Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 5 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

झोपड़ी के अंदर जो कुछ भी हुआ था उसको लेकर राजू और सोनी दोनों बेहद उत्साहित थे,,, राजू को तो यकीन नहीं हो रहा था कि वह सोनी के खूबसूरत बदन को अपने हाथों से स्पर्श किया है,,,, लाजवाब बेमिसाल अद्भुत खूबसूरती की मालकिन सोनी के भरे हुए बदन को अपनी बाहों में लेकर वह पूरी तरह से गदगद हुआ जा रहा था,,, उसे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था,,,जिसे सिर्फ देख कर आहे भरा करता था उसे अपनी बाहों में लेकर वह अपने आप को सबसे ज्यादा खुश नसीब समझने लगा था,,,,,, नंगी चिकनी टांगो को पकड़कर वह चित्र की उत्तेजना का अनुभव अपने अंदर कर रहा था वह पूरी तरह से उसे अपने बस में कर लिया था लेकिन वह नहीं जानता था कि उसके हाथों से ही उस खूबसूरत औरत की साड़ी कमर तक उठ जाएगी,,,, यह शुभ काम अपने हाथों से होता हुआ देखकर वह ऊतेजना के परम शिखर पर विराजमान हो गया था,,,उसकी मानसिक चिकनी कमर पर अपनी हथेलियों की पकड़ को वह अभी तक अपने अंदर महसूस कर रहा था उसके बदन की गर्माहट को अपने अंदर महसूस करके उसे इस बात का डर था कि कहीं उसका लंड पिघल ना जाए,,,,,, उसकी नरम नरम गद्देदार बड़ी बड़ी गांड पर उसके लंड की ठोकर अनजाने में ही लगी थी लेकिन वह जानबूझकर अपनी तरफ से भी हरकत करते हुए अपने लंड का दावा उसकी गांड पर बराबर बनाए हुए था,,, दो दो औरतों का सुख भोग चुका राजू इतना तो समझ गया था कि सोनी को भी उसके लंड की रगड़ साफ महसूस हुई होगी,,,तभी तो वह मुस्कुरा रही थी और जाते समय उसके पहचाने मैंने तंबू की तरफ इशारा करके खुद बोल गई थी कि इसे शांत करके बाहर आ जाना,,,,,, उसकी इस हरकत पर राजू समझ गया था कि सोनी बहुत गरम औरत है वरना जिस तरह की हरकत हुई थी उससे वह क्रोधित हो जाती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था,,,,,। राजू के मन में अभी भी एक सवाल उठ रहा था कि वह साड़ी के अंदर क्या पहनी हुई थी जिसे देखकर उसका मन थोड़ा गया कुछ भेजा रहा था वह अपने मन में ही सोच रहा था कि इतनी बड़ी औरत होने के बावजूद भी अभी भी बच्चों की तरह चड्डी पहनती है,,, क्योंकि राजू को औरतों के अंग वस्त्र के बारे में बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था क्योंकि गांव की सभी औरतें,,,, साड़ी और सलवार के अंदर कुछ भी नहीं पहनती थी और उन्हें भी इस बारे में कुछ पता भी नहीं था,,,, इसीलिए राजू ने ना तो कमला चाची के साड़ी के अंदर कुछ पहना हुआ देखा था और ना ही अपनी बुआ गुलाबी की सलवार के अंदर,,, इसलिए सोनई की कच्छी को देख कर उसे आश्चर्य हो रहा था,,,।

Soni ki gaand par chaddhi dekhkar raju heraan tha





अंदर से ब्लैकबोर्ड लेकर वह बाहर आ चुका था,,,। राजु को देखकर सोनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि अंदर जो कुछ भी हुआ था वह सोनी की सोच से ज्यादा हो चुका था,,सोनी के मन में यही था कि झोपड़ी के अंदर ले जाकर क्यों वह किसी भी तरह से राजू को उत्साहित और उत्तेजित करेगी लेकिन अंदर उम्मीद से कुछ ज्यादा ही हो गया था और राजू की उत्तेजना वह अपनी आंखों से उसके पजामे में देख रही थी जिसे वह अपनी बड़ी बड़ी गांड पर महसूस भी कर चुकी थी,,,, उसकी रगड उसका दबाव बड़ी बड़ी गांड पर बेहद अद्भुत था,,, जिसे महसूस करके अभी भी वह पानी पानी हुए जा रही थी,,,,, सोनी को अपनी कच्छी पूरी तरह से गीलीहो चुकी महसूस हो रही थी जिसे वह बार-बार साड़ी के ऊपर से ही अपना हाथ लगा कर व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही थी और यह हरकत राजू को एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उसकी इस हरकत के कारण उसके तन बदन में काम ज्वाला भड़क रही थी,,,,। राजू समझ गया था कि उत्तेजना के मारे उसका काम रस टपक रहा होगा और वग अपने मन में यही सोचने लगा कि काश उसकी किस्मत में उसकी बुर पर मुंह लगाकर उसका काम रस पीना लिखा होता तो मजा आता ,,,,,,

यह जो खिला दिख रहा है ना पेड में घुसा हुआ इसी मे ब्लैक बोर्ड को टांग दो,,,।

(कोयल सी सुरीली आवाज सुनते ही राजु एकदम मंत्रमुग्ध हो गया और उसके के अनुसार ब्लैक बोर्ड को साफ करके उसी खिले में टांग दिया,,,)

अब ठीक है ना सोनी दीदी,,,,।

हां बिल्कुल ठीक है,,,(इतना कहते हुए वह अपने आप से ही बात करते हुए बोली सोनी दीदी साला मौका मिला होता तो कब से अपना लंड मेरी बुर में डालकर चुदाई कर दिया होता और दीदी कह रहा है,,, फिर वह अपने मन में ही सोचने लगी कि वैसे भी दीदी और भाई के रिश्ते की मर्यादा ही कहां रह गई है उसका बड़ा भाई खुद उसकी चुदाई करता हैं और उसे चोदने के लिए रखा भी है,,, कोई बात नहीं जिंदगी में मजा तो आ रहा है ना बस,,,,)



देखो अब मैं इस ब्लैक बोर्ड पर जो कुछ भी लिखूंगी तुम लोग जमीन पर लिखना कुछ दिन तक ऐसे ही चला लो उसके बाद में तुम लोगों के लिए पाटी लाकर दूंगी,,,,

ठीक है सोनी दीदी,,,(उसकी बात सुनते ही सभी लड़के एक साथ बोल पड़े,,,

Soni





सोनी ने क ख ग घ,,,, यह चार अक्षर ब्लैक बोर्ड पर लिख दि और उसे,,,,,,, जमीन पर लिखने के लिए बोली सभी लड़के ब्लैक बोर्ड में देखकर जमीन पर लिखने की कोशिश कर रहे थे,,,,बीच-बीच में सोनी उन लोगों का हौसला भी बढ़ा रही थी,,,।

हां ऐसे ही धीरे-धीरे सीख जाओगे पढ़ना लिखना जिंदगी में बहुत जरूरी है कभी हिसाब किताब करना पड़ जाएगा तो कैसे करोगे कोई तो मैं बेवकूफ बना कर चला जाएगा इसलिए पढ़ना लिखना सीखना ही होगा धीरे-धीरे सीख जाओगे,,,,(इतना कहते हुए बार आ चुके सर पर हाथ फिर भी उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी राजू कि उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया दोनों की नजरे आपस में टकराई,,, ना जाने क्यों राजू से नजर मिलते ही,,, सोनी की नजरों में शर्म उतर आई वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,, क्योंकि कुछ देर पहले ही राजु ने अपने मर्दाना अंग की रगड़ उसकी गांड पर उसे महसूस करवाया था,,, जिसका एहसास उसकी बुर गीली, कर रहा था,,,, सोनी अपने मन में भाप ली थी कि राजू के साथ उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति होगी,,,,।

ब्लैक बोर्ड में लिखे हुए शब्दों को सभी लड़के लिखने की कोशिश कर रहे थे और धीरे-धीरे कामयाबी हो रहे थे श्याम भी वही कर रहा था लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा था वह अपनी मम्मी यही सोच रहा था कि यह लोग झोपड़ी के अंदर काफी देर से थे यह लोग अंदर कर क्या रहे थे,,,। उससे रहा नहीं गया तो,,, वह धीरे से राजू के कान में बोला,,,।

Raju k intejar me





तुम दोनों इतनी देर से झोपड़ी में क्या कर रहे थे,,,

वही ढूंढरहे थे जिस पर सब कुछ लिखा हुआ है,,, ऊंचाई पर और सबसे नीचे दबा हुआ था इसलिए उसे निकालने में देर हो गई,,,।

कुछ और तो नहीं कर रहा था ना,,,



पागल हो गया क्या तू,,,, लाला की बहन इनके बारे में कुछ सोचना भी नहीं वरना शामत आ जाएगी समझा,,, आप अपना काम कर और मुझे भी करने दे,,,,(लाला का नाम लेकर वह एक तरह से श्याम को धमकाने की कोशिश कर रहा था क्योंकि राजू जानता था कि लाला का डर उसे ज्यादा कुछ सोचने नहीं देगा,,, सोनी और उसके बीच हुए उस वाक्ये के बारे में मैं नहीं चाहता था कि किसी को भी पता चले,,,, वह दूसरे लड़कों की तरह नहीं था कि किसी भी औरत के साथ संबंध बनाने पर वह अपने दोस्तों को बढ़ा चढ़ा कर बातें करते थे वह बल्कि इस तरह के रिश्ते को एकदम खास रखना चाहता था जिसकी किसी को भनक तक ना लगे,,,, सोनी उसी टेबल पर बैठकर आगे क्या करना है उसके बारे में सोच रही थी,,,, राजू को उसने इसी बगीचे में दोबारा बुलाई थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जिस लंड को अपनी बड़ी-बड़ी गांड पर महसूस करके मस्त हो गई है उसे अपनी बुर में लेकर देखना चाहती है ,,वह देखना चाहती थी कि राजू का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसे कितना मजा देता है,,,। यही सब सोच सोच कर वह मस्त हुए जा रही थी और अपनी बुर को गीली कीए जा रही थी,,,, कुछ देर के बाद सोनी ने सब को छुट्टी दे दी और उन्हें अपने-अपने घर जाने के लिए बोल दी,,,,,

उन लोगों के साथ राजू भी जाने लगा,,,, सोनी वही टेबल पर बैठे उसे देखती रही वह उसका इंतजार कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि राजु जरूर आएगा,,,, राजू अपने दोस्तों को सिर्फ दिखाने के लिए उनके साथ जा रहा था,,, वह अंदर ही अंदर वापस बगीचे में जाने के लिए तड़प रहा था लेकिन इस तरह से सबके सामने जाने में डर था वह नहीं चाहता था कि वह लोग किसी भी तरह का शक करें,,, अपने मन में यही सोच रहा था कि सोने जैसी खूबसूरत औरत अगर उसे दोबारा बगीचे में बुलाई है तो जरूर कुछ ना कुछ होगा,,,,,,।

इसलिए वह सब लड़कों के साथ घर तो पहुंच गए लेकिन सबकी नजर बचाकर वापस बगीचे की तरफ चल दिया उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि बगीचे के अंदर जरूर उसका फायदा होने वाला है क्योंकि खूबसूरत औरतों से सबसे नजर बचाकर वहां बुलाई थी और ऐसे सबकी नजर बचाकर औरत तभी बुलाती है जब उसके मन में उसके लिए कुछ कुछ होता है,,,,,।

थोड़ी देर बाद राजू वापस बगीचे मैं पहुंच गया था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था दोपहर का समय था कड़ी धूप होने के बावजूद भी घने पेड़ चारों तरफ होने की वजह से धूप नीचे जमीन तक नहीं पहुंच पा रही थी इसलिए हां पर ठंडक बनी हुई थी,,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि पता नहीं क्या करने के लिए यहां बुलाई है यह सोचकर बार-बार उसकी आंखों के सामने वही दृश्य याद आ जा रहा था जब वह सीढ़ियों पर चढ़ी थी और उसका पैर फिसला था और वह उसकी बाहों में आ गीरी थी,,, राजू के मन में एक मलाल रह गया था कि मौका मिलने के बावजूद भी वह उसकी चूचियों पर हाथ नहीं रख पाया था जो कि किसी पहाड़ी की तरह सीना ताने खड़ी थी,,,,।

बगीचे में पहुंचकर वह सोनी को इधर-उधर ढूंढने लगा सोनी कहीं भी नजर नहीं आ रही थी तो वह झोपड़ी के अंदर जाकर देखने लगा उसे लगा कि शायद झोपड़ी के अंदर होगी,,, लेकिन झोपड़ी भी खाली थी,,,, राजू को बहुत गुस्सा आ रहा था उसे लगने लगा कि शायद वह मजाक कर रही थी वह कितने अरमान लेकर बगीचे में आया था उस ख्याल से ही बार-बार उसका लंड मुंह उठाकर खड़ा हो जाता था जिसे वह बार-बार अपने हाथों से बैठाने की कोशिश कर रहा था,,,,, कुछ देर तक वह झोपड़ी के अंदर ही खड़ा होकर सोचने लगा,,,, और बाहर आ गया इधर-उधर दूर-दूर तक देखने पर भी कोई नजर नहीं आ रहा था इसलिए वह हेड पंप के पास जाकर हेंडपंप चला कर पानी पीने लगा,,,,। उसका मन उदास हो चुका था,,,। वह वापस घर जाने वाला था कि तभी वह सोचा की झोपड़ी के पीछे जाकर देख लु,,,,।

Soni is tarah se raju ko uttejit karti huyi



और यह सोचकर वह झोपड़ी के पीछे जाने लगा,,,,,,, लेकिन यहां पर कोई नहीं था तो वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा थोड़ी ही दूरी पर बेर लगे हुए थे जिसमें बड़े-बड़े पेड़ उगे हुए थे वह सोचा कि चलो कुछ नहीं तो बैर ही लेकर खाया जाए,,,, और यह सोचकर वह बेर के पेड़ के पास पहुंच गया,,,,,, वही थोड़ी दूरी पर सोनी पेशाब करने के लिए आई थी और पेशाब करके वह भी बेर तोड़ रही थी राजू को उस तरफ आता देखकर वह पूरी तरह से सकते में आ गई थी वह सोच रही थी कि वह यहां क्या करने आ रहा है,,,, लेकिन तभी उसके दिमाग में खुराफाती चलने लगा,,,,। राजू बैर तोड़ता इससे पहले ही वह उसके सामने अपनी पीठ उसकी तरफ किए हुए जाकर खड़ी हो गई उसकी पायल और चूड़ियों की खनक की आवाज सुनते हैं राजू उस तरफ देखने लगा और ठीक थोड़ी ही दूरी पर अपने सामने सोनी को खड़ी देख कर वह खुश हो गया लेकिन वह कुछ बोल पाता इससे पहले ही सोनी अपना जलवा दिखाते हुए अपनी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगी जैसा कि वह उस दिन झाड़ियों के अंदर छुप कर देखा था यह देखकर राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा वह समझ गया कि जिस तरह का दृश्य उसने उस दिन देखा था आज भी उसकी किस्मत तेज है आज भी उसे वही देखने को मिलेगा,,,, इसलिए बैर ना तोड़कर वह वहीं खड़ा रह गया और धड़कते दिल के साथ उस दृश्य का आनंद लेने लगा जोकी सोनी जानबूझकरउसे दिखा रही थी जबकि वह पेशाब कर चुकी थी लेकिन आज वह अपनी जवानी की झलक दिखा कर उसे पूरी तरह से अपने बस में कर लेना चाहती थी,,, और वह यह बात नहीं जानती थी कि इस तरह के नजारे को वह पहले भी देख चुका है,,, तभी तो उसके पीछे पीछे लट्टु की तरह घूम रहा था,,,,।

SOni ki laajawab gaand



सोनी अपनी जवानी का जलवा बिखेरना शुरू कर दी थी वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी और देखते ही देखते राजु की आंखों के सामने उसने अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी थी ऐसा करने में उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,, क्योंकि वह जानती थी कि पीछे खड़ा एक नौजवान लड़का उसे अपनी साड़ी कमर तक उठाते हुए देख रहा है उसके नंगे पन को अपनी आंखों से देख कर मस्त हो रहा है और यह एहसास सोनी के तन बदन में आग लगा रहा था,,,,, देखते ही देखते सोनी अपनी साड़ी को कमर तक उठाती थी राजू की आंखें एक बार फिर से चौंधिया गई थी सोनी को चड्डी पहने हुए देखकर,,,, यह राजू के लिए अत्यधिक उत्तेजनात्मक स्थिति का निर्माण कर रहा था वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई औरत इस उमर में भी चड्डी पहनती होगी जबकि चड्डी तो बच्चे पहना करते थे,,,।

Soni ki madmast badi badi gaand



सोनी सब कुछ जानते हुए भी अपनी चड्डी को नीचे की तरफ खासकाने लगी और सोनी की यह हरकत राजू से सीने में छुरियां चला रही थी,,, देखते ही देखते सोनी ने अपनी बड़ी बड़ी गांड को उजागर करते हुए अपनी चड्डी को नीचे घुटनों तक सरका दी,,,राजू से तो कुछ भी बोला नहीं जा रहा था यहां तक कि सांस भी लेना मुश्किल हुआ जा रहा था और पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था ,, पजामे में एक बार फिर से तंबू बन चुका था,,,। गोल गोल गोरी गांड सुनहरी धूप में और ज्यादा चमक रही थी,,, सोनी के अंतर्मन में भी फुलझड़ियां झड़ने लगी थी,,, जवानी की आग में उसका तन जल रहा था,,,। राजू को पाने के लिए वो अपने होशो हवास खो बैठी थी,,,। वह अच्छी तरह से जानती थी कि पीछे खड़ा राजू उसकी नंगी गांड को देख रहा होगा और यही तसल्ली करने के लिए वह पीछे नहीं देखना चाहती थी क्योंकि वह राजू को पूरी तरह से तड़पाना चाहती थी,,,, राजू के लिए उसका नंगा बदन एक तरह से उसके लिए पुरस्कार था और उसे जीतने के लिए उसे खुद सोनी से स्पर्धा करना था जिसमें सोनी को भी मालूम था कि विजेता चाहे जो भी बने फायदा उसी का है,,,, इस खेल में बहुत मजा आने वाला था,,,,

Soni is tarah se raju ko apni jawani ka jalwa dikha rahi thi



सोनी के लिए पहला मौका था जब हुआ इस तरह से किस जवान लड़की को जानबूझकर अपनी गांड दिखा रही थी,,,। और राजु के लिए इस तरह के मौके बनते जा रहे थे,,, सोनी पेशाब कर चुकी थी इसलिए उसे पैसा बिल्कुल भी नहीं लगी थी लेकिन पेशाब करने की कलाकृति दिखाना जरूरी थी इसलिए वह वहीं पर बैठ गई क्योंकि वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दों की सबसे बड़ी ख्वाइश होती और खूबसूरत औरत को,,,, उनकी बड़ी-बड़ी कहां देख कर और खास करके उन्हें पेशाब करता हुआ देखकर मर्द एकदम से उत्तेजित हो जाते हैं,,,, और वह भी यही चाहती थी कि राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो जाए,,,,।

Apni saree ko kamar tak uthaye huye soni kamaal lag rahi thi



सोनी उसी तरह से बैठीरह गई गई सोने की जानकारी में उसे पेशाब करता हुआ आज तक किसी ने भी नहीं देखा था,,,, लेकिन यही उसकी भुल भी वह इस बात से अनजान थी कि राजू एक बार पहले भी से पेशाब करता हुआ देख चुका है और आज तो वह खुद जानबूझकर उसे दिखा रही थी,,, सोनी के खूबसूरत चेहरे की तरह उसकी गांड भी बहुत खूबसूरत थी वह भरी हुई गुदाज एकदम गदराई हुई,,,। जिसे देखकर राजू का मन कर रहा था किसी से में झाड़ियों में घुस जाए और पीछे से बैठकर उसकी गांड में पूरा लंड डाल दें,,,, लेकिन वह‌ ऐसा नहीं करना चाहता था भले ही वह उसके आकर्षण के जाल में पूरी तरह से बंधा हुआ था लेकिन इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि वह लाला की बहन थी,,,,।



सोनी अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपनी गांड की बड़ी-बड़ी फांकों को दोनों हाथों में लेकर हल्के हल्के सहला रही थी,,, और यह देखकर राजू के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था वह पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को सहला रहा था,,,। जो की पूरी तरह से पजामें में अपनी अकड़ दिखा रहा था,,। सोनी पूरी तरह से राजु को मस्त कर देना चाहती थी,,, इसलिए अपनी बड़ी-बड़ी काम को दोनों हथेली में भरकर हल्के हल्के दबा भी रही थी,,,, कुछ समय तक वह उसी तरह से बैठी रह गई,,,, वो जानती थी कि उसका काम हो गया है जिस तरह का जादू चलाना था वह जादू चल चुका है,,, इसलिए वह धीरे से खड़ी हो गई,,, लेकिन अपने साड़ी को नीचे करने से पहले और अपनी कच्छी को पहनने से पहले,,,,वो पीछे मुड़कर देखना चाहती थी पर ऐसा जताना चाहती थी कि सब कुछ अनजाने में हुआ है,,,इसलिए थोड़ा सा नीचे झुकी और अपनी कच्छी को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर करनी चाही रही थी कि पीछे मुड़ कर देखने लगी और तुरंत राजु और सोनी दोनों की नजरें आपस में टकरा गई,,,,,, सोनी अगर गुस्सा करती तो राजू शर्मिंदा हो जाता लेकिन वह ऐसा नहीं चाहती थी क्योंकि वह इस खेल में आगे बढ़ना चाहते थे इसलिए वह राजू की तरफ देखते हूए बोली,,,।

Soni apni gaand ko raju ko dikha k sahla rahi thi



तुम आ गए,,, तुम कब आए,,,,(और ऐसा कहते हुए जानबूझकर उसकी आंखों के सामने ही अपनी चड्डी को पहनने लगी,,,, राजू आंखें फाड़े उसी को देखे जा रहा था,, उसकी सांसों की गति बड़ी तेजी से चल रही थी,,,, राजू उसके छोटी सी चड्ढी को देख रहा था,,, उसे बड़ी ताजुब के साथ साथ उत्तेजना भी छा रही थी,,,, सोनी चड्डी पहन चुकी थी,,,साड़ी को कमर से नीचे गिराने से पहले वह एक बार उसकी तरफ एकदम से खून गई थी वह चड्डी में क्यों अपनी फोटो भी बुरा जी को दिखाना चाहती तुझे अपनी उसकी कच्ची से पूरी तरह से चिपकी हुई थी और उपसी हुई नजर आ रही थी,,,,। राजू की आंखों के सामने उसकी छोटी सी छोटी थी और वह भी आगे से फुली हुई बुर वाली जगह का उभार कुछ ज्यादा ही था,,,,कमला चाची और अपनी बुआ की चुदाई कर चुका राजू अच्छी तरह से जानता था कि दोनों टांगों के बीच औरतों की बुर कौन सी जगह पर होती है,, ईस लिए सोनी की चड्ढी में फूली हुई जगह को देखकर वह समझ गया था कि उसकी बुर कचोरी की तरह फूल गई है,,,।सोनी समझ गई थी कि जो कुछ भी उसमें दिखाई थी वह उसकी उत्तेजना के लिए काफी था क्योंकि उसकी नजर उसके पजामे में बने हुए तंबू पर चली गई थी,,, जिस पर नजर पड़ते ही उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी,,, और आपने साड़ी को कमर से नीचे गिरा कर,,, वह एक बेहद कामुकता भरे नजारे पर पर्दा गिरा दी,,,,, ।

राजू के द्वारा पेशाब करता हुआ उसकी नंगी गांड देखने के बावजूद भी वह बिल्कुल सामान्य थी यह देखकर राजू को भी आश्चर्य हो रहा था उसमें किसी भी प्रकार की झिझक नहीं थी,,, वह बड़े आराम से झाड़ियों के बीच में से अपने साड़ी को दोनों हाथों से हल्के से पकड़ कर बाहर की तरफ आने लगी और बोली,,,)

Raju ko soni apni gaand dekhne ka bharpur mauka de rahi thi



मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही थी मुझे तो लगा तुम आओगे नहीं मुझे बडे जोरो की पिशाब लगी थी तो मैं इधर आ गई,,,,

(सोनी जैसी खूबसूरत औरत के मुंह से पेशाब शब्द सुनकर और अभी एकदम खुले शब्दों में राजू की तो हालत खराब हो गई उसे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था उसके मुंह से पेशाब शब्द सुन कर राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया,,,, और उसकी बात सुनकर हक लाते हुए बोला,,,)

ममममम,,, मैं तो कब से आ गया हूं तुम ही कहीं दिखाई नहीं दे रही थी तो पीछे चला आया,,,,।

कोई बात नहीं चलो आगे चलते हैं,,,,।

(इतना कहकर वो आगे आगे चलने लगी और पीछे-पीछे राजू राजू की बोलती बंद थी सांसो की गति तेज हो चुकी थी इतनी उत्तेजक और खूबसूरत औरत उसने आज तक नहीं देखा था उसकी बड़ी बड़ी गांड पर अपनी नजरों को गड़ाए वह उसके पीछे पीछे चलने लगा,,,)
 
सोनी आगे चल रही थी,,, राजू पीछे-पीछे उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उसकी आंखों के सामने गांव की सबसे खूबसूरत औरत अपनी गांड मटका कर चल रही थीकसी हुई साड़ी में उसकी कार्रवाई ज्यादा बड़ी लग रही थी जिसे वह थोड़ी देर पहले,, वह नंगी देख चुका था उसकी नंगी नंगी गांड राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर को और ऊंची उठा रही थी,, पजामे में बवाल मचा हुआ था,,,। राजू को सोनी काउसे पेशाब करते हुए देख लेने के बावजूद भी राजू के प्रति साहजिक रहना खुद राजू को हैरान कर देने वाला लग रहा था,,,,,, उसे लगने लगा था की इस आम के बगीचे में आज जरूर गुल खिलने वाला है,,,।

Soni



दूसरी तरफ मधु और गुलाबी दोनों राजू का इंतजार कर रहे थे वह उससे पूछना चाहते थे कि आज छोटी मालकिन ने उसे क्या-क्या पढ़ाया,,,,,,,बाकी के सब लड़की आ गए थे इसलिए वह दोनों हैरान थे कि अभी तक वह आया क्यों नहीं एक लड़के से पूछे जाने पर उसने बताया कि वह तो साथ में ही आया था सकता है कहीं इधर उधर घूमने निकल गया हो,,,, उस लड़के की बात मधु और गुलाबी दोनों को सही लग रही थी क्योंकि राजू की आदत से वह दोनों भलीभांति परिचित थे,,,, मधु गुलाबी से बोली चल कोई बात नहीं जब आएगा तो पूछ लेंगे,,, उन दोनों को यही लग रहा था कि राजू वहां पढ़ने गया है हां बाकी के गांव के लड़के तो किताबों का ज्ञान लेने ही गए थे लेकिन सोनी राजीव को किताबों की ज्ञान के साथ-साथ दैहीक ज्ञान भी दे रही थी,,,, ।

Soni ka madmast pichwada



सोनी झोपड़ी के आगे आ गई थी,,,, और हेड पंप के करीब खड़ी हो कर के उसे हेडफोन चलाने के लिए बोली,,, राजु उसकी बात सुनते ही तुरंत हेड पंप के पास पहुंच गया और उसे चलाना शुरु कर दिया,,,,। पंप में से पानी निकलते ही सॉरी नीचे की तरफ झुका कर अपने हाथ पैर धोने को हुई तो उसका साड़ी का पल्लू उसके कंधे पर से सरक कर नीचे गिर गया जिससे उसकी भारी भरकम छातियां राजू को एकदम साफ नजर आने लगी,,, राजू की आंखें फटी की फटी रह गई चुचियों की बीच की गहरी दरार ईतनी गहरी थी कि राजू को उसमें डूब जाने का मन कर रहा था,,, दोनों चूचियां आपस में सटकर एक छोटे से नितंब का निर्माण कर रही थी,,,, क्योंकि जिस तरह से नितंबों में दो फांके होती हैं उसी तरह से सूचियों के बीच की पत्नी करार भी नितंबों की तरह दोनों चूचियों की दो फांके बना रही थी,,,, जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,, साड़ी का पल्लू नीचे गिरते ही सोनी बोली,,,।

धत्,,, जब देखो तब नीचे गिर जाती है,,,,।

संभाल कर रखा करिए दीदी,,,,

अरे संभाल कर ही रखती हूं लेकिन संभाले नहीं संभलती,,, अब हाथ मुंह धोने के बाद ही उठाऊंगी,,,,(इतना कह कर वह हाथ मुंह धोने लगी,,,,वह जानबूझकर अपने साड़ी के पल्लू के ऊपर नहीं उठा रही थी वह राजू को पूरी तरह से अपनी दोनों चूचियों के बीच संभाल लेना चाहती थी वह चाहती थी कि राजू उसकी सूचियों की बीच की गहरी नहर में डूब जाए और ऐसा हो भी रहा था राजू की प्यासी नजरें उसकी दोनों चूचियों के बीच की गहरी दरार पर टिकी हुई थी,,,, राजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी पागल हेडफोन चला रहा था पजामे के अंदर बवंडर सा उठ रहा था जो कि सोनी की नजर से बच नहीं पा रहा था,,,।

Soni k dashahari aam



सोनी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बाद में तो जवानी देख कर राजू के तन बदन में तूफ़ान सा उठ रहा है,,, और वह उस तूफान में खो जाना चाहती थी,,,,,सोनी हाथ में पानी लेकर उसे अपने चेहरे पर मार रही थी और चेहरे से पानी की बूंदे गिर कर नीचे उसकी चूचियों के साथ-साथ उसके ब्लाउज को भीगो रही थी,,, और यह देख कर राजू की हालत खराब हो रही थी,,,,,,, हाथ मुंह धो लेने के बाद सोने खड़ी हुई और अपने साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे को पोछने लगी और चेहरे को पोछते हुए बोली,,,।



राजू मैं देख रही हूं कि बार-बार तुम्हारे पजामे में तंबू बन जा रहा है ऐसा क्यों हो रहा है,,,,?

(सोनी की इस तरह की बातें सुनकर राज एकदम से सकपका उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दें,,,, फिर भी बात को संभालते हुए बोला,,,)

नहीं-नहीं सोनी दीदी ऐसी कोई भी बात नहीं,,, है,,, यह तो ऐसे ही इसकी आदत है,,,(राजू कि इस तरह की मासूम बात सुनकर सोनी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

मुझसे झूठ नहीं बोल सकते बच्चु,,,,मुझे सब पता है बार-बार मुझे देखकर तुम्हारे पजामे में तंबू बन जा रहा है,,,, जब पढ़ने आए थे ब्लैकबोर्ड उतारने के लिए तब भी तुम्हारे पजामे में इसी तरह से उठा हुआ था,,,(उंगली से उसके पजामे के तंबू की तरफ इशारा करते हुए) और ईस समय भी मुझे पेशाब करते हुए देख कर उठा हुआ है,,,, इसका मतलब तुम भी अच्छी तरह से जानते होंगे जब किसी लड़के के मन में गंदे विचार आते हैं तो इसी तरह की हालत हो जाती है मुझे लग रहा है कि मुझे देखकर तुम्हारे मन में गंदे विचार आ रहे हैं मैं इसीलिए तुम्हें समझाने के लिए बुलाई थी लेकिन फिर से तुम्हारी यही हालत है,,,,

Soni saree utarne k bad





नहीं नहीं सोनी दीदी मेरा ऐसा कोई भी इरादा नहीं है,,,(राजू एकदम से घबराते हुए बोला,,,)

ऐसा कोई इरादा नहीं है,,, मुझे बुद्धू बना रहे हो ,,,झोपड़ी के अंदर तुम्हारी हरकत को मैं अच्छी तरह से समझ रही थी मेरी कमर को कैसे अपने दोनों हाथों से थाम कर नितंबों को मेरे पीछे सटा रहे थे,,,, मैं खूब समझती हूं,,,(सोनी जानबूझकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोल रही थी,,,और उसके चेहरे के बदलते हाव-भाव को देखकर राजू को भी डर लगने लगा इसलिए वह फिर से डरते हुए बोला,,,)

तुम क्या कहना चाह रही हो दीदी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,

समझ जाओगे अच्छी तरह से समझ जाओगे जब मैं यह बात अपने भैया से बताऊंगी ना तो सब कुछ समझ जाओगे,,,।(सोनी जानबूझकर अपने भैया का जिक्र कर रही थी ,,,, क्योंकि उसके भैया के बारे में सब लोग अच्छी तरह से जानते थे और उसके लिए राजू का डर और ज्यादा बढ़ गया था वह इस बात से डर रहा था कि कहीं सोनी ने अपने भैया को सब कुछ बता दी तो उसके भैया उसकी चमड़ी निकाल लेंगे,,, इसलिए घबराते हुए बोला,,,)

Saree utarkar nangi hone k bad soni or bhi jyada sundar ho gayi thi



नहीं नहीं दीदी अपने भैया को कुछ मत बताना,,, जो कुछ भी हुआ था हम जाने में हुआ था इसमें मेरी कोई गलती नहीं है,,,, वह तो आपकी खूबसूरती और खुद मेरे बाहों में आ गई थी इसलिए इसका यह हाल हो गया था,,,,।

(राजू की बातें सुनकर सोनी अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी,,,, और बोली,,,)

फिर भी ऐसा नहीं होना चाहिए था तेरे मन में मेरे लिए गलत ख्याल आ गया तभी तेरा खड़ा हुआ,,,।

(सोनी के मुंह से खड़ा हुआ शब्द सुनते ही उसके मदमस्त एहसास से राजू पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था लेकिन उसे डर भी लग रहा था,,, सोनी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

देख कर जो तुम मुझे सच सच बता देगा तो मैं भैया से कुछ नहीं कहूंगी मैं सिर्फ जानना चाहती हूं कि तेरे मन में मुझे लेकर के गंदे ख्याल आए थे कि नहीं,,,

आए थे दीदी,,,(कुछ देर खामोश रहने के बाद नजरें नीचे झुकाए हुए ही वह बोला उसका जवाब सुनकर सोनी अंदर ही अंदर खुश हो रही थी)

अच्छा यह बता कि तेरे मन में यह ख्याल आया कैसे,,,?

वह दीदी जब तुम ऊपर से नीचे गिरी और सीधे मेरी बाहों में आ गई तुम्हारी साड़ी कमर तक उठ गई,,,, और तुम्हारी गांड मेरे से एकदम से सट गई और ना चाहते हुए भी मेरा खड़ा हो गया,,,,(इतना कहकर वह खामोश हो गया ,,, सोनी के कहे अनुसार वह सच सच बता दिया था और सोनी उसकी मासूमियत और उसके भोलेपन पर पूरी तरह से आकर्षित हो गई थी,,,, सोनी का दिमाग बड़ी तेजी से काम कर रहा था ,,,, वह आज राजू से पूरी तरह से मजा लेना चाहती थी,,,, इसलिए वह बोली )

Soni or raju



मैं तुम्हारी सच्चाई से खुश हूं अगर तुम चाहते हो कि मैं अपने भैया से यग सब कुछ ना बताउंं तो,,, जैसा मैं कहूंगी वैसा तुमहे करना होगा,,,,,,,(होठों पर मादक मुस्कान लाते हुए वह बोली,,, राजू के पास कोई रास्ता नही था,,, कहीं ना कहीं राजू को लगने लगा था कि जो कुछ भी हो रहा है उसमें उसका फायदा ही है,,, इसलिए हां में सिर हिला दिया,,,,,,, उसकी हामी होते ही वह राजू से बोली,,,)

चल झोपड़ी में चलते हैं जहां पर मुझे देख कर तेरी हालत खराब हो गई थी,,,,

(राजू कुछ बोला नहीं और उसके पीछे पीछे चलने लगा,,, झोपड़ी के अंदर सोनी उसके साथ क्या करेगी यह सोचकर ही उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,, लेकिन थोड़ा-थोड़ा वह औरतों के मन की बात को समझने लगा था,,, उसे इतना तो समझ में आ ही गया था कि भले ही सोनी गुस्सा दिखा रही लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा है,,,, खूबसूरत औरत का एक जवान लड़की के साथ आम के बगीचे के सुनसान स्थल पर कीसी झोपड़ी में जाने के मतलब को राजू अच्छी तरह से समझ रहा था,, थोड़ी ही देर में सोनी और राजू दोनों झोपड़ी के अंदर थे,,, गांव से दूर आम के बगीचे में दोनों झोपड़ी के अंदर खड़े थे अगर इस बात का आभास गांव में किसी को भी हो जाता तो हड़कंप मच जाता बदनामी हो जाती अगर दोनों के बीच कुछ ना अभी हुआ हो तो भी लोग गलत ही समझते लेकिन यहां किसी को कहां खबर होने वाली थी यहां कोई आता जाता भी नहीं था,,, इसलिए सोनी को यही जगह ठीक लगी थी पढ़ाने के बहाने अपनी कामलीला रचाने के लिए,,,। सोनी की कच्छी काम रस से भीगी जा रही थी,,, तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी मदहोशी का मीठा मीठा दर्द पूरे शरीर में फैल रहा था,,,,। एक जवान मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर के अंदर महसूस करने के लिए सोनी पूरी तरह से तड़प रही थी,,,,,, सांसो की गति राजू की भी दुरुस्त नहीं थी,,, जानलेवा सामान जो उसकी आंखों के सामने था,,,,। सोनी खड़ी खड़ी मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,।

राजू ब्लैकबोर्ड उतारते समय जो कुछ भी हुआ था क्या तुम्हें अच्छा लगा था,,,,

(राजू की मौके की नजाकत को समझने लगा था उसे अच्छी तरह से आभास हो गया था कि एक औरत तभी इस तरह की बातें करती है जब उसके मन में भी कुछ-कुछ हो रहा हो इसलिए अपने मन में सोचने लगा कि डरने वाली कोई भी बात नहीं है अगर ऐसी वैसी बात होती है तो पहले ही बहुत डांट कर भगा दी होती उसे इस तरह से चोरी छुपे आम के बगीचे में बुलाती नहीं इसलिए सोनी के सवाल का जवाब देते हुए राजू बोला हालांकि वह अपनी नजरों को जानबूझकर नीचे किए हुए था ताकि उसे ऐसा ही लगे कि वह अभी भी डरा हुआ है,,,।)

बहुत अच्छा लगा सोनी दीदी अच्छा नहीं लगता तो वह खड़ा होता क्या,,,

क्या खड़ा होता जरा खुल कर बोल,,,

वही दीदी जिसके बारे में तुम बोल रही थी,,,(राजू उसी तरह से नजरे नीचे किए हुए बोला,,,)

तो खुल कर बोलना किसके बारे में बोल रही थी शर्मा क्यों रहा है जवान लड़का होकर शर्माता है,,,।

(राजू को अब लगने लगा था कि उस के नसीब में बड़े घराने की बुर चोदना लिखा है,,, उसे सोनी के इरादे स्पष्ट होते मालूम हो रहे थे,,,,,,, जब सामने से पकवान की थाली आगे बढ़ाई जा रही हो तो भला खाने से इंकार किसको था,,, इसलिए राजू कि अपने मन में सोचने लगा कि जिस भाषा में वह सुनना चाहती हैं क्यों ना उसी भाषा में बात करु,,, इसलिए वह जवाब देते हुए बोला,,,)

वही दीदी आप जानती तो हैं,,,,

अरे मैं तो जानती हूं लेकिन तुम्हारे मुंह से सुनना चाहती हूं,,,,(सोनी की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी क्योंकि उसकी नजर उसकी पजामे पर ही टिकी हुई थी क्योंकि इस समय अपनी पूरी औकात में था,,,, दोनों तरफ उत्तेजना का सैलाब उठ रहा था,,,)

लललल,,,लंड के बारे में दीदी,,,(जानबूझकर राजू थोड़ा घबराते हुए बोला,,, राजू के मुंह से लंड शब्द सुनते ही सोनी की बुर गीली होने लगी,,,ऐसा नहीं था कि वह इन शब्दों को पहली बार सुन रही थी लेकिन आज राजू के मुंह से लंड शब्द सुनकर वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी,,,,को सामान उसके जीवन में आकर गुजर चुके थे लेकिन जैसे कि वह इसी सावन की चाह में थी ईसी सावन की फुहार के इंतजार में थी,,, जो कि बरस कर उसे पूरी तरह से अपनी आगोश में ले लेगा,,, सोनी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, हालात काबू से बाहर जा रहे थे,,,उसे इस बात का आभास हो गया था कि इस झोपड़ी के अंदर तूफान आने वाला है,,,,राजू के मुंह से उसके मर्दाना अंग का नाम सुनते ही उसे देखने की तड़प उसके अंदर जागने लगी इसलिए वह व्याकुल होते हुए बोली,,,)

मुझे दिखाओ,,, कैसा है तुम्हारा जो तुम्हारे पजामे में इतना बवाल मचाए हुए हैं जो तुम्हें इतना परेशान कर रहा है,,,,

(सोनी एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोली उसके होंठों से निकल रहे एक एक शब्द कामुकता बरसा रहे थे मदहोशी भरे शब्द राजू के कानों में घूमते ही उत्तेजना का प्रसारण पूरे बदन में बड़ी तेजी से कर रहे थे,, राजू अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुए बोला,,,)

यह क्या कह रही हो दीदी मैं भला कैसे,,,,?

शरमाओ मत राजु,,,, आखिर तुमएक मर्द हो पर एक औरत के सामने ही अपने अंग का उपयोग करोगे उसे दिखाओ गए किसी जानवर के सामने नहीं इसलिए घबराओ मत मैं जैसा कह रही हूं वैसा ही करो नहीं तो जानते हो ना भैया को बता दी तो तुम्हारी खैर नहीं,,,

(सोनी की अधीरता उसकी व्याकुलता उसके शब्दों में साफ झलक रही थी राजू उसके मन की मनसा को अच्छी तरह से समझ रहा था और उसके मनसा में अपनी खुशी भी देख रहा था लेकिन फिर भी वह जानबूझकर सिर्फ नाटक कर रहा था बल्कि वह तो खुद अपने लंड को उसे दिखाना चाहता था क्योंकि वह इतना तो समझ गया था कि दूसरों की अपेक्षा उसके लंड की ताकत कुछ ज्यादा ही है तभी तो उम्रदराज होने के बावजूद भी कमला चाची पानी पानी हो गई थी और उसकी खुद की शगी बुआ ,,, बुआ और भतीजे के बीच के रिश्ते को तार-तार करते हुए उसके लंड को अपनी बुर में लेकर मस्त हो गई,,,,,,, सोनी के एक-एक शब्द ऐसा लग रहा था कि उसके अंगों को सहला रहे हैं,,, पल-पल राजू उत्तेजना के समंदर में गोते लगाते हुए आगे बढ़ रहा था,,,,,, राजू सोनी की बात सुनकर बोला,,,)

नहीं नहीं दीदी ऐसा मत करना लेकिन मुझे शर्म आ रही है इसलिए मैं तुम से गुजारिश करता हूं कि अपने हाथ से ही देख लो,,,,(राजू शेर पर सवा सेर साबित हो रहा था वह अपने मन में ही सोच रहा था कि सोनी अपने हाथों से उसके पहचाने को नीचे करके उसके लंड को देखें इसमें भी एक अद्भुत सुविधा अपने हाथ से कपड़े उतारने में और औरतों के द्वारा कपड़े उतारने में जमीन आसमान का फर्क होता है जब एक मर्द खुद कपड़े उतारता है तो उसकी अधीरता और उतावलापन होता है लेकिन जब एक औरत मर्द के कपड़े उतारती है तो इसमें उस औरत की प्यास,,, उसकी वासना उसकी संभोग करने की कामेच्छा छुपी होती है इसीलिए वह सोनी को अपना पजामा उतारने के लिए कह रहा था,,, उसके इस आमंत्रण पर सोनी भला कैसे पीछे रह सकती थी,,, वैसे भी मर्दों के कपड़े उतारने के अनुभव से वह पूरी तरह से भरी हुई थी इसलिए राजू की बात सुनते ही मुस्कुराते आगे बढ़ी और तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गई उसके इस तरह से बैठने पर राजू के दिल की धड़कन बढ़ने लगी,,,, झोपड़ी के अंदर चारों तरफ घास फुस का ढेर लगा हुआ था इसलिए घुटने टेक कर बैठने में उसे बिल्कुल भी परेशानी नहीं हुई सोनी अपने दोनों हाथों से बढ़ाकर उसके पजामे के ऊपर रख दी ओर उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, राजू की हालत खराब हो रही थी साथ ही सोनी का दिल जोरों से धड़क रहा था महीनों पहले वह दूर से ही राजू के लंड के दर्शन करके पूरी तरह से काम उत्तेजित हो गई थी और उसे पाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो गई थी और आलम यह था कि आज उसी राजू के साथ वहां आम के बगीचे की झोपड़ी में एकांत में उसका ही पैजामा उतार रही थी,,,,,

अच्छा खासा भरा हुआ तंबू देखकर सोनी की बुर लप-लपाने लगी थी उसमें से काम रस झड़ रहा था,,, धीरे धीरे सोनी उसके पजामे को नीचे कर रही थी,,,, लंबा और मजबूत लंड होने की वजह से पजामा नीचे की तरफ नहीं आ रहा था तो सोनी पजामे में हाथ डालकर राजू के मोटे तगड़े लंड को हाथ से पकड़ ली और उसे बाहर की तरफ खींचने लगी,,,, लंड की गर्माहट पाते हैं सोनी की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पिघलने लगी जो कि पहले से ही पानीयाई हुई थी,,,। बरसों बाद सोनी को इस तरह का अनुभव हुआ था कि वह पहली बार किसी मर्द के लंड को पकड़ रही है,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी हालत खराब हो रही थी,,,, सोनी उसे पजामे से बाहर निकाल ली थी,,, और बाहर निकालते ही उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,,,,, उसका सुपाड़ा एकदम दमदार था आलू बुखारे की शक्ल का,,, कुछ पल के लिए तो सुपाड़े की गोलाई देखकर सोनी अंदर ही अंदर सिहर उठी उसे इस बात का शंका थी कि उसका सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर के छेद में घुस पाएगा कि नहीं,,,लेकिन एक औरत होने के नाते उसे इतना तो अंदाजा था कि वह किसी भी तरह से उसे अंदर लेगी लेगी यह ख्याल मन में आते ही उसके चेहरे पर चमक आ गई और घुटनों में फंसे पजामे को राजू खुद अपने आंखों का सहारा लेकर उसे अपनी टांग से बाहर निकाल दिया कमर से नीचे वह पूरी तरह से नंगा हो चुका था,,, और खूबसूरत औरत के हाथों में अपना दमदार लंड का एहसास उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था,,,।

Saree utarti huyi soni



तो यही था,,,, जो मुझे देख कर खड़ा हो गया था,,,

हां सोनी दीदी यही था इसमें मेरी कोई गलती नहीं है,,,

तुम सच कह रहे हो इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी,,, सारी गलती इसी की ही थी और इसे गलती की सजा जरूर मिलेगी,,,,।(राजू की तरफ नजर उठा कर देखते हुए,,) राजू इस झोपड़ी में मैं तुम्हारे साथ कुछ भी करूं उस बारे में खबर बाहर नहीं जानी चाहिए अगर इस बारे में किसी को भी भनक लगी तो याद रखना तुम्हारी खैर नहीं,,,,

जी जी ,,,, ज़ी दीदी किसी को कानों कान खबर नहीं होगी,,,

बहुत अच्छे काफी समझदार हो,,,(राजू के लंड को मुठीयाते हुए सोनी बोली,,, उसके मुंह में पानी आ रहा था साथ में बुर की हालत खराब होती जा रही थी उसने अब तक अपने पसंद के ना जाने कितने लंड़ कों अपने मुंह में ले कर चुस चुकी थी,,, लेकिन उसे इस बात का अहसास था कि मुझे का लंड मुंह में लेने का मजा ही कुछ और होगा,,, इसलिए सोनी बिना कुछ बोले अपने होठों को राखी के लंड पर रखकर उसे अपने होंठों के बीच अंतर ले ली और उसे जीप का सहारा देकर चाटना शुरू कर दी राजू के लिए यह जबरदस्त हमला था वह अपने आप को संभाल सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था उसे उम्मीद नहीं थी कि एक बड़े घर की औरत इस तरह की हरकत करेगी हालांकि उसे पता ही था कि सोनी आम के बगीचे में उसे वापस बुलाकर कुछ तो अलग करना चाहती है लेकिन इस तरह का कार्यक्रम का उसका मन होगा इस बारे में कभी सोचा नहीं था लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसे तो जैसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो गया था आज वह अपने आप को दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान समझ रहा था,,, और वैसे भी वह सबसे खुशनसीब था भी,,,।

राजू की मस्ती का कोई ठिकाना ना था सोनी पूरी तरह से उसे मस्त कर रही थी,,,, और खुद ही मस्त हुए जा रही थी,,, राजु के लंड से उसका पुरा मुंह भरा हुआ था,,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि किसी का लंड ईतना मोटा होता होगा,,,, वह पूरी तरह से मस्ती में आकर राजू के लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रहे थे और आज भी पूरी तरह से स्वर्ग का सुख प्राप्त करता हुआ अपने दोनों हाथों को उसके रेशमी बालों में उलझा कर हल्के हल्के अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया था,,,, अद्भुत नजारा था अतुल्य जिसकी किसी से तुलना नहीं कर सकते थे,,,सोनी से कुछ भी बोला नहीं जा रहा था वह जितना हो सकता था उतना अपने गले के अंदर तक लेकर राजू के लंड को खा जाने की इच्छा रख रही थी,,,, पूरा गले तक उतार लेने के बावजूद भी डेढ़ इंच जितना रह जाता था,,, यह देखकर सोनी की बुर में खलबली होने लगती थी,,,।

Soni raju ka chustihuyi



कुछ देर तक इसी तरह से सोनी राजू के लंड को मुंह में लेकर चुसती रही,,, राजू खड़े-खड़े अपना ऊपर का कपड़ा भी निकाल कर पूरी तरह से नंगा हो गया था,,,। थोड़ी देर बाद सोनी ने राजू के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल दि,,,, और हांफने लगी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,,, सोनी के चेहरे को देखकर आभास हो रहा था कि उसे बहुत मजा आ रहा था अपनी सांसों को दुरुस्त करके और आगे की तरफ देखते हुए बोली,,,।

बाप रे तुम्हारा तो बहुत मोटा और लंबा है,,,,

(सोने की बात सुनकर राजू खुश हो गया और अपने लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके हीलाने लगा ,, राजु की हरकत को देखकर सोनी समझ गई थी कि यह उसका पहली बार नहीं है यह पहले भी मजा ले चुका है,,, इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

तुम अनाड़ी नहीं हो खिलाड़ी लग रहे हो तुम्हारी हरकत से लग रहा है कि मैं तुम्हारे लिए पहली बार नहीं है इससे पहले भी औरत की चुदाई कर चुके हो,,,।

(सोनी के मुंह से चुदाई जैसे शब्दों को सुनकर राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और उसकी बात सुनकर हुआ है समझ गया था कि छुपाने से कोई फायदा नहीं है इसलिए वह बोला)

जी दीदी,,,, पहले भी मैंने चुदाई किया हूं,,, लेकिन अपनी मर्जी से नहीं गांव की एक चाची है वह हमेशा मेरे पीछे पड़ी रहती थी और एक दिन अपने घर बुलाकर जो तुम कर रही हो वह भी मेरे साथ सब कुछ करी,,,।

(राजू की बात सुनते ही सनी मुस्कुराते हुए बोली)

बहुत अच्छे तब तो मुझे सिखाना नहीं पड़ेगा,,,,(इतना कहते ही वह खड़ी हो गईऔर राजू की आंखों में छापने रवि राजू सोने की आंखों में डूबता चला जा रहा था दोनों के होंठ आपस में टकराए और सोनी पागलों की तरह उसके होंठों को काटना शुरु कर दी,,, राजू भी जवाबी कार्रवाई करते हुए सोनी के गुलाबी होंठों को अपने होंठों में भर कर,,, चूसना शुरू कर दिया काटना शुरू कर दिया दोनों उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुके थे,, राजू के हाथ उसकी चिकनी पीठ पर घूमना शुरू हो गई थी,,, मखमली चिकनी पीठ मक्खन की तरफ चल रही थी उत्तेजना के मारे राजू अपनी हथेलियों को कसके उसकी पीठ पर इधर से उधर घुमा रहा था जिससे दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी सोनी भी उसकी नंगी चिकनी पीठ पर अपनी हथेलियां घूम रही थी राजू अपनी दोनों हथेलियों को उसकी चिकनी पीट से होती उसकी कमर पर ले आया और उस पर दोनों हथेलियां रखकर जोर से दबोच लिया जिससे उत्तेजना के मारे सोनी उछल पड़ी लेकिन वह अपनी हथेली के दबाव में उसे दाबे हुए थाराजू की हरकतों से सोनू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी उसके बदन की गर्मी और ज्यादा अपना असर दिखा रही थी राजू का लंड उसकी दोनों टांगों के बीच से होता हुआ साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर ठोकर मार रहा था जिसकी वजह से सोनी की बुर उत्तेजना के मारे फुदक रही थी,,, एक बड़े घर की औरत को अपनी बाहों में लेकर राजू अपने आप को राजा समझने लगा था सोनी उसकी रानी थी इसकी जवानी के रस को अपने होठों से पीने के लिए व्याकुल था,,,,



सोनी अपनी कमर को अपनी गांड को गोल-गोल घुमा रही थी इस तरह से वह अपनी बुर को रांची का लंड पर रगड़ रही थी भले ही वह साड़ी के ऊपर से ही क्यों ना इस तरह की हरकत कर रही थी लेकिन मजा उसे बहुत आ रहा था,,,, राजू पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबता चला जा रहा था वह अपनी हथेलियों को उसके कमर से हटाकर नीचे के उभार की तरफ आगे बढ़ने लगा और अगले ही पल उसकी मद भरीबड़ी बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखकर उसे जोर-जोर से बताने लगा जिससे सोनी की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसके मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आना शुरू हो गई थी,,,, राजु पागलों की तरह उसके गुलाबी होठों को खा रहा था दोनों के मुंह से लार का आदान-प्रदान हो रहा था जिसे अपने गले के नीचे गटकने में दोनों को किसी भी प्रकार की बाधा महसूस नहीं हो रही थी,,,, सोनी खेली खाई थी तो राजू भी कम नहीं था अपनी दुआ के साथ-साथ एक उम्रदराज औरत की बुर का भी मजा ले चुका था इसलिए उसे अच्छी तरह से मालूम था कि औरत को कैसे संतुष्ट किया जाता है वह सोनी की साड़ी को अपने हाथ से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया था,,, और देखते ही देखते वह सोनी की साड़ी को एक बार फिर से उसकी कमर तक उठा दिया था,,,

सोनी को इसमें किसी भी प्रकार की आपत्ति महसूस नहीं हो रही थी उसे तो मजा आ रहा था उसे पहले लग रहा था कि राजू को सब को सिखाना पड़ेगा लेकिन वह अनाड़ी नहीं खिलाड़ी निकला था इसलिए सोनी मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि अनाड़ी के साथ इतना मजा नहीं आता जितना खिलाड़ी के साथ संभोग करने में आता है,,,, कमला चाची ने उसे औरतों के दोनों टांगों के बीच का रास्ता दिखाई थी और बाकी का कसर उसकी बुआ ने पूरी कर दी थी इसलिए वह अनाड़ी से खिलाड़ी हो गया, था,,,,राजू सोनी की साड़ी को कमर तक उठा लेने के बाद उसकी बड़ी-बड़ी गाने को अपने दोनों हाथों में लेकर दबोच रहा था लेकिन उसकी छोटी सी चड्डी की वजह से वह पूरी तरह से मस्ती कर लुत्फ नहीं उठा पा रहा था,,,लेकिन फिर भी बिना कुछ बोले हो आज चड्डी के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी गांड को रगड़ रहा था मैं कर रहा था और आगे से अपने लंड को उसकी बुर् पर बराबर दबाव बनाए हुए था,,,। राजू कि इन सभी हरकतों की वजह से सोनी चटनी बनी हुई थी जिसे वह पूरी तरह से पीसकर और भी ज्यादा स्वादिष्ट बना रहा था,,,, सोनू की बुर से लगातार काम रस झर रहा था,,, जिसे राजू को पिलाने के लिए सोनी व्याकुल हुए जा रही थी,,, ऊपर और नीचे से राजू पूरी तरह से सोनी के रस को निचोड़ रहा था सोनी की मस्ती को और ज्यादा बढ़ा रहा था सोनी चुदवाने के लिए व्याकुल हुए जा रही थी,,,,सोनी अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर छोटी सी चड्डी उसके बदन पर ना होती तो शायद राजू अपने लंड को अब तक उसकी बुर की गहराई में डाल दिया होता,,,,।

दोनों एक दूसरे के होंठों को छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं थे होंठों की मस्ती का असर नीचे देखने को मिल रहा था,,,। नीचे से दोनों का नाजुक और कड़क अंग पिघल रहा था,,,अपनी उत्तेजना को बर्दाश्त ना कर सकने की स्थिति में राजू अपने दोनों हाथों की उंगलियों का उसकी चड्डी के अंदर डाल कर जोर जोर से मसल रहा था,,,,।

ओहहहह,,, राजू बहुत मजा आ रहा है ऐसा मजा मुझे आज तक नहीं आया,,,।

मुझे भी दी दी बहुत मजा आ रहा है तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हारे अंग कितनी खूबसूरत है,,, खास करके तुम्हारी गांड कितनी मस्त है,,,,आहहहहहह,,,, जी करता है की तुम्हारी गांड में घुस जाउ,,,,

तो घुस जाओ राजू रोका किसने है,,,,( सोनी मद भरी आवाज में बोली,,)



घुस तो जाऊ सोनी दीदी,,, लेकिन तुम्हारी चड्डी बीच में आ रही है,,,, लेकिन एक बात मुझे समझ में नहीं आ रही है दीदी,,,

वह क्या राजू,,,

तुम इतनी बड़ी हो गई हो फिर भी अभी भी चड्डी पहनती हो,,,।

(राजू के मासूम सवाल पर सोनी अपने आप को रोक नहीं पाई और ठहाका मारकर हसने लगी ,,,,रो जोर जोर से हंसी जा रही थी और राजू उसे देख रहा था उसके होठों पर भी मुस्कान आने लगी थी,,,)

तुम हंस क्यों रही हो दीदी,,,

हंसु तो और क्या करूं,,,

ऐसी कौन सी बात हो गई जो जोर जोर से हंसे जा रही हो,,,

अरे तुम बात ही ऐसी कर रहे हैं यह चड्डी नहीं है जो औरतों को पहनने के लिए एक कच्छी है,,,

औरतों को पहहने के लिए,,,, लेकिन मैंने आज तक तो किसी को नहीं देखा पहनते हुए,,,,

हां मैं जानती हूं राजू,,,,गांव में कोई भी औरत से नहीं पहनती क्योंकि किसी को इसके बारे में पता ही नहीं है लेकिन शहर में सभी औरतें पहनते हैं और शहर में इसे पेंटी कहते हैं,,,

क्या पेपप,,,,

पेंटी,,,,,

(राजु और सोनी अभी भी एक दूसरे की बाहों में थे,, राजू अभी भी अपनी हथेली में भर भर कर उसकी गांड को दबा रहा था और सोनी अपनी बुर पर उसके लंड के ठोकर को बराबर महसूस कर रही थी और उसकी पीठ को सहला रही थी,,, राजू को अभी भी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

लेकिन इसे पहनने से होता क्या है,,,

औरतों की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है,,,, देखना चाहते हो,,,,

(सोने की बातें सुनकर राजू बोला कुछ नहीं बस आने से भी ला दिया वह भी देखना चाहता था कि किसी खूबसूरत सोने की खूबसूरती छोटी सी चड्डी पहनने से और ज्यादा कैसे बढ़ जाती है सोनी राजू से अलग होकर उसकी आंखों के सामने अपने हाथों से अपनी साड़ी उतारने लगी,,,,और देखते ही देखते वह अपनी सारी उतार कर घास फूस के ढेर पर रख दी,,, राजू के लिए यह मौका पहली बार था जब उसकी आंखों के सामने कोई औरत अपने कपड़े उतार रही थी अपनी साड़ी उतार रही थी,,, हालांकि वह अपने हाथों से अपनी बुआ की सलवार और समीज उतार चुका था और कुछ-कुछ कमला चाची के साड़ी को उतारने का अनुभव से था लेकिन जो सुख उसे अपनी आंखों से एक औरत को अपनी साड़ी उतार कर नंगी होते हुए मिल रहा था वह उसके लिए बेहद अद्भुत था,,,। देखते ही देखते सोनी के बदन पर ब्लाउज और पेटीकोट रह गई,,,ऐसा नहीं था कि सोनी को मजा नहीं आ रहा था एक लड़के के सामने अपने कपड़े उतारने में उसे भी असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी खास करके उसे राजू को इस तरह से तड़पाने में मजा आ रहा था,,,, साड़ी उतर जाने के बाद राजू की नजर है उसकी घटादार छातियों पर टिकी हुई थी,,, जिसमें से बाहर आने के लिए उसके दोनों जंगली कबूतर अपने पंख फड़फड़ा रहे थे,,,चिकना पेट और उसके बीच की गहरी नाभि राजू को उसकी छोटी सी बुर से कम नहीं लग रही थी,,, उसकी नाभि को फोटो से चोदने का मन कर रहा था लेकिन अभी वह सोनी को केवल चड्डी में देखना चाहता था वह देखना चाहता था कि वाकई में चड्डी में औरतों की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है कि नहीं,,,।

सोनी राजू की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी और धीरे से एक हाथ से अपने पेटीकोट की डोरी को पकड़ ली और उसे खींच दी डोरी को खींचते ही नितंबों पर कैसी हुई पेटिकोट एकदम ढीली हो गई और डोरी को हाथ से छोड़ते ही उसकी पेटीकोट भरभरा कर उसके कदमों में जा गिरी,,,।

और जो नजारा राजू की आंखों के सामने नजर आने लगे उसकी तो कभी उसने कल्पना भी नहीं किया था,,, सोनी के कहे अनुसार वाकई में छोटी सी चड्डी में सोनी की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई थी जिसे देखकर राजू मदहोश हुआ जा रहा था उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी थी,,,। अपने आप पर काबू कर पाना उसके लिए मुश्किल हुआ जा रहा था,,, उसकी छातियों पर अभी भी ब्लाउज टंगा हुआ था जिसे वह दूर करने के लिए मुस्कुराते हुए अपने ब्लाउज के बटन खोल रही थी,,,, एक-एक करके सोनी ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए और ब्लाउज को अपनी बाहों में से निकाल कर उसी घास फूस के ढेर पर रख दी,,

राजू की तो आंखें फटी की फटी रह गई सौंदर्य की देवी उसकी आंखों के सामने खड़ी थी और वह भी छोटी सी चड्डी में,,,, छातियों की शोभा बढ़ा रही उसकी दिनों खरबूजे को देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,, मदमस्त जवानी से भरपूर एक खूबसूरत औरत उसकी आंखों के सामने चड्डी को छोड़कर बाकी पूरी तरह से नंगी खड़ी थी उसके बदन पर केवल एक छोटी सी चड्डी थी जिसमें वाकई में वह सुंदरता की मूरत लग रही थी,,,।

राजू की तो जैसे साथ ही अटक गई थी एक तक उसकी भरपूर जवानी को ऊपर से लेकर नीचे तक अपनी आंखों से पी रहा था,,,, पल भर में ही राजू को 4 बोतलों का नशा होने लगा सोनी उसकी हालत को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,,राजू को लगने लगा कि शराब से ज्यादा नशा औरत की मदमस्त जवानी में होता है जिसे पीकर आदमी मस्त हो जाता है,,,। सोनी की चूचीयों में कसाव बरकरार था जोकि उसकी चूचियों पर कुछ ज्यादा ही मेहनत हुई थी लेकिन फिर भी वह अपनी रंगत और शानो शौकत को नहीं छोड़ी थी उसी तरह से पहाड़ की तरह सीना ताने,,,, भाले की नोक कि तरह अपनी जवानी का जलवा बिखेर रही थी,,,।

राजू की नजर कभी चूचियों पर तो कभी उसकी छोटी सी चड्डी पर चली जा रही थी जिसमें उसने अनमोल खजाना छुपा कर रखी थी जिसे पाने के लिए राजू तड़प रहा था,,,,राज अपने मन में सोचने लगा कि सुनने जो कुछ भी कह रही थी वाकई में वह एकदम सच कह रही थी इस हाल में उसने अभी तक किसी भी औरत को देखा नहीं था,,,,,,राजू की हालत को देखकर सोनी समझ गई थी कि उसकी जवानी का जादू उस पर पूरी तरह से छा चुका है एक तरह से वह उसकी अंगड़ाई लेती जवानी के आगे घुटने टेक दिया था,,,। राजू की हालत को देखकर सोनी बोली,,।

अब बताओ मैं सच कह रही थी या गलत,,,

Soni apni saree utarte huye



तुम बिल्कुल सच कह रही थी छोटी सी चड्डी में तुम्हारी खूबसूरती और ज्यादा निखर रही है,,,।(राजू आपने लंड को पजामे के ऊपर से मसलते हुए बोलाराजू की हरकत सोने के लिए एक इशारा थी कि उसकी हालत खराब हो रही है जो कि सोनी राजू की इस हरकत से अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वह बोली,,,)

इसलिए तुम्हारा और ज्यादा खड़ा हो गया है,,,

अब क्या करूं दीदी आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत एकदम नंगी खड़ी हो तो इंसान कर भी क्या सकता है,,,।

अभी नंगी कहा हुं,,,, अभी भी मेरे बदन पर यह छोटी सी चड्डी है,,,,

इसे भी उतार तो दीदी मैं तुम्हें पूरी तरह से नंगी देखना चाहता हूं,,,,(राजू एकदम से मदहोश होता हुआ बोला)

अब सब कुछ मैं हीं करूंगी,,,, यह शुभ काम तो अपने हाथों से कर बहुत अच्छा लगेगा,,,,।

क्या दीदी सच में यह शुभ काम में अपने हाथों से करु,,,

तो क्या अपने हाथों से उतारकर हीना देखेगा की चड्डी के अंदर कीतना अनमोल खजाना छुपा हुआ है,,,।

सच कह रही हो दीदी मैं भी देखने के लिए तड़प रहा हूं तुम्हारे खजाने को,,,,।

तो वहां क्यों खड़ा है आकर उतार दे इसे,,,।(आंखों के इशारे से उसे अपने पास बुलाते हुए बोली,,,,राजू आप कहां पीछे हटने वाला था उससे तो खुला आमंत्रण मिल रहा था उसका दिल जोरों से धड़क रहा था आज पहली बार किसी खूबसूरत बड़े घर की औरतें कि वह चड्डी अपने हाथों से उतारने जा रहा था,,,, और वैसे भी वह औरतों के इस मंत्र के बारे में वह कभी जानता ही नहीं था आज पहली बार किसी औरत को वापिस वस्त्र में देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था उसे अपने हाथों से उतारकर नंगी करने का सुख वह अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए सोने की बात सुनते ही वह धीरे-धीरे उसके करीब पहुंच गया और जिस तरह से सोनी उसके आगे घुटने टेक कर बैठ गई थी वैसे ही वह उसके सामने घुटने टेक कर नीचे बैठ गया,,,, राजु के साथ साथ सोनी का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, कईयो बार वहइस तरह के अनुभव से गुजर चुकी थी लेकिन आज की बात कुछ और थी आज ऐसा लग रहा था कि उसकी जिंदगी की यह पहेली घड़ी थी जिसने वह किसी की आंखों के सामने नंगी हो रही थी और किसी जवान लड़के के हाथों से अपनी चड्डी उतरवा रही थी,,, यह सब सोनी के लिए बेहद उत्तेजनात्मक पल था जिसमें वह पूरी तरह से डूब जाना चाहती थी,,,,।

Soni or raju ki masti



राजू उसके बेहद करीब घुटने टेककर नीचे बैठा हुआ था उसकी आंखों के ठीक सामने उसकी चड्डी नजर आ रही थी जो कि उसके काम रस से गीली हो चुकी थी,,,। उत्तेजना के मारे सोनी का गला सूखता जा रहा था राजू के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी क्योंकि नहीं पलवा अपने हाथों से एक खूबसूरत औरत की चड्डी उतार कर उसे नंगी करने वाला था,,,,,, अपने दोनों हाथों के बढ़ाकर सोनी की चड्डी पर रख दिया,,,,, राजू की उंगलियों का स्पर्श अपनी चिकनी कमर पर होते हैं वह एकदम से उत्तेजना के मारे सिहर उठी,,, ऊपर नीचे हो रही सांसों के साथ साथ सोनी की चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,,, धीरे-धीरे राजू सोनी की चड्डी को नीचे की तरफ सरकाने लगा,,, राजू के लिए अनुभव बिल्कुल नया था और एकदम कामोत्तेजना से भरा हुआ जिसका वह पूरा फायदा और मजा ले रहा था धीरे-धीरे वह चड्डी को नीचे की तरफ करने लगा और जैसे-जैसे चड्डी नीचे की तरफ आ रही थी वैसे वैसे चड्डी के अंदर छुपा खजाना उजागर होता जा रहा था दोनों टांगों के बीच की हुआ वह जगह के ऊपरी भागकाफी उपसा हुआ नजर आ रहा था जिससे जाहिर हो रहा था कि सोनी कितनी उत्तेजित हो चुकी है,,,,,,,

Soni or raju



देखते-देखते राजू सोनी की चड्डी को उसकी जांघों तक ले आया और उसकी रसीली मद भरी बेशकीमती बुर नंगी हो गई जिसे देखते ही राजू के तन बदन में वासना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों की चमक बढ़ गई जवानी का नशा बढ़ने लगा,,,,अपने सूट के गले को अपने थूक से गीला करते हुए राजू ऊपर नजर करके सोनी की तरफ देखा तो सोनी भी उसी को ही देख रही थी आपस में दोनों की नजरें टकराई,,,, आंखों ही आंखों में इशारा हो गया था सोनी ने आंखों के इशारों में ही सोनी ने उसे अपनी चड्डी उतारने के लिए बोल दी थी,,,, राजू भी सोनी के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए उसकी चड्डी नीचे घुटनों तक ला दिया,,, लेकिन अब उसमें सब्र बिल्कुल भी नहीं था उसकी आंखों के सामने बेशकीमती खजाना पड़ा हुआ था जिसे लूटने के लिए वह ललाईत हुए जा रहा था,,,, सोनी कुछ कहती इससे पहले ही राजू अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी उंगलियों से सोनी की बुर को स्पर्श करने लगा,,, और एक दम मस्त होने लगा ऐसा लग रहा था कि जैसे वह वाकई में बेशकीमती खजाना पा गया हो और उस पर अपनी हथेली पर कर अपने आपको विश्वास दिला रहा हो कि अब यह सब तेरा है,,,।राजू की उंगलियों का स्पर्श पाकर सोनी की दूर से भी सब्र का बांध टूटता हुआ महसूस होने लगा था क्योंकि उसमें से मदन रस की बूंदे अमृतधारा बनकर चुने लगी थी,,, उस अमृतधारा को राजू जमीन पर गिर कर जाया नहीं होने देना चाहता था इसलिए तुरंत अपने होठों को आगे बढ़ा कर सोनी की तख्ती हुई बुर पर रख दिया,,, सोनी राजू के इस अद्भुत कार्य शैली को देखकर एकदम से सिहर उठी,,,, पर तुरंत अपने दोनों हाथों को उसके सर पर रख कर उसे अपनी बुर से चिपका दी,,,,, राजू मंत्रमुग्ध मदहोश हुआ जा रहा था,,, वह अपनी प्यासी जीभ निकालकर,,, तुरंत उसकी रसीली बुर के गुलाबी छेद में डाल दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया,,,, उसकी बुआ गुलाबी ने हीं उसे बुर चाटने की कला में से पारंगत कर दिया था,,, जिसका वो सोनी के साथ सही उपयोग कर रहा था,,,।

Raju Soni ko is tarah se apni god me utha liya tha



सोनी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी बरसों बाद कोई इस तरह से बुर चाट कर उसे मस्त कर रहा था वह पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी बुर को उसके होंठों पर रगड़ रही थी,,, जिससे सोनी के साथ-साथ राजू की भी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,।

ओहह राजु पुरी जीभ अंदर डालकर चाट,,,, आहहहहह राजू बहुत मजा आ रहा है मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि तू कितना कुछ जानता होगा शक्ल से तो तु एकदम मासूम लगता है लेकिन बहुत शैतान है,,,,आहहहहहह,,,,,आहहहहहहह,,,(आंखों को बंद करके सोनी मस्ती की फुहार में नहा रही थी उसकी बुर बार-बार काम रस छोड़ रही थी,,, जिसका स्वाद वह अपनी जीभ से ले रहा था,,,। सोनी की गरम सिसकारियों की आवाज को सुनकर राजू पूरी मस्ती के साथ उसकी बुर की चटाई कर रहा था,,,। राजू को बड़े घराने की औरत की बुर का स्वाद बेहद मधुर लग रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था,,, राजू अपनी जीत के साथ साथ अपनी उंगलियों से उसकी गुलाबी बुर के छेद को कुरेद कुरेद कर उसकी मलाई को चाट रहा था,,, संभोग के असली सुख को प्राप्त करने के लिए सोनी ने बहुत कुछ की थी लेकिन अभी तक उसे उस अद्भुत सुख की प्राप्ति नहीं हुई थी लेकिन आज उसे लगने लगा था कि उसकी जिंदगी में सावन की बहार आने वाली है उसे संभोग का अद्भुत सुख प्राप्त होने वाला है क्योंकि राजू ने तो शुरुआती दौर में अपनी हरकतों से उसे पूरी तरह से मत कर दिया था और उसका पानी भी झाड़ चुका था,,,

सोनी को लगने लगा था कि जब शुरुआत इतनी जबरदस्त है तो चरम कितना आनंददायक होगा,,,,

उसकी बुर लंड के लिए तड़प रही थी राजू के मोटे तगड़े लंड को अपने अंदर लेने के लिए मचल रही थी,,, बुर के अंदर की संकरी दीवारें,,, राजू के मोटे तगड़े लैंड की रबड़ को अपने अंदर महसूस करने के लिए उतावली हुए जा रही थी इसलिए बार-बार पानी छोड़ रही थी,,,,।

सोनी की मदहोशी देखकर राजू की समझ गया था कि अब उसे लंड की जरूरत है,,,, इसलिए अपने तृप्त होठों को उसकी प्यासी बुर से अलग करते हुए वह सोने की तरफ देखने लगा उसके होठों से सोनी की बुर से निकला काम रस टपक रहा था जिसे देखकर सोनी की काम भावना हो ज्यादा भड़क रही थीक्योंकि इतने प्यार से और जो उसके साथ किसी ने भी उसकी बुर को इस कदर चाटा नहीं था,,,,।

कैसा लगा दीदी,,,,

मजा आ गया राजा तूने तो मुझे मस्त कर दिया,,,,

अब क्या करना है दीदी,,,,(राजू एकदम से मासूम बनता हुआ बोला)

करना क्या है मेरे राजा अब अपने मुसल को मेरी ओखली में डाल दी और जी भर कर इसकी कुटाई कर दे,,,(सोनी एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोली)

चिल्लाओगी तो नहीं दीदी,,,,

बिल्कुल नहीं चिल्लाऊगी मेरे राजा,,,, अगर दुखेगा तो भी तू बिल्कुल भी मत रुकना मुझ पर रहम मत करना,,,,

औहह दीदी तुम कितनी अच्छी हो ,,,,(इतना कहने के साथ ही वहसोने की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर हुआ उठ खड़ा हुआ और अपनी आंखों के सामने उसकी मदद से चूचियों को देख कर उसे अपने मुंह में भरने के बाद उसको रोक नहीं पाया और अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर उसकी चुचियों को थाम लिया और से मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया,,,, पूरी तरह से साड़ी में लिपटी हुई सोनी की चूचियां सर्वप्रथम आकर्षण की केंद्र बिंदु बनी रहती हैं और उस पर नजर राजु की पहले से ही थी लेकिन उसकी बुर से मजा लेने के चक्कर में उसकी चूची उसको भूल गया थालेकिन अब वह सारी कसर निकाल लेना चाहता था वह जोर-जोर से उसकी चूची को दबा कर उसका रस पी रहा था मानो जैसे कि उसके हाथों में दशहरी आम आ गया हो,,,,

सोनी भी कामवासना से ग्रस्त होकर राजू के लंड को पकड़ कर उसे अपनी गुलाबी बुर पर रगडना शुरू कर दी थी,,, सोने की यह हरकत राजू के होश उड़ा रही थी उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी जब तक वहउसकी चुचियों से खेलता रहा तब तक सोनी उसके लंड को अपनी बुर के छेद में डालने की नाकाम कोशिश करती रही,,,, लेकिन उसकी इस ख्वाहिश को राजू पूरी करने के उद्देश्य से अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी बड़ी गांड पर रखकर अपनी तरफ खींच दिया जिससे उसके लंड का हल्का सा भाग उसकी बुर के अंदर प्रवेश करने की कोशिश करने लगा जिससे सोनी एकदम से मचल उठे और अपनी एक टांग उठा कर राजू के कमर में डाल दी जिससे लंड को बुर में घुसने की जगह मिल गई,,, और बुर पूरी तरह से गिली होने की वजह से,,, लंड के सुपाड़े को अपने अंदर की तरफ खींचने लगी सोनी से यह उतेजात्मक पल बर्दाश्त नहीं हुआऔर वह अपने होठों को उसके होठों पर रखकर चूसना शुरु कर दी एक तरह से वाह राजू को और ज्यादा उकसा रही थी आगे बढ़ने के लिए और राजू भी कम नहीं था वह एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को पकड़ कर उसे सहारा देते हुए उसकी बुर में लंड डालने का प्रयास करने लगा और उसका यह प्रयास सफल होने लगा,,, धीरे-धीरे राजू के लंड का सुपाड़ा उसकी बुर के अंदर प्रवेश कर गया,,,, और जब हाथी घुस जाए तो पूछ को घुसने में कौन सी तेरी लगती है,,, इसलिए राजू अपने दोनों हाथों को सोनी के बड़ी बड़ी गांड पर रखकर उसे जोर से दबाते हुए अपनी तरफ खींच लिया और अपने लंड को धीरे धीरे अंदर की तरफ डालना शुरू कर दिया और देखते ही देखते हैं उसका लंड पूरी तरह से सोनी की बुर के अंदर खो गया,,,, राजू की खुशी का ठिकाना ना था जिसके बारे में कभी सोचा भी नहीं था आज उसकी चुदाई कर रहा था धीरे-धीरे राजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,।

मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर के अंदर महसूस करते हैं सोनी पूरी तरह से मस्त हो गई थी और अपनी बाहें उसके गले में डाल दी थी,,,,,।

सोने के लिए यह पल बेहद अद्भुत और अविश्वसनीय था क्योंकि कभी उसने कल्पना भी नहीं की थी कि वह गांव के किसी जवान लड़के के साथ संभोग करेगी,,, लेकिन राजु के मोटे तगड़े लंड को देखकर उसकी इच्छा इतनी ज्यादा प्रबल हो गई थी कि आज वह अपनी इच्छा के बल पर उसे पा चुकी थी,,,,होठ में होठ भीड़े हुए थे,,,दोनों की सांसो की गति तेज हुए जा रहे थे राजू धीरे-धीरे सोनी की चुदाई कर रहा था बड़े घर की औरत की बुर चोदने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, राजू के मोटे तगड़े लंड की रगड़ सोनी अपनी बुर की अंदर बहुत अच्छे से महसूस कर रही थी,,, और यह एहसास उसकी मस्ती को और ज्यादा बढ़ावा दे रहा था,,,,।

दोनों में किसी भी प्रकार का वार्तालाप नहीं हो रहा था दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए बस चुदाई के कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे थे,,,।

आम के बगीचे में गांव का लड़का और हवेली की औरत संभोग सुख प्राप्त करने में जुटे हुए थे कोई सोच भी नहीं सकता था कि आम के बगीचे में इस तरह का कार्यक्रम भी चल रहा होगा,,,आम के बगीचे में चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था दोपहर में भी इधर रात की तरह ही सन्नाटा छाया रहता था बस पंछियों के कलरव की आवाज ही सुनाई देती थी,,,। धीरे-धीरे धक्के मारते हुए राजू सोनी से बोला,,,।

अब कैसा लग रहा है सोनी,,,,

(लंड को घर में डालते हैं राजू के लिए सोनी दीदी अब केवल सोनी रह गई थी वैसे भी संभोग करते समय उस औरत के प्रति मर्दों का देखने का रवैया बदल जाता था उस औरत में उसे बीवी प्रेमिका के साथ-साथ एक रंडी भी नजर आने लगती थी जिसके साथ वह चुदाई का सुख प्राप्त करता है,,, लेकिन सोनी को इस बात का जरा भी बुरा नहीं लगा था वह तो और ज्यादा आनंदित हुए जा रही थी और आनंदित होते हुए बोली,,,)

Soni ki masti



बहुत मजा आ रहा है राजा ऐसा लंड आज तक मैंने अपनी बुर में नहीं ली हुं,,,

अभी तो तुम्हें और मजा आएगा मेरी जान,,,,(राजू के बोलने का तरीका उसके तर्कों के साथ बदलता जा रहा था जिससे सोनी की मदहोशी भी बढ़ती जा रही थी,,,, उसे और ज्यादा मजा देने का वादा करके राजू अगले ही पल उसकी दूसरी टांग को भी अपनी कमर में लपेटते हुए अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी गांड पर रखकर उसे अपनी गोद में उठा दिया और उसे गोद में उठाए हुए उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया,,,, सोनी हैरान ठीक से समझ में नहीं आ रहा था कि पल भर में यह क्या हो गया राजू की ताकत उसकी हिम्मत उसके उसको देखकर सोनी पानी पानी हुए जा रही थी सोनी को यकीन नहीं हो रहा था कि राजू जैसा एक जवान लड़का उसे अपनी गोद में उठाकर उसकी चुदाई कर रहा है क्योंकि उसे उम्मीद भी नहीं थी कि उसे राजू इतने आराम से उठा लेगा और गोद में लिए हुए ही उसकी चुदाई करेगा,,,, शायद चोदने की वजह से इंसान की ताकत और उसका जोश और ज्यादा बढ़ जाता है और यही जोश राजू दिखा रहा था इस तरह की हरकत इस तरह की जुर्रत सोनी के साथ किसी ने भी नहीं किया था,,, जिस किसी ने भी मर्द पर सोने का दिल आ जाता था और मर्द के साथ सोनी अपने तरीके से मजा लेती थी ना कि उसको कभी अपने ऊपर हावी होने देती थी लेकिन राजु के पक्ष में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह शुरू से सोच रही थी कि राजू के साथ वह अपनी मनमानी कर पाएगी लेकिन राज्यों के सामने वह अपने आप को मजबूर महसूस करने लगी थी उसके मस्त मोटे तगड़े की ताकत को देखकर वह उसके आगे घुटने टेक दी थी,,,

राजू उसके ऊपर पूरी तरह से हावी हो चुका था उसके बदन के साथ हुआ मनमानी कर रहा था लेकिन ऐसा नहीं कहा कि सोनी को इसमें मजा नहीं आ रहा था उस की मनमानी से सोनी का मजा दुगुना होता जा रहा था इसलिए वह उसे कुछ नहीं बोल रही थी,,,,

गोद में उठाए हुए वह उसकी बुर में लंड पेले जा रहा था,,, सोनी के मन में कोई भी गिला शिकवा नहीं था,,, कुछ देर तक राजू इसी तरह से गोद में उठाए हुए उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी चुदाई करता रहा लेकिन वह अपनी रफ्तार को बढ़ाना चाहता था जो कि इस आसन में बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था इसलिए वह अच्छी सी जगह देखकर जहां ढेर सारी घास रखी हुई थी वहां पर अपनी गोद में उठाए हुए ही वह सोनी को लेकर आगे बढ़ा और धीरे-धीरे उसे उसी खास पर ले कर दिया बिना अपने लंड को उसकी बुर से निकाले,,,,।

यह आसन राजू और सोनी दोनों के लिए ठीक था क्योंकि इस आसन में राजू पूरी तरह से अपना दम दिखा पाने में सक्षम रहता था और इस आसन में सोनी को भी अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो जाएगी इस बात का राजू को पूरा विश्वास था इसलिए वह तुरंत उसकी चूची को मुंह में भर कर अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया गर्म शिकारियों से पूरी झोपड़ी गूंजने लगी थी लेकिन उसकी कर्मचारियों को सुनने वाला वहां पर कोई भी नहीं था क्योंकि दूर-दूर तक कोई भी दिखाई नहीं देता था सिर्फ पंछियों की आवाज ही सुनाई देती थीजिसका फायदा उठाते हुए सुननी भी दिल खोलकर गर्म सिसकारीयो की आवाज अपने मुंह से निकाल रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,।

मेरी रानी आज तेरी ऐसी चुदाई करुंगा की तू जिंदगी भर याद रखेगी,,,(राजू की यह सभ्यता और उसकी भाषा बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन उसके अंदर भी वासना का शैतान आ चुका था जिसके चलते वह पूरी तरह से बस्ती के सागर में गोते लगाते हुए जो मन में आ रहा था वह बकरा था,,,,,,,सोनी पूरी तरह से मस्ती के सागर में डूब चुकी थी वह राजू को अपनी बाहों में लेकर ऊपर से नीचे तक उसके बदन पर जहां हो सकता था वहां तक अपनी हथेली को उसके नंगे बदन पर रगड रही थी,,,,वह थोड़ा नीचे से उठाना चाहती थी ताकि वह अपनी तरफ से कुछ धक्के लगा सके लेकिनराजू बड़ी मजबूती से उसे अपनी आगोश में लिए हुए था जिससे उसे हिलने का भी मौका नहीं मिल रहा था उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड बार-बार उसके बच्चेदानी में ठोकर मार रहा था जिससे सोनी एकदम मस्त हो जा रही थी क्योंकि इधर तक अभी तक कोई भी नहीं पहुंच पाया था और राजू के लंड की लंबाई दूसरों की अपेक्षा ज्यादा ही थी जो कि बड़े आराम से उसके बच्चेदानी तक पहुंच रही थी,,,।



जवानी की गर्मी पिघल कर दोनों के बदन से पसीना बनकर टपक रही थी,,,, राजू के धक्के कम होने का नाम ही नहीं ले रहे थे वहीं कई रफ्तार में आगे पीछे हो रहे थे,,, कमला चाची और गुलाबी की चुदाई करने के बाद उसे बड़े घर की औरत मिली थी जिसे चोदने का सुख उसकी जिंदगी में सबसे अधिक उत्सुक था जो कि वह कभी भी भूलने वाला नहीं था खूबसूरत अंगों से खेलने का सुख उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था,,,।सोनी उसके जबरदस्त तेज धक्कों को सहन नहीं कर पा रही थी इसलिए उसकी हर एक धक्के के साथ उसकी आह निकल जा रही थी,,,,। कुछ देर बाद सोनी का बदन फिर से अकड़ने लगा,,, वह चरम सुख के करीब पहुंचती जा रही थी,,,,

आहहह आहहहह मेरे राजा मेरा निकलने वाला है और जोर से धक्के लगाओ मेरा पानी निकलने वाला है,,,

चिंता मत करो रानी मैं भी तुम्हारे बेहद करीब हूं,,,,

(और इतना कहने के साथ ही राजू उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर जोर जोर से दबाते हुए अपनी कमर की रफ्तार बढ़ा दिया,,,,उसका लंड बड़ी 2G से सोनपुर के अंदर बाहर हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बुर में कोई मोटर चल रही हो,,, राजू के धक्के और ज्यादा तेज हो गए,,,, और कुछ देखो के बाद दोनों एक साथ झड़ गए,,,,जबरदस्ती चुदाई करते हुए राजू पहली बार सुना था लेकिन सोनी तीन बार अपना पानी निकाल कर मस्त हो गई थी ऐसा सुख उसने कभी भी प्राप्त नहीं की थी कि एक ही बार कि चुदाई में तीन बार झढ़ी हो,,,,ऐसा उसके साथ पहली बार हुआ था राजू उसकी उम्मीदों पर बिल्कुल खरा उतरा था वह बहुत खुश थी राजू अपना पानी उसकी बुर में निकालते हुए उसके ऊपर ढेर हो चुका था,,,।
 
अद्भुत अविस्मरणीय अतुल्य संभोग का सुख भोगते हुए राजू सोनी के खूबसूरत बदन पर ढेर हो चुका था और सोनी एक असीम आनंद की अनुभूति लेते हुए गहरी सांसे ले रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि संभोग में इतना अत्यधिक आनंद भी कोई दे सकता है,,,, अभी तक वह केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए ही अपने बदन का प्रयोग करती आ रही थी लेकिन आज सही मायने में उसको संभोग के सुख के बारे में ज्ञात हुआ था,,, एक शिक्षिका होने के बावजूद भी आज उसे अपने ही विद्यार्थी से बहुत कुछ सीखने को मिला था,,,,।



ज्ञान सिर्फ शब्दों का हो यह जरूरी नहीं,,, संभोग कला में पारंगत होना भी जीवन में बहुत जरूरी होता है,,, राजू को शब्दों का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं है लेकिन बहुत ही जल्द उसने संभोग कला में महारत हासिल कर लिया था,,,, और अपनी इस कला का सही उपयोग सही समय पर सही व्यक्ति पर करना उसे बखूबी आता था तभी तो बड़े घर की औरत होने के बावजूद भी सोनी मंत्रमुग्ध से राजू के सामने चारों खाने चित हो गई थी,,,। सोनी बेलगाम जवानी की मालकिन थी और उसकी जवानी पर अभी तक किसी ने भी लगाम नहीं लगा पाया था,,, जिस किसी के साथ भी बसारी संबंध बनाती थी उस पर उसका पूरा वर्चस्व बनाए रहती थी,,,उसके जीवन में आने वाला राजू ही ऐसा पहला शख्स था जिसके आगे वह घुटने टेक दी थी पूरी तरह से उसके मर्दाना अंग के आगे धराशाई हो गई थी,,,,,, पहली बार में ही राजू ने मर्दानगी का सही अर्थ उसे समझाया था,,,,।



राजू का मर्दाना ताकत से भरा हुआ अंग अभी भी सोनी के कोमल अंग को भेदता हुआ उसके अंदर समाया हुआ था,,। ऐसा लग रहा था कि कोई कुशल तैराकी समुंदर को ही अपना घर बना कर उसके अंदर बैठा हुआ है,,,,,, राजू अपने मोटे तगड़े लंड से सोनी की मदमस्त जवानी की धज्जियां उड़ा दिया था तब तक वह शांत नहीं हुआ जब तक कि अपना गरम लावा से उसकी बुर की कटोरी भर नहीं दिया,,,लंड की गजब की तेज धारदार पिचकारी को अपने बच्चेदानी पर साफ साफ महसूस की थी और पूरी तरह से गदगद हो गई थी,,,,,, इतने सारे लावा को वह पहली बार अपनी बुर के अंदर महसूस कर रही थी क्योंकि इतना किसी का निकलता ही नहीं था जितना कि राजू ने निकाला था,,,।

दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,,,कुछ देर तक उसी तरह से शांत लेटे रहने के बाद राजू सोनी की आंखों में देखते हुए बोला,,,,।

कैसा लगा सोनी दीदी,,,,



पूछो मत राजू गजब का मजा आ गया ऐसा मजा मुझे आज तक नहीं मिला था तुम्हारा लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है तुम्हारे जैसा लंड मैंने आज तक नहीं देखी,,,,।

(सोनी के मुंह से अपनी तारीफ खास करके अपने लंड की तारीफ को सुनकर खुश हो गया और उसके होठों को चूम लिया,,,)

Raju or soni



तू बहुत खूबसूरत हो सोनी दीदी मैंने आज तक तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखा तुम्हारा अंग अंग ऐसा लगता है कि भगवान ने खुद अपने हाथों से बनाया है,,,,

तुमको भी बहुत मजा आया ना राजू,,,।

बहुत मजा आया सोनी दीदी,,,,

मुझे दीदी मत बोला करो,,,, दीदी कहते हो तो ऐसा लगता है कि अपनी बहन को ही चोद रहे हो,,,,

तो क्या हुआ सोनी दीदी तुम्हारी जैसी खूबसूरत बहन हो तो कौन भाई होगा जो नहीं चोदेगा,,,,





धत् कैसी बातें करते हो कोई अपनी बहन को चोदता है क्या,,,!

अगर बहन चाहे तो क्यों नहीं,,,,( राजू अपने होठों पर कुटिल मुस्कान लाते हुए बोला,,, थाना कि राजू ने अभी अपनी बहन की चुदाई नहीं किया था बहन उससे बड़ी थी जिसकी शादी हो चुकी थी लेकिन अपनी बुआ की चुदाई कर चुका था इसलिए उसे धीरे-धीरे लगने लगा था कि रिश्तो के बीच भी चुदाई मुमकिन है दूसरी तरफ सोनी का भी हाल यही था भले ही वह भाई और बहन के बीच शारीरिक संबंध से इंकार कर रही हो लेकिन वह तो खुद अपने बड़े भाई के साथ जिस्मानी ताल्लुकात रखती थी इसलिए उसके लिए भी भाई-बहन के बीच का पवित्र रिश्ता कोई मायने नहीं रखता था,,,। राजू की बात सुनकर सोनी बोली,,,)



तुम पागल हो गए हो राजू भला रिश्तो के बीच चुदाई मुमकिन कैसे हैं,,,,?

क्यों मुमकिन नहीं है सोनी दीदी जब एक खूबसूरत बहन अपनी बड़ी बड़ी चूची को झूलाते चलेंगीऔर अपनी बड़ी बड़ी गांड मटकाते चलेगी अपने भाई को तड़पाएगी तो क्या होगा,,,जब वह खुद तैयार हो अपने भाई से चुदवाने के लिए तो भाई को भला ईंकार कैसे हो सकता है,,,

(भाई बहन के ऊपर राजू की बातें और उसका मंतव्य सुनकर सोनी के बदन में गुदगुदी होने लगी थी उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि दुनिया में केवल वही एक ऐसी औरत नहीं है जो अपने भाई से चुदवाती है ऐसे कई लोग हैं जो अपनी बहन को चोदते हैं,,,,इस बात से उसे थोड़ी संतुष्टि मिल रही थी लेकिन राजू की उत्तेजना एक बार फिर से बढ़ने लगी थी इसलिए सोनी की बुर में ढीला पड रहा लंडएक बार फिर से खुशी के मारे फूलने लगा था जिसका एहसास सोनी को अपनी बुर के अंदर बराबर हो रहा था,,,, उसे भी आनंद आ रहा था राजू की ताकत से‌ वह पूरी तरह से परिचित हुए जा रहे थे एक बार झड़ने के बावजूद भी और वह भी उसे तीन बार झड़ चुका था और तुरंत तैयार भी हो रहा था यह सब बातें सोनी को आश्चर्यचकित कर रहे थे नहीं तो एक बार की चुदाई के बाद तो आदमी ढेर हो जाता है,,,, जैसा कि उसका खुद का भाई,,, लेकिन राजू की बात कुछ और थी इसे थकान बिल्कुल भी महसूस नहीं होती थी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह ईसी कार्य के लिए जन्म लिया है,,,।

Hand pump k pas raju or soni



सोनी को,,, बड़े जोरो की पिशाब लगी थी,,, इसलिए वह राजू को अपने ऊपर से उठाते हुए बोली,,,।

चल अच्छा हट,,, बडा आया अपनी बहन को चोदने,,,,

तो क्या अभी अभी तो अपनी बहन को चोदा हुं,,,,

(राजू के कहने का मतलब को समझकर सोनी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

मैं तुम्हारी सगी बहन थोड़ी हूं,,,

Raju Soni ki taang uthakar





तो क्या हुआ दीदी तो कहता हूं ना,,,,

(सोनी राजू को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन राजू था कि हटने का नाम नहीं ले रहा था,,, उसका लंड अभी भी सोनी की बुर में घुसा हुआ था,,,। जोकि धीरे-धीरे फूलने लगा था उसे फूलता होगा सोनी अपनी बुर में बराबर महसूस कर रही थी और इसी की वजह से उसकी उत्तेजना भी फिर से शुरू होने लगी थी लेकिन उसे बड़े जरूर की पेशाब लगी थी इसलिए उसे हटाना जरूरी था वह हट नहीं रहा था इसलिए सोनी जोड़ देते हुए बोली,,,)

चल अच्छा हट जाओ सगी बहन होती तो नहीं चोदता अभी सिर्फ बातें कर रहा है,,,

नहीं-नहीं जरूर चोदताअगर तुम इसी तरह से मेरे सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी होती तो जरूर मेरा लंड तुम्हारी बुर में होता जैसा कि अभी घुसा हुआ है,,,,(राजू धीरे-धीरे जोश में आ रहा था जिसकी वजह से वह हल्के हल्के उसकी चुचियों को मुंह में लेकर काट ले रहा था,,,,उसका इस तरह से चुचियों को काटना अच्छा भी लग रहा था लेकिन पेशाब की तीव्रता की वजह से वह परेशान थे इसलिए ना चाहते हुए भी उसे बोलना पड़ा,,,।)



अरे उतारोगे,,, मुझे जोरों की पेशाब लगी है,,,,

(खूबसूरती की मुहूर्त सोनी के मुंह से पेशाब लगने वाली बात सुनकर राजू की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह उत्तेजित स्वर में बोला,,,)

अभी तो मुत कर आई थी,,,

तो क्या हुआ फिर से लग गई है,,,,

तुम्हें पैसाब बहुत जल्दी जल्दी लगती है,,,(इतना कहते हुए वह उठने लगा और सोनी अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर थोड़ी होने लगी और अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच स्थिर कर दी,,, जहां पर राजू का लंड अभी भी पूरी तरह से गहराई में धंसा हुआ था,,,, राजू सोनी की आंखों में देखते हुए बोला,,,)

तुम्हारी बुर में से लंड को निकालने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है,,,

निकालोगे नहीं तो पैशाब कैसे करुंगी,,,(सोनी भी अपनी दोनों टांगों के बीच देखते हुए ही बोली,,)

तुम कहती हो तो निकाल देता हूं वरना मेरा इरादा अभी ईसे निकालने का बिल्कुल भी नहीं था,,,,

बहुत शैतान हो मैं तो तुम्हें कितना सीधा साधा समझ रही थी,,,,

अब जिसके पास इतनी खूबसूरत गुलाबी छेद है तो उसे देखकर इंसान कब तक सीधा-साधा रह सकता है,,,,

बातें बहुत आती है तुझे चलो जल्दी से निकालो,,,।

ठीक है महारानी जैसी आपकी आज्ञा,,,(राजु की बात सुनकर सोनी हंसने लगीऔर राजू अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को उसके गुलाबी बुर के गुलाबी पत्तियों के बीच फंसे मुसल को निकालना शुरू कर दिया,,, राजु अपनी कमर को उठाते हुए अपने लंड को बाहर खींच रहा था बाहर खींचते समय भी लंड की नशे बुर की अंदरूनी दीवारों पर रगड़ खा रही थी जिसकी वजह से सोनी की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,और देखते ही देखते राजू ने अपने लंड को उसकी बुर से पक्क की आवाज के साथ बाहर खींच लिया,,, सोनी मुस्कुराने लगी और खड़ी होने लगी राजू भी खड़ा हो गया था और अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,।

अब कपड़े मत पहनो फिर से निकालना पड़ेगा,,,,।

तो क्या हुआ निकाल देना कपड़े उतारने में तो तुम माहिर हो,,,

नहीं नहीं तुम बिना कपड़ों के ही बाहर जाओ एकदम नंगी,,, बहुत अच्छा लगेगा,,,,

पागल हो गया क्या बिना कपड़ों के बाहर कैसे जाऊंगी किसी ने देख लिया तो,,,

यहां कौन आएगा देखने के लिए इतनी वीरान जगह है एकदम सुनसान यहां कोई नहीं आता,,,।

नहीं नहीं मैं कपड़े पहन कर ही जाऊंगी,,,(अपने पेटीकोट को नीचे से उठाते हुए बोली तो राजू तुरंत आगे बढ़ा और उसके हाथ से पेटीकोट छीन लिया और बोला,,,)

कोई नहीं देखेगा ऐसे ही चलो ना एक बार एकदम नंगी बहुत मस्त लगोगी साड़ी में जब चलती हो तो एकदम कयामत लगती हो बिना कपड़ों के चलोगी तो तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड देखकर मेरा लंड,,,(अपने लंड को पकड़ कर हीलाते हुए) एकदम बावला हो जाएगा,,,,

(पर आ चुकी है बात सुनकर वह कुछ सोचने लगीराजू की बातें उसके मन पर भी गहरा प्रभाव छोड़ रही थी वह भी बिना कपड़ों के ही बाहर जाना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि बिना कपड़ों के घूमने में घर से बाहर आम के बगीचे में क्या-क्या लगता है वैसे तो घर में व कई बार बिना कपड़ों के घूम चुकी थी लेकिन आज वह अलग अनुभव लेना चाहती थी इसलिए उसकी बात मानते हुए बोली,,,)

ठीक है तेरी बात मैं मान लेती हूं लेकिन तुझे भी इसी तरह से चलना होगा नल तक,,,, वहीं पर में पेशाब करूंगी,,,,

ठीक है सोनी दीदी,,,,

फिर दीदी कहा,,,,

ठीक है सोनी,,,,,

(सोनी मुस्कुराते भी झोपड़ी के बाहर कदम रखने से पहले एक बार चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है वैसे भी इस जगह पर कोई आता नहीं था फिर भी वह थोड़ी तसल्ली कर लेना चाहती थी और जब पूरी तरह से तसल्ली कर ली तो वह अपना एक कदम बाहर निकाल दी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर तोड़ने लगी आज वह पहली बार घर के बाहर नंगी घूमने का अनुभव ले रही थी पीछे पीछे राजू खड़ा था जो कि झोपड़ी से बाहर निकलने मैं समय ले रही थी तो वह ठीक सोनी के पीछे आ गया उसकी चूची दोनों हाथों से पकड़कर अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ने लगा राजू की हरकत से वग पूरी तरह से बावली हो गई,,,, और उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,।

सहहहहहह ,,,,,आहहहहहहह राजु,,,,,, पेशाब तो कर लेने दे,,,,

रोका किसने है खड़े-खड़े मुत लो,,,ना,,,



धत्,,,, पागल हो गया है क्या,,,, छोड़ो मुझे,,,,( और इतना कहकर झोपड़ी के बाहर निकल गई,,, आगे आगे चल रही है सोनी की बड़ी बड़ी गांड मटकते हुए देखकर राजू के होश उड़ रहे थे,,,,उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह स्वर्ग में पहुंच गया और वहां पर परियों के साथ काम लीला रचा रहा हो,,,, आगे-आगे चल रही सोनी उसे दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत लग रही थी साड़ी में चलते हुए उसे देखा था लेकिन नंगी देखने का सुख उसके भाग्य में लिखा हुआ था इसीलिए आज वहां इस आम के बगीचे में हमसे बिना कपड़ों के चलते हुए देख रहा था सोनी रह-रहकर पीछे की तरफ देख कर मुस्कुरा दे रही थी और जवाब में राजू अपना लंड पकड़ कर हिला दे रहा था,,, दोनों की इस तरह की हरकतें बेहद मदहोशी फैला रही थी दोनों की आंखों में चार बोतलो का नशा छाने लगा था,,,, देखते ही देखते सोनी हेड पंप के पास पहुंच गई और बेझिझक राजू के सामने ही अपनी बड़ी बड़ी गांड लेकर नीचे बैठ गई और मुतना शुरू कर दि,,, 5 कदम की दूरी पर राजू खड़ा हो गया था क्योंकि उसे इतने जोरो की पिशाब लगी हुई थी कि उसकी गुलाबी बुर के छेद से पेशाब की धार बाहर निकलने लगी और साथ ही उसमें से मधुर सिटी की ध्वनि सुनाई देने के लिए जो कि राजू के हौसले पस्त कर रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,,,

सोनी पेशाब करने में पूरी तरह से व्यस्त हो चुकी थी राजू उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था और तुरंत ठीक उसके पीछे बैठ गया और अपने लंड को उसकी गांड के बीचो-बीच से निकालकर उसकी बोर के गुलाब की पत्तियों पर अपने लंड की ठोकर मारने लगा,,,, सोनी को जैसे ही यह एहसास हुआ और पूरी तरह से बावरी हो गई उसकी आंखो में खुमारी छाने लगीऔर वो राजू को रोकने के बिल्कुल भी कोशिश नहीं की और अपनी नजरों को पीछे करके उसको देखने लगी और राजू अपने होठों को आगे बढ़ा कर उसके होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,,, और सोनी तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर राजू के लंड को पकड़ लिया और उसे अपनी बुर पर रख देना शुरू कर दिया हालांकि अभी भी वह पैसाब की धार मार रही थी जो कि रह-रहकर राजू के लंड की सुपाड़े को भिगो दे रही थी जिसे जरा जो कि उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी,,,,,,,।

राजू पूरी तरह से बदहवास हो चुका था वह तुरंत सोनी की बांह पकड़कर उसे खड़ी उठाने लगा,,, सोनी ठीक से मुत नहीं पाई थीलेकिन फिर भी मंत्रमुग्ध से राजू के इशारे पर नाचने लगे थे वह खड़ी हो गई थी और राजू उसे हेड पंप के सहारे उसकी गांड टीका कर उसे खड़ी कर दिया था,,,, सोनी की गुलाबी बुर लप-लपा रही थी,,,गहरी सांस खींचते हुए राजू उसकी चिकनी बुर की तरफ देखा और तुरंत अपने होंठ को उसकी बुर से लगा दिया जिस पर अभी भी पेशाब की बूंदे लगी हुई थी और वह भेज जग अपने होठों पर ओस की बूंद की तरह लेकर उसे जीभ के सहारे अपने गले के नीचे उतार दिया,,,, अद्भुत सुख और रोमांच से सोनी पूरी तरह से मस्त होने लगी उसकी आंखें खुली थी और वो चारों तरफ देख रही थी कहीं कोई आ ना जाए उसे डर भी लग रहा था जो कि वहां पर कोई आने वाला नहीं था आज आसमान के नीचे खुले में नंगी होकर जवानी का मजा लेने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, वास्तव में राजु उसे बेमिसाल लगने लगा था,,,,। राजु पागलों की तरह उसकी बुर चाट रहा थासोनी भी पूरी तरह से मस्त होकर अपनी बुर को गोल-गोल घुमाते उसके चेहरे पर रख रही थी हालांकि वह ठीक से पेशाब नहीं कर पाएगी इसके उत्तेजना के मारे उसकी बुर से रह-रहकर पेशाब की धार फूट पड़ रही थी जो कि राजू उसे अमृत की धार समझ कर उसे अपने मुंह में लेकर पी जा रहा था यह सोनी और राजू के लिए बेहद अनोखा अनुभव था जिसमें पूरी तरह से दोनों भीग चुके थे,,,, राजू की उत्तेजना और उसका हौसला देखकर सोनी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,। एक तरह से वह राजू की गुलाम बन चुकी थी जितना सोची थी उससे कई ज्यादा राजू से मजा दे रहा था रह रह कर राजू अपनी उंगली उसकी बुर में डाल दे रहा था जिसकी वजह से अपनी उत्तेजना को ना संभाल पाने के कारण वह हेड पंप के हफ्ते को कस के पकड़ ले रही थी और खुद भी अपनी कमर को आगे पीछे करके हिला रही थी,,,, पेशाब का स्वाद नमकीन खारेपन का था लेकिन राजू को उसकी पेशाब का स्वाद अमृत से कम नहीं लग रहा था धीरे-धीरे करके वहां उसकी बुर से निकलने वाले पैशाब को पूरी तरह से अपने गले के नीचे गटक गया था,,,,,सोनी की गर्म शिसकारियों की आवाज से पूरा आम का बगीचा पूछ रहा था लेकिन उसे सुनने वाला वहां कोई नहीं था,,,,।

राजू से अब रहा नहीं जा रहा था वह तुरंत खड़ा हुआ है और अपने लंड को खड़े-खड़े ही ,,, सोनी की बुर में डालना शुरू कर दिया,,, राजू का लंड आराम से चला जाए इसलिए सोनी अपनी एक टांग उठा कर वापस उसकी कमर में डाल दी और राजू बड़े आराम से उसकी एक टांग उठा है उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया अद्भुत संभोग,,, शायद इस तरह के संभोग के बारे में सोनी ने भी कभी कल्पना नहीं की थी,,, राजू का हर एक धक्का उसके होश उड़ा रहा था,,,

राजू की कमर लगातार चल रही थी,,,।





सोनी अपने शर्मो हया सब कुछ त्याग चुकी थी,,, तभी तो जिंदगी का सबसे अनोखा सुख भोग रही थी जिसकी कल्पना भी कर पाना मुश्किल था बड़े घर की औरतें इस तरह से खुले में आम के बगीचे में नंगी होकर गांव के लड़के से चुदवाएगी इस बारे में किसी ने भी कल्पना नहीं की थी,,, वैसे भी राजू की हिम्मत की दाद देना पड़ जाए क्योंकि ऐसा काम लोग चोरी छुपे घर के अंदर करते हैं लेकिन वह किसी की परवाह किए बिना अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए लाला की बहन को झोपड़ी से बाहर लाकर उसके चुदाई कर रहा था,,,,

अपनी टांग को उठाएं उठाएं सोनी को दर्द महसूस होने लगा था लेकिन फिर भी दर्द की परवाह किए बिना वह संभोग के असीम सुख को प्राप्त करने में लगी हुई थी और देखते ही देखते दोनों की सांसे तेजी से चलने लगी,,, और राजू बिना आसन बदले एक बार फिर से सोनी को चांद पर लेकर जा चुका था दोनों का लावा निकल चुका था राजू अपना लंड बुर से बाहर निकाल कर अपनी सांसो को दुरुस्त करने लगा और सोनी गहरी गहरी सांसें लेने लगी,,,।

बाप रे कितना हरामी है तु अपनी मनमानी करने से पीछे नहीं हटता,,,

क्या करूं तुम्हारी जवानी का नशा ही कुछ ऐसा है कि बार-बार पीने को मन करता है,,,,।

दो दो बार झढ़ने के बाद भी राजू का लंड ज्यों का त्यों खड़ा था,,,, और वह वही पर सोनी की आंखों के सामने ही खड़े होकर पेशाब करने लगा,,, राजू की इस हरकत पर सोनी हंसने लगी और हंसते हुए बोली,,।

अरे थोड़ी तो शर्म कर लिया होता,,, दूर जाकर मुत नहीं सकते थे,,,

अब तुम से कैसी शर्म,,,,(इतना कहकर मुस्कुराने का क्या और राजू का कहना भी ठीक ही था सोनी यह बात अच्छी तरह से जानती थी,,,, कुछ देर तक वह दोनों वहीं खड़े रहे नंगे पन का एहसास दोनों को एकदम मस्त कर रहा था शाम ढलने वाली थी और सोनी बोली,,,।)

बहुत देर हो गई है अब मुझे चलना चाहिए,,,, अंधेरा हो गया तो मुश्किल हो जाएगी भैया तरह तरह के सवाल पूछना शुरू कर देंगे,,,।

तो क्या हुआ बता देना कि आम के बगीचे में चुदवा रही थी,,,।

धत्,,,,,(और इतना कहकर सोनी इतनी गांड मटका कर झोपड़ी के अंदर जाने लगी तो पीछे पीछे राजू भी चल दिया,,,, सोनी झोपड़ी के अंदर अपनी पेटीकोट उठाकर उसे पहन कर अपनी डोरी बांध रही थी,,, वहीं पास में पड़ी सोनी की चड्डी को उठाकर राजू उसे चारों तरफ घुमा कर देखने लगा एकदम मखमली कपड़े की बनी हुई थी राजू से रहा नहीं गया और वह अपनी नाक से लगाकर उसे सुंघने होने लगा,,,,)

वाहहह ,,, क्या खुशबू है एकदम तरोताजा मेरा तो फिर से लंड खड़ा होने लगा है,,,,,,,(राजू की बात सुनते हैं सोनी राजू की तरफ देखी तो उसे अपनी चड्डी सुनता हुआ पाकर ही दम हैरान हो गई और बोली,,)

तुम सच में एकदम पागल हो,,,

तुम्हारा दीवाना हो गया हूं,,,

धत् पागल,,,,(इतना कहकर राजू की तरफ पीठ करके नीचे झुक कर अपनी साड़ी उठाने लगी तो उसके झुकने की वजह से उसका बड़ा पिछवाड़ा देखा कर राजू से रहा नहीं गया वैसे भी उसकी चड्डी सुंघकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और वह बिना समय गंवाए सीधा उसके पीछे पहुंच गया था,,,और वह नीचे गिरी साड़ी उठा पाती इससे पहले ही राजू पीछे से उसकी पेटीकोट कमर तक उठा दिया था,,, और वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही उसकी कमर थाम कर पीछे से अपने लंड को उसकी बुर में डाल दिया वह उसे रोकती रह गई लेकिन वह उसे चोदना शुरु कर दिया सोनी के तन बदन में एक बार फिर से उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और वह राजू की इस मनमानी का मजा लेने लगी पीछे से भी राजू का लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा थाजो कि यह सोनी के लिए आश्चर्यजनक था क्योंकि पीछे से कोई भी गाना अच्छा नहीं कर पाता था,,, राजू बड़े आराम से कर रहा था इसलिए वह मजा लेने लगी और अपने कर्मचारियों से एक बार फिर से पुरी झोपड़ी को संगीतमय बना दी,,,,।

थोड़ी देर बाद दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर झोपड़ी से बाहर निकल गए और जाते समय सोनी उसके होठों पर चुंबन करके उससे विदा ली और वहां से अपने घर की तरफ निकल गई राजू भी अपने घर की तरफ चल पड़ा,,,।
 
अद्भुत अविस्मरणीय अतुलनीय ,,, संभोग की तृप्ति का अहसास लिए सोनी और राजू अपने अपने रास्ते चले जा रहे थे सोनी आज बहुत खुश थी पहली बार किसी असली मर्द से पाला जो पडा,,,था,,, शाम होने तक तीन बार की खमासा चुदाई का एहसास सोनी हल्के हल्के लंगड़ा कर चल रही थी ऐसा उसके साथ कभी नहीं हुआ था,,,, अपनी बुर में उसे मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था लेकिन यह दर्द उसके लिए बहुत खास था यह यादें यह पल उसकी जिंदगी की सबसे बेहतरीन पल बन चुकी थी,,, क्यों कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि कोई इस तरह से चुदाई करता होगा,,,, एक नहीं दो नहीं तीन तीन बार चुदाई करने पर तीनों का अद्भुत की पराकाष्ठा का अनुभव कराते हुए राजू ने उसे दिन में ही उसे तारे दिखा दिए,, थे,,,। ऊंची नीची पगडंडियों से चलते हुए सोनी को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच रगड महसूस हो रही थी,,,,राजू के लंड से निकले गर्म लावा की धार अभी भी उसकी बुर से रह रह कर बह रही थी,,,, राजू के साथ बिताए हुए एक-एक पल को याद करके सोनी के होठों पर मुस्कान तैरने लग रही थी,,,, वो कभी सोची नहीं होती कि इतनी जल्दी सब कुछ हो जाएगा उसे लग रहा था कि धीरे-धीरे आगे बढ़ना पड़ेगा लेकिन किस्मत बड़े जोरों पर थी जो की पहली बार में ही सब कुछ हो गया था,,,

Madhu





राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड की धार को अपनी बुर की गहराई में बड़े अच्छे से महसूस कर पाई थी उसका हर एक देखा उसके बच्चेदानी को छूकर गुजर जाता था यह एहसास उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन एहसास था इस तरह का अनुभव है अभी तक नहीं कर पाई थी शायद इतना मोटा लंबा लंड उसे मिला ही नहीं था,,,,

राजू के लंड से चुदवाकर सोनी अपने आपको अभी तक तुम्हें का मेंढक भी समझने लगी थी क्योंकि असली सुख तो आज उसे राजू ने दिया था,,,, उसकी संभोग की कार्यक्षमता उसकी कार्यशैली उसकी गरमा गरम हरकतें सब कुछ अद्भुत थी खास करके आम के बगीचे में खुले में हेड पंप के पास वाली हरकत सोनी को एकदम मदहोश और मस्त कर गई थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह इस तरह से आम के बगीचे में खुले में चुदाई का आनंद लेगी,,,, और बार-बार राजू का उसकी दोनों टांगों के बीच मुंह मारना उसे पूरी तरह से राजू का गुलाम बना दिया था राजू की बुर को चाटने की कार्यशैली देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गई थी इस तरह से आज तक किसी ने भी उसके साथ बुर चाटने वाली हरकत नहीं किया था उसकी जीभ बुर की गहराई तक चली जाती थी,,,,,,, बिना चुदाई किए ही वह उसका पानी निकाल चुका था,,, यही सबसे बड़ा उसकी मर्दाना ताकत का प्रमाण था,,,।सोनी को यह भी समझ में आ गया था कि राजू जितना भोला भाला मासूम चेहरे से लगता है उतना भोला भाला वह था नहीं औरतों के मामले में तो खास करके,,,, और यही अदा तो सोनी को भा गई थी उसे लगा था कि राजू को सब कुछ सिखाना पड़ेगा लेकिन,,, राजू तो पहले से ही संभोग की पूरी पुस्तिका का अध्ययन कर चुका था,,,,

सोनी को अपने खूबसूरत बदन पर गर्व होने लगा था,,, खास करके अपनी बड़ी बड़ी गांड पर,,क्योंकि राजू सबसे ज्यादा उसकी गांड से खेल रहा था और वही अंग उसे सबसे ज्यादा उत्तेजित भी कर रहा था,,,, मोटे तगड़े लंड की अगर तू अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर अभी भी महसूस कर पा रही थी,,,, जिस तरह की तेज धक्कों के साथ उसने उसकी चुदाई किया था वह अविस्मरणीय था बिना थके बिना हारे वह डंटा हुआ था जब तक की उसको पूरी तरह से पानी पानी ना कर दिया,,,,।



दूसरी तरफ राजू बहुत खुश था क्योंकि उसने कभी सोचा नहीं था कि बड़े घर की औरत की चुदाई कर पाएगा इस बारे में तो कभी वो सपने में भी नहीं सोचा था लेकिन लाला की बहन सोनी किसी सपने की तरह ही उसकी झोली में आ गिरी थी सब कुछ इतनी आसानी से और आराम से हो गया इस पर अभी भी राजू को विश्वास नहीं हो रहा था उसकी मदमस्त काया उसका गुदाज बदन उसकी गदराई जवानी,,, राजू को पूरी तरह से दीवाना बना गई थी जुदाई के मामले में भले ही सोनी ने राजू के आगे घुटने टेक दि‌ थी,,, लेकिन वास्तविकता यही थी कि सोने की गदराई मदमस्त जवानी के आगे राजू खुद ध्वस्त हो चुका था वह उसकी जवानी का कायल हो चुका था एक तरह से उसका गुलाम हो चुका था,,,,उसकी बुर से निकला नमकीन पानी का स्वाद अभी भी उसे अपने होठों पर महसूस हो रहा था,,,,जिसकी मादक खुशबू में वह पूरी तरह से लिप्त हो चुका था,,,, आज से एक नया अनुभव भी मिला था सोनी की बुर को चाटते हुए उसकी बुर से निकला नमकीन पेशाब की बूंदे उसके गले को तर कर गई थी जिसका एहसास उसे और ज्यादा उत्तेजित कर दिया था वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह इस तरह के हालात से गुजरेगा लेकिन उत्तेजना और मदहोशी के आलम में आज उसने सोनी के पेशाब की बूंदों को भी स्वाद ले चुका था और वह उसे किसी अमृतधारा से कम नहीं लग रही थी,,,,राजू की आंखों के सामने भी सोनी कीमत मस्त जवानी से भरी हुई बदन का हर एक कटा आंखों के सामने नाच रहा था उसके लाल लाल होंठ उसके तीखे नैन नक्श उसके गुलाबी गाल सुराही दार गर्दन हिरनी सी बलखाती कमर मदमस्त नितंबों का उभार ,,,,छातियों की शोभा बढ़ाते दोनों अमृत कलश,,, यह सब राजू के लिए बिल्कुल अनोखा था,,,, एकदम बेशकीमती खजाने की तरह,,, जोकि उसके हाथ लग चुका था,,,,,, मखमली बुर की कोमलता,,, और उसके अंदर की गर्मी अभी तक वह अपने अंदर महसूस कर रहा था,,,,,,, कमला चाची गुलाबी और फिर सोनी तीनों की दमदार चुदाई करके जिस तरह से उन तीनों को वह पूरी तरह से संतुष्ट किया था ईससे राजू का आत्मविश्वास और ज्यादा बढ़ गया था उसे अपने लंड पर पूरा यकीन हो गया था कि वह किसी भी औरत को पूरी तरह से तृप्त कर सकता है जिसमें सच्चाई भी थी,,,।

घर पहुंचते-पहुंचते शाम ढल चुकी थी,,,,, घर पर पहुंचा तो उसकी मां खाना बना रही थी और गुलाबी खाना बनाने में मदद कर रही थी वही आंगन में खाट पर बैठा हरिया बीड़ी सुलगा कर कश खींच रहा था,,,, राजू को देखते ही वह बोला,,,,।

Soni ki chuchi



दिन भर कहां घूम रहे थे छोटे सरकार,,,,

(हरिया की बात सुनते ही राजू कुछ बोलता है इससे पहले ही गुलाबी बोली,,,)

आज पढ़ने गया था भैया,,,,।

( गुलाबी की बात सुनते ही हरिया एकदम आश्चर्यचकित हो गया और बोला,,,)

क्या बोली पढ़ने गया था मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था,,,।

हां मुन्ना के बापू वो अपने मालिक है ना,,,,लाला उनकी बहन पढ़ाती है वह खुद आई थी गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए बोलने और आज सब बच्चे गए भी थे,,,,।

चलो,,, कुछ तो अच्छा हो रहा है नहीं तो इसे पढ़ने के लिए बोल बोल कर मै तो थक गया था,,, कुछ सीखा कि नहीं,,,,(राजू की तरफ देखते हुए राजू से बोला)

जी जी जी,,,, जी पिता जी,,,, क ख ग घ,,,,



चलो अच्छा है शुरुआत अच्छी हो रही है मैं भी यही चाहता था कि कुछ पढ़ लिख कर सीख जाता तो आगे काम देता,,,,

(अपने पिताजी की बात सुनकर राजू अपने मन में ही बोला कि का खा गा के साथ वह बहुत कुछ सीख कर आए हैं आज जिंदगी का सबसे अच्छा फल सपा सीख कर आया है,,,, किताबों के काले अक्षर ही नहीं पढ़ाई बल्कि आज लाला की बहन ने अपनी जवानी की किताब का हर एक पन्ना खोल कर उसे दिखा भी दी और शिखा भी दी,,, मन ही मन खुश होता हुआ राजू अपने पिता से बोला,,,)

जी पिताजी में अच्छे से सीख जाऊंगा,,,

मुझे तुमसे यही उम्मीद है अब जल्दी जाओ हाथ मुंह धो कर आ जाओ,,,, खाना खाना है,,,,

जी पिताजी,,,,(इतना कहकर वह घर से बाहर हाथ मुंह धोने के लिए चला गया राजू को घर से बाहर जाता देख कर गुलाबी भी उसके पीछे पीछे चल दी,,,,,, राजू हाथ मुंह धो रहा था तो गुलाबी उसके पास आकर खड़ी हो गई और बोली,,,)

कहां था रे तू आज दिन भर बाकी सब लड़के आ गए थे तुझे छोड़कर,,,,

अरे कहीं नहीं बुआ,,, गांव के नुक्कड़ पर बैठ गया था दोस्तों के साथ,,,,(राजू अपनी बुआ को झूठ मुठ का बात बना था मैं बोला क्योंकि सच्चाई तो वह बता नहीं सकता था,,,)

अच्छा चल कोई बात नहीं मेरे साथ जरा पीछे चलेगा,,,,

क्यों पीछे क्यों जाना है,,,

अरे बेल को पानी पिलाना है भैया ने कहां है,,, आज से पानी देना भूल गए थे रात को चिल्ला चिल्ला कर परेशान करेगा इसलिए भैया बोले कि उसके आगे एक बाल्टी पानी भर कर रख दो,,,

तो क्या हुआ जाओ ना बुआ,,,, अकेली चली जाओ,,,

मुझे डर लग रहा है,,,

डर लग रहा है किस बात का डर लग रहा है पहले तो नहीं लगता था आज अचानक से डर कैसे लगने लगा,,,,

अरे तू समझ नहीं रहा है मुझे कोई भूत प्रेत डर नहीं लगता वो क्या है ना कि आज पीछे बड़ा सांप निकला था इसलिए मुझे डर लग रहा तु लालटेन लेकर चल,,,

अच्छा यह बात है तो सीधे-सीधे कहो ना,,,,

तू एकदम बुद्धू है,,, आज दिन भर मैं तेरा कितना इंतजार कर रही थी आज बहुत सही मौका था भाभी एकदम गहरी नींद में सो रही थी,,,, आज दिन में चुदवाने का बहुत अच्छा मौका था,,,।

क्या बात कर रही हो बुआ,,,(राजू आश्चर्य जताते हुए बोला क्योंकि वह अपनी बुआ को यह नहीं जताना चाहता था कि उसकी बात सुनकर उसे पछतावा नहीं हुआ,,,,, इसीलिए वह आश्चर्यचकित होकर बोला था,,)

तो क्या सच कह रही हु तुझे याद करके मेरी बुर कितना पानी छोड़ रही थी ऐसा लग रहा था कि तेरी याद में बिछड़ कर रो रही है,,,,,,

ओ मेरी प्यारी बुआ,,,, कसम से तुम्हारी जुदाई मुझसे भी बर्दाश्त नहीं होती दिन में जो कसर रह गया था आज रात को पूरा कर दूंगा,,,,,

(अपने भतीजे की बातें सुनकर गुलाबी मन ही मन प्रसन्न हो गई और उसकी बुर पानी छोड़ने लगी,,,)

अरे अभी तक वहां क्या कर रहा है चल जल्दी आ,,,

(हरिया राजू को आवाज लगाते हुए बोला तो बीच में ही गुलाबी बोल पड़ी,,,)

आ रही हूं भैया जरा बैल को पानी देते अाऊ,,,, राजू भी चल रहा है,,,,

ठीक है गुलाबी जल्दी आना,,,, खाना लग रहा है,,,

जल्दी आई भैया,,,,,, राजू जल्दी से पानी की बाल्टी ले‌ले में लालटेन ले लेती हूं,,,,

ठीक है बुआ,,,,,(इतना कहकर वहां पानी से भरी बाल्टी उठा लिया और दोनों घर के पीछे की तरफ जाने लगे,,,,

सच कह रही हूं राजू आज बहुत अच्छा मौका था,,,

(गुलाबी दिन में मिले सुनहरे मौके का फायदा उठाने के लिए राजू को बोल रही थी जो कि वह उठा नहीं पाई थी,,,लेकिन अब गुलाबी को कौन समझाए कि वह पहले ही मीठी खीर थी लेकिन आज राजू दोपहर के समय मालपुआ खा कर आया था और भला खीर और मालपुआ का कोई मुकाबला हो सकता है,,,,,,, राजू कुछ बोल नहीं रहा था क्योंकि वह जानता था कि दिन की गर्मी को वह रात की ठंडक में एकदम शांत कर देगा उसे अपने लंड पर पूरा भरोसा था,,, दोनों बेल के सामने खड़े थे,,, राजू बिल के सामने पानी से भरी बाल्टी को रख दिया और बोला,,,।

ले पी ले रात को चिल्लाना नहीं,,,, नही तो खामखा बुआ की चुदाई करते करते मुझे बाहर आना पड़ेगा,,,,

और अगर राजू नहीं आया तो भैया को इसकी मां की चुदाई करते करते बाहर आना पड़ेगा,,,,।

(इतना कहने के साथ ही दोनों हंसने लगे दोनों के बीच समाज की नजरों में बुआ और भतीजे का रिश्ता बरकरार था लेकिन दुनिया यह नहीं जानती थी कि चारदीवारी के अंदर यही पुरवा और भतीजा अपने रिश्ते नातों को भूलकर एक मर्द और एक औरत बन जाते हैं जो कि सारी रीति-रिवाजों मर्यादा की दीवार को लांघकर एक दूसरे में समा जाते हैं,,,,गुलाबी और राजू दोनों एक-दूसरे से काफी हद तक खुल चुके थे,,,, गुलाबी हंसते हुए लालटेन राजू को पकड़ा दी और इधर उधर चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगी,,,)

क्या हुआ बुआ अब क्या देख रही हो,,, यहां कहीं भी साफ नहीं है,,,

तेरे पजामे में तो है ना,,,,

हां यह बात तो है बुआ लेकिन क्या तुम्हें उस से डर नहीं लगता,,,

नहीं रे तेरे पजामे के अंदर का सांप तो मेरे काबू में है क्योंकि इसकी गुफा जो मेरे पास है उसी में जाकर शांत हो जाता है,,,

हाय तुम ऐसी बातें मत करो नहीं तो मेरा सांप तुम्हारी गुफा में जाने के लिए उतावला हो जाएगा,,,

उसे समझा कर रख थोड़ी देर इधर-उधर घूम ले रात को इसे अपनी गुफा में लेकर सो जाऊंगी,,,,

हाय बुआ तुम तो मेरी तडप बढ़ा रही हो,,, जल्दी चलो यहां खड़ी खड़ी क्या कर रही हो,,,,

अरे रुको ना चलते हैं,,, तो पहले लालटेन की लो धीमी कर दें उजाला बहुत है,,,

क्यों बुआ इरादा क्या है,,,

अरे मुझे जोरों की पेशाब लगी है मुतना है ,,,

(गुलाबी की बात सुनते ही राजू का लंड पूरी तरह से खड़ा होने लगा,,,,)

हां ऐसी बात करके सच में तुम मुझे मजबूर कर रही हो मुझसे रात तक का इंतजार नहीं होगा,,,

लालटेन की लौ धीमी तो कर मुझे जोरो की पिशाब लगी और तुझे चुदाई की पड़ी है,,,,

क्या करूं वह मेरी आंखों के सामने इतनी खूबसूरत लड़की खड़ी है और मैं अपने आप पर सब्र कैसे रख सकता हूं,,,।

तु जल्दी से लौ धीमी कर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,(गुलाबी अपनी जगह पर खड़े खड़े कसमसाते हुए बोली,,,)

अरे ऐसे ही कर लो ना बुआ यहां कौन देखने वाला है ,,,

तेरे सामने,,,, तेरे सामने मुझे शर्म आ रही है,,,

आआआआ हा,,,,,,,, हाय मेरी शर्मीली बुआ जब अपनी दोनों टांगें खोलकर मेरे लंड को अपनी बुर में लेकर उछल उछल कर चुदवाती हो तुम शर्म नहीं आती,,,

तब बात कुछ और होती है तब तो नशा सा छाने लगता है,,,

लेकिन अभी तो मुझे नशा छा रहा है और मैं लालटेन किलो धीमी नहीं करूंगा तुम्हें मेरी आंखों के सामने पेशाब करना होगा मैं आज देखना चाहता हूं कि तुम पेशाब करते हुए कैसी लगती हो,,,,

तू सच में पागल है,,,

जल्दी करो बुआ,,, नहीं तो मा आ जाएगी बुलाने,,,

(राजू की बातों को सुनकर गुलाबी समझ गई थी कि ऐसे मरने वाला नहीं है अपनी मनमानी करके ही रहेगा और वैसे भी उसकी बात सुनकर गुलाबी के मन में भी उत्सुकता जगने लगी,,,वह भी राजू की आंखों के सामने पेशाब करके देखना चाहती थी उसके बदन में भी उत्तेजना की कसमसाहट होने लगी थी,,, वो पूरी तरह से तैयार थी,,,,इसलिए वह नखरा दिखा दे मैं अपनी सलवार की दूरी खोलने लगी और राजू के ठीक सामने खड़ी थी और राजू ठीक उसके पीछे लालटेन लिए खड़ा था चारों तरफ लालटेन के दायरे में उजाला था बाकी चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था और यहां पर कोई आता भी नहीं था इसलिए राजू निश्चिंत था निश्चिंत तो गुलाबी भी थी बस दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,, गुलाबी अपनी सलवार की डोरी खोलते हुए बोली,,,)

ठीक है मैं मुत लेती हूं लेकिन अगर भाभी आ गई तो कह दूंगी की लालटेन बंद था इसने दोबारा चालू कर दिया देखने के लिए,,,,,, फिर देखना तुझे कैसी डांट पड़ती है

कोई बात नहीं बुआ,,, तुम्हें पेशाब करते हुए देखने के लिए तो मै मार भी खा सकता हूं,,,,

(इतना कहते हुए वहां लालटेन की रोशनी में अपनी बुआ गुलाबी को देखने लगा जो कि अपनी सलवार की दूरी को खोल चुकी थी और अपनी सरकार को ठीक कर चुकी थी गुलाबी भी मन ही मन मुस्कुरा रही थी और खुश हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि जैसे ही वह सलवार को नीचे करेगी उसकी गोल-गोल गांड उसकी आंखों के सामने लालटेन के उजाले में चमक उठेगी और उसको चमकता हुआ देखकर उसकी आंखों की चमक बढ़ जाएगी,,,, इसलिए वह भी बेकरार थी अपनी गांड दिखाने के लिए,,, वह अपनी सलवार को नीचे की तरफ करने लगी अब उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी,,, देखते ही देखते गुलाबी अपनी शलवार को घुटनों तक खींच दी,,,, लालटेन के उजाले में उसकी मदमस्त गोरी गोरी गांड चमकने लगी,,,, यह देख कर राजू की सांस अटक ने लगी ऐसा नहीं था कि राजू ने अपनी बुआ को नंगी देखा नहीं था वह खुद अपने हाथों से अपनी बुआ को नंगी भी कर चुका था लेकिन पेशाब करते हुए उसे शायद पहली बार देख रहा था इसलिए उसकी आंखें खुमारी के नशे में डूबने लगी थी,,,। गुलाबी भी उसकी तड़प को बढ़ाते हुए अपने दोनों हाथों को अपनी गोल-गोल गांड पर रखकर उसे अपनी हथेली में दबोचते हुए पीछे नजर घुमा कर उसकी तरफ देखने लगी,,, गुलाबी की हरकत राजू के लिए असहनीय साबित हो रही थी उसकी हालत खराब हो रही थी और गुलाबी भी यही चाहती थी,,,,गुलाबी यहां पर किसी युक्ति को अंजाम देने के लिए नहीं आई थी बल्कि यह सब एकाएक अचानक ही हो रहा था और इसमें दोनों को मजा आने लगा था,,,,।

हाय बुआ तुम्हारी गांड कितनी खूबसूरत है,,,, मन कर रहा है कि इसे चूम लूं,,,,

Gulabi ki mast gaand ,,,pesab karte huye Gulabi



रात को चुमना मेरे राजा,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी मादक अदा बिखेरते हुए नीचे बैठ गई और पेशाब करने लगी,,, राजू की तो सांसे ही अटक गई थी बेहद काम उत्तेजना से भरपूर मादक दृश्य उसकी आंखों के सामने था,,,। जैसे ही बार पेशाब करना शुरू कि उसकीउसकी गुलाबी बुर्की गुलाब की पत्तियों के पीछे से नमकीन खारे पानी का झरना जैसे ही फुटा वैसे ही उसमें से सुमधुर संगीत की ध्वनि राजू के कानों में पड़ने लगी और वह उस मधुर मादक ध्वनि में पूरी तरह से खो गया,,,, अद्भुत दृश्य का नजारा था उसकी आंखों के सामने उसकी जवान बुआ अपनी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थी,,, जोकि राजू के लिए मादकता से भरा हुआ था राजू क्या उसकी जगह कोई भी होता तो मैं पूरी तरह से मस्त हो जाता,,,,राजू से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था और वहां अपने पहचानने में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया और उसे एक हाथ से मुठीयाते हुए एक हाथ में लालटेन लिए गुलाबी के बेहद करीब पहुंच गया और एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर थोड़ा सा झुक कर वहां गुलाबी की गांड को अपनी हथेली से सहलाने लगा,,, जैसे ही गुलाबी पीछे की तरफ नजर घुमाई तो राजू का खडा लंड उसके गालो पर रगड खा गया,,, गुलाबी उत्तेजना के मारे एकदम से कसमसा उठी और बिना देर किए बिना सोचे समझे राजू के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,।

आहहहहह बुआआआआआ,,,,,,

(राजू के मुंह से गरम सिसकारी की आवाज फूट पड़ी क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसकी बुआ इस तरह की हरकत करेगी,,, वह पूरा का पूरा मुंह में लेकर चुसना शुरु कर दी थी,,,, अद्भुत सुख का अहसास राजू और गुलाबी दोनों को हो रहा था एक साथ गुलाबी दो-दो काम कर रही थी मुत भी रही थी और राजू के लंड को मुंह में लेकर चूस भी रही थी,,,। राजू से बर्दाश्त नहीं हो रहा था जल्द से जल्द अपने लंड को गुलाबी की गुफा में डाल देना चाहता था गुलाबी भी पेशाब कर चुकी थी उसकी बुर में भी चींटियां रेंग रही थी,,, राजू ने तुरंत फुर्ती दिखाते हुए लालटेन को एक डाली में टांग दिया और नीचे झुककर उसकी कमर पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा,,, गुलाबी कि शायद उसके सारे को समझ गई थी और गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार उसकी तरफ खींची चली जा रही थी जैसे ही वह खड़ी हुई राजू उसकी कमर पकड़कर अपनी तरफ खींचने लगा और गुलाबी थोड़ा सा झुक गई और अपनी गांड को दुश्मन को नेस्तनाबूद करने के लिए अपनी गांड की तोप ऊपर की तरफ हवा में लहरा दी,,, पर मौके की नजाकत को समझते हुए राजू अपने लंड को उसकी तोप की गुफा में दाग दिया,,,





उत्तेजना के मारे उसकी बुर चिपचिपा गई थी जिससे राजू का लंड पहली बार में ही उसकी बुर के अंदर सटक गया,,, राजू बिना थी उसकी कमर पकड़कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, दोनों मदहोशी में सब कुछ भूल गए थे दोनों एक ही भूल गए थे कि किसी भी वक्त उन्हें बुलाने के लिए उसके मा या उसके पिताजी आ सकते हैं दोनों बस मजा लेना चाहते थे अपने अपने गर्म लावा को निकाल कर अपनी प्यास बुझाना चाहते थे,,, राजू की कमर अभी तेजी से रफ्तार पकड़ी हुई थी कि दूर से अाती आवाज सुनाई दी,,,।

राजू और राजू गुलाबी इतनी देर से क्या कर रहे हो तुम दोनों,,,

(राजू अपनी मां की आवाज सुनते ही जोर जोर से एक दौ और धक्का मार के अपना लंड बाहर निकाल लिया,,,,सारे मजाक पर पानी फिर गया था उसकी मां दोस्त से मिलने बुला रही थी वो किसी भी वक्त यहां आ सकती थी इसलिए राजू तुरंत अपने पैजामा को ऊपर करते हुए बोला,,,)

जल्दी करो बुआ अपनी सलवार पहन लो,,,

इसीलिए मैं कह रही थी,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी सरकार पकड़ कर अपनी कमर सकी थी और उसकी डोरी बांधने लगी राजू अपनी मां के वहां आने से पहले एकदम दुरुस्त हो गया था गुलाबी भी अपने कपड़ों को व्यवस्थित कर लेती हो जानबूझकर लालटेन को अपने हाथ में ले ली थी और राजू से बोली,,,)

चल राजू देर हो रही है भाभी बुला रही है,,,,

(इतना कहते हुए मधु उन दोनों के पास पहुंचती वह दोनों खुद आगे बढ़ गए थे,,,)

कितनी देर लगा दीए तुम दोनों,,,

क्या करूं भाभी बेल था कि पानी पीने का नाम ही नहीं ले रहा था थक हार कर उसके सामने रख कर चले आए,,,,

चल ठीक करी चलो जल्दी से खाना लगा है खा ले,,,,।

(राजू और गुलाबी दोनों अपने मन में सोचे कि बाल बाल बचे,,,, उन दोनों को अत्यधिक उन्माद और उत्तेजना का नशा छा गया था राजु अपना गर्म लावा अपनी बुआ की बुर में डाल देना चाहता था लेकिन उससे पहले उसकी मां गई थी सारा मजा किरकिरा हो गया था इस तरह से घर के पीछे चुदाई करने में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हुआ था इसी की वजह से गुलाबी सचेत होने के बावजूद भी एक दम मदहोश हो गई थी,,,, सभी लोग साथ में खाना खाने लगे और खाना खाने के बाद भाभी और ननद दोनों बर्तन भास्कर अपने अपने कमरे में चले गए,,,,, हरिया अपनी बीवी मधुर के और राजू अपनी बुआ गुलाबी के कपड़े उतार कर तुरंत नंगी कर दिया क्योंकि घर के पीछे की खुमारी उसकी आंखों में अभी भी छाई हुई थी और बिना रुके ताबड़तोड़ धक्के पर धक्के लगाने लगा,,,, अंत में थक हार कर दोनों एक दूसरे की बाहों में नंगे ही सो गए,,।
 
इसी तरह से राजू के दिन अच्छे गुजरने लगे थे,,,, ऐसा लग रहा था कि राजू की हथेली में चांद उतर आया हो,,, जिस उम्र में लड़के सिर्फ सपने देखा करते थे कल्पनाओं की दुनिया में उनकी पसंदीदा औरतों के साथ रंगरेलियां मनाते हुए अपना हाथ से हिला कर काम चलाते थे उस उम्र में राजू तीन तीन औरतों की चुदाई कर रहा था,,,, । और तीनों औरतें उसके मर्दाना अंग का लोहा मानने लगी थी,,,,।

सोनी पढ़ाने के बाद रोज उसी तरह से राजू को वापस बुला लेती थी और पूरे बगीचे में चुदाई का नंगा नाच नाचा करती थी,,,, राजू के साथ उसे अब बहुत मजा आने लगा था,,, घर पर भी वह‌अपने बड़े भाई से चुदवाती थी,,,,,,, लेकिन जो मजा राजू के साथ आ रहा था अब लाला के साथ उसे बिल्कुल भी नहीं आता था क्योंकि राजू के लंड की लंबाई और चौड़ाई के मुताबिक उसकी बुर में सांचा बन चुका था,,,। जिसमें लाला का पतला लंड जाता जरूर था लेकिन कुछ महसूस नहीं करवा पा रहा था,,,, लाला को तो इस बात की भनक तक नहीं थी कि पढ़ाने के बहाने उसकी बहन गांव के लड़के से चुदवाने जाती है,,,,,,।





दूसरी तरफ गुलाबी का जीवन एकदम गुलाबी हो गया था उसके जीवन में बहार आ गई थी शादीशुदा जिंदगी से पहले ही वह रोज सुहागरात मना रही थी और रोज राजू से नए नए तरीके से पूरी संतुष्टि प्रदान कर रहा था,,,, मधु वैसे तो पूरी तरह से सामान्य ही रहती थी लेकिन कभी-कभी जब वह शांत बैठी रहती थी तो उसे वहीं कुंए वाली घटना याद आ जाती थी और उसे अपनी गांड के बीचो बीच अपने बेटे का मोटा तगड़ा लंबा लंड धंसता हुआ महसूस होने लगता था,,,, और उस पल को याद करके वह गनगना जाती थी ,,, इसीलिए वह कभी भी आप उसे साथ में कुए पर चलने के लिए नहीं बोलती थी उसे इस बात का डर था कि कहीं वह खुद बहक ना जाए आखिरकार राजू उसका सारा बेटा था और वह अपने सगे बेटे के बारे में इस तरह के गंदे ख्याल अपने दिमाग में नहीं लाना चाहती थी,,,,,,,।



ऐसे ही दिन सुबह राजू नहा धोकर तैयार हो गया था पढ़ने जाने के लिए उसकी मां मधु खाना बना रही थी,,,, गुलाबी घर का काम कर रही थी और वह पढ़ने जाने से पहले खाना खाकर ही जाता था इसलिए अपनी मां के पास आकर वह खड़ा हो गया और बोला,,,।

मैं खाना तैयार हो गया है,,,

हां बस थोड़ा रुक जा मैं तुझे गरमा गरम परोसती हुं,,,,(इतना कहकर वह जल्दी-जल्दी रोटियां बेलने लगी राजू ठीक उसके सामने खड़ा होकर उसे रोटियां बेलता हुआ देख रहा था कि तभी उसकी नजर,,, उसकी मां की छातियों की तरफ गई तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिरा हुआ था जो कि गिरा हुआ नहीं था गर्मी की वजह से मधु जानबूझ कर उसे अपने कंधे से अलग कर दी थी और राजू की किस्मत तेज थी कि ब्लाउज का ऊपर वाला बटन खुला हुआ था,,,, राजू को सब कुछ साफ नजर आ रहा था अपनी मां की छातियों को देख कर उसके मुंह में पानी आ गया था ,,, एकदम गदराई हुई,,,,मांसल भरी हुई छातियां अपनी आभा बिखेर रही थी,,, पहले से ही मधु की चूचियां खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी कौन होती और वह ब्लाउज छोटा ही पहनती थी और इसी वजह से उसकी आधे से ज्यादा चूचीया पहले से ही बाहर झांका करती थी और आज ब्लाउज का ऊपर वाला बटन खुला होने की वजह से राजू को अपनी मां की चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी पसीने से लथपथ पसीने की बूंदे मोती के दाने की तरह उसकी छातियों से लगी हुई थी और धीरे-धीरे चुचियों पर फिसल रही थी जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,, पसीने से तरबतर चूचियां और ज्यादा मोहक और मादक लग रही थी,,, हालांकि राजू को अभी अपनी मां की चूचियों कई निप्पल नजर नहीं आ रही थी इसलिए वह थोड़ा सा आगे की तरफ झुक कर,,, ब्लाउज के अंदर झांकने की कोशिश करने लगा क्योंकि जब तक सूचियों के साथ-साथ अंगूर का दाना नजर नहीं आता तब तक देखने वालों का मन नहीं भरता और किसी कोशिश में राजूअपनी मां के ब्लाउज के अंदर झांक रहा था और उसकी यह कोशिश रंग लाने लगी उसे अपनी मां की चुचियों के बीच की शोभा बढ़ा रही अंगुर नजर आने लगे जिस पर नजर पड़ते ही राजू का लंड फूलने लगा,,,, उत्तेजना के मारे राजू का गला सूखता जा रहा था ऐसा नहीं था कि वहां पहली बार अपनी मां की चुची को देख रहा था,,,दीवार में बने छोटे से छेद से वह अपनी मां की कामलीला को और उसके बदन को पूरी तरह से नंगी देख चुका था उसके अंग अंग से दूर से ही वाकिफ हो चुका था लेकिन आज के बाद कुछ और थी पूरी तरह से नग्नता मैं जितना मजा नहीं आता उससे कहीं ज्यादा अर्ध नग्न अवस्था में औरत के मादक शरीर को देखने में उत्तेजना का अनुभव होता है और यही राजू के साथ भी हो रहा था वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी नंगी चुचियों को पहले भी देख चुका था लेकिन आज ब्लाउज में उसकी हल्की सी झलक पाकर वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था,,,,मधु को इस बात का आभास तक नहीं था कि उसका बेटा उसकी आंखों के सामने खड़ा होकर उसके ब्लाउज में झांक रहा है और वह पूरी तरह से बेफिक्र होकर रोटी पका रही थी उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिरा हुआ है और ब्लाउज के ऊपर का बटन खुला हुआ है जिसमें से उसकी आधे से ज्यादा चूचियां नजर आ रही है,,,।



राजू अपनी मां को इस हाल में देखकर बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और उसे अपनी मां की खूबसूरती का आभास भी हो रहा था वह अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मां की चूचियां दूसरी औरतों से कहीं ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक है,,,, जिसकी हल्की सी झलक पाकर उसकी हालत खराब होती जा रही थी,,, उसका मन तो कर रहा था कि उसके पास बैठकर वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर उसका मजा ले लेकिन ऐसा कर नहीं सकता था कुए पर का अनुभव उसे बहुत अच्छे से था अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को वह बहुत करीब से महसूस कर पाया था और उत्तेजना के अद्भुत अनुभव से परिचित हो पाया था,,,



अपनी मां की चुचियों के निप्पल को देखकर उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी ब्लाउज में कैद चूचियों की निप्पल अंगूर के बड़े दाने की तरह नजर आ रही थी जिसका रस पीने में अद्भुत सुख का अनुभव महसूस होता होगा एक तरह से पल भर में उसे अपने पिता से ईर्ष्या होने लगी थी कि उसके हाथों में इतनी खूबसूरत औरत है जिसको जब चाहे तब वह चोद सकता है राजू को ऐसी पलिया ख्याल आने लगा कि अगर उसे मौका मिलेगा तो अपनी मां को जरूर अद्भुत सुख देगा उसे पूरी तरह से संतुष्टि प्रदान करेगा क्योंकि उसे अपने लंड पर पूरा भरोसा था और वह अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर उसकी मां एक बार उसके लंड को अपनी बुर में ले लेगी तो उसकी गुलाम बन जाएगी,,,, जैसा की कमला चाची उसकी बुआ और सोनी का हाल हो रहा था,,,,।

राजू उत्तेजना में इतना ज्यादा ओतप्रोत हो गया था कि उसे इस बात का भी आभास नहीं हुआ कि उसके पजामे में पूरी तरह से तंबू बना हुआ है,,, वह लार टपका ता हुआ ललचाई आंखों से अपनी मां के ब्लाउज में ही झांक रहा था,,,, इस तरह से खड़ा देखा कर मधु उससे बोली,,,।

अरे खड़ा क्यों है बैठ,,,,(इतना कहते हुए जैसे अपनी नजरों को ऊपर की तरफ उठाई और अपने बेटे की तरफ देख कर उसकी नजरों को देखी तो उसके शब्द उसके मुंह में ही अटक गए क्योंकि उसे इस बात का आभास हो गया कि उसका बेटा उसकी ब्लाउज में झांक रहा है और वह अपनी नजरों को नीचे करके अपनी छातियों की तरफ देखी तो पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि उसे इस बात का आभास हो गया कि उसके उसका बटन खुला हुआ है उसमें से उसके आधे से ज्यादा चूचियां नजर आ रही हैं और उसे देखकर उसका बेटा ललच रहा है,,,, मधुर की तो हालत खराब हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपने बेटे की हरकत पर उसे शर्म महसूस होने लगी क्योंकि राजू उसका सारा बेटा था वह सजा बेटा होने के बावजूद भी वह बड़े मजे लेकर उसकी चुचियों को देख रहा था यह बात मधु को अजीब लग रही थी उसे तुरंत कुंए वाली बात याद आ गई जब कोई मे से बाल्टी खींचने के बहाने वह ठीक उसके पीछे खड़ा था और उसकी गांड के बीचो बीच अपने लंड को धंसाय चला जा रहा था,,, मधु अपने बेटे की इस हरकत को देख कर उसे समझ में आ गया था कि उस दिन जो कुछ भी हुआ था राजू जानबूझकर किया था उसे इस बात का आभास था कि उसका लंड पजामे में तंबू बनाया हुआ है और उसी तंबू को वह जानबूझकर उसकी गांड से रगड़ रहा था,,,,

RRaju or Gulabi





उस दिन वाली घटना और अभी मौजूदा हालात को देखकर मधु शर्म से गडी जा रही थी,,। मधु को समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा इतनी गंदी हरकत कैसे कर सकता है,,,, मधु यह सब सोच रही थी कि तभी,,,,उसकी नजर अपने बेटे के पजामे में बने तंबू पर गई तो उसका मुंह खुला का खुला रह‌ गया,,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे बैल और भैंस बांधने के लिए कोई खूंटा उसके पजामे में अटक गया हो,,,, मधु की अनुभवी आंखें समझ गई थी कि उसके बेटे के पजामे जबरदस्त खुंटा है तभी तो कुंए पर साड़ी पहनी होने के बावजूद भी गांड के बीच धंसा चला जा रहा था,,,,,,, मधु को समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा उसे देखकर इस तरह उत्तेजित क्यों हुआ जा रहा है,,,,अपनी मां को देखकर उसके मन में इतने गंदे विचार क्यों आ रहे हैं,,,यह सब ख्याल मन में आने के बावजूद भी मधु को भी ना जाने कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था उसे अपने बदन में भी गुदगुदी सी महसूस होने लगी थी खास करके उसे अपनी दोनों टांगों के बीच हलचल सी महसूस हो रही थी,,, उसे अपनी पतली दरार में से काम रस रिश्ता हुआ महसूस होने लगा था,,,, पल भर में ही मधु की भी सांसे भारी हो चली थी और गहरी सांस लेने की वजह से,,, चुचियों का ऊपर नीचे होना अपनी अलग ही कहानी बयां कर रहा था अपनी मां की उठती बैठती चूचियों को देखकर राजू की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी,,,।,,,

दूसरी तरफ मधु अजीब सी कशमकश में थी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,, उसे इस बात का डर था कि कहीं गुलाबी या मुन्ना के पापा ना आ जाए और इस हाल में देखकर कहीं कुछ गलत ना समझ बैठे इसलिए बहुत अपने साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए राजु से बोली,,)



तू बैठ में खाना लगाती हूं,,,,

(अपनी मां की बात सुनकर जैसे वह नींद से जागा हो इस तरह से एकदम से हड़बड़ा गया और अपनी गलती का एहसास उसे होते ही वह वहीं पास में नीचे बैठ गया,,, मधु असहज महसूस कर रही थी वह जल्दी जल्दी खाना परोस कर थाली को अपने बेटे के आगे रख दी,,, और वापस रोटियां बेलने में लग गई,,, राजू जल्दी-जल्दी खाना खाकर जा चुका था उसके बाद में उत्तेजना का अनुभव अभी भी हो रहा था दूसरी तरफ मधु की हालत खराब होती जा रही थी वह समझ गई थी कि उसका बेटा बड़ा हो रहा था,,,, लेकिन उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी ही मां के बारे में गंदे विचार मन में लाकर उत्तेजित क्यों हो रहा था मधु को यह सब अच्छा नहीं लग रहा था आखिरकार वह उसकी सगी मां थी और वह उसका सगा बेटा था,,,,

राजू अपनी मां की चूचियों के बारे में सोचते हुए,, श्याम के घर की तरफ चला जा रहा था वह पढ़ने जाने के लिए उसे रोज बुलाने जाता था,,,, देखते ही देखते वह उसके घर पर पहुंच गया,,,,घर के बाहर खड़ा होकर वहां श्याम का नाम लेकर बुलाने लगा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला तो घर में प्रवेश कर गया और इधर उधर देखते देखते वह सीधा अंदर की तरफ जाने लगा,,, तीन कमरे सीधे-सीधे बने हुए थे राजू धीरे-धीरे इधर उधर देखता हुआ तीसरे कमरे में पहुंच गया था लेकिन उधर भी कोई नहीं था तीसरे कमरे के पीछे दरवाजा बना हुआ था वह सोचा शायद उधर होगा और यही सोचकर वह तीसरे कमरे को भी पार कर गया और तीसरे कमरे को पार करते उसकी आंखों के सामने जो नजारा नजर आया उसे देखकर उसके होश उड़ गए,,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,,।
 
तीसरे कमरे को पार करते ही,,, जिस तरह का नजारा राजू की आंखों के सामने नजर आया उसे देखकर राजू के तो होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,,,, वह आखे फाडे उस अद्भुत दृश्य को देखने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा है ना कि वह श्याम के घर पर इस तरह का नजारा देख पाएगा,,,,,और वह भी तीन कमरों को पार करने के बाद घर के पीछे जो जगह चारों तरफ से पेड़ पौधों के साथ-साथ लकड़ी के पाटीयो को जोड़कर एक घेराबंदी से जोड़ा गया था,,,,, घर के पीछे की हरियाली आंखों को ठंडक प्रदान तो कर ही रही थी लेकिन घर के पीछे का अद्भुत नजारा पूरे बदन में गर्मी फैला रहा था,,, राजू की तो सांसे ही बंद हो चली थी वह बस एकटक उस नजारे को देख जा रहा था,,,,राजू आखिरकार कर भी क्या सकता था उसकी आंखों के सामने नजारा ही कुछ ऐसा था अगर उसकी जगह कोई और होता तो उसका तो शायद,,, खड़े-खड़े पानी निकल जाता नजारा ही इतना मादकता से भरा हुआ था,,,।

Jhumri is tarah se naha rahi thi



क्योंकि सामने एकदम नंगी खड़ी होकर की श्याम की बहन जिसका नाम झुमरी था वह नहा रही थी,,,,वह पूरी तरह से पानी में भीगी हुई थी उसके बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था वह संपूर्ण रूप से एकदम नंगी खड़ी थी,,,, ज्यादा गोरी तो नहीं थी लेकिन खूबसूरती के सांचे में उसका बदन ढाला हुआ था,,,, उसकी पीठ राजू की तरफ थी,,, जिसकी वजह से उसकी नंगी चिकनी मखमली पीठ के साथ-साथ उसके उभार दार नितंब अपनी आभा बिखेर रहे थे,,।तीन तीन औरतों का अनुभव राजू को औरतों के बदन के भूगोल को समझने में काफी मददगार साबित हो रहा था,,,, झुमरी की उभारदार गांड को देखकर राजू समझ गया था कि झुमरी की जवानी पूरी तरह से गदराई हुई जिसका रस निचोड़ कर पीने बहुत मजा आएगा,,,,अभी तो राजू केवल अपनी आंखों से ही दूर खड़ा होकर उसकी जवानी का रसपान कर रहा था,,,, राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा था झुमरी बार-बार नीचे झुककर बाल्टी में से लोटा भर भर कर पानी अपने ऊपर डाल रही थी,,,, वह खड़ी होकर नारायण की ओर झुकने की वजह से जब जब वह चूक रही थी तो उसकी गदराई गांड आसमान में चांद की तरह निखर कर सामने आ रही थी,,,, राजू दूर से ही खड़ा होकर इस दृश्य को देखकर ललचा रहा था और उसके मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आना शुरू हो गया था,,, उत्तेजित अवस्था में वह श्याम की बहन झुमरी को नहाता हुआ देखकर पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को दबाना शुरू कर दिया था,,, लोटे से किसका हुआ पानी उसके बदन के हर एक कोने तक पहुंच रहा था उसके रेशमी बालों को बिग उड़ता हुआ उसकी चिकनी पीठ से सरक कर उसके संपूर्ण नितंबों को भी भीगोता हुआ उसके नितंबों की पतली गहरी दरार में प्रवेश करके उसकी नंगी चिकनी जांघों को अपनी आगोश में लेता हुआ उसके कदमों में जाकर गिर जा रहा था,,,, एक तरह से तो राजू को उसके बदन पर उसके बदन को भिगो रहे पानी की बूंदों से जलन होने लगी थी अपने मन में सोच रहा था कि काश वह भी पानी होता तो उसके बदन को पूरी तरह से अपनी आगोश में भर लेता,,,,

झुमरी की गोल गोल भरी हुई चिकनी गांड पर राजू का मन फिसल रहा था,,,, उसका मन कर रहा था कि आगे बढ़कर झुमरी को अपनी बाहों में भर ले और उसके साथ भी मजा मार ले,,,,,, पजामे में राजू का लंड पूरी तरह से टनटना कर खड़ा हो गया था आखिरकार एक जवान नंगी लड़की को देखेगा तो किसी का भी लंड खड़ा ही हो जाएगा और इतनी खूबसूरत है बदन का हर एक कौण एकदम लाजवाब था हालांकि अभी तक राजू ने उसको पीछे से ही देखा था उसकी तरबूज जैसी गोल-गोल गांड को देखकर राजू का मन उसकी नारंगी जैसे चुचियों को देखने का मन कर रहा था,,। लेकिन वह नहाने में मशगूल थी,,,उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि उसके पीछे खड़ा होकर कोई जवान लड़का उसके नंगे बदन को देख कर मस्त हो रहा है,,,,,,,





श्याम की बहन झुमरी को देखकर राजू गर्म आहें भर रहा था,,, कि तभी उसके पैर से पास में पड़ा लोटा,,, लग कर नीचे गिर गया और उसकी आवाज के साथ ही झूमरी पीछे नजर घुमा कर देखी तो,,, सामने दरवाजे पर राजू खड़ा था,,, एक बार तो उस पर नजर पड़ते ही झुमरी घबरा गई लेकिन वह राजू को अच्छी तरह से जानती थी वैसे भी छोटा सा गांव होने की वजह से लोग एक दूसरे को जानते ही थे,,,, राजू को देखकर अपने आप को संभालते हुए वह बोले,,,।

तु यहां क्या कर रहा है,,,,,,

तुझे देख रहा हूं,,,,मममम,, मेरा मतलब है कि मैं यहां शयाम को ढूंढते हुए आया हूं,,,(राजु एकदम से हकलाते हुए बोला,,, उसकी घबराहट देखकर झुमरी अंदर ही अंदर मुस्कुराने लगी,,,)

आया तो है तू श्याम को ढूंढने लेकिन मुझे भी अच्छी तरह से समझ में आ रहा है कि तू मुझे ही देख रहा है वरना तु यहां से चला गया होता,,,,



नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है झुमरी मैं अभी-अभी आया हूं,,,,(राजू फिर से घबराहट भरे स्वर में बोला,,,,झुमरी अभी भी राजू की तरफ पीठ करके खड़ी थी सिर्फ गर्दन घुमा कर उससे बात कर रही थी,,, राजू का मन उसकी चुचियों को देखने का कर रहा था,,, जहां तक राजू का मानना था कि चुचियों को देखकर ही उसकी सुंदरता का अंदाजा लगाया जाता है,,,,,,)

अभी-अभी आया है तो चला जाना चाहिए था ना खडा क्यों है,,,,(झुमरी बात तो उसे जरूर कर रही थी लेकिन उसकी नजरों को भांपने की कोशिश कर रही थी,, उसे साफ पता चल रहा था कि राजू भले ही लाख सफाई दे रहा हूं लेकिन उसकी नजर उसके नंगे चिकने बदन के साथ-साथ उसकी गांड पर टिकी हुई थी राजू बार पर उसकी गांड की तरफ देख रहा था उसकी ललचाई नजरों को झुमरी अच्छी तरह से पहचान रही थी और अंदर ही अंदर झुमरी राजू की प्यासी नजरों को देखकर खुश भी हो रही थी ,,,राजू का उसको इस तरह से प्यासी नजरों से देखना अच्छा लग रहा था,,,,)

वो तो बस,,,,,(इतना कहकर राजू खामोश हो गया इसे ज्यादा बोलने की हिम्मत उसमें नहीं थी,, तो झुमरी ही उसकी बात को सुनकर बोली,,,)

क्या वह तो बस,,,, मुझे नंगी देख रहा था ना और लगता है कि अभी तक ठीक से देखा भी नहीं है,,,,(झुमरी की बातों को सुनकर राजू एकदम शांत हो गया क्योंकि झुमरी एकदम खुले शब्दों में बोल रही थी,,,,) अच्छा ले,,,,

(पर इतना कहने के साथ ही झुमरी जो कि अभी तक उसकी तरफ पीठ करके खड़ी थी वह उसकी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई बिना शर्माए बिना घबराए एकदम बेझिझक,,, ऐसा लग रहा था कि एक अनजान लड़के के उसे नंगी देखी जाने पर भी उसे बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं हो रही है,,,, राजू की आंखों के सामने जो मरी एकदम सीना ताने खड़ी थी उसकी बदमस्त गोल गोल नारंगी जैसे चुचियों पर नजर पड़ते ही राजू के मुंह में पानी आ गया वह पागलों की तरह आंखें फाड़े उसकी छातियों की तरफ देख रहा था,,,, उसकी छातियों में बेहद आकर्षक कसक था,, जिस के आकर्षण में राजू पूरी तरह से खींचता चला जा रहा था,,,, एकदम नारंगी को की आकार की बेहद आकर्षक सूचियों की मालकिन थी झुमरी ऐसा लग रहा था कि अभी तक उसकी नारंगीयों का रस किसी ने चखा नहीं था,,, झुमरी उसी तरह से खड़ी हो गई थी मानो की कोई शिल्पकार की मूर्ति हो,,, राजू अपनी प्यासी आंखों से उसके बदन का ऊपर से नीचे तक मुआयना कर रहा था,,,, उसकी मदमस्त नारंगीयो जैसी चुचियों पर सेउसकी नजर धीरे-धीरे नीचे की तरफ सड़क रही थी चिकना मानसा पेट चर्बी हो का नामोनिशान नहीं था जो कि पानी की बूंदे उस पर मोतियों के दाने की तरफ चल रही थी छाती और कमर के बीच गहरी नाभि छोटी सी बुर से कम नहीं लग रही थी जिसमें पानी की बूंदे ओस की बूंदों की तरह जमी हुई थी जिसे अपने होंठ लगाकर उसका स्वाद चखने का मन राजू को कर रहा था,,,, राजू की सा,से ऊपर नीचे हो रही थीधीरे-धीरे उसकी नजर नीचे की तरफ चल रही थी मानो कि उसकी नजर ना हो पानी की बूंद हो,,,, देखते ही देखते राजू की प्यासी और व्याकुल नजरें झुमरी की दोनों टांगों के बीच के उसके तिकोन भाग पर पहुंच गईजिसको देखने के लिए हर मर्द व्याकुल रहता है तड़पता रहता है लेकिन यहां राजू का भाग्य बहुत तेज था जो कि झुमरी खुद उसे अपने नंगे बदन के साथ-साथ अपना तिकौन वाला भाग भी दिखा रही थी,,,,राजू तो झुमरी की दोनों टांगों के बीच की उस पतली कलिहारी को देखकर एकदम पागल हो गया,,, एकदम पतली संकरी गली नुमा बुर की दरार को देखकर राजू एकदम पागल हो गया,,,, उस पर हल्के हल्के रेशमी मुलायम बाल उगे हुए थे जिस पर पानी की बूंदे ओस की बूंदों की तरह चमक रही थी राजू की नजर उसकी दोनों टांगों के बीच से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी और यह देखकर झुमरी मन ही मन खुश हो रही थी,,,,,ऐसा नहीं था कि हमारी किसी को भी अपना नंगा बदन देखने को या दिखाने के लिए तैयार हो जाती राजू के प्रति उसका आकर्षण बहुत पहले से ही था जब वह अपने भाई श्याम साथ उसे देखी थी,,, इसलिए आज उसे मौका मिल गया था राजू को अपने नंगे बदन का दर्शन कराने का जो कि अनजाने में ही प्राप्त हुआ था,,,, जितना उत्साहित और उत्तेजक राजू था उससे ज्यादा कहीं व्याकुल झुमरी थी,,, राजू को झुमरी को नंगी देखने में मजा आ रहा था और छोरी को राजू को अपने आप को नंगी दिखाने में आनंद आ रहा था,,,,राजू से रहा नहीं गया और उसके मुंह से उसकी तारीफ निकल गई,,,

Raju or Gulabi



झुमरी तू बहुत खूबसूरत है,,,,

मुझे पता है,,,,(झुमरी नाक सिकोड़ते हुए बोली,,, वैसे भी राजू के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना उसे अच्छा लग रहा था वह सिर्फ जानबूझकर इस तरह से बोल रही थी,,, राजू अभी-अभी उसे ऊपर से नीचे की तरफ जी जान लगा कर देख रहा था ऐसा लग रहा है कि जैसे उसने इससे पहले किसी नंगी औरत या लड़की को देखा नहीं था तीन तीन खूबसूरत औरतों की चुदाई करने के बावजूद भी नई जवान लड़की देखते हीराजू के पजामे में हलचल होने लगती थी और यही मर्दों की फितरत भी होती है,,, एक औरत से कभी भी उसका मन नहीं भरता,,

एक जवान लड़की को अपना नंगा बदन दिखाने में झुमरी को भी बेहद उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसके बदन में सनसनी सी फेल रही थी,,,। लेकिन वक्त की नजाकत कोझुमकी अच्छी तरह से समझ रही थी कि उसे काफी समय हो गया था परवाह नहीं चाहती थी कि उसके घर वाले उसे इस हालत में देख लें कि कोई जवान लड़के के सामने वह पूरी तरह से नंगी खड़ी है इसलिए राजू से बोली,,,।

चल देख लिया ना,, अब जा,,,,

(झुमरी की आवाज में उसके शब्दों में एक विश्वास था बिल्कुल भी डर नहीं था घबराहट में थी एक अंजाम लड़के को अपना जवान नंगा जिस्म दिखाना कोई आम बात नहीं थी,,,, लेकिन झुमरी बेफिक्र थी,,,,उसकी बात सुनने के बावजूद भी राजू भाई खड़ा होकर उसके नंगे पन का दर्शन कर रहा था तो झुमरी फिर बोली,,,)

चल अब जाना खड़ा क्यों है,,,

(झुमरी की बात सुनकर राजू को भी लगने लगा कि अब वहां से चले जाना चाहिए अगर किसी ने देख लिया तो बवाल हो जाएगा,,,, इसलिए वह बोला,,,)

श्याम कहां है पढ़ने जाना है,,,,

मुझे नहीं लगता कि आज वह जाएगा,,, वह खेत पर गया है खेतों में पानी देने,,,,( झुमरी राजू की लालच को बढ़ाने के लिए अपने दोनों हाथों से अपनी चुचियों पर की पानी की बूंदों को साफ करते हुए इसे अपनी हथेली में भरकर ऊपर की तरफ उठाने लगी यह देखकर राजू के मुंह से गर्म आह निकल गई,,,, झुमरी की हरकत और उसकी बात को सुनकर राजू बोला,,)

ठीक है मैं खेत पर चला जाता हूं वही पूछ लूंगा चलेगा कि नहीं,,,(इतना कहकर राजू पीछे कदम लेकर जा ही रहा था कि वापस कदम बढ़ाते हुए झुमरी से बोला,,,,)

और हां झुमरी तू बहुत खूबसूरत है खास करके तेरी चूचियां तेरी बुर,,,,

(इतना कहने के साथ ही झुमरी का जवाब सुने बिना ही वहां से वापस लौट गया और झुमरी उसे जाते हुए देखती रह गई राजू के आखिरी शब्द उसके तन बदन में आग लगा गए यह पहली बार था जब झुमरी की किसी लड़के ने इतने खुले तौर पर तारीफ किया था और वह भी उसकी चूची और उसकी बुर की हालांकि उसकी चूची और बुर अभी तक किसी लड़के ने देखा ही नहीं था बस केवल कल्पना किया करते थे राजू पहला सख्स थाजो झुमरी को पूरी तरह से नंगी देखा था उसी को उसकी बुर को एकदम गौर से देखा हूं उसकी बलखाती कमर के साथ-साथ उसकी मदमस्त गांड के दर्शन किया था,,,, राजू के कहे शब्द उसके बदन की उत्तेजना को एकदम से बढ़ा दिए थे उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी और उसके होठों पर मुस्कान आ गई थी,,,,

राजू श्याम को बुलाने के लिए खेत पर चला जा रहा था वैसे तो उसे बुलाने की कोई जरूरत वह समझता नहीं था लेकिन वह नहीं चाहता था कि सोनी और उस पर कोई शक करें इसीलिए वह जानबूझकर उन्हें बुलाता था ताकि उन लोगों को ऐसा लगे कि अगर सोनी और उसके बीच कुछ चल रहा होता तो वहां इस तरह से उन्हें रोज बुलाने नहीं आता,,,)
 
झुमरी की मद मस्त नंगी जवानी को देखकर राजू पूरी तरह से गर्म हो गया था,,,, पहले भी उसकी चुनरी से मुलाकात हो चुकी थी लेकिन तब वह कपड़ों में देखा था और उसके देखने का नजरिया भी बदला नहीं था लेकिन आज जब उसे नहाते हुए पूरी तरह से नंगी अपनी आंखों से देखा तो जाकर पता चला कि झुमरी कितनी खूबसूरत है,,,, छोरी पूरी तरह से अनछुई लड़की थी,,,,अभी तक गांव के किसी लड़के ने उसके अंगों को उसके बदन को स्पर्श तक नहीं किया था और ना ही वह किसी को करने दी थी,,,वह तो राज्य की किस्मत बहुत तेज थी कि उसने झुमरी को एकदम नग्नावस्था में देख लिया था और जो मेरी उसे जानबूझकर अपने नंगे बदन का दर्शन करा रही थी,,, अगर राजू की जगह कोई और होता तो शायद वह डंडा लेकर उसे खूब पीटती,,,, लेकिन राजू का आकर्षण उसे बहुत पहले से ही था,,, इसलिए वह भी मौके का फायदा उठाते हुए अपने नंगे बदन का दर्शन उसे करा दी,,, और अपनी इस हरकत पर झुमरी को किसी भी तरह का पछतावा या गलत नहीं लगा वह पूरी तरह से खुश थी क्योंकि यह बात अभी अच्छी तरह से जानती थी कि लड़कों को कैसे अपने काबू में किया जाता है भले ही वह इस तरह की हरकत और पैंतरेबाजी अभी तक किसी पर आजमाई नहीं थी लेकिन एक जवान लड़की होने के नाते उसे इतना तो ज्ञान था ही,,,,।



राजू झुमरी के नंगे बदन का दर्शन करके पूरी तरह से गनगना गया था,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कपड़ों में बिल्कुल सामान्य सी लगने वाली लड़की बिना कपड़ों के इतनी खूबसूरत और लाजवाब लगती होगी उसका अंग-अंग खरा सोना नजर आ रहा था,,,,औरतों के बदन की भूगोल को पूरी तरह से समझ सकने के कारण राजू को इतना तो ज्ञान हुई गया था कि झुमरी के बदन का हर एक कोना एकदम तराशा हुआ था उसके गुलाबी और उसके गोरे गोरे गाल रेशमी बाल हिरनी जैसी गर्दन के साथ-साथ मदमस्त कर देने वाली दोनों नारंगिया वाकई में उसकी छातियों की शोभा बढ़ा रही थी,,,, चिकना सपाट पेट जिस पर पानी की बूंद बिल्कुल भी ठहर नहीं रही थी और चिकनी पीठ की शोभा बढ़ा रही गहरी नाभि शायद बुर से भी ज्यादा खूबसूरत नजर आ रही थी,,,, पतली कमर के नीचे का कसा हुआ उभार गांड की सर्वोत्तम परिभाषा को,,, परिभाषित कर रहा था,,,, राजू की आंखों ने अब तक जितने भी ने तंबू के दर्शन किए थे शायद उनमें से एक खूबसूरत नितंबों में से एक नितंब झुमरी की थी,,,, जिसे जीभ लगाकर चाटने का मन कर रहा था,,,,,, राजू नेझुमरी के दोनों टांगों के बीच किस पत्नी करार के भी दर्शन कर लिए थे और धन्य हो गया हल्के हल्के रेशमी बालों से घिरी हुई उसकी पतली दरार किसी जंगल की गहरी घाटी में बहती हुई नदी की तरह लग रही थी,,, जिस में राजू का डूब कर तैरने का मन कर रहा था,,,,,,, संपूर्ण रूप से नंगी होकर नहाते हुए वह एकदम कामदेवी लग रही थी,,,,

खेतों की तरफ जाते हुए भी राजू के दिलों दिमाग पर झुमरी छाई हुई थी,,, उसकी हरकत उसकी नजाकत और एकदम निडर होकर यह कहना कि सब कुछ देख लिया ना अब जा इस पर राजू पूरी तरह से फिदा हो चुका था,,,, राजू को लगने लगा था कि झुमरी उसे जानबूझकर अपने नंगे बदन का दर्शन करा रही थी,,,, वरना उसे कब का भगा दी होती और अपने अंगों को छुपाने की भरपूर कोशिश करती लेकिन ऐसा कुछ नहीं झुमरी बिल्कुल भी नहीं कर रही थी ना तो राजू को अपनी आंखों के सामने खड़ा देखकर घबरा गई थी और ना ही अपने सुकोमल बेशकीमती खजाने को छुपाने की कोशिश की थी,,,,,,,,राजू अपने मन में यही सोचता हुआ चला जा रहा हूं ताकि काश झुमरी को भी चोदने का मौका मिल जाता तो वह अपने आप को सबसे भाग्यशाली समझता,,,,,,,



देखते ही देखते राजू श्याम के खेतों पर पहुंच चुका था चारों तरफ हरे हरे खेत लहलहा रहे थे लेकिन श्याम उसे कहीं भी नजर नहीं आ रहा था राजू कुछ देर तक इधर-उधर घूम कर उसे ढूंढता रहा वैसे तो राजू के लिए उसे ढूंढना इतना जरूरी नहीं थालेकिन वह नहीं चाहता था कि किसी भी तरह से उन लोगों को उसके और सोनी के बीच क्या चल रहा है उसके बारे में शक हो,,,, इसीलिए वह जानबूझकर शयाम को बुलाता था ताकि उन लोगों को बिल्कुल भी शक ना हो और वह दोनों साथ में पढ़ते वक्त इसी तरह से इनकार करते थे जैसा कि सोनी दूसरे लड़कों के साथ करती थी बिल्कुल भी लगाव या अपनापन राजू से नहीं दिखाती थी और इसीलिए श्याम भी उस पर बिल्कुल भी शक नहीं करता था,,,।

खेत के चारों तरफ घूम घूम कर राजू ने मुआयना कर लिया था लेकिन कहीं कोई भी नजर नहीं आ रहा था तब वह सोचा कि हो सकता है इसे हम खेतों के बीच में हो जहां पर वह अपने लिए छोटी सी झोपड़ी बनाया था ताकि खेतों पर काम करने आए तो उसमें आराम कर सके,,,,,,, इसलिए हरिया रे खेतों के बीच में से वह झाड़ियों को हटाता हुआ धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा,,,।

दूसरी तरफ झोपड़ी के अंदर श्याम अपने लंड को बड़ी तेजी से बुर के अंदर बाहर करते हुए,,,,

आहहहहहह,,,,, सच में तेरी बुर बहुत मस्त है तुझे रंडी बनाकर चोदने बहुत मजा आता है,,,आहहहह मेरी रानी ऐसे ही रोज मुझे दिया कर मैं तुझे मस्त कर दूंगा,,,,ऊफफ इस उमर में भी तेरी बुर कितनी गरम है,,,,ओहहहहह बहुत मजा आ रहा है मेरी रानी तुझे मैं रानी बनाकर रखूंगा,,,,( चुचियों को जोर-जोर से दबाते हुए,,) हाय तेरी चूची कितनी बड़ी बड़ी है लगता है कि जैसे मेरे लिए संभाल कर रखी थी,,,, इसे तो मैं पी जाऊंगा,,,(और इतना कहने के साथ ही बना दोनों चुचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और अपनी कमर को जोर-जोर से हीलाना जारी रखा,,,,





सहहहह आहहहहह ,,, मेरे लाल तेरे लिए ही तो है मेरी चूचियां,,,, जब तू छोटा था तो इसी तरह से मुंह लगाकर पीता था लेकिन अब अपने पेट की भूख मिटाने के लिए पीता था लेकिन आज अपने जिस्म की भूख मिटाने के लिए पी रहा है,,,,ऊममममम धीरे से बेटा इस तरह से तो तेरे बाबूजी भी नहीं काटते,,,,,आहहहहहह जरा धीरे धक्के मार,,, मैं भागी नहीं जा रही हूं तुझ से चुदवाने के लिए तो नहीं खेत में काम करने का बहाना देकर तुझे यहां लेकर आई हूं,,,, नही तो झुमरी कहां खेतों पर आने दे रही थी,,,,

तू सच में कितनी अच्छी है मां,,,, तभी तो तुझे चोदने में इतना मजा आता है मन करता है कि झुमरी की चुदाई कर दु तक हम दोनों को किसी का डर नहीं रहेगा,,,,

हां कह तो तू ठीक ही रहा है लेकिन तू जानता है झुमरी मानने वाली नहीं है अगर उसे हम दोनों के बारे में पता चल गया था शायद हम दोनों का भी बुरा हाल कर देगी,,,

जब करेगी तब देखा जाएगा अभी तो मुझे अपनी मां को चोदने में बहुत मजा आ रहा है,,,(इतना कहने के साथ श्याम अपनी मां के होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,,ऊममममम,,,,,ऊमममममम,,,)

तेरे होठों में बहुत रस है,,,, बाबूजी को भी पिलाती है कि नहीं,,,,

ओ मुआ अब किसी काम का नहीं है,,, हरामि का खडा ही नहीं होता,,,, अगर किसी तरह से खड़ा कर दूं तो दो ही झटके में पानी फेंक देता है,,, इसलिए तो मुझे तेरा सहारा लेना पड़ रहा है,,,,

ओहहह मां,,, तो बहुत अच्छे हैं अच्छा हुआ कि बाबूजी का खड़ा नहीं होता वह तुझे चोद नहीं पाते वरना मुझे इतना मजा कभी नहीं मिल पाता औरत को कैसे चोदा जाता है या मैं कभी नहीं सीख पाता,,,,तूने मुझे चुदाई सिखा कर मुझ पर बहुत बड़ा एहसान की है और इसीलिए मैं एहसान का बदला चुका रहा हूं,,,(जोर से धक्का लगाते हुए जिसकी वजह से श्याम की मां के मुंह से आह निकल गई जब जब उसकी आह निकल रही थी तब तब श्याम का मजा दोगुना होता जा रहा था,,, अपनी मां के कराने की आवाज को सुनकर श्याम बोला,,,)

क्या हुआ मां एकदम अंदर तक चला जा रहा है क्या,,,,

नहीं रे तेरा ज्यादा लंबा नहीं है,,,, थोड़ा सा और बड़ा होता तो मेरे बच्चेदानी तक पहुंच जाता लेकिन फिर भी बहुत मजा देता है,,,,(अपनी मां के मुंह से अपने लंड के बारे में सुनकर बहुत थोड़ा उदास हो गया क्योंकि उसकी मां ने कही थी कि ज्यादा लंबा नहीं है लेकिन फिर भी इस बात की तसल्ली थी कि उसके लंड से उसकी मां को बहुत मजा आ रहा था,,,, ज्यादा लंबा शब्द सुनकर अनायास ही श्याम के दिमाग में उस दिन वाला दृश्य नजर आने लगा जब राजू उससे गुस्सा करके अपना पजामा नीचे करके अपना लंड दिखा रहा था और उसके लंड को देख कर खुद श्याम की हालत खराब हो गई थी क्योंकि उसके नंबर के सामने श्याम का आधा भी नहीं था और इसीलिए से हम सोचने लगा कि अगर उसकी जगह राजू होता तो शायद उसकी मां पूरी तरह से पागल हो जाती उसके लंड को अपनी बुर में लेकर क्योंकि उसका लन्डउसके लंड से ज्यादा लंबा था और मोटा भी वह बड़े आराम से उसकी मां के बच्चेदानी तक पहुंच जाता,,,, अनायास ही राजू के लंड का ख्याल आते ही श्याम थोड़ा सा गुस्सा हो गया किस तरह का ख्याल उसके मन में आया कैसे और वह इसी गुस्से को उतारने के लिए जोर जोर से अपना कमर हिलाना शुरू कर दिया झोपड़ी में रखी हुई चारपाई चरमरा रही थी,,,।

अरे धीरे बेटा तू तो खटिया ही तोड़ डालेगा,,,,,

टूट जाने दो मां हम दोनों की चुदाई की निशानी होगी कि मैं तुम्हारी चुदाई करते करते खटिया भी तोड़ डाला था,,,

नाना ऐसा मत करना हम का खर्चा बढ़ जाएगा इसे बनाना पड़ेगा मेहनत करनी पड़ेगी तो आराम से ही कर,,,, लेकिन जल्दी पानी मत निकालना बहुत मजा आ रहा है,,,

मुझे भी बहुत मजा आ रहा है ना मैं भी चाहता हूं कि मेरा पानी जल्दी लाने के लिए दिन रात तुम्हारी बुर में लंड डालकर पडा रहु,,,, लेकिन क्या करूं तुम्हारी बुरा अंदर से इतना ज्यादा गर्म हो जाती है कि ऐसा लगता है कि सब कुछ बिगड़ जाएगा और तुम्हारी बुर की गर्माहट पाते हैं मेरी मोमबत्ती पिघलने लगती है,,,,।

लेकिन आज ऐसा मत होने देना बेटामैं हमेशा प्यासी रह जाती हूं और तू अपना पानी निकाल कर चला जाता है,,,

आज नहीं जाऊंगा आज मैं अपनी रानी की पूरी सेवा करूंगा,,,



ओ मेरा राजा बेटा,,,( और इतना कहने के साथ ही श्याम की मां उसका बाल पकड़कर उसके होठों को अपनी चूची पर रख दी और उसे पिलाने लगी श्याम भी मन लगाकर अपनी मां की सूचियों की सेवा कर रहा था और उसकी बुर की खातिरदारी भी,,,,, झुमरी को तो इस बात का आभास तक नहीं था कि खेतों में काम करने के बहाने उसकी मां और उसके भाई आपस में चुदाई का गंदआ खेल खेलते हैं,,,, इससे पहले दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं था दोनों के बीच मां-बेटे का पवित्र रिश्ता बना हुआ था लेकिन श्याम की मां अपने पति से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं थी और उसके बदन में जवानी की आग लगी हुई थी वह अपने बदन की तपिश को बुझाना चाहती थी उसे जवान लंड की आवश्यकता थी,,, और ऐसे में ही 1 दिन वह खेत में अपने बेटे को मुठ मारते हुए देख ली थी,,अपने बेटे की इस हरकत पर श्याम की मां पूरी तरह से मदहोश हो गई थी उसे अपने बेटे पर गुस्सा नहीं आया था बल्कि अपने लिए एक उम्मीद की किरण नजर आने लगी थी वह समझ गई थी कि उसका बेटा भी पूरी तरह से जवान हो गया है और जवानी की गर्मी शांत करने का बहाना ढूंढ रहा है ऐसे में उसका काम जरूर बन जाएगा और उसे मौका मिल गया एक दिन वह अपने ही खेत पर बने हेडपंप पर नहा कर छोटी सी झोपड़ी में जाकर कपड़े बदल रही थी और उसी समय उसका बेटा भी झोपड़ी में प्रवेश कर गया था उस समय तो श्याम की मां के बदन पर पानी से भीगी हुई साड़ी थी जिसे वह अपने बेटे को झोपड़ी के अंदर देखते ही 1 बहाने से उतार फेंकी और उसके सामने पूरी तरह से नंगी हो गई श्याम के लिए पहला मौका था जब किसी नंगी औरत को देखना था और वह भी खुद की अपनी सगी मां को वह पूरी तरह से मदहोश हो गया अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर उसके मुंह में पानी आ गया,,,, अपनी मां की पानी से गीली बुर देखकर उसका लंड खड़ा होने लगा,,, जोकि पजामे में उठता हुआ श्याम की मां को साफ नजर आ रहा था,,, श्याम से रहा नहीं जा रहा था और श्याम की मां की भी हालत खराब हो रही थी,,,, मौका और दस्तूर दोनों श्याम की मां के पक्ष में था और वह‌ बोली,,,,

श्याम की मां



श्याम मुझे नंगी देखकर तेरा तो खड़ा हो गया है कुछ करने का मन है क्या,,,?

(अपनी मां के मुंह से इस तरह का सवाल सुनते ही श्याम अपने आप को रोक नहीं पाया और हां में सिर हिला दिया,,,, फिर क्या था उसी दिन दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता खत्म हो गया और एक मर्द और औरत का रिश्ता शुरू हो गया दोनों चुदाई में पूरी तरह से मस्त होते हैं और इसी तरह से रोज खेतों पर खेत में काम करने के बहाने चुदाई करना शुरू कर दिया,,,,और आज भी वह खेत में काम करने के बहाने घर से दोनों मां-बेटे आ गए थे और झूठी के अंदर चुदाई का गरमा गरम कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे जिसे देखने वाला कोई नहीं था दोनों आपस में पूरी तरह से लिप्त हो चुके थे श्याम का लंड उसकी मां की बुर की गहराई नाप रहा था,,, और श्याम की मां उसका हौसला बढ़ाते हुए खुद उसे अपना दूध पिला रही थी,,,।

श्याम के धक्के तेज चल रहे थे श्याम की मां मस्त हो रही थी,,,, यहां पर कोई आने वाला नहीं था इसलिए दोनों खुल कर मजा ले रहे थे,,,,

आज तेरी बुर का भोंसड़ा बना दूंगा,,,,

बना ना मादरचोद मैं तो तड़प रही हूं जोर जोर से चोद मुझे मस्त कर दे मुझे,,,

यह बात है देख आज तेरी कैसी हालत करता हूं,,,

(श्याम अपनी मां की बात सुनकर पूरी तरह से जोश में आ गया था औरजोर जोर से धक्के लगाने की तैयारी कर ही रहा था कि उसके कानों में उसका नाम सुनाई देते हैं वह बुरी तरह से चौक गया,,,)

श्याम,,,,ओ ,,,,,श्याम ,,,, कहां गया भोंसड़ी के पढ़ने नहीं चलना है क्या,,,,?

(इतना सुनते ही श्याम के तो होश उड़ गए उसकी आवाज बड़े करीब से आ रही थी उसकी मां भी एकदम सकते में आ गई,,,,,)

यह कौन आ रहा है बेटा,,,

राजू है ना मुझे बुलाने आया है पता नहीं कौन ईसे यहां भेज दिया,,,

हट बेटा मुझे उठने दे अगर वह देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,,

(अपनी मां की बात को और मुसीबत को अच्छी तरह से समझता था इसलिए जल्दी से बे मन से अपने लंड को अपनी मां की पुर से बाहर निकालकर खडा हो गया और जल्दी से पजामा पहनने लगा,,,,श्याम की मां भी जल्दी से उठी और जल्दी-जल्दी अपने ब्लाउज का बटन बंद करके अपनी पेटीकोट की डोरी बांधने लगी,,,, अपनी साड़ी को दुरुस्त करने लगी तो श्याम उससे बोला,,,)

तुम कोने में खड़े हो जाओ मां अगर बाहर जाओगी तो वह देख लेगा और इतने सुनसान अकेले खेत में हम दोनों को देखकर खामखा शक करेगा,,,

तु ठीक कह रहा है बेटा,,,,लेकिन तू भी अंदर मत रहे बाहर निकल जा अगर अंदर आ गया तो हम दोनों को अंदर देखकर वाकई में शक करने लगेगा,,,

तुम ठीक कह रही हो,,,,(इतना कहकर जैसे ही श्याम झूठी से बाहर निकला वैसे ही सामने से राजू आ गया,,,अपनी मां की चुदाई करने में श्याम काफी मेहनत कर चुका था इसलिए पसीने से तरबतर था और उसे इस तरह से पसीने में भीगा हुआ देखकर राजू बोला,,,,)

श्याम खेतों में काम करने की जगह तो झोपड़ी में काम कर रहा था जो इतना पसीने में भीगा हुआ है,,,, और यह तेरा लंड खड़ा क्यों है,,,(इतना सुनकर श्याम की तो घिघ्घी बंध गई,,, अब क्या जवाब दे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,)

बताना अंदर क्या कर रहा था,,,,ओहहह अब समझा मुट्ठ मार रहा था,,, अरे हरामी इतनी मेहनत करने से अच्छा था कि अपनी मां को ले आया होता और उसकी चुदाई कर दिया होता तब तुझे मजा भी आ जाता,,,।(राजू की बात को अंदर खड़ी श्याम की मां सुन रही थी और इस बात पर वह पूरी तरह से गनगना गई क्योंकि उसका दोस्त श्याम को उसकी मां चोदने के लिए कह रहा था जो कि श्याम वही कर भी रहा था,,, राजू की बात सुनकर गुस्से में श्याम बोला,,)

तेरी मां साथ आने को तैयार होती तो मजा आ जाता,,,

पहले ठीक से अपनी मां की तो चुदाई कर ले मुझे लगता नहीं है कि तु अपनी मां को संतुष्ट कर पाएगा,,, तेरी मां की चूची देखा है कितनी बड़ी-बड़ी है,,, उसकी गांड कितनी बड़ी बड़ी है तेरी मां के लिए तो मोटा और लंबा लैंड चाहिए जो कि मेरे पास है एक ही बार में तेरी मां को मस्त कर दूंगा,,,,(राजू की बात सुनकर श्याम की मां की हालत खराब होने लगी,,, क्योंकि श्याम का दोस्त राजू सीधे-सीधे उसे चोदने की बात कर रहा था और श्याम की मां अपने मन में राजू की बात सुनकर ही सोचने लगी कि राजू जो कुछ भी कह रहा है वह सच कह रहा था उसके मन में भी मोटे लंबे लंड से चुदवाने की इच्छा बहुत समय से थी लेकिन उसकी इच्छा पूरी नहीं हो पा रही थी बस जरूरत पूरी हो रही थी,,,)

राजू जबान संभाल कर बात कर मेरी मां के बारे में उल्टा सीधा मत कहना,,,,

क्यों क्यों तुझे बुरा लग रहा है और जब तू मेरे परिवार वालों के बारे में यह सब चलता है तो मुझे क्या अच्छा लगता है,,,

Soni



जो भी है लेकिन में यह सब बातें नहीं सुनना चाहता,,,,(श्याम एक बहाने से उसे झोपड़ी से थोड़ा दूर ले जाना चाहता था ताकि वह झोपड़ी के अंदर प्रवेश न कर पाए,,, इसलिए वो धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ रहा था वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

तुझे यहां भेजा किसने,,,

तेरी बहन ने और किसने तेरे घर गया तो पता चला कि तु यहा खेत पर है,,,,

(श्याम अपनी बहन को मन ही मन गाली देने लगा क्योंकि सारा मजा किरकिरा कर दी थी वह अपनी मां की चुदाई किए बिना ही कर खड़ा हो गया था उसकी मां भी संतुष्ट नहीं हो पाई थी दोनों चरम सुख पाते पाते रह गए थे इसलिए गुस्सा दोनों का जायज था लेकिन दोनों कर भी कुछ नहीं सकते थे क्योंकि जरा सा भी भनक लगने पर पूरे गांव में बदनामी होने का डर था इसलिए वह कुछ बोला नहीं और उसके साथ पढ़ने के लिए चल दिया,,, पर उन दोनों के जाते हैं श्याम की मां की जान में जान आई लेकिन राजू पर गुस्सा भी बहुत आया,,, क्योंकि इसकी वजह से उसका पानी निकलते निकलते रह गया था लेकिन वह खटिया पर एक टांग रखकर अपनी पेटीकोट को कमर तक उठाकर अपनी उंगली का सहारा लेकर अपना पानी निकाल कर ही बाहर निकली,,,।
 
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