- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 84,650
कमरे से निकलकर नेहा सीधा विक्रम के कमरे में जा पहुंची. विक्रम कमरे में hi पुशअप्स मार रहा था. नेहा को सामने खड़ा देख वो एकदम हड़बड़ा कर खड़ा हो गया.
विक्रम: तुम यहाँ, कल रात मैंने तुम्हे कह दिया था न की मई अब तुम्हारे पास कभी नहीं आऊंगा फिर सुबह होते hi तुम फिर मेरे पास आ गई.
नेहा गुस्से में: ोोोू ओह hello मुझे भी कोई शौक नहीं तुम्हारे पास आने का पर जो तुमने खुद को सही दिखाकर और मेरी फ्रेंड की नज़रो में मुझे बुरा बनाकर जो गेम खेला है न तो तुम्हे भी आईने में तुम्हारा चेहरा दिखाना ज़रूरी था.
नेहा की आवाज़ काफी तेज़ थी और विक्रम नहीं चाहता था की कोई उनकी बाते सुन ले.
देखो धीमे बात करो मई नहीं चाहता यहाँ कोई तमाशा हो.
नेहा: मई भी यहाँ कोई तमाशा करने नहीं आई हु बस अपने कुछ सवालो के जवाब मांगने आई हु उसके बाद मई अपने रास्ते तुम अपने रास्ते.
विक्रम: ठीक है तुम्हे बात hi करनी है न तो चलो ऊपर छत पर चलो वह हमारी बाते कोई नहीं सुन पाएगा.
नेहा: ठीक है चलो छत पर चलो.
विक्रम ने कमरे के बहार देखा और जब आस पास कोई नहीं था तो नेहा को लेकर ऊपर छत की ततफ निकल गया. छत पर पहुंच कर विक्रम ने जीने का दरवाज़ा बंद कर लिया ताकि कोई अचानक से ऊपर न आ जाए.
विक्रम: हम्म अब बोलो क्या पूछना है तुम्हे. कौनसा आइना दिखाना है तुम्हे मुझे. मेरे साथ फ्लिर्टिंग पहले तुमने शुरू करि और एक्ससिटेमेंट में मई भी थोड़ा बहक गया पर शुरुआत तुम्हारी तरफ से हुई थी.
नेहा: अच्छा साली जीजा की हलकी फुलकी फ्लिर्टिंग तुम्हे सेक्स का सिग्नल लग गई और एक्ससिटेमेंट में तुम इतना आगे बाद गए की मेरे साथ वो स्ट्रेंजर और स्लेव वाला खेल खेलने लगे.
विक्रम: आधी रात को अपनी सहेली के पति के पास बिना कपड़ो के जाना और अपने बदन की नुमाइश करके उसे सडके करना तुम्हे जीजा साली की हलकी फुलकी फ्लिर्टिंग लगता है. उस रात तुम आई थी मेरे पास या मई गया था. बोलो जवाब दो बोलती बंद हो गई.
नेहा: भला मेरी बोलती क्यों बंद होगी जबकि मई वह खुद से नहीं आई थी मुझे तुमने बुलाया था.
विक्रम: मैंने बुलाया तुम्हारा दिमाग ख़राब है भला मई तुम्हे क्यों बुलाऊंगा, मैंने कब कहा था तुम्हे आने को.
नेहा: अच्छा और उस रात से पहले से जो मेरे साथ स्ट्रेंजर का नक़ाब पहनकर जो बड़सम का खेल खेला वो सब भी भूल गए. पहले मुझे दुल्हन की ड्रेस में उस कॉटेज में बुलाया और फिर मुझे नंगा करके गले में कुत्ते का पत्ता डालकर अपनी स्लेव बनाकर घुमाया. अगली रात में मुझे एक कॉलगर्ल के ड्रेससुप में बुलाया और न जाने किस किस तरह से मेरे साथ उन्नातुराल सेक्स करा और फिर उस रात तुमने मुझे पूरी तरह नंगा होकर उस तालाब के पास आने को कहा.
विक्रम: अरे ु आउट ऑफ़ योर मंद, ये क्या जनाब शनाब बक रही हो कौन स्ट्रेंजर कौनसा बड़सम गेम दिमाग ख़राब हो गया है क्या. न मैंने तुम्हे कभी दुल्हन के लिबाज़ में बुलाया न कॉलगर्ल के और न उस रात मुझे तो लगता है तुम सच में शहर में हाई सोसाइटी कॉलगर्ल का धंदा करती होगी. पेशे से hi धनदेवाली होगी यहाँ मुझे पैसे वाला देखा तो मुझे फ़साने के लिए अलग अलग हथकंडे अपनाने लगी.
नेहा का पारा भी हाई हो गया और उसने खींचकर एक झापड़ विक्रम के गाल पर रसीद कर दिया. विक्रम ने रिएक्शन में अपना हाथ उठाया पर कुछ सोचकर रुक गया.
विक्रम: उठाने को तो मई भी हाथ उठा सकता हु पर एक तो तुम एक लड़की हो और यहाँ मेरी बीवी की मेहमान बन कर आई हो इसलिए मई इस बात को आगे नहीं बढ़ाना चाहता.
नेहा: तुम्हारे न मैंने से सच झूट नहीं हो जाएगा तुम्हारा उस तालाब के किनारे बना कॉटेज भरा पड़ा है बड़सम के सामन से जहा दो रात तुमने मेरा साथ एन्जॉय करा.
विक्रम: देखो न मैंने से अगर सच झूट नहीं होता तो कुछ भी बोल देने भर से झूट भी सच नहीं हो जाएगा. और उस कॉटेज की बात कर रही हो न चलो अभी चलो मेरे साथ उस कॉटेज में दिखाओ क्या है वह.
विक्रम गुस्से में जीने का दरवाज़ा खोलकर नीचे उतरके हवेली से बहार आकर उस कॉटेज की तरफ चल दिया. नेहा भी इधर उधर देखकर सबसे नज़रे बचाकर विक्रम के पीछे पीछे उस कॉटेज की तरफ चल दी. दोनों बिना किसी नज़रो में आए उस आम के बाघ से होते हुए तालाब के पीछे बने उस कॉटेज पर पहुंच गए. विक्रम ने आगे बाद कर उस कॉटेज का दरवाज़ा खोल दिया.
विक्रम: जाओ और अंदर जाकर दिखाओ कौनसा बड़सम का सामान रखा है अंदर.
नेहा भी तेज़ कदमो से कॉटेज के अंदर दाखिल हुई पर अंदर का नज़ारा देख कर हैरान हो गई अंदर का सेन एकदम चेंज था न वह कोई डिस्को लाइट था न कोई पोल्ल जिसमे उसने पोल्ल डांस करा था न कमरे में कोई चैन लटक रही थी जिसमे उसे हैंडकफ्फ्स करके बंधा गया था. नेहा ने वो दीवार देखि जहा वाल डिलडो लगा था अब वो दीवार एकदम सपाट थी वह कोई डिलडो नहीं लगा था. वह न उसे वो डिलडो चेयर दिखी जिसमे उसे बिठाया गया था न कही वो फ्लोर पिल्लोरी थी जिसमे उसे दोगी पोजीशन में बंधा गया था. है वो लकड़ी की अलमारी वही राखी जिसमे उस रात तरह तरह के बड़सम का सामान था गले का पत्ता हैंडकफ्फ्स ब्लैंडफोल्ड बेल्ट डिलडो पिन मोमबत्ती. नेहा ने बिना देर किये वो अलमारी खोली पर वो अलमारी पूरी तरह खली थी वह बड़सम का सामान तो दूर एक पिन भी नहीं थी.
नेहा: वो सब सामान यही था यही पर था, यहाँ डिस्को लाइट लगी थी और एक पोल्ल लगा था जिसमे मैंने पोल्ल डांस करा था, वह दीवार पर एक डिलडो लगा था, इस अलमारी में बड़सम का बहुत सारा सामान था. ज़रूर तुमने हटा दिया है वो सब.
विक्रम: देखो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा तुम क्या कह रही हो. पर ये कॉटेज मेरे लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट है क्युकी यही मेरी और शोभा की मैरिड लाइफ की शुरुआत होने वाली है यही हमारी सुहागरात होने वाली है.
नेहा: ओह तो इसीलिए यहाँ से सारा सामान हटा दिया. बहुत बड़े धोकेबाज़ इंसान हो जो लड़की तुम्हारे साथ साडी ज़िन्दगी जीने वाली है उसे क्या खूब धोका दे रहे हो.
विक्रम: मंटा हु गलत करा है मैंने पर विक्रम धोकेबाज़ नहीं है पहले मैंने जो करा सो करा वो शादी से पहले की बात थी पर शादी हो जाने के बाद तुम्हारे साथ जो कुछ हुआ वो गलत था और मई इस गलती की माफ़ी मांगे बिना अपनी नै लाइफ की शुरुआत नहीं करूँगा. मई पहले शोभा को सब सच बताऊंगा उससे माफ़ी मांगूंगा उसके बाद ये उसका डिसिशन होगा की उसे मेरे साथ रहना है या नहीं.
इतना कहकर विक्रम ने अपनी जेब से एक चिट्ठी निकलकर नेहा की तरफ बड़ा दी. नेहा ने वो चिट्ठी लेकर पड़ना शुरू कर दिया. वो चिट्ठी शोभा के लिए थी.
विक्रम की चिट्ठी: शोभा मई जनता हु तुमने बचपन से मुझे प्यार करा सच्चा प्यार करा पर शायद मई इस प्यार के लायक नहीं हु शादी से पहले कई लड़कियों से मेरे अफेयर्स रहे है और शायद ऐसा करके मई खुद को स्टड शो करता था. पर वो सब शादी से पहले की बात थी पर तुमसे शादी होने के बाद भी मुझसे एक गलती हो गई, शादी में आई एक लड़की की तरफ में अट्रैक्ट हो गया और मेरे और उसके बीच रिलेशन बन गया हम दोनों इंटिमेट हो गए. पर सच बोल रहा हु अब मुझे दिल से इस बात का पछतावा हो रहा है. मई अब तक एक डिसलोयाल इंसान रहा हु पर मई तुमसे वडा करता हु की अगर आज तुमने मेरा साथ दिया तुम्हे एक परफेक्ट लॉयल हस्बैंड बन कर दिखाऊंगा. मई तुम्हे उस लड़की का नाम बताकर उस लड़की की लाइफ में कोई प्रॉब्लम क्रिएट नहीं करना चाहता ये समझ लो जो भी गलती थी वो मेरी थी और मई हमारे नए रिश्ते की शुरुआत एक गलती के साथ नहीं करना चाहता था इसलिए ये शुरुआत इस माफ़ी के साथ कर रहा हु. ये बात शायद मई तुमसे खुद से न कह पाव इसलिए ये सब इस चिट्ठी में लिख रहा हु. अगर तुम मुझे मेरी इस गलती के लिए माफ़ कर सकती हो तो मई खुद को दुनिया का सबसे लकी इंसान समझूंगा की मुझे तुम अस ा वाइफ मिली पर अगर तुम मुझे माफ़ न करते हुए भी इस रिश्ते को हमेशा हमेशा के लिए ख़तम कर देती हो तो भी मई यही समझूंगा की शायद मेरी गलती की यही सजा था. पर उसके बाद भी मई लिफेलॉन्ग तुम्हे hi प्यार करूँगा क्युकी जनता हु तुम्हे मुझसे अच्छा कोई भी मिल जाएगा पर साला मुझे तुमसे अच्छी कोई नहीं मिलने वाली.
तुम्हारा और सिर्फ तुम्हारा विक्रम
नेहा ने वो चिट्ठी पूरी पडली. और विक्रम ने वो चिट्ठी वापस लेकर अपनी जेब में रख ली.
विक्रम: देखो मई तुम्हारे करैक्टर को जज नहीं करना चाहता ऊपर छत में मैंने जो कहा वो सब हीट ऑफ़ थे मूवमेंट में बक दिया. तुम चाहो तो मुझे और झापड़ मार लो पर प्लीज मेरी शोभा की लाइफ में और कोई प्रॉब्लम क्रिएट मत करो प्लीज. आगे तुम्हे जो ठीक लगे तुम वो करो.
इतना बोलकर विक्रम नेहा को वही खड़ा छोड़ कर उस कॉटेज से बहार निकल गया. नेहा को समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट करे. उसका दिल कह रहा था की विक्रम सच बोल रहा है पर दिमाग ये सब मैंने को तैयार नहीं था. यही सब सोचते सोचते नेहा वापस अपने कमरे में आ गई.
शबाना: क्या हुआ बात हो गई तुम्हारी विक्रम से.
नेहा: हम्म हो गई
शबाना: तो सब कुछ ख़तम कर लिया न तुम दोनों ने अपने बीच.
नेहा है में सर हिलाते hue:Hmm
शबाना ने आगे बाद कर नेहा को गले से लगा लिया: That's लिखे माय डार्लिंग नेहा मई जानती हु मेरी नेहा दिल की बुरी नहीं है बस उसकी वाइल्ड फैंटसीज थोड़ी आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो जाती है इन पर थोड़ा कण्ट्रोल करो.
नेहा: हम्म
नेहा ने शबाना की बात के जवाब में हामी तो भर दी थी पर उसके दिमाग में अब भी यही बात चल रही थी की अगर विक्रम सच बोल रहा है और विक्रम वो स्ट्रेंजर नहीं है तो फिर वो था कौन और विक्रम से मिलने के बाद से वो कहा गायब हो गया न उसने दुबारा कोई टास्क दिया न खुद से सामने आया. नेहा ने थान लिया था की हर कीमत पर यहाँ से जाने से पहले उस स्ट्रेंजर के रहस्य से पर्दा उठाना है. देखना था वो ये सब कैसे करने वाली थी और कौन था वो स्ट्रेंजर और क्या था उसका गेम.
विक्रम: तुम यहाँ, कल रात मैंने तुम्हे कह दिया था न की मई अब तुम्हारे पास कभी नहीं आऊंगा फिर सुबह होते hi तुम फिर मेरे पास आ गई.
नेहा गुस्से में: ोोोू ओह hello मुझे भी कोई शौक नहीं तुम्हारे पास आने का पर जो तुमने खुद को सही दिखाकर और मेरी फ्रेंड की नज़रो में मुझे बुरा बनाकर जो गेम खेला है न तो तुम्हे भी आईने में तुम्हारा चेहरा दिखाना ज़रूरी था.
नेहा की आवाज़ काफी तेज़ थी और विक्रम नहीं चाहता था की कोई उनकी बाते सुन ले.
देखो धीमे बात करो मई नहीं चाहता यहाँ कोई तमाशा हो.
नेहा: मई भी यहाँ कोई तमाशा करने नहीं आई हु बस अपने कुछ सवालो के जवाब मांगने आई हु उसके बाद मई अपने रास्ते तुम अपने रास्ते.
विक्रम: ठीक है तुम्हे बात hi करनी है न तो चलो ऊपर छत पर चलो वह हमारी बाते कोई नहीं सुन पाएगा.
नेहा: ठीक है चलो छत पर चलो.
विक्रम ने कमरे के बहार देखा और जब आस पास कोई नहीं था तो नेहा को लेकर ऊपर छत की ततफ निकल गया. छत पर पहुंच कर विक्रम ने जीने का दरवाज़ा बंद कर लिया ताकि कोई अचानक से ऊपर न आ जाए.
विक्रम: हम्म अब बोलो क्या पूछना है तुम्हे. कौनसा आइना दिखाना है तुम्हे मुझे. मेरे साथ फ्लिर्टिंग पहले तुमने शुरू करि और एक्ससिटेमेंट में मई भी थोड़ा बहक गया पर शुरुआत तुम्हारी तरफ से हुई थी.
नेहा: अच्छा साली जीजा की हलकी फुलकी फ्लिर्टिंग तुम्हे सेक्स का सिग्नल लग गई और एक्ससिटेमेंट में तुम इतना आगे बाद गए की मेरे साथ वो स्ट्रेंजर और स्लेव वाला खेल खेलने लगे.
विक्रम: आधी रात को अपनी सहेली के पति के पास बिना कपड़ो के जाना और अपने बदन की नुमाइश करके उसे सडके करना तुम्हे जीजा साली की हलकी फुलकी फ्लिर्टिंग लगता है. उस रात तुम आई थी मेरे पास या मई गया था. बोलो जवाब दो बोलती बंद हो गई.
नेहा: भला मेरी बोलती क्यों बंद होगी जबकि मई वह खुद से नहीं आई थी मुझे तुमने बुलाया था.
विक्रम: मैंने बुलाया तुम्हारा दिमाग ख़राब है भला मई तुम्हे क्यों बुलाऊंगा, मैंने कब कहा था तुम्हे आने को.
नेहा: अच्छा और उस रात से पहले से जो मेरे साथ स्ट्रेंजर का नक़ाब पहनकर जो बड़सम का खेल खेला वो सब भी भूल गए. पहले मुझे दुल्हन की ड्रेस में उस कॉटेज में बुलाया और फिर मुझे नंगा करके गले में कुत्ते का पत्ता डालकर अपनी स्लेव बनाकर घुमाया. अगली रात में मुझे एक कॉलगर्ल के ड्रेससुप में बुलाया और न जाने किस किस तरह से मेरे साथ उन्नातुराल सेक्स करा और फिर उस रात तुमने मुझे पूरी तरह नंगा होकर उस तालाब के पास आने को कहा.
विक्रम: अरे ु आउट ऑफ़ योर मंद, ये क्या जनाब शनाब बक रही हो कौन स्ट्रेंजर कौनसा बड़सम गेम दिमाग ख़राब हो गया है क्या. न मैंने तुम्हे कभी दुल्हन के लिबाज़ में बुलाया न कॉलगर्ल के और न उस रात मुझे तो लगता है तुम सच में शहर में हाई सोसाइटी कॉलगर्ल का धंदा करती होगी. पेशे से hi धनदेवाली होगी यहाँ मुझे पैसे वाला देखा तो मुझे फ़साने के लिए अलग अलग हथकंडे अपनाने लगी.
नेहा का पारा भी हाई हो गया और उसने खींचकर एक झापड़ विक्रम के गाल पर रसीद कर दिया. विक्रम ने रिएक्शन में अपना हाथ उठाया पर कुछ सोचकर रुक गया.
विक्रम: उठाने को तो मई भी हाथ उठा सकता हु पर एक तो तुम एक लड़की हो और यहाँ मेरी बीवी की मेहमान बन कर आई हो इसलिए मई इस बात को आगे नहीं बढ़ाना चाहता.
नेहा: तुम्हारे न मैंने से सच झूट नहीं हो जाएगा तुम्हारा उस तालाब के किनारे बना कॉटेज भरा पड़ा है बड़सम के सामन से जहा दो रात तुमने मेरा साथ एन्जॉय करा.
विक्रम: देखो न मैंने से अगर सच झूट नहीं होता तो कुछ भी बोल देने भर से झूट भी सच नहीं हो जाएगा. और उस कॉटेज की बात कर रही हो न चलो अभी चलो मेरे साथ उस कॉटेज में दिखाओ क्या है वह.
विक्रम गुस्से में जीने का दरवाज़ा खोलकर नीचे उतरके हवेली से बहार आकर उस कॉटेज की तरफ चल दिया. नेहा भी इधर उधर देखकर सबसे नज़रे बचाकर विक्रम के पीछे पीछे उस कॉटेज की तरफ चल दी. दोनों बिना किसी नज़रो में आए उस आम के बाघ से होते हुए तालाब के पीछे बने उस कॉटेज पर पहुंच गए. विक्रम ने आगे बाद कर उस कॉटेज का दरवाज़ा खोल दिया.
विक्रम: जाओ और अंदर जाकर दिखाओ कौनसा बड़सम का सामान रखा है अंदर.
नेहा भी तेज़ कदमो से कॉटेज के अंदर दाखिल हुई पर अंदर का नज़ारा देख कर हैरान हो गई अंदर का सेन एकदम चेंज था न वह कोई डिस्को लाइट था न कोई पोल्ल जिसमे उसने पोल्ल डांस करा था न कमरे में कोई चैन लटक रही थी जिसमे उसे हैंडकफ्फ्स करके बंधा गया था. नेहा ने वो दीवार देखि जहा वाल डिलडो लगा था अब वो दीवार एकदम सपाट थी वह कोई डिलडो नहीं लगा था. वह न उसे वो डिलडो चेयर दिखी जिसमे उसे बिठाया गया था न कही वो फ्लोर पिल्लोरी थी जिसमे उसे दोगी पोजीशन में बंधा गया था. है वो लकड़ी की अलमारी वही राखी जिसमे उस रात तरह तरह के बड़सम का सामान था गले का पत्ता हैंडकफ्फ्स ब्लैंडफोल्ड बेल्ट डिलडो पिन मोमबत्ती. नेहा ने बिना देर किये वो अलमारी खोली पर वो अलमारी पूरी तरह खली थी वह बड़सम का सामान तो दूर एक पिन भी नहीं थी.
नेहा: वो सब सामान यही था यही पर था, यहाँ डिस्को लाइट लगी थी और एक पोल्ल लगा था जिसमे मैंने पोल्ल डांस करा था, वह दीवार पर एक डिलडो लगा था, इस अलमारी में बड़सम का बहुत सारा सामान था. ज़रूर तुमने हटा दिया है वो सब.
विक्रम: देखो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा तुम क्या कह रही हो. पर ये कॉटेज मेरे लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट है क्युकी यही मेरी और शोभा की मैरिड लाइफ की शुरुआत होने वाली है यही हमारी सुहागरात होने वाली है.
नेहा: ओह तो इसीलिए यहाँ से सारा सामान हटा दिया. बहुत बड़े धोकेबाज़ इंसान हो जो लड़की तुम्हारे साथ साडी ज़िन्दगी जीने वाली है उसे क्या खूब धोका दे रहे हो.
विक्रम: मंटा हु गलत करा है मैंने पर विक्रम धोकेबाज़ नहीं है पहले मैंने जो करा सो करा वो शादी से पहले की बात थी पर शादी हो जाने के बाद तुम्हारे साथ जो कुछ हुआ वो गलत था और मई इस गलती की माफ़ी मांगे बिना अपनी नै लाइफ की शुरुआत नहीं करूँगा. मई पहले शोभा को सब सच बताऊंगा उससे माफ़ी मांगूंगा उसके बाद ये उसका डिसिशन होगा की उसे मेरे साथ रहना है या नहीं.
इतना कहकर विक्रम ने अपनी जेब से एक चिट्ठी निकलकर नेहा की तरफ बड़ा दी. नेहा ने वो चिट्ठी लेकर पड़ना शुरू कर दिया. वो चिट्ठी शोभा के लिए थी.
विक्रम की चिट्ठी: शोभा मई जनता हु तुमने बचपन से मुझे प्यार करा सच्चा प्यार करा पर शायद मई इस प्यार के लायक नहीं हु शादी से पहले कई लड़कियों से मेरे अफेयर्स रहे है और शायद ऐसा करके मई खुद को स्टड शो करता था. पर वो सब शादी से पहले की बात थी पर तुमसे शादी होने के बाद भी मुझसे एक गलती हो गई, शादी में आई एक लड़की की तरफ में अट्रैक्ट हो गया और मेरे और उसके बीच रिलेशन बन गया हम दोनों इंटिमेट हो गए. पर सच बोल रहा हु अब मुझे दिल से इस बात का पछतावा हो रहा है. मई अब तक एक डिसलोयाल इंसान रहा हु पर मई तुमसे वडा करता हु की अगर आज तुमने मेरा साथ दिया तुम्हे एक परफेक्ट लॉयल हस्बैंड बन कर दिखाऊंगा. मई तुम्हे उस लड़की का नाम बताकर उस लड़की की लाइफ में कोई प्रॉब्लम क्रिएट नहीं करना चाहता ये समझ लो जो भी गलती थी वो मेरी थी और मई हमारे नए रिश्ते की शुरुआत एक गलती के साथ नहीं करना चाहता था इसलिए ये शुरुआत इस माफ़ी के साथ कर रहा हु. ये बात शायद मई तुमसे खुद से न कह पाव इसलिए ये सब इस चिट्ठी में लिख रहा हु. अगर तुम मुझे मेरी इस गलती के लिए माफ़ कर सकती हो तो मई खुद को दुनिया का सबसे लकी इंसान समझूंगा की मुझे तुम अस ा वाइफ मिली पर अगर तुम मुझे माफ़ न करते हुए भी इस रिश्ते को हमेशा हमेशा के लिए ख़तम कर देती हो तो भी मई यही समझूंगा की शायद मेरी गलती की यही सजा था. पर उसके बाद भी मई लिफेलॉन्ग तुम्हे hi प्यार करूँगा क्युकी जनता हु तुम्हे मुझसे अच्छा कोई भी मिल जाएगा पर साला मुझे तुमसे अच्छी कोई नहीं मिलने वाली.
तुम्हारा और सिर्फ तुम्हारा विक्रम
नेहा ने वो चिट्ठी पूरी पडली. और विक्रम ने वो चिट्ठी वापस लेकर अपनी जेब में रख ली.
विक्रम: देखो मई तुम्हारे करैक्टर को जज नहीं करना चाहता ऊपर छत में मैंने जो कहा वो सब हीट ऑफ़ थे मूवमेंट में बक दिया. तुम चाहो तो मुझे और झापड़ मार लो पर प्लीज मेरी शोभा की लाइफ में और कोई प्रॉब्लम क्रिएट मत करो प्लीज. आगे तुम्हे जो ठीक लगे तुम वो करो.
इतना बोलकर विक्रम नेहा को वही खड़ा छोड़ कर उस कॉटेज से बहार निकल गया. नेहा को समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट करे. उसका दिल कह रहा था की विक्रम सच बोल रहा है पर दिमाग ये सब मैंने को तैयार नहीं था. यही सब सोचते सोचते नेहा वापस अपने कमरे में आ गई.
शबाना: क्या हुआ बात हो गई तुम्हारी विक्रम से.
नेहा: हम्म हो गई
शबाना: तो सब कुछ ख़तम कर लिया न तुम दोनों ने अपने बीच.
नेहा है में सर हिलाते hue:Hmm
शबाना ने आगे बाद कर नेहा को गले से लगा लिया: That's लिखे माय डार्लिंग नेहा मई जानती हु मेरी नेहा दिल की बुरी नहीं है बस उसकी वाइल्ड फैंटसीज थोड़ी आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो जाती है इन पर थोड़ा कण्ट्रोल करो.
नेहा: हम्म
नेहा ने शबाना की बात के जवाब में हामी तो भर दी थी पर उसके दिमाग में अब भी यही बात चल रही थी की अगर विक्रम सच बोल रहा है और विक्रम वो स्ट्रेंजर नहीं है तो फिर वो था कौन और विक्रम से मिलने के बाद से वो कहा गायब हो गया न उसने दुबारा कोई टास्क दिया न खुद से सामने आया. नेहा ने थान लिया था की हर कीमत पर यहाँ से जाने से पहले उस स्ट्रेंजर के रहस्य से पर्दा उठाना है. देखना था वो ये सब कैसे करने वाली थी और कौन था वो स्ट्रेंजर और क्या था उसका गेम.