Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 7 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

बस से उतरने के बाद ही सुगंधा राहत की सांस ली थी,,, वह मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि अच्छा हुआ जल्दी से उसकी स्कूल आ गई थी,, वरना आज न जाने क्या होता उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे की उम्र के लड़के इस कदर गंदी हरकत करते होंगे क्योंकि उसने आज तक इस तरह की हरकत अपने बेटे की तरफ से तो नहीं देखी थी और ना ही कभी उसे उम्मीद थी कि उसका बेटा इस तरह की कोई हरकत करेगा,,,, बस में उसके पीछे तीन लड़के खड़े थे लेकिन वह अपने पीछे वाले लड़के को ही गौर से देख पाई थी जो की बिल्कुल उसके बेटे के ही उम्र का था,,,, उन तीनों की बातें सुनकर उसकी जो हालत हुई थी उसे बयां करना मुश्किल हुआ जा रहा था अभी पूरी तरह से जवान फूटी भी नहीं थी और उनके मन में इतनी गंदी-गंदी बातें चल रही थी किसी भी औरत को देखकर वह लोग गंदी हरकत करने के उतारू हो जाते थे जरा भी लाज शर्म डर नहीं था उन तीनों में वरना अगर ऐसा होता तो वह लड़का उसके बदन से सटने की कोशिश ना करता,,,,।



क्लास में पहुंच जाने के बावजूद भी उसके बदन में अजीब सी थरथराहट थी उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे अभी भी वह तीन लड़के उसके पीछे खड़े हो क्योंकि बार-बार वह पीछे मुड़कर देख ले रही थी,,,,,,, वैसे तो सुगंधा इससे पहले भी मर्दों की नजर को अपने बदन पर फिसलने की आदत से वाकिफ थी,,, और आते जाते कभी कबार अपने लिए मर्दों के द्वारा गंदी टिप्पणियों को भी सुन चुकी थी,,, लेकिन वह सब टिप्पणियां दबे श्वर में थी,,, जिसके कुछ शब्द ही उसके कानों तक पडते थे,,,, और सुगंधा उन शब्दों के हिसाब से अंदाज़ा लगती थी कि वह टिप्पणियां उसके बारे में ही थी,,,, लेकिन आज ऐसा पहली बार हुआ था कि कोई उसके बारे में खुलकर गंदे शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,, और वह भी कोई आदमी नहीं बल्कि उसके बेटे के उम्र का लड़का,,,,, इसीलिए तो वह एकदम हैरान थी,,,, जो कुछ भी हुआ था वह सब कुछ सुगंधा के सोच के परे था,,,, उसे इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि बस में उसके साथ इस तरह की हरकत हो जाएगी हालांकि वह इससे पहले भी कई बार बस का उपयोग कर चुकी थी,,, लेकिन इस तरह का अनुभव उसे कभी नहीं हुआ था हां इतना जरूर था कि बस में भीड़भाड़ की वजह से लोग एक दूसरे के स्पर्श होकर निकल जाते थे लेकिन इतनी गंदी हरकत आज तक उसके साथ किसी ने नहीं किया था,,,।

सुगंधा अपनी क्लास में कुर्सी पर बैठी हुई थी और अपने विद्यार्थियों को पाठ पूरा करने के लिए दे दी थी आज उसका पढ़ने का मन बिल्कुल भी नहीं था,,,, बार-बार उसका ध्यान बस वाले लड़कों की तरफ ही चला जा रहा था,,,,, उनकी हरकत के बारे में सोचकर उसके बदन में जहां एक प्रकार का डर फैल जाता था वहीं ना जाने क्यों उसकी दोनों टांगों के बीच की हलचल बढ़ जाती थी सुगंधा ने बस में भी महसूस की थी कि उसे लड़के की हरकत की वजह से उसकी पेंटिं पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,, और यही सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है जबकि जो कुछ भी हो रहा था वह सब कुछ उसकी इच्छा के विरुद्ध था अनजाने में हो रहा था फिर भी उसके बदन में उत्तेजना अपना असर क्यों दिख रही थी,,,,, यही सोच सोच कर वह हैरान हुए जा रही थी,,,।

जैसे तैसे करके रिशेष की घंटी बज गई,,, सुगंधा को अपनी दोनों टांगों की बीच की स्थिति से असहजयाता महसूस हो रही थी,,, उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी पेंटिं पूरी तरह से गीली हो चुकी थी गीली होने की वजह से उसमें चिपचिपाहट हो रही थी जिससे वह बहुत असहज महसूस कर रही थी,,,, इसीलिए घंटी बजते ही विद्यार्थियों से पहले सुगंधा अपनी जगह से खड़ी हुई और क्लास से बाहर निकल गई,,,, वह जल्दी-जल्दी बाथरूम के पास पहुंच गई और बाथरूम का दरवाजा खोलकर बाथरूम में प्रवेश कर गई,,,, बाथरूम का दरवाजा अच्छे से बंद कर लेने के बाद वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी कमर तक उठा दी और अपनी दोनों टांगों के बीच नजर नीचे करके देखी तो उसके होश उड़ गए,,, उसकी पैंटी आगे से पूरी तरह से भीग चुकी थी उसकी बुर ने कुछ ज्यादा ही पानी निकाल दिया था,,, ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे उस पर पानी गिरा हो,,,, वैसे तो उसकी इच्छा हो रही थी की पेंटिं निकाल कर अपने पर्स में रख ले क्योंकि पेंटी पहने हुए उसे बहुत ही ज्यादा असहजता महसूस हो रही थी,,,, लेकिन वह अपने घर पर नहीं बल्कि स्कूल के बाथरूम में थी इसलिए ऐसा करना उचित नहीं था वह धीरे से एक हाथ से अपने पेटी के आगे वाले इलास्टिक वाले रबड़ को पड़कर आगे की तरफ खींची और अंदर की तरफ देखने लगी उत्तेजना के मारे उसकी बुर कचोरी की तरह फुली हुई नजर आ रही थी,,,, अपनी बुर पर नजर पडते ही वह एक गहरी सांस ली और फिर पेटी के अंदर मुआयना करने लगी,,, बुर से निकला मदनरस पूरी तरह से चिपचिपाहट भरा हुआ था सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि यहां पर वह कुछ नहीं कर सकती अगर वह उसे धोने की कोशिश करती है तो उसकी पेंटिंग पूरी तरह से गिली हो जाएगी और फिर उसे और असहजता महसूस होगी,,,,,,।

अपनी गीली और कचोरी की तरह फुली हुई बुर को देखकर सुगंधा का मन अपनी बुर में उंगली करने को कर रहा था लेकिन इस समय उसके संस्कार और स्कूल की मर्यादा उसके हाथ को रोके हुए थे,,,, वह गहरी सांस लेते हुए अपनी पेंटी के छोर को दोनों हाथों से पकड़ कर,,, उसे घुटनों तक नीचे खींच दी और फिर बैठकर पेशाब करने लगी पल भर में ही उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद से सिटी की मधुर ध्वनि के साथ खारे पानी का फवारा निकाला और फिर सुगंधा राहत की सांस लेने लगी बस वाली हरकत की वजह से ही उसे आज बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह अपने आप को रोकी हुई थी पेसाब की तीव्रता इतनी तेज थी कि उसकी बुर से पेशाब की धार निकल कर सीधे बाथरूम के दरवाजे पर गिर रही थी,,, एक तरह से सुगंधा अपने पेशाब की धार से बाथरूम का दरवाजा भीगो रही थी,,,, ठीक से पेशाब कर लेने के बाद सुगंधा अपनी जगह पर खड़ी हुई और पैंटी को ऊपर कमर तक चढ़ा दी अभी तक वह उसके गीलेपन से परेशान थी लेकिन वह कुछ भी कर नहीं सकती थी इसलिए धीरे से नीचे साड़ी छोड़कर वहां अपने कपड़ों को दुरुस्त करके बाथरूम से बाहर निकली,,,, और अपना लंच बॉक्स लेकर स्टाफ रूम में चली गई,,, जहां पर पहले से ही नूपुर उसका इंतजार कर रही थी,,,, वैसे तो अगले साल ही नूपुर ने शिक्षिका के रूप में पद ग्रहण की थी और दो-तीन महीने ही हुए उसे सुगंधा से दोस्ती किए हुए हालांकि दोनों के बीच केवल स्टाफ रूम तक ही रिश्ता सीमित था,,, दोनों केवल लंच करते समय ही आपस में बातचीत किया करते थे और एक दूसरे को अपने लंच बॉक्स में से लाया हुआ खाना शेयर करते थे और दोनों के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं होती थी दोनों एक दूसरे के बारे में कुछ जानती भी नहीं थी बस एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा देती थी बस इतना ही रिश्ता दोनों में था और जैसे ही सुगंधा स्टाफ रूप में पहुंची नूपुर ने आवाज देकर सुगंधा को अपने पास बुला ली और फिर दोनों एक साथ लंच करने लगे,,,,।

सुगंधा को स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार था बहुत जल्दी से जल्दी घर पहुंच जाना चाहती थी क्योंकि उसके मन में अजीब सी हलचल हो रही थी और जैसे ही छुट्टी की घंटी बजी सुगंधा अपना पर्स लेकर स्कूल से बाहर निकल गई और ऑटो पकड़कर सीधा अपने घर पहुंच गई,,, घर पर पहुंचकर उसने जल्दी से दरवाजे पर लगा हुआ ताला खोला और फिर घर में प्रवेश करके दरवाजे को बंद कर दी और अपने पर्स को टेबल पर रखकर सीधा बाथरूम में घुस गई और बाथरूम का दरवाजा बंद भी नहीं की और अंदर घुसते ही अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर एकदम निर्वस्त्र हो गई एकदम नंगी,,,,, अपनी आखिरी वस्त्र अपनी पेंटिं को उतारते हुए वह पेंटी को ही घूर-घूर कर देख रही थी वह अभी तक पूरी तरह से गीली थी वह अपने हाथ में लेकर इधर-उधर घूमर पेटी को देखने के बाद उसे बाथरूम में नीचे फेंक दी और फिर अपनी दोनों टांगें हल्के से खोलकर अपनी नितंबों को आगे की तरफ ले जाकर वह अपनी बर को बड़े गौर से देखने लगी वह पूरी तरह से गुलाबी हो चुकी थी और,,,,, उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फूल भी गई थी सुगंधा अपनी हथेली को पूरी तरह से अपनी बर पर रखकर उसे अपनी हथेली में छुपा ली और उसे अपनी आंखों को बंद करके ऊपर नीचे करके रगड़ना शुरू कर दि,,,,।

अपनी हरकत से ही पल भर में उसके मुख से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,, वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी एक अद्भुत आनंद मिलता था उसे अपनी हरकत में वह अपनी हथेली को अपनी बर पर पूरी तरह से चिपक कर उसे पर दबाव बनाकर उसे ऊपर नीचे करके अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को रगड़ रही थी जिससे उसकी बुर पूरी तरह से गुलाबी हो चुकी थी और उसमें से मदन रस का बहाव निरंतर हो रहा था सुगंधा इतना तो समझ गई थी कि जिस तरह का खेल हुआ खेल रही है अब वापस कदम हटाना मुमकिन नहीं था क्योंकि उसकी जवानी की प्यास बुझ ही नहीं रही थी क्योंकि उसकी जवानी पूरी तरह से बेलगाम हो चुकी थी और यह लगाम किसी मर्दाना जोश से भरे हुए मर्द के हाथ में आने से ही उसकी प्यास बुझने वाली थी,,,,हांथ की उंगलियों से नही बल्कि टांगो के बीच लटक रहे मोटे मुसल से उसकी प्यास बुझने वाली थी और इस बात को भाभी अच्छी तरह से जानती थी लेकिन इस समय असहाय थी जवानी से भारी होने के बावजूद भी वह मोटे तगड़े लंड से वंचित थी वरना ऐसी जवानी प्रकार कोई भी औरतों मर्दों की लाइन लगाने में पूरी तरह से सक्षम थी,,, वैसे तो अपने लिए मर्दों की लाइन लगाना सुगंधा के लिए भी कोई बड़ी बात नहीं थी लेकिन संस्कार और मर्यादा भी कोई चीज होती है,,, वह अपने संस्कार और मर्यादा के विरुद्ध कोई कार्य करना नहीं चाहती इसीलिए तो वह अपनी जवानी की प्यास को अपनी उंगलियों का सहारा देकर बुझा रही थी,,,।

और इस समय भी वह एक साथ अपनी दो उंगलियों को अपनी कचोरी जैसी खुली हुई बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करना शुरू कर दी उसकी आंखें पूरी तरह से बंद थी टांगे दोनों खुली हुई थी और नितंबों का झुकाव आगे की तरफ था जिसे वह हल्के-हल्के आगे पीछे करते हुए अपनी उंगली को ही लंड समझकर मजा ले रही थी,,, इस समय घर में कोई नहीं था दरवाजा भी बंद था इसलिए वह अपनी आंखों को बंद करके गरमा गरम में शिसकारी की आवाज लेते हुए वह संभोग के सुख को महसूस करते हुए अपनी इच्छा की पूर्ति कर रही थी और देखते ही देखते उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और एक बार फिर से उसकी बुर से गरम लावा फूट पड़ा,,,।
 
, एक तरफ जहां सुगंधा अपनी हरकत की वजह से शरीर में जिंदगी महसूस करती थी वही अपने मन में उठ रहे जवानी के तूफान से कहीं ना कहीं उसे भी आनंद प्राप्त हो रहा था,,, लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी जीवन और जवानी दोनों की डोर किस दिशा में जा रही है उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,, क्या करें क्या ना करें यह उसके समझ के पार था उसकी जवानी इस समय पानी की धार बन चुकी थी जो जहां जगह मिल रही थी उसी और खिंची चली जा रही थी,,, उसकी आंखों के सामने आने वाला जोशीला और घाटीला बदन का हर एक मर्द उसे अपने बिस्तर पर महसूस होने लगा था ना चाहते हुए भी वह चाहने लगी थी कि उसे भी बिस्तर पर एक मर्द की जरूरत है जो उसकी जवानी के रस को अपनी मर्दाना अंग से नीचोड सके,,,,।

उसके जीवन में सब कुछ बदल गया था रहन-सहन का तरीका देखने का तरीका यहां तक कि उसे अपने बेटे में भी एक मर्द नजर आने लगा था जो कि अंकित इस बात से पूरी तरह से अंजान था ,,,, वह तो अपने में ही मस्त रहता था उसे क्या पता कि उसकी मां के अंतर मन में किस तरह की हलचल मच रही है कई दिनों से वह किस तरह से अपने आप से ही जूझ रही है,,, और अगर शायद कोई जवान लड़का अपनी मां के अंतर्मन में हो रही हलचल को समझ लेता तो शायद बिस्तर पर वह कब का अपनी मां की दोनों टांगों के बीच होता ,,,

सुगंधा सब्जी काट रही थी,,,, शाम ढल चुकी थी और अंधेरा रोशनी को अपनी आगोश में लेकर चारों तरफ फैलने लगा था,,,, समय अपनी गति से चल रहा था लेकिन सुगंधा मानो स्थिर हो चुकी थी,,, अपने पति के गुजरने के बाद इस तरह से उसने अपनी जवानी को संभाल कर रखी थी और अपने अरमानों को दबाकर रखी थी एक गलती के चलते मन में दबी हुई जवानी की चिंगारी पूरी तरह से भड़क चुकी थी,,, निरंतर बार-बार अपने ही ख्यालों से वह अपनी पेंटिं को गीली कर ले रही थी,,,, वह अपनी बेटी के बारे में ही सोच रही थी कि तभी अंकित ठीक उसके सामने आकर बैठ गया और किताब खोलकर पढ़ने लगा अंकित को क्या पता था कि उसकी मां जवानी की लहरों में पूरी तरह से डूबती चली जा रही है वह अपने ख्यालों में खोया हुआ था और सुगंधा अपने ख्यालों में,,,, वह सब्जी काटते हुए अंकित को देख रही थी उसके भोले चेहरे को देख रही थी उसके गठीले बदन को देख रही थी,,,, उसका ध्यान और चित दोनों अंकित के ऊपर टिका हुआ था,,, अंकित इस बात से बेखबर था वह पढ़ाई कर रहा था और सुगंधा अपने मन की तपन को अपनी आंखों से सेंक रही थी,,, कि तभी हल्की सी दर्द है कि करहा की आवाज सुगंधा के मुंह से आई,,, अंकित की नजर तुरंत अपनी मां के ऊपर गई और उसने देखा तो दंग रह गया उसकी मां की उंगली और किसी कट गई थी वह तुरंत किताब एक तरफ रख कर अपनी जगह से खड़ा हुआ,,,

अरे यह क्या कर ली मम्मी तुमने,,,(इतना कहते हुए अंकित तुरंत अपनी मां के करीब आया और एकदम घुटनों के बल बैठकर अपनी मां का हाथ अपने हाथ में ले लिया और बिना कुछ सोचे समझे अपनी मां की कटी हुई उंगली को अपने मुंह में भर लिया,,,, और अपनी मां की उंगली से बह रहे खून को बंद करने की कोशिश करने लगा,,,, अंकित तो अपना काम कर रहा था वह पूरी तरह से परेशान हो चुका था वह जानता था कि उसकी मां को दर्द हो रहा होगा और एक बेटा होने के नाते अपना फर्ज निभा रहा था लेकिन सुगंधा जो उसकी मां थी अपने बेटे की यह हरकत पर पूरी तरह से रोमांचित हो उठी वह अपने बेटे की हरकत को एक मां के नजरिए से नहीं बल्कि एक औरत के नजरिए से देख रही थी,,,, अंकित की हरकत से वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी,,,,। जिस तरह से अंकित ने बिना कुछ सोचे समझे उसका हाथ पकड़ कर उसकी कटी हुई उंगली को अपने मुंह में डालकर चूस रहा था यह देखकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,, सुगंधा को इस समय अंकित में अपना बेटा नहीं बल्कि एक प्रेमी नजर आ रहा था जो उसका इतना ख्याल रखना था और यह ख्याल आते ही उसकी दोनों टांगों के बीच थरथराहट बढ़ने लगी वह मदहोश होने लगी सुगंधा की आंखों में खुमारी छाने लगी और वह मदहोश नजरों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी,,,,,,।

अब तक अंकित की नजर अपनी मां की खूबसूरत चेहरे की तरफ नहीं गई थी वह उसकी उंगली को मुंह में लेकर चूस रहा था उसका खून बंद करना चाहता था किसी भी तरीके से और उसे इस समय यही उपाय सबसे उचित लग रहा था,,,,, अंकित अपनी मां की उंगली को मुंह में लिए हुए तिरछी नजरों से अपनी मां की तरफ देखा तो देखा ही रह गया उसकी मां मंद मंद मुस्कुरा रही थी उसके होठों पर मादक मुस्कान थी और अंकित औरत की इस तरह की मुस्कान को समझने में सक्षम नहीं था वह अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर उसके चेहरे की रौनक देखकर ऐसा ही समझ रहा था कि मानो जैसे उसकी मां को उसकी हरकत से राहत मिल रही थी इसलिए वह भी अपनी मां की तरफ देखने लगा था अपने बेटे को अपनी तरफ देखा हुआ प्रकार सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी वह मदहोश होने लगी उसे ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा उसकी तरफ मदहोश नजरों से देख रहा है उसके बेटे की आंखों में उसे मदहोशी नजर आ रही थी वासना नजर आ रही थी जबकि उसका बेटा उसकी तरफ एक मर्द की तरह नहीं बल्कि एक बेटे की तरह ही देख रहा था,,,,।

अब कैसा लग रहा है,,,,(पल भर के लिए अंकित अपनी मां की उंगली को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर बोला और फिर वापस उसे अपने मुंह में डाल दिया इस दौरान वह अपनी नजरों को अपनी मां की खूबसूरत चेहरे से बिल्कुल भी नहीं हटाया था और यही अदा अंकित की सुगंधा के तन बदन में मदहोशी भर रही थी सुगंधा को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी बुर से पानी टपक रहा है उसकी पेंटि गीली हो रही थी,,, पल भर में ही सुगंधा की सांसे भारी होने लगी थी,,,, अपने बेटे के मुंह से आप कैसा लग रहा है सुनकर वह पूरी तरह से रोमांचित हो उठी थी उसके नस-नस में उत्तेजना पूरी तरह से असर दिख रही थी अगर इस समय उसका बेटा अपने होठों को आगे बढ़कर उसके होठों पर होंठ रखकर चुंबन करने लगता तो भी सुगंधा को ऐतराज ना होता,,,। सुगंधा मादक मुस्कान बिखरते हुए अपने बेटे को जवाब देते हुए बोली,,,)

बहुत अच्छा लग रहा है अंकित,,,,

तुम भी ना अपना बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखती,,,(अंकित फिर से अपनी मां की उंगली को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर बोला और फिर उसे अपने मुंह में डाल लिया)

तू भी कहां रखता है मेरा ख्याल,,,(सुगंधा इतराते हुए बोली)

ख्याल ना होता तो मैं अभी यह न कर रहा होता,,,,(अंकित फिर से अपने मुंह में से उंगली निकालते हुए बोला,,, लेकिन वह इस बार अपनी मां की उंगली को वापस मुंह में नहीं डाला बस उसे पकड़ कर उसे देख रहा था,,,)

इतनी फिक्र करता है तू मेरी,,,(सुगंधा आंखों को थोड़ी चोडी करते हुए बोली,,,, अंकित औरतों के इस तरह के नखरे को बिल्कुल भी नहीं समझता था अगर औरतों के बारे में उसे जरा भी समझदारी होती तो उसे समझते देर ना लगती कि उसकी मां के मां के अंदर क्या चल रहा है उसकी मां क्या चाहती है इसलिए वह अपनी मां का सवाल का जवाब देते हुए बोला,,,)

फिक्र भला कैसे न होगी तुम ही तो हो सब कुछ,,,

तेरे लिए मैं सब कुछ हूं,,,,

तो क्या यह भी कोई कहने की बात है,,,,

(सुगंधा को अपने बेटे की हर एक बात रोमांटिक लग रही थी अपने बेटे की बात सुनकर उसके सामने ध्यान में उसकी बुर बार-बार गीली हो रही थी बार-बार पानी छोड़ रही थी,,,)

इतना प्यार करता है तु मुझसे,,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंध अपना एक हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के गाल को सहलाने लगी और जवाब में अंकित भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां के खूबसूरत गोरे-गोरे गाल पर रखकर सहलाते हुए बोला)

बहुत प्यार करता हूं,,,,

(सुगंधा अपने बेटे के स्वाभाविक और औपचारिक बातों को रोमांटिक तरीके से ले रही थी उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी आंखों के सामने उसका बेटा नहीं बल्कि उसका प्रेमी बैठा है और उसे मीठी-मीठी बातें कर रहा है प्यार भरी बातें कर रहा है तभी सुगंधा की नजर अपनी उंगली पर गई जिस पर अभी भी हल्का सा खून निकल रहा था और वह इतराते हुए बोली,,,)

ऊममम अगर तू मुझसे प्यार करता तो मेरी उंगली को यूं ही ना छोड़ देता देख अभी भी खून निकल रहा है,,,।

कहां,,,?(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से अपनी मां की उंगली की तरफ देखने लगा जिसमें से अभी भी हल्का सा खून निकल रहा था और नटवह तुरंत फिर से अपने मुंह में अपनी मां की उंगली को डाल दिया और उसे चूसना शुरू कर दिया,,, अंकित जिस तरह से उसकी उंगली को चूस रहा था सुगंधा कल्पना कर रही थी कि जैसे उसकी बड़ी-बड़ी चूची उसके बेटे के मुंह में भरी हुई है और वह उसकी निप्पल को चूस रहा हो और यह एहसास करते ही उसे खुद की निप्पल कड़क होती हुई महसूस होने लगी और बुर से फिर से पानी निकलने लगा,,,,, यह बातचीत है थोड़ी और देर तक चलती है इससे पहले ही तृप्ति आ गई और तृप्ति दोनों को देखकर बोली,,,)

अरे यह क्या हो गया,,,?

मम्मी ने अपनी उंगली ही काट ली है,,,,(अपने मुंह से उंगली को बाहर निकलते हुए अंकित बोल तो यह देखकर तृप्ति हुआ भी थोड़ा सा घबराते हुए उन दोनों के पास बैठ गई और अंकित के हाथ में से अपनी मां का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोली,,,)

क्या मम्मी तुम भी बिल्कुल भी ध्यान नहीं देता ऐसे कैसे सब्जी काट रही थी की उंगली काट ली ज्यादा लग जाता तो,,,, रुको मैं अभी बैंड एड लगा देती हुं,,,,(इतना कहते हुए तृप्ति अपने कमरे में गई और एक छोटा सा बॉक्स खोलकर उसमें से बांडेड लेकर आई और उसे अपनी मां की उंगली पर लपेट दी और बोली)

अब आगे से संभाल कर काम करना वरना रहने देना मैं कर दूंगी,,,,।

(इसके बाद बाकी का खाना तृप्ति अपनी मां को नहीं बनाने दी खुद ही बनाई लेकिन तृप्ति का इस तरह से बीच में आ जाना सुगंधा को अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि उसके और उसके बेटे के बीच अच्छी खासी बातचीत चल रही थी जिसकी वजह से सुगंध काफी उत्तेजित हो चुकी थी,,,)

दूसरे दिन सुगंधा रसोई घर में काम कर रही थी की तभी वह पीछे की तरफ नजर घुमा कर देखी तो उसके ठीक पीछे अंकित खड़ा था और वह चोर नजरों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड की तरफ ही देख रहा था जो कि कई हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही कई हुई और उभरी हुई नजर आ रही थी यह देखते ही सुगंधा के तन-बड़ा अजीब सी हलचल होने लगी क्योंकि यह पहली मर्तबा था कि जब अंकित अपनी मां की गांड को घुर कर देख रहा था,,, पल भर में इस सुगंधा की सांस ऊपर नीचे होने लगी कुछ देर तक अंकित इस तरह से खड़ा रहा वह कुछ बोल नहीं रहा था बस पीछे खड़े होकर अपनी मां की गोल-गोल गांड को भी देख रहा था कुछ देर बाद जब सुगंधा से रहा नहीं गया तो वह पीछे नजर घुमा कर बोली,,,)

Ankit apni ma ko piche se pakadte huye



क्या हुआ वहां क्यों खड़ा है और ऐसे क्यों देख रहा है,,,

कुछ नहीं मम्मी मैं देख रहा था कि तुम खाना बना ली हो या नहीं मुझे बड़े जोरों की भूख लगी है,,,।

(अंकित की बात को सुनकर सुगंध मन ही मन बोल रही थी कि खाना खाने की भूख लगी है या कुछ और क्योंकि अपने बेटे की नजर को देखकर वह इतना तो समझ ही गई थी कि उसके बेटे के मन में क्या चल रहा है और वह थोड़ा सा घबरा भी गई थी क्योंकि इस तरह से वह अपने बेटे को कभी भी अपने आप को घूरते हुए नहीं देखी थी इसलिए वह बोली)

जा बाहर जाकर इंतजार कर में 5 मिनट में खाना लेकर आती हूं,,,,,

इंतजार ही तो नहीं होता मम्मी,,,(इतना कहते हुए अंकित अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगा और उसे आगे बढ़ता हुआ देखकर सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा उसे अजीब सा महसूस होने लगा था उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल सी बढ़ने लगी थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी और संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मुझे बड़े जोरों की भूख लगी है,,,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी मां के बेहद करीब पहुंच गया उसकी मां घबरा सी गई थी और घबराहट भरे श्वर में बोली,,,।

Ankit apni ma ki saree uthate huye



का तो रही हूं बाहर जाकर इंतजार कर मैं 5 मिनट में गरमा गरम खाना लेकर आती हूं,,,

मुझे आज खाना नहीं खाना है कुछ और खाना है,,,,

,,, क्या खाना है,,,?(घबराहट भरे शवर में वह बोली,,,)

तुम्हारी जवानी,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया अंकित की हरकत पर सुगंधा पूरी तरह से घबरा गई उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि अंकित इस तरह की हरकत करेगा क्योंकि आज तक वह अपने बेटे को सीधा-साधा लड़का ही समझते आ रही थी और वह अपने बेटे की बाहों में से छूटने की पूरी कोशिश करने लगी लेकिन अंकित पूरी तरह से जवान हो चुका था हट्टा कट्टा गठीले बदन का मालिक हो चुका था,,,, अंकित अपनी बाहों की कैद में से अपनी मां को जाने नहीं देना चाहता था इसलिए वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को एक हाथ से पकड़ कर दबाना शुरू,, कर दिया,,,)

Mana karne k bawjood Ankit apni ma ka blouse kholte huye



अरे अरे यह क्या कर रहा है तुझे जरा भी शर्म नहीं आ रही है,,,,

इसमें शरम कैसी मेरी जान तुम इतनी खूबसूरत हो कि मुझे रहा नहीं जाना है बहुत दिनों से मेरी नजर तुम्हारे ऊपर थी तुम्हारी जवानी का नशा मुझे पागल बना रहा है,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाना शुरू कर दिया और सुगंधा उसे रोकने की भरपूर कोशिश करते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं ऐसा मत कर हम दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता बिल्कुल भी नहीं है मैं तेरी मां हूं किसी को पता चल जाएगा तो गजब हो जाएगा,,,,

Ankit apni ma ki chuchiyo se khelte huye



मैं जानता हूं कि तुम मेरी मां हो लेकिन मन से पहले तुम एक औरत हो खूबसूरत औरत जवानी से भरी हुई और तुम्हें एक मर्द की जरूरत है इस बात को तुम भी अच्छी तरह से जानती हो और रही बात दूसरे को जानने का तो सवाल ही नहीं उठता क्योंकि घर की चार दिवारी के अंदर क्या हो रहा है किसी को क्या पता,,,,

अंकित ऐसा मत कर मैं तेरे सामने हाथ जोड़ती हूं,,,

Ankit apni ma k sath





हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है मेरी रानी अपने हाथ को मेरे लंड पर रख दो मजा ही मजा आएगा,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी गांड पर जोर से चपत लग रहा था,,,, उसकी गांड को छुपाने के लिए उसकी छोटी सी चड्डी नाकाम साबित हो रही थी उसकी गांड का ज्यादातर भाग नजर आ रहा था जो कि एकदम मक्खन की तरह चमक रहा था जिस पर अंकित की नजर पडते ही उसकी आंखों में वासना की चिंगारी फुटने लगी और वह अपनी मां की गांड को हथेली में लेकर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से हैरान थी परेशान थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि पल भर में ही उसे क्या हो गया वह उसके साथ ही गंदा व्यवहार क्यों कर रहा है उसके समझ के बिल्कुल पड़े था अंकित का व्यवहार और अंकित था कि अपनी मां के बदन से खेले जा रहा था और सुगंधा उसे रोकने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन वह रुकने का तैयार ही नहीं था,,,,)

Ankit a0ni ma k sath



ऐसा मत कर अंकित यह पाप है ऐसा नहीं करना चाहिए मैं तेरी मां हूं तू मेरा बेटा है और मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता कभी भी संभव नहीं है,,,,

सब कुछ संभव है इस समय तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द तुम्हारे पास खूबसूरत बुर हैं और मेरे पास मोटा तगड़ा लंड जो तुम्हारी बुर में जाकर तुम्हारा पानी निकलेगा बस यही रिश्ता होता है मर्द और औरत में,,,

Apni ma ko madhosh karta huA





यह तो क्या कह रहा है कहां से यह सब सीख कर आया,,,(सुगंधा पूरी तरह से हैरान थी अपने बेटे की इस तरह की अश्लील बातें सुनकर उसने अभी आज तक अपने बेटे के मुंह से एक गली तक नहीं सुनी थी और आज उसका बेटा सारी हदें पार करके औरत और मर्द के बीच के रिश्ते की दुहाई दे रहा था,,,, और अपनी हरकतों से पूरी तरह से उसे मदहोश कर रहा था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें कैसे रोके अपने बेटे को अंकित पागलों की तरह अपनी मां की गोरी गोरी गांड पर चपत लगाते हुए उसे जोर-जोर से मसल दे रहा था ऐसा करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और कहीं ना कहीं अपने बेटे की हरकत से सुगंध को भी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था और वह परेशान थी कि आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है क्यों अपने बेटे को रोक रही है वह भी तो यही चाहती थी वह भी तो अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होना चाहती थी उसके मोटे लंड को अपनी बुर में लेकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने चाहती थी तो फिर आज वह क्यों रोक रही है उसे क्यों से आगे नहीं बढ़ने देना चाहती इसमें उसकी भी तो भलाई है जो सुख अंकित को मिलेगा उससे कहीं ज्यादा सुख उसे भी तो मिलेगा बरसों से उसने अपनी जवानी को जिम्मेदारी की बोझ तले दबा रखी थी आज उसे बोझ को हटाने का मौका मिल रहा है तो क्यों उसे रोक रही है,,,,।

Sugandha apne bete ko mast karti huyi



सुगंधा को अपने बेटे को इस तरह की हरकत करने से रोकना उसकी मजबूरी नहीं उसका फर्ज था क्योंकि वह एक मां थी और एक बेटे को इस तरह की हरकत करने से रोकना ही उसका फर्ज था क्योंकि दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता था और वह इस मां बेटे के रिश्ते को कलंकित नहीं होने देना चाहती थी पहले ही वह मन ही मन में संजू के साथ हम बिस्तर होने का कल्पना करती थी लेकिन हकीकत में हुआ ऐसा करने से कतराती थी,,,, इसी लिए वह फिर से अपने बेटे का हाथ पकड़ कर उसे अपने से दूर करने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

Apni ma ki chaddhi dekhkar mast hota hua



नहीं मैं तुझे ऐसा नहीं करने दुंगी,,,।

(सुगंधा का ऐसा कहना था कि तभी संजू उसकी बांह पकड़कर उसे अपनी तरफ घुमा दिया और उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर पागलों की तरह उसके होठों का रस पीना शुरू कर दिया,,, ईतने में सुगंधा का धैर्य जवाब दे गया,,,, वह एकदम से मस्त हो गई मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को वह भी एकदम से भूल गई,,, और बोलती भी कैसे नहीं वह भी तो यही चाहती थी बरसों बाद किसी मर्द की बाहों में वह थी इसलिए उसकी जवानी पिघलने लगी थी,,,,। अंकित को एहसास हो रहा था कि उसकी मां ढीली पड़ रही थी और इसी मौके का फायदा उठाते हुए वह तुरंत अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया और देखते ही देखते हो अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलकर ब्लाउज को उतार फेंका और ब्रा भी उतार फेंका,,, अपनी मां की नंगी चूचियों को देखकर वह पूरी तरह से पागल हो गया और तुरंत अपने दोनों हाथों में उसके दोनों कबूतरों को पकड़ कर उसका गला घोटने शुरू कर दिया वह पागलों की तरह अपनी मां की चूचियों को दबा रहा था क्योंकि पहली बार वह किसी औरत की चूची को अपने हाथ में लिया था और वह कोई और औरत नहीं बल्कि उसकी खुद की मां थी इसलिए उसे कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का एहसास हो रहा था,,,,।

Lund dalne ka prayas karta Ankit



अंकित की हरकतों का सुगंधा भी मजा लेने लगी उसे मजा आने लगा था अपने बेटे के साथ जिस तरह से अंकित उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबा रहा था वह पागल हुए जा रही थी और देखते ही देखते अंकित बारी-बारी से अपनी मां की दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया था कुछ देर तक वह अपनी मां की जवानी से इसी तरह से खेलता रहा और एक हाथ से वह अपने पेंट को उतार कर नीचे जमीन पर गिरा दिया था वह पूरी तरह से नंगा हो चुका था हालांकि उसकी मां अभी भी कपड़ों में थी,,, अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था और पागल हुआ जा रहा था अपनी मां की बुर में जाने के लिए,,,,।

अपने लंड की स्थिति से भली भांति परिचित होते ही अंकित अपनी मां के दोनों कंधों पर हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ बैठाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते सुगंधा भी अपने घुटनों के बाल हो गई उसके चेहरे के सामने उसके बेटे का खड़ा लंड एकदम लहरा रहा था,,, जिस पर नजर पडते ही सुगंधा के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आ गया,,,, सुगंधा को मालूम था कि उसे क्या करना है वह तुरंत अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के लंड को पकड़कर उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दि,,, सुगंधा को भी मजा आने लगा था अपनी मां को लंड चूसता हुआ देखकर अंकित समझ गया था कि उसकी मां भी लाइन पर आ चुकी है इसलिए अपनी कमर को धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया था उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,

Apni ma ki chudai karta Ankit





कुछ देर तक अंकित इसी तरह से अपनी मां को मस्त करता रहा और खुद भी आनंद लेता रहा,,, लेकिन अब वह समझ गया था कि लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका है या हथोड़ा मारना जरूरी हो चुका है इसलिए अपनी मां की बाहों को पकड़ कर उसे उपर की तरफ उठाया और रसोई घर में रसोई के पत्थर की तरफ घूमाकर उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया,,, और फिर एक बार फिर से मैं अपनी मां की साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर उठा कर कमर तक कर दिया एक बार फिर से सुगंधा की भारी भरकम गोल-गोल गांड अंकित की आंखों के सामने चमकने लगी और उसे पर से लाल रंग की चड्डी यह देखकर अंकित की जवानी पूरी तरह से जोड़ करने लगी वह तुरंत अपनी मां की चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे खींच दिया और उसे घुटने तक लाकर उसे घुटनों में फंसा दिया अब अंकित के लिए रास्ता साफ हो चुका था उसकी मां भी तैयार हो चुकी थी चुदवाने के लिए,,,,।

अंकित की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी उसका हल भी बुरा था अपनी मां की मदमस्त जवानी देखकर वह पूरी तरह से पसीने से तरबतर हो चुका था,,,, अंकित का यह पहली बार था वह पहली बार किसी औरत को चोदने जा रहा था,,, सुगंधा का दिल भी जोरों से धड़क रहा था,,, उसके माथे पर भी पसीना टपक रहा था वह एक तरफ है कि अंकित पहली बार कैसे उसकी चुदाई कर पाएगा और इस बात से उत्सुक थी की आज बरसों बाद उसकी बुर में लंड घुसने वाला था,,, अंकित ढेर सारा थुक अपने लंड के सुपाडे पर लगाया,,, और अपनी मां की बुर पर भी लगाकर जिला कर दिया वह तो पहले से ही पानी पानी से गीली हो चुकी थी और फिर अपने लंड को सुपाडे को जैसे ही अपनी मां की गुलाबी छेद पर रखा सुगंधा की बुर से सावन की फुहार बरसने लगी वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी और देखते ही देखते अंकित अपने लंड के सुपाडे को अपनी मां की बुर के अंदर डाल दिया,,, और फिर अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया,,,।

सुगंधा मदहोश हुए जा रही थी बरसों बाद उसकी बुर में लंड गया था और वह भी अपने ही बेटे का जो कि कुछ ज्यादा ही मोटा तगड़ा और लंबा था,,, सुगंधा एक तरफ पसीने से तरबतर हुए जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसकी बुर से बदन रस निकालकर पानी पानी हुए जा रही थी वह पूरी तरह से मस्त थी वह कभी सपने में भी नहीं सोचती थी कि वह अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होगी अंकित का हर एक धक्का उसे स्वर्ग का सुख दे रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी पलंग चरमरा रही थी,,, अंकित के हर एक धक्के पर सुगंध लहर उड़ाती थी और उसकी भारी भरकम चुचीया पानी भरे गुब्बारे की तरह छाती पर लौटने लगती थी,,, देखते ही देखते सुगंधा की सांस ऊपर नीचे होने लगी वह गहरी गहरी सांस लेने लगी उसके बदन में अकड़न पढ़ने लगे और फिर वह बिस्तर की चादर को दोनों हाथों से कस के पकड़ कर गरम लावा बाहर निकलने लगी,,,, वह चरम सुख पर पहुंच चुकी थी और झड़ना शुरू कर दी थी कि तभी उसकी आंख खुल गई,,,, आंख खुलते ही उसकी नजर छत पर गई पंखा चोरों से चल रहा था वह इधर-उधर देखने लगी उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह अपने बिस्तर पर अकेली ही थी और एकदम निर्वस्त्र पूरी तरह से नंगी और उसकी हाथ की दो ऊंगली उसकी बुर में अंदर बाहर हो रही थी,,,, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि वह सपना देख रही थी वह कल्पनाओं की दुनिया में इस कदर खो गई थी कि सपने में उसके बेटे ने उसकी चुदाई करके उसे तृप्त कर दिया था उसकी हाथ की उंगली अभी भी उसकी बुर के अंदर घुसी हुई थी उसे धीरे-धीरे याद आने लगा कि वह अपने कमरे में आई थी तो बिस्तर पर लेते ही वह धीरे-धीरे अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी और जिस तरह से अपने बेटे से बातचीत करके रोमांचित हुई थी उसी के चलते वह अपने बेटे की कल्पना करके अपने साथ संभोग रत कर ली थी,,, जिसके चलते वह सपनों की दुनिया में पूरी तरह से खो चुकी थी और सपने में अपने बेटे के साथ चुदाई का सुख भोग रही थी हकीकत का भान होते ही वह एकदम से बिस्तर से उठकर बैठ गई और अपनी उंगली को अपनी बुर में से बाहर निकाली तो बुर से मदन रस का फव्वारा फुट पड़ा,,,, वह पूरी तरह से मत हो चुकी थी कल्पनाओं की दुनिया में ही सही वह मदहोश हो चुकी थी उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था,,,,। वह धीरे से बिस्तर पर से अपने दोनों पैरों को पलंग से लटका कर बैठ गई और अपनी सांसों को दुरुस्त करने लगी टेबल पर बड़ा पानी का गिलास उठाकर वह एक सांस में गटक गई,,, इस समय उसे बहुत हल्का महसूस हो रहा था वह कुछ देर तक किसी तरह से बैठी रही दीवार पर टंगी घड़ी पर नजर गई तो रात के 2:00 बज रहे थे सुबह होने में अभी बहुत समय था इसलिए वह इस तरह से निर्वस्त्र रही बिस्तर पर लेट गई और फिर से उसकी आंख लग गई,,,।

Sugandha chudwasi hoti huyi

 
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