Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 12 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

अंकित एक सीधा साधा और सुलझा हुआ लड़का था,,, वह खुद से औरतों के आकर्षण में पडना नहीं चाहता था लेकिन उसे ऐसा लगने लगा था कि जैसे सब कुछ अपने आप ही होते जा रहा है,,, औरतों को देखने का नजरिया उसका बिल्कुल भी गलत नहीं था लेकिन कुछ दिनों से जिस तरह के हालात उसके सामने पैदा हो रहे थे उसे देखते हुए उसका आकर्षण औरतों की तरफ जवान लड़कियों की तरफ उनके उभरते हुए अंगों की तरफ बढ़ने लगे थे,,,। जिसकी शुरुआत अंकित के लिए अपनी खुद की सगी मां से ही हुई थी,,,,।



अंकित बेचैन रहने लगा था वह पहले की तरह बिंदास होकर गली मोहल्ले में सड़क पर नहीं घूम पता था क्योंकि अब उसकी नजर जाने अनजाने में राह चलती औरतों और जवान लड़कियों के अंगों पर चली ही जाती थी अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि औरतों के पास बड़ी-बड़ी चूचियां होती है जिसे देखकर उसके जैसे जवान लड़के पागल हो जाते हैं उनकी बड़ी-बड़ी गांड कैसी हुई साड़ी में और ज्यादा ऊपरी हुई नजर आती है जिसे देखने हर मर्द की चाहत होती है और उसे देखकर अपने मन में न जाने कैसे-कैसे कल्पना करते हैं जाने अनजाने में ही सही लेकिन अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि,,, क्यों उसके सभी दोस्त हमेशा लड़की और औरतों की ही बातें करते रहते हैं गली मोहल्ले की औरतों के बारे में गंदी-गंदी बातें कहते रहते हैं रोज उन लोगों के बातचीत का जरिया गली मोहल्ले की एक अलग ही औरत होती थी,,, पहले अंकित को अपने दोस्तों की तरह की बातें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थी इस तरह की बातें शुरू होने पर ही वह या तो वहां से उठकर चला जाता था या फिर उन्हें इस तरह की बातें ना करने के लिए बोलता था,,,, लेकिन आप हालात बदल चुके थे उसकी सोचने का रवैया बदल चुका था,,, और यह तब हुआ था जब सुमन के बारे में उसके दोस्त गंदी गंदी बातें कर रहे थे पहले तो उसे इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ था लेकिन अचार देने के लिए जब वह उसके घर गया था और जिस तरह का वाक्या उसकी आंखों के सामने पेश आया था उसे देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था हालांकि अभी भी अंकित को इस बात पर पूरा विश्वास नहीं हुआ था कि सुमन का तीन चार लड़कों के साथ शारीरिक संबंध है वह तो उसके साथ कुछ आनंददायक हादसा हो गया था जिसके बारे में सोच सोच कर ही उसका लंड कब खड़ा हो जाता था उसे पता ही नहीं चलता था,,,,,,,



ऐसे ही एक दिन अंकित नुक्कड़ पर अपने दोस्तों के साथ बैठकर चाय पी रहा था और तभी उनमें से एक लड़का जो कि उनके ही ग्रुप का था वह गाली देते हुए बोला,,,।

अरे यार रमेश एक नंबर का मादरचोद है,,,

(उसकी बात सुनकर दूसरा बोला)

क्यों क्या हुआ,,,?

अरे यार रमेश के घर उसकी बुआ आई है देखने पर एकदम पटाखा लगती है दो बच्चों की मां है लेकिन कम से उसका कसा हुआ पसंद देख कर तो मेरा खुद का लंड खड़ा हो गया था,,,।

क्या बात कर रहा है यार,,,,

हां मैं सच कह रहा हूं,,,,

(उन दोनों की बात सुनकर बाकी लोगों के साथ-साथ अंकित के भी कान खड़े हो गए थे वह भले ही चाय की चुस्की ले रहा था लेकिन उसका पूरा ध्यान उन दोनों की बातें सुनने में लगा हुआ था तभी वह पहले वाला बोला,,,)

कल मैं यार उसे बुलाने के लिए उसके घर गया था दोपहर के समय था उसके घर पहुंचा तो दरवाजा खिड़की संबंध जबकि गर्मी का दिन है लोग दरवाजा ना सही लेकिन खिड़की तो खोल कर ही रखते हैं बाहर से दरवाजा लॉक नहीं था इसलिए मैं समझ गया कि अंदर कोई ना कोई तो होगा ही मुझे लगा आवाज देने पर जरूर कोई बोलेगा लेकिन जब मैं दरवाजे पर दस्तक देने लगा तो अंदर से बिल्कुल भी आवाज नहीं आ रही थी,,,,

फिर क्या हुआ,,,?(दूसरे वाले ने आश्चर्यचक जताते हुए बोला,,,)



अरे फिर क्या मुझे उससे जरुरी किताबें लेनी थी होमवर्क पूरा करने के लिए इसलिए मैं पूरी कोशिश करने लगा कि कोई दरवाजा खोल दे या कोई अंदर से जवाब ही दे दे लेकिन कोई आवाज ही नहीं अंदर से आ रही थी इसलिए मैं दरवाजे को छोड़कर खिड़की के पास गया कि मुझे लगा कि शायद खिड़की तो पूरी होगी लेकिन देखा तो खिड़की भी बंद थी लेकिन अंदर इतना तो महसूस हो ही रहा था कि कोई ना कोई तो जरूर है और जब मैं खिड़की से जो की थोड़ी सी खिड़की में दरार थी उसमें से नजर गडाकर अंदर की तरफ देखा तो मेरा होश उड़ गया,,,

अरे ऐसा क्या देख लिया जो तेरा होश उड़ गया,,,(उनमें से तीसरे वाले ने बोला सबके कान खड़े थे उसकी बात सुनने के लिए सब अंदर से बेचैन हो रहे थे कि वह क्या बताता है और यही हाल अंकित का भी था हालांकि अभी पूरी बात वह सुन नहीं पाया था लेकिन फिर भी उत्सुकता के कारण उसका लंड हरकत में आना शुरू हो गया था,,,,)

अरे यार क्या बताऊं जब मैं खिड़की से अंदर देखने की कोशिश करने लगा तो अंदर तो ज्यादा उजाला नहीं था लेकिन फिर भी दोपहर का समय होने से इधर-उधर से अंदर उजाला थोड़ा बहुत नजर आ ही रहा था और मैंने देखा कि बिस्तर पर से एक औरत उठकर दूसरी तरफ जाने लगी या का को की अंदर बाथरूम की तरफ जाने लगी मुझे तो ज्यादा कुछ दिखाई नहीं दिया बस उसकी बड़ी-बड़ी गांड दिखाई दी एकदम नंगी वह पूरी तरह से नंगी थी मेरे तो होश उड़ गए और सही बताऊं तो मेरा तो लंड भी खड़ा हो गया सच कहूं तो पहली बार किसी औरत को मैं एकदम नंगी देख रहा था ,,,,,

(वह जिस तरह से बता रहा था बताते हुए उसकी हालत खराब हुई जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और सुनने वाले की तो हालात और ज्यादा खराब हो गई थी अंकित ने सभी दोस्तों के पेट की तरफ देखा तो वह हैरान हो गया क्योंकि सबकी पेट के आगे तंबू बना हुआ था उसकी बात सुनकर सब की हालत खराब थी सबका लंड खड़ा हो गया था उसकआ खुद का भी लंड खड़ा था,,, उसकी बात सुनकर एक आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)



क्या कह रहा है यार क्या सच में तूने इस तरह का नजारा देखा,,,

हां यार कसम खा कर कहता हूं मैं बिल्कुल भी झूठ नहीं कह रहा हूं मुझे तो ऐसा लगा कि शायद रमेश की मम्मी पापा है लेकिन जब मैं बिस्तर पर नजर दौड़ी तो मैं हैरान रह गया क्योंकि बिस्तर पर तो खुद रमेश भाई का नंगा उसका लंड पानी छोड़ चुका था,,,,।

क्या,,,,(एक साथ दो तीन लड़के बोल पड़े क्योंकि सबको हैरानी हुई थी)

हां यार बिस्तर पर रमेश था एकदम नंगा मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था और मुझे झटका तो इस बात का लगा की कहानी वह औरत उसकी मां तो नहीं थी मैं तो एकदम हैरान हो गया मैंने तो सिर्फ सुना था मुझे लगा कि मैं आज अपनी आंखों से देख लिया कि एक बेटा कैसे अपनी मां की चुदाई करता है,,,,,, (इस बात को सुनते ही अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों के सामने उसकी मां का खूबसूरत चेहरा नजर आने लगा,,, उसकी मां की साड़ी में कसी हुई गांड नजर आने लगी उसका भरा हुआ स्तन नजर आने लगा जिसे वह नजर भर कर कई बार देख चुका था वह लड़का अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

सच कह रहा हूं यार मेरी तो हालत खराब हो गई थी मेरा लंड सच में पानी छोड़ने वाला था किसी तरह से मैं अपने आप को संभाल कर रखा था,,, मैं तो खिड़की से नजर हटा ही नहीं रहा था मैं देख पा रहा था कि रमेश उसी औरत के पेटीकोट से अपने लंड को साफ कर रहा था,,, और अंदर से पानी गिरने की आवाज आ रही थी मैं समझ गया कि वह अपनी बुर धोने के लिए गई है,,,।

बाप रे क्या सच में रमेश अपनी मां को चोदता है और उसकी मां उससे चुदवा भी लेती है,,,

हां यार चुदवा लेती होगी देखा नहीं है उसका बाप कितना बीमार रहता है मरियल सा है और उसकी मां अभी भी पूरी जवानी से भरी हुई है बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूची मुझे मिल जाए तो मैं खुद ही रात भर उसकी बुर में लंड डालकर पड़ा रहुं,,,(उनमें से एक लड़के ने अपने मन की भड़ास निकलते हुए बोला,,,)



कसम से जैसा तू सोच रहा है मेरा भी ख्याल बिलकुल ऐसा ही है उसकी मां को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है काश मैं भी रमेश की जगह होता तो मजा आ जाता,,,(उनमें से दूसरे लड़के ने भी उसे लड़के के सुर में सुर मिलाते हुए बोला तो तभी उसकी बात सुनकर तीसरा लड़का बोला)

तो बन जाना तू भी रमेश तेरी मां कौन सी कम है लाली पाउडर लगाकर कितनी गजब लगती है,,, तेरी मां को भी देख कर मेरा खडा हो जाता है,,,।(इनमें से उसका ही दोस्त चुटकी लेते हुए बोला तो वह भी मजे लेते हुए बोला,,,)

लेकिन मुझे तो तेरी मां बहुत अच्छी लगती है,,,

तो कोई बात नहीं अदला बदली कर लेते हैं तो मेरी मां को मैं तेरी मां को,,,,।

(अंकित हैरान था क्योंकि पहले दूसरों की मां के बारे में बातें होती थी लेकिन आज यह दोनों अपनी ही मन के बारे में गंदी बातें कर रहे थे और वह भी एकदम खुश होकर दोनों के चेहरे पर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं था जहां पहले अंकित इस तरह की बातें शुरू होने पर वहां से चला जाता था या इस तरह की बातें करने से मना कर देता था वही आज अंकित वहीं बैठकर चाय की चुस्की के साथ-साथ उन लोगों की बातों का आनंद भी ले रहा था और उसे मजा भी आ रहा था वह अपने मन में उसे दिन की बात सोचने लगा जब क्रिकेट में हर जाने के बाद उसका दोस्त उसे गंदी-गंदी गालियां दे रहा था उसकी मां के बारे में उसकी मां को चोदने के लिए बोल रहा था ना जाने क्यों ना चाहते हुए भी उसकी आंखों के सामने उसे तरह का दृश्य अपने आप नजर आने लगा जैसा कि वह अंकित को गाली दे रहा था कि तेरी मां को चोद दूंगा,,, और उसकी आंखों के सामने कल्पना चित्र उभरने लगा कि कैसे उसका दोस्त उसकी मां की साड़ी उठाकर पीछे से उसकी चुदाई कर रहा है इस तरह की दृश्य के बारे में सोचते ही अंकित एकदम से अपने आप पर ही गुस्सा होने लगा कि यह क्या सोच रहा है मैं ना चोद दूं उसकी मां को,,,, सभी की बातों को सुनने के बाद वह लड़का बोला,,,,)



यार मैं भी यही सोच रहा था अगर बिस्तर पर से उठकर जो औरत बाथरूम की तरफ गई है अगर सच में उसकी मां होगी तो मैं भी ट्राई करूंगा उसकी मां को चोदने को क्योंकि मैं तो सब कुछ देख चुका था बड़े आराम से उसकी मां मुझे दे देती,,,, लेकिन अंदर कमरे में उसकी मां नहीं बल्कि उसकी बुआ थी जो कुछ दिनों के लिए उसके घर आई थी अगर मैं उसकी मां को सामने से आई हुई ना देखा तो मुझे ऐसा ही लगता कि रमेश अपनी मां को चोद रहा था,,,।

धत् ,,, सारा मजा किरकिरा कर दिया,,, मुझे तो लग रहा था कि रमेश अपनी मां को ही चोद रहा था,,,,(उनमें से एक लड़का थोड़ा सा निराशा दिखाकर के बोला,,,)

मुझे भी तो ऐसा ही लग रहा था लेकिन जरा यह तो सोचो हम लोग जहां देख भी नहीं पाते हैं बुर को वही रमेश अपनी बुआ की जमकर चुदाई कर रहा है सोचो अपने और रमेश में कितना फर्क है उसकी किस्मत कितनी बुलंदियों पर है और हम लोग अभी भी सिर्फ याद करके हिला के काम चलाते हैं,,,,

हां यार बात तो सही कह रहा है हम लोगों से अच्छा तो रमेश ही है जो बुर का आनंद उठा रहा है,,,।

(कुछ देर तक वहीं बैठने के बाद सभी लोग अपने-अपने घर की तरफ जाने लगे तो उन लोगों के जाने के बाद अंकित भी उठकर अपने घर की तरफ जाने लगा तभी उसे रास्ते में सुमन आगे आगे जाती दिखाई दी उसके हाथ में सब्जियों का खेला था ऐसा लग रहा था कि वह मार्केट से सब्जी खरीद के आ रही थी अंकित की नजर सुमन के थैले के साथ-साथ उसके पिछवाड़े पर भी चली गई थी जिसकी थिरकन देखकर उसकी टांगों के बीच हलचल होने लगी थी,,, क्योंकि यह वही पिछवाड़ा था जो अनजाने में ही उसके लंड से एकदम सच गया था जिसकी गर्मी उसे अभी तक अपने लंड पर महसूस होती थी,,,, वैसे तो अंकित किसी भी लड़की से बात करने में बहुत शर्माता था लेकिन न जाने उसमें कहां से हिम्मत आ गई और वह पीछे से आवाज लगाते हुए बोला,,,)



सुमन दीदी,,,,ओ सुमन दीदी,,,,,( सुमन को पीछे से आ रही आवाज जानी पहचानी लगी तो वहां अपनी जगह पर खड़ी होकर पीछे की तरफ देखने लगी और पीछे से आ रहे हैं अंकित को देख कर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह एकदम से खुश होते हुए बोली,,,)

अरे अंकित तुम यहां क्या कर रहे हो,,,?

कुछ नहीं दीदी बस दोस्तों के साथ थोड़ा घूम रहा था तुम्हें जाता हुआ देखा तो तुम्हारे पीछे आ गया,,,

ओहहहह तो यह बात है लड़कियों का पीछा किया जा रहा है,,,,(नजर को गोल-गोल घूमाते हुए वह बोली,,,)

नहीं दीदी मैं भला लड़कियों का पीछा क्यों करूंगा मैं यह सबसे दूर ही रहता हूं वह तो तुम थैला लाकर जा रही थी इसलिए आ गया,,, लाए में ले चलता हूं,,,

(इतना कहने के साथ ही अंकित तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके हाथ से थैला लेने लगा और सुमन भी उसे इनकार नहीं कर पाई,,, दोनों बातचीत करते हुए आगे आगे चलने लगे अंकित केलिए यह पहला मौका था जब वह किसी लड़की से इस तरह से बातें कर रहा था और बातचीत का केंद्र बिंदु केवल पढ़ाई पर ही था पैसे तो लड़कियों से बातचीत करने का अनुभव अंकित के पास बिल्कुल भीनहीं था,,,, लेकिन सुमन खेली खाई लड़की थी लड़कों को अपनी बातचीत के जाल में फसना उसे अच्छी तरह से आता था वह चाहती तो पहली बार में ही अंकित को अपनी बातों के जाल में फंसा कर अपनी जवानी का जलवा दिखा कर उसे बिस्तर पर ले आई लेकिन वह धीरे-धीरे अंकित के साथ आगे बढ़ना चाहती थी क्योंकि पहली बार में ही वह अंकित के मन को पढ़ चुकी थी अंकित सीधा-साधा था इस बात को अच्छी तरह से जानती थी और इसीलिए उसकी जवानी से जी भरकर खेलना चाहती थी बातों ही बातों में दोनों का घर आ चुका था और अंकित खेला उसके हाथ में पकडाते हुए मुस्कुरा कर अपने घर में आ चुका था और शाम ढलने की वजह से खाना बनाने की तैयारी हो रही थी,,,,।



अंकित हाथ में धोकर चाय पीकर पढ़ने के लिए अपने कमरे में चला गया था लेकिन उसका मन पढ़ने में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था क्योंकि शाम कुछ इस तरह से उसके दोस्त ने रमेश की बात ,,,, बताया था उसे सुनकर उसके होश उड़ गए थे बार-बार उसकी आंखों के सामने उसके दोस्त के बताए अनुसार कि उसे खिड़की से केवल उसे औरत की बड़ी-बड़ी गांड दिख रही थी वही नजर वह अपने मन में कल्पना कर रहा था कि कैसे रमेश बिस्तर पर नंगा लेट होगा और उसकी बुआ एकदम नंगी बिस्तर पर से उतरकर बाथरूम की तरफ जा रही होगी तब तक रमेश अपना काम खत्म कर चुका था इस बात को सोचकर ही उसके बदन में सुरसुराहट होने लगी और उसके दोस्त के बताएं अनुसार उसे एहसास होने लगा कि वाकई में रमेश की किस्मत उन लोगों से कुछ ज्यादा ही अच्छी थी जो इस उम्र में बुर चोदने के लिए मिल रहा था वह अपनी बुआ को चोद रहा था और उन लोगों को तो आज तक बुर के दर्शन भी नहीं हुए थे,,,,,, खैर जैसे तैसे करके रात गुजर गई,,,,।

सुबह उठकर कहां नहा कर बाथरूम से टावल लपेटकर अपने कमरे में चला गया और दरवाजे को बंद कर लिया,,,,, वह इस बात से निश्चिंत था,, की दरवाजा उसने बंद कर दिया है और कोई गीत गुनगुनाते हुआ वह निश्चित होकर अपने बदन से टावल निकाल कर बिस्तर पर फेंक दिया और एकदम नंगा हो गया,,,, नंगा होने के बाद सहज रूप से उसकी नजर अपने लंड की तरफ चली गई क्योंकि सुषुप्त अवस्था में भी गजब का लग रहा था,,,। और वह अनजाने में ही उसके तार को छेड़ते हुए उसे पर हाथ लगाकर थोड़ा सा ऊपर उठा दिया और वापस अपने हाथ को वहां से हटा लिया लेकिन इतना उसके लिए काफी था,,,, उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा,,,।

और वह अपने कमरे में खड़े होकर,,, अपने लंड की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था उसे यह नजारा अच्छा लग रहा था फिर वह,,, अलमारी के पास जाकर अपने कपड़े ढूंढने लगा,,,, लेकिन इस दौरान लंड खड़ा होने की वजह से ऊपर नीचे हिल रहा था जिसे देखकर वह आनंदित हो रहा था,,, वहीं दूसरी तरफ नाश्ता तैयार कर चुकी सुगंध देर होने की वजह से अपने बेटे को बुलाने के लिए उसके कमरे की तरफ आगे बढ़ गई,,,

वह पूरी तरह से सहज थी और औपचारिक रूप से वह अपने बेटे के कमरे के पास पहुंच गई लेकिन दरवाजा बंद होने की वजह से वह आवाज नहीं लगाई बल्कि अनजाने में ही खिड़की की तरफ आ गई,,, खिड़की का एक पट बंद था और एक पट खुला हुआ था,,,।



वह खिड़की पर खड़ी होकर अंदर आवाज लगाने ही वाली थी कि अंदर का नजारा उसकी आंखों सामने आ गया और अंदर का नजारा देखकर वह एकदम से मंत्र मुग्ध हो गई वह अंतर साफ तौर पर देख पा रही थी कि उसका बेटा कमरे के अंदर पूरी तरह से नंगा खड़ा था,,,, और उसके हाथ में उसका अंडरवियर था वह सामने की तरफ मुंह ना करके बगल की तरफ मुंह करके खड़ा उसके हाथों में उसकाअंडरवियर था जिसे वह पहनने की तैयारी में था सुगंधा की हालत एकदम खराब होने लगी अपने बेटे को नग्न अवस्था में देखकर बरसों बाद वह अपने बेटे को नंगा देख रही थी इन वर्षों में काफी कुछ उसके बदन में बदल चुका था उसके बदन में गठीलापन आ गया था कसरती बदन हो चुका था और जैसे ही उसकी नजर नीचे की तरफ गई तो वहां का नजारा देखकर तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि वह क्या देख रही है उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह कोई सपना देख रही है क्योंकि उसे साफ तौर पर दिख रहा था कि उसके बेटे का लंड एकदम अपनी औकात में आकर खड़ा था और कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा था अपने बेटे के लंड को देखकर उसे गधा का लंड याद आ गया,, । जिसे वह मार्केट जाते समय बहुत बार खुले मैदान पर देख चुकी थी लटकता हुआ,,,,।

सुगंधा को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि इतने मोटे और तगड़े लंबे लंड के बारे में उसने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी,,, एक बार इसी कमरे में वह अपने बेटे के तंबू को देखकर उसे पर हाथ लगाकर पकड़ने की कोशिश जरूर की थी लेकिन तब भी वह अंडरवियर में था लेकिन आज अंडरवियर के बाहर अपने बेटे के हथियार को देखकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल होने लगी थी और वह पानी छोड़ने लगी थी,,,,, सुगंधा का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था अपने हाथ में अंडरवियर लेकर खड़े अंकित की हरकत को वह देख रही थी और अंकित भी अनजाने में ही अपने लंड को बार-बार हाथ से पकड़ कर ऊपर नीचे करके दिला दे रहा था उसकी यह हरकत सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना भर रही थी अंकित को तो पता भी नहीं था की खिड़की पर उसकी मां खड़ी होकर सब कुछ देख रही है वरना वह कमरे में इस तरह से नंगा होने की हिम्मत ही ना करता,,,।



अपने बेटे के मोटे तगड़े लंबे और खड़े लंड को देखकर सुगंधा की बर पानी छोड़ रही थी अब तो उसकी इच्छा और बढ़ गई थी अपने बेटे के लैंड को अपनी बुर में लेने के लिए अपने बेटे के लैंड को देखते ही अपने स्वर्गवासी पति के लंड के बारे में उसे पूरा याद आ गया जिसके लंबाई चौड़ाई और मोटी सेवा अच्छी तरह से बाकी थी जिसे वह अपनी बुर में ले चुकी थी,,, और इसीलिए उसे समझते देर नहीं लगी कि उसके पति का लंड तो उसके बेटे के लंड के बच्चे के बराबर था और वह अपनी मन में कल्पना करने लगी कि वाकई में जब उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी कई हुई बुर में जाएगा तो कैसा धमाल मचाएगा इस बात से ही उसकी बुर पानी पानी हो गई थी,,,।

उसकी कल्पनाओं का घोड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा था सुगंध अपने बेटे को लेकर अपने मन में पल भर में ही बहुत सारी कल्पना कर चुकी थी लेकिन तभी यह खूबसूरत दृश्य पर पर्दा डालते हुए उसका बेटा अंडरवियर को अपनी दोनों टांगों में डालकर उसे ऊपर की तरफ खींचकर अपने खड़े लंड को हाथ से पड़कर अपनी अंडरवियर में छुपाने की कोशिश करने लगा जो की नाकामयाब साबित हो रहा था अंदर डालने पर भी उसमें गजब का तंबू बना हुआ था,, ।



वैसे तो सुगंध का मन खिड़की छोड़कर कहीं जाने को नहीं हो रहा था लेकिन अब वहां खड़ा रहना उचित नहीं था इसलिए वह मां महसूस कर उसे बिना आवाज लगाई वापस किचन में आ गई हो गहरी गहरी सांस लेने लगी आज उसकी मां पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था क्योंकि आज पहली बार उसने अपने बेटे के लंड के दर्शन जो किए थे,,, जो की बेहद अद्भुत अविस्मरणीय और अतुल्य था,,,,।
 
सुगंधा के मन में मार्केट में नूपुर के साथ जो लड़का था उसे लेकर उसके मन में बड़ी द्विधा थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह लड़का था कौन रिश्ते में क्या लगता था जिस तरह की उसकी हरकत थी उसे देखते हुए सुगंधा अपने मन में ही तर्क लग रही थी कि हो ना हो नूपुर के पति की उम्र को देखकर जरूर नूपुर ने अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए कोई जवान लड़का तलाश रखी है वरना वह उसके साथ मार्केट में ही इस तरह की हरकत ना करता,,,। नूपुर के बारे में सोच-सोच कर उसका मन अजीब सी उलझन में फंसा हुआ था,,,।



जैसे तैसे करके दो-तीन दिन गुजर गए थे वह नूपुर से पूछ नहीं पाई थी,,,,, पूछने की तो सुगंधा ने बहुत कोशिश की थी लेकिन हर बार उसके सवाल उसके होठों पर आकर रुक जाते थे उसे हिम्मत नहीं हो रही थी उसे लड़के के बारे में पूछने की कि उस लड़के से उसका क्या रिश्ता है,,,, लेकिन अब सुगंध को नूपुर में बदलाव दिखाई दे रहा था जहां नूपुर कोई कोई सी रहती थी वहीं अब उसके चेहरे पर खुशहाली और प्रसन्नता के भाव साफ नजर आते थे,,,,। और यही बदलाव सुगंधा के शक के कारण को और ज्यादा मजबूत कर रहा था,,,,। हालांकि उसे लड़के को लेकर जिस तरह की उत्सुकता सुगंधा के मन में थी इस प्रकार की चाहत वह अपने बेटे से रखती थी वह चाहती थी कि उसका बेटा भी उसके साथ इस तरह की हरकत करें जैसा कि वह लड़का नूपुर के साथ कर रहा था,,,,। और कभी-कभी तो वह उस मार्केट वाले दृश्य की कल्पना अपने साथ करने लगती थी,,,, आंखों को बंद करके वह उस दृश्य के बारे में सोचने लगती थी,,,वह, एहसास करने लगती थी कि कैसे उसका लड़का ठीक उसके बगल में खड़ा होकर सब्जी खरीदते समय अपनी हथेली को उसकी ऊपरी हुई गांड पर रखकर लड़के-हल्के सहला रहा है,,, और उसकी इस हरकत पर वह पूरी तरह से उत्तेजित और रोमांचित हो उठती थी,,,, उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगती थी मार्केट मैं इस तरह की हरकत करता देख वह अपने बेटे को ,, गुस्से से आंख दिखाती थी जो की उसका गुस्सा ऊपरी मन से था अंदर से वह अपने बेटे की हरकत का पूरा आनंद ले रही थी और कल्पना में भी अपनी मां की आंख दिखाने पर भी अंकित अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रहा था और नितंबों की गोलाई के निचले भाग पर अपनी हथेली रखकर वहां अपनी दो उंगली को साड़ी के ऊपर से ही उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर वाली जगह पर धंसाने की कोशिश करता था और अपनी मनसा में वह कामयाब भी हो जाता था उसकी हरकत से सुगंध अपने बदन में अद्भुत उत्तेजना का संचार महसूस करके पूरी तरह से पानी पानी हो जाती थी और अपने आप पर कबूल ना कर पाने की स्थिति में वह घर पर आते ही सब्जी के थेले को एक तरफ फेंक कर,,, वह खुद अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपने बेटे को बिस्तर पर गिरा कर खुद उसके लंड पर सवार हो जाती थी और फिर अपनी मनमानी करते हुए अपनी जवानी का लावा पूरी तरह से निकाल कर शांत हो जातीथी,,,, इस तरह की कल्पना करके उसके बाद में और ज्यादा रोमांच पैदा हो जाता था लेकिन उसकी उत्सुकता और बढ़ने लगी थी उस लड़के के बारे में जानने के लिए,,,,।





दूसरी तरफ जब से सुमन की सच्चाई अंकित को पता चली थी और अंकित का जिस तरह से उसके घर पर जाना हुआ था और जिस तरह से उसके जवानी के दर्शन उसे करने को मिले थे उसे देखते हुए उसका आकर्षण सुमन की तरफ और फिर दूसरी औरतों की भी तरफ बढ़ने लगा था एक तरह से औरतों को देखने का रवैया पूरी तरह से उसका बदल गया था अब वह आने जाने वाली औरतों को ताड़ता रहता था खास करके उसकी नजर उन औरतों की चूचियों पर रहती थी और उनके गोलाकार नितंबों पर और हर एक औरत के अंगों के बारे में वह उनकी नग्न अवस्था को लेकर कल्पना किया करता था,,,,।

ऐसे ही एक दिन वह चाय की दुकान पर अपने दोस्तों के साथ बैठा हुआ था तभी उसके दोस्त ने धीरे से उसके कान में बोला,,,।

तुझे एक चीज दिखाउं बहुत गजब की है,,,

क्या है बता,,,(अंकित उत्सुकता दिखाते हुए बोला)

लेकिन जाने दे तुझे दिखाने का कोई मतलब नहीं है तो बाद में गुस्सा करेगा तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा,,,



लेकिन यह तो बता चीज क्या है,,,(उसे चीज के बारे में उत्सुकता दिखाते हुए अंकित बोला जिस तरह से उसने बोला था कि तुझे दिखाने का कोई मतलब नहीं है तू नाराज हो जाएगा इतना तो उसे समझ में आ गया था कि वह जो कुछ भी चीज है वह गंदी है इसलिए तो उसकी उत्सुकता और ज्यादा बढ़ गई थी जब उसका आकर्षण औरतों की तरफ नहीं था तब अगर उसके दोस्त ने उसे कुछ दिखाने की बात करता तो शायद वह इनकार कर देता और इतना उस पर ध्यान भी नहीं देता लेकिन अब हालात बदल चुके थे धीरे-धीरे अंकित भी उन लड़कों की तरह ही होता जा रहा था,,,,)

एक गंदी किताब है लेकिन तुझे दिखाने का कोई फायदा नहीं है तू रहने दे मैं दूसरे को दिखा दूंगा,,,।

(अब तो अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई वह उसे उस किताब को देखने की उत्सुकता और ज्यादा बढ़ने लगी इसलिए वह बोला,,,)

दिखा तो सही में कुछ नहीं कहूंगा,,,,

नहीं यार तेरा कोई भरोसा नहीं है,,,, तू रहने दे,,,,



जब दिखाना ही नहीं था तो बताया क्यों,,,?(अंकित उस पर गुस्सा दिखाते हुए बोला,,,,) अब तु मुझसे बात मत करना,,,,(इतना कहकर वह उठने वाला था कि उसके दोस्त ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपने पास बैठाते हुए बोला,,,)

यार तू गुस्सा बहुत जल्दी हो जाता है और वैसे भी तू इस तरह की चीज देखना पसंद नहीं करता इसलिए मैं कह रहा था,,,, तू नाराज हो जाता है तो मजा नहीं आता,,,,(सूरज उसे समझाते हुए बोला,,,)

देख ऐसा नहीं है कि मैं उसे देखने के लिए तड़प रहा हूं लेकिन मुझे भी तो पता चले की लड़की किस तरह की चीजे देखते हैं,,,(अंदर से तो अंकित का मन बहुत कर रहा था उसके हिंदी चीज को देखने के लिए लेकिन वह ऊपर से सिर्फ सहज रूप से बता रहा था कि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता,,)



अरे सच कह रहा हूं अंकित तू देखेगा तो पागल हो जाएगा बहुत मजा आएगा मैं भी पहली बार ही देख रहा हूं,,,,

अच्छा दिखा,,,,,(अंकित उत्सुकता दिखाते हुए बोला,,,)

पागल हो गया है यहां नहीं चल दीवार के पीछे चलते हैं,,,

ठीक है,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी जगह से खड़ा हो गया और सूरज भी अपनी जगह से खड़ा होता हुआ बोला,,)

रुक जरा एक मीठा पान ले लेते हैं उसमें से आधा-आधा खा लेंगे,,,

ठीक है,,,,(और इतना कहने के साथ ही दोनों पास में पान की दुकान पर चले गए और पान की दुकान पर पहुंचते ही सूरज बोला,,)

और पांडे चाचा जरा एक मीठा पान लगाना तो,, (इतना कहने के साथ ही सूरज पान के गले पर टीका लेकर खड़ा हो गया और सड़क की तरफ देखने लगा,,,, तो वह पान वाला बोला,,,)

क्या हुआ बबुआ तुम्हारे पापा नजर नहीं आ रहे हैं,,,,

अरे वो कुछ दिनों के लिए गांव गए हैं इसलिए अगले सप्ताह आने ही वाले हैं,,,,

चलो ठीक है,,,, एक ही बनाना है ना,,,,



हां चाचा एक ही पान,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज की नजर सामने सड़क से गुजर रही है खूबसूरत औरत पर गई जो की लंबाई चौड़ाई में काफी मजबूत थी और उसकी चूचियां भी बड़ी-बड़ी थी और गांड भी तरबूज की तरह निकली हुई थी उसे सूरज घूरता ही रह गया तो यह देखकर उस पान वाले ने बोला,,,)

क्या देख रहे हो बबुआ,, अपने शर्मा जी की बड़ी साली है बंबई से आई है साली की गांड देखकर मेरी खुद की धोती तन जाती है,,,,

क्या बात कर रहे हो चाचा,,,,(सूरज एकदम से उत्सुकता दिखाते हुए बोला उस पान वाले की बात सुनकर अंकित भी हैरान था,,,, उस पान वाले की उम्र तकरीबन 45 से 50 के बीच में होगी,,, इस उम्र में भी उसका देखने का नजरिया बिल्कुल भी नहीं बदला था हर एक औरत को वह प्यासी नजरों से ही देखता होगा इतना तो अंकित समझ ही गया था और इस बात से हैरान भी था कि छोटे-बड़े सभी मर्द औरतों की ताकत झांकी में लगे रहते हैं एक वही पूरी दुनिया में शरीफ बनने चला था,,,,।)

अरे सही कह रहा हूं बबुआ हम तो दिन रात यहीं बैठकर यही करते रहते हैं,,,, देखो तो सही उसकी गांड कैसी निकली हुई है ऐसा लगता है कि जैसे साड़ी में तरबूज डाल दिया गया है,,,। देख कर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,।

सही बात कह रहे हो चाचा वैसे एकदम कमाल की औरत है तभी तो उसे पर नजर पड़ी तो उसे देखता ही रह गया,,,,।

अरे तुम तो आज देख रहे हो बबुआ,,, जिस दिन से आई है उसे दिन से देख रहा हूं सुबह-सुबह टहलने के लिए निकलती है तब देखो नजरा,,, सुबह में केवल मेक्सी पहनी रहती है और एकदम कसी हुई ,,, उसका हर एक अंग एकदम साफ-साफ उभरा हुआ नजर आता है ऐसा लगता है कि माने जैसे उसने कुछ पहनी ही ना हो,,,,(वह पान वाला सूरज को पान थमाते हुए बोला,,,, उसकी आंखों में औरतों के प्रति आकर्षण और हवस एकदम साफ नजर आ रही थी,,,)

चाचा तुम्हारी बातें सुनकर तो मेरी हालत खराब हो गई है लगता है सुबह-सुबह उठना पड़ेगा,,,,

अरे बबुआ वह कहावत सुने हो ना जो सोवत है वह खोवत है और जो जागत है वह पावत है,,,, बिल्कुल ऐसा ही है,,,,।

बिल्कुल सही कह रहे हो चाचा,,,,,(इतना कहकर सूरज उसे औरत को गली के किनारे तक देखता रह गया जब तक कि वह आंखों से ओझल नहीं हो गई,,,, ऐसा नहीं था कि केवल पान वाला और सूरज ही उसे औरत को देखकर मजे ले रहे थे आज अंकित को भी उसे औरत को देखने में मजा आ रहा था,,,, उसे औरत को देखकर अंकित अपनी मां ही मन में सोच रहा था कि वाकई में उस औरत की गांड और चूचियां दोनों बड़ी-बड़ी थी,,, और यहां तक की अंकित तो अपने मन में उसे औरत को नग्न अवस्था में कल्पना भी कर लिया था कि उसके अंग कैसे नजर आते होंगे,,,, हालांकि अंकित अभी तक औरतों के खूबसूरत अंगों से अच्छे से रूबरू नहीं हो पाया था इसलिए कल्पना करने में भी उसे थोड़ी दिक्कत महसूस होती थी लेकिन मजा बहुत आता था जाते-जाते सूरज ने उस पान वाले से बोला,,,)

चाचा यह सब बातें पापा से मत बताना,,,,

अरे बबुआ,,,, हमें हमारा धंधा थोड़ी ना खराब करना है यह सब अगर हम घर वालों को बताते रह गए तो फिर हमारे पान की दुकान पर आएगा कौन,,,,

हां चाचा यह बात तो है सही कहा तुमने अच्छा तो मैं चलता हूं,,,,

(ठीक है बबुआ और इतना कहकर वह हंसने लगा,, , अंकित को आज पूरा यकीन हो गया था कि दुनिया में ऐसा कोई भी मर्द नहीं है जो औरतों के प्रति गंदी नजर ना रखता हो छोटे बड़े सब औरतों को ताकने झांकने में ही लगे हुए थे,,,,, पान की दुकान बड़ी सी दीवार से सटी हुई थी जिसके पीछे उन दोनों को जाना था और दोनों तकरीबन 4 फीट की दीवार को लाख कर दूसरी और उतर गए थे जहां पर खेलने का मैदान था लेकिन इस समय वहां कोई नहीं था और वह दोनों एक बड़े से पेड़ की छाया में जाकर बैठ गई और फिर सूरज अपनी जेब में रखे हुए उस गंदी किताब को धीरे से निकाला,,,, उसे किताब के मुख्य पृष्ठ को देखकर ही अंकित का लंड अंगड़ाई लेने लगा,,,।
 
पान की दुकन पर अंकित उसका दोस्त और पान वाला शर्मा जी की साली को ताड़ते हुए
 
शर्मा जी की बड़ी साली को ताड़ने के बाद ,, उसकी बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर वैसे ही अंकित उत्तेजित हो चुका था। सूरज का भी यही हाल था,,, सूरज और अंकित दोनों दीवाल लांघकर दूसरी और कूद गए थे,,, यहां पर क्रिकेट खेला जाता था जो कि हमेशा मोहल्ले के लड़कों से यह मैदान भरा रहता था,,, लेकिन दोपहर का समय होने की वजह से कोई भी नहीं था और यही दोनों के लिए अच्छा भी था दोनों ने एक बड़े से पेड़ के नीचे अच्छी सी जगह देखकर बैठ गए,,,।

सूरज अपनी जेब में से वह गंदी सी चीज निकालता है इससे पहले ही अंकित बोला।

यार सूरज अगर पान वाले पांडे जी ने तेरे पापा से सब कुछ बता दिया तो।!

क्या बता दिया तो,,(सूरज आश्चर्य से अंकित की तरफ देखते हुए बोला)

वही कि हम दोनों पान की दुकान पर खड़े होकर शर्मा जी की बड़ी साली को देख रहे थे।

अच्छा वो,,, तू चिंता मत कर पांडे चाचा किसी से भी नहीं बताएंगे क्योंकि दिन भर हम लोग वेट कर वहां से कुछ ना कुछ खरीद कर खाते ही रहते हैं अगर बता दिए तो उनकी बिक्री भी जाती रहेगी और वैसे भी तो वह भी तो देख कर मजा ले रहा था। वैसे सच में शर्मा जी की शादी थी एकदम कमाल अगर औरत मिले तो बिल्कुल उसकी तरह ही जो बिस्तर में एकदम धमाल मचा दे देख नहीं रहा था कितनी भरी हुई बदन की थी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां तरबूज जैसे बड़े-बड़े गांड कसम से चोदने में मजा ही आ जाए।

(सूरज की बातें सुनकर अंकित केतन बताने में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसे सूरज की कही बातें बड़ी अच्छी लग रही थी और वैसे भी सूरज जो कुछ भी कह रहा था अंकित के नजरिया सेवा बिल्कुल सच ही था अगर बीवी हो तो शर्माजी की बड़ी साली जैसी भरे बदन वाली क्योंकि उसका भी आकर्षण भरे बदन वाली औरत पर कुछ ज्यादा ही होता था अंकित को भी औरतों की बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूचियां अच्छी लगती थी और अपनी तरफ आकर्षित भी करती थी। चारों तरफ नजर घूमर तसल्ली कर लेने के बाद धीरे से सूरज अपनी जेब में हाथ डाला और जब में से छोटी सी डायरी नुमा रंगीन किताब निकाला,, अंकित का दील बड़े जोरों से धड़क रहा था। वह यह देखने के लिए कुछ ज्यादा ही उत्सुक था कि उसके जेब में ऐसी कौन सी गंदी चीज है जिसे देखने के लिए उसने एकांत में लेकर आया।)

अब आएगा असली मजा,,,,(सूरज उसे छोटी सी रंगीन डायरी का मुख्य पृष्ठ अपनी हथेली के पर्दे को हटाते हुए और अंकित को दिखाते हुए बोला... उसे रंगीन किताब के मुख्य पृष्ठ को देखकर अंकित के तो होश उड़ गए उसे अंदाजा नहीं था कि सूरज इस तरह की कोई चीज दिखाएगा वह तो आंख फाड़े उस मुख्य पृष्ठ को देखता ही रह गया,,,, अंकित को हक्का बक्का देख सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

क्यों बरखुदार हो गई ना हवा टाइट,,,,

बाप रे सूरज यह क्या लाया तू,,,(एकदम हैरान होते हुए अंकित बोला)

अरे यही तो है वह गंदी चीज जो मैं तुझे दिखाने के लिए लाया था,,,।

बाप रे इसमें तो सब खुला खुला है।

तभी तो मजा आएगा मेरे दोस्त,,, देख कैसे टांग उठा कर उसकी बुर में लंड डाल रहा है। (गहरी सांस लेते हुए सुरज बोला,,)

यह सब तो अंग्रेज लग रहे हैं।

तो क्या इन्हीं में तो दम है तुझे लगता है की हमारे देश की औरतें इस तरह का हुनर दिखा पाएंगी।

(सूरज की बात सुनकर अंकित बोल कुछ नहीं बस ना में सिर हिला दिया,,,, अंकित के पूरे बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसने आज तक इस तरह के दृश्य को कभी नहीं देखा था उसे नहीं मालूम था कि इस तरह की भी कोई किताब आती है जिसमें औरतों और मर्दों की गंदी तस्वीर होती है मुख्य पृष्ठ के चित्र को देखकर ही अंकित केतन बदन में आग लग गई थी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या देखें,,,, बार-बार उसकी नजर मुख्य पृष्ठ वाली हीरोइन की बड़ी-बड़ी चूचियों पर जा रही थी जो कि एकदम गोल कश्मीरी सेव की तरह लेकिन कुछ ज्यादा ही बड़े नजर आ रहे थे,,,, चूचियों से नजर हटती तो उसका ध्यान उसे औरत के दोनों टांगों के बीच फूली हुई बुर पर चली जाती थी जो की हीरो के मोटे तगड़े लंड को अंदर लेने के बाद उसकी बुर पूरी तरह से छल्ला नुमा गोल बन जा रही थी।

बस एक ही फोटो में तेरा यह हाल हो गया तेरे तो पसीने छूट रहे हैं,,, तू कहता है तो बंद कर दुं,(यह कहकर सूरज अंकित का मन टटोल रहा था लेकिन आप अंकित इनकार करने वाला नहीं था वह धीरे से बोला,,,)

आगे भी ऐसा ही है,,,

अरे यार पूरी किताब भरी हुई है,,,,

तो पन्ना पलट कर दिखा,,,

(अंकित का हाल देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न होने लगा,,,, वह तुरंत पन्ना पलट दिया और उसके बाद अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई क्योंकि इस पन्ने पर हीरोइन घुटनों के बाल बैठी हुई थी और उसके सामने दो हट्टे कट्टे आदमी अपने पेंट में से अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल कर उसे हीरोइन के सामने पकडकर खड़े थे और वह हीरोइन दोनों के लंड को पकड़कर अपने लाल लाल होठों कोखोलकर दोनों के सुपाड़े को चाटने की कोशिश कर रही थी यह देखकर करते हो अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई सूरज भी चुदवासा हुआ जा रहा था,,। वह बार-बार उस हीरोइन की चूची पर अपनी उंगली घूमा रहा था मानों जैसे उसकी आंखों के सामने सच में किसी औरत की नंगी चूचियां हो,,,।

यार अंकित काश ऐसी किस्मत अपनी होती तो मजा आ जाता देख नहीं रहा है कितने मजे से मुंह में लेने की कोशिश कर रही है।

(सूरज औरतों के संबंध के बारे में ढेर सारी जानकारियां रखता था हालांकि किसी भी औरत के साथ अभी तक संबंध नहीं बना पाया था लेकिन अंकित औरतों के मामले में बिलकुल नादान था उसे नहीं मालूम था जो कुछ भी गंदी किताब के चित्र में था वह सब कुछ उसके लिए नया और अनोखा था ,, इसलिए आश्चर्य जताते हुए वह बोला।)

यार सूरज क्या इतनी गंदी चीज को कोई औरत अपने मुंह में ले सकती है।

यार अंकित तू सच में बहुत पागल है तू नहीं जानता औरत क्या-क्या मुंह में ले सकती है और मर्द भी क्या-क्या औरत का मुंह में ले सकते हैं।

लेकिन मुझे तो विश्वास नहीं होता इससे तो पेशाब किया जाता है।

और ईसे बुर में भी डाला जाता है तुझे विश्वास नहीं आता तो रुक तुझे दिखाता हूं,,,( और इतना कहने के साथ ही सूरज उस गंदी किताब का अगला पन्ना पलटा तो अगले ही पन्ने पर एक हीरोइन एक मोटे तगड़े हट्टे-कटे इंसान के लंबे लंड को पूरी तरह से मुंह में लेकर चूस रही थी और अंकित को दिखाता हुआ सूरज बोला,,,)



देख और बता क्या लगता है तुझे,,,।

(अंकित क्या बोलता उसकी तो बोलती बंद हो गई थी सूरज ने उसके शंका का समाधान जो कर दिया था,,, अंकित तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था की औरतें इस तरह की हरकत करती हैं लेकिन उसे दृश्य को देखकर अंकित केतन बादल में आग लग गई उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और यही हाल सूरज का भी था जो की पेंट के ऊपर से ही वह उसे हल्के-हल्के दबा भी रहा था। अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी अंकित आंख फाड़े उसी दृश्य को देख रहा था,,, अंकित को इस तरह से देखता हुआ पाकर सूरज बोला,,,)

सो जरा अंकित इस आदमी की जगह तू होता या मैं होता और इस औरत की जगह शर्मा जी की बड़ी साली होती तो कितना मजा आता उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसका नंगा जिस्म उफफ,,, मेरा तो सोच कर ही लंड फटा जा रहा है,,,,।

(सूरज की बातें सुनकर अंकित की भी हालत खराब होती जा रही थी उसके भी लंड में हल्का-हल्का दर्द हो रहा था और वह भी उसे औरत की जगह शर्मा जी की बड़ी साली को रखकर और उस आदमी की जगह अपने आप को रखकर कल्पना करने लगा था जो की बेहद उत्तेजनात्मक था सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

कल्पना तो कर सकते हैं लेकिन इसकी तरह अपना लंड नहीं है क्योंकि हमारे देश में इतना मोटा और तगड़ा लंबा नहीं होता विदेशियों का इतना ही बड़ा होता है । काश मेरा भी इतना मोटा और लंबा होता तो मजा आ जाता किसी भी औरत को दिखा देता तो वह दीवानी हो जाती,,।



दिखाने से दीवानी हो जाती है मैं कुछ समझ नहीं,,,(अंकित शंका जताते हुए बोला,,,)

अरे पागल जिस तरह से हम लोग चोदने के लिए तड़पते हैं इस तरह से औरतें भी चुदवाने के लिए तड़पती है और औरतों को मोटा लंबा लंड कुछ ज्यादा ही पसंद आता है अगर किसी भी औरत को मोटा और लंबा लंड सही समय पर दिखाया जाए तो वह उसकी दीवानी हो जाती है उसे अपनी बुर में लेने के लिए।

क्या बात कर रहा है सूरज,,,, ऐसा भी कहीं होता है क्या,,,!

तू नादान है अंकित इसलिए तुझे नहीं मालूम है बहुत कुछ होता हैतू ही सिर्फ सीधा बनकर रहता है इसलिए तुझे कुछ नहीं मालूम है।(इतना कहते हुएसूरज उसे किताब का अगला पन्ना पलटा तो अगले पन्ने पर भी कामोत्तेजना से भरा हुआ दिल से था लेकिन अंकित के लिए बिल्कुल अनोखा था,, क्योंकि उसमें एक औरत बिल्कुल नंगी होकर एक मोटे तगड़े लंड पर बैठी हुई थी और उसकी मोती मोती गंद बाहर को निकली हुई थी और उसकी मोटी मोटी गांड पर उस आदमी की मजबूत हथेलियां थी,, जिससे वह उसे औरत की भारी भरकम गांड का वजन संभाला हुआ था,,,,।



अंकित बड़े से वृक्ष के शीतलछाव में बैठकर भी गरमा गरमदृश्य को देखकर पसीने से तरबतर हो चुका था उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी किताब का हर एक पन्ना अपनी उत्तेजना की नई कहानी कह रहा था,,, जिसे देखकर अंकित का सीधा-साधा मन बावला हुआ जा रहा था,,, तभी एक पन्ने पर ऐसा दृश्य था जो बाथरूम के अंदर एक लड़का बैठा हुआ था और उसके हाथ में एक गंदी किताब थी और वह अपनी आंखों को बंद करके चुदाई की कल्पना कर रहा था और अपने लंड को हिला रहा था और उसके लंड से तेज पिचकारी निकल रही थी यह देखकर अंकित हैरान हो गया क्योंकि उसके लंड से निकलने वाली पिचकारी एकदम सफेद घाडे रंग की थी,,, उसे लग रहा था कि वह लड़का पेशाब कर रहा है लेकिन सफेद गाड़ी द्रव्य को देखकर अंकित हैरान हो गया था इसलिए वह बोला।

यह क्या है सूरज यह पेशाब तो बिल्कुल भी नहीं है।

(अंकित की मूर्खता भरी बातों पर सूरज जोर-जोर से हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर अंकित बोला)

तू हंस क्यों रहा है,,?

अरे हंसो नहीं तो और क्या करूं तुझे इतना भी नहीं पता कि यह क्या कर रहा है।

हां मैं सच कह रहा हूं मुझे नहीं मालूम कि यह क्या कर रहा है और उसके लंड में से यह क्या निकल रहा है,,,(पहली बार अंकित के मुंह से लंड शब्द निकला था जिसके बारे में सोचकर इसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी)



तू सच में बुद्धू है अंकित,,, अरे पागल यह मुट्ठ मार रहा है,,,

मुट्ठ मार रहा है,,, मैं अभी भी कुछ नहीं समझा,,,।

(अंकित की बात सुनकर सूरज उसे आश्चर्य से देखने लगा उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि अंकित इस क्रिया के बारे में कुछ भी नहीं जानता उसे लग रहा था कि वह झूठ बोल रहा है लेकिन उसके चेहरे की तरफ देखकर सूरज समझ गया था कि यह बिलकुल नादान है इसलिए धीरे से मुस्कुराते हुए बोला।)

देख यार यह तो तूने मुझे बोल दिया लेकिन किसी और को मत कहना वरना तेरा मजाक उड़ाएंगे,,,(अंकित सूरज की बात को बड़े ध्यान से सुन रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी कौन सी बात हो गई जिसके बारे में सुनकर लोग उसका मजाक उड़ाएंगे सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) देखिए यह चित्र देख रहा है ना इसलिए लड़का कैसे अपना लंड को मुट्ठी में दबाकर पकड़ा हुआ है।



हां,,,,

इसे इसी तरह से पकड़ कर आगे पीछे करके हिलाते हैं इसमें बहुत मजा आता है और यही क्रिया लंड बुर में जाकर करती है बुरे में जब लंड डालते हैं तो अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाते हैं जिससे लंड बुर के अंदर बाहर होता है। और इस क्रिया करने में जितना हम लोगों को मजा आता है उतना ही मजा औरतों को भी आता है समझ में आया और जब इसी तरह से लंड को हिलाते हुए अपने मन में किसी भी औरत की कल्पना करते हैं तो अपनी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती है और इसके बाद इसी तरह से तेज पिचकारी निकलती है और ईतना मजा आता है कि पूछो मत,,,।

क्या कह रहा है तू,,,

मैं बिल्कुल सच कहारहा हूं अंकित अपने सारे दोस्त करते हैं मैं भी तो यही करता हूं क्योंकि हम लोगों के पास जुगाड़ नहीं है,,,



जुगाड़ मतलब,,,

जुगाड़ मतलब बुर औरत यह सब अपने पास नहीं है इसलिए हाथ से हिला कर काम चलाना पड़ता है अगर औरत होती खूबसूरत लड़की होती तो उसकी बुर में लंड डालकर चुदाई का मजा नहीं लुटते,,,,

जुगाड़,,,,(आश्चर्य से अंकित बोल तो उसकी बात सुनकर मुस्कुराता हुआ सूरज बोला,,)

अपनी मम्मी और अपनी बहन के बारे में सोच कर जुगाड़ मत बना लेना,,,

सूरज अभी बहुत मारूंगा,,,,

यार मैं तो मजाक कर रहा था,,,, लेकिन एक बात कहु बुरा मत मानना जब अकेले में कभी रहना तो अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे अपने हाथ में ले लेना और हिलाते अपनी आंखों को बंद कर लेना और फिर कल्पना करना अपनी मां के बारे में अपनी बहन के बारे में उसे चोदने के बारे में उनके कपड़े उतारने के बारे में तुझे इतना मजा आएगा कि तेरे लंड से इतनी तेज पिचकारी निकलेगी कि सामने की दीवार पर जाकर गिरेगी,,,।



तू भी ऐसा ही करता है क्या,,,?(अंकित थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोला इस बार उसके शब्दों में ज्यादा गुस्सा नहीं था क्योंकि ना जाने क्यों उसे भी सूरज की बातें अच्छी लग रही थी)

मैं तो ऐसा ही करता हूं अंकित मैं आज तक ऐसी बात किसी को बताया नहीं हूं लेकिन तुझे बता रहा हूं मैं भी मुठ मारता हूं और इन सबको देखने के बाद मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया है ,, अब घर पर जाकर मुझे मूठ मारना होगा,,।

अपनी मां के बारे में सोच कर,,,

बिल्कुल सही किसी और के बारे में सोच कर अगर मुठ मारता हूं तो इतना मजा नहीं आता लेकिन अपनी मां के बारे में सोच कर मुठ मारता हूं तो इतना मजा आता है कि पूछो मत ऐसा लगता है कि सच में मैं उसको चोदने जा रहा हूं,,,।

यह सब गलत नहीं है,,,

कैसे गलत है थोड़ी ना सच में करने जा रहा हूं मन में सिर्फ कल्पना कर रहा हूं और इस बारे में कहां किसी को पता चल रहा है इसके बारे में भी कल्पना कर सकते हो चाहूं तो मैं तेरी मां के बारे में भी कल्पना करके मुट्ठ मार सकता हूं वैसे भी मुझे बड़ी गांड वाली औरतें बहुत पसंद है,,,।



सूरज अब तु मुझे गुस्सा दिला रहा है,,,।

यार तू नाराज बहुत जल्दी हो जाता है मैं तो मजाक कर रहा हूं तू भी मेरी मां के बारे में बोल सकता है कि उसकी चूची बड़ी-बड़ी है,,,,।

(सूरज की बात सुनकर अंकित के बदन में सायरन सी दौड़ने लगी क्योंकि सूरज अपनी मां के बारे में एकदम खुली की बातें कर रहा था उसे बिल्कुल भी ऐतराज नहीं था अगर वह कुछ भी उसकी मां के बारे में बोलता तो,,, लेकिन फिर भी वह हिम्मत जुटा कर बोला,,)

मैं भी तेरी मां के बारे में सोच कर मुठ मारूंगा,,,

अच्छा बहुत जल्दी आ गया लाइन पर,,,(सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,)

तू बोलेगा तो मैं भी बोलूंगा ना,,,

चल अच्छा रहने दे मुझे रहा नहीं जा रहा है अब मैं जा रहा हूं घर।

क्या करने,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए अंकित बोला)

मुट्ठ मारने,,,,बदन की गर्मी तो शांत करना पड़ेगा,,,ना

किसके बारेमें सोच कर ,,,

तेरी मां के बारे में क्योंकि तेरी मां की गांड और चूची दोनों बड़ी-बड़ी है बहुत मजा आएगा,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपनी जगह से उठ गया और भागने लगा क्योंकि उसे मालूम था कि अंकित उसे मारेगा और उसके पीछे अंकित भी उठकर उसकी तरफ भागते हुए बोला)



मैं भी तेरी मां के बारे में सोच कर मुठ मरूंगा क्योंकि तेरी मां की भी गांड बड़ी-बड़ी है उसको चोदने में मजा आएगा,,,,,(सूरज दीवार को उतर भाग चुका था लेकिन अंकित दीवाल के पास खड़ा हो गया और जो शब्द उसने अभी-अभी अपने मुंह से कहा था उसके बारे में सोच कर उसके बदन में सियहरन सी दौड़ने लगी क्योंकि इस तरह के गंदे शब्द है उसकी जुबान पर पहली बार आए थे और उसे खाने में उसे इतना आनंद की प्राप्ति हुई थी कि पूछो मत उसका मन बिल्कुल भी लग नहीं रहा था। वह अपने घर भी नहीं किया क्योंकि सूरज की तरह मुठ मारने की हिम्मत अभी उसमें बिल्कुल भी नहीं थी,,,, लेकिन उसका भी लंड पूरी तरह से खड़ा था वह कुछ देर तक इस जगह पर आकर बैठ गया,,,। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें फिर अपनी जगह से उठकर इधर-उधर घूमने लगा जैसे तैसे करके शाम हो गई और वह शाम को अपने घर चला गया लेकिन दोपहर में जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखा था वह दृश्य उसकी आंखों से ओझल नहीं हो रहे थे बार-बार उसकी आंखों के सामने टेलीविजन के चलचित्र की तरह नाचने लगते थे जिसे वह काफी परेशान और उत्तेजित हो जा रहा था।
 
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