अंकित ने सारा मामला तय कर लिया था पूरी तरह से माहौल बना लिया था जिस तरह से वह उत्सुक था उससे भी कई ज्यादा राहुल उत्सुक नजर आ रहा था,,, अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि राहुल कितना बेशर्मी की अपनी आंखों के सामने अपनी मां की चुदाई देखकर खुद उत्तेजित हो गया है और उसके साथ मिलकर अपनी मां को चोदने के लिए तैयार हो गया है,,, यह एक नया अनुभव होगा राहुल के लिए भी अंकित के लिए भी इसलिए राहुल और अंकित दोनों उसे दिन के लिए बेहद उत्सुक थे जब वह दोनों एक साथ मिलकर नूपुर की चुदाई करेंगे,,,, अंकित तो सोच कर ही मदहोश हुआ जा रहा था,, उसे अच्छी तरह से मालूम था कि इसमें कोई दिक्कत आने वाली नहीं थी क्योंकि दोनों की दुखती रग वह अच्छी तरह से जानता था,,,,।
शाम को अंकित अपने घर पहुंचा,, तो देखा कि उसकी मां घर पर नहीं थी इसलिए वह,,, अपने पड़ोस में सुषमा आंटी के घर पहुंच गया,,, दरवाजे पर दस्तक देने के बाद दरवाजा खोलने वाली सुमन ही थी सुमन तो अंकित को देखकर एकदम से खुश हो गई और एकदम चहकते हुए बोली,,,।
अंकित तु,,,,,,
क्या दीदी तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे कि मुझे पहली बार देख रही हो,,,,।
अरे बेवकूफ अकेले में मुझे दीदी मत बोला कर मुझे नाम लेकर बुलाया कर सुमन,,,।
क्यों अभी तुम अकेली हो क्या,,,,?
इसीलिए तो कह रही हूं सुमन का कर बुलाया कर चल जल्दी से आजा घर में,,,।
(सुमन की बात सुनकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था क्योंकि उसे यकीन हो चला था कि आज उसके लंड के लिए जवान बुर का प्रबंध हो चुका है,,, लेकिन वह सुमन के सामने नादान बनने की कोशिश करते हुए बोला।)
आंटी नहीं है तब किसी और दिन आऊंगा,,,,।
अरे बेवकूफ ऐसा मौका फिर कहां मिलेगा,,, (एकदम से अंकित का हाथ पकड़ कर घर के अंदर खींचते हुए सुमन बोली और अगले ही पल अंकित घर के अंदर खड़ा था और सुमन जल्दी से दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी,,,,, अंकित तो बहुत खुश हो रहा था वह तो जल्द से जल्द बेताब था सुमन के कमरे में पहुंचने के लिए क्योंकि अभी तक उसके जीवन में जितने भी बुर चोदने के लिए आई थी वह थोड़ी उम्र दराज थी हालांकि सभी बुर से उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी लेकिन,,, आज वह एक नए अनुभव को महसूस करना चाहता था फिर जवान लड़की की बुर में अपना लंड डालना चाहता था वह देखना चाहता था कि उम्र दराज औरत और एक जवान लड़की की बुर की कसाव कैसी होती है,,,,, अंकित चाहता तो दरवाजा बंद होने के साथ ए सुमन को अपनी बाहों में लेकर अपना काम खरीद शुरू कर सकता था लेकिन सुमन के सामने हुआ अभी नादान था सुमन को नहीं मालूम था कि वह कितना हरामि हो चुका है इसलिए वह सुमन की बात सुनकर फिर से बोला,,,)
सुमन और अंकीत
लेकिन आंटी कहां गई है,,,,,?
आंटी ही नहीं तेरी मम्मी भी साथ में गई है तभी तो कह रही हुं,,,हम दोनों के पास बहुतअच्छा समय है,,,,,
लेकिन,,,,(अंकित का इतना कहना था कि सुमन एकदम से उसे अपनी तरफ खींचकर उसे अपनी बाहों में भर ली और उसके होठों पर अपने देखते हुए होठ रखकर उसका चुंबन करने लगी,,,,, और अंकित के शब्द उसके गले में ही अटक गए अंकित पूरी तरह से मत हो चुका था वह सोच नहीं था कि सुमन इतनी जल्दी बाजी दिखाएंगी सुमन पूरी तरह से उसे अपनी आगोश में ले ली थी और उस पर हावी होना शुरू हो गई थी,,,। सुमन की हरकत से अंकित का लंड बहुत जल्द ही अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था जो सीधे सलवार के ऊपर से ही सुमन की गुलाबी पर के ऊपर शासक दे रहा था जिसका एहसास सुमन को हो गया था और वह अंकित के होठों का रसपान करते हुए सीधा एक हाथ नीचे की तरफ लाई और पेंट के ऊपर से ही अंकित के लैंड को पकड़ कर दबाना शुरू कर दी,,,, सुमन की हरकत से अंकित मदहोश होने लगा,,,,,, यह मदहोशी उसे अत्यधिक उत्तेजना का एहसास करा रही थी,,,,, कुछ पल के लिए समान अपने होठों को अंकित के होठों से अलग करी और गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)
अंकीत के लंड को देख कर खुश होती हुई सुमन
बाप रे अंकित तेरा तो बहुत मोटा है बहुत जल्दी तैयार हो गया,,,,,।
(नादान बनने की वजह से अंकित कुछ बोल नहीं पाया और वह भी गहरी सांस लेता हुआ सुमन के खूबसूरत चेहरे को देख रहा था सुमन वापस उसके होठों से अपनी होंठ को सटा दी एक बार फिर से दोनों प्रगाढ़ चुंबन में डूब गए,,,,,,,, अंकित से अब रहा नहीं जा रहा था अंकित भी पूरी तरह से उत्तेजना में डूब रहा था वह जानता था कि नादान बनने से कोई फायदा नहीं है अगर नादान बनते रहा तो मजा नहीं ले पाएगा इसलिए बस सीधी अपने दोनों हाथों को सलवार के ऊपर से ही सुमन के गोलाकार नितंबों पर रख दिया और उन्हें दबाना शुरू कर दिया अंकित की हरकत से सुमन भी हैरान हो गई लेकिन उसकी हरकत का मजा लेने लगी क्योंकि उसकी दोनों मजबूत हथेलियां में उसके नितंबों का आधा भाग भरा हुआ था जिसे अंकित पूरी ताकत से जोर-जोर से दबा रहा था मसल रहा था, एक जवानी से भारी खूबसूरत लड़की को और क्या चाहिए,, वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,,। कुछ देर तक चुंबन का सुख भोगने के बाद अपने रसीले होठों को सुमन अंकित के होठों से अलग की हालांकि अभी भी उसके हाथ में अंकित का लंड था जिसे वह पेंट के ऊपर से ही जोर-जोर से दबा रही थी और उसके एहसास में डूब रही थी अंकित गहरी सांस लेता हुआ फिर से अपने मन की शंका को जताते हुए बोला,,,,,)
अगर आंटी आ गई तो,,,,,,,।
मेरे राजा तेरी मां और मेरी मां 1 घंटे से पहले आने वाली नहीं है,,,,,।
ऐसा क्यों,,,?
क्योंकि वह दोनों हॉस्पिटल में किसी को देखने के लिए गई है और जिस हॉस्पिटल में गई है वहां से आने-जाने में ही आधे घंटे हो जाते हैं अब समझ गया ना,,,,, चल अब जल्दी से मेरे कमरे में,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित का हाथ पकड़ कर वह अपने कमरे की तरफ ले जाने लगी अंकित तुम्हारी खुशी के फूला नहीं समा रहा था अभी कुछ देर पहले ही वह राहुल की मां की जमकर चुदाई कर क्या रहा था और आते ही सुमन की गुलाबी बुर उसे मिलने वाली थी,,,,, फिर भी अपनी तरफ से नादानी दिखने में अंकित कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहता था इसलिए वह फिर से बोला।)
लेकिन फिर भी मान लो अगर आंटी आ गई तो तब क्या खाओगी क्या जवाब दोगी तुम तो अपने साथ-साथ मुझे भी फंसा दोगी,,,,।
(इतना सुनते ही अपने कमरे के बाहर ही सुमन रुक गई और अंकित की तरफ देखते हुए बोली)
तुझे तेरी मां की कसम है सच-सच बताना तुझे मजा आ रहा है कि नहीं,,,।
आ रहाहै,,,(कुछ देर खामोश रहने के बाद अंकित बोला और यह सुनकर सुमन मुस्कुराने लगी और फिर से उसे अपने कमरे में ले जाते हुए बोली,,,)
तू सच में बहुत बड़ा बेवकूफ है अगर इतना मौका किसी और को मिला होता तो अब तक तो शायद वह मेरी चुदाई भी करके चला गया होता लेकिन दोगे कि घबरा रहा है अरे बुद्धू बाहर दरवाजा बंद है अगर वह लोग आ भी जाएंगे तो दरवाजे पर दस्तक तो देंगे हम दोनों को पता तो चल जाएगा और रही बात की मेरी मां को शक हो गया तो क्या बोलेंगे तो यह देख,,,,(इतना कहने के साथ ही कुछ किताबें टेबल पर फैला दी और बोली) बोल दूंगी की तुझे पढ़ा रही थी समझ गया ना,,,,,।
वाह दीदी तुम तो बहुत चालाक हो,,,,।
दीदी नहीं बेवकूफ सुमन बोला कर,,,, दीदी बोलकर अपनी बहन की चुदाई करेगा क्या,,,,,(इतना कहने के साथ वह खुद ही अपने कुर्ते को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाते हुए बोली,,,) तुझे मालूम है ना आप तो क्या करने जा रहा है और फिर भी मुझे दीदी बोल रहा है ऐसे तो तू अपनी बहन पर भी चढ़ जाएगा,,,,,(सुमन की बात सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया हालांकि उसकी बातें सुनकर उसे बहुत मजा आ रहा था उसे इसमें कुछ भी बुरा नहीं लग रहा था क्योंकि जब वह अपनी मां की चुदाई कर सकता है तो अपनी बड़ी बहन की चुदाई करने में कैसी झिझक,,, और देखते ही देखते सुमन अपना कुर्ता उतार कर बिस्तर पर फेंक दे इस समय उसकी छाती पर क्रीम कलर की ब्रा उसकी चूचियों की शोभा बढ़ा रही थी,,,,, वाकई में उम्र के हिसाब से सुमन की चूचियां कुछ ज्यादा ही पड़ी थी क्योंकि उसके ब्रा में समा नहीं पा रही थी,,,,, अंकित के सामने कुर्ता उतार देने के बाद सुमन फिर से मदहोश होने लगी और एक बार फिर से वह अंकित को अपनी बाहों में भर ली,,,, अंकित भी जैसे अपनी नादानी के कवच से बाहर निकलता हुआ अपने एक हाथ को ब्रा के ऊपर से ही रखकर सुमन की चूची को दबाना शुरू कर दिया यह देखकर सुमन बोली,,,)
हां बेटा ऐसे ही तभी तो मजा आएगा चलो इतना तो तू जानता ही है,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गई और अपने हाथों से ही ब्रा का खोलकर अपनी ब्रा को अगले ही पल अपने बदन से अलग करके कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो गई उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम तनी हुई थी गोलाकार खरबूजे की तरह जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था अंकित आंख मारे सुमन की चूचियों को ही देख रहा था यह देखकर सुमन मुस्कुराते हुए बोली,,,)
देख क्या रहा है रे तेरे लिए ही तो उतारी हूं,,,,, चल जल्दी से ईसे मुंह में लेकर पीना शुरूकर दे,,,,,।
(सुमन की तरफ से इशारा पाते हैं अंकित ने बिल्कुल भी देर नहीं किया और धीरे से अपने प्यासे होठों को सुमन की चूची पर रखकर उसकी निप्पल को पीना शुरू कर दिया यह देखकर सुमन एकदम से मत हो गई मदहोश हो गई और तुरंत अपने दोनों हाथों को उसके सर पर रखकर इसका दबाव अपनी छातीयो पर बढ़नेा लगी,,,,, अंकित भी मदहोश होने लगा और अपने दोनों हाथों को उसकी कमर पर रखकर हल्के हल्के उसे दबाते हुए बारी-बारी से उसकी दोनों चुचियों का रसपान करने लगा अंकित को बहुत मजा आ रहा था पहली बार जवान लड़की की चूची का मजा लूट रहा था वैसे तो यह माया हुआ पहले भी ले चुका था और अभी सुमन के ही साथ लेकिन उसे समय समय का अभाव था अंदर एक डर था लेकिन इस समय अंकित के मन में भी किसी भी प्रकार का डर नहीं था वह तो जानबूझकर सुमन के सामने घबराने की कोशिश कर रहा था क्योंकि वह उसकी मां को भी जानता था अगर कुछ ऐसी वैसी बात हो गई तो वह जानता था कि उसे क्या कहना है,,,, क्योंकि वह खुद सुमन की मां को कुछ बोलने लायक नहीं छोड़ा था।
बारी-बारी से अंकित सुमन की दोनों चुचियों का मजा लूट रहा था ऐसा लग रहा था कि वह सुमन की सूची नहीं बल्कि दशहरी आम को दोनों हाथों में लेकर बारी-बारी से उसका रस चूस रहा हो अंकित की हरकत से सुमन भी मदहोश हो गई थी उसकी आंखें बंद हो गई थी और वह बार-बार उत्तेजना को काबू में करने के लिए अपने होंठ को ही अपने दांत से चबा ले रही थी,,,,,, लेकिन इस बीच सुमन पेंट के ऊपर से बार-बार उसके लंड को पकड़ ले रही थी,,,, जी भरकर चूचियों की चुसाई करने के बाद अपने आप ही अंकित के दोनों हाथ फिर से सलवार के ऊपर से ही सुमन की गांड पर आ गए और वजह से उन्हें दबाना शुरू कर दिया मसलना शुरू कर दिया,,,,, सुमन से रहा नहीं जा रहा था पेट के ऊपर से जिस तरह का आकार का आभास हो रहा था उसे देखकर सुमन समझ गई थी कि अंकित का लंड उसकी बुर में जाते ही धमाल मचा देगा,,,, इसी तरह से कुछ देर तक अंकित को मजा देने के बाद वह बिस्तर पर बैठ गई उसकी दोनों टांगें बिस्तर से नीचे थी अंकित ठीक उसकी दोनों टांगों के बीच खड़ा था उसके पेंट में तंबू बना हुआ था,,,,, सुमन उसके शर्ट के बटन को खोलने लगी यह देखकर अंकित भी ऊपर से अपने शर्ट के बटन को खोलने लगा,,,,। और अगले ही पल अंकित अपने शर्ट को अपने बदन से अलग करके उसे बिस्तर पर फेंक दिया,,,,,,।
सुमन की चुदाई
शर्ट के उतर जाने के बाद सुमन प्यासी नजरों से अंकित के पेंट में बने तंबू की तरफ देख रही थी और धीरे-धीरे पेंट की बटन को खोल रही थी,, यह देखकर अंकित अपने मन में ही सोचा की कितनी बड़ी छिनार है जैसी मां है वैसी बेटी भी है लेकिन मजा बहुत देती है,,,,,, सुमन के नरम नरम उंगलियां बटन खोलते समय उसके लंड से स्पर्श हो जा रही थी जिससे उसकी अकड़ और ज्यादा बढ़ रही थी और सुमन थी कि जल्द से जल्द अंकित के नंगे लंड के दर्शन करना चाहती थी,,,,, और फिर देखते ही देखिए सुमन जल्दबाजी दिखाते हुए अंकित के पेट का बटन खोलती हो रहा उसके पेंट को अंडरवियर सहित खींचकर उसके घुटनों तक लाकर छोड़ दी अगले ही पल उसकी आंखों के सामने अंकित का मोटा तगड़ा लंड लहराने लगा जिसे देखकर सुमन के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में की पानी आ गया और एक नजर अंकित की तरफ देखकर वह मुस्कुराते हुए अपने लाल-लाल होठों को खोल दी और अगले ही पल आइसक्रीम के कौन की तरह सीधा आलू बुखारे जैसे मोटे सुपाड़े को वह अपने मुंह में भरली और उसे चूसना शुरूकर दी,,,,, एकदम से अंकित की आंखें बंद हो गई और वो गहरी सांस लेता हुआ एकदम से इस एहसास में डूबने लगा,,,,, अंकित पागल हुआ जा रहा था,,,, वह धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके हीलाना शुरू कर दिया था। सुमन को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि अंकित का लैंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था वह सीधा उसके गले की गहराई तक जा रहा था ऐसा करने में उसे थोड़ी दिक्कत हो रही थी लेकिन इस मदहोश कर देने वाले पल को अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहती थी थोड़ा दिक्कत ही सही लेकिन वह इस सुख को भी महसूस कर लेना चाहती थी,,,, सांस लेने में थोड़ी तकलीफ होने के बावजूद भी होगा बढ़िया आराम से अंकित के लंड को अपने गले तक उतार ले रही थी और उसे ऐसा करने में बहुत मजा आ रहा था,,,, और अंकित अपने दोनों हाथों के नीचे की तरफ लाकर उसके दशहरी आम को पकड़ कर जोर से दबा भी रहा था।
लेकिन सुमन की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में तूफान सा उठ रहा था वह तूफान को शांत करना चाह रही थी। इसलिए वह अपने मुंह में से अंकित के लंड को बाहर निकाली,,,, अंकित मदहोश हो जा रहा था उसे लग रहा था कि अब सुमन अपनी बुर में लंड डलवाएगी,,, क्योंकि वह जल्दी से जल्दी काम खत्म करके अपने घर चले जाना चाहता था वह नहीं चाहता था कि उसकी मां आ जाए,,, इसलिए अपने हाथों से घुटनों में फंसी पैंट और अंडरवियर को निकाल कर एकदम नंगा हो गया और ईस दौरान सुमन भी अपनी जगह से ऊठ कर खड़ी हो गई और अपनी सलवार का नाडा खोलने लगी यह देखकर तो अंकित की आंखों में चमक बढ़ने लगी देखते-देखते सुमन अपनी सलवार उतार कर एक तरफ रखनी और अपनी पैंटी को नाजुकों गलियों में फंसा कर उसे नीचे की तरफ खींचने लगी यह देखकर अंकित के लंड कि अकड़ और ज्यादा बढ़ने लगी और यह सब समान अपनी आंखों से देख कर मन ही मन और ज्यादा उत्साहित हो रही थी,,,,। अगले ही पर सुमन और अंकित दोनों ही कमरे में पूरी तरह से नंगे खड़े थे सुमन पूरी तरह से नंगी थी उसकी नंगी जवानी देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था,,,,, सुमन अंकित का हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर पर पीठ के बल लेट दी और बोली,,,,।
अब आएगा असली मजा,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिस्तर पर घुटनों के बल चढ़ गई,,, और फिर से अंकित के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, अंकित की मदहोशी लगातार बढ़ती जा रही थी वह मस्त हुआ जा रहा था आज उसमें सबर नहीं था वह जल्द से जल्द अपने लंड को सुमन की गुलाबी बुर में डालकर एहसास कर लेना चाहता था कि जवान लड़की की बुर चोदने में कैसा महसूस होता है। लेकिन ऐसा लग रहा था कि अभी समय नहीं आया था,,,,, लेकिन अगले ही पर सुमन ने जो हरकत की उसे देखकर खुद अंकित का लंड पानी फेंकने के कगार पर आ गया था,,,, वह अंकित के लंड को चूसते हुए ही दोनों टांगों को फैला कर अंकित के ऊपर चढ़ गई और अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को एकदम से उसके चेहरे पर रखकर रगड़ना शुरू कर दी,,, ऊपर कुछ बोल नहीं रही थी क्योंकि उसके मुंह में अंकित का लंड था लेकिन अगले ही पल सुमन के इशारे को अंकित अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए दोनों हाथों से उसकी गांड को पकड़ कर वह अपने प्यास होठों को उसके गुलाबी छेंद से सटा दिया,,, और पागलों की तरफ उसे चाटना शुरू कर दिया क्योंकि इससे पहले भी वह सुमन की बुर को चाट चुका था,,,, उसकी पूरी एकदम चिकनी थी बाल का रेशा तक नहीं था उसे पर ऐसा लग रहा था कि जैसे आज ही क्रीम लगाकर साफ की हो इसलिए अंकित को कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था उसकी बुर चाटने में। सुमन मदहोशी के सागर में पूरी तरह से डूब चुकी थी वह अपनी गांड को अंकित के चेहरे पर पटक रही थी। और पागलों की तरह अंकित के लंड को चुस रही थी,,, अंकित को तो इस बात का डर था कि कहीं वह झड़ ना जाए,,,, लेकिन फिर भी बड़ी मुश्किल से वह टिका हुआ था,,, इन सबके बावजूद वह अपनी उंगली और अपने जीभ की करामात दिखाते हुए सुमन को एक बार झड़ चुका था वह झाड़ चुकी थी अपना पानी निकल चुकी थी और वह भी अंकित के चेहरे पर।
सुमन पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी लेकिन उसका चुदासपन बरकरार था उसे अपनी बुर में अंकित का लंड चाहिए था इसलिए वह धीरे से अंकित के लंड के ऊपर सवार होने लगी एक हाथ से अंकित के लंड को पकड़कर वह धीरे-धीरे अपने गुलाबी बुर के छेद को उसके सुपाड़े पर रखने लगी,,,, पहले से ही अंकित का लंड सुमन के लार और थूक से सना हुआ था और यही हाल उसकी बुर का भी था इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं हुई सुमन को अंकित के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए लेकिन उसकी मोटाई और लंबाई का एहसास उसे अपनी बुर में अच्छी तरह से महसूस हो रहा था इसलिए तो उसके पसीने छूट गई थी लेकिन देखते ही देखते सुमन पूरी तरह से अंकित के ऊपर बैठ चुकी थी और उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में खो चुका था यह देखकर सुमन के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह खुद ही अंकित के कंधों को पकड़ कर अपनी गांड उस पर पटकना शुरू कर दी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,, अंकित का मोटा थोड़ा लंड उसकी बुर में रगड़ता हुआ अंदर तक जा रहा था और बाहर आ रहा था,,,,, दोनों को काफी समय हो गया था इसलिए दोनों के पास समय काम था इसलिए ज्यादा बात ना करते हुए सुमन जोर-जोर से अपनी गांड को पटक रही थी कुछ देर तक इसी तरह से पटकने के बाद भी अंकित के लंड का पानी नहीं निकला लेकिन वह फिर से झड़ गई,,, अंकित के मर्दानगी को देखकर वह पूरी तरह से पानी पानी हो रही थी और अगले ही पल अंकित ने पूरी कलाबाजियां दिखाता हुआ उसे अपनी बाहों में भर लिया और एकदम से घूम गया और सुमन अगले ही पल उसके नीचे आ गई और वह उसके ऊपर छा गया,,,, यह कैसे हो गया यह सुमन को भी पता नहीं चला।
अंकित पूरी तरह से सुमन को अपने काबू में कर लिया था और फिर उसकी दोनों टांगों को थोड़ा और अपने हाथों से खोलकर ऐसा करारा करारा धक्का लगा रहा था कि वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,, हर धक्के के साथ उसकी चीख निकल जा रही थी लेकिन इस चीज में भी उसे आनंद ही आनंद मिल रहा था,,,, सुमन आज असली मर्द से चुदवा रही थी इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था अंकित अब अपनी सारी कलाबाजिया दिखा रहा था,,,,, वह उसकी दोनों चूचियों को दोनों हाथ से पकड़ कर बारी-बारी से चूसते हुए धक्के पर धक्के लगा रहा था ऐसा करने से सुमन को और ज्यादा मजा आ रहा था सुमन के नीचे से अपनी गांड ऊपर की तरफ पहुंचने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंकित की मजबूत जांघों के नीचे वह पूरी तरह से दबी हुई थी,,,, इस अवस्था में तकरीबन आधे घंटे तक चुदाई करने के बाद दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,,।
थोड़ी देर में अंकित अपने कपड़े पहन कर अपनी घर आ चुका था और सुमन इस चुदाई से मदहोश होकर बिना कपड़े पहने ही बाथरूम में पेशाब करने के लिए चली गई थी हालांकि वह अंकित को छोड़ने के लिए दरवाजे तक आई थी और धीरे से दरवाजा खोलकर उसे बाहर निकालने के बाद वह इस अवस्था में बाथरूम में पेशाब कर रहे थे और फिर इसके बाद नहा कर अपने आप को तरोताजा महसूस करा रही थी। और अंकित तो पूरी तरह से मस्त हो चुका था आज एक नया एहसास मैं वह पूरी तरह से डूबा हुआ था लेकिन उसे इस बात का भी एहसास हुआ था कि जितना मजा उसे अपनी मां की बुर चोदने में आता था उतना मजा उसे सुमन की बुर चोदने में नहीं आया था हालांकि मजा बराबर आया था लेकिन जो एहसास उसे अपनी मां के साथ आ रहा था उसे दोनों के बीच फर्क 19 20 का ही लगा ज्यादा कुछ खास फर्क नहीं था और इस बात से अंकित को और ज्यादा गर्व होने लगा कि उसकी मां की बुर जवान लड़की की तरह ही कसी हुई थी।
तकरीबन 2 घंटे बाद उसकी मां वापस लौटी थी वह काफी थकी हुई थी इसलिए ज्यादा कुछ खास खाने में बनाई नहीं दाल चावल बनाकर वह आराम करना चाहती थी और वैसे भी आज अंकित अपनी मां को परेशान नहीं करना चाहता था क्योंकि आज के दिन भर राहुल की मां और सुमन की जमकर चुदाई कर चुका था वह भी थक चुका था इसलिए वह भी बिना कुछ किए सो गया,,,, सुबह जब छत पर धूप आने लगी तो उसकी नींद खुली और बगल में देखा तो उसकी मां उठकर जा चुकी थी इसलिए धीरे से उठकर खड़ा हुआ और कुछ देर ठंडी हवा लेने के बाद वह धीरे से नीचे आ गया और आते ही किचन से आ रही आवाज की तरफ आगे बढ़ गया और किचन के दरवाजे पर खड़ा होकर देखा तो अपनी मां को देखा ही रह गया उसकी मां नहा कर तैयार हो चुकी थी लेकिन आज उसके बदन पर साड़ी नहीं थी पर की सलवार और कमी थी और यह देखकर वह पूरी तरह से चौंक गया और हैरान होता हुआ बोला।
यह क्या पहनी हो मम्मी,,,,।
कपड़े पहनी हूं नंगी तो नहीं हुं ना,,,,।
मैं यह नहीं कह रहा हूं लेकिन पहली बार मैं तुम्हें सलवार और कमीज में देख रहा हूं।
क्यों तुझे अच्छी नहीं लग रही है क्या,,,,?
पूछो मत आज तो तुम 20 साल की जवान लड़की लग रही हो मैं तो पहले पहचान ही नहीं पाया मुझे लगा कहीं तृप्ति दीदी तो नहीं आ गई,,,,, मैं तो घबरा ही गया था।
क्यों तुझे अपनी बड़ी बहन में और मुझ में कोई फर्क नहीं दिखाई देता।
सलवार कमीज में तो बिल्कुल भी फर्क नहीं दिखता मम्मी मैं तो सच में अभी हैरान हूं तुम तो आज अपनी उम्र को भी पीछे छोड़ दिया आज पूरी तरह से जवान लग रही है वैसे तो तुम जवान हो ही लेकिन आज यह जवानी 20 साल कम हो गई है।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंध पूरी तरह से मत हुए जा रही थी और उसकी बातें सुनकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार से मदन रस का बहन हो रहा था क्योंकि आज बरसों बाद वह भी सलवार कमीज पहनकर अपने आप को एकदम जवान महसूस कर रहे थे एकदम लड़की की तरह जिसका असर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच हो रहा था,, अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली)
चल अच्छा रहने दे मुझे खाना बनाने दे और जा जाकर जल्दी से नहा ले मैं नाश्ता तैयार कर देती हूं,,,,।
नाश्ता तो आज तैयार हो गया है,,,,,, तुम्हें सलवार कमीज में देखकर मेरा मन नहीं मानता आज तो मैं तुम्हारा दूध पीकर नाश्ता करूंगा,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगा यह देखकर सुगंधा के तन बदन में हलचल सिमटने लगी और वह मुस्कुराने लगी और अपने आप को अपने बेटे से बचने की कोशिश करने लगी अपने कदमों को पीछे लेने लगे यह देखकर अंकित और भी ज्यादा उत्साहित होकर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ते हुए बोला) आज तो तुम मेरे यहां से किसी भी कीमत पर बच नहीं सकती आज तो तुमने यह नया रूप धारण की हो इसे देखकर तुम मेरा लंड खड़ा हो गया है मुझे लग रहा है कि जैसे मेरी आंखों के सामने मेरी मां नहीं बल्कि कोई नौजवान लड़की खड़ी है जो पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है,,,,,, जिनके अंग अंग से मधुर रस टपक रहा है और आज यह मधुर रस में अपने मुंह से पिऊंगा,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित तुरंत अपनी मां का हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खींच लिया सुगंध अपने आप को संभाल नहीं पाई और उसकी छाती से लग गई उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम से अंकित की छाती से बने लगी अंकित तुरंत उसे अपनी बाहों में भरकर अपने दोनों हाथों को उसकी सलवार के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को टटोलना लगा जो कि वाकई में सलवार में कुछ ज्यादा ही बड़ी लग रही थी,,,,,,)
अरे छोड़ मुझे खाना बनाने दे,,,, अभी तो पूरा दिन बचा है लगता है रात की कसर पूरा करने का इरादा है क्या,,?(अपने बेटे की पकड़ से अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करते हुए वह बोली लेकिन जितना वह छुड़ा रही थी उतना ज्यादा अंकित उसे अपनी बाहों में जकड़ रहा था और वह एकदम से उसके लाल-लाल होठों के करीब अपने होंठ ले जाते हुए बोला,,,,)
वैसे सच कहूं तो मेरा इरादा बिल्कुल भी नहीं था लेकिन तुम्हारा यह रूप देखकर मुझे रहा नहीं जा रहा है अगर मैं आज इस समय कुछ नहीं किया तो फिर मुझसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा,,,,।
अरे हरामि छोड़ मुझे दाल जल जाएगी,,,,,।
दाल जल जाएगी उसकी चिंता मुझे बिल्कुल भी नहीं है अगर मैं अभी कुछ नहीं किया तो मेरी दाल नहीं गलेगी,,,,,(और इतना कहने के साथ ही एकदम से अपने होंठ को अपनी मां के लाल लाल होठों पर रख दिया और उसका रसपान करते हुए बड़ी जोर-जोर से अपनी मां की गांड को दबाना शुरू कर दिया वैसे भी सुगंध खुद अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए आज यह सलवार कमीज पहनी थी वह अपनी उम्र से और ज्यादा कम दीखना चाहती थी,,,, और उसकी यह युक्ति काम कर गई थी, अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ और अपनी उम्र की तारीफ सुनकर वह पहले नहीं समा रही थी उसका उत्साह और ज्यादा बढ़ गया था और अपने बेटे की हरकत से वह भी उन्मादित हो गई थी,,,,, अगले ही पलवा भी अपने बेटे का साथ देने लगी धीरे-धीरे अंकित आगे बढ़ने लगा वह अपनी मां की सलवार को खोलना चाहता था लेकिन उसे खोलने से पहले वह अपनी मां की कमीज को दोनों हाथों से पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा जिसमें सुगंधा भी उसका साथ देते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठा दी और अगले ही पल अंकित ने अपनी मां की कमीज को उतार कर एक तरफ फेंक दिया और इस समय वह किचन के अंदर सलवार और पुराने खड़ी थी सलवार के साथ जिस तरह का वह ब्रा पहनी थी उसकी चूचियां खरबूजे की तरह और ज्यादा बड़ी-बड़ी दिखाई दे रही थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था अंकित प्यासी नजरों से अपनी मां के खूबसूरत बदन को निहार रहा था,,,और सुगंधा शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए थी। अंकीत पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था वह जल्दी से बिना कुछ बोले अपनी मां को एकदम से गोद में उठा लिया,,,, अंकित की हरकत पर सुगंधा एकदम से घबरा गई,,,और बोली,,,,।
अरे अरे यह क्या कर रहा है नीचे उतर मुझे गिर जाऊंगी,,,,।
मेरे हाथों से तुम नहीं गिर सकती,,,,,, अब ले चलता हूं तुमको कमरे में वहीं पर मजा लूटेंगे,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां को गोद में लिए हुए ही किचन से बाहर निकल गया और गोद में उठाए हुए उसे उसके ही कमरे में ले जाने लगा सुगंधा के कमरे का दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था वह कमरे में दाखिल होते हैं अपनी मां को बिस्तर पर पटक दिया और खुद के कपड़े उतारना शुरू कर दिया,,,,,, अपने कपड़े उतार कर वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गया,,,, अपनी मां की मदद करने वाली जवानी को सलवार कमीज में देखकर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था,,, यह देखकर सुगंधा की बुर भी पानी छोड़ने लगी,,,,,, अंकित बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था वह जल्दी से अपनी मां की सलवार की डोरी खोलने लगा यह देखकर सुगंधा बोली,,,)
तू अपनी मनमानी किए बिना मानेगा नहीं ना,,,,।
सवाल ही नहीं उठता,,,(और इतना कहने का साथ है वह एक झटके में अपनी मां की सलवार की डोरी को खींचकर खोल दिया और दोनों हाथों से पेंटी सहित सलवार को नीचे खींचने लगा जिसमें उसकी मां भी सहयोग कर रही थी अगले ही पर अंकित अपनी मां को कमर के नीचे से एकदम नंगी कर दिया,,,,,, अंकित अपनी मां की बुर देखा तो पूरी तरह से पनीआई थी,,, यह देखकर कर वह मुस्कुराने लगा और बोला,,,)
तुम तो पूरी तैयार हो चुकी हो,,,,,।
(इतना कहने के साथ ही हुआ है अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बनाने लगा,,,,,, सुगंधा भी उत्तेजित हो चुकी थी,,,,, अंकित अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया,,,,, और फिर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,,, वैसे तो सुगंधा इसी के लिए ही सलवार कमीज पहनी थी लेकिन उसका बेटा इतनी जल्दबाजी दिखाएगा उसे नहीं मालूम था,,,, उसे नहीं मालूम था कि इस उम्र में भी वह सलवार कमीज में हुस्न की मल्लिका लगती है,,,,, वह भी अपने बेटे का पूरा साथ दे रही थी,,,, अंकित तब तक अपनी मां की चुदाई करता रहा जब तक की वो अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और खुद भी झड़ नहीं गया,,,,,।)