- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 34,477
जो हुआ सो हुआ जो हुआ सो हुआ हमेशा मन का सोचा कहां होता है कई बार तो नियति को खुद भी नहीं पता कि वह कौन सी घटनाएं घटित करवाती है वह भी बाध्य है कहानी का अंत मध्य और पड़ाव पूर्व निर्धारित हैं बीज की रचनाओं में कुछ आगे पीछे होता रहता है जुड़े रहिए और आनंद लेते रहे
सर्वप्रथम तो आपके कहानी के पटल परआगमन के लिए धन्यवाद। मैंने वांछित अपडेट भेज दिया है
It's your greatness thanks for your appreciation
Sent
सर्वप्रथम तो आपके कहानी के पटल परआगमन के लिए और मेरी सराहना के लिए धन्यवाद। मैंने वांछित अपडेट भेज दिया है
सर्वप्रथम तो आपके कहानी के पटल परआगमन के लिए धन्यवाद। मैंने वांछित अपडेट भेज दिया है
It's your greatness thanks for your appreciation
Sent
सर्वप्रथम तो आपके कहानी के पटल परआगमन के लिए और मेरी सराहना के लिए धन्यवाद। मैंने वांछित अपडेट भेज दिया है