A wedding ceremony in village - Page 22 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

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अच्छा रीडर्स अगला अपडेट गरिमा पर है और कई पार्ट्स में होगा और प्रॉपर सेक्स अपडेट होगा. विथ गरिमा एंड हिज थ्री इडियट्स हरिया, बिहारी काका एंड जीतू. और गरिमा का इस स्टोरी का आखिरी प्रॉपर अपडेट होगा. विनीता की स्टोरी के आखिरी अपडेट का आईडिया मेरे दिमाग में है तो वो मुझे पता है पर गरिमा के इस अपडेट को मई थोड़ा बढ़िया बनाना चाहता हु और गरिमा का पिछले सेक्स अपडेट इतना ज्यादा ज़बरदस्त हो गया की उसका बार काफी हाई सेट हो गया एक रीडर ने तो मुझे पर्सनल उस अपडेट को लेकर पर्सनल मैसेज भी करा. ऐसे में मई थोड़ा कन्फ्यूज्ड भी हु की क्या लिखू की ये सन उस सन से भी ज्यादा इरोटिक हो. सो कोई आईडिया हो तो बताए पहले भी बोलै था पर तब कोई रिस्पांस नहीं मिला था तो खुद से हरिया की वापसी करवाई अब फिर पूछ रहा हु कोई आईडिया हो तो बताए. बात सेक्स सन की नहीं बात सिचुएशन की होती है सिचुएशन और माहौल अपडेट को इरोटिक बनता है सेक्स तो एक hi तरीके से होता है तो ऐसी कोई सिचुएशन हो तो आईडिया दे. शायद कोई आईडिया धमाकेदार लगे.
 
लखन सिंह की कोठी में

जब किचन में गरिमा बिहारी काका और उनका बीटा जीतू ये तीनो वासना के नशे पूरी तरह मदमस्त थे की तभी उनके पीछे से आई एक भरी भरकम आवाज़ ने उनके रंग में भांग दाल दिया. तीनो ने एक साथ पीछे पलट कर देखा और तीनो के मुँह से एक साथ एक नाम निकला.

"हरिया"

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जी हां वही हरिया जिसने गरिमा को हवस और वासना के इस रास्ते पर पहला कदम रखने को मजबूर किया था, जो अपनी बीवी की प्रेगनेंसी के चलते कुछ दिनों के लिए अपने ससुराल गया था वो अब वापस आ गया था. हरिया की आवाज़ सुनकर hi बिहारी काका के तो चेहरे पे हवइया सी उड़ने लगी और जीतू की तो सिटी पित्ती hi गम हो गई वो इस बात से डरे हुए थे की कही हरिया ये सब लखन सिंह को न बता दे क्युकी वो इस बात से अनजान थे की हरिया तो गरिमा का पहले मज़ा ले चूका था वो भी कई बार. वही गरिमा को हलाकि ये दर तो नहीं था की हरिया बहार किसी से कह देगा पर है आज उसे यु एक बाप बेटे के साथ इस हालत में देख हरिया अब उसे एक चैरेक्टरलेस औरत hi समझेगा. कुछ पल के लिए वह एक अजीब सी ख़ामोशी छै रही जिसे हरिया ने hi तोडा.

हरिया : ये सब क्या हो रहा है घर में इतना सन्नाटा क्यों है कहा हो सब लोग. गेट खुला पड़ा है बहार पानी चल रहा था पुरे पौधे पानी से भर गए. कहा हो आप लोग. बिहारी काका जीतू हो की नहीं.

तीनो ने एक दुसरे को देखा और थोड़ी रहत की सांस ली की हरिया ने उन्हें वो सब करते हुए नहीं देखा है. गरिमा ने जल्दी जल्दी अपने अस्त व्यस्त कपडे ठीक करे अपनी ऊपर नीचे होती सासो को काबू करा. बहार हॉल में एक बड़ा सा आइना लगा था जिसमे उन्हें इधर उधर देखता हरिया साफ़ नज़र आ रहा था पर हरिया की बातो से साफ़ ज़ाहिर था की उसने उन्हें नहीं देखा है.

जीतू: बापू हरिया भाई ने अपने को नहीं देखा है.

बिहारी काका: है तो सब लोग एकदम नार्मल बेहवे करो जैसे हम लोग किचन में बस खाना बना रहे थे.

गरिमा ने भी सहमति में सर हिला दिया.

तीनो लोग नार्मल बेहवे करते हुए एक साथ किचन से बहार आ गए.

हरिया: अरे आप तीनो किचन में थे एक साथ तीनो लोग किचन में क्या कर रहे थे.

बिहारी काका: अब बीटा मई किचन में क्या करूँगा खाना hi बनाऊगा वही बना रहा था. ये बिटिया ने ज़िद्द करि की जाने से पहले एक बार मेरी खाने में मदद करेगी तो वही कर रही थी. और ये जीतू ठंडा पानी पीने आया था. वो सब छोडो तुम तो सात बजे आने वाले थे इतनी जल्दी कैसे आ गए.

हरिया: रास्ता लुम्बा था और पल भी अभी नया बना है तो ज्यादा रात करना ठीक नहीं इसलिए जल्दी आ गया. थोड़ा जल्दी निकल लेना hi सही रहेगा. आपको तो कोई दिक्कत नहीं मेमसाब.

गरिमा: नहीं नहीं जल्दी निकल लेते है सही रहेगा.

बिहारी काका और खास कर जीतू मन मसोस कर रह गए अब हरिया के सामने तो वो कुछ नहीं कर सकते थे. और गरिमा अब जाने वाली थी तो अब उन्हें दुबारा कोई मौका भी मिलने से रहा. हरिया ने आगे बाद कर एक पैकेट गरिमा की तरफ बड़ा दिया.

हरिया: इसमें आपके लिए कपडे और आपकी साइज के hi है मई खरीद के लाया था. आप तैयार होकर नीचे आ जाइये हम अभी निकलेंगे ज्यादा अँधेरा करना ठीक नहीं.

गरिमा भी हरिया को शुक्रिया बोल कर वो पैकेट लेकर ऊपर अपने कमरे में चली गई. उस पैकेट में एक नारंगी रंग की साड़ी मैचिंग ब्लाउज पेटीकोट और एक ब्लैक ब्रा पंतय का सेट था. और शायद हरिया को अच्छे से नपा था तभी हर चीज़ गरिमा की साइज की hi थी. गरिमा वो कपडे पहनकर तैयार होने लगी. तैयार होकर जब वो नीचे आई तो Hariya,Bihari काका और जीतू तीनो वह चुपचाप खड़े थे.

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हरिया: चलिए आप गाडी में बैठिये और है ये दोनों भी नदी तक हमारे साथ hi चलेंगे अगर पिछली बार की तरह फिर ऐसा कुछ हो गया तो वह बचने के लिए कोई रहे तो अच्छा रहेगा.

गरिमा, बिहारी काका और जीतू तीनो गाड़ी में बैठ गए और हरिया ड्राइवर सीट में आकर बैठ गया. और गाड़ी गांव के पथरीले उबड़ खाबड़ रास्तो से होते उस नदी की तरफ चल पड़ी. नदी के पास पहुंच कर हरिया ने गाडी रोक दी. गरिमा ने उस जगह को एक पल को देखा था ये वही जगह थी जहा गरिमा उस एक्सीडेंट के बाद हरिया के साथ साडी रात गुज़री थी वो भी बिना कपड़ो के. ये वो पहली रात जब गरिमा अपने पति के अलावा किसी गैर मर्द के सामने नंगी हुई थी. है बेशक उसमे उसकी कोई सहमति नहीं थी क्युकी वो तो बेहोश थी. पर वो रात उसके इस गांव के कामुक सफर का पहला कदम थी. सब सोच hi रहे थे की हरिया ने गाड़ी क्यों रोक दी की तभी हरिया ने खुद इसका जवाब दे दिया.

हरिया: गाड़ी का तो पेट्रोल hi ख़तम हो गया मैंने तो अपने घर से चलते टाइम टंकी फुल करवाई थी.

हरिया ने गाड़ी से उतारकर देखा.

हरिया: ओह गाड़ी से तो पेट्रोल लीक कर रहा है. लगता है रस्ते में कोई नुकीला पत्थर लगने से ये लीक कर गया. और गाड़ी का तो एक टायर भी पंक्चर है. पेट्रोल भी लाना होगा और किसी मैकेनिक को भी लाना होगा. पर अब यहाँ पेट्रोल और मैकेनिक कहा मिलेगा. पेट्रोल पंप तो यहाँ से काफी दूर गाँव मर है.

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बिहारी काका: मेरे एक नातेदार यहाँ से थोड़ी दूर रहता है वो गाडी भी ठीक कर लेता है. और उसके यहाँ गाड़ी भी है तो शायद हमे वह पेट्रोल भी मिल जाए. पर शाम हो रही है तो अकेला कैसे जाऊ.

हरिया: एक काम करते है मई आपके साथ चलता हु और मैडम जी और जीतू को यही छोड़ देते है मैडम जी कहा परेशां होंगी उन्हें यही रहने देते है ठीक है न.

बिहारी काका: है सही रहेगा जीतू मैडम जी का ख्याल रखना.

जीतू: जी बापू

जीतू और गरिमा को वही छोड़ हरिया और बिहारी काका चले गए.

जीतू: गरिमा दी यहाँ गाड़ी में तो बहुत गर्मी है एक भी ख़राब है इसका तो जब तक हरिया भाई और बापू वापस आते है हम उधर उस पेड़ के नीचे चले वह थोड़ी हवा लगेगी. वैसे भी बापू जिस नातेदार की बात कर रहे उसके घर यहाँ से काफी दूर है और सड़क भी ऐसी नहीं जिसपर तेज़ तेज़ चल सके तो उन्हें एक घंटे से ज्यादा लगेगा तो तब तक हम यहाँ गाड़ी में क्या बैठे रहे.

गरिमा: ठीक है चलो.

जीतू और गरिमा गाड़ी से उतर कर एक पेड़ के नीचे आ गए. पेड़ की ूत होने के कारन उन्हें यहाँ से गाड़ी नज़र नहीं आ रही थी. हवाई तेज़ तेज़ चल रही थी और गरिमा की ज़ुल्फ़े उसके चेहरे पर आ रही थी. आस पास कोई नहीं था और हरिया और बिहारी काका को भी अभी समय लगने वाला था ऐसे में ब्लाउज में से गरिमा के उभरे हुए स्तनों को देख कर जीतू की जवानी की कीड़े फिर से कुलबुलाने लगे थे. पर पता नहीं अब गरिमा उसे कुछ करने देगी भी की नहीं. पर एक बार तरय करना तो ज़रूरी था क्युकी इसके बाद दुबारा ये मौका नहीं मिलने वाला था.

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जीतू: मम्मी आप गुस्सा तो नहीं हो.

गरिमा: क्या मई तुम्हारी मम्मी नहीं हु.

जीतू: पर सुबह तो अपने मान लिया था की आप मेरी मम्मी हो. और बापू ने जब आपकी मांग भरी है तो आप उनकी बीवी हुई तो उस रिश्ते से तो मेरी मम्मी hi हुई.

गरिमा के पास जीतू की इस बात का कोई उत्तर नहीं था.

गरिमा: देखो जीतू जो होना था हो गया अब मई जा रही हु तो अब तुमसे रिक्वेस्ट है की इस बात का ज़िक्र किसी से मत करना. क्युकी अगर ये बात शोभा को पता चली तो मेरी बाकि सहेलियों को भी पता चल जाएगी और मेरे घरवालों को भी पता चल जाएगी प्लीज ये सब भूल जाऊ.

जीतू: मई कहा कुछ कह रहा हु, मई तो बस एक बार आपको मम्मी के रूप में इमेजिन करना चाहता हु. मेरी मम्मी तो मेरे पैदा होते hi चल बसी तो मुझे बाप की सख्ती तो मिली पर माँ का प्यार नहीं.

जीतू की इस बात ने गरिमा को भी इमोशनल कर दिया.

गरिमा: ठीक है जब तक हरिया और तुम्हारे बापू आते है तुम मुझे मम्मी मान सकते हो. पर उनके सामने नहीं.

जीतू: थैंक ु मम्मी आप कितनी अच्छी हो काश आप सच में मेरी मम्मी होती. मई आप और बापू तीनो साथ में रहते और 9 महीने बाद मुझे एक भाई या बेहेन भी मिल जाता.

जीतू जानबूझ कर गरिमा को उसकी कल रात कही हुई बाते याद दिला कर एक्साइट कर रहा था.

जीतू: मम्मी क्या मई आपकी गोड़ में सर रख कर लेट जाऊ.

गरिमा: ठीक है लेट जाओ. पर कोई शैतानी मत करना.

जीतू: मम्मी अब बच्चा अपनी माँ से शैतानी नहीं करेगा तो किस्से करेगा.

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इतना कह कर जीतू ने अपना सर गरिमा की गोड़ में रख दिया. जीतू के क्या इंटेंशन्स थे मम्मी मम्मी बोल कर वो क्या करना चाहता था ये तो बस वो hi जनता था.
 
उस सूनसान जगह पर जीतू गरिमा की गोड़ में सर रखकर लेता था.

जीतू: मम्मी मेरे बालो को सेहलाओ न प्लीज.

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गरिमा जीतू के बालो को हौले हौले सहलाने लगी. अपने बालो में चलती गरिमा की कोमल कोमल उंगलिया जीतू को मदमस्त सा कर रही थी. उसने गरिमा की तरफ hi करवट ले ली. ऐसा करने से गरिमा का पेट जीतू के चेहरे के ठीक सामने आ गया. और तेज़ तेज़ चलती हवाओ से जब गरिमा की साड़ी थोड़ा सा यहाँ वह होती तो गरिमा की गहरी नाभि जीतू के सामने बेपर्दा हो जाती. हलाकि गरिमा और जीतू के बीच अब परदे लायक कुछ था भी नहीं. पर फिर भी गरिमा के साथ घाटे पिछले दो इन्सिडेंट्स ने जीतू के मन में गरिमा के प्रति एक्ससिटेमेंट को हद से ज्यादा बड़ा दिया था.

जीतू ने अपने चेहरे को थोड़ा आगे सिरकाया और अपने होंठ गरिमा के पेट पर रख दिए. जीतू की इस हरकत पर गरिमा एकदम से चिहुँक पड़ी.

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गरिमा: जीतू ये क्या कर रहे हो.

जीतू: अपनी मम्मी के साथ खेल रहा क्या इतना भी नहीं कर सकता प्लीज थोड़ी देर खेल लेने दो न फिर तो आप चली hi जाओगी.

गरिमा: ठीक है पर केवल थोड़ी देर.

जीतू: है पक्का

जीतू ने फिर से अपने होंठ गरिमा के पेट पर रख दिए. और धीमे धीमे अपनी जीभ बहार निकल कर गरिमा के पेट को चेतना शुरू कर दिया. गरिमा की उंगलिया अब भी जीतू के बालो को सेहला रही थी पर जीतू की इन कामुक हरकतों के चलते गरिमा की सासो की गति भी बाद गई थी और और उसकी उंगलियों की भी. गरिमा का पेट छत्ते छत्ते जीतू ने अचानक अपनी जीभ गरिमा की नाभि में दाल दी. गरिमा ने कास कर अपने निचले होंठ को अपने दातो में दबा लिया और उंगलियों की पकड़ जीतू के बालो पर कास गई.

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जीतू का हल्का दर्द तो हुआ पर अब उसे ये अंदाजा भी हो गया की गरिमा भी काफी एक्ससिटेड हो गई इसलिए अब बारी है नेक्स्ट स्टेप लेने की.

जीतू: मम्मी एक छोटी सी रिक्वेस्ट है बस आप बुरा न मन्ना.

गरिमा: क्या

जीतू: मेरी मम्मी तो मेरे जनम के समय hi नहीं रही तो मैंने कभी माँ का दूध पीने का सुख नहीं लिया. क्या मई आपके दूध पी सकता हु.

गरिमा: कैसी बात करते हो जीतू अब ये सब दुबारा चालू मत करो.

जीतू: पर क्यों मम्मी क्या एक बच्चा अपनी माँ का दूध नहीं पी सकता.

गरिमा: पी सकता है पर एक निश्चित आगे तक और अब तुम उस आगे से काफी आगे निकल चुके हो.

जीतू: पर आज किचेन में तो आप तैयार थी फिर अब क्या हुआ.

गरिमा: देखो जीतू जो हो गया सो हो गया और पहले hi किचन में हम फास्ट फास्ट बचे अब दुबारा नहीं. अगर हरिया वापस आ गया और उसने हमे देख लिया तो पता नहीं क्या होगा.

जीतू: मैंने आपको बताया न वो काफी दूर गए है अभी उन्हें गए हुए 15-20 मं hi हुए है अभी उन्हें कुमसेकुम एक घंटा लगेगा. बस एक बार मुझे आपको मम्मी मान कर अपने दूध पी लेने दो.

गरिमा: पर मेरे स्तनों में दूध नहीं आता इस वक़्त.

जीतू: कोई बात नहीं मुझे भी बस वो अनुभव लेना है जो एक बच्चा अपनी माँ के दूध पीते वक़्त लेता है.

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गरिमा: जीतू......

जीतू: मम्मी प्लीज बस एक रेक मान लो प्लीज. इतनी बार मौका होने के बावजूद मैंने आपके दूध को मुँह में नहीं लिया. पर आज जब पता चला की कल रात आप मेरे बापू को एक रात की बीवी बानी और उस रिश्ते से मेरी मम्मी तो मेरे मन की ये दबी इच्छा बहार आ गई प्लीज एक बार मेरी इच्छा पूरी कार्डो. प्लीज

गरिमा: जीतू कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी.

जीतू: इधर बहुत कम लोग आते है और आया भी तो हम पेड़ की ूत में है किसीको दिखाई नहीं देंगे. और हरिया भाई को अभी एक घंटा लगेगा.

गरिमा: जीतू क्या कहु कुछ समझ नहीं आ रहा.

जीतू: ज्यादा समझो नहीं मम्मी कल रात तुमने मेरे बापू की बीवी बन कर उनकी इच्छा पूरी करि आज मेरी मम्मी बनकर मेरी इच्छा भी पूरी कार्डो.

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इतना कह कर जीतू ने गरिमा के सीने से उसकी साड़ी का पल्लू नीचे खींच दिया. पल्लू नीचे आते hi गरिमा गरिमा का तना हुआ ब्लाउज जीतू की आँखों के सामने बेपरद था. गरिमा के तने हुए दूध देखकर जीतू के मुँह में पानी आ रहा था.

जीतू: मम्मी ब्लाउज के हुक खोलो न अब और परेशां मत करो प्लीज.

गरिमा अब थोड़ा एक्ससिटेड हो गई थी और जीतू भी मानने वाला नहीं था इसलिए उसने ज्यादा बेहेस न करते हुए हाथ पीछे ले जाकर अपने ब्लाउज के हुक खोलना शुरू कर दिया. हर खुलते हुक के साथ गरिमा के स्तनों पर उसके ब्लाउज की कसावट ढीली पड़ती जा रही थी गरिमा की गोड़ में लेते जीतू के सामने उसकी काली सेक्सी ब्रा की झलक दिखती जा रही थी.

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गरिमा ने ब्लाउज के सरे हुक खोल दिए अब जीतू के होंठो और गरिमा के दूध के बीच सिर्क उसकी काली ब्रा थी.

जीतू: मम्मी मुझे आपकी ब्रा नहीं चूसनी दूध पीने है इसलिए ये ब्रा भी तो खोलो.

गरिमा ने एक बार फिर हाथ पीछे करके अपनी ब्रा का हुक भी खोल दिया.

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ब्रा का हुक खुलते hi गरिमा का ब्लाउज और उसकी ब्रा उसके कंधो से झूलने लगे. उसके नीचे से गरिमा के स्तनों की गोलिया साफ़ नज़र आ रही थी.

जीतू: मम्मी अपने ब्लाउज और ब्रा को ऊपर तो करो ताकि आपकी दूध मुझे दिखाई दे तभी तो पी पाउँगा.

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गरिमा ने कापते हाथो से अपने ब्लाउज और ब्रा को अपने स्तनों से ऊपर कर लिया ऐसा करते hi गरिमा के बड़े बड़े स्तन और उनके मुहाने पर वो भूरी भूरी निप्पल जीतू के सामने पूरी तरह बेपर्दा थे.

जीतू: मम्मी पिलाओ न अपने दूध.

गरिमा: खोल तो दिए अब और क्या करू.

जीतू: नहीं जैसे मम्मी पिलाती है वैसे पिलाओ तुम खुद अपने हाथो से अपने दूध पकड़ कर मेरे मुँह में डालो.

गरिमा: देखो तुमने जो जो कहा मैंने कर दिया अब खुद पी लो जल्दी वर्ण वो लोग आ जाएंगे.

जीतू: तो जब मम्मी इतनी सब बाते मान hi ली तो इतनी सी बात और मान लो और अगर तुम खुद से अपनी चूचिया सॉरी सॉरी मेरा मतलब है दूध मेरे मुँह में दाल डोज तो ऐसा भी क्या हो जाएगा. कार्डो न प्लीज.

गरिमा ने भी सोचा जब दूध नंगे कर hi दिए तो इसमें क्या हो जाएगा. इसलिए उसने जीतू के सर के नीचे हाथ लगाकर उसे थोड़ा ऊपर उठाया और दुसरे हाथ से अपना एक स्तन पकड़ कर जीतू के मुँह की तरफ बड़ा दिया. जीतू ने भी किसी भी अबोध बच्चे की तरह गरिमा के स्तन को अपने मुँह में भर लिया और बड़ी मादक तरह से गरिमा के स्तन को चूसने चाटने लगा. गरिमा को भी अपने स्तनों पर जीतू की गरम गरम सासे महसूस हो रही थी जिसने उसके आनंद इस कदर बड़ा दिया था की उसकी आँखे बंद हो गई थी. गरिमा के हाथो का दबाव जीतू के सर पर बाद गया था, जीतू भी गरिमा की उत्तेजना को साफ़ महसूस कर रहा था इसलिए उसने भी अपनी चूसने की गति बड़ा दी.

ये तो साफ़ था की यहाँ एक माँ बेटे का वात्स्ल्यपूर्ण स्तनपान तो नहीं हो रहा था बल्कि यहाँ तो पूरी माहौल कमल और मादक था.

जीतू: मम्मी अपनी ब्लाउज और ब्रा उतर कर रख दो न बहुत डिस्टर्ब कर रही है.

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उत्तेजना ने गरिमा को भी पूरी तरह जकड लिया था इसलिए उसने बिना किसी न नुकुर के hi एक बार बोलने पर hi पर hi अपने कंधो पर झूलते ब्लाउज और ब्रा को उतर कर नीचे ज़मीन पर रख दिया. गरिमा के बदन के कमर से ऊपर के सरे कपडे उतारते hi जीतू की जवानी का जोश सातवे आसमान पर पहुंच गया. उसने अपना पूरा भर गरिमा पर दाल दिया की गरिमा उसे सेह न सकीय और ज़मीन पर लेट गई पर जीतू को तो जैसे यही चाहिए था वो भी गरिमा के बगल में आ गया और एक बार फिर उसने गरिमा की दाई चुकी को मुँह में भर लिया. जैसे किसी भिखारी के सामने आप स्वादिष्ट खाना रख दो तो वो उस पर टूट पड़ता है वैसे hi इस वक़्त जीतू गरिमा की गोल उभारो को मसलने रगड़ने चूसने चाटने में लगा पड़ा था. वो कभी गरिमा की दाई चूची को चूसता तो कभी उसकी बाज चूची को मुँह में भर लेता.

गरिमा को जीतू के उतावलापन बहुत अच्छा लग रहा था ये उतावलापन न उसे हरिया में दिखा था न बिहारी काका में. गरिमा की सासे बहुत तेज़ तेज़ चल रही थी वो आनंद के सागर में इस कदर डूब चुकी थी की उसे पता hi नहीं चला की जीतू के हाथ उसकी कमर से नीचे सटकते हुए उसके पेटीकोट को घुटनो तक ऊपर करके उसके अंदर दाखिल होकर गरिमा की नंगी जांघो तक पहुंच गए थे. जीतू का हाथो का एहसास गरिमा को तब हुआ जब जब गरिमा की जांघो को सहलाते सहलाते उसका गरिमा की चड्डी तक पहुंच गया और जीतू अपने अंगूठे से चड्डी के ऊपर से hi गरिमा की छूट के दाने को रङ्गने मसलने लगा. गरिमा पूरी तरह मदमस्त नागिन सी ज़मीन बलखा रही थी. माँ बेटे के नाम से शुरू हुआ ये रोलप्ले अब वासनापूर्ण रूप लेता जा रहा था.

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गरिमा अधनंगी हालत में ज़मीन पर मदमस्त नागिन सी बलखा रही थी और जीतू अपने अंगूठे से उसके छूट के दाने को रगड़ रहा था. की तभी गरिमा को अपनी चड्डी नीचे सरकती महसूस हुई. जीतू ने गरिमा की चड्डी के ऊपर सिरों में हाथ दाल कर उसे नीचे सरकना शुरू कर दिया. जीतू गरिमा के दूध को तो नंगा कर hi चूका था अब वो उसकी छूट को भी नंगा कर देना चाहता था. गरिमा के हाथो ने एक त्वरित प्रतिक्रिया के कारन नीचे जाकर जीतू के हाथो को थम लिया. बेशक वो उत्तेजना में थी पर उसे इस बात का भी दर था की कही हरिया वापस न आ जाए.

गरिमा: जीतू नहीं ये क्या कर रहे हो वो लोग कभी भी वापस आ सकते.

जीतू: अभी उन्हें और आधा घंटा लगेगा. प्लीज उतरने दो न. प्लीज मम्मी

गरिमा: मम्मी भी बोल रहे हो मम्मी बोल कर मेरी चड्डी भी उतरना चाहते हो.

जीतू: मम्मी मेरी कोई गर्लफ्रेंड तो है नहीं जिसकी चड्डी उतर सकू मेरी लाइफ तो इस वक़्त एकमात्र महिला आप hi हो अब बच्चा अपनी मम्मी से ज़िद्द नहीं करेगा तो किस्से करेगा. और पहले भी तो दो बार आप मेरे सामने चड्डी उतर चुकी हो फिर आज क्या दिक्कत है.

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जीतू की ज़िद्द के आगे गरिमा की एक न चली और उसकी पकड़ जीतू के हाथो पर ढीली पद गई. और गरिमा की चड्डी उसके घुटनो से नीचे तक सरक गई जिसे जीतू ने अपने पैरो से खींच गरिमा के पैरो से बहार धकेल दिया. गरिमा की छूट को नंगा करने के टास्क में विहाय हासिल करने के बाद जीतू ने गरिमा को अपनी बहो में कास कर जकड लिया. जीतू के होंठ गरिमा के स्तनों से अलग होकर गरिमा के गले तक जा पहुंचे और जीतू अपनी जीभ निकल कर उसकी गर्दन को ऊपर से नीचे तक चाटने लगा. जीतू का यु अपनी गर्दन चेतना गरिमा को भी बेचैन कर रहा था उसके हाथो की गिरफ्त भी जीतू की बदन पर कास गई. वो दोनों अब जिस अवस्था में एक दुसरे में गुथे हुए थे उन्हें माँ बीटा तो किसी एंगल में नहीं माना जा सकता था.

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गरिमा तो उत्तेजना में थी hi पर जीतू की जवानी का औजार भी उसके पायजामे में बम्बू बन चूका. गरिमा की चड्डी तो पहले hi उतर चूका था अब उसे जल्द से जल्द अपने हथियार को भी आज़ाद करना था ताकि वो अगले पड़ाव पर बाद सके. और उसने बिना देर किये अपनी कमर उचककर अपने एक हाथ से hi अपने पायजामे और अंडरवियर को एक साथ नीचे सरका दिया और अपने पैरो से खींचकर उन्हें बहार निकल दिया. जीतू का साप पूरी तरह अपना फैन उठाए हुए फुफकार रहा और घुसने के लिए बिल तलाश रहा था.

गरिमा को अभी इस बात का अंदाजा भी नहीं था की जीतू भी अपने नीचे के कपडे उतर कर अपने लुंड को आज़ाद कर चूका है. गरिमा की गर्दन को छत्ते छत्ते जीतू अपना चेहरा गरिमा के चेहरे के ठीक सामने ले आया और गरिमा के चेहरे को भी अपनी जीभ से चाट चाट कर गीला करने लगा. गरिमा के चेहरे को छत्ते छत्ते जीतू ने अपने होंठ गरिमा के होंठो से जोड़ दिए. गरिमा भी पूरी तरह उसके साथ पैशनेट किश के नशे में खो गए. जीतू जो एक तरफ गरिमा के होंठो को चूम रहा था वही दूसरी तरफ उसके हाथ गरिमा की कमर से नीचे सरकते हुए उसके पेटीकोट तक जा पहुंचे और जीतू ने उसे धीमे धीमे ऊपर उठाना शुरू कर दिया. गरिमा की साड़ी तो पहले hi इस उठा पटक में पूरी तरह खुल गई थी अब उसका पेटीकोट भी उसकी कमर तक ऊपर उठ चूका था. और गरिमा की कमर के नीचे का हिस्सा उसकी छूट और चूतड़ भी अब पूरी तरह नंगे थे.

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गरिमा के कूल्हों को पूरी तरह नंगा करने के बाद जीतू ने अपने दोनों हाथ गरिमा के चूतड़ों पर रख दिए और उन्हें दबाने मसलने सहलाने लगा. जीतू जिस औरत को मम्मी मम्मी कह रहा था अब उसी औरत के कूल्हों को नंगा करके उन्हें अपने हाथो से सेहला रहा था. गरिमा के होंठो को चूमते और उसके कूल्हों को सहलाते हुए जीतू अपनी टांगो को सरक कर गरिमा की टांगो के एकदम करीब ले आया. गरिमा की नंगी जाँघे जीतू की नंगी जांघो से रगड़ खा रही थी पर वासना के उन्माद में खोई गरिमा को अब भी इस और ध्यान नहीं गया की जीतू नीचे से नंगा हो चूका है. पर अगले hi पल जब जब जीतू ने गरिमा की एक टांग को थोड़ा ऊपर उठा कर खुद को उसकी दोनों टांगो के बीच फिट करा और जीतू के तमतमाए फनफनाये किंग कोबरा के हिलने का झटका गरिमा को अपनी जांघो के बीच बने बिल के मुहाने पर महसूस हुआ गरिमा समझ गई की ये झटका किस चीज़ का है.

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गरिमा ने अपने होंठ जीतू के होंठो से अलग करके उसे पीछे धकेलने की कोशिश करि.

गरिमा: जीतू ये क्या कर रहे हो तुमने अपने नीचे के कपडे क्यों उतरे क्या करना क्या चाहते हो.

जीतू: आपके वापस जाने से पहले एक बार छोड़ना चाहता हु आपको.

गरिमा: अभी तो तुम मम्मी मम्मी कह रहे थे मुझे अब ये सब क्या कह रहे हो.

जीतू: वो क्या है न मम्मी गाँव में मेरे सारे दोस्त मुझे मदर छोड़ कहते है अब आप hi बताओ मदर छोड़ कौन होता है.

गरिमा को दर था की हरिया और बिहारी काका कभी भी आ जाएंगे इसलिए वो जीतू को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी. पर गरिमा शहर की नाज़ुक औरत और जीतू गाँव का 18 साल का देहाती लौंडा जो इस वक़्त चुदाई के नशे में पागल था भला गरिमा उसे कैसे पीछे धकेल पति. बल्कि जीतू ने झटका देकर गरिमा को ज़मीन पार पीठ के बल लेटाया और खुद उठा कर गरिमा की टांगो फैला कर गरिमा को जांघो के बीच आ गया. जीतू ने गरिमा के दोनों हाथो की हथेलियों को अपने हाथो से कास कर जकड लिया. अपनी कमर हिला कर अपने लुंड के टोपे को गरिमा की छूट के मुहाने पर सेट करा. और एक hi झटके अपना नासो से भरा एकदम किसी स्टील रोड की तरह सख्त 18 साल का कौड़ा लुंड गरिमा की छूट में आधा दाखिल कर दिया.

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यहाँ आने के बाद अब तक गरिमा 4 बार चूड़ी थी पर चारो बार उसमे गरिमा की भी सहमति रही थी पर आज जीतू ने गरिमा की सहमति के बिना एक तेज़ झटके के साथ अपना लुंड गरिमा की छूट में डाला था जिस वजह से गरिमा को दर्द भी हुआ था. जीतू की पकड़ इतनी ज़ादा मज़बूत थी की गरिमा हिल भी नहीं प् रही थी. कुछ देर जीतू यही अपना आधा घुसा लुंड गरिमा की छूट में अंदर बहार करता रहा जब उसे लगा की गरिमा का विरोध अब थोड़ा कम हो रहा है तब उसने एक और ज़ोरदार धक्का मारा और अपना पूरा लुंड गरिमा की छूट के अंदर तक उतार दिया. गरिमा का मुँह चीखने के लिए खुला पर जीतू ने तुरंत अपने होंठ गरिमा के होंठो पर रख कर उसकी आवाज़ को अंदर hi रोक दिया.

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जीतू अपना पूरा भर गरिमा के ऊपर रखकर लेट गया था. जीतू के इस तरह लेटने से उसका लुंड गरिमा की छूट में अंदर गहराई तक उतर चूका था. वो अब भी गरिमा की दोनों हथेलियों को कास कर जकड़े हुए था ताकि गरिमा उसे पीछे न धकेल सके. कुछ देर वो यही गरिमा के होंठो को अपने होंठो से बंद करे और अपना लुंड गरिमा की छूट में डाले लेता रहा. जब गरिमा थोड़ा शांत हुई तो उसने अपने होंठ गरिमा के होंठो से हटा लिए. गरिमा की सासे तेज़ तेज़ चल रही थी. गरिमा का विरोध कम पड़ता देख जीतू ने धीमे धीमे अपनी कमर आगे पीछे करना शुरू कर दिया. गरिमा का दर्द भी अब धीमे धीमे आनंद में बदल रहा था.

जीतू: मम्मी कैसा लग रहा है.

गरिमा: मेरी छूट के अंदर अपना लुंड दाल रखा है और अब भी मुझे मम्मी बोल रहे हो.

जीतू: चुदाई अपनी जगह और रिश्ता अपनी जगह. अब कल रात बापू ने आपकी मांग भरी तो उस रिश्ते से तो आपको मम्मी hi बुलाऊंगा न.

गरिमा: तो कल रात तुम्हारे बापू ने अपना स्पर्म मेरे अंदर निकला था और मैंने उन्हें कहा था की नौ महीने बाद मई उनका बच्चा पैदा करुँगी. तो अब तुम ये क्यों कर रहे हो.

जीतू: सर्पम जे क्या है. कोई साप की जाती है क्या.

गरिमा: स्पर्म यानि उनके लुंड का पानी.

जीतू: तो सीधा सीधा लुंड का पानी hi बोलो न. पर एक बात बताओ मेरे बापू 50 साल से ऊपर के आपको लगता है उनके उनके लुंड के पानी में इतनी जान बची होगी की वो आपको माँ बना सके.

गरिमा: तुम्हारे पैदा होते hi तो तुम्हारी माँ और उनकी बीवी गुज़र गई तो उन्हें ज्यादा मौका मिला hi कहा तो उनके पानी पर शक मत करो.

जीतू: आप उनके लुंड के पानी से माँ बनो या मेरे लुंड के पानी से होगा तो वो बच्चा हमारा hi खून न. तो दिक्कत क्या है. उसकी मर्ज़ी वो चाहे तो मुझे पापा बुलाए चाहे तो भाई.

जीतू की इस बात पर अब तक विरोध कर रही गरिमा की भी हसी छूट गई.

गरिमा: पर मुझे तो नहीं पता होगा की मेरे बच्चे का बाप कौन है. बाप या बीटा.

जीतू: ये तो और भी अच्छा है न मेरे बापू इस्पे हक़ जाता पाएंगे न मई.

गरिमा मुस्कुराते हुए: है ये तो है.

जीतू: तो बोलो मम्मी अपने बेटे के लुंड का पानी लोगी अपने अंदर.

गरिमा ने भी इस बार सहमति में सर हिला दिया.

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गरिमा से भी सहमति मिलते hi जीतू ने गरिमा के अधनंगे बदन पूरी तरह जकड लिया और गरिमा की छूट में अंदर तक दाखिल अपने लुंड के तेज़ तेज़ झटके मारना शुरू कर दिया. एक 18 साल का जवान बीटा अपनी एक रात पहले बानी 30 साल की माँ के साथ अधनंगी हालत में सम्भोग क्रिया में मदमस्त था.

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एक रात पहले जिस औरत को उसके बाप ने छोड़ा था और अपना माल उसके अंदर hi छोड़ा था अब बीटा उसी औरत को माँ माँ बोलकर छोड़ने में लगा पड़ा था. और अब तो गरिमा भी इसमें उसका भरपूर साथ दे रही थी.

पेड़ो से आती हवाई जब पास बहती नदी के ठन्डे पानी को छू कर गरिमा के खुले कूल्हों से स्पर्श करती तो गरिमा के पुरे तन बसन में सिहरन सी दौड़ जाती. वही जीतू का जवान कैसा नसों से भरा लुंड जब गरिमा की छूट से रगड़ खता हुआ अंदर तक जाता तो गरिमा के पुरे तन बदन में गर्मी आ जाती. गरिमा ने सपने में भी नहीं सोचा था की जीतू जैसा 18 साल का लड़का छोड़ने में इतना उस्ताद होगा. शायद अगर उसे ये पता होता तो उसने पिछले दोनों मौके यही बर्बाद न किये होते. जीतू ने तो चुदाई में अपने बाप को भी पीछे छोड़ दिया था.

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जीतू गरिमा के ऊपर लेटकर ताबड़तोड़ धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था. गरिमा ने भी जीतू की कमर के इर्द गिर्द अपनी टांगो को लपेट लिया ताकि जीतू अंदर और ज्यादा अंदर तक अपना लुंड ले जा सके. जीतू पहली बार किसी औरत के अंदर दाखिल हुआ था और वो भी अपने से उम्र में लगभग दुगनी उम्र की महिला जिसे फिलहाल वो मम्मी मम्मी कहकर सम्बोधित कर रहा था इन सब का एक्ससिटेमेंट यानी उतावलापन उसके धक्को में भी साफ़ नज़र आ रहा था. जीतू के लिए किसी औरत की छूट की गर्मी को महसूस करने का ये पहला अनुभव था और इस गर्मी के आगे तो बड़े बड़े सूरमा भी ढेर हो गए थे फिर भला जीतू जैसे फर्स्ट टाइमर और कितनी देर टिकता ऐसे में जीतू के हथियार ने अपना फाइनल फायर कर दिया.

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पहले एक 36 साल के गबरू जवान मर्द का फिर एक 54 साल के ठरकी बुड्ढे का और अब एक 18 साल के नए वर्जिन लौंडे का गाड़ा गाड़ा वीर्य गरिमा की छूट को अंदर तक भर रहा था. गरिमा जब इस गाँव में आई थी तब वो एक शरीफ पतिव्रता घरेलु औरत थी इन चाँद दिनों में hi वो तीन अलग अलग आगे ग्रुप के तीन मर्दो का वीर्य अपने अंदर ले चुकी थी.

जीतू अपना पूरा भर गरिमा के ऊपर दाल कर लेता हुआ था और गरिमा भी अपने बाहे जीतू के इर्द गिर्द कैसे हुए उसे अपने सीने से लिपटे लेती हुई थी. दोनों की सासे तेज़ तेज़ चल रही थी. दोनों पसीने से पूरी तरह तरबतर थे. गरिमा को नीचे अपनी जांघो के बीच बहकर आता जीतू का वीर्य साफ़ महसूस हो रहा था. जब गरिमा की सासे थोड़ी नार्मल हुई और वो वापस अपने सेंसेस में आई तो उसे अचानक ख्याल आया की हरिया और बिहारी काका किसी भी वक़्त वापस आ सकते है.

गरिमा : जीतू अब मेरे ऊपर से हटो तुम्हारे बापू और हरिया कभी भी वापस आ सकते है.

जीतू भी गरिमा की बात सुनकर थोड़ा हड़बड़ा गया और तुरंत गरिमा के ऊपर से उठ गया और यहाँ वह देख कर अपने कपडे ढूंढ़ने लगा. जीतू तो अपने कपडे उठाकर उन्हें पहनने लगा पर जीतू का वीर्य तो बहकर गरिमा की जांघो तक आ गया था जिस वजह से उसकी जाँघे चिपचिपा रही थी और उसका पूरा बदन भी पसीने से सराबोर था. जब हरिया और बिहारी काका गए थे तब गरिमा के बदन से पाउडर और इत्र की सुगंध आ रही थी वही अब पसीने और वीर्य की दुर्गन्ध जिसे हरिया और बिहारी काका जैसे माझे हुए खिलाडी साफ़ महसूस कर लेते.

गरिमा : जीतू तुमने तो कपडे पेहेन लिए पर मई तुम्हारे इस बहते सफ़ेद माल का क्या करू इसने तो मेरी पूरी जाँघे ख़राब कर दी है अगर मैंने अपना पेटीकोट नीचे करा तो ये भी ख़राब हो जाएगा और ऊपर से ये पसीना.

जीतू : एक काम करो आप अपने कपडे उतर कर नदी में एक डुबकी मार लो इससे पसीने की महक भी चली जाएगी और जांघो पर लगा वीर्य भी साफ़ हो जाएगा.

गरिमा : पर तब तक वो लोग आ गए तो.

जीतू : अरे इसमें कितना hi समय लगेगा जल्दी से धो कर बहार आ जाओ और अगर आ भी गए तो नदी में नहाना कोई पाप थोड़ी न है बोल देना बहती नदी देखकर नहाने का मन कर गया.

गरिमा को भी जीतू की बात सही लगी और वो नदी की तरफ चल दी.

गरिमा : तुम उधर देखो

जीतू : अरे अभी तो मेरा लुंड आपकी छूट के अंदर hi था अब मुझसे क्या शर्माना.

गरिमा : उधर देखो की कही वो लोग तो नहीं आ रहे.

जीतू : ओह ऐसा क्या.

जीतू ने एक नज़र गाडी की तरफ देखा जहा कोई नहीं था. गरिमा ने अपने पेटीकोट जो उसकी कमर पर लिप्त हुआ था उसकी गाँठ खोलकर उसे ऊपर से निकल लिया. अब गरिमा ऊपर से नीचे तक पूरी तरह नंगी थी.

जीतू : आपको नंगा देख कर तो मेरा दुबारा मन करने लगा hi की मई आपके साथ नदी में नहाने चालू.

गरिमा : कोई ज़रूरत नहीं चुपचाप उधर नज़र रखो. और अगर कोई आता नज़र आए तो तुरंत मुझे खबर कर देना.

जीतू : ठीक जैसा आपका हुकुम.

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जीतू को वही खड़ा कर गरिमा अपने बदन पर लगा पसीना और वीर्य धोने के लिए नदी में चली गई. जीतू वही खड़ा गरिमा को नदी में नंगा नहाते देखने में मस्त हो गया.
 
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गरिमा नदी में थोड़ा hi अंदर जाकर नहाने लगी और अपने बदन पर लगे वीर्य और पसीने को साफ़ करने लगी. वो नहाते नहाते जीतू की डरफ भी देख लेती थी की कही जीतू की तरफ से कोई इशारा तो नहीं आ रहा. उसे नहाते हुए बमुश्किल 5-6 मं hi हुए होंगे की उसे अपने अपने कूल्हों पर किसी के हाथ फिरते महसूस हुए. इससे पहले वो पीछे पलट कर देखती दो बलिष्ठ मजबूत हाथो ने उसे पीछे से कमर से पकड़ कर अपने बदन से सत्ता लिया. पीछे खड़े शक्श का बदन गरिमा से पूरी तरह चिपका था और गरिमा को अपनी जांघो पर कुछ हार्ड चीज़ के हिलने का एहसास हो रहा था जो उसकी जांघो पर यहाँ वह टच हो रहा था. गरिमा के लिए ये समझना कोई मुश्किल नहीं था की ये क्या है. पर इससे पहले गरिमा पीछे घूम कर देखती उस शक्श ने खुद उसके कान में कह दिया.

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" क्या बात है मैडम जी उस रात तुमको नदी से निकलने के बाद नंगा करा था आज तो तुम खुद से नंगी होकर नदी में आ गई. "

अब गरिमा के लिए ये समझना मुश्किल नहीं था की पीछे खड़ा शक्श और कोई नहीं हरिया है. पर हरिया अचानक से कैसे आ गया और क्या उसने जीतू के साथ जो हुआ सब देख लिया. गरिमा ये सब सोच hi रही थी की हरिया ने उसे अपनी तरफ घुमा लिया. हरिया भी ऊपर से नीचे तक पूरा नंगा था और उसका फनफनाया लुंड गरिमा पानी के अंदर hi की छूट के मुहाने पर बार बार दस्तक दे रहा था. गरिमा के ध्यान से उतर hi गया था की जीतू भी वही खड़ा है और उन्हें देख रहा है.

हरिया : मैडम जी जबसे यहाँ से गया हहु बहुत तड़पा हु आपके लिए. बीवी ने तो बच्चे के चलते हाथ भी नहीं रखने दिया. सोचा आपको आपकी मंज़िल तक पहुंचने से पहले एक बार अपने लुंड को उसकी मंज़िल तक पंहुचा दू.

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इतना कह कर हरिया को अपनी तरफ खींच कर अपने होंठ गरिमा के होंठो से जोड़ दिए. हरिया के हाथ सरक कर गरिमा के कूल्हों तक पहुंच गए और वो दोनों हाथो से गरिमा के कूल्हों को मसलने दबाने लगा. हरिया एक असली बांका मर्द था उससे चुदाई का अलग hi मज़ा था इसलिए गरिमा भी बड़ी जल्दी गरम हो गई और गरिमा के साथ एक पैशनेट किसिंग में खो गई. गरिमा और हरिया पूरी तरह किसिंग में डूबे थे और हरिया के हाथ गरिमा के कूल्हों को मसलने में व्यस्त थे की तभी गरिमा को अपने स्तनों पर दो और हाथो का दबाव महसूस हुआ और पीछे अपनी पीठ और जांघो पर किसी के बदन की छुअन का भी एहसास हुआ. उसने नज़रे तिरछी कर जीतू की तरफ देखा वो तो वही नदी किनारे एक पत्थर पर बैठा गरिमा को हरिया को किश करता देख मुस्कुरा रहा था यानि ये जीतू नहीं तो फिर क्या....... गरिमा ये सब सोच hi रही थी पीछे खड़े शक्श ने भी उसके कान में कुछ कहा.

" क्या बात है तुम्हे बिटिया कहु या बीवी पर कितने मर्दो को अपनी उंगलियों पर नचा रही थी मानना पड़ेगा. "

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उस शिक्षा की आवाज़ सुनकर गरिमा समझ गई की ये और कोई नहीं बिहारी काका है. गरिमा इसी सोच में थी की ये सब क्या हो रहा की हरिया ने सब कुछ क्लियर कर दिया.

हरिया : क्या हुआ मैडम जी इतना मत सोचो जब मई कोठी में आया था मैंने तब hi आपको काका को और जीतू को हॉल में रखे मिरर में किचन में मज़ा करते देख लिया था पर तब मैंने कुछ नहीं कहा क्युकी मई आपके साथ ये सब यहाँ इसी जगह पर करना चाहता था. पर जब वो सब देखा तो सोचा क्यों न इस सबमे इन दोनों को भी शामिल करलु. तभी जब आप ऊपर तैयार होने गई मैंने इन दोनों को बता दिया की मैंने सब देख लिया है और ये भी बता दिया की मई पहले hi आपको चुदाई कर चूका हु. तब मैंने कहा की क्यों न इस आखिरी बार थोड़ा और मज़ेदार बनाए तीन मर्द एक औरत का सन बनाए. बिहारी काका तो तुरंत तैयार हो गए. पर जीतू ने रिक्वेस्ट करि की उसने अब तक आपको छोड़ा नहीं एक बार वो आपको अकेले छोड़ना चाहता है इसीलिए हम दोनों गाडी ख़राब होने का बहाना करके यहाँ से चले गए ताकि जीतू अपने अकेले चुदाई करने के अरमान पुरे करले. और अब जब उसने अपना काम कर लिया हम दोनों वापस आ गए हमारी इस आखिरी मुलाकात को और दिलचस्प बनाने के लिए.

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गरिमा तो शॉक रह गई की वो तो सोच रही थी सब कुछ उसके हिसाब से हो रहा है पर ये तीनो लोग अपनी अलग hi खिचड़ी पकाए हुए थे.

बिहारी काका : क्या हुआ बिटिया तुम तो 9 महीने बाद मेरा बच्चा जानने वाली थी और मेरे hi बच्चे का पानी अपने अंदर ले लिया.

गरिमा से बात करते करते भी वो दोनों गरिमा को चूम चाट रहे थे. हरिया सामने से गरिमा की गर्दन को चाट रहा था और बिहारी काका पीछे से उसकी पीच पर अपनी जबान फिरा रहे थे. उन दोनों के होंठो के गर्माहट हुए जीभ कामुक हरकते गरिमा को ठन्डे पानी में भी गर्मी का एहसास करा रही थी. बिहारी काका के हाथ गरिमा के दूध सहलाते सहलाते नीचे की और सरक सरक कर आते आते गरिमा की छूट तक आ गए और उन्होंने दो उंगलिया गरिमा की छूट के अंदर दाल दी और गरिमा की छूट में आहिस्ता आहिस्ता उन्हें अंदर बहार करने लगे. वही हरिया ने भी अपने दोनों हाथो से गरिमा के चूतड़ फैला कर अपनी एक उंगली गरिमा की गांड के छेड़ में दाखिल करदी और गरिमा की गांड को अंदर से सहलाने गुदगुदाने लगा. इस दोहरे हमले ने तो गरिमा की हालत hi ख़राब करदी थी. उसका खून उसके पैरो में उतर आया था. पानी की ठण्डक के चलते उसके पेअर सुन्न से पद गड गर थे. अब यहाँ खड़े रहना भी उसके लिए मुश्किल हो रहा था.

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गरिमा : प्लीज् नदी के बहार चलो पानी बहुत ठंडा है मुझसे अब और खड़ा नहीं हुआ जा रहा है.

हरिया : पहले वादा करो की बहार निकल कर हमारे साथ के इन आखिरी पालो को यादगार बनाओगी न पिछली बार की तरह छड़ी से तो नहीं मरोगी.

गरिमा : नहीं मरूंगी तुम लोग जो कहोगे जैसा कहोगे वो करुँगी पर नदी से बहार चलो.

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हरिया ने गरिमा के नंगे बदन को अपनी बहो में उठा लिया और नदी से बहार लेन लगा. पिछली बार भी हरिया इसी तरह गरिमा को नदी बहार निकल कर लाया था अंतर बस इतना था की उस वक़्त गरिमा बेहोश थी आज होश में और उस वक़्त गरिमा के बदन पर कपडे थे और आज ऊपर से नीचे तक पूरी तरह नंगी. बहार लेकर हरिया ने गरिमा को उसी पत्थर पर लिटा दिया जिसपर उस दिन लिटाया था और जिसपर कुछ देर पहले जीतू बैठा था. हरिया और बिहारी काका भी नदी से बहार आकर गरिमा के अगल बगल आकर खड़े हो गर. अब गरिमा वह उस चट्टान पर पूरी तरह नंगे लेती थी और हरिया उम्र 36 बिहारी काका उम्र 54 और जीतू उम्र 18 उसके तीन तरफ खड़े गरिमा के नंगे बदन को ऐसे निहार रहे थे जैसे कोई भूका कुत्ता सामने राखी रोटी को निहारता है.

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मर्दो का नाम तो यही कहरब है क्या कुमइया औरतो में नहीं होती. गरिमा जब इस गाँव में आई थी तो अपनी पति के पैसे से खरीदी सादिया लेकर आई थी और अब साडी तो छोडो उसके बाकी कपडे भी उसके बदन का साथ छोड़ चुके थे. गरिमा जब आई थी तो अपने पति नाम का मंगलसूत्र पेहेन कर एक पतिव्रता पत्नी बनकर आई थी आज वही वही पतिव्रता तीन अलग अलग आगे ग्रुप में मर्दो के कदमो में नंदी लेती हुई अंगड़ाइयां ले रही थी. बेशक उन लोगो ने भी थोड़ा पहल करि पर क्या गलती सिर्फ उनकी थी क्या गरिमा की तरफ से भी उन्हें ग्रीन सिग्नल नहीं मिले.

लोग कहते है की आदमी नाड़े के ढीले होते है पर गर्मी तो औरतो की जांघो के बीच भी होती है उत्तेजना से भरे कमजोर पल उनको भी मिलते है पर उन कमजोर पालो में भी जो खुद पर काबू रखता है खुद से पहले अपने परिवार का सोचता है वही चरित्रवान होता और जो उन कमजोर पालो में बहक कर अपनी काम इच्छाओ के आगे अपने घर परिवार को भी टाक पर रख दे उसे दुनिया बस एक नाम से बकती है.

" चरित्रहीन "

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गरिमा नदी किनारे पत्थर पर नंगी लेती थी और हरिया, बिहारी काका और जीतू उसके तीन तरफ खड़े उसके नंगे बदन को निहार रहे थे. तीन तीन मर्दो को अपने नंगे बदन को निहारते देख गरिमा को शर्म सी आ रही थी इसलिए वो उठ कर बैठ गई और अपने घुटनो को मोड़ कर अपनी स्तनों को अपने हाथो और घुटनो से ढकने की नाकाम कोशिश करने लगी. ये देखकर अच्छा लग रहा था की शर्म हाय का थोड़ा अंश अब भी गरिमा के अंदर कही मौजूद था. हरिया ने नीचे झुक कर अपने होंठ गरिमा के चेहरे की तरफ बड़े पर गरिमा ने अपने चेहरा दूसरी तरफ कर लिया.

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हरिया : क्या हुआ मेमसाब अचानक से आपने अपना चेहरा क्यों मोड़ लिया.

गरिमा : ये सब क्या है हरिया तुम तीनो लोग एक साथ यहाँ मुझे नंगा करके मेरे साथ क्या करना चाहते हो. तुम लोगो ने मुझे समझ क्या रखा है मई कोई बाज़ारू औरत नहीं हु जो एक साथ कई मर्दो को खुश करू.

बिहारी काका तो गरिमा के इस बदले हुए रूप से सन्न रह गए थोड़ा झटका तो हरिया को भी लगा पर वो पहले भी गरिमा को दिमाग से अपने नीचे ला चूका था और वो समझ गया की इस बार भी दिमाग से hi काम लेना होगा.

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हरिया : नहीं नहीं मेमसाब ऐसा नहीं है हम लोग तो आपकी बहुत इज़्ज़ाफ़ करते है. सच कहे तो आपसे ज्यादा खूबसूरत औरत हमने आज तक नहीं देखि. बुरा न मन्ना पर इसमें गलती आपकी hi है आपको इतना खूबसूरत नहीं होना चाहिए था की मर्दो का मन मचलने पर मजबूर हो जाए.

हरिया की तारीफ भरी नॉटी बातो को गरिमा का गुस्सा थोड़ा कम और उसके चेहरे पर हलकी मुस्कराहट भी आई पर उसे उसने रोक लिया.

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गरिमा : मई जैसी भी हु इसका मतलब ये नहीं की ये सब करू.

हरिया: ये सब से क्या मतलब क्या आपको ये गलत लगता है.

गरिमा : तो क्या ये सब सही है.

हरिया : आप पनीर कहती हो.

गरिमा: है कहती हु पर यहाँ पनीर कहासे आ गया बीच में.

हरिया: बताता हु पहले ये बताओ मटर पनीर कहती हो या शाही पनीर या हांड़ी पनीर या पालक पनीर या कड़ाई पनीर.

गरिमा: अरे सभी कहती हु सब पसंद है.

हरिया: क्यों होता तो सबमे पनीर hi है फिर एक hi डिश क्यों नहीं चुन लेती इन सबमे से.

गरिमा: क्युकी एक डिश खा खा कर इंसान बोर हो जाता है इसलिए टास्ते चेंज करने के लिए डिश बदलता रहता है.

हरिया: जब एक तरह की डिश कहते कहते इंसान बोर हो जाता है तो क्या एक hi तरह का सेक्स करते करते वो भी एक hi इंसान के साथ तो क्या उस इंसान को बोरियत नहीं होती होगी.

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हरिया की इस बात से गरिमा पूरी तरह निरुत्तर हो चुकी थी वो बस यहाँ वह देखते हुए इसका जवाब सोच रही thi.Wahi जीतू और बिहारी काका हरिया के बुद्धि और चतुराई को मन hi मन सलाम कर रहे थे. मतलब पनीर का इतना सुन्दर इस्तेमाल उन्होंने कभी न देखा था न किया था.

हरिया : क्या हुआ मेमसाब आपने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. आप यहाँ हमारे साथ बस कुछ समय के लिए है फिर आप वापस अपनी दुनिया में चली जाएंगी. जहा न आप हमे दुबारा मिलेंगी न हम आपको और हम जानते है अपनी उस घरेलु ज़िन्दगी में आपको दुबारा इस तरह के अनुभव लेने का मौका दुबारा नहीं मिलेगा. इतना तो हम समझ गए है की आप एक शरीफ महिला हो जो कुछ नया अनुभव लेना चाहती थी इसी लिए हमारे साथ थोड़ा बहक गई क्युकी वो भी अपनी लाइफ में एक तरह का पनीर कहते कहते बोर हो गई थी. और इसमें कोई गलती या बुराई नहीं है अब मेरी नज़र में तो नहीं है.

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गरिमा चुपचाप बैठी हरिया की बाते सुन रही थी. और हरिया अपनी बात आगे कंटिन्यू करता है.

हरिया : उपरवाले ने हमे आँखे दी ताकि हम अलग अलग चीज़े देख सके, कान दिए ताकि ताकि हम अलग अलग आवाज़ों को सुन सके, ज़बान दी ताकि हम अलग अलग चीज़ो का स्वाद ले सके फिर केवल छूट और लुंड से hi ये उम्मीद क्यों की जाती है की वो ज़िन्दगी भर एक hi तरह का सेक्स करे और वो भी एक hi इंसान के साथ और अगर उन्होंने कुछ अलग तरय करने की कोशिश कर ली तो उन पर चैरेक्टरलेस का ठप्पा लगा दिया जाएगा. भला उनके साथ hi ये सौतेला व्यवहार क्यों. कोई जवाब है आपके पास मेरी बात का.

गरिमा अब भी पूरी तरह अवाक और निरुत्तर थी.

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हरिया: देखिये चरित्रहीन होने की आपकी क्या परिभाषा है मुझे नहीं पता पर मेरी नज़र में वही मर्द या औरत चरित्रहीन है जो नए अनुभव लेने के चलते अपने परिवार अपनी ज़िम्मेदारियों से मुँह फेर ले. मेरी बीवी पेट से थी उसे मेरी ज़रूरत थी उस वक़्त वो मेरी ज़िम्मेदारी थी जिसे मैंने उसके पास जाकर पूरा करा उसके बाद आपके पास आया. आप किसी की बीवी हो किसी की माँ हो उनका ख्याल रखना आपकी ज़िम्मेदारी है और वापस जाकर आप उन सब ज़िमींदारियो को पूरा करोगी ये आप भी जानती हो. पर इस वक़्त आप पर कोई ज़िम्मेदारी नहीं है अगर इस पल में आप एक नया अनुभव अपनी ख़ुशी के लिए ले लेती हो तो आप चरित्रहीन कैसे हो गई.

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गरिमा को समझ hi नहीं आ रहा की अब वो क्या कहे.

हरिया : वैसे एक और बात कहु इंसान को अपनी इच्छाओ को दबाना नहीं चाहिए जब उसे मौका मिले तो अपनी इच्छाओ को भी उतना hi महत्व देना चाहिए जितना वो अपनी ज़िम्मेदारियों को देता है वर्ण अगर ज़िम्मेदारियों के चलते वो हर वक़्त अपनी इच्छाओ को दबाता चला जाता है तो एक वक़्त ऐसा भी अत है जब उसे वो ज़िम्मेदारिया hi बोझ लगने लगती है और तब जिन ज़िम्मेदारियों के चलते उसने समय और मौका मिलने पर भी अपनी इच्छाओ को पूरा नहीं करा था तब उसके पास सिर्फ उस बात का अफसोस hi रह जाता है. वो न घर का रह जाता है न खुद का.

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हरिया की एक एक बात ने गरिमा को अंदर तक झकझोर दिया था. इस सबको इस एंजेल से तो उसने कभी देखा hi नहीं था.

हरिया : देखो मुझे जो कहना था मैंने कह दिया अब अगर आपको लगता है हमने कुछ गलत करा है तो हम आपसे हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगते है. आप अपने कपडे पेहेन लीजिये हम गाडी में आपका इंतज़ार कर रहे है.

इतना कह कर हरिया बिना एक पल भी वह रुके तुरंत पलट कर तेज़ कदमो से गाडी की तरफ चल दिया. बिहारी काका और जीतू को तो समझ hi नहीं आया अब क्या करे पर हरिया की पीछे पीछे चलने के अलावा उन्हें कुछ समझ नहीं आया तो वो भी उदास मन से चुपचाप हरिया के पीछे पीछे चल दिए.

गरिमा अब भी उन्हें जाते हुए देख रही थी.

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गरिमा को अपने पीछे सोचता छोड़ कर हरिया कार की तरफ बड़ा जा रहा था और उसके पीछे पीछे बिहारी काका और जीतू भी उखड़े मन से चले जा रहे थे.

बिहारी काका : ये सब क्या क्या बोल रहा था वह, तुझे तो उनको तैयार करना था थोड़ी रिक्वेस्ट करता तो शायद मान जाती, उल्टा तू तो वह से चला आया.

हरिया : हर बार रिक्वेस्ट करके सामने वाले तैयार नहीं करा जाता मज़ा तो तब है जब सामने वाला चल कर आए आपसे रिक्वेस्ट करने.

जीतू हस्ते हुए : तो आपको क्या लगता है वो आपसे रिक्वेस्ट करेगी छोड़ने के लाइन. हाहाहा

इससे पहले जीतू की हसी ख़तम होती पीछे से गरिमा की आवाज़ आ गई.

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गरिमा: रुको

तीनो के बढ़ते कदम एकदम रुक गए. हरिया ने अपनी गर्दन घुमाकर पीछे देखा तो गरिमा अब भी उसी पत्थर पर बैठी मुस्कुराती हुई उन्हें हाथ के इशारे से अपने पास बुला रही थी. जीतू और बिहारी काका ने तो लपक कर उसकी तरफ कदम बड़े पर हरिया ने उन्हें कंधे से पकड़ कर रोक दिया. हरिया को ऐसा करते देख गरिमा उस पत्थर से उठकर नंगी hi अपनी नज़रे झुकाए चलती हुई हरिया के ेकडूक करीब आकर कड़ी हो गई.

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हरिया : मैडम जी आप कपडे पेहेन लीजिये हमे निकलना है.

गरिमा : उसमे अभी भी थोड़ा टाइम है हम कुछ देर और रुक सकते है अभी.

हरिया : रुकने की कोई वजह भी होनी चाहिए.

गरिमा : मई हु न, मेरे जैसी सुन्दर गद्रे बदन की औरत इस सुनसान जगह पर बिना कपड़ो के भीगे बदन के साथ तुम्हारे सामने नंगी कड़ी क्या ये वजह काफी नहीं कुछ वक़्त के लिए रुकने के लिए.

हरिया : पर आप पर हमारा कोई हक़ नहीं बनता और अगर हम कुछ हक़ जाता दे तो आपको ऐसा लगेगा की हम आपको बाज़ारू औरत समझ रहे है.

गरिमा : और अगर मई कहु मुझे ऐसा नहीं लगेगा तो.

हरिया : रहने दीजिये मैडम जी अब रहने दीजिये आपकी बात मेरे दिल में चुभ गई मुझसे नहीं हो पाएगा अब कुछ, मूड नहीं रहा अब मेरा.

गरिमा : कोई बात नहीं मूड बनाना मुझे अच्छे से आता है.

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इतना कह कर गरिमा ने होंठ आगे बढ़ाकर हरिया के होंठो से जोड़ दिए. पर हरिया ने गरिमा के कंधे पकड़ कर उसे खुद से दूर कर दिया. बिहारी काका और जीतू बस दर्शक बने ये सब देख रहे थे. उन्हें यही लग रहा था की हरिया बेवजह का भाव खा रहा है कही गरिमा का hi मूड जो बड़ी मुश्किल से बना है बिगड़ न जाए. पर हरिया जनता था वो क्या कर रहा है.

हरिया : मत करिये मैडम जी मई अपनी इस मुलाकात के लिए बहुत कुछ सोच कर आया था पर अब वो सब करना तो बहुत दूर की बात कहने और सोचने तक की हिम्मत नहीं हो रही.

गरिमा : क्यों पहले तो बहुत हिम्मत थी तुममे इतनी की बीच सड़क में मेरे घाघरे में मुँह डालने में भी तुम्हे दर नहीं लगा था फिर आज क्या हुआ उस हिम्मत को.

हरिया : आपने बात hi ऐसी करदी की दिल hi तोड़ दिया आपने तो. मई तो क्या क्या अरमान लेकर आया था और आपने क्या कह दिया.

गरिमा : अरे सॉरी बाबा माफ़ कार्डो देखो शायद दुबारा कभी मिलना न हो पाए तो क्या इस आखिरी मुलाकात में इस तरह मेरी बात का बुरा मानोगे.

हरिया : अरे आपकी तो किसी बात का बुरा नहीं मान सकते पर ये भी नहीं चाहते की आपको ऐसा लगे की हम आपको बाज़ारू औरत समझते है.

गरिमा : नहीं लगेगा ी प्रॉमिस अब नहीं लगेगा सॉरी ऐसा कहने के लिए अब तो मान जाओ न प्लीज.

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इतना कह कर गरिमा आगे बढ़कर हरिया के बदन से लिपट गई. उसके नंगे दूध हरिया के सीने से चिपक कर डाब रहे थे, पीछे खड़े बिहारी काका ये सब देख कर हरिया को सलूट कर रहे थे. गरिमा को अपने सीने से चिपका देख हरिया ने भी अब ज्यादा भाव न कहते हुए गरिमा को अपनी बहो की गिरफ्त में ले लिया. गरिमा को भी हरिया का यु उसे अपनी बहो में भर लेना बड़ा अच्छा लग रहा था क्युकी कही न कही उसके दिल में भी हरिया के लिए एक खास जगह बन चुकी थी. हरिया ने आँखों आँखों में बिहारी काका को शामिल होने का इशारा कर दिया. और वो भी बिना देर पीछे से गरिमा के नज़दीक आकर उसके नंगे बदन से चिपक कर खड़े हो गए.

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बिहारी काका : सही है बिटिया जब जवान हत्ता कट्टा मर्द मिल गया तो अपने पिछली रात के पति को भी भूल गई.

गरिमा : ये मैंने कब कहा की मई आपको भूल गई.

बिहारी काका : तो क्या मई भी तुम्हे प्यार कर सकता हु.

गरिमा : अभी आप खुद को मेरा पति बोल रहे और अब प्यार करने की परमिशन मांग रहे. भला एक पति को अपनी पत्नी को प्यार करने के लिए परमिशन की ज़रूरत होती है क्या.

बिहारी काका : अच्छा ऐसी बात है क्या.

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इतना कह कर बिहारी काका ने भी गरिमा को पीछे से अपनी बहो में भर लिया. और दोनों आगे पीछे से गरिमा के नंगे बदन को चूमने चाटने लगे. जीतू चुपचाप किनारे खड़े अपने बाप और हरिया जिसे वो चाचा कहता था उन्हें उस औरत को चूमते देख रहा था जिसे कुछ hi देर पहले उसने भी छोड़ा. पर देखने में उसे एक अलग hi आनंद मिल रहा था इसलिए वो भी इत्मीनान से एक पत्थर पर बैठ कर अपने सामने चल रही पोर्न मूवी देख कर अपना लुंड सहलाने लगा.

हरिया : ठीक है अगर आप खुद अपनी मर्ज़ी से चल कर मेरे पास आई हो तो मई याद दिला दू की अपने उस दिन खँडहर में मुझे कुछ वादा करा था. याद है.

गरिमा : वादा क्या वादा मुझे याद नहीं.

हरिया: याद करिये मेमसाब आपने कहा था की जब मई वापस लौटकर आऊंगा तो आप मेरी एक इच्छा पूरी करेंगी.

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ये बोलते हुए हरिया ने गरिमा के होंठ सहलाते हुए अपने लुंड की तरफ इशारा करा. और गरिमा को भी याद आ गया की खँडहर में हरिया ने उसे अपना लुंड मुँह में लेकर चूसने की रिक्वेस्ट की थी पर उस वक़्त गरिमा ने ये कहकर बात ताल दी थी की जब वो अपनी बीवी से मिलकर गाँव से वापस आएगा वो तब उसकी ये इच्छा भी पूरी कर देगी.

हरिया : याद आया मेमसाब

गरिमा : हम्म याद है

हरिया : तो वादे के मुताबिक मई आपके जाने से पहले वापस आ गया. अब बारी आपकी है अपना प्रॉमिस पूरा करने की.

गरिमा : पर मैंने आज तक ऐसा पहले कभी नहीं करा बहुत गन्दा लगता है ऐसा करना.

हरिया : अब पहले तो आपने बहुत कुछ नहीं करा था. पहले तो आपने अपने पति के अलावा किसी और मर्द के साथ सेक्स भी नहीं करा था पर अब तीन तीन मर्दो से कर चुकी. क्या पहले कभी यु जंगल में नंगी रही है आज है. और फिर ये तो मेरे लिए भी अच्छा है की मई वो पहला मर्द रहूँगा जिसे अपने लुंड पर आपके होंठो को गर्माहट को महसूस करने का मौका मिलेगा. आपकी छूट की सील तो नहीं तोड़ पाया पर मुँह की सील तोड़ने का मौका तो मिलेगा और वैसे भी आपने वडा करा था अब आप मन नहीं कर सकती.

हरिया गरिमा की बातो से बिहारी काका को अंदाजा हो गया था की हरिया गरिमा के मुँह में लुंड डालने की बात कर रहा था. और ये भी समझ आ गया था की गरिमा ने आज तक किसी भी मर्द का लुंड मुँह में नहीं लिया था. बिहारी काका ने भी कल रात किचन में गरिमा को अपना लुंड मुँह में लेने को कहा था पर तब भी गरिमा ने मन कर दिया था की उसे इसमें उलटी आती है. वो गरिमा के जवाब के इंतज़ार में थे.

गरिमा सकुचाते हुए : ठीक है मैंने वादा करा था सिर्फ इसलिए पर थोड़ा सा केवल आगे आगे से मुँह में लुंगी बस थोड़ी देर और है तुम मुँह में hi मत निकल देना ठीक है.

हरिया : ठीक है मैडम जैसा आप कहो.

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गरिमा को हामी भरते देख काका को बहुत गुस्सा आया की उनको तो उसने साफ़ मन कर दिया था पर हरिया के एक बार कहने पर hi मान गई. पर तभी उन्हें याद आया की गरिमा का एक और छेड़ है जो अब तक पूरी तरह ुन्छुए है जिसे उसके पति ने भी नहीं छोड़ा उसकी फूली चौड़ी गांड. और इस मादक गदराई गांड के तो काका शुरू से बड़े दीवाने थे. हलाकि गरिमा ने गांड में लेने से भी मन कर दिया था पर जब हरिया का लुंड मुँह में लेने को मान गई तो फिर गांड में भी लेने को मान सकती है.
 
बिहारी काका : कल जब मैंने तुमसे कहा था की मेरा लुंड एक बार मुँह में लेलो तब तो तुमने साफ़ मन कर दिया की तुम्हे ऐसा करने से उलटी आ जाएगी.

गरिमा : तो वो तो अब भी मई सूरे नहीं हु की नहीं आउंगी. पर पिछली बार मैंने गलती से hi सही पर हरिया को इस बात का प्रॉमिस कर दिया था. तो अब मन कैसे कर देती इसलिए एक बार किसी तरह से तरय करके देखती हु.

काका : अगर बात एक बार तरय करने की hi है तो कल रात मैंने तुमसे कुछ और माँगा था पर उसके लिए भी तुमने मन कर दिया था.

गरिमा (बिहारी काका की तरफ देखते हुए) : किस चीज़ की बात कर रहे आप.

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काका ने अपने हाथ से गरिमा के कूल्हों को सहलाते हुए उन्हें थोड़ा फैला कर अपनी एक ऊँगली गरिमा की गांड के छेड़ में दाल दी.

काका : इस चीज़ की

गरिमा का दिल तेज़ तेज़ धड़कने लगा. मुँह से लुंड टच करने को तो वो जैसे तैसे मान भी गई थी पर गांड में लुंड लेने की बात ने hi उसके रोए खड़े कर दिए. क्युकी उसने नेहा से भी सुना था की कोरी गांड में पहली बार लेने में बड़ा दर्द होता है.

गरिमा : नहीं मैंने आप से कल hi मन कर दिया था न मैंने यहाँ आज तक अपने पति को भी नहीं डालने दिया.

काका : तो आज तक तो अपने पति का लुंड मुँह में भी नहीं लिया था पर आज इस हरिया का लुंड तो मुँह में लेने को मान गई न. फिर गांड में क्यों नहीं ले सकती.

गरिमा : नहीं मुँह में लेना अलग बात है पर वह लेने में बहुत दर्द होता और आपका तो लुंड भी ज़रूरत से ज्यादा मोटा है. मई नहीं ले पाऊँगी. आप छूट में दाल लो वह क्या दिक्कत है.

काका : अभी अभी मेरे बेटे ने छोड़ा है तुम्हे वह और वैसे भी मई तुम्हारी छूट से ज्यादा तुम्हारी गांड का दीवाना हु. मई भी चाहता हु की अपनी एक रात की पत्नी के एक कोरे अनछुए छेड़ का उद्घाटन करू. एक बार तो तरय कर hi सकती हो.

गरिमा : बात को समझिये मई नहीं ले.....

हरिया : क्यों डर्टी हु मैडम तुम तो यहाँ नए अनुभव लेने hi आई हो तो जो अब तक नहीं करा वो यहाँ तरय करके देखो न. वैसे भी काका पुराने माहिर खिलाडी है बड़े आराम से डालेंगे. जब पहली बार सुहागरात में अपनी पति का लुंड अपनी छूट में लिया था दर्द तो तब भी हुआ होगा पर बाद में मज़ा आया था न. बस वही मज़ा यहाँ आएगा. और सोचिये जो मज़ा आपने अब तक कभी लिया hi नहीं आप उससे अब तक अनजान हो एकबार तरय तो करो. हम आपके दर्द और मज़े दोनों का ख्याल रखेंगे भरोसा रखो हम पर.

गरिमा : पर..

हरिया : अरे पर वॉर कुछ नहीं बेचारा काका का भी एक अरमान है जाने से पहले हम दोनों का ये अरमान पूरा कार्डो न.

हरिया ने इतनी नज़ाकत से कहा की गरिमा छह कर भी मन नहीं कर पाई. गरिमा तो पहले से hi नंगी थी. अब हरिया ने भी अपनी पंत और अंडरवियर एक साथ नीचे कर दिया. अंडरवियर उतारते hi उसका तना हुआ लुंड उछाल कर बहार आ गया और झटके पे झटके खाने लगा.

हरिया : देखो मेमसाब ज़रा नज़रे नीचे करो देखो मेरा लोल्लिपोप आपके होंटो की गर्मी में पिघलने को बेताब हो रहा है अब झुक कर कर इसकी ये इच्छा पूरी कार्डो न.

गरिमा : ठीक है पर एक बात ध्यान रखना अपने लोल्लयपोप के अंदर की मलाई मेरे मुँह के अंदर मत निकल देना.

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गरिमा का ये डबल मीनिंग जवाब सुनकर हरिया के होंठो पर भी हसी आ गई. हरिया ने गरिमा के कंधो पर थोड़ा दबाव डाला और अब गरिमा भी ज्यादा न नुकुर न करते हुए चुप चाप गरिमा के लुंड के सामने सलामी की मुद्रा में झुक gai.Hariya का झटके खता तना हुआ लुंड अब गरिमा के चेहरे के ठीक सामने था. ऐसे झुक कर खड़े होने से एक तरफ तो हरिया का झटके खता लुंड गरिमा के चेहरे के ठीक सामने था वही झुके होने की वजह से गरिमा की गांड पीछे से और फ़ैल गई थी और गरिमा की गांड का चीड़ बिहारी काका के सामने पूरी तरह बेपर्दा था. गरिमा की गांड का ये छोटा टाइट ुन्छुए छेड़ देख कर काका ने अपनी धोती के ऊपर से hi अपना लुंड मसलना शुरू कर दिया. वो एक हाथ से गरिमा के कूल्हों को सेहला रहे थे और दुसरे हाथ से अपने लुंड को मसल रहे थे. कूल्हों को सहलाते सहलाते वो अंगूठे से गरिमा की गांड का छेड़ भी रगड़ रहे थे. रगड़ते रगड़ते उन्हों अपना अंगूठा hi गरिमा की गांड के छेड़ में दाल दिया.

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रगड़ते रगड़ते काका ने मोटा खुरदुरा अंगूठा hi गरिमा की गांड के अंदर दाल दिया. काका की इस अचानक की गई हरकत से गरिमा चौक पड़ी. जीवन में पहली बार कोई चीज़ उसकी गांड के छेड़ में दाखिल हुई थी. काका धीमे धीमे अपना अंगूठा घुमा कर गरिमा की कासी हुई गांड की दीवारों को अंदर से रगड़ने लगे. शायद अपने लुंड के अंदर जाने के लिए रास्ता बना रहे थे. और गरिमा का दर और शॉक अब धीमे धीमे आनंद का रूप ले रहा था. उसने तो सपने में भी नहीं सोचा था की गांड में ऊँगली करवाने में इतना मज़ा आता है सच में वो तो अब तक इस मज़े से पूरी तरह अनजान थी. वो अलग बात थी की अंगूठे को मोटाई और तने हुए लुंड की मोटाई में चार गुने से ज्यादा का फरक होता है और ये ज़रूरी नहीं की जो मज़ा अंगूठे में मिल रहा है वही मज़ा लुंड में भी मिलेगा. पर फिलहाल बिहारी काका का अंगूठा गरिमा को एक नए अनुभव से रूबरू करा रहा था.

गरिमा आनद में इस कदर डूब चुकी थी की उसने इस पूरी तरह महसूस करने के लिए अपनी आँखे बंद कर ली या ये भी कह सकते है की उसकी आँखे खुद बा खुद बंद हो गई. वो ये भूल hi गई की उसके सामने खड़े हरिया का लुंड झटके पे झटके खा रहा है. गरिमा की बंद आँखों को देख हरिया का एक्ससिटेमेंट भी और बाद गया. उसने आगे बाद कर अपना लुंड गरिमा के चेहरे पर यहाँ वह रगड़ना फिरना शुरू कर दिया. हरिया का लुंड कभी गरिमा की बंद आँखों से टकराता कभी नाक से और कभी उसके कोमल गालो की कोमलता को स्पर्श करके उसके गालो पर एक तेज़ झटको लगा देता.

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सामने बैठे जीतू के लिए तो ये सन किसी ज़बरदस्त पोर्न मूवी से कम नहीं था. वो खुद भी इस खेल में शामिल होना चाहता था पर एक तो अपने बापू के सामने उसमे थोड़ी झिझक थी दूसरा वो ये सन देखने का मज़ा मिस नहीं करना छठा था. क्युकी ऐसा नज़ारा उसे दुबारा देखने को कब मिलने वाला था. ये नज़ारा देखते देखते hi उसने अपनी चैन खोल कर अपना लुंड बहार निकल लिया और अपनी आँखों के सामने का सेक्सी इरोटिक सन देख वही पत्थर पर बैठ कर मुठ मारने लगा. बाथरूम में गंदे गंदे वीडियो देख कर तो उसने कई बार मुठ मारी थी पर लाइव सन देखते हुए मुठ मारने का अपना अलग hi मज़ा था.

इधर हरिया का लुंड जब गरिमा की नाक के करीब अत तो उसके मादक सुगंध को वो सास खींच कर अंदर तक भर लेती. एक दो बार हरिया का लुंड गरिमा के होंठो से भी टकराया पर गरिमा के होंठ बंद होने के चलते बस उन्हें बहार बहार से स्पर्श करके hi वापस आ गया.

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दूसरी तरफ बिहारी काका ने अपना अंगूठा गरिमा की गांड में पूरा अंदर तक दाखिल कर दिया शायद अपने अंगूठे से hi गरिमा की गांड की गहराई को नापने की कोशिश कर रहे थे. पर उनके यु अंगूठा पूरा अंदर डालने से गरिमा के होंठ एक हलकी मीठी आह के साथ थोड़े से खुल गए और इसी पल के इंतज़ार में बैठे हरिया ने अपने लुंड के टोपे को गरिमा के होंठो के बीच की खुली जगह में फिट कर दिया. गरिमा के होंठ किसी अधखिले फूल की तरह थोड़ा सा खुले थे और हरिया का लुंड उनमे रगड़ता हुआ यहाँ वह झटके खा रहा था. गरिमा को भी अपने होंठो पर हरिया के लुंड की थिरकन महसूस हो रही थी और न जाने क्यों अपने आप hi उसकी जीभ अपने खुले होंठो से हल्का बहार आ गई और हरिया के लुंड के टोपे को स्पर्श करके उसकी उत्तेजना उसकी गर्माहट और उसके टास्ते को महसूस करने लगी.

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बिहारी काका गरिमा की गांड में अपना अंगूठा तेज़ तेज़ अंदर बहार कर रहे थे जिसके कारन गरिमा की सासे तेज़ तेज़ चल रही थी और ये गरम गरम सासे उसके होंठो के मुहाने पर रखे हरिया के लुंड से टकरा कर उसकी उत्तेजना को बड़ा रही थी जो उसे और तेज़ झटके खाने को मज़बूर कर रहा था. और गरिमा की जीभ के स्पर्श भर ने हरिया के लुंड का हाल बेहाल कर दिया था. हरिया तो ये सोच रहा थे की जब गरिमा के मुँह मुहाने पर उसके लुंड का ये हाल है तो जब पूरा अंदर जाएगा तब क्या हाल होगा. उसे तो यहाँ तक लग रहा था की कही यही गरिमा के होंठो के बहार hi न झाड़ जाए.

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