Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता. - Page 102 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता.

सोनू और सुगना एक दूसरे से अलग होंगे या नहीं यह तो मैं अभी नहीं बता सकता पर जब-जब दोनों साथ होते हैं मुझे उनके बारे में लिखने का बहुत मन करता है। जब प्यार अपने चरम पर पहुंच जाता है तो संभोग का सुख कई गुना बढ़ जाता है सोनू और सुगना के मिलन में यही आनंद है और वही परमानंद है।

आपको अपडेट अच्छा लगा जानकर खुशी हुई सुगना सोनू को मिल चुकी है पर कब तक साथ रहेगी यह देखने लायक बात है।

मैं पाठकों से यह जानना चाहता हूं कि अगला सेक्स एनकाउंटर किसके किसके बीच होना चाहिए

1 सोनू और सुगना

2. लाली और सोनू

3. सोनी का सेक्स

४ मोनी के कामवासना के अनुभव

(किसके साथ होगा यह बताना मुश्किल है पर होगा जरूर)

पहले पांच रिप्लाई एक जैसी आने पर अगले एक दो एपिसोड में वो दृश्य मिलेगा..

प्रतिक्षा में
 
अभी तक पाठकों के अनुरोध अलग-अलग कैरेक्टर्स को लेकर रहे हैं मैं अभी भी फर्स्ट फाइव का इंतजार कर रहा हूं और अगले एक दो एपिसोड में निश्चित ही उनकी यह इच्छा पूरी होती हुई दिखाई देगी।

कहानी गढ़ना मेरा काम है दिशा दिखाना आपका ....

इंतजार रहेगा
 
मनोरमा मैडम अब बहुत बड़ी ऑफिसर बन चुकी हैं।

कहानी में उनकी भूमिका है तो जरूर पर अंत में बीच में सिर्फ उन्हें चुदवाने के लिए घसीट रहना मुझे थोड़ा कठिन लग रहा है फिर भी देखते हैं...

अभी तक जिन लोगों ने भी अपडेट की मांग की थी उन्हें अपडेट भेजे जा चुके हैं यदि कोई छूट गया हो तो जरूर बताइएगा।
 
आपकी कविता बेहद खूबसूरत है यूं ही लिखते पढ़ते रहिए

आप सभी को पढ़ने लायक कमेंट शेयर करने के लिए धन्यवाद यूं ही साथ बनाए रखिए।
 
भाग 138

क्या उसने लाली के साथ अन्याय किया था?

क्या सोनू को अपनी वासना की गिरफ्त में लेकर उसने लाली से विश्वासघात किया था?

सुगना अपने अंतर द्वंद से जूझ रही थी… एक तरफ वह लाली और सोनू को विवाह बंधन में बांधने का नेक काम कर खुद की पीठ थपथपा रही थी दूसरी तरफ लाली के हिस्से का सुहागरात स्वयं मना कर आत्मग्लानि से जूझ भी रही थी।


अचानक सुगना हड़बड़ा कर उठ गई… सोनू को अपने करीब पाकर वह खुश हो गई…उसने चैन की सांस ली पर वह अपने अंतर मन में फैसला कर चुकी थी…

अब आगे..

सुगना और सोनू अपने गांव सीतापुर की तरफ बढ़ रहे थे। जैसे-जैसे गांव करीब आ रहा था सुगना अपने बचपन को याद कर रही थी सोनू जब छोटा था वह उसका बेहद ख्याल रखती थी। कैसे पगडंडियों पर चलते समय वो इधर उधर भागा करता और वो उसे दौड़कर पकड़ती और वापस सही रास्ते पर चलने के लिए विवश करती कभी डांटती कभी फटकारती। जब सोनू गुस्सा होता उसे अपने आलिंगन में लेकर पुचकारती…

और आज वही छोटा सोनू आज एक पूर्ण मर्द बन चुका था। गांव का छोटा सा स्कूल आते ही सुगना ने चहकते हुए कहा.

“सोनू देख गांव के स्कूल”

“तोहरा पगला मास्टरवा याद बा…”

सोनू को पागल मास्टर भली भांति याद था जो उसे बचपन में बहुत परेशान किया करता था और वह सुगना ही थी जो अक्सर सोनू के बचाव में आकर उस पागल मास्टर से सोनू के पक्ष में लड़ाई किया करती थी।

सोनू और सुगना अपने बचपन की बातों में मशगुल हो गए…

बचपन की यादों की सबसे बड़ी खूबसूरती यह होती है कि वह आपको तनाव मुक्त कर देते हैं सुगना ने सोनू के साथ आज दोपहर में जो सुहागरात मनाई थी उसे कहीं ना कहीं यह लग रहा था जैसे उसने लाली के साथ अन्याय किया था और उसके दिमाग में इस बात का तनाव अवश्य था।

परंतु अब सुगना और सोनू दोनों सहज हो चुके थे। जैसे ही सोनू की गाड़ी ने गांव में प्रवेश किया गरीब घरों के बच्चे उसके पीछे-पीछे दौड़ने लगे अपनी सुगना दीदी को वह बखूबी पहचानते थे परंतु शायद यह दौड़ सुगना और गाड़ी को और करीब से देखने के लिए थी उसे छूने के लिए थी उसे महसूस करने के लिए थी।

घर में पदमा सोनू और सुगना का इंतजार कर रही थी जिन्होंने आने में जरूर से ज्यादा विलंब कर दिया था पदमा चाह कर भी अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाई और बोल उठी…

“का करें लागला हा लोग?

सुगना क्या उत्तर देती जो वह कर रही थी उसे वह स्वयं और अपने विधाता के अलावा किसी से बता भी नहीं सकती थी। सुगना के उत्तर देने से पहले ड्राइवर बोल पड़ा.

“वापस बनारस पहुंचते समय रास्ता में जाम लगा था इसीलिए पहुंचने में देर हो गया”

सोनू और सुगना दोनों ने पदमा के पैर छुए और मां का दिल गदगद हो गया पदमा को सोनू और सुगना दोनों पर गर्व था। सोनू के अपने पैर पर खड़े होने तक सुगना ने घर के मुखिया की जिम्मेदारी निभाई थी और अब धीरे-धीरे सुगना स्वयं समर्पण कर सोनू के अधिपत्य में आ चुकी थी। परंतु वह सोनू की नजरों में तब भी आदरणीय थी अब भी आदरणीय थी…

लाली गांव की अन्य महिलाओं के साथ बैठी हंसी ठिठोली का आनंद ले रही थी सोनू और सुगना के आगमन की सूचना उस तक भी पहुंची परंतु सभी महिलाओं के बीच से उठकर आना उसके लिए संभव नहीं था।

धीरे-धीरे पूरा परिवार निर्धारित कार्यक्रमों में लग गया शाम के भोज भात के कार्यक्रम में आसपास के गांव के कई लोग आए और सोनू और लाली की अनोखी शादी के जश्न में शामिल हुए। उनके मन में भले ही यह विचार आ रहा हो कि इस बेमेल शादी का मकसद क्या था परंतु किसी ने भी इस पर प्रश्न चिन्ह उठाने की हिम्मत नहीं दिखाई और दिखता भी कैसे जब सरयू सिंह और सोनू जैसा प्रभावशाली व्यक्तित्व इस रिश्ते को स्वीकार रहा था उस पर प्रश्न करने का अब कोई औचित्य नहीं था।

शाम होते होते सारे रिश्तेदार अपना अपना बिस्तर पकड़ने लगे और सुगना का आंगन खाली होता चला गया। सोनू स्वयं पूरी तरह थक चुका था वह भी बाहर पड़े दलान में एक और चुपचाप जाकर लेट गया और न जाने कब उसकी आंख लग गई।

उधर लाली की सुहाग सेज तैयार हो चुकी थी सुगना और उसकी एक दो सहेलियों को छोड़कर सभी लोग सो चुके थे।

सुगना ने और और देर नहीं की वह सोनू के पास के और उसके माथे पर हाथ फेरते हुए बोला…

“सोनू उठ चल लाली इंतजार करत बिया”

सोनू अब तक गहरी नींद में जा चुका था उसके कानों में सुगना की आवाज पड़ तो रही थी परंतु जैसे वह कुछ भी सुनने के मूड में नहीं था उसने करवट ली और अपनी पीठ सुगना की तरफ कर दी।

सुगना ने अपनी उंगलियों का दबाव और बढ़ाया और एक बार फिर बेहद प्यार से बोला..

“ए सोनू उठ जो”

सोनू ने अपनी आंखें खोली सुगना को देखकर वह सारा माजरा समझ गया उसने अपनी आंखें खींचते हुए सुगना से कहा..

“लाली के मना ले ना दीदी ई काम त बनारस में भी हो सकेला”

सोनू ने पहले भी सुगना को यह बात समझने की कोशिश की थी कि वह आज की सुहागरात के कार्यक्रम को टाल दे क्योंकि वह आज पूरी तरह तृप्त था।

“अभी चुपचाप चल, लाली का सोची आज घर के बहू के रूप में पूजा कईले बिया इ रसम तोरा निभावे के पड़ी”

सुगना की आवाज की खनक से सोनू ने अंदाज कर लिया कि सुगना को इनकार कर पाना अब उसके बस में नहीं था वह उठा और यंत्रवत उसके पीछे-पीछे चलने लगा। अब भी उसके शरीर में फुर्ती नहीं दिखाई पड़ रही थी।

सुगना ने अपनी चाल धीमी की और सोनू से मुखातिब होते हुए बोली..

“आज दिन में जवन सिखवले रहनी उ लाली के भी सिखा दीहे बाद में उ हे काम देही”

सुगना ने सोनू को आज दिन में मनाए गए सुहागरात का मंजर याद दिला दिया था सुगना का यह रूप उसने पहली बार देखा था उन खूबसूरत पलों को याद कर सोनू के लंड में एक बार फिर हरकत हुई और सोनू का हथियार एक बार फिर प्रेम युद्ध में उतरने के लिए तैयार हो गया।

पर जो उत्सुकता और ताजगी सुहागरात का इंतजार कर रहे पुरुष में होनी चाहिए शायद उसमें अब भी कुछ कमी थी।

कमरे के दरवाजे तक पहुंचते पहुंचते सुगना ने सोनू के दोनों मजबूत बुझाओ को अपने कोमल हाथों से पकड़ा और उसके कान में फुसफुसाते हुए बोला..

“अभीयो मन नईखे करत ता बत्ती बुझा दीहे और सोच लीहे कि बिस्तर पर हम ही बानी..”

सुगना यह बात बोल तो गई पर मारे शर्म के वह खुद ही लाल हो गई उसने अपनी हथेलियां अपनी आंखों पर रख ली और अपना चेहरा छुपाने की कोशिश की पर सुगना की इस अदा ने सोनू की उत्तेजना को पूरी तरह जागृत कर दिया सोनू ने सुगना के माथे को चूमना चाहा परंतु सुगना में इस समय अपने अधरों को सोनू के लिए प्रस्तुत कर दिया सोनू और सुगना के अधर एक दूसरे से सट गए..

इसके पहले कि यह चुंबन कामुक रूप ले पता सुगना ने अपने होंठ अलग किए और बोला

“ जो हमारा भाभी के खुश कर दे..”

लाली अब सुगना की भाभी बन चुकी थी।

अंदर लाली भी आज सोनू को खुश करने के लिए बेताब थी। अंदर हो रही हलचल सुगना महसूस कर रही थी। सुगना कुछ देर दरवाजे पर रही पर शायद अंदर हो रही हरकतों से वह अपने बदन में उठ रही उत्तेजना को महसूस कर रही थी उसने वहां से हट जाना ही उचित समझा।

सोनू और लाली की सुहागरात भी कम यादगार नहीं थी। लाली ने भी सोनू को खुश करने में कोई कमी नहीं रखी। सोनू की दोनों बहने आज उस पर मेहरबान थी। सोनू का दिन और रात आज दोनों गुलजार थे। सोनू को अपने निर्णय पर कोई अफसोस नहीं था उसे पता था उसका आने वाला समय बेहद शानदार था। दो रूप लावण्य से भरी हुई युवतियां उसे सहज ही प्राप्त हो चुकी थी वह भी पूरे दिल से आत्मीयता रखने वाली।

कुछ ही दिनों में लाली अपने बाल बच्चों समेत जौनपुर शिफ्ट हो गई। सुगना अपने बनारस के घर में अपने बच्चों के साथ अकेले रहने लगी। सोनू हर हफ्ते सुगना से मिलने बनारस आता परंतु लाली उसका पीछा नहीं छोड़ती वह भी उसके साथ-साथ बनारस आ जाती।

सोनू और सुगना का मिलन कठिन हो गया था। और तो और कुछ दिनों बाद सुगना ने सोनू से बात कर सीतापुर की गृहस्थी को बंद करने का निर्णय ले लिया और अपनी मां पदमा को भी बनारस बुला लिया।


वैसे भी बनारस में सुगना अकेले रह रही थी मां पदमा के आ जाने से उसे भी एक साथ मिल गया था। परंतु पदमा की उपस्थिति ने सोनू और सुगना के मिलन में और भी बाधाएं डाल दीं। दिन बीतने लगे सुगना को भूल पाना सोनू के लिए इतना आसान नहीं था सुगना के साथ बिताए गए अंतरंग पल सोनू को बेचैन किए हुए थे। गर्दन का दाग पूरी तरह गायब था और सोनू दाग लगवाने को आतुर।

सोनू और सुगना के मन में मिलन की कशिश बढ़ रही थी।

उधर आश्रम में रतन और माधवी दोनों उन अनोखे कूपे में अपनी काम पिपाशा मिटा रहे थे। रतन को पता चल चुका था कि मोनी अब तक कुंवारी थी और वह आज तक मनी से नहीं मिल पाया था।

मातहत कभी किसी एक के नहीं होते। माधवी ने जिस प्रकार रतन के लड़कों से मिलकर उसकी चाल बाजी को नाकाम कर दिया था और मोनी के लिए निर्धारित कूपे में स्वयं प्रस्तुत होती रहीं थी उसी प्रकार एक दिन रतन ने उसकी चाल बाजी को पकड़ लिया और माधवी इस बार किसी ऐसे कूपे में जा पहुंची जहां रतन की जगह एक अनजान लड़का था। रतन ने उस लड़के को अपने दिशानिर्देश दे दिए थे। उसका पारितोषिक कूपे में उसका इंतजार कर रहा था।

माधवी खूबसूरत बदन की मालकिन तो थी ही और वह लड़का बेहद प्यासा था। माधवी के गदराए बदन को देखकर वह अपनी सुध बुध खो बैठा .. वह बेझिझक माधवी के बदन से खेलने लगा। उसे न तो कुपे के नियमों का ध्यान रहा और न हीं पिट जाने का खतरा..

माधवी अब तक जान चुकी थी कि वह गलत कूपे में आ गई है। उसने एक बार लाल बत्ती दबाकर उसे रोकना चाहा पर वह लड़का नहीं रुका।

जैसे ही उसने अपना लंड माधवी की बुर में घुसाया माधवी ने एक बार फिर लाल बटन दबाया लड़का एक पल के लिए रुका जरूर पर अगले ही पल उसने अपनी कमर आगे की और उसका लंड माधवी की बुर में जड़ तक धंस गया।

माधवी चाहकर भी लाल बटन दो बार नहीं दबा सकी। उसे पता था दो बार बटन दबाने पर वह लड़का नियामानुसार दंडित होता परंतु माधवी की भी पहचान उजागर हो जाती। माधवी बेचैन थी वह लड़का उसे लगातार चोदे जा रहा था। वह उसकी चूचियों को बेदर्दी से मीसता और लंड को पूरी ताकत से आगे पीछे करता।

माधवी ने खुद को इतना लाचार पहले कभी नहीं महसूस किया था। इतने बड़े आश्रम में इतने प्रतिष्ठित पद पर होने के बावजूद आज वह कूपे में एक रंडी की भांति चुद रही थी। उसका स्वाभिमान तार तार हो रहा था। वह अपने ईश्वर से इस बुरे समय को शीघ्र बीतने के लिए उन्होंने विनय कर रही थी। परंतु जब तक कूपे का निर्धारित समय खत्म होता उसे लड़के ने उसकी बुर में वीर्य वर्षा कर दी।

खेल खत्म हो चुका था वह लड़का कूपे से बाहर जा चुका था माधवी अपनी जांघों से बहते हुए उसे घृणित वीर्य को देख रही थी। आज उसने जो महसूस किया था वह निश्चित ही उसके किसी पाप का दंड था।

उधर रतन आज अपनी अप्सरा के कूपे में पहुंचने में कामयाब हो गया था। एक तरफ माधवी नरक झेल रही थी दूसरी तरफ रतन स्वर्ग के मुहाने पर खड़ा था।

रतन मोनी की सुंदरता का कायल हो गया। अब तक तो वह सुगना की बदन की कोमलता और उसके कटाव से बेहद प्रभावित था परंतु मोनी जैसी कुंवारी, कमसिन और सांचे में ढली युवती को देखकर वो सुगना की खूबसूरती भूल गया। उसे मोनी सुगना से भी ज्यादा पसंद आने लगी वैसे भी रतन के मन में सुगना को लेकर थोड़ी जलन भी थी और अपनी नाकामयाबी को लेकर चिंता भी सुगना को संतुष्ट नहीं कर पाना उसकी मर्दानगी पर एक ऐसा प्रश्न चिन्ह था जिसने उसे झिंझोड़कर रख दिया था और उसे इस आश्रम में आने पर मजबूर कर दिया था

समय बीत रहा था और मोनी पुरुष स्पर्श का इंतजार कर रही थी। अब तक जब भी वह कूपे में आई थी पुरुषों के हाथ उसके बदन से खेलने लगते थे परंतु आज कुछ अलग हो रहा था मोनी स्वयं अधीर हो रही थी बेचैनी में वह अपना थूक गुटकने का प्रयास कर रही थी। वह बार-बार अपनी जांघों को आगे पीछे करती और उसके कमर में बल पड़ जाते। मोनी का बलखाता शरीर पुरुष स्पर्श को आमंत्रित कर रहा था । परंतु रतन अब भी उसकी चूचियों पर निगाह गड़ाए हुए था मोनी की चूचियां स्पर्श के इंतजार में और भी तन चुकी थी। जितना ही मोनी पुरुष स्पर्श के बारे में सोचती उसके निप्पल उतने ही खड़े हो जाते… माधवी ने मोनी की चूचियों की मालिश कर करके उसे सुडौल आकार में ला दिया था और वह इस समय उसके सीने पर सांची के स्तूपों की भांति रतन को आकर्षित कर रही थी। मोनी की दूधिया चूचियां और शहतूत के जैसे उसके निप्पल ने रतन के दांतों को आपस में रगड़ने पर मजबूर कर दिया। चूचियों के नीचे उसकी कटवादार कमर और बीच में गहरी नाभि देखने लायक थी।


मोनी के लव हैंडल रतन के हाथों को आमंत्रित कर रहे थे की आओ मुझे पकड़ो मुझे थाम लो …जब रतन का ध्यान मोनी के वस्ति प्रदेश पर गया एक पल के लिए उसने आंखें बंद कर ली। मोनी रतन की साली थी और उस उम्र में कई वर्ष छोटी थी।

जब रतन का विवाह हुआ था उस समय मोनी किशोरी थी आज मोनी को इस रूप में चोरी चोरी देखते हुए रतन को ग्लानि भी हो रही थी पर वासना में लिप्त आदमी की बुद्धि मंद हो जाती है।

रतन उसके कामुक बदन की तुलना उसकी किशोरावस्था से करना लगा। विधि का विधान अनूठा था छोटी अमिया अब आम बन चुकी थी। जागो के बीच की छोटी सी दरार अब फूल चुकी थी ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे अंदर खिल रही कली बाहरी होठों को फैला कर अपनी उपस्थिति का एहसास करना चाह रही थी।


मोनी के अंदर के होंठ स्वयं झांकने को तैयार थे और बाहरी होठों पर अपना दबाव लगातार बनाये हुए थे।

मोनी स्वयं अपनी बुर की कली को खिलने से रोकना चाहती थी। उसकी पुष्ट जांघें उस कली के ऊपर आवरण देने की नाकाम कोशिश कर रही थी।

मोनी का वस्ति प्रदेश पूरी तरह चिकना था सुनहरे बाल गायब थे।माधवी के दिव्य कुंड का वह स्नान अनोखा था जिसने मोनी की बुर के बाल हमेशा के लिए गायब कर दिए थे।


रतन से अब और बर्दाश्त ना हुआ वह आगे बढ़ा और उसने मोनी के कमर के दोनों तरफ अपना हाथ रख कर मोनी को थाम लिया।

मोनी का सारा बदन गनगना गया। यद्यपि वह पुरुष स्पर्श की प्रतीक्षा वह कुछ मिनट से कर रही थी पर अचानक मजबूत खुरदुरे हाथों ने जब उसके कोमल बदन को स्पर्श किया उसके शरीर में कपकपाहट सी हुई उसके रोंगटे खड़े हो गए। चूचियों के छुपे रोमकूप अचानक एक-एक करके तेजी से उभरने लगे। रतन ने मोनी के शरीर में हो रही इस उत्तेजना को महसूस किया और वह मोनी के बदन को सहलाकर उन रोमकूपों को वापस शांत करने की कोशिश करने लगा।

मोनी ने ऐसा पहले कभी महसूस नहीं किया था वह बेचैन हो रही थी और ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी कि निर्धारित समय जल्द से जल्द बीते और वह इस अद्भुत एहसास को अपने दिल में संजोए हुए वापस चले जाना चाहती थी। परंतु विधाता ने उसके भाग्य में और सुख लिखा था

रतन ने अपने स्पर्श का असर देख लिया था। उसके हाथ अब मोनी की पीठ को सहला रखे थे जैसे वह उसे सहज होने के लिए प्रेरित कर रहा हो। परंतु जैसे ही रतन का हाथ उसकी पीठ से सरकते हुए उसके नितंब्बों तक पहुंचा मोनी की उत्तेजना और बढ़ गई।


वह बार-बार अपने विधाता से इस पल को इसी अवस्था में रोक लेने की गुहार करती रही परंतु रतन के हाथ ना रुके उसने मोनी के नितंबों का जायजा लिया उसकी उंगलियां मोनी की गांड को छूते छूते रह गई.. मोनी स्वयं अपनी गांड को सिकोड कर रतन की उंगलियों के लिए अवरोध पैदा कर रही थी।

मोनी की सांसें तेज चल रही थीं .. समय तेजी से बीत रहा था रतन ने अपना चेहरा मोनी की जांघों से सटा दिया उसके बाल मोनी के प्रेम त्रिकोण पर पर गुदगुदी करने लगे। नाक लगभग मोनी की लिसलिसी दरारों से छू रही थी। रतन अपनी नासिका से अपनी साली के प्रेम रस को सूंघने की कोशिश कर रहा था। जैसे वह इस खुशबू से मोनी की सहमति का अंदाजा लगाना चाह रहा हो।

आज कई दिनों बाद मोनी की बुर लार टपकने को तैयार थी। जैसे ही रतन की नाक को मोनी की बुर से निकलती कामरस की बूंद का स्पर्श मिला उसने देर नहीं की और अपनी बड़ी सी जीभ निकाल कर मोनी की बुर के नीचे लगा दिया। जैसे वह इस अमृत की बूंद को व्यर्थ हो जाने से रोकना चाहता हो। रतन इतना अधीर हो गया था कि उसने बूंद के अपनी जीभ तक पहुंचाने का इंतजार ना किया परंतु अपनी लंबी जीभ से मोनी की बुर को फैलता हुआ स्वयं उस बूंद तक पहुंच गया।

मोनी की उत्तेजना बेकाबू हो रही थी काश वह अपना हाथ नीचे कर पाती। पर वह खुद भी यह तय नहीं कर पा रही थी कि वह उसे अनजान पुरुष को यह कार्य करने से रोके या प्रेरित करें। यह सुख अनोखा था।

रतन की जीभ पर अमृत की बूंद के अनोखे स्वाद ने रतन को बावला कर दिया। शेर के मुंह में खून लग चुका था। रतन मोनी की बुर से अमृत की बूंद खींचने के लिए अपने होठों से निर्वात कायम करने लगा जैसे वह मोनी की बुर का सारा रस खींच लेना चाहता हो वह कभी अपने होठों से बुर के कपाटों को फैलता और फिर अपनी जीभ से अंदर तक जाकर प्रेम रस की बूंदे चुराने को कोशिश करता।

उसकी जीभ को मोनी का कौमार्य प्रतिरोध दे रहा था.. वह पतली सी पारदर्शी झिल्ली अपनी स्वामिनी का कौमार्य बचाए रखने की पुरजोर कोशिश कर रही थी। रतन बार-बार अपनी जीभ से दस्तक देता पर वह कमजोरी सी झिल्ली उसके दस्तक को नकार देती।

वह मोनी की जादुई गुफा की प्रहरी थी। पर इस अपाधपी में मोनी बेहद उत्तेजित हो चुकी थी .. जब रतन की जीभ की दाल गुफा के अंदर ना गली तो उसने मोनी के सुनहरे दाने को अपनी लपेट में ले लिया…मोनी ने अपनी जांघों से रतन को दूर हटाने की कोशिश की पर रतन ने हार न मानी उसने अपनी जीभ उस सुनहरे दाने पर फिरानी शुरू कर दी।

मोनी का बदन कांपने लगा…नाभि के नीचे ऐंठन सी होने लगी। और फिर प्रेम रसधार फूट पड़ी पर रतन जिसने मटकी फोड़ने में जी तोड़ मेहनत की थी उसे अब रस पीने का भरपूर अवसर मिल रहा था..

मोनी स्खलित हो रही थी.. आज पहली बार उसे पुरुषों की उपयोगिता समझ में आ रही थी…काश वह उसे पुरुष को देख पाती उसे समझ पाती और उसका तहे दिल से धन्यवाद अदा कर पाती…

कूपे में रहने का निर्धारित दस मिनट का समय पूरा हो चुका था।

मोनी उस दिव्य पुरुष से मिलना चाहती थी जिसने उसे यह अलौकिक सुख दिया था..

शेष अगले भाग में
 
भाग 139

मोनी का बदन कांपने लगा…नाभि के नीचे ऐंठन सी होने लगी। और फिर प्रेम रसधार फूट पड़ी पर रतन जिसने मटकी फोड़ने में जी तोड़ मेहनत की थी उसे अब रस पीने का भरपूर अवसर मिल रहा था..

मोनी स्खलित हो रही थी.. आज पहली बार उसे पुरुषों की उपयोगिता समझ में आ रही थी…काश वह उसे पुरुष को देख पाती उसे समझ पाती और उसका तहे दिल से धन्यवाद अदा कर पाती…

कूपे में रहने का निर्धारित दस मिनट का समय पूरा हो चुका था।


मोनी उस दिव्य पुरुष से मिलना चाहती थी जिसने उसे यह अलौकिक सुख दिया था..

अब आगे..






उधर अमेरिका में सोनी और विकास वासना की नई ऊंचाइयां छू रहे थे। ब्लू फिल्मों की सीडी अब उनके बेडरूम का आम हिस्सा हो चुकी थी। विकास सोनी को तरह-तरह के कामुक प्रयोग के लिए प्रेरित करता कुछ तो सोनी मान जाती और कुछ के लिए साफ मना कर देती। सोनी का शरीर लचीला था उसे नए नए आसान प्रयोग करने मे विशेष दिक्कत महसूस नहीं होती थी पर काम संबंधों में गुदाद्वार का प्रयोग उसे कतई पसंद नहीं था।

जब ब्लू फिल्मों का असर धीरे-धीरे विकास और सोनी में उत्तेजना जागृत करने में नाकाम रहा तो विकास ने एक रात नई तरकीब लगाई…

हमेशा की भांति टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही थी। एक नीग्रो एक सुंदर गोरी अंग्रेजन को चोदने के लिए उसकी पैंटी उतार रहा था । स्क्रीन पर उसकी गोरी बेदाग बुर को देख सोनी बोल उठी…

“ हम इंडियन्स का इतना गोरा क्यों नहीं होता?”






ऐसा नहीं था कि सोनी गोरी नहीं थी पर फिर भी उसके निचले और ऊपरी होंठो में अंतर स्पष्ट था..

सोनी के इस प्रश्न पर विकास द्रवित हो गया उसे सोनी पर बेहद प्यार आया और उसने तुरंत नीचे खिसक कर सोनी की जांघों के बीच लिसलिसी बुर को चूम लिया और बोला

“मेरी जान तुम्हारी मुनिया तो इतनी जानदार है कि साठ साल का बूढ़ा भी देख ले तो जवान हो जाए”

सोनी के दिमाग में तुरंत ही सरयू सिंह का चेहरा घूम गया।

सोनी ने अपना ध्यान भटकाया और विकास का मन टटोलने के लिए मुस्कुराते हुए पूछा

“कौन बूढ़ा?” यदि कहीं गलती से विकास सरयू सिंह का नाम ले लेता तो शायद सोनी उसे कतई नहीं रोकती। पर विकास सपने में भी सरयू सिंह को अपनी कामुक बातों के बीच में नहीं ला सकता था कारण स्पष्ट था सरयू सिंह के बारे में इस तरह की बात सोचना भी पाप था और विकास सोनी की मनोदशा से पूरी तरह अनभिज्ञ था। उसने अपनी बात को बदला और सोनी की आंखों में देखते हुए बोला

“और यदि ये नीग्रो देख ले तो..”

सोनी शर्मा गई…उसका पति जो कल्पना कर रहा था वो निराली थी।

“हट आप भी ना…” सोनी ने अपना चेहरा अपने हाथों से छुपाने की कोशिश पर जांघो को फैला दिया।

अचानक विकास की उत्तेजना को एक जोरदार किक मिली उसने अपनी बड़ी सी जीभ निकाली और सोनी के बुर को नीचे से चाटते हुए उसके दाने तक आ गया। उसकी जीभ सोनी के बुर के होठों को फैलाने में कामयाब रही थी और उसे इसका पारितोषिक रसीले कामरस के रूप में मिला।

सोनी भी सिहर उठी..

अचानक उसने टीवी पर कराहने की आवाज सुनी..






उसने देखा वह नीग्रो आईने मोटे लंड के फूले हुए सुपाड़े को उस गोरी लड़की के बुर पर रगड़ रहा था जैसे ही वह लंड को अंदर घुसाने को कोशिश करता वो लड़की चिहुंक उठती और उसकी कराह निकल जाती।

सोनी अपनी कल्पना में उस लड़की की जगह ले चुकी थी। उसने अपनी बुर के कसाव का अंदाजा लिया जिसका आभाष विकास को भी हुआ को अभी भी उसकी बुर को चूम चाट रहा था। बुर के संकुचन को महसूस कर विकास ने सोनी को बुर को और जोर से चूस दिया..

सोनी कराह उठी और बोली..

“एजी तनी धीरे से ….दुखाता”

सोनी के मुंह से भोजपुरी के कामुक शब्द सुनकर विकास ने सोनी की तरफ देखा …यह अनुभव विकास के लिए नया था।

सोनी खुद शर्मशार थी सरयू सिंह उसके दिमाग पर इस कदर छ जाएंगे उसे अंदाजा नहीं था।

वह नीग्रो अब अधीर हो रहा था। जब जब वह उस अंग्रेजन के बुर में अपना लंड घुसता वो अपने हाथों से उसे रोकने की कोशिश करती पर अब सब्र का बांध टूटने वाल था।

सोनी की मनोदशा कमोबेश उसी लड़की की थी।तभी उस नीग्रो ने उस अंग्रेजन के मुंह पर हांथ रखा और अपना काली मूसल अंदर ठास दिया..

अंग्रेजन की आवाज तो बाहर नहीं आई पर आंखे बाहर आने लगी। उसके चेहरे पर पीड़ा के भाव आ गए


एक पल के लिए सोनी को लगा ये बेमेल मिलन हकीकत में संभव नहीं। शायद इसीलिए सरयू चाचा आज तक कुवारे थे। उस भीषण लंड को अपने भीतर लेना …सोनी के लिए ये रोंगटे खड़े कर देने वाला था।

फिल्मी नाटकीय होती है अभी तक पीड़ा में कर रही अंग्रेजन धीरे-धीरे सामान्य हो चुकी थी नीग्रो उसकी बुर में लंड अब भी पूरा नहीं घुस पाया था और शायद यह मुमकिन भी नहीं था यदि नीग्रो इसे और ज्यादा घुसने का प्रयास करता तो निश्चित ही अंग्रेजन की आतें बाहर आने लगती।

गोरी गुलाबी बुर से काला मुसल जब बाहर आता सोनी उस चमकते हुए लंड को देखकर रोमांचित हों जाती. विकास सोनी के चेहरे के भावों को पढ़ने की कोशिश कर रहा था…

सोनी ने उसे अपने चेहरे की तरफ देखते हुए ताड़ लिया और मुस्कुराते हुए बोली

“मुझे क्या देख रहे हो टीवी में देखो..”

“क्या उसे लड़की को तकलीफ नहीं हो रही होगी?” विकास ने पूछा

सोनी मुस्कुराते हुए बोली

“अभी तो उसके हाव-भाव देखकर ऐसा लग तो नहीं रहा”

“क्या तुम्हारी मुनिया भी इतना बड़ा…”विकास अपनी बात कंप्लीट करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया परंतु सोनी ने उसकी बात समझ ली और उसे उठाते हुए बोली

“क्या-क्या क्या बोलना चाह रहे हो साफ-साफ बोलो”

“क्या इतना मोटा और बड़ा सामान इस कसी हुई मुनिया में जा सकता है? विकास ने हिम्मत जुटा के आखिर अपनी बात कह ही दी और यह बात कहते हुए उसके हाथ सोनी की बुर पर चले गए बुर की लार ने विकास की उंगलियों को गीला कर दिया..

सोनी उत्तर देने की स्थिति में नहीं थी उसने विकास को अपने आलिंगन में लेने की कोशिश की विकास सोनी का इशारा समझ चुका था। उसने अपना लंड सोने की बुर में डाल दिया पर यह क्या सोनी की बुर आज पूरी तरह चिपचिपी और फिसलन भरी थी शायद सोनी जरूरत से ज्यादा उत्तेजित थी। विकास का खुद का लंड आज पहली बार छोटा महसूस हो रहा था। सोनी भी अपने भीतर कुछ खालीपन महसूस कर रही थी और थोड़ा से शिथिल महसूस कर रही थी।

विकास ने सोनी को और भी उत्तेजित करते हुए कहा..

“एक बार सोच कर देख कि वो काला मुसल तेरे ही अंदर है…”

“अरे वाह ये तुम कह रहें हो” सोनी को यकीन नहीं हो रहा था।

“ अरे सोचने को ही तो कह रहा हूं ..कौन सा वो नीग्रो तुम्हे चो……द रहा है..” विकास अब स्वयं बहुत उत्तेजित हो चुका था अपनी कल्पनाओं में वह स्वयं सोनी को उस नीग्रो से चुदवाने हुए देख रहा था।

सोनी अब भी विकास को छेड़ रही थी .. उसने अपनी कमर हिलाते हुए विकास से कहा..

“चलो मान लिया पर उस समय तुम कहां हो….”.

कल्पना को सच में परिवर्तित करना कठिन था इतना तो विकास में भी नहीं सोचा था।

नीचे सोनी की बुर की चुदाई जारी रही थी…विकास हंस रहा था और पूरी ताकत से सोनी को चोद रहा था.. अब जब सोनी उसका साथ दे ही रही थी तो उसने आगे बढ़ते हुए बोला..

“मैं अपनी सोनी के पास ही रहूंगा..”

सोनी उस दृश्य की कल्पना करने लगी…जब सरयू सिंह उसे विकास की उपस्थिति में ही चोद रहे हों।

बेहद बेढंगी और बेहद वाहियात कल्पना थी सोनी की । पर कामुक कल्पनाओं का सबसे वाहियात रूप चरमोत्कर्ष के दौरान ही होता है सोनी और विकास अपनी-अपनी कल्पनाओं में उस दृश्य की कल्पना कर रहे थे। पर दोनों की कल्पनाओं में एक ही चीज कॉमन थी वह था सोनी की कचनार बुर में वह काला मुसल जैसा लंड..

वासना अपने फोन पर थी और थोड़ी ही देर में सोनी और विकास पूरी तृप्ति के साथ झड़ने लगे। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे। सेक्स का ऐसा क्लाइमैक्स कई दिनों बाद आया था।

दोनों की सांसे सामान्य होते ही…विकास ने सोनी को छेड़ते हुए कहा..

“आज तो मजा आ गया काला मुसल है तो जोरदार यह सीडी संभाल कर रखना..”

सोनी ने अपनी आंखें बंद करते हुए कहा “ हट क्या-क्या सोचते हैं और मुझे भी सोचने पर मजबूर करते हैं”

विकास ने सोनी के होठों को चूम लिया और सोनी ने भी प्रत्युत्तर में विकास को अपने फ्रेंच किस पाश में बांध लिया।

सोनी और विकास सुखद दांपत्य जीवन जी रहे थे। सोनी सोनी अब पूरी तरह गदरा गई थी.. चूचियां भी फुल कर 36 का आकार ले चुकी थी.. और नितंब भी सीने की बराबरी कर रहे थे। पर कमर को सोनी ने बढ़ने नहीं दिया था आज भी वह उसी प्रकार एक्सरसाइज कर अपने शरीर की कमानीयता बनाए रखने में कामयाब थी। सोनी की सबसे बड़ी अमानत थी उसके भरे भरे नितंब जो बरबस ही सबका मन मोह लेते। एक अजब सी कशिश थी।

सोनी जब सड़क पर चलती युवा मर्द शायद ही उसे कभी क्रॉस करते और यदि करते भी तो यह तय था की या तो वह ब्रिस्क वॉक कर रहे होते या कहीं जल्दी में जा रहे होते। पर समानता सोनी पुरुषों की चाल को धीमा करने में अक्सर कामयाब रहती। सेक्स के दौरान विकास कभी-कभी उसे नीग्रो और उसके काले लंड का जिक्र करता कभी-कभी सोनी उसे रोकती पर अधिकतर दोनों उसे अपनी उत्तेजना जागृत करने के लिए गाहे बगाहे उसे बीच ले ही आते.. और अपना चरमोत्कर्ष बेहतर बना लेते.

सुखद समय जल्दी बीत जाता है और अब विकास और सोनी के विवाह को लगभग 1 वर्ष होने वाले थे.. आगे की कहानी विकास से ही सुनते हैं..

(मैं विकास)

मुझे साउथ अफ्रीका जाना था वहां पर मेरा तीन दिन का सेमिनार था मैंने जब यह बात सोनी को बताई वह बहुत खुश हुई उसने कहा

"मैं भी आपके साथ साउथ अफ्रीका जाना चाहती हूँ। मैंने वहां के बारे में बहुत सुना है"

“सुना है कि देखा है…” विकास ने उसे आंख मारते हुए कहा..

सोनी झेंप गई और मेरी छाती पर मुक्के मारते हुए मुझसे लिपट गई…वह मुझसे अपनी नजरे नहीं मिला रही थी..पर मुझे उसकी इच्छा का भी पता था उसकी बुर की भी।

मेरे साउथ अफ्रीका जाने के दिन करीब आ रहे थे. सोनी बहुत उत्साहित थी…वह अपनी दबी हुई उस अनोखी इच्छा के बारे में अब बात नहीं करती पर मुझे उसकी झिझक और उसके चेहरे पर शर्म मुझे उसकी इच्छा को पूरा करने पर मजबूर कर रही थी।



साउथ अफ्रीका में बीच पर पहला दिन एयरपोर्ट से होटल जाते समय केपटाउन शहर का खूबसूरत नजारा देखकर सोनीमंत्रमुग्ध हो गई थी. वह बार-बार मुझसे लिपटती मैं उसकी जांघों पर हाथ रखकर उसे सहलाता और उसे प्यार कर इस खूबसूरत लम्हे को यादगार बनाता।

सोनी अभी भी खूबसूरत शहर को निहार रही थी। थकावट की वजह से मेरी आंख लग गई। टायरों के चीखने की आवाज से मेरी नींद खुली मैंने देखा होटल आ चुका था।हम दोनों रिसेप्शन की तरफ बढ़ चले अटेंडेंट हमारा लगेज लेकर पीछे-पीछे आ रहा था।


यह होटल एक पांच सितारा होटल था जिसमें एक प्राइवेट बीच भी था। मैंने यह होटल खास इसी मकसद के लिए चुना था जिससे हम बीच का आनंद बिना किसी थकावट के उठा पाऐं। मेरा सेमिनार स्थल भी इस होटल के बहुत ही करीब था।

मैं और सोनीदोपहर में आराम करने के पश्चात शाम को बीच पर जाने की तैयारी करने लगे। मैने 2- 3 सुंदर बिकनी जो वह खासकर सोनीके लिए लाई थी उसे दिखाई और बोला यही पहन कर बीच पर चलना है।

“हट अब इतना भी नंगापन ठीक नहीं पता नहीं कैसे कैसे लोग होंगे?” , पर मन ही मन खुश थी।

“जब मैं हूं तो क्या डर है..?” विकास ने उसे उत्साहित किया..


मैंने उसे बिकनी पहनने और उसके ऊपर एक गाउन डालने के लिए कहा जिसे वह आवश्यकतानुसार बीच पर उतार सकती थी उसने दिखावटी थोड़ा प्रतिरोध किया पर मान गई। वह इतनी बार मुझसे चुद चुकी थी पर कामुक परिस्थितियों में अभी भी उसके गाल लाल हो जाते।

कुछ ही देर में हम बीच पर थे. होटल का यह बीच बहुत ही खूबसूरत था। संगमरमर सी चमकती रेत और आकाश की नीलिमा लिए हुए समुंद्र का स्वच्छ जल और किनारों पर प्रकृति द्वारा सजाई गई हरियाली इस बीच को स्वर्गीय रूप दे रहे थे। स्वच्छ रेत पर कई सारे नवयुवक एवं सुंदर नवयुवतियां अर्धनग्न अवस्था में टहल रहे थे। अद्भुत कामुक माहौल था। वहां उपस्थित अधिकतर लड़कियां और युवतियां बिकनी में ही थे। कुछ ही औरतें विशेष प्रकार का स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहने हुई थी।

मैंने सोनीको उत्साहित किया तो उसने अपना गाउन उतार दिया और बिकनी में समुद्र की तरफ बढ़ चली।





मैं ही क्या वहां पर उपस्थित सभी स्त्री पुरुष मेरी सोनी की इस नग्नता का आनंद ले रहे थे। जिस किसी की भी नजर सोनीके खूबसूरत बदन और उस लाल रंग की प्रिंटेड बिकनी पर पड़ती वह एक नजर उसे जी भर कर देखता और अपने मन में उपजी कामुकता को लेकर अपनी प्रियतमा के साथ आगे बढ़ जाता। मेरी सोनी एक खूबसूरत पोर्न स्टार की तरह समुद्र की तरफ बढ़ रही थी। पीछे से उसके गोल नितंब और गोरी पीठ उसे और मादक बना रहे थे।

इसी बीच पर टहलते हुए भारतीय मूल के किशोर लड़के आपस मे …

"अबे देख क्या गच्च माल है"

"साली के चूतड़ कितने गोल हैं। जाने किसके हिस्से में आयी है"

मुझे सिर्फ साली सब्द पर क्रोध आया जो उनकी विकृत मानसिकता के कारण था बाकी जो उनके अंदर की आवाज थी जो सच ही था।

ऐसा लगता था सोनीको भगवान ने एक अद्भुत और इकलौते सांचे में ढाला था। सुगना की बहन सोनी वाकई कमाल थी। कुछ ही देर में मैं और सोनी समुद्र की लहरों से अठखेलियां कर रहे थे। सोनीको स्विमिंग आती थी पर उसने समुंद्र का इस तरह आनंद नहीं लिया था। वह बेहद उत्साहित होकर समंदर की लहरों से टकराकर बार-बार मेरे ऊपर गिरती और मैं उसे संभाल लेता। इस दौरान मैं भी अपने हिस्से की कामुकता का आनंद ले रहा था। जब वह मेरे आगोश में आती उसके नितंब और स्तन मेरे हाथों से बच नहीं पाते कभी-कभी उसकी बुर भी मेरी उंगलियों का स्पर्श पाती। हम दोनों अपनी उत्तेजना कायम रखते हुए समुद्र का आनंद ले रहे थे। मेरा लंड भी इस दौरान लगातार तन कर सोनीके हाथों की प्रतीक्षा कर रहा था। वह अपना धर्म बीच-बीच में निभा भी रही थी। उसे भी लंड को प्यार करना अच्छा लगता था। मैने महसूस किया कि लंड को सहलाते समय वह खोई खोई सी रहती थी।


मेरी वाइन पीने की इच्छा हुई मैं सोनीको लेकर बीच के किनारे एक रेस्टोरेंट में गया। रेस्टोरेंट्स बहुत खूबसूरत था इसमें 60 -70 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी। सोनीखूबसूरत लाल बिकनी में अपने अद्भुत यौवन को संजोए हुए मेरे साथ रेस्टोरेंट में आ चुकी थी। मैंने सोनीकी पसंद की रेड वाइन ऑर्डर की। मैंने यह बात नोटिस की कि इस होटल में काम करने वाले सभी युवक नीग्रो प्रजाति के थे और उनका शारीरिक सौष्ठव दर्शनीय था उनकी कद काठी भी आश्चर्यजनक थी वहां पर कुछ लड़कियां भी कार्यरत वह भी उसी प्रजाति की थी उनकी शारीरिक संरचना भी बेहद खूबसूरत थी।

रेस्टोरेंट अद्भुत था कई देशों से आए हुए खूबसूरत जोड़े इस रेस्टोरेंट की शोभा बढ़ा रहे थे। वेटर के रूप में उपस्थित नीग्रो प्रजाति के युवक और युवतियां अपनी शारीरिक संरचना से सभी का मन मोह रहे थे। होटल के इन सभी कर्मचारियों के पीठ पर एक नंबर पड़ा हुआ था मुझे लगता है इन नंबरों से इन्हें पहचाना जा सकता था।


सोनी की रेड वाइन आ चुकी थी लाल बिकनी पहनी हुई सोनीके हाथों में रेड वाइन बेहद खूबसूरत लग रही थी। वहां उपस्थित सभी महिलाओं और युवतियों में सोनीसबसे सुंदर और सुडोल थी। वहां से गुजरने वाले सभी स्त्री और पुरुष हमें एक बार अवश्य देख रहे थे उन्हें लग रहा था जैसे बॉलीवुड से कोई हीरोइन यहां पर छुट्टियां मनाने आई हुई थी।

रेस्टोरेंट के काउंटर पर बैठा हुआ 20- 22 वर्ष का नवयुवक सोनीको लगातार घूरे जा रहा था। उसकी आंखों में सोनीके प्रति एक अजीब किस्म की हवस दिखाई दे रही थी। सोनी की पीठ उस आदमी की तरह थी निश्चय ही वह सोनी के गोरे नितंबों को और गोरी पीठ को घूर रहा था। मैं उसे देख कर एक बार क्रोधित भी हुआ पर उसकी इस हरकत में उसकी गलती कम ही थी। सोनी इतनी कामुक लग रही थी कि जो भी पुरुष उसे नहीं देखता मैं उसकी मर्दानगी पर अवश्य प्रश्नचिन्ह लगा देता।

मैंने उसे नजरअंदाज कर दिया परंतु उसने अपनी आंखें सोनी से नहीं हटायीं। रेड वाइन खत्म हो चुकी थी मैंने बिल पे करने के लिए सोनी को ही रिसेप्शन पर जाने के लिए कहा ऐसा कहकर मैं उस व्यक्ति की उत्तेजना को और चरम पर ले जाना चाहता था। वह निश्चय ही अपनी तरफ आती हुई सोनीके स्तनों को भी देखता और सोनीके कोमल मुख मंडल को भी। वह सोनीकी बुरको तो वह नहीं देख पाता पर जांघों के बीच से उसके आकार की कल्पना वह अवश्य कर सकता था। बुरके फूले हुए होंठ अपनी मादकता का एहसास बिकिनी के अंदर से भी करा रहे थे।


सोनीअपनी पूर्ण मादकता के साथ उसकी तरफ बढ़ रही थी। सोनीवहां पहुंची उसने बिल दिया और वह व्यक्ति उसके स्तनों पर लगातार अपनी निगाहें गड़ाए रखा।

मुझे लगता है यदि वेद व्यास को जो शक्तियां महाभारत के समय प्राप्त थी यह दिव्य शक्ति उस व्यक्ति के पास होती तो मेरी सोनीइतनी देर में 2-3 पुत्रों की मां बन गई होती। उसकी निगाहों में इतनी वासना थी।

सोनीने भी उसकी कामुक दृष्टि अवश्य महसूस की होगी। सोनीबहुत ही समझदार थी वह अपने आसपास पनप रही कामुकता को पहचानती थी तथा अपनी इच्छा अनुसार उसे बढ़ावा देती या रोक देती थी।

हम दोनों वापस बीच पर आ गए। कुछ ही देर में हम एक बार फिर समुंद्र के अंदर अठखेलियां कर रहे थे। रेड वाइन के नशे में हमारी कामुकता और बढ़ चली थी। हम बीच के उस हिस्से में आ गए जहां पर बहुत ही कम लोग थे। मैं सोनीको अब उत्तेजक तरीके से छू रहा था। मैंने सोनीकी बुरको अपनी उंगलियों से छुआ। उसका प्रेम रस रिस रिस कर समुद्र में बह रहा था परंतु बुरका गीलापन मेरी उंगलियों ने पहचान लिया। मैंने अपने लंड को वही बुरमें प्रवेश कराने की कोशिश की। मुझे इसमें कुछ सफलता तो मिली पर पूरी तरह से नहीं समुंदर का साफ पानी हमारे संभोग दृश्य को छुपा पाने में नाकाम हो रहा था मैंने और प्रयास ना करते हुए उसे बाहर निकाल लिया और अपनी उंगलियों से ही उसकी बुरको स्खलित करने का प्रयास करने लगा। मैं और सोनीकुछ ही देर के प्रयासों में स्खलित हो गए। मेरा वीर्य समंदर की विशाल लहरों में विलुप्त हो गया सोनीमेरे होठों का चुंबन लेते हुए समंदर के नमकीन पानी का भी रस ले रही थी। शाम गहरा रही थी। हम धीरे-धीरे बीच की तरफ आ रहे थे। जैसे ही सोनीकी कमर पानी से बाहर आयी मैंने देखा उसकी बिकिनी का नीचे वाला भाग गायब था। मैंने सोनीका ध्यान उस तरफ दिलाया तो वह वापस पानी में चली गई। मुझे लगता है हमारी आपस की छेड़खानी में उसके पैरों से फिसलते हुए वह समुद्र में विलीन हो गई थी।


सोनीअब नीचे से पूरी तरह नग्न थी। इसी अवस्था में उसे बीच के किनारे तक जाना था। अभी भी बीच पर पर्याप्त रोशनी थी इस तरह सरेआम नग्न होकर बीच पर पहुंचना कठिन था। मैं उसे छोड़कर वापस बीच पर आया उसका गांउन लेकर वापस समुंद्र में आ गया। इस दौरान सोनीनग्न होकर ही समुद्र के अंदर खड़ी थी। समुद्र के साफ पानी से उसकी नग्नता झलक रही थी। आसपास के युवक और युवतियां सोनीको देख रहे थे सोनीशर्म से पानी पानी हुए अपनी गर्दन झुकाए मेरी प्रतीक्षा कर रही थी।

तभी अचानक वह होटल वाला लड़का जो सोनी को ताड़ रहा था पीछे से आ रहा था उसके हाथ में सोने की पैंटी थी…

“मैंम इस इट योर्स”

सोनी नीचे से नग्न थी किसी अनजान व्यक्ति को इतने पास देखकर वह तुरंत घुटनों के बाल नीचे बैठ गई और अपनी नमिता को छुपाने का प्रयास करने लगी। मैं भी अब तक उसके पास आ चुका था मैंने उसे व्यक्ति से सोने की पैंटी को लेते हुए बोला..

“थैंक यू बट हाउ यू गॉट इट?”

मेरी बात उसे इंग्लिश में ही हो रही थी परंतु हिंदी कहानी होने के नाते में उसे बातचीत को हिंदी में ही बताना चाहूंगा

“मैं पीछे स्विमिंग कर रहा था तभी यह पैंटी मुझे दिखाई पड़ी मैंने ये खूबसूरत लाल रंग देखा और सामने मैडम को देखा जो कुछ खोज रही थीं मुझे लगा निश्चित ही यह उनकी ही है”

ठीक है शुक्रिया…वह लड़का हम लोगों से दूर वापस समुद्र में जा रहा था. सोनी शर्मा के मारे अपनी गर्दन झुकाए हुए थे उसके दूर चले जाने के बाद उसने अपनी पैंटी पहनी और ऊपर से गाउन डाल लिया।

हम धीरे-धीरे होटल की तरफ पर चल पड़े। सोनी बार-बार उसे लड़के के बारे में सोच रही थी क्या उसने उसे नॉन देख लिया था जिस समय वह अपनी पैंटी खोज रही थी उसे समय वह निश्चित ही पूरी तरह नग्न थी। हे भगवान वह आदमी क्या सोच रहा होगा…सोनी की बुर जो बाहर से गीली थी अब अंदर से भी गीली होने लगी।


अपनी नग्नता का सोनी ने भी उतना ही आनंद लिया था जितना उसके आस पड़ोस के युवक-युवतियों उसे देख कर लिया था। सोनीअनचाहे में भी कामुकता की ऐसी मिसाल पेश कर देती थी जो उसके आस पास के पुरुषों में स्वाभाविक रूप उत्तेजना फैला दे रही थी।

उधर वह लड़का सोनी के बारे में सोच रहा था…

शेष अगले भाग में
 
भाग 140

हम धीरे-धीरे होटल की तरफ पर चल पड़े। सोनी बार-बार उसे लड़के के बारे में सोच रही थी क्या उसने उसे नग्न देख लिया था जिस समय वह अपनी पैंटी खोज रही थी उसे समय वह निश्चित ही पूरी तरह नग्न थी। हे भगवान वह आदमी क्या सोच रहा होगा…सोनी की बुर जो बाहर से गीली थी अब अंदर से भी गीली होने लगी।



अपनी नग्नता का सोनी ने भी उतना ही आनंद लिया था जितना उसके आस पड़ोस के युवक-युवतियों उसे देख कर लिया था। सोनी अनजाने में भी कामुकता की ऐसी मिसाल पेश कर देती थी जो उसके आस पास के पुरुषों में स्वाभाविक रूप उत्तेजना फैला दे रही थी।

उधर वह लड़का सोनी के बारे में सोच रहा था…

अब आगे

रात को होटल के कोमल बिस्तर पर मैं और सोनी एक दूसरे को बाहों में लिए लेटे हुए थे।सोनी टीवी के रिमोट से लगातार चैनल बदल रही थी…उसे कोई चैनल पसंद ही नहीं आ रहा था। मैं तो चादर में मुंह डाले कभी उसकी चूचियों को चूमता कभी उसकी भरी भरी चूचियों से खेल रहा था…

अचानक सोनी ने मेरा सर चादर से बाहर निकालते हुए बोला .

ये क्या है? यहां होटल में ये सब?

टीवी पर प्रतिबंधित कंटेंट का मैसेज आ रहा था..

सोनी ने उत्सुकता से मुझसे पूछा..

“यस कर दूं?

“तुम्हारा मन कर दो…”

मैने खुद को वापस चादर के अंदर कर लिया और सोनी की चूचियों को चूमने लगा।

उधर टीवी पर सोनी की पसंदीदा पोर्न चालू हो चुकी थी…एक नीग्रो और एक विदेशी लड़की का संभोग जारी था…सोनी एकटक उसे देख रही थी और मेरा काम आसान कर रही थी। नयन सुख का असर जांघों के बीच भी दिखाई पड़ रहा था। बुर नीचे अपनी लार छोड रही थी।

बीच बीच में मै भी टीवी पर चल रहे दृश्यो का जायजा ले लेता।

सोनी से उत्तेजना और बर्दाश्त न हुई और हम एक बार फिर गुत्थंगुथा हो गए। वह मेरे ऊपर आ चुकी थी। सोनी के बड़े लंड की चाहत अब परवान चढ़ चुकी थी। जब तक मैं यह सोच रहा था. मेरा लंड अपनी सोनी की बुर के आगोश में आ चुका था।

सोनी की कमर हिलना शुरू हो चुकी थी मैं उसके स्तनों और नितंबों पर बराबर ध्यान देते हुए संभोग का आनंद लेने लगा।


मैंने सोनीसे पूछा

"वह बिल काउंटर वाला लड़का तुम्हें याद है"

"हां वह कामुक निगाहों से मुझे देख रहा था"

"हां मैंने भी बात नोटिस की थी"

"फिर भी आपने मुझे बिल देने भेज दिया था।"


मैं हंसने लगा

"मैंने सोचा जब वह तुम्हें देख ही रहा है तो और ध्यान से देख ले." मैंने महसूस किया था कि सोनीकी कमर गति में थोड़ी तेजी आ रही थी वह इन बातों से उत्तेजित हो रही थी।

“बीच पर तो साले ने हद ही कर दी” सोनी में बात आगे बढ़ते हुए कहा..

“हां सच में, उसे तुम्हारी पैंटी कैसे मिल गई” मैंने उत्सुकता बस पूछा।

सोनी मुस्कुराने लगी और बड़ी अदा से बोली…

“लगता है वो तैरते हुए आया होगा और पैंटी की डोरी खींच कर पैंटी खींच ले गया होगा …..और लाइए डिजाइनर पैंटी “

सोनी की पेटी अद्भुत थी सिर्फ आगे और पीछे त्रिकोण के आकार में दो कपड़े जो अगल-बगल से कुछ रेशम की डोरियों से बंधे हुए थे..

“लगता है वह तुम्हारे नितंबों के जाल में फंस गया..” मैं सोनी के गदर आए हुए चूतड़ों को सहलाए जा रहा था

सोनी ने कुछ कहा नहीं परंतु उसके चेहरे पर आत्मविश्वास से भरी विजयी मुस्कान थी उसे अपने खजाने का बखूबी अहसास था।


मैंने फिर कहा

"वह लड़का कितना विशालकाय था सोचो उसका लंड कैसा होगा" मैंने सोनी की दुखती रग पर हाथ रख दिया।

सोनीअपनी कमर और तेजी से हिलाने लगी मुझे लगता है इस तरह खुलकर उस नीग्रो के लंड की बातें सुनकर वह अत्यधिक उत्तेजित हो चली थी. उसका चेहरा वासना से लाल हो गया था. वह और बात करने की हालत में नहीं थी। वह लगातार अपने स्तनों को मेरे सीने से रगड़ते हुए मेरे होठों को चूम रही थी और अपनी कमर को अद्भुत गति से हिला रही थी। मैं उसके नितंबों को अपने हाथों से अपनी तरफ खींचे हुआ था तथा अंगुलियों से उसकी गांड को छू रहा था गुदगुदा रहा था।

आ ….. ई…………सोनी बुरी तरह हाफ रही थी…. अचानक वह शांत हो गई पर उसकी कमर अब भी धीरे-धीरे चल रही थी। शायद सोनी अब स्खलित हो रही थी उसकी बुर की कंपकपाहट अद्भुत थी मैं भी उसके साथ साथ स्खलित होने लगा। मैंने सोनी की बुर वीर्य से भर दिया था। वह पसीने से लथपथ हो चुकी थी। मैं उसे जी भर कर प्यार कर रहा था। कुछ देर बाद उसके शांत होने के पश्चात मैने उसकी चुचियों से खेलते हुए कहा...

“एक चैलेंज है तुम्हारे लिए…”

“क्या…” सोनी ने अपनी पलके बंद किए हुए पूछा।

“पहले हां बोलो तभी बताऊंगा..”

“अरे मुझे क्या पता आपका चैलेंज क्या है..” सोनी ने अपनी आंख खोली और मेरे चेहरे को पढ़ने की कोशिश करते हुए बोला..

"सोनी क्या तुम उस नीग्रो लड़के का वीर्य दोहन कर सकती हो?" मैंने उत्तेजना में यह उचित या अनुचित बात कह दी…

सोनी ने अपनी आंख पूरी खोली..

“ये क्या बात है..मजाक है क्या? न उससे जान पहचान न मिलना जुलना और सीधा वीर्य दोहन…” सोनी ने अपनी आंखें मेरे चेहरे पर गड़ाते हुए कहा..

विकास पूरे आत्मविश्वास से सोनी को समझाते हुए बोला

“अरे यहां के पुरुष बस इसी फिराक में रहते हैं किसी ने मौका दिया और उसके साथ हो लिए..कई औरते जिन्हें बड़ा हथियार पसंद होता है वो अक्सर इनके संपर्क आ जाती हैं “ मैने सोनी को समझाते हुए बोला..


"और यदि इस दौरान उसने मेरे से जबरदस्ती संभोग कर लिया तब…...मैं तो मर ही जाऊंगी ? उसने मेरे सीने से अपना सर चिपकाते हुए कहा।

मुझे हंसी आ गई…पर मैने अपनी हंसी पर अंकुश लगाते

“अरे पागल वो ऐसा कभी नहीं कर सकता..”

सोनी शायद मेरी बात से संतुष्ट न थी। मैने आगे उसे समझाने की कोशिश की..


"वह रेस्टोरेंट् होटल से जुड़ा हुआ है उसकी इतनी हिम्मत नहीं होगी की वह यहां के अतिथियों से इस प्रकार का व्यवहार करें परंतु मुझे नहीं लगता कि तुम इतनी हिम्मत जुटा पाओगी कि उसके लंड के दर्शन कर पाओ और उसका वीर्य दोहन कर सको"

सोनीमुस्कुराते हुए बोली

"और यदि कर दिया तो?"

मैंने कहा

"तुम जब भी कहोगी तुम्हारी एक बात बिना कहे मान लूंगा चाहे वह कुछ भी हो"


वह मुस्कुराते हुए बोली…

"आपका हुकुम सर आंखों पर कल शाम तक उस काले नीग्रो का वीर्य मेरे हाथों में होगा मेरे आका" वो मुस्कुरा रही थी।

मैंने भी मुस्कुराते हुए उसे चूम लिया और कल के दिन के बारे में सोचते हुए सो गया।

(मैं सोनी)

अगली सुबह विकास सेमिनार के लिए निकल चुका था। उसके होटल से जाने के बाद मुझे अपने चैलेंज को पूरा करने के लिए तैयार होना था. मुझे अपनी सहेली की बातें याद आ रही थीं। उसने मुझसे कहा था सोनी यदि संभव हो तो वहां जाकर किसी नीग्रो का लंड देखना। वहां मेल प्रॉस्टिट्यूट या जिगोलो बड़े आसानी से उपलब्ध होते हैं। हम सभी ने उस काले लंड को टीवी पर तो देखा है पर क्या हकीकत में वह वैसा ही होता है?


तुम्हें विकासके साथ साउथ अफ्रीका जाने का मौका मिल रहा है हो सकता है तुम्हे यह अवसर मिले तुम इस अवसर को अपने हाथ से जाने मत देना।

जीवन में कामुकता का अतिरेक अमिट छाप छोड़ता है यह हमारे जीवन की अनोखी याद होती है. वैसे भी विकास तुम्हारी इच्छाओं का मान रखता है।.

मैं अपनी सहेली की इन बातों को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह मन बना चुकी थी। मैं स्वयं भगवान द्वारा बनाई गई अद्भुत कलाकृति थी और वैसा ही वह अद्भुत विशालकाय नीग्रो. मुझे भगवान ने सुंदर शरीर के अलावा सोचने समझने की अद्भुत शक्ति भी दी थी. मुझे उनके द्वारा बनाई गई हर कलाकृति को देखने और भोगने का अधिकार था.

विकास ने जो दलील मुझे दी थी मैं उससे भी आश्वस्त थी कि वह नीग्रो मेरे साथ जबरदस्ती नहीं करेगा। आखिर मैं भी तो उसका वीर्य दोहन ही करने वाली थी कत्ल नहीं। मैने अपनी दूसरी बिकनी निकाली और मन में कुछ डर और उत्साह लिए तैयार होने लगी।

यह बिकिनी बेहद खूबसूरत थी यह सुर्ख लाल रंग की रेशम की बनी हुई थी। मैं इस बिकिनी को पहन कर जब आईने के सामने गई तो मैंने अपनी सुंदरता और इस मदमस्त यौवन के लिए भगवान को एक बार फिर शुक्रिया कहा। उन्होंने मुझे धरती पर शायद इसीलिए भेजा था कि मैं अपनी कामुकता की पूर्ति कर सकूं। मैंने बिकनी के ऊपर एक काली जालीदार टॉप पहन ली। यह टॉप मेरे शरीर की बनावट को और भी अच्छी तरह से उजागर कर रही थी। ढकी हुई नग्नता ज्यादा उत्तेजक होती है. टॉप मेरे नितंबों तक आ रही थी पर उसे ढकने में नाकामयाब हो रही थी।

मैं सज धज कर उस नीग्रो से मिलने चल पड़ी। बीच पर अकेले जाते समय मुझे थोड़ा अटपटा लग रहा था पर मेरा उद्देश्य निर्धारित था। कुछ ही देर में मैं उस रेस्टोरेंट के सामने बीच पर पहुंच गई मैंने अपनी जालीदार टॉप को रेत पर रख दिया और समुंद्र की लहरों का आनंद लेने चल पड़ी। मैं बार-बार होटल की तरफ ही देख रही थी। मेरे मन में इच्छा थी कि वह लड़का मुझे देख कर बीच पर आए।

सुबह का वक्त था रेस्टोरेंट में बियर पीने वालों की कमी थी। कुछ ही देर में मैंने उस लड़के को बीच पर टहलते हुए देखा। वह बार-बार मुझे देख रहा था। उसके मन में निश्चय ही सोच रहा होगा कि आज मैं अकेली क्यों हूं? मैं कुछ देर अठखेलियां करने के बाद समुन्द्र से बाहर आई. वह मेरी जालीदार नाइटी के ठीक बगल में खड़ा था. वह लगभग 7 फुट ऊँचा हट्टा कट्टा जवान था। चौड़ा सीना पुस्ट जाँघे पतली कमर और जाँघों की जोड़ पर आया उभार उसकी मर्दानगी को प्रदर्शित करता था एक ही कमी थी उसका चेहरा और रंग।

मैं उसके पास आ चुकी थी। जैसे ही मैं अपनी टॉप को उठाने के लिए झुकी मेरे नितंब उसकी आंखों के ठीक सामने आ गए. मैं यह जान गयी थी कि वह मुझे घूर रहा है। मेरा रास्ता आसान हो रहा था। मैं उसके रेस्टोरेंट की तरफ चल पड़ी। वह भी मुझे पीछे से देखते हुए रेस्टोरेंट की तरफ आने लगा।

मैं अभी भी इस बात से घबराई थी कि यदि कहीं उत्तेजना वश उसने मुझ पर संभोग के लिए दबाव बनाया मैं उसे किस प्रकार ठुकरा पाऊंगी उस नीग्रो से संभोग करना मेरे बस का नहीं था। मैं कोमलंगी और सामान्य युवती थी। मुझ में उत्तेजना तो बहुत थी पर उसके विशालकाय लिंग को अपनी बुरमें समाहित करने की क्षमता शायद मुझ में नहीं थी । मुझे सिर्फ उत्तेजना और कामुकता में ही आनंद आता था। किसी अन्य पुरुष से संभोग मैने अब तक नहीं किया था पर जब से विकास ने इस वीर्य दोहन के कार्य के लिए मुझे चेलेंज किया था तो मैंने भी उसे स्वीकार कर लिया था। ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपनी उस काल्पनिक इच्छा के पीछे भाग रही थी जिसे विकास से साझा करना कठिन था पर वो बिना कहे शायद यह समझ गया था।

मैं रेस्टोरेंट् में एक किनारे की टेबल पर जाकर बैठ गई। मेरा चेहरा रिसेप्शन की तरफ था। अचानक उस लड़के को मैंने अपनी तरफ आते देखा उसने एक सुंदर टी-शर्ट और बरमूडा पहना हुआ था। वह आने के बाद मुझसे बोला (वह मुझसे अंग्रेजी में ही बात कर रहा था पर मैं पाठकों की सुविधा के लिए उसे हिंदी में व्यक्त कर रही हूँ)

मैम आप क्या लेना पसंद करेंगी?

मैं उससे इस तरह अचानक बात करने में घबरा रही थी। मैंने जल्दी बाजी में बोल दिया

“रेड वाइन” मैं उससे नज़रें नहीं मिला रही थी।


“मैम एक बार आप यहां की स्पेशल डिश ट्राई कीजिए”

उसने आग्रह किया

क्या है वो..

उसने अंग्रेजी में डिश का जो भी नाम बताया वो नाम मैंने पहले कभी नहीं सुना था पर दोबारा पूछ कर मैं खुद को नासमझ नहीं जताना चाहती थी..


“ठीक है ले आइए”

कुछ ही देर में वह समुद्री मछली से बनी हुई एक डिश और रेड वाइन लेकर आ गया। मैं अभी भी अपनी कामुक अदाओं के साथ टेबल पर बैठी हुई थी। जैसे ही वह मेरा ऑर्डर रखकर जाने को हुआ मैंने उससे कहा…

यहां पास में कोई आईलैंड नहीं है क्या? मैने हिम्मत जुटा कर उससे बात करने की कोशिश की। जबकि विकास मुझे यहां के बारे में सब कुछ समझा चुका था।

मेरी बात सुनकर वो खुश हो गया और बोला..

“एक आईलैंड है तो पर वह यहां से थोड़ा दूर है वहां सिर्फ प्राइवेट बोट से जाया जा सकता है.”


“ओके थैंक यू”

“मैम, यदि आप वहां जाना चाहती हैं तो मैं आपको ले जा सकता हूं। आप मेरी प्राइवेट बोट पर वहां जा सकती हैं।” उसने आगे बढ़कर कहा..

“आपका नाम क्या है।”

“मैम अल्बर्ट” उसने अपना आईकार्ड भी दिखाया।

इसके बाद तो वह बिना रुके अपनी वोट और उस आईलैंड के बारे में ढेर सारी बातें बताने लगा। मैंने बात खत्म करते हुए अंततः कहा..

“ठीक है।”

वो खुश हो गया। उसने अपने साथी को इशारा किया और कुछ देर किसी से फोन पर बातें की। अपनी वाइन खत्म करने के बाद मैं उसकी बोट में सवार होकर आइलैंड के लिए निकल रही थी। अल्बर्ट ने ट्रिप के लिए आवश्यक सामान बोट में रख लिया था।

जैसा विकास ने समझाया था अब तक सब कुछ वैसा ही हो रहा था। मुझे विकास की जानकारी पर संदेह हो रहा था सब कुछ इतना आसानी से घट रहा था जैसे यह सुनियोजित हो।

अल्बर्ट का दोस्त भी उसी की तरह हट्टा कट्टा था। वो बोट चला रहा था। जैसे- जैसे वोट बीच से दूर हो रही थी मेरी धड़कन तेज हो रही थी। मैं आज दो अपरिचित हट्टे कट्टे मर्दो के साथ एक अपरिचित आईलैंड पर जा रही थी। मेरे साथ वहां क्या होने वाला था यह तो वक्त ही बताता पर मैं उत्तेजित थी। मुझे परिस्थितियों और भगवान पर भरोसा था।


अल्बर्ट मेरे पास आकर मुझसे बातें कर रहा था। वह मुझे उस आईलैंड के बारे में बता रहा था। उसकी बातों से मुझे मालूम हुआ कि वह आईलैंड खूबसूरत तो था और वहां अन्य लोगों का आना जाना नहीं था। सिर्फ होटल में रहने वाले कुछ पर्यटक वहां जाते थे। वह अभी पर्यटन के हिसाब से विकसित नहीं हुआ था। मेरा डर एक बार के लिए और बढ़ गया। उस सुनसान आईलैंड पर इन दो मर्दों के साथ अकेले घूमना और अपने उद्देश्य की पूर्ति करना यह एक अजीब कार्य था।

मैं निर्विकार भाव से होने वाली घटनाओं की प्रतीक्षा कर रही थी। कुछ ही देर में वह टापू दिखाई देने लगा। मैं उस टापू की सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध थी। वहां पहुंचने से कुछ ही देर पहले समुंद्र में कई सारी छोटी-छोटी मछलियां तैरती हुई दिखाई दी। अल्बर्ट ने मुझे बताया कि यह मछलियां किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि जब यह आपके शरीर से टकराती हैं तो आपको अद्भुत आनंद देती हैं। उसने मुझसे कहा आप चाहे तो पानी में उतर कर इसका आनंद ले सकती हैं।

उसने मुझसे यह भी पूछा कि आपको स्विमिंग आती है? मैंने ना में सर हिला दिया. पर मैं मछलियों की सुंदरता देखकर पानी में उतरने को तैयार हो गई. मैंने अल्बर्ट को भी पानी में आने को कहा. मुझे अकेले डर लग रहा था. मैने अपनी जालीदार टॉप को एक बार फिर बाहर कर दिया।

मैंने उस टॉप को वही वोट पर रखा और अल्बर्ट के साथ पानी में कूद गयी। बोट चला रहा दूसरा युवक कुछ देर के लिए मेरी नग्नता का आनंद ले पाया। मैं और अल्बर्ट पानी में थे मछलियां बार-बार मेरी जाँघों और स्तनों से टकराती और अलग किस्म की उत्तेजना देती। कई बार वह मेरे कमर को पूरी तरह से घेर लेती थीं । कई बार अल्बर्ट अपने हाथों से उन मछलियों को मेरे शरीर से हटाया। अल्बर्ट के हाथ अपने पेट और नितंबों पर लगते ही मेरी उत्तेजना बढ़ गई। उसकी बड़ी-बड़ी हथेलियां मेरे नितंबों से अकस्मात ही टकरा रही थी। जब उसे इसका एहसास होता वह तुरंत ही बोल उठता सॉरी मैंम


मैंने अल्बर्ट से कहा ..

"इट्स ओके, आई एम इंज्योयिंग फीसेस आर मैग्नीफिसेंट"

सचमुच उन छोटी मछलियों का स्पर्श मुझे रोमांचक लग रहा था वह अपने छोटे-छोटे होठों से मेरी जाँघों और पेट को छू रही थीं। मुझे गुदगुदी हो रही थी और साथ ही साथ उत्तेजना भी।

कुछ मछलियां तो जैसे शैतानी करने के मूड में थी। वह बार-बार मेरी दोनों जांघों के बीच घुसने का प्रयास कर रही थीं। अपने होठों से वह मेरी त्वचा को कभी चुमतीं तथा तथा कभी चूसतीं। वो कभी इधर हिलती कभी उधर मुझे सचमुच उत्तेजना महसूस होने लगी।


ऐसा लग रहा था जैसे प्रकृति ने भी मुझे छेड़ने के लिए इन सुकुमार मछलियों को भेज दिया था। वो मेरी बुरको भी चूमने की कोशिश कर रहीं थीं। मेरी बुर ने बिकनी की चादर ओढ़ रखी थी वह मन ही मन मैदान में उतरने को तैयार थी उसे सिर्फ मेरे सहयोग के प्रतीक्षा थी वह चाह कर भी अपनी चादर हटा पाने में असमर्थ थी।

मेरा पूरा शरीर मछलियों के चुंबन का आनंद ले रहा था मैंने अपनी बुरको दुखी नहीं किया। मैंने अपने दोनों हाथ नीचे किये और अपनी बिकनी को खींचकर अपनी जांघो तक कर दिया। एक पल के।लिए मैं भूल गई कि अल्बर्ट पास ही था…यद्यपि उसका ध्यान अपने साथी से बात करने में था।

पानी की ठंडी ठंडी धार मेरी बुरके होठों को छूने लगी।


कुछ मछलियां मेरे पेट और स्तनों के आसपास भी थी मैं गर्दन तक पानी में डूबी हुई थी।

छोटी छोटी मछलीयां मेरी दोनों जांघों के बीच से बार-बार निकलती वह बुरके होठों को चुमतीं। बुरभी अब खुश हो गई थी ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वह मछलियों के लिए अपना प्रेम रस उत्सर्जित कर रही थी बुरका यह प्रेम रस मछलियों को कुछ ज्यादा ही पसंद आ गया था वह उसके होठों से प्रेम रस पीने को आतुर दिख रही थीं।


कुछ ही देर में मेरी बुरके होठों पर मछलियों का जमावड़ा लगने लगा मैंने अपनी दोनों जाँघें सटा दीं। मछलियां तितर-बितर हो गई मेरे होठों पर मुस्कान आ गयी । जिसे देखकर अल्बर्ट ने कहा

"मैम आर यू इंजॉयिंग"

"यस दीस फिशेस आर मैग्नीफिसेंट" मेरे इतना कहते-कहते छोटी-छोटी मछलियों ने मेरी जांघों के जोड़ पर एकबार फिर जमावड़ा लगा लिया वो मेरी दोनों जांघों को फैलाने का असफल प्रयास कर रही थीं मैंने अपना दिल बड़ा करते हुए अपनी जांघों को फैला दिया एक बार फिर मेरी बुरका प्रेम रस उन्हें तृप्त कर रहा था वह उत्तेजित होकर बुरके दोनों होठों के बीच से प्रेम रस लूटने के प्रयास में थी मेरी उत्तेजना चरम पर थी जी करता था कि मैं अपने स्तनों पर से भी वह आवरण हटा दूं जो मेरी बिकनी के ऊपरी भाग ने उन्हें दिया हुआ था वह भी इस अद्भुत सुख की प्रतीक्षा में थे परंतु मैं यह हिम्मत नहीं जुटा पाई अल्बर्ट बगल में ही था समुंद्र के स्वच्छ जल में मेरे स्तन स्पष्ट दिखाई दे जाते।

मेरी बुरपर मछलियों का आक्रमण तेजी से हो रहा मेरी बुरमचल रही थी वह मुझ से मदद की गुहार मांग रही थी पर मैंने उसे उसके हाल पर छोड़ दिया मैं उसे स्खलित होते हुए देखना चाहती थी। आखिर इस उत्तेजना के लिए वह स्वयं आगे आई थी मछलियां बुर के दोनों होठों के बीच घुसने का प्रयास कर रही थी पर उनमें इतनी ताकत नहीं थी आज भी विकास को बुर के मुख में लंड को प्रवेश कराने में कुछ ताकत तो अवश्य लगानी पड़ती थी यह ताकत लगाना छोटी और प्यारी मछलियों के बस का नहीं था।


इसी दौरान मछलियों ने मेरी गांड को भी घेर लिया जैसे ही मैं अपने घुटने थोड़ा ऊपर करती मेरी गांड उनकी जद में आ जाती और मेरे घुटने नीचे करते ही वह गांड से दूर भाग जातीं। मेरे नितंबों का दबाव झेल पाना उनके लिए कठिन हो जाता। मुझे अब इस खेल में मजा आने लगा था चेहरे पर मुस्कुराहट लिए मैं आकाश को देख रही थी और प्रकृति की यह अद्भुत रचनाएं मेरी उत्तेजना को एक नया आयाम दे रहीं थीं।

जब मछलियां मेरी बुरके दोनों होंठो के बीच घुसने का प्रयास कर रही थीं। तभी कुछ मछलियों में मेरी भग्नासा को अपना निशाना बना लिया। उसका विशेष आकार उन्हें अपना आहार जैसा महसूस हुआ। वह तेजी से उसे चूस चूस कर खाने का प्रयास करने लगीं।


मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था मैंने अपने हाथों से उन्हें हटाने का प्रयास किया पर मेरे हाथ कमर तक पहुंचकर ही रुक गए। मुझे वह उत्तेजना अद्भुत महसूस हो रही थी। मैंने अपनी बुरको सिकोड़ कर उसके होठों को करीब लाने की कोशिश की। मछलियां कुछ देर के लिए वहां से हटीं पर आकुंचन के हटते ही वह दोबारा उसके होठों पर आ गयीं। ( आज यही क्रिया कीगल क्रिया के नाम से जानी जाती है )

मैं यह अद्भुत खेल ज्यादा देर नहीं खेल पाई मेरी बुरस्खलित होने लगी. मेरी बुर मछलियों के इस अद्भुत प्रेम से हार चुकी थी. उसके होंठ फैल चुके थे मछलियां जी भर कर प्रेम रस पी रही थी. मेरा मुंह खुला हुआ था आंखें आकाश की तरफ देखती हुई अद्भुत प्रकृति को धन्यवाद अर्पित कर रही थीं।

मुझे मदहोश देखकर अल्बर्ट ने कहा

मैंम आर यू कंफर्टेबल

मैं मैं वापस अपनी चेतना में लौट आई अपने हाथ नीचे किया और पेटी को वापस ऊपर कर अपनी अमानत को ढक लिया। वापस नाव पर चढ़ना बेहद कठिन था अल्बर्ट को आखिर मेरी मदद करनी पड़ी मुझे नाव पर चढ़ने के लिए अल्बर्ट ने मेरे नितंबों को थाम लिया और ऊपर की तरफ धकेला .. किसी पराए मर्द का मजबूत हाथ आज पहली बार मेरे नितंबों से सट रहा था…मुझे अभी विकास का चैलेंज पूरा करना था…


कुछ होने वाला था…

क्या सोनी कामयाब रहेगी…या ये कामयाबी उसे महंगी पड़ेगी…

शेष अगले भाग में..

अगला एपिसोड पाठकों की प्रतिक्रिया आते ही उन्हें भेज दिया जाएगा।
 
भाग 141



मैं मैं वापस अपनी चेतना में लौट आई अपने हाथ नीचे किया और पेटी को वापस ऊपर कर अपनी अमानत को ढक लिया। वापस नाव पर चढ़ना बेहद कठिन था अल्बर्ट को आखिर मेरी मदद करनी पड़ी मुझे नाव पर चढ़ने के लिए अल्बर्ट ने मेरे नितंबों को थाम लिया और ऊपर की तरफ धकेला .. किसी पराए मर्द का मजबूत हाथ आज पहली बार मेरे नितंबों से सट रहा था…मुझे अभी विकास का चैलेंज पूरा करना था…

कुछ होने वाला था…



क्या सोनी कामयाब रहेगी…या ये कामयाबी उसे महंगी पड़ेगी…

अब आगे..

मेरे गदराए हुए कूल्हों को थाम कर अल्बर्ट भी आनंदित था। उंगलियों की हरकत जब तक मैं महसूस कर पाती तभी समुद्र की एक तेज लहर आयी।

अचानक आयी इस लहर ने हम दोनों को असंतुलित कर दिया। मैं पूरी तरह उसके आलिंगन में आ गई। मुझे सहारा देने के लिए उसने मुझे अपने आप से चिपका लिया। एक पल के लिए मुझे लगा जैसे किसी काले साए ने मुझे अपने आगोश में ले लिया। अल्बर्ट की हथेलियां मेरी पीठ और नितंबों पर थी वह उनसे मुझे सहारा दिए हुए था। उसके विशालकाय लिंग का एहसास मुझे अपने जांघों पर हो रहा था। वह मुझसे कद काठी में काफी बड़ा था और मैं सामान्य कद काठी की। अल्बर्ट ने अपने हाथ वापस पानी में डाल कर हिलाने लगा ताकि वह हम दोनों को पानी के ऊपर तैरता रख सके। उसके अचानक मेरी पीठ पर से हाथ हटाने से मैं पानी में नीचे जाने लगी।

डूबते को तिनके का सहारा

मैंने अपनी सारी हिम्मत जुटा कर उस दिव्य हथियार को पकड़ लिया जो बरमूडा के अंदर एक खूंटे की भांति तना था।

मैं उस का सहारा लेकर ऊपर आने की कोशिश की इस दौरान मैंने उसके लिंग का अंदाज लगा लिया। इस छोटी सी घटना ने अल्बर्ट के मन में भी उम्मीद जगा दी होगी। वह बेहद खुश दिखाई दे रहा था। न जाने उसके मन में हिम्मत कहां से आई उसने एक बार फिर अपनी हथेलियां का सपोर्ट हटा लिया और मैं फिर पानी में जाने लगी। पर इस बार मै सचेत थी मैंने अल्बर्ट के गले में अपनी गोरी बाहें डाल दीं। मेरी चूची अल्बर्ट के ठुड्ढी के पास थी।

हम दोनों की अठखेलियां कुछ देर यूं ही चली।

मैंने मुस्कुराते हुए अल्बर्ट से वापस वोट पर चलने को कहा मैं अब थक चुकी थी। उसने मुझे मेरे पैरों से पकड़ कर ऊपर उठा लिया। उसके वोट पर जाने वाली सीढ़ी थोड़ी ऊंची थी। अल्बर्ट के दोनों हाथ मेरी जांघों के निचले हिस्से पर थे तथा उसका चेहरा मेरे पेट से टकरा रहा था। उसके मोटे मोटे होंठ मेरी बुरके बिल्कुल समीप थे।

यद्यपि मैं जानती थी कि मेरा और अल्बर्ट का मेल असंभव है हम दोनों एक दूसरे के लिए नहीं बने थे। वह अलग था और मैं अलग। परंतु जिस सहजता से वह मुझे पेश आ रहा था मुझे बेहद अच्छा लग रहा था।

मैंने बोट की सीढ़ी पकड़ ली और धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगी। और अपने गदराए हुए कूल्हे उसकी आंखों के सामने परोस दिए। क्या मंजर रहा होगा वह भी पीछे पीछे ऊपर आ गया। मैने पलट कर देखा उसने झट से अपनी पलके झुका लीं।

बरमूडा के अंदर उसका लिंग अब और भी स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था। बरमूडा गीला होने से वो उसके शरीर से चिपक गया था। वो उसे छुपाने की कोशिश कर रहा था परंतु उसकी मर्दानगी छुपने लायक नहीं थी।

हम दोनों वोट पर आ चुके थे मेरी नग्नता का दर्शन अब वोट पर बैठा दूसरा आदमी भी कर रहा था। मैंने अपनी जालीदार नाइटी पहनने की कोशिश नहीं की। अल्बर्ट ने वोट से लाकर एक साफ और सुंदर तोलिया मुझे अपना शरीर पोछने के लिए दिया। वह पूरी व्यवस्था करके आया था। थोड़ा आराम करते हुए मैं आईलैंड के आने का इंतजार कर रही थी।

तभी मैंने देखा वह दूसरा आदमी रेड वाइन की बोतल और गिलास लिए हुए हमारे पास आ गया उसने भी बड़े आदर से मुझे कहा "मैम यू आर सो ब्यूटीफुल आर यू इन बॉलीवुड?"

मैं उसकी बात से बहुत खुश हो गई.

अल्बर्ट ने कहा

"ही इज माय फ्रेंड माइकल"

मैंने रेड वाइन की बोतल ले ली और अपने हाथों से उसे तीन गिलासों में डाल दिया.

माइकल मेरे हाथों से रेड वाइन का ग्लास पकड़ते हुए बहुत खुश था। कभी कभी मैं सोचने लगती कि यदि अल्बर्ट और माइकल दोनों के मन में पाप होता तो मेरा क्या होता। यदि वह अपनी दरिंदगी पर आते तो मेरी दुर्गति करने के लिए एक ही काफी था और यहां तो दो दो थे। पर अभी तक मुझे उनके व्यवहार मे सिर्फ और सिर्फ सौम्यता नजर आ रही थी। उनमें उत्तेजना तो अवश्य थी पर उन्होंने उसे नियंत्रित किया हुआ था।

यही बात मुझे सर्वाधिक पसंद है। मुझे लगता है की स्त्रियों को ही कामुकता की कमान संभालनी चाहिए और पुरुषों को उनकी इच्छा अनुसार ही उनका साथ देना चाहिए और उनकी पूर्ण सहमति से सहवास करना चाहिए.

मैं रेड वाइन पीते हुए और समुंद्र की ओर देखते हुए यह बातें सोच रही थी और वह दोनों मेरी नग्नता का जी भर कर आनंद ले रहे थे। रेड वाइन का ग्लास खत्म हो चुका था और मैं हलके सुरूर में आ चुकी थी।

बोट आइलैंड के बिल्कुल समीप आ चुकी थी. मैं और अल्बर्ट उतरकर किनारे पर आ गए माइकल ने भी वोट को किनारे पर बांध दिया और वोट पर से आवश्यक सामग्री लेकर हमारे साथ आईलैंड को देखने निकल पड़ा.

हम तीनों आईलैंड की खूबसूरती का आनंद लेते हुए अंदर की तरफ चल पड़े ऊपर वाले ने आईलैंड बेहद खूबसूरती से बनाया था वहां पूरी तरह हरियाली थी अलग प्रकार के पेड़ थे और छोटी-छोटी पहाड़िया थीं. अद्भुत दृश्य था मैं प्रकृति के द्वारा बनाई खूबसूरत जगह पर धूप का आनंद ले रही थी. प्रकृति के दो अनमोल नगीने मेरे साथ में थे मैं मन ही मन सोच रही थी की प्रकृति किस किस तरह के जीव बनाती है निश्चय हैं उसकी इन खूबसूरत कलाकृतियों में कोई न कोई बात रहती है जिससे हम सभी का उनमें आकर्षण बना रहता है।

एक अनोखी बात थी। बीच पर काफी कम लोग दिखाई पड़ रहे थे उनमें अक्सर मेरी उम्र की ही कई सारी युवतियां थी और सभी के साथ माइकल और अल्बर्ट जैसे लोग थे।

अधिकतर युवतियों बेहद उत्तेजक बिकनी में थी और कई टॉपलेस होकर घूम रही थी।

एक अंग्रेजन तो पूरी तरह नंगी थी और दो काले सायों के बीच मिस फिक्र होकर चल रही थी उनसे हंस कर बातें कर रही थी यह देखकर मुझे भी साहस आ रहा था। यह कैसा अनोखा द्वीप था। सभी युवतियां यहां अकेली ही आई थी। क्या वह भी मेरे जैसी हिम्मतवाली थी या यह कोई अनोखा द्वीप था और इसके नियम भी अनोखे थे।

मैं इस रहस्य को समझने में पूरी तरह नाकाम थी। कुछ भी देर बाद एक और भी युवती जो मुझे कल होटल के रेस्टोरेंट में मिली थी वह भी दो मुस्टंड नीग्रो के साथ इस बीच पर टहल रही थी।

मेरा आत्मविश्वास अब पूरी तरह बढ़ चुका था इतना तो अवश्य था कि मैं यहां अकेली नही थी।

मैं इस खूबसूरत आईलैंड पर आकर अपने आप को खुशकिस्मत महसूस कर रही थी काश विकास मेरे साथ होता। कुछ ही देर में हम थक चुके थे. दोपहर के लगभग 1:00 बज रहे होंगे.

मुझे भूख लग आई थी मैंने अल्बर्ट से कहा वह बोला

"यस मैम आई हैव समथिंग फॉर यू"

माइकल और अल्बर्ट ने अपने साथ लाए सामान से एक चादर निकाली. हमने वही चादर बिछाकर खाना खाया अल्बर्ट और माइकल ने आईलैंड पर आने की पूरी तैयारी की थी चादर निकालते समय बैग से कंडोम के पैकेट भी निकल कर गिर गया एक बार के लिए मेरी रूह कांप गई.

ऐसा लगा जैसे इसी चादर पर मेरा योनि मर्दन होने वाला था। पर अल्बर्ट ने अपनी नज़रें झुकाए हुए ही उस पैकेट को पकड़ा और वापस बाग में डाल दिया। मेरे मन का डर अल्बर्ट और माइकल की सौम्यता ने दबा रखा था.

कुछ ही देर में हम तीनों खाना खा रहे थे मैंने थोड़ा सा ही खाना खाया क्योंकि वह समुद्री फूड था अंत में माइकल ने एक सुंदर स्वीट डिश निकाली यह कॉन्टिनेंटल डिश थी जो मुझे बेहद पसंद थी. मैंने उसे खाया और मैं तृप्त हो गई.

मुझे यह बात समझ नहीं आ रही थी कि अल्बर्ट को मेरी पसंद की स्वीट डिश का पता कैसे चला। मैं जब अल्बर्ट से पूछा तो वो बोला..

“ मोस्ट ऑफ द इंडियन विमेन लाइक दिस”

मैं अभी भी अपनी बिकनी में ही थी वह दोनों मेरी नग्नता के आदि हो चुके थे. मैं भी अपने आप को सहज महसूस कर रही थी.

मेरा पेट भर चुका था सुनहरी धूप में बैठे बैठे मुझे नींद आने लगी . अल्बर्ट ने हवा से फूलने वाला तकिया निकाला और अपने बड़े-बड़े फेफड़ों से तीन-चार फूक में ही उसे फुला दिया और मुझसे कहा

"मैम, यू कैन टेक रेस्ट"

मेरा इतना आदर और सत्कार उन दोनों द्वारा किया जा रहा था जो एक तरफ मुझे सहज भी कर रहा था पर दूसरी तरफ कही न कहीं मेरे मन में डर भी था. फिर भी मैं वह तकिया लेकर करवट लेकर सो गयी. उसी दौरान अल्बर्ट के एक बात कही

" मैम, इफ यू डोंट माइंड वी कैन गिव यू रिलैक्सिंग फुट मसाज"

मैं वास्तव में थकी हुई थी और मेरे कोमल पैर दर्द भी कर रहे थे. मुझे अंततः अल्बर्ट का वीर्य दोहन करना ही था मैंने उसे अनुमति दे दी. कुछ ही देर में अल्बर्ट मेरे पैरों को दबा रहा था उसकी हथेलियां मेरे पैरों को घुटनों तक दबा रही थी वह उसके ऊपर नहीं आ रहा था शायद उसे अपनी मर्यादा मालूम थी. माइकल ने भी मेरे हाथों को दबाना शुरू किया था.

उन दोनों के इस तरह मसाज करने से मुझे अद्भुत आनंद आ रहा था मुझे पता था उन दोनों को भी मेरे कोमल शरीर को छूने में निश्चय ही आनंद आ रहा होगा. मुझे कब झपकी लग गई मुझे याद भी नहीं। अल्बर्ट के हाथ मेरी जांघों तक पहुंच चुके थे। कुछ देर तक तो मैं उसके अनोखे स्पर्श का आनंद लेती रही पर मन में डर अब भी कायम था। उधर माइकल की उंगलियां मेरे कंधों तक पहुंच चुकी थी। यदि मैं उन्हें नहीं रोकती तो शायद उनकी उंगलियां मेरी बुर और चूचियों को सहला रही होती।

मैंने अपनी पलकें खोल दीं. वह दोनों झेंप गए .. काले काले होठों के बीच से मोती जैसे दांत दिखाई पड़ने लगे उन दोनों के ही लिंग पूरी तरह तने हुए थे। मैंने मन ही मन यह सोच लिया। मेरे लिए अल्बर्ट और माइकल दोनों एक जैसे ही थे दोनों का व्यवहार अनूठा था मैं सोच लिया यदि संभव हुआ तो मैं दोनों का ही वीर्य दोहन करूंगी.

"मैम, आर यू कंफर्टेबल नाउ"

मैंने मुस्कुराकर हां में सर हिलाया. मेरी अंगड़ाई से मेरे स्तनों का उभार एक बार और उनकी निगाहों में आ चुका था. मैंने उन दोनों को ढेर सारा थैंक्यू बोला खासकर उनके उस रिलैक्सिंग मसाज के लिए. अब मुझे अपने असली उद्देश्य को पूरा करना था.

मैंने अल्बर्ट से कहा

"आई वांट टू गो वॉशरूम"

वह दोनों हंसने लगे अल्बर्ट ने कहा

"मैम, यह प्राकृतिक द्वीप है आपको यहां यह कार्य प्राकृतिक तरीके से ही करना होगा हां आप हमसे दूर जाकर किसी पेड़ का सहारा ले सकती हैं."

हम बीच की जिस जगह पर थे वहां से हरियाली कुछ दूर थी मेरी वहां अकेले जाने की हिम्मत नहीं थी. मैंने अल्बर्ट को कहा अपने साथ चलने के लिए कहा वह मेरे साथ चल पड़ा.

मैं रास्ते में अपने अगले स्टेप के बारे में सोच रही थी अल्बर्ट थोड़ा दूर खड़ा था और मैं बाथरूम करने के लिए झाड़ी की ओट का सहारा लेकर अपनी पैंटी पहले नीचे की फिर कुछ सोचकर मैने उसे बाहर निकाल दिया। मेरा दिल धक धक करने लगा अल्बर्ट पास ही खड़ा था मैं पेड़ की ओट में थी पर उसके करीब थी।

आखिर मैं नीचे बैठ चुकी थी। इस मूत्र विसर्जन में अद्भुत आनंद आ रहा था. बहती हुई हवा मेरी नंगी बुरको सहला रही थी यह सिहरन एक अद्भुत सुख दे रही थी. मैं कई वर्षों बाद बाहर खुले में मूत्र विसर्जन कर रही थी और शायद इस तरह से खुले में नग्न होकर पहली बार।

मैंने मूत्र को काफी देर से रोका हुआ था। एक बार जब मूत्र विसर्जन शुरू हुआ उसकी धार अद्भुत रूप से तेज थी। मूत्र की धार निकलते हुए वैसे भी अवरुद्ध सीटी की आवाज निकाल रही थी । मूत्र की धार तेज थी वह लगभग मेरे शरीर से एक हाथ दूर गिर रही थी। वहीं पास में कुछ छोटे कीड़े मकोड़े चल रहे थे मेरे न चाहते हुए भी वह उससे भीगते हुए तितर-बितर हो रहे थे। मुझे भी अब उन्हें भीगोने में मजा आने लगा था। मैं अपनी कमर को ऊपर नीचे कर अपनी मूत्र की धार से उन पर निशाना लगाती। मेरी इस प्रक्रिया में मेरे कोमल नितंब कभी ऊपर उठते कभी नीचे। अचानक मुझे ध्यान आया अल्बर्ट पीछे ही खड़ा है। वह क्या सोच रहा होगा? मैं शर्म के मारे लाल हो गयी अपनी मैंम का यह रूप उसने शायद सोचा भी नहीं होगा। पर जो गलती होनी थी वह हो चुकी थी।

मैंने यह अनुभव अपनी युवावस्था में कभी महसूस नहीं किया था. . जब मैं उठ कर खड़ी हुई तभी मैंने निर्णय लिया कि यदि अभी नहीं तो कभी नहीं.मैंने अपनी लाल बिकिनी अपने हाथ में ली. मैं उसी अवस्था में बाहर आ गयी. अल्बर्ट मुझे इस तरह नग्न देखकर आश्चर्यचकित था.

वाह अपनी बड़ी बड़ी आंखें फाड़े मुझे देख रहा था वह मेरे बिल्कुल करीब आ चुका था. मुझे ऐसा लग रहा था कि वह कभी भी अपने सब्र का बांध तोड़ कर मुझे अपनी आगोश में भर लेगा. मेरा डर एक बार फिर उफान पर था. मैं झुक कर अपनी बिकनी दोबारा पहनने लगी. अल्बर्ट ने घुटनों के बल बैठ कर मुझसे कहा

"मैम, इफ यू डोंट माइंड प्लीज बी लाइक दिस. आई हैव नेवर सीन सच ए ब्यूटीफुल लेडी इन माई लाइफ. वी विल नॉट टच यू. यू आर द मोस्ट ब्यूटीफुल वूमेन आई हैव एवर सीन"

तारीफ हर सुंदरी को पसंद आती है मैं भी इससे अछूती नहीं थी. मैं उसकी इस अदा की कायल हो गयी. मैंने कहा

"ओके..ओके.. बट प्लीज डोंट टच मी"

उसने अपने दोनों कान पकड़ लिए और सर झुकाए हुए बोला..

विल टच यू ओनली व्हेन यू विश ..

वो मेरी नंगी बुर को छोड़ मेरी चूचियों को देख रहा था। मैं उसका इरादा समझ गई…

मैंने अपनी बिकनी के दूसरे भाग की तरफ इशारा किया जिसने मेरे खूबसूरत स्तनों को थोड़ा बहुत ढक कर रखा था. और मुस्कुराते हुए बोली

यू वांट मी टू रिमूव दिस?

उसने एक बार फिर खीसें निपोर दीं

"मैम, सो नाइस आफ यू"

मैंने अंततः बिकिनी का वह भाग भी हटा दिया और मैं पूरी तरह नग्न हो गयी. इस बीच पर पूरी तरह नग्न होने वाली में पहली युवती नहीं थी। इस तरह अल्बर्ट के सामने नग्न होकर मैंने अपनी हिम्मत की नई मिसाल पेश की थी. पर अल्बर्ट को देखकर लगता नहीं था कि वह उग्र होकर मेरे साथ कोई जबर्दस्ती करेगा. अल्बर्ट बड़ी बड़ी आंखों से मेरी नग्नता का आनंद ले रहा था. मेरे हाथ में मेरी बिकिनी थी अल्बर्ट में हाथ बढ़ाकर वह बिकनी मुझसे ले ली और अपनी बरमूडा की जेब में डाल दिया.

हम दोनों वापस माइकल की तरफ आने लगे अल्बर्ट को यह उम्मीद नहीं थी कि मैं इस तरह माइकल की तरफ चल पड़ूँगी.

मैंने यह जान लिया था कि वह दोनों दोस्त एक ही थे रास्ते में मैंने अल्बर्ट से पूछा

"आर यू सेटिस्फाइड नाउ?"

"यस मैम, यू आर वेरी ब्यूटीफुल लाइक दिस आईलैंड. ऑल नेचुरल."

मेरे साथ चलने की वजह से वह मुझे ध्यान से नहीं देख पा रहा था. कुछ ही देर में हम माइकल के पास आ चुके थे मुझे नग्न देखकर माइकल की आंखें फटी रह गई थीं. एक बार फिर मैं वापस में चादर पर बैठ चुकी थी. मैंने स्वयं को वज्रासन में व्यवस्थित कर लिया था जिससे मेरी बुरके होंठ मेरी जांघों के बीच छूप गए थे पर मेरे दोनों नग्न स्तन उन दोनों विशालकाय पुरुषों को खुला निमंत्रण दे रहे थे.

उन्होंने मुझे फिर से एक बार रेड वाइन ऑफर की मैंने ग्लास ले लिया वह दोनों मेरी नग्नता का आनंद ले रहे थे. अचानक मैंने अल्बर्ट से कहा..

"मैं यहां पर पूर्णतया नग्न हूं और आप दोनों कपड़े पहने हुए यह उचित नहीं" वह दोनों मुस्कुराने लगे उन्होंने एक ही झटके में अपने बरमूडा को अपने शरीर से अलग कर दिया. मेरे सामने दो काले साए अपने विशालकाय लिंग जो अब पूरी तरह उत्तेजित अवस्था में थे के साथ खड़े थे.

मैं उन दोनों को देखकर अपने आप को एक दूसरी दुनिया में महसूस कर रही थी. कभी-कभी मुझे लगता कि जैसे मैं एक स्वप्नलोक में आ गयी हूँ जिसमें हम तीनों के अलावा कोई नहीं था.

मैं पूरी तरह नग्न थी और वह दोनों भी. उनके लिंग बेहद आकर्षक थे और पूरी तरह काले थे. लिंग का अगला भाग हल्का मशरूम के जैसे लाल था लिंग के ऊपर की चमड़ी स्वता ही पीछे हो गई थी. बड़े नींबू के आकार के उनके सुपारे अपने रंग को शरीर के रंग से अलग किए हुए थे. उनके अंडकोष छोटे ही थे परंतु उनमें गजब का तनाव था. दोनों की उम्र 20 -22 वर्ष के आसपास रही होगी ऐसे उत्तेजक और जवान नवयुवक मैंने आज तक नहीं देखे थे.

भगवान ने उनके चेहरे को छोड़कर बाकी हर जगह सुंदरता भर भर के प्रधान की थी।

उनकी उत्तेजना और असीम काम शक्ति अद्भुत थी. मुझ जैसी कोमलंगी निश्चय ही इनके लिए नहीं बनी थी पर जिस तरह सफेद छोटा रसगुल्ला छोटे -बड़े सभी लोगों की प्यास बुझाता है मेरी सुंदरता इन दोनों के लिए एक उसी तरह थी.

उनके लिंग में आई उत्तेजना में निश्चय ही मेरा योगदान था. वह दोनों इस तरह मेरे सामने खड़े थे मुझे देखकर हंसी भी आ रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे वो अपने शारीरिक सौष्ठव का प्रदर्शन मेरे सामने कर रहे थे. मैं उठ खड़ी हुई मैंने कहा

"आप दोनों बेहद सुंदर हैं एंड योर …. "

मेरे जुबान से लन्ड शब्द नहीं निकला पर मेरी निगाहों ने उनके लंड की तरफ इशारा कर दिया।

“मैंम वुड यू लाइक तो टच इट”

यह सुनहरा अवसर था मेरे हाथ आगे बढ़े और उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई मैंने अल्बर्ट और माइकल में भेद नहीं किया और कुछ ही पलों में मेरे दोनों हाथों में दो अद्भुत लंड थे जिसकी हूबहू कल्पना तो मैं नहीं की थी तुरंत यह सरयू सिंह के लंड से मिलते-जुलते थे।

वह दोनों खुश हो गए मैंने अपने दोनों हाथों से उन दोनों के लिंग को अपनी मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश की। मैं सफल तो नहीं हुई परंतु उनके लंड में अचानक एक उछाल आया ऐसा लगा जैसे मैं किसी जिंदा कोबरे को पकड़ लिया हो। मेरी रूह कांप रही थी. मेरे सीने की धड़कन तेज थी.

मुझे लगता है लिंग का आकार मेरी कलाई से लेकर कोहनी तक था लिंग की मोटाई भी कमोबेश वैसी ही थी.

मैं उनके लिंग को छू रही थी ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसका पचीस प्रतिशत भाग ही हथेलियों में पकड़ पा रही थी. बाकी का भाग अभी भी खुला हुआ था. मैंने उनके लिंग को ऊपर से नीचे तक सहलाया. वह दोनों आनंद में अपनी आंखें ऊपर किये आकाश की तरफ देख रहे थे.

अद्भुत उत्तेजक माहौल में मेरी बुरभी अपना प्रेम रस अपने होठों तक ले आयी थी. अचानक अल्बर्ट की नजर उस पर पड़ गई वह मुस्कुराते हुए बोला

"मैम, आपको अच्छा लगा?

मैंने कहा

"यस यू बोथ आर मैग्नीफिसेंट"

माइकल ने इस पर हिम्मत जुटाकर कहा "क्या हम आपको दोबारा छू सकते हैं?"

मैं भी अब पूरी तरह उत्तेजित हो चली थी मैं जिस उद्देश्य के लिए वीरान टापू पर आई थी वह पूरा होने वाला था. मैंने सर हिलाकर माइकल को अपनी सहमति दे दी जिसे अल्बर्ट ने भी देख लिया. वह दोनों मेरे समीप आ चुके थे और मेरे कंधे और पीठ को सहला रहे थे शायद उन्हें मेरी अनमोल अमानतों को छूने के लिए नीचे झुकना पड़ रहा था। अल्बर्ट ने मेरे कंधों को पड़कर ऊपर उठाना चाहा और मैं खड़ी हो गई। उन दोनों काले सायों ने मुझे घेर लिया।

वह दोनों मेरी पीठ को सहलाना शुरू कर चुके थे मेरा हाथ अभी भी उन दोनों के लिंग को सहला रहा था. उत्तेजना बढ़ रही थी. कुछ ही देर में उन्होंने उनकी हथेलियां मेरे नितंबों तक आ गयीं. मैंने मना नहीं किया वह उन्हें प्यार से सहला रहे थे मैं चाहती थी कि वह उन्हें थोड़ा और तेजी से दबाए पर शायद वो इतनी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे.

मैंने स्वयं उनके लिंग को और तेजी से सहलाया जिससे उन्हें अद्भुत उत्तेजना हुयी इस उत्तेजना में उन्होंने मेरे नितंबों को तेजी से पकड़ लिया. उनकी बड़ी-बड़ी हथेलियों मेरे नितंबों को पूरी तरह अपने आगोश में ले चुकीं थीं. उनकी उंगलियां मेरे नितंबों के बीच की दरार में कभी-कभी मेरी को भी छू रहीं थी.

तभी अल्बर्ट का हाथ ने सामने से आकर मेरी बुर को घेर लिया। बर से रस रही लार को सहारा मिला और वह माइकल की उंगलियों को भिगो गई। उसने अपना हाथ हटाया और मेरे चेहरे के सामने से लाते हुए अपनी नासिक पर ले गया और उसे सूंघते हुए बोला..

“मैम यू स्मेल सो नाइस…”

मैं स्वयं बेहद उत्तेजित महसूस कर रही थी। अल्बर्ट की इस हरकत में मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया था।

तभी अल्बर्ट में अपनी रस से भीगी उंगलियां माइकल के नथुनों से सटा दी और उससे अपनी भाषा में कुछ बोला..

उन दोनों को अनजान भाषा में बात करते हुए देखकर मैं डर गई और इंटरफेयर किया

“व्हाट यू पीपल आर टॉकिंग”

सॉरी मैंम .. यू स्मैल सो नाइस.. वी कुड नॉट कंट्रोल अप्रेसिंग यू..

एक बार फिर अल्बर्ट की उंगलियां मेरी बुर पर थी.. मेरा ध्यान उनके लैंड से हटकर अपनी उत्तेजना पर केंद्रित हो रहा था मैं आई थी यहां कुछ और करने पर हो कुछ और रहा था। माइकल की उंगलियों को अपनी बुर पर फिसलते हुए महसूस कर मुझे मन ही मन या ख्याल आ रहा था कि अल्बर्ट अपनी उंगली मेरी बुरके अंदर प्रवेश करा दे उनकी उंगलियां एक सामान्य किशोर के लिंग जितनी मोटी थी पर उन्होंने यह नहीं किया. मैं स्वयं आगे बढ़कर उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित नहीं कर सकती थी. यह उनकी उत्तेजना को और भड़का सकता था और संभव था कि वह संभोग के लिए मुझ पर दबाव बनाने लगते.

मुझे बहुत संभाल कर चलना था. अचानक मेरे दिमाग में एक ख्याल आया. वहां पास में एक पेड़ की ठूंठ पड़ी थी जिसका ऊपरी भाग समतल था. मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि यदि मैं उस पर खड़ी हो जाओ तो मेरी बुर इनके लिंग के उचाई तक आ जाएगी.

मैं अल्बर्ट और माइकल के लिंग को पकड़े हुए उधर चल पड़ी. मैंने अगल-बगल निगाह दौड़ाई.. कुछ ही दूर पर कई सारे जोड़े कामुक गतिविधियों में लिप्त थे. अब लगभग यह द्वीप एक नग्न द्वीप में तब्दील हो चुका था। मेरा ध्यान बाई तरफ गया…कुछ दूर पर मेरे अल्बर्ट की तरह ही दिखने वाला एक नीग्रो एक अंग्रेजन को चोद रहा था..

मैं अपनी फटी हुई आंखों से एक लाइव ब्लू फिल्म देख रही थी अल्बर्ट और माइकल मेरे आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे थे मुझे आश्चर्य से इनका मुख घटनाओं को देखते हुए अल्बर्ट ने कहा

मैं यहां पर यह सामान्य बात है यह द्वीप इसीलिए अनोखा है। यहां पर लगभग सभी लोग इसीलिए आते हैं। यह सब लोग आपके ही होटल में रह रहें हैं।

मुझे अब सहज महसूस हो रहा था। मैं अपने मिशन पर आगे बढ़ चुकी थी

वह दोनों भी आज्ञाकारी बच्चों की तरह मेरे साथ साथ वहां तक आ गए. मैं लकड़ी के ठूंठ पर खड़ी हो गई और अल्बर्ट को अपने पीछे आने के लिए कहा.

अल्बर्ट मेरे पीछे आ चुका था. मैंने उसके लिंग को अपनी दोनों जांघों के बीच से निकालते हुए सामने ला दिया और स्वयं अपना भार अल्बर्ट के सीने पर दे दिया. मेरी पीठ उसके सीने से सटी हुई थी मेरे नितंब की जांघों उसे छू रहे थे उसका लिंग मेरी बुरसे सटा हुआ सामने की तरफ मेरी हथेलियों में था.

मैं अपनी इच्छा से उसके लिंग को सहला रही थी. सुपारे पर हाथ फिराते समय उसका लिंग उछल जाता और मेरी बुरके होठों को थपथपा देता. उत्तेजना मुझ में पूरी तरह भर चुकी थी बुरका प्रेम रस उसके लिंग को भिगो रहा था.

माइकल मेरे ठीक सामने था। मैं अल्बर्ट और माइकल के बीच में सैंडविच बनी हुई थी। माइकल का लैंड मेरी नाभि से टकरा रहा था। मैं एक हाथ से माइकल के लंड के सुपाड़े को सहला रही थी और दूसरे हाथ से अल्बर्ट के लंड को अपनी बुर पर रगड़ भी रही थी और हथेलियां से उसके सुपाड़े को मसल रही थी। माइकल मेरी दोनों चूचियों को हल्के-हल्के सहला रहा था। बीच-बीच में वह शायद अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं रख पाता और चूचियों को जोर से मसल देता..

अल्बर्ट की उंगलियां भी मेरी मदद करने को आ पहुंची थी। वह स्वयं अपने लंड को मेरी बुर पर रगड़ रहा था और अपनी उंगलियों से मेरी भगनासा को छू रहा था..

चिपचिपा प्रेम रस उसके लिंग को सहलाने में मेरी मदद कर रहा था मेरी आंखें बंद हो रही थी. कुछ ही देर में माइकल और अल्बर्ट ने अपनी स्थितियां बदल लीं।

मैंने माइकल को भी उसी तरह अपनी बुरके संपर्क में ला दिया था. मेरे लिए वह दोनों एक ही थे अद्भुत विशालकाय और एक मजबूत लिंग के स्वामी जिनका मुझे बीर्य दोहन करना था.

कुछ ही देर में उन दोनों के लिंग में अद्भुत कठोरता महसूस होने लगी। ऐसा नहीं था की लार सिर्फ मेरी बुर से बह रही थी उनके लंड से भी वीर्य रिस रिस कर बाहर आ रहा था..

किसकी उंगलियां कहां से प्रेम रस चुरा रही थी यह कहना कठिन था पर दोनों के लंड मेरी हथेली में फिसल रहे थे..

माइकल का लंड मेरी बुर पर रगड़ रहा था…एक पल के लिए मुझे लगा जैसे मैं स्वयं भी उसे अंग्रेजन में की भांति यहीं पर चुद जाऊं….

इस विचार मात्र ने मेरी उत्तेजना को चरम पर पहुंचा दिया। अपने पति से विश्वासघात ना ना यह पाप…मैं नहीं करूंगी..

अल्बर्ट की उंगलियां लगातार मेरे भागना से को शहला रही थी। आखिर उन्होंने ही तो मुझे वीर्य दोहन के लिए भेजा है अब जब मैं पराए मर्द का लंड पकड़ ही लिया है तो उसे…आह अपनी बुर…में…..आह….

मेरा ध्यान भटक रहा था मैं यहां उनका वीर्य दोहन करने आई थी और खुद स्खलन की कगार पर पहुंच गई थी..

मेरा बदन कांप रहा था…. अचानक मेरे सामने खड़ा माइकल नीचे झुका और मेरी चूचियों के ठीक सामने अपने होठों को रखते हुए मेरी तरफ देखा जैसे मुझे अनुमति मांग रहा हो…

मैं उत्तेजना की पराकाष्ठा पर थी मना कर पाना मेरे बस में नहीं था मैंने अपने होंठ अपने दांतों में भींच रखे थे..

मैंने सहमति में अपनी पलके झुका दी और मेरी आधी चूंची अल्बर्ट के मुंह में थी..

इधर उसने मेरी चूची चुसनी शुरू की और उधर मेरी बुर ने रसदार छोड़ दी मैं मदहोश होने लगी मेरे हाथ रुक गए और मैं इस स्खलन के परमानंद में खो गई। कुछ देर तक उन्होंने मेरे शरीर के साथ क्या किया मुझे इसका अंदाजा भी नहीं लगा पर इतना अवश्य था मैं तृप्त थी और इस अद्भुत सुख के लिए उनके शुक्रगुजार थी।

वापस अपनी चेतना में आने के बाद मैंने खुद को नियंत्रित किया और उस ठूंठ पर से उतर कर वापस रेत पर आ गई मैं घुटनों के बल बैठ चुकी थी..

मेरी तेज चलती हुई सांसों को देखकर माइकल ने बड़े अदब से पूछा..

मैंम वुड यू लाइक टू टेक वॉटर

मैंने उसकी नम्रता को दिल से सलाम किया कि इस उत्तेजक घड़ी में भी वह अपना संयम बनाए हुए था और अपनी मेहमान नवाजी में कोई कमी नहीं रख रहा था मैंने अपने हाथ आगे बढ़ाएं और वापस उन दोनों के लंड को पकड़ते हुए बोला

“लेट मी फिनिश एंड रिटर्न यू द फेवर”

मैं अपने छोटे-छोटे कोमल हाथों से उन्हें आगे पीछे कर रही थी मेरे हाथ दुखने लगे थे वह दोनों मेरे गालों को सहना रहे थे. वह दोनों आसमान की तरफ देख रहे थे।

अचानक अल्बर्ट और माइकल ने अपने हाथों को मेरी मदद के लिए ला दिया उनकी बड़ी-बड़ी हथेलियां उनके लिंग के अनुसार ही थी और उसके लिए सर्वथा उपयुक्त थी मैं अपनी कोमल हथेलियों से उनके सुपारे को मसलने लगी अचानक अल्बर्ट के लिंग से निकली वीर्य धारा मेरे गालों पर पड़ी। जब तक मैं अपने आप को संभाल पाती तब तक माइकल का स्खलन भी प्रारंभ हो गया।

मैं अपने चेहरे को दोनों हथेलियों से ढकी हुई थी और वह दोनों अपने वीर्य की धार से मुझे भिगो रहे थे उनके मुख से एक अजीब सी बुदबुदाने गदगुदाने की आवाज आ रही थी जिसमें कभी-कभी मैम शब्द सुनाई पड़ रहा था मुझे पता था वह अपनी कल्पनाओं में मेरा योनि मर्दन कर रहे थे पर यह उनकी कल्पना थी जिस पर उनका हक था और उनके हक पर मुझे कोई आपत्ति नहीं थी.

मैंने उनकी उत्तेजना शांत होने का इंतजार किया वीर्य वर्षा रुक जाने के पश्चात मैंने चेहरे पर से अपने हाथ हटाए और उठ खड़ी हुयी. वीर्य की कुछ बूंदे मेरे स्तनों से होती हुई मेरी जांघों के जोड़ तक पहुंच चुकी थी जो मेरी योनि के होठों को स्पर्श कर रहीं थीं. मेरी बुर से स्खलित हुआ प्रेम रस उन अद्भुत मर्दों की वीर्य से मिल रहा था।

अंततः मैंने विकास के चैलेंज को पूरा कर दिया था। मैं विकास के पास जल्द से जल्द पहुंचना चाहती थी और उनसे अपनी विजय की सूचना देकर उनका प्यार और प्रोत्साहन पाना चाहती थी।

वह दोनों संतुष्ट दिखाई पड़ रहे थे. अल्बर्ट और माइकल ने मेरे स्तनों पर लगे हुए वीर्य को अपनी हथेलियों से पोछना चाहा। जितना ही उन्होंने इसे पोछा उतना ही वह फैलता गया। वैसे मुझे इसकी आदत पड़ चुकी थी विकास की यह पसंदीदा आदत थी.

मैं उठ खड़ी हुई।

तभी माइकल और अल्बर्ट दोनों घुटनों के बल आकर मुझसे क्षमा मांगने लगे..

"मैम आई एम सॉरी वी कुड नॉट कंट्रोल"

मैंने उनके सर पर हाथ रख दिया और उनके बालों को सहला दिया मेरी इस क्रिया से उनकी आत्मग्लानि कम हुई और उन दोनों ने अपना चेहरा मेरी नग्न जांघों से सटा दिया उनके होठों से निकलने वाली गर्म सांसे मेरी बुर पर महसूस हुई।

"इट्स ओके, इट्स ओके नो प्रॉब्लम"

वह दोनों खुश हो गए काले चेहरों के पीछे से उनके सुंदर और सफेद दात स्पष्ट दिखाई पड़ने लगे।

माइकल भागकर तोलिया ले आया पर तब तक मेरे शरीर पर लगा हुआ वीर्य लगभग सूख चुका था। वीर्य की लकीरें मेरे पेट और स्तनों पर साफ दिखाई पड़ रही थीं। मैंने माइकल से तौलिया ले लिया और अपनी कमर के चारों तरफ लपेट लिया। मेरी नग्नता ने अपना कार्य कर लिया था हम तीनों रेत पर पड़ी हुई चादर की तरफ चल पड़े।

अल्बर्ट ने मेरी बिकनी अपनी बरमूडा से निकाली और बिकनी का निचला भाग अपने हाथों में पकड़ कर रेत पर पर बैठ गया जैसे वह मुझे इसे पहनाने में मदद करना चाह रहा था। मैंने तोलिया गिरा दिया और अपने पैरों को बारी-बारी से बिकनी के अंदर डाल दिया। अल्बर्ट की उंगलियां उसे खींचती हुई मेरी कमर तक ले आयी। इस दौरान मेरी जांघों पर एक बार फिर अल्बर्ट की हथेलियों का स्पर्श महसूस हुआ। एक पल के लिए मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे अल्बर्ट के अंगूठे ने मेरी बुरके मुकुट (भगनासा) को छू लिया था मैं सिहर गयी थी।

पैंटी से मेरी बुर को ढकते हुए अल्बर्ट ने मेरी आंखों में देखते हुए बोला..

“इट लुक लाइक ए हेवन एंड स्मेल लाइक नेक्टर योर हसबैंड इस वेरी लकी”

मेरा ध्यान अपनी बुर पर था तभी मैंने माइकल के हाथों को अपने स्तनों पर महसूस किया वह मुझे बिकनी का उपरी भाग पहना रहा था। उन दोनों का यह प्रेम देखकर मैं मन ही मन उनकी सौम्यता की कायल हो गई थी।

उन दोनों में अद्भुत समानता थी दोनों ही अपनी उत्तेजना को काबू में रखना जानते थे जो मुझे पुरुषों में सर्वाधिक प्रिय है। उन्होंने आज मेरी नग्नता का जी भर कर आनंद लिया था शायद यह उनसे ज्यादा मेरी जरूरत थी। मुझे भी आज उनके लिंग का जो दिव्य दर्शन प्राप्त हुआ था यह मेरे लिए यादगार था।

हम तीनों वापस अपने होटल की तरफ चल पड़े थे इस वीरान टापू पर इन दो पुरुषों का वीर्य स्खलन मेरे जीवन की अद्भुत रोमांचक घटना थी। मैं विकास से मिलने के लिए बेकरार थी। मैं उनसे अपनी इस विषय पर निश्चय ही कोई अद्भुत उपहार चाहती थी।

मैं मन ही मन मुस्कुरा रही थी और इस तरह सकुशल लौटने के लिए भगवान का शुक्रिया अदा कर रही थी। अल्बर्ट और माइकल मेरे पसंदीदा हो चुके थे इन्होंने मुझे आज खुश कर दिया था। कुछ देर बाद होटल की खूबसूरत बिल्डिंग दिखाई देने लगी।

मेरी अधीरता बढ़ती जा रही थी शाम के 5:00 बज रहे थे काश विकास वहां पर होते। बोट के किनारे लगते ही मैं बीच पर उतर गयी। अचानक विकास दिखाई पड़े मैं उनकी तरफ भागी ठीक उसी प्रकार से जिस तरह से जेल से छूटा हुआ कोई कैदी अपने परिवार जनों को देखकर दौड़ता है।

उन दोनों ने मेरे साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया था पर विकास को देखकर मैं बिना उनका शुक्रिया अदा किये ही उनकी तरफ भाग गयी थी। कुछ ही देर में वह दोनों मेरी जालीदार टॉप को हाथों में लिए मेरे पास आये और बोले

"मैम यू हैव लेफ्ट योरटॉप"

मैंने विकास से उन दोनों का परिचय कराया और कहा

"अल्बर्ट और माइकल इन दोनों लोगों ने मुझे एक खूबसूरत टापू दिखाया और कई सारे प्राकृतिक नजारे भी ये बहुत अच्छे हैं" वह दोनों मुस्कुरा रहे थे.

विकास ने उन्हें थैंक्यू कहा और वह दोनों रेस्टोरेंट की तरफ चल पड़े। मैं और विकास एक बार फिर समंदर की लहरों के बीच में आ गए। विकास मेरी और प्रश्नवाचक निगाहों से देख रहा था। पर मैं कुछ नहीं बोल रही थी। समुद्र के अंदर जाते हैं विकास ने मेरे स्तनों को छुआ उन्हें अपने हाथ पर चिपचिपाहट का एहसास हुआ वाह तुरंत ही समझ गए।

उन्होंने मेरे होठों को अपने होठों के बीच भर लिया और बेहद प्यार से चूमने लगे कुछ देर के लिए उन्होंने अपने होंठ अलग किया और बोला.

. ब्रेव सोनी यू वोंन द चैलेंज..

उन्होंने स्वयं अपने वीर्य से न जाने मुझे कितनी बार भिगोया था और नहाते समय उसे अपने ही हाथों से साफ किया था उन्हें अंदाज लग गया था कि मैं जीत चुकी थी।वह बेहद खुश थे।

समुद्र में बिकास के साथ अठखेलियां करके मैं तरोताजा हो गई थी मुझे पता था विकास मेरे अद्भुत कार्य के लिए मुझे होटल ले जाकर कसकर चोदने लिए तैयार थे और मैं भी इसका इंतजार कर रही थी। हम दोनों बेहद खुश थे।

मैंने विकास से पूछा..

अरे आपका चैलेंज मैने पूरा किया मेरा इनाम कहां है..

“कल मिलेगा बराबर मिलेगा…” विकास मुस्कुरा रहे थे…

शेष अगले भाग में..
 
Due to problems being faced by this site I am unable to send updates to readers..hence I am taking a pause..

Sorry for the same..

Keep enjoying
 
Back
Top