A wedding ceremony in village - Page 20 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

कमरे से निकलकर नेहा सीधा विक्रम के कमरे में जा पहुंची. विक्रम कमरे में hi पुशअप्स मार रहा था. नेहा को सामने खड़ा देख वो एकदम हड़बड़ा कर खड़ा हो गया.

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विक्रम: तुम यहाँ, कल रात मैंने तुम्हे कह दिया था न की मई अब तुम्हारे पास कभी नहीं आऊंगा फिर सुबह होते hi तुम फिर मेरे पास आ गई.

नेहा गुस्से में: ोोोू ओह hello मुझे भी कोई शौक नहीं तुम्हारे पास आने का पर जो तुमने खुद को सही दिखाकर और मेरी फ्रेंड की नज़रो में मुझे बुरा बनाकर जो गेम खेला है न तो तुम्हे भी आईने में तुम्हारा चेहरा दिखाना ज़रूरी था.

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नेहा की आवाज़ काफी तेज़ थी और विक्रम नहीं चाहता था की कोई उनकी बाते सुन ले.

देखो धीमे बात करो मई नहीं चाहता यहाँ कोई तमाशा हो.

नेहा: मई भी यहाँ कोई तमाशा करने नहीं आई हु बस अपने कुछ सवालो के जवाब मांगने आई हु उसके बाद मई अपने रास्ते तुम अपने रास्ते.

विक्रम: ठीक है तुम्हे बात hi करनी है न तो चलो ऊपर छत पर चलो वह हमारी बाते कोई नहीं सुन पाएगा.

नेहा: ठीक है चलो छत पर चलो.

विक्रम ने कमरे के बहार देखा और जब आस पास कोई नहीं था तो नेहा को लेकर ऊपर छत की ततफ निकल गया. छत पर पहुंच कर विक्रम ने जीने का दरवाज़ा बंद कर लिया ताकि कोई अचानक से ऊपर न आ जाए.

विक्रम: हम्म अब बोलो क्या पूछना है तुम्हे. कौनसा आइना दिखाना है तुम्हे मुझे. मेरे साथ फ्लिर्टिंग पहले तुमने शुरू करि और एक्ससिटेमेंट में मई भी थोड़ा बहक गया पर शुरुआत तुम्हारी तरफ से हुई थी.

नेहा: अच्छा साली जीजा की हलकी फुलकी फ्लिर्टिंग तुम्हे सेक्स का सिग्नल लग गई और एक्ससिटेमेंट में तुम इतना आगे बाद गए की मेरे साथ वो स्ट्रेंजर और स्लेव वाला खेल खेलने लगे.

विक्रम: आधी रात को अपनी सहेली के पति के पास बिना कपड़ो के जाना और अपने बदन की नुमाइश करके उसे सडके करना तुम्हे जीजा साली की हलकी फुलकी फ्लिर्टिंग लगता है. उस रात तुम आई थी मेरे पास या मई गया था. बोलो जवाब दो बोलती बंद हो गई.

नेहा: भला मेरी बोलती क्यों बंद होगी जबकि मई वह खुद से नहीं आई थी मुझे तुमने बुलाया था.

विक्रम: मैंने बुलाया तुम्हारा दिमाग ख़राब है भला मई तुम्हे क्यों बुलाऊंगा, मैंने कब कहा था तुम्हे आने को.

नेहा: अच्छा और उस रात से पहले से जो मेरे साथ स्ट्रेंजर का नक़ाब पहनकर जो बड़सम का खेल खेला वो सब भी भूल गए. पहले मुझे दुल्हन की ड्रेस में उस कॉटेज में बुलाया और फिर मुझे नंगा करके गले में कुत्ते का पत्ता डालकर अपनी स्लेव बनाकर घुमाया. अगली रात में मुझे एक कॉलगर्ल के ड्रेससुप में बुलाया और न जाने किस किस तरह से मेरे साथ उन्नातुराल सेक्स करा और फिर उस रात तुमने मुझे पूरी तरह नंगा होकर उस तालाब के पास आने को कहा.

विक्रम: अरे ु आउट ऑफ़ योर मंद, ये क्या जनाब शनाब बक रही हो कौन स्ट्रेंजर कौनसा बड़सम गेम दिमाग ख़राब हो गया है क्या. न मैंने तुम्हे कभी दुल्हन के लिबाज़ में बुलाया न कॉलगर्ल के और न उस रात मुझे तो लगता है तुम सच में शहर में हाई सोसाइटी कॉलगर्ल का धंदा करती होगी. पेशे से hi धनदेवाली होगी यहाँ मुझे पैसे वाला देखा तो मुझे फ़साने के लिए अलग अलग हथकंडे अपनाने लगी.

नेहा का पारा भी हाई हो गया और उसने खींचकर एक झापड़ विक्रम के गाल पर रसीद कर दिया. विक्रम ने रिएक्शन में अपना हाथ उठाया पर कुछ सोचकर रुक गया.

विक्रम: उठाने को तो मई भी हाथ उठा सकता हु पर एक तो तुम एक लड़की हो और यहाँ मेरी बीवी की मेहमान बन कर आई हो इसलिए मई इस बात को आगे नहीं बढ़ाना चाहता.

नेहा: तुम्हारे न मैंने से सच झूट नहीं हो जाएगा तुम्हारा उस तालाब के किनारे बना कॉटेज भरा पड़ा है बड़सम के सामन से जहा दो रात तुमने मेरा साथ एन्जॉय करा.

विक्रम: देखो न मैंने से अगर सच झूट नहीं होता तो कुछ भी बोल देने भर से झूट भी सच नहीं हो जाएगा. और उस कॉटेज की बात कर रही हो न चलो अभी चलो मेरे साथ उस कॉटेज में दिखाओ क्या है वह.

विक्रम गुस्से में जीने का दरवाज़ा खोलकर नीचे उतरके हवेली से बहार आकर उस कॉटेज की तरफ चल दिया. नेहा भी इधर उधर देखकर सबसे नज़रे बचाकर विक्रम के पीछे पीछे उस कॉटेज की तरफ चल दी. दोनों बिना किसी नज़रो में आए उस आम के बाघ से होते हुए तालाब के पीछे बने उस कॉटेज पर पहुंच गए. विक्रम ने आगे बाद कर उस कॉटेज का दरवाज़ा खोल दिया.

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विक्रम: जाओ और अंदर जाकर दिखाओ कौनसा बड़सम का सामान रखा है अंदर.

नेहा भी तेज़ कदमो से कॉटेज के अंदर दाखिल हुई पर अंदर का नज़ारा देख कर हैरान हो गई अंदर का सेन एकदम चेंज था न वह कोई डिस्को लाइट था न कोई पोल्ल जिसमे उसने पोल्ल डांस करा था न कमरे में कोई चैन लटक रही थी जिसमे उसे हैंडकफ्फ्स करके बंधा गया था. नेहा ने वो दीवार देखि जहा वाल डिलडो लगा था अब वो दीवार एकदम सपाट थी वह कोई डिलडो नहीं लगा था. वह न उसे वो डिलडो चेयर दिखी जिसमे उसे बिठाया गया था न कही वो फ्लोर पिल्लोरी थी जिसमे उसे दोगी पोजीशन में बंधा गया था. है वो लकड़ी की अलमारी वही राखी जिसमे उस रात तरह तरह के बड़सम का सामान था गले का पत्ता हैंडकफ्फ्स ब्लैंडफोल्ड बेल्ट डिलडो पिन मोमबत्ती. नेहा ने बिना देर किये वो अलमारी खोली पर वो अलमारी पूरी तरह खली थी वह बड़सम का सामान तो दूर एक पिन भी नहीं थी.

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नेहा: वो सब सामान यही था यही पर था, यहाँ डिस्को लाइट लगी थी और एक पोल्ल लगा था जिसमे मैंने पोल्ल डांस करा था, वह दीवार पर एक डिलडो लगा था, इस अलमारी में बड़सम का बहुत सारा सामान था. ज़रूर तुमने हटा दिया है वो सब.

विक्रम: देखो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा तुम क्या कह रही हो. पर ये कॉटेज मेरे लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट है क्युकी यही मेरी और शोभा की मैरिड लाइफ की शुरुआत होने वाली है यही हमारी सुहागरात होने वाली है.

नेहा: ओह तो इसीलिए यहाँ से सारा सामान हटा दिया. बहुत बड़े धोकेबाज़ इंसान हो जो लड़की तुम्हारे साथ साडी ज़िन्दगी जीने वाली है उसे क्या खूब धोका दे रहे हो.

विक्रम: मंटा हु गलत करा है मैंने पर विक्रम धोकेबाज़ नहीं है पहले मैंने जो करा सो करा वो शादी से पहले की बात थी पर शादी हो जाने के बाद तुम्हारे साथ जो कुछ हुआ वो गलत था और मई इस गलती की माफ़ी मांगे बिना अपनी नै लाइफ की शुरुआत नहीं करूँगा. मई पहले शोभा को सब सच बताऊंगा उससे माफ़ी मांगूंगा उसके बाद ये उसका डिसिशन होगा की उसे मेरे साथ रहना है या नहीं.

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इतना कहकर विक्रम ने अपनी जेब से एक चिट्ठी निकलकर नेहा की तरफ बड़ा दी. नेहा ने वो चिट्ठी लेकर पड़ना शुरू कर दिया. वो चिट्ठी शोभा के लिए थी.

विक्रम की चिट्ठी: शोभा मई जनता हु तुमने बचपन से मुझे प्यार करा सच्चा प्यार करा पर शायद मई इस प्यार के लायक नहीं हु शादी से पहले कई लड़कियों से मेरे अफेयर्स रहे है और शायद ऐसा करके मई खुद को स्टड शो करता था. पर वो सब शादी से पहले की बात थी पर तुमसे शादी होने के बाद भी मुझसे एक गलती हो गई, शादी में आई एक लड़की की तरफ में अट्रैक्ट हो गया और मेरे और उसके बीच रिलेशन बन गया हम दोनों इंटिमेट हो गए. पर सच बोल रहा हु अब मुझे दिल से इस बात का पछतावा हो रहा है. मई अब तक एक डिसलोयाल इंसान रहा हु पर मई तुमसे वडा करता हु की अगर आज तुमने मेरा साथ दिया तुम्हे एक परफेक्ट लॉयल हस्बैंड बन कर दिखाऊंगा. मई तुम्हे उस लड़की का नाम बताकर उस लड़की की लाइफ में कोई प्रॉब्लम क्रिएट नहीं करना चाहता ये समझ लो जो भी गलती थी वो मेरी थी और मई हमारे नए रिश्ते की शुरुआत एक गलती के साथ नहीं करना चाहता था इसलिए ये शुरुआत इस माफ़ी के साथ कर रहा हु. ये बात शायद मई तुमसे खुद से न कह पाव इसलिए ये सब इस चिट्ठी में लिख रहा हु. अगर तुम मुझे मेरी इस गलती के लिए माफ़ कर सकती हो तो मई खुद को दुनिया का सबसे लकी इंसान समझूंगा की मुझे तुम अस ा वाइफ मिली पर अगर तुम मुझे माफ़ न करते हुए भी इस रिश्ते को हमेशा हमेशा के लिए ख़तम कर देती हो तो भी मई यही समझूंगा की शायद मेरी गलती की यही सजा था. पर उसके बाद भी मई लिफेलॉन्ग तुम्हे hi प्यार करूँगा क्युकी जनता हु तुम्हे मुझसे अच्छा कोई भी मिल जाएगा पर साला मुझे तुमसे अच्छी कोई नहीं मिलने वाली.

तुम्हारा और सिर्फ तुम्हारा विक्रम

नेहा ने वो चिट्ठी पूरी पडली. और विक्रम ने वो चिट्ठी वापस लेकर अपनी जेब में रख ली.

विक्रम: देखो मई तुम्हारे करैक्टर को जज नहीं करना चाहता ऊपर छत में मैंने जो कहा वो सब हीट ऑफ़ थे मूवमेंट में बक दिया. तुम चाहो तो मुझे और झापड़ मार लो पर प्लीज मेरी शोभा की लाइफ में और कोई प्रॉब्लम क्रिएट मत करो प्लीज. आगे तुम्हे जो ठीक लगे तुम वो करो.

इतना बोलकर विक्रम नेहा को वही खड़ा छोड़ कर उस कॉटेज से बहार निकल गया. नेहा को समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट करे. उसका दिल कह रहा था की विक्रम सच बोल रहा है पर दिमाग ये सब मैंने को तैयार नहीं था. यही सब सोचते सोचते नेहा वापस अपने कमरे में आ गई.

शबाना: क्या हुआ बात हो गई तुम्हारी विक्रम से.

नेहा: हम्म हो गई

शबाना: तो सब कुछ ख़तम कर लिया न तुम दोनों ने अपने बीच.

नेहा है में सर हिलाते hue:Hmm

शबाना ने आगे बाद कर नेहा को गले से लगा लिया: That's लिखे माय डार्लिंग नेहा मई जानती हु मेरी नेहा दिल की बुरी नहीं है बस उसकी वाइल्ड फैंटसीज थोड़ी आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो जाती है इन पर थोड़ा कण्ट्रोल करो.

नेहा: हम्म

नेहा ने शबाना की बात के जवाब में हामी तो भर दी थी पर उसके दिमाग में अब भी यही बात चल रही थी की अगर विक्रम सच बोल रहा है और विक्रम वो स्ट्रेंजर नहीं है तो फिर वो था कौन और विक्रम से मिलने के बाद से वो कहा गायब हो गया न उसने दुबारा कोई टास्क दिया न खुद से सामने आया. नेहा ने थान लिया था की हर कीमत पर यहाँ से जाने से पहले उस स्ट्रेंजर के रहस्य से पर्दा उठाना है. देखना था वो ये सब कैसे करने वाली थी और कौन था वो स्ट्रेंजर और क्या था उसका गेम.

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उधर शोभा की सहेली छुम सास विनीता का साज सृंगार हो रहा था और इधर हवेली में शोभा की मेंहदी लगाई जा रही उसका हल्दी और मुल्तानी मिटटी से लेपन हो रहा था ताकि आज रात में उसका रूप रंग निखार कर आए क्युकी भले hi उसकी शादी हफ्ते भर पहले हुई थी पर उसकी सुहागरात तो आज होने वाली थी इस पूजा की समाप्ति के साथ, वो अलग बात है की शोभा तो इस बीच दो बार सुहागरात मन चुकी थी वो भी दो अलग अलग मर्दो के साथ एक हवेली के जमादार भीमा और दूसरा उसका खुद का बाप मलखान सिंह और इससे भी ज्यादा शॉकिंग ये था की वो अब तक यही समझती थी की उसने जो दो बार सम्बन्ध बनाए दोनों बार उसका पति विक्रम hi था उसके साथ, उसे पता भी नहीं था की विक्रम ने तो अब तक उसे अब तक टच भी नहीं करा था.

पूरी हवेली में नाच गाने का माहौल था क्युकी सब तक ये सूचना पहुंच चुकी थी की लखन सिंह और विनीता पूजा के आखिरी पड़ाव तक पहुंच गए है पर यहाँ तक पहुंचने के लिए उन्हें क्या क्या करना पड़ा और आगे क्या क्या करना पड़ेगा इसका तो किसीको अंदाजा भी नहीं था. सब तरफ बस ख़ुशी का माहौल था महिला संगीत अपने पुरे शबाब पर था. पर आज इस तरह की संगीत पार्टीज की जान रहने वाली नेहा थोड़ा टेंस थी. उसके दिमाग में अब भी विक्रम की बाते चल रही थी की उसने उसे कभी नहीं बुलाया तो आखिर वो स्ट्रेंजर को कैसे ढूंढे कैसे पता लगाए की वो आखिर है कौन. अचानक उसके दिमाग की बत्ती जल उठी वो वह से उठकर सीधा अपने कमरे में पहुंच कर अपनी अलमारी में कुछ तलाशने लगी और जल्द hi उसे वो चीज़ मिल भी गई. वो एंड्राइड फ़ोन जिससे वो स्ट्रेंजर उससे स्पार्क करता था. नेहा की आँखे चमक उठी.

नेहा: अब यही फ़ोन मुझे उस स्ट्रेंजर तक पहचानेगा.

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नेहा ने अपना फ़ोन निकला और उससे एक नंबर डायल करा.

नेहा: Hello राहुल

राहुल नेहा की कॉलोनी में रहने वाला एक जीनियस टेक एक्सपर्ट 12तह का स्टूडेंट था. जिसने अपनी टेक्निकल इंटेलिजेंस के दम पर नेहा को सेट करके छोड़ा था. और अपने से छोटी उम्र के एक पढ़ाकू लड़के से छोड़ने में नेहा को भी एक अलग फंतासी मिली थी. खैर उस कहानी के बारे में बाद में कभी बात करेंगे फिलहाल तो नेहा को राहुल की हेल्प की ज़रूरत थी.

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राहुल: क्या बात है नेहा मैडम आज बड़े दिनों बाद फ़ोन करा कितने दिनों बाद याद आई मेरी.

नेहा: तुमसे एक काम था जो सिर्फ तुम कर सकते हो.

राहुल: अरे एक झटके में दिल तोड़ दिया झूट hi बोल देती की मेरी याद आ रही तभी कॉल करा.

नेहा: अच्छा क्या प्यार हो गया मुझसे.

राहुल: अरे नेहा मैडम कोई पागल hi होगा जिसे आपको देखकर आपसे मुहोब्बत न हो जाए, आपकी चिकनी कमर पतली टाँगे रसीले होंठ तीखी नज़रे उफ़ क्या कहु क्या चीज़ हो आप.

नेहा: अच्छा जब मई इतनी अच्छी हु तो मेरा एक काम करोगे.

राहुल: आपके लिए तो जान हाज़िर है आप मांग कर तो देखो. कहो तो सीना चीयर कर दिल निकल कर कदमो में रखदे आपके.

नेहा: दिल नहीं फिलहाल तो दिमाग चाहिए तुम्हारा.

राहुल: अच्छा और इस दिमाग के बदले में मुझे क्या मिलेगा.

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नेहा: एक सेडक्टिव ब्लोजॉब.

राहुल: वैसे डील तो अच्छी है पर केवल ब्लोजॉब.

नेहा: एक फुल नाईट इन एंड आउट.

राहुल: वाओ फुल नाईट तब तो तबियत से करूँगा. इतना बढ़िया ऑफर मतलब मतलब काम भी बढ़िया होगा.

नेहा: हम्म्म

राहुल: तो बतिये क्या करना है बाँदा आपकी खिदमत में हाज़िर है.

नेहा: किसी का पता लगाना है केवल एक फेसबुक मैसेंजर अकाउंट से.

राहुल: Ok क्या ये आपको परेशां कर रहा है.

नेहा: वो छोडो तुम, मुझे तो खुद परेशां होने में मज़ा आ रहा था पर अब मुझे पता करना है वो है कौन. काम हो जाएगा की नहीं ये बताओ.

राहुल: राहुल कोई काम हाथ में ले और वो न हो ऐसा हो hi नहीं sakta,apki उसके साथ चाट हुई थी.

नेहा: हम्म हुई थी.

राहुल: Ok तो मुझे आपके अकाउंट का एक्सेस चाहिए ताकि मई आपकी चाट में आए मेस्सगेस का िप अड्रेस ट्रेस करके उन्हें भेजने वाले के डेस्टिनेशन अकाउंट तक पहुंच जाऊ. और फिर मुझे बस उसकी अकाउंट में रजिस्टर्ड ईमेल ईद को हैक करना होगा और उस ईमेल की मदद से फंड माय लोकेशन अप्प की मदद से मई उसकी एक्सएक्ट लोकेशन तक पहुंच जाऊंगा.

बस अपने अकाउंट का ईद पासवर्ड बताओ.

नेहा: मुझे नहीं पता वो दुसरे फ़ोन में है और मुझे पहले से लॉगिन करा कराया मिला था.

राहुल: Ok no प्रॉब्लम आपको एक कर कोड भेजा है अपने दुसरे फ़ोन के कमरे से इसे बस स्कैन करलो और मई यही से बैठे बैठे आपके उस दुसरे फ़ोन का एक्सेस अपने हाथ में ले लूंगा.

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नेहा ने वैसा hi करा और राहुल ने उसके स्ट्रेंजर द्वारा दिए फ़ोन का एक्सेस अपने हाथ में ले लिया.

राहुल: अब आप ये फ़ोन कही सेफ जगह रख दो ताकि किसी की नज़र में न आए, मुझे कुछ घंटे लगेंगे उस बन्दे को ट्रैक करने में. तब तक आप एन्जॉय करो शाम तक आपको आपके बन्दे की लोकेशन पता चल जाएगी.

नेहा: पक्का

राहुल: 200 ताका पक्का.

नेहा: ठीक तो शाम को बात करते है

राहुल: बस अपना फुल नाईट वाला वडा याद रखना.

नेहा: इधर से भी 200 ताका पक्का.

नेहा ने उस स्ट्रेंजर की तरफ अपने कदम बड़ा दिए थे अब देखना था की क्या वो उस स्ट्रेंजर का नक़ाब उतरने में कामयाब होगी या नहीं.

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उधर हवेली में शोभा का महिला संगीत चल रहा था और यहाँ लखन सिंह की कोठी में कल रात की मदमस्त ज़बरदस्त चुदाई के बाद बिना किसी नशीली दवा के hi गरिमा की आँख खुद बा खुद देर से खुली.

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उसने कमरे में लगी घडी पर नज़र डाली दोपहर के 1:30 बजे रहे थे. रोज़ बिहारी काका की नशीली दवाई के बावजूद उसकी आँख 12 बजे तक खुल जाती थी पर आज तो कुछ ज्यादा hi देर हो गई. फिर उसे याद आया की कल रात सुबह के 5:30 बजे के आस पास तो वो बिहारी काका के पास से hi आई तो और सोते सोते भी उसे 6 बज गए थे ऐसे में इतनी देर से उठना तो स्वाभाविक था. गरिमा रात में बिना खुद को साफ़ करे ऐसे hi नंगी सो गई थी इसलिए उसे अपनी जांघो और चूतड़ों पर बिहारी काका के वीर्य का कड़ापन अब भी महसूस हो रहा था.

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गरिमा ने बिस्तर से उठकर कमरे में रखे शीशे में अपने नंगे बदन को ऊपर से नीचे तक देखा, अपनी जांघो में काका के वीर्य के कड़ेपन को अपनी उंगलियों से छूकर महसूस करा. उसे महसूस करते करते गरिमा कल रात की चुदाई के खयालो में खो गई और उसके दुसरे हाथ की उंगलिया खुद बा खुद अपनी छूट के सुराख़ तक पहुंच गई और गरिमा वही उस शीशे के सामने कड़ी कड़ी बिहारी काका और अपनी चुदाई को याद करके एक्ससिटेड होते हुए अपनी छूट में उंगली अंदर बहार करने लगी.

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जैसे जैसे गरिमा के अंदर की गर्मी बाद रही थी उसकी उंगलियों के अंदर बहार होने की रफ़्तार भी तेज़ और तेज़ होती जा रही थी. तकरीबन 20 मं तक गरिमा यही अपनी छूट में उंगली अंदर बहार करती रही जब तक वो झाड़ नहीं गई.

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झड़ने के बाद उसे थोड़ी संतुष्टि तो मिल गई थी पर केवल अपनी पतली सी ऊँगली से अब उसका मन नहीं भरने वाला था, उसे तो कल रात की तरह एक बार और बिहारी काका के नीचे लेटकर एक ताबड़तोड़ भरपूर चुदाई चाहिए थी वो भी यहाँ से जाने से पहले. पर नीचे जाने से पहले खुद को अच्छे से साफ़ करना ज़रूरी था क्युकी एक तो पहले hi उसके बदन पर काका का कल रात का वीर्य लगा हुआ था और अभी अभी वो खुद भी झाड़ गई तो उसके बदन से वीर्य की hi महक आ रही थी. इसलिए वो सीधा बाथरूम में घुस गई और शावर ों करके अपने बदन में चिपके वीर्य को अच्छे से साफ़ करने लगी.

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नहाते हुए भी उसके मन में चुदाई का hi ख्याल चल रहा था की वो कैसे एक बार और काका के साथ वो सब kare.Pehle उसने उस नशीले लड्डू के बहाने से काका के साथ चुदाई का मज़ा लिया फिर कल रात उसने काका की एक रात की पत्नी का ड्रामा करके अपनी चुदाई की इच्छा को पूरा कर लिया पर अब वो क्या करे.

क्या डायरेक्ट काका से कहे की वो यहाँ से जाने से पहले एक बार और उनके साथ सेक्स करना चाहती है. है यही सही रहेगा ज्यादा सोचने विचरने का समय नहीं है जो करना है जल्दी करना होगा. वैसे भी दो दो बार चुदाई होने के बाद अब इतना क्या सोचना पर जीतू उसका क्या, कल रात तो वो सोने चला गया था पर अभी तो वो घर पर hi रहेगा उसके सामने ये सब कैसे होगा. और वैसे लुंड तो उसका भी अपने बाप की तरह hi मज़बूत और तगड़ा था. काश कल मालिश के वक़्त उसने अपना पानी बहार न निकला होता तो एक 18 साल के जवान लुंड को अंदर लेने का भी मज़ा मिल जाता. पर कही न कही उसमे बहुत ज्यादा बचपना है हरिया को जब भी मौका मिला उसने उस मौके का भरपूर फायदा उठाया और मेरे अंदर की हवस की आग को भड़काने का असली क्रेडिट उसी को जाता है.

और फिर बिहारी काका को भी जो दो मौके मिले मुझे छोड़ने के उन्होंने दोनों बार मौके पे चौका मारा. पर जीतू को पहले उस बारिश और फिर मालिश के टाइम मौका मिला था पर उसने दोनों मौको को हाथ से जाने दिया. तो ऐसे में क्या किया जा सकता है और अब समय इतना नहीं की मई दोनों के बारे में सोचु क्युकी शाम तक हरिया भी आ जाएगा मुझे लेने. ऐसे में मुझे बिहारी काका के साथ hi एक बार और करने का तरय करना होगा. और उन्हें कहूँगी तो वो कुछ न कुछ काम बताकर जीतू को कही भेज hi देंगे पर अगर जीतू के साथ करने का तरय करू भी तो बिहारी काका तो कही नहीं जाने वाले और कल रात के बाद तो वो खुद भी मेरे जाने से पहले एक बार और मेरे साथ वो सब करने का मौका तलाश रहे होंगे तो ऐसे में जीतू को कमरे में बुलाकर भी वो सब नहीं कर सकती. इसलिए अब बेटे के बारे में न सोच कर मुझे उसके बाप के साथ hi हैटट्रिक चुदाई का मौका तलाशना होगा.

गरिमा ने नाहा धोकर खुद को अच्छे से साफ़ करा. नाहने के बाद उसे दोनों तरह की भूक बड़े ज़ोरो से लगी थी एक तो पेट की भूक और दूसरी छूट की भूक. और दोनों hi भूक को शांत करने के लिए उसे नीचे जाना होगा इसलिए गरिमा ने हरिया की बीवी के कपड़ो से एक टाइट ब्लाउज निकला जिसमे उसके स्तनों की गोलिया साफ़ नज़र आए,

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एक पतले कपडे का पेटीकोट निकला जिसमे उसके नितम्बो पर ऊपर से हाथ रखने भर से एहसास hi न हो की बीच में कोई कपडा भी है और फॉर्मेलिटी के लिए एक सड़ी भी पेहेन ली, यहाँ आने के बाद ब्रा पंतय तो वैसे भी उसने काफी कम hi पहनी है.

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कपडे पेहेन कर वो आहिस्ता आहिस्ता नीचे हॉल में आ गई. उसने हॉल में लगी घडी देखि इस वक़्त दोपहर के 3:00 बज रहे थे और हरिया ने शाम 7 बजे तक आने को कहा था ऐसे में अब उसके पास केवल 4 घंटे का hi समय था. उसे अब यहाँ जो भी करना था वो इन 4 घंटो में hi करना था.

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वैसे गरिमा के आने वाले अपडेट पर मई अपने रीडर्स के भी सुग्गेशंस जानना चाहूंगा की वो गरिमा का आने वाला सेक्स किस अंदाज़ में देखना चाहते है. प्लीज कमेंट करे और अपना सुग्गेशंस दे ताकि मुझे भी पता चले की लोगो की स्टोरी के चरक्टेर्स पर क्या राइ है. और इससे मुझे उन साइलेंट रीडर्स को भी सुनने का मौका मिलेगा जो बस स्टोरी पड़तर है वो भी अपना सुग्गेशन de.Sirf ओने लाइनर कमैंट्स की जगह थोड़े बड़े कमैंट्स करे ताकि मुझे भी लोगो का फीडबैक पता चले.
 
No कमैंट्स मैंने अगले अपडेट के लिए लोगो की राय मांगी पर किसी ने कोई इंटरेस्ट नहीं लिया सिर्फ एक रीडर ने कुछ कहा अगर आप लोगो इस स्टोरी में इंटरेस्ट नहीं रहा है तो कोई बात नहीं मई अपने हिसाब से hi अपडेट लिखकर इस स्टोरी को जैसे तैसे ख़तम कर लूंगा क्युकी इस स्टोरी को चालू करा है तो अंजाम तक तो पहुँचाऊँगा hi. पर.................... क्या कहु कुछ नहीं.
 
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नीचे हॉल में आने के बाद उसने यहाँ वह बिहारी काका को ढूंढा पर न उसे बिहारी काका कही दिखे और न hi जीतू. उसने किचन में झांक कर देखा तो वह भी कोई नहीं था. फिलहाल उसे भूक भी बड़े जोरो की लग रही थी तो उसने यहाँ वह कुछ खाने को ढूंढा तो बिहारी काका ने अब तक खाने में भी कुछ नहीं बनाया था. वो फ्रिज में झुक कर देख hi रही थी की उसे पीछे अपने कूल्हों पर एक हाथ सहलाता महसूस हुआ, वो समझ गई की ये बिहारी काका hi है. वो पलट कर घूमने को हुई पर उसके पीछे खड़े शख्स ने उसे मजबूती से अपनी बहो में जकड लिया और अपने होंठ गरिमा के कंधे पर रख दिए और होल होल गरिमा के कंधे को चाटने लगा. गरिमा समझ चुकी थी की ये बिहारी काका hi है वो तो सोच रही थी की बिहारी काका से इस बार सेक्स के लिए कैसे कहेगी पर वो तो खुद hi बहुत भरे बैठे थे की खुद से hi गरिमा पर टूट पड़े.

उसे बिहारी काका की हरकतों से कोई ऐतराज़ नहीं था पर है उसे इस बात का दर था की जीतू भी यही है कही वो उसे अपने बापू के साथ ये सब करता न देख ले.

गरिमा: जीतू के बापू कुछ तो शर्म करो जीतू भी यही है कही उसने आपको मेरे साथ ये सब करते देख लिया तो क्या सोचेगा.

पीछे से awaaz(Garima के कान में): आप चिंता मत करो मई कुछ भी गलत नहीं सोचूंगा मम्मी.

पीछे से आती ये आवाज़ और मम्मी शब्द सुनकर ये क्लियर थे की ये बिहारी काका तो नहीं है. अचानक गरिमा की नज़रे किचन के गेट पर पड़ी तो वो हैरान रह गई क्युकी बिहारी काका किचन के गेट पर उसे किसी और मर्द की बहो में देख कर भी मुस्कुरा रहे थे.

पीछे से आवाज़: क्या हुआ मम्मी बापू को देखकर हैरान हो गई चिंता मत करो बापू कुछ नहीं कहेंगे.

बापू शब्द सुनते और आवाज़ को ध्यान लगाकर पहचानते hi गरिमा को समझते देर न लगी की उसके पीछे खड़ा शख्स और कोई नहीं जीतू है.

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पीछे से गरिमा की गर्दन को चूमते हुए जीतू अपने हाथ गरिमा की कमर से ऊपर सरकते हुए गरिमा के ब्लाउज तक ले आया और गरिमा को दोनों उछालते कबूतरों को अपने हाथो में भर लिया और उन्हें होल होल दबाने सहलाने लगा. गरिमा की आँखे तो लज़्ज़त के मारे बंद hi हो गई और कुछ सेकंड बाद hi जब उसने आँखे दुबारा खोली तो बिहारी काका अब उसके ठीक सामने खड़े थे और उनका चेहरा गरिमा के चेहरे के एकदम करीब था.

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बिहारी काका: क्या हुआ जीतू की अम्मा जीतू तुम्हे ज्यादा परेशां तो नहीं कर रहा वैसे भी जब कल रात तुम मेरी बीवी बन गई तो उसकी तो अम्मा बन गई अपने आप. तो इतना हसी ठिठोली तो कर hi सकता है तुम्हारे साथ आखिर उसके अंदर की जवानी की गर्मी भी बहार आने को मचल रही. और मई जनता हु की उसके अंदर की गर्मी को बहार लेन में तुम उसकी मदद ज़रूर करोगी आखिर अम्मा जो हो उसकी.

गरिमा को समझ नहीं आ रहा था की बिहारी काका ये सब क्या कर रहे है और जीतू जो अपने बाप से इतना डरता था अचानक से अपने बाप के सामने इतना ओपन कैसे हो गया.

बिहारी काका: क्या हुआ क्या सोचने लगी पहले भी तो दो बार तुम मेरे पीठ पीछे उसकी जवानी की गर्मी को निकलने में उसकी मदद कर चुकी आज ज़रा मुझे भी तो देखने दो की मेरा बीटा कितना जवान हो गया है.

गरिमा की आँखे हैरानी में पूरी खुल गई, मतलब जीतू ने अपने बाप को उस दिन मंदिर के पीछे बाग़ की और कल रात मालिश के दौरान घाटी साडी घटनाए बता दी है.

बिहारी काका: ज्यादा सोचो मत और अपने माँ और बीवी होने के दोनों फ़र्ज़ पुरे करो वो भी यहाँ से जाने से पहले अपने नए नवेले पति को एक बार और एक औरत का सुख दो और अपने नए नवेले बेटे को जवान होने में मदद करो.

इतना कहकर बिहारी काका ने अपना चेहरा आगे करके अपने होंठ गरिमा के होंठो से जोड़ दिए. दूसरी तरफ गरिमा को यकीन नहीं हो रहा था की जीतू ने अपने बाप को सब कुछ बता दिया पर क्यों उसने ऐसा क्यों करा. वो ये सोच hi रही थी की जीतू अपने चेहरा गरिमा की गर्दन से हटाकर उसके कान के नज़दीक ले आया.

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जीतू: क्या हुआ गरिमा दीदी या यु कहु गरिमा मम्मी. मई कल रात वह अपने कमरे में लेता आपके नाम की मुठ मार रहा था सोचा की बापू सो गए हो तो एक बार मौका देख कर आपके कमरे में चुपके से देख लू ताकि आपको सोते हुए देखते हुए मुठ मारने में और मज़ा आए. पर जब किचन की खिड़की से झांक कर अंदर देखा तो अंदर का तो नज़ारा hi अलग धमाकेदार था, आप बापू के बगल में लेटकर उनकी पत्नी यानि हमरी असल अम्मा की कुमी को पूरा कर रही थी. और हम पर हमेशा चिल्लाने वाले जे हुए बापू तो और चार हाथ आगे के निकले, आपकी मांग में सिन्दूर भरकर आपको सच में हमारी अम्मा बनाए दिया, गज़ब. और जाते जाते का बोली थी 9 महीने बाद हुए बापू का बच्चा भी जानोगी. हम तो कल मालिश करते करते आपकी चड्डी के अंदर झाड़ जाने पर hi बड़ा शर्मिंदा होए रहे थे और हुए बापू को देखो जे तो सीधा आपकी जांघो के बीच की गुफा के अंदर hi झाड़ गए. सवेरा होते hi हम सीधा बापू से कल रात के बारे में सवाल दाग दिए पहले तो जे थोड़ा झेप गए और चिल्ला कर हमे चुप करने लगे पर जब हम उस दिन वो बारिश वाली बात और कल की मालिश वाली साडी बात बापू को बताए तो इनका मुँह भी ऐसे hi आपकी तरह खुला का खुला रह गया. तबाही हम समझ गए की आपकी छूट में बड़ी खुजली मच रही है जिसे आप हम दोनों बाप बेटे के साथ बारी बारी नए नए बहाने बनाए के ठंडा कर रही हो. पर अब सब कुछ खुल्लम खुल्ला सामने है आपको हमारे लुंड चाहिए और हमे आपके छेड़ तो बेकार में बहाने बना बना के ये सब क्यों करना कुछ देर में तो वैसे भी आप चली जाओगी तो जे बचे खुचे घंटे हम दोनों बाप बेटे के साथ एक साथ एन्जॉय करलो बोलो क्या बोलती हो मेरी मम्मी.

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अब सब कुछ शीशे की तरह साफ़ हो गया था कल रात जीतू ने गरिमा को अपने बाप के साथ रात कब्बड्डी खेलते देख लिया था और उसने सुबह होते hi साड़ी बात अपने बापू को बता दी और अब इन दोनों बाप बेटे ने मिलकर गरिमा को भोगने का फैसला करा है. गरिमा ने मन hi मन सोचा की वो तो वैसे भी जीतू के साथ भी जाने से पहले एक बार सेक्स करना चाहती थी और उसके बाप बिहारी से भी सेक्स करने का मौका तलाश रही थी यहाँ तो दोनों बाप बेटे उसे अपनी बहो में जकड़े खड़े थे. उसने अब तक नेहा के मुँह से थ्रीसम सेक्स के बारे में केवल सुना था और नेहा की अलग अलग फंतासी की कहानिया सुनती रहती थी पर पहली बार थ्रीसम को असल में एक्सपीरियंस करने का उसके पास आज मौका था वो एक 54 साल बुड्ढे बाप और उसके 18 साल बेटे के साथ. गरिमा ने मन hi मन सोचा की यहाँ से जाने के बाद भला ऐसा एक्सपीरियंस लेने का मौका दुबारा कहा मिलने वाला है. यहाँ से जाने के बाद दुबारा से उसकी लाइफ वही पति बच्चे घर खाने में hi गुजरने लगेगी अगर कुछ पल के लिए वो एक शरीफ कन्सेर्वटिवे घर की हाउसवाइफ से एक ठरकी बाज़ारू मर्दो की हवस पूरी करने वाली बाज़ारू रांड बन भी जाएगी तो कौन सा बड़ा पहाड़ टूट पड़ेगा. यहाँ से जाने के बाद दुबारा अपनी पुराणी लाइफस्टाइल में एडजस्ट हो जाएगी और यहाँ हरिया, बिहारी काका और जीतू के साथ जो कुछ भी हुआ उसने जो कुछ भी करा वो सब यही इस गाँव में छोड़ जाएगी, यहाँ की साड़ी यादे यही दफ़न हो जाएगी. साड़ी ज़िन्दगी तो वो दूसरो के लिए उनके हिसाब से hi जीती आई है और आगे भी दूसरो के लिए उनके हिसाब से hi जीना है पहले अपने बाप के हिसाब से फिर पति के और आगे बच्चो के हिसाब से ज़िन्दगी जीनी है अगर उनमे से कुछ पल अपने लिए थोड़ा एन्जॉय कर लिया तो इसमें हर्ज़ hi क्या है.

गरिमा की इस कहानी का एक hi आधार था वो खुद hi खुद से सवाल करती और खुद hi खुद को अपने मन माफ़िक़ जवाब देकर अपने किये काम को जस्टिफाई भी ठहरा देती. मतलब खुद hi विक्टिम खुद hi कुलप्रीत और खुद hi फैसला सुनाने वाली जज. जब वो यहाँ आई थी तब वो एक शरीफ घरेलु हाउसवाइफ थी पर बचपन से उसके अंदर की दबी इच्छाए आज उस पर इस कदर हावी हो चुकी थी की उसने एक बाप बेटे के साथ एक साथ एक साथ सेक्स करने को भी आज जस्टिफाई ठहरा दिया था वो भी इस तर्क के साथ की बस कुछ hi घंटे की तो बात है अगर वो एन्जॉय कर लेगी तो क्या हो जाएगा. पर ये सवाल मई आप लोगो से पूछता हु की गरिमा हवस और वासना के जिस रास्ते पर इतनी आगे निकल आई है क्या वो यहाँ से जाने के बाद अपनी पुराणी लाइफ में लौट पाएगी क्या इतना आसान होगा सब कुछ भूल कर वापस से घर गृहस्थी में सेटल हो जाना, खुद विचार कीजिये क्या उसके अंदर की ठरकी हाउसवाइफ बस इन कुछ घंटो के एन्जॉयमेंट के बाद फुल्ली सटिस्फी होकर शांत होकर बैठ जाएगी, या फिर ये तो बस शुरुआत है गरिमा की असल कहानी तो यहाँ से जाने के बाद शुरू होगी. ये फैसला मई आप लोगो पर छोड़ता खुद विचार करे की गरिमा का यहाँ से जाने के बाद फ्यूचर क्या होने वाला है.

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किचन में ुए वासनापूर्ण माहौल में गरिमा उन बाप बेटो के बीच ऐसे कड़ी थी जैसे सैंडविच में दो ब्रेड के बीच ालो. अचानक बिहारी काका ने उसके होंठो आज़ाद कर दिया और एक कदम पीछे हैट गए.

काका: सुनो बहुत दिन तुम हमारे हाथ का बना खा चुकी, अब जरा जाने से पहले अपना औरत का फ़र्ज़ निभाओ और पति और अपने बेटे को अपने हाथ से बना के खाना खिलाओ. तबाही आज हम कुछ नहीं बनाए क्युकी आज का खाना तुम बनाओगी. आता मादा रखा सब्जी कटी राखी बस तुम्हे बनाना है. बोलो बनाओगी न हमारे लिए.

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गरिमा ने जवाब में हां में सर हिला दिया.

काका: चल बीटा छोड़ दे अपनी अम्मा को अब जे हमारे लिए खाना बनाएगी. पगले हम इसके हाथ का बना खाना खाएंगे और फिर खाने के बाद की मिठाई में इसे खाएंगे.

अपने बाप के केन्ने पर जीतू ने भी गरिमा को छोड़ दिया और अब तक गरिमा के सामने हाथ जोड़ कर खड़े रहने वाले बाप बेटे सीना तान कर मुस्कुराते हुए कमरे से बहार निकल गए. गरिमा कुछ देर कड़ी यही सोचती रही की ये अचानक हुआ क्या एकदम से वक़्त बदल दिया हालत बदल दिया जज़्बात बदल दिया. पर इसे भी एक नया एक्सपीरियंस मानकर वो गैस की तरफ बाद गई. उसने एक बहार की तरफ देखा देखा तो काका और जीतू बहार दिंनिंग तबेल के पास कुर्सी में बैठकर दिंनिंग तबेल में पेअर रख कर बैठे गरिमा को देख कर मुस्कुरा रहे थे जैसे वो इस घर के मालिक हो और गरिमा उनके यहाँ की कामवाली. पर गरिमा भी उनका ये व्यवहार देख कर मुस्कुरा दी और उनकी तरफ पीठ करके खाना बनाने लगी.

गरिमा उन दोनों की तरफ पीठ करके रोटियां बेल रही थी की अचानक उसे अपने दोनों कूल्हों पर दो हाथ महसूस हुए. वो समझ गई की ये या तो काका है या उनका बीटा जीतू. वो दोनों हाथ गरिमा के दोनों मोठे कूल्हों को पेटीकोट के ऊपर से हु मसल और रगड़ रहे थे. गरिमा ने पीछे घूमकर भी नहीं देखा की ये काका है जीतू, वो वैसे hi अपना काम करती रही. अचानक एक तीसरा हाथ उसका सीने की तरफ आया और उसने उसके सीने पर पड़ा साडी का पल्लू खींचकर नीचे सरका दिया और एक चौथे हाथ ने उस नीचे सरक चुकी साडी को उसकी कमर से खींच कर बहार निकल दिया. अब क्लियर था की जीतू और काका दोनों hi वापस आकर उसके बदन से खेल रहे थे. उसके दाई तरफ जीतू खड़ा था और बाई तरफ उसके पिता बिहारी kaka.Jeetu का एक हाथ गरिमा के दे कूल्हे पर था और दूसरा उसके सीने पर और अब उसकी साडी का पल्लू सरकने के बाद जीतू का हाथ उसके ब्लाउज के स्तनों के बीच की दरार के खुले हुए हिस्से से अंदर दाखिल होने के लिए जगह बनाने लगा और दूसरी तरफ बिहारी काका एक हाथ से गरिमा की गांड सेहला रहे थे और उनका दूसरा हाथ गरिमा के पेटीकोट को ऊपर और ऊपर उठाने लगा. गरिमा की सासे तेज़ तेज़ ऊपर नीचे हो रही थी. पर वो अब भी अपने काम में लगी थी.

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गरिमा का ब्लाउज बेहद टाइट था पर जीतू का हाथ तो हर कीमत पर उसके अंदर दाखिल होना चाहता था. ऐसे में उस सस्ते पुराने ब्लाउज के बटन कितनी देर संघर्ष करते, आखिरकार ऊपर वाले बटन ने हार मान ली और जैसे जैसे जीतू का हाथ आगे बड़ा दूसरा बटन पक्क से टूट कर अलग हो गया. अब गरिमा का ब्लाउज का ब्लाउज सिर्फ एक बटन के सहारे गरिमा के सीने से टिका हुआ था. और दो बटन खुल जाने से गरिमा के आधे से ज्यादा दूध बेपर्दा हो चुके थे और जीतू के खुरदुरे हाथ गरिमा के मोठे मोठे चिकने चिकने उभारो को यहाँ वह रगड़ रहे थे.

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दूसरी तरफ बिहारी काका भी अपने बेटे के सुर में सुर मिला रहे थे और गरिमा का पेटीकोट ऊपर करते करते वो गरिमा की जांघो के मुहाने तक पहुंच चुके थे जहा से गरिमा की छूट उनके हाथ से बस इंच भर के फासले पर थी. और जल्द hi उन्होंने वो फासला भी ख़तम कर दिया और उनकी फूकिंग फिंगर गरिमा की छूट के दाने तक पहुंच कर उसे रगड़ने लगी. इस पल पर आखिरकार गरिमा का ध्यान खाने से हैट hi गया और वासना के आवेश में उसकी आँखे बंद हो गई. जीतू ने अपने हाथ को थोड़ा और झटका दिया और इस झटके के साथ hi गरिमा के ब्लाउज का वो आखिरी बटन खुल कर अलग हो गया. उस आखिरी बटन के खुलते गरिमा दोनों कबूतर कपड़ो की कैद से पूरी तरह आज़ाद हो गए. जीतू गरिमा की बगल से सामने आकर अपना चेहरा गरिमा के स्तनों के करीब लेकर उनसे आती महक सूंघने लगा.

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जीतू: मम्मी गांव में इतनी गई भैस बकरियों का दूध निकला है और पिया है पर जो दूध की मस्त महक आपकी चूचियों से आ रही है वो कही नहीं. मन करता है इन्हे मुँह में भरकर इनके अंदर का सारा दूध पि लू.

गरिमा जीतू की कामुक बाते सुनकर अंदर hi अंदर उत्तेजित हो रही थी और नीचे बिहारी काका की उंगली भी इस उत्तेजना को और बड़ा रही थी.

बिहारी काका: अरे बीटा जब वो मेरी बीवी हो तेरी तो अम्मा hi हुई न और बच्चा अपनी अम्मा के दूध नहीं पियेगा तो क्या पड़ोसन के पियेगा.

जीतू: पर बापू अम्मा तो ये कल रात hi बानी है पहले तो मैडम थी. और अब तक इन्होने मुझे प्यार से बीटा भी नहीं कहा है तो कैसे मान लू की ये मेरी अम्मा है.

बिहारी काका: अगर ऐसा है तो अपनी अम्मा से hi पूछ ले की क्या वो तुझे अपना दूध पिलाएंगी.

जीतू: नहीं बापू मई कुछ नहीं पूछूंगा न hi खुद से पियूँगा अगर ये मेरी अम्मा है तो खुद से मेरा सर अपनी चूचियों से लगाकर अपने ये मोठे मोठे दूध मेरे मुँह में डाले तभी मई इनका दूध पियुगा.

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गरिमा का तो उत्तेजना के मारे बुरा हाल हो रहा था, उसने बिना देर किये जीतू का चेहरा अपने स्तनों में भींच लिया और अपना एक स्तन पकड़कर जीतू के खुले मुँह में दाल दिया. जीतू ने भी ख़ुशी ख़ुशी गरिमा की कमर के इर्द गिर्द अपनी बाहे दाल कर खुद कोबगेरिमा से चिपका लिया और मुँह चला चला कर गरिमा की स्तनों को चूसने लगा. हलाकि गरिमा की छाती से दूध तो वैसे भी नहीं आ रहा था पर जीतू तो उन्हें ऐसे hi चूस रहा था जैसे उनसे ढेरो दूध निकल रहा हो.

बिहारी काका: वाह पहले तुम हमरी बीवी बानी बाद में इसकी अम्मा पर बेटे ने तुमसे दूध माँगा तो तुरंत उसे अपनी छाती से चिपका लिया कुछ अपने इस पति का भी ख्याल करो.

गरिमा: तो दूसरी तरफ का खुला है आप भी आ जाइये.

बिहारी काका: छह दूध तो बच्चा पीटा है अपनी अम्मा का पति तो अपनी बीवी का कुछ और पीटा है.

गरिमा: और वो कुछ और क्या है भला.

बिहारी काका: प्रेमरस जो औरत की जांघो के बीच बने छेड़ से निकलता है. हमे तो तुम्हारा प्रेमरस पीना है.

गरिमा: तो मैंने क्या रोक रखा है आपका. पर इसके लिए तो आपको मेरे सामने घुटनो पर आना होगा.

बिहारी काका गरिमा का पेटीकोट छोड़कर उसके सामने घुटनो के बल बैठ गए. वासना की आग में जल रही गरिमा ने भी अपना पेटीकोट खुद से ऊपर उठा कर अपनी एक तंग काका के कंधे से पीछे की तरफ लटका और अपने पेटीकोट से काका को पूरी तरह धक् लिया. अब बिहारी काका गरिमा के पेटीकोट के अंदर थे और गरिमा की फूली हुई छूट बिहारी काका के चेहरे के ठीक सामने थी. काका गरिमा की छूट की कामुकता को अपलक निहार रहे थे. अचानक उन्हें अपने सर के पीछे गरिमा के हाथो का दबाव महसूस हुआ. गरिमा ने अपने हाथो का दबाव डालकर उनका चेहरा अपनी छूट में दबा दिया. बिहारी काका अपने होंठ गरिमा की छूट पर यहाँ वह रगड़ रहे थे. गरिमा की झांट के हलके हलके बाल काका के चेहरे पर यहाँ वह रगड़ रहे थे और काका की दादी के सफ़ेद घने बाल गरिमा की नंगी जांघो पर यहाँ वह घिस रहे थे. गरिमा की छूट से आती मादक सुगंध ने काका को दीवाना कर दिया था.

बिहारी काका: गरिमा जी आपके प्रेमरस की सुगंध hi इतनी मादक है की मेरा हथियार धोती के अंदर कुलाचे भर रहा है सोच रहा हु इसका स्वाद कितना नशीला होगा.

गरिमा: जीतू के बापू आप न सोचते ज्यादा हो करते कम. आपसे तेज़ तो आपका बीटा है देखो कितने अच्छे बच्चे की तरह मेरा दूध पी रहा और आप अभी तक सूंघने में hi लगे पड़े हो.

इतना सुन्ना भर था की बिहारी काका ने अपनी जीभ गरिमा की छूट के अंदर दाखिल करदी. अचानक हुई इस हरकत से गरिमा की जांघो का कसाव बाद गया और काका का सर गरिमा की जांघो के बीच डाब गया. उत्तेजना के मारे गरिमा ने एक हाथ से जीतू के बाल कास कर पकड़ लिए और उसका चेहरा ज़ोर ज़ोर से अपने उभारो पर रगड़ने लगे और दुसरे हाथ से पेटीकोट के ऊपर से hi बिहारी का सर पर पीछे से दबाव डालने लगी ताकि वो और ज्यादा गहराई तक अपनी जीभ डालकर गरिमा की छूट को अंदर तक चाट सके.

गैस तो फिलहाल फालतू hi जल रही थी क्युकी न इस वक़्त गरिमा को खाना बनाने में इंटरेस्ट था न उन बाप बेटे को खाना बनवाने में.

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18 साल के बेटे ने गरिमा के दूध और 52 साल के बाप ने गरिमा की छूट चूस और चाट कर hi गरिमा को झड़ने के करीब पंहुचा दिया था. गरिमा की उखड़ती सासो को महसूस कर जीतू ने गरिमा के स्तनों को और तेज़ चूसना शुरू कर दिया. उसने एक नज़र गरिमा के चेहरे को देखा, गरिमा आँखे बंद करे वह कड़ी थी और उसके होंठ थरथरा रहे थे. जीतू ने अपना चेहरा आगे करके अपने होंठ गरिमा के कपकपकते होंठो पर रख दिए और बड़े पैशनेट तरीके गरिमा के होंठो को किश करने लगा. गरिमा भी उसका पूरा साथ दे रही थी. काका भी गरिमा के पेटीकोट के अंदर अपने काम में तन्मयता से लगे थे उन्हें अब एहसास हो गया था की गरिमा अब झड़ने के बेहद करीब है.

किचन में भरपूर वासना का माहौल बन चूका था गरिमा अपने चरमसुख बेहद करीब थी की तभी एक भरी भरकम आवाज़ ने उस माहौल को में रंग में भांग दाल दिया.

" ये क्या हो रहा है "

इस अचानक किचन के बाहर से आई आवाज़ से गरिमा जीतू और बिहारी काका तीनो अपनी सेंस में वापस आए और चैन रिएक्शन की तरह उन तीनो के चेहरे उस आवाज़ की दिशा में घूम गए. और जब उनकी नज़रे उस आवाज़ के मालिक पर पड़ी तो जीतू और बिहारी काका हड़बड़ा कर गरिमा से परे हैट गए और गरिमा के चेहरे की भी हवइया उड़ गई.

और तीनो के मुँह से एक साथ एक सुर में एक hi नाम निकला........

" हरिया "

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भाई बहुत बहुत शुक्रिया अगर आप कम कमेंट करते है फिर भी आपने मेरी स्टोरी पर कमेंट करा. सच कहु विनीता part तो इस स्टोरी की सोल यानि आत्मा है पुरु स्टोरी hi उस part के इर्द गिर्द घूम रही है. और उस स्टोरी को लिखने में मज़ा भी आता है क्युकी उसमे मुझे काफी रिसर्च करनी पड़ती है. शायद जो मेरे रीडर्स है वो ग्रीक गोड्स के बारे में इतना नहीं जानते होंगे जितना मैंने यहाँ ग्रीक गोड्स एरेस, पोसिडों, ज़ीउस, क्रोनस, एफ्रोडाइट इन सबको एक्सप्लेन करा है. अगर कभी आप नेट पर उनके बारे में पदों तब आपको पता चलेगा मैंने उनकी पसंद नापसंद उनकी लाइफस्टाइल के अकॉर्डिंग किस तरह सेक्सुअल एंड थ्रिलिंग मिक्स्ड टच देकर विनीता के अपडेट लिखे है.

और ऊपर से अनुष्का थे ब्यूटी उसकी ब्यूटी एंड बॉडी का तो कोई जोड़ hi नहीं hai.Ab विनीता की स्टोरी भी अपने फुनले तक आ गई है कोशिश करूँगा उसका ग्रैंड फिनाले ज़बरदस्त दू.
 
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लखन सिंह उस सफ़ेद कबूतर का काफी दूर तक पीछा करते करते एक मेले तक ले आया जहा कई दुकाने लगी थी जहा औरतो के साज श्रृंगार की अलग अलग दुकाने लगी थी. पर उन दुकानों की ख़ास बात ये थी की हर दूकान अलग अलग सामान की थी पर उस दूकान पर केवल एक तरह का सामान hi मिल रहा था. जैसे काजल की दूकान पर सिर्फ और सिर्फ काजल hi था, लिपस्टिक की दूकान पर तरह तरह के रंगो की लिपस्टिक hi थी, नेल पोलिश की दूकान पर केवल नेल पोलिश मिल रही थी इनके अलावा bindi,saree,sindoor, पाउडर, इनर wear(bra), इनर wear(panty),chppal, ऑय शैडो, दर्पण, सुंगधित इत्र, तरह तरह के हेयर आयल, फेस पैक, क्रीम्स, गालो की laali,yaha तक की साबुन की भी दुकाने थे. लखन सिंह को समझ नहीं आ रहा था की यहाँ इस मेले में उन्हें करना क्या है.

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वो ये सब सोच hi रहे थे की तभी छोटा सा लड़का भागता हुआ आया और लखन जी को एक पत्र थमा कर वापस भाग गया. लखन जी ने उसे पीछे से आवाज़ दी पर वो पल में उनकी आँखों से ओझिल हो गया. लखन जी ने वो पत्र खोला जिसमे अघोरी का एक और सन्देश लिखा था.

" लखन जी अगर ये पत्र आपको मिल चूका है मतलब आप उस कबूतर का पीछा करते करते इस मेले तक पहुंच गए है जहा केवल औरतो के साज सृंगार की hi दुकाने लगी है वो भी अलग अलग वस्तुओ की. हर दूकान में सामान बेचने के लिए एक एक महिला कड़ी है, और हर महिला के पास एक नक्शा है पर उन सब नक्शो में से केवल एक नक्शा सही है बाकि सब गलत और उस सही नक़्शे में उस भवन का पता है जहा आज की वीनस पूजा के आगे के चरण पुरे होने है. विनीता जी भी आपको वही मिलेंगी. इस मेले से एक बार में केवल एक चीज़ hi ले सकते है और जिस भी दूकान से आप कोई वास्तु लेंगे उस दूकान की महिला आपको एक नक्शा देगी और नक़्शे के सहारे आपको आगे का सफर पूरा करना है. अब अगर आपको सही नक्शा मिला तो आप अपनी मंज़िल तक पहुंच जाएंगे और अगर आप गलत दूकान पर गए तो आप एक गलत जगह पहुंच जाएंगे और आपको दुबारा वापस आकर फिर से इस प्रक्रिया को दोहराना है जब तक की आपको सही नक्शा न मिल जाए. और ध्यान रहे इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपके पास केवल सूर्यास्त तक का समय है. अगर सूर्यास्त तक आप उस भवन तक नहीं पहुंचे तो ये साड़ी दुकाने हैट जाएंगी और आपकी आज की पूजा भांग हो जाएगी. पर अब ये सोच रहे होंगे की वो सही नक्शा इन सब दुकानों में से किस दूकान की महिला के पास है तो सही उत्तर उसी पत्र में था जो आपको शुरुआत में दिया गया था और कहा गया था की इसे बेहद ध्यान से पढ़िए. अब उसी पत्र को ध्यान करिये और सोचिये स्त्री के श्रृंगार की वो कौन सी वास्तु है जो देवी एफ्रोडाइट को सबसे अधिक प्रिय है. आशा है आप सही चुनाव करे और सरलता से अपनी मंज़िल तक पहुंच जाए. शुभकामनाए. "

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नहीं भाई फिलहाल के लिए तो तिरंगी बर्फी पंचमेल फिर कभी देखेंगे थैंक्स फॉर क्रिएटेड थे ईद फॉर थिस स्टोरी. ख्वाहिश करूँगा वैसे इस स्टोरी में hi इतने सारे किरदार है की हर किरदार पर एक एक अलग सरोरी लिखी जा सकती है और यही मेरा प्लान है सबको अपनी अपनी एक स्टोरी देना. बिलकुल भाई नोट्स और गूगल सर्च दोनों बहुत करा एंड शुक्रिया इसे अप्प्रेसियते करने के लिए एंड डेफिनेटली मेरा प्रयास होगा एफ्रोडाइट वीनस पूजा का ये आखिरी चरण भी लॉजिकल इरोटिक एंड अनुषकाफुल्ल हो. बिकॉज़ ु लव अनुष्का.
 
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