अंकीत ने जो कुछ भी बगीचे में देखा था उसका जिक्र ना तो अपनी बहन से ही और ना ही अपनी मां से कर पाया था क्योंकि वह ऐसे माहौल में पला बढा नहीं हुआ था जहां इस तरह की बातें होती हो,,, वह हमेशा से ही सीधा-साधा लड़का था यहां तक की जवानी की दहलीज पर कदम रखने के बावजूद भी उसमें दूसरे लड़कों की तरह बदलाव बिल्कुल भी नहीं आया था,,,,,, सीधा-साधा लड़का होने के नाते वह अपनी मां और बहन के बारे में भी अच्छी तरह से जानता था वह उन दोनों से भी भली भांति परिचित था लेकिन बगीचे में अपनी बहन को दूसरे लड़के के साथ देखकर और जिस तरह की हरकत हुआ लड़का उसके साथ किया था और खुद उसकी बहन ने जाते-जाते उसे एक चुंबन दी थी यह सब देखते हुए उसके तो होश उड़ गए थे वह अपनी बहन के बारे में कभी इस तरह की बात सपने में भी नहीं सोच सकता था वह पहली बार अपने घर के सदस्य को इस तरह की हरकत करते हुए देखा था इसलिए तो उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,।
खास करके अंकित उसे लड़के की हरकत के बारे में सोचकर हैरान था और काफी गुस्से में भी था लेकिन वह अपना सारा गुस्सा पी गया था उससे भी ज्यादा गुस्सा तो उसे अपनी बहन पर आ रहा था क्योंकि उसे लड़के की ऐसी हरकत के बावजूद भी वह कुछ नहीं बोली थी बस मुस्कुरा दी थी ,,, अंकित की जगह कोई और भाई होता तो शायद इस समय उसे लड़के का मुंह तोड़ दिया होता लेकिन अंकित झगड़ा तकरार से हमेशा दूर रहता था इसलिए ऐसा होकर भी नहीं पाया था वरना कौन भाई होगा जब उसकी आंखों के सामने ही कोई लड़का उसकी बहन की चूची दबा दे और वह कुछ ना बोले,,,,,,।
घर पर पहुंचा तो सब कुछ सहज था उसकी बहन तर्प्ति भी अपने काम में मस्त थी,,,,,, अंकित को अपनी बड़ी बहन तृप्ति का यही सादगी भरा रूप सबसे ज्यादा अच्छा लगता था घर का काम करती हुई पढ़ाई करती हुई अपनी मां के काम में हाथ बटाती हुई,,,, तृप्ति के इसी रूप को इसी व्यवहार को अंकित बहुत पसंद करता था ना कि बगीचे वाले व्यवहार को क्योंकि बगीचे में जिस तरह की हरकत उसने उस लड़के के साथ की थी उसे बारे में तो वह कभी सोच भी नहीं सकता था,,, लेकिन तभी बगीचे वाली बात उसे याद आने लगी जब वह लड़का कह रहा था कि उसकी बहन की खूबसूरती में वह पूरी तरह से खो गया था इसलिए बहक गया था,,,।
बहकने शब्द से अंकित को कुछ ज्यादा समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जवान हो चुका अंकित इतना तो समझ ही रहा था कि कहीं उसकी बहन उसे लड़के के बीच शारीरिक संबंध स्थापित नहीं हो गया है कहीं उसे लड़के ने उसकी बहन की चुदाई तो नहीं कर दिया है और अगर ऐसा हो गया तो फिर वह कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाएगा,,,, फिर अपने मन में सोचा नहीं नहीं ऐसा वह नहीं कर सकती आखिरकार उसमें भी तो उसकी मां की संस्कार है वह भला कैसे बहन सकती है लेकिन फिर अपने ही सवाल का ढेर सारा जवाब उसके मन में अपने आप ही उमड रहा था वह अपने मन में यही सोच कर हैरान हुए जा रहा था की कही वाकई में उसकी बहन और उसे लड़के के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया हो तो क्या होगा यही सोचकर वह एकदम हैरान हो गया था और इस बात की गंभीरता को समझते हुए वह अपनी मां से इस बारे में बात करना चाहता था और अपनी बहन को भी समझाना चाहता था लेकिन अभी खुद उसके मन में ही शंका बनी हुई थी इसलिए वह इस तरह की बात छेड़ने से भी घबरा रहा था,,,।
लेकिन देखते ही देखते 15 दिन गुजर गए और अंकित ने बगीचे वाली बात का जिक्र तक नहीं किया वहीं दूसरी तरफ सुगंधा धीरे-धीरे अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने का सारा जुगाड़ बनाकर उसे पर अमल करने लगी और उसे इस बात का एहसास भी होने लगा कि उसका बेटा भी उसे देखने की कोशिश करता था उसकी तरफ देखकर आकर्षित होता था,,, लेकिन इस तरह की देखा ताकि से आगे अभी तक कुछ बात बन नहीं पाई थी,,,। और इस बात का मलाल सुगंध को भी रहता था लेकिन इस खेल में भी उसे बहुत मजा आ रहा था रोज ही वह अपनी बेटी को अपनी तरफ आकर्षित करने के चक्कर में अपनी बुर की थी कर लेती थी और फिर रात को अपने बेटे के बारे में कल्पना करके कभी उंगली तो कभी मुली गाजर और खीरा डालकर अपनी जवानी की आदत को बुझाने की कोशिश करती थी लेकिन यह आगे सी थी कि जितना बुझाने की कोशिश करती थी उतनी ज्यादा और भडक जाती थी,,,।
ऐसे ही एक दिन अंकित का दोस्त सूरज बातें करते हुए चाय की दुकान पर बैठा हुआ था की तभी वहां से अंकित के पड़ोस वाली लड़की सुमन हाथ किताब ली अपने घर की तरफ जाने लगी जिसे देखकर सूरज गर्म आहे भरता हुआ बोला,,,।
यार अंकित तेरी पड़ोस वाली लड़की तो देख कितनी जवान हो चुकी है गांड कितनी मस्त हो गई है,,,।
(सूरज की बात पर अनजाने में ही अंकित ने भी अपनी नजर उठा कर उसे लड़की की तरह देख लिया जो कि अपने घर की तरफ चली जा रही थी और उसकी पीठ और नितंब अंकित की तरफ ही थे अनजाने में ही अंकित का ध्यान उसकी गोल-गोल गांड पर चली गई थी जो कि वाकई में कसी हुई सलवार में कुछ ज्यादा ही उभार लिए हुए नजर आ रही थी,,,, लेकिन जब उसे स्थिति का एहसास हुआ वह सूरज पर नाराज होते हुए बोला,,,)
यार सूरज इस तरह की बातें मत किया कर यह अपनी सुषमा आंटी है ना उनकी लड़की है समझा और उसे भी मैं अपनी बहन की नजरिए से देखता हूं,,,
अंकित तु सच में एकदम पागल है हर लड़की को अपनी बहन की नजर से देखेगा तो शादी किससे करेगा और अगर सच में हर लड़की को अपनी बहन समझेगा तो सुहागरात के दिन चुदाई किसकी करेगा,,, सुहागरात वाली रात को ऐसा बोलेगा,,,।
दीदी जरा सा अपनी कमर उठाओ ना तुम्हारी चड्डी उतारना है,,,(और इतना कहकर वह हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर अंकित को बहुत गुस्सा आया लेकिन न जाने क्यों चड्डी उतारने वाली बात पर उसके बदन में अजीब सी हलचल आने लगी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच कुछ ज्यादा ही हलचल महसूस होने लगी,,,, क्योंकि सूरज की बात सुनते ही उसके मन में कल्पना का चित्र उभरने लगा था कि वाकई में जैसा उसका दोस्त कह रहा है वैसा ही वह उसके साथ उसकी चड्डी उतारने के लिए कह रहा है,,, सूरज की बात तो उसे उत्तेजित कर देने वाली लगी थी लेकिन फिर भी वह नाराजगी दर्शाते हुए बोला,,,।)
सच में सूरज तू बहुत बिगड़ गया है तू भी रौनक जैसा हो गया है,,,
मैं रोनक जैसा नहीं हो गया हूं अंकित सारे लड़के रौनक जैसे हैं और वैसे होते ही हैं क्योंकि यह तो प्राकृतिक है,,, लड़कियों और औरतों को देखकर हम जैसे लड़कियां आकर्षित नहीं होंगे तो कौन होगा,,,, लेकिन रौनक मैं तुझे एक बात बताना चाहता हूं तो शायद अपनी पड़ोस वाली लड़की के बारे में कुछ जानता नहीं है इसलिए उसे अपनी बड़ी बहन का दर्जा देता है लेकिन क्या वह तुझे अपने भाई का दर्जा देती है कभी नहीं देती होगी क्योंकि उसके बारे में तु कुछ जानता ही नहीं है,,,,।
चल अब रहने दे सूरज किसी को बदनाम करने से कोई फायदा नहीं है,,,
मैं कहां बदनाम कर रहा हूं वह तो खुद बदनाम है तू नहीं जानता कि उसके कितने लड़कों के साथ चक्कर हैं और वह न जाने कितने लड़कों के साथ सो भी चुकी है इसलिए देखता नहीं है उसकी गांड कितनी बड़ी-बड़ी है,,, उसे उम्र की लड़कियों को देखा उसे देख,,,(एक पल के लिए तो सूरज के मन में ख्याल आया था कि वह सीधे-सीधे कह दे कि तेरी बहन की गांड देखा और उसकी गांड देखा लेकिन ऐसा कहने में बात भी कर सकती थी इसलिए वह अंकित की बहन का उदाहरण नहीं दिया लेकिन अपनी बात को समझने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन सीधा-साधा अंकित उसकी बात समझ नहीं पा रहा था तो आश्चर्य से सूरज की तरफ देख रहा था सूरज उसके मन में उठ रहे सवाल को शायद उसके चेहरे पर पढ़ लिया था इसलिए वह बोला)
देख अंकित जो लड़कियां ज्यादा चुडक्कड़ होती है उनकी गांड सबसे पहले बड़ी हो जाती है जैसा कि तेरी पड़ोस वाली लड़की की गांड कैसी बड़ी-बड़ी है वह न जाने कितने लड़कों से चुदवा चुकी है,,,, अगर मेरी बात करते चाहिए यकीन नहीं होता तो दूसरे लड़कों से पूछ ले सब लोग जानते हैं एक सिर्फ तू ही नहीं जानता,,,,।
(सूरज की बात सुनकर अंकित एकदम से हैरान हो गया था क्योंकि वह अपने पड़ोस वाली सुषमा आंटी की लड़की को सीधी साधी ही समझता था लेकिन सूरज के मुंह से उसके बारे में हकीकत जानकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई थी लेकिन चुदाई वाली बातें से उसके तन-बड़े उत्तेजना की लहर भी उठ रही थी और पल भर में उसे अपनी बहन का ख्याल आ गया क्योंकि वह भी अपनी बहन को बहुत सीधी-सादी समझता था लेकिन बगीचे में अपनी बहन को दूसरे लड़के के साथ देखकर उसका यह भरम धीरे-धीरे टूट रहा था और आज सुमन के बारे में जान कर दो उसे अपने मन में डर लगने लगा था कि कहीं उसकी बहन तृप्ति भी तो नहीं सुमन की तरह लड़कों से चुदवाती हो,,,, फिर अपने ही सवाल का जवाब अपने मन में खुद को देते हुए नहीं-नहीं ऐसा नहीं हो सकता तृप्ति सुमन की तरह नहीं हो सकती,,,,)
अरे क्या सोच रहा है मैं सच कह रहा हूं और सच कहूं तो अपने साथ के जितने लड़के हैं सब कोई,,, उसके पीछे पड़े हुए हैं और अगर वह तैयार हो तो सब छोड़ना भी चाहते हैं लेकिन किसी का नंबर ही नहीं लग रहा है वह बाहर बाहर ही सब कुछ करवा लेती है और तुझे तो इन सब के बारे में अनुभव ही नहीं है नहीं तो खुद तू अपनी नजर से पहचान लेता उसकी छाती के संतरे कितने बड़े हो गए हैं उसकी गांड कितनी बड़ी हो गई है,,,।
यह सब बदलाव,,,(अंकित उत्सुकता और आश्चर्य जताते हुए दबे स्वर में बोला,,,)
हां अंकित यह सब बदलाव लड़कियों के शरीर में आ ही जाते हैं जब मरद का हाथ लगता है लड़कियों की चूची पर हाथ लगाते ही उन्हें दबाते ही उनका आकार बढ़ना शुरू हो जाता है और गांड भी फैलने लगती है,,,,,(इतना वह कहीं रहा था कि तभी उनका एक दोस्त और भी उनके पास आया जिसे देखकर सूरज उसे बैठने के लिए बोला और अपनी बात को आगे बढ़ते हुए उस दोस्त से मुखातिब होता हुआ बोला,,) यार तू जरा बता इसे सुमन के बारे में,,,।
अरे उसके बारे में क्या बताना उसके बारे में सब कोई जानता है बस यही पड़ोस में रहकर कुछ नहीं जानता,,
और यह महानुभाव उसे बड़ी दीदी समझते हैं उसे बड़ी दीदी कहकर बुलाते हैं,,,,(सूरज की बात सुनते ही सूरज और उसका दोस्त दोनों तरह के लगाकर हंसने लगे और सूरज का दोस्त हंसते हुए बोला)
बहुत बड़ी दीदी बड़ी दीदी कहता है ना किसी दिन देखना तेरे पर अगर फिदा हो गई तो तेरे लिए अपनी टांग खोल देगी फिर चाटते रहना अपनी बड़ी दीदी की बुर,,,,।
(अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह दोनों की बातों को सुनकर कैसा बर्ताव करें उसके चेहरे के भाव बदल तो रहे थे उसे आश्चर्य हो रहा था क्योंकि आज तक वह सुमन के बारे में अनजान बना था और जिस तरह से उसके दोस्त ने दोनों टांगें फैला कर बुर चाटने वाली बात कहा था उसे सुनकर उसका लंड खड़ा हो गया था,,,, कुछ देर तक तीनों वहीं बैठकर बातें करते रहे और फिर सूरज जाते-जाते बोला,,,)
यार अंकित तेरी बात बन सकती है तू अगर चाहे तो सुमन तुझे जरूर कुछ करने देगी,,,।
धत् यार तू भी,,,,
अरे सच कह रहा हूं बाकी तेरी मर्जी,,,(इतना कहकर सूरज वहां से चला गया और अंकित कुछ देर तक वहीं बैठकर सुमन के बारे में सोचता रहा क्योंकि आज तक उसने सुमन के अंदर कोई इस तरह की हरकत देख ही नहीं था जिसे देखकर सुमन के बारे में उसे कोई शक हो लेकिन उसके दोस्त भी उसे झूठ नहीं बोल सकते थे इसलिए काफी सोच विचार करने के बाद वहां धीरे से वहां से उठाओ और अपने घर की तरफ चल दिया धीरे-धीरे शाम ढल चुकी थी और अंधेरा अपनी चादर बिछाने के लिए उतारू हो रहा था,,, अंकित अपने घर में पहुंच कर सबसे पहले तृप्ति के ऊपर नजर घुमा कर देखने लगा वह अपने दोस्त की बात को अपनी बहन पर आजमा रहा था वह कर नजरों से अपनी बहन की छाती की गोली को और उसके नितंबों के आकार की तरफ देखकर अंदाजा लगा रहा था कि कहीं उसकी बहन भी तो नहीं सुमन की तरह निकल गई लेकिन ,,, लेकिन अपनी बहन की छाती और अपनी बहन की गांड की तरफ देखकर उसे थोड़ा संतोष हुआ कि उसकी बहन की छाती सुमन की तरह बड़ी-बड़ी नहीं थी और गांड का आकार भी एकदम सीमित था भले ही वह थोड़ा उभरा हुआ था लेकिन सुमन की तरह चौड़ा नहीं था इसलिए उसे इस बात का एहसास होने लगा कि अभी तक उसकी बहन में लंड नहीं लिया और जैसे ही अपने मन में अपनी बहन के लिए लंड लेने वाली बात का ख्याल आया,,, तुरंत ही उसका खुद का लंड खड़ा हो गया,,,, जैसे तैसे करके वह अपनी बहन के ऊपर से अपना ख्याल दूसरी तरफ घूमने की कोशिश करने लगा तो वैसे ही उसे खाना बनाती हुई अपनी मां नजर आने लगी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूची देखकर वह उसे पर शक करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था क्योंकि वह तो शादीशुदा और उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी थी जहां पर उसकी खूबसूरती चार चांद बन गई थी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूची देखकर उसे इस बात का अंदाजा तो लगी गया था कि उसकी मां दो बच्चों की मां हो चुकी थी और इसके लिए न जाने कितनी बार चुदवा चुकी थी,,, अपनी मां के बारे में इस तरह के शब्द अपने जेहन में आते ही वह पल भर के लिए शर्मिंदा हो गया,,, और अपने ध्यान को दूसरी तरफ बांटने की कोशिश करने लगा,,,,।)
दूसरे दिन रविवार का दिन था और दोपहर के समय सुगंधा एक कटोरी आम का अचार भरकर अंकित को थमाते हुए बोली,,,।
ले अंकित इसे पड़ोस वाली आंटी के वहां दे आना तो,,,
अरे यह क्या है,,,(हाथ में कटोरी को पकड़ते हुए)
आम का अचार है और क्या है दिखाई नहीं दे रहा है क्या,,,!
अरे मुझे दिखाई तो दे रहा है लेकिन इतना सारा उन्हें देने की क्या जरूरत है,,,
अरे बुद्धू सुषमा ने मुझे पहले से ही आचार देने के लिए बोल रखी थी इसलिए दे रही हूं,,,, अब जा जल्दी से पहुंचा दे,,,,
ठीक है मम्मी,,,,(इतना कहकर अंकित कटोरी लेकर घर से बाहर निकल गया रविवार का दिन होने की वजह से तृप्ति भी घर पर थी,,, वैसे तो इस समय वह कोचिंग के लिए घर से बाहर चली जाती थी लेकिन आज वह घर पर ही थी इसीलिए सुगंधा भी मन महसूस कर रह गई थी वरना अभी तक तो वह अपने बेटे को अपनी जवानी के जलवे दिखा दी होती,,,।
अंकित हाथ में अचार की कटोरी लेकर दरवाजे पर खड़ा था और दरवाजे की कड़ी बजाकर आवाज दे रहा था,,,, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही थी तो वह धीरे से दरवाजे पर हाथ रखा तो दरवाजा खुद ब खुद खुल गया,,,, वह धीरे से घर में प्रवेश किया वह इधर-उधर देखने लगा लेकिन कोई नजर नहीं आ रहा था तो वह देखते ही देखते सीधा आगे की तरफ बढ़ने लगा और देखते ही देखते वहां घर के अंतिम कमरे की तरफ पहुंच गया और अंतिम कमरे की तरफ पहुंचते ही जैसे ही कमरे की तरफ नजर डाला तो अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए,,, वैसे भी अगर उसकी जगह कोई और होता तो शायद उसके भी होश उड़ जाते क्योंकि अंदर का नजारा ही इतना मदहोश कर देने वाला था कि खुद संस्कारी अंकित का भी इमान डोलने लगा,,,,।
दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और वह दरवाजे पर दस्तक देने ही वाला था कि उसकी नजर कैमरे के अंदर चली गई थी और अंदर का नजारा देखकर उसके तो होश उड़ गए थे क्योंकि अंदर कमरे में सुमन जो की गीले बालों से लग रहा था कि अभी-अभी नहा कर आई थी और उसके बदन पर केवल एक टावर थी जो कि वह टॉवल भी वह इस तरह से पकड़े हुए थे कि टॉवल उसके आधे नितंबों को ही ढंक पा रहा था,,,, और सुमन की खूबसूरत गोरी गोरी गांड और उसके बीच वाली फांक एकदम साफ नजर आ रही थी,,, और ऐसे हालात में सुमन की खूबसूरत गांड आधे चांद की तरह नजर आ रही थी,,, जिसे देखकर अंकित तन बदन में चार बोतलों का नशा चढ़ना शुरू हो गया था,,।
वैसे भी अंकित के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी खूबसूरत लड़की को अर्धनग्न अवस्था में देख रहा था और वह अलमारी में से कुछ ढूंढ रही थी और अंकित को समझते देर नहीं लगी कि वह अपने पहनने के लिए कपड़े ढूंढ रही थी और थोड़ी देर में उसे ड्राोवर में से,,, कोई कपड़ा मिल गया लेकिन दरवाजे के पीछे खड़ा अंकित समझ नहीं पा रहा था कि उसे क्या मिला है और वह थोड़ी ही देर में जब पीछे की तरफ हाथ लाकर उसका हुक लगाने लगी तब उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह ब्रा पहन रही थी और दोनों हाथ का उपयोग करने की वजह से उसकी कमर पर लिपटा हुआ टावल एकदम से नीचे उसके कदमों में जाकर गिर गया,,, और वह पूरी तरह से नंगी हो गई और उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके नंगे बदन को देखकर अंकित का बिना कहीं उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया और अपनी औकात में आ गया अंकित का तो इस नजारे को देखकर उसकी आंखें फटी जा रही थी उसका दिमाग काम करना बंद हो गया था पहली बार जिंदगी में वहां किसी खूबसूरत लड़की को बिना कपड़ों के देख रहा था उसके अंगों को देख रहा था उसकी मखमली चिकनी पीठ को देख रहा था और इसके नितंबों की गोली को देख रहा था जो कि वाकई में बेहद खूबसूरत उभार लिए हुए थे,,,।
शायद इस बारे में कपड़े पहने होने की वजह से अंकित सुमन की खूबसूरत नितंबों के बारे में कल्पना भी नहीं कर सकता था,,, लेकिन उसे ऐसा लग रहा था कि शायद जैसे उसकी कल्पना से भी ज्यादा खूबसूरत नजारा वह देख रहा था,,,। उत्तेजना के मारे अंकित का गला सूख रहा था वह गहरी गहरी सांस ले रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसके हाथ से अचार की कटोरी छूट न जाए और फिर कहीं इस तरह के खूबसूरत नजारे पर पर्दा ना पड़ जाए,,, अंदर नहा कर कपड़े पहन रही सुमन का ध्यान दरवाजे पर बिल्कुल भी नहीं था उसका दरवाजा हल्का सा खुला हुआ ही था जो कि अंकित से आने से पहले ही वह बाथरुम से नहा कर अपने कमरे में गई थी,,,।
देखते ही देखते वह अपनी ब्रा का हक बंद करके उसे पहन कर अपनी नारंगियों को उसके कप में ढंक ली थी लेकिन अफसोस की बात यह थी कि उसकी नंगी संतरों को अंकित अपनी आंखों से देख नहीं पाया था,,, उसके अंको की हरकत की वजह से उसके गोल-गोल नितंबो में अजीब सी थिरकन हो रही थी जिसे देखकर अंकित का लंड अंगड़ाई ले रहा था,,, अंकित के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी खूबसूरत लड़की को नंगी और इतने करीब से देख रहा था इसलिए तो उसकी हालत एकदम से खराब हो गई थी,,,, ब्रा को पहनने के बाद वह वापस ड्रोवर को खोलकर उसमें से फिर से कपड़ा ढूंढने लगी लेकिन इस बार अंकित को अंदाजा हो गया था कि वह क्या ढूंढ रही है पर थोड़ी ही देर में वहां लाल रंग की चड्डी निकाल कर उसे अपने ऊपर करके उसके गोल बड़े छेद में डाली और फिर वापस दूसरी काम को भी उसी तरह से दूसरे गोले में डाल दी और दोनों हाथों से पकड़ कर चड्डी को ऊपर की तरफ खींचने लगी एक औरत का या खूबसूरत लड़की का कपड़ा पहनना कपड़ा उतारना भी मर्दों के लिए बेहद हसीन नजारा होता है जिसे देखने के लिए उनकी आंखें हमेशा ललाईत रहती है लेकिन ऐसा खूबसूरत नजारा और दूसरी औरतों को कपड़े बदलते हुए देख पाना बहुत कम लोगों की किस्मत में होता है और इस समय किस्मत का धनी था अंकित जो कि अनजाने में ही इस तरह के खूबसूरत दृश्य को देखकर उत्तेजित हो गया था,,, जैसे ही वह लाल रंग की चड्डी को कमर पर चढ़ाकर अपनी गोल-गोल गांड को उसे छोटी सी चड्डी में छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी वैसे ही अंकित को भी इस बात का एहसास हुआ कि वह गलत जगह पर खड़ा था,,,। अगर ऐसे में उसकी नजर उस पर पड़ जाती तो लेने के देने पड़ जाते ,,, इसलिए वह धीरे से अपने कदम पीछे लिया और वापस दरवाजे के पास पहुंचकर वहां पर दस्तक देने लगा मानो के जैसे अभी-अभी आया हो,,,, अंकित को अपने कदम पीछे लेता देख कर सुमन मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि उसकी उपस्थिति को वह अलमारी में लगे शीशे में देख चुकी थी जिस बात से अंकित पूरी तरह से अनजान था और जानबूझकर सुमन अंकित को देखकर ही अपनी टॉवल को नीचे गिर कर नंगी हो गई थी क्योंकि वह अंकित को अपनी नंगी गांड अपना नंगा जिस्म दिखाना चाहती थी क्योंकि उसे अपनी जवानी पर पूरा विश्वास था कि उसके नंगे बदन को देखकर अंकित जरूर कुछ ना कुछ करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ,,, लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि वह अंकित को अपनी जवानी के रस में पूरी तरह से डूबा कर ही रहेगी,,,,।
सुमन जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन ली और दरवाजे के पास आ गई जहां पर वह अंकित को देखकर मुस्कुराने लगी और बोली,,,।
अंकित क्या हुआ कुछ काम था क्या,,,?
कककककक,,, कुछ नहीं,,,(सुमन की खूबसूरत चेहरे की तरफ एक टक देखते हुए अंकित बोला) मम्मी ने आचार भिजवाई थी वह लेकर आया हूं,,,(इतना कहकर उसकी नजर अपने आप ही सुमन की छतियो पर चली गई जिसका अंदाजा सुमन को भी हो गया और वह मन ही मन मुस्कुराने लगी,,,, लेकिन तभी उसकी नजर अंकित के पेंट की तरफ गई तो उसमे बना तंबू देखकर उसके तो होश उड़ गए क्योंकि सुमन अब तक तीन-चार लड़कों के साथ संबंध बन चुकी थी और सबके लंड के बारे में अच्छी तरह से जानती थी लेकिन अंकित के पेट में बना तंबू देख कर उसके होश उड़ गए थे क्योंकि उसे अंदाजा लग गया था कि अंकित के पेंट में मामूली लंड नहीं था,,, वासना से भरी हुई सुमन की आंखों में वासना साफ नजर आ रहा था उसका मन तो कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़ाकर अंकित के पेट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ ले और फिर उसे अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बुझाने लेकिन एकाएक ऐसा करना उचित नहीं था वह भी धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी इसलिए उससे बोली,,,)
ठीक है अंकित इसे लेकर किचन में आ जाओ,,,(इतना कहकर वहां आगे आगे अपनी गोल-गोल गांड को कुछ ज्यादा ही मटकाते हुए चलने लगी ताकि अंकित का ध्यान उसकी गांड पर रहे और ऐसा ही हुआ उसकी गोल-गोल गांड पर नजर पड़ते हैं अंकित का कलेजा सूखने लगा वह उत्तेजना के सागर में डूबने लगा,,, देखते ही देखते सुमन किचन में आ गई थी और अंकित ठीक उसके पीछे खड़ा था सुमन का दिमाग ऐसी हालत में कुछ ज्यादा ही काम करता था और वह अपने ठीक पीछे खड़े अंकित की तरफ ध्यान न देकर एकदम से नीचे झुकी और किचन के नीचे का ड्रोवर खोलने लगी और जैसे ही वह नीचे झुकी उसकी गोल-गोल गांड सीधे अंकित के खड़े लंड पर जाकर टकरा गई और जैसे ही सुमन को अपनी गांड के बीचो-बीच अंकित का लंड महसूस हुआ वह एकदम से मदहोश हो गई और पल भर में ही समझ गई कि अगर अंकित का लंड उसकी बुर में घुसेगा तो क्या हालत करेगा,,, और दूसरी तरफ,,, अंकित का भी बुरा हाल था उसके झुकने पर जिस तरह से पेट में तना हुआ उसका लंड सुमन की गांड से जाकर टकराया था उसके पूरे बदन में हलचल सी मच गई थी ,,, उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ गई थी,,,, पल भर में ही उसे लगा कि जैसे कि मानो उसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो गया हो,, वह पूरी तरह से मदहोश हो गया था एक हाथ में उसके कटोरी थी इसलिए वह एक ही हाथ को उसकी गोल-गोल कांड पर रख पाया था वरना वह दोनों हाथों से उसकी गांड की दोनों फांको को थाम लेता,,,, लेकिन अंकित की यह हरकत सुमन के बदले में भी हलचल मचा गई थी उसकी बुर से मदन रस अमृत बूंद बनकर उसकी पतली दरार से बहने लगी थी,,, वह इस हालत में ज्यादा देर तक झुकी नहीं रह सकती थी इसलिए मन मसोस कर खड़ी हो गई और बिना कुछ बोले अंकित की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और फिर उसके हाथ से अचार की कटोरी लेकर ड्रोवर में रखने लगी,,, अंकित के हालात का सुमन को अंदाजा हो चुका था सुमन समझ गई किसी उसकी जवानी का तूफान अंकित को रौंद कर रख दिया है लेकिन मुझसे ज्यादा कुछ कर पाती से पहले ही उसके कानों में उसकी मां की आवाज आने लगी जिसे सुनकर वह भी एकदम सकते में आ गई अंकित भी धीरे से किचन से बाहर आ गया और फिर,,, सुषमा को देखकर नमस्ते करते हुए बोला,,,।)
आंटी मा ने अचार भेजा है,,,
सच में तुम अचार लाए हो अंकित,,,
हां मम्मी अंकित अचार लेकर आया था मैं किचन में रखकर आ रही हूं,,,
ओहहहह बेटा तुम्हारी मां कितनी अच्छी है उसे धन्यवाद बोलना,,,
ठीक है आंटी,,,(और इतना कहकर अंकित कमरे से बाहर निकल गया)