- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 84,650
अगर ऐसा हो जाता तो हरिया की बड़ी बेज़्ज़ती हो जाती. उसने आँखों आँखों में hi बिहारी काका को ये तिमेपास ख़तम करके असली खेल शुरू करने का इशारा करा. और बिहारी काका ने भी अपने होंठो पर एक कुटिल मुस्कान लाते हुए सहमति में सर हिला दिया. और अपने लुंड को मसल रहे हाथ से अपनी धोती को खींच कर अपने जांघिये की गाँठ को भी खोल दिया. गाँठ खुलते hi बिहारी काका की धोती और जांघिया एक साथ ज़मीन पर जा गिरे. और उनका मोटा सफ़ेद बालो से भरा बदसूरत सा लुंड जो अब तक हाथो के मसलने के कारन पूरी तरह फूल चूका था बहार लटकने झूलने लगा. बिहारी काका ने अपना लुंड गरिमा के मोठे गद्रे छुटाओदों पर फिरना शुरू कर दिया. चूतड़ों पर फिरते फिरते वो लुंड गरिमा की गांड की दरार के अंदर उसकी गांड के छेड़ तक ले आए. जहा अब भी उनका अंगूठा रास्ता रोके खड़ा था.
बिहारी काका ने अपना अंगूठा बहार खींच लिया. अचानक अंगूठा बहार निकल जाने से गरिमा के आनंद में एक ब्रेक सा लग गया. पर अंगूठा बहार निकलते hi काका ने अपने लुंड का टोपा गरिमा की गांड के छेड़ के मुहाने पर रख दिया. गरिमा को एक पल को यही लगा की ये अंगूठा hi पर जैसे hi काका ने अपनी कमर का दबाव आगे की तरफ बढ़ाया और बिहारी काका का लुंड उनके अंगूठे के अंदर बहार होने से थोड़ा मुलायम पद चुके गरिमा की गांड का छेड़ को फैलता हुआ थोड़ा सा अंदर दाखिल हुआ hi था की दर्द के मारे उसकी हालत ख़राब हो गई.
उसने खुद को गिरने से बचने के लिए हरिया की कमर को कास कर पकड़ लिया. जो आँखे अब तक मज़े और आनंद में बंद थी वो गांड के छेड़ के फैलने से खुद भी पूरी तरह फ़ैल गई. और दर्द की सुद्दीन प्रतिक्रिया के रूप में गरिमा का मुँह भी पूरी तरह खुल गया.
गरिमा के मुँह खुलते hi हरिया का लुंड जो अब तक गरिमा के अधखुले होंठो के इर्द गिर्द झटके खा कर गरिमा की जीभ के स्पर्श और उसकी सासो की गर्माहट का hi आनंद ले प् रहा था. गरिमा का मुँह खुलते hi उसे भी बिना किसी दिक्कत के अंदर जाने का रास्ता मिल गया. और बिना देर किये हरिया ने भी अपना लुंड गरिमा के मुँह के अंदर दाखिल कर दिया.
जीवन में ये पहला मौका था जब गरिमा ने अपने मुँह और गांड में किसी का लुंड लिया था और वो भी एक साथ. गरिमा के शरीर की जिन जगह से उसका अपना पति जिसने उसके साथ सात फेरे लिए थे वो भी महरूम रहा था आज एक 52 साल का बूढ़ा और एक 36 साल का गवर देहाती ड्राइवर इन अनछुए हिस्सों की पहली पिलाई करने जा रहे थे. वही गरिमा जिसे ये लगा था की गांड में अंगूठा लेना और होंठो से लुंड चूमना उसकी महक को सूंघना जितना आसान है जब उसने ये कर लिया तो वो आगे भी कर लेगी.
पर अब उसे समझ आ रहा था की ये करना इतना भी आसान नहीं होने वाला था. क्यों लड़किया लुंड चूसने और गांड में लेने से कतराती है उसे अब समझ आ रहा था. पर अब तो गाडी स्टेशन से चल चुकी थी, हरिया का लुंड उसके मुँह में और बिहारी काका का लुंड उसकी गांड में दाखिल हो चुके थे. अब तो ये गाडी अपनी मंज़िल से पहले नहीं रुकने वाली थी.
बिहारी काका ने पीछे से एक और ज़ोर का धक्का आगे की और मारा और उनका आधे सर ज्यादा लुंड गरिमा की कोरी अनछुई गांड को चीरता हुआ अंदर तक पहुंच गया. गरिमा का मुँह पूरी तरह खुल गया उसकी उंगलिया हरिया की कमर पर गड गई. वो दर्द से छटपटा उठी पर उसकी इस छटपटाहट ने हरिया का जोश और बड़ा दिया और हरिया ने भी अपना लुंड गरिमा के पूरी तरह खुल चुके मुँह में उसके हलक के मुहाने तक पहुंच दिया.
गरिमा दर्द के मारे चिल्लाना चाहती थी पर हरिया के मोटा काला लुंड ने उसकी आवाज़ को उसके हलक से बहार आने का रास्ता hi नहीं दिया. पीछे से बिहारी काका गरिमा की गांड में अपना लुंड आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करने लगे और थोड़ा थोड़ा करके उसके अंदर और अंदर दाखिल करने लगे. वही हरिया भी अपने लुंड से गरिमा का मुँह छोड़ने लगा. कुछ देर पहले तो वो गरिमा से रिक्वेस्ट कर रहे थे की एक बार वो उनकी इच्छा पूरी कर दे पर अब वो गरिमा की छटपटाहट को नज़रअंदाज़ करते हुए अपने अपने काम में लगे थे. शायद उन्हें पहले से पता था की ऐसा होगा क्युकी जिस औरत आज तक कभी ये अनुभव लिया तक नहीं था वो पहली बार में बिना छटपटाए तो ये नहीं कर पाएगा. और वो ये भी जानते थे की अगर अब उन्होंने गरिमा को छोड़ दिया तो वो दुबारा उन्हें अपने मुँह और गांड के करीब भी नहीं फटकने देगी.
उनका तो कलपद हो जाएगा. इसलिए अब इतना आगे बढ़ने के बाद पीछे हटने का तो रास्ता hi नहीं. अब बाद में वो जो भी कहे गाली दे या झापड़ मारे वो सब झेल लिया जाएगा पर अब काम पूरा करके की रुका जाए. पत्थर पर बैठा जीतू अपने बाप को गरिमा की गांड मारते देख कर एक्ससिटेमेंट के मारे अपने लुंड पर अपना हाथ ऊपर नीचे चला रहा था. वो जब पोर्न वीडियो देखता था तो मुँह में लुंड लेने वाले या गांड में लुंड लेने वाले सन को आगे बड़ा देता था क्युकी उसे छूट में लुंड डालने वाले सन ज्यादा बढ़िया लगते थे पर आज अपनी आँखों के सामने गांड और मुँह की एक साथ होती ठुकाई के इस लाइव टेलीकास्ट को देख कर उसे जो एक्ससिटेमेंट मिला था वो आज तक किसी पोर्न वीडियो से भी नहीं मिला था.
कुछ देर आहिस्ता आहिस्ता करने के बाद धीमे धीमे काका ने अपनी स्पीड बड़ा दी. पीछे से गरिमा का दर्द के मारे बुरा हाल हो रहा था वही आगे से उसका पूरा मुँह उसके थूक और लार से भर गया था. हरिया का लुंड उसके हलक तक जाकर बहार आता तो वापस उसके हलक तक चला जाता. और हरिया के लुंड के साथ साथ गरिमा के मुँह में भरा थूक और लार भी बहकर बहार आ रहा था. गरिमा की सासे उखड रही थी उसके पेअर कपकपा रहे थे उससे ढंग से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था, पर पीछे से बिहारी काका ने उसे कमर और आगे से हरिया ने उसे कंधे से थाम रखा था इसलिए वो नीचे भी जा सकती थी. अपने बाप और मुँह बोले चाचा हरिया के तेज़ तेज़ धक्के को देख कर जीतू का एक्ससिटेमेंट भी अपने शिखर पर पहुंच गया था और उसके हाथो के गति अपने लुंड पर तेज़ हो गई थी.
आज उसे एक नया सबक सीखने को मिल रहा था की औरत के बदन को किस तरह इस्तेमाल करा जाता है. औरत का काम होता है मर्द का लुंड अपने हर छेड़ में लेकर मर्द को मज़ा देना. अगर इसमें औरत को थोड़ा बहुत दर्द थोड़ी छटपटाहट होती है तो इतना तो चलता है बल्कि देखा जाए तो ये छटपटाहट देख कर तो मर्द का एक्ससिटेमेंट और बाद जाता है जैसे इस वक़्त बापू और हरिया चाचा का बाद रहा था. बिहारी काका पीछे से गरिमा को छोड़ नहीं रहे थे और जब वो आगे बढ़ती तो हरिया का लुंड उसके हलक में और गहराई तक उतर जाता. और जब गरिमा हरिया को पीछे धकेलने की कोशिश करती तो हरिया माँ जोश और बाद जाता तो वो अपना लुंड और अंदर तक घुसेड़ देता. कहते है की तीन इयर्स में इंसान जो बाते अपने दिमाग में बसा लेता है वो बाते उसका चैरेक्टर उसका आने वाला फ्यूचर डीडे करती है और कुछ ऐसा hi इस वक़्त जीतू के साथ हो रहा था. औरत के पार्टी उसके मन में आज एक नै तरह की सोच जनम ले रही थी. और पता नहीं ये सोच उसे कहा ले जाने वाली थी.
काका और हरिया के धक्को ने गरिमा की हालत ख़राब करदी थी उसने ज़बरदस्ती जोश जोश में हामी तो भर दी थी पर अब उसे अपने फैसले पर पछतावा हो रहा था. पर अब पछताए हॉट क्या जब लुंड घुस गए छेड़. बिहारी काका और हरिया इन दोनों के लिए भी ये उनके जीवन का एकदम नया अनुभव उन्होंने भी अब तक केवल फिल्मो में hi देखा था मुँह में लुंड डालते और गांड मारते कभी खुद ऐसा अनुभव उन्हें भी नहीं मिला था उनकी खुद की बीवियों ने भी कभी उनका लुंड अपने मुँह और गांड में नहीं लिया था पर आज गरिमा को अपनी बातो फसा कर उन्होंने उसे ऐसा करने को मन लिया था. हलाकि हरिया ने वादा करा था की वो अपना पानी गरिमा के मुँह के अंदर नहीं निकलेगा पर क्या गरिमा की मुँह की गरम गरम सासो के आगे उसका खुद का ज़ोर चल पाएगा.
दूसरी तरफ गरिमा की कासी हुई चौड़ी गांड की कसावट बिहारी काका को एक नै नवेली छूट का एहसास करा रही थी. काका का लुंड बड़ा भले hi न हो पर मोटा बहुत काफी था और वो गरिमा की गांड को पूरा खोलता हुआ अपनी जगह बनता हुआ अंदर बहार हो रहा था. गरिमा को भी अपनी सुहागरात में हुई पहली चुदाई का सा एहसास हो रहा था जब पहली बार कोई लुंड उसके अंदर दाखिल हुआ था और उसकी छूट की सील टूटी थी. चुदाई का वो पहला दर्द उसे आज दुबारा अनुभव हो रहा था जब एक 54 साल का बुद्धा पीछे से गांड मार रहा था. वह का सन्नाटा काका की कमर और गरिमा के चूतड़ों के टकराने से ठप्प ठप्प की आवाज़ से गूँज रहा था. गरिमा की दर्द भी अब धीमे धीमे उसके बर्दाश्त में आ रहा था. गरिमा के मुँह छोड़ रहा हरिया भी बिहारी काका की स्टैमिना देख कर हैरान था उसने नहीं सोचा था की ये बुद्धा इतनी देर टिक जाएगा पर गरिमा तो भयहारी काका का स्टैमिना कल रात hi देख चुकी थी.
बिहारी काका ने अपना अंगूठा बहार खींच लिया. अचानक अंगूठा बहार निकल जाने से गरिमा के आनंद में एक ब्रेक सा लग गया. पर अंगूठा बहार निकलते hi काका ने अपने लुंड का टोपा गरिमा की गांड के छेड़ के मुहाने पर रख दिया. गरिमा को एक पल को यही लगा की ये अंगूठा hi पर जैसे hi काका ने अपनी कमर का दबाव आगे की तरफ बढ़ाया और बिहारी काका का लुंड उनके अंगूठे के अंदर बहार होने से थोड़ा मुलायम पद चुके गरिमा की गांड का छेड़ को फैलता हुआ थोड़ा सा अंदर दाखिल हुआ hi था की दर्द के मारे उसकी हालत ख़राब हो गई.
उसने खुद को गिरने से बचने के लिए हरिया की कमर को कास कर पकड़ लिया. जो आँखे अब तक मज़े और आनंद में बंद थी वो गांड के छेड़ के फैलने से खुद भी पूरी तरह फ़ैल गई. और दर्द की सुद्दीन प्रतिक्रिया के रूप में गरिमा का मुँह भी पूरी तरह खुल गया.
गरिमा के मुँह खुलते hi हरिया का लुंड जो अब तक गरिमा के अधखुले होंठो के इर्द गिर्द झटके खा कर गरिमा की जीभ के स्पर्श और उसकी सासो की गर्माहट का hi आनंद ले प् रहा था. गरिमा का मुँह खुलते hi उसे भी बिना किसी दिक्कत के अंदर जाने का रास्ता मिल गया. और बिना देर किये हरिया ने भी अपना लुंड गरिमा के मुँह के अंदर दाखिल कर दिया.
जीवन में ये पहला मौका था जब गरिमा ने अपने मुँह और गांड में किसी का लुंड लिया था और वो भी एक साथ. गरिमा के शरीर की जिन जगह से उसका अपना पति जिसने उसके साथ सात फेरे लिए थे वो भी महरूम रहा था आज एक 52 साल का बूढ़ा और एक 36 साल का गवर देहाती ड्राइवर इन अनछुए हिस्सों की पहली पिलाई करने जा रहे थे. वही गरिमा जिसे ये लगा था की गांड में अंगूठा लेना और होंठो से लुंड चूमना उसकी महक को सूंघना जितना आसान है जब उसने ये कर लिया तो वो आगे भी कर लेगी.
पर अब उसे समझ आ रहा था की ये करना इतना भी आसान नहीं होने वाला था. क्यों लड़किया लुंड चूसने और गांड में लेने से कतराती है उसे अब समझ आ रहा था. पर अब तो गाडी स्टेशन से चल चुकी थी, हरिया का लुंड उसके मुँह में और बिहारी काका का लुंड उसकी गांड में दाखिल हो चुके थे. अब तो ये गाडी अपनी मंज़िल से पहले नहीं रुकने वाली थी.
बिहारी काका ने पीछे से एक और ज़ोर का धक्का आगे की और मारा और उनका आधे सर ज्यादा लुंड गरिमा की कोरी अनछुई गांड को चीरता हुआ अंदर तक पहुंच गया. गरिमा का मुँह पूरी तरह खुल गया उसकी उंगलिया हरिया की कमर पर गड गई. वो दर्द से छटपटा उठी पर उसकी इस छटपटाहट ने हरिया का जोश और बड़ा दिया और हरिया ने भी अपना लुंड गरिमा के पूरी तरह खुल चुके मुँह में उसके हलक के मुहाने तक पहुंच दिया.
गरिमा दर्द के मारे चिल्लाना चाहती थी पर हरिया के मोटा काला लुंड ने उसकी आवाज़ को उसके हलक से बहार आने का रास्ता hi नहीं दिया. पीछे से बिहारी काका गरिमा की गांड में अपना लुंड आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करने लगे और थोड़ा थोड़ा करके उसके अंदर और अंदर दाखिल करने लगे. वही हरिया भी अपने लुंड से गरिमा का मुँह छोड़ने लगा. कुछ देर पहले तो वो गरिमा से रिक्वेस्ट कर रहे थे की एक बार वो उनकी इच्छा पूरी कर दे पर अब वो गरिमा की छटपटाहट को नज़रअंदाज़ करते हुए अपने अपने काम में लगे थे. शायद उन्हें पहले से पता था की ऐसा होगा क्युकी जिस औरत आज तक कभी ये अनुभव लिया तक नहीं था वो पहली बार में बिना छटपटाए तो ये नहीं कर पाएगा. और वो ये भी जानते थे की अगर अब उन्होंने गरिमा को छोड़ दिया तो वो दुबारा उन्हें अपने मुँह और गांड के करीब भी नहीं फटकने देगी.
उनका तो कलपद हो जाएगा. इसलिए अब इतना आगे बढ़ने के बाद पीछे हटने का तो रास्ता hi नहीं. अब बाद में वो जो भी कहे गाली दे या झापड़ मारे वो सब झेल लिया जाएगा पर अब काम पूरा करके की रुका जाए. पत्थर पर बैठा जीतू अपने बाप को गरिमा की गांड मारते देख कर एक्ससिटेमेंट के मारे अपने लुंड पर अपना हाथ ऊपर नीचे चला रहा था. वो जब पोर्न वीडियो देखता था तो मुँह में लुंड लेने वाले या गांड में लुंड लेने वाले सन को आगे बड़ा देता था क्युकी उसे छूट में लुंड डालने वाले सन ज्यादा बढ़िया लगते थे पर आज अपनी आँखों के सामने गांड और मुँह की एक साथ होती ठुकाई के इस लाइव टेलीकास्ट को देख कर उसे जो एक्ससिटेमेंट मिला था वो आज तक किसी पोर्न वीडियो से भी नहीं मिला था.
कुछ देर आहिस्ता आहिस्ता करने के बाद धीमे धीमे काका ने अपनी स्पीड बड़ा दी. पीछे से गरिमा का दर्द के मारे बुरा हाल हो रहा था वही आगे से उसका पूरा मुँह उसके थूक और लार से भर गया था. हरिया का लुंड उसके हलक तक जाकर बहार आता तो वापस उसके हलक तक चला जाता. और हरिया के लुंड के साथ साथ गरिमा के मुँह में भरा थूक और लार भी बहकर बहार आ रहा था. गरिमा की सासे उखड रही थी उसके पेअर कपकपा रहे थे उससे ढंग से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था, पर पीछे से बिहारी काका ने उसे कमर और आगे से हरिया ने उसे कंधे से थाम रखा था इसलिए वो नीचे भी जा सकती थी. अपने बाप और मुँह बोले चाचा हरिया के तेज़ तेज़ धक्के को देख कर जीतू का एक्ससिटेमेंट भी अपने शिखर पर पहुंच गया था और उसके हाथो के गति अपने लुंड पर तेज़ हो गई थी.
आज उसे एक नया सबक सीखने को मिल रहा था की औरत के बदन को किस तरह इस्तेमाल करा जाता है. औरत का काम होता है मर्द का लुंड अपने हर छेड़ में लेकर मर्द को मज़ा देना. अगर इसमें औरत को थोड़ा बहुत दर्द थोड़ी छटपटाहट होती है तो इतना तो चलता है बल्कि देखा जाए तो ये छटपटाहट देख कर तो मर्द का एक्ससिटेमेंट और बाद जाता है जैसे इस वक़्त बापू और हरिया चाचा का बाद रहा था. बिहारी काका पीछे से गरिमा को छोड़ नहीं रहे थे और जब वो आगे बढ़ती तो हरिया का लुंड उसके हलक में और गहराई तक उतर जाता. और जब गरिमा हरिया को पीछे धकेलने की कोशिश करती तो हरिया माँ जोश और बाद जाता तो वो अपना लुंड और अंदर तक घुसेड़ देता. कहते है की तीन इयर्स में इंसान जो बाते अपने दिमाग में बसा लेता है वो बाते उसका चैरेक्टर उसका आने वाला फ्यूचर डीडे करती है और कुछ ऐसा hi इस वक़्त जीतू के साथ हो रहा था. औरत के पार्टी उसके मन में आज एक नै तरह की सोच जनम ले रही थी. और पता नहीं ये सोच उसे कहा ले जाने वाली थी.
काका और हरिया के धक्को ने गरिमा की हालत ख़राब करदी थी उसने ज़बरदस्ती जोश जोश में हामी तो भर दी थी पर अब उसे अपने फैसले पर पछतावा हो रहा था. पर अब पछताए हॉट क्या जब लुंड घुस गए छेड़. बिहारी काका और हरिया इन दोनों के लिए भी ये उनके जीवन का एकदम नया अनुभव उन्होंने भी अब तक केवल फिल्मो में hi देखा था मुँह में लुंड डालते और गांड मारते कभी खुद ऐसा अनुभव उन्हें भी नहीं मिला था उनकी खुद की बीवियों ने भी कभी उनका लुंड अपने मुँह और गांड में नहीं लिया था पर आज गरिमा को अपनी बातो फसा कर उन्होंने उसे ऐसा करने को मन लिया था. हलाकि हरिया ने वादा करा था की वो अपना पानी गरिमा के मुँह के अंदर नहीं निकलेगा पर क्या गरिमा की मुँह की गरम गरम सासो के आगे उसका खुद का ज़ोर चल पाएगा.
दूसरी तरफ गरिमा की कासी हुई चौड़ी गांड की कसावट बिहारी काका को एक नै नवेली छूट का एहसास करा रही थी. काका का लुंड बड़ा भले hi न हो पर मोटा बहुत काफी था और वो गरिमा की गांड को पूरा खोलता हुआ अपनी जगह बनता हुआ अंदर बहार हो रहा था. गरिमा को भी अपनी सुहागरात में हुई पहली चुदाई का सा एहसास हो रहा था जब पहली बार कोई लुंड उसके अंदर दाखिल हुआ था और उसकी छूट की सील टूटी थी. चुदाई का वो पहला दर्द उसे आज दुबारा अनुभव हो रहा था जब एक 54 साल का बुद्धा पीछे से गांड मार रहा था. वह का सन्नाटा काका की कमर और गरिमा के चूतड़ों के टकराने से ठप्प ठप्प की आवाज़ से गूँज रहा था. गरिमा की दर्द भी अब धीमे धीमे उसके बर्दाश्त में आ रहा था. गरिमा के मुँह छोड़ रहा हरिया भी बिहारी काका की स्टैमिना देख कर हैरान था उसने नहीं सोचा था की ये बुद्धा इतनी देर टिक जाएगा पर गरिमा तो भयहारी काका का स्टैमिना कल रात hi देख चुकी थी.