Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 18 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane



अपडेट-145


दीदी इतना कहकर झाड़ गई. मैं अब भी उनको हचक हचक्क कर छोड़ रहा था 10-12 जोर दर धक्के लगन ेके बाद मैं भी झड़ने वाला हो गया था. इसलिये मैं भी बड़बड़ाते हुवे उनकी छूट में झड़ने लगा.

मैं- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सविता सलीईई. चू मेरीए रद्द हीी. ली मेरा पनीइ निकाल राहहह यही तेरई छूट मई मैंन झाड़ रहा हूँ. ऊऊओह्ह्ह्हह्ह सविता. मैं भी गया ररी.

इतना कहकर मैं भी दीदी की छूट में झाड़ गया और दीदी के ऊपर लड़ गया.

अब आगे.

दीदी की छूट में झड़ने के बाद मैंने अपना लुंड उनकी छूट से बहार नहीं निकला जब तक की मेरा लुंड झाड़कर छोटा नहीं हो गया. जब मेरा लुंड पूरी तरह से झाड़ गया तो मैंने अपना लुंड उनकी छूट से बहार निकला. दीदी अभी भी सेल्फ के सहारे झुकी हुई हांफ रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी की सांसे दुरुस्त हुई तो वो सेल्फ के सहारे कड़ी हो गयी और मेरी तरफ देखने लगी. मैं जमीन पर बैठ गया था. दीदी ने मेरी तरफ देखते हुवे मुस्कुराकर कहा.

सविता दी- होऊ गयई तेरई इच्छा पुररी. कब से मरा जा रहा था मुझे छोड़ने के लिए.

मैं- बोल तो ऐसे रही हो जैसे तुमको मज़ा hi नहीं आया छुड़वाने में. गांड उठा उठा कर मुझसे छुड़वा रही था और अब मुझपर hi सारा ब्लेम दाल रही हो.

सविता दी- अरे नहीं रे. मैं तो मज़ाक कर रही थी. तुझसे चाहे जितना भी छुड़वा लू मन hi नहीं भरता.

मैं- चलो दीदी अब जल्दी से फ्रेश होकर खाना खा लेते हैं ट्रैन का समय हो रहा है. हमें आज निकलना भी तो है घर के लिए.

इतना कहकर मैंने अपने कपडे उठाया और बाथरूम में चला गया, थोड़ी देर बाद मैं फ्रेश होकर बहार आया तो दीदी बाथरूम में चली गई. थोड़ी देर बाद दी भी फ्रेश होकर बहार आयी और हम दोनों ने मिलकर खाना खाया. खाना खाने के बाद मैं तैयार होने लगा. दीदी भी दूसरे कमरे में जाकर तैयार होने लगी. थोड़ी देर बाद दी तैयार होकर बहार आयी तो मैं उन्हें देखता रह गया. दीदी बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. मैंने दीदी को देखते हुवे उनके पास गया और उनके गाल और माथे पर किश कर लिया और दीदी से कहा.

मैं- आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं दीदी. किसी की नज़र न लगे आपको.

सविता दी- जितको तेरी हवसी नजर लग चुकी हो उसे कोई आम नजर लग hi नहीं सकती.

दीदी की बात सुनकर मैं मुस्कुरा दिया. दीदी भी मेरी बात सुनकर मुस्कुराने लगी. फिर मैं सारा सामान लेकर घर से बहार आया और दीदी ने घर को टाला लगा दिया. मैंने जीजा जी को फ़ोन करके बता दिया की मैं दीदी को अल्लाहाबाद लेकर जार अहा हूँ. जीजा जी से बात करने के बाद मैंने एक कैब बुक की जो थोड़ी hi देर में आ गयी. मैंने सामान दिग्गी में रखा और कैब में बैठ गया. दीदी भी मेरी बगल बैठ गयी. कुछ hi देर में हम स्टेशन पर थे. गाड़ी बिलकुल सही समय पर थी. मैं और दीदी जाकर अपनी शीट पर बैठ गए. अच्छी बात ये थी की उस कम्पार्टमेंट में मुझे छोड़कर सब लेडीज hi बैठी थी. ट्रैन सही समय पर डिपार्चर हो गयी. मैंने पापा को फ़ोन करके बता दिया की मैंडिडी को लेकर आ रहा हूँ. पापा ने कहा की वो स्टेशन 9 बजे लेने के लिए आ जायेंगे.

रत के 9 बजे हम अल्लाहाबाद पहुंच गए. मैं और दी सामान लेकर बहार आये तो पापा बहार hi खड़े थे. मैंने बैग्स कार की दिग्गी में रखा और मेंआगे बैठ गया. दीदी पीछे वाली शीट पर बैठ गयी. थोड़ी देर में हम घर आ गए. बेल्ल बजने पर सरिता दीदी ने दरवाज़ा खोला. वो सविता दीदी को देखकर बहुत खुश हुई और उनके लगे लग गयी. थोड़ी देर बाद मनीषा भी अपने कमरे से बहार आयी और दीदी के गले मिली. ये देखकर मैंने कहा.

मैं- अरे यार ये तो गलत है. दीदी के साथ मैं भी तो बहार से hi आ रहा हूँ तो सब दीदी से hi गले मिल रहे हैं हॉल चल पुच्च रहे हैं. मुझसे तो गले मिलना तो दूर एक शब्द भी कोई नहीं पूछ रहा है.

मेरी बात सुनकर सभी मुस्कुराने लगे. सरिता दीदी मेरे पास आयी और मुझसे लिपट गयी. कुछ सेकंड में hi वो मुझसे अलग हो गयी और बोली.

सरिता दी- अब खुश न. बड़ा आया गले मिलने वाला. तुझसे तो मैं हाँथ भी न मिलों. लेकिन तेरी रोनी सूरत देख कर मुझको तेरे ऊपर दया आ गयी.

मैं- मैं कोई रो वो नहीं रहा था. समझी आप. और मुझे आपसे गले मिलकर बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा.

मेरी बात सुनकर सभी हंसने लगे. फिर मैं दीदी और पापा फ्रेश होने चले गए. हम दोनों तीनो लोग फ्रेश होकर हॉल में आये. सब लोगो ने मिलकर खाना खाया और अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गए. मैं भी जाकर अपने बिस्टेर पर पड़ा और कब नींद आ गयी मुझे पता भी नहीं चला. सुबह मेरी आँख देर से खुली तो मैं उठकर फ्रेश हुवा और निचे हॉल में आ गया. वह सरिता दीदी पहले से hi बैठी हुई थी. मुझे देखते hi वो मुस्कुराने lagi.main भी जाकर उनके पास बैठ गया. दीदी ने मेरे कंधे पर मरते हुवे मुझसे कहा.

सरिता दी- अच्छा तो तुमको मेरे गले लगने से मज़ा नहीं आता हां. अब कभी मेरे पास मत आना.

मैं- अब क्या सब के सामने कहता की मुझे बहुत मज़ा आ रहा है और चिपक जाओ मेरे से.

दी मेरी बात सुनकर मुस्कुराने लगी. तभी मनीषा भी निचे आकर सोफे पर बैठ गयी और बोली.

मनीषा- और बताओ भैया. कैसा रहा आगरा का सफर.

मैं- बहुत क़ज़ा आया. वह पर ताजमहल देखने गया, फिर पांच महल गया और उसके बाद आगरा फोर्ट देखा. बहुत hi मनोरम दृश्य है वह का

मनीषा- अब ज्यादा बात को घुमाओ मत हमें पता है की अपने कौन सा महल और कौन सा किला देखा और कहा का दृश्य मनोरम था. बहुत मज़ा मारा है आपने दीदी के साथ. है न.

मैं- जब तुमको सबकुछ पता है तो क्यों पूछ रही हो. वैसे बहुत मज़ा आया दीदी के साथ करके.

अभी मैंने इतना कहा था की मम्मी पापा भी वह आ गए. तो सरिता दीदी उठकर मम्मी से साथ किचन में चली गयी. थोड़ी देर बाद जब नाश्ता बन गया थो सविता दीदी भी निचे आ गयी और सबने मिलकर नाश्ता किया. नाश्ता करने के बाद मैं अपने काम पर चला गया पापा और मम्मी भी जॉब पर चले गए. मैं कई दिन बाद काम पर गया था इसलिए काम कुछ ज्यादा था तो मैंने वही बैठ कर काम फिनिश किया और शाम को घर वापस आया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा भी आ गए. हम सब अपने अपने कमरे में जाकर फ्रेश हुवे. उसके बाद निचे हॉल में आकर बैठ गए.

खाना खाने के समय सबने मिलकर खाना खाया. खाना कहते समय पापा बोले.

पापा- एक हफ्ते बाद मेरे ऑफिस से एक टूर जा रहा है बहार 2 दिन के लिए. उसमे सभी फॅमिली मेंबर को इन्विते किया गया है. तो मैं सोच रहा हूँ की तुम सब भी चलो साथ में.

मनीषा- नहीं पापा मैं नहीं जाउंगी. मेरा पढाई का नुकसान होगा.

पापा- तेरा सोल्लगे तो अभी बंद चल रहा है. तो तुझे कौन सी पढाई करनी है.

मनीषा- सोल्लगे बंद है तो क्या हुवा. घर में बैठकर तो पढ़ती हूँ न. मुझे नहीं जाना.

पापा- अगर ये नहीं जाएगी तो अभी भी नहीं जा पाएगा. तुम बताओ सरिता. तुम चलोगी.

सरिता दी- नहीं पापा मेरा भी जाने का मन नहीं hai.aap सविता दीदी को साथ ले जाइये.

सविता दी- मुझे भी कही नहीं जाना. अभी कल hi तो आई हूँ.

पापा- लो जी मेरे बच्चे तो एक से बढ़कर एक हैं सब बच्चे घूमने जाने के लिए जिद करते हैं और एक ये हैं जो मौका मिलने पर भी नहीं जाना चाहते.

मम्मी- जब नहीं जाना चाहते तो ज़िद मत करिये. मैं दो दिन की छुट्टी ले लेती हूँ. मैं चलूंगी साथ.

उसके बाद कोई बात नहीं हुई. सब खाना खाकर अपने कमरे में चले गए. मैं भी अपने कमरे में आकर बिस्टेर पर उव में लेट गया. थोड़ी देर बाद सविता दीदी दूध का गिलास लेकर मेरे कमरे में आयी और झुकार मुझे दूध देने लगी. झुकने की वजह से उनकी सदी का पल्लू सरक गया. जिससे उनकी चूचिया दिखने लगी. मैं दीदी को कई बार छोड़ चुक्का था, लेकिन सभी जानते हैं की पूरी ओपन चीज़ से हाफ ओपन चीज़ ज्यादा आकर्षित करती है. यही कारन है की जब भी मैं अपनी बहनो की चूचिया कपडे के अंदर से थोड़ी नंगी देखता था. तो मारा लुंड तुरंत खड़ा हो जाता था.



दीदी की चूचियों को देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया था. मैं अपने उव के ऊपर से पाने लैंड को सहलाने लगा. दीदी झुकी झुकी hi मुझे लुंड सहलाते देखने लगी. वो झुकी हुई hi मुझसे बोली.

सविता दी- अभी क्या देख रहा है. दूध ले और पि ले नहीं तो ठंडा हो जायेगा.

मैं- आपको पता है की अब मुझे आपका hi दूध अच्छा लगता है. मुझे ये बहार वाला दूध नहीं चाहिए.

सविता दी- अच्छा. जब मैं नहीं थी तो तुझे कौन अपना दूध पिलाता था.

मैं- अरे मेरी दो गफ हैं न मैं दिन में उन्ही का दूध पि लेता था तो रत माँ जरुरत hi नहीं पड़ती थी.

सविता दी- तो कब मिलवा रहा है तू मुझे अपनी दोनों गफ से.

मैं- जब आप कहेंगी तभी मिलवा दूंगा उन्हें आपसे. वैसे आप उन्हें जानती भी हैं.

सविता दी- अच्छा कौन हैं वो. जिन्हे मैं जानती हूँ. नाम तो बता दे उनका.

मैं- अरे दीदी नाम में क्या रखा है. कल आप खुद hi सामने से मिल लेना उनसे.

इतना बोलकर मैंने दीदी के हाँथ से दूध का गिलास ले कर मेज पर रख दिया और दीदी को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया और उनके होंठो को चूमने लगा.



दीदी भी मेरे होंठो को चूमने लगी. मैं अपना हाथ बढाकर दीदी की गांड पर रख दिया और दबाने लगा. दीदी की गांड को दबाते हुवे मैंने पानी जीभ निकली और दीदी के मुझ में दाल दी. दीदी मेरी जीभ चूसने लगी. थोड़ी देर मेरी जीभ चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ दीदी के मुंह से निकल ली और दीदी के गलो को चूमने लगा. मैंने अपने दोनों हाँथ में दीदी की गांड को भर लिया और सख्ती के साथ मसल दिया. दीदी मस्ती से सिसक पड़ी.

सविता दी- ooooohhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiii. आराममम सीए दबावू. तुम्हारी ही हईं यी. प्यार से प्यार कारु इनको. आआआअह्हह्ह्ह्ह.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की गांड पर एक थप्पड़ मारा जिससे दीदी सस्शह्ह्हह्ह स्स्स्सस्ठ्ठ करने लगी. थोड़ी देर थप्पड़ मरने के बाद मैंने दीदी को पलटकर अपने निचे कर लिया और ऊपर आकर उनकी ब्लाउज से सदी का पल्लू हराकर अपने होंठ उनकी क्लीवेज पर रख दिया और चूमने गाला. दीदी मस्ती में आहे भरने लगी. मैं जोर जोर से दीदी की क्लीवेज चुम रहा था और चूस रहा था. एक हाँथ से मैं दीदी की चुकी भी दबा रहा था. तभी निचे से मनीषा की आवाज़ आई.

मनीषा- सविता दीदी. कहा हैं आप. मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

सविता दी- हाँ मनीषा बोलो क्या बात करनी है. मैं अभी को दूध पिलाने आई थी. रुक आ गहि हु.

दीदी ने इतना कहकर मुझे अपने ऊपर से हटाकर उठ कड़ी हुई और अपना पल्लू सही करके निचे जाने लगी. दीदी जाते हुवे मुझे बोली.

सविता दी- कॉल दोपहर को समय निकल कर मेरे कमरे में आ जाना.

ये बोलकर दीदी कमरे से बहार चली गयी. उनकी जाने के थोड़ी देर बाद hi सरिता दीदी मेरे कमरे में आ गयी. दीदी ने तो जैसे कुछ पहना hi नहीं था. एक जीना सा सफ़ेद रैंड का कपडा वो भी आगे से खुला हुवा था. दीदी आकर मेरे पास बैठ गयी और मुझे चूमती हुई बोली.



सरिता di-Kya बात है भाई. सविता दीदी से खूब मज़े लिए जा रहे हैं. मेरा भी तो खुछ ख्याल करो.

मैं- बस दीदी. मैं दीदी को किसी तरह इस खेल में शामिल करने की युक्ति ढूंढ रहा हों.

सरिता दी- इसमें क्या है. जैसा मनीषा ने किया था मेरे साथ उसी तरह उनके साथ भी करना पड़ेगा.

मैं- नहीं दीदी. ये इतना आसान नहीं है जितना आप समझ रही हो. मैंने दीदी से वह बात की थी इस बारे में तो वो एकदम भड़क गयी थी. मुझे नहीं लगता की ये तरीका कारगर साबित होगा.

सरिता दी- जब कोई और तरीका नहीं है तो इसी को आजमाने में क्या जाता है. हो सकता है बात बन जाये.

मैं- चलो ठीक है. कल दोपहर को दीदी ने मुझे अपने कमरे में आने के लिए कहा hai.jab मैं उनके कमरे में जाऊंगा तो आपको कॉल कर दूंगा. तो आप दोनों तैयार रहना, मैं अंदर से दरवाज़ा लॉक नहीं करूँगा, बाद में बोल दूंगा की गलती से दरवाज़ा बंद करना भूल गया. लेकिन तब तक अंदर मत आना जब तक मैं दीदी की छूट को अच्छी तरह छोड़ न लू. दीदी और मेरे झाड़ जाने के बाद hi कमरे में आना. बाकि जो होगा देखा जायेगा. हो सकता है आप जो कह रही हो वो हो जाये.

सरिता दी- ठीक है फिर हम दोनों तैयार रहेंगे. लेकिन अभी मेरा कुछ कर न.

मैं- यार दीदी. थोड़ा सबर करो. इतनी उतावली मत बनो. कल दीदी को छोड़ लेने दो उसके बाद आप दोनों का hi नंबर लगाऊंगा.

इतना कहकर मैंने दीदी की चूचियों को पकड़कर जोर जोर से मरोड़ना शुरू कर दिया. दीदी की छूट मेरे छूटे hi पानी बहाने लगी. जिससे उनकी पंतय गीली हो गयी थी. थोड़ी देर दीदी की चूचिया दबाने के बाद मैंने दीदी को छोड़ दिया. और उन्हें अपने कमरे में जाने के लिए कहा.

दीदी अपने कमरे में चली गयी और मैं दूध पीकर बिस्टेर पर लत गया और मुझे नींद आ गयी. सुबह मैं अपने समय से सोकर उठा और अपनी एक्सेरसीज़े की. उसके बाद मैं फ्रेश होकर निचे हॉल में आया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा भी कमरे से बहार आये मम्मी किठचें में चली गयी थोड़ी देर बाद नाश्ता बन गया. सबने नाश्ता किया. मम्मी पापा तैयार होकर अपने जॉब पर निकल गए. मैं भी तैयार हुवा और अपने काम पर निकल गया. वह जाकर अपना कुछ देर काम किया फिर अपना काम समेटकर घर आ गया.

घर आकर अपने कमरे में बैठकर लैपटॉप पर अपना काम करने लगा. थोड़ी देर बाद सविता दीदी की कॉल आयी और उन्होंने मुझे अपने कमरे में बुलाया. मैंने अपना काम फिनिश किया और लोअर उतर कर उव में hi दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. निचे जाने से पहले मैंने सरिता दीदी को फ़ोन करके बता दिया की मैं दीदी को छोड़ने उनके कमरे में जा रहा हूँ. कमरे में पहुंच कर मैंने दरवाज़ा नॉक किया तो वो खुल गया. मैं जल्दी से अंदर चला गया और दरवाज़ा बंद कर लिया लेकिन सिटकिनी नहीं लगाई. मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो बिस्टेर पर बैठी हुई थी. दीदी के शरीर पर इस समय ब्रा और पंतय थी.



वो मुस्कुराते हुवे मुझे देख रही थी. मैं धीरे धीरे चलता हुवा दीदी के पास पहुंच गया और बिस्टेर पर चढ़ाकर उनके चेहरे को अपने हांथो में भरकर ुकि आँखों में देखने लगा. दीदी की आंके पहले से लाल थी . वो ग्रह हुई बैठी थी. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे अपना होंठ उनके होंठो पर रख दिया.

मरे होंठ अपने होंठो पर लगते hi दीदी की आँखे मस्ती से बंद हो गयी. मैं दीदी के होंठो को बहुत प्यार से चुम रहा था. मैं दीदी के होंठ चूमते हुवे अपनी जीभ निकली और उनके होंठो को चाटने लगा. दीदी ने अपना मुंह खोल कर मेरी जीभ को अपने मुंह में ले लिया. मैं दीदी के मुंह में जीभ डालकर गोल गोल घूमने लगा. थोड़ी दे रेज करने के बाद मैं दीदी के मुंह से अपनी जीभ निकली और उनके गलो पर फिरने लगा. मैंने दीदी का चेहरा छोड़ दिया और अपना एक हाँथ से दीदी की चुकी को अपनी मुठी में भर लिया और दबाने लगा. मैं थोड़ी देर दीदी की चुकी दबाने के बाद दीदी की चुकी छोड़ दी और उठकर दीदी के पीछे जाकर बैठ गया. मैंने पीछे बैठकर हाँथ आगे बढाकर दीदी की दोनों चूचियों को हाथो में भर लिया और दबाने लगा.

दीदी ने अपने दोनों हाँथ उठाकर मेरी गार्डन पर लप्पेट लिया और अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया और अपनी चूचिया बडबवाते हुवे मज़ा लेने लगी. थोड़ी देर उनकी चूचिया दबाने के बाद मैंने दीदी की चूचिया छोड़ दी और अपना हाँथ दीदी की कमर पर ले जाकर उनकी ब्रा का हक्क खोल दिया और ब्रा निकल कर दीदी के शरीर से अलग कर दी. और दीदी को घुमाकर अपनी तरफ कर लिया और उनकी चुकी को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा. थोड़ी देर दीदी की चूचिया चूसने के बाद मैंने दीदी को बीएड पर लिटा दिया और उनकी पंथी में हाँथ फसकर उसे खींचकर उनके पैरो से निकल दिया. और झुककर दीदी की छूट पर अपना मुंह रख दिया दीदी की सीस्की निकल गयी.



मैं दीदी की छूट पर अपनी जीभ चलने लगा. थोड़ी देर जीभह चलने के बाद मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी छूट में दाल दी और अंदर बहार करने लगा. दीदी अह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊऊओह्ह्ह्ह अभी. करना लगी. थोड़ी देर दीदी की छूट चाटने के बाद मैं दीदी की छूट को अपने मुंह में भर लिया अरु जोर जोर से चूसने लगा. दीदी मस्ती में अपना सर इधर उधर करने लगी और बोलने लगी.

सविता दी- आआह्ह्ह्हह्ह अभीइइइइइ. खा जोऊ मेरीए छूठ को. बहुत्त रस भारा ही इसमे पी जाओ इसी. निचोड़ लो मेरी छूट को. ऐसी हीई चुसू मेरीए छूट को. आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अभीइइइइइइइ औरर जोर से चुसू मेरी छुटत. उउउउउउफफ्फफ्फ्फ़ मुम्ममइय्यययय.

दीदी इतना कहकर अपने हाथ से मेरे सर को अपनी छूट पर दबाने लगी. मैं जोर जोर से दीदी की छूट चूसने लगा और अपने हाँथ से दीदी की क्लीट को सहलाने लगा. थोड़ी देर तक उनकी छूट चूसने के बाद मैंने अपना मुंह दीदी की छूट से हटा लिया और दीदी के ऊपर झुककर दीदी की चुकी को अपने मुंह में भरकर पिने लगा. मैं एक हाँथ से उनकी चुकी दबाने लगा. थोड़ी देर तक दीदी की चुकी पिने के बाद मैंने अपना होंठ बढाकर दीदी के होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. थोड़ी देर उनका होंठ चूसने के बाद मैं उनसे अलग होकर बैठ गया. मैंने दी को उठाकर बिस्टेर पर बैठाया और खुद बिस्टेर पर लेट गया.

मेरे बिस्टेर पर लेटने के बाद दीदी ने मेरी उव को अपनी ऊँगली में फसकर निचे किया और मेरे पैरो से निकल कर जमीन पारर फेंक दी और मेरे लुंड को अपनी जीभ निकलकर चाटने lagi.didi मेरे लुंड को chat-ti हुई मेरी गोटियों को चाट रही थी फिर दीदी ने लुंड को चेतना बंद कर दिया और मेरी दोनों गोटियों को अपने मुंह में भरकर चूसने लगी. थोड़ी देर तक मेरी गोटिया चूसने के बाद दी ने अपने मुंह से मेरी गोटिया बहार निकली और अपना मुंह खोलकर मेरा लुंड अपने मुंह में ले लिया. और चूसने लगी. दीदी मेरा पूरा लुंड अपने मुंह में लेकर चूस रही थी. थोड़ी देर ऐसे hi लुंड चूसने के बाअद मैंने दीदी के सर को पकड़ लिया और जोर जोर से धक्के मार्कर उनका मुंह छोड़ने लगा. मुंह छोड़ते हुवे मैं बोलने लगा.

मैं- ले सविता रानीई. मेरा लुंड अपने मुंह की गहराई में उतर ले. तेरा मुंह समुन्दर की तरह गहरा है. मेरा लुंड तेरे मुंह में खो जाता है सरिता. तू सछह मी बहुत्त कड़क माल ही. तुझे पाकर तू मैं धन्य हो गया सरिता. ले और अंदर तक ले मेरे लौड़े को.

इतना कहकर मई अपने लुंड को जोर जोर से दी के मुंह में डालने लगा और दीदी के सर को पकड़कर अपने लुंड पर दबाने लगा 5 मिनट तक दी का मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड उनके मुंह से निकल लिया और दीदी को अपने ऊपर आकर छूट में लुंड लेने का इशारा किया. दीदी उठाकर दोनों पेअर मेरी कमर के पास राखी और झुककर मेरे लुंड को पकड़कर उसपर अपनी छूट रखकर बैठती चली गयी. मैंने भी अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दिया. जिससे मेरा पूरा लुंड उनकी छूट में समां गया. दीदी के मुंह से आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अभियई निकल गया. मैं हाँथ बढाकर दीदी की चुकी को पकड़ लिया और जोर जोर से दबाने लगा. और लुंड दीदी की छूट में धीरे धीरे पेलने लगा.

थोड़ी देर तक हलके हलके धक्के मरने के बाद मैंने अपनी गति बढ़ा दी और जोर जोर से उनकी छूट छोड़ने लगा. और दीदी की चुकी को दोनों मुट्ठी में भरकर मसल दिया. दीदी के मुंह से चीख निकल गयी.

सविता दी- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiii. इतनीई जोररर सी मात मसल्ल मेरीए चूऊछीइ को नहीं तो लाल्ल्ल होजायेगी. मुझी बहुत्त दर्द होता हैई. आरममम से दबा मेरी चूचियों को.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से बहार निकल लिया और दीदी को डोगग्य स्टाइल में खड़ा कर दिया और पिचई आकर उनकी गांड पर थुक्क दिया और अपने लुंड पर थूक लगाकर दीदी की गांड पर रख दिया और एक धक्का मारा. मेरा आधा लुंड उनकी छूट में समां गया. दीदी दर्द से कराह उठी.

सविता दी- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiii. वहा मैट कर अभी. थोड़ी दिन बाद कर लेना. मुझी दर्द्द हो रहा हैई. आआह्ह्ह्हह्ह भाईईई. निकल ली बहररर.

दीदी की बात की परवाह किये बगैर मैंने अपना लुंड जड़ तक बहार खींचा और फिर से एक जोरदार झटका उनकी गांड पर मारा. मेरा लुंड उनकी गांड को चीरता हुवे पूरा जड़ तक समां गया दीदी दर्द से चीख पड़ी.

सविता दी- aaaaaaaahhhhhhhhhhh सलेटी. कामिनी. मेरिइइइ गंड़द फाटत गयीईइ री. तू मेररिई जाननं होई ले लेगा किसी दिन्नं. बहार निकलल ली सल्ली. दर्द्द हो रहा हीी.

मैं- चुप्प कर सलिई रण्डी. बहुत्त नाटकक करती ही तू. आजजज तेरी गण्ड की धज्जिया उदा दूंगा छोड़ छोड़ कर. तू चाल नहीं पाएगी थीएकक सी. यी ले और अंदर तक ले.

मैं दीदी की गांड जोर जोर से छोड़ रहा tha.kuchh देर छोड़ने के बाद दीदी को भी अच्छा लगने लगा. वो भी अपनी गांड पीछे तेल तेल कर अपनी गांड मरवाने लगी. थोड़ी देर दीदी की गांड छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी की गांड से बहार निकल लिया और दीदी को बिस्टेर पर लिटा दिया. मैं दीदी की दोनों टैंगो के बिच आ गया और उनकी दोनों टैंगो को पकड़कर उनकी चूचियों से सटाकर पकड़ा लिया और अपने लुंड को उनकी छूट पर रखकर एक झटके में अंदर पेल दिया और हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा.



दीदी ाआअऊऊऊऊओह्ह्ह्हह भाईईई आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभी कर रही थी. लगभर 10 मिनट इसी पोज़ में छोड़ने के बाद मैं झड़ने वाला हो गया. दीदी का भी बदन कमान की तरह हो गया शायद वो भी झड़ने वाली thi.wo वो मस्ती से बड़बड़ाती हुई झड़ने लगी.

सविता दीदी- oooooohhhhhhhhhhh कामिनी अभियई. मैंन झाड़ रहीए होऊणन. मेरी छूट पानी छोड़ रही हैई. चू मेरी छूट रोज़ज छोड़कर मेरा पनीइ निकला कर मेरे चुड़क्कड़ अभी. मैंनं आ रही हूँण . मुझे सम्भालू भैई. मैं गई.. ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह मुनम्मीयिययीय.

दीदी के झड़ने के बाद मैंने भी 8-10 कास कास कर धक्के दीदी की छूट पर मरे और दीदी की छूट में गहराई तक लुंड घुसकर बड़बड़ाते हुवे झड़ने लगा.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh रानीई. मैंन भी तुम्हारी सठह ही आ रहा हूँ. मैं भी तेरी छूट मी झाड़ रहा हूँ कामिनीई. ले मैं aayaa.sambhall मुझी aaaaaahhhhhhhhhhhhhh.

इतना कहकर मैं भी दीदी की छूट में झाड़ गया. और दीदी के ऊपर लटकर अपनी सांसे दुरुस्त करने लगा. तभी दरवाज़ा खुला और सरिता दीदी की आवाज़ आई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-146

मैं झाड़कर दीदी के उपल लेट गया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा. तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और सरिता दीदी की आवाज़ आई.

सरिता दी- दीदी मुझे आपसे kuchhh……………………..shabd अहुरा छोड़ दिया

सरिता दीदी की आवाज़ सुनकर दीदी ने मुझे अपने जिस्म से परे हटा दिया और अपने शरीर को चादर से ढकने की कोशिश करने लगी, उनका चेहरा फक्क पद गया था. शर्म के कारन उनका सर झुक गया था और आँखों में आँशु आ गए थे. दरवाज़े पर मनीषा और सरिता दीदी कड़ी thi.Wo हम दोनों को hi देख रही थी और दोनों के चेहरे पर एकक मुस्कान आ कर चली गयी. उन्होंने अभी तक कुछ नहीं बोलै था. वो दोनों चलती हुई बिस्टेर तक गयी और मनीषा बोली.

मनीषा- ये क्या हो रहा है yahan.Aap दोनों को शर्म नहीं आती. भाई बहन हो कर ऐसा गन्दा काम कर रहे हैं आप लोग.

मैं- अरे ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम दोनों समझ रहे ho.aur तुम दोनों यहाँ क्या कर रही हो.

सरिता दी- हम तुम को बच्चे दिख रहे हैं. जो हमें कुछ समझ नहीं aayega.Pichhle एक घंटे से हम दोनों आप दोनों की रासलीला देख रहे हैं. और तुम बोल रहे हो की हम दोनों hi गलत समझ रहे हैं. आप दोनों को शर्म नहीं आई ऐसी गन्दी हरकत करते हुवे.

सरिता दीदी की बात सुनकर सविता दीदी रोने lagi.Unko रट देख कर मनीषा ने कहा.

मनीषा- अब रोने से क्या फायदा didi.Ye तो आपको ये हरकत करने से पहले सोचना चाहिए था.

सविता di-(rote huwe)-Mujhe माफ़ कर दे मनीषा. मुझसे बहुत बड़ी गलती हूँ गयी.

सरिता दी- अब इसका जवाब आप पापा मम्मी को देना. चल मनीषा यहाँ से.

इतना बोलकर सरिता दीदी मनीषा का हाँथ पकड़ कर जाने लगी तो सविता दीदी आगे बढ़कर उनका हाँथ पकड़ लिया और रट हुवे उनसे बोली.

सविता दी- सरिता मुझसे गलती हो gayi.Mujhe माफ़ कर de.Tu मुझे जो सजा देना चाहे दे दे. मगर ये बात मम्मी पापा का मत batana.Nahi तो मैं जिन्दा नहीं रहूंगी.

सरिता दीदी सविता दीदी की बात सुनकर रुक गयी. वो भी नहीं चाहती थी की दीदी अपने साथ कुछ गलत करे. दीदी की बात सुनकर मनीषा और दीदी दोनों भी दर gayi.Aur पलट कर दीदी की तरफ हो गयी और उन्हें देखने lagi.Savita दीदी को रोटा हुवा देखकर उन्होंने दीदी से कहा.

सविता दी- ठीक है मैं मम्मी पापा को कुछ नहीं बताउंगी. लेकिन आप दोनों ने ये बिलकुल भी सही नहीं kiya.Ham क्या सजा देंगे aapko.Chal मनीषा यहाँ से.

इतना कहकर दीदी मनीषा के साथ बहार निकल gayi.Unke बहार जाते hi सरिता दीदी बिस्टेर पर बैठ गयी और जोर जोर से रोने लगी. मैं दीदी को शांत करवाने laga.didi ने मुझे देखते हुवे रट हुवे कहा.

सविता दी- ये क्या हो गया अभी. मनीषा और सरिता ने सब देख लिया है. अगर उन्होंने ये बात किसी को बता दी तो क्या होगा. मैं तो अपनी hi बहनो की नज़र में गिर गई hoon.Kaise नज़र मिलाऊँगी मैं दोनों से.

दीदी की बात सुनकर अब मुझे भी अपना नाटक शुरू कर देना था, इसलिए मैंने दीदी के आँशु पोछते हुवे उनका सर अपने साइन से लगा लिया और उनके सर को सहलाते हुवे कहा.

मैं- कुछ नहीं होगा दीदी. वो दोनों आपसे बहुत प्यार करती हैं. वो किसी को कुछ नहीं बताएंगी. मैं बात करूँगा उन दोनों से. मैं समझाऊंगा उन्हें.

सविता दी- ये सब तेरी वजह से हुवा है. तू दरवाज़ा बंद करना कैसे भूल गया. अब मैं क्या karungi.Kaise उनके सामने jaungi.Kuchh समझ में नहीं आ रहा है.

मैं- वो आपको देखकर जोश जोश में दरवाज़ा बंद तो किया था, लेकिन लगता है सिटकिनी नहीं लगी थी. आप शांत हो जाइये. मैं बात करूँगा उन दोनों से. सब ठिक्क हो जायेगा.

सविता दी- क्या ठीक हो jayega.Main तो बदनाम हो गयी अपनी बहनो के samne.Kya सोच रही होंगी मेरे बारे में. की मैं कितनी गिरी हुई बहन हूँ जो अपने hi भाई के साथ ये सब कर रही हूँ.

दीदी के अंदर दर भी tha.Jo उनके चेहरे से साफ़ दिख रहा tha.Main दीदी को सांत्वना देते हुवे कहा.

मैं- बात तो आपकी सही hai.Lekin इन दोनों को कैसे शक हो गया. और इन दोनों ने देख लिया.

सविता दी- मुझे तो बहुत दर लग रहा है. सरिता ने कहा तो है की वो नहीं बताये गई पापा मम्मी को, लेकिन कही उसने बता दिया तो. मैं सच कह रही हूँ. अगर ये बात मम्मी पापा को पता चली तो मैं अपनी जान दे दूंगी. देख लेना तुम लोग.

मैं- ये क्या बकवास बाटे कर रही हैं आप. मैं भी तो आपके साथ पकड़ा गया हूँ. मम्मी पापा को मेरा भी तो पता चलेगा na.isliye आप परेशां मत हो. मैं कुछ करता हूँ.

सविता दी- क्या करेगा tu.Waise भी सरिता तेरे से हमेशा खुन्नस खाये रहती hai.Tu कैसे संभालेगा.

मैं- एक राष्ट है दीदी. आप कहो तो दोनों को पकड़ कर पेल देता हूँ. फिर तो वो किसी को कुछ नहीं बता पाएंगी. बोलो क्या बोलती हो आप.

मैंने ये बाटत होंडा मज़ाकिया अंदाज में kahi.Didi मेरी बात सुनकर भड़क गयी और बोली.

सविता दी- सेल यहाँ इतना बड़ा कांड हो गया है और तुझे मस्ती सूझ रही है. वो दोनों सविता नहीं हैं. जो तेरे निचे आ जाएँगी. अपनी फालतू की बक्वा सपने पास rakh.Aur कुछ सोच.

मैं- अच्छा आप रुको. मैं कुछ सोचता हूँ इस बारे में.

सविता di-tu अपना दिमाग न लगा. और जाकर उनसे अभी बात कर इस बारे में.

मैं- ठीक है दीदी आप यही रहिये मैं जा रहा hoon.Jo भी बात होती है आप को बताता हूँ.

इतना बोलकर मैंने दीदी के होंठो पर इ किश किया और कमरे से बहार आने लगा तो दीदी ने कहा.

सविता दी- अबे पागल है kya.Nanga hi जायेगा क्या उनके samne.Kapde तो पहन ले अपने.

मुझे तो अभी तक ख्याल hi नहीं था की मैं अभी तक नंगा hi hoon.Didi की बात सुनकर मैंने अपनी उव पहनी और दीदी के कमरे से बहार आ गया. मैं सिद्ध अपने कमरे में चला गया. पहले मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश हुवा उसके baad.Kapde पहनकर सरिता दीदी के कमरे में चला गया. वह दोनों बैठी हुई कुछ बाटे कर रही थी. मैं भी जाकर उनके पास बैठ गया और उनसे कहा.

मैं- आज तो तुम दोनों बहुत खुश hogi.Aakhir दीदी को तुम दोनों ने डरा hi दिया था.

मनीषा (हँसते huwe)-Haan बहुत खुश हूँ. अब तो कोई दिक्कत hi नहीं hai.Ab ये छुप छुप के और दर डरके छुड़वाने की जरूरत hi नहीं है.

मैं- लेकिन अभी कैसे होगा ये सब. दीदी अभी इसके लिए तैयार कहा हुई हैं.

सरिता दी- वैसे hi होगा जैसे दीदी हम दोनों के सामने छुड़वा रही थी. बल्कि बहुत जल्द hi दीदी खुद मुझे तेरे से छुडवाएंगी. बहुत hi जल्द.

मैं- लेकिन यार दीदी बहुत परेशां हैं. मुझसे उनकी परेशानी देखि नहीं जा रही है.

सरिता दी- थोड़ी समय बाद सब ठिक्क हो जायेगा यार. वाइस ीक बात तो है. तुमने क्या चुदाई की है दीदी की. दीदी इतनी छुडासी थी, मुझे तो पता hi नहीं था. शादी के बाद भी दीदी के अंदर बहुत आग है अभी.

मनीषा- तुम दोनों को चुदाई करते देखकर हम दोनों का बुरा हॉल हो गया था. मन कर रहा था की अंदर आ जॉन और दीदी को हटाकर खुद तुम्हारे निचे लेट जॉन.

मैं- तो आ जाती न. मन किसने किया था. तुम दोनों को को दीदी के सामने छोड़ देता( मज़ाक में). वैसे तुम तीनो बहाने बहुत गरम और चुड़क्कड़ हो.

सरिता दी- और हम सब को चुड़क्कड़ बनाया किसने है. तूने बनाया. तुम दोनों की चुदाई देखर देथो क्या हाल हो गया है. कैसे रो रही है हम दोनों की छूट.

इतना कहकर सरिता दीदी और मनीषा ने अपनी लेग्गी पर छूट के पास हाँथ रखकर मुझे दिखे.

सरिता दी- देखो. अपने भाई के लुंड से अपनी बड़ी बहन की छूट चुड़ते देखकर देखो कैसी गीली हो गयी है और बाकी का बचा खुचा काम मनीषा ने कर दिया. हमारी छूट बहुत गरम हो गयी है. तू कुछ कर न. हम दोनों को छोड़ कर ठंडा कर दे भाई.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी के होंठो पर अपना होंठ रख दिया और चूमने लगा. और अपना दूसरा हाँथ बढाकर उनकी छूट पर रख दिया और दबाने लगा. मनीषा भी गरम थी. उसकी छूट ने भी मेरी और दीदी की चुदाई देखकर पानी छोड़ दी थी. वो भी आकर मेरी पीठ से चिपक गयी और अपनी चूचियों को मेरी पीठ पर रगड़ते हुवे अपना एक हाँथ मेरे लुंड पर रख दिया और मेरी गार्डन चूमने लगी. मैं दीदी के होंठ चूमते हुवे दीदी की छूट को मुठी में भरकर दबाते हुवे कहा.

मैं- तुम दोनों तो लगता है बहुत ज्यादा गरम हो गयी हो. लेकिन अभी मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ. दीदी भी बहुत परेशां हैं. और मैं अभी अभी झाड़ा हूँ तो अभी ये ठीक नहीं है.

मनीषा मेरी बात सुनकर मेरे कण को अपने मुंह में भरकर चूसा और बोली..

मनीषा- क्या आपकी साडी ताकत दीदी को hi छोड़ने में चली गयी है. हम दोनों को कौन छोड़ेगा.

मैं- ठिक्क है मेरी मान. अभी मुझे दीदी को संभालना है. तुम दोनों को कभी भी छोड़ दूंगा.

सरिता दी- ठीक हैं. अभी तुमको जाने देते हैं, लेकिन बाद में तुमको नहीं छोड़ेंगे. वैसे एक बात बताओ अभी. मेरी तरकीब कैसी रही. बहुत जल्दी दीदी अपने साथ होंगी फिर तुम हम तीनो को एक साथ एक hi बिस्टेर पर रगड़ रगड़ कर छोड़ना. वाह्ह्ह क्या मज़ा आएगा फिर.

मैं- जरूर छोडूंगा तुम तीनो को, लेकिन सबसे पहले मैं तुम तीनो की गांड मरूंगा. बहुत जानलेवा गांड है तुम तीनो को. इसे देखते hi लुंड खड़ा हो जाता है. बहुत मज़ेदार गांड है तुम तीनो की.

इतना कहकर मैंने अपने हाँथ सरिता दीदी की गांड पर रख कर जोर से दबा दिया. और अपना एक हाँथ पीछे ले जाकर मनीषा की छूट पर रख दिया और जोर से दबा दिया. दोनों के मुंह से aaaaahhhhhhhhhhh अभी निकल गया. मैंने दोनों की छूट और गांड दबाने लगा. दोनों मचलने लगी. मनीषा ने कहा.

मनीषा- वैसे एक बात है. दीदी हम दोनों को देखकर बहुत दर गयी हैं. लेकिन उन्हें नहीं पता की जिनसे वो दर रही हैं वो दोनों खुद hi अपने भाई से चुदवाती हैं और अपने भाई पर मरती हैं.

मैं- मैं भी तो तुम तीनो पर मरता हूँ.

इतना कहकर मैंने अपना दोनों हाथ उठाकर सरिता दीदी की चुकी पर रख दिया और जोर से दबा दिया. जिससे सरिता दीदी के मुंह से एक चीख निकल गयी.

सरिता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ाभीईई. धीरे डब्बा. नहीं तो मेरीए चीख दीदी सुन्न लेंगी.

मैं- तो sun-ne दो न. अगर वो यहाँ पर आई तो उनको भी तुम दोनों के साथ पटक कर छोड़ दूंगा.

अभी मैंने इतना hi कहा था की तभी सरिता दीदी के कमरे का दरवाज़ा खुला और सविता दीदी अंदर आ गयी. उनका चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था. वो मुझे गुस्से से घूरे जा रही थी. दीदी को देखकर एक बार तो हम तीनो की गांड फैट गयी. सविता दीदी हमको गुस्से से देख रही थी. मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- दीदी आप…. यहाँन….. कैसी…

सविता दी- हां मैं यहाँ, क्योंन क्या हुवा. मुझे देखकर तुम खुश नहीं हुवे. तुम तो मुझे इनके साथ पटक कर छोड़ने वाले थे न. अब क्या हुवा. ये सब तुम तीनो की मिली भगत थी. तुम तीनो मिलकर मेरे साथ इतना गन्दा मज़ाक करोगे मैंने कभी सोचा नहीं था. और तुम अभी. तुमसे तो मुझे ये उम्मीद नहीं थी. तुमने ये अच्छा नहीं किया मेरे साथ.

इतना बोलकर दीदी एक बार फिर से रोटी हुई अपने कमरे में चली गयी. मैं भी दीदी के पीछे पीछे भगा. मेरे साथ साथ माणसीः और सरिता दीदी भी सविता दीदी के पीछे भागी. तब तक दीदी अपने कमरे में चली गयी थी और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया था. मैं दरवाज़ा pit-te हुवे दीदी से कहा.

मैं- दीदी दरवाज़ा खोलो. हमें आपसे बात करनी है. प्ल्ज़ हम सबको माफ़ कर दो.

सविता दी- कमीनो चले जाओ यहाँ से. मुझे तुम तीनो से कोई बात नहीं करनी है.

हम तीनो ने बहुत देर कोशिश की दीदी से बाटत करने की लेकिन दीदी ने दरवाज़ा नहीं खोला, निराश होकर हम तीनो सरिता दीदी के कमरे में आ गए और बिस्टेर पर बैठ गए. थोड़ी देर बाद सरिता दी ने कहा.

सरिता दी- चलो अच्छा हुवा जो दीदी को सब कुछ पता चल गया. अब हम लोगो के बिछ का सारा पर्दा हैट चुक्का है. अब जो भी होगा खुलकर होगा.

सरिता दीदी की बात सुनकर मुझे थोड़ा बुरा लग रहा था. इसलिए मैं बिना कुछ बोले उठकर उनके कमरे से बहार चला गया. मैं फिर से दीदी के कमरे के पास जाकर दीदी को दरवाज़ा खोलने के लिए कहा. पर दीदी ने जब दरवाज़ा नही खोला तो मैंने उनसे कहा.

मैं- दीदी अगर आपने तुरंत दरवाज़ा नहीं खोला तो मैं घर छोड़कर चला जाऊंगा.

मेरी इस बात का तुरंत असर हुवे. कुछ hi सेकंड में कमरे का दरवाज़ा खुल गया. मैं कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद कर दिया. दीदी बिस्टेर पर जा चुकी थी. वो हल्का हल्का रो रही थी. मैं भी चलते हुवे उनके बीएड के पास चला गया और उनके पास बैठकर दीदी की कमर पर हाँथ रखते हुवे कहा.

मैं- दीदी सुनो न. एक बार मेरी बायत तो सुन लो.

दीदी ने तुरंत मेरा हाथ झटक दिया और उठकर बैठ गयी और एक जोरदार & झन्नाटेदार थप्पड़ मेरे गलो पर जड़ दिया. मैं अपने गाल पकड़ कर बैठ गया. मेरा गाल लाल हो गया था. दीदी ने गुस्से के सहा.

सविता दी- दूर हैट मुझसे कमीने. छूना मत मुझे. मुझे नहीं पता था की तुम इतने गंदे और गिरे हुवे हो गए हो की सरिता और मनीषा को भी ख़राब कर डाला तूने. तेरे लुंड को ठंडक मुझ अकेले को छोड़कर नहीं मिलती थी क्या जो तूने उन दोनों को भी नहीं छोड़ा, खैर अब मैं तुझसे क्या कहु मैं तो खुद तुझसे चुदवाती हूँ. मैं तुमसे कुछ्ह कह भी नहीं सकती, बस तुम्हे उन दोनों के साथ मिलकर मेरे साथ इतना बड़ा खेल नहीं खेलना चाहिए था. तुमने मेरे साथ ज्यादती की है. मैं भी कैसे तुम्हारे साथ मस्ती में गन्दी गन्दी बाटे करते हुवे छुड़वा रही थी और छोड़ो छोड़ो बोल रही थी. बस मुज्झे तुमसे यही शिकायत है की जब तुमने हम तीनो को छोड़ hi लिया था तो काम से काम एक पर्दा जो हमारे बिच था वो तो रहने देते. तुम मुझे भी छोड़ते, सरिता को भी छोड़ते और मनीषा को भी छोड़ते. अब मैं समझ गयी हूँ की तुम्हारी वो 2 गफ कौन हैं. मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी अभी.

दीदी की बात सुनकर मैं भावुक हो गया. और उनके हाँथ को पकड़कर अपने सर से लगा लिया और बोलै.

मैं- सोररीयय दीदी. मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी. प्ल्ज़ मुझे माफ़ कर दो. आगे से जैसे आप बोलोगी मैं वैसा hi करूँगा. प्ल्ज़ दीदी मुझे माफ़ कर दो. सॉरी.

सविता di(mere हाँथ झटककर)- मैंने बोलै न मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है.

इतना कहकर दीदी ने कमरे का दरवाज़ा खोला और निचे हॉल में चली गयी. मैंने भी सोचा. अभी दीदी बहुत गुस्से में हैं. उन्हें थोड़ा समय देते हैं. शायद उनका गुस्सा उतर जाने के बाद वो मेरी बात सुने. इसलिए मैं सीधा अपने कमरे में आया और बिस्टेर पर लेटकर सो गया. शाम को मेरी आँख खुली तो मैं फ्रेश होकर निचे आया. मम्मी पापा भी कुछ देर में आ गए. थोड़ी देर बाद दीदी और मनीषा भी निचे आ गयी. किसी ने कोई बात नहीं की. खाना बन जाने के बाद सबने अपना खाना खाया मैंने दूध के लिए मन कर दिया और अपने कमरे में आकर बिस्टेर पर लेट गया और आगे क्या करना है वही सोचने लगा. लेकिन कुछ समझ में नहीं आ रहा था, इसलिए मैंने अपने सर को झटका और आँखे बंद करके सो गया.

सुबह मेरी आँख समय से खुली तो मैंने नित्य क्रिया से निपट कर निचे आया नास्ता किया और बहार निकल गया काम से. घर वापस आकर अपने कमरे में चला गया अपना काम किया और सो गया. इसी तरह 4 दिन निकल गए दीदी ने किसी से बात नहीं की, दी को लेकर हम तीनो भी चिंतित थे इसलिए हमारा भी मन चुदाई का नहीं करता था. फिर एक दोपहर जब मैं हॉल में बैठा था तो दी निचे आई . मैंने उन्हें देखते hi कहा.

मैं- कैसी हो दीदी (इतना कहकर मैंने दी के सर को पकड़कर उनके माथे पर किश कर लिए)

सविता दी- दूर हटो मुझसे (उन्होंने मुझे अपने आप से दूर धकेल दिया)

मैंने बेशर्मी करते हुवे आगे बढाकर दीदी को कसकर अपने गले लगा लिया और धीरे से कहा

main-haaiiiii मेरी प्यारी और खूबसूरत दीदी. आप कब तक अपने इस कमीने भाई से नाराज़ रहोगी. अरे यार अब छोड़ भी दो ये नाराज़गी. ऐसे कब तक हम सब से नाराज़ रहोगी मेरी जान.

सविता di(mujhe हटते हुवे) तो क्या करू. फिर से मनीषा और सरिता के सामने चुद जाऊ तुमसे. तो ये लो बुलाओ उनको निचे और उनके सामने hi छोड़ दो मुझको.

इतना कहकर दीदी ने अपनी सदी का पल्लू अपने साइन से हटा दिया. जिससे उनकी तानी हुई चूचिया ब्लाउज के ऊपर से hi ग़दर मचने लगी. मैंने दीदी के पल्लू से उनकी चूचिया ढकते हुवे कहा.

मैं- क्या यारर दीदी. क्यों बच्चो जैसी बाते कर रही हो. मैं माफ़ी तो मांग रहा हूँ न.

सविता दी- हाँ मैं तो बच्ची हूँ. जवान तो तुम हो गए ho.jo अपनी तीनो बहनो को छोड़ चुके हो. पता नहीं और कौन कौन हैं जिनको तू छोड़ता होगा.

मैं- अरे यारर दीदी. अब बहुत्त हो गया आपका. मैं कब से माफ़ी मांग तो रहा हूँ. और अब तो सब कुछ पता चल hi गया है फिर भी आप नखरा कर रही हो. अगर अब भी आप नाराज़ रही तो समझ लेना आप मैं सच में घर छोड़कर चला जाऊंगा.

सविता दी- हाँ चला जा घर छोड़ कर. मैं भी नहीं रोकूंगी तुझे. चला जा.

मैं- ठीक है दीदी. जब आप इतना कह रही हैं तो मैं जा रहा हूँ. अब आप बुलाओगी भी तब भी नहीं आऊंगा. आप hi जवाब देना घर वालो को की मैं क्यों घर छोड़कर चला गया.

सविता दीदी- हाँ चला जा. जहा जाना हो जा. लेकिन मुझसे बात करने की कोशिश मर कर.

दीदी की बात सुनकर मैं उनके कमरे से निकल गया और अपने कमरे में आकर कपडे पहने और अपना कुछ सामान अपने बैग में रख लिया और निचे जाने लगा. दीदी अपने रूम के दरवाज़े से मुझे जाता हुवा देख रही थी, लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका. मैंने अपनी बाइक निकली और घर से निकल पड़ा.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका सर जी।



बात तो आपकी सही है सर जी, लेकिन फिर तीनों बहनों को साथ में लेने की उसकी मंशा कभी पूरी नहीं होती🤗🤗🤗🤗

अभी सेक्स करने वाला बन्दा है। तो उसके लिए उसको जो सही लगा वो किया😁😁😁😁

देखते हैं आगे क्या होता है।

एक गुजारिश है आपसे की कहानी समाप्त होने के बाद पूरी कहानी का निचोड़ एक ही टिप्पणी में सकारात्मक या नकारात्मक जैसी भी लगी हो कहानी आपको जरूर दीजिएगा।



आगे के लिए साथ बने रहिए।
 
अपडेट-147

मैं- ठीक है दीदी. जब आप इतना कह रही हैं तो मैं जा रहा हूँ. अब आप बुलाओगी भी तब भी नहीं आऊंगा. आप hi जवाब देना घर वालो को की मैं क्यों घर छोड़कर चला गया.

सविता दीदी- हाँ चला जा. जहा जाना हो जा. लेकिन मुझसे बात करने की कोशिश मर कर.

दीदी की बात सुनकर मैं उनके कमरे से निकल गया और अपने कमरे में आकर कपडे पहने और अपना कुछ सामान अपने बैग में रख लिया और निचे जाने लगा. दीदी अपने रूम के दरवाज़े से मुझे जाता हुवा देख रही थी, लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका. मैंने अपनी बाइक निकली और घर से निकल पड़ा.

अब आगे.

घर से निकलने के बाद मैंने पापा को फ़ोन कर दिया की मैं अपने दोस्तों के अचानक इम्पोर्टेन्ट काम के लिए बहार जा रहा हूँ. आप लोगो के टूर पर जाने से पहले लौट आऊंगा. पहले तो पापा मन hi नहीं रहे थे लेकिन बहुत समझने के बाद वो मने. उसके बाद मैंने मनीषा को फ़ोन किया और उसे अपना सारा प्लान समझा दिया. मनीषा ने पूरा प्लान sun-ne के बाद कहा.

मनीषा- आपको क्या लगता है की हमारा ये प्लान वर्क करेगा. इससे दीदी की नाराज़गी दूर हो जाएगी.

मैं- मैं एकदम सूरे तो नही हूँ, लेकिन मैं जनता हूँ की दीदी मुझसे बहुत प्यार करती हैं. वो अभी नाराज़ जरूर हैं लेकिन बहुत जल्द वो मन जाएँगी उसके बाद सबकुछ अच्छा हो जाएगा.

सरिता दी- लेकिन ऐसा करने की क्या जरूरत थी. तुम कोई और तरीके से दीदी को मन सकते थे. लेकिन तुमने तो जोश जोश में घर hi छोड़ने का बोल दिया दीदी से.

main-Ye सब तुम्हारे खुराफाती दिमाग की वजह से हुवा है. मैं मन कर रहा था की ऐसा कुछ मत करना. मैं अपने तरीके से दीदी को हैंडल करूँगा, मगर तुम्हारी hi छूट में बहुत आग लगी थी. तुमको hi दीदी को साथ मिलकर चुदाई करवानी थी. अब जो हो रहा है उसे होने दो और इंतज़ार करो सब ठीक होने का.

सरिता दी- देख अभी तू ये गलत बोल रहा है. मन की मैंने जल्दबाज़ी कर दी, लेकिन ये सैम हमने हम सबके लिए hi तो किया था, लेकिन ऐसा हो जायेगा उसकी उम्मीद नहीं थी.

मैं- ठीक है अगर इन बचे हुवे समय में दीदी नहीं मणि तो भी मैं लौट आऊंगा. लेकिन मुझे उम्मीद है की वो मान जाएँगी. तुम अपन्ना और सविता दीदी का ख्याल रखना. bye.

मनीषा और सरिता दीदी को सब बताने के बाद मैं अपने एक दोस्त के यहाँ चला गया. जो किराये के माकन में रहता था. मैंने उसे अपनी प्रॉब्लम बताई, जो की झूठ थी. मैं उसके साथ कुछः दिन रहने वाला हूँ ये जानकर वो मन गया. मैंने अपना बैग निचे रहा और फ्रेश होकर कपडे बदल लिए. इसी तरह ये दिन भी निकल गया.

मेरे रात को घर न लौटने से सविता दीदी बहुत परेशां हो गयी, उनको लग रहा था की मैं केवल धमकी दे रहा हूँ, लेकिन मेरे न लौटने से वो जान गयी की मैं सही बोल रहा था. वो परेशानी में अपने बिस्टेर पर करवट बदल रही थी. थोड़ी देर बाद उन्हें नींद आ गयी.

अगली सुबह घर में सब पहले की hi तरह हुवा, मम्मी पापा जॉब पर चले गए. मैं भी अपने दोस्त के कमरे से अपने काम पर चला गया. पूरा काम निपटाया और वापस कमरे में आ गया. इस तरह ये दिन भी गुजर गया, ये दिन भी गुजर जाने और मेरे न लौटने से सविता दीदी बहुत परेशां हो गयी थी.

खाना खाने के बाद सब लोग जब अपने कमरे में चले गए तो सरिता दीदी ने किचन का पूरा काम समेटने के बाद अपने कमरे में आ गयी और थोड़ी देर कुछ सोचने के बाद अपना फ़ोन निकला और मुझे कॉल किया. मेरा फ़ोन रिंग हुवा. दीदी की कॉल देखकर मैंने फ़ोन सीलेंट पर रख दिया, मैं उनका फ़ोन नहीं काटना चाहता था, दीदी लगातार कॉल कर रही थी. लगभग 15 कॉल करने के बाद भी जब मैंने फ़ोन नहीं उठाया तो वो अपने कमरे से निकली और सरिता दीदी के कमरे की तरफ चली गयी. उन्होंने डोर नॉक किया. सरिता दी ने दरवाज़ा खोला. और जाकर बिस्टेर पर बैठ गयी. सविता दी ने अंदर आते हुवे कहा.

सविता दी- सरिता वो अभी कल से घर नहीं आया है और मेरा फ़ोन भी नहीं उठा रहा है. तुझे कुछ पता है की वो कहा गया है. मुझे बहुत घबराहट हो रही है.

सरिता दी- मुझे क्या पता की वो कहा गया है. वो तो आप को पता होगा न, क्योंकि आपने hi तो कहा था की वो चला जाये. वो आपसे इतना प्यार करता है की अपनी बात मानकर वो घर छोड़कर चला गया.

सविता दी- मैंने तो बस गुस्से में कहा था, मुझे थोड़ी hi पता था की वो सच में घर छोड़कर चला जायेगा. तुम लोगो ने मिलकर जो मेरे साथ किया उसकी वजह से मैं बहुत डिस्टर्ब हूँ और अभी के ऐसे चले जाने के बाद मुझे और भी दुखः हो रहा है. अगर तुझे पता है की वो कहा है तो उसे बोल की वो घर आ जाये.

सविता दीदी ये बात बोलते समय एकदम रुवासी हो गयी थी. सरिता दीदी ने जब ये देखा तो उनको बहुत बुरा फील हुवा. वो उठाकर दीदी के पास आयी और उन्हें अपने गले लगा liya.Sarita दीदी के गले लगकर दीदी रोने लगी. थोड़ी देर रोने के बाद दीदी जब नार्मल हो गयी तो उन्होंने सरिता दीदी से कहा.

सविता दी- देख न सरिता. एक तो तुम तीनो ने मिलकर मेरे साथ इतना बड़ा गेम खेला. और ऊपर से वो मुझसे नाराज़ भी हो गया. क्या मैं तुम लोगो से गुस्सा भी नहीं हो सकती. क्या मैं इतनी बुरी हूँ. बोलो.

सरिता दी- नहीं दीदी. आप बहुत अच्छी हैं दीदी. हम सब आपसे बहुत प्यार करते हैं. अभी भी आपसे बहुत प्यार करता है. इसलिए जब आपने कहा तो चला गया. आप ऐसा क्यों सोचती हैं दीदी. और मैं और मनीषा आपसे बिलकुल भी खफा नहीं हैं. वो तो बस गलती से हम लोगो ने आपके साथ थोड़ी मस्ती करनी चाही थी. हमें नहीं पता था की इसका ये नतीजा निकलेगा. मुझे माफ़ कर दीजिये दीदी. ी म सॉरी.

सविता दी- अब माफ़ी मांगने से क्या होगा. तुम लोगो ने जो मेरे साथ किया है उसे मैं नहीं भूल सकती. मैं तो बस इसलिए आई थी की अभी के बारे में कोई जानकारी मुझे मिल jaye.lekin लगता है मुझे तुम्हारे पास आना hi नहीं चाहिए था. अच्छा मैं चलती हूँ. तुम सो जाओ.

इतना कहकर सविता दीदी जाने लगी तो सरिता दीदी ने उन्हें रोकते हुवे कहा.

सरिता दी- रुकिये दीदी. मैं अभी को फ़ोन लगाती हूँ. और बोलती हूँ वापस आने के लिए.

इस दौरान दीदी ने मुझे मश्ग भेज दिया था की दीदी उनके पास आए हैं इसलिए अगर उनके फ़ोन आये तो थोड़ा संभल कर बात करू. सरिता दीदी ने मुझे फ़ोन किया. काफी रिंग होने के बाद मैंने फोन पिक किया तो सरिता दीदी ने फ़ोन स्पीकर पर डालते हुवे कहा.

सरिता दी- hello अभी कहाँ है तू. और ये क्या है कल से घर से गायब है. कुछ पता है हम सब कितना परेशां हो रहे हैं तुम्हारे ऐसे घर से चले जाने से. देख अभी अब बहुत हो गया. चुपचाप गर ाज़ा. नहीं तो बहुत मार पड़ेगी.

मैं- मैं नहीं आऊंगा घर. मेरा वह है hi कौन. मैं जिसको इतना प्यार करता हूँ. उसको भी मेरी कोई परवाह hi नहीं hai.kitni आसानी से बोल दिया की चले जाओ जहा जाना हो. तो मैं चला आया. अब मुझे नींद आ रही है. मैं फ़ोन रख रहा हूँ. bye.

इतना बोलकर मैंने कॉल डिसकनेक्ट कर दी. सरिता दीदी ने कॉल काटने के बाद सविता दीदी की तरफ देखा तो उनकी आँखों से ांशी निकल रहे थे. वो सिसक रही थी. दीदी ने आगे बढाकर उन्हें गले लगाने की कोशिश की तो वो रोटी हुई अपने कमरे में चली गयी और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया. सरिता दीदी उनके पीछे पिचई gayi.lekin उन्होंने दरवाज़ा नहीं खोला, थकहार कर सरिता दीदी वापस अपने कमरे में आ गयी.

सरिता दीदी ने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और मुझे फिर से फ़ोन लगाया. मेरे कॉल उठाने के तुरंत बाद hi दीदी ने कहा.

सरिता दी- देख अभी अब बहुत हो गया तेरा नाटक. मुझसे दीदी की हालत देखि नहीं जा रही है. अब जो होना था हो गया. अगर दीदी अपनी इच्छा से हम लोगो के साथ मिलकर नहीं छुड़वाना चाहती हैं तो जाने दे. लेकिन अब तू घर लौट आ. दीदी सच में बहुत परेशां हैं यार. कही वो कुछ गलत कदम न उठा ले.

सरिता दीदी की बात सुनकर मुझे भी सविता दीदी की चिंता होने लगी. मैंने सरिता दीदी से कहा.

मैं- ठीक है दीदी. मैं कल शाम तक घर आ जाउगा. अब जो भी होगा बाद में देखेंगे.

इतना कहकर मैंने कॉल डिसकनेक्ट कर दी और सोने के लिए कमरे में चला गया. सुबह उठने के बाद मैं फ्रेश हुवा और नास्ता करके दोस्त के कमरे से काम पर चला गया. और जाते समय ये भी बता दिया की मैं आज घर जा रहा हूँ. थोड़ी देर काम करने के बाद मैं वह से निकला और जाकर एक पार्क में बैठ गया. मैं सोचने लगा की अब कुछ नहीं हो सकता जो सोचा था, दीदी तो मन hi नहीं रही हैं. सरिता दीदी ने भी रत में घर आने के लिए बोल दिया है. अब घर जाना hi होगा मुझे. अभी मैं ये सब सोच hi रहा था की मेरा फ़ोन बजा. मैंने देखा तो सविता दीदी की कॉल थी. मैंने कुछ देर फ़ोन बजने दिया. फिर मैंने फ़ोन रिसीव किया और दीदी से कहा.

मैं- hello दीदी. आप कैसी हैं.

सविता दी- (सिसकती हुई आवाज़ में) मुझे रुलाकर पूछता है मैं कैसी हूँ. तुझे मेरी तनिक भी फ़िक्र नहीं है. पता है मैं कितना दर गयी थी तुम्हारे फ़ोन ने उठाने से. कहा है तू.

मैं- अब इससे आपको क्या लेना देना मैं कही भी हूँ. आपने जो कहा मैंने तो वही किया फिर इस सवाल का क्या मतलब है.

सविता दी- मैंने कुछ नहीं कहा था समझा. और तू जहा भी हो. घर आ जा.

मैं- घर आ कर मैं क्या करूँगा. आप मुझसे बात hi नहीं करती. सरिता दीदी और मनीषा भी आपकी वजह से परेशां हैं. तो मैं क्या करूँ घर आकर.

सविता दी- अच्छा मतलब इस सब की जिम्मेदार मैं hi हूँ. बोलो, और तुम तीनो ने मिलकर जो किया उसके बाद मुझे तुम लोगो से नाराज होने का भी हक़ नहीं.

मैं- ठीक है न तो अब आप कुश है न. अब मेरी क्या जरूरत है आपको.

सविता दी- अच्छा अब ज्यादा नाटक मत कर और जल्दी से घर आ जा. नहीं तो कान के निचे एक बजाऊंगी.

मैं- घर आने का क्या फायदा. जब आप hi मुझसे नाराज़ हैं दीदी.

सविता di-main तुझसे अब नाराज़ नहीं हूँ. मैं किसी से भी नाराज़ नहीं हूँ. अब तो आ जा वापस.

मैं- अब क्या करने आऊं घर. जब आप भाव hi नहीं दे रही हैं मुझको

सविता दी- अब और कितना भाव दूँ तुमको. छूट तो पहले hi मार चुके हो उन दोनों के सामने और गांड भी आगरा में मार चुके हो. अब और कितना भाव दूँ तुमको मैं.

main(didi की बात से गरम होते हुवे)- वो तो आपने एक hi बार मरने दी थी.

अब दीदी बिलकुल नार्मल हो गयी थी और मुझसे खुलकर बात कर रही thi.meri बात सुनकर दीदी ने कहा.

सविता दी- अबे सेल. क्यों झूठ बोल रहा है. कितनी बार तो मेरी छूट छोड़ चुक्का है. और गांड को छोड़ छोड़ कर फाड़ दिया और और बोल रहा है की एक hi बार मरने दी थी.

इतना सुनकर मैंने फ़ोन डिसकनेक्ट कर दिया. दीदी ने फिर से फ़ोन किया मैंने फिर से फ़ोन कट कर दिया. दीदी ने फिर से फ़ोन किया तो मैंने फ़ोन पिक कर लिया और उनसे कहा.

मैं- अब क्या है. क्यों परेशां कर रही हो आप. आपके मन का कर दिया फिर भी आप खुश नहीं हैं.

सविता दी- अरे अभी. ऐसे क्यों बात कर रहा है. अच्छा ठीक है मैं तुझसे नाराज़ नहीं होउंगी kabhi.tu घर आ जा भैई. मुझे तेरे बिना बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा है.

मैं- ठीक है दीदी मैं एक शर्त पर आऊंगा घर वापस. नहीं तो नहीं.

सविता दी- और वो शर्त है क्या. देख तू कुछ ऐसा मत बोलना जिसे मैं पूरा न कर पौन.

मैं- मुझे आपको , मनीषा को और सरिता दीदी को एक साथ और एक hi बिस्टेर पर छोड़ना है. और मैं जब घर औ तो आप hi गेट खोलो और उस समय आप ब्रा और पंतय hi कपनी होनी चाहिए. तभी तो मुझे पता चलेगा की आप मुझसे नाराज़ नहीं हैं. बोलो मंजूर है.

सविता दी- देख अभी. ये कुछ ज्यादा हो रहा है. मैं सच में तुझसे नाराज़ नहीं हूँ यार

मैं- मैंने जो कहा वो अगर आपको मंजूर हो तभी बात करो नहीं तो फ़ोन रख दो.

सविता दी- देख अभी तेरी ख़ुशी के लिए मैं ब्रा पंतय पहन कर दरवाज़ा खोलूंगी. लेकिन मनीषा और सरिता के साथ एक hi बिस्टेर पर……. नहीं अभी ये मुझसे नहीं होगा.

मैं- ठीक है दीदी फिर भूल जाओ की मैं घर आऊंगा. चलो अब फ़ोन रखो.

इतना कहकर मैंने फ़ोन कट कर दिया. दीदी ने फिर से फ़ोन किया मैंने नहीं उठाया. उन्होंने फिर फ़ोन किया तो मैंने फ़ोन उठाया और उनसे कहा.

मैं- अब क्या है दीदी.

सविता दी- तू सच में मुझसे प्यार नहीं करता अभी. तू बस मुझसे प्यार का दिखावा करता है. अगर तू सच में मुझसे प्यार करता तो मेरी बात जरूर मंटा.

दीदी की बात सुनकर मुझे लगा की शायद मैं कुछ ज्यादा hi रियेक्ट कर रहा हूँ. दीदी की बात से तो एक बात साफ हो गयी थी की वो देर सबीर फोर्समे के लिए मन hi जाएँगी. इसलिए मैंने दीदी से कहा.

मैं- ठीक है दीदी मैं घर आऊंगा, लेकिन आप दरवाज़ा वैसे hi खोलना जैसे मैंने बताया है.

सविता दी- (खुश होते huwe)Thik है अभी. जैसा तू बोल रहा है मैं वैसे hi दरवाज़ा खोलूंगी, लेकिन मुझे कैसे पता चलेगा की वो तू hi है. अगर गलती से कोई और हुवा तो.

मैं- हाँ आप सही कह रही हैं दीदी. ये बात तो मैंने सोची hi नहीं.

सविता दी- हाँ तू सोचेगा कैसे तेरा दिमाग तो हर वक्त बहनो की छूट और गांड में लगा रहता है. तू मुझे पहुंचने के बाद फ़ोन कर देना. ठीक है. अब जल्दी से घर आ जा.

उसके बाद दीदी ने फ़ोन डिसकनेक्ट कर दिया. मैंने तुरंत सरिता दीदी को फ़ोन करके पूरी बात बता दी और उनसे ये भी कह की जब मैं घर औ तो वो कमरे से बहार न निकले. उसके बाद मैंने पार्क से बहार आया और अपनी बाइक स्टार्ट कर के घर की तरफ चल पड़ा. घर पहुंचने के बाद मैंने सविता दीदी को कॉल किया. थोड़ी देर बाद सविता दीदी ने आकर दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खोलते hi हैं सविता दीदी को देखता रह गया. सविता दीदी ने ब्रा और पंतय पनही हुई थी. लेकिन उन्होंने जो ब्रा पंतय पहनी हुई थी वो एकदम झीनी थी. जिसमे से उनकी चूचिया और उनके निप्पल साफ साफ नज़र आ रहे थे. उसके साथ छूट भी पंतय से पूरी साफ साफ नज़र आ रही थी. मैं तुरंत hi घर के अंदर आया और दरवाज़ा बने कर लिया.



दरवाज़ा बंद करने के बाद मैंने पलटकर दीदी की तरफ देखने लगा. दीदी अपनी तरफ मुझे देखता पाकर अपनी पलके झुका ली. मैं चलता हुवा दी के पास गया और उनकी कमर में हाँथ डालकर उन्हें अपनी तरफ खींच लिया. दीदी की चूचिया सीधे मेरे साइन में टकराई और उनकी छूट में मेरा लुंड टकरा गया. दोनों के मुंह से सिसकी निकल गयी. मुझसे चिपकने के बाद दीदी ने अपनी नज़ारे उठायी मैं दीदी की आँखों में देखने लगा. दीदी की आँखे एकदम नशीली हो गयी थी. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- वह दीदी. बहुत कमल की मॉल लग रही हो तुम तो. और बहुत गरम भी हो गयी हो.

मेरी बात सुनकर दीदी मेरे कंधे पर मरने लगी. और मुझसे बोली.

सविता दी- कभी तो तू मुझसे एक भाई की तरह बात कर लिया कर. हर समय ठरकी hi बना रहता है.

मैं- तो क्या इरादा है दीदी. चालू तुम्हारे कर्म में तुम्हारी छूट मरने.

सविता दी- हाँ ठीक है छोड़ लेना मुझे, लेकिन अभी नहीं रत में जब सब सो जायेंगे.

मैं- मैं तो सोच रहा हूँ की मनीषा और सरिता दीदी को यही बुला लू और तुमको इस सोफे पर उनके सामने हो छोड़ दू. बोलो क्या कहती हो.

सविता दी- देख अभी. मैंने कहा था न की ये सब बाटे मुझसे न किया कर लेकिन तू फिर शुरू हो गया. अब मुझे ज्यादा गुस्सा मत दिलाना. नहीं तो तेरे लिए अच्छा नहीं होगा.

मैं- ठीक है दीदी. नहीं बुलाता उन दोनों को. लेकिन आज तुम्हारी छूट बहुत बुरी तरीके से मरूंगा.

सविता दी- अच्छा. कितनी बुरी तरीके से मरेगा अपनी दीदी की छूट. बता न.

मैं- मैं तुम्हे पहले नंगा करूँगा और तुम्हे कुटिया बनाकर हचक हचक कर तुम्हारी छूट छोडूंगा. और तुम्हारी गांड फि फाड़ दूंगा आज. तुम देखती जाओ.

मेरी बात सुनकर दीदी गरम हो रही थी. इसलिए वो अपना एक हाँथ अपनी छूट पर लेजाकर उसे सहलाने लगी. दीदी अपने होंठ भी मस्ती में काटने लगी. वो मुझे नशीली नज़रो से देखती हुई बोली.

सविता दीदी- अच्छा. बड़ा आया गांड फाड़ने वाला. ये बता मनीषा और सरिता को कितनी बार छोड़ा है.

मैं- ये मुझसे क्या पूछ रही हो दीदी. उन्ही से जाकर पूछ लो वो बताएंगी तुमको.

सविता दी- तू सच में बहुत कमीना है. मेरी गैर मौजूदगी में तुमने उन दोनों को छोड़ दिया और अब मुझसे कह रहा है की मैं जाकर उनसे पुछु की अभी ने कितनी बार तुम दोनों को छोड़ा है.

main-Ab तुम hi जीजा जी के साथ चली गयी थी तो मुझे किसी न किसज को छोड़ना hi था. और मनीषा और सरिता दीदी से ज्यादा अच्छा और सेफ और कौन हो सकता था. इसलिए मौका देख कर उन दोनों को छोड़ दिया.

सविता दी- तू सच में बहुत कमीना है बे. अब तू जा अपने कमरे में फ्रेश हो कर फिर आना मेरे कमरे में.

मैं- अगर फिर से मनीषा और सरिता दीदी ने देख लिया चुदाई करते हुवे तो.

सविता दी- देख लेंगी तो क्या होगा. और कौन सा पहली बार देखेंगी. मुझे अब कोई फर्क नहीं पड़ता.

दीदी की बात सुनकर मैं अपने कमरे में जाने के लिए मुदा तो देखा मनीषा और सरिता दीदी हॉल में खड़े थे और हम दोनों को देखकर मुस्कुरा रही थी. दी ने उन्हें जब देखा तो सरमाकर अपनी नज़रे निचे कर ली. सरिता दी ने मुझे देखते हुवे मुस्कुराकर कहा.

सरिता दी- कहा था तू अभी तक. दो दिन से गायब था. तुझे पता है दीदी की क्या हालत हो गयी थी. तेरी याद में रो रही थी. देखो दीदी को तेरे स्वागत के लिए उन्होंने ब्रा पंतय पहनकर तेरा स्वागत किया.

सरिता दीदी की बात सुनकर सविता दीदी सरमने लगी और सरिता दीदी से बोली.

सविता दी- ऐसा कुछ भी नहीं है समझी. वो तो मैं नहाने जा रही थी. तभी अभी आ गया. और कुछ नहीं है जैसे तुम सोच रही हो. वैसे बहार दो दिन से पता नहीं क्या कर रहा था ये.

मनीषा- क्या कर रहा था का क्या मतलब. जो घर में करते हैं वही बहार भी करते होंगे.

मैं- घर में मैं तो सिर्फ अपना काम hi करता रहता हूँ.

सरिता दी- हाँ वो तो हमने देखा की तुम दीदी के साथ बहुत म्हणत वाला काम कर रहे थे.

सविता di-(tunakkar) कह तो ऐसे रही हो जैसे तुम दोनों तो इसके साथ म्हणत वाला काम करती नहीं हो.

सरिता दी- अच्छा अच्छा. लड़ाई की कोई जरूरत नहीं है. आप लोग अपना काम शुरू करिये. चल मनीषा हम दोनों चलते हैं अपने कमरे में.

इतना कहकर दोनों ऊपर अपने कमरे में चली गयी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-148

इतना कहकर दोनों ऊपर अपने कमरे में चली गयी. मैं भी दीदी के होंठो को चूमकर अपने कमरे में चला गया और फ्रेश होकर निचे आ गया. दीदी अपने कमरे में जा चुकी थी. थोड़ी देर बाद मनीषा किचन से बहार आई और मुझसे बोली.

मनीषा- क्या यार भाई. अब इतने दिन हो गए हैं. हम दोनों का भी कुछ ख्याल करो.

मैं- तुमको तो पता है मनीषा. दीदी को भी अपने साथ मिलाना है इसलिए दीदी के साथ ज्यादा समय बिताना पड़ेगा. बात को समझा करो यार.

manisha-kya समझू यार. कितने दिन हो गए हैं चुदाई को. मेरी छूट तड़प रही है. पता नहीं कब चुदाई नसीब होगी. ये सब सविता दीदी की वजह से हो रहा है. न खुद चुदवाती है और न की हमको छोड़ने देती है. कामिनी कही की.

main(thoda गुस्से में). मनीषा क्या बकवास कर रही हो तुम. वो दीदी हैं तुम्हारी.

manisha-Sorry भैया. वो थोड़ा गुस्से में बोल गयी. दोबार ऐसा नहीं होगा.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना होंठ उसके होंठो पर रख दिया और एक लम्बी किश किया और और मनीषा के कहा.

मैं- फ़िक्र मत करो मनीषा. मैं तुम दोनों को छोडूंगा. तुम्हारी प्यास बुझाऊंगा.

मनीषा- तो फिरर आज hi बुझाइये भैया. बहुत मस्ती चढ़ गयी है हम दोनों को. सरिता दीदी का तो और भी बुरा हाल है. मैं तो कहती हूँ आज आप हम दोनों को खूभ अच्छी तरह से छोड़ो बहिया.

मैं- ठीक है मनीषा तुम चलो मैं आता हूँ तुम्हारे कमरे में.

मनीषा- भैया एक बात कहूं. दीदी हमारे साथ मिलकर नहीं छुड़वाना चाहती, बल्कि ये कहे की वो हम दोनों के सामने आपसे नहीं छुड़वाना चाहती, लेकिन आप तो उनके सामने हम दोनों को छोड़ hi सकते हो न.

अभी हम बात कर hi रहे थे की सरिता दीदी भी निचे आ गयी और सोफे पर बैठ गयी.

मनीषा- देखो भैया. मैं ये कह रही हूँ की हम सब एक साथ दीदी के कमरे में चलते हैं और आप हम दोनों के वही गरम करके चुदाई शुरू कर देना. हो सकता है हम दोनों की चुदाई देखकर दीदी के अंदर भी ऐसा कोई कीड़ा रंग जाये और वो मान जाये.

मैं- कैसी बात कर रही हो मनीषा. दीदी का गुस्सा अभी अभी शांत हुवा है और तुम फिर से उन्हें गुस्सा दिलाना चाहती हो. नहीं ये सही नहीं है. कही फिर से दीदी नाराज़ हो गयी तो.

सरिता दी- क्या यार अभी. इतना दिन हो गए तुझे हम सब को छोड़ते हुवे और तू अभी भी दर रहा है.

मैं- मैं दर नहीं रहा हूँ. मगर मेरी समझ में एक बात नहीं आ रही है की दीदी के सामने तुम दोनों को अपनी छूट छुड़वाने में ऐसा कौन सा मज़ा मिलेगा. जो अकेले में नहीं मिलेगा.

सरिता di-haaayyyyyy. तुझे क्या पता अभी. ये सोचकर hi मेरी छूट गीली हो जाती है की मैं दीदी के सामने तेरा लुंड अपनी छूट में लुंगी. जब सोचने से hi मेरा ये हाल है. तो तुम सोचो अभी. की अगर सच में दीदी के सामने तुम मुझे छोड़ोगे तो मेरा क्या हाल होगा. कितने मज़ा आएगा.

मैं- अच्छा. दीदी के सामने न छोड़ू तुमको को क्या काम मज़ा आता है क्या.

Manisha-Aree ह्ह्ह्हहईय्यययय भैया तुम नहीं समझोगे. कितना मज़ा आएगा. क्या तुम्हारा दिल नहीं करता की तुम्हारी तीन गरम मॉल बहन एकदम छुडासी होकर अपनी छूट खोलकर एक hi बिस्टेर पर लेती हूँ और तुम तीनो की छूट को बरी बरी से अपने लौड़े से छोड़ो.

मैं- करता तो बहुत है यार लेकिन दीदी मन hi नहीं रही हैं न.

सरिता दी- तो बस फिर देर किश बात की मनीषा की बात में डैम है. उसकी बात मनो और आज दीदी के सामने hi हम दोनों को छोड़ो. हो सकता है ये चुदाई देखकर दीदी भी इस चुदाई में शामिल हो जाये.

मैं- कही ऐसा है हो की जो थोड़ा बहुत काम बनता दिख रहा है वो भी न बिगड़ जाये.

मनीषा- मनीषा का प्लान कभी फ़ैल नहीं होता भैया. उसका नमूना आप देख hi चुके हैं.

मनीषा ये बात सरिता दीदी की तरफ इशारा करके कहती है. जिसको दीदी भी समझ जाती हैं और उनके चेहरे पर एक मुस्कराहट आ जाती है. तभी सविता दीदी भी निचे आ गयी और सोफे पर baith-ti हुई बोली.

सविता दी- क्या कर रहे हो तुम सब यहाँ बैठ कर.

मनीषा- कुछ कांड करने की तयारी कर रहे हैं दीदी.

सविता दी- कैसा कांड.

मनीषा- (मनीषा हस्ते हुवे) वही जो आप और भैया उस दिन कर रही थे.

मनीषा की बात सुनकर सविता दीदी एक पल के लिए शोक हो गयी. फिर थोड़ी देर कुछ सोचते हुवे बोली.

सविता di-Dekho मनीषा. वो हम दोनों से एक गलती हो गयी थी. जिसके लिए मैंने तुम दोनों से माफ़ी भी मांग ली है. मैं तुम दोनों को दोषी भी नहीं मन रही हूँ. तो प्ल्ज़ तुम दोनों मुझे बात बात पर बेइज़्ज़त मत करो. मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूँ.

सरिता दी- वैसे आपकी गलती बड़ी हसीं गलती थी. ऐसे गलती हो हम बार बार करना चाहेंगे.

सविता दी- देखो सरिता मैं तुम लोगो से कोई बहस नहीं करना चाहती हूँ. वो बस एक गलती थी मेरी. और मैं तुम दोनों से भी यही काऊंगी की तुम दोनों भी जो कुछ इस कमीने के साथ कर रही हो उसे भूल जाओ. और ज़िन्दगी में आगे बढ़ो. तुम दोनों तो अभी कुंवारी भी नहीं हो. अगर कुछ उच्च नीच हो गयी तो क्या मुंह दिखाओगी दुनिया वालो को. कैसे सामना करोगी घर वालो का.

क्योंकि सरिता दीदी और सविता दीदी दोनों बहुत क्लोज थे. हर बात शेयर करते थे एक दूसरे से. वो दीदी के साथ झ्यादा फ्री थी मनीषा के मुकाबले इसलिए सविता दीदी की बात सुनकर सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दी- अब कहे का कुंवारी दीदी. मैंने तो अभी के साथ सुहागदिन भी मन लिया है. मनीषा ने भी अपनी छूट और गांड फड़वा ली है अपने यार से. और आप शादी शुदा हैं फिर भी आप अभी से चुदवाती हैं.

सविता दी- सच में तुम सब पागल हो गए हो. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की हम सब एक दिन बैठकर आपस में ऐसी बाते करेंगे. वो भी अभी के सामने.

सरिता दी- अब जो भी हो रहा है इसमें कोई कुछ नहीं कर सकता. वैसे एक बात काहू आपसे.

सविता दीदी अभी तक पूरी तरह से खुलकर बात नहीं कर रही थी, लेकिन वो अब आपस की बातो से गरम जरूर हो रही थी. तभी तो वो अपने पेअर को आपस में कभी इधर तो कभी उधर कर रही थी. अपनी हथेली मसल रही थी. कभी कभी अपना हाँथ सेकंड भर के लिए अपनी छूट पर रख देती थी. दी ने कहा.

सविता दी- अब इतनी बेशर्मी कर hi रही हो तो पूछ क्यों रही हो. बोलो जो बोलना हो.

सरिता दी- चलो ठीक है दीदी. हम तो कुंवारी हैं. हम दोनों को तो इस मज़े के बारे में पता hi नहीं थी , लेकिन आप तो शादी शुदा हैं. फिर भी आपका कैसे दिल किया अभी के साथ ये सब करने का.

सरिता दीदी की ये बात मुझे भी अच्छी नहीं लगी तो मैंने सरिता दीदी को टोकते हुवे कहा.

मैं- दीदी ये क्या बकवास कर रही हो आप. वो बड़ी बहन हैं हम सब की. इस बात का ध्यान रखो.

सरिता दी- तुम चुप रहो अभी. तुम्हे बोलने की जरुरत नहीं है. हाँ तो दीदी जवाब दीजिए.

सविता di-(nazar झुककर)- मैंने कहा न की वो सब गलती हो हो गया.

सरिता दी- क्यों झूठ बोल रही हो दीदी. ये सब गलती से हो गया या फिर आपको अभी का मोटा लुंड पसंद आ गया था. कैसे उस दिन उछाल उछाल कर छुड़वा रही थी. मुझे पता है आपको जीजा जी संतुष्ट नहीं कर पते. इसीलिए आप ने वो संतुष्टि अभी में तलाश कर ली.

सविता दी- मैंने कहा न की वो सब मुझसे गलती से हो गया. और तुम लोग भी काम नहीं हो. तुम तीनो में गेम प्लान करके मुझे मिलकर फसाया ताकि मैंभी तुम्हारी साथ मिल जॉन और तुम सब पूरी आज़ादी के साथ मस्ती कर सको और तुम्ही कोई रोकने वाला न हो. मैंने तुम तीनो की बाते सुन ली थी उस दिन.

सरिता di-(unchi आवाज़ में)- हाँ मैंने hi आपको पकड़कर अभी के लुंड पर बैठाया था और कहा था की अभी से उछाल उछाल कर छुड़वाओ.

सविता दी- तुम्हे शर्म नहीं आती अपनी बड़ी बहन से ऐसी ओछी बात करते हुवे. तुम तो छोटे बड़े का लिहाज़ hi भूल गई ho.dekh लो अभी. तुम्हारी सरिता दीदी कैसे बात कर रही हैं मुझसे.

सरिता दी- अच्छा जब उस दिन मेरी बड़ी बहन अपने भाई से मेरे सामने उछाल उछाल कर छुड़वा रही थी तब ओछी बात नहीं लगी जब बोल रही थी की “अभी पूरा लुंड मेरी छूट में दल दो. फॉर दो मेरी छूट को” और अपनी ये बड़ी बड़ी गांड उठा उठा कर पूरे मज़े से लुंड अंदर ले रही थी तब ये बात ओछी नहीं लगी थी. आखिर भैई के लुंड और जीजा के लुंड में फरक जो है. क्यों दीदी.

सरिता दी( गुस्से में). अब तुम चुप हो जाओ सरिता नहीं तो मार खा जाओगी मेरे हांथो से. मुझे तो बहुत भासन दे रही है. पता नहीं मेरे जाने के बाद कितनी चुदाई करवाई है तूने अभी के साथ. तुम्हारी छूट सही सलामत है भी या अभी ने छोड़ छोड़ कर भोसड़ा बना दिया है.

एक नार्मल बात चित से शुरू हुई बातचीत ने एक भयानक रूप ले लिया था. मेरी दोनों बड़ी बहाने खुलकर सामने आ गयी थी. और जो मन में आ रहा था बोले जा रही थी. ऐसा लग रहा था की जैसे कोई किसे प्रतियोगिता चल रही है और दोनों एक दूसरे का सवालो का जवाब दे रही हो. मैं और मनीषा मूक दर्शक बने कभी सविता दीदी को देख रहे थे तो कभी सरिता दीदी को. मनीषा ने दोनों की बात को kat-te हुवे कहा.

मनीषा- ये क्या आप दोनों बिल्लियों की तरह झगड़ रही हो. शांत हो जाओ आप दोनों.

सरिता दी- तू चुप कर मनीषा. आज फीअसला होकर रहेगा. हम तो दीदी मैं कौन सा इस बात से मुकर रही हूँ की मैं तो अभी से खूब चुदवाती हूँ. और मुझे मज़ा भी आता है अपने भाई से छुड़वाने में.

सविता दी- हाँ तो उसी तरह मैं भी चुदवाती हूँ अभी से और मुझे भी मज़ा आता है छुड़वाने में.

दीदी ने बात तो बोल दी, लेकिन बाद में उन्हें एह्साह हो गया की उन्होंने क्या बोलै है. मैं भी दीदी की बात सुनकर मुस्कुरा दिया. सरिता दीदी ने अपनी बातो में फसकर सविता दीदी से ये बात बुलवा hi दी. और दीदी इतनी गरम हो गयी थी की अब वो पीछे हटने वाली नहीं थी.

सरिता दी- जब आपको भी अभी से छुड़वाने में इतना मज़ा आता है तो इतना नखरा किस लिए कर रही हो. इतनी शर्मीली क्यों बन रही हो. खुल कर बोल दो की अभी के लुंड का चस्का लग गया है आपको.

सविता दी- (जोश में आकर) हाँ मुझे चस्का लग गया है अभी के लुंड का. बोल क्या करेगी तू.

सरिता दी( मुस्कुराकर)- मैंने क्या करना है. चस्का तो आपको अभी के लुंड का लगा है तो जो कुछ भी करना होगा वो अभी hi karega.aur जब चस्का लग hi गया है तो हमारे साथ hi अभी से छुड़वाया करो. छुप छुप कर छुड़वाने की क्या जरूरत है.

सविता दी- हाँ ये मेरी छूट है. मैं जहा चहु. जैसे चहु वैसे अभी से अपनी छूट छुड़वा सकती हूँ. तुम्हे क्यों इतनी जलन हो रही है.

सरिता दी- मुझे कोई जलन नहीं हो रही है. ये मेरी भी छूट है. मैं भी जहा चाहूँ, जैसी छहों. अभी से अपनी छूट छुड़वा सकती हूँ. आपको समझने की जरूरत नहीं है.

मैं और मनीषा कभी सरिता दीदी की तरफ देखते तो कभी सविता दीदी की तरफ. जो भी बोलने लगता हम दोनों की मुंडी उनकी तरफ हो जाती. अब हम दोनों को दो बिल्लियों की लड़ाई माँ मज़ा आ रहा था.

सविता दी- तेरे अंदर तो बड़ी आग लगी है सरिता. मेरी बाते तुझे कहा समझ आएगी.

सरिता दी- अच्छा. मेरे अंदर बड़ी आग लगी है तो क्या आपके अंदर आग नहीं लगी जो अभी का इतना लम्बा और मोटा लौड़ा अपनी छूट में घुसवा लेती हो. और बोलती हो और अंदर घुसा. मुझे तो लगता है एक दिन कही आप अभी को hi अपनी छूट में न घुसा लो.

सरिता दीदी की बात सुनकर मुझे हंसी आ गयी और मैंने हँसते हुवे कहा.

मैं- अरे यार सरिता दीदी. चुप हो जाओ आप. क्यों बात का बतंगड़ बना रही हो.

सरिता दी- नहीं मैं चुप नहीं होउंगी. ये मुझे क्यों रोक रही हैं फिर.

सविता दी- मुझे क्या रोकना है अब. तुम्हारी जहा मर्जी वह छुड़वा तो कामिनी.

सरिता दी- देखे दीदी . गली मत देना नहीं तो मेरे मुंह से भी कुछ निकल सकता है. डरपोक कही की. लुंड छूट में लेती हो लेकिन छुप छुप कर. हिम्मत है तो मेरे सामने लेकर दिखाओ.

सविता दी- ठीक हैं मैं डरपोक हूँ. तुम तो बहादुर हो. तुम सब के सामने छुड़वा लेना

सरिता दी- हाँ मैं छुडवाउंगी सबके सामने. मुझे किसी का दर नहीं है.

सविता दी- बंद करो अपनी बकवास. तुमसे तो बात करना बेकार है. मैं जा रही हूँ सोने.

सरिता दी- देखो फिर झूठ बोल रही हैं. छूट में खुजली हो रही है उसे जो मोटवानी है तो बहाना तो बनाएगी न. नहीं तो छूट की खुजली कैसे मिटेगी.

सविता di(jate हुवे पलटकर)- हाँ हो रही है मेरी छूट में खुजली इसलिए जा रही होऊं.

सरिता दी- तो उसके लिए अंदर जाने की क्या जरूरत है. अभी यही है, यही खुजली मत्वा लो दीदी. हमने तो पहले भी देखि है आप दोनों की चुदाई. शर्मा क्यों रही हो.

सविता दी- मेरा जहा दिल करेगा वह मिटवाउंगी. मैं तेरी कोई गुलाम नहीं हूँ. जो तेरे कहने पर चालू.

सरिता दी- मेरी नहीं हो. लेकिन अभी की तो गुलाम हो. और पता नहीं क्या क्या हो.

सरिता दी की बात सुनकर सावित ा दीदी ने गुस्से से घूर कर सरिता दीदी को देखा और बिना कुछ बोले अपने कमरे में चली गयी. उनके जाने के बाद मैंने सरिता दीदी से कहा.

मैं- क्या था ये सब दीदी. आप दोनों ने तो जुंग शुरू कर दी. आपने ने ये बिलकुल भी ठीक नहीं किया. जो थोड़ी बहुत उम्मीद थी की दीदी आज नहीं तो कल हमारे साथ होंगी. आपने वो भी ख़तम कर दी.

सरिता दी- तुम न अभी. तुम एकदम गधे जैसे हो . जिसके पास लुंड के अलावा कुछ बड़ा नहीं होता, उसी तरह तुम्हारे पास भी लुंड के आलावा कुछ भी बड़ा नहीं है. उम्मीद ख़तम नहीं हुई गधे और बढ़ गयी है. देखा नहीं तुमने कैसे दीदी लुंड छूट गांड करके बात कर रही थी. तेरी कोशिश में तो दीदी साल भर में भी हमारे साथ नहीं आती. अब देखने कैसे दीदी हम दोनों के साथ एक hi बीएड पर let-ti हैं.

मैं (हँसते हुवे)- बड़ा हरामी दिमाग है तुम्हारा दीदी. मनीषा से भी खतरनाक. तुमने तो दीदी को जोश दिला दिला कर अपने झांसे में ले लिया और दीदी भी सब खुलकर बोल रही थी. मन गए तुमने.

सरिता दी- क्या करू यार होना पड़ता है कभी कभी. अब तुम जाओ और दीदी की प्यास बुझाओ मैं और मनीषा कुछ देर में आ रहे हैं उनके कमरे में.

दीदी की बात सुनकर मैंने आगे बढाकर उनकी दोनों चूचियों का पकड़कर जोर से दबा दिया और उनके गाल को अपने दांतो से पकड़कर काट लिया. सरिता दीदी की चीख निकल गयी.



सरिता दी- ऊऊऊह्ह्ह्ह साली हरामी. तेरा कम् मैंने बनाया और मुझे hi दर्द दे रहा है.

मैं- आआअह्ह्ह सरिता. बहुत बड़ीईई चुधिया हैं तुम्हारी. मैं जा रहा हूँ दीदी के कमरे में. जल्दी आना तुम दोनों. तूने जो कमल किया है उसका इनाम दीदी के कमरे में hi दूंगा.

इतना कहकर मैं सोफे से उठा और दीदी के कमरे की तरफ जाने लगा तो मनीषा न कहा.

मनीषा- केवल दीदी को hi प्यार करोगे. इसमें मेरा भी कुछ योगदान है. मुझे भी कुछ मिलना चाहिए

मनीषा की बात सुनकर मैं वापस मनीषा के पास आया और उसको सोफे से उठाकर खड़ा किया और उसके पीछे खड़ा होकर अपनी कमर को उसकी गांड से थोड़ा दूर करके हाँथ आगे बढाकर उसकी दोनों चूचियों को कसकर पकड़ लिया और अपनी कमर को एक जबरदस्त धक्का उसकी गांड पर लगा कर उसकी चूचियों को सरिता दीदी से भी ज्यादा जोर से दबा दिया. मनीषा जोर से चीख पड़ी.



मनीषा- oooooohhhhhhhhhhhh भाइयाँआ. धीरी सी. बहुत्त ड़ड़ड़ड़ड़ हुवा मुझी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसे छोड़ दिया और उसे घुमाकर अपनी तरफ किया तो देखा की उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे लेकिन वो मुस्कुरा रही थी. मैंने अपनी जीभ निकलकर उसके आंशुओ को चाट लिया और उसको किश करते हुवे कहा.

मैं- सॉरी मनीषा. तुम्हे बहुत दर्द हुवा.

मनीषा- नही भैया. आपके लिए तो कोई भी दर्द सह लूंगी मैं. अब आप जाओ दीदी इंतज़ार कर रही होंगी.

उसकी बात सुनकर मैं ऊपर जाने लगा तो देखा की दीदी दरवाज़े पर कड़ी हैं. शायद वो मनीषा की चीख सुनकर बहार आ गयी थी. मुझे देखते hi वो अपने कमरे में चली गयी. मैं भी उनके कमरे के पास गया तो दरवाज़ा खुला था. मैं भी दीदी के कमरे में चला गया और दरवाज़ा बंद कर दिया मगर सिटकिनी नहीं लगाई. मैं जाकर दीदी के बगल बिस्टेर पर बैठ गया. दीदी ने मेरी तरफ देखा तो उनकी आँखों में आँशु थे. मैंने हाँथ बढाकर दीदी के आँशु साफ करते हुवे कहा.

मैं- ये सब क्या है दीदी. और आप सरिता दीदी से क्यों उलझ रही थी.

सविता दी- मैं कहा उलझ रही थी. वो मुझसे उलझ रही थी. देखा नहीं कैसे मुझसे बात कर रही थी.

मैं- छोडो न उनकी बात दीदी. आप मुझसे नाराज़ तो नहीं हैं अब न.

सविता दी- हाँ मैं अभी भी तुझसे नाराज़ हूँ, लेकिन थोड़ा थोड़ा.

मैं- और वो जो थोड़ी थोड़ी बची हुई नाराज़गी है वो कैसे ख़तम होगी और कब ख़तम होगी.

सविता दी- वो तो तुझे hi करनी पड़ेगी ख़तम. अब ये तुझे सोचना है की तू कैसे ख़तम करेगा. अच्छा ये सब छोड़ ये मनीषा इतनी जोर से क्यों चीखी थी. तुमने कुछ किया था क्या.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और जोर से दबा दिया. दीदी की सिसकी निकल गयी.



सविता दी- या क्या कर रहा है तू. मुझे दर्द होता है न.

मैं- मैं कहा कुछ कर रहा हूँ. आपने पूछा था न की मनीषा क्यों चीखी तो मैं वही आपको करके बता रहा हूँ, इसलिए मनीषा चीखी थी.

सविता दी- तू सच में बहुत कमीना है. वो अभी बच्ची है. उसकी इतनी जोर से मत दबाया कर.

मैं- ठीक है दीदी उसकी जगह आपकी जोर से दबाया करूँगा. अब तो ठीक है न.

तभी दरवाजा खुला और सरिता दीदी की आवाज़ आयी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-149

मैं- मैं कहा कुछ कर रहा हूँ. आपने पूछा था न की मनीषा क्यों चीखी तो मैं वही आपको करके बता रहा हूँ, इसलिए मनीषा चीखी थी.

सविता दी- तू सच में बहुत कमीना है. वो अभी बच्ची है. उसकी इतनी जोर से मत दबाया कर.

मैं- ठीक है दीदी उसकी जगह आपकी जोर से दबाया करूँगा. अब तो ठीक है न.

तभी दरवाजा खुला और सरिता दीदी की आवाज़ आयी.

अब आगे.

तभी दरवाज़ा खुला और मनीषा और दीदी अंदर आ गयी. अंदर आकर उन्होंने दरवाज़ा लॉक किया और चलती हुई बीएड के बॉस आकर रुक गयी और हमें देखते हुवे बोली.

सरिता di-Kya बात है मैं तो सोच रही थी की अब तक आप दोनों का एक रौंग हो गया होगा, लेकिन अभी तक आप दोनों कपडे पहनकर बैठे हुवे हैं.

सविता दी- मैं तुम्हारी तरह बेशरम नहीं हूँ. जो कभी भी और कहीं भी शुरू हो जॉन.

सरिता दी- अभी आपने मेरी बेशर्मी देखि hi कहा हैं. लगता है मुझे बेशर्म ban-na hi पड़ेगा. रखो दीदी आज मैं तुम्हे अपनी बेशर्मी दिखा hi देती हूँ.

इतना कहकर सरिता दीदी ने मनीषा को कुछ इशारा किया और अपनी t-shirt उतर कर दरवाज़े के पास फ़ेंक दी और अपने चूचियों को पकड़ कर दीदी को दिखते हुवे बोली.

सरिता दी- देखो दीदी. हैं ने मेरी चूचिया शानदार और आपसे बड़ी.



सविता दी- तो मैं क्या करू. और ये क्या बदतमीज़ी है. तुम्हे शर्म नहीं आती ऐसी हरकत करते हुवे.

सरिता दी- क्यों दीदी मेरी चूचिया देखकर जलन हो रही है क्या. लगता है आपकी चूचिया मुझसे छोटी हैं. इसलिए आपको बुरा लग रहा है.

सविता दी- मेरी चूचिया तुझसे भी बड़ी हैं समझी. और ये अपनी फालतू की बकवास और हरकते बंद कर.

दीदी की बात सुनकर सरिता दीदी बिस्टेर पर चढ़ गयी और जाकर दीदी के पास बैठ गयी और उनके गलो पर ऊँगली फिरते हुए एक हाँथ से उनकी खूबसूरत गोरी पिण्डलिया सहलाते हुवे बोली.

सरिता दी- कब तक हमसे नाराज़ रहोगी दीदी. मान जाओ न. इतना भाव क्यों खा रही हो. प्ल्ज़

सविता दी- मैं नाराज़ नहीं हूँ किसी से, और मैंने तुझे कहा रोका है. जो करना है कर.

इतना सुनते hi सरिता दीदी ने दीदी के सर को अपने हांथो से पकड़कर अपना होंठ उन्हके होंठो पर रख दिया और उनका होंठ चूमने लगी. सविता दीदी सरिता दीदी की इस हरकत से शॉक हो गयी और अपने सर को इधर उधर करके छूटने की कोशिश करने लगी.



परनतु सरिता दी ने सविता दीदी को नहीं छोड़ा और उनके होंठो को चूमती रही. इधर माणसीः ने भी आकर मेरे बगल बैठते हुवे मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगी. मैंने भी अपना एक हाथ बढाकर मनीषा की गांड पर रख दिया और दबाने लगा. थोड़ी देर तक मनीषा के होंठ चूसने और गांड दबाने के बाद मनीषा की होंठो से मैंने अपने होंठ अलग कर लिए और सरिता दीदी और सविता दीदी को देखने लगा.

सरित दीदी थोड़ी फाॅर्स फुल्ली दीदी के होंठो को चूसने लगी. सविता दीदी पहले से hi गरम थी. सरिता दीदी की इस हरकत से सविता दी और भी गरम हो रही थी. अब तक जो हाँथ सरिता दीदी को दूर धकेल रहा था वो हाँथ अब ढीला पद चुक्का था. सरिता दी ने 5 मिनट तक लगातार दीदी के होंठ चूसने के बाद अपना हाँथ उनकी चेहरे से हटा लिया और उनकी चूचियों पर रख दिया.

सविता दी ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया तो सरिता दी ने उनकी चूचियों से एक हाँथ उठाकर फिर से उनके चेहरे को पकड़ लिया और उसे घुमा दिया. और फिर से किश करने लगी. सरिता दी ने फिर से अपना हाँथ सविता दी की चूचियों पर रख दिया और सहलाने लगी. इस बार दीदी ने अपना सर नहीं घुमाया और बिना किसी रिस्पांस के बैठी रही. थोड़ी देर तक दीदी के होंठ चूसने के बाद सरिता दीदी ने उनकी दोनों चूचियों को अपनी मुठी में भरा और कसकर मसल दिया. जिससे दीदी होश में आ गयी और जोर से चीख पड़ी.

सविता दी- aaaaaaaahhhhhhhhhh कामिनी. क्या करती हैई. दूर हट मुझसे.

दीदी ने एक चीख के साथ hi सरिता दीदी को बिस्टेर पर धकेल दिया और उठकर कड़ी हो गयी और सरिता दीदी को देखते हुवे गुस्स्से से बोली.

सविता दी- ये क्या बेहूदगी है सरिता. मैं बड़ी बहन हूँ तुम्हारी. कुछ तो लिहाज़ करो मेरा.

सरिता दी- क्यों दीदी मज़ा नहीं आया क्या.

सविता दी- तुम सब इतने बेशरम हो गए हो की तुम लोगो से बात करना hi बेकार है.

इतना बोलकर सविता दीदी कमरे से जाने लगी तो सरिता दीदी ने उनका हाँथ पकड़ लिया और उन्हें खींचकर अपने पास बैठा लिया और उनके एक चुकी को पकड़कर दबा दिया और बोली.

सरिता दी- क्यों नखरे कर रही हो दीदी. मैं जानती हूँ की तुम भी तड़प रही हो हम लोगो के साथ मिलकर मज़ा लेने के लिए. तो ये शर्म छोड़ दो और खुलकर इंजॉय करो दीदी.

सविता दी- छोड़ मुझे. मुझे नहीं करना कोई इंजॉय ुंजोय तुम्हारे साथ. क्या अब तुम मेरे साथ जबरदस्ती करोगी. क्या तनिक भी इज़्ज़त और मान सम्मान नहीं रहा गया है मेरा तुम्हारे दिल में.

दीदी की बात सुनते hi सरिता दीदी ने उन्हें छोड़ दिया. सविता दीदी बिना कुछ बोले कमरे से बहार चली गयी. उनके जाने के बाद सरिता दीदी मुझे देखने lagi.ye देखकर मनीषा ने कहा.

मनीषा- देखो अभी भी कैसे नखरे कर रही हैं दीदी. पता नहीं कब मानेगी ये हम लोगो की बात.

सरिता दी- छोड़ न यार मनीषा. उनके चक्कर में अपना मज़ा क्यों ख़राब करना. हम लोग तो अपना काम शुरू कर hi सकते हैं. क्यों अभी क्या कहता है.

इतना कहकर दीदी मेरे पास आई और मेरे गलो को किश करना लगी. मनीषा ने भी अपनी t-shirt उतर दी और मुझसे सत्कार बैठ कर मेरे दूसरे गाल पर किश करने लगी. थोड़ी देर किश करने के बाद दोनों अपनी जीभ निकल कर आपस में लड़ने लगी. मैंने भी अपनी जीभ निकली और उनकी जीभ पर घुमानी शुरू कर दी. थोड़ी देर ऐसे करने के बाद मैंने अपना हाँथ बढाकर दोनों की पीठ पर रख दिया और उनकी पूरी पीठ को सहलाने लगा. थोड़ी देर बाद जीभ चूसै बंद करके हम तीनो बरी बरी से एक दूसरे के होंठ चूसने लगे. तभी मेरी नज़र दरवाज़े के पास गयी. जहाँ से मुझे कुछ परछाई नजर आ रही थी. मैं जान गया की दीदी बहार कड़ी होकर हम तीनो की रासलीला देख रही हैं. मैंने उन दोनों को भी ये बात बता दी.

थोड़ी देर एक दूसरे को किश करने के बाद मैंने बिस्टेर पर खड़ा हो गया और और दोनों के सर पर हाँथ फेरने लगा. सरिता दीदी ने हाँथ बढाकर मेरे लुंड को लोअर के ऊपर से पकड़ लिया और मसल दिया. मनीषा मेरे घुटनो के बल बैठ गयी और मेरे पेट को चूमने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को लोअर के ऊपर से सहलाने के बाद सरिता दीदी ने मेरी लोअर में ऊँगली फसे और उव समेत निचे खिसका दी. अब मैं एकदम नंगा बिस्टेर पर खड़ा हुवा था और मेरे पैरो के पास मेरी दो गरम बहने अपना मुंह खोले लुंड अपने मुंह में लेने के लिए बैठी थी.

मैंने अपने पैरो से अपना लोअर निकल कर दरवाज़े की तरफ उछाल दिया. सरिता दी ने मेरे लुंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी. मनीषा ने भी मेरी गोटियों को सहलाया. थोड़ी देर बाद दीदी अपनी जीभ निकल कर मेरे लुंड को चाटने लगी. मनीषा ने अपनी जीभ मेरी गोटियों पर चलनी शुरू कर दी. थोड़ी देर तक मेरी गोटियों को चाटने के बाद उसने मेरी गोटिया अपने मुंह में भर ली और चूसने लगी. सरिता दी ने अपने मुंह में मेरा लुंड भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर बाद दोने ने अपने जगह बदल ली. अब मनीषा मेरा लुंड चूस रही थी और सरिता दीदी मेरी गोटिया चूस रही थी. मैंने मनीषा का सर पकड़कर जोर जोर से उसका मुंह छोड़ना शुरू कर दिया और बोलने लगा.



मैं- सलीई मनिशांआ. दीदी से बदतमीज़ी से बात करती है. आज मैं तुझे बताऊंगा की बड़ो के साथ किस तरह पेस आते हैं, चूस मेरा लुंड. बहुत गर्मी छड़ी है तुझमे आज साडी गर्मी तेरी उतर दूंगा.

थोड़ी देर बाद मैंने अपना लुंड मनीषा के मुंह से निकला और दीदी के मुंह में ठोस दिया और बोलै.

मैं- और तुम सरिता. तुमने तो आज हद hi कर दी. दीदी के साथ जबरदस्ती करने जे रही थी. मेरी इतनी प्यारी और गरम दीदी से तुमने झगड़ा किया. आज तुझे बताऊंगा की दीदी को परेशां करने का क्या नतीजा होता है.

मैं ये सब दीदी को खुश करने के लिए बोल रहा था और दीदी बहार कड़ी मेरी बात सुनकर खुश भी हो रही थी. मैं दीदी का मुंह छोड़ने के बाद लुंड बहार निकल लिया और दोनों को बीएड पर लिटा दिया. मैंने पहले मनीषा की लोअर और पैंटी एकसाथ उतर दी और मनीषा की छूट चाटने लगा. ये देखकर दीदी ने भी अपने लोअर और पैंटी उतर दी और जाकर मनीषा के मुंह पर बैठ गयी. मैं मनीषा की छूट chat-te हुवे उसकी छूट में एक ऊँगली दाल दी और उसकी छूट छोड़ने लगा. थोड़ी देर उसकी छूट छोड़ने के बाद मैंने दी को मनीषा के ऊपर 69 पोजीशन पर लिटा दिया और अपना लुंड दीदी के मुंह में दाल दिया. दीदी मेरा लुंड चूसने लगी और मैं मनीषा की छूट में ऊँगली करने लगा. थोड़ी देर लुंड चुसवाने के बाद मैंने अपना लुंड उनके मुंह से निकल लिया और मनीषा की छूट में सेट किया और एक जोर का धक्का मार्कर पूरा लुंड उसकी छूट में दल दिया. मनीषा मस्ती में सिसक पड़ी.

मनीषा- आआआअह्हह्ह्ह्ह भाईयईया. धीरे धीरे करूओ. बहुत्त ाचा लग रहा है. ऐसे होई करते राहू. आआआहहहहहहह ऑर्डर जोर से कार्रो भाई

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा की छूट की ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी. मैंने थोड़ी देर मनीषा की छूट छोड़ने के बाद मनीषा की छूट से अपना लुंड बहार निकला और घूमकर सरिता दीदी की छूट की तरफ चला गया. मैंने अपना लुंड उनकी छूट पर लगाया और एक नज़र दरवाज़े की तरफ देखा. अब दरवाज़ा हल्का सा खुल गया था और दीदी छुपकर हमारी चुदाई देख रही थी. ये देखकर मुझे और जोश आ गया और मैंने अपने लुंड एक धक्के में उनकी छूट में उतर दिया. सरिता दीदी की सिसकारी निकल गयी.



सरिता दी- आआअह्ह्ह्हह अभियई. क्या चुदाई करता ही तू री. बहुत अच्छा लग रहा है ऐसे hi छोड़ अपनी दोनों बहनो को. दीदी तो पागल हैं जो इस मज़े से दूर भाग रही हैं. उन्हें क्या पता की हम तीनो को थ्रीसम में कितना मज़ा आता है. अगर दीदी भी साथ में शामिल हो जाये तो मज़ा और भी ज्यादा आएगा.

मैं दीदी की बात सुनकर उन्हें और जोर जोर से छोड़ने लगा और धक्के लगते हुवे सरिता दी से कहा.

मैं- सरिता मेरी जान. अब दीदी के साथ कोई बदतमीज़ी मत करना और उनसे इज़्ज़त से पेश आना. जब तक वो अपनी मर्ज़ी से हमारे साथ ग्रुप चुदाई के लिए रेडी न हो. कोई भी उनके साथ जोर जबरदस्ती नहीं करेगा.

सरिता दी- हम दोनों तो जबरदति करेंगे दीदी के साथ. तू बिच में मत बोलना.

हम तीनो ऐसी बाते दीदी को सुनाने के लिया कर रहे थे. सरिता दी की बायत सुनकर मैंने अपना लुंड उनकी छूट से बहार निकला और मनीषा को दीदी के ऊपर लेटने के लिया कहा. दोनों मेरी तरफ अपनी गांड और छूट करके लेट गयी. मैंने दोनों की गांड में अपने मुंह से ढेर सारा थूक गिराया और सरिता दी की गांड पर अपना लुंड सेट करते हुवे कहा.

मैं- दीदी से बदतमीज़ी से बात करेगी साली तू. रुक तुझे अभी बताता हूँ.

इतना कहकर मैंने अपनी कमर को एक जोरदार धक्का मारा और मेरा लुंड दीदी की गांड को चीरता हुवा जड़ तक घुस गया. सरिता दीदी कुछ ज्यादा hi जोर से नाटक करते हुवे चीखे.

सरिता दी- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सलीईई, फ़ायद दी मेरीए गंडड. निकल बहारर नाहीइ छुड़वाना मुझी. aooooooooooohhhhhhhhh दीदी बचावू मुझी अभियई सी नहीं तो यी मुझे मार डालेगा. मैंन क़बीहीइ आपसे गलत बायत नाहीई करुँगीई ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह डीडीइइइइइइ.

सरिता दी को मैं जोर जोर से उनकी गांड छोड़ रहा था. थोड़ी देर बाद मैंने उनकी गांड से लुंड निकला और मनीषा की गांड में सेट किया और एक झटके से लुंड उसकी गांड में लुंड दाल दिया. मनीषा चीख पड़ी.



मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्ह भैय्याहा. इतनीई जोरर सी मत्तट मारू मेरी गंड़द. आआह्ह्ह्हह्ह बहुतत्त ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा ही. आआआह्ह्ह्हह्ह डीडीईई मुज्झी बचाए लूओ. मैं मर्डर jaungiiiii.oohhhhhhhhh.

सरिता दी और मनीषा की चीखः सुनकर दीदी से अब बर्दास्त नहीं हुवा. वोऊ चुदाई का नज़ारा छुप छुप कर देख के गरम हो गयी थी. वो तुरंत दरवाज़ा खोलकर अंदर आ गयी और मुझसे बोली.

सविता दी- क्या कर रहहा ही अभी. इतनी बेरहमी से मैट छोड़ इन दोनों को मार जाएंगी बेचारी. थोड़ा रहम कर इन दोनों पर. धीरे धीरे छोड़ इनको.

मैं- नहीं दीदी मैं इन्हे सजा दे रहा हूँ आपसे बदतमीज़ी करने की. आप मुझे मत रोको.

इतना बोलकर मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड से निकला और एक झटके में फिर से उसकी गांड में चाप दिया. मनीषा दर्द और मसे से दोहरी हो गयी और सविता दी से बोली

मनीषा- oooooohhhhhhhhhhhhhhhh Aaaaaaahhhhhhhhhhh. डीडीई मुझी बचा लूओ नाहीई तू भैया मुझी मार डालेंगी. ओह्ह्ह्हह्हह आआह्ह्हह्ह्ह्ह. मैं मर्डर गयीईइ.

सविता दी- ृक्क जा अभी. देखह मनीषा को कितना दर्द्द हो रहा हैई. शांत हूँ जा भायी.

दीदी की बायत सुनकर मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड से निकला और सरिता दीदी की गांड पर रखकर जोर से चाप दिया. लुंड एक hi बार में अंदर घुस गया और दीदी के मुंह से चीख निकल गयी.

सरिता दी- aaaaaahhhhhhhhhh ABhiiiiiiiiii. मारर डालेगा क्या मुझी. डीडीईई िस्कु बोलु ना धीरे धीरी गण्ड मरे. नाहीइ तू मैंन मर्डर जौन्ग्गीइइइइइ. ऊऊऊह्ह्हह्ह डीडीइइइइइइ

सविता दी- रुकक्क जाए अभीयी. देखहह दूनु कोई क्या हालात कार दी है तुमने. मैनी इन्ही माफ कर दिया हैई. अब्ब चू भी शन्तत हूँ जा. प्ल्ज़ भैई मेरी बात नहीं मानेगा तू.

इतना बोलकर दीदी बीएड पर हमारे पास बैठ गयी और मनीषा के सर पर हाँथ फेरने लगी. मैं सरिता दीदी की गांड से लुंड निकलकर उनकी छूट पर रख दिया और छोड़ने लगा. सरिता दीदी बोली.

सरिता दी- आआआहहहहहहह ाभीईई. ऐसी ही छोड़ड़ड़ भईईई. चू बहुत्त अछ्हीइ छूट छोड़ता हैई. लेकिन टूउउ गण्ड बहुत्त बेरहमी से मरता ही. तूने तू मेरीए कुवारी गांड फाड़ hi दी है.

सरिता दीदी की बात सुनकर सविता दी ने उन्हें देखते हुवे उसका मज़ाक उड़ाते हुवे कहा.

सविता दी- बड़ी आई कुंवारी गांड है. पता नहीं कितनी बार अभी से अपनी गांड मरवा चुकी है और मेरे सामने नाटककक कर रही ही की कुंवारी गांड है.

दीदी हम तीनो की चुदाई देखकर गरम हो गयी थी. और अपने होंठ काटने लगी थी. ये देखकर मनीषा ने अपना हाँथ बढाकर दीदी की लोअर पर रख दिया. दी का लोअर आगे से गिला हो गया था. जो ये बता रहा था की सविता दीदी पूरी छुडासी हो चुकी हैं. मनीषा का हाँथ अपनी छूट पर पड़ते hi दीदी ने उसके हाँथ पर अपना हाँथ रख दिया और न में गार्डन हिलने लगी, लेकिन वो उठकर कमरे से बहार नहीं गयी. शायद उनकी गर्मी उन्हें रोक रही थी. ये देखकर सरिता दी ने अपना हाँथ उठाकर उनकी चुकी पर रख दिया और सहलाने लगी. दीदी ने सरिता दीदी का हाँथ भी पकड़ लिया. मैंने सरिता दीदी की छूट को छोड़ने के बाद लुंड निकला और मनीषा की छूट में दाल दिया और छोड़ने लगा. मनीषा बोलने लगी.

मनीषा- आआआहहहहहहह डीडीइइइइइ. सचहहह मई भैया बहुत्त अच्छीई छूट छोड़ते हैं. मुझे बहुत्त मज़ा आता हैई. आपको भी मज़ा आता ही न दीदी भैया से छुड़वाने मी.

सविता दीदी ने मनीषा की बात सुनकर उसकी तरफ अपनी नशीली नज़रो से देखा लेकिन बोली कुछ नहीं. मनीषा ने अपना हाँथ दीदी की छूट पर फिरना शुरू कर दिया दीदी ने उसके हाँथ को पकड़ा तो था पर उनके हाँथ में रोकने वाली सख्ती नहीं थी. मनीषा ने उनकी छूट से हाँथ हटाया और अपना हाथ चाट लिया.

मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह भैय्यियाआ.. डीडीई कोई छुटत तू बहुत्त टेस्टी हैई. मज़ा आएगा डीडीई की छूट चाटने मी. मैं दीदी की पूरी छूट खा जौंगीय.

मनीषा की बात सुनकर भी दीदी ने मनीषा को कुछ नहीं कहा. ऊपर सरिता दीदी ने सविता दीदी की चुकी को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया और मनीषा ने दीदी की छूट को फिर से मुट्ठी में भर कर दबाना शुरू कर दिया. मैं पीछे से कभी मनीषा की छूट में लुंड घुसेड़ कर छोड़ता तो कभी सरिता दीदी की छूट में. अब हम टीनू झड़ने की कगार पर थे. और शायद सविता दी भी झड़ने के निकट thi.wo अपने बदन को ैथ रही थी और अपने दांतो से अपने होठो को काट रही थी. फिर दीदी ने अपने दोनों हाँथ मनीषा और सरिता दीदी के हांथो से हटा लिए और एक हाँथ मनीषा की पीठ पर रखकर सहलाने लगी. मैं मनीषा की छूट पर धक्के मार रहा thaa.manisha अब झड़ने के करीब थी तो वो बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- ahhhhhhhhhh भैइयाआआ. औरर जोरर से चूडू मुझी मैं आने लगी हूँ औरर जोरर सी. देखू डीई. भैया कैसी मेरी छूट को छोड़ रही हैंन. बहुत्त मज़ा आ रहा हैई. ाप्प भीई हम्म्म लोगो के सठह मिलकर चुदैई करवाओ. आपको भी बहुत्त मज़ा आयेगा. मैंन गयी भैया. आआआअह्हह्ह्ह्ह गयी मैं….

इतना कहकर मनीषा झाड़ गयी. दीदी ने उसकी बातो पर कोई रियेक्ट नहीं किया वो अपनी आँखे बंद कर मस्ती में जोर जोर से सांसे ले रही थी. मनीषा ने झड़ने के बाद दीदी की छूट को जोर से मुत्तय्य से पकड़कर दबा दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गयी, वो आप अपने आखिरी स्टेज पर थी. कभी भी झाड़ा सकती थी. मैंने मनीषा के झड़ने के बाद अपने लुंड को उसकी छूट से निकला और सरिता दीदी की छूट में दाल दिया और छोड़ने लगा. 8-10 दकके मरने के बाद सरिता दीदी भी झड़ने लगी और बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ. आओर जोर सी छोड़ू अपनी डीडीडीई को ढक्की माररू मेरी छूट को फ़ायद डालू मेरीए छूट. मैंन भी आ रहीए हूँ भैया. देखू डीडीई. अभियई तुम्हारी सरिता कोऊ कैसे मज़े से छोड़ रहा हैई. रण्डी बहा लिया हैई इसने मुझी अपनीइ. आअह्ह्ह अभी. मैंन झाड़ रहीए होऊ. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊह्ह्हह्ह्ह्ह.

सरिता दी भी झाड़ गयी. और झड़ते समय उन्होंने दीदी की चुकी को डैम लगाकर मसल दिया. बस चूचिय मसलते hi सविता दीदी की छूट ने भलभलाकर पानी छोड़ दिया. और वो चीखते हुवे झड़ने लगी.

सविता दी- aaaaahhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii. क्या ागगग लाग्ग्गा डीई हैई तुमने मेरे शरीयरर में. ऊऊऊऊओह्ह्ह सरित्ता मुझी भी रण्डी बना लिया ही अभी नई चूडड़ड छोड़ कर. ऊऊओह्ह्ह्हह मैं गईइइइइइइ. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

मैं भी अब झड़ने वाला था तो मैंने सरिता दीदी की छूट से अपना लुंड निकला और उठकर दीदी के सामने जाकर खड़ा हो गया और उनके मुंह पर अपना लुंड लगा दिया. दीदी झड़ते हुवे अपना मुंह खोल दिया था. मैंने अपना लुंड एक झटके में दीदी के गले तक उतर दिया और उनके मुंह में झड़ने लगा. दीदी ने भी मस्ती में मेरा पूरा पानी पी लिया और मेरे लुंड को अपने मुंह से निकल दिया. मैंने एक छठा दीदी के मुंह पर धड़ दिया दीदी बिस्टेर पर निढाल हो कर गिर पड़ी.



मैं भी बिस्टेर पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद जब सविता दी नार्मल हुई तो उन्हको याद आया की उन्होंने क्या कर दिया है. वो उठकर बैठ गयी और हमें देखने लगी. हम सब दीदी को देखते हुवे मुस्कुरा रहे थे. दीदी ने अपनी आहे शर्म से झुका ली और धीरे से बोली.

सविता दी- ी म सूर्य्य. मुझसे ये सब गलती से हो गया. मैंने जानबूझकर नहीं किया ये.

इतना बोलकर दीदी बिस्टेर से उठी और बिना कोई जवाब सुने जल्दी से बहार चली गयी हम तीनो उन्हें आभार जाता देखकर हंसने लगे. सरिता दीदी ने सविता दीदी के कमरे से बहार जाते hi मुझसे कहा.

सरिता दी- दीदी तो गयी काम से. न न करते करते उन्होंने हाँ भी कर दी. अब शुरू होगा असली खेल.

मैं- वाह दीदी आप तो सच में कमल की हैं. कैसे सविता दीदी को अपनी बातो में उलझा लेती हैं.

सरिता दी- ये सब तेरी चुदाई का असर है जो मेरा दिमाग इतना ज्यादा काम करता है आजकल. वर्ण मुझे तो ये सब बाटे समझ में hi नहीं आती थी.

दीदी की बात सुनकर हम सब हंसने लगे. उसके बाद हम सब ने अपने कपडे पहने. मैं सीधा अपने कमरे में चला गया. मनीषा दीदी और सरिता दीदी अपने अपने कमरे में. ऐसी hi शाम हो गयी और मम्मी पापा घर आ गए. मैं भी अपने कमरे से निचे आया और सबके साथ बैठ गया. सविता दीदी अपने कमरे से बहार नहीं आयी थी. शायद आज जो कुछ उन्होंने किया था. उसकी वजह से उन्हें शर्म आ रही थी. पूछने पर मम्मी ने बताया की उनकी तबियत कुछ ख़राब है. मैं समझ गया की उनकी तबियत को क्या हुवा है. थोड़ी देर बाद खाना बन गया. सबने मिलकर खाना खाने लगे.

पापा- अभी कल सुबह मैं और तुम्हारी मम्मी टूर के लिए निकल रहे हैं तो तुम अपनी बहनो का अचे से ख्याल रखना. और हाँ कोई लड़ाई झगड़ा नहीं होना चाहिए तुम सब के बिछ.

मैं- ठिक्क है पापा. मैं तो वैसे भी शांत hi रहता हूँ. यही लोग लड़ाई झगड़ा करते रहते हैं.

मनीषा- अच्छा बड़े आये. हमेशा मुझे तंग करते रहते हैं और पापा के सामने भोले बन रहे है

मम्मी- अच्छा अब तुम सब चुपचाप खाना खाओ. तुम लोगो को तो मौका चाहिए झगड़ने के लिए.

उसके बाद सब लोगो ने चुपचाप खाना खाया. खाना खा कर मैं अपने कमरे में सोने चला गया. किचन का काम समेटने के बाद सब अपने अपने कमरे में चले गए. मैं अपने कमरे लोअर उतर कर उव में hi लेट गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-150 (मेगा अपडेट)

मैं अपने कमरे लोअर उतर कर उव में hi लेट गया था की तभी सविता दीदी मेरे कमरे में आयी. उनके हांथो में दूध का गिलास था. वो एक लोअर और शर्ट पहनकर मेरे कमरे में आयी थी. जिससे दी का पूरा शरीर ढाका हुवा था. दीदी मेरे पास आकर कड़ी हो गयी और मुझसे बोली.

सविता दी- अभी ले दूध पि ले जल्दी से नहीं ठंडा हो जायेगा.

दीदी ने शाम वाली घटना का कोई जीकर मुझसे नहीं किया. तो मुझे भी या जानकर अच्छा लगा की शायद दीदी अब धीरे धीरे अपना आपको इस माहौल में ढल रही हैं. मैंने दीदी की चूचियों को देखते हुवे कहा.

मैं- कहा है दूधः सविता मुझे तो दिखाई नहीं दे रहा है. सब कुछ तो अंदर छिपा हुवा है.

सविता दी- सेल कमीने. इतना बड़ा दूध का गिलास नहीं दिख रहा है तुझे.

मैं- गिलास तो दिख रहा है सविता, लेकिन बड़ा बड़ा दूध नहीं दिख रहा है.

दीदी ये सुनकर मुस्कुराने लगी और मेरी आँखों में देखती हुई बोली.

सविता दी- तुझे बड़ा बड़ा दूध देखना है न. रुक तुझे दिखती हूँ बड़ा बड़ा दूध.

इतना कहकर दी ने अपनी शर्ट अपने कलर के पास दोनों हांथो से पकड़ी और पूरी ताकत से खींच दिया. शर्ट के पुरे बटन टूटते चले गए और दीदी की बड़ी बड़ी ृषभरी चूचिया ब्रा समेत उछलकर सामने आ गयी. ये नज़ारा देखकर मेरा कलेजा मुंह क आ गया. मैं दीदी की चूचियों को आँखे फाड़े देखता रहा. दीदी ने मेरी हालत देखते हुवे कहा.



सविता दी- अब देख लिया न बड़ा बड़ा दूध. अब चुपचाप दूध पि और सो जा. मैं जा रही हूँ.

दीदी इतना बोलकर निचे चली गयी. मैं भी दूध पीकर सो गया. सुबह मैं देर से उठा. उठकर फ्रेश हुवा और निचे आया. मम्मी पापा जाने के लिए तैयार हो रहे थे. कुछ hi देर में मम्मी पापा निकल गए. उन्हें बस स्टैंड के पास से बस पकड़नी थी. मम्मी पापा ने जाते वक्त मुझे सख्त हिदायत दी थी की मैं कोई शरारत न करू. उनके जाने के बाद मैं भी नाहा धोकर अपने नाश्ता करके अपने काम पर व्हाला गया. वह पर कुछ काम करने के बाद काम समेत कर मैं घर आया और अपने कमरे में बैठकर लैपटॉप खोलकर काम करने लगा. थोड़ी देर में मैं अपना काम समाप्त करने के बाद निचे हॉल में आ गया. जहा पर मनीषा और सरिता दीदी पहले से hi बेहति हुई थी.

मैं भी जाकर उनके पास वाले सोफे पर बैठ गया. और आपस में बात करने लगे. थोड़ी देर बाद सविता दीदी भी निचे आई और आकर सोफे पर मेरे पास बैठ गयी. सरिता दीदी ने सविता दीदी से कहा.

सरिता दी- दीदी अब तो घर में कोई नहीं है हम चारो प्रेमियों के अलावा. क्या कहती हो. शुरू करे फिर.

सविता दी- घर में कोई नहीं है तो क्या हुवा. तू बाज़ आ जा अपनी हरकतों से. नहीं तो मर खायेगी किसी दिन.

मनीषा दी- क्या दीदी अब क्या शर्माना. कल तो आपने हमारी भी चुदाई देख ली और आपने मज़े से ऊँगली करवाकर अपनी और चुकी दबवाकर हम दोनों से मज़ा भी लिया था.

सविता दी- मैंने वो जानबूझकर नहीं किया था. गलती से हो गया था. और वैसे तेरी छूट में कुछ ज्यादा hi आग लगी है जो आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो रही है. सबर करना सिख मनीषा.

मनीषा- अरे मेरी प्यारी दीदी. मेरी आग इतने जल्दी आउट ऑफ़ कण्ट्रोल नहीं होती. जब आप दोनों ने भैया को फंसना शुरू किया था या ये कहूं की जब से भैया ने आप दोनों को फंसना शुरू किया था तब से मैं आप दोनों की साडी हरकते और बाद में चुदाई dekh-dekh कर खुद पर काबू किया हुवा था. और आप बोल रही हैं की मैं आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो रही हूँ.

सविता दीदी मनीषा की बात सुनकर चौंक गयी और वो हम दोनों को देखने लगी. हम दोनों मुस्कुरा रहे थे. दीदी ने फिर से मनीषा को देखते हुवे कहा.

सविता दी- क्या- क्या कहा. मतलब तुझे शुरू से सब पता था. हिएएयययययय दिया. मैं तो समझती थी की किसी को मेरे और अभी के बारे में पता hi नहीं है.

मैं- हाँ दीदी मनीषा को शुरू से सब पता है. लेकिन ये हम सब से बहुत प्यार करती है. इसलिलिये इसने ये बात अपने तक hi सिमित राखी. अगर ये चाहती तो शुरुवात में hi हम सबको रेंज हांथो पकड़ सकती थी और ब्लैकमेल भी कर सकती थी, लेकिन इसने ऐसा नहीं kiya.kyonki ये स्पेशली आपसे बहुत प्यार करती है.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मनीषा को अपने गले लगा लिया. थोड़ी देर बाद वो मनीषा से अलग हुई तो सरिता दीदी ने सविता दीदी से कहा.

सरिता दीदी- तो क्या कहती हो दीदी. हम लोगो के साथ मिलकर अभी के साथ चुदाई करवाने के लिए तैयार हो.

सविता दी- (मुस्कुराते हुवे)- तुम सब पागल हो चुके हो. मैं ऐसा वैसा कुछ भी नहीं करने वाली समझे. और तुमसब ने कल मेरा पूरा बिस्टेर ख़राब कर दिया था. उसे साफ़ भी नहीं किया. तुम लोग बाते करो मैं जा रही हूँ अपने कमरे में सोने.

मनीषा- लेकिन हम सब तो बात करने के लिए बैठे hi नहीं हैं.

सविता दीदी- बात नहीं करनी है तो वही शुरू कर दो. जोट ुम सबको अच्छा लगता है.

इतना कहकर सविता दी अपने कमरे की तरफ चल दी. वो आज अपनी गांड कुछ ज्यादा मटकती हुई जा रही थी.



जो उनकी लोअर में मटक रही थी, मैं उनकी गांड को घूरने लगा. मुझे ऐसा लग रहा था की उन्होंने पंतय नहीं पहनी है. क्योंकि पंतय की कोई आउटलाइन नजर नहीं आ रही थी. सरिता दी ने भी ये बात नोट कर ली. दीदी के जाने के बाद मैंने सरिता दीदी से कहा.

main-Yaar ये सविता दीदी तो मन hi नहीं रही हैं एक साथ मिलकर करवाने के लिए.

सरिता दी- तू सच में बिलकुल गधा है यार. दीदी बिना ब्रा और पंतय के हम लोगो के साथ बैठी हुई थी. और जाते समय देखा कैसे गांड matka-matka कर चल रही थी कामिनी. ये पक्का छुड़वाना चाहती है, लेकिन अभी भी शर्मा रही है. और जहा तक मुझे लगता है की उन्होंने हमको निमंत्रण दिया है की उनके कमरे में आ जाऊ और वही मिलकर चुदाई का खेल शुरू करने हैं.

मैं- तुम्हारा दिमाग ख़राब हो गया है सरिता. कुछ भी बोलती रहती हो. ऐसा होता तो दीदी खुलकर नहीं कहती की तुम सब मेरे कमरे में chalo.jo करना है वही कर लो.

सविता दी- इसीलिए तो मैं बोल रही हूँ की तुम गधे हो. लुंड के आलावा तुम्हारे पास कुछ काबिल चीज नहीं है. अरे जब मैंने तुझे इतना खुलकर इशारा किया छुड़वाने का तो तू मेरे कहने का इंतज़ार कर रहा था. तो तू इन बातो को नहीं समझ सकता. मैं एक लड़की हूँ यार और दीदी के हाव भाव मैंने अच्छी तरह नोट किया है. और मुझे 99.99% विस्वाश है की आज दीदी हम दोनों के साथ तुझसे छुड़वाकर रहेंगी.

दीदी की बात सुनकर मैं अंदर से झूम उठा. मुझे भी अब ग्रुप चुदाई में ज्यादा मज़ा आता था, सरिता दीदी ने कुछ देर शांत रहने के बाद फिर से कहा.

सरिता दी- अब देर किस बात की चलो चलते हैं दीदी के कमरे में, लेकिन एकदम बेशरम बैंकर चलना होगा. मतलब काम से काम कपड़ो में. 10 मिनट में दीदी के कमरे में सबलोग चलते हैं.

इसके बाद दीदी और मनीषा अपने कमरे में चले गए. मैं भी अपने कमरे में आ गया और लोअर उतारकर केवल उव में हो गया और निचे सविता दीदी के कमर की तरफ चल पड़ा. सविता दीदी के कमरे का दरवाज़ा खुला था. मैं सीधे अंदर चला गया. दीदी मुझे देखते हुवे बोली.

सविता दी- तू तो एकदम बेशरम बन गया है अभी. अपनी बड़ी बहन के कमरे में कोई ऐसे आता है क्या.

मैं- क्या बात करती हो सविता मैं तो तुम्हारे पता नहीं कहा कहा नंगा घुस चुक्का हूँ. और तुम उव में मुझे देखकर ऐसी बात कर रही हो.

तभी मनीषा और सरिता दीदी भी सविता दीदी के कमरे में आ गयी. सरिता दीदी ने एक ब्लैक ब्रा पंतय पहना हुवा था. वो बहुत सेक्सी लग रही थी. मनीषा ने एक ब्लू ब्रा और पंतय पहनी हुई थी.



दोनों ने अंदर आकर दरवाज़ा लॉक किया और मटक मटक कर चलती हुई सविता दीदी के बीएड के पास आ गयी. मैं बस उन दोनों को hi देखता जा रहा था. उन दोनों को देखकर सविता दीदी ने कहा.

सविता दी- तुम तीनो बिलकुल बेशरम हो गए हो. शर्म नाम की चीज नहीं है तुम तीनो में. अपनी दीदी के कमरे में ऐसे अधनंगे होकर आ गए हो तुम सब. कुछ तो शर्म करो.

मनीषा- अगर आप को अकवाद लग रहा है तो आप भी अपनी लोअर और t-shirt उतारकर फेंक दो.

सविता दी- तू चुप कर मनीषा, बहुत पातर पातर बोलती है तू.

सरिता दीदी और मनीषा मेरे पास आ गयी और बिस्टेर पर मेरी बगल बैठ गयी. सरिता दीदी हम तीनो को hi देख रही थी. सरिता दीदी ने एक नज़र सविता दीदी की तरफ डाली और मेरी गॉड में आकर बैठ गयी. और मेरे होठो पर अपने होंठ रख दिए. मैं उनके होंठ चूसने लगा. मनीषा मेरे पीछे आकर बैठ गयी और अपनी चूचिया मेरी पीठ पर रगड़ने लगी. सविता दीदी ये सब देख रही थी और गरम भी हो रही थी. थोड़ी देर तक मेरी पीठ पर अपनी चुकी रगड़ने के बाद मनीषा ने मेरी पीछ चुनी शुरू कर दी. मैं और सरिता दी एक दूसरे को चुम रहे थे. थोड़ी देर किश करने के बाद सरिता दीदी ने मेरा होंठ छोड़ा और दीदी को देखते हुवे कहा.

सरिता दी- कब तक ऐसे शर्माती रहोगी मेरी प्यारी दीदी. आ जाओ साथ में मज़ा करते हैं.

सविता दी- मैं तुम लोगो की तरह बेशरम नहीं हूँ. ये मज़ा तुम लोगो को hi मुबारक हो. मुझे तो यहाँ रुकना hi नहीं चाहिए. मैं जा रही हूँ निचे.

इतना बोलकर दीदी ने कुछ सेकंड तक हम लोगो को देखा फिर बिस्टेर से उठने लगी. सरिता दीदी ने हाँथ बढाकर उनका हाँथ पकड़ कर अपने बिलकुल पास खींच लिया. दीदी हम दोनों से एकदम सत्कार बैठी हुई थी. सरिता दी ने उनकी कमर सहलाई और उनसे कहा.

सरिता दी- कहाँ चलो छम्मकछल्लो. अच्छा ठीक है साथ में मत करो लेकिन देख तो सकती हो न.

सविता दी- नहीं देखना मुझे तुम लोगो की ये गन्दी हरकते. तुम सब बहुत गंदे हो.

इतना बोलकर अपनी गार्डन घुमा ली, लेकिन न वो बिस्टेर से उठी और न hi वो हम लोगो से दूर हुई. वो अभी भी हम दोनों से सटी हुई बैठी थी. हम सब भी समझ गए की अब दीदी कही जाने वाली नहीं हैं. वो भी मज़ा लेना चाहती हैं लेकिन पहले दीदी को और गरम करना पड़ेगा उसके बाद hi इनको अपने साथ शामिल किया जा सकता है. मैं फिर से सरिता दीदी के होंठो पर अपना होंठ रख दिया और उनके होंठ चूसने लगा. ऐसे hi कुछ देर दीदी के होंठ चूसने के बाद सरिता दीदी के होंठ छोड़ दिए. पीछे मनीषा अपने घुटनो के बल बैठ गयी और अपना चेहरा मेरे सर के ऊपर से लेकर अपने एक हाँथ से मेरे चेहरे को पकड़ और ऊपर उठा दिया और मेरे चैहरे के ऊपर अपना चेहरा करके मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए. मैं उसके होंठो को चूसने लगा. सरिता दी मेरी गॉड से उतर गयी और दीदी के सामने बैठ गयी और झुककर मेरे साइन को चूमने लगी और एक हाँथ मेरी उव के ऊपर रखकर मेरे लुंड को पकड़ लिया.

सविता दी अब कनखियों से हाँ सब की रासलीला देख रही थी. मनीषा मेरे होंठो को अभी भी चूस रही थी. सरिता दीदी मेरे लुंड को मुठियाने लगी और मेरे साइन पर अपनी जीभ फिरने लगी. मैं अपना एक हाँथ उठाकर सरिता दीदी के सर पर रख लिया और सहलाने लगा. एक हाँथ मैंने सविता दीदी के कंधे पर रख दिया और उनके कंधे को पकड़ लिया. सविता दीदी ने एक नज़र मेरी तरफ देखा. लेकिन बोली कुछ नहीं. थोड़ी देर मेरे होंठो को चूमने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ निकली और मेरे मुंह पर फिरने लगी. मैंने मुंह खोलकर उसकी जीभ अंदर ले ली और जोर जोर से चूसने लगा.

सरिता दीदी मेरे निप्पल को अपनी ऊँगली से कुरेदने लगी jis-se मेरे शरीर में सिहरन दौड़ जाती थी. एक निप्पल पर वह अपनी जीभ घुमा रही थी. थोड़ी देर तक ऐसे hi करने के बाद सरिता दीदी ने मेरा लुंड जोर से दबाया और मेरी निप्पल को अपनी ऊँगली और अंगूठे से मसल दिया. मेरे मुझ से एक सिसकी निकली जो मनीषा के मुंह में गायब हो गयी मेरे शरीर ने झटका खाया और मेरे हाँथ सविता दीदी के कंधे पर सख्त हो गए. थोड़ी देर मैंने और मनीषा ने एक दूसरे की जीभ को चूसने के दाब अपने होंठ अलग कर लिया.

फिर मनीषा मेरे पीछे से उठकर मेरे बगल में आ गयी और झुककर मेरे लुंड को उव समेत अपने मुंह में भर लिया और मेरे मुंह से सिसकी निकल गयी. मैंने मनीषा से कहा.

मैं- आआआआअह्हह्ह्ह्ह मनीषआआआ. ऐसी होई . क्या कर रही हैई तू. दीदी देख लेंगीए.

सरिता दी- तू कर मनीषा. दीदी का मुंह दूसरी तरफ है वो कुछ नहीं देखेंगी.

उन दोनों की बात समाप्त होने पर मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो मनीषा को hi देख रही थी मेरा लुंड चूसते हुवे. मैंने अपने हाँथ को उनके कंधे पर दबाया तो दीदी ने मेरी आँखों में देखा. दीदी की आँखे वासना के कारन लाल हो गयी थी. कुछ देर मेरी आँखों में देखने के बाद दीदी ने अपनी नज़र निचे झुका ली. थोड़ी देर मेरे साइन और निप्पल से खेलने के बाद सरिता दी सीधी होकर बैठ गयी. सरिता दी ने दीदी को देखा और उनकी ठुड्ढी पकड़कर उनका सर ऊपर उठाया और उनकी आँखों में देखते हुवे कहा.

सरिता दी- क्यों दीदी. क्यों अपने आपको तड़पा रही हो. मैं जानती हूँ की आप इस समय बहुत गरम हो रही हो. और आपको भी अभी से छुड़वाना है. तो अपनी शर्म को उतर फेकिये और हमारे साथ मिल जाइये.

सरिता दीदी की बात पर सविता दीदी ने कुछ नहीं कहा तो सरिता दीदी ने अपना हाँथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा का हक्क खोल दिया और अपनी ब्रा उतर कर दीदीकेँ हाँथ में पकड़ा दी और दीदी का एक हाँथ पकड़ कर अपने चुकी पर रख लिया और उनके हाँथ को अपनी चुकी पर दबा दिया. सरिता दी ने एक सिसकी ली.

सरिता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह डीडीईई. oohhhhhhhhhhhhhh.

सविता दीदी ने अपना हाँथ उनकी चुकी से हटा लिया. सरिता दीदी ने सविता दीदी को छोड़ दिया और मरे पास आकर मनीषा के मुंह से मेरा लुंड बहार nikala.meri उव मनीषा के थूक से गीली हो गयी थी. और मरे लुंड से चिपक गयी थी. दीदी ने मेरे उव में ऊँगली फसे और उसे निचे उतरने लगी. मैंने अपनी गांड ऊपर उठाकर उव उतरने में उनकी मैडम की. उव उतारते hi मेरा लुंड चाट से आकर मेरे पेट में लगा. मैंने सविता दीदी की तरफ देखा तो वो मेरे लुंड को प्यासी नज़रो से देख रही थी और अपने मुंह पर जीभ फिर रही थी मैं उनके कंधे दबाने लगा. सरिता दी ने मेरा उव उतरने के बाद मेरे लुंड को अपने हांथो में पकड़ लिया और सहलाने लगी. मनीषा ने मेरी गोशयो को थम लिया और दबा दिया.

सरिता दीदी मेरे लुंड को सहलाते हुवे थोड़ी थूक मेरे लुंड पर गिराया और अपना मुंह लुंड को पास ले जाकर अपनी जीभ निकल कर लुंड को चाट लिया. मेरे मुंह से सिसकी निकल गयी.

मैं- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सरिताआ. oooohhhhhhhhhhh

मेरे सिसकी लेते hi सविता दीदी ने मेरी तरफ देखा मैंने भी उनकी तरफ देखा तो उनका होंठ कैंप रहा था. सांसे भरी हो रही थी. थोड़ी देर मेरी तरफ देखने के बाद दीदी फिर से मनीषा और सरिता दीदी को देखने लगी. सरिता दीदी मेरा लुंड चाट रही थी. मनीषा ने भी मेरे लुंड से अपना मुंह हटाया और दूसरी तरफ से वो भी मेरा लुंड चाटने लगी. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद मैंने अपना लुंड पकड़कर मनीषा के मुंह दे दाल दिया. मनीषा मेरे लुंड को चूसने लगी.



थोड़ी देर तक मैंने मनीषा को अपना लुंड चुसाया फिर. मैंने लुंड मनीषा के मुंह से निकला और सरिता दीदी के मुंह में दाल दिया और उनका सर पकड़कर अपने लुंड पर दबा दिया. थोड़ी देर तक सरिता दीदी का मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड उनके मुंह से निकल लिया और उठकर बिस्टेर पर खड़ा हो गया. मैंने मनीषा और सरिता दीदी से कहा.

मैं- सरिता और मनीषा तुम दोनों सब सविता के सामने कुटिया बन कर कड़ी हो जाओ मैं तुम दोनों का मुंह खुटिया बनाकर छोड़ने चाहता हूँ.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी और मनीषा बिस्टेर पर कुटिया बन गयी मैं सविता दीदी के तरफ देखने लगा तो वो मुझे hi देख रही थी. लेकिन उनके चेहरे पर वासना के आलावा कोई भाव नजर नहीं आ रहा था. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे सरिता दीदी का सर पकड़ा और अपना लुंड उनके मुंह में दाल दिया और जोर जोर से छोड़ने लगा. सविता दीदी ने अपनी नज़र निचे करके सरिता दीदी को मेरे लुंड को अपने मुंह में अंदर बहार करते हुवे देखने लगी. सविता दीदी अब गरम हो गयी थी. उन्होंने सरिता दीदी की मुंह चुदाई देखते हुवे अपने हाँथ को उठाकर अपनी गार्डन पर रखकर सहलाने लगी. मैंने भी मौके की नज़ाकत को समझते हुवे सविता दीदी का एक हाँथ पकड़ कर अपने गांड पर रख दिया. दीदी ने अपना हाँथ हटा लिया. मैंने फिर से उनका हाथ पकेगा और अपनी गांड पर रख दिया. इस बार दीदी ने अपना हाँथ नहीं हटाया.

मैं सरिता दीदी का मुंह जोर जोर से छोड़ने लगा. थोड़ी देर उनका मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड उनके मुंह से निकल कर मनीषा के मुंह में दाल दिया और उसका मुंह जोर जोर से छोड़ने लगा. सविता दीदी मेरी गांड पर अपना हाँथ फिरने लगी और एक हाँथ से अपने गार्डन को सहलाते हुवे अपने होंठ काटने lagi.main मनीषा के मुंह को कुछ देर छोड़ने के बाद अपना लुंड उसके मुंह से बहार निकल लिया. फिर मैंने मनीषा और सरिता दीदी को एक दूसरे का ऊपर दीदी के बगल में लिटा दिया और उनकी छूट के पास बैठ कर मनीषा की पंतय को अपने हाँथ से पकड़कर दीदी से कहा.

मैं- सविता तुम ऐसा करो सरिता की पंतय को उतर कर उसको नंगा कर दीजिए.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी ने कुछ देर मेरी तरफ देखा फिर सरिता दीदी की पंतय उतरने लगी. कुछ hi सेकंड में सरिता दीदी की पंतय सविता दीदी ने उतर कर नमीं पर फ़ेंक दी. मैंने भी मनीषा की उतर दी. फिर मैं झुक कर अपनी नख उनकी छूट के सामने ले गया और एक लम्बी साँस खींचकर उनकी छूट की महक ली और दीदी से बोलै.

मैं- सविता. मनीषा और सरिता की छूट की बहुत मस्त है, लेकिन तुम्हारी छूट की बात hi कुछ और है. क्यों सविता मैं सही कह रहा हूँ न.

सविता दी ने मेरी बातो का कोई जवाब नहीं दिया. मैंने अपनी जीभ निकली और सरिता दीदी की छूट पर रख दी और चाटने लगा. मैंने एक ऊँगली मनीषा की छूट में घुसा दी और उसकी छूट को ऊँगली से छोड़ने लगा. थोड़ी देर तक मनीषा की छूट को ऊँगली से छोड़ने के बाद मैंने उनकी छूट से ऊँगली निकली और उन्स्की गांड में दाल दी. मनीषा ने आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया कहा. मैं सरिता की छूट chat-te हुवे मनीषा की गांड में ऊँगली करता रहा. थोड़ी देर मनीषा की में ऊँगली करनेके बाद मैंने उसकी गांड से ऊँगली निकली और अपनी जीभ मनीषा की छूट पर रखकर चाटने लगा और ऊँगली सरिता दीदी की गांड में दाल दी. सरिता दी आआआहहह अभी कर उठी. सविता दीदी बड़ी गौर से मनीषा और सरिता दी की छूट और गांड के साथ मेरी छेड़ छड़ देख रही थी. मैंने थोड़ी देर तक दोनों की छूट अचे से चाटकर चिकना kiya.aur मैंने अपना मुंह उनकी छूट से हटा लिया. मैंने सविता दीदी की तरफ देखा तो वो अपने एक हाँथ से अपनी चुकी दबा रही थी.

मैंने सविता दीदी को देखते हुवे अपना लुंड मनीषा की छूट पर रखा और दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- सविता. तुम क्या बोलती हो. मनीषा की छूट में एक hi झटके में पूरा लुंड दाल दू.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी ने मेरी तरफ देखा लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. मुझे अब थोड़ा गुस्सा आ गया. और सरिता दी से बोलै.

मैं- इतनी गरम हो गयी हो. छूट पानी बहा रही है, लेकिन कुछ पूछो तो जवाब नहीं देती हो. भागो यहाँ से. यहाँ कोई तमाशा नहीं हो रहा है जो बैठ कर मज़ा ले रही हो. चलो निकलो यहाँ से.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी ने मेरी तरफ देखा. मेरी बात सुनकर उनकी आँखे दबदबा आयी थी. लेकिन वो इतनी गरम हो चुकी थी की व बिस्टेर से तस से मास नहीं हुई. सविता दीदी ने अपनी गार्डन निचे करके मुझसे कहा.

सविता दी- hhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmm.

मैं- यी hhhhhhhhmmmmmmmmmmmm क्या है. ठीक से नहीं बोल सकती हो क्या.

सविता दी- हाँ एक hi बार में डालकर इटकी छूट को फाड़ डालो.

सविता दीदी की बात सुनकर मैंने अपनी कमर को एकक झटका मारा और मेरा लुंड मनीषा की छूट में जड़ तक समां गया. मनीषा के मुंह से एक चीख निकल गयी.

manisha-ooooooohhhhhhhhh मम्मीयिययीय. ऊऊओह्ह्ह्हह धीरे भैया. मुझसे कोई दुस्मणीय ही क्या तुम्हईई दीदी. क्यूओ मेरीए छूट फडवणा चाहतीई हूँ. तुम्हारी अंडरर ज्यादा आग लगीई हूँ तू अपनीइ छूट मी डलवाना एकक होई बार मेई. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

मनीषा की बात सुनकर मैं जोर जोर से मनीषा को छोड़ने lag.maine अपना हाँथ बढाकर सविता दी को अपने और करीब खींच लिया. सविता दी मेरी आँखों में देखने लगी. मैं भी उनकी आँखों में देखना लगा. मैं अपनी कमर को आगे पीछे करता रहा. मनीषा ने भी सरिता दी के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगी. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने एक हाँथ दीदी के सर के पीछे रखकर उनके बालो को कसकर पकड़ लिया जिससे दीदी के मुंह से आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अभी, की आवाज़ निकल गयी. सरिता दीदी ने सर घुमाकर पीछे देखा और दीदी को इस पोजीशन में देखकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी. उन्होंने फिर सर आगे करके मनीषा के होंठो को चूमने लगी.

मैं मनीषा की छूट छोड़ रहा था. मैं सविता दीदी की आँखों में देखते हुवे अपना होंठ उनके होंठो पर रख दिया और सॉफ्ट सॉफ्ट किश करने लगा. दीदी ने मस्ती में अपनी आँखे बंद कर ली और मेरा किश में साथ देने लगी. थोड़ी देर तह मैं दीदी के होंठो को किश करता रहा और मनीषा की छूट छोड़ता रहा. फिर मैंने दीदी को होंठो से अपने होंठ अलग किया और अपना लुंड मनीषा की छूट से बहार निकल लिया. मैंने मनीषा की छूट से लुंड निकल कर सरिता दीदी की छूट पर सेट किया और धक्का मरने वाला hi था की सरिता दी ने अपना सर पीछे किया और मुझसे कहा.

सरिता दी- रखो अभी. मैं चाहती हूँ की दीदी खुद तुम्हरा लुंड पकड़कर मेरी छूट पर लगाए और तुमसे कहे की अभी सरिता की छूट में एक झटके में अपना लुंड डालकर छोड़ो इसे.

सरिता दी की बात सुनकर सविता दी कभी मेरी तरफ देख रही थी तो कभी सरिता दी की तरफ. कुछ सेकंड देखने के बाद सविता दीदी ने कहा.

सविता दी- अभी तुमको छोड़ने तो जा hi रहा है फिर तुम ऐसा क्यों कह रही हो. मुझसे नहीं होगा ये सरिता.

सविता दीदी की बात सुनकर सरिता दी ने मनीषा से कहा.

सरिता दी- चल मनीषा यहाँ से. अब नहीं छुड़वाना हम दोनों को. साली कामिनी इतनी गरम हुई पड़ी है. छूट पानी बहा रही है. अपने हांथो से अपनी चूचिया रगड़ रही है, लेकिन पता नहीं किस बात की शर्म है इनको जो ख़तम hi नहीं हो रही है. इनको बस अपने से मतलब है. हम लोगो के प्यास की कोई कदर hi नहीं है इनको. पता नहीं अपनी छूट को बचाकर अचार डालेंगी क्या ये. चल मनीषा नहीं छुड़वाना अब.

सरिता दीदी ने झूठा गुस्सा दिखते हुवे कहा. सविता दीदी की हालत ऐसी हो गयी थी की जैसे काटो खून नहीं. एक तो वो पहले से hi इतनी गरम हो चुकी थी की अगर मनीषा और सरिता दीदी न होती तो अब तक पता नहीं कितनी बार मेरा लुंड अपनी छूट में ले चुकी होती, लेकिन मनीषा और सरिता दीदी के कारन उन्होंने अपने आप को सेंट्रल किया हुवा था. लेकिन सरिता दीदी की इस बात से उनका कण्ट्रोल ख़तम हो गया और उन्होंने मेरा लुंड अपने हांथो से पकड़ लिया और सरिता दीदी की छूट पर सेट करके सरिता दीदी से कहा.

सविता दी- रुको सरिता. अभी. अपना लुंड एक hi झटके में इस कामिनी की छूट में दाल दो और इसे रंडी की तरह छोड़ो, इसकी छूट इतनी बुरी तरह फेडो की ये चल न पाए. मारो धक्का अभी. फाड् डालो इसकी छूट को.

इतना कहकर सविता दी ने मेरे लुंड का डायरेक्शन को चेंज कर के सरिता दीदी की गांड पर लगा दिया और अपने मुंह से थूक उनकी गांड पर गिरा दिया. सविता दी की बात सुनकर मैंने अपनी कमर का एक जोरदार झटका लगाया और मेरा लुंड सरिता दी की गांड में एक hi बार में गहराई तक उतर गया. सरिता दी दर्द से चिक पड़ी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyy. oooooooooooohhhhhhhhh सलिई हरामीई सविता. मेरिइइइइ गानंददद फड़वा डीई री. चू बहूत्त कामिनीई haiii.mainee अपनी छूटत छुड्वानी की लिये कहा था, लेकिननं तुणी मुझी धोखा दिया. ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीयी. आराम सीए काररर भायी. यी मुझसेइ बदला ली रहीए हैई. रुकक्क सलीई मेरा भी समायी आयेगा तू मैंन तुझी अभी सी रुंडी की तआराहः छुड्वायगी देखह लेना.

सविता दी- क्यों सरिता मज़ा आया न. बड़ी उछाल रही थी लुंड लेने के लिए अब क्या हो गया. मज़ा नहीं आ रहा है क्या. जोर से छोड़ अभी इसकी गांड कोऊ. मुझसे उलझती है. आज के बाद सोच समझ कर उलझना मुझसे. नही तू इस बार तेरी गांड में अभी का लुंड नहीं अभी को hi घुसेड़ दूंगी.

सविता दीदी ये कहकर मेरे होंठो को चूमने lagi.main सरिता दीदी की गांड मर रहा था. मनीषा सरिता दी के होंठ को चूस रही थी. मैं दीदी के होंठ चूसते हुवे अपना हाँथ दीदी की चुकी पर रख दिया और दबाने लगा. दीदी की चुकी उत्तेजना के कारन ठोस हो गयी थी. मैं उनके होंठ चूसते हुवे उनकी चूचिया दबाने laga.niche से मैं सरिता दीदी की गांड मरता रहा. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लुंड सरिता दी की गांड से निकला तो दीदी ने मेरा लुंड पकड़कर मनीषा की गांड पर लगा दिया और उसकी गांड पर ढेर सारा थूक गिरा दिया. मैंने सविता दीदी की चूचिया दबाते हुवे उनकी पर एक धक्का मारा. मेरा लुंड आधा उसकी गांड में घुस गया. मनीषा की चीख निकल गयी.

मनीषा- आआआआअह्हह्ह्ह्हह भैईयाआआआ. ऐसी होई छोड़ो मेरीए गण्ड को. ऊऊऊह्ह्ह दीदी.

मैंने अपना लुंड थोड़ा बहार निकला और एक झटके में पूरा लुंड मनीषा की गांड में दाल दिया. मनीषा दर्द से चीख पड़ी और सरता दीदी के होंठो को काट लिया.

मनीषा- आआआअह्हह्ह्ह्ह भैयाआ. धीरी सीए. तुमनेई टूओ मेर्री गंड़द होई फाड़ डीई. मैनी ऐसा हलब्बीी लुंड नहीं देखा जो. दो दू गरम जवानीयूवू की गण्ड मर्डर रहा हैई. थोड़ड़ा धीरी . छोड़ड़ड़ मुझी ऊऊओह्ह्ह्ह डीडीई. भैया सी कहिये की मुझी छोड़ती रही.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना लुंड जोर जोर से मनीषा की गांड में ठोकने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड से बहार निकला और सविता दी का सर पकड़कर निचे की तरफ दबाने लगा. दीदी मेरा इशारा समझ गयी और अपने मुंह में मेरा लुंड ले लिया और चूसने लगी. मैं दीदी की चुकी दबा रहा था. और दीदी मेरा लुंड चूस रही थी. सरिता दीदी और मनीषा दीदी एक दूसरे को होंठ चूस रही थी. मैं अपने आपको बहुत खुशनसीब मन रहा था की मेरी तीनो चुड़क्कड़ बहाने मेरी रंडी बन चुकी थी. मैं उन्हें जब चहु जैसे चहु छोड़ सकता हूँ.

मैंने दीदी के मुंह को छोड़ने लगा और बोलने लगा.

मैं- आअह्ह्ह सरिता. तुम भी इन दोनों की तरह एक नंबर की माल हूँ, तुम्हारा मुंह बहुत गरम है. मेरा लुंड पिघल जायेगा तुम्हारे मुंह में.

इतना बोलकर मैंने 5-6 धक्के दीदी के मुंह में लगाए और अपना लुंड बहार निकल लिया दीदी ने मेरा लुंड सरिता दीदी की छूट पर सेट किय और मैंने एक झटके में पूरा लुंड उनकी छूट में दाल दिया. दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- आआह्ह्ह्हह्ह अभियई. यी कामिनी पक्का मुझसे बदला ले रही है. ऊऊओह्ह धीरे कर न.

सरिता दीदी की चीख शंकर मैंने जोर जोर से उनकी छूट छोड़नी शुरू कर दी. मैं दीदी की छूट छोड़ते हुवे सरिता दी की t-shirt पकड़ ली और उसे उतरने लगा. दीदी ने मेरी आँखों में देखा और अपने हाँथ ऊपर कर लिया. मैंने सविता दीदी की t-shirt उतारकर सरिता दी के सामने फेंक दिया. सरिता दी ने नज़र घुमाकर मेरी तरफ देखा और हँसते हुवे आगे देखने लगी. सरिता दी ने अपना जिस्म बीएड पर एक हाँथ रखकर ऊपर उठाया और मनीषा की एक चुकी हाँथ में लेकर दबाने लगी. मैं सविता दीदी की t-shirt उतारकर उनकी नंगी चुकी को अपने हाँथ में भरकर दबाने लगा और एक चुकी को अपना मुंह निचे करके अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. निचे मैं सरिता दीदी को लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगाकर छोड़ रहा था. सरिता दीद को मैंने 5 मिनट ताबड़तोड़ धक्के मार्कर छोड़ने के बाद अपना लुंड उसकी छूट से निकल लिया.

मैं सरिता दी की छूट से लुंड निकल लिया तो सविता दी ने मेरा लुंड मनीषा की छूट में सेट किया मैं ीक बार में hi लुंड अंदर डालकर लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगाने लगा. मैं सविता दीदी की चुकी पिटे हुवे दबा रहा था. दीदी एक हाँथ से मेरे सर को अपनी चुकी पर दबाने लगी थोड़ी देर तक चुकी पिने और दबाने के बाद मैंने अपना मुंह और हाँथ उनकी चुकी से हटा लिया और मनीषा की छूट जोर जोर धक्के मार्कर छोड़ने लगा. सविता दीदी उठकर मेरे पीछे घुटने के बल बैठ गयी और अपना हाँथ आगे ले आकर मेरे साइन को सहलाने लगी. और अपनी चूचिया मेरी पीठ पर रगड़ने लगी.

मैं थोड़ी देर मनीषा को छोड़ने के बाद उसकी छूट से पाना लुंड निकला और सरिता दी की छूट में पेल दिया. सरिता दी की छूट में 9-10 हचक हचक कर धक्के मरने के बाद मैंने उनकी छूट से लुंड निकलकर मनीषा की छूट में पेल दिया और उसकी छूट में भी 9-10 धक्के लगाने के बाद मैंने लुंड बहार निकल लिया. इसी तरह लगभग 5 मिनट दोनों को छोड़ने के बाद मैं, मनीषा और सरिता दीदी झड़ने की कगार पर पहुंच गए थे. पीछे दीदी मेरी पीठ पर अपनी चूचिया जोर जोर से रगड़ रही थी और मेरे साइन को सहला रही थी. मैंने अपना लुंड मनीषा की छूट में डालकर लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिए 8-10 स्ट्रोक लगाने के बाद मनीषा झड़ने लगी और बोलने लगी.

मनीषा- aaaaahhhhhhhhhhh भैयाआ.. तूने तो मुझे छोड़ छोड़ कर मस्त कर दिया, बहुत अच्छा छोड़ता है तू सेल. कहा से सीखा ऐसा छोड़ना तुणी. तू बहुत्त बड़ा हरामी है रे. और जोर से छोड़ भाईई. मैंनं झड़ने वालीए हूँ. औरर जोरर से मैं आए रहीए हूँ आआआअह्हह्ह्ह्ह डीडीई मैंनं गयी मुझी sambhaallooo.ooooohhhhhhh aaaaaaaahhhhhhhhhh.

इतना बोलते हुवे मनीषा झाड़ गयी. मैंने अपना लुंड मनीषा की छूट से बहार निकला और सरिता दीदी की छूट में दाल दिया और उन्हें छोड़ने लगा. पीछे सविता दी पूरी ताकत से अपनी चुकी मेरी पीठ पर रगड़ रही थी. वो अपने हाँथ से अब मेरे साइन को मुठी में भर भर कर दबा रही थी और जीभ निकलकर मेरी गार्डन और कन्धा चाट रही थी. मुझे लगता था की वो भी अब झड़ने वाली थी. मैं सरिता दीदी की छूट को लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगा रहा था. कुछ hi देर में सरिता दीदी झड़ने लगी

सरिता दी- आआआआअह्ह्ह्हह आआआहहहहह अभियई. छोड़ड़ड़ दी मुझी अपनीइ रांदडीई बनाकर रर छोड़ मुझी. टेरिइइइ तीनूओ बहनी तेरी रण्डी बन्न चुकी हीी. अपने इस्सस राक्षसीय लौड़ी सीए हम्म टीनू की छुटत ठोकता राजहठ आआआहहहहह फुककक मई हरदाररर. मैं झड़ने वलियी हूँण ओह्ह्ह्हह्हह ऊऊऊऊह्ह्ह मम्मीयी. ाआउउउउउछहहहहहहह. मैंन गइईईई.

सरिता दीदी के झड़ने के बाद 7-8 स्ट्रोक लगाने के बाद अपना पानी सरिता दी की छूट में छोड़ना शुरू कर दिया और बड़बड़ाने लगा.

मैं- आआआआअह्हह्ह्ह्हह meriiiiiiiiii रनडीईयूओ. बहुतत्त गरममम हूँ तुम तीनूओ. आआअह्हह्ह्ह्हह मेंननभी झाड़ रहा होंण. ोोोूह सरित्ताआ. मेंनननभी आए रहा होणं. तुम्हाररी छूट मी झाड़ रहा हूणंण ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.

मेरी बात सुनकर सविता दी पूरी ताकत से अपनी चुकी मेरी पीठ पर रगड़ती हुई झड़ने लगी.

सविता दी- oooooooooooohhhhhhhhh अभीइइइइइइइ मेरी भैयाआ. टेरिइइइइ सविता भीई झाड़ रहीए हैईईई ऊऊऊओह्ह्ह सँभालुओ मुझी . मैं गइईईई ऊह्ह्ह्हह्ह सरिता,,,

हम चारो झाड़कर पास्ट होकर बिस्टेर पर गिर पड़े.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-151 (मेगा अपडेट)

झड़ने के बाद मनीषा और सरिता दीदी एक दूसरे से लिपटे बिस्टेर पर लेते अपनी सांसे दुरुस्त कर रहे थे और मैं और सविता दी एक दूसरे से लिपटे अपनी सांसे दुरुस्त कर रहे the.lagbhag 5 मिनट हैट हम ऐसे hi पड़े रहे. सबसे पहले सरिता दी उठ और बीएड पर बैठ गयी. मनीषा भी उठकर बीएड पर बैठ गयी. मैं और दीदी अभी भी ऐसे hi लेते हुवे पड़े थे. सरिता दी ने हम दोनों को देखते हुवे कहा.

सरिता दी- अरे दीदी अब तो छोड़ दो अभी को या अपने अंदर घुसा लेना चाहती हैं उसे आप.

सविता दी- तू चुप कर सरिता बहुत बोलती है तू. तुझे कोई परेशानी है क्या अगर मैं अभी को अपने अंदर घुसा लू तो.

सरिता दी- मुझे क्या परेशानी है. आप अभी को चाहे जहा घुसाए. लेकिन कभी कभी उसे बहार भी निकल दीजियेगा. वो क्या है न बहार हम दोनों भी हैं जिसे इसकी जरूरत है.

सरिता दीदी की बात सुनकर सबके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी. अब मैं और सविता डिब hi उठकर बैठ गए थे. सरिता दी और मनीषा ने दीदी को पकड़कर अपने बिच बैठा लिया और उनके कंधे पर सपना सर रख दिया. सविता दीदी भी अपने दोनों हांथो से उनके सर को सहलाने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद सरिता दीदी ने सविता दीदी से पूछा.

सरिता दी- दीदी आप क्या अभी भी हमसे नाराज़ हैं. सॉरी दीदी अगर आपको हमारी कोई बात बुरी लगी हो.

सविता दी- तुम्हे सॉरी कहने की जरुरत नहीं है. हाँ पहले मैं तुम सब से बहुत नाराज़ थी लेकिन कल से सब कुछ सोचने के बाद मेरी नाराज़गी ख़तम हो गयी है. जो मैं करती हूँ अभी के साथ वही तुम दोनों भी करते हो. तो नाराज़गी का सवाल hi पैदा नहीं होता.

दीदी की बात सुनकर सरिता दीदी और मनीषा ने सविता दीदी को कसकर गले लगा लिया. मनीषा बोली.

मनीषा- वववववव. ये तो बहुत ख़ुशी की बात हैई. भैया अब दीदी भी हमारे साथ हैं तो क्यों न खेल शुरू किया जाये. क्या कहती हो सरिता दी.

सरिता दी- हाँ क्यों नहीं. थोड़ी देर बाद खेल शुरू करते हैं.

सविता दी- कौन सा खेल शुरू करने वाले हो तुम सब.

मनीषा- अरे दीदी चुदाई का खेल और कौन सा खेल. वो भी आपके साथ मिलकर

सविता दी- तुम सब पागल हो क्या. अभी अभी तो चुदाई करवाई तुम दोनों ने. अब फिर से. और मैं भी तो तुम लोगो के साथ hi थीं ा.

सरिता दी- नहीं दीदी एक तो आप बहुत देर से खेल में शामिल हुई और जो कुछ भी मज़ा क्या वो अभी ने किया आपके साथ. हम दोनों ने तो आपको अभी चखा भी नहीं. तो इस बार आपको अचे से चखेंगे. और आपकी जवानी को अचे से निचोड़ेंगे भी मैं और मनीषा मिलकर.

सरिता दी की बात सुनकर सविता दी मुस्कुराने लगी. और बोली.

सविता दी- तुम लोग नहीं man-ne वाले न. ठीक है, लेकिन पहले पानी पि लू. बहुत प्यास लगी है.

इतना कहकर सविता दी ने टेबल पर रखा पानी उठाया और पिने लगी. उसके बाद मैंने, मनीषा ने और सरिता दीदी ने भी पानी पिया और बिस्टेर पर बैठ गए. थोड़ी देर बैठे रहने के बाद सरिता दीदी उठकर सविता दीदी के पीछे बैठ गयी और अपना ठंठ उनकी पीठ पर रखकर सहलाने लगी. मनीषा ने ये देखकर दीदी के सामने आकर दीदी के कंधे पर अपना हाँथ रक् दिया और उनके सामने बैठ गयी. मनीषा दीदी की आँखों में देखने लगी और अपने होंठो पर जीभ फिरने लगी. फिर मनीषा दीदी के ऊपर झुकी और अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और चूमने लगी. सरिता दीदी सविता दी की पीठ को सहलाते हुवे अपना होंठ उनके कंडे पर रख दिया और चूसने लगी. आगे मनीषा सविता दीदी के होंठ चूस रही थी. दीदी भी मनीषा का सहयोग कर रही थी होंठ चूसने में.

मनीषा सविता दीदी के होंठो को चूसते हुवे अपना हाँथ दीदी की दोनों चूचियों पर रख दिया और हलके हलके दबाने लगी. सरिता दीदी सविता दीदी की पीठ सहलाते हुवे अपना हाँथ उनकी गद्देदार गांड के ऊपरी भाग पर रख दिया और दबाने लगी. साथ hi अपनी झुब्ध निकलकर उनके धंधे और गले को चाटने लगी. मनीषा ने दीदी की चुकी दबाते हुवे अपना होंठ दीदी के होंठो से अलग किय अपनी जीभ निकलकर सविता दीदी के होंठो पर फिरने लगी. दीदी ने होंठ खोलकर मनीषा की जीभ अपने मुंह में ले ली और चूसने लगी. जीभ चूसते हुवे वो अपने हाँथ मनीषा की चुकी पर रख दिया और दबाने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi एक दूसरे की चुकी बढ़ाते हुवे होंठ चुस्ती, जीभ चुस्ती रही. फिर मनीषा ने अपनी जीभ दीदी की मुंह से निकल कर दीदी के गाल और गार्डन पर गुमने लगी. सरिता दी उनकी गांड को दबा रही थी.

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद सरिता दीदी उठकर दीदी के बगल में आकर बैठ गयी और दीदी को देखने लगी. थोड़ी देर दीदी को देखने के बाद उन्होंने अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया. सरिता दीदी के बैठने के बाद मनीषा सविता दीदी के आगे से उठकर उनके बगल में जाकर बैठ गयी और उसने भी अपने होंठ बढाकर दोनों दीदियो के होंठ चूसने की कोशिश करने लगी. सरिता दीदी ने अपना होंठ सविता दीद के होंठ से अलग किया और मनीषा के होंठो को चूसने लगी. कुछः देर तक चुने के बाद सरिता दीदी फिर से सविता दीदी के होंठ चूसने लगी. मनीषा ने अपनी जीभ बहार निकली और दोनों दीदियो के होंठो के बिच डालने की कोशिश करने lagi.ye देखकर दोनों दीदियो ने भी अपनी जीभ बहार निकल ली और मनीषा की जीभ पर घूमने लगी.



कुछ देर एक दुसरे की जीभ से खेलने के बाद मनीषा ने दीदी की जीभ अपने मुंह में ले ली और चूसने लगी. सरिता दीदी दोनों के गलो पर अपनी जीभ घूमने लगी. थोड़ी देर तक सविता दीदी की जीभ चूसने के बाद मनीषा ने दीदी की जीभ अपने मुंह से बहार निकली तो सविता दीदी ने सरिता दीदी की जीभ अपने मुंह में ले ली और चूसने लगी. ऐसे hi बरी बरी से बदल बदल कर लगभग 15 मिनट तक मेरी तीनो बहाने एक दूसरे की जीभ को अपने मुंह में लेकर चुस्ती rahi.uske बाद सरिता दीदी और मनीषा ने दीदी के एक एक गाल को अपने कब्जे में ले लिया और चाटने लगी. गाल chat-te हुवे वो दोनों निचे जाने लगी.

दीदी के आधे शरीर पर मनीषा ने कब्ज़ा कर लिया और आधे शरीर पर सरिता दीदी ने कब्ज़ा कर liya.dono दीदी के गाल चूसने के बाद उनके कंधे और गार्डन को चूमने और चूसने लगी. सरिता दीदी ने एक हाँथ बढाकर दीदी की चुकी पर रख दिया और मनीषा ने अपने हाँथ बढाकर दीदी की छूट पर रख दिया. दीदी मस्ती में एकदम पागल हो गयी और अपनी आँखे बंद कर अपनी गार्डन पीछे करके मस्ती से बोली.

सविता दी- oooooooohhhhhhhhhh सरिताआ, आआआअह्हह्ह्ह्ह मनीषा. कहा सी सीखा ही तुम दोन्यू नई ये सबब्ब. बहुत्त मज़ा आ रहा ही. ऐसी होई करत्ती राहू.

मैंने बहुत देर से बैठा अपनी तीनो मॉल का garma-garam खेल देख रहा था. अब मुझसे कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया तो मैं सविता दीदी के पिचई जाकर खड़ा हो गया. खड़ा होने पर मेरा लुंड दीदी के सर के ठीक सामने था. मैं निचे झुका और सविता दीदी की गार्डन पकड़कर दीदी का सर ऊपर उठाया और उनकी आँखों में देखते हुवे उनके फड़कते हुवे होंठो पर अपना होंठ रख दिया और चूसने लगा. निचे सरिता दीदी उनकी चुकी जोर जोर से दबाते हुवे उनकी चूचियों के ऊपरी भाग को चूस और चाट रही थी.

मनीषा दीदी के लोअर के ऊपर से उनकी छूट सहला रही थी और दीदी की चूचियों के ऊपरी भाग को चूस रही थी. दीदी एकदम मस्त हो गयी थी और अपने बदन को हिला रही थी. थोड़ी देर दीदी के होंठ चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ निकली और उसके दीदी के मुंह में डालने के लिए उनके होंठो पर दबाद देने लगा. दीदी ने अपना मुंह खोल दिया मैंने जीभ दीदी के मुंह के अंदर दाल दी. दीदी मेरी जीभ चूसने लगी मनीषा दीदी की छूट सहलाते हुवे उनकी एक चुकी के ऊपर अपना मुंह रख दिया और चूसने लगी. सरिता दीदी ने दीदी की चुकी की घुंडियो को जीभ निकलकर चाटने लगी.

थोड़ी देर सविता दीदी ने मेरी जीभ छाती फिर अपनी जीभ मेरे मुंह में घुसेड़ दी मैं दीदी की जीभ चूसने लगा. सरिता दीदी दी के निप्पल को अपने दांतो से बाइट कर रही थी और मनीषा दीदी की एक चुकी मुंह में भर कर जोर जोर से चूसते हुवे दीदी की छूट सहला रही थी. थोड़ी देर तक मैंने भी दीदी की जीभ चूसी . उसके बाद मैंने दीदी की जीभ अपने मुंह से निकल दी. मैं दीदी की आँखों में देखने लगा. दीदी की आँखे नशीली हो गयी थी. उनकी आँखों में वासना के लाल डोरे तैर रहे थे. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे उनके चेहरे पर झुका और उनकी दोनों आँखों को चुम लिया. दीदी के चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी. मैंने दीदी की गार्डन को छोड़ दिया. दीदी ने अपना सर निचे कर लिया. और अपना हाँथ मनीषा और सतीरा दीदी के सर पर रखकर सहलाने लगी. थोड़ी देर दीदी की चुकी को चूसने के बाद मनीषा ने दीदी की चुकी अपने दांतो से पकड़ी और अपनी ऊँगली दीदी की लोअर के ऊपर छूट के सामने राखी और जोर से दीदी की चुकी को काट लिया और ऊँगली लोअर समेत दीदी की छूट में डालने की कोशिश की दीदी मस्ती में चीख पड़ी.

सविता दी- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनिशांआ. ऐसी होई कर्रूआ. बहुत्त मज़ा आ रहा हैई.

दीदी के बात सुनकर सरिता दीदी ने भी मनीषा को कुछ इशारा किया और दोनों ने दीदी की चुकी को अपने दांतो से जोर से काट लिया और मनीषा ने की छूट अपनी मूंठी में भरकर मसल दिया. सविता दीदी की आँखे मस्ती में बंद हो गयी और एक मादक दर्दभरी सिसकी उनके मुंह से निकल गयी.

सविता दी- aaaaahhhhhhhhhh सारितत्ताआ. क्या कररर राहीईई हैईईईई. बहुत्तत्त मज़ा आ राहहहहा हैई. ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह मनिशांआ कहा जाओ मेरीए चूचियोऊ को तुममम दोन्यू. ऊह्ह्हह्ह.

सरिता दी- मैं तो पहले hi बोल रही थी की हम लोगो के साथ आ जाओ मिलकर चुदाई करेंगे तो बहुत मज़ा आएगा, मगर तुम hi थी जो बहुत नखरे कर रही थी. अब नखरे नहीं करोगी.

सविता दी- ooooooooohhhhhhhhhhh सविताआए. मेंनननन पागल थिई जोऊ तुममम लोगो की बात नही मॉनीई ऑर्डर अब्ब्ब टकककक इस्सस मज़े सीए वांछित्त रहीए. अब्ब्ब मैंन रुजज ऐसी मज़ाआ लुंगी तुममम लोगो की सठह मिललकाररर.

सविता दीदी की बात सुनकर मनीषा ने उनकी लोअर में हाँथ दाल दिया और अपनी ऊँगली उनकी छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगी. और ऊपर अपना मुंह दीदी की चुकी से हटा लिया और मुझे पास आने का इशारा किया. मैं मनीषा के पास जाकर बैठ गया तो मनीषा ने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिया और चूसने लगी. मैंने भी अपना एक हाँथ बढाकर सविता दीदी की चुकी पर रखकर दबाने लगा. लगभग 10 मिनट तक हम सब ऐसे hi एक दूसरे के बदन के साथ खेलते रहे. उसके बाद सबने दीदी के शरीर से अपना हाँथ और मुंह अलग कर लिया. दीदी मस्ती में बैठी हांफ रही थी.

थोड़ी देर बाद मनीषा ने सरिता दीदी से कहा.

मनीषा- दीदी अब आप उठकर कड़ी हो जाओ.

मनीषा की बात सुनकर सविता दीदी उठकर कड़ी हो गयी सरिता दीदी सविता दीदी के पीछे बैठ गयी और मनीषा सविता दीदी की आगे बैठ गयी. मनीषा ने दीदी की लोअर पकड़ ली और उसे दीदी के पैरो तक उतर दिया. दीदी ने अपने पेअर उठाकर लोअर उतर दिया और निचे फेंक दिया. मनीषा ने ऊपर दीदी के चेहरे की तरफ देखा तो दीदी मनीषा को hi देख रही थी. सरिता दीदी ने अपने हाँथ दीदी की दोनों गद्दे दर गांड पर रख दिया और उनकी गांड सहलाने लगी. मनीषा ने कुछ देर दीदी के चेहरे की तरफ देखा फिर अपनी जीभ निकल कर दीदी की छूट पर रख दी और चाटने लगी. दीदी के मुंह से सिसकी निकल गयी.

सविता di-aaaahhhhhhhhhh मनीषआआआ. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह सरिता. ऐसी होई मेरी बहनों.

दीदी की बात सुनकर मनीषा ने अपनी जीभ जोर जोर से दीदी की छूट पर ऊपर निचे चलना शुरू कर दी. सरिता दी ने सविता दी की गांड के दोनों पतों में अपना चेहरा घुसा दिया और अपनी जीभ निकलकर दीदी के ासशोले को चाटने लगी. दीदी ने अपना एक हाँथ सरिता दीदी के सर पर रख दिया और उनके बालो को सहलाने लगी और एक हाँथ मनीषा के सर पर रखकर अपनी छूट पर दबाने लगी.



मैं भी आगे ाककर दीदी के बगल में खड़ा हो गया और थोड़ा निचे जुकककर दीदी की एक चुकी अपने मुंह में भर ली और चूसने लगा. एक हाँथ मैंने दीदी की चुकी पर रख दिया और सहलाने लगा. सविता दीदी ने अपना हाँथ बढाकर मेरे लुंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी.

थोड़ी देर तक दीदी की चुकी चूसने ने काब मैंने दीदी की चुकी को अपनी मुट्ठी में भर लिया और जोर से बढ़ाकर उनकी एक चुकी को दांतो से काट लिया. दीदी मस्ती और दर्द से चीख पड़ी.

सविता दी- aaaaahhhhhhhhhh ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiii. धीरी सीए भाईईई oohhhhhhhhhhh मज़ा आ रहा ाहीई ऐसी hi करूऊ. uuuuuuuuffffffffffff मुम्ममइय्य्य

दीदी मेरे लुंड को जोर जोर से दबाने लगी. सहलाने लगी. सरिता दीदी सविता दीदी की गांड चाट रही थी और अपने एक हाँथ से उनकी गांड को दबा रही थी और एक हाँथ से उनकी गांड पर थप्पड़ मर रही thi.har थप्पड़ के साथ दीदी के मुंह से ऊऊऊह्ह्हह्हआआअह्ह्ह्हह ssssssssss की आवाज़ निकल रही थी. आगे से मनीषा दीदी की छूट चाट रही थी और अपनी एक ऊँगली दीदी की छूट में घुसकर अंदर बहार कर रही थी. लगभग 10 मिनट ऐसे ही दीदी की गांड छूट चुकी चूसने और दबाने के करम दीदी एकदम चरम पर पहुंच गयी और मनीषा का सर पकड़कर अपनी छूट पर दबा लिया और मेरा लुंड दबाते हुवे झड़ने लगी.

सविता दी- ooooooohhhhhhhhhh Aaaaaahhhhhhhhhhh. मुम्ममइय्य्य्यय्य. बहुत्त मज़ाआ आ रहा हीी. मैंन झड़ने वली होऊणन औरर जोरर सी चट्टू मेरी छुटत. निचोड़ लो सारा रस मेरीए छूट का मनीषा. और जोर से उंगली अंदर डालो मेरी बहन. ऊऊऊह्ह्ह्ह सरिता. चतत्त मेरीए गण्ड और जूरर सी पीट मेरी गांड को लललल कर डे पीट पीट कररर. ोुह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह ufffffffffff अभीयी. निचोड़ड़ डॉल मेरिइइइ चूचियोऊ कोऊ यी तेरी हांथोउ ऑर्डर मुँहहह के छुवाननं की लिये तरसती ही. ऊऊओह्ह्ह्ह मैंन गईइइइइइ री. ऊऊह्ह्हह्ह आआआहहहहह मैं गईई.

इतना कहकर दीदी भलभलाकर झड़ने लगी. मनीषा ने दीदी की छूट का सारा राश चाट कर साफ कर दिया. सविता दीदी एकदम निढाल दोनों का सर पकड़कर कड़ी रहीए. थोड़ी देर में जब उनकी सांसे दुरुस्त हुई तो वो मनीषा को छोड़ी. मनीषा chhut-te hi मेरे लुंड को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मैं मनीषा के सर पर हाँथ फेरने लगा. मनीषा मेरा लुंड चूसते हुवे अपनी छूट अपने हांथो से सहला रही थी. सरिता दीदी मेरी आप आ गयी और उन्होंने अपनी जीभ से मेरी गोटियों को सहलाने लगी. सविता दीदी बिस्टेर पर बैठकर मनीषा और सरिता दी को देख रही थी.

मैंने मैंने मनीषा का सर पकड़ा और अपने लुंड पर पटकने लगा. मनीषा के मुंह से ग्ग्ग्हःहःहःहूउउउउ गगगगगगठ्हूउउउउउउउ की आवास निकलने लगी. सरिता दीदी मेरी गोटिया चूस रही थी. मैं मनीषा का मुंह छोड़ने के बाद मनीषा के मुंह से अपना लुंड बहार निकला और सरिता दीदी के मुंह में दाल दिया और छोड़ने लगा. मनीषा अपने हाँथ से मेरी गोटिया सहलाने लगी. मैं सरिता दीदी का सर पकड़ा और अपने लुंड जोर जोर से उनके मुंह में पेलने लगा. मैं लुंड पेलते हुवे बोलै.

मैं- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सरिताआ. मेरा लुंड अंडरर ताकक लिए री. चू बहुतत्त तिकड़मबाज़ज़्ज़ज़ ही री. देखह डीडीईई कोऊ कैसी तुणी अपनी साथ मिला लिया हीी. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सरिता. लिए मेरा लुंड अपनी गरममम मुँहहह मी.

इसके बाद बरी बरी से सरिता दीदी और मनीषा ने मेरी लुंड और गोठिया सहलाती रही चुस्ती रहीए. chat-ti रही उसके बाद मैंने दोनों को बिस्टेर पर लिटा दिया. मैं मनीषा के पैरो के बिच में आया और उसकी तंग फिआलकार मैं उसकी छूट देखने लगा. मनीषा की छूट पानी फेंक रही थी. मैंने झुककर अपनी जीभ निकली और मनीषा की छूट पर रख दी और चूसने लगा. थोड़ी देर तक मनीषा की छूट चूसने के बाद मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी छूट में दाल दी. थोड़ी देर तक उसकी छूट चाटने के बाद मैंने सरिता दीदी को मनीषा के बगल में खींच लिया और उसकी छूट पर अपनी जुबान रख दी और चूसने लगा. सरिता दीदी अपना सर टेढ़ा कर मनीषा के होंठ चूसने लगी. मैंने उनकी छूट में ऊँगली डालकर उसे गिला किया और उसे सरिता दीदी की गांड पर रखकर एक झटके में पेल दिया सरिता दीदी के मुंह से स्स्स्सस्शह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल गयी.

मैंने सरिता दीदी की छूट से होंठ हटा लिया और मनीषा के मुंह के ऊपर सविता दीदी को छूट रखकर बैठने के लिए कहा. सविता दीदी अपनी छूट मनीषा के मुंह के ऊपर रखकर बैठ gayi.fir मैंने सरिता दीदी को मनीषा जी कमर के ऊपर बैठाया और उनकी कमर में हाँथ डालकर मनीषा की छूट के सामने खींच लिया और उनको हाँथ पीछे की तरफ मनीषा के कंधे के पास रखने के लिए कहा. सरिता दीदी अपना हाँथ मनीषा के कंधे के पास रखकर अपना शरीर सविता दीदी की तरफ झुकालिया.

अब सरिता दीदी की छूट और मनीषा की छूट एकदम पास पास थी. मैंने अपने लुंड मनीषा की छूट पर सेट किया और एक जोर का धक्का मारा. मनीषा की छूट में लुंड झाड़ टेक एक hi बार में समां गया. मनीषा के मुंह सी aaaahhhhhuuugggggggghhhhhhhhhuuuuuuuuuuu की आवाज़ निकली जो सविता दीदी की छूट में डाब gai.main सरिता दीदी की झाग को अपने हांथो से पकड़ा और मनीषा की छूट ठोकने लगा. सविता दीदी मनीषा के मुंह पर गोल गोल घूमकर अपनी छूट चटवा रही थी. मैं एक हाँथ बढाकर सरिता दी की चुकी को अपने हाँथ में ले लिया और मनीषा को ठोकने लगा.

थोड़ी देर मनीषा को ठोकने के बाद मैंने अपना लुंड मनीषा की छूट से बहार निकल लिया और सरिता दीदी की छूट पर सेट किया और एक झटके में उनकी छूट में पूरा लुंड उतर दिया. सरिता दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह ABhiiiiii.mereee भईईई. ऐसी होई चूड़ो अपनीइ डीईडीई कोऊ. आअह्ह्ह्ह बहुतत्त ाच्या लग रहा हीी तेरा लुंड लेकारर. और जोरर से छोडोऊ मुझी आआह्ह्ह.

मैं सरिता दी की बात सुनकर हाथ बढाकर दीदी की दोनों चूचिया अपने हांथो से पकड़ लिया और अपनी मुठ में भरकर दबाने लगा और दीदी की छूट ठोकने लगा. दीदी मस्ती में अपना सर इधर उधर झटक रही थी. मनीषा सविता दीदी की छूट चूस रही थी और अपने दोनों हांथो से दीदी की गांड को दबा रही थी. थोड़ी देर दीदी की गांड दबाने के बाद वो दीदी की गांड को अपने हांथो से पीटने लगी सविता दीदी बोली.

सविता दी- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनिशांआ.. मैट कर मेरीए बहनन . मेरी गण्ड लाल जो जाएगीइ. कुछः देरर बाद अभ्हिई वैसी भी हम्म सबब्ब की गाँण्ड लाल करनी वाला है.

सविता दीदी की बात नहीं मणि मनीषा और दीदी की गांड को लगातार pit-ti रही. दीदी आआआहहहहहहह मनीषा ऊऊह्ह्ह मनीषा करती rahi.main सरिता दीदी को लगातार पेलता रहा और उनकी चूचिया दबाता रहा. थोड़ी देर पेलने के बाद मैंने उनकी छूट से अपना लुंड बहार निकला और मनीषा की छूट में पेल दिया और मनीषा को जोर जोर से छोड़ने लगा. मैंने अपनी एक ऊँगली सरिता दीदी की छूट में दाल दी और उनकी छूट ऊँगली से छोड़ने लगा. सविता दीदी थोड़ी देर बाद मनीषा के ऊपर से उतर कर मेरे पास आकर बैठ गयी और झुककर सरिता दीदी की छूट चूसने लगी. मैं मनीषा को छुड़ता रहा. कुछ देर मनीषा को छोड़ने के बाद मैंने सरिता दीदी की छूट में लुंड दाल दिया और उनको छोड़ने लगा. लगभग 5 मिनट तक सरिता दीदी की छूट छोड़ने के बाद मैंने मनीषा की छूट से अपना लुंड बहार निकल लिया और दीदी की बिस्टेर पर लिटाकर उनकी छूट पर अपना लुंड रखा और एक hi झटके में जड़ तक पेल दिया. दीदी की चीख निकल गयी.

सविता दी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiii. ऐसी होई छोडोऊ मुझी. आआह्ह्ह्ह बहुतत्त प्यासी हूँण मेंनमम. मेरी प्यास बुझा दोऊ. ऑर्डर जोरर जोरर सी छोड़ू मुझी हचक्क हचककक कर छोड़ू अपनी दीदी को. आआआहहह अभीयी. मुझी सन्तुस्सठ कर दोऊ अपनी लौड़े सी. ओह्ह.

मैं दीदी को डैम लगाकर छोड़ने लगा. उधर मनीषा और सरिता दीदी 69 की पोजीशन में आ गयी और एक दूसरे की छूट चूसने लगी. मैं दीदी की छूट चूसते हुवे उनकी गार्डन में दोनों हाँथ दाल दिया और अपनी तरफ खींच लिया जिससे दीदी का शरीर कमान की तरह तन गया. मैं हचक हचक कर दीदी की छूट छोड़ने लगा. थोड़ी देर तक दीदी की छूट छोड़ने के बाद मैंने दीदी की छूट से लुंड निकल लिया और मनीषा के पिचई जाकर उसकी छूट में लूँ डालकर उसकी छूट छोड़ने लगा. मनीषा की छूट छोड़ते हुवे मैं सरिता दीदी के मुंह में अपनी ऊँगली दाल दी. सरिता दी मेरी ऊँगली को चूसने लगी. कुछ देर बाद मैंने सरिता दीदी को मनीषा के ऊपर पेट के बल लिटा दिया और मनीषा की छूट से लिंड निकलकर सरिता दीदी की छूट में पेल दिया.

सरिता दीदी की छूट में लुंड डालकर मैं हचक हचक कर छोड़ने लगा. सविता दीदी उठकर मेरी बगल में बैठ गयी और अपना होंठ आगे करके मेरे होंठो को चूसने लगी. मैं सरिता दीदी को छोड़ते हुवे सविता दीदी के होंठ चूस रहा था. मैं लगातार उनके होंठो को चूसते हुवे सरिता दी को लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगा रहा था. थोड़ी देर उनकी छूट छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड बहार निकला और सविता दीदी के सर को निचे झुकाया सेवता दीदी ने निचे झुककर मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैं दीदी के सर के पीछे अपने हाथ रख दिया और लम्बे लम्बे स्टॉक लगाकर उनका मुंह छोड़ने लगा. उनके मुंह से ग्ग्ग्ग्हःहःहःऊउउउउउउउ गगगगगगगगगह्ह्ह्हह्हुउउउउउउ की आवाज़ निकल रही थी.

थोड़ी देर उनका मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड बहार निकला और मैश की छूट में दाल दिया और जोर जोर से छोड़ने लगा. 8-10 जबरदस्त धक्के लगाने के बाद मैंने मनीषा की छूट से लुंड बहार निकला और सरिता दीदी की छूट में पेल दिया. इसी तरह बरी बरी से 8-10 धक्के लगाकर मनीषा की छूट से निकलकर सरिता दी की छूट में पेलता फिर 8-10 लगाकर सरिता दी की छूट से निकलकर मनीषा की छूट में पेलता. सविता दीदी झुकी हुई सयरता दीदी की पीठ पर चुम रही थी.

मैं सरिता दीदी की छूट से अपना लुंड निकलकर मनीषा की छूट में दाल दिया और हचक हचक कर छोड़ने लगा. मैं बहुत जोर जोर धक्के मर्डर रहा था. मनीषा अब झड़ने के बिलकुल करीब पहुंच गयी थी इसलिए वो चिल्लाते हुवे झड़ने लगी.

मनीषा- ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीयी. सलेटी ऊऊऊह्ह्ह बहुत्त अछ्हीइ छुड़ायी करता ही चू. मैंन झड़ने वाली हूँण. मेरिइइइइ छुटत पानी निकाल रही हीी औरर जोरर सी ठोकू अपना लुंड मेरीए छुटत मी. मैं झाड़ रहियी होऊणन भैया ऊऊऊऊह्ह्हह्ह आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मैं गईई. मेंनननन गयी. उउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ मम्मीयिययीय.

मनीषा के झड़ने के बाद मैंने 2-3 झटका मनीषा की छूट में मारा और अपना लुंड निकल कर सरिता दीदी की छूट में दाल दिया और जोर जोर से छोड़ने लगा. मैं अपने हांथो से सरिता दीदी की गांड को अपनी मुठी में भर लिया और पूरी ताकत से भींजकर सरिता दीदी की छूट में लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगाने लगा. सरिता दीदी की छूट में मैं जब लगातार 10-13 धक्के लगाए तो उनकी छूट ने पानी छोड़ दिया और वो झड़ने लगी.

सरिता दी- ऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआअह्हह्ह्ह्ह ाभीईई. मैंनं आए रहहीइ होऊणन्न चू बहुत्त अच्छीई चुड्दिई करता हीी. टीरी जैसी छोडऊ पुररी शाहर्र मी नही होगा. तुणीऐ अपनी तीनूओ बहननु की छूट ेक्क्क होई बिस्टीयर पारर छोड़ डीई. औरर छोड़ चुड़क्कड़ साली. जोरर जोरर से छोड़. मैं आनी वालीए हूँण. आआह्ह्ह्ह औरर जोर मैं गइईईई आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह उउउउउउउउउफ्फ्फ्फ्फ़.

सरिता दीदी भी झाड़ गयी तो मैंने उनकी छूट से अपना लुंड बहार निकला और सविता दीदी की तंग पकड़कर उन्हें बिस्टेर के निचे उठाकर खड़ा कर लिया और एक पेअर बिस्टेर पर रखकर अपना लुंड पकड़कर दीदी की छूट पर सेट किया और एक झटके में उनकी छूट में उतर दिया. दीदी दर्द और मज़े से चीख पड़ी.

सविता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सलीबी ारांम सीई चूड्डड्ड. मैंन तुझसी छुड्वानी के लियी होई नंगई हुई हुन्न मैं कही भागी नहीं जा रही हूँ. छोड़ सेल बहनचोड़ड़ छोड़ औरर जोरर से छोड़ अपनी रंडी दीदी को आआअह्हह्ह्ह्हह ऊऊओह्ह्ह्हह्ह

दीदी की चीख सुनकर मैंने उनके दोनों हांथो को पकड़ा और पीछे खींचते हुवे अपना लुंड दीदी की छूट में ठोकने लगा. दीदी भी अपनी गांड पीछे धकेल धकेल कर अपनी छूट चुदवाती रही. मैं दीदी की छूट बहुत ब्राह्मिन से छोड़ रहा था. थोड़ी देर ऐसे hi छूट छोड़ने के बाद मैंने दीदी दीदी की छूट से अपना लुंड बहार निकल लिया और उनको जम्मीं पर डोगग्य स्टाइल में खड़ा कर दिया और दीदी के पीछे जाकर अपना लुंड दीदी की छूट पर सेट किया और एक झटके में जड़ तक पे लिया और लम्बे लम्बे स्टॉक लगाने लगा. दीदी बस ऊह्ह्ह्ह अभीयी आअह्ह्ह्ह अभियई कर रही थी. लगभग 10 मिनट की लगातार चुदाई के बाद मैं झड़ने के करीब पहुंच गया tha.isliye मैं दीदी की छूट ठोकता हुवा झड़ने लगा.

मैं- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह सललीई रंडी सविता. मैंनं झाड़ रहा हूँण ऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह तुममम तीनूओ एकदमममम रांदड़ होऊ. जो अपनी ही भाई का बिस्टेर गरममम करती हो. मैं तुममम टीनू को ररोजज छोडूंगा. ऊऊऊओह्ह्ह सविता . बहुत्त चूडाकककड़ ही तू. मेनन झाड़ रहा होंण तेरी छूट मई आआह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मैं गया.

मैं दीदी की छूट में झड़ने लगा. झड़ते हुवे भी मैं दीदी की छूट में लुंड ठोकता रहा. दीदी भी झड़ने वाली हो गयी थी. इसलिए वो भी बड़बड़ाते हुवे झड़ने लगी.

सविता दी- ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाभीईई. मैं भ्ही आआ रहियी होऊणन सल्ली. थोड़ी दररर ऑर्डर रुक्खक्क जाता तू साहट में hi झड़ती ोुह्ह्हह्ह आआआह्ह्ह्ह मैं गईइइइइइ उउउउउउफफ्फ मुम्ममइय्यययय.

ये बोलकर सविता दीदी भी झाड़ गयी. और जमीन पर लेट गयी मैं भी दीदी के ऊपर लेट गया. 15 मिनट हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे के ऊपर लेते रहे. फिर दीदी ने मुझे अपने ऊपर से उठाया. मैं जब उनके ऊपर से उठा तो मेरा लुंड फिर से tan-na शुरू हो गया था. मैं आज खुद हैरान था की आज मुझे क्या हो गया है. झड़ने के बाद फिर से मेरा लुंड खड़ा हो रहा है. सरिता दीदी और मनीषा बिस्टेर पर बैठी एक दूसरे को चुम रही थी. उन्होंने मेरे लुंड को फिर से खड़ा होता हुवा देखा तो उन दोनों ने आपस में कुछ इशारा किया और बिस्टेर से उतारकर मेरे पास आ गयी और जमीन में बैठकर मेरे लुंड को पकड़ लिया. मनीषा ने मेरी गोटियों को पकड़ लिया. मेरे लुंड ने सरिता दी के हाँथ में एक झटका खाया. सरिता दीदी ने मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. सविता दीदी अब तक जमीन पर hi लेती थी. वो उठी और चलती हुई मेरे पास आई और मेरे सामने कड़ी हो गयी. तीन मस्ती और गरम जवानी एकदम नंगी मेरे सामने बैठी और कड़ी थी. सविता दीदी ने मुझे देकते हुवे आगे बढ़कर मेरे होंठो पर अपना होंठ रख दिया और चूसने लगी.

मनीषा ने मेरी गोटियों को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. सरिता दीदी मेरा लुंड पूरा अपने मुंह में भरकर जोर जोर से चूस रही थी. मैं सविता दीदी के होंठ चूसते हुवे पानी दोनों हाँथ बढ़ा कर उनकी चूचियों पर रख दिया और बढ़ाने लगा. मैं दीदी को होंठ चूसते हुवे उनकी चूचिया दबा रहा था. थोड़ी देर उनके होंठ चूसने के बाद मैंने एक हाँथ निचे ले जाकर उनकी छूट पर रख दिया और सहलाने लगा. थोड़ी देर सरिता दीदी ने मेरा लुंड चूसा फिर लुंड अपने मुंह से बहार निकल लिया. मनीषा ने मेरी गोटी चुसनी छोड़ दी और मेरे लुंड को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. सरिता दी ने मेरी गोटियों पर अपनी जीभ फिरनी शुरू कर दी.

मैं दीदी की छूट सहलाते हुवे उनकी चुकी दबा रहा था और उनके होंठ चूस रहा था. सविता दीदी बहुत गरम हो गयी तो मैंने अपनी ऊँगली उनकी छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगा. अब मैं अपनी कमर को आगे पीछे करने लगा. जिससे मारा लुंड मनीषा के मुंह में अंदर बहार हो रहा था. थोड़ी देर तक सविता दीदी की छूट में ऊँगली करने के बाद मैंने अपनी ऊँगली उनकी छूट से बहार निकल ली और उनकी चुकी को छोड़ दिया. सविता दीदी ने मेरे होंठो से अपना होंठ हटाया तो मैंने अपने हाँथ से दीदी के सर को निचे की तरफ दबाया और सविता दीदी निचे baith-ti चली गयी.

मैंने मनीषा के मुंह से आप लुंड बहार निकल लिया और थोड़ा आगे बढ़कर सविता दीदी के मुंह के पास किया सविता दीदी ने मुंह खोलकर मेरा लुंड अंदर ले लिया और चूसने लगी. सरिता दीदी एक तरफ से जीभ निकल कर मेरे लुंड को अंदर बहार होते समय चाट रही थी और दूसरी तरफ से मनीषा चाट रही थी. थोड़ी देर तक दीदी का मुंह छोड़ने के बाद मैंने सविता दीदी का सर पकड़ा और तेज़ी से उनका मुंह छोड़ने लगा. उनके मुंह से ग्ग्घूऊऊऊह्हुउउउ की आवाज़ निकल रही थी. थोड़ी देर तक उनका मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड उनके मुंह से बहार निकल लिया. और अपने हांथो से सरिता दीदी और मनीषा का सर पकड़कर अपने लुंड पर उनका मुंह लगा दिया और दोनों के होंठो के बिच अपना लुंड आगे पीछे करने लगा. फिर सविता दीदी थोड़ा आगे हुई और अपना मुंह खोल दिया. अब मेरा लुंड मेरी तीनो बहनो का मुंह एक साथ छोड़ रहा था. मैं उन तीनो का मुंह छोड़ते हुवे बड़बड़ाया.

मैं- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरीए रंड्डीयोंन. बहुतत्त मज़ाआ आ रहा हैई. मैनी पिछली जनम में बहुत्त पुण्य किये होंगे जो तुम जैसी छुडासी और मॉल बहाने मुझे मिली हैं. ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह बहुत्त गरम्म हो तुम टीनू. बहुत्त मज़ा आ रहा हैई तुम तीनो का मुंह छोड़ने में.

थोड़ी देर तक मैंने उनका मुंह छोड़ा उसके बाद अपना लुंड बहार निकल लिया. उसके बाद मैं सरिता दीदी को बिस्टेर पर डोगग्य स्टाइल में खड़ा किया और सविता दी को सरिता दीदी के ऊपर पेट के बल लिटा दिया और मनीषा को सविता दीदी की कमर के ऊपर सर रख कर बिस्टेर पर बैठा दिया. फिर मैंने अपना थुक्क सरिता दीदी की गांड पर गिराया. मनीषा ने ढेर सारा थूक सविता दीदी की गांड पर गिराया. फिर मैंने अपने लुंड को सविता दीदी की गांड पर सेट किया और उनकी कमर को मज़बूती से पकड़कर एक जोरदार धक्का मारा. मेरा लुंड उनकी गांड को चीरता हुवा पूरा अंदर घुस गया. सविता दीदी चीख पड़ी.

सविता दी- ohhhhhhhhhhhh मम्मीयिययी. मारर्र डाला ree.thoddddaa धीरे कर अभी. कौन सा बदला निकाल रहा हैई जोऊ एकक hi बार मी पूरा लुंड पिल्ल दिया. uuuuuiiiiiiiiii मम्मीयीय. आआअह्ह्ह्हह थोड़ड़ा धीरे धीरे छोड़ मुही.

सविता दी की बात सुनकर मैंने अपने लुंड को अंदर बहार करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद दीदी अपनी कमर पीछे करके मेरा लुंड पानी गांड में पलवाने लगी. मैं दीदी की कमर पकड़ कर लम्बे लम्बे झटके देकर उनकी गांड छोड़ने लगा. दीदी बोलने लगी.

सविता दी- ह्ह्हह्हह्हआआआ अभियई. ऐसी ही छोड़ लम्बे लम्बे ढकी lagakar.aaaaahhhh बहुत अच्छा छोड़ता ही तू. बॉस ऐसी hi छोड़ना.

कुछ देर सविता दीदी की गांड मरने के बाद मैंने अपना लुंड बहार निकल लिया और मनीषा के मुंह के सामने काग दिया मनीषा मेरे लुंड को चूसने लगी. सविता दी मनीषा की छूट पर ऊँगली फिरने लगी. थोड़ी देर मनीषा का मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड मनीषा के मुंह से बहार निकल लिया और सरिता दी की गांड पर थूक गिराकर अपना लुंड उनकी गांड पर रखा और अपनी कमर का एक झटका दिया. मेरा लुंड आधा उनकी गांड में चला गया. अभी उनके मुंह से कोई आवाज़ निकलती उसके पहले hi मैंने अपना लुंड बहार खींचा और एक झटके से पूरा लुंड अंदर पेल दिया. दीदी के मुंह से चीख निकल गयी.

सरिता दी- ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सलेटी हरामीई. मुफ्फ़्ट्ट की गण्ड मिलीइ ही तू क्या फाड़ hi दललीगा साली. शुकार माना हारामीई. तेरी बहननी टेरिइइइ गरम्मी अपनी छूट से ठण्डा कररर रहीए हईं नाहीइ तू चू किसी दीवाललल में छिड़ कर रहा होता कामिनी. ोाआआह्ह्हह्ह्ह्ह धिरररे थोकक मेरी गण्ड को.

सरिता दीदी की गांड कुछ देर ठोकने के बाद मैंने अपना लुंड उनकी गांड से बहार निकल लिया और मनीषा के मुंह में दाल दिया और उसके मुंह की चुदाई करने लगा. सविता दीदी मनीषा की छूट में ऊँगली कर रही थी. थोड़ी देर मनीषा का मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड उसके मुंह से बहार निकला और सविता दीदी के छूट पर रखकर जोरदार डक्की के साथ अंदर घुसा दिया. दीदी मज़े से चीख पड़ी.

सविता दी- आआअह्हह्ह्ह्ह अभीयी. ऐसी ही छोड़ अपनी दीदी को. ऊऊओह्ह्ह्ह मम्मीयिययी. देखू तुम्हारा बीटा सरिता और सविता को घोड़ी बनाकर छोड़ रहा हैई ooooooooohhhhhhhhhh.

मैं सविता दीदी की छूट से अपना लुंड निकला और सरिता दीदी की छूट पर सेट कर एक hi झटके में जड़ तक अंदर घुसा दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गयी.

सरिता दी- oooooohhhhhhhhhh साली अभीइइइइइ. प्यार से मार मेरी छूट भैई. बस ऐसी होई.

मैं थोड़ी देर सरिता दीदी की छूट मरने के बाद अपना लुंड उनकी छूट से निकला और मनीषा के मुंह में दाल दिया और उसका मुंह छोड़ने लगा. फिर मनीषा के मुंह से अपना लुंड निकलकर उसे सरिता दी की गांड में दाल दिया और हचक हचक कर छोड़ने लगा. मैं अपनी एक ऊँगली सविता दीदी की छूट में डालकर अंदर बहार करने लगा. थोड़ी डॉ सरिता दीदी की गांड मरने के बाद मैंने अपना लुंड बहार निकला और सरिता दीदी की छूट में दाल दिया और छोड़ने लगा. मैं सरिता दीदी की छूट में जबरदस्त धक्के लगा रहा था. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लुंड बहार निकला और मनीषा के मुंह में दे दिया वो मेरा लुंड चूसने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लुंड उसके मुंह से निकलकर सरिता दीदी की छूट में दाल दिया और छोड़ने लगा.

इसी तरह10 मिनट तक बदल बदल कर सरिता दीदी और सविता दीदी की छूट और गांड मरने के कारन दोनों झड़ने के करीब पहुंच गयी थी. इसलिए मैंने अपना लुंड मनीषा के मुंह में डालकर उसका मुंह छोड़कर खूब अच्छे से गिला किया और उसे सविता दीदी की छूट में लगाकर पूरी ताकत से उनकी छूट में पेल दिया और लम्बा लम्बे स्ट्रोक लगाने लगा. लगभग 15-16 जबरदस्त धक्के मरने के बाद सविता दीदी झड़ने लगी और बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- oooooooooohhhhhhhh ाहीईई ऐसी होई छोड्दुओ अपनी बहाननं कोऊ मैं तुम्हाररी रुण्डीइ हूँ oohhhhhhhhhh आआआअह्हह्ह्ह्ह मैं झड़ने वालीए होऊणन्न बहन चूड्डड्ड. औरर जोरर सी ढक्की लगाकर छोड़ड़ड़ आह्ह्हह्ह्ह्ह मैं गइईईई ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषआआआ.

सविता दीदी के झड़ने के बाद मैंने उनकी छूट से लुंड निकलकर सरिता दी की छूट में जड़तक दाल दिया और हुमक हुमक्क कर छोड़ने लगा. मैंने मनीषा को सविता दीदी के ऊपर से हटा दिया और दीदी को पलटकर सरिता दीदी के ऊपर से हटाया और सरिता दीदी की कमर पकड़कर ताबड़तोड़ धक्का मरने लगा.20-25 धक्के के बाद सरिता दी झड़ने लगी और बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ छोड़ अपनी दीदी कोऊ अच्छी से चूड.. aaahhhhhhhhhh आज अपनी इस हलब्बी लौड़ी से अपनी सरिता की छुटत ठण्डी कर दी. ऊऊफफफफफफ क्या मस्त्त लैंड ही तीरा सेल हमररीई मेरीए छूट का पानी अपनी लुंड से निकल साली. छोड़ मुज्झी मैं गईई ोुह्ह्ह्हह्ह आआह्ह्ह मैं गइईईई .

सरिता दीदी इतना बोलकर झाड़ गयी और पेट के बल बिस्टेर पर लेट गयी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-152

सविता दीदी के झड़ने के बाद मैंने उनकी छूट से लुंड निकलकर सरिता दी की छूट में जड़तक दाल दिया और हुमक हुमक्क कर छोड़ने लगा. मैंने मनीषा को सविता दीदी के ऊपर से हटा दिया और दीदी को पलटकर सरिता दीदी के ऊपर से हटाया और सरिता दीदी की कमर पकड़कर ताबड़तोड़ धक्का मरने लगा.20-25 धक्के के बाद सरिता दी झड़ने लगी और बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ छोड़ अपनी दीदी कोऊ अच्छी से चूड.. aaahhhhhhhhhh आज अपनी इस हलब्बी लौड़ी से अपनी सरिता की छुटत ठण्डी कर दी. ऊऊफफफफफफ क्या मस्त्त लैंड ही तीरा सेल हमररीई मेरीए छूट का पानी अपनी लुंड से निकल साली. छोड़ मुज्झी मैं गईई ोुह्ह्ह्हह्ह आआह्ह्ह मैं गइईईई .

सरिता दीदी इतना बोलकर झाड़ गयी और पेट के बल बिस्टेर पर लेट गयी.

अब आगे..

सरिता दी के झड़ने के बाद मैंने उनकी छूट से अपना लुंड बहार निकल लिया और मनीषा के मुंह के सामने अपना लुंड कर diya.manisha अपना मुंह खोलकर मेरे लुंड को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मैंने मनीषा के सर को अपने हांथो से पकड़ा और मनीषा के मुंह में पूरा लुंड ठोककर कुछ देर रुका रहा. फिर अपना लुंड बहार खींच लिया उसके मुंह से थुक्क की एक लकीर लुंड तक बन गयी वो लुंड निकलने के बाद खांसने लगी.



मैंने मनीषा को पकड़कर सीधा बिस्टेर पर लिटाया और उसकी छूट पर अपनी जुबान लगा दी और चाटने लगा. मैंने अपनी एक ऊँगली अपने मुंह में डालकर गीली की और उसकी गांड में एकक झटके में डालकर ुकि गांड के अंदर बहार करने लगा. मनीषा के मुंह से आह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊऊह्ह्ह्ह की आवाज़ निकलने लगी. थोड़ी देर उसकी छूट चाटने और गांड में ऊँगली करने के बाद मैं मनीषा की छूट से हैट गया और अपना लुंड अपने हाँथ से मनीषा की छूट पर रखकर एक झटके में उसकी छूट में उतर दिया और धक्के मरने लगा. मनीषा चीखते हुवे बोलने लगी.

मनीषा- ोुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सलेटी. किटनीय जोरर सी डालता है भाई तू अपना लौड़ा. थोड़ा धीरे दल न. ऊऊओह्ह्ह्हह भैयाआ . मेरे चुड़क्कड़ सैया. ऐसे हो छोड़ो मुझी अह्ह्ह्हह

मैं मनीषा की बात सुनकर मनीषा को जोर जोर से छोड़ने लगा और बोलै.

मैं- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सलीईई रनडीई मनीषा. आजजज तेरी छूट का भोसड़ा बना दूंगा कामिनीई. तुणीऐ सबब कुछः जानती हुवी भी मुझसे सबब कुछ छुपाया. आआआह क्या मस्त छूट ही तेरी मनीषा. ोुह्ह्हह्ह्ह्ह

सरिता दीदी और सविता दीदी बिस्टेर पर लेती लम्बी लम्बी सांसे लेती हुई हम दोनों की चुदाई देख रही थी. थोड़ी देर मनीषा को छोड़ने के बाद मैंने अपने लैंड मनीषा की छूट से बहार निकल लिया कर बिस्टेर से उतर कर खड़ा हो गया. मनीषा को मैंने बिस्टेर से उठाया और जमीन पर बैठा दिया. मनीषा ने मेरा लुंड अपने मुंह में लेकर चूसा. लगभग 5 मिनट तक मनीषा ने मेरा लुंड चूसा. लुंड चुसवाने के बाद मैंने मनीषा को उठाकर खड़ा किया और उसे लेजाकर टेबल के पास खड़ा कर दिया और मैंउसके पीछे खड़ा हो गया. मनीषा टेबल पर हाँथ रखकर अपनी गांड थोड़ा पीछे की तरफ निकल ली. मैंने अपने मुंह से अपने हाँथ पर ढेर सारा थूक गिराया और उसे मनीषा की गांड पर लगा दिया और अपना लुंड पकड़कर मनीषा की गांड पर सेट किया और एक हाँथ से उसकी कमर को पकड़कर पूरी ताकत के साथ उसकी गांड पर लुंड दे मारा. मेरा लुंड मनीषा की गांड की रुकावट को hata-ta हुवा पूरा उसकी गांड में घुस गहा. मनीषा दर्द से चीख पड़ी.



मनीषा- oooooooooohhhhhhhhhhhhh Didiiiii.bachaaooo मुझेईई. ऊऊओह्ह्ह्ह मम्मीयिययी मर्डर गयी मैंन. आआअह्हह्ह्ह्ह मेरी गांडड. छोड़ड़ड़ मादरर्चोड़द्द, मेरी गंड़द फाटत गयी ही , ऐसा लग रहा हैई मेरीए गंड़द मी किसी गढ़ी का लुंड घुस गया हीी oohhhhhhhhhh डीडीइइइइइइ. बचाओ मुझी आआह.

सविता दी- अरे मनीषा गढ़ी का ही लुंड घुस्स्सा हैई. चिल्ला क्योंनं रही हीी. मज़ा नही आ रहा हैई क्या.

मनीषा- चुप्प्प सल्लीइइइइइ. याहहहा यी सल्ला इतनी बेरहमी से मेरी गण्ड मर्डर रहा ही औरर तुमको मज़ाककक सूझःह रहा हैई. जब तुम्हारिई गण्ड माररता ही तू कैसी चिल्लाती हूँ. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Bhaaiiiiiiiiiiiii. थोड़ड़ा धीरे कर ना.

मनीषा की बात सुनकर सविता दीदी हमारे पास आ गयी और मेरे पेरू के भींच बहैठकर मनीषा की छूट चाटने लगी. थोड़ी देर उसकी छूट चाटने के बाद मेरी गोटियों को मुंह में भरकर चाटने लगी. मैं ताबड़तोड़ मनीषा की गांड ठोकता रहा मनीषा को अब थोड़ा आराम मिल रहा था तो वो अपनी गांड पीछे उचका उचका कर मेरा लुंड अपनी गांड में ले रही थी. और बोल रही थी.



मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह भैयाआ. अब अच्छा लग रहा हैई. पहली से ऐसी क्योंन नहीं छोड़ा. और अचे से छोड़िये अपनी मनीषा को आआआआआह भैया.

मैं थोड़ी देर मनीषा की गांड मरता रहा. और दीदी निचे बैठी उसकी छूट chat-ti रही. फिर मैंने मनीषा की गांड से अपना लुंड निकल लिया और सविता दीदी के गाल पर लुंड से मरने लगा. दीदी ने मेरी आँखों में देखा और मनीषा की छूट छोड़कर मेरा लुंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर तक मेरा लुंड चूसने के बाद उन्होंने मेरा लुंड अपने मुंह से निकला और उठकर कड़ी हो गयी और जाकर बिस्टेर पर बैठ गयी. मैंने मनीषा की छूट पर अपना लुंड लगाया और उसकी छूट में दाल दिया और लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगाना लगा. मनीषा भी पूरी मस्ती में मुझसे छुड़वाने लगी. थोड़ी देर मनीषा की छूट को खड़े खड़े छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड उसकी छूट से निकल लिया और उसे लेकर बिस्टेर पर आ गया और उसको बिस्टेर पर लेता दिया.

सरिता दीदी ने मनीषा का सर अपनी गोदी में ले लिया. मैंने अपना लुंड मनीषा की छूट पर रखा और एक पेअर बिस्टेर पर रखकर पूरी ताकत से अपना लुंड मनीषा की छूट में थोक दिया. मनीषा मस्ती में चिल्ला उठी.



मनीषा- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मीयिययियीय. कोईई मुझी इस्सस माँ की लौड़ी से बचावूओ. ह्ह्ह्हह्ह्ह्हीीयययय कामिनी. इतनीई जूर्रर सीए कही लुंदड़ घुसा रहा हैई. मेरी जानन लेनी का इरादा हैई क्या. मुझसे तेरी कोइई दुश्मनी ही क्या जो इतनी बेरहमी से ठोंककक रहा ही. ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह डीडीई.

मैं- आआआआहहहहहहह सलीईई मनीषआआ. मेरा लुँड्ड्ड टेरिइइइ छुट्ट्ट्ट कोऊ बहुतत्त याददद करर्ता हैईईई. इसलिये आजजज मौक्का मिला ही तू तुझी बेरहमी सी ठोंककक रहाहूणं रनडीई. ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ले साली मेरा लुंड और अंदर तक्क ली .

मैं मनीषा को ताबड़तोड़ धक्के मार्कर चोदे जा रहा था. 25-30 धक्के कास कास कर मरने के बाद हम दोनों झड़ने की कगार पर पहुंच गए थे. मैंने मनीषा की ऊपर लेट गया और उसकी आँखों में देखते हुवे धक्के मरने लगा. मनीषा झड़ने लगी और बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- ooooooohhhhhhhhhhh भैयाआआ. मैंनं झाड़ड़ड़ रहीए हूँण. आअह्ह्ह्हह भाईया. ऐसी होई रोजज मुझी छोड़ छोड़ कर ठण्डी कर देना भैया. आआह्ह्हह्ह्ह्ह ohhhhhhhhhhhhh. मैं झाड़ रहीए हूणंण मैंन gaiiiiiiiiiii

मनीषा के झड़ने के बाद मैंने भी 4-5 धक्के मनीषा की छूट में लगाए. और झड़ने लगा. और मनीषा से बोलै.

मैं- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा मैंन भी आ रहा होऊणणन्न. तुमममम फिकार माटट करूऊ तुममम तीनूओ मेरीए रंडिया हो.. तुमकोऊ छोड़ना मेरीए जिम्मेदारी हैई. आअह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्हह मैंन भी झाड़ रहा हूँण aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh manishaaaaaaaaaa.

इतना कहर मैं मनीषा की छूट में भलभलाकर झड़ने लगा और मनीषा के ऊपर लेटकर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा.

थोड़ी देर ऐसे ही लेते रहने के बाद मैं मनीषा के ऊपर से उठकर बदल में बैठ गया. मनीषा भी उठकर बैठ गयी. सरिता दीदी, सविता दीदी मनीषा और मैं नंगे hi बिस्टेर पर बैठे हुवे थे. और एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे. कुछ देर बाअद सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दीदी- 4सम चुदाई में बहुत मज़ा आया अभी.

मैं- हाँ सरिता. मुझे तो उम्मीद hi नहीं थी की इतना मज़ा आएगा.

सविता दी- मज़ा तो मुझको भी बहुत आया यार.

मनीषा- तुम्ही हो दीदी जो दूर भाग रही थी. अब देखो कैसे बोल रही हूँ की बहुत मज़ा आया.

सविता दी- अरे मनीषा मैं बेवकूफ थी जो इस मज़े से भाग रही थी. लेकिन तुम दोनों मेरी अच्छी बहाने हो. तुम्हारी वजह से hi मुझे इस आनंद की प्राप्ति हुई. अब हम रोज़ एकक साथ चुदैई करेंगे और अपनी जवानी का आनद लेंगे. क्या बोलते हो सभी लोग.

मैं, मनीषा और सविता दीदी एक साथ बोले.

हाँ दीदी हम तैयारर हैं हमेशा ज़िन्दगी का ऐसा मज़ा लेने के लिए.

सविता दी- इसी बात पर अभी के लिए एक शेयर है.

तेरे लौड़े में जितना है दम..

हमारी छूट भी नहीं है काम..

जब भी तू दिखायेगा अपना लौड़ा..

हम भी अपनी टंगे कर लेंगी चौड़ा..

तू जब भी दिखायेगा अपने लुंड का घमंड..


हम भी उच्छल कर छूट में ले लेंगी तेरा लुंड..

दीदी की इस शायरी को सुनकर हम सब जोर जोर से हंसने लगे. उस दिन हमने एक राउंड और चुदाई की.

उसके बाद जब तक मम्मी पापा टूर से लौटकर नहीं आये. हम चारो ने कपडे को हाँथ तक नहीं लगाया. मम्मी पापा के आने के बाद भी हमारी चुदाई नियमित रूप से चलती रही. एक महीने बाद सविता दीदी आगरा चली गयी तो मैं, मनीषा और सरिता दीदी चुदाई का खेल खेलते रहे समय bit-ta गया और हमारी चुदाई चलती रही. 3 महीने बाद राघव जीजा का ट्रांसफर आगरा से अल्लाहाबाद हो गया पापा तो चाहते थे की सविता दीदी और राघव जीजा हमारे hi घर में रहे, लेकिन जीजा जी नहीं मने. और उन्होंने हमारे घर से 2 कम. दूर माकन ले लिया. अब या तो दीदी छुड़वाने के लिए घर आ जाती या मैं उन्हें छोड़ने उनके घर चला जाता. इसी तरह मैं अपनी तीनो बहनो को छोड़ता रहा.

7 महीने बाद सरिता दीदी की शादी हो गयी. मेरी सरिता दीदी का नसीब अच्छा था की जीजा जी का लुंड भी मेरी hi तरह दमदार और मजबूत था. वो दीदी को छोड़ छोड़ कर उनकी नस नस ढीली कर देते थे, इसलिए दीदी प्यासी नहीं रहती, लेकिन हाँ जब जब दीदी घर आती हैं मैं उन्हें अभी भी छोड़ता हूँ और वो ख़ुशी ख़ुशी चुदवाती हैं. मैं अपनी सरिता दीदी के लिए बहुत खुश हूँ.

मनीषा भले अभी भी मुझसे चुदती थी, लेकिन उसका अपने ऊपर कण्ट्रोल गजब का है. इसलिए वो मुझसे अब हफ्ते में 1 hi बार चुदवाती है, वो भी तब जब वो कोई पोर्न मूवी देख लेती थी. नहीं तो वो छोड़ने के लिए मुझसे ज्यादा नहीं बोलती थी. हाँ अगर मेरा मन होता था उसे छोड़ने का तो वो मुझे मन भी नहीं करती थी. मैंने उससे कई बार सुहागरात मानाने के लिए उसके साथ मेरी जो फंतासी थी उसके बारे में उसे बताया, लेकिन वो हर बार मन कर देती है कहती है की ये रात लाइफ में एक hi बार आती है, इसलिए मैं ये अपने पति के साथ hi मनाऊंगी. वो भी अपनी जगह सही है. इसलिए उससे नाराज़ भी नहीं हो सकता.

सविता दी की छूट की प्यास मुझसे पहली चुदाई के समय जैसी थी वैसी आज भी है. अगर मैं उन्हें दिन रत छोड़ू तो भी वो मन नहीं करती, लेकिन फिर भी उनको हफ्ते में 3-4 दिन मेरा लुंड अपनी छूट में चाहिए होता है, इसलिए उन्होंने जीजा जी से जोर देखर अब हमारे घर में hi रहने लगी हैं. वो भी अपने कमरे में. ा बुनको मुझसे छुड़वाने के लिए ज्यादा मसक्कत या दर वाली कोई बात नहीं है.

main-maine अपनी तीनो बहनो को घर के हरेक कोने में नंगी करके रगड़ रगड़ कर छोड़ा है. सविता दीदी को मैं अभी भी अल्टेरनाते छोड़ता हूँ, अब मैंने वो पुराण काम छोड़ दिया है. पापा ने मुझे गेरेरल स्टोर और इलेक्ट्रॉनिक्स की दो दुकान खुलवा दी, ईश्वर की कृपा से दोनों दुकान खूभ चल निकली और मेरी लाइफ सेट हो gayi.mujhe पैसे की अब कोई दिक्कत नहीं रह गयी है. और छूट का इंतेज़ाम तो घर में hi है.

मेरा प्यारे मित्रो और पाठको. मैं अपनी कहानी अब यही समाप्त करती हूँ. उम्मीद करती हूँ की आप सब को मेरी कहानी पसंद आयी होगी, क्योंकि ये मेरी पहली कहानी है. तो अगर कही पर कहानी में कोई स्पेलिंग मिस्टेक या कही नाम में मिस्टेक हो गयी हो तो उसके लिए माफ़ करना. इस कहानी में अभी भी 10-12 अपडेट की गुंजाईश थी, लेकिन मेरे पास आज से समय की कमी हो गयी है. इसलिए मैं अब रेगुलर अपडेट नहीं लिख पाऊँगी , इसलिए इस कहानी को यही समाप्त कर रही हूँ. मेरी कहानी पर जिस भी रीडर्स ने पॉजिटिव या निगेटिव कमैंट्स किया है शुरू से लेकर अभी तक, मैंने लगभग सभी को रिप्लाई किया है. फिर भी हो सकता है मेरे रिप्लाई से कोई हार्ट हो गया हो तो मैं उससे माफ़ी चाहती हूँ और उम्मीद करती हूँ को वो मेरी माफ़ी स्वीकार करेंगे.

अगर ये कहानी इतनी लम्भी चल पाई है तो इसमें मेरे साथ आप सभी रीडर्स का हो इम्पोटेंट योगदान रहा है. या कहानी भले hi जनि जाएगी की इसको माहि मौर्या ने लिखी है, लेकिन इस कहानी को अगर आप सब रीडर्स सफल मानते हैं तो इसे सफल बनाने में आप सब का योगदान रहा है. सभी रीडर्स को इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

इस कहानी का बेस मज़बूत करने में 4-5 रीडर्स और वरिटेरस का इम्पोर्टेन्ट रोल है. मैं उनमे से किसी का नाम यहाँ नहीं लिखूंगी, क्योंकि किसी एक रीडर्स का नाम लिखकर किसी दुसरे रीडर्स का अपमान नहीं करुँगी. वो जो भी हैं इसे पढ़ने के बाद समझा जायेंगे. उन्होंने कहानी के शुरू में जब कहानी अपने ट्रैक से भटक रही थी तो अपने Positive+Negative, लेकिन वैल्युएबल कमैंट्स और व्यूज से मुझे अवगत कराया. जिसके कारन मैंने कहानी में सुधर किया. समय समय पर इन्होने अपना इम्पोर्टेन्ट व्यूज और कमैंट्स से मुझे मेरी कहानी की कमियों के बारे में बताते रहे. इन सभी को बहुत बहुत धन्यवाद्.

आखिर में जाते जाते सभी रीडर्स से एक रिक्वेस्ट है खासकर सिळान्त रीडर्स से की अगर उन्होंने मेरी कहानी शुरू से लेकर एन्ड तक पढ़ी है तो वो अपना व्यूज और कमैंट्स अवश्य लिखे, क्योंकि कोई भी कहानी परफेक्ट नहीं हो सकती. इसलिए मेरी भी कहानी में कुछ गलतिया होंगी. उससे मुझे अवगत कराये. ताकि अगर फ्यूचर में मैं कोई कहानी फिर शुरू करती हूँ तो उस कहानी को और अच्छी तरह लिख सकूं.

कहानी पढ़ने वाले सभी मित्रो और पाठकों का धन्यवाद.

SAMAPT/KHATAM/THE END/

समाप्त/पूर्ण/खत्म
 
आपकी बात सही है कि इतने दिन सेक्स करने के बाद भी कोई गर्भवती क्यों नहीं हुई।।

तो बात ये है मान्यवर। एक लेखक होने के नाते मुझे ये पसंद नहीं था इसलिए तीनों में से कोई गर्भवती नहीं हुई।😑😑😑

क्योंकि मेरा मानना है कि सेक्स तक तो ठीक है। लेकिन गर्भवती करने का हक सिर्फ पति को ही मिलना चाहिए। हाँ अगर पति में कुछ कमी है तो अलग बात है।।

🙏🏼🙏🏼🙏🙏🙏🏽🙏🏽
 
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