- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 132,868
अपडेट 54
अब तक आपने पढ़ा की कैसे में साक्षी के साथ कुछ हसीं पल बिताने के बाद जब फिर एक बार से मेरे दिल और दिमाग में जुंग चीड़ गयी तोह में उस दलीलों की जुंग के बिच पइसे जा रहा था तब साक्षी ने मेरे चेहरे से मेरे हाव भाव को पढ़ के इस जुंग का अंत कर दिया फिर में उससे विदा लेके अपने खेतों की तरफ चल पड़ा जब में खेत की तरफ जा hi रहा था की तभी मुझे ऐसा आभास होने लगा की कोई मेरा पीछा कर रहा है जब भी में पीछे मुड़ता वह कही कबप जाता लेकिन कोई था तोह जरूर इसी का पता लगा ने के लिए मेने स्लो मोड एक्टिव कर के में उसे ढूंढने लगा लेकिन मुझे कोई दिखा नहीं तोह में इसे अपना भरम मान के hi आगे बढ़ गया और स्लो मोड को भी डीएक्टिवेट कर दिया लेकिन इतनी चालाकी दिखा के भी कुछ फायदा नहीं हुआ मेरे सामने से आती गाड़ी ने मुझे उन लोगों के बारे में बता दिया मीन्स गाड़ी के फ्रंट मिरर में मुझे उनका अक्ष दिखाई देने लगा जो की केवल कुछ सेकंड के लिए था लेकिन मेरे लिए वह भी काफी था इन्हे देखने से hi ये कही के गुंडे लग रहे थे अब जब की मुझे इनकी पोजीशन पता थी तोह अब में भी तैयार था मुकाबले के लिए अभी में चलते चलते एक सुनसान रस्ते पे आ गया जहा मेरे और उन लोगों के अलावा कोई नहीं था ऐसा उन गुंडों को लग रहा था लेकिन ऐसा नहीं था जैसे hi उन गुंडों ने मुझे घेरना शुरू किया मेने तुरंत चीला दिया
में :- बहार निकलो
में जैसे hi चिलाय वैसे hi मेरे बोडीगार्ड्स जिनको दादाजी ने मेरी सुरक्षा के लिए मेरे पीछे लगाया था वह बहार आ गए और उन गुंडों को hi घेरने लगे इस अचानक हुए हमले को वह गुंडे समझ पते उससे पहले hi मेरे बोडीगार्ड्स ने उन्हें पूरी तरह घेर लिया
में :- भून डालो इनको
मेरे बोलगे hi बिना आगे पीछे का विचार किये सरे बोडीगार्ड्स ने अपने बंदूकों के मुँह खोल दिए बस फिर क्या वह जितने भी गुंडे थे वह कुछ समझ पते उससे पहले hi उन को गोलियों से भून दिया गया फिर में बोडीगार्ड्स के सामने जेक
में :- ये सब साफ़ करो और अगर किसी ने भी इसकी चुगली घर पे की तोह उसका क्या होगा वह खुद सोच ले
अभी में बोल hi रहा था की तभी उन लाशों में से एक का फ़ोन बजने लगा
मेने जब फ़ोन उठाया तोह सामने से आवाज आयी
सामने से :- क्या हुआ वह लड़का पकड़ा गया न उसे पकड़ के लेके आओ जल्दी फिर उसके परिवार को बताऊंगा की में क्या हु
में :- (डाट पिस्टे हुए) ी ऍम कमिंग सून
ये बोल में वह फ़ोन जमीं पे पटक देता हु और फिर सरे गार्ड्स की तरफ देखता हु
मेरा इशारा मिलते hi सरे गार्ड्स उन सबकी बॉडी को उठके खेतों में फेकने लगे
फिर में भी निकल पड़ा अपने खेत की तरफ
वही खेतों में आज खुद दीदी मेरा खाना लेकर आयी थी जब में खेत में पंहुचा तोह दीदी की स्कूटी देख में समझ गया की दीदी आयी है तोह कुछ न कुछ करेगी hi जब मेने आस पास नज़र दौड़ाई तोह डैड ने जिन बोडीगार्ड्स को दीदी के पीछे भेजा था वह लोग भी मुझे दिख गए
खेत हमारे घर से ज्यादा दूर नहीं थे इसीलिए में और दीदी कई बार खेत में आते थे इसीलिए हमे हमारे hi गांव के अंदर घूमने के लिए कोई भी बोडीगार्ड्स की जरुरत नहीं थी फिर भी डैड और दादाजी हिडन गार्ड्स को हमारे पीछे भेज देते थे
जब में खेत वाले घर में पंहुचा तोह मेरे पेअर वही रुक गए
दीदी खत पे पेट के बल लटके जमीं पे कुछ बना रही थी जिस वजह से उनकी चूचियां अलग hi उठ के दिख रही थी जैसे वह बहार आने के लिए बिलकुल तैयार हो अगर दीदी जरा भी हिली तोह वह दोनों तुरंत बहार आ जायेंगे
में दरवाजे के पास खड़ा इस दृश्य को निहारे hi जा रहा था की तभी मेरे कानो में दीदी की आवाज आ गयी
जब मेने दीदी के तरफ देखा तोह वह अभी भी वैसे hi लेती हुई मुझे hi देख रही थी और मंद मंद मुस्कुरा भी रही थी
दीदी (मुझे देखते हुए) :- भाई क्या देख रहा है खाना नहीं खाना क्या
में दीदी के अचानक बोलने से जहा हड़बड़ा गया और अनादर चला आया और घर में hi दूसरे कोने में डाली हुई खत पर बैठे बैठे हिसाब किताब देख रहा था (वैसे तोह मुझे चेतन पे पूरा भरोसा था लेकिन फिर भी एक बार चेक कर रहा था) हिसाब देखते देखते देखते जब मेरी नज़र दीदी पे पड़ी तोह हिसाब को साइड में रख के में दीदी की उछलती हुई चूचियों को देख देख कर अनादित हो रहा था
दीदी को भी पता था की उसका भाई क्या देख रहा है वो भी बार बार झुक कर मुझ को अपनी चूचियों के दर्शन करवा रही थी
जिसका असर सीधा मेरे लोअर के अंदर हो रहा था में अभी अपने एक हाथ से अपने विशाल लुंड को दबा कर बैठा हुआ था जो की साक्षी के वजह से पहले hi खड़ा था में अभी में हिसाब साइड में रखने के बाद हाथ मुँह धो कर दीदी के पास आ गया
में :- लाओ दीदी देदो खाना
दीदी जल्दी से झोपडी में से बर्तन लती है और मुझ को वही खत के पास खाना परोस देती है
में भी वही निचे बैठ कर खाना खाने लगता हु
दीदी :- क्या बात है आज कल बड़ी म्हणत कर रहा है तू
में :- दीदी म्हणत करेंगे तभी तो अच्छी फसल होगी न
दीदी :- पर भाई तुझे मेहनत करने की क्या जरुरत है तू इस सब का मालिक है तुझे तोह आराम करना चाहिए
में :- वही तोह इन सब का में मालिक हु अगर में hi ध्यान न दू तोह कैसे होगा और वैसे भी में अपने hi खेतों में मेहनत करता हु किसी और के नहीं
दीदी :- तुझसे बातों में कोई नहीं जीत सकता
दीदी भले hi बात मुझसे कर रही थी लेकिन उनकी नजरे मेरे लोअर पर तिकी हुई थी अब वो मुझ को उकसाना कहती थी उन्हें पता था की में भी अब उनकी तरफ अट्रैक्शन फील करने लगा हु बस दीदी को थोड़ी सी म्हणत करनी पड़ेगी और उनका भाई पूरी तरह से उनका हो जायेगा उसी के बारे में सोचते हुए अचानक दीदी जो अबतक बैठी हुई थी अब उल्टा होकर छाती के बल लेत जाती है अपना मुँह मेरी तरफ कर देती है
जिस वजह से उनकी की भरी भरकम चूचिया आधे से ज्यादा टॉप के बहार आ जाती है
दीदी :- भाई मेरी जमीं कब जोतेगा तू
में अच्चानक से दीदी की बात सुनकर उनकी तरफ नजर करता हु और दीदी को देखने लगता हु जिससे मेरा मुँह खुला का खुला रह जाता है
असल में दीदी इतनी उत्तेजित थी की वो अपने कुर्ते का एक बोटों भी खोल चुकी थी जिस कारन उसकी आधे से ज्यादा चूचिया मेरे सामने नंगी थी
जिसका सीधा असर सीधा मेरे लुंड पर होने लगता है
दीदी मेरी और देखती है तोह मुझे खुद की और देखता प् के शर्मा जाती है और समझ जाती है की उनका भाई उनके जाल में फसना शुरू हो गया है
दीदी अपना दुपट्टा उठती है और अपनी दोनों चुकियो के बिच बानी घाटी में दाल कर पसीना पोछने लगती है ये दृश्य देख के मेटः जैसे काबू से बहार hi जा रहा था की तभी दीदी बोल पड़ी
दीदी :- चल भाई जल्दी कर हमे घर भी जाना है
में (हड़बड़ा के) :- क्क्क्य दीदी
दीदी :- अरे खाना जल्दी ख़तम कर नहीं तोह देर हो जाएगी
फिर में जल्दी से खाना ख़तम करके हाथ धो लेता हु और फिर दीदी के साथ hi घर चल पड़ता हु
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आज के लिए इतना hi
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब तक आपने पढ़ा की कैसे में साक्षी के साथ कुछ हसीं पल बिताने के बाद जब फिर एक बार से मेरे दिल और दिमाग में जुंग चीड़ गयी तोह में उस दलीलों की जुंग के बिच पइसे जा रहा था तब साक्षी ने मेरे चेहरे से मेरे हाव भाव को पढ़ के इस जुंग का अंत कर दिया फिर में उससे विदा लेके अपने खेतों की तरफ चल पड़ा जब में खेत की तरफ जा hi रहा था की तभी मुझे ऐसा आभास होने लगा की कोई मेरा पीछा कर रहा है जब भी में पीछे मुड़ता वह कही कबप जाता लेकिन कोई था तोह जरूर इसी का पता लगा ने के लिए मेने स्लो मोड एक्टिव कर के में उसे ढूंढने लगा लेकिन मुझे कोई दिखा नहीं तोह में इसे अपना भरम मान के hi आगे बढ़ गया और स्लो मोड को भी डीएक्टिवेट कर दिया लेकिन इतनी चालाकी दिखा के भी कुछ फायदा नहीं हुआ मेरे सामने से आती गाड़ी ने मुझे उन लोगों के बारे में बता दिया मीन्स गाड़ी के फ्रंट मिरर में मुझे उनका अक्ष दिखाई देने लगा जो की केवल कुछ सेकंड के लिए था लेकिन मेरे लिए वह भी काफी था इन्हे देखने से hi ये कही के गुंडे लग रहे थे अब जब की मुझे इनकी पोजीशन पता थी तोह अब में भी तैयार था मुकाबले के लिए अभी में चलते चलते एक सुनसान रस्ते पे आ गया जहा मेरे और उन लोगों के अलावा कोई नहीं था ऐसा उन गुंडों को लग रहा था लेकिन ऐसा नहीं था जैसे hi उन गुंडों ने मुझे घेरना शुरू किया मेने तुरंत चीला दिया
में :- बहार निकलो
में जैसे hi चिलाय वैसे hi मेरे बोडीगार्ड्स जिनको दादाजी ने मेरी सुरक्षा के लिए मेरे पीछे लगाया था वह बहार आ गए और उन गुंडों को hi घेरने लगे इस अचानक हुए हमले को वह गुंडे समझ पते उससे पहले hi मेरे बोडीगार्ड्स ने उन्हें पूरी तरह घेर लिया
में :- भून डालो इनको
मेरे बोलगे hi बिना आगे पीछे का विचार किये सरे बोडीगार्ड्स ने अपने बंदूकों के मुँह खोल दिए बस फिर क्या वह जितने भी गुंडे थे वह कुछ समझ पते उससे पहले hi उन को गोलियों से भून दिया गया फिर में बोडीगार्ड्स के सामने जेक
में :- ये सब साफ़ करो और अगर किसी ने भी इसकी चुगली घर पे की तोह उसका क्या होगा वह खुद सोच ले
अभी में बोल hi रहा था की तभी उन लाशों में से एक का फ़ोन बजने लगा
मेने जब फ़ोन उठाया तोह सामने से आवाज आयी
सामने से :- क्या हुआ वह लड़का पकड़ा गया न उसे पकड़ के लेके आओ जल्दी फिर उसके परिवार को बताऊंगा की में क्या हु
में :- (डाट पिस्टे हुए) ी ऍम कमिंग सून
ये बोल में वह फ़ोन जमीं पे पटक देता हु और फिर सरे गार्ड्स की तरफ देखता हु
मेरा इशारा मिलते hi सरे गार्ड्स उन सबकी बॉडी को उठके खेतों में फेकने लगे
फिर में भी निकल पड़ा अपने खेत की तरफ
वही खेतों में आज खुद दीदी मेरा खाना लेकर आयी थी जब में खेत में पंहुचा तोह दीदी की स्कूटी देख में समझ गया की दीदी आयी है तोह कुछ न कुछ करेगी hi जब मेने आस पास नज़र दौड़ाई तोह डैड ने जिन बोडीगार्ड्स को दीदी के पीछे भेजा था वह लोग भी मुझे दिख गए
खेत हमारे घर से ज्यादा दूर नहीं थे इसीलिए में और दीदी कई बार खेत में आते थे इसीलिए हमे हमारे hi गांव के अंदर घूमने के लिए कोई भी बोडीगार्ड्स की जरुरत नहीं थी फिर भी डैड और दादाजी हिडन गार्ड्स को हमारे पीछे भेज देते थे
जब में खेत वाले घर में पंहुचा तोह मेरे पेअर वही रुक गए
दीदी खत पे पेट के बल लटके जमीं पे कुछ बना रही थी जिस वजह से उनकी चूचियां अलग hi उठ के दिख रही थी जैसे वह बहार आने के लिए बिलकुल तैयार हो अगर दीदी जरा भी हिली तोह वह दोनों तुरंत बहार आ जायेंगे
में दरवाजे के पास खड़ा इस दृश्य को निहारे hi जा रहा था की तभी मेरे कानो में दीदी की आवाज आ गयी
जब मेने दीदी के तरफ देखा तोह वह अभी भी वैसे hi लेती हुई मुझे hi देख रही थी और मंद मंद मुस्कुरा भी रही थी
दीदी (मुझे देखते हुए) :- भाई क्या देख रहा है खाना नहीं खाना क्या
में दीदी के अचानक बोलने से जहा हड़बड़ा गया और अनादर चला आया और घर में hi दूसरे कोने में डाली हुई खत पर बैठे बैठे हिसाब किताब देख रहा था (वैसे तोह मुझे चेतन पे पूरा भरोसा था लेकिन फिर भी एक बार चेक कर रहा था) हिसाब देखते देखते देखते जब मेरी नज़र दीदी पे पड़ी तोह हिसाब को साइड में रख के में दीदी की उछलती हुई चूचियों को देख देख कर अनादित हो रहा था
दीदी को भी पता था की उसका भाई क्या देख रहा है वो भी बार बार झुक कर मुझ को अपनी चूचियों के दर्शन करवा रही थी
जिसका असर सीधा मेरे लोअर के अंदर हो रहा था में अभी अपने एक हाथ से अपने विशाल लुंड को दबा कर बैठा हुआ था जो की साक्षी के वजह से पहले hi खड़ा था में अभी में हिसाब साइड में रखने के बाद हाथ मुँह धो कर दीदी के पास आ गया
में :- लाओ दीदी देदो खाना
दीदी जल्दी से झोपडी में से बर्तन लती है और मुझ को वही खत के पास खाना परोस देती है
में भी वही निचे बैठ कर खाना खाने लगता हु
दीदी :- क्या बात है आज कल बड़ी म्हणत कर रहा है तू
में :- दीदी म्हणत करेंगे तभी तो अच्छी फसल होगी न
दीदी :- पर भाई तुझे मेहनत करने की क्या जरुरत है तू इस सब का मालिक है तुझे तोह आराम करना चाहिए
में :- वही तोह इन सब का में मालिक हु अगर में hi ध्यान न दू तोह कैसे होगा और वैसे भी में अपने hi खेतों में मेहनत करता हु किसी और के नहीं
दीदी :- तुझसे बातों में कोई नहीं जीत सकता
दीदी भले hi बात मुझसे कर रही थी लेकिन उनकी नजरे मेरे लोअर पर तिकी हुई थी अब वो मुझ को उकसाना कहती थी उन्हें पता था की में भी अब उनकी तरफ अट्रैक्शन फील करने लगा हु बस दीदी को थोड़ी सी म्हणत करनी पड़ेगी और उनका भाई पूरी तरह से उनका हो जायेगा उसी के बारे में सोचते हुए अचानक दीदी जो अबतक बैठी हुई थी अब उल्टा होकर छाती के बल लेत जाती है अपना मुँह मेरी तरफ कर देती है
जिस वजह से उनकी की भरी भरकम चूचिया आधे से ज्यादा टॉप के बहार आ जाती है
दीदी :- भाई मेरी जमीं कब जोतेगा तू
में अच्चानक से दीदी की बात सुनकर उनकी तरफ नजर करता हु और दीदी को देखने लगता हु जिससे मेरा मुँह खुला का खुला रह जाता है
असल में दीदी इतनी उत्तेजित थी की वो अपने कुर्ते का एक बोटों भी खोल चुकी थी जिस कारन उसकी आधे से ज्यादा चूचिया मेरे सामने नंगी थी
जिसका सीधा असर सीधा मेरे लुंड पर होने लगता है
दीदी मेरी और देखती है तोह मुझे खुद की और देखता प् के शर्मा जाती है और समझ जाती है की उनका भाई उनके जाल में फसना शुरू हो गया है
दीदी अपना दुपट्टा उठती है और अपनी दोनों चुकियो के बिच बानी घाटी में दाल कर पसीना पोछने लगती है ये दृश्य देख के मेटः जैसे काबू से बहार hi जा रहा था की तभी दीदी बोल पड़ी
दीदी :- चल भाई जल्दी कर हमे घर भी जाना है
में (हड़बड़ा के) :- क्क्क्य दीदी
दीदी :- अरे खाना जल्दी ख़तम कर नहीं तोह देर हो जाएगी
फिर में जल्दी से खाना ख़तम करके हाथ धो लेता हु और फिर दीदी के साथ hi घर चल पड़ता हु
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आज के लिए इतना hi
~~~~~~~~~~~~~~~~~~