Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 27 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)



अपडेट ::: 121


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ब्रेकफास्ट के बाद मई जूली के पास था, मेरे साथ महक भी थी.. दीदी और जूली अपने काम में बिजी थीं.. आज उनका हर्ष अंकल की कोठी पर इंटरव्यू डे था..

नए बिज़नेस के लिए वर्कर्स की ज़रूरत थी, एक दिन पहले hi ऐड दे दिया गया था, जूली और दीदी उसी काम में लगी हुई थी..

कल शाम से पहले कुछ देर पहले दन्न के पालतू कुत्तों ने पैलेस पर ड्रोन कैमरा से व्यू देखने की कोशिश की थी, पैलेस की छत पर नसब हैवी मशीन गन ने उसे डिटेक्ट करके उदा दिए था.......... जूली भी सबब पहले से जान गई थी क दन्न के कुत्ते पैलेस की और डरने कैमरा लेकर बढ़ रहे हाँ.......... दन्न के ड्रोन कैमरा को तो उदा दिया गया था, पारर इस घटना से दन्न अब्ब हमारे बारे में सबब hi जान गया था, पैलेस में हैवी मशीन गन नसब करके किसी भी ड्रोन को उदा दिया जाना कोई आम बात नहीं थी, दन्न समझ गया था क हम पैलेस में मौजूद हाँ, अब्ब सबब के लिए पैलेस से बहार खतरा बढ़ गया था, सब को hi बता दिए गया था, कोई भी अब्ब पैलेस से बहार नहीं जायेगा.. पापा और हर्ष अंकल को छोड़ कर, वो अपनी सिक्योरिटी के साथ बहार जाया करेंगे..

shetal,shikha,rupa और राज का स्कूल कुछ दिनों के लिए बंद करवा दिए गया था..

मई और महक एक टेबल पर बैठे थे.. हमर राब्ता राजा पार्टी से था.. वो हमें अब्ब टक्क की सबब डिटेल बता रहे थे.. वहां अभी तक्क उन्हों ने कुछ भी नहीं किया था, कल वो देर से आये थे, तो साइड के एरिया को चेक कर रहे थे..

राजा:- विजय अब्ब हम आगे बढ़ने वाले हाँ, तुम क्या कहते हो..

विजय:- ठीक है अब्ब तुम सबब आगे बढ़ो, और हमसे मुसलसल hi राब्ते में रहना, कॉल को सुत्त मैट होने देना..

उदय:- इसकी चितना तुम मैट करो, हम कॉल कट नहीं होने देंगे.... चलो सब आगे बढ़ते हाँ..

फिर सबब hi आगे बढ़ने लगे..

महक:- क्या ख्याल है, हमें वहां होना चाहिए या नहीं..

विजय:- नहीं मेरा नै ख्याल क जैसा ये मिशन है हमें वहां होना चाहिए, ये एक सिंपल सा मिशन है, राजा पार्टी इसे आसानी से हैंडल कर लेगी.. गुरनाम भी साथ में है, तो उसे भी टेस्ट कर लेंगे. हर बार हम hi तो सब के साथ नहीं रह सकते ना. कभी कोई डिफरेंट कंडीशन भी बन्न सकती है, उसी हिसाब से हमें सब को पूरी तरह से तैयार भी करना होगा..

mehak:-hmmmmmmmmmm ठीक कह रहे हो तुम विजय... हम हर बार hi तो सबब के साथ नहीं रह सकते, दन्न के बाद हमें आगे भी जाना है, फिर सबब जूली और राजा पार्टी hi संभालेगी..

विजय:- हाँ अब्ब तक्क तो वो पोहंच भी चूका होगा दिल्ली में..

महक:- और उस बेस पर अपना कब्ज़ा भी जमा चूका होगा.. हाहाहाहाहा दन्न कितना खुश होगा, इस बात को लेके क वो एक सुरक्षित बेस ढूंढ पाने में सफल हो गया है, और अब्ब वो वही बैठ कर हमसे टकराने की कोशिश करेगा... मरेगा साला इस बार उसने दिल्ली में आ कर गलती करदी, अब वो यहाँ से ज़िंदा बच कर वापिस पुणे नहीं लौट पायेगा....

हम दोनों ऐसे hi बातें करते रहे, ज़यादा बातें दन्न से रिलेटेड hi थी, राजा पार्टी की बातें भी हम सुन रहे थे..

अचानक से hi हमे उनकी बातों से कुछ हट के लगा तो हम खामोश हो गए..




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राजा पार्टी आगे बढ़ने लगे, जब वो गोदामों के करीब पोहंचे तो सबब दूरबीन लगा कर सबब अच्छे से देखने लगे.. गुरनाम भी सबब देख रहा था, वो अचानक से hi उछाल pada."sandeep यहाँ"

सब गुरनाम की बात सुनके दूरबीन आँखों से हटा कर गुरनाम को देखने लगे..

राजा:- क्या कहा गुरनाम तुमने, संदीप को कहा देख लिया तुमने..

गुरनाम ख़ुशी से:- 2ंद गोदाम की और देखो वहां तुम्हे संदीप दिखेगा, वो भी यहाँ पारर आया हुआ है...

सबब 2ंद गोदाम की और देखने लगे, उन्हें भी संदीप दिख गया था..

उदय:- ये तो कोई पहलवान टाइप दिख रहा है...

गुरनाम:- यही तो है मेरा य्र्र संदीप सिंह..

सब देख रहे थे, संदीप गोदाम के अंदर घुसने की कोशिश कर रहा रहा था..

अनु:- चलो चल के उससे से मिलते हाँ..

गुरनाम:- हाँ अब्ब मुझसे भी नहीं रहा जाएगा.. चलो चलते हाँ.. सबब फिरसे आगे बढ़ने लगे..

मैं और महक एक दूसरे को देखने लगे...

महक:- चलो ये तो अच्छा हुआ क गुरनाम को उसका दोस्त मिल गया..

विजय:- हाँ, संदीप भी गुरनाम के जैसा hi है, अकेला hi सबब करता फिर रहा है, जैसा गुरनाम ने बताया था क उसका दोस्त खुद में भी बहुत कुछ है, अब्ब उसे वहां पा के सबब सम्भ में आ रहा है, ऐसे hi जयलोन की मुझे गैंग में ज़रूरत है, ऐसे hi बहादुर और खुद की परवा न करते हुए दूसरे के बारे में सोचने वाले मुझे चाहिए, ऐसे लोगों का साथ पा कर हमारी गैंग बहुत पॉवरफुल बन्न जायेगी..

महक:- हाँ वो तो है, गुरनाम और संदीप हमारे बहुत काम आएंगे..

गोदाम के पास पोहंचे तो संदीप को भी अपने पीछे किसी के आने का एहसास हो गया था.. संदीप ने मुद कर देखा तो 5 जानो को अपने पीछे देखकर उन्हें घूरने लगा, फिर जब्ब उसकी नज़र गुरनाम पर पड़ी तो वो हैरान रह गया... सालों बाद भी गुरनाम को देख कर वो पहचान गया था..

दोनों तेज़ी से एक दूसरे की और बढे और बहुत hi बेताबी से एक दूसरे के गले लग गए.

गुरनाम:- तू मुझे मिल गया मेरे य्र्र... तुझे ढूंढ ढूंढ के मई थक्क गया था मेरे य्र्र..

संदीप:- गुरनाम मेरे य्र्र तू जेल से कब्ब छूटा, मुझे तो कोई खबर hi नहीं हुई, और न hi किसी ने मुझे कुछ बताया... तुझे अपने सामने फिरसे देख के मुझेबोहत ख़ुशी मिल रहे है..

गुरनाम:- मई भी बहुत खुश हों, हम फिरसे मिल गए हाँ.. अब्ब हम हुएमेंशा साथ रहेंगे.. कुछ देर दोनों एक दूसरे को महसूस करते रहे, फिर दोनों अलग हो गए...

गुरनाम:- संदीप मेरे य्र्र इनसे मिल, ये राजा, ये उदय, ये जीतू और ये अनु.... गुरनाम ने सबका इंट्रो करवाया, संदीप सबसे मिला..

गुरनाम:- संदीप मेर य्र्र जैसी लाइफ कभी हम जिया करते थे, जैसा हमारा मक़सद था जीने , मेरे ये दोस्त वैसे से विचारो को सामने रख कर एक गैंग बना रहे हाँ, मई भी अब्ब इनके साथ मिलकर वो सबब फिर से कर रहा हों, जो मैंने अपणु से धोका खा के करना छोड़ दिया था..

संदीप गुरनाम की बात सुनकर हैरान रह गया...

संदीप:- मतलब मई कुछ समझा नहीं, गैंग वो भी हमारे हिसाब se(sandeep का चेहरा भी जोश से भर गया था) मुझे सबब डिटेल में बताओ...

गुरनाम:- संदीप तुमने कुछ दिन पहले दो लड़कियों के रपे का सुना था, फिर दोनों रेपिस्ट को डाँडो से मार मार कर भड़ता बना दिया गया था.. और फिर दिल्ली में मौजूद तीनो गैंग के ख़तम होने की खबर भी तुमने सुनी होगी.... वो सबब यही गैंग करती फिर रही है..

संदीप सब जान कर हैरान रह गया.. वो कुछ नहीं बोलै, गुरनाम उसे बाकी की भी डिटेल शार्ट में बताने लगा... संदीप बाकी का सबब सुनकर और भी हैरान होने लगा............... जैसा हम कर रहे थे, वैसा तो कोई सरफिरा hi कर सकता था, संदीप को बड़ी हैरानगी हो रही थी..

महक:- संदीप सिंह निर्वाण सवागत है आपका इस समाज सेवक गैंग में, सबब डिटेल में आपको बता दिए जाएगा... पहले आप सबब वहां का मिशन पूरा कर लें.

संदीप महक की सुनकर और भी हैरान रह गया..

संदीप:- गुरनाम ये कौन हाँ.?

गुरनाम:- ये भी सब तुम्हे बता दिए जायेगा, ये हमसे सीनियर हाँ, और अभी एक वो बेस पर हाँ, हम उनसे बाद में मिलेंगे...

विजय:- hello संदीप मई विजय हों, मई भी इसी टीम में शामिल हों, जिसमे हम तुम्हे भी शामिल देखना चाहते हाँ, सबब बातें तुमसे डिटेल में बात की जाएँगी, अभी तुम सबब मिलकर वहां फंसे लाचार बच्चो को आज़ादी दिलवाओ..

महक:- गुरनाम, संदीप तुम दोनों मिलकर कोई प्लान बनाओ, हम भी देखना चाहते हाँ क तुम दोनों कैसा परफेक्ट प्लान बनाते हो, हम सबब को सिचुएशन के हिसाब से प्लान बनाना आना चाहिए, और सबको hi पता होना चाहिए क कौन किस कदर काबिल है..

राजा उदय तुम सबब अभी गुरनाम और संदीप को कोई हेल्प नहीं डोज, जब तक वो दोनों सही से कोई प्लान नहीं बना लेते.

विजय:- गुरनाम अपने दोस्त के साथ मिलकर इस मिशन को पूरा करो, अब्ब मई तुम्हे और तुम्हारे दोस्त को इस मिशन का इंचार्ज बनता हों, राजा पार्टी तुम दोनों को फॉलो करेगी...

उदय:- वाह क्या बात है, बहुत दमाग चला रहे हो तुम दोनों पैलेस में बैठे बैठे..... वैसे ये सबब बहुत hi बढ़िया है, इससे हमें भी सबब पता चल जायेगा क दोनों में कौन किस कदर जीनियस है.... हमारी गैंग में सभी को एक दूसरे से बढ़कर होना चाहिए.. और ऐसा hi परख से हम एक दूसरे को सही से जान सकते हाँ..

राजा:- मर गुरनाम एंड मर संदीप सिंह आप दोनों को बहुत बहुत बधाई हो पहले मिशन की सापरस्ती की..

उदय:- और अब्ब हमे कोई प्लान बना कर दो, जिसपर चलते हुए हम इस पुरे एरिया की माँ बेहेन को छोड़ सकें...

संदीप सिंह अब्ब हैरानगी भरे भाव से बहार निकल आया था, जैसी लाइफ उसने गुज़री थी, वहां वो पहले hi बहुत से जहटके झील चूका था, ये झटका कुछ हट के था, पारर एक जल्द hi संभल भी गया था..

गुरनाम और संदीप इस इज़्ज़त अफ़ज़ाई पर बहुत खुश थे.. सबने एक सेफ जहा देख कर अपना डेरा जमाया, फिर संदीप और गुरनाम ने पहले एक दूसरे से बात की, संदीप बहुत पहले से hi इस इलाके में था, तो वो बहुत कुछ जान गया था इस एरिया के बारे में..

संदीप:- अब्ब गोदाम में घुसने की बजाये हमें यहाँ मौजूद सब गुंडों को मार देना होगा, उसके लिए हमे एक प्लान पर अमल करना hoga..(raja पार्टी से) तुममे से कोई भी दो जा कर झोंपड़ियों की और जहाँ गुंडे मौजूद हाँ, वहां पर फायरिंग करेंगे.. 2-2 राउंड चलने के बाद वो रुक जायेंगे.. कुछ देर बाद गुंडे एक साथ जमा होकर उन दोनों की और बढ़ेंगे तो बाकी के सबब उन गुंडों के पीछे रहते हुए उन्हें मार डालेंगे..

गुरनाम:- इस तरह से गुंडे घेरे में आ जायेंगे, और अगर कोई गुंडा वही झोंपड़ियों में रहा तो उसे भी ढूंढ कर मार दिए जाएगा..

महक:- एक बात का खास ख्याल रह्कने क गुंडों में जो लीडर गुंडे हों, उन्हें ज़िंदा पकड़ना है, उनसे कुछ इन्फो भी निकालनी है, इस अड्डे के बारे में और कहाँ कहाँ इनके धंदे चल रहे हाँ, और इनके बॉस कहाँ मिल सकते हाँ, वो सबब इन्फो भी उनसे लेनी है...

संदीप:- मैडम वो आप सबब हम पर छोड़ दें, हमने अपनी पूरी लाइफ hi पुलिस में रहते हुए गुज़र दी है, ये तो हमारे बाएं हाथ का काम है...

विजय:- ok विश यू गुडलुक.. अपना पहले मिशन अंजाम दो. फिर सबब hi मिलकर बैठते हाँ...

जीतू और अनु झोंपड़ बस्ती की दूसरी साइड में जा कर गुंडों पर गोलियां बरसाने लगे, 2 ज़बरदस्त किसम के राउंड चलने के बाद वो दोनों रुक गए और खुद को एक जगा सुरक्षित कर लिया..

कुछ देर में गुंडे छुपते हुए अनु और जीतू की और बढ़ने लगे, पीछे से गुरनाम, sandeep,uday और राजा गुंडों पर टूट पड़े, गुंडों दोनों तरफ से घेरे में आये तो जीतू अरु अनु भी फिरसे पोजीशन में आ गए.. 20 मिंट में hi वो एरिया गुंडों से पाक हो गया..

वहां ज़यादा गुंडे नहीं थे, जितने भी थे, वो सबब शूटर भी नहीं थे, बास गन चलना जानते थे, जल्द hi 4 गुंडों को छोड़ कर सबब को मार दिया गया..

फिर संदीप और गुरनाम के टार्चर के आगे उन चरों ने भी घुटने रेख दिए..

चरों ने जो बताया वो सबब बहुत hi भयानक था, तीनो गोदामों के ततल 80+ लकड़ी के क्रेटों में लड़के और लड़कियों कड़ी थे, सबब को hi हैवी ड्रग्स दे कर बेहोश किया गया था, यहाँ से आगे सबब को मैं बेस पर लेजा जाना था, ये वही बेस था, जिसे पर दन्न कब्ज़ा करना छह रहा था..

वो बेस इस एरिया से 35 किलोमेरे आगे था..

मैंने पापा और कम को सबब इन्फो दे गई... वो अपनी फाॅर्स को लिए वहां के लिए निकल पड़े थे..

तीनो गोदामों को खोल कर राहुल और दूसरे बच्चे को निकल लिया गया था, सब ने मिलकर सब करतेस तोड़ दिए थे.. चरों बचे हुए गुंडों को संदीप और गुरनाम ने चीयर डाला था.. सब बहुत ज़यादा ग़ुस्से में आ गए थे..

खबीस इंसान पैसे कमाने क लिए कैसे कैसे घटिया काम करने लगे थे..

दोनों बचो को बहार निकल कर वहां काम कर रहे मज़दूर टाइप लोगों को वहां से चले जाने क लिए कह दिए गया था..

ये वो लोग थे, जो जंगल से लकड़ी कटा करते थे, वो बच्चो और लड़कियों के बारे में कुछ नहीं जानते थे, वो निचले दर्जे के गरीब लोग थे, अपनी फॅमिली के साथ मिलकर लकड़ी काटने का काम किया करते थे.... मीडिया भी बुलाई जाने वाली थी, इसलिए सबब को वहां से हटने का कह दिया गया था..

राजा पार्टी पुलिस के पोहचने से पहले hi दोनों बच्चो को लेकर वहां से निकल पड़े............ पुलिस ने वहां पोहंच कर पुरे एरिया को घेर लिया राजा पार्टी का किया हुआ कांड पुलिस के नाम लिखा जा चूका था... वहां पोहचते hi कम ने मीडिया को कॉल करदी थी... कम ने कम को भी सबब बता दिए, कम भी अपने स्पेशल हेलीकाप्टर पर बैठ कर वही पोहंच गया...

मीडिया ने जब वहां का सबब देखा तो सब को hi बहुत दुःख हुआ, वहां मौजूद लड़कियों और बच्चो की हालत बहुत ज़यादा ख़राब थी.

मीडिया ने सबब लाइव दिखने लगा, मीडिया इस बार पुलिस डिपार्टमेंट को बड़े अच्छे अल्फ़ाज़ से नवाज़ रही थी, इस बार पुलिस डिपार्टमेंट की कारकर्दगी को भी सराहा जाने लगा था, मीडिया एक बार फिरसे कम और पुलिस के बारे में अच्छे विचारो से बात करने लगी..

सब लड़कियों और बच्चो को जल्दी से हॉस्पिटल के लिए रवाना कर दिया गया, मीडिया वहां भी मौजूद थी, मीडिया के ज़रिये सबब को बताया जा रहा था.. इनके बच्चे लापता हाँ, जिस घर से लड़कियां ग़ायब हाँ, वो सबब हॉस्पिटल के लिए दौड़ पड़े.


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पैलेस में भी सबब वो न्यूज़ देख रहे थे, सबब इस घटना को देख कर दुखी थे, राहुल के बारे में सोनम को सबब बता दिया गया था, राहुल भी एक हॉस्पिटल में एडमिट था............. सोनम की माँ की हालत सही नहीं थी, उसे ये सबब नहीं बताया गया tha..sonam अपनी बेहेन को लेकर हॉस्पिटल चली गई थी..

मैं महक के साथ बिजी था, जूली दीदी को लेकर पैलेस से निकल चुकी थी, पैलेस के बहार दन्न के आदमी मौजदू थे, वो जूली के पीछे लग गए थे, लेकिन जूली सबब को चकमा देते हुए हर्ष अंकल की कोठी तक्क सेफ पोहंच गई थी, जूली ने हमें कॉल करके सबब बता दिया था..

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दन्न अपने फ्रैंड्स के साथ पवन के बेस में मौजदू एक व्विप रूम में बैठा हुआ था..

जैसे फाॅर्स दन्न के पास थी, जैसे वैपोन दन्न के पास थे, दन्न और उसके फ्रेंड्स को ज़यादा म्हणत नहीं करनी पड़ी, पवन के बेस को अपने कब्ज़े में लेने क लिए..

पवन ने बेस बहुत hi बढ़िया से बनवाया था, यहाँ पर कई कुदरती गुफाएं मौजूद थी, कुछ पवन ने अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर बनवाई थी.. कई ऐसी केव भी थी, जहाँ पवन और उसके आदमी नहीं जा पाए थे, कही ऐसे रास्ते थे जिन्हे कोई भी पूरी तरह से नहीं खोज पाया था.. पवन के कई आदमी गुफाओं में जा कर गुम्म हो गए थे, कइयों की भयानक चीखे भी पवन एंड पार्टनर्स को सुनाई दी थी, इस सबब के चलते पवन एंड पार्टनर्स ने खुद को लिमिट में रखते हुए बेस बनाया था.

कई रास्ते वो बंद कर चुके थे लेकिन सबब hi रास्ते वो बंद नहीं कर पाए थे.

पुरे पहाड़ में hi सुरंगों का एक जाल बिछा हुआ था.. इस सबब के होते हुए भी पवन दन्न के आदमियों से अपना बेस नहीं बचा सका था..

दन्न का नाम भी पवन एंड पार्टनर्स को पस्पा होने पर मजबूर कर गया था, दन्न का नाम सबब hi जानते थे, आधे आदमी मरे तो पवन एंड पार्टनर्स ने घुटने तक दिए थे... दन्न को पवन एंड पार्टनेस की यही ऐडा भा गई, दन्न ने सबब की जान बख्श दी, और सब को क़ैद कर लिया...

दन्न:- साला पवन ने तो बेस बहुत hi बढ़िया बनाया हुआ है.. ऐसा बेस तो मैं भी कभी नहीं बना पाया.. बड़े hi आला पैमाने पर बेस को स्ट्रांग बनाया गया है..

मार्टियन:- अभी तक्क हमने सारा बेस नहीं देखा है, और भी नजाने क्या कुछ हो इस बेस में...........

जोसेफ:- हाँ पारर मुझे बेस पर मौजूद लड़कियां सबसे ज़यादा पसंद आई हाँ, क्या माल ढूंढा है पवन ने.... मेरा तो यहाँ बहुत मन लगेगा...... जोसेफ अपने लुंड को मसलते हुए बोलै........ सब जोसेफ की बात सुनकर जोरसे हस्सन लगे.

मारतें;- ये बात भी तुमने खूब कही, अब्ब ये बेस हमारा है तो यहाँ का सब कुछ भी हमारा हुआ... और यहाँ की लड़किया भी हमारी हुई.. जिसपे दिल ए उसे पकड़ कर छोड़ दो, कौन रोकेगा हमें..

दन्न:- वो सबब तो ठीक है मार्टियन, पारर वो साला स अब्ब उसका क्या करें, रात उसने हमारे ड्रोन को मार गिराया, साला पैलेस को इतना सुरक्षित कैसे कर लिया है उसने.. उसके पास भी हमारे hi जैसी टेक्नोलॉजी है क्या.?

मार्टीअ:- जितना भी स्ट्रांग बन्न जाए, एक बात तो पता चल गई क स पैलेस में रहता है.... हमारे आदमी मौजूद है पैलेस के आस पास... अब्ब कुछ दिनों में अपने इस बेस को HI-TECH बना लें, फिर उसे भी देख लेंगे..

दन्न:- हाँ अब्ब उस स का ताँता ख़तम करना पड़ेगा, बड़ा नाम बना रहा है दिल्ली में, समाज सेवा करेगा, समाज सेवा तो मैं करूँगा दिल्ली में रह के..

इतना बोल दन्न हस्सन लगा, बाकी सबब भी दन्न के साथ मिलकर हस्सन लगे..




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अपडेट ::: 122

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सबब काम हो चूका था, राजा एंड पार्टी वहां से राहुल को और संदीप अपने मतलूबा बच्चे को लेकर निकल लिया था.. वहां रेक रहे मज़दूरो से कह दिया गया था, क अब्ब वो यहाँ से कही और जा कर काम ढूंढें, वाहन पुलिस के चक्कर में फँस जायेंगे..

सोनम अपनी माँ को पहले से hi पैलेस लेकर आ चुकी थी, सोनम की माँ की सेहत अच्छी नहीं थी, उसका ट्रीटमेंट चल रहा था, पति के मरने का ग़म और बच्चो के ग़ायब हो जाने के सदमे में थी वो, सोनम को और छोटी बेटी को पा कर बहुत खुश हुई थी, पारर इकलौते बेटे के गुम्म हो जाने का सुन्न कर फिरसे सदमे में चली गई थी, अब्ब उस दुखियारी के दुःख भी ख़तम होने का समय आ गया था.

एक बात और भी सोचने वाली थी, जब्ब राहुल को वहां 2-3 दिन हुए हाँ तो पहले वो इतने दिन कहाँ रखा गया होगा.. उनके और भी कई अड्डे होंगे, राजा पार्टी ने सबब डिटेल ली थी या नहीं.. ये तो उनके आने पर hi पता चलता....





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जूली ने हमें दन्न के आदमियों के बारे में बता दिया था.. दीदी की वजा से जूली ने कोई रिस्क नहीं लिया था, वर्ण जूली उन्हें रास्ते में hi टपका देती.. जिस गाडी में जूली गई थी, उस गाडी में भी हर तरह सा असला मौजूद था.... हर किसम की सिचुएशन के लिए उसमे वेपन्स मौजूद थे..

मैं और महक भी जूली भी हर्ष अंकल की कोठी की और जाने लगे.. अभी हम फ्री थे तो इंटरव्यू लेने वालो को देखना भी ज़रूरी था.. दीदी सबब कर लेती, पारर इंसानो को पहचानने की परख तो हम दोनों को जूली और दीदी से ज़यादा थी..

जल्द hi हम वहां पोहंच गए.... रास्ते में हमें कही भी दन्न के आदमी नहीं दिखे...........

वहां टोटल 100+ लड़के और लड़कियां थे.......... मैं और महक सभी को घोरसे देखने लगे.... वो भी हमें देख कर समझ गए क हम भी कोई ख़ास हाँ..

सभी को एक नज़र देखने क बाद मैं और महक अंदर दीदी के पास जा पोहंचे..

जूली और दीदी हमें देख कर सरप्राइज हो गए... अंदर एक लड़की मौजूद थी, जिसका इंटरव्यू लिया जा रहा था..

मैं और महक साइड में रखे सूफी पर बैठ गए.. जूली और दीदी लड़की का इंटरव्यू लेने लगीं..

मैं और महक बैठे हुए देख रहे थे.... कुछ देर में लड़की चली गई तो.. तो दीदी के पेओन से कह कर 5 मिंट की ब्रेक ले ली..

दीदी:- भाई तुम यहाँ कैसे..

विजय:- दीदी देखने आया हों क कैसे इंटरव्यू लिया जाता है...

महक:- बहार मौजूद सभी hi हमें सही लगे हाँ, बास 2-4 को छोड़ कर सभी को सेलेक्ट कर लीजिये..

जूली:- रिजेक्ट तो फ़िलहाल किसी को भी नहीं किया जाएगा.. पहले ये दहकने है क किस्मे कितना है दुम्म.... जूली स्टाइल से बोली..

मैं, महक और दीदी हस्सन लगी...

विजय:- कुश्ती करवानी है क्या सभी से..

दीदी:- ये सबब कुश्ती से कम् भी नहीं है भाई.. कुश्ती से मसल्स की मैट मारी जाती है तो, बिज़नेस करते हुए दमाग की चौलें तक्क हिल कर रह जाती हाँ.

विजय:- हाँ वो तो है...

महक दूर के पास पोहंची दूर खोला और वही से बहार मौजूद सभी एम्प्लाइज से कहने लगी....

महक:- आप सबब जो यहाँ पारर मौजूद हाँ, उन सबब को hi जॉब पर रखा जायेगा, अभी बहुत कुछ है आप सबब से कहने क लिए.. इसलिए जो कोई भी इंटरव्यू देने क लिए अंदर आये तो वो ये बात अपने मैं से निकल दे क इंटरव्यू सही न हुआ तो उसे जॉब नहीं मिलेगा.. जो सभी को मिलेगी.. अपने अंदर की स्ट्रेस को ख़तम करें और रिलैक्स होकर इंटरव्यू दें, जो जितना काबिल होगा, उसे उसी हिसाब से पोस्ट भी मिलेगी.. नेक्स्ट भिओ सभी के लिए बेशुमार पैकेजेस भी हाँ.. तो कुछ देर का वेट करें, जॉब न मिल पाने की टेंशन से फ्री हो जाएँ....

हम अंदर बैठे हुए थे.. महक के बोलने से बहार एकदुम्म से hi सन्नाटा छ गया.. फिर जल्द hi सिसकियों की आवाज़ गूंजने लगी.. कुछ लड़के और लड़कियां रोने लग पड़े थे..

मैंने दीदी को इशारा किया.. हम सभी उठ कर बहार आ गए..

इंटरव्यू के आने वालों को देखने लगे.. सभी के सभी hi शॉकेड थे..

मैंने दीदी को देखा तो दीदी एक ऊंची जगा पर जा कढ़ी हुई

दीदी:- आप सबब रोने बंद करें.. पहले मेरी बात सुनलें.. आप में से कई ऐसे भी होंगे जो इंटरव्यू दे दे कर थक चुके होंगे.. कुछ लड़कियां ऐसी भी होंगी, जिन्हे अपनी इज़्ज़ज़त खतरे में महसूस हुई तो वो इंटरव्यू दिए बगैर hi वापिस आ गई होंगी.. इक नयी आस लिए वो आज फिर यही मौजूद हाँ...

मेरा भाई ऐसे लड़कियों को खुद की बहन मानता है, सभी ऐसी लड़कियों को हर मामले में भरपूर सुप्परत दिया जाएगा, उन्हें खुद की और खुद के घर वळून की लाइफ को बेटर बनाने के बेशुमार मुवाके दिए जाएंगे.. इज़्ज़त की सुरक्षा के साथ बेस्ट पैकेजेस भी मिलेंगे..

हमारे बिज़नेस में सब कुछ दूसरों से हट कर होगा, जो वर्कर जितना बेस्ट देगा, उसे उसी हिसाब से पाय भी दी जायेगी, जो जितना बेस्ट प्लान हमें देगा, हम उसे उस प्रॉफिट से कमीशन भी देंगे... इसलिए जितनी ख़ुशी माननी है वो मन लें.. अपना बेस्ट इंटरव्यू दें.. सभी को उनकी काबलियत के हिसाब से अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाएगा..

हमारे साथ रहते हुए पेमेंट का कभी कोई इशू नहीं होगा, एक hi पोस्ट कर कइयों को भी रखा जा सकता है.....

ऐसे hi और भी बहुत कुछ है आप सबब से कहने क लिए.. अभी मेरा भाई और महक ने आप सबब के दिलों से na-ummeedi ख़तम करने क लिए ये तरीका कार अपनाया है..

जो बात मुझे बाद में केहनी थी, वो मैं अभी से hi कह देती हों..

आप सबब को जॉब पर रखा जा चूका है. और आज इंटरव्यू के बाद सभी से कुछ बातें और की जाएंगी, सभी को 2 महीने की पगार भी एडवांस में दी जायेगी.. आपके और आपके घरवळून के डगर मायाले भी जल्द hi हॉल कर दिए जाएंगे.. बदले में हमें आप सबब से सिर्फ और सिर्फ ईमानदारी चाहिए..

आनेस्टी आप के hi काम आएगी, हमें काम के लिए और कई मिल जाएंगे. लेकिन आप में से किसी को हमारे जैसे नहीं मिलेंगे..

दीदी इतना बोल कर नीचे उतर आई.. फिर मैं और महक भी मिलकर सभी का इंटरव्यू लेने लगे..

2 बजे तक्क इंटरवेव्स से फ्री हुए फ्री सभी से कुछ और बातें की.. सभी को एडवांस में hi सैलेरी दी गई, वो सभी खुश खुश अपने अपने घर चले गए.

सभी को दिन का टाइम दिया गया था, उसके बाद सभी को काम पर आना था.. तब्ब तक्क हम डीडे कर लेते.. ऑफिस कहाँ होना चाहिए.. तीनो गैंग्स से बहुत सी प्रॉपर्टी हमें मिली थी, तो कोई अच्छी सी जगा देख कर ऑफिस का काम शुरू कर दिया जाता..

आधे घंटे बाद हम फिरसे पैलेस में मौजूद थे.. पैलेस के पास hi हमें दन्न के आदमी भी दिख गए थे..

महक:- इनका भी फ़ौरन hi इंतेज़ाम करना पड़ेगा....

विजय:- जूली इसी साइड में जो कहती ली गई थी, उसका काम कहाँ तक्क पोहंचा..

जूली :- वो सबब रेडी है.. ज़यादा टर्र तो पहले से hi मौजूद था, बास अपने हिसाब से कुछ और उसमे ऐड किया गया है.. सुराग का काम भी जल्द hi मुकम्मल होने वाला है..

विजय:- तो फिर दन्न के आदमियों को घेर कर उनका कला कमा करते हाँ.. हमारे पैलेस के आस पास किसी को भी फटकने की इजाज़त नहीं है..

जूली:- हो जाएगा.. तुम टेंशन न लो..

महक और दीदी अंदर पैलेस में चली गयी और मैं जूली के साथ कण्ट्रोल रूम की तरफ जाने लगा..

जूली:- विजय बेसमेंट में चलते हाँ, वहां कुछ काम है.... जूली के बोलने से मई समझ गया.. मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई.. जूली भी मुझे देख मुस्कान देने लगी..

जूली:- इतने दिन हो गए हाँ, आज तो आग बुझा दो मेरी.. अभी तक्क तो मैं खुल कर तुमसे सबब नहीं कर पाई.. तुम्हारा पूरा प्यार भी मई नहीं पा सकीय..

विजय:- कल से hi मैंने भी सबब नोट कर लय है, और अभी मेरा भी कुछ औसा hi मैं था..

जूली:- रियली, तो चलो फिर देर क्यों कर रहे हो.. कही यही पर hi ना चुतरस टपकने लगे... जूली आवाज़ को नशीला बनाते हुए बोली..

जूली की बेकरारी को करार देने क लिए मैं और जूली बेसमेंट में मौजूद एक रूम की और बढ़ चले..

30 मिंट बाद........

जूली की छूट को अच्छे से छोड़ने के बाद अब्ब जूली की गांड का नंबर था, जूली बुरी तरह से हांप रही थी, पहले एक बार जूली को छोड़ कर उसकी छूट का पानी मैं निकल चूका tha,lekin जूली की मुसलसल चुदाई नहीं हुई थी..

मेरा लुंड अभी भी जूली की छूट में था, और जूली मेरे ऊपर गिरी हुई अपनी साँसे बहाल कर रही थी.... कुछ देर में जूली की सांस ठीक हुई तो जूली मेरे होंटो पर टूट पड़ी... जूली मुझे वाइल्ड किश करने लगी....... जूली भी सबकी तरह से मेरे लुंड और मेरे प्यार पर कुर्बान हुई जा रही थी.. कुछ देर मुझे किश करने क बाद जूली ने मेरे होंटो को छोड़ दिए....

जूली:- ahhhhhhhhhh विजय कितना मज़ा आया तुम्हरे लुंड को अपनी छूट में लेकर, आज मई सही से चूड़ी हों, उस दिन तो बास जल्दी में hi तुमने मेरी छूट के लुंड घुसा दिए था... आज सुकून तो तुम्हारा लुंड लिया है तो मई बता नहीं सकती क मुझे कितना मज़ा आया है..

विजय:- मुझे भी तो तुमने बहुत मज़ा दिए है, कितने जोश के साथ तुम चुद रही थी, मेरे अंदर भी करंट दौड़ा दिया तुमने...

जूली:- हाँ वो तो है, आज एक लम्बे आरसे के बाद मई पुरे मैं से चूड़ी हों, इसलिए मैं कुछ जोश में आ गई थी..

विजय:- तो अब्ब क्या करने का इरादा है.......

जूली मुझे नउघैत स्माइल देते हुए, मेरे लुंड को अपनी छूट में लिए हुए गोल गोल गोमती हुई बोली." अब्ब गांड में भी तुम्हारा लुंड लेके देखना है, मैं देखना चाहती हो क छूट के तरह से तुम्हारा लुंड मेरी गांड में जाते हुए मुझे वैसा hi मज़ा देगा, कम् देगा या ज़यादा मज़ा देगा...

विजय;- तो फिर देर क्यों कर रही हो, मुझे और मेरे लुंड को भी तो तुम्हारी गांड का प्यार मिलना चाहिए...

जूली हस्ते हुए उठी और मेरे लुंड को अपनी छूट से निकल पर अपनी गांड के छेड़ पर सेट कर दिए..

विजय:- धयान से मेरा मोटा लुंड कही तुम्हरी गांड को न पहाड़ दे...

julie:-hasste हुए) मेरी गांड बहुत पहले से hi पहटि हुई है, तुम उसकी चिंता मैट करो.. कुछ दिन बंद रहने से थोड़ी टाइट हो गई है, कुछ दर्द भी तो होगा, पारर मुझे दर्द नहीं तुम्हारे लुंड के मज़े से ग़र्ज़ है... इतना बोल कर जूली मेरे लुंड को अच्छे से थाम कर अपनी गानन्द के छेड़ पर टिकते हुए धीरे धीरे नीचे होने लगी, मेरे लुंड का सुपड जूली की गांड के छेड़ पर था, जूली के बैठते hi वो जूली की गांड के छेड़ को खोलता हुआ अंदर जाने लगा... जूली के चेहरे पर दर्द के भाव आने लगे, जूली दर्द को सहन करते हुए धीरे धीरे नीचे बैठती चली गई, 6" तक्क लुंड जूली की गांड में घुस चूका था, जूली ने अपने नीचे वाले होंठ को अपने दांतों में ले लिया था, जूली की गांड में मेरा लुंड फंसा हुआ था, जूली की गांड उतनी भी नहीं खुली हुई थी, जितना जूली बता रही थी, जूली को अच्छा ख़ासा दर्द हो रहा था..

आखिर का बचा हुआ लुंड जूली के हाथ में था, और जूली मेरी आँखों में देखती हुई अचानक से hi अपने हाथ को मेरे लुंड पार्स हटा कर नीचे बैठ गई, मेरा पूरा लुंड जूली की गांड में घुसा तो जूली की एक ज़ोरदार चीख निकल गई..

जूली की आँखों में नमी सी आ गई थी, जूली कितनी स्ट्रांग थी, पारर जूली की गांड में उतना दुम्म नहीं था, जो मेरे मोठे लुंड का दर्द झेल सकती, गांड का दर्द चलता हुआ जूली की आँखों में पानी बन्न कर बहने लगा... कुछ देर जूली खुद को रिलैक्स करती रही...

जूली:- साला मैंने कभी सोचा भी नहीं था, क फिरसे किसी का लुंड लेके मुझे दर्द होगा, सच में hi विजय तुम्हरे लुंड में बहुत दुम्म है, मेरी छूट की धज्जयां तो इसने उड़ाई hi हाँ, मुझे गांड का दर्द भी दे दिए, दर्द पा कर मुझे बहुत सुकून मिला है विजय.... ितं चुड़के भी दर्द.......... ये बात भी मुझे बहुत मज़ा दे रही है...

ितं बोल के जूली मेरे लुंड पर ऊपर होने लगी, मेरा लुंड फिरसे जूली की गांड के अंदर से निकलने लगा, जब सुपड तक लुंड बहार आया तो जूली एक बार फिरसे पुरे जोरसे मेरे लुंड पर बैठ गयी, मेरा लुंड जूली की गांड को चीरता हुआ अंदर घुसता चला गया, जूली इस बार फिरसे चीखी, जूली बे मेरे लुंड को फिरसे सुपड तक बहार निकला , और एक झटके में फिरसे बैठ गई, जूली बार ऐसा कर रही थी, 3 बार करते हुए जूली की मस्ती से भरपूर चीखे निकलने लगी थीं, जूली दर्द भरा मज़ा ले रही थी, उसे गांड में लुंड लेते हुए दर्द सहते हुए छोड़ने में मज़ा आने लगा था..

कुछ देर बाद जूली मेरे सीने पर दोनों हाथ रखते हुए मेरे आँखों में देखते हुए मेरे लुंड को अपनी गांड में लिए गोल गोल घूमने लगी..

जूली:- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह विजय आज गांड छुड़ा के भी मुझे बहुत मज़ा मिल रहा है, हाय विजय तुम्हारा लुंड कितना बड़ा और मोटा है, मेरी तो गांड hi पहाड़ के रख दी तुम्हरे लुंड ने, कितना दर्द और कितना मज़ा मुझे दे रहा है मुझे तुम्हारा लुंड.. hmmmmmmmmmm अह्ह्ह्हह ufffffffffff ी ऍम hi हेवन विजय, लुंड पर सवार होकर मई तो हेवन में जा पोहंची हों.......

जूली ने स्पीड बढ़ा दी और मेरा मोटा लुंड जूली की गांड को खोलता हुआ स्पीड से अंदर बहार होने लगा, जूली सिसकियाँ लेती हुई मेरे लुंड पर उछलने लगी थी, मैंने जूली के फूल चुके बूब्स को थाम लिया, बलून जैसे जूली के बूब्स को पकड़ कर मैं दबाने laga,julie अपना सर्र पीछे किये हुए स्पीड से मेरे लुंड को अपनी गांड में ले रही थी, जूली की मस्ती और आहें बढ़ने लगीं तो मैंने भी जूली के दोनों दूध और निप्पल्स कस के दबाने शुरू कर दिए, जूली की आहें और भी बढ़ने लगी, जूली पुरे चरम से मुझसे चुद रही थी,..

जूली ने अपने एक हाथ को अपनी छूट के दाने पर रखा और मसलने लगी, जूली एक बार फिरसे झड़ने वाली हो गई थी, जूली को मज़े में देख कर मई भी पुरे मूड में आ गया था, जूली की टाइट गांड ने मेरे लुंड की रगों को और भी फुलाना शुरू कर दिए था........ जल्द hi मेरे लुंड का पानी भी जूली की गांड में निकलने वाला था, जूली के जोश के आगे मेरा लुंड भी आज जल्दी झड़ने के मूड में आ गया था, जूली पुरे रिशम से मेरे लुंड पर उछाल रही थी..

कुछ देर गुज़री तो जूली की स्पीड और भी खतरनाक रूप धारण लगी, मेरे लुंड भी पानी छोड़ने के लिए तयारी करने लगा..

जूली:- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ siiiiiiiiii अह्ह्ह्हह विजय मई गई, गांड में लुंड लेके मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है...

विजय;- अह्ह्ह मेरी आज तो तुम मेरा भी पानी जल्दी निकल देने वाली हो, और स्पीड से मेरे लुंड पर ऊपर नीचे होती रहो, मेरा लुंड भी पानी छोड़ने वाला है..

मेरा जोश बढ़ा तो मैं भी अपनी गांड उठा उठा के जूली की गांड को पेलने लगा. जूली की सिसकियाँ बढ़ें तो मेरे अंदर भी जोश बढ़ने लगा..

जल्द hi मेरे लुंड ने जूली की गांड में अपना सारा माल छोड़ना शुरू कर दिए, जूली भी स्पीड से चुदती हुई, आहें भर्ती हुई, मेरे ऊपर ढेर हो गयी..

हम दोनों की सांस बहुत तेज़ थी, आज जूली से चुदाई का बहुत मज़ा आया था, आज जूली ने अपना असली जलवा दिखाया था, जूली पुरे जोश से मेरे लुंड से चूड़ी थी, जितना मज़ा जूली ने लिया था, जूली ने उतना hi मज़ा मुझे भी दिया था..




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अपडेट ::: 123


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राहुल को हॉस्पिटल ले जाया गया था, वहां उसका ट्रीटमेंट हो रहा था, उसे हैवी दोसे दी गई थी ड्रग्स की.. वो कई दिनों से hi नींद में था, उसकी हालत खतरे से बहार थी, पर उसकी हालत सही नहीं थी... सिर्फ सोनम को बताया गया था.. सोनम अपने भाई के पास आ गई थी.. सोनम की माँ अपने इकलौते बेटे को ाईस हालत में देख कर सहन नहीं कर पाती, और उसकी हालत और भी ख़राब हो सकती थी..

सोनम अपने भाई को पा कर जहाँ बहुत खुश थी, वही उसकी हालत देख कर बहुत रोइ भी थी वो..

संदीप सिंह बच्चे को लेकर अपने इलाके में चला गया था.. गुरनाम उसके साथ था... कुछ वहां के करीबी हॉस्पिटल में उसका इलाज चल रहा था.. बच्चे के माता पिता अपने बच्चे को पा कर बहुत खुश हुए.. जब्ब उन्हें पता क सनीप ने ये सबब किया है तो वो उसके पेर्रों में गिर गए थे..

संदीप:- दीदी क्यों मुझे पराया कर रही हाँ, सोनू मेरा भी तो बीटा hi था.. मेरा कोई नहीं है तो मुझे सोनू से अपणु जैसा hi प्यार है, आप दोनों ऐसे मेर पैरों में न गिरें..

सोनू के पाटा पिता, और दूसरे सभी संदीप का धन्यवाद् करते नहीं थक रहे थे.. संदीप ने सभी को घर का चिराग़ वापिस ला कर दिया था..





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तीनो गौदामो से और भी कई लड़कियों और बच्चो को बचा लिया गया था.. मीडिया तक्क भी ये बात पोहंचा दी गई थी, और इस बार मीडिया इस खबर को चलते पुलिस और कम की बहुत तारीफ कर रहा था..

जेल के हादसे के बाद से पुलिस और कम की खुश इज़्ज़त उछली गया थी, बच्चो और लड़कियों को बचा लेने पर मीडिया ने अच्छे रिमार्क्स देने शुरू कर दिए थे..

सभी बच्चो को और लड़कियों को फोरि ट्रीटमेंट के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कर दिया गे..

मीडिया पर खबर चलने के बाद जिनके बच्चे और लड़कियां ग़ायब थीं..

वो सभी परिवार हॉस्पिटल की और भाग खड़े हुए ..

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जूली को ठंडा करने के बाद मई पैलेस में दाखिल हुआ तो सभी हाल में बैठे हुए थे.. मुझे देख कर सबब hi चहकने लगे....

मुझे महक और दीदी नज़र नहीं आये तो मैंने माँ से पुछा दीदी के बारे में..

माँ:- वो अभी अपने रूम में गई है, कोई काम था की..

विजय:- हाँ माँ एक छोटा सा काम था दीदी से, मैं उनसे मिलके आता हों.. मैंने माँ को आंख मारी तो माँ की आंख बड़ी हो गई..

माँ;- चल मई भी तेरे साथ hi चलती हों..... मैं भी मुझसे कुछ जान्ने क लिए बेचैन हो गई थी.. पूजा दीदी और प्रिय का धयान मुझपर ज़यादा था, तो उनके भी कान खड़े हो गए थे मेरे माँ को आंख मारने से.. लेकिन अभी दोनों ने hi सबर कर लिया था..

माँ मेरा हाथ थाम कर अंदर की और बढ़ने लगी.. माँ के चलने से hi मुझे माँ की बेचैनी का पता चल रही थी, मैं भी माँ के साथ चलता हुआ मंद मंद मुस्कुरा रहा था..

सभी से दूर पोहंचे तो माँ बोली..

माँ:- विज्जू बीटा, तुम्हारे अंदाज़ से मुझे लग रहा है, जैसे शुशी को भी लाइन में लगा दिया है.. मैंने आस पास देखा तो कोई नहीं था.. मैं रुक गया और माँ को अपनी बहन में भर लिया..

माँ भी मेरे सीने से लगते हुए खुश हो गयी. मैंने माँ को किश किया..

विजय:- हाँ मेरी डार्लिंग माँ दीदी आपके जैसी hi हाँ, तो मैं कैसे उन्हें माफ़ कर सकता हों, उसका भी तो सबब कुछ आप के जैसा है, बास अभी उनकी छूट और गांड का दीदार नहीं kiya,ek बार रगड़ कर उनकी छूट का पानी निकला है और कुछ ज़यादा नहीं किया अभी...

माँ हैरान रह गई..

माँ:- विज्जू बीटा तुमने शुशी के साथ इतना सबब कर लिया, वो तो इस टाइप की है hi नहीं.. वो तो पैलेस के माहौल को भी सही नहीं समझती थी, बास मज़बूरी में सबब बर्दाश्त कर रही थी, उसे सेक्स से इतना लगाओ नहीं है..

vijay:-(maa के चुत्तड़ को मसलते हुए) माँ जिसके पास छूट हो वो कैसे रह सकती है बिना चुदाई के.. दीदी तो वैसे भी आप से भी ज़यादा पियासी हाँ..

माँ:- मैंने भी उसके बदन की गर्मी महसूस की थी, पारर ये नहीं अंदाज़ा था क वो भी तुमसे पत् जाएगी, वो भी इतनी जल्दी.. हैरत है.

विजय:- माँ इसमें हैरत की क्या बात है.. आपका बीटा तो है hi बेशरम, और दीदी भी तो अंदर से इस सबब क लिए तड़प रही हाँ, उसकी सेक्स लाइफ कैसी चल रही है, ये मैं जान गया हों, प्रॉब्लम क्या हाँ उनकी लाइफ में.. ये अभी नहीं जान पाया..

माँ:- मुझे भी उसने अभी तक्क कुछ नहीं बताया है.... तू उसका अच्छे से ख्याल रख, और उसके दिल का भेद मालूम कर... उसके अंदर का सारा दुःख बहार निकाल, मुझे वो बहुत पायरी है.. उसे मई हर दुम्म hi हस्ते हुए देखने चाहती हों.. कोई बात दबी हुई है उसके अंदर...

विजय:- तो मुझे जाने दो ना, कही देर न हो जाए और वो बहार निकल आएं..

माँ:- हाँ हाँ तू जा, और मुझे बाद में सबब बताना, पहले भी तूने मुझे कुछ नहीं बताया... अब्ब तू भी बहुत कुछ छुपाने लगा है.. माँ ने मुझे किश की, और फिर मुझे छोड़ कर वापिस चली गई..

मैं दीदी के रूम की और बढ़ गया.. दूर लॉक नहीं था तो मैं डोर खोल कर अंदर जा घुसा. दीदी बाथरूम में नाहा रही थी.. मैंने दूर को अंदर से लॉक कर दिया..

मेरे होंटो पर मुस्कान आ गयी.. मैं बाथरूम के पास गया तो दूर को खोलने के लिए दबाओ बढ़ाया तो दूर अंदर से लॉक था..

सहित दीदी ने तो मूड hi बदल दिया मेरा,.. चलो कोई बात नहीं.. मई साइड में दीदी के बहार आने का वेट करने लगा..

दीदी अंदर ख़ामोशी से नाहा रही थी, वर्ण तो अक्सर hi लेडीज गुनगुनाते हुए नहाती हाँ...

कुछ देर बाद दीदी नाहा कर फारिग हुई तो मई समझ गया क अब्ब दीदी अंदर से बहार निकलेगी..

मैं साइड में हो गया जहाँ फ़ौरन hi दीदी की नज़र मुझपर न पड़े..

दीदी बाथरूम से टॉवल में निकलीं.. दीदी सीधे वार्डरॉब की और बढ़ गए..

और वहां से अपने अंडर गरमेंर्टस निकलने लगीं, मेरे रहते उन्हें खुद से अंडर गारमेंट्स निकलने की क्या ज़रूरत थी..

मैं धीमे क़दमों से चलता हुआ दीदी के पीछे पोहंचा,. दीदी अपनी मस्ती में लगी हुई थीं उन्हें क्या पता क अब्ब उनके साथ क्या होने वाला है..

मैंने टॉवल को पकड़ कर एक झटका दिया, टॉवल दीदी के बदन से अलग हो गया..

oiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaa

और दीदी चीखती हुई घूम गईं.. दीदी ने गिरने के डर से अपनी ऑंखें बंद कर ली थीं..

मैंने दीदी को थाम लिया, दीदी के गीले बदन से नहाने के बाद की स्मेल आ रही थी. वो समल मुझे मज़ा देने लगी और मैं दीदी के बदन की खुशबु को अपने अंदर उतरने लगा..

दीदी ने जल्द hi खुद को संभल लिया.

दीदी:- विजजूउउ ये क्या बेशर्मी है, ऐसा करने की क्या ज़रूरत थी... दीदी कुछ हाइपर हो गई थीं.. मैं दीदी को कोई भी जवाब दिए बिना hi उनके बदन को सूंघने अलग..

दीदी:- विज्जू छोडो मुझे, शर्म नाम की भी कोई चीज़ है तुममे या साडी hi बेच चुके हो.. छोडो मुझे..

मैंने दीदी की गीली पीठ पर हाथ चलने शुरू कर दिए.... दीदी के बदन में कुरैरंट सा दौड़ने लगा..

दीदी की छूट से पानी निकलने के बाद फिरसे दीदी की छूट ने गरम होकर दीदी के बदन को गरम कर दिया था.. दीदी की छूट में कितनी गर्मी थी, मेरा लुंड एक झटके में hi खड़ा होने लगा.... दीदी ने जैसे hi मेरे लुंड को जागते हुए महसूस किया..

दीदी:- भाई प्लीज अभी मुझे छोड़ दो, मेरा टॉवल भी तुमने उतार दिया है, मुझे बहुत लज्जा आ रही है..

दीदी मेरे हाथो की रगड़ से मूड में आने लगी थी, उसकी गीली, नरम और ागरम पीठ पर मेरे खुरदरे और सख्त हाथ जैसे hi चले दीदी के बदन की कम्पन भड़ने लगी थी, दीदी के पानी से गीली छूट अब्ब चुतरस में नहाने लगी थी.. मैंने दीदी की गांड की दरार में एक ऊँगली दाल दी..

दीदी:- ोीीीी maaaaaaaaaaa भाई न करो ना, देखो मुझसे ये सबब सहन नहीं होता...

विजय:- दीदी क्यों सहन नहीं होता आपसे ये सबब..

दीदी:- नहीं भाई मई तुम्हे कुछ नहीं बता सकती. प्लीज मुझे छोड़ दो.. मुझे टॉवल दे दो, मुझे कपडे भी पहनने हाँ..

विजय:- दीदी क्या ज़रूरत है कपडे पहनने की, आज हम फिरसे प्यार करते हाँ न, जैसे उस दिन आपको मज़ा दिया था, आज फिरसे वही मज़ा मई आपको देता हों ना..

दीदी:- मुझे नहीं लेना कोई मज़ा वज़ा, और न hi उस दिन मुझे कोई मज़ा आया था..

दीदी मुझसे छूटने की कोशिश करते हुए बोलीं..

मैंने ऐसे hi दीदी को उठाये हुए बीएड की और बढ़ गया, दीदी और भी झाटपटने lagi..."vijjuuu मेरे भाई मुझे छोड़ दो, देखो तुम सबब ठीक नहीं कर रहे हो"

मैंने दीदी को बीएड पर पटक दिए, दीदी ने अचानक से hi खुद को बीएड पर गिरे पाया तो वो मुझे देखने लगी.... फिर जैसे hi दीदी को अंदाज़ा हुआ क मैं उनके को नंगा कर चूका हों और अब उनके चमकते हुए गीले शरीर को देख रहा हों तो वो झट से बीएड से उतरना लगीं, मैंने दीदी के पेअर पकड़ लिया और दीदी के ऊपर hi कूद गया..

दीदी तेज़ सांस लेते हुए, " भाई मुझे छोड़ दो, देखो तुमने मेरा सबब कुछ देख लिया है"

विजय:- दीदी तो क्या हुआ, मई आपका भाई hi तो हों, मई आपक्सा सब कुछ देख सकता हों..

दीदी:- ावें hi तुम मेरा सबब कुछ देख सकते हो. मेरा सब कुछ मेरा हस्बैंड hi देख सकता है..

विजय:- मुझे तो नहीं लगता क आप अपना सबब कुछ अपने हस्बैंड को भी दिखती hongi..didi मेरी बात पर अचानक से hi चुप हो गईं.. और नज़रें चुराने लगी

मैंने दीदी को सीधा किया फिर दीदी क ऊपर आ कर दीदी को किश करना शुरू कर दिए, दीदी के नंगे बूब्स मेरे सीने पर दबने लगे, दीदी के बूब्स बहुत ज़यादा गरम थे, सख्त तो वो हमेशा से hi थे..

दीदी अपने होंठ मेरे होंटो से छुड़ाना चाहती थीं लेकिन मैंने दीदी का फेस कस के थमा हुआ था.. कुछ देर दीदी को किश करने क बाद मैंने दीदी को छोड़ दिया..

दीदी की आँखों में देखते हुए..

विजय:- दीदी सच बताना आपको मेरा किश करना बुरा तो नहीं लगा.. दीदी ने मुझे देखा और फिर अपनी ऑंखें फेर लीं... दीदी कुछ नहीं बोली थी, दीदी अपने मैं की बात अपनी जुबां पर नहीं लाना चाहती थी. मैं कुछ भी करूँ दीदी के साथ ज़बरदस्ती भी करूँ दीदी कुछ देर मुझसे लड़ेंगी, पर मुझे अपने मैं से रोकेंगी नहीं, ये मैं जान गया था..

मैं थोड़ा सा और ऊपर उठा और दीदी के बूब्स को देखने लगा.. मैं नीचे झुका और दीदी के निप्पल को अपने मोहन में ले लिए...... आआआआआ maaaaaaaaaa भाई न करो ना मुझे गुदगुदी हो रही है.... अह्ह्ह्हह भाई छोड़ दो ना अपनी दीदी को..

मैं दीदी के दूसरे बूब्स को भी दबाने लगा, दीदी के दोनों hi बूब्स पूरी तरह से फूले हुए थे, दीदी के दोनों निप्पल अकड़ चुके थे, पता नहीं कभी ये ढीले भी होते थे या नहीं..

दीदी के हाथ मेरे सर्र पर आ गया दीदी अब्ब मस्ती में थी, दीदी तो रेगुलर hi मस्ती में रहती थी, वो खुद से लड़ कर खुद को आगे बढ़ने से रोक लिया करती थी. आज दीदी का खुद पार्स कण्ट्रोल खोने लगा था.. मैं पुरे मैं से दीदी के दूध को पि और दबा रहा था, दीदी की छूट ने तो नदियन hi बहा दी होंगी..

ये मुझे अंदाज़ा हो गया था. दीदी आहें भरने लगी थी.. दीदी के हाथ का दबाओ मेरे सर्र पारर बढ़ने लगा.. मैं दीदी का मैं जान गया था..

मैंने दीदी के दूध छोड़े और दीदी के ऊपर से उठ खड़ा हुआ.. दीदी की ऑंखें बंद थी और दीदी लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी, मैं दीदी को देखते हुए अपने कपडे उतारने लगा, जल्द hi मैं पूरा नंगा हो कर दीदी के ऊपर आ गया था..

दीदी के दूध फिरसे मेरे मोहन और हाथ में आये तो दीदी ने फिरसे मेरे सर्र पर अपना हाथ रखा दिए, इस बार मेरा लुंड दीदी की छूट पर था.. वो पूरी तरह से जाग उठा था, इस बार मेरा लुंड सही से दीदी की छूट पर था, मैं दीदी के दूध को पीने लगा, दूसरे हाथ से दीदी के दूसरे दूध को निचोड़ने लगा..

दीदी को अचानक से hi एहसास हुआ तो दीदी ने मेरे सर्र के बालों को पकड़ कर मेरे सर्र को ऊपर कर दिए मैं दीदी की आँखों में देखने लगा.. दीदी भी मेरी आँखों में देख रही थी, दीदी की ऑंखें पूरी तरह से लाल हो चुकी थी..

didi:-bhbh..bbhaaai तुमने अपने कपडे भी उतार दिए, कुछ भी नहीं रहने दिया.. दीदी इतना बोल कर फिरसे ऑंखें बंद कर गई... मैं दीदी को देख रहा था, दीदी पूरी तरह से मस्ती में थीं, मुझे नंगा महसूस करके कुछ हैरान ज़रूर हुई थी, लेकिन इस बार दीदी की मस्ती ज़यादा बढ़ी हुई थे, दीदी ने कुछ और नहीं कहा..

मैं इस बार नीचे हुआ और दीदी की नाभि पर आते हुए दीदी की नाभि को चूमने चाटने लगा.. hmmmmmmmmmmmmmm दीदी आहें भरने लगी, दीदी आज पूरा मज़ा ले रही थी. मेरी जेब की नोक दीदी की नाभि में घुसी तो दीदी के बदन ने एक झटका खाया..

ahhhhhhhhhhhhhhhh bhaiiiiiiiiiii yeeeeeeeeee kyaaaaaaaaaaaaa karrrrrrrrrrr रही

hoooooooooooooooooooooo दीदी ने इस बार बहुत बड़ा झटका खाया और दीदी की ज़ुबान भी पूरी तरह से खुल गई..

दीदी की गांड ऊपर उठ गई थी.. मैं दीदी की नाभि में अच्छे से अपनी जीब फेरने लगा, दीदी की मस्ती कुछ बढ़ गई... मैं सरकते हुए नीचे आने लगा, दीदी की नदी के नीचे वाले हिस्से को चूमते चाट ते हुए दीदी की छूट पर जा पोहंचा, दीदी की छूट से आग की लपटें निकल रही थीई..

अचानक से hi मेरा मैं बदला तो मैंने अपनी पोजीशन बदल दी.. दीदी तो अपनी मस्ती में थी, दीदी को होश hi कहा था, मैं दीदी के सर्र वाली साइड में आया और अपने लुंड को दीदी के चेहरे पर करते हुए दीदी की छूट पर झुकता चला गया, दीदी कुछ करती उससे पहले hi मेरा मोहन दीदी की छूट पर था, मैं दीदी की दोनों टांगें साइड में खोल चूका था, दीदी की छूट के जुड़े हुए लिप्स मैंने दोनों हाथो के अंगूठे से खोल दिए थे, दीदी की छूट के अंदर का सबब hi गुलाबी गुलाबी था, मेरी जीब दीदी की छूट में छेड़ पर चलने लगी..

दीदी:- हयईईई mainnnnnnnnnnn marrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiii bhaiiiiiiiiii

yeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

मेरा लुंड दीदी के चेहरे पर था, दीदी अपने सर्र को लेफ्ट राइट करते हुए मेरे लुंड से बचने की कोशिश में लगी हुई थीं.. मेरा घोड़े जैसा लुंड दीदी के गालों से टकरा रहा था.. दीदी की छूट मेरे मोहन में थी, दीदी कैसे सबब सहन कर पाती..

दीदी को मज़ा भी बहुत ज़यादा आ रहा था, दीदी की शर्म भी मेरे लुंड की वजा से आज साड़ी सीमायें पार कर गई थी, मेरे लुंड की हीट ने दीदी को पागल भी बना दिया था, दीदी की छूट पर मेरी चल रही जीब ने दीदी को और भी ज़यादा बेचैन कर दिए था...

दीदी की आहें और सिसकियाँ बढ़ने लगी थी.. दीदी की छूट में तेज़ी से चल रही मेरी जीब ने दीदी की बर्दाश्त को ख़तम करना शुरू कर दिए.....

दीदी;- ahhhhhhhhhhhhhhh bhaiiiiiiiiiiiiiiiii maiiiiinnnnnnnnnnnnn marrrrrrrrrrrr

jaoooooooooooonnnnnnnngiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii... मुझे छोड़ दोऊ, मेरी

andarrrrrrrrrrrrr aagggggggggggggg laggneeeeeeeeeeee lagiiiiiiiiiiii हैईईई

ahhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa ............... दीदी ने मेरे लुंड को अपने एक हाथ में पकड़ लिया था, दीदी के बदन ने झटके खाने शुरू कर दिए थे, दीदी अब्ब बास किसी भी पल झड़ने वाली थीई, दीदी की पकड़ मेरे लुंड पर बढ़ने लगी थी, दीदी बहुत ज़यादा हॉर्नी होने लगी दीदी की छूट में भी बहुत ज़यादा मिक़्दार में पानी छोड़ना शुरू कर दिए था.. मेरी एक ऊँगली दीदी की छूट के छेड़ से टकराए तो मैंने दीदी की छूट में अपनी वो उनलगी डालनी शुरू कर दी, थोड़ी सी उनलगी दीदी की छूट में दाल कर मई दीदी की छूट को चाट रहा था, दीदी मेरे लुंड को और भी ज़यादा कस के पकडे हुए थी.. दीदी कही मेरे लुंड को तोड़ hi न दे.. इतनी सख्त पकड़ थी दीदी की..

मेरा लुंड दीदी के हाथ में था, मेरे लुंड का सुपड दीदी के होंटो पर था, दीदी की गरम साँसे मेरे लुंड अच्छे से महसूस कर पा रहा था.. दीदी तेज़ सांसे लेती हुए मेरे लुंड को कस के पकड़ते हुए, दीदी झड़ने लगी, दीदी की छूट ने इस बार पानी की नदियां hi बहा दी थीई..

मैं दीदी की छूट का पानी पीने लगा, मैं तो सोचा था क दीदी बेचैन हो कर मेरे लुंड को अपने मोहन में ले लेंगेगी, पारर दीदी ने ये काम नहीं किया था..

मैं दीदी के ऊपर से उठा दीदी के हाथ मेरे लुंड पर ढीले पद चुके थे, मेरे उठते hi मेरा लुंड दीदी के हाथ से छूट गया, मैं दीदी के पैरों की तरफ आया दीदी के दोनों पेअर उठा कर खोल दिए .. दीदी की छूट मेरे सामने थी, दीदी की छूट को देख कर मुझे ऐसा लगा जैसे दीदी सालों से न चूड़ी हों, मैंने दीदी की छूट के लिप्स खोले और अंदर झाँकने लगा, दीदी की छूट को देखकर मैं हैरान रह गया. दीदी की छूट किसी कुंवारी लड़की जैसे दिख रही थी..

दीदी अभी भी अपनी सांस बहा कर रही थी, दीदी को अपनी छूट का होश hi कहाँ था, मैंने अपनी एक फिंगर फिरसे दीदी की छूट में घुसा दी, मेरी ऊँगली थोड़ी सी hi दीदी की छूट में गई थी, क उसने और आगे जाने से इंकार कर दिए..

मैं भी ज़यादा और आगे अपनी फिंगर को नहीं बढ़ाया, अब्ब मई जान गया था क दीदी अभी तक्क कुंवारी हाँ, मई दीदी के दुःख को जान गया था, दीदी का दुःख भी कम् नहीं था, दीदी शादी शुदा होक भी अभी तक्क कुंवारी थी.. दीदी ने कितना सहन किया होगा, सालों से दीदी कितनी भयंकर आग में जल रही थी.. मुझे दीदी पर तरस और प्यार आने लगा..

मई सीधा हुआ, और दीदी के पेअर खोले हुए hi दीदी के ऊपर आ गया, मेरा लुंड फिरसे दीदी की छूट के साथ जुड़ चूका था....

दीदी:- देख लिया सबब, जान गए न भाई तुम अपनी दीदी के दर्द को...

दीदी की आँखों में आंसू नहीं आये, अभी दीदी छूट के पानी के बह जाने के नशे में थीं, दीदी मेरी आँखों देख कर वो बात बोल रही थी, जो दीदी इतने दिनों से नहीं कह पाए थीं... मैं दीदी की आँखों पर झुका और दीदी की आँखों को चूमने लगा, दीदी की दोनों आँखों को चूम कर मई फिरसे दीदी की आँखों में देखने लगा, अब्ब दीदी की आँखों में शर्म नहीं थी, दीदी का मई सबब hi देख चूका था, दीदी का दर्द भी जान गया था.. मेरे होंठ दीदी क होंटो से मिले तो मैं दीदी के होंटो को धीरे धीरे से पीने लगा, दीदी ने भी इस बार मुझे पूरा रिस्पांस देना शुरू कर दिए था.. दीदी मेरी पीठ सहलाते हुए मुझे किश कर रही थी..

कुछ देर बाद हमने किश तोड़ दिए, फिरसे दीदी की आँखों में देखा तो दीदी की आँखों में प्यार hi प्यार था मेरे लिए...

विजय:- दीदी अपना दर्द अपणु से कह देना चाहिए, दर्द ज़यादा बढ़ जाए तो अंदर hi अंदर इंसान को ख़तम करना शुरू कर देता है..

दीदी:- भाई कुछ दर्द ऐसे भी होते हाँ, जिन्हे खुद के अंदर दफ़न करना पड़ता है, तुम तो अब्ब आये हो ना मेरी लाइफ में, तुमसे पहले कब मेरी लाइफ में कोई ऐसा था, जिसे मई अपना दर्द कह पाती, तुमसे भी तो मैंने नै kaha,tumne तो खुद से hi सब जान लिया है, मई कैसे अपने घरवळून को दुखी करती, वो तो खुद को hi दोषी मानने लगते, सबकी hi मर्ज़ी से तो मैंने ये शादी की थी, अब्ब मुझे या किसी को क्या पता था, क शादी के नाम पर हमे धोका दिए जा रहा है...

विजय:- दीदी मुझे साड़ी बात बाआओ..

didi:-aansu बहती हुई) विज्जउ जिस दफ्तर में मई काम करती थी, जहाँ मैंने नौकरी छोड़ दी थी, उसी कंपनी में एक घटिया इंसान भी काम करता था, वो मुझपर बुरी नज़र रखता था, मैंने उसकी अच्छी खासी बेइज़्ज़ती की थी, उसे उस कंपनी से निकल दिए गया, लेकिन वो बाज़ नहीं आया. उसके कुछ दोस्त भी थे उसी कंपनी में, जिनको उस कुत्ते का कंपनी से निकल दिए जाना पसंद नहीं आया था, मुझे उस कंपनी में इतना परेहन किया गया क मुझे वहां से रिजाइन करना पड़ा, फिर मई घर पर बैठ कर और टूशन पढ़ा कर घर चलने लगी, शेखर भी तब्ब तक्क स्टडी पूरी कर चूका था, जल्द hi उसे जॉब मिली तो घरवळून ने मेरी शादी करने का सोच लिया. घरवळून की जल्द बाज़ी की वजा से जो रिश्ता मेरे लिए आया, पूरी तरह से छान बीन किये बिना hi मेरी शादी कर दी गई.. पर ये भी एक धोका था, मेरी शादी का सारा चक्कर उसी कुत्ते का चलाया हुआ था, जिसे मेरी वजा से उस कंपनी से निकल दिए गया था..

वो अपनी बेइज़्ज़ती नहीं भुला था.. वो मोके की तलाश में था, और फिर जिस हरामी नामर्द से मेरी शादी हुई थी, वो भी उसका दोस्त था, शादी के समय मुझे पता चला क वो किसी औरत के लायक hi नहीं है, मैं घरवळून को ये सबब नहीं बता सकती thi...isliye तब से ले कर आज तक्क मैंने किसी से कुछ नहीं कहा, वर्ण सभी घर्लवाले खुद को दोषी मानते.. माँ और बाबा ये सबब सहन नहीं कर पाते, उन्हें कुछ हो ये मई भी बर्दाश्त नहीं कर सकती थी..... दीदी इतना बोल कर रोने लगी थी.. दीदी के साथ सच में hi बहुत बड़ा धोका हुआ था, सालों से दीदी एक आग में जल रही थी..

विजय:- दीदी अब्ब आप दोनों एक साथ hi रहते हाँ क्या.?

दीदी:- नहीं भाई मई उसके साथ नहीं रहती.. घर एक hi है, लेकिन उसके दो पोरशन किये हुए हाँ, मैंने अपने घरवळून को कुछ नहीं बताया, किसी को भी मेरे घर में आने की इजाज़त नहीं है. शेखर तक्क मेरे घर में कभी नहीं आता, मैंने सभी को घर आने से मन किया हुआ है... फोन पर राब्ता रहता है है, या मई खुद hi वहां जा कर सबब से मिल लेती हों.....

मेरी लाइफ तो बर्बाद हो hi गई है, लेकिन मैंने अपने उस कुत्ते, हरामी, नामर्द का भी जीना हराम किया हुआ है, उसने मुझे दबाने की बहुत कोशिश की थी, अपने दोस्त के साथ भी मुझे सबब करने क लिए बहुत फाॅर्स किया था, लेकिन मैंने उसकी पिटाई करदी और उसे धमकी दी क अगर उसने फिरसे कबि कोई बकवास की तो मैं उसे पूरी सोसाइटी में बदनाम कार्डोँगी, सब को बता डोंगी क वो एक नामर्द है, अब्ब वो मुझसे डर के रहता है... मेरा उससे कोई कनेक्शन नहीं है, बास खर्चा वो मुझे देता रहता है, उसका वो हरामी दोस्त कभी अपने मक़सद में कामयाब नहीं हो सका..

vijay:-didi आप उससे डाइवोर्स क्यों नै ले लेती.? आप उसे छोड़ कर किसी और से शादी क्यों नहीं कर लेती.?

दीदी मेरी आँखों में देखते हुए मुझे स्माइल देने लगी.. अब्ब दीदी की टोन बदल चुकी थी....

दीदी:- विज्जउ एक औरत का अगर सबब कुछ किसी मर्द के तसर्रुफ़ में आ जाये तो वो औरत उस मर्द को कभी नहीं छोड़ती.. तुम मेरी लाइफ में आने वाले पहले मर्द हो, और अब्ब मई तुम्हे कभी अपने हाथ से नहीं जाने डोंगी, तुमने मेरा सबब कुछ मेरी मर्ज़ी के बिना hi देख लिया है, तुम वहां तक्क जा पोहंचे हो, जहाँ तक्क मैंने कभी किसी को नहीं जाने दिया, मेरा नामर्द हस्बैंड भी पहली रात इतना नहीं कर सका, जितना तुमने मेरे साथ कर लिया है, तुम मेरे साथ बहुत आगे तक्क बढ़ चुके हो, तुमने मुझे फिरसे एक औरत होने का एहसास करा दिए है, अब्ब तुम्हे मुझसे शादी करनी पड़ेगी.. मैं अब्ब वहां नहीं रहने वाली, मई कल hi उससे डाइवोर्स ले लुंगी..

विजय:- वाह्ह्हह्हह्ह्ह्ह दीदी आपने तो एक hi बॉल में 2 सिक्सर लगा दिए... क्या मज़े वाली बात बोली है आपने.. मतलब अब्ब मई आपके साथ कुछ भी कर सकता हों..

दीदी:- इतनी भी मुझे आग नहीं लगी हुई, पहले मुझे मेरा पूरा हक़ दे दो, मुझे दीदी के जैसे अपनी बीवी बनाओ, मेरे माँ पापा के सामने मेरी तुमसे शादी होगी, मई सबसे छुप कर तुम्हारे साथ सबब नहीं करना चाहती.. दीदी की शादी तुमसे हो चुकी है, जिसे सबने hi एक्सेप्ट किया है, मौसी भी जब्ब यहाँ आएगी तो वो भी कुछ नहीं कह पाएंगी, मेरी माँ भी दीदी को कुछ नहीं कह पाएगी, सबब hi दीदी से बहुत प्यार करते हाँ.......

मैं भी कुछ ऐसा hi चाहती हों, तुम्हारे साथ मेरी शादी सबसे सामने हो और सबब तुमसे मेरी शादी को एक्सेप्ट करें, यही मेरे दिल की चाह है...

तुमने मेरे सोये हुए सारे अरमान जगा दिए हाँ.. अब्ब तुम जल्दी से अपने सारे दुशमनो को ख़तम कर, मौसी को यहाँ लाओ, उसे सब हकीकत का पता चलेगा, तो फिर मेरी तुमसे शादी हो सकेगी.. जब सबको पता चलेगा क मई अभी तक्क कुंवारी हों तो मुझे नहीं लगता क सबब मेरी तुमसे शादी पर कोई ऐतराज़ उठाएंगे..

विजय:- दीदी इतनी बातें भी आप कर लेती हाँ, पहले तो आप सबब ..

दीदी ने मेरे होंटो पर हाथ रख दिए..

दीदी:- भाई पहले मई खुद से बनाये हुए एक खोल में बंद थी, तुमने उस खोल को तोड़ दिए है, अब्ब मई बिलकुल वैसी hi हो गई हों, जैसी कभी शुरू शुरू में हुआ करती थी, दीदी की घटना से पहले मई ऐसी hi थी... हर दम खुश खुश रहना, सब के साथ मिलकर रहना.. सबसे प्यार करना और सबका प्यार पाना, यही तो थी मेरी लाइफ.. फिर दीदी की वजा से बहुत कुछ बदल गया था..

विजय:- दीदी माँ की वजा से कैसे बदल सकता था, माँ तो खुद मुसीबत में फँसी हुई थीई.....

दीदी:- भाई दीदी की वजा से तुम्हारे नाना ने माँ, मेरे बाबा और तुम्हारी नानी को बहुत ज़लील किया था, जिस वजा से कई साल तक्क मेरे बाबा ने मुझ पर भी कई पाबंदियां लगा दी थी.. बहुत बड़ी झड़प हुई थी, सालों तक्क बाबा उसी ग़ुस्से में रहे थे, फिर बाद में जा के बाबा को एहसास हुआ क एक बे वजा की बात कर वो अपने hi बच्चों को दर्द दे रहे हाँ, जैसे hi बाबा को इस सबब का एहसास हुआ तो बाबा ने वो इलाका छोड़ दिए, और फिर वो दिल्ली में आ गए हम सबब को लेकर.. भाई हम सबब ने बहुत दर्द झेले हाँ, दीदी के घरवळून ने सबके साथ hi बहुत बुरा बर्ताव किया था...

विजय:- खैर उन सबब को देख लूंगा.. अब्ब आप ये बताएं, अब्ब तो आप मेरी आधी बीवी बन चुकी हाँ तो....

दीदी:- रुको रुको.. आधी बीवी मतलब..

विजय:- दीदी आपने रज़ामंदी तो दे दी है ना..

दीदी:- हहहहहए... ज़यादा शायना बनने की कोशिश मैट करना मेरे सामने, मई एक जीनियस लेडी हों, कुंवारी हों तो कुआ हुआ, मेरा एक्सपीरियंस तुमसे ज़यादा है, इसलिए तुम जो सोच रहे हो, वो पहले से hi जानती हों, मैंने कहा था न क फीमेल से उलझने की कोशिश मैट किया करो, तुम तो मुझसे दमाग का खेल खेलने की कोशिश में लग्ग गए हो, अपने दमाग को अपने काबू में रखो, अब्ब तुम जो सोच रहे हो, वो मैं नहीं करने वाली समझे तुम...

मैं दीदी की बात सुनकर हैरान रह गया....

विजय:- मतलब, मैं कुछ समझा नहीं.?

दीदी:- इसी लिए तो कहती हों क मुझसे दमाग मैट लड़ाओ, तुम बात करने से पहले जो सोच रहे थे, वो तो याद है ना, तुम अपनी बात करने के बाद जो करने के लिए मुझे कहने वाले थे, वो कहने की ज़रूरत नहीं है.. उसके लिए तुम्हे इंतज़ार करना पड़ेगा, हाँ अगर कभी चांस बना तो जितना अभी कुछ देर पहले किया है, उतना करके खुद हो लिया करना..

तेरी behnnnnnnnnnnnnn nuuuuuuuuuuuuuuuuuu keeeeeeeeee .. दीदी का दमाग इतना फ़ास्ट था क्याआ.?

मैं दीदी को बातों में उलझा कर अपना लुंड चुसवाना छह रहा था, दीदी ने सबब जान लिया था, दीदी मेरी आँखों और मेरी बातों से सबब समझ गई थी, दीदी मुझे मुस्कुराती हुयो नज़रों से देख रही थीई..

मैंने एक लम्बी सांस ली.. फिर किसी हारे हुए जवारी के जैसे मई बोलै

विजय:- ठीक है दीदी, तब्ब तक्क मई किसी के मोहन में अपना लुंड दाल के मज़ा ले लेता हों, आप तो अभी मेरे लुंड से प्यार नहीं करने वाली...

दीदी:- विजयी मुस्कान के साथ) गुड बॉय, अब्ब तुम सबब समझ गेट हो, इतने भी स्टुपिड नहीं हो तुम.. अब्ब तुम मेरे ऊपर से उठने का क्या लोगे, वैसे भी अब्ब मेरी आग ठंडी पद चुकी है तो मुझे इस वक़्त तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है...

हाँ तुम्हे थैंक्स ज़रूर बोलूंगी क तुमने मेरी आग को शांत करने में और मुझे फिरसे पुराणी लाइफ वापिस जीने में मदद दी है, उसके लिए मुझसे जितनी किश चाहिए मैंने देने को तैयार हों, पारर वो मई अभी नहीं करने वाली........ दीदी आँखों में कातिल चमक लिए मुझे रनौत करते हुए बोल रही थीईई..

और दीदी के ऊपर से हट कर बीएड पर जा गिरा, साला मेरा लुंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा था, उसे दीदी की बातों की कोई परवा नहीं थी, वो जान hi नहीं पाया था क अभी दीदी की छूट में जाने के लिए दीदी के मोहन में जाने के लिए, दीदी का पूरा प्यार पाने क लिए उसे बहुत इंतज़ार करना पड़ेगा....

मैं छत को घूर रहा था और दीदी मुझे.........................

कुछ भी था आज मैंने दीदी को भी जीत लिए था, मैंने खुद से जुडी एक और हस्ती को ज़िन्दगी की तरफ ला खड़ा किया था, अब्ब वो भी सबकी तरह से लाइफ को पूरी तरह से एन्जॉय करेगी.....................

मुझे इससे बढ़कर और क्या चाहिए था.. मुझे किसी को भी छोड़ने की बेचैनी तो थी नहीं, मुझे तो सबब को प्यार से छोड़ना था...




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अपडेट ::: 124


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गुरनाम और संदीप भी राजा पार्टी समेत पैलेस में मौजूद थे... दन्न के अदमीयोपन को घेर कर काबू में कर लिया गया था.. दन्न के आदमी 8 थे और वो 2 गाड़ियों में थे....

सभी को बेहोश कर देने वाली बुलेट्स से निशाना बनाया गया था.. सभी का धयान पैलेस की और था, तो राजा पार्टी जिनमे गुरनाम और संदीप भी थे, सभी ने मिलकर दन्न के आदमियों को सँभालने का मौका hi नहीं दिया था..

सभी को दूसरी कोठी में ले जाय गया था, जो पैलेस से कुछ फासले पर थी..

संदीप औअर गुरनाम टार्चर करने में स्पेशलिस्ट थे, पुलिस में रह चुके थे, सभी क्रिमिनल्स के बारे अच्छे से जानते थे... कौनसा क्रिमिनल्स कहाँ पारर आ कर टूट सकता है, ये दोनों से बेहतर कौन जान सकता था..

1 घंटा लगा था सभी को टार्चर से गुज़रते हुए.. क सभी फर्र फर्र बोलने लगे थे..

उन्ही से hi पता चला क दन्न पोहंच चूका है दिल्ली में और दन्न और उसके फ्रेंड्स ने पहाड़ी इलाके में मौजूद पवन के बेस पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है...

बड़ी जल्दी दन्न और उसके फ्रेंड्स ने अपनी गुंडों के साथ मिलकर वो बेस हासिल कर लिया था...

दन्न के कुत्तों से डिटेल लेकर फ़ौरन hi उन सबब को मार दिया था.. उनकी गाड़ियों को शहर से बहार लेजा कर छोड़ दिया गया था.....

गुंडों क लाशों को ठिकाने लगाने क लिए कल का दिन मुंतखिब किया गया था...

सभी इस टाइम पैलेस में मौजूद थे...

मैं महक जूली एंड राजा पार्टी....

गुरनाम और संदीप नहीं थे, गुरनाम संदीप को लेकर अपनी फॅमिली से मिलने चला गया था.....

विजय:- महक मुझे लगता है क दन्न अभी उस बेस पर अपना धयान ज़यादा देगा, अभी वो हमारी तरफ कम् और बेस को सुरक्षित करने पर ज़यादा फोकस बनाएगा... मैं चाहता हों क उसके सावधान होने से पहले, बेस को HI-TECH करने से पहले hi मुझे उस बेस में घुस जाना चाहिए..

महक:- तुमने सही सोचा है विजय, दन्न को टाइम देना बहुत hi खतरनाक फैसला होगा.. जितनी जल्दी उसका kala-qama कर दिया जाए, उतना hi अच्छा है.. दन्न अब्ब दिल्ली में आ चूका है तो वो बहुत जल्द hi कुछ ऐसा करेगा क तुम्हे भी घुटने टेकने ापद सकते हाँ.. वो बहुत ज़ालिम है.. वो ये तो जान hi गया है क तुममम आम जनता की भलाई क लिए बहुत ज़ोर लगा रहे हो.. वो ऐसे hi कोई गेम प्लान करके तुम्हे जाल में फँसायेगा... उसका दमाग ऐसे कामों में बहुत चलता है..

जैसा सलूक तुमने और मैंने रेपिस्ट लड़किओं के साथ किया है.. दन्न तुम्हे तोड़ने क लिए ऐसा भी कर सकता है.. तुम्हारे चक्कर में कई और भी मासूम लड़के मारे जाएंगे.. कई लड़कियों की ाब्रो खतरे में पद जायेगी.. तुम जितना किसी का भला करोगे, वो उतना hi किसी भी राह चलती लड़की को उठवा कर उसका रपे करके सोशल मीडिया पर वायरल kardega..fir तुम कुछ भी नहीं कर पाओगे..

तुम मेंटली टूटने लगोगे तो तुम कुछ करने लायक नहीं रहोगे.. इसलिए तुम्हे फ़ौरन hi दन्न जैसे नासूर को मालयमेंट कर देना होगा..

राजा:- हैं विजय हमें फ़ौरन hi कोई डिशन लेना होगा.. दन्न ने पुणे सिटी में अपना नाम ऐसे hi तो नहीं बनाया होगा.. दहशत ऐसे hi घटिया कामों को करने से बढ़ती है.. दन्न कुछ करे, हमें उसके बेस को और उसकी पूरी टीम को ख़तम करना होगा...

विजय:- इसी लिए मैंने सोचा है क मुझे अब से कुछ देर बाद निकल जाना चाहिए..

उदय:- या तुम वहां अकेला जाओगे...

विजय;- नहीं मेरे साथ महक जायेगी. तुम सबब जूली के साथ मिलकर पैलेस की सुरक्षा बढ़ा दो, अब्ब जुंग शुरू हो चुकी है, तो हमें हर तरफ धयान देना होगा.. कुछ क़ैदियों को पैलेस के पास वाली कोठी पर लगा दो.. जो मास्क मैंने पहले से hi बना रखे हाँ.. उतने क़ैदियों को ले आना.. वहां हमें छुपते हुए जाना है, ज़यादा भेद सही नहीं होगी...

महक:- ये भी तुमने सही कहा विजय, हमे अपने पीछे कोई चांस नहीं छोड़ना है, दन्न अपने आदमियों के मरने पारर चुप नहीं बैठेगा, वो ज़रूर कुछ करेगा.. और हमें उसके कुछ करने से पहले hi सबब कर लेना होगा...

विजय:- चलो महक फिर देर करना सही नहीं है, तैयारी भी करनी hai..(raja से)

संदीप को फार्महाउस पर भेज देना, वो वहां क़ैदियों को ट्रैंनिंग देगा.. गुरनाम भी वहां आता जाता रहेगा, सबब क़ैदियों को जल्द से जल्द बेसिक ट्रैंनिंग दे दो.

उदय एक काम और भी करना है तुम सब को....

उदय:- वो क्या............ फिर मैंने सबको दीदी का सबब बता दिए, दीदी के साथ धोका करने वाले के साथ क्या करना है, वो दीदी पर छोड़ दिए गया था, शेखर को भी सबब सच बता देने का कह दिए गया था.. दीदी के साथ धोके का सुनकर सबब को बहुत ग़ुस्सा आया था.. मैंने अनिल और कृति का भी सब बता दिए क कैसे उन्हें उनके घर से निकला गया था..... सब शार्ट में बताया था.. मेरे पीछे ऐसे छोटे मोठे सबब मसले वो हॉल करने वाले थे..

मैं और महक उठ खड़े हुए..

1 घंटे बाद मैं और महक निकलने के लिए रेडी थे.. जूली भी आ गई थी, जूली ने सबब रेडी कर दिया था.. इस बार हमारे पास बहुत कुछ था, दन्न से लड़ना tha,to हमें स्पेशल हाथियों की ज़रूरत पड़ते वाली थी..

जब निकलने का टाइम हुआ तो सबब hi हमारे पास थे.. सभी के चेहरों का रंग उदा हुआ था.. लाली भी माँ के साथ hi कड़ी थी... उसकी आँखों में आंसू थे.. मेरी तितलियाँ भी आंसू बहा रही थी, इस बार का मेरा मिशन सबसे खतरनाक और फैसलाकुन tha..mere साथ कुछ भी हो सकता था. सबब के दिल धक् धक् कर रहे थे.. अंदर hi अंदर सबके दिल देहल उठे थे..

माँ ने मुझे अपने सीने से लगाया तो उनके दिल की धड़कन बहुत फ़ास्ट थी.. माँ को भी बेचैनी हो रही थी..

माँ:- जा मेरा बीटा और मिटादे उस ज़ालिम की नगरी को, और उसे मेरे क़दमों में ला कर मेरे दूध कर क़र्ज़ ऐडा कर.. जितना उसने मुझे रुलाया है, जितना उसने मुझे तड़पाया है, उतना hi मैं भी उसे तड़पना और रुलाना चाहती हों..

एक एक करके मैं सबब से मिला...

मेरी प्रिय सब से ज़यादा रो रही थी, अपर्णा भी रो रही थी.. वो भी मुझसे मिली, मेरे गालों को चूम कर बोली..

अपर्णा:- विज्जू भाई, प्लीज हम सबब के लिए वापिस आना, हमें आपकी बहुत ज़रूरत है........... मैंने भी अपर्णा के गाल चूम लिए.. हाँ मेरी तितली मैं तुम्हारे लिए और सबके लिए वापिस आऊँगा..

shetal,rupa,shikha,raj,anil,kriti मुझसे लिपट कर रोने लगे.. वो सब मुझे छोड़ hi नहीं रहे थे.. मुझे खुद से दूर जाने नहीं देना चाहते थे..

पूजा दीदी मेरी पत्नी मेरी जान मेरी लवर मेरा हौसला बढ़ने वाली.. मुझसे मिली तो उसकी ऑंखें तो नम्म थी, पारर उनके चेहरे पर सकती भी बहुत थी....

दीदी:- विज्जउ मुझे अपनी सुहागरात का गिफ्ट चाहिए, नेकलेस तो बाजार में आम मिलते हाँ, और मुझे आम नहीं ख़ास गिफ्ट चाहिए.. मेरे पैरों में दन्न ज़िंदा पड़ा हुआ मैं देखना चाहती हों... बोहत दुःख दिए हाँ उसने माँ को, बहुत रुलाया है उसने मेरे विज्जू को, सिसक सिसक कर मरते हुए देखना चाहती हों मैं उस हरामज़ादे को... जा विज्जू जा और जल्दी से उस हरामी को हमारे पैरों में ला..

मई उसे बताना चाहती हों क जब जब इस धरती पर हैवान जन्मे हाँ, उनका अंजाम बहुत hi भयानक हुआ है..

सभी मेरे जाने से दुखी थे, दन्न के लिए सभी एक दिल में एक आग थी... जूही माँ भी मेरे गले से लगी, मेरे माथे को चूमा.

जूही माँ:- विज्जू बीटा मुझे भी हिसाब लेना है दन्न से, बहुत सा उधर बाकी है मेरा भी उस कुत्ते पारर.. मुझे भी अपना उधार चुकता करना है... मेरे लिए भी उस कुत्ते को पैलेस में लाना..

जूही और कारन भी अपनी माँ की बात सुन रहे थे, दोनों के चेहरे पर भी दर्द आ गया था...

सोना aunty,malikn, भाभी पद्मा आंटी, दीक्षा आंटी अजित भाई, हर्ष अंकल से भी मई मिला. सबब मुझे कुछ न कुछ कह रहे थे..

रानी और नताशा दीदी साइड में कड़ी सबब देख रही थी. मैं उनके पास गया तो दोनों मुझसे लिपट कर रोने लगी..

रानी:- विज्जू मुझे पता है तुम उस कुत्ते को रगड़ते हुए लाओगे, फिर भी डर लग रहा है विज्जू, प्लीज हम सबब क लिए अपना ख्याल रखना..

नताशा दीदी:- हाँ मेरे भाई हम सबब क लिए अपना ख्याल रखना, अब्ब तो हम सबब की लाइफ और भी खूबसूरत हो गई है, प्लीज हमारे लिए खुद को सलामत रखना, और उस कुत्ते को भी हम सबब के पैरों में ले आना..

शुष्मा दीदी भी मुझसे अलग मिलना छह रही थी, अब्ब उनके चेहरे पर शाम वाले भाव नहीं थे, वो भी मुझसे पूरा हक़ जानते हुए मिली..

दीदी:- कान में) भाई मेरे होने वाले पति को सही सलामत वापिस लाना, मुझे अपने होने वाले पति को एक गिफ्ट भी देना है.. मैंने दीदी के चुत्तड़ सेहला दिए..

दीदी:- भाई अब्ब तुम मुझे सब्बके सामने किश भी कर सकते हो, मुझे अब्ब कोई ज़यादा परेशानी नहीं है...

पापा पैलेस में नहीं थे, वो कम के साथ बिजी थे..

जूली और राजा पार्टी हमें छोड़ने गए तक्क आई तह.. सबब मुझसे बड़ी गर्मजोशी से मिले. जूली भी इस बार आँखों में नमी लिए मुझसे मिली, जूली ने सबके सामने मुझे भरपूर तरीके से किश की, और इस बार उदय ने भी जूली को कुछ नहीं कहा.

जूली ने अपने दिल की साड़ी हसरत पूरी की..

हमें निकलते निकलते 9 बजने वाले हो गए थे... खाना हमने नहीं खता था, अब्ब तो रास्ते में hi कुछ जुगाड़ हो सकता था.. वैसे हमारे बैग में ड्राई फ्रूट्स थे, जैसा सुना था क वहां गुफाओं का जाल बिछा हुआ है तो वहां खाने की बहुत ज़रूरत पड़ने वाली थी.

वहां 1 दिन लगे या कई दिन, कोई अंदाज़ा नहीं था, दन्न ने तो अपनी फाॅर्स को काम में लाते हुए जल्द hi बेस पर कब्ज़ा कर लिया था... हमारे लिए सबब आसान नहीं था....

दन्न के आदमियों का मुकाबला पवन जैसे लोकल गुंडों से था.. हमारे सामने पुरे महाराष्ट्र का बाप दन्न था..

दन्न के बेस को तबाह करना आसान नहीं था.. बहुत पापड़ बेलने पड़ने वाले थे...

मैं और महक गाडी में बैठ कर निकल पड़े.. पीछे सभी को दुखी कर गए थे हम दोनों hi..





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दन्न:- मारतें कैसे स्टुपिड लोगों को स के मुकाबले में भेजा था.. एक hi झटके में सभी ग़ायब हो गए.. अगर वो सबब स के कब्ज़े में चले गए हाँ तो, तो अब्ब तक्क वो जान गया होगा क हमने इस बेस पर कब्ज़ा किया हुआ है.. इतनी जल्दी हमें मन्ज़रे आम पर नहीं आना चाहिए था...

दन्न के फ्रेंड्स सोच में गुम्म थे...... जोसेफ उठा और बहार जा कर सभी को कड़ी निगरानी का आर्डर दे दिए...

जितना टाइम दन्न को बेस पर कब्ज़ा किये हुए हुआ था, उतने टाइम में खाना भी हज़म नहीं होता, बेस को HI-Tech कैसे बनाया जा सकता था....

दन्न समेत सभी को बेचैनी होने लगी थी, स नाम के आगे वो भी टेंशन में थे, अभी किसी से स का सामना नहीं हुआ था, पारर जितना उसके कारनामे सुन चुके थे, उसके चलते वो कोई भी चांस नहीं लेना चाहते थे, अगर स फ़ौरन hi बेस पर छड्ड दौड़ा तो कैसे उसका सामना करेंगे..

मारतें:- देखते हाँ अब्ब स क्या करता है. अगर वो यहाँ आया तो इतनी आसानी से तो हमें नहीं मार सकता...

दन्न:- खैर मार तो वो हमें नहीं सकता, इतना भी दुम्म नहीं है उसमे, दन्न के आगे वो एक चिउंटी hi है, आने दो अगर वो यहाँ आना hi चाहता है तो.. देख लेंगे उसे भी... और अपनी बेटी को भी..

मार्टियन:- हाँ महक भी स के साथ ज़रूर आएगी..

दन्न:- चलो फिर तो अच्छा हुआ क स को पता चल गया हमारे बारे में.. सबब उनके सवागत का इंतेज़ाम करते हाँ..

दन्न सबब बोलते हुए एक बात भूल गया था क अभी उनमे से किसी ने भी अभी तक्क पूरा बेस नहीं देखा है.. पहाड़ो में घिरी हुई कई गुफाएं और सुरंगें ऐसी हाँ, जिनके बारे में वो नहीं जानते थे....

पवन को जब्ब ये इलाका दिखा था, तो कई गुफाओं का जाल बिछा हुआ था, कई गुफाएं उसने खुद से बनवाई थी, कई गुफाओं में मौत का जाल भी बिछे हुए थे... पवन खुद अभी तक्क उस एरिया को पूरा नहीं जान पाया था.. वो बास अपनी ज़रूरत के हिसाब से अपने लिए गुफाओ को मुंतखिब कर चूका था... कई केव्स की तरफ जब भी उसके आदमी गए थे, वो वापिस नहीं आये थे.. पवन ने इसी डर से बाकी की गुफाओं को नहीं देखा था...





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मैं और महक दन्न के नए बेस से 1 किलोमीटर के फासले पर पोहंच चुके थे..

लास्ट दो किलोमीटर का फासला हमने गाडी की लाइट को ऑफ करके तय किया था.. नाईट विज़न चश्मे लगा के हमने वो 2 किलोमीटर का फासला तय किया था..

रेड जोन एरिया शुरू हो गया था, यहाँ से आगे अब्ब दन्न की हुकूमत शुरू हो जाती थी.. भले hi दन्न ने अभी चार्ज संभाला था.. पर थी तो ये दन्न की रियासत hi... और हम दन्न की रियासत की धज्जियाँ उड़ाने क लिए ाँ वरद हुए थे..

गाडी को एक जगा देख कर छुपा दिए गया.. मई और महक गाडी से सभी सामान निकाल चुके थे..

अब्ब हमें सब सामान साथ लेकर चलता था.. दो छोटे बैग्स के साथ दो बड़े बैग भी थे.. छोटे बैग पीठ पर बंधे थे.. और बड़े बैग हमने अपने कंधे से लटकाये हुए थे..

हमारी तैयारी ऐसी थी, जैसे हम किसी जुंग में शिरकत के लिए जा रहे हों... हर्र वक़्त hi सारा सामान साथ लिए नै घूम सकते थे.. बेस के पास hi किसी मेहफ़ूज़ जगा हमें बड़े दोनों बैग्स को छुपाना था.. ज़रूरत के वक़्त हम कभी भी उन्हें हासिल करें, कुछ ऐसा hi करना था हमें...

ये इलाका 30 किलोमीटर तक्क पहाड़ों से घिरा हुआ था.. जहाँ बेस था, वो एक बड़ा पहाड़ था, आस पास छोटी छोटी पहाड़ियां थी..

जहाँ हम थे, वहां दरख्तों की बोहतात थी, बेस के आस पास भी दरख़्त थे, पारर कम् थे.. शायद बेस के आस पास के एरिया पार्स ज़यादा तर दरख़्त काट दिए गए थे... बेस की सुरक्षा के लिए..

पवन साला इतनी सबब करके भी बेस को दन्न के आदमियों से मेहफ़ूज़ नहीं रख पाया था...

महक:- (लम्बी सांस लेती हुई) चलो दन्न को भी उसकी ऐशो आराम की लाइफ से मुक्त करते हाँ.... (धीरे से हस्सन लगी).. कैसी अजीब बात है किसी अनजान के साथ मिलकर मई अपने hi डैड को मारने आई हों..

vijay:-mehak वो सिर्फ तुम्हारा डैड hi नहीं हाँ, वो एक राक्षस भी है, बेबसों के लिए जल्लाद सिफत भेड़िया है. उसकी बर्बादी तो शुरू होगी, पारर अभी उसकी मौत नहीं लिखी हुई.. अभी तो उसे एक एक ज़ुल्म का बदला देने होगा, जिनते लोगों को बर्बाद किया है इसने, एक एक का हिसाब चुटका करना होगा... दन्न को मई वो सजा डोंगा क दन्न मेरे और मेरी माँ के पैरों में अपनी नाक रगड़ रगड़ कर माफ़ी मांगेगा.. खुद क लिए नौर की भीक मांगेगा, पर उसे मौत नानी मिलेगी..

महक:- हाँ जानती हों, कितना घटिया और हरामी इंसान है वो.. मई भी उसे नहीं छड़ाने वाली... पारर सजा देने से पहले से सोच लेना क कही दन्न तुम्हारे कब्ज़े से निकल ना भागे, वो एक बार हमारे हाथ से निकल गया तो फिर कभी वो हमारे हाथ नहीं आएगा.. छुपे रह कर hi वो सबब क लिए मौत बरसाने लगेगा..

विजय:- एक बार हाथ तो आये सही, फिर देखना मैं उसका क्या हशर करता हं, चलो अब्ब आगे बढ़ते हाँ....

नाईट विज़न चश्मे लगाए हम आगे बढ़ने लगे....

300 मीटर की दूरी पर बेस था, हम दोनों hi रुक गए थे.. अब आगे और भी खतरा था... आगे हमें एक एक कदम फूँक फूँक कर रखना था.. नाईट विज़न दूरबीन से बेस को देखने का बाद

महक:- इस साइड से बेस में घुसने का कोई चांस नहीं है.. हमें दुरी दिशा से घूम कर जाना होगा....

विजय:- हाँ और हमें पहाड़ के दूसरी दिशा में पोहंच कर कुछ वेट करना होगा.. 1 बजे के बाद हम आगे में घुसने की कोशिश करेंगे... तब तक सब hi सुस्त पद जायेंगे..

महक:- किसी के सुस्त परदे का चांस तो नहीं है, सब hi दन्न से बहुत डरते हाँ, दन्न दरिंदा है.. दन्न जहाँ हो, वहां लोग एक आंख से सोते हाँ.. लेकिन फिर भी हम देर से hi अंदर घुसने की कोशिश करेंगे, पहले रास्ता ढूंढ लें, अंदर जाने क लिए....

हम घुसते हुए बेस की ुतली दिशा में जाने लगे.. हम धीरे धीरे चल रहे, किसी की नज़र में नहीं आना चाहते थे.. इस लिए टाइम अच्छा ख़ासा लग रहा था.

आगे छोटी बड़ी चाटने भी आ गाइट हैं, उन चटानो की सपोर्ट hi काफी थी, लेकिन हम फिर भी कोई रिस्क नै लेना चाहते थे...

1 घंटे बाद हम पहाड़ की दूसरी दिशा में थे, हमें कुछ फालसे पर दन्न के कुत्ते दिखे थे, लेकिन किसी को भी चहेरे बगैर हम आगे बढ़ग ए थे.. मरना तो सभी को था.. लेकिन बाद में

पहले हमें बेस में घुसकर दन्न की माँ छोड़नी थी..

हम वही इंतज़ार करने लगे..

1 बजा, तो हम दोनों hi उठ खड़े हुए... इस साइड में दन्न का कोई गुंडा नहीं था. सभी फ्रंट साइड में hi थे....

पहाड़ के पास पोहंच कर ऊपर जाने वाले रास्ते को चेक करने लगे...

महक:- विजय कई बार ऐसा भी होता है क पहाड़ के पीछे वाली साइड में भी गुफाएं होती हाँ, पर छोटी छोटी चटानो से उनके मोहन बंद हो जाते हाँ..

महक की बात सुनकर मई चौंक गया, महक ने बिलकुल सही कहा था.. ज़रूरी नहीं है, क जो यहाँ पर रहते हों, वो सबब hi जानते हों, कुदरती राज़ कई ऐसे भी होते हाँ, जिनके बारे सभी नहीं जानते.. कई ऐसी गुफा भी छुप चुकी हाँ, जिनके बारे में कभी किसी को नहीं पता होता..

और फिर जैसा इस बेस में बारे में सुना था क यहाँ पर अनगिनत गुफाएं हाँ.. तो कोई भी गुफा किसी और गुफा से मिलता हुआ हमें हमारी मंज़िल तक्क ले जाए...

विजय:- महक तुमने एकदुम्म सही कहा है, चलो तो फिर ऐसा hi कोई गुफा ढूंढ़ते हाँ....

अगले 30 मिंट में हमें कुछ भी ऐसा नै दिखा, जिससे गुमान हो क यहाँ पर कोई गुफा हो सकती.

हम चलते हुए पहाड़ की फ्रंट साइड की और बढ़ रहे थे.... कुछ hi फासले पर दन्न के गुंडों से सामना होने का ामकान था..

हम दोनों hi अचे से देखते हुए आगे बढ़ रहे थे. क एक जगा से कुछ स्मेल सी आती हुई महसूस हुई, तो मं रुक गया..

mehak:-(dheere से) क्या हुआ विजय रुक कुयं गए....... अब्ब हम खुल कर नहीं बोल सकते थे, रात के सन्नटे में आवाज़ बोहत दूर तक जाती.. महक इसी लिए बहुत hi धीमी आवाज़ में बोली...

विजय:- महक मुझे यहाँ सेकुछ स्मेल आ रही है.. कुछ अजीब सी है.. महक ने भी धयान दिया तो उसने भी मेरे जैसा hi रिएक्शन दिया..

चीख करने पर एक छोटी चेतन के पास से वो स्मेल आ रही थी... मैंने और महक ने चेतन के पास झुकते हुए अच्छे से सूंघा..

महक:- विजय इस चेतन के नीच यकीनन कोई गुफा होगी.. चलो चेतन को हटाने की कोशिश करते हाँ...

फिर दोनों ने hi मिलकर उस चट्टान को हटा दिया.. महक के 3 मर्दों के बराबर ताक़त थी... बड़ी जान थी महक में.. आम हालत में नरम सी दिखने वाली ये लड़की अंदर से बहुत hi स्ट्रांग थी..

चट्टान हटी तो उसके नीचे सच में hi एक गुफा मौजूद थी.. स्मेल से hi अंदाज़ा हो गया क इस तरफ कभी कोई नहीं आया होगा..

महक:- तो अब्ब क्या सोचना है, इसी में घुस कर चीख करें क्या.?

मई सोचने लगा क इस गुफा में उतर कर देखा जाए या नहीं..... फिर गोरी फैसला लेते हुए मैंने महक को हाँ बोल दिया..

दोनों hi बारी बारी अंदर उतर गए.. टोर्च को रोशन कर दिया गया था.. यहाँ हमें गुंडों से कोई खतरा नहीं था.. नाईट विज़न को ऊपर सर्र की और सरका दिया गया था..

हमारी कमर से बंधी हुई बेल्ट में 2-2 पिस्तौल और एक छोटी राइफल थी, जिसपर सीलेंसर लगे हुए थे.. एक एक चाकू और एक एक खनजर भी बेल्ट में ादसे हुए थे...

गुफा में देखने से पता चला क गुफा अंदर से आगे जा कर और भी खुली हो जाती थी.. हम दोनों hi आगे बढ़ने लगे..

केव शरू में 1.5 फ़ीट था, कुछ फासले पर 4 फ़ीट हुआ तो आगे बढ़ने पर गुफा की चौड़ाई 5-6 फ़ीट की हो गई थी, गुफा की हाइट 8-10 फ़ीट थी.. और आगे बढ़ते हुए और भी खुली होती जा रही थी..

30 फ़ीट आगे जाने क बाद गुफा अचानक से hi तंग हो गई.... गुफा की चौफे वहां पर 2 फ़ीट हो गई.. वहां से आगे बढे तो कुछ फासले पर दो रास्ते हमें दिखे एक सीधा और एक लेफ्ट साइड में.....

जब्ब हम गुफा में घुसते थे तो स्मेल कुछ तेज़ थी, अब्ब यहाँ पर स्मेल कम् हो गई थी..

मोड़ तक्क जा पोहंचे तो मोड़ वाली साइड में स्मेल और भी कम् महसूस हुई, सीधे जाने वाली रास्ते से स्मेल ज़यादा आने लगी.. कुछ अजीब सी स्मेल थी.. ऐसे जैसे किसी पानी की टंकी को सालों न खोला जाए तो उस स्मेल से मिलती जुलती स्मेल थी..

विजय:- अब्ब बोलो महक क्या करना चाहिए.. आगे बढे या मुद जाएँ....

महक मेरी बात का जवाब देती उससे पहले hi महक ने फ़ौरन hi बेल्ट में एड्स सीलेंसर लगा पिस्तौल निकला और मेरे पीछे फायर कर दिया.... मैंने मुद कर देखा तो एक सांप मुझे डसने वाला था.... मैंने महक को थैंक्स बोलै तो महक मुस्कुरा दी...

महक:- ये कोई पहला सांप नहीं है.. यहाँ और भी कई ऐसी खतरनाक चीज़ें हमें मिलने वाली हाँ... अभी तो शुरआत है....... अगर हम यहाँ से मुद जाये तो हम बेस से दूर हो सकते हाँ, और आगे जाएँ तो बेस के नज़दीक पॉंच सकते हाँ, पारर सामने से बहुत hi अजीब सी स्मेल आ रही है, ऐसा लगता है, जैसे आगे हमारे लिए खतरा मौजूद हो.. महक सोचते हुए बोली

विजय:- खतरा तो हमें हर जगा है, जैसी गुफा में हम मौजूद हाँ. वहां एक से बढ़कर एक खतरा हमारे लिए मौजूद है... हमें बेस की तरफ hi जाना चाहिए, देखते हाँ आगे काउन्स खतरा है....

महक मुझे मुस्कान देते हुए बोली..

महक:- शामे मेरे जैसे hi हो, चलो फिर आगे बढ़ते हाँ.. देखते हाँ आगे हमारे लिए कौनसा नया खतरा मौजूद है..

हम आगे बढ़ने लगे.... जैसे जैसे आगे बढ़ रहे थे, स्मेल भी बढ़ती जा रही थी... 4 फ़ीट आगे बैज थे क गुफा अचानक से hi बहुत खुली हो गई. और स्मेल भी बहुत तेज़ हो गई थी..

महक:- ऐसा लग रहा है, जैसा यहाँ पास में hi पानी मौजूद हो...

विजय:- और उस पानी में कुछ ऐसा है, जिससे हमे खतरा हो सकता है..

महक:- चलो फिर देखते हाँ, और खतरा को ख़तम करते हाँ...

हम और आगे बढे तो सामने का नज़ारा देख कर हमारी ऑंखें hi चुंधिया गईं..

आगे गुफा की छत 80 फ़ीट ऊपर थी, गुफा की लम्बाई और चौड़ाई 40 मीटर से भी बढ़ गई थी....

सेण्टर में एक पानी का तालाब था, और पानी चमक रहा था, पानी के अंदर अनगिनत हीरे भी चमक रहे थे... और हीरों के साथ मगरमच्छो की ऑंखें भी चमक रही थी..

महक भी मेरी hi तरह से ऑंखें फाड़े देख रही थी.....

महक:- ुंबलीवबले इंडिया में कोई ऐसी जगा भी है जहाँ ऐसा नज़ारा भी देखने को मिल सकता है.. शहर पास होने की बिना पर कोई भी इस गुफा को ढूंढ नहीं पाया, इतने हीरों के लिए तो कोई भी 2-4 दिनों में hi इस पहाड़ को रेज़ा रेज़ा करदे.

woooooooooow क्या नज़ारा है...... मज़ा आ गया विजय ये सबब देख कर.. महक सबब देखकर बहुत एक्ससिटेड हो गई थी..

vijay:-(lambi सांस लेते हुए) हाँ नज़ारा तो बहुत hi खूबसूरत है, अगर हम फ़ौरन हिन् यहाँ से ना निकले तो ये मगरमछ हमें काट खाएं, तो फिर इसी तालाब में मौजूद हीरों के बीच में पड़े हुए हमारे कंकाल भी एक दिलकश नज़ारा क्रिएट करदेंगे..

महक मेरी बात सुनकर खिखिला कर हस्सन लगी...





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अपडेट ::: 125


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गुफा में मौजूद हीरों को देख कर तबियत बहुत फ़्रेशः हो गई थी, हीरों को देखना और फिर अनगिनत हीरों को देखना... ये एक ऐसा नज़ारा होता है, जो किसी को भी बहुत बड़ी ख़ुशी दे देता है.. हमें हीरों की ज़रूरत नहीं थी..

हीरों को देखना hi बहुत मज़ा दे रहा था.. एक अजीब सी ख़ुशी मिल रही थी. हीरों के साथ hi मौत का सामान भी मौजूद था.. हमारे पास मौजूद वेपन्स भी कम् नहीं थे... हम गुफा में मौजूद सभी जीवो को मार कर हीरे ले जा सकते थे.. लेकिन हम लालची नहीं थे.. अगर मिशन सुसस्फुल रहा तो, फि हीरों के बारे में कुछ सोचते..

मेरे मक़सद के लिए हीरे बहुत काम आ सकते थे.. हीरे इतने थे क एक पूरा शहर बनाया जा सकता था... हर एक हीरा अपनी चमक दमक में एक दूसरे से बढ़कर था...

महक:- चलो अब्ब आगे बढ़ते हाँ, बिलवाजा इन हीरों के रखवालों को क्यों मारना.. हमें ज़रूरत तो है नहीं हीरो की....

विजय;- ज़रूरत तो है महक हमें इन हीरो की... इन्ही हीरो से हम भूके, रट बिलतके बच्चो और बड़ो की जरुआत पूरी करेंगे.. और फिर उन्हें भी इन्ही हीरो के जैसे चमकाएंगे... हीरे बहुत काम आएंगे हमारे.

महक:- हाँ मैं ये तो भूल hi गई थी, इन डायमंड्स से एक रिसायत कड़ी की सकती है.. चलो पहले अपना काम ख़तम करते हाँ, फिर इसे भी हासिल कर लेंगे..

हम दोनों वापिस हो लिए यहाँ से आगे जाने का रास्ता नहीं था.. अगर होता तो कोई भी यहाँ तक्क पोहंच सकता था.. हमें फिरसे उसी मोड़ तक्क वापिस जाना था..

मैं ये रास्ता और लोकेशन भूल न जाऊं, इसलिए मैंने एक डिटेक्टिव डिवाइस पास में hi एक मुनासिब जगा छोड़ दी...

ाजल्द hi हम उसी मॉफ रक् पोहंच कर आगे बढ़ने लगे.. इस तरफ स्मेल नहीं थी, तो हम इस बार तेज़ी से आगे बढ़ने लगे...

20 मीटर आगे बढे थे क हमें एक मगरमच्छ आता हुआ दिखाई दिया..

mehak:-(hasste हुए) लो जिनसे भागे थे वही हमें रास्ते में मिल गए.. समझ आया कुछ, ये पूरा एरिया hi इन मगरमच्छो का है, इसलिए कोई इस तरफ आने में सफल नहीं हो पाया... मगरमछ आज़ादी से इन गुफाओं में घूम फिर रहे हाँ...

हमें देख कर मगरमछ की भी स्पीड बढ़ गई वो तेज़ी से हमारी तरफ आने laga..torch की रौशनी में मगरमछ की ऑंखें चमक रही थी, हमने मगरमछ की आँखों में खुनी चमक देख ली थी..

उसे भी शायद सालों से इंसानी गोश्त खाने को नहीं मिला था, इंसानी गोश्त की खुशबु hi किसी भी दरिंदे को बेचैन कर देती है... मगरमछ अपनी भूक मिटने क लिए और हमें चीयर पहाड़ देने क लिए पूरी स्पीड से हमारी और बढ़ने लगा..

इससे पहले हमने इंसानी दरिंदो से लड़ाई की थी, पहले बार ओरिजिनल दरिंदे से पाला पड़ा था, एक बार तो जिस्म के सारे hi बाल खड़े हो गए, जल्द hi हमने खुद पर काबू पाया और पिस्तौल निकल कर मगरमछ की आंख का निशाना लेने लगे, आंख के इलावा मगरमछ के पेट पर हमला करके मगरमछ को मात सकते थे, वर्ण उसकी मोती जिल्द को हमारी गोलियों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था.. जैसे hi मगरमछ हमारे पास पोहचा तो हमारे दोनों hi पिस्तौल आग उगलने लगे, मगरमछ कुछ कर पाने से पहले hi आँखों में गोलियां खा कर लूट पुअर होने लगा...

मैं और महक उसे तड़पता हुआ छोड़ कर, उसे फलांगते हुए आगे बढ़ गए...

महक:- इसे मारने का मैं नहीं था मेरा..... महक दुखी हो गई थी..

विजय:- हाँ मुझे भी इसे मार कर ाचा नहीं लगा, पर कोई और चारा भी तो नहीं था.... और फिर अभी तो हमे डायमंड्स भी निकलने हाँ, तो इंसानो की भलाई का सोचते हुए हमें इन दरिंदो को मारना पेड़गा.... चाँद मगरमच्छो के मरने से लाखों इंसानो का भला होना है, तो मगरमच्छो को मारना hi सही है.. वैसे कोशिश करेंगे इन्हे मारे बिना hi सबब हीरे हासिल हो सकीं..

महक:- चलो आगे बढ़ो, वो सबब बाद में सोचेंगे, अभी दन्न का कुछ करते हाँ.

काफी आगे जाने क बाद गुफा गहराई में जाने लगी, हम भी गहराई में उतर गए, रास्ते में और भी सांप मिले जिन्हे हमने मार दिया था.. बड़ी बड़ी छिपकलियां भी मिलें, मकड़ियां भी मिलीं, खतरनाक जीवो को मारते हुए हम आगे बढ़ते रहे..

गुफा अंदर से बहुत hi भयानक हो गयी थी, पर अंदर कही से भी घुटन का एहसास नहीं हो पा रहा था.. कही से हवा के अंदर आने का रास्ता था.. तभी हम सांस ले पा रहे थे..

गुफा की गहराई ख़तम हुई तो हम फिरसे ऊंचाई की और बढ़ने लगे.. गुफा में घुसे हमें 1 घंटे से ऊपर हो गया था.. और अभी तक्क हम चलते hi जा रहे थे.. अंदर गुफा भूल भलाइयां लिए हुए थी.........

ऐसे hi तो नहीं वो हीरे मेहफ़ूज़ थे.. यहाँ हमें पैरों के निशान भी नहीं दिखे थे, हम सदियों बाद आने वाले पहले 2 थे... वर्ण सदियों से कोई इस दिशा में नहीं आया था....

जगा जगा मड़कियों ने जले बुन्न रखे थे.. गुफा में टोर्च की रौशनी होते hi कीड़े मकोड़े भाग खड़े होते थे....

आगे बढ़ते हुए हमें एक ऐसी जगा मिली जिसे देख कर हम एक बार फिरसे चक्र गए..

महक:- यकीन नहीं होता, हिमालिया जैसी गुफा यहाँ भी मौजूद है.. एक छोटे से रास्ते से हम अंदर घुसे थे, पारर देखो उसी रास्ते पर चलते हुए हमने पूरा पहाड़ hi अंदर से देख लिया है...

विजय:- पूरा कहाँ अभी तो हमने आधा भी नहीं देखा. अभी तो बेस वाला एरिया पूरा hi रहता है..

महक:- हाँ ये तो है, अब्ब कौनसा रास्ता चूसे किया जाए.. यहाँ तो अनगिनत रास्ते अलग अलग दिशा में जा रहे हाँ..

vijay:-(left साइड इशारा करते हुए) बेस हमारे हिसाब से इक रुख पर है, तो इसी रस्ते पर चलना सही रहेगा.. आगे देखते हाँ, क्या कुछ देखने को मिलता है.

मैं खुद उलझन में था, लेकिन कोई तो रास्ता चूसे करना hi था..

हम दोनों उसी और बढ़ने लगे... महक की साँसे में मैं बहुत देर से चेंजिंग महसूस कर प् रहा था.. महक को सेक्स ड्रग दिया गया था, और ऐसी जगा आते hi महक पर उस ड्रग्स का असर कुछ ज़यादा hi होने लगा था, ये मेरा अनुमान था, कुछ और भी हो सकता था.. अगर ऐसा था तो महक के लिए परेशानी बन्न सकती थी.. जहाँ हम मौजूद थे, वहां महक का हर दुम्म hi एक्टिव रहना ज़रूरी था.

अगर महक के अंदर सेक्स डिजायर बढ़ गई तो मेरे लिए भी प्रॉब्लम हो सकती थी.

विजय:- महक तुम्हे ड्रग्स के चलते डिस्टर्बेंस शुरू हो गई है ना.

महक चलते हुए मुझे देखने लगी, फिर एक लम्बी सांस लेते हुए बोली.

महक:- हाँ विजय मुझपर ड्रग्स का नशा हावी होने लगा है.. मेरे हिसाब से अभी भी 4-5 दिन मई खुद पर कण्ट्रोल क्र सकती थी, पारर यहाँ की आबो हवा में कुछ केमिकल ऐसे हाँ जिनके चलते सांस लेने से मेरे अंदर सेक्स ड्रग्स एक्टिव होने लगा है....

अगर मैं अभी बहार चली जाओ तो खुद पर काबू बना सकती हों, लेकिन ऐसे माहौल के अंदर, मुझे लगता है मेरे लिए प्रॉब्लम कड़ी होजायेगी... खैर देखते हाँ, आगे क्या होता है मेरे साथ... जब्ब भी मेरी ऐसी हालत होती hai,mera मन करता है दन्न मेरे सामने हो और मैं उसे थोड़ा थोड़ा करके चीरना शुरू कार्डों..

विजय:- हम वापिस चलते है, जहाँ से ये रास्ता शुरू हुआ था, वहां पोहंच कर रेस्ट करते हाँ, वहां रह कर तुम खुद पर काबू पा लेना, और देख भी लेना क किश हद्द तक्क तुम्हारी प्रॉब्लम बढ़ रही है, अब्ब तो हम यहाँ पोहंच hi चुके हाँ, तो टाइम तो लगेगा hi दन्न के बेस को तबाह करने में... कुछ रेस्ट भी कर लेंगे, फिर ताज़ा दुम्म होकर आगे बढने...

महक ने मुझे मश्कूर नज़रों से देखा...

महक:- थैंक्स विजय मुझे भी ऐसा लग रहा tha.k अभी आगे न बढ़ा जाए.. कुछ घंटो बाद भी तो हम आगे बढ़ सकते हाँ..

मैंने महक का हाथ थामा, और हम वापसी की और हो लिए.. महक का हाथ बहुत गरम हो चूका था, महक के अंदर की आग भड़क चुकी थी. महक अंदर से बहुत स्ट्रांग थी.. इसी लिए खुद पर काबू बनाये हुए थी.

वर्ण ऐसी कंडीशन में लड़कियां किसी के सामने भी अपनी जांघों को एक दूसरे से रगड़ने से नहीं रोक पाती..

जल्द hi हम वाहन पोहंच गए.......... जहाँ अनगिनत रास्ते बने हुए थे... चरों बैग खुद से अलग किये और बैठ गए..

बैग से बोतल निकल कर पानी पिया.. महक लेट गई, महक की सांस तेज़ चलने से महक में बूब्स टोर्च की रौशनी में ऊपर नीचे होते हुए दिख रहे थे..

महक ने अपनी ऑंखें बंद थी.. मैं भी महक के पास hi लेट गया...

इस एरिया में हमे कोई खतरनाक जीव नहीं दिखा था.. इसलिए दोनों hi लेट गए, हम दोनों की hi 6तह सेंस पूरी तरह जाग रही थी...

मेरी आँखों की पलकें भारी होने लगी थी, लेकिन महक के लिए सुकून से सो पाना मुमकिन नहीं रहा था...

बहुत गलत समय में महक के अंदर से सेक्स ड्रग एक्टिव हो गया था.. मुझे नींद आने लगी थी, तो मैं सो गया था..

मैंने महक को खुद से लड़ने के लिए टाइम दे दिया था..

मेरे सोने के बाद महक खुद को सटिस्फी कर सकती थी.. इतना तो मैं समझता hi था, क महक से अगर बर्दाश्त न हुआ तो महक अपनी छूट को रगड़ कर ठंडा कर लेगी...

धीरे धीरे मेरे नींद बढ़ने लगी और महक की बेचैनी भी.......

महक की साँसे तेज़ होती चली गयी, फिर महक ने क्या किया मुझे नहीं पता, मई नींद की वादियों में गुम्म हो गया था...

मेरी नींद एक आवाज़ से खुली तो मैंने देखा क महक एक हाथ से अपने बूब्स को दबा रही है, तो एक हाथ अपनी पेण्ट में घुसाए अपनी छूट को मसल रही है, महक की ऑंखें बंद थी.. टोर्च की रौशनी में महक का पसीने से तर चेहरा मुझे दिख रहा था..

मुझे महक को इस हालत में देख कर तरस आने लगा, महक जैसे शेरनी की ये हालत... महक सच में hi ऐसी सिचुएशन में अंदर से भी टूट जाती होगी..

अपनी मैं मर्ज़ी से कोई भी चाहे किसी के साथ सेक्स करे या अपने जिस्म से खेले, उसे मज़ा आता है, पारर बिना मर्ज़ी के अपने जिस्म से खेला, और फिर भयानक जोश के साथ अपनी छूट को नोचते हुए पानी निकलना.. बाद में बहुत पीड़ा देता है...

महक ऐसे hi दौर से गुज़र रही थी.. मैंने फिरसे अपनी ऑंखें बंद क्र लीं..

महक की बेचैनी भड़ती गई.. साथ hi महक की सिसकियाँ भी बढ़ने लगीं.. कभी कभी महक की जूनून में डूबी हुई सिसकियाँ सुनाई देने लगती.. महक मुझे भूल चुकी थी, महक खुद के अंगों से खेलते हुए खुद को ठंडा करने की कोशिश में लगी हुई थी.. महक की सिसकियाँ और आहें बहुत तेज़ थी. मेरे लिए भी खुद पर काबू पाना आसान नहीं रहा था. एक लड़की अपनी छूट में ऊँगली डाले अपने दूध को दबाते हुए सिसकियाँ ले रही थी.. कैसे कोई खुद पर काबू पा सकता था..

पर मुझे खुद पर काबू रखना था, बात महक की थी, बात महक को दिए गए सेक्स ड्रग की थी... बात महक के आत्मा सम्मान की थी.. महक ये सबब सेक्स के नशे में सेक्स के मज़े में नहीं कर रही थी, महक सेक्स ड्रग्स के चलते मज़बूरी में सब कर रही थी... महक मज़े में नहीं थी, महक अंदर hi अंदर तड़प रही थी..

महक अपने हाथो से कुछ देर खुद को रिलैक्स करने की कोशिश करती रही, अपनी छूट और बूब्स को कस कस के दबती और सहलाती रही..

पारर उसे किसी पल चैन नहीं मिल पा रहा था..

महक अचानक से hi मेरे ऊपर आ गई, अपनी छूट को मेरे लुंड पर सत्ता कर मेरे चेहरे को थाम कर मेरे ऊपर लेट गई.. महक की साँसों से मुझे आग की लपटें आती हुई महसूस हो रही थी..

महक मेरे चेहरे को चूमती हुई मेरे लुंड पर अपनी छूट को रगड़ने लगी, धीरे धीरे करके महक की स्पीड बढ़ने लगी.

मैंने अपनी ऑंखें नहीं खोली.... महक को उसके मैं की सबब करने दी.. पारर शायद ये महक के मैं की नहीं थी, महक तो होश में थी hi नहीं,.. उसे क्या पता क वो क्या करती फिर रही है...

मैंने महक से कहा था क मैं कभी भी उसका गलत फायदा नहीं उठाऊँगा, पारर ये नहीं कहा था क उसे तड़पता हुआ देख कर उसे कुछ भी करने से रोकूंगा..

मैं महक को नहीं रोक सकता था... महक का शांत होना बहुत ज़रूरी था, और मई कुछ न करके भी महक की बहुत मदद कर रहा था.. मई महक को न रोक कर महक को शांत होने में मदद दे रहा था..

महक मेरे चेहरे को चूमती हुई मेरे होंटो पर आई और फिर मेरे होंटो को अपने होंटो में लिए वाइल्ड किश करने लगी.. महक किसी भुकी शेरनी की तरह से मेरे होंटो पर टूट पड़ी थी..

मेरा लुंड महक की छूट की हज़ारों गुना बढ़ चुकी हीट के कारण खड़ा हो गया था.. महक को मेरे लुंड पर अपनी छूट रगड़ते हुए कुछ सुकून मिलने लगा, महक की स्पीड बढ़ी तो महक ने मेरे होंटो का भी बुरा हाल करना शुरू कर दिया..

महक हॉर्नी तो हो hi चुकी थी, धीरे धीरे महक पागलपण की हालत में जाने लगी, मेरी हालत भी महक ने ख़राब कर दी थी.. महक मेरे होंटो को छोड़ hi नहीं रही थी, मेरे होंटो से शायद खून भी निकलने लगा tha,mehak के नाख़ून मेरे गालों पर मेरे गले पर अपने निशाँ छोड़ते जा रहे थे.. अच्छी खासी कहरेशन मुझे आ चुकी थी. पारर न तो महक रुकी और न hi मैंने महक को रोका..

महक की किश बहुत hi खतरनाक होती चली गई, मेरा दुम्म घुटने लगा था..

मुझे लगने लगा क महक ने मुझे जल्द न छोड़ा तो मेरी सांस hi बंद हो जायेगी..

महक मेरे लुंड पर पूरी तरह से तक आगे पीछे हो रही थी.. महक जैसे ये सबब कर रही थी, ऐसा तो हो hi नहीं सकता था क मेरा लुंड खड़ा न हो.. मेरा लुंड पूरी तरह से तन्न चूका था, उस वजा से भी महक होरी हो गई थी, गरम लुंड पर गरम छूट रगड़ते हुए महक भी कण्ट्रोल से बहार होने लगी थी..

शुक्र है जल्द hi महक की छूट ने आग ऊगली, महक मेरे ऊपर ढेर हुई.. तब्ब जा के मुझे कुछ सुकून मिला..

महक मेरे ऊपर hi भयानक शोर करती हुई सांस ले रही थी.... शेरनी बकरी बन्न गई थी.. शेरनी छूट के पानी के बह जाने से शांत पद गई थी..

मैंने अपनी ऑंखें नहीं खोली थीं, मैं फिरसे नींद में जाने लगा, महक की छूट का पानी उसकी पंतय से निकलता हुआ मेरे खड़ा लुंड को भिगो रहा था..

मेरी पेण्ट पर महक के चुतरस के धब्बे बनने शुरू हो गए थे, और ये बार बार महक को बहुत कुछ याद दिलाते रहेंगे....

मुझे नींद आ गई, महक भी इतनी म्हणत करके थक गई थी, वो भी मेरे ऊपर hi सो गई thi...meri आंख खुली तो महक वैसे hi मेरे ऊपर सो रही थी...

मई कुछ हिला ज़रूर, पारर अपनी ऑंखें फिरसे बंद कर ली थी. महक मेरे हिलने से जाग गई, खुद को मेरे ऊपर पा कर एक झटके में hi मेरे ऊपर से उठ गई..

मुझे महक की भयानक चीखें सुनाई देने लगी.. महक दन्न को गलियां देने लगी.. पिस्तौल के मैगज़ीन में भरी हुई गोलियों से गुफा के अंदर दन्न की ख़याली शबीह को शूट करने लगी... मैं ऑंखें खोल कर महक को देखने लगा..

विजय:- mehakkkkkkkkkk

महक मेरी और घूमी तो उसकी आँखों में खून उतरा हुआ था..

महक धप्प से मेरे पास आ कर बैठ गई..

महक:- (दहाड़ते hue)maine तुमसे कहा था क ऐसे कमज़ोर लम्हे में मुझे टूटने न देना.. फिर तुमने मुझे रोका क्यों नहीं..

विजय:- महक मैंने कुछ भी ऐसा वैसा नहीं किया है तुम्हारे साथ..

महक:- जानती हों, मुझे सबब याद है, जब्ब मेरे अंदर का नशा बढ़ता है तो मेरी हालत बहुत ख़राब हो जाती है, जो मेने तुम्हारे साथ किया, वो तो कुछ भी नहीं था.. वानर जैसी मेरी हालत होती है, मेरा सेक्स के बिना रहने को मैं नहीं होता... मैं करता है, अपने सारे hi रूल्स तोड़ डॉन.. इतनी आग बढ़ जाती है मेरे अंदर.. तुमने खुदसे कुछ न करके मुझे शांत रख है, अगर तुम 1% भी आगे बढ़ते तो वो सबब हो जाना था, जो मई नहीं करना चाहती थी.. मई अभी इस सबब क लिए रेडी नहीं हों.. तुमने मेरे लिए ये सबब करके मुझे खुद की नज़रों में गिरने से बचा लिए है..

उसके लिए मैं तुम्हे थैंक्स बोलती हों.. गुफा के माहौल में मुझसे सहन करना मुमकिन नहीं रहा था.. और फिर ऐसे समय में मेरे पास पहली बार कोई मर्द मौजूद था, वर्ण शायद मई खुद पर काबू पा लेती.. तुम्हारे रहते मई खुद पर काबू नहीं पा सकीय, जब्ब मई मैं तुम्हारे ऊपर आई थी, तो तब मैं तुमसे सबब hi करने के मूड में थी, तुम आगे नहीं बढे तो मैंने भी खुद पर जितना हो सका काबू पा लिया, और खुद की आग बुझा ली...

मैंने सीधा हुआ और महक को लिटा कर महक के ऊपर आ गया.. अपने होंटो को धीरे धीरे महक के होंटो के करीब करने लगा.. महक मुस्कुराने लगी..

महक:- क्यों मुझे तंग कर रहे हो, मुझे पता है तुम मुझे किश नहीं करोगे..

विजय:- (महक की आँखों में देखता हुआ) किसने कहा क मैं तुम्हे किश नहीं करूंगा, आज मैं तुम्हे किश ज़रूर करूंगा..

महक:- अच्छा ऐसा है तो फिर मुझे किश करो, मैं भी तो देखो एक शेर एक शेरनी को कैसे किश करता है... महक भी इस सिचारशन का भरपूर मज़ा ले रही थी...

महक पल भर में hi शांत भी हो गई थी, और पहली वाली फीलिंग्स से भी निकल आई थी..

पारर यहाँ महक कुछ गलत हो गई थी... या शायद टोर्च की रौशनी सही से मेरी आँखों पर नहीं पड़ रही thi..mehak मेरी आँखों में उतर कर सबब जान नहीं पाई.

मैंने महक को किश करना का मैं बना लिया था....

मैंने अपने होंटो महक के होंटो से जोड़ते हुए महक के होंटो को चूम लिया, फ़ौरन hi मैं महक के होंटो को छोड़ कर ऊपर भी हो गया.......... महक की आँखों में बेपनाह हैरत थी..

विजय:- क्या हुआ हैरान क्यों हो गई, मैंने किश कर दिया है तुम्हे... एक बात कहूं अगर बुरा न लगे तो..

महक:- बोलो....... महक सिंपल से लहजे में boli...uski हैरत अब्ब ख़तम हो चुकी थी.. ऐसी hi थी mehak.pal में hi खुद पर काबू पा लेती थी..

विजय:- तुम्हे कभी न कभी तो शादी करनी hi है, सेक्स से भी तुम कभी बच नहीं सकती.. तुम्हारी आँखों में मैंने खुद क लिए बहुत देख लिया है.. एक भरोसा दिखा है मुझे खुद के लिए तुम्हारी आँखों में..

महक:- हाँ वो तो है, अभी का hi ले लो, मेरी खतरनाक हालत में भी तुमने मेरा फायदा नहीं उठाया.. भले hi बाद में हमारी तल्ख कलमी होती, बात जाहगदे तक्क भी पोहंच सकती थी.. लेकिन एक बार तो मुझसे सबब कर hi लेते.. मैं तो उस हालत में अपना सबब कुछ तुम्हे सूंप देने वाली थी, मैं होश में hi कहाँ थी, तुम आगे बढ़ते तो अब्ब तक्क मेरे साथ वो हो चूका होता, जिससे मई अब्ब तक्क बचती फिर रही हों.

लेकिन तुमने मेरे साथ कुछ नहीं, मुझे मेरी hi नज़रों में गिरने से बचा लिए.. यही तो वो बात है जो मुझे तुमसे करीब कर रही है...

मैंने एक बार फिरसे झुका और महक के माथे पर किश कर दी.... महक इस बार चहकते हुए बोली..

महक:- आज तुम्हारे तेवर क्यों बदले बदले से लग रहे हाँ................. मैं महक के गाल पर ऊँगली चलता हुए बोलै..

विजय:- महक मुझे भी तुम बहुत पसंद हो, पता नहीं मेरे अंदर तुम्हरे लिए कैसी फीलिंग्स जाग चुकी हाँ, मई हमेशा hi तुम्हे अपने पास देखना चाहता हों.

मेरी लाइफ में पहले भी बहुत सी लड़कियां और औरतें हाँ, मेरी माँ और बहने भी है मेरी लाइफ में.. तुम्हे सबब hi तो पता है, इस सबब क रहते हुए भी मुझे तुम्हारी कमी सी महसूस होने लगी है..

महक:- मेरे मैं में भी कुछ ऐसे hi विचार हाँ विजय, ऐसे hi तो नहीं मई सबब छोड़ कर यहाँ दिल्ली में आ गई हों.. उस दिन रोड पर जूही के लिए तुमने जो कुछ भी किया था, उसे देख कर मेरे अंदर भी कुछ चेंज हुआ था, कही कुछ क्लिक सा हुआ था... प्यार है या नहीं ये नहीं पता, पारर अंदर से आवाज़ आई क महक इस लड़के को कभी खुद से दूर ना जाने देना.. और फिर देखो कैसे वक़्त ने हमें और भी करीब कर दिया..

मैंने अपने अंगूठे को अपने दांतो से चबाया, खून निकलने लगा मेरे अंगूठे से.. महक मुझे हैरत से देखने लगी..

विजय:- महक अगर कभी तुम्हे शादी करनी पड़े, तो क्या मेरे इलावा भी कोई चॉइस है तुम्हारे पास (महक ने इंकार में सर्र हिला दिया) तुम्हे सेक्स ड्रग्स दिया गया है, जिस बिना पर तुम्हे हर कुछ दिन के बाद तुम खुद पार्स कण्ट्रोल खोने लगती हो. मैं चाहता हों क तुम कभी भी ऐसे ना तड़पो.. तुम जब्ब भी बेचैन हो जाओ तो मुझसे ऐसे hi प्यार करके, या जैसे तुम्हारा मैं करे, खुद को शांत कर लिया करना..

हमारे बीच कभी भी सेक्स एक दूसरे की पूरी मर्ज़ी के बिना नहीं होगा..... तुम मेरे साथ सबब अपना हक़ समझ कर कर लेना.. तुम्हे कभी भी गुलित नहीं लगेगा.. वर्ण हर बार hi तुम दन्न को गालियां देती रहोगी.......

मैंने अपने अंगूठे पर लगे हुए खून को महक की आँखों के सामने करते हुए बोलै.. तो महक की आँखों का साइज कई गुना बढ़ गया.. महक मेरी बात का मतलब समझ गई थी.... महक मुझे देख रही थी, मेरे अंगूठे पर लगा हुआ खून महक की मांग को भरते हुए महक को मुझसे जोड़ देने वाला था..... महक कोई फैसला करती उससे पहले hi मेरा अंगूठा महक को मेरी पत्नी बना चूका था.

मेरे अंगूठे पर लगा हुआ खून अब्ब महक की मांग भर चूका था..

फ़िल्मी सीटूशन के हिसाब से अब्ब महक मेरी वाइफ बन्न चुकी थी.. दन्न के बेस वाले पहाड़ के बहुत अंदर गहराई में गुफाओं की भूल भलाइयों में महक मेरी पत्नी बन्न चुकी थी...

"""""""""kyaaaaaaaaaaa सन thaaaaaaaaaaa"""""""""

महक ने ऑंखें बंद कर लीं, महक की सांस एक बार फिरसे तेज़ चलने लगी. महक के चेहरे के भाव पल पल बदल रहे थे...

कभी दुःख wale,kabhi ख़ुशी wale,kabhi ग़ुस्से वाले, कभी दर्द bhare,kabhi प्यार भरे,

मैं बड़े घोरसे महक के चेहरे को तक्क रहा था, महक खुद से लड़ रही थी..

कुछ देर बाद मैंने अपने होंठ फिरसे महक के होंटो पर रख दिए और महक को हलके हलके किश करने लगा..... मैं तब्ब तक्क महक के होंठ चूमता रहा, जब तक्क महक ने कोई रिस्पांस नहीं दिए..

महक ने रिस्पांस दिया.. महक ने अचानक से hi मुझे साइड में धक्का दे दिया.. मई साइड में जा गिरा, महक मेरे ऊपर आई, मेरे लुंड पर बैठ कर महक मुझे घूरने लगी, फिर महक के हाथ उठे और महक मेरे दोनों hi गालों को लाल करने लगी.

महक के दोनों hi हाथो की उँगलियाँ मेरे गालों पर अपने निशाँ छोड़ने लगी. महक के मज़बूत हाथ मेरे मेरे गालों पर पड़े, मेरे होंटो पर पड़े, मेरे होंटो से खून रिसना शुरू हो गया.. महक नहीं रुकी और मुझे थप्पड़ पर थप्पड़ मारने लगी..





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अपडेट ::: 126


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महक मुझे घूरते हुए मेरे गालों पर थप्पड़ो की बरसात करने लगी..

गुफा का माहौल पल पल रंग बदल रहा था, गुफा का माहौल पहले महक की छूट के पानी की खुशबु से महक रहा था, साथ hi महक की सिसकियों से गूँज रहा था..

जहाँ सदियों से कोई नहीं आया था, वहां अनगिनत मौसम बदल रहे थे, महक मेरे लुंड पर अपनी छूट को रगड़ रगड़ कर पानी निकल चुकी थी, फिर महक अपनी छूट के पानी निकलने के बाद मेरे ऊपर hi सो गई थी... महक का ग़ुस्से में आना भी गुफा के सन्नाटे ने अपनी आँखों से देखा था.. गुफा में छुपे हुए जीवो ने भी महक का ये खेल देता था, वो भी महक के पल पल बदल रहे भाव को देख कर हैरान थे.. उस सब ने कहाँ कभी कुछ ऐसा देखा होगा.. वो सबब तो सदियों से इंसान को देख hi नहीं पाए थे... आज दो इंसानो को देखा और फिर उनके रंग देखे तो हैरान रह गए... क्या इंसान ऐसे होते हाँ, कुछ hi देर में कितने रंग बदल लेता है इंसान.....

मेरा महक की मांग भरना और महक को किश करना भी गुफा का सन्नाटा और छुपी हुई आत्माएं देख रही थी..

अब्ब महक के मुझे पड़ने वाले थप्पड़ भी गुफा के सन्नाटे को तोड़ते हुए एक नया hi साउंड क्रिएट कर रहे थे... कभी यहाँ चुतरस टपक रहा था, कभी यहाँ होंटो का अमृत पिया जा रहा था, और अब्ब यहाँ थपड़ों की बारिश भी हो रही थी........

महक ने मुझे थप्पड़ मारे.. मुझे घोर से देखा और फिर वो मेरे चेहरे पर झुकी और मेरे होंटो को अपने होंटो में लेकर चूसने लगी...

इस बार महक मेरे होंटो को प्यार से पि रही थी.. मैं भी महक की पीठ को सहलाते हुए महक के होंटो का अमृत पीने लगा...

कुछ देर बाद महक ने किश तोड़ दी, फिरसे मेरी आँखों में देखने लगी....

महक:- तो तुमने शेरनी को राम कर hi लिया.. बड़ी हिम्मत दिखाई है तुमने विजय, वर्ण मई शायद सालों तक्क ऐसा न करती... मेरा अंदर सबब hi बदल चूका था, सेक्स के बिना तो किसी की लाइफ hi नहीं है, पारर मुझे इस सबब से कोई दिलचस्पी नहीं थी.... दन्न ने मुझे ड्रग्स देकर सेक्स की लत्त लगा दी, फिर तुम मेरी लाइफ में आये तो मुझे मेरे मतलब का जीवन साथी भी मिल गया.. लेकिन अभी मेरा इस बारे में कोई मंद नहीं था, आज अचानक से hi सबब हो गया है.

अचानक से hi सेक्स एक्टिवटे हुआ, अचानक से hi मैं खुद पर काबू भूल गई, और फिर तुमने मेरा भरपूर साथ देकर मुझे खरीद लिया.. मेरे दिल में तो तुम बास hi चुके थे, लेकिन आज तुम पूरी तरह से अंदर जा घुसे हो... तुमने मुझे वो सारे हक़ भी दे दिए हाँ, जिनके होने से एक लड़की समाज में सर्र उठा कर जी सकती है, और सर्र उठा क्र जीने क लिए मुझे तुमसे बेहतर कौन मिलेगा..

अब्ब मुझे खुद की आग में जलने की कोई ज़रूरत नहीं है.... अब्ब तो मैं शादी शुदा हो गई हों.......... महक अंत में नॉटी होते हुए हस्सन लगी..

मैंने महक को साइड में पलटा.. महक की नाक से नाक को रगड़ने अलग..

विजय:- तो फिर एक पति को भी सारे हक़ मिल जाते हाँ, शादी क बाद.. मेरा मैं होने लगा है, वो सारे हक़ वसूल करने का.... अब्ब तुम मेरी पत्नी हो तो कैसे मई तुम्हे छोड़ डॉन, मेरे लुंड को तो तुमने वैसे भी जगा दिया है..

महक:- ावें, मैंने तो नहीं जगाया, वो तो खुद से hi जाग गया है, और फिर मेरी मुन्निया अभी रेस्ट में है................... महक तो पहले से hi सबसे बड़ी बेशरम थी..

विजय:- देख लोन वो अभी सो रही है या सर्र उठाये हुए झाँक रही है..

महक हस्ते हुए:- अभी न तो उसका मूड है और न hi मेरा.. हटो मेरे ऊपर से, मांग भरी नहीं और बन्न गए रोमियो...

मैंने महक को होंटो से होंठ जोड़े तो महक ने खुद से hi मेरे होंटो को किश करनी शुरू करदी.. मैंने अपनी जीब निकाली तो महक मेरी आँखों में देखती हुई मेरी जीब को अपने मोहन में लेने लगी.. महक की आँखों में मस्ती पूरी तरह से जाग उठी थी.... पर सेक्स का नशा महक की आँखों में कही नहीं था. वो भी बास इस पल का मज़ा ले रही थी..

महक मेरी जीब को चूसने लगी, महक की आँखों में शोखी थी, महक मज़ा लेते हुए मेरे जीब को चूसने लगी.. कुछ देर अच्छे से मेरी जीब को चूसने के बाद महक खुद hi अलग हो गई... मई महक को देखने लगा, महक मुस्कुराती नज़रों से मुझे देखने लगी..

महक कड़ी हुई... "चलो अब्ब आगे का सफर भी करना है" महक की बात सुनकर मई उठ खड़ा हुआ, अब्ब महक के फेस एक्सपेरशन बदल चुके थे, महक की आँखों की चमक तो बढ़ hi गई थी, पर महक लवर्स वाले अंदाज़ से दूर थी..

महक अत्रि घोड़ी थी, राम हो गई थी, पारर अभी सवारी क लिए तैयार नहीं थी..

हमने सबब समेटा और एक बार फिरसे आगे बढ़ने की तैयारी कर ली.. हम फिरसे उसी रस्ते की और बढ़ रहे थे, जिस रास्ते से हम वापिस हुए थे..

20 मिंट बाद hi हम एक ऐसी जगा पोहंचे जहाँ आगे जाने का रास्ता नहीं था.

ये एक ku'an था..

टोर्च के रौशनी में हम ku'en को देखने लगे..

महक:- हम्म्म्म, इसी लिए कोई इस तरफ नहीं आ पाया, यहाँ से आगे बढ़ने का रास्ता नहीं है, हमें ऊपर चढ़ना होगा..

विजय:- हाँ ये तो है, हमें ऊपर जाना होगा.. ऊपर बने हुए सुराख़ भी देख रही हों, और यहाँ से जो स्मेल आ रही है, वो भी कुछ हट के है..

महक:- हाँ मई समझ रही हों, यहाँ खतरा ज़यादा है, कोई, सांप, कोई बिछो या और कोई ज़हरीला जीव भी हो सकता है, पारर हमें ऊपर तो जाना hi होगा... महक फैसला कुन लहजे में बोली..

विजय:- ठीक है तो फिर मई ऊपर जाने की तरय करता हों.. देखता हों अब्ब कौनसा नया खतरा हमारी राह में है..

महक:- हाँ तो चलो, देर न करो... महक मुझे छडे हुए बोली.. महक किसी भी किसम की सिचुएशन से नहीं घबराती थी, वर्ण यहाँ पूजा दीदी होती तो कहती "नहीं नहीं तुम प्लीज ऊपर मैट जाओ, ऊपर बहुत खतरा है"

पर महक मुझे गुडलुक बोल रही है, वो मुझे जल्दी ऊपर पोंछने क लिए उकसा भी रही थी..

15 फ़ीट की हाइट थी, पर थी बहुत hi खर्ताक.. अगर वहां कोई हमें सांप, बिच्छू या कोई और ज़हरीला जानदार न मिला तो फिर कोई दिक्कत नहीं थी..

टोर्च की रौशनी मई ऊपर चढ़ने लगा, अभी कुछ hi ऊपर गया था क मुझे सांप की फुंकार की आवाज़ सुनाई दी, मुझसे 4 फ़ीट ऊपर एक सांप मुझे hi घूर रहा था, उसकी ज़हरीली आँखें मुझे hi घूर रही थी.. महक ने भी उस सांप को देख लिया था, महक ने देर नहीं की और सांप की दोनों आँखों में बीच में गोली उतार दी, सांप मुझपर गिरता, उससे पहले hi मई साइड में हो गया था..

उस सांप के बाद मुझे कुछ और नहीं दिखा, मई जल्दी से ऊपर चढ़ने लगा, कुँए की दीवार पथरीली थी. हाथ और पाऊँ रखने के लिए बहुत आसानी बन गई थी..

जल्द hi मई ऊपर खड़ा हुआ था, महक ने मुझे देखा तो

महक:- तुम तो पोहंच गए, अब्ब मेरी बारी है..

महक ने भी देर नहीं की, महक तो मुझसे भी फ़ास्ट निकली, मई टोर्च की रौशनी महक पर और साइड में फ़ेंक रहा था, दूसरे हाथ में पिस्तौल था.. जल्द hi महक भी मेरे पास पोहंच गई...

महक ऊपर आई तो मैंने महक को अपनी बहन में भर लिया और महक को किश करने लगा, महक ने हाथ नीचे लेजाते हुए मेरे लुंड को पकड़ लिया, और मसलने लगी. मई महक को थोड़ा कस के किश करने लगा तो महक ने मेरे लुंड को पकडे हुए hi मेरे अण्डों को अपनी उँगलियों से दबा दिया, मुझे दर्द हुआ तो मैंने महक के होंटो से अपने होंठ अलग किये..

महक:- ोये मजनू की औलाद, तुझे हर दुम्म होंटो को पीने का hi मैं करता है, चल आगे भी बढ़ना है.. फिर महक हस्सन लगी...... कैसा लगा अण्डों के फूटने का ट्रेलर. नेक्स्ट टाइम धयान रखना, कही सच में hi न फोन डॉन.

मैं भी हस्सन लगा.

विजय:- के दिन यही अंडे होंगे और तुम इसे अपने मोहन में लिए मेरी आँखों में देखते हुए चूस रही होगी.. मैं अपने लुंड और अण्डों को मसलते हुए बोलै..

महक:- अभी दूर दूर तक ऐसा कोई चांस नहीं है, तो जब ये सबब होगा, तब्ब देखेंगे, अभी ऐसा कुछ नहीं है ना, तो चलो आगे बढ़ो... वर्ण

मैं हस्ता हुआ आगे बढ़ने लगा.. ये एक 8 फ़ीट की सुराग थी, हम ैसिलय उस सुरंग के अंदर रहते हुए आगे बढ़ने लगे..

20 मीटर चले होंगे क सुरंग दो हिस्सों में बैठत गई.. हम वही रुक गए..

विजय:- अब्ब किस दिशा में आगे बढ़ें, यहाँ तो अब्ब हमें सही से अंदाज़ा भी नहीं क बेस किस तरफ होगा..

महक:- चलो पहले लेफ्ट वाले रस्ते की और आगे बढ़ते है, अगर सही पोहंचे तो ठीक, वर्ण वापिस आ कर दूसरे रास्ते की और बढ़ेंगे..

मैं और महक लेफ्ट साइड की तरफ मुद गए थी... 15 फ़ीट hi आगे गए होंगे, क सुरंग अचानक से hi नीचे जाने लगी.. हम दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा और फिर नीचे जाने का फैसला लेते हुए हम नीचे उतरने लगे, इस बार हम स्पीड से जा रहे थे..

साला दन्न तक पोहंचना भी एक मसला बन गया था.. कितनी देर हो गई थी हमें सुरंगो में घुमते हुए, अभी तक हम बेस तक नहीं पोहंचे थे.. सुराग ढलान की सूरत में थी, तो हम ढलान पर उतारते हुए आगे बढ़ने लगे.. 80 फ़ीट आगे बढे तो सुराग ढलान की hi शकल में राइट साइड में मुड़ने लगी, हम उसी साइड आगे बढ़ने लगे...

वही से आगे बढे तो हमें उस रास्ते कई और छोट छोटे रास्ते कही और जाते हुए दिखे, मैंने और महक ने एक फैसला लेते हुए सीधे से चलना जारी रखा.. इस सुराग में मिलने वाले रास्ते 2 से 5 फ़ीट के थे.. हमने उन रास्ते पर जाना सही नहीं समझा.. शायद हमारी 6तह सेंस हमें वारं कर रही थी, इस लिए हमने वो रास्ते चूसे नहीं किये थे..

हम दोनों hi आगे बढ़ते रहे, सुरंग कही से बहुत चौड़ी हो जाती कहीं से बहुत तंग.. लेकिन हम उस सुरंग को छोड़े बिना hi आगे बढ़ते रहे..

महक:- विजय इस बार तो गुफाओं का अंदर का हाल बीकूल hi बदला हुआ है, इस बार के मिलने वाले रास्ते कितने भयंकर और छोटे छोटे हाँ, और फिर ये सुरंग भी देखो कितनी अजीब है, न इसकी चौड़ाई एक सी है, और न hi नीचे से एक जैसी है.. कही से ये सुरंग ऊपर उठ जाती है तो एक दम से hi ढलान शरू हो जाती है..

विजय:- हाँ ये तो है, मैंने जहाँ ट्रैंनिंग ली थी, वहां भी ऐसे hi पहाड़ थे, पारर इस जैसा वहां कुछ भी नहीं था.. इतना लम्बा चौड़ा गुफाओं का जाल मैंने लाइफ में पहले कभी नहीं देखा..

महक:- देखा तो मैंने भी नहीं कही भी, मैंने तो आधी दुन्या भी घूम ली hai,parr इस पहाड़ जैसा मुझे कही कोई पहाड़ नहीं दिखा..

विजय:- हस्ता हुआ)) जैसे दिखेगा, ये हमारा इंडिया है, और हमारा कुछ भी किसी और कंट्री में कहाँ....... महक भी हस्सन लगी.... ऐसे hi हम चलते जा रहे थे.....

आखिर हमें लेफ्ट साइड में सुराग का एक बड़ा दहन नज़र आया, सुरंग वहां से टर्न हो रही थी.. आगे भी जा रही थी, लेकिन सामने से रास्ता और भी तंग हो गया था. हम वहां रुक गए...

महक:- अब्ब क्या करें.. आगे जाएँ या यही से मुद जाएँ..

मैंने पानी की बोतल निकली और पानी पीने लगा, गुफा के अंदर रहने से पानी गरम नहीं हुआ था.. मैंने महक को पानी की बोतल थमा दी... महक ने मुझसे पानी की बोतल ली पीने के बाद मुझे दे दी.. महक ने मुझे थैंक्स नहीं बोलै था, और न hi कोई स्माइल दे थी... मैंने भी पानी पिया और फिर सोचने लगा क कौनसा रास्ता चूसे किया जाए..

विजय:- एक बार इसी रास्ते से सामने जा कर देखते हाँ, फिर कुछ फैसला लेते हाँ..

महक:- तो फ्री चलो, अब्ब तो इन गुफाओं में चलते चलते उलझन सी होने लगी है.

विजय:- मेरे रहते तुम्हे उलझन क्यों होने लगी... मैंने महक को ऑंखें दिखाएँ.

महक:- हस्ते हुए)) तुम्हारे रहते मेरी उलझन ख़तम कैसे हो सकती है.. तुम कोई मज़े की चीज़ हो क्या....

विजय:- हाँ वो तो मई हों मज़े की चीज़.. टास्ते करवाएं क्या.?

महक:- बस बस रहने दो.. चलो आगे चल के देखते हाँ..

मई और महक सीधे hi तंग रास्ते से गुज़रते हुए आगे बढ़ने लगे.. कुछ आगे बढ़ने पर सुरंग खुली होती चली गई.. और फिर सामने देख कर मई और महक अचानक से hi हैरान रह गए..

महक:- विजय ये तो कमाल हो गया.. सामने से तो दिन जैसा दिख रहा है, क्या सूबा हो चुकी है..

विजय:- लग तो कुछ ऐसा hi रहा है.. हमने टाइम का धयान तो दिए hi नहीं, और फिर हम रात कितनी देर सोये इसका भी कोई आईडिया नहीं है, हम तो किसी और hi चक्कर में उलझ गए थे.. कैसे पता चलता इस सबब का..

दोनों hi फिर आगे बढ़ने लगा, गुफा में हमें आगे धुप जैसा कुछ दिख रहा था, गुफा वहां ख़तम हो रही थी... जल्द hi हम वहां जा पोहंचे.. गुफा के आगे एक बड़ी चटान थी. बहार निकलने क लिए 3 फ़ीट का रास्ता चेतन ने छोड़ा हुआ था.

चेतन बड़ी थी, तो गुफा को उसने अच्छे से छुपा हुआ था.. बहार से सही से नहीं देखा जा सकता था.. लेकिन अंदर से दिन की रौशनी के कारन सब दिख जाता था..

मैं और महक उसी रास्ते से बहार निकले और फिर फ़ौरन hi हम वापिस भी हो लिए..

हैरत की बात थी, क हमसे 30 फ़ीट के फासले के हमें दन्न के 2 आदमी दिखे the..lekin वो हमारी और नहीं देख पाए थे.. ये गुफा दन्न के आदमी नहीं ढूंढ पाए थे.... उनके पास hi थी, अगर वो कुछ मेहनत करते तो गुफा को ढूंढ सकते थे..

मैं और महक गुफा में पीछे हट गए.. कुछ फैसले पर पोहंच कर हम दोनों hi बैठ गए..

विजय:- दन्न के आदमी तो दिन में भी सो रहे हाँ. यहाँ एक गुफा है और उन्हें इसका पता भी नहीं...

महक:- वो भी क्या कर सकते हाँ.. मेरा ख्याल है रात भर से बहार पहरा दे रहे हाँ.. सामने देखते हुए रात बिता दी.. अब्ब भी वो सामने hi देख रहे थे..

उन्हें पहाड़ में किसी गुफा की तरफ से तो कोई टेंशन होने से रही..

विजय:- हाँ ये भी है.. अब्ब क्या करें, पीछे उसी रास्ते पर चलें, अब तो हम मंज़िल के पास पोहंच hi गए हाँ..

महक:- हाँ वही मोड़ तक पोहंच कर कुछ रेस्ट करते हाँ, कुछ खा पि के फिर आगे बढ़ेंगे...

दोनों फिरसे उसी मोड़ की और चल दिए.. वहां पोहंचे तो वही बैठ कर बैग उतार कर उसके अंदर से ड्राई फ्रूट निकला और खाने लगे.. 40 मिंट एक हमने रेस्ट की..

यहाँ से मैंने महक से मश्वरा करके जूली से राब्ता बना लिया था, जूली से कह के पापा और कम को अपने ऐतमाद के आदमियों के साथ दन्न के बेस से कुछ फासले पर रहने का कहा था.. ये सबब इस लिए था, क बेस पर हमला होने की सूरत में और बेस के अंदर धमाके होने की सूरत में गुंडे बहार निकलते और भाग जाते.. दन्न भी दुम्म दबा कर भाग सकता था, और इस बार दन्न को भागने देना नहीं चाहते थे हम दोनों hi.... महक भी अब्ब दन्न से अपना बदला ले लेना चाहती थी.

7:40 का टाइम हो रहा था..

दोनों बड़े बैग हमने वही रख दिए.. और नए रस्ते पर चलते हुए आगे बढ़ने लगे.. इस बार हमारे स्पीड और भी तेज़ थी.. और हम पूरी तरह से एक्टिव भी थे.. हम दन्न के बेस पर पोहंच चुके थे.. अब्ब हमारे लिए खतरे वाली सिचुएशन बन्न गई थी....

पूरा बेस hi भेड़ियों से भरा हुआ था, और हम दो थे... खुद को सेफ रखते हुए हम इस मिशन में कामयाब होना था..

उसी रस्ते पर चलते हुए जल्द hi हम बेस वाले एरिया में जा pohnche...andhera था, टोर्च की रौशनी में हम आगे बढ़ रहे थे.. अब्ब टोर्च को ऑफ करके बैग में रखा और नाईट विज़न चश्मे लगा कर आगे बढ़ने लगे..

यहाँ पर सुरंगें खोदी गई थी.. कुदरती गुफाओं को खोद कर रस्ते बड़े बड़े बनाये गए थे.. बड़े बड़े हाल भी थे.. ये हामरे अंदाज़ा था. अभी तक्क हमें कोई हाल नहीं दिखा था...

मुख्तलिफ रास्तों पर घूसमते हुए हम आगे बढ़ते रहे.... एक मोड़ घूमे तो हमें सामने से दो आदमी आते हुए दिखे...

यहाँ से आगे रौशनी का इंतेज़ाम था.. लेकिन ज़यादा नहीं.. 30-40 फ़ीट के फासले पर एक एक लाइट लगी हुई थी, और उसकी रौशनी भी ज़यादा नहीं थी..

मई आगे था तो मैं फ़ौरन hi पीछे होते हुए महक को भी पीछे ले लगा.. महक भी सब समझ गई.. हम दोनों hi दुम्म साध कर खड़े हो गए.. जैसे hi वो दोनों गुंडे हमारे पास से गुजरने लगे, तो मैं और महक एक्दम्मम से दोनों पर टूट पड़े.. हम दोनों ने hi एक एक गुंडे की गर्दन को जकड लिए, फिर हम दोनों को hi उन दोनों गुंडों की गर्दन तोड़ने में कोई समय नहीं लगा..

कडक्क कडक्क की आवाज़ दो बार गूंजी और दोनों गुंडे दुन्या छोड़ कर चल बेस..

मैंने और महक ने दोनों को hi लम्बा लिया दिए..

विजय:- महक हमें आगे जाने क लिए इन दोनों की वर्दी पहंनही होगी, क्या ख्याल है मई सही कह रहा हों.?

महक:- हाँ विजय तुम सही कह रहे हो.. चलो अब्ब देर करना सही नहीं है, हमे जल्दी hi दोनों के कपडे उतर कर पहनने होंगे.... हम दोनों अपने कपडे उतरे बिना hi दोनों को नंगा करके उनके कपडे पहनने लगे.. जल्द hi हम इस काम से फ्री हो गए..

महक:- अब्ब इन दोनों की लाशों का क्या करना है. यहाँ तो हम इनकी लाशों को नहीं छोड़ सकते..

महक की बात सुनकर मैं उस तरफ देखने लगा जिस दिशा से दोनों गुंडे आ रहे थे...

विजय:- हमें या तो वापिस जा कर गुंडों की लाशों को ठिकाने लगाना होगा, या फिर आगे कही हमें कोई जगा ढूंढ़नी पड़ेगी..

महक:- नहीं वापिस हमें बहुत दूर जाना पड़ेगा, आगे hi कोई रस्ता देखते हाँ.. वैसे एक काम हमने नहीं किया, इनको मारने से पहले हमें इनसे इन्फो ले लेनी चाहिए थी..

विजय:- कोई नहीं वो काम तो हम आगे भी कर लेंगे.. आगे इन जैसे और बहुत से मिलने वाले हाँ हमें........ महक खंजर निकल कर हाथ में लेते हुए..

महक:- हाँ ये तो तुमने सही कहा, बहुत दिन हुए, मुझे सही से खंजर चलने का मौका भी नहीं मिला.. मेरा खंजर भी बहुत पियासा है खून के लिए...

ऐसे hi मूड में हम गुंडों को छोड़ कर आगे बढ़ गए, कोई जगा देखने क लिए.. जल्द hi आगे जा कर हमें अपने मतलब की जगा भी मिल गई... सुरंग की एक साइड दीवार में एक जाली लगी हुई थी.. जो सेवेरगे पाइपलाइन से कनेक्टेड थी.. यहाँ से आगे वो एरिया शुरू हो रहा था, जो हहतों से तराशा गया था.. हम वापिस ए गुंडों को उठया और एक जाली को हटा कर लाशों को उस नाली में दाल दिए.. गंदे पानी में बह कर ये खुद hi आगे कही अपनी मंज़िल पर पोहंच जाती..

जाली को सही करके हम आगे बढ़ गए.. अब्ब दूर से हमें देख कर कोई ये नहीं कह सकता क हम उनमे से नहीं हाँ..... मरने वाले दन्न के आदमी थे या पवन के, हम नहीं जानते थे.. यहाँ दन्न के कब्ज़ा करने क बाअद कैसी सिचुएशन क्रिएट हुई थी, हम नहीं जानते थे, और हमारे लिए ये जानना भी ज़रूरी नहीं था..

ऐसे hi चलते हुए हम एक जगा जा पोहंचे, बिना दूर के hi हम एक बड़े हाल में जा पोहंचे थे.. 20-25 मीटर का ये हाल आधा अँधेरे में डूबा हुआ था.. हाल में साइड दीवारों पर हलकी हलकी लाइट्स जल रही थी.. अंदर लकड़ी के बने हुए करतेस पड़े हुए थे..

मैंने और महक ने एक दूसरे की आँखों में देखा...

महक:- ज़रूर इन करतेस में ड्रग्स या वेपन्स होंगे..

विअज्य:- चलो एक दो को खोल कर देखते हाँ...... करतेस खुले तो अंदर भयंकर हथियार हमें मिले.. मैंने और महक ने एक करते के अंदर से मशीन गुणस्स निकल लीं, अपने बड़े बाद हमने उसी हाल में एक जगा छुपा दिए.. फिर हम हाल से निकल कर आगे बढ़ गए..

महक:- यहाँ तो बहुत बड़े पैमाने पर धंदा किया जा रहा है, इतना असला और भी बहुत कुछ होगा इस बेस में, और ये सबब पवन का है, दन्न के पास भी बहुत कुछ होगा... जल्द hi इन सबब को ख़तम नहीं किया गया, तो ये दिल्ली पर उजाड़ कर रख देंगे..

हमें रास्ते में कोई और गुंडा नहीं मिला था, एक दो बास दूर से दिखे थे.. वो भी हमें देख कर आगे बढ़ गए थे.. हमने भी उन्हें छोड़ दिए था.. अभी हम सेफ थे और बेस को अच्छे से देख लेना चाहते थे..

अगले 10 मिंट में हमने बेस का बहुत सा एरिया छान मारा.. फिर हम एक ऐसी जगा पोहंचे.. जहाँ कमरे बने हुए दिखाई दे रहे थे... रौशनी का पूरा इंतेज़ाम था..

एक रूम के पास पोहंचे तो दूर को खोल कर देखा तो अंदर एक आदमी सोता हुआ नज़र आया.. हमने उसे सोने दिए और आगे बढ़ गए.. कुछ आगे हमें एक वर्कशॉप दिखी, जिसमे अलग अलग किसम की मचिनेस पड़ी हुई थी.. उन मचिनो को देखकर हम सबब समझ गए क ये मचिनेस इंसानो को अपाहिज बनाने क लिए इस्तेमाल में लाइ जाती हाँ.

हम दोनों को hi बहुत घुसा आने लगा था.. उसी वर्कशॉप से जुड़े हुए एक रूम का दूर खोल कर हम अंदर दाखिल हो गए...

अंदर का व्यू देखकर मेरा और महक का ग़ुस्सा अपनी हद्द पार कर गया.. अंदर का मंज़र देखकर हमारे रोंगटे खड़े हो गए थे.. ग़ुस्से की तो हद्द hi नहीं थी.. अंदर एक बड़ा हाल था, 30 के करीब पेशेंट बीएड पड़े हुए थे, और हर एक बीएड पर एक bachha"har एक का" लेता हुआ था..

किसी का एक हाथ कंधे पर से कटा हुआ था, तो किसी का पेअर जांग पार्स.. किसी के एक गाल को महसीने की मदद से ऐसे जलाया गया था, जैसे उसके साथ कोई हादसा हुआ हो.. किसी की आंख एक अंदर से उनकी आंख hi निकल दी गई थी.. तो किसी के हाथ को तो किसी के एक पेअर को मचिनो की मदद से सुकेद दिए गया था..

हाथ और पैरों की हड्डीओं पर मॉस साफ़ दिखाई दे रहा था.. सब की ऐसी हालत देखकर हम दोनों hi गुहसे से पागल होने लगे..

महक:- (ग़ुस्से से) कागज़ के चाँद टुकड़ो क लिए कैसा दरिंदों जैसा सलूक किया गया hai,in मासूम बच्चो पर... (अपनी मुठियों को क्सास्ति हुई) किसी को नहीं छोडूंगी एक एक का मई वो हशर करुँगी.. क कभी किसी ने किसी का नहीं किया होगा.

इस रह रहे सारे हरामज़ादे मेरे हाथों से मरेंगे... और अगर तो वो पवन ज़िंदा है तो मैं उसका वो हशर करुँगी क अपने पैदा होने पर अफ़सोस करता रहे थे...

हरामज़ादा पैसा कमाने क लिए ये भी कोई धंदा है.. और धंदे ख़तम हो गए थे...

ग़ुस्सा तो मुझे भी बहुत आ रहा था, इतना ग़ुस्सा मुझे अपनी ज़िन्दगी में पहले कबि नहीं आया था.. दिल चाह रहा था क इस पुर बेस को धमाके से उदा डॉन...

पर इससे बहुत सो का नुकसान हो जाना था..

लेकिन एक काम हो चूका था, अब्ब हम किसी को भी सुकून से नहीं रहने देने वाले थे. अब्ब हमे फ़ौरन hi सबब की मैय्या छोड़नी थी.. और इस बेस पर मौजूद बच्चो को यहाँ से सुरक्षित निकलना था..

जूली को कॉल करके मैंने सही किया था.. अब्ब हमें बहार से भी मदद मिल सकती थी.. इस बेस से अब्ब ज़िंदा बचकर कोई भी नहीं निकल सकता था...

मई और महक एक बार फिरसे वापिस उसी दिशा में जा रहे थे, जहाँ हमें वेपन्स मिले थे.. अब्ब हमें एक भयानक जुंग लड़नी थी.. हमें जल्द से जल्द दन्न को छोड़ कर बाकी के सबब को मार गिरना था.. देर होने की सूरत में और भी कई बच्चो को हमेशा क लिए अपाहिज बना दिया जाता..




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अपडेट ::: 127

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जल्द hi हम वापिस वेपन्स वाले एरिया में पोहंच गए.. फिर एक एक करके हम सरे करतेस को खोल कर देखने लगे.. हमे वहां अपने मतलब का बहुत कुछ मिला था. धंदा करने वाले हर किसम का hi माल रखते हाँ, पवन साला हरामी भी अपने बेस पर सब कुछ रखे हुए था..

टाइम बम भी हमें मिले और हलके वज़न की मशीन्स गन्स भी मिलें.. हलकी मार वाले टाइम बम हमने कादि सारे उठा लिए.. फिर मिलकर उसपर टाइम सेट करने लगे.

सब hi बॉम्ब्स पर अलग अलग टाइम सेट किया था, सिर्फ 3 बॉम्ब्स का टाइम शामे था.. अगले आधे घंटे में हमने वो बॉम्ब्स कई जगा फिट कर दिए.. हमारे बड़े बैग्स जो हमने यहाँ रख छोड़े थे.. वो वहां से उठा लिए, अब्ब गुंडे यहाँ आयते तो उन्हें हमारे बारे में पता चल सकता था, हम अपना सामान खोना नहीं चाहते थे.. अपने मतलब का बहुत सा सामान हम छोटे बैग्स में ट्रांसफर कर चुके थे..

महक:- चलो विजय अब्ब पहले इन दोनों बड़े बैग्स को कही सुरक्षित करते हाँ, फिर अटैक करते हुए सबकी माँ छोड़ते हाँ, पैसा कमाने का बड़ा शोक है सबको. अब्ब मई सबको बताऊँगी क पैसा कैसे कमाया जाता है..

हम दोनों ने hi वो बैग उठाये और एक साइड में चल दिए.. अब्ब तक्क हम खुद के लिए बहुत से ठिकाने इस बेस में ढूंढ चुके थे...

कुछ देर बाद हम दोनों अपने बड़े बैग्स सेफ कर चुके थे.. टाइम देखा तो पहले 3 बॉम्ब्स के ब्लास्ट होने में 3 मिंट बाकी थे..

कुछ देर में बेस के अंदर एक साथ तीन धमाके हुए.. पुरे बेस में hi हड़बड़ी मच गई थी इन ब्लास्ट की वजा से..

मैंने और महक ने साडी तैयारी पहले से hi कर्ली थी, मशीन गन्स को वही रखते हुए हमने अपने सीलेंसर लगे हुए पिस्टल्स को अपने हाथों में लिया और ब्लास्ट वाली साइड में जाने लगे, इस बार हम रास्ते में आने वाली सभी लाइट को भी तोड़ते हुए जा रहे थे. अब्ब हमारी जुंग अँधेरे में रहते हुए होने वाली थी.. अँधेरा हमारे लिए बहुत फायदेमंद था..

जल्द hi हम ब्लास्ट वाली साइड में जा पोहंचे.. तीनो ब्लास्ट एक hi साइड में हुए थे, तो बेस पर मौजूद अक्सर गुंडे उसी दिशा में दौड़ पड़े थे..

मई और महक फिर मिलकर उन गुंडों को एक एक करके मार गिराने लगे.. एक सेकंड में 2 गुंडे मरते हुए नीचे गिर रहे थे.. इतनी फुर्ती थी हमारी..

गुंडे अभी से कुछ नहीं समझ पाए थे.. पिस्तौल के चलने से आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी, आवाज़ तो गुंडों की भी नहीं सुनाई दे रही थी, गोलियां उनके सर्र में उतर रही थी. बास उनके गिरने की आवाज़ें hi सुनाई दे रही थी.. हर तरफ हां हां कार मच गई, गुंडे बोखला गए..

50 के करीब गुंडे थे. दो कुछ hi देर में मारे गए, एक दो शायद बच गए थे. वही चीखते फिर रहे थे..

मैं और महक फिरसे वापसी क लिए दौड़ पड़े.. नाईट विज़न की वजा से हमें कोई परेशानी नहीं हुई.. जल्द hi हम अपने ठिकाने पर थे..

कुछ hi देर के एक एक करके बाकी के भी ब्लास्ट होने वाले थे....

महक:- विजय दो ब्लास्ट के बाद हम फिरसे वही जायेंगे.. लेकिन इस बार कुछ बदलाव करना पड़ेगा.. हमे अपने पास मौजूद स्माल बॉम्ब्स को भी दीवारों से चिपकना होगा..

विजय:- ठीक है.. लेकिन मेरा ख्याल है, हमें अभी कुछ देर के लिए इस काम को पेंडिंग कर देना चाहिए.. स्माल बॉस हम बेस के दूसरी दिशा में अगर लगाएं तो हमें डबल फायदा मिलेगा, अभी इन गुंडों को मार देते हाँ.. बाकी का बाद में देखते हैं..

महक:- ये भी टकीक है..

जल्द hi फिर दूसरे ब्लास्ट भी होने शुरू हो गए...... मई और महक एक बार फिरसे एक्शन में आ गए... इस बार भी हमने कई और घंटो को मार गिराया.. आधा बेस अँधेरे में डूब चूका था.. मैं और महक फिर से वापिस हो लिए और इस बार हमारा रुख बेस की दूसरी दिशा में था..

दन्न साला अभी पुरे बेस को समझ नहीं सका था.. कई रास्तो से वो अनजान था, बेस को सुरक्षित करने क लिए उसने कुछ नहीं किया था.. हम बड़े आराम से बेस में दनदनाते फिर रहे थे.. अभी तक्क का मिशन तो महेंद्र गैंग वाले मिशन से भी इजी चल रहा था, बाद का पता नहीं..




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बेस में ब्लास्ट हुए तो दन्न और बाकी के छक्के छूट गए.. सबब भागे भागे फिरने लगे, एक बार ओट सबब ये समझे क बेस पूरा hi पहाड़ी धमाकों से तबाह हो जाएगा.. पारर जल्द hi सबब समझ आ गया क जैसे ब्लास्ट हो रहे हाँ, उससे बेस को नुकसान तो पोहंच सकता hai,parr बेस तबाह नहीं हो सकता..

सब एक hi रूम में बैठे थे.. पवन और उसके फ्रेंड्स को भी बुलवा लिया गया था.

ये काम दन्न ने किया था, सब एक बड़े कमरे में बैठे हुए थे.. जोसेफ को गुंडों को हैंडल करने पर लगा दिए गया.. जोसेफ को छोड़ के बाकी सबब hi रूम में बैठे हुए थे..

दन्न:- पवन हमारे दुश्मनो ने बेस पर हमला कर दिए है, हमें बेस बारे सबब बताओ, कहाँ कहाँ हम सुरक्षित रह सकते हाँ और कहाँ रह कर हम अपने दुश्मनो को जला में फंसा सकते हाँ.. यहाँ पर कक्तव कहाँ कहाँ है.. वो सबब भी हमें बताओ..

पवन:- कक्तव सिस्टम तो ज़यादा तर आपके hi आदमियों ने बर्बाद कर दिए था. वही यही के आस पास का कक्तव वर्किंग में है.. दुशमनो से बचने क लिए कक्तव hi हमारे काम आ सकता है, अगर यहाँ रहते छुपने की जगा होती या छुप कर लड़ने का ामकान होता तो क्या हम ऐसे hi आपके कब्ज़े में आ जाते, हम भी तो खुद को बचने क लिए बहुत कुछ कर सकते थे.... यहाँ बेस में सीधे रास्ते से आना मुमकिन नहीं है.. अगर कोई यहाँ आ जाए तो उसे ढूंढा आसान नहीं है.. हम भी यहाँ के बारे में पूरी तरह से नहीं जानते.. हाँ आप सिर्फ इस बेस से बहार निकल कर खुद को सेफ रख सकते हाँ.. या फिर उनसे लड़ कर उनको मार कर खुद को सेफ रख सकते हाँ.. बाकी अगर आप हमे आप नज़र बंद न करते और हमारे साथ रहकर सारे रास्ते देख लेते तो सही रहता.. पारर अब्ब तो जैसे धमाके हो रहे हाँ. मेरा नहीं ख्याल क अब्ब आगे बढ़ कर कुछ किया जा सकता है..

दन्न:- वो तुम छोड़ हम क्या करलेंगे उनका वो तुम्हे बताने की ज़रूरत नहीं है.. इतना लम्बा लेक्चर देने की क्या ज़रूरत थी.............. दन्न का मूड चौपट हो गया था..

मार्टिन:- दन्न यार मूड मत ख़राब करो.. सब देख लेंगे.. इतनी आसानी से तो वो हमें नहीं मार सकता..

दन्न:- मार्टिन मई ये बेस नहीं छोड़ने वाला, तुम तो जानते हो, पीछे हटना और भाग खड़े होना मैंने नहीं सीखा है.. मई हमेशा hi सबब पर भरी पड़ा हों, अब्ब भी ऐसा hi होगा, तो जोसेफ से मिलकर सारे आदमियों को एक जगा समेटो.. फिर कुछ आगे का प्लान बनाते हाँ..

मार्टिन उठ गया, जोसेफ से मिलकर सारे गुंडों को एक साथ किया, और फिर दन्न पवन के साथ मिलकर बेस को अच्छे से समझने लगा..

फिर कई टीम्स बना कर अलग अलग दिशाओं में भेजने लगा..




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मई और महक दन्न और उसके दोस्तों को सबब्ब करते हुए देख रहे थे.. कितनी हैरत की बात थी, दन्न इतनी जल्दी मेरी आँखों के सामने आ गया था.. पर अभी मई उसका कुछ बिगड़ नहीं सकता था, उसे मरना होता तो यही से एक गोली दन्न के सर्र को कई हिस्सों में तकसीम कर सकती थी..

जब 50 गुंडों को छोड़ कर बाकी सबब गुंडे चले गए.. तो दन्न बच रहे गुंडों के साथ वही रह गया.. उसके दोस्त और पवन एंड पार्टनर्स भी वही रह गए..

दन्न ने एक बार चीख कर पवन को मुखतिब किया था, जिस बिना पर हम पवन को जान पाए थे, दन्न ने कुछ आदमियों से कह के पवन और उसके दोस्तों को फिरसे बंद करवा दिए..

दन्न अपने आदमियों के साथ कही जाने लगा तो मई और महक भी नज़र बचते हुए पवन वाली साइड में बढ़ गए.. जल्दी hi हम वहां जा पोहंचे..

वहां 10 गुंडे थे, मैंने और महक ने उन्हें वही ढेर कर dia..gundo की लाशों को छुपा कर पवन के पास पोहंचो वो हमें देखकर हैरान रह गए..

पवन:- तुम दोनों कौन हो, और यहाँ कैसे ए..

महक:- तुम्ही पवन सेठ हो ना..

pawan:-haan मई hi हों, तुम क्यों पूछ रही हो..

महक:- मई क्यों पूछ रही हों..... महक ने एक गोली पवन के एक दोस्त के सर्र में मार दी.. वो वही ढेर हो गया... इसलिए पॉच रही हों.. तुम खुद को बहुत बड़ा दरिंदा समझ रहे हो.. बच्चो को अपाहिज बना कर भीक मानवाओगे.. इतना hi पैसा चाहिए था, तो अपनी माँ, अपनी बहन, अपनी बीवी. बेटियों को धंदे पर लगा देते.. अच्छा पैसा तुम्हे मिल जाता तुम्हे..

पवन महक की बात सुनकर ग़ुस्से में आ गया था.. लेकिन अपने दोस्त को मरते देखकर वो बहुत डर भी गया था.. वो कुछ नहीं बोलै और चुप hi रहा.. उसके दोस्त भी पवन की तरह से चुप hi रहे थे..

महक:- विजय इनका हाल भी बच्चो के जैसे hi करते हाँ..

विजय:- चलो फिर देर किस बात की, मिलकर इनका वही हाल करते हाँ, जो ये सबब बच्चो के साथ करते रहे हाँ..

पवन और उसके दोस्त अब्ब और भी डर गए थे.. वो खुद को बचने क लिए उठ खड़े हुए... लेकिन हमारे सामने उनकी दाल कैसे गाल सकती थी, पल भर में hi मैंने और महक ने पिस्तौल का दस्ता मार कर उन्हें बेहोश कर दिए..

एक मारा गया tha,to बाकी 4 बचे थे.. मैं और महक उन्हें लेकर एक दिशा में बढ़ने लगे.. अभी हम पवन को सबक़ नहीं सीखा सकते थे, अभी दन्न से लड़ने का समय था, पवन और उसके दोस्तों को दररने क लिए महक ने ऐसा बोलै था.. उनकी सजा अभी से hi शुरू हो गई थी.. हम उनको लिए एक जगा जा पोहंचे, वो जगा किसी की नज़रों में नहीं आ सकती थी, और वैसे भी अब्ब सबब हमें hi पुरे बेस में ढूंढ रहे थे, पारर हम तो उनके पास hi थे..

जल्द hi हम पवन और उसके दोस्तों को अच्छे से उन्ही के hi कपड़ो से बाँध कर निकल पड़े..

विजय:- मूड कुछ ख़राब सा हो गया है, है ना..

महक:- हाँ पवन कुत्ते को देख कर मेरा भी मूड कुछ ख़राब हुआ तो है..

मैंने महक को अपनी बहन में भर लिया, और महक के होंटो को अपने होंटो में लिए किश करने लगा.. महक ऑंखें बड़ी किये मुझे देखने लगी.. पहले वो हैरान हुई फिर उसकी भी ऑंखें चमकने लगी, महक भी मुझे किश करने लगी, मई अच्छे से महक के होंटो को पि रहा था, महक भी मेरे होंटो को गीला करने लगी.. कुछ देर किश चली फिर हम दोनों hi अलग हो गए..

महक:- बड़े कमीने हो तुम, ऐसी सिचुएशन में भी तुम मस्ती करने से बाज़ नहीं आते..

विजय:- ः अब्ब बताओ मूड अच्छा हुआ या नहीं...

महक:- हैं जैसी दोसे तुमने दी है, उसका कुछ असर तो असर होगा..

विजय:- चलो एक किश की दोसे और तुम्हे देता हों..

महक:- बस बस रहने दो, अब्ब कई घंटों के लिए मुझे इस सबब की ज़रूरत नहीं पड़ने वाली.. महक हस्ती हुई आगे बढ़ने लगी, मई भी महक की गांड को सहलाता हुआ उसके पीछे चल पड़ा..... गांड पर हाथ लगते hi महक मुझे घूरने लगी

विजय:- वैसे यहाँ से तुम बहुत कातिल दिखती हो, हाय कब्ब मुझे इसे प्यार करने का मौका मिलेगा.. महक की मस्त गांड को देख कर मुझे मस्ती सूझ रही थी. गुफा का माहौल भी मस्त था, हम अकेले भी थे, और अब महक मेरी थी, पारर पूरी नै, महक को भी नए रंग में रंगना था.. लेकिन धीरे धीरे..

mehak:-bhol जाओ, ऐसा कुछ नहीं होने वाला.. मुझसे ऐसी कोई भी उम्मीद मैट रखो samjhe.(mehak मुझे ऑंखें दिखते हुए बोली). अब्ब चलो आगे और दन्न को ख़तम करते हाँ, देरी होने पर कही वो कोई जाल hi न बिछा दे..

मैंने भी जितनी मस्ती करनी थी, कर्ली मैंने अपना फोकस दन्न की और करते हुए महक से साथ स्पीड से आगे बढ़ने लगा.... पवन वाले कैदखाने से पास से गुज़रे तो कुछ गुंडे हमें वही दिखे..

ये एक गुफा थी, और गुफा के अंत में hi वो रूम कैदखाना बना हुआ था, गुंडे टोटल 4 थे और अपने साथियों को ढूंढ रहे थे, पवन भी नहीं मौजूद था.. सब बोखलाए हुए से लग रहे थे..

TICH...TICH...TICH...TICH... की आवाज़ चार बार हुई और हमारे पिस्तौल से निकलने वाली गोइलियन उन चरों के hi सरों में उतर गयी.

वो नीचे गिर पड़े तो हमने उन्हें भी ठिकाने लगा दिए.. यहाँ पर भी जाली वाली पाइपलाइन थी.. गुंडों की लाशों को पिपलिनेस की नज़र कर दिए गया..

जल्द hi मई और महक मुख्तलिफ दिशाओं में घूतमे हुए गुंडों को मारने लगे.. इस बार गुंडे सावधान थे तो वो भी हम पर गोलियां बरसाने लगे.. शोर की आवाज़ हुई तो मैं और महक जितने गुंडे मार सकते थे, मार कर वापिस हो लिए..

गुंडे हमे देख चुके थे.. अब्ब हमें आगे की लड़ाई खुद को सेफ रखते हुए लड़नी थी..

mehak:-vijay एक बार चल कर वेपन वाले एरिया को देखते हाँ और अब्ब देर मैट करो, अब्ब हमें स्माल बॉम्ब्स लगा देने चाहिए.. अब्ब इस जुंग को जल्दी ख़तम करना पड़ेगा..

विजय:- चलो फिर ठीक है, अब्ब जो होगा देखा जाएगा.. अब्ब पूरी तरह से खतरा मोल लेते हुए ब्लास्ट करते हाँ, और सब को hi ख़ौफ़ज़दा करते हाँ...

मई और महक पहले पवन क वेपन्स वाले ठिकाने पर पोहंचे.. लेकिन हमे बीच में hi वापिस मुड़ना पड़ा.. वहां लाइट्स और गुंडों की क्वांटिटी बढ़ा दी गई थी.. हमने वहां मौजूद गुंडों को नहीं मारा..

हम वापिस हुए और अपने बैग में मौजूद बॉम्ब्स निकल कर दन्न वाली साइड में मौजूद सुरंगो पर लगाने लगे.. इस साइड में भी गुंडे थे, लेकिन वो सबब दन्न और उसके दोस्तों की सुरक्षा में लगे हुए थे...

20 के करीब बॉम्ब्स हमने लगा दिए..

मई और महक वापिस हुए और अपने बड़े बैग्स जहाँ रखे थे, वहां जा पोहंचे.. उनके अंदर से और भी बॉम्ब्स निकले और फिर से वापिस हो लिए..

बेस का असल हिस्सा 250 मीटर के एरिया में पहला हुआ था, इसी लिए हमें अभी तक ज़यादा परेशानी नहीं हुई थी.. वर्ण कहाँ हम ऐसे बेस पर हमला करके सुरक्षित रह सकते थे.. गुफाओं से भरा हुआ ये बेस पहले पवन और अब्ब दन्न के लिए मौत का फन्दा बनने वाला था..

बॉम्ब्स के फटने में कुछ hi टाइम था, और इस बार का हमारा काण्ड कुछ और भी रिस्की था, बॉम्ब्स के phat'te hi हम बेस के बाहरी और बढ़ने का सोच रहे थे, वहां मौजूद गुंडों को मार कर हम बेस के बहरी दूर पर कब्ज़ा करने का सोच रहे थे..

कुछ hi देर बेस के अंदर लगाए गए बॉम्ब्स फटने लगे और एक बार फिरसे हर तरफ चीखो पुकार होने लगे, गुंडे ब्लास्ट से मर्डर कम् रहे थे, डर ज़यादा रहे थे, इतने धमाके किसी भी पहाड़ की छत को गिराने क लिए काफी होते हाँ, लेकि बॉम्ब्स की पावर कम् थी, गुफाओं की छतों को कुछ नहीं हुआ...

ब्लास्ट होते hi मैं और महक बेस के मैं दूर hi और भाग खड़े हुए.. इस बार हम खुद भी खतरे में थे... इस बार मैंने और महक ने मशीन गन्स थामी हुई थी, और हम रास्ते में आने वाले गुंडों को भूनते हुए आगे बढ़ रहे थे..






ब्लास्ट के बाद मशीन गन्स के दहाड़ने की आवाज़ ने मंज़र को और भी भयानक बना दिया था.. गुंडे चीखते हुए अनगिनत घाव कहते हुए गिरते जा रहे थे.. मई और महक रुके बिना hi आगे बढ़ने लगे..

जल्द hi आधे गुंडों को मार कर हम बेस के बहरी दूर के पास जा पोहंचे, वहां गुंडे मौजूद थे, लेकिन उसकी संख्या कम् थी... हम वहां रुके बिना hi मशीन गन्स की गोलियां बरसते हुए गेट से बहार निकल गए..

बहार निकलते hi हम दिन की रौशनी में आ गए थे.. हम दोनों ने hi अपने नाईट विज़न चश्मे उतारे.. और पास की चट्टान के पीछे छुप कर पोजीशन ले ली..

ये सफर हमारे लिए बहुत hi रिस्की था.. एक गोली लगती और हमारा काम हो जाना था.. लेकिन इस बार हम बेस के मैं गेट के बहार मौजूद पोजीशन लिए हुए थे.

हमें बॉम्ब्स लगाने की अभी ज़रूरत नहीं पड़ी थी.. बॉम्ब्स अभी भी हमारे पास थे.

हम दोनों ने साइड में नज़र दौड़ाई तो हम देख कर हैरान रह गए क दन्न का कोई भी आदमी बहार मौजूद नहीं था..

महक:- है है है दन्न पागल हो गया है, हमें अंदर बेस में पा कर उसने अपने सरे hi आदमी बहार से अंदर बुला लिए थे.. चलो एक काम तो अच्छा हुआ क अब्ब उनमे से कोई भी बहार नहीं निकल सकता.. घूम फिर कर एक hi रास्ता इस बेस से बहार निकलता है.. जहाँ हमने दन्न के दो गुंडों को देखा था... वहां जाना भी आसान नहीं है..

विजय:: तुम खुद hi तो कहती हो क दन्न के पास दमाग बहुत है तो वो खुद को सेफ रखने क लिए बहुत कुछ करेगा.. कोई न कोई रास्ता तो वो वो ढूंढेगा hi..

एक काम और क्यों न करें..

महक:- वो क्या.............. महक सामने गुफा के मोहन को देख रही थी, जो पवन के बेस का मैं गेट भी था.. अब्ब वहां पर कोई भी मौजूद नहीं था, यहाँ से कुछ गुंडों की लाशें नज़र आ रही थी.. अंदर हमें अँधेरा hi अँधेरा नज़र आ रहा था.. अंदर मौजूद ब्लास्ट ने बहुत ज़यादा नुकसान कर दिया था बेस का.. गुफा का दहन 10 फ़ीट चौड़ा था..






विजय:- हम इस मैं गेट को डिस्ट्रॉय कर देते हाँ, और फिर वही से फिरसे अंदर दाखिल होते हाँ, इस बार दन्न को फिरसे एक झटका लगेगा, वो अब्ब समझ चूका होगा क हम बेस से बहार निकल कर उनके बहार निकलने का रास्ता बंद कर चुके हाँ.. और फिर ये भी तो हो सकता है क दन्न के दिल्ली में भी कुछ कनेक्शंस हों, और वो अपने उन्ही कनेक्शंस के द्वारा और गुंडे बुलवाले.. फिर हमारे लिए बहार से भी दन्न पर अटैक करना मुमकिन नहीं रहेगा..

महक:- हाँ तुमने सही कहा है, हमे ऐसा hi करना चाहिए.. हमें वही से एक बार फिर अंदर जाना चाहिए लेकिन अभी नहीं.. कुछ देर ठहर कर चलते हाँ, पहले उनके यहाँ से बच निकलने के चान्सेस को ख़तम करते हाँ.... एक बात और भी मेरे मैं में आ रही है, कही दन्न फ़ैल होने की सूरत में अपनी पावर को इस्तेमाल में लाते हुए पुलिस की मदद न हासिल करले.. महाराष्ट्र का कम भी तो दन्न का आदमी है, अगर दन्न ने उससे राब्ता किया और फिर महाराष्ट्र कम प्राइम मिनिस्टर से भी कह कर साड़ी गेम के अंडर में भी ले सकता है.. जब्ब वो हारे गए तो ये भी हो सकता है क पवन के बेस पर फंसे हुए बच्चो को आज़ाद करवा कर सारा क्रेडिट वो खुद ले ले.. ऐसा करने से दन्न हमारी पोहंच से भी दूर हो जाएगा..

विजय:- haaaaaaaaaaaaaa...............mehak की बात सुनकर मेरे अंदर की साड़ी हवा hi मोहन के रास्ते बहार निकल गई..

विजय:- साली तुम इतनी ज़हीन हो, ये सबब सोच सकती हो, तो दन्न खुद कितना ज़हीन होगा.. तुम भी तो उसके लुंड से hi जन्मी हो.. उसके लुंड के पानी ने तुम्हे इतना ज़हीन बनाया है, तो सोचो वो खुद कितना कमाल का ज़हीन होगा.. तुमने तो साड़ी गेम hi पलट दी..






महक:- मंद योर लैंग्वेज.. मुझे साली मैट बोलो समझे.. और ज़हानत मुझे दन्न के लुंड से नहीं मिली है, मई सेल्फमेड हों, दन्न मेरे सामने क्या बेचता है..






मैंने महक को पकड़ कर खुद के ऊपर गिरा लिया.. महक मेरे ऊपर आई और मेरी आँखों में देखने लगी....






mehak:-(mere चेहरे पर फूँक मारते हुए) डर गए..

विजय:- (महक को हल्का सा किश करते) हाँ बहुत ज़यादा..






mehak:-(maza लेते हुए) तो अब्ब कैसे तुम्हारा डर ख़तम होगा.

विजय:- दूध पीने से मेरा सारा डर चला जायेगा.. पिलाओगी न मुझे तुम अपना दूध.... महक के होंटो पर जीब फेरते हुए..

महक ने मेरी जीब को अपने दांतो में भर लिया, और मुझे मुस्कुराती हुई देखने लगी.... थोड़ा सा दबाओ मेरी जीब पर बढ़ा दिए.. फिर छोड़ कर मेरे गाल को अपने डेंटन में भर लिया और थोड़ा सा काट दिया..

महक:- दूध का तो पता नहीं, पर मुझे लगता है, तुम्हे अपने अण्डों की फ़िक्र नहीं है, अगर मैंने उन्हें तोड़ दिए, तो तुम्हारा केला भी किसी काम का नहीं रहेगा, बिना अण्डों के वो कुछ hi देर में सूख जायेगा.. और पुरे पैलेस में hi मातम छ जायेगा. एक लुंड की वजा से कितनी hi छूट हमेशा के लिए लुंड से दूर हो जाएँगी..

विजय:- हाय तुम मेरे अंडो को अपने मोहन में लेकर तोड़ सकती हो... कुछ देर के लिए hi सही पर मुझे मज़ा तो आ hi जायेगा ना... और तुम पैलेस में मौजूद छूट की फ़िक्र न करो, मेरा लुंड बिना अण्डों के भी उनकी छूट को ठंडा कर दिए करेगा..

महक:- चलो फिर गुफा के अंदर घुस कर मई तुम्हारे अण्डों को फोड़ने का कोई जुगाड़ करती हों.

विजय:- सच्ची

महक:- मुछियई........... विजय तुम पुरे कमीने हो, मुझे भी अपनी लाइन पर लाने की कोशिश में लगे हुए हो....... साला पता नहीं क्यों मुझे भी ये सबब बहुत मज़ा दे रहा है.. न जाने ये कैसी फीलिंग्स han.jo मेरे अंदर सर उठाने लगी हाँ... प्यार वाला तो कोई चक्कर हो hi नहीं सकता.. पारर है कुछ ऐसा जो मुझे समझ तो नहीं आ रहा, पारर अब्ब मुझे ज़िन्दगी जीने में मज़ा भी बहुत आ रहा hai..abb से पहले में मई हमेशा hi अकेली रही हों, सबब कुछ अकेले hi कुआ है, पारर अब्ब तुम साथ हो तो सबब बदला बदला सा, सबब महकता महकता सा लगने लगा है.... महक इतना बोल कर खुद से hi मुझे हल्का किश करते हुए पीछे हट गई..

मैं महक को देखने लगा, महक के साथ इतने खतरनाक हालत में भी ये सबब करके मुझे कितना सुकून मिल रहा था... ये सबब करते हुए मेरे लुंड को कोई भी फर्क नहीं पड़ा था... ये सब लुंड वाला चक्कर नहीं था..

जो भी था, पारर था बहुत hi मज़े का..

पारर एक लड़की के साथ ऐसा तब्ब hi किया जाट है, जब्ब फ्यूचर में लुंड का खेले जाने की उम्मीद हो, अंदर hi अंदर कही बहुत दूर कुछ चल रहा होता है, और बाँदा समझता है, क नहीं मई तो ऐसा कुछ भी नहीं सोच रहा..





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थैंक्स..!!

स्टोरी को स्पीड देने का मैं किया तो स्पीड दे दी.. विज्जू ने शादी और सुहागरात का सन सबके लिए hi मस्त था. सबको विज्जू और श्वेता का प्यार देख कर मज़ा आया..

अब्ब दन्न से महक और विजु का टंका भीड़ गया है, दन्न मरने क लिए दिल्ली आ पोहंचा है, और दोनों दन्न का हशर करने क लिए वही जा पोहंचे हाँ..

विज्जू का महक से पहले से hi कोई कनेक्शन नहीं है.
 
अपडेट :::128

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मैं और महक एक दूसरे से अलग हुए तो कुछ देर पहले वाले भाव हमारे चेहरे पर नहीं थे.... अब्ब हम दोनों hi "आगे जो करना है" वो सोच रहे थे...

हमें चट्टान पर ए हुए 10 मिंट बीत चुके थे, और अभी तक्क बेस के अंदर से बहार कोई नहीं आया था...

मैंने और महक ने अपने दोनों बैग्स उतारे और उसके अंदर से बॉम्ब्स निकल कर बहार रख दिए..

टोटल 20 के करीब छोटे छोटे बम थे.. बेस के अंदर से उठाये हुए बम 15 थे.. हमने छोटे बॉम्ब्स को छोड़ कर वो 15 बॉम्ब्स एक साथ रखे और उनका टाइम सेट करने लगे..... हमारा इरादा था क सब बम एक साथ गुफा के मैं गेट से ऊपर ब्लास्ट किये जाएँ.. जिससे ऊपर मौजूद चट्टानें और पत्थर टूट टूट कर बेस के गेट को बंद करदेंगे.. अगर बंद न भी हुआ तो हमारा काम हो जाना था..

जल्द hi हम अपने काम से फ्री हुए, तो फिर सामने और आस पास देखते हुए हम बेस के गेट के ऊपरी और चढ़ने लगे..

अगले 10 मिंट में हम अपना करके फिरसे चट्टान के पास पोहंच चुके थे...

महक:- विजय तुमने फिर जूली से राब्ता नहीं किया, हमे अब्ब हर लेटेस्ट खबर का पता होना चाहिए, जैसा हम पहले सोच रहे थे, वैसा hi कुछ हुआ तो गड़बड़ हो सकती है..

मुझे भी महक की बात सही लगी..

विजय:- ब्लास्ट करके फ्री होते हाँ तो, फिर जूली से भी राब्ता करता हों..... जल्द hi टाइम पूरा हुआ और एक बड़ा धमका हुआ, बेस वाली गुफा के ऊपर रखे धमाके की वजा से ऊपर मौजूद चट्टानें और पत्थर टूट टूट कर गिरने लगे...

धमाका अच्छा ख़ासा था, गुफा का मोहन आधे से ज़यादा बंद हो चूका था, और अभी भी ऊपर से पत्थर फिर रहे थे.. मई और महक सर्र नीचे किये ये सबब देख रहे थे..




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बार बार होने वाले धमाकों ने बेस के अंदर मौजूद दन्न उसके दोस्तों को और गुंडों को टेंशन में डाला हुआ था.. लेकिन अब्ब दन्न और उसके फ्रेंड्स धमाकों की टेंशन में नहीं थे, वो धमाकों के आदि हो चुके थे, अब्ब मसला उसके लिए खुद को सेफ रखते हुए महक और विजय का खत्म करना था....

दन्न मुसलसल hi टहल रहा था.. उसे किसी पल चैन नहीं मिल रहा था.. ईंटे धमाके हुए थे, क बेस का पूरा नक्शा hi बदल कर रह गया था, दन्न जो कुछ सोचकर दिल्ली में आया था, वो पूरा होता नज़र नहीं रहा था.. उसके कई काबिल आदमी मारे जा चुके थे.. वो चाह कर भी कुछ कर नहीं पा रहा था..

इतनी बड़ी हार दन्न को अपनी लाइफ में कभी नहीं मिली थी.. हमेशा से hi दन्न jeet'ta आ रहा था, कोई भी आज तक्क उसके सामने टिक नहीं पाया था, आज कोई उसके बेस में घुस कर उसे hi बर्बाद करने पर तुला हुआ था..

मार्टिन:- दन्न य्र्र अब्ब क्या करने का सोचा है तुमने.. अब्ब तो वो बहार मौजूद हाँ, और हम भी अब्ब बहार नहीं जा सकते.. पवन और बाकी सबब भी कही नहीं हाँ.. हमारे आदमी भी 60% मारे जा चुके हाँ.. कुछ तो हट के सोचना पड़ेगा..

विलियम:- दन्न मैंने तो कहता हों क हमें बहार से मदद ले लेनी चाहिए..

दन्न रुक गया और विलियम को घूरने लगा..

विलियम:- मैंने कुछ गलत भी तो नहीं बोलै, जो ऐसे देख रहे हो.

दन्न:- तुमने जो बोलै है विलियम उस बात पर घोर भी किया है तुमने.. पूरा इंडिया हमसे मदद मांगता है तुम कह रहे हो क मई उनसे मदद मांगो.. कौन ऐसा है जो मुझसे बढ़कर है, किसकी पावर मुझसे बढ़कर है, कौन ऐसा है, जो मई न कर सकूँ और वो कर दिखाए.. मेरे hi लुंड से जन्मी मुझसे टक्कर ले रही है तो मई दुसरो की मदद हासिल करूँ.. श्वेता जिसे मई सालो से छोड़ रहा हों, उसकी छूट से निकला विजय, मई उससे डर जाऊं, क्या यही सबब सोच कर हम दिल्ली में आये थे, क्या ऐसे hi लोगों से मदद मांग कर हम अपना धंदा दिल्ली में जमाएंगे.. लोग मेरे पास मदद क लिए आते हाँ, और मई उनके पास जाओ मदद क लिए... विलियम फिरसे ऐसा मैट बोलना.. अभी बेस पर हमला हुआ है, हमारे कई आदमी मारे गए हाँ, पारर अभी मई बेबस नहीं हुआ हों, अगर ये सबब कर दिखने इतना hi आसान होता तो अब्ब तब्ब हममे से कोई भी ज़िंदा नहीं होता..

मार्टिन:- ठीक है तुमने दन्न, मई भी सबब समझ रहा हों, वो अचानक से hi इतने धमाके करके भी हमसे गलतियां करवाना चाहते हाँ, अगर उन दोनों क लिए ये सबब कर पाना इतना hi आसान होता तो अब्ब तक्क वो पूरा बेस hi उदा चुके होते.. लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए.. अब्ब जो आखरी हमला बहार मौजूद केव का मोहन बंद करके किया है, वो समझते हाँ क हम अंदर खुद को फंसे हुए पा कर बहार निकलने की कोशिश करेंगे.. लेकिन इस बार वो दोनों गलत हाँ.. हम कोई भी स्टेप ऐसे नहीं ले सकते.. अब्ब हमे सबब hi सोच समझ कर करना है..

दन्न मार्टिन की बात सुनकर बैठ गया..

दन्न:- जोसेफ कितने आदमी हमारे ज़िंदा हाँ.

जोसेफ:- 100 के करीब होंगे. कम् तो हो सकते हाँ, पर ज़यादा नहीं.. इस बार के धमाकों में कुछ ज़यादा hi नुकसान हुआ है हमारा..

दन्न:- वो सबब छोडो, और उन सबब को फिरसे जमा करो, और इस एरिया के हर एक रास्ते पर उन्हें टाइनाट कार्डो.. अब्ब्ब इस दिशा में कोई न आ सके.. अभी हम इस बेस के बारे में सही से नहीं जानते... यहाँ आने वाले रास्तो को भी सही से नहीं जान पाए.. वो दोनों हरामी साले बड़ी जल्दी हम पर चढ़ चौड़े हाँ, हमे बेस को सुरक्षित बनाने का मौका भी नहीं दिया दोनों ने..

इस बार सबब छुप कर और अँधेरे में रहते हुए पोजीशन पर रहेंगे.. अब्ब इस एरिया को छोड़ कर कही और जाने की ज़रूरत नहीं है.. पहले देखते हाँ अब्ब वो दोनों नया क्या करते हाँ. फिर आगे का सोचेंगे.. साला मैंने भी बहार से सारे आदमी बुलवा कर बहुत बड़ी गलती करदी.. कुछ बहार होते तो अब्ब तक्क दोनों को मार चुके होते..




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जूली से राब्ता हुआ तो उसने बता दिए क पापा और कम दोनों hi यहाँ पर मौजूद हाँ... मैंने पापा और कम से बात की, और उन्हें बेस के मैं गेट की सुरक्षा का बोल कर आगे जाने के लिए तैयार हो गए...

एक काम हमारा भी हो गया था, पापा और कम के आने से हमारी बड़ी मदद हो गई थी..

मई और महक फिरसे पहाड़ पर चढ़ने लगे, जहाँ एक चट्टान के पास हमें वो गुफा का रास्ता दिखा था.. वो ज़यादा दूर नहीं था, पारर उसे ढूंढ़ना आसान नहीं था. एक तो धुप बहुत तेज़ थी, और चट्टान भी कुछ ऐसी थी, जिससे मिलती जुलती और भी कई चट्टानें आस पास मौजूद थी..

मैं और महक दोनों मिलकर वो चट्टान ढूंढ़ने लगे, जिसके पास hi गुफा का रास्ता मौजूद था.. कुछ परेशानी तो हुई लेकिन दन्न के आदमियों के पैरों के निशानों पर चलते हुए हम वहां पोहंच hi गए.. हमें वो गुफा ढूंढ़ने में 40 मिंट लग गए थे..

मैं वही खड़ा हो कर पीछे मुद कर देखने लगा.. दूर दूर तक मुझे कोई भी नहीं दिखाई दे रहा था.. बास कुछ पुलिस वाले थे जो छुपते हुए आगे बढ़ रहे थे..

महक:- चलो अब्ब अंदर भी..

विजय:- अभी ठहरो......... मैंने पापा और कम को भी अपनी लोकेशन बारे बता दिए.. ज़रूरत पढ़ सकती थी.. उन्हें भी अंदर घुसना पद सकता था..

महक:- ये भी तुमने सही किया, इस बार हम अपना लाइन ऑफ़ एक्शन भी चेंज कर लेंगे............ महक मेरे साथ अंदर बढ़ते हुए बोली.

विजय:- वो तो करना hi पड़ेगा.. अब्ब दन्न भी कुछ तो हट करेगा..

महक:- देखते हाँ, अब्ब वो हरामी क्या करता है.

जल्द hi हम गुफाओं के अंदर रहते हुए आगे बढ़ रहे थे.. जल्द hi हम फिरसे बेस के करीब थे.. इस बार हमारे लिए रास्ता सही नहीं था, जगा जगा ब्लास्ट के कारण होने वाली टूट फूट का सामना करना पद रहा था.. कई छोटे बड़े पत्थर टूटे हुए रास्ते में पड़े थे, हम उन्हें फलांगते हुए आगे बढ़ रहे थे..

हर तरफ अँधेरा था, नाईट विषयों चश्मे हमारी आँखों पर थे, और अब्ब हम कुछ भी बोले बिना आगे बढ़ रहे थे, एक बार फिरसे डेंजरस जोन शुरू हो चूका था.. अब्ब दन्न सावधान हो चूका था, उसे भी सँभालने का मौका मिल चूका था..'

हमें एक एक कदम फूँक फूँक कर रखना था.. जल्द hi हम वर्कशॉप वाले एरिया में जा पोहंचे.. वो एरिया जहाँ मचिनेस पड़े हुई थी, जिनकी मदद से बच्चों को अपाहिज बनाया जाता था.. इस एरिया को छोड़ कर आस पास का सबब hi तबाह हो चूका था.. कही कोई गुंडा हमें नहीं दिखा था.. हाँ लाशें बहुत सी दिखी थी हमें गुंडों की.. सबकी बहुत बुरी हालत हुई पड़ी थी, कुछ गलियों से मरे थे तो कुछ पत्थरो के बीचे डब्ब कर मरे थे..

सब अच्छे से देख लेने क बाद..

महक:- अब्ब हमें यहाँ तो कोई भी मिलने से रहा.. अब्ब यहाँ इस दिशा में कोई भी नहीं है..

विजय:- दन्न के पास अब्ब गुंडे कम् रह गए हाँ, तो वो ज़रूर उन्हें अपने आस पास hi रखेगा..

महक:- तो फिर एक काम और क्यों न करें. यहाँ मौजूद बच्चो को बहार लेजाने का इंतेज़ाम करें.. जैसे तीनो गोदामों से बच्चो के साथ लड़कियां भी मिली थी, यहाँ भी लड़कियों के मिलने के चांस हो सकते हाँ.. उन्हें भी सेफ करना होगा..

फिर हमें बेस को उड़ाने में कोई टेंशन नहीं होगी..

विजय:- अच्छा ऐसा है तो पहले लड़कियों को ढूंढ़ते हाँ.. वो भी ज़रूर कही आस पास hi होंगी..

महक:- एक बात पर हमने धयान hi नहीं दिए.. पवन के बने इस बेस के बारे में सब फ़ौरन hi समझ लेना आसान नहीं है, उनसे ज़रूर इस बेस में कोई बसमेंट भी बनाया होगा.. हमें वो भी ढूंढ़ना होगा..

विजय:- ोू हाँ, ये हम पहले कैसे भूल गए, वहां भी हमें बहुत कुछ मिल सकता है, इन्फो भी, लड़कियां और बच्चे भी और माल भी.. पवन और उसके पार्टनर्स ने बहुत कुछ छुपा कर रखा होगा, और दन्न को सबब जान्ने से कोई दिलचस्पी नहीं रही होगी, इसलिए उसने नहीं जाना होगा, वो तो बास बेस देखकर खुश था..

महक:- और हमें दन्न की इस गलती का फायदा उठाना है..

फिर मई और महक आस पास मौजूद एक एक रूम को अच्छे से चेक करने लगे.. कही से बेसमेंट में जाने का रास्ता तो नहीं है.. ये कोई आसान काम नहीं था, ये भी नै पता था, क बेसमेंट का रास्ता इधर से होकर जाता है भी है या नहीं..

आधे घंटे तक्क मई और महक खवार होते रहे, पारर हमें कुछ भी ऐसा नहीं दिखा, जिससे अंदाज़ा हो क यहाँ पर बेसमेंट में जाने का रास्ता होः..

बेसमेंट भी है या नहीं ये भी हमें कन्फर्म नहीं था.. लेकिन कोई भी बेस बेसमेंट के बिना बन hi नहीं सकता, हर कोई पहले बेसमेंट पर धयान देता है..

महक:- अब तो एक hi हॉल है, पवन और उसके दोस्तों को हमें यहाँ लाना होगा, उनपर टार्चर करके हमे सबब उगलवाना होगा.. जो काम हमे पहले करने का समय नहीं मिला था, अब्ब हमे वो काम करना होगा..

विजय:- उनको लाना आसान भी नहीं होगा, आगे दन्न बहुत एक्टिव होगा..

महक:- पहले कौनसा हमने दन्न की टेंशन ली है, जो अब्ब लेनेगे.. अगर तो दन्न ने अपने आदमियों को अपने आस पास रखा हुआ है, तो हमें पवन और अपने बैग्स लाने में कोई परेशानी नहीं होगी.. और हमें अब्ब जल्द hi ये सबब कर लेना चाहिए..

विजय:- तो फिर चलो.......... आगे चलते हुए हमें वैसी hi तबाही दिखी, जो पहले hi देख चुके थे, लाशें और पत्थर बहुत मिले हमे रास्ते में.. कई गुंडे अभी भी तड़प रहे थे, उन्हें नज़र अंदाज़ करते हुए हम आगे बढ़ने लगे..

हर तरफ अँधेरा था, और हमें कोई गुंडा नहीं दिखा.. दन्न वाले एरिया से लेफ्ट साइड में हमारा ठिकाना था, जहाँ पवन मौजूद था..

मैंने दो और महक ने एक गको उठा लिया.. महक के एक हाथ में गन थी. हम दोनों hi अपने दोनों हाथ गन्स से खली नहीं कर सकते थे..

कुछ देर लगी पर पवन और उसके दोस्तों के साथ हम अपने बैग्स भी उठा लाये थे.. पवन और उसके दोस्तों को हम बहुत पीछे ले गुफा में ले गए थे, जहाँ से उसकी चीखे कोई न सुन सके..

टोर्च की रौशनी में चरों को नंगा किया.. चरों के हाथ और पेअर एक एक करके फिरसे बाँध दिए गए थे... पवन को राह पर लाने क लिए महक ने खुद से सबब करने का मैं बना लिया था..

महक को एक hi काम करना आता था, लुंड को चीरा देना.. और वो भी दरिंदगी की इन्तहा करते हुए..

महक ने एक के लुंड पर खंजर से हल्का का कट लगा दिए.. उसे दर्द हुआ तो वो होश में आने लगा.. महक ने बाकी के तीनो को भी जाएंगे पर हलके हलके कट लगा दिए. वो भी होश में आने लगे.. खुद को हमारे कब्ज़े में देख कर वो डर गए, खुद को नंगा और बंधा हुआ देखकर और फिर महक के हाथ में खंजर और खंजर को एक के लुंड पर देख कर वो डर के मारे कांपने लगे..

महक ने उनपर धयान दिए बिना hi एक के लुंड से खेलते हुए उसे चीरना शुरू कर दिए.. जिसका लुंड चिर्र रहा था, वो तो चीख hi रहा था, दूसरे भी ज़ोर ज़ोर से चीखने लगे, वो समझे क एक लुंड के बाद उनके लुंड की बारी आयने वाली है..

गुफा में चरों की दर्द भरी, दहशत भरी चीखें सुनाई देने लगीं.. महक उसका लुंड चीरते हुए बोली.

महक:- क्यों ऐसे hi वो बच्चे भी चीखते थे ना, जिनके तुम हाथ, पेअर काट ते थे.. बड़े मज़े मज़े से उनके अंगों को उनके जिस्मो से अलग होते हुए देखते थे.. अब्ब मज़ा आ रहा है ना..

वो:- मुझे माफ़ कार्डो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई, तुम चाहो तो मेरा पास मौजूद सारा माल ले लो, पारर मुझे छोड़ दो....... वो बेइंतेहा दर्द से बिलबिला रहा था.. तड़प रहा था. बंधा हुआ होने की बिना पर खुद को बचने क लिए कुछ कर नहीं सकता था..

महक ने उसकी आँखों में देखा और फिर बाकी की बंधे हुओं को देखा..

महक:- क्यों पवन लुंड कटवाना चाहते हो naa..mehak मज़ा लेते हुए बोली.. पवन की हवा hi बंद हो चुकी थी, उसकी ऑंखें देखकर लग रहा था, जैसे उसने कोई बहुत hi भयानक आत्मा देख ली हो..

pawan:-nnnnn.. नहीं.... ममम.. mera.....nnn...nahi

महक:- तो फिर बताओ, इस बेस के बारे में और तुमने जो कुछ दन्न को बताया है वो भी बता दो. बाकी के बच्चे और लड़कियां कहाँ है, यहाँ वर्कशॉप है, मचिनेस लगी हुई हाँ, तो बाकी का सारा स्टाफ कहाँ है.. डॉक्टर भी होंगे.. और मुझे तुम सबब बताओगे......

पवन थूक निगलते हुए हाँ में सर्र हिलने laga...mehak ने मुझे देखा तो मैंने पानी की बोलता निकल कर पवन के मोहन में थोड़ा सा पानी उंडेल दिए.. पवन ने मुझे मश्कूर नज़रो से देखा..

पवन:- मई जो भी बोलूंगा, उसमे कोई भी झूट शामिल नहीं होगा..

महक:- झूट तुम मेरे सामने बोल भी नहीं सकते.. जैसे hi तुम्हारी ज़ुबान लड़खड़ाने लगेगी.. मेरा हाथ में मौजूद खंजर तुम्हारे लुंड से खेलना शुरू कर देगा.. और मुझे ऐसा खेल खेलने में बहुत ज़यादा मज़ा आता है..

पवन ने फिर हमें सबब hi बता दिए.. बेसमेंट में उसकी सालों की कमाई पड़ी हुई थी, बेसमेंट में hi कुछ लोग मौजूद थे, और किसी भी टाइम बाज़ी पलट देने क लिए एक्शन में आ सकते थे.. बच्चे और लड़कियां भी मौजूद थे बेसमेंट में... स्टाफ भी वही था, कुछ दन्न के हमला में मारा गया था, तो कुछ अभी भी वहां ज़िंदा सलामत था..

पवन ने सबब ऐसे hi नहीं बताया था, वो सबब सच नहीं बता पा रहा था, सब इन्फो निकलने क लिए उसके दोस्त का लुंड कई लुन्डों में तब्दील हो गया था, और महक के पवन के दोस्त को और भी कई जगा छोटे छोटे चीरे दिए थे.. कुछ पवन के दूसरे दोस्तों ने भी बक्क दिए था..

महक:- विजय हमारा काम तो हो hi गया है.. तो अब्ब इनका क्या करें.. इनको आसान मौत तो नहीं मिल सकती. पल पल सिसक सिसक कर मरेंगे. ये भी दन्न से कम् दरिंदे नहीं है, दन्न जिस्मो का भूका है तो ये मासूम बच्चो और लचर लड़कियों पर ज़ुल्म करने वाले दरिंदे.. इन्हे मई लम्बे आरसे तक्क ज़िंदा रख कर पल पल मारना चाहती हों..

विजय:- ठीक है, तो फिर इन्हे एक बार फिरसे बेहोश कर देते हाँ, बेसमेंट को अपने कबसे में लेते हाँ, और इन्हे फिर वही कही बाँध देंगे.. दन्न का ताँता ख़तम करने के बाद दन्न के साथ इसे भी साथ ले चलेंगे, और वहीँ पैलेस में hi इनका भी रेखा बाई के जैसे इंतेज़ाम करेंगे.... वैसे भी मुझे दन्न के लिए भी इनमे से मौजूद एक डॉटर्स और मचिनो की ज़रूरत पड़ेगी..

रेखा बाई और दन्न के साथ भी मई कुछ ऐसा hi करना चाहता हों.

महक:- सही है. दन्न कुत्ता भी कुछ कम्मं सजा के लायक नहीं है, उसे भी बहुत कुछ भुगतना पड़ेगा.. चलो अब्ब इनकी गेम बजाते हाँ.... पवन और दूसरे आधे मर्डर चुके थे, महक के खेल ने उन्हें कही का नहीं छोड़ा था, सेल खुद दरिंदे थे, लेकिन महक की दरिंदगी देख कर डर और दहशत के मारे आधे मर्डर गए थे... जब्ब खुद के साथ ऐसा होता हुआ नहीं देख सकते तो क्यों दूसरों के साथ ऐसा करते हाँ..

जिसका लुंड महक ने चीरा था, अब्ब उसे ज़िंदा रखने का कोई फायदा नहीं था, महक ने उसके लुंड को पूरी तरह से चीयर कर अलग कर दिए, उसकी गांड में भी खंजर उतार कर उसकी गांड पहाड़ दी.. उसकी चीखें एक बार फिरसे गूंजने लगी थी. बाकी भी फिरसे मारे दहशत के चीख रहे थे.. महक बाकी बचे हरामियों को उनके किये का नमूना दिखा रही थी..

उनकी गांड पहाड़ देने क बाद महक ने उसके पेट के अंदर से उनका सारा अंजार बंजर बहार निकल दिए.. जिसे देख कर पवन और बाकी उल्टियां करने लगे, खली पेट उलटी करने की वजा से उनकी हालत और भी ख़राब होने लगी थी..

ये सबब करके महक में खंजर को पवन के गालों से साफ़ किया.. पवन की हालत होश मांडो जैसी नहीं रही थी.. महक ने उल्टा खंजर पवन और उसके बाकी बढे दोनों दोस्तों के सर्र पर मार कर उन्हें बेहोश कर दिए..

तीनो को उठाये हुए हम बेसमेंट की और बढ़ चले..

अब्ब हमें उस बेसमेंट में मौजूद बाकी के हरामजादो को ख़तम करके बेसमेंट पर कब्ज़ा करना था..

वहां फंसे हुए बच्चों और लड़कियों को मेहफ़ूज़ करना था.. उन्हें वहां से निकल कर गुफा के रास्ते बहार निकलना था..




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अपडेट :::129


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पवन से बेसमेंट का रास्ता जान कर हम वही जा पोहंचे.. बेसमेंट में पोहचने में और वहां पर मौजूद गुंडों को मार कर बेसमेंट पर कब्ज़ा करने में हमें ज़यादा टाइम नहीं लगा..

रीज़न ये था, क कई धमाके होने की वजा से बेसमेंट को भी कुछ नुकसान पोहंचा था, बेसमेंट में टोटल 11 गुंडे थे, 3 मेल और 1 फीमेल डॉक्टर थी, कई लड़कियां और बच्चे भी वही थे..

धमाकों की वजा से बेसमेंट की छत पर से कुछ पत्थर गिर अपडे थे, कुछ गुंडों को और कुछ बच्चो और लड़कियों को ज़ख़्मी कर गए थे.. सब hi अफरा तफरी में थे.

गुंडे जो पहले शायद ऊपर हमला करने क लिए रेडी हों, पर धमाकों के बाद ज़ख़्मी होकर वो सबब सुस्त पड़े हुए थे.. कुछ गुंडे ज़ख़्मी the,kuch रेस्ट कर रहे थे, और कुछ के पास हथिया नहीं थे..

मैंने और महक ने गुंडों को देर किये बिना hi मार दिया था.. आधे तो वो पहले से hi मरे हुए थे, बेसमेंट में कैद की लाइफ जी रहे थे, फिर होने वाले धमाकों की वजा से वो और भी ज़यादा डर गए थे..

एक फीमेल डॉक्टर को छोड़ कर बाकी डॉक्टर्स को महक ने काट डाला था... ुणसब्ब के मरने पर फीमेल डॉक्टर ने महक के पैरों में रट हुए बताया था क उसके बच्चे को पवन ने कही किडनैप करके रखा हुआ है, इसलिए वो मज़बूरी में ये सबब कर रही है.. महक ने फिर भी उसे कई थप्पड़ मारे थे.... खुद के बच्चे को बचने क लिए वो औरों के बच्चों के साथ जानवरों का सा सलूक कर रही थी..

डॉक्टर भी चुप नहीं रही thi.."agar मई ये सबब नहीं करती तो पवन कुत्ता किसी और डॉक्टर को उठा कर यहाँ ले आता, यहाँ पर मौजूद बच्चो का ऐसा हाल तो होना hi था, ऐसा हरामी लोगों को रोकना पुलिस का काम है, या किसी मिनिस्टर का..

सबब मिलकर ऐसो को सपोर्ट करते हाँ.. मेरा एक hi बीटा है, उसे बचने के लिए मई कुछ भी कर जाओगी.. बुराई को रोक पाना मेरे बास में नहीं है"

डॉक्टर रट हुए सबब बोली थी, और डॉक्टर की बात गलत भी कहाँ थी.. मई और महक एक दूसरे का मोहन देखकर रह गए थे..

70 के करीब लड़कियां वहां हमें मिली थीं, और इतने hi बच्चे यहाँ मौजूद थे, एक बात जो अच्छी हुई थी, वो ये थी क बेसमेंट में मौजूद बच्चे ठीक थे, अभी उनको ऑपरेट नहीं किया गया था.....

एक बात बुरी भी हुई थी, क कुछ लड़कियां ऊपर भी मौजूद हटीं, और वो दन्न वाली साइड में थी.. वो सबब अपनी इज़्ज़त गुणवा चुकी थी, ये सबब हमें डॉक्टर ने बताया था.. हमने लड़कियों और बच्चो को बता दिए क वो सबब अब्ब आज़ाद अहं और जल्द hi सबब को उनके घर भेजा जाएगा..

बेसमेंट मेहफ़ूज़ भी था और नहीं भी, हमने चांस लेना सही नहीं समझा और सभी को लेकर उसी गुफा से होते हुए बहार निकलने लगे..

सब बहुत खुश थे.. खुद को सेफ जान कर, खुद को दलदल से निकला हुआ पारर.. वही से मैंने पापा और कम को कॉल करके सबब बता दिए था..

5 पोलिकेवलून के साथ कम वही बेस वाली गुफा के पास रह गए, और पापा बाकी के पुलिस वळून को लेकर हमारी और आने लगे..

जल्द hi वो हम तक्क पोहंच गए.. पापा ने हमें बधाई दी, हमारी हिम्मत भी बधाई, और हमें जल्द से जल्द सब ख़तम करने का कह दिए..

ये वाला एरिया बेस से काफी दूर था, बेस में होने वाले धमाके यहाँ नुकसान नहीं कर सकते थे...

मैंने महक से प्लान बनाया क हम मिलकर उन बेहोश पड़े हुए बच्चों को भी यही ले आएं.. पुलिस वाले जो पापा के साथ आये थे, वो टोटल 12 थे..

इतने hi पोलिसवाले भरोसेमंद थे.. पापा भी सबब जान कर दुखी हुई, और फिर अगले आधे घंटे तक्क हम उन बच्चो को भी यही गुफा के कार्नर पर ले आये.... वहां अस पास देखकर सोचा जाने लगा क कही यही रहकर लड़कियों और बच्चो को कोई खतरा तो नहीं हो सकता..

फिर सबके मश्वरे पर अमल करते हुए सभी को पहाड़ से उतार कर नीचे लेजाना जाने लगा.. कुछ फैसले पर एक छोटी पहाड़ी थी, और वही कुछ ट्रीज भी थे, वही सबब को पोहचने का इंतेज़ाम किया जाने लगा..

जब सबब बच्चे वाहन पोहंच गए तो मैं और महक सबसे मिलकर अंदर जाने लगे.. जिन बच्चो को ऑपरेट किया गया था.. उन्हें जल्द से जल्द ट्रीटमेंट की ज़रूरत थी.. इसलिए पापा ने कम से बात करके कम को सब बता देने को बोल दिए..

अब्ब इस मटर को मीडिया में लाना ज़रूरी था, कही इससे पहले hi दन्न कुछ गड़बड़ न करदे.. हमें hi मीडिया को सब सच बता कर अपने साथ शामिल कर लेना था..

कम पहले भी ऐसे काम कर चूका था, कम भी पैलेस और दिल्ली गैंस्टर वाले मिशन पर काम कर चूका था, इस बार का काण्ड सबकी hi इज़्ज़त को चार चाँद लगा देता..

कम को खबर कर दी गई थी.. पापा से कह कर मैंने पवन और उसके बचे दोस्तों को भी अंदर से उठवा कर बहार निकलवा लिया था, पवन और उसके दोस्त अब्ब पुलिस के पास नहीं, सीधे पैलेस में जाने वाले थे..

सब काम हुआ तो मैं और महक पापा से मिलकर अंदर बढ़ने लगे.. इस एरिया में अब्ब इमरजेंसी नफ़ज़ होने वाली थी, दन्न अब्ब कुछ नहीं कर सकता था. वो न तो बहार आ सकता था, और न hi अब्ब वो किसी से कोई मदद ले सकता था..

मीडिया पर बात आई तो मीडिया जल्द hi सबब बच्चो और लड़कियों का हाल दिखा देने वाले थे.. दन्न कितना बड़ा गंगतर है, ये तो पूरा इंडिया hi जानता था.. अब्ब दन्न के लिए खुद को यहाँ से निकल पाना मुमकिन नहीं रहा था, अगर वो पहले से hi कोई ऐसी गेम खेल जाता तो वो बच सकता था, लेकिन इतने धमाके हमने कर दिए थे क वो सही से सोचने लायक नहीं रहा था..

या वो खुद की अकड़ में था.. खुद से hi हमारा सामना करना चाहता था..

मई और महक दन्न वाले एरिया की और बढ़ रहे थे.. अभी हम कुछ फासले पर थे, क अचानक से hi गोलियां चलनी शुरू हो गई..

हम अँधेरे में आगे बढ़ रहे थे. और दन्न ने भी इस बार अँधेरे में hi जुंग लड़ने का फैसला कर लिया था.. गोलियां चली तो मेरी और महक की चीख निकल गई..

कई गोलियां हमारी और बढ़ी थी, पर सहकर था क हम ज़िंदा थे.. एक एक दो दो गोलियां हमे छोटे हुए गुज़र गई थी.. गोलियां चलते hi मई और महक नीचे गिरते हुए hi जल्दी से एक एक बम गुंडों वाली साइड में पहनेका और वापसी के लिए रेंगने लगे.... दो छोटे छोटे धमाके हुए और हर ताराम रौशनी फेल गई. तेज़ रौशनी नाईट विज़न के लिए नुकसान देह होती है, गुंडों को उसी रौशनी का नुकसान ज़यादा हुआ.. वो चीखने लगे, वो गोलियां चलना भूल गए थे..

मैं और महक रेंगते हुए उनकी पोहंच से दूर हो गए थे..

वो गुंडे या तो स्टुपिड थे, या फिर वो हमसे बहुत ज़यादा खुआफजादा हो गए थे. हमें कुछ कुछ और आगे बढ़कर घेरते तो वो कमताब ठहरते.. पर वो ऐसा नहीं कर सके..

मई और महक सेफ जोन में पोहंचे तो हम दोनों hi खड़े हुए और वापिस हो लिउए.. गुंडों को दूर होने पर हमने टोर्च ों की तो एक दूसरे को देख कर हम हैरान रह गए.. हमे अंदाज़ा hi नहीं हुआ था क हम कितने ज़ख़्मी हुए हाँ, वहां गोलियां हमें लगी तो दर्द तो बहुत हुआ था, पारर यही लगा था क गोलियां हमें छो कर गुज़र गई हाँ..

लेकिन ऐसा हुआ नहीं था.. हम दोनों hi अच्छे खासे खून में नहाये हुए थे, ज़मीन पर रेंगने की वजा से मिटटी भी खून में शामिल होकर हमे अजीब से सूरत में वाले हुए थी.. महक के पेट की साइड से बहुत खुद बह रहा था, महक के एक हाथ पर कोहनी से कुछ ऊपर अच्छा ख़ासा घाव था, और मेरे

मेरी एक जांग में एक गोली पूरा तरह से पार हो चुकी थी, और भी एक शोल्डर से कुछ नीचे एक गोली गोश्त को चीरते हुए गुज़र गई थी..

महक:- चलो पहले वर्कशॉप में पोहंच कर खुद को साफ़ करते हाँ, खुद की ड्रेसिंग भी करते हाँ... दर्द तो था hi humen,lekin हम दोनों hi हैरान भी थे..

जल्द hi हम वर्कशॉप में जा पोहंचे, वहां हमें अपने मतलब का सबब सामान मिल गया था, तो हम एक दूसरे को क्लीन करने लगे, खुद को पूरी तरह से क्लीन नहीं कर सकते थे.. इसलिए एक दूसरे को साफ़ करने लगे..

महक:- इस बार तो हम बाल बाल बचे हाँ, वर्ण हमारा बच पाना मुमकिन नहीं था, वो साले बहुत ज़यादा दहशत में थे.. जो हमें देखते hi फायरिंग शुरू कर दी थी.

विजय:- हाँ ये तो है, उनकी इसी देहनत ने हमें बचा लिया, वर्ण वो सबब बहुत अच्छे पोजीशन में थे.. अब्ब हमें लाइट गन का इस्तेमाल करना पड़ेगा, तब वो और भी दहशत में आ जायेंगे..

महक:- देख लेना कही दन्न भी अँधा न हो जाए, महक हस्ते हुए बोली..

विजय:- वो ऐसे hi तो अँधा नहीं होगा, उसे तो सबब अपनी आँखों से बर्बाद होते हुए देखना है, मुझे मेरा लेते हुए देखना है..

महक:- वैसे विजय तुम कैसे दन्न से बदला लेना चाहते हो.

मैंने महक को बता दिए क मई दन्न के हाथ में आने के बाद क्या करने वाला हों..

महक:- वाह, फिर तो दन्न की एक एक झांट सुलगती रहेगी.. ऐसा उसके साथ पहले कभी कोई नहीं कर पाया.. अब्ब देखते हाँ, तुम कैसे दन्न से अपना बदला लेते हो.

विजय:- मई अकेला तो नहीं लूंगा बदला, दोनों मिलकर लेंगे ना, तुम भी तो इस काम में मेरे साथ रहते वाली हो..

महक:- न बाबा न, मई नहीं इस काम में तुम्हारे साथ रहने वाली. मेरा वहां क्या काम.. तुम खुद को सबब करो, और मुझे माफ़ी दो.. महक मुस्कुराते हुए बोली..

हमारी क्लीनिंग और ड्रेसिंग कम्पलीट हुई तो हम फिरसे एक्शन क लिए रेड थे..

इस बार हम लाइट गन से गुंडों को मारने वाले थे, कुछ ऐसे क गुंडे सामने आने की बजाये हमें देख कर भागने लगें..

मई और महक ने लाइट गन को चेक किया और पिस्टल्स को भी हमने फिरसे रीलोड किया.. महसीने गन्स हमारे पास नहीं थी, इस बार हमें उनकी ज़रूरत नहीं पड़ने वाली थी..

अगर पड़ी भी तो रास्ते में कई मरे हुए गुंडों की मशीन गन्स हमारे लिए तैयार थी..

जल्द hi हम वही जा पोंछे लेकिन इस बार हम आगे नहीं बढे थे, इस बार हमने मोड़ पर रुक कर अच्छे से आगे का सबब देखा था, कुछ दूर कुछ साये से मेहसूस हुए तो मैंने महक को बता कर उसी दिशा ने लाइट गन करके फायर कर दिया... फ़ौरन hi मुद कर खुद की आँखों की सेफ्टी भी कर ली थी..

रौशनी अचानक से hi गुफा में इतनी भयंकर बढ़ी क गुंडों की चीखें हमें यही पर बहुत साफ़ सुनाई देने लगी थी.. वही ब्यूरो तरह से तड़प रहे थे.. एक दो गन्स के चलने की भी आवाज़ गुदा में गूंजी थी.. ट्रिगर खुद से hi डब्ब गया होगा.

ट्रिगर दबने से उनके अपने hi गुंडे मर रहे थे..




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दन्न अपने दोस्तों के साथ एक रूम में बैठा हुआ था क उसे एक कॉल आए.. कॉल सुनकर दन्न ग़ुस्से से खड़ा हो गया..

मार्टिन, जोसेफ और विलियम ने पूछा तो..

दन्न:- कुत्ता, साला, वही कर गया जो मैंने नहीं सोचा था, मैंने सोचा था क वो खुद के दुम्म पर मुझसे जुंग लड़ेगा, लेकिन उसने मीडिया को बीच में ला खड़ा किया है.. कम और मीडिया यहाँ क लिए निकल पड़े han.ab वो सबब किसी भी समय यहाँ पोहचने वाले हाँ. बहार हमारे लिए निकलने का कोई रास्ता भी नहीं है..

विलियम:- इसी लिए hi तो मैंने कहा था क कुछ हमें भी ऐसा hi कर लेना चाहिए, लेकिन............. दन्न ने हाथ उठा कर विलियम को आगे बोलने से रोक दिए..

दन्न:- तो क्या हुआ अगर उसने मीडिया और कम की मदद ले ली है, तो मैं भी तो पुरे महाराष्ट्र का बाप हों, एक फोन कॉल और सबब कुछ बर्बाद करके रख दूंगा.. कोई भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकता.. लेकिन विजय और महक ने ये सही नहीं किया.. अगर मुझसे लड़ने आये थे, तो सीधे सीधे मुझसे लड़ते, पुलिस और पावर का चक्कर न चलते...

दन्न खुद को भूल गया था, वो भी हमेशा से ऐसी hi काम करता आया था, अब्ब यहाँ शेरोन वाली लड़ाई तो होने से रही.. वो खुद 300+ गुंडों के साथ विजय ुर महक सलाद रहा है, खुद के बाज़ों में वो पावर नहीं है, खुद से महक या विजय से लड़ नहीं सकता, और बातें दुम्म की करता है..

दन्न के दोस्त भी ये सबब जानते थे, लेकिन वो दन्न को कुछ कह नहीं सकते थे..

कोई कुछ और बोलता, क अचानक से गोलियां चलने की आवाज़ें सुनाई देने लगी.. और फिर फ़ौरन hi दो छोटे छोटे धमाके भी हो गए.... दन्न ने जोसेफ की और देखा तो जोसेफ फ़ौरन hi बहार निकल गया.. कुछ मिनट्स के बाद वो वापिस आया

जोसेफ:-- वही थे, विजय ुर महक फिरसे बेस के अंदर मौजूद हाँ.. हमारे आदमी कह रहे हाँ क वो दोनों ज़ख़्मी भी हुआ हाँ. वहां जा के चेक किया तो दोनों के खून के निशान मिले हाँ, दोनों ज़ख़्मी हालत में रेंगते हुए वापिस मुद गए थे..

दन्न:- मेरा सारे आदमी hi बेवक़ूफ़ हाँ, उन्हें घेरने की बजाये गोलियां चलनी शुरू कर दीं... हम यहाँ उन सबब की माँ छोड़ने क लिए बैठे हाँ क्या.. हमे कुछ बताये बिना hi खुदसे सबब करते फिर रहे हाँ..

खैर... एक बात ज़रूर अच्छी हुई है.

सब:- वो क्या.?

दन्न:- अगर विजय और महक दोनों बेस में घुस सकते han,to इसका मतलब है क बेसमेंट से बहार जाने का एक hi रास्ता नहीं है, और भी कई रास्ते हाँ, यहाँ से बहार जाने के..

सबब दन्न की बार सुनकर खुश होने लगे.. अब्ब उन्हें खुद के ज़िंदा बच जाने की उम्मीद नज़र आने लग गई थी..

सब मिलकर फिरसे प्लानिंग करने लगे.. अब्ब वो सबब यहाँ से निकल जाना चाहते थे, वो अब्ब खुद को यहाँ सेफ नहीं प् रहे थे.. मीडिया या पुलिस दन्न का कुछ नहीं उखड सकती थी, लेकिन उनका एनकाउंटर भी किया जा सकता था, यही डर था दन्न को.

कुछ देर गुज़री एक बार फिरसे शोर सुनाई देने लगी.. और इसबार सब रूम में थे, पर फिरभी सबने वो रौशनी महसूस कर ली थी.. इतनी रौशनी से किसी को कोई नुसकान नहीं हुआ था....

लेकिन रौशनी देख कर सबब hi उछाल पड़े थे.. बहार मौजूद सारे hi गुंडे चीखने लगे थे..

दन्न:- oooooooooo इन दोनों क पास लाइट गन भी है.. (रोशनी अब्ब तक ख़तम हो चुकी थी) जोसेफ फ़ौरन hi बहार जा कर चेक करो, और अब हमें यहाँ से निकल जाना चाहिए, मेरा ख्याल है, इस रौशनी की वजा से हमारे सारे hi आदमी अब्ब किसी से लड़ने लायक नहीं रहे हाँ.. जोसेफ फ़ौरन hi बहार चला गया, फिर 2 hi मिंट में भागता हुआ वापिस भी आ गया

जोसेफ:- दन्न महक और विजय इसी तरफ आ रहे थे.. अगर दोनों ने फिरसे लाइट गुणसे फायर कर दिए तो..

जोसेफ की बात का किसी ने कोई जवाब नहीं dia..aur उठ कर भाग खड़े हुए.. बहार का मंज़र देखकर सबब की हालत खराब होने लगी टी.. बहार उनके आदमी आँखों पर हाथ रखे हुए तड़प रहे थे..

दन्न;- साला इतना खतरनाक हथियार इनके पास कहाँ से आ गया.. इतने स्टोरंग ये दोनों कैसे हो सकते हाँ.. दन्न भागते हे बोलै..

मार्टिन:- वो सबब बाद में सोच्नेगे, पहले हमें यहाँ से निकलना होगा..

दन्न:- साला कभी ऐसा सोचा न था, क कभी मुझे भी खुद को बचने क लिए भागना पड़ेगा.. एक बार मई यहाँ से बच कर निकल जाओ.. फिर मई बताऊंगा विजय को मई क्या कर सकता हों.. पुरे का पूरा पैलेस hi न धमाके से उदा दिए तो मेरा नाम भी दन्न नहीं है... हरामी मुझसे लड़ने चला है, उसकी माँ को 18 साल तक छोड़ा है मैंने, और अब्ब मेरे सामने उड़ने की कोशिश कर रहा है...

दन्न भागता हुआ सबब बोलता भी जा रहा था.. मार्टिन जोसेफ और विलियम भी दन्न के साथ मिलकर भाग रहे थे.. एक रास्ता विजय वाली साइड में था, एक बहार जा रहा था.. और यहाँ से आगे और कई रास्ते निकल रहे थे..

सब अपनी जान बचने क लिए भाग रहे थे..





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