही तो तू अपनी माँ का ख्याल कैसे रखेगी
बिंला की बेटी- क्यूँ आप हो ना मेरी माँ का ख्याल रखने के लिए
दिलीप- [बिंला की बेटी क्या बोल रही थी यह तो मैं समझ गया था
लेकिन वो ऐसे डाइरेक्ट मुझसे बात करेगी मैं कभी सोचा भी नही था]
मैं कुछ समझा नही
बिंला की बेटी- आप समझे नही या समझना नही चाहते
बिम्ला- तू पढ़ाई क्यूँ नही कर रही है
दिलीप- फिर बिंला की बेटी कुछ नही बोली
मैं बिंला की बेटी की बात को सोचके परेशान हो गया
कि बिंला की बेटी अब अपनी माँ को ग़लत समझ रही है
या यूँ कहे तो वो अपना माँ को रंडी समझ रही है
जो ग़लत है उसकी माँ दिल की बुरी नही है
मुझे उसे समझाना पड़ेगा
मैं घर आ गया...