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- Dec 5, 2013
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अपडेट 30
अखिल- अपन एमएलए को 4 साल से मार नही पा रहा है और तू 4 दिन बोल रहा है
दिलीप- वो सब मैं सोच लूँगा तू जाके घर देख
अखिल- पहले कुछ ठुसने तो दे
दिलीप- किसी होटेल में चलते हैं
अखिल- होटेल की ऐसी की तैसी अपन के घर चल मस्त नाश्ता करेंगे
दिलीप- तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे तेरी घरवाली ने तेरे लिए नाश्ता बनाया होगा
अखिल- तुझे नाश्ते से मतलब है या मेरा दिमाग़ खाने से
दिलीप- चल
अखिल ने एक टॅक्सी रुकाई हम उसमें बैठ गये 30 मिनिट बाद हम पहुँचे अखिल के घर
अखिल का घर बहुत भीड़ वाले इलाक़े में था अखिल अपने घर के अंदर गया मैं भी उसके पीछे अंदर गया
अखिल- मेरी डार्लिंग मेरी जानू कहाँ है तू मेरी रानी
[एक लड़की किचन से बाहर आई]
कौन है
अखिल- तेरा नन्हा मुन्ना अखिल
लड़की- अरे आप आ गये बैठिए नाश्ता तयार ही है
[उस लड़की की नज़र मुझपे पड़ी]
यह कौन हैं
अखिल- यह अपन का दोस्त है यह भी नाश्ता करेगा
लड़की- नमस्ते
दिलीप- मैं भी नमस्ते किया
फिर वो किचन में चली गयी
[मैं धीरे से अखिल को कहा]
मैं तो मज़ाक में कहा था सच में यह तेरी बीवी है
अखिल- नही रे अपन अभी 20 साल का है और यह 19 की
अपन 21 साल का होते ही इससे शादी मनाएगा और पूरी क्रिकेट टीम पैदा करेगा
दिलीप- पर तेरे जैसे लंगूर को यह अंगूर कहाँ से मिल गया
अखिल- तू अपन की तारीफ़ कर रहा है या बेज़्जती
दिलीप- तारीफ़ कर रहा हूँ
[लूक्के मैं बड़बड़ाया]
अखिल- वो मैं तुझे नही बताउन्गा अपन की जान बताना चाहे तो बता सकती है
दिलीप- [इसकी थोड़ी लेता हूँ] वैसे जान का नाम क्या है
अखिल- अबे वो तेरी भाभी है अरषि जान सिर्फ़ अपन की है
दिलीप- लेकिन मैं तो जान ही कहूँगा
अखिल- जा मैं तेरे साथ नही करता
दिलीप- अच्छा सॉरी
अरषि- यह लीजिए नाश्ता तय्यार है
अखिल- आहहा कितनी रापचिक खुसबु है खाने में कितना मज़ा आएगा
दिलीप- बहुत अच्छी खुश्बू है
[फिर हम तीनो ने नाश्ता किया नाश्ता करने के बाद]
अखिल- तू तय्यार हो जा तुझे कॉलेज छोड़ देता हूँ
अरषि- नही आज कॉलेज बंद है टीचर्स ने हड़ताल करदी है
अखिल- यह मास्टर लोगो ने बहुत अच्छा किया
अरषि- क्या आप भी चलिए हाथ धो लीजिए
अखिल- अच्छा सुन यह मेरा दोस्त है
यह हुमारी लवस्टोरी जानना चाहता है
अरषि- जैसी आपकी मर्ज़ी
अखिल- तू कभी नही सुधरेगी अच्छा जा तू आराम कर
[अरषि चली गयी]...
अखिल- अपन एमएलए को 4 साल से मार नही पा रहा है और तू 4 दिन बोल रहा है
दिलीप- वो सब मैं सोच लूँगा तू जाके घर देख
अखिल- पहले कुछ ठुसने तो दे
दिलीप- किसी होटेल में चलते हैं
अखिल- होटेल की ऐसी की तैसी अपन के घर चल मस्त नाश्ता करेंगे
दिलीप- तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे तेरी घरवाली ने तेरे लिए नाश्ता बनाया होगा
अखिल- तुझे नाश्ते से मतलब है या मेरा दिमाग़ खाने से
दिलीप- चल
अखिल ने एक टॅक्सी रुकाई हम उसमें बैठ गये 30 मिनिट बाद हम पहुँचे अखिल के घर
अखिल का घर बहुत भीड़ वाले इलाक़े में था अखिल अपने घर के अंदर गया मैं भी उसके पीछे अंदर गया
अखिल- मेरी डार्लिंग मेरी जानू कहाँ है तू मेरी रानी
[एक लड़की किचन से बाहर आई]
कौन है
अखिल- तेरा नन्हा मुन्ना अखिल
लड़की- अरे आप आ गये बैठिए नाश्ता तयार ही है
[उस लड़की की नज़र मुझपे पड़ी]
यह कौन हैं
अखिल- यह अपन का दोस्त है यह भी नाश्ता करेगा
लड़की- नमस्ते
दिलीप- मैं भी नमस्ते किया
फिर वो किचन में चली गयी
[मैं धीरे से अखिल को कहा]
मैं तो मज़ाक में कहा था सच में यह तेरी बीवी है
अखिल- नही रे अपन अभी 20 साल का है और यह 19 की
अपन 21 साल का होते ही इससे शादी मनाएगा और पूरी क्रिकेट टीम पैदा करेगा
दिलीप- पर तेरे जैसे लंगूर को यह अंगूर कहाँ से मिल गया
अखिल- तू अपन की तारीफ़ कर रहा है या बेज़्जती
दिलीप- तारीफ़ कर रहा हूँ
[लूक्के मैं बड़बड़ाया]
अखिल- वो मैं तुझे नही बताउन्गा अपन की जान बताना चाहे तो बता सकती है
दिलीप- [इसकी थोड़ी लेता हूँ] वैसे जान का नाम क्या है
अखिल- अबे वो तेरी भाभी है अरषि जान सिर्फ़ अपन की है
दिलीप- लेकिन मैं तो जान ही कहूँगा
अखिल- जा मैं तेरे साथ नही करता
दिलीप- अच्छा सॉरी
अरषि- यह लीजिए नाश्ता तय्यार है
अखिल- आहहा कितनी रापचिक खुसबु है खाने में कितना मज़ा आएगा
दिलीप- बहुत अच्छी खुश्बू है
[फिर हम तीनो ने नाश्ता किया नाश्ता करने के बाद]
अखिल- तू तय्यार हो जा तुझे कॉलेज छोड़ देता हूँ
अरषि- नही आज कॉलेज बंद है टीचर्स ने हड़ताल करदी है
अखिल- यह मास्टर लोगो ने बहुत अच्छा किया
अरषि- क्या आप भी चलिए हाथ धो लीजिए
अखिल- अच्छा सुन यह मेरा दोस्त है
यह हुमारी लवस्टोरी जानना चाहता है
अरषि- जैसी आपकी मर्ज़ी
अखिल- तू कभी नही सुधरेगी अच्छा जा तू आराम कर
[अरषि चली गयी]...