Apne Pyaare rishte - Page 8 - SexBaba
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Apne Pyaare rishte

अपडेट 64

अब तक आपने देखा की कैसे राज ने सहर में जेक अपने परिवार पर हुम्ला करने वाले को डरा कर समझा दिया फिर उसके बाद शॉपिंग करने गए मॉल में उसने एक औरत के साथ बदतमीजी कर रहे गुंडों को भी ाचा सबक सिखाया लेकिन उसके बाद राज जब आस पास देखता है तोह उसे उस औरत का कही भी कोई भी सबूत नहीं मिलता की वह कोण थी या कहा गायब हुई खैर राज इस सब को अपने दिमाग से निकल के घर के लिए रवाना हो जाता है जहा पे वह सबके साथ खाना खाने लगता है जब सब का खाना हो जाता है तोह दादाजी ने डैड और काका को स्टडी रूम में बुला लिया जहा दादा जी के सवाल सुनके उन दोनों का मुँह खुला रह जाता है

अब आगे

दादाजी :- बोलो क्या हो रहा है पिछले कुछ दिनों में

डैड :- (हड़बड़ाते हुए) पिताजी वो

दादाजी :- धर्म मुझे सुच जानना है झूठ बोलने के बारे में सोचना भी मत

डैड :- लितजी गवर्नमेंट ने एक टेंडर निकला है जो की बहुत बड़ा है उस टेंडर के लिए लगभग साडी बड़ी कम्पनीज ने अपपल्य किया है जिनमे हमारी कंपनी भी है उसी टेंडर को पाने के लिए कुछ बिज़नेस रिवल्स मुझे धमकी दे रहे थे जो की बिज़नेस में नार्मल था लेकिन एक कंपनी है जिन्होंने न सिर्फ मुझे धमकी दी बल्कि मेरे परिवार पर जानलेवा हुम्ला भी कराया

भीमा काका :- उन्होंने 4 बार हुम्ला किया था 2 बार मेरे आदमियों ने उन्हें रोक लिया लेकिन फिर उन्होंने छोटे मालिक पर जानलेवा हुम्ला किया जिसके बाद उन हमलावरों का कोई भी नमो निशान नहीं मिला और 1 हुम्ला होने की संबबवना थी लेकिन वह हुआ hi नहीं

दादाजी :- और राज का यु अचानक सहर जाने के पीछे क्या कारण है

काका :- वह उसी से मिलने गए थे जिसने हुम्ला किया

फिर भीमा काका उन्हें सब बता देते है की कैसे मैंने प्लान करके उस आदमी को समझाया और इस मामले को ख़तम कर दिया

दादाजी :- मेरे नाक के निचे इतना सब हो रहा है और मुझे मालूम भी नहीं भीमा तुमने भी मुझसे ये बात छुपाई

काका :- माफ़ करना ठाकुर साहब लेकिन उस वक़्त घर में ख़ुशी का माहौल था जिसे ख़राब करना मेने सही नहीं समजा

दादाजी :- ठीक है अब तुम दोनों जा सकते हो और आज के बाद कोई भी बात अगर मुझसे छुपाई तोह में माफ़ नहीं करूँगा

डैड और काका :- जी

तोह वही में अपने कमरे में बैठ कर पिछले कुछ दिनों में जो भी हुआ उसके बारे में सोचने लगा की

में (मन में) :- कैसे मेने अपनी गलती के चलते अपने परिवार की जान खतरे में दाल दी थी मेने केवल अपने परिवार की जान बचने के लिए किसी और के परिवार की जान खतरे में दाल दी क्या में सच्ची में इन शक्तियों को डेसेर्वे करता हु या नहीं क्या में इतने सरे लोगों के प्यार और भरोसे के लायक हु या नहीं

यही सब सोचते हुए कब मेरे आखों से ासु निकल आये में भी नहीं जानता अभी में यही सब सोच रहा था की तभी मेरे दूर पे नॉक हुआ जब मैंने दूर खोल के देखा तोह वह दादाजी खड़े थे

में :- अरे दादाजी आप आइये न अंदर

दादाजी ने अंदर आके दरवाजा लॉक कर दिया और फिर मुझे लेके बीएड पर बैठ गए.

दादाजी :- क्या सोच रहे हो राज

में :- कुछ भी तोह नहीं

दादाजी :- देखो राज में जानता हु की अभी तुम आज के बारे में सोच कर hi उदास हो रहे तुम्हारे चेहरे पर दिख रहा है की तुम किसी बात को सोच कर बहुत ज्यादा उदास हो रहे थे

में :- नक़्ही दादाजी

दादाजी :- राज मुझसे झूट मत बोलो जो भी हो सब सच बोल के अपना मन हल्का कर दो

में :- (लम्बी सास लेके) कल जब में सुबह सोफे पे बैठा था तोह डैड के फ़ोन पे फ़ोन आया

फिर उसके बाद में दादाजी को सब बता ने लगा की कैसे मेने उन हमलवारों को जान से मारा (यहाँ मेने अपनी शक्तियों का जरा भी उल्लेख नहीं किया था मेने बस उन हमलवयरों के बारे में बताया था जिनको मेने बोडीगार्ड्स के जरिये मारा था)

उसके बाद जो आज सहर में मेने उस आदमी के परिवार की जान खतरे में डाली वह भी बताया

दादाजी :- हम्म ये बात है अब मेरे कुछ सवालों के जवाब दो क्या तुमने जिन हमलवयरों को मारा अगर तुम उन्हें न मारते तोह क्या होता

में :- हम्म सायद वह मुझ पर हमला कर देते और हो सकता है मेरी जान ले लेते

दादाजी :- उसके बाद क्या होता तुम्हारे मरने से सिर्फ घर में hi नहीं बल्कि पुरे शेर ग्रह में मातम च जाता जिसका फायदा उठके हुम्ला वॉर फिर से हुम्ला कर देता और उस वक़्त हम तैयार भी नहीं होते और शायद मरे जाते तुमने जिनको मारा वह आत्म रक्षा थी याद रखना जिंदगी का रास्ता मृत्यु से hi मिलता है वह भले तुम्हारी मृत्यु हो या तुम्हारे शत्रुओं की

और अब दूसरा सवाल क्या तुमने उस ट्रक ड्राइवर को उस औरत की जान लेने को कहा था

में ;- नहीं.

दादाजी :- क्या कहा था

में :- यही की ट्रक को उस औरत के बिलकुल सामने जेक रोकना और जैसे में उसे वह से हटा दू तोह ट्रक लेके चले जाना

दादाजी :- तोह तुमने उसकी जान खतरे में कैसे डाली तुमने बस एक ड्रामा किया जिसमे किसी को चोट नहीं लगी और नहीं तुम्हारे मन में ऐसा कोई विचार था सही कहा न

में :- जी

दादाजी :- तोह इन सब बातों को छोड़ो और आराम करो कुछ दिनों बाद घर में सरे कार्यक्रम शुरू हो जायेंगे तोह आराम करने का भी मौका नहीं मिलेगा

में :- जी

दादाजी के समझने से में भी थोड़ा रिलैक्स हो गया था लेकिन मेरे मन में फिर भी एक सवाल था

में :- और अगर कभी में hi गलत हु तोह

दादाजी :- मतलब

में :- अगर कभी मेरी गलती से मेरे किसी अपने की जान खतरे में आ जाये या में कभी कोई ऐसी गलती कर दू जिससे मेरे घर परिवार की या किसी मासूम की जिंदगी खतरे में पद जाये तोह

मेरा ये सवाल सुनके दादाजी गहरी सोच में पद गए जैसे मेरे कहे गए सवाल का जवाब hi सोच रहे हो

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 65



में :- अगर कभी मेरी भूल से मेरे किसी अपने की जान खतरे में आ जाये या में कभी कोई ऐसी गलती कर दू जिससे मेरे घर परिवार की या किसी मासूम की जिंदगी खतरे में पद जाये तोह

मेरा ये सवाल सुनके दादाजी गहरी सोच में पद गए जैसे मेरे कहे गए सवाल का जवाब hi सोच रहे हो

अब आगे

ददज्ज :- राज अगर कभी ऐसा हुआ तोह भी में तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा लेकिन सिर्फ तभी जब तुम गलती सुधारना चाहो तुम्हे अपनी भूल का एहसास हो सिर्फ तभी में तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा अगर तुम अपनी गलती को सुधरने के बजाये तुम उससे भागोगे उसके परिणाम स्वीकार ने के बजाये तुम बहाने बनाओगे तोह में कभी तुम्हारा साथ नहीं दूंगा ये भी सुन लो

में :- और अगर कोई ऐसी गलती हो जाये जो सुधरी न जाये तोह भी आप मुझे ऐसे hi प्यार करोगे

दादाजी :- दुनिया में ऐसी कोई गलती नहीं होती जो सुधर नहीं सकते जिस गलती को सुधरने का तरीका नहीं होता वह गलती नहीं गुनाह होता है और ये जो तुम्हारी उम्र है उसमे गलतिया होना स्वाभाविक है लेकिन उन गलतियों को सुधर कर उनसे सिख लेना ये भी तुम्हारा कर्त्तव्य है अगर गलतियों की वजह से तुम खुद के जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकते और तुमसे चाहे गलती हो या गुनाह जब तक तुम सही हो में तुम्हारे लिए किसी से भी लड़ लूंगा लेकिन अगर तुम गलत हो तोह मुझ से किसी भी तरह के मदद की उम्मीद मत करना बल्कि तुम्हारे खिलाफ आवाज उठाने वालों में मैं सबसे आगे रहूँगा लेकिन तुम्हारे लिए मेरा प्यार कभी भी किसी भी परिस्थितियों में काम नहीं होगा

इतना बोलके दादाजी भी कमरे से निकल गए और में वही बीएड पे बैठे बैठे दादाजी की कही बातों को सोचने लगता हु दादाजी के साथ बाटे करते गए कब 12 बज गए पता भी नहीं चला

दादाजी से बाते करके दल को थोड़ी रहत तोह मिली थी लेकिन मुझे अभी भी कुछ भी ाचा नहीं लग रहा था ऐसा लग रहा था की में किसी बोझ के टेल दबा जा रहा हु यही सब सोचते हुए मेरी आखे कब बंद हुई मुझे भी पता नहीं चला में बीएड पर बैठे बैठे hi सो गया

सुबह जब आँख खुली तोह में अभी भी बीएड पे वैसे hi बैठा था फिर में उठे फ्रेश हुआ और चाट पे चला गया और ध्यान लगाने बैठ गया न आज मुझे सप्त चक्रों पे काबू पाना था न hi कुछ जानना था आज मुझे केवल अपने मस्तिष्क को शांत करना था

में अभी ध्यान में बैठा hi था की मुझे अपने आस पास एक अजीब सी ठंडक महसूस होने लगी जो मेरे मस्तिष्क को अपने आप शांत कर रही थी जब मेने अपनी आखे खोली तोह में उसी जगह पे था जहा उस दिन गाइड लेके आया था जिस जगह को देख के hi मुझे दर लगने लगा की कही फिर से कुछ गड़बड़ न करदी हो मैंने

आज भी गाइड मेरे सामने hi बैठा था

में :- हम यहाँ क्या कर रहे है कही मेने फिर से कोई गड़बड़ तोह नहीं की….

ग :- शह्ह्ह्ह जो कर रहे हो वह करो अपने मस्तिष्क से साडी चिंता सरे विचार सरे भय निकल दो अपने सम्पूर्ण ऊर्जा को अपने मस्तिष्क के केंद्र पे एकत्रित करो

में जैसे गाइड ने बोलै वैसे hi करने लगा जिससे मेरे मन को भी एक अद्भुत शांति मिल रही थी जो आज तक कभी नहीं मिली थी में उसी अलौकिक शांति में कब खो गया मुझे भी ज्ञान न रहा जैसे जैसे शांति मुझे महसूस हो रही थी में उसमे और खोता जा रहा था

ऐसे hi कुछ देर बैठे रहने के बाद मुझे फिर से गाइड की आवाज सुनाई देने लगी

ग :- अपनी आखे खोलो राज

में मेने जब आखे खोली तोह मुझे कुछ पल को तोह अपनी आखों पर सूर्य का इतना तेज महसूस हुआ की मेरी आखे फिर बंद हो गयी फिर थोड़ी देर बाद जब मेने अपनी आखे खोली तोह मुझे अभी भी वह अलौकिक शांति महसूस हो रही थी

ग :- शाबाश राज अब तुम अपने दिमाग पर काबू पाना सिख लिया है अब आज से हम तुम्हारे सप्त चक्रों पे काबू पाने के सफर की शुरुवात करेंगे उसके लिए तैयार हो

में ;- जी पूरी तरह से

ग :- बहुत अचे पहले में तुम्हे बता दू की तुम्हे सप्त चक्रों पे काबू पाने से पहले अपने कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करना होगा

में :- वह क्यों

ग :- वह इसलिए की सप्त चक्र सबसे मुश्किल और शक्ति शाली विद्या है जो हर पड़ाव के साथ अपना और उसके साधक का स्टार बढाती जाएगी जीसे तुम्हारे अंदर ज्ञान और शक्ति का स्टार भी बढ़ता जायेगा और तुम्हारे पास अधूरा ज्ञान होने से वह शक्ति कब अहंकार में बदल जाये गई तुम्हे भी मालुम नहीं पड़ेगा इसी लिए तुम्हे सर्व प्रथम अपने कुण्डलिनी को जागृत करना होगा जो तुम्हे तुम्हारे गन अवगुण तुम्हारे बल तुम्हारी कमजोरी सबसे अलग कर के तुम्हे आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ देगी

में :- सुनने में तोह बहुत गुणकारी दिख रहा है

ग :- कुण्डलिनी जागृत करने के नुक्सान भी है

में :- एक सेकंड ये सप्त चक्र, कुण्डिलिनी सब तोह दैविक और आचायी की शक्तियों में से एक है इसके नुक्सान कैसे हो सकते है

ग :- शक्ति भले hi दैविक हो या तामसिक हो उनको अगर पूरी तरीके से साध लिया तोह साधक का लाभ होता है और उनपर से नियंत्रण हैट गया तोह सर्व नाश

कुंडलिनी जागरण से मिलने वाली सभी शक्तियों को अचे से वही इस्तेमाल कर सकता है जिसके अंदर सहस, धैर्य, दानशीलता, ठहराव, प्रेम, उपकार जैसी चीजे है, वही व्यक्ति इन सभी शक्तियों को संभल के रख सकता है

अगर नहीं संभल पाए तोह तुम्हारा मानसिक संतुलन भी बिगड़ सकता है

ये सब में तुम्हे डरने के लिए नहीं बल्कि तुम्हे आगे आने वाले परिस्थितियों से बचने के लिए कह रहा हु

में (आखे बंद कर के कुछ सोच कर) :- में तैयार हु अब परिस्थितिया कितनी भी ख़राब क्यों न हो जाये में अपने कर्तव्यों से नहीं बहगुनगा

फिर गाइड मुझे कुण्डलिनी के सरे लाभ और नुक्सान के बारे में बता कर उसे जागृत करने की विधि बता ने लगे जिसे में भी उनके बताये हुए तरीके से hi अमल में लेन लगा

मुझे पता है इस अपडेट में कुछ भी खास नहीं था सब सिर्फ बोआर हुए होंगे लेकिन आगे के पार्ट्स के लिए ऐसा एक अपडेट मेरे हिसाब से जरूरी था इसीलिए में ये अपडेट लिखा है कृपया अपनी रे देकर मेरी गलतियों को बताते रहे जीसे मुझे भी स्टोरी और अचे से लिखने के लिए आईडिया मिलती रहे

थैंक यू

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 66



में अभी ध्यान में बैठ के गाइड के कहने मुताबिक अपनी कुण्डलिनी शक्ति जागृत कर रहा था लेकिन में कुछ भी करके अपने मन को एक जगह स्थिर नहीं कर प् रहा था जैसे hi मन से कोई विचार निकलता मेरा मन फिर से नए विचारों से भर जाता थक हर के मेने मन को शांत करने का प्रयास बंद करके पहले की तरह अपने मन को शांत करने के लिए आस पास की शांति को महसूस करने लगा जिससे मेरा मन फिर एक बार शांत हो गया और में इस बार अपनी साडी ऊर्जा को अपने शरीर के केंद्र में केंद्रित करने लगा और में इस ऊर्जा शरीर के केंद्र में केंद्रित होते वक़्त महसूस भी कर सकता था जैसे कोई मेरे शरीर की साडी नसों को खींच के केंद्र तक ले जा रहा हो जिससे मेरे शरीर में अब दर्द भी हो रहा था लेकिन में उसपे ध्यान न देते हुए अपनी उसी ऊर्जा पर ध्यान लगाए बैठा था की कुछ देर बाद hi मुझे ऐसा महसूस होने लगा की जैसे कोई साप मेरे शरीर पर रेंग रहा हो लेकिन वह भी इतने धीरे की में उसके हर हरकत को अछेसे महसूस कर सकता था जैसे जैसे वह साप ऊपर की और बढ़ रहा था मुझे मेरे शरीर में असीम पीड़ा की अनुभूति hi रही थी जैसे की वह सैप जैसे ऊपर जा रहा हो वैसे वैसे मेरे शरीर पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा हो

कुछ इस तरह.




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मुझे मेरे आस पास वारावरण में बार बार बदलाव महसूस हो रहा था कभू ठंडक तोह कभी गर्मी और तोह और ऐसा भी लग रहा था जैसे शरीर पे कोई पानी छिड़क रहा है ऐसे hi कुछ देर पीड़ा सहन करने के बाद जब मुझे उस पीड़ा का अनुभव होना बंद तोह नहीं हुआ लेकिन अब उस पीड़ा की जैसे आदत सी hi गयी थी की तभी मुझे गाइड की आवाज सुनाई देने लगी


ग :- राज अब तुम अपने ध्यान से बहार निकल सकते हो

जब मेने ध्यान तोडा तोह में अपने आस पास का नज़ारा देख के हैरत में पद गया जहा आस पास पहले हलकी हलकी घास थी वह अब घास की लम्बाई इतनी बढ़ गयी थी की में जब ध्यान लगाने बैठा था तोह मेरे कंधे तक घास आ रही थी

में :- ये सब

ग :- अगर 2 साल तक ध्यान लगाओगे तोह वातावरण में बदलाव तोह होगा hi न

में :- 2 साल तक कैसे में तोह अभी कुछ देर पहले hi

ग :- शांत राज अपने जीवन में अब तिम्हे धीरः और ठहराव लाना होगा

में :- ठीक है बताइये

ग :- कुण्डलिनी शक्ति को तुम जब जागृत करते हो तोह वह शक्ति तुम्हारे मन को खली करने लगती है लेकिन मन उसे ऐसा करने नहीं देता जिस वजह से कुण्डलिनी कोई भी आसानी से जागृत कर नहीं सकते लेकिन तुम्हारे मकसद के लिए अत्यधिक आवश्यक है इसीलिए मेने तुमसे ये विद्या का अभ्यास कराया अब तुम्हे और भी सावध रहना होगा तुम्हारी जुंग अब तुम्हारे hi मन से है और अब तुम्हे ज्यादा टेंशन लेने की जरुरत नहीं है ये मायावी लोक है मेरी दुनिया यहाँ का समय मेरे आज्ञा अनुसार चलता है यहाँ पे बिताये 2 साल तुम्हारे दुनिया के केवल 2 घंटो के सामान है

इस सब में मैं पुरे वक़्त शांत hi रहा था क्यूंकि गाइड के कहने के मुताबिक hi जैसे hi मेने ध्यान तोडा कुछ देर के बाद hi मेरे मन में विचारों का बवंडर पैदा होने लगा कभी मेरे मन में दीदी और मेरे बिच के बदलते रिश्तों का ख्याल आता तोह कभी साक्षी का कभी मुझे कल रात के दादाजी के कहे शब्द याद आ रहे थे तोह कभी क

गाइड ने बताये हुए कुण्डलिनी जागृत करने के नुक्सान याद आ रहे थे

की तभी मुझे मेरे माथे के बिच में जोर का झटका महसूस हुआ

असल बात ये है की मुजबे ऐसे ख्यालों में खोता देख गाइड ने hi मुझे पंच मार्के ध्यान से बहार निकल वैसे और भी तरीके हो सकते थे लेकिन खैर अब कोई बोले तोह बोले क्या

फिर कुछ देर उन्होंने मुझे अपने मन को एकाग्र करने का तरीका बताया फिर ने वापस ध्यान में बैठ गया और इस बार जब आखे खुली तोह में अपने कमरे में मौजूद था और अपने बीएड पे hi लेता था

ग (मेरे मन में) :- थोड़ी देर आराम कर लो ाचा लगेगा

फिर में भी गाइड के बात मन के सोने लग गया क्युकी सुबह अभी हुई थी तोह इस वक़्त कोई भी उठाने नहीं आने वाला था

सुबह जब नींद खुली तोह ऐसा लगा की कोई मेरे होंठो को चुम रहा है जब आँख खोल के देखा तोह कोई और नहीं वह दीदी थी

में भी दीदी के किश को महसूस करके अलग hi दुनिया में पहुंच गया था तभी मेरी नज़र दरवाजे के और गयी जो खुला था उसे खुला देख कर hi मेरी साडी मस्ती ख़तम हो चुकी थी.

में-( होठ छुड़ाते हुए) ये क्या कर रही हो आप कोई देख लेगा तो क्या होगा

दीदी- देख ने दे मुझे कोई परवाह नहीं है तूने मुझे पागल कर रख्हा और अब तेरे से ये दुरी मुझे तड़पा रही है जो की मुझसे सेहन नहीं हो रही

वो फिर से मुझे पागलो की तरह चूमने चाट ने लगी में भी आखिर कब तक कण्ट्रोल करता आखिर इंसान हु तो में भी किश में साथ देने लगा और मेरे हाथ दीदी की गांड को सेहला रहे तभी दीदी निचे बैठ गयी और लोअर निचे खेच दिया और मेरा लुंड भी एक दम से उछाल के बहार आज्ञा जिसे

दीदी ने देखते hi मुँह में भर लिया

में :- उफ्फ्फ

क्या एहसास था में तो एक दम जन्नत में पहुंच गया और मजे में दीदी के सर को पकड़ के छोड़ने लगा अभी में मस्ती में गम था की तभी किसी के आने की आहात हुई तोह दीदी तुरंत बाथ्रून के अंदर भाग गयी और में भी अपने लोअर को पहन के वैसे hi लेत गया

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 67

क्या एहसास था में तो एक दम जन्नत में पहुंच गया और मजे में दीदी के सर को पकड़ के छोड़ने लगा अभी में मस्ती में गम था की तभी किसी के आने की आहात हुई तोह दीदी तुरंत बाथ्रून के अंदर भाग गयी और में भी अपने लोअर को पहन के वैसे hi लेत गया

अब आगे

अभी मुझे वैसे लेते हुए कुछ वक़्त हो गया लेकिन फिर भी जब मेरे रूम में कोई हलचल नहीं हुई तोह में अपनी आखे खोल के देखा तोह दूर बंद था जब मेने अपने रूम पे देखा तोह वह भी कोई नहीं था जब मेने अपने बाथ्रून में चेक किया तोह वह भी एम्प्टी था जब मेरी नज़र अपने रूम में लगी हुई घडी पे पड़ी तोह मुझे सोये हुए केवल 10 मं hi हुए थे तोह में समझ गया की ये सब कुण्डलिनी को जागृत करने के वजह से hi हो रही है तोह में तुरंत अपनी कुण्डिनी को शांत करने लगा लेकिन में कर नहीं प् रहा था बार नार वही सन आखों के सामने आ रहा था जब मेरा लुंड दीदी के मुँह में था और में उनका मुँह छोड़ रहा था




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जब थोड़ी देर ध्यान लगाने के बाद भी के सफल नहीं हुआ बल्कि अब मेरे अंदर की आग और बढ़ चुकी थी तोह में अपने रूम से निकल के सीधा दीदी के रूम में जाने लगा


में जैसे hi कमरे में गया मेरी नज़र काम रास से गीली हुई दीदी जो नंगी hi बेसुध सोई हुई दिखी जिसे देखते hi रूद्र का लुंड अंगड़ाई लेने लगा शायद दीदी रॉट को पोर्न वीडियोस या स्टोरी पढ़ रही थी क्यूंकि उनका फ़ोन भी उनके हाथ में hi था

अब मुझ से कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया था तो में जेक सीधा दीदी की पहले से गीली छूट को दबोच लिया और अंगूठे से मसल ने लगा बहुत hi कामुक नज़ारा था मेरे ऐसे अचानक हमले से दीदी भी उठ गयी मगर हिल नहीं पा रही थी मेरी पकड़ hi ऐसी थी

दीदी :- आआह्ह्ह बबभाई हैट जा भाई प्ल्ज़ ऐसे मत कर कोई आ गया तो गज़ब हो जायेगा ऊऊफफफफफफ ममअअअ हत्थ हटा ना आअह्ह्ह्ह मायआ मेरी फूल सी छूट को कैसे बेरहमी से मसल रहा है uuuufffffffffffffooohhhhhhhhh

में :- सष्ठ दीदी आवाज़ नहीं वर्ण तुम्हारी आवाज़ सुनकर सच मच किसी को पता चल जायेगा की आप अपने भाई के साथ क्या कर रही हो हाय क्या फूली हुई छूट है आप की ऊपर से आप का ये नंगा जिस्म मुझे पागल कर रहा है और वैसे भी दरवाजा बंद है अभी इस वक़्त तोह सब सो रहे होंगे

आखिरकार दीदी भी तो औरत थी ऊपर से प्यासी भी इसलिए छूट की आग उन्हें और भी ज्यादा मजबूर करने लगी की वो सब भूल कर बस अपनी प्यास बुझाये पैर अभी भी कही घबरा रही थी की कही कोई आ न जाये या अगर किसी को पता पद गया तोह

दीदी :- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह मेरे भाई में मर जाउंगी ऐसा मत कर आआह्ह्ह्ह माआआआ एक बार चेक कर ले कही कोई आ गया तोह गजब हो जायेगा

में :- नहीं दीदी कोई नहीं आएगा आप बस इस पल को एन्जॉय करो और सब भूल जाओ दीदी थोड़ी देर बाद आप खुद चीख चीख कार कहोगी के फाड़ दे मेरी छूट को बस पहले आपके होठो का रास पीलू थोड़ा सा

दीदी कुछ बोल पाती उस से पहले hi दोनों के होठो आपस में जुड़ चुके थे अब किसी की कोई फ़िक्र नहीं थी दोनों को दीदी पूरी तरह मदहोश थी वही मेरे से भी अब ज्यादा सब्र नहीं हो रहा था ऐसा लग रहा की बस अब जल्दी से जल्दी अपने लुंड को दीदी के छूट में घुसा दू लेकिन मीरा माँ और साक्षी के साथ चुदाई से इतना तोह एक्सपीरियंस मिल गया था की मेने अगर ऐसा किया तोह दीदी बेहोस भी हो सकती है और हो सकता है उनकी तब्येत भी ख़राब हो जाये इसलिए मुझे संभल कर काम लेना था इसीलिए में उनके होठ चुके पहले उन्हें पूरी तरीके से मदहोश कर लिया था

में भी आज दीदी के होंटो का रास चूस कर बहुत खुश था और अब दीदी की छूट भी किसी नदी की तरह पानी बहा रही थी अब दीदी से और सबर नहीं हो रहा था जिस वजह से उनका हैट अपने आप मेरे लुंड पे चला जाता है लेकिन वह तुरंत उसे हटा देती है

अब में दीदी से अलग हो जाता हु और दीदी को देखने लगता हु दीदी की आखे छुडासी से लाल हो गई थी और उसके मोठे मोठे चुके बार बार उप्पेर निचे हो रहे थे जिन्हे देख के में उन्ही के तरफ आकर्षित होने लगता हु

मेरे ऐसे देखने से दीदी सरमने लगती है.

दीदी :- ( शरमाते हुए ) ऐसे क्या देख रहे हो.

में :- आपको शर्माना भी आता है. मुझे लगा आज आप मुझे कच्चा hi खा जाओगी

मेरी ऐसी बात सुनकर दीदी मेरे गले लग जाती है और आपने चेहरा मेरे साइन में छुपा लेती है जिससे में भी प्यार से दीदी की पथ सहलाने लगता हु

पथ सहलाते सहलाते मेरे हाथ दीदी के चूतड़ों पर चले जाते है जिन्हे में धीरे धीरे प्यार से सहालते हुए दबाने लगता हु जिससे दीदी अलग hi दुनिया में पहुंच गयी थी और मुझे भी उनके सॉफ्ट सॉफ्ट चूतड़ों को दबाने से बहुत मजा आ रहा था

अब में उन्हें फिर से बीएड पर लिटा के धीरे उनके पुरे शरीर पर चूमते हुए अपना मुहवुनके छूट पर रख देता हु और उसे चाटने लगता हु जिससे दीदी जो पहले से hi गरम हो चुकी थी वह अब खुलके सिसकिया ले के मेरा साथ दे रही थी

दीदी साथ पके अब में भी और आगे बढ़ना चाहता था फिर ऐसे hi कुछ देर उनकी छूट चाटने के बाद में दीदी की दोनों टैंगो के साइड से आपने दोनों हाथो को आगे ले जेक

दीद के दोनों चुचो को पकड़ कर दबाने लगता हु जिससे दीदी इस दो तर्फे हो रहे हमले को सहन माहि कर पति और बीएड पे अपने पीठ के बल लेट जाती है और अपने दोनों हाथो को मेरे हाथो पर रख कर आपने

चुके मेरे साथ दबाते हुए अपनी कमर को ढाका मरते हुए मेरे मुँह पर अपनी छूट घिसने लगती है.

दीदी :- अहा आहे आह ाः भईई ाः ाः भाई मई गई ाः आह आह

आहाहा आठ आहे

आहे भरते हुए दीदी अपनी कमर हवा में उदा लेती है और मेरे मुँह में झड़ने लगती है में भी दीदी की छूट से भ रहे रास को अमृत रास समझ के पिने लगता हु

अब में भी अपने कपडे निकल हु और फिर में आपने लुंड के सुपडे को दीदी की छूट के होंटो पर रगड़ने लगा जिससे दीदी ने भी अपने आखे खोल कर मेरी तरफ देखा तो उन्होंने मेरी तरफ देख के पहले हलके से मुस्कुरा दी फिर जब उन्होंने मेरे लुंड की तरफ देखा तोह उनके चेहरे पर मुझे दर दिख रहा था

में :- (लुंड घिसते हुए) क्या हुआ दर लग रहा है

दीदी :- आज नहीं तोह कल ये होना hi है तोह दर कैसा

दीदी के तरफ से ग्रीन सिगनल पते hi में किसी खुले सैंड की तरह दीदी के ऊपर चढ़ गया और दीदी के दोनों पैरो को हवा में उठा कर एक बार में hi लुंड को छूट में घुसाने के लिए धक्का मार दिया

म- आआह्ह्ह्हह्ह माआआआ कमीने फाड़ दी एआरएम से नहीं दाल सकता था क्या

aaahhhhhhhhhh माआससा ऊऊओह्ह्ह्हह मरीईई भाईईई. मुझी क्या होऊ रहा हैईईईई. मेई मार जाउंगी

ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़ हिआआआआ आआआआअह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

दीदी के ऐसे चीखने से मुझे लगा की शायद दीदी को बहुत hi ज्यादा दर्द हो रहा होगा तो में थोड़ा पीछे को हुआ जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट से निकल गया जिसे दोबारा दीदी ने hi अपनी छूट में दोबारा सेट किया और अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए बोली

दीदी :- ऊऊह्ह्हह्ह भाई तू न सच में बुद्धू है इतना मजा आ रहा है और तू है की लुंड निकाल ने लगा था

में :- आपको hi तोह दर्द हो रहा था कितनी जोर से चीला रही थी अगर कमरे साउंड प्रूफ न होते तो पूरा घर यहाँ मौजूद होता

दीदी :- वो में मजे में बोल रही थी अब तेज़ धक्के मार जैसे पहले मारना चाहते थे

में :- ना अब मेरा मूड नहीं है

मेरे बोलते hi दीदी ने मुझे बीएड पर धक्का दे दिया और मेरे लुंड पे अपनी छूट सेट कर के मेरे लुंड पर धीरे धीरे बैठने लगी जैसे जैसे वह बैठ रही थी उनके चेहरे पर दर्द साफ़ साफ़ देखा जा सकता था

में दीदी को इतने दर्द में देख कर मुझसे रहा नहीं गया और फिर में दीदी को बीएड पे लेता कर जितना घुसा था उतने से hi छोड़ने लगा जिससे उनका भी दर्द धीरे धीरे काम होने लगा

दीदी :- ीीीीीस्सस्स्स्स ईस्सस

मेरे भाईई आआआहहहहहहह एआईसीए

हठीीी aaaaaaahhhhhhhhhh ममअअअ

मेरीए चूऊउत्तत्ततत्तत आआअह्हह्ह्ह्ह

भाआईईई बहुत्त मजा आए राहहहाआ हाईइइइइइइइ आआह्ह्ह्हह

आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मम्मारर ग्ग्ग्गाय्यी

रईईईईई आआह्ह्ह्हह ममअअअअअअअअ भाई में झाड़ रही हुऊ

इतना बोलके वह झड़ने लगी और जब उनका गरम लावा मेरे लुंड पे गिरा तोह मेरा लुंड और भी slippery(hindi में क्या बोलते है याद नहीं) हो गया जिससे मेने एक जोर का धक्का मार्के अपने लुंड को पूरा उनकी छूट में घुसा दिया जिससे झड़ने के वजह से जहा दीदी शांत पड़ी थी वही अब जोर जोर से चीख के अपने सर को बीएड में यहाँ से वह पटकने लगी थी

में :- ज्यादा दर्द हो रहा है क्या

दीदी :- अह्ह्ह्ह जान लेने के बाद बोल रहा है जिन्दा हो या मर गए अब थोड़ी देर ऐसे hi रहो हिलना मत

फिर कुछ देर में वैसे hi अपना लुंड दीदी के छूट में घुसाए उनके ऊपर पड़ा रहा कुछ देर ऐसे hi रहने के बाद दीदी ने अपने चूतड़ हिला के सिग्नल दे दिया

जिसे पते hi में भी दीदी के छूट में ढके मारने लगा

दीदी :- ऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह रावववईईईई तू ने तो मेरी जाएं निकाल डीई रईईई aaaaahhhhhhhhhhh कसम से बहुत मजाआ ाआयययया aaaahhhhhhhhhhh

मेऐईं तो आअज सीए तेरी हो गई भाई अब मुझे तेरे अलावा और कुछ नहीं चाहिए

में :- पहले कहा अलग थी तभी भी मेरी hi थी आज भी मेरी hi हो और आगे भी मेरी hi रहोगी

दीदी :- आआअह्हह्ह्ह्हह भईईई एआईसीए होई तेज़ तेज़्ज़ज़ उउउउउउउउउम्म आआअह्हह्ह्ह्हह फुकककक मेई हार्डडेरररर आआअह्ह्ह्हह

एइस्स्स्सस्स सीएएसससससस डीएपारररर ूउम्मम्महहहहह ममममीए गायियीईई

ऐसे hi दीदी अब तक 3 बार झाड़ चुकी थी और मुझसे भी अब मेरा कण्ट्रोल छूटने लगा जिससे में और भी तेज़ी से दीदी को छोड़ने लगा जिससे दीदी फिर गरम हो गयी और सिसकिया लेते हुए मेरा साथ देने लगी

ऐसे hi थोड़ी देर तक धक्के लगाने के बाद जब मेरे और कण्ट्रोल नहीं हुआ तोह में दीदी के छूट में hi झाड़ गया जिसे महसूस कर दीदी भी फिर से झाड़ गयी फिर हम दोनों वैसे hi एक दूसरे की बाँहों में आराम करने लगे

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आज के लिए इतना hi

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अपडेट 68

अब तक आपने देखा की कैसे राज ने सुबह में अपनी दीदी के साथ प्यार करने के बाद राज उसके पास hi सो गया था इस बात से अनजान की अगर सुबह कोई आ गया तो क्या होगा

अब आगे

अभी में और दीदी आराम से सो रहे थे की तभी बहार से माँ की आवाज आने लगी

माँ :- रीना ो रीना बेटी उठ जा कितना सोयेगी

माँ की आवाज़ कानो में पड़ते hi मेरी नींद टूट गयी और जैसे hi मेरी आखे खुली मेरी नज़र बिस्तर पैर पड़ी तो वह मेरे बगल में दीदी को नंगा सोता देख रात की चुदाई याद आ गयी और मुझे अपने आप पर हसी भी आ रही थी की रात को में इतना बेकाबू हो गया था की मुझे इस बात का भी अंदाजा न रहा की ऊपर कोई भी आ सकता है

में इन्ही खयालो गम था की एक बार फिर से माँ की आवाज़ कानो गुंजी जिसे सुनते hi मुझे अपनी हालत का आभास हुआ और में एक दम से हड़बड़ाते हुए दीदी को हिलाते हुए बोलै

में :- दीदी उठ जाओ माँ आवाज़ लगा रही कपडे पहनो जल्दी से

दीदी ने मेरी बात सुनके धीरे से आंख खोली और उसे अपने गले लगते हुए बोली

दीदी :- लगाने दे आवाज तू टेंशन मत ले गेट लॉक कर दिया था रात को hi

में :- पैर अब बहार कैसे जाऊंगा में वो गेट पे hi कड़ी है

दीदी :- ये तोह तुझे पहले hi सोचना चाहिए था अब मुझसे पूछ के क्या फायदा

में :- हो गयी गलती अब माफ़ भी करो

दीदी :- चल तू भी क्या याद रखेगा अब तू फ़िक्र मत कर में हु न

फिर दीदी ने उठकर अपना दरवाजा हल्का सा खोला जिससे न बहार वाले को अंदर का कुछ दिखे न hi अंदर वाले को बहार का

दीदी :- उठ रही हु माँ आप चलो में अभी आयी

माँ :- ठीक है जल्दी आ

माँ के जाने के बाद में भी खड़ा हुआ और कपडे पहन ते हुए बोलै

में :- वैसे आप बिना कपड़ो के बहुत हॉट लगती हो

दीदी :- चल अब बाते मत बना और मुझे मेरी मॉर्निंग गुड करने दे

इतना बोल के दीदी ने मुझ को अपने पास खींच कर मेरे होठो पैर किश करने लगी फिर कुछ देर ऐसे hi किश करने के बाद में वह से छुपते हुए अपने रूम में चला गया

अपने रूम में आके थोड़ी देर आराम किया फिर फ्रेश होक निचे आ गया जहा सब पहले से hi मौजूद थे और दादाजी किसी बात पे स. चाचा को दन्त रहे थे जब मेने नजदीक जेक सुना तोह पता चला की कल मुझे और भीमा काका को अकेला छोड़के जो ये घूमने गए थे इसीलिए इन्हे दन्त पद रही थी जो देख के मुझे बड़ी हसी आ रही थी लेकिन में उसे कण्ट्रोल किये हुए था जब स. चाचा ने मुझे देखा तोह वह मुझे गुस्से से घूरने लगे जिसे शायद दादाजी ने देख लिया और फिर उसके बाद C.Chacha को और दन्त पड़ी फिर उन्होंने सब को नाश्ता करने को बोलै सब चुप चाप नाश्ता करने लगे जब माँ और दीदी कीकतें से नाश्ता ला रही थी तोह मेरी नज़र दीदी पे पड़ी जो सुबह की चुदाई की वजह से लंगड़ा के चल रही थी जो देख के मुझे मस्ती सूझी

में :- दीदी क्या हुआ आपको लंगड़ा के क्यों चल रही हो

मेरे ऐसे बोलने से दीदी मुझे गुस्से से घूरने लगी

माँ :- रात को नींद में चलते हुए पेअर में लग गयी

में (नाटक करते हुए) :- क्या दीदी आपको नींद में चलने की बीमारी है और आपने मुझे बताया भी नहीं अगर रात को आपको ज्यादा चोट लग जाती तोह आप एक काम करो आप है न आज से मेरे रूम में hi सोया करो जिससे आपको कभी भी नींद में चलने की वजह से चोट नहीं लगेगी

ऐसे hi थोड़ी और मजाक मस्ती करते हुए सब ने नास्ता ख़तम किया फिर में खेतों पर जाने के लिए निकलने hi वाला था की स. चाचा ने मुझे साइड में बुलाया

में :- बोलिये चाचा मुझे क्यों बुलाया

स. चाचा :- बुलाया के बचे मुझे दन्त पड़ते देख बड़ी हसी आ रही थी तुझे क्यों

में :- में कहा है रहा था

स. चाचा :- रुक अभी बताता हु तुझे

में :- अगर आपने मुझे हाथ भी लगाया तोह में दादाजी को बता दूंगा

और वैसे भी मेने आपको पहले hi वारं किआ था की मुझसे पन्गा मत लो (अपडेट 40)

C.chacha (सोचते हुए) :- तू अब तक उस बात को भुला नहीं

में बस ना के गार्डा हिला दी और वह से भाग गया और खेतों में जाने लगा

में खेतों की तरफ निकलने लगा की तभी दादाजी ने मुझे बुलाया

दादाजी :- सुनो राज आज से तुम आम के बगीचों का काम देखोगे

दादाजी का हुकुम सुनके में एक तरफ खुश भी हो रहा था और दुखी भी खुश इस लिए की आम के बगीचों से लग कर hi मीरा माँ का घर भी है और दुखी इसीलिए की आम के बगीचों में मेहनत करने जैसा कुछ है hi नहीं वह बस यहाँ से वह घूमते रहना पड़ता है लेकिन दादाजी का हुकुम कैसे ताल सकते है

फिर में वह से अपनी जीप में बैठ के निकल पड़ा आम के बगीचों के तरफ जो की हवेली से थोड़े दूर भी थे जब में वह पंहुचा तोह वह काम करने वाले सरे मजदूर मुझे देख के एक साथ लाइन में खड़े हो गए फिर सबसे कुछ देर बाटे करने के बाद में बगीचे का राउंड लगाने चल पड़ा

में अभी खेतों का राउंड लगते हुए चले जा रहा था की तभी मेरी थोड़ी दूर से एक 30-32 साल की सवाली सी लेडी नज़र आयी जो बकरिया चारा रही थी देखने से hi किसी मॉडल की तरब लग रही उस ने घागरा टाइप स्कर्ट पहन राखी थी जिस में से उसकी उभरी हुई गांड कुछ जायदा hi बड़ी लग रही थी और ऊपर एक छोटा सा ब्लाउज पहना था जिस में चूचियों के स्थान पे नोक सी बानी हुई थी पैर जो उसे ख़ास बनता था वो था उसका चेहरा नशीली आँखे पतले होठ जो की गोरा न होने पैर भी उसका आकर्षण बढ़ा रहा था जहा में खड़ा था वह मोटा सा पेड था तो में उसकी ूत में हो गया और उसे देखने लगा

पहले तो वो वही एक पत्थर पैर बैठ गयी और थोड़ी देर बाद अपना ब्लाउज उतार के वही पत्थर पे रख दिया उफ्फ्फ साली के चुके तो बिना ब्रा के भी एक दम टाइट और सीधे खड़े थे तूफ़ान तो तब आया जब घागरा खुला उफ्फ्फ क्या मस्त गांड थी साली किम करदीआं की तरह बहार को निकली हुई में उसे देख hi रहा था की तभी उसने अपनी 2 उँगलियों को अपनी छूट में घुसके अंदर बहार करने लगी जो देख के में थोड़ा हैरान रह गया की कैसे ये औरत ऐसे खुले बगीचे में पूरी नंगी होक अपनी छूट में ऊँगली कर रही है जब में उसे देख hi रहा था की तभी वह पास में hi पड़ी डंडी जिससे वह बकरिया संभल रही थी उससे अपनी छूट पर घिसने लगी और ऐसा सन देख के मेरा हाथ भी अपने आप मेरे लुंड पे चला गया और में उसे धीरे धीरे घिसने लगा जब वह औरत झड़ने के करीब थी तभी में पास में पड़ा हुआ एक छोटा पत्थर उठा के उसकी तरफ फेका और वह से भाग गया अब मेरे पास न hi स्लो मोड था और न सुपर स्पीड अब मेरी स्पीड नार्मल इंसान जितनी hi थी इसीलिए में पूरा जोर लगाके वह से भाग रहा था

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 69

जब में वह से भगा तोह में थोड़ी दूर जेक रुक गया और फिर से सब बातों से अनजान बनते हुए में फिर से बगीचे का चक्कर काटने लगा फिर ऐसे गई चक्कर काट ते हुए में एक पेड़ के निचे बैठ गया और अभी अभी देखे हुए सन के बारे में सोचने लगा

में तोह जैसे उसकी सुंदरता में hi खोता जा रहा था की तभी मेरे ध्यान को भांग करने का जिम्मा जैसे नेचर ने hi उठा लिया और एक के बाद एक 2 आम पेड़ से टूट के मेरे सर पे गिरे जीसे में होश में आ गया जब मेने आमों की देखा तोह मेरे पेट में भी छुए दौड़ने लगे मुँह ने पानी आने लगा में अभी उन आम को खाने hi वाला था की तभी एक छड़ी मेरे हाथों पर पड़ी जिससे मुझे गुस्सा आने लगा जब मेने उस छड़ी को पकडे हुए हाथों के तरफ देखा तोह सारा गुस्सा जैसे हवा हो गया उस छड़ी को पकड़ने वाली कोई और नहीं वही ब्लैक ब्यूटी hi थी

वह :- ये चोरे पता नहीं क्या तुझे यहाँ आम तोडना सख्त मन है.

में अभी भी उसे hi घर रहा था जिसे शायस्ड उसने भी देख लिया और फिर से एक छड़ी मेरे हाथ पर बजा दी लेकिन इस बार उसने इतने जोर से मारा की मेरे हाथ से टकराते hi वह छड़ी टूट गयी और में भी होश में आ गया

में :- इतने जोर से कोई मरता है क्या

वह :- अभी घूरना बंद हो गया हो तोह बता कोण है तू और तुझे नहीं पता क्या यहाँ आम तोडना सख्त मन है

में :- ये मेरा बगीचा है में कुछ भी करू तुझे क्या वैसे भी मेने तोड़े नहीं है बल्कि इस पेड़ को मुझ भूके पे दया आ गयी तोह इसने मुझे ये आम खुद दिए है

वह :- ाचा सच नहीं बोलोगे अभी देखो में तुम्हारी क्या हालत करती हु (छिलके) हरिया काका

फिर इतना बोलके वह बगीचे के वैठ मन को आवाज देने लगी जिसका नाम हरिया है

हरिया :- क्या हुआ सोनिया गाला क्यों पहाड़ रही है

ओह तो उस का नाम सोनिया है

सोनिया :- ये देखो ये छोरा आम तोड़ रहा है और ऊपर से कहता है की ये इसके खेत है

जैसे hi उस ने मुझे देखा वह तुरंत सकपका गया

में :- हरिया ये दोनों आम लो अचे से धोके फिर काट के ले आओ

मेरे बोलते hi वह तुरंत मेरे हाथों से आम लेके वही बने हुए गोदाम में चला गया वही उस सोनिया का तोह मुँह खुला hi रह गया में भी उसके हुस्न को hi देकने में फिर खो गया और मेरा ध्यान तब टुटा जब उस हरिया के पैरों टेल एक लकड़ी ने अपना दम तोडा

जब हरिया आया तोह सोनिया भी होश में आ गयी

सोनिया :- ये क्या हरिया काका में एक आम भू खाने को लेती हु तोह मजदूरी काटने की धमकी देते हो और इस कल के आये छोकरे को अपने हाथों से आम काट के खिला रहे हो

हरिया :- अरे बैल बूढी तू एक मामूली मजदूर है और ये इस पुरे बगीचे के मालिक तुम दोनों में फरक होगा की नहीं

में ;- मेने तोह इसे बताया था यही मैंने को तैयार नहीं

में ;- (हरिया से) वैसे काका हमारे बगीचे में कुल मजदूर कितने होंगे

ह :- 75 है मालिक 50 मर्द 25 औरते

में :- और गोदाम में अभी कितने पेटिया पड़ी है

ह :- (बही में देखते हुए) कुछ 2000 है जिन में से 1900 की बुकिंग हो चुकी है और 100 एक्स्ट्रा है

में :- एक काम करो उन 100 में से 75 पेटिया मजदूरों में बात दो हर मजदियर के घर एक एक पति पहुंच जनि चाहिए

ह :- लेकिन मालिक ठाकुर साहब पूछेंगे तोह क्या बोलूंगा

में :- उसकी चिटा मत करो वह सब में संभल लूंगा

फिर में उस आम के टुकड़ों मेसे 2 टुकड़े उठाये और बाकि के सोनिया को देते हुए उसके कण में बोलै

में :- पत्थर मारने के लिए सॉरी

इतना बोलके में वह से मीरा माँ के खेतों के तरफ निकल पड़ा

वही दूसरी तरफ

इस वक़्त काल किसी सोच में गम था की तभी उसके पीछे गाइड आ गया

ग :- क्या सोच रहे हो काल

जब काल ने पीछे देखा तोह गाइड वह मुस्कुराता खड़ा था

काल :- अरे आप कब आये माफ़ करना में आपको देख hi नहीं पाया

ग :- अपने उत्तराधिकारी के बल क्रीड़ाओं में मग्न थे क्या

काल :- आप से क्या छुपा है उसे अभी और कठिन और बड़ी यात्रा करनी है और वह है की अपने मन को काबू नहीं कर प् रहा है

ग :- अकबर कुछ भी हो वह कलयुग में जन्मा हुआ बालक है कुछ अवगुण तोह होंगे उसमे

काल :- इसमें गलती आपकी भी है आप उसे सप्त चक्रों को काबू करने की विधि क्यों नहीं बता देते जिससे वह जल्द से जल्द अपने कार्यों में सफल हो सके

ग :- एक विद्यार्थी को उसके गुरु से ाचा कोई नहीं जान सकता अगर तुम उसे विधि बता डोज तोह वह उतावला होक सरे चक्रों को एक साथ जागृत करने का प्रयास करेगा और उसका इंसानी शरीर वह ऊर्जा सहन नहीं कर पायेगा जिससे या तोह उसका शरीर को सदा सदा के लिए लकवा मार जायेगा (परलैसेड) या फिर वह अपनी hi ऊर्जा के चपेट में आके कुड़का विनाश कर देगा दोनों hi सूरतों में सृष्टि का विनाश पक्का है

काल :- अगर उसे वह पुस्तिका दे दे जिसमे सप्त चक्रों की विधि को पूरी तरह से विस्तारित स्वरुप में लिखा है फिर राज के लिए और भी सरल होगा

ग :- यहाँ भी राज और उसके मंजिल के बिच उसका उतावले पाना आ जायेगा जब राज वह किताब पढ़ेगा तोह सप्त चक्रों को छोड़ के बाकि सरे मन्त्रों का अभ्यास करने लगेगा जिसका परिणाम वही होगा जो नहीं होना चाहिए

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 70

में अभी आम के बगीचों से निकल के वह से सीधा मीरा माँ के खेतों के तरफ निकल पड़ा जब में मीरा माँ के खेत में पंहुचा तोह वह कोई भी नहीं था जब में उनके झोपड़े के पास पंहुचा तोह वह का नज़ारा देखके तोह दिमाग hi सन्न रह गया वह मीरा माँ निचे झुक कर कुछ काम कर रही थी जीसे उनकी गांड अलग hi कहर ध रही थी जब में उनके पास पंहुचा तोह में अपना लुंड जो पहले hi खड़ा हो चूका था में उसे उनकी गांड पर रगड़ते हुए पीछे से hi उन्हें गले लगा लिया

में :- क्या कर रही हो मीरा माँ

मेरे ऐसे अचानक गले लगाने से पहले तोह वह दर गयी लेकिन मेरी आवाज सुनके वह निश्चिंत हो गयी

मीरा माँ :- जाइये में आपसे बात नहीं करती

में :- क्यों क्या हुआ.

मीरा माँ :- आपको तोह अब मेरी याद आती hi नहीं पता है कितने दिन हो गए आपसे मिले हुए लेकिन आप हो की मुझसे बात करने भी नहीं आते

में :- माफ़ कर दो न अब से गलती नहीं होगी वह तोह पिछले कुछ दिनों से काम में इतना बिजी हो गया था समय hi नहीं मिल पाया

ये बोलते हुए में अपना लुंड भी उनकी गांड पर रगड़ने लगा जिससे वह भी गरम होने लगी

मीरा माँ :- अह्ह्ह ये क्या कर रहे हो छोटे मालिक ऐसे बहार ये सब ठीक नहीं आप अंदर आइये

में :- कितनी बार बोलै है में आपका मालिक नहीं बेटे जैसा हु मुझे राज भुलैये

फिर में और मीरा माँ उनके झोपड़े में चले गए जहा पहुंचने के बाद पहले सब दरवाजे खिड़किया बंद करने लगी वही में वह की साडी चीजे देखने लगा जिसके बारे में जानकारी मुझे पहले hi त्रिनेत्र से मिली थी वह चीजों का ज्ञान भी जैसे मेरे दिमाग से मिट गया था सब पता होक भी जैसे मुझे कुछ पता नहीं था

में अभी ये सब सोच hi रहा था की तभी मीरा माँ मेरे नजदीक आयी और बोलने लगी

मीरा माँ :- अब कहा खो गए आप चलिए जल्दी से

इतना बोलके मीरा माँ मेरा हाथ पकड़ कर उसी झोपड़े में रखे हुए खत पर ले जाती है और मेरे खत पर बैठते hi मेरे होठो पैर कब्ज़ा कर लिया जिसमे मेने भी उनका पूरा साथ दिया और किश करते हुए उनके बूब्स को मसल ने लगा जिससे मीरा माँ भी होश खोने लगी थी

दोनों गरम जोशी से एक दूसरे के को चूस ने में लगे हुए थे वही मीरा माँ मुझको खुद hi अपनी चूचियों में मुँह दबाते हुए प्यार और जोश में बोले जा रही थी

मीरा माँ :- आअह्हह्ह्ह्ह खा जाईये इन्हे बहुत तड़प रही थी ये आपके लिए ऊऊफफफफ निचोड़ लीजिये इन्हे आआअह्ह्ह पता है कब से आपके हाथो मसल जाने को तड़प रही थी ऐसे तड़पाया न करो

में :- मेरी प्यारी मीरा की चूचियों प्यार कर रहा हु देखो इनके निप्पल कैसे कड़े हो गए (चुकी के निप्पल पैर हाथ फिरा कर दिखते हुए बोलै)

मीरा माँ तो मेरे ऐसा करने से मछली की तरह मचल ने लगी जिससे उनके जिस्म चीटिया रंगते हुई महसूस होने लगी थी जिससे उन्हें और भी मस्ती चढ़ रही थी वही में उनकी मोती चूचियों को जोर जोर से दबाते हुए चूसे जा रहा था जिस से मीरा माँ की चुकी पूरी मेरे थूक से गीली हो गयी थी जिसे छोड़ कर मेने थूक से साणे होठ वापस मीरा माँ के होठ से जोड़कर उनकी जीब को चूस ने लगा

dheere-dheere दोनों किश से कही आगे बढ़ ने लगे थे मीरा माँ के कपड़ोंवने भी उनका साथ अब छोड़ दिया था

जिसका उन्हें कोई होश नहीं था और उनकी छूट में तो मानो आग लग गयी जिसे वो बुझाना चाहती थी इसलिए वो खुद hi मेरा हाथ अपनी नंगी छूट पैर ले जाती हुई बोली

मीरा माँ :- ोुह्ह्ह्ह मेरे मालिक मेरे राज बहुत खुजली हो रही है यहाँ प्ल्ज़ इसका भी कुछ करो वर्ण आपकी मीरा इस खुजली से पागल हो जाएगी वैसे भी टाइम काम है जल्दी से घुसा दो न इस के अंदर

मीरा माँ की बेचैनी का ख्याल करते हुए मेने अपनी पेण्ट निचे सरका कर धीरे से अपने लुंड को उनकी छूट में उतार दिया जिसके अंदर जाते hi मीरा माँ ने चैन की सांस

लेते हुए बोली

मीरा माँ :- ऊऊह्ह्ह मेरे राज कितना सकूं मिल रहा है ऊऊफफफफफ ऐसी ही प्यार से धक्के लगते रहो में आपके प्यार में पागल हो गयी हु मई आअह्ह्ह्ह हमेसा मुझे इतना hi प्यार करोगे न आआह्ह्ह्ह

में :- में अपनी मीरा को इस से भी जायदा प्यार करूँगा आप खुद कहोगी की इतना प्यार मत करो

मीरा माँ :- आआअह्ह्ह्ह ऐसा कभी नहीं होगा ऊऊफफफफफ आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आपके प्यार पाने के लिए में हमेशा हाज़िर रहूंगी चाहे जो भी हो जायर

में :- पहले थोड़ा घूम जाओ मेरी डार्लिंग टाइम काम है

मेरे कहते hi मीरा माँ तुरंत hi घूम गयी और में पीछे से उनकी छूट में धक्के लगाने लगा

मीरा माँ :- आआआहहह राज

ऊऊफफफफ बाहुत्त तेज़्ज़ज़ कर रहे होऊ आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह

में :- तेज़ करूँगा तभी तो आप जल्दी से मंज़िल पैर पहुँचोगी और आपकी बेचैनी ख़तम होगी

मीरा माँ :- माआआआआ अगर ऐसा है तो मेरी फ़िक्र मत करो तेज़ तेज़ करो

मुझे इस बैचेनी से छुटकारा दे दो

में :- ये हुई ना बात अब देखो कितना मजा आएगा आपकी साडी खुजली मिट जाएगी आपको बस ऐसे hi मेरा साथ देना है फिर देखना दोनों मौज करेंगे बस मजा hi मजा देखिये आपकी छूट कैसे मेरा लुंड खा रही मजे से उउउउउफफ्फ्फ्फ़ क्या मस्त छूट है आपकी

मीरा माँ :- मेरी कहा अब तो ये आपकी है मुझे कुछ हो रहा है में ाआंने लगीई हुऊ आआह्ह्ह्हह मुझे सम्भालो मई गईई

अब मुझ से भी ज्यादस सब्र नहीं हो रहा थस इस लिए मेने मीरा माँ को झुकाते हुए तेज़ तेज़ धक्के मार ने लगा

ऐसे hi थोड़ी देर धक्के मरने के बाद में भी मीरा माँ के अंदर hi झड़ने लगा फिर कुछ और देर उनके साथ समय बिताने के बाद में भी आम के बगीचों के लिए निकल गया जहा का सारा काम देखने के बाद में भी साम को अपने घर के लिए निकल गया

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 71

में जब घर में पंहुचा तोह सब लोग बहार हॉल में hi मौजूद थे शिवाये दीदी के तोह में भी घर में घुसते hi सबसे पहले दीदी के रूम में घुस गया लेकिन वह वह नहीं थी तोह में वह से अपने रूम में देखा तोह दीदी मेरे रूम में सोइ हुई थी जब मेने उन्हें सोते हुए देखा तोह में भी वहज उनसे लिपट के सो गया

मेरे ऐसे लिपट ने से दीदी की भी नींद टूट गयी

दीदी :- क्या कर रहा है भाई

में :- अपनी दीदी को प्यार कर रहा हु

दीदी :- भाई प्लीज अब नहीं पहले hi सुबह से बहुत दर्द कर रही है अब और नहीं

में :- (मजाकिया अंदाज में) क्या दर्द कर रही है

दीदी :- वही

में :- क्या वही

दीदी :- समझ न भाई

में :- अगर आप बताओगी नहीं तोह कैसे समझूंगा

दीदी :- (मेरे कान मरोड़ते हुए) जानती हु सब समझ रहा है तुझे बस मेरा मजाक बना रहा है तू

में :- अहह अहा दीदी दर्द कर रहा है छोड़ो

दीदी :- अब पता चला न बच्चू

इतना बोल के दीदी ने मेरा कान छोड़ दिया

फिर ऐसे hi कुछ देर मैंने दीदी के साथ मस्ती की फिर हम दोनों भी निचे आ गए जहा घर के सरे लोग थे जब हम निचे आये तोह सबने खाने के लिए बोल दिया तोह हम सभी फिर खाने खाने बैठ गए

जब में खाना की तरफ देखा तोह मेरे मुँह में पानी आ गया

डैड :- अरे वह आज कुछ खास बात है क्या

माँ :- नहीं कुछ खास नहीं है वह तोह मजी का ये सब खाने का मन था तोह बना दिया मेने तोह बस मदद की है सारा खाना तोह मजी ने hi बनाया है

दादी :- वह सब छोड़ बहु और खाना परोस

दादा (मुझसे) :- बीटा राज

में :- जी दादाजी

दादाजी :- आज आम के बगीचों में क्या किया तुमने

में :- क्या किया मैंने

डैड :- 75 आम की पेटिया तुमने ऐसे hi फ्री में बात दी

दादी :- राज ये करने की क्या जरुरत थी

में :- अरे ये क्या मुझे लगा आप भी मेरा साथ डोज लेकिन आप सब hi मुझे डट रहे हो

डैड :- अगर इतने बड़ा नुक्सान करोगे तोह डाट तोह पड़ेगी hi न

में :- ठीक है डैड (माँ से) माँ ये क्या कर रहे हो आप

माँ :- क्या कर रही हु सब को खाना परोस रही हु

में :- वही तोह आपको पता है दादी को शुगर है और आप उन्हें ये सब खिला रही हो उनकी तब्येत बिगड़ सकती है

माँ :- लेकिन बीटा दादी ने इतने मेहनत से ये सब बनाया है उन्हें थोड़ा तोह चखने दो

दादी (दुखी मन से) :- रहने दे बहु नहीं खाना मुझे

दादी ये बोल के अपनी जगह से उठने लगी की तभी में भी अपनी जगह से उठके उनके पास गया और अपने हाथों से उन्हें खिलने लगा

में :- बुरा लगा न जब आप के पसंद की चीज आप इतने मेहनत से बनाओ और आपको खाने भी न मिले क्यों

जब मैंने दादी से सवाल पूछा तोह सब लोग मेरे तरफ hi देखने लगे

दादी :- मतलब

में :- आपने बस कुछ घंटे मेहनत की और ये सब खाना बनाया वही वह लोग पुरे साल मेहनत करते है और उनकी मेहनत का फल केवल 4 महीनों के लिए आता है अगर वह खाने के लिए भी उन्हें न मिले तोह कितना गलत होगा न वह पुरे साल मेहनत करके हमे करोड़ों का प्रॉफिट कमा देते है और उन्ही के लिए अगर हमे कुछ नुक्सान हो भी गया तोह क्या हर्ज़ है

दादा :- सही कहा बीटा तुमने वह हमारे लिए इतनी मेहनत करते हैं हमे भी उनके लिए कुछ करना चाहिए

फिर ऐसे hi हम सब ने कुछ देर और बाटे की फिर सब अपने अपने कमरों में सोने चले गए

जब में अपने कमरे में पहुंचा तोह वह दीदी पहले से hi लेती हुई थी जब उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तोह वह उठ कर बीएड पे बैठ गयी और मुझे देख के मंद hi मंद मुस्कुराने लगी

में :- क्या हुआ ऐसे क्यों देख रही हो

दीदी :- पता नहीं आज तुमपे बड़ा प्यार आ रहा है

में :- ाचा मैंने ऐसा क्या किया

दीदी :- पता नहीं शायद जो हमारे बिच नया रिश्ता शुरू हुआ है उस वजह से भी hi सकता है.

में :- नया रिश्ता होगा आपके लिए आप आज भी मेरे लिए आप अभी भी वही पुराणी दीदी हो जिससे में अपने दिल और जान से प्यार करता था और करता रहूँगा

जब मैनी ये कहा तोह दीदी आके मेरे गले लग गयी

दीदी :- भाई तू जब ऐसी बाते करता है तोह और भी प्यार आता है

में ;- तोह करो न प्यार रोका किसने है

दीदी :- चाहती तोह में भी हु की तुझे कच्चा चबा जाऊ लेकिन क्या करू अभी भी दर्द हो रहा है

में :- आपने अभी तक बताया नहीं की दर्द कहा हो रहा है

मेरा सवाल सुनके दीदी शर्माने लगी लेकिन थोड़ी hi देर में पता नहीं उन्हें क्या हुआ उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी छूट पे रख दिया

दीदी :- यहाँ दर्द हो रहा है

में :- ाचा देखु तोह

दीदी :- नहीं आज नहीं भाई प्लीज तू अपने आप पर कण्ट्रोल कर लेगा लेकिन में नहीं कर पाऊँगी

फिर में ऐसे hi दीदी को कुछ देर छेड़ने के बाद हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर सो गए

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 72



जब सुबह मेरी आँख खुली तोह मेने देखा की दीदी वही पास में hi लेती हुई थी जिन्होंने मेरे हाथ को मजबूती से पकड़ा हुआ था जैसे में कही भगा जा रहा हु फिर मैंने बड़े आराम से अपना हाथ उनके हाथ से छुड़ाया और फिर उनके माथे पर किश करके चाट पर चला आया जहा गाइड पहले से hi मौजूद था

ग :- आओ राज तोह कैसा लग रहा है कुण्डलिनी को जागृत करने के बाद

में :- ऐसा लग रहा है की जैसे दिल और दिमाग दोनों ने एक दूसरे से लड़ना शुरू कर दिया है

ग :- एक बात याद रखना राज जब दो बड़ी ताकत आपस में लड़ती है तोह कोई छोटी ताकत भी उन्हें हारने के काबिल होती है लेकि जब वही बड़ी ताकते एक साथ हो जाती है तोह दुनिया की कोई भी बड़ी ताकत उन्हें हराना तोह दूर छू भी नहीं सकते

में :- जी समझा

ग :- ाचा मुझे बताओ क्या समझे

में :- आपने यही कहा न की एकता में बल है

ग (मुस्कुराते हुए) ;- नहीं समझे कोई नहीं जल्द hi समझ जाओगे यहाँ आओ

जब में उसके पास पंहुचा तोह उसने अपने राइट हाथ को ऊपर की तरफ कर दिया जिससे हमारे आस पास की जगह hi बदलने लगी जहा कुछ सेकण्ड्स पहले हम चाट पर थे वही अभी हम उसी जगह थे जहा गाइड ने मुझे कुण्डलिनी को जागृत करने का ज्ञान दिया था लेकिन ये जगह बदली हुई थी जहा पहले साडी जगह समुन्दर से घिरी हुई थी वही अब समुन्दर की जगह पर खली मैदान था

में :- ये क्या है यहाँ तोग समुन्दर था वह इतनी जल्दी कैसे सुख गया

ग :- जब यहाँ का समय hi मेरे अनुसार चलता है तोह यहाँ मेरे लिए क्या असंभव होगा

में :- ये भी सही है जब चाहे तब गर्मी जब चाहे तब बारिश मजे है

ग :- अब मजे बंद करो और सुनो आज तुम ध्यान नहीं लगाओगे

में :- क्यों में ध्यान क्यों नहीं लगाऊंगा सप्त चक्रों पे काबू करने के लिए ध्यान तोह लगाना पड़ेगा न

ग :- सब्र रखो राज आज तुम ध्यान नहीं लगाओगे बल्कि आज तुम परीक्षा डोज की आज तक मेने तुम्हे जो भी ज्ञान दिया है तुम उसका किस तरह उपयोग करते हो

में :- आपने कब मुझे ज्ञान प्रदान किया

ग :- जब तुम खुदको शुन्य में देखोगे तब तुम्हे सब समझ आएगा

में :- इसका क्या मतलब है में कुछ समझा नहीं आप साडी बाते सीधे सरल अंदाज में क्यों नहीं बताते की ये मेरी गलती है और इसे ऐसे सुधारना है हर बात को घुमा फिरा के बोलते हो

ग :- (मुस्कुराते हुए) जब कोई चीज बिना किसी मेहनत के मिले तोह उसका कोई मोल नहीं होता जब तुम किसी चीज के लिए परिश्रम करते हो तभी तुम्हे उस चीज का मोल पता चलता है

में :- लो फिर वही बात आपको पता है आप जो भी बोलते है कुछ समझता तोह नहीं है लेकिन सुनने में ाचा लगता है जैसे कोई संत बाबा के प्रवचन में बैठे हो

ग :- सब समझ जाओगे सही समय तुम्हे सब पता चल जायेगा चलो अब परीक्षा आरम्भ करते है

इतना कह कर गाइड ने मुझे ढाका दे दिया जिससे में सीधा जेक उस मैदान के बीचो बिच रुक गया जैसे hi में बीचो बिच आ गया मुझे ऐसा फील होने लगा की मुझे कोई घर रहा है जब मेने घोड़े के और देखा तोह वह वही खड़े मुस्कुरा रहे थे जैसे hi मेरी आखे उनके आखों से टकराई वैसे वह की जमीं हिलने लगी और उस जमीं के अंदर से दीवारे निकलने लगी जो मुझे घेरे खड़े थे ऐसा लग रहा हो की में किसी भूल भुलाया के बिच में खड़ा हु

अभी में आश्चर्य से से हर जगह देख hi था की तभी मुझे किसी ने पीछे से ढाका मारा जिसे में हड़बड़ा गया और तुरंत पलट गया लेकिन अब वह कोई नहीं था लेकिन मेरे पलटने के कुछ देर बाद hi मुझे फिर से ढाका लगा जिससे में इस बार गिरते गिरते बचा

में :- कोण है सामने आओ नहीं तोह अंजाम बहुत बुरा होगा

में पूरी जोर से छिलके बोलै लेकिन उसका कोई भी असर नहीं हुआ बल्कि इस बार का धक्का इतने होर का था की में इस बार गिर hi गया

में :- मुझे पता है ये आप hi हो एक बार यहाँ से निकल लू फिर देखता हु आपको

फिर में वह से उठ कर बहार निकलने का रास्ता ढूंढने लगा लेकिन में जिस जगह से शुरू किआ था में उसी जगह घूम कर आ जाता

जब में बहार निकल ने के लिए रास्ता धुंध रहा था तोह मेने एक बात नोट की में जब भी चलता था तोह मुझे धक्का नहीं लगता था बल्कि जब में किसी जगह रुक जाता तोह मुझे धक्का मार्के मुझे जमीं पर गिरा दिया जाता था तोह अब उन धक्कों से बचने का एक hi रास्ता था बिना रुके चलते रहना तोह अब में बस चल रहा था लेकिन फिर वही हो रहा था जिस जगह से में शुरू करता में उसी जगह आ खड़ा होता लेकिन में रुका नहीं था अब में जिस भी रस्ते से गुजरता में वह पे कुछ निशान बना देता जिससे मुझे एक hi जगह से बार बार न जाना पड़े लेकिन में जब भी किसी जगह पर निशानी बनाने के लिए रुकता फिर से कोई पीछे से आके मुझे ढाका दे देता लेकिन अब मेने भी अब जैसे थान लिया था की यहाँ से जल्द से जल्द निकल के hi रहूँगा इसलिए अब में कहते हुए hi बिना रुके निशानी बनाने लगा लेकिन ये इतना भी आसान नहीं था

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 73

अब मेने भी अब जैसे थान लिया था की यहाँ से जल्द से जल्द निकल के hi रहूँगा इसलिए अब में कहते हुए hi बिना रुके निशानी बनाने लगा लेकिन ये इतना भी आसान नहीं था

में जब भी चलते हुए निशानी बनाने की तरय करता मेरी स्पीड स्लो हो जाती और मुझे पीछे से कोई धक्का दे देता अब चलते हुए मेरा बैलेंस नहीं बन प् रहा था जिससे में जमीं पर गिर जाता अभी में उठ hi रहा था की तभी मुझे एक आईडिया आया और में वैसे hi जमीं पर लेत कर आगे बढ़ने लगा लेकिन में अभी कुछ hi आगे गया था की तभी मुझे ऐसा लगा की किसीने कोई भरी चीज मेरे पिच के ऊपर लाड दी है जिससे अब न में आगे बढ़ प् रहा था और न hi मेरा दिमाग काम कर रहा था जिससे में थक हार कर फिर खड़ा हो गया और जब खड़ा होक में अपनी थकन को कण्ट्रोल कर hi रहा था की तभी फिर से किसी ने मुझे धक्का दे दिया जिससे में गिरा तोह नहीं लेकिन में अब जमीं पर बैठ गया था अब जब में जमीं पर बैठ गया तोह न अब कोई धक्का लग रहा था न किसी तरह का भर महसूस हो रहा था जिससे में अब वैसे hi बैठे बैठे आराम करने लगा और अपनी थकन उतरने लगा जब मुझे थोड़ी रहत महसूस होने लगी तोह में अपने आस पास के माहौल को समझने लगा और आगे की प्लानिंग करने लगा जब मुझे कुछ भी पता नहीं चला तोह में वैसे hi बैठे हुए ध्यान लगाने लगा जिससे अब मेरा दिमाग भी शांत हो रहा था की तभी मेरे कानो में गाइड की आवाज आने लगी और आखों के सामने कुछ दिन पहले का सन आ गया

गाइड (इन मेमोरी) :- बड़ी बड़ी समस्याओं की तरफ देखने से पहले छोटी अड़चनों के बारे में विचार करो क्यूंकि अगर तुम छोटी छोटी अड़चनों में फेज रहोगे तोह कभी बड़ी समस्या का समाधान नहीं धुंध पाओगे

जब मुझे गाइड की आवाज सुनाई देने लगी तोह में भी समझ गया की अब मुझे क्या करना है

सबसे पहले मैंने सरे बातों के बारे में सोचना शुरू किआ फिर उन सब को प्रायोरिटी के हिसाब में तोलने लगा जैसे मेरा मकसद था इस भू भुलैया से बहार निकलना जिसके लिए मुझे उसका सही रास्ता ढूँढना होगा जिसके लिए मुझे हर दीवाल पे एक सिग्न बनाना था की में उसी रस्ते का फिर से उसे न करू लेकिन इसके लिए मुझे उस फाॅर्स का पता लगाना था की जिससे वह मुझे बार बार गिरा न सके

अब सारा प्लान मेरे मंद में तैयार था अब में ध्यान लगा के सबसे पहले मेरे आस पास होने वाले सरे मूवमेंट्स को सेंस करने लगा जिससे मुझे मेरे शरीर के आस पास कुछ मूवमेंट्स महसूस होने लगी जिससे महसूस करके मेरे चेहरे पर भी अब मुस्कान आ गयी थी

फिर में वैसे hi आखे बंद करके खड़ा हो गया और जैसे hi मेने उस मूवमेंट को फिर से सेंस किया मेने उसी डिरेक्टन में अपनी पूरी ताकत के साथ पंच मार दिया और जब मेने आखे खोली तोह मेरे सामने कोई नहीं था बल्कि जमीं पर कुछ पत्थर के टुकड़े पड़े हुए थे मतलब मुझे इस पत्थर का उसे करके बार बार धक्का दिए जा रहे थे जब मेरी नज़र मेरे हाथ पर गयी तोह मेरे हाथ पर लाल रंग की मिटटी लगी हुई थी जो शायद उसी पत्थर की थी लेकिन अब मेरी एक अड़चन दोर्र हो गयी थी अब मुझे यहाँ से बहार निकलने पर फोकस करना था तोह मेने उन्ही पत्थर के टुकड़ों में से एक पीेछे उठके वह की दीवारों पर निशानी बना दी और आगे की तरफ चलने लगा ऐसे की कुछ देर चलने के बाद मुझे बहार जाने का रास्ता भी मिल गया जिससे मुझे बहुत ख़ुशी हुई लेकिन वह ज्यादा देर तिकी नहीं क्यूंकि में भूल भुलैया से तोह बहार आ गया था लेकिन ये चुनौती ख़तम नहीं हुई थी

अभी मेरे सामने एक रास्ता था जो किसी टनल की तरह बना हुआ था जब मेने वह रास्ता देखा तोह उसपर बढ़ने लगा क्यूंकि वह और कोई दूसरा रास्ता नहीं था अभी मेने चलते हुए आधा रास्ता hi क्रॉस किआ था की तभी मेरे सामने से एक बड़ी चट्टान आके मुझसे टकराई जिसके फाॅर्स से में फिर से उस टनल के स्टार्टिंग में आ गया था

में :- (मन में) मुझे और तेज़ होना होगा

फिर में तेज़ी से उस टनल में दौड़ने लगा जिसके वजह से मेने आधा रास्ता तोह बिना किसी दिक्कत के क्रॉस कर लिया था लेकिन फिर से वही हुआ उस बड़ी चट्टान ने मुझे स्टार्टिंग में भेज दिया

ऐसे hi 10 से 15 तरय करने के बाद भी में सक्सेस नहीं हुआ जबकि में हर बार अपनी स्पीड बढ़ता जा रहा था मेने एक दो बार उस चट्टान को तोड़ने का भी तरय किया लेकिन कुछ नहीं हुआ बल्कि में जितनी फाॅर्स से पंच मारता वह उसके दुगने फाॅर्स से मुझे फिर से स्टार्टिंग में फेक देता अब मेरे कपडे जगह जगह से पहात गए थे और शरीर के कुछ कुछ हिस्सों से अभी खून भी बहाने लगा था इसीलिए अब मेने कुछ देर आराम करने का फैसला लिया और अब तक के मेरे जितने भी तरय किये थे उनके बारे में सोचने लगा तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया और में फिर से उस टनल के अंदर जाने लगा लेकिन में इस बार न भाग रहा था न hi कुछ सोच रहा था बल्कि अब में बस चले जा रहा था ऐसे चलते हुए में कुछ दूर hi पंहुचा था तोह मुझे वह चट्टान दिखाई देने लगी उसे देख के में जहा था वही रुक गया और उस चट्टान के मेरे करीब आने का इंतज़ार करने लगा जैसे hi वह चट्टान मेरे करीब आयी में तुरनर साइड हो गया जिससे वह चट्टान बिना मुझे छुए पीछे की और निकल गयी उसके जाते hi मेने भी फिर से चलना शुरू कर दिया

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आज के लिए इतना hi


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