Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 129 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

देर शाम को मां बेटे दोनों की नींद खुली,, तो अपने आप को अपने घर में पाकर दोनों को थोड़ी निराशा जरूर हुई लेकिन यह उनका खुद का घर था इसलिए यहां आना जरूरी था लेकिन जो मजा उन्हें तीन दिनों के अंदर मिला था वह दोनों जिंदगी भर भुलने वाले नहीं थे हर एक पल हर एक घंटा मदहोशी से भरा हुआ था,दोनों ने वहां पर कितना मजा किया था इस बात का जिक्र एक दूसरे को छोड़कर दोनों किसी और से कभी कर भी नहीं सकते थे। अंगड़ाई लेते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली,,।

बाप रे बहुत गहरी नींद लग गई थी।

हां वह तो है तीन दिन तक ठीक से ना तुम सो पाई हो ना मैं सो पाया हूं।



जगाया भी तो तूने हीं था।

आप कर भी क्या सकते हैं साथ में इतनी खूबसूरत औरत हो तो भला सोकर कोई वक्त बिताएगा क्या अगर सच में कोई सोकर वक्त बिताएगा इतनी खूबसूरत औरत साथ में होने के बावजूद भी तो दुनिया में उससे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा।

मतलब की तु समझदार है!

बिल्कुल सही समय का सदुपयोग करना जानता हूं तुम्हारे साथ बिताया हुआ हर एक पल बहुत कीमती है इसलिए उसका समय कैसे बिताना है कैसे उपयोग करना है मैं यह अच्छी तरह से जानता हूं।

क्या जानता है,,?( सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)

यही कि तुम्हारे साथ जितना भी पल रहो लंड को तुम्हारी बुर में डाले रहो,,, तभी समय का सही उपयोग किया कहा जाएगा वरना सब कुछ बेकार है।

सच में तु बहुत बदमाश हो गया है,,।

बदमाशी करने में ही तो असली मजा है। तुम भी थोड़ी सी बदमाशी करती हो तभी तो मुझे इतना मजा देती हो जब शरीफ थी तो ना तुम मजा ले पा रही थी ना मैं मजा ले पा रहा था बस दोनों तड़प कर सो जाते थे।

अच्छा यह सब बदमाशी है।

तो क्या एक छिनार की बदमाशी,,, अगर तुम पर पुस्तक लिखा जाए तो उसका शीर्षक यही होना चाहिए छिनार की बदमाशी।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी और हंसते हुए बोली,,,)





अच्छा यह बात है अब तो लेखक बनना चाहता है और किताब भी अपनी मां पर ही लिखना चाहता है।

किताब में मुख्य भूमिका में तुम और मैं कितना मजा आ जाए अगर सच में मैं किताब लिखना शुरू कर दूं तो हाथों-हाथ बिक जाएगी,,,।

अच्छा जब लोगों को पता चलेगा कि छिनार की बदमाशी पुस्तक में मां बेटे के बीच के अवैध संबंध को लेकर कहानी लिखी हुई है तो क्या इसे कोई खरीदेगा।

क्या बात कर रही हो मम्मी हांथो हाथ बिक जाएगी किसी को पता भी नहीं चलेगा की किताब कब दुकान पर आती है और कब बिक जाती है। लोग किताब लेने के लिए लाइन लगा कर रखेंगे।

क्या ऐसी किताबें लोग पढ़ते हैं।

क्यों नहीं पढ़ते हैं पिताजी की किताब हम दोनों ने पढे तो थे कितनी रसीली किताब थी पढ़कर ही लंड खड़ा हो जाता था और सच कहो तो किताब पढ़ने के बाद ही तुम्हें चोदने का मन मेरे दिमाग में एकदम बन गया था।

हां यह बात तो है किताब का हर एक करना एक अलग ही मदहोशी की कहानी कह रहा था सच में उसे पढ़ने के बाद कोई भी मर्द हो या औरत अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाता अगर जुगाड़ हो तो चुदाई या तो फिर हाथ से ही काम चला लेता इसके बावजूद भी कहानी को पढ़ने के बाद इस जुगाड़ में लग जाता कि कब उसके नीचे कोई आए जैसे कि तू। मैं देख रही थी तू कहानी जिस तरह से पढ़ रहा था तेरा लंड एकदम से खड़ा था तेरे पेट में तंबू बना हुआ था,,,



तुम्हारी बुर भी तो पानी छोड़ रही थी,,,,।

धत् ऐसा नहीं था,,,।

बिल्कुल ऐसा ही था मेरी जान जब पंखे की सफाई के लिए तुम टेबल पर चढ़ी थी तो तुम्हारी दूर से मदन रस की बूंद गिरकर टेबल पर अपनी आभा बिखेर दी थी जो मैं अपनी आंखों से देखा था,,,, अब तुम चाहे लाख इनकार करो लेकिन मैं नहीं मानने वाला क्योंकि मैं अपनी आंखों से देखा था।

अच्छा तो तु मेरी साड़ी के अंदर देख रहा था।

क्या करूं मैं अपनी लालच को रोक नहीं पाया था वह पल बेहद मदहोशी से भरा हुआ था और तुम भी तो मुझे अपनी बर दिखाना चाहती थी इसलिए तो अपनी चड्डी निकाल दी थी।

धत्,,,, झूठा,,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा शर्मा गई और मुस्कुराने लगी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा जो कुछ भी कह रहा है वह सच कह रहा है इस बात से वह पहले इनकार करें लेकिन हकीकत उसे भी पता थी वह जानबूझकर अपनी चड्डी निकाल कर अपने बेटे को वाकई में अपनी बुर के दर्शन कराना चाहती थी क्योंकि जितनी आग अंकित के बदन में लगी हुई थी उतनी ही आग उसके बदन में भी लगी हुई थी। अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को शर्म से लाल होता देखकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला।)

होठ भले इनकार कर रहे हो लेकिन तुम्हारा चेहरा झूठ नहीं कह पा रहा है देखो कितना शर्म से लाल हो गया है,,,,।

तू सच में हरामी है लगता है तूने बराबर मुझ पर नजर रखा हुआ था,,,, लेकिन तुझे कैसे पता चला कि मैं पंखा साफ करने से पहले चड्डी पहनी हुई थी।

जब मैं किताब पढ़ रहा था और किताब पढ़ कर जब मैं अलमारी में उसे रख दिया तब किसी बात को लेकर हम दोनों के बीच कुश्ती हुई थी पता है मैं तुम्हें लेकर बिस्तर पर गिर गया था और तुम्हारी टांग ऊपर उठ गई थी तुम्हारी साड़ी एकदम कमर तक आ गई थी तब मैं तुम्हारी चड्डी देख लिया था और उसके बाद जब पंखा साफ कर रही थी तब तुम चड्डी नहीं पहनी थी। इस बीच तुम कमरे से बाहर गई थी तभी निकल कर आ गई थी।

मेरी एक एक हरकत पर नजर रख रहा था है ना।

क्या करूं तुम्हें पाने का जो ख्वाब मन में बसा रखा था उसके लिए यह सब करना जरूरी था।

और आखिरकार तेरा ख्वाब पूरा हो गया जो मन में तूने सोचा था वह करके दिखा ही दिया। छिनार की बदमाशी। लेकिन तू अगर कहानी लिखेगा तो हम दोनों का जिक्र भी दिखेगा तो सबको पता नहीं चल जाएगा की कहानी मैं दोनों किरदार हम दोनों हैं। फिर तो हम दोनों की बहुत बदनामी हो जाएगी।

बेवकूफ थोड़ी ना हूं हरकतें हम दोनों की होगी सोच हम दोनों की होगी लेकिन किरदार के नाम अलग होंगे।

क्या नाम रखेगा किरदार का,,,,।

ऊममममम (कुछ देर सोचने के बाद) नूपुर और राहुल,,,,,,! यह कैसा रहेगा,,,.

पागल हो गया है क्या,,,(अपने बेटे को आंख दिखाते हुए) वह मेरी अच्छी सहेली है इस तरह से तो वह बदनाम हो जाएगी...

लेकिन उन दोनों के बीच भी तो यही रिश्ता है जैसा हम दोनों के बीच है।

तो क्या हो गया वह दोनों भी तो आपस में अपनी जरूरत को पूरा कर रहे हैं वैसे उन दोनों पर मुझे बहुत पहले ही शक हो गया था। लेकिन पूरी जानकारी तो नहीं है लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि हम दोनों के बीच में शारीरिक संबंध जरूर होगा। वरना एक बेटा अपनी मां से इतना खुलकर नहीं रहता की बाजार में उसकी गांड पर हाथ रख दे।

तुम देखी थी ऐसा करते हुए।

हां बिल्कुल दखी थी,,, वैसे अगर सच में कहानी लिखा जाए तो शुरुआत कैसे होगी कहानी की।

तुम बताओ तुम तो टीचर हो तुम्हें तो कहानी लिखने का ज्ञान होना चाहिए।

ऐसा थोड़ी ना है की मां बेटे के ऊपर में कहानी लिखने में महारथ हासिल की हूं,,,,।

चलो कोई बात नहीं फिर भी अगर लिखोगी तो कैसे लिखोगी यह तो बताओ,,,,।

हममममम,,,,, शुरुआत इस तरह से होगी,,,, अगर मैं अपनी आत्मकथा लिखूं इस शीर्षक के साथ तो ऐसे लिखूंगी,,,,।

आज बड़े सबेरे मेरी नींद खुल गई थी,,, जल्दी से घर का काम खत्म करके मुझे नहाना था लेकिन काम खत्म करते-करते एक घंटा जैसा समय गुजर गया था,,, मेरा बड़ा बेटा अभी तक अपने कमरे में सो रहा था मैं अपने कपड़े लेकर सीधा बाथरूम में चली गई लेकिन बाथरूम का दरवाजा टूटा हुआ था जिसकी वजह से दरवाजे की कड़ी नहीं लग पाती थी इसे बनवाना था लेकिन अभी पैसे का जुगाड़ नहीं था,,, मैं कुछ देर दरवाजे को ही देखती रही, फिर अपने मन में सोची अभी तो मेरे बेटे को उठने में समय है तब तक तुम्हें नहा लूंगी और यह सोचकर मैं अपनी साड़ी खोलना शुरू कर दी,,,, मैं मन में गीत गुनगुना रही थी, देखते देखते मैंने साड़ी अपने बदन से अलग करके उसे बाथरूम में ही रख दी,

एकदम बराबर जा रही हो आगे बढ़ती रहो,,,(अपनी मां के मुंह से कहानी के शब्द सुनकर अंकित उत्साहित हो रहा था और अपनी मां का हौसला बढ़ाते हुए आगे बढ़ने को बोल रहा था,,, सुगंधा भी अपने बेटे के मुंह से तारीफ सुनकर उत्साहित हो गई और वह भी बात को आगे बढ़ते हुए बोली।)

आगे सुन,,,,,, वैसे तो मैं अक्सर ब्लाउज और पेटीकोट में ही ना आई थी लेकिन आज सुबह जल्दी उठ जाने की वजह से न जाने क्यों मेरा मन अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नहाने का कर रहा था इसलिए मैं अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी वैसे ना जाने क्यों ब्लाउज का बटन खोलने में मेरे मन में अजीब सी हलचल हो रही थी क्योंकि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था अगर बाथरूम का दरवाजा बंद होता तो मैं एकदम सहज रहती लेकिन दरवाजा खुला होने की वजह से तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी इसके बावजूद भी एक निश्चित भाव मेरे चेहरे पर बना हुआ था और मैं धीरे-धीरे अपने ब्लाउज के सारे बटन खोलकर ब्लाउज को उतारने लगी ब्लाउज के उतरने के बावजूद भी मेरे बदन पर मेरी लाल रंग की ब्रा मेरी चूचियों की शोभा बढ़ा रही थी। मेरे गोरे रंग पर लाल रंग की ब्रा खूब जच रही थी,,,, कुछ पल के लिए मैं अपनी नजरों को नीचे करके अपनी दोनों गोलियों को देखने लगी जो की लाल रंग की ब्रा में और भी ज्यादा खूबसूरत और मादक लग रही थी,,,, देखते ही देखते मैं अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गई और ब्रा का हुक खोलने लगी, अगले ही पल मेरी कई हुई बड़ी-बड़ी चूचियों पर से ब्रा का कसाव एकदम से ढीला पड़ गया और मैं अपनी ब्रा को भी उतार कर साड़ी के ऊपर रख दे कमर के ऊपर में पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी अपनी नंगी चूचियों को देखकर खुद मेरे ही बदल में अजीब सी हलचल हो रही थी मुझसे रहने गया और मैं अपने दोनों हाथों में अपनी दोनों गोलाइयों को भरकर हल्के से दबा दी और मेरे मुख से हल्की सी शिसक की आवाज फूट पड़ी।

(अपनी मां के मुंह से इतना सुनते ही हौसला अफजाई करते हुए अंकित बोल पड़ा)

वाह मम्मी वाह तुम तो लेखक को भी पीछे छोड़ दोगी क्या गजब का कहानी बना रही हो और आगे बढ़ती रहो,,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुरा दी,,,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

मैं खुद अपनी ही आवाज पर शर्मा गई और मेरे चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,,,, वैसे सच कहूं तो मेरी ख्वाहिश दब चुकी थी पति के जाने के बाद से मेरे चूचियों को अपने हाथों में लेकर दबाने वाला कोई नहीं था वैसे तो दबाने वाले बहुत मिल जाती है लेकिन मैं खुद ही आगे बढ़ना नहीं चाहती थी क्योंकि मेरा बेटा बड़ा हो गया था अपने बेटे की परवरिश में मैं अपनी भावनाओं को दबा दी थी,,,, लेकिन अचानक की मेरे हाथों से ही आज मेरे मन की प्यास थोड़ी सी भड़क गई थी लेकिन फिर भी अपने आप को संभालते हुए मैं अपने पेटिकोट की डोरी पर दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों को ले गई और पेटिकोट की गिठान खोलने लगी,,,, देखते ही देखते मैंने पेटिकोट की डोरी को अपनी उंगली से पकड़ कर खींच दी और मेरी पेटिकोट मेरी कसी हुई गांड पर एकदम से ढीली हो गई,,,।

(इतना सुनते ही अंकित बोल पड़ा)

बाप रे मम्मी तुम तो मेरा लंड खड़ा कर रही हो क्या गजब की रचना है तुम्हारी,,,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा फिर से मुस्कुरा दी और आगे बोली,,,)

फिर भी मेरी नितंबों का उभार उन्नत था गजब का आकार लिया हुआ था जिस पर मेरी बेटी को टिकी हुई थी अगर सपाट नितंब होते तो मेरी पेटिकोट गिर कर मेरे कदमों में पड़ी होती लेकिन उन्नत नितंबों की वजह से मेरी बेटी को टिकी हुई थी जिसे मैं अपनी नाजुक हूं कैसे पकड़ कर उसे धीरे से हल्का सा खोली और इस अवस्था में अपनी उंगलियों से छोड़ दी और मेरी पेटिकोट एकदम से मेरे कदमों में जगी थी और मैं बाथरूम के अंदर संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था होने के कगार पर थी क्योंकि अभी भी मेरे नंगेपन को ढकने के लिए मेरी लाल रंग की पेंटि मेरे बदन पर थी,,,, मेरी सांसें थोड़ी भारी हो रही थी मैं अपनी दोनों टांगों के बीच अच्छी तो मेरी पेटी का आगे वाला भाग कचोरी की तरह खुला हुआ था मुझे समझते देर नहीं लगी कि मेरी हरकत से मेरा बदन उत्तेजित हो रहा था,,, मेरी हालत देखकर मुझे खुद पर हंसी आ रही थी,,,, मेरी फूली हुई पेंटी वाला भाग मुझे फिर से उत्तेजित कर रहा था ना चाहते हुए भी मेरी हथेली अपने आप ही उसे पर चली गई और मैं हल्के से अपनी हथेली का दबाव उसे पर बनाकर अपनी आंखों को बंद करके उसे पल को महसूस करने लगी जो की काफी मदहोश कर देने वाला था,,,, मेरी हालत खराब हो रही थी समय की नजाकत को देखते हुए मुझे जल्दी से नहा लेना था मैं अपनी पैंटी को उतारने लगी और अगले ही पल बाथरूम के अंदर में पैंटी उतार कर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी मैं बाथरूम के अंदर थी जिसका दरवाजा टूटा हुआ था और खुला हुआ था घर में मेरे बेटे किसी और कोई नहीं था और वह गहरी नींद में सो रहा था उसकी गहरी नींद का ही फायदा उठाकर में बाथरूम के अंदर पूरी तरह से नंगी हुई थी वरना बाथरूम का दरवाजा बंद करने के बावजूद भी मैं अपने बदन से सारे कपड़े इसलिए नहीं उतारती थी ताकि मैं कहीं बहक ना जाऊं,,,,।

लेकिन आज शायद मेरी किस्मत में कुछ और लिखा था मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी बाथरूम के अंदर अपने आप को नंगी करके मेरे बदन में मदहोशी की लहर उठ रही थी मुझे रहा नहीं जा रहा था और मैं अपनी दोनों टांगों को हल्के से खोलकर अपनी गुलाबी बुर को देख रही थी जिस पर हल्के हल्के बालों का गुच्छा बना हुआ था क्योंकि बुर के बालों की सफाई किए हुए मुझे चार-पांच महीने बीत गए थे वैसे भी इसकी सफाई का कोई मतलब नहीं था क्योंकि बुर को चिकनी करके मैं किसे दिखाती,,,, इसे देखने वाला कोई नहीं था इसलिए मैं सिर्फ सफाई के खाती हूं साल में एक या दो बार ही बालों की सफाई करती थी लेकिन फिर भी बालों के बीच की मेरी पतली दरार गुलाबी लकीर बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही थी जो की बदन में हल्की उत्तेजना के कारण कचोरी की तरह फुल गई थी। मुझे नहाना था, मुझे खाना बनाना था नाश्ता तैयार करना था लेकिन न जाने क्यों मैं अपने भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी ऐसा बरसों बाद हुआ था जब मैं अपने बस में नहीं थी और इसी के कारण मेरी हथेली कब मेरी बर पर पहुंच गई मुझे पता ही नहीं चला नंगी बुर पर हथेली रखकर बदन में अजीब सी सनसनाहट होने लगी पूरे बदन में उत्तेजना की लहर दोड़ने लगी मेरी आंखें अपने आप बंद होने लगी,,,,।

बाप रे मम्मी तुम तो मेरा लंड खड़ा कर दी हालत खराब कर दी सच में अगर इस तरह की कहानी लिखी जाए तो अपने आप ही पानी निकल जाए सिर्फ पढ़कर ही आगे बताओ आगे एक प्रकरण तो पूरा कर दो,,,,।

धत् हारामी तू मुझसे ना जाने क्या-क्या करवाएगा,,,।

अभी तो करवाने के लिए बहुत कुछ है मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि मेरी जिस तरह की हालत हुई है तुम्हारे मुंह से कहानी सुनाने में तुम्हारे कहने में भी तुम्हारी बुर पानी छोड़ रही होगी सच सच बताना छोड़ रही है कि नहीं,,,, बता दो नहीं तो साड़ी उठाकर देख लूंगा,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा शर्मा से पानी पानी में जा रही थी वह जानती थी कि उसका बेटा सही कह रहा था इसलिए वहां में सर हिला दी यह देखकर अंकित मुस्कुराने लगा और अपनी मां से बोला,,)

कहानी सुपरहिट है आगे बताओ,,,,,।

मेरी हालत खराब हो रही थी मुझे रहा नहीं जा रहा था बाथरूम का दरवाजा खुला था यह मैं जानती थी कि अगर मेरा बेटा आ गया तो मुझे इस हालत में देख लेगा तब बन जाने मेरे बारे में क्या सोचेगा लेकिन इस पल मुझे इसकी परवाह बिल्कुल भी नहींथी,,,। बस मजा लेने को दिल कर रहा था और इसी चक्कर में मेरा दूसरा हाथ मेरी चूची पर चली गई थी जो कि मेरी चूची इतनी बड़ी थी कि मेरे एक हाथ में ठीक तरह से आती भी नहीं थी फिर भी मैं बारी-बारी से दोनों चूचियों को दबा रही थी,,,, आंखों को बंद करके मदहोश हुए जा रही थी हालात पूरी तरह से खराब थी , बुर से निकलने वाले मदन रस के कारण मेरी हथेली चिपचिपी हो गई थी,,,, मेरी हथेली पर मेरे झांट के बाल टूट कर बिखरे हुए थे,,,, मुझसे मेरी उत्तेजना काबू में बिल्कुल भी नहीं हो रही थी,,,, और मैं एक फैसला ले ली जो मैंने आज तक कभी नहीं की थी। मैं अपनी बीच वाली होली अपनी बुर के अंदर प्रवेश कराने लगी और मेरे लिए हैरानी की बात यह थी कि मात्र उंगली प्रवेश के कारण ही मेरी बुर में दर्द महसूस होने लगा था यह शायद इसलिए कि पति के जाने के बाद से मैं अपनी बुर में उंगली तक नहीं डाली थी ताकि मेरी भावनाएं काबू में रहे और मैं कभी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने के लिए तड़प ना उठु और इसीलिए मेरी बुर का संकरापन बढ़ने लगा था वह एकदम कस चुकी थी मात्र उसमें से पेशाब करने का ही काम हो रहा था इसलिए मुझे हल्का सा दर्द महसूस हो रहा था और इस बात का गर्व भी हो रहा था कि मेरी बर एकदम जवान लड़की की तरह कसी हुई हो चुकी थी,,,।

ना चाहते हुए भी मेरे मन में यह ख्याल आ गया कि अगर वाकई में मुझे किसी के सामने हम बिस्तर होना पड़ेगा तो सामने वाला कितना खुश किस्मत होगा की उसे गदराई जवानी के साथ-साथ कसी हुई पर मिल रही है चोदने को,,,,।

(अपनी मां के मुंह से निकलने वाली इस बात को सुनकर अंकित से रहा नहीं गया और वह अगले ही पल अपने पेंट का बटन खोल कर अपने पेंट को घुटनों से नीचे खींच दिया और अपने खड़े लंड को हाथ में लेकर मुठीयाने लगा,,,, यह देखकर सुगंधा मुस्कुराने लगी तो अंकित बोला)

कसम से मम्मी रहा नहीं जा रहा है क्या गजब की कहानी बता रही हो ऐसा लग रहा है कि जैसे सब कुछ मेरी आंखों के सामने हो रहा है,,,,। अब आगे बताओ,,,।

धत् शाम ढल गई है खाने का बंदोबस्त भी करना है अब रहने दे,,,,।

प्लीज मम्मी कहो ना जब तक की पानी नहीं निकल जाता,,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा अपने बेटे के खड़े लंड की तरफ अच्छी और मुस्कुरा कर अपनी बात को आगे बढ़ाने लगी,,,)

धीरे-धीरे मेरी उंगली मेरी बुर के अंदर घुस चुकी थी और मैं उसे अंदर बाहर करने लगी थी। मेरी हालत खराब हो चुकी थी एक खांसी में अपनी चूची को दबा रही थी और दूसरे हाथ की उंगली से अपनी बुर की गर्मी शांत करने में लगी थी। मेरी मदहोशी बढती जा रही थी मुझे भूल गई थी कि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है लेकिन मैं निश्चिंत थी क्योंकि मैं जानती थी कि मेरा बेटा अभी सो रहा होगा,,,, तभी धीरे से मैं अपनी आंखों को खुली तो मेरे होश उड़ गए मेरे पैरों तले जमीन खिसकने लगी क्योंकि मेरी आंखों के सामने दीवार के पीछे छुप कर मेरा बेटा मुझे ही देख रहा था और जब मैं उसके हाथ की हरकत पर ध्यान दी तो मेरे होश उड़ गए,,, मुझे समझते देर नहीं लगी कि मेरा बेटा मुझे देखकर मुठ मार रहा था। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं मैं अजीब सी अवस्था में फंसी हुई थी मैं अपने बेटे की आंखों के सामने पूरी तरह से नंगी थी,,, मैं अपने आप को अपने बेटे की नजरों से छुपाने के बारे में सोच ही रही थी कि अभी मैं सोने लगी कि अगर वह जान जाएगा कि मैं उसे देख ली हूं तो वह शर्मिंदा हो जाएगा मैं न जाने क्यों अपने मन में ऐसा सोचने लगी कि मुझे ऐसा करना है कि मेरे बेटे को पता ही ना चले कि मैं उसे देख ली हूं,,,, और मेरी यही सोच मेरे पतन का कारण बनने वाली थी,,, मैं देख रही थी कि मेरा बेटा मुझे इस अवस्था में देखकर अपना लंड हिला रहा था मैं उसकी मनोस्थिति को समझ सकती थी। मैं जानती थी कि एक औरत को नंगी देखकर किसी भी मर्द का मन बह जाएगा और वह इस तरह की हरकत करने पर उतारू हो जाएगा लेकिन मुझे यह बात हजम नहीं हो रही थी कि इस तरह की हरकत करने वाला मेरा बेटा है और वह भी अपनी मां को देखकर इस तरह की हरकत कर रहा है यही सब सो कर मेरी हालत खराब हो रही थी लेकिन इस दौरान भी मेरी उंगली बराबर अंदर बाहर हो रही थी।

मुझे पूरा यकीन था कि मेरा बेटा पहली बार मुझे नग्न अवस्था में देख रहा था,,, मेरे हाथ में मेरी चूचियां थी तो और दूसरे हाथ की उंगली बुर में खुशी हुई थी अजीब सी स्थिति बनी हुई थी। देखते ही देखे मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी मेरा बदन अकड़ने लगा और मेरा पानी निकलता है इससे पहले एक बार फिर से मेरी नजर अपने बेटे पर पड़ी और सीधा उसके लंड पर चली गई उसके लंड को देखकर मेरा दिमाग एकदम से सन्न रह गया और मेरी बुर से भलबला कर पानी निकलने लगा मैं झढ़ने लगी,,, मेरे मुंह से अजीब अजीब सी आवाज ही नहीं कर रही थी जिसे सुनकर शायद मेरा बेटा समझ गया था कि मैं किसी स्थिति में पहुंच चुकी हूं इसलिए वह वहां पर ठहरना उचित नहीं समझा और फिर से अपने कमरे में चला गया शायद उसका काम अभी बना नहीं था वह अपना पानी निकालने के लिए गया था लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी इस अवस्था में अपने बेटे के कमरे तक जाऊं मैं झड़ चुके थे मेरा काम हो चुका था लेकिन मेरी हरकत की वजह से मां बेटे के बीच की मर्यादा टूटने के कगार पर आ चुकी थी। क्योंकि मेरी बेटी का लैंड मेरी आंखों में बस चुका था ना मोटा और लंबा शायद ही मैंने कभी देखी थी जहां तक मेरा ख्याल था कि मेरी आंखों के सामने आज तक मेरे पति का ही लंड आया था और मुझे पूरी तरह से याद है कि जिस तरह से मेरे बेटे का लंड था मोटा और लंबा उसके हिसाब से मेरे पति का उसके आधा भी नहीं था।

(इतना कहकर सुगंधा गहरी सांस लेते हुए चुप हो गई और अपने बेटे की तरफ देखने लगी जोर जोर से अपने लंड को हिला रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था लेकिन अपनी मां को खामोश देखकर वह समझ गया था कि अब उसे क्या करना है इसलिए वह बिल्कुल भी देर ना करते हुए एकदम से अपनी मां को बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया और उसकी दोनों टांगों को को खोलते हुए उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ ले जाने लगा और अगले ही पल हुआ अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी लाल रंग की चड्डी को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींचने लगा था जिसमें सहायक बनते हुए सुगंधा खुद अपनी भारी भरकम गांड को कुछ पल के लिए हवा में ऊपर उठा दी थी जिससे उसकी चड्डी बाहर निकल जाए और अगले ही पल वह कमर के नीचे नंगी हो चुकी और अंकित अपने मोटे तगड़े लंड को बिना कुछ बोले अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,, दोनों के बीच किसी को सुधार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों खामोश हो चुके थे क्योंकि दोनों की कहानी सुगंधा की जुबानी दोनों सुन चुके थे दोनों पागल हो चुके थे अंकित तब तक अपनी मां को चोदता रहा जब तक की दोनों का पानी नहीं निकल गया,,,,।

वासना का तूफान शांत होने के बाद धीरे से अंकित अपनी मां के ऊपर से उठा और मुस्कुराते हुए अपनी मां की तरफ देखकर बोला।)

बाप रे अगर सच में तुम कहानी लिखो तो तुम्हारी पहली कहानी है सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगी। जो तुम्हारी अलमारी में से किताब मिली थी उससे भी गजब की कहानी थी यह बाथरूम के अंदर अपनी मां को नंगी नहाता हुआ देखकर और अपनी उंगली से अपनी प्यास बुझाता हुआ देखकर वाकई में किसी भी बेटे का मन एकदम से बहक जाए और कुछ ना कर सकने की स्थिति में वह मुठ मारे बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकता,,,,,।

(सुगंधा धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और फर्श पर गिरी हुई अपनी लाल रंग की चड्डी को उठाकर उसे पहनने लगी और पहनते हुए बोली)

क्या सच में मैं अगर कहानी लिखूं तो अच्छा लिख पाऊंगी,,,।

बिल्कुल गजब की कहानी लिखोगी अगर तुम लिखोगी तो,,,,।

(शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो गया था,,,,, सफाई करने के बाद सुगंधा खाना बना रही थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,, अंकित कुर्सी पर बैठा हुआ था और दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनकर कुर्सी पर से उठकर खड़ा हुआ और जाकर दरवाजा खोलने लगा दरवाजा खुलते ही सामने देखा तो सुषमा आंटी थी सुषमा आंटी को देखकर ही अंकित मुस्कुराते हुए बोला।)

नमस्ते चाची,,,,,।

(अंकित को देखकर सुषमा के चेहरे पर प्रश्ननता के भाव नजर आ रहे थे,,, क्योंकि तीन-चार दिनों से उसने अंकित को अच्छी नहीं थी और उसका मन बहुत कर रहा था अंकित से चुदवाने का,,,,, इसलिए वह अंकित से बोली,,,)

कहां चले गए थे बेटा,,,,।

(रसोई में खाना बना रही सुगंधा सुषमा की आवाज सुनकर एकदम से दौडती चली आई क्योंकि उसे डर था कि कहीं अंकित सच्चाई ना बता दे,, की वह दोनों नैनीताल घूमने के लिए गए थे इसलिए वह सुषमा से बोली,,,)

अरे कहीं नहीं एक स्कूल की सहेली थी उसके घर पर शादी का फंक्शन था । वहीं तीन दिन ठहरना था।

अरे लेकिन बता कर तो जाती मैं देखी तो दरवाजे पर ताला लगा है मुझे लगा कहीं गए होंगे मार्केट करने लेकिन एक दिन बीत गया दो-तीन बीत गया पानी है तो ताला हटाने का नाम ही नहीं ले रहा था मैं तो चिंता करने लगी कि आखिरकार ऐसा क्या हो गया कि बिना कुछ बताइए लोग चले गए वरना कहीं भी जाते हो तो बता कर ही जाते हो।

अरे हम लोग इतनी जल्दबाजी में थी कि किसी को बताना ही भूल गए वरना बस छूट जाती तो गजब हो जाता जल्दबाजी में निकले थे इसलिए किसी को बता नहीं पाए,,,,।

चलो अच्छा है यहां तो कहीं वरना तुम लोगों के बिना तो अच्छा ही नहीं लग रहा था,,,, और हां पड़ोस में शर्मा जी के घर शादी है तुम्हारे घर भी निमंत्रण है दरवाजा बंद था तो लोग मुझे ही देकर गए थे।

शादी कब है चाची,,,।

शादी परसों है कल लेकिन फंक्शन में भी जाना है कल हल्दी की रसम है खाना पीना भी वही है इसलिए कल शाम को खाना बनाना नहीं।

चलो अच्छा हुआ तुमने बता दी,,,।

अच्छा ठीक है अब मैं चलती हूं,,,, नमस्ते

नमस्ते,,,,,(मां बेटे दोनों एक साथ सुषमा को नमस्ते बोली और सुषमा वहां से चली गई,,,, उसके जाते ही सुगंधा अपने बेटे से बोली,)

मुझे तो लगा कि तु कहीं बता ना दे कि हम लोग नैनीताल गए थे,,,,।

अरे मुझे बेवकूफ समझती हो क्या,,,? लेकिन अच्छा हुआ कि तुम आकर बता दे वरना में कोई और बहन बताने वाला था लेकिन तुम्हारा वाला कुछ ज्यादा बेहतर था क्योंकि दीदी के आने के बाद कहीं जिक्र हुआ कि हम लोग दो-तीन दिन के लिए कहीं गए थे तो तुम्हारा वाला बहाना एकदम ठीक है वह तो कभी पूछेंगे नहीं की कौन सी सहेली किसके घर,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंध मुस्कुराती और फिर वापस अपनी गांड मटका कर रसोई घर की तरफ जाने लगी)
 
सुगंधा बड़े ही सफाई से सुषमा को समझाने में कामयाब हो गई थी कि वह अपनी स्कूल की सहेली के घर शादी के फंक्शन में गई थी,, वैसे तो वह सुषमा को कुछ भी बता सकती थी लेकिन उसे इस बात का डर था कि कहीं सुषमा तृप्ति के आने पर यह बात की जिक्र छेड़ दे तो वह तृप्ति से क्या बोलेगी,,, इसलिए सुगंधा ने सुषमा से ऐसा बहाना बनाई थी कि इस बारे में अगर उसकी बेटी को भी पता चले तो वह उससे पूछ नहीं पाती क्योंकि उसे भी नहीं मालूम है कि स्कूल में उसकी मां की कौन-कौन सहेली है। लेकिन सुषमा ने जाते-जाते यह अच्छी खबर दी थी कि दूसरे दिन ही शादी में उसका निमंत्रण है खाना मत बनाना हल्दी की रस्म थी।



हल्दी की रस्में में जाने के लिए मां बेटे दोनों तैयार हो रहे थे शाम का वक्त था,, सुगंधा और अंकित के बीच ऐसी कोई मर्यादा नहीं रह गई थी जिसके चलते सुगंधा को शर्म करना पड़े इसलिए वह बाथरुम से नहाकर नंगी ही चलते हुए अपने कमरे में गई यह सब अंकित कुर्सी पर बैठा देख रहा था अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देखकर उसकी भावनाएं भड़कने लगी थी लेकिन फिर भी अपने मन पर काबू करके अपनी मां की कातिल अदा को देख रहा था, सुगंधा की बड़ी-बड़ी गोरी गांड हमेशा से उसकी सबसे बड़ी कमजोरी रही थी,,, और इस समय भी सुगंधा की गदराई और मटकती गांड अंकित के मन पर छुरियां चला रही थी सुगंधा अपने बेटे की तरफ मुस्कान का बाण फेंकते हुए अपने कमरे में चली गई,,, अंकित ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठ नहीं पाया और वह भी उठकर अपनी मां के कमरे में चला गया और बिस्तर पर जाकर बैठ गया उसकी मां नंगी ही अलमारी से कपड़े निकाल रही थी। बड़ा ही लुभावना दृश्य था,,, नितंबों के बीच की पतली दरार और पतली कमर के मोड पर बनती पतली सी लकीर किसी भी मर्द के लंड को खड़ा करने में सक्षम थी वैसे भी मर्दों को औरतों के अंगों का कटाव से बने हुए पतली लकीर कुछ ज्यादा ही अपनी तरफ आकर्षित करती है। बिस्तर पर बैठा अंकित अपनी मां की हर एक क्रियाकलाप को देख रहा था। सुगंधा अलमारी में से अपने पसंदीदा कपड़े को ढूंढ रही थी और बार-बार अंकित की तरफ देखकर मुस्कुरा दे रही थी। उसका इस तरह से मुस्कुराना अंकित को उत्तेजित कर रहा था।



अगर मां बेटे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित न हो गया होता तो शायद सुगंधा का इस तरह से मुस्कुराना अंकित के लिए एक सुनहरा आमंत्रण का इशारा हो सकता था। लेकिन मां बेटे के बीच बहुत ही गहरा रिश्ता बन चुका था अंकित जब चाहे तब अपनी मां की चुदाई कर सकता था इसलिए वह अपनी भावनाओं पर काबू करके बैठा हुआ था क्योंकि वह दोनों हल्दी की रस्म में जा रहे थे उसकी मां तैयार होने जा रही थी अभी-अभी नहा करने के लिए थे इसलिए उसके बदन से उठ रही मादक खुशबू पूरे कमरे में फैली हुई थी, फिर भी अंकित से रहा नहीं गया तो वह अपनी मां से बोला।

सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो।

कपड़े पहने बिना ही तुझे खूबसूरत लग रही है कपड़े तो पहन लेने दे,,,।

मुझे तो तुम बिना कपड़े के ही बहुत खूबसूरत लगती हो,,।

अगर खूबसूरत लग रही हो तो क्या ऐसे ही बिना कपड़ों के हल्दी की रस्म में चली जाऊं।

मैं तो कहता हूं ऐसे ही चलो बहुत मजा आएगा।

हां ताकि सारे मोहल्ले का खड़ा हो जाए मेरी लेने के लिए।

बात तो सही है जब तुम कपड़े पहन कर मोहल्ले में चलती हो तो वैसे भी न जाने कितनों का खड़ा हो जाता होगा और बिना कपड़ों के जाओगी तो मुझे तो लगता है कि पानी ही निकल जाएगा।

और किसी ने दबा के चोद दिया तो।

इतनी किसी की हिम्मत नहीं है और वैसे अगर किसी ने हिम्मत दिखा कर दिया तो मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारे गुलाबी बुर के द्वारा तक उसका लंड पहुंच ही नहीं पाएगा,।

ऐसा क्यों,,,,?

क्योंकि तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड की गहरी दरार लंड को तुम्हारी बुर के छेद तक पहुंचने से पहले ही पिघला देगा उसका पानी निकाल देगा,,,।



(अपने बेटे कि ईस तरह की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी,,,, और हंसते हुए बोली लेकिन इस बीच वह पीले रंग की चड्डी अलमारी में से निकाल कर उसे हाथ में लेकर इधर-उधर घूमा रही थी)

लेकिन तेरा तो बड़े आराम से पहुंच जाता है।

क्योंकि तुम्हारी गांड का इलाका मेरा है मैं इसकी हर एक गली से बाकी हूं कैसे कहां से गुजरना है सब जानता हूं तभी तो मैं मंजिल तक पहुंच जाता हूं लेकिन अनजान लोग तुम्हारी गहरी घाटी में खो जाएंगे मंजिल तक कभी पहुंच ही नहीं पाएंगे इधर-उधर भटकते रह जाएंगे,,,,।

(इस बात पर सुगंधा जोर-जोर से हंसने लगी,,,, और हंसते हुए अपनी पीले रंग की चड्डी को पहनने लगी,,,,, उसे टांगों में डालकर मोती मोती जांघों के ऊपर खींचकर अपनी गुलाबी बुर को उसमें छुपाते हुए उसके इलास्टिक को परखने के लिए उसे ज़ोर से अपने हाथों से छोड़ दि और इलास्टिक जाकर एकदम से कमर से चिपक गई,,,, पीले रंग की चड्डी में सुगंधा की गोरी गोरी गांड बहुत ही खूबसूरत लग रही थी यह देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।)

तुम्हारे गोरे रंग पर पीला रंग कुछ ज्यादा ही जंचता है,,, देखना किसी के सामने साड़ी कमर तक मत उठा देना वरना वह उठने के लायक नहीं रह जाएगा वही खुशी से दम तोड़ देगा।

बस कर हरामी तू तो मुझे हंसा हंसा कर मार देगा,,,,,(अंकित की हर एक बात पर सुगंधा को हंसी आ रही थी। और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) जा जाकर जल्दी से तू भी तैयार हो जा....

मुझे तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा मैं तो तुम्हें तैयार होते हुए देखना चाहता हूं इसलिए यहां बैठा हूं।

ओह हो,,,,, तू तो ऐसा कह रहा है जैसे कि मुझे कभी देखा ही नहीं है। हारामी तूने मुझे हर हाल में इतनी बार देख लिया कि इतनी बार तो तेरा बाप भी कभी नहीं देखा था।



तभी तो मैं बाप से 10 कदम आगे हूं,,,।

ऐसे ही आगे रहना तभी तो मेरी जरूरत को तु पूरी कर पाएगा,,,,(अलमारी में से पीले रंग की ब्रा निकाल कर उसे अपने हाथ में डालते हुए बोली)

तुम चिंता मत करो तुम्हारी जरूरत पूरी करने के लिए तो मैं हमेशा हाजिर हूं तुम्हारी खिदमत में,,,,।

(अंकित अपने जवाब से अपनी मां को खुश कर दे रहा था देखते ही-देखते सुगंधा ब्रा और पैंटी पहन चुकी थी और फिर पेटिकोट पहन कर उसकी डोरी को बांध दी थी फिर उसके बाद ब्लाउज पहनने लगी जो की पीछे से डोरी वाली थी,,,, अंकित जानता था कि उसकी मां ब्लाउज की डोरी को बंद नहीं पाएगी इसलिए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और उसकी मां कुछ कहती है इससे पहले ही वहां ब्लाउज की डोरी को अपने हाथों में ले लिया यह देखकर उसकी मां मुस्कुराने लगी और बोली।)

मेरी जरूरत को अच्छी तरह से समझता है तु।

समझता हूं तभी तो तुम्हारे साथ तुम्हारे कमरे में हूं वरना बाहर बैठकर इंतजार कर रहा था।

बड़ा हाजिर जवाबी हो गया है तु।

तुम्हारे साथ रहना है तो हाजिर जवाबी बनना ही पड़ेगा तुम एक तीर छोड़ो हम दो तीर छोड़ेंगे,,,।

वाह मुकाबला टक्कर का है,,,।

बात तुमसे मुकाबले की आएगी तो चक्कर का बनना पड़ेगा वरना तुम्हारी गर्म जवानी के आगे ढेर होने में ज्यादा देर नहीं लगेगा।



(बातों ही बातों में अंकित अपनी मां की ब्लाउज की डोरी को कस दिया था उसके बदन पर सब कुछ पीले रंग का ही था पारदर्शी पीले रंग की साड़ी सुगंधा की खूबसूरती में चार चांद लग रही थी अपनी मां को पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद अंकित देखकर बोला।)

कसम से कह रहा हूं मम्मी आज हल्दी के रसम में न जाने कितनों का लंड खड़ा हो जाएगा और न जाने कितने लोग तुम्हारे नाम के मुठ मारेंगे,,,,।

और तू क्या करेगा,,,?

मै,,,,(गहरी सांस लेता हुआ अपनी मां के करीब गया और पीछे से अपनी बाहों में भरकर अपनी कमर को जोर-जोर से अपनी मां की गांड पर आगे पीछे करके हिलने लगा और बोला) घर पर आकर पटक कर तुमको पेलूंगा,,,,,.

धत्,,,, तब की तब करना अभी छोड़ मुझे,,,, और जाकर जल्दी से तैयार हो जा दूसरों की बात करते हैं तेरा खुद का खड़ा है जो कि रोज मेरी ले रहा है फिर भी,,,,,,।

अब क्या करूं तुम्हारी जवानी को सलामी देने के लिए यह सबसे पहले तैयार हो जाता है,,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा फिर से हंसने लगी,, थोड़ी ही देर में दोनों हल्दी की रस्म में पहुंच चुके थे,,, बहुत अच्छा खासा माहौल बना हुआ था सुगंध को देखकर मोहल्ले की औरतें आपस में धीरे-धीरे बातें करने लगी थी क्योंकि इस बात का एहसास दिला रही थी की सुगंधा की खूबसूरती से कहीं ना कहीं उन्हें जलन हो रही थी और कुछ लोग खोलकर सुगंधा से मिल रही थी और उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रही थी जिसमें खुद शर्मा जी की बीवी भी थी वह सुगंध को देखकर एकदम से अपनी जगह से उठकर आई और सुगंधा का हाथ पकड़ कर बोली)



अरे वह सुगंधा सच कहूं तो दुल्हन तो तुम ही लग रही हो,,, तुम इधर आकर हमारी महफिल में चार चांद लगा दिया और हां तुम्हें नाचना होगा तुम बहुत अच्छा नाचती हो,,,,,।

क्या कह रही हो मैं कहां अच्छा नाचती हूं,,,।

तुम अच्छा नाचती हो मैं देखी थी और आज बिल्कुल भी बहाना नहीं चलेगा आखिरकार मेरी बेटी की शादी है,,,,।

(शर्मा जी की बीवी की बात सुनकर सुगंधा बोली कुछ नहीं बस मुस्कुरा रही थी,,,, सुगंधा औरतों के बीच जाकर बात कर रही थी और अंकित एक तरफ कुर्सी पर बैठा हुआ था कि तभी वहां पर सुमन आ गई सुमन भी पीले रंग की ड्रेस पहनी हुई थी पीले रंग का सलवार पीले रंग की कुर्ती में वह भी बहुत खूबसूरत लग रही थी अंकित को देखकर वह मुस्कुराते हुए बोली)

अच्छा हुआ तुम इधर अभी तुम तो ऐसे गायब हो गए थे जैसे कहते कि सर से सिंग गायब हो जाती है कहां चले गए थे,,,,(पास वाली कुर्सी को अपनी तरफ खींच कर ठीक अंकित के सामने बैठते हुए वह बोली, सुमन की मौजूदगी में अंकित थोड़ा उत्तेजित हो रहा था क्योंकि कई हुई सलवार में उसकी जवानी खुल खुल कर सामने आ रही थी,,,, उसकी बात सुनकर अंकित बोला)



मम्मी की सहेली थी उसके घर शादी थी वहीं चले गए थे,,,,।

चलो अच्छा हुआ कि सही समय पर आगे वैसे तुम बहुत हैंडसम लग रहे हो।

पीले रंग की सलवार कुर्ती में तुम भी बहुत खूबसूरत लग रही हो,,,।

सच में,,,

बिल्कुल मैं झूठ नहीं कह रहा।

(अंकित की बात सुनकर समान खुश होने लगी तभी सामने से शर्मा जी आते हुए दिखाई दिए और सुमन को आवाज लगाकर बोले)

बेटी सुमन,,,, जाकर थोड़ा हाथ बंटा लो मेहमानों को थोड़ा चाय पानी भी कराना है,,,, जाकर देखो तो सही तुम्हारी चाची क्या कर रही है।

जी चाचा जी मैं अभी जाती हूं,,,,,(इतना कहकर वह कुर्सी से उठकर खड़ी हो गई,,, और अंकित की तरफ देखकर बोली।)

तुम भी आ जाओ अंकित हाथ बंटाओगे तो अच्छा रहेगा क्यों चाचा जी।

हां हां अंकित बेटा तुम भी साथ में जो मैहमानो को चाय पानी पिलाओ,,,।

जी चाचा जी मैं भी जाता हूं,,,,(इतना कहकर वह भी कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया,,, और दोनों शर्मा जी के घर में प्रवेश कर गए,,,, जितना बाहर खूबसूरत सजाया हुआ था उतना ही घर के अंदर की भी सजावट मेहमानों का ध्यान अपनी तरफ खींच रही थी। शर्मा जी का घर भी बड़ा था,,,, अंतर जाते ही शरबत के क्लास की ट्रे रखी हुई थी सुमन एक हाथ में उसे उठा ली और अंकित को भी एक ट्रे लेने के लिए बोली वह भी सुमन की बात मानकर ट्रे उठा लिया यह देखकर शर्मा जी की बहू उधर आई और सुमन को मुस्कुराते हुए बोली,,,।)



अच्छा हुआ तुम आ गई सुमन मेहमानों को तुम जल्दी-जल्दी शरबत पिलाओ काफी देर हो गई है।

जी भाभी कोई चिंता की बात नहीं है मैं आ गई हूं ना और यह मेरे साथ अंकित भी आ गया है यह काम तुम हम पर ही छोड़ दो।

ओह अंकित तुम,,,, तुम्हें देखकर अच्छा लगा क्योंकि तुम अक्सर कहीं आते जाते नहीं हो।

जी भाभी जी,,,,,,।

अच्छा तुम दोनों मेहमानों को देखो मैं रसोई का काम देख लेती हूं,,,,।

ठीक है भाभी,,,,,।

(इतना कहकर अंकित और सुमन दोनों मेहमानों को शरबत परोसने लगे,,,,, देखते ही देखते अंकित और सुमन दोनों मिलकर सभी मेहमानों को शरबत पिला चुके थे लेकिन खुद के लिए शरबत नहीं बचा था तो वह लोग शर्मा जी की बहू से बोले शर्मा जी की बहू उन्हें बताई कि,,,)

ऊपर वाले कमरे में जहां सारा रसोई का सामान पड़ा है वहीं पर शरबत बनाने का पाउडर भी पड़ा है बिस्तर पर जाकर ले आओ और बनाकर पी लेना देखो बुरा मत मानना सुमन बिल्कुल भी समय नहीं है।

अरे भाभी जी इसमें बुरा मानने वाली कौन सी बात है यह भी तो हमारा ही घर है हम काम नहीं करेंगे तो कौन करेगा क्यों अंकित।

जी भाभी जी आप चिंता मत करो हम लोग बना लेंगे अपने लिए,,,,,।



ठीक है तब तक मे रसोई का काम देख लेती हूं,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू रसोई का काम देखने के लिए चली गई और अंकित सुमन के साथ सीढ़ियां चढ़ता हुआ ऊपर आ गया,,,, अंकित को नहीं मालूम था की रसोई का सामान कौन से कमरे में रखा हुआ है,,,, इसलिए वह सुमन से बोला,,,)

रसोई का सामान कौन से कमरे में रखा है सुमन दीदी,,,।

अरे बुद्धू कितनी बार कहीं हूं कि अकेले में मुझे दीदी मत बोला कर,,,, चल मैं तुझे बताती हूं मैं यहां आती जाती रहती हूं इसलिए मुझे सब मालूम है,,(इतना कहकर सुमन अंकित का हाथ पकड़ कर गैलरी की तरफ ले जाने लगी उसके मन में कुछ और चल रहा था क्योंकि सारे मेहमान नीचे थे ऊपर कोई नहीं था और देखते ही देखते सुमन अंकित को लेकर रसोई के समान वाले कमरे में आ गई जो की काफी बड़ा था चारों तरफ रसोई का सामान पड़ा हुआ था क्योंकि शादी वाला घर था इसलिए सामान भी ज्यादा था इतना सारा सामान देखकर अंकित सुमन से बोला)

इतना सारा सामान है शरबत का पाउडर कहां रखा है कैसे पता चलेगा।

अरे बुद्धू यहां तुझे शरबत का पाउडर ढूंढने के लिए लाइ हु क्या,,,?

फिर,,,,!



(अंकित का इतना कहना था कि सुमन एकदम से उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दी एकदम मदहोशी में वह उसके होठों का चुंबन करने लगी पल भर में ही अंकित के तन-बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी पहले तो अंकित उसकी बाहों से छूटने की कोशिश कर रहा था क्योंकि शादी वाला करता यहां पर कोई भी आ सकता था लेकिन सुमन के बदन की गर्माहट उसे उत्तेजित करने लगी और वह भी एकदम से उत्तेजित होकर अपने दोनों हथेलियां को एकदम से उसकी सलवार के ऊपर से उसकी गांड पर रख दिया और उसे दबाना शुरूकर दिया,,,, दोनों मदहोश होने लगे अंकित पहले भी सुमन की चुदाई कर चुका था इसलिए आगे बढ़ने में अंकित को कोई भी दिक्कत पेश नहीं आ रही थी,,,, अंकित तो सुमन को देखकर ही उत्तेजित होने लगा था पीले रंग की उसकी सलवार में कसी हुई गांड उसके होश उड़ा रही थी लेकिन वह नहीं जानता था कि इसी मौके पर सुमन की जवानी का मजा उसे मिलेगा इसलिए वह दोनों हाथों को कसकर उसके दोनों नितंबों की फांक पर रखकर जोर-जोर से दबा रहा था,,,,, अंकित के हाथों में अपनी जवानी सौंप कर सुमन मदहोश हो रही थी दोनों एक दूसरे के मुंह में अपनी जीभ डालकर चुम्मा चाटी कर रहे थे,,,, इस दौरान सुमन जल्दबाजी दिखाते हुए एकदम से अंकित के पेंट की बटन खोलने लगी अंकित का होश उड़ा जा रहा था वाकई में सुमन बहुत तेज लड़की थी इस बात को अंकित पहले से ही जानता था क्योंकि जवानी का मजा सबसे पहले उसने ही अंकित को चखाई थी।



सुमन देखते ही देखते अंकित की पेंट की बटन खोलकर उसके मोटे-तगड़े लंड को उसके अंडर बियर से बाहर निकाल ली जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर फूंफकार रहा था। काफी दिनों बाद सुमन के हाथ में अंकित का मोटा तगड़ा लंड आया था जिसकी गर्मी से उसकी बुर का लावा पिघल रहा था उसकी बुर गीली हो रही थी,,,, उससे रहा नहीं जा रहा था,,,, वह धीरे से अंकित के होठों से अपने होठों को अलग की और फिर जल्दी से घुटनों के बल बैठ गई अंकित उसे घुटनों के बाल बैठा देखकर मदहोश होने लगा क्योंकि उसे मालूम था कि अब सुमन क्या करने वाली है लेकिन फिर भी वह शंका जताते हुए सुमन से बोला,,,।

कोई आ गया तो सुमन,,,,(वह दरवाजे की तरफ देखते हुए बोला जो की हल्का सा खुला हुआ था और उसे अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे पूरा बंद कर दिया लेकिन उसे पर कड़ी नहीं लगी थी, अंकित की बात सुनकर समान बोली,,,)





यहां कोई नहीं आने वाला है देख नहीं रहे हो सब अपने आप में ही मस्त हैं तब तक तो हम दोनों अपना काम खत्म करके यहां से चले जाएंगे,,,(इतना कहने के साथ ही सुमन अंकित के मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में भर ली और से चूसना शुरू कर दी अंकित तो पल भर में ही हवा में उड़ने लगा क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी की हल्दी की रस्म जैसे फंक्शन में उसे इस तरह का जिस्मानी सुख मिलेगा अंकित पागल हुए जा रहा था धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था सुमन भी अंकित के नितंबों को दोनों हाथ से पड़कर अपना मुंह आगे पीछे करके उसकी लंबाई को नाप रही थी देखते ही देखते अंकित उसके सर के बाल को पकड़ कर अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाने लगा एक तरह से हुआ सुमन के मुंह को ही चोद रहा था,,,, नीचे ढोलक के बचने की आवाज दोनों को साफ सुनाई दे रही थी लोगों के हंसने की आवाज खुश होने की आवाज के बीच सुमन के मुंह से मदहोशी की आवाज निकल रही थी वह पागल हो जा रहे थे उसकी बुर मदन रस से डूब चुकी थी जो कि उसकी पेंटिं को गीली कर रही थी,,,, कुछ देर तक सुमन इसी तरह से लंड चुसाई का मजा लेती रही लेकिन,, उसके पास समय का अभाव था इस बात से वह अच्छी तरह से वाकिफ थी इसलिए जल्दी से उठकर खड़ी गई और अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी अंकित भी जानता था वक्त की अहमियत को इसलिए पर अपनी पेट को जो उसके घुटनों में फंसी हुई थी उसे थोड़ा नीचे करके अपने पैरों में कर लिया और अपने लंड को पड़कर मुठीयाते हुए सुमन को देखने लगा जो की चुदवाने के लिए तैयार हो रही थी। दोनों उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुके थे दोनों भूल चुके थे कि वह दोनों कौन सी जगह पर हैं शादी के माहौल में बंद कमरे के अंदर दोनों जवानी का मजा लूटने में लगे थे।



सुमन अपनी सलवार की डोरी खोलकर अपनी चड्डी सहित उसे नीचे खींच कर अपनी घुटनों में फंसा ली और फिर अपनी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड को अंकित को दिखाते हुए मुस्कुरा कर बेड का सहारा लेकर घोड़ी बन गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दे जितना हो सकता था लेकिन इतना पर्याप्त था टांग को खोलते ही उसका गुलाबी छेद नजर आने लगा जो की पूरी तरह से मदन रस में डूबा हुआ था,,,, यह देखकर अंकित सिरहाने गया और वह नीचे छुककर जीभ से उसकी बुर को चाटने लगा,,, अंकित की हरकत से सुमन मस्त होने लगी वह एकदम से अपने हाथ को पीछे की तरफ लाकर अंकित के सर पर रख दिया और उसके सर पर दबाव बनाते हुए उसे और भी ज्यादा प्रेरित करने लगी बुर चाटने के लिए,,,,, अंकित भी पागलों की तरह उसकी बुर चाट रहा था उसके मदन रस को अपने गले के अंदर उतर रहा था लेकिन समय का अभाव दोनों को था इसलिए जल्दी से वह उठकर खड़ा हो गया और अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गीली बुर पर लगाकर,,, जोरदार प्रहार किया और पहले ही प्रयास में अंकित का मोटा तगड़ा लंड सुमन की नाजुक बुर को चीरता हुआ उसके बच्चेदानी से जाकर कराया जबरदस्त प्रहार के कारण सुमन के मुंह से हल्की सी चेक निकल गई थी क्योंकि उसे नहीं मालूम था की पहली बार में ही अंकित तेज प्रहार कर देगा। लेकिन अंकित के तेज प्रहार के कारण वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी अंकित उसकी कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था अंकित उसकी चुदाई कर रहा था वह भी सुमन की बहुत दिन के बाद ले रहा था। इसलिए उसे भी बहुत मजा आ रहा था।



सुमन भी नहीं सोची थी की शादी के माहौल के बीच वह शर्मा जी के घर में घुसकर उनके ही कमरे में चुदाई का मजा लौटेगी लेकिन यह ख्याल उसके मन में पहले बिल्कुल भी नहीं था शरबत पीने का मन दोनों का था लेकिन शरबत का पाउडर लेने के लिए रसोई का सामान जा रखा था वहां आना था और कमरे में अंकित को अकेला देखकर सुमन का मन बहकने लगा था शरबत को छोड़कर उसका केला खाने का मन कर रहा था और इसीलिए आज वह जवानी का मजा लूट रही थी अंकित जोर-जोर से चोद रहा था वैसे भी अपनी मां को तैयार होता देखकर करवा काफी हद तक उत्तेजित हो गया था लेकिन उसे समय वह अपनी मां के साथ कुछ कर नहीं पाया था उसी की कसर वह सुमन के ऊपर उतार रहा था और सुमन को मदहोश कर रहा था सुमन हल्की हल्की सिसकारी की आवाज ले रही थी क्योंकि वह जानती थी कि जोर से आवाज निकालने का मतलब था कि मुसीबत में पड़ना और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी। वह चुदाई का मजा भरपूर ले रही थी सुमन की बड़ी-बड़ी गांड पर रह रहकर अंकित जोर-जोर से चपत लग रहा था जिससे उसकी गोरी गोरी गांड टमाटर की तरह लाल हो गई थी और वह कुर्ती के ऊपर से ही उसकी चूची को मसल रहा था जिससे सुमन का मजा दुगना होता चला जा रहा था लेकिन दोनों मदहोश हो रहे थे सुमन काफी दिनों बाद अंकित के साथ मजा ले रही थी इसके लिए उसकी सांसे जल्दी उखड़ने लगी उसका बदनाम करने लगा और वह एकदम से झड़ने के कगार पर पहुंच गई,,,, इसका अहसास होते ही हम की जोर-जोर से धक्के लगाने लगा लेकिन इस बीच धडाम की आवाज के साथ कमरे का दरवाजा खुला तब तक सुमन झड़ना शुरू कर दी थी लेकिन दरवाजा खोलने की आवाज से वह एकदम से चौंक गई थी दोनों पीछे नजर घुमा कर देखें तो शर्मा जी की बहू खड़ी थी उन दोनों को इस अवस्था में देखकर वह अपने मुंह पर आश्चर्य से हाथ रख ली थी और बोली ।

हाय दइया यह तुम दोनों क्या कर रहे हो,,,,,?



(इतना सुनते ही अंकित की हालत खराब हो गई और वह धीरे से अपने लंड को सुमन की बुर से बाहर निकाल लिया सुमन झड़ रही थी इसलिए मदहोशी में इस तरह से खड़ी रह गई थी क्योंकि उसमें हिम्मत नहीं थी. लेकिन अंकित एकदम से चौंक गया था क्योंकि उसकी छवि मोहल्ले में सीधे लड़के की थी लेकिन आज शर्मा जी की बहू ने मोहल्ले की ही लड़की की चुदाई करते हुए उसे पकड़ ली थी अंकित घबरा गया था एकदम से बोला)

भाभी जी,,,,,,

क्या भाभी जी तुम दोनों तो शरबत का पाउडर लेने के लिए उठा देना और यहां तो कुछ और ही खेल खेल रहे हो,,,,,।

(शर्मा जी की बहू की बात सुनकर धीरे से सुमन खड़ी हुई और अपनी पेंटी के साथ अपनी सलवार को ऊपर खींच ली वह भी काफी शर्मिंदा थी शर्मा जी की बहू के सामने शर्मा जी की बहू बोली)

तुम्हारे बारे में सुमन तो मैं सिर्फ सुन रखी थी लेकिन आज मैं अपनी आंखों से देख ली तुम्हारी करतुतों को,,,,

मुझे माफ कर देना भाभी यह सब किसी को बताना नहीं है मुझसे गलती हो गई,,,,,।



गलती हो गई अगर यह सब में नीचे जाकर बता दूं तो क्या इज्जत रह जाएगी तुम दोनों की,,,, तुम अंकित सुगंधा चाची के लड़के हो ना एक टीचर के लड़के होने के बावजूद कितनी गंदी हरकत करते हो।

(शर्मा जी की बहू की बात सुनकर अंकित रोने जैसा हो गया लेकिन तब तक शर्मा जी की बहू की नजर अंकित के खड़े लंड पर चली गई उसे देखकर वह एकदम से दंग रह गई उसे देखकर वह अपने मन में सोचने पर मजबूर हो गई कि आखिरकार इतना बड़ा लंड किसी का होता है क्या,,,? शर्मा की बहू तो देखते ही रह गई उसने जिंदगी में इतना मोटा तगड़ा और लंबा लंड नहीं देखी थी,,,, इसलिए अंकित के लंड को देखकर हैरान थी उसकी खुद की बोलती बंद हो गई थी आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था लेकिन सुमन काफी परेशान थी वह एकदम से हाथ जोड़कर बोली।)

प्लीज भाभी ऐसा बात किसी को मत बताना मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं तुम्हारे पैर पडती हूं,,,,।

(शर्मा जी की बहू जो यह सब देखकर काफी गुस्से में थी लेकिन अंकित के मोटे तगड़े लंड को देखकर उसका गुस्सा एकदम से गायब हो गया था उसके मन में अजीब सी उलझन होने लगी थी और बदन में थरथराहट होने लगी थी,,,,,, उसके मन में कुछ और चलने लगा था वह सुमन की बात सुनकर एकदम नरम लहजे में बोली ,,,)

अच्छा अच्छा ठीक है मैं किसी से नहीं कहूंगी,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू कमरे के अंदर रसोई कहां रखा सामान में से मिर्ची का बड़ा पैकेट निकाल कर सुमन को थमाते हुए बोली,,,)

यह ले मिर्च का पैकेट इसे जल्दी से रसोईया को दे देना,,,,,

ठीक है भाभी लेकिन किसी को कहोगी तो नहीं,,,,।

बिल्कुल भी नहीं कहूंगी लेकिन तुझे भी मेरा एक काम करना होगा तभी यह राज, राज रह पाएगा,,,,।

कौन सा काम भाभी आप जो कहोगी मैं वह करने को तैयार हूं,,,,,।

(सुमन की बात सुनकर शर्मा जी की बहू आगे बड़ी और बिस्तर पर रखा हुआ तारा और चाबी अपने हाथ में लेकर सुमन को थमाते हुए बोली)

यह ले ताला और चाबी जाते समय दरवाजा बंद करके उसे पर मार देना और यह चाबी अपने हाथ में ही रखना कोई कुछ मांगे तो तू ही इधर आना और अगर कोई ना भी मंगाए तो बिना कहे आधे घंटे के अंदर चली आना और कोई ना हो तो दरवाजा खोल देना,,,।



(खेली खाई सुमन शर्मा जी की बहू के कहने के मतलब को समझ गई थी इसलिए उसके चेहरे पर परेशानी के भाव एकदम से चले गए और वह मुस्कुरा दी यह देखकर शर्मा जी की बहू बोली,,,)

जल्दी जा रसोईया को दे दे वरना यहां कोई और आ जाएगा,,,,और जैसा बोली हुं वैसा ही करना।

ठीक है भाभी,,,,(इतना कहकर सुमन कमरे से बाहर निकल गई उसके सर से बहुत बड़ी मुसीबत टल गई थी और वह समझ गई थी कि अब शर्मा जी की बहू अंकित के साथ क्या करने वाली है और जाते-जाते दरवाजा बंद करते हुए मुस्कुरा कर दोनों की तरफ देखी अंकित सवालिया नजरों से सुमन की तरफ देख रहा था लेकिन इस बात का एहसास उसे हो गया था कि अब बंद कमरे में शर्मा जी की बहू के साथ उसे क्या करना है।)
 
अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था अनजाने में ही आज एक और बुर उसे मिलने वाली थी चोदने के लिए,, इतना तो अंकित समझ गया था कि जिस तरह से शर्मा जी की बहू ने सुमन को ताला चाबी दी थी दरवाजे पर लगाने के लिए आज उसकी किस्मत का ताला एक बार फिर खुलने वाला था। लेकिन इस तरह से एकाएक किसी औरत के साथ अंकित ने शारीरिक संबंध नहीं बनाया था बहुत ही कम समय में उसने केवल बस के अंदर सफर के दौरान उसे अनजान औरतों के साथ ही संबंध बना पाया था फिर भी उसके साथ संबंध बनाने में थोड़ी बहुत बातचीत का जरिया बना हुआ था और वह उसे पेशाब करने के लिए बस के नीचे ले गया था इन सब के दौरान दोनों के बीच अच्छी खासी बातचीत हुई थी जिससे अंकित को उसे चोदने में कोई परेशानी नहीं हुई थी,,,।



लेकिन यहां पर मामला कुछ अलग ही था शर्मा जी की बहू को वह ठीक तरह से कभी जनता भी नहीं था भले ही वह उसी मोहल्ले में शादी करके आई थी लेकिन आज शर्मा जी की बहू से अंकित की पहली मुलाकात थी और वह पहली बार ही शर्मा जी की बहू को देख भी रहा था इतने कम समय में किसी औरत के साथ दैनिक सुख प्राप्त करना और उसे प्रदान करना यह बड़ा कठिन कार्य था,,,, और वैसे भी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि शर्मा जी की बहू इतनी जल्दी तैयार कैसे हो गई उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए,,, यह अंकित के मन में सवाल घूम रहा था लेकिन वह शर्मा जी की बहू के बारे में नहीं जानता था शर्मा जी की बहू को इस घर में आए 3 साल गुजर चुके थे इन 3 साल में उसका पति 3 महीने भी उसके साथ बराबर नहीं था घर में उसके ननद की शादी थी और खुद उसका भाई काम में इस तरह से डूबा हुआ था कि हल्दी वाले दिन भी वह घर नहीं आ पाया था वह कल आने वाला था इसी से अंदाजा लगा सकते थे कि शर्मा जी की बहू अपनी जवानी के दौर का खुलकर मजा नहीं ले पा रही थी रोज रात को बिस्तर पर अपनी टांगों को आपस में रगड़कर अपनी भावनाओं को मार कर सोना उसके दिनचर्या हो चुकी थी,,,। लेकिन वह बेहद सीधी शादी और मर्यादा सील औरत थी। सुमन और अंकित को रंगे हाथ पकड़ने के बावजूद भी उसके मन में ऐसा कुछ भी नहीं था कि वह अंकित के साथ जवानी का मजा ले सके लेकिन अनजाने में उसकी नजर अंकित के मर्दाना अंग पर चली गई थी जिसे देखकर उसके होशो हवास उड़ गए थे क्योंकि अपने पति के अंग को देखकर वह अंकित के अंग के बारे में सोच रही थी जिसके आगे उसके पति का कुछ भी नहीं था और यही देखकर उसके मन में भी काम भावना प्रज्वलित होने लगी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि यही सही मौका है मजा लेने का ना किसी बात का डर क्योंकि वह खुद उसे रंगे हाथ पकड़ चुकी है इससे दोनों का राज राज ही रह जाएगा और वैसे भी अंकित उसके मोहल्ले का लड़का था और अंकित के बारे में सुनी थी कि वह बहुत सीधा-साधा लड़का है लेकिन आज अपनी आंखों से उसका सिधापन देखकर खुद उसकी भावनाएं बहकने लगी थी। अंकित के मोटे तगड़े लंड़ को अपनी बुर में लेने के लिए उसकी भावनाएं तेज हो चुकी थी इसीलिए वह जो नहीं करना था वही करने के लिए तड़प उठी थी।



धीरे-धीरे शर्मा जी की बहू अंकित की तरफ आगे बढ़ रही थी अंकित शर्मा के मारे नजर नीचे झुका ले रहा था वैसे वह शर्मा जी की बहू को नजर भर कर देख चुका था विवाहित होने की वजह से उसका शरीर जवानी से भरा हुआ था उसके अंग अंग में मादकता छलक रही थी ब्लाउज के अंदर कैद उसकी दोनों चूचियां कबूतर की भांति आजाद होने के लिए पंख फड़फड़ा रहे थे वैसे भी शर्मा जी की बहू की चूचियां खरबूजे जैसी बड़ी थी और उन्हें संभालने के लिए ब्लाउज का साइज छोटा था जिसकी वजह से ब्लाउज के बटन जहां लगे होते हैं वहां का कपड़ा कुछ ज्यादा ही खिंचा हुआ था जिससे ऐसा लग रहा था कि शर्मा जी की बहू की जवानी छलक रही हो। मोटी मोटी बांहें मांसल चिकनी कमर और ऊपर से गहरी नाभि कुल मिलाकर जवानी से भरी हुई शर्मा जी की बहू काम देवी लग रही थी। और ऐसी खूबसूरत नारी की जवानी का रस चखने वाला कोई नहीं था लेकिन आज यह सुनहरा मौका अंकित को प्राप्त हुआ था। इसलिए अंकित भी अपने आप को अंदर से तैयार कर रहा था वैसे भले ही वह शर्मा जी की बहू को देखकर घबरा गया था लेकिन वहां अपने लंड को पेट के अंदर छुपा नहीं पाया था उसका लंड अभी भी पेंट के बाहर अपना हुनर दिखाने के लिए सीना ताने खड़ा था,,,, जिस पर शर्मा जी की बहू की नजर बराबर लगी हुई थी,,, दरवाजा बंद होने के बाद दरवाजे पर ताला लगाने की आवाज अंकित को साफ सुनाई दे रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं दोनों पकड़े न जाए,, लेकिन शर्मा जी की बहू की मौजूदगी से उसमें हिम्मत आ रही थी और घर भी उसी का था तो जब सैया कोतवाल तो डर कांहे का यह मुहावरा यहां अंकित पर बराबर फिट बैठ रहा था,,, शर्मा जी की बहू की मुस्कान पूरी कहानी बयां कर दे रही थी कि उसके मन में क्या चल रहा है,,, वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए अंकित की तरफ आगे बढ़ रही थी उसकी चूड़ियों के खनक की आवाज से पूरा कमरा मदहोश हुआ जा रहा था वैसे भी हल्दी की रस्म थी इसलिए वह भी तैयार हुई थी और सही कहा जाए तो वह खुद एक दुल्हन की तरह लग रही थी पीली साड़ी में उसका गोरा रूप खिल उठा था।



यह तुम क्या कर रहे थे सुमन के साथ,,,?

ककककक,,, कुछ नहीं भाभी,,,!(अंकित थोड़ा डरते हुए बोला)

यह अगर कुछ नहीं था तो बहुत कुछ किया था अब छुपाने की कोई जरूरत नहीं है मैंने सब अपनी आंखों से देख ली हूं सुमन के बारे में तो मैं अपने कानों से सुन चुकी थी और आज अपनी आंखों से देख भी ली लेकिन तुम तो मोहल्ले के सबसे सीधे लड़के थे तुम कैसे ही इन सब पचड़े में पड़ गए,,,,,।

वो ,,,वो,,,, मैं कुछ करना नहीं चाहता था भाभी में तो यहां शरबत के पाउडर के लिए आया था लेकिन सुमन ही यह सब करने पर मजबूर कर दी,,,,।

ऊममम वह तो मैं देख ही रही हूं तुम्हारे पास हथियार ही इतना जानदार है कि कोई भी लड़ने के लिए मैदान में उतर जाए,,,(इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ले जो की पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था उसकी गर्माहट अपनी हथेली में महसूस करके उसकी पसीजने लगी,,,, और अचानक उसके मुंह से निकल गया,,,,) सहहहहह आहहहहहह इतना मोटा और लंबा तो मैं आज तक नहीं देखी कौन सा तेल लगाता है रे ईस पर,,,,।

कोई भी तो नहीं भाभी यह ऐसा ही है,,,।



बाप रे यानी नेचुरल तौर पर ऐसा ही है अगर इसकी सरसों के तेल की मालिश की जाए तो यह तो और भी ज्यादा लेट्ठ बन जाएगा,,,(मदहोश होते हुए शर्मा जी की बहू अंकित के लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर उसे मुट्ठीयाने लगी,,,,, शर्मा जी की बहू की हरकत से अंकित की हालत खराब हो रही थी उसे मजा भी आ रहा था और उसे इस बात का डर था कि कहीं कोई आना जाए इस बात का डर तो उसके मन से निकल चुका था कि शर्मा जी की बहू कुछ करेगी क्योंकि वह शर्मा जी की बहू की हालत को समझ गया था वह जानता था कि अब ये बिना चुदवाए मानने वाली नहीं है,,,,, फिर भी जानबूझकर नाटक करते हुए अंकित बोला,,,)

यह क्या कर रही हो भाभी,,,,?

वही जो एक औरत को करना चाहिए सच-सच बताना सुमन की कितनी बार लिया है,,,,,।

(यह सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया खामोश हो क्या तो शर्मा जी की बहू फिर से अपनी बात को दोहराते हुए बोली,,,)

बताना घबरा क्यों रहा है कितनी बार लिया है सुमन की जिस तरह से तू धक्के लगा रहा था मुझे तो लगता है कि बहुत पहले से यह सब चल रहा है। (शर्मा जी की बहू मादक अदा से अपनी मुट्ठी में भरकर अंकित के लंड को धीरे-धीरे मुठिया रही थी ऐसा करने में उसे तो आनंद ही रहा था अंकित की भी हालत खराब हो रही थी,,, शर्मा जी की बहू के इस तरह के सवाल और उसकी हरकत से अंकित मदहोश हो रहा था उसे मजा आ रहा था फिर वह धीरे से बोला,,,)



तीन बार,,,,

ओहहहहह बहुत मजा आता है यह सब करने में सुमन की गांड भी बड़ी-बड़ी है लेने में तो मत हो जाता है तेरा चेहरा बता रहा है,,,,।

(शर्मा जी की बहू इस तरह की बातें करेगी अंकित को उम्मीद नहीं थी लेकिन इस तरह की बातें सुनकर अंकित के तन बदन में आग लग रही थी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी एक औरत का पहली बार में ही एक जवान लड़के के साथ इस तरह की बात करना कितना मदहोश कर देने वाला पल होता है,,,,,,, फिर वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) वह तो छिनार है लेकिन तुझे भी छिनरपन सीखा दी है,,,, मजा आ रहा था ना उसकी लेने में सच-सच बताना अब मुझसे छुपाने की जरूरत नहीं है,,,,,।(वह उसी तरह से धीरे-धीरे मुठिया रही थी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले लेकिन मजा बहुत आ रहा था इस सवाल पर भी वह कुछ बोल नहीं पाया,,,,, तो शर्मा जी की बहू फिर से बोली।)

बताना शर्मा क्यों रहा है,,,, मजा आया ना सुमन की लेने में,,,,

जजज,,,जी जी भाभी,,,,,।

(अंकित का जवाब सुनकर वह मुस्कुराने लगी उसकी आंखों में मदहोशी भरी हुई थी उत्तेजना से उसकी आंखें मदहोश हुए जा रही थी,,, और वह मुस्कुराते हुए फिर से बोली,,,)



कितनी बार पानी निकाला,,,,,।

एक भी बार नहीं,,,,।

मतलब तुम दोनों का काम अधूरा रह गया धत् गलत समय पर आ गई,,,,,,।

मेरा मतलब है कि सुमन का निकल गया था मेरा नहीं निकला,,,,,।

(इतना सुनकर शर्मा जी की बहू मादक अंदाज में मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ देखकर बोली)

कोई बात नहीं मेरे राजा मैं निकाल दूंगी तेरा,,, वैसे भी लड़कियों से ज्यादा मजा भाभिया देती हैं,,,,, उससे भी बड़ी-बड़ी चूची मेरी है और गांड जो तुझे बहुत पसंद आएगी,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू एकदम से अपना मुंह अंकित के लंड की तरह बधाई और अगले ही पल उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू करती अंकित तो सातवें आसमान में उड़ने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह सब हकीकत है उसे तो सब कुछ सपना ही लग रहा था,,, क्योंकि भला कौन यकीन कर पाएगा कि शादी वाले घर में जाने पर पहली मुलाकात में ही इस घर की बहू अपनी देने के लिए तैयार हो जाएगी,,,,, लेकिन यह सपना नहीं हकीकत था और इस हकीकत में अंकित डूबने लगा था अपनी आंखों को बंद करके इस पल का मजा लेने लगा था शादीशुदा होने के कारण एक मर्द को खुश करना शर्मा जी की बहु अच्छी तरह से जानती थी,,, वह पूरा का पूरा अपने गले तक उतार कर उसे कस रही थी शायद इस तरह का लंड उसे पहली बार मिला था,,,, और यह हकीकत ही था अंकित के लंड को चूसते हुए शर्मा जी की बहू अपने मन में यही सोच रही थी कि काश ऐसा लंड उसके पति का होता तो कितना मजा आता फिर अपनी मन में सोचने लगी कि अगर उसके पति का ऐसा होता भी तो उसे कौन सा मजा मिलने वाला था साल भर में तो 15 दिन के लिए ही आता है उसमें से ज्यादातर थककर सो जाता है,,,, वह अपने मन ही मन में सोच रही थी कि ऐसे आदमी को पाकर उसकी जिंदगी खराब हो गई। क्योंकि वह जवानी से पूरी तरह से भरी हुई थी ऐसे में हर रात उसे मर्द का साथ चाहिए था जो उसकी जवानी को अपनी बाहों में कस के दबोच कर उसका रस निकाल दे लेकिन यह सब सिर्फ उसका ख्वाब था उसकी कल्पना थी ऐसा मर्द अभी तक उसके जीवन में नहीं आया था लेकिन आज जैसे उसका भाग्य खुल गया था क्योंकि इस तरह के लंड के बारे में वह कभी कल्पना भी नहीं की थी और आज उसे उम्मीद से दुगना कल्पना से परे प्राप्त हो रहा था।





वह अपने मन में सोचने लगी थी कि वाकई में पति से ज्यादा मजा तो मोहल्ले के देवर देते हैं अगर सच में वह मोहल्ले के देवर से दिल लगा ले तो रोज रात को बिस्तर पर करोड़ बदल कर सोना नहीं पड़ेगा बल्कि देवर की बाहों में जवानी का असली सुख प्राप्त करके वह चैन की नींद सोएगी,,,,, पल भर में ही शर्मा जी की बहु बहुत कुछ सोच ली थी इस तरह के हालात में वह मर्यादा सील औरत की छवि को पूरी तरह से बदलकर रख दी थी,,, शर्मा जी की बहू संस्कारी औरत थी और उसके संस्कार के बारे में पूरा मोहल्ला जानता था उसकी इज्जत करता था उसे सम्मान देता था लेकिन इसके विपरीत उसका एक ऐसा विरोध था जो माहौल के हिसाब से पूरी तरह से बदल चुका था शर्मा जी की बहू में इस समय एक छिनार जागरूक हो गई थी जो अपने वतन की प्यास बुझाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो चुकी थी। वह पागलों की तरह अपने मुंह को ही ऊपर नीचे आगे पीछे करके अंकित के लंड का मजा ले रही थी। अंकित भी धीरे-धीरे खुलने लगा था क्योंकि वह जानता था कि अगर मजा लेना है तो उसे भी मैदान में उतरना पड़ेगा इस तरह से शर्माने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि शर्मा जी की बहू खुद मजा लेना चाहती है इसलिए वह एक हाथ शर्मा जी की बहू के सर पर रखकर अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया था उसके ईस हरकत पर शर्मा जी की बहू मदहोश हुई जा रही थी अपने दोनों हाथों को अंकित के नितंबों पर रखकर उसे कसके दबाते हुए उसके लंड की चुसाई कर रही थी,,,,, शर्मा जी की बहू इस बात से भी हैरान थी कि अभी तक अंकित के लंड से पिचकारी नहीं निकली थी इतनी देर में तो उसका पति थककर सो भी ज्यादा उसे प्यासी छोड़कर लेकिन अंकित के मर्दाना ताकत को देखकर उसकी मां प्रसन्नता से चूमने लगा था क्योंकि उसे यकीन हो चला था कि अंकित उसकी प्यास को बुझा सकता है,,,, वह कुछ देर तक इसी तरह से अंकित को खुश करती रही फिर धीरे से उसके लंड को अपने मुंह में से बाहर निकले और धीरे से उठकर खड़ी हो गई उसका चेहरा उत्तेजना से लाल टमाटर की तरह हो गया था लंड मोटा और लंबा होने की वजह से उसे गले तक लेकर जो हिम्मत उसने दिखाई थी उसके चलते उसकी आंखें भी बड़ी-बड़ी हो गई थी। उसका खूबसूरत चेहरा देखकर अंकित की प्रसन्न दिखाई दे रहा था और वह धीरे से अपने लंड को पकड़ कर एक असली मर्द की तरह उसे मुठीयाते हुए मदहोशी भरी नजरों से शर्मा जी की बहू की तरफ देख रहा था। उसकी हरकत को देखकर शर्मा जी की बहू को एहसास होने लगा कि आज उसका पाला असली मर्द से पड़ा है,,, वह मुस्कुराते हुए अंकित से बोली।



क्या ऐसा मजा सुमन देती है,,,,?

बिल्कुल भी नहीं भाभी और तुम्हारी तरह हिम्मत नहीं दिख पाती बस ऊपर ऊपर से चुसती है वह कहती है की उसे इतने मोटे और लंबे लंड से डर लगता है,,,,(अंकित जानबूझकर इस तरह की बातें बना रहा था क्योंकि वह आज शर्मा जी की बहू को जमकर चोदना चाहता था,,,, अंकित की बात सुनकर शर्मा जी की बहू मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

इसलिए तो कहती हूं सुमन से ज्यादा मजा मेरी जैसी भाभिया ही दे पाएंगी,,,(, इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू अपने ब्लाउस को बिना खोले नीचे से ऊपर की तरफ करने लगी उसकी ब्रा भी साथ में ऊपर सरक रही थी,,,, देखते ही देखते अपने हाथों से ही बिना ब्लाउज खोलें वह अपनी एक बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी च को अपनी ब्लाउज से बाहर निकाल दे जो कि नीचे की तरफ लुभा रहा था शर्मा जी की बहू की हरकत को देखकर वह समझ गया था कि उसे क्या करना है इसलिए अंकित धीरे से आगे बढ़ा और उसे हाथ में लेकर दबाते हुए बिना कुछ बोलेगी उसकी खजूर जैसे निप्पल को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया उसकी इसी से शर्मा जी की बहू मदहोश होने लगी मत होने लगी उसकी आंखें अपने आप बंद होने लगी और अंकित अपनी हरकत को बढ़ाते हुए दूसरे हाथ को ब्लाउज के ऊपर रखकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया लेकिन अंकित जानता था कि इस तरह से पूरा मजा मिलने वाला नहीं है इसलिए वह कुछ देर तक किसी तरह से मजा लेने के बाद एकदम से गहरी सांस देता हुआ उसकी चूची से अपना मुंह हटाया और अपने हाथों से उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,, शर्मा जी की बहू मदहोश हो चुकी थी मस्त हो चुकी थी उत्तेजना और कुमारी उसकी आंखों में सवार हो चुकी थी क्योंकि महीनों बाद उसे इस तरह का सुख मिल रहा था,,, क्योंकि तकरीबन 8 महीने जैसा समय गुजर गया था उसके पति को बाहर गए, तब से वहां बिस्तर पर अकेले ही करवट बदलकर अपने दिन गुजर रही थी लेकिन आज उसका दिन था आज उसकी मनोकामना पूरी होने वाली थी क्योंकि आज वहां असली मर्द की बाहों में थी असली मर्द के हाथों में खेल रही थी।





देखते ही देखते अंकित उसके ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी ब्रा को नीचे से पकड़ कर ऊपर की तरफ कर दिया और उसके दोनों दशहरी आम एकदम से आजाद हो गए शर्मा जी की बहू की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था वह दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा और इस बार अपने होठों को एकदम से उसके लाल-लाल होठों पर रखकर उसके होठों पर रसपान करने लगा अंकित की हरकत से शर्मा जी की बहू भी एकदम मदहोश और व्याकुल हो गई उसके दोनों हाथ अंकित की पीठ पर चली गई और वह भी उसका साथ देते हुए एक दूसरे के मुंह में अपनी जीभ को डालकर मजा लेने लगे,,, अंकित इस खेल का असली खिलाड़ी था भले ही शर्मा जी की बहू शादीशुदा थी लेकिन फिर भी वह अच्छी तरह से समझता था की चुदाई के मामले में शर्मा जी की बहू अनुभव हीन चुदाई के असली सुख सेवा वंचित थे उसे नहीं मालूम था की असली चुदाई किसे कहते हैं इसलिए अंकित अपने काम कला के सारे दांव पेच इधर आजमा लेना चाहता था,,, इसलिए तो उसकी चूचियों पर से हाथ हटाकर वह एकदम से अपने दोनों हाथों को उसके भारी भर के पिछवाड़े पर ले गए और साड़ी के ऊपर से ही उसकी बड़ी-बड़ी गांड को मसलने लगा दबाने लगा उसकी हरकत से, शर्मा जी की बहू के तन बदन में चुदाई का रंग चढ़ने लगा,,,, वह आनंदित होने लगी और वह भी उत्तेजना से अपने दोनों हाथों को अंकित के नितंबों पर रखकर जोर-जोर से दबाने लगी हालांकि इसकी हरकत से अंकित को भी बहुत मजा आ रहा था। दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के अंगों को दबोच रहे थे इस दौरान अंकित का खड़ा लंड साड़ी के ऊपर से ही शर्मा जी की बहू की बुर पर ठोकर मार रहा था। जिसका एहसास शर्मा जी की बहू को मदहोश कर रहा था वह जल्द से जल्द अंकित के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,,,, इसलिए वह मादक स्वर में बोली।



ओहहह अंकीत सहहहहह आहहहहहह मुझसे रहा नहीं जा रहा है रे,,,,,,आहहहहहह,,,,, कुछ कर अंकित मैं पागल हो जा रही हूं डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में,,,,,(ऐसा कहते हुए शर्मा जी की बहू अंकित के लंड को अपने हाथ से पकड़ ली और साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर वाली जगह पर जोर-जोर से रगड़ने लगी उसका दबाव बनाने लगी.. उसकी हरकत से अंकीत भी मदहोश हुआ जा रहा था,,,,, लेकिन फिर भी इससे भी शर्मा जी की बहू को बर्दाश्त नहीं हो रहा था देखते-देखते वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी पड़कर उसे कमर तक उठा दी कमर तक साड़ी उठते ही उसकी आसमानी रंग की चड्डी दिखाई देने लगी क्योंकि आगे से काफी फली हुई थी और एकदम गीली भी हो चुकी थी जो कि उसके मदन रस के बदौलत ही वह भीग गई थी,,,, अपनी चड्डी के ऊपर से ही शर्मा जी की बहू अंकित के लंड को उसके सुपाड़े को जोर-जोर से अपनी बुर वाली जगह पर रगड़ रही थी। उसका गीलापन अंकित को अपने सुपाड़े पर अच्छे तरीके से महसूस हो रहा था। अंकित अभी भी उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर चूस रहा था उसकी चुसाई करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,, फिर देखते ही देखते अंकित अपने एक हाथ को सीधा उसके चड्डी के अंदर डाल दिया और उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर रखकर उसे अपनी हथेली में दबोचने लगा जिससे शर्मा जी की बहू की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह एकदम से मदहोश होने लगी और खुद ही अपनी गांड को गोल गोल घूमा कर अपनी बुर को अंकित की हथेली पर नचाने लगी,,,,, शर्मा जी की बहू के मुख से हल्की-हल्की शिसकारी की आवाज निकल रही थी जिससे पूरा कमरा मदहोशी में डूबा हुआ था,,,, अंकित की हथेली पूरी तरह से चिपचिपी हो चुकी थी अंकित शर्मा जी की बहू की बुर की गहराई और कसाव का जायजा लेना चाहता था इसलिए धीरे से अपनी बीच वाली उंगली को उसमें प्रवेश कराने लगा,,,, अंकित की हरकत से शर्मा जी की बहू एकदम से मचलने लगी। उसकी मदहोशी बढ़ती जा रही थी उसे अपनी जवानी की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी।



धीरे-धीरे अंकित अपना हुनर दिखाता हुआ अपनी उंगली को पूरा का पूरा उसकी बुर में प्रवेश कर दिया था उंगली के प्रवेश करते ही शर्मा जी की बहू एकदम से मदहोश होने लगी उसे मजा आने लगा ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित ने अपनी उंगली नहीं बल्कि अपना लंड डाल दिया हो,,, और वैसे भी जो औरत पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है और रात को करोड़ बदल कर अपनी रात गुजर रही हो ऐसी औरत के लिए तो मर्द की उंगली भी लंड के बराबर होती है,, बुर के अंदर की गर्माहट और कसाव पन महसूस करके अंकित बेहद खुश नजर आ रहा था क्योंकि शादीशुदा होने के बावजूद भी आज उसे कई हुई बुर मिलने वाली थी चोदने के लिए,,, शर्मा जी की बहू की जवानी की धधक और अपनी तड़प देखकर अंकित से सब्र करना मुश्किल हुआ जा रहा था इसलिए वह एकदम से शर्मा जी की बहू को अपनी गोद में उठा लिया वह एकदम से घबरा गई लेकिन तुरंत उसके कंधे का सहारा ले ली उसने यह बात बोली भी कि कहीं गिर मत देना लेकिन अंकित जानता था कि उसे अब क्या करना है वह बिना कुछ बोले उसे कमरे में बिछे हुए नरम-नरम गद्दे पर उसे ले जाकर के पटक दिया,,,, अंकित की हरकत से उसकी साड़ी एकदम कमर तक उड़ गई थी उसकी मोटी मोटी जांघें ट्यूबलाइट की रोशनी में चमक रही थी,,,,, शर्मा जी की बहू की गदराई जवानी और गदराई जांघें अंकित के होश उड़ा रही थी उसे बर्दाश्त करना आप मुश्किल हुआ जा रहा था वह एकदम से बिस्तर के ऊपर झुका और शर्मा जी की बहू की चड्डी को दोनों हाथों से थाम लिया और एक झटके से उसे नीचे की तरफ सरकने लगा जिसमें खुद शर्मा जी की बहू उसकी मदद करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा ली और अंकित अगले ही पल उसके बदन से उसकी चड्डी को अलग कर चुका था।



शर्मा जी की बहू का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि अब उसे लगने लगा इसलिए अब उसके बरसों की ख्वाहिश पूरी होने वाली है एक मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में प्रवेश करने वाला है,,,, और ऐसा होना ही था अगर अंकित की जगह कोई और होता तो अब तक उसकी बुर में लंड डालकर झढ़ भी गया होता लेकिन ऐसे ही नहीं औरतें अंकित की दीवानी हो जाती है क्योंकि अंकित को औरत को खुश करने का काम कला अच्छी तरह से मालूम था वह औरत को खुश करने में महारथ हासिल किया था उसका यह हुनर हमेशा औरतों को घुटना टेकने पर मजबूर कर देता था। अंकित बिस्तर के नीचे खड़ा था और शर्मा जी की बहू बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी अपनी दोनों टांगें फैलाएं उसकी गुलाबी बुर एकदमसाफ दिखाई दे रही थी अंकित तो उसकी बुर को देखता ही रह गया था,,,, उसकी कसी हुई बुर की बनावट देखकर कोई कह नहीं सकता था कि यह शादीशुदा है अभी भी एकदम कुंवारी बुर की तरह दिखाई दे रही थी हल्के हल्के बल से सुशोभित उसकी गुलाबी बुर खड़े-खड़े किसी भी मर्द का पानी निकाल देने में सक्षम थी। अंकित से रहा नहीं गया और वह उसकी बुर की तारीफ करते हुए बोला,,,।



वह भाभी क्या बुर हैं तुम्हारी सुमन तो तुम्हारे आगे कुछ भी नहीं है,,,,,।

(अंकित के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ खासकर के अपनी बुर की तारीफ सुनकर शर्मा जी की बहू फुले नहीं समा रही थी,,,,,, वह शर्म के मारे अपनी नज़रें इधर-उधर घूमा ले रही थी नीचे से ढोलक की आवाज लगातार आ रही थी लोगों के हंसने की नाचने गाने की आवाज आ रही थी नीचे का माहौल पूरी तरह से शादी वाला था और ऊपर के कमरे का माहौल शादी के बाद का सुहागरात वाला था,,,, जिसमें आज दुल्हन ननद की भाभी बनी हुई थी और पति मोहल्ले का जवान लड़का था। अपनी जवानी की गर्मी शर्मा जी की बहू से बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह अंकित से बोली।)

अंकित अब डाल दे अपना लंड मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,।

मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है भाभी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित घुटनों में फंसी अपनी पेट को नीचे छुपाकर दोनों हाथों से निकाल कर अलग कर दिया कमर के नीचे हो पूरी तरह से नंगा हो चुका था शर्मा जी की बहू को लगने लगा कि अब उसके अरमान पूरे होने वाले हैं और अंकित धीरे-धीरे घुटनों के बाल उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया लेकिन शर्मा जी की बहू की सोच के विपरीत अगले ही पर अंकित अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रख दिया और उसे चाटने लगा अंकित की इस हरकत के लिए शर्मा जी की बहू बिल्कुल भी तैयार नहीं थी उसे उम्मीद नहीं थी कि जवान लड़का उसकी बुर की चटाई करेगा जो कि उसकी यह दिली ख्वाहिश थी क्योंकि आज तक उसके पति ने उसे इस तरह का सुख कभी नहीं दिया था। इसलिए मोहल्ले के लड़के से इस तरह का सुख प्रकार शर्मा जी की बहू उत्तेजना और खुशी से गदगद हुए जा रही थी वह एकदम से अपने दोनों हाथ को अंकित के सर पर रखकर उसके मुंह को अपनी बउुर के ऊपर दबाना शुरू कर दी और अंकित भी जितना हो सकता था उतनी अपनी जीत को इसकी गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था कुछ देर तक अंकित इसी तरह से शर्मा जी की बहू को मदहोश बनाता रहा व्याकुल बनाता रहा वह बिस्तर पर तड़प रही थी छटपटा रही थी अंकित के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए लेकिन अंकित उसे तड़प रहा था असली खेल से वाकिफ कर रहा था और शर्मा जी की बहू भी इस तरह की छटपटाहट और तड़प कभी भी बिस्तर पर महसूस नहीं की थी आज वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह साक्षात कामदेव के हाथों में मदहोश हुए जा रही है उसे यकीन हो चला था कि अंकित कामकला में पूरी तरह से माहिर था।



लेकिन अब शर्मा जी की बहू की मदद कर देने वाली जवानी की चमक में अंकित भी होने लगा था वह भी जल्द से जल्द शर्मा जी की बहू को भोगना चाहता था क्योंकि धीरे-धीरे समय व्यतीत होता चला जा रहा था कोई भी किसी भी समय यहां आ सकता था,,,, इसलिए धीरे से अंकित शर्मा जी की बहू की गुलाबी पर से अपने मुंह को ऊपर की तरफ उठाया उसके हॉट पर उसके मुंह पर उसका मदन रस लगा हुआ था जो कि उसके मुंह से टपक रहा था यह देखकर शर्मा जी की बहू शर्म से पानी पानी होने लगी उसका चेहरा और का लाल हो गया अंकित यह देखकर मदहोश होने लगा और अगले ही पर उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी जांघो पर चढ़ा लिया,,, धीरे-धीरे वह अपने मोटे सुपर को शर्मा जी की बहू के नाजुक गुलाबी बुर के अंदर प्रवेश करने लगा जैसे-जैसे लंड अंदर की तरफ आगे बढ़ रहा था वैसे-वैसे शर्मा जी की बहू के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे,,,, शर्मा जी की बहू को भी इस बात का हिसाब से हो रहा था कि वाकई ने उसकी बुर में आज मर्दाना लंड घुस रहा था उसकी हालत खराब हो रही थी उसे दर्द महसूस हो रहा था लेकिन ना तो वह रुकने वाली थी और ना ही अंकित को अपने वाला आधा लंड घुसने के बाद अंकित ने करारा चोट लगाया और अंकित का पूरा का पुरा लंड सडसडाता हुआ उसकी बुर की गहराई में खुशियां उसके बच्चेदानी से टकरा गया और उसके मुंह से चीख निकल गई लेकिन उसकी चीख की आवाज ढोलक की आवाज के बीच दब गई अगर शादी वाला करना होता तो उसके चिखने की आवाज जरूर कोई ना कोई सुन लेता,,, लंड की मोटाई और लंबाई के घुसने का दर्द शर्मा जी की बहू के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, लेकिन अंकित यह देखकर हैरान था कि वह बिल्कुल भी उसे रोकने के लिए नहीं कह रही थी शायद यह पल उसके लिए बेहद कीमती था ऐसा मजा उसने जिंदगी में कभी नहीं ली थी इसलिए वह अपने दर्द को पी गई थी इस अद्भुत अवसर को जीने के लिए,,,,।



अंकित पूरा काम कर चुका था उसका पूरा का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में घुस चुका था वह भी हैरान थी क्योंकि वह अपने मन में इस बात की शंका जाता रही थी कितना मोटा और लंबा लंड उसकी बुर में घुस पाएगा कि नहीं लेकिन सब कुछ बढ़िया आराम से हो गया था थोड़ा दर्द झेल लेना जरूर पड़ा था लेकिन उसके बाद सब कुछ आनंद के सागर में गोते लगाने जैसा था अंकित शर्मा जी की बहू की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था वह उसे चोद रहा था,, कसी हुई बुर में लंड डालने का अपना अलग ही मजा होता है इस बात का एहसास अंकित को भी था इसलिए अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता और उत्तेजना के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे। अंकित पसीने से तरबतर हो चुका था आखिरकार कोई भी चीज पाने के लिए मेहनत तो करनी पड़ती है,,, लेकिन यह मेहनत रंग ला रही थी अंकित शर्मा जी की बहू पर पूरी तरह से छा चुका था उसे अपनी बाहों में भरकर धक्के लगना शुरू कर दिया था क्योंकि अब समय दोनों के लिए बहुत कम था कुछ देर तक इसी तरह से अंकित शर्मा जी की बहू की चुदाई करता रहा और शर्मा जी की बहू का बदन करने लगा वह करने वाली थी उसके मुख से अजीब अजीब सी आवाज निकल रही थी,,,, और अंकित के धक्के तेज हो गए वह झड़ने लगी थी वह एकदम से अंकित को अपनी बाहों में कस ली थी जिंदगी में पहली बार वह इस तरह का चरम सुख प्राप्त की थी वह एकदम गदगद हुए जा रही थी।



शर्मा जी की बहू एक बार झड़ चुकी थी और अंकित धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल दिया था शर्मा जी के बहू को लग रहा था कि काम खत्म हो गया है वह बिस्तर से नीचे उतरकर अपने कपड़े पहन रही थी कि अंकित उसे पकड़कर घोड़ी बना दिया और बोला,,।

कहां जा रही हो भाभी अभी तो मेरा निकला नहीं है,,,।

(यह सुनकर शर्मा जी की बहू हैरान हो गई क्योंकि अभी कुछ देर पहले ही वहां सुमन की चुदाई करके उसे संतुष्ट कर चुका था और एक बार उसे खुद संतुष्ट कर चुका था लेकिन उसका खुद का पानी नहीं निकला था शायद यही असली मर्द की पहचान होती है और वह खुशी-खुशी फिर से घोड़ी बन गई उसकी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड देखकर अंकित की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह एकदम से पीछे से शर्मा जी की बहू की गुलाबी बुर में अपना लंड डाल दिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और तब तक उसकी चुदाई करता रहा जब तक उसका पानी नहीं निकल गया लेकिन इस दौरान उसका पानी निकालते निकालते दरवाजे पर दस्तक होने लगी थी सुमन बाहर आ चुकी थी क्योंकि दस्तक देते हुए वहां बता रही थी कि वह समान है नहीं तो दोनों घबरा जाते की कही कोई आ तो नहीं गया,,,,, दोनों अपने-अपने कपड़े पहन कर अपने आप को दुरुस्त कर लिए थे शर्मा जी की बहू के चेहरे पर संतुष्टि के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे,,,, कपड़े पहन लेने के बाद शर्मा जी की बहू बोली।

दरवाजा खोलो सुमन,,।

(अगले ही पल दरवाजा खुला और सुमन ने शर्मा जी की बहू की तरफ देखकर चुटकी लेते हुए बोली)

वह भाभी तुम्हारा चेहरा तो खिला-खिला दिखाई दे रहा है इसका मतलब है कि आज बहुत मजा ली हो,,,।

तो क्या मेरी लाडो आज तो मजा ही आ गया,,,,(गाल पर चुटकी भरते हुए शर्मा जी की बहू बोली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

अब धीरे से दरवाजा बंद कर दे और नीचे आजा किसी को शक ना होने पाए,,,,,।(इतना कहकर शर्मा जी की बहू नीचे चली गई और थोड़ी देर बाद सुमन और अंकित दोनों मुस्कुराते हुए नीचे आ गए अभी भी हल्दी की रस्म जारी थी और वह दोनों हल्दी की रस्म में शामिल हो गए।
 
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