Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 18 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

अंकित राहुल के घर से निकल गया था अपने मन में ढेर सारे सवाल लेकर राहुल के घर पर जो कुछ भी हुआ था वह अंकित के लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था,,, पहली बार उसकी नजर किसी दूसरी औरत पर गई थी और वह भी राहुल की मां पर जो कि उसकी मां खुद उसकी मां के साथ सहअध्यापिका थी,,,। राहुल की मां के बारे में सोचते हुए वह अपने घर की तरफ चला जा रहा था और राहुल के घर के बाहर जाते ही नूपुर गुस्सा दिखाते हुए राहुल से बोली,,,।

तुझे बताना चाहिए था ना कि घर पर तो अंकित को लेकर आएगा,,,,

तो क्या हो गया मम्मी इसमें नाराज होने वाली कौन सी बात है,,,

तू नहीं जानता क्या बुद्धू बनने का नाटक मत कर देखा था ना उसकी आंखों के सामने में किस हालत में दरवाजा खोली थी,,,,

अरे लेकिन मुझे क्या मालूम था कि तुम नहा कर सीधा दरवाजा खोलना चली जाओगी और वह भी बिना ब्लाउज पहने,,,

मैं तो यही समझी थी कि तू है और मेरा मन भी बहुत कर रहा था इसलिए पहना हुआ ब्लाउज उतार कर गली साड़ी में चली गई थी ताकि तो मेरी चूची देखकर उत्तेजित हो जाए,,,,(सामने की टेबल से उठकर राहुल के बगल में बैठते हुए नूपुर बोली और उसकी बात सुनकर राहुल मुस्कुराने लगा और बड़े प्यार से उसके उलझे हुए बालों को संवारते हुए बोला,,,)

मैं तो तुम्हें देखते ही चुदवासा हो जाता हूं,,,,

लेकिन मैं चुदवासी हो गई थी उसका क्या,,, वैसे तो अंकित देखने में सीधा-साधा ही लगता है लेकिन देखा नहीं दरवाजे पर कैसे मेरी चुचीया देख रहा था,,,

तो क्या हो गया तुम्हें तो खुश होना चाहिए तुम्हारी खूबसूरत चूचियों को देखकर उसकी हालत खराब हो रही थी एक जवान लड़के की मां होने के बावजूद भी तुम्हारी जवानी बरकरार है तुम्हारा बदन अभी भी कसा हुआ है इस बात पर तुम्हें गर्व होना चाहिए,,, अभी भी तुम किसी का भी लंड खड़ा कर सकती हो,,,(अपनी मां की एक चूची दबाते हुए बोला)

अरे वह सब तो ठीक है मुझे भी उसका घूरना अच्छा लग रहा था लेकिन तू नहीं जानता वह किसका लड़का है,,, मुझे तो इस बात का डर है कि कहीं अपनी मां से सब कुछ बता दिया तो कि मैं घर में ऐसे ही घूमती रहती हूं,,,

उसे देखकर लगता है कि वह अपनी मां से इस तरह की बातें करता होगा,,,! बिल्कुल भी नहीं बहुत सीधा-साधा है हां भले ही तुम्हें देखकर उसका लंड खड़ा हो गया था लेकिन फिर भी अपनी मां से तो इस तरह की बात नहीं करता होगा,,,

तुझे कैसे मालूम तू तो मुझसे इसी तरह की बातें करता है,,,,।

मेरी बात कुछ और है मेरी जगह अंकित नहीं ले सकता बहुत भला भला है मेरी तरह बनने में उसे बहुत समय लगेगा,,,, वैसे उसकी मां बहुत ज्यादा चिकनी है उसकी मां को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था अगर मौका मिले तो उसकी मां की बुर में लंड डाल दु,,, हाय मेरी रानी,,(एकदम से उत्तेजित होते हुए अपने लंड को दबाते हुए वह बोला तो एक औरत होने के नाते नूपुर अपने बेटे की हरकत से औरअपने सामने किसी दूसरी औरत की तारीफ अपने बेटे के मुंह से सुनकर वह गुस्सा हो गई और गुस्से में एकदम से उठते हुए बोली,,,)

यह बात है तो आप जब भी तेरा लंड खड़ा हो तो उसी के पास चले जाना मेरे पास मत आना,,,,(गुस्से में ऐसा कहकर वह चलने को हुई की राहुल भी मौके की नजाकत को देखते हुए तुरंत अपनी मां की कलाई पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला)

अरे जाती कहां हो मेरी रानी,,,(अपनी तरफ खींचते ही वह एकदम से अपने बेटे की तरफ झुकी और उसकी गोद में जाकर गिर गई,,,) तुम्हारे से भला खूबसूरत कोई औरत मुझे मिलेगी क्या दुनिया में तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हें देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,(राहुल अच्छी तरह से जानता था की दूसरी औरत की बात करने की वजह से उसकी मां गुस्सा गई है और अगर ऐसा हुआ तो वह उसे चोदने नहीं देंगी और फिर उसे खड़ा लंड हाथ से हिला कर शांत करना पड़ेगा जैसा कि वह करना नहीं चाहता था,,,)

नहीं नहीं जा उसके पास तुझे तो वह ज्यादा चिकनी लगती है ना,,,

अरे मम्मी अब तुम्हारी बुर से ज्यादा चिकनी बुर किसकी होगी,,, देखो तो सही तुम्हारी गांड की गर्मी पाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया,,,,।

(इस बात को सुनकर नूपुर मुस्कुराने लगी क्योंकि वाकई में वह अपने बेटे की गोद में बैठी हुई थी और इसकी वजह से उसकी भारी भरकम गांव उसके लंड के ऊपर टिकी हुई थी और धीरे-धीरे उसका लंड खड़ा होकर उसकी गांड के बीचों बीच चुभने लगा था,,, जिसका एहसास होते ही नूपुर की बुर से मदन रस बहने लगा था,,,, अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर राहुल बोला,,,)

अब एक राउंड तो बनता ही है,,,,(और इतना कहने के साथ ही राहुल अपनी बलिष्ठ भुजाओं में अपनी मां को गोद में उठा लिया और उसे गोद में उठाए हुए हैं अपनी उनके कमरे में ले जाने लगा क्योंकि ऐसा वक्त उसके पापा घर पर नहीं थे और वैसे भी ज्यादातर उसके पापा घर पर रहते नहीं थे बाहर ही काम के सिलसिले में रहते थे,,,, इसलिए वह दोनों पूरी तरह से निश्चित था थे राहुल अपनी गोद में उठाकर अपनी मां को अपने मां के कमरे में लेकर आया और नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,, गद्दे पर गिरते ही उसकी मां का भारी भरकम शरीर हल्के से उछल कर वापस गद्दे में धंस गया,,, और उसकी साड़ी एकदम से उसकी जांघों तक चढ गई,,, अपनी मां की मोटी मोटी केले के तने के समान चिकनी जांघों को देखकर,,,, राहुल एकदम पर काबू हो गया और उत्तेजना के मारे अपनी मां के कपड़े उतारने से पहले खुद अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया,,,,।

अपने बेटे को कपड़े उतारकर नंगा होता हुआ देख कर नूपुर से रहने की और वह खुद अपने हाथों से अपने कपड़े उतारने लगी और देखते ही देखते वह भी अपने बेटे की तरह कपड़े उतार कर नंगी हो गई,,,,, राहुल का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था अपनी मां की नंगी जवानी देखकर वह बेकाबू हो गया था और बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी मां की दोनों टांगें फैला कर अपने प्यासे होठों को अपनी मां की बुर पर लगाने हीं वाला था कि,,, उसकी मां अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर अपने बेटे की बांह थाम ली और उसे अपनी तरफ खींचने लगी ,,,, राहुल अपनी मां के इशारे को समझ गया था और समझ गया था कि उसकी मां कुछ ज्यादा ही चुदवासी हो गई है इसलिए अपनी मां की बात मानते हुए वह अपने चेहरे को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच से ऊपर उठाया और अपनी मां की दोनों टांगों को फैला कर उसे अपनी कमर में लपेट लिया और फिर अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया और तब तक चोदता रहा जब तक की उसकी मां झड़ नहीं गई और उसके बाद वह भाभी अपना गरम लव अपनी मां की बुर में डाल दिया,,,,।

दूसरी तरफ घर पहुंच कर भी अंकित हैरान था जिस तरह से दरवाजा खुला था और दरवाजे पर उसकी मां अर्धनग्नवस्था में दरवाजा खोली थी यह सब अंकित को हैरान कर दे रहा था अंकित को सोचने पर मजबूर कर दे रहा था कि दोनों मां बेटे के बीच क्या चल रहा है क्योंकि ऐसी औरत और वह भी मा क्यों बिना ब्लाउज के साड़ी पहन कर दरवाजा खोलने आएगी और जबकि उसे मालूम हो कि दरवाजे पर उसका बेटा होगा,,,, अंकित के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे राहुल की मां को लेकर स्कूल में जब अपनी मां के साथ राहुल की मां से मिला था तब वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि स्कूल में पढ़ाने वाली औरत का ऐसा रूप उसे देखने को मिलेगा,,, जहां एक तरफ राहुल की मां की हरकत से अंकित हैरान सभा की दूसरी तरफ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों के दर्शन करके वह धन्य हो गया था,, पर तुरंत उसके जीवन में बाथरूम के अंदर अपनी मां को नंगी देखने वाला दृश्य घूमने लगा और वह अपनी मां की चूची से राहुल की मां की चूची की तुलना करने लगा कुछ ज्यादा खास फर्क नहीं था दोनों की चुचियों में बस इतना फर्क था कि अंकित की मां की चुची बड़ी होने के साथ-साथ एकदम कसी हुई थी,,, और राहुल की मां की चूची में हल्का सा ढीलापन था लेकिन फिर भी अकेली साड़ी में लिपटकर उसकी चूची चार चांद लग रही थी,,,।

अंकित राहुल की मां के बारे में सोच रहा था कि तभी उसे राहुल की बात याद आ गई कि वह अपनी मां को घूरता रहता है अपनी मां की चूची और गांड के बारे में वहां भेजी जब बातें कर रहा था और बात वही बातों में उसने बताया भी था कि उसकी मां को भी यह सब पता है और उसे भी यह सब अच्छा लगता है राहुल से ही पता चला था की औरतों की तारीफ करने से औरतें बहुत खुश होती है खास करके उनके खूबसूरत बदन की तारीफ करने की वजह से तो,,, वह और ज्यादा खुश नजर आती है और अंकित इस बात से भी हैरान था कि उसकी मां को सब कुछ पता था कि उसका बेटा उसे घूरता रहता है लेकिन फिर भी वह कुछ नहीं बोलते बल्कि अंदर ही अंदर खुश होती है और यह बात राहुल ने ही उसे बताया था,,, और बात ही बात में राहुल ने उसकी मां के बारे में भी जिक्र छेड़ दिया था,,, उसकी मां की गांड के बारे में चुची के बारे में सब कुछ बोलकर उत्तेजित हो रहा था अगर कोई और समय होता तो शायद अंकित राहुल के मुंह से अपनी मां के बारे में इस तरह के गंदे शब्द नहीं सुन पाता लेकिन न जाने क्या हुआ था कि वह कुछ बोल नहीं पा रहा था क्योंकि उसे भी मजा आ रहा था और राहुल खुद अपनी मां के बारे में भी गंदी बात कर रहा था इसलिए अंकित ने भी अपनी मां के बारे में भी गंदी बात सुन लिया था लेकिन उसे इस बात का पता चला था कि जैसा कि राहुल उसकी मां के बारे में उसकी मां की खूबसूरती के बारे में उसकी मां की चूची और गांड के बारे में गंदी बातें कर रहा था उसी तरह से दूसरे लड़के भी उसकी मां को देखकर मन ही मन में या एक दूसरे से गंदी बातें करते रहते हैं और यह सब अपनी मां की खूबसूरती के बारे में लेकर गर्व की बात भी थी ऐसा खुद अंकित ने भी बताया था लेकिन इस बात का निष्कर्ष अभी तक नहीं निकल पाया था कि वाकई में दोनों मां बेटे के बीच क्या चल रहा है अंकित को तो राहुल उसकी मां पर शक होने लगा था कि दोनों के बीच जरूर कुछ चल रहा है लेकिन अपनी आंखों से देखे बिना भला कैसे यकीन कर सकता था,,,।

जहां एक तरफ अंकित राहुल और उसकी मां को लेकर सोच में डूबा हुआ था वहीं दूसरी तरफ सुगंधा अपने बेटे को देखकर खुश हो रही थी वह जानना चाहती थी कि राहुल से मिलकर अंकित ने क्या-क्या किया,,, इसलिए वह खाना बनाने की तैयारी करते हुए अंकित से बोली,,,।

क्यों बेटा कैसा रहा आज का दिन राहुल से मिले थे ना,,,

हां मम्मी मिला था उसके साथ क्रिकेट खेला था और उसने मुझे अपने घर पर भी लेकर गया था,,,।

क्या बात है तुम्हें अपने घर पर भी ले गया,,,,(हरी सब्जी थेले में से निकालकर उसे काटने की तैयारी करते हुए,,,)

हां मम्मी उसके साथ मुझे बहुत मजा आया और उसके घर पर मैं उसकी मां से भी मिला,,,

नूपुर से,,,

हां मम्मी,,,,

कैसी है वह,,,

ठीक है तुम्हारे बारे में पूछ रही थी,,,

मेरा मतलब है कि दोनों मां बेटे खुश तो रहते हैं ना,,,,(दोनों मां बेटे के बारे में पूछ कर उन दोनों के बीच क्या चल रहा है सुगंधा यह जानना चाहती थी लेकिन खुले शब्दों में बोल नहीं पा रही थी,,,, और अंकित राहुल की मां का जिक्र आते ही उसकी आंखों के सामने उसके द्वारा दरवाजा खोलने के बाद जो नजारा दिखाई दिया था वह सब कुछ उसकी आंखों के सामने किसी फिल्म की तरह घूमने लगा वह अपनी मां को नूपुर के बारे में बता देना चाहता था कि कैसे वह उसकी आंखों के सामने आई थी क्या पहनी थी किस हालत में थी क्योंकि अपनी मां से इस तरह की बात शुरुआत करने पर वह धीरे-धीरे अपनी मां से खोलना चाहता था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थीकी नूपुर के बारे में कुछ भी बोले )

हां मम्मी दोनों खुश थे उसकी मन चाय नाश्ता कर करा ही मुझे जाने दे,,,,

और राहुल,,,, राहुल कैसा लड़का है,,,?

(एक पल के लिए अंकित के मन में आया कि अपनी मां से बता दे कि राहुल कैसा लड़का है वह औरतों को किसी नजर से देखा है यहां तक की अपनी मां को कितनी गंदी नजर से देखा है और साथ ही तुम्हारे बारे में भी गंदे विचार रखता है लेकिन पता नहीं पाया और बात को घुमाते हुए बोला)

बहुत अच्छा लड़का है मम्मी हम दोनों साथ में क्रिकेट खेले थे और टीम को जीत भी दिलाए थे,,,

क्या बात है बेटा इसी तरह से मिलकर खेला करो और टीम को जीत दिलाया करो,,,(सुगंधा आगे भी इसी तरह से आपस में मेल जोड़ बढ़ाने के लिए बोल रही थी,,, क्योंकि सुगंध को पक्का विश्वास था कि दोनों मां बेटे की शारीरिक संबंध है दोनों मां बेटे एक दूसरे को मां बेटे की तरह नहीं बल्कि औरत और मर्द की तरह देखकर ही व्यवहार करते हैं और सुगंध यही चाहती थी कि उसका बेटा भी यही सीखे अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,,)

ठीक है मम्मी,,,,(इतना कहकर वह वापस घूमने वाला था कि तभी उसे राहुल की बात याद आ गई और वह बड़ी हिम्मत जुटाकर डरते हुए बोला,,,)

मम्मी एक बात कहूं,,,

एक क्या 10 बातें बोल तुझे रोका किसने है,,,।( किचन पर सब्जी काटते हुए सुगंधा बोली और उसकी बात सुनकर अंकित घबराते हुए हिम्मत जुटाकर बोला,,,)

तततत,,, तुम,,,, बहुत खूबसूरत लगती हो,,,।

(इतना सुनते ही सब्जी काटते हुए सुगंधा के हाथ एकदम से रुक गए उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,, वह एकदम से हैरान होते हुए अंकित की तरफ देखी और बोली,,,,,)

क्या कहा,,,,,?

ककक,,, कुछ नहीं,,,,(और एकदम से जाने को हुआ लेकिन सुगंध तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचने लगी अपनी मां की ईस हरकत से अंकित एकदम से घबरा गया उसे इस बात का डर था कि उसकी मां उसे डाटेंगी,,,, और उसके माथे से पसीना टपकने लगा)

बता क्या बोला तू,,,

कककक,, कुछ नहीं मम्मी,,,,

नहीं नहीं मेरे बारे में कुछ तो बोला तु,,,

सच में कुछ नहीं बोला,,,

देख डर मत मैं तुझे कुछ नहीं बोलूंगी,,,। बता दे क्या बोला तु,,,।

(जिस तरह से सुगंध अंकित का हाथ पकड़ी हुई थी अंकित एकदम से घबरा गया था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां उसे डांटे नहीं लेकिन फिर भी जब उसकी मां बोली कि कुछ नहीं बोलुगी तो उसमें थोड़ी हिम्मत आई और करते हुए बोला,,)

ककक,, कुछ नहीं,,,मे बस कह रहा ताकि तुम बहुत खूबसूरत लगती हो,,,,

(इतना सुनते ही सुगंधा के चेहरे का भाव एकदम से बदलने लगा पल भर में उसका चेहरा शर्म से लाल होने लगा,,, क्योंकि उसके बेटे ने उसकी खूबसूरती की तारीफ जो कर दिया था सुगंधा अपने चेहरे के भाव को,,, चाहकर भी नहीं छुपा पा रही थी लेकिन औरतों के चेहरे के भाव को पढ़ने में अंकित अभी माहिर नहीं था इसलिए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन फिर भी अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए सुगंधा बोली,,,)

हाय दइया यह तुझसे किसने कह दिया,,,

किसने किया मुझे पता है दिखाई भी देता है की खूबसूरती क्या होती है,,,

क्या होती है खूबसूरती बात तो जरा,,,,

तुम्हारी खूबसूरत घने बाल जब तुम्हारे चेहरे पर इसकी लट आती है तो बहुत अच्छा लगता है और तुम जब किचन में काम करते हुए अपनी साड़ी को कमर से खोंसती हो तब तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगती हो,,,(साड़ी को कमर से खोंसने पर साड़ी का का कसाव नितंबों पर अत्यधिक बढ़ जाता था जिसकी वजह से सुगंधा की गांड और ज्यादा बड़ी और उभरी हुई नजर आती थी और यही अंकित बताना भी चाहता था कि इस तरह से तुम्हारी गांड बहुत मस्त लगती है लेकिन वह खुले शब्दों में बोल नहीं पा रहा था,,, लेकिन सुगंध अपने बेटे के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि जब वह साड़ी कमर से खोंसने वाली बात किया था तब औपचारिक रूप से सुगंधा की नजर अपने पिछवाड़े पर चली गई थी जो की काफी बड़ी और कसी हुई नजर आ रही थी,,, पर वह समझ गई थी कि अंकित किस बारे में बात कर रहा था अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) बस यही कह रहा था,,,,।

ओहहह ,,, तो मेरे बेटे को मे खूबसूरत लगती हुं,,,

लगती नहीं हो तुम हो खूबसूरत मम्मी,,,

चल रहने दे किसी और के सामने मत कहनानहीं तो तुझे बेवकूफी समझेंगे दो-दो बच्चों की मां कभी खूबसूरत हो सकती है क्या,,,

क्या मम्मी तुम तो मजाक समझती हो,,,

रहने दे जाकर पढ़ाई कर और मुझे अपना काम करने दे,,,,(इतना कहकर सुगंधा वापस सब्जी काटने लगी और अंकित वहां से चला गया,,, अंकित के वहां से जाते हैं सुगंधा राहत की सांस लेने लगी क्योंकि ना जाने क्यों इस तरह की बात अपने बेटे के मुंह से उसके बदन में उत्तेजना के लहर उठने लगी थी और वह बदहवास होते जा रही थी,,, मदहोशी उसकी नसों में घूमने लगी थी बरसों के बाद कोई मर्द उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और इशारों ही इशारों में उसकी गांड की तारीफ कर रहा था इसलिए सुगंधा के तन बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी,,,, उसकी बर पानी छोड़ रही थी और मन ही मन वह प्रसन्न हो रही थी इस बात पर की राहुल के पास भेजने का उसका मकसद सफल हो रहा था,,, क्योंकि आज ही वह राहुल से मिला था और आज ही वहां उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था यही बदलाव उसमें एकाएक आया था,,,,।

दूसरी तरफ अंकित का वीडियो जोरों से धड़क रहा था पहली बार अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और ऐसा करते समय उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी और उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था लेकिन अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ करने में उसे आज बहुत अच्छा लग रहा था,,, ऐसे ही दो-तीन में तीन गुजर गए और सुगंधा एक दिन शाम को मार्केट जाने के लिए तैयार होने लगी,,,,।।।।
 
अपने बेटे में आए बदलाव से सुगंध बेहद खुश थी राहुल की संगत में कुछ तो असर हुआ था जिसके चलते उसके बेटे ने उसकी खूबसूरती की तारीफ किया था यह इशारा था कि अब वह पूरी तरह से बड़ा हो चुका है औरतों के प्रति आकर्षण उसके में भी स्वाभाविक रूप से आ चुका है वह भी समझ चुका है की औरतों का कौन सा अंग बेहद आकर्षक होता है,,, क्योंकि सुगंध अपने बेटे की नजर को अच्छी तरह से पहचानती थी काम करते वक्त वह काम में जरूर मन लगाती थी लेकिन उसकी नजर हमेशा अंकित के ऊपर ही रहती थी और उसकी तिरछी नजरों के बाण को अपने बदन पर चलता हुआ वह देखकर अंदर ही अंदर बहुत खुश होती थी,,,।



एक दिन बाहर मार्केट जाने के लिए तैयार हो रही थी और अपने साथ अंकित को भी ले जा रही थी वह अपने कमरे में तैयार हो रही थी,,, और अंकित तैयार होकर कमरे से बाहर कुर्सी पर बैठकर इंतजार कर रहा था,,, और अपनी मां के बारे में ही सोच रहा था,,, अब वह अपने मन में यही सोचता था कि काश उसकी मां राहुल की मां की तरह होती तो कितना मजा आ जाता घर में ही खुला वातावरण देखने को मिलता ,,, क्योंकि राहुल की मां को देखकर मन ही मन वह भी यही चाहता था कि उसकी मां भी राहुल की मां की तरह ही घर में रहे मां बेटे के बीच में किसी प्रकार का पर्दा ना हो सब कुछ देखने को मिले जैसा कि वह खुद अचानक उसके घर पर पहुंच कर देख चुका था उसकी मां का कामुक रूप बड़ी-बड़ी चूचियां उस पर गीली साड़ी,,,उफ्फ,,,, उस दृश्य को याद करके अभी भी अंकित का लंड खड़ा हो जाता था। और इस समय भी उसका यही हाल था,,, राहुल की मां के बारे में सोचकर ही उसका लंड ठुनकी मारता हुआ अपनी औकात में आ चुका था,,,।



बाहर बैठा हुआ अंकित बार-बार अपनी घड़ी की तरफ देख रहा था क्योंकि मार्केट जाने का समय कुछ ज्यादा ही होता जा रहा था,,, वह बाहर से ही आवाज लगाता हुआ बोला,,,।

मम्मी तैयार हुई कि नहीं देर हो रही है,,,

अरे हां तैयार हो गई हूं बस थोड़ा सा रह गया है यह ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है,,,।

(उसकी मां का इतना कहना था कि अंकित की कल्पनाओं का घोड़ा पल भर में ही गति पकड़ लिया वह अपनी मां के बारे में कल्पना करने लगा अपनी मां के डोरी वाले ब्लाउज के बारे में कल्पना करने लगा वह अपने मन में सोच रहा था कि उसकी मां डोरी वाले ब्लाउज में कितनी खूबसूरत लगती होगी हालांकि वह पहले भी अपनी मां को डोरी वाले ब्लाउज में देख चुका था लेकिन इतना ध्यान नहीं दिया था लेकिन जब से उसका आकर्षण अपनी मां की तरफ बढ़ा था तब सेवा अपनी मां की हर एक हरकत और उसके रूप को देखकर उसके बारे में गंदी-गंदी कल्पना किया करता था और इस समय भी उसके मन में यही हो रहा था अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां कैसे छोटे से ब्लाउज में समा जाती होगी,,, वह अपने मन में यह सोच रहा था कि पता नहीं उसकी मां कौन से रंग का ब्रा पहनी होगी,,, और अपने ब्लाउज की डोरी को कैसे बांधती होगी,,,,उफ्फ,,, कितना गजब का नजारा होगा अपने मन में इस तरह की कल्पना करके अंकित अपनी मां को इस रूप में देखना चाहता था अपनी मां को कपड़े पहनते हुए देखना चाहता था ब्लाउज पहना हुए देखना चाहता था उसे अंतर्वस्त्र पहनते हुए देखना चाहता था लेकिन वह जानता था ऐसी हालत में अपनी मां को देख पाना नामुमकिन सा है,, क्योंकि जब भी कपड़े पहनना होता था तो उसकी मां अपने कमरे में चली जाती थी और दरवाजा बंद कर लेती थी हां यह बात और ठीक ही वह अपनी मां को अस्त-व्यस्त हालत में धीरे-धीरे कई बार देख चुका था, ।





घर के पीछे रात को पेशाब करते हुए उसकी नंगी गांड के दर्शन करके वह अपने आप को धन्य समझने लगा था और उस समय का पल उसके लिए बेहद उत्तेजनात्मक था,,, और वह बाथरूम में भी अपनी मां को पूरी तरह से नंगी होकर नहाते हुए देख चुका था उसके हर एक अंग को देख चुका था और उसे दृश्य को देखकर वह इस समय अपने लंड को हिला कर अपनी घर में शांत करने की लालच को रोक नहीं पाया था और हस्तमैथुन करके अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने की कोशिश किया था और फिर उसके बाद सुबह-सुबह जब वह अपनी मां के कमरे में उसे जगाने के लिए गया था तब का दृश्य देखकर तो उसके लंड की नसे फटने को हो गई थी क्योंकि कमर के नीचे उसकी मां पूरी तरह से नंगी थी और उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर को देखकर अंकित अपनी लालच को रोक नहीं पाया था और हल्के से अपनी मां की बुर को छूने का सुख प्राप्त कर लिया था,,,। अंकित यही सब अपनी मां के बारे में सोच ही रहा था कि तभी फिर से कमरे के अंदर से आवाज आई,,,।



अरे अंकित देखा तो ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है जरा आकर बंद कर देना तो,,,।

(इतना सुनते ही अंकित की आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था और यह फैसला भी सोच समझ कर सुगंधा ने ली थी ऐसा नहीं था कि वह अपने हाथ से ब्लाउज की डोरी बंद नहीं कर पा रही थी बल्कि वह अपने बेटे के हाथ से अपनी डोरी को बंद करवाना चाहती थी और उसे उत्तेजित कर देना चाहती थी वह आदम कद आईने के सामने खड़ी थी,,,। और ऐसे हालात में,,, आईने में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में कैद नजर आ रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कैसे हालात में डोरी बातें जैसे मैं उसकी नजर आई नहीं पर जरूर पड़ेगी और वह उसे समय अपने बेटे के चेहरे पर बदलने वाले भाव को देखना चाहती थी उसके दोनों टांगों के बीच की स्थिति को महसूस करना चाहती थी देखना चाहती थी,,,,। अंकित अभी इसी कसमकस था कि उसकी मा सच में उसे अंदर बुलाई है या ऐसे ही उसके कान बज रहे हैं,,, और फिर कुछ देर तक अंकित की तरफ से कोई भी हरकत ना होता हुआ देख कर उसकी मां फिर से बोली,,,,।)



अंकित बेटा जरा अंदर आना तो मेरे ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है जरा बंद कर दे तो,,,,।

(इतना सुनते ही उसकी मां प्रसन्नता से भर गया उसकी मन भंवरा बनकर उड़ने लगा कि उसके कान नहीं बज रहे थे बल्कि सच में उसकी मां यही बोल रही थी जैसा कि वह सुन रहा था वह तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां के कमरे के पास जाने लगा दरवाजा अंदर से बंद जरूर था लेकिन सिटकिनी नहीं लगाई हुई थी,,, और हल्के से दरवाजे पर हाथ रखते ही दरवाजा एकदम से खुल गया,,, आंखों के सामने जो दृश्य नजर आया उसे देखकर अंकित के पेट के अंदर हलचल बढने लगी,,,, दरवाजा खुलते ही पीछे ब्लाउज की डोरी को दोनों हाथों से पकड़े हुए उसकी मां दरवाजे की तरफ देखने लगी ऐसी हालत में अंकित की नजर एकदम साफ तौर पर देख पा रहे थे कि उसकी मां आसमानी रंग का ब्रा पहनी हुई थी क्योंकि पीछे के साइड से ही दिख रही थी आगे से तो ब्लाउज का कपड़ा होने की वजह से सिर्फ चुचियों का उभार ही दिख रहा था,,,। अपनी मां की तरफ कामुक नजर से देखते हुए अंकित औपचारिकता निभाते हुए बोला,,,)

क्या हुआ मम्मी,,,?



अरे देख नहीं रहा है ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है,,,,।

अरे कैसे बंद नहीं हो रही मम्मी,,,,

बहुत दिनों बाद यह ब्लाउज पहन रही हुं,,,,

रोज ही तो पहनती हो,,,(अपनी मां की तरफ आगे बढ़ते हुए अंकित बोला)

अरे पागल हो गया है क्या कहां रोज पहनती हूं,,,।

क्या मम्मी तुम भी बिना ब्लाउज के रहती हो क्या रोज,,,,(अपनी मां के एकदम करीब पहुंचते हुए बोला,,,,, अपनी मां के साथ बात करते हुए ब्लाउज जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए उसके बदन की उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी और सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,)



अरे बुद्धू डोरी वाला बहुत दिन बाद पहन रही हूं तो हाउस तुम्हें रोज पहनती हूं लेकिन कभी उसकी डिजाइन तूने देखने की कोशिश किया है तुझे क्या मालूम मैं क्या पहनती हूं क्या नहीं पहनती हूं,,, पहले जो ब्लाउज पहनती थी उसका बटन आगे से,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा तुरंत अपने बेटे की तरफ घूम गई और अपनी छाती दिखाते हुए बोली) बंद होता है लेकिन इस ब्लाउज में बटन भी आगे से बंद होता है और पीछे से डोरी को भी बांधी जाती है समझ में आया तुझे कुछ,,,(ऐसा कहते हुए जिस तरह से सुगंध अपने बेटे की तरफ घूम कर अपनी छाती दिख रही थी हालांकि वह अपने ब्लाउज का बटन दिखाना चाहती थी लेकिन उसका उद्देश्य अपनी चूचियों को दिखाना ही था और वाकई में सूरज की नजर बटन पर तो बाद में लेकिन उसकी भरी हुई छाती पर पहले गई थी जिसे इतने करीब से देख कर पेंट में हलचल सी मचने लगी थी,,,। अंकित क्या कहता है कुछ समझ में नहीं आया उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और यह बदलाव सुगंधा की नजर में आ चुका था वह अंदर के अंदर खुश हो रही थी,,,,, कुछ देर तक वह इस स्थिति में खड़ी रही पीछे से ब्लाउज खुला हुआ था उसकी ब्रा की पिछली पट्टी साफ दिखाई दे रही थी,,, यह किसी भी जवान लड़के की तरह मदहोश कर देने वाला दृश्य था इस तरह के दृश्य देख कर कोई भी मर्द उत्तेजित होकर जुगाड़ ना होने की स्थिति में हस्तमैथुन करके अपने घर में शांत करने की कोशिश जरूर करता और इसमें अंकित की भी हालत खराब हो रही थी वह कुछ सेकेंड तक अपनी मां की भारी भरकम चूचियों की तरफ देखते हुए औपचारिकता वश बोला,,,।)



तो यह बात है मुझे क्या करना है,,,,,।

तुझे ज्यादा कुछ करना नहीं है बस इस ब्लाउज की डोरी को बांधना है,,, इतना तो तुझे आता ही है ना,,,,

ठीक है मम्मी,,,,।

( अंकित की मां इतना सुनते ही वापस आईने की तरफ घूम गई और अपनी चिकनी पीठ को अपने बेटे की तरफ कर दी,,, अंकित तो यह दृश्य देख कर मदहोश हुआ जा रहा था,,, अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को बांधने के नाम से उसके बदन में उत्तेजना भारी कंपन हो रही थी,,,, वह नजर उठा कर आईने की तरफ देखा उसकी मां सीधे-सीधे आईने में नहीं देख रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा आईने की तरफ देखेगी और उस नजर मिलते ही वह अपनी नजर को घुमा लगा और ऐसा हुआ नहीं चाहती थी वह चाहती थी कि उसका बेटा खुली नजरों से ब्लाउज में कैद उसकी चूचियों को देखें चूचियों के बीच से गुजरती हुई पतली दरार को देखें और ऐसा ही हुआ,,, सूरज नजर उठा कर आईने में देखने लगा जिसमें उसकी मां का खूबसूरत चेहरा और उसकी मां की मदद कर देने वाली ऊभरी हुई उन्नत छाती नजर आ रही थी जिस पर साड़ी का पल्लू नहीं था और साड़ी कमर तक भरी हुई थी और साड़ी का पल्लू नीचे जमीन पर लहरा रहा था एक तरह से यह दृश्य कामोतेजना से भर देने वाला था,,,। अगर इस समय स्त्री से पर किसी और की नजर पड़ जाती तो औपचारिक रूप से इस दृश्य के चलते मां बेटे के बीच गलत संबंध के रिश्ते का ठप्पा लग जाता और वैसे भी इस तरह के दिल से अक्षर प्रेमी प्रेमिका और पति पत्नी के बीच ही देखने को मिलता है और अगर इस समय यहदृश्य तृप्ति देख लेती तो शायद उसकी मां और उसका भाई दोनों उसके नजर से गिर जाते लेकिन इस समय दोनों निश्चिंत्य थे क्योंकि तृप्ति कोचिंग के लिए गई हुई थी,,,,,।



जवान हो चुके अंकित के लिए यह काम बेहद कठिन नजर आ रहा था क्योंकि आज तक कुछ नहीं कभी औरत के ब्लाउज की डोरी नहीं बांधी थी यह पहला मौका था जब उसकी मां खुद ही अपने बेटे से ब्लाउज की डोरी को बंधवाने जा रही थी,,, अंकित ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा हुआ था उसके पेट में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जो की एक कदम आगे बढ़ने से ही उसका तंबू उसकी मां की भारी भरकम नितंबों पर स्पर्श करने लगता उस पर रगड़ खाने लगता,,, और शायद इसी रगड़ को सुगंधा महसूस करना चाहती थी क्योंकि वह भी तिरछी नजर से अंकित के पेट में उभरे हुए तंबू को देख चुकी थी और इतना तो समझ ही गई थी कि उसके बेटे का लंड क्यों खड़ा है और इसी के चलते उसे अपनी जवानी पर अपने कसे हुए बदन पर गर्व महसूस हो रहा था,,,, कुछ पल के लिए कमरे के अंदर खामोशी छा चुकी थी मां बेटे दोनों खामोश थे आईने में अंकित की नजर अपनी मां की भारी भरकम छातियों पर टिकी हुई थी जिसके बीच से गुजरती हुई गहरी लकीर किसी नहर से काम नहीं लग रही थी और इसी नहर में अंकित डुबकी लगाना चाहता था,,,, अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि ब्लाउज के अंदर उसकी मां कितना बेश कीमती खजाना छुपा कर रखी है,,, जिसे देखने के लिए उसका मान कितना ललाईत हो रहा है और अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि काश उसकी मां राहुल की मां की तरह होती तो कितना अच्छा होता,,, तो उसे भी इस समय अपनी मां की नंगी चूचियों को देखने का सुख प्राप्त हो जाता गली साड़ी में बड़ी-बड़ी चूची और उसके कड़े निप्पल,,,उफ्फ ,,,, यही सब सोच कर अंकित मन ही मन खुश हो रहा था कि तभी उसकी मां बोली,,,।



अरे अब देख क्या रहा है बंद भी करेगा कि खड़ा ही रहेगा मार्केट भी जाना है,,,।

मैंने कभी बंद नहीं किया ना इसलिए समझ में नहीं आ रहा है,,,।

अरे तो सीख लेना चाहिए था, , आखिरकार यह सब आगे चलकर काम आएगा,,,,।

(अपनी मां की बातें सुनकर अंकित अपनी मां के खाने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था और मन ही मन प्रसन्न भी हो रहा था वह धीरे से अपना हाथ आगे बढ़े और अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को अपने दोनों हाथों से थाम लिया,,,, ब्लाउज की डोरी पकड़ने में उसकी हालत खराब हो रही थी माथे से पसीना को पकने लगा था जबकि कमरे में पंखा चल रहा था और गर्मी का एहसास सुगंधा को बिल्कुल भी नहीं हो रहा था और वही वह पसीने से तरबतर होता जा रहा था,,,, यह सब सुगंधा आईने में अच्छी तरह से देख पा रही थी,,,। देखते ही देखते अंकित ब्लाउज की डोरी को बांधने लगा,,, उसकी उंगलियां कांप रही थी,, अपने बेटे की हालत देखकर सुगंधा को भी शक हो रहा था कि कहीं उसका बेटा सच में उसकी डोरी बांध पाएगा या नहीं,,,,।



डोरी को बांधते समय अंकित की उंगलियां अपनी मां की चिकनी पीठ से स्पर्श हो जा रही थी और इतने सही अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह मदहोश हुआ जा रहा था,,, उसे अपनी मां की नंगी पीठ का स्पर्श भी बेहद आनंददायक लग रहा था,,,, वह अपनी मन में सोच रहा था कि उसकी मां की चिकनी पीठ कितनी कोमल है अगर ब्लाउज उतार दिया जाए तो बस केवल ब्रा की पतली सी पट्टी ही नजर आती है कोई भी शख्स पैसे में उसकी मां की नंगी चिकनी पीठ की कल्पना कर सकता है कि बिगर ब्रा और ब्लाउज की कैसी दिखती होगी,,,,।

यही हाल सुगंधा का भी था,, जब जब उसे अपनी पीठ पर अपने बेटे की उंगली का स्पर्श होता तब तब उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगती थी,,, देखते ही देखते एक गिठान मार कर अंकित दूसरी गिठान मार रहा था,,, उत्तेजना से अंकित की हालत बहुत खराब होती जा रही थी और यही हाल सुगंधा का भी था,,, सुगंधा किसी तरह से अपने बेटे के पेंट में बने हुए तंबू का स्पर्श अपनी नितंबों पर करना चाहती थी लेकिन कामयाब नहीं हो पा रही थी वह हल्के-हल्के अपने नितंबों में हरकत भी दे रही थी कि पीछे की तरफ जाकर बस स्पर्श हो जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था,,,, ऐसे में ब्लाउज की डोरी बांधते हुए अंकित की नजर अपनी मां की गांड पर गई तो उसके होश उड़ गए गांड का उभार बहुत ही गजब का था,, नजर नीचे करने पर उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड और उसके लंड के बीच केवल दो तीन अंगुल का ही फासला रह गया था हल्का सा कमरक्ष आगे कर देता था उसका लंड उसकी मां के नितंबों से रगड़ खा जाता। लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी उसे इस बात का डर था कि अगर उसकी मां की गांड पर उसका लंड स्पर्श करेगा तो उसकी चुभन से वह कैसा महसूस करेगी,,, नाराज हो जाएगी यही सब सो कर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी जबकि उसकी मां तो चाहती थी कि किसी भी तरह से उसके बेटे का लंड उसकी गांड से रगड़ खा जाए बस इतने से ही सुगंधा प्रसन्न हो जाती और अंकित मत हो जाता लेकिन फिर भी आगे बढ़ने से डर रहा था,,,।



देखते ही देखते अंकित अपनी मां के ब्लाउज की डोरी की गिठान को मार दिया था,,,, और बोला,,,।

लो हो गया,,,,।

बाप रे तूने तो बहुत कस के डोरी बांध दिया है,,,, आगे से देख,,,(एकदम से अंकित की तरफ घूम कर एक बार फिर से अपनी छाती की गोलाई दिखाते हुए) कितना बाहर निकल गया,,, एकदम उभरा हुआ दिख रहा है,,,,।

(अपनी मां की हरकत और उसकी छातिया को देखकर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि वह एकदम से छाती को तानकर अपनी दोनों गोलाईयों को दिखा रही थी,,, अंकित की हालत एकदम खराब होती जा रही थी वह आंख फाड़े अपनी मां की छातियो को ही देख रहा था और सुगंधा को भी अपने बेटे को अपनी चूची दिखाने में मजा आ रही थी भले ही ब्लाउज के ऊपर से लेकिन आनंद बेहद प्राप्त हो रहा था,,,। अपनी मां की हरकत से पूरी तरह से मदहोश हो चुका अंकित अपनी मां की चूचियों की तरफ देखते हुए ही बोला,,,)





सच में यह तो एकदम बड़ी-बड़ी नजर आने लगी लाओ में गिठान खोल देता हूं,,,।

नहीं नहीं रहने दे अच्छी लग रही है,,, क्यों सच कह रही हो,,,।

(अब अंकित क्या बोलता वह तो एकदम से हक्का-बक्का रह गया,,, सीधे शब्दों में उसकी मां खुद अपनी ही मुंह से अपनी चूचियों की तारीफ कर रही थी और कोई झूठ तारीफ नहीं कह रही थी वाकई में उसकी चूची इस समय कुछ ज्यादा ही बड़ी और बेहद आकर्षक लग रही थी,,, इसलिए गहरी सांस लेते हुए अंकित भी बोला,,,)

सच में मम्मी बहुत अच्छी लग रही है,,,।



हां तभी तो,,, चलिए सब जाने दे बस पीछे से जरा ब्रा की पट्टी को ब्लाउज की डोरी के नीचे कर देना तो वरना दिखेगी तो खराब लगेगी,,,,(इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से सुगंधा आईने की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई और अब जिस तरह की बातचीत हुई थी उसके चलते और ब्रा की पट्टी को ठीक करने के नाम से ही अंकित पूरी तरह से अपने बदन में चुदवासा पन महसूस कर रहा था,,,,,, अपनी मां की बात सुनकर एक बार फिर से अंकित की उंगलियां उसकी नंगी चिकनी पीठ को स्पर्श करने लगी और एक औरत के बदन पर उसकी ब्रा की पट्टी को छुने का सुख अंकित प्राप्त करने लगा,,, और अपनी उंगलियों को अपनी मां की ब्रा की पट्टी के नीचे सरका कर वह पट्टी को एकदम ठीक करने हेतु,,, अपनी तरफ खींच जो कि एकदम कसी हुई थी और खींचने की वजह से सुगंधा का बैलेंस एकदम से गड़बड़ क्या और वह एकदम पीछे की तरफ गिरने लगी,,, और उसे संभालने के लिए अंकित तुरंत अपनी बाहों को खोल दिया और पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में ले लिया लेकिन सुगंधा का शरीर थोड़ा गदराया हुआ था जिसके चलते अंकित भी ठीक तरह से अपनी मां को संभाल नहीं पा रहा था और दो-तीन कदम पीछे की तरफ आ गया उसकी मां भी साथ में उसके बाहों में पीछे से उसके ऊपर गिरती हुई और खुद ही बचने की कोशिश करते हुए दोनों बिस्तर के करीब आ गए,,,, लेकिन आखिर में अंकित अपने आप को अपनी मां के भार को संभाल नहीं पाया और बिस्तर पर गिर गया गनीमत थी कि बिस्तर तीन कदम पीछे ही था,,,, इसलिए दोनों बिस्तर पर गिरे वरना नीचे जमीन पर गिर जाते तो दोनों को चोट लग जाती ,,,,,।



इसके बावजूद भी बेहद अद्भुत और मादकता से भरा हुआ नजारा बन चुका था,,, अंकित नीचे था और उसकी मां उसके ऊपर थी,,, पीछे से अपनी मां को बाहों में भरा हुआ था और ऐसे हालात में इसकी भारी भरकम गांड उसके मोटे तगड़े लंड के ऊपर टिकी हुई थी जो की पूरी औकात में आकर खूंटा बना हुआ था,,, पर सीधे-सीधे साड़ी सहित गांड की दोनों फांकों के बीच रास्ता बनाता हुआ,,, उसकी बुर के मुहाने दस्तक दे रहा था,,,,,, जिसका एहसास सुगंधा को एकदम बराबर हो रहा था,,, अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर पर महसूस करते ही वह पूरी तरह से मचल उठी,,,, एकदम से मदहोश हो गई,,, पहले तो बिल्कुल अपरा तफरी का माहौल था क्योंकि गिरते गिरते बची थी लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि वह बिस्तर पर गिरी है और बच गई है तो राहत की सांस थी लेकिन तभी उसकी यह राहत मदहोशी में बदल गई जब उसे अपनी गांड के बीचों बीच कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ,, और उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा के लिए,,, अनुमान लगाना कोई बड़ी बात नहीं देखी उसकी गांड के बीचों बीच जो चीज चुभ रही है वह क्या है,,, और जब उसे यहां एहसास हुआ कि वह चीज कुछ और नहीं बल्कि उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड है तो यह एहसास ही उसकी बुर को मदन रस से भिगोने लगी वह चारों खाने चित हो चुकी थी,,,।



और यही हाल अंकित का भी था जब उसे भी इस बात का एहसास हुआ कि उसका लंड उसकी मां की गांड के बीचों बीच जाकर कहीं फस गया है तो वह भी एकदम से मदहोश हो गया और वैसे भी वह पीछे से अपनी मां को बाहों में झगड़ा हुआ था और उसे बचाने के चक्कर में अनजाने में उसकी दोनों हथेलियां उसके दोनों खरबुजो पर चली गई थी जिसे वह संभालने के चक्कर में दबा दिया था,,,, और शायद यह एहसास सुगंध को नहीं हो पाया था क्योंकि वह अपनी दोनों टांगों के बीच के एहसास में पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,।

कुछ देर तक दोनों इसी अवस्था में बिस्तर पर पड़े रहे दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रही थी दोनों मदहोश हो चुके थे उत्तेजना दोनों के सर पर सवार हो चुकी थी लेकिन जैसे तैसे करके सुगंध अपने आप को संभाली और यह बोलते हुए उठने लगे की,,,, अच्छा हुआ बिस्तर पर गिरे वरना चोट लग जाती,,,।

और फिर दोनों मार्केट की तरफ निकल गए,,,।।
 
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