लखन सिंह की कोठी में
जब किचन में गरिमा बिहारी काका और उनका बीटा जीतू ये तीनो वासना के नशे पूरी तरह मदमस्त थे की तभी उनके पीछे से आई एक भरी भरकम आवाज़ ने उनके रंग में भांग दाल दिया. तीनो ने एक साथ पीछे पलट कर देखा और तीनो के मुँह से एक साथ एक नाम निकला.
"हरिया"
जी हां वही हरिया जिसने गरिमा को हवस और वासना के इस रास्ते पर पहला कदम रखने को मजबूर किया था, जो अपनी बीवी की प्रेगनेंसी के चलते कुछ दिनों के लिए अपने ससुराल गया था वो अब वापस आ गया था. हरिया की आवाज़ सुनकर hi बिहारी काका के तो चेहरे पे हवइया सी उड़ने लगी और जीतू की तो सिटी पित्ती hi गम हो गई वो इस बात से डरे हुए थे की कही हरिया ये सब लखन सिंह को न बता दे क्युकी वो इस बात से अनजान थे की हरिया तो गरिमा का पहले मज़ा ले चूका था वो भी कई बार. वही गरिमा को हलाकि ये दर तो नहीं था की हरिया बहार किसी से कह देगा पर है आज उसे यु एक बाप बेटे के साथ इस हालत में देख हरिया अब उसे एक चैरेक्टरलेस औरत hi समझेगा. कुछ पल के लिए वह एक अजीब सी ख़ामोशी छै रही जिसे हरिया ने hi तोडा.
हरिया : ये सब क्या हो रहा है घर में इतना सन्नाटा क्यों है कहा हो सब लोग. गेट खुला पड़ा है बहार पानी चल रहा था पुरे पौधे पानी से भर गए. कहा हो आप लोग. बिहारी काका जीतू हो की नहीं.
तीनो ने एक दुसरे को देखा और थोड़ी रहत की सांस ली की हरिया ने उन्हें वो सब करते हुए नहीं देखा है. गरिमा ने जल्दी जल्दी अपने अस्त व्यस्त कपडे ठीक करे अपनी ऊपर नीचे होती सासो को काबू करा. बहार हॉल में एक बड़ा सा आइना लगा था जिसमे उन्हें इधर उधर देखता हरिया साफ़ नज़र आ रहा था पर हरिया की बातो से साफ़ ज़ाहिर था की उसने उन्हें नहीं देखा है.
जीतू: बापू हरिया भाई ने अपने को नहीं देखा है.
बिहारी काका: है तो सब लोग एकदम नार्मल बेहवे करो जैसे हम लोग किचन में बस खाना बना रहे थे.
गरिमा ने भी सहमति में सर हिला दिया.
तीनो लोग नार्मल बेहवे करते हुए एक साथ किचन से बहार आ गए.
हरिया: अरे आप तीनो किचन में थे एक साथ तीनो लोग किचन में क्या कर रहे थे.
बिहारी काका: अब बीटा मई किचन में क्या करूँगा खाना hi बनाऊगा वही बना रहा था. ये बिटिया ने ज़िद्द करि की जाने से पहले एक बार मेरी खाने में मदद करेगी तो वही कर रही थी. और ये जीतू ठंडा पानी पीने आया था. वो सब छोडो तुम तो सात बजे आने वाले थे इतनी जल्दी कैसे आ गए.
हरिया: रास्ता लुम्बा था और पल भी अभी नया बना है तो ज्यादा रात करना ठीक नहीं इसलिए जल्दी आ गया. थोड़ा जल्दी निकल लेना hi सही रहेगा. आपको तो कोई दिक्कत नहीं मेमसाब.
गरिमा: नहीं नहीं जल्दी निकल लेते है सही रहेगा.
बिहारी काका और खास कर जीतू मन मसोस कर रह गए अब हरिया के सामने तो वो कुछ नहीं कर सकते थे. और गरिमा अब जाने वाली थी तो अब उन्हें दुबारा कोई मौका भी मिलने से रहा. हरिया ने आगे बाद कर एक पैकेट गरिमा की तरफ बड़ा दिया.
हरिया: इसमें आपके लिए कपडे और आपकी साइज के hi है मई खरीद के लाया था. आप तैयार होकर नीचे आ जाइये हम अभी निकलेंगे ज्यादा अँधेरा करना ठीक नहीं.
गरिमा भी हरिया को शुक्रिया बोल कर वो पैकेट लेकर ऊपर अपने कमरे में चली गई. उस पैकेट में एक नारंगी रंग की साड़ी मैचिंग ब्लाउज पेटीकोट और एक ब्लैक ब्रा पंतय का सेट था. और शायद हरिया को अच्छे से नपा था तभी हर चीज़ गरिमा की साइज की hi थी. गरिमा वो कपडे पहनकर तैयार होने लगी. तैयार होकर जब वो नीचे आई तो Hariya,Bihari काका और जीतू तीनो वह चुपचाप खड़े थे.
हरिया: चलिए आप गाडी में बैठिये और है ये दोनों भी नदी तक हमारे साथ hi चलेंगे अगर पिछली बार की तरह फिर ऐसा कुछ हो गया तो वह बचने के लिए कोई रहे तो अच्छा रहेगा.
गरिमा, बिहारी काका और जीतू तीनो गाड़ी में बैठ गए और हरिया ड्राइवर सीट में आकर बैठ गया. और गाड़ी गांव के पथरीले उबड़ खाबड़ रास्तो से होते उस नदी की तरफ चल पड़ी. नदी के पास पहुंच कर हरिया ने गाडी रोक दी. गरिमा ने उस जगह को एक पल को देखा था ये वही जगह थी जहा गरिमा उस एक्सीडेंट के बाद हरिया के साथ साडी रात गुज़री थी वो भी बिना कपड़ो के. ये वो पहली रात जब गरिमा अपने पति के अलावा किसी गैर मर्द के सामने नंगी हुई थी. है बेशक उसमे उसकी कोई सहमति नहीं थी क्युकी वो तो बेहोश थी. पर वो रात उसके इस गांव के कामुक सफर का पहला कदम थी. सब सोच hi रहे थे की हरिया ने गाड़ी क्यों रोक दी की तभी हरिया ने खुद इसका जवाब दे दिया.
हरिया: गाड़ी का तो पेट्रोल hi ख़तम हो गया मैंने तो अपने घर से चलते टाइम टंकी फुल करवाई थी.
हरिया ने गाड़ी से उतारकर देखा.
हरिया: ओह गाड़ी से तो पेट्रोल लीक कर रहा है. लगता है रस्ते में कोई नुकीला पत्थर लगने से ये लीक कर गया. और गाड़ी का तो एक टायर भी पंक्चर है. पेट्रोल भी लाना होगा और किसी मैकेनिक को भी लाना होगा. पर अब यहाँ पेट्रोल और मैकेनिक कहा मिलेगा. पेट्रोल पंप तो यहाँ से काफी दूर गाँव मर है.
बिहारी काका: मेरे एक नातेदार यहाँ से थोड़ी दूर रहता है वो गाडी भी ठीक कर लेता है. और उसके यहाँ गाड़ी भी है तो शायद हमे वह पेट्रोल भी मिल जाए. पर शाम हो रही है तो अकेला कैसे जाऊ.
हरिया: एक काम करते है मई आपके साथ चलता हु और मैडम जी और जीतू को यही छोड़ देते है मैडम जी कहा परेशां होंगी उन्हें यही रहने देते है ठीक है न.
बिहारी काका: है सही रहेगा जीतू मैडम जी का ख्याल रखना.
जीतू: जी बापू
जीतू और गरिमा को वही छोड़ हरिया और बिहारी काका चले गए.
जीतू: गरिमा दी यहाँ गाड़ी में तो बहुत गर्मी है एक भी ख़राब है इसका तो जब तक हरिया भाई और बापू वापस आते है हम उधर उस पेड़ के नीचे चले वह थोड़ी हवा लगेगी. वैसे भी बापू जिस नातेदार की बात कर रहे उसके घर यहाँ से काफी दूर है और सड़क भी ऐसी नहीं जिसपर तेज़ तेज़ चल सके तो उन्हें एक घंटे से ज्यादा लगेगा तो तब तक हम यहाँ गाड़ी में क्या बैठे रहे.
गरिमा: ठीक है चलो.
जीतू और गरिमा गाड़ी से उतर कर एक पेड़ के नीचे आ गए. पेड़ की ूत होने के कारन उन्हें यहाँ से गाड़ी नज़र नहीं आ रही थी. हवाई तेज़ तेज़ चल रही थी और गरिमा की ज़ुल्फ़े उसके चेहरे पर आ रही थी. आस पास कोई नहीं था और हरिया और बिहारी काका को भी अभी समय लगने वाला था ऐसे में ब्लाउज में से गरिमा के उभरे हुए स्तनों को देख कर जीतू की जवानी की कीड़े फिर से कुलबुलाने लगे थे. पर पता नहीं अब गरिमा उसे कुछ करने देगी भी की नहीं. पर एक बार तरय करना तो ज़रूरी था क्युकी इसके बाद दुबारा ये मौका नहीं मिलने वाला था.
जीतू: मम्मी आप गुस्सा तो नहीं हो.
गरिमा: क्या मई तुम्हारी मम्मी नहीं हु.
जीतू: पर सुबह तो अपने मान लिया था की आप मेरी मम्मी हो. और बापू ने जब आपकी मांग भरी है तो आप उनकी बीवी हुई तो उस रिश्ते से तो मेरी मम्मी hi हुई.
गरिमा के पास जीतू की इस बात का कोई उत्तर नहीं था.
गरिमा: देखो जीतू जो होना था हो गया अब मई जा रही हु तो अब तुमसे रिक्वेस्ट है की इस बात का ज़िक्र किसी से मत करना. क्युकी अगर ये बात शोभा को पता चली तो मेरी बाकि सहेलियों को भी पता चल जाएगी और मेरे घरवालों को भी पता चल जाएगी प्लीज ये सब भूल जाऊ.
जीतू: मई कहा कुछ कह रहा हु, मई तो बस एक बार आपको मम्मी के रूप में इमेजिन करना चाहता हु. मेरी मम्मी तो मेरे पैदा होते hi चल बसी तो मुझे बाप की सख्ती तो मिली पर माँ का प्यार नहीं.
जीतू की इस बात ने गरिमा को भी इमोशनल कर दिया.
गरिमा: ठीक है जब तक हरिया और तुम्हारे बापू आते है तुम मुझे मम्मी मान सकते हो. पर उनके सामने नहीं.
जीतू: थैंक ु मम्मी आप कितनी अच्छी हो काश आप सच में मेरी मम्मी होती. मई आप और बापू तीनो साथ में रहते और 9 महीने बाद मुझे एक भाई या बेहेन भी मिल जाता.
जीतू जानबूझ कर गरिमा को उसकी कल रात कही हुई बाते याद दिला कर एक्साइट कर रहा था.
जीतू: मम्मी क्या मई आपकी गोड़ में सर रख कर लेट जाऊ.
गरिमा: ठीक है लेट जाओ. पर कोई शैतानी मत करना.
जीतू: मम्मी अब बच्चा अपनी माँ से शैतानी नहीं करेगा तो किस्से करेगा.
इतना कह कर जीतू ने अपना सर गरिमा की गोड़ में रख दिया. जीतू के क्या इंटेंशन्स थे मम्मी मम्मी बोल कर वो क्या करना चाहता था ये तो बस वो hi जनता था.