अपडेट :::136
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पार्टी बहुत देर तक चली.... रात बहुत हो चुकी तो सबसे कल ग्राउंड में मिलने का बोल कर मैं और महक कोठी क लिए निकल पड़े.. जल्द hi हम अपनी कोठी पर थे.
थकन नाम की कोई चीज़ हमारी लाइफ में नहीं थी.. हाँ बहुत ज़यादा और रेगुलर जान जोखम वाला काम किया जाए तो फिर थकन बनती थी... लेकिन यहाँ ऐसा कोई काम नहीं तो हमें फर्श फ्रेश hi थे..
कोठी पर पोहंचे तो रात के 2 बजने वाले हो गए थे..
दर्वाइंग रूम में पोहंचे तो महक पेट पकड़ कर हस्सन लगी.. हस्ते हस्ते वो लूट पूत होने लगी.. फिर अचानक से hi वो सीरियस भी हो गई.. मैं महक को hi देख रहा था.
महक:- अच्छा हुआ विजय जो मनजोत सिंह का ताँता जल्दी ख़तम होने वाला है... नागराज मिशन बाद में सही.. पहले मनजोत सिंह और उसके बेटों को सबक़ सीखा कर उस घर में लड़कियों और औरतों को रिहाई दिला दें.. सब मौत से बदतर ज़िन्दगी जी रही हाँ.. कल का मुकाबला ख़तम होते hi हम सीधा वही जायेंगे और सबको एक आज़ाद लाइफ की खुशखबरी भी सुनाएंगी.... (महक बहुत ज़यादा साद हो गई थी) विजय कही ख़ुशी सहन न करते हुए उन्हें कुछ हो गया तो..
विजय:- कुछ भी होना मुमकिन है महक.. जैसी लाइफ वो सबब जी रही हाँ, कैसे वो ये सबब सहन कर सकती हाँ.. हमें एक दो डॉक्टर्स को भी साथ लेके चलना पड़ेगा..
महक:- जूली से कह के वही से डॉक्टर मंगवा लो.. हम कोई रिस्क नहीं ले सकते.. और फिर सब को फ़ौरन hi दिल्ली भी शिफ्ट करना है.. यहाँ नागराज और कई दूसरे भी हमपर नज़र रखे हुए होंगे, हमें ये सबब दूसरों की नज़रों में ए बिना hi करना पेड़गा.
महक की बात सुनकर मैंने कम को साल मिला दी.. वो सो रहे थे, तो मैंने उन्हें सब बता कर एक चार्टर्ड प्लेन क लिए बोल दिया.. ये सबब सेक्रेटली रखना है ये भी बोल दिए.. कम ने मुझे "विजय बीटा सब होजायेगा" बोल दिए... जूली से भी बात हुई जूली को भी प्लेन का बता दिए.. वो भी सो रही थी.. फ़ौरन hi काम पर लग गई.. मुझसे बात होने hi वो काम पर लग गई..
विजय:- चलो ये काम तो हमारा हो गया.. अब्ब मुकाबला भी कल 3 बजे है.. तब तक क लिए हम फ्री हाँ.. तो क्यों न मुकाबले के बेच के समय का भरपूर मज़ा लिया जाए.... मैं महक के मस्त फिगर को चेक करने लगा..
महक भी मुझे मुस्कुरा कर देखने लगी..
महक:- जैसे पहले कुछ नया किया था.. मेरे अंदर के तार हिला कर रख दिए थे.......... आज भी कर के दिखाओ दो और ले लो वो मज़ा मुझसे जो तुम लेना चाहते हो..
लेकिन शर्त वही है.. पहले मेरे लिए तुम्हे कुछ स्पेशल करना होगा. जिससे मुझे भी लगे क हाँ अब्ब मेरे भी मज़े हाँ.. महक अपने कातिल फिगर को मुझे बल खा कर दिखते हुए बोली.. वो भी अब्ब पूरी मूड में थी.. उसके अंदर का सब बदलने लगा था, मेरा उसपर और उसका मुझपर पूरा हक़ बनता था.. प्यार की भी शुरुआत हो चुकी थी, तो फिर नए नए रंग तो देखने बनते hi थे..
मुझे भी महक के साथ कुछ हटके करने का मैं होने लगा था... और इस सबब में मज़ा भी बहुत था..
विजय:- अगर मैंने कुछ स्पेसेल कर दिखाया तो क्या छूट मिलने के भी चांस हाँ..
हहहहहहहह महक हस्सन लगी..... चांस बन भी सकते हाँ.. पर कल मुकाबला है तो हम दोनों को hi एक्टिव रहना पड़ेगा.. तुम्हारी तो खैर है.. अगर तुमने सच में hi कुछ स्पेशल कर दिखाया और मई अपनी छूट की ओपनिंग के लिए रेडी भी हो गई, तो कल मैं तो चलने फिरने से जाऊँगी.. जितना मोटा तगड़ा तुम्हारा लुंड है.. वो तो मेरी छूट की धज्जियाँ hi उदा कर रख दे गए.. मई भले hi स्ट्रांग हों.. पर मेरी छूट नहीं.
महक हस्ते हुए बोली.. महक की बात पर मैं भी हस्स पड़ा.. महक साली कितनी पियरी लगती थी ऐसी बातें करते हुए.. पहले तो सिर्फ लुंड को काटने वाली फीलिंग्स की मालिक थी पारर अब्ब वो बदल गई थी, तो ऐसी बातें करते हुए उसके फेस के एक्सप्रेशन देखने से ताल्लुक़ रखते थे.. मेरे लुंड में कुछ हलचल सी होने लगी तो मैं महक को देखते हुए एक स्माइल देते हुए अपने लुंड को मसलने लगा..
महक फिरसे हस्सन लगी... हाहाहाहाहा देखा कैसे बिना छेड़ छड़ के hi तुम्हारा लुंड खड़ा कर दिए..
विजय:- अब्ब खड़ा हो hi गया है तो इसका कुछ ख्याल hi कर लो.. मैंने महक को खेंच कर अपने पास hi बिता दिए.. पहले वो कड़ी थी..
महक:- ये तो तुम पर है.. कैसे मुझे खुश करके तुम मुझसे अपने लुंड को ख़ुशी दिलवा सकते हो.. मैं ऐसे hi तो नहीं तुम्हारी या तुम्हरे लुंड की सेवा करने वाली.. पहले तुमने मुझे अंदर से इस सबब के लिए एक्टिव करना पड़ेगा. मेरे अंदर के तार एक बार फिरसे हिलने पेदेंगे.. तभी मैं तुम दोनों को प्यार और मज़ा दे सकती हों.. महक ने ये बात मेरे लुंड को पकड़ कर मसलते हुए बोली.. लेकिन उसकी पकड़ मेरे लुंड को डिस्टर्ब करने वाली थी. मज़ा देने वाली नहीं थी... वो एक शेरनी थी, खूंखार शेरनी..'
शेरनी भी शेर को अपनी छूट ऐसे hi तो नहीं दे सकती थी.. मुझे hi कुछ सोचना पड़ेगा.. वर्ण आज का मिलने वाला मज़ा छूट जायेगा.. महक से मस्ती का तो मज़ा था hi लेकिन महक से सेक्स रोमांस का भी अपना hi एक मज़ा था...
मैं अंदर तक्क खुश हो जाता था. पूरा बदन में hi मीठा मेथा दर्द सा होने लगता था.. लास्ट टाइम भी महक की छूट का पानी निकला था.. मेरे लुंड का महक ने कोई ख्याल नहीं किया था. वो पहले टाइम था तो मैंने भी महक को माफ़ी दे दी थी..
पारर आज मैं महक को माफ़ी नहीं देने वाला था.. पारर ऐसा क्या करून के महक को मज़ा मिले तो फिर वो मुझे भी मेरे हिस्से का पूरा पूरा मज़ा दे..
अब मैं सोच रहा था, और महक मुझे मुस्कुराते हुए देख रही थी.. मैं भी महक को देख कर सोच में डूबा हुआ था.. महक भी दिल से चाहती थी क मैं कुछ ख़ास कुछ स्पेसेल उसके लिए सोच लोन, वो भी तो अब्ब नयी जग चुकी फीलिंग्स का मज़ा ले रही थी..
कुछ देर सोचने के बाद मुझे कोई आईडिया नहीं मिला तो मैं महक को देखने लगा.. महक मुझे देख के मायूसी से बोली.... "नहीं मिला कोई आईडिया, अब ऐसे hi सोना पड़ेगा क्या"
मुझे महक को ऐसे देख के अच्छा नहीं लगा.. महक का मुझसे भी ज़यादा दिल कर रहा था, सेक्स रोमांस के लिए, मेरे साथ प्यार भरी लम्हे बिताने क लिए..
मुझे कुछ तो करना hi था.. तो एक बात मेरे मंद में आई, अब्ब पता नहीं वो महक को पसंद आती भी या नहीं, लेकिन तरय तो किया hi जा सकता था.. शायद इससे काम बन्न जाए..
मैं खड़ा हुआ, महक मुझे देखने लगी.. मैंने अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए, महक मुझे हैरत से देखने लगी.. महक बोल पड़ी...
महक:- नहीं मैं ऐसे कुछ नहीं करने wali,kuch स्पेशल करो, वर्ण कपडे पहन लो, बीएड रूम में चलते हाँ, और चल कर सोते हाँ..
मैं नंगा हुआ और महक को पकड़ कर खड़ा कर dia..mehak मुझे देख रही थी, क अब्ब मैं क्या करने वाला हों.. महक की आँखों में एक बार देखने के बाद मैंने महक की शर्ट को गले के नीचे से पकड़ा और एक झटके में hi खेंच कर पहाड़ दिए.. महक को भी झटका लगा था, वो ज़रा सा लड़खड़ा गई थी.. एक हाथ से मैंने महक को थमा और दसूरे हाथ से महक की पंत को भी पकड़ा और एक झट देते हुए महक की पंत भी पहाड़ दी.. पंतय भी पंत के साथ hi फट गई थी.. महक मुझे हैरत से देख रही थी.. पहात चुके कपडे मैंने महक के बदन से अलग किये.. महक को अपनी बहन में उठाया और छत पर जाने लगा..
जितना टाइम हो चूका था, आस पास के सबब hi सो चुके थे.. मैं महक को लिए छत पर पोहंचा.. महक मुसलसल मुझे hi देख रही thi..uski आँखों की चमक फिरसे बढ़ गई थी.... महक को हट कर कुछ करने की आदर थी.. फाॅर्स सेक्स और रोमन्स भी हट कर था, तो महक की ऑंखें मेरे ऐसा करने से चमक उठी थी..
हम दोनों नंगे छत पर पोहंचे तो मैं छत पर देखने लगा... ऊपर एक रूम भी था.. और उसमे क्या कुछ था मैं जानता था..
मैंने महक को नीचे छत पर खड़ा किया और रूम में जा घुसा.. अंदर देखने पर मुझे एक रस्सी मिल गई.. मैंने वो उठाई और लेकर बहार आ गया.. महक मेरे हाथ में रस्सी देख कर हैरान हुई
महक:- इस रस्सी का क्या करने वाले हो विजय.?
विजय:- बस देखती जाओ.. कुछ तो करूँगा इस रस्सी से.. महक को जवाब दे कर मैं छत पर देखने लगा... कोठी की एक साइड में खली जगा थी. उस तरफ किसी के होने के चांस नहीं था. वो किसी हद तक वरन एरिया था.. छत पर लोहे की ग्रिल लगी हुई थी.. मैंने महक का हाथ थमा और छत के कार्नर पर जा पोहंचा.. वहां ग्रिल लगी हुई थी... वहां पोहंच कर मैंने महक के दोनों हाथ रस्सी से बांध दिए महक मुझे चमकती आँखों से देख रही थी.. छत से नीचे खली जगा पर भी देख रही थी.. रस्सी का दूसरा सिरा मैंने ग्रिल से बांध दिए..
ग्रिल 4 फ़ीट ऊंची थी.... मेरे कहने पर महक ने भी ग्रिल की सलाखों को अपनी मुठियों में कस लिया. महक की पीठ मेरी तरफ थी.. महक फेस कोठी के बहरी तरग था...
मैंने नीचे बैठा महक को पैरों से पकड़ कर उठ खड़ा हुआ.. महक ग्रिल के बराबर हो गई..
तो मैंने महक के पैरों को खोल कर महक की दोनों जाएंगें अपने कंधे पर रख दीं, मैंने सीधा हुआ तो महक की छूट वाला एरिया उसके हाथों से ऊंचा था..
महक:- वूऊऊ that's सो अमेजिंग विजय.. क्या नज़ारा है.. ऐसे hi स्टंट करने की तो मैंने आदि................ siiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa अह्ह्ह्हह्हह
महक की बात के बीच में hi मैंने अपनी जीब महक की छूट पर लगा दी थी, जिस के कारन महक की बोलती hi बंद नहीं हुई, महक की सिसकी भी निकल गई..
यहाँ रौशनी काम थी तो महक की छूट के सही से दर्शन नहीं हो सकते थे... बास मज़ा लिया और दिया जा सकता था.. महक की छूट की खुशबु भी आखिर कार मैंने पा ली थी..
रात के अढ़ाई बजे का टाइम था... साडी दुन्या सो रही थी.. और हम कोठी की छत पर अजीब ो गरीब अंदाज़ में ओरल सेक्स का मज़ा ले रहे थे..
महक की छूट ऐसे कस गई थी तो मेरी जीब सही से महक की छूट में नहीं घुस पा रही थी.. छूट में जीब घुसने की ज़रूरत hi क्या थी.. लुंड जो मेरे पास वही घुसा सकता था.. महक की अध् खुली छूट मेरे सांमने थी.. महक सेक्स ड्रग्स के चलते अपनी छूट की फिंगर्स से hi काफी लोउसे कर चुकी थी.. ये महक ने hi मुझे बता दिए था.. उसे ये सबब बताने में कोई शर्म नहीं आई थी...
महक की पीठ आसमान की तरफ थी..
महक;- अह्हह्ह्ह्ह विजय मेरे पैरों को थोड़ा सा और खोलो, फिर सही से जीब आगे जाएगी.. कैसे कैसे अजीब तरीके फूँद लेते हो तुम....... बी गॉड क्या मज़ा मिल रहा है.. मैंने कभी सोचा भी नहीं था.. क मैं ये सबब और ऐसे सबब करुँगी..
मेरे दोनों हाथ महक के चुत्तड़ो के ऊपर थे.. महक के चूतड़ों को कलहोलटे हुए मैं महक की गांड के छेड़ पर भी अपनी उँगलियाँ चलने लगा.. महक से सहन नहीं हुआ aiiiiiiiiiiiiiiii विजय मेरी गांड पर भी ऊँगली घुमा रहे हो.. हम्म्म्म
अह्हह्ह्ह्ह अछ्हा है थोड़ी सी अंदर भी कर दो.. नाख़ून से थोड़ा सा कुरेद भी दो..
अहह कैसा समा बना दिए है तुमने विजय, ोीी मा विजय आज पूरा पूरा मज़ा दे दो विजय मुझे, आज मैं तुम्हे नहीं रोकने वाली.. आह आह आह ओह्ह
मेरी जीब जितनी महक की छूट में घुस सकती थी मैं उसे घुसाए स्पीड से मूव कर रहा था... महक बुरी तरह से मचलने लगी थी.. महक ने कब ऐसा सब सोचा होगा, अपनी पहली hi छूट चुसाई भी महक को एडवेंचर लिए हुए थी.. महक मज़े से दुहरी होने लगी, मेरी गरम जीब और छत पर ठंडी हवा महक से सहन करना मुश्किल हो रहा था.. मेरी उँगलियाँ महक की गांड में तो जीब महक की छूट में तो कभी छूट को नीचे से ऊपर तक चाट रही थी..
महक स्ट्रांग गर्ल थी, लेकिन छूट के मामले में वो बहुत hi सेंसिटिव थी.. कुछ मिनटुटेस में hi महक की कुंवाणी छूट ने मेरे जीब पर hi अपनी रस छोड़ना शुरू कर दिए........... पहले महक सिसकियाँ ले रही थी, अब्ब महक की सांस छत की ख़ामोशी को भांग किये हुए थी...
मैं नहीं रुका था, अपनी शेरनी की छूट का पानी पीने में लगा रहा.. कुछ देर महक ने खुद की सांस पर काबू पाया तो
महक:- थैंक्स विजय एक बार फिरसे नया और भरपूर मज़ा देने क लिए. अब्ब कुछ और नया करो, अब मुझे कुछ और भी अलग कर दे दिखाओ, हर बार मेरे अंदर मुझे कुछ नया नया फील होने लगता है.. कब जी थी मैंने ऐसी लाइफ.. तुमने मुझे ऐसी लाइफ दे कर बौह्त ख़ुशी दी है.. मज़े की तो बात hi अलग है.. ऐसा मज़ा तो मैं कभी स्टंट करके भी प्राप्त नहीं कर पाई थी..
महक की बात के बीच में hi मैंने महक की छूट पार्स जीब हाडा ली थी.. महक की बात सुनके मैंने महक को आगे का मज़ा भी देना का सोच लिया..
मेरा लुंड तो महक को देखते hi नीचे ड्राइंग रूम में hi खड़ा हो गया था... अब्ब तो वो पूरी फार्म में पुई अकड़न में था.. महक के दोनों पैरों को मैंने बारी बारी करके ड्रिल के बीच में फंसा दिए.. महक के दोनों पेअर पुरे hi खुले हुए थे.. महक ने भी सब समझते हे अपने आप को पूरी तरह से एडजस्ट क्र लिया था..
मैं महक के जिस्म को घूरने लगा, मेरा लुंड मुझे उसका रहा था क मैं महक की छूट पहाड़ डॉन, अब जैसा समय था, जैसी फीलिंग्स में महक थी, महका भी अब मेरे लुंड को लेने के मोड़ में थी, पर अभी मैं महक को चुद नहीं सकता था, कल का दिन बहुत hi खास था, मेरी या महक की ख़ुशी और मज़े से बढ़कर थी मेरी नानी मेरी माइयों और बहनो की रिहाई.. उन सब को एक नई लाइफ देना मेरी और महक की खुशियों से कही बढ़कर था..
महक को मैं पीछे से चूमने लगा.. साथ hi महक के जिस्म पर हाथ भी फेरने लगा, महक मेरे एक एक सुपर्ष पर एक एक किश पर सिसकियां ले रही थी, महक ने पहले कब इतने मज़े लिए थे, वो फुल मस्ती में होकर सिसकियाँ भर रही थी..
मैं महक की पीठ को चूमते सहलाते हुए नीचे महक की गांड तक आया, कुछ महक की गांड को छठा और फिर अपने लुंड को थाम कर महक की गांड और छूट से रगड़ना शुरू कर दिए...
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआआ छूट पर पहली बार लुंड को महसूस क्र प् रही हों.. कितना मज़ा कितना सुकून दे रहा है..... लव यू विजय हम्मम्मम्मम्म उफ्फ्फफ्फ्फ़ विजय माय लव...
मैं महक की कमर को पकडे हुए महक की छूट और गांड पर अपने लुंड को रगड़ रहा था.. महक का बास नहीं चल रहा था, वर्ण वो पुरे जोश से चीखती हुई अपने मज़े के बारे में सबब को बताने लगती..
जल्द hi फिरसे महक की छूट ने गरम होना शुरू कर दिए था.. अगले 5 मिंट में फिरसे महक की छूट ने पानी छोड़ दिए..
महक सुरूर की इन्तहा पर थी.. अपनी ख़ुशी और मज़े का िन्हार वो अजीब अजीब लफ़्ज़ों में कर रही थी... महक की ख़ुशी देखने लायक थी..
कुछ देर में मैंने महक को छोड़ दिए, महक के हाथ भी खोल दिए.. महक खुद से hi छत पर आ गई और मेरे चेहरे को थाम कर मेरे होंठ पर टूट पड़ी.. कब महक की छूट ने दो बार मज़े से पानी छोड़ा होगा.. महक के अंदर के रंग उसकी छूट के पानी के साथ बहार निकले तो महक बाहर हलकी फुल्की और फ्रेश हो गई थी.
महक कुछ देर मुझे पुरे जोश से किश करती रही, मेरे होंटो पर सूख चुके अपनी छूट के पानी को चोम चाट चुकी तो वो मुझसे अलग हो गई..
मेरी आँखों में देखती हुई वो बोली
महक:- विज्जउ........... महक ने मुझे विज्जू कह दिए.. पहले कभी उसने मुझे विज्जू नहीं कहा था.. और आप तो जानते hi हाँ क मुझे विज्जू कौन कहता है..
विजय:- विजजूउउउउउ....... मई महक को देखते हुए बोलै
महक:- हाँ अब्ब से तुम मेरे लिए भी विज्जू hi हो.. तुमसे मुझे भी उन सबब में शामिल कर दिए है तो जिनके लिए तुम विज्जू हो.. महक स्माइल देते हुए बोली.. महक बहुत खुश थी..
विजय:- चलो अब तुम भी नीचे बैठ कर मेरे लुंड को अपना प्यार दो.. उसका भी आज बिना प्यार किये सोने का मन नहीं है.. उसे भी हल्का होना है..
महक ने मेरे लुंड को देखते हुए अपने हाथ में थम लिया और फिर मेरी आँखों में देखती हुई बोली
महक:- जब ये किसी को अपना अपना लगे तो वो फिर उसका hi होकर रह जाता है, जैसे बाकी सब इस्पे अपना हक़ समझते हाँ, आज से मेरा भी इसपर पूरा पूरा हक़ है. और अणि चीज़ों का ख्याल तो फिर हर एक को रखना पड़ता है.. मैं भी करुँगी न इससे प्यार, करुँगी इसके अंदर का पानी निकल कर इसे हल्का.. महक शरारती स्माइल देते हुए नीचे झुकी और मेरे लुंड को दोनों हहतों की मुठियों में दबा दबा कर चेक करने लगी.........
महक:- विज्जू कितना हार्ड है न तुम्हारा लुंड.. सही किया जो तुमने इसे मेरी छूट में नहीं डाला, वर्ण तो सच में hi मई चलने लायक नहीं रहती..
महक ने मेरे लुंड को किश करना शुरू कर दिए, मेरे हाथ महक के सर्र पर पोहंचे तो मैंने महक के बालों से खेलने लगा..
महक ने कुछ देर मेरे लुंड को चूमने के बाद थोड़ा सा अपने मोहन में दाल लिए और फिर महक ने मुझे वो मज़ा दिए क क्या बताओ, महक मेरे लुंड को तब तब चूमती चूसती रही जब तक मेरे लुंड का पानी नहीं निकल गया.. महक ने मेरे लुंड का पानी पाने मोहन से नहीं गिरने दिए.... महक के लिए ये फर्स्ट टाइम था, तो वो एक एक पल का मज़ा ले रही थी.. मेरे लुंड के माल को भी महक टास्ते कर लेना चाहती थी... महक तो सबसे आगे की चीज़ थी... उसे शर्म भी नहीं थी और झिझक भी नहीं थी.. महक पुरे मज़े से मेरे लुंड से खेली थी..
जितना हो सका महक ने मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर चूसा था.. मसला था, अण्डों को भी अपने मोहन में लेकर उसका भी सवाद लिए था महक ने...
3 बजे जे करीब हम दोनों लगने hi बैडरूम में जा घुसे थे, नंगे hi एक दूसरे से लिपट कर सो गए थे.. सोने से पहले महक ने एक बार फिरसे मेरे लुंड को खड़ा कर दिए था.. और फिर मेरे ऊपर आ कर मेरे लुंड को अपनी टांगों के बीच अपनी छूट से सत्ता क्र सो गई थी..
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पुणे क्रिकेट स्टेडियम में इस समय आधा पुणे मौजूद था.. पूरा स्टेडियम खचा खच भरा हुआ था, हर तरफ शोर मचा हुआ था.. इतने शोर में भी कोई डिस्टर्ब नहीं था. क्रिकेट मैच तो लोगों ने बेशुमार देखे होंगे.. लेकिन जैसा मैच आज इस स्टेडियम में हो रहा था.. वैसा न तो कभी किसी ने देखा था और न hi कबि देख पायेगा..
मैच था hi ऐसा........... मनजोत सिंह का सैम कुछ तो दो पर लगा हुआ था hi, इज़्ज़त भी उसकी दो पर लग चुकी थी.. वो मनजोत सिंह जो पुणे सिटी के चाँद गिने चुने खानदानो में से एक था..
आज उसी खंडन की इज़्ज़त और प्रोपोएर्टय की धज्जियाँ सबके सामने उड़ने वाली थी.. सभी लोग लोग अलग अलग सोच में थे.. सबसे अलग नज़रिये थे, जिनके रिलेशन अच्छे थे, वो जानते थे क मनजोत सिंह और उसके बेटे किसी से कम् नहीं हाँ, जिनकी सपोर्ट मनजोत सिंह किया करता था, वो चाहते थे क मनजोत सिंह क बेटे ये फाइट जीत जाएँ..
जो नागराज मनजोत सिंह के दस हुए थे.. या जिनकी मनजोत सिंह से दुश्मनी थी, जो मनजोत सिंह का कुछ बिगड़ नहीं सके थे... आज वो कुछ ज़यादा hi खुश थे.. वो सबब भी इस स्टडिउम में मौजूद थे..
जहाँ मुकाबला होना था.. वहां पर एक छोटा सा अखाडा बनाया गया था.. क्रिकेट स्टेडियम में अखाडा बनाना आसान नहीं था. ऐसा कभी किसी ने पहले नहीं किया था..
लेकिन आज ये सबब भी हो रहा था.. उसी अखाड़े के दोनों साइड में सिटी व्विप पर्सन बैठे हुए थे.. बड़े बड़े ओहदे दार भी आज मौजूद थे.. कुछ तो मनजोत सिंह के साथ बैठे हुए थे, तो कुछ कम के साथ बैठे हुए थे.. मैं और महक एक और साइड में बैठे हुए थे.. मनजोत सिंह और उसके बेटे मुझे आग बरसाती हुई नज़रों से देख रहे थे.. उनमे से किसी के भी चेहरे पर ऐसे भाव नहीं थे, क वो आज यहाँ पर हार जाने वाले हाँ..
वो घमंडी खंडन से थे, ग़रूर और तकब्बर कूट कूट उनमे भरा हुआ था.. वो कहाँ जानते थे क मुझे भी जग्गू पहलवान ने ट्रेंनेड किया है.. मुझसे लड़ पाना, मुझसे जीत पाना उनमे से किसी क लिए भी आसान नहीं होने वाला..
आज मेरा नहीं मेरे उस्ताद ने जो मुझपर म्हणत की थी, उसका मुकाबला इस ग्राउंड में होने वाला था... मई हार जाता कोई बात नहीं थी.. पारर मेरे हारने से मेरे उस्ताद का नाम मिटटी में मिल जाता.. और मैं मर्डर तो सकता था, लेकिन अपने उस्ताद का नाम मिटटी नहीं होने दे सकता था.... उस्ताद जग्गू एक महान उस्ताद hi नहीं एक महान इंसान भी थे... उनके मान सम्मान क लिए तो मेरी गर्दन तक्क काट जाती, पर उनका नाम मिटटी में नहीं मिल सकता था..
इस मुकाबले की हार जीत से और भी कई ज़िन्दगी जुडी हुई थी. मुझे आज का मुकाबला जीत कर उन सबब को एक नयी ज़िन्दगी देनी थी.. माँ को वो ख़ुशी देनी थी.. जो मेरा पूरा प्यार मिल पाने के बाद भी अधूरी थी..
मनजोत सिंह ने आज तक्क जितने भी ज़ुल्म उस बेबस और लचर मजूबर अपने hi घर की महिलयों पर जो ज़ुल्म किये थे.. उन सब का आज होने वाला था.. आज का सूरज डूबने से पहले बहुत कुछ नया लाने वाला था.
महक से मस्ती भरी रात की अगली सूबा मैंने पैलेस में माँ से और सबसे बात करके उन्हें भी सबब बता दिए था.. माँ और बाकी सबब ये सुनकर बहुत खुश भी हुए थे और दुखी भी.. वो सब भी जल्द से जल्द मनजोत सिंह की कोठी वाली जेल में मौजूद कड़ियों को अपने बीच में देखने की ख्वाहिशमंद थी..
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जूली की रात को विजय से बात हुई तो फिर उसके बाद से सोइ नहीं थी.. वो सबब इन्तेज़ामात करने में लग गई थी..
जूली ने पैलेस में hi पुणे में होने वाले मुकाबले को दिखने का बंदोबस्त क्र दिए था.
कुछ लोगों को जूली ने डस्टर के साथ पुणे प्लेन स्वरा भेज दिए था.... वहीँ से वीडियो लिंक क ज़रिये ग्राउंड में हो रहा सब पैलेस में भी देखा जा रहा था..
सब hi तो सिटींग हाल में जहाँ बड़ी लेद टीवी लगा हुआ था. वहां बैठे हुए थे..
श्वेता की बहुत बुरी हालत थी... ख़ुशी तो थी hi लेकिन इतने सालों बाद अपने पिता और भाइयों को देख कर वो गुज़रा समय फिरसे याद कर बैठी थी.. पूजा और शुष्मा दोनों साइड्स से श्वेता को थामे उसे हौसला दे रही थी.... priya,jhanvi और श्रुति शेता के पीछे कड़ी thee..wo भी दुखी थी अपनी माँ को ऐसी हालत में देख कर उनके दिल भी तड़प रहे थे.....
लेकिन आज श्वेता को हौसला कैसे मिल सकता था... दर्द एक बार फिरसे बढ़ गया था.. दर्द था hi इतना कैसे सहन कर पाती..
अपने hi कसाई पिता और भाइयों ने उसे कोठे की मंडी में बिकने क लिए घर से घक्के मार कर भगा दिए था... कौन अपनी hi इज़्ज़त की ऐसे धज्जियाँ उडाता है..
श्वेता को हौसला देने वाले कहाँ उसके दर्द को ख़तम कर सकते थे.. जो ख़तम कर सकता था.. वो तो उससे बहुत दूर था... लेकिन सामने दिख भी रहा था...
वो वही मौजूद श्वेता को अधूरी रह चुकी खुशियां लौटने क लिए पुणे में मौजूद था.. बास अगर श्वेता के दिल को कुछ करार था. तो अपने स्वामी अपने बेटे अपने राजकुमार के वहां मौजूद होने से था... उसके रहते वो टूटने से बची हुई थी..
आज वही उसका राजकुमार उसकी अधूरी खुशियों को भी ला कर उसकी झोली भर देने वाला था....
सबकी नज़रें लेद टीवी की स्क्रीन पर जमी हुई थी. और सबब बहुत बेचैनी से मैच के शुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे..
सब विज्जू और महक को देख रहे थे.. तो कभी मनजोत सिंह और उसके बेटो को.. जिनकी अकड़.. जिनका घमंड आज भी बरक़रार था.. अपनी बेटी को कोठे की ज़ीनत बना कर भी वो अकड़ में थे..
सबकी नज़रे श्वेता की और भी थी.. श्वेता को देख कर सबकी ऑंखें भी नम्म थी.. ख़ुशी का समय भी था और दर्द का भी..