Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 11 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

पहली बार अंकित को अपने पड़ोस में कुछ देने पर बहुत ज्यादा खुशी महसूस हुई थी और इस खुशी को वह बयान नहीं कर सकता था खास करके शब्दों से तो बिल्कुल भी नहीं लेकिन दोनों टांगों के बीच के लटकते हुए हथियार उसकी खुशी को अच्छी तरह से बयां कर रहे थे जो कि अभी तक तना हुआ था,,,। अंकित ने कभी सपने कभी नहीं सोचा था कि पड़ोस के घर में उसे इस तरह का मदहोश कर देने वाला नजारा देखने को मिलेगा जो कि उसकी कल्पना की बिल्कुल परे था,,, अंकित को अभी भी अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी उसने देखा वह सब कुछ सही था उसे तो सब कुछ ख्वाब जैसा ही लग रहा था उसकी कल्पना नजर आ रही थी लेकिन इस बात को वह भी अच्छी तरह से जानता था कि जो कुछ भी उसकी आंखों ने देखा था वह बिल्कुल सही था क्योंकि आज तक तो उसने इस तरह का कामोत्तेजना से भरा हुआ स्वप्न भी नहीं देखा था,,,।



अंकित का मन सुमन के घर से वापस लौटने का बिल्कुल भी नहीं हो रहा था,,,। और होता भी कैसे पूरी तरह से जवान हो चुके अंकित जैसे जवान लड़के को अगर उसकी आंखों के सामने कोई जवान लड़की जवान से भरी हुई अर्धनग्न अवस्था में खासकर के अपने नितंबों को दिखाती हुई नजर आ जाए तो दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो इस तरह की खूबसूरत नजारे को छोड़कर जाना चाहेगा उसमें से अंकित भी,,, अलग नहीं था वह भी पूरी तरह से जवान हो चुका है एक जवान लड़का था हट्टा कट्टा बांका नौजवान था,,, और जीवन में पहली बार उसने इस तरह की खूबसूरत नजारे को अपनी आंखों से देखा था सुमन की गोल गोल नितंबों को देखकर उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी जिस तरह से उसके दोस्त ने सुमन के बारे में उसके चरित्र के बारे में बताया था उसे देखते हुए,,, अंकित के मन में भी कुछ-कुछ हो रहा था वैसे तो अंकित को सुमन के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं था पहले ही वह उसके पड़ोस में रहती थी कभी-कभार ही उससे मुलाकात होती थी लेकिन लेकिन यह इत्तेफाक ही था जो दोस्त के द्वारा सुमन का चरित्र बयां करने के बाद ही उसे सुमन का नंगा बदन भी देखने को मिल गया था उसकी बड़ी-बड़ी गोरी गोरी गोल गोल गांड देख कर अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,,, सुमन की खूबसूरत आकर्षण से वह अपने आप को बचाने के बारे में सोच भी नहीं सकता था कि तब भी सुमन की तरफ से उसकी एक हरकत नहीं अंकित के तन बदन में आग लगा दिया था,,, जब सुमन किचन का ड्रोवर खोलने के लिए नीचे झुकी थी,,, और उसकी गोलाकार गांड सीधे जाकर अंकित के जवान खड़े लंड से टकरा गई थी हालांकि सुमन की तरफ से यह हरकत जानबूझकर ही हुई थी लेकिन अंकित को नहीं मालूम था,,,। वह तो पल भर के लिए ही सही लेकिन स्वर्ग का सुख का अनुभव किया था उसे नहीं मालूम था कि स्वर्ग का सुख क्या होता है संभोग से जुड़ा सुख क्या होता है लेकिन सुमन के गोलाकार नितंबों का स्पर्श अपने लंड पर होते ही तो जो सुख जो हलचल उसे अपनी तन-बदन में महसूस हुई थी वह अंकित के लिए स्वर्ग की सुख से काम नहीं था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था,,, सुमन के मां के आ जाने की वजह से अंकित मां महसूस कर वहां से लौट कर अपने घर पर आ गया था लेकिन सुमन के घर से बेहद मादकता भरी यादें अपने जेहन में लेकर आया था जिसे याद करने पर कभी भी उसका लंड अपनी औकात में आ सकता था,,,।



घर में जैसे ही अंकित ने प्रवेश किया उसकी मां तुरंत उससे पूछी,,,।

अचार दे दिया ना,,,

हां मम्मी दे दिया,,,,(और इतना कहते हुए अंकित अपने कमरे में जाने लगा लेकिन सुगंधा की नजर,,, उसके पेंट में बने तंबू पर चली गई और उसे देखते ही सुगंध के तन-बदन में हलचल होने लगा उसके मन में सवालों का बवंडर उठने लगा,,, वह उस समय बर्तन धो रही थी सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार दिन में यु एकाएक अंकित का लंड क्यों खड़ा हो गया उसके मन में क्या चल रहा है क्या सोच रहा है कहीं कुछ देख तो नहीं लिया सड़क पर आते जाते किसी खूबसूरत औरत को तो नहीं देख कर मन में कल्पना करने लगा,,, वह बर्तन धो रही थी और इस तरह के सवाल अपने मन में सोच रही थी और उसका जवाब भी अपने मन में ही दे रही थी,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा पूरी तरह से जवान हो चुका है जो इस तरह से उसका लंड कभी भी खड़ा हो जा रहा है और इस बारे में सोचकर वह अंदर ही अंदर बहुत खुश भी हो रही थी क्योंकि अंकित के पेंट में बनी तंबू को देखकर बहुत उत्साहित भी हो रही थी क्योंकि यह सब उसके लिए ही अच्छा था,,,, क्योंकि इस बात को अच्छी तरह से जाती थी कि मर्दों का लंड कब खड़ा होता है जब औरतों के बारे में उनके मन में गलत विचार आते हैं जब वह औरत को चोदने के बारे में सोचते हैं या चोदने की तैयारी करते हैं तब उनका लंड हमेशा खड़ा हो जाता है,,, और यह विचार उसके मन में आते ही वह सोचने लगी कि उसके बेटे के मन में भी यही चल रहा है जरूर उसके मन में किसी को लेकर गंदे विचार आ रहे हैं या ऐसा भी हो सकता है कि,,, उसके ही बारे में सोचकर उसके बेटे का लंड खड़ा हो गया है जैसा कि उसे दिन जब वह अपने बाल को सही करने के लिए उसे बोली थी तब,, भी अंकित की हालत ऐसी ही हुई थी और यह ख्याल मन में आते ही उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ने लगी,,,,,, उसके मन में कुछ और भी चल रहा था वह इस मौके का फायदा उठाना चाहती थी लेकिन तृप्ति भी मौजूद थी इसलिए उसे थोड़ा तृप्ति पर गुस्सा भी आ रहा था थोड़ी देर में वह बर्तन साफ करके किचन पर रख दी थी,,, और देखी की तृप्ति हाथ में बैग लेकर कहीं जा रही थी इसलिए वह उत्सुकता बस पूछी,,,।





कहां जा रही हो ,,,?

मम्मी में सहेली के वहां पढ़ने जा रही हूं,,,

(इतना सुनते ही सुगंधा मन ही मन एकदम प्रसन्न होने लगी लेकिन फिर भी जानबूझकर थोड़ा सा तैस दिखाते हुए बोली,,,)

लेकिन आज तो रविवार है आज कहां जा रही हो,,,

वह क्या है ना मम्मी एग्जाम आने वाले हैं उसकी तैयारी करनी है,,।

ठीक है जाओ लेकिन जल्दी आ जाना,,,

ठीक है मम्मी मैं जल्दी आ जाऊंगी,,,(और इतना कहने के साथ ही वह कमरे से बाहर निकल गई और उसके जाते ही सुगंधा जल्दी से दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी,,, सुगंधा के मन में अरमान मचल रहे थे उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ रही थी खास करके उसकी बुर की हालत खराब होती जा रही थी उसकी बुर से मदन रस का रिशाव हो रहा था,,, वह कुछ देर दरवाजे पर ही खड़ी होकर कुछ सोचती रही और फिर तुरंत मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चली गई,,,, और थोड़ी ही देर में अलमारी में से झंडू बाम लेकर वह अपने बेटे के कमरे की तरफ आगे बढ़ गई और उसकी किस्मत अच्छी थी कि कमरा खुला ही था हल्का सा दरवाजा बंद था जिसमें से अंकित का बिस्तर और बिस्तर पर लेटा हुआ अंकित एकदम साफ नजर आ रहे थे लेकिन अंदर अंकित की हालत को देखकर सुगंधा के तन बदन में आग लग गई,,,। वह अंदर के नजारे को एकदम साफ तौर पर देख पा रही थी वह देख रही थी कि उसका बेटा पीठ के बाल दोनों टांगें बिस्तर पर फैलाए लेटा हुआ है और उसका हाथ पेट में बने तंबू पर घूम रहा था जिसे वह हल्के हल्के पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा रहा था इस नजारे को देखते ही सुगंधा की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,,,,, अंकित की हालत को देखकर सुगंधा समझ गई कि उसके मन में जरूर कुछ चल रहा है,,, क्योंकि इस समय भी उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था बस पेंट के अंदर था लेकिन उसके बेटे के मन में जरूर ऐसा कुछ चल रहा था जिसकी वजह से वह परेशान नजर आ रहा था लेकिन इस नजारे को देखकर सुगंधा के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नज़र आने लगे उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी,,,।

क्योंकि उसे लगने लगा था कि अपने बेटे की हालत को देखकर उसका काम बन सकता है,,,।



यह नजारा भी क्या खूब था दरवाजे पर खड़ी होकर एक मां अपने बेटे की कामुक हरकत को देख रही थी जो कि खुद अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होना चाहती थी लेकिन कैसे यह उसे नहीं मालूम था लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि एक न एक दिन जरूर वह अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने में कामयाब हो जाएगी,,, अंकित के मन में सुमन का ख्याल पूरी तरह से छाया हुआ था बार-बार उसकी आंखों के सामने सुमन की गोरी गोरी नंगी गांड नजर आ जाती थी तो कभी उसका एकाएक नीचे झुक जाना जिसकी वजह से उसकी गांड पर वह अपने लंड का स्पर्श महसूस कर पाया था,,, इन्हीं घटनाओं के बारे में सोचकर अंकित का बुरा हाल था,,, तभी उसे दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी वह एकदम से हड़बड़ा गया और अपनी दोनों टांगों को मोड़ लिया ताकि उसकी मां को उसके पेंट में बना तंबू दिखाई ना दे,,,। वह तुरंत जल्दी से उठकर बैठ गया था और दरवाजे की तरफ देखते हुए बोला,,,।

कककक,, क्या हुआ मम्मी कुछ काम था क्या,,,?

(सुगंध को अपने बेटे का इस तरह से हडबढ़ाना बहुत अच्छा लगा था,,, लेकिन वह अपने चेहरे पर दर्द के भाव लिए हुए अपने बेटे के कमरे में दाखिल होते हुए बोली,,,)



कुछ खास नहीं बेटा लेकिन मेरे सर में दर्द कर रहा था इसलिए बाम लेकर आई हूं अगर तुझे कोई काम ना हो तो मेरे सर पर लगा कर थोड़ी मालिश कर दे,,,

हां,, हां,,, क्यों नहीं वैसे भी मैं एकदम फ्री हूं,,, लाओ में बाम लगाकर मालिश कर देता हूं,,,

बहुत अच्छे बेटा बहुत देर से मेरा सर दर्द कर रहा है,,,,(इतना कहते हुए सुगंधा अपने बेटे के बिस्तर की तरफ आगे बड़ी और जाकर बिस्तर पर बैठ गई नरम नरम गद्दे पर सुगंधा की भारी भरकम गांड का दबाव एकदम साफ महसूस हो रहा था और अंकित ने इस नजारे को एकदम साफ-साफ देखा था कि जब उसकी मां गद्दे पर बैठ रही थी तो उसकी गांड के दबाव पर गद्दा भी पूरी तरह से दब गया था और उसकी मां की भारी भरकम गांड गद्दे में एकदम साफ तौर पर धरती हुई नजर आ रही थी इस नजारे को देखकर अंकित का हाल और भी बुरा होने लगा था,,, लेकिन वह अपनी मां के प्रति इस तरह के ख्याल बिलकुल भी नहीं अपने मन में लाता था लेकिन उसके मन में इस तरह का ख्याल इकाई एक ही आया था इसलिए वह अपने आप को संभालने की पूरी कोशिश कर रहा था क्योंकि ऐसा एक बार उसके साथ किचन में भी हो चुका था जब वह अपनी मां के बल के लटो को ठीक कर रहा था,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कि है कि बेटे के मन में उसकी मां के लिए इस तरह के गंदे विचार कभी नहीं आने चाहिए क्योंकि यह हर तरीके से गलत है इसलिए वह अपना मन दूसरी तरफ घूमाने की कोशिश करने लगा था,,,।



अच्छे से मालिश करके सर दबाना ताकि दर्द दूर हो जाए,,, मैं भी आज तेरे हाथों का जादू देखना चाहती हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही सुगंधा पीठ के बाल एकदम सीधी लेट गई और ऐसा लेटने की वजह से उसके साड़ी का पल्लू उसकी छाती पर से हटकर थोड़ा नीचे चला गया था जिससे उसकी भारी भरकम छाती एकदम साफ नजर आ रही थी और उसकी छतिया के बीच की पतली गहरी लकीर भी एकदम साफ नजर आ रही थी लेकिन अभी तक अंकित का ध्यान उसकी मां की चूचियों पर नहीं किया था अपनी मां के हाथ में से झंडू बाम किसी से लेकर उसके ढक्कन को खोलकर उसमें से थोड़ा सा बम निकाला और उसे अपनी मां के सर पर हल्के हल्के रगड़ने लगा और उसे दबाना शुरू कर दिया,,,,,,,

अपने बेटे का स्पर्श सुगंधा को बेहद रोमांचित कर रहा था,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से वहां लेटी हुई थी ऐसे में उसके बेटे का ध्यान उसकी भारी भरकम साथियों पर जरूर जाने वाली थी इसलिए तो वह अपनी छाती पर से साड़ी का पल्लू धीरे से एक बहाने से हटा दी थी,,,, कुछ देर तक सब कुछ ठीक चलता रहा अंकित इस तरह से अपनी मां के सर पर बम लगाकर उस पर मालिश कर रहा था,,, लेकिन अंकित की हालत तब खराब होने लगी जब उसकी बहाने अपने सर को उसकी गोद में रखने के लिए बोली,,,।)



बेटा ऐसे ठीक नहीं लग रहा है,,, मेरे सर को अपनी गोद में रख लो फिर मालिश करना तब मुझे अच्छा लगेगा,,,,

ठीक है मम्मी,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित जो कि अपनी मां के सिरहाने बैठा हुआ था वह पलाठी मार लिया,,, ताकि उसकी मां का सर उसकी गोद में ठीक से आ सके,,, और थोड़ी ही देर में सुगंधा अपने सर को अपने बेटे की गोद में रख ली लेकिन इस दौरान उसने बाकी का काम भी तमाम कर दिया था अपनी साड़ी के पल्लू को पूरी तरह से अपने ऊपर से हटा दी थी,,, ऐसे में सर से लेकर उसकी कमर तक सब कुछ एकदम साफ नजर आ रहा था उसकी गहरी नाभि भी किसी छोटी सी बुर से कम नजर नहीं आ रही थी,,,, और बिस्तर पर लेटने से पहले सुगंधा ने चला कि दिखाते हुए ऊपर का एक बटन खोल दी थी जिसकी वजह से उसकी दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह छाती पर ब्लाउज के अंदर लहरा रही थी,,,।,,

अब जाकर ठीक लग रहा है अच्छे से मालिश करना,,,





(अंकित अपनी मां की बात को सुन तो जरूर रहा था लेकिन उसकी आंखों के सामने जिस तरह का नजारा था उसे देखकर उसके होशो हवास गायब हो चुके थे,,, अभी तक उसकी नजर अपनी मां की छातियों पर नहीं गई थी लेकिन जैसे ही चला कि दिखाते हुए सुगंधा ने अपनी साड़ी के पल्लू को पूरी तरह से अपने बदन से दूर हटाई थी ऐसे में अंकित की नजर अपनी मां की गदराऊ चूचियों पर सीधे-सीधे चली गई थी,,, ब्लाउज के ऊपर का बटन खुला होने की वजह से उसकी मां की दोनों चूचियां ब्लाउज से बाहर आने के लिए आतुर नजर आ रही थी जिसका अच्छा खासा भाग अंकित को एकदम साफ नजर आ रहा था अंकित नजर भरकर कमर से ऊपर तक अपनी मां को प्यासी नजरों से देख रहा था हालांकि ऐसी नजर के चलते उसे अपने आप से ग्लानी भी हो रही थी लेकिन वह अपने आप को अपने मन को रोक नहीं पा रहा था,,,, अंकित की तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत ना होता देखकर सुगंधा समझ गई थी कि जो वह दिखाना चाह रही है उसका बेटा वही देख रहा है और इस बात को लेकर उसके मन में खुशी भी झलक रही थी,,, वह धीरे से बोली,,,)

क्या हुआ बेटा मालिश तो कर दर्द पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है,,,



हां,,,हां ,,,, अभी करता हूं,,,(अपनी मां की आवाज सुनते ही जैसे वह नींद से जागा हो और फिर से वह बाम की सीसी में से थोड़ा सा बाम अपनी उंगली में लगाकर वापस अपनी मां के सर पर लगाकर उसे पर धीरे-धीरे मालिश करने लगा,,, लेकिन उसका पूरा ध्यान अपनी मां की छातियों पर था जो की पूरी तरह से खीला हुआ नजर आ रहा था,,,, इस नजारे को देखकर पहले से ही अंकित का लंड खड़ा था अब उसमें और ज्यादा अकड़ बढ़ने लगी और उसमें अकड़ पढ़ने की वजह से वह सीधा पेट में खड़ा हुआ था जहां पर उसकी मां का कर रखा हुआ था लेकिन अनुभव से भरी हुई सुगंधा को अपने बेटे के खड़े लंड का एहसास अपने सर पर हो रहा था जिसकी वजह से उसके बाद में उत्तेजना की चीटियां रेंग रही थी,,, सुगंधा की हालत खराब होने लगी ठीक कर के ऊपर वाले भाग पर उसे अपने बेटे के लंड की गर्माहट साफ महसूस हो रही थी और उसका कड़कपन भी उसे महसूस हो रहा था,,, जिसके चलते उसकी सांसे उत्तेजना के मारे गहरी चलने लगी जिसकी वजह से उसकी छातियां ऊपर नीचे होने लगी और इस नजारे को देखकर तो अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी,,,।





सुगंधा निश्चिंत होकर अपने बेटे के गोद में लेटी हुई थी अपने सर की मालिश करवा रही थी और अपनी जवानी का जलवा अपने बेटे के ऊपर भी खेल रही थी जिसमें उसका बेटा पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था अपनी मां की चूचियों के बीच की पतली और गहरी लकीर को देखकर अंकित का मन उसमें डूबने को कर रहा था और वह अपनी मन में कल्पना कर रहा था कि ब्लाउज के अंदर जब उसकी मां की चूचियां ऐसी नजर आती है तो ब्लाउज उतारने के बाद नंगी चूचियां कैसी नज़र आती होगी इस बारे में सोच कर ही उसकी हालत खराब होती जा रही थी वह पसीने से टरपटर हो चुका था उत्तेजना पूरी तरह से उसके ऊपर कब्जा जमा चुका था अभी तक वह एक बेटे का फर्ज निभाते हुए अपनी मां के बारे में अपने मन में गंदे ख्याल लाने से कटरा रहा था लेकिन उसकी आंखों के सामने इस तरह के मदहोश कर देने वाले नजारे को देखकर उसकी आंखों ने भी अपने ऊपर से शर्म मर्यादा और रिश्ते के पर्दे को हटा दिया था और इस समय अंकित को अपनी गोद में लेटी हुई सुगंधा अपनी मां नहीं बल्कि एक औरत नजर आ रही थी जिसका बदन पूरी तरह से जवानी से भरा हुआ था जिनके अंग अंग से जवानी का रस टपक रहा था,,, जिसे पीने के लिए खुद अंकित बेकरार हुआ जा रहा था,,,,।



अंकित बिना कुछ बोले अपनी मां के सर की मालिश किया जा रहा था और आप उसे भी एहसास होने लगा था कि उसका खड़ा नहीं उसकी मां के सर पर स्पर्श हो रहा है और न जाने क्यों अंकित जानबूझकर अपने लंड को अपनी मां के सर पर रगड़ने की कोशिश कर रहा था और खुद सुगंधा भी एक दो बार अपने सर को ऊपर की तरफ ले जा करके अपने बेटे के खड़े लंड को पूरी तरह से उसके कड़कपन को महसूस करके मस्त हो चुकी थी,,, अंकित को अपने बदन में अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी ऐसा हलचल उसे पहले कभी महसूस नहीं हुआ था वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और उसके लंड की अकड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि उसे अपने लंड में दर्द महसूस हो रहा था,,,,।

अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,(उत्तेजना से भरी आवाज में अंकित बोला,,)

बहुत अच्छा लग रहा है बेटा एकदम आराम लगने लगा है तेरे हाथों में तो जादू है,,,, इससे पहले भी मेरा सर बहुत बार दर्द कर चुका है और मैं तृप्ति से मालिश करवाई हूं लेकिन ऐसा आराम मुझे तृप्ति के हाथों से बिल्कुल भी महसूस नहीं हुआ था जैसा कि तेरे हाथों से आराम लग रहा है,,,



यह तो अच्छी बात है मम्मी की मेरे हाथों से तुम्हें आराम मिल रहा है,,,(ऐसा कहते हुए अंकित कभी अपनी मां की चूचियों की तरफ तो कभी उसकी गहरी नाभि की तरफ देख रहा था इस समय अंकित को अपनी मां की गहरी मेरी बेहद आकर्षित कर देने वाली लग रही थी अंकित का मन अपनी मां की नाभि में उंगली घुमाने को कर रहा था लेकिन ऐसा करना उचित नहीं था,,,,,,,।

दूसरी तरफ सुगंधा की भी हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी उसकी चड्डी पूरी तरह से उसके मदन रस से भीग चुकी थी उसकी बुर लगातार पानी बाहर आई थी इतनी उत्तेजना उसने भी पहले महसूस नहीं की थी एक तो यह दूसरा मौका था जब उसने खुले तौर पर अपने अंग का प्रदर्शन अपने बेटे के बेहद करीब कर रही थी और साथ में अपने बेटे के लंड को अपने सर पर महसूस भी कर रही थी उसका मन तो कर रहा था कि इसी समय अपने बेटे के लंड को पकड़ ले और उसे चोदने के लिए बोले लेकिन वह अपनी मर्यादा को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि एकाएक आगे बढ़ना उचित नहीं है वह धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी,,, ताकि उसके बेटे को ऐसा ना लगे कि उसकी मां जानबूझकर यह सारा खेल उससे चुदवाने के लिए रच रही है,,, वह सारा माहौल ऐसा बनाना चाहते थे की दोनों के बीच चुदाई अपने आप हो जाए और दोनों एक साथ इसके जिम्मेदार हो,,, और इसके लिए सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि अपने बेटे को अपने काबू में करना बहुत जरूरी है और वह अपने बेटे को अपनी जवानी का जलवा दिखाकर ही काबू में कर सकती थी जिसकी शुरुआत उसने कर दी थी और जिसका असर उसके बेटे पर भी होना शुरू हो गया था,,,।



अब तो मैं जब मेरा बदन दर्द करेगा तो तेरे से ही अपने बदन की मालिश करवाऊंगी क्योंकि तेरे हाथों में जादू है और मैं जल्दी से ठीक हो जाऊंगी,,,।

(अपनी मां के बदन की मालिश के बारे में सोचकर ही अंकित की हालत खराब होने लगी और मन में प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और अपनी प्रसन्नता को अपने मन में दबाकर वह बोला,,,)

क्यों नहीं मम्मी मैं कहां भाग जा रहा हूं मैं भी तो यही हूं,,,(इतना कहते हुए अंकित सुमन वाली घटना के बारे में सोचने लगा और अपने मन में या कल्पना करने लगा कि अगर सुमन की जगह उसकी मां उसे अवस्था में दिखती तो कितना मजा आ जाता सुमन की गांड तो फिर भी छोटी-छोटी थी लेकिन उसकी मां की गांड भारी भरकम गोल गोल और बहुत मत कर देने वाली थी हालांकि अभी तक उसने अपनी मां की गांड को नंगी नहीं देखा था लेकिन फिर भी कल्पना करके पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था क्योंकि अब तो कल्पना करने के लिए उसके मन में रेखा चित्र भी था की गांड कैसी दिखती है,, और उसे पक्का विश्वास था कि सुमन से भी ज्यादा खूबसूरत और बेहतर हसीन उसकी मां की गांड नजर आएगी यह सब कल्पना उसके पसीने छुड़ा रहे थे और तभी उसके माथे से पसीना टपक कर सुगंधा के गाल पर गिर गया जिसे अपने गाल पर महसूस करके वह बोली,,)

तू पसीना पसीना क्यों हो गया है तबीयत तो तेरी ठीक है ना पंखा भी चल रहा है फिर भी तेरा पसीना छूट रहा है,,,



कककक,,, कुछ नहीं मम्मी यह तो नॉर्मल है कभी कबार मुझे ऐसा हो जाता है,,,

तब तो ठीक है मुझे लगा कि तेरी तबीयत खराब है,,,(सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे का पसीना क्यों छूट रहा है उसकी गदराई जवानी देखकर ही उसके बेटे का पसीना छूट रहा था,,,, और इस बात के लिए वह मन ही मन बहुत खुश हो रही थी उसने अपना जादू चला दी थी धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,)

बहुत अच्छा लग रहा है बेटा आप रहने दे तूने अच्छे से मालिश किया है,,,,(और ऐसा कहते हुए वह अपने बेटे के गोद से उठी और अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करने लगी क्योंकि अब बेहतरीन खूबसूरत मादकता भरे दृश्य पर पर्दा डालने का समय आ चुका था और वह अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए उठकर बैठ गई,,,,, लेकिन संजू की हालत खराब थी वह अपने साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए तिरछी नजर से संजू के पेट की तरफ देखी थी जो की पूरी तरह से बेल को बांधने वाले खुंटे की तरह नजर आ रहा था,,,, जिसे देख कर वह मन ही मन प्रसन्न होने लगी और बिस्तर पर से उठते हुए बोली,,,)

अब थोड़ा जाकर नहा लेती हूं तो मन हल्का हो जाएगा,,,,,(और ऐसा कहते हुए अपने बेटे के कमरे से बाहर निकल गई वह जानबूझकर नहाने की बात कही थी क्योंकि वह अपनी बुर में उंगली डालकर अपनी प्यास को बुझाना चाहती थी इसलिए वह सीधे बाथरूम में गई और अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई,,, और फिर अपने पैर को नल के ऊपर रखकर,,, एक साथ अपनी दो उंगली को अपनी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करके अपनी गर्मी को शांत करने लगी और थोड़ी देर बाद ही अपनी गर्मी को शांत करने के बाद ठंडे पानी से नहाकर वह बाथरुम से बाहर आ गई,,,)
 
बहुत-बहुत धन्यवाद कहानी के अंत तक बने रहने के लिए
 
मैं बहुत शुक्रगुजार हूं कि आप लोगों को कहानी इतनी ज्यादा पसंद आ रही है लेकिन अब कहानी का अंत नजदीक है।
 
आप लोगों के कमेंट ही मुझे और भी अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करते हैं
 
बहुत-बहुत शुक्रिया,,,, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ेगी अंकित के कुंवारे पन को कौन तोड़ता है उसके बारे में भी पता चल जाएगा
 
सुगंधा की जवानी बेलगाम होती जा रही थी सुगंधा का उसके मन पर और उसके तन पर,,, बिल्कुल भी काबू नहीं रह गया था तीन प्रतिदिन उसकी इच्छा अपने बेटे के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन करने की बढ़ती जा रही थी जिसके चलते वह दो बार इस तरह की हरकत को अंजाम दे चुकी थी और दोनों बार खुद तो पानी पानी हुई थी अपने बेटे को भी उत्तेजित कर चुकी थी एक तो किचन में बालों के लटो को ठीक करवाते समय और दूसरी बार सर दर्द का बहाना देकर सर की मालिश करवाते समय वह अपनी भारी भरकम खरबूजे जैसी चुचियों का प्रदर्शन कर चुकी थी जिसके चलते वह अपने बेटे की उत्तेजना को ठीक अपने सर पर महसूस कर चुकी थी,,, और यह एहसास कर चुकी थी कि उसके बेटे का लंड बेहद दमदार है,,, जिसके चलते हैं वहां मालिश करवाने के बाद तुरंत बाथरूम में नहाने के बहाने चली गई थी और वहां अपनी उंगली का सहारा लेकर अपनी मलाई को अपनी बुर में से बाहर निकाल दी थी,,,।



अपनी मां की मस्त-मस्त कर देने वाली चूचियों को देखकर और अपने लंड को उसके सर पर महसूस करके अंकित उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था वह इतना ज्यादा उत्तेजना अपने बदन में महसूस कर रहा था कि उसके लंड में दर्द होने लगा था हालांकि इस समस्या से निजात पाने के लिए उसे हस्तमैथुन करना नहीं आता था और ना ही इस बारे में वह जानता था अगर जानता तो अब तक न जाने कितनी बार अपने हाथ से हिलाकर वह अपने लंड के दर्द से छुटकारा पा लिया होता,,,।

अपनी मां की खूबसूरत चूचियों की प्रति उसका आकर्षण बढ़ता जा रहा था और उसे इस बात का एहसास भी होने लगा था कि वाकई में उसकी मां बहुत ज्यादा खूबसूरत है लेकिन फिर भी इस तरह के ख्याल बने आते ही वह अपनी भावनाओं को अपने मन में दबाकर इन खयालों से अपने ध्यान को दूसरी तरफ करने की कोशिश करता था लेकिन नाकाम हो जाता था,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां को किस नजरिए से देखें क्योंकि अब तो वह चोर नजरों से अपनी मां की तरफ देखने लगा था उसकी खूबसूरती के रस को अपनी आंखों से पीने लगा था उसके नितंबों के घेराव और कसावपन को देख कर अंदर ही अंदर मस्त होने लगा था,,,। इन सबके बावजूद भी वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि जो कुछ भी वह कर रहा है वह गलत है क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है वह अनजाने में हो रहा है उसकी मां जानबूझकर अपनी छाती पर से साड़ी के पल्लू को थोड़ी हटाई थी उसे यह थोड़ी मालूम था की छाती पर से साड़ी का पल्लू है जाने पर मैं उसे घूर-घूर कर देखूंगा या फिर बालों को ठीक करते समय मेरी नजर उसकी छाती पर चली जाएगी यह सब तो अनजाने में हो रहा था और इस बात का दोष वह अपने ही आपको दे रहा था कि उसकी नजर में ही गड़बड़ है,,,, उसके खुद के देखने का नजरिया बदल गया है जिससे वह निजात पाना जाता था,,,, और इस समस्या से निजात पाने के लिए वह अपने मन में अपनी ही मां की कसम खाकर आइंदा इस तरह से वह कभी अपनी मां को नहीं देखेगा,,,, ऐसा मन में कसम लेकर वह सहज होने की कोशिश करने लगा,,, और धीरे-धीरे इसमें कामयाब भी होने लगा,,,।



लेकिन दूसरी तरफ सुगंधा की बुर की खुजली बढ़ती जा रही थी,,,, उसकी हालत जल बिन मछली की तरह हो रही थी,,,, वह अपनी जवानी की आग बुझाने में नाकाम साबित हो रही थी अगर उसकी जगह कोई और औरत होती तो शायद अब तक किसी मर्द का सहारा लेकर अपनी बुर की प्यास को बुझा ली होती लेकिन सुगंधा दूसरी औरतों की तरह बिल्कुल भी नहीं थी एक औरत होने के साथ-साथ वह एक शिक्षिका भी थी और उसे अपनी इज्जत मान मर्यादा का अच्छी तरह से भान था,,,, इतना तो वह जानती ही थी कि उसकी प्यास बुझाने वाला उसके घर में ही मौजूद है लेकिन कैसे इस बात को वो भी नहीं जानती थी लेकिन इतना विश्वास था कि एक ना एक दिन लह जरुर कामयाबी हासिल करेगी,,, इसीलिए वह अपने प्रयास में लगी हुई थी,,,।

दूसरी तरफ सुमन अपने गोल-गोल नितंबों पर अंकित के मोटे तगड़े तंबू का चुभन महसूस करके मदहोश हो चुकी थी तृप्ति और सुमन की उम्र एक जैसी ही थी लेकिन जहां एक तरफ तृप्ति मर्यादा में रहती थी वहीं दूसरी तरफ सुमन अपनी जवानी की आग को संभाल नहीं पा रही थी इसीलिए वह दो-तीन लड़कों के साथ शारीरिक संबंध भी बन चुकी थी और उन लड़कों के साथ बनाए संबंध के अनुभव के जरिए ही उसे इस बात का एहसास हुआ था कि अंकित का लंड बेहद दमदार है,,,,,,, अंकित को ऐसा लगता था कि सुमन के कमरे के दरवाजे पर जब वह खड़ा था तो सुमन को इस बात का अहसास तक नहीं था बल्कि सुमन अलमारी के आईने में सब कुछ देख चुकी थी और इसीलिए जानबूझकर ही अपने तौलियों को नीचे गिराकर एकदम नग्न अवस्था में हो चुकी थी,,, अंकित के चेहरे के भाव को पढ़कर वह अंदर ही अंदर बहुत प्रसन्न भी हो रही थी और जिस तरह से रसोई में आकर वह नीचे झुकी थी और उसकी गांड पर अंकित का लंड एकदम से ठोकर खा गया था उसे अभी तक वह अपनी गांड पर महसूस कर पा रही थी जिसके चलते उसकी बुर से पानी निकल जाता था,,, वैसे तो सुमन भी अंकित से ज्यादा बातचीत नहीं करती थी कभी कभार ही आमने-सामने आ जाने पर बातचीत हो जाती थी लेकिन अब ऐसा लग रहा था कि सुमन के मन में कुछ और चलने लगा था,,,, वह भी मौका देखकर अंकित पर अपनी जवानी के डोरे डालने के लिए तैयार हो चुकी थी,,,।



ऐसे ही सभी लोग अपने-अपने तरीके से लगे हुए थे देखते ही देखते दिन गुजर रहे थे लेकिन कोई भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पा रहा था,,, तनख्वाह का दिन था,,, तनख्वाह लेकर शाम को लौटते समय सुगंधा सब्जी मार्केट में सब्जी और बच्चों के लिए नाश्ता लेने के लिए चली गई,,,, घर पर सब्जी बनाने के लिए करेला कद्दू और पटर खरीद चुकी थी,,, लेकिन तभी उसकी नजर बैगन पर गई जो की काफी लंबे और मोटे थे,,,, बैगन पर नजर पढ़ते ही और उसकी लंबाई और मोटाई को देखकर सबसे पहले सुगंधा के मन में अपने बेटे के दोनों टांगों के बीच लटकते हुए लंड का ख्याल आ गया,,,, और उसके बदन में सुरसुराहट सी दौड़ने लगी वैसे उसे बैगन नहीं खरीदना था लेकिन उसकी लंबाई और मोटाई उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी,,, और वह उसे ठेले के पास जाने से अपने आप को रोक नहीं पाई और हाथ में थैला लिए वह उस ठेले के पास पहुंच गई,,,।



ठेले पर पहुंचते ही उसने एक मोटे तगड़े लंबे बैगन को अपने हाथ में उठाकर उसे गोल-गोल घुमा कर देखने लगी और उसकी इस प्रक्रिया का उसके चेहरे पर अद्भुत प्रभाव पड़ रहा था ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे वहां बैगन को नहीं बल्कि अपने ही बेटे के लंड को अपने हाथ में लेकर खेल रही हो,,,,, वह उसे बैगन को लेकर कल्पना की दुनिया में इतना खो गई कि उसे इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि वह कब अपने एक हाथ की उंगली और अंगूठे को मिलकर उसका गोल छल्ला बना ली और उसे गोल छल्ले में से उसे बैगन को अंदर प्रवेश करा कर दो-तीन बार उसे अपने हाथ के गले में से अंदर बाहर करने लगी और उसकी यह हरकत ठेले वाले ने देख लिया और एकदम से मुस्कुराते हुए अपने चेहरे पर अश्लील भाव लाते हुए बोला,,,।

बहुत मोटा और लंबा है मैडम जी बहुत मजा आएगा,,,

(उसे ठेले वाले की बात सुनते ही सुगंधा को जैसे एकदम से होश आया हो वह एकदम से हड़बड़ा कर उस ठेले वाले की तरफ देखने लगी,,, और अपने दोनों हाथ की तरफ देखी तो एकदम शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि उसका एक हाथ में अभी भी उंगली और अंगूठे को सटकर गोल छल्ला बना हुआ था और उसके बीचो-बीच तक बैगन घुसा हुआ था मानों जैसे किसी औरत की बुर में लंड घुसा हो,,,, अपनी स्थिति का भान होते ही सुगंधा एकदम शर्म से पानी पानी होते हुए अपने चारों तरफ देखने लगी लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसे समय उस ठेले पर सिवाय ठेले वाले के ओर कोई नहीं था,,,,)



कककककक,,, कैसे दिए बैगन,,,,(हड़बड़ाहट और घबराहट भरे स्वर में सुगंधा बोली,,,)

अब आपसे क्या मेलजोल करना मैडम₹15 किलो है,,,, तुम 10 रुपया दे देना,,,,,,(कुटिल मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए वह ठेला वाला बोला,,, सुगंधा को अपने मन में उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन इस समय एकदम लाचार नजर आ रही थी क्योंकि उसकी हरकत को वह अपनी आंखों से देख लिया था,, इसलिए उसकी बात सुनकर वह धीरे से बोली,,,)

ठीक है 1 किलो कर दो,,,(और इतना कहने के साथ ही सुगंधा बैगन को अपने हाथों से बिन कर निकालने लगी तभी वह ठेला वाला खुद बैगन के देर में से नीचे से एक मोटा तगड़ा और लंबा बैगन निकाल कर सुगंधा की तरफ दिखाते हुए बोला,,,)

यह वाला दीजिए मैडम तुम्हारे लिए एकदम फिट बैठेगा ,,,,,

(उसे ठेले वाले की बात सुनकर सुगंधा गुस्से से लाल पीली हुई जा रही थी लेकिन उसे कुछ कहने की उसमें हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी,,, सुगंधा उसे ठेले वाले के खाने के मतलब को एकदम सीधा,, समझ रही थी वह जानती थी कि वह किस सुर में बात कर रहा है,,, इसलिए सुगंधा उसे ठेले वाले की बात काटते हुए बोली,,,,)



कोई जरूरत नहीं है मैं ले रही हूं ना,,,

मैं तो तुम्हारी मदद कर रहा था मैडम इसे ले लेती तो और अच्छा होता तुम्हारे लिए ही अच्छा होता है एकदम मेरी तरह है,,,

क्या मतलब,,,!(एकदम गुस्से से उस ठेले वाले को आंख दिखाते हुए बोली,,,)

कुछ नहीं मैडम जी मैं तो अच्छा देख कर दे रहा था,,,

कोई जरूरत नहीं है मैं ले लूंगी,,,

कोई बात नहीं मैडम जैसी आपकी मर्जी आपका समान है जैसा ठीक लगे वैसा ही लेना,,,(वह ठेले वाला एकदम धीमे स्वर में बोला तो सुगंधा फिर से गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए बोली क्योंकि भले ही वह धीरे से बोला था लेकिन सुगंधा ने उसकी बात को सुन ली थी,,,)



क्या बड़बड़ा रहे हो शांति से बैठ नहीं सकते क्या,,!

ठीक है मैडम मैं कुछ कहां बोल रहा हूं,,,, और जल्दी करिए दूसरे ग्राहक को भी आने दीजिए,,,।

मैं रोक कर रखी हूं क्या,,,,

(इतना कहते हुए सुगंधा बैगन को तराजू में रखने लगी जब थोड़ा बहुत बैगन किलो में कम पड़ने लगा तो वह ठेले वाला इस बेगन को वापस तराजू में डाल दिया जिसे वह खुद चुनकर निकाला था इस बार सुगंधा इनकार नहीं कर पाई क्योंकि सुगंधा की नजरों ने उसे बैंगन की मोटाई और लंबाई को भांप ली थी,,, और बैगन को अपने थैले में लेकर वह अपने पर्स में से 10 का नोट निकाल कर उस ठेले वालों को थमा दी,,, और वहां से चलने लगी लेकिन उसे ठेले वाले से रहा नहीं गया और अपने मन की बात अपने होठों पर लाते हुए धीरे से बोला,,,)

ससहहह हाय क्या मस्त गांड है इसकी मिल जाती तो उसकी बुर में बेगन नहीं मैं अपना लंड डालकर चोदता,,,, ।

(उसके धीरे से कहीं हुई बात को सुगंधा सुन ली थी और अंदर ही अंदर बहुत क्रोधी भी हो रही थी लेकिन मुड़कर जवाब देने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह जानती थी कि ऐसे लोग से मुंह लगने का मतलब है कि अपनी ही इज्जत खराब करना ,, लेकिन इस बात से उसके बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी कि वह खुले शब्दों में उसे चोदने की बात कर रहा था और उसे इस बात का मलाल था कि सड़क पर चलते हुए जितने भी मर्दों की नजर उसके खूबसूरत बदन पर उसकी चूचियों पर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर जाती थी वह लोग उसे चोदने का मन बना लेते थे और मन ही मन में उसके बारे में गंदे ख्याल भी करके मस्त हो जाते थे लेकिन एक उसका लड़का ही था जो घर में साथ होने के बावजूद भी उसके मन की बात को समझ नहीं पा रहा था,,,।

सुगंधा को उसे ठेले वाले की बात पर गुस्सा भी आ रहा था और हंसी भी आ रही थी साथ में उत्तेजना का अनुभव भी हो रहा था और अपने आप को वह दोषी भी ठहरा रही थी क्योंकि उसकी हरकत की वजह से ही उसे इतनी हिम्मत हुई थी बोलने की,,, सुगंधा अपने आप से ही बात करते हुए बोली मैं भी कितनी बुद्धू हूं कहीं भी कल्पना करने लगती हूं बैगन को देखते ही मुझे मेरे बेटे का लंड याद आने लगा भले ही मैं उसे देखी नहीं हूं लेकिन पेंट में जिस तरह का तंबू बना होता है उसे समझ में तो आता ही है कि कितना बड़ा और मोटा होगा,,,। बाप रे में कभी सोच भी नहीं सकती थी कि मैं इस तरह की हरकत करूंगी कैसे अपने हाथ का गोल छल्ला बनाकर उसमें बैगन डाल रही थी निकल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे बुर में लंड घुस रहा हो,,,, अपने आप से ही इस तरह की मन में बात करते हुए सुगंधा के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और उसकी बुर गीली होने लगी,,,,,।

अपनी उलझन में से बाहर निकलने की कोशिश करते हुए वह सब्जी मार्केट में ही स्थित एक समोसे और जलेबी नाश्ते की दुकान पर पहुंच गई और वहां पर गरमा गरम समोसे के साथ-साथ जलेबी भी पैक करवाने लगी कि तभी उसकी नजर उसे समोसे की दुकान के ठीक सामने ठेले पर गई,,, वहां पर एक औरत खड़ी थी जिसे पीछे से भी वह पहचान गई थी वह उसकी सा अध्यापिका नूपुर थी,,, वह कोई सब्जी खरीद रही थी,, नूपुर को देखते ही सुगंधा के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे वह उससे मिलना चाहती थी उसे वह आवाज देने ही वाली थी कि उसके पास में खड़ा एक जवान लड़का जो कि अंकित की उम्र का था उसकी हरकत से वह एकदम से चौंक गई उसे लड़के ने अपनी हथेली को नूपुर के गोलाकार नितंबों पर रखकर ऊपर से ही हौले हौले से सहलाने लगा,,, इस दृश्य को देखकर तो उसकी हालत खराब हो गई सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सब्जी मार्केट के अंदर वह जवान लड़का,,, बेफिक्र होकर नूपुर की गांड पर अपना हाथ रखकर मजे लेता था वह जल्दबाजी में उसकी तरफ जाना चाहती थी लेकिन तभी उसकी आंखों ने जो देखा उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,, उस जवान लड़के से नूपुर हंस हंस के बातें कर रही थी जबकि बातें करते समय भी उसे लड़के का हाथ नूपुर की गांड पर था,,,, यह नजारा सुगंधा को हैरान कर देने वाला था,,,।

जिस तरह से दोनों हंस हंस के बातें कर रहे थे उसे देखकर सुगंधा समझ गई थी कि दोनों एक दूसरे को जानते हैं लेकिन वह लड़का नूपुर का क्या लगता है यह नहीं मालूम पड़ रहा था,,,। उसे नजारे को देखकर सुगंधा के तन बदन में आग लगने लगी थी उत्तेजना के लहर रखने लगी थी उसकी बुर से पानी निकलना शुरू हो गया था क्योंकि जब वह लड़का नूपुर के साथ इस तरह की हरकत कर सकता है तो वह जरूर उसके साथ हम बिस्तर भी होता होगा उसे मजा देता होगा यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके पति का ख्याल आने लगा जो की नूपुर से कई ज्यादा उम्र का था और उसकी उम्र को देखते हुए और नूपुर की जवानी से भरी हुई किया को देखकर सुगंधा अपने मन में तर्क लग रही थी कि जरूर वह अपने पति से बिल्कुल भी खुश नहीं होती होगी इसीलिए तो जवान लड़के से मजा ले रही है,,,,।

सुगंधा का नाश्ता तैयार हो चुका था वह दुकानदार से समोसे और जलेबी या लेकर ठेले में डाल चुकी थी लेकिन वह उसी दुकान पर खड़ी होकर सबसे नजर बचाकर नूपुर की तरफ ही देख रही थी और उसके साथ जो लड़का था वह भी,, बहुत चालाक नजर आ रहा था और वैसे भी वह ठेला भी बड़े से घने पेड़ के नीचे था और शाम का वक्त होने पर धीरे-धीरे अंधेरा भी हो रहा था जब कोई उधर से गुजरता था तो वह लड़का नूपुर की गांड पर से अपने हाथ को हटा दे रहा था नूपुर को भी उस लड़के की हरकत से बहुत मजा आ रहा था और जैसे ही वहां कोई नहीं रहता था फिर से वह उसकी गांड को अपने हाथों से दबाना शुरू कर देता था यह सब अपनी आंखों से देख कर सुगंधा की बुर कचोरी की तरह फूल गई थी,,,,।

सुगंधा तब तक वहां खड़ी रही जब तक कि नूपुर वहां से चली नहीं गई उस जवान लड़के के साथ सुगंधा का मन तो बहुत हो रहा था कि वह जाकर नूपुर से पूछे कि वह लड़का कौन है लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी और वह अपने मन में ही तर्क लगाने लगी थी कि वह लड़का कौन होगा हो सकता है उसका प्रेमी हो या फिर भतीजा हो या फिर कोई रिश्तेदार हो जिसके साथ नुपुर इतना घुल मिल गई है,,,। लेकिन पल भर में ही वह इतना समझ गई कि भले ही वह अपने पति से खुश नहीं है लेकिन उसकी किस्मत से ज्यादा अच्छी है क्योंकि उसकी प्यास बुझाने वाला एक जवान लड़का उसके पास जो है ,, यहां तो हर रात करवट बदल कर ही गुजरती है,,,, नूपुर उसे लड़की के साथ जा चुकी थी और नूपुर उसे लड़के के साथ बहुत खुश भी नजर आ रही थी वरना उसके चेहरे पर हमेशा उदासी छाई रहती थी सुगंधा भी वहां से अपने घर की तरफ निकल गई,,,।

रात को सब काम से निपट करवा अपने कमरे में गई और ठेले में से लाए हुए उस मोटे तगड़े बैगन को जिसे वह अपने पलंग के नीचे छीपा दी थी उसे धीरे से निकाली और उसे हाथ में लेकर चारों तरफ घूम कर देखने लगी वाकई में उसका आकार एक मोटे तगड़े जानदार लंड से काम नहीं था जिसे देखकर ही उसकी बुर से पानी बहना शुरू हो गया,,,, देखते ही देखते सुगंधा अपने बदन पर से अपनी साड़ी कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई और अपनी दोनों टांगों को खोलकर वह उसे बैगन के गोल वाले मोटे भाग को अपनी बुर पर रखकर उसे अंदर डालने की कोशिश करने लगी और थोड़ी देर में उसे समझ में आ गया कि उसकी बुर के छेद से बैगन के आगे वाला भाग कुछ ज्यादा मोटा था इस बात को समझते ही वह और ज्यादा उत्तेजित हो गई और जल्दी से अपनी बिस्तर पर से उठकर वहां अलमारी के पास के टेबल के पास गई जहां पर सरसों के तेल की सीसी रखी हुई थी और वह उसमें से तेल को अपनी हथेली में गिराकर वापस सीसी को वही रखती और फिर उसे सरसों के तेल को बैगन पर अच्छी तरह से लगने लगी खास करके आगे वाले भाग पर ताकि चिकनाहट पाकर वह आराम से उसकी बुर में घुस सके,,,।



थोड़ी ही देर में सुगंध तैयार थी उसे बैंगन को अपनी बुर में डालने के लिए आज उसकी उत्तेजना कुछ ज्यादा ही बढ़ चुकी थी क्योंकि उसके मन में सब्जी मार्केट का वही दृश्य याद आ रहा था जब वह जवान लड़का नूपुर की गांड को जोर-जोर से दबा रहा था,,, लेकिन आज उसकी कल्पना में उसका जवान बेटा नहीं बल्कि नूपुर थी और वह जवान लड़का था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि वह जवान लड़का कैसे नूपुर के साथ हम बिस्तर होता होगा कैसे उसे चोदता होगा वह अपनी आंखों को बंद करके कल्पना कर रही थी कि वह जवान लड़का नूपुर को अपनी बाहों में लेकर उसके लाल लाल होठों को चुसता हुआ उसे बिस्तर पर लेटा देता होगा और फिर धीरे-धीरे उसके कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर देता होगा,,, और नूपुर भी उसे अपनी छाती से लगाकर उसे अपना दूध पिलाती होगी अपने हाथों से उसकी पेंट उतार कर उसके लंड को मुंह में लेकर चूस रही होगी,,,,।

और धीरे-धीरे वह जवान लड़का नूपुर की दोनों टांगों को खोलकर कुछ देर तक उसकी गुलाबी बुर को अपने होठों से लगाकर चाटता होगा और फिर दोनों टांगों को खोलकर अपने मोटे तगड़े लड को नूपुर की बुर में डालकर उसकी जा की चुदाई करता होगा,,, यही सब कल्पना करते हुए वह मोटा तगड़ा बैगन का उसकी बुर में घुस गया और अंदर बाहर होने लगा उसे खुद को नहीं पता चला लेकिन वह काफी उत्तेजित थी इसलिए जल्द ही उसकी बुर से मदन रस का तेज फवारा फूट पड़ा और वह शांत होकर नग्न अवस्था में ही सो गई,,,।
 
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