Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता. - Page 97 - SexBaba
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Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता.

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आज आपके कमेंट में दिए लिंक पर क्लिक किया जो पेज खुला उसमें आपकी कहानी की शुरुवाती लाइंस मेरे छाया वाली स्टोरी से हु बहु मिलते हैं क्या संयोग है...

आप और आपके कमेंट सराहनीय है।

जुड़े रहिए...
 
Dear readers,

Thanks for visting story and marking your presense

I hearty welcome to all।new and old reader।

Update १३२ has been sent to you as DM

KEEP WRITTING SOMETING WHAT COMES TO YOUR MIND AFTER READING THE STORY। IT IS NOT ONLY FEEDBACK AND APPRECIATION FOR ME BUT SOME RELATED CONTENT OR ANY THING।

THIS WILL HELP OTHERS READERS TO READ AND ENJOY TILL NEXT EPISODE IN POSTED।

THIS IS HELP ME AND EVERY READER WILL GET SOMETHING TO READ ON DAILY BASIS।

HOPE YOU WILL।NOT TAKE ME ITHERWISE.
 
दोस्त मैं उसे पाठक की सोच का कायल हूं हूं जो रचनाकार की कृति को मन लगाकर पड़ता तो है और आनंद भी लेता है परंतु रचनाकार के कहने के बावजूद कहानी के पटल पर अपनी उपस्थिति दर्शाने से बचता है।

यह कहानी पाठकों से जुड़ाव के लिए लिखी जा रही है और उनके मनोभाव पढ़ने की इच्छा मुझे सदैव रहती है आप सबके विचार पढ़कर मुझे आनंद आता है और कहानी के अगले भाग लिखने की प्रेरणा देता है।

मैं अपने पाठकों से रूबरू तो नहीं हो सकता परंतु उनके मन में चल रही बातें पढ़ने का मुझे हक भी है और मेरी इच्छा भी उम्मीद करता हूं कि कहीं और पाठक हिम्मत जताकर अपनी प्रतिक्रिया देते रहेंगे और कहानी आगे बढ़ती रहेगी।

एक और बात जो पाठक मूक रूप से इस कहानी को पढ़ रहे हैं उन्हें भी यह ज्ञात होना चाहिए की जो एपिसोड पोस्ट नहीं किए गए हैं उनमें निश्चित ही कामों का वर्णन है परंतु उसे एपिसोड में हुई घटनाएं और उनका असर अगले एपिसोड में बता दिया गया जिससे वह कहानी बिना उन एपिसोड के भी पढ़ सकते हैं और कहानी से जुड़ सकते हैं फिर भी मैं यही चाहूंगा कि वह बिजी छत कहानी के पटल पर जाकर अपना जुड़ाव और साथ दिखाएं और मुझे आगे लिखने को प्रेरित करते रहे थैंक यू
 
मेरे उन सभी पाठकों को हृदय से धन्यवाद जिन्होंने इस कहानी पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रियाएं दी है जिन्हें पढ़कर मुझे उतना ही अच्छा लगा जितना आपको कहानी के एपिसोड पढ़कर लगा।

इस मैसेज के पहले तक जिन लोगों ने भी अपडेट्स की मांग की थी वह उन्हें भेजा जा चुका है। यदि पाठकों के अपडेट मांगने के बावजूद मुझसे गलती हुई है तो मैं एक बार फिर उनसे क्षमा प्रार्थी हूं और उनसे विनम्र अनुरोध है कि वह एक बार फिर मुझे अपने मैसेज द्वारा याद दिला दे।

थैक्स
 
आपने सच कहा मुझे याद आ गया..माफ कीजिएगा..
 
अपने कई सारे नए पुराने पाठकों को देखकर अच्छा लगा जो नए पाठक इस कहानी से जुड़े हैं या जुड़े हुए हैं मैं उनका स्वागत करता हूं और उम्मीद करता हूं कि वह अपनी झिझक मतकर कहानी के बटन पर आकर अपने विचार जरूर रखेंगे... और मुझे उनकी मन की भावनाएं समझने का मौका देंगे एक बार फिर सभी को दिल से धन्यवाद जुड़े रहिए।
 
मन की वॉयस टाइपिंग की मिस्टेक है पर सच अर्थ का अनर्थ हो रहा था।

थैंक्यू
 
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