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पहाडी आम (इन्सेस्ट)
अब बता तुझे कुछ दिखाई दे रहा है,,,,,(आम के पेड़ पर चढा सूरज नीचे खड़ी अपनी बहन की तरफ देखकर बोला,,,)
हां भैया वहां तुम्हारे थोड़ा सा ऊपर ही है बड़ा सा आम,,,
कहां है,,,?
अरे भैया तुम्हारे ऊपर ही तो है सीधा सर के ऊपर हाथ ऊपर करो तुम्हारे हाथ में आ जाएगा,,,,
(नीचे खड़ी अपनी बहन की बात मानते हुए सूरज बिना देखे ही अपने हाथ को ऊपर की तरफ ले गया तो वाकई में उसके हाथ में बड़ा सा आम आ गया और मुस्कुराते हुए वह आम को एक झटके से तोड़ लिया और बोला,,,,,)
अरे वह रानी तेरी नजर तो बहुत तेज है मेरे सर के ऊपर इतना बड़ा आम है और मुझे दिखाई नहीं दे रहा है और नीचे खडी तु सब कुछ देख ले रही है,,,(इतना कहते हुए सूरज उसे बड़े से आम को नीचे की तरफ गिरा दिया और नीचे खड़ी रानी अपनी कुर्ती को फैला कर उस गिरते हुए आम को अपनी कुर्ती में ले ली,,,)
अच्छा अब इतने से तो काम चल जाएगा ना,,,,
नहीं भैया इतने से कुछ भी होने वाला नहीं है मा ३ ढेर सारा आम मंगाया है,,,, तुम तो जानते ही हो मुझे अचार कितना पसंद है साल भर भी नहीं चल पाता इसलिए मा ने इस बार ज्यादा आम मंगाए हैं,,,,, अब जल्दी-जल्दी आम नीचे गिरा वरना बगीचे का मालिक आ गया तो कुछ भी हाथ में नहीं लगेगा,,,,
तू सच कह रही है रानी मैं तो भूल ही गया,,,,
(और इतना कहने के साथ ही सूरज एक बड़ी सी डाली को पकड़ कर जोर-जोर से हिलाने लगा और एक साथ सरे आम नीचे गिरना शुरू हो गए जिसे जल्दी-जल्दी से रानी बटोर कर उसे अपनी कुर्ती में रख रही थी कुर्ती भर जाने के बाद उसने एक थैला भी लेकर आई थी जिसमें वह जल्दी-जल्दी आम रख रही थी,,, देखते ही देखते सूरज ढेर सारा आम नीचे गिरा चुका था और आम के पेड़ पर चढ़कर वह दूर-दूर तक नजर दौड़ा कर यह अभी देख ले रहा था कि कहीं कोई यहां तो नहीं रहा है,,,, दोनों भाई बहन कच्चे आम तोड़ने के लिए चोरी-छिपी दीवाल कूद कर इस बगीचे में आए थे वह दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि तेज गर्मी होने की वजह से बगीचे का मालिक यहां पर नहीं होगा,,, और इसी मौके का फायदा उठाते हुए सूरज और रानी दोनों भाई बहन ढेर सारा आम तोड़कर बटोर लेना चाहते थे,,, और ऐसा हो भी रहा था ,,, सूरज ढेर सारा आम नीचे गिरा चुका था,,,, वह जानता था कि इतना सारा हम उसकी बहन ठेले में भर नहीं पाएगी इसलिए वह धीरे से नीचे उतरा और जल्दी-जल्दी वह भी ठेले में आम भरना शुरू कर दिया देखते-देखते पूरा तेरा आम से भर गया,,,, रानी के कुर्ते में भरे हुए आम को सूरज अपने साथ लाई हुई दूसरी थैली में भरने लगा ताकि यहां से जाने में आसानी रहे,,,,,।)
अरे भैया तुम दूसरा थैला कब उठा लाए,,,
मैं जानता था कि दूसरे ठेले की भी जरूरत पड़ेगी इसलिए मैं अपने साथ ले आया था,,,, अब जल्दी-जल्दी पर और यहां से चल वरना बगीचे का मालिक आ गया तो गजब हो जाएगा,,,,।
(इतना सुनते ही रानी जल्दी-जल्दी आम को थैली में भरने लगी और देखते-देखते दोनों तेरा आम से भर गया कि तभी दोनों को दूर से आ रही कदमों की आवाज सुनाई दी दोनों एकदम चौकन्ने हो गए,,,,)
रानी लगता है कोई आ रहा है,,,, जल्दी से थैला उठा,,,
(सूरज के इतना कहते ही रानी जल्दी से आम से भरा हुआ थैला उठाकर अपने कंधे पर ले ली और सूरज भी दूसरे थैली को उठाकर जल्दी-जल्दी जाने लगा तब तक बगीचे के मालिक की नजर उन दोनों पर पड़ गई थी और वह गाली देता हुआ चिल्लाया,,,,)
कौन है रे मादरचोद इसकी बहन का चोदु,,,, कौन है बगीचे में अपनी बहन चुदवा रहा है,,, भोसड़ी वाला,,,(इतना कहते हुए वह बगीचे का मालिक उन दोनों के पीछे भागते हुए बड़ा सा पत्थर उठाकर मारा जो कि उन दोनों के बगल में से चला गया वह दोनों एकदम से घबरा गए थे,,,)
भाग रानी जल्दी भाग अगर उसके हाथ लग गए तो खैर नहीं है,,,,
(इतना सुनते ही रानी और सूरज दोनों जान लगाकर भागने लगी और देखते ही देखते वह दोनों दीवार के पास पहुंच गए थे अभी भी बगीचे का मालिक उन्हें दोनों से लगभग 40-50 मीटर की दूरी पर था और वह भागता हुआ आ रहा था दोनों के पास समय बिल्कुल भी नहीं था सूरज बोला,,,)
बाप रे बिल्कुल भी समय नहीं है रानी तु जल्दी से दीवार पर चढ़ थैला यही छोड़ दे,,,,
नहीं भैया अगर आज आम नहीं ले गए तो फिर कभी आम मिलने वाला नहीं है,,,
अरे तू चढ तो सही,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज उसके हाथ से थैला लेकर वही रख दिया और उसे दीवार पर चढ़ने लगा रानी एक पर को आदि दीवार पर रखकर ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगी लेकिन वह चढ़ नहीं पा रही थी तो सूरज उसकी मदद करते हुए उसे दीवार पर चढ़ने लगा और ऐसे हालात में उसके दोनों हाथ उसकी गोल-गोल नितंबों पर आ गए थे जिसे वह पकड़कर उसे ऊपर की तरफ चढ़ा रहा था लेकिन इस अफरा तफरी के माहौल में उसे इस बात का एहसास भी नहीं हो रहा था कि वह अपनी बहन को दीवार पर चढ़ते हुए उसकी गांड पर सहारा देकर उसे ऊपर उठाया हुआ है,,, इस जल्दबाजी में दीवार खोदने के चक्कर में सूरज जी जैसे जवान लड़के को इस बात का जरा भी एहसास नहीं हो रहा था कि वह एक खूबसूरत लड़की की गोल-गोल गांड को अपने हाथों से पकड़े हुए था अगर कोई और माहौल होता तो शायद उसके ही हरकत पर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो जाता और रानी जो की एक खूबसूरत जवान की दहलीज पर कदम रख चुकी लड़की थी एक जवान लड़के की ईस हरकत पर अपनी बुर से पानी फेंक दी होती,,,, लेकिन दोनों जवानी से भरे हुए भाई बहन को इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी वह जल्द से जल्द दीवार को कुद जाना चाहते थे,,,, तभी फिर उसे बगीचे के मालिक की गाली सुनाई दी,,,)
तुम्हारी मां की भोसड़ी में लंड डालु मादरचोद,,,,(इतना कहने के साथ ही वह फिर से एक बड़े पत्थर को मारा और इस बार भी उसका निशाना चूक गया)
बाप रे भैया यह बगीचे का मालिक तो पागल हो गया इधर उसके हाथ लग गए तो हड्डी पसली एक कर देगा,,,,
इसीलिए तो कह रहा हूं तू जल्दी से चढ़ जा,,,(और इतना कहते हुए वह अपनी बहन को दीवार पर चढ़ा दिया था उसकी गोल गोल गांड को पकड़ कर उसे सहारा देकर वहां दीवार पर सही सलामत चढ़ा दिया था और इसके बाद वह जल्दी से आम के थैले को अपनी बहन को पकडाने लगा,,, उसकी बहन भी जल्दबाजी दिखाते हुए आम के दोनों तेरे को पकड़ कर उसे दूसरी तरफ नीचे गिरा दिए और खुद कूद गई वह जानती थी कि उसका भाई आराम से दीवार को जाएगा और ऐसा ही हुआ सूरज जल्दी से दीवार खुद के दूसरी तरफ कूद गया था और जल्दी से आम के ठेले को पड़कर उसे बगीचे से दूर निकल गया था,,,,।
अब बता तुझे कुछ दिखाई दे रहा है,,,,,(आम के पेड़ पर चढा सूरज नीचे खड़ी अपनी बहन की तरफ देखकर बोला,,,)
हां भैया वहां तुम्हारे थोड़ा सा ऊपर ही है बड़ा सा आम,,,
कहां है,,,?
अरे भैया तुम्हारे ऊपर ही तो है सीधा सर के ऊपर हाथ ऊपर करो तुम्हारे हाथ में आ जाएगा,,,,
(नीचे खड़ी अपनी बहन की बात मानते हुए सूरज बिना देखे ही अपने हाथ को ऊपर की तरफ ले गया तो वाकई में उसके हाथ में बड़ा सा आम आ गया और मुस्कुराते हुए वह आम को एक झटके से तोड़ लिया और बोला,,,,,)
अरे वह रानी तेरी नजर तो बहुत तेज है मेरे सर के ऊपर इतना बड़ा आम है और मुझे दिखाई नहीं दे रहा है और नीचे खडी तु सब कुछ देख ले रही है,,,(इतना कहते हुए सूरज उसे बड़े से आम को नीचे की तरफ गिरा दिया और नीचे खड़ी रानी अपनी कुर्ती को फैला कर उस गिरते हुए आम को अपनी कुर्ती में ले ली,,,)
अच्छा अब इतने से तो काम चल जाएगा ना,,,,
नहीं भैया इतने से कुछ भी होने वाला नहीं है मा ३ ढेर सारा आम मंगाया है,,,, तुम तो जानते ही हो मुझे अचार कितना पसंद है साल भर भी नहीं चल पाता इसलिए मा ने इस बार ज्यादा आम मंगाए हैं,,,,, अब जल्दी-जल्दी आम नीचे गिरा वरना बगीचे का मालिक आ गया तो कुछ भी हाथ में नहीं लगेगा,,,,
तू सच कह रही है रानी मैं तो भूल ही गया,,,,
(और इतना कहने के साथ ही सूरज एक बड़ी सी डाली को पकड़ कर जोर-जोर से हिलाने लगा और एक साथ सरे आम नीचे गिरना शुरू हो गए जिसे जल्दी-जल्दी से रानी बटोर कर उसे अपनी कुर्ती में रख रही थी कुर्ती भर जाने के बाद उसने एक थैला भी लेकर आई थी जिसमें वह जल्दी-जल्दी आम रख रही थी,,, देखते ही देखते सूरज ढेर सारा आम नीचे गिरा चुका था और आम के पेड़ पर चढ़कर वह दूर-दूर तक नजर दौड़ा कर यह अभी देख ले रहा था कि कहीं कोई यहां तो नहीं रहा है,,,, दोनों भाई बहन कच्चे आम तोड़ने के लिए चोरी-छिपी दीवाल कूद कर इस बगीचे में आए थे वह दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि तेज गर्मी होने की वजह से बगीचे का मालिक यहां पर नहीं होगा,,, और इसी मौके का फायदा उठाते हुए सूरज और रानी दोनों भाई बहन ढेर सारा आम तोड़कर बटोर लेना चाहते थे,,, और ऐसा हो भी रहा था ,,, सूरज ढेर सारा आम नीचे गिरा चुका था,,,, वह जानता था कि इतना सारा हम उसकी बहन ठेले में भर नहीं पाएगी इसलिए वह धीरे से नीचे उतरा और जल्दी-जल्दी वह भी ठेले में आम भरना शुरू कर दिया देखते-देखते पूरा तेरा आम से भर गया,,,, रानी के कुर्ते में भरे हुए आम को सूरज अपने साथ लाई हुई दूसरी थैली में भरने लगा ताकि यहां से जाने में आसानी रहे,,,,,।)
अरे भैया तुम दूसरा थैला कब उठा लाए,,,
मैं जानता था कि दूसरे ठेले की भी जरूरत पड़ेगी इसलिए मैं अपने साथ ले आया था,,,, अब जल्दी-जल्दी पर और यहां से चल वरना बगीचे का मालिक आ गया तो गजब हो जाएगा,,,,।
(इतना सुनते ही रानी जल्दी-जल्दी आम को थैली में भरने लगी और देखते-देखते दोनों तेरा आम से भर गया कि तभी दोनों को दूर से आ रही कदमों की आवाज सुनाई दी दोनों एकदम चौकन्ने हो गए,,,,)
रानी लगता है कोई आ रहा है,,,, जल्दी से थैला उठा,,,
(सूरज के इतना कहते ही रानी जल्दी से आम से भरा हुआ थैला उठाकर अपने कंधे पर ले ली और सूरज भी दूसरे थैली को उठाकर जल्दी-जल्दी जाने लगा तब तक बगीचे के मालिक की नजर उन दोनों पर पड़ गई थी और वह गाली देता हुआ चिल्लाया,,,,)
कौन है रे मादरचोद इसकी बहन का चोदु,,,, कौन है बगीचे में अपनी बहन चुदवा रहा है,,, भोसड़ी वाला,,,(इतना कहते हुए वह बगीचे का मालिक उन दोनों के पीछे भागते हुए बड़ा सा पत्थर उठाकर मारा जो कि उन दोनों के बगल में से चला गया वह दोनों एकदम से घबरा गए थे,,,)
भाग रानी जल्दी भाग अगर उसके हाथ लग गए तो खैर नहीं है,,,,
(इतना सुनते ही रानी और सूरज दोनों जान लगाकर भागने लगी और देखते ही देखते वह दोनों दीवार के पास पहुंच गए थे अभी भी बगीचे का मालिक उन्हें दोनों से लगभग 40-50 मीटर की दूरी पर था और वह भागता हुआ आ रहा था दोनों के पास समय बिल्कुल भी नहीं था सूरज बोला,,,)
बाप रे बिल्कुल भी समय नहीं है रानी तु जल्दी से दीवार पर चढ़ थैला यही छोड़ दे,,,,
नहीं भैया अगर आज आम नहीं ले गए तो फिर कभी आम मिलने वाला नहीं है,,,
अरे तू चढ तो सही,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज उसके हाथ से थैला लेकर वही रख दिया और उसे दीवार पर चढ़ने लगा रानी एक पर को आदि दीवार पर रखकर ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगी लेकिन वह चढ़ नहीं पा रही थी तो सूरज उसकी मदद करते हुए उसे दीवार पर चढ़ने लगा और ऐसे हालात में उसके दोनों हाथ उसकी गोल-गोल नितंबों पर आ गए थे जिसे वह पकड़कर उसे ऊपर की तरफ चढ़ा रहा था लेकिन इस अफरा तफरी के माहौल में उसे इस बात का एहसास भी नहीं हो रहा था कि वह अपनी बहन को दीवार पर चढ़ते हुए उसकी गांड पर सहारा देकर उसे ऊपर उठाया हुआ है,,, इस जल्दबाजी में दीवार खोदने के चक्कर में सूरज जी जैसे जवान लड़के को इस बात का जरा भी एहसास नहीं हो रहा था कि वह एक खूबसूरत लड़की की गोल-गोल गांड को अपने हाथों से पकड़े हुए था अगर कोई और माहौल होता तो शायद उसके ही हरकत पर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो जाता और रानी जो की एक खूबसूरत जवान की दहलीज पर कदम रख चुकी लड़की थी एक जवान लड़के की ईस हरकत पर अपनी बुर से पानी फेंक दी होती,,,, लेकिन दोनों जवानी से भरे हुए भाई बहन को इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी वह जल्द से जल्द दीवार को कुद जाना चाहते थे,,,, तभी फिर उसे बगीचे के मालिक की गाली सुनाई दी,,,)
तुम्हारी मां की भोसड़ी में लंड डालु मादरचोद,,,,(इतना कहने के साथ ही वह फिर से एक बड़े पत्थर को मारा और इस बार भी उसका निशाना चूक गया)
बाप रे भैया यह बगीचे का मालिक तो पागल हो गया इधर उसके हाथ लग गए तो हड्डी पसली एक कर देगा,,,,
इसीलिए तो कह रहा हूं तू जल्दी से चढ़ जा,,,(और इतना कहते हुए वह अपनी बहन को दीवार पर चढ़ा दिया था उसकी गोल गोल गांड को पकड़ कर उसे सहारा देकर वहां दीवार पर सही सलामत चढ़ा दिया था और इसके बाद वह जल्दी से आम के थैले को अपनी बहन को पकडाने लगा,,, उसकी बहन भी जल्दबाजी दिखाते हुए आम के दोनों तेरे को पकड़ कर उसे दूसरी तरफ नीचे गिरा दिए और खुद कूद गई वह जानती थी कि उसका भाई आराम से दीवार को जाएगा और ऐसा ही हुआ सूरज जल्दी से दीवार खुद के दूसरी तरफ कूद गया था और जल्दी से आम के ठेले को पड़कर उसे बगीचे से दूर निकल गया था,,,,।