Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 3 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

कमला चाची की हालत को देखकर राजू को लग रहा था कि कमला चाची को बहुत दर्द कर रहा है और वैसे भी चींटी के काटने के दर्द से वह अनजान नहीं था वह चित्र से जानता था कि जिस जगह पर चींटी काटती है तो थोड़ा उस जगह जलन भी करती है और सूज भी जाती है,,,। इसलिए राजू को भी चिंता हो रही थी,,,, राजू के मन में दो भाव पैदा हो रहे थे एक तो उसे कमला चाची की चिंता भी हो रही थी और उसके इस तरह से उछल कूद में जाने की वजह से जिस तरह से उसकी खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में गदर मचा रही थी उसे देखकर उसे उत्तेजना भी महसूस हो रही थी और तो कमला चाची जब खुद बात बोल दी कि तु ही चींटी निकाल दे तो इस बात से राजू एकदम उत्तेजना से भर गया,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, वह बस एक टक कमला चाची को देखे जा रहा था,,,,। उसे इस तरह से आश्चर्य से देखते हुए कमला चाची बोली,,,।

ऐसे क्या देख रहा है तू ही निकाल दे,,,,

ममममम,,, में,,, कैसे चाची,,,,



अरे क्यों नहीं,,,? , तु निकाल सकता है,,,, देख राजु मेरी जल्दी मदद कर बड़े जोरों से काट रही है,,,,,आहहहहह ,,,ऊईईईईई,, मां,,,,,(दर्द से आह भरते हुए कमला चाची साड़ी के ऊपर से ही जोर से अपनी बुर को हथेली में दबोच ली,,,, कमला चाची की इस हरकत पर राजू पूरी तरह से मोहित हो गया,,,,,,, अपने अंदर वह अजीब सी हलचल तो महसूस कर रहा था उसके पजामे में पूरी तरह से तंबू तन चुका था,,, जिस पर राजू का तो नहीं लेकिन कमला चाची का ध्यान बराबर बना हुआ था कमला चाची के तन बदन में राजू के तंबू को देखकर सुरूर सा चढने लगा था,,,।राजू को इसी तरह से खाना देखकर कमला चाची अपने मन में सोची कि उसे ही कुछ करना होगा इसलिए वह,,, बोली,,)

राजु,,,, जल्दी कुछ कर,,,,,( और इतना कहने के साथ ही कमला चाची,,,एक झटके से अपनी साड़ी पकड़कर कमर तक उठा दी,,,,, पल भर के लिए भी अपनी इस हरकत को लेकर कमला चाची शर्मा महसूस नहीं की वो एकदम से बेशर्म बन चुकी थी वह जानती थी कि वह क्या कर रही है वह पूरी तरह से होशो हवास में थी,,,,साड़ी के अंदर उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी उसे किसी चींटी ने नहीं काटी थी बस वह तो 1 बहाने से मर्दों की सबसे बड़ी कमजोरी दिखाना चाहती थी इसे देखते हैं मर्दो पर मदहोशी छाने लगती है और वही मदहोशी वह राजू के तन बदन में उसके चेहरे पर देखना चाहती थी,,,,कमला चाची एक झटके से अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी कमर को थोड़ा सा आगे की तरफ कर दी एक बेहद अद्भुत दुर्लभ और अतुल्य दृश्य राजू की आंखों के सामने था उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसकी आंखों के सामने कोई औरत इस तरह से हरकत करेगी और कमला चाची पर तो उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी,,,,,,,



दोपहर का समय था दुर दुर तक कोई नजर नहीं आ रहा था,,, चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था सिर्फ पंछियों के कलरव की आवाज ही सुनाई दे रही थी,,, ऐसे में खेतों के बीच अद्भुत और कामुकता से भरा हुआ दृश्य अपनी कामुकता फैला रहा था,,,,,, राजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी सब कुछ उसकी आंखों के सामने था फिर भी उसे किसी सपने की तरह लग रहा था क्योंकि हकीकत की तो उसे उम्मीद भी नहीं थी,,,, कमला चाची की भी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थीक्योंकि वह जिसके सामने अपनी साड़ी उठाकर खड़ी थी और उसके बेटे से भी कम उम्र का था और कभी कमला चाची ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी कम उम्र के लड़के के सामने उसे इस तरह से साड़ी उठाकर अपनी वासना का प्रदर्शन करना होगा और वैसे भी बहुत पहले से ही वासनामई औरत थी,,,,,,। गहरी सांस लेते हुए कमला चाची बोली,,,।



देख राजु चीटियां नजर आ रही है कि नहीं,,,,! (कमला चाची को अच्छी तरह से मालूम था कि कोई चींटी वीटी नहीं थी फिर भी वह एक बहाने से राजू को अपने पास बुलाना चाहती थी ताकी अपनी रसीली बुर कि उसे दर्शन करा सकें,,,कमला चाची की बात सुनते ही वह अपना एक कदम आगे बढ़ाया उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,, वह वहीं रुक कर कमला चाची की दोनों टांगों के बीच की स्थिति का जायजा लेने लगा,,, राजु के तन बदन में आग लग रही थी,,,, वह वहीं खड़ा हो कर देख रहा था आगे बढ़ने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी तो कमला चाची फिर बोली,,,)

अरे दूर से क्या देख रहा है पास आकर देख,,,,

(कमला चाची की इस तरह की बातें राजू के लिए खुला आमंत्रण थी लेकिन राजू उसके आमंत्रण को उसके इशारे को समझ नहीं पा रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि वाकई में कमला चाची से चीटियां देखने के लिए कह रही है,,,, कमला चाची की बात सुनकर और एक कदम और आगे बढ़ाया उसके और कमला चाची के बीच केवल अब 1 फीट की दूरी का ही फासला रह गया था,,,, अद्भुत नजारा राजू ने कभी सपने में भी नहीं देखा था राजू के लिए यह नजारा मादकता का विस्फोट कि तरह था,,, किसी जवान औरत का इस तरह से साड़ी उठाकर अपनी बुर दिखाना शायद इतना उत्तेजक नहीं होता उनकी एक उम्र दराज औरत का इस तरह से अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बुर का प्रदर्शन करना बेहद कामोत्तेजक और उन मादक था राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर अपने चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी अगर उत्तेजना नापने का कोई साधन होता तो शायद इस समय उत्तेजना का कांटा पार कर गया होता,, जैसे ज्वर नापने का थर्मामीटर होता है अगर इसी तरह से कुत्ते से ना कभी थर्मामीटर होता तो शायद उत्तेजना के मारे थर्मामीटर भी भूल जाता है इस तरह की उत्तेजना का अनुभव राजू अपने तन बदन में कर रहा था कमला चाची की सांसे भी तेजी से चुल रही थीक्योंकि उम्र के इस दौर में अब तक उसने इस तरह की हरकत कभी नहीं की थी हालांकि मर्दों के प्रति उसका आकर्षण हमेशा से बनाई रहता था लेकिन राजू के उम्र के लड़के के साथ यह उसका पहला अनुभव था,,,,।



कमला चाची उसी तरह से साड़ी को कमर तक उठाएं अपनी बुर दिखा रही थी जिस पर झांटों का झुरमुट से बना हुआ था,,,, और घूंघराले बालों के झुरमुट में छुपी बुर को देखने की कोशिश राजू बड़े जोड़-तोड़ से कर रहा था लेकिन घने बालों की वजह से कमला चाची की बुर उसे नजर नहीं आ रही थी,,,, राजू बड़े गौर से कमला चाची की बुर वाली जगह पर देख रहा था कि तभी कमला चाची बोल पड़ी,,,,

आहहहहह राजु,,, देखना कब से काट रही है मुझे परेशान की हुई है और तू दूर से बस देखे जा रहे हैं पास आकर देख जल्दी से इसे अपने हाथों से निकाल,,,,(कमला चाची उत्तेजना में और राजू को मदहोश करने के उद्देश्य से ऐसा बोलते हुए अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखकर उसे मसल दी,,,राजू के लिए कमला चाची की हरकत उत्तेजना की पराकाष्ठा थी वह और ज्यादा नजदीक आ गया उसका खुद का मन कर रहा था कि वह अपने हाथों से कमला चाची की बुर को स्पर्श करें उसे छू ले लेकिन उसे डर लग रहा था,,,,,,, वो डरते हुए कमला चाची से बोला,,,)

अब क्या करूं चाची,,,,

अरे करना क्या है मेरी बुर पर देख झांट के बाल में देख,,, चिंटीव फसी हो तो जल्दी से निकाल,,,,(कमला चाची गहरी सांस लेते हुए बोली,,, राजू अजीब सी उलझन में फंसा हुआ था जो कुछ भी कमला चाची कह रही थी वह सब उसे करने का बहुत मन कर रहा था लेकिन डर रहा था,,,, फिर भी डरते हुए बोला)

मैं करूं चाची,,,,

हां और कौन करेगा मैं ठीक से ढूंढ नहीं पाऊंगी,,,,

लेकिन कोई देख लेगा तो,,,( राजू घबराते में चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए बोला,,,,राजू की बातें सुनकर कमला चाची मन में ही मुस्कुराने लगी वह इस बात से ही संतुष्ट थी कि चलो रांची को इतना तो पता है कि यह सब अकेले में सबसे छिपकर किया जाता है,,,)

तू डर मत यहां कोई नहीं आने वाला है और कोई देखने वाला भी नहीं है और वैसे भी तू कोई केयर थोड़ी है तो अच्छा लड़का है तुझे मैं अपना समझती हूं इसलिए मैं तुझे बोल रही हूं फिर जगह अगर कोई होता तो मैं उससे से थोड़ी बोलती,,,

(कमला चाची की बातें सुनकर राजु को थोड़ी तसल्ली हुई वह,,, थोड़ा सा छुप गया था कि कमला चाची की बुर को अच्छे से देख सके,,,, झुकने पर राजू को कमला चाची की बुर बड़े अच्छे से दिखाई दे रही थी अपना हाथ आगे बढ़ा कर कमला चाची के घुंघराले बालों पर रख दिया और उसके अंदर उंगली घुमाने लगा राजू की यह हरकत कमला चाची के तन बदन में उत्तेजना की लहर को बढ़ावा दे रही थी,,,, राजू तो सच में जाटों के झुरमुट के बीच में चीटियों को ढूंढ रहा था उसकी उंगली चारों तरफ घूम रही थी इस हरकत को अंजाम देने में राजू को भी अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी रह रह कर उसकी उंगलियां कमला चाची की बुर पर स्पर्श हो जा रही थी जिससे कमला चाची की उत्तेजना पर जा रही थी और राजू की हालत खराब हो जा रही थी,,,, वह अपनी उंगली को झांटों में गोल गोल घुमा रहा था,,,, तो कमला चाची बोली,,,।

क्या हुआ मिला क्या,,,,?

नहीं चाची कुछ भी नजर नहीं आ रहा है,,, मुझे लगता है कि चींटी चली गई है,,,,(कमला चाची की तरफ देखते हुए राजू बोला)

आहहहहह,,,, ऐसे कैसे चली गई है देख मुझे अभी भी काट रही है अच्छे से देख बालों को फैला फैलाकर देख,,,,।



(राजू बड़े अच्छे से कमला चाची की बुर को देखना चाहता था जिंदगी में एक ही बार गुड़ के दर्शन किया था और वह भी अपनी बुआ गुलाबी की बुर के जो कि एक पतली दरार के रूप में थी और बेहद खूबसूरत नजार‌ आ रहीं थी उस पर हल्के हल्के ही बाल थे,,,, लेकिन कमला चाची की बुर पर तो बालों का जंगल उगा हुआ थागुलाबी की बुर देखने में राजू को बिल्कुल भी दिक्कत नहीं हो रही थी लेकिन कमला चाची की बुर देखने में राजू को दिक्कत महसूस हो रही थी लेकिन अब चाची की बात सुनते ही उसे उम्मीद की किरण नजर आने लगी और वह अपने हाथों की उंगलियों से कमला चाची की बुर के बाल को इधर-उधर फैलाते हुए उसकी बुर देखने की कोशिश करने लगा और ऐसा करने पर उसे कमला चाची की बुर उसकी गुलाबी पत्ती उसकी पतली दरार बड़े अच्छे से नजर आने लगी,,,,,कमला चाची की फोटो देखने में उसे इस बात का एहसास हुआ था कि उसकी बाकि पुर मात्र एक पतली दरार के रूप में नजर आ रही थी और कमला चाची की बुक हल्की सी खुली हुई थी शायद यह उम्र की वजह से थी,,।

राजू अपनी उंगली से बड़े अच्छे से बुरके ऊपर ईधर उधर घुमा कर चींटी को ढूंढ रहा था,,, लेकिन उसे चींटी कहीं भी नजर नहीं आ रही थी लेकिन ऐसा करने में उसे ऐसा सुख प्राप्त हो रहा था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था कमला चाची की बुर से अनजाने में खेलते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच लटकता खंजर में दर्द महसूस होने लगा था,,,, क्योंकि उसके लंड की अकड़ बढ़ते जा रही थी,,,,दूसरी तरफ एक जवान लड़के के ऊंगलीयो का स्पर्श अपनी बुर के ऊपर महसूस करके कमला चाची पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी इस उम्र में भी उसकी उत्तेजना बरकरार थी,,, राजू की हरकतों में उसे पूरी तरह से चुदवासी बना दिया था जिसके चलते उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में से मदन रस का रिसाव होना शुरू हो गया था,,,, जोकि धीरे-धीरे राजू की अंगुलियों पर रीश रहा था,,,। राजू का ध्यान पूरी तरह से कमला चाची की बुर पर टिका हुआ था,,, वह अपनी नजरों को इधर उधर भी नहीं घुमा रहा था,,,। कमला चाची की बुर का जायजा लेने में वह पूरी तरह से मशरुफ हो चुका था,,। देखते-देखते अनजाने में ही राजू ने अपनी उंगली के पोर से कमला चाची की बुर के गुलाबी पत्तियों को छेड़ दिया,,,, तो वैसे ही तुरंत कमला चाची के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,,।





सहहहहह आहहहहहहह,,,,,,,,ऊमममममममम,,,,

क्या हुआ चाची,,,(उसकी गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर राजेश की तरफ देखते हुए बोला,,,)

ककककक,,, कुछ नहीं राजू फिर से काट रही है,,,,(कमला चाची गर्म आहे भरते हुए बोली,,,)

लेकिन चाची यहां तो मुझे कुछ भी नजर नहीं आ रहा है,,,,(राजू अपने दोनों हाथों की उंगलियों से झांट के बालों को फैलाते हुए बोला,,,)

ध्यान से देख राजु मुझे बड़ी तकलीफ हो रही है,,,,आहहहहह नहीईईईई,,,,,।

क्या चाची सच में बहुत तकलीफ हो रही है,,,

अरे बहुत तकलीफ हो रही है मुझे तो डर है कहीं सूज ना जाए,,,,। देख बड़े अच्छे से मेरी बुर को देख,,,,आहहहहह राजु,,,

(कमला चाची के मुंह से बुर शब्द सुन कर राजु पूरी तरह से रोमांचित हो उठा,,,)

रुको चाची में फिर से देखता हूं,,,,,,

(कमला चाची उसी तरह से अपनी साड़ी उठाए हुए राजू को अपनी बुर बड़े अच्छे से दिखा रही थी और राजू को मजा भी आ रहा था लेकिन इस बात से अनजान था कि कमला चाची उसे चींटी वाली बात झूठ कह रही है और वह चींटी ढूंढने में ही व्यस्त था,,, लेकिन चींटी ढुंढते हुए उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति भी हो रही थी,,,, राजू फिर से बड़े ध्यान से देखने लगा राजू को कमला चाची की बुर का गुलाबी छेद बड़े साफ तौर पर नजर आ रहा था वह उसे गुलाबी छेद को देखते हुए कमला चाची से बोला,,,)

चाची चींटी तो नहीं नजर आ रही है लेकिन तुम्हारे बुर का गुलाबी छेद नजर आ रहा है,,,,।

(राजू के मुंह से बुर शब्द और गुलाबी छेद सुनकर वह पूरी तरह से मस्त हो गई,,, पलवल में ही राजू के इन शब्दों ने उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा दिया क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि राजू किस बारे में बात कर रहा है,,, इसलिए मदहोशी भरे शब्दों में वह बोली,,)

हां,,, राजू लगता है चींटी उसी चीज में चली गई है मुझे वही दर्द हो रहा है,,,,सहहहहह,,आहहहहहह,,,,,(कमला चाची पूरी तरह से मदहोश हो गई थी उसकी बातों को सुनकर राजु बोला,,,)

तो अब क्या करूं चाची,,,,(राजू उत्सुकता बस कमला चाची की तरफ देखते हुए बोला,,,, राजू की बात सुनकर कमला चाची बोली)

करना क्या है राजू उसे निकालना तो पड़ेगा ही अपनी उंगली डालकर उसे निकाल बाहर वरना यह मेरी बुर सुजा देगा,,,,,,

(कमला चाची पर हस्ताक्षर में बनी कमला चाची की इस तरह की गंदी बातों को सुनकर राजू के तन बदन में जो आग लग रही थी उसे बयां करना शायद शब्दों में मुश्किल हो रहा था कमला चाची की गंदी बातें उत्तेजना की आग में घी डालने का काम कर रहा था,,,, कमला चाची की बातें सुनकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढने लगी और उसका गला सूखने लगा,,, इसलिए वह अपने थुक से अपने गले को गिला करने की कोशिश करने लगा,,,, कमला चाची ने उसे अद्भुत काम सौंप दीया था,,,। जिसे करने में राजू को बहुत खुशी भी हो रही थी और वह उत्सुक भी था,,, कमला चाची चाहती तो राजू से सीधे-सीधे उसका लंड अपनी बुर में डालने के लिए कह देती और राजू इंकार भी नहीं करता लेकिन उसे न जाने क्यों धीरे-धीरे इस खेल में मजा आ रहा था राजू के नादानियत उसे और ज्यादा मदहोश कर रही थी,,,

राजू के दिल की धड़कन बढने लगी थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,, वह अपनी बीच वाली उंगली को बुरके छेद में डालना शुरू कर दिया,,,,कमला चाची अपने मन में यही सोच रही थी कि राजू के लिए यह संभोग का पहला शबक था जिसमें वह धीरे-धीरे कामयाब हो रहा था,,, कमला चाची की बुर उत्तेजना के मारे पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसीलिए राजू की उंगली बड़े आराम से अंदर की तरफ सरक रही थी,,,,जैसे-जैसे राजू की उंगली बुर के अंदर जा रही थी वैसे वैसे कमला चाची की हालत खराब होती जा रही थी उसके चेहरे का हाव भाव उसका रंग बदलता जा रहा था और पल भर में ही उसके गोरे गोरे गाल लाल टमाटर कि तरह हो गए,,,,, राजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,,, उसे मजा आ रहा था कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि दोबारा कभी उसे इतनी नजदीक से किसी औरत की बुर को देखने का मौका भी मिलेगा और उसने उंगली डालने का भी मौका मिलेगा लेकिन राजू के सोचने के विपरीत हो रहा था और इसमें राजू को मजा भी आ रहा था,,,,धीरे-धीरे करके राजु अपनी आधी से ज्यादा ऊंगली वकमला चाची की बुर के अंदर डाल दिया था,,, बुर के अंदर अपनी उंगली पर बेहद गर्मी महसुस हो रही थी,,, इसलिेए वह उत्सुकता बस बोला,,,,।

चाची तुम्हारे बुर के अंदर तो बहुत गर्मी है,,,

क्यों क्या हुआ रे,,,,(कमला चाची मदहोश होते हुए बोली,,)

मेरी उंगली तुम्हारी बुर के अंदर जाकर जल रही है,,,,

(राजू की बात सुनकर पूरी तरह से कामोत्तेजना मे मदहोश होते हुए भी हंसने लगी और वह बोली,,)

तो क्या तुझे क्या लगा औरत की बुर ऐसे ही नरम नरम होती है सिर्फ ऊपर से ही मुलायम होती है अंदर तो‌ शोला दहकता रहता है,,,,

सच में चाची बहुत गर्म है,,,,,(ऐसा कहते हुए राजू अपनी पूरी उंगली कमला चाची की बुर में डाल दिया,,, जैसे ही उसकी पूरी उंगली बुर के अंदर तक घुशी वैसे ही कमला चाची कि सिसकारी फूट पड़ी,,,,)

सहहहहह आहहहहहहह,,,,,

क्या हुआ ,,,, चाची,,,,

ककककक,,,कुछ नहीं अपनी उंगली को अंदर बाहर कर ताकि चींटी आराम से बाहर भी कर सकें,,,

(कमला चाची की बात सुनते ही राजू उसी तरह से अपनी ऊंगलीको अंदर बाहर करते हुए अनजाने में ही उसकी बुर में अपनी उंगली पेलने लगा,,, कमला चाची की उत्तेजना और सिसकारी बढ़ने लगी,,,, राजू का मजा आने लगा,,, राजू जो कि अभी तक औरत की बुर तो देख लिया मैंने तुम कहां के दर्शन नहीं कर पाया था जो कि उसकी आंखों के बेहद करीब थी लेकिन फिर भी उसका ध्यान कमला चाची की गांड पर ना होकर उसकी बुर पर ही टिका हुआ था,,, लेकिन उत्तेजना के मारे वहअपना एक हाथ कमला चाची के पीछे की तरफ ले जाकर उसकी नरम नरम बड़ी-बड़ी गांड को अपनी हथेली में दबाए हुए था,,,जिससे वह पूरी तरह से अनजान था लेकिन कमला चाची को इसका अहसास बड़ी अच्छी तरह से था और जिस तरह से वह अपनी हथेली में जोर-जोर से उसकी गांड को दबा रहा था उससे चाची का मजा दोगुना होता जा रहा था,,,।

सहहहहह आहहहहह ,,,आहहहहहहह,,,,, और जोर से राजू और जोर से अंदर बाहर कर,,,,आहहहहहहहह,,,,

Kamlaa chachi



(कमला चाची की बातें सुनकर राजू बड़ी तेजी से अपनी ऊंगली को बुर के अंदर बाहर कर रहा था जिसमें से चप-चप की आवाज आना शुरू हो गई थी,,,कमला और राजू दोनों चींटी के बारे में बिल्कुल भी भुल गए थे बस दोनों अपने अपने तरीके से मजा ले रहे थे,,,, कमला की गरम सिसकारियां खेतों में गूंजने लगी थी वह गर्म सिसकारी लेते हुए बोली,,,।)

सहहहहह ,आहहहहह,,, राजु तुझे मेरी बुर कैसी लगी,,,?

आहहहहहह बहुत अच्छी है चाची ,,,,, बहुत खूबसूरत है,,,,

मेरी बुर के अंदर तेरी उंगली तुझे बहुत गर्म महसूस हो रही है ना,,

बहुत ज्यादा गर्म लग रही है चाची,,,

मैं जानती हूं बुर के अंदर उंगली बुर की गर्मी नही सहन कर पाती,,,, बुर के अंदर केवल एक ही चीज इसकी गर्मी को सहन कर पाती है,,,।

कौन सी चीज है चाची,,(राजू लपालप अपनी उंगली को कमला की बुर में पेलते हुए बोला,,,)

लंड,,,,,,

(कमला चाची के मुंह से लंड शब्द सुनकर जैसे कि राजू को अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था इसलिए वह दोबारा पूछा,,)

क्या चाची,,,?

लंड रे,,,,,बुर की गर्मी को केवल लंड ही सहन कर सकता है और बुर की गर्मी को उतार भी सकता है,,,,

क्या कह रही हो चाची,,,,

(राजू आश्चर्य जताते हुए बोला चाची के मुंह से सुनी यह बातें राजु के लिए बिल्कुल नंई थी,,, कमला चाची इसी मौके की तलाश में थी वह राजू से एकदम से पूछ बैठी,,,)

तु अपनी उंगली की जगह लंड डालेगा इसमें,,,,

(कमला चाची के मुंह से इतनी गंदी बात सुनकर राजू उत्सुकता उत्तेजना और आश्चर्य से कमला चाची की तरफ देखने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कमला चाची उससे यह सवाल पूछ रही है,,,, राजू का गला सूखता जा रहा था,,,, कमला चाची की बुर में अभी भी उसकी उंगली पूरी तरह से घुसी हुई थी,,, कमला चाची देखना चाहती थी कि राजू क्या कहता है व चित्र से जानती थी कि राजु उसकी बात को इंकार नहीं कर पाएंगा,,, राजू ही क्यों कोई भी लड़का उसके इस प्रस्ताव को ठुकरा नहीं पाएगा वह अच्छी तरह से जानती थी,,, राजू कि हां मैं जवाब देता इससे पहले ही उसके कानों में और कमला के कानों में जो आवाज पड़ी उससे वह दोनों एकदम से चौक गए,,,।

माजी खाना लेकर आई हूं,,,,

(इतना सुनते ही कमला चाची के होश उड़ गए वह तुरंत राजू से बोली,,)

निकाल निकाल अपनी उंगली निकाल जल्दी कर,,,,(राजू की आवाज सुनकर हैरान हो गया था और तुरंत अपनी उंगली को कमला चाची की बुर से बाहर निकाल लिया था,,, कमला चाची तुरंत अपनी साड़ी को कमर से नीचे छोड़ दी और व्यवस्थित करने लगी और अपनी बहू रमा के आने से पहले ही बाहर राजू को जो काम कर रहा था वह काम करने के लिए बोल दिया और इस बारे में उसी से बिल्कुल भी बात ना करें,, यह बात, राजू भी अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह की बातें किसी को बताना नहीं चाहिए था इसलिए व कमला चाची की बात मानते हुए घास उखाड़ना शुरू कर दिया,,, कमला चाची अपने काम में लग गई,,, और उसकी बहू रमा खाना लेकर पहुंच गई,,,।
 
कमला चाची का दिल जोरों से धड़क रहा था उन्हें इस बात का डर था कि कहीं उसकी बहू ने सब कुछ देख तो नहीं लिया लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था करना चाहती की बहू रमा उसे ढूंढते हुए खेतों के बीच पहुंच तो गई थी लेकिन वह अपनी आंखों से ऐसा कुछ भी नहीं देखी थी जिससे उसके मन में शंका हो,,,,, अपनी बहू रमा की आवाज सुनते ही कमला चाची अपनी शाडी को तुरंत नीचे गिरा कर खुद भी काम करने लग गई थी और राजू को भी काम करने के लिए बोल दी थी राजू भाई मौके की नजाकत को समझते हुए तुरंत उसी तरह से काम करने लगा था जैसा कि एक इंसान खेतों में काम करता है हालांकि जिस तरह का दृश्य अपनी आंखों से देखा था उसके चलते उसके लंड की हालत बिल्कुल खराब हो रही थी,,, राजू को अपने लंड में दर्द महसूस हो रहा था। राजू अक्सर खेतों में काम करने के लिए जाया करता था लेकिन जिंदगी में पहली बार खेतों में काम करते हुए राजू ने अपनी आंखों से इतने सुहावने दृश्य को अपनी आंखों से देखा था,,,। राजू के साथ-साथ कमला चाची की भी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसे अपनी बहू रामा पर गुस्सा आ रहा था कि ऐन मौके पर वह आ गई वरना आज वह राजू के साथ अपने मन की कर लेती कमला चाची उसी तरह से नीचे झुककर घास उखाडते हुए बोली,,,।

तू क्यों इधर आ गई बहु,,,,?

आपके लिए खाना लेकर आई थी माजी,,,

अरे मैं वापस घर आ कर खा लेती यहां लेकर आने की क्या जरूरत थी,,,

मुझे लगा कि आप नाराज हो कर चली गई हो इसलिए मैं लेकर आ गई,,,

नहीं रे ऐसी कोई बात नहीं है बस थोड़ा सा काम था इसलिए आ गई,,,,( कमला चाची उसी तरह से अपना काम करते हुए बोली दूसरी तरफ रमा भले ही अपने सांसों से बात कर रहे थे लेकिन उसकी नजर राजू की तरफ थी,,, राजू का भोलापन उसे एकदम भा गया था,,, एक तरह से वह उसे मन ही मन में पसंद करने लगी थी,,,)

अच्छा छोड़िए माजी यह सब पहले खाना खा लीजिए,,,

नहीं अभी नहीं खाऊंगी तू रख कर जा यहां से खेतों का काम पूरा होते ही मैं खाना खा लूंगी,,,( कमला चाची किसी भी तरह से अपनी बाबू को वहां से भगाना चाहती थी क्योंकि रंग में भंग वह पहले ही डाल चुकी थी अगर आज का मौका उसके हाथ से निकल गया तो ना जाने कब ऐसा मौका हाथ लगेगा इसलिए वह अपनी बहू को वहां से चले जाने के लिए बोल रही थी ताकि उसके जाते ही वह अपनी रासलीला को एक बार फिर से शुरू कर सकें,,,)

नही माजी पहले आप खाना खा लीजिए तो मैं चली जाती हूं वरना मुझे ऐसा ही लगा कि आप नाराज हैं,,,( रमा बात तो अपनी सास से कर रही थी लेकिन वह देख राजु को रही थी क्योंकि उसे इस तरह से देखना भी उसे अच्छा लग रहा था,,)

नहीं नहीं तू जा यहां से,,, धूप तेज होने वाली है और तू घर खुला छोड़ कर आई है,,,,,,, घर इस तरह से छोड़कर नहीं आना चाहिए था जा जल्दी चोरों उचक्कों का भरोसा नहीं होता ऐसे ही मौके की तलाश में लगे रहते हैं,,,,। जा अब यहां रुक मत,,,

ठीक है माजी मैं जा रही हूं लेकिन खाना खा लेना और राजू तुम भी खाना खा लेना,,,,

ठीक है भाभी मैं भी खा लूंगा,,,,

( राजू भी काम रोक कर उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोला जवाब में वह भी राजू को देख कर मुस्कुरा दी और वहां से चलती बनी,,, कमला चाची वहीं खड़ी होकर उसे जाते हुए देखती रही और जब तक वह आंखों से ओझल नहीं हो गई तब तक वह उसे ही देखती रही जैसे ही वह आंखों से ओझल हुई तो उसकी जान में जान आई,,,)

बाप रे आज तो बाल बाल बचे अगर उसकी नजर पड़ जाती तो न जाने क्या हो जाता,,,

सही कह रही हो चाची,,,,( राजू की कमला चाची के सुर में सुर मिलाते हुए बोला वैसे रमा के आ जाने से उसे भी अच्छा नहीं लगा था क्योंकि बेहद खूबसूरत नजारा जो उसके सामने चल रहा था वह कमला चाची की तरफ देखते हुए बोला)

अब तो ठीक है ना चाची,,,,?

तुझे क्या लगता है ठीक हो गया है अभी भी वैसे ही तकलीफ है मेरी बुर में जलन हो रही है,,, ऐसा लगता है कि जैसे एकदम अंदर घुस गई है और वहां काट रही है,,,,( कमला चाची जानबूझकर साड़ी के ऊपर से अपनी बुर को खुजाते हुए बोली,,, कमला चाची की हरकत को देखकर राजू के पजामे में फिर से हरकत होने लगी,,,,)

तो क्या करोगी चाची मुझे तो नहीं लगता कि मेरी उंगली से काम बन पाएगा,,,

हां तु सच कह रहा है मेरी बुर के अंदर तेरी उंगली छोटी पड़ रही है,,,( कमला चाची मादकता भरी गहरी सांस लेते हुए बोली,,, और राजू कमला चाची के मुंह से बार-बार बुर शब्द सुनकर मदहोश हुआ जा रहा था,,, राजू फिर से कमला चाची की बुर में अपनी उंगली पेलना चाहता था क्योंकि उसे ऐसा करने में बहुत मजा आ रहा था,,, लेकिन अपने मन से खुले शब्दों में कहने में उसे शर्म आ रही थी कमला चाची की बात सुनकर राजू बोला,,,)

तो फिर अब क्या करोगी चाची,,,,,( राजू कुतूहल भरी नजरों से कमला चाची की तरफ देखते हूए बोला,,, कमला चाची का भी दिल जोरों से धड़क रहा था एक बार फिर से उनके तन बदन में उमंग जागने लगी क्योंकि राजु के लंड से ना सही उसकी ऊंगली से उसकी बुर पानी पानी हो गई थी,,।)

आहहहहह,,, मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करु,,, मेरी बुर में बहुत ज्यादा जलन हो रही है,,,( कमला चाची उसी तरह से अपनी बुर को साड़ी के ऊपर से मसलते हुज बोली,,,)

एक काम करो चाची पेशाब कर लो हो सकता है पेशाब की धार के साथ चींटी भी बाहर निकल जाए,,,( राजू कुछ देर तक सोचते हुए बोला,,,, राजु की बात सुनते ही कमला चाची का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि जो वह बात कह रहा था उसके बारे में कमला चाची भी नहीं सोची थी और ऐसा करने में शायद उसका काम बन सकता था एक अनजान जवान लड़के के सामने पेशाब करने में उसके तन बदन में कैसी हलचल होती है यह भी कमला चाची देखना चाहती थी उसे पूरा यकीन था कि उसे पेशाब करता हुआ देख कर राजू के तन बदन में आग लग जाएगी और वह चुदवासा हो जाएगा,,,)

क्या इससे काम बन जाएगा,,,

क्यों नहीं चाची जरूर बन जाएगा,,,,( पेशाब करने वाली बात कहकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी जिससे एक बार फिर से उसके पजामे में तंबू बनना शुरू हो गया था और तंबु को देखकर कमला चाची की हालत खराब हो रही थी,,, दोनों तो तन बदन में उत्तेजना अपना असर दिखा रहा था कमला चाची राजू की बात सुनकर उत्सुक हो गई थी पेशाब करने के लिए इसलिए वह तुरंत,, खेत के किनारे आगे बढ़ते हुए बोली,,,)

तु कहता है तो यह भी कर के देख लेती हूं,,,( इतना कहते हुए कमला चाची खेत के किनारे पहुंच गई और राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा कमला चाची राजू की तरफ देखते हुए धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी कमला चाची अपनी चूची के साथ-साथ राजू को अपनी बुर के दर्शन करवा चुकी थी केवल अपनी नंगी गांड अभी तक पूरी तरह से नंगी नहीं दिखाई थी इसलिए वह इस बार राजू की तरफ अपनी पीठ करके खड़ी हो गई थी,,, धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर उठा रही थी राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था और देखते ही देखते कमला चाची अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और राजू की आंखों के सामने कमला चाची की बड़ी-बड़ी एकदम गोरी गांड चमक उठी,,,, सुनहरी धूप में कमला चाची की गोरी गांड सोने के आभूषण की तरह चमक रही थी जिसे देखकर राजू का लंड पूरी तरह से अकड़ गया,,,, कमला चाची की बड़ी-बड़ी गाड देख खराब हो गई,,,, राजू पहली बार किसी औरत की नंगी गांड को देख रहा था हालांकि उसने औरतों की बुर को दो बार देख चुका था लेकिन अभी तक उनकी मदमस्त कर देने वाली गांड के दर्शन नहीं हुए थे और वह भी कमला चाची ने अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी गांड के दर्शन करवा दी थी,,,,, पल-पल राजू की हालत खराब हो रही थी और जिस तरह से कमला चाची अपनी पीठ राजू की तरफ करके अपनी साड़ी कमर तक उठा कर रखे हुए थी,,, उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी बड़ी बड़ी गांड राजू को साफ दिखाई दे रही होगी और वहां यही देखना चाहती थी कि उसकी नंगी गांड देखकर राज्यों के हाव-भाव पर क्या असर होता है,,, अभी देखने के लिए वह अपनी साड़ी कमर तक उठाए हुए पीछे नजर करके राजू की तरफ देखे तो वह मन ही मन प्रसन्न हो गई,,, पर जानबूझकर अपनी गांड को थोड़ा मटका कर नीचे की तरफ बैठ गई,,, उसे अपनी कामुक हरकतों पर पूरा यकीन था कि राजू पूरी तरह से उसके वश में होता चला जा रहा है,,। देखते ही देखते कमला चाची राजू की आंखों के सामने पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई थी लेकिन उसके मन में कुछ और सुझ रहा था,,,,। वह कुछ देर तक उसी तरह से बैठी रही और पीछे खड़ा राजू अपनी आंखों के सामने कमला चाची को इस तरह से बैठकर पेशाब करते हुए देख रहा था उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उसके दिल की धड़कन किसी इंजन की तरह चल रही थी उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि जिंदगी में पहली बार वह अपनी आंखों से किसी औरत को पेशाब करते हुए देखने जा रहा था और वह भी बिना किसी दिक्कत के,,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता जा रहा था,,, कमला चाची की गोरी गोरी गांड उसकी आंखों की चमक बढ़ा रही थी,,,,, तभी कमला चाची बोली,,,।

आहहह राजू मुझसे पेशाब नहीं हो रहा है,,,,

क्यों चाची,,?( ऐसा कहते हुए राजू उसके करीब पहुंच गया,,,)

पता नहीं क्यों लेकिन मुझसे पेशाब नहीं हो रहा है,,,,

तो क्या होगा चाची,,,,

एक काम कर तू मेरी आंखों के सामने पेशाब कर शायद ऐसा हो सकता है कि तुझे पेशाब करता हुआ देखकर मेरी बुर से भी पेशाब निकलने लगे,,,

( कमला चाची की बातें सुनकर राजू के दिल की धड़कन बढ़ने लगी उसे समझ नहीं आता क्या करें,,)

क्या ऐसा हो सकता है चाची,,,,

हां बिल्कुल हो सकता है,,, तु जल्दी कर मेरे बुर की जलन बढ़ती जा रही है,,,,

( कमला चाची की इस तरह की बातें राजू के होश उड़ा रहे थे वह कमला चाची की बात मानने को तैयार हो गया था और उसके बगल में ही खड़ा होकर अपने पजामे को नीचे करने लगा,,, देखते ही देखते वह अपने पहचानी को नीचे करके अपना लंड बाहर निकाल दिया,,,, जिसे देखकर कमला चाची की सांस अटक गई कमला चाची ने अपनी पूरी जवानी में इस तरह का तगड़ा लंड कभी नहीं देखी थी,,, उत्तेजना के मारे और उत्सुकता के मारे उसकी बुर फूलने पिचकने लगी थी,,, कमला चाची से रहा नहीं गया और उसके मुंह से निकल गया,,,)

बाप रे इतना बड़ा लंबा और मोटा इतना तगड़ा तो मैंने आज तक नहीं देखी,,,( कमला चाची के मुंह से अपने लंड की तारीफ सुनकर राजू का सीना गदगद हुआ जा रहा था,,, कमला चाची प्यासी आंखों से उसके हथियार को देखे जा रही थी और उससे रहा नहीं गया और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर राजू के लंड़ को अपने हाथ में पकड़ ली,,,, एक औरत का हाथ अपने लंड पर महसुस करते ही राजू और ज्यादा उत्तेजित हो गया,,, राजू कुछ बोल पाता इससे पहले ही कमला चाची बोली,,,)

अब मुत राजू,,,

( बस इतना सुनना था कि राजू की पेशाब फूट पड़ी वह जोरों से मुतना शुरू कर दिया,,, और उसे देखकर कमला चाची से भी रहा नहीं गया और उसकी बुर से पेशाब की तेज धार फूट पड़ी,,, राजू की सासे बड़ी गहरी चल रही थी वह अपनी नजरों को कमला चाची की दोनों टांगों के बीच डालकर उसे पेशाब करता हुआ देख रहा था,,, यह नजारा राजू के लिए बेहद अद्भुत और अतुल्य था क्योंकि उसने आज तक इस तरह का नजारा नहीं देखा था इसलिए उसकी उत्तेजना परम शिखर पर थी,,, थोड़ी ही देर में राजू और कमला चाची दोनों ने ही मित्र विसर्जन का कार्यक्रम समाप्त कर दिया पेशाब करने के तुरंत बाद राजू बोला,,,)

अब कैसा लग रहा है चाची चींटी निकल गई,,,

( राजू के मोटे तगड़े लंडको देखकर कमला चाची की हालत खराब हो गई थी और वह जल्द से जल्द उसे अपनी लेकर चुदवाना चाहती थी,,,, इसलिए सीधे-सीधे अपने मतलब हुए वह बोली,,)

नहीं रे मुझे तो बिल्कुल भी आराम नहीं हुआ,,,( ऐसा कहते हुए वह खड़ी हो गई लेकिन अपनी साड़ी पर कमर तक पकड़कर उठाए हुए थी और राजू प्यासी नजरों से कमला चाची की बुर को देख रहा था,,,) अब एक ही रास्ता रह गया है मुझे इस तकलीफ से निजात दिलाने का ,,,

वह क्या चाची,,,?

इस बार तू अपना मोटा तगड़ा लंड मेरी बुर में डाल,,,( इस बार बेझिझक कमला चाची अपने मन की बात राजू को बोल दी,,, राजू को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें उसी तरह का कोई भी अनुभव नहीं था,, लेकिन जो कुछ भी कमला चाची बोल रही थी उसे करने के लिए वह पूरी तरह से तैयार था क्योंकि उसकी बात को ही सुनकर राजू के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,,)

लेकिन कैसे चाची मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है

तू चिंता मत कर तुझे कुछ भी ज्यादा करने की जरूरत नहीं है जैसा मैं कहता हूं वैसा करते रहना मुझे अपने आप आराम मिल जाएगा,,,( ऐसा कहने के साथ ही कमला चाची अच्छी सी जगह ढूंढने लगी और घास के ढेर पर अच्छी जगह देखकर उसी तरह से अपनी साड़ी कमर तक उठाए हुए उसी पर लेट गई,,, उत्तेजना के मारे राजू का गला सूख रहा था,,, कमला चाची की घास के ढेर पर लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगों को फैला दी थी,,, इस तरह की हरकत करने की वजह से कमला चाची के भी तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपने तन बदन में इस उम्र में भी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी,,,। कमला चाची की नजर राजू के हथियार पर थी जो की पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा था,,,, कमला चाची इशारे से राजू को अपनी दोनों टांगों के बीच बुलाते हुए बोली,,,)

अब जल्दी से आजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,

( इतना सुनते ही राजू तुरंत एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर कमला चाची की दोनों टांगों के बीच पहुंच गया और बोला,,,)

अब क्या करूं चाची,,,?

बस अब घुटनों के बल बैठ जा मेरे बिल्कुल करीब आकर,,,

( इतना सुनते ही राजू अपने घुटनों के बल बैठने को चला तभी उसे कमला चाची पजामा उतारने के लिए बोली,, और राजू भी बिना देर किए हुए अपना पजामा उतार कर कमर के नीचे पूरी तरह से नंगा हो गया,,,)

हां अब ठीक है अब घुटनों के बल बैठ जा और जैसा मैं बताती हूं वैसा ही कर,,,

( कमला चाची की बात सुनकर राजू जैसा जैसा वह बता रही थी वैसा ही कर रहा था वह घुटनों के बल बैठ गया था और कमला चाची को आगे की तरफ सरक कर अपनी मोटी मोटी जांघो को उसकी जांघों पर चढ़ा दी ऐसा करने से उसकी लंड की दूरी पूरी तरह से खत्म हो गई,,, कमला चाची का उत्तेजना के मारे गला सूख रहा था अपना हाथ आगे बढ़ाकर राजू के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसे अपनीनी गुलाबी बुर के छेद पर रख दी और राजू को धक्का मारने के लिए बोली राजू की हालत बिल्कुल खराब थी उसके तन बदन में आग लग रही थी पहली बार उसका लंड* बुर * से स्पर्श हो रहा था,,,। राजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी चुदाई के ज्ञान से वह बिल्कुल अनजान था,,,। लेकिन कमला चाची ने उसे बताई थी कि कुछ भी हो उसे अपना पूरा लंड* उसकी बुर की गहराई में उतार देना है तभी उसे आराम मिलेगा और देखते ही देखते राजू पूरी तरह से ही उसकी बुर की गहराई में उतर गया,,,।

आहहहहहह,,( जैसे ही राजू का पूरा गहराई में उतरा कमला चाची के मुंह से सिसकारी भरी आवाज निकल गई,,,।)

क्या हुआ चाची,,,,

कुछ नहीं हुआ राजू देखे बस तू अपना काम कर अपने घंटे को अंदर बाहर करना शुरू कर दें और जितना तेज हो सकता है उतनी जोर से अपनी कमर हिला तब जाकर मुझे आराम मिलेगा,,,

( राजू को कमला चाची का आदेश और दिशा निर्देश मिल चुका था इसलिए अब उसे पूछने की जरूरत नहीं थी,,, राजू उसी तरह से अपनी कमर हिलाते हुए अपने लंड को कमला चाची की बुर के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,, कमला चाची को उम्र के इस दौर में एक जवान लड़के से चुदवाने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और राजू की यह पहली चुदाई* थी जिसमें उसे बहुत मजा आ रहा था,,, वह बड़े जोर से अपनी कमर हिला रहा था कमला चाची राजू के ताकत को देखकर पूरी तरह से मचल उठी थी उसकी बुर पानी पानी हो रही थी,,। राजू की कमर किसी इंजन की तरह ऊपर नीचे हो रही थी ,,, फच फच. की आवाज खेतों में गूंज रही थी,,,,

तकरीबन आधे घंटे जैसी घमासान चुदाई के बाद राजु को अपने अंदर कुछ महसूस होने के लगा वह अपने अंदर की इस कशमकश को समझ पाता इससे पहले ही उसके लंड से पानी का फव्वारा फूट पड़ा,,,, और वह कमला चाची के ऊपर ढेर हो गया,,,, लेकिन देर होने के पहले वह कमला चाची को तीन बार झाड़ चुका था,,,, कुछ देर तक वह उसी के ऊपर पड़ा रहा और जब शांत हुआ तो वह कमला चाची के ऊपर से उठने लगा,,,, कमला चाची मुस्कुराते हुए बोली,,।

बाप रे गजब की ताकत है तेरे में,,,,

अब कैसा लग रहा है चाची,,,,

अब जाकर राहत महसूस हो रही है अब लगता है कि चींटी निकल गई,,,( ऐसा कहते हुए मुस्कुराने लगी और अपने कपड़ों को दुरुस्त करते हुए बोली,,)

देख इस बारे में किसी को भी कानो कान खबर नहीं होनी चाहिए,,, तुझे मजा आया ना,,,

हां चाची मुझे बहुत मजा आया,,,

अगर आगे भी इसी तरह का मजा लेना है तो किसी को बताना नहीं और सीधे मेरे पास चले आना जब भी मैं बुलाऊं तो चले ही आना तुझे ऐसा ही मजा दुंगी,,,

ठीक है चाची मैं किसी को भी नहीं बताऊंगा,,,

तू बहुत अच्छा लड़का है चल अब चल कर खाना खा लेते हैं
 
राजू कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी जिंदगी में इस तरह से बहार आएगी,,, कमला चाची इस तरह से तन और मन से आत्मसमर्पण कर देगी इस बारे में उसे कभी अंदाजा नहीं था वह अपने मन में यह सोच रहा था कि उसके दोस्त लोग सही कह रहे थे कि कमला चाची उसका लेना चाहती है,,, तभी तो उसे से हंस हंस कर बात करती रहती है और दूसरों को भाव भी नहीं देती थी,,, राजू बहुत खुश था इतना तो उसे मालूम ही था कि जो कुछ भी वह कमला चाची के साथ किया था उसे सरल भाषा में चुदाई कहते हैं जो कि वह बड़े अच्छे से संतुष्टि प्राप्त कर चुका था,,,। तेरी मां चोद दूंगा तेरी बहन चोद दूंगा इन शब्दों कोइनकेंती भाषाओं को राजू अपने दोस्तों के मुंह से कई बार सुन चुका था एक दूसरे को गाली देते हुए लेकिन इसके असली मतलब और मकसद को आज जाकर समझ पाया था और उस पल को जिया था जिसके एहसास से वह अभी भी पूरी तरह से गदगद हुए जा रहा था,,,,, राजू ने कभी अपने इस उम्र में भी औरतों के खूबसूरत अंगों के बारे में कभी कल्पना भी नहीं किया था,,, औरतों का खूबसूरत है उनकी बनावट उनका खूबसूरत बदन उसकी कल्पना से परे था,,,,,

पहली बार उसे औरतों के खूबसूरत हमको की झलक कमला चाची के नहाने की वजह से ही प्राप्त हुई थी और दूसरी बात रही सही कसर वह अपनी बुआ की बुर देखकर पूरा कर लिया था लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि बुर के अंदर लंड डालने में ईतना मजा आता है,,,,,, राजू को अपने आप पर इतना विश्वास बिल्कुल भी नहीं था कि कमला चाची के दिए गए कार्य को वह सिद्ध कर पाएगा,,, कमला चाची अपनी सारी युक्ति लगा चुकी थी,,, राजू के साथ संभोग करने के लिए,,,,,,, जो कुछ भी संभव हो पाया था वह कमला चाची के निर्देश की वजह से ही संभव हो पाया था वरना राजू तो इस खेल में खिलाड़ी नहीं बल्कि अनाड़ी था लेकिन अब उसे खिलाड़ी बनाने की पहली सीढ़ी को कमला चाची खुद पार करा चुकी थी,,, ,, ऐसा लग रहा था कि मानो कमला चाची एक शिक्षिका के रूप में अपने विद्यार्थी राजू को संभोग का प्रकरण सिखा रही हैं,,, और राजू धीरे-धीरे उसमे खरा उतरता जा रहा था,,,,,

कमला चाची की चुदाई करते समय राजू का मन बहुत मजा आ रहा है कमला चाची की चूचियों को अपने हाथ में पकड़ कर दबाने के लिए लेकिन राजू को यह बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि संभोग करते समय किसी औरत को चोदते समय और ज्यादा मस्ती और सुख प्राप्ति के लिए ऐसा ही किया जाता है लेकिन उसके दिमाग में यह बात संभोग की पराकाष्ठा और उन्मादकता की वजह से उत्पन्न हो रही थी बार-बार उसका मन गुरुत्वाकर्षण बल के चलते कमला चाची की बड़ी बड़ी चूचीयो पर खींची चली जा रही थी,,, लेकिन ऐसा करने से वह डर भी रहा था वह केवल कमला चाची के दिशा निर्देश अनुसार अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा था लेकिन ऐसा करने में जो सुख उसे प्राप्त हो रहा था ऐसा तो कभी उसने कल्पना भी नहीं किया था,,,

अपने लंड को छोड़ दी और सीखना चाची की बुर के अंदर बाहर करते हुए राजू कमला चाची के चेहरे पर बदलते भाव छोटे बड़े अच्छे से देख रहा था,,,और उसके मुख से निकल रही गरमा-गरम से इस कार्य की आवाज को सुनकर भी वह कुछ ज्यादा ही मस्ती में आ जा रहा था,,,,,, खेतों में काम करने के बहाने आकर जो कुछ भी राजू ने पाया था उससे वह बेहद खुश था,,,। राजू यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि कमला चाची की चुदाई के बारे में अगर उसके दोस्तों को पता चलेगा तो वह जल भूल जाएंगे इसलिए वह मन ही मन में प्रसन्न भी हो रहा था,,,,। राजू के हाव भाव को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे कि मां कमला चाची के साथ प्रथम संभोग के बाद से ही बड़ा और समझदार होने लगा है,,,,

कमला चाची और राजू दोनों खाना खा रहे थे,,, कमला चाची राजू के साथ चुदवा कर बेहद खुश थी,,,वह बहुत पहले से ही राजू के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहती थी लेकिन उसे कभी मौका नहीं मिल रहा था और राजू की नादानी को देखते हुए अपना कदम आगे बढ़ाने में उसे डर भी लग रहा था लेकिन सब कुछ बड़े आराम से हो चुका था जिसकी उसे तसल्ली थी,,,। लेकिन कमला चाची राजू के साथ खुलकर चुदाई का मजा लेना चाहती थी और ऐसा हो नहीं पाया था,,, चींटी काटने वाली युक्ति उसकी कामयाब हो चुकी थी,,,,,, राजू के साथ उसकी उंगलियों से छेड़खानी में ही उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी लेकिन जिस तरह से उसकी बहू रमा खेतों पर पहुंच चुकी थी उसे देखते हुए कमला चाची के मन में इस बात का डर बैठ गया था कि अगर आगे मौका हाथ से चला जाएगा तो ऐसा मौका न जाने कब मिलेगा ,,,,,, वह पहले से ही पेशाब करते हुए राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड के दर्शन करके पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी कमला चाची राजू की तरह बवाल मचा देने वाला लंड नहीं देखी थी,,,, इसीलिए तो पेशाब करते समय राजू के लंड के दर्शन करते हुए उसकी बुर पानी फेंक दी थी,,,।राजू के साथ खुलकर मस्ती करना चाहती थी उसके मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी और उसे अपना दूध पिलाना चाहती थी और साथ में अपनी मस्त रसीली बुर के अंदर उसकी जीभ को महसूस करना चाहती थी,,, और हर आसन में संभोग का भरपूर मजा लेना चाहती थी लेकिन शायद इस समय उसके पास समय बिल्कुल भी नहीं था और वहां राजू के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी और इसी लालच के कुछ और ना करके बस आनंद को लेकर संतुष्ट हो चुकी थी उसका काम बन चुका था वह जानती थी कि एक बार चुदाई कर देने के बाद राजू का आकर्षण उसकी तरफ और ज्यादा बढ़ जाएगा एक तरह से वह उसका गुलाम बन जाएगा और वह जब चाहे तब राजू के साथ चुदाई का भरपूर आनंद लूट सकेगी और कमला चाची अपनी तरफ से सारी चालें चल चुकी थी और पूरी बाजी कमला चाची के हाथ में आ चुकी थी,,,।

देख राजू जो कुछ भी यहां पर हम दोनों ने किया इस बारे में किसी को भी मत बताना मैं फिर तुझ से कह देती हूं,,,(रोटी के टुकड़े को मुंह में डालते हुए कमला चाची बोली)

नहीं नहीं चाची ऐसा कभी नहीं होगा,,,, लेकिन तुम्हें अब तो आराम हो गया ना,,,

अरे आराम कैसे नहीं होगा,,, तेरा इतना लंबा मोटा लंड है और मेरी बुर में जाकर सारी कसर निकाल दिया है,, सारी परेशानियां दूर हो गई है,,,(खाना खाते खाते ही इतना कहने के साथ ही वह एक हाथ से बैठे हुए अपनी साड़ी के ऊपर उठा कर अपने बालों से भरी हुई बुर दिखाते हुए बोली,,)

देख नहीं रहा है तेरा उपचार पाकर कैसा पानी छोड़ रही है,,, लेकिन तू जानता भी है कि जो हम दोनों ने किया है इसे क्या कहते हैं,,,।

(कमला चाची के कहने का मतलब पूरा जो अच्छी तरह से जानता था जवान लड़का होने के नाते और जमाल लड़कों के संगत में उसे गाली गलौज करते हुए और अपने दोस्तों की बातों को सुनकर इतना तो मालूम ही था कि एक औरत के साथ एक लड़का जब उसकी बुर में लंड डालता है तो उसे क्या कहते हैं लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए बोला)

नहीं तो,,,, क्या कहते हैं चाची,,,?( सब्जी को रोटी में लगाकर मुंह में डालते हुए बोला)

सच में तु एकदम बुद्धू है,,,, अरे बुद्धू हम दोनों ने जो किया उसे चुदाई कहते हैं,,,,।

वो ,,,,, अब समझा,,,, इसीलिए सब गाली गलौज करते हुए कहते हैं तेरी मां चोद दूंगा तेरी बहन चोद दूंगा,,,,।

हां अब जाकर तू समझा,,,,

लेकिन चाची ऐसा करने में मुझे ना जाने क्यों बहुत मजा आ रहा था बहुत अजीब सा लग रहा था,,,,(राजू एकदम से अनजान बनते हुए बोला,,हालांकि यह बात सच ही था कि संभोग के सुख के अनुभव सेवा बिल्कुल अज्ञान था,,, और राजू की यह बात सुनकर कमला चाची मुस्कुराते हुए बोली)

अरे ऐसा ही होता है इस खेल में इतना मजा आता है कि पूछो मत तभी तो सब खेलने के लिए बेकरार रहते हैं,,,,, मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरे दोस्त लोग भी मेरे बारे में न जाने कैसी कैसी बातें करते रहते हैं,,।

हां चाची तुम सही कह रही हो जब भी तुम मुझसे बातें करती हो ना तो मेरे दोस्त लोग ना जाने क्यों मुझसे जलते रहते हैं,,,

क्या कहते हैं,,, तेरे दोस्त लोग,,,

अरे बहुत कुछ कहते हैं गंदी गंदी बातें करते हैं,,,

अरे बताएगा भी की कैसी कैसी बातें करते हैं,,,,

अरे चाची पूछो मत जब भी तुम मुझसे बातें करती हो तो वह लोग यही कहते हैं कि लगता है चाची को तेरा पसंद आ गया है,,, चाची तेरे से चुदवाना चाहती है,,,

(राजू की यह बात सुनकर कमला चाची मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

सच ही तो कहते हैं तेरे दोस्त मुझे तु शुरु से बहुत अच्छा लगता है और अब तो तु मुझे और ज्यादा अच्छा लगने लगा है,,,

ऐसा क्यों चाची,,,

तेरे लंड की वजह से,,,, हां राजू मैं सच कह रही हूं तेरे जैसा मोटा तगड़ा लंड शायद गांव में किसी के पास नहीं है,,,तभी तो तू अपने लंड को मेरी बुर में डालकर आज मुझे एकदम मस्त कर दिया,,,,,,

(कमला चाची की बात सुनकर राजू मन ही मन में बहुत खुश हो रहा था क्योंकि कमला चाची उसके लंड की बडाई कर रही थी,,,, कमला चाची की बात सुनकर राजु तपाक से बोला,,,)

लेकिन चाची मेरे दोस्त तो मेरा मजाक उड़ाते हैं कि तेरे पास है ही नहीं तभी तो कमला चाची के साथ कुछ कर नहीं पाता अगर तेरी जगह हम होते तो कब से कमला चाची को मस्त कर देते,,,

तो दिखा देना चाहिए था ना खोल कर एक दिन सबका मुंह बंद हो जाता तेरा लंड देखकर,,,,,,,

जाने दो ना चाची वह लोग अच्छे लोग नहीं है उन लोगों के साथ मुझे बहस में नहीं उतरना है,,,और वैसे भी अगर यह बात मेरे पिताजी को पता चल गई तो मेरी खैर नहीं,,,,,,।

हां सच कह रहा है तू,,, इस बात की किसी को कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए अगर ऐसा हुआ तो आकर भी हम दोनों ऐसे ही मजा करते रहेंगे और पकड़े गए तो सब कुछ खत्म,,,,

तुम चिंता मत करो चाची किसी को कानों कान खबर नहीं होगी,,,,

बहुत अच्छा है तू,,,,(ऐसा कहते हुए कमला चाची अपना हाथ आगे बढ़ाकर राजू के सर पर हाथ फेरने लगी,,, राजू के लंड की मोटाई को वह अपने बुर के अंदरूनी हिस्सों पर बड़े अच्छे से उसकी रगड़ को महसूस कर पाई थी ऐसा अनुभव से अपनी जवानी के दिनों में ही प्राप्त हुआ था इस उम्र में किसी लड़के का उसकी बुर की दीवारों को रगड़ देगा इस बात का अंदाजा उसे भी बिल्कुल नहीं था कमला चाची अपने मन ही मन में यही सोच रही थी कि राजू ने अपने लंबे लंड से उसके बुर का भोसड़ा बना दिया था,,,,,, और कमला चाची इस बात से भी हैरान थे कि जिंदगी में पहली बार संभोग करते हुए राजु दूसरों की अपेक्षा जल्दी स्खलित नहीं हुआ था,,, तीन बार उसका पानी निकालने के बाद ही उसके खुद का पानी निकला था,,,, उसके लंड से निकली लावा की पिचकारी उसे अपने बच्चेदानी पर साफ महसूस हुई थी जिसके बदौलत वह तुरंत उसके साथ झड़ गई थी,,।

राजू और कमला चाची दोनों खाना खा चुके थे लेकिन एक बार फिर से कमला चाची की बुर पानी छोड़ने लगी उसकी पूर्व में खुजली होना शुरू हो गई वह एक बार फिर से राजू के लंड को अपनी बुर में लेना चाहती थी,,,, उसे इस बात की आशंका थी कि राजु दूसरी बार कर पाएगा कि नहीं,,,,,, और राजू के मन में भी यही चल रहा था कि एक बार फिर से चाची को चोदने को मिल जाता तो बहुतमजा आता क्योंकि एक बार फिर से पजामे में उसके मुसल ने हरकत करना शुरू कर दिया था,,,, लेकिन यह बात राजू अपने मुंह से नहीं कह सकता था इसलिए खामोश ही रहा लेकिन उसके मन की बात जैसे कमला जान गई हो इस तरह से बैठे बैठे ही,, अपनी साड़ी को ऊपर उठा कर एक बार फिर से राजू को अपनी बुर का दर्शन करते हुए बोली,,,)

देख राजू तेरे लंड ने ईसका क्या हाल किया है कैसे पानी छोड़ रही है,,,,

(कमला चाची की इस हरकत पर एक बार फिर से कमला चाची की बुर के दर्शन करके राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और उसे प्यासी नजरों से देखते हुए बोला,,,)

हां चाची अब क्या करना है,,,,

करना क्या है एक बार फिर से तेरे को डालना पड़ेगा लेकिन इस बार पीछे से,,,,

पीछे से मैं कुछ समझा नहीं,,,,

ऐसे तो नहीं समझेगा रुक मैं तुझे बताती हूं ,,(इतना कहते हुए कमला चाची अपनी जगह से खड़ी हो गई और पास में ही घनी झाड़ियों के पास जाकर खड़ी हो गई राजू वहीं खड़ा खड़ा कमला चाची को देख रहा था कमला चाची झाड़ियों के पास खड़ी होकर पीछे नजर घुमाकर राजु को देखी और मुस्कुराने लगी,,, राजू की नजर से खूबसूरत गोलाकार बड़ी बड़ी गांड पर ही टिकी हुई थी जिसे देख कर उसके मुंह के साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था,,,, कमला चाची राजू को देखते हुए अपनी सारी को पकड़कर एक बार फिर से ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,, और देखते ही देखते राजू की आंखों के सामने कमला चाची अपनी साड़ी कमर तक उठा दी,,,राजू कमला चाची की भरपूर नंगी गांड को देखकर मचल उठा गांड की दोनों फांके बड़े-बड़े तरबूज की तरह थी जिसे पकड़ कर दबाने की इच्छा राजू की बहुत कर रही थी,,, कमला चाची उसी तरह से ही राज्यों की तरह मुस्कुराकर देखते हुए अपने दोनों हथेली को जोर से अपनी गांड पर मारते हुए बोली,,,।)

बोल राजू कैसी है मेरी गांड,,,?

बहुत खूबसूरत है चाची,,,,(राजू प्यासी आंखों से कमला चाची की गांड को देखते हुए बोला,,)

कभी किसी औरत की गांड देखा है कि नहीं,,,

नहीं चाची पहली बार देख रहा हूं और वह भी आपकी,,,

तो दूर क्यों खड़ा है पास आना,,,

(कमला चाची की बात सुनकर राजू तुरंत उसके पास पहुंच गया और उसके बेहद करीब खड़ा हो गया कमला चाची की बेहद नजदीक जिसे वह प्यासी नजरों से देख रहा था)

पकड़ कर देख कैसा लगता हैं,,,,(चाची अपने अपने मुंह से अपने नितम्बों को पकड़ने का आमंत्रण देते हुए बोली,,, राजू का मन तो पहले से यही कह रहा था इसलिए हम ना चाहत की बात करते हैं वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा दिया लेकिन कमला चाची की गांड पर पहुंचते-पहुंचते उसके हाथों में कंपन होने लगा लेकिन फिर भी वह कमला चाची की गांड पकड़ ही लिया ,,, कमला चाची की गांड को पकड़कर उसे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,, कमला चाची ने जिस तरह से अपने हाथों से अपनी गांड पर दो चपत लगाई थी उसी तरह से राजू भी कमला चाची की गांड पर चपत लगा दिया और उसे चपत लगाने में बहुत मजा आया क्योंकि चपत लगते ही कमला चाची के मुंह से सिसकारी फूट पड़ी,,,। कमला चाची को भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन वह वक्त बर्बाद नहीं करना चाहती थी,,, इसलिए वह मुस्कुराते हुए झुक गई,,, झुकने के बाद अपनी गांड को थोड़ा और ऊपर उठाते हुए बोली,,,।

राजू तुझे मेरी बराबर दिख रही है कि नहीं,,,?

( कमला चाची की बातें सुनकर राजू तुरंत झुक कर कमला चाची की गांड के बीचो-बीच देखने लगा उसे कमला चाची के बड़े साफ तौर पर नजर आ रही थी,,)

हां चाची एकदम साफ नजर आ रही है,,,

बस राजू बेटा पीछे से तुझे अपने लंड को उसमें डालना है जैसा आगे से किया था वैसे पीछे से करना है कर तो लेगा ना,,

हां चाचा तुम बिल्कुल चिंता मत करो आराम से कर लुंगा,,,,

बस बेटा यही तेरे मुंह से सुनना था अब जल्दी से डाल दे,,,

(इतना सुनने के बाद ही राखी एक बार फिर से अपना पजामा उतार कर फेंक दिया और कमला चाची के पीछे खड़े होकर अपने लंड को कमला चाची की गुलाबी बुर पर रखते हुए जोरदार धक्का मारा कमला चाची की बुर पहले से गीली हो चुकी थी इसने एक बार फिर से गच के आवाज के साथ राजू का लंड कमला चाची के बुर में प्रवेश कर गया,,, कमला चाची के मन में आशंका थी कि राजू जिस तरह से आगे से कर पाया था क्या पीछे से कर पाएगा पर यही वह देखना चाहती थी क्योंकि कमला चाची जानती थी कि उसकी गांड बहुत बड़ी-बड़ी थी ऐसे में पीछे से कर पाना आसान नहीं होता था और इसका उसे खुद का अनुभव था जिन जिन के साथ उसने शारीरिक संबंध बनाई थी वह लोग पीछे से उसे संतुष्ट करने में नाकामयाब हो गए थे,,, लेकिन कमला चाची के चेहरे पर चमक पैदा होने लगी क्योंकि देखते ही देखते राजीव अपना पूरा लंड उसकी बुर में पीछे से डाल चुका था और उसकी बड़ी बड़ी गांड पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था एक अच्छी अध्यापिका का यही काम होता है कि वह जो काम भी अपने विद्यार्थी को सिखाए वह बड़े लगन से और अच्छे तरीके से सिखाएं,,, और यह काम कमला चाची बखूबी कर दिखाई थी और एक अच्छे विद्यार्थी का भी फर्ज होता है कि अपने अध्यापक के द्वारा सिखाए गए हरपाठ का वह अच्छी तरीके से कंठस्थ कर ले ताकि जरूरत पड़ने पर वह बेझिझक बोल सके या कर सके और वही काम राजू ने भी किया था बस एक बार ही कमला चाची ने उसे बताई थी कि बुर के अंदर लग जाने पर क्या करना हैऔर राजू वही अच्छे तरीके से कर भी रहा था आगे से भी पीछे से भी देखते ही देखते राजू के धक्के तीव्र गति से होने लगे कमला चाची की आंखों से आंसू टपकने लगे थे क्योंकि राजू लगातार अपनी कमर हिला रहा था इससे इस उम्र में भी कमला चाची को अपनी बुर में दर्द को महसूस हो रहा था लेकिन अद्भुत हो रही थी ऐसा सुख उसने आज तक नहीं भोगी थी,,,खेतों में उसकी गरम सिसकारियां गूंज रही थी लेकिन उसकी सिसकारियां को सुनने वाला कोई नहीं था,,,एक बार फिर राजू के तन बदन में अद्भुत ऊर्जा के साथ-साथ असीम सुख की अनुभूति होने लगी,,, राजू कमला चाची की बड़ी बड़ी गांड को दोनों हाथों से थामैं अपनी कमर हिला रहा था किसी औरत को चोदने में कितना मजा आता है यह बात राजू को पहली बार महसूस हो रहा था वरना वह इन सब बातों को बहुत ही खराब मानता था जब कभी भी उसके दोस्त उससे इस तरह की बातें करते थे,,,,लेकिन कमला चाची को चोदते हुए वहां अपने मन में यह सोचने लगा कि वह अब तक इस अद्भुत सुख से वंचित कैसे रह गया था,,,,।

और देखते ही देखते घमासान सिकाई करने के बाद एक साथ कमला चाची और राजू अपना लावा फेंकने लगे और संतुष्ट होने के बाद चुपचाप खेतों से वापस घर आ गए,,,,राजू को अब चुदाई की तलब लग चुकी थी औरतों के प्रति उसका आकर्षण बढ़ने लगा था,,,लेकिन कई दिनों से उसकी मुलाकात कमलआ चाची से नहीं हुई थी,,,, इसलिए उसकी तडप बढ़ती जा रही थी,,, ऐसे ही एक रात को गुलाबी गहरी नींद में सो रही थी और अचानक उसकी नींद खुल गई लालटेन की रोशनी पूरे कमरे में उजाला दे रहा था बहुत कर पानी पिया और वापस खटिया पर बैठकर सोने ही वाला था कि उसका ध्यान उस दिन की बात पर चला गया जब उसकी नींद ऐसे ही खुली थी और उसकी बुआ कोने में खड़ी होकर न जाने क्या देख रही थी राजू को कुतूहल हुआ और वह धीरे से खटिया पर से उठ कर खड़ा हो गया एक नजर अपनी बुआ पर डाला तो और करवट लेकर सो रही थी और उसकी मादक गांड उभरी हुई थी जिसे देख कर राजू का मन मचल उठा लेकिन वहां उसी जगह पर आ गया जहां से उसकी बुआ ना जाने क्या कर रही थी वहां पर पहुंचकर वह उसी जगह पर आग लगा कर इधर-उधर करने लगा उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसकी बुआ कर क्या रही थीलेकिन काफी देर तक मशक्कत करने के बाद उसे समझ में नहीं आया और बता छोड़ कर वापस खटिया पर आने की तैयारी कर रहा था कि तभी उसे हल्की सी रोशनी नजर आने लगी रोशनी का पीछा करते हुए उसे बहुत ही जल्द दीवार में बना हुआ वह छेद नजर आने लगा राजू बड़े गौर से उस क्षेंद में से अंदर देखने का प्रयास करने लगा तो अगले ही पल अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए,,,।
 
रात गहराई हुई थी चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,,, आज गुलाबी दिन भर की थकान से थककर खटिया पर पडते ही सो गई थी,,,, लेकिन आज अचानक ही राजू के लिए खुल गई थी ऐसा उसके साथ पता नहीं था लेकिन आज अचानक ही उसकी आंख खुली थी,,,,

पानी पीने के बाद का कुतूहल बस उसी जगह पर पहुंच गया था जहां पर उसने कुछ दिन पहले गुलाबी को झांकते हुए देखा था,,,, थोड़ी मशक्कत करने के बाद उसे वह छेद दिख ही गया,,, उसे अंदाजा नहीं था कि उस छोटे से छेद से उसकी बुआ गुलाबी क्या देख रही थी,,,, लेकिन अपनी नजरों को उस छेद में से आर पार करते हुए उसे जो नजर आया उसे देखकर उसके होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और पल भर में उसकी सांसों की गति तेज हो गई,,,,,,,,

इस तरह से राजू दीवार के उस छोटे से छेद में से देख रहा था



बगल के कमरे में भी लालटेन जल रही थी जिसकी रोशनी में पूरा कमरा प्रकाशित हो रहा था बगल के कमरे में सब कुछ साफ नजर आ रहा था ,,,राजू की नजरें साफ देख पा रही थी कि खटिए पर उसके पिताजी लेटे हुए थे और वह भी बिल्कुल नंगे,,, राजू की नजर उसके पिताजी के लंड पर थी,,, जिसे उसके पिताजी अपने हाथों में लेकर हवा में लहराते हुए हिला रहे थे,,,,,, राजू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसके पिताजी क्या कर रहे हैं राजू की नजरे उसकी मां को ढूंढ रही थी,,, लेकिन राजू को अपनी मां नजर नहीं आ रही थी राजू हैरान था अपने पिताजी की हरकत को देखकर लेकिन अपने मन में यह सोच रहा था कि उसकी मां कहां गई,,, तभी उसे हल्की सी आवाज सुनाई दी,,,।

अरे क्या कर रही हो जल्दी से आओ ना,,,





आ रही हूं आप भी ना बहुत उतावले हो जाते हो,,,

(अपनी मां की बात सुनते ही राजू का दिल जोरों से धड़कने लगा,,,, अपने पिताजी को नंग धड़ंग हालत में देख कर और अपना लंड हीलीते हुए देखकर और दो दो बार कमला चाची के साथ संभोग करने के बाद उसे इतना तो अंदाजा लग गया था कि कमरे के अंदर उसकी मां और उसके पिताजी कुछ अद्भुत कार्य करने जा रहे हैं जिसके बारे में सोच कर ही राजू मदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि आज तक उसने अपने पिताजी को इस हालत में नहीं देखा था,,, लेकिन आज उसके जीवन में कुछ नया और अद्भुत होने जा रहा था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था तभी उसकी मां दाहिने तरफ से आती हुई दिखाई गई जिसके बदन पर साड़ी नहीं थी और वह केवल ब्लाउज और पेटीकोट में ही थी,,,, वैसे तो अक्सर लड़के अपनी मां को कपड़े बदलते हुए या अर्धनग्न अवस्था में या तो फिर पूरी तरह से नंगी देख ही लेते हैं लेकिन राजू के साथ अब तक ऐसा नहीं हुआ था राजू अपनी मां को मां के कपड़े में बदलते हुए देखा था ना ही अर्धनग्न अवस्था में और ना ही पूरी तरह से नंगी लेकिन आज उसके जीवन में अद्भुत होने जा रहा था जिसके लिए वह अपनी सांसों को थाम कर उस छोटे से छेद में नजर धशाएं खड़ा था,,,, मधु उसी तरह से ब्लाउज और पेटीकोट में ही हरिया के पास पहुंच गई और अपने कमर पर हाथ रखते हुए मुस्कुराते हुए बोली,,)

अपना तो खुद ही सोते हैं और ना ही मुझे सोने देते हैं आप जानते हैं दिन भर कितना काम लगा रहता है और आप हैं कि रात को सोने की जगह मेरी नींद हराम करके रखते हैं,,,



अरे मेरी रानी नींद तो मेरी हराम हो जाती है तुम्हारी खूबसूरती देखकर,,,, तीन तीन बच्चों की मां हो गई हो लेकिन अभी भी पूरी तरह से जवान लगती हो,,,

बाप रे ना जाने कब तुम्हारी प्यास बुझेगी,,,,

यह प्यास कभी नहीं बुझने वाली मेरी रानी,,,,,,(हरिया अपने लंड को हिलाते हुए बोला,,,,राजू अपने बाप की हरकत और उसकी बातों को सुनकर पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था उसे थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन ना जाने क्यों इस दृश्य में इस वार्तालाप में एक आकर्षण था जिसके प्रति व खींचता चला जा रहा था अपने पिताजी को इस हालत में देखना उसके लिए गवारा नहीं था लेकिन वह चाह कर भी अपने आप को नहीं रोक पा रहा था वह साफ तौर पर देख पा रहा था कि उसके पिताजी खटिया पर निश्चिंत नंगा होकर अपने लंड को हिलाते हुए लेटे हुए थे और उसकी मां सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट नहीं उसके पास में खड़ी थी उसके लंबे घने बाल उसके नितंबों तक आ रहे थे उसकी बलखाती कमर एक नया ही राजू के जीवन में प्रकरण की शुरुआत कर रही थी अपनी मां का मांसल खूबसूरत बदन के प्रति राजू का आकर्षण बढ़ता जा रहा था हालांकि आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था वह अपनी मां को इस नजरों से कभी नहीं देखा था लेकिन,,, कमला चाची की बदौलत उसकी सोच और नजरों में बदलाव आ गया था,,,,,,, राजू की मां राजू के पिताजी के पास में खड़ी होकर अठखेलियां करते हुए हल्के हल्के अपने बदन को हीला रही थी जिसकी वजह से उसकी चूड़ियों की खनक वातावरण में मादकता फैला रही थी,,,, राजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, राजू के अंतर्मन में अजीब सी हलचल मची हुई थी वह जानता था कि अपनी मां और पिताजी को इस हालत में देखना अच्छी बात नहीं है और वह वहां से हट जाना चाहता था उस नजारे को देखना नहीं चाहता था लेकिन फिर भी जवानी के जिस दौर से वह गुजर रहा था उस दौर में सोचने समझने की शक्ति इस शारीरिक आकर्षण के मामले में छीण हो जाती है,,, इसलिए वह सही बुरे का फैसला नहीं कर पा रहा था बस उस नजारे को देखकर जाना था वह देखना चाहता था कि आगे क्या होता है,,,)

अरे खड़ी ही रहोगी या कपड़े उतार कर आओगी,,,।

(अपने पिताजी की यह बात सुनते ही राजू के तन बदन में मदहोशी का रस घुलने लगा क्योंकि सीधे-सीधे उसके पिताजी उसकी मां को कपड़े उतार कर नंगी होने के लिए कह रहे थे और राजू आंखें फाड़े उस दृश्य को देख रहा था,,, वह जानता था कि उसके पिताजी की आज्ञा पाकर उसकी मां अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाएगी और राजू यही देखना चाहता था कि बिना कपड़ों की उसकी मां कैसी दिखती है,,,। अपने पिताजी की बातें सुनकर राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह जानता था कि अगर उसकी मां उसके पिताजी की बात मानेगी तो अकेले पाए उसकी मां उसे बिना कपड़ों के देखने को मिलेगी,,,, यह पल उसके लिए अद्भुत था ,,। उसके बदन में कसमसाहट बढ़ती जा रही थी,,,, वह बार-बार खटिया पर सोई हुई अपनी बुआ की तरफ देख ले रहा था,,,,वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि दीवार में बने उस छोटे से छेद से उसे इतना बेहतरीन खूबसूरत मादक दृश्य देखने को मिलेगा,,,, उसकी मां अभी भी कमर पर हाथ रखे खटिया पर लेटे उसके पिताजी को देख रही थी और मुस्कुरा रही थी,,, मुस्कुराते हुए राजू को अपनी मां बेहद खूबसूरत लग रही थी और उसके पिताजी हाथ में अपने खड़े लंड को पकड़े हीला रहे थे,,,, बार-बार मधु की नजर अपने पति के लंड पर चली जा रही थी जो कि राजू को साफ तौर पर नजर आ रहा था,,,,,,)

अब मुस्कुराती ही रहोगी कि अपने कपड़े भी उतारोगी,,,,

नहीं आज मैं कपड़े नहीं उतारूंगी,,, आज ऐसे ही कर लो,,,

(अपने मां के मुंह से ऐसे ही कर लो शब्द सुनकर उसका दिमाग झन्ना गया ऐसे ही कर लो का मतलब वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसे चोदने के लिए बोल रही थी वह अपनी मां के मुंह से इस तरह की अश्लील शब्दों को कभी सुना नहीं था इसलिए पहली बार इस तरह के शब्दों को सुनकर वह हैरान भी था लेकिन कामुकता के मदहोशी भरे इस पल को जी भी रहा था उसे ना जाने क्यों अपनी मां के मुंह से इस तरह के गंदे शब्द अच्छे लग रहे थे,,, लेकिन अपनी मां की बातों को सुनकर वह थोड़ा निराश हुआ क्योंकि उसकी मां कपड़े उतारने के लिए तैयार नहीं थी और अगर ऐसा होता तो राजू को अपनी मां का नंगा बदन देखने को नहीं मिलता और ऐसा वह नहीं चाहता था लेकिन अपने मन में आए इस ख्याल से कि अपनी मां को नंगी देखें वह इस बात से उत्तेजित भी था और हैरान भी था क्योंकि वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह अपनी मां को नंगी देखने का ख्याल अपने मन में लाएगा लेकिन इस समय हालात बदलते हुए नजर आ रहे थे,,, वह सच में अपनी मां को न्गनावस्था में देखना चाहता था उसकी खूबसूरती को देखना चाहता था उसके बदन के बनावट को देखना चाहता था,,,,दो बार कमला चाची की जमकर चुदाई करने के बाद भी वह कमला चाची को संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र नहीं देखा था एक औरत नंगी होने के बाद कैसी दिखती है यह उसके कल्पना के परे था लेकिन उनके नंगे कोमल अंगों को देखकरपर इस समय जिस तरह के हालात बन रहे थे उसे देखते हुए राजू अपने मन में यही चाहता था कि एक औरत के नंगे बदन को अपनी नजरों से देखें जो कि उस समय उसकी आंखों के सामने उसकी मां थी,,,,,, वह अपने मन में यही सब सोच रहा था कि तभी उसके पिताजी बोले,,,)



नहीं नहीं ऐसा मत करो मेरी रानी,,, तुम तो अच्छी तरह से जानते हो कि तुम्हें नंगी करके चोदने में जो मजा है वह मुझे सिर्फ साड़ी उठाकर चोदने में नहीं है,,,,,(हरिया एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,, और राजू अपनी पिताजी की यह बात सुनकर एकदम मस्त हो गया क्योंकि आज तक उसने इतने अश्लील शब्दअपने घर के किसी भी सदस्य के मुंह से सुना नहीं था और आज तो उसके पिताजी लेकिन खुले शब्दों में उसकी मां को चोदने के लिए बोल रहे थे,,,राजू इस बात से और ज्यादा हैरान था कि उसकी मां को उसके पिताजी के कहे शब्दों उसकी बातों से कोई आपत्ति नहीं थी वह तो मुस्कुराए जा रही थी,,,,,)

लेकिन आज मेरा मन नहीं है जी,,,,,,,

ऐसे कैसे मन नहीं है मैं जानता हूं तुम्हारा भी मन कर रहा है बुर पानी छोड़ रही है और कह रही हो कि मेरा मन नहीं है,,,

(हरिया की बातें राजू के मन पर अपना कह रहा असर छोड़ रही थी अपनी मां के बारे में इस तरह की गंदी बातें सुनकर उसे गुस्सा नहीं बल्कि ना जाने क्यों आनंद आ रहा था और वैसे भी उसकी मां को गंदी बात बोलने वाला कोई दूसरा नहीं उसके ही पिताजी थे इसलिए उसे कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए तो उसे इस तरह की बातें सुनने में मजा आ रहा था,,,राजू की मदहोशी इस बात से और ज्यादा बढ़ गई थी कि उसके पिताजी खुला शब्दों में उसकी मां की बुर के बारे में बात कर रहे थे,,, इसलिए राजू की सांसे ऊपर नीचे हो रहे थे,,,,)

आपको कैसे मालूम कि मेरी बुर पानी छोड़ रही है,,,(मधु भी मुस्कुराते हुए बोली और राजुअपनी मां के मुंह से इस ताकि गंदी बातें सुनकर पूरी तरह से बावला हो गया था ,, पजामे में उसका लंड अकड़ने लगा,,, क्योंकि उसकी मां लाज शर्म छोड़कर एकदम खुले शब्दों में अपने अंग का नाम ले रही थी,,,)

राजू अपनी मां की मदमस्त चुचियों को देखकर मस्त हुआ जा रहा था





मुझे सब पता है मेरी रानी,,,, कहो तो पेटीकोट उठा कर दिखा दु,,,,,

नहीं नहीं रहने दीजिए वैसे भी उतारना ही पड़ेगा,,,,

यह हुई ना बात मेरी रानी है मुझे पूरा यकीन था कि तुम मेरी बात जरुर मानोगी मुझे निराश नहीं करोगी क्योंकि तुम भी यह बात अच्छी तरह से जानती हो कि नंगी करके चोदने में चुदवाने में जो मजा है वो किसी में नहीं,,,,

(एक एक शब्द राजू के कानों में मधुर और मादकता भरे रस को बोल रहे थे अपने पिताजी की बातें राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ा रहे थे और उनकी बातों को सुनकर उसकी मां मुस्कुरा रही थी जिसका मतलब साफ था कि अब वह उसके पिताजी की बात मानते हुए अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाएगी इस बात का एहसास राजू को होते ही वह ना चाहते हुए भी पजामे के ऊपर से अपने लंड को पकड़ लिया,,,,,)

आपकी बात तो माननी ही पड़ेगी,,,,( और इतना कहने के साथ ही खटिया के पास खड़ी होकर मधु अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी और हरिया अपना हाथ आगे बढ़ा कर पेटीकोट के ऊपर से ही अपनी बीवी मधु की गांड को पकड़ने लगा दबोचने लगा,,,,उत्तेजना की दृष्टि से राजू के लिए यह सब असहनीय होता जा रहा था क्योंकि उसका बदन उत्तेजना की पराकाष्ठा को पार कर जा रहा था,,,, वह दीवार में बने छोटे से छेद के जरिए बगल वाले कमरे की एक नई दुनिया को झांक रहा था जो कि अब तक उसकी आंखों से और उसकी सोच से बिल्कुल अनजान था,,,। राजू ने कभी भी अपनी मां के बारे में इस तरह की कल्पना नहीं किया था अपनी मां के बारे में ही क्यों उसने तो किसी के बारे में भी इस तरह की कल्पना नहीं किया था,,,, वह अब तक अपनी मां को एक साथ ही रूप में ही देखता रहा था जो कि उसके लिए एक आदर्श थी आदर्श तो अभी भी थी लेकिन उसका दूसरा पहलू उसे आज नजर आ रहा था,,,,, राजू साफ तौर पर देख पा रहा था कि उसके पिताजी उसकी मां की गांड से पेटिकोट के ऊपर से ही खेल रहे थे,,।

जोकि राजू को अपने पिताजी की यह हरकत बेहद मदहोश कर देने वाली लग रही थी,,, राजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी देखते ही देखते मधु एक-एक करके अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दी और बटन के खुलते ही राज्य की आंखों के सामने बेहद खूबसूरत नजारा नजर आने लगा राजू अपनी मां की गोल-गोल खरबूजे जैसी चुचियों को देखकर मस्त हो गया,,,, उसने अभी तक किसी औरत की चूचियों को संपूर्ण रुप से नग्न अवस्था में नहीं देखा था आज पहली बार वह अपनी मां की सूचियों को और वह भी एक दम नंगी देख रहा था,,,। मधु अपने ब्लाउज को अपनी बाहों में से निकालते हुए बोली,,,।

अब तो खुश है ना जी,,,,,

अरे मेरी रानी यही अदा तो मुझे मार देती है तुम्हारी चुचियां देखे बिना तू मेरा दिन नहीं गुजरता,,,,(हरिया की बात सुनकर मधु मंद मंद मुस्कुरा रही थी अपने पति के मुंह से अपनी और अपने बदन की खूबसूरती की प्रशंसा सुनकर मधु और ज्यादा प्रसन्न हुए जा रही थी,,,भले ही वह कपड़े उतारने में आनाकानी कर रही थी लेकिन यह बात वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसे भी सारे कपड़े उतारने के बाद ही मजा आता था राजू के तो दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी कमर से ऊपर उसकी मां पूरी तरह से नंगी थी उसकी गोल-गोल बड़ी-बड़ी चूचियां दशहरी आम की तरह छातियों पर लहलहा रही थी,,, जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था राजू ने अब तक किसी और अतिथियों को देखा नहीं था इसलिए किसी दूसरी औरतों की चुचियों से उसकी मां की सूचियों की तुलना करना उसके लिए मुश्किल था लेकिन फिर भी वह इतना तो समझ गया था कि चुचियां कितनी खूबसूरत होती है,,,,राजू अपने दिल की धड़कन पर काम करने की भरपूर कोशिश कर रहा था लेकिन बगल के कमरे का नजारा इतना गरमा गरम झांकी वहां चाह कर भी अपने आप पर अंकुश नहीं रख पा रहा था,,,, गहरी रात में कमरे के अंदर इस तरह का दृश्य नजर आता है इस बारे में राजु को मालूम ही नहीं था वह तो बस इतना ही जानता था कि रात को सोया जाता है,,, लेकिन आज अपनी आंखों से दुनिया की ओर रिश्तो के बीच की सच्चाई को देख रहा था और समझ रहा था,,,,,,, राजू को एक औरत की खूबसूरती की व्याख्या मालूम नहीं थी,,,। लेकिन इतना जरूर समझ रहा था कि उसकी मां बहुत खूबसूरत है जो कि उसे अपनी आंखों से दिखाई दे रहा था छातियों की शोभा बढ़ा रहे उसकी कर तुमसे जैसी सूचियां और एकदम दशहरी आम की तरह तनी हुई और उस पर किसमिस के दाने की तरह तनी हुई निप्पल को देख कर राजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,, मधु एकदम गोरी थी इसलिए इसके गोरे बदन पर उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां और ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,,,,, राजू की हालत तो वैसे ही खराब भी जा रही थी लेकिन उसकी मां की हरकत को देखकर राजू के तन बदन में उत्तेजना के शोले भड़कने लगे,,, क्योंकि उसकी मां अपने दोनों चुचियों को हर बच्चे की तरह नीचे से अपने हथेली में भरकर उसे ऊपर की तरफ उठाते हुए हल्के हल्के दबाने लगी,,, यह देख कर राजू के पिता जी बोले,,,,।

यह सब तुम मुझ पर छोड़ दो रानी,,,, और आओ मेरे पास इतना कहने के साथ ही राजू के पिताजी एक हाथ आगे बढ़ाकर उसकी मां की पेटीकोट की डोरी को खींच लिया और पेटीकोट की डोरी खींचते हैं वह एकदम से ढीली हो गई और तुरंत राजू के पिताजी डोरी को अपने हाथों से छोड़ दिया और डोरी के छोड़ते ही पेटीकोट भरभरा कर नीचे उसके कदमों में गिर गई,,,, और अगले ही पल राजू की आंखों के सामने उसकी मां एकदम नंगी हो गई ,,, राजू की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि उसकी आंखों के सामने पहली बार उसकी मां पूरी तरह से महंगी हुई थी जो कि उसके पिताजी ने अपने हाथों से किया था अपने मा बाप की कामुक हरकत को वह पहली बार अपनी आंखों से देख रहा था उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था,,,। वह बार-बार अपनी आंखों को मल कर अपने आप को तसल्ली दी रहना चाहता था कि वह वाकई में अपनी आंखों से देख रहा है या उसका कोई सपना या कल्पना है,,,, लेकिन जो कुछ भी वह अपनी आंखों से देख रहा था वह शत प्रतिशत सत्य था जिसमें चेहरा भी मिलावट नहीं था उसकी आंखों के सामने बगल वाले कमरे में उसके पिताजी के साथ-साथ उसकी मां पूरी तरह से नंगी थी,,,,

राजू अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी मां नंगी होने के बाद और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा उसकी आंखों के सामने खड़ी हो गोरा रंग बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां छातियों की शोभा बढ़ाती हुई,,,, मांसल चिकना पेट उसने कमर की तरफ हल्का सा कटाव जो कि उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहा था केले के तने के समान मोटी मोटी चिकनी जांघें जिस को देखकर ऋषि मुनि का भी तप भंग हो जाए,,,,,,, राजूका मन अपनी खूबसूरत मां की खूबसूरत गांड देखने को कर रहा था उसे पूरा विश्वास था कि इतनी खूबसूरत उसकी मां है उससे भी कई ज्यादा खूबसूरत उसकी गांड होगी,,,, और इसीलिए अपनी मां की गांड देखने के लिए होना चाह रहा था लेकिन उसकी मां एक ही तरफ से उसे नजर आ रही थी,,,। इसलिए ना तो उसे उसकी मां की गांड दिख रही थी ना ही उसकी मां की बुर देख रही थी जो कि दोनों को देखने की तमन्ना उसके मन में प्रज्वलित हो रही थी,,,,, राजू का यही सोचना था कि उसके पिता जी बोले,,,।

अरे मेरी रानी,,, खड़े-खड़े अपनी गांड तो दिखाओ सच कहता हूं तुम्हारी गांड देखकर गांव वालों का लंड खड़ा हो जाता होगा,,,,

धत्,,,, कैसी बातें कर रहे हो जी मैं गांव वालों के लिए थोड़ी हूं तुम्हारे लिए हुं,,,,

वह तो तुम मेरे लिए ही हो लेकिन मैं अपने मन की बात बता रहा था जो कि सच है,,,,

गांव वाले मेरे बारे में क्या सोचते हैं इसका मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता,,,,

इसमें तुम्हारा कसूर नहीं है रानी तुम्हारे बदन की ओर से मारी गांड की बनावट ही कुछ ऐसी है कि ना चाहते हुए भी उस पर नजर चली जाती ही जाती है,,,।

(राजू अपने पिताजी के मुंह से अपनी मां के लिए ऐसी बात सुनकर एकदम दंग हो गया था उसे तुरंत अपने दोस्त से आम की बात याद आने लगी तो उस दिन उसकी मां और बुआ के बारे में गंदी गंदी बातें कर रहा था तो वह अपने मन में यही सोचने लगा कि क्या वह सच बोल रहा था क्या गांव के लड़के गांव के मर्द उसकी मां और बुआ को देखकर यही सोचते हैं,,, अपने पिताजी की इस बात पर राजु का दिल और ज्यादा धड़कने लगा,,,कमला चाची को चोदने के बाद उसे चोदने के अर्थ को बची तरह से समझ गया था इसीलिए वह अपने-अपने सोचने लगा कि गांव के लड़के उसके दोस्त क्या उसकी मां को चोदने का सपना देखते हैं उसके पिताजी की मानें तो यह बात सनातन सत्य थी अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि उसकी बुआ और उसकी मां पर है खूबसूरत औरत है अपनी मां के बदन की बनावट को देखकर राजु अब समझने लगा था कि वाकई में उसकी मां और बुआ को देख कर सबका मन चोदने को करते हो ना इस बात का ख्याल मन नहीं आते ही उसे इस ख्याल से गुस्सा भी आ रहा था लेकिन ना जाने क्यों ईस बात से उसकी उत्तेजना भी बढ रही थी,,,। राजू बड़ी शिद्दत से दीवार के उस छोटे से छेद से बगल वाले कमरे में अपने पिताजी और अपनी मां की काम लीला को अपनी आंखों से देख रहा था,,,लेकिन बार-बार अपनी बुआ पर भी नजर मार ले रहा था कि कहीं वह जागना जाए लेकिन एक बात उसके जेहन में पूरी तरह से बैठ गई थी कि उस दिन उसकी बुआ उसे झूठ बोली थी कि छिपकली को भगा रही है वह भी इसी छेद से उसकी मां और उसके पिताजी की चुदाई देखती है,,,, यह ख्याल मन में आते ही उत्तेजना के मारे राजू को अपने लंड में दर्द महसूस होने लगा,,,।

अरे दिखाओ भी,,,

क्या करते हो मुन्ना के बाबु तीन -तीन बच्चों के बाप हो गए हैं लेकिन फिर भी ऐसी हरकत करते हो जैसे कि मैं पहली बार तुम्हारी आंखों के सामने आई हूं,,,

सच कह रही हो मधुरानी ईतने बरस हो गए लेकिन आज भी ऐसा लग रहा है कि आज हमारी सुहागरात है,,,।

(सुहागरात का जिक्र होते ही मधु एकदम से शर्मा गई,,,)

एक बार घूम जाओ मुझे तुम्हारी गांड देखना है,,,,

(राजू के पिताजी अपने खडे लंड को हिलाते हुए बोले,,,, राजू की हालत खराब हो रही थी उसके पिताजी खुले शब्दों में उसकी मां को अपनी गांड दिखाने को बोल रहे थे पल भर में ही राजू का अपनी मां को देखने का नजरिया बदल गया था,,, अपनी मां और पिताजी के मुंह से गंदे गंदे शब्दों को सुनकर और उनकी गंदी हरकतों की बदौलत राजू के तन बदन में मदहोशी का नशा छाने लगा था इसलिए वह बगल वाले कमरे में खड़ी उसकी मां को एक औरत के नजरिए से देख रहा था उसके खूबसूरत अंगों को देखकर मस्त हो रहा था,,, राजू का लंड पजामे के अंदर गदर मचाया हुआ था,,, इस उत्तेजनात्मक स्थिति मेंराजू को वह पहले आधा रहा था जब वह अपना मोटा तगड़ा लेने कमला चाची की बुर में डालकर अंदर बाहर कर रहा था राजू के इस बात का एहसास होने लगा कि बदन की गर्मी को शांत करने का यही एक तरीका है और इस समय उसे खुद चोदने का बहुत मन कर रहा था पल भर में उसके मन में यह ख्याल आया कि काश बगल वाले कमरे में उसके पिताजी की जगह वह होता तो कितना मजा आता,,,, यह ख्याल मन में आते ही राजू कीउत्तेजना परम शिखर पर पहुंच गई लेकिन इतनी गंदे ख्याल की बदौलत उसे अपने आप पर गुस्सा भी आ रहा था लेकिन वह अपने आप पर अंकुश कसने में नाकामयाब साबित हो रहा था क्योंकि इस तरह के गंदे ख्याल के कारण उसके तन बदन में मस्ती की लहर दौड़ रही थी,,,, उसके पिताजी उसकी मां को गांड दिखाने के लिए कह रहे थे और उसकी मां शर्मा रही थी,,,उसके पिताजी के इस प्रस्ताव पर राजू खुद सहमत था क्योंकि उसके पिताजी जितना उत्सुक थे उसकी मां की गांड देखने के लिए उससे कहीं ज्यादा उत्सुक राजू था अपनी मां की गांड के दर्शन करने के लिए,,,,।

क्रमशः,,,,,
 
राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि कुछ ही देर में उसे उसकी मां की खूबसूरत गांड के दर्शन जो होने वाले थे,,राजू अपने अंदर अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था इतना ज्यादा उत्तेजना तो उसे कमला चाची को चोदते समय भी नहीं महसूस हुआ था जितना कि सिर्फ अपनी मां को नंगी देखकर वह महसूस कर रहा था,,,,राजू के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी कमरे के अंदर का दृश्य धीरे-धीरे और ज्यादा गर्म होता जा रहा था जिसकी राजू को कल्पना भी नहीं थी,,,। बार-बार राजू के पिताजी राजू की मां को अपनी बड़ी बड़ी गांड दिखाने को कहते थे हालांकि वह पूरी तरह से नंगी थी लेकिन उसकी दूसरी तरफ थी जिसे राजू की पिताजी देखकर और ज्यादा उत्तेजित होना चाहते थे,,,, राजू अपने मन में यही सोच रहा था कि उसके पिताजी और उसकी मां की चुदाई बरसों से करते आ रहे थे और अनगिनत बार उसकी मां को अपने हाथों से नंगी करके उसके वजन के हर एक अंग को देख चुके थे लेकिन फिर भी उसकी मदमस्त गांड को देखने के लिए लालायित थे ,,, और उसने तो कभी भी अपनी मां को ना तो गलत नजरिए से देखा था और ना ही बिना कपड़ों के,,, तो फिर वह क्यों ना ज्यादा उत्सुक हो अपनी मां को नंगी देखने के लिए और वैसे मौका ए दस्तूर भी यही था क्योंकिउसकी आंखों के सामने बगल वाले कमरे में उसकी मां बिना कपड़ों के एकदम नंगी खड़ी थी लेकिन नंगी होने के बावजूद भी ना तो राजु को अपनी मां की रसीली बुर दिखाई दे रही थी और ना ही उसकी मादकता भरी गांड नजर आ रही थी,,। इसलिए तो उसके पिताजी से भी ज्यादा उत्सुक वह खुद का अपनी मां की गांड देखने के लिए,,,।

राजू की मां की बड़ी बड़ी गांड





बेहद अद्भुत और मादकता का रस घोलता हुआ यह नजारा राजू के बगल वाले कमरे में दृश्य मान हो रहा था जिसकी राजू ने कभी कल्पना भी नहीं किया था यह तो उसकी बुआ की ही बदौलत था जो उसे ऐसा कामुक और मनोरम दृश्य देखने को मिल रहा था,,,,,,राजू का मन अभी भी मानने को तैयार नहीं था कि वह अपनी आंखों से ही अपने पिताजी और अपनी मां को इस हालत में देख रहा है,,,,कमरे में राजू की मां एकदम नंगी खड़ी थी खटिया पर उसके पिताजी पीठ के बल लेटे हुए थे और अपने खड़े लंड को जोर जोर से हिला रहे थे,,,, और एक हाथ से राजू की मां की चिकनी जांघों पर अपना हाथ फेर रहे थे,,, यह देखकर राजू की भी हालत खराब हो रही थी,,,।

अब दिखा भी तो मेरी जान इतना क्या तड़पाना,,,,

आप भी ना बच्चों की तरह जीतने पर बैठ जाते हैं,,,।

बच्चे क्या ईस तरह की जीद करते हैं,,,,,,, गांड़ देखने की,,,(हरिया मुस्कुराते हुए बोला)

आप भी ना,,,,

चलो दिखा भी दो,,,,

(मधु जानती थी कि उसके पति जिस चीज के लिए जिद करते हैं अपनी जीत पूरी करके ही रहते हैं और वैसे भी अपनी नंगी गांड दिखाने में मधु को कोई आपत्ति नहीं थी,,, लेकिन उसे शर्म महसूस हो रही थी,,, फिर भी वह बोली,,,)

चलिए कोई बात नहीं दिखा देती हूं लेकिन ज्यादा परेशान मत करना रात काफी हो गई है मुझे नींद भी आ रही है,,,।

हाय मेरी जान सो जाना लेकिन पहले जी भर कर चुदवा लेना,,,,

(अपनी मां और पिताजी की बातें सुनकर राजू के तन बदन में उत्तेजना के शोले भड़कने लगे थे राजू को अपनी मां का इस तरह से मुस्कुराना और एकदम नंगी होकर खड़े रहना बेहद लुभावना लग रहा था पल-पल वह अपनी मां के प्रति आकर्षित होते चले जा रहा था और रह रह कर उसे अपनी मां में सिर्फ एक औरत नजर आती थी,,,। जो कि एक औरत के प्रति आकर्षण का ही नतीजा था वरना वह अपनी मां को आज तक इस नजरिए से कभी नहीं देखा था,,,राजू के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि मैं जानता था कि कुछ ही पल में उसकी मां उसके पिताजी को अपनी भारी भरकम गोरी गोरी गांड दिखाने वाली है जिसे राजू ने आज तक नहीं देखा था और ना ही उसके बारे में कभी कल्पना किया था,,, मधु जानती थी किवह बेहद खूबसूरत है इस उमर में भी उसकी जवानी बरकरार थी तभी तो उसका पति उसके ऊपर पूरी तरह से लट्टु था,,,, मधु मुस्कुरा रही थी और हरिया के मुंह में पानी आ रहा था धीरे-धीरे मधु अपने पीठ को पीठ को क्या अपनी गांड को अपने पति हरिया की तरफ करने लगी,,,,,,, वह बड़े मादक तरीके से गोल घूमते हुए अपने पति की तरफ गांड कर रही थी राजू को मालूम था कि जिस तरह से उसकी मां गोल घूम कर अपने पति की तरह काम करने जा रहे हैं थोड़ी देर के लिए ही सही उसे अपनी मां की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड के दर्शन करने को जरूर मिलेंगे,,,, और जैसे ही राजू की मां की गांड राजू की तरफ हुई राजू के तो जैसे होश ही उड़ गए,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई लगता था मानो जैसे वक्त रुक गया कुछ सेकंड के लिए राजू के जीवन की सबसे अद्भुत अतुलनीय पल बन गया बेहद यादगार पल था राजू के लिए राजू ने कभी अपनी मां की गांड के लिए नहीं किया था उसे बिना कपड़ों के देखेगा इस बारे में कभी सोचा भी नहीं था कि जो कुछ भी हो रहा था वह राजू के जीवन में बदलाव लाने के लिए काफी था,,,,।

राजू की मां की रसीली बुर





कमला चाची की बड़ी बड़ी गांड देखने के बाद राजू को यही लगा था कि औरतों की गांड खूबसूरत होती है लेकिन आज अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली गांड को देखकर राजू को यह समझ में आ गया था कि उसकी मां की गांड बेहद खूबसूरत है कमला चाची की गांड उसकी मां की गांड के आगे कुछ भी नहीं थी गांड की दोनों फांकें बड़े-बड़े तरबूज की तरह लग रही थी जिस पर मुंह लगाकर उसके रस को पी जाने का मन राजू का कर रहा था,,, तरबूज के टुकड़ों की तरह दांत से दबा कर अपनी मां की भरपूर जवानी के केंद्र बिंदु उसकी बड़ी-बड़ी गांड को काटने का मन कर रहा था,,,। इस मादकता भरे दृश्य को देख पाना राजू के बस में बिल्कुल भी नहीं था लेकिन फिर भी वह किसी तरह से अपने आप को संभाले हुए उसे दृश्य के हर एक रस के बूंदों को अपनी आंखों से पी रहा था,,,, राजू की आंखो में खुमारी छाने लगी थीशराब का नशा कैसा होता है उसे बिल्कुल भी नहीं पता था लेकिन अपनी मां के नंगे बदन को उसकी नंगी गांड को देखकर नशे पन का एहसास उसे जरूर हो रहा था,,,, पजामे में गदर मचा हुआ था वह कैसे अपने आप को संभाले हुए था यह भी अपने आप में काबिले तारीफ था वरना सबसे खूबसूरत औरत को नंगी देख लेने पर अपने आप ही पानी निकल जाता है,,,।

देखते ही देखते मधु अपनी गांड को अपनी पति हरिया के सामने कर दी,,, और हरिया अपनी बीवी की मदमस्त गांड को परोसे हुए स्वादिष्ट व्यंजन की तरह दोनों हाथों से झपट लिया और उसे अपनी तरफ खींच लिया उसकी कमर में हाथ डाले वह मधु को अपने ऊपर गिरा लिया और अगले ही पल मधु की भारी-भरकम गांड,,,राजू के पिताजी के मुंह पर थी एक तरह से मधु की गांड के नीचे राजू के पिता जी का चेहरा पूरी तरह से ढक गया था मानव की गांड की चादर ओढ़ा दी गई हो,,,, यह दृश्य देखकर राजू की हालत एकदम से खराब हो गई राजू अपने मन में सोचने लगा कि उसके पिताजी की किस्मत कितनी अच्छी है कि एक खूबसूरत औरत की गांड उसके चेहरे पर है,,,,अखिलेश पर मधु को जब एहसास हुआ कि उसकी भारी-भरकम कार्ड उसके पति के चेहरे पर है तो वह एकदम से हिचकते हुए बोली,,,,।

हाय दैया यह क्या कर रहे हैं आप उठने दीजिए मुझे,,,,

नहीं मेरी रानी बस ऐसे ही बैठे रहो,,, इसी तरह से तुम्हारी गांड चाटना चाहता हूं तुम्हारी बुर का रस पीना चाहता हूं,,,,

(और हरिया का इतना कहना था कि अकेले ही पल मधु की आंखें मदहोशी के आलम में मूंदने लगी उसके चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे उसके होंठ हल्के से खुले के खुले रह गए,,,, क्योंकि हरिया एक साथ अपनी जीभ से उसकी गांड का छेद और उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया था राजू तो यह देखकर पूरी तरह से पागल हो गया,,,उसके पिताजी का चेहरा उसकी मां की गांड के नीचे पूरी तरह से ढका हुआ था इसलिए उसे ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन अपने पिताजी की बात सुनकर उसे इतना तो पता चल गया था कि उसके पिताजी उसकी मां की गांड और बुर दोनों अपनी जीभ से चाट रहे हैं,,,, औरत और मर्द के बीच का यह एक और प्रकरण किताबी पन्ने की तरह राजू की आंखों के सामने खुल रहा था ,,,उसे तो इस क्रिया के बारे में पता ही नहीं था वह तो बस दो बार कमला चाची की बुर में लंड डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था उसे और कुछ ज्यादा मालूम नहीं था लेकिन वह अपनी आंखों के सामने अपने पिताजी और अपने मां की रंगरेलियां उनके मादकता भरे क्रीडा को देखकर पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था,,,।

कुछ देर पहले जो मधु अपने पति के चेहरे पर अपनी गांड रखे होने की वजह से शर्मिंदगी महसूस कर रही थी वही मधु अब बड़े मजे से धीरे-धीरे अपनी बड़ी बड़ी गांड को अपने पति के चेहरे पर रगड़ रही थी राजू यह देखकर पूरी तरह से मस्त हो जा रहा था अपनी मां की कामलीला को देख कर उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी उसकी आंखें देख रही थी उसमें सच्चाई ही सच्चाई थी जरा भी झूठा पन दिखावा नहीं था,,,, धीरे-धीरे मधु के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फूटने लगी थी जो कि राजू के कानों तक आराम से पहुंच रहे थे राजू अपनी मां के बदलते चेहरे के हाव भाव को देखकर इतना तो अंदाजा लगा रहा था कि इस क्रिया को करने में उसकी मां को बहुत मजा आ रहा है उसके पिताजी के दोनों हाथ ऊपर की तरफ होकर उसकी मां की कमर को थामे हुए थे और ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी कमर को जोर से पकड़ कर उसकी कमर को अपने चेहरे पर और जोर से दबा रहे हैं यह आसन और यह क्रिया राजू के लिए बिल्कुल नया था लेकिन इससे राजू का जो श भी बढ़ता जा रहा था इस दृश्य के चलते राजू का हाथ अपने आप ही पजामे के अंदर चला गया और अपने खड़े लंड को पकड़ लिया,,,,,,

दीवार के छोटे से छेद में से राजू को अद्भुत और मनोरम दृश्य नजर आ रहा था वह बार-बार अपनी बुआ की तरफ देख ले रहा था जो कि बेसुध होकर सोई हुई थी अच्छा हुआ वह सो रही है अगर जाग गई होती तो उसे यह दृश्य देखने का मौका नहीं मिलता अपने मन में सोचते हुए अपनी मां के खूबसूरत बदन के हर एक अंग को और उसकी हरकत को बारीकी से देख रहा था,,,। उसकी मां गहरी सांसे दे रही थी और उसकी सांसो की गति के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां दशहरी आम की तरह झूल रही थी राजू का मन कर रहा था कि वह भी कमरे में घुस जाए और अपने दोनों हाथों में उसकी मां की चूची पकड़ कर उसे जी भर कर प्यार करें,,, यह ख्याल मन में आते ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगती थी राजू को समझ में नहीं आ रहा था कि जब जब अपनी मां के बारे में गंदे विचार अपने मन में लाता था तब तक उसकी उत्तेजना इतनी ज्यादा क्यों बढ़ जाती थी लेकिन उसे इस ख्याल से आनंद भी आता था,,,,।

आहहहहह,,,,, आहहहहहह,,,,सईईईईईईईई,,,, आहहहहहहह,,, मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है पूरी जीभ अंदर तक डालिए,,,,, हां,,,,,,,ऐसे ही,,,,,ऊफफफ,,,,,ऊमममममम,,,,

(राजू तो अपने मां के मुंह से इस तरह की रंगत भरी बातें सुनकर एकदम मस्त हुआ जा रहा था उसकी मां की हरकत को देखकर उसकी बातों को सुनकर उसे साथ पता चला था कि उसकी मां को बहुत मजा आ रहा है क्योंकि वह पूरी जीभ अंदर तक डाल कर चाटने के लिए बोल रही थी,,, इसका मतलब साफ था कि बुर में जीभ डालकर चाटा भी जाता है,,,,वह अपनी मन में इस बात को सोचकर और ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था वह सोचने लगा था कि औरत की बुर में जीभ डालने पर कैसा महसूस होता है राजू इस अनुभव से अवगत होना चाहता था,,,,वह धड़कते दिल के साथ पजामे में अपना हाथ डाले कमरे के अंदर के दृश्य को देख रहा था कुछ देर तक इसी तरह से चलता रहा,,,, तभी उसकी मां पीछे की तरफ झुकते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके पिताजी के लंड को पकड़ ली,,,, यह दृश्य राजू को साफ नजर आ रहा था,,,,। वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी मां इस तरह से हरकत करेगी वह आप उसके पिताजी के लंड को पकड़ कर जोर जोर से हिला रही थी,,,, कि तभी राजू के पिता जी बोले,,,,।)

आहहहहह मेरी रानी ऐसे नहीं मुंह में लेकर चूसो,,,

(अपने पिताजी के मुंह से यह बातें सुनते ही राजू के दिल की धड़कन और ज्यादा बढ़ने लगी उसके मां और उसके पिताजी की एक-एक हरकत बारी-बारी से राजू के तन बदन में आग लगा रही थी एक-एक करके औरत और मर्द के बीच का यह रहस्य खुलता जा रहा था,,,, जिससे राजू पूरी तरह से आकर्षित हुआ जा रहा था उसके पिताजी के कहे अनुसार औरत आदमी का लंड चुसती है,,, अपने मन में सोचने लगा कि कमला चाची उसे चोदना तो सिखाई लेकिन उसके बारीकियों से उसे परिचित नहीं करवाई,,,,,, उसके पिताजी की बात सुनते ही उसकी मां अपनी बड़ी बड़ी गांड को उसके पिताजी के चेहरे पर रखे हुए ही पीछे की तरफ झुक गई और उसके पिताजी के लंड को मुंह में डालकर चुसना शुरु कर दी,,,। राजू के बदन में कंपन होना शुरू हो गया,,, राजू को अपनी मां का यह रुप बेहद लुभावना और कामुकता से भरा हुआ लग रहा था,,, जिसके प्रति राजू आकर्षित होता चला जा रहा था,,,, राजू की मां को ज्यादा उत्तेजित हो गई थी वह अपनी गांड को उसके पिताजी के चेहरे पर जोर जोर से पटक रही थी,,, शायद कामुकता भरे इस पल में मर्द औरत के भारी-भरकम वजन को भी बड़े आसानी से झेल जाता है तभी तो उसके पिताजी उसकी मां की पड़ी पड़ी गांड के वार को उसकी पटक पर बड़े आराम से अपने चेहरे पर झेल कर मस्त हुए जा रहे थे,,,।

कुछ देर तक यह दृश्य ऐसे ही चलता रहा,,,, रात और ज्यादा गहरी हो चली थी चारों तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा था केवल रह-रहकर कुत्तों के भोंकने के ही आवाज आ रही थी,,,। ऐसे में सारा गांव नींद की आगोश में सो चुका था लेकिन राजू के पिताजी और उसकी मां की नींद उड़ी हुई थी वह दोनों शारीरिक क्रीड़ा में पूरी तरह से लिखते हो चुके थे इस बात से अनजान की बगल वाले कमरे में से उनका जवान बेटा उनकी काम क्रीड़ा को अपनी आंखों से देख रहा हैं,,,,। पूरी तरह से मस्त होने के बाद मधु अपने पति के ऊपर से उठी तो हरिया बोला,,,,।

कहां जा रही हो मेरी रानी,,,

कहीं नहीं जा रही हूं मेरे राजा तुम खटिया पर से उठ जाओ तो मैं लेटु,,, तभी ना मुझे चोदोगे,,,,

(राजू तो अपनी मां के मुंह से चोदने वाली बात सुनकर एकदम से हैरान और मस्त हुआ जा रहा था वह अपनी मां को आज तक एक सीधी-सादी और संस्कारों से भरी हुई औरत ही समझता था लेकिन आज उसका एक नया रूप देख रहा था इसलिए वह हैरान था,,,लेकिन इसमें दोष राजू का बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि राजू पति और पत्नी के बीच के रिश्ते से पूरी तरह से अनजान था वह यह बात नहीं जानता था कि दिन भर संस्कार से भरी हुई औरत अपने परिवार को संभालने वाली औरत,,,रात में अपने पति के साथ अपने सारे कपड़े उतार कर संस्कार और मर्यादा के दीवारों को गिरा कर,,, अपने पति के साथ चुदाई में मस्त हो जाती है,,,, मधु की बातें सुनकर हरिया बोला,,,)

नहीं नहीं मेरी रानी आज तुम मेरे ऊपर चढोगी,,,,

यह क्या कह रहे हैं आप सारी कसरत आप मुझसे करवाएंगे,,,,

इस तरह से मधु हरिया के ऊपर कूद रही थी



हां मेरी रानी अब जल्दी से चढ जाओ,,,,,

(अपने पिताजी की बात सुनकर राजू हैरान था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था ऊपर चढ़ जाने वाली बात उसे समझ में नहीं आई थी,,,,,लेकिन थोड़ी ही देर बाद सब कुछ साफ हो गया उसे सब कुछ समझ में आ गया कि उसके पिताजी किस बारे में बात कर रहे थे थोड़ी देर ना नूकुर करने के बाद मधु मान गई घुटने के बल होकर अपने पति के इर्द-गिर्द अपनी दोनों घुटनों को रख कर,,,एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने हाथ से अपने पति का लंड पकड़ ले और से धीरे से अपनी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रख दी ऊपर चढ़ने के मतलब को अब राजु अच्छी तरह से समझ गया था,,,, देखते ही देखते उसकी मां अपने पति के मोटे तगड़े लंबे लंड को धीरे-धीरे अपनी बुर की गहराई में उतार ली,,,, राजू पहली बार अपनी मां की फोटो को देख रहा था एकदम खूबसूरत गुलाबी पत्ती से सुशोभित हल्के हल्के रोशनी बाल की गहराई लिए हुए अपनी मां की बुर को देखकर राजू पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गया,,,, राजू अपनी मां की बुर को देखकर अपने मन में यही सोचने लगा कि उसकी बुआ की बुर और उसकी मां की बुर में ज्यादा फर्क नहीं था लेकिन दूर से देखने के बाद भी राजू इतना तो समझ गया था कि उसकी बुआ की दूर से ज्यादा उसकी मां की बुर मजा देती है,,,,। राजू धीरे-धीरे अपनी मां के नंगे बदन के हर एक अंग को देख लिया था,,, और उसे अपनी मां के भजन के हर एक अंग बेहद खूबसूरत और लुभावना लग रहा था,,,।





राजू को एकदम साफ नजर आ रहा था उसकी मां उसके पिताजी के लंड पर चढ़ी हुई थी और उसके पिताजी का लंड उसकी मां की बुर की गहराई के अंदर था मधु की सांसे गहरी चल रही थी और वह धीरे-धीरे अपनी गांड को ऊपर नीचे करते हुए उसके पिताजी के लंड को अंदर बाहर ले रही थी यह आसन यह तरीका देखकर राजू का मन मचल उठा,,,,बार-बार उसकी नजर अपनी बुआ के ऊपर जा रही थी बगल के कमरे में अपनी मां की चुदाई देखकर राजू का मैंने अपनी बुआ पर मचल रहा था क्योंकि वह उसके साथ एक ही खटिया पर सोती थी और उसे इस बात का अहसास होने लगा था कि उसकी बुआ भी इस छेद में से अपनी भैया और भाभी की चुदाई देखकर मस्त होती है,,,इस बात का अंदाजा राजू लगा चुका था कि उसकी बुआ को भी यह सब अच्छा लगता है वरना वह छोटे से छेद में से बगल वाले कमरे के दृश्य को कभी नहीं देखती,,, अंदर का दृश्य इतना ज्यादा उत्तेजना से भरा हुआ था कि राजू के मन में आ रहा था कि वह अपने बुआ की चुदाई कर दें क्योंकि चोदना तो उसे आ ही गया था और चुदाई करने से पहले क्या-क्या किया जाता है यह भी वह अपने मां और पिता जी से सीख रहा था,,,।

राजू का पूरा ध्यान उसके पिताजी का नाम और उसकी मां की बुर पर टिका हुआ था,,,। उसकी आंखों के सामने उसके पिताजी कारण उसकी मां की बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,। राजू की हालत खराब हो रही थी वह अपने मन में यही सोच रहा था कि काश वह उसके पिताजी की जगह होता तो उसकी मां उसके ऊपर होती और उसका लंड उसकी मां की बुर में होता,,,तो कितना मजा आता क्योंकि दो बार बार चुदाई के सुख से रूबरू हो चुका था वह जानता था कि चुदाई में बहुत मजा आता है,,,, धीरे-धीरे राजू की मां अपनी गांड जोर-जोर से अपने पति के लंड पर पटकने लगी ,,। जिसके साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी जोर जोर से उछल रही थी जिसे उसके पिताजी अपना हाथ आगे बढ़ाकर दोनों हाथों में थाम ले उसे जोर जोर से दबाने लगे अपने पिताजी को इस तरह से अपनी मां की चूची को दबा कर के देख कर राजू को वह दिन याद आ गया जब वहां की कमला चाची को चोदते हुए उसकी चूची को अपने हाथ में पकड़ कर दबाने के लिए मचल रहा था लेकिन ऐसा करने की हिम्मत नहीं थी,,,।राजू अपने मन में यही सोच रहा था कि चोदते सभी औरतों की चूची दबाने में ज्यादा मजा आता होगा और यही सोचते हुए अपने पजामे को घुटने तक नीचे गिरा दिया,,, और अपने लंड को जोर से अपनी मुट्ठी में भर कर आगे पीछे करके हिलाने लगा,,, राजु को मुठ मारने का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं था और ना ही उसने आज तक मारा था लेकिन अपनी मां की मदमस्त चुदाई देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और अनजाने में ही वह मुठ मारना शुरू कर दिया,,,।

उसके पिताजी नीचे से भी अपनी कमर को ऊपर की तरफ दे मार रहे थे शायद उत्तेजना में उसकी चुदाई करते हुए वह अपने आप पर काबू नहीं रख पा रहे थे मधु राजू की मां पूरी तरह से मस्त होकर जोर-जोर से अपने गांड को हरिया के लैंड पर पटक रही थी राजू अपने पिताजी के लंड को देख कर उसकी तुलना अपने लंड से करने लगा था जो कि हर हाल में उसके पिताजी के लंड से उत्तम कोटि का था,,, और इसीलिए राजू इस बात से सहमत हैं कि अगर उसकी मां की पूरी में उसका लंड जाएगा तो उसकी मां को उसके पिताजी की चुदाई से ज्यादा मजा आएगा,,,।

दोनों तरफ का माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था हरिया और मधु एक साथ चरमोत्कर्ष के करीब पहुंच चुके थे और दूसरी तरफ राजू भी अपने लंड को हिलाते हुए पानी निकालने के करीब था,,, तभी राजू की मां के मुंह से तेज सिसकारी फूट पड़ी,,,।

ससहहहह,,आहहहहह,आहहहहहह,, मैं तो गई,,,, मैं तो गई मेरे राजा,,,,,आहहहहहहहह,,,,,

मैं भी गया मेरी रानी,,,,(और इतना कहने के साथ ही दोनों झड़ गए,,, साथ ही राजू जी अपनी पिचकारी दीवार पर मार दिया,,,,राजू की सांसे तेज चल रही थी उसका पानी निकल चुका था लेकिन फिर भी वह दीवार के उस छोटे से छेद में से अंदर अपने मां पिताजी को देख रहा था जो कि उसकी मां उसके पिताजी के ऊपर निढाल होकर गिर गई थी और उसके पिताजी,, उसकी मां को बाहों में लेकर उसकी पीठ सहला रहे थे अब राजू के लिए वहां खड़े रहना उचित नहीं था,,,आज का यह अनुभव राजू के जीवन का सबसे बड़ा सड़क साबित होने वाला था वह अपने माता-पिता की चुदाई को देखकर बहुत कुछ सीख चुका था वह अपने पहचाने को ऊपर करके वापस खटिए पर आ गया उसकी बुआ बेसुध होकर सो रही थी,,, लो खटिया पर पीठ के बल लेटा हुआ था,,, वह अभी भी अपनी सांसो को दुरुस्त नहीं कर पाया था,,, पानी निकल जाने की वजह से,,, उसका दिमाग थोड़ा ठंडा महसुस कर रहा थाइसलिए अपनी बुआ के बारे में कुछ सोच पाता इससे पहले ही वह नींद की आगोश में चला गया,,,।
 
कमला चाची की बहू रमा,,, जिसकी गदराई जवानी पानी मांग रही थी



मधु की लाजवाब चुचियां



हरिया अपने हाथ से अपनी बीवी की चूची दबाते हुए
 
राजू ने अपनी आंखों से जो कुछ भी देखा था उसका गहरा प्रभाव उसके कोमल मन पर पड़ा था,,,, अब वह अपनी मां को एक मां की तरह नहीं बल्कि एक औरत की तरह देखने लगा था,,, हर औरत को वह अपने अलग नजरिए से देख रहा था पहले औरतों को वहां इज्जत और सम्मान के नजरिए से देखता था हालांकि सम्मान अभी भी वह करता ही था लेकिन अब देखने का नजरिया उसका बदल गया था किसी भी औरत को देखता था तो पहले उसके मादक अंगो पर उसकी नजर जाती थी,,, उसकी नजर अब औरतों की बड़ी बड़ी चूचियों और उनकी बड़ी बड़ी गांड पर ज्यादा ठहरती थी,,, औरतों के नितंबों और चुचियों में एक अजीब सा आकर्षण उसके मन को प्रफुल्लित करता था,,, इस आकर्षण के वशीभूत होकर राजू अपने मन में गंदे गंदे विचार को जन्म देता था,,।

मधु की लाजवाब चुचियां



जब से वह अपनी आंखों के सामने अपनी मां को कपड़े उतारकर नंगी होते देखा था और उसे अपने पिताजी से चुदवाते हुए देखा था,,, तब से वह अपनी मां की खूबसूरती और उसके मादक बदन के आकर्षण से वशीभूत होकर खुद को अपने पिताजी की जगह रखकर अपनी मां से संभोग सुख का आनंद लूटता था,,,,उसे इस तरह की कल्पना में भी अत्यधिक उत्तेजना और संतुष्टि पन का एहसास होता था,,,,, अपनी मां को वह एक नए रूप में देखा था जोकि राजू के लिए यह बिल्कुल नया रूप था लेकिन एक औरत के लिए एक पत्नी के लिए और मधु के लिए यह सब कुछ एकदम सहज था,,, इसके बारे में राजु नहीं जानता था उसे तो अपनी मां का संभोग लिप्त,,, मदहोशी मैं खोई हुई अपनी मां का रूप ही बार-बार याद आ रहा था,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी मां रात के अंधेरे में इस तरह से खुल कर मजे लेती है,,, बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां,,,

मधु की बड़ी-बड़ी रस से भरी हुई चूचियां जिसे खुद मधु अपने दोनों हाथों से थाम लेती थी



, मादक सुडौल बदन उसकी उभरी हुई गद्देदार मुलायम भराव दार गांड और उसकी रसीली बुर जिसमे उसके पिताजी का लंड बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था,,,, इस दृश्य को याद करके राजू हमेशा यही सोचता रहता था कि उसके पिताजी का लंड उसके लंड से पतला और छोटा है और राजू अपने और अपने पिताजी के लंड की तुलनात्मक स्थिति में इसी निष्कर्ष पर निकलता था कि उसके पिताजी को उसकी मां की बड़े आराम से अंदर बाहर आ जा रहा था अगर,,,उसके पिताजी की जगह उसका लंड उसकी मां की बुर में जाएगा तो इतने आराम से बिल्कुल भी नहीं जा पाएगा क्योंकि राजू रात को अपने पिताजी के बंद को देखकर जायजा ले लिया था अच्छी तरह से जानता था कि उसके पिताजी का लंड उसके लंड से कमजोर है इसलिए वह कमला चाची की चुदाई करने के बाद इतना तो समझ ही गया था कि उसका लंड उसकी मां की बुर में आराम से नहीं जा पाएगा जितने आराम से उसकी मां उसके पिताजी के लंड पर कूद कूद कर अंदर बाहर ले रही थी इस तरह से तो बिल्कुल नहीं हो पाएगा,,, इस बारे में सोचते ही राजू की उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच जाती थी,,,।,,क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसे यह सुनहरा मौका मिला अपनी मां चोदने का तो वह बहुत ही अच्छे से अपनी मां की चुदाई करेगा और उस चुदाई से उसकी मां बेहद खुश और प्रसन्न हो जाएगी और संतुष्टि पाकर उसी के साथ ही चुदाई करवाएगी,,,,। यह सब सोचकर राजू के तन बदन में आग लग जाती थी,,,,,, राजू के लंड बार-बार अपनी मां और अपने पिताजी के बारे में सोच कर उबाल आ जाता था,,,,,

लेकिन कुछ दिनों से जहां चाह कर भी रात को जाग नहीं पाता था,,,।

मधु का गदराया बदन



अब वह घर में किसी भी तरह से कोई भी काम करते हुए सिर्फ अपनी मां को देखा है क्या था इस बात का आभास उसकी मां को बिल्कुल भी नहीं था जब कभी भी वह काम करती थी झाडु लगाती थी कपड़े धोती थी,,, राजू की निगाह उसके गोल मटोल गांड के साथ-साथ उसके ब्लाउज में से झांकते उसके दोनों कबूतरों पर चली जाती थी,,,। ऐसे ही एक दिन सुबह का समय था और हरिया दातुन कर रहा था,,, वह आंगन में बैठा हुआ था,,, राजू भी वहीं पास में बैठ कर दातुन कर रहा था तो हरिया उसे बोला,,,।

अरे इतना बड़ा हो गया है ऐसा नहीं कि मेरा हाथ बताएं बस दिन भर इधर-उधर आवारा दोस्तों के साथ घूमता रहता है पढ़ता लिखता तो है नहीं कम से कम काम तो किया कर,,,,(अपने पिताजी की बातें सुनकर राजु कुछ बोला नहीं रहा था वह बस दातुन किए जा रहा था,,,,और अपनी मां के पिछवाड़े को देख रहा था क्योंकि वह झुक कर झाड़ू लगा रही थी,,, राजू को अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड उसका पिछवाड़ा,,, बेहद खूबसूरत लगने लगा था,,, झाड़ू लगाते समय कि वह कल्पना में अपनी मां को नंगी होकर झाड़ू लगाते हुए देख रहा था और संपूर्ण रूप से नंगी होकर जावे लगाते समय उसकी मां उसे बेहद खूबसूरत और कामुक लग रही थी उसकी कल्पना निरंतर बढ़ती जाती थी,,, वह अपने पिताजी की बात पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा था तो उसके पिताजी फिर बोले,,,)

अरे तेरा ध्यान किधर है मैं तुमसे कब से बकबक कर रहा हूं और तू है कि सुनी नहीं रहा,,, है,,,।(हरिया अपने बेटे राजू का हाथ पकड़कर झकझोरते हुए बोला तो जैसे राजू को होश आया हो इस तरह से हड़बड़ा कर बोला,,,)

ककककक,,, क्या हुआ पिताजी,,,,,

अरे अभी भी नींद में है क्या,,,,

राजू की कल्पना अपनी मां के लिए कुछ इस तरह से





छोड़ो जी आप भी हमेशा उसके पीछे पड़े रहते हैं,,,(मधु झाड़ू लगाकर झाड़ू को एक कोने में रखते हुए बोली)

अरे मुन्ना की मां तुम समझती नहीं हो,,,इतना बड़ा हो गया है पढ़ता लिखता तो नहीं कम से कम कामकाज में हाथ बताएगा तो हमारे लिए भी अच्छा रहेगा वरना दिनभर आवारा लड़कों के साथ घूमता फिरता रहता है,,,।

अरे अभी तो उसके खेलने कूदने के दिन है।,,,,

तुम्हारा यही लाड प्यार एक दिन उसे बिगाड़ देगा,,,,(हरिया दातुन करके उसे फेंकते हुए बोला,,,)

अरे कुछ नहीं होगा मुझे मेरे बेटे पर विश्वास है,,,,

मैं इसीलिए कुछ नहीं कहता,,, चलो अच्छा एक लोटा पानी तो दो मुंह धोना है,,,,

रुकीए में कुंए पर से पानी लेकर आती हूं,,,,(इतना कहकर वह खूंटे पर टांगे हुई मोटी रस्सी को उतार कर अपने हाथों में ले ली और घर से बाहर निकलते हुए राजू से बोली,,,)

राजू बेटा जरा बाल्टी लेकर आना तो,,,,

(राजू की नजर अपनी मां पर ही थी घर से निकलते समय जिस तरह से उसकी बड़ी बड़ी गांड मटक रही थी उसे देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था इसलिए अपनी मां की बात मानते हुए वह तुरंत खडा हो गया,,, और बाल्टी को हाथ में लेकर वह भी अपनी मां के पीछे पीछे घर से बाहर निकल गया,,,वह अपनी मां के पीछे पीछे ही चल रहा था जहां से उसकी मां का भरपूर पिछवाड़ा उसे साफ नजर आ रहा था,,, जिसे देखकर धीरे-धीरे उसके लंड में तनाव आना शुरू हो गया था,,,, जब से वह अपनी मां की चुदाई अपनी आंखों से देखा था तब से अपनी मां के बदन के हर एक कौन में उसके हर एक अंग से मादकता छलकते हुए उसे नजर आती थी,,,, आगे आगे चल रही है अपनी मां को देखकर राजु का मन करता था कि पीछे से उसे अपनी बाहों में भर ले,,, लेकिन ऐसा करने की उसकी बिल्कुल भी हिम्मत नहीं थी,,, राजु अपनी मां के रूप से पूरी तरह से आकर्षित हो चुका था,,, पीछे से उसकी मां का बदन बेहद कामुकता भरा लगता था,,, चौडी चिकनी पीठ गोरी गोरी बेहद खूबसूरत लगती थी,,, ब्लाउज की डोरी कस के बानी होने की वजह से उस जगह का भरावदार अंग अद्भुत कटाव लिए हुए नजर आता था,,, चिकनी मांसल कमर उसके बीच में गहरी पतली लकीर बेहद खूबसूरत लगती थी और काले घने रेशमी बाल,,, नितंबों के उभार तक पहुंचती थी,,,,,जिसे देखकर राजू पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो चुका था,,,

थोड़ी ही देर में गांव के छोर पर बने कुएं पर दोनों पहुंच गए कुए पर कोई भी नहीं था,,,, कुवे पर पहुंचते ही मधु कुए की सीढ़ी पर एक पांव रखकर आगे की तरफ थोड़ा सा झुक गई और रस्सी को खोलने लगी,,, इस तरह की स्थिति में उसकी बड़ी-बड़ी गांड और ज्यादा बड़ी नजर आने लगी,, जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आने लगा,,,। रस्सी खोलते हुए मधु बोली,,,)

ला राजू बाल्टी ईधर लाना तो,,,

लो मां,,,,(इतना कहते हुए राजू बाल्टी को अपनी मां के आगे रख दिया और बाल्टी को देखकर मधु बोली,,,)

अरे बुद्धू इतनी बड़ी बाल्टी ले आया,,, यह उठेगी कैसे,,,

अरे उठ जाएगी मम्मी मैं हूं ना,,,

अरे तूने कभी कुएं से पानी निकाला है जो आज निकाल लेगा,,,

अरे मां तुम डालो तो सही,,,

राजू अपनी मां के लिए कुछ इस तरह से कल्पना करने लगा था।



चल ठीक है देखती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही मधु उस बाल्टी में रस्सी बांधकर उसे कुएं के अंदर डालने लगी राजू की वहीं खड़ा हो गया,,, देखते-देखते बाल्टी कुएं के पानी की सतह पर पहुंच गई जिसे,,, मधु रास्सी को गोल गोल घुमाकर उसे पानी के अंदर डालने की कोशिश कर रही थी ऐसा करने पर उसके ब्लाउज के अंदर उसकी चूचियां आपस में रगड़ खा रही थी,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे मानो उसके ब्लाउज में कैद दोनों कबूतर आपस में गुटर गु कर रहे हो,,, यह नजारा देखते ही राजू की सांसे ऊपर नीचे हो गई ऐसा नहीं था कि वह पहली बार अपनी मां को कुएं में से पानी निकाल कर देख रहा था पहले भी वह बहुत बार कूंए पर इसी तरह के दृश्य को देख चुका था लेकिन आज उसके देखने का नजरिया बदल चुका था,,, अपनी मां के ब्लाउज में अच्छी तरह से जानता था कि उसके अंदर मादकता भरी चूचियां है,,, जिसे हाथों में लेकर दबाकर मस्त हुआ जाता है जैसा कि उसके पिताजी कर रहे थे,,, इसलिए राजू भी अपनी मां के ब्लाउज में उसके दोनों मस्तियों को ढूंढ रहा था बड़ी बड़ी चूची होने की वजह से और थोड़ा सा झुक जाने की वजह से ऐसा लग रहा था कि मानो राजू की मां की चूचियां ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएंगी जैसा कि कमला चाची के साथ हुआ था,,,,, लेकिन यहां पर ऐसा हो पाना संभव नहीं था क्योंकि करना चाहती तो जानबूझकर अपनी चुचियों को ब्लाउज से बाहर लाई थी,,,,,। इसलिए उत्तेजना के मारे अपने सूखते हुए गले को थूक से गीला करते हुए राजू टकटकी लगाए यह नजारे को देख रहा था और मधु इस बातों से अनजान कुएं के पानी में बड़ी बाल्टी को डुबोने में लगी हुई थी,,,।

दैया रे दैया आज कितनी मेहनत करनी पड़ रही है तेरी वजह से,,, तुझे यही बाल्टी में मिली थी लाने के लिए छोटी बाल्टी नहीं ला सकता था,,,,।(मध कुएं में बाल्टी को गोल-गोल घुमाते हुए बोली,,,।)

अरे मम्मी ठीक से उसे अंदर की तरफ डालो हो जाएगा,,,,।

अरे हो तो जाएगा लेकिन उठेगा कैसे,,,

मधु इस तरह से चुप कर कुएं में से पानी की बाल्टी को खींच रही थी पर ऐसा करने पर उसकी बड़ी बड़ी गांड कुछ ज्यादा ही उभर कर बड़ी लग रही थी जिसे देखकर राजू का मन मचल रहा था



मैं हूं ना पहले तुम अकेले उठाती थी आज मैं भी हूं इसलिए हम दोनों इस बड़ी बाल्टी को बाहर निकाल लेंगे,,,,।

(राजू अपनी मां की विशाल छातियों को देखते हुए बोला,, राजू बने बाल्टी की बात कर रहा था लेकिन उसका ध्यान तो अपनी मां की चूचियों पर था जोकी रस से भरी हुई थी,,, लेकिन मधु का ध्यान इस पर बिल्कुल भी नहीं था उत्तेजना के मारे धीरे धीरे राजू के पजामे में तंबू बन चुका था,,,, राजू अपने अंदर काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,। )

हां अब ठीक है देख चली गई ना बाल्टी,,,,

भर जाने दो मां फिर बाहर निकालना,,,(राजू कुए के अंदर आधी भरी हुई बाल्टी को देखते हुए बोला,,,)

हां ठीक है लेकिन तू पकड़ लेना,,,।

ठीक है तुम भरो तो सही,,,,।

(सुबह का समय था इसलिए कुए पर कोई नहीं था चारों तरफ सुनसान था,,,,, दोपहर को ही को मुंह पर ज्यादा भीड़ भाड़ होती है,,,, थोड़ी ही देर में बाल्टी भर गई और मधु बोली,,,)

राजू बाल्टी भर गई अब जल्दी आ,,,

(राजू अपनी मां की बात सुनते ही तुरंत उसके बेहद करीब खड़ा हो गया और रस्सी को थाम लिया,,,,)

अब रस्सी को ऊपर की तरफ खींच,,,,(मधु रस्सी को ऊपर की तरफ खींचते हुए राजू से बोली,,,)

ठीक है ,,,(और इतना कहने के साथ ही वह भी अपनी मां के साथ बाल्टी को ऊपर की तरफ खींचने लगा,,,लेकिन इससे पहले राजू ने कभी भी कुएं में से बाल्टी को इस तरह से रस्सी के जरिए खींचा नहीं था इसलिए उसे इसका बिल्कुल भी अनुभव नहीं था और बार-बार उसके पैर फिसल रहे थे इसलिए मधु उससे बोली,,,)

इधर से नहीं तो मेरे पीछे आ जा और वहां से खींच वरना तेरा पैर फिसल जाएगा,,,।

ठीक है मां,,,,,,

(इतना कहना कैसा था कि राजू ने रस्सी छोड़ दिया पर अपनी मां के पीछे आने लगा अभी तक राजू को इस बात का आभास नहीं था कि उसकी मां ने उसे से क्या कह दिया है वह इस बात को बहुत ही सहजता से लिया था लेकिन जैसे ही वह अपनी मां के पीछे आया तब उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी मां ने जाने अनजाने में उसे एक अद्भुत काम सौंप दिया है अपनी मां की पिछवाड़े को देखते ही राजू के लंड में हरकत होना शुरू हो गया वह जानता था कि उसे अपनी मां के पीछे खड़े होकर रस्सी को खींचना है और ऐसा करने पर उसकी मां की गांड से उसका आगे वाला भाग एकदम से सट जाएगा जो कि इस समय धीरे धीरे अपनी औकात में आ चुका था,,,। राजू को इस बात का आभास था कि जिस दिन से उसकी मां रस्सी खींचने के लिए कह रही है अगर ऐसा करेगा तो उसकी मां की गांड से उसका लंड पूरी तरह से सट जाएगा,,,, ना जाने क्यों राजू को इस बात का एहसास होने के बावजूद भी वह अपनी मां की बात मानने से इनकार नहीं कर रहा था,,,। वह तो उत्सुकता अपनी मां के बताए काम को करने के लिए,,,।)

अरे क्या कर रहा है जल्दी कर मेरी कमर दुखने लगी है,,,।

(अपनी मां की बात सुनते ही राजू अपने मन में बोला कि पिताजी के लंड पर उठक बैठक करते हुए कमर नहीं दुख रही थी,,, और अब बाल्टी खींचने में कमर दुख रही है,,,। राजू अपने मन में यह सोच कर एक नजर अपनी मां की भरपूर को भरी हुई गांड पर डाला और उसके पीछे खड़ा हो गया,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपनी मां के पीछे सटकर खडा हो गया लेकिन अभी मधु को अपनी गांड पर किसी भी तरह की रगड़ यां चुभन महसूस नहीं हो रही थी,,, इसलिए उसका सारा ध्यान बाल्टी को खींचने में ही था,,,,,,।

अरे जल्दी कर ठीक से पकड़,,, ।

(अपनी मां की बात सुनते ही राजू से रहा नहीं गया पजामे मैं उसका मुसल पूरी तरह से तैयार था,,, वह तुरंत और ज्यादा अपनी मां के पिछवाड़े से सट गया और रस्सी को कस के पकड़ लिया राजू के तन बदन में पल भर में ही उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसे इस बात का एहसास हो गया था उसका लंड सीधी उसकी मां की गांड पर स्पर्श हो रहा है,,,, लेकिन बाल्टी खींचने के चक्कर में मधु को इस बात का अहसास तक नहीं हुआ,,,। राजू भी दम लगाकर अपनी मां की मदद करते हुए रस्सी को ऊपर की तरफ खींचने लगा लेकिन अपने लंड को अपनी मां की नरम नरम गांड के बीचो-बीच महसूस करके राजू की हालत खराब होने देगी,,,, राजू का लंड बची हुई कसर निकालते हुए और ज्यादा कड़क हो गया रस्सी को ठीक से पकड़ने के चक्कर में राजू जैसे ही थोड़ा सा आगे की तरफ अपना हाथ बढ़ाया,, वैसे ही मधु को अपनी गांड के बीचो बीच कुछ धंसता हुआ महसूस हुआ,,,लेकिन अनुभव से भरी हुई मधु को समझते देर नहीं लगी कि उसकी गांड के बीचो बीच जो चीज चुभ रही है,, वह और कुछ नहीं उसके बेटे का लंड है,,, इस बात का एहसास होते हैं मधु के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसका रोम रोम पुलकित होने लगा,,, उसकी सांस ऊपर नीचे होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, और इस बात से बात पूरी तरह से अचंभित थी कि उसके बेटे का लंड खड़ा क्यों हो गया,,, वह अपने मन में यही सोच लिया लेकिन कि आखिरकार पल भर में उसके बेटे का लंड खड़ा कैसे हो गया,,,। क्योंकि उसके नजरिए से उसके सोचने के तरीके से ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था कि जैसे कोई लड़का या मर्द उत्तेजित हो जाए उसका लंड खड़ा हो जाए,,, तभी उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसका बेटा पीछे से उसकी गांड से एकदम चिपका हुआ है,,,और मधु को समझते देर नहीं लगी कि इसी वजह से उसका बेटा उत्तेजित हो गया है और उसका लंड खड़ा हो गया है लेकिन वह हैरान इस बात से थी कि वह कोई गैर औरत नहीं थी उसकी मां थी,,,,, तब कैसे उसका बेटा उत्तेजित हो गया क्यों उसका लंड खड़ा हो गया,,, रस्सी को पकड़े हुए ही मधु अपने मन में हजार सवाल बुझ रही थी,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,और समझ में आता भी कैसे वह एक मां थी और अपने बेटे को वह एक मां के नजरिए से देख रही थी,,,,,, इसलिए उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा उसकी वजह से उत्तेजित हो गया है,,,। मधुर एक सीधी साधी औरत थी संस्कारी पारिवारिक और कभी भी आकर्षण के चाल में नहीं पूछी थी उसे इन सब बातों से कोई लगाव भी नहीं था इसलिए वहां विश्वास नहीं कर पा रही थी कि उसकी वजह से उसका बेटा उत्तेजित हो गया है लेकिन इस बात से इंकार भी नहीं कर पा रही थी कि उसकी गांड से सटने की वजह से उसके बेटे का लंड खड़ा हो गया है,,,,,,।

पल भर में ही मधु की सासे ऊपर नीचे होने लगी थी,,, वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या करें एक पल के लिए तो उसका मन कह रहा था कि अभी तुरंत राजू को थप्पड़ मार कर उसे डांट‌ दे,,, लेकिन तभी वह शांत हो गई वह अपने मन में सोचने लगी कि अनजाने में ही उससे यह गलती हुई होगी वरना उसे इन सब के बारे में कहां पता है,,, मधु अपने बेटे को भोला ही समझ रही थीवह कहां जानती थी कि उसका बेटा एक उम्र दराज औरत की 2 बार चुदाई कर चुका है और रात भर उसकी और उसके पति की गरमा गरम चुदाई देखकर मचल उठा है,,,।

मधु अजीब सी कशमकश में थी और राजू को मजा आ रहा है चोदने से भी ज्यादा सुख उसे अपनी मां की गांड से लंड को सटाने में आ रहा था,,,। राजू का लंड मोटा तगड़ा और ताकतवर था इसीलिए तो वह साड़ी सहित सब कुछ भेदता हुआ गांड की दोनों फांकों को फैलाता हुआ अंदर तक घुस गया था,,, इसलिए तो मधु भी हैरान थी जिस तरह से वह अपने बेटे के लंड को अपने गांड की दरार के बीचो-बीच महसूस कर रही थी और वहां से केवल दो अंगुल की दूरी पर ही उसकी गुलाबी छेद रह गई थी इस बात का एहसास सेवा पूरी तरह से हैरान और मस्त हो गई थी,,, वह अंदाजा लगा ली थी की उसके बेटे का लंड कितना मोटा तगड़ा और ताकतवर है,,,। क्योंकि वह जानती थी कि लंड मे चाहे जितना भी दम हो वह इस तरह से साड़ी सहित अंदर तक नहीं घुस सकता,,, अपने बेटे को डांटने का ख्याल वह अपने मन से निकाल चुकी थीक्योंकि अपने मन में यही समझते थे कि यह सब को समझाने नहीं हो रहा है और वह अपने बेटे को अपनी ही नजरों में शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी वह बस ऐसा जताना चाहती थी कि उसे कुछ भी पता नहीं है,,, इसलिए वह अपनी उत्तेजना को दबाते हुए बोली,,।

थोड़ा दम लगा बेटा,,,,, (और ऐसा कहते हुए अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन कोई भी नजर नहीं आ रहा था तब जाकर मधु को राहत महसूस हुई क्योंकि जिस तरह से उसका बेटा ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसे दबाए हुए था उससे देखने वाले को गलत ही लगता,,,,अपनी मां की बातें सुनकर राजु रस्सी को जोर से ऊपर की तरफ खींचते हुए बोला,,,।

ठीक है मम्मी,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू और जोर से कम लगाने लगा लेकिन जानबूझकर अपनी कमर को आगे की तरफ सरकार दिया और ऐसा करने पर रही सही कसर भी निकल गई क्योंकि अब राजू के लंड का सुपाड़ा सब कुछ चीरता हुआ ठीक मधु की गुलाबी बुर के छेद पर ठोकर मारने लगा,,, अपनी गुलाबीबुर पर अपने ही बेटे के लंड के ठोकर को महसूस करते ही ना चाहते हुए भी मधु एकदम से मचल उठी,,,, उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि उसके बेटे ने इतनी जल्दी सिद्धि प्राप्त कर ली है,,,। उत्तेजना के मारे मधु की तो जैसे सांस ही अटक गई,,, और राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था इस तरह की छेड़खानी करने में राजू को चोदने से भी ज्यादा मजा आ रहा था,,,लेकिन उत्तेजना के मारे राजू का मन अपनी मां को चोदने को कर रहा था उसका मन कर रहा था कि इसी समय साड़ी कमर तक उठाकर पीछे से अपने लंड को पूरा का पूरा पेल दे,,, लेकिन ऐसा करने में वह असमर्थ था इतनी ज्यादा उसमें हिम्मत नहीं थी,,,। लेकिन वह अपने मन में इस समय यही सोच रहा था कि काश इस समय वह कमला चाची के पीछे खड़ा होता तो इतनी हिम्मत करके उसकी चुदाई कर दिया होता,,,,।

मधु की उत्तेजना के मारे गला सूख रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपने ही बेटे के लंड को अपनी गांड के पीछे पीछे अपनी बुर पर महसूस करके वह पूरी तरह से मस्त तो हो ही गई थी लेकिन अजीब से कशमकश में थीआज तक उसके बदन को कोई गैर मर्द स्पर्श तक नहीं कर पाया था और आज उसका खुद का बेटा उसके अंदरूनी भाग तक पहुंच चुका था जाने या अनजाने में अब इसका समझ मधु को बिल्कुल भी नहीं हो पा रहा था,,, अजीब से हालात में मधु फंसी हुई थी उसे मजा भी आ रहा था गुस्सा भी आ रहा था उत्तेजना भी महसूस हो रही थी और धीरे-धीरे उसे अपने बेटे की हरकत की वजह से अपनी बुर गिली होती हुई महसूस हो रही थी,,,। गीली होती हुई बुर को महसूस करते ही वह शर्म से पानी पानी आने लगी क्योंकि वह अपने ही बेटे के कारण अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी,,,, आज तक वह इस तरह के हालात से नहीं गुजरी थी,,, वह एक तरह से पीछे से अपने बेटे की बाहों में थी,,, राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था चुदाई से भी अधिक उत्तेजना का अनुभव और सुख भोग रहा था वह हल्के हल्के अपनी कमर को आगे पीछे करना चाहता था ताकि ऐसा लगे कि जैसे कि वह अपनी मां की चुदाई कर रहा है,,,।लेकिन ऐसा करने से वह घबरा रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी हरकत का उसकी मां को पता ना चल जाए लेकिन वह अपने मन में सोच रहा था की क्याअब तो जो कुछ भी हो रहा है इसकी मां को पता नहीं चला होगा उसकी मां को एहसास नहीं हुआ होगा कि उसकी गांड के बीचो बीच क्या चुभ रहा है लेकिन फिर भी इसे आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था,,,,।

मधु अपने चारों तरफ देखते हुए धीरे-धीरे रस्सी को ऊपर की तरफ खींचने लगी और साथ ही राजू भी अपनी मां का हाथ बंटाने लगा और देखते ही देखते बाल्टी कुएं से बाहर आ गई मधु अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुए बाल्टी में बंधी रस्सी को खोलने लगी,,,। अभी भी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी राजू उसके ठीक बगल में खड़ा था,,, मधु चोर नजरों से अपने बेटे के पजामे की तरफ देखी तो दंग रह गई,,, पजामे में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था,,,मधु अपने बेटे के तंबू को देखकर पूरी तरह से हैरान हो गई थी क्योंकि तंबु की शक्ल कुछ ज्यादा ही उठी हुई थी,,,।अपने मन में सोचने लगी कि उसके बेटे का लंड कितना मोटा तगड़ा और लंबा है कि तंबू इतना भयानक बना हुआ है अगर कपड़ा टांग दो तो कपड़ा टंगा रह जाए,,,। मधु की हालत खराब हो रही थी वह अपने बेटे से नजर मिला पाने में असमर्थ साबित हो रही थी उसे शर्म महसूस हो रही थी बाल्टी से रस्सी को खोल कर लूंगा रस्सी को लपेट ली और रस्सी को राजू को थमाते हुए बाल्टी उठा ली और आगे आगे चलने लगी बाल्टी लेकर चलते हुए मधु की गांड को ज्यादा ही मटक रही थी और यह देख कर राजू के तन बदन में आग लग रही थी कुछ देर पहले जो हरकत उसने किया था और अभी अपनी मां की उभरी हुई मटकती गांड को देखकर उसका मन कर रहा था कि काश साड़ी उठाकर अपना लंड डाल दिया होता तो अच्छा होता,,,,, मधु घर पर पहुंचते ही बाल्टी रखकर अपने काम में लग गई,,,,।
 
मधु का काम में मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था,,, जो कुछ भी हुआ था उसका अंदाजा भी मधु को बिल्कुल भी नहीं था अनजाने में ही आज उसने अपने आपको अपने ही बेटे के द्वारा उत्तेजना अवस्था में पाकर शर्म से पानी पानी हो रही थी उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि कुछ देर पहले जो कुछ भी हुआ था वह हकीकत था या एक सपना था,,,। घर का काम करते हुए भी उसके दिल की धड़कन उस पल को याद करके बढ जा रही थी,,,, बाल्टी से रस्सी को खोलते हुए तिरछी नजरों से उसने अपने बेटे के पजामे में बने तंबू को नजर भर कर देख ली थी,,, और उस तंबू को देखकर आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था,,,उसे अपनी नजरों पर भरोसा नहीं हो रहा था अपने मन में सोच रही थी कि इतना बड़ा कैसे हो सकता है क्योंकि वह आज तक अपने पति के ही लंड से भलीभांति परिचित थी और जिस तरह का तंबू उसने अपने बेटे के पजामे में देखी थी उससे उसे पूरा यकीन था कि,,, उसकी लंबाई एक लंबे खीरे की तरह ही होगा वह अपने मन में यह सब सोचती भी थी लेकिन उस पर यकीन कर पाना उसके लिए मुश्किल हुआ जा रहा था,,,, अनजाने में ही अपने बेटे के लंड की तुलना अपने पति से करने के बाद ही उसके मन में यह ख्याल आया कि जब उसके पति का लंड उसकी बुर में इतना खलबली मचाता है अगर उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुस जाएगा तो क्या हाल करेगा,,,,,,,यह ख्याल उसके मन में अनायास ही आया था लेकिन इस ख्याल के मन में आते हैं उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल सी मचने लगी उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुदकने लगी,,,,,,,



अपने बेटे के साथ अनायास ही आए संभोग की कल्पना से वह एकदम से शर्मसार हो उठी,,,, उसे अपने इस कल्पना पर शर्मिंदगी का अहसास होने लगा अपनी बेटी के साथ चुदाई करवाने के ख्याल से ही वह अपने हाथ को शर्म के मारे धिक्कारने लगी और जैसे-तैसे वह अपने मन को मना कर अपने काम में लग गई,,,,।

दूसरी तरफ राजू की हालत एकदम खराब थी,,,, चोरी छिपेअपनी मां के नंगे भजन और उसकी जबरदस्त चुदाई को देखकर वह अपनी मां के बारे में गंदी-गंदी कल्पना ही करने लगा था अपनी मां को वह अपनी मां की नजर से नहीं बल्कि एक औरत की नजर से देखने लगा था उसके अंगों को उसके कोमल बदन को देख कर वह उत्तेजना महसूस करने लगा था,,,अपनी मां के बदन को स्पर्श करने की इच्छा उसकी तिरु होने लगी थी लेकिन अनायास ही कुए पर अपनी मां के पिछवाड़े पर अपने लंड का स्पर्श महसूस करके वह पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गया था,,,। अपनी मां के गोलाकार भारी-भरकम नितंबों का स्पर्श उसे इतना उत्तेजना देगा ईस बारे में उसे एहसास भी नहीं था,,,,, कुएं में से बाल्टी को खींचते समय राजू पजामे में ही सही अपने लंड को अपनी मां की गांड के दरार के बीचो बीच डाल दिया था साड़ी के ऊपर से ही सही लेकिन उसे यह पल बेहद आनंददायक प्रतीत हुआ था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसने यह पराक्रम कर दिया है उस समय वह इतना ज्यादा उत्तेजित था कि उसका मन कर रहा था कि अपनी मां की सारी उठाकर अपने लंड को उसकी बुर में डाल दें जिस तरह से वह कमला चाची की बुर में डालकर पहली बार संभोग के प्रकरण की शुरुआत किया था,,,,,,पहली बार उसे कुए से बाल्टी को खींचने में इतना आनंद आया था और यह कार्य वह पहली बार ही कर रहा था लेकिन इस बात क्या उसे डर भी था कि उसकी हरकत कहीं उसकी मां को पता ना चल गया हो लेकिन अपने मम्मी सोचेंगे क्योंकि जो कुछ भी हुआ था अनजाने में हुआ था शायद बाल्टी को खींचते समय उसकी मां ने इस बात पर ध्यान नहीं देते वरना जरूर उसे डांट लगाती,,,,,,

इस बारे में सोच कर राजू इतना ज्यादा उत्तेजित था कि,,, वह खेत में पहुंचकर पेशाब करने के लिए अपने लंड को बाहर निकाल दिया था उत्तेजना के मारे उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसे जोरों की पेशाब लगी है,,, लेकिन उसे ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,, इसलिए वह अपनी मां के पिछवाड़े को याद करके अपने लंड को सहलाना शुरू कर दिया था,,,,पेशाब तो वह नहीं कर रहा था लेकिन अपनी मां के ख्यालों में खो कर वो अपने लंड को धीरे धीरे से लाते हुए जोर-जोर से अपनी मुट्ठी में लेकर हिलाना शुरू कर दिया था अनायास ही मुठ मारना शुरू कर दिया ना और उसके ख्यालों में खुद उसकी मां थी जिसे वह अपने पिताजी के साथ नग्न अवस्था में देखकर उसके बारे में गंदे विचारों को जन्म देने लगा था और इस समय भी उसके दिमाग में उसकी मां के प्रति गंदे विचार ही पैदा हो रहे थे वह अपने लंड को हिलाते हुए,,, कल्पना कर रहा था कि जैसे वह अपनी मां की साड़ी को अपने हाथों से कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों में भरकर जोर जोर से दबा रहा है इस तरह का ख्याल मन में लाते ही उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी और कल्पना में उसकी हरकतों से उसकी मां और ज्यादा मदहोश हुए जा रही है,,,,,,वह अपने हाथों से अपनी मां की गांड को जोर जोर से मसल कर उसे उत्तेजित कर रहा था और कल्पना में उसकी मां अत्यधिक उत्तेजना वश अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर पजामे में से,,, उसके लंड को बाहर निकालकर हीलाना शुरू कर दी और अपनी गांड के बीचो-बीच लगाते हुए अपने बेटे को आज्ञा देते हुए बोली,,,।

डाल दे बेटा अपने लंड को डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में और जोर जोर से चोद,,,।

कल्पना में अपनी मां की मदहोशी और उसकी इस तरह की बातों को सुनकर राजू पूरी तरह से मंत्रमुग्ध होकर अपनी मां की जवानी के आकर्षण में पूरी तरह से खो गया और जोर-जोर से मुठ मारना शुरू कर दिया अपनी मां की आज्ञा पाकर कल्पना में ही वह कल्पनातीत हो कर,,, अपने लंड को अपनी मां की पनीयाई बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया उसकी आंखें बंद थी उसकी कल्पना बहुत ही जबरजस्ती कल्पना मैं भी उसे हकीकत का परिचय हो रहा था बहुत जोर जोर से अपने लंड को हिलाते हुए आखिरकार,,, पिघल गया उसकी जिंदगी का यह पहला हस्तमैथुन था जिसे वह अनायास ही अनजाने में प्राप्त कर चुका था इस क्रिया को करने में उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव और संतुष्टि प्राप्त हो रही थी लेकिन जब उसे यह एहसास हुआ कि यह तो मात्र उसका ख्याल है तो वह यह सोचने लगा कि,,, जब कल्पना में उसे अपनी मां के साथ इतना मजा मिला तो वास्तविक संभोग में उसे अपनी मां के साथ कीतना सुख मिलेगा,,,। इस बारे में सोचते ही उसके होठों पर मुस्कान करने लगी,,,।

Kamlaa chachi ki gaand



दूसरी तरफ लाला की बहन सोनी पूरी तरह से काम विह्वल थी,,, जब से उसने राजू के लंड के दर्शन की थी तब से उसकी हालत खराब थीबार-बार उसकी आंखों के सामने राजु का लंड आसमान की तरफ मुंह उठाए खड़ा नजर आता था,,,,,। जब से उसने राजू के लंड को देखी थी तब से उसे अपनी बुर के अंदर लेने की लालसा बढ़ती जा रही थी,,,,, वो राजू से मुलाकात करना चाहती थी लेकिन कैसे उसे समझ में नहीं आ रहा था तभी उसे इस बारे में ख्याल आया कि वह बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देती है जिससे उन लोगों का भला होता है और उसका समय भी व्यतीत हो जाता है,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि क्यों ना राजू को भी पढ़ाया जाए जिससे उसे भी कुछ सीखने को मिलेगा और इस तरह से वह उसे प्राप्त भी कर लेगी सोनी को अपनी यह युक्ति बेहद कारगर लगने लगी वह जल्द से जल्द गांव में जाकर राजू से उसके घर आकर पढ़ने के लिए बोलने के लिए व्याकुल हो गई,,,,,,।

बा राजू के बारे में सोचते हुए अपने भाई लाला को खाना परोस रही थी लाला पालथी मारकर बैठा हुआ था जब सोनी खाना परोस दि तो लाला बोला,,,।

सोनी आज तुमने दूध नहीं टी,,,

नहीं भैया वो क्या है ना कि बिल्ली ने दूध को जूठा कर दिया था इसलिए आज दूध पीने के लिए नहीं है,,,।

बिना दूध के मेरा काम कैसे चलेगा तुम तो जानती हो खाना खाने के तुरंत बाद मुझे एक गिलास दूध पीने की आदत है,,,।(लाला अपनी बहन की बड़ी बड़ी छातियों की तरफ देखते हुए बोला सोनी अपने भाई के नजरिए को अच्छी तरह से समझती थी उसके नजरिए को देखकर उसके होठों पर मुस्कान तेरने लगी और वह बोली,,,)

Soni iki garayyi jawani



चिंता क्यों करते हो भैया मैं हूं ना आज गाय का दूध नहीं मिला तो क्या हुआ मेरा दूध पी कर काम चला लेना ,,(और इतना कहने के साथ ही सोनी अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी अपनी छोटी बहन की यह अदा देखकर लाला का लंड तुरंत हरकत में आ गया,,, और वह अपने फटी आंखों से अपनी बहन की मद मस्त जवानी को देखने लगा अगले ही पल सैनिक अपनी ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपना मदमस्त कर देने वाली पपाया जैसे चुचियों को अपने भाई के आगे परोस दी और लाला अपनी बहन की चूची को देखकर एक पल भी ठहर नहीं पाया और अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसकी चूची को दशहरी आम की तरफ थाम लिया,,, सोनी उत्तेजना के मारे एकदम गनगना गई,,,

Soni is tarah se apne bhai ko apni chuchiya dikhate huye boli



सोनी अपने भाई के कमजोरी को अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि औरत का नंगा बदन उसके भाई की सबसे बड़ी कमजोरी है और इसी कमजोरी के चलते वह अपने भाई के घर में रानी की तरह जिंदगी गुजारतई थी जो चाहती थी वह उसे मिलता था,,,,,, सोनी पहले से ही एक कामुक औरत थी,,,अपने शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक चली जाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ दी थी पति के देहांत के बाद उधर शरीर सुख से वंचित हो गई थी इसीलिए अपने भाई के घर आई थी और उसका भाई उसकी कमजोरी का भरपूर फायदा उठाता था,,,

अपनी बहन की बड़ी बड़ी चूची हो कौन जोर-जोर से दबाते हुए बोला,,,।

आज तो मैं भोजन करने से पहले ही दूध पीना चाहता हूं,,,

क्या भैया मैं भागी थोडी जा रही हुं,,,,( सोनी अपनी दोनों चुचियों पत्नी दोनों हाथों में भरते हुए बोली,,, अपने बड़े भाई को ललचा रही थी यह देखकर लाला के मुंह में पानी आ रहा था साथ ही धोती में खलबली मचने लगी थी,,,)

तुम भागी नहीं जा रही हो सोनी लेकिन तुम्हारी चूची मेरी भूख को और ज्यादा बढ़ा रही है,,,।(इतना कहने के साथ ही लाला अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बहन की चूची को दोनों हाथों में थाम लिया सोनी समझ गई थी कि उसके भाई को किसी और चीज़ की भूख लग गई है इसलिए वह अपने भाई को थोड़ा और तड़पाते हुए बोली,,)

छोड़ो ना भैया खाना खाने के बाद ही मिलेगी,,,,(ऐसा कहते हुए सोनी थोड़ा पीछे हो गई,,, लाला की भूख और तड़प दोनों बढ़ती जा रही थी,,,,,)

नहीं सोनी तुम्हारी चूची देखकर मुझे मेरी भुख बरदाश नहीं हो रही है,,,,,,(और इतना कहते हुएलाला भोजन की थाली को एक तरफ करके घुटनों के बल चलते हो आगे भरा और अपनी बहन सोनी को बाहों में भर लिया और,, और उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चूमना शुरू कर दिया,,, लाला ऐसा ही था अपनी बहन की मदमस्त जवानी देख कर वह पूरी तरह से निहाल हो चुका था,,, वह अपनी बहन सोनी को नीचे जमीन पर पीठ के बल लिटा दिया और तुरंत अपने होठों को उसके होठों पर से हटा कर उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथों में पकड़ कर बारी-बारी से मुंह लगाकर पीना शुरू कर दिया,,, लाला के लिए उसकी बहन सोनी की चूचियां दशहरी आम से कम नहीं थी वह अपनी बहन की चूची को बड़े शिद्दत से पीता था उसे अपनी बहन की चूचियां बेहद आकर्षक लगती थी ऐसा नहीं था कि विधवा होने के बाद ही वह अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाना शुरू कर दिया था उसका उसके बहन के प्रति पहले से ही आकर्षण था और पहले से ही वह अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बना चुका था लेकिन उसकी जिंदगी में उसकी बहन हमेशा के लिए आ जाएगी इस बारे में उसे बिल्कुल भी एहसास नहीं था,, अगर उसकी बहन ना होती तो वह अपनी जिंदगी अकेले ही गुजार रहा होता,,,,।

आहहह भैया धीरे से दांत क्यों गड़ा रहे हो,,,,आहहहहहह,,,,,,,

क्या करूं रानी मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है,,,

रोज तो मुंह लगाकर पीते हो फिर भी ईसकी प्यास तुम्हें इतनी क्यों है,,,,!

चूची की कदर शायद एक औरत से ज्यादा एक मर्द को होती है तुम नहीं जानती सोनी मर्द की जिंदगी में औरत की चूची कितना मायने रखती है,,,, बड़ी बड़ी चूची को देखते ही आदमी का लंड खराब हो जाता है,,,,,,।

तुम भी ना भैया एकदम शरारती हो गए हो,,,,,,,

तुम चीज ही ऐसी हो कि शरारती बनना पड़ता है,,,।

अब क्या करें भगवान ने मुझे बनाया ही ऐसा है कि तुम मेरी खूबसूरत बदन के दीवाने हो गए हो,,,,

(अपनी बहन की बात सुनते ही लाला जोर-जोर से उसकी चूची को पीना शुरू कर दिया सोनी को भी बहुत मजा आता था अपने भाई से इस तरह से चूची चुसवाते हुए,,,।

आहहहहह,,,, क्या भैया तुम तो खाना खाते-खाते मेरा दूध पीने लगे,,,, देखना कहीं दरवाजा ना खुला छोड़ दिया हो वरना उस दिन की तरह कोई आ गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,।

अरे कुछ नहीं होगा मेरी जान आज दरवाजा बंद है,,,,

उस दिन उस हरिया ने मुझे पहचाना तो नहीं था ना,,,

नहीं नहीं बिल्कुल नहीं अगर पहचाना होता तो शायद अब तक गांव में खुशर फुसर होना शुरू हो जाता,,,, वह तो अच्छा हुआ कि तुम्हारे लंबे बालों में तुम्हें पहचानने नहीं दिया,,,, वरना सच में अनर्थ हो जाता,,,,।(ऐसा कहते हुए लाला अपनी बहन की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा,,,,)

क्या भैया पहले खाना तो खा लो,,,,

खाना बाद में खा लूंगा पहले स्वादिष्ट पकवान तो खा लेने दो,,,, भला ईस पकवान के आगे कोई यह भोजन क्यों करें,,,(ऐसा कहते हो मिला ना अपनी बहन की शादी पूरी तरह से कमर तक उठा दिया कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो गई उसकी गुलाबी बुर को देखकर उसका लंड एकदम ताव में आ गया,,, सोनी को अपने भाई की बातें बड़ी अच्छी लग रही थी,,,,,ऐसा नहीं था कि वह अपने भाई का सिर्फ मन बहलाने के लिए उसका साथ दे रही थी उसकी भाई की हरकत की वजह से उसे भी आनंद आ रहा था,,,, लाला से रहा नहीं जा रहा था और वह तुरंत अपनी धोती को उतार फेंका वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगा हो गया उसका खडा लंड देखकर सोनी की बुर पानी छोड़ने लगी,,,, लेकिन इस समय अपने भाई के लंड को देखकर सोने के मन में राजू के लंड की कल्पना होने लगी अपने मन में सोचने लगी कि काश उसके भाई की जगह वह लड़का होता तो कितना मजा आता ,,,, लाला आनन-फानन में अपनी बहन की दोनों टांगों को चौड़ी करके अपने लिए जगह बना लिया और सोनी इसी मौके की तलाश में थी उसका भाई उसकी बुर में लंड डालता इससे पहले ही सोनी अपने भाई से बोली,,।

भैया में गांव में जाकर कुछ बच्चों को और पढ़ने के लिए बोलना चाहती हुं,,,,

गांव में लेकिन गांव में क्यों जाओगे किसी से खबर भेजवा देती तो ,,,,

नहीं भैया ऐसे मैं खुद जाकर बच्चों को पढ़ने के लिए बोलूंगी तो वो लोग जरूर आएंगे,,, तुम तो जानते हो मैं स्कूल में शिक्षिका बनना चाहती थी लेकिन मेरी पढ़ाई पूरी नहीं हो पाई और मैं गांव में रह गई इसीलिए मैं चाहती हूं कि यहां रह कर अपने शौक को पूरा कर सकु,,,।

Lala soni ki chudai ki taiyari karta hua





(लाला यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन बेहद खूबसूरत है और कामुक भी,,, उसे अपनी बहन पर विश्वास नहीं था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसकी बहन से भी शादी होती तो अपने बड़े भाई के साथ शारीरिक संबंध कभी नहीं बनाती और वहां इसीलिए गांव में नहीं जाने देना चाहता था क्योंकि गांव के आवारा लड़कों के संगत में अगर वह पड़ गई तो नाक कट जाती क्योंकि वह अपनी बहन के चरित्र को अच्छे से जानता था इसलिए गांव में जाने के लिए वह हमेशा मना करता था और उसकी बहन चाहती कि नहीं थी लेकिन राजू से मिलने उसे पढ़ने के लिए अपने घर बुलाने के लिए उसे गांव में जाना ही था और वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका भाई उसे गांव में जाने के लिए कभी भी इजाजत नहीं देता लेकिन संभोग क्रिया स्त्री और पुरुष के बीच ऐसी क्रिया है कि कुछ भी चाय संभोग के समय पुरुष से मनवा लेती है,,,और इसीलिए सोनी अपने भाई को मनाने के लिए इसी समय का इंतजार कर रही थी कुछ देर सोचने के बाद लाला बोला,,,)

Laala apni bahan soni ki chudai karte huye



ठीक है चली जाना लेकिन बार-बार नहीं बस एक ही बार,,,

नहीं भैया बस एक ही बार कुछ बच्चों को पढ़ाने के लिए मनाना है ताकि वह लोग भी पढ़ लिख कर कुछ अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें,,,,।

ठीक है मेरी जान बस अब कुछ मत बोलो,,,,(लाला को अपनी बहन की चुदाई करने का भुत सवार था और वह एक पल भी बिगाड़ना नहीं चाहता था क्योंकि उसके लंड से उसकी बहन की बुर की दूरी केवल 2 4 अंगुल ही रह गई थी,,, और उससे यह दूरी बर्दाश्त नहीं हुई थी इसलिए आनन-फानन वह अपनी बहन को गांव मे जाने की इजाजत दे दीया था,,, और अगले ही पल उसका लंड उसकी बहन की बुर की गहराई नापने लगा वह जोर-जोर से अपना कमर हिलाना शुरू कर दिया और सोनी गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकाल कर अपने भाई को और उकसाने लगी,,,,,,, थोड़ी ही देर में लाला की गर्मी शांत होगी तो वह अपनी बहन के ऊपर से उठ कर हांफते हुए बगल में बैठ गया और सोनी उठ कर बैठ गई और अपने ब्लाउज के बटन बंद करती हुए बोली,,,।

अब तो दूध नहीं चाहिए ना,,,,

अभी के लिए तो हो गया लेकिन रात के भोजन के समय भी दूध चाहिए,,,

(इतना सुनकर सोनी हंसने लगी,,,,,,, सोनी को इस बात की तसल्ली हो गई थी कि वह जल्द ही राजू से मिलेगी और उसे पढ़ने के लिए मना लेगी और उसके बाद वह अपने मन की कर सकती है,,,,।

रात गहराने लगी थी,,,, गुलाबी को अपने भैया भाभी की चुदाई का इंतजार था और यही नजारा देखने के लिए राजू भी तड़प रहा था,,,, दोनों खटिए पर एक साथ लेटे हुए थे,,, अपनी बुआ के बदन का स्पर्श राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रहा था वह बात तो अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बुआ भी उसके पिताजी और उसकी मां की चुदाई देखकर गरम होती है,,,, राजू इस बात को सोचकर यह अनुमान लगाने लगा कि जिस तरह से अपनी मां और पिताजी की चुदाई देखकर उसके मन में यह भावना पैदा होती है कि आज उसके पिताजी की जगह हुआ होता तो उसकी मां को चोदने में उसे बहुत मजा आता तो क्या उसकी बुआ भी यही सोचती होगी कि उसकी भाभी की जगह वह होती तो उसके भैया से चुदवाने में बहुत मजा आता,,,,,, इस बात का अनुमान लगाते ही राजु का लंड खड़ा हो गया,,,।वह अपनी बुआ से इस बारे में बात करना चाहता था लेकिन उसे बात करने में डर लग रहा था उसे हराने जा रहा था आखिरकार वह अपनी बुआ से एक बहाने से बोला,,,।

बुआ क्या छिपकली उसी क्षेंद में से आती है मुझे छिपकली से बहुत डर लगता है,,,।

(छेद का जिक्र आते ही गुलाबी थोड़ा घबरा सी गई लेकिन फिर अपने आप को संभालते हुए बोली,,)

हां उसी जगह से आती है लेकिन डरने की जरूरत नहीं है मैं भगा दी हूं,,,।

मैं जाकर देखूं क्या हुआ कहीं उसी छेद में हुई तो,,,

नहीं नहीं देखने की जरूरत नहीं है अभी नहीं है,,,।

(गुलाबी यह बात अच्छी तरह से जानती थी किअगर राजू उज्जैन में देखने की कोशिश करेगा तो बगल वाले कमरे का दृश्य उसे जरूर दिखाई देगा और अगर इसमें कुछ हो रहा होगा उसके भैया और भाभी के बीच तो राजू देख लेगा और वह समझ जाएगा कि वह क्या देखती है,,,)

देखने तो दो बुआ,,, हुई तो मैं भगा दूंगा,,,

नहीं कोई जरूरत नहीं है तू सो जा,,,,

(गुलाबी मन ही मन में डर रही थी राजू की बात सुनकर उसे लगने लगा कि उसका काम बिगड़ रहा है जो नजारे को देखकर वह अपनी गर्मी को शांत करने की थी शायद अब राजू की वजह से उसे देखने में डर महसूस होने रहा था इसलिए एक बहाने से उसे सोने के लिए बोल कर दूसरी तरफ करवट लेकर सो गई लेकिन दूसरी तरफ करवट लेने के चक्कर में जैसे ही वो घुम कर दुसरी तरफ हुई वैसे ही राजू उसकी तरफ मुंह करके करवट ले लिया और अपना एक हाथ उसके ऊपर डालकर उसी से जानबूझकर चपकते हुए बोला,,,)

मुझे भी नींद आ रही है बुआ,,,,

(उसके इतना कहते ही गुलाबी को अपनी गांड पर कड़क चीज धंसती भी महसूस हुई वह पहले भी अपने भतीजे राजू के लंड को देख चुकी थी इसलिए उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी गांड पर क्या चुभ रहा है,,, पल भर में ही उसकी सांसे उपर नीचे हो गई,,,, राजू को भी इस बात का एहसास था कि उसका लंड उसकी बुआ की गांड पर रगड़ खा रहा है क्योंकि पहले भी बार इस अनुभव से गुजर चुका था और वह भी अपनी मां के साथ इसलिए उसे मजा आने लगा वह जानबूझकर सोने का नाटक करने लगा,,, गुलाबी की हालत खराब हो रही थी,,, कुछ कर सकने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी राजू को ही मजा आ रहा था वहीं से आगे बढ़ना चाहता था आप दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी लेकिन पहल करने से दोनों घबरा रहे थे,,, धीरे धीरे समय व्यतीत होने लगा राजू रह रह कर अपनी कमर को आगे की तरफ दबा दे रहा था जिससे गुलाबी को अपनी गांड की गहराई में राजू का लंड महसूस होने लगा था,,,, उसकी आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन वह जानबूझकर सोने का नाटक कर रही थी कुछ देर तक गुलाबी के बदन में कोई भी हरकत ना देख कर राजू को लगने लगा कि वह सो गई है,,,, इसलिए वह अपनी बुआ गुलाबी के साथ अपनी हरकत को बढ़ाना चाहता था,,,, वह गुलाबी कि नरम नरम गांड पर अपना हाथ रख कर उसे महसूस करना चाहता था,,,वह ऐसा करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया ही था कि बगल वाले कमरे से गिलास गिरने की आवाज आई और वह रुक गया,,,,, उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी वह समझ गया कि बगल वाले कमरे में फिर से वही खेल शुरू हो गया है,,,,,,और वह फिर से उसी नजारे को देखने के लिए खटिया पर से उठ खड़ा हुआ और धीरे-धीरे अपने कदम उसे दीवार के छेद की तरफ बढ़ाने लगा गुलाबी जो कि सोई नहीं थी सिर्फ सोने का नाटक कर रही थी वह राजू की हर एक हरकत को चोरी-छिपे देख रही थी,,,।
 
राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था एक बार फिर उसे अपनी मां और अपने पिताजी की चुदाई जो दीखने वाली थी,,,एक बार फिर से वहां अपने पिताजी का लंड अपनी मां की बुर में अंदर बाहर होता हुआ देखने जा रहा था,,, खटिया पर सोते हुए अपनी बुआ की गांड पर हाथ रखने के ख्याल से ही उसका लंड खड़ा हो चुका था,,,, और कमरे के अंदर के दृश्य को देखते ही उसके लंड का कड़क पन एकदम से बढ़ गया,,,,



दूसरी तरफ गुलाबी की भी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि जिस तरह से राजू उठकर उससे दीवार के छेद के तरफ गया था गुलाबी को लगने लगा था कि राजू को हो ना हो शंका जरूर हो चुकी है कि दीवार के छेद का मामला कुछ और ही है,,,, इसलिए वह कुछ बोली नहीं बस आंखों को हल्का सा खोल कर लेटी रही,,,, राजू अपनी आंखों कोदीवार के उस छोटे से छेद में हटाकर दूसरी तरफ के कमरे के दृश्य को देखने की कोशिश करने लगा,,, तो जल्द ही लालटेन की पीली रोशनी में उसे उसकी मां नजर आई जो कि अभी पूरी तरह से कपड़ों में थी और गिरी हुई गिलास को उठाकर रख रही थी शायद वह पानी पी रही थी,,,,,, अपनी मां को संपूर्ण वस्त्र में देखकर उसकी आंखें वासना से चमकने लगी उसके पिताजी उसी तरह से खटिए पर लेटे हुए थे लेकिन उनके बदन पर भी अभी वस्त्र था,,, दोनों को कपड़ों में देखकर राजू को लगने लगा कि खेल अभी शुरू होने जा रहा है,,, वह टकटकी बांधे नजारे के लुप्त को उठाने लगा थोड़ी ही देर में उसकी मां उसकी आंखों के सामने अपनी साड़ी उतारने लगी यह देखकर राजू के लंड में हरकत होना शुरू हो गया वह समझ गया था कि थोड़ी ही देर में उसकी मां की आंखों के सामने नंगी हो जाएगी,,,,,, पर देखते ही देखते राजू की मां अपनी साड़ी उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दी वह केवल ब्लाउज और पेटीकोट में ही खड़ी थी,,,,,,, राजू को अंदर के कमरे की बात सुनाई नहीं दे रही थी बस उसे दिखाई दे रहा था,,,, क्योंकि वह दो ना बहुत ही फुसफुसाहट भरे स्वर में बात कर रहे थे,,,राजू अपने मन में सोचने लगा कि काश ऊन दोनों की बात आज भी सुनाई देती तो और मजा आता क्योंकि अपनी मां और पिताजी के मुंह से चुदाई जैसे गंदे शब्दों का प्रयोग उनकी बातें सुनकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती थी,,,,,,,,,

अपनी मां को कपड़ा उतारते हुए देखकर राजु की हालत खराब हो गई



दूसरी तरफ गुलाबी समझ गई थी कि बगल वाले कमरे में क्या हो रहा है वरना राजू इतनी देर तक वहां खड़ा नहीं रहता और वह यह भी जान गई थी कि उस छोटे से छेद में से उसे सब कुछ नजर आने लगा है,,,, गुलाबी अपने मन में यही सोच रही थी कि अपने मां और अपने पिताजी की चुदाई देखकर उन्हें नंगा देखकर राजू क्या महसूस करेगा उसे कैसा लगेगा कहीं उसे गुस्सा तो नहीं आएगा और यही देखने के लिए वह बड़े गौर से राजू की तरफ देखने लगी,,,,

राजू के मुंह में पानी आ रहा था क्योंकि उसकी नजर इस समय अपनी मां की चूचियों पर टिकी हुई थी जो की पूरी तरह से ब्लाउज में कैद में होने के बावजूद भी मानो जैसे कि उसके ब्लाउज के अंदर खरबूजे भर दिए गए हो इस तरह से ऊभरी हुई नजर आ रही थी जिसे देख कर ही राजू समझ गया था कि उसकी मां की चूची कितनी बड़ी है ऐसा नहीं था कि आज वह देख रहा था अगली बार भी वह अपनी मां कोसंपूर्ण रूप से नंगी देख चुका था और अपनी मां की बड़ी-बड़ी चुचियों को देखकर उसके लंड का तनाव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था इस समय ब्लाउज के अंदर उसकी मां की चूचियां बेहद आकर्षक लग रही थी ब्लाउज के ऊपर का एक बटन खुला होने की वजह से उसकी गहरी दरार साफ नजर आ रही थी जिसमें राजू का मन डूब जाने को कह रहा था,,,,,, राजू को अपनी मां स्वर्ग से उतरी अप्सरा लग रही थी,,, जो कि किसी भी हाल में कामदेवी नजर आती थी,,,,अपनी मां के खूबसूरत बदन को देखकर भले ही वह वस्त्र में हो या चाहे वस्त्र विहीन,,,राजू की आंखों में एक अद्भुत चमक आ जाती थी जो कि इस समय भी उसकी आंखों में बरकरार थी,,,,। राजू कमरे में बने उस छोटे से छेद के पीछे के रहस्य को अच्छी तरह से समझ गया था और यह भी जान गया था कि इसी क्षेत्र में से उसकी बुआ गुलाबी भी उसी नजारे को देखकर मस्त हो जाती है जिस नजारे को देखकर वह अपने अंदर उत्तेजना की लहर को ऊमडते हुए महसूस कर रहा था,,,।

र राजू की मां धीरे-धीरे अपनी साड़ी उतार रही थी इस तरह से





खटिया पर नींद का बहाना करके लेटी हुई गुलाबी राजू के हर एक हरकत को बड़ी बारीकी से देख रही थी,,,,, हर एक पल गुलाबी के दिल की धड़कन को बढ़ा रहा था गुलाबी भी,,,इतना तो समझ ही गई थी कि उसका भतीजा राजू समझ ही गया होगा कि उस छोटे से छेद का रहस्य क्या है,,,,,, गुलाबी जानती थी कि कमरे के अंदर संभोग का प्रसारण शुरू हो गया होगा,,,और यही अहसास उसके तन बदन में उत्तेजना को बढ़ा रहा था और उससे ज्यादा वह अपने बदन में कामुकता का एहसास इस बात से कर रही थी कि उस मादक दृश्य को उसका भतीजा राजू खुद अपनी आंखों से देख रहा था,,,, वह देखना चाहती थी कि अपनी मां को चुदते हुए देखकर वह कैसा महसूस करता है,,,,इसलिए उत्तेजना के मारे अपने सूखे गले को अपने ही थूक से गीला करने की कोशिश करते हुए वह टकटकी लगाए देख रही थी,,,।

ब्लाउज के बटन खुलते ही राजू की मां के दोनों खरबूजे बाहर आ गए



राजू अपने मन में यह सोच रहा था कि जल्द से जल्द उसकी मां बाकी के बचे अपने कपड़े उतार कर पूरी नंगी हो जाए बहुत दूर से ही सही अपनी मां को नंगी देखना चाहता था ब्लाउज में कैद उसके दोनों खरबूजे कोअपनी आंखों से देखना चाहता था दोनों टांगों के बीच उसकी पतली गुलाबी दरार को देखकर मस्त होना चाहता था,,,, गोल गोल बड़ी बड़ी गांड को देखकर अपने अंदर दहकते शोले को महसूस करना चाहता था,,,। लेकिन उसकी मां की की बाकी के बचे कपड़े उतारने का नाम नहीं ले रही थी,, बस अपने दोनों हाथ कमर पर रखकर अपने शरीर को गोल-गोल तरीके से हिला रही थी जिसे देख कर उसके पिताजी आहें भर रहे थे,,,,,,राजू अपने मन में यह सोच कर मस्त हो रहा था कि उसकी मां को इस हाल में देखकर उसके पिताजी का लंड खड़ा हो गया होगा क्योंकि दूर से देख कर ही जब उसका लैंड पर जाने में बवाल मचा रहा था तो उसके पिताजी की हालत को वह अच्छी तरह से समझ रहा होगा,,,। अपनी मां को खुशहाल में खाना देखकर राजू अपने मन में ही बोल रहा था कि,,,।

उतार जल्दी उतार मुझे सब कुछ देखना है,,,,।

अपनी मां की मदमस्त चुचियों को देखकर राजू की हालत खराब होने लगी



तभी उसके पिताजी अपनी धोती को उतारने लगे और अगले ही पल वह खटिए पर निर्वस्त्र हो गया,,, राजू अपने पिताजी को देखकर अपने मन में फिर से वही सोचने लगा कि उसके पिताजी की जगह उसका लंड होता तो और मजा आता,,,, उसके पिताजी अपने लंड को हाथ से पकड़ कर ही लेना शुरू कर दिए थे जिसे देखकर उसकी मां मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,,। अपनी मां को मंद मंद मुस्कुराता हुआ देखकर राजू अपने मन में ही बोलने लगा कि उतारेगी भी या हंसती रहेगी,,।

गुलाबी खटिया पर लेटी लेटी यही सोच रही थी कि अंदर क्या हो रहा होगा,,,,,, उसकी खुद की हालत खराब थी,,,राजू रह-रहकर एक नजर अपनी बुआ गुलाबी पर डाल दे रहा था कि कहीं वह जाग तो नहीं रही है और जब जब वह गुलाबी की तरफ देखता तब तब गुलाबी अपनी आंखों को जल्दी से बंद कर लेती,,, उत्तेजना के मारे गुलाबी और राजू दोनों का हाल बद्तर हुआ जा रहा था,,,,,

राजू टकटकी लगाए सब कुछ देख रहा था वह अपने मन में इस बात से पूरी तरह से तसल्ली किए हुए था कि अच्छा है कि उसके पिताजी यह काम लालटेन के उजाले में करते हैं,,, अगर लालटेन जला रही होती तो उसे कुछ भी देखने का मौका नहीं मिल पाता और अपनी मां का कामुक रुप,,, उसका खूबसूरत बदन उसके अंगों की परिभाषा को ना हीं देख पाता और ना ही समझ पाता,,,।राजू को यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि उसकी मां कपड़े उतार के नंगी होने में इतना नाटक क्यों करती है वह अपने पिताजी की तड़प को अच्छी तरह से समझ रहा था क्योंकि वह खुद तड़प रहा था उत्सुक था अपनी मां को नंगी देखने के लिए वह अपने मन में यह सोच रहा था कि अगर वह खुद अपने पिताजी की जगह मौजूद होता तो वह अपने हाथों से अपनी मां के सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी करने में एक पल की भी देरी ना करता,,,,।

राजू की मां पेटीकोट की डोरी खोल कर पेटीकोट को नीचे सरका दी जिससे राजू को उसकी मां की बुर साफ नजर आने लगी





यह राजू के मन की बात थीऔर शायद वह अपनी मां के साथ मौका मिलने पर ऐसा ही करता है लेकिन वह इस बात से अनजान था कि एक औरत को मर्द को तड़पाने में इसी तरह से मजा आता है और मर्द को तड़पाने का यह सबसे जबरदस्त तरीका भी है,,,, औरत इसी तरह से अपनी जवानी का जलवा दिखा कर मर्द को घुटनों पर ला देती है उन्हें अपना गुलाम बना देते हैं अपनी जवानी का रस मिलाकर जिंदगी भर अपनी मनमानी करती रहती है,,,, मधु भी इससे अछूती नहीं थी वह भी अपने पति की भले ही चाहे जितनी भी इज्जत करती थी लेकिन रात को बिस्तर पर वह अपने पति को अपनी जवानी का गुलाम ही बना देती थी,,,,,,

राजू का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे यह नहीं मालूम था कि उसकी तरह कोई ओर लड़का इस तरह से अपनी मां बाप की चुदाई छुप छुप कर देखता है या नहीं लेकिन इस तरह से देखने में अजीब से सुख की अनुभूति होती है जिसे प्राप्त करके राजू अपने आप को भाग्यशाली समझ रहा था,,,। भले ही यह नैतिक नजरिए से गलत था लेकिन इसमें एक अद्भुत सुख भी था जिससे राजू वंचित नहीं होना चाहता था,,,। धड़कते दिल के साथ हुआ बगल वाले कमरे के नजारे को देख रहा था कि तभी उसके कानों में उसके पिता जी के शब्द पडे,,,।

अरे अब कितना तड़पाओगी,,,

रुको जरा मुझे जोरों की पेशाब लगी है,,,

चुदवाने के नाम पर तुम्हें पेशाब जल्दी लग जाती है,,,

अरे ऐसी बात नहीं है,,,(मधु मुस्कुराते हुए बोली,,,,राजू तो अपनी मां के मुंह से पेशाब करने वाली बात सुनते ही एकदम से उत्तेजित हो गया उसके लंड कि अकड और ज्यादा बढ़ गई,,,। सांसों की गति तेज होने लगी,,,,पहली बार वह अपनी मां के मुंह से इस तरह के शब्दों पसंद आया था इतने खुले तरीके से उसने आज तक पेशाब करने वाली बात नहीं बोली थी इसलिए राजू को अपनी मां के इस बात में बेहद कामुकता का अनुभव हो रहा था,,,,)

अब थोड़ा रुकीए में जल्दी आती हूं,,,(इतना कहकर मधु जाने को हुई ही थी कि हरिया पीछे से आवाज लगाते हुए बोला,,,)

अरे बाहर कहां जा रही हो यही कर लो,,,

( अपने पिताजी की यह बात सुनकर राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा,,,)

अरे पागल हो गए हो गए हो क्या जी यहां नहीं,,,,

अरे तुम भी बेवकूफ हो नाली लगी हुई है ना वहां बैठ कर कर लो बाहर जाने की जरूरत नहीं है,,,(राजू के पिताजी उंगली से इशारा करके बोले,,,)

यहां लेकिन यहां मैंने कभी की नहीं हुं।

तो क्या हुआ अब कर लो बाहर जाने की जरूरत नहीं है,,,।

(राजू की तो सासे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, उसकी मां पेशाब करने वाली है इस बात से ही उसके तन बदन में आग लगी हुई थी,,,, क्योंकि अब तक वह अपनी मां को पेशाब करते हुए कभी नहीं देखा था लेकिन ऐसा लग रहा था कि वह आज भी नहीं देख पाएगा क्योंकि उसके पिताजी उंगली के इशारे से घर के कोने की तरफ करने को बोल रहे थे जहां पर पानी गिराया जाता था बर्तन धोने के काम आता था वहां नाली लगी हुई थी ताकि पानी निकल सके और उसी जगह पर उसकी मां के साथ करने जा रहे थे जो की नजरों से दूर थी वहां तक नजर नहीं पहुंच पा रही थी उसकी मां बिना कुछ बोले उस कोने में चली गई और थोड़ी देर में राजू के कानों में पेशाब करने की मधुर धुन सुनाई देने लगी इतना तो जानता ही था कि पेशाब करने पर इस तरह की आवाज निकलती है हालांकि उसने आज तक,,, किसी औरत को पेशाब करते हुए नहीं देखा था,,, इस बात के एहसास सेवह पूरी तरह से मदहोश हो गया कि उसकी मां कोने में बैठ कर के साफ कर रही है पेशाब करते हुए कैसे नजर आती होगी उसकी गांड कैसी दिखाई देती होगी और उसकी मां अपनी पेटी कोट को कमर तक कैसे उठाई होगी,,, यह सब ख्याल राजू के तन बदन में आग लगा रहा था उसके कानों में पढ़ रही परेशान की मधुर धुन बेहद मादक लग रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके कानों में मध घोल दिया गया गया हो राजू के चेहरे का अभाव बदल रहा था जो कि गुलाबी बड़े सांप तौर पर देख पा रही थी राजु के चेहरे पर बदलते भाव को देखकर,,,गुलाबी इतना तो समझ गई थी कि कमरे के अंदर का दृश्य बेहद उत्तेजक होता जा रहा है,,,

थोड़ी ही देर में पेशाब करने की आवाज की मधुर धुन बंद हो गई और राजू समझ गया कि उसकी मां पेशाब कर चुकी है अपने पिताजी के नजर और उसके चेहरे के बदलते हावभाव को देखकर राजु भी समझ गया था कि उसके पिताजी उसकी मां को पेशाब करते हुए देख कर मस्त हुए जा रहे हैं,,,, थोड़ी ही देर में उसकी मां फिर से उसी जगह पर पहुंच गई जहां पर खड़ी थी लेकिन खड़ी होकर अपने पेटिकोट की डोरी को बांट रही थी तो पेटीकोट की डोरी को बांधते हुए देखकर राजू के पिताजी बोले,,,।

अरे अब ईसे क्यों बांध रही हो इसे तो अब उतारना है,,,।

(उसकी बातें सुनकर मधु मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

मैं तो भूल ही गई थी,,,(इतना कहते हुए भी वह पेटीकोट की डोरी को बांध दी और अगले ही पल अपनी उंगलियों को ब्लाउज पर रख दी और ब्लाउज के बटन खोलने लगी,,,राजू समझ गया कि उसकी मां पेटीकोट से नहीं ब्लाउज से कपड़े उतारने का शुरुआत करना चाहती है,,, अब राजू के दिल की धड़कन बढ़ने लगी,,,देखते देखते उसकी आंखों के सामने उसकी मां अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अगले ही पल ब्लाउज को उतार कर नीचे फेंक दी,,,राजू को अपनी आंखों के सामने अपना भविष्य नजर आने लगा अपनी मां की गोल गोल बड़ी-बड़ी तनी हुई चूचियों को देखकर उसके लंड में उबाल आना शुरू हो गया,,,,,,



मधु की चूचियां पहले से ही बेहद आकर्षक थी,,तीन तीन बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसकी चूचियां उसी तरह से तनी हुई थी जैसे की जवानी के दिनों में तनी रहती थी,,, दूसरों की तरह उसकी चुचियों में जरा भी लचक नहीं थी यह देखकर राजू के तन बदन में और आग भड़कने रखती थी,,,, और जैसे ही राजू की मां का हाथ पेटीकोट की डोरी पर क्या राजू के दिल की धड़कन और तेजी से चलने लगी वह समझ गया कि अब अकेले ही पल उसकी मां नंगी हो जाएगी उससे यह दृश्य यह कामुकता यह मादकता,,, सही नहीं जा रही थी,,, उसकी सांसे बेहद गहरी चल रही थी,,, उसके पेजामे में बवाल मचा हुआ था उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर आने के लिए मचल रहा था,,,

अब तक गुलाबी उसके चेहरे के बदलते हुए हाव-भाव को देख रही थी,,,उसके लंड की तरफ उसका ध्यान बिल्कुल भी नहीं गया था लेकिन जैसे ही उसकी नजर पजामे पर पड़ी उसके तो होश उड़ गए,,,, पजामे में जबरदस्त तंबू बना हुआ थाअब तो गुलाबी की हालत ज्यादा खराब होने लगी कमरे का दृश्य धीरे-धीरे गरमाता चला जा रहा था,,,,देखते ही देखते राजू की मां ने अपनी पेटीकोट भी उतार कर फेंक दी इस समय वह कमरे में पूरी तरह से नंगी हो गई,,,, राजू की हालत खराब होने लगी और अगले ही पल वहअपना तो अपने पजामे में डाल कर अपने खड़े लंड को पकड़ लिया,,, गुलाबी यह देखकर एकदम से मचल उठी,,,राजू की हरकत और उसकी उत्तेजना देखकर गुलाबी को समझ तो आ ही रहा था कि अंदर कितने से कहते हो कर उसे गुस्सा नहीं बल्कि मजा आ रहा है और ऐसा ही तो वह मन ही मन चाहती भी थी क्योंकि अगर राजू को मजा आएगा तो उसका काम आसान हो जाएगा,,,,।





राजू की मां कमरे में एकदम नंगी हो गई थी राजु के पिताजी की हालत खराब होती जा रही थी,,,,,,राजू को साफ नजर आ रहा था किसकी पिताजी से रहा नहीं जा रहा था बरवा के लिए पल अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर उसकी मां की गांड पकड़ कर उसे अपनी तरफ से इसलिए बस यह दृश्य राजू से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ और वह पजामे को घुटने तक सरका कर अपना लंड बाहर निकाल लिया और,,, उसे हाथ में लेकर हीलाना शुरू कर दिया,,,, गुलाबी यह देखकर दंग रह गईक्योंकि राजू भूल चुका था कि वह कमरे में है और कमरे में उसकी बुआ गुलाबी भी सो रही है,,,, गुलाबी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और उसे यही मौका सही भी लग रहा था राजू के लंड को वह पहले भी नजर भर कर देख चुकी थी,,, लेकिन आज का हालात कुछ और था,,,, उससे रहा नहीं गया और वह खटिए पर से उठ खड़ी हुई,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और इस बात से अनजान राजू कमरे के अंदर अपने मां बाप की गरमा गरम चुदाई देखने जा रहा था,,,, राजू को अपनी मां की गांड बेहद खूबसूरत लग रही थी,,,।
 
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