Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 10 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स..!!

प्या कभी छुपता नहीं.. और जब्ब इतने महीनो की जुदाई हो तो फिर सबर करना मुश्किल होता है..

S.S का टाइम अब्ब शुरू होगया है........ लेकिन S,S बनना इतना भी आसान है है... गुंडों को मार देना आसान है .. लेकिन पावर हासिल करना आसान नहीं..

अब्ब देखते हैं विजय के लिए दिल्ली के 3no गैंग्स कितना टफ टाइम ले के आते हैं..
 
अपडेट ::: 48

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लास्ट 1.5 ईयर को रेखा बाई के कोठे पर क्या हुआ

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क्यूंकि जब्ब विजय को गोली लगी थी .. तो श्वेता बीमार पद गई थी..

अननोन का सीक्रेट खुल चूका था और priya..shuruti और जहान्वी के साथ सोनक्षी की बेटी और बेटे अनिल की वजा से ये बात अजित भाई फिर पूजा को पता चल गई..

और फिर इस तरह से पूजा के ज़रिये हर्ष चौहान को पता चली ..

तो हर्ष च्वहाण ने अननोन की पूरी कुंडली hi निकल ली..

जो क एक बोहत hi बड़ा काम tha.jo हर्ष चौहान ने कर दिखाया था.

हर्ष चौहना विजय की माँ और बहनो के लिए तो कुछ नहीं कर पाया ..

लेकिन विजय के दुश्मनो को be-naqaab करके हर्ष चुहान्न ने एक बोहत hi बड़ा मरहला तय कर लिया था..

अब्ब विजय के सामने उसके सारे hi दुश्मन आ चुके थे..


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मैंने शुरू की उपदटेस में बताया था क लाली नाम की एक कुत्तिया रेखा बाई के कोठे पर hi रहती थी.. साली शुरू में वो भी मजबूर थी लेकिन जो हसरतें उसकी कोठे पारर आने से पहले अधूरी रह गई थीं वो यहाँ रेखा बाई के पास पुरी होने लगीं. और वो जल्द hi रेखा बाई की ख़ास कुत्तिया बन गई.. रेखा बाई ने लाली को बोहत छूट दे दी थी.. जिस की वजा से रेखा बाई के बाद कोठे पर लाली hi रेखा बाई थी... लाली कुत्तिया अपना पहला वक़्त भूल गई थी क जब्ब वो यहाँ लाइ गई थी तो कितना रोइ थी .. gid-gidai थी (मुझे छोड़ दो मैं अपने जिस्म नहीं बेचूगी) लाली ने अपनी छूट की सील बचने के लिए बोहत मार भी खाई थी.. लेकिन फिर वक़्त ने लाली को सबब करने पर मजबूर कर दिया .. लाली की छूट hi नहीं खुली .. लाली की गांड भी उसकी छूट की तरह के जैसे hi खुल गई..

लाली की छूट और गांड के खुलते hi लाली अपने दुःख भूल कर कोठे के रंग में

रंगति हुई एक महा चुड़क्कड़ बन गई .. लाली के तो मज़े हो गए थे.. लाली अपनी इज़्ज़त लुटवा कर और एक कुत्तिया बन्न कर खुद को सबब से अलग hi शो करवाने लगी.. रखा बाई को इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला था. बल्कि वो तो खुश थी क लाली कितने अच्छे से यहां के माहौल में रच गई थी..

रेखा बाई के बाद कोठे पारर लाली की दादा गिरी चलने लगी.. अउ लाली रेखा बाई के बाद सबब की hi हाकिम बन गई.. हर नयी आने वाली लड़की को मरने पीटने से भी पीछे नहीं hat'ti थी.. लाली का ये रूप रेखा बाई को पसंद आया और लाली कुछ और भी खुल कर सबब को hi तंग करने लगी..

कोठे की कोई लड़की ऐसी नहीं थी.. jis'se लाली ने अपनी मालिश न करवाई हो.. अपनी छूट और गांड पर वराम लगवाने का काम वो दूसरी लड़कियों से करवाने लगी.

बास खुद को सबब के सामने वो दूसरी रेखा बाई मनवाने पर तुली हुई थी...

shweta..priya..jhanvi..shuruti..kriti..aur सोनाक्षी भी लाली की हरकतों से मेहफ़ूज़ नहीं थी ...

लाली का कमीना पत्र तब्ब खुल कर सामने आया जब्ब षुरूति और जहान्वी 18 बरस की हो गई थीं...

लाली ने रेखा बाई से कहा

लाली:- बाई जी मैं एक बात कहूं. अगर आप को बुरा न लगे तो..

रेखा बाई:- (लाली की छूट में ऊँगली करते हुए) लाली तूने यहाँ की रौनक बधाई हुई है .. मुझे तेरी किसी भी बात का बुरा नहीं लगे.. तू ने खुद को इस कोठे का आदि बना कर अच्छा hi किया है.. अब देख जैसे मैंने तुझे सबब छोट दी हुई है. वैसे यहाँ किसी को मिली है क्या.. तू बोल जो बोलना चाहती है.. मैं बुरा नहीं मानोगी..

रेखा की लाली की छूट से छेड़ छड़ से लाली को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा.. जितना लाली चुद चुकी थी ..रेखा बाई की ऊँगली से वो कैसे इतनी जल्दी गरम हो सकती थी..

लेकिन लाली रेखा बाई के हाथ को अपनी छूट पर और भी रगड़ते हुए बोली..'

लाली:- बाई जी मैं भी सबब समझती हूँ.. पार मैं इस बार बात श्वेता को ले कर करना चाहती हूँ..

रेखा बाई ने लाली की छूट से अपनी ऊँगली अलग की और लाली को देखने लगी. लाली अब क्या बोलने वाली है.

लाली:- बाई जी मैं ये कहने वाली हूँ क षुरूति और जहान्वी अब्ब 18 की होगी हैं तो उनका क्या करने वाली हैं आप....

रेखा बाई:- देख लाली मैं तुझसे कुछ भी नहीं छुपाती लेकिन यहाँ मुआमला श्वेता और उसके साथ की लड़कियों का है.. तो तू इस में न बोल.. ये दूसरा hi मटर hai..DNN hi जाने दोनों का क्या करेगा..

लाली:- बाई जी आपका कहना भी सही है और मैं भी सबब समझती हूँ. लेकिन मैं दूसरी बात करना चाहती हूँ.

रेखा बाई:- दूसरी बात मतलब.. लाली खुल का बोल .. ऐसे क्यों रुक रुक कर बोल रही है... जो भी तेरे दिल में है वो सबब बता दे..

लाली:- बाई जी जैसा मैं देखा है क आप और दन्न श्वेता को हर रोज़ज कोई न कोई अलग hi किसम की तकलीफ देना चाहते हैं, तो इसी लिए मेरे मैं में एक बात आई है..

लाली की बात सुन कर रेखा बॉबी की आँखों में चमक आ गई आ

रेखा बाई :- हाँ हाँ बोल. अगर तुमने कुछ ाचा सोचा है तो मैं तुम्हारा मोहन चूम लुंगी.....

लाली :- बाई जी जब तक दन्न कोई फैसला नहीं ले लेता तब्ब तक्क क्यों न षुरूति और जहान्वी के शरीर को श्वेता के सामने hi मस्सगे करके आने वाले वक़्त के लिए चमका दिया जाए.. is'se श्वेता के साथ साथ तीनो लड़कियां भी हिल जाएँगी. ऐसे में उसकी तड़प देख कर आप को मज़ा ज़रूर आएगा..

लाली की बात सुन कर रेखा ने सच में hi लाली का मोहन चूम लिया.. और फिर

रेखा बाई:- लाली तूने बड़ी अच्छी बात कही है.. आज मैं तुमसे और भी खुश हो गई hoon.jaa आज से तुझे पूरी आज़ादी है .. अगर तेरा दिल किसी का लुंड लेने को न करे तो मैट लेना जब्ब तेरा दिल करे तो अपने दिल से चुद लेना.. लाली तू जब्ब से आई है.. तुमने कभी कोई बग़ावत नहीं की है इसलिए आज मैं तुझे यहाँ कोठे पर छोट देती हूँ..

ये बोल कर रेखा बाई ने लाली को मोहन चूमा और अंदर कमरे में चली गई..

और लाली के होंठों पर एक कमीनी सी मुस्कान आ गई..

तब्ब से hi श्रुति जहान्वी और प्रिय का श्वेता के सामने hi मस्सगे होने लगा...

जब्ब पहली बार श्रुति और जहान्वी प्रिय को लाली के सामने hi नंगा किया गया तो. तीनो की hi नज़रें मारे शर्म के झुकी यही थीं.. बेशरम तो वो कोठे पर बन्न hi गई थीं.. लेकिन ऐसे किसी के सामने तीनो hi नंगी नहीं हुई थीं..

आज उन्हें लग्ग रहा था क जैसे वो कोई किसी दूकान पर सजे डेकोरेशन पीेछे हैं और सभी को दिखने के लिए ऐसे नंगी कड़ी हैं.. विज्जु का जाने के वो सबब टूट तो चुकी थीं.. लकिन इक आस थी क विज्जु आएगा ज़रूर लेकिन विज्जु इतना लेट क्यों हो गया.. तीनो hi नज़रें झुकाये सर्र नीचे किये आँखों में आंसू लिए हुए विज्जु को याद कर रही थीं..

priya:-(mann me)vijju आ देख तेरी बहनो का क्या हशर होने वाला है.. हम तीनो hi सरे बाजार नंगी होने hi वाली हैं. अभी तो सिर्फ कोठे के इक बंद रूम में hi नंगी हुई हैं. जल्द hi वो वॉट भी आने वाला है. जब हम भी माँ के जैसे किसी भेड़िये के सामने नंगी बीएड पर लेती खुद को बर्बाद होते देख रही हूँगी..

विज्जु अब्ब तो jaao..dekh कहीं तेरी देरर की वजा से हूयमर सबब कुछ न लूट जाये.

षुरूति:- (मैं में) विज्जु कहाँ रह गया है तू देख तेरी hi वजा से हम यहाँ हैं.. और तेरे hi कहने पर माँ ने हमें अपने पास रखा था.. विज्जु अगर तुम ना आये तो मुझे तेरी hi कसम है .. मैं अपनी जान दे दूँगी लेकिन खुद को बर्बाद होने नहीं दूँगी .. मुझे तेरे इलावा कोई छो भी नहीं सकता.. और मैं किसी को भी खुद को छूने भी नहीं दूंगी.. विज्जु तेरी कसम मर्डर जाऊँगी मैं..

जहान्वी:- (मैं में) विज्जु तू सबब जान hi लेगा क हमारे साथ क्या कुछ हो रहा है. विज्जु अब्ब देर मैट कर आ जा.. मुझे तुझपर यकीन है क तू हमें कुछ भी नहीं होने देगा.. बास विज्जु खुद को सलामत रखना और जल्द से जल्द वापिस आना. हम तीनो hi की तरह माँ भी हमारी ऐसी हालत देख कर और hi टूट जाएगी..

फिर तेरा यहाँ से जाने का फायदा hi क्या होगा.. अगर माँ को कुछ हो गया तो..

तू हमारे लिए hi गया था ना .. तो फिरर अब्ब समय आ गया है .. प्ल्ज़ विज्जु जल्द hi लौट कर आ जा..

विज्जु तेरी जुदाई अब्ब और सहन नहीं होती.. आ जा हमारे दिल को सकूं भी दे और हमें यहाँ से निकाल कर भी ले जा...

श्वेता तीनो के hi चेहरों को देख रही थी. उसकी तीनो hi बेटियां नंगी उसके सामने कड़ी हुई थीं और उनके सर्र झुके हुए थे लेकिन उन तीनो के चेहरे पर दर्द श्वेता को बड़े अच्छे से दिख रहा था..

श्वेता:- (मैं में) देख विज्जु तू अभी तक्क नहीं आया.. मैंने कहा था ना क तू इस काबिल नहीं है क मुझे और मेरी बेटियों को इस दलदल से निकाल सके..

अब्ब अगर तूने खुद को काबिल बनाना शुरू कर hi दिया है..

तो फिर जल्दी से आ कर अपनी बहनो को दलदल से निकाल कर ले जा ..

मैं तो बर्बाद हो hi चुकी हूँ.. कम् से कम् अपनी बहनो को तो बचा ले....... फिर श्वेता के अंदर से उबाल उठने लगा..

विज्जु मुझे बचने वाला कोई नहीं tha..isliye मैं बर्बाद हो गई.. लेकिन तूने खुद अपनी बहनो की रक्षा के लिए मुझे बोलै था.. अगर तू अपनी बहनो को लूटने से न बचा सका तो मुझे कभी अपनी शकल मैट दिखाना.. जितने दर्द मैंने झेले हैं. अब्ब और नहीं सहन कर सकती.. मैं कभी भी अपनी तीनो बेटियों को बर्बाद होते नहीं देख सकती..

विज्जु मेरे दूध की लाज ज़रूर रखना और अपनी बहनो को बर्बाद होने से बचा लेना. वर्ण मैं तुम्हें अपना दूध भी नहीं बख्शूं गई.... जल्दी से आ और मेरे दूध का हक़ ऐडा कर.... कहीं ऐसा न हो क देर हो जाये..


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लाली कमीनी सबब के hi चेहरों को देख रही थी.. और एक कामिनी मुस्कान के साथ सबब को hi देख रही थी..

इस वक़्त रूम में shweta..priya..shuruti..janvi..laali के इलावा तेन लड़कियां और भी thi..jinho ने तीनो का मास्स्सगे करना था..

लाली:- चलो नीचे पड़े हुए मत पर जा कर लेट जाओ..

लाली षुरूति प्रिय और जहान्वी से बोली..

तीनो ने hi एक बार अपनी माँ को देखा और फिर सर्र झुअए हुए मत पर जा कर नीचे लेट गईं..

यहाँ श्वेता क्या कर सकती थी..

तीनो ने hi अपने अपने शर्म से लाल हो रहे चेहरों को एक साथ से कवर कर लिया..

लाली और तीनो मस्सगे करने वाली लड़कियां हसने लगीं..

लाली तीनो मस्सगे गर्ल्स से..

लाली:- पहले इन तीनो की छूट की सफाई करो.. देखो कैसे बाल बढ़ाये हुए हैं. (फिर प्रिय षुरूति और जहान्वी से) आज के बाद हर रोज़ अपनी छूट के बाल अच्छे से साफ़ करना और मैं तुम्हे कुछ क्रीम और लोशन दूँगी us'se अपनी छूट को चमकना है तुम तीनो ने .. जब्ब तुम तीनो को बेचा jayega..to तुम्हारे शरीर के साथ साथ तुम्हारी छूट और गांड को देख कर अच्छी कीमत मिलेगी रेखा बाई को..

तीनो कुछ नहीं बोलीं,,

मस्सगे गर्ल्स ने पहले तीनो की छूट को बालो से क्लीन किया.. तीनो की छूट को चिकना होते देख कर hi लाली की राल टपकने लगी और वो चलती हुई पहले षुरूति के पास गई.. षुरूति की छूट को अपने दोनों हाथों की थम्ब्स से थोड़ा सा खोल कर देखना लगी .. साली लाली षुरूति की वर्जिन छूट को देख कर hi फ़िदा हो गई.. षुरूति की छूट के अंदर का गुलाबी दिख रह छेड़ बोहत पायरा लग्ग रहा था.. षुरूति को शर्म तो आई लेकिन षुरूति की छूट के छेद में छूट के पानी से नमी सी आ गई थी... लाली ने अपनी ऊँगली से पहले शूरति की छूट को अच्छे से कुरेदा और फिर अपनी एक ऊँगली को षुरूति की छूट में थोड़ा सा अंदर घुसा दिया. षुरूति की सिसकी निकल गई.. लाली कुछ देरर षुरूति की कमसिन छूट का मज़ा लेती रही.. फिर






लाली:- षुरूति तुम्हारी छूट को देख कर लगता है क तुम अपनी ऊँगली को कुछ ज़यादा hi चलती हो अपनी छूट के छेड़ में .तुम्हारी छूट खूबरूस्त तो दिख रही है. आउट टाइट भी है लेकिन अब्ब कभी भी अपनी छूट में ऊँगली मैट डालना.. समझ गई.. अगर नहीं समझी तो मैं दोबारा समझा दूँ..

षुरूति लाली के तेवर देख कर डर गई और हाँ में सर हिला दिया.. क अब्ब जैसा लाली बोलेगी वो वैसी hi करेगी.

फिर लाली ने जहान्वी और प्रिय की भी छूट को खोल कर देखा तो दोनों की hi छूट कुछ कुछ खुली थी.. लाली ने प्रिय और जहान्वी की भी छूट के पहले मज़े लिए..

प्रिय की कमसिन छूट को लाली ने झुकते हुए चाट लिया और अपनी जीब को अंदर दाल कर प्रिय की छूट का पानी टास्ते करने लगी.....




तीनो तितलियाँ मस्ती में hi एक दुसरे की छूट में ऊँगली दाल कर खेला करती थीं..

लाली ने प्रिय और जहान्वी को भी वार्निंग दी ... क अब्ब गलती से भी अपनी छूट में ऊँगली मैट करना.....

अब्ब तीनो के लिए वार्निंग की कोई अहमियत hi नहीं थी.. जितना आज हुआ था उन तीनो के साथ.. उसके बाद उनके दिल में मस्ती कैसे रह सकती थी... अब्ब तो बास हर वक़्त डर hi डर था.. na-jaane कब्ब उनके साथ क्या कुछ हो जाए ... वो सबब एक दलदल में फँसी थीं.. और दलदल में कभी भी कुछ भी हो सकता था...

ऐसे hi लाली रेखा बाई की ख़ास हो गई और लाली ने सबब के साथ साथ श्वेता और तीनो का भी जीना हराम किया हुआ था..

रेखा बाई ने लाली वाली बात जब्ब दन्न को बताई तो वो हरामज़ादा बड़ा हंसा था.

दन्न: रखा बाई षुरूति और जहान्वी को बेचने की मुझे भी जल्दी नहीं है.. मुझे बास अपने बदले से मतलब है और जैसा लाली कर रही है .. उसे करने दो.. श्वेता हर दिन ये सबब देखते हुए तड़पेगी और मुझे उसे ऐसे hi तड़पाना है..


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श्वेता रूम

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दूर को अंदर से कुण्डी लगी हुई थी और तीनो श्वेता से लिपटी हुई रो रहें थीं.

प्रिय:- माँ भाई तो बड़ी दूर गया हुआ है ट्रेनिंग के लिए .. अगर वो लेट हो गया तो हमारा क्या बनेगा..

श्वेता प्रिय के सर के बालों में उँगलियाँ फेर रही थी और किसी गहरी सोच में डूबी हुई थी....

जहान्वी:- प्रिय तुम दर्रो नहीं मेरा दिल मुझे बता रहा है क हमारा विज्जु जल्द hi हमें लेने आने वाला है.....

षुरूति:- पता नहीं कब्ब आएगा विज्जु कहीं देर न हो जाए.. जहान्वी तुम देख नहीं रही क कैसे रेखा बाई और लाली सबब हमें बेचने की तैयारी में लगी हुई हैं. मुझे बोहत डर लग रहा hai..vijju देरर न करदे.. और हमें दूर न भेज दिया जाए..

प्रिय और षुरूति ज़यादा दर्री हुई theen..jhanvi खुद भी दर्री हुई थी लेकिन उसे उसका दिल कुछ संभाले हुए था. क लेट hi सही लेकिन विज्जु उन सभी को कुछ नहीं होने देगा..

श्वेता किसी को तसल्ली नहीं देना चाहती थी.. उसने अपनी गुज़री ज़िन्दगी में इतने रंग देख लिए थे क पल पल बदलते वक़्त ने कैसे उसका सबब कुछ उजाड़ दिया था.. यहाँ भी फिरसे कुछ ऐसा hi होने वाला था.. इक विज्जु की आस तो थी श्वेता को लेकिन विज्जु कैसा बननन कर आएगा.. क्या वो इस काबिल बन पायेगा क अपनी माँ और बहनो को बचा ले.. श्वेता उम्मीद और na-ummedi में फँसी हुई थी..

वो छह कर भी तीनो के दिल को ढारस नहीं दे सकती थी..


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पूजा दीदी से मिलने के बाद रानी मेरी गले लग गई .. मेरे चेहरे का जो हिस्सा गीला रह गया था.. वहां अपने होंठों से मेरे गालों को टर्र करने लगी..

अभी सबब hi मिलने वाले रहते थे तो थोड़ा थोड़ा टाइम लगा कर सबब hi मुझसे अलग हो रहे थे..

पूजा दीदी रानी शिखा सुर रूपा से मैं मिल लिया था..... और अब्ब बारी थी..

मालिकान पद्मा आंटी और भाभी की.... हर्ष चौहान की फॅमिली यहाँ पर नहीं थी.. शंकर को इस कोठी का पता नहीं था.. इसलिए हर्ष चौहान और उसकी फॅमिली अभी कुछ दिनों से इधर नहीं आ रही थी..

पहले मैं मालिकान से मिला .. मेरे गले लगते hi उनकी पहले से गीली आँखों ने फिरसे बहना शुरू कर दिया..... कुछ मिंट वो मुझसे मिलकर अपना प्यार लुटाती रहीं. फिर जब्ब मैं उनसे अलग हुआ तो मैंने पद्मा आंटी की तरफ देखा तो आंटी मुझे देख कर फ़ौरन hi मेरे गले लग गई और रोने लगी.. मैंने भी आंटी को बड़े प्यार से गले लगाया और उनकी पीठ को सहलाने लगा .. फिर अपने मोहन उनके कान के पास ला कर

विजय:- सॉरी आंटी उस मैंने कुछ ज़यादा hi कर दिया था आपके और भाभी के साथ.

पद्मा आंटी को भी सबब याद आ गया और वो कुछ झेंप भी गई लेकिन फिर जल्दी hi खुद पर काबू पा कर..

आंटी:- विज्जु बीटा वो तेरी शरत थी लेकिन उसमे भी तेरा प्यार hi था.. मैं कैसे बुरा मान सकती हूँ. तू हमारा सबब कुछ है.. और वैसे भी ..... आंटी आगे कुछ बोलने वाली थी लेकिन फिर शर्मा कर चुप हो गई.

विजय:- कोई ना आंटी जी इस पर हम दोनों फिर बात करलेंगे.. अभी भाभी से भी मिलना है.

ये सुनते hi अनूठी मुझसे अलग हुई एक बार मेरी आँखों में देखा और फिर से शर्मा कर अपने चेहरा घुमा लिया..

मैंने भाभी की तरफ देखा तो भाभी भी आँखों में आंसू लिए बड़े hi प्यार से मुझे देख रहीं थीं.

मैंने भाभी को भी गले लगा लिया..

विजय:- भाभी उस दिन के लिए सॉरी

भाभी:- विज्जु किस दिन के लिए सॉरी??

विजय:- भाभी वही छूट लेटर वाली शरत जो मैंने की थी..

भाभी:- (हलके सा हस्ते हुए और मेरी कमर पर एक चुटकी काट ली) अब्ब जब्ब तुमने सबब देख भी लिया है और जान भी लिया है तो अब्ब तुम्हें फिरसे वही सबब करना पड़ेगा .. अब्ब तो तुमने आदत दाल hi दी है.. मैं तो नहीं पीछे हटने वाली..

विजय:- मतलब ?? ओह्ह्ह्हह भाभी जी आपम कितनी बदल गई हैं .. कहीं ऐसा तो नहीं क आप अब्ब रोज़ hi पद्मा आंटी की छूट में ऊँगली दाल कर मज़े लेने लगी हैं...

भाभी:- क्या करून विज्जु.. तेरे अजित भाई तो अब्ब यहाँ कम् hi आते हैं. और अब्ब वो कुछ ठन्डे भी पड़ने लगे हैं.. लेकिन तेरी वजा से पद्मा की और मेरी छूट ने बोहत तंग करना शरू कर दिया है ..

विजय:- भाभी तो क्या आपने पद्मा आंटी को भी अपने जैसे hi बना दिया है..

भाभी:- हहहहए तो क्या करती अपनी छूट की आग को कैसे ठंडा करती.. अब्ब तो अकेली पद्मा hi नहीं है.. मालिकान भी तुम्हारे और pooja..rani के सबब गंदे काम देख कर अपनी छूट में ऊँगली करने लगी है.. कभी कभी तो हम तीनो hi एक दुसरे को ठंडा करने लग जाती हैं..

विजय:- ओह्ह्ह अच्छा मतलब मालिकान भी .. लेकिन मैं अकेला सबब को कैसे ठंडा करूंगा भाभी... पहले hi इतनी सारी हैं...

भाभी :- चल बड़ी देर हो गई है.. सबब देख रहे हैं और वैसी भी मेरा फिर से पानी निकलना शुरू हो गया है..

विजय:- मुझे पता है भाभी आपके बदन की सरसराहट से hi मैं समझ गया था क आपकी छूट ने बरसना शुरू कर दिया है. आप कहें तो यहीं पारर hi आपकी छूट का रुका हुआ पानी निकाल दूँ...

भाभी एक झटके में कुझसे अलग हो गईं. और मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी..

सबब से मिलने में hi बड़ा टाइम लग्ग गया था और अनुष्का और उसकी बेहेन भी कड़ी ये सबब देख रही थी.. हमारे प्यार को देख कर जहाँ उनके चेहरे चमक रहे थे.. वहीँ वो अपनी ज़िन्दगी में पहली बार इतनी शॉकेड भी हो गई थीं..

ऐसे और इतनी देर भी कोई किसी से मिलता है.. और मिलने का अंदाज़ भी सबब से अलग.. ये उन दोनों बहनो के लिए शॉकिंग तो था hi लेकिन उन के लिए ये एक एडवेंचर भी बन्न गया था.. ज़रूर दोनों अपनी फ्रेंड्स या घर वळून को ये सबब बताएंगी.....

फिर हम अंदर ड्राइंग रूम की तरफ बढ़ गए........


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सॉरी गाइस..!!

किसी काम में उलझ गया हूँ.. इसलिए आपके रिप्लाई का आंसर देने का भी टाइम नहीं मिला...

अभी कुछ और भी मसरूफियत है.. तो जैसे hi फ्री हुआ ... तो मैं यहाँ स्फोरम पे सिर्फ आप सबब के लिए hi हूँ..

अगेन सॉरी ........ जल्द hi सबके शिकवे दूर कर दूंगा.. उपदटेस लॉन्ग और क्वांटिटी में भी ज़यादा पोस्ट करता रहूँगा...
 
अपडेट ::49::

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कुछ देर बाद बाद हम सबब ड्राइंग रूम में बैठे थे..

मेरे साथ पूजा दीदी और रानी बैठी थीं.. राज भी पूजा दीदी के साथ hi चिपक कर बैठ गया... बाकी सबब अनुष्का और उसकी बेहेन को साथ लिए सामने बैठी हुई थीं...

पूजा दीदी:- विज्जु तूने बड़ा तड़पाया है हम सबब को..

रानी:- हाँ विज्जु .. तुम क्या जानो हमे इंतज़ार करना कितना भारी पड़ रहा tha.itni बेचैनी कभी भी नहीं हुई.. जितनी आज तुम्हारे लेट होने से हुई है..

पूजा दीदी:- विज्जु भले hi तुम सबब से खुद को सेफ रख सकते हो.. लेकिन हमारा दिल तो तड़पता hi रहता है हर्र दुम्म .. na-jaane कब्ब क्या हो जाए..

rani:-vijju अज्ज तो हमने तुम्हे माफ़ कर दिया अगर फिर कभी तुमने हमारे साथ ऐसा किया तो फिर देख लेना............. माने तो तुम्हारा वो हशर करुँगी क सबब देखती रह जाएँगी... आज तो पूजा दीदी की वजा से तुम जल्दी hi छूट gaye..warna आज सच में hi मुझे तुम पर बड़ा ग़ुस्सा था..

पूजा दीदी:- रानी तुम सही बोल रही हो आज सच में hi विज्जु के लेट आने की वजा से बड़ी परेशानी उठानी पड़ी.. कैसे जब उदय अनुष्का अरु उसकी बेहेन को ले कर आया था तो सबब hi पागलों की तरह से भाग कर विज्जु से मिलने के लिए गई थीं.. लेकिन इस कमीने को क्या हमें जितनी भी परेशानी हो जितना भी हमारा दिल इस के लिए तड़पे....

rani:-(dheere se)didi टेंशन न लें बास यहाँ से फ्री हो jayen..to फिट रूम में इस से सारा बदला ले लेंगी...

पूजा दीदी:- (पूजा डीड को मस्ती याद आते hi) हाँ रानी तू सही बोल रही hai..chalo अभी इसे माफ़ कर दे देते हैं.. आखिर हमारा hi तो भाई है.....

मैं दोनों के hi चेहरे देख रहा था . मुझे बोलने का मौका दिए बगैर hi बोले जा रही थीं .. मेरे होंठों पे मुस्कान आई तो ड्राइंग रूम में बैठे सभी समझ गए और फिर अचानक से पूरा ड्राइंग रूम hi सभी के kah-kahon से गूँज utha..anushka अरु सुकि की बहन कुछ झिझक रही थीं.. लेकिन कुछ हद्द तक्क वो भी हंस दीं..

पूजा दीदी और रानी ने सबब को ऐसे हँसते देखा तो पहले हैरान हुई .. फिर वो भी सबब के साथ मिल कर हसने लगीं..

पूजा दीदी और रानी मुझे कमर के दोनों साइड hi चुटकी काटने लगी..

विजय:- अब मैं आप सबब को क्या बताओं.. पहले आप सबब अपने सारे सवाल एक साथ करलें. और अगर दिल में कुछ और भी है तो तो वो भी बता den..fir मैं सबब को अपने 8 महीनो की kaar-guzari सुनाओगे..

पूजा दीदी और रानी झींप गई.. उनको ऐसे झींपते देख कर एक बार फिरसे सबब हंस पड़े.. अनुष्का और उसकी बेहेन भी इस माहौल का मज़ा लेने लगी थी. दोनों hi बहनो को बड़ा मज़ा आ रहा tha....is पूरे फॅमिली ड्रामा का और ढेर सारा प्यार देख कर वो दिल hi दिल में बोहत खुश थीं..

पद्मा आंटी बोली:- विजय बीटा हम सबब तो तेरे लिए बेचैन तो थे hi.. लेकिन तेरी जुदाई ने सबब को hi तोड़पा कर देख दिया था.. और ऊपर से वो शंकर के लोगों ने हमारा जीना हराम किया हुआ था.. अब्ब तुम्हारे आने से hi तो सबब के चेहरे फिर से खिल gayehain..warna तू खुद hi समझ सकता है.. क एक तो तुम्हारी जुदाई और ऊपर से शंकर की तरफ से होप्ने वाले हमले... सभी का जीना हराम हो चूका था.. सबब एक दो दिन में ठीक हो जायेंगे .. कुछ टाइम तो लगेगा hi ..

विजय:- हाँ मैं पहले घर hi गया था .. वहां का सबब देख कर मैं भी सबब समझ गया था..

पूजा दीदी:- क्याआआआ?? तुम वहां घर गए थे.??

बाकी सबब भी:-- हाँ वहां क्यों गए थे..

राज कभी मुझे तो कभी सबब को देख रहा है.. अभी वो कुछ बोलै नहीं है..

विजय:- अरे मुझे क्या पता था क आप सबब यहाँ पर रह रहे हैं.. और मैं भी तो अचानक से आया था.. मुझे कौन बताता क वहां के सबब हालत बदल चुके हैं.. और ऊपर से मेरा मोबाइल भी बैटरी ख़तम होने से बंद हो गया था..

और एक हिसाब से अच्छा hi हुआ जो मैं वहां चला गया.. (अनुष्का तो देख कर) अनुष्का ने बताया नहीं क मैंने अनुष्का को अपने घर में hi तो बचाया था..

अनुष्का:- मैंने बास इतना hi बताया था क तुमने मेरी इज़्ज़त बचाई है.. घर की बात बताने का समय नहीं था.. और वैसे भी सबब तुम्हरे लिए बेचैन the...to खुल कर सबब बताने का टाइम नहीं mila..zayada टर्र तुम्हारी hi बातें होती रही थीं..

आखरी बात अनुष्का ने थोड़ा मज़ा लेते हुए बोली....

विजय:- अब्ब मुझे बताओ वहां क्या हुआ था.. जो अचानक से यहाँ आना पड़ा..

पूजा दीदी:- विज्जु वो शंकर कुत्ता और उसके दोनों दोस्तों ने हमारा जीना हराम किया हुआ था.. आये दिन कोई न कोई पन्गा होने लगा था.. कई बार तो शिखा और रूपा के साथ साथ राज को भी किडनैप करने की कोशिश की गई थी.. तुम तो थे नहीं तो उन्हों ने घर की लड़कियों को टारगेट करना शुरू कर दिया था ......

पूजा दीदी की बात सुन कर मुझे ग़ुस्सा तो आया लेकिन मुझे पहले से hi अंदाज़ा हो गया था.. क धर्मेश अपने भाई का मर्डर नहीं भूलेगा.. वो कमीने दिल्ली पे राज करते हैं तो .. खुद को नीचे कैसा देख सकते थे.. इतने महीने हो गए थे .. धर्मेश और शंकर हमारा कुछ नहीं उखड सके थे.. इतना ग़ुस्सा तो करना बनता hi था....

विजय:- दीदी फिर यहाँ आने की वजा यही है या कुछ और भी बात हुई थी..

पूजा दीदी:- विज्जु और भी बोहत कुछ है ..कई बार नाकाम होने की वजा से धर्मेश पागल सा होने लगा तो शंकर ने चाल चलते हुए एक बड़ा अटैक कर दिया था घर पर... वो तो raja..aur बाकी के तुम्हारे तीनो दोस्तों ने हम को बचा लिया वर्ण आज हम यहाँ नहीं होते..

विजय:- तो ins-ranjeet ने कुछ नहीं किया...

पूजा दीदी:- यही तो शंकर का प्लान था... विज्जु वो शंकर बड़ा हरामी है.. उसने पहले ins-ranjeet को किसी और लफड़े में उलझाया और फिर अचानक से हमारे घर पर अटैक कर दिया..

विजय:- मतलब मुझे डिटेल में बताओ और राजा के साथ साथ बाकी तीनो कैसे अचानक से घर पर आ गए..

हमारी बातें सुन कर अनुष्का और उसकी बेहेन के पसीने निकलने शुरू हो गए थे..

पूजा दीदी:- विज्जु जहाँ तुम ट्रेनिंग का लिए वीराने में जाय करते थे.. वही शंकर ने अपने hi आदमियों के दो ग्रुप बना कर झूट मूट की लड़ाई करवा दी.. बड़े khatar-naak किसम के हथियार चलाये गए थे.. पूरा टाउन hi अपने अपने घरों में क़ैद हो गया था.. और फिर जैसे हम पर हमले हो रहे थे.. ins-ranjeet को भी शक हुआ क कही ये कोई चाल न हो लेकिन फिर भी उसे उसी वीराने में अपनी पुलिस फाॅर्स को ले कर जाना पड़ा.. लेकिन जाने से पहले hi हर्ष च्वहाण और राजा को घर पारर जाने को बोलल दिया.. हर्ष चौहान तो लेट था ..

लेकिन राजा.. जीतू .. उदय और अनुपम जल्दी hi आ गए हमारे पास.. बास उनके पोहचते hi शंकर .. धर्मेश और प्रेम भी पोहंच गया अपने कई आदमियों को लेके... अगर वो चाहता तो हमारे पूरे घर को hi शमशान बना सकता था.. लेकिन वो हमें ज़िंदा पकड़ना चाहता था.. ता के अपने हिसाब से हम सबसे बदला ले सके.. और इतने महीनो की नाकामी और अपने कई गुंडों के मरने का बदला भी ले सके..

विज्जु मैं तुम्हें सही से नहीं बता सकती क हमारी हालत कैसी हो गई थी.. बहार गोलियों की बारिश शुरू हुई और ऐसी हुई क कई गोलियां तो हमारे घर की दीवारों को चीरते हुए अंदर आने लगीं... वो तो शुक्र था क हम सबब ज़रा हट के और लेते हुए थे.. वर्ण हम में से कोई भी बच नहीं सकता था....

राजा और बाकी के तीनो ने हर्ष चौहान के गार्ड्स के साथ मिल कर कुछ उनका मुक़ाबला किया लेकिन शंकर पूरी तैयारी के साथ आया था..... पूरे टाउन में मौत की सी ख़ामोशी छाई हुई थी.. बास फ़िज़ा में गोलियों की आवाज़ें hi गुन्ज रही थीं.. विज्जु ऐसा लग्ग रहा था जैसे कोई जुंग हो रही हो .इतना शूर हो रहा था.. जैसे हम सबब बीच जुंग के मैदान में फंसे हुए हूँ.... हमारे तो कान के परदे फ्हटने वाले हो गए थे..

फिर रानी बोली:---- विज्जु राजा और बाकी के गार्ड्स के पास तो अच्छे हथियार थे. लेकिन कब्ब तक शंकर के हहियारों ा मुकालबा कर सकते थे..

ऐसे में शंकर के पीछे से हर्ष चौहान के गार्ड्स आ गए तो शंकर और सके दोस्त उलझ गया .. वो दो तरफ़ा होने वाली फायरिंग में फँस गए और उसके कई गुंडे मारे गए.. इसलिए शंकर और उसके दोस्तों को मजबूरन पीछे हटना पड़ा..

पूजा दीदी की बात सुन कर जहाँ अनुष्का और उसकी बेहेन मारे डर के कांपने लगी थीं.. वही पूजा दीदी और रानी के पूरी बात बताने से मेरे घर वाले सभी रोने लगे.. और रानी के साथ पूजा दीदी की भी आँखों में आंसू आ गए..

पूजा दीदी और रानी दोनों मुझसे चिपक गईं..

पूजा दीदी:- विजजू.. मैं बोहत डर गई थी.. मुझे लगा अब्ब मैं कभी तुम्हे कभी देख नहीं सकुंगी ... विजु तुम्हारे बिना मरने को भी मैं नहीं है मेरा....

उस दिन बास भगवन से यही दुआ मांग रही थी.. क विज्जु के आने से पहले हम में से किसी को कुछ न हो... क्यूंकि विज्जु तुम्हरे रहते हमें इतना डर नहीं लगता..

रानी:- (रट हुए) विज्जु शंकर और उसके दोस्तों ने हमें बोहत डराया है.. उनको छोड़ना मैट .. वर्ण कही ऐसा न हो क हमारी खुशियों को फिरसे किसी की नज़र लग्ग जाये..

रानी के आंसू उसके गालों पर से फिसलते हुए उसकी चीन पर इकठे होने लगे.. रानी के मासूम चेहरे पारर कितना दर्द और कितना डर आ गया तय.. अभी सिर्फ उस गुज़रे काण्ड को याद hi किया था.. जब्ब उस वक़्त उन सबब पर बीत रही होगी तब्ब कैसे दर्रे हुए होंगे सबब... नाज़ुक सी लड़कियां और औरतें .. कैसे सबब ने मिल कर वो समय बिताया होगा.. मुझे सबब पर तरस आने लगा.. क ये सबब नरम दिल वालियों ने कितना टफ टाइम गुज़ारा था...

मैंने रानी और पूजा दीदी के आंसू साफ़ किये और

विजय:- बास अब्ब मैं आ गया हूँ न.. डरना छोड़ दो.. अब्ब मैं किसी को कुछ नहीं होने दूंगा..

मैंने फिर बारी बारी रानी और पूजा दीदी के गालों पर किश की और बोलै

विजय:- मुझपर भरोसा है ना

रही:- ऐसा क्यों बोलते हो .. हमें तो खुद से भी ज़यादा तुझपे भरोसा नहीं.. तुम्हारे लिए तो हम जी रहे हैं.. वर्ण तुम तो जानते hi हो .. तुम्हारे आने से पहले हमारी ज़िन्दगी में क्या था .. कुछ भी तो नहीं था हमारी ज़िन्दगी में.. हर वक़्त कैला पत्र hi तो देखा मैंने.. अब्ब तुम हो हमारी ज़िन्दगी me...(apni माँ की तरफ इशारा करते हुए) विज्जु माँ को देखो कैसे आंसुओं भरे चेहरे पर भी एक सकूं सा है.. ये सबब तुम्हारे साथ होने की वजा से है...... अब्ब हम क्यों दररेंगे.. बास उस पल को याद करके रात भर नींद नहीं आती.. अब्ब तुम ा गए हो ना.. तो चैन की नींद सो सकेंगे.. विज्जु देखो सबब की आँखों में .. कई रातों से सही से सोये नहीं हैं हम सबब ...

रानी की एक लम्बी तक़रीर के बाद सबब hi के चेहरे पर आंसू आ गए और सबब के hi चेहरों पर मुझे खुद के लिए प्यार दिखने लगा ............

सब मुझे Hi देख रहे थे और मैं रानी और पूजा दीदी को गले लगाए उनके दुःख हो काम कोशिश में लगा हुआ था..

लेकिन रानी के साथ साथ सब ने जितना कुछ झेल लिया था वो कम् नहीं था पूजा दीदी और रानी मेरे गले लगे हुए hi आंसू बहाने में लगी हुई थी .. रानी के दिल की धड़कन मेरे दिल की धरकन से मिलते hi pur-sakoon होने लगी....

विजय:- बस अब चुप कर जाओ अब्ब मैं आ गया हूँ ना तो डरने की जरुरत नहीं शंकर ने जो करना था वो उसने कर लिया ..अब मेरी बरी है ..

शंकर को लेके तुम सबब को जितना दररना था डर लिया .. अब दररने की बारी शंकर की hai..shankar खुद को बोहत बड़ा दादा समझता है ना.. में उसे बताऊंगा क उससे भी बड़ा दादा दिल्ली में वापिस आ गया है....

शकणार की ज़िन्दगी के बास कुछ hi दिन बाकी हैं.. मैं उसे ऐसी मौत दूंगा क खुद उसने भी कभी किसी को ऐसी मौत नहीं दी होगी..

मेरी बातें सुन कर सबब शांत हो गए .. वैसे भी अब्ब रोना किस लिए था.. जो खतरा उन सब की जिंदगी में Tha..wo अब्ब टालल चूका था..

अब सिर्फ में hi nahin..Raja उदय अनुपम और जीतू भी मेरे जैसे hi बन गए थे..

हम पंचन की एक टीम बन गई थी .. उदय जीतू और अनुपम राजा और मेरे जैसे तो नहीं थे लेकिन फिर भी अब उनके अंदर से दर ख़तम हो गया था ..

तीनो के बदल जाने से मैं और राजा और भी स्ट्रांग हो गए थे...


अब बस आज की Hi रात थिओ.. कल से संकर धर्मेश प्रेम और उसके साथ साथ दिल्ली के दो दूसरे गैंग्स का भी सफाया में शुरू करने वाला tha..ab बस बहुत हो चूका. जितना इन लोगों ने मजबूरों be-kason और लाचारों पर ज़ुल्म करना था कर लिया अब और नहीं... सभी को कुत्ते की मौत मर कर दिल्ली की एवं को सभी कुत्तूण के ज़ुल्म से निजात दिला दूँगा..........

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विजय:- पूजा दीदी अब आप ठीक है न .......

मैंने रानी और बाकि सब की तरफ देखते हुए पूजा दीदी से पूछा ..

पूजा दीदी और रानी की आँखों से आंसू बहाने रुक गए थे .. मेरी बात सुनकर पूजा दीदी ने मेरा चेहरा चूम लिया और मेरे कंधे पर अपना सर्र रख कर बोली.

पूजा दीदी:- विजु जब तुम हमारे साथ हो तुम मुझे कुछ भी कैसे हो सकता है. और हम सब तुम्हें देखने के बाद हम्म बिलकुल अच्छे हो गए हैं .. अब्ब हमें किसी किसम की कोई चिंता नहीं है.. बस तुम ऐसे hi अपना प्यार हमपे लुटाते रहना ..विजु हमें सिर्फ तुम्हारी और तुम्हारे प्यार की जरुरत hai..Tumhara प्यार पा के दिल को सुकून मिलता है .. हम सब के जीने की वजह तुम हो विज्जु ..जिंदगी में वो रंग नहीं दीखते हमें जो तुम्हारे पास होने से हमारी ज़िन्दगी में आने लगते हैं..

रानी:- दीदी अब्ब बहुत टाइम हो गया है.. बाकि की बाते रूम में चल कर करते हैं.. रानी पूजा दीदी को देख कर मज़ा लेते हुए बोली..

रानी की बात सुनकर पूजा दीदी की आँखों मैं भी चमक आ गई..

पूजा दीदी ने एक बार सब की तरफ देखा सब हम तीनों को Hi देख रहे थे

मालकिन नजरे चुराने लगी पूजा के इस तरह देखने से.. और भाभी और और पद्मा आंटी मजे लेकर हम तीनों को Hi देखने लगी.. रानी की बात और पूजा दीदी के ऐसे देखने से malkin..bhabhi और पद्मा आंटी सब समझ गई ..

जिस तरह से रानी मई और और पूजा दीदी एक hi बीएड पर मस्ती करते हुए सोते थे..

वो मालकिन’ भाभी और पद्मा आंटी के साथ साथ सब hi जानती थी …

भाभी:- शरारत करते हुए… इतनी भी क्या जल्दी है.. कितने वक़्त के बाद विजु आया है...... कमरे में क्यों जाना चाहती ho..Abhi विजय को आये देर hi कितनी हुई है और तुम दोनों विजु को लेकर कमरे में घुसने का सोच रही हो..

हम सब भी तो यही बैठी हैं .. अभी हमारा दिल नहीं भरा ..अभी तो हम सबब ठीक से विजय से मिले भी नहीं.. अभी तो पूरी रात पड़ी है.. विजय क्या यहाँ सोने के लिए आया है.. मुझे अभी विजय से बहुत सी बातें करनी है.. आज रात के लिए विजय को ताम दोनों हमारे लिए छोड़ जाओ.. फिर भाभी पद्मा आंटी को आँख मरते हुए.. क्यों पद्मा मैंने ठीक बोलै न.. भाभी की बात सुनकर पद्मा आंटी ने भी एक शरारती मुस्कान देते हुए हाँ में सर्र हाला दिया..




मैं भाभी और पद्मा आंटी की शरारत ने महज़ूज़ होने लगा...


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बाकी की अपडेट भी आज hi मिलेगी............. अभी इतने की hi करेक्शन हुई है.. तो सोचा पोस्ट कर दूँ..
 
अपडेट:50

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भाभी और पद्मा आंटी ने रानी और पूजा दीदी का सच में hi खून खुश्क कर दिया था ..रानी और पूजा दीदी समझ भी रही थी के भाभी और पद्मा आंटी दोनों के साथ उंगली कर रही है लेकिन फिर भी दोनों अपने लड्ड़ूऊऊऊ को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थीं .. पूजा दीदी भाभी और पद्मा आंटी को आँखें दिखने लगी थी.. लेकिन आज



पूजा दीदी की कोई सुनाने वाला नहीं था

शिखा और रूपा भी अपनी माँ और पद्मा आंटी को देख कर

रानी और पूजा दीदी के मजे लेने लगी.. अब जब जहाँ पैर सब hi मिलकर रानी और पूजा दीदी को छेड़ रहे तो फिर राज कैसे पीछे रह जाता .. राज जब्ब भी कोई बात करता था तो राज की बात सब से hi अलग होती थी..

राज:- आप सब जो भी फैसला कर लें लेकिन आज भैया के साथ तो मैं hi सोने वाला हूँ..

राज अब इतना भी छोटा नहीं रहा था.. वो सब समझता था..

राज को पता था क उसकी दोनों बहने hi मुझसे से बहुत प्यार करती हैं.. लेकिन राज को इस पैर कोई ऐतराज़ नहीं था.. वो तो खुद भी मुझसे से बहुत मोहब्बत करता Tha..main राज के लिए बड़े भाई के सम्मान था..

राज जानता था के मेरे दिल में किसी के लिए भी गंदे विचार नहीं हैं..

और जैसे सब लड़कियां मुझसे से प्यार करती हैं.. उतना hi प्यार मैं भी सब लड़कियों से करता hai..main सबब से hi मस्ती कर लिया करता था और बस चुदाई के इलावा सबब hi कर चूका था.. नट्सः अऊर शीतल को छोड़ कर .. लेकिन मेरे दिल में किसी के लिए भी हवस अनहि थी.. और सबब hi जानते थे....

भाभी और पद्मा आंटी की मुसीबत अभी ख़तम नहीं नहीं हुई थी.. के राज बीच में बोल पड़ा..

मैंने कहा था क राज जब भी किसी के बीच में बोलता था तो राज की बात सबब से hi अलग होती थी... राज की बात सुनकर रानी और पूजा दीदी राज को घूरने लगी..

और ड्राइंग रूम में बैठी हुई सभी महिलायें ज़ोर ज़ोर और से हंसने लगी..

रानी और पूजा दीदी राज को खा जाने वाली नजरों से देखने लगी.. अब राज नादाँ नहीं था..

वो भी सब के साथ मिलकर रानी और पूजा दीदी की खिंचाई में शामिल हो गया..

रानी और पूजा दीदी के बदलते हुए तेवर देख कर राज नौटंकी करने लगा.. वो पूजा दीदी के पास से खड़ा होकर मेरे पैरों में बैठ गया.. और मेरे दोनों पैरों के पास नीचे बैठ कर अपना सर मेरे घुटने पर रख दिया और पूजा डीड का हाथ पकड़ कर पूजा दीदी से बोलै..

राज:- दीदी आप दोनों ने hi भैया का इंतज़ार नहीं किया हम सब ने Hi है को जुदाई को सहा है.. माँ और आंटी सही बोल रही हैं.. आज आपकी और रानी दीदी की छुट्टी.. आज यही पे हम सब मिलकर बातें करेंगे और मई भैया की गॉड में सर्र रख कर सो जाऊँगा...

राज की बात सुन कर एक बार फिर से सब जोर जोर से हंसने लगे.. रानी और पूजा दीदी ने राज के सर के बालों को पकड़ लिया.. और फ्री राज को नीचे फर्श पैर लिटा दिया.. रानी राज के पेट के ऊपर बैठ गई...

पूजा दीदी:- रानी छोड़ना मैट.. साला इतना बड़ा कैसे हो गया मुझे पता hi नहीं chala..kall तक्क तो िटटू सा था.. (पूजा दीदी ऊँगली और अंघूठे से साइज बताते हुए बोली) सबब पूजा दीदी के इस तरह करने से एक बार फिर हसने लगे..

फिर पूजा दीदी आगे बोली...

साला ित्तचू सा है तू और सब के साथ मिलकर मेरी खिंचाई करेगा... रानी आज इसको ऐसा सबक सिखाओ क फिर कभी मेरे साथ पंगा लेने का सोचे भी ना...

पूजा दीदी को राज का ऐसा करना बुरा भी नहीं लगा था.. बल्कि उसे और भी अच्छा लगा था.. लेकिन जब सब मिलके नौटंकी करने लगे थे..

तू फिर पूजा दीदी तो इन सब में नंबर ओने थी.. और रानी भी किसी से काम नहीं थी... पूरा ड्राइंग रूम मुझ समेत kah-kahoon से गूँज उठा....

राज की इस नौटंकी ने सब को मिलकर बड़ा मजा कराया..

अनुष्का और उसकी बहन वो दोनों भी सब के साथ मिलकर इस दिलचस्प और प्यार भरे माहौल का पूरा पूरा आनंद ले रही थीं..

रानी राज और पूजा दीदी 5 मिनट तक ऐसे hi मस्ती में लगे रहे फिर रानी राज के ऊपर से उठी.. और मेरे पास आ कर बैठ गई.. रानी को देखते hi पूजा दीदी भी मेरे पास आ कर बैठ गयी

जब मैं यहाँ से गया था तो राज इतना चेंज नहीं था .. राज के ऐसे रूप को देख कर मुझे बड़ी ख़ुशी हो रही थी.....

राज नीचे लेते लेते हे सब को देख कर मुस्कुराने लगा.. भाभी शिखा रूपा राज को ऐसे मस्ती करते देख कर बहुत खुश थी.. राज ने सच में hi आज सब के साथ मिलकर बढ़िया से मस्ती की थी..

रात बहुत हो गई थी. मुझे तो कोई थकन नहीं थी.. मैंने तो ट्रैन में जी भर कर अपनी थकन उतार ली थी... लेकिन फिर भी रात सोने के लिए होती है.. रात को जल्दी सोयेंगे तो सुबह जल्दी उठकर फिर से यही सब तो होना था.. इसलिए मालकिन भाभी पद्मा आंटी ने सब को अपने रूम में जाने को बोल दिया.. शिखा और रूपा अनुष्का और उसकी बहन को अपने साथ रूम में ले गईं....


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कुछ देर बाद हम तीनों hi बीएड पारर लेते हुए थे.. मैं दरमियान में था.. मेरे राइट साइड पूजा दीदी और लेफ्ट साइड में रानी लेती हुई थी.. अभी हम तीनों कोई भी बात नहीं कर रहे थे.. हम तीनों की hi नज़रों ऊपर छत की तरफ थी.. बहार ड्राइंग रूम में जो कुछ भी हुआ था....

अब हम तीनों hi उस बारे में नहीं सोच रहे थे.. बस हम तीनों hi रूम की छत को hi घोड़े जा रहे थे... कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था.. हम तीनो Hi एक दूसरे से कुछ भी बात नहीं कर रहे थे.. शायद इन 8 महीनों में जो कुछ हम सब पैर बीत चूका था.. उसी बारे में सोच रहे थे.. हम तीनो hi यह सोच रहे थे.. के पहले बात कौन शुरू करे..

हमारे पास बात करने के लिए बहुत कुछ था लेकिन शुरू करने के लिए किसी के पास अलफ़ाज़ नहीं थे..

10 मिनट तक ऐसे hi लेते रहे और छत को घूरते रहे......

मैंने hi इस ख़ामोशी को थोड़ा

विजय:- पूजा दीदी आप दोनों hi किस सोच में गुम्म हैं..

मेरी बात सुन कर रानी और पूजा दीदी दोनों ने hi मेरी तरफ देखना शुरू कर दिया..

oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मैं भी सोचो ये दोनों बात क्यों नहीं कर रही .. दोनों की आँखों में फिर से आंसू ा गए थे.. कुछ देर पहले की गई मस्ती को रानी और पूजा दीदी भूल गई thi..aab उन दोनों की आँखें गुजरे 8 महीनों की जुदाई की वजह से नम्म होने लगी थी..

दोनों रोटी हुई मुझ में समा गईं....

रानी:- विजु इन 8 महीनों मैं तुम्हारी बहुत याद आई.. बहुत मुश्किल से ये वक़्त गुज़ारा है humne..harr पल दिल यही चाहता था क तुम जल्द से जल्द वापिस आ जाओ..

पूजा दीदी:- हाँ विजु हर पल तेरी याद आती रहती थी.. बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला hai..Varna हम तो तुम्हारे बिना रहने के आदि hi नहीं थे.. तेरी जुदाई ने पल पल रुलाया है मुझे.. रानी और मैं उसी टूटे हुए बीएड पर हर पल तुम्हें hi याद किया करती थी..

विजु उस बीएड में तुम्हारी खुशबु रची हुई थी.. विजु पता नहीं अब वो बीएड सलामत भी होगा क नहीं.. शंकर के आदमियों ने न जाने उस बीएड का क्या हशर किया hoga..Viju तुम्हारी तरह वो बाद भी मुझे बहुत अज़ीज़ है.. प्लीज उस बीएड को यही कोठी पैर मंगवा lo..............main उसे से फिर से ठीक करवा लुंगी.. उस बीएड के बिना मुझे सही से नींद नहीं aati..Viju प्लीज कल hi वो बीएड मंगवा देना मुझे..

मैं और रानी पूजा दीदी की बात सुनकर कुछ हैरान भी हुए.. लेकिन पूजा दीदी ने सच hi कहा था.. क उस बीएड में हम तीनो की hi खुशबू रची हुई थी.. और हम सबब के प्यार की वो निशानी भी था..

जो चीज़ पूजा दीदी के दिल में बस जाए .. वो मैं कैसे उनसे दूर रख सकता tah..Pooja दीदी मुझे कुछ कहे अरु मैं न करो .. ये कैसे हो सकता था... मैंने सोच लिया था क कॉल hi बीएड यही कोठी पर ले आऊंगा..

रानी:- विजु देखो जैसे पूजा दीदी और मेरी नज़र में वो बाद इतना ख़ास है..

तुम खुद Hi सोच लो की तुम्हारी खुशबु वाले बीएड हम छोड़ नहीं सकती..

तो फिर तुम्हारे बिना हमारा गुज़ारा कैसे होगा... विजु "ी लव यू" मैं तुमसे बहुत बहुत प्यार करती hun..aur तुम्हारे बिना जीने का सोच भी नहीं सकती..

मैं ये भी जानती हों क अभी तुम्हारी जिंदगी मई बहुत से मरहले आने वाले हैं.. हम तुम्हें कभी भी कहीं भी जाने से नहीं रोकने वाली.. लेकिन प्लीज हमें भूल मैट Jaana..jahan भी जाना अपने मक़सद को hi सामने rakhna..lekin हमें भी अपने दिल में रहने देना और यही सोचना क तुम्हारे पीछे हम भी तुम्हारे इंतज़ार में हैं..

पूजा दीदी रानी की बात सुनकर बोली

पूजा दीदी:- विज्जु जहाँ भी जाओ ख़ुशी ख़ुशी जाओ .. तुम हमारा ग़म मैट karna..abb से तुम बास अपने मक़सद पर hi फोकस रखना.. और जल्द से जल्द माँ और बहनो को ले कर aana...ham सब तुम्हारी राह देखते रहेंगे..

अब हम सब भी समझ रहे हैं.. तुम्हारा आगे का मिशन शुरू हो गया है..

अब वक़्त आ गया है ..

तुम्हे खुद को पावरफुल बनाना hai.....Viju तुम्हारे पास टाइम बहुत काम है..

तुम भी यह बात बहुत अच्छी तरह से जानते होंगे..

माँ जी और बहाने किस दलदल में फँसी हुई है.. विज्जु वहां की रिपोर्ट के मुताबिक श्रुति जानवी और प्रिय के साथ बहुत कुछ गलत हो रहा है..

श्रुति और जानवी 18 साल की हो चुकी हैं......

रेखा बाई और दन्न किसी भी वक़्त उनको कही बेच सकते हैं.. इसलिए जो भी तुम करने वाले हो जल्द से जल्द कर लो.. तुम कल से Hi खुद की पावर को बढ़ाना शुरू कर दो.. जितनी जल्दी हो सके अपने साथियों को लेकर मुंबई के लिए निकल जाओ.. किसी भी वक़्त कुछ भी हो सकता है..

यहाँ दिल्ली में तुम्हें जिस चीज की बी ज़रुरत है वह जल्द से जल्द हासिल करो और अपनी टीम को भी जयादा ताकतवर बनाकर मुंबई के लिए निकल जाओ..

विजय:- हाँ दीदी मुझे भी सब पता है.. नए बदले हुए हालत मैं सही से तो नहीं Jaanta..lekin वक़्त की कमी और नज़ाकत को मैं बहुत अच्छे से समझता हूँ..

पहले hi बहुत वक़्त गुजर चूका है.. अब मैं खुद भी और लेट होना नहीं चाहता..

दीदी आप परेशां न हूँ.. मैं बहुत जल्द मुंबई के लिए निकल जाऊंगा.. बस यहाँ के हालत को ठीक कर लून.. क्यूंकि कहीं ऐसा न हो मैं वहां माँ और बहनो को बचने के लिए Jaaon....aur यहाँ मेरे पीछे आप सब की ज़िंदगियाँ खतरे में आ जाएँ.. मुझे माँ और बहनो के साथ साथ आप सब की भी ज़रुरत है.. मैं कभी भी ये नहीं चाहूंगा.. क आप में से किसी को भी किसी किसम की कोई परेशानी उठानी पड़े.. सब लोग मेरे लिए एक सम्मान है.. वे अरे फॅमिली..

मैं किसी को भी खोना नहीं Chahta...bus में कल से Hi राजा और बाकि तीनों के साथ मिलकर शंकर धर्मेश और प्रेम के साथ साथ दिल्ली शहर के दूसरे दोनों गैंग्स को भी जड़ से उखड देना चाहता हूँ.

क्यूंकि जिस तरह की लाइफ मैंने गुज़री है. मेरी hi तरह यहाँ और भी कई ऐसे होओगे.. ाजो मेरे जैसे hi हालातों का सामना कर रहे होंगे.. मुझे मेरी माँ और बहनो को बचने के लिए कुछ देर सही .. लेकिन यहाँ के मासूम लोगों की लाइफ को भी मैं ठीक करना चाहता हूँ.... जो दर्द मेने सहा है.. वो और भी na-jaane कितने लोग सेह रहे होंगे.. मुझे खुद के दर्द के साथ साथ दूसरों के भी दर्द को ख़तम करना है.. वर्ण मेरे अंदर से मुझे चैन नहीं मिलेगा....... मेरी आत्मा ाहर दुम्म तड़पती रहेगी.... अगर मैं उन सबब के लिए कुछ न कर सका तो.

मुझपर तो भगवन ने बड़ा करम किया है.. जो आप सबब मेरी लाइफ में आ गए .. वर्ण कई ऐसे भी हैं.. जिनके के पास कोई सहारा hi नहीं है.. मेरी hi तरह और भी कई मासूम लड़कों की मायें और बहने भी इस तीनो गैंग्स के चुंगल में ज़रूर फँसी हुई होंगी.. मैं बास पहले उन सब के लिए भी कुछ करना चाहता हूँ..

इस बीच मेरी कोशिश होगी की जल्द से जल्द सब काम से फ्री हो जाऊं.......

अभी मुझे माँ और बहनों के साथ साथ आप सब के लिए भी कोई महफूज़ ठिकाना भी बनाना है ... क्यूंकि जो लड़ाई मैं लड़ने वाला हूँ.. उसमे आप सबब की सुरक्षा ज़यादा ज़रूरी है.. वर्ण मैं तो बीच में hi अटका रहूँगा....

दीदी एक काम तो आज हो गया hai...aaj शंकर के एक अड्डे से हमें वेपन भी मिल गए हैं.. इससे हमारा काम बोहत हद्द तक्क आसान हो गया है.. और हमारा टाइम भी बच गया है...

और आप अब्ब टेंशन न लें .. मुझे सबब पता है .. मुझे क्या करना है वो मैं बोहत अच्छे से जानता हूँ...


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रानी और पूजा दीदी मुझे प्यार भरी नज़रों से देख रहे थी..

फिर मुझे अचानक से कुछ याद आया के पुराने घर में शंकर के गुंडे बंधे पड़े हैं....

मैंने अपना मोबाइल निकल कर राजा को कॉल कर दी...

और उसे घर में मौजूद गुंडों के बारे में बता दिया.. राजा ने कहा तुम आराम करो.. मैं उदय जीतू और अनुपम से कहकर उन सब को भी यही उठवा कर ले आता हूँ..

लेकिन मैंने राजा को बोल दिया.. क हमारे लिए शंकर के अड्डे से उठाया हुआ लीडर hi काफी है.. वहां घर में जो गुंडे थे उनको मार कर किसी वीराने मैं फेंक दे... क्यूंकि कचरा जितना काम हो उतना hi अच्छा है.. राजा को भी मेरी बात सही लगी और राजा ने ok बोल दिया......

रानी और पूजा दीदी मुझे राजा से बात करते हुए सुन रही थी.. मेरी बात पूरी होते hi दोनों मुझपर टूट पड़ें...




अब्ब आज के लिए मस्ती के इलावा जो कुछ था .. वो सबब पेंडिंग हो गया था..

क्यूंकि दोनों hi अपनी छूट को लेके बावली हो चुकी थी...

पूजा दीदी और रानी पिछले 8 महीनों की गर्मी को संभाले हुए थी.. अब दोनों मुझे छोड़ने वाली नहीं थीं.. और फिर गर्मी तो मुझमे भी स्टॉक हो चुकी थी.. अब्ब हम तीनो के अंदर की गर्मी के बहार निकलने का टाइम आ गया था...

और हम सबब कुछ भूल कर अपनी गर्मी को निकलने के लिए sar-garam होगये...

रानी को कुछ ज़यादा hi बेचैनी थी .. रानी बीएड पर कड़ी हुई.. और रानी ने देर न करते हुए अपने सरे कपडे एक झटके में Hi उतार दिए....




आज दीदी को भी उनकी मुनिया की गर्मी ने बोहत तंग किया हुआ था.. और लॉन में छोड़े हुए अधूरे किश को भी पूरा करना था... उस सबब के लिए दीदी को भी नंगा होना था तो

पूजा दीदी ने भी देर न करते हो अपने कपडे उतरने शुरू कर दिए..




मैं दोनों को hi नंगे होते देख रहा था.. मेरे होठों पैर मुस्कान ा गई.. मुझे मेरे कपडे उतरने की जरुरत hi नहीं थी......

जितना उन दोनों की मुनिया पानी बहाये जा रही थी.. उसकी वजह से दोनों मेरे कपडे खुद Hi कर देने वाली थी...... या शायद मेरे कपडे उतारने की बजाये पहाड़ ही न दें..

दोनों जैसे hi पूरी तरह से नंगी हो गई.. दोनों hi मुझ पैर टूट पड़ी..

और चाँद hi लम्हों में मेरे कपडे भी बीएड से दूर रूम के एक कार्नर में पड़े हुए थे.. शुक्र है क दोनों ने मेरे पकडे नहीं पहाडे थे.. वर्ण दोनों की छूट की गर्मी ने आज उन दोनों से hi कुछ गलत करवा देना था.........

इन 8 महीनों में मेरा मुन्ना और भी बड़ा और स्ट्रांग हो गया था.. रानी और पूजा दीदी ललचाई हुई नजरों से मेरे मुन्ने को देख रही थी...

मेरा मुन्ना खड़ा tha..full स्ट्रैट हालत में छत की तरफ किसी मिसाइल के जैसे उड़ने के लिए तैयार था..

इतनी गर्मी दोनों की छूट में होने लगी थी.. उनका बस चले तो अपनी मुनिया को मेरे मुन्ने के ऊपर रख कर एक झटके में निचे hi बैठ जाएँ..

और अपनी सील जो अभी तक्क दोनों ने hi सलामत राखी हुई थी.. एक झटके में chakna-choor कर दें... दोनों का बास नहीं चल रहा था वर्ण आज सच में hi वो औरत बन जाना चाहती थीं..

लेकिन अभी मेरे मुन्ने और इन दोनों की मुनिया के नसीब में यह सब नहीं था..

अभी मेरा सबसे ज़रोरोइ मिशन मा और बहनो को लाना था .. रानी और पूजा दीदी के इलावा मैं किसी के साथ भी हर हद्द पार नहीं करना चाहता था... क्यूंकि मैं अपना फोकस टूटने नहीं देना चाहता था.. छूट का चस्का सबसे बुरा है.. और अभी मैं इस चस्के से दूर hi रहना चाहता था.. बस्स्स एक बार माँ और बहने आज़ाद हो jayen..fir कोई टेंशन नहीं.... फिर मैं सबब छूट वालियों को भी देख लूंगा.. जिस के अंदर जितनी भी गर्मी है.. उनकी गर्मी उन सबब की चीखों के साथ hi उनकी छूट से खून के साथ hi निकलूंगा.. खून भी निकलेगा और गर्मी भी..

है ना मस्त िद्या.............

is'se पहले क रानी मेरे मुन्ने को अपने हाथ में लेती.. रानी से पहले hi पूजा दीदी ने मेरे मुन्ने को पकड़ लिया और अपने दोनों हाथों से मेरे मुन्ने को सहलाने लगी..




पूजा दीदी सच में hi आज बावली हो गई थी.. वो मेरे मुन्ने को ललचाई हुई नज़रों से देख रही थी. लेकिन मेरे मुन्ने के विशाल रूप को देख कर कुछ कुछ परेशान भी दिख रही थीं..

झल्ली कही की...... अभी कौनसा उसकी उसमे जाने वाला है..... आने वाले वक़्त को इमेजिन करके hi परेशान होने लगी............ मैं दिल hi दिल में हसने लगा...

रानी को is'se कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला था.. रानी कमीनी अपने मतलब का सबब कुछ खुद hi कर लिया करती थी..

रानी उठ कर मेरे सर की तरफ ै ..और दोनों पैरों को मेरे फेस के साइड में करके अपनी छूट को मेरे मुंह पैर रख दिया.. रानी की छूट पैर पानी की

बूँदें चमक रही थी.. जैसे hi रानी की छूट मेरे मुंह के पास आई.

तो मैं अपनी जुबां को बहार निकल कर रानी की छूट का पानी अपनी जुबां की नोक से चाटनी लगा...

siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

रानी की सिसकी निकल गई... रानी की सिसकी सुनकर पूजा दीदी भी जोश में आ गई.. मेरे मुन्ने को सहलाना छोड़कर थोड़ा सा पीछे हटी और फिर मेरे मुन्ने के ऊपर झुकती चली गई..

मैं रानी की छूट को चाट रहा था.. और रानी अपने दोनों हाथों को मेरे सर के बालों मैं चलने लगी.. और साथ hi अपनी छूट को भी आगे पीछे करने लगी रानी कुछ ज्यादा hi गरम हो गई थी.

पूजा दीदी ने ज़ुबान से एक बार मुन्ने के मुंह को चूमा..




और एक हाथ से मेरे मुन्ने को जड़ से पकड़ कर हवा में जलने लगी.... मेरे मुन्ने की मोटाई और लम्बाई देख कर पूजा दीदी का हल्क खुश्क होने लगा था.. उसे समझ hi नहीं आ रही थी..

कैसे मेरे मुन्ने को मुंह में ले.. लेकिन छूट की गर्मी कहाँ इतना सोचने देती है.... और जितना वो पानी बहाये जा रही थी.. वो कैसे पूजा दीदी को मेरे मुन्ने को अपने मुंह में लेने से रोक सकती थी.. पूजा दीदी मेरे मुन्ने को मोहन में लेने की बजाये अपनी जुबां को पूरी तरह से मेरे मुन्ने पैर चलने लगी.. अभी उनका मन नहीं हो रहा था मुंह में लेने के लिए..... लेकिन जो काम वो कर रही थी.. वो मुंह में लेने से भी बढ़िया था..

रानी मेरे मुंह पैर अपनी छूट को रुग्गड़ रही थी.. जैसे hi पूजा दीदी मेरे मुन्ने को चाटनी लगी..

.

.

मेरे अंदर बेचैनी बढ़ने लगे.. आखिर इन दोनों की तरह मैं भी तो 8 महीनो से खुद अपर कण्ट्रोल किये हुए था...

मैंने रानी के दोनों दूध पकड़ लिए.. और फिर उनको निचोड़ने लगा.. जैसे hi मेरे हाथों ने रानी के दूध को दबाया. रानी की स्पीड मेरे मुंह पैर और भी बढ़ गई.. रानी की स्पीड बढ़ते hi रानी की छूट ने पानी का बहाना और भी बढ़ा दिया... मेरा मुंह और जीब रानी की छूट के पानी से भरने लगी... हम तीनों hi पूरी मस्ती में लगे हुए थे.. कोई भी कुछ भी बात करने के मूड में नहीं था..

जब तक तीनों के अंदर से 8 महीनों की गर्मी निकल नहीं जाती.. तब तक तीनों की जुबां बोलने लायक कहाँ थी ....... आज सिर्फ मेरा मुन्ना और दोनों की मुनिया hi बोलेंगी..

मैंने रानी के एक दूध पैर से एक हाथ हटा कर रानी की कमर पैर रख लिया.

मैं रानी की पीठ को सहलाते हुए अपने हाथ को नीचे लाने लगा.. रानी अपनी छूट की रगड़ और मेरे उसके दूध को दबाने की वजह से पहले hi बहुत बेचैन थी..

अब्ब मेरे हाथ को अपनी गांड की तरफ जाते हुए महसूस करते हे रानी की छूट ने और भी तेज़ी से पानी छोड़ना शुरू कर दिया... अभी मेरा हाथ रानी की गांड की दरार मैं पहुंचा Hi था.. क रानी की सांस तेज होने लगी... रानी ने अपने हाथ से अपना एक दूध पकड़ लिया..

रानी से बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था .. रानी खुद को जल्द से जल्द ठंडा करना चाहती थी.

क्यों की जितनी गर्मी रानी के अंदर बढ़ चुकी थी.. पहले चरमसुख को रानी जल्द hi पा लेना चाहती थी..

और वैसे भी उबलता हुआ पानी हमेशा hi परेशां करता है.. जिसके भी ऊपर गिरे टी उसे ज़ख़्मी कर देता है.. लेकिन रानी और पूजा दीदी के तो अंदर छूट में पानी उबाल रहा था.. वो कैसे खुद को ज़ख़्मी होने से बच पाती..

इस लिए 8 महीनो से टप्प रहे पानी को जल्द से जल्द निकाल कर खुद को मज़ीद ज़ख़्मी होने से बचाना चाहती थी..

मैं अपने हाथ की उंगली से रानी की गांड की दरार को टटोलन लगा....

रानी अपनी छूट को मेरे मोहन पर घिसते हुए अपने निप्पल को मरोड़ने लगी..

मेरी उंगली जैसे hi रानी की गांड के छेड़ पर लगी... रानी को एक झटका लगा..

ahhhhhhhhhhhhhhhhhh उम्मम्मम्मम्महा siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii हाय वजूउउउउउउउ मेरिइइइइइइइ जाआआआंत्र aisseeeeeeeeee hiiiiiiiiiiiiiiiiii meriiiiiiiiiiiiiiiii

ganndddddddddddd meeeeeeeeee ungliiiiiiiiiiiiiiiii daallteeeeeeeeee राहूऊओ..

रानी का खुद को और अपनी छूट को संभालना मुश्किल हुआ तो

रानी झटके लेते हुए बोली...... विज्जु मेंनननननननन gaiiiiiiiiiiiiiiiiii......

ये बोल कर रानी अपनी छूट के अंदर रुका हुआ सारा पानी मेरे मुंह पैर छोड़ने लगी.............

आज रानी बहुत जल्द ठंडी हो गई थी... रानी मेरे मुंह के ऊपर सुस्त पढ़ गई..

अब रानी कुछ मिनट्स के लिए एक्सपिरे हो गई थी.. इसलिए मैंने रानी को अपने मुंह के ऊपर से उठा कर बीएड पर लिटा दिया.. रानी की छूट का पानी मेरे मुंह पैर लगा हुआ था.. मैंने रानी की तरफ देखा.. तू रानी के दूध तेज़ चल रही सांस की वजह से ऊपर नीचे हो रहे थे.. मैं रानी को रिलैक्स होने के लिए छोड़ दिया..

मेरा पूरा फोकस रानी की तरफ था.. इस बिच पूजा दीदी मेरे मुन्ने के साथ क्या कर रही थी.. मेरा ध्यान टूट गया था..

अब जो मैंने देखा. तू मेरा मोटा मुन्ना पूजा दीदी के मुंह के अंदर 3 इंच तक्क धंसा हुआ था... पूजा दीदी मुझे खुद की तरफ देखते हुए पा कर मुझे लाचारी से देखने लगी.. उनकी आँखें बोल रही थी विजु तुम्हारा मुन्ना इतना भी मोटा नहीं होना चाहिए था.. देखो कैसे फस फस कर मेरे मुंह में जा रहा है..

विजय:- कोई बात नहीं दीदी आज बड़े दिनों के बाद आप ये सब कर रही हैं. इसलिए आपको थोड़ी सी परेशानी हो रही है.. बार बार करने से ये आपके मुंह में अच्छे से जाने लगेगा..

मैंने पूजा दीदी को पेअर से पकड़ कर 69 डिग्री की पोजीशन में ले आया..

मेरे ऐसा करते हे मेरा मुन्ना दीदी के मुंह से पुककककककक की आवाज़ करते हुए निकल गया.. पारर दीदी को इससे कोई परेशानी नहीं Hui....didi ने अपनी छूट को अच्छे से मेरे मुंह पैर सेट किया.. और फिर मेरे मुन्ने को हाट में पकड़ कर फिर से अपने मुंह में डालने लगें... रानी की तरह hi मैं पूजा दीदी की छूट का पानी पीने लगा... रानी की तरह पूजा दीदी भी बहुत ज्यादा गरम थी.. वो भी अपनी छूट को मेरे मोहन पारर रगड़ने लगी ... मैंने दीदी की छूट chaat'te हुए अपनी एक उंगली से दीदी की छूट के लिप्स को खोलने laga..Meri पूरी ऊँगली दीदी की छूट के पानी से गीली हो गई.. मेरा मुन्ना दीदी के मुंह में tha..isliye दीदी की सिसकी उसके मुंह में Hi डब्ब गई..

दीदी मेरा मुन्ना अपने मुंह में लिए चूस रही थी. दीदी की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. मुझे लगा की बहुत देर हो चुकी है. मैंने अपनी उंगली दीदी की गांड की दरार में दाल दी.. जैसे hi दीदी की गांड के दरार में ऊँगली घुसी तो मेरे मुन्ने को चूसना छोड़ कर झाकते लेने लगी.. दीदी की छूट का छेड़ दीदी का वीक पॉइंट था.. और दीदी की गांड को टच होते हई दीदी का कण्ट्रोल ख़तम होने लगा.. दीदी मेरे मुन्ने को अपने मोहन से अपनी गांड को मेरे मोहन पर रख कर बैठ गई... और अपनी गांड से हो रही छेड़ छड़ माँ मज़ा लेने लगी..




अब्ब ऐसी हालत में वो मेरे मुन्ने का कैसे ख्याल रख सकती थी.. चलो कोई बात नहीं मैं तो रखूंगा ना अपनी दीदी का ख्याल.. मेरे मुन्ना फिर बाद में मज़े लेलेगा..

मैंने अपनी ऊँगली हटा कर दीदी दीदी को खुद पार्स हटाया.. दीदी मुझे बेसब्री से देख रही थी.. उनकी ऑंखें बोल रही थी.. विज्जु तुमने मुझे ऐसे मोड़ पर क्यों छोड़ दिया.. तुम तो जानते hi हो क मेरी अस को चुने के बाद मुझसे रहा नहीं जाता.. अब्ब बास जल्दीसे मेरी छूट में से पानी निकल दो.. वर्ण मैं पागल हो जाऊँगी...........

विजय:- दीदी टेंशन न लो आप.. बास आप घोड़ी बन्न जाएँ फिर आपको सही से मज़ा देता हूँ...

दीदी तो अपनी छूट की गर्मी में पागल थी .. वो झट से घोड़ी बन गई ...




दीदी के घोड़ी बनते hi दीदी क्या मस्त पीछे सेदीख रही थी.. मेरा मुन्ना हवा में झूल रहा था.. एक बार तो मैं किया क जैसे पूजा दीदी अपनी छूट और गांड के दर्शन दे रही hain..unki छूट के छेड़ पर अपने लुंड के सुपडे को रख कर एक स्पेशल किसम का चक्का मारों और मेरा लुंड दीदी की

छूट की साड़ी दीवारें तोड़ता हुआ सारा hi अंदर चला जाए... मैं बास एक ठंडी सांस ले कर hi रह गया............


दीदी के चेहरे पर बेचैनी तो थी लेकिन फिर भी मुझे मुद कर देखते हुए एक मुस्कान देने लगी....





मैं दीदी की गांड और छूट के छेड़ को घोरसे देखने लगा.. दीदी की छूट और गांड din-ba-din निखरती जा रही थी.. मैंने एक नज़र रानी को देखा तो रानी बड़े hi स्टाइल में अपनी टांगें खोली अपनी छूट को हवा दे रही थी..



दीदी तो अपनी छूट की गर्मी की वजा से मस्ती में थी.. मुझे देख कर अपने पर एक हाथ रख कर मुझे अपनी छूट और गांड अच्छे से दिखने लगी..

दीदी बार बार ऐसी हरकतें कर रही थी. जैसे आज वो मेरा सबर तोडना और अपनी सील तुड़वाना चाहती हूँ....

मैंने रानी को स्माइल दी और पूजा दीदी की गांड के छेड़ पर अपनी जुबां को ला कर किश करने लगा.. दीदी ने एक झटका खाया और सिसकी लेने लगी...




didi:-siiiiiiiiiiii उम्मम्मम्हा विज्जु प्लीज मुझे और मत तड़पाओ जल्दी से मुझे ठंडा कार्डो.. अब्ब और बर्दाश्त नहीं हो रहा.. मैंने भी यही सोचा क अब्ब दीदी को

जल्दी से ठंडा कर hi देता हूँ.. नेक्स्ट शिफ्ट में आराम से सबब कुछ करलूँगा..

इसलिलये मैंने अपनी जीब को दीदी की गांड के छेड़ में घुसते हुए अपनी एक ऊँगली से दीदी की छूट के लिप्स को कुरेदने लगा...




ummmmmmmmmm ahhhhhhhhhhhh uffffffffff वीजजजजज्जजूउउउउउउउ

दो तरफ़ा अटैक से दीदी की सीस्कियाँ तेज़ होने लगीं.. दीदी की मस्ती बढ़ने लगी और उनकी छूट के अंदर के रुका हुआ पानी बहार आने के लिए महकालने लगा.. जैसे जैसे मेरी जीब दीदी की गांड को चूम रही थी और मेरी फिंगर दीदी की छूट के लिप्स के अंदर छुपी हुई छूट के ढक्कन को थोड़ा सा खोलने लगा.. दीदी अब्ब इतनी भी स्ट्रांग नहीं थी क मेरे इतने हमले बर्दाश्त कर सकती .....

oiiiiiiiiiiiiiiiiiii हयययययययययीीीे siiiiiiiiiiiiiiiiiii vijjjjjjjuuuuuuuuuu

मइईईईईन्न्नन्नं gaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii..




ये बोलते hi दीदी की छूट ने फवारे की शकल में अपना रुका हुआ पानी मेरी चीन पर छिड़कना शुरू कर दिया.. दीदी की छूट का पानी निकलते hi दीदी की बैटरी भी ख़तम हो गई और वो एक झटके से बीएड पर ढेर हो गई.............

दीदी की छूट का पानी निकलते hi मैंने रही की तरफ देखा तो रानी मुझे ललचाई हुई नज़रों से देख रही थी........

मैंने रानी को लेटने के लिए कहा . रानी लेट गई .. मैंने रानी के पैरों को पकड़ कर फैलाया.. तो रानी की चिकनी छूट मेरे सामने आ गई.. रानी भी पूजा दीदी से कम् नहीं थी.. रानी ने भी आज पूजा डीड के जैसे अपनी छूट को अच्छे से चमकाया हुआ था.. जैसे उन दोनों से आज अच्छे प्लान बना कर अपनी अपनी छूट को मुझे दिखने का लिए hi सबब किया था.. वैसे सच hi था दोनों ने अपनी छूट को मेरे लिए तो क्लीन किया था.. अब्ब मेरे आस पास रहने वाली लड़कियों और ाउंटियों की छूट और गांड मेरी hi थीं... तो फिर सब ने मेरी चीज़ों का ख्याल तो रखना hi था.. रानी की छूट को अच्छे से देखने के बाद मैंने अपने लुंड को पकड़ कर रानी की छूट पर रख दिया..




रानी की सिसकी निकल गई.. रानी मेरे मोठे लुंड को अपनी छूट पर महसूस करते hi मदहोश होने लगी.. और रानी अपनी जुबां को बहार निकल आकर अपने hi होंठों को गीला करने लगी.. अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं था और रानी फिरसे गरम हो गई थी.. अभी तो मैंने अपना लुंड रानी की छूट पारर घिसना था..

रानी की छूट को देख क्र मेरा भी कण्ट्रोल खोने लगा .. मेरा लुंड भी कब्ब से अपना पानी बहाने के लिए तड़प रहा था.. तो माने देर न ाकरते हुए अपने लुंड के सुपडे को रानी की छूट की दरार में घुसाया.. रानी की छोटी और सेल पैक छूट मेरे लुंड के सुपडे को कैसे झेल सकती थी.. मेरे लुंड के सुपडे ने hi रानी की छूट को छुपा लिया..

मैंने रानी की छूट के लिप्स के अंदर अपने मुन्ने के सुपडे को घिसना शुरू किया.. रानी ऐसे मचलने लगी.. जैसे मेरा मुन्ना रानी की मुनिया के अंदर जा रहा हो.. रानी की मस्ती बढ़ गई.. इतने महीनो के बाद मेरे मुन्ने को अपनी मुनिया के लिप्स के अंदर महसूस करते hi रानी की हालत मज़े और बेचैनी से पतली होने लगी.. रानी को बास चले तो वो मेरा मुन्ना आज hi अपनी मुनिया में ले ले..

मेरे मोठे मुन्ने की घिसाई से रानी की सिसकियाँ बढ़ने लगीं...

जब्ब रानी से नहीं रहा गया तो

रानी:- विज्जु प्लीज तुम नीचे लेट जाओ.. और मुझे अपने मुन्ने पर सवारी ाकरने दो.. बोहत महीने गुज़र गए हैं एक्सपेरस ट्रैन के जैसी स्पीड नहीं दिखा सकीय मैं.. मुझे भी अपनी मुनिया की अच्छे से सर्विस करवानी है..

रानी के स्टाइल पर मैं मुस्कुरा कर रानी को देखा और फिर मैं बीएड पर लेट गया .. मेरा मुन्ना चाट की तरफ फिरसे सलामी देने लगा..

रानी ने इस बार अपनी पोजीशन फिरसे चेंज की और मेरे पैरों की तरफ मोहन करके मेरे मुन्ने पर बैठ गई.......




मेरा मुन्ना रानी की छूट के लिप्स में धंस गया.. रानी ने एक दो गहरी गहरी साँसें ली.. जैसे तेज़ डरने से पहले खुद को कुछ रिलैक्स किया जाता है और फिर रानी ने अपना दुम्म दिखाना शुरू कर दिया.. रानी ने एक मंझे हुए रनर की ातरः से पहले अच्छे ातरः से मेरे मुन्ने को अपनी मुनिया के पानी से नहलाया और बड़े प्यार से मुन्ने के ऊपर अपनी मुनिया को घिसने लगी.. रानी.. ने कुछ देर अपनी स्पीड काम राखी.. फिर हर एक घिसाई के बाद रानी की स्पीड बढ़ने लगी..

मेरा तो पहले से hi हाल बुरा था.. रानी की छूट की घिसाई की वजा से मेरा हजाल और भी बुरा होने लगा.. जैसे जैसे रानी की रफ़्तार बढ़ने लगी वैसे hi मेरे मुन्ना भी फहुलने लगा.. रानी की भी मुनिया ने पानी के बहाओ को तेज़ कर दिया.. जिससे रानी की सिसकियाँ रूम में गूंजने लगीं....

रानी अपने फन का और अपनी छूट की गर्मी का पूरे ज़ोरो शूर से मुज़ाहिरा करने लगी.. रानी तो एक्सपर्ट थी hi.. लेकिन रानी छूट रानी से भी दो क़दम आगे थी.

रानी की रफ़्तार के साथ hi रानी की सिसकियों के साथ साथ रानी की हलकी हलकी चीखें निकलने लगी... रानी कमीनी किसी और hi दुन्या में चली गई थी..

रानी की ऐसी ज़बरदस्त रनिंग की वजा से मेरा मुन्ना अपना कण्ट्रोल खोने लगा और उसके अंदर से लावा बास बहार आने hi वाला था. क मुझसे भी पहले रानी एक बार फिरसे से अपना पानी छोड़ गई..

रानी पानी छोड़ते hi साइड पर लुढ़क गई....

चलो अब्ब मेरा काम भी होने वाला था. इसलिए मैंने रानी कुछ नहीं कहा और पूजा दीदी के ऊपर आ क्र अपने मुन्ने को पूजा दीदी के दूध के दरमियान में घिसने लगा.. ऐसा मैं आज पहली बार पूजा डीड के साथ कर रहा था.. तो पूजा दीदी मेरे ऐसा करने से बड़ी हैरान हुई लेकिन एक्ससिटेड भी ोहत हुई.. क चलो छूट में न सही.. कहीं और तो घुस hi रहा है............ दीदी बड़े hi घोरसे मेरे लुंड को अपने बूब्स के अंदर से निकलता हुआ देख रही थी....

जल्द hi मेरा मुन्ना भी पानी छोड़ने लगा...




पूजा दीदी के दोनों hi दूध पर मेरे मुन्ने के अंदर से निकलने वाला दूध दिखने लगा..

मेरी सांस तेज़ चल रही थी... फिर भी मैं बोलै

विजय:- दीदी देख लो आपके दूध में से तो दूध नहीं निकला.. मैंने अपने मुन्ने के अंदर से निकाल कर आपके दूध को अपने दूध से रंग दिया है...

पूजा दीदी शरमाने लगी.. और मैं दोनों के सेण्टर में लेट गया.......

उसके बाद रानी और पूजा दीदी ने अपने दिल की हसरत पूरी कारण ेके लिए अपनी छूट के अंदर से जितना भी पानी निकल ाक्ति थीं.. दोनों ने hi निकाल लिया.. फिर थक हार कर सो गईं..

थका हुआ तो मैंने भी था.. लेकिन 1 घंटे बाद सूबा होने वाली थी. तो मैंने सोना सांक्ले कर दिया.. अब्ब अगर मैं सो जाता हूँ तो दोनों की hi वजा से मुझे देर से उठना पड़ेगा..

लेकिन मैं अब्ब देर नहीं करना चाहता था... दो भी मुझे करना था.. टाइम को बचते हुए करना था.....

हम तीनो hi बीएड पर नंगे लेते हुए थे.. रानी और पूजा दीदी दोनों hi बोहत ज़यादा थक चुकी थीं... जितना पानी दोनों का निकला था. थकना तो फिर था hi.. और अब्ब दोनों की नींद कल जल्दी नहीं खुलने वाली थी.... मैं बीएड से नीचे उतरा.. और फिर रानी और पूजा दीदी के ऊपर एक चादर दाल दी..

मैंने अपने बैग से निक्कर निकल कर पहन ली और रूम से बहार आ कर ड्राइंग रोऊं में जा कर बैठ गया..

5 मिंट वही बैठा रहा फिर उठ कर किठन में जा कर फिरज से ठन्डे पानी की एक बोतल निकल कर एक गिलास उठाया और फिरसे ड्राइंग रूम में आ कर बैठ गया..

2 गिलास पानी के पीने के बाद मैं कुछ रिलैक्स हुआ.. तो मैं बोतल और गिलास वही रख कर बहार लॉन में आ गया..

अभी अँधेरा hi था. सूरज निकलने में अभी भी टाइम था.. मैं वही ग्रास पर hi बैठ गया और सोचने लगा क मुझे कहाँ से और कैसे काम शुरू करना चाहिए..

जब्ब तक्क अँधेरा रहा मैं आगे की hi प्लानिंग करने में लगा रहा...

मैंने सोच लिया था क मुझे क्या.. कैसे और कितना करना था.. सब hi एक साथ हो जाए ज़रूरी तो नहीं.. अगर शंकर और दुसरे गैंग्स वाले सालों से दिल्ली पर राज कर रहे थे.. तो साफ़ ज़ाहिर था क इतनी जल्दी वो 3 गैंग्स ख़तम होने वाले नहीं थे..

जितना मेरे पास टाइम है.. उस टाइम में अगर तीनो hi गैंग्स ख़तम हो सके तो ठीक. वर्ण मुझे इतना स्ट्रांग तो ज़रूर hi बनना था क तीनो hi गैंग्स वाले मेरा कुछ उखाड़ न सकें .......

मैं घूम फिर कर पूरी कोठी को देखने लगा.. मैं एक एक चीज़ को बड़े घोरसे देख रहा था.. मैं अपने घर वालों की सुरक्षा को ले के कोई भी चांस नहीं लेना चाहता था...


ज़रूरी नहीं था क मैं अगर स्ट्रांग बन गया हूँ ..तो मैं सबब पारर hi भारी पद जाऊँगा.. इस दुन्या में मुझसे से बड़े बड़े तुर्रम खान मौजूद थे.. मैं तो अभी कुछ भी नहीं था.. अभी तो मेरी ट्रेनिंग ख़तम हुई थी और मेरी प्रैक्टिकल लाइफ आज से सही मानो में शुरू होने वाली थी.. और मेरी जुंग एक्सपेरिएंस्ड समुग्गलरों से थी.. मुझे हर किसम की गलती से परहेज़ करना पड़ेगा.. वर्ण कुछ पाने की बजाये जो कुछ भी मेरे पास है.. कहीं मैं वो भी न खो दूँ.......

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ुपड़ते:::51

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साडी कोठी का सर्वे ाकरने के बाद मैं गेट के पास चला गया. और फिर गेट अपर मौजूद गार्ड्स मुझे देख कर अटेन्शन हो गए..

मुझे शकल को कम् hi गार्ड्स जानते थे लेकिन मेरे नाम से मुझे कुछ ज़ायदा hi jaan'ne लगे थे ......

आव्हान राखी इक चेयर पर मैं जा क्र बैठ गया. और गार्ड्स मुझे देख कर कुछ नर्वस होने लगे..

विजय:- देखो मुझे भी अपने जैसे hi समझो.. मैं इस कोठी का मालिक नहीं हूँ. और अगर होता भी तो मैं तुम लोगों से फ़र्क़ नहीं करता.. इसलिए मुझे किसी मालिक के जैसी मैट देखो.

एक गार्ड:- सर जैसा आपके बारे में बताया गया है. उस हिसाब से आप को सम्मान देना भी ज़रूरी है.. और कुछ आपके रूप को दख कर भी लगता है क आप हम सबब से बोहत बेहतर हैं.. इसलिए कुछ कनफरसे हो गए थे..

विजय:- (मुस्कुराते हुए) होता है ऐसा भी कभी कभी.. लेकिन अब्ब से तुम सबब hi मुझे अपने जैसा hi समझो ....... और अगर कोई बात दिल में हो तो बता सकते हो. ये मैट मालिक वाला स्टाइल मुझे हज़म नहीं होता.. समझे या फिर से समझाऊँ..

सबब गार्ड्स खुश हो के:-- जी समझ गए..

विजय:- पास में कोई ऐसी मार्किट है जो अब्ब खुली हुई मिले .. जहाँ मुझे सबब मिल सके....

geta-keeper:- विजय बाबू.. यहाँ से कुछ फासले पर एक माल है वो साडी रात hi खुला रहता है. तो इस वक़्त भी अगर आप जायेंगे तो सबब कुछ मिल जायेगा और आपका टाइम भी बच जायेगा..

ये उन कर मैंने gate-keeper से एड्रेस पुछा तो उसने बता दिया ..

मैं अंदर कमरे में आया और एक नज़र गन्दी बच्चियों को देखा वो दोनों hi एक दुसरे में समाई सो रही थीं..

मैंने अपने बैग को खोला और उसमे मौजूद सामान को निकल कर देखने लगा.. जो जो मुझे मेरे काम का मिस लगा मैं उसे नोट करने लगा .. सबब नोट करके मैंने बैग को क्लोज किया और कमरे से बहार निकल कर राजा के रूम की तरफ चल दिया.

राजा के रूम में पोहचते hi मैंने देखा क वो सबब hi सो रहे हैं. मैं रूम में वो ब्रीफ़केस देखने लगा जो शंकर के अड्डे से मिला था.. वो मुझे दिख गया.. यहाँ चोरी की क्या टेंशन थी. सब कुछ ओपन hi पड़ा हुआ था.. मैंने उसे खोल कर देखा तो उस में अच्छे खासे पैसे पड़े थे. 7 8 लाख तो होंगे hi..

मैंने नोटों के दो बंडल उठाये और बहार की तरफ चल दिया..

कुछ मिंट में hi मैं एक माल के सामने खड़ा था...

गाडी को मैंने पार्क कर दिया था.. और फिर पैदल hi चलता हुआ हेलो काउंटर की तरफ बढ़ चला.. वहां पोहचते hi मैंने काउंटर पर कड़ी ""इक ख़ूबसूरत लड़की लेकिन रात की थकन ने उसकी खूबसूरती को कुछ कम् कर दिया था"" से अपनी मतलूबा शॉप के बार्रे में पूछा.. लड़की मेरी तरफ देख आकर मुस्कान देने लगी.. अब्ब उस की सूबा मुझे देख कर अच्छी हो गई थी. तो उसने बड़े hi प्यार से मुझे मेरे काम की दुकान के बारे में बता दिया.. मैंने उसको थैंक्स बोलै और फिर लड़की की बताई गई शॉप की तरफ चल दिया..

मुझे अपने मतलब का सामान लेते हुए कोई 1 घंटा लग गया .. जब मुझे मेरे मतलब का सबब मिल गया तो मैंने घर की राह ली...

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कोठी पर पोहचते hi मैंने gate-keeper से पूछा क रात वाला क़ैदी कहाँ है.

तो gate-keeper की बजाये एक गार्ड ने मुझे बता दिया.. जहाँ उसे रखा गया था..

मैंने गार्ड को अपने साथ चलने को कहा..

गार्ड के साथ चलता हुआ जब्ब मैं अपने मतलूबा रूम में पोहंचा तो शंकर का आदमी एक चेयर पर बंधा हुआ था.. और उसकी रात यहाँ आते hi कुछ ट्रीटमेंट भी की गई थी..

हमारे रूम में पोहचते hi उनसे अपनी ऑंखें खोल दीं.. जो हमारे आने से पहले बंद थीं.. वो मुझे ग़ुस्से से देखने लगा.. मैंने उसको नज़र अंदाज़ किया और रूम को देखने लगा..

वो मुझे खामोश देख कर बोलै:- तुम लोगों ने मुझे क्यों उठाया है.. तुम शायद जानते नहीं हो क मुझे न प् कर शंकर क्या करदेगा.. शंकर के लिए मैं बोहत hi ख़ास हूँ...

विजय:- इसी लिए तो तुझे यहाँ ले कर ए हैं.. मैं तुझे देख कर समझ गया था क तू टार्चर से कुछ नहीं बताने वाला.. इस लिए तेरा बढ़िया से मैंने इंतेज़ाम कर लिया है.. और तुझे टार्चर करने के लिए फिलहाल मेरे पास टाइम भी नहीं है.. इसलिए तुम बास चुप hi राहु.. क्यूंकि अभी कुछ टाइम के गुज़रते hi पूरी कोठी में सिर्फ तुम्हारी hi आवाज़ें गूंजने लगेंगी.... सो अपनी बैटरी ख़तम न करो.. नेक्स्ट के लिए कुछ बचा आकर रखो... शंकर के ख़ास कुत्ते के साथ साथ मेरे साथ आने वाला गार्ड भी हैरान हो गया.. क मैं क्या करने वाला हूँ..

मैंने गार्ड से आप[ne matlab ka ek rom poocha to usne kaha.

guard:- vijay babu isi kothi me hi hai ik aisa room jaisa aapko chahiye..

vijay:- to fir le chalo ise usi room me..

guard bahar chala gaya aur kuch hi der me apne sath 2 guards ko le aaya aur uski madad se kuch hi minuts me shankar ka kutta guard ke bataye huye room me pohnch gaya..

maine room ko dekha to mujhe theek hi laga..

mere kehne par kuch hi der guards ne gunde ko room me hi maujood ek lohe ki khatiya par baandh diya..

wo hilne ki sakat kho chuka tha. maine jaise kaha tha usay bilkul waisa hi badha gaya tha..

guards mujhe herat se dekh rahe the...

20 mint me maine shankar ke kutte ka intezam kar diya.. mujhe aisa karte dekh kar guards to heraan the hi.. gunda bhi mujhe aisa karte dekh kar heraan hua fir jaise hi maine apne bag se kuch nikala to guards ke saht hi gunda ki halat patli hone lagi..

maine sabb ko nazar andaz karte huye apne saath laye saman ko set kiya aur

vijay:- ye jitna bhi cheekhe chillaye 1 ghante se pehle nahi kholna.. theek ek ghante baad sabb saman utaar dena..

ye bol kar main bahar nikal kar drawing room ki taraf chal diya...

pehle maine jo mera saman bach gaya tha wo maine room me ja kar bag me rakh diya.

aur fir wpis aa kar kitchen me ja kar coffee bana kar peene ka socha lekin jaise hi main kithen me ghusa to saamne bhabhi ko dekh kar mere honton par muskan aa gai.




मेरे किचन में एंटर करते hi भाभी की भी नज़र मुझपर पड़ी तो भाभी भी मुझे देख कर खुश हो गई ..



भाभी:- विज्जु आज सूबा सूबा कैसे जल्दी जल्दी उठ गए .. (फिर शरत करते हुए)

रात भर में थके नहीं क्या तुम.. रानी और पूजा ने तो यकीनन तुम को थका दिया होगा..

विजय:- भाभी मैं कभी अपनों से थक सकता हूँ.. और फिर वो मेरी दोनों hi मृ ख़ास हैं.. उल्टा वो दोनों hi थक गईं थीं.. और फिर टाइम को देखते हुए मैंने भी सोना सांक्ले कर दिया..

फिर मैं भी भाभी मज़े लेता हुआ.. वैसे एक हिसाब से अच्छा hi हुआ hai.jo मैं नहीं सोया.. वर्ण आपसे अकेले में बात ाकरने का ामय कैसे मिलता..

भाभी:- हाँ हाँ मैं सबब असमझती हूँ. तुझे अपनी बहनो से फुर्सत मिले तो hi तुम मेरे पास आओगे ना.. वैसे भी अब्ब हमारा ज़माना कहाँ रहा.. (फिर शरारत करते हुए) अब्ब पूजा और रानी के जैसी मेरा सबब कुछ नहीं है ना.. जो माज़ तुमको अपनी दीदी और रानी में आएगा वो हम जैसियों में कहाँ...

भाभी शरारत करते हुए भी कुछ मायूस थी.. उसे खुद का अधूरा पत्र भी महसूस होने लगा था..

ये बोल कर भाभी कुछ ढूंढ़ने के लिए नीचे झुक गईं...




जैसे hi मेरी नज़र भाभी के पीछे गई तो मेरा हलक hi खुश हो गया.. भाभी की पंतय मुझे दिख रही रही.. भाभी ने इतनी छोटी निघ्त्य पहनी हुई थी.. पहले तो मैंने ग़ौर hi नहीं किया था.. लेकिन फिर जैसे hi मैंने भाभी को ऐसी हालत में देखा तो.. मुझे भाभी की बातें और भाभी का अधूरा पत्र याद आने लगा..

मैंने किचन को अंदर से लॉक किया और फिर भाभी के पास जाने लगा..

दूर लॉक होते hi भाभी ने एक नज़र मुझे देखा और फिर अपने काम में लग गई..

मैं भाभी के पीछे गया और

विजय:- भाभी आप ऐसे दुखी तो न हुआ करें मुझे अच्छा नहीं लगता....

भाभी मुड़े बगैर hi बोली

भाभी:- विजय मैं क्या करूँ मुझे भी खुद का ऐसा रहना पसंद नेही है लेकिन ार किसी की इच्छाएं होती हैं.. वैसे hi मेरी भी हैं.. लेकिन मैं कैसे असबब के जैसे खुल कर सबब कर सकती हूँ.. मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था क अजित के इलावा भी मेरा मैं में किसी और का ख्याल आएगा.. लेकिन अजित के कमज़ोर पड़ने से आउट फिर तुम्हारे बर्ताव और तुम्हरे प्यार और फिर तुम्हारे लिए सबब के प्यार ने मुझे भी खुद पार्स be-ikhtiyaar बना दिया.. लेकिन एक बात है क मैं दिल से तुम्हारे लिए सबब सोचती हूँ.. शरीर की गर्मी भले hi मुझे डिस्टर्ब करती हो.. लेकिन तुम्हरे लिए मेरे अंदर हवस नहीं है.. बास कुछ फीलिंग्स मेरे अंदर पैदा हो गई हैं. वर्ण मैं ऐसी तो नहीं थी..

भाभी की बातें सुन कर मुझे भी दुःख होने लगा.. मैंने सोचा जब्ब सबब hi मेरे साथ इतना कुछ कर लेती हैं तो फिर भाभी को भी उनके मैं मुताबिक़ मिलना चाहिए.

यही सोचते हुए मैंने भभाई के बहार को निकले हुए चुत्तडों पर अपने हाथ रख दिए ..




भाभी मेरे ऐसा करने से खुश हो गई...

विजय:- भाभी सबब करने से आपके दिल में कोई गिल्ट तो पैदा नहीं होगा ना.. वर्ण मैं यही रुक जाता हूँ...

भाभी ने पीछे मुद कर मुझे देखा और बोली

भाभी:- विजय तुम ऐसा कभी सोचना भी मैट.. मैंने कहा न हम सबब के दिल में तुम्हारे लिए सिर्फ वासना hi नहीं है.. जो भी है दिल से है.. और कभी भी किसी को भी गिल्ट नहीं होगा.. देखा जायेगा तो लड़कियों के इलावा सबब बड़ी अंदर से खली हैं. और तुम्हारे प्यार के लिए अंदर hi अंदर तड़प रही हैं.. मालिकान और पद्मा भी तुम्हारे लिए बेचैन हो गई हैं.. अगर टाइम मिले और तुम्हारे दिल माने तो उन दोनों का भी ख्याल कर लेना. मेरा तो फिर भी अजित के आ जाने से कुछ मैं हल्का हो जाता है.. लेकिन मालिकान और पद्मा तो सालों से तड़प रही हैं.. उनके लिए तुम ज़रूर कुछ करना.. वर्ण वो तो कुछ नहीं कहेंगी.. लेकिन उनके अंदर तड़प बढ़ती रहेगी... सिर्फ तुम्ही उन दोनों की तड़प को ख़तम कर सकते हो..

विजय:- ठीक है भाभी.. अगर आप सबब को सही लगता है तो मुझे कोई परेशानी नहीं है..

भाही:- विज्जु इस बार अजित लेट हो गया है और पद्मा से भी अब्ब्माजा नहीं आता. तुम कुछ कर सकते हो मेरे लिए.. देखो कैसे तुम्हरे पास रहने से ये सख्त हो गए हैं..

ये बोलते hi भाभी ने अपनी निघ्त्य को ऊपर किया .. भाभी ने ब्रा नहीं पहनी थी

तो निघ्त्य को ऊपर करते hi भाभी का एक दूध नंगा हो गया..




मैं बावला हो कर भाभी के दूध को देखने लगा.. भाभी का दूध ीनता khub-soorat भी हो सकता था . मैंने तो कभी इमेजिन hi नहीं किया था.. और क्या चमक थी भाभी के दूध की.. मेरा लुंड अकड़के लगा.. रात भर सर्विस करता रहा था लेकिन भाभी के दूध और निप्पल को देखने से hi वो खड़ा हो गया..



भाभी मुझे अपने दूध को देख कर बावला होते देख रही थी.. भाभी के होंठों पर मुस्कान आ गई और फिर भाही की नज़र मेरे लुंड पर गई तो भाभी की हालत भी ख़राब होने लगी.. भाही सांस तेज़ होने लगी.. मैंने भाभी को पदक और भाभी को पलटा कर भाभी को पीछे से hi पकड़ लिया..

भाभी मेरे जिस्म की गर्मी पाते hi पानी पानी होने लगी.. भाभी की सांस होने लगी.. टाइम कम् था कोई भी उठ कर आ सकता था.. तो मैंने बभी के फेस को पीछे अपने अपनी अतराफ़ करते हुए hi भाभी के होंठों पर किश करने लगा..

और अपने एक हाथ को भाभी के नंगे दूध पर रख दिया




भाभी मदहोश होने लगी.. भाभी के लिए ये मेरा चांस था क वो मुझमे समाई हुई थी और हम दोनों hi एक दुसरे को पहली बार मज़ा दे रहे थे.. बहभी भी को मज़ा तो आ hi रहा था लेकिन उनका खुद पार्स कण्ट्रोल खोने लगा.. किस का मज़ा तो आ रहा था भाभी को लेकिन भाभी की वहुत की ागर्मी ने उनको परेशां किया हुआ था.. इस लिए उन्हों ने किश तूड़ी और फिर झट्ट से सीधे होते हुए मेरे ट्रॉउज़र को नीचे सरका दिया..

मेरा लुंड नंगा हो गया ुर भाभी ने मुझे देखते हुए मेरे लुंड को पकड़ लिया..




विजय:- भाभी जो भी करना है हमें जल्दी hi करना होगा वर्ण देर हो जाएगी.. और कोई आ जायेगा.. फिर साब कुछ अधूरा रह जाने आपको hi परेशानी होगी. फिर मुझे कुछ मैट बोलना..

भाभी:- मुझे पता है.. तुम बास कुछ मैट बोलो और मुझे मेरा काम करने दो..

ये बोल कर भाभी मेरे पैरों में बैठी और मेरे लुंड को पकड़ कर एक बार मेरी आँखों में देखा और फिर मेरे लुंड को किश करने लगी.




भाभी फुल मज़े में डूब कर मेरे लुंड को किश कर रही थी.. भाभी के लिए ये पहला और उनकी लाइफ का सबब से बढ़िया कहने था.. कहाँ अजित भाई का इतना बड़ा और मोटा लुंड होगा.. भाभी का बास नहीं चल रहा था क वो मेरे लुंड को hi चूमती rahe.lekin टाइम की कमी की वजा से भाभी ने किश तोड़ दिया..

भाभी ने मेरे लुंड को किश क्र के जल्दी में अपनी निघ्त्य उतरी और नंगी हो गई और फिर मुझे भी नंगा कर दिया...

विजय:- भाभी इस सबब की क्या ज़रुरत थी.. कोई भी आ सकता है..

भाभी:- कहा न तुम बास खामोश रहो और मुझे मेरा काम करने दो.. अब्ब तो कोई आता है तो ा जाये.. सबब hi तो सबब कुछ तुम्हारे साथ कर लेती हाइमन. अब्ब मेरी बारी आई है तो तुम मुझे दूसरों की बात सुना रहे हो.

भाभी की बात सुन कर मैं हस्सन लगा .. वाह भाभी आज कितनी khatar-naak लग्ग रही थी.. छूट की ागर्मी क्या कुछ नहीं करवा देती. है औरत ज़ात से..

नंगे होते hi भाभी ने मुझे नीचे लेटने को बोलै .. अब्ब जब्ब भाभी ने कह दिया था क मैं कुहक न बोलों और जो वो कहें वो करता रहूं.. तो मैंने भी भाभी की बात मान कर जैसे भाभी कह रही थी वैसे hi करने लगा..

मेरे let'te hi भाभी ने मेरे लुंड को पकड़ लिया और मज़ाए लेते हुए चाटने लगी..




भाभी के मेरे लुंड को चाटने से मुझे भी मज़ा आने लगा.. भाभी तो एक्सपर्ट लग्ग रही थी..

भ्भी ने अच्छी तरह से मेरे लुंड को छाता.. मेरे लुंड के बाद भाभी मेरे सर्र की तरफ आई और अपनी छूट को मेरे मोहन पर रख कर मेरे लुंड पर जहक गई..




वाह भाभी आज अपने दिल की साड़ी hi हसरतें पूरी करने वाली थी.. चलो अच्छा है जो उनके दिल में आता है वो करती रहें.. मैंने भी भाभी की छूट को अपने मोहन में लिया और भाभी की पानी छोड़ रही छूट को चाटने अलग.. भाभी ने मेरे लुंड को अपने मोहन में ले कर चूसने लगी.. भाभी की बेचैनी बढ़ने लगी.. जिस की वजा से भाभी की छूट ने पानी का बहाओ भी बढ़ा दिया.. भाभी कभी मेरे लुंड को चूसती तो कभी अपने मोहन से निकल क्र सिसकियाँ लेने लगती.. भाभी का बास नहीं चल रहा था वर्ण वो आज मेरा लुंड अपनी छूट में hi ले लेती. लेकिन सबब को hi पता था क अभी मुझे छूट से दूर hi रहना चाहिए..

भाभी अचानक से मेरे ऊपर से उठी और मुझे भी खड़ा होने को बोलै मैं भी भाभी की मानते हुए खड़ा हो गया और भाभी ने देर न करते हुए मेरे लुंड को अपने मोहन में लिया और मेरे चुत्तड़ को पकड़ कर मुझे माउथ फूकिंग का सिग्नल देने लगी..




वाओ भाभी की छूट न सही मोहन hi सही .. मैंने भाभी के मोहन को छोड़ना शुरू कर दिया.. मेरा धीरे धीरे कर रहा था भाभी के मोहन में मेरा लुंड कुछ आसानी से चला गया था.. लेकिन फिर भी था तो विशाल hi.. इसलिए मैंने भाभी को परेशां नहीं kiya..bhabhi भी मुझे इतनी स्पीड से अपने मोहन को छोड़ते देख कर सकूं से थी. वर्ण उनको भी टेंसियओं थी कही अमिन उनका मोहन hi न फहद दूँ..

कुछ देर बाद भाभी ने लुंड की चुदाई का मज़ा लिया. लेकिन जब्ब उनका दिल भर गया तो अपने मोहन से मेरे लुंड को निकाल लिया. और नीचे लेट कर अपनी को उठा कर अपने सर की तरफ कर लिया और

भाभी:- विज्जु मेरी छूट के छेड़ में अपने लुंड को थोड़ा थोड़ा घिसो.. मुझे बड़ी बेचैनी हो रही है.. प्लीज कुछ जल्दी कार्डो..

मैंने तो बास भाभी को ऐसी पोजीशन में देख कर मज़े लेने लगा था.. भाभी की छूट की फिटिंग कितनी पायरी थी.. मैं तो किया क इसी पोजीशन में भाभी की छूट को अच्छे से छतों लेकिन फिर भाभी की बेचैनी और टाइम की कमी को सामने रखते हुए मैंने अपने लुंड को भाही की छूट के छेड़ में उतार दिया..




भाभी:- विज्जु अभी अंदर मैट डालना एक तो तुम्हारा बोहत बड़ा यही और फिर टाइम भी कम् यही.. और मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा और मेरी चीख निकल जाएगी..

मैंने भी भाभी की बात मानते हुए अपने लुंड को भाभी की छूट में थोड़ा थोड़ा करके छोड़ने लगा.. भाभी की सिसकियाँ किचन में गूंजने लगीं.. बस अब्ब कुछ hi पल में भाभी की छूट पानी छोड़ने वाली थी.. मैंने भाभी की छूट के छेड़ के साथसाथ भाभी की छूट के ऊपर मौजूद क्लीट पर भी अपने लुंड को घिसने लगा.. भाभी siiiiiiiiiiiiiiiiii hmmmmmmmmmma ahhhhhhhhhhh विजजू थोड़ा तेज़ करो मेरा होने वाला है.. सीईईईई हम्म्म्म उफ्फ्फफ्फ्फ़ विज्जु आज तुमने सच महि मज़ा मकर दिया.. मुझे नहीं पता था क आज तुमसे ये सबब ाकरने को मिल जायेगा .... विज्जु और तेज़ तेज़ रगड़ो.. फ़ास्ट.. तेज़ भाभी अपनी गांड को हकलाते हुए झटके खाने लगी.. भाभी का जिस्म अकड़ने लगा और फिर कुछ hi पलों में भाभी शांत हो गई..

भाभी की छूट और भाभी के दिल की हसरत आज पूरी हो गई थी.. भाभी के छूटने मैं नहीं रुका और भाभी की छूट पर अपने लुंड को घिसता hi रहा.. कुछ देर बाद भाभी की सांस ठीक हुई तो

भाही:- विज्जु आज तुमने मेरे दिल की तमन्ना पूरी कर दी है.. मैं आज बोहत खुश हूँ..

विजय:- भाभी अब्ब मेरा भी निकल दो.. मुझे भी अब्ब लग्ग रहा है क मेरा भी जल्दी hi निकल जायेगा..

भाभी ने फिर उठ कर मेरे लुंड को अपने में में लिया और छुपे लगाने लगी..




कुछ मिन्ट्स के बाद मुझे लगने लगा के मेरा लुंड भी अब्ब पानी चढांए वाला है..

विजय:- भाभी आज आपके मेरे लुंड को चूसने ने बड़ा माज़ आ रहा है.. भाभी और तेज़ karo.bass मेरा भी निकलने वाला है..

भाभी ने अपने आहत और मोहन की स्पीड बढ़ा दी और फिर मेरा मुन्ना भी भाभी के मोहन पर hi रोने लगा.. मेरे लुंड में माल निकलने लगा और भाभी अपनी जीब से उसे चाटने लगी.. भाभी को ऐसा ब्रेकफास्ट कभी कैसे मिल सकता था..




भाभी मज़े से मेरे लुंड के पानी को अपने पेट में उठाने लगी..

जब्ब भाभी ने मेरे लुंड को चाट व्हाट कर साफ़ कर दिया तो मैं उठ खड़ा हुआ और अपने कपडे पहन कर भाभी को एक किश की .. फि पानी पिया और भाभी को कूफ़े बनाने का कह कर किचन से बहार निकल गया..

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जब्ब मैं ड्राइंग रूम में पोहंचा तो पद्मा आंटी और मालिकान वही बैठी हुई थीं..

ohhhhhhhhhhhhh तो दोनों को िद्या हो गया था क किचन बिजी है.. चलो कोई बात नहीं.. अब्ब भाभी के बाद उनके अंदर की झिझक भी ख़तम हो जाएगी.. मैं उसके पास जा कर बैठ गया.. दोनों मुझे hi देख रही थीं..

मैंने उन को देखा तो दोनों की hi ऑंखें लाल थीं.. मतलब मालिकान और पद्मा आंटी की छूट ने पानी छोड़ा हुआ था..

दोनों ने hi मुझे फीकी सी स्माइल दी.. अब्ब अपनी पानी छोड़ रही छूट के साथ वो मुझे कैसे फ्रेश हालत में मिलती.

विजय:- तो आप दोनों को hi पता व्हाल गया क किचन में कुछ ख़ास प्रोग्राम चल रहा था.. मेरी बात सुन कर दोनों ने अपनी जांघों को रगड़ते हुए नज़रें फेर लीं.. लेकिन मेरी बात का जवाब नहीं दिया.. मैंने भी अभी दोनों को डिस्टर्ब करना सही नहीं समझा.. पहले वो दोनों भाभी का इंटरव्यू ाकरेंगी उसके बाद hi मुझसे सही से बात करने लायक होंगी.. अभी तो दोनों को hi अपनी छूट को ठंडा करना था.

मैं दोनों को hi bye बोल कर बहार उस गुंडे की तरफ चल दिया.. ड्राइंग रूम से निकलते hi मुझे उसकी चीखें सुनाई देने लगीं..

उस रूम के बहार 3 गार्ड्स खड़े हुए थे. और तीनो के hi चेहरे पारर पसीना आया हुआ था.. वो मुझे देख क्र परेशां हो गए..

उनका परेशान होना बनता hi था....... माइए गुंडे के साथ जो क्या था.. वो था hi इतना दहशत नाक क आज के बाद गार्ड्स भले hi मेरी इज़्ज़त अक्रें लेकिन मुझसे डरेंगे ज़रूर.........

विजय:- हाँ जी तो सुनाओ क्या हाल है.. उस गुंडे महाराज का..

तीनो hi एक दुसरे को देखने लगे..

मैं तीनो को hi देहक कर मुस्कुराया और फिर रूम का दूर खोल कर अंदर चला गया. जैसे hi दूर हुआ तो गुंडे की चीखों ने रूम से बहार आ क्र सबब के hi रोंगटे खड़े कर दिए थे..

मेरा उस गुंडे के लिए ट्रीटमेंट hi ऐसा था.. क जो भी देखता.. देख कर hi पनाह मांगता और सोचता.. क अगर मौत ए भी तो सीधा गोली hi लगे.. जैसा उस गुंडे के साथ हुआ था.. कभी उनके साथ न hoooooooooooo....

तीनो गार्ड्स गुंडे की चीखें सुन कर थार थार कांपने लगे


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इस अपडेट में स्पेलिंग की करेक्शन का टाइम नहीं मिला...

आप सबब के वेट को मद्दे नज़र रखते हुए जल्दी में ये उप्दत दे रहा हूँ.

अगर कुछ मिस हुआ हो तो एडवांस में hi सॉरी.....................................

एक बात और..

मैंने कहा था क कुछ काम की वजा से बिजी हो गया था.. मैं अभी भी कम्पलीट फ्री नहीं हुआ हूँ तो

इसलिए अपडेट लेट पोस्ट हो रहा है..
 
Hi रीडर्स....!!!!

कुछ दिनों से मैं बिजी तो हूँ hi.. लेकिन उसके साथ hi एक और बात भी हुई है.

जैसा क आप सबब अच्छे जानते हैं क मैं भी आपके जैसा hi एक रीडर हूँ था.

शोक शोक में एक स्टोरी लिख डाली. स्टोरी की शुरुआत कुछ अछि नहीं हुई......

लेकिन कुछ टाइम के बाद अच्छा रिस्पांस मिलने लगा..... तो मैंने एक और स्टोरी

{Himmat-Wala} लिखनी शुरू कर दी.. और फिर जैसे उसकी पॉपुलरिटी में इज़ाफ़ा हुआ है.. मुझे बेहद्द ख़ुशी हुई... लेकिन मेरी फर्स्ट स्टोरी का रेस्पॉस कम् होने लगा. तो मैंने फिर एक और स्टोरी


......{Laa-Waaris}.....

के नाम से शुरू करदी... laa-waaris के शुरू करते hi मुझे मेरी पहली स्टोरी का भी रिस्पांस मिलने लगा... अब्ब मेरी मसरूफियत भी कुछ बढ़ गई थी. तो मुझे लगने लगा .. क मैंने 3रद स्टोरी शुरू करके जल्द बाज़ी की है.. मैं एक टाइम में

2 स्टोरीज को ले के चलना चाहता था..

इसका भी बड़ा रीज़न था.... yakk-saaniyat

एक hi सूर्य को लिखते हुए कभी कभी राइटर का मैं कुछ बेचैन सा होने लगता है.. और फिर जब्ब मैं के अंदर कुछ और स्टोरीज का भी प्लाट बनना शुरू हो जाए .. तो फिर रुकना मुमकिन नहीं रहता............ इसलिए इस टाइम मेरी 3 स्टोरीज रेगुलर चल रही हैं...

और फिर भी मेरे अंदड़ कई और स्टोरीज का प्लाट बनना चूरू हो गया..

अब्ब मैं सबब स्टोरीज को एक साथ तो ले के नहीं चल सकता.... इसलिए उसको पेंडिंग hi रहने दिया ..................

जैसे hi मेरी एक स्टोरी कम्पलीट होगी मैं इक नई स्टोरी भी शुरू कर डोंगा..

स्टोरी फंतासी होगी.. लेकिन होगी बोहत hi मज़े की..

मैंने सोचा क स्फोरम पे उस स्टोरी को भी बुक कर देता हों.. और सही टाइम आने पे उसे चूरू कर दूंगा.......... या अगर टाइम मिला तो कभी कभी उसकी भी उपदटेस दे दिया करूँगा.....

आप सबब रीडर्स के लिए............ मेरी आने वाली अपकमिंग स्टोरी का कुछ स्टेटस आप सबब के सामने रखना चाहता हूँ.. उम्मीद है आप सबब को पसंद आएगा..


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थे लाइफ ऑफ़ mine({story ऑफ़ ा monkey}{fantasy+Adultery+action}

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आज मैं एक इंसान हूँ.............. लेकिन पहले नहीं था ....

मैं एक बन्दर था.. और एक साइंटिस्ट के एक्सपीरियंस की वजा से मुझे इंसान बनना पद गया ........

लेकिन इंसान बनना मुझे बोहत hi भारी पड़ा......

बिकॉज़ नाउ ी वास् थे सुपर ह्यूमन ................

तो मुझे दुन्या के हर्र कंट्री ने खुद के कब्ज़े में लेने के लिए अपने बेस्ट एजेंट्स मेरे पीछे लगा दिए थे...

मैं बन्दर hi ठीक था.. मुझे इंसान नहीं बनना चाहिए था.........

लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ क मुझे.............................. इंसान होने में मज़ा आने लगा.......... रंग बरंगी छूट और गांड की वजा से मुझे इंसानी लाइफ फवौरीते लगने लगी ................ और मेरे अंदर हैवानी फीलिंग्स के साथ साथ इंसानी फीलिंग्स भी आने लगी.......

मैं आधा बन्दर और आधा इंसान बन गया.................


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मैं सबब से पहले अपनी स्टोरी

Himmat-Wala को कम्पलीट करूँगा... बाकी भी रेगुलर चलती रहेंगी...

बाकी आप सबब परेशां ना हूँ.. अगर ऊपर वाले ने चाहा तो मेरी कोई भी स्टोरी उनकंप्लेटे नहीं रहेगी...............

ोथेरविसे इन्सिडेंट्स अरे पार्ट्स ऑफ़ ौरस लिव्स

थैंक्स तो आल....................


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थैंक्स..!!

ये एक बन्दर की स्टोरी है जो इंसान बन गया था तो इन्सेस्ट तो हो नहीं सकता..

भाही को ठंडा कर दिया विजय ने .. भाभी का हाल ाचा हो गया.. अब्ब पद्मा और मालिकान का भी नंबर है.. तो विजय दिल्ली पर राज करने के साथ साथ पद्मा और मालिकान को छोड़ता है या नहीं .. वो तो विजय hi जाने.. और रही बात विजय की माँ और बहनो की तो उनके आने के बाद क्या होता है.. वो तब्ब देखेंगे.......
 
थैंक्स..!!

हाँ विजय ने भाभी की छूट में थोड़ा सा सही लेकिन अपना लुंड घुसा कर भाभू को भी ठंडा कर दिया .. भाभी को भी विजय से प्यार है जैसे बाकी सबब hi करती हैं.

अब्ब वीजा के मज़े कुछ कम् होंगे .. क्यूंकि विजय को अब्ब अपने काम पे फोकस करना है...........

और रही बात. राजा एंड फ्रेंड्स की तो राजा एंड फ्रेंड्स कोठी में अलग hi रहते हैं.. उनकी टेंशन नहीं है.. और वैसे भी अब्ब उनकी लाइफ भी बदल चुकी है.. जल्द hi राजा के साथ साथ

उदय जीतू और अनुपम भी एक्शन और सेक्स में नज़र आएंगे...

विजय का टार्चर कैसा है वो अभी कुछ देर में पता चल जायेगा..
 
अपडेट::: 52

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आप सबब सोच रहे होओगे क मैंने ऐसा क्या किया उस गुंडे के साथ ..

जो गुंडे के साथ साथ सबब गार्ड्स का भी मूट निकलना शुरू हो दिया था................


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मैंने गुंडे के साथ कुछ भी फिजिकली टार्चर जैसे नहीं किया था.. मैंने तो बास गुंडे को मेंटली टार्चर किया था.. और मेंटली टार्चर फिजिकली टार्चर से कई गुना बढ़ के होता है...........

मैंने कहा था क मेरे पास टाइम कम् है .. और मैं गुंडे को टार्चर करके उससे शंकर की डिटेल नहीं निकलना चाहता था.. और वैसे भी मुझे अंदाज़ा हुआ था क वो गुंडा आसानी से कुछ भी नहीं बताएगा...........

और फिर मैंने एक टाइम में दो काम भी कर लिए थे. गुंडे की अकड़ भी ख़तम करदी और भाभी की छूट को भी ठंडा कर दिया.. और साथ में तीसरा काम भी होने hi वाला है.. आंटी पद्मा और मालिकान की छूट भी अब्ब मेरी होने वाली थीं..




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कोठी पर शंकर के पालतू गुंडे के लिए जैसा सबब कुछ अर्रंगे चाहिए था वैसा तो कुछ भी नहीं था कोठी में.. लेकिन फिर भी मेरा काम हो गया था..

रूम के अंदर लोहे की खटिया पर शंकर का गुंडा बंधा हुआ था.. और चत्तव से लटक रही रस्सी से बंधी हुई एक ड्रिल मशीन उसकी दोनों आँखों के सेण्टर में चल रही थी...

ड्रिल महसीने का फासला गुंडे से 1" का था.. और ड्रिल मशीन की आवाज़ से गुंडा दहशत ज़ादा हो गया था ......

आप सबब सोच रहे होंगे क ये कैसा टार्चर है........... तो

ये किसी भी बन्दे को फिजिकली टार्चर करने से भी बड़ा और भयंकर टार्चर है.. ड्रिल मशीन की आवाज़ और फिर उसका तेज़ी से घूम रहा आगे वाला हिस्सा.. उसे इमेजिन करके बाँदा अंदर hi अंदर पल पल मरता रहता है..

फिजिकली टार्चर से एक तो बाँदा आसानी से नहीं बकता और दूसरा वो किसी हद्द तक्क खुद पर काबू भी रख लेता है ..........

लेकिन जो चोट मिली hi नहीं और बाँदा इमिगिनाशन में चला जाए क

अब्ब घुसी ये ड्रिल मशीन मेरे सर्र के अंदर.. वो बास यही सोचता रह जाता है..

और दूसरी बात मुसलसल चलते रहने से सस्पेक्ट की विल पावर ख़तम होने लगती है.. और जब किसी की विल पावर hi ख़तम हो जाये तो वो अंदर से




..................ख़तम...................



कुछ ऐसा hi हाल शंकर के पालतू का भी हो रहा था.. वो ऑंखें बंद किये हुए hi ऐसे चीख रहा था.. जैसे किसी वीराने में कोई भूत देख लिया हो और उसे बचने वाला भी न हो ........ पल पल अपनी तरफ बढ़ती हुई मौत को देख कर वो

अपने दमाग का बैलेंस खोने लगता है.. शंकर के पालतू का भी दमाग हिल चूका था..

गुंडे की हालत देख कर मेरे होंठों पे मुस्कान आ गई थी.. मैंने ड्रिल मशीन को ऑफ किया.. लेकिन शंकर का पालतू तो बास चीखे hi जा रहा था..

अब्ब वो ड्रिल मशीन उसकी आँखों के ऊपर नहीं उसके दमाग में चल रही थी..

और उसे बेइंतेहा दर्द हो रहा था.. ऐसा दर्द सहन करना किसी के लिए मुमकिन hi नहीं होता..

तो फिर वो गुंडा कैसे सहन कर पाटा मेरा ये स्पेशल टार्चर...

बहार खड़े गार्ड्स का कांपना अभी नहीं रुका था... वो भी फिलहाल के लिए ड्रिल मशीन के रुकने का एहसास नहीं कर पाए थे.. गार्ड्स को भी देख कर मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई..

विजय:- गार्ड्स........ मैंने कुछ ज़ोर से चिल्लाया..

सबब की हालत hi बुरी हुई पड़ी थी.. साला सबब hi इमेजिनेशन में थे..

कुछ सेकण्ड्स लगे गार्ड्स को होश में आने में.. जैसे hi उनको ड्रिल मशीन के बंद होने का एहसास हुआ तो सबब ने hi लम्बी लम्बी साँसें ली और फिर अंदर रूम में आ गए...

मैंने सबब सामान हटाने को कह दिया..... कुछ देर में सबब सामान हटा दिया गया और गुंडे को भी खोल कर एक चेयर पर बाँध दिया गया.. लेकिन उसका चिल्लाना नहीं रुका............ मैंने कहा ना क ड्रिल मशीन अब्ब उसके दमाग में चल रही थी.. वो कैसे चुप हो जाता .........

चेयर पर इसलिए बंधा था क कही ऑंखें खुलते hi दहशत के मारे भाग खड़ा न हो...

अब्ब तक्क दिन काफी निकल चूका था.. चीखों की वजा से राजा और बाकी के तीनो भी जाग गए.. और चीखों की आवाज़ से रूम की तरफ आने लगे..

मेरे कहने पारर गार्ड्स ने गुंडे के ऊपर ठन्डे पानी की एक बाल्टी फेंकी तो उसे कुछ होश आया और जैसे hi होश आया उसने उठने की कोशिश की लेकिन उठ नहीं पाया.. उसकी ऑंखें दहशत से फटी पड़ी थीं और वो सबब को ऐसे देख रहा था जैसे क वो इस दुन्या में न हो कर किसी और hi दुन्या में जा कर फँस गया हो.. या जैसे कोई किसी सान्निबल विलेज में फैन गया हो और सबब को बारी बारी मरता देख कर अपनी मौत का भी यकीन होने के बाद की दहशत उसकी आँखों में दिखने लगती है..

कुछ hi देर में मेरे चरों शेर साथी भी आ गए.. और

राजा:- विजय तू इतनी जल्दी उठ गया और ये इतना चीख क्यों रहा था...

विजय:- अच्छा हुआ जो तुम सबब आ गए.. अब्ब इसके साथ मैंने क्या किया hi वो सबब तुम्हे गार्ड्स बता देंगे.. फिलहाल मुझे कुछ काम है और मैं तुम चरों के लिए कॉफ़ी भिजवाता हों..

उदय:- लेकिन विजय तुमने इसके साथ किया क्या है.. इसकी ऑंखें देख कर लगता है क बोहत hi दर्रा हुआ है..

मैंने उदय की बात सुन कर सबब का धयान रूम में मौजूद सामन की तरफ कर दिया. और फिर सामान को देख कर चरों hi मुझे हेरात से देखने लगे..

जीतू:- ये कैसा सामान पड़ा हुआ है. और इससे क्या किया है तुमने.. जो ये अकड़ू इतना डर गया..

विजय:- वो सब गार्ड्स से पूछ लो.. मैं फ्रेश हो कर आता हों फिर साडी बातें करलेंगे.. तब्ब तक्क तुम सबब इससे साड़ी डिटेल निकलवा लो.

हमें आज से hi अपने काम पे लग्ग जाना है.... लेकिन डिटेल मिलने के बाद.

पहले सोचेंगे क कहाँ से और कैसे शुरू करना है......

ये बोल कर मैं सबब को हैरान परेशां छोड़ कर ड्राइंग रूम की तरफ चल दिया.. जैसे hi मैं वाहन पोहंचा तो रानी और पूजा दीदी के इलावा सबब hi मौजूद थीं.. इतनी जल्दी सबब उठ गए थे.. मुझे कुछ हेरात तो हुई लेकिन अच्छा भी लगा....

मैंने सबब को गम बोलै और फिर अपने चरों दोस्तों के लिए कूफ़े भिजवाने का बोल कर फ्रेश होने के लिए रूम में घुस गया...

रानी और पूजा दीदी दोनों के hi कपडे बदले हुए थे.. अब्ब पता नहीं खुद उठ कर कपडे पहने थे या भाभी ने पहना कर सुला दिया tha..kyunki टाइम बोहत हो गया था और कोई भी रूम में आ सकता था.. चलो अच्छा हुआ जो दोनों की hi छूट और छूट पर जम्मा हुआ पानी छुप चुके थे......

मैं बाथरूम में घुस कर नहाया और फिर नंगा hi बहार आ क्र अपने नए कपडे पहने . अब्ब इस घर में कोई भी मुझे नंगा देख ले.. मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता tha.malikan के इलावा मेरा सबब कुछ hi तो सब्बने देखा हुआ था...

हाँ अगर अनुष्का या उसकी बहन आ गई तो गड़बड़ ज़रूर होती......

मैंने कपडे पहन कर अपने बैग को खोला और उसमे मौजूद सामान को निकल कर ड्रेसिंग टेबल पर सजाना शुरू कर दिया ... जब्ब सबब सामान निकल गया तो मैं एक स्टूल पर बैठ गया ...

सबसे से पहले मैंने एक सिलिकॉन का फेस मास्क उठाया ..




उसपर जितना ज़रूरी था छोटे छोटे प्लास्टिक के टुकड़े गुम्म से चिपकने लगा .. और फिर उसपर सप्रे करने लगा.. डिफरेंट कोर्स से मैंने एक फेयर कलर का कॉम्बिनेशन बना कर फेस मास्क को रेडी किया ..

फिर कुछ हेयर्स को उठा कर उसपर भी स्प्रे करने लगा.. कुछ देर बाद बाल भी फेस मास्क से मैच करने लगे..

फिर मैं उस मास्क के सर्र और चेहरे पर गुम्म से बालों को चिपकने लगा..




मैंने अपनी शर्ट उतार कर वो मास्क पहना और फिर खुद को देखने.. अभी भी कुछ चेंज की ज़रुरत थी तो ..

मैं स्प्रे से अपने फेस मास्क पर अपने हिसाब से चेंज लाने लगा.. 5 मिंट में hi सबब ठीक हो गया.. मैंने खुद को आईने में देखा और फिर मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई...






अब्ब कौन मुझे पहचानेगा...........

ये होगा S.S का फेस सबब के लिए............................





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जब्ब मैंने अपने फेस मास्क में लगा हुआ tha.to भाभी अचानक से मेरे रूम में मेरे लिए कॉफ़ी ले कर आई.. लेकिन मुझे फेस मास्क में उलझे हुए देख कर वो बड़ी हैरान हुई लेकिन फिर जैसे hi मैंने वो फेस मास्क खुद के चेहरे से बदला तो भाभी स्टेचू बन्न गई...

वो सोच रही थी क ऐसा भी हो सकता है क्या.. क कोई पूरा का पूरा hi बदल जाए..

भाभी की टांगें कांपने लगीं और उनसे खड़ा रहना मुश्किल हुआ तो वो चल कर एक चेयर पर बैठ गई. कॉफ़ी को साइड टेबल में रखा और दोनों हाथों से अपने सर्र को पकड़ कर मुझे देखने लगी.. उनकी ऑंखें मारे हेरात के बड़ी बड़ी हो गई थीं..






जब्ब भाभी चलते हुए रूम में दाखिल हुयी थी तो मुझे पता चल गया था..

लेकि मैं अपने काम में hi मगन रहा.. जब मेरा सबब हो गया तो मैं भाभी की तरफ चल कर गया और उनके हाथ को थाम कर उनको उठाया और अपने गले लाया लिया...

भाभी ने कोई भी मूवमेंट नहीं की .. जैसे मैं उनके साथ बर्ताव कर रहा था.

वो वैसा hi कर रही thi.wo अभी भी स्टेचू वाली कंडीशन में थी.. मैंने भाभी को देखा तो भाभी मुझे बदला हुआ देख कर भी दर्री नहीं थी.. या फिर उनकी अभी समझ वापिस नहीं ै थी.. मैंने भाभी के होंठों पर अपनी जीब को फेरने लगा..

मेरे ऐसा करते hi भाबी होश में आई और फिर एक झटके में मुझसे अलग हो गई और मुझे फटी फटी आँखों से देखने लगी..

विजय:- (मुस्कुराता हुआ) भाभी क्या हुआ?? मैं आपका विज्जु hi हूँ..

भाभी:- vij...vijj..vijju y..ye..sabbb.. क्या है.............????

भाभी बोहत hi ज़यादा नर्वस हो गई थी...

विजय:- क्यों भाभी डर गई क्या.. हाहाहाहाहा बड़ा मज़ा आएगा जब्ब मैं आपके साथ ड्राइंग रूम में जाऊँगा.. आप बास किसी को अभी बताना मैट..

भाभी:- (हाँ में सर्र हिलाया और फिर) लेकिन ये सबब क्यों किया तुमने..

विजय:- ये सबब ज़रूरी है मेरे लिए और आप सबब के लिए भी. बाकी सबब भी बता दूंगा.. लेकिन अभी टाइम कम् है और मुझे बोहत कुछ करना है..

मैंने कॉफ़ी उठाई जो ठंडी हो चुकी थी लेकिन फिर भी मैं पीने लगा.

और भाभी मुझे हैरत से देख रही थीं..

मैं कॉफ़ी पीते हुए भाभी को देख कर मुस्कुरा भी रहा tha..mujhe भाभी की हालत से बड़ा मज़ा आ रहा था..

विजय:- भाभी फिर सूबा से अब्ब तक्क कैसे फील हो रहा है.. मैंने भाभी की छूट की तरफ इशारा करते हुए कहा..

भाभी शर्मा गई लेकिन फिर

भाभी:- विज्जु थैंक्स तुमने मेरे लिए इतना किया.. पता है मैं अंदर से कितना जल रही थी.. अब्ब अंदर से सबब कुछ एकदुम्म से शांत शांत हो गया है..

विजय:- पद्मा आंटी और मालिकान उन्हों ने भी सबब सुन लिया था.. हमने जो भी कीतचन में किया था..

भाभी शरमाते हुए:- हाँ विज्जु वो दोनों भी पागल हो गई हैं. अब्ब जल्द hi उनका भी कुछ कार्डो.. वर्ण कही उनका सबर न टूट जाये..

विजय:- ह्म्म्मम्म्म्म ठीक है भाभी.. सबब की hi छूट की गर्मी निकाल दूंगा..

बास मा और बहनो को निकाल लाऊँ उस दलदल से ... फिर सबब के लिए सबब कुछ करूँगा..

कॉफ़ी ख़तम हुई और मैं भाभी के साथ ड्राइंग रूम में एंटर हुआ...

सबब hi भाभी के साथ एक अनजान शख्स को देख कर हैरान हुए क ये कब्ब कोठी में आया.. किसी ने भी तो नहीं देखा उसे अंदर आते हुए.. सबब hi तो रात भर ड्राइंग रूम में hi थे.. और फिर भाभी क्यों चिपकी हुई हैं इस अनजान बन्दे से.

मेरी आगे कुछ बढ़ गई थी फेस मास्क की वजा से.. और भाभी के साथ मैं मैच बोहत hi ज़बरदस्त लग रहा था.. भाभी अपनी आगे से कुछ कम् दिखती थीं तो मैं भी अब्ब 24 25 का दिखने लगा था.... और मैंने और भाभी ने एक दुसरे की कमर पर हाथ भी रखे हुए थे.........






राज शिखा और रूपा अपनी माँ को फटी फटी आँखों से देख रही थीं.




उन्हों ने अपनी माँ को कभी भी किसी अनजान से इतना फ्री होते नहीं देखा था...

उनकी माँ तो कभी भी उनके पापा के साथ भी इस तरह से कमर में हाथ डाले नहीं फिर करती थीं...............




तीनो बेहेन भाई अपनी माँ को शॉकेड हो कर देख रहे थे...........




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