अपडेट ::: 118
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आज रूम में मेरे साथ माँ और पूजा दीदी सोइ थीं, आज की रात मैंने रेस्ट की थीं.. रूम में होने वाली चुदाई पार्क में कर ली थीं, दीदी को अभी रेस्ट दे दी थी, छूट के मज़े थे, तो गांड बहुत दर्द कर रही थी, दीदी की, माँ भी खुश थी. तो माँ और दीदी मुझसे लिपट कर सो गईं थे..
मैं निक्कर पहन कर सोया था, तो दीदी और माँ दोनों hi नाईट पहन कर सोइ थी. बिना ब्रा और पंतय के चुत्तड़ो पर आने वाली निघ्त्य पहन कर सोना भी क्या सोना है.. साड़ी रत hi चुत्तड़ नंगे रहते हाँ..
सूबा जब्ब मेरी आंख खुली माँ और दीदी दोनों के hi चुत्तड़ नंगे थे, और दोनों का hi एक एक हाथ मेरे सीने पर था और दोनों hi उलटी सो रही थीं.. जैसे hi मुझे इस बात का अंदाज़ा हुआ तो मेरे लुंड ने झटके मारने शुरू कर दिए..
मैंने माँ और दीदी क हाथ खुद पर्रे हटाए और उठ बैठा..
माँ और दीदी के पैरों में आते हुए मैं दोनों को देखने लगा, माँ और दीदी की गांड का फर्क निकलने लगा.. दोनों hi कमाल की दिख रही थीं, मेरा लुंड की अकड़न एक दुम्म hi आखरी हद्द तक्क जा पोहंची..
ऐसा मेरे साथ पहले बार हो रहा था, माँ और दीदी दोनों की hi गांड का मई फैन था.. दोनों की hi गांड मेरे सामने खुली पड़ी थीं और दोनों की hi गांड में मेरा लुंड घुस चूका था..
काश ऐसा होता क मैं एक साथ hi दोनों की गांड में अपना लुंड उतार देता.. चलो कोई बात नहीं, अलग अलग hi सही पारर आज माँ और दीदी की गांड तो मुझसे नहीं बचने वाली.......
मैं नंगा होकर अपने हाथ पर ढेर सारा थूक लगा कर लङकी मालिश करने लगा.
कभी माँ की गांड को देखता तो कभी दीदी की गांड को देखते हुए अपने लुंड की मालिश करने लगा..
माँ की गांड ज़यादा बेहतर थी और माँ की गांड का हक़ भी ज़यादा था तो मैं अपने लुंड की मालिश करते हुए झुका और माँ के चुत्तड़ो को चाटने लगा.. दोनों चूतड़ों को चाटने के बाद मैंने अपने लुंड पर से हाथ हटाया और माँ के चुत्तड़ पहला कर माँ की गांड को चाटने लगा.. माँ कसमसाने अलगी..
अच्छी से माँ की गांड को चाटने क बाद मैंने अपने लुंड को माँ की गांड के छेड़ पर अच्छे से सेट किया माँ के चुत्तड़ो को अच्छे से खोला.. लुंड का दबाओ बहदया तो वो माँ की गांड के छेड़ में फँस गया, माँ की कमर को पकड़ कर मैंने अपने लुंड का दबाओ भी बढ़ाना शुरू कर दिया.. माँ की नींद टूटने अलगी, लेकिन मैं नहीं रुका धीरे धीरे करके मैंने अपना सारा hi लुंड माँ की गांड में घुसा दिया..
माँ की टाइट गांड ने मेरे लुंड को आसानी से नहीं लिया था, माँ को दर्द हुआ तो माँ उठ गई माँ ने सर्र घुमा कर मुझे देखा, पहल तो वो हैरान हुई, फिर मुझे मुस्कान देते हुए बोलने लगी,..
माँ:- क्या हुआ, मेरे बेटे को सूबा सूबा माँ की गांड पर कुछ ज़यादा hi प्यार आने लगा है..
मैंने माँ के झुकता हुआ अपने लुंड को और भी माँ की गांड की गहराई में उतारता हुआ..
विजय:- माँ क्या करून, आप दोनों की hi गांड मुझे बेचैन करती रहती है, और आज तो आप दोनों ने hi सूबा सूबा मुझे अपनी गांड दिखा कर सरप्राइज कर दिया है, कैसे अब्ब मैं आप दोनों की गांड में लुंड उतारे बिना रह सकता हों..
मैं अपने लुंड को धीरे धीरे माँ की गांड में अंदर बहार करते हुआ माँ के साइड से गाल को चूमने लगा..
सूबा सूबा की इरेक्शन का भी एक अलग hi मज़ा होता है.. लुंड बुरी तरह से तना हुआ माँ की गांड की तिघटनेस को कम् करने की कोशिश कर रहा था..
माँ:- बीटा मेरी गांड भी तो तुम्हरी hi है, बजा दो उसकी बंद, और कार्डो उसे अच्छे से खुला, अपनी दीदी की भी गांड मारने का मैं है क्या अभी..
विजय:- हाँ माँ अभी दोनों की hi गांड के मज़े लेने के मूड में हों मई, वर्ण आज का सारा दिन hi बोर बोर लगेगा मुझे..
एक हाथ से मैंने माँ के चेहरे को घुमाया और माँ को किश करने लगा.. माँ के साइड से होंठ को किश करते हुए माँ की गांड में धक्को की भी स्पीड बढ़ने लगी..
जल्दी hi माँ की छूट ने भी पानी बहा कर माँ को मज़ा देना शुरू कर दिया..
मैंने दीदी को देखा.
विजय:- माँ देखों ना आपकी बहु कैसे मज़े से सो रही यही, उसे बीएड के हिलने का भी पता नहीं चल पा रहा, उसकी सास की गांड उसका पति मार रहा है और वो मज़े से सो रही है..
maa:-ahhh विजजूउ बीटा अच्छा है ना तू जल्दी से मेरी छूट का पानी निकल कर पूजा बेटी की भी गांड में अपना मूसल जैसा लुंड दाल दो, उसका भी दिन मेरी तरह से अच्छा गुज़रेगा...
मैंने दीदी के चेहरे को देखा तो वो किसी मासूम बच्ची के जैसे गांड नंगी किये हुए सो रही थी, मैंने भी माँ की गांड के बखिये उधेड़ने शुरू कर दिए..
मेरे हर एक धक्के से माँ की गांड और भी खुलती जा रही थी, मेरा मोटा और लमबा लुंड माँ की गांड को धुवां धार छोड़ रहा था, जल्द hi माँ की सिसकियाँ बढ़ने ालगीं, मुझे लगा का अब्ब दीदी उठ जायेगी, पारर दीदी नहीं उठी..
लगता है मेरा लुंड लेके hi उठेगी.. मैंने स्पीड बढ़ा कर माँ की अगंद मारनी शुरू कर दी..
कुछ मिंट के बाद माँ झाड़ गई तो मैं माँ को चूमता हुआ उठ खड़ा हुआ, मेरा लुंड माँ की गांड से आवाज़ निकलता हुआ बहार निकल आया, माँ अपनी सांस बहाल करने लगी, तो मैंने अपने लुंड को माँ की गांड की दरार पर मारना शुरू कर दिया, मुझे ऐसा करने में भी मज़ा आ रहा था..
मई दीदी के ऊपर आया.. सबसे है दीदी की गांड को छाता अच्छे से दीदी की गांड को नरम किया, दीदी हिलने लगी थीं उनकी नींद टूट रही थी..
मैंने अपने लुंड के सुआपद को दीदी की गांड पर रखा.. दीदी के चुत्तड़ो को खेँचाउर धीरे से लुंड को दीदी की गांड में फंसा दिया..
दीदी के ऊपर झुकते हुए एक धक्का मार दिया..
दीदी:- ोीीीी maaaaaaaaaaaa ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी गांड में लुंड घुसते hi एक झटके में उठ कड़ी हुयी..
विजय:- क्यों लुंड लिए बिना उठने मि आदर नहीं है ना, िटनिओ देर से माँ की गांड मार रहा हों, और आप हाँ क उठ hi नहीं रही थीं.
दीदी:- विज्जू प्लीज धीरे से, अभी मेरी गांड में दर्द है..
विजय:- अरे मेरी बुलबुल वही दर्द तो निचोड़ रहा हों. लुंड अआप्की गांड को अच्छे से खल देगा तो दर्द भी फ़ौरन hi चल जायेगा...
मैं दीदी के ऊपर आया और दीदी की गांड में बाकी का बचा लुंड भी 2 झटको में घुसा दिया.. दीदी रोने लगी..
दीदी को फीररसे दर्द होने लगा था, मैं दीदी को चुमते हुए धक्के मारने लगा, धीरे धीरे धक्के भी बढ़ते गए और दीदी की चीखें भी बढ़ती गयीं..
5 मिंट बाद दीदी की गांड का दर्द छूट में पानी आ जाने से ख़तम होने लगा, तो मैंने दीदी की गांड को भी माँ की गांड के साइज के हिसाब से बनाते हुए धक्के मारने लगा.. दीदी बीएड पर उछाल रही थीं.. नयी नयी गांड इस अंदाज़ से चूड़े तो दर्द भी होता है..
शुरू में दीदी को बहुत दर्द हुआ, पारर अब्ब वो शांत थी, और मेरे लुंड से अपनी गांड खुलने का पूरा मज़ा ले रही थी..
जल्द hi दीदी की भी सिसकियाँ बढ़ने लगी मेरे धक्कों की स्पीड भी बढ़ने लगी..
अगले 5 मिंट में दीदी की छूट में पानी छोड़ दिया...... मैंने दीदी की छूट से लुंड निकला तो माँ मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.. माँ समझ गई अब्ब उनकी छूट की बारी है..
मैंने माँ की छूट भी मारनी शुरू कर दी माँ सूबा सूबा गांड और छूट खुलवा कर बहुत खुश थीं..
माँ की छूट से पानी निकल आकर दीदी की छूट से भी पानी निकला तो उसके बाद मेरे लुंड को दोनों ने hi चूस चूस कर ढीला कर दिया..
फिर तीनो hi मिलकर नहाये.. माँ और दीदी ने मेरे लुंड को फिरसे खड़ा क्र दिए था, लेकिन अब्ब दोनों की चुदाई का समय नहीं था.. तो मैं दोनों की छूट को चूम कर बाथरूम से बहार निकल आया..
बहार आ क्र सीधा बावर्ची काने में जा घुसा तो वहां भाभी और सोना आंटी दोनों hi थीं..
विजय:- खैर तो है आज दोनों कैसे एक साथ... दोनों के hi बूब्स को दबाते हुए पुछा..
भाभी:- (सिसकी लेते hue)kyun हम दोनों एक साथ नहीं मिल बैठ सकती..
विजय:- (दोनों को बारी बारी किस करते हुए) क्यों नहीं सूबा सूबा जल्दी उठना अच्छा होता है, क्या पता कभी कोई चांस भी बन्न जाए..
सोएं:- इसी लिए तो आज जल्दी उठी हों, आज तो तुमसे चुद के hi दिल को चैन मिलेगा.. आज मेरा बहुत मैं है तेरे लुंड को छूट में लेने का..
विजय:- सिर्फ छूट में गांड का क्या करना है बचा कर..
सोना;- पहले छूट तो मार लो, गांड भी मिल जाएगी, क्यों मालती..
bhabhi:-mera तो कोई मैं नहीं है गांड में लुंड लेने का.. छूट hi बहुत है, गांड अभी सील पैक है तो खुलवाने से जो दर्द होगा, अभी मेरा वो दर्द सहने का मूड नहीं है, तू ले ले दोनों छेड़ में विज्जू का लुंड... जा आज ऐश कर मेरी तरफ से तुझे छुट्टी है..
सोना:- क्या बात करती है, तू नहीं लेगी विज्जू का लुंड..
भाभी:- विज्जू का लुंड कौन छोड़ सकती है.. मैं तो कभी भी विज्जू के लुंड के बिना रहने को नहीं मानता... पारर तेरा पहली बार है ना तो तू पूरा मज़ा लेले.. विज्जू तो सभी का है, कहाँ भाग क्र जाएगा, जब्ब चहुँ विज्जू का लुंड अपनी छूट में ले सकती हों..
सोना आंटी ने भाभी को किश करनी शुरू करदी, भाभी के बूब्स भी वो अच्छे से दबा रही थी..
सोएं:- थैंक्स मालती मेरे लिए इतना सोचा तुमने.. चलो विज्जू आज फिरसे छत पर चलें..
मैं सोना आंटी का मूड देख कर इंकार कैसे कर सकता था, मैं तो अभी माँ और दीदी को छोड़ कर आया था, मई तो रिलैक्स hi था, अगर सोना आंटी का मैं था मुझसे छोड़ने का तो उनका दिल दुखाना अच्छी बात तो नहीं थी..
विजय:- हाँ चलो आज आपको भी खुश कर देता हों..........
10 मिंट बाद..
सोना:- अह्ह्ह्ह विज्जउ अपनी पूरी जीब घुसा दो मेरी छूट में अह्ह्ह मई छूट पानी छोड़ने वाली, ह्म्म्मम्म siiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह maaaaaaaaaaaaaaaaa कितना सवाद आ रहा है................. सोना मेरे लुंड पर झुकी हुई सिसकियाँ ले रही थी, मेरा लुंड वो अपने मोहन से निकल चुकी थी... मैं सोना की गांड मङ्गली घुसाए, उसे घूमते हुए सोना की छूट में अपनी जीब डाले चाट रहा था..
सोना की हालत अंत सीमा पर थी, वो अपनी गांड हिलाते हुए झड़ने लगी.. उसकी कहत का सारा hi पानी मेरे मोहन में जाने लगा..
मैंने सोना को साइड में किया... वो ुतली लेट कर साँसे लेने लगी. अभी सोना की छूट शांत हो गई थी, तो मेरा मैं हुआ क पहले सोना की गांड मार लोन, जल्द hi वो फिरसे गरम हो जायेगी तो उसकी छूट में भी लुंड दाल दूंगा..
मैं सोना के ऊपर आया, सोना के दोनों चुत्तड़ो को खोल कर अपने लुंड को सोना की गांड के छेड़ पर टिका दिए... मैंने देखा क सोना की गांड खुश्क है तो मैंने अपने मोहन से काफी सारा थूक सोना की गांड पर गिरा दिए, एक ऊँगली से सोना की गांड के छेड़ पर उस थुक्क को मलना लगा, फिर एक ऊँगली सोना की गांड में घुसा कर अच्छे से नरम करने लगा.. फिर दूसरी ऊँगली भी दाल दी, सोना की गांड पहले से hi खुली हुई थी, सोना को पेरशानी नहीं हुई..
परेशानी तो मेरे लुंड के घुसते समय होगी सोना को, मेरा बड़ा लुंड सोना की गांड को पहाड़ देने वाला था..
उँगलियाँ निकल कर मैंने सोना की गांड के छेड़ पर अपने लुंड को सेट किया, सोना के चुत्तड़ो को खोल कर अपने लुंड का दबाओ बढ़ाया तो सुपड अंदर जाने लगा..
sona:-haaye विज्जू पहले अपनी सोना की गांड मारने का मैं है क्या, मार लो, उसे भी पूरा प्यार चाहिए न, बाद में क्या लेना अभी से hi उसे पूरा प्यार दे दो.. दाल दो अपने लुंड को अपनी सोना की गांड में और दे दो उसे अपना पूरा प्यार, कर डॉन अपनी सोना को पूरा, बहुत तदपि है तुम्हारी सोना प्यार के लिए... स्वामी के बाद तो मेरी ज़िंदगी hi नर्ग बन गई थी, अब्ब से तुम hi मेरे स्वामी हो, अपना लुंड दाल कर मुझपर अपना हक़ बना लो..
सोना के चुत्तड़ो को खोलते हुए मैंने एक धक्का मारा तो मेरा लुंड सोना की गांड में 5" तक उतरता चला गया, सोना की चीख निकल, लेकिन उसने खुद पर काबू प् लिया था, मैंने एक और धक्का मारा तो मेरा सारा लुंड सोना की गांड में जा घुसा.. सारा लुंड सोना की गांड में घुसा कर मैं रुक गया..
सोना लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.. कुछ देर रुकने के बाद मैंने फिरसे सोना की गांड मारनी शुरू करदी, सोना की टाइट गांड में मेरा मोटा लुंड फस फस कर जा रहा था, सोना भी सालों से चुद चुद कर आदि हो चुकी थी, जल्द hi वो मज़ा लेने लगी, उसकी सिसकियाँ बढ़ने लगी तो मैंने भी धक्कों की स्पीड बढ़ा दी..
अगले 10 मिंट तक मैंने अच्छे से सोना की गांड को खोल दिए.. सोना की छूट भी अब्ब गरम हो चुकी थी, मैंने सोना की गांड से अपना लुंड निकला, और सोना की छूट पर सेट कर दिया था, सोना ने भी अपने चुत्तड़ उठा कर अपनी छूट को मेरे लुंड के हिसाब से सेट किया, जब मुझे लगा क अब्ब लुंड को सोना की छूट में घुसा देना चाहिए तो मैंने साइड मत पर अपने दोनों हाथो का वज़न डालते हुए एक धक्का मार दिया, सोना की छूट गीली थी, माँ की दवाई से टाइट हो चुकी थी, मेरा लुंड सोना की छूट की तिघटनेस को चीरता हुआ अंदर घुसता चला गया, सोना की दर्द और मज़े से भरपूर चीख गूँज उठी..
मैंने एक धक्का और मारा तो मेरा लुंड सोना की छूट में अंत तक जा पोहंचा.. सोना के तो मज़े hi हो गए थे..
सोना:- हम्मम्मम्मम्मम्हा अह्हह्ह्ह्ह siiiiiiiiii विज्जउ आज मुझे सही से शान्ति मिली है, मुझे बहुत सुकून मिला है, तेरे लुंड को अपनी छूट की गहराई में लेकर.. विज्जउ अब्ब रुकू मैट, बार बार मेरी छूट की गहराई नापते रहो, अह्ह्ह ओह्ह्ह मा
सालों बाद फिरसे मैं मज़े में हो गई हो, ऐसी प्यार भरी चुदाई क लिए hi तो मैं तरस रही थी..
मैं सोना को मज़ा देने क लिए अपने लुंड को सुपड तक्क बहार निकल कर अंदर बहार करने लगा. धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.. सोना की सिसकियाँ भी बढ़ने लगी. सोना की छूट फिरसे बहने वाली हो गई थी, सोना आहें भरने लगी, सोना अपनी गांड को हिलाते हुए मुझसे छोड़ने लगी.. सोना नशे में होनी लगी, तो सोना एक हाथ से अपने hi चुत्तड़ को सहलाने लगी..
जल्द hi सोना की छूट बे पानी छोड़ दिया.. मैं नहीं रुका जब तक सोना रिलैक्स नहीं हो गई, सोना की पानी छोड़ चुकी गीली छूट में मेरा लुंड पांच पांच धप्प धप्प की आवाज़ करता हुआ अंदर बहार होने लगा था.... मेरी जाएंगें स्पीड से सोना के चुत्तड़ो से टकरा रही थी..
सोना:- विज्जू अब्ब तुम लेटो मई खुद से hi सब karungi..maine लेट गया तो सोना ने पहले मेरे लुंड को अच्छे से साफ़ किया, फिर मेरे लुंड पर बैठ कर मेरे लुंड को अपनी छूट में लिया, जब्ब सारा लुंड सोना की छूट में छुप तो सोना मेरे सीने पर हाथ रखते हुए मेरे लुंड पर ऊपर नीचे होने लगी.. मेरा लुंड फिरसे फस फस कर सोना की छूट में जाने लगा.. धीरे धीरे करके सोना अपनी स्पीड बढ़ने लगी, सोना की छूट ने फिरसे गरम होना शुरू किया तो सोना ने मेरे लुंड को अपनी छूट से निकल कर अपनी गांड पर सेट कर दिया, मेरी आँखों में देखती हुई, मुझे स्माइल देती हुई सोना मेरे लुंड को खुदसे अपनी गांड में लेने लगी, धीरे धीरे करके सोना ने मेरा सारा hi लुंड अपनी गांड में ले लिया, फिरसे सोना से उछलना शुरू कर दिए, सोना की स्पीड फिरसे धीरे धीरे बढ़ने लगी...
कुछ मिंट अपनी गांड में मेरा लुंड लेते हुए अपनी गांड को पूरी तरह से खुलवाते हुए सोना ने फिरसे मेरे लुंड को अपनी गांड से निकल कर अपनी छूट में ले लिया, इसबार सोना की स्पीड बहुत तेज़ थी, सोना की छूट ने फिरसे पानी छोड़ना शुरू कर दिया.. सोना पूरी स्पीड से मेरे लुंड पर उछलने लगी तो मैंने सोना के उछाल रहे बूब्स को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिए, सोना के बूब्स फूल चुके थे, सोना के निप्पल अकड़ चुके थे, मैं सोना के बूब्स ुर निप्पल को दबाना लगा..
जल्द hi सोना की हिम्मत फिरसे से जवाब दे गई, सोना फिरसे खाद गई, सोना मेरे ऊपर गिरी तो मैंने सोना के चुत्तड़ो को पकड़ कर सोना की छूट में अपने लुंड को अंदर बहार करने लगा.. इस बार मेरी भी स्पीड बढ़ गई थी, सोना की छूट और गांड मरते हुए मैं भी बहुत मज़े में था, मेरा लुंड भी पूरी तरह से परफॉरमेंस देता हुआ सोना को खुश कर रहा था. सोना की सांस ठाक हुई तो सोना मेरे ऊपर से उठ गई.. सोना मेरे पैरों की और रुख कर मेरे लुंड पर बैठी और मेरे लुंड को अपनी गांड में लेते हुए स्पीड से छोड़ने लगी, इस बार मेरे झड़ने की बारी थी, इस बार सोना पुरे जोश से मुझे मज़ा दे रही थी, सोना को भी गांड में लुंड लेना बहुत पंसद था, सोना की स्पीड बढ़ती चली गई, और मेरे लुंड की नसें भी फूलती चली गई, सोना तक तक्क नहीं रुकी जब्ब तक्क मेरा लुंड अंदर से खली हो कर सारा पानी सोना की गांड को भर नहीं दिया...
सोना भी समझ गई क अब्ब मैं भी झाड़ गया हों तो सोना मेरे ऊपर से उठी और मेरे ऊपर सही से आते हुए मुझे किश करने लगी, इस बार सोना किश बहुत hi जानदार थी, सोना पूरी तरह से खुश थी, मेरे लुंड ने सोना को बहुत खुश कर दिए था.
सोना मुझे अपना प्यार देने लगी, और मई भी सोना को अपना प्यार देने लगा, सोना मुझे किश करते हुए मेरे चेहरे को भी चूम रही थी........
सोना:- थैंक ु विजजूउउ मुझे अपना पूरा प्यार देने क लिए, आज बहुत सालों बाद मई किसी पेड़ की ठंडी छाओं में खुद को महसूस कर पा रही हों.. तुमने मुझे बहुत सुकून दिए है.. ी लव यू विज्जू.. विज्जउ तुम सदा ऐसे hi रहना.. तुम्हारा प्यार पा के सभी को ढेर साड़ी खुशियां मिलती हाँ, चुदाई का क्या है, गन्दी लत्त तो सबब को hi लग्ग चुकी है, पारर तुम्हारे साथ चुदाई करके हमे सिर्फ सेक्स शान्ति hi नहीं मिलती.. हमें आत्मा तक की ख़ुशी मिलती है.. ऐसे hi सबब को अपना प्यार देते रहा करना.. सोना मुझे फिरसे चूमने लगी..
और मैं सोना को खुश देख कर बहुत खुश था.. यही तो मेरा काम था, अपनों में खुशियां बांटना.. मुझे रोज़ रोज़ नयी छूट की चाह नहीं थी, मुझे सिर्फ प्यार की चाह थी...
प्यार के बिना संसार में और है भी क्या...
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