A wedding ceremony in village - Page 23 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

A wedding ceremony in village

अगर ऐसा हो जाता तो हरिया की बड़ी बेज़्ज़ती हो जाती. उसने आँखों आँखों में hi बिहारी काका को ये तिमेपास ख़तम करके असली खेल शुरू करने का इशारा करा. और बिहारी काका ने भी अपने होंठो पर एक कुटिल मुस्कान लाते हुए सहमति में सर हिला दिया. और अपने लुंड को मसल रहे हाथ से अपनी धोती को खींच कर अपने जांघिये की गाँठ को भी खोल दिया. गाँठ खुलते hi बिहारी काका की धोती और जांघिया एक साथ ज़मीन पर जा गिरे. और उनका मोटा सफ़ेद बालो से भरा बदसूरत सा लुंड जो अब तक हाथो के मसलने के कारन पूरी तरह फूल चूका था बहार लटकने झूलने लगा. बिहारी काका ने अपना लुंड गरिमा के मोठे गद्रे छुटाओदों पर फिरना शुरू कर दिया. चूतड़ों पर फिरते फिरते वो लुंड गरिमा की गांड की दरार के अंदर उसकी गांड के छेड़ तक ले आए. जहा अब भी उनका अंगूठा रास्ता रोके खड़ा था.

JiHcyBtJ_o.gif


बिहारी काका ने अपना अंगूठा बहार खींच लिया. अचानक अंगूठा बहार निकल जाने से गरिमा के आनंद में एक ब्रेक सा लग गया. पर अंगूठा बहार निकलते hi काका ने अपने लुंड का टोपा गरिमा की गांड के छेड़ के मुहाने पर रख दिया. गरिमा को एक पल को यही लगा की ये अंगूठा hi पर जैसे hi काका ने अपनी कमर का दबाव आगे की तरफ बढ़ाया और बिहारी काका का लुंड उनके अंगूठे के अंदर बहार होने से थोड़ा मुलायम पद चुके गरिमा की गांड का छेड़ को फैलता हुआ थोड़ा सा अंदर दाखिल हुआ hi था की दर्द के मारे उसकी हालत ख़राब हो गई.

HE67jYj6_o.jpeg


उसने खुद को गिरने से बचने के लिए हरिया की कमर को कास कर पकड़ लिया. जो आँखे अब तक मज़े और आनंद में बंद थी वो गांड के छेड़ के फैलने से खुद भी पूरी तरह फ़ैल गई. और दर्द की सुद्दीन प्रतिक्रिया के रूप में गरिमा का मुँह भी पूरी तरह खुल गया.

गरिमा के मुँह खुलते hi हरिया का लुंड जो अब तक गरिमा के अधखुले होंठो के इर्द गिर्द झटके खा कर गरिमा की जीभ के स्पर्श और उसकी सासो की गर्माहट का hi आनंद ले प् रहा था. गरिमा का मुँह खुलते hi उसे भी बिना किसी दिक्कत के अंदर जाने का रास्ता मिल गया. और बिना देर किये हरिया ने भी अपना लुंड गरिमा के मुँह के अंदर दाखिल कर दिया.

OW2UfY4P_o.jpeg


जीवन में ये पहला मौका था जब गरिमा ने अपने मुँह और गांड में किसी का लुंड लिया था और वो भी एक साथ. गरिमा के शरीर की जिन जगह से उसका अपना पति जिसने उसके साथ सात फेरे लिए थे वो भी महरूम रहा था आज एक 52 साल का बूढ़ा और एक 36 साल का गवर देहाती ड्राइवर इन अनछुए हिस्सों की पहली पिलाई करने जा रहे थे. वही गरिमा जिसे ये लगा था की गांड में अंगूठा लेना और होंठो से लुंड चूमना उसकी महक को सूंघना जितना आसान है जब उसने ये कर लिया तो वो आगे भी कर लेगी.

पर अब उसे समझ आ रहा था की ये करना इतना भी आसान नहीं होने वाला था. क्यों लड़किया लुंड चूसने और गांड में लेने से कतराती है उसे अब समझ आ रहा था. पर अब तो गाडी स्टेशन से चल चुकी थी, हरिया का लुंड उसके मुँह में और बिहारी काका का लुंड उसकी गांड में दाखिल हो चुके थे. अब तो ये गाडी अपनी मंज़िल से पहले नहीं रुकने वाली थी.

2pa6rJ2B_o.jpeg


बिहारी काका ने पीछे से एक और ज़ोर का धक्का आगे की और मारा और उनका आधे सर ज्यादा लुंड गरिमा की कोरी अनछुई गांड को चीरता हुआ अंदर तक पहुंच गया. गरिमा का मुँह पूरी तरह खुल गया उसकी उंगलिया हरिया की कमर पर गड गई. वो दर्द से छटपटा उठी पर उसकी इस छटपटाहट ने हरिया का जोश और बड़ा दिया और हरिया ने भी अपना लुंड गरिमा के पूरी तरह खुल चुके मुँह में उसके हलक के मुहाने तक पहुंच दिया.

LMQxhLQi_o.gif


गरिमा दर्द के मारे चिल्लाना चाहती थी पर हरिया के मोटा काला लुंड ने उसकी आवाज़ को उसके हलक से बहार आने का रास्ता hi नहीं दिया. पीछे से बिहारी काका गरिमा की गांड में अपना लुंड आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करने लगे और थोड़ा थोड़ा करके उसके अंदर और अंदर दाखिल करने लगे. वही हरिया भी अपने लुंड से गरिमा का मुँह छोड़ने लगा. कुछ देर पहले तो वो गरिमा से रिक्वेस्ट कर रहे थे की एक बार वो उनकी इच्छा पूरी कर दे पर अब वो गरिमा की छटपटाहट को नज़रअंदाज़ करते हुए अपने अपने काम में लगे थे. शायद उन्हें पहले से पता था की ऐसा होगा क्युकी जिस औरत आज तक कभी ये अनुभव लिया तक नहीं था वो पहली बार में बिना छटपटाए तो ये नहीं कर पाएगा. और वो ये भी जानते थे की अगर अब उन्होंने गरिमा को छोड़ दिया तो वो दुबारा उन्हें अपने मुँह और गांड के करीब भी नहीं फटकने देगी.

उनका तो कलपद हो जाएगा. इसलिए अब इतना आगे बढ़ने के बाद पीछे हटने का तो रास्ता hi नहीं. अब बाद में वो जो भी कहे गाली दे या झापड़ मारे वो सब झेल लिया जाएगा पर अब काम पूरा करके की रुका जाए. पत्थर पर बैठा जीतू अपने बाप को गरिमा की गांड मारते देख कर एक्ससिटेमेंट के मारे अपने लुंड पर अपना हाथ ऊपर नीचे चला रहा था. वो जब पोर्न वीडियो देखता था तो मुँह में लुंड लेने वाले या गांड में लुंड लेने वाले सन को आगे बड़ा देता था क्युकी उसे छूट में लुंड डालने वाले सन ज्यादा बढ़िया लगते थे पर आज अपनी आँखों के सामने गांड और मुँह की एक साथ होती ठुकाई के इस लाइव टेलीकास्ट को देख कर उसे जो एक्ससिटेमेंट मिला था वो आज तक किसी पोर्न वीडियो से भी नहीं मिला था.

lOTeZAUB_o.gif


कुछ देर आहिस्ता आहिस्ता करने के बाद धीमे धीमे काका ने अपनी स्पीड बड़ा दी. पीछे से गरिमा का दर्द के मारे बुरा हाल हो रहा था वही आगे से उसका पूरा मुँह उसके थूक और लार से भर गया था. हरिया का लुंड उसके हलक तक जाकर बहार आता तो वापस उसके हलक तक चला जाता. और हरिया के लुंड के साथ साथ गरिमा के मुँह में भरा थूक और लार भी बहकर बहार आ रहा था. गरिमा की सासे उखड रही थी उसके पेअर कपकपा रहे थे उससे ढंग से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था, पर पीछे से बिहारी काका ने उसे कमर और आगे से हरिया ने उसे कंधे से थाम रखा था इसलिए वो नीचे भी जा सकती थी. अपने बाप और मुँह बोले चाचा हरिया के तेज़ तेज़ धक्के को देख कर जीतू का एक्ससिटेमेंट भी अपने शिखर पर पहुंच गया था और उसके हाथो के गति अपने लुंड पर तेज़ हो गई थी.

0L5khMcb_o.gif


आज उसे एक नया सबक सीखने को मिल रहा था की औरत के बदन को किस तरह इस्तेमाल करा जाता है. औरत का काम होता है मर्द का लुंड अपने हर छेड़ में लेकर मर्द को मज़ा देना. अगर इसमें औरत को थोड़ा बहुत दर्द थोड़ी छटपटाहट होती है तो इतना तो चलता है बल्कि देखा जाए तो ये छटपटाहट देख कर तो मर्द का एक्ससिटेमेंट और बाद जाता है जैसे इस वक़्त बापू और हरिया चाचा का बाद रहा था. बिहारी काका पीछे से गरिमा को छोड़ नहीं रहे थे और जब वो आगे बढ़ती तो हरिया का लुंड उसके हलक में और गहराई तक उतर जाता. और जब गरिमा हरिया को पीछे धकेलने की कोशिश करती तो हरिया माँ जोश और बाद जाता तो वो अपना लुंड और अंदर तक घुसेड़ देता. कहते है की तीन इयर्स में इंसान जो बाते अपने दिमाग में बसा लेता है वो बाते उसका चैरेक्टर उसका आने वाला फ्यूचर डीडे करती है और कुछ ऐसा hi इस वक़्त जीतू के साथ हो रहा था. औरत के पार्टी उसके मन में आज एक नै तरह की सोच जनम ले रही थी. और पता नहीं ये सोच उसे कहा ले जाने वाली थी.

काका और हरिया के धक्को ने गरिमा की हालत ख़राब करदी थी उसने ज़बरदस्ती जोश जोश में हामी तो भर दी थी पर अब उसे अपने फैसले पर पछतावा हो रहा था. पर अब पछताए हॉट क्या जब लुंड घुस गए छेड़. बिहारी काका और हरिया इन दोनों के लिए भी ये उनके जीवन का एकदम नया अनुभव उन्होंने भी अब तक केवल फिल्मो में hi देखा था मुँह में लुंड डालते और गांड मारते कभी खुद ऐसा अनुभव उन्हें भी नहीं मिला था उनकी खुद की बीवियों ने भी कभी उनका लुंड अपने मुँह और गांड में नहीं लिया था पर आज गरिमा को अपनी बातो फसा कर उन्होंने उसे ऐसा करने को मन लिया था. हलाकि हरिया ने वादा करा था की वो अपना पानी गरिमा के मुँह के अंदर नहीं निकलेगा पर क्या गरिमा की मुँह की गरम गरम सासो के आगे उसका खुद का ज़ोर चल पाएगा.

7RpL6tkz_o.jpeg


दूसरी तरफ गरिमा की कासी हुई चौड़ी गांड की कसावट बिहारी काका को एक नै नवेली छूट का एहसास करा रही थी. काका का लुंड बड़ा भले hi न हो पर मोटा बहुत काफी था और वो गरिमा की गांड को पूरा खोलता हुआ अपनी जगह बनता हुआ अंदर बहार हो रहा था. गरिमा को भी अपनी सुहागरात में हुई पहली चुदाई का सा एहसास हो रहा था जब पहली बार कोई लुंड उसके अंदर दाखिल हुआ था और उसकी छूट की सील टूटी थी. चुदाई का वो पहला दर्द उसे आज दुबारा अनुभव हो रहा था जब एक 54 साल का बुद्धा पीछे से गांड मार रहा था. वह का सन्नाटा काका की कमर और गरिमा के चूतड़ों के टकराने से ठप्प ठप्प की आवाज़ से गूँज रहा था. गरिमा की दर्द भी अब धीमे धीमे उसके बर्दाश्त में आ रहा था. गरिमा के मुँह छोड़ रहा हरिया भी बिहारी काका की स्टैमिना देख कर हैरान था उसने नहीं सोचा था की ये बुद्धा इतनी देर टिक जाएगा पर गरिमा तो भयहारी काका का स्टैमिना कल रात hi देख चुकी थी.

v9U0MOH2_o.gif
 
OSjPoKkQ_o.jpeg


सामने से हरिया को गरिमा के मुँह में लुंड अंदर बहार करने में एक जन्नत का सा एहसास हो रहा था. उसने रुंडिया तो बहुत छोड़ी थी पर एक तो कोई रुंडी मुँह में लेती नहीं थी अगर मुँह में देना है तो उसका पैसा बहुत मांगती थी. दुसरे रुंडियो में वो पहली बार मैंने hi करा है वाली फीलिंग नहीं मिल सकती थी वो तो खुली बोरी की तरह होती थी जिसे न जाने कितनी बार खोला गया है. पर गरिमा के मुँह में लुंड डालने की अलग hi बात थी. एक तो शहर की पड़ी लिखी औरत उसपर जिस घर का वो एक मामूली ड्राइवर है उस घर की होने वाली बहु की सहेली उसपर भी जिसने आज तक अपने पति का भी मुँह में नहीं लिया उसके मुँह में लुंड डालने की फीलिंग को बयां करना hi मुश्किल था.

सेक्स क्या होता है बस एक लुंड और छूट का मिलान चले वो लुंड किसी का हो और छूट किसी का. फिर भी लोग अलग अलग लोगो के साथ क्यों करना चाहते है उस फीलिंग की hi वजह से. यही फीलिंग होती है जो मर्द का एक्ससिटेमेंट बढ़ती है की वो एक खुली बोरी में hi अंदर बहार कर रहा है या खुद से एक बंद बोरी को खोल कर उसकी बोनी कर रहा है. वो उस जगह दाखिल होने वाला पहला मर्द है ये एहसास उसका जोश और ज्यादा बड़ा देता है. और यही जोश इस वक़्त हरिया के धक्को में भी नज़र आ रहा था. वो पहला मर्द होने का जोश जिसने गरिमा के मुँह में लुंड डाला.

QLWVswfY_o.gif


हरिया का लुंड गरिमा के हलक तक जा रहा था और हरिया तो उसे बहार भी निकल रहा था उसका पूरा लुंड गरिमा के थूक और लार से पूरी तरह गीला हो चूका था. हरिया ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की उसे गरिमा जैसी सुन्दर हीघक्लास्स शादीशुदा औरत के मुँह में लुंड डालने का मौका मिलेगा शायद इसलिए उसका लुंड एक पल को भी बहार आने को तैयार नहीं था. उसने गरिमा के बालो कास कर पकड़ा उसके लुंड की नसे कास कर फूली और अगले hi पल उसके लुंड से ढेर सारा सफ़ेद गाड़ा वीर्य गरिमा के मुँह में hi निकलता चला गया.

NlCKqz8l_o.gif


हलाकि उसने गरिमा से वादा करा था पर वादा उसके मुँह ने करा था लुंड ने नहीं. और इस वक़्त उसका लुंड जिस कंडीशन में था वह वादा के कितने बांध क्यों न लुंड का पानी उस बाँध को तोड़ कर बहार आना hi था. गरिमा की आश्चर्य से फ़ैल गई थी उसे यकीन नहीं हो रहा था की हरिया ने अपने लुंड का पूरा पानी उसके मुँह के अंदर निकल दिया था. इस गाँव में आने से पहले वो एक खासे सुविधा संपन्न घर की शरीफ पतिव्रता पत्नी थी पर अब वो यहाँ इस सुनसान जगह पर मादरजात पूरी नंगी हालत में एक देहाती ड्राइवर के लुंड से निकला पानी अपने मुँह में भरे बैठी थी. उसे ये पानी एक पल भी अपने मुँह में बर्दाश्त नहीं हो रहा था वो जल्द से जल्द ये पानी से अपने मुँह से बहार थूक देना चाहती थी. पर पानी निकलने के बावजूद हरिया अपना लुंड उसके मुँह से नहीं निकला था. वो अपने लुंड के पानी की आखिरी बूँद भी हरिया के मुँह में खली कर देना चाहता था.

Ew7UOe66_o.gif


गरिमा अपने हाथो का पूरा ज़ोर लगाकर उसे पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी पर हरिया ने भी अपने लुंड का दबाव गरिमा के मुँह पर बड़ा दिया था. गरिमा छटपटाने के अलावा कुछ नहीं कर प् रही थी. वो ये वीर्य अपने हलक के नीचे नहीं ले जाना चाहती थी पर हरिया तो अपना लुंड बहार निकल hi नहीं रहा था की गरिमा को अपने मुँह में भरा वीर्य बहार थूकने का मौका मिल सके.

mTKWQ6ap_o.gif


इधर बिहारी काका अब पीछे से गरिमा की गांड में धक्के पे धक्के लगाए जा रहे थे. उन्होंने आज दिखा दिया था की उम्र में भले hi वो हरिया से बड़े हो पर उनका स्टैमिना आज भी हरिया जैसे हट्टे काटते मर्द से ज्यादा था. पर अब धीमे उनका लुंड भी अपना लावा उगलने को तैयार था. उन्होंने भी पीछे से गरिमा की कमर को कास कर जकड लिया. एक ज़ोरदार धक्के के साथ अपना लुंड गरिमा की गांड में गहराई तक उतार दिया. और कुछ hi पालो बाद गरिमा को अपने कूल्हों से कुछ गरम गरम चिपचिपा बहकर नीचे आता महसूस हुआ.

GrzxyEQH_o.gif


गरिमा समझ चुकी थी बिहारी काका ने अपना सारा वीर्य उसकी गांड के अंदर hi खाली कर दिया था. उसके मुँह में भरा आधे से ज्यादा वीर्य तो उसके हलक में जा hi जा hi चूका बेवजह का विरोध करने से अब कोई फायदा नहीं था. इसलिए फाइनली उसने भी अपने हथियार दाल दिया और अपने मुँह में भरा सारा वीर्य अपने हलक के नीचे ले लिया. बिहारी काका ने अपना बदन का पूरा भार गरिमा की पीठ पर दाल दिया. उनकी ऊपर नीचे होती सासो से साफ़ पता चल रहा था की आज गरिमा की गांड मार करकर उन्हें कितना ज्यादा मज़ा और संतोष प्राप्त हुआ है. वो गरिमा के ऊपर झुके झुके hi उसकी की गांड के छेड़ से बहकर आता अपना वीर्य अपने हाथो से गरिमा के कूल्हों पर मॉल रहे थे.

s024vUSc_o.gif


बेशक आज गरिमा को साथ जो हुआ उसके लिए वो पूरी ततः तैयार नहीं थी पर आगे पीछे से हुई इस ज़बरदस्त ताबड़तोड़ चुदाई ने गरिमा के बदन का ज़र्रा ज़र्रा हिला कर रख दिया था. आज उसे चुदाई का एक अलग hi अनुभव प्राप्त हुआ था. एक ऐसा एक्सपीरियंस जिसे वो अपनी पूरी ज़िन्दगी तक नहीं भूलने वाली थी. और शायद यही वो एक्सपीरियंस था जो आने वाला फ्यूचर पूरी तरह बदल कर रख देने वाला था. क्युकी चुदाई तो सुख तो भले hi उसे अपने पति से मिल जाए पर क्या ये उसके बदन का तोड़ कर रख देने वाला बदंतोड़ चुआड़ी का ऐसा अनुभव उसका पति उसे दे पाएगा. फ्यूचर तो किसी और का बदलने वाला था जीतू का जो अपने बाप और मुंहबोले चाचा के द्वारा गरिमा लाइव ज़बरदस्त और ज़बरदस्ती की गई चुदाई का लाइव टेलीकास्ट देख कर दो बार झाड़ गया था. आज उसके मन औरत के प्रति एक अलग hi सोच का जनम हुआ था की औरत की चुदाई किस तरह करनी चाहिए चाहिए उसे किस तरह इस्तेमाल करना चाहिए. औरत मर्द को खुश करने की एक चीज़ भर है और उसकी ये सोच किस रास्ते पर ले जाने वाल्ज थी.

गरिमा के मुँह और गांड में अपना अपना लुंड पूरी तरह निचोड़ देने के बाद हरिया और बिहारी काका ने गरिमा पर से अपनी पकड़ को ढीला कर दिया. और गरिमा एक टूटी बेल की तरह ज़मीन पर बैठ गई. उसके पेअर अब भी कपकपा रहे थे. उसके मुँह के नीचे हरिया के वीर्य की चिपचिपाहट और कूल्हों पर काका के वीर्य का गीलापन साफ़ महसूस हो रहा था. इस वक़्त वो हरिया और बिहारी काका को देखना भी नहीं चाहती थी. उसका बदन पूरी तरह थक चूका था. हरिया और बिहारी काका को अब समझ आ रहा था की वो जोश जोश में क्या कर गए. हरिया को समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या कहे. काफी देर वह एक अजीब सा सन्नाटा चाय रहा. फिर हरिया ने बिहारी काका को आँख से इशारा करा की वो कुछ कहे. गरिमा से बाग़ करते तो बिहारी काका को भी दर लग रहा था पर वो यही तो बैठे नहीं रह सकते थे, इसलिए डरते सकुचाते उन्होंने hi बात शुरू की.

बिहारी काका : बिटिया वो मई, मई वो ये मई कह रहा था की मतलब मममम दरअसल मई कहना छह रहा था की.......

गरिमा (भरी आवाज़ में) : किसीको कुछ कहने की ज़रूरत नहीं मई अब अपनी सहेलियों के पास जाना चाहती हु बस, आप लोग गाडी में बैटजिये मई खुद को साफ़ करके और कपडे पेहेन कर आ रही हु.

15OOXnI3_o.jpeg


गरिमा की आवाज़ से उसके अंदर का गुस्सा साफ़ पता चल रहा था. हरिया की तो कुछ बोलने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी उसने तो वादा करा था वो अपना वीर्य गरिमा के मुँह में नहीं निकलेगा इसी शर्त पर गरिमा उसका लुंड मुँह में लेने को तैयार हुई थी और न सिर्फ उसने अपने वीर्य उसके मुँह में निकला बल्कि उसे थूके भी नहीं दिया और सारा वीर्य पीने को मजबूर कर दिया. वो चुपचाप वह खड़ा था. गरिमा किसी तरह हाथो के सहारे से उठी और बिना हरिया की तरफ देखे लड़खड़ाते कदमो से वापस तालाब की चरफ चली गई जहा उसके कपडे पड़े थे. गरिमा के वह से जाने के बाद.

हरिया : काका बड़ी गलती हो गई. मेरा न खुद पर काबू hi नहीं रहा. जोश जोश में अपना सारा माल उनके मुँह में hi निकाल दिया और न सिर्फ निकला पीने को भी मजबूर कर दिया.

बिहारी काका : तू अपनी कह रहा है मेरी पूछ मैंने पीछे से इतने जाड़े धक्के मारे है की देख नहीं रहा ढंग से चल भी नहीं प् रही है.

हरिया : किसी से कह तो नहीं देंगी.

बिहारी काका : मुझे नहीं लगता कहेगी क्युकी इस सबमे वो भी बराबर की शामिल थी हमने कोई ज़बरदस्ती थोड़ी न की है. और अगर कहा भी तो बदनामी तो उनकी भी होगी. बस जब वो आए तो एक बार हाथ जोड़ कर उनसे माफ़ी मांग लेना पर अगर वो कुछ न बोले तो ज्यादा बात मत करना. ऐसे वक़्त पर औरत चुप रहना ज्यादा पसंद करती है.

हरिया : हम्म ठीक है.

7KGxnzDH_o.jpeg
 
UEnx4Ut3_o.jpeg


कुछ देर बाद गरिमा खुद को साफ़ करके अपने कपडे पहनकर वह आ गई. वो अब भी लड़खड़ा लड़खड़ा कर hi चल रही थी. हरिया ने हाथ जोड़ कर आगे बढ़कर उसे सॉरी बोलै पर गरिमा उसकी तरफ बिना देखे सीधा कार में पीछे जाकर बैठ गई.

jfoe08J5_o.jpg


हरिया : काका इन्होने तो मेरी तरफ देखा भी नहीं.

बिहारी काका : देख तू अभी कुछ मत कर और चुपचाप इन्हे शादी वाली जगह पर छोड़ रास्ते में कुछ मत बोलना, ऐसा न हो ज्यादा माफ़ी मांगने के चक्कर में बात और बिगड़ जाए. अपनी सहेलियों में जाएगी तो धीमे धीमे सब भूल जाएगी और कल परसो तक वापस भी चली जाएगी और ये बात यही ख़तम हो जाएगी. ज्यादा सोच मत और जा इन्हे लेकर यहाँ से.

बिहारी काका और जीतू को वही छोड़ कर हरिया भी गाडी में ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गया. और चुपचाप गाडी स्टार्ट करके उस नए बने लकड़ी के पल से आहिस्ता आहिस्ता गाडी को पार कराकर मलखान सिंह की हवेली के लिए चल पड़ा. रास्ते भर उन दोनों ने आपस में कोई बात नहीं की. लगभग 1 घंटे बाद वो शादी वाली जगह पहुंच गए जहा काफी चेहेल पहल थी. गाडी से उतारकर गरिमा अपनी चल को थोड़ा नार्मल रखते हुए हवेली के गेट से अंदर चली गई. जाते हुए उसने एक बार भी हरिया को पलट कर नहीं देखा. हरिया को गरिमा की इस बेरुखी से बड़ा बुरा लगा पर वो ये भी जनता था की इसमें कही न कही गलती उसीकी है. उसे वही उसका भाई भूरा दिख गया और वो उसकी तरफ चला गया. इधर गरिमा भी कई दिनों बाद फाइनली अपनी सहेलियों के पास पहुंच गई थी.

uxwcfXHY_o.jpeg


वह उसे पता चला की किस तरह विनीता ने शोभा की शादी पर आए संकट को दूर करने के लिए शोभा के ससुर लखन सिंह के साथ कुछ दिनों की कॉन्ट्रैक्ट मैरिज करि है और वो इस वक़्त उन्हीके साथ एक खास तरह की नवग्रह पूजा के लिए गई है. नीतू अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ गई है आरती भी उनके साथ गई है. गरिमा भी अपनी सहेलियों के बीच आकर कुछ देर पहले जो हुआ वो सब भूल गई थी और वह के रंगारंग माहौल और नाच गाने में मस्त हो गई थी.

सब नाच गाने में मशगूल सिवाय नाच गाने की सबसे ज्यादा शौक़ीन नेहा के वो बड़ी बेसब्री राहुल की कॉल का वेट कर रही थी जिसे उसने उस स्ट्रेंजर को ढूंढ़ने का काम दिया था. नेहा ने थोड़ा हटकर राहुल को खुद से कॉल करा.

rOk0mScG_o.jpeg


नेहा : क्या हुआ तुमने अब तक कॉल क्यों नहीं की.

राहुल : अरे सुबह से आपके hi काम लगा हु.

नेहा : सिर्फ लगे hi हो या कुछ रिजल्ट भी निकला.

राहुल : मैंने आपके फ़ोन में आए मश्ग से उनका िप अड्रेस निकल लिया और दुसरे फ़ोन में एक्टिव अकाउंट में रजिस्टर्ड ईमेल भी निकल ली. पर वो फ़ोन आपको भेजे गए आखिरी मैग के बाद hi स्विचऑफ कर दिया गया था इसलिए फंड माय अप्प से उसकी लोकेशन नहीं निकल सकीय.

नेहा : मतलब काम नहीं हो पाया.

krp14HtU_o.jpeg


राहुल : मैंने ऐसा तो नहीं कहा. मेरी फ्रेंड के पापा साइबर सेल में है वह से मैंने उस फ़ोन में जो सिम नंबर चल रहा था उसकी कॉल डिटेल्स निकली और बड़े आश्चर्य की बात है की उस नंबर से केवल एक कॉल करि गई है वो भी सिर्फ 10 सेक् की शायद जिस बन्दे को आप ढून्ढ रही हो वो किसी को कॉल मिला रहा था उसने गलती से अपने असली फ़ोन की जगह इस फ़ोन से कॉल कर दिया पर 10 सेक् में hi काट भी दिया.

नेहा : तो उससे क्या होगा.

राहुल : तो उससे ये होगा की अब मेरे पास वो नंबर जिसे उसने 10 सेक् के लिए कॉल करा था और कही न कही वो नंबर आपके उस स्ट्रेंजर से किसी न किसी तरह लिंक्ड है.

नेहा : ये भी तो हो सकता है की उसने ऐसे hi गलती से किसी भी रैंडम नंबर पर कॉल कर दिया हो और पता चलने पर कॉल काट दी.

राहुल : बात तो सही है आपकी पर आप जो सोचती हो न वो मई पहले hi सोच कर कुछ बोलता हु. मैंने अपने फ्रेंड के पापा से उस नंबर की लोकेशन निकलवाई है. बस मुझे कुछ समय और दो मई आज रात तक आपको उसकी लोकेशन बता दूंगा. थोड़ा पेचीदा काम है इसलिए दिन के उजाले में नहीं किया जा सकता ऐसे काम रात के अँधेरे में लोगो की नज़रो से छुपकर hi करने पड़ते है.

नेहा : कुछ भी करो बस मुझे उस स्ट्रेंजर तक पंहुचा दो.

राहुल : राहुल ने बोलै है न तो आपका काम हक जाएगा बस मेरे इनाम का याद रखना.

नेहा : तो नेहा ने भी बोलै है न तुम्हे तुम्हारा इनाम मिल जाएगा.

राहुल : ठीक है थोड़ी देर उस शक़श की एक्सएक्ट लोकेशन के साथ आपको कॉल करूँगा. आइए जाते जाते एक बात बता दू मैंने क्रेडिट कार्ड वाला बनकर उस नंबर पर कॉल की थी तो किसी औरत ने कॉल उठाया था. तो या तो आपकी बात सही है और ये सच में एक रैंडम मिस्स्कॉल थी या फिर उसके साथ कोई औरत भी इन्वॉल्व है. Ok थोड़ी देर में कॉल करता हु Bye

नेहा : Bye

नेहा सोच रही थी की वो औरत कौन हो सकती है जिसे उस स्ट्रेंजर ने कॉल की. नेहा उस स्ट्रेंजर के करीब और करीब पहुँचती जा रही थी.

BcdKhF3u_o.jpg


yheQaCM6_o.jpg
 
सभी रीडर्स जो भी स्टोरी को रीड करते हो और अगर उन्हें मज़ा अत है तो प्लीज यहाँ एक कमेंट करके अपना फीडबैक ज़रूर दे कर जाए सिर्फ तीन चार रीडर्स के अलावा कोई रीडर कमेंट नहीं करता. प्लीज करे.

भारत भरवल, मिलफ्राविशेर आप लोग इस वक़्त इस स्टोरी के एक्टिव रीडर है तो प्लीज अपना कमेंट या लिखे देकर ज़रूर जाए. ज्यादा समय नहीं लगेगा गाइस. और लिखे देने के लिए तो बस एक क्लिक करना पड़ेगा प्लीज अपना फीडबैक ज़रूर देकर जाए.
 
गरिमा अपनी तीन सहेलियों शबाना नेहा और शोभा के पास हवेली पहुंच चुकी थी. वीणा यहाँ से काफी दूर वीनस पूजा के लिए निर्धारित किये गए भवन में थी, आरती को अजेस्टर अघोरियों के उस गुप्त कबीले में ले गया था जहा वह के गुरु आरती और अभय के अतीत के रहस्यो को जान्ने के लिए एक विशेष साधना कर रहे थे. और बाची नीतू जिसने कल रात अपना कौमार्य अन्धकार के देवता हदीस को समर्पित करा था उसे अब होश आ रहा था.

अघोरी उस वक़्त विनीता और लखन सिंह से फ़ोन पर बात कर रहा था शायद उन्हें आज रात की पूजा की आगे की विधि बता रहा था. ( इस वार्तालाप के बारे में विनीता के आने वाले उपदटेस में बताया जाएगा ). विनीता लखन को सब कुछ समझने के बाद अघोरी नीतू से मुखातिब हुआ.

SCy36tQJ_o.jpg


अघोरी : उठ गई आप काफी देर तक बेहोश रही आप. काफी कठिन प्रक्रिया से गुज़ारना पड़ा आपको पर आपने कल रात की विकत चुनौती का सामना भी बड़ी बहादुरी से किया और मुझे इस बात की ख़ुशी है की आप जिस उद्देश्य से यहाँ आई थी आपने वो हासिल कर लिया. अब आपका मंगेतर पूरी तरह सुरक्षित है उसके जीवन पर आया संकट अब दूर हो चूका है.

नीतू : ये सब आपकी वजह से hi संभव हो पाया है. अगर आप न होते तो या सब कभी मुमकिन नहीं था.

अघोरी : कोई बात नहीं मई उपरवाले से आप दोनों के खुशहाल भविष्य की प्रार्थना करूँगा. अब आप तैयार हो जाइये.

नीतू: तैयार हो जाइये मतलब क्या अभी कुछ और भी बचा है.

अघोरी (मुस्कुराते हुए) : अरे नहीं नहीं तैयार होने से मेरा मतलब है अपनी सहेलियों के पास जाने के लिए तैयार हो जाइये. आज आपकी सहेली विनीता और लखन सिंह की नवग्रह पूजा भी संपन्न हो जाएगी जिसके बाद उनके परिवार पर लगा श्राप भी हैट जाएगा. इसी ख़ुशी में हवेली में आज उत्सव का माहौल है ऐसे में आपको भी उनके साथ होना चाहिए. है की नहीं.

नीतू : है आप सही कह रहे है.

अघोरी : तो मई बहार आपका इन्तेज़ाआर कर रहा हु आप कुछ अच्छे कपडे पहनकर आ जाए. शाम हो रही है मई अँधेरा होने से पहले आपको हवेली छोड़ आऊंगा.

इतना कह कर अघोरी कमरे से बहार निकल गया. नीतू अपने बैग से कपडे निकल कर तैयार होने लगी. उसने एक गुलाबी साड़ी और मैचिंग ब्लाउज पहना हल्का मेकअप भी करा आखिर इतने दिनों बाद अपनी सहेलियों के पास जा रही थी ऐसे में किसी को कुछ शक नहीं हो इसलिए हल्का फुल्का मेकअप ज़रूरी था.

ZQoBmDG0_o.jpg


तैयार होकर जब वो बहार आई और अघोरी की नज़र उस पर पड़ी तो मनमोहक रूप सौंदर्य देख कर वो कुछ पल को भूल hi गया की वो कौन है और एकटक नीतू को निहारता hi रह गया. नीतू की बंगाली बड़ी बड़ी आँखे, आँखों में लगा हल्का हल्का काजल, कमर तक लटकते काले घने बाल, और उसके सावले सलोने रूप को और ज्यादा आकर्षक बना रही उसकी गुलाबी साड़ी. अघोरी तो पूरी तरह मंत्रमुग्ध सा हो गया था. जीवन में पहली बार अघोरी किसी स्त्री की तरफ इतना आकर्षित हुआ था. पर अघोरी ने अपने मन को एकाग्रचित्त करके अपनी भावनाओ को काबू करते हुए नीतू से चलने के लिए पुछा.

अघोरी : तो हम चले

नीतू : जी चलते है

नीतू से सहमति मिलते hi अघोरी हवेली को जाने वाले रास्ते पर चल पड़ा और उसके पीछे पीछे नीतू भी चल दी. अघोरी के बदन पर केवल एक लंगोट था. उसका शेष बदन पूरी तरह खुला था.

kGTQAGM6_o.jpg


और पीछे चलती नीतू बस उनका ये गठीला बदन निहारते हुए चली जा रही थी. नीतू के दिमाग पिछले कुछ दिनों में उसके और अघोरी के बीच घाटी साड़ी घटनाए एक चलचित्र की तरह चल रही थी. किस तरह उसने शुरुआत में अघोरी को एक ढोंगी समझा था उसकी तांत्रिक क्रियाओ को मज़ाक समझा था. पर जब अघोरी ने यहाँ बैठे बैठे Raj(Neetu का मंगेतर) के ऊपर आए संकट को उसके सामने ला दिया. तब उसे खुद उसी अघोरी की शरण में जाना पड़ा. नीतू उन साडी कामुक क्रियाओ के बारे में भी सोच रही थी जो उसने पिछले कुछ दिनों में अघोरी के साथ करि. फिर चाहे वो अघोरी से अपनी योनि की पूजा करवाना हो या अघोरी के साथ किये गए वो कामुक आसान. उन पालो को याद करते hi नीतू के तन बदन में बेचैनी सी हो जाती. कल रात तो उसने अपना कौमार्य तक अघोरी को सौप दिया पर उस सम्भोग क्रिया का उसे ज्यादा कुछ याद hi नहीं था क्युकी वो सब उसके और हदीस के बीच हुआ, अघोरी का तो केवल शरीर था.

शायद ये उसकी और अघोरी की आखिरी मुलाकात है. इसके बाद दुबारा उसे जीवन में कभी अघोरी से मिलने का मौका नहीं मिलेगा. अघोरी का सुडौल हत्ता शरीर उसे बरबस hi अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था. वो यही यहाँ से नहीं जाना छह रही थी. वो अपने इस अंतिम कुछ पालो को अपने पूरी ज़िन्दगी के लिए यादगार बना देना छह रही थी. अपने और अघोरी के बारे में ऐसे विचार को सोचने मात्रा से उसकी योनि ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. पर क्या ये सही है उसके मन में एक अजीब सी दुविधा चल रही थी. अब तक उसने अघोरी के साथ जो भी किया वो सिर्फ और सिर्फ राज के लिए करा पर अब वो क्यों अघोरी के बारे में ऐसे विचार अपने मन में ला रही है. पर एक औरत का कुंवारापन जो केवल उसके पति के लिए होता है वो तो पहले hi वो अघोरी हो समर्पित कर चुकी है. भले hi अघोरी के शरीर में कोई और था पर वो शरीर तो अघोरी का hi था. और सबसे बुरा ये है अपने जीवन का वो पहला सम्भोग जो हर औरत अपनी साड़ी ज़िन्दगी याद रखना चाहती है उसके बारे में नीतू को कुछ याद hi नहीं. जिस पुरुष ने अपने लिंग से उसकी कुअमार्य की दीवार को तोडा उस पुरुष से अब वो दुबारा कभी नहीं मिलेगी.

kAoc6ncc_o.jpg


ये बात सोच सोच कर hi उसका मन बेचैन हो रहा था. क्या उसे अघोरी से प्यार हो गया था या सिर्फ ये एक शारीरिक आकर्षण था. अघोरी तेज़ कदमो से हवेली का रास्ते पर चला जा रहा था. नीतू पीछे से आवाज़ देकर उसे रोकना छह रही थी पर उसकी आवाज़ तो जैसे मुँह तक आकर वापस लौट जा रही थी. एक अघोरी के साथ प्रेम करना ठीक नहीं है पर फिर भी प्रेम पर किसी का कोई बस भी नहीं है. वो तेज़ कदमो से भाग कर अघोरी से लिपट जाना चाहती थी. पर वो तो एक ज़ोंबी की तरह अघोरी के पीछे पीछे चली जा रही थी. चलो एक बार वो अघोरी के सामने अपनी दिल की बेचैनी ज़ाहिर कर भी देती है तो क्या अघोरी इसके लिए तैयार होगा. वो पिछले कुछ दिनों में अघोरी के साथ बिताए गए पालो के आधार पर अघोरी के मन को पड़ने की कोशिश कर रही थी. वो जैसे उसे देखता था जैसे उसे छूटा था क्या उसके मन में मेरे लिए ज़रा सा भी आकर्षण था या नहीं.

हवेली की दूरी कम और कम होती जा रही थी उसे जो भी फैसला लेना था जल्दी लेना था. या तो वो चुपचाप अपने और अघोरी के साथ के इन बचे खुचे पालो को यही उनके पीछे पीछे चलते हुए काट दे और फिर साडी ज़िन्दगी ये सोचती रहे की उसका पहला सेक्स कैसा रहा होगा और फिर इस बात का अफ़सोस करती रहे की काश उसने एक आखिरी बार अघोरी के साथ अपने आखिरी पालो में अपने प्रथम सम्भोग को अनुभव कर लिया होता. या फिर इसी समय खुद से आगे बाद कर प्रयास करे अघोरी को एक अंतिम मिलान के लिए.

आप hi बताए मुझे क्या करना चाहिए.

नीतू

4Tu8Rm3O_o.jpg
 
GJ7aGHzI_o.jpg


नीतू ने फैसला कर लिया था और वो बिना और समय गवाए तेज़ कदमो से आगे बाद कर सीधा जाकर पीछे से अघोरी के बदन से लिपट गई. अचानक हुई इस हरकत से अघोरी के बढ़ते कदम भी ठिठक गए. अघोरी के रुकते hi नीतू के सामने आ गई और उसके सीने से लिपट कर उसके काले हट्टे काटते बदन को बेतहाशा चूमने लगी. अघोरी को तो एकदम से समझ hi नहीं की ये अचानक से नीतू को क्या हो गया. अघोरी नीतू को पीछे धकेलने का प्रयास कर रहा था पर नीतू तो जैसे पूरा फैसला कर के आई थी और पीछे हटने को तैयार hi नहीं थी. जब नीतू काफी देर तक नहीं हटी तो अघोरी ने एक तेज़ धक्का मारकर नीतू को अपने से परे धकेल दिया. अचानक पड़े इस धक्के ने नीतू को नीचे ज़मीन पर गिरा दिया. पर नीतू दुबारा उठकर अघोरी के पैरो से जाकर लिपट गई. अब अघोरी पूरी तरह स्तभ्ध था क्युकी किसी औरत को पैरो से धकेलना उसके उसूलो के खिलाफ था.

BDFlp5GB_o.jpg


अघोरी : आखिर आपको अचानक से क्या हो गया है. हम हवेली से कुछ hi दूर रह गए है. आप ये क्या कर रही है. आपकी साधना पूरी हो चुकी है. अब आपको ये सब करने की कोई ज़रूरत नहीं है. आपका प्रेमी अब पूरी तरह सुरक्षित है.

नीतू : ये सब मई उसके लिए नहीं अपने लिए कर रही हु.

अघोरी : क्या मतलब

नीतू : यहाँ आने से पहले मई एक कुंवारी लड़की थी आपने मुझे एक लड़की से औरत बनाया. मुझे एक औरत और मर्द के बीच के सम्बन्ध के आकर्षण से परिचित कराया. और अब ऐसे बर्ताव कर रहे है जैसे हमारे बीच कुछ नहीं हुआ.

अघोरी : कहना क्या चाहती है क्या हमारे बीच इतने दिनों में कुछ भी नहीं हुआ.

अघोरी : हमारे बीच जो भी हुआ वो हमारी साधना का हिस्सा था. कोई स्त्री पुरुष का आकर्षण नहीं.

dQ6jFIeB_o.jpg


नीतू : आप झूट बोल रहे है मैंने आपकी आन्ह्को में अपने लिए आकर्षण साफ़ साफ़ देखा है. जब जब आपने मुझे छुआ है आपके हाथो के कम्पन को महसूस किया है जो इस बात का प्रमाण है की आपके मन में भी मेरे लिए आकर्षण था.

अघोरी : आपको बहुत बड़ी ग़लतफहमी हो रही है. काम वासना ने आपकी सोचने समझने की शक्ति को ख़तम कर दिया है. जो मेरे द्वारा की गई मदद आपको आकर्षण प्रतीत हो रही है.

नीतू : तो क्या आपके मन में मेरे लिए कोई आकर्षण नहीं था.

अघोरी : नहीं

नीतू : क्या यही बात आप मेरी आँखों में आँख दाल कर कह सकते है.

अघोरी : मई एक अघोरी हु आप क्या सोच रही है ये सब, आपके पास एक प्यार करने वाला प्रेमी है जो आपको प्यार करता है और आप भी उसे दिल से चाहती है तभी आपने उसके लिए इतनी कठिन साधना को भी पूरा करा. आप दोनों की शादी होने वाली है फिर आप मेरे प्रति ऐसा कैसे सोच सकती है. मेरी और आपकी क्या तुलना क्या सम्बन्ध.

N1srXnLq_o.jpg


नीतू : सम्बन्ध आप जानना चाहते हो हमारा क्या सम्बन्ध है आप वो पहले पुरुष हो जिसके सामने मैंने निर्वस्त्र हुई. आप वो पहले पुरुष हो जिसने मेरी योनि को स्पर्श करा और आप वो पहले पुरुष हो जिसके साथ मेरा शारीरिक मिलान हुआ जिसे मैंने अपना कुंवारापन दिया.

अघोरी : वो सब आपके और हदीस के बीच हुआ था.

नीतू : पर हदीस ने भी वो सब करने के लिए शरीर किसका इस्तेमाल करा आपका. जो लिंग मेरी योनि के अंदर गया था वो लिंग तो आपका hi था न. बोलिये क्या आप इस बात से भी इंकार कर सकते है.

HNW4mJa3_o.jpg


नीतू की बातो ने अघोरी को भी निरुत्तर कर दिया.

अघोरी : मई मंटा हु की वो लिंग मेरा था पर वो सब उस साधना का हिस्सा था.

नीतू : भले hi वो कोई साध्ना थी पर कौमार्य तो एक वास्तविकता थी जिसे तोड़ने वाला लिंग आपका था. और हसी की बात देखिये मुझे उस पल का कुछ भी याद नहीं.

अघोरी (गहरी सांस लेते हुए) : तो अब आप चाहती क्या है.

नीतू : मई यहाँ से जाने से पहले एक आखिरी बार आपके साथ उस पल को दुबारा जीना चाहती हु. मई आपका लिंग अपने अंदर लेना चाहती हु.

अघोरी : आपका दिमाग ख़राब हो गया है क्या मई एक अघोरी हु. मोह माया राग रंग इन सबसे विरक्त हु. ये सोचना भी पाप है मेरे लिए.

नीतू : तो कल रात जो हमारे बीच हुआ वो भी पाप था क्या.

अघोरी : वो एक साधना थी आपको ये बात समझ क्यों नहीं आ रही है. आप चलिए यहाँ से मई शीघ्र अतिशीघ्र आपको आपकी सहेलियों के पास छोड़ दू ताकि आपके दिमाग से ये पागलपन उतर जाए.

नीतू : ये मेरा कोई पागलपन नहीं है. और जूठे आप हो जो अपने मन की सच्चाई को छुपा रहे हो.

अघोरी : किस सच्चाई की बात कर रही आप.

नीतू : की आप भी उस पल को महसूस करना चाहते हो. आप भी मेरी तरफ आकर्षित हो.

अघोरी : ऐसा कुछ नहीं है.

नीतू : क्या आपको यकीन है.

अघोरी : है मुझे पूरा यकीन है.

नीतू : तो क्या आप परीक्षा देने को तैयार हो.

अघोरी : कैसी परीक्षा

नीतू : वही परीक्षा जो मेनका ने विश्वामित्र की ली थी. सैयाम की परीक्षा.

snpNTlD8_o.jpg


अघोरी : मतलब

नीतू : मतलब आप कह रहे हो की आपके मन में मेरे लिए कोई आकर्षण का भाव नहीं है. तो बस अपने सैयाम की परीक्षा दे दीजिये.

अघोरी : और इस परीक्षा में मुझे करना क्या है.

नीतू : ज्यादा कुछ नहीं करना बस अपनी भावनाओ और उत्तेजना को काबू में रखना है.

अघोरी : मतलब मई कुछ समझा नहीं.

नीतू : पुरुष का लिंग उसकी उत्तेजना का आइना होता है. अगर कोई पुरुष उत्तेजित है तो ये उसके लिंग की नसों के तनाव को देखकर साफ़ पता चल जाता है. तो अगर आपके मन में मेरे लिए कोई आकर्षण का भाव hi नहीं है तो मई कुछ भी करलु आपके लिंग में कोई उत्तेजना नहीं आएगी. और अगर आपके लिंग में उत्तेजना आ गई तो आपको ये मन्ना होगा की आपके मन में भी मेरे लिए आकर्षण है. बोलिये है हिम्मत इस चुनौती को पूरा करने की.

Zyw0MGQj_o.jpg


अघोरी सोच में डूब गया, वो ये जनता था की कही न कही उसके मन में भी नीतू के लिए थोड़ा आकर्षण तो था. पर एक अघोरी होने के चलते वो ये भाव ज़ाहिर नहीं कर सकता था. पर अब नीतू ने उसके सामने एक ऐसी चुनौती रख दी थी जिसके लिए अगर वो इंकार कर देता तो ये दीखता की अपने मन के कामुक विचारो को छुपाने के लिए इस चुनौती से घभ्रा कर वो इस चुनौती से इंकार कर रहा है. और इससे उसके मन की दुर्बलता दिखती की उसका खुद पर सैयाम hi नहीं है. और अगर कही वो हां कर देता तो पता नहीं नीतू उसके लिंग को उत्तेजित करने के लिए क्या क्या करेगी, और क्या वो उसको अनदेखा कर भी पाएगा. स्त्री ने तो बड़े बड़े ऋषि मुनियो को तपस्या भांग करदी फिर वो किस खेत की मूली है. क्या वो खुद पर खुद पर सैयाम रखते हुए अपने लिंग को उत्तेजित होने से रोक पाएगा.

एक तरफ कुआ था दूसरी तरफ खाई. अघोरी इंकार करके खुद को दुर्बल भी नहीं दिखा सकता था और इस चुनौती को पूरा कर पाने को लेकर भी वो पूरी तरह कॉंफिडेंट नहीं था. पर अगर वो मन करता है तब तो वो बिना प्रयास करे hi हार जाएगा पर अगर वो हां करता है तो एक उम्मीद है की खुद पर सैयाम रखते हुए इस चुनौती को पूरा कर जाए. ऐसा करने से न सिर्फ नीतू का मुँह बंद हो जाएगा बल्कि उसे भी पता चल जाएगा की उसका अपने मन की भावनाओ पर कितना नियंत्रण है. उसके शरीर और मन की आपस की जुंग थी. इस लिए एक गहरी सास लेटव हुए अघोरी ने अपना जवाब दे दिया.

अघोरी (गहरी सास लेते हुए) : ठीक है मई तैयार हु आपकी उस चनौती का सामना करने के लिए. अगर आप जीती तो आप जो कहोगी मई करूँगा पर अगर मई जीता तो आप बिना किसी बेहेस और वाद विवाद के यहाँ से चली जाएगी और अपने शादीशुदा जीवन को अपने पति के साथ अच्छे से बिताएगी और दुबारा कभी भी मेरा विचार भी अपने मन में नहीं लाएंगी.

नीतू : मुझे मंज़ूर है

iHOaOQiw_o.jpg


अघोरी ने हां तो कर दी थी पर जीवन में पहली बार वो भी अंदर से दर रहा था की क्या वो अपने से आधे वज़न की इस बंगाली बाला के रूप सौंदर्य और उत्तेजक क्रियाओ को बर्दाश्त करते हुए अपनी उत्तेजना को काबू में रख पाएगा. या ये साबित हो जाएगा की स्त्री की कामुकता के आगे पुरुष की तपस्या भांग हो जाती है.

0rcpjUQ0_o.jpg
 
UrqMf2hE_o.jpg


अघोरी ने नीतू की चुनौती स्वीकार कर ली थी. अब उसे करना सिर्फ इतना था की अपने लिंग की उत्तेजना को काबू में रखना था. अघोरी और नीतू उस जंगल के बीच से गुजरने वाले सुनसान रास्ते पर खड़े जहा दूर दूर तक उन्हें देखने वाला कोई नहीं था. नीतू के पाए सिर्फ आधा घंटा था खुद को सही साबित करने के लिए वही अघोरी के पास भी ये आधा घंटा hi था अपनी कई सालो की साधना की परीक्षा लेने के लिए.

0awExJD4_o.jpg


अघोरी केवल एक लंगोट में नीतू के सामने खड़ा था. वही नीतू के बदन पर उसकी गुलाबी साडी बेहद सुन्दर लग रही थी.

8hQA85xQ_o.jpg


नीतू अघोरी के एकदम करीब आ गई और अघोरी की आँखों में देखते हुए अपने सीने से अपनी साडी का पल्लू का नीचे सरका दिया. नीतू के ब्लाउज के अंदर ऐ तने हुए वक्ष अघोरी की आँखों के सामने थे पर अघोरी ने अपनी नज़रे फेर ली. नीतू ने भी मुस्कुराते हुए अपनी कमर में बंधी साड़ी की गाँठ खोल दी और अपनी साड़ी को पास hi एक पेड़ के नीचे रख दिया. फिर उसने अपने हाथ पीछे ले जाकर अपने ब्लाउज के हुक भी खोल दिए. और अपना ब्लाउज उतर कर अघोरी के कंधे पर रख दिया. इसके बाद वो अपने हाथ नीचे ले गई और अपने पेटीकोट की गाँठ को भी खोल दिया. गाँठ खुलते hi वो पेटीकोट पेड़ से टूटे पत्ते की तरह ज़मीन पर नीचे आ गिरा. नीतू ने वो वो पेटीकोट भी पेअर से सरका कर अपनी साड़ी के पास रख दिया.

Bi7ZGyAg_o.jpg


अब नीतू का भी 90% बदन नंगा था. उसके बदन पर सिर्फ उसकी ब्रा और पंतय hi रह गई थी जो उसके उभारो और गुफा को धक् कर रखे थी पर कब तक. नीतू तो आज पूरी तरह नंगी होने के hi मूड में थी. नीतू ब्रा के ऊपर से अपने उभारो को दबा दबा कर अघोरी को उत्तेजित करने की कोशिश कर रही थी पर अघोरी तो इधर उधर hi देख रहे थे ताकि नीतू की किसी भी हरकत का उनपर कोई प्रभाव न पड़े. खुद को असफल होता देख नीतू ने नेक्स्ट लेवल पर जाने का फैसला करा. नीतू अघोरी की तरफ पीठ करके कड़ी हो गई और फिर थोड़ा पीछे होकर अघोरी के बदन से पूरी तरह सात गई. जिससे उसके नितम्ब अघोरी के लिंग के बेहद करीब आ गए. इतने की नीतू को अपने कूल्हों पर अघोरी के लिंग का स्पर्श साफ़ महसूस हो रहा था.

Uy1DU9Ej_o.jpg


अपने कूल्हे अघोरी के लिंग से सताने के बाद नीतू ने अपनी कमर को ऊपर नीचे हिलना शुरू कर दिया. जिससे उसके कूल्हे अघोरी के लिंग से रगड़ रगड़ कर उसे उत्तेजित करने का प्रयास कर रहे थे. पर नीतू को अब तक अपने कूल्हों पर अघोरी के लिंग के झटके महसूस नहीं हो रहे थे जो इस बात का प्रमाण था की अघोरी अब भी खुद पर संयम रखे हुए था. नीतू एक बार फिर अघोरी की तरफ फेस करके कड़ी हो गई और अघोरी की आँखों में देखते हुए बड़ी कामुक अदाओ के साथ अपने हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोल कर उसे भी अपने बदन से निकल कर उसे भी वही ज़मीन पर अघोरी के पैरो के पास दाल दिया.

अब अघोरी के बदन पर एक लंगोट और नीतू के बदन पर बस उसकी पंतय. नीतू अघोरी के एकदम करीब आकर कड़ी हो गई. इतना करीब की उसके स्तन अघोरी के सीने से स्पर्श कर रहे थे. और नीतू के होंठ अघोरी के होंठो के इतना करीब थे की नीतू की मुँह से आती गरम सासे तक अघोरी को अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी. नीतू ने अघोरी को अपनी बहो की गिरफ्त में ले लिया और अपने होंठ अघोरी के होंठो से मिला दिए. नीतू के स्तन अघोरी के सीने से डाब रहे और नीतू इतनी कामुकता के साथ अघोरी के होंठो को चूस रही थी की किसी बेजान शरीर में भी उत्तेजना पैदा हो जाए. पर अघोरी की अचल पेड़ की तरह वह जड़ सा खड़ा था. समय हर बीते पल के साथ आगे बाद रहा था.

खुद को असफल होता देख नीतू अघोरी के बदन से अलग होकर दो कदम पीछे हटी और पीछे हटकर उसने अपने हाथो को नीचे ले जाकर अपने बदन के उस आखिरी कपडे यानि अपनी पंतय को भी अपने बदन से उतर कर अलग कर दिया. अब नीतू पूरी तरह नंगी पर नीतू खुद को नंगा करने तक hi नहीं रुकी उसने अघोरी के लंगोट की गाँठ की तरफ भी अपने हाथ बड़ा दिए. पर अघोरी ने उसके हाथो को बीच में hi थम लिया.

नीतू : क्या हुआ आप मुझे आधे घंटे तक रोक नहीं सकते आपने वादा करा था. और ये आपके लिंग की उत्तेजना की परीक्षा तो आपका लिंग तो दिखना hi चाहिए वैसे भी ये पहली बार तो नहीं है की मई आपका लिंग देख रही हु. या आपको दर है की आपका लंगोट उतारते hi आपके लिंग की उत्तेजना मुझे दिख न जाए.

नीतू की ये बात सुनकर न चाहते हुए भी अघोरी ने नीतू के हाथ को छोड़ दिया. और नीतू ने बिना देर किया अघोरी के लंगोट की गाँठ को खोल कर उसके लंगोट को खींच कर उसके बदन से अलग कर दिया. अब नीतू उस अघोरी के साथ उस जंगल में मादरजात पूरी तरह नंगी कड़ी थी. उनके बदन पर कपडे का नामोनिशान तक नहीं बचा था. अघोरी का लंगोट उतारते hi नीतू ने अपनी नज़रे नीचे करके अघोरी के लिंग को देखा जो अब भी नीचे की और झुका हुआ था. पर शांत अवस्था में भी आम मर्दो के तने हुए लिंग के बराबर होगा. तो उत्तेजना के बाद इसका अकार क्या होगा.

cAa0e5N2_o.jpg


नीतू एक बार फिर अघोरी के बदन से लिपट गई पर इस बार उसकी छूट और अघोरी के लुंड के बीच कपड़ो की कोई दीवार भी नहीं थी. नीतू ने अपनी एक टांग अघोरी की कमर के इर्द गिर्द लपेट ली जिससे नीतू की योनि अघोरी के लिंग के बेहद करीब आ गई. इतनी की नीतू को अपनी योनि पर अघोरी के लिंग का स्पर्श साफ़ अनुभव हो रहा था. नीतू के हाथ अघोरी के पीठ पर चल रहे थे उसके स्तन अघोरी के सीने से रगड़ खा रहे थे, उसकी गरम साँसे अघोरी के चेहरे को गरम कर रही थी और उसकी योनि से बेहटा कामरुस अघोरी के लिंग को गीला कर रहा था. पर इतना सब होने के बावजूद अघोरी पता नहीं कैसे अपना सयम बनाए हुए था. नीतू को यकीन नहीं हो रहा था की कोई पुरुष किस तरह खुद पर इतना संयम रख सकता है.

अपने सरे प्रयास विफल होते देखकर अब बात नीतू के ईगो पर आ गई थी. अब वो किसी भी कीमत पर इस तरह खुद को बेज़्ज़त करवा कर यहाँ से नहीं जाना चाहती थी. इसीलिए अब उसने अपना आखिरी हथियार इस्तेमाल करने का निश्चय करा जिसके सामने किसी भी पुरुष के लिंग का संयम नहीं टिक सकता. नीतू अघोरी के सामने घुटनो के बल बैठ गई. अपना ध्यान एकाग्रचित्त रखने के लिए अघोरी ने अपनी आँखे बंद कर राखी थी इसलिए उसे नहीं पता था की नीतू क्या कर रही है. पर उसे पता तब चला जब उसे पता तब चला जब उसे अपने लिंग किसी नरम मुलायम गीली चीज़ की छुअन और थिरकन का एहसास हुआ. और इससे पहले अघोरी कुछ समझ पता उसका लिंग का आगे का टोपा नीतू के मुँह के अंदर जा चूका था.

q4dCom3r_o.jpg


नीतू उस सुनसान खुली जगह पर पूरी तरह नंगी हालत में एक अघोरी के लुंड को मुँह में लेकर उसे ब्लोजॉब देने वाली थी. एक औरत के मुँह की गर्मी को क्या अघोरी का लिंग बर्दाश्त कर पाएगा. अघोरी ने पीछे हटने की कोशिसि पर नीतू अघोरी को कमर से कास कर पकड़ लिया. और अपने होंठो की गिरफ्त को अघोरी के लिंग पर और तेज़ कर दिया. अघोरी के लिंग को चूसते चूसते नीतू पीछे से अपने हाथ सरकते सरकते उनके कूल्हों तक ले आई. और अपने हाथो से उनके खुल्हो को दबाने सहलाने लगी. अघोरी नीतू के कंधो को पकड़ कर उसे पीछे धकेलने का प्रयास कर रहा था पर पता नहीं इस वक़्त नीतू पर कौनसा जूनून सवार था की वो पीछे हटने को तैयार hi नहीं थी. बल्कि अघोरी उसे पीछे धकेलने के लिए जितना ज़ोर लगा रहा था नीतू उतना hi उसके लिंग को और तेज़ी से चूस रही थी.

fTLUepIJ_o.gif


अघोरी की पकड़ नीतू के कंधो पर और कास गई. उसके लिंग ने आहिस्ता आहिस्ता नीतू के मुँह के अंदर हलके हलके झटके खाना शुरू कर दिया था. जो इस बात का प्रमाण था की अघोरी के सयम की दीवार धीमे धीमे टूट रही थी. नीतू को अपने मुँह के अंदर अघोरी के लिंग में अत तनाव साफ़ महसूस हो रहा था. और ये बात उसके जोश को और ज़ादा बड़ा रही थी की आखिरकार वो अघोरी के लिंग में उत्तेजना लाने में सफल रही. नीतू ने अघोरी के लिंग को अपने मुँह से निकल कर एक नज़र उसे देखा. उसके लिंग का अकार पहले से बाद चूका था उसमे उत्तेजना का संचार हो चूका था. पर अब भी वो पूरी तरह अपनी चरम उत्तेजना पर नहीं था. नीतू ने अपना मुँह नीचे ले जाकर अघोरी के लिंग के नीचे लटकते उसके गोलों को अपने मुँह भर लिया और बड़ी कामुकता से उन्हें अपनी जीभ से छत्ते हुए मुँह में भरकर चूसने लगी.

NDSLJDkc_o.jpg


आज तक किसी ने भी अघोरी के लिंग के नीचे लटकती गोलियों को नहीं चूसा था और ये अनुभव अघोरी के लिए एकदम नया और बेहद कामुक और उत्तेजनापूर्ण था. अघोरी का अपने लिंग पर नियंत्रण पूरी तरह ख़तम हो चूका था. उसे समझ आ चूका था की अगर औरत अपने पर आ जाए तो एक पुरुष के सरे सयम को दो मं में उसकी गांड में घुसेड़ दे. अघोरी के पेअर काँप रहे थे उसने अपने हाथो का पूरा भार नीतू के कंधो पर दाल दिया. भले hi नीतू अघोरी की लटकती गोलियों को चूस रही थी पर उसका प्रभाव अघोरी के लिंग पर साफ़ नज़र आ रहा था जो झटके पे झटके खा रहा था. जिसका अकार अब पूरी तरह बाद चूका था. लिंग में मौजूद नसे उभर कर ऊपर आ गई थी. और वो बार नीतू के मस्तक पर झटके खा रहा था जैसे उसे इतना आनंद और मज़ा देने के लिए उसे आशीर्वाद दे रहा हो.

eYbSgJW6_o.jpg


नीतू अघोरी के लिंग को झड़ने नहीं देना चाहती थी वर्ण उसका सारा तनाव और उत्तेजना समाप्त हो जाती. पर अगर वो अपना ब्लोजॉब जारी रखती तो ये तै था की अघोरी अपने लिंग का सारा लावा नीतू के सर में hi निकल देता इसलिए अघोरी के लिंग को उत्तेजित करने की अपनी चुनौती को पूरा करने के बाद नीतू उठ कर कड़ी हो गई. अघोरी ने भी अपनी ऊपर नीचे होती सासो को काबू करा और आँखे खोल कर एक बार नज़रे नीचे करके अपने लिंग को देखा तो पूरी तरह तनाव से भरा सीधा खड़ा था. अघोरी को अपनी नज़रे उठा कर नीतू से नज़रे मिलाने में भी शर्म आ रही थी. वो ये चुनौती हार चूका था. और अब शर्त के मुताबिक उसे वो करना था जो नीतू चाहती थी.
 
RXdVyNjx_o.jpg


अघोरी संयम की ये चुनौती हार चूका था और अब उसे वही करना था जो नीतू चाहती थी. उसके सालो का सयम एक औरत के ब्लोजॉब के आगे चूर चूर हो गया था. उसे खुद पर बहुत शर्म आ रही थी. वही नीतू बेहद खुश थी की उसका ईगो सटिस्फी हो चूका था वो यहाँ से हारकर नहीं जाना चाहती थी और ऐसा उसने कर दिया था. पर अघोरी को अपनी जगह जड़ खड़ा देख माहौल को थोड़ा लाइट करने के लिए के लिए वो एक बार फिर बड़ी ऐडा से चलती हुई अघोरी के करीब आ कर उसके बगल में कड़ी हो गई. उसने अघोरी का हाथ पकड़ कर अपनी कमर में रख दिया और अघोरी के कंधे पर सर टिका कर कड़ी हो गई.

V7owdSso_o.jpg


नीतू : देखिये आज आपका ये उत्तेजित लिंग इस बात की गवाही दे रहा है की अंदर से आप भी एक आम पुरुष hi है, जो औरत के स्पर्श से उत्तेजना फील करता है. भले hi आप ऊपर से खुद को कितना भी सख्त दिख ले पर अंदर hi अंदर आप भी वही उत्तेजना महसूस करते है जो बाकि पुरुष करते है. ऐसे में अपने अंदर की इस उत्तेजना को दबा कर अपने लिंग के साथ गलत कर रहे है. उपरवाले ने पुरुष को लिंग इसीलिए दिया है ताकि वो किसी स्त्री की योनि से मिलान कर सके ऐसे में अगर आप उपरवाले के दिए उस तोहफे का तिरस्कार करते है तो आप उपरवाले का अपमान कर रहे है.

अघोरी : पर मई एक अघोरी हु मई कैसे ये सब कर सकता हु. मैंने जीवन भर खुद पर सयम रखने की कसम खाई थी.

anbRvYPy_o.jpg


नीतू : प्लीज बस आज कुछ समय के लिए भूल जाइये न की आप एक अघोरी हो. बस कुछ वक़्त के लिए आप बस एक पुरुष बन जाओ और मई एक औरत की नज़र से देखो.

अघोरी : मैंने अब तक इस उत्तेजना के प्रवाह को अपने संयम के बाँध से रोक कर ताखा hai.aur

नीतू: तो जिस उत्तेजना को अब तक अपने अंदर दबा कर रखा है उस पर अपने सयम का बाँध बना रखा है एक बार उस बाँध को खोल दो.

अघोरी : आप उस उत्तेजना के तेज़ प्रवाह को बर्दाश्त नहीं कर पाओगी.

नीतू : मई आपके अंदर की उत्तेजना के तेज़ प्रवाह को सहने के लिए पूरी तरह समर्पित हु. बस आप एक बार खुद को तैयार करलो.

zxsutEy3_o.jpg


अघोरी पूरी तरह नीतू के शब्दों के जाल में फस चूका था. अघोरी के साथ इतना समय बिता कर नीतू को इतना तो समझ आ गया था की अगर वो नार्मल तरह से अघोरी को सेक्स के लिए कहती तो कभी वो इसके लिए तैयार नहीं होता इसलिए उसने ये टेड़ा रास्ता अपनाया था. ये बात सही थी नीतू अघोरी की मस्कुलर पर्सनालिटी की तरफ आकर्षित हो गई जिस वजह से कुछ समय के लिए भूल गई की वो शहर में किसी के साथ पहले से ेंगगड़ है और कुछ दिन पहले किस तरह उसके जीवन की चिंता में परेशां थी. पर अब वो समस्या ख़तम हो चुकी थी तो अब नीतू को उस बात की कोई चिंता नहीं थी.

कुछ दिन पहले तक जो नीतू अघोरी के प्रति कृतज्ञ थी उसने उसके प्रेमी के जीवन को बचने के लिए इतना सब करा, वही नीतू अब यहाँ से जाने से पहले अपने कुछ पल के अट्रैक्शन और एक्ससिटेमेंट के चलते उसी अघोरी को अपने शब्दों के जाल में फसा रही थी. और ये सब करना उसे गलत भी नहीं लग रहा था क्युकी जब कल रात हदीस के शरीर में आने के बाद जब अघोरी उसके साथ सम्बन्ध बना सकता है तो एक बार और ऐसा करने में क्या गलत है. पर अगर हम आत्मरक्षा में या किसी की जान बचने के लिए किसी की हत्या करे और दूसरी तरफ जानबूझ कर अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए किसी गलत इरादे से किसी की हत्या करे तो दोनों में फ़र्क़ है. यही फ़र्क़ नीतू भूल चुकी थी. अघोरी ने अब तक जो भी करा था वो एक नेक इरादे से करा था. पर अब नीतू अपने गलत मंशा से अघोरी को एक गलत रास्ते पे ले जा रही थी.

पर अब नीतू को इस बात पर गर्व का अनुभव हो रहा था की जिस अघोरी को इस गाँव की कई औरतो ने सडके करना चाहा पर वो सब नाकाम रही उस अघोरी को उसने अपने साथ सम्बन्ध बनाने को मजबूर कर दिया था.

O9ecxcVl_o.jpg


आज हमे नीतू के चरित्र का एक अलग hi रूप देखने को मिल रहा था. जिसे समझना अघोरी के लिए नामुमकिन था. शायद इसे नारी का त्रिया चरित्र कहते है जिसे बड़े बड़े विद्वान् नहीं समझ पाए तो भला समाज से अलग रहने वाला ये अघोरी क्या समझ पता. वो तो नीतू के एक छणिक एक्ससिटेमेंट और इन्फैटुएशन को एक स्त्री और पुरुष का प्रेम समझ रहा था. अहोरी ने नीतू की कमर पर रखे अपने हाथो की पकड़ नीतू की कमर पर कास दी और अपना चेहरा नीतू के चेहरे के करीब लेजाकर अपने होंठ नीतू के होंठो से जोड़ दिए. शहर से अपनी सहेली की शादी में शामिल होने आई थी यहाँ एक अघोरी के प्रति इस कदर आकर्षित हो चुकी थी की सही गलत का भेद hi भूल चुकी थी.

ODpmKBSv_o.jpg


दूसरी तरफ अघोरी था जो एक तो वचन के बंधन में बांध चूका था दूसरा उसे आज तक अपने संयम पर गर्व और अभिमान था वो चकनाचूर हो गया था तीसरा कही न कही उसके मन के गहरे कोने में नीतू के लिए आकर्षण का भाव उत्पन्न हो गया था जिसके चलते उसके अंतर्मन में वासना और कामुकता का संचार हो गया था और चौथे जिस तरह नीतू ने उस समाज से दूर रहने वाले अघोरी को अपने शब्दों के जाल में फसाया था उसने अघोरी को ये मैंने पर मजबूर कर दिया की स्त्री से दूर रहकर कही न कही वो अपने लिंग के साथ गलत कर रहा था. वासना और कामुकता के उन्माद ने उसकी सोचने समझने की शक्ति को हर लिया था. शायद ये हदीस को कल रात अपने शरीर में स्थान देने का भी परिणाम था जिसने अघोरी के शुद्ध सात्विक चरित्र को दूषित कर दिया था शायद आज वो सही गलत का अंतर नहीं समझ रहा था.

नीतू का मन वैसे भी अघोरी की प्रति आकर्षित था पर अब तो अघोरी भी इसमें नीतू का पूरा साथ दे रहा था. एक अफ्रीकन 6.5 फुट का आदमी और एक दुबली पतली सांवली बेगली बाला पूर्ण नग्न अवस्था उस सुनसान जगह एक दुसरे होंठो को आपस में जोड़े आलिंगनबद्ध अवस्था में एक दुसरे इस कदर चिपके खड़े की उनके बीच से हवा के निकलने की जगह नहीं थी.

Kbzl9ZSF_o.jpg


कामवासना में दोनों पूरी तरह डूब चुके थे. नीतू ने उसके अंदर की कामवासना को तो जगा दिया था उसका आदमकद लुम्बा शरीर लिंग और योनि कक मिलान अब निश्चित था. पर अघोरी ने आज तक कभी सम्भोग नहीं किया था इसलिए उसे पता है था की एक स्त्री को किस तरह सम्भोग सुख दिया जाता है. और नीतू का दुबला पतला शरीर उस 6.5 फुट के आदमी के मूसल लुंड के प्रहार को झेल पाएगी.

अब लोग कहेंगे की कल रात भी तो झेला था पर कल रात नीतू भी कही न कही हदीस के प्रभाव में थी इसीलिए वो हदीस के लिंग के धक्को को सेहेन कर गई थी वर्ण एक नार्मल महिला के लिए किसी डेविल गॉड के धक्को को सहना मुमकिन hi नहीं था. पर अब बात नीतू की थी. एक्ससिटेमेंट में उसने एक काले सांड को लाल कपडा तो दिखा दिया था, वो भी उस सांड को जिसे अन्तर कोर्स यानि सम्भोग का अबकड भी नहीं पता था. अब देकना था की ये काला सांड उस लाल कपडे का क्या हाल करने वाला था.

fm0SacuW_o.jpg
 
Back
Top