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अब तक आपने देखा की कैसे राज ने सहर में जेक अपने परिवार पर हुम्ला करने वाले को डरा कर समझा दिया फिर उसके बाद शॉपिंग करने गए मॉल में उसने एक औरत के साथ बदतमीजी कर रहे गुंडों को भी ाचा सबक सिखाया लेकिन उसके बाद राज जब आस पास देखता है तोह उसे उस औरत का कही भी कोई भी सबूत नहीं मिलता की वह कोण थी या कहा गायब हुई खैर राज इस सब को अपने दिमाग से निकल के घर के लिए रवाना हो जाता है जहा पे वह सबके साथ खाना खाने लगता है जब सब का खाना हो जाता है तोह दादाजी ने डैड और काका को स्टडी रूम में बुला लिया जहा दादा जी के सवाल सुनके उन दोनों का मुँह खुला रह जाता है
अब आगे
दादाजी :- बोलो क्या हो रहा है पिछले कुछ दिनों में
डैड :- (हड़बड़ाते हुए) पिताजी वो
दादाजी :- धर्म मुझे सुच जानना है झूठ बोलने के बारे में सोचना भी मत
डैड :- लितजी गवर्नमेंट ने एक टेंडर निकला है जो की बहुत बड़ा है उस टेंडर के लिए लगभग साडी बड़ी कम्पनीज ने अपपल्य किया है जिनमे हमारी कंपनी भी है उसी टेंडर को पाने के लिए कुछ बिज़नेस रिवल्स मुझे धमकी दे रहे थे जो की बिज़नेस में नार्मल था लेकिन एक कंपनी है जिन्होंने न सिर्फ मुझे धमकी दी बल्कि मेरे परिवार पर जानलेवा हुम्ला भी कराया
भीमा काका :- उन्होंने 4 बार हुम्ला किया था 2 बार मेरे आदमियों ने उन्हें रोक लिया लेकिन फिर उन्होंने छोटे मालिक पर जानलेवा हुम्ला किया जिसके बाद उन हमलावरों का कोई भी नमो निशान नहीं मिला और 1 हुम्ला होने की संबबवना थी लेकिन वह हुआ hi नहीं
दादाजी :- और राज का यु अचानक सहर जाने के पीछे क्या कारण है
काका :- वह उसी से मिलने गए थे जिसने हुम्ला किया
फिर भीमा काका उन्हें सब बता देते है की कैसे मैंने प्लान करके उस आदमी को समझाया और इस मामले को ख़तम कर दिया
दादाजी :- मेरे नाक के निचे इतना सब हो रहा है और मुझे मालूम भी नहीं भीमा तुमने भी मुझसे ये बात छुपाई
काका :- माफ़ करना ठाकुर साहब लेकिन उस वक़्त घर में ख़ुशी का माहौल था जिसे ख़राब करना मेने सही नहीं समजा
दादाजी :- ठीक है अब तुम दोनों जा सकते हो और आज के बाद कोई भी बात अगर मुझसे छुपाई तोह में माफ़ नहीं करूँगा
डैड और काका :- जी
तोह वही में अपने कमरे में बैठ कर पिछले कुछ दिनों में जो भी हुआ उसके बारे में सोचने लगा की
में (मन में) :- कैसे मेने अपनी गलती के चलते अपने परिवार की जान खतरे में दाल दी थी मेने केवल अपने परिवार की जान बचने के लिए किसी और के परिवार की जान खतरे में दाल दी क्या में सच्ची में इन शक्तियों को डेसेर्वे करता हु या नहीं क्या में इतने सरे लोगों के प्यार और भरोसे के लायक हु या नहीं
यही सब सोचते हुए कब मेरे आखों से ासु निकल आये में भी नहीं जानता अभी में यही सब सोच रहा था की तभी मेरे दूर पे नॉक हुआ जब मैंने दूर खोल के देखा तोह वह दादाजी खड़े थे
में :- अरे दादाजी आप आइये न अंदर
दादाजी ने अंदर आके दरवाजा लॉक कर दिया और फिर मुझे लेके बीएड पर बैठ गए.
दादाजी :- क्या सोच रहे हो राज
में :- कुछ भी तोह नहीं
दादाजी :- देखो राज में जानता हु की अभी तुम आज के बारे में सोच कर hi उदास हो रहे तुम्हारे चेहरे पर दिख रहा है की तुम किसी बात को सोच कर बहुत ज्यादा उदास हो रहे थे
में :- नक़्ही दादाजी
दादाजी :- राज मुझसे झूट मत बोलो जो भी हो सब सच बोल के अपना मन हल्का कर दो
में :- (लम्बी सास लेके) कल जब में सुबह सोफे पे बैठा था तोह डैड के फ़ोन पे फ़ोन आया
फिर उसके बाद में दादाजी को सब बता ने लगा की कैसे मेने उन हमलवारों को जान से मारा (यहाँ मेने अपनी शक्तियों का जरा भी उल्लेख नहीं किया था मेने बस उन हमलवयरों के बारे में बताया था जिनको मेने बोडीगार्ड्स के जरिये मारा था)
उसके बाद जो आज सहर में मेने उस आदमी के परिवार की जान खतरे में डाली वह भी बताया
दादाजी :- हम्म ये बात है अब मेरे कुछ सवालों के जवाब दो क्या तुमने जिन हमलवयरों को मारा अगर तुम उन्हें न मारते तोह क्या होता
में :- हम्म सायद वह मुझ पर हमला कर देते और हो सकता है मेरी जान ले लेते
दादाजी :- उसके बाद क्या होता तुम्हारे मरने से सिर्फ घर में hi नहीं बल्कि पुरे शेर ग्रह में मातम च जाता जिसका फायदा उठके हुम्ला वॉर फिर से हुम्ला कर देता और उस वक़्त हम तैयार भी नहीं होते और शायद मरे जाते तुमने जिनको मारा वह आत्म रक्षा थी याद रखना जिंदगी का रास्ता मृत्यु से hi मिलता है वह भले तुम्हारी मृत्यु हो या तुम्हारे शत्रुओं की
और अब दूसरा सवाल क्या तुमने उस ट्रक ड्राइवर को उस औरत की जान लेने को कहा था
में ;- नहीं.
दादाजी :- क्या कहा था
में :- यही की ट्रक को उस औरत के बिलकुल सामने जेक रोकना और जैसे में उसे वह से हटा दू तोह ट्रक लेके चले जाना
दादाजी :- तोह तुमने उसकी जान खतरे में कैसे डाली तुमने बस एक ड्रामा किया जिसमे किसी को चोट नहीं लगी और नहीं तुम्हारे मन में ऐसा कोई विचार था सही कहा न
में :- जी
दादाजी :- तोह इन सब बातों को छोड़ो और आराम करो कुछ दिनों बाद घर में सरे कार्यक्रम शुरू हो जायेंगे तोह आराम करने का भी मौका नहीं मिलेगा
में :- जी
दादाजी के समझने से में भी थोड़ा रिलैक्स हो गया था लेकिन मेरे मन में फिर भी एक सवाल था
में :- और अगर कभी में hi गलत हु तोह
दादाजी :- मतलब
में :- अगर कभी मेरी गलती से मेरे किसी अपने की जान खतरे में आ जाये या में कभी कोई ऐसी गलती कर दू जिससे मेरे घर परिवार की या किसी मासूम की जिंदगी खतरे में पद जाये तोह
मेरा ये सवाल सुनके दादाजी गहरी सोच में पद गए जैसे मेरे कहे गए सवाल का जवाब hi सोच रहे हो
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आज के लिए इतना hi
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अब तक आपने देखा की कैसे राज ने सहर में जेक अपने परिवार पर हुम्ला करने वाले को डरा कर समझा दिया फिर उसके बाद शॉपिंग करने गए मॉल में उसने एक औरत के साथ बदतमीजी कर रहे गुंडों को भी ाचा सबक सिखाया लेकिन उसके बाद राज जब आस पास देखता है तोह उसे उस औरत का कही भी कोई भी सबूत नहीं मिलता की वह कोण थी या कहा गायब हुई खैर राज इस सब को अपने दिमाग से निकल के घर के लिए रवाना हो जाता है जहा पे वह सबके साथ खाना खाने लगता है जब सब का खाना हो जाता है तोह दादाजी ने डैड और काका को स्टडी रूम में बुला लिया जहा दादा जी के सवाल सुनके उन दोनों का मुँह खुला रह जाता है
अब आगे
दादाजी :- बोलो क्या हो रहा है पिछले कुछ दिनों में
डैड :- (हड़बड़ाते हुए) पिताजी वो
दादाजी :- धर्म मुझे सुच जानना है झूठ बोलने के बारे में सोचना भी मत
डैड :- लितजी गवर्नमेंट ने एक टेंडर निकला है जो की बहुत बड़ा है उस टेंडर के लिए लगभग साडी बड़ी कम्पनीज ने अपपल्य किया है जिनमे हमारी कंपनी भी है उसी टेंडर को पाने के लिए कुछ बिज़नेस रिवल्स मुझे धमकी दे रहे थे जो की बिज़नेस में नार्मल था लेकिन एक कंपनी है जिन्होंने न सिर्फ मुझे धमकी दी बल्कि मेरे परिवार पर जानलेवा हुम्ला भी कराया
भीमा काका :- उन्होंने 4 बार हुम्ला किया था 2 बार मेरे आदमियों ने उन्हें रोक लिया लेकिन फिर उन्होंने छोटे मालिक पर जानलेवा हुम्ला किया जिसके बाद उन हमलावरों का कोई भी नमो निशान नहीं मिला और 1 हुम्ला होने की संबबवना थी लेकिन वह हुआ hi नहीं
दादाजी :- और राज का यु अचानक सहर जाने के पीछे क्या कारण है
काका :- वह उसी से मिलने गए थे जिसने हुम्ला किया
फिर भीमा काका उन्हें सब बता देते है की कैसे मैंने प्लान करके उस आदमी को समझाया और इस मामले को ख़तम कर दिया
दादाजी :- मेरे नाक के निचे इतना सब हो रहा है और मुझे मालूम भी नहीं भीमा तुमने भी मुझसे ये बात छुपाई
काका :- माफ़ करना ठाकुर साहब लेकिन उस वक़्त घर में ख़ुशी का माहौल था जिसे ख़राब करना मेने सही नहीं समजा
दादाजी :- ठीक है अब तुम दोनों जा सकते हो और आज के बाद कोई भी बात अगर मुझसे छुपाई तोह में माफ़ नहीं करूँगा
डैड और काका :- जी
तोह वही में अपने कमरे में बैठ कर पिछले कुछ दिनों में जो भी हुआ उसके बारे में सोचने लगा की
में (मन में) :- कैसे मेने अपनी गलती के चलते अपने परिवार की जान खतरे में दाल दी थी मेने केवल अपने परिवार की जान बचने के लिए किसी और के परिवार की जान खतरे में दाल दी क्या में सच्ची में इन शक्तियों को डेसेर्वे करता हु या नहीं क्या में इतने सरे लोगों के प्यार और भरोसे के लायक हु या नहीं
यही सब सोचते हुए कब मेरे आखों से ासु निकल आये में भी नहीं जानता अभी में यही सब सोच रहा था की तभी मेरे दूर पे नॉक हुआ जब मैंने दूर खोल के देखा तोह वह दादाजी खड़े थे
में :- अरे दादाजी आप आइये न अंदर
दादाजी ने अंदर आके दरवाजा लॉक कर दिया और फिर मुझे लेके बीएड पर बैठ गए.
दादाजी :- क्या सोच रहे हो राज
में :- कुछ भी तोह नहीं
दादाजी :- देखो राज में जानता हु की अभी तुम आज के बारे में सोच कर hi उदास हो रहे तुम्हारे चेहरे पर दिख रहा है की तुम किसी बात को सोच कर बहुत ज्यादा उदास हो रहे थे
में :- नक़्ही दादाजी
दादाजी :- राज मुझसे झूट मत बोलो जो भी हो सब सच बोल के अपना मन हल्का कर दो
में :- (लम्बी सास लेके) कल जब में सुबह सोफे पे बैठा था तोह डैड के फ़ोन पे फ़ोन आया
फिर उसके बाद में दादाजी को सब बता ने लगा की कैसे मेने उन हमलवारों को जान से मारा (यहाँ मेने अपनी शक्तियों का जरा भी उल्लेख नहीं किया था मेने बस उन हमलवयरों के बारे में बताया था जिनको मेने बोडीगार्ड्स के जरिये मारा था)
उसके बाद जो आज सहर में मेने उस आदमी के परिवार की जान खतरे में डाली वह भी बताया
दादाजी :- हम्म ये बात है अब मेरे कुछ सवालों के जवाब दो क्या तुमने जिन हमलवयरों को मारा अगर तुम उन्हें न मारते तोह क्या होता
में :- हम्म सायद वह मुझ पर हमला कर देते और हो सकता है मेरी जान ले लेते
दादाजी :- उसके बाद क्या होता तुम्हारे मरने से सिर्फ घर में hi नहीं बल्कि पुरे शेर ग्रह में मातम च जाता जिसका फायदा उठके हुम्ला वॉर फिर से हुम्ला कर देता और उस वक़्त हम तैयार भी नहीं होते और शायद मरे जाते तुमने जिनको मारा वह आत्म रक्षा थी याद रखना जिंदगी का रास्ता मृत्यु से hi मिलता है वह भले तुम्हारी मृत्यु हो या तुम्हारे शत्रुओं की
और अब दूसरा सवाल क्या तुमने उस ट्रक ड्राइवर को उस औरत की जान लेने को कहा था
में ;- नहीं.
दादाजी :- क्या कहा था
में :- यही की ट्रक को उस औरत के बिलकुल सामने जेक रोकना और जैसे में उसे वह से हटा दू तोह ट्रक लेके चले जाना
दादाजी :- तोह तुमने उसकी जान खतरे में कैसे डाली तुमने बस एक ड्रामा किया जिसमे किसी को चोट नहीं लगी और नहीं तुम्हारे मन में ऐसा कोई विचार था सही कहा न
में :- जी
दादाजी :- तोह इन सब बातों को छोड़ो और आराम करो कुछ दिनों बाद घर में सरे कार्यक्रम शुरू हो जायेंगे तोह आराम करने का भी मौका नहीं मिलेगा
में :- जी
दादाजी के समझने से में भी थोड़ा रिलैक्स हो गया था लेकिन मेरे मन में फिर भी एक सवाल था
में :- और अगर कभी में hi गलत हु तोह
दादाजी :- मतलब
में :- अगर कभी मेरी गलती से मेरे किसी अपने की जान खतरे में आ जाये या में कभी कोई ऐसी गलती कर दू जिससे मेरे घर परिवार की या किसी मासूम की जिंदगी खतरे में पद जाये तोह
मेरा ये सवाल सुनके दादाजी गहरी सोच में पद गए जैसे मेरे कहे गए सवाल का जवाब hi सोच रहे हो
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आज के लिए इतना hi
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