Incest मैं अपने परिवार का दीवाना - Page 3 - SexBaba
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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 20

ब मामा- तुम्हें कोई लड़की पसंद है जिससे तुम शादी करना चाहते हो

दिलीप- नही मामा जी

ब मामा- ठीक है खाना खाओ

दिलीप- [क्या खाना खाओ सारा मूड कराब कर दिया]

मैं खाना खा रहा था

वँया मुझे घूर रही थी

ममाजी और मामा जी खाना ख़ाके अपने रूम में चले गये

बड़ी नानी मैं सुबह शहेर बाइक पे जाऊँगा

मैं बड़ी नानी से पूछा

वँया- मैं नही हम जाएँगे

दिलीप- हाँ पता है

ब नानी- नही बेटा तू कार लेके जाएगा

दिलीप- मुझे कहाँ कार चलानी आती है

ब नानी- ड्राइवर भी तो होगा

दिलीप- सुबह कितने बजे जाना है यहाँ से

ब नानी- 11 बजे

दिलीप- अच्छा ठीक है मैं सोने जा रहा हूँ मैं अपने रूम में आके लेट गया

अभी 9 बजे थे 1 घंटे बाद मैने अपना दोनो मोबाइल जेब में रखा

और वँया के रूम की तरफ जाने लगा

मैं गेट नॉक किया

वँया ने गेट खोला

वँया- क्या है

दिलीप- कुछ नही तुमसे बात करनी थी

वँया- बोलो

दिलीप- गेट पे ही

वँया साइड हो गयी मैं अंदर गया और वँया का रूम देखने लगा

वँया- मेरा रूम देखने आए हो

दिलीप- मैने अपना टच वाला मोबाइल निकाला तुम्हे यह चलना आता है

वँया- क्यूँ तुम्हें नही आता

दिलीप- आता तो तुम्हे क्यूँ बोलता

वँया मेरे हाथ से मोबाइल लेके चलाने लगी मैं ध्यान से देख रहा था

वँया- यह लो वँया ने मोबाइल देते हुए मुझे कहा

दिलीप- बस इतना ही

वँया- 1 घंटे से बता रही हूँ

दिलीप- लेकिन तुमने मोबाइल चलाना कहाँ से सीखा तुम्हारे पास तो मोबाइल भी नही है

वँया- प्रिया दी ने ही मुझे सिखाया

दिलीप- तुमसे एक सवाल पुछु बुरा तो नही मनोगी

वँया- क्या

दिलीप- मेरे हवेली आने से पहले तुम मुझसे ठीक तरह से बात नही करती थी ऐसा क्यूँ

वँया- तुम मेरे एक सवाल का जवाब दो तुम बड़ी दादी से कितना प्यार करते हो

दिलीप- मैं इस दुनिया में सबसे ज़्यादा अपनी बड़ी नानी से प्यार करता हूँ

वँया- बड़ी दादी किसी से बात ना करती हो और ना ही उसे पसंद करती हो तो

दिलीप- तो मैं भी उससे बात नही करूँगा और उससे दूर रहूँगा

[अब मेरी समझ में आ गया कि वँया क्या कहना चाहती है

बड़े मामा हर वक़्त मुझे डाँटते थे मुझे पसंद नही करते थे

इसी लिए वँया भी मुझसे दूर रहती थी]

मैं अपनी सोच में डूबा हुआ था

वँया ने मुझे हिलाया

वँया- कहाँ खो गये

दिलीप- कहीं नही वँया मुझे माफ़ करदो मैने तुम्हे ग़लत समझा

वँया- कोई बात नही

दिलीप- लेकिन आज तुमने मेरे साथ मज़ाक क्यूँ किया

वँया- उसमें भी तुम्हारी ग़लती है आज तुम घर पे आए मुझसे बात भी नही की और बाहर चले गये

दिलीप- अच्छा ठीक है तुम सो जाओ मैं जाता हूँ

वँया- एक मिनिट वँया मेरे हाथ से मोबाइल लेके हम दोनो का एक साथ फोटो खींच लिया

दिलीप- अब जाउ नही तो ममाजी को पता चल जाएगा

वँया- तुम पिताजी से इतना डरते क्यूँ हो

दिलीप- क्यूँ तुम नही डरती हो

वँया- डरती हूँ पर उतना नही नही जितना तुम डरते हो

दिलीप- एक बार मेरे जैसा सपना देख लो मैं बड़बड़ाया

वँया- कुछ कहा तुमने

दिलीप- नही तो यह कहके मैं भागा वहाँ से अपने रूम में आके कपड़े चेंज किया

मोबाइल में सुबह 8बजे का अलार्म लगाया बेड पे लेट ते ही नींद आ गयी

सुबह अलार्म के बजने से मेरी नींद खुली मैं उठा नाहया धोया कपड़े पहना

अपने रूम से बाहर निकला तो हिट्लर पेपर पढ़ रहे थे

ममाजी ने मुझे देखा और फिर पेपर पढ़ने लगे

मैं बड़ी नानी को ढूँडने लगा

बड़ी नानी मामी जी के साथ किचन में थी मैं बड़ी नानी के पास गया

और पीछे से उनकी आँखों पे अपना हाथ रख दिया

ब नानी- मेरा प्यारा बेटा

दिलीप- आप हमेशा मुझे पहचान लेती हैं

ब नानी- क्यूँ तुझे अच्छा नही लगता

दिलीप- बहुत अच्छा लगता है

मैं विनय से मिलके आउ

ब नानी- अभी तो तुझे शहेर जाना है

दिलीप- 1 घंटे में आ जाउन्गा

ब नानी- अच्छा ठीक है पहले नाश्ता करले

दिलीप- विनय के यहाँ करलूंगा

मैं बाहर जाने ही वाला था कि हिट्लर ने मुझे आवाज़ दी

ब नानी- धर्मेश

ब मामा- जी बड़ी माँ

मैं मौका देख के अपनी बाइक से निकल गया

सबसे पहले मोबाइल साइलेंट पे लगाके मोबाइल में 45 मिनिट बाद का अलार्म लगाया

मैं विनय के घर पहुँचा विनय के घर पे ताला लगा था

विनय और माँ शायद खेत गये होंगे

विनय के पड़ोस में बिम्ला रहती थी वो विधवा थी उसकी एक बेटी मेरी ही उमर की थी

और मेरे साथ ही पढ़ती थी

बात यह थी कि विमला के घर से कुछ आवाज़ आ रही थी

और मुझे पक्का यकीन था कि यह चुदाई की आवाज़ है

पहले तो सोचा की रहने दूं फिर सोचा कि बिम्ला तो विधवा है फिर ये चुदवा किससे रही है

मेन गेट बंद था मुझे याद आया कि घर की दूसरी तरफ खिड़की है

मैं उस तरफ गया तो मेरा दिमाग़ घूम गया

बिम्ला की बेटी खिड़की के पास खड़ी थी इसे तो स्कूल में होना चाहिए था

मैं चुपके से खिड़की के पास गया अंदर का नज़ारा देख के मैं दंग रह गया

बिम्ला घोड़ी बनी हुवी थी और गाओं का सरपंच बिम्ला की गंद में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था

पहली बार मैं किसी औरत को गांद मराते हुए देख रहा था

उपर से बिम्ला की बेटी अपनी चूत सहला रही थी मेरा लंड तो खड़ा होगया

मैने अपना मोबाइल निकाला और लगा रेकॉर्डिंग करने जब सरपंच झड गया

तो बिम्ला की बेटी पीछे मूडी मुझे देख के उसकी चीख निकलने वाली थी

कि मैं उसके मुँह पे अपना हाथ रख दिया और कहा

चिल्लाओ मत वरना तुम्हारी माँ की ही बदनामी होगी मैने अपना हाथ हटा लिया

और रेकॉर्डिंग बंद करदी मैं वहाँ से निकलना ही ठीक समझा

1 घंटा होने में 15 मिनिट ही बचा था......
 
अपडेट 21

दिलीप- तुम आज स्कूल नही गयी क्या

मैने [बिम्ला की बेटी] से पूछा

वो कुछ बोल ही नही रही थी शायद शरम के कारणया डर गयी थी स्कूल जाओ

मैं दाँत पीस के कहा वो भागी स्कूल की तरफ

मैं ज़मीन से एक पत्थर उठाया

सरपंच की गान्ड पे निशाना लगाके मार दिया

सरपंच को पत्थर लगते ही सरपंच की चीख निकल गयी

मैं बाइक पे बैठा और फुल स्पीड में बाइक चलाने लगा

शूकर है 5मिनिट पहले पहुँच गया हवेली मैं अंदर गया तो देखा

ब मामा की नज़र गेट पे ही थी मैं धीमे कदमो से अंदर गया

ब मामा कुछ बोल पाते उससे पहले ही बड़ी नानी मुझे अपने साथ मेरे रूम में लेगयि

ब नानी- नाश्ता किया

दिलीप- हाँ कर लिया

बड़ी नानी ने मेरे सिर पे एक चपत लगा दी

ब नानी- क्यूँ झूठ बोल रहा है तुझे अच्छे से जानती हूँ

दिलीप- विनय के घर ताला लगा है शायद खेत गया होगा

ब नानी- अच्छा सुन तू अपने छोटे मामा के यहाँ जा तो रहा है कोई कुछ बोले तो चुप चाप सुन लेना

दिलीप- ठीक बड़ी नानी और वैसे एक ही दिन की तो बात हैआज जाउन्गा रात को रुकुंगा

कल सुबह विद्या को लेके आ जाउन्गा और छोटे मामा मुझसे अच्छी तरह बात भी करते हैं

ब नानी- तू विद्या को दीदी क्यूँ नही कहता

दिलीप- विद्या ने मुझसे आज तक बात ही नही की तो मैं उसे दीदी क्यूँ कहूँ

ब नानी- बाते बनाना तो कोई तुझ से सीखे अच्छा जा तेरे बड़े मामा को तुझसे कुछ बात करनी है

मैं बड़ी नानी को देखने लगा

ब नानी- पहले कुछ खा ले

बड़ी नानी मुझे अपने हाथ से खाना खिलाने लगी मैं खाना खाया और चल दिया हिट्लर मामा के पास

दिलीप- मामा जी

ब मामा- बैठो

[मैं बैठ गया]

आज मंडे है तुम्हे विद्या को सनडे तक लेके आना है

दिलीप-[यह क्या नयी मुसीबत है] 6 दिन तक मैं वहाँ क्या करूँगा

ब मामा- यह भी हम बताएँ घूमना फिरना जो चीज़ पसंद आए वो खरीदना

दिलीप- [पैसे कॉन देगा आज तक मैं बड़ी नानी से कुछ नही माँगा तो आपसे माँगने का तो सवाल ही नही है]

ब मामा- यह लो और ज़रूरत पड़े तो जतिन से ले लेना

ब मामा ने नोटो की दो गॅडी जो करीब 1 लाख होगी मेरे हाथ में रखते हुए कहा

दिलीप- [अब हिट्लर के सामने सोचना भी बंद] मैने वो पैसे अपने कोर्ट के जेब में रख लिए

मैं बड़ी नानी के पास उनके रूम में गया

बड़ी नानी यह लीजिए मैने वो पैसे बड़ी नानी को देते हुए कहा

ब नानी- यह मुझे क्यूँ दे रहा है यह तो तुझे धर्मेश ने दिया है

दिलीप- आप तो अंतर्यामी हो गयी

ब नानी- बात मत बदल

दिलीप- आप को पता है मैं यह पैसे नही लूँगा

बड़ी नानी ने वो पैसे मेरे हाथ से लेके अलमारी में रख दिए

और अलमारी से नोटो की 4 गॅडी निकाल के मेरे कॉट की जेब में रखते हुए कहा

ब नानी- अब ठीक है

मैं बड़ी नानी से कुछ कह भी नही पाया बड़ी नानी अगर मुझे विष भी देंगी पीने को तो मैं वो भी पी लूँगा

मैं देखा बड़ी नानी रो रही है

बड़ी नानी क्या हुवा आप रो क्यूँ रही हैं

ब नानी- तू पहली बार मुझसे दूर जा रहा है तेरे बिना मैं कैसे रहूंगी

दिलीप- मैं भी आप से दूर नही जाना चाहता यह तो ममाजी की वजह से

तभी वँया आ गयी

वँया- चलना नही है क्या

ब नानी- अपना और वँया का ख्याल रखना

दिलीप- आप भी अपना ख्याल रखिएगा

मैने और वँया ने बड़ी नानी के पैर छुए

हम बाहर आए तो मामा जी और मामी जी मेन गेट पे खड़े थे

मैने और वँया ने दोनो के पैर छुए

ब मामा- ड्राइवर सारा समान रख दिया गाड़ी में

ड्राइवर- जी मालिक रख दिया है

ब मामा- अपना और वँया का ख्याल रखिएगा मामा जी ने मुझसे कहा

दिलीप- जी मामा जी

मैं और वँया कार में बैठे ड्राइवर गाड़ी चलाने लगा

दिलीप- वँया हमे पहुँचने में कितना टाइम लगेगा

वँया- 4 घंटे लगेंगे

दिलीप- बस मुझे लगा कि 6 घंटे तो लगेंगे ही

वँया- तुम क्या चाहते हो मैं पूरा दिन गाड़ी में बैठी रहूं

दिलीप- भड़क क्यूँ रही हो मैं तो सिर्फ़ पूछ रहा था और मैं अपना मुँह घुमा लिया

1 घंटे तक जब मैं कुछ नही बोला तो

वँया- दिलीप

मैं जवाब नही दिया

वँया- दिलीप सुनो ना मेरा सर दर्द कर रहा है

मैं वँया का सर अपने कंधे पे रखके दबाने लगा थोड़ी देर बाद वँया सो गयी

काका आगे किसी ढाबे पे रोकिएगा मैं ड्राइवर से कहा

ड्राइवर काका- जी छोटे मालिक

थोड़ी देर बाद मुझे भी नींद आने लगी लेकिन मैं सोया नही वँया के लिए....
 
अपडेट 22

दिलीप- काका आगे कोई ढाबा दिख रहा है

ड्राइवर काका- जी छोटे मालिक

मैं वँया को जगाने लगा

वँया- क्या है सोने भी नही देते

दिलीप- उठो तो

काका आप जाइए कुछ खाना है तो खा लीजिए

काका गाड़ी से बाहर चले गये

वँया- अब बोलो क्या है

दिलीप- चाइ पीयोगी

वँया- नही पीनी

दिलीप- सर दर्द कम हो जाएगा

वँया- नही

दिलीप- मान जाओ नही तो उठा के ले जाऊँगा

वँया- तुम और उठाके ले जाओगे पिताजी को अगर पता चला तो

दिलीप- शायद तुम भूल गयी मामा जी ने ही कहा था कि अपना और वँया का ख्याल रखना

वँया- चलो

हम एक टेबल पे बैठ गये

दिलीप- भैया दो चाइ देनामैने ढाबा वाले से कहा

वँया- तुमको याद है विद्या दीदी कैसी दिखती है

दिलीप- मुझे कैसे याद होगा विद्या को देखे हुवे 6 साल हो गये

वँया- तुम उन्हे दीदी क्यूँ नही कहते वो तुमसे 3 साल बड़ी है

दिलीप- तुम भी तो मुझसे 1 साल बड़ी हो तो क्या तुम्हे भी दीदी कहूँ

वँया- कह के तो दिखाओ दाँत तोड़ दूँगी

दिलीप- लो चाइ भी आ गई

हम दोनो ने चाइ पी और गाड़ी में बैठ गये

मैं अपने मोबाइल में सॉंग चालू करके सुनने लगा

मैं काका से पूछा और कितना टाइम लगेगा

ड्राइवर काका- 1 घंटा लगेगा छोटे मालिक

दिलीप- हम शहेर में दाखिल हो गये [बड़ी नानी मुझे हर साल दूसरे शहेर घूमने ले जाती थी

आज 1 साल बाद मैं छोटे मामा से मिलूँगा छोटे मामा 8साल पहले शहेर चले गये थे

लेकिन वो हर साल मुझसे और बड़ी नानी से मिलने आते हैं]

दिलीप- वँया तुम्हे पता है छोटे मामा शहेर क्यूँ चले गये

वँया- मुझे ठीक से याद नही है बाद में बताउन्गी

दिलीप- क्या हुआ काका गाड़ी क्यूँ रोक दी

ड्राइवर काका- बेटा आगे भीड़ लगी हुई है

दिलीप- हाँ तो देखिए ना किस बात की भीड़ है

ड्राइवर काका- अभी देखता हूँ [काका बाहर चले गये]

वँया- यह तो आम बात है जब भी मैं पिताजी के साथ आती हूँ शहेर यहाँ हमेशा कम से कम 1घंटा जाम ही लगा रहता है

ड्रायवर काका- छोटे मालिक कोई लड़की है जो बीच रास्ते पे पड़ी है

दिलीप- चलिए जाके देखते हैं

ड्राइवर काका- छोड़िए ना छोटे मालिक हमे क्या ज़रूरत है

दिलीप- [काका की बात सुनके गुस्सा बहुत आया] चलिए

[मैने काका को घूरते हुए कहा]

हम दोनो भीड़ में घुसते हुए आगे बढ़े

दिलीप- मैं काका को बोला क्या जमाना आ गया है

यहाँ पे कम से कम 500 लोग होंगे फिर भी इनमे से एक भी इस लड़की की मदद नही कर रहा है

लोग यह भूल जाते हैं कल कोई उनका अपना भी ऐसी हालत में हो सकता है काका ने अपनी गर्दन झुका ली

मैं उस लड़की के पास गया

तो देखा कि वो लड़की मेरे ही उमर की है चोट के निशान बहुत थे उसके जिस्म पर

उसके चेहरे पे लाल रंग लगा था इसी वजह से उसका चेहरा सॉफ नही दिख रहा था

मैने उसे अपनी गोद में उठा लिया और जाने लगा

तभी किसी की आवाज़ आई

अरे कहीं लड़की को किडनॅप ना करले पोलीस को फोन करो

दिलीप- कौन बोला कौन बोला

एक आदमी भीड़ से निकल के बिल्कुल मेरे सामने खड़ा हो गया

आदमी- मैं बोला

दिलीप- मैं अपनी लात पूरी ताक़त से उसके मैं पार्ट पे मार दी

वो वहीं पे गिर के दर्द से चिल्लाने लगा

तभी भीड़ के लोग मेरी तरफ बढ़ने लगे

दिलीप- रूको रूको वही पे भीड़ रुक गयी

जब यह लड़की यहाँ पे इतनी देर से पड़ी हुई थी

तो यह मादरचोद देखने नही आया कि यह लड़की जिंदा है कि मर गयी

जब मैं इसको अपने साथ ले जा रहा हूँ तो यह बोलता है कि पोलीस को फोन करो

मेरे आने से पहले इसने पोलीस को फोन क्यूँ नही किया मैं बताता हूँ

क्यूंकी यह अपनी माँ चोद रहा था

मैने एक और लात उसके पेट पे मारा

और वहाँ से आगे बढ़ गया

काका ने गाड़ी का गेट खोला

मैं उसे अपनी गोद में ही रखके बैठ गया

काका जल्दी चाचा जी के घर चलो

काका गाड़ी चलाने लगे

अब तुम्हे क्या हुवा

[मैं वँया से पूछा]

वँया- कुछ नही

दिलीप- 30 मिनिट बाद हम चाचा के घर पहुँचे

काका ने गेट खोला मैं बाहर उतरा और अंदर जाता उससे पहले ही सेक्यूरिटी ने मुझे रोक लिया

दिलीप- सामने से हटो

सेक्यूरिटी- पहले अपनी पहचान बताओ

दिलीप- वँया

वँया को देखते ही सेक्यूरिटी वाला साइड हो गया मैं जल्दी से अंदर गया

छोटी मामी और उनकी बेटियाँ सोफे पे बैठी बातें कर रही थी

सी मामी- कौन हो तुम और अंदर कैसे आए

दिलीप- मैने उस लड़की को ले जाके सोफे पे लिटा दिया

सी मामी- सेक्यूरिटी

[इसके आगे छोटी मामी कुछ बोल ही नही पाई]

वँया तुम यह तुम्हारे साथ है

वँया- चाची जी यह दिलीप है

[छोटी मामी मुझे घूर्ने लगी]

सी मामी- लेकिन यह लड़की कौन है

वँया- यह तो ड्राइवर काका को पता होगा

सी मामी- ड्राइवर कौन है यह लड़की

[फिर ड्राइवर काका ने सारी बात छोटी मामी को बताई गाली छोड़ के]

सी मामी- ठीक है तुम जाओ

[ड्राइवर से]

यह तुम्हारे बाप का घर नही है जो यहाँ किसी को भी उठा लाओ

अरुणा1- मम्मा आप किस भिकारी को समझा रही हैं

जिसे इतनी भी समझ नही है किसकी मदद करनी चाहिए और किसकी नही

अवन्तिका2- इसके लिए बड़ी दादी ने हम से रिश्ता नही रखा

दिलीप- आप सबको जितनी गाली देनी है बाद में दे देना पहले डॉक्टर को बुला दीजिए

[तभी छोटे मामा मैं गेट से अंदर आए

छोटे मामा- दिलीप तुम कब आए और यह लड़की कौन है

दिलीप- मैने छोटे मामा को सारी बात बताई

सी मामा- सविता जल्दी से डॉक्टर बुलाओ

दिलीप- [छोटी मामी ने इतनी जल्दी फोन लगाया कि मुझे हँसी आ गयी

मैं अपना रुमाल निकाला उसे मग में भिगोया और उस लड़की का चेहरा सॉफ किया

उस लड़की का चेहरा देखके सब की चीख निकल गयी

सब के मुँह से सिर्फ़ इतना ही निकला मेघा
 
अपडेट 23

दिलीप- मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी

क्यूंकी मेघा4 हूबहू सुनीता3 की तरह दिखती थी

सुनीता तो बेहोश ही होगयि

छोटे मामा मेघा का हाथ पकड़ के रोने लगे

सी मामा- बेटी क्या हुआ तुझे मेघा उठ ना बेटा

दिलीप- छोटी मामी भी मेघा के पास बैठ के रोने लगी

अरुणा और अवन्तिका जो अभी शेरनी बनी हुई थी वो भी रोने लगी]

मैं छोटे मामा के पास गया मामा जी संभालिए खुदको

छोटे मामा- कैसे संभालू खुदको मेरी फूल जैसी बच्ची के जिस्म पे ऐसे निशान

दिलीप- देखिए डॉक्टर साहब भी आ गये

छोटे मामा- डॉक्टर साहब मेरी बेटी को कुछ नही होना चाहिए आपको जो चाहिए मैं दूँगा

डॉक्टर- ठाकुर साहब सय्यम रखिए

दिलीप- [डॉक्टर मेघा को चेक करने लगा]

मैं वँया के पास गया

दिलीप- तुम कहाँ रोने लगी

[वँया मुझे घूर्ने लगी]

मेरा मतलब है कि तुम जाके मामी जी को सम्भालो ताकि वो अपनी बेटियो को संभाले

[वँया मामी जी के पास चली गयी]

मैं मामा जी के पास गया मामा जी मेरे गले लग्के रोने लगे

छोटे मामा- दिलीप मैं तुम्हारा एहसान कैसे चुकाउन्गा

दिलीप- मामा जी यह आप कैसी बात कर रहे हैं

वँया- चुप हो जाइए चाची आप ऐसे करेंगी तो अरुणा दीदी और अवन्तिका को कौन संभालेगा सुनीता भी बेहोश है

सी मामी- बेटी यह क्या हो गया सुबह मेघा अपने कॉलेज की तरफ से पिक्निक पे गयी थी

यह तो मान ही नही रहे थे मैने ही ज़िद की थी इनसे

डॉक्टर- ठाकुर साहब मैने इंजेक्षन दे दिया है सुनीता बेटी को भी थोड़ी देर में होश आ जाएगा

यह कुछ दवाई है मंगवा लीजिए मेघा बेटी को किसी बात का सदमा लगा है घबराने की बात नही है

सुबह तक होश आ जाएगा

दिलीप- डॉक्टर साहब वो चोट के निशान

डॉक्टर- वो तो जानबूझ के बनाए गये हैं बच्ची को कुछ भी नही हुआ है

[यह सुनके सी मामी अरुणा और अवन्तिका ने रोना बंद किया

वँया तो पहले ही चुप हो गयी थी]

छोटे मामा- थॅंक यू डॉक्टर साहब

डॉक्टर- अच्छा ठाकुर साहब अब अग्या दीजिए

दिलीप- [डॉक्टर साहब चले गये]

छोटे मामा- दिलीप अब तुम जाके आराम करो

अरुणा दिलीप को गेस्ट रूम में ले जाओ

अरुणा- जी पिताजी

दिलीप- मैं अपना समान लेके अरुणा के पीछे चलने लगा

अरुणा- यह है गेस्ट रूम

दिलीप- अरुणा आगे कुछ बोल पाती उससे पहले ही मैने रूम में जाके गेट अंदर से लॉक कर लिया

मैं जाके शवर के नीचे खड़ा हो गया [मैं बहुत देर से खुद को कंट्रोल किया हुआ था]

मेरी आँखो से आँसू बहने लगे बार बार मुझे याद आ रहा था कि यह घर तुम्हारे बाप का नही है

30 मिनिट तक शवर के नीचे खड़ा होके मैं रोता रहा

मैं बाथरूम से बाहर आया अपने कपड़े पहना और बेड पे लेट गया

मैने अपना मोबाइल में वाय्स रेकॉर्ड बंद किया

वाय्स रेकॉर्ड को 3 बार कॉपी किया

सोचा थोड़ा सो लेता हूँ मैं सो गया

मेरे कान में खट खाट की आवाज़ आने लगी

मैं उठा तो देखा मुझे सोते हुए 2 घंटे हो गये

मैं गेट खोला सामने वँया खड़ी थी

दिलीप- अंदर आओ

[वँया अंदर आ गयी]

बैठो

मैं बाथरूम गया मुँह धोके बाहर आया

क्या हुआ चुप क्यूँ हो

वँया- वो

दिलीप- क्या है सॉफ सॉफ बोलोना

वँया- तुम्हे नीचे खाना खाने के लिए बुला रहे हैं

दिलीप- विद्या कहाँ है

वँया- दीदी यही है घर पे जबसे उन्हे पता चला है वो भी बहुत दुखी है

दिलीप- अच्छा यह बताओ विद्या कोन्से कॉलेज में पढ़ती है

[यहण पे मैं कॉलेज को ए बी सी में लिखूंगा]

वँया- विद्या दी

कॉलेज ए में पढ़ती है

अरुणा और अवन्तिका दी कॉलेज बी में पढ़ती है

सुनीता और मेघा कॉलेज सी में पढ़ती है

दिलीप- तुमसे विद्या के बारे में पूछा था

उनसब की बात करने की क्या ज़रूरत थी

वँया- तुम्हारा मतलब तुम जब मुझसे पुछोगे तब मैं बताऊ

दिलीप- [ यह तो खिसकने वाली है]अया हूओ

वँया- क्या हुआ

दिलीप- चिंटी ने काट लिया

वँया हँसने लगी

चलो खाना खाने

मैं और वँया हॉल में पहुँचे

डाइनिंग टेबल पे सब बैठे थे पूरी फॅमिली सिर्फ़ मेघा सुनीता मामा जी और मामी जी नही थे

मैं बैठ गया

वँया मामी जी कहाँ है

वँया- मामा जी और मामी जी आज खाना नही खाएँगे

अरुणा मेरे प्लेट लगाने लगी

रहने दीजिए मैं ले लूँगा

अरुणा अपनी जगह जाके बैठ गयी

मैं प्याली में डाल डाला आधी रोटी लिया और खाने लगा सब मुझे देख रहे थे

[मैने वँया को आँख मारते हुए कहा]

खाना खाओ मुझे खा जाने वाली नज़र से मत देखो

सब ने खाना शुरू कर्दिया

मैं खाना ख़ाके उठने ही वाला था कि

विद्या- दिलीप हमे तुमसे कुछ बात करनी है

दिलीप- जी कहिए

विद्या- अरुणा और अवन्तिका तुमसे माफी माँगना चाहती हैं

दिलीप- किस लिए माफी माँगना है इन्हे इसीलिए कि मैने इनकी बहेन की जान बचाई

जी नही मैने इनकी बहेन की जान नही बचाई मैने एक इंसान की जान बचाई है

अगर यह लड़की कोई ऑर होती तो अभी तक मुझे 1000 गालियाँ पड़ चुकी होती

और वो लड़की इन्हे मुझसे माफी नही माँगनी है

इन्हे मुझे शुक्रिया कहना है कि मैने इनकी बहेन की जान बचाई

यह मेरा फ़र्ज़ था और किसी की भी मदद करने के लिए मैं कभी भी नही सोचूँगा

[यह बात मैने अरुणा की तरफ देखके कही]

वँया मेघा किस रूम में है

वँया- उस रूम में

दिलीप- तुम भी मेरे साथ चलो मैं और वँया मेघा वाले रूम में गये

मामा जी और मामी जी सोफे पे बैठे थे मैं मेघा को देखा और अपने रूम में चला गया

वँया भी अपने रूम में चली गयी मैं अपने रूम में पहुँच के कपड़े उतारा और अंडरवेर में सो गया...
 
अपडेट 24

सुबह 6 बजे मेरी नींद खुली

मैं उठके नाहया धोया कपड़े चेंज किया

अपना मोबाइल और पैसा कोट की जेब में रखा

रूम का गेट खोलते ही सामने वँया और विद्या खड़ी थी

वँया- कहाँ जा रहे हो

दिलीप- मामा जी से मिलने जा रहा हूँ

वँया- हम भी चलेंगे

हम तीनो मेघा के रूम में पहुँचे

वहाँ पे मामी थी

विद्या- चाचा जी कहाँ हैं

सी मामी- वो अपने रूम में गये हैं

विद्या- मेघा कैसी है

सी मामी- अभी तक होश नही आया हैतुम लोग बैठो ना

[हम तीनो बैठ गये

मामी बार बार मेरी तरफ देख रही थी]

वँया- दिलीप तुम्हे अरुणा और अवन्तिका से बात करनी चाहिए

दिलीप- मैं कुछ बोलता उससे पहले[मेघा को होश आने लगा]

मेघा मामी जी के गले लग्के रोने लगी

छोटी मामी- चुप हो जा बेटी तू रो क्यूँ रही है मैं हूँ ना तेरे पास

मेघा- मम्मा मैं बहुत डर गयी थी

[छोटे मामा भी आ गये]

छोटे मामा- [मेघा के सर पे हाथ रखते हुए] मेरी बहादुर बेटी

मेघा- पापा

[मैने वँया का हाथ पकड़ा और रूमसे निकल गया]

वँया- क्या है

दिलीप- तुम्हे क्या है हर वक़्त रोती रहती हो चलके अरुणा और अवन्तिका को बोलो मेघा को होश आ गया है

हम नीचे हॉल में गये

वँया- अरुणा दी मेघा को होश अगया है

अरुणा- अवन्तिका चल जल्दी

अवन्तिका- जी दीदी

[अरुणा और अवन्तिका मेघा को देखने चली गयी]

दिलीप- यहाँ से नज़दीक कोई मार्केट है

वँया- मेघा की तबीयत खराब है और तुम्हे मार्केट घूमना है

दिलीप- बताना है तो बताओ वरना मैं खुद ढूँढ लूँगा

वँया- रूको चलती हूँ झगड़ालू बैल

दिलीप- क्या बोली

वँया- कुछ नही चलो

[बाहर आके] काका गाड़ी निकालिए

दिलीप- मार्केट जाने के लिए कार लेजाना ज़रूरी है पैदल नही चल सकती

वँया- 2किमी दूर है मार्केट

दिलीप- हाँ तो टॅक्सी ले लेंगे

[वँया और मैं घर से बाहर निकले

वँया ने एक टॅक्सी रुकाई हम उसमे बैठ गये वँया ने बताया कहाँ जाना है

थोड़ी देर बाद हम मार्केट पहुँच गये मैने टॅक्सी वाले को पैसा दिया]

वँया- अब तो बताओ क्या काम है

दिलीप- तुम्हे क्यूँ जानना है

वँया- मत बताओ

मैं एक फ्लवर्स की दुकान पे गया और एक गुलदस्ता खरीदा उस गुलदस्ते पे लिखा था ;;गेट वेल सून

ये लो मैने वँया को गुलदस्ता देते हुए कहा

वँया- मेरे लिए थॅंक यू

दिलीप- मेघा के लिए है

वँया- पर यह तो तुमने लिया है मेघा के लिए तुम्हे ही देना चाहिए

दिलीप- मैं नही दूँगा

वँया- क्यूँ

दिलीप- मैं ये गुलदस्ता मेघा को दूँगा तो मामी अरुणा और अवन्तिका सोचेगी कि मैं छोटे मामा के सामने अपनी बढ़ाई करवाना चाहता हूँ

वँया- कितना ग़लत सोचते हो तुम तुम्हे पता है कल तुम्हारे जाने के बाद अरुणा दी और अवन्तिका कितना रोई हैं

दिलीप- तो मैं क्या करूँ

वँया- तुमने यह गुलदस्ता मेघा के लिए लिया है तो तुम्ही दो मैं नही दूँगी

दिलीप- मेरे लिए इतना नही कर सकती

वँया- नही

दिलीप- तुम्हे मेरी कसम

वँया- दे दूँगी अब चलें यहाँ से फिर हम टॅक्सी में बैठे हमे गये हुवे 2 घंटे हो गये थे

जब हम छोटे मामा के घर पहुँचे तो सी मामा चाइ पी रहे थे छोटी मामी किचन में थी

छोटे मामा- दिलीप कहाँ थे तुम 2 घंटे से

दिलीप- मार्केट गया था

छोटे मामा- बता के जाया करो

दिलीप- जी मामा जी हम मेघा को देख के आते हैं

सी मामा- ठीक है बेटा

दिलीप- मैं और वँया मेघा के रूम में पहुँचे वहाँ पे पाँचो बहनें बाते कर रही थी

विद्या- वानु कहाँ गये थे तुम दोनो

वँया- मार्केट गये थे

[वँया ने वो गुलदस्ता मेघा को देते हुए कहा] दिलीप लेके आया है तुम्हारे लिए

[मैने वँया को घूर के देखा]

मेघा- थॅंक यू दिलीप अरुणा दी ने मुझे बताया कि तुमने ही मेरी मदद की थॅंक यू सो मच

दिलीप- कोई बात नही आप आराम करो

[मेरी इस बात पे अरुणा और विद्या दोनो हँसने लगी]

वँया- अरे आप सब इतना क्यूँ हंस रही हैं

विद्या- बताती हूँ

दिलीप मेघा से इतनी इज़्ज़त से बात कर रहा है जैसे मेघा दादी अम्मा हो उसकी

मेघा- विद्या दीदी जाइए मैं आपसे बात नही करती

अरुणा- देख दादी अम्मा गुस्सा हो गयी

[मेघा अपना मुँह फूला कर बैठ गयी]

[सबने उसे किसी तरह मनाया]

दिलीप- वँया

वँया- क्या है

दिलीप- मैं अपने रूम में जा रहा हूँ

विद्या- दिलीप तुम भी बैठो ना हमारे साथ

[मैं कुछ नही बोला और सबके साथ बैठ गया

सब गॉसिप कर रहे थे और मैं बोर हो रहा था]

मैं फिर उठ गया

दिलीप- वँया मुझे कुछ काम है

मैं थोड़ी देर में आता हूँ

वँया- तुम्हे क्या काम है

[मैने वँया को घूर के देखा]

मैं भी आती हूँ

[मैं अपनी गर्दन ना में हिला दिया]

फिर भी वँया खड़ी होगयि फिर हम दोनो मेरे रूम में आए

मैं जल्दी से बाथरूम में घुसा और हल्का होने लगा

मैं बाथरूम से निकला तो वँया मुस्कुरा रही थी

दिलीप- तुमने मेरा नाम क्यूँ लिया

वँया- मैं कुछ समझी नही

दिलीप- मेरी प्यारी भोली वँया

गुलदस्ता तुमने दिया और नाम मेरा लिया

वँया- तुम उनसब से इतनी नफ़रत क्यूँ करते हो

दिलीप- नफ़रत

[मैं ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा]

तुम्हे पता है नफ़रत किसे कहते हैं नफ़रत वो है जो मैं रोज सहता हूँ फिर भी उफ्फ नही करता मैं इंसान हूँ मुझे भी तकलीफ़ होती है मैं सबसे दूर रहता इसकी वजह है आज कोई भी मुझे गाली देता है धूतकारता है मैं सहन कर लेता हूँ और सहन करता रहूँगा लेकिन कल अगर यह लोग मेरे दिल में बस गये तो फिर मैं इनकी नफ़रत इनकी गाली इनका धूतकारना कभी भी सहन नही कर पाउन्गा

मैं मर जाउन्गा

[यह कहके मैं घुटनो के बल बैठ गया

और फुट फुट के रोने लगा]...
 
अपडेट 25

दिलीप- मैं वही पे बैठा रोता रहा वँया रूम का गेट खोलके बाहर चली गयी

[चलिए देखते हैं वँया कहाँ गयी]

वँया दिलीप के रूम से सीधा मेघा के रूम की तरफ जाने लगी

ऐसा लग रहा था वँया को दिलीप से ज़्यादा तकलीफ़ हो रही थी

वँया की आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे वँया मेघा के रूम में पहुँची

पाँचो बहनो ने जब वँया की आँखों में आँसू देखा तो वो बहुत ज़्यादा घबरा गयी

विद्या- छोटी क्या हुआ तुझे तू रो क्यूँ रही

[वँया कुछ नही बोली]

अरुणा- वानु क्या हुआ मुझे बताना

विद्या- वँया वँया

[वँया कुछ बोल ही नही रही थी]

सुनीता और मेघा तो ज़्यादा डर गयी और रोने लगी

तभी विद्या ने वँया का कंधा पकड़ के ज़ोर से हिलाया वँया होश में आई और विद्या के गले लग्के रोने लगी

वँया- दीदी वो कह रहा था कि वो मर जाएगा

विद्या- कौन मर जाएगा बताना छोटी मेरा दिल बहुत घबरा रहा है

वँया- दिलीप

सब के मुँह से यही निकला क्या

विद्या- क्या हुआ दिलीप को

[वँया अपने दुपट्टे में से मोबाइल निकल के विद्या को देती है]

विद्या- छोटी यह तो मेरा मोबाइल है यह तेरे पास कहाँ से आया

[वँया वो मोबाइल विद्या से लेती है और उसमें वाय्स रेकॉर्डर प्ले कर्देति है]

विद्या- छोटी यह क्या कर रही

[दिलीप के बाथरूम से निकलने के बाद जो बाते दिलीप और वँया के बीच होती है वो सब मोबाइल के ज़रिए सब को सुनाई देता है जैसे जैसे दिलीप की बात आगे बढ़ती है सब के आँखों से आँसू बहने लगते हैं]

अरुणा- दी हमें देखना चाहिए कहीं दिलीप कोई ग़लत कदम ना उठा ले

[विद्या से]

विद्या- हाँ

[उसके बाद दिलीप की बहनें उसके रूम की तरफ दौड़ी]

[अब देखते हैं इधर क्या हुआ जब वँया रूम से बाहर गयी]

दिलीप- मुझे आज बहुत तकलीफ़ हो रही थी ऐसा लग रहा था कि अब मैं इनलोगो की नफ़रत बर्दाश्त नही कर पाउन्गा तभी मेरे सर में बहुत तेज़ दर्द होने लगा ऐसा लगा कि इस दर्द से मेरी जान निकल जाएगी मेरी पलके भारी होने लगी और मैं बेहोश हो गया वँया और बाकी सब दिलीप के रूम में पहुँचे

वँया दौड़ के दिलीप के पास गयी

वँया- दिलीप उठोना क्या हुआ तुम्हे दीदी देखोना दिलीप नही उठ रहा है

विद्या- अवन्तिका जल्दी से डॉक्टर को फोन लगा

अवन्तिका- डॉक्टर का नंबर तो मम्मा के पास है अभी जाती हूँ नीचे

अवन्तिका- मम्मी आपका फोन कहाँ है

छोटी मामी- वहाँ टेबल पे है तू इतनी घबराई हुई क्यूँ है

अवन्तिका- मम्मी दिलीप बेहोश हो गया है डॉक्टर को फोन करूँगी

सी मामी- उसे क्या हुआ

अवन्तिका डॉक्टर को फोन करने लगी

छोटी मामी- अब तो बता क्या हुआ दिलीप को

अवन्तिका- पापा का कहाँ हैं

छोटी मामी- ऑफीस गये हैं तू बात मत बदल

अवन्तिका ने सारी बात बताई

छोटी मामी- तू क्यूँ चिंता करती है उसे कुछ नही होगा जब तक वो हम सब की खुशियो में आग नही लगाएगा वो मरेगा नही

अवन्तिका- मम्मी आप को जितनी नफ़रत करनी है दिलीप से करिए हम बहनो का प्यार हमारे भाई के लिए काफ़ी है

छोटी मामी- बदतमीज़ अपनी माँ से ज़ुबान लड़ाती है

अवन्तिका बिना कुछ सुने दिलीप के रूम की तरफ जाने लगती है

इधर वँया का रोरोके बुरा हाल था

विद्या- छोटी चुप हो जा दिलीप ठीक हो जाएगा

वँया- यह सब मेरी वजह से हुआ है मैने दिलीप को उकसाया था कि वो अपने दिल का बोझ हल्का करे

विद्या- तेरी कोई ग़लती नही है ग़लती तो हमारी है हम कभी दिलीप को समझ नही पाए

दिलीप के लिए पापा और चाची की नफ़रत को बचपन से देखके हमारे दिल में भी दिलीप के लिए नफ़रत बैठ गयी

जबकि हमें पता ही नही है कि हम दिलीप से नफ़रत क्यूँ करते हैं

अरुणा- आप ठीक कह रही हैं दीदी हर साल हम गाओं जाते थे लेकिन कभी हम ने दिलीप से बात नही की

दिलीप हम से मिलने भी आता था तो हम उसे धूतकार के भगा देते थे

मेघा- दीदी दिलीप को कुछ होगा तो नही

विद्या- कुछ नही होगा दिलीप को आज तक दिलीप हमारी नफ़रत सहता रहा लेकिन अब मैं अपने भैया को कुछ नही होने दूँगी

अरुणा- हम अपने भैया को कुछ नही होने देंगे दीदी

अवन्तिका- हम सब बहने अपने भैया को कुछ नही होने देंगे

विद्या- डॉक्टर को फोन किया

अवन्तिका- जी दीदी थोड़ी देर में अजाएगा

विद्या- पहले दिलीप को बेड पे लिटाओ सब बहनो ने दिलीप को उठाके बेड पे लिटाया

वँया दिलीप के सर को अपनी गोद में रखे हुए थी सब बहनों के आँखो से आँसू बह रहे थे

विद्या- अवन्तिका जाके नीचे बैठ डॉक्टर आए तो जल्दी लेके आना

अवन्तिका रूम से बाहर आई और सीढ़ियो पे बैठ गयी वो अपनी माँ से बात नही करना चाहती थी

थोड़ी देर बाद डॉक्टर आगया

अवन्तिका डॉक्टर को उपर लेके आई

डॉक्टर ने दिलीप को चेक किया एक इंजेक्षन लगाया

डॉक्टर- थोड़ी देर में होश आजाएगा यह कहके डॉक्टर चला गया

अरुणा- देखो दिलीप को होश आरहा है

दिलीप- मैने अपनी आँखें खोल के देखा तो मैं चौंक गया मेरा सिर वँया की गोद में है मेरी पाँचो बहने मेरे आजू बाजू बैठी है काश यह पल यही थम जाए लेकिन मेरे दिमाग़ ने मुझे समझाया यह सच नही है

आप सब यहाँ वँया तुम रो क्यूँ रही हो

अरुणा- दिलीप हमें माफ़ करदो

दिलीप- आप सब जाइए यहाँ से

विद्या- दिलीप हम तबतक यहाँ से नही जाएँगे जब तक तुम हमें माफ़ नही करते

दिलीप- मैने कहा ना मुझे आप सब से बात नही करनी है यह कहके मैने अपना मुँह वँया की गोद छुपा लिया और रोने लगा

अरुणा- दिलीप तुम चाहो तो हमें भी धूतकार लो मार लो पर हमें माफ़ करदो

हम तुम्हारे पैर पकड़ते हैं हमें माफ़ करदो

दिलीप- दिदीइ...
 
अपडेट26

दिलीप- आप मुझे मजबूर कर रही हैं

विद्या- हम बहनों ने कभी भी तुम्हे राखी नही बाँधी शायद इसी लिए तुम हमें माफ़ नही कर रहे हो

दिलीप- आप समझ नही रही हैं आज आप सब जोश में होश खो बैठी हैं लेकिन कल आप सब मुझे फिर से ठुकरा देंगी

तो मैं तो जीते जी मर जाउन्गा

[सब एक साथ दिलीप कहते हुए मेरे गले लग गयी]

विद्या- अगर दुबारा मरने की बात कही तो हम अपनी जान दे देंगे एक बार हमें माफ़ कर्दे हम तुझे अपना भैया नही अपने जिगर का टुकड़ा समझेंगे

दिलीप- [अब मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था मेरा दिल खुद को रोक नही पा रहा था मैं कितना खुशनसीब हूँ कल मेरे पास सिर्फ़ बड़ी नानी थी लेकिन आज मेरे पास इतनी बहने और वँया है] भैया भी चलेगा

अरुणा- दीदी क्या बोला अभी दिलीप ने

विद्या- मुझे क्या पता उसी से पूछ

दिलीप- भैया भी चलेगा यह कह के मैं विद्या दी के गले लग गया और रोने लगा

अवन्तिका - तू सिर्फ़ विद्या दी का भैया नही है हम सबका है

मेघा- हाँ

अरुणा- दीदी देखो तो

हमारा भैया कैसे लड़कियो की तरह रो रहा है

विद्या- अरुणा तू तो सच बोल रही है अब चुप भी हो जा कितना रोएगा

दिलीप- मैं कहाँ रो रहा हूँ

अरुणा- दीदी मैं अपने भैया के लिए स्पेशल आलू के पराठे बना के लाती हूँ

[यह कहके अरुणा चली गयी]

विद्या- तेरे हाथ के पराठे भैया तू तो गया

मेघा- दीदी अब भैया का क्या होगा

अवन्तिका- वही होगा जो अरुणा दी का परान्ठा चाहेगा

दिलीप- आप सब इतना क्यूँ घबरा गयी अरुणा दी पराठे ही तो बनाने गयी हैं कोई बॉम्ब बनाने थोड़ी गयी हैं

अवन्तिका- भैया बॉम्ब बनाके खिलती तो चलता लेकिन अरुणा दी के पराठे

विद्या- अवनी ऐसा नही कहते

अवन्तिका- सॉरी दी

दिलीप- [मुझे तो इस बात से खुशी हो रही थी आज पहली बार मैं अपनी दी के हाथों से बने हुए पराठे खाउन्गा]

[जब अरुणा नीचे गयी]

अरुणा- मम्मी जल्दी किचन से बाहर जाओ

छोटी मामी- क्या करेगी मैं खाना बना रही हूँ

अरुणा- आप खाना बाद में बना लेना मुझे अपने भैया के लिए आलू के पराठे बनाने है

छोटी मामी- एक काम करना आलू के पराठे में थोड़ा सा ज़हेर मिला के अपने भैया को खिला देना

अरुणा- मम्मी अगर अपने ऐसा दोबारा कहा तो

सी मामी- बहुत ज़ुबान चलाने लगी है

अरुणा- आप जाइए यहाँ से

[छोटी मामी बिना कुछ बोले अपने कमरे की तरफ चली गयी]

[दिलीप के रूम में]

दिलीप- दीदी आप मुझसे बात नही करेंगी [मैने सुनीता दी से पूछा]

विद्या- यह तो हम से भी कम ही बात करती है यह सिर्फ़ मेघा से बात करती है

दिलीप- [मैने सुनीता दी की तरफ देखा]

सुनीता- नही भैया दी झूठ बोल रही हैं मैं तो सब से बात करती हूँ मैं तो तुझसे भी बात कर रही हूँ

तू तो मेरा भैया है है ना है कि नही

दिलीप- [मैं विद्या दी की तरफ देखा यह कम बोलता हुआ]

[विद्या दी अवनतिका दी और मेघा दी हँसने लगी उनका हसना बंद ही नही हो रहा था]

सुनीता- आप सब को क्या हुआ है

[तभी अरुणा दी पराठे लेके आ गयी]

अरुणा- पेश है मेरे हाथो के बने स्पेशल आलू के पराठे मैं अपने भैया को अपने हाथो से खिलाउन्गी

[दिलीप- [अरुणा दी मेरे साथ बेड पे बैठ गयी और मुझे अपने हाथों से पराठे खिलाने लगी]

[सब आँखें फाड़ फाड़ के मुझे खाते हुए देख रहे थे]

आप सब भी खाओना

अरुणा- वो सब मेरे हाथ के बने हुवे पराठे नही खाती

दिलीप- इतना स्वादिष्ट है

विद्या- सच में

दिलीप- आप खुद ख़ाके देखो

[उसके बाद तो सब पराठे पे टूट पड़े 5 मिनिट के अंदर सारे पराठे ख़तम हो गये]

अरुणा- यह क्या सारा चट कर गये आज तक तो कभी नही खाया

दिलीप- क्यूँ

अरुणा- मैं बताती हूँ पहली बार जब मैं पराठे बना रही थी मेरी ग़लती से पराठे में लाल मिर्च और नमक ज़्यादा पड़ गया था जब सब ने मेरे हाथ के बने हुए पराठे खाए तो सब ने मेरा बहुत मज़ाक उड़ाया उस दिन से जब भी मैं पराठे बनाती थी

उसमें नमक और लाल मिर्च 10गुना ज़्यादा मिला देती थी

विद्या- इसका मतलब तू हमें आज तक अपने मगरमच्छ आँसू दिखा के अपने ज्वालामुखी टाइप पराठे खिलाती रही

अरुणा- हाँ

विद्या- हाँ की बच्ची रुक तुझे बताती हूँ

[विद्या दी अरुणा दी को चपत लगाने लगी]

अरुणा- भैया बचाओ भैया बचाओ

दिलीप- [मैं उठने लगा]

विद्या- अगर तू वहाँ से उठा है तो तेरी टांगे तोड़ दूँगी

दिलीप- [मैं फिर बैठ गया]

अरुणा- मेरा प्यारा भैया अपनी दीदी को नही बचाएगा

दिलीप- [मैं तो फँस चुका था दोनो तरफ से तभी मुझे गाँव का एक मुहावरा याद आगया]

एक महापुरुष ने कहा था दो औरतो के झगड़े में ना किसी मर्द को पड़ना चाहिए ना ही किसी औरत को

[जहाँ विद्या दी मेरी बात पे खुश दिख रही थी वही अरुणा दी ने अपना मुँह फूला लिया]

[मैने अवन्तिका दी की तरफ देखा]

अवन्तिका- दीदी आप दोनो को यह औरत बोल रहा है

[इस बात पे मैने अपना माथा पीट लिया]

[विद्या और अरुणा दी मेरी सामने आके खड़ी हो गयी

विद्या- मैं तुझे किस आंगल से औरत दिखती हूँ

दिलीप- मैने आपको औरत थोड़े ही कहा है

अरुणा- तो तू मुझे औरत कह रहा है

दिलीप- मैने तो मुहावरे में औरत कहा था

[विद्या दी और अरुणा दी ने एक दूसरे को देखा और लगी मुझे पीटने]

[तभी छोटी मामा के चिल्लाने की आवाज़ आई

वो मेघा दी को आवाज़ दे रही थी]

[मैं मेघा दी की तरफ देखा तो मेघा दी बहुत डरी हुई दिख रही थी]

अरुणा- मेघा पिताजी तुझे आवाज़ दे रहे हैं

[तभी छोटे मामा मेरे रूम में दाखिल हुए उनके चेहरे को देखके हम सब डर गये

वो बहुत ही ज़्यादा गुस्से में लग रहे थे]...
 
अपडेट 27

छोटे मामा- मेघा हम आपसे सिर्फ़ एक बार पूछेंगे कल आप कहाँ गयी थी

दिलीप- [यह तो बड़े मामा का अंदाज़ है]

[पीछे से छोटी मामी भी आ गयी]

विद्या- चाचा जी बात क्या है

छोटे मामा- अभी हम मेघा को कॉलेज गये थे वहाँ हमें पता चला कि कल कॉलेज की तरफ से कोई पिक्निक प्लान नही किया गया था मेघा जवाब दीजिए

मेघा- पिताजी मुझे माफ़ कर दीजिए लेकिन मैं आपको नही बता सकती

छोटे मामा- मेघा

छोटी मामी- आप शांत हो जाइए

[छोटे मामा मामी को घूर्ने लगे छोटी मामी ने अपनी गर्दन नीचे कर ली]

छोटे मामा- मेघा अगर आपने कुछ ग़लत नही किया है तो हम आपसे वादा करते हैं हम आपको माफ़ करदेंगे

दिलीप- [मेघा दी ने अपनी गर्दन ना में हिला दी]

[मामा जी गुस्से में मेघा दी की तरफ बढ़ने लगे]

[डर तो बहुत लग रहा था पर क्या करूँ बहेन का सवाल था मुझे पता था कि छोटे मामा कभी गुस्सा नही करते

लेकिन जब करते है तो जल्दी शांत नही होते ]

[मैं मामा जी के सामने खड़ा हो गया]

छोटे मामा- दिलीप सामने से हट जाओ

दिलीप- आप शांत हो जाइए

छोटे मामा- हम ने कहा सामने से हट जाओ

दिलीप- आप शांत हो जाइए

छोटे मामा- दिलीप

[मामा जी ने अपना हाथ उठा लिया मुझे मारने के लिए]

[सब की चीख निकल गयी]

हम फिर कह रहे हैं

दिलीप- मैं वही पे खड़ा रहा

मामा जी मुझे मारने लगे

एक तो आज तक किसीने मुझपे हाथ नही उठाया उपर से ममाजी पहलवान टाइप 1 मार रहे थे ऐसा लग रहा था कि 10आदमी मिलके पीट रहे हैं मामा जी मुझे मारते रहे मैं वही पे खड़ा रहा जब ममाजी का गुस्सा शांत हुआ तो वो चले गये

छोटी मामी भी चली गयी मैं वही पे बैठ गया दर्द के कारण

चोट मुझे लगी है रो आप सब रही हैं मैं बिल्कुल ठीक हूँ

मेघा दी मेरे पास आने लगी

तभी वँया जो शुरू से चुप थी

वँया ने मेघा दी को धक्का दे दिया

दिलीप- वँया

मैने मेघा दी को जाके उठाया यह क्या कर रही हो

वँया- क्या कर रही हूँ यह अगर सच बता देती तो चाचा तुम्हे इतनी बुरी तरह मारते

दिलीप- मतलब तुम बदला लोगि

मेघा- नही भैया मारने दीजिए दीदी को मुझे तो घिन आ रही है अपने आप से आज ही मुझे भाई मिला और आज ही मेरी वजह से मेरे भाई को

दिलीप- विद्या दी आप सब बाहर जाइए मुझे मेघा दी से अकेले मिनट बात करनी है

[वँया तो जा ही नही रही थी विद्या और अरुणा दी उसे पकड़ के ले गये]

मैने गेट लॉक किया और मेघा दी के पास बैठ गया

पहले आप रोना बंद कीजिए मैने अपने हाथो से मेघा दी के आँसू पोछे

अब आप अगर मुझे दिल से अपना भाई मानती हैं तो मुझे सच बताएँगी

मेघा- भैया जान माँग लो दे दूँगी पर

दिलीप- ठीक है

मैं मामा जी से जाके कह देता हूँ कल मैं गाओं वापस जा रहा हूँ और कभी वापस नही आउन्गा

मेघा- भैया मुझे मजबूर मत करो

दिलीप- एक आखरी बात कहना चाहता हूँ मान लीजिए कल मुझे कॅन्सर हो जाए तो मैं भी आप सब को कुछ नही बताऊ

और मर जाउ कितना अच्छा लगेगा आप सब को ना

मेघा- भैया ऐसा मत बोलो मैं बताती हूँ

[यह बात आज से एक महीना पहले की है]

[आज भी मैं रोज की तरह कॉलेज गयी]

मैं घर से सीधा कॉलेज जाती थी जब मैं अपने क्लास की तरफ बढ़ रही थी तो अचानक मेरे सामने एक लड़का आके खड़ा होगया मैं घबरा गयी

लड़का- मुझे तुमसे बात करनी है

मेघा- बोलो

लड़का- यहाँ नही अकेले में

मेघा- जो बात करनी है यही पे करो

लड़का- आइ लव यू

मेघा- बट आइ डोंट लव यू

[मुझे पता था कि यह इस कॉलेज के गुन्डो में से एक था जो लड़के पढ़ते नही सिर्फ़ टाइम पास करने आते हैं]

यह कह के मैं क्लास रूम में चली गयी

उस दिन से वो लड़का रोज मुझे परेशान करने लगा

[1 हफ्ते बाद]

आज फिर वो लड़का मेरे सामने आगया

मेघा- मुझे क्यूँ परेशान कर रहे हो

लड़का- मैं तुमसे प्यार करता हूँ

मेघा- रोज एक ही बात कहते हो जब मैं ना कह चुकी हूँ आज आखरी बार सुन लो मैं तुमसे प्यार नही करती मैं इतनी परेशान थी कि मुझे पता ही नही चला कि मैं किधर जा रही हूँ

तभी किसी लड़की ने मेरा हाथ पकड़ के खींच लिया

लड़की- पागल हो क्या अभी सीढ़ी से गिर जाती

मेघा- क्या मैं सीढ़ी से गिरने वाली थी

लड़की- हां

मेघा- ओह थॅंक यू सो मच

लड़की- इट्स ओके मैं शीतल

मेघा- आइ आम मेघा उस दिन से हम बहुत अच्छे फ्रेंड्स बन गये

मैं और शीतल हर बात शेयर करते इसी तरह दिन बीतते गये

उस दिन मैं शीतल के साथ थी वो लड़का फिर आया इस बार तो उसने हद करदी उसने मेरा हाथ पकड़ लिया मुझे बहुत गुस्सा आया मैने गुस्से में उस लड़के को थप्पड़ मार दिया थप्पड़ की आवाज़ सुनके वहाँ पे भीड़ जमा हो गयी

जब प्रिन्सिपल ने सुना कि किसीने मेरा हाथ पकड़ा है वो दौड़े हुए आए

उस लड़के का बाप यहाँ का एमएलए था इसीलिए प्रिन्सिपल ने उस लड़के को वॉर्निंग दी

प्रिन्सिपल- बेटी यह बात ठाकुर साहब को मत बताना

मेघा- ओके सर मैं भी शीतल को बाइ बोलके घर चली आई

भैया तुम्हारे आने के एक दिन पहले शीतल ने मुझे बोला

शीतल- मेघा 2दिन बाद मेरा बर्तडे है

मेघा- वाउ यार अच्छा बता तुझे क्या गिफ्ट चाहिए

शीतल- तू

मेघा- मतलब

शीतल- कल और परसो मैं तेरे साथ बिताना चाहती हूँ

मेघा- ठीक है कल का दिन और परसो का दिन तेरा हुआ

शीतल- मैं 48अवर्स कह रही हूँ

मेघा- नही यार दिन का तो ठीक है पर रात को बाहर रुकने की पर्मिशन पापा कभी नही देंगे

शीतल- प्लीज़ यार तू ही तो मेरी एक फ़्रेंड है

शीतल मुझे मनाने लगी

हार के मैं भी हाँ कह दी

माँ ने किसी तरह पापा को मना लिया

पापा मान गये...
 
अपडेट 28

[मैने माँ को भी पिक्निक के बारे में झूठ कहा सुनीता की तबीयत ठीक नही थी तो वो कॉलेज नही गयी

इस लिए माँ भी आसानी से मान गयी]

मेघा- मैं बहुत खुश थी

शीतल मेरी एक ही फ़्रेंड थी

शीतल को उसके बर्तडे पे मेरा साथ चाहिए था

प्रेज़ेंट-

मेघा- भैया वो देखो

दिलीप- मेन गेट की तरफ देखा

ऐसा लग रहा था कि कोई हमारी बाते सुनने की कोशिश कर रहा है

[यह वँया ही होगी] आप चिंता मत करो

मेघा- हमारी बाते कोई सुन रहा है

दिलीप- सुनता है तो सुनने दीजिए वो जिंदगी भर बाहर खड़ा रहे

इस रूम से आवाज़ बाहर जाएगी ही नही तो वो सुनेगा क्या

मेघा- तुम्हे कैसे पता

दिलीप- आप बताइए ना जो बता रही थी

पास्ट

मेघा- मैं सुबह होके रेडी हो गयी

शीतल ने कहा था कि 10 बजे माल में आजना

मैं 8 बजे ही निकल गयी पापा ने 1घंटा पहले ही बोला जानेको

मैं सोचने लगी

2 घंटे पहले माल जाके क्या करूँगी शीतल के घर ही चली जाती हूँ

शीतल के पापा बिज्निस मॅन हैं और वो दूसरे सिटी में रहते हैं उन्होने शीतल के लिए अलग घर ले रखा है

शीतल के साथ केर्टेकर भी रहती है

मैं पहुँची शीतल के घर

मेन गेट खुला था

मैं अंदर गयी

शीतल के रूम से कुछ आवाज़ आ रही थी

मैं सीढ़ियो से उपर जाने लगी

जब मैं उपर पहुँची तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी

जिस लड़के मदन को मैने थप्पड़ मारा था

वो और मेरी बेस्ट फ़्रेंड शीतल सेक्स कर रहे थे

मेरी आँखों से आँसू बहने लगे

मदन- मेरी जान आज हमारा प्लान पूरा हो जाएगा

शीतल- हाँ मेरा राजा

आज हम सुनीता से बदला लेंगे उसकी बहेन को बर्बाद करके

मेघा- [सुनीता से बदला पर आज तक सुनीता का किसी के साथ झगड़ा तो नही हुआ]

मदन- हाँ मेरी जान

शीतल- मदन तुम्हे तो सुनीता से बदला लेना चाहिए

मदन- बेस्ट फ़्रेंड का नाटक करते करते कहीं सच में तो

शीतल- मदन तुम ऐसा कैसे सोच सकते हो तुम्हारे लिए मैं इस कॉलेज में आई हूँ तुम्हारे लिए मैने मेघा से दोस्ती की

मदन- सॉरी जान गुस्सा मत हो बताता हूँ मेरा प्लान क्या है हम पहले मेघा को यूज़ करेंगे

और जब हमें सही मौका मिलेगा तब हम सुनीता पे वार करेंगे

शीतल- उसके बाद मेघा और सुनीता तुम्हारी रखैल और मेरी गुलाम होगी

मेघा- सुनीता के बारे में ऐसा सुनके मैं अपने आप को रोक नही पाई

शीतल.........................

मदन और शीतल मुझे देखते ही बुत बन गये

तू ही मेरी एक फ़्रेंड थी और तूने ही मुझे धोखा दिया मैं तुम दोनो का वो हाल करूँगी

इसके आगे मैं कुछ बोल पाती उससे पहले ही किसी ने मेरी गर्दन पे इंजेक्षन लगा दिया

मेरी आँखें भारी होने लगी और मैं बेहोश हो गयी जब मेरी आँख खुली तो मेरे होश उड़ गये

मेरे हाथ पैर दोनो बँधे हुए थे एक टेबल के बीच वाले हिस्से पे मुझे बाँध के लिटाया हुआ था

मेरे दोनो पैर टेबल के अलग साइड में बँधे थे मुझे एहसास हुवा कि मेरे बदन पे एक भी कपड़ा नही था

मदन मेरी फोटो खींच रहा था मैं रोती रही बिलखती रही चिल्लाती रही पर मदन टेबल के चारो तरफ घूम के मेरे नंगे जिस्म की फोटो खींचता रहा मैं दुआ कर रही थी कि मुझे मौत आजाए

तभी मेरे कानो में पोलीस साइरन की आवाज़ पड़ी मैने डर से अपनी आँखें बंद कर ली

मेरी गर्दन पे फिर किसी ने इंजेक्षन लगा दिया और मैं फिर बेहोश हो गयी

उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो मैं अपने कमरे में थी

मेरे पास मेरा पूरा परिवार था

प्रेज़ेंट

अब तुम ही बताओ अगर मैं पापा को यह सारी बाते बता दूं तो क्या पापा चुप बैठेंगे

नही वो शीतल और मदन को कहीं से भी ढूंड निकालेंगे और जान से मार देंगे

फिर वो अपने आप को पोलीस के हवाले करदेंगे उन्हे या तो फाँसी होगी या उम्रक़ैद

फिर मेरी माँ और मेरी बहनों का क्या होगा

दिलीप- होगा तो मदन और शीतल के साथ वो जो ना कभी किसीने देखा होगा और ना कभी किसी सुना होगा

[यह सब बात मैं बहुत ज़्यादा गुस्से में कह रहा था]

मेघा- देखा इसी लिए मैं नही बता रही थी

तुम्हे मेरी कसम यह सब बात भूल जाओ

दिलीप- ठीक है आप मेरी कसम खा के कहिए आप कभी शूसाइड करने की कोशिश नही करेंगी

मेघा- मैं तुम्हारी कसम नही खाउन्गी

दिलीप- तो मैं भी आपकी कसम नही मानूँगा

मेघा- मैं तुम्हारी कसम खाती हूँ मैं कभी शूसाइड नही करूँगी

दिलीप- ठीक है आप यही सो जाइए

मेघा- मैं अपने कमरे में जा रही हूँ

दिलीप- नही

[मैने मेघा दी का हाथ पकड़ा अपने बेड पे ले गया मेघा दी का सर अपनी गोद में रखा]

सो जाइए

मेघा- भैया हमेशा मेरे साथ रहोगे ना

दिलीप- हाँ दीदी अब सो जाइए

[मेघा दी सो गयी]

आज का दिन ही अजीब था शाम 6 बजे ही लग रहा था कि रात हो गयी

[मैने गेट खोला तो देखा वँया दीवार से सट के सो रही थी

मैने वँया को गोद में उठाया और उसके रूम में लेजाके सुला दिया

मैने अरुणा दी का रूम नॉक किया

अरुणा दी ने गेट खोला

अरुणा- मेघा कहाँ है

दिलीप- सो रही है आप भी आराम करो

[एक एक करके मैं सब बहनो के रूम में गया]

6 घंटे ऐसे ही बीत गये

कोई भी खाना खाने नही आया मैं अपने रूम में गया

[कोट पैंट पहना अपने पैसे अपना मोबाइल जेब में रखा]

[मैं मेघा दी को देखा]

मेघा दी मुझे माफ़ करदेना मैं आपकी कसम तोड़ रहा हूँ कल आप मुझे कसम देती तो शायद मैं नही तोड़ता

लेकिन आज भाई का फ़र्ज़ पूरा करना है मैं घर से बाहर आया और निकल पड़ा

अपनी जिंदगी की बाजी खेलने

अपनी बहेन के लिए....
 
अपडेट 29

दिलीप- मैं निकल तो गया घर से पर कुछ समझ ही नही आरहा था पहली बार बाहर अकेले

डर नही लग रहा था पर बेचैनी ज़रूर थी मैं चलने लगा

1 घंटे तक चलता रहा

तभी 1 पार्क दिखा मैं पार्क के अंदर गया और 1 बेंच पे बैठ गया

एक तो रात उपर से ठंड उपर से छोटे मामा ने जो पीटा उससे जल्द ही नींद आ गई

पता नही कितनी देर तक मैं सोया रहा

मुझे ऐसा लगा कोई मेरी जेब टटोल रहा है

मैने उसका हाथ पकड़ा और ज़ोर से दबा दिया

आँख खोला तो देखा यह मेरी ही उमर का लड़का है

तभी लड़के ने मेरे मुँह पे एक मुक्का मार दिया

पूरा जबड़ा हिल गया

वो अपना हाथ छुड़ाके भागने की कोशिश कर रहा था

मैने भी उसके मुँह पे एक मुक्का मार दिया

लड़का- अया हाथ है या हथौड़ा

दिलीप- [मैने एक और मुक्का उसके मुँह पे मारा]

लड़का- सॉरी माफ़ कर्दे आगे से कभी पंगा नही लूँगा

दिलीप- [मैने उसका हाथ छोड़ दिया]

तू सुबह 5 बजे मेरी जेब क्यूँ टटोल रहा था

लड़का- चोरी करने के लिए अपुन पैसे के लिए कुछ भी करेगा

दिलीप- कुछ भी

लड़का- हाँ

दिलीप- 1 खून करने का कितना लेगा

[वो लड़का मुझे नीचे से उपर घूर्ने लगा]

लड़का- अपुन सारे काम करता है पर खून और रेप कभी नही

दिलीप- 1 लड़की की इन्फर्मेशन निकालने का कितना लेगा

लड़का- उस लड़की का स्टेटस पता होना माँगता

दिलीप- किसी बिज्निस की बेटी है यहाँ अकेली रहती है

लड़का- 15000

दिलीप- 10000 दूँगा

लड़का- 15000 से एक रुपया भी कम नही

दिलीप- तो फिर रहने दे

लड़का- अरे तू तो गुस्सा हो गया

दिलीप- 10000

लड़का- डन

लड़का- नाम तो बता लड़की का

दिलीप- फोटो है

लड़का- भेज भेज मेरे मोबाइल पे

दिलीप-[मैने अपना मोबाइल निकाला]

लड़का- रुक रुक 1 मिनिट तेरा मोबाइल दिखा

दिलीप- [वो लड़का अपनी जेब से एक सिम कार्ड निकाल के मेरे मोबाइल में डालने लगा]

यह क्या कर रहा है

लड़का- तुझे देखके लगता है तू कोई झोल पार्टी है

मैं तेरे मोबाइल में खांचा सिम कार्ड डाल रहा हूँ

दिलीप- मेरे मोबाइल में सिम तो है

लड़का- कल अगर तू किसी लफडे में अंदर होगया तो पोलीस तेरा नंबर चेक करेगी उसमें तो मेरा नंबर दिख जाएगा ना अप्पुन किसी लफडे में ना फँसे इसी लिए अपन तेरे मोबाइल में खांचा कार्ड डाल रहा है इसका नंबर ही नही दिखता है

दिलीप- पर मैं तो फोटो भेज रहा हूँ फोन थोड़ी कर रहा हूँ

लड़का- अरे यह पोलीस वाले बहुत बड़े मामू होते हैं यह पता कर लेते हैं कि मोबाइल कहाँ है यह तो सिम कार्ड है

इसीलिए अगर कोई लफडे वाला काम है तो मोबाइल और सिमकार्ड दोनो फेन्क दे

दिलीप- [फिर उसने मेरे मोबाइल से फोटो भेजा और अपना सिम निकालने लगा]

यह सिम कितने का देगा

लड़का- 1000

दिलीप- यह ले 1000 और 5000 5 काम होने के बाद

लड़का- 4 घंटे बाद यही पे मिलना

दिलीप- धोखा तो नही देगा

लड़का- अपन ग़लत काम भी सही तरीके से करता है

दिलीप- [मैं आँख बंद करके सोचने लगा] थोड़ी देर बाद किसी के हँसन की आवाज़ आई

मैने आँख खोलके देखा तो 3 4 लड़किया आपस में बाते करके हंस रही थी

घड़ी में टाइम देखा तो 7बजे थे

[तभी मेरे दिमाग़ में 1 आइडिया आया]

मैं उन लड़कियों के पास गया

मैने हाथ जोड़ के कहा

धन्यवाद देवियो

वो सब मुझे आँखें फाड़ फाड़ के देखने लगी

मैं पार्क से बाहर निकलके आगे बढ़ गया मैं एक सस्ते होटल गया

500 में 12 घंटे

मैं रूम में गया नहाया धोया फ्रेश हुवा

वही कपड़े दोबारा पहेन के वापस पार्क में आके बैठ गया

आधे घंटे बाद वो लड़का आ गया

लड़का- इस लड़की का नाम शीतल वर्मा है यह पहले किसी और कॉलेज में पढ़ती थी

अचानक कुछ दिन पहले यह दूसरे कॉलेज में पढ़ने लगी इसका हरामी एमएलए के बेटे के साथ चक्कर है

पहले इसके साथ एक केयरटेकर रहती थी

1 हफ्ते पहले इसकी केयरटेकर गायब हो गई अप्पुन ने पता किया

2दिन से यह घर से बाहर नही निकली

यह इस सोसाइटी में रहती है

दिलीप- अच्छा एक बात बता तूने एमएलए को हरामी क्यूँ कहा

लड़का- जब 1000 कमिने मरते हैं तो 1 हरामी पैदा होता है

और जब वैसे 1000 हरामी मरते हैं तो एमएलए जैसा महहरामी पैदा होता है

यह हरामी एमएलए इस शहेर का सबसे बड़ा रंडीखाना चलता हैऔरतो और बच्चो की तस्करी करता है

पहले यह हरामी एमएलए इसी रंडीखाने का एक भडवा था

दिलीप- [यह कहते हुए उस लड़के की आँखों में आँसू आ गये]

तू रो क्यूँ रहा है

लड़का- क्यूंकी अप्पुन भी उसी रंडीखाने की उपज है मैं तो बहुत खुश हूँ कि मेरी माँ मुझे जानम देते हुए ही मर गयी वरना दुनिया के ताने सुन सुन के मर जाती और अपन एक एक को चीर देता अपन ने 2 बार एमएलए को मारने की कोशिश की पर मार नही पाया तू सोच रहा है अपन तेरे को यह बात क्यूँ बता रहा है तेरी आँखो में अपन ने एक ऐसा दर्द देखा है

जो एक बिन माँ बाप का बच्चा ही समझ सकता है

दिलीप- मैं तुझे एक बात बताता हूँ मैं नेता के बेटे से बदला लेना चाहता हूँ

और अगर तू एमएलए से बदला लेना चाहता है तो हम दोनो का दुश्मन एक है

लड़का- अपन सिर्फ़ एमएलए को ठोकना चाहता है और अपन आज से तेरे साथ है हाथ मिला

दिलीप- मैं दिलीप

लड़का- मैं अखिल

दिलीप- यह ले बाकी पैसे

अखिल- यह पैसे तू अपने पास रख और बता तूने कुछ सोचा है आगे क्या करेगा

दिलीप- शीतल जहाँ रहती है वहाँ हमे एक घर चाहिए और यह याद रखना वो घर साउंडप्रूफ हो

अखिल- हो जाएगा

दिलीप- हमारे पास सिर्फ़ 4दिन है

[ पाँच5वे दिन बड़े मामा नही ठाकुर धर्मेश वीर परताप सिंग यमराज बनके आएँगे]..,
 
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