Incest मैं अपने परिवार का दीवाना - Page 13 - SexBaba
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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 112

दिलीप- वँया रोना बंद करो विद्या दी को कुछ नही हुआ है

वँया- अरुणा दी तो

दिलीप- बोला ना चुप करो मैने वँया को अपने आपसे अलग किया चलो नीचे हम सब शहर जाने वाले हैं

मैं और वँया नीचे आए

वँया के रोने की आवाज़ सुनके बड़ी मामी बड़ी नानी और बड़े मामा हमारे पास आगये

बड़ी नानी- क्या हुआ दिलीप वँया क्यूँ रो रही है

बड़ी मामी- वानु क्या हुआ बेटा क्यूँ रो रही है

वँया बड़ी मामी के गले लग्के रोने लगी

बड़े मामा- दिलीप

दिलीप- मैने कुछ नही किया है अरुणा दी का फोन आया था वो कह रही थी कि विद्या दी ने अपने हाथ की नस काट ली है

और वो हॉस्पिटल में है

यह सुनके सबके पैरो तले ज़मीन खिसक गयी वँया के साथ बड़ी मामी भी रोने लगी और बड़े मामा ने मुझे थप्पड़ मार दिया थप्पड़ इतना ज़ोर का था कि मेरे होंठ फॅट गये

बड़े मामा- तुम यह बात इतने आराम से बोल रहे हो

[चीखके] लखन

लखन दौड़ता हुआ अंदर आया

लखन- जी मालिक

बड़े मामा- लखन गाड़ी निकालो हम जतिन के शहेर जा रहे हैं जल्दी

लखन गाड़ी लेके बाहर में आगया सब लोग गाड़ी में जाके बैठ गये

बड़ी नानी मेरा हाथ पकड़के मुझे दूसरी गाड़ी के पास ले गयी

फिर मुझे अंदर लेके बैठ गयी

गाड़ी में नई मामी भी बैठी थी

फिर दोनो गाड़ी चल पड़ी

मेरे साथ सिर्फ़ बड़ी नानी और नई मामी थी गाड़ी में

बड़ी नानी अपने आँचल से मेरे होंठ पे जो खून जम गया था वो सॉफ करने लगी

दिलीप- बड़ी नानी मामा ने मुझे क्यूँ मारा अरुणा दी तो मज़ाक कर रही थी

बड़ी नानी- बेटा तेरी तबीयत ठीक नही है तू सो जा

दिलीप- [मुस्कुरा कर] बड़ी नानी मुझे क्या हुआ है आप लोग ही बिना मतलब के परेशान हो रही हैं

बड़ी नानी- तुझे मेरी कसम तू सो जा

मैने बड़ी नानी के गोद में अपना सर रख दिया नींद तो नही आई 3 घंटे में हम लोग हॉस्पिटल पहुँचे

बड़े मामा और बड़ी मामी वँया सब दौड़ते हुए हॉस्पिटल के अंदर गये मैं आराम से अंदर गया

सब बहने रो रही थी

बड़ी मामी सी मामी के गले लग्के रोने लगी

बड़े मामा की आँखों से आँसू बहने लगे

थोड़ी देर बाद डॉक्टर आइसीयू से बाहर आया

बड़े मामा- डॉक्टर साहब कैसी है हमारी बेटी

डॉक्टर- हम लोग पूरी कोशिश कर रहे हैं पेशेंट का बहुत खून बह चुका है बाकी जो भगवान की मर्ज़ी होगी वोही होगा

यह सुनके बड़े मामा ने डॉक्टर का कॉलर पकड़ लिया

बड़े मामा- डॉक्टर मेरे खून की एक एक बूँद मेरी बेटी को दे दोलेकिन अगर मेरी बेटी को कुछ हो गया तो इस हॉस्पिटल को शमशान भूमि में बदल दूँगा

तभी छोटे मामा आगये

छोटे मामा- भाई साहब छोड़िए इनको

कितनी कोशिश करने के बाद बड़े मामा ने डॉक्टर का कॉलर छोड़ दिया

छोटे मामा- सॉरी डॉक्टर वेरी सॉरी

डॉक्टर- इट्स ओके ठाकुर साहब मुझे पता हैं यह काफ़ी परेशान हैं और यह हॉस्पिटल आपका ही है

आप समझ सकते हैं कि हम अपनी जी जान से कोशिश कर रहे हैं यह कहके डॉक्टर आइसीयू में चला गया

शाम हो गई लेकिन ओपरेशन अभी तक चल रहा था सबकी आँखो से आँसू निकल रहे थे लेकिन मैं मानने को तय्यार ही नही था कि विदू अपनी जिंदगी के लिए मौत से लड़ रही है

तभी डॉक्टर और नर्सस आइसीयू से बाहर आगये

बड़े मामा- डॉक्टर साहब मेरी बेटी तो ठीक है ना

डॉक्टर- सॉरी हम ने बहुत कोशिश की लेकिन ऐसा लगता है कि पेशेंट जीना ही नही चाहती थी शी ईज़ डेड

बड़े मामा- मतलब

डॉक्टर- अब वो इस दुनिया में नही रही...
 
अपडेट 113

दिलीप- यह सुनते ही बड़े मामा दौड़के आइसीयू में गये

बड़े मामा के पीछे बड़ी मामी बड़ी नानी और वँया भी दौड़ कर अंदर चली गयी

छोटे मामा और किसी को भी अंदर नही जाने दे रहे थे

फिर बड़ी मामी बेहोश हो गयी

उनको दूसरे रूम में शिफ्ट किया गया

थोड़ी देर बाद सब बहने एक एक करके अंदर चली गयी

मैं आइसीयू के बाहर एक साइड में खड़ा होके यह सब देख रहा था

थोड़ी देर बाद छोटे मामा मेरे पास आए

छोटे मामा- दिलीप तुम भी चलके विद्या को देख लो विद्या तुम्हारी भी तो बहेन थी

दिलीप- आप क्या बोल रहे है मेरी कुछ भी समझ में नही आरहा है

छोटे मामा- दिलीप विद्या मर चुकी है

दिलीप- ठीक है मैं आता हूँ

छोटे मामा चले गये

मैं हॉस्पिटल से बाहर आया और लखन के पास गया

दिलीप- लखन मुझे लग रहा है कि कुछ गड़बड़ है

लखन- क्या गड़बड़ है छोटे मालिक

दिलीप- कुछ लोगो के पास मैने गन्स देखी हैं

लखन- क्या आज तो हमारे पास आदमी भी नही हैं कितने लोग हैं

दिलीप- 7 8 लोग होंगे

लखन कुछ सोचने लगा

लखन अपने पीछे से एक गन निकालके मुझे दे दिया

लखन- आप यह बड़े मालिक को दे दीजिए मैं देखता हूँ वो कौन लोग हैं

लखन चला गया

मैं गन अपने पीछे पैंट में घुसा लिया

और पहुँचा आइसीयू के बाहर धीमे कदमो से अंदर गया

बड़े मामा एक लाश के सर के पास बैठे थे

वँया उसके पैरो के पास बैठी थी

अब मुझे तो यकीन था कि यह मेरी विदू नही है

फिर भी मैं उस लाश के पास गया

लाश को सफेद कपड़े में ढका हुआ था

मैं लाश के पास गया

और अपने हाथ से कपड़े को नीचे करने लगा

जैसे ही मैं उस लाश का चेहरा देखा

मेरी आँखो से मेरे आँसू सैलाब बनके बहने लगे

मेरी दुनिया उजड़ चुकी थी क्यूंकी वो लाश नही थी वो मेरी विदू थी

जो मुझसे किए हर वादे को तोड़ के इस दुनिया से जा चुकी थी

अगर विदू मुझे छोड़ देती तो मैं जी भी लेता

लेकिन सिर्फ़ मेरी वजह से मेरी विदू इस दुनिया में नही थी

दिलीप- विद्या दी उठिए ना

मैं विद्या दी को आवाज़ देता रहा

लेकिन विद्या दी नही उठी

तभी बड़ी नानी मेरे कंधे पे हाथ रख दी

दिलीप-बड़ी नानी विद्या दी उठ क्यूँ नही रही हैं

बड़ी नानी- बेटा अब वो कभी नही उठेगी

दिलीप- अरे हां मैं भी कितना पागल हूँ यह तो मेरी प्यारी विदू है

सब सोचने लगे की मैं प्यार से विद्या दी को विदू कह रहा हूँ

मैने विदू का हाथ पकड़ लिया

आपको याद है आप मुझसे कितना प्यार करती थी

थी नही हैं

देखिए ना आपका दिलीप आपके पास है

आपका हाथ पकड़े हुए

अपनी आँखें खोलिए ना

आप मेरे साथ मज़ाक कर रही हैं ना

लगता है कल की बात से आप मुझसे नाराज़ हैं

होना भी चाहिए मैने काम ही ऐसा किया है

[सब लोग आँखें फाड़के मुझे देख रहे थे किसी को भी मेरी बाते समझ में नही आरहि थी]

अरे हां मैं तो भूल ही गया कि आप तो मुझे प्यार से पतिदेव जी कहती हैं

[यह सुनके वहाँ के हर शख्स के पैरो तले ज़मीन खिसक जाती है]

मैं विदू का हाथ पकड़े हुए बोला --देखिए ना आपके पतिदेव जी आपके सामने खड़े हैं

[बड़े मामा को तो समझ ही नही आरहा था कि वो अपनी बेटी के लिए दुखी हो या मुझपे गुस्सा]

बड़े मामा- [चीखके]दिलीप

दिलीप- मैं बिना देखे बड़े मामा की तरफ हाथ कर दिया] मैं अपनी विदू से बात कर रहा हूँ

एक बार मेरी विदू मुझे देखले फिर आप मुझे जान से मार दीजिएगा मेरे साथ जो करना हो कीजिएगा

[किसी को भी यह उम्मीद नही थी कि मैं जो बड़े मामा के नाम से काँपने लगता था वो आज बड़े मामा को चुप रहने को कह रहा है उसके बाद बड़े मामा कुछ नही बोले बड़ी नानी तो मुझे देखती रह गयी]...
 
अपडेट 114

दिलीप- मैं विदू के पास बैठ गया

आपको पता है कल मैं कितना रोया आज फिर आप मुझे रुला रही हैं

मुझे पता है कि मैने कल फोन तोड़के ग़लत किया मुझे आपसे पूरी बात करनी चाहिए थी

आप तो कहती थी यह मैं थी क्यूँ बोलता हूँ

कहती हैं कि आप मुझसे बहुत प्यार करती हैं

उठिए ना आप मेरी बात नही मानेंगी आप तो मुझसे रूठ गयी

मुझे आपको मनाना पड़ेगा

अच्छा मेरे लिए नही उठना चाहती हैं आप

आप वँया के लिए उठ जाइए

देखिए ना वँया कितना रो रही है

उठिए ना आप उठ जाइए आपके बदले मैं अपनी जान दे दूँगा

बड़ी नानी मेरे पास आगयि और मेरे सर पे हाथ रखके

बड़ी नानी- बेटा वो अब नही उठेगी वो जा चुकी है

दिलीप- ऐसा मत बोलिए वो यही पे है यह मुझे प्यार करती हैं यह मेरी बात ज़रूर मानेंगी

बड़ी नानी- बेटा संभाल अपने आपको अब वो नही उठेगी

बड़े मामा- बहुत हो गया तुम्हारा नाटक अब जाके साइड में खड़े हो जाओ दिमाग़ तो नही खराब हो गया है तुम्हारा

यह क्या विदू विदू लगा रखा है

दिलीप- आप लोग ऐसे नही मानेंगे

[मैने अपने पीछे से गन निकालके अपनी कनपटी पे लगा दिया सब की चीख निकल गयी]

अब अगर आप में से कोई कुछ बोला तो मैं अपने आप को गोली मार लूँगा

[मैने अपनी बहनो की तरफ देखा सब रो रही थी]

आप सब रोना बंद कीजिए कोई मरा नही है यहाँ पे

[सब बहनो ने रोना बंद कर दिया सिर्फ़ हिचकिया ले रही थी]

मैं वापस विदू के चेहरे को देखने लगा

आपको मुझसे बात नही करनी है मत कीजिए लेकिन एक बार अपनी आँखें खोलके अपने पतिदेव जी को देख तो लीजिए

कही ऐसा ना हो कि आप आँखें खोले और मेरी लाश आपके सामने पड़ी हो

मैं थोड़ी देर तक वैसे ही विदू के पास अपनी कनपटी पे गन लगाए बैठा रहा

तभी गेट खोलके एक डॉक्टर अंदर आया मुझे देखके वो घबरा गया

बड़े मामा ने उस डॉक्टर को बाहर जाने का इशारा किया

मैं अपनी भीगी आँखो से आस लगाए विदू को देखता रहा लेकिन विदू उठ ही नही रही थी मैं अपने हाथ से विदू के गाल सहलाने लगा शायद ऐसा करने से विदू अपनी आँखें खोलके मुझे देख ले थोड़ी देर तक मैं विदू के गाल सहलाता रहा लेकिन विदू वैसे ही लेटी रही अब मेरी हिम्मत टूटने लगी थी इतना दर्द तो तब भी नही हुआ था जब माँ को आवाज़ देता और वो नही आती]

ठीक है आपको नही उठना है तो मत उठिए मुझे क्या लेकिन मैं आपके बिना जी नही सकूँगा

मैं 10 तक गिनूंगा

1

बड़ी नानी- दिलीप तू अपनी बड़ी नानी को छोड़ कर चला जाएगा मैं कैसे जीऊंगी तेरे बिना क्या यही सिला देगा तू मेरी ममता का

दिलीप- बड़ी नानी मैं तो शायद जी भी लेता लेकिन विदू के बिना कैसे जीऊं मुझे याद है मैने किसिको बोला था कि अगर आपका प्यार आपसे दूर हो जाए तो आप अपने परिवार के लिए ज़िंदा रहो और अगर परिवार नही है तो इस उम्मीद में जिंदा रहो कि शायद आपको कभी प्यार और परिवार मिल जाए आज पता चला कि प्यार क्या होता है और परिवार क्या होता है

प्यार तो भूल भी जाता लेकिन यहाँ तो परिवार में ही प्यार हो गया

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3

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सब बहने रोने लगी बिलखने लगी

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बड़ी नानी- बेटा दिलीप रुक जा

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[मैं अपना हाथ विदू के हाथ में टाइट पकड़ लिया मैने वँया की तरफ देखा वँया मुझे डबडबाइ आँखो से देख रही थी]

वँया बड़ी नानी का ख्याल रखना उन्हे कभी कोई तकलीफ़ नही होनी चाहिए मुझे माफ़ कर दीजिए बड़ी नानी मैने आपको सिर्फ़ तकलीफ़ दिया है

9

मेरी प्यारी विदू आप मुझसे एक बात कही थी कि मैं आपसे नाराज़ ना होऊ मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ

और आपसे नाराज़ होके जा रहा हूँ

10

सबकी चीख निकल गयी

मैं ट्रिग्गर पे अपनी उंगली दबाने लगा

तभी मेरे हाथ में विदू का जो हाथ था मुझे हिलता हुआ महसूस होने लगा

मैने विदू की तरफ देखा विदू की आँखें बंद थी मैं मुस्कुरा दिया

आपके प्यार ने पागल कर दिया है मुझे मैने अपनी आँखें बंद कर लिया

और ट्रिग्गर दबाने लगा

तभी मेरे कानो में विदू की मीठी शहद भरी आवाज़ पड़ी

विदू- आप मुझसे नाराज़ हैं

दिलीप- मैने अपनी आँखें खोलके देखा

विदू अपनी आधी खुली आँखे खोलके मुस्कुरा रही थी...
 
अपडेट 115

विदू- बोलिए ना आप मुझसे नाराज़ हैं

दिलीप- [मेरे हाथ से गन नीचे गिर गया मैने अपने दोनो हाथो से विदू का हाथ थाम लिया]

नही नही मैं अपनी विदू से क्यूँ नाराज़ होऊँगा

[ आज तो हर किसी को शॉक लग रहा था पर मुझे नही मुझे यकीन था कि मेरी विदू मेरे से किए वादे को तोड़के कभी नही जाएगी

बड़े मामा- [चीखके] डॉक्टर

डॉक्टर सब दौड़ते हुए आए

[उसके बाद यह चमत्कार है मिराकल भगवान ने आप सबकी सुन ली]

फिर डॉक्टर ने सबको बाहर जाने को बोला

सब लोग बाहर चले गये

सिर्फ़ बड़े मामा थे

वँया को बड़ी नानी अपने साथ ले गयी

डॉक्टर मेरे पास आके

डॉक्टर- सर आप भी बाहर जाइए

दिलीप- आप को जो करना है मेरे सामने कीजिए पहले भी आप ग़लती कर चुके हैं

डॉक्टर- सर उस वक़्त सच में मर

दिलीप- [ गुस्से मे ]बोर मत कीजिए

डॉक्टर- [बड़े मामा से] सर आप ही समझाइये

विदू- आप जाइए ना मैं ठीक हूँ

दिलीप- विदू की बात से मैं कैसे मना करता मैं चुपचाप आइसीयू से बाहर आके साइड में खड़ा हो गया

छोटे मामा और बाकी परिवार वाले एक साइड में खड़े थे

बड़ी नानी वँया और नई मामी एक साइड में खड़ी थी सब लोग मुझे घूर रहे थे

मेरी आँखो से अभी भी आँसू बह रहे थे लेकिन खुशी के

तभी लखन मेरे पास आया

लखन- छोटे मालिक मुझे तो कोई नही मिला यहाँ तो सब ठीक है ना

दिलीप- सब ठीक है आप आराम कीजिए

देखते देखते रात हो गयी

बड़ी मामी को होश आगया

बड़ी मामी वॉर्ड से बाहर आई

बड़ी मामी के बाहर आते ही वँया बड़ी मामी के गले लग्के रोने लगी

मैं हॉस्पिटल कॅंटीन से जाके सबके लिए कुछ ना कुछ खाने के लिए ले आया

सब लोग वो खाने लगे

अब सिर्फ़ बड़े मामा बचे थे जो साइड में खड़े विदू को देख रहे थे

मैं बड़े मामा के पास गया

दिलीप- आप कुछ खा लीजिए

[बड़े मामा उपर से नीचे तक मुझे देखने लगे]

लीजिए ना

बड़े मामा ने मेरे सर पे हाथ रख दिए

मैं वापस अपनी जगह आके खड़ा हो गया

तभी बड़ी नानी मेरे पास आई

बड़ी नानी- तू भी तो कुछ खाले सुबह से भूखा है

दिलीप- मुझे पता है आपने भी कुछ नही खाया है

मैं और बड़ी नानी बेंच पे बैठ गये

मैं बड़ी नानी को सॅंडविच खिलाने लगा बड़ी नानी भी मुझे खिलाने लगी

तभी हमारे पास बड़ी मामी और वँया आगयि

बड़ी मामी मुझे अपने सीने से लगाके रोने लगी

मैं बड़ी मामी के आँसू पोछा

दिलीप- आप रो क्यूँ रही हो

बड़ी मामी- तेरा प्यार को देखके

आज तेरे प्यार की वजह से मेरी बेटी जिंदा है

[मैं समझ गया कि वँया ने बड़ी मामी को सब बता दिया है

दिलीप- वो मरी कब थी वो तो हमेशा जिंदा थी जिंदा है

आप लोग ही बिना मतलब के आँसू बहा रहे थे

बड़ी मामी- हाँ बेटा हम लोग तो बेवकूफ़ हैं एक तू ही हमारे परिवार में समझदार है हमे माफ़ कर दे

दिलीप- आपने कुछ खाया नही होगा वँया तुम भी बैठो और यह लो सॅंडविच बहुत अच्छा है फिर हम सब सॅंडविच खाने लगे

इसी बीच डॉक्टर आके बोला कि कल आप पेशेंट को ले जा सकते हैं

मेरी जगह कोई और होता तो डॉक्टर के दाँत तोड़ देता

मैं मेरी बहनो के पास गया

मैं कुछ बोलने वाला था कि सब बहने मेरे गले लग्के रोने लगी

दिलीप- आप सब भी रोने लगी आप सबको रोता हुआ देखके क्या विदू को अच्छा लगेगा

अरुणा- किसको

दिलीप- विदू को आज पहली बार मुझे शरम आरहि थी

अवन्तिका- दीदी देखो ना हमारा भाई कैसे शर्मा रहा है

दिलीप- [अब तो यह सब मेरा मज़ाक बनाके रख देंगी]

उपर से डॉक्टर ने मुझे मेरी प्यारी विदू से मिलने भी नही दिया ऐसे ही सब लोग बेंच पे सो गये...
 
अपडेट 116

दिलीप- मैं रात भर जागा रहा

सुबह हो गयी

बड़े मामा को देखके लगा कि वो भी रात भर नही सोए हैं

एक तो यह डॉक्टर इतना बड़ा था कि मुझे मिलने ही नही दे रहा था विदू से

थोड़ी देर बाद विदू बाहर आई स्ट्रेचर पे

विदू शायद सोई हुई थी

डॉक्टर बड़े मामा को साइड में लेके गये

डॉक्टर- ठाकुर साहब यह चमत्कार से कम नही है कि आपकी बेटी मर के भी जिंदा हो गयी शायद हम से कोई ग़लती हो गयी हो लेकिन हम यह नही भूल सकते कि 8 घंटे तक आपकी बेटी के हाथ से खून बहता रहा आप एक और बात का ध्यान रखें

कि आपकी बेटी उस लड़के के साथ एमोशनली जुड़ चुकी है उस लड़के को अगर एक भी खरॉच आई तो आपकी बेटी शायद फिर उसी हालत में वापस चली जाए

दिलीप- वॉर्ड बॉय स्ट्रेचर को आंब्युलेन्स में डाल दो मैं जल्दी से आंब्युलेन्स में बैठ गया फिर बड़े मामा और वँया आके बैठ गयी बड़े मामा जब आंब्युलेन्स में बैठने आए वो मुझे देखके दूसरी गाड़ी में बैठ गये फिर आंब्युलेन्स चल पड़ी सी मामा के घर . मैने विदू का हाथ अपने दोनो हाथ में थाम लिया

वैसे बड़ी मामी के सामने यह करने में शरम आराही थी लेकिन क्या करू मैने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया

थोड़ी देर बाद हम सब छोटे मामा के घर पहुँचे विदू अभी भी सोई हुई थी वॉर्ड बॉय सब स्ट्रेचर को नीचे उतारने लगे

दिलीप- आप रहने दो मैं करता हूँ

मैने विदू को अपनी गोद में उठा लिया और विदू के रूम में पहुँचा

विदू को बेड पे लिटा दिया जैसे ही मैं पीछे मुड़ा

मेरी फट गई मेरे सामने मेरा पूरा परिवार खड़ा होके मुझे घूर रहा था

मैने सोचा कि इतनी बारिश कहाँ से हो रही है

मैने अपने माथे पे हाथ लगाके देखा तो मुझे पता चला कि मैं पसीने से भीग गया हूँ

तभी बड़े मामा मेरे पास आए

बड़े मामा- हमे तुमसे बात करनी है आओ हमारे साथ

दिलीप- बड़े मामा मेरा हाथ पकड़के मुझे अपने साथ दूसरे रूम में लेके गये

बड़ी नानी कुछ बोलना चाहती थी लेकिन बोल नही पाई

बड़े मामा ने मेरा हाथ छोड़ कर गेट लॉक कर दिया फिर एक कुर्सी पे बैठ गये

बड़े मामा- बैठ जाओ

[मैं बड़े मामा के सामने वाली कुर्सी पे बैठ गया अंदर से तो पूरी फटी पड़ी थी]

बड़े मामा- यह तो हम देख चुके हैं कि कल तुमने क्या किया और क्या नही किया अब हम यह जानना चाहते हैं कि तुम आगे क्या करना चाहते हो

दिलीप- आअप आप जो कहेंगे क्क्करुन्गा

बड़े मामा- [आँख दिखाते] हम ने पूछा कि क्या करोगे

दिलीप- [मैने सोचा बेटा दिलीप अब अगर शहीद होना है तो एक कोशिश करने में क्या जाता है शायद बड़े मामा मान जाए]

[मैं एक लंबी साँस लिया]

अपनी पढ़ाई पूरी करके विदू से शादी करूँगा

बड़े मामा मुझे देखते रह गये थोड़ी देर तक बड़े मामा कुछ सोचते रहे

बड़े मामा- ठीक है हमे तुम पर विश्वाश है हमारा भरोसा टूटने मत देना तुम समझ रहे हो ना हम क्या कहना चाहते हैं

दिलीप- [मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगे मैने तो सोचा था कि बड़े मामा मुझे जान से मार देंगे]

दिलीप-जी मैं आपका विश्वाश कभी टूटने नही दूँगा मैं आपसे वादा करता हूँ

बड़े मामा- ठीक है अब जाओ

दिलीप- मैं रूम से बाहर आगया और सीधा विदू के रूम में गया अभी भी सब रूम में खड़े थे

मेरे पास मेरी सब बहने आगयि वँया को छोड़ कर

अरुणा- तू ठीक तो है ना

अवन्तिका- तुझे कुछ हुआ तो नही

दिलीप- ज़्यादा कुछ नही बस बड़े मामा ने बहुत मारा

[यह सुनके सब रोने लगी]

आप सब फिर रोने लगी पता है ना

अरुणा- हाँ पता है तेरी विदू को दुख होगा हमे रोते हुए देखके

दिलीप- मैं तो मज़ाक कर रहा था

[यह सुनके चारो बहने मेरी पीठ पे ढोल बजाने लगी]

बड़ी नानी- बस भी करो और जाओ अपने रूम में

अरुणा बहू को भी अपने साथ ले जा

अरुणा दी नई मामी को अपने साथ लेगयि

बड़ी मामी छोटी मामी के साथ उनके रूम में चली गयी

छोटे मामा तो फॅमिली ड्रामा में दिखते ही नही हैं

बड़ी नानी मेरे पास आई

बड़ी नानी- मेरा प्यारा दिलीप कितना बड़ा हो गया है अब बता क्या बोला तेरा मामा ने

[मैने बड़ी मामी को सारी बात बता दी]

दिलीप- बड़ी नानी मुझे माफ़ कर दीजिए मैने आपका दिल दुखाया है

बड़ी नानी- दिलीप मैं तेरी माँ नही हूँ लेकिन तू मेरा बेटा है और माँ कभी भी अपने बच्चो से नाराज़ नही होती है

मैं तेरे लिए बहुत खुश हूँ तू अपनी विदू के पास बैठ

[फिर बड़ी नानी रूम से चली गयी]...
 
अपडेट 117

दिलीप- मैं विदू के सरके पास बैठ गया

विदू का मासूम खूबसूरत चेहरा देखके मेरा दिल नाचने लगा

पता नही कितनी देर तक मैं अपनी विदू को देखता रहा

अब तो बड़े मामा भी हमारी शादी के लिए मान गये हैं

यह बात बहुत अजीब है

लेकिन मैं इस बारे में सोचके अपनी खुशी कम करना नही चाहता था

तभी विदू अपनी पलके झपकाने लगी

मैने झुक के अपनी विदू की पॅल्को को अपने होंटो से चूम लिया

विदू मुस्कुराने लगी

लेकिन विदू की मुस्कुराहट के पीछे वो दर्द था जिसकी वजह मैं था

पता नही आज कल मुझे क्या होता जा रहा है

विदू के सामने मैं अपने आँसू रोक ही नही पाता हूँ

मेरी आँखो से आँसू बहते देख विदू उठने की कोशिश करने लगी

दिलीप- आप लेटके ही रहिए

विदू- आप रो क्यूँ रहे हैं प्लीज़ मत रोओ

दिलीप- यह सब मेरी वजह से हुआ है अगर मैं कल फोन नही तोड़ता तो आप ऐसा कुछ नही करती

विदू- आप ऐसा मत बोलिए ग़लती तो मेरी थी कि मैने मरने की बात कह दी जब आपने फोन काट दिया

दिलीप- मुझे माफ़ कर दीजिए

विदू- मैं 2 घंटे तक आप को फोन लगाती रही लेकिन आपका फोन लग ही नही रहा था

मैं डर गयी कि आप कुछ ग़लत ना कर बैठे मैं सोची कि आप को अगर कुछ हो गया

तो मैं आपके बिना कैसे जीऊंगी आप ही मेरे सब कुछ हैं

इसीलिए मैने अपने आप को सज़ा देने के लिए अपने हाथ की नस काट ली

मैं सोची कि अगर आप मुझसे नाराज़ होंगे तो आप मुझे माफ़ करदेंगे

दिलीप- मैं आपसे कभी भी नाराज़ नही रहूँगा

मैं विदू के सर पे अपना सर रखके रोने लगा

विदू भी मेरे साथ रोने लगी

फिर मैने अपने आप को संभाला और विदू के आँसू पोछा

दिलीप- आप मुझसे वादा कीजिए आप दोबारा कभी भी ऐसा नही करेंगी

विदू- आप भी मुझसे कभी नाराज़ मत होना

दिलीप- पहले आप कीजिए

विदू- नही पहले आप

दिलीप- ठीक है मैं आपसे कभी नाराज़ नही रहूँगा

विदू- मैं भी हमेशा आपके साथ रहूंगी

दिलीप- अब आप मुझे पूरी बात बताएँगी

विदू- मैं कुछ समझी नही

दिलीप- विदू

विदू- [रोते हुए]आप फिर मुझपे गुस्सा होंगे

दिलीप- नही होऊँगा

मैं विदू के दोनो गाल चूम लिया

विदू- [रोते हुए] जब मैने अपने हाथ की नस काट ली तब मैं सोची कि आप को अगर कुछ हो गया होगा तो इसीलिए मैं चाकू अपने गले पे रखके काटने ही वाली थी कि मैं बेहोश हो गयी

दिलीप- [विदू की यह बात सुनके मेरे होश उड़ गये एक बार फिर मेरी आँखो से आँसू बहने लगे अगर विदू को कुछ हो जाता तो मेरी एक ग़लती मेरी ज़िंदगी मेरी प्यारी विदू मेरी प्यारी विदू

[मैं बार बार अपने आपको कोसने लगा]

तभी विदू ने मेरा हाथ पकड़ लिया मैने विदू की तरफ देखा

विदू- आप मुझसे नाराज़ हैं

दिलीप- नही ---यह कहके मैं विदू के गले लग्के रोने लगा

विदू मेरे सर में अपनी उंगली फिराने लगी मैं काफ़ी देर तक रोता रहा

तभी मुझे ख्याल आया कि मैं रो रहा हूँ तो मेरी विदू भी रो रही होगी

मैने विदू की आँखो को चूम लिया

दिलीप- कितना रोती हो आप

विदू- आप मुझे रुलाते हैं

दिलीप- अब नही रुलाउन्गा

फिर मैं विदू का हाथ पकड़के बैठ गया फिर हम एक दूसरे की आँखो में खो गये मैं विदू की आँखो को पढ़ने लगा विदू मेरी आँखो को पढ़ने लगी बीच-2 में हम मुस्कुरा भी देते विदू अभी इस हालत में ज़्यादा बाते नही कर सकती थी

लेकिन इस जिस्म को क्या पता जब दिल एक हो तो लफ़ज़ो की ज़रूरत नही पड़ती...
 
अपडेट 118

दिलीप- हम दोनो एक दूसरे की आँखो में खोए थे कि बड़ी नानी अंदर आगयि

मैं विदू को देखे जा रहा था

बड़ी नानी ने मेरे सर पे चपत मार दी

मैं होश में आया और विदू का हाथ छोड़ दिया

विदू बुरी तरह से शर्मा गयी

बड़ी नानी- क्या कर रहा था तू अभी

दिलीप- क्कुच्छ नही

बड़ी नानी- चल तुझसे कोई मिलने आया है

दिलीप- आप यही पे बैठिए

[मैने विदू की तरफ देखा विदू ने आँखो से इशारा किया जल्दी आना]

बड़ी नानी- अब जाएगा भी

दिलीप- मैं रूम से बाहर आके नीचे गया

आइजी सर मतलब अरविंद राणा बैठे हुए थे साथ में छोटे मामा भी थे

मैने अरविंद से जाके हाथ मिलाया

अरविंद- तुमसे कुछ बात करनी है आओ ठाकुर साहब अगर आपकी अग्या हो तो

छोटे मामा- जी जी बिल्कुल

दिलीप- फिर मैं अरविंद के साथ बाहर आगया

दिलीप- जी कहिए

अरविंद- सबसे पहले तुम यह लो

[अरविंद ने मुझे एक कार्ड दिया]

इस कार्ड में तुम्हारे 1400 करोड़ रुपये हैं

दिलीप- इस कार्ड में मैं कुछ समझा नही

अरविंद- यह एक स्पेशल कार्ड है यह कार्ड तुम किसी बॅंक में लेके जाओगे

जितने पैसे चाहो निकाल सकते हो बस एक कोड बताना पड़ेगा

[फिर अरविंद ने मुझे वो कोड बता दिया]

दिलीप- बस यही बात करनी थी आपको

अरविंद- एक और बात है लेकिन तुम मानोगे नही

दिलीप- मदन के बारे में मैं कोई बात ही नही करना चाहता मदन एक ऐसा इंसान है जो जहन्नुम में जाने के लायक भी नही है आप को और कुछ पूछना है

अरविंद- अब मैं चलता हूँ

दिलीप- फिर अरविंद चला गया मैं जल्दी से विदू के रूम में आगया

बड़ी मामी विदू को अपने हाथो से खाना खिला रही थी

बड़ी मामी- आगये तुम लो अब अपनी विदू को खिलाओ देखो कैसे तुम्हे देख रही है

दिलीप- [विदू शर्मा गयी मैने बड़ी मामी के हाथ से प्लेट ले लिया फिर बड़ी मामी रूम से बाहर चली गयी]

फिर मैं विदू को अपने हाथ से खिलाने लगा विदू को खाना खिलाने के बाद जैसे ही मैं उठा विदू ने मेरा हाथ पकड़ लिया

मैने विदू के गाल सहलाते हुए कहा

क्या हुआ

विदू- कुछ नही बस आप यही मेरे पास रहिए

दिलीप- हाथ धोके आता हूँ

विदू- नही

दिलीप- अच्छा बाबा नही जाता

मैं विदू के पास बैठ गया

विदू- आप से कॉन मिलने आया था

दिलीप- एक दोस्त आप से एक बात पुच्छू

विदू- दो पूछिए

दिलीप- [मैं मुस्कुरा दिया]

आप शहेर वाले कपड़े क्यूँ नही पहन्ति हैं

विदू- आप कहेंगे तो मैं पहेन लूँगी

दिलीप- पहले बताइए आप क्यूँ नही पहनती हैं

विदू- आप के लिए नही पहनती हूँ

दिलीप- मेरे लिए क्यूँ

विदू- क्यूंकी आप मेरे पतिदेव जी हैं

दिलीप- [मुझे तो कुछ समझ ही नही अरहा था कि विदू शहेर वाले कपड़े जैसे जीन्स टॉप फ्रॉक और भी सब क्यूँ नही पहनती हैं जीन्स के बारे में याद आते ही मुझे अदिति याद आगयि अच्छा शायद इसीलिए विदू जीन्स नही पहनती हैं]

विदू- क्या सोच रहे हैं

दिलीप- [मैं अपनी सोच से बाहर आया]

अब आपका दवाई खाने का वक़्त हो गया

विदू- मैं नही खाउन्गी बहुत कड़वी होती है

दिलीप- [विदू किसी छोटी बच्ची की तरह मुँह बनाने लगी]

अगर आप दवाई खा लोगि तो आपका मुँह मीठा कर दूँगा

विदू- कैसे

दिलीप- मैं अपना मुँह विदू के मुँह के पास ले गया हम एक दूसरे की सांसो को महसूस करने लगे

मैने अपने होंठ विदू के होंठो पे रखके हल्का सा चूम लिया

विदू शरमाने लगी

मैने विदू को दवाई खिला दी

जैसे ही मैं विदू के होंटो को चूमने के लिए आगे बढ़ा

तभी किसी के खांसने की आवाज़ आई

मैं पीछे मूड गया

सामने मेरी चारो बहने खड़ी थी

मैं सकपका गया

और विदू बुरी तरह से शर्मा गयी...
 
अपडेट 119

दिलीप- [मैं अपने दिमाग़ का घोड़ा तेज़ दौड़ने लगा वरना यह चंडाल चौकड़ी हुमारा मज़ाक उड़ाके हमे अपना बंदर बना लेती]

मेरी बहने मेरे पास आने लगी मैं पीछे मूड गया विदू मुझे ही देख रही थी

मैने विदू को अपनी आँख बंद करने का इशारा कर दिया विदू अपनी आँख बंद कर ली

अरुणा दी विदू को सोते हुए देखके सोच में पड़ गयी

दिलीप- क्या हुआ [मैं धीरे से पूछा]

अरुणा- तेरी तबीयत तो ठीक है ना

दिलीप- मुझे क्या हुआ है

अरुणा- नही मुझे ऐसा लगा कि तू लंगड़ा के चल रहा है

[यह सुनके विदू अपना दर्द भूलके एक झटके में उठ गयी और मेरे पास आने लगी

दिलीप- आप कहाँ आरहि हैं लेटी रहिए

[लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी विदू मेरे पास आगयि]

विदू- आप ठीक तो है ना आपने मुझे बताया भी नही आप लंगड़ा के क्यूँ चल रहे हैं बोलिए ना

दिलीप- [जिस बात का डर था वोई हुआ अरुणा दी को पता था कि विदू सोने का नाटक कर रही है

और अरुणा दी ने ऐसी बात कह दी जो विदू कभी बर्दाश्त नही कर सकती]

मैने बिना कुछ बोले विदू को अपनी बाहो में ले लिया और विदू सर पे हाथ फिरने लगा

विदू मेरी बाहो में सो गयी मैं विदू को धीरे से बेड पे लेटा दिया और रूम से बाहर आगया

पीछे-2 मेरी बहने भी रूम से बाहर आगयि मैने देखा अरुणा दी की आँखो से आँसू बह रहे थे

मैने अरुणा दी के आँसू पोछा]

अरुणा- मुझे माफ़ कर्दे

दिलीप- कोई बात नही दी आप तो मज़ाक कर रही थी आप रोना बंद कीजिए

मैने देखा मेघा दी और सुनीता दी भी रो रही हैं

दिलीप-मेरी प्यारी जुड़वा बहने क्यूँ रो रही हैं

मेघा- तू भी तो रो रहा है

दिलीप- एक काम कीजिए मैं आपके आँसू पोछता हूँ आप मेरे आँसू पोछिये

हम ने ऐसा ही किया फिर मेरी बहने चली गयी मैने सोचा वँया से मिल लेता हूँ

मैं वँया के रूम पहुँचा गेट नॉक किया

वँया गेट खोलके मुझे घूर्ने लगी

दिलीप- अब तुम्हे क्या हुआ

वँया- कुछ नही अंदर आओ

दिलीप- मैं अंदर जाके बेड पे बैठ गया

वँया- कैसी हैं विद्या दी

दिलीप- खुद जाके देख लो

वँया- तुमने मुझे बताया क्यूँ नही

दिलीप- किस बारे में

वँया- यही कि तुम और विद्या दी एक दूसरे से प्यार करते हो

दिलीप- पता नही शायद कभी इस बारे में सोचा ही नही

वँया- मैं तुम्हारे और विद्या दी के लिए बहुत खुश हूँ अब तो पिताजी भी मान गये हैं तुम्हारी और विद्या दी की शादी के लिए

दिलीप- तुम्हे किसने बताया

वँया- पिताजी ने सबको यह बात बताई है

दिलीप- अच्छा मामा जी ने बताया है

[यह बड़े मामा का कुछ समझ नही आता है कब क्या कर बैठे]

वँया- क्या हुआ क्या सोच रहे हो

दिलीप- सोच रहा हूँ कि अब पूरे स्कूल में फर्स्ट कैसे आउन्गा

वँया- अब उसकी कोई ज़रूरत नही है अब तुम अपना और विद्या दी का ख्याल रक्खो

दिलीप- तुमने खाना खाया

वँया- खा लूँगी

दिलीप- खा लूँगी नही चलके खाना खाओ और बड़ी मामी को भी खिलाओ

वँया- तुम्हे कैसे पता कि मैने भी खाना नही खाया हैं

दिलीप- सीधी बात है कि बड़ी मामी को पता होगा कि तुम खाना नही खाई हो तो वो कैसे खा लेंगी

वँया मेरे साथ नीचे आई

डाइनिंग टेबल पे बड़ी मामी और छोटी मामी बैठी थी मैं और वँया भी बैठ गये

मुझे देख कर बड़ी नानी भी आगयि

फिर हम सबने खाना खा लिया

आज छोटी मामी मुझे घूर नही रही थी

फिर मैं जल्दी-2 खाना खाने लगा

बड़ी नानी- आराम से खा बेटा इतनी जल्दी भी क्या है

दिलीप- बड़ी नानी बोलती रही और मैं ख़ाता रहा उनको भी पता था कि मैं जल्दी क्यूँ खा रहा हूँ

मैं ख़ाके दौड़के विदू के रूम में आया गेट लॉक किया शूकर है विदू सोई हुई थीमैं विदू के साथ लेट गया

पता ही नही चला कब आँख लग गयी,..
 
अपडेट 120

दिलीप- जब मैं उठा तो शाम हो चुकी थी विदू मेरे सीने से चिपकी हुई थी मैने विदू के माथे पे किस किया

विदू अपनी आँखें खोलके मुझे देखने लगी

मैं मुस्कुराते हुए बोला] आप कब उठी

विदू- जब आप सोए हुए थे तब

दिलीप- आपने मुझे जगाया क्यूँ नही

विदू- आप को सोते देख सब कुछ भूल गयी

दिलीप- विदू को मुस्कुराते देख मेरा मन झूम रहा था मैं अपने होंठ विदू के होन्ट के पास लेगया और हल्के से चूम लिया

विदू शर्मा गयी

जब से विदू शहर वापस आई थी वो बहुत ज़्यादा शरमाने लगी थी मैने फिर विदू के होंठो को हल्का सा चूम लिया

ऐसे ही मैने 10 12 बार विदू के होंठो को चूम लिया हर किस के बाद विदू बुरी तरह से शर्मा जाती

विदू के किस में मुझे सुकून मिलता था मैं ज़्यादा देर किस नही कर सकता था क्यूंकी विदू बहुत कमजोर थी

चेहरा बिल्कुल पीला पड़ गया था ऐसे में विदू को साँस लेने में तकलीफ़ हो रही थी]

मैं बेड पर से उतर गया विदू बेड पे बैठ गयी

विदू- आप कहाँ जा रहे हैं

दिलीप- आप भी ना बाथरूम जा रहा हूँ

विदू- तो उधर कहाँ जा रहे हैं बाथरूम तो इधर है

दिलीप- मैं अपने वाले रूम में जा रहा हूँ

विदू- क्यूँ

दिलीप- वो इसलिए मेरी प्यारी विदू उस रूम में मेरे कपड़े हैं कल से मैं वही कपड़े पहने हुआ हूँ इतनी बदबू आरहि है

विदू- कहाँ स्मेल आरहि है

दिलीप- मैं हाथ जोड़के विदू के सामने झुक गया] माते जाने की अग्या दे दीजिए

विदू- जाओ बालक जी लो अपनी जिंदगी

[विदू खिलखिला कर हंस पड़ी]

मैं रूम से बाहर आगया और अरुणा डी के रूम पे पहुँचा

मुझे पता था कि अभी मेरी चारो बहने साथ में होंगी

मैने गेट नॉक किया

अवनी गेट खोलके मुझे देखने लगी]

अरुणा- कौन है अवन्तिका

अवनी- हमारे जीजा जी हैं दीदी

अरुणा- तू बाहर क्यूँ खड़ा है अंदर आजा

दिलीप- मैं अंदर जाके बेड पे बैठ गया

अरुणा- हाँ तो जीजा जी बताइए आप अपनी सालियो के पास क्यूँ आए हैं

दिलीप- क्या दी आप भी वो मैं अपने रूम में जा रहा हूँ तो आप विदू के रूम में जाओगी

अरुणा- ज़रूर जाउन्गि मेरे जीजा जी का हुकुम जो है

दिलीप- और हां आप विदू को ज़्यादा परेशान मत करना

अरुणा- बड़ा आया विदू को ज़्यादा परेशान मत करना मेरी दी हैं मैं जो चाहे करू

दिलीप- [अब माहौल थोड़ा ज़्यादा गर्म होने वाला था इससे बचने का एक ही रास्ता था मेरी जुड़वा बहने]

मेरी जुड़वा दिदियो आप मेरी एक मदद करोगी

मेघा- ज़रूर करूँगी

सुनीता- तू हमे सिर्फ़ बोला कर कि क्या करना है

दिलीप- बस एक ही काम करना है अरुणा दी को गुदगुदी

यह सुनके अरुणा दी का मुँह खुला का खुला रह गया

हम चारो अरुणा दी की तरफ बढ़ने लगे

अरुणा- तू भूल गया विदू अकेली है मैं उसके पास जा रही हूँ यह बोलके अरुणा दी रूम से भाग गयी

उनके पीछे तीनो बहने भी भागी मैं अपने रूम में आगया नहा धोके तय्यार हुआ

और वोही गाओं वाले कपड़े पहेन लिए क्यूंकी मेरी यही पहचान है कि मैं गाओं का लड़का हूँ

और मेरा मानना यह है कि आपको जो अच्छा लगे वोही करो वरना कल आपको दुख होगा

कि आप ने ऐसा क्यूँ नही किया मैं यह सब सोचते हुए नीचे आगया बड़ी नानी किचन में थी

मैने बड़ी नानी से थोड़ी देर बात की फिर विदू के लिए खाना प्लेट में भरने लगा बड़ी मामी बड़ी खुश लग रही थी

छोटी मामी भी मुझे आज मुझे नफ़रत की निगाह से नही देख रही थी मेरी जिंदगी आज पूरी तरह से बदल गयी

मुझे और क्या चाहिए बड़े मामा मेरी और विदू की शादी के लिए मान गये बड़ी मामी मेरा ख्याल रखने लगी थी

वँया मेरी बहेन कम दोस्त ज़्यादा थी या कहे एक वँया ही थी जो बचपन से मेरे साथ खेलती थी मुझसे हमेशा रूठ के बात करती थी बड़ी नानी जैसी माँ जिनकी वजह से मुझे मेरा परिवार और प्यार मतलब मेरी विदू मुझे मिली

यह सब सोचते हुए मैं हाथ में खाने की प्लेट लेके विदू के रूम में आगया...
 
अपडेट 121

दिलीप- सब बैठके बाते कर रही थी मैं बेड पे बैठ गया

अरुणा- आगये अपनी विदू के लिए खाना लेके

दिलीप- मेरी जुड़वा बहनो

अरुणा- अब तुझसे मज़ाक भी नही कर सकती क्या

दिलीप- मैं भी तो मज़ाक कर रहा हूँ मेरी जुड़वा बहने हँसने लगी

अरुणा दी दोनो को पकड़ने के लिए उठी दोनो बहने हंसते हुए भागने लगी

दोनो के पीछे अरुणा दी भी भागी अब रूम में मैं और विदू ही थे

मैं विदू को अपने हाथ से खाना खिलाने लगा

थोड़ी देर बाद बड़ी नानी मेरे लिए खाना लेके आगयि

मैने भी खाना खा लिया फिर बड़ी नानी प्लेट लेके चली गयी

विदू- आप मेरी एक बात मानेंगे

दिलीप- क्या

विदू- आप कल गाओं चले जाइए

दिलीप- [विदू की बात सुनके मुझे झटका लगा]

यह आप क्या कह रही हैं मैं नही जाउन्गा

विदू- आप नही जाएँगे तो एग्ज़ॅम्स की . कैसे करेंगे

दिलीप- मैं नही जाउन्गा

विदू- आप फैल हो जाएँगे

दिलीप- मैं आपको इस हालत में आपको छोड़ कर कहीं नही जाउन्गा

विदू- आपको मेरी कसम

दिलीप- आप कुछ भी कर लीजिए मैं आपके पास ही रहूँगा

विदू- तो क्या आप मेरी बात नही मानेंगे

दिलीप- मैं आपकी हर बात मानूँगा लेकिन आपको अकेला नही छोड़ूँगा

विदू- क्यूँ

दिलीप- मैं यहाँ से जाउन्गा और फिर आप खुदको कुछ कर लेंगी

विदू- नही करूँगी आपसे वादा कर चुकी हूँ

दिलीप- नही जाउन्गा

विदू- अच्छा ठीक है लेकिन आप रो क्यूँ रहे हैं

दिलीप- आप भी तो रो रही हैं मैं विदू के गले लग गया

विदू मेरे सर में अपनी उंगलिया फिराने लगी

विदू- आपको पता है मुझे कितनी खुशी होगी जब आप अपने एग्ज़ॅम में फर्स्ट आएँगे लेकिन आप तो इस बार एग्ज़ॅम देंगे ही नही काश आप एग्ज़ॅम देते यह सब मेरी ग़लती है अगर मैं इतना ड्रामा नही करती तो यह सब नही होता

दिलीप- मैं जानता हूँ आप यह सब किसलिए बोल रही हैं ठीक है मैं चला जाउन्गा गाओं आप यह सब मत बोलिए

विदू- मेरे प्यार पतिदेव जी

दिलीप- और हां मेरे जाने के बाद रोना मत मुझे पता है मुझसे ज़्यादा आपको तकलीफ़ होगी

मैं विदू के गाल सहलाने लगा]

अब आप सो जाओ मैं जाता हूँ ठीक है विदू बेड पे लेट गयी फिर मैं अपने रूम में आगया

बड़े मामा हमारी शादी के लिए मान गये थे यही हमारे लिए काफ़ी था

लेकिन मेरे और विदू के बीच में लकीर थी बड़े मामा ने मुझपे भरोसा किया था मैं उनका भरोसा नही तोड़ सकता था

रात को विदू के पास रुकने का मतलब होता कि हम अपने परिवार से प्यार नही करते हैं

मुझे तो अब भी विश्वास नही हो रहा था कि यह सब इतनी आसानी से हो गया था

विदू का प्यार तो ऐसा है कि मैं कभी समझ ही नही पाता हूँ कभी बच्ची बन जाती है कभी मेरी माँ

जैसे अभी मुझे गाओं जाने के लिए मना ही लिया

मैं वँया के रूम में आगया आज वँया के रूम का गेट खुला ही हुआ था आज वँया कुछ ज़्यादा जल्दी ही सो गयी थी

फिर मैं अपने रूम में आगया नींद तो आ नही रही थी

मैं सोचा गार्डन में घूम लेता हूँ

छोटे मामा के घर में स्विम्मिंग पूल गार्डन सब था

मैं गार्डन में पहुँच तो देखा वँया बेंच पे बैठके रो रही थी मैं पहुँचा वँया के पास मुझे देखते ही वँया अपने आँसू पोछने लगी

मैं बेंच पे बैठ गया

दिलीप- [मैं बहुत डर गया कि इतनी रात को वँया क्यूँ रो रही है]

क्या हुआ वँया तुम रो क्यूँ रही हो

वँया- कुछ नही बस किसी की याद आगयि थी

दिलीप- किसकी

वँया- था कोई जिसे मैं बहुत चाहती थी

दिलीप- [वँया की बात सुनके तो मेरा दिमाग़ घूम गया आज एक दिन मेरे साथ क्या क्या हो रहा था]

वँया- तुम विद्या दी से बहुत प्यार करते हो ना

दिलीप- बिल्कुल करता हूँ

वँया- अगर विद्या दी को किसी और से प्यार हो जाए तो

दिलीप- ऐसा कभी नही होगा

वँया- अगर ऐसा हो गया तो क्या तुम विद्या दी को माफ़ कर दोगे

दिलीप- वँया यह तुम्हे आज हो क्या गया है कैसी बाते कर रही हो

वँया- पहले मेरी बात का जवाब दो

दिलीप- सच तो यह है कि मैं अपने आपको विदू के लायक समझता ही नही हूँ अगर ऐसा दिन कभी आया तो मैं विदू के लिए उसके रास्ते से हट जाउन्गा और उससे कभी नाराज़ भी नही रहूँगा क्यूंकी मैं विदू से प्यार करता हूँ और मैं हमेशा उनको खुश देखना चाहता हूँ

दिलीप- अब तुम बताओ कि तुम किसके लिए रो रही थी

[मेरी बात सुनके वँया हँसने लगी]

वँया- अरे बुद्धू मैं तो सिर्फ़ यह देखना चाहती थी कि तुम विद्या दी से कितना प्यार करते हो देखो ना कैसे तुम्हारी आँखो से गंगा जमुना बह रही है

दिलीप- वँया झूठ मत बोलो तुम्हारी आँखो में दिख रहा है कि तुम किसी के प्यार में रो रही थी

वँया- मैं क्यूँ झूठ बोलूँगी तुम्हारे सिवा मेरी जिंदगी में कोई लड़का आया ही नही है मैं तो सिर्फ़ तुम्हारी परीक्षा ले रही थी

अब तुम ही सोचो मैं इतनी जल्दी कभी सोती हूँ जब तुम मेरे रूम में आए तो मैं सोने का नाटक कर रही थी

दिलीप- अच्छा लेकिन तुम्हे कैसे पता चला कि मैं गार्डन में आउन्गा

[यह सुनके वँया सोचने लगी]

दिलीप-अब बताओ क्यूँ रो रही थी

वँया- मैं कब कह रही हूँ कि मैं अभी तुम्हारे लिए गार्डन में आई थी वो तो तुमको गार्डन में देखके मैं सोची कि तुम्हारी परीक्षा ले ही लेती हूँ और यह देखो विक्स मैने अपनी आँखो में लगाई हुई थी

दिलीप- अच्छा ठीक है अब जाके सो जाओ

वँया- तुम भी चलो

दिलीप- फिर मैं अपने रूम में आगया वँया अपने रूम में चली गयीलेकिन मुझे अभी भी लग रहा था कि वँया मुझसे झूठ बोल रही है और मैं पता करके रहूँगा कि वो लड़का कौन है यह सब सोचते हुए मैं सो गया.....
 
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