सुगंधा कभी सोची नहीं थी कि वह अपने बेटे के तरफ इस तरह आकर्षित होगी कि सपने में भी उसके दिलों दिमाग पर उसके बिस्तर पर उसका बेटा ही छाया रहेगा स्वप्न में ही सही सुगंधा ने अपने बेटे के साथ संभोग सुख का आनंद लूट चुकी थी और जिसके जरिए अपने बेटे से उसकी झिझक खत्म सी होने लगी थी वह अपने मन में कल्पना करती थी कि अगर जो सपने में हुआ वह वास्तविक जीवन में हो जाए तो कैसा हो,,,, उसका बेटा बिस्तर पर कैसा प्रदर्शन करेगा कहीं ऐसा तो नहीं उसकी भरी हुई जवान देखकर ही उसका पानी निकल जाएगा और ऐसा भी हो सकता है कि उसका पानी निकाले बिना वह खुद ना झड़े,,,, अपने बेटे की कायाकल्प को देखकर तो उसे ऐसा ही लगता था कि जैसे उसका बेटा बिस्तर पर उसे संपूर्ण रूप से संतुष्टि प्रदान करेगा,,,,।
इन सब के बारे में सोचकर जहां एक तरफ उसका मन उत्तेजित हो जाता तो वहीं दूसरी तरफ उसका मन भरी भी हो जाता था क्योंकि वह ऐसा ख्वाब की दुनिया ढूंढ रही थी जिसमें उसका हम बिस्तर उसका ही बेटा था जो की दुनिया की नजर में गलत था और इन सब के बारे में सोच कर उसे दुख भी होता था लेकिन इस बात से उसे इनकार भी नहीं था कि अपने बेटे की कल्पना करके इस अत्यधिक आनंद की प्राप्ति भी होती थी,,,, कभी-कभी तो वह इस तरह के खयालात के बारे में सोच कर दुखी भी हो जाती थी और अपने आप को कसम देकर इस तरह की कल्पना में ना खोने का वादा भी करती थी लेकिन दूसरे दिन फिर शुरू हो जाती थी ऐसा हुआ कई बार कर चुकी थी लेकिन उसका खुद के मन पर बिल्कुल भी काबू नहीं था जिसकी वजह से उसके ख्याल आते और उसकी जवानी पूरी तरह से बेलगांव होती जा रही थी उसकी जवानी में खूबसूरती में और ज्यादा निखार आते जा रहा था जिसका घर में जवान बेटे को तो बिल्कुल भी पता नहीं चलता था लेकिन घर के बाहर सभी लोग की नजरे सुगंधा पर ही टिकी रहती थी सुगंधा के आते-जाते हंसने बोलने सब पर कई लोगों की नजर रहती थी,,, लोग सुगंधा के बारे में अपने मन में ही अत्यधिक मादकता भरे कल्पना में खुद को उसकी दोनों टांगों के बीच कल्पना करके आनंद लिया करते थे,,, लोगों को सुगंधा की भारी छातिया और गद्देदार गांड कुछ ज्यादा ही उत्तेजित कर जाती थी,,,, लेकिन इन सबसे अनजान था तो वह था सुगंधा का खुद का जवान बेटा अंकित क्योंकि आज तक कुछ नहीं अपनी मां को किसी गलत नजरिए से देखा ही नहीं था अपनी मां को क्या हुआ किसी भी औरत को कभी भी गलत नजरिए से देखता ही नहीं था,,,, इसीलिए मां बेटे दोनों के बीच जैसा सुगंधा के विचार थे उसे तरह से अंकित के विचार मिलते ही नहीं थे वरना जो कुछ भी स्वप्न में हुआ था उसे हकीकत की शक्ल देने में देर ना लगती,,,।
समय के साथ धीरे-धीरे सब कुछ आगे बढ़ता चला जा रहा था सुगंधा अपने मन में यही सोचती थी कि वह किस तरह से अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करें क्योंकि कई बार सोने के बाद उसने अपने मन में फैसला कर दी थी कि अगर उसे शारीरिक संबंध बनाना ही पड़ा तो वह अपने बेटे के साथ बनाएगी क्योंकि इसमें बदनामी का डर बिल्कुल भी नहीं था,,, और ना ही किसी के द्वारा बदनाम करने के दर से बार-बार शोषण करने का डर था घर की बात घर में ही रह जाती और मजा का मजा मिल जाता लेकिन अपने बेटे के चाल चलन और उसके संस्कार देखकर सुगंधा को लगता नहीं था कि उसका बेटा किसी भी तरह से उसके तरफ आकर्षित होगा,,, लेकिन एक औरत होने के नाते उसे अपने आप पर विश्वास था,,, कि वह अपनी नशीली जवानी के चलते अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने में कामयाब हो जाएगी क्योंकि वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि एक स्वर्ग की अप्सरा ने एक संत की तपस्या को भंग कर दी थी और इस समय वह संत था उसका बेटा और अप्सरा थी वह खुद,,,, बस उसे मौका नहीं मिल रहा था अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए हालांकि वह अपने मन में ठान चुकी थी कि अब वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करके अपनी मनमानी करके रहेगी लेकिन इसकी शुरुआत करने में उसके मन में भी झिझक हो रही थी क्योंकि उसे इसह बात का डर था कि अगर उसका बेटा बुरा मान गया तब क्या होगा उसकी नजर में तो वह बदनाम हो जाएगी और उसका बेटा फिर कभी उसकी इज्जत भी नहीं करेगा यह ख्याल मन में आता था तो वह थोड़ा डगम जाती थी लेकिन फिर उसे वही सपना याद आने लगता था जब वह सपने में उसका बेटा उसके साथ जबरदस्त संभोग कर रहा था और फिर इस कल्पना के जरिए वह अपने आप को आगे बढ़ने का दृढ़ विश्वास कराती थी,,,।
धीरे-धीरे सुगंधा अपने जीवन में आगे बढ़ रही थी वह रोज सही समय पर स्कूल पहुंच जाती है और सही समय पर घर पर भी आ जाती थी,, घर के बाहर अगर कोई उसकी सहेली थी तो वह थी नूपुर जिससे वह ज्यादा बातचीत भी नहीं करती थी लेकिन उसे लगता था कि एक वही है जो उसकी सही मायने में सहेली है क्योंकि वह रोज रिशेष पडते ही अपना लंच बॉक्स लेकर उसके पास पहुंच जाती थी और दोनों आपस में मिलकर एक दूसरे का लंच बॉक्स खत्म करते थे,,,, वैसे तो सुगंध को नूपुर के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे सुगंधा को उसी के द्वारा पता चला कि वह शादीशुदा और दो बच्चों की मां ठीक उसकी ही तरह लेकिन उसके दोनों बच्चे अंकित और तृप्ति की तरह जवान नहीं थे,,,,।
सुगंधा वैसे तो खास कुछ अपने बारे में नूपुर को बताती नहीं थी लेकिन उसके बारे में जानने की उत्सुकता उसकी हमेशा बढ़ती ही रहती थी नूपुर सुगंधा जितनी खूबसूरत तो नहीं लेकिन सुगंधा से काम भी नहीं थी दो बच्चों की मां भाभी थी और अपने बदन की देखरेख अच्छी तरह से रख कर वहां भी पूरी तरह से जवान बनी हुई थी पूरी तरह से गदराई जवानी की मालकिन थी नुपुर,,,,,,, वह भी स्कूल अक्सर रिक्शा से या बस तो कभी उसके घर से कोई छोड़ने आ जाता था अधिकतर सुगंधा ने तो एक उम्र दराज आदमी को ही देखी थी जिसकी तोंद कुछ ज्यादा ही निकली हुई थी और देखने में कुछ खास नहीं था स्कूटर पर उसके पीछे बैठकर वह कभी-कभी स्कूल आतीनथी स्कूटर वाले आदमी को देखकर उसके बारे में जानने की उत्सुकता कुछ ज्यादा ही थी सुगंध को बचाना चाहती थी कि नूपुर जिसके साथ बैठकर आती है वह है कौन उसका पति है या कोई और या घर का कोई सदस्य,,,,,,।
और ऐसे ही एक दिन दोनों विशेष के समय लंच कर रहे थे तो बात ही बात में सुगंधा नूपुर से बोली,,।
नूपुर वह स्कूटर पर तुम जिसके साथ बैठ कर आती हो कौन है वो,,,,(नूपुर की तरफ देखे बिना ही सुगंधा उससे बोली,,, लेकिन नजर नीचे किए हुए भी वह नूपुर की तरफ कर नजरों से देख रही थी वह एक तरह से नूपुर के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही थी कि नूपुर क्या जवाब देती है,,,, सुगंधा के मुंह से इस बारे में बात की जिक्र छिड़ते ही नूपुर एकदम से शक पका गई नूपुर के चेहरे को देखकर ही लग रहा था कि वह जवाब देना नहीं चाह रही थी और उसके चेहरे पर आया यह भाव सुगंधा को अच्छी तरह से समझ में आ रहा था,,,, नूपुर यह सवाल सुनकर खामोश रही और लंच करने में ही अपने आप को व्यस्त करने की कोशिश में लगी रही तो सुगंधा अपने सवाल का जवाब न पाकर एक बार फिर से बोली,,,)
क्या हुआ,,, तुम बताई नहीं कौन है वो,,,,
वह मेरे पति हैं,,,( अपनी नजरों को नीचे करके अगल-बगल देखते हुए नूपुर ने यह जवाब दी और ऐसा लग रहा था कि जैसे नूपुर सुगंधा के सवाल का जवाब नहीं देना चाहती थी या अपने और उसके बीच के रिश्ते को बताना नहीं चाहती थी लेकिन एक बार तो सुगंधा को झटका सा लगा नूपुर के मुंह से यह सुनकर कि वह इंसान उसका पति है,,, जवाब देने के बाद अनूपपुर अपने आप को लंच करने में व्यस्त कर दी लेकिन पल भर में ही सुगंधा नूपुर के दर्द को अच्छी तरह से समझ गई,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि नूपुर बहुत खूबसूरत औरत है कदकाठी और रंग रखाव में भी एकदम गोरी चिट्टी,,, बदन का भराव एकदम मादकता लिए हुए था,,, और ऐसे खूबसूरत बदन की मालकिन होने के नाते किसी भी सूरत में वह उस इंसान की बीवी नहीं लगती थी,,, इसीलिए तो सुगंध अपने मन में ही सोचने लगी कि कहां राजा भोज और कहां गंगू तेली यह तो लंगूर के हाथ में अंगूर लग जाने जैसी बात थी लेकिन यह बात सुगंधा इस समय कहना नहीं चाहती थी लेकिन पल भर में ही भानपुर के दर्द को समझ गई थी कितनी खूबसूरत औरत भला उसे इंसान के साथ कैसी रहती होगी जो की उम्र में भी उससे बड़ा था और लगभग उसके ससुर की उम्र जैसा ही लगता था दोनों साथ में चलते समय किसी भी सूरत में पति-पत्नी लगते ही नहीं थे और यही प्रश्न सुगंधा के मन में भी था इसीलिए वह अपने मन की उत्सुकता को खत्म कर लेना चाहती थी इसीलिए सुगंधा ने नूपुर से यह सवाल पूछी थी,,,, सवाल जवाब के बाद कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही इस खामोशी को सुगंधा ही खत्म करते हुए बोली,,,)
नूपुर बुरा ना मानना लेकिन तुम्हें देखने के बाद किसी को यकीन ही नहीं होगा कि वह तुम्हारा पति है मुझे माफ करना मैं यह बात कहना नहीं चाहती थी लेकिन मुझे कहना पड़ रहा है क्योंकि तुम बहुत खूबसूरत हो मुझे लग रहा था कि शायद तुम्हारा पति तुम्हारी तरह ही होगा लेकिन सब किस्मत की बात है लेकिन यह सब हुआ कैसे वह तो उम्र में तुमसे भी ज्यादा बड़े हैं,,,,
मजबूरी,,,(कुछ देर खामोश रहने के बाद नूपुर बोली)
मजबूरी,,,, कैसी मजबूरी (आश्चर्य जताते हुए सुगंधा बोली,,)
गरीबों की और कैसी,,,(नूपुर थोड़ा सा चिढ़ते हुए बोली,,, उसकी बात से लग रहा था कि जैसे वह जवाब देना नहीं चाहती थी लेकिन फिर भी सुगंधा बोल पड़ी,,,)
गरीबी मैं कुछ समझी नहीं,,,
हम सात भाई बहन थे पांच बहन और दो भाई,,, मैं तीसरे नंबर की थी बहनों में दो बहनों की तो शादी जैसे तैसे करके मम्मी पापा ने कर दी है लेकिन उसके बाद पापा की नौकरी छूट गई कहीं नौकरी नहीं मिल रही थी पैसे का जुगाड़ नहीं हो रहा था और मेरी शादी की उम्र हो चुकी थी मेरे पिताजी और मेरी गरीबी का फायदा उठाकर मेरे पति के पिताजी मेरे पिताजी से मिलकर शादी में की कर दिए शादी का सहारा खर्चा गहना कपड़े लगते सब कुछ का खर्चा उन्हीं लोगों ने दिया,,, मेरे पिताजी मजबूर थे और शादी तय हो गई,,,,
क्या कह रही हो नूपुर इसमें तुम्हारी मर्जी थी,,,
तुम्हें क्या लगता है मेरी जैसी औरत की मर्जी होगी क्या भला लेकिन मैं मजबूर थी ना चाहते हुए पर मुझे हां कहना पड़ा और नतीजा तुम देख रही हो,,,,
(इतना कहते हुए उसकी आंखें छलक आई जिसे वह अपने रुमाल से पोछने की कोशिश कर रही थी,,, सुगंधा तुरंत हाथ बढ़ाकर उसकी हथेली को अपने हथेली में लेकर दबा दी यह एक तरह से उसकी तरफ सांत्वना का इशारा था उसे शांत कराते हुए सुगंधा बोली,,,)
इंसान अपने मन में तो बहुत कुछ सोच कर रखता है अपने सपनों की दुनिया अलग ही बसा कर रखता है लेकिन हकीकत कुछ और होती है क्योंकि किस्मत में जो कुछ भी लिखा होता है वह तो होना ही है तुम्हें देखकर कोई नहीं कहेगा कि तुम्हारी पसंद ही की शादी हुई है लेकिन कर भी क्या सकती है किस्मत को मंजूर भी यही था,,,,।,,,
मेरे बारे में तो जान गई लेकिन अपने बारे में कुछ तो बताओ,,,(नूपुर बहुत ही ज्यादा अपने आप को स्वस्थ करते हुए बोली,,,,, नूपुर की बात सुनकर सुगंधा के भी चेहरे पर उदासी छाने लगी,,, वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)
अपनी तो जिंदगी एकदम खुली किताब की तरह है मेरे दो बच्चे हैं और पति का देहांत हुए बरसों गुजर गए,,,,।
क्या,,,,?(सुगंधा के मुंह से इतना सुनते ही एकदम से आश्चर्य में नूपुर बोली क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था की सुगंधा जो कुछ भी कह रही है वह सही है,,,)
हा नुपुर यह सच है मेरे पति का देहांत हुए लगभग लगभग सात आठ साल गुजर चुके हैं मेरे दो बच्चे हैं बड़ी लड़की है छोटा लड़का है ,,,,
मुझे माफ करना सुगंधा मुझे मालूम नहीं था लेकिन तुम्हें देखकर कोई भी नहीं कह सकता कि तुम इतना बड़ा दुख हंसते-हंसते झेल रही हो,,,,
मैं तुमसे कहीं ना नुपुर कि इंसान सोचता कुछ और है होता कुछ और है,,,, मेरे पति भी इसी स्कूल में शिक्षक थे और यह अच्छा हुआ कि उन्होंने मुझे भी इस स्कूल में शिक्षिका के रूप में जोब दिल दिए थे वरना गुजारा करना मुश्किल हो जाता,,,
(सुगंधा के जीवन के बारे में सुनकर नूपुर को बहुत दुख हो रहा था क्योंकि नूपुर ने कभी सपने में नहीं सोची थी कि इतनी खूबसूरत और हंसते खेलते रहने वाली औरत इतना बड़ा दुख झेल रही है,,,, वह दोनों के बीच बातों का सिलसिला और बढ़ता इससे पहले ही रिशेष पूरी होने की घंटी बज गई और दोनों एक दूसरे की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर अपना लंच बॉक्स बैग में रखकर अपनी अपनी क्लास की तरफ जाने लगी,,,,।)
रात को खाना खाने के बाद अपने कमरे में बिस्तर पर पडते ही फिर से वही सिलसिला शुरू हो गया,,,, बिस्तर पर जाते ही अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई फिर वही अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपने जवानी की प्यास को बुझाने की कोशिश करने लगी,,,, और फिर गहरी निंद्रा में सो गई सुबह-सुबह जब दरवाजे पर दस्तक होने लगी तो उसकी आंख खुली और अपने आप को बिस्तर पर संपूर्ण रूप से नंगी देखकर वह जल्दी से उठकर बैठ गई वह जानती थी कि दरवाजे पर दूध वाला आया था वह अपने सारे कपड़े पहनने में असमर्थ थी इसलिए गाउन को जैसे तैसे करके पहन ले और फिर अपने कमरे से निकलकर और किचन में गई और एक पतीला लेकर मुख्य दरवाजे पर पहुंच गई और दरवाजा खोलकर दूध लेने लगी दूध वाला सुगंधा को देखकर रोज की तरह ही मुस्कुराया और बोला,,,)
बीबी जी थोड़ा जल्दी उठ जाया करो मुझे देर हो जाती है,,,,
माफ करना आंख लग गई थी,,,,(और इतना कहते हुए बात पतीला लेकर थोड़ा सा झुक गई दूधवाला साइकिल को स्टैंड पर लगाकर,,, दूध के कान में से नाप भरकर दूध निकाला और पतीला में डालने लगा,,, अभी तक तो वह केवल दूध की धार देख रहा था लेकिन उसकी नजर जैसे ही धार के ठीक सामने गई तो उसके होश उड़ गए,,, क्योंकि दूध लेने के लिए सुगंध झुकी हुई थी और झुकाने की वजह से उसके गांव में से उसकी मदमस्त कर देने वाली खरबूजे जैसी च एकदम साफ दिख रही थी और साथ ही उस चुचियों की शोभा बढ़ा रही उसकी कड़क निप्पल भी एकदम तनी हुई साफ दिख रही थी,,,, यह नजारा देख कर तो दूध वाले की हालत खराब हो गई और उसके पेट में तंबू बनना शुरू हो गया,,,। और इस बात से सुगंधा बिलकुल बेखबर थी क्योंकि अभी भी हल्की-हल्की नींद में ही थी ,, दूध वाला तो पहला नाप भरकर दूध पतीला में डाला,,, और उसके बाद उसे आधा ही नाप डालना था लेकिन इस बार भी वह पूरा नाप भर लिया था दूध से और पतीला में डालते हुए वह सुगंधा की गाउन में उसकी चूचियों को देखता रहा उसकी कड़क निप्पल को देखकर उसका लंड कड़क हो गया था,,, सुगंधा को अभी तक इस बात का अहसास तक नहीं हुआ था कि वह दूध वाला उसकी चूचियों को देख रहा था जो कि एकदम साफ नजर आ रही थी,,,,, उसका ध्यान तब गया जब पतीले में से दूध नीचे गिरने लगा हुआ एकदम से दूध वाले को बोली,,,।
अरे अरे भैया यह क्या कर रहे हो,,,,(इतना कहते हुए वह दूध वाले की तरफ देखी तो उसकी निगाहों की सिधान पर जब उसका ध्यान गया और वह नजर झुका कर अपनी छातियों की तरफ देखने लगी तो उसके होश उड़ गए वाकई में उसकी चूची एकदम साफ नजर आ रही थी उसे इस बात का एहसास हुआ कि उस गलती हो गई थी रात को वह नंगी ही सो गई थी वह सुबह उठते ही वह जल्दबाजी में केवल गाउन पहनकर बाहर आ गई थी जिसमें से उसका पूरा बदन एकदम साफ झलक रहा था,,,, अपनी गलती का अहसास होते ही सुगंधा तुरंत अपना एक हाथ अपने गाऊन के उपर सतह पर रखकर अपनी चूचियों के नजारे को छुपाने की कोशिश करने लगी,,,, सुगंधा की हरकत को देखकर दूध वाले को समझ में आ गया कि वह जान गई है इसलिए वह तुरंत बिना कुछ बोले साइकिल को स्टैंड पर से उतरा और तुरंत वहां से रवाना हो गया सुगंध को अपनी गलती का एहसास हो रहा था वह तुरंत दरवाजा बंद करके कमरे में आ गई और फिर रसोई घर में प्रवेश करते ही वह ट्यूबलाइट की स्वीच ऑन करके दूध के पतीले को किचन पर रखकर गहरी गहरी सांस लेने लगी शुरू शुरू में तो उसे एकदम से घबराहट महसूस होने लगी लेकिन जिस तरह से वह दूध वाला उसकी चूचियों को देख रहा था सुगंधा के बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वैसे तो सड़क पर आते जाते हर कोई उसके बदन को अपनी आंखों से नजर भर कर देखता ही रहता था लेकिन आज पहली बार था जब उसकी आंखों के सामने एक दूध वाला उसकी नंगी चूचियों को जी भर कर देख रहा था इस बात का एहसास उसके बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रहा था वह दूध वाले के बारे में सोचने लगी तभी उसके मन में युक्ति सोचने लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि जब दूध वाला उसकी चूची की झलक भर देख कर इस कदर पागल हो सकता है तो उसका बेटा क्यों नहीं,,,, और यही सोचकर उसके होठों पर मादक मुस्कान नाचने लगी,,,,।