Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 123 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

नूपुर की चुदाई करके अंकित बहुत बड़ी विजय प्राप्त कर चुका था क्योंकि वह नूपुर की चुदाई नहीं किया था बल्कि नूपुर के साथ-साथ उसके बेटे की गांड मार लिया था,,, वह भी उसकी मां की आंखों के सामने ही जिसका विरोध उसकी मां ने बिल्कुल भी नहीं किया था बल्कि उसे पल का वह पूरी तरह से मजा लूटी थी उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था कि उसकी आंखों के सामने उसका बेटा गांड मरवा रहा था,,,, शायद एक मोटे और लंबे लंड की लाना जिस तरह से उसकी मां को थी उसी तरह से उस पल के लिए उसके बेटे के मन में भी वही लालच जाग चुकी थी और ऐसा करके अंकित ने राहुल के अहंकार पर वह पूर्ण विराम लगा चुका था। लेकिन पहली बार तीन लोगों के साथ एक ही बिस्तर पर मजा लेने में जो उसे आनंद प्राप्त हुआ था,, वह उसके लिए जिंदगी भर के लिए यादगार बन गया था। वह कभी सोचा भी नहीं था कि उसके जीवन में ऐसा फल आएगा कि वह एक बेटे के साथ मिलकर उसकी आंखों के सामने उसकी मां की चुदाई करेगा और उसकी भी गांड मारेगा, इसलिए तो अंकित का उत्साह पूरे चरम पर था। अब उसे तैयारी करनी थी नैनीताल जाने की और वह भी अपनी मां के साथ एक नए अनुभव के लिए एक नए एहसास के लिए।



अंकित अपने घर पहुंच चुका था और वह नैनीताल जाने की तैयारी में अपनी मां के साथ जुड़ चुका था। कुछ जरूरी कपड़े और सामान उसकी मां बाग में भर रही थी ज्यादा सामान ले नहीं जाना था केवल अपने-अपने कपड़े ले जाना था,,, इस बात को सुगंध भी अच्छी तरह से जानती थी कि यह नैनीताल का सफर उनके जीवन का बेहद यादगार सफल करने वाला है क्योंकि आज तक वह अपने पति के साथ कभी हनीमून पर नहीं जा पाई थी नहीं उसके पति ने उसे कहीं घूमाने ले गए थे,,,, जब से शादी करके आई थी इसी घर में थी हनीमून भी उसी घर में हुआ था लेकिन जिस तरह से हालात बदले थे अपने बेटे के साथ ही वह हम बिस्तर होकर शारीरिक संबंध बना रही थी जो मजा अपने पति और प्रेमी से लेना चाहिए था वह मजा उसे उसका बेटा दे रहा था उसे देखते हैं उसे पूरा आत्मविश्वास था कि जो कभी उसके जीवन में बनी हुई है उसे कमी को उसका बेटा नैनीताल ले जाकर के जरूर पूरा करेगा। सुगंधा खुशी-खुशी पैकिंग कर रही थी क्या करना है कैसे करना है सब कुछ अपने मन में सोच रही थी यह पहला मौका था जब वह अपने बेटे के साथ कहीं घूमने जा रही थी किसी रिश्तेदार के वहां नहीं बल्कि कहीं दूर ऐसी जगह जहां लोग घूमने जाया करते हैं अपने पति के साथ अपनी प्रेमिका के साथ लेकिन वह अपने बेटे के साथ जा रही थी,,, वह अकेले ही पैकिंग कर रही थी क्योंकि अंकित बस की टिकट लेने गया था। उसे बस की टिकट मिल चुकी थी अंकित ने जानबूझकर बस में केबिन बुक करवाया था जिसमें सफर के दौरान भी वह और उसकी मां दोनों मजा ले सके।



अंकीत घर पहुंचता है तो देखता है कि उसकी मां पैकिंग कर रही थी वह बिस्तर के पास झुकी हुई थी और झुकाने की वजह से उसकी भारी भरकम जवानी से भरी हुई गांड को ज्यादा ही उफान मार रही थी। यह देखकर अंकित से रहा नहीं जाता उसके जवानी का जोश बढ़ने लगता है और वह पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में जकड़ लेता है,,,, कुछ पल के लिए सुगंधा घबरा जाती है लेकिन जल्द ही एहसास हो जाता है कि पीछे उसका बेटा है वह फिर भी पैकिंग करते हुए मुस्कुराते हुए बोलती है।

टिकट मिला क्या,,,,?

मिल गई मम्मी और वह भी केबिन की मजा ही आ जाएगा,,,।

केबिन की क्यों,,,?

अरे केबिन में केवल हम दोनों ही रहेंगे जाते समय भी मजा करेंगे,,,।

नहीं नहीं बस में कुछ भी नहीं किसी को पता चल गया तो,,,,।

अरे कुछ भी नहीं होगा और तुम तो हिम्मत वाली हो घबराती क्यों हो दर्जी के सामने हिम्मत दिखाई थी ना कितना मजा आया था,,,, बस में भी मजा आएगा।

तु सच में बहुत हारामी हो गया है,,,।

आखिर बेटा किसका हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां की साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर कमर तक उठा दिया यह देखकर सुगंधा उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोली)

क्या कर रहा है जब देखो तब शुरू हो जाता है,,,



क्या करूं मुझे रहा नहीं जाता तुम्हारी जवानी देखकर बार-बार मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,(अपनी मां की नंगी गांड पर अपने पेंट में बना तंबू रगडते हुए अंकित बोला,,,)

तो समझ कर रख इसको तेरे साथ-साथ यह भी मुझे ज्यादा परेशान करने लगा है,,,(सुगंधा इस तरह से कपड़ों को बैग में भरते हुए बोली)

तो फिर थोड़ा सा और परेशानी झेल लो,,,, थोड़ा सा अपनी टांगों को खोल दो और इसी जगह दे दो अपनी गुलाबी गली में,,,,

नहीं नहीं मुझे अभी बहुत काम है,,,, वैसे बस कब की है,,,।

रात को 8:00 की है,,,

तब तो बिल्कुल भी समय नहीं है यह सब छोड़ तू भी जल्दी से जरूर का सामान देख ले कहीं कुछ छूट न जाए,,,

मेरी जरूरत का सामान तो मेरी बाहों में है इसे मैं कैसे छोड़ सकता हूं,,,,।



(अपने बेटे कि ईस तरह की बातों को सुनकर सुगंधा एकदम से मुस्कुराने लगी और अपने बेटे की जीद पूरी करने के लिए अपनी टांगों को खोल भी दी जिससे उसकी गुलाबी गली एकदम से नजर आने लगी यह देखकर अंकित से रहने गया और जल्दबाजी दिखाते हुए अपनी पेंट की बटन खोलकर घुटनों तक नीचे खींच दिया लंड पूरी तरह से तैयार था,,, और अगले ही पल अंकित अपनी मां की गुलाबी बुर में अपना लंड डालकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया था और इस दौरान भी सुगंधा सिसकारी भरते हुए जरूर का सामान बैग में भर रही थी,,,, अंकित तब तक अपनी मां की चुदाई करता है जब तक की वह अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और खुद भी नहीं झढ़ गया,,,,।



शाम हो चली थी रास्ते के लिए सुगंधा नाश्ता तैयार कर रही थी,,, अंकित भी मदद कर रहा था क्योंकि 8:00 बजे उसे बस स्टॉप पर पहुंचना था,,, रात भर का सफर था दूसरे दिन सुबह 10:00 बजे तक वालों नैनीताल पहुंच जाते ,,,, जल्दी-जल्दी सुगंधा नाश्ता तैयार करके बाथरूम में नहाने के लिए घुस गई क्योंकि जाने से पहले नहा लेना चाहती थी क्योंकि गर्मी का समय था इसलिए खाना बनाते समय पसीने से वह तरबतर हो चुकी थी बाथरूम में पहुंचते ही वह अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नहा रही थी,,, यह देखकर अंकित का मन फिर से डोल गया और वह भी अपने सारे कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस गया इस बार सुगंधा से रहा नहीं गया क्योंकि बार-बार उसका लंड उसकी गांड पर रगड़ खा रहा था और वह तुरंत नीचे घुटनों के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरूकर दी,,, अंकित पूरी तरह से मदहोश हो गया बाथरूम में वह अपनी आंखों को बंद करके एकदम मदहोशी में खोने लगा,,, उसे मजा आ रहा था क्योंकि उसे उसकी मां मस्त कर रही थी अद्भुत सुख प्रदान कर रही थी,,,, एक बार फिर से अंकित अपनी मां की बुर में लंड डालना चाहता था उसे छोड़ना चाहता था लेकिन सुगंधा का मन इस समय कुछ और कह रहा था। सुगंधा थी कि अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकालने का नाम ही नहीं ले रही थी और तब तक चुसती रही जब तक की उसका बेटा उसके मुंह में ही झड़ नहीं गया।



एक बैग हाथ में लेकर अंकित घर से बाहर निकल गया उसकी मां दरवाजे पर ताला लगा रही थी वैसे तो वह अपनी पड़ोसन सुमन से सब कुछ बता देना चाहती थी लेकिन वह बताना उचित नहीं समझी और वहां से वह दोनों मुख्य सड़क पर आए और ऑटो पकड़कर बस स्टैंड पर पहुंच गए,,, बस स्टैंड पर काफी भीड़ थी। थोड़ी देर में बस में अपना सामान रखकर वह दोनों अपने केबिन में जाकर बैठ गए बस में काफी भीड़ थी एक भी एक्स्ट्रा सीट नहीं बची थी बैठने के लिए,,, यह सब देखकर अंकित अपनी मां से बोला कि अच्छा हुआ मैंने केबिन वाली सीट बुक कराया यहां हम लोग आराम से सोते हुए चले जाएंगे और मजे करते हुए,,, तकरीबन आधे घंटे तक बस वहीं पर खड़ी रही है इसके बाद बस के कंडक्टर ने एक बार आवाज लगा कि कहीं कोई रहे तो नहीं किया है लेकिन सारे लोग बैठ चुके थे और थोड़ी देर बाद वह ड्राइवर को चलने के लिए बोला और थोड़ी ही देर में बस हाईवे पर दौड़ने लगी,,,, गर्मी का महीना था इसलिए थोड़ी बहुत गर्मी का एहसास हो रहा था अंकित थोड़ी सी खिड़की को खोल दिया जिससे ठंडी हवा अंदर आ रही थी और दोनों को राहत पहुंच रही थी,,, अंकित और उसकी मां दोनों लेते हुए थे बस में अभी रोशनी थी क्योंकि लाइट जल रही थी तकरीबन 1 घंटे के सफर होने पर कंडक्टर ने बस की लाइट बंद कर दिया बस में अंधेरा छा गया क्योंकि सबके सोने का समय हो रहा था और कुछ लोग तो सो भी गए थे। अंकित अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुराया उसकी मुस्कुराहट के मतलब को सुगंधा अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए इशारे में ही उसे मना करने लगी लेकिन अंकित कहां मानने वाला था वह एकदम से अपनी मां को अपनी बाहों में जाकर लिया और उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसके नितंबों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया आखिरकार सुगंधा कब तक इनकार कर पाती अपने बेटे की हरकत से वह भी मदहोश होने लगी,,।



बस अपनी रफ्तार में हाईवे पर भागती चली जा रहीथी बस में किसी के भी बातचीत करने की आवाज नहीं आ रही थी मतलब साफ था कि सब लोग सो चुके थे। लेकिन मां बेटे दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि बस में एक नया अनुभव होने मिलने वाला था,,,, अंकित एक हाथ से अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते देखते वह अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोलकर ब्रा के ऊपर से अपनी मां की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया बस हिचकोले खा रही थी इसलिए दोनों को और ज्यादा मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई झूला झूला रहा हो,,,, अंकित अपनी मां की चूचियों को मुंह में लेकर पीना चाहता था उसे दबाना चाहता था इसलिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर के उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा तो उसकी मां बोली।)

यह सब मत उतार ऐसे ही मजा ले ले यहां पर सारे कपड़े उतारना अच्छा नहीं है।





अरे मम्मी कुछ नहीं होगा सब लोग सो रहे हैं और वैसे भी हम लोग केबिन के अंदर है कोई देखने वाला नहीं है।

फिर भी मुझे यह सब अच्छा नहीं लग रहा है,,,,।

अरे अभी अच्छा लगने लगेगा रुको तो सही,,,,(सुगंधा उसे रोकते रह गई लेकिन उसकी एक नहीं सुना और अंकित अपनी मां की ब्रा का हक खोलकर उसके बदन से ब्रा को भी अलग कर दिया कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी नंगी चूचियां खरबूजे की तरह गोल-गोल थी जो की केबिन की लाल रोशनी में और भी ज्यादा चमक रही थी और किस तरह नहीं किया और वह तुरंत अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और बारी-बारी से मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया सुगंधा जो अब तक अपने बेटे को रोक रही थी वह भी मजा लेने लगी वह भी मस्त होने लगी,,,, अपनी मां की चूचियों को पीता हुआ अंकित एक हाथ अपनी मां की साड़ी के अंदर डाल दिया और उसके गुलाबी बुर को मसलने लगा जो की पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,, अंकित अपनी हरकतों से अपनी मां को पूरी तरह से मदहोश कर दे रहा था अपने बेटे की हरकत से सुगंधा भी मस्त हो रही थी मजा ले रही थी उसे इस बात की खुशी थी कि उसका बेटा उसे हर तरह से शुख प्रदान कर रहा था। अंकित अपनी एक उंगली को अपनी मां की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर कर रहा था जो की मदन रस से पूरी तरह से चिपचिपी हो चुकी थी यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला।



तुम तो इंकार कर रही हो लेकिन तुम्हारी बुर तो कुछ और ही कहानी कह रही है,,,,।

उसे कहने दे मैं तो नहीं कह रही हूं ना,,,।

तुम्हारे कहने ना खाने से क्या होता है मियां बीबी राजी तो क्या करेगा काजी,,,।

अच्छा तो मेरी बुर तेरी बीवी हो गई है।

तभी तो मेरा साथ दे रही है तुम भले ना दो लेकिन वह तो मेरा साथ दे रही है मेरी हरकतों से पानी छोड़ रही है।

तभी तो कहती हूं तुम दोनों शैतान हो चुके हो और तुम दोनों की शैतानी में मेरा जीना हराम हुआ है,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित हंसते हुए अपनी मां की साड़ी को खोलने लगा यह देखकर सुगंधा फिर से बोली,,,,)

नहीं रहने दे इसको तो रहने दे,,,, ऊपर का तो खोल दिया है नीचे का रहने दे,,, साड़ी उठाकर कर ले,,,।



क्या मम्मी तुम भी कितना मजा आ रहा है देखो तो सही बस कभी अनुभव ले लो कितना मजा आएगा जब बस में नंगी होकर चुदवाओगी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां की साडी को खोलने लगा अौर सुगंधा उसे बिल्कुल भी रोक नहीं रही थी क्योंकि भले ही वह उसे रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंदर ही अंदर वह भी चाहती थी कि बस में वह नंगी होकर चुदवाए,,, देखते ही देखते अंकित अपनी मां की साड़ी को खोलकर एक तरफ रख दिया और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) देखना तुम एकदम जवान हो जाओगे लगेगा ही नहीं की तुम दो बच्चों की मां हो ऐसा अनुभव करो कि कि जैसे तुम अपने प्रेमी के साथ हो या अपने पति के साथ हो,,,, (ऐसा कहते हुए वह अपनी मां के पेटीकोट का नाडा भी खींच कर खोल दिया अपने बेटे की हरकत से सुगंधा उत्तेजना से सिहर उठी उसके बदन में मदहोशी का नशा घुल रहा था,,,, वह कुछ बोलने लायक नहीं थी बस अपनी रफ्तार में आगे बढ़ती चली जा रही थी और बस के हिसकोले में उन दोनों का बदन भी हिल रहा था दोनों को मजा आ रहा था एक अलग ही नशा छा रहा था हल्की सी खिड़की खुली होने की वजह से ठंडी ठंडी हवा दोनों के बदन को ठंडक देने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन वातावरण की शीतलता जवानी की गर्मी के आगे घुटने टेक दे रही थी। अंकित की आंखों में वासना का तूफान उठ रहा था वह बस में अपनी मां को चोदने के लिए बेकरार हुआ जा रहा था,,,, और देखते ही देखते हो अपनी मां के पेटीकोट को खींचकर उसके वचन से अलग कर दिया पेटिकोट को निकलते समय उसकी मां भी उसका पूरा सहयोग करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा दी थी जिससे उसका पेटिकोट आराम से निकल सके,,,,।





सुगंधा के बदन पर अब केवल उसकी छोटी सी पेटी रह गई थी जो उसकी बुर को ढकी हुई थी उसके खूबसूरत हसीन और बेशकीमती खजाने को ढके हुए थी,,,, अंकित अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को बस की लाल रोशनी में देखता ही रह गया वह जल्द से जल्द अपनी मां की पैंटी उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर देना चाहता था इसलिए एकदम से हाथ आगे बढ़ाया और अपनी मां की पेंटिं को दोनों हाथों में पकड़ लिया उसकी मां भी एक बार फिर से अपनी गांड को ऊपर उठा दी और अंकित ने बिल्कुल भी देर नहीं किया अपनी मां की चड्डी उतारने में देखते ही देखते बस के अंदर सुगंध पूरी तरह से नंगी हो गई एक अद्भुत एहसास के साथ वह गहरी गहरी सांस ले रही थी अपने बेटे की हरकत से वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी एक नई जिंदगी की रही थी एक नई खुशी के साथ। बस में सभी लोग सो चुके थे गहरी नींद में लेकिन मां बेटे की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी दोनों मदहोशी के सागर में डुबकी लगाने को तैयार थे देखते ही देखते अंकित भी अपने कपड़े को उतार कर नंगा हो गया उसका लंड पूरी तरह से तैयार था उसकी मां की बुर में घुसने के लिए लेकिन अभी अंकित इस मजे को और भी दुगना कर देना चाहता था इसलिए वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया और उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर अपना मुंह रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया। सुगंधा मदहोश होने लगी वह अपनी टांगों को थोड़ा और खोल दे क्योंकि सोने लायक जगह कही थी बैठने लायक भी जगह थी इसलिए टांगे खोलने में उसे ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी,,,,, अंकित लपालप अपनी मां की बुर को चाट रहा था उसके नमकीन रस का स्वाद ले रहा था और जितना हो सकता था उतना जीभ अंदर डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,।



सुगंधा अपने आप पर काबू किए हुए शिसकारी ले रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,, रह रह कर वह अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी,,, मां बेटे दोनों पूरी तरह से गर्म हो चुके थे अब समय आ गया था सुगंधा की चुदाई करने का इसलिए वह धीरे से उठा और अपनी मां की टांगों के बीच जगह बनाते हुए उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया उसकी आधी गांड उसकी जांघों पर आ गई और फिर अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर की गहराई नापने लगा अंकित कमर हिला हिला कर अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया मां बेटे दोनों के लिए ही बस के अंदर चुदाई का यह पहला अनुभव था,,,, इससे पहले बस का अनुभव सुगंधा को तब हुआ था जब वह अपने छोटे भाई के घर जा रही थी,,,, लेकिन उसे समय केवल रगड़ स्पर्श यही सब चल रहा था आज बस के अंदर वह खुलकर चुदवा रही थी,,, सुगंधा को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसका बेटा सही कह रहा था कि आज वह अपने आप को एकदम जवान लड़की की तरह महसूस करेगी और ऐसा ही वह महसूस कर रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह दो बच्चों की मां नहीं बल्कि एक जवान खूबसूरत लड़की है जो अपनी प्रेमी के साथ चुदाई का शुख भोग रही है।



आखिरकार 25 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद अंकित का अलावा उसकी मां की बुर को भरने लगा इस दौरान सुगंध दो बार झड़ चुकी थी,,,, इसके बाद दोनों अपनी कपड़े पहनकर आराम करने लगे और जल्द ही दोनों को नींद आ गई,,,, तकरीबन 3:30 बजे बस एक स्टॉप पर रुकी,,,, कुछ यात्री सोए रह गए और कुछ यात्री उतर गए,,,, अंकित की भी नींद खुल गई वह अपनी मां को जगाया क्योंकि उसे भी पेशाब लगी थी और सोचा कि उसकी मां भी इसी समय पेशाब कर ले तो अच्छा होगा,,,,, मां बेटे दोनों उतर कर पेशाब करने के लिए चले गए पेशाब करने के बाद मां बेटे दोनों वही ढाबे पर आकर बैठ गए क्योंकि वहां पर भी बहुत से लोग बैठे हुए थे और चाय पानी कर रहे थे,,, अंकित और उसकी मां भी वहीं पर बैठकर चाय पीने लगे तभी सामने से एक ऑटो आया और उनके पास रुक गया उसमें से एक औरत तकरीबन 30-35 साल की थी वह उतरी उसके साथ उसका आदमी भी था उसे भी कहीं जाना था वापस के कंडक्टर से बात करने लगी उसे पर ज्यादा ध्यान न देते हुए अंकित चाय पीते अपनी मां से बात करने लगा कुछ देर पहले जिस तरह का मजा हम दोनों में लिया था उसका एहसास अभी तक दोनों के चेहरे पर दिखाई दे रहा था दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे,,,, तभी वह कंडक्टर उसे औरत और उसके आदमी को लेकर उनके पास आया और सुगंधा से बोलने लगा,,,,।



बहन जी अगर आपको दिक्कत ना हो तो क्या आप इन्हें बैठ सकती हैं,,,।

(उसे कंडक्टर की बात सुनकर मां बेटे दोनों कंडक्टर की तरफ तो कभी उसे औरत की तरफ तो कभी उसके आदमी की तरफ देखने लगे तभी उसका आदमी एकदम से हाथ जोड़ते हुए बोला)

देखिए दीदी यह मेरी बीवी है इसकी बहन की तबीयत खराब है और इसे जल्दबाजी में जाना पड़ रहा है बच्चे घर पर है इसलिए मैं जा नहीं सकता और आप तो देख ही रही हो 3:30 बज रहे हैं इस समय कोई बस मिलने वाली नहीं है और इसका वहां पहुंचना जरूरी है,,,,,।

लेकिन भाई साहब इसमें हम क्या कर सकते हैं आप तो कंडक्टर से बात करिए ना बस उनकी है बस तो उन्हें लेकर जाना है,,,(सुगंधा उस आदमी से बोली)

आप बिल्कुल ठीक कह रही है दीदी लेकिन बस में बिल्कुल भी जगह नहीं है,,,, यह भाई साहब बता रहे हैं कि आप दोनों केबिन बुक किए हैं अगर उसने मेरी बीवी को जगह दे देंगे तो वह भी समय पर पहुंच जाएगी निश्चिंत होकर,,, क्योंकि रात का समय है और औरतों का इस तरह से सफर करना ठीक नहीं है आप एक औरत है इसलिए आपके सहारे मैं यह आपसे बात कर रहा हूं,,,,,।



(अंकित को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह अपने मन में सोच रहा था अगर यह औरत उनके साथ बैठ जाएगी तो उन दोनों का मजा किरकिरा हो जाएगा और सुगंध अपने मन में सोच रही थी कि मजा तो वह दोनों ले चुके हैं और अब कुछ ही घंटे की बात है और वैसे भी वह अब सोने वाली है कुछ करने वाले तो है नहीं इसलिए उसके मन में यही चल रहा था कि अगर इसे अपने साथ बिता भी लेंगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी और वैसे भी उसे औरत को देखकर और जिस तरह से उसका पति मिन्नतें कर रहा था सुगंधा का दिल पिघल गया,,,, इसलिए वह बोली,,,)

चलिए कोई बात नहीं कुछ घंटे की ही तो बात है वैसे आपको जाना कहां है,,,,।

नैनीताल से एक स्टॉप पहले ही उतरना है,,,।

चलो ठीक है कोई बात नहीं एक औरत को इसलिए मैं तुम्हारी मदद कर रही हूं,,,,(सुगंधा की बात सुनकर वह औरत के भी चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और उसका आदमी जल्दी से कंडक्टर से टिकट कटाया इसके बाद वह तीनों अपने केबिन में आकर बैठ गए उसका पति बस के बाहर खिड़की में देखता रहा जब तक की बस चली नहीं गई,,,, दोनों के बीच में सुगंधा जानबूझकर लेटी हुई थी क्योंकि वह एक औरत थी और वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा उसके साथ सोए वैसे तो उसे अपने बेटे पर भरोसा था लेकिन फिर भी वह एक औरत होने के नाते एक औरत का जलन उसके अंदर कुछ पल के लिए पनप गया था। बस फिर से हाईवे पर अपनी रफ्तार से भागती चली जा रही थी अंकित अपने मन में ही सोच रहा था कि अगर यह औरत साथ में ना होती तो अपनी मां को बाहों में लेकर वह चैन की नींद सोता,,,, लेकिन कोई बात नहीं जो काम दोनों को करना था वह काम तो कर चुका था इसलिए वह भी मन मार कर सोने लगा थोड़ी ही देर में तीनों को नींद आ गई,,,,, तकरीबन 1 घंटे बाद बस फिर से एक जगह पर रुक गई,,,, कुछ देर पहले ही उसे औरत की नींद खुली थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी लेकिन वह किसी को कुछ कह नहीं पा रही थी जब बस रुकी तो उसे रहने क्या और वह सुगंधा को जगाने की कोशिश करने लगी लेकिन वह गहरी नींद में सो रही थी इसलिए वह ना चाहते हुए भी अंकित को जागने लगी और अंकित एकदम से उठकर बैठ गया वह बोला,,,)





क्या हुआ,,,?

मेरे साथ जरा नीचे चलो ना,,,,।

क्यों क्या हुआ,,,,,?

अब मैं कैसे बताऊं,,,,, मुझे बाथरूम जाना है,,,,,(यह सुनकर अंकित का मन हिचकोले खाने लगा वैसे भी बस की लाल रोशनी में वह कुछ और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी लेकिन फिर भी अंकित उसे पर से नजर हटाकर खिड़की से बाहर देखने की कोशिश करते हुए बोला कि वह लोग है कहां पर,,,,, और वह उसे औरत से पूछा)

लेकिन बस खड़ी कहां पर है,,,?

मुझे यह तो नहीं मालूम लेकिन आप जल्दी चलो तो मेरा भी काम हो जाएगा नहीं तो अगर बस शुरू हो गई तो,,,,,,(इतना कहकर वह रुक गई अंकित समझ गया था कि मामला गंभीर था इसलिए वह उसके साथ चलने को तैयार हो गया दोनों केबिन से नीचे उतरे और अंकित उसे बस से नीचे लेकर आया बस एक पेट्रोल पंप पर खड़ी थी जहां पर बस में ईंधन भरा जा रहा था,,,, पेट्रोल पंप के पास ही एक छोटी सी चाय की दुकान थी जो कि इस समय भी चालू थी और बस का ड्राइवर कंडक्टर दोनों वहीं पर बैठकर चाय पी रहे थे बाकी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था,,,, वह औरत शरमाते हुए अंकित से बोली,,,)



कहां जाऊं,,,?

(उसके इस सवाल पर उसकी मासूमियत पर अंकित उसे पर पूरी तरह से फिदा हो चुका था और वैसे भी वह देखने में बहुत सुंदर थी इस बात का एहसास अंकित को अभी हो रहा था उसके चमकते मोती जैसे दांत बहुत खूबसूरत थे उसका गोल चेहरा अच्छी नैन नक्श और उसके छातियों का उभार उसकी जवानी की पूरी कहानी कह रहा था,,,,, उसकी बात सुनकर वह अपने चारों तरफ देखने लगा और बोला,,,)

देखो यहां पर हम दोनों के सिवा कोई पैसेंजर नीचे उतरा नहीं है और यहां पर काफी अंधेरा भी है इसलिए ज्यादा दूर तक जाना ठीक नहीं है ऐसा करो तुम यह सामने की झाड़ी के पास बैठ जाओ,,,,,।



(अंकित का इतना कहना था कि वह औरत अपने पेशाब की तीव्रता को रोक नहीं पा रही थी और तुरंत जाकर उसके सामने झाड़ियां के पास गई और साड़ी कमर तक उठाकर अपनी पैंटी को नीचे करने लगी वह कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में थी अंकित उसकी जल्दबाजी को अच्छी तरह से समझ रहा था,,,,, अंधेरा कुछ ज्यादा ही था लेकिन इतना भी अंधेरा नहीं था कि वह उसे औरत को देखना सके वह औरत एकदम साफ दिखाई दे रही थी क्योंकि दोनों के बीच की दूरी केवल 2 मीटर की ही थी दोनों के बीच ज्यादा दूरी नहीं थी और उसे औरत ने अंकित के सामने बिल्कुल भी शर्म नहीं की थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह थोड़ी देर और रखेगी तो शायद वह अपने कपड़े को गीला कर लेगी,,, वह अपनी पैंटी को अपने हाथों से नीचे करके वहीं पर बैठ गई थी साड़ी उसकी कमर तक थी बैठे हुए भी अपनी साड़ी को पीछे से उठाई हुई थी,,,, जिससे उसकी भरपूर गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी और यह नजारा देखकर तो अंकित का लंड एकदम से खड़ा हो गया था,,,, अंकित उसकी भरपूर जवानी को अपनी आंखों से देख रहा था वह अपनी आंखों को दूसरी तरफ घूमा भी नहीं रहा था क्योंकि इतना खूबसूरत है की आंखों के सामने जो नजारा था उसे देखने का लालच हुआ अपने मन से रोक नहीं पा रहा था,,,,

उसकी बुर से निकलने वाली सीटी की मधुर ध्वनि अंकित के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,, जिसे सुनकर अंकित व्याकुल हो रहा था मदहोश हो रहा था और वह पेशाब कर रही औरत पीछे नजर घुमा कर यह देखने की कोशिश कर रही थी कि कहीं अंकित चला तो नहीं किया लेकिन जब उसने देखी कि कहीं पीछे ही खड़ा है और उसे ही देख रहा है तो वह राहत की सांस ली और फिर से पेशाब करने में मशगूल हो गई थोड़ी देर में वह पेशाब करके खड़ी हो गई और अपने हाथों से पेंटी को ऊपर की तरफ खींचने लगी उसकी नंगी गांड का उभार देखकर अंकित को यह समझते देर नहीं लगी कि वह पूरी तरह से जवानी से पकी हुई थी,,,,, वह अंकित के पास आई और बोली।

अब चलो,,,,(उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव में चला रहे थे क्योंकि काफी देर से वह पेशाब की तीव्रता से जूझ रही थी और अब जाकर उसे राहत महसूस हुई थी अंकित उससे बोला,,,)



तुम चलो मैं चाय लेकर आता हूं,,,,,।(इतना सुनकर वह औरत बस में चढ़ गई और अंकित जल्दी से दो कप चाय लेकर आ गया क्योंकि वह चाहता था कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी,,,, वैसे भी अंकित को अपनी मां की आदत अच्छी तरह से मालूम थी वह जानता था कि जब उसकी मां जमकर चुदवाती थी तो सोती भी एकदम गहरी नींद में थी,,,, अंकित चाय लेकर जब बस में पहुंचा तो वह औरत के बिन के पास ही खड़ी थी यह देखकर अंकित उससे बोला,,,,)

क्या हुआ तुम खड़ी क्यों हो केबिन में चलो,,,।

मैं उपर चढ़ नहीं पा रही हूं,,,,,

(यह सुनकर अंकित के तन बदन में गुदगुदी होने लगी वह चाय के कप को एक सीट के किनारे रख दिया और उसे औरत को केबिन में चढ़ाने की कोशिश करने लगा,,, इस दौरान वह जानबूझकर उसे औरत के भारी भरकम गोलाकार नितंबों पर हाथ रखकर उसे ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगा जिसमें उसे औरत ने बिल्कुल भी ऐतराज नहीं किया और वह केबिन में चढ़ गई लेकिन इस दौरान अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह भी चाय का कप उसे औरत को थाम कर वह भी केबिन में चला गया और केबिन को बंद कर लिया वह देखा तो उसकी मां एकदम गहरी नींद में सो रही थी,,,, और नींद में होने की वजह से वह एक किनारे पर आ चुकी थी जिसे अंकित को खूबसूरत के पास में ही सोना था इस बात की खुशी अंकित के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी वह एकदम से खिड़की वाली जगह पर पहुंच गया और वह औरत बीच में आ गई दोनों चाय पी रहे थे बस अभी भी खड़ी थी दोनों एक दूसरे से बात करने लगे बात ही बात में उसे पता चला कि उसका नाम मनीषा है और वह अपनी बहन से मिलने के लिए जा रही थी वैसे तो उसकी तबीयत ज्यादा खराब तो नहीं थी लेकिन फिर भी उससे मुलाकात करना जरूरी था।

उस औरत से अंकित को यह भी पता चला कि,,,, उसे अभी बच्चा नहीं था यह बात सुनकर अंकित बोला,,,।

लेकिन तुम तो मतलब कि तुम्हारे पति तो बता रहे थे कि बच्चों को छोड़कर आए हैं,,,।

वह उनकी बहन के बच्चे हैं जो साथ में ही रहते हैं इसलिए ऐसा कह रहे थे,,,,।

(एक भी बच्चा ना होने की बात सुनकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी वह अपने मन में ही सोचने लगा कि इसका मतलब माल एकदम कड़क है,,,, दोनों की चाय खत्म होती इससे पहले ही बस चल पड़ी,,,, अंकित आजमाना चाहता था कि यह औरत उसका साथ देगी कि नहीं इसलिए वह पैर फैला कर लेटा हुआ था और लेते-लेते दोनों बात करने लगे थे इस दौरान अंकित जानबूझकर अपने पैर को उसके पैर से स्पर्श कर रहा था और अंकित को एहसास हो रहा था कि वह औरत अपने पैर को बिल्कुल भी हटाने की कोशिश नहीं कर रही थी अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी थी,,,, दोनों पीठ के बोल लेते हुए थे और अंकित एकदम से उसकी तरफ करवट लेकर एक हाथ के सहारा लेकर अपनी गर्दन को उठाकर उससे बात करने लगा क्योंकि वह उसकी चूचियों को देखना चाहता था और उसे उसकी चूची दिखाई भी दे रही थी क्योंकि साड़ी का पल्लू एक तरफ हट गया था और उसकी बड़ी-बड़ी चूची उसके ब्लाउज में कैद लाल रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,, चूचियों के बीच की गहरी लकीर उसकी चूचियों के आकार को साफ बयां कर रही थी,,,, तभी अंकित उससे बोला,,,)

अगर हम लोग तुम्हें साथ में नहीं बैठाते तब क्या करती,,,,।

फिर क्या हमें घर जाना पड़ता और फिर दो-तीन दिन लग जाते,,,,।

इसका मतलब हमने सही किया तो मैं साथ में आने के लिए बोलकर,,,,।

बिल्कुल सही किया वैसे आप लोग भी बहुत अच्छे हैं तभी तो मेरे पति आप लोग के भरोसे छोड़कर गए हैं,,,,।

वैसे तो अच्छी तो तुम भी हो और खूबसूरत भी,,,।

(अंकित की यह बात सुनकर वह एकदम से शर्मा गई अंकित अच्छी तरह से जानता था कि औरत अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर पिघलने लगती है और इस समय यही हो भी रहा था,,, वह शरमाते हुए बोली)

लेकिन मेरे पति तो कहते हैं कि कुछ महीने और रुक जाता तो तुमसे कई गुना खूबसूरत औरत मुझे मिलती,,,।

देखो मनीषा जी मेरी बात का बुरा बिल्कुल भी मत मानना बस स्टॉप पर मैं तुम्हारे पति को देखा हूं और सच कहूं तो तुम दोनों जिनकी जोड़ी कुछ खास नहीं है तुम आसमां हो तो वह जमीन है कोई मिल नहीं है तुम गुलाब का खूबसूरत फूल हो और तुम्हारी खूबसूरती देखकर तो तुम्हारे पति बगीचे के माली भी नहीं लगते,,, क्यों ठीक कहा ना,,,,।

(अंकित की बात सुनकर वह हंसने लगी और फिर कुछ सोच में पड़ गई और बोली)

तुम बिल्कुल सही कह रहे हो वैसे यह शादी मेरे मन मर्जी की नहीं हुई है मैं किसी और से प्यार करती थी,,,, लेकिन वह शादी नहीं करना चाहता था बस दोस्ती रखना चाहता था,,,।

मतलब है कि प्यार के नाम पर उसने कुछ और,,,

नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था,,,, वह मुझसे प्यार तो बहुत करता था लेकिन अपने परिवार वालों के खिलाफ नहीं जा पाया मेरी और उसकी बात बहुत लोगों को मालूम हो चुकी थी इसलिए मेरे पिताजी जल्दबाजी में मेरी शादी कर दिए।

तो क्या तुम ईस शादी से खुश हो,,,,।

मुझे तो नहीं लगता,,,(गहरी सांस लेते हुए,,,, अंकित को उसका दर्द समझ में आ गया था और अभी तक उसके बच्चे भी नहीं थे इसका मतलब साफ था कि उसका पति कोई काम का नहीं था अंकित उसकी आंखों में देख रहा था वह भी अंकित की आंखों में देख रही थी तो उन्होंने एक दूसरे की आंखों की गहराई में डूब रहे थे अंकित से रहा नहीं किया और वह तुरंत अपने होठों को उसके होंठ पर रख दिया पल भर के लिए वह औरक एकदम से हिचकीचाई अंकित ने अपने होठों को वापस उसके होठों से अलग कर लिया और उसकी आंखों में देखने लगा लेकिन इस बार वह औरत हल्के से अपने होठों को ऊपर की तरफ करने की कोशिश करने लगी और यह देखकर हम किस रहा नहीं किया और अंकित फिर से उसके होठों पर टूट पड़ा और दोनों एकदम से मदहोश होने लगी अंकित उसके लाल-लाल होठों का रस पीने लगा वह औरत भी उसका पूरा साथ दे रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे पहली बार हुआ किसी पुरुष संसर्ग का आनंद ले रही थी,,,, बगल में ही सुगंधा गहरी नींद में सो रही थी उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि केबिन के अंदर क्या हो रहा है क्योंकि कुछ देर पहले ही वह काम क्रीड़ा का आनंद लेकर सो गई थी। अंकित फिर से उसे आजमाना चाहता था और फिर से उसके होठों से अपने होठों को अलग कर दिया और गहरी गहरी सांस लेता हुआ उसके खूबसूरत चेहरे को देखने लगा इस बार अंकित कोई भी पहल करना नहीं चाहता था और उसका यह सब्र रंग लाया,,, वह औरत अपने हाथ की कहानी का सहारा लेकर अपनी गर्दन को ऊपर उठे और खुद ही अपने हाथ को अंकित के होठों पर रख दी बस अब सब्र जवाब दे चुका था अंकित एकदम से उसे औरत पर टूट पड़ा और उसके होठों का रसपान करते हुए ब्लाउज के ऊपर से उसकी चुचियों का दबाना शुरू कर दिया,,,,।

चूचियों पर हथेलियो का कसाव से उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि आज वह एक अच्छे मर्द के पाले पड़ी थी,,,, अंकित पागलों की तरह उसकी दोनों सूचियां को दबाता हुआ उसके होठों का रसपान कर रहा था अंकित का लंड खड़ा हो चुका था,, अंकित बिल्कुल भी देर ना करते हुए पूरी मजबूती के साथ उसे अपनी बाहों में भरकर अपने ऊपर खींच लिया वह औरत अंकित के ऊपर थी और अंकित दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को साड़ी के ऊपर से दबा रहा था मसल रहा था और नीचे से उसका तना हुआ लंड उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था,,, लंड की चुभन को अपनी बुर के ऊपर महसूस करते ही वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद होने लगी। उसे एहसास होने लगा कि अंकित के पास मोटा तगड़ा लंड है जो उसकी प्यास पूरी तरह से बुझा सकता है इसलिए वह भी अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेट के ऊपर से अंकित के लंड को दबाए अंकित पागल हुआ जा रहा था मदहोश हुआ जा रहा था,,,,, वह गहरी सांस लेते हुए फिर से अंकित की तरफ देखने लगी और उसकी मां की तरफ देखने लगी अंकित समझ रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बोला।

अभी उठने वाली नहीं सुबह होगी तभी उठेगी तुम बिल्कुल चिंता मत करो,,,,(इतना सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वहां अंकित की टांगों के पास आ गई और अपने हाथों से उसके पेंट की बटन खोलने लगी अंकित तो पागल हुआ जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि सफर के दौरान इतनी खूबसूरत औरत उसे मिलेगी जो उसे भरपूर मजा देगी,,,, देखते ही देखते वहां अंकित के पेट की बटन खोलकर दोनों हाथों से उसकी पेंट और अंडरवियर दोनों नीचे खींच दी और अंकित के लंड को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई अंकित उसके चेहरे के हाव-भाव कोई देख रहा था,,,,, वह जानता था कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बोला,,,,)

क्या हुआ तुम तो शादीशुदा हो यह सब देख चुकी होगी फिर क्यों हैरान हो रही है।

इतना बड़ा इतना मोटा बाप रे,,,,।

क्यों तुम्हारे पति का नहीं है क्या ऐसा,,,।

बीत्ता भर का है,,,, इसके सामने तो बच्चा ही है,,,,।

(यह सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और वह एकदम से उसे अपने मुंह में लेकर भर ली और उसे चूसना शुरू कर दी अंकित को मजा आ रहा था उसे एहसास हो रहा था कि यह औरत कितनी प्यासी है अपने पति से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है और वाकई में जितनी खूबसूरत वह औरत थी उसके हिसाब से उसे उसका पति नहीं मिला था उसे खुश करने वाला भी पति नहीं मिला था इसलिए अंकित अपने मन में सोच रहा था कि जितना भी समय मिलता है आज उसे जी भर कर खुश कर देगा शायद किस्मत ने ही इसे उसके साथ केबिन में भेजी है,,,, अंकित अपना हाथ उसके सर पर रखकर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा रहा था जिससे उसका लंड उसके गले के गहराई तक घुस जा रहा था उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी फिर भी वह लंड को बाहर नहीं निकाल रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,,, अंकित कुछ देर इसी तरह से मजा लेने के बाद बोला,,,)

तुम्हें एक काम करो अपनी गांड मेरे मुंह पर रख दो ताकि मैं तुम्हारी बुर की चटाई कर सकूं तुम्हें भी मजा मिलेगा और मुझे भी,,,.

(अंकित के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वह जल्दी से अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी पैंटी को बैठे-बैठे अपनी टांगों से बाहर निकाल दी और उसे अपने पर्स में रख दी,,,, और जैसे अंकित बोला था वैसे ही अपनी भारी भरकम गांड को उसके मुंह पर रख दी अंकित दोनों हाथों से उसकी मुलायम गांड को पकड़ कर उसकी गुलाबी पर को चाटना शुरू कर दिया उसमें से मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी क्योंकि अभी-अभी उसने इसमें से पेशाब की थी जिसकी बूंदे अभी भी उसकी बुर पर लगी हुई थी जिसे अंकित अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया,,,, वह औरत पूरी तरह से मदहोश हो रही थी मस्त हो रही थी इस तरह का सुख आज तक उसके पति ने उसे कभी नहीं दिया था इसलिए वह पागलों की तरह अपनी गांड को अंकित के चेहरे पर पटक रही थी रगड़ रही थी गोल-गोल घूम रही थी अंकित पूरी तरह से उसे मजा दे रहा था अपनी दो उंगली एक साथ उसकी बुर में डालकर अपने लंड के लिए जगह भी बना रहा था उंगली डालने पर उसे एहसास हो गया था कि वाकई में उसकी बुर में पतला लंड ही गया था तभी तो उसकी बुर अभी भी कसी हुई थी। दो उंगली एक साथ उसकी बुर के अंदर बाहर करने से वह अपनी उत्तेजना को संभाल नहीं पाई और भलभला कर झड़ने लगी उसका मदन रस अंकित की नाक और मुंह में घुसने लगा जिसे वह अपनी जेब से चाटना शुरू कर दिया और तब तक चाटता रहा जब तक कि वह चाटकर एकदम चिकना नहीं कर दिया,,,,, लेकिन वह हैरान थी कि अभी भी अंकित के लंड से पानी नहीं निकला था वह ज्यो का त्यों खड़ा था,,,,,

थोड़ी ही देर में वह अंकित के ऊपर से अपनी गांड को उठाई और अंकित के लंड को एक हाथ से पकड़ कर उसे मुठियाने लगी घुटनों के बाल उसकी जांघों के ईर्द गिर्द जगह बनाकर एक हाथ से अंकित के लंड को पकड़ी और अपनी गुलाबी छेद को उसके सुपाड़े पर रख दी जल्द ही उसे एहसास हो गया कि वाकई में अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था जो उसकी बुर में आराम से नहीं घुस पा रहा था लेकिन फिर भी वह पूरी मसक्कत कर रही थी और उसकी मेहनत रंग ला रही थी हालांकि इस दौरान वह पसीने से करवात्तर हो चुकी थी लेकिन फिर भी धीरे-धीरे अंकित का लंड उसके गुलाबी गली में जगह बना था वह अंदर की तरफ आगे बढ़ रहा था और जैसे-जैसे अंदर घुस रहा था वैसे-वैसे उसके चेहरे का हाव-भाव बदल रहा था। देखते ही देखते वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड उसके लंड पर रखते चली गई अपना दबाव बनाते चली गई और अंकित का लंड उसकी बुर की गहराई में खो गया तब जाकर उसे सुकून मिला और यह देखकर वह भी हैरान थी कितना मोटा तगड़ा लंड उसने बड़े आराम से अपनी बुर में ले ली थी हालांकि उसे लेने के लिए थोड़ी बहुत मशक्कत करनी पड़ी थी लेकिन फिर भी उसने कर दिखाई थी,,,,,

चेहरे पर पसीने की बूंदे ऊपस आई थी लेकिन अब उसे अच्छा लग रहा था वह अपनी गांड को धीरे-धीरे अंकित के लंड के ऊपर पटक रही थी मोटा तगड़ा लंड सब कुछ रगड़ हुआ अंदरूनी एहसास दिलाता हुआ बर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंकित ब्लाउज का बटन खोलकर उसकी दोनों चूचियों को बाहर निकाल कर दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया था और नीचे से भी धीरे-धीरे अपनी कमर को ऊपर उछाल रहा था,,,,, उसने आज तक इस तरह के एहसास को कभी महसूस नहीं की थी इसलिए वह आनंद के सागर में गोते लगा रही थी देखते ही देखते वह जोर-जोर से अपनी गांड को अंकित के लंड पर पटक रही थी अब बड़े आराम से अंकित का लंड उसकी बुर कीगहराई नाप रहा था लेकिन उसे इस बात का डर भी था कि कहीं अंकित की मां जाग न जाए,,,, कुछ देर तक वह अंकित के लंड पर इसी तरह से कूदती रही लेकिन अंकित अब जोर-जोर से धक्के लगाना चाहता था उसे एहसास दिलाना चाहता था की असली मर्द कैसे चोदता है।

इसलिए अंकित अब आसन बदल चुका था वह पीठ केवल लेटी हुई थी और अंकित उसकी दोनों टांगों को खोलकर उसे एहसास दिला रहा था असली चुदाई का वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था बस अपनी रफ्तार में आगे बढ़ रही थी और हिचकोले खा रही थी जिसे किसी दूसरे को शक भी नहीं हो रहा था कि केबिन के अंदर क्या हो रहा है वह जोर-जोर से उसे औरत की चुदाई कर रहा था वह पूरी तरह से पल में जा रही थी उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि जिंदगी में पहली बार हुआ इस तरह की चुदाई का सुख प्राप्त कर रही थी और देखते ही देखते अंकित उसकी बुर में अपना लावा उगलने लगा,,,,, कुछ देर तक अंकित उसके ऊपर ही लेटा रह गया और फिर धीरे से उसके बगल में लेट गया,,,,, दोनों फिर से कुछ देर तक बात करते हैं 5:00 चुका था थोड़ी देर में उजाला होने वाला था,,, एक बार फिर से वह अंकित के लंड का मजा लेना चाहती थी अंकित का पेंट अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था और बातचीत के दौरान धीरे-धीरे खड़ा हो चुका था लेकिन अंकित को नहीं मालूम था कि उसके मन में क्या चल रहा है वह तो सोच रहा था कि बस हो गया लेकिन तभी वह फिर से अपने हाथ में उसके लंड को पकड़ लिया और मुस्कुराने लगी फिर किया था एक बार फिर से दोनों के बीच चुदाई का खेल शुरू हो गया और इस बार अंकित ने पूरा दम लगा दिया उसकी चुदाई करने में वह पूरी तरह से मचल उठी थी उसका बदन तड़प उठा था उसकी जवानी का रस पूरी तरह से अंकित ने नीचोड़ दिया था।

थोड़ी देर बाद उसका स्टॉप आ गया अंकित उसे नीचे तक छोड़ने आया जाते समय उसकी आंखों में आंसू था क्योंकि एक ही रात में अंकित ने उसे वह प्यार दिया था जिसके बारे में वह कभी सपने भी नहीं सोची थी हालांकि इस दौरान अभी तक सुगंधा की आंख नहीं खुली थी और अंकित फिर से आकर केबिन में लेट गया था उजाला हो चुका था नैनीताल भी आने वाला था इसलिए अंकित ने अपनी मां को जगाया और सुगंधा जैसे ही जागी वह बोली।

वह कहां गई,,,?

वह तो कब से उतर गई उसका स्टॉप आ गया था,,,।

चलो कोई बात नहीं वह भी समय से अपने घरपहुंच गई,,,,(अपनी मां की बात सुनकर अंकित मन ही मन खुश हो रहा था उसे इस बात की खुशी थी कि उसकी मां पास में लेटी हुई थी और उसके पास में ही वह एक दूसरी औरत की जमकर चुदाई किया था लेकिन उसे बिल्कुल अहसास तक नहीं था थोड़ी देर बाद उन दोनों का भी स्टॉक आगे और वह दोनों भी नीचे उतर गए)
 
मां बेटे दोनों नैनीताल पहुंच चुके थे यह सफर दोनों के जीवन का यादगार सफर बन चुका था सुगंधा के लिए भी और अंकित के लिए भी अंकित ने कभी सोचा नहीं था कि बस में भी उसे एक रूप सुंदरी को भोगने का मौका मिल जाएगा,,, शादीशुदा विवाहित जीवन होने के बावजूद भी उसकी बुर इतनी कसी हुई थी कि अंकित को यकीन नहीं हो रहा था लेकिन या कोई ख्वाब नहीं था कोई कल्पना नहीं था जो कुछ भी था सभा हकीकत ही था बस में उसने जी भर कर आनंद लिया था अपनी मां के साथ भी और उस अनजान औरत के साथ भी,,,, बस से नीचे उतर कर कुछ देर वह लोग वहीं पर बैठे रहे चाय नाश्ता किया क्योंकि सुबह का समय था और बस के सफर की वजह से दोनों के बदन में थकान महसूस हो रही थी। यहां के बारे में वालों को ज्यादा जानते नहीं थे बस सुगंधा का सपना था कि वह नैनीताल घूमने जाएं अपने पति के साथ तो उसका यह सपना पूरा नहीं हो सका लेकिन अपने बेटे के साथ वह अपना सपना को पूरा करके जवानी के दिनों की ख्वाहिश को पूरा कर लेना चाहती थी।



इस जगह के बारे में ओटो वाले से बेहतर कोई नहीं जान सकता था,,, इसलिए वह दोनों एक ऑटो के पास गए और उसे यहां की जानकारी लेने लगे वह ऑटो वाला अच्छा इंसान था इसलिए उन्हें एक सस्ते से होटल में लेकर गया,,, होटल भले ही सस्ता था लेकिन सुविधा बहुत ही अच्छी थी होटल में सारी सुविधाएं नियुक्त थी सुगंधा ने उस ऑटो वाले को उसका किराया दी और धन्यवाद कहकर होटल में आ गई,,,, काउंटर पर लेडिस नहीं थी एक 30 32 साल का युवा बैठा हुआ था उसने ऊपर के कमरे की चाबी दे दिया हालांकि उसकी नजर सुगंधा पर ही थी सुगंधा को इस बात का एहसास हो रहा था इसलिए वह अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक कर रही थी और उससे काउंटर वाले आदमी से अपनी नज़रें बचा रही थी,,,, उसे काउंटर वाले आदमी ने सुगंधा से पूछा था कि कितने देर के लिए कमरा चाहिए,,, लेकिन सुगंधा ने जब तीन-चार दिनों के लिए कहा तो वह उसे देखा ही रह गया था क्योंकि ज्यादातर इस होटल में कपल आते थे और वह मजे लौटकर वापस चले जाते थे दो-तीन घंटे के लिए ही बहुत कम लोग ही एक-दो दिन के लिए कमरा बुक करते थे लेकिन सुगंधा ने तीन-चार दिनों के लिए कमरा बुक की थी इसलिए वह हैरानी से देख रहा था,,,,। सुगंधा सीढ़ियां चल रही थी तो उसे काउंटर वाले आदमी ने अंकित को इशारे से अपने पास बुलाया और बोला।





यार कहां से ले आए इस आइटम को,,,।

(उसकी बात सुनकर अंकित थोड़ा हैरान हुआ और हैरानी से पूछा)

क्यों क्या हुआ,,,?

यार क्या चीज है यार तुम्हारी तो किस्मत खुल गई और वह भी तीन-चार दिनों के लिए दिन-रात लगे रहो,,,।

(अंकित उसे काउंटर वाले की बात को अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए ज्यादा कुछ बोला नहीं और मुस्कुरा कर वहां से चला बना उसे इस बात की खुशी थी कि वह काउंटर वाला आदमी उन दोनों को मां बेटा नहीं समझ रहा था बल्कि कोई कपल ही समझ रहा था,,,, और वह यही सोच रहा था कि यह दोनों तीन-चार दिनों के लिए मजा करने आए हैं,,, देखते ही देखते अंकित अपनी मां के पास पहुंच चुका था और उसकी मां कमरे का नंबर देख रही थी और जो चाबी पर नंबर लिखा हुआ था उसी कमरे के सामने आकर खड़ी हो गई अंकित को अपने पीछे आता देखकर वह मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखें और अंकित भी मुस्कुरा कर अपनी मां के पास पहुंच गया और बोला,,,)

तुम्हें मजे की बात बताऊं,,,,।



मजे की बात क्या है मजे की बात बता तो सही,,,(इतना कहकर वह उस चाबी से दरवाजा खोलने लगी,,,, और धीरे से कमरे में दाखिल हो गई पीछे-पीछे अंकित भी देख लिए हुए कमरे में दाखिल हो गया और धीरे से दरवाजा बंद कर दिया,,,, कमरा ज्यादा बड़ा नहीं था लेकिन सुसज्जित था,,,, एक बड़ा सा बेड था दो तकिया रखा हुआ था साफ सुथरी चादर थी पास में ही टेबल रखा हुआ था ड्राइवर वाला और उसे पर नाइट लैंप रखा हुआ था सामने ही खिड़की थी जिस पर परदे लगे हुए थे और सुगंधा कमरे में दाखिल होते ही सीधा जाकर खिड़की पर के पर्दे को हटाने लगी और परदे के हटते ही सुगंधा खिड़की को खोल दी खिड़की के खुलते ही ठंडी हवा एकदम से कमरे में प्रवेश कर गई जो दोनों के बदन को ठंडक प्रदान कर रही थी खिड़की के सामने ही मुख्य सड़क थी नजारा काफी अच्छा था और कमरे से सटा हुआ बाथरूम भी था,,, कम पैसे में फाइव स्टार से कम सुविधा बिल्कुल भी नहीं थी कैमरा देखकर मां बेटे दोनों काफी प्रसन्न नजर आ रहे थे,,, दोनों हाथ बांधकर खिड़की से मुख्य सड़क पर देखते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली,,,।)

तु कोई मजे की बात बता रहा था,,,,।

अरे हां मैं तो बताना भुल ही गया,,,, यह होटल में लोग अक्सर दो-तीन घंटे के लिए ही कमरा बुक करते हैं,,,।

मतलब,,,,



अरे मेरा मतलब है कि दो-तीन घंटे के लिए कपल लोग कमरा बुक करते हैं तो सोच लो क्या करने के लिए करते होंगे,,,

क्या करने के लिए,,,?(सुगंधा को थोड़ा-थोड़ा शक हो रहा था लेकिन फिर भी वह अपने बेटे के मुंह से जानना चाहती थी)

चुदाई,,,,,,।

ओह,,,,,,,।

और सबसे ज्यादा मजे की बात यह हुई थी होटल वाला हम दोनों को मां बेटा नहीं बल्कि एक कपल ही समझ रहा है,,,,।

क्या बात कर रहा है,,,(एकदम से हैरान होते हुए)

हां मम्मी,,,, वह हम दोनों को मां बेटा बिल्कुल भी नहीं समझ रहा है कपल ही समझ रहा है।

लेकिन तुझे कैसे मालूम,,,,

जब तुम सीढ़ियां चढ़ रही थी तो उसने मुझे इशारे से अपने पास बुलाया था,,,, और पूछ रहा था कि इतना जबरदस्त आइटम कहां से लेकर आया यार,,,,, मैं समझ गया कि यह तुम्हें क्या समझ रहा था और बोल रहा था तीन-चार दिन तक तो मजे ही मजे हैं,,,, वह तुम्हें धंधे वाली समझ रहा था ‌।

(अपने बेटे के मुंह से धंधे वाली का जिक्र सुनते ही वह आश्चर्य से अपने मुंह पर हाथ रख ली और बोली)

हाय दइया क्या सच में वह मुझे एक गंदी वाली समझना है तभी वह इस नजर से मुझे देख रहा था। और यह होटल भी लगता है इसी काम के लिए नहीं है तभी उस रिक्शा वाले ने भी,,, हमें इस होटल में लेकर आया और शायद वह भी हम दोनों को मां बेटा नहीं बल्कि कपल ही समझ रहा है।



यह तो हम लोगों के लिए और भी अच्छा है कि सब लोग हमें कपल ही समझ रहे हैं और हम लोग मजे करने के लिए आए भी हैं यहां पर,,,,।

तब तो सच में यह बहुत खुशी की बात है,,,,।

(अपनी मां को खुश होता हुआ देखकर अंकित एकदम से उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके नितंबों पर हाथ रखकर जोर से दबाते हुए अपने बदन से सटा लिया,,,, यह देखकर सुगंधा उसके बदन से अलग होने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

अरे अरे तू तो फिर से शुरू हो गया नहा तो लेने दे पहले,,,,,।

क्या हुआ मेरी जान आज हम दोनों साथ में नहाएंगे,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित उसे एकदम से अपनी गोद में उठा लिया सुगंधा एकदम से घबरा गई लेकिन उसे अपनी बेटी की ताकत पर पूरा यकीन था वह सीधा बाथरूम के दरवाजे के पास पहुंच गया गोद में होने की वजह से सुगंधा जानती थी कि वह बाथरूम का दरवाजा नहीं खोल पाएगा इसलिए खुद ही हाथ आगे बढ़ाकर बाथरूम का दरवाजा खोल दी,,,, बाथरूम का दरवाजा खुलते ही बाथरूम देखकर मां बेटे एकदम से खुश हो गए पूरे बाथरुम में रंगीन टाइल्स लगी हुई थी और सोच के लिए इंग्लिश टॉयलेट लगा हुआ था यह देखकर तो सुगंधा एकदम से खुश हो गई लेकिन वह परेशान थी कि इसका उपयोग कैसे किया जाता है,,,,, लेकिन यह सब अभी उसके दिमाग में ही चल रहा था और अंकित के दिमाग में कुछ और चल रहा था अंकित पागलों की तरफ से अपने बाहों में भरकर उसके बदन पर चुंबनों की बौछार कर दिया था और एक हाथ से उसकी साड़ी को उसके कंधे से पकड़ कर नीचे गिरा दिया था और उसकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया था,,,,, सुगंधा फिर भी उसे रोक रही थी,,, लेकिन अंकित कहां मानने वाला था। देखते ही देखते हो अपनी मां के भजन से साड़ी को खोलकर अलग कर दिया इस समय वह बाथरूम में केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी और अंकित उसे बाहों में भरकर पेटिकोट सहित उसकी गांड को जोर-जोर से दबा रहा था मसल रहा था और सुगंधा को मजा भी आ रहा था,,, अंकित कुछ ज्यादा ही जोश में था क्योंकि वह उसे होटल वाले में उसकी मां को धंधे वाली समझकर उसके जोश को और भी ज्यादा बढ़ा दिया था।



अंकित पागलों की तरह अपनी मां के बदन से प्यार कर रहा था। सुगंध को खराब रखने का सवाल ही नहीं उठाता था क्योंकि यह सब करने के लिए ही तो वह दोनों यहां आए थे वह भी अपने बेटे का साथ देने लगी पागलों की तरह वह भी चुंबन का जवाब चुंबन से दे रही थी अंकित ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां के दोनों खरबूजा को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था यह देखकर सुगंधा भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर पेंट के ऊपर से अपने बेटे के लंड को दबाना शुरू कर दी जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर तंबू बनाया हुआ था,,,, मां बेटे दोनों एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे लेकिन अब सुगंधा से ही सबर नहीं हो रहा था,,, वह अपने हाथ से ही अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगे और यह देखकर अंकित से रहने की और वह खुद ही अपनी मां की पेटिकोट की डोरी को पड़कर खींच लिया कमर पर कई हुई पेटिकोट एकदम से ढीली हो गई लेकिन फिर भी उभरे हुए नितंबों पर वह टिकी थी जिसे अंकित खुद अपने हाथों से ढीली करके उसे कमर से ही छोड़ दिया और सुगंधा की पेटिकोट उसके कदमों में जा गीरी। सुगंधा भी अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी अंकित अपनी मां की चूचियों को ब्रा में देखकर और ज्यादा चुदवासा हो गया,,, और वह जोर-जोर से चूचियों को मसलने लगा रगड़ने लगा वह जितनी ज्यादा जोर लगाता था उतना ज्यादा सुगंधा को मजा आता था एक तरफ हुआ अपनी मां की चूचियों से खेल रहा था और दूसरी तरफ सुगंधा अपने बेटे के पेंट के बटन खोल रही थी वह भी इतना ज्यादा चुदवासी हो चुकी थी कि इससे ज्यादा देर नहीं लगी अपने बेटे के पेंट के बटन को खोलने में,,, और अगले ही पल वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लड को हाथ में लेकर हीला रही थी और मदहोशी भरे स्वर में बोली।

तू तो पूरा तैयार है रे,,



मैं तो इस समय तैयार हो गया था जब वह होटल वाले ने तुम्हें धंधे वाली समझा था मेरी रंडी,,,,(अंकित अच्छी तरह से जानता था कि आप उसकी मां को क्या चाहिए इसलिए इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां के कंधों को पकड़ कर उसे नीचे की तरफ झुकने लगा और अपने बेटे के इशारे को समझ कर सुगंध अगले ही पल घुटनों के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अंकित एकदम मस्त हो गया पहली बार वह लोग किसी होटल में मजा लूट रहे थे और अभी घर से छः सात सौ किलोमीटर दूर,,, अंकित अपनी कमर पर हाथ रखकर मत आवाज आ रहा था इतनी खूबसूरत बाथरूम में पहली बार वह अपनी मां के मुंह में लंड डालकर मदहोश हो रहा था,,,,, दोनों बाथरूम में थे जिसमें टॉयलेट भी बना हुआ था लेकिन होटल वालों ने इतना अच्छा इंतजाम किया था कि बाथरूम में भीनी भीनी फूलों की खुशबू आ रही थी जिससे उन दोनों का एहसास ही नहीं हो रहा था कि वह दोनों किस जगह पर है,,,, अंकित अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था और सुगंधा भी पूरा का पूरा लंड अपने गले में उतर कर कुछ देर चुसती और फिर उसके सुपाडे को अपने होठों तक लेकर आती और फिर उसे अंदर ले लेती यही क्रिया वह बार-बार दोहरा रही थी ऐसा करने से अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी,,,। अंकित मस्त हो रहा था ऐसा लग रहा था कि वाकई में आज वह किसी रंडी के साथ था क्योंकि उसकी मां आज लंड चुसाई में और भी ज्यादा करतब दिखा रही थी। कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेटते रहे इसके बाद सुगंधा से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था इसलिए वह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर उठकर खड़ी हो गई,,,।



अभी भी उसके बदन पर ब्रा और पैंटी थी और वह उसे निकले बिना ही दीवाल पर दोनों हाथ रखकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को गोल-गोल हिलने लगी और अपने बेटे को अपने करीब बुलाने लगी उसे ललचा रही थी शायद अंकित भी अपनी मां के मन की बात को अच्छी तरह से समझ गया और तुरंत वह अपनी मां को पीछे से पकड़ लिया लेकिन इस बार उसने अपनी मां के वस्त्र को उतारने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं किया बल्कि अपनी मां की पेटी के चोर को एक हाथ से पकड़कर उसे दूसरी तरफ खींच दिया जिससे उसकी गुलाबी बर एकदम से उजागर हो गई अंकित को जीतने की जरूरत थी उतना अंग उसकी आंखों के सामने कचोरी की तरह फुला हुआ दिखाई दे रहा था इससे ज्यादा अंकित को क्या चाहिए था अंकित ने अपने लंड पर थोड़ा सा थुक लगाया और इस अवस्था में ही अपनी मां की बुर में लंड डाल दिया उसकी कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, पूरे बाथरुम में सुगंधा की गरमा गरम शिसकारी की आवाज गुंजने लगी,,,, सुगंधा के मन में बिल्कुल भी घबराहट नहीं थी इसलिए वह खुलकर शिसकारी ले रही थी वैसे भी इस होटल में अब उसे किसी बात की दर नहीं थी क्योंकि होटल वाला भी उसे धंधे वाली औरत ही समझ रहा था। अंकित लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड रगड़ हुआ उसकी मां की बुर की गहराई में घुस जा रहा था अंकित ब्रा के ऊपर से अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर अपनी कमर जोर-जोर से हिला रहा था।

आहहहह आहहहहह और जोर से चोद हरामजादे,,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह बहुत मोटा लंड है तेरा,,,, बहुत मजा आ रहा है मुझे और जोर-जोर सेधक्के लगा,,,,।



और जोर से धक्के लगाऊंगा तो तेरी बुर फट जायेगी रे रंडी,,,,।

तो फाड़ डालना रोका किसने हैं,,,, मेरे राजा।।

तेरी बुर फट जाएगी तो मजा नहीं आएगी मेरी रानी इसीलिए संभाल कर तेरी चुदाई करनी पड़ती है,,,,,

इतना ख्याल है तुझे मेरा,,,,।

तेरा नहीं मेरी रानी तेरी बुर का तेरी बर को चोदे बिना मुझे चैन कहां मिलता है,,,,।

मतलब हरामजादे तुझे सिर्फ मेरी बुर से ही प्यार है मेरी चुदाई से मतलब है।

भोसड़ा छोड़ी तेरे पास बुर नहीं होती तो मतलब ही खत्म हो जाता,,,(अपनी मां की चूचियों को जोर-जोर से मसलते हुए धक्के लगाते हुए अंकित बोला,,)

बड़ा मादरचोद है रे तू,,,,,

तू भी तो छिनार है मेरे पास इतना दमदार लंड ना होता तो,,, किसी और से गांड मरवा रही होती।

क्या तुझे ऐसा लगता है,,,।

मुझे तो बहुत कुछ लगता है मेरी जान तेरी बुर में इतनी गर्मी है कि,,, तेरी बुर में गधे का भी लंड घुस जाए तो भी तेरी गर्मी शांत नहीं होगी,,,,,आहहहहहह लेकिन साली तू मजा भी बहुत देती है,,,,।



(मां बेटे दोनों के बीच इस तरह की अश्लील बातें हो रही थी और चुदाई में अश्लील बातें जब मिल जाती है तो मजा दोगुना हो जाता है और यही दोनों के साथ हो रहा था दोनों एक दूसरे को गाली गलौज से बातें कर रहे थे दोनों एक दूसरे को अपनी बातों से नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन दोनों को मजा भी बहुत आ रहा था,,,,, अंकित के दिमाग में एक छवि उमट रही थी जिसे उसने राहुल की गंदी किताब में देखा था जिसमें एक अंग्रेज टॉयलेट पोट के ऊपर बैठकर एक औरत को अपने लंड पर बैठाया था और इस समय मौका भी सही था और दस्तूरभी,,,, अंकित धीरे से अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर निकाल और सीधा जाकर के टॉयलेट पोट पर बैठ गया सुगंधा को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे को ही देख रही थी,,,, अंकित जानता था कि उसका इशारा उसकी मां समझ जाएगी,,, इसलिए अंकित बोल कुछ नहीं बस अपने लंड को धीरे-धीरे मुठीयाना शुरू कर दिया और अपनी मां की दोनों टांगों के बीच घूर-घूर कर देख रहा था,,,, सुगंधा समझ गई थी कि आप क्या करना है इसलिए वहां अपनी ब्रा और पैंटी को भी उतार कर एकदम नंगी हो गई और सीधा जाकर के अपने बेटे की गोद में बैठ गई हालांकि वह एकदम से बैठ गई थी जिसकी वजह से उसका लंड उसकी बुर में घुस नहीं था इसलिए अंकित अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर अपने लंड को पकड़ लिया था और उसकी मां भी धीरे से अपनी गांड को ऊपर उठा ली थी और अगले ही पल उसका पूरा लंड उसके गुलाबी बुर में घुस गया था और वह अपनी बाहों को अपने बेटे के गले में डालकर जोर-जोर से कूदना शुरू कर दी थी। इस अवस्था में सुगंधा को भी ज्यादा मजा आ रहा था।



अंकित कुछ भी नहीं कर रहा था जो कुछ भी कर रही थी उसकी मां ही कर रही थी,,,, इस दौरान सुगंधा एक बार झड़ चुकी थी लेकिन अंकित झड़ने का नाम नहीं ले रहा था लगातार कूदते हुए सुगंधा काफी थक चुकी थी पसीने से तरबतर हो चुकी थी इसलिए अंकित अपनी मां की कमर पकड़कर उसे ऊपर उठाने लगा सुगंधा भी अपने बेटे के लंड के ऊपर से खड़ी हो गई वह गहरी गहरी सांस ले रही थी वह बेहद आनंदित नजर आ रही थी लेकिन थकी हुई थी अंकित इंग्लिश टॉयलेट का पूरा मजा लूट लेना चाहता था इसलिए धीरे से वह भी इंग्लिश टॉयलेट पर से उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां को टॉयलेट पकड़कर झुका दिया इस अवस्था में उसकी मां सच में कोई अंग्रेज औरत दिखाई दे रही थी जिसे देखकर अंकित का लंड फटने को तैयार था,,,, अंकित पीछे से अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया और इस बार वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था हर धक्के के साथ सुगंधा आगे को लुढ़क जाती थी क्योंकि वह अपने बेटे के जबर्दस्त प्रहार को झेल नहीं पा रही थी हालांकि आनंद तो उसे बहुत आ रहा था और अंकित भी अपनी मां की कमर को थामे हुए था वरना वह गिर जाती और तब तक धक्के पर धक्का लगता रहा जब तक कि वह फिर से अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और खुद भी नहीं झढ़ गया। दोनों का काम खत्म हो चुका था अंकित तो गहरी सांस लेता हुआ बाथरुम के अंदर ही बैठ गया और मुस्कुराता हुआ अपनी मां को देख रहा,,, था। सुगंधा भी जो अभी तक घोड़ी बनाकर झुकी हुई थी वह धीरे से टॉयलेट पोट पर बैठ चुकी थी,,,,,



बाप रे मजा आ गया घर से बाहर निकल कर इतना मजा आता है चुदवाने में मैं तो पहली बार महसूस कर रही हूं,,,,,।

मैं भी तो पहली बारी आया हूं मैं कहां किसी को लेकर आता हूं,,,।

मुझे तो लेकर आया ना,,,।

तभी तो ज्यादा मजा आ रहा है,,,,(इतना कहकर अंकित है धीरे से खड़ा हो गया और बाथरूम में लगे फुहारें को देखने लगा,,, और दीवार में लगे हैंडल को घुमा दिया तो उसमें से झरझारा कर पानी गिरने लगा जो कि सीधे उसके सर पर गिर रहा था वह एकदम से मत हो गया,,,,,,, लेकिन तभी दूसरी तरफ सुगंधा सौच करने लगी थी वैसे तो अपने बेटे के सामने वह बहुत बार पेशाब की थी लेकिन आज पहली बार वह सौच कर रही थी। लेकिन आज उसे बिल्कुल भी शर्म नहीं महसूस हो रही थी वह तो पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी अंकित को इस बात का एहसास हो गया था वह अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था और देखते ही देखते अपने बदन पर साबुन भी लगाना शुरू कर दिया,,,, साबुन भी बाथरुम में रखा हुआ था बेहद सुगंधित जिसे लगाकर अंकित अपने आप को तरो ताजा महसूस कर रहा था,,,,, देखते-देखते उसके पूरे बदन पर झाग ही झाग दिखाई देने लगा। तब तक उसकी मां सौच कर चुकी थी लेकिन इसके आगे का सिस्टम उसे समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि अब उसे अपनी गांड धोना था वह इधर-उधर देख डाली उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अंकित अपनी मां को ही देख रहा था और फिर आश्चर्य से सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखने लगी तो अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,।

क्या हो गया,,,,?

अरे इसमें तो पानी का सिस्टम कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,।

अरे जब करने के लिए दिया है तो पानी का भी तो सिस्टम दिया होगा,,,,।

मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है तू ही देख ले,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित इस अवस्था में अपनी मां के बेहद करीब पहुंच गया उसके पूरे बदन पर झाग ही झाग दिखाई दे रहा था यहां तक की उसका लंड भी साबुन के झाग में छुपा हुआ था अंकित अपनी मां के करीब आ गया और टॉयलेट के सिस्टम को समझने लगा वह हर एक बटन दबाकर देख रहा था तो कहीं ऊपर से पानी चालू हो जा रहा था तो कहीं बंद हो जा रहा था लेकिन नीचे से कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो फिर एक बटन जो टॉयलेट पोट के पीछे लगा हुआ था वह उसे दबा दिया तो नीचे से पानी एकदम से निकाला और सुगंधा की गांड पर फवारा करने लगा सुगंधा पहले तो एकदम से घबरा गई और फिर हंसने लगी क्योंकि इंग्लिश टॉयलेट बनाने वाले ने कितना सोच समझकर बनाया था कि बटन दबाते ही पानी का फवारा गांड के छेद पर ही जा रहा था और अपने आप गाना साफ हो रही थी लेकिन इससे सुगंधा का मन नहीं माना और वह टॉयलेट पोट से नीचे उतरकर बैठ गई और उसके पास ही टॉयलेट में एक फुवारा लगा हुआ था जिसमें पाइप जुड़ी हुई थी उसे फुहारे को अपने हाथ में लेकर वह अपने बेटे से बोली,,,,।

इसे चालू कर दे,,,,।

(अंकित ने फुहारे का बटन चालू कर दिया उसमें से पानी निकलना शुरू हो गया और उसे पानी को अपनी हथेली में लेकर सुगंध अपनी गांड धोने लगी,,,, यह देखकर अंकित जोर-जोर से हंस रहा था और सुगंधा भी मन ही मन में मुस्कुरा रही थी,,,,, थोड़ी देर बाद दोनों मां बेटे नहा कर बाथरूम से बाहर निकल गए,,,, होटल में ही खाने की सुविधा भी थी रेस्टोरेंट भी था अंकित ने फोन लगाया और खाने का ऑर्डर दे दिया,,,, सुगंधा अभी तक मखमली टावल ही लपेटी हुई थी कपड़े नहीं पहनी थी क्योंकि घर से दूर होटल में इस अवस्था में उसे अच्छा लग रहा था,,,, एक बार फिर से अंकित के दिमाग में शरारत सुझने लगी वह अपनी मां से बोला,,,)

थोड़ा मजा लेना चाहती हो मम्मी,,,,।

कैसा मजा,,,(आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,)

मैं तुम्हें बताता हूं देखना अभी 10 15 मिनट में ही वेटर खाना लेकर कमरे में आएगा,,,,

तो,,,,।

देखो मेरी बात समझने की कोशिश करो वैसे भी होटल वाले तुम्हें धंधे वाली समझ रहे हैं।

हां तो यह तो मैं जानती हूं,,,,।

मैं कहता हूं कि अगर वह वेटर खाना लेकर कमरे में आए तो खाना लेने के लिए तुम जाना दरवाजे पर तब उसका रिएक्शन देखना और इस समय तुम अपनी टॉवल भी गिरा देना उसकी आंखों के सामने तुम एकदम नंगी हो जाओगी तब देखना उसकी हालत क्या होती है,,,।

धत् पागल हो गया क्या,,,,?

अरे इसमें क्या हो गया होगा थोड़ी ना कुछ करेगा लेकिन उसकी हालत देखने एकदम खराब हो जाएगा,, और तुम्हें देखने के बाद बाथरूम में जाकर उसे मूठ मारना पड़ेगा,,,,।

नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली हूं,,,(अपने बेटे की बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए बोली उसे अपनी बेटी की बात सुनकर गुस्सा भी आ रहा था और वह अपने मन में सोच भी रही थी कि वाकई में अगर उसे वेटर के सामने वह नंगी हो जाए तो उसकी क्या हालत होगी.. और यही सोच कर उसका दिल धक-धक कर रहा था अंकित फिर से अपनी मां को समझाते। हुए बोला,,,,)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो वैसे भी हम लोग को यहां कोई पहचानता नहीं है सिर्फ उसका रिएक्शन देखना उसकी हालत देखना उसके चेहरे का हाव-भाव देखना वह पूरी तरह से पागल हो जाएगा।

अगर उसने कुछ किया तो,,,।

अरे वह कुछ नहीं करेगा,,,,।

(अंकित का इतना कहना था कि तभी डोर बेल बजने लगी और अंकित एकदम से उत्साहित हो गया और बिस्तर पर जाकर लेट गया और बोला)

जाओ जल्दी से बिल्कुल भी मत घबराना मैं हूं ना देखना बहुत मजा आएगा दर्जी की दुकान का याद है ना कितना मजा आया था यहां भी ऐसा ही मजा आएगा,,,,।

(सुगंधा के पास अब कोई दूसरा रास्ता नहीं था वैसे भी उसके बेटे कि इस तरह की युक्ति उसे खुद भी आनंदित कर देती थी इसलिए वह इनकार नहीं कर पाई और इस हालत में टावल लिपटा हुआ,,, आधी चूचियां दिखाई दे रही थी और आधी जांघ तक टावल लिपटा हुआ था,,, बार-बार डोर बेल की आवाज आ रही थी सुगंधा कभी अपन बेट की तरफ देख ले रही थी तो कभी दरवाजे की तरफ देख ले रही थी अंकित बार-बार उसे इशारा करके दरवाजे के पास जाने के लिए कह रहा था दरवाजा खोलने के लिए कह रहा था और फिर सुगंधा को अपने बेटे की बात माननी ही पड़ी,,,, वह दरवाजे के पास पहुंच गई उसका दिल जोरो से धड़क रहा था समझ में नहीं आ रहा था कि क्या होगा,,,‌ लगातार डोर बेल बजने की वजह से सुगंधा धीरे से दरवाजा खोल दे दरवाजा खुलते ही सामने बेटर दोनों हाथ में ऑर्डर के मुताबिक खाना लिया हुआ था और वह सुगंधा को देखा ही रह गया अभी-अभी सुगंध बाथरूम से नहा कर निकली थी उसके बदन पर टॉवल लपेटा हुआ था और कुछ भी नहीं था इस रूप में वह बेटर सुगंधा को देखा तो देखता ही रह गया,,,, औपचारिकता निभाते हुए वह बोला।

गुड मॉर्निंग मैडम,,,

गुड मॉर्निंग,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह दरवाजा को पूरा खोल दिया और वह बेटर खाना लेकर कमरे में आ गया और टेबल पर खाना रखने लगा,,,, टेबल पर खाना रखते हुए वह बार-बार सुगंधा की तरह देख ले रहा था और मुस्कुरा दे रहा था सुगंध भी जवाब में मुस्कुरा दे रही थी,,, सुगंधा उस वेटर की नजर को अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि उसे वेटर की नजर बार-बार उसकी चूचियों की तरफ और उसकी मोती मोती जांघों की तरफ टिक जा रही थी,,, खाना रखने के बाद वह तूने तो दोनों हाथ पीछे की तरफ करके खड़ा हो गया और औपचारिकता दिखाते हुए बोला।)

और भी किसी की चीज की जरूरत हो तो बुला लीजिएगा मैडम,,,,।

जी जरूर,,,,,

इतना सुनकर होगा हम मुस्कुराते हुए दरवाजे के पास आया और एक बार फिर से,, सुगंधा की तरफ देखकर मुस्कुराया और सुगंधा ने पहले से ही अपनी टॉवल को ढीली छोड़ रखी थी जो एकदम से उसके बदन से ढीली होकर उसके कदमों में जा गिरी और उस वेटर की आंखों के सामने सुगंधा पूरी तरह से नंगी हो गई,,,, सुगंधा ऐसा बर्ताव करने लगी जैसे कि यह सब अनजाने में हुआ हो वह तुरंत नीचे झुक कर टावर उठने लगी लेकिन उसे वेटर ने सब कुछ देख लिया था सुगंधा की कातिलाना जवानी को देखकर उसके पेंट में एकदम से तंबू बन गया था जिसका एहसास सुगंधा को भी हो रहा था,,,,, टॉवल उठाकर वह फिर से अपने बदन पर लपेटते हुए बोली।

माफ कीजिएगा,,,,।

कोई बात नहीं मैडम,,,,।(इतना कहने के बाद भी वह वहां से जाने क्यों तैयार नहीं था तो उसके चेहरे का भाव पूरी तरह से बदल गया था उत्तेजना के मारे उसका चेहरा तमतमा रहा था,,,, वह बेटर कमरे से चला जाए इसलिए दरवाजा को पकड़ कर उसे बंद करने के लिए एक कदम आगे बढ़ाते हुए वह बोली,,)

मुझे किसी चीज की जरूरत पड़ेगी तो मैं फिर से फोन करूंगी,,,,,।

ठीक है मैडम मैं फोन का इंतजार करूंगा इतना कहकर वह कमरे से बाहर निकल गया और सुगंधा ने तुरंत दरवाजा बंद कर दी तब जाकर राहत की सांस ली,,,,।



(यह सब देखकर अंकित हंस रहा था और उसके बाद दोनों हंसने लगे खाना खाने के बाद दोनों आराम करना चाहते थे क्योंकि काफी थक चुके थे,,,,, शाम के जब 6:00 बजे तो वह दोनों उठकर बाहर जाने के लिए तैयार हो गए)
 
अंकित और उसकी मां दोनों होटल से बाहर निकल चुके थे घूमने के लिए बाहर का नजारा देखने के लिए,,, लेकिन आज सुगंधा ने साड़ी नहीं पहनी थी बल्कि एक शर्ट और जींस पहनी थी जिसमें वह गजब की कयामत लग रही थी कई हुई जींस में उसकी बड़ी-बड़ी गांड वाकई में कयामत ढा रही थी। यह पहली बार था जब सुगंधा ने इस तरह के कपड़े पहने थे इसलिए थोड़ा उसे अजीब लग रहा था बार-बार अंकित अपनी मां का पिछवाड़ा देखकर मस्त हो जा रहा था और अपनी मां से बोल भी रहा था।

बाप रे मम्मी तुम तो आज एकदम बम लग रही हो। किसी फिल्म की हीरोइन से कम नहीं लग रही हो ,आज देखना सब की नजर तुम्हारे पर ही होगी।



धत् मुझे तो बड़ा अजीब लग रहा है,,,,, इस तरह के कपड़े मैंने पहले कभी नहीं पहनी तेरी जीद में पहनना पड़ रहा है,,, और यह हाई हील की सेंडल चलने में भी तकलीफ दे रही है,,,,।

कोई बात नहीं लेकिन यह तो सोचो कितनी गजब लग रही हो आईने में अपने आप को देखी नहीं पूरा रूप बदल गया है तुम्हारा,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी वह दोनों फुटपाथ पर चल रहे थे और वाकई में उसके बेटे के के अनुसार आने जाने वालों की नजर सुगंध पर ही टिकी हुई थी ब्लू रंग की जींस और व्हाइट कलर की टीशर्ट में सुगंध का यह नया रूप वाकई में गजब का लग रहा था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां व्हाइट शर्ट में एकदम कसी हुई दिखाई दे रही थी और आज उसने बालों को गोल बनाकर क्लिप लगा ली थी जिससे उसका खूबसूरत चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगा था इस तरह के कपड़े में इसी तरह के बाल शोभा देते हैं इस बात को वह अच्छी तरह से जानती थी,,,। सैंडल पहने होने की वजह से सुगंधा धीरे-धीरे चल रही थी और साथ में अंकित भी धीरे-धीरे चल रहा था वह जानता था कि,,, उसकी मां को हाई हील सैंडल पहन कर चलने की आदत बिल्कुल भी नहीं थी। अंकित मजे लेते हुए चल रहा था वह आते जाते लोगों को देख रहा था और उसे अच्छा लग रहा था कि आते-जाते लोग उसकी मां को प्यासी नजरों से देख रहे थे यह देखकर वह अपनी मां से बोला)



देख रही हो मम्मी कैसे तुम्हें सब लोग देख रहे हैं ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई फिल्म की हीरोइन फुटपाथ पर चल रही हो,,,,।

धत् लोगों की नजर कितनी गंदी है देख नहीं रहा है वह लोग क्या देख रहे हैं,,,।

मुझे मालूम है और वह लोग देख भी क्या सकते हैं तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूची और बड़ी-बड़ी गांड और देखते हैं तो देखने दो कौन सा वह लोग तुम्हें चोद पाएंगे बल्कि तुम्हारी खूबसूरत जवान तो उन लोगों का पानी निकाल देगी देखना यह लोग घर जाकर अपने हाथ से हिला कर काम चला लेंगे,,,।

तू बहुत शैतान है इस तरह की बातें करता है,,,,।

तो इसमें गलत क्या है मैं तो जो भी कह रहा हूं सही कह रहा हूं मर्दों की नजर औरतों की बड़ी-बड़ी चूची और बड़ी-बड़ी गांड पर ही रहती है और जिसके पास जुगाड़ नहीं रहता वहां उसके बारे में सोच कर हाथ से हिला कर काम चलाते हैं,,,।

तू भी इसी तरह से काम चलाता था क्या,,?

बिल्कुल भी नहीं मेरी किस्मत जरा दूसरों से अलग है क्योंकि सीधे मुझे तुम्हारी गुलाबी बुर मिल गई हिलाने का मौका ही नहीं मिला बस डालने से ही शुरुआत हो गई।

हम्म,,,, बडा आया किस्मत वाला,,,, (मुंह बनाते हुए सुगंधा बोली,,)



हां तो क्या समझ रही हो किस्मत वाला ही हुं ना,,, तुमि जरा सोचो यह आते जाते लोग जो तुम्हें देख रहे हैं प्यासी नजरों से उनके लंड की क्या हालत होती होगी वह तुम्हें देख कर भी कुछ कर नहीं सकते सिवा हिलाने के और मैं हूं देखो जब चाहे तब तुम्हारी पटक कर ले सकता हूं,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी,,, वह दोनों आपस में बात करते हुए आगे बढ़ते चले जा रहे थे वहां पर ढेर सारी होटल थी यहां से ज्यादा बाहर के लोग इधर घूमने आए थे,,, जिसकी वजह से सड़कों पर लोगों की भीड़भाड़ अच्छी खासी दिखाई दे रही थी फुटपाथ पर खाने के स्टाल भी लगे हुए थे जहां पर कुछ लोग बैठकर चाय नाश्ता कर रहे थे खाना खा रहे थे आपस में गप्पे लड़ा रहे थे,,,, अंकित को यह सब नजारा देखकर बहुत अच्छा लग रहा था उसकी मां भी बहुत खुश थी आखिरकार उसके जीवन का सपना जो पूरा हो रहा था उसने आज तक कहीं घूमने नहीं गई थी सिवाय रिश्तेदार के घर के लेकिन आज पहला मौका मिला था उसे अपने बेटे के साथ घूमने का जीवन का असली सुख भोगने का और इस अवसर को वह अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी,,,,



देखते ही देखते दोनों एक झरने के पास पहुंच गए झरना बेहद खूबसूरत था उसके चारों तरफ रेलिंग लगी हुई थी ताकि कोई आगे ना जा सके क्योंकि झरने का पानी नीचे खाई में गिर रहा था अंकित और उसकी मां भी रेलिंग पकड़ कर झरने की खूबसूरती को देखने लगी एक अलग ही संगीत बज रहा था पानी के गिरने का हवा के बौछार के साथ पानी के छिटे उन दोनों के बदन को ठंडक दे रहे थे,,,,,, और भी लोग वहीं पर खड़े होकर इस नजारे का लुफ्त उठा रहे थे,,, तभी सुगंध को अपने नितंबों पर हाथ से सहलाने का एहसास हुआ उसे लगा कि अंकित है लेकिन वह कुछ बोली नहीं और झरने को ही देखती रही लेकिन तभी जोर से नितंबों को अपनी हथेली में कसने के एहसास से वह पीछे मुड़कर देखी तो एक अनजान आदमी उसकी गांड को सहला कर आगे निकल गया था,,, वह कुछ बोल पाती यआ समझ पाती ईससे पहले ही वह आगे निकल गया था सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखने लगी तो वह उसके पास नहीं खड़ा था बल्कि चार-पांच लोगों के बाद वह दूसरी तरफ खड़ा था,,, सुगंधा एकदम से घबरा गई और वह जल्दी से अपने बेटे के पास जाकर खड़ी हो गई लेकिन वह अपने बेटे से बात नहीं पाई की कुछ देर पहले उसके साथ क्या हुआ था। कुछ देर तक दोनों वहीं पर खड़े होकर झरने का मजा लेते रहे,,, वैसे भी इस समय अंकित अपनी मां की खूबसूरती को जींस और टीशर्ट में देखकर मस्त हो गया था। बार-बार उसका लंड खड़ा हो जा रहा था जिसे तैसे करके वह अपने को शांत रखे हुए था।



इसके बाद दोनों थोड़ी ऊंचाई पर चढ़ने लगे,,, वैसे ईस टेकरी पर कोई चढ़ नहीं रहा था लेकिन अंकित और उसकी मां दोनों यहां मजा लेने के लिए आए थे इसलिए ऊंची टेकरी पर चढ़ने लगे वैसे तो यहां कोई रास्ता नहीं था चारों तरफ घनी झाड़ियां ही थी और छोटी-मोटी पगडंडी थी जिससे कभी कभार लोग ऊपर जाते थे और नीचे आ जाते थे,,, देखते ही देखते दोनों ऊपर की तरह चढने लगे सुगंधा आगे आगे चल रही थी और अंकित पीछे-पीछे पहाड़ी चढ़ते समय सुगंधा के कदम जिस तरह से ऊपर नीचे पड़ रहे थे उसकी भारी भरकम गांड ऐसा लग रहा था की जेसे जींस फाड़ कर बाहर आ जाएगी। और अंकित यह नजारा देखकर मत हो रहा था वह पीछे-पीछे चलते हुए अपनी मां से बोला।

वाह क्या गांड है,,,, साड़ी में जानलेवा तो लगते ही थी लेकिन जींस में तो कातिलाना लग रही है,,,।

देखना कहीं तेरा कत्ल ना हो जाए,,,।

मेरी जान मेरी कत्ल के लिए तो हथियार की जरूरत ही नहीं है तुम बस अपनी गांड दिला दो और मेरा कत्ल हो जाए,,,,।

बड़ा शायर बन रहा है तू,,,, (आगे आगे चलते हुए सुगंधा बोली,,,)



बस तुम्हारी खूबसूरती देखकर मुंह से शब्द निकल जाते हैं और वह शायरी बन जाती है।

तो तेरे पास सिर्फ मेरी गांड के लिए शायरी है और किसी चीज के लिए नहीं,,,,।

शायरी तो बहुत है मेरी जान बस एक-एक करके अपने कपड़े उतार कर दिखाती जाओ और मैं शायरी बोलता चला जाऊं तुम्हारी बुर पर तुम्हारी चुची पर तुम्हारी खूबसूरती पर,,,।

बड़ा छिनरा शायर है तू,,,,

तू भी तो मेरी जान छीनरपन से भरी हुई है,,,।

चल ये सब छोड़ मुझे बड़ी जोर की पेशाब लगी हुई है बता क्या करूं।

क्या करूं,,, अरे कहीं भी बैठ जाओ और मुतना शुरू कर दो इसमें मैं क्या कर सकता हूं,,,,।

अरे बेवकूफ यह तो मैं भी जानती हूं कि मुझे ही मुतना है,,,, तेरा पकड़ कर नहीं मुतने वाली में,,,।

हाय काश कैसा हो जाता कि तुम मेरा पकड़ कर मुझे पेशाब करवाती,,,,।

बस कर मजनू की औलाद यह देखा कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा है ना,,,,।

अरे मेरी रानी यहां कोई नहीं आने वाला है इतनी देर से हम लोग ऊपर चढ़ रहे हैं कोई दिखाई दिया ना तो नीचे उतारते हुए कोई दिखाई दिया ना कोई चढ़ते हुए यहां कोई आने वाला नहीं है कहीं भी बैठ जाओ,,,,।

(सुगंधा को भी इस बात का एहसास था कि इस छोटी सी पहाड़ी पर कोई आने जाने वाला नहीं था लेकिन फिर भी अपनी तसल्ली के लिए वह इधर-उधर देखकर निश्चिंत हो जाना चाहती थी,,, इसलिए वह चारों तरफ नजर दौड़ा रहने के बाद एक पेड़ के पास गई और अपने जींस की बटन खोलने लगी जिसकी बटन खोलते हुए वह बोली,,,)



जींस पहनने में यही सब दिक्कत रहती है साड़ी पहनी होती तो आराम से उठकर बैठ जाती लेकिन इसे तो खोलना पड़ेगा,,,,।

तो इसमें क्या हो गया बटन ही तो खोलना है कौन सा जींस को फाड़ देना है,,,,।

तुझे आज बहुत बातें आ रही है,,,,, चल होटल में तुझे बताती हूं तुझे छूने भी नहीं दूंगी तब हाथ से हिला कर काम चला लेना,,,।

मेरी जान मेरा तन तन आया हुआ लंड देखकर तुम खुद ही मेरे लंड पर कूदने लगोगी,,,।

(अपने बेटे किस बात का वह बिल्कुल भी जवाब नहीं दे पाई क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि वह खुद उसके लंड के बिना नहीं रह पाती थी. धीरे-धीरे वह जींस के बटन को खोल चुकी थी और दोनों हाथों से जींस के किनारे को पकड़ कर नीचे की तरफ सरका रही थी साथ में वह अपनी काले रंग की पेंटि को भी अपनी उंगलियों में दबा ली थी और देखते ही देखते वह अपनी जींस और पैंटी को एक साथ अपनी घुटनों तक खींच कर ले आई अंकित पीछे खड़ा यह सब देख रहा था जींस में उसकी मां वैसे भी क़यामत लग रही थी और पहली बार अपनी मां को जींस उतारते हुए देखकर पूरी तरह से मस्त हो चुका था उसका खुद का लंड बवाल मचाने को तैयार हो चुका था,,, सुगंधा नीचे बैठकर पेशाब कर रही थी और उसकी बुर में से निकलने वाली सीटी की आवाज पूरे वातावरण में गूंज रही थी और इस आवाज को सुनकर अंकित खुद बावला हो गया था,,,, वह भी धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल लिया था जो की पूरी औकात में आकर खड़ा हो चुका था और उसे हिलाते हुए अपनी मां से बोला,,,,)



वैसे तो तुमको बहुत बार पेशाब करते हुए देख चुका हूं लेकिन जींस में देखकर तो मेरी हालत खराब हो रही है कसम से तुम हमेशा जींस पहना करो रोज ना जाने कितनों का पानी खड़े-खड़े निकाल दोगी।

नहीं तू रहने दे बस यही तक घर पर जाकर मुझे यह सब मत कहना वैसे कि मुझे इन सब में अच्छा नहीं लगता,,,।

तो किसने अच्छा लगता है मेरी जान साड़ी में ताकि जल्दी से काम निपटाया जा सके ना पेशाब लगे तो साड़ी उठाकर बैठ जाओ चुदवाने का मन हो तो साड़ी उठाकर शुरू हो जाओ,, ।

तो क्या सच ही तो है इसमें तो मुझे ठीक से पैर फैला कर बैठा भी नहीं जा रहा है।

तो कहां तुम्हें बैठे ही रहना है खड़ी भी तो होना है,,, (अपने लंड को धीरे-धीरे मुठीयाता हुआ अंकित बोला उसकी मां को साफ करने में मशगूल थी,,, उसे नहीं मालूम था कि पीछे खड़ा उसका बेटा अपने लंड को हिला रहा था थोड़ी ही देर में बुर से निकलने वाली सीट की आवाज एकदम से शांत हो गई वह पेशाब कर चुकी थी और धीरे से उठकर खड़ी हो गई। और इसी मौके की तक में अंकित था जैसे ही वह खड़ी होकर अपनी जींस को ऊपर चढ़ने लगी वह सीधा जाकर के अपनी मां से फट गया और अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ते हुए उसे एकदम से पेड़ से सटा दिया,,,, सुगंधा किसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी वह एकदम से हड़बड़ा गई थी,,, अंकित पागलों की तरह शर्ट के ऊपर से अपनी मां की दोनों चुचियों का दबाना शुरू कर दिया था और अपने लंड को उसकी गांड की दरार में धंसाना शुरू कर दिया था यह सब देखकर सुगंधा इधर-उधर देखने लगी और बोली,,,।)



हाय दैया यह क्या कर रहा है रे कोई देख लेगा तो,,,।

पागल हो गई हो क्या यहां कौन देखने वाला है,,,,,।

अरे फिर भी थोड़ा झाड़ी के अंदर चल यहां करने की जरूरत नहीं है,,,,।

नहीं मैं तो यही करूंगा कोई देख नहीं रहा है,,,, (और इतना कहने के साथ वह अपनी मां की टीशर्ट में नीचे से अपने दोनों हाथ को डाल दिया और चूचियों को दबाना शुरू कर दिया वह एकदम से हैरान हो गया था कि टी-शर्ट के अंदर उसकी मां ब्रा नहीं पहनी थी उसकी चूचियां एकदम से नंगी थी वह एकदम से हैरान होते हुए अपनी मां से बोला,,,)

यार तुमसे एकदम छिनार हो टी शर्ट के अंदर कुछ पहनी नहीं हो,,,,।

तो इसमें क्या हो गया थोड़ी ना किसी को दिखाई दे रहा है,,,।

दिखाई नहीं दे रहा है लेकिन तुम्हारा यह चॉकलेटी कैडबरी शर्ट से बाहर भाले की तरह तनी दिखाई देती है,,,, (अंकित अपनी मां की निप्पल को दोनों हाथों की उंगलियों से पकड़ कर उसे ज़ोर से मसलते हुए बोला अपनी बेटी की हरकत से सुगंधा पानी पानी होने लगी वह दोनों हाथों से पेड़ को पकड़कर अपने बेटे की हरकतों का आनंद ले रही थी।)

सहहहहह आहहहह,,,,,,,, थोड़ा धीरे-धीरे बहुत जोर-जोर से मसलता है तू,,,।



जोर से मसलने में ही तो ज्यादा मजा आता है,,,,, (ऐसा कहते हो कि अपने दोनों हाथों को अपनी मां की चूचियों पर उलझाया हुआ था और अपने लंड को अपनी मां की गांड की दरार में उलझाया था। लंड की चुभन सुगंध को अपनी गांड की दरार में बहुत ही अच्छी लग रही थी वह मस्त हो रही थी और इस तरह से खुले में वह पहली बार अपने बेटे के साथ इस तरह के हालात में मजा ले रही थी उसे मजा आ रहा था देखते ही देखते अंकित अपनी मां की चूचियों को और करते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था वह जानता था कि उसका लंड उसकी मां की बुर में अभी प्रवेश नहीं कर रहा है लेकिन फिर भी वह लंड की रगड़ से ही मस्त हो रहा था,,,, गांड के बीचोंबीच लंड की रगड़ उसे मदहोश कर रही थी। अंकित से अब रहा नहीं जा रहा था वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को जींस और टीशर्ट में देखकर उसके जवानी के लावा उबाल मार रहा था,,,, और वह एकदम से अपनी मां की टी-शर्ट में से अपने दोनों हाथ को बाहर निकाला और अपनी मां के कंधों को पकड़ कर उसे नीचे छुपाने लगा उसकी मां भी पेड़ पड़कर नीचे झुक गई जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम गोलाई ली हुई गांड एकदम से बाहर निकल आई,,, जिसे देख कर तो अब अंकित से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था पर तुरंत अपने लंड को अपनी मां की गुलाबी गली में प्रवेश कर दिया और उसकी कमर को पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया।



शाम ढल रही थी लेकिन अभी भी उजाला था इसलिए उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था घनी झाड़ियों के बीच पेड़ पकड़ा कर वह अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसकी मां भी खुलकर शिसकारी ले रही थी यहां आकर उसे बहुत सुकून मिल रहा था आंखों को भी और बुर को भी उसे तो ऐसा ही लग रहा था कि जैसे सच में वह अपने बेटे के साथ यहां पर हनीमून पर आई थी,,,,, जींस पहने होने की वजह से सुगंधा से अपनी टांग खोली नहीं जा रही थी जींस में उसे थोड़ा आशाए महसूस हो रहा था वह बार-बार अपनी टांगे खोलने की कोशिश करती थी लेकिन जींस की वजह से उसके टांगे फेल नहीं रही थी इसका एहसास अंकित को हो गया था दो-चार धक्के लगाने के बाद अंकित अपनी मां की बुर में से लंड को बाहर निकाल लिया क्योंकि अब उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था,,, देखते देखते वह नीचे झुक गया और अपनी मां की जींस को नीचे की तरफ खींचना शुरू कर दिया,,, सुगंधा को एहसास हो गया था किसका बेटा क्या करने जा रहा है इसलिए वह इधर-उधर देखते हुए बोली।)

यह क्या कर रहा है अंकित जिंस मत उतार कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,,,



अरे मम्मी यहां कोई नहीं आने वाला है देख रही हो शाम ढल रहा है सब अपने-अपने होटल की तरफ जा रहे हैं यहां कौन आने वाला है इसलिए निश्चित हो जाओ,,,, (और ऐसा कहने के साथ ही वह अपनी मां की जींस को उसके पैरों से निकलना शुरू कर दिया सुगंध भी अपने बेटे के कंधे को पकड़ कर उसे सहारा देते हुए एक-एक करके अपनी टांग को उठाकर जींस को अपनी टांगों से बाहर निकलवा दी ,,,,जींस निकल जाने के बाद उसे अच्छा महसूस हो रहा था,,,,, अंकित अपनी मां के टांगों को खोलता हुआ बोला)

जींस में टांगे नहीं खोल पा रही थी ना,,,,।

हा रे तू सच कह रहा है मैं कब से पैर फैलाना चाहती थी लेकिन फैला नहीं पा रही थी अब अच्छे से चुदवाने में मजा आएगा,,,,, (इतना कहकर वह भी मस्ती से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने लगी,,,, अंकित कुछ देर तक अपनी मां को इसी तरह से चोदता रहा लेकिन उसका पानी निकालने का नाम नहीं दे रहा था जबकि उसकी मां एक बार अपना पानी निकल चुकी थी सुगंधा को भी मजा आ रहा था धीरे-धीरे हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था,,, ठंडी ठंडी हवा चल रही थी जिसका एहसास दोनों को और भी ज्यादा मदहोश बना रहाथा,,,,, अंकित अपनी कमर हिलता हूं अपनी मां की शर्ट को भी निकाल दिया था वह इस समय पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसे बिल्कुल भी आपत्ति नहीं थी नंगी होने में क्योंकि इस तरह से खुले में उसे और भी ज्यादा मजा आ रहा था। अपनी मां की चुदाई करते हुए धीरे से फिर से अपने लंड को बाहर निकाल लिया और अपनी मां की मां पड़कर उसे अपनी तरफ घूमा लिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया,,,,, गदराई जवानी को अपनी बाहों में लेकर उसकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी उसका लंड बार-बार फिर से उसके बुर पर रगड़ खा रहा था और सुगंधा उसके लंड को अपनी बुर में लेना चाहती थी क्योंकि काम खत्म किए बिना ही उसके बेटे ने लंड को बाहर निकाल लिया था,,, इसलिए सुगंधा अपने हाथ को नीचे की तरफ ले गई और अपने बेटे के लंड को अपनी बुर का रास्ता दिखा दे इस अवस्था में भी अंकित का लंड बड़े आराम से उसकी बुर में जाने लगा अंकित अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर खड़े-खड़े उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया,,,,



कैसा लग रहा है पहाड़ी पर चुदवाने में,,,

पूछ मत मेरे राजा कितना मजा आ रहा है ऐसा लग रहा है कि जिंदगी का असली सुख बस यही है,,,।

सच में यही जिंदगी का असली सुख है ,, इसके आगे तो सारे सुख फीके हैं,,,, (वह लगातार अपने लंड को अपनी मां की बुर में अंदर बाहर कर रहा था,,,, थोड़ी ही दूर पर उसे बड़ा सा पत्थर दिखाई दे रहा था अंकित धीरे से अपनी मम्मी को बाहर निकाल दिया यह देखकर उसकी मम्मी बोली)

क्या हुआ निकाल क्यों लिया,,,,!

ऊपर देखो,,, (सुगंधा भी बड़े से पत्थर की तरफ देखने लगी उसे देखकर उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो अंकित ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) चलो उस पत्थर पर तुम्हारी चुदाई करते हैं,,,

(अपने बेटे की बात सुगंधा मान भी गई और बिना कुछ बोले उसे पत्थर की तरफ आगे बढ़ गई वह पूरी तरह से नंगी थी और जिस तरह से वह चल रही थी अंकित बावला हुआ जा रहा था उसे बहुत अच्छा लग रहा था जिस तरह से उसकी मां नंगी ही आगे बढ़ रही थी देखते ही देखते मां बेटे दोनों बड़े से पत्थर के पास पहुंच चुके थे पत्थर के पास पहुंचने के बाद सुगंध अपने बेटे से बोली,,)

अब,,,,?

सुगंधा



अब क्या,,,, (इतना कहने के साथ ही हो अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और एकदम से उठाकर उसे पत्थर पर बैठा दिया,,,,, और अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोला,,,) अब अपनी टांग खोल कर लेट जाओ,,,,।

(इतना सुनते ही सुगंधा पीठ के बल लेट गई फिर अपनी दोनों टांगों को खोल दी उसकी गुलाबी पर एकदम से चमक रही थी उसे पर उसके मदन रस की बूंदे लगी हुई थी जिसे देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह अपने प्यास होठों को अपनी मां के बुर पर रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया सुगंधा एकदम से मदहोश हो गई और अपना हाथ आगे बढ़कर उसके सर पर रखकर उसे अपनी बुर पर दबाना शुरू कर दी अंकित भी पागलों की तरह अपनी मां की बुर को चाटना शुरूकर दिया सुगंधा उत्तेजना के मारे जोर-जोर से शिसकारी लेना शुरू कर दी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसकी गरमा गरम शिकारी की आवाज इस पहाड़ी पर कोई सुनने वाला नहीं था,,,, अंकित मस्त हो चुका था वह अपनी दो उंगली को एक साथ अपनी मां की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए उसकी मलाई को चाट रहा था एक बार फिर से अंकित ने अपनी उंगली से ही उसकी बुर का पानी निकाल दिया था,,,, अब अंकित से भी रहा नहीं जा रहा था वह तुरंत अपने लंड को अपनी मां की बुर से सटा दिया और जोरदार करारा धक्का लगाया लंड पहली बार में ही उसके बच्चेदानी से जा टकराया जिसकी वजह से सुगंधा के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई लेकिन यह चीख पल भर में ही मदहोशी में बदल गई,,,,



गरमा गरम शिसकारी का आनंद लेते हुए,,, अंकित जोर-जोर से अपनी मां की बुर की चुदाई कर रहा है और तब तक चुदाई करता रहा जब तक इस बार उसका पानी नहीं निकल गया,,, दोनों मस्त हो चुके थे कुछ देर तक उसे बड़े से पत्थर पर ही सुगंधा लेटी रह गई और फिर धीरे से अंकित नहीं उसे बड़े पत्थर पर से अपनी मां को नीचे उतारा,,,, और वह अपने कपड़े को पहन कर फिर से पहाड़ी से नीचे आ गई थी,,,, जब उन दोनों का होटल कुछ दूरी पर रह गया था तो वह लोग पास में ही एक चाय की दुकान पर बैठकर चाय पी रहे थे जहां पर एक औरत भी बैठकर अकेले ही चाय पी रही थी तकरीबन उसकी मां की उम्र की तो नहीं बल्कि चार-पांच साल उसे बड़ी ही थी अंकित बार-बार उसे ही देख रहा था क्योंकि इस उम्र में भी वह बेहद कयामत की तरह लग रही थी,,,। चाय की चुस्की लेते हुए अंकित बार-बार उसे चोर नजर से देख ले रहा था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसकी मां यह देखें कि वह किसी और को देख रहा है,,,, वहां से बैठे-बैठे भी होटल दिखाई दे रहा था वह औरत अपनी ही मस्ती में बैठकर चाय पी रही थी। तभी सुगंधा अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई है देखकर अंकित बोला,,,।

क्या हुआ,,,,?

मुझे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है,,,, (इधर-उधर देखते हुए वह बोली ताकि कोई उसकी बात सुन ना ले,,,, लेकिन अभी अंकित की चाय खत्म नहीं हुई थी वह कुछ देर वही बैठना चाहता था इसलिए अपनी मां से बोला,,)



अच्छा तुम चलो मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं,,,,।

ठीक है जल्दी आ जाना,,,, (इतना कहकर वह वहां से होटल की तरफ आगे बढ़ गई,,,,, और अंकित वहीं बैठकर उस औरत को देखता रहा तभी वह औरत अपनी जगह से उठी और चलती बनी अंकित अभी तक उसी को ही देख रहा था उसकी मदहोश कर देने वाली गांड कैसी हुई साड़ी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी लेकिन तभी उसकी नजर गई कि जहां पर वह बैठी हुई थी वह अपना पर्स वहीं पर भूल चुकी थी और वह आगे निकल गई थी इससे अच्छा मौका उनकी के पास कोई और नहीं था उससे बात करने के लिए वह जल्दी से परसों उठाया और उसके पीछे भागता हुआ गया और उसे आवाज देते हुए बोला,,,)

मैडम जी रुकीए,,,, ।

(लेकिन वह अंकित की बात को सुन नहीं रही थी और आगे अपनी ही धुन में चली जा रही थी तो एकदम से अंकित उसके पास पहुंच गया और उसके आगे खड़े होकर बोला)

अरे मैडम जी रूक चाहिए मैं कब से आपको आवाज दे रहा हूं और अपने की सुन नहीं रही है,,,।

मुझे,,,,( वह आश्चर्य से बोली,,,)



हां आपको,,,,

लेकिन किस लिए,,,,?

आप वहां पर अपना पर्स भुल आई थी,,,,।

(इतना सुनते ही उसकी आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई,,,, और वह तुरंत हाथ आगे बढ़ाकर अंकित के हाथ से अपने पर्स को ले ली और उसे खोलकर देखने लगी,,,, सब कुछ ठीक-ठाक था वह अपने पर्स को पाकर खुश थी,,,)

देख लीजिए सब कुछ ठीक-ठाक है ना,,,,।

तुम इसे खोल कर देखे नहीं,,,,।

मैं कैसे देख सकता हूं यह आपका है,,,,।

तुम नहीं जानते कि तुमने मुझे कितनी बड़ी मुसीबत से बचा लिए हो,,,,

मुसीबत से में कुछ समझ नहीं,,,,।

ईस पर्स में किसी की अमानत है,,, यूं समझ लो की किसी के दहेज की रकम है,,, और कल ही मुझे इस बैंक में जमा करना था अगर तुम मुझे यह मेरा पर्सनल लौट आते तो बहुत बड़ी मुसीबत आ जाती। तुम शायद जानते नहीं कि इसमें डेढ़ लाख रुपए हैं,,,।

(डेढ़ लाख रुपये शब्द सुनकर अंकित के तो होश उड़ गए लेकिन वह अपने चेहरे पर बिल्कुल भी इस बात का भाव आने नहीं दिया और वह एकदम से सहज बना रहा और बड़े आराम से जवाब दिया,,,)

अब इसमें क्या है मुझे तो नहीं मालूम,,, लेकिन यह जानता हूं कि यह पर्स आपका है इसलिए मैंने आपको दे दिया,,,



तुमने बहुत अच्छा किया बेटा कोई और होता तो यह पर्स लेकर रफुचक्कर हो गया होता वैसे क्या तुम यहीं रहते हो,,,।

जी नहीं यहां तो में घूमने के लिए आया हूं,,,।

ओहहह,,,, मैं भी यहां किसी काम से आई थी।

आप कहां ठहरी हैं,,,।

वह सामने होटल दिखाई दे रहा है ना वहां पर,,,, चलो मेरे साथ आज का डिनर मेरी तरफ से,,,,

जी अभी तो मैं नहीं आ सकता मुझे काम है,,,।

चलो कोई बात नहीं लेकिन कल जरूर आना,,,,

कितने दिनों के लिए रुकी है,,,

बस कल का ही दिन है शाम को मैं चली जाऊंगी,,,,।

चलिए कोई बात नहीं तो कल मैं आपसे मिल लुंगा,,, 12:00 के करीब,,,,,

बहुत अच्छे लेकिन आना जरूर क्योंकि तुम्हारा मेरे ऊपर बहुत बड़ा एहसान है मेरे साथ अगर खाना खा लोगे तो मैं समझूंगी मैं भी तुम्हारे लिए कुछ की हूं,,,।

यह बात है तब तो मैं जरूर आऊंगा,,,,।

ठीक है अभी मैं चलती हूं लेकिन कल तुम्हारा इंतजार करूंगी,,,,,।

जरूर,,,,,,।

(इसके बाद वह औरत अपने होटल की तरफ जाने लगी अंकित खड़ा होकर उसकी कसी हुई गांड को ही देखता रह गया,,,, और अपने मन में सोचने लगा कि अगर उसे औरत की खूबसूरती का दीवाना ना हो गया होता तो आज उसके हाथ डेढ़ लाख रुपए लग जाते लेकिन फिर अपने मन में सोचने लगा कि इस तरह का पैसा किस काम का जो किसी की खुशियों को छीन कर मिलता हो और इतना सोचकर वह अपने होटल की तरफ चल दिया)
 
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