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- Dec 5, 2013
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देव – बाबा आपकी जबान क्यों लड़खड़ा रही है वो ठीक तो है न? आप बोलते क्यों नहीं कहा है मेरा भाई?
फब– देव वो बिलकुल ठीक है. लेकिन ……………….
देव – लेकिन क्या बाबा अगर वो ठीक है तो कहा है?
फब – पृथ्वी लोक में
देव – क्या पृथ्वी पे? लेकिन क्यों ? कहा?
फब - जिस दिन वो हादसा हुआ था उस दिन उसे संभालना सब के लिए बेहद मुश्किल हो गया था, किन्तु तुम्हरे दिए हुए कंगन की वजह से उसे सब पता चला और वो शांत हो गया, लेकिन समस्या तो वह भी हो गयी. क्युकी वो खुद hi नहीं बल्कि उस के साथ नीलम भी शांत हो गयी. तुम्हरे अंतिम संस्कार के बाद रूद्र और नीलम एक डैम गुमसुम हो गए. यहाँ तक की वो एक दूजे से भी बात नहीं करते थे न hi मिलते थे.
……. ये बात मुझे मेरे गुरु से पता चली और उन्ही की आज्ञा से मए एक रात नीलम के पास पंहुचा उस वक़्त भी वो बस खोई खोई नजरो से शून्य में देख रही थी और उसकी आँखों से आंसू बहे जा रहे थे.
फब – nilam………..nilam…………..
अचानक नीलम की तन्द्रा टूटी और उसने सामने देखा
नीलम – आप कौन है बाबा?
फब - सब बता दुगा नीलम लेकिन पहले मेरे साथ आओ हमें अभी रूद्र के पास जाना है.
फिर फब और नीलम रूद्र के पास आते है. इस बीच न नीलम ने कुछ कहा न फ़कीर बाबा ने
दोनों जब रूद्र के घर पहुंचे तो वो अपने घर के बहार hi बैठा हुआ था एक डैम उदास और गम शूम
नीलम ने जाकर रूद्र को कंधे से पकड़ के हिलाया तो रूद्र होश में आया
रूद्र - अरे नीलम तुम यहाँ इस वक़्त ? क्या हुआ?
नीलम ने पशुपतिनाथ की तरफ इशारा कर दिया
रूद्र - प्रणाम बाबा
पण - आयुष्मान रहो वत्स
रूद्र – आपका इस समय आने का क्या कारन है बाबा
पण – रूद्र मए जो कहने वाला हु उसे पूरे ध्यान से सुन्ना. ये जो कुछ भी हुआ उस सब के पीछे मेरा hi स्वार्थ था देखा जाये तो इस सब का कारन मए hi हु.
रूद्र - ये आप क्या कह रहे है?
पण - मए सच कह रहा हु.
रूद्र – नहीं कृपया अपने शब्द वापस ले लीजिये वार्ना कही ऐसा न हो के मए अपना संयम खो कर कोई गलती कर बैठु मुझ पर किसी सिद्ध पुरुष की हत्या का कलंक न लग जाये.
पण – ये संभव है hi नहीं रूद्र. इसीलिए मैने कहा के पहले मेरी पूरी बात को सुन लो. फिर जो चाहो कर लेना किन्तु उससे पहले नहीं.
रूद्र – ठीक है बाबा आप कहिये मए सुनुँगा.
पण – ये सब बहोत पहले शुरू हुआ मेरे मन की लालच की वजह से तिलिस्म नगरी के सिंघासन की लालच किन्तु मुझे अपना सपना पूरा करने का कोई जरिया नहीं मिल रहा था फिर एक दिन मुझे एक मन्त्रिक मिला और मए जा कर उसे मिला…………………………………..
पण उसे पूरी बात बता देता है. जिसे सुन कर रूद्र एक बार फिर जोर जोर से रोने लगता है.
रूद्र - अब आप मुझसे क्या चाहते है?
पण - मुझे मेरे गुरु का आदेश है बस वही तुम्हे बताने आया हु. लेकिन उससे पहले मए तुम दोनों से कुछ जानना चाहता हु.
रूद्र - पूछिए
पण – तुमने कहा था के तुम दोनों अपना गृहस्थ जीवन तभी शुरू करोगे जब देव और पूनम का शुरू होगा. तो अब वो इस संसार में है hi नहीं क्या अब तुम अपना गृहस्थ जीवन शुरू करना चाहोगे?
रूद्र – babaaaaaaaaaaaaaa…………..
……………ये बात यदि किसी और ने कही होती तो वो दूसरी सांस लेने के लिए जीवित नहीं रहता. मेरा देव मारा नहीं है. वो लौट के आएगा. वो खुद भी कह कर गया है. और अभी आपने hi कहा के आप उसे ढूंढकर अपने पास रखेंगे और सही वक़्त पर उसे यहाँ लाएंगे तो वो मारा कैसे है? है वो हम सब से दूर जरूर चला गया है. इसलिए ये तो संभव hi नहीं के बिना उस के मए सिर्फ अपने विषय में या अपनी खुशियों के विषय में सोच भी लू. मए अपनी प्रतिज्ञा जरूर पूरी करुगा. उस के बिना मए विवाह नहीं करुगा . और अगर इस इंतजार में मए मर भी जाऊ तो मुझे परवाह नहीं.
पण – नीलम तुम्हरा क्या विचार है. रूद्र तो विवाह देव के बिना करेगा नहीं. तो क्या तुम किसी और से विवाह कर के अपना जीवन बिताना चाहती हो?
नीलम एक फीकी सी मुस्कान दे कर - बाबा मेरा विवाह तो रूद्र से उसी दिन हो गया था जिस दिन मए पहली बार इससे भोलेनाथ के मंदिर में मिली. हमारा रिश्ता भोलेनाथ के मंदिर में तय हुआ था. अब किसी और से विवाह का सोचना भी मेरे लिए संभव नहीं . मए हमेशा रूद्र की hi रहूगी चाहे हमारा तन मिले या न मिले मुझे भी कोई परवाह नहीं चाहे मुझे कितना भी इंतजार करना पड़े मए करुँगी.
पण – जीते रहो मेरे बच्चो. मुझे तुम दोनों से यही उम्मीद थी.
………. अब सुनो रूद्र. जब देव यहाँ आएगा. तब तक यु तो वो खुद बेहद शक्तिशाली हो चूका होगा. लेकिन फिर भी एक चीज़ है जो उसे तुम दोनों hi दे सकते हो क्यों की यदि देव वो चीज़ पाना चाहे तो उसे दुगना समय लग जायेगा .
रूद्र – नहीं बाबा हम नहीं चाहेंगे के देव को समय ज्यादा लगे पहले hi आपने कहा के उसे बहोत समय लगने वाला है. फिर किसी और चीज़ को पाने के लिए उतना hi समय और लगेगा तो ये उचित नहीं. मुझे बताइये मए उसे जल्दी लेन के लिए क्या कर सकता हु.
पण – वही जो अब तक तुम दोनों दोस्त करते आये एक दूजे की सहायता. जैसे दुश्मन अधिक होने पे तुम दोनों आधे आधे बात लेते थे और उन्हें निपटा देते थे. ठीक वैसे hi इस समय चक्र को भी तुम उस के साथ बात सकते हो यदि उस के हिस्से का आधा काम तुम कर दो तो उसे समय आधा लगेगा. हो सकता है जब तुम उस चीज़ तक पहुँचो तब तक देव भी आ जाये और फिर तुम्हे वही आ कर मदद करेगा उसे पाने में.
रूद्र – बाबा खुल कर बताइये आप कहना क्या चाहते है?
पण – तुम्हे और नीलम को भी वही तपस्या करनी होगी जो मए करुगा , जो देव और पूनम करेंगे. मेरी तपस्या से मए तुम सब की मदद करुगा, देव अपने तप से शक्तिया हासिल करेगा, पूनम अपने तप से खुद को तिलिस्मी शक्तिया और देव की शक्तिया सँभालने के लिए मजबूत करेगी, तुम और नीलम अपने तप से इच्छाधारी बनोगे और फिर सही वक़्त आने पर देव और पूनम के साथ मिल कर उस स्वर्ण मणि को हासिल करोगे. जिसकी सहायता से तुम भविष्य में आने वाले अपने दुश्मनो का नाश भी कर पाओगे और उस मन्त्रिक से बदला भी ले पाओगे क्यों की वो अब तक जिन्दा है और इस वक़्त वो भी अपनी शक्तिया हासिल करने के लिए तपस्या कर रहा है. यदि वो सफल हुआ तो उस मणि को हासिल कर के न सिर्फ वो अमर हो जायेगा बल्कि इस बार वो देव को हमेशा हमेशा के लिए समाप्त कर देगा.
रूद्र – उस मन्त्रिक को तो मए मरुँगा बाबा उसे कुचल के रख दुगा जिसने इस बार मेरे देव की जान ली मुझे मेरे देव से जुड़ा किया. मए तैयार हु बाबा.
पण – उसके लिए तुम्हे और नीलम को भी अपना शरीर त्यागना पड़ेगा, क्यों की जो सिद्धि देव, पूनम, और वो मन्त्रिक हासिल करेंगे वो शरीर के साथ पाना मुमकिन hi नहीं.
रूद्र - बस इतनी सी बात? अपने देव के लिए मए ख़ुशी ख़ुशी अपने प्राण त्याग सकता हु ये शरीर छोड़ सकता हु.
फब - तुम दोनों क्यों की अपनी मर्जी से शरीर छोड़ोगे इसीलिए मए तुम दोनों के शरीर सुरक्षित रखुगा जब तुम्हारी तपस्या सम्पूर्ण होगी तुम दोनों को अपने अपने शरीर में वापस भेज दुगा. इससे तुम दोनों की आयु भी यही से शुरू होगी और तुम दोनों के जिस्म भी बूढ़े नहीं होंगे., लेकिन एक बात का ध्यान रखना रूद्र तुम्हे और नीलम को हमेशा साथ रहना है तुम दोनों hi इच्छाधारी नाग नागिन बन जाओगे तब तुम कही भी जा सकोगे किसी का भी रूप ले सकोगे, तुम से बड़ा शक्तिशाली नाग या नागिन पूरे संसार में कोई नहीं होगा, तुम जो इच्छा करोगे वो पूरी होगी. लेकिन जब तक तुम दोनों का विवाह न हो जाये तुम दोनों का मिलान नहीं हो पायेगा . और यदि तुम्हारा मिलान हो गया. तो तुम्हारे सम्भोग करते hi. तुम दोनों फिर से साधारण नाग नागिन बन जाओगे और इस नाग लोक में वापस आ जाओगे. तुम दोनों की साडी म्हणत विफल हो जाएगी. है किन्तु यदि तुम चाहो तो किसी अन्य स्त्री के साथ सम्भोग कर सकते हो. नीलम के आलावा.
रूद्र – ऐसा नहीं होगा बाबा. मेरा विवाह देव के बिना नहीं होगा और विवाह से पहले नीलम के साथ या किसी अन्य के साथ मेरा सम्बन्ध भी नहीं होगा.
पण - ठीक है अब तुम दोनों किसी गुप्त स्थान पे चले जाओ और अपनी तपस्या इसी वक़्त से शुरू कर दो. साधना में बैठत hi तुम्हरे प्राण इस शरीर से निकल जायेगे और मए ये शरीर सुरक्षित कर दुगा. ईश्वर तुम्हे सफल बनाये.
प्रेजेंट टाइम………………
उस के बाअद रूद्र और नीलम भी अपनी तपस्या में लीं हो गए. सब कोई अपनी अपनी जगह पे जैम गया था. और खामोशी से सब भविष्य में होने वाले महासंग्राम की तैयारियों में जुट गए थे. वो वक़्त और जगह कौन सी होगी कोई नहीं जनता था पर सब अपनी अपनी तरफ से तैयारियों में जुट गए थे. उस युद्ध के लिए जो अभी क्षितिज के उस पार था.
देव – बाबा इतनी देर में आपने ये पहली अच्छी खबर सुनाई है. बस इतना और बता दे के मेरा दोस्त मेरा भाई कहा है . आँखे तरस गयी है उसे देखने के लिए.
पण – जैसे के मइँ बताया के नीलम और रूद्र भी तपस्या में लीं हो गए थे. तो अब उनकी भी तपस्या पूरी हो चुकी है और वो दोनों ह इच्छाधारी नाग नागिन बन चुके है. उन्होंने सच में अपना वादा निभाया है देव, इतने वर्षो तक अपनी मंगेतर के साथ अकेले बिताने के बावजूद रूद्र ने कभी अपनी सीमा पार नहीं की. उसी वजह से आज न सिर्फ रूद्र बल्कि नीलम भी सोनो hi बेहद शक्तिशाली बन चुके है. वो तुम्हारे गाँव के बहोत नजदीक पहुंच चुके है. लेकिन तुम उसे अभी मत मिलना क्यों की उस मन्त्रिक जो अब एक अघोरी बन चूका है. उस की नजर स्वर्ण मणि को हासिल करने के लिए hi नीलम पे लगी हुई है. वो रूद्र को पकड़ कर मरना चाहता है और नीलम के साथ सम्भोग कर के स्वर्ण मणि हासिल करना चाहता है. क्यों की यदि उस अघोरी ने नीलम के साथ प्रथम सम्भोग कर लिया तो उसे बिना किसी म्हणत के रूद्र से भी बड़ी शक्तिया हासिल हॉप जाएगी जो के इस वक़्त नीलम की है.
देव क्रोध में – कहा है वो अघोरी बाबा?
फब – आवेश में मत आओ पुत्र अब हर कदम सोच समझ के रखना है तुम्हे. जब तक रूद्र तुम्हारे गाँव नहीं पहुंच जाता तब तक तुम्हे भी उसके पास नहीं जाना है वार्ना उस अघोरी को पता चल जायेगा के तुम आ गए हो. …………
देव – तो उससे क्या फरक पद जायेगा बाबा
फब - उसे ये पता चलते hi वो रूद्र और नीलम को ख़तम कर देगा और तुम्हे भी फिर स्वर्ण मणि हासिल नहीं होगी. जिसकी सहायता से उस दुष्ट अघोरी का नाश संभव है.
देवा – लेकिन बाबा कही वो रूद्र को कुछ कर न दे.
फब – रूद्र तो पहले से एक महँ योद्धा है और अब तो सेकड़ो सालो की तपस्या से और भी शक्तिशाली हो चूका है. और ये मत भूलो की उस के साथ नीलम भी है. उसका अहित इतना आसान नहीं, उसे मरना इतना आसान नहीं होगा अघोरी के लिए इससे वो स्वर्ण मणि खो सकता है. इसीलिए वो भी इसी इंतजार में है जब रूद्र तुम्हरे गाँव के जंगल के करीब आये तो वो उसे ख़तम कर सके.
देव – ऐसा नहीं होगा बाबा अब तो ऐसा बिलकुल नहीं होगा. “बिकॉज़ ी ऍम बैक बहनचोद.”
सभी एक साथ - क्या?????????
देव – k..k..k..kuch नहीं मए ये कह रहा था मए ऐसा होने नहीं दुगा.
मन में … अबे क्या बोल दिया साला ये इंग्लिश कहा से निकल गयी मेरे मुँह से वो भी तिलिस्म लोक में.
इधर रूद्र और नीलम अपनी मस्ती में आराम से चले जा रहे थे उन्हें जल्दी पहुंचना भी नहीं था क्यों के जिस समय उन्हें उस जंगल में जाना था वो समय अभी दूर था.
रूद्र – क्या नीलम थक तो नहीं गयी हो?
नीलम – नहीं रूद्र हम थके नहीं है. लेकिन हमें यहाँ जाना है ये तुम्हे कैसे पता चला?
रूद्र – नीलम जब हम लोग तपस्या में लीं थे तब पण मेरे पास आये थे और उन्होंने मेरी आत्मा को मेर शरीर में वापस दाल दिया और फिर……………
पण - रूद्र …………… उठो पुत्र तुम्हरी साधना आज पूरी हुई
रूद्र धीरे से आँख खोल कर देखता है.
रूद्र – प्रणाम बाबा
पण – आयुष्मान भाव पुत्र. आज मए फिर तुम्हारे पास अपने गुरु की आज्ञा से आया हु वत्स
रूद्र - बाबा क्षमा चाहता हु किन्तु आप पहले मेरी उत्सुकता को शांत कीजिये.
पण मुस्कराते हुए – अच्छा ठीक है पूछ?
रूद्र - बाबा मेरा देव कहा है, पूनम कहा है?
पण – वो भी अपनी तपस्या पूरी कर चुके है और उन्होंने तो कई साल पहले पुनर्जन्म भी ले लिया है.
रूद्र – सच बाबा अभी कहा है वो? क्या वो नाग लोक में है ? क्या मए उनसे मिल सकता हु?
पण – नहीं पुत्र अभी वो वक़्त नहीं आया किन्तु जल्द hi वो वक़्त आएगा जब तुम और देव फिर से मिल जाओगे किन्तु……
रूद्र – किन्तु क्या बाबा?
उससे पहले तुम्हे एक कार्य करना है
रूद्र – आदेश दे बाबा
पण – तुम्हारी और नीलम की तपस्या का समय पूरा हो चूका है और तुम दोनों पूरी तरह से इच्छाधारी बन चुके हो. और तुम दोनों के अंदर इतनी शक्तिया आ चुकी है के तुम हर बुरी ताक़त का सामने कर सकते हो.
रूद्र – ये सब आपकी कृपा है बाबा
पण - अब ज्यादा वक़्त नहीं बचा है. तुम दोनों तुरंत hi पृथ्वी लोक में चन्दन पुर नमक जगह जाओ वह से पैदल hi तुम्हे सूर्यगढ़ के जंगल में जाना है और वही जाकर तुम्हे आगे का मार्ग मिलेगा और संभवतः तुम्हारी मुकत देव और पूनम से भी होगी. फिर तुम सब को एक साथ तिलिस्म लोक आना होगा. पहले इतना रास्ता पार कर लो फिर आगे की बाते हम तिलिस्म नगरी में करेंगे. किन्तु इसमें बहोत खतरा है. सावधानी बेहद जरूरी है. इसलिए तुम्हे और नीलम को जंगल में पहुंचने तक सावधान रहना होगा, तुम दोनों अपनी किसी भी शक्ति का उपयोग उस जंगल को पार करने से पहले नहीं करोगे न अपनी सुविधा के लिए न hi किसी लड़ाई झगडे के लिए और ध्यान रहे तुम्हे उस जंगल में उस दिन पहुंचना है जिस दिन पूनम की रात हो उससे पहले नहीं जब तुम जंगल तक पहुंचोगे तो आगे का मार्ग स्वयं hi मिलता चला जायेगा. और वो जो मैने खुद पर संयम रखने की बात कही थी उसे अवश्य याद रखना. क्यों के अब तक तुम और नीलम बिना शरीर के थे अब तुम्हे तुम्हारा शरीर वापस मिल गया है और अभी तक तुम दोनों का विवाह नहीं हुआ तो विवाह तक खुद पर संयम रखना. मए भी नहीं चाहता कुछ क्षण की ख़ुशी के बहकावे में आकर तुम अपनी इतनी बड़ी और सालो की म्हणत पर पानी फेर लो.
रूद्र – जी बाबा मए ध्यान रखुगा, बाबा मए देव से कब मिलुंगा?
पण – ईष्वर बेहतर जानते है पुत्र क्या पता इसी सफर में तुम्हे देव मिल जाये. या ये भी हो सकता है के सफर की समाप्ति पे hi मिले. उस ईश्वर की माया किसी को नहीं पता होती. मैने नीलम की आत्मा भी उसके शरीर में दाल दी है उसे उठाओ वो जाग जाएगी. अब तुम दोनों प्रस्थान करो.
प्रेजेंट टाइम...........
रूद्र - बस फिर मैने तुम्हे भी साधना से जगाया और हम यहाँ के लिए निकल पड़े लेकिन. बाबा ने पहुंचने का समय भी निश्चित बताया है वार्ना हम तुरंत वह पहुंच जाते और ये भी कहा के पैदल जाना है अपनी किसी शक्ति का भी उपयोग नहीं करना है रस्ते में, न अपनी सुविधा के लिए न hi किसी लड़ाई झगडे के लिए. सबसे बड़ी बात तुम्हारे साथ रहते हुए दूर रहना है अब देखो इस कातिल जवानी से मए खुद को कैसे बचाओ जी तो चाहता है तुम्हे अभी यही लिटा के ........
नीलम - ा........ ये मुझे अपने नीचे लिटाने का सोचना भी नहीं वार्ना भूलो मत देव भैया मिलने hi वाले है आपने मुझे लिटाया तो देव भैया आपको खड़े रहने लायक नहीं छोड़ेगे अब छोडो ये लेटने लिटाने की बात और आप चिंता क्यों करते है ? हम बिना कोई दिव्या शक्ति इस्तेमाल किये भी सब पे भरी पड़ेगे . लेकिन भगवन न करे की कोई ऐसा मौका अभी आये.
रूद्र – है सही कहा चलो देखते है आगे क्या होता है. उफ़ तेरी ये जवानी मुझे तो भोलेनाथ hi बचाये अब .......
देव – बाबा आपकी जबान क्यों लड़खड़ा रही है वो ठीक तो है न? आप बोलते क्यों नहीं कहा है मेरा भाई?
फब– देव वो बिलकुल ठीक है. लेकिन ……………….
देव – लेकिन क्या बाबा अगर वो ठीक है तो कहा है?
फब – पृथ्वी लोक में
देव – क्या पृथ्वी पे? लेकिन क्यों ? कहा?
फब - जिस दिन वो हादसा हुआ था उस दिन उसे संभालना सब के लिए बेहद मुश्किल हो गया था, किन्तु तुम्हरे दिए हुए कंगन की वजह से उसे सब पता चला और वो शांत हो गया, लेकिन समस्या तो वह भी हो गयी. क्युकी वो खुद hi नहीं बल्कि उस के साथ नीलम भी शांत हो गयी. तुम्हरे अंतिम संस्कार के बाद रूद्र और नीलम एक डैम गुमसुम हो गए. यहाँ तक की वो एक दूजे से भी बात नहीं करते थे न hi मिलते थे.
……. ये बात मुझे मेरे गुरु से पता चली और उन्ही की आज्ञा से मए एक रात नीलम के पास पंहुचा उस वक़्त भी वो बस खोई खोई नजरो से शून्य में देख रही थी और उसकी आँखों से आंसू बहे जा रहे थे.
फब – nilam………..nilam…………..
अचानक नीलम की तन्द्रा टूटी और उसने सामने देखा
नीलम – आप कौन है बाबा?
फब - सब बता दुगा नीलम लेकिन पहले मेरे साथ आओ हमें अभी रूद्र के पास जाना है.
फिर फब और नीलम रूद्र के पास आते है. इस बीच न नीलम ने कुछ कहा न फ़कीर बाबा ने
दोनों जब रूद्र के घर पहुंचे तो वो अपने घर के बहार hi बैठा हुआ था एक डैम उदास और गम शूम
नीलम ने जाकर रूद्र को कंधे से पकड़ के हिलाया तो रूद्र होश में आया
रूद्र - अरे नीलम तुम यहाँ इस वक़्त ? क्या हुआ?
नीलम ने पशुपतिनाथ की तरफ इशारा कर दिया
रूद्र - प्रणाम बाबा
पण - आयुष्मान रहो वत्स
रूद्र – आपका इस समय आने का क्या कारन है बाबा
पण – रूद्र मए जो कहने वाला हु उसे पूरे ध्यान से सुन्ना. ये जो कुछ भी हुआ उस सब के पीछे मेरा hi स्वार्थ था देखा जाये तो इस सब का कारन मए hi हु.
रूद्र - ये आप क्या कह रहे है?
पण - मए सच कह रहा हु.
रूद्र – नहीं कृपया अपने शब्द वापस ले लीजिये वार्ना कही ऐसा न हो के मए अपना संयम खो कर कोई गलती कर बैठु मुझ पर किसी सिद्ध पुरुष की हत्या का कलंक न लग जाये.
पण – ये संभव है hi नहीं रूद्र. इसीलिए मैने कहा के पहले मेरी पूरी बात को सुन लो. फिर जो चाहो कर लेना किन्तु उससे पहले नहीं.
रूद्र – ठीक है बाबा आप कहिये मए सुनुँगा.
पण – ये सब बहोत पहले शुरू हुआ मेरे मन की लालच की वजह से तिलिस्म नगरी के सिंघासन की लालच किन्तु मुझे अपना सपना पूरा करने का कोई जरिया नहीं मिल रहा था फिर एक दिन मुझे एक मन्त्रिक मिला और मए जा कर उसे मिला…………………………………..
पण उसे पूरी बात बता देता है. जिसे सुन कर रूद्र एक बार फिर जोर जोर से रोने लगता है.
रूद्र - अब आप मुझसे क्या चाहते है?
पण - मुझे मेरे गुरु का आदेश है बस वही तुम्हे बताने आया हु. लेकिन उससे पहले मए तुम दोनों से कुछ जानना चाहता हु.
रूद्र - पूछिए
पण – तुमने कहा था के तुम दोनों अपना गृहस्थ जीवन तभी शुरू करोगे जब देव और पूनम का शुरू होगा. तो अब वो इस संसार में है hi नहीं क्या अब तुम अपना गृहस्थ जीवन शुरू करना चाहोगे?
रूद्र – babaaaaaaaaaaaaaa…………..
……………ये बात यदि किसी और ने कही होती तो वो दूसरी सांस लेने के लिए जीवित नहीं रहता. मेरा देव मारा नहीं है. वो लौट के आएगा. वो खुद भी कह कर गया है. और अभी आपने hi कहा के आप उसे ढूंढकर अपने पास रखेंगे और सही वक़्त पर उसे यहाँ लाएंगे तो वो मारा कैसे है? है वो हम सब से दूर जरूर चला गया है. इसलिए ये तो संभव hi नहीं के बिना उस के मए सिर्फ अपने विषय में या अपनी खुशियों के विषय में सोच भी लू. मए अपनी प्रतिज्ञा जरूर पूरी करुगा. उस के बिना मए विवाह नहीं करुगा . और अगर इस इंतजार में मए मर भी जाऊ तो मुझे परवाह नहीं.
पण – नीलम तुम्हरा क्या विचार है. रूद्र तो विवाह देव के बिना करेगा नहीं. तो क्या तुम किसी और से विवाह कर के अपना जीवन बिताना चाहती हो?
नीलम एक फीकी सी मुस्कान दे कर - बाबा मेरा विवाह तो रूद्र से उसी दिन हो गया था जिस दिन मए पहली बार इससे भोलेनाथ के मंदिर में मिली. हमारा रिश्ता भोलेनाथ के मंदिर में तय हुआ था. अब किसी और से विवाह का सोचना भी मेरे लिए संभव नहीं . मए हमेशा रूद्र की hi रहूगी चाहे हमारा तन मिले या न मिले मुझे भी कोई परवाह नहीं चाहे मुझे कितना भी इंतजार करना पड़े मए करुँगी.
पण – जीते रहो मेरे बच्चो. मुझे तुम दोनों से यही उम्मीद थी.
………. अब सुनो रूद्र. जब देव यहाँ आएगा. तब तक यु तो वो खुद बेहद शक्तिशाली हो चूका होगा. लेकिन फिर भी एक चीज़ है जो उसे तुम दोनों hi दे सकते हो क्यों की यदि देव वो चीज़ पाना चाहे तो उसे दुगना समय लग जायेगा .
रूद्र – नहीं बाबा हम नहीं चाहेंगे के देव को समय ज्यादा लगे पहले hi आपने कहा के उसे बहोत समय लगने वाला है. फिर किसी और चीज़ को पाने के लिए उतना hi समय और लगेगा तो ये उचित नहीं. मुझे बताइये मए उसे जल्दी लेन के लिए क्या कर सकता हु.
पण – वही जो अब तक तुम दोनों दोस्त करते आये एक दूजे की सहायता. जैसे दुश्मन अधिक होने पे तुम दोनों आधे आधे बात लेते थे और उन्हें निपटा देते थे. ठीक वैसे hi इस समय चक्र को भी तुम उस के साथ बात सकते हो यदि उस के हिस्से का आधा काम तुम कर दो तो उसे समय आधा लगेगा. हो सकता है जब तुम उस चीज़ तक पहुँचो तब तक देव भी आ जाये और फिर तुम्हे वही आ कर मदद करेगा उसे पाने में.
रूद्र – बाबा खुल कर बताइये आप कहना क्या चाहते है?
पण – तुम्हे और नीलम को भी वही तपस्या करनी होगी जो मए करुगा , जो देव और पूनम करेंगे. मेरी तपस्या से मए तुम सब की मदद करुगा, देव अपने तप से शक्तिया हासिल करेगा, पूनम अपने तप से खुद को तिलिस्मी शक्तिया और देव की शक्तिया सँभालने के लिए मजबूत करेगी, तुम और नीलम अपने तप से इच्छाधारी बनोगे और फिर सही वक़्त आने पर देव और पूनम के साथ मिल कर उस स्वर्ण मणि को हासिल करोगे. जिसकी सहायता से तुम भविष्य में आने वाले अपने दुश्मनो का नाश भी कर पाओगे और उस मन्त्रिक से बदला भी ले पाओगे क्यों की वो अब तक जिन्दा है और इस वक़्त वो भी अपनी शक्तिया हासिल करने के लिए तपस्या कर रहा है. यदि वो सफल हुआ तो उस मणि को हासिल कर के न सिर्फ वो अमर हो जायेगा बल्कि इस बार वो देव को हमेशा हमेशा के लिए समाप्त कर देगा.
रूद्र – उस मन्त्रिक को तो मए मरुँगा बाबा उसे कुचल के रख दुगा जिसने इस बार मेरे देव की जान ली मुझे मेरे देव से जुड़ा किया. मए तैयार हु बाबा.
पण – उसके लिए तुम्हे और नीलम को भी अपना शरीर त्यागना पड़ेगा, क्यों की जो सिद्धि देव, पूनम, और वो मन्त्रिक हासिल करेंगे वो शरीर के साथ पाना मुमकिन hi नहीं.
रूद्र - बस इतनी सी बात? अपने देव के लिए मए ख़ुशी ख़ुशी अपने प्राण त्याग सकता हु ये शरीर छोड़ सकता हु.
फब - तुम दोनों क्यों की अपनी मर्जी से शरीर छोड़ोगे इसीलिए मए तुम दोनों के शरीर सुरक्षित रखुगा जब तुम्हारी तपस्या सम्पूर्ण होगी तुम दोनों को अपने अपने शरीर में वापस भेज दुगा. इससे तुम दोनों की आयु भी यही से शुरू होगी और तुम दोनों के जिस्म भी बूढ़े नहीं होंगे., लेकिन एक बात का ध्यान रखना रूद्र तुम्हे और नीलम को हमेशा साथ रहना है तुम दोनों hi इच्छाधारी नाग नागिन बन जाओगे तब तुम कही भी जा सकोगे किसी का भी रूप ले सकोगे, तुम से बड़ा शक्तिशाली नाग या नागिन पूरे संसार में कोई नहीं होगा, तुम जो इच्छा करोगे वो पूरी होगी. लेकिन जब तक तुम दोनों का विवाह न हो जाये तुम दोनों का मिलान नहीं हो पायेगा . और यदि तुम्हारा मिलान हो गया. तो तुम्हारे सम्भोग करते hi. तुम दोनों फिर से साधारण नाग नागिन बन जाओगे और इस नाग लोक में वापस आ जाओगे. तुम दोनों की साडी म्हणत विफल हो जाएगी. है किन्तु यदि तुम चाहो तो किसी अन्य स्त्री के साथ सम्भोग कर सकते हो. नीलम के आलावा.
रूद्र – ऐसा नहीं होगा बाबा. मेरा विवाह देव के बिना नहीं होगा और विवाह से पहले नीलम के साथ या किसी अन्य के साथ मेरा सम्बन्ध भी नहीं होगा.
पण - ठीक है अब तुम दोनों किसी गुप्त स्थान पे चले जाओ और अपनी तपस्या इसी वक़्त से शुरू कर दो. साधना में बैठत hi तुम्हरे प्राण इस शरीर से निकल जायेगे और मए ये शरीर सुरक्षित कर दुगा. ईश्वर तुम्हे सफल बनाये.
प्रेजेंट टाइम………………
उस के बाअद रूद्र और नीलम भी अपनी तपस्या में लीं हो गए. सब कोई अपनी अपनी जगह पे जैम गया था. और खामोशी से सब भविष्य में होने वाले महासंग्राम की तैयारियों में जुट गए थे. वो वक़्त और जगह कौन सी होगी कोई नहीं जनता था पर सब अपनी अपनी तरफ से तैयारियों में जुट गए थे. उस युद्ध के लिए जो अभी क्षितिज के उस पार था.
देव – बाबा इतनी देर में आपने ये पहली अच्छी खबर सुनाई है. बस इतना और बता दे के मेरा दोस्त मेरा भाई कहा है . आँखे तरस गयी है उसे देखने के लिए.
पण – जैसे के मइँ बताया के नीलम और रूद्र भी तपस्या में लीं हो गए थे. तो अब उनकी भी तपस्या पूरी हो चुकी है और वो दोनों ह इच्छाधारी नाग नागिन बन चुके है. उन्होंने सच में अपना वादा निभाया है देव, इतने वर्षो तक अपनी मंगेतर के साथ अकेले बिताने के बावजूद रूद्र ने कभी अपनी सीमा पार नहीं की. उसी वजह से आज न सिर्फ रूद्र बल्कि नीलम भी सोनो hi बेहद शक्तिशाली बन चुके है. वो तुम्हारे गाँव के बहोत नजदीक पहुंच चुके है. लेकिन तुम उसे अभी मत मिलना क्यों की उस मन्त्रिक जो अब एक अघोरी बन चूका है. उस की नजर स्वर्ण मणि को हासिल करने के लिए hi नीलम पे लगी हुई है. वो रूद्र को पकड़ कर मरना चाहता है और नीलम के साथ सम्भोग कर के स्वर्ण मणि हासिल करना चाहता है. क्यों की यदि उस अघोरी ने नीलम के साथ प्रथम सम्भोग कर लिया तो उसे बिना किसी म्हणत के रूद्र से भी बड़ी शक्तिया हासिल हॉप जाएगी जो के इस वक़्त नीलम की है.
देव क्रोध में – कहा है वो अघोरी बाबा?
फब – आवेश में मत आओ पुत्र अब हर कदम सोच समझ के रखना है तुम्हे. जब तक रूद्र तुम्हारे गाँव नहीं पहुंच जाता तब तक तुम्हे भी उसके पास नहीं जाना है वार्ना उस अघोरी को पता चल जायेगा के तुम आ गए हो. …………
देव – तो उससे क्या फरक पद जायेगा बाबा
फब - उसे ये पता चलते hi वो रूद्र और नीलम को ख़तम कर देगा और तुम्हे भी फिर स्वर्ण मणि हासिल नहीं होगी. जिसकी सहायता से उस दुष्ट अघोरी का नाश संभव है.
देवा – लेकिन बाबा कही वो रूद्र को कुछ कर न दे.
फब – रूद्र तो पहले से एक महँ योद्धा है और अब तो सेकड़ो सालो की तपस्या से और भी शक्तिशाली हो चूका है. और ये मत भूलो की उस के साथ नीलम भी है. उसका अहित इतना आसान नहीं, उसे मरना इतना आसान नहीं होगा अघोरी के लिए इससे वो स्वर्ण मणि खो सकता है. इसीलिए वो भी इसी इंतजार में है जब रूद्र तुम्हरे गाँव के जंगल के करीब आये तो वो उसे ख़तम कर सके.
देव – ऐसा नहीं होगा बाबा अब तो ऐसा बिलकुल नहीं होगा. “बिकॉज़ ी ऍम बैक बहनचोद.”
सभी एक साथ - क्या?????????
देव – k..k..k..kuch नहीं मए ये कह रहा था मए ऐसा होने नहीं दुगा.
मन में … अबे क्या बोल दिया साला ये इंग्लिश कहा से निकल गयी मेरे मुँह से वो भी तिलिस्म लोक में.
इधर रूद्र और नीलम अपनी मस्ती में आराम से चले जा रहे थे उन्हें जल्दी पहुंचना भी नहीं था क्यों के जिस समय उन्हें उस जंगल में जाना था वो समय अभी दूर था.
रूद्र – क्या नीलम थक तो नहीं गयी हो?
नीलम – नहीं रूद्र हम थके नहीं है. लेकिन हमें यहाँ जाना है ये तुम्हे कैसे पता चला?
रूद्र – नीलम जब हम लोग तपस्या में लीं थे तब पण मेरे पास आये थे और उन्होंने मेरी आत्मा को मेर शरीर में वापस दाल दिया और फिर……………
पण - रूद्र …………… उठो पुत्र तुम्हरी साधना आज पूरी हुई
रूद्र धीरे से आँख खोल कर देखता है.
रूद्र – प्रणाम बाबा
पण – आयुष्मान भाव पुत्र. आज मए फिर तुम्हारे पास अपने गुरु की आज्ञा से आया हु वत्स
रूद्र - बाबा क्षमा चाहता हु किन्तु आप पहले मेरी उत्सुकता को शांत कीजिये.
पण मुस्कराते हुए – अच्छा ठीक है पूछ?
रूद्र - बाबा मेरा देव कहा है, पूनम कहा है?
पण – वो भी अपनी तपस्या पूरी कर चुके है और उन्होंने तो कई साल पहले पुनर्जन्म भी ले लिया है.
रूद्र – सच बाबा अभी कहा है वो? क्या वो नाग लोक में है ? क्या मए उनसे मिल सकता हु?
पण – नहीं पुत्र अभी वो वक़्त नहीं आया किन्तु जल्द hi वो वक़्त आएगा जब तुम और देव फिर से मिल जाओगे किन्तु……
रूद्र – किन्तु क्या बाबा?
उससे पहले तुम्हे एक कार्य करना है
रूद्र – आदेश दे बाबा
पण – तुम्हारी और नीलम की तपस्या का समय पूरा हो चूका है और तुम दोनों पूरी तरह से इच्छाधारी बन चुके हो. और तुम दोनों के अंदर इतनी शक्तिया आ चुकी है के तुम हर बुरी ताक़त का सामने कर सकते हो.
रूद्र – ये सब आपकी कृपा है बाबा
पण - अब ज्यादा वक़्त नहीं बचा है. तुम दोनों तुरंत hi पृथ्वी लोक में चन्दन पुर नमक जगह जाओ वह से पैदल hi तुम्हे सूर्यगढ़ के जंगल में जाना है और वही जाकर तुम्हे आगे का मार्ग मिलेगा और संभवतः तुम्हारी मुकत देव और पूनम से भी होगी. फिर तुम सब को एक साथ तिलिस्म लोक आना होगा. पहले इतना रास्ता पार कर लो फिर आगे की बाते हम तिलिस्म नगरी में करेंगे. किन्तु इसमें बहोत खतरा है. सावधानी बेहद जरूरी है. इसलिए तुम्हे और नीलम को जंगल में पहुंचने तक सावधान रहना होगा, तुम दोनों अपनी किसी भी शक्ति का उपयोग उस जंगल को पार करने से पहले नहीं करोगे न अपनी सुविधा के लिए न hi किसी लड़ाई झगडे के लिए और ध्यान रहे तुम्हे उस जंगल में उस दिन पहुंचना है जिस दिन पूनम की रात हो उससे पहले नहीं जब तुम जंगल तक पहुंचोगे तो आगे का मार्ग स्वयं hi मिलता चला जायेगा. और वो जो मैने खुद पर संयम रखने की बात कही थी उसे अवश्य याद रखना. क्यों के अब तक तुम और नीलम बिना शरीर के थे अब तुम्हे तुम्हारा शरीर वापस मिल गया है और अभी तक तुम दोनों का विवाह नहीं हुआ तो विवाह तक खुद पर संयम रखना. मए भी नहीं चाहता कुछ क्षण की ख़ुशी के बहकावे में आकर तुम अपनी इतनी बड़ी और सालो की म्हणत पर पानी फेर लो.
रूद्र – जी बाबा मए ध्यान रखुगा, बाबा मए देव से कब मिलुंगा?
पण – ईष्वर बेहतर जानते है पुत्र क्या पता इसी सफर में तुम्हे देव मिल जाये. या ये भी हो सकता है के सफर की समाप्ति पे hi मिले. उस ईश्वर की माया किसी को नहीं पता होती. मैने नीलम की आत्मा भी उसके शरीर में दाल दी है उसे उठाओ वो जाग जाएगी. अब तुम दोनों प्रस्थान करो.
प्रेजेंट टाइम...........
रूद्र - बस फिर मैने तुम्हे भी साधना से जगाया और हम यहाँ के लिए निकल पड़े लेकिन. बाबा ने पहुंचने का समय भी निश्चित बताया है वार्ना हम तुरंत वह पहुंच जाते और ये भी कहा के पैदल जाना है अपनी किसी शक्ति का भी उपयोग नहीं करना है रस्ते में, न अपनी सुविधा के लिए न hi किसी लड़ाई झगडे के लिए. सबसे बड़ी बात तुम्हारे साथ रहते हुए दूर रहना है अब देखो इस कातिल जवानी से मए खुद को कैसे बचाओ जी तो चाहता है तुम्हे अभी यही लिटा के ........
नीलम - ा........ ये मुझे अपने नीचे लिटाने का सोचना भी नहीं वार्ना भूलो मत देव भैया मिलने hi वाले है आपने मुझे लिटाया तो देव भैया आपको खड़े रहने लायक नहीं छोड़ेगे अब छोडो ये लेटने लिटाने की बात और आप चिंता क्यों करते है ? हम बिना कोई दिव्या शक्ति इस्तेमाल किये भी सब पे भरी पड़ेगे . लेकिन भगवन न करे की कोई ऐसा मौका अभी आये.
रूद्र – है सही कहा चलो देखते है आगे क्या होता है. उफ़ तेरी ये जवानी मुझे तो भोलेनाथ hi बचाये अब .......