Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 10 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

अंकित अपनी मां की मस्त-मस्त जवानी के आगे धीरे-धीरे धराशाही हो रहा था और उसे पता भी नहीं चल रहा था,,, उसकी मां सुगंधा ने अपने बालों की लातों को ठीक करवाने के अपने जुगाड़ में पूरी तरह से सफल होती नजर आ रही थी वैसे भी सुगंधा ने पहले से ही अपने ब्लाउज के उपरी बटन को खोलकर अंकित के मन पर गहरी चोट करने के लिए अपने आप को तैयार कर चुकी थी और ठीक वैसा ही हुआ जब अंकित अपनी मां के बाल के लटो को अपने हाथों से ठीक करने के लिए आया तो उसकी नजर सीधे अपनी मां की छातिया पर गई जिसे देखते ही उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल होना शुरू हो गया,,, हालांकि ऐसा उसके साथ पहले कभी होता नहीं था लेकिन यह पहली मर्तबा था और पहली मर्तबा में ही वह चारों खाने चित हो चुका था,,, भले ही अंकित अपने आप को दूसरे लड़कों से अलग समझता हो लेकिन आखिरकार था तो वह एक मर्द ही और मर्द की फितरत में ही होता है कि औरत के खूबसूरत बदन उसके उभार उसके उठाव और कटाव को देखकर उत्तेजित हो जाना,,, फिर भले ही ना उसकी आंखों के सामने उसके रिश्तेदारी की ही औरत हो उस औरत का सगा हो यह सब कोई मायने नहीं रखता था,,,।



अंकित अपनी मां की भरी हुई छातियो की तरफ देखकर जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव अपने बदन में कर रहा था उसे देखते हुए उसे बाथरूम में जाना ही पड़ा और अपनी पेंट को नीचे सरका कर,,, जिस नजारे को उसने देखा था उसे देखकर वह खुद दंग रह गया था,,, पहली बार वह अपने लंड को गौर से देख रहा था और वह भी पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था जिस पर हाथ रखते हैं उसके बदन में गुदगुदी सी होने लगी थी और उसे वह उत्तेजना के मारे धीरे-धीरे दबा भी रहा था अगर कुछ देर तक वह और अपने लंड को दबाता तो उसके लंड से वीर्य का फवारा फूट पड़ता जिसे वह पूरी तरह से अनजान था लेकिन वह अपनी हरकत को इस समय रोक दिया था क्योंकि उसे अपने बदन में हो रहे हलचल को देखकर थोड़ी घबराहट होने लगी थी और वह अपने मन को शांत करने के लिए घर से बाहर टहलने के लिए निकल गया था,,,।

अपने बेटे की हालत को देखकर सुगंधा मन ही मन मुस्कुरा रही थी और खुश भी हो रही थी क्योंकि उसकी युक्ति काम कर गई थी,,, यह पहली बार था जब वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी और जिसमें वह कामयाब हो चुकी थी हालांकि ऐसा करने में उसके खुद के पसीने छूट गए थे माथे से भी और दोनों टांगों के बीच से भी उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस हो रही थी,,, एक अजीब से दुसाहस का परिणाम वह अपने बदन में अद्भुत तरीके से देख रही थी अपने बेटे के लिए अपने ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खोलने उसके लिए किसी पहाड़ चढ़ने से काम नहीं था आखिरकार वह एक शिक्षिका थी और शिक्षा होने के साथ-साथ वह एक मां भी थी और एक मां होने के नाते अपने बेटे के सामने इस तरह की हरकत करना बेहद शर्मनाक भी था लेकिन इसमें बेहद हिम्मत की और बेशर्मी की भी जरूरत होती है जिसे मिला-जुला प्रभाव सुगंधा को अपने मन में उमडता हुआ दिख रहा था,,,।



सुगंधा अपने मन में ठान ली थी कि इस खेल में वह धीरे-धीरे आगे बढ़ेगी अपने बेटे को कभी इस बात का एहसास सही नहीं होने देगी कि जो कुछ भी हो रहा है उसमें उसकी मां की ही चाल है वह सब कुछ ऐसा प्रभाव डालना चाहती थी कि सब कुछ अपने आप हो रहा है और इसी में उसकी भलाई भी थी क्योंकि वह अपने बेटे की नजर में इस तरह से गिरना नहीं चाहती थी क्योंकि उसे इस बात का डर भी था कि अगर उसके बेटे को कहीं इस बात का भनक तक लग गया कि जो कुछ भी उसकी मन कर रही है वह जानबूझकर कर रही है तो वह उसके बारे में क्या सोचेगा इसीलिए वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस राह में फुंक फुंक कर कदम रखने में ही भलाई है,, ।

रात को खाना खाने के बाद सभी काम को निपटाने के बाद रोज की तरह तीनों बैठकर टीवी देख रहे थे,,,,,, धारावाहिक खत्म होने के बाद सुगंधा धीरे से बाथरूम में घुस गई बाथरूम जो की ड्राइंग रूम से ही सटा हुआ था जिसमें अगर पानी भी गिरता था तो उसकी आवाज एकदम साफ आई थी और इस बात का एहसास सुगंधा को भी था और सुगंधा पहले तो जब उसके मन में इस तरह की हलचल नहीं होती थी तब वह एकदम संभाल कर पेशाब करती थी ताकि उसकी आवाज अंकित के कानों तक ना पहुंच पाए लेकिन अब माहौल पूरी तरह से बदल चुका था सुगंधा अब इसी तरह के मौके की तलाश में रहती थी वह किसी भी तरह से अपने बेटे को अपनी जवानी के जाल में फसना चाहती थी उसे अपनी आकर्षण में डूबा देना चाहती थी ताकि वह अपने बेटे के साथ अपनी जवानी की प्यास को बुझा सके,,,, उसे जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह बाथरूम में प्रवेश कर चुकी थी,,, लेकिन बाथरूम में जाने से पहले रहा धारावाहिक के खत्म होने के बाद टीवी की आवाज को थोड़ा काम कर दी थी यह कहकर की आवाज को ज्यादा है और जानबूझकर टीवी चालू रखी थी ताकि अंकित वहीं बैठा रहे,,,,।



बाथरूम में प्रवेश करने के बाद वह तुरंत अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और अपनी दोनों टांगों के बीच नजर डालकर अच्छी तो उसके होंठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी क्योंकि अब हमेशा किसी न किसी बहाने उसकी बर पानी छोड़ देती थी और उसकी चड्डी क्यों नहीं हो जाती थी ऐसा उसके साथ पहले कभी नहीं होता था लेकिन अब ऐसा बार-बार होता था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी जवानी फिर से वापस लौट आई है और वह भी पूरे शबाब में,,,, अपनी चड्डी की आदत को देखकर वह गहरी गहरी सांस लेने लगी औरत धीरे से अपनी चड्डी को नीचे करके अपनी चिकनी बुर की तरफ देखने लगी जिस पर हल्के हल्के बालों के हुए थे लेकिन उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फुल चुकी थी और यही खुली हुई बुरी औरत की सबसे बड़ी ताकत होती है क्योंकि कचोरी जैसी खुली हुई किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने में पूरी सामर्थ्य रखती है और इतना तो उसे पूरा भरोसा था कि अगर वह अपनी दोनों टांगें खोलकर अपने बेटे को अगर अपने पास आने का आमंत्रण देगी तो उसका बेटा बिल्कुल भी देर नहीं करेगा उसकी दोनों टांगों के बीच जाकर उसकी बुर में समा जाने के लिए लेकिन ऐसा हुआ करना नहीं चाहते थे क्योंकि ऐसा करने में वह अपनी नजर में गिर सकती थी वह कुछ ऐसा माहौल बनाना चाहती थी कि उसका बेटा खुद अपने लंड को उसकी बुर में डालने के लिए ललाईत हो जाए,,, और उसी के चलते वहां एक बार अपनी हथेली को अपनी बर पर रखकर उसे अपनी हथेली में कस के दबोच ली मानो कि जैसे अपने मन में कल्पना कर रही हो कि जैसे उसका बेटा उसकी चिकनी बुर को देखकर उत्तेजित अवस्था में जोर से उसकी बुर दबा दिया हो,,,, गहरी सांस लेते हुए वहां एक दोबारा अपनी हथेली अपनी बुर पर रगड़ कर पेशाब करने के लिए बैठ गई,,, उसे पूरा यकीन था कि पेशाब करने की आवाज उसके बेटे के कानों में जरूर पड़ेगी,,,,।





इसलिए वह धीरे से अपनी दोनों टांगें फैला कर बैठ गई और पेशाब करना शुरू करती और जैसे ही गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकली,,, वैसे ही एक लाजवाब तेज सिटी की आवाज बुर में से निकलना शुरू हो गई और बाथरूम के दरवाजे के तकरीबन 5 फीट की दूरी पर बैठकर टीवी देख रहे अंकित के कानों में जैसे ही आवाज पहुंची उसके तो मानो होश उड़ गए उसके कान के साथ-साथ उसका लंड भी खड़ा होने लगा क्योंकि अंकित पूरी तरह से जवान था और इतना तो जानता ही था कि यह सिटी की आवाज कैसी है कहां से आ रही है और क्यों आ रही है उसे मालूम था कि बाथरूम में उसकी मां पेशाब करने गई है और पेशाब करने पर ही औरत की बुर से इस तरह की आवाज आती थी जिसे सुनकर वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा था और टीवी पर भले ही उसकी निगाहें थी लेकिन कान बाथरूम के दरवाजे पर सटा हुआ था,,,, पल भर में ही अंकित पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और उसकी पेंट में उसका लंड खड़ा होकर तंबू बना दिया वह ना चाहते हुए भी अपने मन में कल्पना करने लगा कि कैसे उसकी मां बाथरूम में बैठकर पेशाब कर रही होगी उसकी गुलाबी बुर से पेशाब की धार निकल रही होगी हालांकि अभी तक अंकित ने किसी औरत को नंगी नहीं देखा था और ना ही उसके खूबसूरत नंगे अंगों को देखा था चुची से लेकर बुर तक अभी तक उसकी आंखों ने औरत के बेस कीमती खजाने को देखा नहीं था इसलिए उसके बारे में कल्पना करना भी उसके बस में नहीं था,,, इसीलिए तो वह अंदर ही अंदर और ज्यादा उत्सुक होने लगता था उसे नजारे को देखने के लिए,,,, लेकिन धीरे-धीरे बाथरूम से आ रही सिटी की आवाज कमजोर पड़ने लगी और उसे इस बात का एहसास होने लगा कि उसकी मां पेशाब करने के आरे पर है और कुछ ही सेकंड में बाथरूम से आ रही सिटी की आवाज एकदम से शांत हो गई क्योंकि सुगंधा पेशाब कर चुकी थी,,,, इसके बाद वह धीरे से खड़ी हुई है अपनी चड्डी को उपर चढकर साड़ी को कमर से नीचे गिरा दी और फिर बाल्टी भरकर पानी गिरने लगी,,, पानी गिराने की आवाज अंकित को सुनाई दे रही थी,,, वह समझ गया कि उसकी मां मुत ली है और किसी भी वक्त बाहर आ जाएगी,,,, और वैसे ही बाथरूम का दरवाजा खुला और उसकी मां बाथरूम से बाहर आ गई लेकिन बाहर आते हैं उसकी नजर सीधे अंकित के पेट की तरफ पड़ी जो कि आगे वाला भाग पूरी तरह से फूला हुआ था और तंबू बना हुआ था जिसे देखकर वह मन ही मन मुस्कुराने लगी और उसे इस बात का यकीन हो गया कि वह जब अंदर बैठकर पेशाब कर रही थी तो पेशाब करने की वजह से सिटी की आवाज उसके बेटे के कानों में जरूर पड़ रही थी जिसे सुनकर ही वह उत्तेजित हुआ है,,,, और वह जल्दी टीवी बंद करके सो जाना इतना कहकर अपने कमरे में चली गई,,,।



अंकित कुछ देर तक इस तरह से बैठकर टीवी देखता रहा कोई फिल्म चल रही थी थोड़ी देर बाद वह भी उठकर अपने कमरे में चला गया क्योंकि वह अपने ध्यान को इन सब चीजों से हटाना चाहता था लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था,,,, तृप्ति बेठकर टीवी देख रही थी तभी टीवी में चल रही फिल्म में हीरो हीरोइन का हाथ पकड़ कर उसे खींचकर अपनी बाहों में भर लेता है और उसके होठों पर अपनी हॉट रख चुंबन करने लगता है इस दृश्य को देखते ही तृप्ति खत्म बदन में अजीब सी हरकत होने लगी और उसे फिल्म में दिखाई दे रही हीरोइन की जगह खुद वह और हीरो की जगह संदीप की कल्पना करने लगी,,,,,,।

तृप्ति पल भर में ही उत्तेजित होने लगी भले ही वह संदीप की हरकत की वजह से उससे नाराज थी लेकिन कहीं ना कहीं उसे भी संदीप की हरकत पूरी तरह से मदहोश कर गई थी उसे दिन कोचिंग से लौटते समय जिस तरह से संदीप ने अंधेरे का फायदा उठाते उसे अपनी बाहों में भर लिया था और उसकी दोनों चूचियों पर हाथ रखकर कुर्ती के ऊपर से ही दबाया था और,,, उसकी तरफ से किसी भी प्रकार का विरोध ना होता देखकर हिम्मत करते हुए वह अपनी हथेली को उसकी कुर्ती में डालकर पेटी के अंदर से उसकी बुर को दबोच लिया था यह सब तृप्ति को पूरी तरह से मदहोश कर जाता था और जब भी उस पल का ख्याल आता था तो,,, तृप्ति को अपनी बुर पानी छोड़ती हुई महसूस होती थी और उसे समय वह पूरी तरह से मदहोश हो जाती थी और इस समय भी उसका यही हाल था,,, टीवी पर चल रहे फिल्म के रोमांटिक दृश्य को देखकर अनायास ही संदीप की कल्पना करके उसकी बुर कचोरी की तरह फूलना शुरू हो गई थी जिस पर वह अनजाने में ही अपनी सलवार पर हाथ रखकर धीरे-धीरे अपनी बुर पर दबाव बढ़ा रही थी,,, और टीवी पर चल रहा है दृश्य धीरे-धीरे अपनी मदहोशी बिखेरना शुरू कर दिया,,, लेकिन तभी फिल्म की हीरोइन को जैसे होश आया हो और वह तुरंत हीरो के हाथ में से दूर होते हुए मुस्कुराकर वहां से भाग गई पर यह दृश्य देखकर तृप्ति को भी होश आ गया और वहां अपनी हरकत पर शर्मिंदा होने लगी और धीरे से उठकर टीवी को बंद कर दी और एक गिलास ठंडा पानी पीकर अपने मन को शांत करने की कोशिश करने लगी और अपने कमरे में जाकर सो गई दूसरी तरफ सुगंधा अपने सारे वस्त्र त्याग कर पूरी तरह से नग्न अवस्था में बिस्तर पर करवटें बदलते हुए अपनी बुर को हथेली में दबा दबा कर उसका पानी निकाल रही थी,,,, आज जो कुछ भी उसने अपनी तरफ से हरकत की थी उसका प्रभाव उसके बेटे पर बहुत ही गहरा पड़ रहा था जिसका अंदाजा उसे अच्छी तरह से था वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा बहुत ही सीधा-साधा है दूसरे लड़कों की तरह बिल्कुल भी नहीं है वरना अब तक कुछ का कुछ कर दिया होता,,,,।



एक दिन रविवार को शाम के समय वह बगीचे में टहलने के लिए गया था,,, बगीचा काफी बड़ा था बगीचे के आगे भाग में थोड़ी भीड़भाड़ थी तो अंकित धीरे-धीरे बगीचे के पीछे वाले भाग में चला गया यहां पर कुछ थोड़ी शांति थी लेकिन जहां-था कुछ लोग बैठे हुए नजर आते थे और वह एक तरफ की कुर्सी पर बैठ गया और ठंडी ठंडी हवा का लुफ्त उठाने लगा,,, तभी उसके कानों में एक लड़की की आवाज आई जो आवाज एकदम जानी पहचानी थी वह तुरंत एकदम जैसे होश में आया हो और वह तुरंत अपने बगल वाली जो कि तकरीबन 5 मीटर की दूरी पर रखी हुई बेंच थी उस पर देखा तो उसकी बहन तृप्ति बैठी हुई थी और वह भी एक लड़के के साथ दोनों आपस में बातें कर रहे थे और दोनों की बातें उसे साफ सुनाई दे रही थी,,,।

संदीप मुझे बगीचे में मिलना ठीक नहीं लगता मुलाकात तो कॉलेज में हो जाती है फिर बगीचा क्यों,,?(अपनी बहन तृप्ति की बात सुनकर तो अंकित के होश उड़ गए और वह दोनों उसे देख ना ले इसलिए वह तुरंत बेंच पर से उठकर एक छोटे से घने फुल के पौधे के पीछे अपने आप को छुपा कर उन दोनों की बातों को सुनने लगा और दोनों की तरफ देखने लगा,,,)

Sugandha ki sulagati jawani



मैं भी जानता हूं तृप्ति इस तरह से बगीचा में मिलना ठीक नहीं है लेकिन क्या करूं तुमसे दो घड़ी मिलकर बातें करने का मन करता है जो की कॉलेज में मुमकिन नहीं हो पता वहां पर बातें करने का मतलब है कि तुम्हारी बदनामी हो जाएगी कोई देख लेगा तो तरह-तरह की बात बनाएगा,,,।

और यहां यहां भी तो वही होने वाला है अगर कोई नहीं देख लिया तो मेरी तो बदनामी हो जाएगी,,,

ऐसा कुछ भी नहीं होगा तृप्ति मुझ पर भरोसा रखो,,,,

तुम पर भरोसा,,,, तुम पर भरोसा करके देखी थी अगर मैं अपने आप को संभाल ली ना होती तो उसी दिन अनर्थ हो जाता,,,,।

(अपनी बहन के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर अंकित एकदम से चौंक गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कैसा अनर्थ हो जाता और वह कौन सी बात कर रही है लेकिन इतना तो वह समझ ही रहा था कि कुछ गड़बड़ वाली ही बात है इसलिए वह दोनों की तरफ देख रहा था और उसे लड़के को पहचानने की कोशिश कर रहा था लेकिन अंकित उसे पहचान नहीं पा रहा था कि वह कौन है लेकिन उसे अंदाजा हो गया था कि उसके साथ पढ़ने वाला ही कोई लड़का है,,,,)

Ankit k sath sugandha



अरे नहीं त्रिप्ति उस दिन जैसी गलती मुझसे नहीं होगी,,, उसे दिन तो अंधेरा और एकांत पाकर में बहक गया था वैसे भी तुम्हारी खूबसूरती देखकर कोई भी बहक जाए,,,,(संदीप काफी शातिर लड़का था,,, वह अच्छी तरह से जानता था की लड़कियों की तारीफ करने पर वह जल्दी पिघल जाती है और ऐसा ही हो रहा था अपनी तारीफ संदीप के मुंह से सुनकर वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी लेकिन थोड़ी ही दूरी पर छुप कर देख रहा अंकित गुस्से से आग बाबूला हुआ जा रहा था,,,,)

चलो रहने दो बेवजह तारीफ करने को,,,,

(अंकित कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी बहन बगीचे में इस तरह से किसी से मिलेगी,,,, और दूसरी तरफ मौके की नजाकत को देखते हुए संदीप पूरा फायदा उठाना चाहता था और इसलिए अपने हाथ को ऊपर की तरफ ले जाकर उसके कंधे पर रख दिया और अपनी हाथ की उंगलियों को उसकी छाती के उभार पर हल्के हल्के घूमाना शुरू कर दिया जिसका गोलापन संदीप को साथ महसूस हो रहा था और उसे बहुत मजा आ रहा था और वह बोला,,,)

अपनी कसम खाकर कहता हूं कि मैं आज तक तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की देखा नहीं हूं इसलिए तो तुम्हारे पीछे लट्टू हूं,, (इस तरह की मनमोहक बातें करके संदीप तृप्ति की चूची पर अपनी उंगलियों को घुमा रहा था जिसका एहसास तृप्ति को भी हो रहा था,,, और न जाने क्यों तृप्ति को भी संदीप की हरकत से आनंद आ रहा था वह उसकी चूची को होले होले से स्पर्श कर रहा था लेकिन उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर में हलचल हो रही थी,,,, अंकित उसे लड़के की हरकत को देखकर गुस्से से क्रोधित हुआ जा रहा था लेकिन इस समय वह कुछ भी कर सकते की स्थिति में नहीं था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह लड़का उसकी आंखों के सामने ही उसकी बहन की चूची पर हाथ को मारा था लेकिन वह कुछ कह नहीं पा रहा था क्योंकि उसकी बहन भी इसमें शामिल थी,,,,)

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चलो अब रहने दो संदीप कल कॉलेज में मुलाकात होगी अब चलते हैं बहुत देर हो गई है,,,

नहीं तृप्ति ऐसा मत करो कुछ देर और रुक जाओ,,,

नहीं मैं नहीं रुक सकती मम्मी घर पर इंतजार कर रही होगी और वैसे भी शाम ढलने वाली है,,,, और वैसे भी इस सिचुएशन पर मुझे एक गाना याद आ गया,,,

कौन सा,,,?

ढल गया दिन हो गई शाम जाने दो घर जाना है,,,

अभी-अभी तो आई हो अभी अभी जाना है,,(आगे की कड़ी को संदीप पूरा करके हंसने लगा और इसी के साथ तृप्ति भी हंसने लगी,,,, और अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई लेकिन तभी संदीप उसका हाथ पकड़ लिया और संदीप की ईस हरकत पर तृप्ति पूरी तरह से शर्मा गई और अपने अगल-बगल देखने लगी अंकित जल्दी से झाड़ी के पीछे छुप गया,,,)

यह क्या कर रहे हो संदीप छोड़ो मेरा हाथ कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,

ऐसे नहीं छोडूंगा पहले एक पप्पी दो,,,

अरे यह कैसी जिद है,,,(तृप्ति मुस्कुराते हुए बोली)

यह एक प्रेमी की प्रेमिका से जिद है क्या प्रेमिका इतना भी अपने प्रेमी की जीद को पूरी नहीं कर पाएगी,,,

(तृप्ति का हाथ अभी भी संदीप के हाथ में था तृप्ति मुस्कुरा रही थी और उसकी बात सुनकर अपने इधर-उधर देखकर धीरे से झुकी और उसके गाल पर अपने लाल-लाल हॉट रख दी और मौका देखकर संदीप जल्दी से उसके झुकाने की वजह से कुर्ती में से उसकी चूची को दबा दिया और संदीप की हरकत पर वह एकदम से चौंक गई और बोली,,,)

हाए,,,, यह क्या कर रहे हो,,,



इतना तो कर ही सकता हूं,,, (संदीप की हरकत और उसकी बात सुनकर कुछ देर तक तृप्ति उसे गुस्से से घूरने का नाटक करती रही और फिर मुस्कुरा कर अपना पर्स कंधे पर लटका कर,,, चलने लगी और संदीप की बेंच पर से उठकर खड़ा हो गया और उसके पीछे-पीछे चलने लगा यह सब देखकर अंकित का खून खौल रहा था लेकिन वह कुछ भी कर सके नहीं की स्थिति में नहीं था वह कुछ देर तक वही बैठ कर सोचने लगा क्योंकि उसे अपनी बहन से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी,,, वह अपने मन में सोच रहा था कि चलकर सब कुछ अपनी मां से बता दे या इस बारे में तृप्ति से ही बात करें लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि इस तरह की बातों का जिक्र भी उसने अभी तक अपने घर में ना तो सुना था और ना ही किया था इसलिए उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें कुछ देर बगीचे में बैठने के बाद वह भी वहां से उठकर घर की ओर चल दिया लेकिन घर पर पहुंचने पर भी वह अपनी बहन से या अपनी मां से बगीचे वाली बात का जिक्र नहीं कर पाया,,,)
 
अंकीत ने जो कुछ भी बगीचे में देखा था उसका जिक्र ना तो अपनी बहन से ही और ना ही अपनी मां से कर पाया था क्योंकि वह ऐसे माहौल में पला बढा नहीं हुआ था जहां इस तरह की बातें होती हो,,, वह हमेशा से ही सीधा-साधा लड़का था यहां तक की जवानी की दहलीज पर कदम रखने के बावजूद भी उसमें दूसरे लड़कों की तरह बदलाव बिल्कुल भी नहीं आया था,,,,,, सीधा-साधा लड़का होने के नाते वह अपनी मां और बहन के बारे में भी अच्छी तरह से जानता था वह उन दोनों से भी भली भांति परिचित था लेकिन बगीचे में अपनी बहन को दूसरे लड़के के साथ देखकर और जिस तरह की हरकत हुआ लड़का उसके साथ किया था और खुद उसकी बहन ने जाते-जाते उसे एक चुंबन दी थी यह सब देखते हुए उसके तो होश उड़ गए थे वह अपनी बहन के बारे में कभी इस तरह की बात सपने में भी नहीं सोच सकता था वह पहली बार अपने घर के सदस्य को इस तरह की हरकत करते हुए देखा था इसलिए तो उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,।



खास करके अंकित उसे लड़के की हरकत के बारे में सोचकर हैरान था और काफी गुस्से में भी था लेकिन वह अपना सारा गुस्सा पी गया था उससे भी ज्यादा गुस्सा तो उसे अपनी बहन पर आ रहा था क्योंकि उसे लड़के की ऐसी हरकत के बावजूद भी वह कुछ नहीं बोली थी बस मुस्कुरा दी थी ,,, अंकित की जगह कोई और भाई होता तो शायद इस समय उसे लड़के का मुंह तोड़ दिया होता लेकिन अंकित झगड़ा तकरार से हमेशा दूर रहता था इसलिए ऐसा होकर भी नहीं पाया था वरना कौन भाई होगा जब उसकी आंखों के सामने ही कोई लड़का उसकी बहन की चूची दबा दे और वह कुछ ना बोले,,,,,,।

घर पर पहुंचा तो सब कुछ सहज था उसकी बहन तर्प्ति भी अपने काम में मस्त थी,,,,,, अंकित को अपनी बड़ी बहन तृप्ति का यही सादगी भरा रूप सबसे ज्यादा अच्छा लगता था घर का काम करती हुई पढ़ाई करती हुई अपनी मां के काम में हाथ बटाती हुई,,,, तृप्ति के इसी रूप को इसी व्यवहार को अंकित बहुत पसंद करता था ना कि बगीचे वाले व्यवहार को क्योंकि बगीचे में जिस तरह की हरकत उसने उस लड़के के साथ की थी उसे बारे में तो वह कभी सोच भी नहीं सकता था,,, लेकिन तभी बगीचे वाली बात उसे याद आने लगी जब वह लड़का कह रहा था कि उसकी बहन की खूबसूरती में वह पूरी तरह से खो गया था इसलिए बहक गया था,,,।



बहकने शब्द से अंकित को कुछ ज्यादा समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जवान हो चुका अंकित इतना तो समझ ही रहा था कि कहीं उसकी बहन उसे लड़के के बीच शारीरिक संबंध स्थापित नहीं हो गया है कहीं उसे लड़के ने उसकी बहन की चुदाई तो नहीं कर दिया है और अगर ऐसा हो गया तो फिर वह कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाएगा,,,, फिर अपने मन में सोचा नहीं नहीं ऐसा वह नहीं कर सकती आखिरकार उसमें भी तो उसकी मां की संस्कार है वह भला कैसे बहन सकती है लेकिन फिर अपने ही सवाल का ढेर सारा जवाब उसके मन में अपने आप ही उमड रहा था वह अपने मन में यही सोच कर हैरान हुए जा रहा था की कही वाकई में उसकी बहन और उसे लड़के के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया हो तो क्या होगा यही सोचकर वह एकदम हैरान हो गया था और इस बात की गंभीरता को समझते हुए वह अपनी मां से इस बारे में बात करना चाहता था और अपनी बहन को भी समझाना चाहता था लेकिन अभी खुद उसके मन में ही शंका बनी हुई थी इसलिए वह इस तरह की बात छेड़ने से भी घबरा रहा था,,,।



लेकिन देखते ही देखते 15 दिन गुजर गए और अंकित ने बगीचे वाली बात का जिक्र तक नहीं किया वहीं दूसरी तरफ सुगंधा धीरे-धीरे अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने का सारा जुगाड़ बनाकर उसे पर अमल करने लगी और उसे इस बात का एहसास भी होने लगा कि उसका बेटा भी उसे देखने की कोशिश करता था उसकी तरफ देखकर आकर्षित होता था,,, लेकिन इस तरह की देखा ताकि से आगे अभी तक कुछ बात बन नहीं पाई थी,,,। और इस बात का मलाल सुगंध को भी रहता था लेकिन इस खेल में भी उसे बहुत मजा आ रहा था रोज ही वह अपनी बेटी को अपनी तरफ आकर्षित करने के चक्कर में अपनी बुर की थी कर लेती थी और फिर रात को अपने बेटे के बारे में कल्पना करके कभी उंगली तो कभी मुली गाजर और खीरा डालकर अपनी जवानी की आदत को बुझाने की कोशिश करती थी लेकिन यह आगे सी थी कि जितना बुझाने की कोशिश करती थी उतनी ज्यादा और भडक जाती थी,,,।

ऐसे ही एक दिन अंकित का दोस्त सूरज बातें करते हुए चाय की दुकान पर बैठा हुआ था की तभी वहां से अंकित के पड़ोस वाली लड़की सुमन हाथ किताब ली अपने घर की तरफ जाने लगी जिसे देखकर सूरज गर्म आहे भरता हुआ बोला,,,।



यार अंकित तेरी पड़ोस वाली लड़की तो देख कितनी जवान हो चुकी है गांड कितनी मस्त हो गई है,,,।

(सूरज की बात पर अनजाने में ही अंकित ने भी अपनी नजर उठा कर उसे लड़की की तरह देख लिया जो कि अपने घर की तरफ चली जा रही थी और उसकी पीठ और नितंब अंकित की तरफ ही थे अनजाने में ही अंकित का ध्यान उसकी गोल-गोल गांड पर चली गई थी जो कि वाकई में कसी हुई सलवार में कुछ ज्यादा ही उभार लिए हुए नजर आ रही थी,,,, लेकिन जब उसे स्थिति का एहसास हुआ वह सूरज पर नाराज होते हुए बोला,,,)

यार सूरज इस तरह की बातें मत किया कर यह अपनी सुषमा आंटी है ना उनकी लड़की है समझा और उसे भी मैं अपनी बहन की नजरिए से देखता हूं,,,

अंकित तु सच में एकदम पागल है हर लड़की को अपनी बहन की नजर से देखेगा तो शादी किससे करेगा और अगर सच में हर लड़की को अपनी बहन समझेगा तो सुहागरात के दिन चुदाई किसकी करेगा,,, सुहागरात वाली रात को ऐसा बोलेगा,,,।

दीदी जरा सा अपनी कमर उठाओ ना तुम्हारी चड्डी उतारना है,,,(और इतना कहकर वह हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर अंकित को बहुत गुस्सा आया लेकिन न जाने क्यों चड्डी उतारने वाली बात पर उसके बदन में अजीब सी हलचल आने लगी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच कुछ ज्यादा ही हलचल महसूस होने लगी,,,, क्योंकि सूरज की बात सुनते ही उसके मन में कल्पना का चित्र उभरने लगा था कि वाकई में जैसा उसका दोस्त कह रहा है वैसा ही वह उसके साथ उसकी चड्डी उतारने के लिए कह रहा है,,, सूरज की बात तो उसे उत्तेजित कर देने वाली लगी थी लेकिन फिर भी वह नाराजगी दर्शाते हुए बोला,,,।)

सच में सूरज तू बहुत बिगड़ गया है तू भी रौनक जैसा हो गया है,,,



मैं रोनक जैसा नहीं हो गया हूं अंकित सारे लड़के रौनक जैसे हैं और वैसे होते ही हैं क्योंकि यह तो प्राकृतिक है,,, लड़कियों और औरतों को देखकर हम जैसे लड़कियां आकर्षित नहीं होंगे तो कौन होगा,,,, लेकिन रौनक मैं तुझे एक बात बताना चाहता हूं तो शायद अपनी पड़ोस वाली लड़की के बारे में कुछ जानता नहीं है इसलिए उसे अपनी बड़ी बहन का दर्जा देता है लेकिन क्या वह तुझे अपने भाई का दर्जा देती है कभी नहीं देती होगी क्योंकि उसके बारे में तु कुछ जानता ही नहीं है,,,,।

चल अब रहने दे सूरज किसी को बदनाम करने से कोई फायदा नहीं है,,,

मैं कहां बदनाम कर रहा हूं वह तो खुद बदनाम है तू नहीं जानता कि उसके कितने लड़कों के साथ चक्कर हैं और वह न जाने कितने लड़कों के साथ सो भी चुकी है इसलिए देखता नहीं है उसकी गांड कितनी बड़ी-बड़ी है,,, उसे उम्र की लड़कियों को देखा उसे देख,,,(एक पल के लिए तो सूरज के मन में ख्याल आया था कि वह सीधे-सीधे कह दे कि तेरी बहन की गांड देखा और उसकी गांड देखा लेकिन ऐसा कहने में बात भी कर सकती थी इसलिए वह अंकित की बहन का उदाहरण नहीं दिया लेकिन अपनी बात को समझने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन सीधा-साधा अंकित उसकी बात समझ नहीं पा रहा था तो आश्चर्य से सूरज की तरफ देख रहा था सूरज उसके मन में उठ रहे सवाल को शायद उसके चेहरे पर पढ़ लिया था इसलिए वह बोला)



देख अंकित जो लड़कियां ज्यादा चुडक्कड़ होती है उनकी गांड सबसे पहले बड़ी हो जाती है जैसा कि तेरी पड़ोस वाली लड़की की गांड कैसी बड़ी-बड़ी है वह न जाने कितने लड़कों से चुदवा चुकी है,,,, अगर मेरी बात करते चाहिए यकीन नहीं होता तो दूसरे लड़कों से पूछ ले सब लोग जानते हैं एक सिर्फ तू ही नहीं जानता,,,,।

(सूरज की बात सुनकर अंकित एकदम से हैरान हो गया था क्योंकि वह अपने पड़ोस वाली सुषमा आंटी की लड़की को सीधी साधी ही समझता था लेकिन सूरज के मुंह से उसके बारे में हकीकत जानकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई थी लेकिन चुदाई वाली बातें से उसके तन-बड़े उत्तेजना की लहर भी उठ रही थी और पल भर में उसे अपनी बहन का ख्याल आ गया क्योंकि वह भी अपनी बहन को बहुत सीधी-सादी समझता था लेकिन बगीचे में अपनी बहन को दूसरे लड़के के साथ देखकर उसका यह भरम धीरे-धीरे टूट रहा था और आज सुमन के बारे में जान कर दो उसे अपने मन में डर लगने लगा था कि कहीं उसकी बहन तृप्ति भी तो नहीं सुमन की तरह लड़कों से चुदवाती हो,,,, फिर अपने ही सवाल का जवाब अपने मन में खुद को देते हुए नहीं-नहीं ऐसा नहीं हो सकता तृप्ति सुमन की तरह नहीं हो सकती,,,,)

अरे क्या सोच रहा है मैं सच कह रहा हूं और सच कहूं तो अपने साथ के जितने लड़के हैं सब कोई,,, उसके पीछे पड़े हुए हैं और अगर वह तैयार हो तो सब छोड़ना भी चाहते हैं लेकिन किसी का नंबर ही नहीं लग रहा है वह बाहर बाहर ही सब कुछ करवा लेती है और तुझे तो इन सब के बारे में अनुभव ही नहीं है नहीं तो खुद तू अपनी नजर से पहचान लेता उसकी छाती के संतरे कितने बड़े हो गए हैं उसकी गांड कितनी बड़ी हो गई है,,,।



यह सब बदलाव,,,(अंकित उत्सुकता और आश्चर्य जताते हुए दबे स्वर में बोला,,,)

हां अंकित यह सब बदलाव लड़कियों के शरीर में आ ही जाते हैं जब मरद का हाथ लगता है लड़कियों की चूची पर हाथ लगाते ही उन्हें दबाते ही उनका आकार बढ़ना शुरू हो जाता है और गांड भी फैलने लगती है,,,,,(इतना वह कहीं रहा था कि तभी उनका एक दोस्त और भी उनके पास आया जिसे देखकर सूरज उसे बैठने के लिए बोला और अपनी बात को आगे बढ़ते हुए उस दोस्त से मुखातिब होता हुआ बोला,,) यार तू जरा बता इसे सुमन के बारे में,,,।

अरे उसके बारे में क्या बताना उसके बारे में सब कोई जानता है बस यही पड़ोस में रहकर कुछ नहीं जानता,,

और यह महानुभाव उसे बड़ी दीदी समझते हैं उसे बड़ी दीदी कहकर बुलाते हैं,,,,(सूरज की बात सुनते ही सूरज और उसका दोस्त दोनों तरह के लगाकर हंसने लगे और सूरज का दोस्त हंसते हुए बोला)



बहुत बड़ी दीदी बड़ी दीदी कहता है ना किसी दिन देखना तेरे पर अगर फिदा हो गई तो तेरे लिए अपनी टांग खोल देगी फिर चाटते रहना अपनी बड़ी दीदी की बुर,,,,।

(अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह दोनों की बातों को सुनकर कैसा बर्ताव करें उसके चेहरे के भाव बदल तो रहे थे उसे आश्चर्य हो रहा था क्योंकि आज तक वह सुमन के बारे में अनजान बना था और जिस तरह से उसके दोस्त ने दोनों टांगें फैला कर बुर चाटने वाली बात कहा था उसे सुनकर उसका लंड खड़ा हो गया था,,,, कुछ देर तक तीनों वहीं बैठकर बातें करते रहे और फिर सूरज जाते-जाते बोला,,,)

यार अंकित तेरी बात बन सकती है तू अगर चाहे तो सुमन तुझे जरूर कुछ करने देगी,,,।

धत् यार तू भी,,,,

अरे सच कह रहा हूं बाकी तेरी मर्जी,,,(इतना कहकर सूरज वहां से चला गया और अंकित कुछ देर तक वहीं बैठकर सुमन के बारे में सोचता रहा क्योंकि आज तक उसने सुमन के अंदर कोई इस तरह की हरकत देख ही नहीं था जिसे देखकर सुमन के बारे में उसे कोई शक हो लेकिन उसके दोस्त भी उसे झूठ नहीं बोल सकते थे इसलिए काफी सोच विचार करने के बाद वहां धीरे से वहां से उठाओ और अपने घर की तरफ चल दिया धीरे-धीरे शाम ढल चुकी थी और अंधेरा अपनी चादर बिछाने के लिए उतारू हो रहा था,,, अंकित अपने घर में पहुंच कर सबसे पहले तृप्ति के ऊपर नजर घुमा कर देखने लगा वह अपने दोस्त की बात को अपनी बहन पर आजमा रहा था वह कर नजरों से अपनी बहन की छाती की गोली को और उसके नितंबों के आकार की तरफ देखकर अंदाजा लगा रहा था कि कहीं उसकी बहन भी तो नहीं सुमन की तरह निकल गई लेकिन ,,, लेकिन अपनी बहन की छाती और अपनी बहन की गांड की तरफ देखकर उसे थोड़ा संतोष हुआ कि उसकी बहन की छाती सुमन की तरह बड़ी-बड़ी नहीं थी और गांड का आकार भी एकदम सीमित था भले ही वह थोड़ा उभरा हुआ था लेकिन सुमन की तरह चौड़ा नहीं था इसलिए उसे इस बात का एहसास होने लगा कि अभी तक उसकी बहन में लंड नहीं लिया और जैसे ही अपने मन में अपनी बहन के लिए लंड लेने वाली बात का ख्याल आया,,, तुरंत ही उसका खुद का लंड खड़ा हो गया,,,, जैसे तैसे करके वह अपनी बहन के ऊपर से अपना ख्याल दूसरी तरफ घूमने की कोशिश करने लगा तो वैसे ही उसे खाना बनाती हुई अपनी मां नजर आने लगी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूची देखकर वह उसे पर शक करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था क्योंकि वह तो शादीशुदा और उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी थी जहां पर उसकी खूबसूरती चार चांद बन गई थी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी-बड़ी चूची देखकर उसे इस बात का अंदाजा तो लगी गया था कि उसकी मां दो बच्चों की मां हो चुकी थी और इसके लिए न जाने कितनी बार चुदवा चुकी थी,,, अपनी मां के बारे में इस तरह के शब्द अपने जेहन में आते ही वह पल भर के लिए शर्मिंदा हो गया,,, और अपने ध्यान को दूसरी तरफ बांटने की कोशिश करने लगा,,,,।)



दूसरे दिन रविवार का दिन था और दोपहर के समय सुगंधा एक कटोरी आम का अचार भरकर अंकित को थमाते हुए बोली,,,।

ले अंकित इसे पड़ोस वाली आंटी के वहां दे आना तो,,,

अरे यह क्या है,,,(हाथ में कटोरी को पकड़ते हुए)

आम का अचार है और क्या है दिखाई नहीं दे रहा है क्या,,,!

अरे मुझे दिखाई तो दे रहा है लेकिन इतना सारा उन्हें देने की क्या जरूरत है,,,

अरे बुद्धू सुषमा ने मुझे पहले से ही आचार देने के लिए बोल रखी थी इसलिए दे रही हूं,,,, अब जा जल्दी से पहुंचा दे,,,,

ठीक है मम्मी,,,,(इतना कहकर अंकित कटोरी लेकर घर से बाहर निकल गया रविवार का दिन होने की वजह से तृप्ति भी घर पर थी,,, वैसे तो इस समय वह कोचिंग के लिए घर से बाहर चली जाती थी लेकिन आज वह घर पर ही थी इसीलिए सुगंधा भी मन महसूस कर रह गई थी वरना अभी तक तो वह अपने बेटे को अपनी जवानी के जलवे दिखा दी होती,,,।



अंकित हाथ में अचार की कटोरी लेकर दरवाजे पर खड़ा था और दरवाजे की कड़ी बजाकर आवाज दे रहा था,,,, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही थी तो वह धीरे से दरवाजे पर हाथ रखा तो दरवाजा खुद ब खुद खुल गया,,,, वह धीरे से घर में प्रवेश किया वह इधर-उधर देखने लगा लेकिन कोई नजर नहीं आ रहा था तो वह देखते ही देखते सीधा आगे की तरफ बढ़ने लगा और देखते ही देखते वहां घर के अंतिम कमरे की तरफ पहुंच गया और अंतिम कमरे की तरफ पहुंचते ही जैसे ही कमरे की तरफ नजर डाला तो अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए,,, वैसे भी अगर उसकी जगह कोई और होता तो शायद उसके भी होश उड़ जाते क्योंकि अंदर का नजारा ही इतना मदहोश कर देने वाला था कि खुद संस्कारी अंकित का भी इमान डोलने लगा,,,,।

दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और वह दरवाजे पर दस्तक देने ही वाला था कि उसकी नजर कैमरे के अंदर चली गई थी और अंदर का नजारा देखकर उसके तो होश उड़ गए थे क्योंकि अंदर कमरे में सुमन जो की गीले बालों से लग रहा था कि अभी-अभी नहा कर आई थी और उसके बदन पर केवल एक टावर थी जो कि वह टॉवल भी वह इस तरह से पकड़े हुए थे कि टॉवल उसके आधे नितंबों को ही ढंक पा रहा था,,,, और सुमन की खूबसूरत गोरी गोरी गांड और उसके बीच वाली फांक एकदम साफ नजर आ रही थी,,, और ऐसे हालात में सुमन की खूबसूरत गांड आधे चांद की तरह नजर आ रही थी,,, जिसे देखकर अंकित तन बदन में चार बोतलों का नशा चढ़ना शुरू हो गया था,,।



वैसे भी अंकित के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी खूबसूरत लड़की को अर्धनग्न अवस्था में देख रहा था और वह अलमारी में से कुछ ढूंढ रही थी और अंकित को समझते देर नहीं लगी कि वह अपने पहनने के लिए कपड़े ढूंढ रही थी और थोड़ी देर में उसे ड्राोवर में से,,, कोई कपड़ा मिल गया लेकिन दरवाजे के पीछे खड़ा अंकित समझ नहीं पा रहा था कि उसे क्या मिला है और वह थोड़ी ही देर में जब पीछे की तरफ हाथ लाकर उसका हुक लगाने लगी तब उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह ब्रा पहन रही थी और दोनों हाथ का उपयोग करने की वजह से उसकी कमर पर लिपटा हुआ टावल एकदम से नीचे उसके कदमों में जाकर गिर गया,,, और वह पूरी तरह से नंगी हो गई और उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके नंगे बदन को देखकर अंकित का बिना कहीं उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया और अपनी औकात में आ गया अंकित का तो इस नजारे को देखकर उसकी आंखें फटी जा रही थी उसका दिमाग काम करना बंद हो गया था पहली बार जिंदगी में वहां किसी खूबसूरत लड़की को बिना कपड़ों के देख रहा था उसके अंगों को देख रहा था उसकी मखमली चिकनी पीठ को देख रहा था और इसके नितंबों की गोली को देख रहा था जो कि वाकई में बेहद खूबसूरत उभार लिए हुए थे,,,।

शायद इस बारे में कपड़े पहने होने की वजह से अंकित सुमन की खूबसूरत नितंबों के बारे में कल्पना भी नहीं कर सकता था,,, लेकिन उसे ऐसा लग रहा था कि शायद जैसे उसकी कल्पना से भी ज्यादा खूबसूरत नजारा वह देख रहा था,,,। उत्तेजना के मारे अंकित का गला सूख रहा था वह गहरी गहरी सांस ले रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसके हाथ से अचार की कटोरी छूट न जाए और फिर कहीं इस तरह के खूबसूरत नजारे पर पर्दा ना पड़ जाए,,, अंदर नहा कर कपड़े पहन रही सुमन का ध्यान दरवाजे पर बिल्कुल भी नहीं था उसका दरवाजा हल्का सा खुला हुआ ही था जो कि अंकित से आने से पहले ही वह बाथरुम से नहा कर अपने कमरे में गई थी,,,।





देखते ही देखते वह अपनी ब्रा का हक बंद करके उसे पहन कर अपनी नारंगियों को उसके कप में ढंक ली थी लेकिन अफसोस की बात यह थी कि उसकी नंगी संतरों को अंकित अपनी आंखों से देख नहीं पाया था,,, उसके अंको की हरकत की वजह से उसके गोल-गोल नितंबो में अजीब सी थिरकन हो रही थी जिसे देखकर अंकित का लंड अंगड़ाई ले रहा था,,, अंकित के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी खूबसूरत लड़की को नंगी और इतने करीब से देख रहा था इसलिए तो उसकी हालत एकदम से खराब हो गई थी,,,, ब्रा को पहनने के बाद वह वापस ड्रोवर को खोलकर उसमें से फिर से कपड़ा ढूंढने लगी लेकिन इस बार अंकित को अंदाजा हो गया था कि वह क्या ढूंढ रही है पर थोड़ी ही देर में वहां लाल रंग की चड्डी निकाल कर उसे अपने ऊपर करके उसके गोल बड़े छेद में डाली और फिर वापस दूसरी काम को भी उसी तरह से दूसरे गोले में डाल दी और दोनों हाथों से पकड़ कर चड्डी को ऊपर की तरफ खींचने लगी एक औरत का या खूबसूरत लड़की का कपड़ा पहनना कपड़ा उतारना भी मर्दों के लिए बेहद हसीन नजारा होता है जिसे देखने के लिए उनकी आंखें हमेशा ललाईत रहती है लेकिन ऐसा खूबसूरत नजारा और दूसरी औरतों को कपड़े बदलते हुए देख पाना बहुत कम लोगों की किस्मत में होता है और इस समय किस्मत का धनी था अंकित जो कि अनजाने में ही इस तरह के खूबसूरत दृश्य को देखकर उत्तेजित हो गया था,,, जैसे ही वह लाल रंग की चड्डी को कमर पर चढ़ाकर अपनी गोल-गोल गांड को उसे छोटी सी चड्डी में छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी वैसे ही अंकित को भी इस बात का एहसास हुआ कि वह गलत जगह पर खड़ा था,,,। अगर ऐसे में उसकी नजर उस पर पड़ जाती तो लेने के देने पड़ जाते ,,, इसलिए वह धीरे से अपने कदम पीछे लिया और वापस दरवाजे के पास पहुंचकर वहां पर दस्तक देने लगा मानो के जैसे अभी-अभी आया हो,,,, अंकित को अपने कदम पीछे लेता देख कर सुमन मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि उसकी उपस्थिति को वह अलमारी में लगे शीशे में देख चुकी थी जिस बात से अंकित पूरी तरह से अनजान था और जानबूझकर सुमन अंकित को देखकर ही अपनी टॉवल को नीचे गिर कर नंगी हो गई थी क्योंकि वह अंकित को अपनी नंगी गांड अपना नंगा जिस्म दिखाना चाहती थी क्योंकि उसे अपनी जवानी पर पूरा विश्वास था कि उसके नंगे बदन को देखकर अंकित जरूर कुछ ना कुछ करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ,,, लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि वह अंकित को अपनी जवानी के रस में पूरी तरह से डूबा कर ही रहेगी,,,,।



सुमन जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन ली और दरवाजे के पास आ गई जहां पर वह अंकित को देखकर मुस्कुराने लगी और बोली,,,।

अंकित क्या हुआ कुछ काम था क्या,,,?

कककककक,,, कुछ नहीं,,,(सुमन की खूबसूरत चेहरे की तरफ एक टक देखते हुए अंकित बोला) मम्मी ने आचार भिजवाई थी वह लेकर आया हूं,,,(इतना कहकर उसकी नजर अपने आप ही सुमन की छतियो पर चली गई जिसका अंदाजा सुमन को भी हो गया और वह मन ही मन मुस्कुराने लगी,,,, लेकिन तभी उसकी नजर अंकित के पेंट की तरफ गई तो उसमे बना तंबू देखकर उसके तो होश उड़ गए क्योंकि सुमन अब तक तीन-चार लड़कों के साथ संबंध बन चुकी थी और सबके लंड के बारे में अच्छी तरह से जानती थी लेकिन अंकित के पेट में बना तंबू देख कर उसके होश उड़ गए थे क्योंकि उसे अंदाजा लग गया था कि अंकित के पेंट में मामूली लंड नहीं था,,, वासना से भरी हुई सुमन की आंखों में वासना साफ नजर आ रहा था उसका मन तो कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़ाकर अंकित के पेट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ ले और फिर उसे अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बुझाने लेकिन एकाएक ऐसा करना उचित नहीं था वह भी धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी इसलिए उससे बोली,,,)



ठीक है अंकित इसे लेकर किचन में आ जाओ,,,(इतना कहकर वहां आगे आगे अपनी गोल-गोल गांड को कुछ ज्यादा ही मटकाते हुए चलने लगी ताकि अंकित का ध्यान उसकी गांड पर रहे और ऐसा ही हुआ उसकी गोल-गोल गांड पर नजर पड़ते हैं अंकित का कलेजा सूखने लगा वह उत्तेजना के सागर में डूबने लगा,,, देखते ही देखते सुमन किचन में आ गई थी और अंकित ठीक उसके पीछे खड़ा था सुमन का दिमाग ऐसी हालत में कुछ ज्यादा ही काम करता था और वह अपने ठीक पीछे खड़े अंकित की तरफ ध्यान न देकर एकदम से नीचे झुकी और किचन के नीचे का ड्रोवर खोलने लगी और जैसे ही वह नीचे झुकी उसकी गोल-गोल गांड सीधे अंकित के खड़े लंड पर जाकर टकरा गई और जैसे ही सुमन को अपनी गांड के बीचो-बीच अंकित का लंड महसूस हुआ वह एकदम से मदहोश हो गई और पल भर में ही समझ गई कि अगर अंकित का लंड उसकी बुर में घुसेगा तो क्या हालत करेगा,,, और दूसरी तरफ,,, अंकित का भी बुरा हाल था उसके झुकने पर जिस तरह से पेट में तना हुआ उसका लंड सुमन की गांड से जाकर टकराया था उसके पूरे बदन में हलचल सी मच गई थी ,,, उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ गई थी,,,, पल भर में ही उसे लगा कि जैसे कि मानो उसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो गया हो,, वह पूरी तरह से मदहोश हो गया था एक हाथ में उसके कटोरी थी इसलिए वह एक ही हाथ को उसकी गोल-गोल कांड पर रख पाया था वरना वह दोनों हाथों से उसकी गांड की दोनों फांको को थाम लेता,,,, लेकिन अंकित की यह हरकत सुमन के बदले में भी हलचल मचा गई थी उसकी बुर से मदन रस अमृत बूंद बनकर उसकी पतली दरार से बहने लगी थी,,, वह इस हालत में ज्यादा देर तक झुकी नहीं रह सकती थी इसलिए मन मसोस कर खड़ी हो गई और बिना कुछ बोले अंकित की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और फिर उसके हाथ से अचार की कटोरी लेकर ड्रोवर में रखने लगी,,, अंकित के हालात का सुमन को अंदाजा हो चुका था सुमन समझ गई किसी उसकी जवानी का तूफान अंकित को रौंद कर रख दिया है लेकिन मुझसे ज्यादा कुछ कर पाती से पहले ही उसके कानों में उसकी मां की आवाज आने लगी जिसे सुनकर वह भी एकदम सकते में आ गई अंकित भी धीरे से किचन से बाहर आ गया और फिर,,, सुषमा को देखकर नमस्ते करते हुए बोला,,,।)



आंटी मा ने अचार भेजा है,,,

सच में तुम अचार लाए हो अंकित,,,

हां मम्मी अंकित अचार लेकर आया था मैं किचन में रखकर आ रही हूं,,,

ओहहहह बेटा तुम्हारी मां कितनी अच्छी है उसे धन्यवाद बोलना,,,

ठीक है आंटी,,,(और इतना कहकर अंकित कमरे से बाहर निकल गया)
 
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