Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 9 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

सुबह-सुबह जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर सुगंधा काफी रोमांचित थी उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह का हादसा उसके साथ हो जाएगा,,,, लेकिन जो कुछ भी हुआ उसके चलते उसके मन में एक अजीब सी युक्ति ने जन्म लिया जिस पर वह जल्द से जल्द अमल करना चाहती थी और वह भी अपने ही बेटे पर वह अच्छी तरह से जानती थी कि जब उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर दूध वाले का मन डोल गया तो उसके बेटे का क्यों नहीं डोलेगा,,, दूध वाला तो अधेड़ उम्र का था और उसका बेटा तो अभी जवानी की दहलीज पर कदम रखा था और उसके मन में और तो के अंगों को लेकर उत्सुकता और रोमांच दोनों होगा इसलिए उसे पूरा विश्वास था कि उसकी नंगी चूचियों को देखकर उसके बेटे की हालत जरूर खराब हो जाएगी,,,, जहां तक उसे ख्याल था उसके बेटे ने आज तक उसे अर्धनग्न अवस्था में कभी नहीं देखा था और वैसे भी एक मां और एक शिक्षिका होने के नाते वह अपनी मर्यादा को अच्छी तरह से जानती थी,,,, जैसे ही उसका बेटा जवान होने लगा वैसे ही वह अपने बेटे के सामने अपने अंगों को जहां तक हो सकता था छुपाने की कोशिश करने लगी थी लेकिन अब उसे लगने लगा था कि समय आ गया है जब उसके बेटे को उसके खूबसूरत अंगों का दर्शन कराना चाहिए,,,।



और यही सोचकर उसके तन-बाद में अजीब सी हलचल हो रही थी दूध वाले के जाने के बाद वह पतीला लेकर रसोई घर में रख दी थी और वही खड़ी-खड़ी जो कुछ देर पहले हुआ था उसके बारे में सोच रही थी उसे तो अंदाजा भी नहीं था कि झुकाने की वजह से उसकी चूचियां एकदम साफ दूध वाले को नजर आ रही होगी वह तो हल्की नींद में ही थी,,, उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि वह गाऊन के अंदर कुछ पहनी भी है कि नहीं,,,,,,, वह रसोई घर में खड़ी-खड़ी रात की घटना के बारे में सोचने लगी जब वह टीवी बंद करके अपने कमरे में सोने के लिए आई थी,,,, कमरे में आते ही वह बिस्तर पर लेटने से पहले अपने सारे वस्त्र उतार कर एकदम नंगी हो गई थी और बिस्तर पर लेट कर अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपनी हथेली को अपनी गरम बुर पर रखकर उसे जोर-जोर से रगड़ रही थी और अपने मन में अपने बेटे का ख्याल कर रही थी,,, एक बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था कि जब भी वह अपने बेटे का ख्याल अपने मन में लाती थी और अपने अंगों से खेलने की कोशिश करती थी उसे कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का एहसास होता था और मजा भी बहुत आता था,,,, और वह अपनी दोनों टांगें फैलाए अपनी गुलाबी बुर से खेल रही थी और अपने बेटे की कल्पना करते हुए अपने मन में यह सोच रही थी कि उसका बेटा उसकी दोनों टांगों के बीच झुक कर उसकी बुर को अपनी होठों से स्पर्श करके अपनी जीभ से चाट रहा है यह ख्याल उसके मन में आते ही वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी,,, और मदहोशी के आलम में अपनी दो उंगलियां अपनी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए अपने मन में कल्पना कर रही थी कि उसका बेटा उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर पर लपेटकर उसकी बुर में अपना लंड डालकर उसे चोद रहा है यह एहसास यह कल्पना उसे पूरी तरह से मदहोश कर दिया था और वह बहुत ही जल्द झड़ गई थी,,, और फिर संतुष्टि का एहसास लिए नरम नरम तकीए को अपनी बाहों में समेटे वह कब नींद की आगोश में चली गई उसे भी पता नहीं चला,,,,।

Sugandha ki kalpna Ankit ko lekar



रात वाली घटना के बारे में याद करके उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह नग्न अवस्था में ही सो गई थी और सुबह दरवाजे पर दूध वाले की दस्तक की आवाज सुनकर जल्दबाजी में केवल गाउन पहनकर दूध लेने के लिए आ गई थी और उसकी मदमस्त चूचियों को देखकर दूध वाला पागल हो गया यह सब सोचने के बाद उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस होने लगी,,, उसे अपनी सांसे भी ऊपर नीचे होती हुई महसूस होने लगी वह दीवार पर टकली घड़ी की तरफ देखी तो 6:00 बजने में 20 मिनट की देरी थी इसलिए वह अपना ध्यान भर के काम में लगाकर झाड़ू लगाना शुरू कर दी और अपने मन में सोचने लगी कि किस तरह से अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करेगी हालांकि उसे दूध वाले से इशारा तो मिल ही गया था बस उसे पर अमल करने की देरी थी लेकिन अमल करने में भी इस घबराहट हो रही थी,,, मन में भले ही बड़े सहज रूप से इरादा बना ली थी कि वह अपने बेटे के सामने इस तरह से पैसा आएगी कि उसके बेटे को उसकी नंगी चूचियों का दर्शन हो जाएगा लेकिन हकीकत में उसे बहुत घबराहट हो रही थी अपने बेटे के सामने इस तरह की हरकत करने मे उसे शर्म भी महसूस हो रही थी,,,, लेकिन घर की सफाई करते हुए वह अपना इरादा बना ली थी वह अपने मन को पक्का कर रही थी कि आज वह किसी भी तरह से अपने बेटे को अपनी जवानी के दर्शन करा कर रहेगी,,,,

Sugandha ki kalpna



यही सब सोचते सोचते वह घर की सफाई कर ली थी पूरे घर में झाड़ू लगा लेने के बाद,,,,,,, वह दीवार के सहारे बैठ गई और अपने मन में सोचने लगी कि वह अपने बेटे के सामने जाए तो जाए कैसे और यह सोचती हो बार-बार अपने गांव के अंदर देख ले रही थी जिसमें से उसे खुद अपनी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और उसकी छुआरे जैसी निप्पल एकदम कैडबरी चॉकलेट की तरह कड़क नजर आ रही थी,,,, यह सब देखकर उसकी खुद की हालत खराब होती नजर आ रही थी घड़ी पर नजर गई तो 6:00 बज गए थे,,,, उसके बच्चों के उठने का समय हो गया था लेकिन फिर भी 15 मिनट जैसा समय रह गया था वह अपने मन में सोचने लगी की यही 15 मिनट में जो कुछ भी करना है उसे करना है यही सोच कर वह अपनी जगह से खड़ी हुई और अपने बेटे के कमरे के पास जाकर कुछ देर तक वहीं खड़ी होकर सोचने लगी आखिरकार वह एक मां थी और भला कैसे अपने ही बेटे को अपनी ही नंगी चूचियों के दर्शन जानबूझकर करा सकती थी,,, एक औरत होने के नाते औरत किस क्रियाकलाप को अच्छी तरह से जानती थी उसे इस बात का भी एहसास था कि इस क्रियाकलाप में कुछ भी उंच नीच हो सकती थी,,, लेकिन वह मन बना ली थी इसलिए दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही वह अपना हाथ उठाकर दरवाजे पर रखी तो दरवाजा खुद ब खुद खुल गया,,,,,।

Kalpna me ma bete



कभी कभार अंकित अपने कमरे के दरवाजों को खुला ही छोड़ देता था वैसे भी छुपाने लायक उसके पास कुछ भी नहीं था,,, और अपने बेटे के कमरे के खुले हुए दरवाजे को अपनी किस्मत का द्वार समझ कर वह प्रसन्नता के साथ अंदर की तरफ देखने लगी उसका बेटा एकदम गहरी नींद में सो रहा था,,,, अंदर डिम लाइट जल रहा था इसके लिए उसकी रोशनी बहुत कम थी जिसमें उसे कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था वह धीरे से कमरे में प्रवेश की और हल्के से दरवाजे को बंद कर दी सुबह का समय हो चुका था इसलिए उसके पास एक बहाना था उसे जगाने का और कैमरा साफ करने का और वह अपने साथ में झाड़ू भी लेकर आई थी इसलिए वह ट्यूबलाइट की स्विच को ऑन कर दी और पूरे कमरे में दूधिया रोशनी फैल गई और अपने बेटे के बिस्तर की तरफ देखी तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न था उसका बेटा पीठ के बल लेटा हुआ था और चादर उसकी छाती हो तो खींची हुई थी लेकिन इस बीच उसकी दोनों टांगों के बीच का हिस्सा तंबू की शक्ल में ऊपर की तरफ उठा हुआ था जिसे देखकर सुगंधा की हालत खराब हो गई उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया क्योंकि जिस तरह का तंबू चादर में बना हुआ था उसे देखकर सुगंधा को एहसास हो गया था कि उसके बेटे का मर्दाना अंग कुछ ज्यादा ही ताकतवर है,,,,। ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा था वह आई तो थी अपनी जवानी का जलवा भी खेलने लेकिन अपने बेटे की जवानी देखकर उसका खुद का पानी छूट रहा था उसकी बुर पिघल रही थी,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह अभी भी अपने बेटे के बिस्तर से तीन-चार फीट की दूरी पर थी लेकिन फिर भी सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,, वह अपने बेटे के चेहरे की तरफ देखी जो की बहुत ही मासूम लग रहा था और वैसे भी उसका बेटा बहुत मासूम था लेकिन सोते समय वह और भी ज्यादा मासूम नजर आता था वह धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे बढ़ने लगी और अपने बेटे के बिस्तर के बेहद करीब जाकर खड़ी हो गई और बड़े ध्यान से अपने बेटे की दोनों टांगों के बीच चादर में बने तंबू को देखने लगी उसके सांस लेने के साथ-साथ उसके तंबू में हरकत होती थी जो की हल्का-हल्का हिल रहा था और उसे देखकर ना जाने क्यों सुगंधा के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आना शुरू हो गया था उसका मन तो कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के लंड को पकड़ ले लेकिन उसकी हिम्मत गवाही नहीं दे रही थी हालांकि उसकी सांसों पर नीचे हो रही थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर तोड़ने लगी थी वह गाऊन के अंदर पूरी तरह से नंगी थी,,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि अगर उसके बेटे की तरफ से दूसरे मर्दों की तरह प्रतिक्रिया मिली होती या उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित होता तो इस समय वह बेझिझक होकर अपने बेटे के ऊपर से चादर हटाकर उसके खड़े लंड पर अपनी गुलाबी बुर रख देती और उसके लंड पर कूदना शुरू कर देती,,, क्योंकि वह जानती थी कि उसके और उसके बेटे के बीच केवल शर्म की ही दूरी थी,,,, और इस दूरी को सुगंधा पूरी तरह से कम कर देना चाहती थी लेकिन कैसे उसे समझ में नहीं आ रहा था,,,,।

Ankit or sugandha



सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था उत्तेजना के मरी उसकी बुर फुल पिचक रही थी बार-बार उसका हाथ अपने आप ही उसकी बुर पर चला जा रहा था आई तो थी वह अपने बेटे को अपनी चूची दिखाने लेकिन अपने बेटे की मर्दाना अंग की झलक पाकर ही उसकी बुर की हालत खराब होती नजर आ रही थी,,,, बरसों गुजर गए थे उसकी बुर में लंड प्रवेश नहीं कर पाया था अपने पति के देहांत के बाद तो वह लंड की गर्मी को अपनी बुर में महसूस करना ही भूल गई थी,,, इसलिए तो उसकी बुर तड़प रही थी एक मोटे तगड़े लंड को लेने के लिए,,,, सुगंधा का मन व्याकुल हो रहा था और अंदर ही अंदर वह तड़प रही थी वह अपने बेटे के लंड को स्पर्श करना चाहती थी पकड़ना चाहती थी देखना चाहती थी उसकी मोटाई को उसकी लंबाई को उसके अंदर की गर्मी को वह अपनी आंखों से अपने बेटे के लंड को पिघलता हुआ देखना चाहती थी अपने बेटे के लंड से निकलने वाली पिचकारी की धार को देखना चाहती थी और उस धार को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी बहुत कुछ था सुगंधा के अंदर लेकिन शर्म की दीवार के पीछे सब कुछ छुपा हुआ था,,,,

Ankit or sugandha



सुगंधा अपने बेटे की तरफ बड़े ध्यान से देख रही थी वह पूरी तरह से गहरी नींद में सो रहा था इसलिए वह अपने बेटे के नींद में होने का फायदा उठा लेना चाहती थी इसलिए हिम्मत बांधकर वह अपने हाथ को आगे बढ़ने लगी चादर के ऊपर से ही सही वह बरसों के बाद लंड को पकड़ना चाहती थी,,, इसलिए धीरे-धीरे अपने हाथ को आगे बढ़ा रही थी अपने बेटे के लंड की तरफ बढ़ते अपने हाथ की तरफ वह बड़ी गौर से देख रही थी जिसमें डर और उत्तेजना का कंपन साफ महसूस हो रहा था,,,, और देखते ही देखते उसकी हथेली उसके बेटे के लंड के बेहद करीब पहुंच गई थी और इसी के साथ उसके दिल की धड़कन भी एकदम तेज चलने लगी थी,,, वह अपनी हथेली को कुछ देर तक अपने बेटे के लंड के करीब ही स्थिर कर दी थी और अपने मन में सोचने लगी थी कि अगर उसके बेटे की आंख खुल गई और उसने अपनी आंखों से अपनी मां को इस तरह की हरकत करता देखा तो अपने मन में क्या सोचेगा,,, फिर वह अपने ही मन में उठ रहे सवाल का खुद से ही जवाब देते हुए अपने मन में अपने मन की तसल्ली के लिए बोली,,,।

Ankit or sugandha



कुछ नहीं होगा उसका बेटा भी आखिरकार एक मर्द ही तो है उसके बीच जज्बात है उसका भी लंड खड़ा होता होगा जैसा कि इस समय खड़ा है अगर एक औरत का हाथ उसके लंड पर स्पर्श होगा तो वह पूरी तरह से मस्त हो जाएगा मचल उठेगा औरत के प्यार को पाने के लिए,,, और अगर एक औरत के स्पर्श से उसके लंड में जरा भी अंगड़ाई आएगी तो वह उसे औरत के सुख के लिए तड़प उठेगा भले ही उसके लंड का स्पर्श करने वाला उसकी मां ही क्यों ना हो,,,, यह सब सोच कर सुगंध का दिन बड़े जोरों से धड़क रहा था,,, अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर उसके मन में अपने बेटे को लेकर बड़ी जिज्ञासा हो रही थी वह अपनी मन में सोच रही थी कि उसका बेटा भी औरतों के बारे में जरुर सोचता है तभी तो उसका लंड खड़ा है,,,, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था अंकित का लंड प्राकृतिक रूप से सुबह-सुबह पेशाब लगने के कारण अपने आप ही खड़ा हो गया था जिसका अर्थ उसकी मां गलत तरीके से ले रही थी चाहे जैसा भी हो सुगंधा को अपना उल्लू ठीक करने से मतलब था,, ।

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अंकित पूरी तरह से गहरी नींद में डूबा हुआ था वह गहरी-गहरी सांस ले रहा था और इसी का फायदा वह उठा लेना चाहती थी और यही हाल सुगंधा का भी था वह अपने मन में सोच रही थी कि जल्दी से वह अपने बेटे के लंड को पकड़ कर जल्दी से छोड़ देगी ताकि उसके बेटे को अहसास तक ना हो,,,, मुझे सोच कर अपनी हथेली को खोलकर वहां जल्दी से चादर में बने तंबू को अपनी हथेली में भरकर उसकी लंबाई उसकी मोटाई को अपने अंदर महसूस करके एकदम मस्त होते हुए जल्दी से छोड़ दी उत्तेजना के मारे और मदहोशी के आलम में उसकी आंख अपने आप बंद हो चुकी थी,,,, सुगंधा हिम्मत दिखा कर अपनी बेटी के लैंड को एक बार अपनी हथेली में दबाकर उसे छोड़ दी थी लेकिन इतने से वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि उसकी बुर से पानी फेंक दिया वह झड़ गई थी आखिर ऐसा होना संभव ही था क्योंकि बरसों बाद उसके हाथ में लंड जो आया था और वह भी अपने ही बेटे का एकदम मजबूत मोटा तगड़ा लंबा,,, वह गहरी गहरी सांस लेते हुए अपना पानी निकाल रही थी वह अपने बेटे की तरफ देखी थी उसका बेटा अभी भी बेसुध होकर सो रहा था,,,, सुगंधा की हरकत का उसके बेटे पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा था इसलिए सुगंधा की हिम्मत थोड़ा और बढ़ने लगी वह एक बार फिर से अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भरकर महसूस करना चाहती थी,,,,,।

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एक बार अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भरकर उसके परिणाम को देख चुकी थी पहली बार में ही वह अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भरने पर ही झड़ चुकी थी और दूसरी बार वह फिर से यह गुस्ताखी करके देखना चाहती थी,,,, और वह फिर से अपना हाथ आगे बढ़ा कर एक बार फिर से अपने बेटे के तंबू को अपनी हथेली में भरकर हल्के से दबा दी और इस बार उसके बेटे के बदन में थोड़ी हरकत हुई और वह तुरंत अपनी हथेली को पीछे खींच ली,,,, इस बार सुगंधा की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बड़े जोर से भाग कर आई हो उत्तेजना के मारे उसकी चूचियों की निप्पल एकदम तन गई थी और उसकी बुर फूल पिचक रही थी,,,,, धड़कते दिल के साथ वह घड़ी की तरफ देखी तो 6:20 हो रहा था,,,,, समय हो गया था और उसे अपनी बेटी के कमरे से भी हल्की-हल्की आवाज आ रही थी इसका मतलब साफ था कि वह भी जाग गई थी अब अपनी युक्ति पर आगे बढ़ना उचित नहीं था,,, और जिस हालत में वह अपने बेटे के बिस्तर के बेहद करीब खड़ी थी उसे शर्म महसूस होने लगी थी वह धीरे से वापस दरवाजे की तरफ गई और ट्यूबलाइट बंद करके वापस दरवाजे को बाहर से ही दस्तक देते हुए अपने बेटे को उठने के लिए बोली दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज सुनकर अंकित की नींद खुल गई और वह भी उठकर बैठ गया लेकिन उसे जरा भी एहसास नहीं हुआ कि उसकी मां दो बार उसके लंड को अपने हाथ में लेकर छोड़ दी थी वह पूरी तरह से सहज था असहज थी तो सिर्फ सुगंधा,,,, जब सुगंधा ने देखी कि उसका बेटा उठकर बैठ गया है तो वह खुद-ब-खुद वहां से हट गई और अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए बाथरूम में घुस गई जहां पर वह अपना गाउन उतार कर एकदम नंगी हो गई और फिर अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपनी जवानी की आग को बुझाने की कोशिश करने लगी,,,।

Sugandha or Ankit

 
सुगंधा ने दूध वाले की तरह ही अपने बेटे को अपनी चुचियों का जलवा दिखाने की युक्ति को स्थगित कर दी थी क्योंकि उसे अपनी जवानी का जलवा दिखाने जितना समय ही नहीं था वरना वह अपने मन में तय कर चुकी थी कि आज झाड़ू लगाते समय वह अपने बेटे को अपनी उभरती हुई जवानी का जलवा जरूर दिखाएगी,,, लेकिन अपने बेटे के कमरे में प्रवेश करते ही उसकी आंखों के सामने जो नजर नजर आया था उसे देखकर उसके तन बदन में आग लग चुकी थी और वह अपने मां पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई थी चादर ओढ़ कर सो रहे अंकित के खुंटे को अपनी आंखों से देख कर उसे पकड़ने की अपनी इच्छा को सुगंधा दबा नहीं पाई थी और इसी के चलते वहां चादर के ऊपर से ही सही अपने बेटे के लंड को छूने की कोशिश की थी और जिसमें वह कामयाब भी हो चुकी थी एक नहीं बल्कि दो दो बार,,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा को समझते देर नहीं लगी थी कि उसके बेटे के पास का हथियार बेहद दमदार है जो कि किसी भी औरत को पूरी तरह से तृप्त कर सकता है,,,

अपने बेटे के लंड को चादर के ऊपर से ही स्पर्श करने की खुशी में हो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी,,, जिसका असर उसे अपनी बुर में बराबर महसूस हो रहा था और वह अपनी बुर की गर्मी को शांत करने के लिए बाथरूम में प्रवेश करके अपनी उंगलियों का सहारा लेकर वह अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रही थी,,,।

सुगंधा का दिमाग पूरी तरह से उन्मादित हो चुका था उसमें अब सही गलत के सोचने की क्षमता नहीं रह गई थी पहले तो वह दूसरे लड़कों की दोनों टांगों के बीच की स्थिति का कल्पना में ही जायजा लिया करती थी लेकिन अब उसकी नजर अपने ही जवान बेटे पर थे जो की पूरी तरह से भला भला था उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं हुआ था की चोरी से उसकी मां उसके कमरे में जाकर उसके खड़े लंड को चादर के ऊपर से पकड़ ली थी,,,। सुगंधा ने अपने मां पर बिल्कुल भी काबू न करके जिस तरह की हरकत अपने बेटे के साथ की थी उसे देखते हुए वहां अपने बेटे को चाय पानी खाना देने पर भी उससे,, नजर नहीं पिला पा रही थी क्योंकि उसने हरकत ही ऐसी कर दी थी पहले ही एक औरत होने के नाते वह अपने बेटे को उसे समय मर्द समझकर उसके खड़े लंड को अपने हाथों से पकड़ ली थी लेकिन आखिरकार थी तो वह उसे मर्द की मा ही,,, इसलिए सुगंधा के साहजिक होने पर उसमें की औरत दूर हो जाती थी और उसमें एक मां नजर आने लगती थी इसलिए वह अपने बेटे से नजर नहीं मिल पा रही थी लेकिन अंकित को तो कुछ पता ही नहीं था कि उसके साथ क्या हुआ था वह तो पूरी तरह से सहज था,,,,।

कभी-कभी सुगंधा को अपनी हरकत पर शर्मिंदगी महसूस होती थी और वह इस झमेले से निकलने की कोशिश करती थी लेकिन वह जितना भी इस झमेले से निकलने की कोशिश करती थी उतनी ही उसके अंदर डूबती चली जाती थी,,,, आखिरकार वासना का दरिया ही होता है इतना गहरा की सब कुछ अपने अंदर डूबा ले जाता है और ऐसा ही सुगंधा के साथ भी हो रहा था,,,,।

जैसे तैसे करके दिन गुजरने लगे सुगंधा अपने मन में बहुत चाहती थी कि वह अपने बेटे को अपनी जवानी का जलवा दिखाएं लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से अपने आप को तैयार करें अपने बेटे के सामने प्रदर्शन करने के लिए,,,,, क्योंकि जब भी वह कोशिश करती थी उसके अंदर घबराहट और शर्म एकदम साफ नजर आती थी वह इस बात से घबरा जाती थी कि अगर उसके बेटे को जरा भी इस बात का एहसास हो गया कि उसकी मां,,, जानबूझकर अपने अंगों की नुमाइश उसके सामने कर रही है तब क्या होगा तब उसका बेटा कैसा बर्ताव करेगा उसके बारे में क्या सोचेगा यही सब सोच कर उसका मन बैठ जाता था,,,, लेकिन जो काम हो घर में नहीं कर पाती थी वह खुद के लिए अद्भुत कार्य को अपनी क्लास में कर जाती थी अपने विद्यार्थियों के सामने,,,।

एक दिन वह अपने विद्यार्थियों को पढ़ा रही थी,,, और ब्लैक बोर्ड पर कुछ लिख रही थी उसे इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसके लिए एकदम सहज क्रिया को उसके जवान विद्यार्थी वासना भरी नजरों से देख रहे थे क्योंकि जिस तरह से वह अपना हाथ ऊपर करके ब्लैक बोर्ड पर चौक से कुछ लिख रही थी उसकी इस क्रिया पर उसके नितंबों का आकार कुछ ज्यादा ही उभर कर सामने नजर आ रहा था,,, और वैसे भी सुगंधा की आदत थी वह साड़ी को कमर पर एकदम कसकर बांधती थी जिसकी वजह से उसके नितंबों का आकार साड़ी के ऊपर से भी झलकता रहता था,,, और उसकी यही आदत मर्दों की कमजोरी बन जाती थी,,, और इस समय सुगंधा का यह रूप क्लास के कुछ आवारा लड़कों की आंखें सेंकने का काम कर रही थी,,,, अपनी टीचर की खूबसूरती और उसके अंगों का कटाव उभारओर मरोड़ देखकर विद्यार्थियों के मुंह से गर्म आ निकल जाती थी,,, और वह आवारा लड़के दूसरी बेंच पर बैठकर यही सब देखा करते थे उन लोगों को सुगंधा क्या पड़ता है इससे कोई मतलब नहीं था उन लोगों को मतलब था सिर्फ सुगंधा की खूबसूरती को अपनी आंखों से देखने का उसके खूबसूरत बदन के रस को अपनी आंखों से पीने का जो कि वह बखूबी कर रहे थे,,,।

जिस तरह से सुगंधा चौक से ब्लैक बोर्ड पर एक-एक शब्द को लिख रही थी उसके हाथ के झटका के साथ-साथ उसके बदन में भी लहर उठ रही थी उसके नितंबों में एक अद्भुत तरीके की थिरकन हो रही थी मानो कि जैसे कोई शांत नदी में कंकड़ फेंकने पर लहर उठती है ठीक उसी तरह से सुगंधा के नितंबों में भी लहर उठ रही थी जिसे देखकर आगे बेंच पर बैठे लड़कों का लंड खड़ा हो चुका था,,,, उनमें से एक लड़का धीरे से दूसरे के कान में बोला,,,।

बाप रे मैडम की गांड तो देख मेरा तो लंड खड़ा हो गया है,,,

मेरा भी यही हाल है यार बस एक बार डालने का मौका मिल जाए तो समझ लो जिंदगी सफल हो गई,,,।

(दोनों आपस में इस तरह से बात कर रहे थे और आगे ब्लैकबोर्ड पर लिख रही सुगंध को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था बस उसे इतना ही एहसास हो रहा था कि कोई बातें कर रहा है लेकिन क्या बातें कर रहा है किसके बारे में बातें कर रहा है यह उसे नहीं मालूम था तो वह धीरे से नजर घुमा कर उन दोनों की तरफ देखी तो उसके होश उड़ गए पहले तो उसे पता नहीं चला लेकिन जैसे ही उन लड़कों की नजरों का पता चला सुगंधा के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी क्योंकि वह लड़के प्यासी नजरों से उसके नितंबों के उभार को ही देख रहे थे,,,, उन लड़कों की नजरों को देखकर सुगंधा कुछ बोल नहीं पाई और वापस ब्लैक बोर्ड पर सहज होकर लिखने का नाटक करने लगी लेकिन अब उसके कान खड़े हो चुके थे वह उन लड़कों की बातों को सुनना चाहती थी क्योंकि उन दोनों की नजरे उसकी गांड पर ही टिकी हुई थी और इतना तो वह समझता ही थी कि ऐसा जवान लड़के कब करते हैं वह ब्लैकबोर्ड पर लिख रही थी तभी वह बड़े गौर से सुनने लगी और उसे हल्का-हल्का सुनाई देने लगा,,,)

कसम से मैडम की गांड कितनी बड़ी-बड़ी है,,,,,

(उनमें से एक लड़का बोला और सुगंधा को केवल गांड कितनी बड़ी-बड़ी है इतना ही सुनाई दिया लेकिन उसे समझते देर नहीं लगी कि वह दोनों किसके बारे में बात कर रहे थे वह जान गई थी कि वह लड़के उसके बारे में ही बातें कर रहे थे एकदम खुलकर,,, इतना सुनकर सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा जहां एक तरफ उसे थोड़ा अजीब लग रहा था वहीं दूसरी तरफ लड़कों की बातें और उन दोनों की नजरों को देखकर उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,, वह धड़कते दिल के साथ हुआ ब्लैक बोर्ड पर इस तरह से लिखे जा रही थी और उन दोनों की बातें सुनी जा रही थी तभी उनमें से एक लड़का बोला,,,)

कसम से मुझे मिल जाए तो मैं तो मैडम की गांड दोनों हाथों से पकड़ कर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दुं,,,।

(उसे लड़के की पूरी बात एक-एक शब्द सुगंधा के कानों में एकदम साफ-साफ सुनाई दिया था और इसे सुनकर तो उसकी बुर का पूरा तालाब नमकीन खारे पानी से भर गया और उसमें से बहने भी लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सारे विद्यार्थी उसके बेटे की उम्र के थे उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था,,,उन, लड़कों की बात सुनकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी,,, तभी उसके मन में ख्याल आया कि क्यों ना वह जो युक्ति अपने बेटे पर आजमाना चाहती थी वही युक्ति अपने विद्यार्थियों पर आजमाए,,,, यह ख्याल उसके मन में आते ही उत्तेजना के मारे उसकी बुर फूलने पिचकने लगी और वह अपनी युक्ति को क्लास में ही आजमा लेना चाहती थी वह अपने विद्यार्थियों के चेहरे पर बदलते भाव को देखना चाहते कि वह देखना चाहती थी कि उसकी चूचियों को देखकर उसके विद्यार्थियों पर क्या प्रभाव पड़ता है और इसके लिए वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी इसलिए जैसे ही वह विद्यार्थियों की तरफ घूमी वह अपने हाथ से चौक के टुकड़े को नीचे गिरा दी,,,, और उसे उठाने के लिए नीचे झुक गई और झुकाने की वजह से जवानी से भरी हुई लबालब उसकी दोनों चूचियां ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने के लिए उतारू हो गई उसके साड़ी का पल्लू कंधे पर से नीचे गिर गया था जो की वह खुद ही जानबूझकर नीचे गिरती थी और कुछ सेकेंड के लिए वह चौक के टुकड़े को उठाने के लिए नीचे झुकी रह गई थी और इतना तो उन विद्यार्थियों के लिए बहुत था उन विद्यार्थियों की नजर से ही सुगंधा की जवानी से भरी हुई चूचियों पर गई उनके तो होश उड़ गए उनकी आंखें फटी के फटी रह गई और आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,,

सुगंधा उसे स्थिति में अपने आप को एक बार देखने लगी और नजर उठाकर उन विद्यार्थियों की तरफ देखने लगी जो कि वह विद्यार्थी उसी की तरफ देख रहे थे विद्यार्थियों की हालत को सुगंधा अच्छी तरह से समझ गई थी,,वह साफ तौर पर देख पा रही थी कि विद्यार्थियों के चेहरे का रंग उड़ चुका था उनकी आंखों में वासना की चमक एकदम साफ नजर आ रही थी वह एकदम भूल चुके थे कि जिसे देखकर वह इतना उत्तेजित हो रहे हैं वह सही मायने में उन लोगों की गुरु थी शिक्षिका थीं उन्हें शिक्षा देने वाली थी सही मार्गदर्शन करने वाली थी लेकिन जवानी से भरी हुई है खूबसूरत औरत अगर मर्दों की नजर में वासना भारी हो तो वह फिर किसी भी रिश्ते की रेखा में नहीं आती बल्कि वह केवल एक औरत ही बनकर रह जाती है और इस समय भी यहां भी यही हो रहा था वह एक शिकायत ही और क्लास में बैठे लड़के विद्यार्थी थे लेकिन शिक्षिका और विद्यार्थी के बीच का रिश्ता मानव खत्म हो चुका था वह लड़के वासना भरी नजरों से अपनी ही शिक्षिका की अपने ही मैडम की चूचियों को नजर भर कर देख रहे थे लेकिन इसका मलाल सुगंधा को बिल्कुल भी नहीं था बल्कि वह तो अंदर ही अंदर एकदम प्रसन्न नजर आ रही थी क्योंकि उसकी युक्ति एकदम सत प्रतिशत कम कर रही थी,,,, यह नजारा कुछ सेकंड का ही था हाथ में चौक लेकर वापस सुगंधा खड़ी हो गई और अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करने लगी और तिरछी नजर से उन लड़कों की तरफ देख भी रही थी चौकी अभी तक बदहवास नजरों से उसे ही देख रहे थे,,,, सुगंधा आगे कुछ बोल पाती या अपनी क्रियाकलाप का प्रदर्शन यहां पर कर पाती से पहले ही छुट्टी होने की घंटी बज गई,,,। और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा गिर चुका था,,,।

रात को सुगंधा अपने बिस्तर पर क्लास वाली घटना के बारे में ही सोच रही थी और इस घटना के बारे में सोचकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि वह लड़के भी तो उसके बेटे की ही उम्र के थे लेकिन उन दोनों की सोच कितनी गंदी थी एक औरत को लेकर वह एक औरत को या तो किसी भी औरत के बारे में कितना गंदा सोच रखते थे जब वह लोग अपनी टीचर को ही इस नजर से देखते हैं तो घर में भी तो अपनी मां बहन को भी गंदी नजरों से देखते होंगे यही सब सोच कर सुगंधा अपने बेटे के बारे में सोच रही थी कि जब वह लड़के उसके बारे में इतना गंदा सोच सकते हैं तो उसका बेटा उसकी जवानी देखकर उसकी भरी हुई मदहोश कर देने वाली जवान देखकर उसके नितंबों का उभार और चूचियों की गोलाई देखकर क्यों नहीं उसकी तरफ आकर्षित होता,,,।

वह अपने मन में यही सब सो कर उत्तेजित हुए जा रही थी और धीरे-धीरे अपने कपड़ों को उतारती जा रही थी वह अपने मन में अपने आप से ही बात करते हुए बोल रही थी कि वह लड़के तो उसे छोड़ने के लिए बोल रहे थे उसकी बड़ी-बड़ी गांड देख कर उत्तेजित हो गए थे लंड खड़ा हो गया था उन लड़कों का तो उसके लड़के का क्यों नहीं खड़ा होता लंड उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर चुची देखकर क्यों उसका मन नहीं करता चोदने को अपनी मां को,,,, आखिरकार उन लड़कों की उम्र और उसके लड़के की उम्र एक ही तो थी तो उसके लड़के में यह सब बदलाव क्यों नहीं होता है एक औरत को देखकर एक खूबसूरत औरत को देख कर क्यों हुआ उत्तेजित नहीं होता कि उसका लंड खड़ा नहीं होता,,,, चोदने के लिए,,, ऐसा अपने आप से ही बात करते हुए वह धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी हो गई,,, और एक बार फिर से अपने बेटे की कल्पना करके अपनी दोनों टांगों को खोल दी और फिर अपनी उंगलियों को अपनी गुलाबी बुर में डालकर अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने की कोशिश करने लगी,,,।

दूसरे दिन सुबह जब किचन में काम कर रही थी तब तृप्ति बालों में कंघी करते हुए अपनी मां से बोली,,,।

मम्मी मुझे कुछ किताबें चाहिए,,,।

हां तो पैसे ले ले जाकर खरीद लेना,,,

नहीं मम्मी तुम खरीद कर ले आना तुम उसे किताब वाली मार्केट चलाती हो ना जहां पर आधे कीमत में ही किताबें मिलती है,,, वहीं से खरीद लेना,,,,

हां यह तु ठीक कह रही है,,, लेकिन किताबें कौन सी लानी है,,,

मैं तुमको लिख कर दे देता हूं तुमको समय मिले तो खरीद लेना,,,,

तुझे चाहिए कब,,,,,

परसों ही चाहिए क्योंकि एग्जाम की तैयारी करना है ना,,,,

तो ठीक है मैं कल जाकर ले लेती हूं वैसे भी मुझे भी कुछ किताबें खरीदना है,,,,

ठीक है मम्मी मैं अभी लिखकर लाती हूं,,,,

(थोड़ी देर में तृप्ति एक कागज के टुकड़े पर उसे जो किताबें चाहिए थी उसका नाम लिखकर अपनी मम्मी के हाथ में थमा दी,,, तीन किताबें थी और सुगंधा जानती थी कि उस किताब वाली मार्केट में जरूर मिल जाएगी,,,, सुगंधा इस बात से भी खुश थी की उसकी बेटी बहुत समझदार हो गई है वह चाहती तो नहीं किताबें ले सकती थी लेकिन,,, जब वही किताबें आधे कीमत में मिलती हो तो नई किताबें लेकर क्या फायदा इस बात को तृप्ति अच्छी तरह से जानती थी और सुगंध भी अपने बच्चों के लिए वही से ही किताबें खरीद कर लाती थी,,,, थोड़ी देर में सुगंधा खाना बना कर नाश्ता तैयार करके खुद भी तैयार होने लगी,,,)

दूसरे दिन स्कूल से छूटने के बाद वह सीधा इस किताब के बाजार में चली गई चौकी उसकी स्कूल से तकरीबन 2 किलोमीटर और आगे था अपने स्कूल के बाहर ही वह रिक्शा पड़कर थोड़ी ही देर में किताब के बाजार में पहुंच गई,,, यहां पहुंच कर देखी की मार्केट में कुछ ज्यादा भीड़भाड़ था इसलिए वह धीरे-धीरे आगे जाने लगी वह अपने बच्चों के लिए किताबें एक ही दुकान से खरीदती थी और वह दुकान वाला सुगंध को अच्छी तरह से जानता था इसलिए किताबों पर अच्छा खासा डिस्काउंट भी दे देता था काउंटर पर पहुंच कर सुगंधा ने उसे दुकान वाले को परची थमा दी और वह दुकान वाला किताबें निकालने लगा,,,,। और सुगंधा इधर-उधर नजर घुमा कर देखने लगी,, उसे दुकान में किताब के साथ-साथ बहुत सारी स्टेशनरी के साथ-साथ दूसरी वस्तुएं भी मिलती थी जैसे की हेयर तेल साबुन वगैरह-वगैरह जो की काउंटर के पास में ही कांच वाले काउंटर में सजा कर रखा हुआ था तभी उसकी नजर,,,, एक छोटे से पूछ पर गई जिस पर कुछ गंदी तस्वीर छपी हुई थी जिसमें एक मर्द औरत आलिंगन होकर एक दूसरे के होठों का रस चूस रहे थे,,, पहले तो सुगंध को समझ में नहीं आया कि वह वस्तु क्या है जो इतना अश्लील चित्र होने के बावजूद कि उसे दुकान वाले ने उसे काउंटर में सजा कर रखा है लेकिन जब बड़े गौर से उसे पूछ के ऊपर लिखे हुए नाम को पढ़कर देखी तो उसके होश उड़ गए उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल होने लगी वह कोहिनूर कंडोम था जिसे देखते ही उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,, उसके पति ने कभी भी कंडोम का उपयोग नहीं किया था इसलिए उसने आज तक कंडोम को अपनी आंखों से देखी भी नहीं थी लेकिन इतना जानती जरूर थी कि कंडोम एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसे मर्द इस्तेमाल करते हैं जो कि गर्भ निरोधक के लिए काम आता है,,,

उसे प्रोडक्ट के बारे में सुगंधा और कुछ सोचती इससे पहले ही वह दुकान वाला किताबें लेकर काउंटर पर पहुंच गया और सुगंध भी अपनी नजरों को उसे कंडोम के पैकेट से हटा दी,,,,।

कितना हुआ भैया,,,,

रुकिए हिसाब करके बताता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वहां तीनों किताब की कीमत लिखकर उसे जोड़ने लगा लेकिन तभी सुगंधा ने उसे काउंटर वाले आदमी पर गौर की वह तिरछी नजरों से उसकी छतिया की तरफ देख रहा था जो की हल्की सी पारदर्शी साड़ी होने की वजह से उसकी चूचियों के बीच की पतली दरार काफी खूबसूरत नजर आ रहा था उसे देखकर वह मन ही मन उत्तेजित हो रहा था इस बात का अहसास होते ही सुगंधा एकदम से सचेत हो गई लेकिन वह उसे काउंटर वाले आदमी के सामने अपनी साड़ी को ठीक करना भी नहीं चाहती थी क्योंकि ऐसा करने पर उसे आदमी को एहसास हो सकता था कि उसने उसकी हरकत को देख ली है इसलिए वह एकदम सहज बनने की कोशिश करने लगी,,,, और वह भी तिरछी नजर से उसे आदमी की तरफ देखने लगी और इस तरह से इधर-उधर देखने लगी कि मानो जैसे कुछ हुआ ही ना हो वह आदमी अभी भी उसकी छातियों की तरफ घूर-घूर कर देख रहा था और बिल बना रहा था,,, उसे आदमी की हरकत को देखकर सुगंध अपने मन में सोचने लगी की दुनिया के सारे मर्द उसकी छाती की तरफ देखते हैं लेकिन उसका बेटा ही नहीं देखता,,,।

थोड़ी देर में बिल बनकर तैयार हो गया और उसे दुकान वाले ने बिल सुगंधा के हाथों में थमा दिया लेकिन बिल थमते समय अपनी उंगली से उसके हाथ की उंगली को स्पर्श कर लिया मानो इतने से ही वह पूरी तरह से सुगंधा को का गया हो वह अंदर ही अंदर एकदम उत्तेजित और प्रसन्न हो गया उसकी हरकत का एहसास सुगंधा को भी अच्छी तरह से था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी क्योंकि यह सब बेहद सहज था लेकिन बिल देखकर वह उसे काउंटर वाले दुकानदार से बोली,,,)

भैया हम तो तुम्हारे पुराने ग्राहक है थोड़ा तो डिस्काउंट दीजिए,,,।

देखिए बहन जी जो बिल मैंने आपको दिया है वह डिस्काउंट काट कर ही है लेकिन आप हमारे पुराने ग्राहक हैं इसलिए ₹20 ऊपर के कम कर दीजिए,,,,(इतना कहते हुए वह सुगंधा की चूचियों की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा,,,, सुगंधा भी जल्दी से अपने पर्स में से ₹200 निकालकर उसे दुकानदार को थमा दी और फिर वह भी मुस्कुराते हुए दुकान की सीढ़ियां उतर गई,,,, और अपने मन में सोच रही थी कि वह उसे दुकानदार को भैया बोल रही थी और वह दुकानदार भी उसे बहन जी बोल रहा था लेकिन उसे मौका मिलता तो अपनी बहन पर चढ़ने से बिल्कुल भी नहीं शर्म करता,,,, इतने से ही सुगंधा को इस बात का ख्याल हो रहा था कि दुनिया में रिश्तेदारी कोई मायने नहीं रखती बस अपनी अपनी जरूरत पूरी होनी चाहिए,,,,

उस किताब के बाजार में सब्जी मार्केट भी थी तो सुगंधा घर के लिए सब्जियां भी खरीदने लगी,,,,,,, सब्जियां खरीदने खरीदे थे उसे थोड़ी देर होने लगी क्योंकि शाम धीरे-धीरे ढल रही थी उसे मालूम था कि आज देर हो चुकी है इसलिए वह सब्जी लेकर और बच्चों के लिए थोड़ा समोसा और जलेबी लेकर वह रिक्शा पकड़ने के लिए जल्दी-जल्दी आगे बढ़ने लगी वह फुटपाथ पर चल रही थी और फुटपाथ पर जगह-जगह पर किताबें बिक रही थी एक जगह पर स्ट्रीट लाइट के नीचे आकर वह रुक गई और बिछी हुई किताबों को देखने लगी जिसमें सारा शरीर मनोहर कहानियां और फिल्मों से संबंधित कुछ किताबें रखी हुई थी सुगंधा को किताबें पढ़ने का भी बहुत शौक था,,, खास करके सरस सलिल वह पढ़ा करती थी,,,, वह धीरे से नीचे झुक कर कुछ सरस सलिल की मैगजीन को इधर-उधर करने लगी और उनमें से दो मैगजीन निकाल कर उसे अपने हाथ में पकड़ लिया और तभी उसकी नजर मनोहर कहानियां पर गई तो वह एक मनोहर कहानी उठाकर उसे जैसे ही पढ़ने को हुई कि उसमें एक दूसरी किताब उसी नजर आ गई जिसके पृष्ठ पढ़ने पर लिखा था,,, मदहोश जवानी,,, सुगंधा पहली बार इस तरह की किताब को अपने हाथ में ली थी और लेखक का नाम था मस्तराम यह सब उसके लिए पहली बार था वह उत्सुकता में उसे किताब को,,, अपने हाथ में लेकर उसके पन्ने पलटने लगी,,,,,, तभी पहले पन्ने पर ही कहानी का शीर्षक उसे दिखाई दिया दूध का कर्ज़,,,,

कहानी के शीर्षक को पढ़कर सुगंधा को ऐसा ही लग रहा था कि जैसे कोई सामान्य कहानी होगी,,, सुगंधा इस तरह से खड़ी थी उसके हाथ में तो किताबें सरल सलीम की थी और दूसरे हाथ में मनोहर कहानी की थी और उसके बीच में एक दूसरी किताब थी जिसके पन्ने पलट रही थी पहले पन्ने का तो वह सिर्फ शीर्षक ही पड़ी थी,, लेकिन,दूसरा पन्ना पलट करवा उसकी दो-तीन लाइन पढ़ने की कोशिश करने लगी और पहले ही लाइन पढ़कर उसके होश उड़ गए जिसमें लिखा था अपनी मां की गुलाबी बुर देखकर संजय का लंड एकदम से खड़ा हो गया,,,, इतना पढ़ते ही सुगंधा के तो होश उड़ गए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह कौन सी किताब है वह एक लाइन पढ़कर ही अपने चारों तरफ देखने लगी कि कहीं कोई उसे देख तो नहीं रहा है लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी कि वहां दूसरा कोई भी नहीं था इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ने लगी और बात दूसरी लाइन बिना पढ़े तीसरे पढ़ने की तरफ आगे बढ़ गई जिसमें लिखा था,,,, संजय अपनी मां की दोनों टांगों को खोलकर उसकी मोटी मोटी जांघों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया,,, संजय की मां पूरी तरह से व्याकुल थी अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होने के लिए वह अपने दोनों हाथों से अपनी चूची पकड़ कर जोर-जोर से दबा रही थी,,,, सुगंधा के तो होश उड़ गए उसकी बुर से पानी निकलने लगा हुआ पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी वह समझ नहीं पा रही थी कि यह कैसी कहानी है लेकिन उसका मन बिना पढ़े मचल रहा था वह आगे की लाइन पढ़ने लगी,,,,

संजय अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाकर उसे चिकना कर रहा था और थोड़ा सा तोक अपनी मां की बुर पर भी लगा कर उसे चिकनाहट दे रहा था और थोड़ी देर में अपने मोटे लंड के सूखने को अपनी मां की बुर के मुख्य द्वार पर रखकर जोर से धक्का मारा और उसका पूरा लंड एक ही बार में उसकी मां की बुर में घुस गया,,,,

अब तो सुगंधा से रहा नहीं जा रहा था सुगंध पूरी तरह से पागल हो चुकी थी केवल चार-पांच लाइन पढ़कर ही,,,,, उसका वहां ज्यादा देर तक खड़ा रहना उचित नहीं था,,,, वह उस किताब वाले से बोली,,,

कितना हुआ भाई साहब,,,

₹40 हुए बहन जी,,,,

लेकिन तीन किताबों के तो तीस ही रुपए हुए ना,,,

बहन जी मनोहर कहानी के अंदर एक और किताब है उसका लेकर 40 रुपए हुए,,,,

(उसे किताब वाले की बात सुनकर सुगंधा शर्मिंदा हो गई उसे लग रहा था कि अनजाने में ही वह किताब उसे मनोहर कहानी के अंदर है जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था उसका बेचने का यही तरीका था क्योंकि वह जानता था कि वह चीज किताब को मनोहर कहानी में रख रहा है अगर कोई भी खरीदने वाला एक बार पड़ेगा तो वह उसे पूरा पढ़े बिना नहीं रह पाएगा और इसके लिए उसे खरीदना ही होगा जैसा की सुगंधा को भी लग रहा था कि वह इस किताब को जरूर पूरा पढेगी,,,, वह अपने चारों तरफ नजर घुमा कर देखी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और ऐसे भी यह जगह बहुत दूर थी और यहां पर उसकी पहचान वाला कोई नहीं था इसलिए वह निश्चिंत होकर लेकिन जल्दबाजी में वह किताब को अपने थेले में रख ली ताकि कोई देख ना ले और अपने पर्स में से ₹40 निकालकर उस किताब वाले को दे दी,,, और फिर थोडा आगे जाकर ओटो पकड़ के अपने घर पहुंच गई,,,,।
 
सुगंधा अपनी बेटी के कॉलेज की किताब के साथ-साथ अपने काम की भी किताब खरीद चुकी थी सरस शलील के साथ-साथ मनोहर कहानियां के अंदर रखी हुई उसे अश्लील साहित्य को अपने साथ खरीद लाई थी वैसे तो उसे अश्लील साहित्य का केवल चार-पांच लाइन का ही वह पठन कर पाई थी,,, लेकिन इतना ही कहानी की गहराई को जानने के लिए काफी था,,,,,, बस इतनी सी ही लाइन पढ़कर वह समझ गई थी कि यह कहानी मां बेटे के बीच के अवैध संबंध को लेकर हैं लेकिन क्या है कैसे हैं इसके बारे में वह जानने के लिए पूरी तरह से उत्सुक हो गई थी,,,।

कहानी की नायिका और उसका बेटा



पहली बार इस तरह के अश्लील साहित्य को खरीदने में उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह तो अच्छा था कि वहां कोई दूसरा नहीं था वह केवल अकेली ही थी वहां पर किताब खरीदने वाली क्योंकि शाम ढलने लगी थी इसलिए लोग अपने-अपने घरों की तरफ चले जा रहे थे किसी को भी वहां खड़े रहने की जल्दबाजी दिखाई नहीं दे रही थी,,,, सुगंधा ने जल्दी से अपने बटुए में से पैसा निकाल कर उस किताब वाले को थमा दी थी,,,, और वहां से निकल गई थी ऑटो पकड़ने के लिए,,,, थोड़ी ही देर में वह घर पहुंच गई थी लेकिन इतनी दूरी में भी उसके मन में अजीब सी उथल-पुथल चल रही थी बार-बार उसके मन में वही शब्द चल रहे थे जिसे उसने मदहोश जवानी की किताब के पन्नों को पलट कर पढी थी,,,,, अपनी मां की गुलाबी बुर देखकर संजय का लंड एकदम से खड़ा हो गया,,,,,, संजय अपनी मां की दोनों टांगों को फैला कर अपने लिए जगह बनाने लगा,,,

किताब के पन्ने की यही लाइन उसके दिलों दिमाग पर हथौड़े की तरह बज रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,,, जिंदगी में पहली बार हुआ इस तरह के किताब को अपने हाथ में ली थी जिसके पन्नों को पढ़कर उसके दिलों दिमाग पर गहरा असर पड रहा था,,,, क्योंकि वह पल भर में ही उस मदहोश जवानी की किताब के नायक में अपने बेटे को और उसकी मां में खुद को देख रही थी,,,,,,, वह उसे लाइन में संजय की जगह अपनी बेटी का नाम जोड़कर उसे लाइन को अपने मन में पढ़ रही थी,,,,,,, अपनी मां की गुलाबी बुर देखकर अंकित का लंड खड़ा हो गया,,,,,, अंकित अपनी मां की दोनों टांगों को फैला कर अपने लिए जगह बनाने लगा यह सब शब्दों का जोड़-तोड़ करना सुगंधा को काफी रोमांचित कर दे रहा था,,,, उसकी बुर पानी पानी हुए जा रही थी,,, और उसे किताब को पढ़ने की उत्सुकता उसकी निरंतर बढ़ती जा रही थी,,,।

कहानी की नायिका और उसका बेटा



देखते ही देखते हो अपने घर के आगे के चौराहे पर रिक्शा से उतर गई और पैदल अपने घर पर पहुंच गई शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो रहा था उसके दोनों बच्चे घर पर ही मौजूद थे,,, दरवाजे पर दस्तक देने के बाद तृप्ति ने हीं दरवाजा को खोली,,,, और अपनी मां को दरवाजे पर देखते ही वह और कुछ नहीं बस इतना ही पूछी,,,।

किताबें मिल गई मम्मी,,,

हां हां मिल गई,,,,(घर में प्रवेश करते हुए और तृप्ति घर को बंद करके कड़ी लगाते हुए) लेकिन तुझे सिर्फ किताबों की पड़ी है यह नहीं पूछी की इतनी देर क्यों हो गई मेरी तो तुझे फिक्र ही नहीं है,,,

नहीं मम्मी ऐसी बिल्कुल भी बात नहीं है वह क्या है ना की एग्जाम की तैयारी करना है इसलिए किताबें बहुत जरूरी है,,,

कहानी की नायिका और उसका बेटा



और मां,,,(आंखों को ना चाहते हुए एक जगह पर खड़ी होते हुए सुगंधा बोली)

तुम तो जिंदगी की जरूरत हो,,,(और इतना कहने के साथ ही तृप्ति अपने मां के गाल पर चुंबन कर ली और उसके कंधे पर लटके थैले को अपने हाथ से उतारने लगी थी कि उसे रोकते हुए सुगंधा बोली क्योंकि उसे एकाएक याद आ गया था की थैले में वह अश्लील साहित्य भी है,,, इसलिए वह बहाना करते हुए बोली,,,)

अरे कहीं भागी नहीं जा रही हु पहले एक ग्लास पानी तो पिला दे,,,,।

ठीक है मम्मी अभी लाई,,,(इतना कहने के साथ ही तृतीय रसोई घर में पानी लेने के लिए चली गई और सुगंध मौका देखकर तुरंत अपने कमरे में चली गई और जल्दी-जल्दी मनोहर कहानी की किताब में से उसे अश्लील साहित्य को निकाल कर अपने अलमारी के ड्रावर में रखकर उसे लॉक कर दी,,,, और आराम से अपनी बिस्तर पर बैठ गई तब तक तृप्ति हाथ में पानी का गिलास लिए हुए अपनी मां के पास आ गई थी,,,, और सुगंधा उसके हाथ से पानी लेकर पीने लगी,,, और जब तक उसकी मां पानी पीती तब तक तृप्ति थैले में से अपने कॉलेज की किताब को बाहर निकाल कर देखने लगी और बहुत खुश हुई और वहां से चली गई,,,,,।

कहानी की नायिका और उसका बेटा



थोड़ी ही देर में थोड़ा फ्रेश होकर सुगंधा खाना बनाने लगी,,,,,, उसका आज खाना बनाने में मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था अपनी मन में सोच रही थी कि कब वह अपने कमरे में जाएं और आराम से उसे किताब को पड़े क्योंकि अब वह भी किताब की कहानी के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो गई थी कि कैसे हालात में एक मां बेटे इतने करीब आ जाते हैं कि दोनों के बीच मर्द और औरत वाला संबंध स्थापित हो जाता है कैसे एक मां अपने ही बेटे के साथ चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है,,, और कैसे एक बेटा जो अपनी मां की बुर से ही जन्म लेने के बाद जवान होने के बाद अपने ही लंड को अपनी मां की बुर में डालकर उसकी चुदाई करने को तैयार हो जाता है,,,, यही सब सवाल उसे परेशान कर रहे थे और इसी सवाल का जवाब जानने के लिए वह किताब को पूरी तरह से पढ़ना चाहती थी,,,,

अपने बेटे के तंबू को देखकर चुदवासी होती हुई नायिका



और इसीलिए बहुत जल्दी-जल्दी खाना बनाकर तैयार करती हो समय पर अपने बच्चों को खिलाकर कुछ देर टीवी देखने लगी क्योंकि उसके डेली रूटीन में आता था वह हमेशा अपने बच्चों के साथ टीवी देखा करती थी,,,, और जैसे ही समय हुआ वह उठकर बाथरूम में गई और साड़ी उठाकर पेशाब करने लगे उसकी बुर से आ रही तेज सीटी की आवाज अंकित के कानों में सांप सुनाई दे रही थी जो कि उसके रोज का हो गया था और वहां उसे आवाज पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देता था लेकिन पल भर के लिए उसके बदन में भी अजीब सी हलचल हो जाती थी जब उसके कानों में इस तरह की आवाज आती थी,,, थोड़ी देर में उसकी मां बाथरूम से बाहर निकली और दोनों बच्चों को सोने की हिदायत देकर खुद अपने कमरे में चली गई,,,।

सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था बहुत जल्दी से दरवाजा बंद करके कड़ी लगाने के बाद,,, अलमारी की तरफ गई और धीरे से अलमारी को खोलकर,,, ड्रावर में से उसे किताब को बाहर निकाल ली,,,, हाथ में एक बार फिर से उसे किताब को लेने के बाद सुगंधा के तन बदन में अजीब सी तरंगे उठने लगी वह मदहोश होने लगी किताब का मुख श्रेष्ठ ही बेहद नशीला था,,,, जिस पर एक खूबसूरत लड़की की तस्वीर बनी हुई थी अंगड़ाई लेते हुए और उसे लड़की के बदन पर केवल जालीदार गाउन था जिसमें से उसके बदन का हर एक हिस्सा नजर आ रहा था,,,, मुख्य पृष्ठ के उस तस्वीर को देखकर सुगंधा की जवानी हीलोर मारने लगी,,,, वह जल्द से जल्द उसे किताब को पढ़ लेना चाहती थी,,,, इसलिए उसे किताब को लेकर जल्दी से अपने बिस्तर पर पहुंच गई और पीठ के बाल लाकर कर के नीचे तकिया लगाकर आराम से उस किताब के पन्नों को पलटने लगी,,,।

अपनी मां की चड्डी उतारता हुआ नायक



किताब पढ़ने के बाद उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह पसीने से तरबतर हो गई लेकिन वह अभी पूरी किताब नहीं पड़ी थी केवल पांच पन्ने ही पड़ी थी कि उसके बदन में उत्तेजना अपना असर दिखने लगी उसके बदन में जवानी चिकोटि काटने लगी,,,, उसने आज तक इस तरह की अश्लील कहानी कभी पड़ी नहीं थी इसलिए पहली बार में ही उसके पसीने छूट गए थे साथ में उसकी बुर का पानी भी निकलने लगा था,,,, पांच पन्ने पढ़ने के बाद उसे इतना तो अंदाजा लग गया था कि कहानी क्या है उसकी जिंदगी में और किताब की कहानी में कुछ ज्यादा फर्क नहीं था किताब वाली कहानी में भी एक औरत जल्द ही विधवा हो जाती है और वह खुद भी एक विधवा थी कहानी की नायिका का भी एक जवान लड़का था और उसके खुद का भी एक जवान लड़का था पर कितना था कि उसकी लड़की नहीं थी,,,,,।

मदहोश होती हुई नायिका अपने बेटे के साथ



कहानी की नायिका किसी स्कूल में नहीं बल्कि किसी ऑफिस में काम करती थी और घर में केवल वह और उसका बेटा संजय ही रहते थे दोनों में काफी मेलजोल था दोनों एक दूसरे को समझते थे और संजय अपनी मां का पूरा ख्याल रखता था यहां तक की आज तक उसने अपनी मां को कभी गलत नजरिया से देखा नहीं था और नहीं कभी उसे नायिका ने भी अपने बेटे को गलत नजरिए से देखी थी दोनों के बीच में मां बेटे वाला पवित्र संबंध नहीं था लेकिन एक दिन अचानक सब कुछ बदल गया,,,,।

एक दिन बरसात हो रही थी और वह भी बड़े जोरों की,,, उसका बेटा संजय घर पर ही था धीरे-धीरे शाम हो रही थी लेकिन उसकी मां का कहीं भी आता पता नहीं था वह बार-बार दरवाजे पर आकर अपनी मां का राह देख रहा था,,,, और तभी थोड़ी देर बाद उसकी मां भीगती हुई उसे नजर आई,,,, अपनी मां को देख कर संजय बहुत खुश हुआ लेकिन इस बात से वह काफी परेशान हो गया क्योंकि उसकी मां पूरी तरह से बरसात के पानी में भीग चुकी थी ऐसे में तबीयत खराब होने का डर था,,,,।

जल्दी से उसकी मां घर में प्रवेश कर गई लेकिन वह पूरी तरह से भेज चुकी थी उसके बदन के कपड़े उसके खूबसूरत बदन से चिपक गए थे जिसमें से उसका पूरा अंग एकदम साफ नजर आ रहा था,,, जिस पर अभी तक संजय की नजर नहीं पड़ी थी वह जल्दी से कमरे में जाकर अपनी मां के लिए टावल लेकर आया था ताकि वह जल्दी से वह अपने कपड़ों को बदलकर दूसरे कपड़े पहन ले लेकिन जैसे ही वह टावल लेकर अपनी मां के पास आया उसकी नजर अपनी मां की छाती पर चली गई उसकी मां का ध्यान संजय के ऊपर बिल्कुल भी नहीं था वह अपनी साड़ी को करने से उतर कर उसमें से पानी को निचोड़ रही थी,,, और भीगे हुए ब्लाउज में से उसकी मां की मस्त-मस्त बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी क्योंकि उसकी मां ने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी,,,, इस तरह का नजारा संजू पहली बार अपनी आंखों से देख रहा था,,,, वह अपनी मां को टावल पकड़ाना भूल गया और प्यासी नजरों से अपनी मां की चूचियों की तरफ देखने लगा जो की पूरी तरह से जवानी से मिली हुई थी और उसे इस बात की भी हैरानी थी कि ब्लाउज के अंदर उसकी मां ब्रा नहीं पहनी थी ब्लाउज के अंदर उसकी मां की चूचियां एकदम नंगी थी,,,,।

संजय अपनी मां की चूत चाटता हुआ



और जैसे ही उसकी मां टावल लेने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाई तो अपने बेटे की नजर को अपनी छातियों पर टिकी हुई देखकर वह अंदर तक सिहर उठी,,, पहले तो उसे तेज झटका सा लगा ताज्जुब हुआ अपने बेटे की हरकत पर क्योंकि आज तक उसके बेटे ने उसे इस नजर से कभी नहीं देखा था लेकिन आज की बात कुछ और थी वह अपनी छातियों की तरफ नजर नीचे करके देखी तो वह खुद शर्म से पानी पानी हो गई,,, उसे इस बात का एहसास हुआ कि वाकई में हुआ ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी और उसकी नंगी चूचियां एकदम साफ दिख रही थी,,,,, वह जल्दी से अपने बेटे के हाथों से टावल लेकर,,, बाथरूम में घुस गई लेकिन जाते-जाते यह उसकी किस्मत का ही दोस्त कहो उसकी नजर अपने बेटे की तने हुए तंबू पर पड़ गई जो की पूरी तरह से एकदम खिला हुआ तंबू की शक्ल में पेट के अंदर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था,,,,, बाथरूम में प्रवेश करते ही वह जल्दी से बाथरूम का दरवाजा बंद कर दी और गहरी गहरी सांस लेने लगी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है वह अपनी गलती पर शर्मिंदा होने लगी,,,, लेकिन तभी उसे अपने बेटे के पेट में बना तंबू याद आने लगा बरसों गुजर गए थे उसने अपने पति के बाद किसी के लंड के दर्शन नहीं किए थे और अपने बेटे के पेट में बने तंबू को देखकर उसे एहसास हो गया था कि उसके बेटे का लंड काफी बड़ा है,,,,

अपने बदल से कपड़े उतारते हुए उसके मन में भी अजीब सी हलचल होने लगी थी हालांकि आज तक उसके मन में अपने बेटे को लेकर कभी भी गलत भावना नहीं जागृत हुई थी लेकिन आज न जाने उसे क्या हो रहा था उसके बदन में अजीब सी उलझन हो रही थी आज उसका दिमाग उसका साथ बिल्कुल भी नहीं दे रहा था,,,,।

कहानी का नायक और नायिका





वह जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार कर दूसरे कपड़ों के लिए बाथरूम के हैंगर पर हाथ बढाई तो हैरान हो गई वह तो कपड़ा लाना ही भूल गई थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और फिर वह टावल को अपने बदन से लपेटकर धीरे से बाथरूम से बाहर निकली,,,, और बिना कुछ बोले अपनी कमरे की तरफ जाने लगी वह बड़ी जल्दबाजी में थी क्योंकि वहीं पर उसका बेटा भी बैठकर पढ़ाई कर रहा था लेकिन अपनी मां को बाथरूम से बाहर निकलते हुए वह देख लिया था और केवल टॉवल में देखकर उसे भी अजीब सा एहसास हो रहा था जल्द से जल्द उसकी मां उसकी नजरों से दूर हो जाना चाहती थी इसलिए लगभग थोड़ा सा तेज चलते हुए वह जाने लगी तो अपने आप ही उसके बदन से टॉवल छूट कर नीचे गिर गई और ऐसे हालात में संजय की नजर अपनी मां पर गई तो वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी लेकिन वह पीछे से अपनी मां को देख रहा था पूरी तरह नंगी उसकी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसकी आंखों की चमक बढ़ गई और उसकी मां जल्दबाजी दिखाते हुए जल्दी से टावल को नीचे से उठे और वापस अपने बदन पर लपेटे हुए अपने कमरे में घुस गई,,,,।

थोड़ी देर बाद खाना खाते समय उसकी मां को छींक आ रही थी और संजय को चिंता होने लगी संजय अपनी मां को सरसों के तेल की मालिश करने के लिए बोल रहा था जिसके लिए उसकी मां तैयार हो गई हालांकि वह तैयार तो नहीं होती लेकिन अब उसे भी कुछ-कुछ हो रहा था वह अभी अपने बेटे के हाथों से तेल की मालिश करवाना चाहती थी जिसके लिए वह सारे काम को निपटा कर खुद उसके कमरे में गई और,,, उसके बिस्तर पर लेट गई संजय धीरे-धीरे उसके बदन पर मालिश करने लगा,,, जिसके चलते हैं उसकी मां मदहोश होने लगी संजय की भी हालत खराब होने लगी संजय अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देखना चाहता था इसलिए मालिश का बहाना करके धीरे-धीरे उसके बदन पर से वस्त्र को उतारना शुरू कर दिया और जैसे ही वह अपनी बाकी साड़ी को उसकी कमर के ऊपर तक उठाया तो अपनी मां की नंगी बुर देखकर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया जिसका एहसास उसकी मां को भी हो रहा था,,,,,।

कहानी की नायिका अपने बेटे को खुश करती हुई



(इतना भर सुगंधा ने कहानी को पढ़ी थी और उसकी बुर पानी फेंक रही थी,,,, उसका दिमाग एकदम समय रह गया था पहली बार वह इस तरह की अश्लील कहानी को पढ़ रही थी और कहानी में मां बेटे का उल्लेख को देखकर उसकी जवानी और ज्यादा फूट रही थी,,,,, अपनी भी साड़ी को कमर तक उठाए हुए अपनी बुर को अपनी हथेली से मसलते हुए वह आगे कहानी का अध्ययन करने लगी,,,,)

संजय का हाथ सरसों के तेल की मालिश उसकी मां की बुर पर कर रहा था उसकी मां मदहोश में जा रही थी पूरी तरह से पागल हो जा रही थी देखते ही देखते संजय आगे बढ़ने लगा और अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा वह आज अपनी मां की जवानी से पूरी तरह से खेलने का इरादा बना चुका था और उसकी मां भी अपने बेटे के साथ एकाकार होने का मन बना ली थी,,, देखते ही देखते संजय अपने हाथों को हरकत देते हुए अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलकर उसके बदन से ब्लाउज को उतार कर वहीं फेंक दिया है अपनी मां की नंगी चूचियों पर सरसों के तेल की धार गिरा कर उसे दोनों हाथों में लेकर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया,,,(ऐसा पढ़ते हुए सुगंधा की हालत खराब होने लगी और वह अपने हाथ से अपने ब्लाउज का बटन खोलकर अपनी चूचियों को बाहर निकाल कर अपने ही कहां से मसाला शुरू करती और अपने मन में अपने बेटे की कल्पना करने लगी) आगे संजय से रहा नहीं जा रहा था,,,, और वह अपनी मां से इजाजत लिए भी नहीं अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया उसकी मां अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से मदहोश हो गई उत्तेजित हो गई उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छाने लगा और वह अपने बेटे के सर पर हाथ रखकर उसे अपनी छाती पर दबाना शुरू कर दी,,,,,।

देखते ही देखते कहानी का अंतिम प्रस्ठ शुरू हो चुका था जिसमें संजय अपनी मां के बदन पर से सारे कपड़ों को उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया था और यह कार्य खुद सुगंधा अपने हाथों से करके बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, संजय बिस्तर पर अपनी मां की नंगी जवान देखकर पागल हुआ जा रहा था और अपने हाथों से अपने कपड़े उतार कर वह भी पूरी तरह से नंगा हो चुका था बाहर तेज बारिश हो रही थी जिसका फायदा संजय और उसकी मां पूरी तरह से उठा लेना चाहते थे संजय का मोटा तगड़ा लंबा लंड देखकर उसकी मां की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,,, संजय की मां अपना हाथ आगे बढ़ाकर,,, अपने बेटे के लंड को पकड़ ली बरसों के बाद उसके हाथ में कोई जवान लंड आया था जिससे वह पागलों की तरह खेल रही थी उसे मुंह में लेकर चूस रही थी और देखते ही देखते सब्जी अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया था और फिर अपनी मां की गुलाबी बुर पर अपने लंड को रखकर एक तेज धक्का मारा और संजय का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर के अंदरूनी अडचने को दूर करते हुए सीधा उसकी मां के बच्चेदानी से टकरा गया और उसकी मां के मुंह से एक तेज चीख निकल गई जो की बरसात के शोर में पूरी तरह से दब गई और फिर संजय मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी मां की कमर को पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया,,,।

कहानी का नायक अपनी मां की चुदाई करता हुआं



कहानी समाप्त हो चुकी थी लेकिन यहां से एक नई कहानी का जन्म होने लगा था सुगंध पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और वहां अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी दो उंगली को अपनी बुर में डालकर अपने बेटे की कल्पना करते हुए बिस्तर पर अंकित अंकित चिल्ला रही थी और जोर-जोर से अपनी दोनों उंगलियों को अपनी बुर के अंदर बाहर कर रही थी और देखते ही देखते उसकी गुलाबी बुर से तेज फवारा फुटा और वह एकदम लहरा कर झड़ने लगी,,,,,,, कहानी को पढ़ने के साथ-साथ अपनी बुर में उंगली करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हुई थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और अपनी मन में यही प्रार्थना कर रही थी कि काश उसकी जिंदगी भी कहानी वाली नायिका की तरह हो जाती तो कितना मजा आता है और यही सब सोचते हुए वह नींद की आगोश में चली गई,,,।
 
अश्लील उपन्यास को पढ़कर और वह भी एक मां बेटे वाली कहानी को पढ़कर तो मानो जैसे सुगंधा का दिमाग एकदम से बदल गया था,,,, वह अपने आप को कहानी वाली मां की जगह रखकर और उसके लड़के की जगह अपने बेटे को रखकर वह मन में कल्पना करने लगी और उसे ऐसा करने में बहुत ज्यादा आनंद की प्राप्ति होने लगी वह पूरी तरह से पहन चुकी थी वह अपने बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी बस शुरुआत करने की देरी थी,,,, अब धीरे-धीरे सुगंधा अपने बेटे के सामने अश्लील हरकत करने की शुरुआत कर दी थी,,,, उसे पूरा विश्वास था कि एक न एक दिन उसकी गर्म जवानी के संपर्क में जाकर उसके बेटे का गरम लावा जरूर पिघलेगा,,,, और उम्मीद पर तो दुनिया कायम थी,,,।



ऐसे ही एक दिन वह किचन में सब्जी काट रही थी,,,,,, और सब्जी काटते काटते उसका कामुक दिमाग बड़ी तेजी से चलने लगा घर में उसे वक्त तृप्ति और अंकित दोनों मौजूद थे तृप्ति पढ़ाई कर रही थी और अंकित यूं ही किचन के सामने ही बैठा हुआ था,,,,,, वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहती थी इसलिए बार-बार सब्जी काटते हुए अपनी कलाइयों की चूड़ियों को बचा रही थी ताकि उसका बेटा उसकी तरफ देखे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा था रह रहा कर सुगंधा को अपने बेटे पर गुस्सा भी आ रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उसकी जगह कोई और जवान लड़का होता तो जरूर उसकी तरफ देखकर मुस्कुराता उसकी हरकतों से उत्तेजित होता और उसकी तरफ आकर्षित होकर खुद भी उसके साथ गंदी हरकत करता लेकिन ऐसा कुछ भी ना होता देखकर सुगंध मन ही मां अपने बेटे को ही भला बुरा कहने लगी,,, लेकिन वह अपनी हरकत को जारी रखते हुए अपने मन में कुछ सोचने लगी और फिर उसके बाद,,,,।



बड़े से बर्तन में आटा लेकर उसमें पानी डालकर आंटा को गुंथने लगी,,,,,,,,, और फिर धीरे से अपने ब्लाउज के ऊपर के दो बटन जल्दी-जल्दी खोल दी और अपनी चूची को नीचे से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ थोड़ा सा उठा देता कि वह काफी अच्छे आकार में उसके बेटे को दिखाई दे और फिर अपने खुले बालों को दोनों तरफ से अपने गले से नीचे की तरफ लटका दी और कुछ बालों को अपनी आंखों की तरफ कर दी और फिर अपनी साड़ी के पल्लू को एकदम से नीचे गिरा दी,,,, ऐसा करते हुए वह अपने बेटे की तरफ देख रही थी लेकिन उसका बेटा था कि अपने में ही मस्त था वह जवानी से भरी हुई अपनी मां की तरफ देख ही नहीं रहा था,,, और उसी बात का तो उसे मलाल था,,,, और अपने इसी मलाल को वह काम करना चाहती थी इसलिए अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर चुकी थी,,, वह वापस आटे को गुंथने लगी,,, देखते ही देखते सुगंध अपने दोनों हाथों में आंटा चुपड ली,,,,।



वह पूरी तैयारी कर चुकी थी उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह अपनी कामुक हरकत को अंजाम देने जा रही थी एक बार वह अपनी छातियों की तरफ देखने लगी जो की अच्छी खासी उभरी हुई नजर आ रही थी,,,, वह अपने बेटे की तरफ देखी और उसे आवाज लगाते हुए बोली,,,।

अंकित ,,,,ओ,,, अंकित,,,

क्या हुआ ,,,?(वह एकदम से अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)

जरा इधर आना तो,,,,

क्या हो गया,,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी जगह पर खड़ा हो गया और रसोइ की तरफ आने लगा,,,, और और अपनी मां के पास पहुंचकर वह बोला,,,)



क्या हुआ मम्मी,,,,?(अंकित अपनी मां की बेहद करीब था ठीक आमने-सामने अगर उसकी जगह कोई और लड़का होता तो उसकी नजर सीधे सुगंधा की भारी भरकर छतिया पर जाती उसकी अस्त व्यस्त हालत पर जाती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ,,,, वह पूरी तरह से सहज था और इसी बात का गुस्सा सुगंधा के मन में भी था क्योंकि उसका बेटा ठीक उसकी आंखों के सामने खड़ा था और जो चीज जवानी की उम्र में देखना चाहिए वह उसे दिखाई नहीं दे रही थी इसलिए वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,)

अरे हुआ कुछ नहीं बस मेरे चेहरे पर से बाल तो हटा दे,,,,

ओहहहह,,,(अपनी मां के कहने पर उसकी नजर उसके चेहरे पर उड़ रहे उसकी बालों की लातों पर गई तब उसे पता चला कि मामला क्या है और अपना हाथ आगे बढ़ाकर वह अपनी मां के गाल पर से बालों की लटो को हटाने लगा,,,,, अपने बेटे की उंगलियों को अपने गालों पर उसके स्पर्श का अनुभव होते ही सुगंधा उत्तेजना के मारे एकदम से सिहर उठी उसके बदन में झुनझुनी सी फैलने लगी,,,, और वह उत्तेजित होते हुए अपनी छाती के उभार को कुछ ज्यादा ही आगे तरफ बढ़ा दी और इसका एहसास अंकित को भी अच्छी तरह से हुआ अपनी मां की हरकत पर अंकित की नजर सीधे उसकी चूचियों पर चली गई और अपनी मां के ब्लाउज की ऊपर के दो बटन को खुला हुआ देखकर वह हैरान हो क्या क्योंकि उसमें से उसकी आधी चूचियां एकदम बाहर की तरफ झांक रही थी मानो की कैद में पड़े कबूतर बाहर आने के लिए फड़फड़ा रहे हैं यह पहला मौका था जब अंकित अपनी मां की चूचियों की तरफ इस तरह से देख रहा था आखिरकार अंकित पूरी तरह से जवान था औरत को देखकर आकर्षण पैदा होना लाजिमी था ऐसा तो वह पहले कभी अनुभव नहीं किया था लेकिन आज इतने करीब से अपनी मां की मदद कर देने वाली चूचियों को देखकर वह हैरान हो गया,,,, और ऊपर के दो बटन खुले होने की वजह से उसकी मां की आधे से ज्यादा चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और उसे देखकर ना जाने क्यों अंकित के मुंह में पानी आने लगा ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था वह अपनी मां के बाल के लटो को उसकी खूबसूरत चेहरे से दूर करते हुए अपनी निगाह को वह अपनी मां की छातियों पर ही टिकाया रह गया,,,,।



अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, अपने बेटे को इस तरह से देखा हुआ प्रकार सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी वह मदहोश होने लगी उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर से नमकीन पानी बहने लगा क्योंकि वह अपनी युक्ति में अपनी इरादे में कुछ हद तक कामयाब होती नजर आ रही थी,,,, और इस बार सुगंधा एक कदम धीरे से आगे बढ़ाई और अपनी छतिया को गहरी सांस लेते हुए ऊपर की तरफ कुछ ज्यादा ही उठा दी और उसके ऐसा करने से अंकित के चेहरे की टोढी सीधे सुगंधा की चूचियों पर स्पर्श हो गई और तब जाकर अंकित को होश आया वह एकदम से हड़बड़ा गया,,,, और अपने आप को एकदम से पीछे ले लिया मानो कि जैसे बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो,,,, यह देख कर सुगंधा अपने बेटे को सहज करते हुए बोली,,,



क्या हुआ,,, ऐसे क्यों हड बढ़ा रहा है,,,,(और तुरंत अंकित के ध्यान को दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली,,) मेरे साड़ी का पल्लू तो ठीक से कर दे,,,,

ओहहह ,, हां,,,,,,(अपनी मां की बात सुनकर जैसे उसे एकदम से होश आया हो वह तुरंत एक बार फिर से अपनी मां की खूबसूरत बदन की तरफ देखा और उसे इस बात का एहसास सुबह की उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया था जिसकी वजह से उसकी छाती का उभार एकदम साफ नजर आ रहा था,,,,, वह धीरे से अपनी मां के साड़ी के पल्लू को पकड़ा और उसे ठीक करते हुए उसकी मद-मस्त जानलेवा छातियों को साड़ी के पल्लू से ढंकते हुए,,,) क्या मम्मी तुम भी साड़ी के पल्लू को नहीं संभाल पा रही हो,,,,,

(अपने बेटे किस तरह की बात को सुनकर सुगंधा अपने मन में ही बोली,,, सही कह रहा है बेटा तू अब मुझसे मेरी साड़ी का पल्लू संभाला नहीं जा रहा मेरी जवानी मुझसे संभाली नहीं जा रही है मेरी जवानी बेलगाम हो चुकी है इसे अपने लगाम से कस दे मेरे राजा,,,,, और अपने आप को संभालते हुए वह बोली,,,)



क्या करूं बेटा खाना बनाते समय अक्सर ऐसा हो जाता है और हाथ में मेरे आटा लगा हुआ था वरना मैं खुद ही ठीक कर लेती,,,,((मन में तो आ रहा था कि वह अपने बेटे को ब्लाउज का बटन बंद करने के लिए भी बोलते लेकिन न जाने क्यों इस समय वह शर्म महसूस करने लगी थी और वह ऐसा नहीं बोल पाई,,, लेकिन सुगंधा अपनी नजरों को अपने बेटे की दोनों टांगों के बीच ले जाने से रोक नहीं पाई और जैसे ही उसकी नज़रें अपने बेटे के दोनों टांगों के बीच पहुंची तो वह देखकर हैरान रह गई क्योंकि उसके बेटे की पेंट में आगे वाले भाग में तंबू बना हुआ था और वह तंबू सामान्य बिल्कुल भी नहीं था उसे तंबू का तनाव कुछ ज्यादा ही बड़ा था जिसे देखते ही सुगंधा की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी थी,,,, कुछ पल के लिए तो सुगंधा को लगा कि यह पल यही थम जाए तो कितना अच्छा हो,,,, लेकिन ऐसा संभव नहीं था अंकित अपनी मां की साड़ी के पल्लू को ठीक करके वहां से जल्द से जल्द हट गया और वापस अपनी जगह पर आकर बैठ गया,,,,।



वैसे तो वह अपने आप को हमेशा सामान्य ही रखता था लेकिन आज उसकी मां की ऊभरी हुई छतियो को देखकर उसके होश उड़ गए थे,,, सामान्य तौर पर कभी भी उसकी नजर औरतों की छातियों पर या उनके नितंबों पर पड़ भी जाती थी तो भी वह उस नजारे को गलत नजरिए से नहीं देखता था,,,, लेकिन आज पहली बार वह अपनी मां की खुली चाहती हो और ब्लाउज के खुले हुए बटन को देखकर पूरी तरह से मंत्र मुग्ध हो गया था,,,, पहली बार उसे एहसास हुआ कि औरतों की छातियों में कितना आकर्षण होता है,,,, वह अपनी जगह पर बैठ कर उसी दृश्य के बारे में सोच रहा था और न जाने क्यों उस द्शय के बारे में सोच कर उसके तन-बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, तभी अचानक उसे इस बात का एहसास हुआ कि पेंट के अंदर उसका लंड एकदम से तन गया है,,,, और इस एहसास से उसके दिल की धड़कन एकदम से बढ़ने लगी तरफ देखा तो उसमें अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे देखकर वह हैरान हो गया था हैरानी उसे इस बात की नहीं थी कि उसका लंड इस समय खड़ा हो गया था हैरानी तो उसे इस बात की थी कि अपनी मां की छातियों को देखकर उसकी हालत हुई थी,,,, इसीलिए उसे बड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि उसने आज तक अपनी मां को गलत नजरिए से नहीं देखा था अपनी मां को क्या वह किसी भी औरत और लड़कियों को गलत नजरिए से देखता ही नहीं था,,,। लेकिन आज न जाने उसे क्या हो गया था उसे ऐसा लग रहा था कि उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई है वह तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ा हुआ और बाथरूम की तरफ चला गया बाथरूम में जाकर वह बाथरूम का दरवाजा बंद करके अपनी पेंट का बटन खोलकर उसे घुटनों तक खींच दिया और फिर अपने अंडर बियर को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाते हुए खड़े लंड की वजह से ऐसा करने में उसे दिक्कत महसूस हो रही थी,,,, लेकिन फिर भी वह जबरदस्ती करता हुआ अपनी अंडरवियर को नीचे की तरफ खींच दिया और जैसे ही अंडर बियर नीचे गई वैसे ही उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड एकदम से स्प्रिंग की तरह उछल पड़ा,,, और तीन चार बार ऊपर नीचे करके होने लगा यह देखकर खुद अंकित भी हैरान हो गया सही मायने में वह अपने खड़े लंड को पहली बार अपनी आंखों से देख रहा था,,,

अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था उत्तेजना के मारे उसके लंड की नशे एकदम फुल चुकी थी जॉकी लंड के उपर उभरी हुई नजर आ रही थी,,,, अपने लंड की हालत को देखकर खुद अंकित हैरान हो गया था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह धड़कते दिल के साथ अपने खड़े और मोटे लंड को अपने हाथ से पकड़ लिया और न जाने क्यों इस समय अपने लंड को पकड़ने में उसे कुछ ज्यादा ही आनंद की अनुभूति हो रही थी और वह एक बार लंड की चमड़ी को पीछे की तरफ खींचा तो उसका सुपाड़ा एकदम से आलू बुखारे की तरह खिल उठा,,,, जोकि रक्त के बहाव के कारण एकदम लाल हो चुका था,,, और फिर उसके लंड से पेशाब की धार फूट पड़ी जो कि सामने की दीवार से टकरा रही थी,,,, अनायास ही पेशाब करते समय लंड की चमड़ी को आगे पीछे वह दो-चार बार खींच दिया,,,, और ऐसा करने पर उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे नहीं मालूम था कि उसके बदन में यह बदलाव किस लिए हो रहा था उसे आनंद किस लिए आ रहा है अगर तीन चार बार वह और अपने लंड की चमड़ी को आगे पीछे करके खींच देता तो उसके लंड से वीर्य का फवारा फुट पड़ता,,,, लेकिन वह अपने बदन में जिस तरह की हलचल हो रही थी उसे देखते हुए उसके मन में थोड़ी घबराहट भी थी और वह तुरंत पेशाब करने के बाद अपने लंड को अपने हाथ से छोड़ दिया,,,,और फिर वह अपनी पेंट को पहनकर बाथरूम से बाहर आ गया,,, लेकिन इस बार वह किचन के सामने नहीं बल्कि अपने मन को शांत करने के लिए घर से बाहर टहलने के लिए निकल गया,,,।
 
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