वह तुरंत बाथरूम के अंदर ही ऊपर की तरफ थोड़ी सी जगह थी उसे जगह में थोड़ा कपड़ा भरा हुआ था जब वह उसे कपड़े को हटाई तो अंदर बीट क्रीम पड़ा था और बीट क्रीम को अपने हाथ में लेकर उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी वह जल्दी से क्रीम निकाल कर उसे अपनी बुर के बालों पर अच्छी तरह से लगा ली,,, और 5 10 मिनट तक इंतजार करने लगे उसे अपनी बर पर क्रीम लगाने में आज बेहद शर्म और उत्तेजना का अनुभव हो रहा था वैसे तो उसे संदीप के साथ केवल वक्त गुजारना था लेकिन उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी बुर क्यों चिकनी कर रही थी,,, अपने मन में उठ गए इस सवाल का जवाब उसे खुद समझ में नहीं आ रहा तेरे कर उसके मन में अनजाने में ख्याल आ जा रहा था कि संदीप से चुदवाने जा रही है,, और अपने ही मन में आए इस तरह के ख्याल से वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी,,,,।
देखते ही देखते 10 मिनट गुजर जाने के बाद अपनी पेंटिं को हाथ में लेकर उससे बुर पर लगी क्रीम को साफ करने लगी जिसके साथ उसकी झांट के बाल भी एकदम साफ होते जा रहे थे और देखते ही देखते उसकी पूरे एकदम मलाई की तरह चीकनी हो गई अपनी बर देखकर खुद उसके मुंह में पानी आ रहा था और वह अपनी हथेली को अपनी बर पर रखकर अपनी गुलाबी पतली दरार को अपनी हथेली के नीचे छुपा ली और अपने मन में सोचने लगी की जब इस पर संदीप का हाथ स्पर्श करेगा तब उसकी क्या हालत होगी,,, यह सोचकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,,, और फिर जल्दी-जल्दी नहा कर वह बाहर आ गई,,,।
उसकी मां भी उठ गई थी और वह झाड़ू लगा रही थी,,, झाड़ू लगाते हुए वह उससे बोली,,,।
तू छोड़कर तैयार हो गई है लेकिन अभी राजकुमार सो रही जाकर उन्हें भी तो जगा दो,,,,।
अभी अंकित उठा नहीं,,,!(आश्चर्य जताते हुए दीवार में टंगी घड़ी की तरफ देखते हुए तृप्ति बोली)
नहीं अभी नहीं उठा है जाकर जल्दी से जगा दे,,,,।
ठीक है मम्मी पहले कपड़े पहन लु,,,(वह केवल टावल में ही थी,,,,)
ठीक है लेकिन जल्दी करना देर हो रही है फिर जल्दी-जल्दी करेगा तो नाश्ता किए बिना चला जाएगा,,,,
ठीक है मम्मी मैं जल्दी से जगा देती हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही तृप्ति अपने कमरे में चली गई और फिर जल्दी-जल्दी कपड़े पहन कर अंकित को जगाने के लिए उसके कमरे में जाने लगी दरवाजे पर पहुंची तो दरवाजे की कड़ी बंद नहीं थी क्योंकि दरवाजे पर हाथ रखते ही दरवाजा अपने आप खुल गया था और वह धीरे से कमरे में प्रवेश कर गई,,,, वह अपनी ही धुन में थी देखते देखते हो अपने भाई के बिस्तर के करीब पहुंच गई और जब वह अपने भाई को आवाज लगाने ही वाली थी तो उसकी नजर अंकित पर पड़ी और अंकित पर नजर पढ़ते ही उसके तो हो सके उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,,।
इसमें तृप्ति का दोष बिल्कुल भी नहीं था,,,,, नजर ही कुछ ऐसा था कि अगर उसकी जगह कोई और होती तो उसकी भी हालत तृप्ति की तरह ही होती,,,, तृप्ति की सांस ऊपर नीचे होने लगी थी क्योंकि बिस्तर में उसका भाई उनकी पूरी तरह से नग्न अवस्था में सोया हुआ था उसके बदन पर ना तो कपड़ा था और ना ही चादर और पूरी तरह से नंगा बिस्तर पर सोया हुआ था और इस हालत में उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर छत की तरफ मुंह उठाई खड़ा था,,, तृप्ति को अपने भाई के कमरे में इस तरह के नजारे की अपेक्षा बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए तो उसके होश उड़ गए थे और वह कभी सोचा नहीं थी कि वह अपने भाई को इस रूप में देखेगी,,,।
तृप्ति को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बार-बार उसकी नजर ना चाहते हुए भी अपने भाई के खड़े लंड पर चली जा रही थी,,,, तृप्ति अपने जीवन में पहली बार एक जवान लड़के के लंड को देख रही थी और वह भी अपने ही भाई के,,, उसे तो अपनी आंखों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था वह तो हैरान इस बात से थी कि क्या लंड ऐसा होता है इतना मोटा तगड़ा लंबा एकदम मुसल की तरह बाप रे,,, उसके मन में ही यह शब्द निकल पड़े वाकई में तृप्ति के लिए लड की लंबाई और चौड़ाई उसकी मोटाई सब कुछ हैरान कर देने वाली थी वह बड़ी गौर से अपने भाई के लंड को देख रही थी और दरवाजे की तरफ देख ले रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां दरवाजे पर न जाए,, वह खुद कमरे से बाहर निकल जाना चाहती थी लेकिन जवानी की कशिश उसे रोके हुए थी बार-बार वह अपने भाई के लंड को ही देख रही थी,,, और अनजाने में ही उसके मन में यह खेला गया कि संदीप का भी क्या ऐसा ही होगा,,,, इस ख्याल से उसके तन-बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,,।
तृप्ति को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अगर इस अवस्था में वह अपने भाई को जगाती है तो उसके भाई के साथ-साथ वह खुद शर्मिंदगी से भर जाएगी और अगर बिना जगाए चली जाती है तो उसकी मां जगाने के लिए कमरे में आ जाएगी और अपने बेटे की इस हालत को देखकर वह भी न जाने क्या सोचेगी और वह भी समझ जाएगी की उसकी बेटी तृप्ति ने भी इस नजारे को अपनी आंखों से देख ली है,,,, इसलिए वह सोच समझ कर धीरे-धीरे कमरे से बाहर गई और दरवाजे को बाहर से बंद करके उसकी कड़ी को जोर-जोर से बजाने लगी,,,।
अंकित,,, कब तक सोता रहेगा ऊठ जा देर हो रही है,,, (तृप्ति के एक दो बार आवाज लगाने से अंकित की नींद खुल गई और वह अपनी हालत को देखा तो एकदम से घबरा गया रात को हुआ अपनी मां के ख्यालों में अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया था और अपनी मां को याद करके अपनी मां के बारे में गंदी कल्पना करके अपने लंड को हिलाकर मुठ मारा था उसे सब कुछ याद आते ही जल्दी से बिस्तर पर से उठा और बोला,,,)
हां दीदी आया,,,,।
(उसकी आवाज सुनकर तृप्ति अपने मन में ही बोली शुक्र है उठ तो गया,,,,)
चल जल्दी तैयार हो जा देर हो रही है,,,।
आया दीदी,,,,(इतना कहकर वह भी जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगा,,,,,।
दूसरी तरफ नाश्ता करके तृप्ति जाने के लिए तैयार हो गई थी जाने से पहले वह रसोई घर में काम करिए अपनी मां से बोली,,,)
मम्मी में जा रही हूं सहेलियां इंतजार कर रही होगी,,,।
ठीक है समय पर आ जाना,,,,
जल्दी आ जाऊंगी मम्मी तुम चिंता मत करो,,,,
(और इतना कहकर वह घर से निकल गई,,,, संदीप ने उसे पहले ही बता रखा था कि कहां आना है इसलिए उसके बताएं अनुसार इस जगह पर तृप्ति पहुंच गई और थोड़ी ही देर में वहां संदीप भी आ गया अपनी मोटरसाइकिल लेकर,,,, मोटरसाइकिल को देखकर तृप्ति बोली,,,)
तुम्हारे पास मोटरसाइकिल भी है,,,।
दो है एक पापा ले जाते हैं एक ऐसे ही पड़ी रहती है जब कभी काम पड़ता है तो मैं ही चलाता हूं,,,
तब तो अच्छा है जल्दी जाएंगे जल्दी आ जाएंगे,,,,
हां इसीलिए तो मैं मोटरसाइकिल लेकर आया हूं और वैसे आज तो तुम एकदम माल लग रही हो,,,,(तृप्ति को ऊपर से नीचे की तरफ चलते हुए संदीप बोला तो अपने लिए माल शब्द सुनकर तृप्ति गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)
क्या बोले,,,,,?
कककक ,,, कुछ नहीं मैं तो यह कह रहा हूं कि आज तो तुम एकदम परी लग रही हो,,,(उसका इतना कहते हैं संदीप के साथ-साथ तृप्ति मुस्कुराने लगी और वह उसके पीछे मोटरसाइकिल पर बैठकर जल्दी मैडम के घर,,,)
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
तृप्ति घर से निकल गई थी एक नए सफर के लिए,,, यह पहली बार था जब वह कहीं जाने के लिए अपनी मां से इजाजत मांगी थी और उसकी मां भी खुशी-खुशी उसे जाने की इजाजत दे दी थी क्योंकि वह कहीं और नहीं बल्कि अपने ही कॉलेज की मैडम की जन्मदिन पर जा रही थी पर वह भी शाम तक वापस लौट आना था इसीलिए उसकी मां ने उसे इजाजत दे दी थी,,,, तृप्ति बहुत खुश थी पीले और ब्राउन रंग के सूट सलवार में वह परी लग रही थी,,,, और इस कपड़े में देखकर संदीप भी लार टपकाने लगा था,,, तभी तो वह तृप्ति को माल कहकर संबोधन किया था जिसका तृप्ति ने भी हंस कर स्वागत की थी,,,,। संदीप अपना मोटरसाइकिल लाया था यह जानकार तृप्ति बहुत खुश थी,,, क्योंकि खुद का मोटरसाइकिल होने की वजह से आने जाने का समय बच जाता,,,,।
तृप्ति मोटरसाइकिल के पीछे बैठ गई थी,,, यह उसका पहला मौका था जब वह कीसी लड़के के साथ मोटरसाइकिल पर बैठी थी,,, वैसे तो आते जाते वह कई लड़कियों को इसी तरह से जवान लड़कों के पीछे बैठकर आते-जाते देखी थी और उन्हें देखकर वह भी अपने मन में यही सोचती थी कि उसका दिन कब आएगा जब वह अभी इसी तरह से मोटरसाइकिल पर बैठकर शहर घूमेगी,,, और ऐसा लग रहा था कि जैसे आज बहुत दिन आ गया था जब वह अपनी ख्वाहिश पूरी कर रही थी,,,,।
तर्प्ति बहुत खुश थी,,, लेकिन तभी उसे सुबह वाला वाक्या याद आ गया,,, और पल भर में उसके चेहरे पर सुर्ख लालीमा छाने लगी,,, उस पल के बारे में सोचकर,,, तृप्ति की सांसें ऊपर नीचे होने लगी, क्योंकि वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि अपने भाई के कमरे में उसे इस तरह के दृश्य देखने को मिलेगा,,, वह कभी सोची नहीं थी कि उसका भाई सारे कपड़े उतार कर नंगा होकर सोता होगा,,, तृप्ति इतना भी बर्दाश्त कर लेती लेकिन अपने भाई को नंगा देखने पर और उसके नंगे पन की चरम सीमा को देखकर खुद उसके होश उड़ गए थे,,,, जिंदगी में पहली बार वो किसी मर्दाना लंड को अपनी आंखों से देख रही थी और वह भी किसी गैर मर्द के नहीं बल्कि अपने ही भाई के लंड को,,,।
लंड की शक्ल सूरत और उसका भूगोल देखकर उसके होश उड़ गए थे,,, वह कभी सपने भी नहीं सोची थी कि मर्दों का लंड इतना बम पिलाट होता है,,, इतना मोटा लंबा और तगड़ा जिसमें बिल्कुल भी लचक नहीं थी और छत की तरफ मुंह उठाए खड़ा था,,, जवान लड़की के लिए यह दृश्य पूरी तरह से कामोत्तेजना से भरा हुआ होता है,,, लड़की के ही क्यों हर उस औरत के लिए जिनकी टांगों के बीच जवानी बरकरार रहती है,,, ऐसी हर एक औरत के लिए यह दृश्य,,, मादकता का काम करती है,,,, और वही मादकता तृप्ति के दिलों दिमाग पर छाया हुआ था,,,, वह मोटरसाइकिल पर बैठकर संदीप के साथ कॉलेज की मैडम के वहां जा रही थी लेकिन उसका दिमाग पूरी तरह से अपने भाई के लंड पर टिका हुआ था,,, कॉलेज में पढ़ने वाली पढ़ी लिखी लड़की होने के साथ-साथ तृप्ति, पूरी तरह से जवान हो चुकी थी,, मर्द औरत के बीच के रिश्ते को अच्छी तरह से समझती थी और वह यह भी जानती थी कि उत्तेजित होने पर ही मर्द का लंड खड़ा होता है,,, और यही जानकारी उसे अचंभित कर रही थी अपने भाई के पक्ष में,,, क्योंकि सुबह-सुबह उसका भाई तो पूरी तरह से गहरी नींद में सो रहा था उत्तेजित करने वाली एक भी वस्तु या स्त्री उसके भाई के समीप बिल्कुल भी नहीं थे तो उसका भाई किसी भी उत्तेजित हो रहा था और उसकी उत्तेजना का मापदंड तृप्ति उसके लंड के खड़े होने पर लगा रही थी और इसीलिए तो वह हैरान थी,,,।
लेकिन वह इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि सहज और प्राकृतिक रूप से सुबह-सुबह हर मर्द का लंड खड़ा ही रहता है,,, ज्यादातर पेशाब की तीव्रता की स्थिति मे,,, लेकिन ईस ज्ञान से तृप्ति पूरी तरह से अंजान थी,,,, अपने भाई का ख्यालों से पूरी तरह से उत्तेजित किए जा रहा था जिसका असर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में महसूस हो रहा था,,, उसे अपनी पेंटिं गीली होती हुई महसूस हो रही थी,,, क्योंकि उसकी बुर से कम रस टपक रहा था,,,, तृप्ति कुछ बोल नहीं रही थी,,, वह खामोश थी,, और उसे खामोश देखकर संदीप बोला,,,।
क्या हुआ तर्प्ति कुछ बोल क्यों नहीं रही हो,,,।
नहीं कुछ नहीं,,,बस ऐसै ही,,,,।
(तृप्ति अपनी और संदीप के बीच हाथ रख कर बैठी हुई थी और ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी और संदीप के बीच हाथ की दीवार खड़ी करके रखी हो ताकि दोनों का बदन आपस में स्पर्श न हो और संदीप बार-बार कोशिश भी कर रहा था ब्रेक लगा कर की झटका खाकर त्रप्ती का बदन उसकी पीठ से स्पर्श हो जाए,,, लेकिन तृप्ति के कारण ऐसा हो नहीं पा रहा था इसलिए संदीप बोला,,,)
कंधे पर हाथ रख कर बैठ जाओ,,,, तब आराम से बैठ पाओगी,,,,।
(संदीप जानबूझकर तृप्ति को अपने कंधे पर हाथ रखने के लिए बोल रहा था क्योंकि वह जानता था कि जब वह उसके कंधे पर हाथ रखेगी तो उसका हाथ ऊपर की तरफ हो जाएगा और ऐसे हालात में,,, जब भी ब्रेक लगाने पर उसका बदन उसकी पीठ से स्पर्श होगा तो उसकी चूचियां भी उसकी पीठ से रगड़ खा जाएंगी,,,, और ऐसा ही हुआ,,, संदीप के कहने पर तृप्ति अपना हाथ उसके कंधे पर रख दी थी,,, और जब जब संदीप ब्रेक लग रहा था तब तब उसके एक तरफ का संतरा उसकी पीठ से दब जा रहा था और उसकी नरमाहट संदीप को अपनी पीठ पर बहुत अच्छे से महसूस हो रही थी जिसके कारण वह अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,, उसे बहुत मजा आ रहा था और इस बात का एहसास तृप्ति को भी हो रहा था तृप्ति को भी पता चल रहा था कि जब-जब संदीप ब्रेक लग रहा था तब तक वह एकदम से संदीप से सट जा रही थी,,, और उसकी चूची भी उसकी पीठ से दब जा रही थी,,,।
इन सबके बावजूद भी तृप्ति को बिल्कुल भी संदीप से ऐतराज नहीं हो रहा था बल्कि ना जाने क्यों उसके बदन में मदहोशी का आलम उबाल मार रहा था उसे संदीप के हरकत बहुत अच्छी लग रही थी जब जब ब्रेक लगाने पर उसकी चूची संदीप की पीठ से रगड़ खाती थी तब तब उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगती थी,,,,,,एक तो अपने भाई के लंड का ख्याल और ऊपर से संदीप की हरकत की वजह से उसकी चुचियों का उसकी पीठ से रगड़ खाना कुल मिलाकर उसकी पेंटिं को पूरी तरह से गीली करने पर उतारू हो गए थे,,,,,,।
पहली बार इस तरह का एकांत दोनों को मिला था लेकिन फिर भी दोनों एक दूसरे से बात नहीं कर रहे थे क्योंकि दोनों अपने-अपने तरीके से एक दूसरे से मजा ले रहे थे,,,, तर्प्ति की चूची की रगड़ से संदीप का लंड खड़ा हो गया था,,, और इस एहसास से तृप्ति की बुर पानी छोड़ रही थी,,, और इसी आनंद की पराकाष्ठा में दोनों एक दूसरे से बात करना भूल गए थे नतीजन मैडम का घर आ गया था,,,, वैसे तो दोनों यही सोच रहे थे कि यह सफर कभी खत्म ना हो लेकिन एक दूसरे में दोनों इस तरह से डूब गए थे कि सफर की दूरी का पता ही नहीं चला,,,।
यही है मैडम का घर,,,,(संदीप एकदम बड़े से दरवाजे के आगे मोटरसाइकिल रोक दिया था जिससे तृप्ति अंदाजा लगाते हुए बोल रही थी और वाकई में जिस दरवाजे के आगे दोनों रुके थे वही घर मैडम का था,,,,,)
हां यही है,,,,।
लेकिन देख कर लग तो नहीं रहा है कि मैडम का जन्मदिन है,,,,
,,, हां,,, ऐसा भी हो सकता है कि हम दोनों सबसे पहले पहुंच गए हो,,,,चलो चलकर देखते हैं,,,,
(संदीप मोटरसाइकिल खड़ी करके गेट खोल के अंदर जाने लगा और पीछे-पीछे तृप्ति भी जाने लगी,,,, दरवाजे के आगे पहुंचकर संदीप डोर बेल बजा दिया,,, थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला और दरवाजे पर मैडम खड़ी थी दोनों को देखकर मुस्कुराने लगी,,, मैडम को देखकर संदीपबोला,,,)
हैप्पी बर्थडे मैडम,,,, साथ में त्रप्ती भी मैडम को जन्मदिन की बधाई दी,,,।
(मैडम एकदम से खुश होते हुए बोली)
अच्छा हुआ संदीप तुम पहले आ गए,,,
पहले आ गए मतलब,,,,।
मेरा मतलब है कि अभी बाकी बच्चों का आना बाकी है और अच्छा हुआ तुम आ गए,,, क्योंकि जल्दी आ गए हो तो काम में हाथ भी बंटा लोगे,,,।
यह तो हमारा सौभाग्य है मेडम,,(संदीप बोलता है इससे पहले ही तृप्ति बोल पड़ी,,, और तृप्ति,, की तरफ देखते हुए मैडम बोली,,,)
तुम्हारा नाम,,,,,,(कुछ सोचते हुए मैडम बोली)
मैडम इसका नाम तृप्ति है और यह भी अपनी ही कॉलेज में पढ़ती है,,,(संदीप मैडम से तृप्ति को मिलाते हुए बोला,,,,)
ओहहहह,,,,, तुम दोनों बाहर क्यों खड़े हो आओ जल्दी अंदर आओ,,,, और जल्दी से मेरे काम में हाथ बंटाओ,,,।
(इतना कहकर मैडम इन दोनों को घर में ले आई और उन दोनों को एक कमरे में लेकर गई जहां पर वह खुद सब्जी काटने बैठी हुई थी,,,, और वह संदीप और तृप्ति से बोली,,,)
बाकी का सब काम तो हो गया है लेकिन सब्जियां काटना रह गया है बस यही काम हो जाए तो छुटकारा हो जाए वैसे भी मेरे बच्चे केक लेने गए हैं,,, वैसे मैं ज्यादा लोग को बुलाई नहीं हूं लेकिन बहुत खास खास को बुलाई हुं ,,,,,(इतना कहकर मैडम वहीं पर बैठ गई और फिर से सब्जी काटने लगी मैडम को सब्जी काटता हुआ देखकर तृप्ति बोली,,,)
अरे अरे मैडम यह आप क्या कर रही है मेरे होते हुए आपको यह सब करने की जरूरत नहीं है,,,,।
(इतना सुनते ही मैडम तृप्ति की तरफ देखने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)
तुम कर लोगी ना,,,,
जी मैडम मैं कर लूंगी मेरा तो रोज का काम है,,,,।
हां,,, हां,,,, मैडम हम दोनों यह काम कर लेंगे मैं भी सब्जी काटने में अपनी मां की मदद करता ही रहता हूं,,,,।
ओहहहह ,,, तुम दोनों कितने अच्छे हो,,,,,।
हम कर लेंगे मैडम आप चिंता ना करें आप दूसरा काम संभालो,,,,(इतना कहते हुए तृप्ति वहीं बैठ गई सब्जी काटने के लिए और तृप्ति की बात सुनकर मैडम बोली,,,)
तुम दोनों कितने अच्छे हो अच्छा हुआ तुम दोनों पहले आ गए वैसे तो अब कुछ काम बचा नहीं है बस मुझे नहाना है और अगर तुम दोनों यह काम कर लोगे तो हमें जल्दी से जाकर नहा लूंगी और फिर खाना तो जल्दी बनजाएगा,,,।
कोई बात नहीं मैडम आप जल्दी से जाकर नहा लीजिए तब तक हम दोनों सब्जी काट लेते हैं,,,,।
ठीक है,,,,(और इतना कहने के साथ ही मैडम नहाने के लिए चली गई,,,, मैडम के जाते ही तृप्ति बोली)
लो यहां तो अभी खाना ही नहीं बना है,,,, लगता है सारा काम हम लोगों को ही करना होगा,,,।
अरे वह बात छोड़ो लेकिन यह तो देखो मैडम हम दोनों को कमरे में अकेला छोड़ कर चली गई नहाने,,,,
तोक्या हुआ,,,?(सब्जी काटते हुए तृप्ति बोली,,,)
तो क्या हुआ,,,, समझ नहीं रही हो एक जवान लड़का और एक जवान लड़की कमरे में इस तरह से अकेले रहेंगे तो क्या होगा,,,,।
क्या होगा,,,,?(तृप्ति संदीप के खाने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए संदीप की तरफ देखे बिना ही वह शर्म के मारे नजर नीचे झुकाए हुए सब्जी काटते हुए बोली)
यह पूछो क्या नहीं होगा,,,,,(और इतना कहने के साथ ही बैठे-बैठे ही संदीप अपने प्यास होठों को तृप्ति के देखते हुए होठों की तरफ आगे बढ़ने लगा संदीप की हरकत से तृप्ति के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,, एक तो सुबह का नजारा और फिर बाइक पर चुचियों का रगड़ खाना यह सब पहले से ही तृप्ति के तन बदन में आग लगाया हुआ था,, और अभी यह कमरे में एकांत कुल मिलाकर तृप्ति को मदहोश कर रहा था और देखते ही देखते संदीप भी अपने होठों को एकदम उसके होठों के करीब ले गया इतना करीब कि दोनों की सांस एक दूसरे के गालों पर अपनी गर्माहट का एहसास दिलाने लगी,,,, संदीप की हरकत की वजह से तृप्ति के बदन में मदहोशी का नशा छाने लगा उसकी सांस उखड़ने लगी और उसकी आंखें अपने आप बंद हो गई यही मौका देखकर संदीप अपने प्यासे होठों को,,, तृप्ति के दहकते हुए होठों पर रख दिया,,, और मानो,,, तृप्ति भी इसी मौके का इंतजार कर रही हो वह तुरंत अपने होठों को खोल दी और गरमा गरम चुंबन में पूरा सहकार देने लगी दोनों पूरी तरह से पागल हो गए दोनों के हाथों से सब्जी काटने वाला चाकू छोड़कर नीचे गिर गया और दोनों एक दूसरे की बाहों में समाने लगी देखते ही देखते संदीप अपना हाथ आगे बढ़ाकर कुर्ती के ऊपर से ही,,, उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया।