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- Dec 5, 2013
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अपडेट 20
ब मामा- तुम्हें कोई लड़की पसंद है जिससे तुम शादी करना चाहते हो
दिलीप- नही मामा जी
ब मामा- ठीक है खाना खाओ
दिलीप- [क्या खाना खाओ सारा मूड कराब कर दिया]
मैं खाना खा रहा था
वँया मुझे घूर रही थी
ममाजी और मामा जी खाना ख़ाके अपने रूम में चले गये
बड़ी नानी मैं सुबह शहेर बाइक पे जाऊँगा
मैं बड़ी नानी से पूछा
वँया- मैं नही हम जाएँगे
दिलीप- हाँ पता है
ब नानी- नही बेटा तू कार लेके जाएगा
दिलीप- मुझे कहाँ कार चलानी आती है
ब नानी- ड्राइवर भी तो होगा
दिलीप- सुबह कितने बजे जाना है यहाँ से
ब नानी- 11 बजे
दिलीप- अच्छा ठीक है मैं सोने जा रहा हूँ मैं अपने रूम में आके लेट गया
अभी 9 बजे थे 1 घंटे बाद मैने अपना दोनो मोबाइल जेब में रखा
और वँया के रूम की तरफ जाने लगा
मैं गेट नॉक किया
वँया ने गेट खोला
वँया- क्या है
दिलीप- कुछ नही तुमसे बात करनी थी
वँया- बोलो
दिलीप- गेट पे ही
वँया साइड हो गयी मैं अंदर गया और वँया का रूम देखने लगा
वँया- मेरा रूम देखने आए हो
दिलीप- मैने अपना टच वाला मोबाइल निकाला तुम्हे यह चलना आता है
वँया- क्यूँ तुम्हें नही आता
दिलीप- आता तो तुम्हे क्यूँ बोलता
वँया मेरे हाथ से मोबाइल लेके चलाने लगी मैं ध्यान से देख रहा था
वँया- यह लो वँया ने मोबाइल देते हुए मुझे कहा
दिलीप- बस इतना ही
वँया- 1 घंटे से बता रही हूँ
दिलीप- लेकिन तुमने मोबाइल चलाना कहाँ से सीखा तुम्हारे पास तो मोबाइल भी नही है
वँया- प्रिया दी ने ही मुझे सिखाया
दिलीप- तुमसे एक सवाल पुछु बुरा तो नही मनोगी
वँया- क्या
दिलीप- मेरे हवेली आने से पहले तुम मुझसे ठीक तरह से बात नही करती थी ऐसा क्यूँ
वँया- तुम मेरे एक सवाल का जवाब दो तुम बड़ी दादी से कितना प्यार करते हो
दिलीप- मैं इस दुनिया में सबसे ज़्यादा अपनी बड़ी नानी से प्यार करता हूँ
वँया- बड़ी दादी किसी से बात ना करती हो और ना ही उसे पसंद करती हो तो
दिलीप- तो मैं भी उससे बात नही करूँगा और उससे दूर रहूँगा
[अब मेरी समझ में आ गया कि वँया क्या कहना चाहती है
बड़े मामा हर वक़्त मुझे डाँटते थे मुझे पसंद नही करते थे
इसी लिए वँया भी मुझसे दूर रहती थी]
मैं अपनी सोच में डूबा हुआ था
वँया ने मुझे हिलाया
वँया- कहाँ खो गये
दिलीप- कहीं नही वँया मुझे माफ़ करदो मैने तुम्हे ग़लत समझा
वँया- कोई बात नही
दिलीप- लेकिन आज तुमने मेरे साथ मज़ाक क्यूँ किया
वँया- उसमें भी तुम्हारी ग़लती है आज तुम घर पे आए मुझसे बात भी नही की और बाहर चले गये
दिलीप- अच्छा ठीक है तुम सो जाओ मैं जाता हूँ
वँया- एक मिनिट वँया मेरे हाथ से मोबाइल लेके हम दोनो का एक साथ फोटो खींच लिया
दिलीप- अब जाउ नही तो ममाजी को पता चल जाएगा
वँया- तुम पिताजी से इतना डरते क्यूँ हो
दिलीप- क्यूँ तुम नही डरती हो
वँया- डरती हूँ पर उतना नही नही जितना तुम डरते हो
दिलीप- एक बार मेरे जैसा सपना देख लो मैं बड़बड़ाया
वँया- कुछ कहा तुमने
दिलीप- नही तो यह कहके मैं भागा वहाँ से अपने रूम में आके कपड़े चेंज किया
मोबाइल में सुबह 8बजे का अलार्म लगाया बेड पे लेट ते ही नींद आ गयी
सुबह अलार्म के बजने से मेरी नींद खुली मैं उठा नाहया धोया कपड़े पहना
अपने रूम से बाहर निकला तो हिट्लर पेपर पढ़ रहे थे
ममाजी ने मुझे देखा और फिर पेपर पढ़ने लगे
मैं बड़ी नानी को ढूँडने लगा
बड़ी नानी मामी जी के साथ किचन में थी मैं बड़ी नानी के पास गया
और पीछे से उनकी आँखों पे अपना हाथ रख दिया
ब नानी- मेरा प्यारा बेटा
दिलीप- आप हमेशा मुझे पहचान लेती हैं
ब नानी- क्यूँ तुझे अच्छा नही लगता
दिलीप- बहुत अच्छा लगता है
मैं विनय से मिलके आउ
ब नानी- अभी तो तुझे शहेर जाना है
दिलीप- 1 घंटे में आ जाउन्गा
ब नानी- अच्छा ठीक है पहले नाश्ता करले
दिलीप- विनय के यहाँ करलूंगा
मैं बाहर जाने ही वाला था कि हिट्लर ने मुझे आवाज़ दी
ब नानी- धर्मेश
ब मामा- जी बड़ी माँ
मैं मौका देख के अपनी बाइक से निकल गया
सबसे पहले मोबाइल साइलेंट पे लगाके मोबाइल में 45 मिनिट बाद का अलार्म लगाया
मैं विनय के घर पहुँचा विनय के घर पे ताला लगा था
विनय और माँ शायद खेत गये होंगे
विनय के पड़ोस में बिम्ला रहती थी वो विधवा थी उसकी एक बेटी मेरी ही उमर की थी
और मेरे साथ ही पढ़ती थी
बात यह थी कि विमला के घर से कुछ आवाज़ आ रही थी
और मुझे पक्का यकीन था कि यह चुदाई की आवाज़ है
पहले तो सोचा की रहने दूं फिर सोचा कि बिम्ला तो विधवा है फिर ये चुदवा किससे रही है
मेन गेट बंद था मुझे याद आया कि घर की दूसरी तरफ खिड़की है
मैं उस तरफ गया तो मेरा दिमाग़ घूम गया
बिम्ला की बेटी खिड़की के पास खड़ी थी इसे तो स्कूल में होना चाहिए था
मैं चुपके से खिड़की के पास गया अंदर का नज़ारा देख के मैं दंग रह गया
बिम्ला घोड़ी बनी हुवी थी और गाओं का सरपंच बिम्ला की गंद में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था
पहली बार मैं किसी औरत को गांद मराते हुए देख रहा था
उपर से बिम्ला की बेटी अपनी चूत सहला रही थी मेरा लंड तो खड़ा होगया
मैने अपना मोबाइल निकाला और लगा रेकॉर्डिंग करने जब सरपंच झड गया
तो बिम्ला की बेटी पीछे मूडी मुझे देख के उसकी चीख निकलने वाली थी
कि मैं उसके मुँह पे अपना हाथ रख दिया और कहा
चिल्लाओ मत वरना तुम्हारी माँ की ही बदनामी होगी मैने अपना हाथ हटा लिया
और रेकॉर्डिंग बंद करदी मैं वहाँ से निकलना ही ठीक समझा
1 घंटा होने में 15 मिनिट ही बचा था......
ब मामा- तुम्हें कोई लड़की पसंद है जिससे तुम शादी करना चाहते हो
दिलीप- नही मामा जी
ब मामा- ठीक है खाना खाओ
दिलीप- [क्या खाना खाओ सारा मूड कराब कर दिया]
मैं खाना खा रहा था
वँया मुझे घूर रही थी
ममाजी और मामा जी खाना ख़ाके अपने रूम में चले गये
बड़ी नानी मैं सुबह शहेर बाइक पे जाऊँगा
मैं बड़ी नानी से पूछा
वँया- मैं नही हम जाएँगे
दिलीप- हाँ पता है
ब नानी- नही बेटा तू कार लेके जाएगा
दिलीप- मुझे कहाँ कार चलानी आती है
ब नानी- ड्राइवर भी तो होगा
दिलीप- सुबह कितने बजे जाना है यहाँ से
ब नानी- 11 बजे
दिलीप- अच्छा ठीक है मैं सोने जा रहा हूँ मैं अपने रूम में आके लेट गया
अभी 9 बजे थे 1 घंटे बाद मैने अपना दोनो मोबाइल जेब में रखा
और वँया के रूम की तरफ जाने लगा
मैं गेट नॉक किया
वँया ने गेट खोला
वँया- क्या है
दिलीप- कुछ नही तुमसे बात करनी थी
वँया- बोलो
दिलीप- गेट पे ही
वँया साइड हो गयी मैं अंदर गया और वँया का रूम देखने लगा
वँया- मेरा रूम देखने आए हो
दिलीप- मैने अपना टच वाला मोबाइल निकाला तुम्हे यह चलना आता है
वँया- क्यूँ तुम्हें नही आता
दिलीप- आता तो तुम्हे क्यूँ बोलता
वँया मेरे हाथ से मोबाइल लेके चलाने लगी मैं ध्यान से देख रहा था
वँया- यह लो वँया ने मोबाइल देते हुए मुझे कहा
दिलीप- बस इतना ही
वँया- 1 घंटे से बता रही हूँ
दिलीप- लेकिन तुमने मोबाइल चलाना कहाँ से सीखा तुम्हारे पास तो मोबाइल भी नही है
वँया- प्रिया दी ने ही मुझे सिखाया
दिलीप- तुमसे एक सवाल पुछु बुरा तो नही मनोगी
वँया- क्या
दिलीप- मेरे हवेली आने से पहले तुम मुझसे ठीक तरह से बात नही करती थी ऐसा क्यूँ
वँया- तुम मेरे एक सवाल का जवाब दो तुम बड़ी दादी से कितना प्यार करते हो
दिलीप- मैं इस दुनिया में सबसे ज़्यादा अपनी बड़ी नानी से प्यार करता हूँ
वँया- बड़ी दादी किसी से बात ना करती हो और ना ही उसे पसंद करती हो तो
दिलीप- तो मैं भी उससे बात नही करूँगा और उससे दूर रहूँगा
[अब मेरी समझ में आ गया कि वँया क्या कहना चाहती है
बड़े मामा हर वक़्त मुझे डाँटते थे मुझे पसंद नही करते थे
इसी लिए वँया भी मुझसे दूर रहती थी]
मैं अपनी सोच में डूबा हुआ था
वँया ने मुझे हिलाया
वँया- कहाँ खो गये
दिलीप- कहीं नही वँया मुझे माफ़ करदो मैने तुम्हे ग़लत समझा
वँया- कोई बात नही
दिलीप- लेकिन आज तुमने मेरे साथ मज़ाक क्यूँ किया
वँया- उसमें भी तुम्हारी ग़लती है आज तुम घर पे आए मुझसे बात भी नही की और बाहर चले गये
दिलीप- अच्छा ठीक है तुम सो जाओ मैं जाता हूँ
वँया- एक मिनिट वँया मेरे हाथ से मोबाइल लेके हम दोनो का एक साथ फोटो खींच लिया
दिलीप- अब जाउ नही तो ममाजी को पता चल जाएगा
वँया- तुम पिताजी से इतना डरते क्यूँ हो
दिलीप- क्यूँ तुम नही डरती हो
वँया- डरती हूँ पर उतना नही नही जितना तुम डरते हो
दिलीप- एक बार मेरे जैसा सपना देख लो मैं बड़बड़ाया
वँया- कुछ कहा तुमने
दिलीप- नही तो यह कहके मैं भागा वहाँ से अपने रूम में आके कपड़े चेंज किया
मोबाइल में सुबह 8बजे का अलार्म लगाया बेड पे लेट ते ही नींद आ गयी
सुबह अलार्म के बजने से मेरी नींद खुली मैं उठा नाहया धोया कपड़े पहना
अपने रूम से बाहर निकला तो हिट्लर पेपर पढ़ रहे थे
ममाजी ने मुझे देखा और फिर पेपर पढ़ने लगे
मैं बड़ी नानी को ढूँडने लगा
बड़ी नानी मामी जी के साथ किचन में थी मैं बड़ी नानी के पास गया
और पीछे से उनकी आँखों पे अपना हाथ रख दिया
ब नानी- मेरा प्यारा बेटा
दिलीप- आप हमेशा मुझे पहचान लेती हैं
ब नानी- क्यूँ तुझे अच्छा नही लगता
दिलीप- बहुत अच्छा लगता है
मैं विनय से मिलके आउ
ब नानी- अभी तो तुझे शहेर जाना है
दिलीप- 1 घंटे में आ जाउन्गा
ब नानी- अच्छा ठीक है पहले नाश्ता करले
दिलीप- विनय के यहाँ करलूंगा
मैं बाहर जाने ही वाला था कि हिट्लर ने मुझे आवाज़ दी
ब नानी- धर्मेश
ब मामा- जी बड़ी माँ
मैं मौका देख के अपनी बाइक से निकल गया
सबसे पहले मोबाइल साइलेंट पे लगाके मोबाइल में 45 मिनिट बाद का अलार्म लगाया
मैं विनय के घर पहुँचा विनय के घर पे ताला लगा था
विनय और माँ शायद खेत गये होंगे
विनय के पड़ोस में बिम्ला रहती थी वो विधवा थी उसकी एक बेटी मेरी ही उमर की थी
और मेरे साथ ही पढ़ती थी
बात यह थी कि विमला के घर से कुछ आवाज़ आ रही थी
और मुझे पक्का यकीन था कि यह चुदाई की आवाज़ है
पहले तो सोचा की रहने दूं फिर सोचा कि बिम्ला तो विधवा है फिर ये चुदवा किससे रही है
मेन गेट बंद था मुझे याद आया कि घर की दूसरी तरफ खिड़की है
मैं उस तरफ गया तो मेरा दिमाग़ घूम गया
बिम्ला की बेटी खिड़की के पास खड़ी थी इसे तो स्कूल में होना चाहिए था
मैं चुपके से खिड़की के पास गया अंदर का नज़ारा देख के मैं दंग रह गया
बिम्ला घोड़ी बनी हुवी थी और गाओं का सरपंच बिम्ला की गंद में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था
पहली बार मैं किसी औरत को गांद मराते हुए देख रहा था
उपर से बिम्ला की बेटी अपनी चूत सहला रही थी मेरा लंड तो खड़ा होगया
मैने अपना मोबाइल निकाला और लगा रेकॉर्डिंग करने जब सरपंच झड गया
तो बिम्ला की बेटी पीछे मूडी मुझे देख के उसकी चीख निकलने वाली थी
कि मैं उसके मुँह पे अपना हाथ रख दिया और कहा
चिल्लाओ मत वरना तुम्हारी माँ की ही बदनामी होगी मैने अपना हाथ हटा लिया
और रेकॉर्डिंग बंद करदी मैं वहाँ से निकलना ही ठीक समझा
1 घंटा होने में 15 मिनिट ही बचा था......