Incest मैं अपने परिवार का दीवाना - Page 15 - SexBaba
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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 130

दिलीप- वँया का भी समझ में नही आता हैइतना क्या गुस्सा

मैं अपने रूम में आ गया

कुछ था नही करने के लिए सोचा पढ़ाई ही कर लेता हूँ

1 घंटा पढ़ाई किया फिर नीचे गया खाना खाने

वँया मेरी तरफ देखी भी नही

मैने खाना खा लिया

अगर वँया मुझसे बात नही करना चाहती तो मैं भी नही करूँगा

क्या नही करूँगा मेरी तो किस्मत ही खराब है

तभी मुझे एक आइडिया आया

मैने वँया की तरफ देखा

दिलीप- बड़ी नानी मैं छत पे जा रहा हूँ

बड़ी नानी- इतनी रात को तू कही नही जाएगा जा अपने रूम में

दिलीप- बस आधे घंटे में आ जाउन्गा

बड़ी नानी- छत पे क्या करना है तुझे

दिलीप- कुछ नही बस ऐसे ही

बड़ी नानी- वँया दिलीप के साथ जा

दिलीप- वँया मुझे घूर्ने लगी लेकिन करती भी क्या बेचारी

मुझे पता था रात कॉ बड़ी नानी मुझे अकेले जाने नही देंगी

मैं छत पे आ गया

मेरे पीछे वँया भी आ गई

मैं छत पे इधर उधर घूमने लगा

वँया मुझे खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी

लेकिन कुछ बोली नही

बोलती भी क्या मुझसे नाराज़ जो थी

आधे घंटे तक मैं छत पे घूमता रहा

फिर मैं अपने रूम में आ गया

वँया भी अपने रूम में चली गयी

अब मैं यही आइडिया अपनाने वाला था

तीनो टाइम खाने के बाद छत पे जाउन्गा

बड़ी नानी वँया को मेरे साथ भेजेगी

इसी बात से तंग आके वँया मुझसे ज़रूर बात करेगी

वो क्या है ना बड़ी नानी को ऊँचाई से डर लगता है

इसलिए वो मुझे भी उँचाई पे जाने से मना करती हैं

रात को बड़ी मामी मेरे लिए दूध लेके आ गई

मैं दूध पी लिया

फिर सो गया

आज मुझे मंदिर जाना था

मैं जल्दी उठ गया

नीचे गया तो किरण मौसी पूजा की थाली लेके तय्यार खड़ी थी

दिलीप- कौन्से मंदिर जाना है

किरण मौसी- पुराने वाले मंदिर

[यह वो मंदिर था जहाँ शांति गयी थी]

किरण मौसी- तुम गाड़ी पे आगे चलो मैं आती हूँ

दिलीप- मतलब

बड़ी नानी- मतलब यह कि तेरी मासी पैदल चलके मंदिर जाएगी

दिलीप- तो फिर मैं भी पैदल चलूँगा

बड़ी मामी- बड़ी माँ देखा मैं ना कहती थी कि दिलीप भी पैदल जाएगा

किरण मौसी- दिलीप मैं कह रही हूँ ना कि तुम गाड़ी में आओ

बड़ी नानी- रहने दे यह नही मानेगा

दिलीप- फिर मैं और मासी 2 घंटे तक पैदल चलते हुए पहुँचे मंदिर

किरण मौसी पूजा करने लगी

मैं बाहर में खड़ा रहा

अभी सिर्फ़ पुजारी जी और 2 3 लोग ही थे मंदिर में

किरण मौसी पूजा करके वापस आ गई

फिर मैं किरण मौसी घर आगये घर पहुँचते दोपहर हो गयी

मैं खाना खा लिया

मैं बड़ी नानी को बोलके छत पे आ गया

मेरे पीछे वँया भी आ गई

फिर आधे घंटे बाद मैं अपने रूम में आया

कपड़े बदलके बिम्ला के घर गया

बिम्ला- आज कल आते ही नही

दिलीप- मंदिर गया था

बिम्ला- मैं शांति को बुला कर लाती हूँ

पहले यह बताकी मेरी प्यास कब बुझाएगा

दिलीप- 5 दिन में शांति का कोटा पूरा हो जाएगा

फिर मैं अपने एग्ज़ॅम्स में बिज़ी हो जाउन्गा

बिम्ला- मतलब अब 1 महीना 12 दिन

दिलीप- अगर मैं फर्स्ट नही आया तो मेरा घर बाहर निकलना बंद

बिंला- ठीक है मैं कर लूँगी इंतेज़ार

दिलीप- और हाँ आपको मेरा एक काम करना है

बिम्ला- क्या

दिलीप- आप शांति को भड़काएँगी की गान्ड मरवाने में बड़ा मज़ा आता है

बिम्ला- क्या खाक मज़ा आता है बहुत बुरी हालत हो जाती है

दिलीप- तो फिर ठीक है आज के बाद मैं आपकी चुदाई नही करूँगा

बिंला- अरे तू तो गुस्सा हो गया लेकिन अगर शांति नही मानी तो

दिलीप- क्यूँ नही मानेगी जब वो आपको गांद मरवाते हुए देखेगी

तो ज़रूर मान जाएगी

मेरी बात सुनके बिम्ला की पूरी तरह से फॅट गयी

बिम्ला- मुझे देखेगी

दिलीप- हाँ और आप इतना डर क्यूँ रही हो

आपको तो पता है कि पहली बार ही दर्द होता है

और आप तो पहले भी मरवा चुकी हो

बिम्ला- मेरे पति का लंड तेरे आधे लंड के बराबर था

ऐसा मत कर मेरी चूत जितनी फाड़ नी हो फाड़ ले

दिलीप- अच्छा ठीक है नही मारूँगा आपकी गान्ड

और ना ही शांति की मुँह मत बनाओ

फिर बिम्ला शांति को लेके आ गई

मैं शांति की चुदाई करके घर आ गया...
 
अपडेट 131

दिलीप- बिम्ला गान्ड मरवाने के लिए तो नही मानी

मैं अपने रूम में आके पढ़ाई करने लगा

पढ़ाई करते हुए शाम हो गयी

फिर भी मैं पढ़ता रहा

रात का खाना ख़ाके मैं छत पे आ गया

मेरे पीछे वँया भी आई

आधे घंटे तक मैं छत पे घूमता रहा

वँया मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी

फिर मैं अपने रूम में आ गया

2 दिन से वँया मुझसे बात नही की थी

पर उसको देख कर ऐसा नही लगता था

कि वो इस बात से परेशान है

थोड़ी देर तक विदू से बात किया

2 दिन से नींद भी नही आरहि थी

मैं नीचे आया किरण मौसी के रूम पे गेट नॉक किया

किरण मौसी- क्या हुआ दिलीप

दिलीप- नींद नही आ रही है

किरण मौसी- आ जाओ अंदर

दिलीप- मैं किरण मौसी की गोद में सर रख के लेट गया

किरण मौसी से बात करने में मुझे झीजक नही होती थी

थोड़ी देर बाद सच में नींद आ गई

सुबह उठके अपने रूम में आके रेडी हो गया

नाश्ता करके छत पे आ गया

वँया भी आई

लेकिन बात नही की

मैं कसरत करने चला गया

कसरत करके बिम्ला के घर आ गया

बिम्ला- तुम मेरा एक काम करोगे

दिलीप- बोलिए

बिंला- मेरी बेटी के साथ थोड़ी देर पढ़ाई करेगा

दिलीप- पहले यह तो बताइए कि हुआ क्या

बिंला- आज कल मेरी बेटी ठीक से पढ़ाई नही कर रही है

कहीं वो फैल तो नही हो जाएगी

दिलीप- आपको कैसे पता आप तो घर पे रहती हैं

बिम्ला- मेरे बेटी के साथ जो लड़की पढ़ती है वो मुझे आज बताने आई थी

कि वो क्लास में पढ़ाई नही करती है

दिन भर पता नही क्या सोचती रहती है

अगर मैं पढ़ी लिखी होती तो तुझे नही कहती

दिलीप- ठीक है शाम में आके पढ़ लूँगा आपकी बेटी के साथ

यह सुनके बिम्ला मुझे किस करने लगी

मैं भी बिम्ला को किस किया

दिलीप- आप यह बताओ कि आप की बेटी कब से पढ़ाई पे ध्यान नही दे रही है

बिंला- यही कुछ 10 15 दिन से

फिर मैं शांति की चुदाई करके घर आ गया

लेकिन मुझे आज शांति थोड़ी उदास लग रही थी

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अब वँया तो मान ही नही रही थी

मैं एक लेटर लिखा कि

तुम मुझसे बात नही करना चाहती मत करो

लेकिन मैं तुम्हारे साथ पढ़ाई करूँगा

तुमको अच्छा लगे या ना लगे

मैं वो लेटर और अपनी किताब लेके वँया के रूम में आ गया

वँया मुझे देख कर चौंक गयी

मैं वँया को वो लेटर दे दिया

वँया वो लेटर पढ़ने लगी

फिर उसने मेरी तरफ देख कर अपनी गर्दन में हाँ में हिला दिया

फिर मैं वँया के साथ पढ़ाई करने लगा

अब सिर्फ़ दस दिन बचे थे एग्ज़ॅम को

पता नही मैं फर्स्ट आउन्गा कि नही

यह तो एग्ज़ॅम के बाद पता चलेगा

अभी तो वँया को मनाना ज़रूरी था

मैं शाम को बिम्ला के घर आ गया

बिंला की बेटी किचन में थी

बिम्ला- अब तू जाके पढ़ाई कर

बिंला की बेटी मेरे साथ पढ़ाई करने लगी

दिलीप- तू आज कल पढ़ाई क्यूँ नही करती

बिंला की बेटी- करती तो हूँ

दिलीप- देख तेरी माँ तुझे कैसे कैसे पढ़ा रही है और अगर तू पढ़ेगी नही तो तू अपनी माँ का ख्याल कैसे रखेगी

बिंला की बेटी- क्यूँ आप हो ना मेरी माँ का ख्याल रखने के लिए

दिलीप- [बिंला की बेटी क्या बोल रही थी यह तो मैं समझ गया था

लेकिन वो ऐसे डाइरेक्ट मुझसे बात करेगी मैं कभी सोचा भी नही था]

मैं कुछ समझा नही

बिंला की बेटी- आप समझे नही या समझना नही चाहते

बिम्ला- तू पढ़ाई क्यूँ नही कर रही है

दिलीप- फिर बिंला की बेटी कुछ नही बोली

मैं बिंला की बेटी की बात को सोचके परेशान हो गया

कि बिंला की बेटी अब अपनी माँ को ग़लत समझ रही है

या यूँ कहे तो वो अपना माँ को रंडी समझ रही है

जो ग़लत है उसकी माँ दिल की बुरी नही है

मुझे उसे समझाना पड़ेगा

मैं घर आ गया...
 
अपडेट 132

दिलीप- मैने घर आके खाना खाया

विदू से बात करके सो गया

आज अच्छी नींद आ रही थी

रात को अचानक आँख खुल गयी

प्यास जो लगी थी

पानी भी नही लाया था

मैने बड़ी नानी को बोला हुआ था कि मेरे रूम कोई नौकर नही जाना चाहिए

मैं नीचे आया किचन में पानी पीके सीढ़िया चढ़ने लगा तभी मेरी नज़र किरण मौसी के रूम पे पड़ी

रूम की लाइट ऑन थी

मैने किरण मौसी के रूम के गेट को जैसे ही हाथ लगाया

गेट खुल गया

अंदर का नज़ारा देख कर मैं दंग रह गया

किरण मौसी की पीठ मेरी तरफ थी

किरण मौसी कमर से उपर पूरी नंगी थी

बात यह नही थी कि मैं किरण मौसी की नंगी पीठ देख लिया था

बात यह थी कि किरण मौसी की पीठ पे चोट के निशान थे

ऐसा लग रहा था किसी ने बेल्ट से मारा हो

किरण मौसी की ऐसी हालत देख कर मैं बुत बन गया था

किरण मौसी जो कि एक दम गोरी थी

उनकी पीठ पे ऐसे निशान देख कर मेरी आँखो से आँसू बहने लगे

कुछ ही दिनो में किरण मौसी मेरे लिए मेरी अपनी हो गयी थी

बड़ी मामी के पास जाने में मुझे झीजक होती थी

लेकिन किरण मौसी को देख कर मुझे उनसे लगाव हो गया था

मैं अभी भी बुत बना हुआ था

किरण मौसी मेरी तरफ पलट गयी

मुझे देखते ही

किरण मौसी- दिलीप तुम

[किरण मौसी अपनी साड़ी से अपने बदन को ढकने लगी

किरण मौसी अपना बदन ढक कर मेरे पास आई

और जैसे ही अपना हाथ उठाई शायद मुझे मारने के लिए

बीच में ही रुक गयी

मैं वहाँ से अपने रूम की तरफ जाने लगा

किरण मौसी मुझे आवाज़ देती रही

शायद वो भी मेरे पीछे आजाती

लेकिन उनके जिस्म पर एक साड़ी थी

मैं अभी कुछ सोचने की हालत में नही था

अगर आप किसी अंजान को भी ऐसी हालत में देख लें

उसके जिस्म पे ऐसे चोट के निशान

तो आप जानने की कोशिश करेंगे यहाँ तो मेरी मासी थी

मैं अपने रूम में आके बेड पे लेट गया

मुझे पता था कि किरण मौसी मुझे कुछ नही बताएँगी

मैं उनका हूँ ही कौन

बताइए जिस ठाकुर से पोलीस से लेके नेता भी डरते हैं

पूरे 150 गाओं पर जिसकी हुकूमत है

उसकी बहेन की ऐसी हालत और उसे पता भी नही

यह सब सोचते हुए पता ही नही चला कब नींद आ गई

सुबह उठा तो वोही सब मेरी आँखो के सामने आ गया

रेडी होके नीचे गया

एक नज़र किरण मौसी को देख कर अपना नाश्ता करने लगा

नाश्ता करके अखाड़े आ गया

कसरत करने लगा

लखन- छोटे मालिक आपकी तबीयत ठीक नही है आज आप रहने दीजिए

मैं लखन को बिना कुछ बोले बिम्ला के घर आ गया

थोड़ी देर बिम्ला से बात किया फिर शांति की चुदाई करके घर आ गया

किताब निकालके पढ़ाई करने लगा

जब मैं पढ़ाई कर रहा था तो वँया मेरे रूम में आ गई

मुझे एक नज़र देख कर चली गयी

थोड़ी देर बाद किरण मौसी मेरे रूम

में आके गेट लॉक कर दी

मैं किरण मौसी को देखने लगा

किरण मौसी- दिलीप कल जो तुमने देखा वो किसी को नही बताओगे

दिलीप- नही बताउन्गा

किरण मौसी- कुछ पूछना है

दिलीप- मैं पूछके क्या करूँगा आप मुझे क्यूँ बताएँगी

बस यहाँ वहाँ की बात बताके मुझे समझा देंगी

किरण मौसी- दिलीप तुम अभी बच्चे हो तुम नही समझोगे और सुनो अगर तुम यह बात जान गये तो तुम यह बर्दाश्त नही कर पाओगे तुमको बड़ी माँ की कसम तुम कभी मुझसे इसकी वजह नही पुछोगे

दिलीप- नही पूछूँगा

[किरण मौसी मेरे रूम से चली गयी]

आप खुद मुझे बताएँगी

आपको शायद पता नही है एक बार अगर मैं किसी अपना मान लेता हूँ

आपकी यह हालत जिसकी वजह से हुई

मैं उसका वो हाल करूँगा जो मैने मदन का किया था...
 
अपडेट 132अ

दिलीप- पढ़ाई करते हुए शाम हो गयी

किरण मौसी के साथ ऐसा किसने किया होगा

किरण मौसी के घर में उनके पति की बहेन और उनकी दोनो बेटी ही रहती है

मैं बड़ी नानी को बोलके बिम्ला के घर आ गया

बिम्ला की बेटी मेरे साथ पढ़ाई करने लगी

तभी थोड़ी देर के लिए बिम्ला बाहर चली गयी

दिलीप- तुझे लगता है कि तेरी माँ ग़लत कर रही है

बिम्ला की बेटी- नही सही कर रही है मुझे आपसे कोई शिकायत नही है आप जवान हैं उपर से ठाकुर आपको तो किसी बात की फ़िक़र ही नही होगी लेकिन मेरी माँ जो मेरे बाप के मरने के बाद सरपंच अब आप और पता नही कितनो के साथ की होगी और आप कहते हैं कि मेरी माँ सही है

दिलीप- [बात तो सही है मैने बिम्ला को सरपंच के साथ देख कर सोचा था कि बिम्ला एक नंबर की रंडी है लेकिन बाद में कुछ और पता चला बिम्ला की बेटी ऐसे नही मानेगी मैं भी वोही आइडिया अपनाउंगा जो सुधा ने मुझपे अपनाई थी बिम्ला की बेटी को इतना गरम कर दूँगा कि वो खुद समझ जाएगी कि कभी-2 चुदाई मजबूरी बन जाती है मैं बिम्ला को धोका नही दूँगा

उसकी बेटी के साथ चुदाई करके मैं तो बस उसे यह समझाउंगा कि किसी को भी इतनी जल्दी ग़लत समझना ठीक नही होता

बिम्ला की बेटी- क्या हुआ

दिलीप- कल मुझे तालाब के पास मिलना

[यह सुनके बिम्ला की बेटी मुझे घूर्ने लगी]

दिलीप -फ़िक़र मत करो मैं तुम्हारे साथ ऐसा वैसा कुछ नही करूँगा बस एक दोस्त के नाते तुमसे बात करूँगा आगे तुम्हारी मर्ज़ी और हां एक बात जान लो मैं तुम्हारे साथ कभी वो सब करने का नही सोचूँगा जो मैं तुम्हारी माँ के साथ करता हूँ

फिर बिम्ला आ गई बिम्ला के आते ही मैं घर आ गया

खाना ख़ाके छत पे आया

मेरे पीछे वँया भी आई

आज भी वँया मुझसे बात नही की

मैं दीवार से सटके बैठ गया

पता नही क्यूँ वँया मेरी तरफ पीठ करके खड़ी रहती है

अगर इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की की दोस्ती एक तरफ हो

और दूसरी तरफ वँया की दोस्ती हो तो मैं अपनी चुहिया को ही चुनूँगा

वँया जैसा कोई नही

मेरे लिए तो मेरी विदू ही सबसे खूबसूरत लड़की थी

विदू भी यही कहेगी कि उससे ज़्यादा खूबसूरत उसकी छोटी बहेन वानु है

पता ही नही चला 1 घंटा बीत गया

मैं नीचे आ गया

वँया अपने रूम में चली गयी

मैं किरण मौसी के रूम में आ गया

दिलीप- मासी आज मैं आपके रूम में सो जाउ

किरण मौसी- आज भी सर में दर्द है दबा दूं

दिलीप- नही बस ऐसे ही

फिर मैं किरण मौसी की गोद में सर रखके लेट गया

एक बात पुछु

किरण मौसी- पूछो

दिलीप- आप अपने भाई बहेन में सबसे ज्याद किसे प्यार करती हैं

किरण मौसी- तुम्हारी माँ से

दिलीप- पर वो तो इस्दुनिया में नही हैं

किरण मौसी- कॉन कहता है वो इस दुनिया में नही हैं मैं तो हमेशा उसे अपने दिल में रखती हूँ

दिलीप- क्या मेरी माँ भी आपसे प्यार करती थी

किरण मौसी- तुम्हारी माँ हमेशा मुझे कहती थी कि वो सबसे ज़्यादा मुझे प्यार करती है

दिलीप- आपको क्या लगता है

किरण मौसी- वो सच कहती थी तुम बिल्कुल उसी के जैसे हो अपने दिल की बात किसी से नही कहते

दिलीप- [शायद इसलिए मैं आपको देख कर खो जाता हूँ]

किरण मौसी- मुझे पता है तुम मुझसे नाराज़ हो होना भी चाहिए मैं तुम्हे वो बात नही बता सकती मैं तुम्हे इतना बता देती हूँ कि यह सब मैं सह रही हूँ सिर्फ़ अपने पति को दिए वचन को पूरा करने के लिए

दिलीप- [मैं यही तो चाहता था कि आप मुझे एक हिंट दे दें आपको एमोशनल करने का एक ही रास्ता था कि आपको उसकी याद दिलाऊ जिससे आप सबसे ज़्यादा प्यार करती है और यह तो और भी अच्छा हो गया की आप मेरी मा से सबसे ज़्यादा प्यार करती थी मैं माँ के बारे में आपसे पूछूँगा तो आपको कोई शक भी नही होगा..,
 
अपडेट 132ब

दिलीप- मैं आज तीसरी बार किरण मौसी की गोद में सो गया

क्या कहूँ बड़ी नानी के बाद किरण मौसी ही थी

जिनकी गोद में मैं सोया था

आज सनडे था मैने उठके वोही किया जो करता हूँ

कसरत करके बिम्ला के घर आ गया

बिम्ला- आज बड़ी जल्दी आगये

दिलीप- आपके होंटो का रस जो पीना था

बिम्ला- बड़ा आया होंटो का रस पीने वाला मैं तो गाओं की गँवार औरत हूँ मैं जानती हूँ तुझे तो लड़किया पसंद है

दिलीप- आपको पता है मैने पहला सेक्स एक औरत के साथ किया था वैसे आप को देख कर तो बूढो का लंड भी खड़ा हो जाएगा

बिम्ला- झूठी तारीफ़ मत कर मैं जानती हूँ तू यह सब कहके मेरी गान्ड मारना चाहता है और मैं यह भी जानती हूँ तू ज़बरदस्ती नही कर सकता

दिलीप- आपको कैसे पता चल गया वैसे आप अपनी बेटी को भेजती कहाँ है आज तो सनडे है और वो घर पे भी नही है

बिम्ला- यह मैं तुझे नही बताउन्गी

दिलीप- आपकी मर्ज़ी मैं रूम में आ गया

रोज तो मैं शांति की चुदाई करने आता हूँ

लेकिन चुदाई से पहले उसके साथ थोड़ा हँसी मज़ाक भी करता हूँ

शांति- तुम बहुत अच्छे हो

दिलीप- वो कैसे

शांति- तुम्हे पता है मेरे पति सीधा आते हैं और मेरी चुदाई करने लगते हैं

तुम्हारी तरह ना मुझसे मज़ाक करते हैं ना मुझे प्यार करते हैं और ना तुम्हारे जैसा प्यार करते हैं

दिलीप- लेकिन हैं तो आपके पति ना और आपके परिवार का ख्याल भी रखते हैं शांति मेरी बात का कोई जवाब नही दी बस मेरे होंठ चूसने लगी अब मैं तीन दिन और शांति की चुदाई करने वाला था इसी लिए मैं उसे जी भरके प्यार करने लगा

उसकी चूत को फाड़ने लगा शांति सिर्फ़ माँ बनने के लिए मेरे साथ चुदाई कर रही थी मैं उससे कैसे कहता कि मुझे आपकी गान्ड मारनी है यहाँ बिम्ला मान नही रही थी

मैं शांति की चुदाई करके तालाब के पास आ गया

बिम्ला की बेटी अभी तक नही आई थी

30 मिनिट तक मैं इंतेज़ार किया बिंला की बेटी नही आई

मैं वापस जाने के लिए आगे बढ़ गया रास्ते में बिम्ला की बेटी मुझे दिखी

मैं दौड़के वापस आया और एक जगह बैठ गया

बिम्ला की बेटी आके मेरे कंधे पे हाथ रख दी

मैं पीछे मूड गया

दिलीप- मुझे लगा कि तुम आओगी ही नही

बिम्ला की बेटी- भोले मत बानिए आपको पता है मैं क्यूँ लेट आई हूँ

दिलीप- यह देखो मैं तुमसे यह थोड़ी पूछा कि तुम लेट क्यूँ आई और मैं समझा नही तुम क्या बोली

बिम्ला की बेटी- क्या आपको सच में नही पता

दिलीप- क्या नही पता

बिम्ला की बेटी- यही कि सनडे को माँ मुझे अपनी सहेली के पास सिलाई करने के लिए छोड़ आती हैं और जब तक वो मुझे लेने नही आती हैं तब तक मैं सिलाई सीखती हूँ और आपको पता है यह सब वो क्यूँ करती हैं आपके के साथ चुदाई करने के लिए

[बिम्ला की बेटी यह सब बड़े गुस्से में कह रही थी मेरी तो फॅट गयी कि कहीं मेरे घर ना पहुँच जाए अब तो मुझे भी डर लगने लगा था बिम्ला की बेटी से बिम्ला की बेटी की नफ़रत कुछ ज़्यादा ही बड़ी हो गयी थी बिम्ला की बेटी को आराम से हॅंडल करना पड़ेगा वरना बिम्ला की बेटी की वजह से मेरा हॅंडल ज़रूर टूट जाएगा]

दिलीप- शांत हो जा लंबी लंबी साँसे ले

बिम्ला की बेटी मेरे कहे अनुसार वैसा ही करने लगी

मैं ज़मीन पे बैठ गया

बिम्ला की बेटी भी ज़मीन पे बैठ गयी

दिलीप- देखो मैं तुम्हारी माँ की तरफ दारी नही कर रहा हूँ मैं बस यह कहना चाहता हूँ कि तुम अपनी माँ की मजबूरी समझो

मेरी बात सुनके बिम्ला की बेटी हँसने लगी

बिम्ला की बेटी- मजबूरी कैसी मजबूरी इस गाओं में कितनी विधवा औरते हैं वो सब मजबूर नही हैं

दिलीप- [यह तो मेरी हर बॉल को नो बॉल दे रही है...
 
अपडेट 133

दिलीप- अच्छा अपनी माँ की बात छोड़ो तुम क्या चाहती हो पढ़ाई नही करोगी तो फैल हो जाओगी

1 साल तुम्हारा बर्बाद होगा तुम्हारी माँ का नही

बिम्ला की बेटी- जब मेरी माँ को ही मेरी कोई फ़िक़र नही है तो मैं क्यूँ सोचु

दिलीप- तो तुम अपनी माँ को नही माफ़ करोगी

बिम्ला की बेटी- मेरी माँ मुझसे माफी माँगने आई

दिलीप- क्यूँ माँगे वो तुमसे माफी जब तुम उसे समझती ही नही हो

बिम्ला की बेटी- अगर मैं ऐसा काम करूँ तो मेरी माँ को कैसा लगेगा सोचके देखिए

दिलीप- तो तुम सोचती हो कि तुम्हारी माँ मज़े के लिए यह सब करती है

बिम्ला की बेटी- हाँ और यही सच है

दिलीप- मैं जानता हूँ कि तुम्हारी माँ ग़लत नही है लेकिन तुम तो मान ही नही रही हो तो एक काम करते हैं एक खेल खेलते हैं अगर तुम जीत गयी तो तुम्हारी माँ ग़लत है अगर तुम हार गयी तो तुम अपनी माँ को माफ़ करदोगी

बिम्ला की बेटी- मैं कुछ समझी नही आप क्या कहना चाहते हैं

दिलीप- समझता हूँ तुम मुझे बताओ कि तुम्हारे जिस्म के कौन्से हिस्से पे अगर कोई तुम्हे छुए तो तुम्हे बुरा लगेगा

बिम्ला की बेटी- यह आप खेल खेल रहे हैं या कुछ और

दिलीप- मैं यह सब कुछ तुम्हारे साथ करके तुम्हारी माँ को धोखा नही दूँगा और हाँ तुम तीन ही जगह बता सकती हो जहाँ पे मैं तुम्हे ना छुऊ

बिम्ला की बेटी- आप छुएन्गे

[आँखें चौड़ी करके]

दिलीप- हाँ यही तो खेल है अगर मैं तीन दिन के अंदर नही जीता तो तुम जीत जाओगी

बिम्ला की बेटी- लेकिन यह कैसे पता चलेगा कि आप हार गये और मैं जीत गयी

दिलीप- सिंपल अगर मैं तुमको वहाँ पे छुऊन्गा जहाँ पे तुम मना करोगी तो मैं हार जाउन्गा

और अगर तुम मुझे मेरे जिस्म को कहीं पे भी टच करोगी तो तुम हार जाओगी

बिम्ला की बेटी- मुझे थोड़ा वक़्त चाहिए

दिलीप- कल इसी टाइम पे यही पे आके बता देना और सुनो मैं कोई हवस का भेड़िया नही हूँ इसी लिए मेरी तरफ से बेफ़िक़र रहो आगे तुम्हारी मर्ज़ी अब मैं चलता हूँ मैं घर की तरफ आने लगा मुझे पता था बिम्ला की बेटी मान ही जाएगी और मुझे यह भी पता था कि बिम्ला की बेटी कौनसी जगह पे मुझे टच करने को नही बोलेगी अब जाहिर सी बात है हम लड़को के पास एक ही मेन चीज़ होती लेकिन लड़कियो के पास तीन मेन चीज़ होती हैं

पहली दूध मेरा मतलब है बूब्स

दूसरी चूत और तीसरी और सबसे मैन चीज़ गान्ड

जब भी कोई लड़का किसी भी लड़की को देखता है तो वो गान्ड होती है

चेहरा हो या फिर बूब्स को तो देखता ही है

लेकिन गान्ड ना देखे ऐसा हो ही नही सकता

जैसे कि मेरा लुक्खा अखिल

शूकर है मैं ऐसा कुछ नही सोचता

बिम्ला की बेटी भी यही तीन को चुनेगी

यह सब सोचते हुए मैं पहुँचा घर

बड़े मामा के घर में हर रूम में टीवी और एसी लगा हुआ है

लेकिन मेरी फॅमिली अपने रूम में नही रहती है

बाहर हॉल में एक साथ बैठ कर बाते करती है

जैसे कि अभी बड़ी नानी बड़ी मामी किरण मौसी और वँया बैठ कर बाते कर रही थी

मैं बड़ी नानी के पास बैठ गया

बड़ी नानी- कहाँ था इतनी देर से

दिलीप- ऐसे ही गाओं में घूम रहा था

बड़ी नानी- देख रही हूँ आज कल गाओं बहुत घूमता है

दिलीप- क्या बड़ी नानी आप भी

बड़ी नानी- मैं भी क्या पहले तुझे बाहर नही जाने देती थी तो तू हर वक़्त मेरे पास रहता था अब तो मैं भी भूल गयी तू आखरी बार मेरे पास कब बैठा था

दिलीप- [बड़ी नानी की बात सुनके मैं सोचने पे मजबूर होगया कि बिम्ला शांति और बिम्ला की बेटी के लिए मेरे पास टाइम ही टाइम है और मेरी बड़ी नानी के लिए जो मुझे ही अपना सबकुछ मानती हैं उनके लिए मेरे पास यही शब्द है कि अभी मेरी पढ़ाई चल रही है इसी लिए मैं आपके साथ बात नही करता हूँ...
 
अपडेट 133अ

दिलीप- यह सब सोचते हुए पता ही नही चला कब मेरी आँखो से आँसू बहने लगे

..... बड़ी नानी मैं आपको बहुत दुख देता हूँ ना

बड़ी नानी- मैं तो ऐसे बोल रही थी इसमें रोने वाली कोन्सि बात है

[बड़ी नानी मेरे आँसू पोछने लगी]

रोना बंद कर वरना मैं भी रो दूँगी

दिलीप- आप सच ही तो बोल रही थी

बड़ी नानी- अच्छा ठीक है तू मेरे साथ रोज 1 घंटा बात कर लेना मुझे बहुत खुशी होगी

दिलीप- ठीक है बड़ी नानी

बड़ी मामी- तो क्या मेरे साथ बात नही करेंगे दामाद जी

[यह सुनके तो दिल से एक ही आवाज़ आई एक बार और बोल दीजिए]

किरण मौसी- भाभी के साथ बात करोगे और मेरे साथ नही

बड़ी मामी- मेरे साथ तो बात करेगा ही आख़िर मैं होने वाली सास हूँ

बड़ी नानी- अब तुम दोनो भी बच्ची बन गयी

दिलीप- मामी आपके साथ भी 1 घंटा बात करूँगा और मासी आपके साथ भी

बड़ी नानी- और पढ़ाई मैं करूँगी हम तीनो के साथ एक ही बार बात कर लेना बच्चा का बच्चा ही रहेगा

दिलीप- बड़ी नानी अब मैं बड़ा हो गया

बड़ी नानी- अब मैं बड़ा हो गया हूँ फिर अभी रोया क्यूँ बड़े तो नही रोते

दिलीप- मामी भी तो रोती रहती हैं हर वक़्त

[जोश में बोल तो दिया लेकिन मामी के एक्सप्रेशन देख कर लग रहा था कि आज तो पीटके ही रहेंगी]

बड़ी मामी- मैं रोती हूँ रुक तू

[और मामी मेरी तरफ झपटी

मैं उठके भागने लगा

मामी भी मेरे पीछे भागने लगी

जब मुझे लगा कि मामी अब दौड़ नही पाएँगी

तो मैं रुक गया और जैसे ही मामी मेरे पास आई

मैं उनको गिलास में पानी दिया

मामी पानी पी ली

मैं और मामी दोनो जाके बड़ी नानी के पास बैठ गये

बड़ी नानी- तुझे क्या ज़रूरत थी इसके पीछे भागने की

किरण मौसी- भाभी भी तो किसी बच्ची से कम नही है

बड़ी मामी- तुम बहुत बड़ी हो गयी बताऊ तू मेंढक को पकड़ कर क्या करती थी

किरण मौसी- मैं भी बताउन्गी आपकी किचन वाली बात

दिलीप- कोन्सि बात

बड़ी नानी- मैं बताती हूँ

मासी और मामी एक साथ- नहियिइ

दिलीप- बड़ी नानी बताइए ना

बड़ी नानी- बता दूँ

किरण मौसी- तुझे क्या है हमारी बात जानके क्या करेगा

बड़ी मामी- दाँत क्या दिखा रहा है

बड़ी नानी- अच्छा लडो मत तुम दोनो कह रही हो कि नही बताऊ दिलीप बोल रहा है बताओ

तो अब वँया तय करेगी की बताऊ कि नही

वँया तुम क्या कहती हो

बड़ी मामी- मेरी बेटी है बेटी बोल दे मत बताइए

वँया- मम्मी आप इतना डर क्यूँ रही हैं

बड़ी दादी बता रही है तो बताने दीजिए

[बड़ी मामी अपना माथा पीट ली और मैं हँसने लगा]

बड़ी नानी- अच्छा तो सुनो पहले किरण की बात बताती हूँ

एक बार मैं किरण को एक कहानी सुनाई

कि एक राजकुमारी एक बहुत ही सुंदर मेंढक को चूम लेती है

तो वो मेंढक एक राजकुमार बन जाता है

तो यह क्या करती थी

उस दिन के बाद से मेंढक पकड़ती थी

और उसे चूम लेती थी

[किरण मौसी शरमाने लगी और बड़ी मामी हँसने लगी]

अब सुनो तुम्हारी मामी के गुण

एक दिन तुम्हारी मामी किचन में खाना बना रही थी अचानक कुछ आवाज़ आई तो तुम्हारी मामी डब्बा हटा के देखने लगी तभी उपर से एक बिल्ली नीचे आई बिल्ली को देख कर यह चीख पड़ी और पूरे घर में भागने लगी बिल्ली भी इसके पीछे भागने लगी तेरी मामी बिल्ली को देख कर इसलिए चीखी थी बिल्ली आटे के डब्बे में थी बिल्ली के शरीर पे आटा लगा हुआ था यह भूत भूत करके भागने लगी

दिलीप- लेकिन बिल्ली इनके पीछे भागी क्यूँ

बड़ी नानी- क्यूंकी वो बिल्ली किसी और की नही तेरी मामी की थी

क्या हुआ यह जब भागी तो बिल्ली समझी कि यह उसके साथ खेलना चाहती है

दिलीप- तो आप दोनो इतना डर क्यूँ रही थी नही बताने को

बड़ी मामी- हमे लगा कि तू हँसेगा

दिलीप- वो तो हँसुँगा ही और मैं ज़ोर से हँसने लगा मुझे लगा कि बड़ी मामी मुझे मारेंगी

लेकिन वो और किरण मौसी भी मेरे साथ हँसने लगी आज इतने दिनो बाद बड़ी मामी हँसी थी

और किरण मौसी को मैं पहली बार हंसते हुए देखा वँया भी अपनी माँ को हंसते हुए देख मुस्कुरा रही थी...
 
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