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दिलीप- वँया रोना बंद करो विद्या दी को कुछ नही हुआ है
वँया- अरुणा दी तो
दिलीप- बोला ना चुप करो मैने वँया को अपने आपसे अलग किया चलो नीचे हम सब शहर जाने वाले हैं
मैं और वँया नीचे आए
वँया के रोने की आवाज़ सुनके बड़ी मामी बड़ी नानी और बड़े मामा हमारे पास आगये
बड़ी नानी- क्या हुआ दिलीप वँया क्यूँ रो रही है
बड़ी मामी- वानु क्या हुआ बेटा क्यूँ रो रही है
वँया बड़ी मामी के गले लग्के रोने लगी
बड़े मामा- दिलीप
दिलीप- मैने कुछ नही किया है अरुणा दी का फोन आया था वो कह रही थी कि विद्या दी ने अपने हाथ की नस काट ली है
और वो हॉस्पिटल में है
यह सुनके सबके पैरो तले ज़मीन खिसक गयी वँया के साथ बड़ी मामी भी रोने लगी और बड़े मामा ने मुझे थप्पड़ मार दिया थप्पड़ इतना ज़ोर का था कि मेरे होंठ फॅट गये
बड़े मामा- तुम यह बात इतने आराम से बोल रहे हो
[चीखके] लखन
लखन दौड़ता हुआ अंदर आया
लखन- जी मालिक
बड़े मामा- लखन गाड़ी निकालो हम जतिन के शहेर जा रहे हैं जल्दी
लखन गाड़ी लेके बाहर में आगया सब लोग गाड़ी में जाके बैठ गये
बड़ी नानी मेरा हाथ पकड़के मुझे दूसरी गाड़ी के पास ले गयी
फिर मुझे अंदर लेके बैठ गयी
गाड़ी में नई मामी भी बैठी थी
फिर दोनो गाड़ी चल पड़ी
मेरे साथ सिर्फ़ बड़ी नानी और नई मामी थी गाड़ी में
बड़ी नानी अपने आँचल से मेरे होंठ पे जो खून जम गया था वो सॉफ करने लगी
दिलीप- बड़ी नानी मामा ने मुझे क्यूँ मारा अरुणा दी तो मज़ाक कर रही थी
बड़ी नानी- बेटा तेरी तबीयत ठीक नही है तू सो जा
दिलीप- [मुस्कुरा कर] बड़ी नानी मुझे क्या हुआ है आप लोग ही बिना मतलब के परेशान हो रही हैं
बड़ी नानी- तुझे मेरी कसम तू सो जा
मैने बड़ी नानी के गोद में अपना सर रख दिया नींद तो नही आई 3 घंटे में हम लोग हॉस्पिटल पहुँचे
बड़े मामा और बड़ी मामी वँया सब दौड़ते हुए हॉस्पिटल के अंदर गये मैं आराम से अंदर गया
सब बहने रो रही थी
बड़ी मामी सी मामी के गले लग्के रोने लगी
बड़े मामा की आँखों से आँसू बहने लगे
थोड़ी देर बाद डॉक्टर आइसीयू से बाहर आया
बड़े मामा- डॉक्टर साहब कैसी है हमारी बेटी
डॉक्टर- हम लोग पूरी कोशिश कर रहे हैं पेशेंट का बहुत खून बह चुका है बाकी जो भगवान की मर्ज़ी होगी वोही होगा
यह सुनके बड़े मामा ने डॉक्टर का कॉलर पकड़ लिया
बड़े मामा- डॉक्टर मेरे खून की एक एक बूँद मेरी बेटी को दे दोलेकिन अगर मेरी बेटी को कुछ हो गया तो इस हॉस्पिटल को शमशान भूमि में बदल दूँगा
तभी छोटे मामा आगये
छोटे मामा- भाई साहब छोड़िए इनको
कितनी कोशिश करने के बाद बड़े मामा ने डॉक्टर का कॉलर छोड़ दिया
छोटे मामा- सॉरी डॉक्टर वेरी सॉरी
डॉक्टर- इट्स ओके ठाकुर साहब मुझे पता हैं यह काफ़ी परेशान हैं और यह हॉस्पिटल आपका ही है
आप समझ सकते हैं कि हम अपनी जी जान से कोशिश कर रहे हैं यह कहके डॉक्टर आइसीयू में चला गया
शाम हो गई लेकिन ओपरेशन अभी तक चल रहा था सबकी आँखो से आँसू निकल रहे थे लेकिन मैं मानने को तय्यार ही नही था कि विदू अपनी जिंदगी के लिए मौत से लड़ रही है
तभी डॉक्टर और नर्सस आइसीयू से बाहर आगये
बड़े मामा- डॉक्टर साहब मेरी बेटी तो ठीक है ना
डॉक्टर- सॉरी हम ने बहुत कोशिश की लेकिन ऐसा लगता है कि पेशेंट जीना ही नही चाहती थी शी ईज़ डेड
बड़े मामा- मतलब
डॉक्टर- अब वो इस दुनिया में नही रही...
दिलीप- वँया रोना बंद करो विद्या दी को कुछ नही हुआ है
वँया- अरुणा दी तो
दिलीप- बोला ना चुप करो मैने वँया को अपने आपसे अलग किया चलो नीचे हम सब शहर जाने वाले हैं
मैं और वँया नीचे आए
वँया के रोने की आवाज़ सुनके बड़ी मामी बड़ी नानी और बड़े मामा हमारे पास आगये
बड़ी नानी- क्या हुआ दिलीप वँया क्यूँ रो रही है
बड़ी मामी- वानु क्या हुआ बेटा क्यूँ रो रही है
वँया बड़ी मामी के गले लग्के रोने लगी
बड़े मामा- दिलीप
दिलीप- मैने कुछ नही किया है अरुणा दी का फोन आया था वो कह रही थी कि विद्या दी ने अपने हाथ की नस काट ली है
और वो हॉस्पिटल में है
यह सुनके सबके पैरो तले ज़मीन खिसक गयी वँया के साथ बड़ी मामी भी रोने लगी और बड़े मामा ने मुझे थप्पड़ मार दिया थप्पड़ इतना ज़ोर का था कि मेरे होंठ फॅट गये
बड़े मामा- तुम यह बात इतने आराम से बोल रहे हो
[चीखके] लखन
लखन दौड़ता हुआ अंदर आया
लखन- जी मालिक
बड़े मामा- लखन गाड़ी निकालो हम जतिन के शहेर जा रहे हैं जल्दी
लखन गाड़ी लेके बाहर में आगया सब लोग गाड़ी में जाके बैठ गये
बड़ी नानी मेरा हाथ पकड़के मुझे दूसरी गाड़ी के पास ले गयी
फिर मुझे अंदर लेके बैठ गयी
गाड़ी में नई मामी भी बैठी थी
फिर दोनो गाड़ी चल पड़ी
मेरे साथ सिर्फ़ बड़ी नानी और नई मामी थी गाड़ी में
बड़ी नानी अपने आँचल से मेरे होंठ पे जो खून जम गया था वो सॉफ करने लगी
दिलीप- बड़ी नानी मामा ने मुझे क्यूँ मारा अरुणा दी तो मज़ाक कर रही थी
बड़ी नानी- बेटा तेरी तबीयत ठीक नही है तू सो जा
दिलीप- [मुस्कुरा कर] बड़ी नानी मुझे क्या हुआ है आप लोग ही बिना मतलब के परेशान हो रही हैं
बड़ी नानी- तुझे मेरी कसम तू सो जा
मैने बड़ी नानी के गोद में अपना सर रख दिया नींद तो नही आई 3 घंटे में हम लोग हॉस्पिटल पहुँचे
बड़े मामा और बड़ी मामी वँया सब दौड़ते हुए हॉस्पिटल के अंदर गये मैं आराम से अंदर गया
सब बहने रो रही थी
बड़ी मामी सी मामी के गले लग्के रोने लगी
बड़े मामा की आँखों से आँसू बहने लगे
थोड़ी देर बाद डॉक्टर आइसीयू से बाहर आया
बड़े मामा- डॉक्टर साहब कैसी है हमारी बेटी
डॉक्टर- हम लोग पूरी कोशिश कर रहे हैं पेशेंट का बहुत खून बह चुका है बाकी जो भगवान की मर्ज़ी होगी वोही होगा
यह सुनके बड़े मामा ने डॉक्टर का कॉलर पकड़ लिया
बड़े मामा- डॉक्टर मेरे खून की एक एक बूँद मेरी बेटी को दे दोलेकिन अगर मेरी बेटी को कुछ हो गया तो इस हॉस्पिटल को शमशान भूमि में बदल दूँगा
तभी छोटे मामा आगये
छोटे मामा- भाई साहब छोड़िए इनको
कितनी कोशिश करने के बाद बड़े मामा ने डॉक्टर का कॉलर छोड़ दिया
छोटे मामा- सॉरी डॉक्टर वेरी सॉरी
डॉक्टर- इट्स ओके ठाकुर साहब मुझे पता हैं यह काफ़ी परेशान हैं और यह हॉस्पिटल आपका ही है
आप समझ सकते हैं कि हम अपनी जी जान से कोशिश कर रहे हैं यह कहके डॉक्टर आइसीयू में चला गया
शाम हो गई लेकिन ओपरेशन अभी तक चल रहा था सबकी आँखो से आँसू निकल रहे थे लेकिन मैं मानने को तय्यार ही नही था कि विदू अपनी जिंदगी के लिए मौत से लड़ रही है
तभी डॉक्टर और नर्सस आइसीयू से बाहर आगये
बड़े मामा- डॉक्टर साहब मेरी बेटी तो ठीक है ना
डॉक्टर- सॉरी हम ने बहुत कोशिश की लेकिन ऐसा लगता है कि पेशेंट जीना ही नही चाहती थी शी ईज़ डेड
बड़े मामा- मतलब
डॉक्टर- अब वो इस दुनिया में नही रही...