Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 4 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

पल-पल राजु के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,, राजू कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे इस तरह से अपने माता पिता के संभोग की क्रिया देखने को मिलती रहेगी,,,,। कुछ दिनों में ही राजू का दिन बदलने लगा था उसके ख्याल बदलने लगे थे औरतों को देखने का नजरिया बदलने लगा था,,, यह सब जवानी के जोश का ही करामत था,,, और तो और राजू की किस्मत इतनी अच्छी थी कि वह कमला चाची के साथ चुदाई का सुख भोग चुका था,,,,,, इसलिए तो उसे और अच्छे से औरतों के बारे में उनके साथ संबंध के बारे में समझ पडने लगी थी,,,, उसका औरतों के कामुक अंगो के प्रति ज्ञान दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था,,, राजू छोटे से छेद से एकदम साफ साफ देख पा रहा था कि उसकी मां पूरी तरह से कमरे में नंगी खड़ी थी और उसकी मां को एकदम नंगी पिक्चर कर उसके पिताजी अपने आप पर काबू नहीं कर पाए थे और उत्तेजना वश राजू की मां की,, बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिए थे राजू से यह तेरी से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो पाया था वह अपनी उत्तेजना पर काबू कर सकने में सक्षम नहीं था इसलिए वह अपने पजामे को घुटनों तक खींच कर अपने खड़े लंड को हिलाना शुरू कर दिया था,,,

मधु अपनी मदमस्त जवानी के जलवे दिखाते हुए।



एक तरह से राजू अपनी मां के नंगे बदन उसकी खूबसूरती और उन दोनों की संभोगनीयाक्रिया को देखकर हस्तमैथुन कर रहा था एक बार पहले भी वह अपनी मां के बारे में गंदे खयालो के चलते हस्तमैथुन करके अपने आप को शांत करने की कोशिश कर चुका था अब फिर से वह वही क्रिया कर रहा था वह यह भी भूल गया था कि उसी कमरे में उसकी बुआ गुलाबी भी सो रही है जो कि वह कभी भी जा सकती है लेकिन इन सब बातों से बिल्कुल अनजान राजू अपने आप में मस्त हो गया था वह तो अपने आप को कल्पना में बगल वाले कमरे में अपने पिताजी की जगह महसूस करने लगा था,,,,।

मधु





कमरे में गुलाबी जोकि राजू को यही लग रहा था कि वह गहरी नींद में सो रही है जबकि वह सो नहीं रही थी वह जाग रही थी,,, अपनी आंखों से अपने भतीजे की कामलीला उसके कामांग को देखकर पूरी तरह से मस्त हो रही थी उसी से भी यह बर्दाश्त नहीं हुआ कि उसका भतीजा राजू अपने खड़े लंड को हिला रहा है और वह खटिए पर से उठ कर बैठ गई अपने भतीजे राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर उसकी बुर ‌ कुलबुलाने लगी थी,,, गुलाबी की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी थी क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि उसका भतीजा राजू छोटे से छेद से क्या देख रहा है,,, गुलाबी राजू की उत्तेजना को देखकर यह सोचने लगी कि काश बगल वाले कमरे का दृश्य अपने कमरे में हकीकत में बदल जाता तो कितना मजा आता है,,,।यही सोचते हुए वह राजू के पास जाना चाहती थी जो कुछ भी उसके मन में था आज वह अपनी अभिलाषा को अपनी आकांक्षा को पूरी कर लेना चाहती थी क्योंकि जिस तरह का हालात कमरे में बना हुआ था उसे देखकर गुलाबी समझ गई थी कि आज उसके मन की इच्छा पूरी होने वाली है,,,,। अभी तक वह राजू से थोड़ा डरती थी कि कहीं वहअपनी मां को सब कुछ बता ना दें क्योंकि वह जानती थी कि वो थोड़ा नादान है लेकिन आज कमरे के अंदर उसकी हरकत को देखकर वह समझ गए थे कि अब वह नादान बिल्कुल भी नहीं रहा था वह जवान हो गया था गुलाबी को वह दिन याद आने लगा जब उसके खड़े लंड को देखकर उसे हाथ में लेकर हीलाई थी और उसका मन बहुत कुछ करने को किया था लेकिन राजू की वजह से ही वह अपने मन को दबा ले गई थी अपनी उत्तेजना को अपने अंदर समा ले गई थी लेकिन आज वह समझ गई थी कि राजू के साथ अब उसे किसी भी प्रकार का डर नहीं है क्योंकि जो वह चाहती थी वही राजू भी चाह रहा था अपनी ही मां बाप की गरमा गरम चुदाई देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था गुलाबी अपने मन में यही सोच रही थी कि अपनी मां को नंगी देखकर वह क्या सोच रहा होगा उसकी बड़ी बड़ी गांड देख कर उसकी बड़ी बड़ी चूचियां देख कर उसकी फोटो देख कर क्या सोच रहा होगा इतना तो समझ ही गई थी कि इन सब को देख कर उसे भी दूसरे लड़कों की तरह मजा ही आ रहा है तभी तो वह अपना लंड बाहर निकाल कर हीला रहा है वरना ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता,,,, और इसी मौके का फायदा गुलाबी पूरी तरह से उठाना चाहती थी,,,,,,,।

मधु अपनी पेटिकोट उतारते हुए।





राजू की मदहोशी और उसकी मस्ती को देखकर गुलाबी को यकीन भी नहीं हो रहा था कि यह वही राजू है जिसे वह नादान समझती थी जो यह समझती थी कि राजू को इन सब बातों से कोई निशबत नहीं है,,, वह दूसरे लड़कों की तरह बिल्कुल भी नहीं है लेकिन आज अपनी आंखों से देखकर गुलाबी को यकीन हो गया कि हर लड़के एक ही तरह के होते हैं बस उनकी आंखों के सामने नजारा कुछ इस तरह से होना चाहिए जिस तरह से वह अपनी आंखों से देख रहा था अपनी ही मां के नंगे बदन को देख कर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,,, अभी भी राजू का ध्यान छोटे से छेद से बगल वाले कमरे में ही केंद्रीत था जहां पर उसके पिताजी उसकी मां के नंगे बदन से खेल रहे थे उसकी बड़ी बड़ी गांड तो अपनी दोनों हथेली में भर भर कर दे पा रहे थे यह देखकर राजू की हालत खराब हो रही थी कमला चाची के साथ उसने केवल संभोग भर किया थासंभोग से जुड़े क्रियाकलापों को वह बिल्कुल भी ना तो किया था और ना ही उसके बारे में कुछ जानता था अपने ही पिता जी से वह धीरे धीरे सीख रहा था कि एक औरत के जिस्म से कैसे खेला जाता है,,,, अपनी मां की मदहोशी और अपने पिताजी की मस्ती को देख कर राजू समझ गया था कि इन क्रियाकलाप होने आदमी और औरतों में को बेहद आनंद की अनुभूति होती है और वह इस क्रिया से वंचित नहीं होना चाहता था वह,, वह संभोग की हर एक क्रिया से हर एक क्रीडा से अवगत होना चाहता था उसकी मस्ती को अपने अंदर महसूस करना चाहता था इसलिए तो अपने अंदर और ज्यादा उत्तेजना को महसूस कर रहा था,,,,।

मधु इस तरह से अपनी साड़ी कमर तक उठाए खड़ी थी,,





राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि इस समय उसने जो सोचा नहीं था वह हो रहा था वह अपनी मां को बेहद संस्कारी औरत समझता था लेकिन उसका यह भ्रम धीरे-धीरे टूटता चला जा रहा था और जो उसकी आंखों ने इस समय देख रही थी उसी से तो उसका दिमाग एकदम सन्न रह गया था उसके पिताजी खटिया पर पीठ के बल लेटे हुए थे और उसकी मां अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपनी बड़ी बड़ी गांड उसके पिताजी के मुंह पर रख दी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके पिताजी इसी पर का इंतजार कर रहे थे जैसे ही उसकी बड़ी-बड़ी उसके पिताजी के चेहरे पर हुई वैसे ही उसकी मां की बुर में उसके पिताजी की जीभ ने प्रवेश कर दिया और चाटना शुरू कर दिया,,,इस नजारे को देखकर तो राजू हक्का-बक्का रह गया उसे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था उसके पिताजी उसकी मां की बुर को चमक रहे थे और वह भी एक दम मजे लेकर,,, राजू अपनी मां के चेहरे और उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को देख रहा था जोकि पपाया की तरह तनी हुई थी,,,, अपनी मां के चेहरे पर बदलते भाव संतुष्टि के भाव और मदहोशी भरी रेखाएं देखकर इतना तो समझ गया था कि इस क्रिया में उसकी मां को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही है,,,,।

राजू की मां और उसके पिताजी





चाटो राजा जोर जोर से चाटो,,,आहहहह,,सहहहहंंंं,,,, आहहहहहहह,,, मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है,,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को गोल गोल चेहरे पर घुमाने लगी,,,। राजू तो अपनी मां और अपने पिताजी की हरकत को देखकर पूरी तरह से मस्त हो चुका था बड़ी-बड़ी गांड को उसके पिताजी बड़े आराम से झेल रहे थे यह देख कर राजू और ज्यादा मदहोश होने लगा था,,,,,,अपनी मां की हरकत को देखकर राजू को यही लग रहा था कि अगर उसका बस चलता तो शायद मैं उसके पिताजी को अपनी बुर की अंदर घुसेड लेती,,,, राजू इस बात से हैरान था कि दिन में अपनी मां को देखने पर उसे ऐसा कभी भी नहीं लगा था कि रात के अंधेरे में उसकी मां इतनी ज्यादा मस्त औरत हो जाती है,,,,अगर यह बात किसी और के मुंह से सुना होता तो शायद राजू के लिए यकीन कर पाना मुश्किल था लेकिन वह अपनी आंखों से देख रहा था इसलिए इसे झुठलाया भी नहीं जा सकता था,,,, अपनी मां को इस तरह से अपनी दूर चटाता देखकरराजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी और वहां अपनी मुट्ठी को अपने लंड पर और ज्यादा कस्ता चला जा रहा था यह देखकर गुलाबी को लगने लगा था कि कमरे के अंदर जरूर चुदाई शुरू हो गई है,,,।

मधु और हरिया



गुलाबी खटिया पर से उठ कर धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी थी राजू को इस बात का अहसास तक नहीं था,,, वह तो अपनी ही मस्ती में मस्त था,,, गुलाबी को अपने अरमान पूरे होते नजर आ रहे थे जवानी की दहलीज पर हो कब से कदम रख चुकी थी लेकिन दोनों टांगों के बीच का रास्ता किसी राहगीर ने अभी तक तय नहीं कर पाया था क्योंकि गुलाबी ने इस रास्ते पर प्रवेश निषेध का शामियाना जो तान दी थी हालांकि अब उसमें प्रवेश करने का रास्ता व खुद बना चुकी थी और उसे उस रास्ते पर प्रवेश करने वाला राहगीर भी मिल चुका था ,,, बगल वाले कमरे का कामोत्तेजक नजारेसे तो गुलाबी भलीभांति परिचित थे लेकिन कमरे के अंदर के इस नजारे को देखकर उसके होश उड़ गए थे उसकी उत्तेजना सब्र के बंधन में बदला नहीं चाहती थी वह किसी पक्षी की तरह पंख फैलाए आसमान में उड़ना चाहती थी,,, इसलिए तो वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी क्योंकि उसे अपनी मंजिल सामने नजर आ रही थी,,, गुलाबी मन में ठान चुकी थी कि आज की रात ही वह अपनी दोनों टांगों के बीच का प्रवेश द्वार खोल देगी ताकि उसमें उसके पहचान राहगीर जाकर अंदर की स्थिति का जायजा ले सकें,,,।,,

मधु और हरिया



राजू अपनी मस्ती में पूरी तरह से खोया हुआ था और देखते-देखते धीरे-धीरे गुलाबी उसके बेहद करीब पहुंच गई उसके ठीक पीछे खड़ी होकर वह धीरे से उसके कान में बोली,,,,।

क्या देख रहा है राजू,,,,?

(पहले तो राजू के कानों में जूं तक नहीं रेंगी,,,, गुलाबी समझ गई कि कमरे के अंदर अपने मां-बाप की गरमा गरम चुदाई देखकर पूरी तरह से बहक गया है इसलिए अपने होठों पर हल्की मुस्कान लाते हुए फिर से धीरे से बोली,,,)

क्या देख रहा है राजु,,,?

(जैसे ही उसके कानों में यह शब्द पड़े उसके तो होश ही उड़ गए वह एक झटके से चमकते हुए पीछे की तरफ देखा तो पीछे उसकी बुआ गुलाबी खडी थी उसकी हालत एकदम से खराब हो गई,,,, काटो तो खून नहीं उसका शरीर पूरा जम गया हालांकि अभी भी धीरे-धीरे उत्तेजना के कारण वह अपने लंड को हिला रहा था यह देख कर गुलाबी गुलाबी अपने मन में ही बोली कि यही लड़का मुश्किल जवानी की गर्मी को शांत करेगा,,,,,,)

राजू और गुलाबी बगल वाले कमरे में ईस‌तरह की गरमा गरम चुदाई देखकर पूरी तरह से मस्त हो चुके थे



बताना क्या देख रहा है,,,, और यह खडा क्यों है,,,(लंड की तरफ देखते हुए बोली राजू एकदम से सहम गया गया जब उसकी बुआ उसके खडे लंड की तरफ देखते हुए बोली राजू को अपनी स्थिति का भान हुआ उसका पजामा घुटनों तक नीचे सरका हुआ था और वह अपने लंड को मुठीया रहा था,,, जैसे ही उसे अपनी स्थिति का भान हुआ अपना हाथ पीछे खींच लिया और इस मौके का फायदा उठाते हुए गुलाबी अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके खड़े हैं अपनी मुट्ठी में अपनी नरम नरम हथेली में दबोच ली और बोली,,,)

बाप रे कितना बड़ा और कितना गर्म है,,,,(ऐसा कहते हो वह है राजु के लंड़ को बिना छोड़े बोली,,,,,,,राजू तो एकदम मस्त हो गया हालांकि उसे डर भी लग रहा था लेकिन अपनी बुआ की नरम हथेली का स्पर्श अपने लंड पर महसूस करते ही वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था,,, पल भर में ही राजू की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी गुलाबी उस छोटे से छेद की तरफ नजर घुमाते हुए बोली,,)

देखु तो जरा तु अंदर क्या देख रहा है,,,

ककककक,,, कुछ नहीं बुआ,,,,(राजू घबराते हुए कांपते स्वर में बोला,,,,, लेकिन गुलाब ने उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए उस छोटे से छेद में अपनी आंखों को घटा दी क्योंकि वह जानती थी कि अंदर क्या चल रहा होगा,,, और अंतर नजर करते ही उसे अपनी भाभी नजर आई जो कि उसके भैया के चेहरे पर अपनी गांड लग रही थी,,, यह देखते ही वह पूरी तरह से मदहोशी से भर गई,,,। उत्तेजना के मारे वह जोर से राजू का लंड दबा दी जिससे राजू की आह निकल गई,,,, और वह मजे लेते हुए बोली,,)

राजू अंदर का नजारा तो बहुत ही गर्म है,,,,, तेरी मां अपनी बड़ी-बड़ी गांड तेरे पिताजी के चेहरे पर रगड रही है और तेरे पिताजी अपनी जीभ निकालकर तेरी मां की बुर चाट रहे हैं,,,।

(अपनी बुआ के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर राजू की तो हालत खराब हो गई उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी वह कुछ कहने के लायक बिल्कुल भी नहीं था)

तो तु यही देख रहा था ना अपने मां बाप की चुदाई,,, मजा आ रहा है देखने में,,,, सच कहूं तो मुझे भी बहुत मजा आ रहा है तू डर मत मैं तुझसे कुछ नहीं कहूंगी,,,(गुलाबी और छोटे से छेद में नजरें गड़ाए हुए ही बोली और राजू की तरफ नहीं देख रही थी खाना कि उसका लंड अभी भी गुलाबी के हाथ में ही था अपनी बुआ की बात सुनकर राजू को थोड़ी राहत महसूस होने लगी,,,,,, राजू समझ गया कि उसकी बुआ उसे कुछ कहेगी नही,,, वह खामोश खड़ा रहा बस अपनी बुआ की प्रतिक्रिया का आनंद लेता रहा,,, गुलाबी अपने भैया और भाभी की काम क्रीड़ा को देख रहई थी गुलाबी को अपनी भाभी की हरकत बेहद लुभावनी लग रही थी वह भी चाहती थी कि इसी तरह से कोई उसकी भी बुर चाटे,,,,क्योंकि वह खुद महसूस करना चाहती थी कि औरतों को अपनी बुर चटवाने में किस तरह की आनंद की प्राप्ति होती है,,,,,,,।

देख राजू तेरी मां कितनी मस्त औरत है,,, कितनी बेशर्म है,,,, कैसे अपनी दोनों टांग खोल कर अपनी बड़ी बड़ी गांड तेरे पिताजी के मुंह पर रगड रही है,,,, तेरे बाप को तो बहुत मजा आ रहा होगा,,,,। (गुलाबी यह कहते हुए अपने हाथ में राजू के लंड को कस के पकड़ कर आगे पीछे हिलाते हुए अपनी आंखों को हटाकर राजू की आंखों को इस खेत पर लगाते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

देख राजू,, कितना मस्त नजारा है,,, देख तू भी देख,,,,,, देखना कैसे तेरी मां की बुर में तेरे बाप का लंड जाएगा,,,।

(अपनी बुआ की बात सुनकर राजू फिर से उस नजारे को देखकर उसका लुफ्त उठाने लगा,,,, राजू अपनी मां को बड़े गौर से देख रहा था उसकी मां के चेहरे का भाव पल-पल बदल रहा था,,,। बिखरे हुए बाल से उत्तेजना के मारे माथे से पसीना टपक रहा था आंखें बंद थी लाल लाल होंठ खुले हुए थे और उसके दोनों खरबूजे रबड़ की गेंद की तरह उछल रहे थे,,,,,, टांगों के बीच हल्के हल्के बाल राजू के साथ नजर आ रहे थे उसकी दोनों गुलाबी पत्तियां खुली हुई थी जिसमें उसके पिताजी की जीभ अंदर बाहर हो रही थी,,, यह नजारा राजू के लिए असहनीय होता जा रहा था और गुलाबी अपनी हरकतों से उसके बदले में उत्तेजना की आग को और ज्यादा भड़का रही थी,,, थोड़ी ही देर में उसकी मां अपनी स्थिति को बदलने लगी शायद अब समय आ गया था लंड को बुर में लेने का,,, वह अपनी स्थिति को बदलती इससे पहले गुलाबी राजू को हटाते हुए उस छेद मैं अपनी आंख को गडा दी अंदर चुदाई शुरू होने वाली थी,,, गुलाबी कुछ ही पल में खटिए पर पीठ के बल लेट गई और हरिया उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया वह अपने हाथ से अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए आगे बढ़ रहा था और गुलाबी यही नजारे को राजू को दिखाना चाहती थी कि कैसे एक औरत की चुदाई की जाती है कैसे उसकी बुर में लंड डाला जाता है गुलाबी को नहीं लग रहा था कि राजू इस ज्ञान से अनजान है इसलिए आगे बढ़ने से पहले उसे सिखाना जरूरी है लेकिन वह कहां जानती थी कि राजू संभोग के प्रकरण की शुरुआत कर चुका है कमला चाची की बार 2 बार चुदाई कर चुका है और उसे अच्छी तरह से मालूम है कि चोदने के लिए लंड को कहां डाला जाता है,,,,। फिर भी गुलाबी एक बार फिर से राजू की आंखों को वापस उस छेद से लगाते हुए बोली,,,।)

देख राजु अब कैसे तेरा बाप तेरी मां की बुर में लंड डालेगा ,,,

(अंदर का नजारा तो राजू को गर्म कर ही रहा था उस पर गुलाबी की अश्लील बातें आग को और ज्यादा भड़का रही थी,,,राजू अंदर के नजारे को देखकर और ज्यादा गरम हो रहा था क्योंकि इससे मैं उसके पिताजी उसकी मां की बुर में लंड डालने की तैयारी कर चुके थे राजू की नजरें उसके पिताजी के लंड पर टिकी हुई थी जो कि उसके हाथ में थी वह अंदर का नजारा देखते हुए ही अपनी बुआ से बोला,,)

पिताजी से बड़ा तो मेरा है,,,

(राजू के मुंह से यह बात सुनते ही गुलाबीकी हालत खराब होने लगी क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि राजु अपने लंड़ की तुलना अपने पिताजी के लंड से करेगा,,,, लेकिन जो कुछ भी राजू कह रहा था उसमें सत प्रतिशत सच्चाई थी,,,, गुलाबी यह बात भली-भांति जानती थी,,, राजू की बातें सुनकर गुलाबी बोली,,,)

तुझे कैसे मालूम,,,

सामने दिखाई तो दे रहा है बुआ,,,,

तो क्या तु अपने बाप से भी अच्छा चुदाई कर लेगा,,,।

हां कर लूंगा,,,( अंदर के नजारे को देखकर राजू एकदम गरम होता हुआ बोला,,,)

अगर तेरी मां को चोदना हुआ तो,,,

(गुलाबी के मुंह से यह बात सुनते ही राजु आश्चर्य से उसकी तरफ देखने लगा लेकिन बोला कुछ नहीं गुलाबी मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, गुलाबी यह बात केवल उसकी उत्तेजना को परखने के लिए बोली थी और देखना चाहती थी कि और कितना उत्तेजित है जो कि वह काफी उत्तेजित भी था लेकिन उसकी ही मां की बात करके गुलाबी या देखना चाहती थी कि वास्तव में वह अपनी मां के बारे में क्या सोचता है लेकिन वह अपनी मां के बारे में सुनकर कुछ बोला नहीं और गुलाबी यही समझने लगी कि अगर मौका मिले तो वह अपनी मां की भी चुदाई कर देगा,,,। इस बात से गुलाबी भी अपने अंदर उत्तेजना का तूफ़ान उठता हुआ मैसेज करने लगी उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस हो रही थी,,, आखिरकार उसका पसंदीदा हथियार जो उसके हाथ में था वह लगातार राजू के दिल को हिला रहे थे जो कि उसके हथेली में लोहे के रोड की तरह लग रहा था गुलाबी को भी बहुत मजा आ रहा था राजू के लंड को हीलाने में,,, राजू उत्तेजना के मारे अपने सुख के गले को अपने हाथों से खिला करते हुए वापस उस छेद से अंदर की तरफ देखने लगा क्योंकि उसकी मां की चुदाई होना प्रारंभ हो चुका था उसका बाप जोर जोर से धक्के लगा रहा था उधर के साथ उसकी मां की खरबूजे जैसी चूचियां उसकी छाती पर लहरा उठती थी,,,,,,, राजु को बिना हटाए गुलाबी भी उसी छेद से अंदर की तरफ देखने लगी,,, गुलाबी और राजू एक साथ बगल के कमरे में चुदाई के दृश्य को देखकर गरम हो रहे थे,,, राजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि वह एक खूबसूरत लड़की जो कि उसकी दुआ थी उसके साथ चुदाई के दृश्य को देखकर आनंद ले रहा था इस वजह से उसकी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी,,,।उत्तेजना के मारे राजू का हाथ खुद-ब-खुद गुलाबी के नितंबों पर आ गया उसकी नरम नरम गांड का स्पर्श पाते ही राजू की हालत खराब हो गई और बाहर उत्तेजना बस अपनी बुआ की गांड को अपनी हथेली में जोर से दबोच लिया राजू की हरकत को देखकर गुलाबी एकदम से मदहोश हो गई क्योंकि पहली बार किसी मर्दाना हाथों का स्पर्श वह अपने गांड पर महसूस कर रही थी उसे बहुत ही ज्यादा उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,, राजू की हरकत की वजह से उसकी भी सांस ऊपर नीचे हो गई थी,,,।

गुलाबी को यही मौका ठीक लग रहा था आगे बढ़ने के लिए आज वह अपने मन की मुरादे पूरी कर लेना चाहती थी,,, अपनी उफान मारती जवानी को आज वह अपने भतीजे के हाथों में सौंप देना चाहती थी गुलाबी को अपने भतीजे के लंड पर पूरा विश्वास था उसकी लंबाई मोटाई को देखकर गुलाबी को इस बात का अहसास हो गया था कि अगर उसके भतीजे का लंड उसकी बुर में एक बार जाएगा तो तहलका मचा कर ही वापस निकलेगा,,,

बगल वाले कमरे में गुलाबी के भैया भाभी की चुदाई बड़े जोरों से चल रही थी और वही चुदाई के दृश्य को देखकर दोनों गरम हो रहे थे गुलाबी समझ गई थी कि उसका भतीजा भी चुदाई के इस खेल का मजा लेने का इच्छुक है वरना,,, वह इस तरह से अपनी बुआ के साथ अपनी ही मां और पिताजी की चुदाई को ना देखता,,,, राजू अभी भी अपनी बुआ की गांड को जोर जोर से दबा रहा था और गुलाबी की हालत खराब हो रही थी उसकी सांसे गहरी चलने लगी थी दोनों मजा ले रहे थे गुलाबी के हाथों में राजू का नंबर था और राजू की हथेली में गुलाबी की मदमस्त गांड थी,,,,। राजु और गुलाबी एक दूसरे की तरफ आंख में आंख डालकर देखने लगे,,, दोनों की सांसें आपस में टकरा रही थी,,,, गुलाबी के गुलाबी गाल शर्म से लाल हो चुके थे और उसके होंठ रस बरसा रहे थे,,,,राजू का मन अपने होठों को अपनी बुआ के होठों पर रखने का बहुत मन कर रहा था लेकिन उसे ना जाने क्यों डर भी लग रहा था,,,, गुलाबी इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी,,,,,, इसलिए इस खेल में वह खुद पहल करना चाहती थी,,, इसलिए जो खयाल राजू के बारे में आ रहा था वह खुद गुलाबी अपने होठों को आगे रखकर राजू के होठों पर और चुंबन करने लगी,,,।

अद्भुत अतुल्य,, रस से भरा हुआ यह चुंबन दोनों के तन बदन में आग लगाने के बाद दोनों एक दूसरे में खोने लगे दोनों को और भी प्यासा बना रहा था,,,। राजू और गुलाबी दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी राजू जोर-जोर से दोनों हाथों में भरकर गुलाबी की गुलाबी गांड को मसल रहा था,,,। गुलाबी उसे रोक नहीं रही थी वह तो बल्की खुश थी राजू की हरकत की वजह से,,,, गुलाबी के अरमान पूरे होते नजर आ रहे थे,,, अपनी भैया भाभी की चुदाई को देखकर रोज तड़पती रहती थी लेकिन आज उसके यह तड़प मिटने वाली थी दोनों एक दूसरे के फोटो को चूसते हुए एक दूसरे में खोते चले जा रहे थे,,,।

बगल वाले कमरे में अपने मां-बाप की चुदाई देखने का अब राजू के पास समय नहीं था क्योंकि इस कमरे में वह अपनी बुआ के साथ कामलीला रचाने जा रहा था,,, उसकी बुआ कितनी खूबसूरत और जवान है उसे आज पता चल रहा था,,,,, गुलाबी राजू को कसके अपनी बाहों में दबोचे हुए थी जिसकी वजह से उसकी दोनों नारंगीया राजू की छाती पर रगड़ खा रही थी,,,, और अपनी छाती पर चूची का घर्षण महसूस करके राजू और ज्यादा गरम हो रहा था,,,।
 
बेहद अद्भुत और अतुल नजारा था जिसके बारे में कभी राजू ने हीं और ना ही कभी गुलाबी ने कल्पना की थी,,,,,, माहौल पूरी तरह से गर्माता चला जा रहा था,,,

मधु की बड़ी-बड़ी गांड





गर्मी का महीना चल रहा है लोग अपने अपने घरों में चैन की नींद सो रहे थे,,, लेकिन हरिया के घर में उसके परिवार में किसी को भी नींद नहीं आ रही थी एक कमरे में हरिया और उसकी बीवी एक दूसरे में समाने में लगे हुए थे उसके बगल वाले कमरे में बुआ और भतीजे की काम लीला शुरू हो चुकी थी,,,, राजु और गुलाबी के जीवन का यह पहला चुंबन था जिसमें दोनों खोते चले जा रहे थे,,। राजू तो दो बार कमला चाची से चुदाई का सुख प्राप्त कर चुका था,,, कमला चाची को चोदने के बावजूद भी राजू उसके खूबसूरत बदन से खेल नहीं पाया था उसकी चूचियों को दबा नहीं पाया था उसके होठों का रसपान नहीं कर पाया था इसलिए राजू के लिए जीवन का पहला संभोग भले ही यादगार क्यों ना हो लेकिन अधूरा ही था और दूसरी तरफ गुलाबी की तड़पती जवानी पहली बार अपनी जवानी की गर्मी शांत करने के राह पर चल पड़ी थी उसके लिए एक मर्द का साथ उसकी गर्मी उसकी भुजाओं उसकी मर्दानगी का एहसास पहली बार था,,, इसलिए तो अपने भतीजे की बाहों में वह अपने आप को पिघलता हुआ महसूस कर रही थी जीवन का पहला चुंबन गुलाबी और राजू दोने के लिए यादगार बनता चला जा रहा था,,,,

मधु की नंगी जवानी,,





राजुर गुलाबी दोनों में से किसी कोटि चुंबन का अभ्यास बिल्कुल भी नहीं था एक मर्द औरत को किस तरह से चुंबन करता हैयह ना तो राजू को पता था और ना ही गुलाबी को ही यह बस अपने आप होता चला जा रहा था और देखते ही देखते यह चुंबन एकदम प्रगाढ होता चला जा रहा है अपने मां-बाप की गरमा गरम चुदाई को देखकर राजु अपने आपको संभाल नहीं पा रहा था,,,,,, गुलाबी की हथेली में राजू का लंड और ज्यादा कड़क होता जा रहा था उसके कड़क पन को उसकी गर्मी को अपने हथेली में महसूस करके गुलाबी अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से कुछ रिश्ता हुआ महसूस कर रही थी उसकी गुड़ की ली हो रही थी इस बात का एहसास गुलाबी को और ज्यादा मदहोश कर रहा था ,,,राजू भी अपनी बुआ गुलाबी की गांड को धीरे-धीरे दोनों हाथों से पकड़कर दबाना शुरू कर दिया उसे अपनी बुआ की गांड दबाने बहुत मजा आ रहा था,,,

बेशक कमला चाची की गांड गुलाबी के गाने से बहुत ज्यादा बड़ी थी लेकिन वह कमला चाची की गांड को अपने हाथों से पकड़ कर उसके साथ खेल नहीं पाया था लेकिन वह कभी वह अपनी बुआ की गांड से खेल कर पूरी करना चाहता था भले ही वह सलवार के अंदर थी लेकिन उसका नरम नरम एहसास उसे और ज्यादा दीवाना बना रही थी,,,,,,। राजू के लिए यह पहला एहसास था जब वहां जवानी के उम्र में किसी जवान लड़की की गांड को अपने दोनों हाथों से थामे हुए था और वह भी अपनी खुद की सगी बुआ की यह एहसास उसके तन बदन में आग लगा रही थी,,,,,,

गुलाबी की गुलाबी जवानी देख कर राजू पानी पानी हो रहा था



दोनों की हालत को देखकर ऐसा लग रहा था कि अब कमरे के छोटे से छेद के जरिए अंदर झांकने का कोई मतलब नहीं रह गया है क्योंकि दोनों अपने आप ही उसी खेल को शुरू कर दिए हैं जो कि बगल वाले कमरे में खेला जा रहा था,,,, गुलाबी की हालत खराब थी शर्म के मारे उसके गाल गुलाबी होते जा रहे थे उत्तेजना और शर्म दोनों उसकी हालत को पल पल खराब करते चले जा रहे थे,,,,,, जो कार्य राजीव सलवार के ऊपर से कर रहा था गुलाबी चाहती थी कि राजू यही कार्य उसके सलवार उतार कर करें,,,, लेकिन राजू पहल करेगा कि नहीं इस बारे में उसे उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी गुलाबी राजू के लंड के कड़क पन की गर्मी में पिघलती चली जा रही थी धीरे-धीरे मदन रस उसकी सलवार को भीगो रहा था,,,,, एक दूसरे के होठों को चूमने और चाटने में अच्छा खासा समय व्यतीत कर चुके थे,,, गुलाबी आगे बढ़ना चाहती थी,,, इसलिए वह अपने होठों को राजू के होठों से अलग करते हुए बोली,,,।

राजू और कमला चाची



राजू जो खेल तेरी मां और तेरे पिताजी खेल रहे हैं क्या तु वही खेल खेलना चाहता है,,,(अपनी उखडती सांसो को दुरुस्त करते हुए गुलाबी बोली,,,)



लेकिन किसके साथ,,,,(राजू आश्चर्य से लेकिन जानबूझकर बोला क्योंकि अब उसके माता-पिता किस तरह का खेल खेल रहे थे उसका जान चुका था और वह खेल का कमला चाची के साथ खेल भी चुका था,,, सिर्फ वह अनजान बनते हुए बोला,,,)

अरे बुद्धू मेरे साथ ,,, और किसके साथ,,,,

क्या मैं तुम्हारे साथ खेल सकता हूं,,,,

बिल्कुल खेल सकता है लेकिन इस बारे में किसी को बताना नहीं,,,,

नहीं बुआ किसी को भी नहीं बताऊंगा,,,,,,(राजू उत्सुकता दिखाते हुए बोला राजू अनजान नहीं था वह सब कुछ जानता था सिर्फ अनजान बनने का नाटक कर रहा था वह तो खुद ही इस खेल को खेलने के लिए उतावला हुआ जा रहा था उसे मौका मिलता तो वह बगल वाले कमरे में अपने पिताजी की जगह लेते हुए अपनी मां की चुदाई कर दिया होता क्योंकि अपनी मां का गदराया बदन देखकर वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव करता था,,,,।)

गुलाबी की गुलाबी चुत चाटने में मस्त राजु



तो चल अपनी कपड़े उतार कर नंगा हो जाए क्योंकि इस खेल को खेलने के लिए कपड़े उतारना पड़ता है देखा ना तु कैसे तेरे पिताजी को तेरी मां कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई थी,,,,,

(राजू के लिए यह बताने वाली बात नहीं थी वह अच्छी तरह से जानता था इस खेल को खेलने के लिए क्या करना पड़ता है वह गुलाबी की आज्ञा पाते ही कपड़े उतार कर नंगा हो गया गुलाबी की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी राजू का कसरतीबदन देखकर गुलाबी कीमत मस्त जवानी अंगड़ाई लेना शुरू कर दी थी राजू के लंड के दर्शन तो वह पहले ही कर चुकी,,, थी,,,। लेकिन उसे संपूर्ण रूप से नंगा देखने का सौभाग्य उसे अब जाकर प्राप्त हुआ था ,,,। चौड़ी छाती गठीला बदन उसपर दोनों टांगों के बीच लटकता हुआ खंजर देखकर गुलाबी की बुर पानी छोड़ रही थी,,,,,, राजू का जवान शरीर देखकर गुलाबी से रहा नहीं गया और वह राजू की तारीफ करते हुए बोली,,,।)

0 गुलाबी की गुलाबी चूत का उद्घाटन करता राजू



बाप रे कपड़ा उतारने के बाद तू इतना खूबसूरत लगता है यह तो मुझे आज पता चला,,, सच में तू अब एकदम जवान हो गया है,,,।( गुलाबी ललचाए आंखों से राजू को ऊपर से नीचे देख रही थी,,,। राजू उसी तरह से खड़ा था एकदम नंगा आंखों में थोड़ी बहुत शर्म बाकी थी इसलिए नजरों नीचे किए हुए था लेकिन मन में अरमान मचल रहे थे,,,,, वह अपनी बुआ के कहने का मतलब को अच्छी तरह से समझ गया था उसकी बुआ उसके माता पिता की तरह खेल खेलना चाहती थी जिसका मतलब साफ था कि वह चुदवाना चाहती थी,,,। राजू इस बात से और ज्यादा उत्साहित था कि वह आज अपनी बुआ को चोदेगा,, वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बुआ की अभी शादी नहीं हुई है इसका मतलब साफ था कि उसके पति से पहले उसकी बुआ की चुदाई वह करेगा इस सुख से वह पूरी तरह से अवगत होना चाहता था,,,,,, इसीलिए तो उत्सुकता के कारण उसका नाम है और ज्यादा कड़क और मोटा हो चुका था गुलाबी की आंखें बार-बार राजू के खड़े लंड पर पहुंच जाती थी जिसे देखते ही उसके तन बदन में झुर्झुरी सी फेल जाती थी,,,। राजू का मोटा और लंबा लंड गुलाबी की दोनों टांगों के बीच हलचल मचा रही थी गुलाबी का मन घर नहीं रहा था राजू के लंड को देखकर,,, गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, वह जल्द से जल्द राजू के लंड से खेलना चाहती थी उसकी गरमाहट को अपने अंदर महसूस करना चाहती थी,,, वह चाहती तो एक झटके में ही राजू करेंगे को अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास को भुजा सकती थी लेकिन वहां इतनी जल्दबाजी दिखाना नहीं चाहती थी जिस तरह से वह अपने भैया और भाभी की गरमा गरम चुदाई को देखते आ रही थी वह जानती थी कि धीरे-धीरे ही आगे बढ़ने में मजा आता है,,,,, आज की रात गुलाबी की रात थीउसकी जिंदगी की आज एक नई शुरुआत होने जा रही थी शादी से पहले ही वह आज संभोग सुख का स्वाद चखने जा रही थी जिसमें किसी भी प्रकार की आपत्ती दोनों को नहीं थे दोनों जवान थे दोनों के अपने अरमान थे,,, दोनों में से कोई भी इस पवित्र रिश्ता के बीच के इस गंदे खेल को खेलने से रोक नहीं रहा था बुआ और भतीजे के बीच जिस्मानी ताल्लुकात की पहली कड़ी दोनों ने पार कर चुके थे,,,,एक दूसरे के अंगों से खेल कर दोनों ने मन ही मन में आगे बढ़ने की हामी भर दी थी,,,,,,।

गुलाबी अपने भतीजे के मोटे तगड़े लंड को देखकर एकदम मचल गई और उसे मुंह में ले ली



राजू इस समय गुलाबी की आंखों के सामने एकदम नंगा खड़ा था गुलाबी अपने नंगे भतीजे को देख कर उसके बदन की बनावट को देखकर उसके गठीले बदन के साथ-साथ उसके मर्दाना ताकत से भरे अंग को देखकर पूरी तरह से उसकी दीवानी हो गई थी,,,, राजू कुछ बोल नहीं रहा था लेकिन अपनी बुआ के सामने इस तरह से नंगा होकर खड़े होने में उसे अंदर ही अंदर उत्तेजना के साथ-साथ मदहोशी का एहसास हो रहा था,,, क्योंकि अपनी बुआ की मदमस्त जवानी और उसकी कामुक हरकत की वजह से,,, उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ गया था,,,, वह खुद जल्द से जल्द अपने लंड को अपनी बुआ की बुर में डाल देना चाहता था क्योंकि कमला चाची के साथ संभोग के अध्याय से इतना तो वो सीख ही गया था की चुदाई कैसे करते हैं,,,,,,, इसी हालात की वजह से उसका दिल जोरों से धड़क रहा था बगल वाले कमरे में इसकी मां एकदम खुलकर चुदाई का मजा ले रही थी जिसकी हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज राजू के कानों में पहुंच रही थी और यही आवाज गुलाबी भी सुन रही थी जिसकी वजह से उसकी भी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी गुलाबी जवानी में कदम रखते ही अपने बदन की गर्मी को शांत करने के लिए तड़प रही थी वह प्यासी थी उसके सामने कुंआ थालेकिन अपनी प्यास बुझाने के लिए कुएं के पास खुद जाना पड़ता है ना कि कुआं पास में आता है इसलिए गुलाबी बिना अपने कपड़ों को उतारे राजू की तरफ आगे बढ़ी और राजू की आंखों में देखते हुए उसके खड़े लंड को पकड़ कर मुस्कुरा दी,,,,गुलाबी की मुस्कुराहट राजू के तन बदन पर उत्तेजना की छुरियां चला रहा था राजू से रहा नहीं जा रहा था उसे लग रहा था कि वह अपने कपड़े उतार कर उसके लंड को अपनी बुर में डलवा लेगी,,,,, लेकिन शायद वह नहीं जानता था कि उसकी बुआ उसके माता-पिता की गरमा गरम चुदाई देखकर उनसे बहुत कुछ सीख गई है,,,। इसलिए वहअपने घुटनों के बल नीचे बैठ गई राजू को समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी बुआ क्या करने वाली है लेकिन तभी गुलाबी अपनी जीभ को हल्के से निकालकर जीभ के पोर राजू के लंड कै सुपाड़े को स्पर्श करने की कोशिश करने लगी,,,, या आभास होते ही राजू के दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चलने लगी,,,, गुलाबी की भी हालत खराब थी वह देखना चाहती थी कि वाकई में मर्द के लंड को मुंह में लेने से उसे चाटने से औरत को कितना मजा आता है,,,उसे इस बात का अहसास अच्छी तरह से था कि उसकी भाभी को यह क्रिया करने में बहुत मजा आता था और उसके भैया को भी,,,

राजु के लंड से खेलती गुलाबी



आप दोनों तरफ बराबर की लगी थी गुलाबी की हरकत से राजू को इस बात का आभास हो गया था कि उसकी बुआ,,,

उसके लंड के साथ अपने मुंह से कुछ हरकत करने वाली है गुलाबी कि सासे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी जीभ लपलपा रही थी,,,। गुलाबी जल्द से जल्द राजू के लंड को अपनी जीभ से चाटना चाहती थी लेकिन लंड चाटने के एहसास से वह अपने तन बदन में अजीब सी हलचल महसूस कर रही थी,,,, क्योंकि लंड से पेशाब किया जाता है और ऐड को मुंह में लेना कुछ अजीब सा लग रहा था लेकिन फिर भी वह इसके लिए लालायित थीउसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, आखिरकार बदन में कपकपी के एहसास के साथ गुलाबी अपनी जीभ को राजू के लंड के सुपाड़े पर स्पर्श करा दी,,,,,,।

सहहहहह आहहहहहहहहह,,,,,एकदम से राजू के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज निकल गई यह पल उसके लिए बेहद अद्भुत और सुख से भरा हुआ था उसने कभी इस पल की कामना नहीं किया था और अपनी बुआ से तो यह उम्मीद उसे बिल्कुल भी नहीं थी पहली बार उसके लंड पर किसी औरत के जीभ का स्पर्श हो रहा था,,, राजू अपनी सांसो को लंबी खींचने लगा पहले तो गुलाबी को यह स्पर्श थोड़ा अजीब लगा लेकिन वह मदहोश हो चुकी थी इसलिए धीरे-धीरे करके वह राजू के संपूर्ण सुपाड़े पर अपनी जीभ फेरने लगी,,, देखते ही देखते गुलाबी को मजा आने लगा उसे अपनी हरकत पर खुद ही शर्म तो आ ही रही थी लेकिन एक अद्भुत सुख का अहसास भी हो रहा था,,,, हालांकि वह अभी तक सिर्फ सुपाड़े को ही चाट रही थी उसे पूरी तरह से मुंह में ले रही थी,,,,,

राजू की हालत बिल्कुल खराब हो चुकी थी वह गहरी गहरी सांसे ले रहा था उसका पेट फूल पिचक रहा था जिस तरह की हरकत से गुलाबी ने राजू के तन बदन में आग लगाई थी राजू पूरी तरह से मदहोश हो चुका था राजू का मन कर रहा था कि इसे समय उसकी बुआ को पटक कर उसकी चुदाई कर दे लेकिन इस खेल में उसे भी मजा आ रहा था इसलिए वह भी सब्र किए हुए था,,,, गुलाबी धीरे-धीरे अपनी भाभी से सब कुछ देख देख कर ही सीख चुकी थी वह जानती थी कि लैंड को पूरी तरह से मुंह में लिया जाता है इसलिए धीरे-धीरे अपना मन कड़क करके वह अपने भतीजे के कड़क लंड को मुंह में लेना शुरू कर दी,,,, लंड का स्वादगुलाबी को कुछ अजीब सा लग रहा था लेकिन फिर भी वह धीरे-धीरे करके राजू के समूचे लंड को अपने मुंह में गले तक ले ली राजू एकदम से स्तब्ध रह गया,,,, उसे कमला चाची याद आने लगी वह अपने मन में सोचने लगा कि कमला साची इतनी परीपकव और उम्र दराज होने के बावजूद भी,,, इस तरह का सुख नहीं दे पाई थी जिस तरह की हरकत गुलाबी करके दे रही थी,,,, गुलाबी एकदम जवान थी जवान की अभी-अभी जवानी की दहलीज पर कदम रख रही थी और ऐसे में औरत और मर्द के बीच के इस खेल का इतना अनुभव ,,,, राजू के समझ के बाहर था,,, वह समझ नहीं पा रहा था कि उसकी बुआ यह सब कहां से सीखी,,,,,,,,

देखते ही देखते गुलाबी अपनी भाभी की नकल करते हुए राजू के लंड को पूरा गले तक लेकर उसे बाहर निकाल देगी और वापस उसे फिर से अंदर ले जाती थी,,, ऐसा करने से राजू का लंड पूरी तरह से गुलाबी के थुक में सन गया,,,, राजू के ऊपर पूरी तरह से मदहोशी छा चुकी थी,,, वह इसे हल्के अपनी कमर को आगे पीछे करके ही लाना शुरू कर दिया था राजू की यह हरकत गुलाबी के तन बदन में भी आग लगा रही थीं,,, एक तरह से राजू अपने लंड को उसकी बुर में नहीं उसके मुंह में डालकर चुदाई कर रहा था,,। राजू का हाथ अपने आप गुलाबी के सर पर पहुंच गया और वह उसके रेशमी बालों में अपनी उंगली घुमाने लगा,,,,।

आहहहहह,,,, बुआ,,,, बहुत मजा आ रहा है बुआ कहां से सीखी तुम यह सब,,,,,

गुलाबी सलवार उतारने के बाद



तेरी मां से ही सीखी हुं,,,(लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल कर बोली और वापस फिर से मुंह में ले ली,,, अपनी मां का जिक्र इतने गंदे काम में होता देखकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई वह अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया,,,,, मदहोशी के आलम में वह गुलाबी के मुंह को उसकी बुर समझ रहा था,,,,

देखते ही देखते राजू का लंड पूरी तरह से गुलाबी के थुक में सन गया जिसकी वजह से उसके मुंह से चप चप की आवाज आना शुरू हो गया,,, मानो उसकी बुर की चुदाई हो रही हो,,,,

लैंड को मुंह में लेकर चूसने में कितना मजा आता है गुलाबी को इस बात का अहसास अब हो रहा था वरना वह छोटे से छेद में से अपनी भाभी को इस तरह की हरकत करती देख कर उसे थोड़ा सा घिन्न महसूस होता था,,,। लेकिन आज हकीकत में खुद भी लंड को मुंह में लेकर की तरह के सुख की अनुभूति व कर रही थी वह उसे बयां नहीं कर सकती थी,,,। कुछ देर तक गुलाबी इसी तरह से राजू के लंड को मुंह में लेकर चुसती रही,,,,। और फिर राजू के लंड को मुंह से बाहर निकालकर वह राजू की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी,,,, राजू भी जवाब में अपनी बुआ की तरफ देख कर मुस्कुरा दिया,,, लेकिन उसका और मन कर रहा था मुंह में लंड देने का लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाया उत्तेजना के मारे उसकी कमर अभी भी आगे पीछे हो रही थी जो कि बार-बार उसका खड़ा लंड लार टपकाता हुआ गुलाबी के गुलाबी गाल पर स्पर्श कर रहा था,,,, गुलाबी धीरे से खड़ी हुई उसे महसूस हो रहा था कि उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी है,,वह, गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।

आज देखना इस खेल में हम दोनों को कितना मजा आएगा,,,,(गुलाबी गहरी सांस लेते हुए बोली,,,, राजू अपनी बुआ की बातें सुन कर मुस्कुरा रहा था और एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा था,,,, यह नजारा बेहद अद्भुत था कामुकता से भरा हुआ,,,,,,,)

गुलाबी की मदमस्त गांड से खेलता राजु





बुआ मुझे तो तुम नंगा कर दी लेकिन अभी भी तुम कपड़े पहने हुए हो तुम भी अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ,,,,(राजू अपने लंड को हिलाते हुए बोला,,, गुलाबी अपने भतीजे की बात और उसकी हरकत को देखकर पूरी तरह से उस पर मोहित हो गई,,,,,,)

अच्छा तो तु मुझे बिना कपड़ों के नंगी देखना चाहता है,,,

तो क्या हुआ मां और पिताजी को देखकर तो इतना तो समझ में आता ही है कि इस खेल को खेलने के लिए हम दोनों को कपड़े उतारकर नंगा होना पड़ेगा मैं तो उतार चुका हूं लेकिन तुम अभी भी कपड़े पहनी हो,,,,,

एक ही रात में इस खेल के बारे में बहुत कुछ सीख गया है,,, चिंता मत कर मैं भी कपड़े उतार देती हूं,,,(गुलाबी मुस्कुराते हुए इतना कहने के साथ नहीं अपनी कमीज को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ सरकाने लगी,,, यह देखकर राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा,,,, देखते ही देखते गुलाबी अपनी कमीज को अपनी छाती तक उठा दी कमीज के अंदर उसने कुछ नहीं पहनी थी उसकी नंगी चूचियां अमरूद की तरह दम कड़क नजर आ रही थी जिसे देखते ही राजू के मुंह में पानी आ गया,,,, चूची को मुंह में लेकर किया जाता है इस बारे में वह अपने पिताजी से ही सीखा था उसका भी मन कर रहा था कि वह अपनी बुआ को अपनी बाहों में भर कर उसकी चूची को मुंह में लेकर पिए लेकिन अपने आप पर सब्र किए हुए था देखते ही देखते उसकी बुआ ने अपनी कमीज को उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दी कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी अमरुद जैसी चूचियां राजू को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी,,,, कमीज को नीचे जमीन पर फेकने के बाद गुलाबी राजू की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी वह जानती थी कि राजू की नजर इस समय उसकी चुचियों पर है इसलिए वह खुद भी अपने दोनों हाथों से अपनी चूची को पकड़कर एक तरह से झकझोरते हुए बोली,,,।)

कैसी लगी मेरी चूचियां,,,,,(गुलाबी एकदम बेशर्म औरत की तरह बोल दी गुलाबी ऐसे बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन ना जाने क्यों आज की रात वह पूरी तरह से खुल जाना चाहती थी,,, राजू की अपनी बुआ के मुंह से चुची शब्द सुनकर उत्तेजना से सिहर उठा था,,,, गहरी सांस लेते हुए बोला,,,)

बहुत खूबसूरत है बुआ मन तो कर रहा है कि इसे हाथों में लेकर जोर जोर से दबाऊ इसे मुंह में लेकर इसके रस को पी जाऊं,,,,।

खटीए पर लेटी हुई गुलाबी



आहहहहहह,,,सहहहहहहहहह,,,,, तो ले ले अपने हाथों में रोका किसने है,,,,(गुलाबी भी एकदम मदहोश होते हुए बोली,,,,,आज की रात दोनों के लिए बेहद अद्भुत अतुलनीय और बेहद हसीन थी जिस रात के बारे में उन दोनों ने शायद कल्पना ही की थी उसे हकीकत में जिया नहीं था लेकिन आज उस पल को भरपूर तरीके से मजा लेने का समय आ गया था,,,। राजू भला इस आमंत्रण को कैसे ठुकरा सकता था,,, वह तो प्यासा था और गुलाबी मीठे पानी का कुआं,,,

गुलाबी कि दोनों चूचियां पहले से ही तड़प रही थी मर्दाना हाथों में जाने के लिए आज इसका शुभारंभ होने वाला था और वह भी राजू के हाथों,,, गुलाबी इस बात से खुश थी कि उसकी जवानी का रस उसका भतीजा ही पीने वाला था जिसमें बदनामी का डर बिल्कुल भी नहीं था,,,,।

लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,, कमरे के अंदर राजू बिना कपड़ों के एकदम नंगा खड़ा था उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,, ठीक उसके सामने जवानी से भरपूर गुलाबी खड़ी थी कमर के,,, उपर पूरी तरह से नंगी,,, जिसे देख कर ही राजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,,, गुलाबी को इस हाल में अगर कोई देख ले तो उसका खड़े खड़े पानी निकल जाए,,, गुलाबी एकदम जवान खूबसूरत गोरे रंग की लड़की थी,,, नाक नैन नक्श सब कुछ बेहद खूबसूरत था,,,

इसलिए तो राजू को अब समझ में आया कि उसकी बुआ कितनी खूबसूरत हैक्योंकि अभी तक औरतों और लड़कियों को देखने का उसका नजरिया तुम कुल साफ था लेकिन अब उसका नजरिया बदल गया था इसलिए औरतों की खूबसूरती के मायने को वह अच्छी तरह से समझ गया था,,

गुलाबी की कड़क चुचीया



कमरे के बीचो बीच खटिया के पास खड़ी गुलाबी अपनी मदमस्त कर देने वाले अमरूदों को दिखाकर राजू को लुभा रही थी और राजू अपनी बुआ की रस से भरी चुचियों को देखकर मस्त हुआ जा रहा था उसके मुंह में पानी आ रहा था और लंड था कि उत्तेजना के मारे आहें भरता हुआ मुंह ऊपर की तरफ उठा ले रहा था,,,,,,,,, राजू का मन आगे बढ़ने को कर रहा था लेकिन ना जाने क्यों उसके मन में थोड़ा डर भी था जो कि सबकुछ साफ हो चुका था दोनों एक दूसरे से प्यार करने के लिए तैयार हो चुके थे काम क्रीड़ा का खेल खेलने के लिए तैयार हो चुके थे फिर भी राजू की आंखों के सामने उसकी बुआ थी,,, इसलिए उसे थोड़ा बहुत झिझक और डर भी लग रहा था,,, लेकिन किसी भी हाल में बढ़ना तो था ही क्योंकि जवानी का असर ही कुछ ऐसा था,,,।,,,,

अपनी बुआ की जवानी देख कर राजू का लंड बौखलाया हुआ था मंजिल उसकी आंखों के सामने की और वहां पर पहुंचने के लिए वह मचल रहा था,,,,अपने कदमों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने लगा जैसे जैसे उसके कदम आगे की तरफ बढ़ रहे थे जैसे जैसे गुलाबी के तन बदन में हलचल सी बढ़ती जा रही थी अब तक उसकी जिंदगी मैं पतझड़ ही चल रहा था,,,। लेकिन अब उसकी जिंदगी में बहार आने वाली थी सावन की फुहार बरसने वाली थी और इस मदहोश कर देने वाले सावन का इंतजार करते हुए खुशी के मारे उसकी बुर की पतली दरार से खुशी के आंसू टपक रहे थे,,, जोकि धीरे-धीरे उसकी सलवार को भिगो रहा था,,,उत्तेजना के मारे गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और सांसो की गति के साथ-साथ छातियों की शोभा बढ़ा रहे उसके दोनों अमरुद ऊपर नीचे हो रहे थे,,, जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था कमला चाची की दो बार चुदाई करने के बावजूद भी औरतों के अंगों से कैसे खेला जाता है इस बारे में उसे बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था कमला चाची ने उसी से चोदने का जानती थी बाकी खूबसूरत बदन से प्यार करने का गुण नहीं सिखाई थी जो कि वह छोटे से छेद से अपनी मां और अपने पिताजी के काम क्रीड़ा को देखकर धीरे-धीरे सीख चुका था,,,, इसलिए गुलाबी के करीब पहुंचते ही उसकी मदहोश कर देने वाली आंखों में देखते हुए जैसे आंखों से ही आगे बढ़ने की अनुमति मांग रहा हो,, और गुलाबी ने भी अपनी नजरों को नीचे झुका कर उसे इशारों ही इशारों में अनुमति दे दी,,,,

इस अनुमति को सहर्ष स्वीकार करते हुए राजु अपना एक हाथ ऊपर की तरफ उठाकर उसे अपनी बुआ की छातियों पर रख दिया,,,, जैसे ही उसे अपनी हथेली पर अपनी बुआ की नरम नरम चुचियों का एहसास हुआ उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, उसकी सांसे बेकाबू होने लगी और उत्तेजना के मारे वहां अपनी हथेली में अपनी बुआ के अमरुद को पकड़कर दबा दिया,,,, गुलाबी राजू की हरकत से पूरी तरह से सिहर उठी और उसके मुंह से हल्की कराहने की आवाज निकल पड़ी,,,।

आहहहहह,,,,,

क्या हुआ बुआ,,,,

ककककक,,, कुछ नहीं,,,,,

(दर्द महसूस करने के बावजूद भी गुलाबी इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी वह अपने भैया को अपनी भाभी की चूची को जोर जोर से दबाते हुए देखी थी इसलिए वह भी चाहती थी कि राजू भी उसकी चुचियों को जोर-जोर से दबाएं,,,। राजू खुद जानता था कि उसे उसकी बुआ की चुचियों के साथ क्या करना है कैसे खेलना है,,,,इसलिए अपनी बुआ के कराने की आवाज सुनने के बावजूद भी वह अपनी हथेली में गुलाबी की चूचियों को दबाए हुए और जिसे वो धीरे धीरे मसल ना शुरू कर दिया था,,,, देखते ही देखते राजू के तन बदन में स्तन मर्दन करने की गर्मी छाने लगी आंखों ने खुमारी नजर आने लगी यही हाल गुलाबी का भी था एक अद्भुत एहसास से वह घीरी जा रही थी,,,, उसे बहुत मजा आ रहा था आनंद के सागर में वो गोते लगा रही थी,,, वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जब एक चूची दबाने में इतना मजा आ रहा है अगर वह दोनों चुची दबाएगा तो कितना मजा आएगा,,,, इसलिए वह बिना कुछ बोले अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर राजू के हाथ को पकड़ लिया और उसे अपनी दूसरी चूची पर रखकर दबाने का इशारा की बस फिर क्या था राजू को क्या चाहिए था राजू जैसे हर जवान लड़कों की ख्वाहिश यही होती है कि उसकी दोनों हाथों में चूचियां हो,,, और यही ख्वाहिश राजू की पूरी होती नजर आ रही थी,,,।

राजू मन लगाकर मजे लेते हुए अपनी बुआ की चुचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था मानो कि जैसे उसके हाथों में दशहरी आम आ गया हो,,,, पूरी तरह से गुलाबी गर्म आ चुकी थी स्तन मर्दन की वजह से उसके मुख से हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज निकल रही थी जो कि इस काम क्रीड़ा को और ज्यादा रंगीन बना रही थी,,,

बगल वाले कमरे में अपनी मां पिताजी की चुदाई को देख कर जिस तरह की गर्मी राजू ने अपने अंदर महसूस किया था उससे भी कहीं ज्यादा उत्तेजना भाई समय अपनी बुआ की सूचियों से खेलते हुए महसूस कर रहा था,,,,।

ससहहहह आआआआबहहहहब ,,,,ऊमममममममम राजुउउउउउउ,,,,,आहहहहहह,,,,,,

(गुलाबी की मदहोशी राजू को दीवाना बना रही थी जितना वह सिसकारी देती थी राजू इतनी जोर जोर से उसकी चूचियों को दबा रहा था थोड़ी ही देर में राजू उसकी गोली चूचियों को दबा दबा कर लाल टमाटर कर दिया,,,,, शर्म और उत्तेजना की लाली गुलाबी के गुलाबी गाल को और गहरा कर रही थी,,, राजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,,,, राजू अपनी बुआ को मुंह में लेकर पीना चाहता था लेकिन इसके लिए भी वह इजाजत का इंतजार कर रहा था,,,, उत्तेजना के मारे गुलाबी की चुचियों के निप्पल चॉकलेट की तरह कड़क हो गई थी जो राजू चाहता था खुला बीपी अपने मन में वही इच्छा रखती थी इसलिए गुलाबी राजू को बोली,,,)

राजु,,,, मुंह में लेकर पी बहुत मजा आएगा,,,,(चूची पिलाने का अनुभव गुलाबी को बिल्कुल भी नहीं था लेकिन फिर भी उसे इस बात का आभास जरूर था की चूची पिलाने में बहुत मजा आता है,,,,,, राजू भी इसी पल का इंतजार कर रहा था अपनी बुआ की बात सुनते ही वह दोनों हाथों में गुलाबी की चूचियों को दबा ही हो गए गुलाबी आंखों में देखने लगा,,,,और अगले ही पल अपने प्यासे होठों को गुलाबी की चूची की तरह बढ़ाने लगा गुलाबी की हालत पल-पल खराब होने लगी क्योंकि अभी तक वह जिस नजारे को देखते आ रही थी,,,,इस नजारे को देखकर एक अद्भुत सुख की कल्पना करती रहती थी उसे आज वह हकीकत में अंजाम देने जा रही थी,,,,देखते ही देखते राजू अपनी बुआ की चूची की मित्र को अपने होठों से स्पर्श करके उसे धीरे से अंदर की तरफ कर लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया मानो कि जैसे कोई बच्चा लेमन चूस चूस रहा हो,,, एक अद्भुत एहसास दोनों के तन बदन में अपना असर दिखाने लगा,,,,राजू एक हाथ से गुलाबी की चूची को पकड़कर दबा रहा था और दूसरी चूची को मुंह में लेकर पी रहा था गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे होने लगी उत्तेजना के मारे घुटनों में कंपन होने लगा चूची पिलाने में इतना मजा आता है वह कभी सोची नहीं थी वह उत्तेजना के मारे राजू के सिर को पकड़कर और जोर से अपनी छातियों पर दबाने लगी,,,, और राजू पागलों की तरह जितना हो सकता था उतना निप्पल सहित अपनी बुआ की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया था अभी तक वह गुलाबी कि एक ही चूची को मुंह में लेकर पी रहा था इसलिए गुलाबी राजू को बालों से पकड़कर,,, उसे अपनी चूची चूची से हटाकर दूसरी चूची पर उसका मुंह रख दी,,, गुलाबी की हरकत राजू की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा दी वह और मन लगाकर भारी बारिश है गुलाबी की चुचियों को पीना शुरू कर दिया,,,।

आहहहहह,,,,सहहहहहहहह,,,,ऊमममममममम, राजू और जोर-जोर से पी बहुत मजा आ रहा है मुझे,,,,आहहहहह,,, तूने तो मुझे मस्त कर दिया,,,।ओहहहहह राजू बहुत मजा आ रहा है पूरा मुंह में लेकर पी,,,,। आहहहहहहहहहह,,,,ऊईईईईईई,मां,,,,,(उसकी गरम सिसकारी की आवाज सुनकर उत्तेजना के मारे राजू ने उसकी निप्पल को दांतों से काट लिया,,, जिससे गुलाबी एकदम से चौंक उठी थी लेकिन उसे बोली कुछ नहीं खुला बीपी तेज ना बढ़ती जा रही थी अपना एक हाथ नीचे की तरफ लाकर राजू के लंड को पकड़ लिया और उसे सलवार के ऊपर से अपनी बुर पर रगडना शुरू कर दी,,,,राजू की उत्तेजना और आनंद दोनों में बढ़ोतरी होती जा रही थी गुलाबी की हरकत से राजू का बदन और ज्यादा ज्यादा गर्म आने लगा था गुलाबी बड़े मजे लेकर सलवार के ऊपर से राजू के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर पर रगड़ रही थी,,,बुर से झर रहे मदन रस के कारण उसकी सलवार पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और सलवार के गीले पन का एहसास राजू को अपने लंड पर अच्छी तरह से महसूस हो रहा था,,,, अपनी दुआ की बुर का पानी अपने लंड पर लगने की वजह से राजू और ज्यादा उत्तेजित होने लगा था और हल्की हल्की कमर आगे पीछे करने लगा था ऐसा लग रहा था कि जैसे मानो सलवार के ऊपर से ही अपनी बुआ को चोद रहा हो,,,,,

गुलाबी की हालत खराब होती जा रही थी,,,, गुलाबी की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसकी बुर में चीटियां रेंग रही थी,,,,अब अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी उंगली से नहीं बल्कि एक मोटे लंड से शांत होने वाली थी राजू उसकी चुचियों को पीने में लगा हुआ था और गुलाबी धीरे-धीरे अपनी सलवार की डोरी खोल रही थी अब वह भी राजू की तरह पूरी तरह से नंगी हो जाना चाहती थी क्योंकि जिस तरह का खेल दोनों खेल रहे थे उसमें वस्त्र बाधा रूट बनते थे,,,और इस समय गुलाबी अपने और राजू के बीच में आने वाली हर बाधा को दूर कर देना चाहती थी,,,,देखते ही देखते गुलाबी अपनी सरकार की डोरी खोल कर उसे वैसे ही छोड़ दी और उसकी सलवार भरभरा कर नीचे उसके कदमों में जा गिरी,,,, गुलाबी भी अब राजू की तरह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,लेकिन गुलाबी के संपूर्ण नग्न अवस्था का एहसास राजू को बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह तो गुलाबी की चुचियों में मस्त था,,,, लेकिन गुलाबी राजू को अपने नंगे पन का एहसास कराना चाहती थी,,, और उसे चूची पीने से रोकना भी नहीं चाहती थी इसलिए वह एक हाथ पकड़ कर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच रख दी,,,,पल भर में ही राजू का पूरा वजूद कांप उठा उसे अपनी हथेली में भट्टी की तरह गर्मी महसूस होने लगी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी हथेली को तपते हुए तवे पर रख दिया हो,,,,,, पल भर में उसकी सांस अटक गई लेकिन वह अपनी हथेली को उस जगह से हटाया नहीं गुलाबी ने उसकी हथेली को सीधे अपनी बुर पर रख दि थी,,,,। राजू तुरंत अपना मुंह उसकी चुची से हटा कर नीचे की तरफ देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई राजू को उसकी बुआ की बुर एकदम साफ नजर आ रही थी हल्के हल्के बालों पर उसका मदन रस लगा हुआ था जो कि मोती के दाने की तरह चमक रही थी,,,, गुलाबी को यह एहसास कि राजू उसकी बुर को देख रहा है पूरी तरह से दीवाना बना दिया गुलाबी कि सासे ऊपर नीचे होने लगी,,,, उस की धड़कन बढ़ने लगी उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा,,,,।

राजू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ऐसा नहीं था कि पहली बार अपनी बुआ की पूर्व को देख रहा था इससे पहले भी वह रात को अनजाने में ही अपनी बुआ की दूर के दर्शन कर चुका था जब वह सलवार उतार कर सोई थी लेकिन उस समय कुछ और बात थी और इस समय हालात को छोड़ दें उस समय वह केवल से देख भर पा रहा था और देखने से ही मजा ले रहा था लेकिन आज का वह अपनी बुआ को छू सकता है उसकी गरमाहट को महसूस कर सकता है हालांकि अभी भी उसकी हथेली उसकी बुर पर ही थी,,,, और अच्छे से अपनी बुआ की पुर को देखने के लिए राजू बिना बोले ही अपने घुटनों के बल बैठ गया अब गुलाबी कि बुर उसकी आंखों के ठीक सामने थी,,, राजू से अब ठीक से सांस भी लिया नहीं जा रहा था उसकी सांस अटक रही थी,, साथ ही उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता चला जा रहा था जिसे वह अपने दुख से गिला करने की पूरी कोशिश कर रहा था आखिरकार वह कर भी क्या सकता था उसकी जगह कोई और होता तो शायद उसकी भी यही हालत होती गुलाबी पहली बार किसी मर्द को अपने कपड़े उतार कर अपना जिस्म दिखा रही थी अपनी बुर दीखा रही थी और वह भी अपने ही भतीजे को,,,

गुलाबी अपने भतीजे की हालत पर मुस्कुरा रही थी वह जानती थी कि उसकी बुर देखकर उसके भतीजे की हालत खराब हो रही है,,,,राजू की हालत और ज्यादा खराब करने के उद्देश्य से गुलाबी अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखकर जोर से रगड़ते हुए अपनी हथेली को ऊपर की तरफ खींच ली,,,, गुलाबी की हरकत राजू को पानी पानी कर रही थी ऊतेजना के मारे उसे अपने लंड की नसें फटती हुई महसूस हो रही थी,,,। राजू से बिल्कुल भी नहीं रहा क्या और इस बार वह अपने बुआ से इजाजत लिए बिना ही अपना हाथ आगे बढ़ाकर उंगली से गुलाबी की बुर को स्पर्श करने लगा बेहद गर्म उस्मा से भरी हुई हल्के हल्के बालों वाली बुर को स्पर्श करते ही राजू के तन बदन में आग लग गई,,,, राजू बड़े गौर से अपनी बुआ की बुर को देख रहा था गुलाबी को अपने भतीजे की हालत पर तरस भी आ रहा था और मजा भी आ रहा था वह ऐसा सोच रही थी कि राजू जिंदगी में पहली बार बुरके दर्शन कर रहा है इसलिए उसकी हालत खराब हो गई है,,, वह यह नहीं जानती थी कि एक बार पहले भी वहां उसकी बुर के दर्शन कर चुका है,,, और कमला चाची की बुर में अपना लंड डालकर तो कर चुदाई भी कर चुका है,,,।

राजू पूरी तरह से उत्तेजना से ग्रस्त होता जा रहा था पूरा गांव चेन कि नहीं सो रहा था शायद आप उसके माता-पिता भी जुदाई का आनंद लेकर सो चुके थे लेकिन अब बुआ और भतीजे के बीच जो काम क्रीड़ा चल रही थी उसके चलते उन दोनों की नींद कोसों दूर थी उन दोनों को नींद नहीं आ रही थी वह दोनों बेचैन हो चुके थे राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और वह धीरे-धीरे अपनी हथेली को अपनी बुआ की बुर पर रखकर मसलना शुरू कर दिया,,,।गुलाबी की बुर पूरी तरह से पानी-पानी हो चुकी थी इसलिए पनियाई बुर पर हथेली रगड़ने से राजू की हथेली पूरी तरह से गीली हो चुकी थी गुलाबी को आनंद की अनुभूति हो रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था मदहोशी में उसकी आंखें बंद हो चुकी थी,,,,,, और वह भी अपने आप ही अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए राजू की हथेली की रगड़ का मजा लूट रही थी,,,।

गुलाबी की गदराई गांड से खेलता राजु



गर्मी का महीना पहले से ही अपना असर दिखा रहा था उस पर दोनों की जवानी की गर्मी दोनों को पसीने से तरबतर कर दी थी लेकिन फिर भी दोनों को किसी बात की दिक्कत नहीं थी दोनों को मजा ही आ रहा था,,,। गुलाबी की बुर पानी पानी हो चुकी थी उसे अपनी आनंद की पराकाष्ठा को बढ़ाना था और अपने मन में वह कुछ और कर गुजरने की सोच रही थी जिसकी राजू को आभास तक नहीं था गुलाबी अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर राजू के सर को पकड़ लिया और धीरे-धीरे उसे अपनी दोनों टांगों के बीच खींचने लगी राजू को समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी बुआ क्या करवाना चाहती है,,,,लेकिन उसे अपनी बुआ की किसी भी हरकत का एतराज भी नहीं था जिस तरह से वह अपनी दोनों टांगों के बीच उसे खींच रही थी वह खींचता चला जा रहा था और देखते ही देखते गुलाबी ने उसके होठों को ठीक अपनी बुर पर रखकर दबा दी और मदहोशी भरे स्वर में बोली,,,।

अब चाट राजू,,,,, जोर-जोर से चाट मेरी बुर में अपनी जीभ डालकर चाट,,,,

(पहले तो राजू को अपनी दुआ की बात सुनकर कुछ अजीब सा लगा बुर चाटने वाली बात उसे कुछ अच्छी नहीं लगी थी लेकिन वह अपनी बुआ को इनकार नहीं कर सकता था,, इसलिए वह हल्के से अपनी जीभ निकालकर बुर के वऊपरी भाग को चाटना शुरू कर दिया,,,, बुरके मदन रस से पहले से ही गुलाबी की बुर पूरी तरह से भीगी हुई थी जिसकी वजह से राजू को अपनी जीभ पर बुर का रस लगते ही उसका स्वाद थोड़ा कसैला लगा,,,, कि धीरे-धीरे उसे यही स्वाद मधुर लगने लगा उसे अच्छा लगने लगा वह गुलाबी की गुलाबी बुर को ऊपर से नीचे की तरफ पूरी तरह से चाहता था उत्तेजना के मारे गुलाबी की बुर फुल कर रोटी की तरह हो गई थी,,,, अभी तक राजू ने अपनी जीभ को गुलाबी कि बुर के अंदर प्रवेश नहीं कराया था,,,, और गुलाबी चाहती थी कि राजू अंदर तक जीभ डा कर चाटे,,, इसलिए वह बोली,,,।

राजु और गुलाबी



ओहहहह राजू मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है,,,आहहहहहह तूने तो मुझे मस्त कर दिया रे,,,,आहहहहहहह आहहहहहहह,,, अब अपनी जीभ मेरी बुर के अंदर डालकर चाट बहुत मजा आएगा तेरे पिताजी भी तेरी मां के साथ यही करते हैं,,,,

(एक बार फिर से अपनी बुआ की मुंह से अपनी मां और अपने पिताजी का जिक्र आते ही वह और ज्यादा उत्तेजित हो गया और अपनी जीभ को उसकी गुलाबी बुर के छेद में डालकर चाटना शुरू कर दिया,,,, वाकई में राजू किस बात का एहसास हो गया कि ऊपर से ज्यादा अंदर मजा आ रहा है और वह पागलों की तरह जीभ से अंदर की मलाई चाटना शुरू कर दिया,,,।गुलाब एकदम मस्त हो जा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आसमान की सैर कर रही हो हवा में उड़ रही हो उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसे इतना मजा आएगा,,, वह हल्के हल्के अपनी कमर हिलाना शुरू कर दी थी धीरे-धीरे वह राजू के मुंह को चोद रही थी अपनी बुर से लेकिन इसमें राजू को बहुत मजा आ रहा था क्योंकि गुलाबी की पूरी पूरी तरह से पानी से तरबतर हो चुकी थी और उसके होठों पर लगकर चप चप की आवाज आ रही थी,,,,कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहे दोनों को बेहद आनंद की प्राप्ति भी हो रही थी,,,

आधी रात से ज्यादा समय बीत चुका था लेकिन दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी दोनों के बीच एक पवित्र रिश्ता था बुआ भतीजा का लेकिन शायद ही रिश्ते से पहले दोनों औरत और मर्द थे और जिनके बीच केवल शारीरिक संबंध का रिश्ता ही पनपता है,,,, और वही इस कमरे में भी हो रहा था बुआ अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर अपने भतीजे का मजा दे रही थी और भतीजा भी कम नहीं था वह भी अपनी बुआ की जवानी देख कर उत्तेजित हो चुका था,, उसका लंड टन टनाकर खडा हो गया था,,,, अपनी बुआ को चोदने के लिए समाज के लिए भले ही दोनों के बीच कैसा संबंध पवित्र रिश्ते को तार-तार करता हूं लेकिन उन दोनों के लिए यह आनंद की परम अनुभूति थी जिस के सुख से वह दोनों वंचित नहीं रहना चाहते थे,,,, गुलाबी दो बार झड़ चुकी थी लेकिन अब वह बिस्तर पर राजू के लंड से झड़ना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,।

बस कर राजू मेरी बुर तेरा लंड लेने के लिए मचल रहीं है,,, अब चल मेरी चुदाई कर मेरी बुर में अपना लंड डालकर मेरी प्यास बुझा दे,,,,।

अपनी बुआ की मस्ती के साथ चुदाई करता राजु

(अपनी बुआ के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर राजू तो एकदम बावला हो गया था उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी वह उसी तरह से घुटने के बल बैठे हुए अपनी बुआ की तरफ देख रहा था उसकी पूरी तरह से नंगी थी उसकी चूचियां एकदम तनी हुई थी,,, राजू से कुछ बोला नहीं जा रहा था भाभी अपनी बुआ को चोदने के लिए तैयार था उसकी किस्मत पड़ी जोरों पर थी कमला चाची के बाद अब उसकी दुआ उसकी खुद की सगी हुआ उसका हमबिस्तर होने वाली थी,,, उसके साथ चुदाई का सुख भोगने वाली थी,,,, अपनी बुआ की बात सुनकर राजु खड़ा हो गया,,, और गुलाबी राजू के लंड को पकड़कर बोली,,,।)

देख रहा है जिस तरह से तेरे पिताजी तेरी मां की बुर में लंड डालकर तेरी मां की चुदाई कर रहे थे ठीक उसी तरह से तुझे भी अपना लंड मेरी बुर में डालना है,,,( अपनी उंगली से अपनी बुर की तरफ इशारा करते हुए),,, कर लेगा ना आराम से,,,



(भला राजू क्या कहता वह तो खुद खुदा मिला था अपने लंड को अपनी बुआ की बुर में डालने के लिए लेकिन जिस तरह से उसकी बुआ खुले शब्दों में सब कुछ बोल रही थी राजू को कभी उम्मीद नहीं थी कि उसकी बुआ इतने खुले शब्दों में सब कुछ बोलेगी इसलिए तो उसकी उत्तेजना और बढ़ती जा रहे थे वह कुछ बोल नहीं पाया बस हा में सिला दिया,,,गुलाबी को ना जाने क्यों अपने भतीजे के मोटे तगड़े लंबे लंड पर पूरा विश्वास था कि वह उसकी बुर की प्यास बुझा देगा,,,, राजू की हामी सुनते ही गुलाबी घूम गई और खटिया की तरफ जाने लगी पीछे का नजारा देखकर राजू की उत्तेजना और बढ़ गई गोल गोल मदद की भी गांड को देखकर अपने आप पर काबू कर पाने में पूरी तरह से असमर्थ साबित हो रहा था लेकिन किसी भी प्रकार का उतावलापन वह दिखाना नहीं चाहता था क्योंकि आज की रात उसकी वह जो कहती जैसे कहती थी वैसे ही उसे करना था,,,, क्योंकि राजू चाहता था कि आज अगर सब कुछ सही हो गया तो आगे भी सही होता रहेगा,,,, गुलाबी अपनी गोल-गोल गांड को मटकाते हुए खटिया पर बैठ गई और पीठ के बल लेट गई,,,, राजू उत्तेजित अवस्था में अपने आप ही अपने लंड को अपने हाथ में थाम लिया और आगे बढ़ने लगा गुलाबी राजू को अपने करीब आता देख कर अपनी दोनों टांगों को फैला दी,,,,,, अपनी बुआ की मादक हरकत को देखकर राजू से रहा नहीं जा रहा था गुलाबी पूरी तरह से अपने भतीजे को अंदर लेने के लिए तैयार थी,,,अपने सुर्ख गले को अपने थूक से गीला करते हुए राजू की खटिया पर बैठ गया और अपने आप ही अपनी बुआ के दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा,,,,गुलाबी अपने भतीजे को अपनी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाता देखकर इशारे से अपनी बुर की तरफ उंगली करते हुए बोली,,,।

देख राजू तुझे अपना लंड ईसी बुर के अंदर डालना है,,,,(गुलाबी मदहोश स्वर मैं बोली,,,,)

चला तो जाएगा ना बुआ,,,(राजू नादान बनता हुआ बोला,,)

थोड़ी मुश्किल होगी लेकिन चला जाएगा तेरा बहुत मोटा है,,,(गुलाबी अपने भैया के लंड की लंबाई और मोटाई से अच्छी तरह से परिचित थी इसलिए वह जानती थी कि उसके भतीजे का लंड उसके भैया के लंड से कुछ ज्यादा ही मजबूत है,,,गुलाबी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) थोड़ा सा थुक भी लगा लेना अपने लंड पर भी और मेरी बुर पर भी,,,,

ठीक है बुआ,,,(और इतना कहने के साथ ही वह ढेर सारा थुक अपने लंड के सुपाड़े पर और फिर अपनी बुआ की बुर पर लगा दिया,,,, अब राजू पूरी तरह से तैयार था अपनी बुआ की बुर में समाने के लिए और गुलाबी उसे अपने अंदर लेने के लिए मचल रही थी,,,राजू घुटनों के बल बैठा हुआ था गुलाबी उससे बोली,,,)

राजू मुझे थोड़ा खींचकर अपने ऊपर रख ले मेरा मतलब है कि मेरी जा को अपनी जांघों पर रख ले तब आराम से तेरा अंदर जाएगा,,,,,,

ठीक है बुआ,,,(गुलाबी बातों ही बातों में उसे संभोग के आसन को बता रही थी,,, राजू ने भी ठीक उसी तरह से किया अपने खड लंड के सुपाड़े को जैसे ही अपनी बुआ की गुलाबी बुर पर सटाया,,,,, गुलाबी वैसे ही एकदम से सिहर उठी क्योंकि उसकी जिंदगी में यह पहला मौका था जब कोई लंड उसकी बुर पर स्पर्श कर रहा था इसलिए वह पूरी तरह से मचल उठी,,,,)

आहहहहह राजा बस अब उसी छेद में धीरे धीरे डाल,,,

(गुलाबी एकदम मदहोश स्वर्ग में बोली राजू को अब आगे क्या करना है पूरा ज्ञान था इसलिए वह,,अपनी बुआ के बुर्के गुलाबी छेद पर रखकर हल्कै से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलना शुरू किया,,,,,, गुलाबी की बुर में चिकनाहट भरपूर थी इसलिए धीरे-धीरे राजू का लंड मोटा होने के बावजूद भी अंदर की तरफ सरकना शुरु कर दिया,,,। गुलाबी के लिए पहला अनुभव था जैसे-जैसे राजू का लंड बुर के अंदर सरक रहा था वैसे वैसे गुलाबी का गुलाबी चेहरा लाल होता जा रहा था,,,, गुलाबी किसान से ऊपर नीचे हो रही थी साथ ही उसकी चूचियां अंगड़ाई लेते हुए छातियों पर नृत्य कर रही थी,,,,,।

बेहद अद्भुत रमणीय कामुक नजारा बना हुआ था,,,, कोई सोच भी नहीं सकता था कि बुआ और भतीजे के बीच इस तरह का रिश्ता कायम होगा,,,,,राजू के पसीने छूट रहे थे कमला चाची के मुकाबले गुलाबी की बुर बेहद संकरी थी,,,राजू पसीने से तरबतर हो चुका था क्योंकि यहां पर उसे ज्यादा मेहनत करने की आवश्यकता पड़ रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि बुर इतनी टाइट भी हो सकती है क्योंकि उसे कमला चाची की बुर का अनुभव था,,, गुलाबी जैसी जवान लड़की का नहीं,,,, लेकिन फिर भी राजू पूरी तरह से कोशिश करता हूं आगे की तरफ बढ़ रहा था और उसका लंड की बुर के अंदर की अड़चनों को दूर करते हुए धीरे-धीरे अंदर की तरफ घुसता चला जा रहा था,,,,गुलाबी से रहा नहीं जा रहा था बार-बार वो अपना सर ऊपर की तरफ करके अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच घड़ा दे रही थी वह राजू के मोटे लंड को देखकर हैरान थी कि किस तरह से उसके छोटे से छेद में इतना मोटा लंड धीरे-धीरे सरकता चला जा रहा है,,,, गुलाबी की सासे ऊपर नीचे हो रही थी उसे दर्द का अनुभव होने लगा था,,,, लेकिन वह किसी भी तरह अपने दर्द को दबाए हुए थी,,,,देखते ही देखते रह चुका लेना आधे से ज्यादा घुस गया,,, यह गुलाबी क्यों रोज का अभ्यास का ही नतीजा था कि थोड़ा मुश्किल ही सही लेकिन आराम से राजू का लंड घुसता चला जा रहा था,,,,क्योंकि रोज-रोज अपने भैया भाभी की चुदाई को देखकर पूरी तरह से गर्म होकरवह अपनी बुर में उंगली डाला करती थी जिससे धीरे-धीरे अंदर की तरफ जगह बनने लगी थी,,,।

गुलाबी के गुलाबी गालों पर पसीने की बूंदें मोती के दाने की तरफ से चल रही थी लालटेन की पीली रोशनी में उत्तेजना के मारे ऐसा लग रहा था कि गुलाबी का बदन दहक रहा है,,,

दर्द के मारे गुलाबी की हालत बदतर हुए जा रहे थे क्योंकि उसे अभी आनंद की अनुमति नहीं हुई ,,, मजा तो आ रहा था लेकिन दर्द भी हो रहा था,,,, आगे का रास्ता राजु को कुछ ज्यादा ही संकरा लग रहा था,,, इसलिए राजू समझदारी दिखाते हुए हल्कै से थोड़ा सा लंड बाहर की तरफ खींचा,,, और फिर कच कचा कर आगे की तरफ ठेल दईया इस बार रही सही कसर पूरी हो गई,,,। राजू का रंग गुलाबी की बुर की गहराई नापने लगा लेकिन गुलाबी को बेतहाशा दर्द का अनुभव होने लगा वह जोर से चिल्लाना चाहती थी लेकिन वह जानती थी कर जोर से चिल्ला आएगी तो बगल में सो रहे उसके भैया भाभी जान जाएंगे और वह ऐसे नहीं होने देना चाहती थी इसलिए जोर से अपने मुंह को दबा ली थी राजू को तो कुछ समझ में नहीं आया कि क्या हुआ लेकिन गुलाबी को तड़पता हुआ देखकर वहां रुक गया वह उसी तरह से रुका रह गया ना आगे ना पीछे,,, अपनी कमर को स्थिर कर दिया मानो कि जैसे किसी मोटर गाड़ी में ब्रेक लग गई हो,,,,। गुलाबी की आंखों में आंसू भर आए थे राजू को लगने लगा कि उसने कुछ गलत कर दिया है इसलिए वह गुलाबी से बोला,,,।

ककककककक क्या हुआ बुआ रो क्यों रही हो,,,,,, क्या मैंने कुछ गलत कर दिया निकाल लु बाहर,,,,।

(राजू घबरा गया था लेकिन गुलाबी अपनी सहेलियों से इतना तो जान ही गई थी कि पहले पहले बहुत दर्द करता है उसके बाद मजा ही मजा आता है इसलिए वह राजू से निकालने के लिए नहीं पूरी बस थोड़ी देर बाद वह बोली,,)

बस अब चोदना शुरू कर,,,,,

(फिर क्या था राजू आज्ञा पाते ही,,, अपनी कमर को आगे पीछे हीलाना शुरू कर दीया देखते-देखते गुलाबी का दर्द मजे में तब्दील होने लगा उसे आनंद आने लगा राजू अभी हल्के हल्के धक्के लगा रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड बुर की गहराई नापते हुए अंदर बाहर हो रहा था दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे क्योंकि दोनों नहीं या मंजिल पाने के लिए काफी मशक्कत उठाई थी,,, ज्यादातर सहन करने को गुलाबी के हिस्से में आया था लेकिन,,,अद्भुत आनंद की प्राप्ति के लिए थोड़ा दर्द भी सहना पड़ता है इसलिए गुलाबी का आनंद बढ़ता जा रहा था जैसे-जैसे रघु का मोटा तगड़ा लंड रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था वैसे वैसे गुलाबी की बुर उत्तेजना में पानी छोड़ रही थी राजू मदहोश हुआ जा रहा था कमला चाची के बाद उसे सीधे उसकी बुआ की बुर प्राप्त हुई थी जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था,,,,)

अब कैसा लग रहा है बुआ,,,,,(हल्के हल्के धक्के लगाते हुए राजु बोला,,,,)

बहुत मजा आ रहा है राजू बहुत मजा,,,,, तु रुकना नहीं,, आहहहहहह ,,,,, ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं स्वर्ग का सुख भोग रही हूं तेरे लंड से बहुत मजा आ रहा है,,,, चौद राजु मुझे चोद,,,,आहहहहहहह,,,,

(फिर क्या था अपनी बुआ की आज्ञा पाकर राजू के धक्के तेज होने लगे कमला चाची की दो बार चुदाई करने के बाद राजीव को इतना तो आत्मविश्वास हो ही गया था कि वह किसी भी औरत की चुदाई करके उसे संपूर्ण रूप से संतुष्टि का अहसास करा सकता है और उसे आज भी अपने ऊपर पूरा विश्वास था कि वह अपनी बुआ को पूरी तरह से पानी पानी कर देगा और इसीलिए उसके धक्के तेज होने लगे,, थे,,,,कमला चाची की चुदाई करते समय उसका मन बहुत कर रहा था कमला चाची की चूची को दोनों हाथ से पकड़ कर दबाने के लिए लेकिन बार ऐसा उस समय नहीं कर पाया था लेकिन आज किसी भी तरह की बंदिश उसे नहीं थी इसलिए वह अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी बुआ की दोनों चूची को पकड़ लिया और उसे जोर जोर से दबाते हुए अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए चुदाई करना शुरू कर दिया,,,।

इस तरह स्तन मर्दन करने के साथ चुदाई करते हुए राजू के साथ-साथ गुलाबी को भी बहुत मजा आ रहा था,,, दोनों अद्भुत सुख की प्राप्ति में रखे हुए थे अब बड़े आराम से राज्यों का मोटा तगड़ा लंबा लंड गुलाबी की छोटे से छेद मे अंदर बाहर हो रहा था बुरा भी बार बार अपने सर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच में देखकर हैरान हो रही थी किराजू भाई इतना मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी छोटे से बुर के छेद में कहां खो जा रहा है,,,, यह नजारा बेहद अद्भुत कामोत्तेजना से भरा हुआ था,,,, राजू के थक्के कम नहीं हो रहे थे राजू गुलाबी की चूचियों को दबा दबा कर टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,,। राजू थकने का नाम नहीं ले रहा था,,,, और इसी वजह से गुलाबी भी हैरान था तकरीबन 30 मिनट से ज्यादा समय गुजर चुका था इस दौरान राजू ने अपने लंड से चुदाई करके उसे 2 बार झाड़ चुका था और खुद झड़ने का नाम नहीं ले रहा था,,,,

धीरे-धीरे राजू संभोग के अध्याय में बहुत कुछ सीखता चला जा रहा था गुलाबी की चुदाई करते समय जिस चूची को व जोर-जोर से लगा रहा था अब उसी पर झुक कर उसे मुंह में लेकर पी रहा था गुलाबी की मस्ती बढ़ने लगी थी राजू की हर एक हरकत अब उसे दीवाना बना रही थी राजू बारी-बारी से उसकी दोनों चूचियों को चोदते हुए पी रहा था,,,,अब धीरे-धीरे राजू की की सांसे तेज होने लगी वह समझ गया कि वह चरम सुख के करीब पहुंच रहा है इसलिए वह अपनी रफ्तार बढ़ा दिया,,,,

चप चप चप की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था गुलाबी को इस बात का डर था कि कहीं यह आवाज बगल वाले कमरे में ना पहुंच जाए क्योंकि इस आवाज से उसके भैया भाभी भली-भांति परिचित थे फिर भी आनंद की कोई सीमा नहीं थी गुलाबी को इतना मजा आ रहा था कि कभी उसने सपने में भी नहीं सोची थी की चुदाई करवाने में इतना मजा आता है,,,, राजू के थक्के तेज होते चले जा रहे थे देखते ही देखते दोनों की सांसें तेज चलने लगी दोनों के बदन में अकड़न पड़ने लगी और अगले ही पल तेज धक्के के साथ राजू के लंड की तीव्र पिचकारी गुलाबी अपनी बुर के अंदर अपने बच्चे दानी में महसूस करने लगी वह पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी राजू की सांसें उखड़ने लगी थी जैसे-जैसे उसके लंड से पिचकारी की बुंद बाहर निकल रही थी वैसे वैसे उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी,,,,।

दोनों अपनी मंजिल को प्राप्त कर चुके थे राजू गुलाबी के ऊपर ढेर हो चुका था और गुलाबी को अपने भतीजे पर बहुत प्यार आ रहा था वह उसके मर्दाना ताकत से भलीभांति परिचित हो चुकी थी और पूरी तरह से उसके आगे घुटने टेक चुकी थी वह उसकी पीठ को सहला आते हुए कब दोनों नींद की आगोश में चले गए पता ही नहीं चला जब सुबह नींद खुली तो दोनों हड़बड़ा गएं,,,।
 
रात भर की कामुकता से भरी हुई अद्भुत संभोग क्रीडा से थक कर दोनों गहरी नींद में सो गए और सुबह जब नींद के लिए तो दोनों एकदम से हड़बड़ा गए क्योंकि काफी समय हो गया था इसलिए मधु दरवाजे को खटखटा रही थी,,,।

दरवाजा खटखटाने की आवाज से कब दोनों की नींद खुली तो दोनों अपनी अपनी स्थिति से वाकिफ होते ही एकदम से घबरा गए,,,क्योंकि दोनों के बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था दोनों रात की तरह संपूर्ण नग्नावस्था में थे रात को चुदाई के असीम सुख को भोगकर दोनों एक-दूसरे को बाहों में लिए उसी तरह से सो गए थे,,,,,।

गुलाबी का खूबसूरत बदन



गुलाबी अरे वो गुलाबी अभी तक सो रही है,,, देख नहीं रही है सूरज सर पर चढ़ आया है,,,, उठ जल्दी उठ,,,,।

(मधु दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोली,,,)

हां ,,,,, आई भाभी आज जरा आंख लग गई थी,,,, तुम चलो मैं आती हूं,,,,

ठीक है मैं आंगन में झाड़ू लगा देती हूं तु अंदर झाड़ू लगा दे,,,

खूबसूरत गांड की मालकिन मधु



ठीक है भाभी,,,,(मधु झाड़ू लेकर घर के आंगन में झाड़ू लगाने लगी और गुलाबी तुरंत खटिए पर ऊठ कर बैठ गई,,,।)

बापरे आज तो बहुत देर हो गई,,,,

रात भर चुदवाई हो तो देर तो होगी ही,,,(राजू अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर,, गुलाबी के फूल आते हुए कबूतर को दबाते हुए बोला,,,,)

आहहहह क्या कर रहा है,,,, रात भर में तेरा मन भरा नहीं क्या,,,! (राजू के हाथ को अपनी चूची पर से हटाते हुए बोली,,,)

तुमको लगता है बुआ एक बार में मन भर जाएगा,,,,

हां तु सच कह रहा है,,, अगर ऐसा होता तो भैया तेरी मां की रोज चुदाई ना करते,,,,

(एक बार फिर से बातों ही बातों में अपनी मां का जिक्र होते ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, अपनी मां का जिक्र होते ही राजू फिर से गुलाबी की चूची को पकड़ते हुए बोला,,)

बुआ तुम रोज दीवार के छेद से मां और पिताजी की चुदाई देखती थी ना,,,,(गुलाबी की चूची को जोर से दबाते हुए बोला,,,)

खटिया पर लेटी हुई गुलाबी



उन्हीं दोनों से तो सब कुछ सीखी हूं देख देख कर ही मैंने यह सब सीख गई तभी तो रात को इतना मजा आया,,,

बुआ फिर से मजा लेना चाहती हो,,,(इतना कह कर राजू अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगा जहां पर उत्तेजना के मारे फिर से उसका लंड खड़ा होने लगा था,, राजू के दोनों टांगों के बीच गुलाबी की भी नजर गई तो वह एक बार फिर से शर्म से पानी पानी होने लगी उसकी बुर में पानी इकट्ठा होने लगा,,,, एक बार फिर से गुलाबी का भी मन मचल उठा था उसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए,,,, राजू गुलाबी कई उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा यह देखकर गुलाबी की हालत और खराब होने लगी,,,)



क्या कहती हो बुआ एक बार फिर से लेट जाओ,,, मजा आ जाएगा,,,,

(गुलाबी का मन मचल उठा था,,, वह एकटक राजू के लंड को देखे जा रही थी लेकिन इस समय उसके पास समय का अभाव था क्योंकि उठने में वैसे भी देरी हो चुकी थी,,, अभी अभी उसकी भाभी भी उसे उठाकर गई थी,,, इसलिए मन होते हुए भी अपने मन को मार कर वह खटिया पर से उठने को हुई तो तुरंत राजू अपनी बाहों को उसकी कमर में डालकर अपनी तरफ खींच लिया जिसकी वजह से गुलाबी उसके ऊपर लुढ़क गई गुलाबी ऊपर थी और राजू नीचे गुलाबी की पीठ राजू की छाती से सटी हुई थी उसके गोलाकार नितंब सीधे-सीधे एकदम सटीक तरीके से राजू के लंड पर टिके हुए थे,,,,,,एक ही रात में राजू इतना खुल जाएगा गुलाबी को इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी राजू की हरकत की वजह से उसके तन बदन में एक बार फिर से आग लगने लगी थी,,,,वैसे भी सुबह-सुबह बदन में उत्तेजना का असर कुछ ज्यादा ही होता है,,,।

बस बुआ एक बार,,, एक बार डाल लेने दो,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को पकड़ कर,,, अपनी बुआ की बुर से सटा दिया और उसमें डालने की कोशिश करने लगा,,, राजू की इस हरकत की वजह से गुलाबी के तन बदन कामोत्तेजना की लहर उठने लगी,,, उसका भी मन करने लगा कि वह एक बार फिर से राजु से चुदवा ले,,,लेकिन वह मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि देर होने पर किसी भी समय उसकी भाभी फिर से आ जाएगी,,,,,, गुलाबी का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि राजू के लंड का सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर के छेद से रगड़ खा रहा था जिसे राजू अंदर डालने की कोशिश कर रहा था,,, राजू के हाथों में एक बार फिर से गुलाबी का गुलाबी बदन था,, उसके गोलाकार नितंब उसके लंड से सटा हुआ था जो कि उसकी उत्तेजना में निरंतर वृद्धि कर रहा था,,, राजू एक बार फिर से अपनी बुआ को चोदना चाहता था और इसीलिए वह फिर से प्रयास करते हुए अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गुलाबी बुर के छेद में डालने की कोशिश कर रहा था लेकिन गुलाबी जानती थी कि चुदाई का यह समय ठीक नहीं है,,,, वह दोनों पकड़े जा सकते थे,,,, संभोग के असीम सुख की भावना मे वह खुद बहने लगी थी एक बार तो उसका मन हुआ कि खुद अपनी दोनों टांगें खोलकर उसके लंड पर सवार हो जाए और यह भावना मन में आता ही वह अपनी दोनों टांगों को खोल भी दी थी लेकिन तभी उसे भान हुआ की ऐसी हालत में वह पकड़ी जा सकती थी,,,, इसलिए वह अपने भतीजे के ऊपर से उठने की कोशिश करने लगी लेकिन उसका भतीजा अपना जौर दिखाते हुए उसकी कमर में दोनों हाथ डालकर उसे नीचे दबाए हुए था भले ही उसको लैंडस्की दूर में प्रवेश नहीं कर पा रहा था लेकिन इस स्थिति में भी उसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था धर्म धर्म गोल-गोल कांड को अपने ऊपर महसूस कर के वह असीम आनंद की अनुभूति कर रहा था,,,।

राजू गुलाबी की चूत में डालने की कोशिश करते हुए



छोड़ राजू मुझे जाने दे देर हो रही है,,,,

नहीं बुआ एक बार और देखो ना मेरा खड़ा हो गया है,,,

तो क्या करूं अभी समय उचित नहीं है,,,

अरे क्यों उचित नहीं है बस एक बार डालना ही तो है,,,

तुझे क्या लगता है कि तू डाल कर निकाल लेगा,,, कितनी देर तक चुदाई करता है तू तेरी मां आ गई तो हम दोनों पकड़े जाएंगे और अगर एक बार पकड़े गए तो यह सब खेल यहीं रुक जाएगा,,,, क्या तू हमेशा मजा लेना नहीं चाहता,,,

चाहता हूं ना बुआ,,,

तो फिर अभी जाने दे तेरी मां भी तो गजब हो जाएगा और वैसे भी हम दोनों साथ में सोते हैं जब चाहे तब इस खेल को खेल सकते हैं,,,।

(अपनी बुआ की बात सुनकर राजू अपने मन में सोचने लगा कि उसकी बुआ ठीक ही कह रही है,,, अगर दोनों पकड़े गए थे इस खेल पर। लग जाएगा और वह ऐसा नहीं चाहता था क्योंकि अभी अभी तो यह खेल शुरू हुआ था इसलिए वह अपना मन मार कर बोला,,)

तुम ठीक कह रही हो बुआ लेकिन रात को करने देना,,,



बिल्कुल तुझे मजा आ रहा है तो क्या मुझे नहीं आ रहा है मुझे कि बहुत मजा आ रहा है मैं भी एक गेम खेलना चाहती हूं लेकिन अभी तू जानता ही नहीं कि तेरी मां किसी भी वक्त आ जाएगी,,,,(इतना कहते हुए वह राजू के ऊपर से उठने लगी गुलाबी की पीठ राजू की तरफ थी राजू पीठ के बल खटिया पर लेटा हुआ था पीछे से गुलाबी की गांड कहर ढा रही थी राजू का मन रुकने को बिल्कुल भी नहीं कर रहा था अपने मन को मार करवा एक बार गुलाबी को जाने दे रहा था लेकिन उसकी गांड को देखकर उसका मन मचल उठा रहा था लेकिन फिर भी वह जानता था की मनमानी करना ठीक नहीं है इसलिए अपने मन को मनाते हुए अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बुआ की गांड पर अपना हाथ फेरने लगा,,, और बोला)

बुआ तुम्हारी गांड कितनी मस्त है,,,

राजु और गुलाबी



मेरे से भी अच्छी तो तेरी मां की देखा नहीं नंगी होने के बाद कितनी खूबसूरत लगती है,,,

(अपनी बुआ की बातें सुनकर राजू कुछ बोला नहीं लेकिन उसकी कहीं बात वाकई में सच थी,,,,अपनी बुआ की बात से एक बार फिर से उसकी आंखों के सामने उसकी मां का नंगा बदन नाचने लगा,,,, गुलाबी खटिए पर से उठ कर अपने कपड़ों को ढूंढने लगी जो कि नीचे जमीन पर बिखरे पड़े थे,,,, राजू उसी तरह से लेटा रहा उसका लंड आसमान की तरफ सर उठाए खड़ा था,,,, गुलाबी राजू की लंड को देखकर पूरी तरह से मोहित हो चुकी थी क्योंकि बिना सहारे वह पूरी तरह से एकदम से हटाना के डंडे की तरह खड़ा था,,,, गुलाबी अपने मन में सोच रही थी कि अगली बार उसकी भाभी जिस तरह से उसकी भईया के लंड पर उठक बैठक करती है उसी तरह से वह भी करेगी,,,। गुलाबी अपने मन में यह सोचते हुए अपनी कुर्ती उठा ली और उसे कहने लगी ऊपर से अपने गले में डालकर वह कुर्ती को पहन रही थी और राजू उसे बड़े गौर से देख रहा था क्योंकि आज तक उसने अपनी बुआ को कपड़े पहनते भी नहीं देखा था हां रात को कपड़े उतारते हुए जरूर देखा था,,, औरतों का कपड़ा पहनना और उसे उतारना भी एक अद्भुत कला के साथ-साथ मादकता भरा एहसास है जो कि देखने वालों के होश उड़ा देता है ,,, राजू भी अपनी बुआ को बड़े मजे ले कर देख रहा था देखते ही देखते उसकी बुआ कुर्ती को पहन लेंगे और नीचे चुप कर सलवार उठाने लगी,,,, ऐसा करते हुए उसकी गांड राजू की तरफ थी ,,, जोकि झुकने की वजह से उसकी गोल गोल गांड कुछ ज्यादा ही भरकर सामने नजर आने लगी जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आने लगा,,,,,

Gulabi apni salwar utarte huye





गुलाबी सलवार उठा कर खड़ी हो गई और उसे सीधा करके अपने पैर में डालकर पहनने लगी,,, और अगले ही पल खूबसूरत मादकता भरे नजारे पर पर्दा पड़ गया,,,,,, पहली बार में ही मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर में लेने की वजह से गुलाबी को अपनी बुर में मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था,,,,,, लेकिन यह मीठा मीठा दर्द भी उसे आनंद ही दे रहा था,,,। अपने कपड़े पहन लेने के बाद वह राजु से बोली,,,।

तू भी उठ कर कपड़े पहन ले नहीं तो मैं दरवाजा खोलने जा रही हूं,,,

नहीं रुको मैं पहनता हूं ,,,(इतना कहने के साथ ही वह भी खटिया पर से खड़ा हो गया और अपना पजामा ढूंढने लगा,,, उसे पहचाना ढुढते हुए देखकर गुलाबी बोली,,,)

उतारते समय नहीं पता था कि कहां उतार रहा है,,,।

क्या करूं बुआ,,, तुम्हें चोदने की लालच में कुछ पता ही नहीं चला कि क्या कर रहा हूं,,,,(अपने पजामे को इधर-उधर ढूंढते हुए बोला,,,)

वो रही खटिया के नीचे,,,,(गुलाबी उंगली के इशारे से दिखाते हुए बोली,,,)

बाप रे रात को पता ही नहीं चला कि कपड़ा उतार के कहां फेंका,,,,।

हां रात को मजा लेने के लिए तो आनन-फानन में सब निकाल कर फेंक दिया,,,,

क्या करूं बुआ तुम चीज ही कुछ ऐसी हो,,,(ऐसा कहते हुए राजू खटिया के नीचे से अपने पजामे को उठाया और पहनने लगा,,,, अपने पजामे को जैसे ही वह ऊपर तक लाया तो,,अभी भी पूरी तरह से खड़ा होने की वजह से पजामे को ठीक से वह और उपर नहीं चढ़ा पा रहा था,,, राजू के खड़े लंड को देखकर गुलाबी बोली,,,)

तेरा तो अभी तक खड़ा है,,,,

क्या करूं बुआ तुम्हारी वजह से एक बार अंदर डाल लेने दीए होती तो यह भी शांत हो जाता,,,,।

रुक मैं अंदर डाल देती हुं,,,(इतना कहने के साथ ही गुलाबी आगे बढ़ी हो तुरंत चला चुके हैं उनको अपनी मुट्ठी में दबा कर उसे पजामे के अंदर करने लगी,,,, राजू को अपनी बुआ की हरकत एकदम मस्त कर गई,,,)

देख रही हो बुआ कितना गर्म है,,,

हारे बहुत गर्म है,,,

इससे भी ज्यादा गरम तुम्हारी बुर है,,,, अंदर जाते ही ऐसा लगता है कि मानो अभी मेरा लंड पिघल जाएगा,,,,(राजू की बात सुनकर गुलाबी मंद मंद मुस्कुराते हुए बोली)

तुझे देखकर लगता नहीं था कि तू इतना हरामी किस्म का लड़का है देखने में कितना शरीफ रखते हैं रात को ही पता चला कि तू कितना हरामि है,,,

मुझे भी तो रात को ही पता चला कि तुम कितनी मस्त हो,,,

चल अब जल्दी कर मैं बाहर जा रही हुं,,, (पजामे के अंदर राजू के खड़े लंड को व्यवस्थित करते हुए बोली,,,)

ठीक है बुआ,,,,(इतना कहकर राजू गुलाबी के गुलाबी होंठ पर अपने होंठ रख कर चुंबन कर लिया,,,)

बहुत तेज है तू,,,(पर इतना क्या कर मुस्कुराते हुए दरवाजा खोलकर बाहर चली गई,,, राजू अपनी बुआ को जाते को देखता रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि रात को जो कुछ भी हुआ था वह हकीकत है उसे सब कुछ सपना समझ रहा था क्योंकि उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी सीधी-सादी हुआ इतनी बड़ी छिनार होगी जो खुद चुदवाने के लिए तड़प रही थी,,,। लेकिन जो कुछ भी हुआ था उसे से ऐसा ही लग रहा था कि राजू की दसों उंगलिया अब घी में थी,,, रात को जो कुछ भी होगा वह सब कुछ राजू की आंखों के सामने एक एक करके घूमने लगा था,,,, उसकी बुआ इतनी खूबसूरत और मस्त हो गई ईस बारे में उसे कभी अंदाजा भी नहीं था,,,अपनी बुआ की कसी हुई बुर में लंड डालकर जिस तरह का आना तो उसने प्राप्त किया था वह उसके लिए अतुल्य और अमूल्य था,,,,रात की गर्माहट भरी चुदाई का एहसास अभी भी उसके तन बदन को गर्माहट दे रहा था,,, रात को फिर अपनी बुआ की चुदाई करेगा यह एहसास उसके तन बदन मे उत्तेजना की लहर को और ज्यादा बढ़ा रहा था,,,। थोड़ी देर तक होगा अपने लैंड को शांत करने के लिए वहीं बैठा रहा जब सब कुछ सामान्य हो गया कमरे से बाहर निकला,,,।

गुलाबी झाड़ू लगाते लगाते अपनी भाभी के पास पहुंच गई तो उसकी भाभी उसे देख कर बोली,,,।

रात भर राजू से चुदवा रही थी क्या जो सुबह आंख नहीं खुली,,,,,,,(मधु झाड़ू लगाते हुए बोली,,, गुलाबी तो अपनी भाभी की बात सुनते ही एकदम सन्न रह गई एक पल को तो लगा कि जैसे वह रात वाली बात को जानती हो लेकिन तभी गुलाबी का एहसास हुआ कि उसकी भाभी को मजाक करने का आदत था लेकिन फिर भी आज का मजाक गुलाबी के लिए तो जानलेवा ही था क्योंकि आज वहां अपने बेटे को लगाकर उसे मजाक की थी जो कि गुलाबी कभी सोची नहीं थी,,,)

क्या भाभी तुम भी इस तरह का मजाक करती हो शर्म नहीं आती अपने ही बेटे के बारे में इस तरह की बात करते हुए,,,

(गुलाबी जानबूझकर गुस्सा दिखाते हुए बोली,,)

अरे तू तो नाराज हो गई मैं तो यूं ही मजाक की थी देखती नहीं है कि अब वह बड़ा हो गया है,,,, लेकिन है एकदम बुद्धू,,,, दुनियादारी की तो खबर ही नहीं है उसको,,,

( मधु यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा बड़ा हो गया है,,, और जिस उम्र से वो पूछ रहा था मधु भली-भांति जानती थी कि इस उम्र में लड़की चुदाई करना शुरू कर देते हैं तो उसका बेटा भी चोदने लायक हो गया था,,,,,,और गुलाबी अपनी भाभी की बात सुनकर मन ही मन में सोचने लगी कि वह भी तो नहीं है अब वह जवान हो गया है पूरा मर्द हो गया है,,, रात भर उसकी चुदाई करके उसकी बुर कौ दर्द दे गया है,,,, गुलाबी अपने मन में ही बोलने लगी कि अब वह बच्चा नहीं रहा मौका मिलेगा तो वह तुम्हारी भी चुदाई कर देगा,,,)

अरे हो जाएगी दुनियादारी की खबर भाभी अभी ज्यादा बड़ा थोड़ी हुआ है,,,,,,, अब चलो जल्दी से खाना बना लो भैया इंतजार कर रहे होंगे,,,,

हां तेरे भैया को तो काम ही क्या है खाना और पेलना,,,,

क्या कहा भाभी,,,

ककक ,,, कुछ नहीं मे जल्दी खाना बना देती हु,,,

ठीक है भाभी मैं तब तक दूसरे काम कर लेती हूं,,,,

(और वह दोनों काम में व्यस्त हो गए,,, दूसरी तरफ सोनी आज गांव में जाने का फैसला कर ली थी खास करके राजू के लिए,,, वह अपनी एक सहेली शांति को तैयार की और गांव के लिए निकल पड़ी उसकी मंजिल राजू था वह राजू को किसी तरह से पढ़ाने के लिए मनाना चाहती थी ताकि पढ़ाने के बहाने वह,,, अपनी प्यास बुझा सके,,,,,,,, गांव में पहुंचने से पहले एक बड़ा तालाब पड़ता है जहां पर गांव के जानवर घास चारा करते थे और तालाब का पानी पिया करते थे,,,, तालाब पर पहुंचते ही सोनी को बड़े जोरों की दोपहर का समय था इसलिए चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,,,)

शांति मुझे जोरो की पिशाब लगी है तु यहीं रुक मे कर के आती हूं,,,,(इतना कहकर वह पगडंडी वाले रास्ते को छोड़कर झाड़ियों के अंदर जाने लगी तो पीछे से शांति आवाज लगाते हुए बोली,,,)

रुको मालकिन मै भी आती हूं मुझे भी जोरों की लगी है,,,

(इतना कहकर वह भी झाड़ियों के अंदर जाने लगी,, सूरज एकदम सर के ऊपर तक रहा था चारों तरफ दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था,,,,ऐसे में सोनिया और उसकी सहेली शांति दोनों झाड़ियों के अंदर पेशाब करने के लिए जा रही थी क्योंकि मैंने इस बात का डर था कि कहीं कोई उन्हें पेशाब करते हुए देख ना ले,,,)
 
सोनी बला की खूबसूरत औरत थी,,, कामुकता उसके बदन के हर एक अंग से टपकती रहती थी,,, एकदम गोरी चिकनी मांसल देह वाली वतन का हर एक कटाव मर्दों के टांगों के बीच की हालत खराब कर दे इस तरह से बनी हुई थी,,, नितंबों का घेराव गजब का आकर्षण बांधा हुआ था,,, कसी हुई साड़ी में उसके गोलाकार नितंब बेहद आकर्षक लगते थे मानो के जैसे बड़े-बड़े तरबूज साड़ी के अंदर छुपा दिए गए हो,,,,,,,,,



लाला अपनी बहन की खूबसूरती को अच्छी तरह से जानता था इसलिए तो उसके मजबूरी का पूरा फायदा उठा रहा था और सोनी भी संस्कार वाली औरत नहीं थी,,,, उसके चरित्र में भी कामुकता झलकती थी मर्दों का आकर्षण उसे शुरू से रहा था,,,।,,,अब उसकी नजर राजू पर थी उसके मर्दाना अनु को देखकर वह पूरी तरह से उससे मिलने के लिए व्याकुल हो चुकी थी उसकी अनुभवी आंखें राजू के मर्दाना अंग को देखकर पहचान गई थी कि उसमें बहुत दम है और वह उस‌दम को अपनी बुर के अंदर महसूस करना चाहती थी,,, कौन सी प्रयास में लगी हुई थी कि उसे जोरों की पेशाब लग गई थी,,, पेशाब करने के लिए झाड़ियों के अंदर जाने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि सड़क पर पेशाब करने से किसी की भी नजर उस पर पड सकती थी,,,, उसकी सहेली शांति भी उसके साथ हो चली थी,,,।



झाड़ियों के बीच पहुंचकर एक अच्छी सी जगह देख कर सोनी पेशाब करने के लिए रुक गई अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है भले ही वह मर्दों के प्रति आकर्षित हो जाती थी संभोग सुख प्राप्त करने के लिए कुछ भी कर सकती थी लेकिन फिर भी उसकी एक मर्यादा थी,,,,वह जो कुछ भी करती थी दुनिया की नजर से बचकर करती थी किसी को कानों कान खबर नहीं होने देती थी,,,,,,, यही वजह थी कि आज तक किसी को कानों कान इस बात की भनक तक नहीं थी कि लाला की बहन चरित्र की गिरी हुई औरत है,,,,।

Madhu pani bharte huye



अच्छी सी जगह देखकर सोनी खड़ी हो गई थी वह पेशाब करने की तैयारी में थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी होती वास्तव में सोनी को इस हाल में देख पाना कि शायद मर्दों की किस्मत की बात थी लेकिन अब तक उसे पेशाब करते हुए किसी ने नहीं देखा था,,,, लेकिन आज शायद जो अभी तक नहीं हुआ था आज होने वाला था,,,,,,,

क्या हुआ मालकिन रुकी में कर लो ना यहां कौन देखने वाला है,,,,

Madhu ki madak adaa kapde dhote huye





हां यही तो देख रही हूं पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद ही औरतों को बैठ कर पेशाब करना चाहिए नहीं तो तू मर्दों की नजर को तो जानती ही है,,,,

हां मालकिन आप सच कह रही हो,,, मर्दों को तो बस मौका मिलना चाहिए तांक झांक करने का,,,,मैं भी जा अपने घर के पीछे पेशाब करने के लिए जाती हूं तो सामने वाले घर का जवान लड़का हमेशा घूरते रहता है,,,, मुझे तो बहुत शर्म आती है लेकिन क्या करूं मजबूरी रहती है,,,।

Soni raju k khyalo me khoyi huyi



हां यही तो किसी को पता भी नहीं सकती ना ही कुछ कह सकती हो अगर बोलोगी तो बोलोगी भी गोल-गोल बात को घुमा देंगे,,,

हां मालकिन,,,, सच कह रही हूं एक दो बार बोलने की कोशिश भी की,,, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि वह तो यह कह कर मेरा मुंह बंद कर दिया कि वह सबको बता देगा कि जानबूझकर मैं जब खड़ा रहता हूं तभी आ कर के पेशाब करती है,,, और मुझे गंदे गंदे इशारे करके अपने पास बुलाती है,,,, सच कहूं तो यह सुनकर मेरी तो बोलती ही बंद हो गई,,,, दुनिया वालों को तो आप जानती ही हो,,,, घुमा फिरा कर इसमें मेरा ही दोष देते,,,,,

अच्छा की तूने की बात को आगे नहीं बढ़ाई वरना गांव वाले तेरा ही दोष देते,,,, औरतों की गांड को इस हाल में देखना मर्दों को कुछ ज्यादा ही अच्छा लगता है तू जानती है मर्द को औरत की गांड सबसे ज्यादा अच्छी लगती है खास करके बड़ी बड़ी गोरी गांड,,,, ईसी के पीछे लट्टु होकर घूमते रहते हैं,,,,।

(सोनी और उसकी सहेली शांति दोनों आपस में बातें कर रहे थे कि हम दोनों की फुसफुसाहट राजू के कानों तक पहुंच गई,,, वह बकरियां चराने आया थाऔर उसे की पेशाब लग गई थी इसलिए वहां झाड़ियों के अंदर चला आया था क्योंकि यहां पर ठंडक थी और बाहर खड़ी थी आने की वजह से गर्मी लग रही थी,,,, उन दोनों औरतों को झाड़ियों के बीच खड़ा देखकर उन दोनों को बातें करते हुए देखकर राजू एक पेड़ के पीछे छुप गया और उन दोनों को चोर नजरों से देखने लगा सोनी पर नजर पड़ते ही उसके होशो हवास उड़ने लगे थे क्योंकि सोनी बेहद खूबसूरती भरा हुआ बदन राजू के होश उड़ा रहा था,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस समय यह दोनों झाड़ियों के बीच क्या कर रही थी,,,, इसलिए एकदम चोर कदमों से पेड़ के पीछे छुप कर उन दोनों की क्रियाकलापों को और उनकी बातों को सुनने लगा,,, अभी तक राजू इस बात का अंदाजा भी नहीं लगा पाया था कि वह दोनों झाड़ियों के अंदर करने क्या है और वह भी इतनी खड़ी दुपहरी में,,,)

इसीलिए शांति मैं जितना हो सकता है उतना अपने आप को बचाकर रखती हूं कहीं भी आते जाते रास्ते में कहीं के साथ लगती तो मैं ऐसी जगह को तलाश करती हूं जहां पर कोई नहीं होता झाड़ियों के पीछे छुप कर ही मौके साफ करती हूं क्योंकि मैं चाहती हूं कि कोई मर्द मेरी गांड को देख ना पाए,,,, क्योंकि मर्दों को औरतों की क्या पसंद होती है,,,,(शांति की तरफ प्रश्नवाचक दृष्टि से देखते हुए बोली,,,)

गांड,,,,,,(शांति हंसते हुए बोली)

हां,,,,,, अब जाकर तुझे समझ में आया है,,,,

(गांड शब्द सुनकर और उन दोनों का हंसना देकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी क्योंकि उसे लगने लगा कि कुछ ना कुछ जरूर होने वाला है,,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा,,,,,)

जल्दी से पेशाब कर लेती हूं वैसे ही देर हो चुकी है,,,,।

(यह सुनकर तो राजू की सांसे अटक गई खूबसूरत औरत के मुंह से वह पेशाब करने की बात सुन रहा था,,, और उसके हाव-भाव से राजू को ऐसा ही लग रहा था कि वह उसकी आंखों के सामने ही पेशाब करने वाली है,,,, यह एहसास राजू के लंड में हरकत करने को मजबूर कर दिया और पल भर में ही राजू का लंड अपनी औकात में आ गया,,,, राजू को दूसरी वाली जिसका नाम शांति था ठीक-ठाक लग रही थी लेकिन गोरे बदन वाली हुस्न की मल्लिका सुडोल देह वाली सोनी राजू के तन बदन में आग लगा रही थी उसका गोरा बदन गठीला तराशा हुआ जिस्म राजू के लंड की अकड़ को बढ़ा रही थी,,,, वह अपने सांसो को दुरुस्त किए हुए उस नजारे को देख रहा था जहां पर सोनी खड़ी होकर अभी भी चारों तरफ देख रही थी जहां पर वह खड़ी थी वह जगह थोड़ी सी खुली हुई थी बाकी झाड़ियों से गिरी हुई थी,,,,।जब वह चारों तरफ तसल्ली भरी नजर से घूम कर देख रही थी तभी राजू कि मुझे उसकी गोलाकार गांड पर पड़ी थी तभी से वह उसकी गांड का दीवाना हो गया था,,,, अच्छी तरह से समझ गया था कि साड़ी के अंदर उसका बदन किसी बेश कीमती खजाने से कम नहीं है,,,, राजु उसकी गांड देखने के लिए लालायित हो गया,,,,

अरे मालकिन अब करोगी भी या चक्रर पकर देखती ही रहोगी,,,।

हां हां कर रही हैं मुझे भी जोरों की ही लगी है,,,,

(इतना कहकर वह धीरे-धीरे की साड़ी को उठाना शुरू कर दिया देखकर राजू के तन बदन में आग लगने लगी उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी सोनी पेशाब करने के लिए पूरी तरह से तैयार थी और देखती देते उसकी साड़ी घुटनों तक आ गई राजू की किस्मत बड़े जोरों पर थी क्योंकि उसकी पीठ ठीक राजू के सामने थे मतलब की राजू उसकी गांड के प्रति पूरी तरह से मोहित था और थोड़ी देर में उसने उसकी नंगी गांड दिखने वाली थी पेशाब तो राजू कभी-कभी थी लेकिन इस समय अपनी सांसो को भी रोक कर खड़ा था कि उसकी आहट का उन दोनों को पता ना चल जाए वरना एक खूबसूरत दृश्य पर परदा पड़ जाएगा,,,। सोनी की मांसल पिंडलिया बहुत खूबसूरत लग रही थी सोनी की साड़ी घुटनों तक आ चुकी थी,,,, शांति भी खड़ी होकर सोनी को ही देख रही थी क्योंकि सोनी को भी पता था की खूबसूरती में वह सबसे आगे थी,,, गोरा रंग होने के कारण उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहता था,,, राजू से भी रहा नहीं जा रहा था मुठ मारने के लिए उसकी आंखों के सामने बेहद कामुकता भरा दृश्य नजर आ रहा था इसलिए वह इस दृश्य का पूरा फायदा उठाते हुए अपने पजामे को नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया और सोनी की कामुक अदाओं को देखकर धीरे-धीरे अपने लंड को हीलाना शुरू कर दिया,,,।

कैसा लग रहा था कि मानो सोनी को सब कुछ पता हो और वह धीरे-धीरे अपनी खूबसूरत बदन को दिखाकर राजू को तड़पा रही हो,,,, वह उसी अदा से धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी शांति को भी मजा आ रहा था एक औरत होने के नाते एक औरत की खूबसूरती से उसे अपने अंदर जलन भी महसूस हो रही थी लेकिन कर भी क्या सकती थी आखिरकार वह उसकी मालकिन जो थी और उसे सहेली की तरह रखती थी,,, जैसे-जैसे सोनी की दूधिया मोटी मोटी जांघें नजर आने लगी वैसे वैसे सोनू का हाथ अपने लंड पर बड़ी तेजी से चलने लगा,,, केले के तने की तरह एकदम चिकनी जांघों को देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था वह उसकी गोरी चिकनी जानू को अपने होठ लगाकर चूमना चाहता था अपनी जीभ से चाटना चाहता था,,,,,पहले उसके मन में इस तरह के ख्याल कभी भी नहीं आती थी उसकी आंखों के सामने बने कितनी खूबसूरत औरत क्यों ना खडी हो लेकिन जब सेबुर्के नमकीन रस का स्वाद उसके मुंह लग गया तब से औरतों को देखने का नजरिया उसका बदल गया था और उन्हें देख कर वो अपने मन में गंदे विचारों को जन्म देने लगा था,,, इसीलिए इस तरह के गंदे ख्याल सोनी को देखकर उसके मन में उम्र रहे थे देखते देखते सोनी की साड़ी कमर तक आ गई,,, यह नजारा देखकर राजू को लगने लगा कि कहीं उसकी सांसे ना अटक जाए,,,,,,

Soni jhadiyo k bich



कुदरत का बनाया हुआ बेहद खूबसूरत अंग उसकी आंखों के सामने एकदम नंगा था जिसे देखकर राजू की संभोग की इच्छा तीव्र हो रही थी वह उस औरत की चुदाई करने की अभिलाषा रखने लगा,,,, उसका बस चलता तो अभी उसे यही पकड़ कर पटक कर चोदने लगता लेकिन राजू का चरित्र अभी इतना गिरा नहीं था कितनी घिनौनी हरकत करता वह रजामंदी होने पर ही चुदाई करता अपनी मनमानी कभी नहीं करता क्योंकि इतना तो उसे ज्ञात हो ही चुका था की मर्जी के बिना मजा भी नहीं आता,,,,

सोनी अपनी साड़ी को कमर तक उठाए खड़ी थी उसकी गोरी गोरी उभरी हुई गदराई गांड सुनहरी धूप में चमक रही थी,,,। एक अजीब सा मादकता भरा आकर्षण सोनी की गांड में था जिसे देखकर राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,, शांति भी इसके आकर्षण से बच नहीं पाई थी वह भी अपनी तिरछी नजर से सोनी की गांड को देख रही थी यह देख कर सोनी बोली,,,,,।

तुम ऐसे क्यों देख रही हो तुम्हारे पास भी तो ऐसे ही है,,,

तुम्हारी बहुत खूबसूरत है एकदम गोरी गोरी और उभरी हुई,,,, सच कहूं तो मर्दों को तुम्हारी जैसी ही गांड अच्छी लगती है,,,

तुम्हें कैसे मालूम ,,,(सोनी मुस्कुराते हुए बोली)

मैं किसी लड़के के मुंह से सुनी थी कि उन लोगों को औरत की बड़ी-बड़ी गाड़ी हई पसंद आती है,,,

तुम्हारी भी तो है,,,,

लेकिन तुम्हारी तरह नहीं है मालकिन,,,, काश मेरी भी तुम्हारी जैसी होती तो अब तक ना जाने कितनों को अपने पीछे पीछे घुमाते होती,,,,।

चल बड़ी आई मर्दों को पीछे पीछे घुमाने वाली अगर कोई पीछे पड़ गया ना तो उस दिन समझ में आएगा,,,, की कितनी बड़ी मुसीबत मोल ले ली है,,,,‌।

(राजू उन दोनों की बातों को सुनकर पूरी तरह से उत्तेजित बजा रहा था क्योंकि वह दोनों गार्ड की खूबसूरती के बारे में ही बातें कर रही थी और अपने मुंह से ही बता रही थी कि औरतों की बड़ी-बड़ी गाड़ी मर्दों को ज्यादा पसंद आती हो और उन दोनों का कहना भी सही था क्योंकि राजू खुद यह अब हंस कर चुका था कि उसे भी औरतों की बड़ी-बड़ी गांड ही पसंद आती है,,,, राजू जोर-जोर से मुट्ठ मार रहा था,,,, राजू के पास चुदाई करने के लिए दे दो बुर का जुगाड़ थालेकिन इस समय यहां पर उन दोनों दोनों में से कोई भी बुर उपस्थित नहीं थी और इसलिए लंड की गर्मी को शांत करने के लिए बस यही एक तरीका रह गया था,,,, जिसे वह बखूबी निभा रहा था,,,)

चलो बहुत देर हो गई है भैया को पता चलेगा कि मैं इतनी देर गांव में लगा दी तो गुस्सा करेंगे,,,,

(और इतना कहने के साथ ही सोनी अपनी बड़ी बड़ी गांड लेकर वहीं बैठ गई ठीक राजू की आंखों के सामने और अगले ही पल पेशाब करने लगी,,,, क्षण भर में ही मुतने की मधुर धुन बांसुरी की ध्वनि की तरह राजू के कानों में सुनाई देने लगी राजू एकदम बावला हो गया या मधुर धुन सुनकर उसके होश उड़ गए और वह जोर-जोर से अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया पीछे से सोनी का पिछवाड़ा देखकर राजू की हालत खराब होने लगी,,,,,, सोनी का पिछवाड़ा राजू को इतना खूबसूरत लग रहा था मानो कि जैसे खेतों में दो खूबसूरत बड़े-बड़े तरबूज रख दिए गए हो,,,, राजू का मन इस समय उसकी गांड चाटने को कर रहा था हालांकि अभी तक राजू में ना तो कमला चाची की और ना ही अपनी बुआ गुलाबी की गांड को चाटा था,,, लेकिन इस समय सोने की खूबसूरती और उसकी खूबसूरत गांव को देखकर उसके मन में यह इच्छा तीव्र हो रही थी,,,,

Soni ko pesab karte huye dekh kar raju ekdam mast ho raha tha



बुर से निकल रही सीटी की आवाज बांसुरी की मधुर धुन की तरह उसे मोहित कर रही थी,,,, सोनी बड़ी आनंदित होकर मूत्र विसर्जन कर रही थी,,,, बड़े जोरों की पेशाब लगने की वजह से उसे राहत महसूस होने लगी थी,,,, अपने पैरों के आगे की घास को वह पूरी तरह से अपने पेशाब से भिगो डाली थी मानो कि जैसे घास में पानी दिया गया हो,,,राजू जानता था कि थोड़ी देर में पेशाब करके वह उठ जाएगी और एक खूबसूरत नजारे पर पर्दा डाल देगी इसलिए वह उसकी खूबसूरत गांड की आकर्षण मैं जोर-जोर से मुठ मार कर अपना पानी निकाल देना चाहता था इसलिए उसकी हथेली बड़ी जोरों से चल रही थी,,,,, और थोड़ी ही देर में जैसे ही हो पेशाब करके खड़ी हुई अपनी साड़ी को वह नीचे करती इससे पहले ही राजू के लंड से गर्म पानी की पिचकारी फुट पड़ी,,,राजू के लिए पहला मौका था जब वह बाहर किसी औरत को नग्न अवस्था में देखकर अपना लंड हिला कर पानी निकाला था उसे बहुत ही मजा आया था लेकिन उस औरत को चोदने के ख्याल से यह मजा कम ही था,,,,

राजू की आंखों के सामने ही वह अपनी साड़ी को नीचे करके फिर से बेश कीमती खजाने को छुपा ली,,,,राजू अपने क्यों जाने को ऊपर करके हम खड़ा रहा मैं देखना चाहता था कि वह दोनों जाती कहां है,,,, तभी सोनी बोली,,।

चल जल्दी कर गांव से लौटना भी है,,,,

(इतना कहने के साथ ही वह दोनों झाड़ियों से बाहर निकल गई और राजू भी अपनी बकरी को लेकर गांव की तरफ जाने लगा क्योंकि वह दोनों उसी तरफ जा रही थी)
 
सोनी के अरमान मचल रहे हैं उसे अपनी जवानी पर अपनी खूबसूरती पर अपनी खूबसूरत बदन पर पूरा विश्वास था कि वह अपनी खूबसूरती जोबन के जाल मे रघु को पूरी तरह से फंसा लेगी ,,वह रघु को अपनी हुस्न का जादू दिखा कर उसे अपने आकर्षण में बांध लेना चाहती थी और उसे पूरी तरह से विश्वास था कि वह जैसा चाहती है वैसा ही होगा,,, क्योंकि वह पूरी तरह से जवान थी एकदम गोरी चिट्टी खूबसूरत अंगो की मालकीन ,,, बड़ी बड़ी चुचीयों के साथ साथ बड़ी बड़ी गांड भी आकर्षण का केंद्र बिंदु थी,,, मर्दों को औरतों का जो भी अंग पसंद होता है वह सब कुछ बेहतरीन उम्दा किस्म का सोनी के पास था,,,,,,,

Kasi huyi saree me soni ki madmast gaand



सोनी यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि अगर राजू के सामने वह अपने साड़ी का पल्लू भी नीचे गिरा देगी तो उसकी लाजवाब बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चुचियों का घेराव देखकर वह घुटने टेक देगा,,,,, इसी आत्मविश्वास के साथ वह आगे पढ़ रही थी,,,, और दूसरी तरफ राजू जो अनजाने में ही सोनी की खूबसूरत गदराई गांड के दर्शन कर चुका था पर उसे देख कर मुट्ठ भी मार चुका था,,, उसके गोलाकार नितंबों के घेराव के आकर्षण में पूरी तरह से बंध कर वह भी अपनी बकरियों को लेकर पीछे पीछे हो चला था वह देखना चाहता था कि वह कहां जाती है,,,,,,,

Bistar pe leti huyi kaamroopi Madhu



गांव में पहुंचते ही सोनी,, राजू को ढूंढने का अभियान शुरू कर दी थी क्योंकि वह नहीं जानती थी कि राजू का घर किधर है और वह सीधे-सीधे राजू को ही पढ़ने के लिए नहीं बोल सकती थी दूसरे लड़कों को भी बोलना जरूरी था क्योंकि ताकि किसी को ऐसा न लगे कि जरूर दाल में कुछ काला है,,, समझा-बुझाकर सोनी ने तीन चार लड़कों को पढ़ने के लिए तैयार कर दिया जिसमें से श्याम भी था हालांकि वह पढ़नानहीं चाहता था लेकिन सोने की खूबसूरती देखकर वहां उस पर मोहित हो गया था और इसीलिए वह हामी भर दिया था,,,,, अब उसे राजू की तलाश थी,,,, वह राजू को ढुंढ रही थी साथ में दूसरे लड़के भी थे,,,,,,

Madhu k nitambo ka Maadi gheraav



सोनी के लिए पढ़ाई तो एक बहाना था राजू को अपने जाल में फंसाने के लिए उसके साथ अपनी मनमानी करने के लिए उसके मोटे तगड़े लंड के दर्शन करके उसे अपनी बुर में लेने के लिए,,,,, इसी चक्कर में वह अपनी हवेली छोड़कर गांव में आई थी,,,,,,दो तीन लड़कों को वह तैयार कर चुकी थी पढ़ाने के लिए बस उसे इंतजार और तलाश थी राजू के जो कि राजू भी सोनी के चक्कर में गांव में पीछे पीछे आ गया था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि वह गांव में क्या करने के लिए आई है उसे अगर इस बात का अंदाजा होता कि वह गांव में उसी को ढूंढते हुए आई है तो वह कब से उसकी आंखों के सामने आकर खड़ा हो जाता,,,,,,, उसको गांव में चक्कर लगाता है वह देखता राजु घर में चला गया था और खाना खाने लगा,,,,।

सोनी उसे ढूंढ ढूंढ कर परेशान हो रही थी उसे नाम भी तो नहीं मालूम था कि उसका नाम क्या है,,,, पर जिन लड़कों को तैयार की थी उनसे ही पूछ रही थी कि कोई और लड़का हो तो उन्हें भी बोल दो पढ़ने के लिए,,,,, श्याम के साथ जो था वह बार-बार श्याम को राजू को भी पढ़ने के लिए बोलने को कह रहा था लेकिन वह उसे इशारों में चुप रहने को कह रहा था क्योंकि श्याम यह अच्छी बात अच्छी तरह से जानता था कि अगर राजू भी साथ चलेगा तो जरूर,,,, यह भी राजू के ऊपर डोरे डालने के लिए और राजु उसकी खूबसूरत जवानी को देखकर पानी पानी हो जाएगा,,,, और ऐसा वह बिल्कुल भी नहीं चाहता था और वैसे भी श्याम ने भी खेल के मैदान में राजू के मोटे तगड़े लंड को देख लिया था,,,और एक मर्द होने के नाते उसे इस बात का अच्छी तरह से आभास था की औरतों को सबसे ज्यादा क्या पसंद है होता है,,,,इसीलिए वह राजू का नाम पता नहीं रहा था और मैं उसका घर बता रहा था और ना ही अपने साथियों को बताने दे रहा था,,,,,

Khubsurat gaand ki maalkin

sonii




सोनी परेशान हो गई थी कड़ी धूप की वजह से उसके माथे से पसीना टपक रहा था उसकी खूबसूरती कड़ी धूप में सोने की तरह चमक रही थी,,,, उसकी मतवाली गांड देखकर श्याम पागल हुआ जा रहा था,,, उसकी मदमस्त चूचियों के उभार को देखकर,,, श्याम के मुंह में पानी आ रहा था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था,,,,,,,,

सोनी परेशान होकर अपने मन में सोचने लगी कि वह भी कितनी बुद्धू है ना नाम ना पता ऐसे कैसे उसको ढूंढ रही है उसका मन उदास हो गया था उसे लगने लगा था कि शायद वह लड़का इस गांव का था ही नहीं,,,, क्योंकि लगभग लगभग उसी सभी घर पर जाकर उसे ढूंढने की पूरी कोशिश की थी,,,,, वह अपनी इस निराशा के बारे में अपनी सहेली शांति को भी बता नहीं सकती थी क्योंकि उसकी कामलीला के बारे में उसकी सहेली शांति को भी कुछ भी नहीं पता था और ना ही वह चाहती थी कि किसी को कानों कान पता चले,,,,,, वह बहुत उदास हो गई थी ,,उसके चेहरे पर उदासी और निराशा दोनों साफ झलक रही थी लेकिन खूबसूरती में जरा भी कमी नहीं आई थी,,,,,, बस दो-चार घर ही बचे हुए थे और सोनी ना उम्मीद हो चुकी थी,,,,,, उसे लगने लगा था कि उसके सपनों का राजकुमार इधर नहीं मिलने वाला उसका गांव में आना बेकार साबित हो रहा था खामखा हुआ दो चार लड़कों को और पढ़ने के लिए बोलती थी अपने सर की मुसीबत मोल ले ली थी,,,,,कर भी क्या सकती थी अपने बड़े भाई को यही बहाना करके तो वह गांव में आई थी,,,,,।

Gulabi ki nangi gaand



मालकिन अब दो चार ही घर बचे हैं,,,,,, जल्दी से अपना काम खत्म कर दे घर चलते हैं तो बहुत तेज लग रही है,,,

हां तु ठीक कह रही हैं,,,, यहां कोई है पढ़ने वाला,,,(साथ में चल रहे हैं वह शयाम को संबोधित करते हुए बोली,,)

नहीं नहीं मेम साहब यहां कोई नहीं है,,,,,(श्याम जानबूझकर बोला क्योंकि वह जानता था कि यहां राजू रहता है और वह नहीं चाहता था कि राजू भी साथ में गोरी मेम साहब के पास पढ़ने जाए,,, शाम की बात सुनकर सोनी और ज्यादा निराश हो गई रही सही उम्मीद जवाब दे गई,,, अब कर भी क्या सकते हैं मन मसोसकर वह ,,, श्याम से बोली,,,,)

ठीक है तुम तीनों परसों से,,, आम वाले बगीचे में आ जाना मैं वहीं पर पढ़ाती हूं,,,,

ठीक है मैम साहब,,,,,(श्याम एकदम से खुश होता हुआ बोला लेकिन उसकी निगाह सोनी की छातियों पर टिकी हुई थी जिसका आभास सोनी को हो गया था,,, इसलिए वह अपना पल्लू ठीक करते हुए बोली,,,,)

ठीक है अब आम के बगीचे में मुलाकात होगी,,,।

(श्याम की नजरों को सोनी भांप गई थी उसे श्याम पर गुस्सा भी आ रहा था भले ही सोनी एक प्यासी औरत थी लेकिन वह किसी को भी अपना तन मन यूं ही नहीं सौंप देती थी जिस पर दिल आता था उसी पर वह पूरी तरह से निछावर हो जाती थी,,,,, इतना कहकर वह चलने लगी और श्याम इस बात से खुश था कि अच्छा हुआ राजू से मुलाकात नहीं हुई क्योंकि वह नहीं चाहता था कि इतनी खूबसूरत औरत और उसके बीच राजू आए,,,, क्योंकि पलभर में ही पहली मुलाकात में ही श्याम सोनी को लेकर सपने बुनने लगा था,,,,वह वहीं खड़ा सोनी को जाते हुए देखता रह गया उसकी मटकती गांड श्याम की हालत को खराब कर रही थी,,,, वैसे भी सोनी कमर के नीचे कसी हुई साड़ी पहनती थी जिसकी वजह से उसकी गांड कुछ ज्यादा ही ‌ऊभर कर बाहर नजर आती थी,,,,।

सोनी पूरी तरह से निराश हो चुकी थीउसके मन में तो आ रहा था किन-किन लड़कों को भी ना बोल दे पढ़ने के लिए,,, लेकिन इसी तरह से पढ़ाने की उम्मीद बची हुई थी जो कि राजू से फिर मिला सकती थी इसी उम्मीद के साथ वह,,, आगे बढ़ने लगी की तभी,,, पीछे से उसे पानी के गिरने की आवाज आई तो वह पीछे नजर घुमा कर देखने लगी,,,, खुशी से देखते ही इसकी आंखों में चमक आ गई उसकी बांछें खिल गई उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,,आखिर खुश क्यों ना होती जिसे ढूंढते हुए वह यहां आई थी वह उसकी आंखों के सामने था,,,, राजू खाना खाकर बाहर हाथ धो रहा था,,,, राजू सोनी को देखने लगा तो दोनों की नजरें आपस में टकरा गई सोनी को देखते ही राजू की आंखों के सामने सोनी की नंगी गांड नाचने लगी,,, राजु को उसकी आंखों के सामने सोनी अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करते हुए नजर आने लगी सोनी से नजरें मिलते ही राजू के पजामे में हलचल होने लगी कुछ देर तक तो राजू उसे देखता ही रहेगा थोड़ी ही दूर पर श्याम अपने साथियों के साथ खड़ा होकर यह सब देख रहा था दोनों को इस तरह से आपस में देखा हुआ पाकर श्याम जल भुन गया,,,, सोनी एकदम से हक्की बक्की होकर वहीं खड़ी रह गई,,,,।

कुछ देर बाद सोनी बोली,,,।

ऐ लड़के यहां आओ,,,,

(सोनी एकदम से मुस्कुराते हुए बोली,,,, सोनी को इस तरह से अपने आप को बुलाते हुए पाकर राजू को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस खूबसूरत औरत को रहा है कुछ देर पहले झाड़ियों में पेशाब करते हुए देखा था उसकी तरफ आकर्षित हो गया था उसकी गांड को देखकर मदहोश हो गया था वह औरत खुद उसे बुला रही थी,,,,ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे वह कोई सपना देख रहा है कुछ देर तक राजू उसी तरह से खड़ा रहा तो सोनी फिर से बोली,,,)

ऐ लड़के सुनाई नहीं दे रहा है क्या,,,? मैं तुम ही से कह रही हूं,,,, इधर आओ,,,

कौन मै,,,?

हां तुम्ही,,,,,

(राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, वह लौटे को वहीं पास में रखकर उसके पास आगे बढ़ने लगा और उसके पास पहुंच कर बोला)

बोलिए क्या हुआ मुझे क्यों बुला रही हो,,,?

पढ़ना चाहते हो,,,,,

Soniii





नहीं नहीं मैं नहीं पढ़ना चाहता,,,,

(पढ़ाई के नाम परराजू एकदम से घबराते हुए बोला क्योंकि वह पढ़ना नहीं चाहता था पढ़ाई के नाम पर उसे सांप सूंघ जाता था गांव के बाहर सरकारी स्कूल थी जिसमें कुछ बच्चे पढ़ने जाया करते थे लेकिन राजू नहीं जाता था और ना ही उसके साथ ही जाया करते थे,,,,,)

क्यों नहीं पढ़ना चाहते पढ़ने में क्या हर्ज है पढ़े-लिखे लोगे तो तुम्हारे काम आएगा हिसाब-किताब समझ पाओगे,,,।

नहीं मुझे नहीं समझना है,,,,

(राजू इतना कहकर घर में जाने ही वाला था कि अंदर से उसकी मां बाहर निकलते हुए बोली)

क्या रे किससे बातें कर रहा है,,,,(इतना कहने के साथ ही उसकी नजर सोनी पर पड़ी तो उसकी खूबसूरती उसकी चमक देखकर मधु समझ गई कि यह कोई बड़े घर की औरत है,,, इसलिए हाथ जोड़ते हुए बोली,,,)

नमस्ते आप कौन हैं मैं पहचानी नहीं,,,,

जी मैं लाला साहब की छोटी बहन हुंंं और बच्चों को पढ़ाने का काम करती हूं,,, इससे मेरा मन भी लग जाता है और बच्चों को कुछ सीखने को भी मिल जाता है,,,,।,,,

अरे अरे आप मालिक की छोटी बहन है,,,, आइए आइए बैठिए,,,, राजू जा अंदर से जाकर खटिया बाहर लेकर आ,,,,, आइए छोटी मालकिन,,,,,

(लाला की छोटी बहन उसके घर आई है यह जानकर मधु बहुत खुश हो रही थी,,, और सोनी अपनी आवभगत देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और उस लड़के का नाम राजू है यह जानकर उसे अच्छा भी लग रहा था,,,, मधु की तकल्लुफ को देखकर सोनी बोली,,,)

अरे रहने दीजिए तकलीफ करने की कोई जरूरत नहीं है,,,

नही नही छोटी मालकिन,,, इसमें तकलीफ वाली कौन सी बात है आप तो हमारी मेहमान है,,,,

(तभी खटिया उठाएं राजू घर से बाहर आ गया उसके मोहक मासूम चेहरे को देखकर सोनी के दिल की धड़कन बढ़ने लगी उसका गठीला बदन उसकी तरफ उसे आकर्षित किए जा रहा था,,, उसके मासूम मोहक चेहरे को देखकर सोनी अपने मन में बोलने लगी कि वाकई में जो खुद इतना खूबसूरत करीला दिखता है तो उसका औजार भी उतना ही दमदार ही होना चाहिए जैसा कि वह देखी थी,,,, राजू वही पर खटिया बिछा दिया,,,, मधु राजू से बोली,,,)

जा जाकर गुड वाला शरबत लेकर आ,,,

नहीं नहीं रहने दीजिए आप खामखा तकलीफ कर रही है,,,,

नहीं नहीं मेहमान नवाजी हमारी औकात के मुताबिक करने दीजिए आखिरकार आप मालिक की छोटी बहन जो है,,,, एक तरह से वह तो हमारे माई बाप है,,,

(मधु की बातें सुनकर सोनी बहुत खुश हो रही थी,,,,, सोनी के मन में पिक्चर बहुत कुछ चल रहा था तो एक तरफ सॉरी की खूबसूरती को देखकर एक अजीब सा आकर्षण भी होता जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि गांव मैं कोई औरत इतनी खूबसूरत भी होगी सोनी बातें करते हुए आंखों से ही मधु के देह लालित्य को नाप रही थी,,, मधु की गोल गोल कठोर चूचियां सोने की अनुभवी आंखों से बच नहीं पाई वह अंदाजा लगा ले कि ब्लाउज के अंदर बवाल छिपा हुआ है,,,, सुडौल बदन देखकर सोनी को मन में अजीब सी हलचल होने लगी,,,, सोनी को इस बात का आभास हो गया कि राजू की मां उससे भी ज्यादा खूबसूरत है,,,, बस उससे रंग थोड़ा सा दबा हुआ है,,,, थोड़ी ही देर में राजू गुड वाला शरबत लेकर आ गया खटिया पर सोनी और शांति दोनों बैठ गई थी,,,दो ग्लास में गुड़ वाला शरबत लाकर राजू उन दोनों को थमाने लगा,,,, गुड़ के शरबत वाला गिलास को थाम ते हुए सोनी को इस बात का आभास हो गया था कि जिस तरह से राजू खड़ा है अगर वह साड़ी का पल्लू थोड़ा सा नीचे गिरा देगी तो उसकी गोल-गोल चूचियो की गहरी लंबी लकीर राजू को साफ नजर आने लगेगी,,, और ऐसा ही हुआ एक बहाने से गर्मी का बहाना करते हुए सोनी थोड़ा सा अपना साड़ी का पल्लू अपनी चूचियों पर से सरका दी जिसकी वजह से उसकी गोल-गोल सूचना एकदम साफ नजर आने लगी,,, राजू की नजर जैसे ही सोनी की छातियों पर पड़ी तो उसके होश उड़ गए उसके मुंह में पानी आ गया,,, पल भर में ही राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा राजू को साफ नजर आ रहा था कि ब्लाउज के साइज से कहीं ज्यादा बड़ी उसकी चूचियां थी जो कि उसके ब्लाउज में से बाहर आने के लिए तड़प रही थी,,,,,

शरबत का ग्लास थमाते हुए राजू उसकी चुचियों को ही घूर रहा था,,,,,, इस बात का आभास होने को हो गया था और वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी और खुश भी हो रही थी तिरछी नजरों से उसकी घूमती हुई निगाहों को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि मानो वह अपना दोनों हाथों के बढा कर उसकी चूचियों को जोर से पकड़ लेगा उसे दबाना शुरू कर देगा,,,, राजू खा जाने वाली निगाहों से उसकी चूचियों को घूर रहा था और यह एहसास सोनी के तन बदन में आग लगा रहा था क्योंकि जैसा वह चाह रही थी वैसा ही हो रहा था राजू के मन का कबूतर अपने पंख फड़फड़ाने लगा ,,,, अपने मन में यहीं सोचने लगा कि,,, उसकी किस्मत कितनी तेज है कि कुछ देर पहले ही सी हो रात को वापस आप करते हुए देखा था इसकी नंगी बड़ी बड़ी गांड को देखकर वह मुठ्ठ भी मारा था और इस समय उसके ब्लाउज में कैद उसकी दोनों चूचियों को देखकर उसके होश उड़ जा रहे थे उसका मन कर रहा था कि,,, अभी इसी समय उसके ब्लाउज का बटन खोल कर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां को बाहर निकाल देना और उसे मुंह में लेकर जोर-जोर से पिए जैसा कि वह अपनी बुआ की चुचियों को पी रहा था,,,, सोनी पूरी तरह से गदराई जवानी की मालकिन थी और उसकी गदराई जवानी देख कर राजू का मन डोल रहा था राजू का मन उसे चोदने को कर रहा था,,,,,, मधु राजू की निगाहों से बिल्कुल अनजान थी,,,

Soni jaanbujhkar apne saree ka pallu sarkaa di



शरबत पीकर ग्लास को राजू को थमा ते हुए बोली,,,

पढ़ने आओगे ना राजू,,,,(सोनी की आवाज में एक अजीब सी कशिश थी एक आकर्षण था उसके शब्दों में एक आमंत्रण था जो उसे अपनी तरफ खींच रहा था बुला रहा था जिसे शायद राजू इंकार नहीं कर पा रहा था क्योंकि अब राजू उसके देह लालित्य,,, उसके बदन के आकर्षण में ब"धता चला जा रहा था,,,, वह कुछ बोला नहीं तो मधु ही बोल पड़ी,,,)

जी मालकिन जरूर आएगा पढ़े लिखेगा नहीं तो क्या करेगा,,, दिनभर आवारा की तरह घूमता रहता है शब्दों को पहचानेगा तभी तो कुछ कर पाएगा,,,,

(मधु की बातें सुनकर सोनी खड़ी हो गई और बोली)

तो परसों उन लड़कों के साथ चले जाना,,,(उंगली के इशारे से श्याम और उसके दोस्तों की तरफ इशारा करते हुए,,, जोकि उनमें से श्याम गुस्सा रहा था,,, क्योंकि जिस बात का डर उसे था वही उसकी आंखों के सामने हो रहा था,,, पढ़ाई के नाम पर जिसे डर लगता था वह सोनी के आकर्षण में कुछ बोल नहीं पाया,,, और हां में सिर हिला दिया,,,, इजाजत लेकर सोनी अपने घर की तरफ जाने लगी राजू उसे जाते हुए देखता रह गया उसकी नजर उसकी कमर के नीचे गोलाकार नितंबों पर टिकी हुई थी जिसे कुछ देर पहले व झाड़ियों में एकदम नंगी देख चुका था उसकी नंगी गांड को देखकर जो हाल उसका हुआ था इस समय भी कुछ ऐसा ही वह अपने अंदर महसूस कर रहा था,,,,, मधु भी बहुत खुश थी क्योंकि उसके घर पर लाला की बहन जो आई थी,,,,

धीरे-धीरे रात गहराने लगी खाना खाकर मधु और उसका पति हरिया अपने कमरे में चले गए,,, गुलाबी और राजु दोनों बाहर बैठे हुए थे,,,, दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि अभी दोनों की प्यास बुझी नहीं थी अभी तो सिर्फ एक ही रात बीती थी अभी तो शुरुआत थी राजु को मालूम था कि आज भी उसे बुआ की बुर चोदने को मिलेगी जो कि उसका लंड पूरी तरह से मचल रहा था और खड़ा भी हो चुका था,,,, वह अपनी बुआ गुलाबी से बोला,,,)

चलो ना बुआ कमरे में अब यहां क्यों बैठी हो,,,,

क्यों तुझसे रहा नहीं जा रहा है क्या,,,,

नहीं बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा है,,,

नहीं बुआ देखो ना कितना तड़प रहा है,,,(इतना कहने के साथ ही राजू एकदम बेशर्म बनता हुआ अपनी बुआ का हांथ पकड़ कर उसे अपने लंड पर रख दिया,,, जिसके कड़क पन का एहसास गुलाबी को अपने हथेली पर होते ही उसकी बुर फुदकने लगी,,, उसका मन तो पहले से ही कर रहा था लेकिन वो थोड़ा अपने भतीजे को तड़पाना चाहती थी,,, लेकिन उसके भतीजे की हरकत ने उसके तन बदन में एक बार फिर से काम ज्वाला को भड़का दिया था,,, अब उससे भी रहा नहीं जा रहा था,,, इसलिए वह बोली,,,)

ठीक है तु कमरे में चल मैं थोड़ी देर में आती हूं,,,,

अब कहां जा रही हो,,,?

Soni kapde utaar kar nangi hone k bad





अरे आ रही हूं तु चल तो सही,,,,

(इतना कहकर वह खटिया से खड़ी हो गई और राजु भी पजामे के ऊपर से अपने खड़े लंड को सहलाते हुए कमरे के अंदर चला गया,,,, और गुलाबी घर के बाहर पेशाब करने को चली गई उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,, थोड़ी देर में पेशाब करके वह कमरे के अंदर आ गई,,, जहां पर राजू खटिया के ऊपर लेटा हुआ था और पैजामा नीचे सरका कर अपने खड़े लंड को हिला रहा था,,, जिसे देखते हीगुलाबी की बुर फुदकने लगी और उसके मुंह में पानी आ गया,,,)
 
गुलाबी पेशाब करके वापस कमरे में आ चुकी थी उसे जोरों की पेशाब तो नहीं लगी थी लेकिन वो जानती थी कि एक बार लंड लड़की बुर में जाएगा तो उसे अपने आप ही के साथ लग जाएगी और वह बाहर आकर अपना मजा किरकिरा नहीं करना चाहती थी क्योंकि पहली चुदाई का अनुभव उसे यह सब एक नई सीख दे रहा था,,,, वैसे तो गुलाबी को पेशाब करते हुए देखना अपने एक अपना अलग ही रोमांच का अनुभव था लेकिन राजू इस अद्भुत रोमांच से चूक गया था क्योंकि उसे तो गुलाबी को चोदने की प्यास थी इसलिए वह कमरे में जाते ही अपने पजामे को घुटनों तक सरका कर,,, अपने खड़े लंड को हिला हिला कर अपनी बुआ की बुर में डालने के लिए तैयार कर रहा था वैसे तो राजू हट्टा कट्टा जवान लड़का था उसे चोदने से पहले तैयारी करने की जरूरत नहीं थी क्योंकि चोदने के ख्याल मात्र से ही उसका नंबर लोहे के रोड की तरह एकदम टाइट हो जाता था,,,,,।

Soni kiachalti jawani





पेशाब करके कमरे में जाकर होते हीवह दरवाजा बंद करके सीट के लिए भी नहीं लगाई थी कि उसकी नजर खटिया पर पड़ी और खटिया पर के नजारे को देखते ही उसकी पुर में खुजली होने लगी क्योंकि राजू अपने खड़े लंड को हिला रहा था और यह नजारे जवान लड़की के लिए कामुकता और वासना से भरा होता है जिसे देखते ही गुलाबी की गुलाबी बुर फुदकने लगी थी,,,, वह सिटकनी लगाकर दरवाजे पर खड़ी होकर राजू के लंड को देख रही थी,,,, एक गजब का आकर्षण था उसके लंड में जिससे गुलाबी भलीभांति परिचित हो चुकी थी,,,, वह अभी तक अपने बड़े भैया के ही लंड को देखते आ रही थी,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके भैया से भी बड़े बड़े लंड होते हैं और उसकी धारणा अपने भतीजे के लंड को देखकर टूट गई,,, जिसे वह अपनी बुर में भी लेकर चुदवा चुकी थी,,,,

इस समय उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,,, वह धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए राजु से बोली,,,।

तू तो एकदम तैयारी में लगा है,,

Gadrayi jawani ki maalkin Madhu



क्या करूं बुआ रहा नहीं जा रहा है एक बार फिर से तुम्हें नंगी देखने का मन कर रहा है,,,,

बड़े जल्दी में हैं,,,,

क्या करूं,,,, मन कर रहा है कि कब तुम नंगी हो और मैं तुम्हारी बुर में अपना लंड डालकर चोद दु,,,,(राजू जोर-जोर से अपने लंड को हीलाते हुए बोला,,,)

और फिर इसके बाद,,, पानी निकल जाता और काम खत्म,,, ऐसा तो तू हाथ से हिला कर भी कर सकता है,,,,,,,,, लेकिन वह मजा नहीं आएगा जैसे कि आना चाहिए,,,,,,,

क्या करूं बुआ मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,,

मैं जानती हूं तड़प ही ऐसी है,,,,लेकिन अपने आप को संभाल कर अपने आप पर काबू करके इस खेल में आगे बढ़ा जाता है तभी तो मजा आता है मैंने यह सब तेरी मां और तेरे पिताजी से सीखी हुं,,,, इस समय भी दोनो चुदाई कर रहे होंगे,,,,,(धीरे-धीरे गुलाबी खटिया के करीब पहुंच गई लालटेन की की की रोशनी रघु का संपूर्ण वजूद एकदम साफ नजर आ रहा था जिसे देखकर गुलाबी की आंखों में वासना की चमक बढ़ती जा रही थी उसकी दोनों टांगों के बीच कंपन हो रहा था,,,, जिस तरह का उतावलापन राजू दिखा रहा था वह चाहती तो वह भी इसी उतावले पानी के चक्कर में सीधे सीधे उसके लंड पर चढ जाती और अपनी गर्मी शांत कर लेती,,, लेकिन गुलाबी तेरे से काम ले रही थी क्योंकि वह रोज रोज छोटे से छेद में से यही सब तो देखती थी उसके भैया और भाभी का धैर्य उन दोनों के बीच पारस्परिक समझदारी और बिल्कुल भी उतावलापन ना दिखाने की जल्दबाजी इसीलिए तो वह दोनों आज भी पहली रात की तरह ही हर रात सुहागरात मना रहे थे,,,, गुलाबी तेरी देखते हैं खटिया के नीचे घुटनों के बल बैठ गई,,, राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड का आकर्षण उसकी आंखों की चमक और ज्यादा बढ़ा रहा था,,, उसकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी,, इसके बावजूद भी उसे अपने अंदर ले लेने की जल्दबाजी वह नहीं दिखा रही थी,,,क्योंकि अपने भैया भाभी को देखकर वह इतना तो समझ गई थी कि इस खेल को धीरे-धीरे खेला जाता है तभी इस खेल में मजा आता है,,,। राजू की सांसें उपर नीचे हो रही थी,,,। उसे लगा था कि उसकी बुआ अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाएगी लेकिन वह ऐसा कुछ भी नहीं की थी,,,,, क्योंकि उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था,,,, वो धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाकर,, राजू के लंड को थाम ली,,,, एक अजीब सी कशक की आवाज के साथ राजू एकदम मस्त हो गया और गुलाबी धीरे-धीरे अपने प्यासे होठों को उसके लंड के सुपाड़े की तरफ आगे बढ़ाने लगी,,,, और देखते ही देखते अपने प्यासे होठों को उसके लंड के सुपाड़े पर रख दी,,,,,,।

Gulabi kapde utaar kar nangi hone k bad



आहहहह बुआ,,,,,,(राजू गरम सिसकारी की आवाज के साथ ही अपनी कमर को उत्तेजना के मारे ऊपर की तरफ उठा दिया और उसका छुपाना गुलाबी के लाल-लाल होठों के बीच प्रवेश कर गया जिसे गुलाबी खुद ही अपने मुंह में लेकर अपने प्यासे होठों के बीच कस ली,,,,।

सहहहहह,,,,,,बुआ,,,,,(एक बार फिर से राजू एकदम से मस्त हो गया और धीरे-धीरे गुलाबी अपनी भाभी की तरह ही अपने भतीजे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, यह क्रिया गुलाबी बड़ी मध्यम गति से कर रही थी बहुत ही धीरे-धीरे राजू की मस्ती और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,। धीरे धीरे गुलाबी राजू के डंडे जैसे लंड को समुचा अपने गले के नीचे तक उतार ले रही थी,,,,यह बेहद अविश्वसनीय कार्य था जिस पर राजू को भी यकीन नहीं हो रहा था इसलिए तो वह अपने हाथों की कोहनी का सहारा देकर अपना सिर उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच देख रहा था,,,,,,, क्योंकि उसके लिए यकीन कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था,,,,,,जो अच्छी तरह से जानता था कि उसके लंड की मोटाई और लंबाई दूसरों से कुछ ज्यादा ही थी,,,,लेकिन जो उसकी आंखों ने देखा था उस पर यकीन कर पाना मुश्किल था गुलाबी बड़े आराम से उसके मोटे तगड़े लंबे मुसल को अपने गले तक उतार कर चूस रही थी हालांकि रह-रहकर उसकी सांसे अटक जाती थी लेकिन फिर भी वह इस मजे को छोड़ना नहीं चाहती थी क्योंकि गले तक ले जाकर उसे चूसने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,,,,

Gulabi ki maadak adaa



गुलाबी की अविश्वसनीय कार्य क्षमता को देखकर राजू अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा उसके तन बदन में आग लगने लगी और वह हल्के रंग के नीचे से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाने लगा मानो कि जैसे वह नीचे से ही उसके मुंह को चोद रहा हो,,,, मदहोशी के आनंद के सागर में डूबते हुए राजू की आंखें मुंदने लगी थी उसे असीम सुख की प्राप्ति हो रही थी,,, ऐसा सुख वह कभी नहीं प्राप्त किया था,,,, अद्भुत आनंद के सागर में राजु और गुलाबी दोनों डुबते चले जा रहे थे,,,, गुलाबी को यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी वह अपनी आंखों से देखती आ रही थी वही क्रिया को वह खुद करेगी,,,, लेकिन यह सपना नहीं हकीकत ही था उसकी सोच से भी कहीं ज्यादा उत्तेजक और मनमोहक,,,, गुलाबी अपने ख्यालों को अंजाम दे रही थी अपनी भैया और भाभी की,,, अद्भुत संभोग लीला को देखकर वह अक्सर कल्पना की दुनिया में खो जाती थी और उसकी कल्पना की दुनिया का राजकुमार कोई और ही होता था लेकिन वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके जीवन में आने वाला पहला मर्द पहला राजकुमार उसका सगा भतीजा होगा जो उसे इस अद्भुत शुक्र की दुनिया में ले जाकर आनंद के सागर में डुबकी लगवाएगा,,,,।

Soni ki gadraayi gaand



राजू मस्ती से बंद आंखों को खोल कर बार-बार अपनी दोनों टांगों के बीच देख ले रहा था जहां पर गुलाबी अपनी पूरी जवानी बिखेर कर उस पर छाई हुई थी,,,,ऐसा लग रहा था कि मानो आज गुलाबी सावन की घटा बन गई थी और उसके ऊपर बरस रही थी,,, गुलाबी रुपी सावन की बौछार में,,, राजीव का पूरा वजूद भीग रहा था डूब रहा था और उसे ढूंढने में भी मजा आ रहा था भला ऐसा कौन सा दर्द होगा जो खूबसूरत जवानी के सागर में डूब ना ना चाहता हो,,,



सपर ,,,सपर,,,,की आवाज के साथ गुलाबी बड़े मजे लेकर राजू के लंड कै सुपाडे को चाट रही थी,,,, ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे कोई उसकी पसंदीदा चीज उसके हाथ लग गई हो,,,, और उसे जी जान से प्यार करने में लगी हो,,,,,,

ओहहहह ,,,, बुआ तुम कितना अच्छा कर रही हो मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि ऐसा भी किया जाता है,,,,

कल भी तो मुंह में ली थी,,,,(गुलाबी अपनी मुंह में से राजु के लंड को बाहर निकाल कर बोली,,, और इतना बोलने के साथ ही वापस फिर से मुंह के अंदर गटक ली,,,)



हां बुआ,,, लेकिन कल से ज्यादा आज मजा आ रहा है,,,ओहहहह बुआ बहुत अच्छे हैं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी हथेली को अपनी बुआ के सर पर रख दिया और उसे हल्के -हल्के अपने लंड पर दबाने लगा,,,,,,) सहहहहह ,,,,आहहहहहहह,,,,,ऊफफफ,,,,,ऊमममममममम,,,,

(राजू को बहुत मजा आ रहा था उसके मुंह से सिसकारी की आवाज फूट नहीं थी जो कि बयां कर रही थी कि उसे कितना मजा आ रहा है गुलाबी थी कि राजू के लंड को छोड़ने का नाम नहीं ले रही थी उसे लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था,,,,, राजू को इस बात का डर था कि कहीं उसका पानी ना निकल जाए क्योंकि गुलाबी की नरम नरम जीभ लंड को और ज्यादा गर्म कर रही थी,,,, पर इसीलिए उसे इस बात का डर था कि गर्माहट पाकर कहीं उसका लंड पिघल ना जाए,,,, राजू का समूचा गुलाबी कि थुक और लार से पूरी तरह से सन गया था,,,,,,,

अत्यधिक उत्तेजना का असर राजू और गुलाबी दोनों के बदन पर दिखाई दे रहा था वैसे भी गर्मी का महीना था और ऐसे गर्मी के महीने में गुलाबी की गर्म जवानी और ज्यादा भौकाल मार रही थी,,,, राजीव के माथे पर पसीने की बूंदें उपसने लगी थी,,,,,लालटेन की पीली रोशनी में पूरा कमरा जगमगा रहा था सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,, बुआ और भतीजा पहली बार में ही इतनी ज्यादा खुल जाएंगे यह दोनों के लिएगजब ही था क्योंकि वह दोनों कभी सपने में भी नहीं सोचे थे कि इस तरह से पवित्र रिश्ता के बीच उन दोनों को संभोग सुख का आनंद मिलेगा,,,,

गुलाबी अपने लाल-लाल होठों को राजू के लंड की गोलाई पर कसी हुई थी जिसे राजू को अपना लंड उसके मुंह में अंदर बाहर करने में बुर का ही मजा मिल रहा था,,,। बड़े आराम से मध्यम गति से राजू अपनी कमर को ऊपर नीचे कर रहा था उसे ऐसा करने का बहुत मजा आ रहा था,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहे गुलाबी की बुर पानी पानी हो रही थी,,,,,,, उसकी बुर कुल बुला रही थी वह चाहती थी कि राजू भी जिस तरह से उसने उसके लंड की सेवा करी है उसी तरह से वह भी उसकी बुर की सेवा करें उसकी खातिरदारी करें ताकि बुर उसे अद्भुत सुख दे,,,,।

यही सोचकर वह राजू के लंड को मुंह में से बाहर निकाल दी,,, और राजू का लंड पूरी तरह से थुक में सना हुआ पकक की आवाज के साथ बाहर आ गया,,,, गुलाबी की जीभ और मुंह की गर्माहट भाप बनकर राजू के लंड से उठ रही थी,,,, गुलाबी के साथ खड़ी हुई थी इसलिए वह वहीं बैठे बैठे अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुए राजू की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी दोनों के बीच विवाह और भतीजे वाला पवित्र रिश्ता बिल्कुल भी नहीं रह गया था यह रिश्ता पूरी तरह से खत्म हो चुका था और वह दोनों अब केवल एक मर्द औरत ही थे जिनके बीच केवल संभोग का ही रिश्ता रहता है,,, और वह दोनों इस रिश्ते से खुश भी दे।

गुलाबी अपने होठों पर लगे थुक को अपने दुपट्टे से साफ करते हुए बोली,,,,।

कैसा लगा राजू,,,,

पूछो मत बुआ बहुत मजा आया,,,,ईतना मजा कि मैं बता नहीं सकता कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतना मजा आएगा,,,,(गहरी गहरी सांस लेते हुए राजू बोला और उसकी बातें सुनकर गुलाबी को भी संतुष्टि हुई वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, )

अब तो एक जो मैं तेरे साथ की हूं तुझे भी वही मेरे साथ करना होगा मेरी बुर चाट ना होगा और वह भी एक दम मजे लेकर,,,,

ठीक है दुआ मैं भी वही करूंगा जो तुम मेरे साथ की थी,,,

बहुत समझदार है,,,(इतना कहकर वह मुस्कुराने लगी और उठ कर खड़ी हो गई तभी बगल वाले कमरे से आवाज आई,,,)

आहहहहहह,,,,

इस कराहने की आवाज को सुनते ही,,, गुलाबी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए राजू से बोली,,,,।

लगता है तेरी मां की बुर में भैया का लंड घुस गया है,,,।

(यह बात सुनकर राजू भी मुस्कुरा दिया क्योंकि उसे भी अपनी मां की कराहने की आवाज साफ सुनाई दी थी,,, और जिस तरह की आवाज उसके कानों में पड़ी थी उसे भी एहसास था कि जरूर उसके पिताजी का लंड उसकी मां की बुर में घुस गया होगा,,,, लेकिन आप छोटे से छेद से उन दोनों की दुनिया को झांकने का कोई मतलब नहीं था क्योंकि उन दोनों ने खुद अपनी दुनिया में ही उस तरह की मस्ती का इंतजाम कर लिया था,,,,अपनी आंखों के सामने मदहोश कर देने वाली जवानी से भरपुर गुलाबी खड़ी थी जो कि उसके साथ सब कुछ कर रही थी फिर भी पल भर में ही आहहहह की आवाज के साथ ही उसके जेहन में उसकी मां का नंगा बदन नाचने लगा वह सबकुछ नजर आने लगा तो उसने छोटे से छेद से देखा था,,,उसकी मां की मदमस्त कर देने वाली अंगड़ाई उसकी छेड़खानी अपने हाथों से अपने कपड़े उतार कर नंगी होना उसकी बड़ी बड़ी गांड,,, उसकी रसीली बुर और बुर में अंदर बाहर होता हुआ उसके पिताजी का लंड,,,, यह सब याद करते हैं राजू का लंड और ज्यादा कड़क हो गया ना जाने क्यों उसे इस बात का एहसास नहीं होता था कि जब जब वह अपनी मां के बारे में कल्पना करता था उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर कुछ ज्यादा ही उफान मारने लगती थी,,,,,इसीलिए वह अपने लंड को पकड़ कर हीलाना शुरू कर दिया था और पास में खड़ी गुलाबी राजू की तरफ देखते हुए अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी थी यह राजू के लिए अद्भुत था,,,, कुछ ही दिनों में वह यह समझ गया था कि औरतों का इस तरह से अपने हाथ से कपड़े उतारते हुए देखने में कितना मजा आता है इसलिए गुलाबी का इस तरह से अपनी सलवार की डोरी खोलते हुए देखने में उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,, अगले ही पल गुलाबी अपनी नाजुक उंगलियों का कमाल दिखाते हुए अपने सलवार की डोरी को उसकी गिठान को खोल दी और उसे उसी स्थिति में अपने हाथ से छोड़ दी और उसकी सलवार भरभरा कर नीचे उसके कदमों में जा गिरी और उसकी घटना से नीचे उसकी नजर आने लगी हालांकि साल बाद फ्री होने की वजह से अभी तक उसका बेशकीमती खजाना नजर नही आया था,,,। राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था अपनी बुआ की बुर अपनी आंखों से देखने के बावजूद उसे प्यार करने के बावजूद उसने अपना लंड डालकर चुदाई करने के बावजूद भी उसे एक बार फिर से नंगी देखने के लिए उसका मन तड़प रहा था,,,,,

गुलाबी उसकी तड़प को खत्म करते हुए अपनी कुर्ती को पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,जैसे-जैसे अपनी कुर्ती के ऊपर की तरफ उठा रही थी वैसे कैसे राजू के डिप्टी घर के अंदर की जा रही थी और वह अपनी धड़कन को संभालना पाने की स्थिति में खटिया पर उठ कर बैठ गया और गुलाबी की गुलाबी हरकतों को देखने लगा उसका बदन एक अंतर आशा हुआ था चर्बी का नामोनिशान नहीं था बेहद खूबसूरत गोरा रंग पतली कमर सुडोल चिकनी चाहे जिसे देखकर किसी का भी इमान फिसल जाए,,,,, देखते-देखते गुलाबी कुर्ती को अपनी छातियों तक उठा दी जिससे उसकी दोनों नारंगीया एकदम साफ नजर आने लगी जिसे देखते ही राजू के मुंह में पानी आ गया और गुलाबी अपनी कुर्ती को अपने सिर से बाहर निकाल पाती इससे पहले ही राजू खटिया पर से उठ कर खड़ा हो गया और तुरंत उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से काम कर अपने प्यासे होठों को उसकी चूची पर रख कर उसकी निप्पल को चुसना शुरु कर दिया,,,,,,, जिस आवेश और उत्तेजनात्मक स्थिति से राजू जल्दी से उठ कर उसकी कमर पकड़कर उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरु किया था उसी से गुलाबी के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,,, आनंद की अद्भुत अनुभूति में वह पूरी तरह से देखने लगी और वह तुरंत अपनी कुर्सी को उतार कर नीचे फेंक दी और अपने भतीजे की आंखों के सामने एकदम मादरजात नंगी हो गई,,,,,, राजू के घुटनों में अभी तक उसका पैजामा फंसा हुआ था,,, जिसे निकालने तक की सुध उसके अंदर नहीं थी,,,,पागलों की तरह गुलाबी की दोनों चुचियों का मजा लेते हुए उसे बारी-बारी से पी रहा था और गुलाबी उसे रोक नहीं रही थी क्योंकि उसे भी बहुत मजा आ रहा था,,,, रह रहकर राजू इतनी जोर से उसकी चूचियों को दबाता की गुलाबी के मुंह से कराहने की आवाज निकल जाती थीलेकिन फिर भी वह उसे रोक नहीं रही थी क्योंकि उसे इस तरह से और ज्यादा मजा आ रहा था,,,,राजू पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाते हुए अपने लोगों की सूची से खेल रहा था हालांकि उसकी चुची बड़ी-बड़ी तो बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन इतने व्यस्त थी नारंगी के आकार की जो कि अभी अभी किसी दूसरों के हाथ में जाना शुरू हुई थी और वह भी उसके खुद के सगे भतीजे के हाथों में और उसके भतीजे के हाथों में उसके बदन में दम बहुत था और वह पूरा दम ऐसा लग रहा था कि जैसे अपनी बुआ की चुचियों पर ही उतार देना चाहता हो,,, वह बड़ी बेरहमी के साथ अपनी बुआ की चूचियों को मसलते हुए आनंद ले रहा था,,,,,

आहहहहह,,,,सईईईईईईईईई,,,,ऊमममममममम,,,राजु,,,,,आहहहहहह,,, दांत से नहीं,,,,, दर्द होता है,,,,,आहहहहहह फिर से काटा,,,,,

क्या करू बुआ तुम्हारी चुचियों के साथ खेलने में बहुत मजा आ रहा है,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह वापस उसे अपने मुंह में भर लिया,,,, तो फिर से चूसना शुरू कर दिया गुलाबी इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि खड़े-खड़े ही उसकी बुर से पानी नीचे जमीन पर चु रहा था,,, बार-बार उसकी बुर की कटोरी पानी से डुब जा रही थी जो कि उसकी पत्नी दरार से बाहर निकल कर जमीन को गिला कर रही थी,,,,, राजू के दोनों हाथ गुलाबी की चूचियों पर व्यस्त थे और गुलाबी अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर हल्के हल्के दबा रही थी जिस तरह के दर्द का अनुभव गुलाबी अपनी चुचियों पर करके मस्त हो रही थी उसी तरह के दर्द का अनुभव राजू अपने लंड पर करके मस्त हुआ जा रहा था दोनों किसी भी तरह से कम नहीं थे दोनों एक दूसरे के अंगों से बराबर मजा ले रहे थे,,,,,पल-पल दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था,,,,,

हरिया और मधु को तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि उनके पीठ पीछे उनके बगल वाले कमरे में उनका बेटा अपनी ही बुआ के खूबसूरत बदन से खेल रहा है और उसकी बुआ भी मजे ले कर अपने भतीजे को इस लीला में शामिल करके मदहोशी के सागर में डूबोए लेकर चली जा रही हैं,,,,,, बुआ और भतीजा के बीच का पवित्र रिश्ता तार-तार हो रहा था लेकिन इस रिश्ते के तार तार होने में ना तो बुआ को कोई अफसोस था और ना ही राजू को ऐतराज,,,, दोनों अपनी अपनी रजामंदी सहमति और जिस्म की जरूरत के हिसाब से आगे बढ़ रहे थे,,,,,

जिस तरह से गुलाबी की बुर पानी छोड़ रही थी गुलाबी का मन मचल रहा था उसे राजू के होठों पर लगाने के लिए वह चाहती थी कि राजू अपनी जीभ अंदर तक डालकर उसकी मलाई को चाटे,,, लेकिन वह कुछ बोलती से पहले ही राजू उसकी दोनों कबूतरों को छोड़कर खटिया के पाटी पर बैठ गया और अपने दोनों हथेली को उसकी गांड पर पीछे की तरफ रखकर उसे जोर से दबाते हुए उसकी बुर को अपने होठों से लगा दिया यह अंदाज राजू का इतना कामरूप था कि इसकी मादकता में गुलाबी अपने आप को संभाल नहीं पाई और राजू का होठ बुर पर लगते ही भला भला कर वह झढ़ने लगी,,,,, यह एहसास गुलाबी के लिए बहुत ही खास था उसे अंदाजा नहीं था कि वह पल भर में ही झड़ जाएगी,

राजू की कामुक हरकत उसे पूरी तरह से मदहोश कर गई थी,,, गुलाबी की गुलाबी बुर की पतली दरार में से मदनरस का सैलाब बह रहा था,,, लेकिन राजू अपने होठों को पीछे नहीं हटाया था वह कार्यरत होते हुए अपनी जीभ को उसके गुलाबी जीभ के अंदर डाल कर चाटना शुरू कर दिया,,,, यह कार्य उसने अपने ही पिता जी से सीखा था उसके पिताजी भी इसी तरह से खटिया के पाटी पर बैठकर उसकी मां की बुर चाट रहे थे,,,। और इसी क्रिया को वह अपनी बुआ गुलाबी के साथ दोहरा रहा था,,,, पल भर में भी गुलाबी दोनों से गर्म सिसकारी की आवाज फुटने लगी लेकिन गुलाबी मधु की तरह बे परवाह नहीं थी वह सतरकर थी वह जानती थी कि अगर वह जोर से आवाज करेगी तो बगल वाले कमरे में उसकी आवाज सुनाई देगी और उसके भैया और भाभी इस तरह की आवाज से भलीभांति परिचित है और वह नहीं चाहती थी कि इस तरह की आवाज इन दोनों के कानों में पड़े इसलिए वह अपनी उत्तेजना के शोर को दबाने की पूरी कोशिश कर रही थी,,,, लगभग लगभग कामयाब भी होती नजर आ रही थी वह अपनी उत्तेजना को दबाने के लिए राजू के सर पर दोनों हाथ रख कर उसके बालों को अपनी मुट्ठी में भिंचते हुए जोर-जोर से उसकी होंठों पर अपनी बुर को रगड़ रही थी,,,और राजू भी पागलों की तरह जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ अंदर डालकर उसकी मनाई को चाट रहा था कसैला स्वाद भी उसे दशहरी आम के रस की तरह मधुर लग रहा था,,,।

ओहहहहह राजू मेरे राजा,,,,सईईईईईईई,,,,आहहहहहह,,,, बहुत मजा आ रहा है,,,,,ऊफफफ तेरी जीभ तो पूरा कमाल दिखा रही है,,,, तेरी जीभ में जादू है,,,आहहहहहहह,,, ऐसे ही जोर जोर से पूरा अंदर डाल कर चाट,,,,,,(गुलाबी गरम सिसकारी की आवाज के साथ ऐसा बोलते हैं अपनी मत मस्त गांड को अपनी कमर को गांड को घुमा रही थी और राजू उसके नितंबों की दोनों फांकों को जोर से अपनी दोनों मुट्ठी में दबाए हुए था,,, जोर मसलते हुए उसकी बुर चाटने का मजा ले रहा था,,,,, गुलाबी की हालत खराब होती जा रही थी,,,, जब-जब राजू पूरा जोर लगा कर अपनी जीभ को गुलाबी की गुलाबी बुर के अंदर उतारता तब तक गुलाबी का पूरा बदन कांप उठता था,,,,गुलाबी को भी करने लगा था कि उसकी ही तरह उसका भतीजा भी धीरे-धीरे सब कुछ सीख रहा है आज वह बड़े अच्छे से उसकी बुर की चटाई कर रहा था,,,, गुलाबी उन्माद भरी सांसे ले रही थी साथ ही उसकी छोटी-छोटी नारंगिया ऊपर नीचे हो रही थी जिसे वह खुद ही रह रह कर अपने हाथ से दबा देती थी,,,, गुलाबी अपने बदन में अतिथि को तहसीना कंट्रोल कर रही थी क्योंकि राजू की हरकत की वजह से उसकी दोनों टांगों के बीच बेहद कंपन हो रही थी उस ऐसा लग रहा था कि वह कभी भी गिर जाएगी,,, वह तो अच्छा था कि राजू ने पूरी ताकत के साथ उसे अपनी हथेली से जकड़ रखा था उसकी नरम नरम गांड से खेलते हुए राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, राजू का लंड उबाल मार रहा था

गुलाबी की हथेली की गर्माहट पाकर वह और ज्यादा गर्म हुआ जा रहा था,,,,।

आहहहहह राजु,,,, मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा मेरी बुर में खुजली हो रही है,,,,(वह इतना कह ही रही थी कि राजू अपनी बीच वाली उंगली धीरे से उसकी बुर के अंदर प्रवेश करा दिया जिसकी वजह से गुलाबी के सब्र का बांध अब टूटने लगा,,,, राजू को तो उसकी बुर चाटने का बहुत मजा आ रहा था ,,,उसका भी मन अपने लंड को उसकी बुर में डालने को कर रहा था लेकिन इस समय उसका इरादा कुछ और था वह गुलाबी कि बुर में पूरी तरह से जुट चुका था,,,,,) आहहहहह राजू तुम्हारे बदन में आग लगा रखा है उंगली नहीं बेटा अपना लंड डाल मुझे तेरे मोटे लंड की जरूरत है उंगली से मेरी प्यास बुझने वाली नहीं है,,,, डाल दें,,, अपने लंड को मेरी बुर में ओहहहहह मेरे राजा क्यों तड़पा रहा है मुझे,,,,आहहहहहहह,,,,(उसके कहते-कहते राजू बार-बार अपनी जीभ को उसकी दिल की गहराई में डालकर तोहार निकाल ले रहा था जिसकी वजह से उसके बदन की आग और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, अब उससे सहन कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था,,,, वह राजू के कंधों को पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,,।

राजू का मन बिल्कुल भी नहीं था वह तो ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखों के सामने खीर से भरी हुई कटोरी रखी हुई है,,, और वह उसे झपट जाना चाहता है इसलिए वह बुर रुपी खीर की कटोरी छोड़ना नहीं चाहता था,,,, फिर भी अपनी बुआ की जरूरत का सम्मान करते हुए उसे उठना ही पड़ा,,, दोनों के तन बदन में आग लगी हुई थी और यह आग दोनों के अंगों से निकले मदन रस से ही बुझने वाली थी,,,, इसलिए राजू वासना और खुमारी भरी नजरों से अपनी बुआ के खूबसूरत चेहरे को देखने लगा गुलाबी भी उसकी आंखों में डूबने लगी,,, राजू अपने प्यासे होठों को आगे बढ़ाने लगा गुलाबी भी अपने तपते हुए होठों को आगे कर दी और देखते ही देखते दोनों एक दूसरे को प्रधान चुंबन करने लगे और राजू अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर उसकी गांड को जोर से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया गांड दबाने का सुख उसे पूरी तरह से सम्मोहित किया जा रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजना के साथ में डूबते तो नहीं जा रहा था और उसकी यादों को और ज्यादा बढ़ाते हुए गुलाबी अपना एक हाथ नीचे की तरफ लाकरउसके लंड को पकड़ लिया और उसके सुपाड़े को अपनी गुलाबी बुर की दरार में रगड़ने लगी यह हरकत राजू की तन बदन में आग लगाने लगा,,,, गुलाबी की प्यास और ज्यादा बढ़ने लगी थी वह बार-बार खड़े-खड़े ही राजू के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर ही अपनी बुर में डालने की कोशिश कर रही थी लेकिन इस तरह से खड़े खड़े शायद अंदर घुस पाना संभव नहीं था,,,, और राजू अपनी बुआ को इस तरह से तड़पता हुआ नहीं देख सकता था,,,,।

राजू की भुजाएं बलिष्ठ थी उसका बदन ताकत से भरा हुआ था इसलिए वह अपनी बुआ की गांड को जोर-जोर से दबाते हुए उसे अपनी गोद में उठा लिया उसका पैजामा अभी भी घुटनों में टिका हुआ था इसलिए वह पैर के ही सहारे से उसे बाहर निकाल कर फेंक दिया,,,, अब दोनों कमरे में एकदम नंगे थे गुलाबी के बदन पर कपड़े का रेशा भी नहीं था और यही हाल राजू का भी था,,, संभोग के खेल को खेलने के लिए शायद यही अवस्था ठीक रहती है,,,, गुलाबी एकदम हैरान थी क्योंकि उसका भतीजा उसे गोद में उठा लिया था उसकी ताकत को उसकी बलिष्ठ भुजाओं को देखकर वह पूरी तरह से अपने भतीजे पर मोहित हो गई अपनी जवानी को उसके पैरों में समर्पित कर दी थी जिस का सही उपयोग करते हुए राजु गोद में उठाए हुए ही,,,, एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को थाम कर अपने लंड कै सुपाडे को गुलाबी छेद में डालने की कोशिश करने लगा और जल्द ही उसे गुलाबी का गुलाबी छेद मिल गया जो की पूरी तरह से गिला था,,,, अब देर करना नामुमकिन था राजू के बदन में उत्तेजना बढ़ती जा रही थी पर वह धीरे-धीरे अपने लंड को अपनी ‌बुआ की बुर में डालना शुरू कर दिया,,,।

राजु अपनी बुआ को गोद में उठा कर चुदाई करता हुआ





गुलाबी को तो यकीन नहीं हो रहा था जिस आसान में वह उसकी चुदाई करने जा रहा था इस आसन के बारे में वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी,,,,,, और ना ही कभी अपने भैया भाभी को इस अवस्था में देखी थी,,,इसलिए यह आसन उसके समझ के बिल्कुल पर ही था वैसे तो यह आसन के बारे में राजू भी नहीं जानता था लेकिन उत्तेजना के मारे उसे रहा नहीं जा रहा था और अपनी बुआ को गोद में उठा दिया था तब अचानक ही उसके मन में ख्याल आया था कि इस तरह से भी उसका लंड उसकी बुर में डाला जा सकता है,,,,और वहां प्रयास करना शुरू कर दिया था जिसमें उसे कामयाबी प्राप्त हो चुकी थी देखते ही देखते अपनी बुआ को अपनी भुजाओं के बल पर गोद में उठाए हुए वह अपने संपूर्ण लंड को अपनी बुआ की बुर की गहराई में डाल चुका था,,,,, गुलाबी की उत्तेजना के मारे सांस अटक रही थी उसके लिए यह सब आश्चर्यजनक था वह तो खटिया पर लेट कर चुदवाना चाहती थी लेकिन इस समय वह अपने भतीजे के गोद में थी जो कि बिना परेशानी के बड़े आराम से उसे अपनी गोद में उठाए हुए था और धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,,।

आहहहहह ,,,,, राजू मुझे गिरा मत देना,,,, तु जिस तरह से मुझे चोद रहा है मुझे डर लग रहा है,,,

चिंता मत करो बुआ,,,मैं तुम्हें गिरने नहीं दूंगा लेकिन देखो कितना मजा आ रहा है,,,,आहहहहह आहहहहह दुआ,,,(राजू होने वाली अपनी कमर आगे पीछे करते हुए सिसकारी लेते हुए बोल रहा था,,,)

मुझे भी बहुत मजा आ रहा है बस थोड़ा डर लग रहा है,,,,,

डर लग रहा है,,,,,बुआ,,,,(इतना कहने के साथ ही अपने होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रखकर चूसना शुरू कर दिया ऐसा करके,,, वह अपनी बुआ के मुंह को और उसके प्यार को खत्म करना चाहता था और उसकी बुआ को भी मजा आने लगा है गुलाबी अपनी बुर की गहराई में अपने भतीजे के लंड को महसूस कर रही थी यह आसन में उसे ज्यादा ही मजा आ रहा था,,,,, राजू गुलाबी को झूला झूलाते हुए चोद रहा था,,,,।

अद्भुत संभोग की कामलीला दोनों बुआ और भतीजे खेल रहे थे दोनों को अत्यधिक मजा आ रहा था दोनों ने कभी सपने में नहीं सोचा था कि उन दोनों के बीच इस तरह से शारीरिक संबंध बन जाएगा जिसका आनंद लूटते हुए वह दुनिया को भूल जाएंगे,,,, राजू की रफ्तार बढ़ने लगी थी उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही थी भले ही उसकी बुआ मोटी नहीं थी लेकिन फिर भी वजनदार तो थी ही लेकिन बड़े आराम से वहां उसे अपनी भुजाओं के सहारे उठाए हुए अपनी कमर हिला रहा था,,,, गुलाबी राजू के दम को मान गई थी वह अपने भतीजे के आगे घुटने टेक दी थी,,, फच फच की आवाज से कमरा गूंजने लगा था गुलाबी को इस बात का डर था कि कहीं हम आज बगल वाले कमरे में ना पहुंच जाए,,,,।

दोनों के बीच अभी भी प्रगाढ चुंबन चालू था जिसका दोनों ही आनंद ले रहे थे,,,, गुलाबी की दोनों नारंगीया राजू की छाती से दबी जा रही थी,,,, जिससे राजू का मजा और बढ़ जा रहा था,,,,,राजू अपनी बुआ को और तेजी से चोदना चाह रहा था लेकिन इस आसन में संभव नहीं हो पा रहा था वह कितना भी कोशिश करता था 15,,,,,,,,20 धक्कों के बाद शांत हो जाता था,,,,, वह समझ गया था कि जबरदस्त चुदाई करने के लिए उसे उसकी बुआ को खटिया पर ले जाना ही होगा,,,,लेकिन वहां अपनी दूंगा को अपने से अलग नहीं होने देना चाहता था क्योंकि उसका लैंड बार-बार उसकी बुर की गहराई नाप रहा था बार-बार उसकी बुर की गहराई को चूम ले रहा था उसके बच्चेदानी का चुंबन पाते ही उसकी ताकत और ज्यादा बढ़ जा रही थी इसलिए वह अपनी गोदी में उठा धीरे-धीरे खटीए तरफ बढ़ने लगा,,,

अब तो गुलाबी और ज्यादा हैरान होने लगी क्योंकि वह उसे गोद में उठाए हुए चल रहा था और बड़े आराम से चल रहा था जरा सा भी झुक नहीं रहा था बल्कि उसे खुद डर लग रहा था,,,, लेकिन जवानी के जोश में बहुत ताकत होती है यही राजू को जब उसकी मां आलू से भरे हुए बोरे उठा कर घर ले जाने के लिए कहती थी तो उसे उठता नहीं था,,, और उसे हमेशा पूरा उठाने के लिए अपनी बुआ का सहारा लेना पड़ता था लेकिन आज बिना सहारे के खुद ही वह अपनी बुआ को उठाकर उसकी चुदाई कर रहा था,,,।

देखते ही देखते वह अपनी बुआ की बुर में लंड डाले हुए ही उसे खटिया पर लेटा दिया,,,और उसकी दोनों टांगों को थोड़ा सा खिला कर अपने लिए और अच्छे से जगह बनाकर अपनी कमर लेना शुरू कर दिया देखते ही देखते उसकी कमर की रफ्तार बढ़ने लगी उसका मोटा तगड़ा लंड गुलाबी कि बुर,,, में बड़ी तेजी से अंदर बाहर होने लगा ,,, राजू ताबड़तोड़ अपनी बुआ की चुदाई करना शुरू कर दिया गुलाबी की बुर से फच फच की आवाज के साथ खटिया की चरर मरर कर रही थी,,,,, जिसकी आवाज को सुनकर गुलाबी बोली,,,,।

ओहहहहहह,,,, तेरे धक्कों से कहीं खटिया टूट न जाए थोड़ा आराम से धक्का मार,,,,

नहीं पूरा धीरे-धीरे चोदने का मजा नहीं आता मजा तो जोर जोर से चोदने में आता है और मुझे भी पूरा विश्वास है कि तुम्हें भी जोर-जोर से चुदवाने में हीं मजा आता, है,,,।

हारे तो ठीक कह रहा है जब-जब तू तेजी से अपने लंड को अंदर बाहर करते हैं मुझे कुछ कुछ होने लगता है बहुत मजा आता है,,,।

फिर क्या हुआ टूट जाने दो खटिया,,,, लेकिन यह मजा कम नहीं होना चाहिए,,,,(इतना कहने के साथ ही राजूगुलाबी की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और अपनी कमर को जोर-जोर से ही लाना शुरू कर दिया,,,, गुलाबी पूरी तरह से ध्वस्त हुए जा रही थी,,,गुलाबी अपने भतीजे के अद्भुत पर आकर मैं को देख कर हैरान हो जा रही थी वह पूरी तरह से उसके आकर्षक में खुद ही चली जा रही थी उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि कोई इतनी देर भी चुराई कर सकता है क्योंकि वह अपने भैया को अपनी भाभी की चुदाई करते हुए रोज देखा करती थी लेकिन इतनी देर तक उसका भाई टिकता नहीं था लेकिन राजु बिना थके बिना हारे ढका हुआ था,,,, इस अद्भुत चुदाई से वह खुद दो बार झड़ चुकी थी,,,,

फच फच की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था,,,, अंधेरी रात में कमरे के अंदर लालटेन अपनी रोशनी बिखेरे हुए था,,,, और उसकी पीली रोशनी में गुलाबी अपने भतीजे के साथ काम क्रीड़ा कर रही थी,,,।

ओहहहह ,,, बुआ तुम्हारी बुर कितनी गरम है मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,

raju apni bua ko god me utha k



मुझे भी बहुत मजा आ रहा है,,,, और जोर से धक्के लगा चोद मुझे,,, फाड़ दे मेरी बुर,,, आहहहहह राजू मेरे राजा,,,,(इतना कहने के साथ गुलाबी अपनी दोनों हथेली को राजू की गांड पर रखकर उसे जोर जोर से दबाने लगी वह काफी उत्तेजित थी और उसकी उत्तेजना को देखकर राजू की भी उत्तेजना बढ़ने लगी थी और वह जोर जोर से धक्के लगाते हुए बोला,,,)

और बुआ मेरी रानी आज तो तुम्हें मस्त कर दूंगा आज तुम्हारी जुदाई करके तुम्हें जन्नत का मज़ा दूंगा आज देखना कितना मजा आता है तुम्हें,,,,ओहहहह बुआ,,,।

(फिर क्या था अब राजीव को रोक पाना किसी के बस में नहीं था राजू बड़ी जोर से बड़ी तेजी से अपनी कमर हिला रहा था उसका लंड बार-बार उसके बच्चेदानी से टकरा जा रहा था जिससे उसका मजा दुगुना होता जा रहा था,,,,, देखते ही देखते कुछ देर बाद दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगे दोनों अपने अपने मंजिल के करीब थे दोनों अपनी मंजिल पर पहुंचने वाली थी चरम सुख की तरफ बढ़ते हुए दोनों एक दूसरे को संपूर्ण सुख देने की भरपूर कोशिश कर रहे थे राजू बार-बार तभी उसके होंठों को चूसना तो कभी उसकी दोनों चूचियों को दबाने लगता है तो कभी दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पीना शुरु कर देता राजू किसी भी तरह से गुलाबी को छोड़ नहीं रहा था वह हर तरह से एक गुलाबी को मजा देना चाहता था और खुद भी आनंद के सागर में डूब ना चाहता,,, था,,, गुलाबी को राजू की चुदाई अविश्वसनीय लग रही थी किसी भी तरह से राजू हार मानने वाला नहीं था,,,,,,गुलाबी को भी ऐसे ही योद्धा की जरूरत थी जो किसी के भी सामने हार ना माने बस मैदान में डटा रहे,,,,,

Raghu apni bua ki chudai karta hua



और देखते ही देखते दोनों का बदन अकड़ ने लगा,,,राजू तुरंत अपना दोनों हाथ उसके पीछे ले जाकर उसे कसके अपनी बाहों में भर लिया,,,और जोर जोर से धक्के लगाने लगा और अगले ही पल ,,,गुलाबी के नाजुक अंग से और राज्यों के कड़क अंग्रेजों की एक दूसरे में समाने की पूरी कोशिश कर रहे थे दोनों से गर्म लावा फूट पड़ा दोनों चढ़ चुके थे राजू के लंड से निकली पिचकारी गुलाबी के बच्चेदानी को पूरी तरह से भिगो रही थी जिसका अनुभव उसे किसी और ही दुनिया में लिए जा रहा था,,,

दोनों एक दूसरे की बाहों में हांफने लगे,,,,,राजू अपनी बुआ को कुछ करते हुए उसके गाल पर उसके माथे पर उसके होठों पर चुंबन करने लगा और गुलाबी उसे सांत्वना देते हुए उसकी ताकत को सम्मान देते हुए उसकी पीठ को सहला रही थी,,,, दोनों गहरी गहरी सांसे ले रहे थे,,,,

Subah subah Gulabi kuch is tarah se



दोनों की यह संभोग लीला अद्भुत थी अविश्वसनीय अतुलनीय,,, जिसकी तुलना कर पाना शायद नामुमकिन था,,,, दोनों तृप्त होकर एक दूसरे की बाहों में गहरी नींद में सो गए सुबह जब नींद खुली तो राजू का लंड,, गुलाबी की गांड के बीचो बीच फंसा हुआ था जिसमें सामान्य तौर पर सुबह के समय कड़क पन बहुत ज्यादा था गुलाबी अपनी आंखों को मलते हुए उठी तोअपने भतीजे के कड़क लंड को अपनी गांड के बीचो बीच महसूस करके एक बार फिर से उत्तेजित हो गई,,,, राजू की आंखों में अभी भी नींद छाई हुई थी,,,, वह ऊठने की कोशिश कर रहा था लेकिन नींद नहीं उसे अपनी आगोश में जकड़े हुई थी,,,, गुलाबी जानती थी कि अभी सुबह होने में कुछ समय बाकी है उसके भैया भाभी भी अभी सो रहे होंगे इसलिए वह इस मौके का फायदा उठाना चाहती थी और राजू को भी नजर आए उसे पीठ के बल कर दी और उसके खड़े लंड पर अपनी दोनों टांगों को उसके कमर के इर्द-गिर्द रखकर,,, अपना हाथ नीचे की तरफ ले गई औरउसके लंड को पकड़ कर उसके सुपाडे को अपनी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर टिका दी,,,, एक बार फिर से गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो गई और वह धीरे-धीरे अपनी गांड का दबाव,,, राजु के लंड पर बढ़ाने लगी गुलाबी की बुर अभी भी पनीयाई हुई थी इसलिए राजू का लंड बड़े आराम से सरकता हुआ अंदर की तरफ जाने लगा,,, अभी तक राजू की नींद पूरी नहीं थी और देखते ही देखते गुलाबी उसके लंड पर बैठकर पूरी तरह से उसके लंड को अपनी बुर के छेद में छुपा ली,,,, गुलाबी को अपनी हरकत पर बेहद उत्तेजना का अनुभव हो रहा था सुबह होने वाली थी उसके भैया भाभी जगने वाले और ऐसे में वह बगल वाले कमरे में अपने भैया के बेटे के साथ रंगरेलियां मना रही थी उसके लंड पर बैठ कर उसकी चुदाई कर‌ रही थी देखते ही देखते गुलाबी राजू के लैंड पर उठक बैठक करने लगी उसे मजा आने लगा और जैसे ही वह आगे की तरफ झुक करअपने भतीजे के कंधों को पकड़ कर अपनी गांड को हिलाना शुरू की वैसे ही राजू की नींद उड़ गई और अपने ऊपर अपनी बुआ को सवार हुआ देखकर वह भी पूरी तरह से जोश में आ गया और अपने हाथ को आगे बढ़ा कर उसकी चूचियों को पकड़ लिया और जोर-जोर से लगाते हुए जितना हो सकता था नीचे से भी धक्के लगाने की कोशिश करने लगा उसकी बुआ जोर-जोर से उसके लंड पर उछालना शुरू कर दी एक बार फिर से दोनों के बीच अद्भुत संभोग देना शुरू हो गई थी राजू नीचे से तो गुलाबी ऊपर से पूरी तरह से छाई हुई थी,,,, देखते ही देखते एक बार फिर से दोनों चरम सुख को प्राप्त करते हुए झड़ गए,,,।

Anumaan lagawo ye dono kon ho sakte he bahot hi jald ye najaara dekhne ko milega

 
गुलाबी के दिन गुलाबी और रात रंगीन होने लगी थी । वह कभी सपने में भी नहीं सोचते कि उसकी जिंदगी में इस तरह से बहार आएगी,,,,,,,रात को जिस तरह से राजू ने उस की चुदाई किया था वह उसे जिंदगी भर याद रहने वाला था उसकी बुर की अंदरूनी नसे अभी भी मीठा मीठा दर्द कर रही थी जिसकी वजह से वह काम करते समय थोड़ा सा लंगड़ा कर चल रही थी,,,,,,, गुलाबी को अपने भतीजे और उसके लंड पर गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि आज तक वह अपने भैया और भाभी की चुदाई देखते आ रही थी लेकिन जिस तरह की चुदाई राजे ने इसकी किया था उस तरह से उसके भैया कभी भी उसकी भाभी की चुदाई नहीं करते थे भले ही उसकी भाभी संतुष्ट हो जाती थी लेकिन जिस तरह की संतुष्टि का अहसास राजू ने घंटों तक चुदाई करके उसे कराया था शायद उसे सुख से उसकी भाभी अभी भी वंचित थी,,,,

Gulabi ki nangi khubsurti



गुलाबी को राजू का लंड की रगड़ अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर साफ महसूस होती थी,,, उसके लंड की मोटाई का एहसास गुलाबी के साथ-साथ उसकी कोमल बुर को भी अच्छी तरह से हो गया,, था,,,। एक तरह से गुलाबी की बुर में राजू के लंड का सांचा बन गया था जो कि उसे बड़े आराम से अंदर बाहर कर लेती थी पहली बार जब गुलाबी ने अपने भतीजे के लैंड के दर्शन किए थे तब उसकी लंबाई और मोटाई को देखकर सिहर उठी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसकी गुलाबी गुलाबी छेद उसके लंड की मोटाई के मामले बहुत छोटा था,,,, खास करके उसके सुपाड़े के मुताबिक तो उसके गुलाबी बुर का छेद बिल्कुल भी नहीं था,,, जिसके बारे में सोच सोच कर ही कुल्हाड़ी घबरा जाती थी हालांकि वह कभी नहीं सोची थी कि वह कभी अपने भतीजे से शुरू आएगी लेकिन फिर भी उसके लंड के सुपाड़े की मोटाई को लेकर उसके मन में हमेशा से आशंका बनी रहती थी लेकिन सारी शंकाओं पर पुणविराम लग चुका था,,,, क्योंकि वह अब बड़े आराम से अपने भतीजे के वही बमपिलाट लंड को अपनी बुर के अंदर गहराई तक ले लेती थी,,,,।

गुलाबी का मादक अंदाज राजू के साथ



रात भर की जबरदस्त घमासान चुदाई के बाद संभोग के प्रकरण के शुरुआती दौर से गुजर रहीगुलाबी अपने भतीजे के लिए उनके जबरजस्त प्रहार को तो जेल गई थी लेकिन उसकी चाल में बदलाव आ गया था वह हल्के हल्के लंगड़ा कर चल रही थी झाड़ू लगाते समय,,,, वह धीरे-धीरे अपना पांव रख रही थी यह देख कर उसकी भाभी बोली,,,।

क्या हुआ गुलाबी रानी आज तुम्हारी चाल बदली बदली क्यों लग रही है,,,,(मधु अपनी कमर पर हाथ रखते हुए बोली मधु का यह रूप औपचारिक रूप से एकदम सरल था लेकिन कामुकता से भरा हुआ था कि ऐसा करने पर उसकी कमर की गहरी लकीर और ज्यादा गहरा जाती थी,,,, उसकी उन्नति चुचीया किसी पहाड़ी की चोटी की तरह आसमान को छूने के लिए लालायित नजर आती थी,,,,अपनी भाभी का यह सवाल सुनकर पहले तो गुलाबी को कुछ समझ में नहीं आया तो वह बोली,,,)

मेरी चाल को क्या हुआ भाभी मेरी तो चाल वैसे ही है जैसे पहले थी,,,,,(झाड़ू लगाते लगाते खड़ी होकर बोली)

लंगड़ा कर चल रही हो इसलिए कह रही हूं,,,,इस तरह से लड़की का तो तभी चलती है जब शादी के बाद उनकी सुहागरात होती है सुहागरात के दूसरे दिन से इसी तरह से चलने लगती हैं,,,,

(गुलाबी को अपनी भाभी की बात समझ में आते ही वह एकदम शर्म से पानी पानी होने लगी क्योंकि जिस राखी उसकी भाभी बात कर रही थी एक तरह से राज्यों के साथ उसकी सुहागरात ही थी क्योंकि रात भर राजू ने जबरदस्ती चुदाई किया था मानो कि जैसे वह उसकी बुआ ना हो करके उसकी बीवी हो,,,, गुलाबी को समझ नहीं आ रहा था कि अपनी भाभी के सवाल का क्या जवाब दें,,,, फिर भी अनजान बनते हुए बोली,,,,)

क्या भाभी सुहागरात के दूसरे दिन लड़किया इसी तरह से चलती है,,,,।

हां जैसा कि तू चल रही है,,,,

मैं माफी चाहती हूं भाभी लेकिन तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं अभी पूरी कुंवारी हूं मेरी शादी नहीं हुई है,,,,।

मैं जानती हूं मेरी गुलाबी रानी लेकिन जिस तरह से तुम लंगड़ा कर चल रही हो मुझे तो ऐसा ही लग रहा है,,,,,,

क्या भाभी सुहागरात से और लंगड़ा का चलने के बीच क्या रिश्ता है,,,(गुलाबी सब कुछ जानती थी फिर भी अनजान बनते हुए बोली,,,क्योंकि वह ऐसा कुछ भी नहीं बोलना चाहती थी जिससे उसकी भाभी को थोड़ा भी शक हो क्योंकि एक जवान लड़का उसके साथ सोता था,,,,)

मेरी गुलाबी रानी,,,, सुहागरात वाली रात को लड़की अपने आदमी से चुदवाती है लड़के का मोटा लंड उसकी बुर में जाकर खलबली मचा देता है,,,, और इसी वजह से पहली बार की चुदाई के बाद लड़की लगड़ा कर चलती है,,,,।

ओहहह यह बात है,,,, लेकिन मेरे मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,(गुलाबी इतराते हुए बोली और वापस झाड़ू लगाने लगी क्योंकि वह अपनी भाभी से नजर मिलाने में शर्म आ रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं जो बात नहीं उसकी जुबान पर लाने से वह डर रही है कि उसकी आंखें बयां ना कर दे,,,,,,,,,)

क्यों तेरे पास बुर नहीं है क्या,,,, खूबसूरत है जवानी किसी का भी दिल मचल जाएगा,,,,

क्या भाभी आप भी कैसी बातें करती हो,,,, मै कभी सोच भी नहीं सकती कि तुम इतनी गंदी-गंदी बातें करती हो,,,,,,

शर्मा रही है मेरी गुलाबी रानी,,,,, लंगड़ा कर चल रही है इसलिए बोल रही हूं,,,,, वैसे भी तु एक जवान लड़के के साथ सोती है,,,,,,, कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम दोनों के बीच

चुदाई का खेल शुरू हो गया हो,,,,(मधु हंसते हुए बोली और गुलाबी की तो हालत खराब हो गई क्योंकि जिस बात का अंदाजा जो कि वह मजाक में ही लगा रही थी लेकिन फिर भी यह मजाक गुलाबी के लिए जानलेवा था उसे कभी भी इस बात की उम्मीद नहीं थी किसकी भाभी राजू को लेकर उसके साथ इस तरह की मजाक करेगी और यह मजाक उसके साथ दूसरी बार हो चुकी थी,,,किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी भाभी के इस सवाल का क्या जवाब दें क्योंकि जिस तरह का अंदाजा लगा रही थी वह सच ही था,,,,,गुलाबी को अपने आप पर गुस्सा आने लगा था क्योंकि वह लग रहा था चल रही थी लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं दी थी,,,, फिर भी जानबूझकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए वह अपनी भाभी से बोली,,,)

क्या भाभी फिर तुम शुरु पड़ गई अपने ही बेटे कोलगाकर इस तरह का मजाक किया अच्छा लगता है तुम क्या राजू को नहीं जानती कितना सीधा साधा है और वह मेरा भतीजा है इस तरह का मजाक के समय भी थोड़ा सोच लिया करिए,,,, ऐसी बातें करके तुम,, गुस्सा दिलाती हो,,, अगर ऐसी बात है तो आज रात से मैं अकेले ही सोऊंगी उसे अपने पास सुला लेना,,,,

(गुलाबी की बात सुनते ही मधु एक दम से हड़बड़ा गई और झट से बोली,,,)

अरे मेरी गुलाबो रानी नाराज हो गई अरे मैं तो मजाक कर रही थी भला मैं अपने ही बेटे को लगाकर इस तरह की मजाक क्यों करूंगी ,,, और वैसे भी मैं कहां किसी और से मजाक कर पाती हूं,,,, एक तू ही तो है ,,,,, मुझे नहीं मालूम था कि तुझे बुरा लग जाएगा वह तो तू लंगड़ा कर चल रही थी इसलिए तुझसे मजाक की,,,,(मधु अपनी कही बात को संभालते हुए बोली क्योंकि वह जानती थी अगर खुदा की गुस्सा जाएगी तो राजु को उसके कमरे में सोने के लिए भेज देगी और ऐसा वह कभी नहीं चाहती थी क्योंकि रात को अपने पति का लंड अपनी बुर में लिए बिना उसे भी नींद नहीं आती थी,,,, ,, और अगर राजू उसके कमरे में आ गया तो उसकी यह इच्छा और उसकी प्यास अधूरी रह जाएगी और ऐसा कभी भी नहीं चाहती थी इसीलिए अपनी बात को संभाल ले गई थी अपनी भाभी की बातें सुनकर गुलाबी को भी थोड़ी राहत हुई और वह अपने लंगडाने का कारण बताते हुए बोली,,,।)

Raju kamlaa chachi ki chuchiyo se khelta hua



कल रात को जब मैं बाहर गई थी,,, तब मेरे पैर में कांटा लग गया था इसीलिए चलने में दिक्कत हो रही है और तुम हो कि बात का बतंगड़ बना रही हो,,,।

अरे यार मैं तो मजाक कर रही थी और वैसे भी रात को बाहर जाने की क्या जरूरत है,,,

पेशाब करने गई थी घूमने नहीं गई थी,,,

अच्छा ठीक है जल्दी से झाडू लगा दे अभी और भी काम बाकी है,,,,।(इतना कहकर मधुर रसोई में चली गई और गुलाबी राहत की सांस लेते में बाकी का काम करने लगी रोटी पकाते समय मधु के मन में एक ही सवाल उठा था कि जिस तरह से उसकी ननद गुलाबी बता रही थी कि राजू कितना मासूम है,,, सीधा-साधा है तो कुएं में से बाल्टी खींचते समय जिस तरह की हरकत उसने किया था,,, वह उसने क्यों किया और उस समय उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था,,,, मधु एकदम खेली खाली औरत थी इसलिए उस समय अपने बेटे के खड़े लंड कि सिहरन को अच्छी तरह से पहचान लेती हो और समझ गई थी कि उसके पजामे के अंदर एक संपूर्ण मर्द का औजार,,,, उस दिन वाली घटना को याद करके मधु को ना जाने क्यों अपनी दोनों टांगों के बीच सिहरन सी महसूस होने लगी और पल भर में ही उसकी बुर में पानी भर गया,,,,जानबूझकर अपना ध्यान खाना बनाने में लगाने लगी ताकि उस दिन की बात उसे और याद ना आए ,,,,क्योंकि कुछ भी हो वह उसका बेटा था और ना जाने क्यों उसके मन में उसके लंड को लेकर ना जाने कैसे-कैसे ख्याल आने लगते थे,,,,,,,, और मधु का मन बहकने लगा था इसीलिए अपने मन को दूसरी तरफ केंद्रित करने लगी,,,।

राजु रात भर चुदाई करती हुई और सुबह में खुद गुलाबी ने जिस तरह से गुलाबी बुर का मजा उसे दी उस अनुभव से राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,, और वह सुबह-सुबह खेतों की तरफ जा रहा था,,,, कि उसे कमला चाची नजर आ गई वह अपने घर के बाहर पेड़ पकड़ कर खड़ी होकर नीम का दातुन कर रही थी और उसकी पीठ राजू की तरफ थी जैसे-जैसे दातुन करते समय अपना हाथ हटा रही थी उसके हाथ के साथ-साथ उसकी भारी-भरकम गांड भी हील रही थी जिसे देखकर राजू का मन फिर से डोलने लगा,,, कमला चाची अपनी मस्ती में दातुन कर रही थी इस बात का ज्ञात भी होता कि उसकी गांड भी बड़े जोर जोर से हो रही है तो वह भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था,,, लेकिन उसकी बीवी कांड तो कर ना जाने कितनों का लैंड खड़ा हो जाता था भले ही कमला चाची उम्र के इस पड़ाव पर क्यों ना हो लेकिन फिर भी उनकी जवानी इस उम्र में भी बरकरार थी बड़ी बड़ी गांड के साथ-साथ खरबूजे जैसी चूचियां उसकी जवानी में चार चांद लगा रहे थे,,,,,,।

और चाची नमस्कार,,,,

(राजू की आवाज कानों में पड़ते ही कमला चाची की बुर काम रस बहाने लगीतुरंत पलट कर पीछे की तरफ देखिए तो राजू खड़ा था राजू को देखते ही उसे खेत वाला दृश्य याद आने लगा जिस तरह से हो जोर-जोर से भी मर के धक्के लगा रहा था उस पल को याद करके कमला चाची की बुर आज भी काम रस बहा देती थी,,,,)

अरे राजु तु,,,उस दिन के बाद से तो यहां आना ही बंद कर दिया मन भर गया क्या तेरा,,,

चाची मन भर गया होता तो इधर आता क्या,,,,(पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाते हुए राजु बोला,,, राजू की इस हरकत पर कमला चाची पूरी तरह से फिदा हो गई,,, वह समझ गई थी कि उसके साथ चुदाई करके राजू खुल गया है,,,, उसका मन गया कि नहीं लगा था वह अपनी भारी-भरकम गांव खटिया पर रखकर बैठ गई और लोटे के पानी से मुंह धो कर इधर-उधर देखने लगी चारों तरफ देखने के बाद वह बोली,,,)

राजू बहु गई है घास काटने घर में कोई नहीं है,,,,(यह कहते हुए कमला चाची के चेहरे पर चमक आ गई थी और राजू भी खुश हो गया था,,, इसलिए वो खुश होता हुआ बोला,,,)

तो चाची इरादा क्या है,,,!

चल अंदर,,,,,(घर के दरवाजे की तरफ आंख से इशारा करते हुए वह बोली,,,)

भाभी आ गई तो

वह भी नहीं आएगी उसे समय लग जाएगा तब तक तो अपना काम हो जाएगा,,,,

(कमला चाची की कामुकता और उसकी व्याकुलता को इस उम्र में भी देखकर राजू का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था उसे लगने लगा था कि औरत हो या मर्द उनकी जिंदगी में चुदाई का एक किरदार है जिसे वह अपने तरीके से जीना चाहते हैं,,,)

चलो फिर,,,,(राजू आनंदित होता हुआ बोला,,, कमला चाची खटिए पर से उठी और अंदर कमरे की तरफ चल दी पीछे-पीछे राजू भी घर के अंदर प्रवेश कर गया,,,, कमला चाची आंगन में नहीं बल्कि सीधे अपने कमरे में घुस गई और पीछे पीछे राजू भी चला गया अपने दो बाकी रात भर चुदाई करने के बाद भी उसका जोश बरकरार था उसकी उत्तेजना बरकरार थी उसके में काम की भावना बहुत ही ज्यादा तीव्र थी,,,,,इसलिए कमरे में प्रवेश करते ही वह कमला चाची को पीछे से पकड़ लिया उसकी बड़ी बड़ी गांड पर पजामे के ऊपर से ही धक्के लगाने लगा,,,,)

आहहहहह,,, एक ही बार में बहुत कुछ सीख गया है तू,,,,

हां चाची तुमसे मैंने बहुत कुछ सीख गया हूं,,,(इतना कहने के साथ ही वह कमला चाची की गर्दन पर चुंबनो का बौछार कर दिया,,,, कमला चाची के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, कमला चाची को लग रहा था कि यह सब कुछ नहीं सीखा है जबकि वह अपनी बुआ से सब कुछ सीख चुका था कमला चाची से केवल बुर में लंड डालना ही सीखा था बाकी सब संभोग कि क्रीडा को वह अपनी बुआ से सीखा था,,,। कमला चाची कमरे में आते समय मन में यही सोच कर आई थी कि सिर्फ अपनी सारी को कमर तक उठा देगी और चुदवा लेगी,,, लेकिन राजू के मन में कुछ और चल रहा था जो कुछ भी वह अपनी बुआ से सीखा था वह सब कुछ कमला चाची पर आजमाना चाहता था इसलिए वह पीछे से ही अपने हाथ को आगे बढ़ाकर ब्लाउज के ऊपर से ही कमला चाची के बड़े-बड़े खरबूजे को हाथ में लेकर दबाना शुरू कर दिया था,,,,तो इतनी जोर जोर से दबा रहा था कि कमला चाची के मुंह से कराहने के साथ-साथ गरम सिसकारी की आवाज फूट पड़ रही थी,,,, लेकिन आज राजू किसी भी हाल में कमला चाची को छोड़ना नहीं चाहता था,,,, कमला चाची कुछ बोल पाती इससे पहले ही वह कमला चाची के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा,,,।

Kamla chachi ki रसीली चुत





अरे मत खोल राजू अपने पास समय नहीं है तेरी भाभी किसी भी वक्त आ जाएगी,,,,(यह कहते हुए कमला चाची उसे रोकने की कोशिश करती रही लेकिन रांची नहीं माना और अपनी ताकत दिखाते हुए कमला चाची के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और ब्लाउज के बटन खुले थे कमला चाची की चूचियां एकदम नंगी हो गई जिसे वह अपने दोनों हाथ में लेकर दबाना शुरू कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके हाथों में बाजार का सबसे कीमती आम आदमी आ गया और वह किसी भी कीमत में उसे छोड़ना नहीं चाहता है ,,,,जोर जोर से दबाते हुए और कमला चाची की चूचियों से सारा रस निचोड़ लेना चाहता था,,,।)

आहहहहह राजू बड़ी ताकत आ गई है तेरे में,,,

चाची तुम्हारी चुचियों को देखकर मेरी ताकत बढ़ गई है,,,,

लेकिन जल्दी कर बहू आ गई तो गजब हो जाएगा,,,

कुछ नहीं होगा चाची,,,( इतना कहते हुए वहां जोर-जोर से चुचियों को दबाते हुए कमला चाची की साड़ी को एक हाथ से खोलने लगा था,,,कमला चाची को इस बात का क्या था अच्छी तरह से ताकि राजू क्या कर रहा है वह उसे रोकना चाहती थी लेकिन ना जाने क्यों उसे रोक नहीं पा रही थी क्योंकि वह जानती भी थी कि उसके पास वक्त कम है किसी भी वक्त उसकी बहू घर में आ सकती थी लेकिन फिर भी वह ना जाने क्यों मजबूर हो गई थी और देखते ही देखते था जो अपनी ताकत को दिखाते हुए उसकी चूचियों को दबा दें इसके साड़ी को उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया था,,, राजू को कमला चाची की चूचियां दबाने बहुत मजा आ रहा था वह अभी तक उसके पीछे का लेकिन अगले ही पल उसके आगे आकर उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया राजू की इस हरकत पर कमला चाची को भी तरह से न्योछावर हो गई थी वह पूरी तरह से मस्त हो गई थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि राजू अपनी तरफ से यह सब हरकत कर रहा है वह बहुत कुछ सीख चुका था उसे यकीन भी नहीं हो रहा था कि मात्र दो ही बार की चुदाई में वह उससे इतना ज्यादा खुल गया है,,,।

ओहहहहहह,,, राजू,,,,आहहहहहह कितना मजा आ रहा है बहुत अच्छे से पीता है तू,,,,,

(कमला चाची का मजा भी आ रहा था और इस बात का डर भी था कि कहीं उसकी बहु ना आ जाए और राजू आज अपनी मनमानी करने पर पूरी तरह से तुल चुका था,,,, राजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,, अगर राजू अपनी बुआ के साथ संभोग क्रिया को ना सीखा होता तो शायद आज भी वह वही करता जो उस दिन कमला चाची के कहने पर खेत में कर रहा था,,, सिर्फ चुदाई और कुछ नहीं,,,, कमला चाची पूरी तरह से मदहोश हो गई थी वह भी इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहती थी इसलिए अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पजामे के ऊपर से ही राजू के लंड को टटोलने लगी जो कि अपने भीषण आकार में आ चुका था,,,। कमला चाची से रहा नहीं गया और वह उसके पजाम के अंदर हाथ डाल दी,,, लंड की गर्माहट पाते ही कमला चाची की बुर कामरस से भीग गई,,,,,, राजु भी उतावला हो चुका था लेकिन फिर भी अपनी बुआ से सीखा हुआ सब कुछ आज मैं देखना चाहता था इसलिए कमला चाची की चूचियों को पीते हुए बाय काट नीचे की तरफ लाकर कमला चाची की पेटीकोट की डोरी को खोलने लगा हालांकि पेटीकोट की डोरी को खोलने का उसको कोई भी अनुभव नहीं था लेकिन फिर भी वह जान हीं गया थाऔरतों के कपड़े को कैसे उतारते हैं अगले ही पल पेटिकोट की डोरी को खींचने लगा और कमला चाची उसे रोकना चाहती थी पेटिकोट की डोरी पर हाथ पडते हैं कमला चाची के मन में हुआ कि वह उसे रोक देंवह अंदर ही अंदर खबर दी गई थी क्योंकि वह जानती थी कि राजू उसे धीरे-धीरे पूरी तरह से नंगी कर देगा और अगर वह पूरी तरह से नंगी हो गई और इस हाल में अगर उसकी बहू आ गई तो कपड़े पहनने तक का उसके पास समय नहीं बचेगा लेकिन फिर भी ना जाने कैसा आकर्षण था मदहोशी थे कि वह राजू को रोक नहीं पाए और अब यहीं पर पेटीकोट की डोरी एकदम से राजू ने खींच दिया जिसकी वजह से चाची की पेटीकोट भरभरा कर उसके कदमों में गिर गई,,,, पल भर में ही कमला चाची एकदम नंगी होगी राजू के लिए यह पहला मौका थाजब वह कमला चाची को पूरी तरह से नंगी देख रहा था भले ही वह कमला चाची की चुदाई दो बार कर चुका था लेकिन पूरी तरह से नंगी करके नहीं वह सिर्फ साड़ी उठाकर ही उनकी बड़ी बड़ी गांड को देखकर उसकी बुर में लंड डाला था,,,, लेकिन आज का दिन कुछ और था करना चाहती के सामने अनुभवहीन कच्चा खिलाड़ी राजू नहीं बल्कि इस खेल में धीरे-धीरे होशियार होता हुआ राजू खड़ा था जो कि अपनी हरकतों से औरतों को अपने बस में कर लेने की कला सीख गया था,,,,कमला चाची पूरी तरह से नंगी हो गई थी और इस बात का अहसास होते ही कमला चाची एकदम से शरमा गई भले ही वो राजु से दो बार चुदवा चुकी थी लेकिन इस बात से हो शर्मसार होने जा रही थी कि राजू उनके बेटे की उम्र से भी छोटा था और इस उम्र का लड़का उसे अपने हाथों से पूरी तरह से नंगी कर दिया था और वह भी चोदने के लिए इस बात का एहसास से वह पूरी तरह से गर्म भी हो चुकी थी और शर्म से गड़ी भी जा रही थी,,,।

Raju kamla chachi ki chut chat ta hua



यह क्या कर दिया राजू तुमने तो मुझे पूरी तरह से नंगी कर दिया अगर बहू आ गई तो,,,

कुछ नहीं होगा चाची तुम्हारी बहू को कुछ पता नहीं चलेगा और अपना काम भी हो जाएगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह भी फुर्ती दिखाता हुआ तुरंत कमला चाची के सामने घुटनों के बल बैठ गया और अपने हाथ को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसकी बुर को अपने होठों की तरफ खींच लिया,,,, कमला चाची को समझ पाती इससे पहले ही उसकी काम रस से भीगी हुई बुर राजू के होठों पर थी जिसे वह जीभ निकाल कर चाटना भी शुरू कर दिया था,,,कमला चाची की तो हालत खराब हो गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है वह हकीकत है या कोई सपना है क्योंकि वह सपने में भी कभी नहीं सोची थी कि कोई जवान लड़का उसकी बुर के साथ इस तरह से खेलेगा,,,,कमला चाची उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी थी जुदाई का बहुत मजा दी थी लेकिन किसी ने भी आज तक कमला चाची के बुर पर अपने होंठ रख कर उसे चांटा नहीं था राजू पहला जवान लड़का था जिसने कमला चाची चाची के साथ इस तरह की हरकत किया था,,,,कमला चाची उसे रोक पाते इससे पहले ही कमला चाची को पूरी तरह से मदहोश इसमें मिलेगी क्योंकि राजू अपनी जीत का कमाल दिखाते हुए कमला चाची की बुर के अंदर अपनी जीभ डाल कर चाटना शुरू कर दिया था,,,कमला चाची का पूरा बदल कंपनी रंगा उत्तेजना की परम शिखर पर पहुंचते ही वह पूरी तरह से मदहोश हो गई,,, अपनी मदहोशी पर कमला चाची को खुद यकीन नहीं हो रहा था,,,, राजू इतना कुछ जानता है इस बारे में कमला चाची को विश्वास ही नहीं हो रहा था अगर यह सब जानता है तो क्या तो मैं अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया क्यों नहीं किया था लेकिन जो भी हो कमला चाची को इस समय स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था कमला चाची अपने कमरे के बीचो-बीच एकदम नंगी खड़ी थी और उसकी दोनों टांगों के बीच बैठकर कमला चाची को बुर चटाई का मजा दे रहा था,,,, कमला चाची राजू की हरकत से तुरंत झड़ गई,,, वह हांफने लगी,,,,राजू ने अपना काम कर दिया था आप कमला चाची से अपना काम करवाना था इसलिए वह कमला चाची की दोनों टांगों के बीच से खड़ा हो गया और कमला चाची के कंधे को पकड़कर उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ दबाने लगा कमला चाची को तो पहले समझ में नहीं आया कि क्या करना है लेकिन जैसे ही कमला चाची के होठ राजू के टनटनाते हुए लंड की करीब पहुंचे तो कमला चाची समझ गई कि उसे क्या करना है क्योंकि यह क्रिया को वह पहले भी बहुत बार कर चुकी थी,,, और अगले ही पल राजू के लंड को गप्प से अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,

Kamla chachi k hath me raju ka lund





पल भर में राजू एकदम मस्त हो गया और अपनी आंखों को बंद करके मजा लेने लगा कमला चाची पूरी तरह से खेली खाई हो रहे थे इसलिए वह जानती थी कि क्या करना है राजीव को स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था पूरी तरह से मस्त होकर वापस कि उनकी अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था,,, एक तरह से वह कमला चाची के मुंह को भी चोदना शुरू कर दिया था,,,, कमला चाची पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी सुबह-सुबह इस तरह से शुरुआत होगी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ कि आज सही समय पर राजू घर पर आ गया और उसकी बहु घर पर नहीं है इसी का फायदा उठाते हुए कमला चाची स्वर्ग का सुख भोग रही थी,,,।मदहोश होकर कमला चाची भी अपनी कमर हिला रही थी और जोर-जोर से अपनी बुर को राजू के चेहरे पर रगड रही थी उम्र के इस पड़ाव पर कमला चाची की यह हरकत बेहद कामुक लग रही थी,,,।

कमला चाची की पीछे से लेते हुए





कुछ देर तक राजु इसी तरह से अपनी जीभ का कमाल दिखाते हुए कमला चाची को पूरी तरह से मस्त करता रहा लेकिन कमला चाची की सिसकारी की आवाज बढ़ने लगी थी उन्हें मोटा लंड चाहिए था इसलिए मौके की नजाकत को समझते हुए खड़ा हो गया और तुरंत अपने पैजामा को उतार कर नंगा हो गया,,,,कमला चाची के कमरे में कमला और राजू दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे दोनों संभोग सुख प्राप्त करने के लिए मचल रहे थे आज राजू कमला चाची की पीछे से लेना चाहता था जैसे कि उस दिन खेत में लिया था,,,

बिस्तर पर झुक जाओ चाची,,,,

पीछे से करेगा क्या,,,,

हां तुम्हारी गांड देख कर आज फिर से पीछे से करने का मन कर रहा है,,,,(राजू अपने लैंड को हिलाते हुए बोला और कमला चाची है उसके लंड को देखकर पूरी तरह से व्याकुल हो गई मदहोश हो गई यह जानते हुए भी कि किसी भी वक्त उसकी बहू आ सकती है फिर भी राजू के कहे अनुसार बिस्तर पर झुकने के लिए आगे बढ़ गई ऐसा लग रहा था कि जैसे कमला चाची को अब किसी भी चीज का डर नहीं है किसी के भी आने का भय बिल्कुल भी नहीं है,,,, मैं तुरंत जाकर बिस्तर पर हाथ से ठेका लेकर झुक गई पर अभी भी बिस्तर के नीचे ही थे हां तो उसके बिस्तर पर एक और वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में उछलकर नीचे की तरफ हाथ की कोहनी का सहारा लेकर झुक गई,,,,।

Raju kamla chachi k pichwade ka muyayna karte huye



इस स्थिति में कमला चाची की बड़ी बड़ी गांड देखकर राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और वह तुरंत कमला चाची की गांड के पीछे पहुंच गया कमला चाची की गांड बहुत बड़ी-बड़ी थी जिससे छोटे लंड वाला कभी भी पीछे से कमला चाची को चोदा नहीं पाता था लेकिन राजू का लंड लंबा बड़े आराम से वह कमला चाची को पीछे चोद सकता था,,,।राजू को अपने लंड कै सुपाडे पर थूक लगाने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थे क्योंकि पहले से ही कमला चाची की बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,, इसलिए वह कमला चाची की गांड पर जोर जोर से चपत लगाते हुए कमला चाची की गांड को एकदम लाल कर दिया कमला चाची को दर्द हो रहा था लेकिन ना जाने क्यों मजा भी आ रहा था इसलिए वह रोक नहीं पाई,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे कमला चाची की जवानी वापस आ गई हो,,,, बहु बच्चे वाली होने के बावजूद भी कमला चाची में कामुकता बरकरार थी ,,,,।

राजू अपने हाथ में लंड पकड़ कर नीचे की तरफ नजर करके वहां कमला चाची की गुलाबी बुर को देखने लगा जो कि काम रस से भीगी हुई थी,,, राजू को अपनी मंजिल मिल चुकी थी और वह अपने लैंड की सुपारी को कमला चाची की बुर की गुलाबी छेद पर लगा दिया और हल्के से धक्का मारा पहली बार में ही लंड का मोटा सुपाड़ा बुर के अंदर प्रवेश कर गया,,,, कमला चाची की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि वह पहली बार बहू आने के बाद अपने कमरे में किसी गैर से लड़के के साथ चुदाई का सुख भोग रही थी और राजू के लिए भी यह पहला मौका था जब वह किसी के घर जाकर उसकी चुदाई कर रहा था राजू अपने दोनों हाथों से कमला चाची की कर लिया और जोर से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला इस बार राजू का पूरा लंड एक बार में ही पूरा का पूरा कमला चाची की बुर में धंस गया,,,,।

आहहहहहहहह,,,राजु,,,

कमला चाची एकदम से मस्त होते हुए बोली,,,, और एक मर्द के लिए औरतों की यही गरम सिसकारी उनके कराने की आवाज ही उनके कर्म का फल होता है,,, राजू भी कमला चाची की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर संतुष्ट हो गया कि कमला चाची को मजा आया है और वह धक्के लगाना शुरू कर दिया,,,, कमला चाची को पीछे से चोद पाना किसी के बस में नहीं था कारण था कमला चाची की बड़ी बड़ी गांड,,, लेकिन इसी बड़ी बड़ी गांड को देखकर राजू की उत्तेजना और विश्वास और ज्यादा बढ़ गया था तभी तो वह कमला चाची को पीछे से चोदने का मन बना लिया था और यह पराक्रम दिखाते हुए वह सफल भी हो रहा था कमला चाची को बहुत मजा आ‌ रहआ था क्योंकि इस स्थिति में,,, राजू का लंड कमला चाची को अपनी बुर की गहराई में जाता हुआ महसूस होता था,,,।

Raju piche se bade arram se karte huye





राजू धड़ाधड़ धक्के लगा रहा था कमला चाची हवा में उड़ रही थी बहुत मजा आ रहा था राजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर कमला चाची के दशहरी आम को पकड़कर जोर-जोर से दबाते हुए उसकी चुदाई कर रहा था जिससे कमला चाची का मजा दोगुना होता जा रहा था,,, दोनों इस बात को पूरी तरह से भुल चुके थे कि वह दोनों घर में चोरी छुपे चुदाई का खेल खेल रहे हैं इस बात को जानते हुए भी कि उसकी बहू किसी भी वक्त घर पर आ सकती है लेकिन चुदाई के सुख के आगे वह दोनों सब कुछ भूल चुके थे दोनों संभोग क्रीडा में पूरी तरह से मुक्त हो चुके थे और बाहर रमा घास काट कर वापस आ चुकी थी,,,, घर पर पहुंचते ही देखी थी घर का दरवाजा खुला हुआ है उसे लगा कि उसकी सांस अंदर होंगे इसलिए वह बिना आवाज किए वह घर में प्रवेश कर गई,,, उसे तो इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि उसके पीठ पीछे उसकी सास जुदाई का असीम सुख भोग रही है,,,,वह घर के अंदर प्रवेश करते ही दर-दर देखने तो की लेकिन उसे कहीं भी उसके सास नजर नहीं आई तो वह सोचने लगी कि घर खुला छोड़ कर उसकी सास आखिर कहां चली गई,,,, वह खड़ी होकर कुछ सोच ही रही थी कि उसे अपनी सास की कमरे से हल्की हल्की आवाज आने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसी आवाज है क्योंकि आवाज पूरी तरह से साफ नहीं थी इसलिए धीरे-धीरे उस आवाज की तरफ कदम बढ़ाने लगे जैसे जैसे वह आगे कदम बढ़ा रही थी वैसे वैसे वह आज उसके कानों में और भी साफ सुनाई दे रही थी मुझे समझते देर नहीं लगी कि वह आवाज किस तरह की है,,,

गदराए बदन से लदी हुई कमला चाची की बहू रमा



उस गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर उसका दिल जोरो से धड़कने लगा उसे समझ में आ गया कि जरूर दाल में कुछ काला है धीरे-धीरे आगे बढ़ी तो कमरा बंद था लेकिन खिड़की हम किसी को नहीं हुई थी और खिड़की में से कमरे के अंदर का नजारा देखी तो देखती रह गई एकदम दंग रह गई कमरे के अंदर उसके साथ पूरी तरह से नंगी होकर बिस्तर पर झुकी हुई थी और पीछे वही लड़का राजू अपना लंड उसकी बुर में डालकर उसकी जबरदस्त चुदाई कर रहा था,,,,,।

कमला चाची की बहू रमा की मचलती चुचिया



कमला चाची की बहू के तो होश उड़ गए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्य करें कमरे के अंदर जिस तरह का दृश्य देख रही थी उस बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी लेकिन अंदर का गरमा गरम नजारा देखकर खुद उसकी हालत खराब होने लगी,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र में भी उसके साथ इस तरह से चुदाई का मजा लेती है,,, कमरे के अंदर के गरमा-गरम दृश्य को देखकर कमला चाची की बहू को समझते देर नहीं लगी कि,,,उस दिन खेत में काम कराने के बहाने उसके साथ राजू को खेत पर ले गई थी और वह ना हो उस दिन भी वह दोनों यही कर रहे थे,,,यह ख्याल मन में आते ही कमला चाची की बहू की सांसे ऊपर नीचे होने लगी वह बड़े गौर से अंदर के दृश्य को देख रही थी और धीरे-धीरे गर्म भी होने लगी थी अंदर का दृश्य ही कुछ इतना ज्यादा कामुकता से बना हुआ था कि वह उन्हें रोकने के लिए कुछ कर नहीं पाई बल्कि खुद भी पूरी तरह से मस्त होने लगी दोनों पूरी तरह से नंगी थे अपनी सास के बदन से तो अच्छी तरह से वाकिफ थी लेकिन बिना कपड़ों के वाह राजू को पहली बार देख रही थी जब गठीला बदन दमदार शरीर लेकिन अभी तक उसके लंड के दर्शन हुए थे उसके मन में यही ख्वाहिश थी कि उसके लंड को देख पाती क्योंकि जिस तरह से उसकी सास को चोद रहा था किसी के बस में नहीं था कि इस तरह से पीछे से उसकी सास को चोद पाएक्योंकि भारत होने के नाते वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि बड़ी बड़ी गांड वाली औरत को पीछे से चोदने में दम निकल जाता है,,,।

और राजू के जबरदस्त धक्कों को देखकर कमला चाची की बहू समझ गई कि राजू का लंडएक दम दमदार होगा तभी तो वह इस चुनौती पर खरा उतर रहा था,,,,कमला चाची की गरम सिसकारियां की आवाज उसकी बहू एकदम साफ तौर पर सुन रही थी जिसे सुनकर उसकी खुद की बुर गीली होने लगी थी,,,,।

कमला चाची की बहू के मन में पहले तो आया कि वह जोर से आवाज लगाकर दोनों की कामलीला को रोक दें और उन्हें डराया धमकाया लेकिन तभी उसके दिमाग में युक्ति आने लगी कि जिस तरह से उसकी सांस इस उम्र में भी इतना मजा लूट रही है तब तो वह भी पूरी तरह से जवान है वह क्यों ना एक जवान लड़के का मजा ले,,, इसलिए उसके मन में नहीं विचारों का जन्म हो रहा था और वह युक्ति लगाने लगी और बहुत ही जल्द उसे इस काम के लिए जा से पूरी तरह से फायदा उठा लेने की युक्ति नजर आने लगी उन्हें रोकने के बजाय वह वही खड़ी होकर हम दोनों की कामलीला को पूरी तरह से देखने लगी,,,,।

आहहहहह,,,आहहहहह राजू और जोर से जोर जोर से धक्के लगा चोद मुझे मेरे राजा,,, मेरा निकलने वाला है मैं झड़ रही हूं बहुत मजा आ रहा है राजू,,,,

(कमला चाची की बहू अपनी सास की इस तरह की बातें सुनकर एकदम हैरान हो गई थी क्योंकि वह राजू की उम्र से पूरी तरह से वाकिफ थी वह उसके लड़के की उम्र से भी छोटा था लेकिन दमदार गठीला बदन का मालिक था जोकि उस की जबरदस्त चुदाई करते हुए पानी पानी कर रहा था,,,,)

मैं भी झड़ने वाला हूं चाची,,,, बहुत मजा देती हो तुम,,,,आहहहह आहहहहह आहहहहहहह,,,, नहीं गया मैं गया,,,,,,,आहहहहहहहहह,,,,(और इतना कहने के साथ ही अपना पानी निकाल कर कमला चाची को पीछे से पकड़ कर उनके ऊपर लेट गया कमला चाची का भी पानी निकल गया था दोनों एक साथ संतुष्ट हुए थे और कमला चाची की बहू वहां और देर खड़ी नहीं रहना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उन दोनों को पता चले कि उसने देख लिया है,,, वह अपने तरीके से मजा लेना चाहती थी इसलिए वह तुरंत उस जगह को छोड़ कर घर से बाहर निकल गई और थोड़ा दूर चली गई ताकि उसकी सास को बिल्कुल भी शक ना हो कि उसने देख लिया है,,,।

चुदाई का भरपूर मजा लूट कर दोनों अपने अपने कपड़े पहनने लगे और कपड़ों को पहनते हुए राजू मस्ती करते हैं कमला चाची की गांड पर जोर से चपत लगाते हुए बोला,,,।

तुम्हारी गांड में बहुत दम है चाची,,,,

और तेरे लंड मे भी बहुत दम है,,, नहीं तो पीछे से मेरी चुदाई कर पाना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन है,,(कमला चाची अपनी पेटीकोट की डोरी को बांधते हुए मुस्कुरा कर बोली,,,)

मैं बोला था ना चाचीकि तुम्हारी बहू इतनी जल्दी नहीं आ पाएगी और अपना काम भी हो जाएगा,,,,

अच्छा हुआ कि वह नहीं आई नहीं तो तो जिस तरह से मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगी किया था अगर वह आ जाती तो कपड़े भी नहीं पहन पाती और आज हम दोनों पकड़े जाते,,,।

ऐसा कभी नहीं होगा चाची,,,,(राजू अपने कपड़े पहनते हुए बोला)

ठीक है अब काम हो गया है अब तु जा किसी भी वक्त बहू आ जाएगी,,,,

Kamlaa chachi ki bahu bhi raju k sath ki kalpana karne lagi





ठीक है चाची चलता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही जाते जाते राजू ब्लाउज के ऊपर से ही कमला चाची की चूची को जोर से दबा कर भी हंसने लगा और हंसते हुए घर से बाहर निकल गया कमला चाची भी उसे घर से बाहर जाते हुए देख कर मुस्कुराती रहें क्योंकि इस उम्र में उसके जीवन में बहार आ गई थी,,,, वह पूरी तरह से संतुष्ट थी,,,,इस बात से अनजान की उन दोनों की संभोग लीला को उनकी बहू अपनी आंखों से देख चुकी है,,,.)
 
अपनी आंखों से अपनी सास की कामलीला देखने के बावजूद भी कमला चाची की बहू रमा बेहद खुश थी उसकी खुशी के पीछे एक राज छिपा हुआ था जो कि उसके मन में एक युक्ति को आकार दे रहा था,,,,भले ही वह राजू के नेट के दर्शन नहीं कर पाई थी लेकिन उसकी अद्भुत जबरदस्त भक्तों को देखकर और अपनी सास की बड़ी-बड़ी कहानी को देखकर जिस तरह से वह बड़े आराम से अपने लंड को उसकी गांड के बीचोबीच उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर कर रहा था उसे देख कर रमा को इस बात का एहसास हो गया था कि राजू के पास जबरदस्त अौजार है अगर वह अपनी बुर में ले ली तो एकदम मस्त हो जाएगी,,,,,, रमा चाहती तो अपनी सास और राजू के खेल को बिगाड़ सकती थी लेकिन वह ऐसा जानबूझकर नहीं की,,,, जिसमें उसका खुद का स्वार्थ छिपा हुआ था,,,।

Madhu ki madmast chuchiya





औरत अपनी काम भावना क्या दिन होकर एकदम मजबूर हो जाती है फिर वह चाहे कोई भी हो बड़े घर की औरत हो या झोपड़े की,,,, फिर वह ऊंच-नीच छोटा बड़ा अमीर गरीब किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं देखती बस अपनी प्यास बुझाने में लग जाती है जिस तरह से कमला चाची कर रही थी अपनी उम्र का भी ख्याल नहीं था उन्हें नाती पोते वाली हो चुकी थी लेकिन बदन की गर्मी शांत करने के लिए उसे हमेशा एक मोटे और लंबे लंड की आवश्यकता थी जो कि आप उसे राजू से पूरी होने लगी थी,,,।

इस बात का आभास अच्छी तरह से होने के बावजूद भी कि उसकी बहू किसी भी वक्त घर पर आ सकती है फिर भी वह अपनी बहू के घर आने के बीच के समय का पूरा का पूरा फायदा उठाते हुए राजू के साथ संभोग जिला में मस्त हो गई चुनरी के अद्भुत सुख को प्राप्त करके वह पूरी तरह से संतुष्ट तो हो चुकी थी लेकिन वह इस बात से अनजान थी की खिड़की पर खड़ी होकर उसकी बहू उन दोनों की कामलीला को अपनी आंखों से देख चुकी है,,,, राजू के हर एक धक्के से कमला चाची इस उमर में भी मस्त हो जा रही थी पहली बार किसी का लंड वह अपने बच्चेदानी के ऊपर महसूस कर पा रही थी,,,राजू की एक बात कमला चाची को बहुत अच्छी लगती थी कि वह चाहे जितनी भी तेजी से जितनी देर तक धक्के लगा ले लेकिन थकता नहीं था,,, बल्कि वाह खुद उसके ही पसीने छुड़ा दे रहा था राजू से चुदवाते समय कमला चाची पसीने से तरबतर हो चुकी थी और पसीना उनके बदन के हर एक अंग से मोती के दाने की तरह टपक रहा था,,,, जोर-जोर से चपत लगाकर कमला चाची की गोरी गांड को टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,,,,,

राजू के जाने के बाद थोड़ी देर बाद रमा घर के अंदर प्रवेश की तो देखी के सामने हेड पंप के नीचे बैठ कर उसकी सास नहा रही थी,,,, रमा को देखते ही वह बोली,,,।

Gulabi



अरे बहु आज बहुत देर लगा दी,,,, कहां रह गई थी,,,

कहीं नहीं माजी घास काटने में देर हो गई,,,,

(अपनी सास को देखकर अपने होठों पर मंद मुस्कान लाते हुए वह बोली अपने मन में बोल रही थी कि आई तो मैं ठीक समय पर ही थी तुम दोनों की कामलीला देखकर वापस चली गई थी,,,,, बड़ी मासूमियत के साथ हेड पंप के पास बैठ कर नहा रही अपनी सास को देखकर रमा अपने मन में यही सोचने लगी थी इस उमर में पहुंचने के बावजूद भी उसकी सास का जोस एकदम कायम है,,,, और मन में इस बात से इर्षया करने लगी की,,, इस उम्र में भी उसे जवान लंड नसीब हो रहा है,,,, और एक वह है कि शादी के 2 साल में ही उसका पति एकदम से थका थका रहने लगा है,,,,अपनी सांस पर उसे करो भी हो रहा था कि राजू के जबरदस्त धक्कों को भी वह बड़े आराम से झेल रही थी,,,,,।)

दूसरी तरफ राजू दोपहर के समय अपने घर पहुंचा तो उसे बड़े जोरों की भूख लगी हुई थी,,,,,,,घर पर उसकी मां और बुआ दोनों थी उसकी मां अपने कमरे में आराम कर रही थी,,, और उसकी बुआ खाना खा रही थी,,, अपनी बुआ को खाना खाते हुए देखकर राजू बोला,,,)

Gulabi khana paroste huye



क्या बुआ अकेले अकेले खा रही हो मुझे तो बुला ली होती,,,,,,

अब खाना खाने के लिए भी तुझे निमंत्रण देना पड़ेगा जा जल्दी से हाथ मुंह धो कर आ जा मैं खाना निकाल देती हूं,,,,(अपनी बुआ को देखकर और उसकी बातों को सुनकर राजू के दिमाग में कुछ और चलने लगा है और वह धीरे से आगे बढ़कर उसके कान में बोला)

मां घर पर नहीं है क्या,,,,(राजू के कहने का मतलब को गुलाबी अच्छी तरह से समझ गए इसलिए उसे बोली,,)

धत्,,,,, भाभी अपने कमरे में ही है,,,,, और इस समय जैसा तू सोच रहा है वैसा कुछ भी होने वाला नहीं है इसलिए उस बारे में सोचना बंद कर दें,,,

क्या बुआ तुम भी,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर कुर्ती के ऊपर से ही अपनी बुआ की चूची को दबा दिया और मुस्कुराने लगा,,,)

आहहह क्या कर रहा है कुछ तो लिहाज कर तेरी मां बगल में आराम कर रही है,,,

तो क्या हुआ बुआ,,रात में भी तो वह बगल वाले कमरे में ही रहती है ना फिर भी तो हम दोनों चुदाई करते हैं,,,

चल भाग यहां से जल्दी से हाथ मुंह धोकर आजा,,,,

(अपनी बुआ की बात सुनकर,,,राजू समझ गया था कि इस समय उसकी दाल गलने वाली नहीं है इसलिए वह हाथ धोने चला गया था, ऐसा नहीं था कि इस समय गुलाबी का मन नहीं कर रहा था राजू की हरकत और उसकी बात को सुनकर उसका भी मन करने लगा था लेकिन वह किसी भी प्रकार का खतरा मोल लेना नहीं चाहती थी क्योंकि बगल में ही उसकी भाभी आराम कर रही थी अगर जरा सा भी भनक लग जाती तो और दोनों का खेल यहीं समाप्त हो जाता और ऐसा वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी वह इस मामले में बेहद सतर्कता से आगे बढ़ना चाहती थी,,,, जिस तरह से राजू ने जाते-जाते कुर्ती के ऊपर से उसकी चूची को दबाया था उसे से गुलाबी के बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी,,, लेकिन दोपहर के समय वह भी मजबूर भी चाह कर भी कुछ कर सकने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,,, थोड़ी देर में राजू हाथ धोकर आ गया और वहीं पास में बैठ कर खाना खाने लगा,,,, गुलाबी तो जैसे तैसे अपने आप को संभाल लेती थी लेकिन राजु से रहा नहीं जाता था खाना खाते समय भी वह गुलाबी के अंगों से छेड़खानी कर रहा था जिससे बार-बार गुलाबी उसका हाथ झटक देती थी लेकिन राजू कि वे छेड़खानी उसके बदन में उत्तेजना जगा रही थी उसे भी राजु की यह छेड़खानी अच्छी लग रही थी,,,,,,, राजू की उत्सुकता और उत्तेजना उम्र के इस दौर में एकदम लाजीमी थी,,, उसके जीवन की संभोग गाथा की अभी तो शुरुआत हुई थी,,, ऐसे में बदन की गर्मी शांत हो जाए ऐसा हो ही नहीं सकता अगर ऐसा शुरुआती दौर में हो जाए तो समझ लो कि वह मर्द किसी काम का नहीं,,, है,,,।

इसीलिए तो वह मुंह में निवाला डालते डालते हैं बार-बार उसकी चूची को दबा दे रहा था और गुलाबी उसे रोकने की कोशिश कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि बगल में ही उसकी भाभी सो रही है जो कि सो नहीं रही थी आराम ही कर रही थी,,,, ।

Madhu nahate huye





रहने दे तेरी मां का पता चल गया ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,

अरे बुआ कुछ भी पता नहीं चलेगा,,, चलो ना अंदर चलते हैं,,,

(राजू की हिम्मत और उसका उतावलापन देखकर गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी एक तरफ उसका मन अंदर जाने के लिए कर भी रहा था लेकिन उसे डर भी लग रहा था,,,,)

नहीं पागल हो गया क्या अभी कुछ भी नहीं वैसे भी तो रात अपनी ही है,,,

लेकिन बुआ मेरा तो खड़ा हो गया है,,,

खड़ा हो गया है तो इसे बिठा ले ,,, लेकिन अभी कुछ भी नहीं,,,,(गुलाबी उसकी दोनों टांगों के बीच उठे हुए भाग को देखते हुए बोली,,,)

क्या हुआ बुआ तुम डरती बहुत हो,,,

डरना पड़ता है क्योंकि आगे भी मजा लेना है इसलिए अगर अभी पकड़े गए तो सब कुछ बंद हो जाएगा बदनामी अलग से होगी,,,,।

अच्छा एक बार दिखा तो दो,,,,(गुलाबी की चूची को जोर से मसलते हुए बोला,,)

धत् पागल हो गया क्या तू,,,,,(फिर से राजू का हांथ हटाते हुए बोली,,,)

बुआ एकबार कुर्ती उपर करके दिखा दो ना,,,,

सच में तो बहुत शैतान है मैं कभी सोच नहीं थी कि तू ईतना बड़ा हारामी होगा,,,,

अब जो भी हूं जैसा भी हूं तुम्हारा ही हूं बुआ,,, मैं तो तुम्हारा दीवाना हो गया हुं,,,,

(राजू की बात पर गुलाबी मुस्कुराने लगी और चारों तरफ देखते हुए बोली,,,)

चल ठीक है एक बार दिखा देती हो लेकिन इस से ज्यादा कुछ भी नहीं जो कुछ भी करना है रात को करना,,,

ठीक है बुआ कुछ नहीं तो देख कर ही काम चला लूंगा,,,

(राजू मुंह में निवाला डालते हुए बोला,,, राजू की हरकतों ने गुलाबी का भी मन मचल ने को मजबूर कर दिया था उसके तन बदन में गर्माहट जाने लगी थी एक बार तो उसका मन किया कि कमरे में जाकर एक बार दोपहर के समय ही चुदाई का मजा ले लिया जाए लेकिन दूसरा मन उसे ऐसा करने से रोक रहा था,,,, फिर भी ज्यादा कुछ नहीं वह राजू की बात मानते हुए उसे अपनी चूची दिखाने के लिए राजी हो गई थी,,,,, और एक बार फिर से घर के चारों तरफ नजर डालकर धीरे से अपनी कुर्ती को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,, यह देखकर राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह उसी तरह से बैठा रह गया और अपनी बुआ को देखता रह गया धीरे-धीरे उसकी अपनी कुश्ती को अपनी छाती के ऊपर तक उठा दी और उसकी दोनों चूंचियां खुली हवा में सांस लेने लगी,,,,

Kuch is tarah se Gulabi ki chuchiya hawa me saans lene lagi



अपनी बुआ की मदमस्त चूचियों को देखकर राजू के मुंह में पानी आ गया और लंड की अकड़न बढ़ने लगी,,,वह अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर अपनी बुआ की चूची को पकड़ लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया गुलाबी भी उत्तेजित हो रही थी इसके लिए उसकी चूची की निप्पल अंगूर के दाने की तरह एकदम कड़क हो गई थी,,,।

Gulabi kuch is tarah se



सहहहहह आहहहहहह,,, धीरे से तू तो बहुत जोर जोर से दबाता है,,,,।

धीरे-धीरे दबाने वाली चीज नहीं है बुआ,,, जितना जोर जोर से दबाऊंगा उतना मजा आएगा,,,,



दर्द भी बहुत करता है,,,,,

तो क्या हुआ मजा भी तो आता होगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही भोजन की थाली को एक तरफ करके घुटने के बल आगे बढ़ा और अपनी बुआ की चूची को मुंह में भर कर पीना शुरु कर दिया,,,,,)

आहहहह राजू क्या कर रहा है,,,,

पीने दो ना बुआ बहुत मजा आ रहा है,,,,

अरे हरामि रात को पी लेना,,,,

नहीं बुआ चोदने नहीं दे रही हो तो कम से कम पीने तो दो,,,,

Raju Gulabi ki chuchiyo se maja lete huye



तू बहुत शैतान हो गया है मानने वाला नहीं है,,,।

(इतना कहकर गुलाबी उसके सर पर हाथ रख दी और इधर-उधर देखने लगी कि कहीं कोई आ ना जाएवैसे किसी और के आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि बाहर दरवाजा बंद था और अंदर उसकी भाभी आराम कर रही थी अगर वह बाहर निकलती तो दरवाजा खुलने का आवाज साफ सुनाई दे देता,,,, लेकिन फिर भी गुलाबी पूरी तरह से सतर्क दी नानू कुछ करने के बावजूद भी राजू की मनमानी को देखते हुए उसे भी मजा आ रहा था जिस तरह से राजू ने उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से अपनी मुंह में लेकर पी रहा था गुलाबी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी उत्तेजना के मारे बीच-बीच में राजू उसकी चूचियों को दांतों से काट भी ले रहा था,,,,,)

बस कर अब बहुत हो गया,,,,,(राजू के मुंह को हटाने की कोशिश करते हुए बोली लेकिन राजू माना नहीं और थोड़ी देर बोल कर फिर से जुट गया मानो कि जैसे कोई छोटा बच्चा दूध पी रहा हो और उसका मन भरा ना हो,,,, राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था कृष की बुआ थोड़ा सा भी इजाजत देती तो इसी समय वह उसकी चुदाई कर देता,,, लेकिन वह भी जानता था कि समय ठीक नहीं है,,,, इसलिए थोड़ी देर और गुलाबी की चूची से मस्त होते हुए वह उसे छोड़ दिया और लंबी सांसे भरने लगा,,,, गुलाबी को भी बहुत मजा आ गया था उसकी बुर बहुत पानी छोड़ रही थी,,,। अपनी चूचियों की तरफ देखते हुए बोली,,,)

देख तूने कैसा लाल कर दिया है,,,,

चुसने से तो लाल हो ही जाएगा ना,,,,(अपनी तरफ से सफाई देते हुए बोला)

तू बहुत हारामी है,,,,(इतना कहकर अपनी कुर्ती को नीचे करके व्यवस्थित कर दी और खाना खाने लगी,,,, बगल वाले कमरे में सो रही मधु को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उसके पीठ पीछे उसका बेटा और उसकी ननद क्या गुल खिला रहे हैं,,,,, दिनभर की गरमा गरम मस्ती से गर्म होकर दोनों को रात का इंतजार था और रात को तेरी दोनों एक बार फिर से एक दूसरे में समाने की पूरी कोशिश करने लगे एक दूसरे को संतुष्ट करने के बाद एक दूसरे की बाहों में सो गए,,,, दूसरे दिन सुबह राजू की नींद खुली तो पहले उसे यही याद आया कि आज उसे पढ़ने के लिए जाना है उसका मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था लेकिन सोनी का गदराया बदन उसकी मादक खुशबू उसे बेचैन कर रही थी,,,, उसकी गोलाकार गांड को याद करके ही राजू उसकी तरफ आकर्षित हुआ जा रहा था,,,, ना चाहते हुए भी उसे जाना ही था भले पढ़ाई के लिए ना सही लेकिन उसके खूबसूरत बदन की खुशबू के लिए,,,,। उसे‌ बड़े चोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह तुरंत खटिया पर से उठ कर घर के पीछे की तरफ चला गया जहां पर उसकी गाय भैंस बकरीया बांधी हुई होती है ,,, वह तुरंत वहां पर गया और झाड़ियों के बीच जाकर खड़ा हो गया और तुरंत अपने पजामे को नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल कर मुतना शुरू कर दिया,,,,,,सुबह का समय होने की वजह से प्राकृतिक रूप से उसका लंड पूरी तरह से टनटनाया हुआ था,,,,,, उसी समय मधु जानवरों को चारा देने के लिए झोपड़ी के अंदर गई हुई थी और बाहर की हलचल की आवाज को सुनकर बाहर देखने के लिए आई की बाहर कौन आया है,,,, और जैसे ही उसकी नजर राजू पर पड़ी तो पहले तो उसे सब कुछ सामान्य सही लगा लेकिन जैसे उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह खड़े होकर पेशाब कर रहा है तो अपने आप ही उसकी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच चली गई और उस तरफ का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए,,,,राजू की पीठ मधुर की तरफ थी लेकिन वह थोड़ा सा भी चाहो पर पेशाब कर रहा था इसलिए मधु को सब कुछ साफ नजर आ रहा था मधुर ने अपनी आंखों से जो कुछ भी अभी देखी उसे देख कर उसे अपने आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था,,,,वह अपने मन में सोचने लगी कि लड्डू इतना बड़ा और मोटा भी हो सकता है वह तो कभी सपने में भी नहीं सोची थी क्योंकि उसने तो आज तक अपने पति के ही लंड को देखती आ रही थी और उसे अपनी बुर में लेती आ रही थी ,,,,,,, उसके बेटे का इतना बड़ा होगा वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी,,,, पल भर में ही मधु की सांसे तेज चलने लगी वह बड़े गौर से अपने बेटे के लंड को देख रही थी जिसमें से पेशाब की धार फुटकर बढ़े दूर तक गिर रही थी,,,, सुबह का समय होने की वजह से प्राकृतिक रूप से राजू के लंड का तनाव अपनी चरम सीमा पर था,,,,,,,,

पल-पल मधु की हालत खराब होती जा रही थी,,,, मधु को कोई बड़ी घटना याद आ गई कि किस तरह से कुएं में से बाल्टी खींचते समय राजू उसके पीछे खड़ा था और रस्सी को खींचते समय वह एकदम से उसके बदन से सटा हुआ था और उसे अपनी गांड के बीचो-बीच अपने बेटे के लंड की रगड़ और चुभन एकदम साफ महसूस हो रही थी,,, उस दिन ही मधु को ऐसा लगा था कि उसके बेटे का लंड दमदार है लेकिन इतना दमदार होगा वह आज अपनी आंखों से देख कर ही यकीन हो रहा था,,,,, पल भर में ही मधु एकदम उत्तेजित हो गई थी उत्तेजना के मारे सुबह-सुबह ही उसका गला सूखता जा रहा था,,,, जिसे वह अपने धूप से गिला करने की कोशिश कर रही थी,,,, राजू पेशाब करते हुएअपने लंड को अपनी उंगलियों का सहारा देकर पकड़े हुए था वैसे तो जिस तरह का उसका मोटा तगड़ा लंड था उसे उंगलियों से पकड़कर सहारा दे पाना मुश्किल हीं था उसे सहारा देने के लिए उसे पूरी तरह से अपनी हथेली में पकड़ कर रखना पड़ता लेकिन,,,, जिसकी बंदरिया उसी से नाचे इसीलिए तो राजू बड़े आराम से अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को ऊंगलियों का सहारा देकर ही पकड़े हुए था और बीच-बीच में उसे झटके देकर ऊपर नीचे हिला दे रहा था,,, जिससे अपने बेटे के हिलते हुए लंड को देखकर मधु के दोनों टांगों के बीच अजीब सी सुरसुराहट पैदा हो रही थी,,,, अपने बदन की इस हलचल से मधु भी हैरान थी क्योंकि वह अपने बेटे के लिए लंड को देखकर अपने अंदर इस तरह की उत्तेजना का अनुभव कर रही थी जैसा कि कभी उसने सपने भी नहीं सोची थी और ना ही चाहती थी कि ऐसा कभी हो लेकिन यह सब ,, सब कुछ प्राकृतिक रूप से हो रहा था कि भले उसकी आंखों के सामने उसका बेटा खड़ा था लेकिन था तो वह एक मर्द ही और मधु उसकी मां होने के नाते ना सही लेकिन थी तो एक औरत ही इसलिए एक औरत का मन औरत की आंखें इस तरह का नजारा देखकर प्राकृतिक रूप से अपने अंदर उत्तेजना का अनुभव करने लगती है जैसा कि मधु कर रही थी,,,,,,।

Raju k lund ko dekhkar madu ki chut gili hone lagi



राजू अपनी मस्ती में पेशाब कर रहा था उसे तो इस बात का आभास तक नहीं था कि पीछे झोपड़े में से उसकी मां उसकी हरकत को देख रही है वह अपनी मस्ती में ही अपने लंड को पकड़े जोर जोर से हिला रहा था,,,, यह उसके लिए प्राकृतिक रूप से औपचारिकता वश ही था,,,। लेकिन मधु के लिए यह उत्तेजना का भूचाल था जो उसके तन बदन उसके कोमल मन पर मदहोशी का हथोड़ा बरसा रहा था,,,। मधु का अपने मन पर बिल्कुल भी काबू नहीं रह गया एक मां होने के नाते उसे यह दृश्य देखना ही नहीं चाहिए था लेकिन उस दृश्य में अद्भुत आकर्षण था जोकि मधु को अपनी तरफ आकर्षित किए जा रहा था तभी तो वह एक मां होने के बावजूद भी अपने बेटे को ईस स्थिति में देखकर उत्तेजित हो रही थी,,,।उसे अपनी बुर की ली होती है मैं तो सो रही थी और इस बात से मैं तो एकदम से हैरान थी कि अपनी बेटी के लंड को देखकर वह इस तरह से अपने अंदर मदहोशी और उत्तेजना का अनुभव क्यों कर रही है,,,, ना चाहते हुए भी उसके कदम वहीं ठहर से गए थे जानवरों को चारा देना उनको पानी पिलाना वो एकदम से भूल चुकी थी,,,

मधु के लिए यह पहला मौका था जब वह अपने जवान बेटे के लंड को देख रही थी जो कि पूरी तरह से उसका लंड मर्दाना ताकत से भर चुका था जिसे देखकर मधु की अनुभवी आंखें भांप ली थी,,, इससे पहले वह बचपन में ही राजू के लंड को देखी थी तब वह छोटी सी नुनी ही था,,, लेकिन नुनी से कब लंड बन गया इस बात का एहसास मधु को अब जाकर हो रहा था,,,। मधु को अपनी बुर पूरी तरह से गिली होती हुई महसूस हो रही थी,,, एक अजब सी खुमारी उसके तन बदन को अपनी आगोश में लिए जा रही थी,,,और राजू ताकि अपनी मस्ती में पेशाब करना था सुबह का वक्त था इसीलिए बड़े जोर की पेशाब लगी थी और इसीलिए वह अभी तक पेशाब कर ही रहा था,,,, अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर अनजाने में ही अनायास उसके मन में यह ख्याल आ गया कि अगर उसका लंड उसकी बुर में जाएगा तो उसकी पूर्व में जाने में बड़ी मुश्किल होगी क्योंकि उसका लंड काफी मोटा है,,,, इस बात का ख्याल मन में आते ही वह अपने आप को अपने मन में झाड़ते हुए बोली,, हाय दैया यह क्या सोच रही है और वह भी अपने ही बेटे के बारे में छी छी,,,, ख्याल मन में आया कैसे,,,,,,,

ऐसा लग रहा था कि जैसे मन में आए इस ख्याल से मधु खुद ही शर्मिंदा हो गई थी लेकिन फिर भी वह अपनी नजरों को हटा नहीं रही थी उस नजारे को पूरी तरह से देख लेना चाहती थी जोकि धीरे-धीरे राजू पेशाब कर चुका था रात को अपनी बुआ की चुदाई करने के कारण उसकी बुर का काम रस और उसके खुद का काम रस लंड पर लगा हुआ था जो कि चिपचिपा महसूस हो रहा था,,,, अपने लंड पर लगे चिपचिपे पन से अपनी बुआ का ख्याल आते ही राजू अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर कर दो तीन बार उसे आगे पीछे करके मुट्ठ मारनेलगा और यह देख कर मुझे पूरी तरह से हैरान हो गई क्योंकि औरत होने के नाते वह मर्दों की हरकत से अच्छी तरह से वाकिफ थी वह अपने मन में सोचने लगी कि मर्द ऐसी हरकत एक औरत को चोदने के लिए और खुद ही अपना पानी निकालने के लिए करता है लेकिन आज यह हरकत क्यों कर रहा है यह बात उसे समझ में नहीं आ रही थी,,,,

Raju ki ye harkat dekhkar Madhu heran ho gayi thi





वह सब सोच रही थी कि तभी राजू पेशाब कर लिया और अपने पर जाने को ऊपर करके वहां से चलता बना,,, तब जाकर मधु को राहत हुई क्योंकि उसे लगने लगा था कि शायद राजू भाई खड़े-खड़े अपना पानी निकाल लेगा और ना जाने क्यों यह देखने के लिए उसका मन मचल भी रहा था लेकिनउसके चले जाने के बाद मधु को इस बात से राहत थे कि उसका लड़का दूसरों की तरह बिल्कुल भी नहीं है,,, लेकिन आज इस तरह का नजारा उसने देखी थी उसके कोमल मन पर बहुत ज्यादा भारी पड़ रहा था,,,। जैसे तैसे करके वहां अपना मन काम में लगाने लगी,,,।

और राजू नहा धोकर नाश्ता करके तैयार हो गया था,,, जिंदगी में पहली बार वह पढ़ने के लिए जा रहा था,,,, घर से निकल ही रहा था कि तभी उसकी बुआ बोली,,,।

अरे अपनी मां का पांव छूकर आशीर्वाद तो ले लो पहली बार पढ़ने जो जा रहा है,,,

तुम ठीक कह रही हो बुआ,,,,(इतना कहकर वह तुरंत अपनी मां के पास गया जो की गुलाबी के पास ही खड़ी होकर मुस्कुरा रही थी क्योंकि उसका बेटा पहली बार पढ़ने से जा रहा था कुछ सीखने जा रहा था राजू अपनी मां के पास ऊपर आशीर्वाद लेने लगा उसकी मां भी उसे आशीर्वाद देते हुए बोली,,,)

तो खूब पढेगा लिखेगा,,,,

राजू अपनी मां का आशीर्वाद लेकर जाने ही वाला था कि उसे रोकते हुए मधु बोली,,,।

अरे कहां चला ,,, अपनी बुआ का तो पांव छू कर आशीर्वाद ले ले,,,,।

(अपनी मां की बातें सुनकर राजू एकटक गुलाबी की तरफ देखने लगा क्योंकि उसके पांव छूकर आशीर्वाद लेने में उसे हिचक से हो रही थी क्योंकि उन दोनों के बीच बुआ और भतीजा वाला रिश्ता बिल्कुल भी नहीं रह गया था रात भर वह अपनी बुआ की चुदाई करता था और सुबह कैसे उसके पांव छूकर आशीर्वाद ले ले,,, वह उसी तरह से खड़ा रह गया तो फिर से उसकी मां बोली,,,)

अरे देख क्या रहा है तुझसे बड़ी है तेरी बुआ है आशीर्वाद ले ले,,,,

चल मेरे भी पांव छूकर आशीर्वाद ले,,,, (गुलाबी जानबूझ कर उसे अपने पांव छूने के लिए बोली क्योंकि जिस तरह से वह खड़ा होकर उसको देख रहा था गुलाबी को डर था कि कहीं उसकी भाभी को शक ना हो जाए,,,, अपनी बुआ की बात सुनकर वह आगे बढ़ा और अपनी बुआ के पांव छूकर आशीर्वाद लेने लगा उसकी बुआ भी उसे आशीर्वाद देकर मुस्कुराते हुए उसे जाते हुए देखती रह गई,,,, राजु ,,,खुशी खुशी पढ़ने के लिए,,,, उसके जीवन का एक और अध्याय शुरू हो रहा था,,,।
 
राजू पढ़ने जाने के लिए तैयार हो गया था,,,, उसके मन में भी बेहद उत्सुकता,, थी,,,, पढ़ने के लिए नहीं बल्कि सोनी से मिलने के लिए उसके बाद खुशबू को अपने अंदर महसूस करने के लिए,,,, उसका गोरा चिकना बदन राजू के मन भा गया था,,,,,,,, जब इतनी खूबसूरत मैम साब पढ़ाने वाली होंगी तो पढ़ने में मन किसका लगेगा,,,,,,,अच्छे से तैयार होकर बालों में तेल लगाकर कभी करके घर से निकल गया था और वह भी अपनी मां और अपनी डूबा का आशीर्वाद देकर अपनी मां का पैर छूकर आशीर्वाद लेकिन उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नजर नहीं आ रही थी लेकिन उसकी मां की कया अनुसार उसकी बुआ के पैर छूने में उसे शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि उसकी बुआ के साथ उसके शारीरिक संबंध जो बन गए थे और वह उस औरत के पैर छूकर कैसे आशीर्वाद ले सकता है जिसकी रात भर चुदाई करता हो,,,,,,, पैर छूते वक्त भी राजू कैसा महसूस हो रहा था कि वह उसके पैर नहीं बल्कि उसकी बुर को हाथ लगा रहा हो,,,, राजू की असहजता को गुलाटी अच्छी तरह से पहचान गई थी इसलिए बात को संभालते हुए उस पर जोर देने लगी पैर छूने के लिए और वह पैर छु कर चला गया,, गुलाबी को भी अपने भतीजे को आशीर्वाद देने में असहजता महसूस हो रही थी लेकिन फिर भी वह उसे आशीर्वाद दे दि वह भी अपने मन में यही सोच रही थी कि जो लड़का रात भर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई करता हूं भला हुआ कैसे ऐसे लड़के को आशीर्वाद दे सकती है,,,, क्योंकि दोनों के बीच बुआ और भतीजा का रिश्ता तो खत्म हो चुका था एक औरत और मर्द का रिश्ता शुरू हो गया था,,,,।

दूसरे लड़के की पढ़ने के लिए तैयार हो चुके थे और रास्ते में सब इकट्ठा हो गए श्याम को राजू से पहले से ही जलन होती थी जब वह कमला चाची से बातें किया करता था और कमला चाची उसके ऊपर पूरी तरह से फिदा रहती थी अब तो छोटी मालकिन क्यों वहां पढ़ने जाना था और श्याम इसीलिए राजू से असहजता महसूस कर रहा था क्योंकि राजू उन सब में सबसे आकर्षक लड़का था और जब से हमने उसके मोटे तगड़े और लंबे लंड को देखा है तब से तो वह राजू से और ज्यादा जलने लगा है,,,, वह जानता था कि छोटी मालकिन भी उस पर ही फिदा हो जाएगी और उन लोगों की दाल गलने वाली नहीं है इसीलिए तो वहां छोटी मालकिन को राजू के बारे में बता ही नहीं रहा था वह तो अपने आप ही वह राजू का पता लगा ली थी,,,,,,

रास्ते में साथ साथ जाते हुए श्याम राजू को एक तरह से धमकाते हुए बोल रहा था,,,।

देख राजु वहां पर किसी भी प्रकार की चालाकी मत करना,,,,,, नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,,

क्या कर लेगा तू,,,, बोलना क्या कर लेगा तु,,, मैं वहां पर पढ़ने जा रहा हूं तेरी तरह ताका झांकी करने के लिए नहीं,,,,

इसीलिए कह रहा हूं कि वहां पर ज्यादा बनने की कोशिश मत करना,,,,(श्याम की बात सुनकर दूसरे लड़के उन दोनों को समझाते हुए अलग कर दिए,,, श्याम इस बात से हैरान था कि,,,वह कभी पलट कर जवाब नहीं देता था लेकिन अब उसकी बात का जवाब देने लगा था,,, यह बदलाव राजु में कैसे आया यह उसके समझ के बाहर था,,,, शायद यह बदलाव राजू मैं औरतों की संगत के कारण आया था वह बड़े अच्छे तरीके से औरतों को अपने लंड से संतुष्टि प्रदान कर रहा था,,,शायद औरतों को संतुष्टि प्रदान करने की ताकत की वजह से ही उसके व्यक्तित्व में बदलाव आने लगा था,,,,।

दूसरी तरफ सोनी बहुत खुश थी,,,,घर में बने गुसलखाने में वह अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,, वैसे तो अगर वह ना भी ना आए तो कोई कह नहीं सकता था कि वह नहाई नहीं है एकदम गोरी चिट्टी होने के नाते वह हमेशा तरोताजा दिखाई देती थी लेकिन आज का दिन उसके लिए भी बहुत खास था आज वह अपने हुस्न का जादू पूरी तरह से राजू पर बिखेर देना चाहती थी,,,, इसलिए अपने बदन को रगड़ रगड़ कर नहा रही थी,,,,,,,

Soni nangi hone k bad





बड़े घराने की होने के नाते घर में ही सब सुख सुविधा मौजूद थीं,,, घर में बने गुशलखाने में आदम कद का आईना लगा हुआ थाजिसमें सोनी अपने प्रतिबिंब को देख रही थी और मन ही मन अपनी खूबसूरती पर गर्व कर रही थी,,,,,, एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार कर वह नंगी हो चुकी थी,,,,। केवल उसके बदन पर मरून रंग की कच्छी थी,,,,,, वह जानती थी कि गांव में कोई भी औरत कच्छी नहीं पहनती थी,,, और वैसे भी गांव में किसी औरत को कच्छी के बारे में कुछ भी पता नहीं था,,, इसलिए तो गांव की औरतें साड़ी के अंदर और सलवार के अंदर नंगी ही रहती है,,, शायद सोनी भी दूसरी औरतों की तरह कभी कच्छी ना पहनती अगर वह,,, अपने पति के साथ कुछ दिन के लिए शहर रहने ना गई होती कौन से निकलकर शहर पहुंचने के बाद वहां की चकाचौंध भरी जिंदगी देकर सोनी पूरी तरह से पागल हो गई थी,,, जल्द ही वहां पर उसने एक सहेली बना ली थी और उसी के चलते उसे इस बात का ज्ञान हुआ कि,,, साड़ी के अंदर और ब्लाउज के अंदर औरतों के लिए पहनने के लिए एक और वस्त्र होता है जिसे ब्रा और पेंटी कहा जाता है,,, लेकिन सोनी ब्लाउज के अंदर पहनने वाले वस्त्र को बुरा तो कहती थी लेकिन साड़ी के अंदर पहनने वाली पैंटी को कच्छी कहती थी,,,, और अपने सहेली के द्वारा वह अपने लिए दर्जनों अंतर्वस्त्र खरीद कर रखी थी उसकी जिंदगी बड़े अच्छे से कट रही थी लेकिन दुर्भाग्यवश उसके पति का देहांत हो गया और वह फिर से गांव वापस आ गई और अपने बड़े भाई के घर रहने लगी,,,, यहां पर आकर वह ब्रा पहनना बंद कर दी क्योंकि उसके भाई ने उसकी चूचियों को दबा दबा कर एकदम खरबूजा जैसा कर दिया था और ब्रा का साइज छोटा था और कभी कबार वह किसी खास मौके पर कच्छी पहनी थी थी जिसमें उसे काफी उतेजना का अनुभव होता था,,,।

Soni raju ko yad karke mast hote huye



आईने के सामने खड़ी होकर,,, सोनी अपनी कच्छी को अपनी नाजुक उंगलियों में फंसाकर धीरे-धीरे उतारना शुरू कर दी,,,,, और देखते ही देखते अपनी मांसल चिकनी सुडोल जांघों से होते हुए वह अपनी लंबी टांग में से उस मारो नारंग की कच्छी को निकालकर वही नीचे रख‌दी,,, और बड़ी प्यार भरी नजरों से अपनी दोनों टांगों के बीच बस दो इंच की ऊभरी हुई दरार को देखने के लिए जो भी हल्के हल्के बालों से घीरी हुई थी,,,,, अपनी हथेली को उस पर रखकर हल्के से दबाते हुए अपने मन में सोचने लगी कि मर्दों की सबसे बड़ी कमजोरी यही है जिसके चलते और इस दुनिया में किसी को भी अपने वश में कर सकती हैं अपना मनचाहा काम करा सकती है,,,,,, जैसा कि वह अपनी बुरके बदोलत अपने भाई को पूरी तरह से अपने वश में की हुई थी,,, और उसका भाई भी अपनी छोटी बहन के रूप जाल में पूरी तरह से बंध सा गया था,,,।

Soni ki masti





सोनी अपनी बुर और हां तेरी रख कर उसे हल्के हल्के से सहला भी रही थी और उसे रगड़ कर गर्म भी कर रही थी,,, जिससे उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी,,,

Soni raju k sath is tarah ki kalpna karte huye



उसे राजू याद आने लगा,,,, उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड हवा में लहराता हुआ नजर आने लगा जिसके बदौलत सोनी इतना तर कट रची थी,,,,यह सारा ताम झाम राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड के प्रति आकर्षण का ही नतीजा था,,,वह किसी भी कीमत पर राजु के मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर के अंदर लेना चाहती थी,,,,, उत्तेजना से भरी हुई सोनी वैसे भी पहले से ही कामुक औरत थी,,, और इस समय राजू टैलेंट को याद करके वह पूरी तरह मदहोश हो सो चुकी थी,,, उसकी बुर से काम रस टपक रहा था,,, ऊससे रहा नहीं जा रहा था और वह,,,, गुसलखाना का दरवाजा खोलकर गुसलखाने से बाहर निकल गई,, और वह भी एकदम नंगी,,, बेझिझक उसके चेहरे पर शर्म का कोई भाव नहीं था,,, वैसे भी वह जानती थी कि घर में कोई भी नहीं है और वह इस समय पूरी हवेली में एकदम अकेली थी इसलिए वह भी झिझक बिना कपड़ों के गुशल खाने से बाहर निकल गई थी और चहल कदमी करते हुए रसोई घर की तरफ जा रही थी,,,,

उसकी चाल एकदम मादक थी उसके नितंबों की थिरकन अद्भुत थी,,, कमर की बलखाहट,,, कयामत ढा रही थी छातियों की शोभा बढ़ा रही दोनों दशहरी आम सीना ताने किसी सरहद पर तैनात जवान कि तरह आगे बढ़ रही थी,,, दिन रात लाला मुंह में भरकर दबाती हुई अपनी बहन की चूची और कार आसान कर रहा था लेकिन फिर भी सोनी की चूचीयों की कडकपन बरकरार थी,,,, पतली कमर के नीचे मैं मदमस्त उभार ली हुई गांड,,, कि दोनों फांकें आपस में रगड़ खा रही थी जिससे पूरे बदन में और ज्यादा गर्मी पैदा हो रही थी,,, सोनी अपनी खूबसूरती और अपनी खूबसूरत बदन पर गर्व करते हुए और ज्यादा इतरा कर चल रही थी वह तो अच्छा था कि इस हार ने उसे देखने वाला इस समय कोई नहीं था अगर उसे हिसाब में कोई देख लेता तो शायद उसके साथ मनमानी करने पर उतारू हो जाता या तो देख भर पानी से ही उसका पानी निकल जाता वैसे भी सोने कीमत मस्त जवानी बेलगाम थी,,, और बेलगाम जवानी को काबू में करने के लिए हट्टा कट्टा नौजवान की जरूरत थी,,, जो अपने मदमस्त मोटे तगड़े लंबे लंड रुपी खूंटे में बांध सके,,,,

Soni raju ko yad karke began se maja le rahi thi



सोनी के लिए यह पहली बार नहीं था कि वह हवेली में इधर से उधर पूरे कपड़े उतार कर नंगी घूम रही हो ऐसा वह पहले भी कर चुकी थी,,,, खास करके लाला की मौजूदगी में क्योंकि वह खुद,,, अपनी छोटी बहन सोनी को घर में उसकी मौजूदगी में जब वह उस की चुदाई करके मस्त हो गया हो तब उसे बिना कपड़ों के हवेली में घूमने के लिए रहता था ताकि वह घर में इधर से उधर नंगी घूमती हुई अपनी बहन की नंगी बड़ी बड़ी गांड को देखकर और उसकी रबड़ के गेंद की तरह उछलती हुई चुचियों को देखकर फिर से जोश में आ सके और फिर से अपने लंड को खड़ा करके उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई कर सके और ऐसा होता भी था,,,,,

बिना कपड़ों के घर में इधर से उधर खूब मैंने सोनी को भी ज्यादा तेजना का अनुभव होता था और वैसे भी वह इस समय काफी उत्तेजित हो चुकी थी,,, रसोई घर में पहुंचते हैं अपने हाथों से तोड़ कर लाई हुई ताजी सब्जियों के बीच रखे हुए उस मोटे तगड़े लंबे बैगन को ढुंढने लगी जो कि वह आज सुबह-सुबह ही खेतों में जाकर सब्जियों के साथ तोड़कर अपने लिए लाई थी,,, उसे हाथ में लेते ही उसके गोरे गोरे गाल शर्म के मारे लाल हो गए ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके हाथों में बैगन नहीं राजू का लंड आ गया हो,,,

वह तुरंत उस बेगन को लेकर वापस गुसल खाने में आ गई,,,।

ऐसा लग रहा था कि जैसे वह गुसल खाने में बेगन नहीं बल्कि किसी जवान लड़की को लेकर आई हो इस तरह से वह काफी उत्साहित नजर आ रही थी,,, वह अपनी हथेली में उस बेगन की मोटाई को लेकर राजू के लंड के बारे में सोच रही थी,,, अपने मन में उस बैगन की तुलना राजू के लंड से कर रही थी,,,, उस पर ढेर सारा थूक लगाकर वह एक टांग उठा कर टेबल पर रख दी और उस बैगन के टॉप को अपनी गुलाबी दूर के छेद के मुहाने पर रखकर धीरे धीरे उसे अंदर की तरफ जाने लगी और अपनी आंखों को बंद कर ली,,, आंखों को बंद करके वह राजू के बारे में कल्पना कर रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे राजू उसकी पतली कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने मौटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डाल रहा हो,,,। इस ख्याल से सोनी पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी और एक ही बार में,, पूरे बैगन को अपनी बुर की गहराई में डाल दी,,, कुर्सी धीरे धीरे अंदर बाहर करते हो यह सोचने लगी कि राजू अपने लंड को उसकी बुर में डालकर धीरे-धीरे अपनी कमर हिला कर उसे चोद रहा है,,,,।

Nahane k bad





यह ख्याल उसके लिए पूरी तरह से मदहोश कर देने वाला था वह एकदम मस्त हुए जा रही थी,,,,ओहहह राजू और जोर से राजू और जोर से,,,, ऐसा कहते हुए सोनी पूरी तरह से बावली होकर बैगन से मजा ले रही थी,,,, और देखते ही देखते वह एकदम से झड़ गई,,, इतनी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव वह पहली बार कर रही थी,,,, शांत होने के बाद वह बैंगन का पानी से धोकर वही रख दीऔर नहाने के बाद उसे अपने साथ वापस लेकर आई और रसोई घर में रखकर अपने कमरे की तरफ चल दी और वह भी उसी तरह से एकदम नंगी,,,,।

Taiyar hone k bad



थोड़ी ही देर में वो बड़े अच्छे से तैयार हो गई सोनी पहले से ही ज्यादा खूबसूरत थी लेकिन आज उसकी खूबसूरती निखर कर सामने आ रही थी और वह,,, आम के बगीचे की तरफ चल दी,,,।
 
सोनी आज बहुत खुश नजर आ रही थी,,,, जिसे वह महीनों से ढूंढ रही थी आज वह उसके पास पढ़ने के लिए आ रहा था सोनी को यह पता नहीं था कि वह उसे वास्तव में शिक्षा का अभ्यास कराने के लिए बुला रही थी या,,, संभोग कला के अध्याय के हर एक पन्ने को बड़ी बारीकी से पढ़ाने के लिए,,,,,,, सोनी को अपनी मदमस्त जवानी पर पूरा भरोसा था कि वह राजू को अपनी दोनों टांगों के बीच लेकर आएगी,,, और अपनी प्यासी जवानी की प्यास बुझाएगी,,, राजू के जबरदस्त लंड की वजह से उसकी रातों की नींद हराम हो गई थी,,, दिन रात उसकी आंखों के सामने राजू का टनटनाया हुआ लंड ही नजर आता था,,। जिसे पाने के लिए उसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए उसका तन बदन मचल रहा था,,,,,।किसी भी हाल में वह राज्यों को अपने आगे घुटने टेक देने पर मजबूर करने के लिए पूरी तैयारी के साथ घर से निकली थी,,, अपने नितंबों पर साड़ी का कसाव कुछ ज्यादा ही बढ़ा कर उसने साड़ी को पहनी थी,,, ताकि उसकी गांड और ज्यादा बड़ी लगे क्योंकि वह अच्छी तरह से जानते थे कि मर्दों की निगाह औरतों के किस अंग पर सबसे पहले पडती है और सबसे ज्यादा आकर्षित करती है,,, औरतों की बड़ी बड़ी गांड देखकर ही मर्दों की उत्तेजना ज्यादा बढ़ जाती है इसीलिए वह किसी भी प्रकार की कसर छोड़ना नहीं चाहती थी वह चाहती थी कि उसकी बड़ी-बड़ी मटकती गांड देखकर राजू पूरी तरह से मदहोश हो जाए उसका ईमान डगमगा जाए,,,, और इसीलिए ब्लाउज भी अपनी चूचियों की साईज से छोटा ही पहनी थी,,, और उसकी चुचियों की बीच की गहरी लकीर काफी लंबी नजर आ रही थी,,,, और आधे से ज्यादा चुची ब्लाउज से बाहर जा रही थी,,,, और आज उसने साड़ी भी पारदर्शी पहनी हुई थी जिसमें से सब कुछ नजर आ रहा था,,, कुल मिलाकर यह सब सोनी ने राजू के लिए जाल बिछा कर रखी थी उसे एक पंछी की तरह अपनी जवानी के जाल में फंसाना चाहती थी,,,,और वैसे भी दुनिया का कौन सा मर्द होगा जो ऐसी खूबसूरत औरत की मदमस्त जवानी के जाल में फंसना चाहता हो,,,,,,

Soni ki badi badi chuchiyo ko dekh kar raju ka man use dabane ka kar raha tha



आम का बगीचा सोनी का ही था गांव से अलग होने की वजह से यहां पर कोई आता जाता नहीं था इसलिए शिक्षा और संभोग के लिए ये जगह बहुत अच्छी थी,,,,,,, सोनी ऊंची नीची पगडंडियों से होती हुई आगे बढ़ रही थी और ऊंची नीची पगडंडियों पर पैर रखने की वजह से उसकी गांड की थिरकन कुछ ज्यादा ही बढ़ जा रही थी,,, बेहद मादक और अद्भुत दृश्य था,,, सोनी को इस तरह से ऊंची नीची पगडंडियों पर चलते हुए देखना भी,,किस्मत की बात थी उसकी मदमस्त कर देने वाली गांड की चाल देखकर अच्छे अच्छों का लंड खड़ा हो जाता था और यह बात सोनी भी अच्छी तरह से जानती थी,,,, उसके लिए यह बात सबसे अच्छी थी कि वह काम से बाहर रहती थी और गांव और बगीचे के बीच का रास्ता हमेशा सुनसान रहता था,,,, इसलिए उसकी ऐसी मादक चाल देखने वाला वहां कोई नहीं था,,,।

थोड़ी देर में चलते-चलते सोनी अपने गंतव्य स्थल पर पहुंच गई,,, आम का बगीचा काफी बड़ा था,, और काफी खाना भी था उसे उसे बड़े-बड़े पेड़ और सभी पेड़ों पर आम लगे हुए थे,,,,, लदा लद आम लगे होने के कारण नजारा काफी खूबसूरत दिखाई दे रहा था,,,,,,, आम के बगीचे में एक झोपड़ी नुमा घर बना हुआ था,,,, जिसमें आम की रखवाली करने वाला माली रहता था लेकिन अभी वहां कोई नहीं रहता था,,,, पास में ही पानी पीने के लिए हेड पंप लगा हुआ था,,,,।

Raju ko yad karke soni ki chut gili huyi ja rahi thi



राजू श्याम और उसके दोस्त एक घने पेड़ के नीचे खड़े होकर सोनी का इंतजार कर रहे थे,,,,वह लोग आम के बगीचे को चकर पकर देख रहे थे क्योंकि उनमें से कोई भी यहां पर कभी भी नहीं आया था और इतने सारे आम लगे होने की वजह से वह लोगों के मुंह में पानी आ रहा था,,,, राजू को तो केवल सोनी का ही इंतजार था,,,, और सामने से आती हुई देखकर राजू का मन हर्षोल्लास से भर गया,,, उसके दिल की धड़कन तेज हो गई ऐसा लग रहा था कि जैसे आसमान से उतरकर कोई परी उसके सामने चलती हुई उसके पास आ रही हो,,,, अद्भुत मादस चाल देखकर राजू के साथ साथ बाकी लोगों का भी दिल मचलने लगा था,,,, सोनी बला की खूबसूरत थी,,,,। सभी के सभी आख फाड़े उसी को ही देख रहे थे,,,, उसका जलवा खूबसूरती अद्भुत थी,,,। पास में पहुंचते ही वह लोग शालीनता दिखाते हुए हाथ जोड़कर सोनी का अभिवादन किया जवाब में इतना भी मुस्कुरा कर उन लोगों का अभिवादन की,,,, खास करके उसकी नजर राजू पर ही टिकी हुई थी उसका भोला मासूम चेहरा देखकर सोनी को यकीन नहीं हो रहा था कि इतने मासूम भोले चेहरे वाले लड़के के पजामे में बलशाली औजार होगा,,,।

वह मादक मुस्कान बिखेरते हुए राजू से बोली,,,,

तुम जाओ पहले उसमें से टेबल लेकर के आओ,,,(उस घास फूस की झोपड़ी की तरफ उंगली से इशारा करते हुए बोली,,,आते ही राजू से बातचीत की शुरुआत होते ही राजू तो मन ही मन प्रसन्न होने लगा लेकिन श्याम अंदर ही अंदर क्रोधित होने लगा खुश होकर राजू तुरंत और छोकरी की तरफ गया और लकड़ी से बने दरवाजे को धीरे से खोलकर अंदर से टेबल लेकर बाहर आ गया,,,,।)

Soni apni chut ki pyas apni ungliyo se bujhane ki koshis karte huye



हां ठीक है इसे यहां पर रख दो,,,,(आपके घने पेड़ के नीचे छांव देखकर सोनी वही टेबल रखने के लिए बोली जिस पर बैठकर वह उन लोगों को पढ़ाने वाली थी,,, राजू अच्छे से साफ करके टेबल वही रख दिया,,,, खास करके टेबल के ऊपर वाले भाग को वह अच्छे से साफ करके धुल मिटटी साफ कर दिया था ताकि,,,उसकी साड़ी गंदी ना हो जाए क्योंकि टेबल पर ही वह अपनी खूबसूरत गांड रखकर बैठने वाली थी,,,,, राजू के हाऊ भगत को देखकर सोनी मन ही मन खुश होने लगी और मुस्कुराते हुए टेबल पर अपनी गांड रख कर बैठ गई,,,,)

अब तुम लोग बैठ जाओ,,,,

(सोनी की बात सुनते ही लड़की नीचे जमीन पर बैठ गए,,, और वह एक शिक्षिका के तौर पर उन लड़कों से बोली,,)

आज तुम लोगों का पहला दीन है,,,, इसलिए एक दूसरे का परिचय होना जरूरी है,,,, मेरा नाम सोनी है,,,, और तुम लोग अपना नाम एक-एक करके बताओ,,,,

(उसकी बात सुनकर सब लड़के बारी-बारी से अपना नाम बताने लगे,,, राजू की बारी है आते ही सोनी बोली)

तुम्हारा नाम क्या है,,,,

मेरा नाम राजू है,,,

बड़ा प्यारा नाम है,,,,

(इतना कहकर सोनी मुस्कुराने लगी राजू को भी सोने की बातें उसकी मुस्कुराहट बहुत अच्छी लग रही थी खास करके उसका ध्यान सोनी की छातियों पर जा रहा था,,, क्योंकि पारदर्शी साड़ी पहनी होने की वजह से उसकी भरपूर छातियां अपने संपूर्ण आभा बिखेर रही थी,,, राजू के मुंह में तो पानी आ रहा था ऐसा नहीं था की सिर्फ राजू की नजर उस पर थी,,, बाकी लड़कों की भी नजर उसकी गोलाकार छातियों पर जा रही थी ऐसा लग रहा था कि सभी के सभी पढ़ने नहीं करती उसे ताकने झांकने के लिए आए हैं,,, अपने नाम की तारीफ सुनकर राजू से भी रहा नहीं गया और वह भी जवाब में बोला,,,)

तुम्हारा नाम भी बहुत खूबसूरत है,,,सोनी,,, हम लोग आपको सोनी दीदी कह कर बुलायेंगे,,,

सोनी दीदी,,,,( राजू के मुंह से सोनी दीदी सुनकर वह अपने आप में ही बोलते हुए अपने मन में सोचने लगी कि सोनी दीदी,,,, अगर इन लड़कों के साथ राजू कि मुझे सोनी दीदी कहेगा तो मैं तो उसकी बड़ी बहन हो जाऊंगी तभी उसके मन में ख्याल आया कि वैसे तो वह अपने बड़े भाई की भी छोटी बहन है फिर भी तुम अपने बड़े भाई से चुदवाती है अगर राजू भी उसे चोदेगा तो कौन सी आफत आ जाएगी,,, मन में यह ख्याल आते ही उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुरा कर बोली,,,)

ठीक है तुम लोग मुझे सोनी दीदी कहना,,,, अच्छा यह तो हो गया हम लोगों का परिचय अब थोड़ी पढ़ाई कर लेते हैं इससे पहले तो तुम लोग कभी पढ़े नहीं होगे,,,

Soni ki madhosh jawani



जी सोनी दीदी,,,,(श्याम एकदम से बोला क्योंकि वह भी सोनी से किसी भी तरह से बातचीत करना चाहता था)

ठीक है इसलिए तुम लोगों को शुरू से पढ़ाना होगा तभी जाकर कुछ सीख पाओगे वरना कुछ नहीं आएगा,,,,,, तुम लोग पहले थोड़ा थोड़ा दूरी बना कर बैठ जाओ क्योंकि तुम लोगों के पास लिखने के लिए पाटी नहीं है,,,कुछ दिन तक ऐसे ही पढ़ लो उसके बाद में तुम लोगों को पाटी लाकर दूंगी तब उस पर लिखना,,,।

ठीक है दीदी,,,,(उनमें से एक लड़का बोला और सभी लोग अपने से थोड़ी थोड़ी दूरी बना कर बैठ गए,,,)

हां अब ठीक है,,,,अब मैं तुम लोगों को क ख ग घ सिखाऊंगी,,,,(इतना कहते हुए वह टेबल पर से उठ कर खड़ी हो गई,,,जिस पेड़ के नीचे बैठी थी उस पेड़ की तरफ मुंह करके कुछ सोचने लगी ऐसा करने पर उसकी पीठ उन लड़कों की तरफ हो गई और सभी लड़कों की नजर उसकी कसी हुई गांड पर चली गई जो कि बेहद आकर्षक लग रही थी उसकी पतली चिकनी कमर देख कर ऊन लड़कों का ईमान फिसल रहा था,,, श्याम की भी हालत पतली हो रही थी राजू पूरी तरह से उसके रूप रंग का दीवाना हो गया था,,, राजू अच्छी तरह जानता था कि साड़ी के अंदर वह गजब का माल छुपा कर रखी है क्योंकि वह इकलौता सक्सेना उन लड़कों में जिसने अपनी आंखों से सोनी की नंगी गांड को देखा था उसे पेशाब करते हुए देखा था,,, और उसकी मदमस्त गोरी गोरी गोल गांड को देखकर उसका दीवाना हो गया था और साथ ही पेशाब करते समय उसकी बुर से निकल रही मधुर आवाज को सुनकर वह पूरी तरह से बावला हो गया था जिसके चलते वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाया था और उसी जगह पर उसे पेशाब करते हुए देख कर मुठ मारना शुरू कर दिया था और वहीं पर अपना पानी गिरा दिया था,,,,बाकी के लड़के तो सिर्फ उसके बारे में कल्पना भर कर सकते थे लेकिन राजू ने जो देखा था शायद इस बारे में उन लोगों को आभास तक नहीं था इसीलिए तो राजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी कसी हुई साड़ी के अंदर कैसा बवाल छुपा हुआ है जिसे देख कर राजू का लंड तुरंत खड़ा हो गया था,,,,। सोनी कुछ देर तक पेड़ की तरफ देखकर सोचती रही फिर वापस मुड़कर,,, राजू से बोली,,,।

राजू तुम मेरे साथ चलो झोपड़ी में से ब्लैक बोर्ड लाना है,,,(ऐसा कहते हुए वहां अपनी साड़ी की किनारी को अपनी कमर में खोसने लगी यह नजारा राजू के साथ सर बाकी लड़कों के लिए भी जान लेवा था मांसल चिकनी कमर देखकर सभी लड़कों के मन पर भारी असर हो रहा था सोनी की बात सुनकर,,, राजू आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)

क्या क्या-क्या लाना है दीदी,,,,

अरे तुम चलो तो सही,,,(सोनी अच्छी तरह से जानती थी कि ब्लैक बोर्ड के बारे में इन लोगों को कुछ भी पता नहीं है इसीलिए वह बताना नहीं बल्कि दिखाना चाहती थी,,,, और इतना कहकर वह आगे आगे चलने लगी,,,,राजू अपनी जगह पर खड़ा हो गया था और उसके पीछे-पीछे चलने लगा था उसके पीछे-पीछे चलने में भी राजू की हालत खराब हो रही थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने ही उसकी मतवाली मदमस्त बड़ी बड़ी गांड मटक रही थी उसे देखकर राजू का मन कर रहा था कि आगे बढ़ कर उसकी गांड को अपनी बाहों में भर लें और उस पर चुंबनों की बरसात कर दें,,, सोने की जवानी पूरी तरह से गदराई हुई थी उसकी जवानी को रोंदने वाला उसके रस को निचोड़ने वाला मर्द अभी तक उसे मिला नहीं था,,, इसलिए उसकी जवानी और ज्यादा उफान मार रही थी,,,, श्याम और उसके साथी उन दोनों को जाते हुए देखते रह गए उसकी मटकती हुई गांड को देखकर श्याम आपने साथी से बोला,,)

हाय क्या चीज है यार कसम से अगर ये अपनी आंखों के सामने कपड़े उतार कर नंगी हो जाए तो मुझे तो लगता है कि हम लोगों का खड़े-खड़े पानी निकल जाए,,,,

हां यार सच कह रहा है तू शायद इसकी जवानी को संभाल पाना अपने लोगों के बस की बात नहीं है,,, इसलिए तो राजू ही ठीक है,,,,,

(अपने साथी की इस तरह की बातें सुनकर श्याम उसे गुस्से से देखने लगा और बोला)

क्यों रे पागल हो गया क्या तू हम लोगों में कौन सी कमी है जो हम लोग इसकी जवानी को संभाल नहीं पाएंगे,,,

अरे यार तू नाराज मत हो लेकिन तो यह बात अच्छी तरह से जानता है कि औरतों को मोटे तगड़े लंबे लंड से ही मजा आता है और राजू का लंड देखा हा ना तु तेरी बोलती बंद हो गई थी,,,,

(राजू के लंड का जिक्र आते ही श्याम खामोश हो क्या क्योंकि वह अपनी आंखों से देख चुका था वाकई में उसका लंड एकदम मुसल कि तरह था,,, उन लोगों की बात सुन उनका एक साथी बीच में बोल पड़ा ,,,)

अरे तुम लोगों की शामत आई है क्या अपनी मौत को दावत दे रहे हो,,, उसके बारे में गंदी गंदी बातें कर रहे हो अगर पता है उसे भनक लग गई तो क्या होगा,,,,, साले मारे जाओगे पता भी नहीं चलेगा कहां चले गए लाला की बहन है,,,, और उसके पास हम लोगों की सब लोगों की जमीन गिरवी पड़ी है कुर्सी पता चल गया कि तुम लोग उसकी बहन के बारे में गंदी गंदी बातें करते हो तो तुम्हारी जुबान खींच लेगा,,,,

(उसकी बात सुनते ही सब खामोश हो गए क्योंकि जो कुछ भी वह कह रहा था वह सच था ,,, लाला बहुत हारामी था और उसके पास सभी लोगों की जमीन गिरवी पड़ी थी इसलिए कोई भी उससे जानबूझकर भी दुश्मनी मोल लेना नहीं चाहता था इसलिए वह लोग एकदम खामोश बैठे हैं और राजू और सोनी दोनों ऊस छोटे से झोपड़ी के करीब पहुंच गए,,,,।)

अब क्या करना है दीदी,,,,

दरवाजा खोलो,,,,,

(इतना सुनते ही राजू लकड़ी के दरवाजे को धीरे से खोल दिया पहले सोनी जोकि लंबाई में थोड़ी बड़ी होने के नाते अंदर प्रवेश करते समय थोड़ा सा झुककर अंदर की तरफ जाने लगी और इस तरह से झुकने में उसकी बड़ी बड़ी गांड बाहर की तरह उभर कर सामने आ गई है देखकर राजू का मन कर रहा था कि उसे पीछे से पकड़ ले उसके साड़ी कमर तक उठाकर उसकी चुदाई कर दें लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसने बिल्कुल भी नहीं दी क्योंकि वह यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि वह लाला की बहन थी,,, सोनी के अंदर प्रवेश करते ही राजु भी पीछे पीछे हल्का सा झुककर अंदर घुस गया,,, अंदर पहुंचते ही बोला,,,)

Soni ki tu thirkati huyi badi badi gaand dekhkar raju ekdam madhosh gaya





अब क्या करना है दीदी,,,?

कहीं-कहीं ब्लैक बोर्ड रखा होगा,,, उसे ढूंढना है,,,(सोनी इधर-उधर चकर पकर देखते हुए बोली,,हालांकि वह झूठ तो रही थी ब्लैकबोर्ड लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा था वह किसी भी तरह से राजु को अपनी जवानी का जलवा दिखाना चाहती तो उसे अपनी जवानी का रस खिलाना चाहती थी उसे उत्तेजित करना चाहती थी इसीलिए उस बारे में युक्ति सोच रही थी,,,)

दीदी तुम जो कुछ भी कह रही हो इस बारे में मुझे बिल्कुल भी पता नहीं है,,,

मैं जानती हूं राजू,,,,(इतना कहते हुए उसे ब्लैक बोर्ड दिखाई दे क्या जो की झोपड़ी के अंदर थोड़ी ऊंचाई पर रखा हुआ था,,,, वह चाहती तो टेबल पर चढ़कर उसे उतार सकती थीलेकिन उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था क्योंकि झोपड़ी के अंदर आते ही उसकी नजर सीडी पर पड़ी थी जो कि तीन चार पट्टे की ही थी ज्यादा ऊंचाई उसकी नहीं थी और वह राजू को उत्तेजित करने के लिए उसी सीडी का उपयोग करना चाहती थी,,,)

राजू तुम वो सीढ़ी लेकर आओ,,,,(उंगली से कोने की तरफ इशारा करते हुए बोली और राजू तुरंत वह सीढी लेकर आ गया,,,)

Soni ki saree raju k hatho is tarah se kamar tak uth gayi thi





लो दीदी,,,,(इतना कहते हुए वह सीडी को सोनी के एकदम करीब अपने हाथ का सहारा देकर रखते हुए बोला सोनी राजू की हर एक हरकत को देख रही थी उसे देखकर उत्तेजित होने जा रही थी बार-बार उसे उसके पजामे के अंदर उसका लंड झुलता हुआ नजर आ रहा था,,, सोने के मन में क्या चल रहा है राजू को इसका आभास तक नहीं था,,, अगर उसे पहले से ही सोने के मन का आभास हो जाता तो शायद यह सारा तिकडम रचाना ही नहीं पड़ता,,, अब तक तो वह सोनी की साड़ी उठाकर उसकी चुदाई कर दिया होता,,,,,,, सोनी उस छोटी सी सीढ़ी को बड़े गौर से देख रही थी नीचे से दूसरे नंबर की पाटी,, एकदम ढीली थी जो कि कभी भी टूट सकती थी,,, और उसी को देखकर उसके मन में युक्ति जन्म ले रही थी उसका दिमाग बड़ी जोरों से चल रहा था शायद ऐसे मामले में उसका दिमाग और ज्यादा तेज चलने लगता था,,, सोनी जानबूझकर सीढ़ी के नीचे वाले पाटी की मजबूती परखने के लिए नीचे की तरफ झुक गई जिसकी वजह से उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया और उसकी मदमस्त कर देने वाली चुचियां,,,,जो कि जंगली कबूतर की तरह ब्लाउज के अंदर कैद अपने पंख फड़फड़ा रहे थे वह तुरंत बाहर आने के लिए बेकाबू हो गए,,,, सोने की भारी-भरकम छातियों को देखते हुए राजू की हालत खराब हो गई,,,, राजू का मन एकदम से ललच उठा,,,उसकी चुचियों को देखते ही राजु मन में ख्याल आने लगा कि एक एक चूची 1 लीटर दूध से भरी होगी,,,,जिसे मुंह में भर कर पीने में बहुत मजा आएगा,,,, चुचियों के साईज से छोटा ब्लाउज अपने छोटे-छोटे बटन के सहारे ना जाने कैसे उसकी भारी-भरकम चुचियों को सहारा देकर थामे हुए था,,,,,,अगर थोड़ा सा और झटका खाता तो शायद उसके ब्लाउज के बटन चरचरा कर टूट जाता है और उसकी मदमस्त कर देने वाली चूचियां एकदम से बाहर आकर राजू से गुफ्तगू करने लगती,,,,राजू अपने मन में यही सोच रहा था कि कहां से उसके ब्लाउज का बटन टूट जाता है तो उसे उसकी नंगी चूचियों को देखने का मौका मिल जाता नंगी गांड के दर्शन तो वह झाड़ियों में कर ही चुका था,,, वह एकटक आंखें आंखें झुकी हुई सोनी की ब्लाउज में लटक रहे चुचियों को देख रहा थाइस बेहद कामोत्तेजक नजारे का असर राजू को अपनी दोनों टांगों के बीच होता हुआ महसूस हो रहा था,,, उसके लंड में तनाव आना शुरू हो गया था,,, और सोनी अपनी जाल फेंकने में कामयाब हो गई थी लेकिन वह तसल्ली कर लेना चाहती थी कि वह पूरी तरह से अपनी चाल में कामयाब हुई है कि नहीं क्योंकि वह जानबूझकर इस तरह से चुकी थी और अपनी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा ही थी यही देखने के लिए राजू की तरफ देखिए कि वह उसकी चूचियों की तरफ देख रहा है कि नहीं और उसे अपनी चूचियों की तरफ पागलों की तरह देखता पाकर वह मन ही मन खुश होने लगी,,,, जितना झलक दिखाना था उतना सोनी ने दिखा चुकी थी और मुस्कुरा कर अपने पल्लू को पकड़कर खड़ी होते हुए अपनी साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर रखकर दोनों हाथों से उसे अपनी छातियों पर खींचकर ढकते हुए बोली,,,

Is halaat me raju ka man soni ki chudai karne ko kar raha tha



बाप रे मुझे तो शर्म आ रही है,,,,(राजू अभी भी उसकी भारी-भरकम छातियों की तरफ देख रहा था,,, राजू को इस तरह से ताकता हुआ देख कर सोनी को अपनी बुर में कुछ होता हुआ महसूस हो रहा था,,,, सोनी की बात सुनकर राजू बोला,,,)

किस बात के लिए दीदी,,,

इसीलिए कि मेरा साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिर गया,,,

अरे वह तो जानबूझकर थोड़ी ना गिरा है अनजाने में गिर गया,,,,,

हां कह तो तुम सच ही रहे हो,,,,(इतना क्या करूं मुस्कुराने लगी,,, और सीढ़ी को यह जगह लगाने के लिए बोल कर वह बोली,,,)

संभाल तो लोगे ना,,,

हां दीदी सामान तो लूंगा लेकिन मुझे कह दो मैं उतार दूंगा क्या उतारना है,,,

तुम्हें अगर मालूम होता तो तुम ही को बोलती लेकिन तुम्हें मालूम नहीं है इसलिए मुझे ही उतारना होगा,,,, तीन चार लकड़ियों के के बीच दबा हुआ है,,,,,,,

ठीक है दीदी तुम सीढ़ी पर चढ़ो मै संभाल लूंगा,,,

मेरा वजन ज्यादा है राजू,,,

कोई बात नहीं दीदी मैं भी हट्टा कट्टा जवान हूं आराम से संभाल लूंगा,,,

(राजू की बात सुनते ही सोनी मन ही मन मुस्कुराने लगी और अपने मन में ही बोली इसीलिए तो अपनी जवानी तुझे सोपने का इरादा कर लि हुं)

चलो तुम पर मुझे पूरा भरोसा है आराम से पकड़ना,,, दूसरे नंबर की पाटी एकदम कमजोर है,,,(सीढी को योग्य स्थान पर लगाते हुए वह बोली,,)

चिंता मत करो दीदी में गिरने नहीं दूंगा,,,(राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था सोनी के तन से उठा रही मादक खुशबू राजू को मदहोश कर रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था इतने करीब से वह सोनी के खूबसूरत बदन की गर्मी को अपने अंदर महसूस कर रहा था हालांकि वह पहले भीसाड़ियों के अंदर सोने की नंगी गांड को देख चुका है उस के नंगे पन के दर्शन कर चुका है लेकिन इस समय के हालात कुछ और थे,,, सोनी के द्वारा बिना कपड़े उतारे ही राजू पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, इसका असर उसे अपने दोनों टांग के बीच होता हुआ महसूस हो रहा था,,,, राजू की बात सुनकर वह तसल्ली के साथ सीढ़ी पर चढ़ने लगी पहली सीढ़ी पर पैर रखने से पहले वह अपनी साड़ी को थोड़ा सा उठा कर अपनी कमर में खोंश दी जिससे उसकी साड़ी उसके घुटने तक उठ गई और उसकी नंगी दूधिया चिकनी पिंडलिया नजर आने लगी,,,जिसे देखते ही राजू की आंखों में हमारी जाने लगी राजू का मन उसकी नंगी चिकनी टांगों को छूने का कर रहा था लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी,,,, झोपड़ी के अंदर क्या हो रहा है बाहर बैठे लड़कों को इसका अहसास तक नहीं था लाला की बहन होने के नाते वालों किसी भी प्रकार की गलती नहीं करना चाहते थे इसलिए वहीं बैठे रह गए ,,, हालांकि उन लोगों के मन में भी उत्तेजना का सैलाब रहा था लेकिन किसी तरह से वह लोग अपने आप पर काबू किए हुए थे,,,



राजू की किस्मत बड़े जोरों पर थी कुछ ही दिन में उसे एक-एक करके नई-नई औरतों का संगत प्राप्त होता जा रहा था पहले कमला चाची फिर उसकी खुद की जवान होगा और अब लाला की बहन सोनी जो अपनी जवानी के जलवे बिखेर रही थी,,,, सोनी का भी दिल जोरों से धड़क रहा था साड़ी को थोड़ा सा उठा कर कमर मैं खोसने की जगह वह अपने मन में सोच रही थी कि क्यों ना साड़ी को कमर तक उठाकर राजू को अपने नंगे पन का दर्शन करा दे अपनी बुर्का दर्शन करा दे जिसे देखकर वह पूरी तरह से बावला हो जाए और उसका गुलाम बन जाए,,, लेकिन ऐसा करना शायद उसके भी संस्कार में नहीं था खुले तौर पर वह इस तरह की हरकत नहीं करना चाहती थी भले ही वह अपनी कामुक अवस्था को संभालना पा रही हो लेकिन खुले तौर पर इस तरह की हरकत उसे भी मंजूर नहीं थी वह इस खेल में धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहती थी,,,, ताकि राजू को भी लगे कि सब कुछ अनजाने में हुआ है,,,सोनी अपनी जवानी का जलवा बिखेरने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और वह अपनी एक टांग सीढ़ी पर रखकर चढना शुरु कर दी थी पहली सीढ़ी मजबूत थी इसलिए उसे दिक्कत नहीं हुई लेकिन वो जानती थी कि दूसरी सीढ़ी कमजोर है और उस पर धीरे से पैर रखकर वह आगे बढ़ने लगी दूसरी सीढ़ी पर पहुंचते ही टांग उठाने की वजह से उसकी गोलाकार गांड बड़े-बड़े तरबूज की तरह उभर कर सामने आ गई,,, मानो कि जैसे खेतों में झाड़ियों के बीच सबसे बड़ा तरबूज उठाए खड़ा हो,,,,गोल गोल गांड देख कर राजू की हालत खराब हो रही थी उसका मन कर रहा था कि अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसकी गांड को थाम ले उसकी गर्मी को अपने अंदर महसूस करें,,, लेकिन वह सिर्फ देखता ही रह गया,,, देखते ही देखते सोनी तीसरे सीढ़ी पर चढ़ चुकी थी और नीचे खड़ा राजू,,, नजर उठाए ऊपर की तरफ देख रहा था उसकी कोशिश पूरी थी कि उसकी नजर उसकी साड़ियों के बीच अंदर तक पहुंच जाएं लेकिन सोनी नहीं पीनी भी साड़ी ऊपर नहीं उठाई थी कि उसकी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच पाती अंदर बहुत अंधेरा था इसलिए उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था,,, सोनी राजू को बराबर समय दे रही थी ताकि वह उसकी खूबसूरत जवानी के रस को अपनी आंखों से पी सके,,,,,,।

ठीक से पकड़े रहना राजू,,,, कहीं में गिर ना जाऊं,,,

नहीं गिरोगी दीदी मैं पकड़ा हूं,,,

अरे सीढ़ी नहीं मेरे पैर पकड़ मेरे पैरों में कंपन हो रहा है मेरा पैर कांप रहा है,,,, कहीं में गिर ना जाऊं,,,,

(फिर पकड़ने वाली बात सुनकर राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा एक तरह से उसके नंगे जिस्म को छुने का आमंत्रण था और वह ऐसा मौका भला कैसे अपने हाथ से जाने देता उसकी बात सुनते ही तुरंत सीढ़ीयों को छोड़कर वह सोने की टांग को पकड़ लिया और वही उसकी पिंडलियों को जिसे अपनी हथेली में दबाते ही उसका तन बदन जोश से भर गया,,,, और सोनी की भी हालत खराब हो गई राजू के प्रति को पूरी तरह से आकर्षित हो चुकी थी इसलिए कहा क्योंकि हथेली अपनी नंगी चिकनी टांग पर पढ़ते हैं उसकी बुर से मदन रस की बूंद टपक गई यह सोने की तरफ से राजू के चरणों में समर्पण का भाव था और पूरी तरह से राजू को समर्पित हो चुकी थी मन से लेकिन अभी तन से बाकी था,,,,)

अब ठीक है ना दीदी,,,

हां राजू संभालना,,,

(राजू का तो लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था पजामे में तंबू सा बन गया था,,,, सोनी ऊंचाई पर रखे हुए ब्लैक बोर्ड को उतारने लगी जो कि दो चार लकड़ियों के नीचे रखा हुआ था,,,,ब्लैक बोर्ड को उतारते समय उसके मन में गई हो रहा था कि राजू जिस तरह से नीचे खड़ा होकर ऊपर की तरफ देख रहा है अगर वह अपनी साड़ी को उठाकर थोड़ा और ऊपर कर दी होती तो उसे उसकी जवानी की दहलीज नजर आने लगती,,,और , राजू को वह पूरी तरह से अपना दीवाना बना देती,,,,लेकिन जितना भी व कर रही थी राजू के लिए काफी था राजू पूरी तरह से अपने अंदर उत्तेजना का अनुभव कर रहा था एक तो उसके बदन से उठ रही खुशबू उसके होश उड़ा रही थी,,, और ऊपर से वह उसकी नंगी पिंडलियों को पकड़े हुए था जिससे उसका जोश दुगुना होता जा रहा था,,,। उत्तेजना के मारे सोनी को भी अपनी कच्छी गीली होती महसूस हो रही थी,,।

जिस चीज को वह ढूंढ रही थी वह मिल चुका था वह उसके हाथों में था अब नीचे उतरना चाहती थी,,,, इसलिए मैं अपना एक पैर नीचे की तरफ लाकर पाटी,, पर रख दी,,,बार-बार राजू की नजर उसकी गोलाकार गांड पर चली जा रही थी जो कि ऊपर नीचे पैर करने की वजह से उसकी गांड कुछ ज्यादा ही उभरकर बड़ी हो जा रही थी जिसे अपने दोनों हाथों में थामने का मन कर रहा था,,,,, सोनी भी यही चाहती थी कि राजू अपने हाथों में उसकी दोनों गांड की फाको को थाम ले,,, और अपने मन में बस यही सोच ही रही थी वह सोच रही थी आखिरी सीढ़ी जब आएगी तो जरूर वह कुछ ऐसा करेगी जिससे राजू को उसकी गांड पकड़ना ही पड़ेगा,,,,। अंतिम दो सीढ़ी बाकी थी और दूसरे नंबर की सीढ़ी कमजोर थी वह तीसरी सीडी पर आराम से खड़ी थी,,,, राजू ठीक सीढ़ियों के इर्द गिर्द अपनी दोनों टांगों को रखकर बीचो-बीच खड़ा था,,, ताकि अगर सोनी गिरे तो वह उसे थाम ले,,,,वह दूसरी सीढ6 पर अपने पैर रखती ईससे पहले ही उत्तेजना के मारे वो एकदम से लड़खड़ा गई,,,,

अरे अरे राजू देखना,,,,( और उसका इतना कहना था कि उसका पैर फिसल गया तीसरी सीढ़ी से ही नीचे फिसल कर गिरने लगी,,,,, लेकिन राजू पूरी तरह सचेत था एकदम तैनात,,,, वह सोनी की टांगों को पकड़े रह गया और उसकी हथेली उसकी नंगी चिकनी टांग ऊपर फिसलते हुए जैसे-जैसे भी नीचे आ रही थी वैसे वैसे उसकी हथेली उपर की तरफ जा रही थी,,,,और उसके पैर नीचे जमीन को छूते इससे पहले ही राजू की हथेली उसकी कमर तक पहुंच गई थी और उसकी साड़ी कमर तक उठ गई थी क्योंकि राजू की हथेली उसकी कमर पर थी और उसकी सारी पूरी तरह से उसकी हथेली के ऊपर टिकी हुई थी,,, लेकिन राजू ने अपनी मजबूत हाथों का सहारा देकर उसे थाम लिया था उसे गिरने नहीं दिया था ना ही उसे चोट लगने दिया था,,,,।

जैसे ही सोनी के पैर जमीन पर पड़े उसकी सांसे तेजी से चलने लगी वो एकदम से घबरा गई थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह सीढ़ी पर से नीचे गिर गई है क्योंकि वह तो दूसरी सीढ़ी पर पैर रखकर सिर्फ नाटक करने वाली थी लेकिन वह हकीकत में ही गिर गई थी,,,,,, जब उसे इस बात का एहसास हुआ तब वह अपने आपको राजू की बाहों में पाई जैसा कि वह चाहती भी थी लेकिन यह सब अनजाने में हुआ था,,,, राजू की दोनों हथेली सोने की चिकनी मांसल कमर पर थी,,, जोकि राजु ने कभी ऐसा सपने में भी नहीं सोचा था,,,, सोनू का बदन राजू के बदन से एकदम चिपका हुआ था एक तरह से राजू ने उसे कमर पकड़कर अपनी बाहों में ले लिया था पजामे के अंदर राजू का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था जो कि तुरंत उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बड़ी बड़ी गांड के बीच धंसना शुरू कर दिया था,,।राजू कोचर इस बात का एहसास हुआ तो वह पूरी तरह से मस्त हो गया पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगा क्योंकि वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका लंड इस तरह से उसकी गांड को स्पर्श होगा,,, पल भर में राजू की सांसे तेजी से चलने लगी दूसरी तरफ सोनी की भी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,,,,

राजू ने उसे अपनी मजबूत बजाओ में पकड़ कर उसे गिरने से बचाया था इस बात की तसल्ली सोनी को अच्छी तरह से थी लेकिन जैसे ही उसे अपनी गांड के बीचों बीच कुछ कठोर चीज है जो भी महसूस हुई तो एकदम से दंग रह गई,,,तब जाकर उसे इस बात का अहसास हुआ कि वह राजू की बाहों में थी और राजू का लंड जोकि पजामे में होने के बावजूद भी उसकी गांड में धंशा जा रहा था,,, पल भर में सोनी की भी सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,,, जिस तरह से वह राजू के साथ उसे उत्तेजित करना चाहते थे अनजाने में ही वह होता जा रहा था,,,

राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड की ताकत को वह अपनी गांड पर महसूस कर रही थी,,,, उसे अंदाजा लग गया था कि राजू का लंड कितना दमदार है,,,वह अपनी स्थिति की तरफ ध्यान दे तो उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी साड़ी पूरी तरह से कमर तक उठ गई है और कमर के नीचे वह पूरी तरह से अपनी कच्छी को छोड़कर नंगी ही थी और उसका कच्छी के लिए सोनी को अपने आप पर गुस्सा आने लगा था अपने मन में सोचने लगी कि अगर कच्छी ना पहनी होती तो आज राजू के लंड को अपने गांड के बीचो बीच अपनी बुर पर महसूस कर ली होती,,,, राजू था कि उसे छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था उसे तो मजा आ रहा था चिकनी कमर को अपने दोनों हाथों में थाम कर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सोनी को चोदने की तैयारी कर रहा हो,,, राजू अपने आपको किस्मत वाला समझने लगा था मौके का फायदा उठाते हुए अपनी कमर को वह आगे की तरफ फैल रहा था जिसका एहसास सोनी को बड़े अच्छे से हो रहा था और राजू की इस हरकत पर वह पूरी तरह से पानी पानी हुए जा रही थी,,,उसे उम्मीद नहीं थी कि अनजाने में ही उसकी साड़ी कमर तक उठ जाएगी और वह भी राजू के हांथो,,,,।

सोनी अपने मन में सोच रही थी कि अब राजू छोड़ेगा अब राजू छोड़ेगा लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था वह तो और मदहोशी के साथ उसे पकड़े हुए था और साथ ही पजामे में होने के बावजूद भी,,, अपने लंड को उसकी बड़ी बड़ी गांड के बीचो-बीच दे रहा था,,,, लेकिन उसे भी गांड के बीच कपड़ा सा महसूस हो रहा था इसलिए वह सोनी को ऊपर से नीचे की तरफ देख रहा था उसकी साड़ी पूरी तरह से कमर तक उठी हुई थी और इसीलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार साड़ी पूरी तरह से ऊपर की तरह टूट जाने के बावजूद भी कौन सा कपड़ा लगा हुआ है क्योंकि वह भी नहीं जानता था कि शहरी औरतें साड़ी के अंदर कच्छी पहनती हैं,,,,,, सोनी की बुर पूरी तरह से पानी छोड़ रही थी,,, अगर बाहर दूसरे लड़के ना होते तो उसी समय राजू के लंड को अपनी बुर में लेकर चुदवा ली होती,, लेकिन इस समय मजबूर थीलेकिन अपनी हरकत से भी राजू ने उसे पूरी तरह से उत्तेजना के महासागर में डुबो दिया था उसकी कच्ची पूरी तरह से काम रस से गीली हो चुकी थीउसे इस बात का डर था कि काफी समय हो गया था झोपड़ी के अंदर कहीं कोई लड़का यहां आ ना जाए इसलिए वह राजू से बोली,,,।





अच्छा हुआ राजू तूने मुझे संभाल लिया वरना आज तो मैं गिर गई होती,,,

मेरे होते हुए मैं तुम्हें गिरने नहीं दूंगा दीदी,,,

बस कर अब छोड़ो मुझे ब्लैकबोर्ड बाहर लेकर चलना है,,,

(राजू का छोड़ने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था सोने के बदन की गर्माहट उसे पूरी तरह से उत्तेजित किए हुए थी और उसकी बड़ी बड़ी गांड का स्पर्श पाकर उसका लंड लोहे के रोड की तरह हो गया था,,, लेकिन फिर भी उसकी बात मानते हुए वह उसे अपनी बाहों की कैद से आजाद कर दिया,,,, सोनी की सांसे अभी भी ऊपर नीचे हो रही थी,,,, राजू से अलग होते हैं सोनी अपनी साड़ी को व्यवस्थित करने लगी व्यवस्थित करते समय,,, राजू को उसकी कच्छी नजर आ गई जिसे देख कर उसे थोड़ा अचरज हुआ लेकिन समझ नहीं पाया,,,,सोनी बहुत खुश थी क्योंकि उसकी नजर राजू की पर जाने की तरफ चली गई थी जो की पूरी तरह से उठा हुआ था,, और वह यही चाहती भी थी,,, सोनी का दिल जोरों से धड़क रहा,,,अपनी साड़ी को व्यवस्थित करने के बाद वह मुस्कुराते हुए राजू के पजामे में बने तंबू को देख कर बोली,,।)

तो यही था जो मेरे पीछे चुभ रहा था,,, लगता है बहुत बड़ा है,,,।

(सोनी के मुंह से इतना सुनकर राजू पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गया उसे लगने लगा कि जैसे उसके लिए रास्ता साफ होता जा रहा है वह मन ही मन बहुत खुश होने लगा लेकिन अपने पजामे में बने तंबू को छुपाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं किया,,,, बस खड़ा मुस्कुरा रहा था और उसकी मुस्कुराहट को देखकर सोनी भी समझ गई थी कि यही वह लड़का है जो उसकी जवानी की गर्मी को शांत करेगा,,,,)

चलो जल्दी चलो काफी देर हो गई में हमें,,,(इतना सुनकर जैसे ही राजू चलने को हुआ राजू के तंबू की तरफ देखते हुए वह बोली,,,)

इस हाल में चलोगे,,(उंगली से राजू के तंबू की तरफ इशारा करते हुए) ऐसे चलोगे तो वह लोग क्या सोचेंगे मैं चलती हूं तुम इस ब्लैकबोर्ड को साफ करके लेते आना तब तक तुम्हारे पजामे का तूफान शांत हो जाएगा,,, और हां सबके साथ छूटने पर जाना जरूर लेकिन थोड़ी देर में वापस इधर ही आ जाना क्योंकि मैं तुम्हारा यही इंतजार करूंगी,,,(इतना कहकर वो मुस्कुरा कर बाहर निकल गई और राजू उसे देखता रह गया और फिर जल्दी-जल्दी ब्लैकबोर्ड को साफ करने लगा,,, इतनी देर में उसका लंड शांत भी हो गया और वह ब्लैकबोर्ड लेकर बाहर आ गया,,,।)
 
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